पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान करीब 3 साल से जेल में बंद हैं। उनकी रिहाई के लिए PTI ने 27 सितंबर को देशभर में मार्च का ऐलान किया है। इससे पहले इस्लामाबाद में प्रशासन ने सख्ती बढ़ा दी है। हाईवे बंद किए जा रहे हैं। करीब 2 हजार कंटेनर सड़कों पर लगाए गए हैं। पंजाब और सिंध से 20 हजार से ज्यादा पुलिसकर्मी बुलाए गए हैं। सरकार ने रैलियों, जुलूस और सार्वजनिक सभाओं पर 2 महीने के लिए रोक लगा दी है। दूसरी तरफ PTI ने भी रास्ते में लगाए जाने वाले कंटेनरों को हटाने की तैयारी शुरू कर दी है। डॉन की रिपोर्ट के मुताबिक पार्टी के कार्यकर्ता और समर्थक बुलडोजर और क्रेन जैसे भारी वाहन जुटा रहे हैं। इन्हें इस्लामाबाद ले जाने की तैयारी है। इस्लामाबाद में धारा 144 लागू, 5 से ज्यादा लोगों के जुटने पर रोक इस्लामाबाद में धारा 144 लागू कर दी गई है। इसके तहत 5 या उससे ज्यादा लोगों के एक जगह जुटने पर रोक है। रैली, जुलूस और प्रदर्शन भी नहीं हो सकेंगे। शहर के कई हिस्सों में कंटेनरों को वेल्डिंग करके जोड़ा गया है। कुछ कंटेनरों के बाहर लोहे के कीले भी लगाए गए हैं। पुलिस के मुताबिक इस्लामाबाद-पेशावर मोटरवे, इस्लामाबाद-डेरा इस्माइल खान मोटरवे और ग्रैंड ट्रंक रोड को कई जगह बंद किया जाएगा। रावलपिंडी और अटक के कुछ इलाकों में 27 सितंबर को मोबाइल और इंटरनेट सेवाएं बंद करने की मांग भी की गई है। शहबाज सरकार ने PTI से मार्च टालने को कहा गृह मंत्री मोहसिन नकवी ने PTI नेताओं से मार्च पर दोबारा विचार करने को कहा है। उन्होंने कहा है कि सरकार इस्लामाबाद की ओर होने वाले मार्च को हर संभव तरीके से रोकेगी। उन्होंने प्रदर्शन के दौरान किसी की जान जाने पर आयोजकों को जिम्मेदार ठहराने की चेतावनी भी दी है। PTI ने हालांकि अपना कार्यक्रम रद्द नहीं किया है। पार्टी का कहना है कि इमरान खान की रिहाई के लिए मार्च किया जाएगा। PTI नेता इसे 2024 के प्रदर्शन से बड़ा बनाने की तैयारी में हैं। हाईकोर्ट ने कहा- सड़कों और सरकारी इमारतों पर कब्जा नहीं कर सकते इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने 14 सितंबर को PTI के मार्च से जुड़े मामले में अहम निर्देश दिए थे। कोर्ट ने कहा था कि कोई राजनीतिक पार्टी या नेता सार्वजनिक सड़क, हाईवे, इंटरचेंज, टोल प्लाजा या सरकारी इमारत पर कब्जा नहीं कर सकता। कोर्ट ने यह भी कहा था कि प्रांतीय सरकारें प्रदर्शन के लिए सरकारी मशीनरी का इस्तेमाल न होने दें। यानी मार्च के दौरान सरकारी संसाधनों के इस्तेमाल को लेकर भी रोक लगाई गई है। इस्लामाबाद हाईकोर्ट ने 14 सितंबर को कहा था कि प्रदर्शन के दौरान कोई राजनीतिक पार्टी, नेता, प्रांतीय सरकार या सरकारी अधिकारी सार्वजनिक सड़कों, हाईवे, इंटरचेंज, टोल प्लाजा या सरकारी इमारतों पर कब्जा नहीं कर सकता। पाकिस्तान में कंटेनरों से रास्ते रोकना पुराना तरीका पाकिस्तान में राजनीतिक प्रदर्शनों के दौरान कंटेनर लगाने का इतिहास करीब 30 साल पुराना है। 1996 में बेनजीर भुट्टो सरकार ने जमात-ए-इस्लामी नेता काजी हुसैन अहमद को इस्लामाबाद पहुंचने से रोकने के लिए कंटेनर लगाए थे। 2014 में इमरान खान के धरने के दौरान यही कंटेनर प्रदर्शन का मंच बन गए। इमरान और उनके समर्थक कई हफ्तों तक एक कंटेनर से भाषण देते रहे। इसके बाद पाकिस्तान की राजनीति में ‘कंटेनर पॉलिटिक्स’ शब्द प्रचलित हो गया। 2016, 2019 और 2022 में हुए बड़े प्रदर्शनों के दौरान भी राजधानी जाने वाले रास्तों को कंटेनर लगाकर बंद किया गया था। अगस्त 2023 से जेल में हैं इमरान 73 साल के इमरान खान अगस्त 2023 से जेल में हैं। उन्हें तोशाखाना मामले में 3 साल की सजा मिलने के बाद गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद उन पर सिफर, अल-कादिर ट्रस्ट और इद्दत निकाह समेत कई मामले दर्ज हुए। बाद में सिफर और इद्दत निकाह मामलों में उन्हें अदालत से राहत मिल गई। तोशाखाना मामले में भी उनकी एक सजा रोक दी गई। इसके बावजूद दूसरे मामलों के चलते वह अभी जेल में हैं। इमरान खान और उनकी पार्टी PTI का कहना है कि 2022 में प्रधानमंत्री पद से हटने के बाद उनके खिलाफ राजनीतिक वजहों से मामले दर्ज किए गए। उनका आरोप है कि उन्हें राजनीति और चुनाव से दूर रखने के लिए ऐसा किया गया। वहीं, पाकिस्तान सरकार और जांच एजेंसियां इन आरोपों को खारिज करती हैं। उनका कहना है कि ये मामले कानूनी प्रक्रिया के तहत चल रहे हैं। ———————– ये खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान ने अफगानिस्तान में 10 ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की:कहा- ड्रोन हमलों का जवाब दिया, तालिबान ने पहले चौकियों पर गोलाबारी की पाकिस्तान ने गुरुवार को अफगानिस्तान में 10 ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की। पाकिस्तान के सूचना मंत्री अताउल्लाह तराड़ ने कहा कि ये हमले अफगानिस्तान से एक दिन पहले हुए ड्रोन हमलों के जवाब में किए गए हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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