मुजफ्फरपुर के ऐतिहासिक सिकंदरपुर मन में पिछले डेढ़ महीने से लगातार मछलियों की मौत हो रही है। ये अब पर्यावरणीय संकट का रूप लेती जा रही है। जिला मत्स्य विभाग की जांच में पानी में अमोनिया की मात्रा अधिक मिली है। इसके साथ ही अस्पतालों से निकलने वाले मेडिकल वेस्ट और धोबी घाट के रासायनिक अपशिष्ट को इसकी बड़ी वजह बताया गया है। विभाग ने रिपोर्ट जिला प्रशासन और नगर निगम को सौंपते हुए तत्काल प्रदूषण रोकने की सिफारिश की है। डेढ़ महीने से लगातार मर रही हैं मछलियां, दुर्गंध से लोग परेशान शहर के बीच स्थित सिकंदरपुर मन में बीते डेढ़ महीने से लगातार बड़ी संख्या में मछलियां मर रही हैं। इससे पूरे इलाके में दुर्गंध फैल गई है, जिसके कारण आसपास रहने वाले लोगों और आने-जाने वालों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं मछली पालन करने वाले व्यवसायियों को भी लाखों रुपये का नुकसान हो चुका है। पानी की जांच में सामने आई चौंकाने वाली रिपोर्ट जिला मत्स्य पदाधिकारी रणधीर कुमार ने बताया कि लगातार मछलियों की मौत की सूचना मिलने के बाद विभाग की टीम ने पानी का नमूना लेकर जांच के लिए पटना की प्रयोगशाला भेजा था। जांच रिपोर्ट में पानी में अमोनिया गैस की मात्रा सामान्य से अधिक पाई गई, जो जलीय जीवों के लिए बेहद खतरनाक है। मेडिकल वेस्ट और केमिकल से बढ़ रहा प्रदूषण मत्स्य विभाग की जांच में यह भी सामने आया कि आसपास के अस्पतालों से निकलने वाला मेडिकल वेस्ट और रासायनिक अपशिष्ट बिना उपचार के सीधे मन के पानी में पहुंच रहा है। इसके अलावा परिसर स्थित धोबी घाट से डिटर्जेंट और अन्य रासायनिक पदार्थ भी सीधे जलाशय में बहाए जा रहे हैं। इन कारणों से पानी तेजी से प्रदूषित हो रहा है और मछलियों की मौत का सिलसिला थम नहीं रहा है। कतला मछली पर सबसे ज्यादा असर जिला मत्स्य पदाधिकारी ने बताया कि प्रदूषण का सबसे अधिक असर कतला मछली पर पड़ा है। यह प्रजाति पानी की ऊपरी सतह पर रहती है, जहां प्रदूषण और ऑक्सीजन की कमी का प्रभाव सबसे पहले दिखाई देता है। विभाग ने यह भी बताया कि पानी की ऊपरी सतह का रंग भी बदल चुका है, जो बढ़ते प्रदूषण का संकेत है। नगर निगम और प्रशासन को दी गई सिफारिश मत्स्य विभाग ने अपनी रिपोर्ट जिला प्रशासन और नगर निगम को भेजते हुए प्रदूषण के स्रोतों पर तत्काल रोक लगाने की मांग की है। विभाग ने अस्पतालों से निकलने वाले मेडिकल वेस्ट का वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण करने, केमिकलयुक्त पानी को बिना ट्रीटमेंट जलाशय में छोड़ने पर रोक लगाने और धोबी घाट से निकलने वाले पानी के लिए अलग निकासी व्यवस्था करने की सिफारिश की है। मछली व्यवसायियों को लाखों का नुकसान सिकंदरपुर मन में मछली पालन करने वाले व्यवसायियों का कहना है कि पिछले दो महीनों में लाखों रुपये मूल्य की मछलियां मर चुकी हैं। उनका कहना है कि यदि जल्द प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो नुकसान और बढ़ेगा और पूरे जलाशय की मत्स्य संपदा पर गंभीर संकट खड़ा हो जाएगा। उन्होंने प्रशासन से तत्काल प्रदूषण रोकने और जलाशय को बचाने की मांग की है।
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