विकास भवन में शिफ्ट होना था अभिलेखागार, वह जर्जर आम जनता को सरकारी दफ्तरों के चक्कर काटने से बचाने और लंबी दूरी से निजात दिलाने के लिए सरकार ने 21 माह पहले (21 अगस्त 2024 को) पटना सदर अंचल कार्यालय को चार हिस्सों में बांट दिया था। पाटलिपुत्र, पटना सदर, पटना सिटी और दीदारगंज अंचल बनाए गए थे। इनके कार्यालय उन इलाकों में चलने थे। लेकिन, 21 माह बाद भी जमीनी हकीकत जस की तस है। आज भी इन चारों अंचलों के अधिकारी कुम्हरार में ही एक ही छत के नीचे बैठ रहे हैं। नतीजा-गांधी मैदान, आशियाना, दीघा या दीदारगंज के रहने वाले लोगों को आज भी जाति, आवासीय प्रमाणपत्र या दाखिल-खारिज जैसे काम के लिए कुम्हरार दौड़ना पड़ रहा है। बाकी 3 अंचलों की स्टेटस रिपोर्ट 1. पाटलिपुत्र अंचल : आशियाना-दीघा रोड में राजीवनगर थाने के पुराने भवन को तोड़कर शेड लगाया जा रहा है। काम की रफ्तार बेहद सुस्त है। फिलहाल यहां अस्थायी दफ्तर बनाने की कवायद है। हालांकि, स्थायी कार्यालय के लिए 1 एकड़ जमीन चिह्नित कर ली गई है। 2. दीदारगंज अंचल : फिलहाल दफ्तर कुम्हरार में ही चल रहा है। आम लोगों को करीब 15 से 20 किलोमीटर की दूरी तय करनी पड़ रही है। बाजार समिति में इसका अस्थायी दफ्तर बनना है। स्थायी कार्यालय के लिए जमीन तो चिह्नित हो गई है, पर निर्माण का अता-पता नहीं। 3. पटना सिटी अंचल : यह अंचल कुम्हरार वाले मौजूदा भवन से ही संचालित होता रहेगा।वर्तमान सदर अंचल कार्यालय के भवन का नाम बदलकर अब पटना सिटी अंचल कार्यालय किया जाएगा। पहले पटना सदर अंचल कार्यालय गांधी मैदान के पास था। वहां से कुम्हरार शिफ्ट किया गया था। अब चार भागों में बंटवारा होने के बाद सदर अंचल कार्यालय को वापस गांधी मैदान के पास वाले पुराने भवन में शिफ्ट करना है। अभी उसमें अभिलेखागार (रिकॉर्ड रूम) है। कलेक्ट्रेट के सामने स्थित विकास भवन में अभिलेखागार को शिफ्ट करने की योजना थी। तब अपने पुराने भवन में सदर अंचल कार्यालय आता। लेकिन, विकास भवन की मरम्मत शुरू हुई, तो पता चला कि इमारत का एक बड़ा हिस्सा बेहद जर्जर हो चुका है। सुरक्षा को देखते हुए जिला प्रशासन ने भवन निर्माण विभाग को पत्र लिखकर इस बिल्डिंग की उम्र जांचने को कहा है। विभाग द्वारा चयनित एजेंसी ने प्राथमिक जांच तो कर ली है, लेकिन अब इसकी गहन जांच होनी बाकी है। अधिकारियों के मुताबिक, इस जांच रिपोर्ट के आने के बाद ही तय होगा कि अभिलेखागार यहां आएगा या नहीं? चौंकाने वाली बात यह है कि जिस जर्जर भवन की पहली मंजिल पर सरकारी दफ्तर शिफ्ट करने में डर लग रहा है, उसी के ग्राउंड फ्लोर को वकीलों के बैठने के लिए अलॉट कर दिया गया है।
पुराने सदर अंचल कार्यालय से नहीं हटा अभिलेखागार
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