नर्मदापुरम जिले स्थित पिपरिया ब्लॉक में शिक्षकों के एरियर्स और छात्रों की छात्रवृत्ति गबन के मामले में बड़ी कार्रवाई हुई है। दैनिक भास्कर द्वारा इस मुद्दे को प्रमुखता से उठाए जाने के बाद शुक्रवार रात मंगलवारा थाना पुलिस ने बीईओ कार्यालय के तत्कालीन डाटा कंप्यूटर ऑपरेटर कमलेश अहिरवार पर एफआईआर दर्ज कर ली है। आरोपी ने करीब डेढ़ साल पहले अपने पद का दुरुपयोग करते हुए 8.71 लाख रुपए से अधिक की शासकीय राशि अपने और परिजनों के बैंक खातों में ट्रांसफर की थी। शुक्रवार, 12 जून को दैनिक भास्कर ने ‘ऑपरेटर ने की गड़बड़ी, डेढ़ साल बाद भी एफआईआर नहीं’ शीर्षक से प्रमुखता से खबर प्रकाशित की थी। इस खुलासे के कुछ ही घंटों बाद ब्लॉक शिक्षा अधिकारी (BEO) ने मंगलवारा थाने पहुंचकर ग्राम चीचली निवासी कमलेश (पिता मदनलाल अहिरवार) के खिलाफ लिखित शिकायत दी। पुलिस ने शिकायत के आधार पर आरोपी ऑपरेटर के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 318(4) और 316(4) के तहत प्रकरण दर्ज कर लिया है। पत्नी और भाई के खातों में ट्रांसफर की थी राशि
विभागीय जांच में खुलासा हुआ था कि ऑपरेटर कमलेश ने छात्रवृत्ति और एरियर्स का पैसा स्वयं के तीन बैंक खातों में भेजा था। इसके अलावा उसने अपनी पत्नी रेवा अहिरवार और भाई अनिल अहिरवार के खातों में भी अवैध रूप से पैसा ट्रांसफर किया था। जांच समिति को कुल 9.48 लाख रुपए के गबन के साक्ष्य मिले थे। हालांकि, विभाग द्वारा मंगलवारा थाने में 8,71,880 रुपए की शासकीय राशि के गबन की एफआईआर दर्ज कराई गई है। ट्रेजरी ने पकड़ी थी चोरी, ब्याज सहित लौटाई थी रकम
करीब डेढ़ साल पहले नर्मदापुरम जिला कोषालय (ट्रेजरी) ने भुगतान प्रक्रिया की जांच के दौरान इस गड़बड़ी को पकड़ा था। मामला उजागर होते ही तत्कालीन अधिकारियों ने तत्परता दिखाते हुए कमलेश अहिरवार को नौकरी से निकाल दिया था। गबन पकड़े जाने के बाद ऑपरेटर ने अपनी गलती स्वीकार कर ली थी और ब्याज समेत पूरी राशि वापस सरकारी खाते में जमा करा दी थी। हालांकि, राशि रिकवर होने के बाद अफसर मेहरबान हो गए और 5700 पन्नों की जांच फाइल बीईओ कार्यालय की अलमारी में बंद कर दी गई। देरी पर शिक्षा विभाग और पुलिस का एक-दूसरे पर दोषारोपण
डेढ़ साल तक एफआईआर दर्ज न होने के मामले में बीईओ और मंगलवारा थाना प्रभारी एक-दूसरे पर दोषारोपण करते नजर आए। बीईओ रघुवंशी के मुताबिक, वे समस्त अभिलेखों और स्टाफ के साथ 6 मार्च 2026 को पुलिस थाने पहुंचे थे। उन्होंने बताया कि इसके बाद 10 मार्च को भी वह स्वयं थाने गए थे, लेकिन विवेचक उपनिरीक्षक राजेंद्र सिंह कुशवाहा की व्यस्तता और समयाभाव के कारण रिपोर्ट दर्ज नहीं की जा सकी। पुलिस बोली- अधूरे दस्तावेज मिलने के कारण दर्ज नहीं हो सका था केस
दूसरी ओर, थाना प्रभारी गिरीश त्रिपाठी ने स्पष्ट किया कि बीईओ कार्यालय ने डेढ़ साल पहले एफआईआर के लिए सिर्फ एक पत्र लिखा था। पुलिस प्राथमिक जांच के आधार पर ही केस दर्ज करने की तैयारी कर रही थी, जिसके लिए कुछ जरूरी दस्तावेज मांगे गए थे। पुलिस के अनुसार, विभाग से ऑपरेटर का हाजिरी रजिस्टर, वेतन पर्ची, जिला कोषालय की मूल जांच रिपोर्ट, भुगतान प्रक्रिया और निलंबन आदेश की सत्यापित प्रतियां मांगी गई थीं। विभाग की ओर से ये दस्तावेज काफी देरी से सौंपे गए, जिसके बाद अब एफआईआर दर्ज की गई है।
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भास्कर इम्पैक्ट- गबन केस में 4 घंटे में एफआईआर: तत्तकालीन कम्प्यूटर ऑपरेटर को बनाया आरोपी; 8.71 लाख की शासकीय राशि हड़पने का मामला – narmadapuram (hoshangabad) News
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