Monday, October 5, 2026
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जर्मनी-अमेरिका के 3 वैज्ञानिकों को मेडिसिन का नोबेल: दिमागी कोशिकाओं को रोशनी से कंट्रोल करने की तकनीक खोजी, मानसिक बीमारियों पर रिसर्च आसान हुई



09:03 AM5 अक्टूबर 2026

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5 वैज्ञानिकों के नाम चर्चा में

1. स्वेतलाना मोइसोव: वजन घटाने वाली दवाओं की नींव

स्वेतलाना मोइसोव ने GLP-1 हार्मोन के उस हिस्से की पहचान करने में अहम भूमिका निभाई, जो शरीर पर सबसे ज्यादा असर करता है। GLP-1 भूख और ब्लड शुगर को नियंत्रित करता है। उनकी रिसर्च ने आगे चलकर मोटापा और डायबिटीज की दवाओं का रास्ता खोला। इस काम में डैनियल ड्रकर और जेन्स जूल होल्स्ट का भी अहम योगदान रहा।

2. डैनियल ड्रकर: GLP-1 को इलाज तक पहुंचाया

डैनियल ड्रकर ने GLP-1 के शरीर पर असर को समझने में अहम योगदान दिया। उनकी रिसर्च से पता चला कि यह हार्मोन इंसुलिन, ब्लड शुगर और भूख को कैसे प्रभावित करता है। उनके काम ने GLP-1 आधारित दवाओं को डायबिटीज और मोटापे के इलाज तक पहुंचाने में मदद की।

3. डेविड लियू: DNA में सटीक बदलाव

डेविड लियू ने जीन एडिटिंग की ऐसी तकनीकें विकसित कीं, जिनसे DNA में खास हिस्सों को ज्यादा सटीक तरीके से बदला जा सकता है। उनकी बेस एडिटिंग और प्राइम एडिटिंग तकनीकों का इस्तेमाल आनुवंशिक बीमारियों के इलाज की दिशा में किया जा रहा है। उनका नाम मेडिसिन के साथ 2026 केमिस्ट्री नोबेल की चर्चाओं में भी है।

4. डेनिस स्लैमोन: कैंसर की लक्षित दवा

डेनिस स्लैमोन ने स्तन कैंसर में HER2 जीन की भूमिका समझने में अहम काम किया। उनकी रिसर्च और क्लिनिकल ट्रायल से हर्सेप्टिन जैसी लक्षित दवा के विकास का रास्ता खुला। यह दवा HER2-पॉजिटिव स्तन कैंसर के इलाज में बड़ा बदलाव लेकर आई।

5. टिमोथी स्प्रिंगर: ऑटोइम्यून बीमारियों के इलाज की दिशा

टिमोथी स्प्रिंगर ने यह समझने में अहम योगदान दिया कि प्रतिरक्षा प्रणाली की कोशिकाएं एक-दूसरे को कैसे पहचानती और जोड़ती हैं। उनकी रिसर्च से ऐसी दवाओं के विकास में मदद मिली, जिनका इस्तेमाल ऑटोइम्यून बीमारियों के इलाज में होता है।



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