Friday, August 28, 2026
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रोज चावल खाते हैं तो जान लें कौन सा है बेहतर, ब्राउन राइस या सफेद चावल?


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Which Rice Better For Health: आजकल अगर आप किसी फिटनेस प्रेमी या हेल्दी डाइट फॉलो करने वाले व्यक्ति से बात करें, तो एक सलाह लगभग तय है-सफेद चावल छोड़िए, ब्राउन राइस खाइए. सोशल मीडिया से लेकर डाइट चार्ट तक ब्राउन राइस को सुपरफूड की तरह पेश किया जाता है. ऐसे में कई लोग बिना अपनी उम्र, स्वास्थ्य और पाचन क्षमता को समझे सीधे सफेद चावल की जगह ब्राउन राइस अपनाने लगते हैं, लेकिन सवाल यह है कि क्या हर किसी के लिए ब्राउन राइस बेहतर है? या फिर सफेद चावल को पूरी तरह गलत मान लेना एक जल्दबाज़ी होगी? पोषण विशेषज्ञों का कहना है कि किसी एक खाद्य पदार्थ को पूरी तरह अच्छा या बुरा कहना सही नहीं है. सही चुनाव आपकी जीवनशैली, स्वास्थ्य स्थिति और खाने की मात्रा पर निर्भर करता है. आइए जानते हैं कि दोनों में क्या अंतर है और किसे अपनी थाली में जगह देनी चाहिए.

ब्राउन राइस आखिर इतना अलग क्यों माना जाता है? डॉक्टर ऋषि मजुंदार के अनुसार, ब्राउन राइस की बाहरी परत यानी ब्रान हटाई नहीं जाती. यही वजह है कि इसमें फाइबर, विटामिन बी, मैग्नीशियम और एंटीऑक्सीडेंट जैसे पोषक तत्व सफेद चावल की तुलना में ज्यादा बने रहते हैं. यही फाइबर पाचन को थोड़ा धीमा करता है, जिससे पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है. जिन लोगों को बार-बार भूख लगती है, उनके लिए यह एक उपयोगी विकल्प बन सकता है. (Image-AI generated)

वजन घटाने में कितना मददगार है? सिर्फ ब्राउन राइस से नहीं घटेगा वजन अक्सर लोग सोचते हैं कि सफेद चावल छोड़ते ही वजन तेजी से कम होने लगेगा. हकीकत इससे थोड़ी अलग है. ब्राउन राइस में फाइबर अधिक होने से ओवरईटिंग कम हो सकती है, लेकिन वजन कम करने के लिए यह अकेला उपाय नहीं है, अगर दिनभर जंक फूड, मीठे पेय और कम शारीरिक गतिविधि बनी रहती है, तो केवल ब्राउन राइस खाने से खास फर्क नहीं पड़ेगा. संतुलित आहार, पर्याप्त प्रोटीन और नियमित व्यायाम भी उतने ही जरूरी हैं. (Image-AI generated)

डायबिटीज़ और दिल की सेहत पर क्या असर पड़ता है? ब्राउन राइस का ग्लाइसेमिक इंडेक्स सामान्यतः सफेद चावल से कम माना जाता है. इसका मतलब है कि यह रक्त में शुगर का स्तर अपेक्षाकृत धीरे बढ़ा सकता है. लंबे समय तक संतुलित मात्रा में पूरे अनाज खाने से टाइप-2 डायबिटीज़, बढ़ते कोलेस्ट्रॉल और हृदय संबंधी जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है. हालांकि, जिन लोगों को पहले से डायबिटीज़ है, उन्हें डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के अनुसार ही चावल की मात्रा तय करनी चाहिए. (Image-AI generated)

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क्या सफेद चावल वाकई नुकसानदेह है? हर थाली से इसे हटाना जरूरी नहीं यह सबसे बड़ा भ्रम है कि सफेद चावल पूरी तरह अस्वस्थ भोजन है. वास्तव में सफेद चावल आसानी से पच जाता है और शरीर को जल्दी ऊर्जा देता है. यही कारण है कि बच्चों, बुजुर्गों और बीमारी से उबर रहे लोगों के लिए कई बार यही बेहतर विकल्प माना जाता है. उदाहरण के तौर पर, तेज बुखार या पेट की तकलीफ के दौरान डॉक्टर अक्सर हल्की खिचड़ी या सादा चावल खाने की सलाह देते हैं क्योंकि यह पाचन पर ज्यादा दबाव नहीं डालता. (Image-AI generated)

ब्राउन राइस शुरू करने से पहले रखें ये बात याद अगर आपकी डाइट में अब तक फाइबर बहुत कम रहा है, तो अचानक रोज़ ब्राउन राइस खाना गैस, पेट फूलना या भारीपन जैसी परेशानी दे सकता है. बेहतर तरीका यह है कि शुरुआत में आधा सफेद और आधा ब्राउन राइस मिलाकर खाएं. धीरे-धीरे शरीर इसकी आदत बना लेता है और पाचन भी सहज रहता है. (Image-AI generated)

बाज़ार से खरीदते समय कैसे पहचानें अच्छा ब्राउन राइस? ब्राउन राइस खरीदते समय केवल पैकेट पर लिखा “हेल्दी” देखकर फैसला न करें. प्राकृतिक हल्के भूरे रंग वाला चावल चुनें और भरोसेमंद ब्रांड या अच्छी गुणवत्ता वाले स्रोत से ही खरीदें. अगर दानों का रंग असमान लगे, बहुत ज्यादा चमक हो या गुणवत्ता संदिग्ध लगे, तो उसे लेने से बचना बेहतर माना जाता है. (Image-AI generated)

आखिर किसे चुनना चाहिए? सही जवाब यह है कि दोनों चावल की अपनी जगह है. यदि आप स्वस्थ वयस्क हैं, वजन और ब्लड शुगर पर ध्यान देना चाहते हैं, तो सीमित मात्रा में ब्राउन राइस या अन्य पूरे अनाज शामिल कर सकते हैं. वहीं बच्चों, बुजुर्गों या जल्दी पचने वाले भोजन की जरूरत वाले लोगों के लिए सफेद चावल भी संतुलित आहार का हिस्सा बन सकता है. (Image-AI generated)

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