Friday, October 23, 2026
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हवा में उड़ते हुए पहुंचेंगे मां कामाख्या के दरबार, स्टेशन से 6 मिनट का सफर


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Kamakhya Temple Ropeway : कामख्‍या मंदिर रेलवे स्‍टेशन से दस किलोमीटर दूर है. मंदिर में दर्शन को हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं. अब सरकार रेलवे स्‍टेशन से मंदिर परिसर तक रोपवे बनाने जा रही है. कामख्‍या रोपवे प्रोजेक्‍ट के लिए टेंडर जारी कर दिया गया है.

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असम में मां कामाख्या देवी के दर्शन को जाने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी है.

नई दिल्‍ली. असम में मां कामाख्या देवी के दर्शन को जाने वाले लाखों श्रद्धालुओं के लिए खुशखबरी है. कामाख्या रेलवे स्टेशन से मंदिर तक पहुंचने के लिए अब भारी ट्रैफिक से जूझना नहीं पड़ेगा. श्रद्धालु जल्‍द ही रोपवे में हवा में उड़ते हुए रेलवे स्‍टेशन से महज 6 मिनट में सीधे मंदिर परिसर पहुंच सकेंगे. सड़क मार्ग से इस सफर को तय करने में कम से कम 20 मिनट का समय लगता है. 1.43 किलोमीटर लंबे इस रोपवे प्रोजेक्‍ट को धरातल पर उतारने के लिए 201.52 करोड़ रुपये का टेंडर जारी कर दिया गया है. नेशनल हाईवे लॉजिस्टिक्स मैनेजमेंट लिमिटेड (NHLML) ने यह टेंडर जारी किया है.

कामाख्या देवी मंदिर असम के गुवाहाटी में नीलांचल पर्वत पर स्थित एक प्रमुख और प्राचीन शक्तिपीठ है. गुवाहाटी रेलवे स्टेशन से यह लगभग 10 किलोमीटर दूर है.सामान्य दर्शन निःशुल्क होते हैं, जबकि जल्दी दर्शन के लिए वीआईपी टिकट काउंटर से लिए जा सकते हैं. हर साल यहां देश-दुनिया से लाखों श्रद्धालु मां कामाख्‍या के दर्शन करने आते हैं.

कामख्‍या रोपवे प्रोजेक्‍ट जिस कंपनी को सौंपा जाएगा, वो रोपवे का निर्माण करेगी और तय समय तक इसका संचालन करने के बाद सरकार को सौंप देगी. सरकारी ई-प्रोक्योरमेंट पोर्टल पर इस प्रोजेक्ट से जुड़ा टेंडर डॉक्‍यूमेंट उपलब्ध करा दिए हैं. इच्छुक कंपनियां 8 दिसंबर 2026 दोपहर 3 बजे तक ऑनलाइन अपने प्रस्‍ताव जमा कर सकती हैं.. 9 दिसंबर को दोपहर 3:30 बजे बोलियां खोली जाएंगी. टेंडर के लिए कंपनी का चयन होने के बाद कामख्‍या रोपवे के निर्माण कार्य के शुरुआत की तारीख तय कर दी जाएगी.

रोजाना 16,500 यात्री कर सकेंगे सफर

कुछ समय पहले केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने कामख्‍या रोपवे के बारे में कहा था कि यह प्रोजेक्ट ‘विकास भी, विरासत भी’ की सोच का बेहतरीन उदाहरण है. इस रोपवे सिस्टम में 18 अत्याधुनिक गोंडोला (केबिन) लगाए जाएंगे. हर रोज 16,500 से अधिक श्रद्धालु इस रोपवे के जरिए मंदिर आ जा सकेंगे. पर्यावरण के अनुकूल यह केबल कार सिस्टम नीलाचल पहाड़ी क्षेत्र की सड़कों पर वाहनों का भारी दबाव कम करेगा और स्थानीय पर्यटन व रोजगार को नए अवसर देगा.

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रुली बिश्‍नोई

रुली बिश्‍नोई मीडिया इंडस्ट्री में 20 साल से अधिक के अनुभव वाले सीनियर पत्रकार हैं. वह अभी News18 Hindi (hindi.news18.com) से जुड़े हैं और बिजनेस वर्टिकल में काम करते हैं. यहां वे बिजनेस जगत के मुश्किल आंकड़ों …

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