शिक्षा विभाग ने 41 वरिष्ठ प्रशासनिक एवं विभागीय अधिकारियों को जिलों का प्रभारी बनाकर उन्हें नियमित रूप से स्कूलों का निरीक्षण करने की जिम्मेदारी दी है। अफसर मौके पर स्कूल की व्यवस्थाएं, सुरक्षा, नामांकन और बच्चों के सीखने का स्तर देखेंगे। स्थानीय स्तर पर समाधान योग्य कमी मिली तो उसे मौके पर ही संबंधित अधिकारियों से समन्वय कर दूर कराने पर जोर रहेगा।
टोंक जिले की जिम्मेदारी वर्षा मीना को सौपी गई है। स्कूल शिक्षा एवं भाषा, पुस्तकालय व पंचायतीराज (प्रारंभिक शिक्षा) विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव राजेश यादव के आदेश के तहत यह व्यवस्था लागू की गई है। पीएम श्री और आवासीय स्कूल होंगे एजेंडे में शामिल प्रत्येक निरीक्षण के दौरान कम से कम दो पीएम श्री और दो आवासीय विद्यालयों का निरीक्षण करना होगा। इसके अलावा अन्य विद्यालयों की व्यवस्थाओं की भी समीक्षा की जाएगी। पेयजल की उपलब्धता, छात्र-छात्राओं के लिए अलग और क्रियाशील शौचालय, स्कूल भवन की स्थिति और शैक्षणिक वातावरण प्रमुख जांच बिंदु होंगे। पीएम श्री और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में स्वीकृत क्षमता के मुकाबले नामांकन की स्थिति भी देखी जाएगी। असुरक्षित या जर्जर घोषित स्कूल भवनों और कमरों को लेकर निरीक्षण में विशेष सख्ती रहेगी। ऐसे भवन या कमरों पर तत्काल ताला लगाने और दरवाजे पर लाल रंग से ‘एक्स’ का निशान लगाने के निर्देश दिए गए है। इसके बाद प्राथमिकता के आधार पर उनके ध्वस्तीकरण की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी। कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालयों में छात्राओं की सुरक्षा, सीसीटीवी, भवन और शौचालयों की स्थिति भी जांची जाएगी। स्कूल परिसर में संचालित सह-स्थित आंगनवाड़ी केंद्रों के भवनों की सुरक्षा भी निरीक्षण का हिस्सा होगी। बच्चों की पढ़ाई भी परखेंगे निरीक्षण में यह भी देखा जाए जाएगा कि स्कूल में सुविधाएं उपलब्ध होने के साथ बच्चों के सीखने का वास्तविक स्तर क्या है। जिला प्रभारियों को निर्देश दिए गए है कि निरीक्षण के दौरान सामने आने वाली ऐसी समस्याएं, जिनका समाधान स्थानीय स्तर पर संभव है, उन्हें लंबित नहीं रखा जाए। संबंधित अधिकारियों से समन्वय कर मौके पर ही समाधान कराने का प्रयास किया जाए। प्रदेशाध्यक्ष,शिक्षक संघ रेसटा,राजस्थान मोहर सिंह सलावद ने कहा शिक्षा विभाग द्वारा प्रदेश के 41 जिलों में संचालित राजकीय विद्यालयों के निरीक्षण, शैक्षणिक एवं प्रशासनिक व्यवस्थाओं की प्रभावी मॉनिटरिंग तथा विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन की समीक्षा के लिए प्रशासनिक एवं विभागीय अधिकारियों को जिला प्रभारी नियुक्त किया गया है। जिला प्रभारियों द्वारा संबंधित जिलों में विद्यालयों का निरीक्षण कर व्यवस्थाओं का जायजा लिया जाएगा तथा निरीक्षण के आधार पर आवश्यक सुधारात्मक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी।
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