अमेरिका ने 100% टैरिफ वाला बिल पास किया तो भारत में चर्चा होने लगी. टैरिफ का डर सताने लगा. लेकिन अर्थशास्त्री एसपी शर्मा का मानना है कि भारत के पास अगर अमेरिका 100% टैरिफ लगा भी दे तो भारत के पास 15 अन्य रास्ते हैं. ऐसे 15 दूसरे बाजार हैं, जहां वह अपने उन प्रोडक्ट को उतार सकता है, जो अमेरिका में एक्सपोर्ट करता था. भारत इन बाजारों से 200 अरब डॉलर छाप सकता है.
एएनआई से बातचीत में एसपी शर्मा ने कहा कि भारत के पास निर्यात के कई दूसरे विकल्प मौजूद हैं और वह अमेरिकी बाजार पर बहुत ज्यादा निर्भर नहीं है. हालांकि भारत और अमेरिका के बीच मजबूत व्यापारिक और आर्थिक संबंध हैं. उन्होंने कहा, हमारे पास 15 ऐसे बाजार हैं, जहां हम वही उत्पाद निर्यात कर सकते हैं, जो अभी अमेरिका को भेज रहे हैं. अगर अमेरिका को हमारा मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट करीब 87-88 अरब डॉलर है, तो इन्हीं उत्पादों के लिए 15 दूसरे देशों में करीब 200 अरब डॉलर का बड़ा बाजार मौजूद है.
कहां कहां बने नए बाजार
एसपी शर्मा ने नीदरलैंड, फ्रांस, ब्रिटेन, लैटिन अमेरिका के देशों, सऊदी अरब, यूएई और नेपाल जैसे बाजारों का जिक्र किया, जहां भारतीय निर्यातक अपने कारोबार का विस्तार कर सकते हैं. उनके मुताबिक, भारत के पास अमेरिका के अलावा ऐसे कई बाजार हैं, जहां भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ रही है.
उन्होंने बताया कि 2025-26 में भारत का अमेरिका को निर्यात 87.3 अरब डॉलर रहा, जो 2024-25 के 86.5 अरब डॉलर से अधिक है. टैरिफ को लेकर अनिश्चितता और वैश्विक स्तर पर कई चुनौतियों के बावजूद भारतीय निर्यातकों ने अपना प्रदर्शन बेहतर किया है. शर्मा ने कहा कि अमेरिका में भारतीय उत्पादों की अच्छी मांग है और भारत प्रतिस्पर्धी कीमतों पर श्रम-प्रधान उत्पाद उपलब्ध करा रहा है.
दूसरे देशों में एक्सपोर्ट तेजी से बढ़ा
शर्मा ने कहा कि कुछ दूसरे बाजारों में भारत का निर्यात अमेरिका की तुलना में तेजी से बढ़ रहा है. उन्होंने कहा, अगर अमेरिका के साथ हमारा निर्यात 10-15 फीसदी की दर से बढ़ रहा है, तो दूसरे बाजारों के साथ निर्यात वृद्धि दर 20-25 फीसदी के बीच है.” उनका मानना है कि भारत के पास विकल्प मौजूद हैं और वह अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर बहुत ज्यादा निर्भर नहीं है.
शर्मा ने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका के आर्थिक रिश्ते काफी मजबूत हैं और दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत कर रहे हैं. उनके मुताबिक, दोनों देशों के लिए कारोबार बढ़ाना ज्यादा फायदेमंद होगा. वहीं रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का कदम अमेरिका और भारत, दोनों के लिए नुकसानदेह हो सकता है.
अमेरिकी ग्राहकों पर भी सीधा असर
उनके मुताबिक- इतने ज्यादा टैरिफ का असर आखिरकार अमेरिकी ग्राहकों की जेब पर भी पड़ेगा, क्योंकि भारतीय कंपनियां कम लागत पर सामान उपलब्ध कराने वाली महत्वपूर्ण सप्लायर हैं. टैरिफ बढ़ने से अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद महंगे हो सकते हैं और वहां महंगाई का दबाव बढ़ सकता है. उन्होंने कहा, “व्यापार हमेशा लोगों के कल्याण के लिए होना चाहिए, व्यापार आपसी टकराव के लिए नहीं.” उनके मुताबिक, अतिरिक्त टैरिफ लगाने की बजाय भारत और अमेरिका के बीच लगातार व्यापारिक बातचीत दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए ज्यादा फायदेमंद होगी.

