Saturday, July 4, 2026
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मुक्त व्यापार समझौते पर एक और देश के साथ फंसा पेच, जल्द बातचीत की उम्मीद नहीं


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India-Peru FTA : भारत और पेरू के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत एक बार िफर अटक गई है. दोनों देशों ने इस पर साल 2017 में बातचीत शुरू की थी, लेिकन अभी तक अंितम पड़ाव नहीं आया है. केंद्रीय वािणज्य मंत्री ने कहा है िक िफलहाल इस पर बातचीत जल्द समाप्त होने की उम्मीद नहीं है.

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भारत और पेरू के साथ एफटीए पर बातचीत साल 2017 में शुरू हुई थी.

नई दिल्ली. अमेिरका के साथ मुक्त व्यापार समझौते पर अभी बातचीत पूरी भी नहीं हुई है कि एक और देश के साथ एफटीए का पेच फंस गया है. वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने शनिवार को कहा कि कुछ उत्पादों में बाजार पहुंच संबंधी चिंताओं के कारण भारत-पेरू मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) के लिए चल रही बातचीत के जल्द संपन्न होने की संभावना नहीं है.

गोयल ने कहाकि कुछ चिंताएं हैं. कई ऐसे उत्पाद हैं जहां हम उन्हें बाजार पहुंच की अनुमति नहीं दे सकते. मुझे नहीं लगता कि पेरू के साथ एफटीए बहुत जल्द होने जा रहा है. उल्लेखनीय है कि भारत और पेरू के बीच प्रस्तावित एफटीए के लिए बातचीत साल 2017 में शुरू हुई थी. दूसरी ओर, भारत-कनाडा एफटीए के संबंध में मंत्री ने सकारात्मक संकेत दिए हैं. उन्होंने बताया कि भारतीय अधिकारियों का एक दल बातचीत के अगले दौर के लिए सोमवार को कनाडा जाएगा.

कनाडा से जल्द समझौते की उम्मीद
गोयल ने कहा कि कनाडा के साथ एफटीए वार्ता अच्छी प्रगति पर है. हमारी टीम अगले दौर की बातचीत के लिए सोमवार को जा रही है. हमारी कोशिश है कि हम अगले छह महीनों में इसे अंतिम रूप दे दें. केंद्रीय मंत्री ने यह भी जानकारी दी कि वह 13 जुलाई को विदेश मंत्री एस. जयशंकर और रेल, सूचना एवं प्रसारण व इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव के साथ ब्रसेल्स जाएंगे, जहां वे भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) व्यापार और प्रौद्योगिकी परिषद (टीटीसी) की बैठक में हिस्सा लेंगे.

पेरू से समझौते का भारत को क्या फायदा
भारत और पेरू के बीच मुक्त व्यापार समझौते पर 9 साल पहले बातचीत शुरू हुई थी. इस एफटीए का भारत को ज्यादा लाभ होगा. इससे पेरू से आने वाले तांबे, सोने और अन्य मेटल का आयात सस्ता हो जाएगा, इससे  भारत के इलेक्ट्रॉिनक्स और मैन्युफैक्चिरंग सेक्टर को काफी लाभ होगा. भारत को इन उत्पादों के विनर्माण िलए सस्ता कच्चा माल िमलेगा और उत्पादन को बढ़ाने में आसानी होगी. इसकी लागत में भी कमी आएगी.

एक्सपोर्ट बढ़ाने में भी फायदा
पेरू के साथ एफटीए पूरा होने के बाद भारत का एक्सपोर्ट और बढ़ेगा. भारत से ऑटोमोबाइल, मशीनरी और सूती धागे का काफी एक्सपोर्ट पेरू में होता है. इन उत्पादों पर शुल्क खत्म होने के बाद पेरू को एक्सपोर्ट बढ़ाने में मदद िमलेगी. भारत की दवाओं की मांग भी पेरू में बढ़ेगी. फार्मा सेक्टर में भारत एक्सपोर्ट का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. इसका मतलब है िक पेरू के साथ मुक्त व्यापार समझौते से भारत के कई उद्योगों को फायदा होगा.

