Monday, September 28, 2026
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सोशल मीडिया अकाउंट बनाने को 18 साल की उम्र जरूरी: सुप्रीम कोर्ट ने सरकार से नियम बनाने को कहा, प्लेटफॉर्म्स को भारतीय कानून मानना होगा


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नई दिल्ली6 मिनट पहले

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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र से सोशल मीडिया अकाउंट्स के लिए 18 साल की उम्र लागू करने वाले वैधानिक नियमों पर विचार करने को कहा है।

कोर्ट ने कहा कि नाबालिगों से जुड़े भारतीय कानूनों का पालन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को करना होगा। नाबालिग 18 साल से कम उम्र के होते हैं और खुद कानूनी अनुबंध नहीं कर सकते।

चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने 28 सितंबर को यह टिप्पणी की।

बेंच जस्ट राइट्स फॉर चिल्ड्रन अलायंस (JRCA) की याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिका में सोशल मीडिया और दूसरे डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर बच्चों की सुरक्षा की मांग की गई है।

जस्टिस जॉयमाल्या बागची ने कहा कि यह शर्त सिर्फ गाइडलाइन तक सीमित नहीं रहनी चाहिए। उन्होंने सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता से इंटरमीडियरी नियमों के तहत इसे “वैधानिक रूप” देने पर विचार करने को कहा।

जस्टिस बागची ने कहा, “सॉफ्टवेयर को भारतीय कानून के अनुरूप होना चाहिए।” उन्होंने जोर दिया कि प्लेटफॉर्म्स को भारतीय कानूनी जरूरतों के हिसाब से अपनी व्यवस्था बनानी होगी।

तुषार मेहता ने कहा कि केंद्र इस मुद्दे की जांच करेगा। उन्होंने बेंच से कहा, “कुछ किया जा सकता है, कुछ किया जाना चाहिए और किया जाएगा।”

मेहता ने इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट (IT Act) की धारा 79 का भी जिक्र किया। यह धारा इंटरमीडियरीज से जुड़ी है।

यह याचिका इस सवाल को उठाती है कि कानूनी रूप से बाध्यकारी अनुबंध करने में असमर्थ नाबालिग डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर खुद अकाउंट कैसे बना और चला सकते हैं।

मेहता ने कहा कि पहली नजर में यह मुद्दा डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन एक्ट, 2023 के दायरे में आता है।

हालांकि, JRCA की ओर से पेश वरिष्ठ वकील एचएस फूलका ने कहा कि डेटा प्रोटेक्शन कानून के संबंधित प्रावधान 2027 में लागू होंगे।

उन्होंने दलील दी कि नए कानून का इंतजार करने की जरूरत नहीं है। मौजूदा कानून के तहत नाबालिगों की ओर से किए गए समझौते शून्य होते हैं।

सॉलिसिटर जनरल ने सुझाव दिया कि माता-पिता की सहमति पर आधारित नियामकीय व्यवस्था बनाई जा सकती है। इसमें अनुबंध माता-पिता और प्लेटफॉर्म के बीच किया जा सकता है।

विदेश में रजिस्टर्ड प्लेटफॉर्म्स पर भी भारतीय कानून लागू

बेंच ने यह भी कहा कि भारत में काम करने वाले कई डिजिटल इंटरमीडियरीज विदेशों में निगमित या रजिस्टर्ड हैं। इनमें अमेरिका में रजिस्टर्ड या निगमित कंपनियां भी शामिल हैं।

कोर्ट ने कहा कि भारत में काम करने के दौरान इन प्लेटफॉर्म्स को भारतीय कानूनों का पालन करना होगा।

फूलका ने कहा कि केंद्र IT Act की धारा 79 के तहत इंटरमीडियरीज को नाबालिगों से जुड़े कानूनों का पालन सुनिश्चित करने का निर्देश दे सकता है।

याचिका में बच्चों को ऑनलाइन खतरों का जिक्र

याचिका में ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स से बच्चों को होने वाले कई खतरों का जिक्र किया गया है। इनमें ग्रूमिंग, यौन शोषण, डिजिटल तस्करी और सेक्सटॉर्शन शामिल हैं।

याचिका में व्यवहार की प्रोफाइलिंग, निजी डेटा के गलत इस्तेमाल और साइबरबुलिंग का खतरा भी बताया गया है।

यह खबर 28 सितंबर 2026 को रात 9:17 बजे अपडेट की गई।



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