Tuesday, May 19, 2026
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धूप की तपन और आम का रस: तेलंगाना के गांवों में तैयार हो रहा है ये फेमस मिठाई!


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Famous Mango Of India: तेलंगाना के ग्रामीण इलाकों में मामीदी तांद्रा यानी आम पापड़ की मांग बढ़ी, कुटीर उद्योग से रोजगार, विशेषज्ञ जीआई टैग और बेहतर पैकेजिंग से निर्यात की सलाह दे रहे हैं. तेलंगाना के ग्रामीण क्षेत्रों में हर साल गर्मियों के मौसम में मामीदी तांद्रा बनाने का काम शुरू हो जाता है. यह पूरी प्रक्रिया बेहद मेहनत और धैर्य से जुड़ी होती है. स्थानीय निवासी सरिता एम. पूर्ति बताती हैं कि इसकी शुरुआत बगीचों से ताजे और पूरी तरह पके हुए रसीले आम इकट्ठा करने से होती है.

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हैदराबाद. गर्मियों का मौसम आते ही देशभर में आम की मिठास लोगों को अपनी ओर खींचने लगती है, लेकिन तेलंगाना में इन दिनों आम से बनने वाली एक खास पारंपरिक मिठाई की जबरदस्त चर्चा हो रही है. यहां गांवों में बड़े स्तर पर तैयार की जाने वाली मामीदी तांद्रा यानी आम पापड़ की मांग लगातार बढ़ती जा रही है. ग्रामीण इलाकों में इसे कुटीर उद्योग के रूप में तैयार किया जाता है, जिससे बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार भी मिल रहा है. तेलंगाना का यह पारंपरिक स्वाद अब धीरे-धीरे दूसरे राज्यों और विदेशों तक भी अपनी पहचान बना रहा है.

तेलंगाना के ग्रामीण क्षेत्रों में हर साल गर्मियों के मौसम में मामीदी तांद्रा बनाने का काम शुरू हो जाता है. यह पूरी प्रक्रिया बेहद मेहनत और धैर्य से जुड़ी होती है. स्थानीय निवासी सरिता एम. पूर्ति बताती हैं कि इसकी शुरुआत बगीचों से ताजे और पूरी तरह पके हुए रसीले आम इकट्ठा करने से होती है. इसके बाद गांव की महिलाएं और पुरुष मिलकर आमों को अच्छी तरह साफ करते हैं. फिर पारंपरिक मशीनों और हाथों की मदद से आम का गाढ़ा रस निकाला जाता है.

कई परतों में तैयार होती है खास मिठाई
आम के रस का स्वाद संतुलित करने के लिए उसमें जरूरत के हिसाब से चीनी या देसी गुड़ मिलाया जाता है. इसके बाद सबसे अहम प्रक्रिया शुरू होती है, जिसे स्थानीय भाषा में ‘तांद्रा बिछाना’ कहा जाता है. इस गाढ़े मीठे रस को खुले मैदानों में बनाए गए ऊंचे मचानों पर ताड़ के पत्तों से बनी चटाइयों पर पतली परत के रूप में फैलाया जाता है. फिर इसे तेज धूप में सुखाया जाता है.

जब पहली परत पूरी तरह सूख जाती है तो उसके ऊपर दोबारा रस की नई परत डाली जाती है. यह प्रक्रिया कई बार दोहराई जाती है, जब तक कि यह एक मोटी और लचीली शीट का रूप नहीं ले लेती. पूरी तरह सूखने के बाद इसे चौकोर टुकड़ों में काटा जाता है और फिर पैकिंग कर बाजारों में भेज दिया जाता है. इसकी मिठास और प्राकृतिक स्वाद लोगों को काफी पसंद आता है.

ग्रामीण अर्थव्यवस्था का बन रहा सहारा
तेलंगाना के कई जिलों में मामीदी तांद्रा अब ग्रामीण अर्थव्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुकी है. बड़ी संख्या में परिवार इस काम से जुड़े हुए हैं और गर्मियों के मौसम में इससे अच्छी आमदनी कर रहे हैं. स्थानीय विशेषज्ञों का मानना है कि अगर सरकार इस पारंपरिक उत्पाद को आधुनिक पैकेजिंग, ब्रांडिंग और कोल्ड स्टोरेज जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराए तो इसका निर्यात बड़े स्तर पर किया जा सकता है.

विशेषज्ञ यह भी मानते हैं कि मामीदी तांद्रा को जीआई टैग मिलने से इसकी पहचान और मजबूत होगी. फिलहाल गर्मियों के इस सीजन में तेलंगाना की यह पारंपरिक मिठाई लोगों की पहली पसंद बनी हुई है और बाजारों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है.

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Anand Pandey

आनंद पाण्डेय वर्तमान में News18 हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अपनी पहचान बनाते हुए उन्होंने राजनीति, अपराध और लाइफ…और पढ़ें



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