सीधी जिला पंचायत सभागार में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था में एक विरोधाभासी दृश्य सामने आया। जहां जिले के कलेक्टर विकास मिश्रा आम लोगों के बीच जमीन पर बैठकर उनकी समस्याएं सुनते दिखे, वहीं अधिकांश अधिकारी और कर्मचारी कुर्सियों पर आराम फरमाते और मोबाइल फोन चलाते नजर आए। कलेक्टर विकास मिश्रा ने जनसुनवाई में पहुंचे ग्रामीणों और फरियादियों के बीच बैठकर सीधे संवाद स्थापित किया। उनका यह व्यवहार एक संवेदनशील प्रशासनिक अधिकारी की छवि को दर्शाता है, जो आमजन से सीधा जुड़ाव स्थापित करने का प्रयास कर रहे थे। इसके विपरीत, सभागार में मौजूद कई अधिकारी और कर्मचारी कुर्सियों पर बैठे रहे। कुछ तो जनसुनवाई के दौरान अपने मोबाइल फोन में व्यस्त दिखाई दिए, जिससे ऐसा प्रतीत हुआ कि उन्हें आमजन की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है। हैरानी की बात यह भी रही कि कलेक्टर विकास मिश्रा स्वयं साइकिल चलाकर कलेक्ट्रेट से जिला पंचायत सभागार पहुंचे। वहीं, अधिकांश अधिकारी और कर्मचारी महज कुछ सौ मीटर की दूरी तय करने के लिए भी चारपहिया वाहनों का उपयोग करते नजर आए। उल्लेखनीय है कि रीवा संभाग के कमिश्नर बी.एस. जामोद पहले ही अधिकारियों को अनावश्यक रूप से चारपहिया वाहनों का उपयोग कम करने की सलाह दे चुके हैं। जनसुनवाई के दौरान कई अधिकारियों और कर्मचारियों के गले में परिचय-पत्र (आईडी कार्ड) भी नहीं दिखाई दिए। जबकि कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि सभी अधिकारी और कर्मचारी अपने कार्यालय एवं संस्थान में प्रवेश के दौरान परिचय-पत्र अनिवार्य रूप से धारण करें। मंगलवार दोपहर करीब 12:30 बजे आयोजित इस जनसुनवाई में इन निर्देशों की खुली अनदेखी देखने को मिली, जिसने शासन-प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं।
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सीधी में जनसुनवाई में साइकिल से आए कलेक्टर: जमीन पर जानी लोगों की समस्याएं, मोबाइल चलाते रहे कर्मचारी – Sidhi News
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