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Rising Bharat Summit 2026 : न्यूज 18 के राइजिंग भारत समिट में डीपटेक इंडस्ट्री के दिग्गजों ने अपने विचार रखे. इंडस्ट्री के लीडर्स ने बताया कि देश में डीपटेक का तेजी से विकास हो रहा है. दक्षिण भारत इस मामले में दुनिया का हब बन रहा है. सरकार की नीतियों की वजह से पिछले कुछ साल में डीपटेक को काफी ग्रोथ मिली है.
राइजिंग भारत समिट 2026 में डीपटेक पर दिग्गजों ने अपनी बात रखी.
नई दिल्ली. भारत के दक्षिणी राज्य सिर्फ देश के भीतर ही नहीं, पूरी दुनिया में डीपटेक के पावरहाउस के रूप में उभर रहे हैं. इन राज्यों में सरकार की नीतियों, निवेशकों की बढ़ती दिलचस्पी, मजबूत रिसर्च इकोसिस्टम और ग्लोबल लेवल पर बढ़ती डिमांड की वजह से दक्षिण में डीपटेक को विकसित करने में मदद मिली है. यही वजह है कि भारत में डीपटेक को विकसित करने में दक्षिणी राज्यों का योगदान लगातार बढ़ रहा है.
बैंगलुरु में चल रही News18 राइजिंग भारत समिट में तकनीकी क्षेत्र के दिग्गजों ने अपनी बात रखी. इस दौरान मौजूद इंडस्ट्री के लीडर्स ने ‘दक्षिण भारत कैसे देश के डीप-टेक लक्ष्यों को आगे बढ़ा रहा है’ विषय पर एक पैनल चर्चा में भारत के डीप-टेक इकोसिस्टम पर बातचीत की. इस चर्चा में T-Hub के सीईओ कविऋत, ध्रुव स्पेस के फ़ाउंडर और सीईओ संजय नेक्कंती, Ethereal Machines के को-फ़ाउंडर और सीईओ कौशिक मुड्डा, कारा टेक्नोलॉजीज के फ़ाउंडर और सीईओ भक्ता केशवचार और Helex की को-फ़ाउंडर और सीईओ पौलमी चौधरी शामिल रहे.
कुछ ही साल में भारत की तेज तरक्की
ध्रुव स्पेस के फाउंडर और CEO संजय नेक्कंती ने कहा कि भारत के डीप-टेक इकोसिस्टम ने पिछले कुछ वर्षों में काफी तरक्की की है. उन्होंने कहा कि भारत में एक डीप-टेक इकोसिस्टम के तौर पर हम काफी आगे आ चुके हैं. ग्लोबल स्पेस इंडस्ट्री से तुलना करते हुए नेक्कंती ने कहा कि अमेरिका में प्राइवेट कंपनियां हज़ारों सैटेलाइट लॉन्च कर रही हैं, जिससे स्पेस टेक्नोलॉजी इंजीनियरिंग के सबसे मुश्किल क्षेत्रों में से एक बन गई है. स्पेस का क्षेत्र आमतौर पर मल्टी-डिसिप्लिनरी इंजीनियरिंग है. यह कई डीप-टेक का कॉम्बिनेशन है जो एक साथ काम करते हैं.
सरकार की मदद से डीप टेक को मिली रफ्तार
उन्होंने इस सेक्टर में इनोवेशन को बढ़ावा देने के लिए सरकार की पहलों जैसे रिसर्च डेवलपमेंट एंड इनोवेशन फंड (RDIF) को भी श्रेय दिया. हमें भी RDIF का फायदा मिला है. इन समस्याओं का समाधान खोजना बहुत रोमांचक है और सरकार की तरफ से इनोवेशन के लिए बढ़ावा भी मिलता है. नेक्कंती के अनुसार, शुरुआती सरकारी मदद ने डीप-टेक स्टार्टअप्स को आगे बढ़ने में अहम भूमिका निभाई है. सरकार इनमें से कुछ डीप-टेक कंपनियों की मददगार रही है, जिससे उन्हें एक शानदार शुरुआत मिली. आज हमारा ऑर्डर बुक लगभग 500 करोड़ रुपये का है और कुछ हज़ार करोड़ रुपये की पाइपलाइन है.
फायदे का सौदा बन रहा डीप टेक
Ethereal Machines के को-फाउंडर और सीईओ कौशिक मुड्डा ने कहा कि सरकारी नीतियों और फंडिंग ने डीप-टेक स्टार्टअप्स के लिए माहौल को काफी बेहतर बनाया है. RDI फंडिंग के लिए केंद्र सरकार को बहुत श्रेय जाता है. यही वजह है कि डीप-टेक अब एक शानदार सेक्टर बन गया है. इस सेक्टर को अब पहले से कहीं ज़्यादा पहचान मिल रही है. सरकारी नीतियों और निवेश की वजह से अब इसे काफी पहचान मिल रही है. फिलहाल देश में ऐसा कोई वेंचर कैपिटल या इन्वेस्टर नहीं है जिसने हमें पहले नजरअंदाज किया हो और फिर बाद में हिस्सेदारी (एलोकेशन) के लिए वापस आया हो.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…
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