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Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें



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मोदी गुजरात में सेमीकंडक्टर प्लांट का उद्घाटन करेंगे: 5 महीने में तीसरे प्लांट में चिप्स बनना शुरू, इलेक्ट्रॉनिक प्रोडक्ट के लिए इम्पोर्ट निर्भरता कम होगी


साणंदकुछ ही क्षण पहले

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पीएम नरेंद्र मोदी शनिवार को गुजरात के साणंद में देश के तीसरे सेमीकंडक्टर प्लांट का उद्घाटन करेंगे। साणंद में स्थित सीजी सेमी के ओएसएटी (OSAT) प्लांट में आज से प्रोडक्शन शुरू होगा।

इससे भारत की चिप निर्माण क्षमता बढ़ेगी और इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के लिए आयातित चिप्स पर निर्भरता कम होगी। सरकार का मानना है कि इससे भारत की वैश्विक सेमीकंडक्टर आपूर्ति श्रृंखला में मजबूत भागीदारी बनेगी।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि पिछले 60 साल से देश में चिप उद्योग को विकसित करने की कोशिशें चल रही थीं, लेकिन मोदी के विजन से यह सपना अब साकार हो रहा है।

5 महीने में तीन प्लांट शुरू

वैष्णव ने कहा कि सेमीकंडक्टर क्षेत्र में काम तेजी से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने बताया कि पहला प्लांट 28 फरवरी को, दूसरा 31 मार्च को और तीसरा प्लांट 4 जुलाई को शुरू हो रहा है। इतने कम समय में तीन बड़े प्लांट शुरू होना भारत के लिए बड़ी उपलब्धि है।

बुलेट ट्रेन परियोजना 80% पूरी

अश्विनी वैष्णव ने मुंबई-अहमदाबाद बुलेट ट्रेन परियोजना की प्रगति की जानकारी देते हुए कहा कि यह परियोजना लगभग 80 फीसदी पूरी हो चुकी है। परियोजना का पहला खंड सूरत से बिलिमोरा के बीच साल 2027 में शुरू किया जाएगा। इसके बाद वापी-सूरत, वापी-अहमदाबाद, अहमदाबाद-ठाणे और अहमदाबाद से मुंबई तक सेवा शुरू की जाएगी।

केंद्र सरकार का दावा है कि सेमीकंडक्टर निर्माण और बुलेट ट्रेन जैसी परियोजनाएं भारत को आधुनिक तकनीक और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में नई पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम साबित होंगी।



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बब्बर शेर ‘अजय’ की रिपोर्ट पर डॉक्टर का बड़ा खुलासा: डॉ. नासिर बोले- कैंसर नहीं था, फेफड़े फटने से हुई मौत; आखिरी सांस तक दर्द दबाए रखा – Kanpur News




