प्रयागराज महाकुंभ-2025 के दौरान चर्चा में आई मध्यप्रदेश की युवती की जन्मतिथि बदलने के महेश्वर नगर पालिका के आदेश को हाई कोर्ट की इंदौर बेंच ने रद्द कर दिया है। नगर पालिका ने युवती के पिता के आवेदन पर उसकी जन्मतिथि 1 जनवरी 2008 से बदलकर 30 दिसंबर 2009 कर दी थी। इस बदलाव के बाद सरकारी दस्तावेजों के आधार पर बालिग हो चुकी युवती की उम्र फिर नाबालिग हो गई थी। मामले की सुनवाई के दौरान हाई कोर्ट ने कहा कि किसी व्यक्ति की जन्मतिथि में इस तरह का बदलाव करने से पहले संबंधित व्यक्ति को सुनने का अवसर दिया जाना जरूरी है। जन्म प्रमाण पत्र समेत कई दस्तावेजों में 1 जनवरी 2008 दर्ज युवती को जून 2025 में जारी जन्म प्रमाण पत्र में उसकी जन्मतिथि 1 जनवरी 2008 दर्ज थी। इसके अलावा आधार कार्ड, पैन कार्ड और अन्य सरकारी दस्तावेजों में भी यही जन्मतिथि दर्ज होने की बात सामने आई। इसके बाद उसके पिता ने जन्मतिथि में संशोधन के लिए महेश्वर नगर पालिका में आवेदन किया। नगर पालिका ने आवेदन पर कार्रवाई करते हुए जन्मतिथि बदलकर 30 दिसंबर 2009 कर दी। जन्मतिथि बदलने से उम्र पर पड़ा सीधा असर जन्मतिथि में करीब दो साल का बदलाव होने से युवती की कानूनी उम्र की स्थिति भी बदल गई। पहले के दस्तावेजों के अनुसार वह बालिग थी, जबकि नई जन्मतिथि के आधार पर उसकी उम्र 18 वर्ष से कम हो गई। मामला हाई कोर्ट पहुंचने पर जन्मतिथि बदलने की प्रक्रिया और युवती को सुनवाई का अवसर दिए जाने के मुद्दे पर सवाल उठाए गए। सरकार की ओर से चार वरिष्ठ वकील पेश हुए मामले में सरकार की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से पेश हुए। उनके साथ अतिरिक्त महाधिवक्ता सोनल गुप्ता, उप महाधिवक्ता श्रेय राज सक्सेना और सरकारी एडवोकेट आदित्य गर्ग भी कोर्ट में मौजूद रहे। हाई कोर्ट ने महेश्वर नगर पालिका द्वारा जन्मतिथि बदलने के आदेश को रद्द कर दिया। कोर्ट के आदेश का आधार यह रहा कि युवती को सुने बिना उसकी जन्मतिथि में इस तरह का बदलाव नहीं किया जा सकता।
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कुंभ की ‘वायरल गर्ल’ की जन्मतिथि बदलने का आदेश रद्द: हाई कोर्ट- युवती को सुने बिना नहीं बदली जा सकती जन्मतिथि; पिता के आवेदन पर नगर पालिका ने 2008 को किया था 2009 – Indore News
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