देश के पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने कहा कि सेना, राजनीतिक इच्छा का सीधा विस्तार है। किसी देश के राजनीतिक हित सबसे ऊपर होते हैं और सेना उन हितों की रक्षा करने वाले कई माध्यमों में से एक हैं। पूर्व CDS ने कहा- “शुरुआत इस बात से करते हैं कि राजनीति और युद्ध अलग नहीं हैं। क्लॉजविट्ज ने कहा था कि युद्ध दूसरे माध्यमों से राजनीति को आगे बढ़ाना है।” पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने मंगलवार को नई दिल्ली में ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद के हालात पर चर्चा की।
यह आयोजन विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन ने रखा था। इस दौरान पूर्व CDS ने राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतांत्रिक शासन के रिश्ते पर बात की। चौहान बोले- युद्ध और राजनीति अलग नहीं जनरल चौहान ने प्रूशियाई जनरल कार्ल वॉन क्लॉजविट्ज की बात जिक्र किया कि युद्ध दूसरे माध्यमों से राजनीति को आगे बढ़ाने का तरीका है। प्रूशियाई जनरल कार्ल वॉन क्लॉजविट्ज की किताब ‘ऑन वॉर’ (वॉम क्रिगे) आधुनिक पश्चिमी सैन्य सिद्धांत की आधारशिला मानी जाती है। यह किताब उनकी मौत के बाद 1832 में उनकी पत्नी मैरी वॉन ब्रुहल ने प्रकाशित की थी। क्लॉजविट्ज ने नेपोलियन के खिलाफ अभियान में हिस्सा लिया था। सरकार को सैन्य विकल्प देना सेना की जिम्मेदारी जनरल चौहान ने कहा कि लोकतंत्र में जब सरकार अपने राजनीतिक उद्देश्यों को हासिल करने के लिए बल प्रयोग का फैसला करती है, तब सेना की जिम्मेदारी दो तरह की होती है- पाकिस्तान हमलों के नतीजों के सबूत नहीं जुटा सका पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने कहा कि पाकिस्तान ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपने हमलों के नतीजों का सबूत नहीं जुटा सका। उसने चीनी कंपनियों समेत कमर्शियल सैटेलाइट इमेजरी हासिल करने की कोशिश की, लेकिन यह साबित नहीं कर सका कि उसके हमलों से कोई टारगेट हिट हुआ। ट्रेनिंग और युद्धाभ्यास से बढ़ते हैं विकल्प जनरल चौहान ने कहा कि सैन्य विकल्पों की संख्या और उनकी गुणवत्ता अचानक तैयार नहीं होती। इसके लिए शांतिकाल में लगातार तैयारी करनी पड़ती है। इसमें कड़ी ट्रेनिंग, युद्धाभ्यास और अलग-अलग संभावित हालात की योजना बनाना शामिल है। विकल्प इस बात पर भी निर्भर करते हैं कि सैन्य नेतृत्व ने किस तरह की ट्रेनिंग दी है, किस तरह के युद्धाभ्यास किए हैं और किन संभावित हालात पर काम किया है। हर सैन्य विकल्प में किसी न किसी तरह का जोखिम होता है। वह उस राजनीतिक जरूरत को भी पूरा करता है, जिसके लिए उसका इस्तेमाल किया जाना है। ऑपरेशन सिंदूर पर अब भी नजर ऑपरेशन सिंदूर को करीब 15 महीने हो चुके हैं। जनरल चौहान ने कहा कि इसके बावजूद ऑपरेशन का रणनीतिक असर बना हुआ है और भारत के साथ विदेशों में भी रणनीतिक मामलों के जानकार इस पर नजर रख रहे हैं। ऐसे ऑपरेशन का आकलन सिर्फ सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसमें ऑपरेशन से मिली सीख, सामने आई कमियों को दूर करने के लिए उठाए गए कदम, आधुनिक युद्ध के बदलते तरीके और दुनिया में बनी अनिश्चितताओं को एक साथ देखना जरूरी है।
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