Sunday, September 20, 2026
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कभी पाई-पाई को थीं मोहताज, लहठी कारोबार से बदली किस्मत, सालाना 12 लाख टर्नओवर


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Sheohar Aamna Khatun Lahathi Business Success Story: शिवहर जिले की आमना खातून ने अपनी मेहनत और लहठी (लाख की चूड़ियां) बनाने के हुनर से गरीबी को मात दे दी है. कभी कच्ची झोपड़ी में रहने वाली आमना आज 10-12 लाख रुपये का सालाना कारोबार चला रही हैं. पक्के मकान में रहती हैं और अपने बच्चों को उच्च शिक्षा दे रही हैं. जानें इनकी कहानी.

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शिवहर: शिवहर जिले के दोस्तियां गांव की रहने वाली आमना खातून की कहानी महिला सशक्तिकरण और आत्मनिर्भरता की एक मिसाल है. कभी कच्चे और फूस के झोपड़ी वाले घर में रहने को मजबूर आमना ने अपनी लगन और कड़ी मेहनत से अपनी आर्थिक तंगी को मात दी है. उन्होंने ग्रुप से जुड़कर और ऋण लेकर लहठी बनाने का स्वरोजगार शुरू किया था. आज अपनी मेहनत और कमाई के बदौलत उन्होंने न केवल अपना पक्का मकान बना लिया है, बल्कि अपने पूरे परिवार को एक सम्मानजनक और खुशहाल जीवन भी प्रदान किया है.

10-12 लाख का कारोबार, 5-6 लाख बचत
आमना बताती हैं कि उन्हें इस व्यवसाय की प्रेरणा अपने मायके से मिली. जहां यह काम पहले से होता था. घर पर खाली बैठने के बजाय उन्होंने अपने पति के साथ मिलकर छोटे स्तर पर दुकान खोली और लहठी निर्माण का काम शुरू किया. आज पति-पत्नी दोनों मिलकर प्रतिदिन लगभग चालीस पीस लहठी तैयार कर लेते हैं. इस कारोबार से वे सालाना करीब 10 से 12 लाख रुपये का कारोबार कर लेते हैं. जिसमें से 5 से 6 लाख रुपये तक की शुद्ध बचत हो जाती है. इस कमाई से वे लोन की किश्तें भी समय पर चुका रही हैं.

पटना, दिल्ली, देवघर और बनारस जैसे बड़े शहरों में सप्लाई 
उत्पादों की गुणवत्ता और बेहतरीन मार्केटिंग के कारण आमना के बने उत्पादों की मांग काफी अधिक है. वे अपने निर्मित सामान को स्थानीय स्तर पर शिवहर और दोस्तियां चौक के अलावा पटना, दिल्ली, देवघर और बनारस जैसे बड़े शहरों में सप्लाई करती हैं. जहां-जहां से ऑर्डर मिलता है, वहां माल भेजा जाता है. व्यापारी खुद भी आकर यहां से सामान ले जाते हैं. शादी-ब्याह और त्योहारों के सीजन में इनके उत्पादों की मांग बहुत ज्यादा बढ़ जाती है, जिससे व्यापार में निरंतर विस्तार हो रहा है.

झोपड़ी से पक्के मकान तक पहुंचा सफर
इस स्वरोजगार से मिले आर्थिक सम्बल के कारण आमना अपने बच्चों को प्राइवेट स्कूल में पढ़ा रही हैं. उन्हें गुणवत्तापूर्ण शिक्षा दिला पा रही हैं. झोपड़ी से शुरू हुआ उनका यह सफर आज पक्के मकान और एक सफल व्यवसाय तक पहुंच चुका है. आमना खातून का यह प्रयास साबित करता है कि इच्छाशक्ति और मेहनत के बल पर कोई भी महिला आत्मनिर्भर बनकर समाज में सफलता और स्वावलंबन की नई इबारत लिख सकती है.

About the Author

Amit Ranjan

अमित रंजन वर्तमान में News18 में बिहार, झारखंड और दिल्ली से जुड़ी खबरों के समन्वय और संपादन का कार्य देख रहे हैं. खोजी पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है. राजनीति, शिक्षा, खेल, क्राईम और मौसम जैसे विषयों …

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