Saturday, October 3, 2026
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रूस से तेल घटा तो भारत ने निकाला गजब का जुगाड़, समंदर के बीचों-बीच कर दिया खेल


नई दिल्‍ली. अमेरिका-ईरान जंग की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्‍य से दुनिया को तेल की सप्‍लाई बहुत कम हो गई है. रूस पर यूक्रेन के ड्रोन हमलों की वजह से भारत को अब रूसी तेल भी मिल रहा है. लेकिन, भारत में फिर भी कच्‍चे तेल की कोई कमी नहीं है. खास बात यह है कि अब खाड़ी देशों से भारत को भरपूर तेल मिल रहा है. दरअसल, भारत ने इराक और सऊदी अरब जैसे देशों के साथ मिलकर तेल सप्‍लाई के खेल को ही बदल दिया है.

दरअसल, भारत को अब ‘शिप-टू-शिप’ (STS) ट्रांसफर के जरिए खाड़ी देशों से खूब कच्‍चा तेल मिल रहा है. पश्चिम एशिया में तनाव और युद्ध की आशंका के बीच खाड़ी देशों का सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ता होर्मुज जलडमरूमध्य बेहद जोखिम भरा हो चुका है. इराक, कुवैत और कतर इसी संकरे रास्ते पर पूरी तरह निर्भर हैं. जंग के खतरे और महंगे बीमा के डर से सीधे बड़े टैंकर भेजना आत्मघाती साबित हो सकता है. इसका तोड़ निकाला गया शिप-टू-शिप (STS) कार्गो ट्रांसफर के जरिए. सामान्य तौर पर तेल सीधे टैंकर में भरकर मंजिल तक भेजा जाता है. लेकिन इस नए जुगाड़ में निर्यातक देश एक छोटे शटल टैंकर में तेल लोड करते हैं. यह शटल टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य के सबसे खतरनाक और तनावग्रस्त हिस्से को पार करता है. यानी खतरे का पूरा जोखिम आपूर्तिकर्ता देश खुद उठाते हैं.

समुद्र में ही अदला-बदली

शटल टैंकर जलडमरूमध्य पार कर बाहर अपेक्षाकृत शांत और सुरक्षित अंतरराष्ट्रीय समुद्री इलाके में पहुंचता है, वहां पहले से लंगर डाले खड़ा बड़ा टैंकर पाइपों के जरिए तेल अपने में ट्रांसफर करा लेता है और सीधे भारतीय बंदरगाहों के लिए रवाना हो जाता है. इस अनूठे तालमेल ने ढुलाई के भारी जोखिम को भारत के सिर से पूरी तरह उतार दिया.

खाड़ी देशों से खूब आ रहा तेल

यह शिप-टू-शिप ट्रांसफर का ही कमाल है कि खाड़ी देशों से अब भारत को तेल की आपूर्ति बढ़ रही है. सितंबर में इराक से भारत का तेल आयात मासिक आधार पर 238.2% की भारी छलांग लगाकर 5,10,000 बैरल प्रतिदिन (BPD) के पार पहुंच गया. सऊदी अरब से खरीद 56.2% बढ़कर लगभग 5,43,000 bpd हो गई, जबकि कुवैत से आयात 104.4% उछलकर 3,17,000 बीपीडी तक जा पहुंचा. अगस्त में कतर से खरीद शून्य थी, लेकिन सितंबर में वहां से भी रोजाना करीब 1,10,000 बैरल कच्चा तेल आया. खाड़ी आपूर्तिकर्ताओं में केवल संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से आयात 15.8% घटकर 4,60,000 bpd रहा. कुल मिलाकर, भारत के कुल तेल आयात में इन पांच पश्चिम एशियाई देशों की हिस्सेदारी अगस्त के 26% से उछलकर सितंबर में 36.7% पर पहुंच गई.

रूस से घटी सप्‍लाई

कमोडिटी ट्रैकर Kpler के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में भारत का रूसी तेल आयात लगभग 9% घटकर 1.9 मिलियन बैरल प्रतिदिन (bpd) पर आ गया. अगस्त में यह 2.1 मिलियन बीपीडी था. जुलाई में रिकॉर्ड 2.8 मिलियन bpd छूने के बाद यह पांच महीने का निचला स्तर है.

यूक्रेन द्वारा रूस के तेल एवं गैस इंफ्रास्ट्रक्चर पर किए गए हमलों से रूसी क्रूड की उपलब्धता प्रभावित हुई. इसके अलावा चीनी रिफाइनरियों ने भी रूसी तेल की खरीद बढ़ा दी है. इससे भी भारत को कम तेल मिल रहा है. हालांकि, गिरावट के बावजूद सितंबर में भारत की कुल तेल खरीद में रूस की हिस्सेदारी 35% से ज्यादा बनी रही.



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