राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन (आरसीए) के चुनाव का रास्ता साफ हो गया हैं। सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के 1 जुलाई के उस आदेश में हस्तक्षेप करने से इनकार कर दिया है, जिसमें हाईकोर्ट ने एडहॉक कमेटी को निलंबित करते हुए तीन महीने में एसोसिएशन के चुनाव कराने का आदेश दिया था। सुप्रीम कोर्ट मे जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस आलोक आराधे की खंडपीठ ने नाराजगी जताते हुए एडहॉक कमेटी के सदस्यों की ओर से दायर याचिका को बेतुका बताया। कोर्ट ने कहा कि एडहॉक कमेटी को अस्थायी तौर पर चुनाव कराने के लिए गठित किया गया था। लेकिन बार-बार एडहॉक कमेटी का समय बढ़ाकर उसे ही संचालन का जिम्मा दे दिया गया। ऐसे कब तक चुनाव नहीं कराओगे। वहीं सबसे दिलचस्प बात यह रही कि आज सुनवाई के दौरान सरकार ने कहा गया कि एडहॉक कमेटी को एसोसिएशन के नाम से याचिका दायर करने का कोई अधिकार नहीं हैं। राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन के नाम से दायर विशेष अनुमति याचिका (एसएलपी) को प्रशासक और उनके निर्देश पर दायर याचिका नहीं माना जा सकता हैं। कोर्ट और सरकार के रूख देखते हुए पूर्ववर्ती एडहॉक कमेटी ने अपनी याचिका वापस लेने की अनुमति मांगी। जिसे कोर्ट ने स्वीकार कर लिया। जल्द चुनाव कार्यक्रम घोषित कर देंगे
प्रशासक आईएएस भास्कर ए. सावंत की ओर से राजस्थान सरकार के अतिरिक्त महाधिवक्ता शिव मंगल शर्मा ने सुप्रीम कोर्ट में कहा कि हाईकोर्ट के आदेश की पालना में राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन का संपूर्ण प्रभार और प्रशासन प्रशासक द्वारा पहले ही ग्रहण किया जा चुका है। हम आदेश के अनुरूप जल्द चुनाव कार्यक्रम घोषित करके 29 जुलाई तक हाईकोर्ट के समक्ष उसे प्रस्तुत कर देगे। पूरी चुनाव प्रक्रिया प्रशासक की देखरेख में हाईकोर्ट के निर्देशों के अनुसार आगे बढ़ेगी। हाईकोर्ट के तीन महीने में चुनाव के निर्देश
दरअसल, राजस्थान हाईकोर्ट ने 1 जुलाई को पूर्व रणजी खिलाड़ी राजीव प्रताप सिंह की जनहित याचिका पर आदेश देते हुए राजस्थान क्रिकेट एसोसिएशन की एडहॉक कमेटी को तत्काल प्रभाव से निलंबित (सस्पेंड) कर दिया था। वहीं होम सेक्रेटरी (IAS) भास्कर ए. सावंत को RCA का प्रशासक नियुक्त करते हुए उन्हें चुनाव कराने के निर्देश दिए थे। याचिका में आरोप लगाया गया था कि RCA की एडहॉक कमेटी का गठन 29 जून 2024 को केवल अंतरिम व्यवस्था के तौर पर किया गया था। उसे 3 महीने के भीतर चुनाव कराने की जिम्मेदारी दी गई थी। लेकिन निर्धारित समय में चुनाव नहीं कराए गए। इसकी बजाय बार-बार कमेटी का कार्यकाल बढ़ाया जाता रहा, जिससे RCA में निर्वाचित कार्यकारिणी का गठन नहीं हो सका।
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