औरंगाबाद के सभी प्रखंडों सहित जिला मुख्यालय में सोमवार को आशा कार्यकर्ताओं और फैसिलिटेटरों ने अपनी 13 सूत्री मांगों के समर्थन में प्रदर्शन किया। जिला मुख्यालय में जिला मंत्री सुधा सुमन और वरीय उपाध्यक्ष वशिष्ठ प्रसाद सिंह के नेतृत्व में कार्यकर्ताओं ने रमेश चौक से समाहरणालय मार्ग होते हुए दानी बिगहा स्थित धरना स्थल तक मार्च निकाला। प्रदर्शन के बाद आयोजित सभा में वक्ताओं ने केंद्र-राज्य सरकार से लंबित मांगों को अविलंब पूरा करने की मांग की। उन्होंने कहा कि आशा कार्यकर्ता ग्रामीण स्वास्थ्य व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी हैं, लेकिन आज भी उन्हें उनके कार्य के अनुरूप सम्मान, वेतन, सुरक्षा और सामाजिक सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। समस्याओं की लगातार उपेक्षा की जा रही सभा को संबोधित करते हुए जिला मंत्री सुधा सुमन, वरीय उपाध्यक्ष वशिष्ठ प्रसाद सिंह, मदनपुर अध्यक्ष कुसुमलता देवी और देव अध्यक्ष बिंदु कुमारी ने कहा कि सरकार स्वास्थ्य योजनाओं के सफल संचालन में आशा कार्यकर्ताओं पर निर्भर है, लेकिन उनकी समस्याओं की लगातार उपेक्षा की जा रही है। उन्होंने संसद में घोषित बढ़ी हुई प्रोत्साहन राशि का एरियर सहित तत्काल भुगतान करने की मांग की। श्रमिक का दर्जा, न्यूनतम वेतन और पेंशन देने की मांग वक्ताओं ने कहा कि आशा एवं आशा फैसिलिटेटरों को श्रमिक का दर्जा दिया जाए और उन्हें न्यूनतम वेतन, सामाजिक सुरक्षा, पेंशन और 65 वर्ष तक सेवा का अधिकार दिया जाए। इसके साथ ही सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण पर रोक लगाने, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन (एनएचएम) के तहत कार्यरत सभी कर्मियों की सेवा नियमित करने और स्वास्थ्य क्षेत्र पर सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) का 6 प्रतिशत खर्च करने की मांग की गई। उन्होंने मोबाइल रिचार्ज भत्ता एवं पोशाक भत्ता बढ़ाने, बंद आईडी को चालू करने और कार्य के हिसाब से सभी सुविधाएं उपलब्ध कराने की भी मांग उठाई। वक्ताओं ने कहा कि आशा कार्यकर्ता मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य, टीकाकरण, परिवार नियोजन, पोषण अभियान सहित अनेक स्वास्थ्य योजनाओं को गांव-गांव तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाती हैं। ऐसे में सरकार को उनके हितों की अनदेखी बंद कर सम्मानजनक सुविधाएं उपलब्ध करानी चाहिए।
केंद्र को 6 सूत्री और बिहार सरकार को 7 सूत्री मांगपत्र सौंपा
प्रदर्शन के बाद आशा संघ की ओर से भारत सरकार के स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय को छह सूत्री और बिहार सरकार के स्वास्थ्य विभाग को 7 सूत्री मांगपत्र भेजा गया। केंद्र सरकार को भेजे गए मांगपत्र में बढ़ी हुई प्रोत्साहन राशि का एरियर सहित भुगतान, सार्वजनिक स्वास्थ्य सेवाओं के निजीकरण पर रोक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन कर्मियों की सेवा नियमित करने, स्वास्थ्य क्षेत्र पर जीडीपी का छह प्रतिशत खर्च करने और आशा एवं आशा फैसिलिटेटरों को सामाजिक सुरक्षा उपलब्ध कराने की मांग शामिल है। प्रदर्शन में शिल्पा कुमारी, प्रभा कुमारी, रंभा देवी, संजू कुमारी, आरती कुमारी, बीना देवी, ललमनी देवी, सुषमा कुमारी, नेहा कुमारी सहित जिले के सभी प्रखंडों से बड़ी संख्या में आशा कार्यकर्ता एवं आशा फैसिलिटेटर शामिल रहीं।
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