नई दिल्ली5 घंटे पहले
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भारतीय वायुसेना की संचार क्षमता मजबूत करने के लिए देश में जीसैट-7सी सैन्य उपग्रह लॉन्च किया जाएगा। रक्षा मंत्रालय ने गुरुवार को न्यू स्पेस इंडिया लिमिटेड के साथ 2,563 करोड़ रुपए का करार किया। इसके तहत उपग्रह का डिजाइन, विकास और निर्माण किया जाएगा।
इस उपग्रह की सबसे बड़ी खासियत दूर तक सुरक्षित संचार उपलब्ध कराने की क्षमता होगी। इससे लड़ाकू विमानों, निगरानी विमानों, मानवरहित विमानों और जमीन पर मौजूद सैन्य केंद्रों के बीच संपर्क स्थापित करने में मदद मिलेगी। सामान्य रेडियो संचार की पहुंच से बाहर होने पर भी उपग्रह के जरिए सूचनाओं का आदान-प्रदान संभव हो सकेगा।
भारतीय वायुसेना का यह दूसरा समर्पित संचार उपग्रह होगा। पहला उपग्रह जीसैट-7ए दिसंबर 2018 में प्रक्षेपित किया गया था। उसकी निर्धारित कार्य अवधि 8 साल थी और उसकी क्षमता का लगभग 30% हिस्सा सेना को भी आवंटित किया गया था।

अंतरिक्ष में संचार केंद्र का काम करेगा सैटेलाइट
जीसैट-7सी अंतरिक्ष में संचार केंद्र की तरह काम करेगा। यह विमानों और जमीन पर मौजूद सैन्य इकाइयों के बीच संपर्क बनाने में मदद करेगा। जब विमान सामान्य रेडियो की सीधी पहुंच से दूर होंगे, तब उपग्रह के जरिए संदेश एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाए जा सकेंगे। इससे लड़ाकू विमान, हवाई निगरानी और नियंत्रण विमान, मानवरहित विमान और जमीन पर मौजूद कंट्रोल सेंटर सूचनाएं साझा कर सकेंगे।
भारतीय सेनाओं के लिए 52 सैटेलाइट
दरअसल, ऑपरेशन सिंदूर के बाद भारत ने सैन्य अंतरिक्ष क्षमता बढ़ाने पर जोर दिया है। सरकार ने 26,968 करोड़ रुपए के अंतरिक्ष आधारित निगरानी कार्यक्रम (एसबीएस-3) को तेजी दी है। इसके तहत 52 सैन्य उपग्रह अंतरिक्ष में स्थापित करने की योजना है। इनके लॉन्च की तैयारी जारी है।

सेना और नौसेना के पास भी अपने उपग्रह
सेना के लिए जीसैट-7बी बनाने का 3,000 करोड़ रुपए का करार मार्च 2023 में हुआ था। नौसेना का जीसैट-7आर नवंबर 2025 में प्रक्षेपित किया गया था। ये परियोजनाएं तीनों सेनाओं की अलग-अलग संचार जरूरतों के लिए अंतरिक्ष आधारित क्षमता बढ़ाने की योजना का हिस्सा हैं।
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