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Success Story : संजुक्ता दास ने उस उम्र में बिजनेस शुरू किया, जिसमें लोग रिटायरमेंट की सोचते हैं. मात्र दस हजार रुपये लगाकर दो साल पहले शुरू किया गया उनका बिजनेस आज सालाना 11 लाख टर्न ओवर वाला कारोबार बन चुका है. संजुक्ता का सफर साबित करता है कि सही योजना और इच्छाशक्ति के आगे संसाधन और उम्र कभी बाधा नहीं बन सकते.
साल 2024 में संजुक्ता दास ने पिग फार्म और डेयरी फार्मिंग शुरू की.
नई दिल्ली. अगर मन में कुछ कर गुजरने का पक्का इरादा हो, तो उम्र की कोई भी सीमा आपके कदमों को रोक नहीं सकती. इस बात को सच साबित कर दिखाया है ओडिशा के जगतसिंहपुर की रहने वाली 62 वर्षीय संजुक्ता दास ने. जिस उम्र में लोग सारी जिम्मेदारियों से मुक्त होकर रिटायरमेंट की जिंदगी जीने की सोचने लगते हैं, उस उम्र में संजुक्ता ने महज ₹10,000 रुपये लगाकर पशुपालन शुरू किया. अपनी मेहनत के दम पर आज उन्होंने ₹11 लाख के सालाना टर्नओवर वाला बिजनेस खड़ा कर दिया है. आज उनका कारोबार ओडिशा की सरहदों को लांघकर मुंबई, कोलकाता और गोवा तक फैल चुका है.
संजुक्ता को यह सफलता रातोंरात नहीं मिली. उन्होंने साल 2000 में 10 महिलाओं के साथ मिलकर हरपार्वती स्वयं सहायता समूह की नींव रखी थी. समूह की सचिव रहते हुए उन्होंने सरकारी राशन की दुकान चलाने से लेकर मिड-डे मील पकाने और अगरबत्ती, पापड़ व बड़ी बनाकर बेचने जैसे कई छोटे काम किए. उत्पाद मेलों और प्रदर्शनियों में बिकते तो थे, लेकिन कमाई कुछ खास नहीं थी. संजुक्ता किसी ऐसे काम की तलाश में थीं जो पूरे साल चले.
पशुपालन ने बदली जिंदगी
साल 2024 में उन्होंने अपनी जिंदगी का सबसे बड़ा दांव खेला. उन्होंने ₹10,000 लगाकर सुअर पालन और डेयरी फार्मिंग में कदम रखा. बेहतर प्रबंधन और मेहनत के चलते उनका छोटा सा काम बड़े कमर्शियल फार्म में तब्दील हो गया. अब वे हर साल 40 से 50 सुअर बेचती हैं, जिनका भाव वजन और आकार के हिसाब से ₹18,000 से ₹20,000 प्रति सुअर तक मिलता है. उनके फार्म से पशुओं की सीधी आपूर्ति आंध्र प्रदेश, मुंबई, गोवा और कोलकाता में होती है.
रोजाना 150 लीटर दूध का उत्पादन
सुअर पालन के साथ-साथ संजुक्ता की डेयरी यूनिट भी इलाके में मिसाल बन चुकी है. उनके फार्म से हर दिन करीब 150 लीटर ताजा दूध निकलता है. वे सिर्फ स्थानीय ग्राहकों को ही दूध नहीं बेचतीं, बल्कि आसपास के महिला स्वयं सहायता समूहों को रियायती दरों पर दूध उपलब्ध कराती हैं. महालक्ष्मी स्वयं सहायता समूह उनके फार्म से रोज 100 से 120 लीटर दूध खरीदकर अपना मिल्क कलेक्शन सेंटर चला रहा है, जिससे दर्जनों अन्य ग्रामीण महिलाओं को भी घर बैठे नियमित आय हो रही है.
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रुली बिश्नोई मीडिया इंडस्ट्री में 20 साल से अधिक के अनुभव वाले सीनियर पत्रकार हैं. वह अभी News18 Hindi (hindi.news18.com) से जुड़े हैं और बिजनेस वर्टिकल में काम करते हैं. यहां वे बिजनेस जगत के मुश्किल आंकड़ों …
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