कानपुर चिड़ियाघर के सबसे बुजुर्ग बब्बर शेर ‘अजय’ की मौत के बाद उसकी मेडिकल रिपोर्ट आ गई है। शनिवार दोपहर 2 बजे डॉ.नासिर ने बताया कि, बरेली की IVRI लैब से आई हिस्टोपैथोलॉजी रिपोर्ट में कैंसर जैसी कोई बात सामने नहीं आई है। अजय की मौत असल में फेफड़े फटने (एम्फिसीमा), किडनी फेल होने और कार्डियक अरेस्ट के कारण हुई थी। शरीर के अंदर इतनी गंभीर बीमारियां होने के बावजूद अजय आखिरी वक्त तक खुद को पूरी तरह ताकतवर दिखाता रहा। कैंसर नहीं, रिपोर्ट में सामने आई ‘एम्फिसीमा’ की गंभीर बीमारी कानपुर जू के वन्यजीव चिकित्सक डॉ. नासिर ने रिपोर्ट का हवाला देते हुए समझाया कि, अजय के फेफड़ों में ‘एम्फिसीमा’ नाम की कंडीशन मिली है। दरअसल, फेफड़ों में एक ट्यूमर जैसी गांठ थी। जो अचानक अंदर ही अंदर फट गई थी। जब फेफड़ों में ऐसी कोई चीज फटती है, तो खून बहने के साथ-साथ वहां खाली जगह में हवा भर जाती है। पोस्टमार्टम के दौरान अजय के चेस्ट में करीब 7 लीटर खून जमा मिला था। फेफड़ों की वायु थैलियों में हवा फंस जाने के कारण उसे सांस लेने में भयंकर तकलीफ हो रही थी, वो हांफ रहा था और उसे दहाड़ने में भी दिक्कत आ रही थी। इसके अलावा उसकी किडनी भी काफी बढ़ चुकी थी और पूरी तरह फेल थी। आखिरी वक्त तक दर्द क्यों छुपाते हैं जंगली जानवर? डॉ. नासिर ने जंगली जानवरों के अनोखे मनोविज्ञान के बारे में एक बेहद दिलचस्प बात बताई। उन्होंने कहा कि यही बात उन्हें पालतू जानवरों से अलग बनाती है। पालतू जानवर बीमार होने पर खाना-पीना छोड़ देते हैं, जुगाली बंद कर देते हैं और सुस्त होकर लेट जाते हैं, जिससे मालिक को पता चल जाता है। लेकिन शेर या बाघ जैसे जंगली जीव कभी अपनी कमजोरी जाहिर नहीं होने देते। जंगल का नियम है कि वहां हमेशा शिकार और शिकारी का खतरा बना रहता है। अगर कोई जंगली जानवर खुद को कमजोर दिखाएगा। तो दूसरा जानवर उस पर हमला कर देगा या फिर इंसानों से उसका टकराव बढ़ जाएगा। इसी सर्वाइवल पावर की वजह से अजय अंदरूनी तकलीफों के बावजूद अंत तक दर्शकों के सामने पिंजरे में घूमता और दहाड़ता रहा। सुबह अचानक खून की उल्टी की और थम गईं सांसें अजय ने 18 साल, 3 महीने और 2 दिन की लंबी उम्र पूरी करने के बाद दम तोड़ा। मौत से ठीक एक दिन पहले ही उसने खाना छोड़ा था। अगली सुबह उसने अचानक खून की उल्टी की और अत्यधिक कमजोरी के कारण वो अपना बॉडी वेट नहीं संभाल पा रहा था। शरीर में भारी इंटरनल ब्लीडिंग होने के कारण दिल तक खून वापस नहीं पहुंच पाया, जिससे ‘हाइपोवोलेमिक शॉक’ या कार्डियक अरेस्ट की वजह से उसकी मौत हो गई।



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कांग्रेस ने सांदीपनि विद्यालय की व्यवस्थाओं पर उठाए सवाल: प्रवेश, बस और शिक्षकों की कमी, प्राचार्य से बात करने स्कूल पहुंचे नेता – shajapur (MP) News




शाजापुर के लालघाटी स्थित सरदार वल्लभभाई पटेल सांदीपनि (सीएम राइज) विद्यालय में कांग्रेस के एक प्रतिनिधिमंडल ने शनिवार दोपहर प्राचार्या सविता सोनी से मुलाकात की। उन्होंने विद्यालय में प्रवेश प्रक्रिया, बस सुविधा और शिक्षकों की कमी सहित अन्य व्यवस्थाओं पर सवाल उठाए। जिला कांग्रेस अध्यक्ष नरेश्वर सिंह प्रताप ने बताया कि विद्यालय शुरू होने के बाद से ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों से लगातार अव्यवस्थाओं की शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ मामलों में राजनीतिक दबाव के तहत प्रवेश दिए गए हैं। प्रताप ने मांग की कि यदि प्रवेश प्रक्रिया बंद है, तो सभी के लिए समान नियम लागू हों और गरीब व जरूरतमंद विद्यार्थियों को प्राथमिकता दी जाए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस इस संबंध में जिला शिक्षा अधिकारी सहित वरिष्ठ अधिकारियों से मिलकर सुधार की मांग करेगी। पूर्व ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष इरशाद खान ने कहा कि कांग्रेस पहले से ही बिना पर्याप्त तैयारियों के स्कूलों के विलय का विरोध करती रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि विद्यालय में शिक्षकों की कमी, बसों की अपर्याप्त व्यवस्था और प्रवेश संबंधी समस्याओं के कारण छात्र-छात्राओं को परेशानी हो रही है। खान ने हाल ही में घायल हुए एक छात्र को अस्पताल पहुंचाने में हुई कठिनाई का भी जिक्र किया, जिसे उन्होंने व्यवस्थाओं की कमी का प्रमाण बताया। प्राचार्या सविता सोनी ने प्रतिनिधिमंडल को विद्यालय की वास्तविक स्थिति से अवगत कराया। उन्होंने स्पष्ट किया कि प्रवेश शासन के निर्धारित दिशा-निर्देशों और सीटों के अनुसार ही दिए जा रहे हैं। प्राचार्या ने बताया कि पहले 11 बसें संचालित थीं, जिनमें हाल ही में तीन और जोड़ी गई हैं। उन्होंने यह भी बताया कि लगभग 18 बसों की मांग शासन को भेजी गई है। प्राचार्या सोनी ने स्वीकार किया कि कृषि संकाय सहित कुछ विषयों में शिक्षकों की कमी है, जिसे जल्द ही अतिथि या नियमित शिक्षकों की नियुक्ति से पूरा किया जाएगा। उन्होंने आश्वासन दिया कि उपलब्ध संसाधनों के साथ व्यवस्थाओं को लगातार बेहतर बनाने का प्रयास किया जा रहा है।



