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Painter to Doctor Suraj Suman Success Story: बूंदी जिले के कापरेन कस्बे के रहने वाले सूरज सुमन ने गरीबी को हराकर नीट-यूजी 2026 में 583 अंक हासिल कर सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश पक्का किया है. मजदूर मां के बेटे और पुताई का काम करने वाले सूरज को एलन के ‘शिक्षा संबल’ कार्यक्रम से निशुल्क कोचिंग मिली. कभी घरों की पुताई करने वाले सूरज अब डॉक्टर बनकर मरीजों का इलाज करेंगे और अपनी बहन की अधूरी पढ़ाई पूरी करवाएंगे.
बूंदी जिले के कापरेन कस्बे के रहने वाले सूरज सुमन ने अपनी मेहनत, संघर्ष और अटूट हौसले के दम पर यह साबित कर दिया कि आर्थिक तंगी और कठिन परिस्थितियां सफलता की राह नहीं रोक सकतीं. पारिवारिक जिम्मेदारियों के बीच पले-बढ़े सूरज ने NEET UG 2026 में 583 अंक, 99.1593559 पर्सेंटाइल, ओबीसी कैटेगरी रैंक 7800 और ऑल इंडिया जनरल रैंक 16569 हासिल कर सरकारी मेडिकल कॉलेज में प्रवेश का रास्ता बना लिया. जो हाथ कभी गांव-कस्बों में लोगों के घरों की पुताई कर परिवार का सहारा बनते थे. अब वही हाथ स्टेथोस्कोप थामकर मरीजों की सेवा करेंगे.
सूरज का परिवार आर्थिक रूप से बेहद कमजोर है. बचपन से ही घर की जिम्मेदारियां उसके कंधों पर आ गई थीं. छुट्टियों और खाली समय में वह गांव और आसपास के कस्बों में पुताई का काम करता था. ताकि अपनी मां का हाथ बंटा सके और परिवार की आर्थिक मदद कर सके. उसकी मां घीसी बाई और छोटी बहन गरिमा खेतों में मजदूरी कर घर का खर्च चलाती रहीं. आर्थिक हालात इतने कठिन थे कि गांव में आगे पढ़ाई की सुविधा नहीं होने और पैसों की कमी के कारण गरिमा को आठवीं कक्षा के बाद अपनी पढ़ाई बीच में ही छोड़नी पड़ी. अब सूरज का सबसे बड़ा सपना डॉक्टर बनने के साथ-साथ अपनी बहन की अधूरी पढ़ाई दोबारा शुरू करवाकर उसके सपनों को भी नई उड़ान देना है.
पढ़ाई में शुरू से ही मेधावी रहे सूरज ने 10वीं में 87 प्रतिशत और 12वीं में 85 प्रतिशत अंक हासिल किए. बायोलॉजी उसका पसंदीदा विषय था और वह बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना देखता था. हालांकि परिवार की आर्थिक स्थिति ऐसी नहीं थी कि मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी का खर्च उठा सके. इसी दौरान उसे कोटा में एलन करियर इंस्टीट्यूट और एलएन माहेश्वरी परमार्थ न्यास द्वारा संचालित ‘शिक्षा संबल’ कार्यक्रम की जानकारी मिली. चयन परीक्षा में सफलता मिलने के बाद उसे निशुल्क NEET कोचिंग के साथ रहने और खाने की सुविधा भी प्रदान की गई. इससे वह आर्थिक चिंताओं से मुक्त होकर पूरी तरह अपनी पढ़ाई और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित कर सका.
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सूरज का कहना है कि यदि ‘शिक्षा संबल’ कार्यक्रम का सहयोग नहीं मिलता, तो शायद वह मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी के लिए कभी कोटा नहीं आ पाता. यह अवसर उसके जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ. कोटा का बेहतर शैक्षणिक माहौल, अनुभवी शिक्षकों का मार्गदर्शन और रहने-खाने सहित सभी जरूरी सुविधाएं मिलने से वह पूरी तरह पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर सका. इसी समर्पण और मेहनत का परिणाम रहा कि उसने NEET UG 2026 में शानदार सफलता हासिल की. अब उसका लक्ष्य एक कुशल डॉक्टर बनकर समाज की सेवा करना, जरूरतमंद मरीजों का इलाज करना और अपने परिवार को बेहतर जीवन देना है.
एलन के निदेशक एवं एलएन माहेश्वरी परमार्थ न्यास के ट्रस्टी नवीन माहेश्वरी ने बताया कि ‘शिक्षा संबल’ कार्यक्रम का उद्देश्य आर्थिक रूप से कमजोर लेकिन प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को आगे बढ़ने का अवसर प्रदान करना है. उन्होंने कहा कि संसाधनों के अभाव में कई प्रतिभाशाली छात्र अपने सपनों को अधूरा छोड़ने के लिए मजबूर हो जाते हैं. लेकिन सही मार्गदर्शन, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और समय पर मिले सहयोग से वे बड़ी सफलताएं हासिल कर सकते हैं. सूरज सुमन की सफलता इसी सोच का जीवंत उदाहरण है. उनकी कहानी यह साबित करती है कि मजबूत इरादे, कठिन परिश्रम और सही अवसर मिल जाए, तो कोई भी सपना असंभव नहीं होता. जिन हाथों में कभी पुताई का ब्रश था, उन्हीं हाथों में अब स्टेथोस्कोप होगा. यही संघर्ष से सफलता तक की एक प्रेरणादायक और मिसाल बनने वाली कहानी है.

