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Bahraich News: स्वयं सहायता समूह से जुड़कर कई महिलाएं आत्मनिर्भर बन रही हैं. उन्हीं में से एक हैं मुनक्का देवी, जिनके पति की मौत हो गई थी. इसके बाद उनकी हालत भीख मांगने जैसी हो गई थी. लेकिन स्वयं सहायता समूह के हाथ थामते ही उनकी जिंदहगी बदल गई.
बहराइच: जिले के छोटे से गांव की रहने वाली महिला मुनक्का देवी पर पति की मौत के बाद दुखों का पहाड़ टूट पड़ा था. परेशानियां इस कदर बढ़ीं कि पेट भरने के लिए भीख मांगनी पड़ी. जिंदगी बहुत मुश्किल से कट रही थी, तब जिंदगी में भगवान का दूत बनकर आईं समूह की दीदी. आज मुनक्का देवी आराम से जिंदगी काट रही हैं. गाय के गोबर और गोमूत्र से वो जैविक खाद बनाकर कमाई कर रही हैं.
समूह से जुड़ने के बाद दूर हुई परेशानी
सरकार की राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन आज उन महिलाओं के लिए सहारा बन रही है, जिनकी कमाई का जरिया हर तरफ से बंद हो गया है या फिर वो काम-धाम को लेकर परेशान रहती हैं. आज इस योजना से जुड़कर तमाम ऐसी महिलाएं हैं, जो आत्मनिर्भर बनने के साथ-साथ अपनी नई जिंदगी की शुरुआत कर रही हैं. इन्हीं में से एक महिला बहराइच जिले के निबिया बेगमपुर गांव की मुनक्का देवी हैं, जो नम आंखों से अपनी पूरी दास्तान बताते हुए नहीं थक रही हैं.
समूह से जुड़कर शुरू किया बिजनेस
मुनक्का देवी राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन से जुड़कर इन दिनों जैविक खाद और जैविक काढ़ा बनाने का काम कर रही हैं. अब धीरे-धीरे उनकी मेहनत रंग लाई है और आज मुनक्का देवी पूरी तरह आत्मनिर्भर हैं और वह अपने घर-परिवार का खर्चा बड़े आराम से चला रही हैं. अब गांव में लोग मुनक्का देवी को देखकर सीख ले रहे हैं. आज मुनक्का देवी से हजारों किसान जुड़कर उन्नत खेती की ओर आगे बढ़ रहे हैं.
किसानों की भूमि बन रही उपजाऊ
मृदा संजीवनी जैविक खाद फसलों में ग्रोथ के लिए जैविक काढ़ा लेकर किसान भाई अपनी आय को दोगुना और फसलों पर लगने वाले खर्च को सीधे तौर पर कम कर रही हैं. इससे न सिर्फ किसानों का फायदा हो रहा है, बल्कि किसानों के साथ-साथ किसानों की भूमि भी उपजाऊ बन रही है. लंबे समय तक पेस्टिसाइड्स का इस्तेमाल करने से ना सिर्फ फसलों को नुकसान होता है, बल्कि धीरे-धीरे किसान का खेत भी बंजर हो जाता है.
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आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.

