नई दिल्ली/कोलकाता31 मिनट पहले
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ममता बनर्जी INDIA ब्लॉक की मीटिंग के लिए दिल्ली आईं थीं। अभी फिलहाल वे दिल्ली में ही हैं।
TMC में टूट के बीच ममता बनर्जी ने मंगलवार को सांसद कल्याण बनर्जी को लोकसभा में पार्टी का चीफ व्हिप नियुक्त किया। लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को लेटर लिखकर कहा कि इसे तत्काल प्रभाव से लागू जाए।
TMC के लोकसभा में 28 सांसदों में से 20 ने एक दिन पहले बगावत के बाद ममता का साथ छोड़ दिया था। उन्होंने NDA सरकार को समर्थन देने का फैसला किया है। इन लोगों ने सांसद काकोली घोष दस्तीदार को अपना चीफ व्हिप चुना था।
खुद काकोली घोष ने बागी सांसदों के साइन वाला लेटर लोकसभा स्पीकर को भेजा था। इसमें TMC से अलग हुए सांसदों के लिए अलग संसदीय ब्लॉक के रूप में सिटिंग मांगी थी।
चीफ व्हिप किसी राजनीतिक दल का सीनियर नेता होता है, जो संसद या विधानसभा में पार्टी के सांसदों/विधायकों के बीच अनुशासन बनाए रखने और पार्टी की रणनीति लागू कराने की जिम्मेदारी संभालता है। अगर कोई आदेश नहीं मानता है तो उसके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्यवाही की जाती है।
लोकसभा में TMC के अभी 28 और राज्यसभा में 13 सांसद हैं। 3 जून को बंगाल के 80 में से 58 विधायक भी अलग गुट बना चुके हैं। इस गुट के नेता ऋतब्रत हैं।

बागी सांसदों ने 8 जून की रात एक सीक्रेट जगह पर मीटिंग की थी, यह तस्वीर उसी दौरान ली गई थी।
काकोली घोष ने कहा था- मैं ही चीफ व्हिप रहूंगी
काकोली ने सोमवार को कहा था कि वे अभी भी लोकसभा में पार्टी की मुख्य सचेतक (चीफ व्हिप) हैं। काकोली ने 27 मई को टीएमसी छोड़ दी है, लेकिन सांसद पद से इस्तीफा नहीं दिया था।
काकोली घोष ने कहा- मैं 1986 से ममता बनर्जी के साथ हूं। 2005 में मुझे पार्षद तक का चुनाव लड़वाया गया। मैं तो लड़ते-लड़ते यहां आई हूं। मेरा सिर कटेगा लेकिन झुकेगा नहीं। मैंने बहुत सह लिया।

सागरिका घोष ने कहा- एक फोन पर नैतिकता खत्म
राज्यसभा सांसद सागरिका घोष: वफादारी सिर्फ जीत तक ही रहती है, अमित शाह के एक कॉल पर ‘नैतिकता खत्म’ हो जाती है। ये बहुत शर्म की बात है।
लोकसभा सांसद कल्याण बनर्जी: आपके पास CM, ED, CBI और दूसरी ताकतें हैं, लेकिन मेरे पास ‘मां, माटी, मानुष’, मेरी पार्टी, कार्यकर्ता और बंगाल के लोग हैं।
पूर्व राज्यसभा सांसद सुखेंदु शेखर: इस्तीफे का फैसला किसी के दबाव के कारण नहीं लिया। यह मेरी अंतरात्मा की आवाज था। मुझे लगा कि अब बहुत हो चुका है।
TMC के सांसदों की बगावत: 9 जून का घटनाक्रम
- ममता और अभिषेक दिल्ली पहुंचे: TMC में बगावत के बीच ममता और भतीजे अभिषेक बनर्जी दिल्ली पहुंचे। इनका मकसद एक तरफ INDIA ब्लॉक की बैठक में हिस्सा लेना था। वहीं दूसरी तरफ पार्टी सांसदों में बढ़ती असंतोष की स्थिति का आकलन करना भी था।
- विधायकों के बाद सांसद भी टूटे: TMC के विधायकों की बगावत के बाद 8 जून को पार्टी के सांसदों में भी असंतोष सामने आया। TMC से इस्तीफा दे चुकीं लोकसभा सांसद काकोली काकोली घोष दास्तीदार ने दावा किया कि 28 में से 20 सांसदों ने NDA के साथ जाने का फैसला किया है। लोकसभा स्पीकर को इनकी जानकारी दे है। रविवार रात को एक अज्ञात स्थान पर इन बागी सांसदों की बैठक भी हुई।
- बागी सांसद भूपेंद्र यादव और शुभेंदु अधिकारी से मिले: दिल्ली में 10 TMC सांसदों ने केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव के आवास पर बैठक की। बंगाल सीएम शुभेंदु अधिकारी भी इनसे मिलने पहुंचे।

बंगाल के CM शुभेंदु अधिकारी दिल्ली में TMC सांसद शताब्दी रॉय के घर से निकले।
- देर रात शताब्दी रॉय के बैठक की: TMC सांसद शताब्दी रॉय के घर बागी सांसदों की बैठक हुई। इसमें जून मालिया, बापी हलदर, अबू ताहिर खान और असित कुमार समेत कई सांसद पहुंचे। बंगाल सीएम शुभेंदु भी सांसदों से मिलने पहुंचे थे।
आगे क्या होगा, 3 सवाल
सवाल: TMC सांसदों पर दल-बदल कानून लगेगा? जवाब: TMC के पास कुल 28 लोकसभा सांसद हैं। अगर 20 सांसदों का बागी गुट खुद को अलग दल या लोकसभा में असली टीएमसी पार्टी बताता है, तो इन पर दल-बदल कानून नहीं लगेगा, क्योंकि बागी गुट के पास दो-तिहाई सांसदों का समर्थन है।
सवाल: TMC के 20 सांसदों के समर्थन के बाद क्या NDA की ताकत बढ़ेगी? जवाब: हां बढ़ेगी। लोकसभा में कुल 543 सांसदों में से एनडीए के अभी 293 सांसद हैं। 20 सांसदों के समर्थन के बाद यह संख्या बढ़कर 313 हो जाएगी।
सवाल: NDA को क्या फायदा मिलेगा? जवाब: कोई भी बिल पास कराने में आसानी होगी। सरकार परिसीमन और उससे जुड़े महिला आरक्षण बिल को पास करा सकती है। 18 अप्रैल को जब परिसीमन बिल पर वोटिंग हुई थी, तो बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े थे। बिल पास कराने के लिए 352 वोट चाहिए थे। यानी बिल 52 वोट से गिर गया था। अगर टीएमसी के 20 सांसद एनडीए में शामिल हो जाएंगे,तो दो-तिहाई बहुमत के लिए 32 और सांसदों की जरूरत पड़ेगी।

28 साल पुरानी TMC में बगावत, 3 जून को अलग हुए 58 विधायक

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