दिल्ली को विश्वस्तरीय, पर्यावरण-अनुकूल और हरित शहर बनाने की दिशा में सरकार के प्रयासों के बीच साउथेम्प्टन यूनिवर्सिटी के छात्रों के प्रतिनिधिमंडल ने पर्यावरण मंत्री मनजिंदर सिंह सिरसा से मुलाकात की। छात्रों ने दिल्ली-एनसीआर में स्वच्छ वायु को बढ़ावा देना विषय पर तैयार अध्ययन रिपोर्ट मंत्री को सौंपी। इस दौरान पर्यावरण एवं वन विभाग के सचिव विजय कुमार बिधूड़ी भी मौजूद रहे। रिपोर्ट में कहा गया है कि दिल्ली का वायु प्रदूषण केवल राजधानी तक सीमित समस्या नहीं, बल्कि पूरे एयरशेड से जुड़ा मुद्दा है। इसके समाधान के लिए पूर्वानुमान आधारित क्षेत्रीय रणनीति, एकीकृत निगरानी व्यवस्था और पूरे एनसीआर में समन्वित कार्रवाई जरूरी है। छात्रों ने ई-वेस्ट रीसाइक्लिंग, ग्रीन मोबिलिटी और उत्सर्जन मानकों में सुधार जैसे उपाय भी सुझाए। छात्रों के प्रयासों की सराहना करते हुए मंत्री सिरसा ने कहा कि दिल्ली की पर्यावरणीय चुनौतियां जटिल हैं, लेकिन नवाचार, तकनीक और सामूहिक प्रयासों से इनका समाधान संभव है। कचरा प्रबंधन और ई-बसों पर फोकस मंत्री ने कहा कि दिल्ली में रोजाना करीब 13 हजार मीट्रिक टन कचरा उत्पन्न होता है, जबकि 30-35 हजार मीट्रिक टन पुराना कचरा मौजूद है। इसके निपटान के लिए सरकार सर्कुलर इकोनॉमी और संसाधन पुनर्प्राप्ति पर काम कर रही है। प्रदूषण कम करने के लिए इलेक्ट्रिक बसों का बेड़ा भी लगातार बढ़ाया जा रहा है। यमुना को प्रदूषण से बचाने के लिए औद्योगिक अपशिष्ट जल के उच्चस्तरीय उपचार को अनिवार्य किया गया है। मंत्री ने कहा कि सरकार तात्कालिक उपायों के साथ दीर्घकालिक व्यवस्थाओं पर भी काम कर रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में आर्थिक विकास और पर्यावरण संतुलन के साथ दिल्ली को हरित राजधानी बनाने का लक्ष्य है।
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