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Ballia famous Kalakand: कलाकंद बनाने वाले हलवाई मनोज कुमार ने बताया कि बलिया का कलाकंद देखने में भले ही बर्फी जैसा लगे, लेकिन इसका रंग, बनावट और स्वाद अलग होता है. इसकी संतुलित मिठास, यानी न ज्यादा मीठा, न फीका, इसे खास बनाती है. इसका स्वाद बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को दीवाना बना देता है. इसमें चीनी की मात्रा कम रखी जाती है. जिससे यह मिठाई हल्की और सेहतमंद होती है.
Kalakand: छोटी-बड़ी तमाम मिठाइयों का स्वाद आपने बेशक चखा होगा, लेकिन बलिया के कलाकंद की बात ही अलग है. यह सिर्फ मिठाई नहीं, बल्कि दूध, मेहनत और परंपरा से भरी ऐसी मिठास है, जो हर बार दिल जीत लेती है. अगर आपने अभी तक बलिया का कलाकंद नहीं चखा है, तो मिठास की दुनिया का एक खास अनुभव अभी बाकी है. शुद्ध देसी दूध से तैयार यह मिठाई बेहद लाजवाब है.
कलाकंद बनाने वाले हलवाई मनोज कुमार ने बताया कि बलिया का कलाकंद देखने में भले ही बर्फी जैसा लगे, लेकिन इसका रंग, बनावट और स्वाद अलग होता है. इसकी संतुलित मिठास, यानी न ज्यादा मीठा, न फीका, इसे खास बनाती है. इसका स्वाद बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को दीवाना बना देता है. इसमें चीनी की मात्रा कम रखी जाती है. जिससे यह मिठाई हल्की और सेहतमंद होती है.
कलाकंद की जान उसका दूध होता है. शुद्ध देसी दूध को धीमी आंच पर घंटों पकाया जाता है ताकि दूध का असली स्वाद बरकरार रहे. जब दूध गाढ़ा होकर दानेदार हो जाता है तो उसे ठंडा किया जाता है. फिर इसमें बहुत कम चीनी मिलाकर दोबारा पकाया जाता है. यही प्रक्रिया इसके स्वाद में जादू भर देती है. मिश्रण तैयार होने पर उसे ट्रे में फैलाकर ठंडा किया जाता है और चौकोर टुकड़ों में काट लिया जाता है.
हर टुकड़ा दूध की खुशबू और देसी मिठास से भरा होता है. जिसने एक बार यह कलाकंद खाया, वह इसकी तारीफ किए बिना नहीं रह पाता. इसकी कीमत मात्र 15 रुपए प्रति पीस और ₹400 प्रति किलो होती है, जो गुणवत्ता के हिसाब से काफी किफायती है. बलिया का कलाकंद इतना लोकप्रिय है कि यहां हमेशा ग्राहकों की भीड़ लगी रहती है. बैरिया, सहतवार, गोरखपुर, रेवती और देवरिया जैसे दूर-दूर से लोग यहां आते है. बलिया जनपद के रेलवे स्टेशन से लगभग 5 किलोमीटर दूर बाईं ओर स्थित यादव मिष्ठान भंडार की दुकान का कलाकंद काफी फेमस है.

