फ्रांस में बढ़ती महंगाई और छात्रों पर पुलिस कार्रवाई के विरोध में शनिवार को हजारों लोग सड़कों पर उतर आए हैं। आंदोलन में छात्र, शिक्षक, मजदूर, किसान और बुजुर्ग शामिल हैं। कुछ जगहों पर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच हिंसक झड़पें हुई हैं। देशभर में सैकड़ों लोगों को गिरफ्तार किया गया है। अधिकारियों ने हिंसा के लिए वामपंथी समूहों को जिम्मेदार ठहराया है। पुलिस ने राजधानी पेरिस में करीब 25 मेट्रो स्टेशन बंद कर दिए हैं। इनमें राष्ट्रपति भवन, संसद व सरकारी कार्यालयों के आसपास के स्टेशन शामिल हैं। फ्रांस में प्रदर्शन से जुड़ीं 10 फोटोज… पुलिस से टकराव की 4 तस्वीरें आगजनी की 4 तस्वीरें… विरोध की 2 तस्वीरें स्कूलों से शुरू हुआ आंदोलन देशभर में फैला इस आंदोलन की शुरुआत पिछले महीने पेरिस के उत्तरी बाहरी इलाकों के स्कूलों में हुई थी। वहां शिक्षकों की गैरमौजूदगी और स्कूलों की खराब हालत को लेकर छात्रों में नाराजगी थी। धीरे-धीरे यह विरोध पूरे देश में फैल गया। अब इसमें सामाजिक असमानता, सरकारी खर्च में कमी और सार्वजनिक सेवाओं की खराब स्थिति जैसे मुद्दे भी शामिल हो गए हैं। फ्रांस की प्रमुख मजदूर यूनियनों में शामिल सीजीटी ने भी प्रदर्शन का समर्थन किया। यूनियन ने ज्यादा वेतन और पेंशन, कम कीमतों और लोगों की जरूरतें पूरी करने वाली सार्वजनिक सेवाओं की सुरक्षा की मांग की। प्रदर्शनकारियों की 4 अहम मांगें… 2018 के ‘येलो वेस्ट’ आंदोलन को दोहराने की अपील प्रदर्शन से पहले सोशल मीडिया पर लोगों से 2018 के ‘येलो वेस्ट’ आंदोलन को दोबारा शुरू करने की अपील की गई थी। इस आंदोलन में लोग पीले रंग की चमकदार जैकेट पहनकर सड़कों पर उतरते थे। फ्रांस में गाड़ियों के ड्राइवरों के लिए ऐसी जैकेट रखना जरूरी होता है, ताकि सड़क पर गाड़ी खराब होने या किसी आपात स्थिति में वे दूर से दिखाई दे सकें। प्रदर्शनकारियों ने इसी जैकेट को विरोध का प्रतीक बना लिया। इसलिए इस आंदोलन को फ्रेंच भाषा में ‘गिले जॉन’ और हिंदी में ‘येलो वेस्ट’ यानी ‘पीली जैकेट वाला आंदोलन’ कहा जाने लगा। मैक्रों ने शांति बनाए रखने की अपील की राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने शुक्रवार को लोगों से शांति बनाए रखने और सार्वजनिक व निजी संपत्ति का सम्मान करने की अपील की थी। उन्होंने कहा कि प्रदर्शन करना और अपनी बात रखना संवैधानिक अधिकार है, लेकिन इसके साथ दूसरों का सम्मान करना भी जरूरी है।
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