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बेतिया में 1.24क्विंटल गांजा पकड़ा, 2 तस्कर अरेस्ट: बोलेरो से ले जाई जा रही थी मादक पदार्थ की खेप, पुलिस ने धर दबोचा – Bettiah (West Champaran) News




बेतिया जिले के मझौलिया थाना पुलिस ने शनिवार को मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। पुलिस ने 1 क्विंटल 24 किलो 600 ग्राम गांजा बरामद किया है। इस दौरान गांजा से लदी एक बोलेरो वाहन जब्त कर दो तस्करों को गिरफ्तार किया गया। हालांकि, बाइक पर सवार दो अन्य तस्कर मौके से फरार होने में सफल रहे, जिनकी गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है। वाहन चैकिंग अभियान में कार्रवाई मझौलिया थानाध्यक्ष अमर कुमार को गुप्त सूचना मिली थी कि मादक पदार्थों की एक बड़ी खेप बोलेरो वाहन से ले जाई जा रही है। इस सूचना के आधार पर उनके नेतृत्व में एक पुलिस टीम का गठन किया गया। टीम ने मझौलिया-महना मुख्य सड़क पर चैलाभार गांव के समीप वाहन जांच अभियान चलाया। अभियान के दौरान एक संदिग्ध बोलेरो को रोककर उसकी तलाशी ली गई। तलाशी में वाहन से कुल 1 क्विंटल 24 किलो 600 ग्राम गांजा बरामद हुआ, जिसे पुलिस ने तत्काल जब्त कर लिया। पुलिस को चकमा देकर 2 अन्य तस्कर फरार पुलिस ने मौके से दो तस्करों को गिरफ्तार किया है। इनकी पहचान रक्सौल के कौड़िहार चौक निवासी 27 वर्षीय दीपक कुमार (पिता पारस साह) और बेतिया आईटीआई निवासी 18 वर्षीय अनुज कुमार (पिता पन्नालाल पासवान) के रूप में हुई है। वहीं, बाइक पर सवार दो अन्य तस्कर पुलिस को चकमा देकर फरार हो गए। प्रारंभिक पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि गांजे की यह खेप रक्सौल से लाकर लोहियरिया पहुंचाई जानी थी। पुलिस का मानना है कि इस तस्करी के पीछे एक संगठित गिरोह सक्रिय है। बरामद गांजे की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में लाखों रुपये आंकी जा रही है। पुलिस पूरे नेटवर्क की जांच में जुट गई है ताकि इस अवैध कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की भी पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया जा सके। थानाध्यक्ष बोले-मामले की जांच जारी मझौलिया थानाध्यक्ष अमर कुमार ने बताया कि फरार दोनों तस्करों की पहचान कर ली गई है। उनकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर लगातार छापेमारी की जा रही है। साथ ही जब्त बोलेरो वाहन को भी कब्जे में लेकर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है। पुलिस का कहना है कि जिले में मादक पदार्थों की तस्करी के विरुद्ध अभियान आगे भी लगातार जारी रहेगा।यदि इसे अखबार की शैली में और अधिक प्रभावशाली या संक्षिप्त बनाना हो, तो मैं वह संस्करण भी तैयार कर सकता हूँ।



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गोवा की स्वास्थ्य व्यवस्था पर केजरीवाल का जुबानी हमला: बोले- पंजाब मॉडल करेंगे लागू, हर परिवार को मिलेगा 10 लाख का हेल्थ इंश्योरेंस – New Delhi News




