Last Updated:
बिलासपुर की सरिता वैष्णव बिहान योजना से जुड़कर अचार बनाने का व्यवसाय कर रही हैं. उन्होंने घर से ही आम, कटहल, लहसुन और आंवले समेत कई तरह के अचार बनाने शुरू किए. अचार बेचकर लागत निकालने के बाद हर महीने 6 से 8 हजार रुपये कमा रही हैं. स्वयं सहायता समूह और बिहान योजना के सहयोग से सरिता आत्मनिर्भर बनकर परिवार को आर्थिक सहारा दे रही हैं.
बिलासपुर: अगर हौसले बुलंद हों और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो छोटी सी शुरुआत भी बड़ी सफलता की कहानी बन सकती है. इसकी मिसाल बिलासपुर जिले के ग्राम पंचायत अमने की रहने वाली सरिता वैष्णव हैं, जिन्होंने बिहान योजना से जुड़कर न सिर्फ खुद का रोजगार शुरू किया, बल्कि अपनी मेहनत से परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत बनाया है. कभी घर की जिम्मेदारियों के बीच सीमित रहने वाली सरिता आज घर पर ही अलग-अलग तरह के स्वादिष्ट अचार तैयार कर रही हैं और उन्हें बाजार में बेचकर अच्छी खासी कमाई कर रही हैं. सरिता ने स्वयं सहायता समूह के माध्यम से पहले आरएफ की राशि प्राप्त की और फिर डेढ़ लाख रुपये का लोन लेकर करीब 500 रुपये की छोटी पूंजी से अचार बनाने का कारोबार शुरू किया. कारोबार में अच्छा मुनाफा मिलने के बाद उन्होंने 3 लाख रुपये का अतिरिक्त लोन लिया और अपने काम को आगे बढ़ाया. आज सरिता आम, कटहल, लहसुन, गाजर-गोभी, आंवला और नींबू समेत कई तरह के अचार तैयार करती हैं. इन अचारों की बिक्री समूह, ग्राम संगठन, क्लस्टर, बैंक और सरस मेले के साथ-साथ ग्राहकों के ऑर्डर पर भी करती हैं. सरिता बताती हैं कि सभी खर्च और लागत निकालने के बाद उन्हें हर महीने करीब 6 से 8 हजार रुपये की बचत हो जाती है. बिहान योजना से मिले सहयोग ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है.
₹500 से शुरू किया अचार बनाने का कारोबार
बिलासपुर जिले के ग्राम पंचायत अमने की रहने वाली सरिता वैष्णव ने महज 500 रुपये की छोटी पूंजी से घर पर अचार बनाने का व्यवसाय शुरू किया. बिहान योजना से जुड़ने के बाद उन्हें स्वयं सहायता समूह के माध्यम से आर्थिक सहयोग मिला, जिससे उन्होंने अपने छोटे से कारोबार को आगे बढ़ाया.
लोन लेकर बढ़ाया अपना कारोबार
सरिता ने शुरुआत में डेढ़ लाख रुपये का लोन लेकर अचार का व्यवसाय शुरू किया. कारोबार में अच्छी आमदनी होने लगी तो उन्होंने 3 लाख रुपये का अतिरिक्त लोन लिया. इससे उन्हें अपना काम बढ़ाने और अधिक मात्रा में अचार तैयार करने का मौका मिला.
कई तरह के स्वादिष्ट अचार बनाती हैं सरिता
सरिता घर पर आम, कटहल, लहसुन, गाजर-गोभी मिक्स, आंवला और नींबू समेत कई तरह के अचार तैयार करती हैं. इसके अलावा सीजन के अनुसार जमीकंद का अचार बनाने की भी तैयारी कर रही हैं. उनके बनाए अचार की कीमत और गुणवत्ता के आधार पर ग्राहक खरीदारी करते हैं.
हर महीने हो रही 6 से 8 हजार रुपये की कमाई
सरिता के मुताबिक अचार बनाने में लागत और अन्य खर्च निकालने के बाद उन्हें हर महीने करीब 6 से 7 हजार रुपये की बचत होती है. कई बार यह कमाई बढ़कर 8 हजार रुपये तक पहुंच जाती है. इस आमदनी से वह अपने परिवार के खर्च में आर्थिक सहयोग कर रही हैं.
समूह और सरस मेले में बेचती हैं अपने उत्पाद
सरिता अपने बनाए अचार को स्वयं सहायता समूह, ग्राम संगठन, क्लस्टर और बैंक के माध्यम से बेचती हैं. इसके अलावा सरस मेले और छोटे-बड़े आयोजनों में भी अपने उत्पाद लेकर पहुंचती हैं. ग्राहकों से मिलने वाले ऑर्डर पर अचार की सप्लाई भी करती हैं. बिहान योजना से मिले सहयोग ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है.
About the Author
Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…

