Thursday, June 25, 2026
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Emergency Chapter Controversy पर NCERT का आया बयान, कहा- ‘फर्जीवाड़ा करने वालों पर करेंगे कार्रवाई’


कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक में ‘आपातकाल अध्याय (Emergency Chapter)’ को लेकर उठे विवाद के बीच एनसीईआरटी ने प्रतिक्रिया दी है। एनसीईआरटी का कहना है कि कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक का एक नकली संस्करण ऑनलाइन प्रसारित हो रहा है। खबरों के अनुसार, “आपातकाल अध्याय” कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान की पाठ्यपुस्तक का हिस्सा है। NCERT ने इसे लेकर एक्स पर बयान भी जारी किया है। 

एक्स पर शेयर किया गया बयान देखें

पोस्ट में बताया, ‘NCERT ने अपनी पाठ्यपुस्तकों की अनधिकृत और पायरेटेड प्रतियों के मुद्रित और डिजिटल दोनों प्रारूपों में प्रसारित होने पर ध्यान दिया है। कक्षा 9 की सामाजिक विज्ञान भाग 1 की पुस्तक, “समाज को समझना: भारत और उससे परे” का एक नकली संस्करण सोशल मीडिया, वेबसाइटों और मैसेजिंग समूहों के माध्यम से भी साझा किया जा रहा है।’ NCERT ने दोषियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई करने की चेतावनी दी है और छात्रों और शिक्षकों को सलाह दी है कि वे एनसीईआरटी की पुस्तकों को केवल आधिकारिक स्रोतों, एनसीईआरटी वेबसाइट (ncert.nic.in), ई-पाठशाला और अधिकृत विक्रेताओं के माध्यम से ही प्राप्त करें।   

NCERT का रुख 

एनसीईआरटी की पाठ्यपुस्तकें केवल परिषद के आधिकारिक माध्यमों से ही प्रकाशित और पब्लिश की जाती हैं। किसी भी पाठ्यपुस्तक को उसके आधिकारिक प्रकाशन से पहले किसी भी रूप में वितरण के लिए अधिकृत नहीं किया जाता है। अनौपचारिक स्रोतों से प्रसारित की जा रही सामग्री गलत, अधूरी, छेड़छाड़ की हुई या पूरी तरह से मनगढ़ंत हो सकती है और छात्रों, शिक्षकों और अभिभावकों को इस पर भरोसा नहीं करना चाहिए। NCERT ने कहा कि इस तरह का अनधिकृत प्रसार अवैध है और कॉपीराइट अधिनियम, 1957 और अन्य लागू कानूनों के तहत दंडनीय अपराध है।

क्या है Emergency Chapter विवाद 

रिपोर्ट्स के अनुसार, NCERT की पाठ्यपुस्तक के “Emergency Chapter” में कहा गया है, ‘भारत में लोकतंत्र के सामने आई प्रमुख चुनौतियों में से एक 1975-77 में आपातकाल लागू होने के दौरान दर्ज की गई थी। 1970 के दशक की शुरुआत में, इंदिरा गांधी के नेतृत्व वाली सरकार के प्रति जनता की असंतुष्टि बढ़ रही थी।’ इसमें आगे कहा गया है, ‘जून 1975 में, सरकार ने आंतरिक अशांति के आधार पर राष्ट्रीय आपातकाल लागू किया। इस दौरान, अधिकांश मौलिक अधिकारों को निलंबित कर दिया गया, प्रेस पर सेंसरशिप लगा दी गई और कई राजनीतिक नेताओं और कार्यकर्ताओं को गिरफ्तार कर लिया गया।’ 

कर्नाटक समूह ने उठाए सवाल 

कर्नाटक स्थित एक शिक्षा अधिकार समूह ने NCERT पर कक्षा 6 की कन्नड़ पाठ्यपुस्तक के माध्यम से पाठ्यक्रम को “भगवाकरण” करने का आरोप लगाया है। समूह का आरोप है कि पाठ्यपुस्तक में धार्मिक विषयों को प्रमुखता दी गई है, जबकि कर्नाटक की सांस्कृतिक पहचान और विविध खान-पान की प्रथाओं को नजरअंदाज किया गया है। शिक्षा के मौलिक अधिकारों के लिए जन गठबंधन (पीएएफआरई) ने कहा कि कृष्ण शीर्षक वाली यह पाठ्यपुस्तक राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) 2020 के ढांचे के तहत स्कूली शिक्षा में पौराणिक कथाओं और धार्मिक विषयों को शामिल करने की व्यापक प्रवृत्ति को दर्शाती है। पीएएफआरई के प्रधान संयोजक निरंजनारध्या वीपी ने एक बयान में दावा किया, ‘यह पाठ्यक्रम का भगवाकरण करने की एक परियोजना के अलावा और कुछ नहीं है।’ उन्होंने पाठ्यपुस्तक का नाम ‘कृष्ण’ रखने के औचित्य पर भी सवाल उठाया। पीएएफआरई ने आरोप लगाया कि पाठ्यपुस्तक में कर्नाटक की सांस्कृतिक और साहित्यिक विरासत की अनदेखी की गई है। समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, पीएएफआरई ने कहा, ‘कर्नाटक की पहचान आदिकवि पम्पा, कुवेम्पु, कोटा शिवराम कारंथ और बसवन्ना जैसे महान कवियों और समाज सुधारकों के विचारों और योगदान में निहित है। फिर भी एनसीईआरटी ने इसका नाम ‘कृष्ण’ रखा है।’ 


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