आम आदमी पार्टी (AAP) के राष्ट्रीय संयोजक और दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने गोवा दौरे के दौरान राज्य की स्वास्थ्य व्यवस्था को लेकर भाजपा सरकार पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि गोवा के लोगों को बेहतर इलाज की सुविधा नहीं मिल रही है और स्वास्थ्य सेवाओं में बड़े सुधार की जरूरत है। केजरीवाल ने घोषणा की कि अगर गोवा में उनकी पार्टी की नीतियां लागू होती हैं, तो पंजाब मॉडल की तर्ज पर राज्य के हर परिवार को बिना किसी पात्रता शर्त के सालाना 10 लाख रुपए तक का स्वास्थ्य बीमा कवर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस योजना का उद्देश्य सभी लोगों को बेहतर और मुफ्त इलाज की सुविधा उपलब्ध कराना है। इस दौरान दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री आतिशी, गोवा के पार्टी विधायक वेन्जी वेगास, क्रूज सिल्वा और अन्य वरिष्ठ पदाधिकारी मौजूद रहे। गोवा की स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह ठप: केजरीवाल प्रेस कॉन्फ्रेंस को संबोधित करते हुए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि गोवा की 90% आबादी सरकारी स्वास्थ्य सेवाओं पर निर्भर है, क्योंकि निजी अस्पतालों में इलाज आम आदमी की पहुंच से बाहर है। उन्होंने कहा- “गोवा में वर्तमान में केवल एक सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल (GMC) है, जहां भारी भीड़ रहती है, बेड के लिए सिफारिशें लगानी पड़ती हैं और दवाएं बाहर से खरीदनी पड़ती हैं। वहीं, दक्षिण गोवा जिला अस्पताल और पोंडा के अस्पतालों की हालत बेहद खराब है, जहां डॉक्टरों और बुनियादी उपकरणों (जैसे CT स्कैन और MRI) की भारी कमी है।” ‘दीनदयाल स्वास्थ्य सेवा योजना’ (DDSSY) को बताया असफल केजरीवाल ने गोवा सरकार की वर्तमान स्वास्थ्य योजना ‘DDSSY’ पर गंभीर सवाल उठाए और इसे पूरी तरह विफल (Dysfunctional) करार दिया। उन्होंने इसके 4 मुख्य कारण बताए- कम बीमा राशि: इसमें केवल 4 से 6 लाख रुपए का कवर मिलता है, जो गंभीर बीमारियों के लिए नाकाफी है। सीमित बीमारियां: इस योजना के तहत केवल 447 प्रक्रियाएं और बीमारियां कवर हैं, जिसमें मोतियाबिंद (Cataract) और पेट स्कैन (PET scan) जैसी बुनियादी चीजें भी शामिल नहीं हैं। भुगतान में देरी: सरकार द्वारा निजी अस्पतालों को समय पर रीइम्बर्समेंट (भुगतान) नहीं दिया जाता, जिससे अस्पतालों ने इस कार्ड को स्वीकार करना बंद कर दिया है। पुरानी दरें: अस्पतालों को दिए जाने वाले रेट साल 2016 के नियमों पर आधारित हैं। उन्होंने दावा किया कि इसी विफलता के कारण साल 2022-23 में जहां 2.95 लाख परिवारों के पास यह कार्ड था, वहीं 2025-26 में यह संख्या घटकर मात्र 1.81 लाख रह गई है। लगभग सवा लाख लोगों ने इस योजना का लाभ लेना छोड़ दिया है। क्या है आम आदमी पार्टी का ‘पंजाब स्वास्थ्य मॉडल’ गोवा के मुख्यमंत्री से पंजाब की अच्छी प्रथाओं को अपनाने की अपील करते हुए केजरीवाल ने अपनी योजना की मुख्य विशेषताएं सामने रखीं- 10 लाख का मुफ्त बीमा: गोवा के प्रत्येक निवासी परिवार को 10 लाख रुपए तक का मुफ्त इलाज मिलेगा, जिसमें कोई आय सीमा या पात्रता मानदंड नहीं होगा। 2350 से अधिक बीमारियां कवर: पंजाब की तरह इस योजना में 2 हजार 350 से अधिक बीमारियों और चिकित्सा प्रक्रियाओं को शामिल किया जाएगा, जो गोवा की वर्तमान योजना से छह गुना अधिक है। सभी बड़े अस्पतालों तक पहुंच: इस योजना के लागू होने से मनीपाल, विक्टर, गैलेक्सी और हेल्थवे जैसे राज्य के सबसे महंगे और प्रतिष्ठित निजी अस्पताल भी गरीब से गरीब व्यक्ति की पहुंच में होंगे। समय पर भुगतान: अस्पतालों को 15 दिनों के भीतर नई और बाजार दरों के अनुसार भुगतान सुनिश्चित किया जाएगा। भ्रष्टाचार खत्म कर जुटाया जाएगा पैसा, गठबंधन के लिए भी ‘आप’ तैयार प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान जब केजरीवाल से पूछा गया कि इस बड़ी योजना के लिए बजट कहां से आएगा, तो उन्होंने पंजाब का उदाहरण देते हुए कहा कि गोवा का प्रति व्यक्ति (Per Capita) बजट बहुत अच्छा है। अगर सरकार में जारी भ्रष्टाचार को पूरी तरह खत्म कर दिया जाए, तो न सिर्फ 10 लाख का स्वास्थ्य बीमा, बल्कि 300 यूनिट मुफ्त बिजली, महिलाओं के लिए मुफ्त बस सेवा और अन्य जनकल्याणकारी योजनाएं आसानी से लागू की जा सकती हैं। उन्होंने घोषणा की कि यह स्वास्थ्य योजना अगस्त या सितंबर में लॉन्च होने वाले ‘आप’ के चुनावी घोषणापत्र (Manifesto) का मुख्य हिस्सा होगी। गठबंधन पर रुख आगामी चुनावों में गठबंधन के सवाल पर अरविंद केजरीवाल ने स्पष्ट किया कि भाजपा को हराने के लिए आम आदमी पार्टी सैद्धांतिक रूप से (In Principle) गठबंधन के पक्ष में है। पार्टी की केंद्रीय कमान ने गोवा की स्थानीय लीडरशिप (वाल्मीकि नाइक और टीम) को अन्य दलों से बातचीत शुरू करने के लिए अधिकृत कर दिया है, और जल्द ही इस पर अंतिम फैसला लिया जाएगा।



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इन 5 स्टेप में बनाएं भुसावर स्टाइल आंवला मुरब्बा! स्वाद में बाजार वाला भी फेल


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इन 5 स्टेप में बनाएं भुसावर स्टाइल आंवला मुरब्बा! स्वाद में बाजार वाला भी फेल

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Amla Murabba Recipe : भरतपुर जिले के भुसावर का आंवले का मुरब्बा वर्षों से अपने खास स्वाद और स्वास्थ्यवर्धक गुणों के कारण लोगों की पहली पसंद बना हुआ है. अगर आप भी बाजार जैसा स्वाद घर पर पाना चाहते हैं, तो इसे बनाना बेहद आसान है. सबसे पहले ताजे और बड़े आकार के आंवलों को अच्छी तरह धोकर हल्का उबालें, फिर उनमें छोटे-छोटे छेद करें ताकि चाशनी अंदर तक पहुंच सके. इसके बाद चीनी की गाढ़ी चाशनी तैयार कर उसमें आंवले डालें और स्वाद बढ़ाने के लिए काली मिर्च सहित पारंपरिक मसालों का संतुलित मिश्रण मिलाएं. कुछ दिनों तक चाशनी में रखने के बाद मुरब्बा पूरी तरह तैयार हो जाता है. यह न सिर्फ खाने में स्वादिष्ट होता है, बल्कि पाचन को बेहतर बनाने, रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने और शरीर को पोषण देने में भी मददगार माना जाता है. यही वजह है कि भुसावर का यह पारंपरिक मुरब्बा आज भी लोगों के बीच खास पहचान रखता है.

भरतपुर जिले के भुसावर क्षेत्र का आवले का मुरब्बा अपनी खास मिठास और औषधीय गुणों के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध है. अब आप इस पारंपरिक स्वाद को घर पर भी आसानी से तैयार कर सकते हैं. खास बात यह है कि यह मुरब्बा सिर्फ स्वाद में ही नहीं बल्कि सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद माना जाता है. पेट संबंधी समस्याओं से राहत देने के साथ-साथ यह इम्युनिटी बढ़ाने में भी मदद करता है.

घर पर भुसावर जैसा आवले का मुरब्बा बनाने के लिए सबसे पहले अच्छे ताजे और मोटे आकार के आवलों का चयन करना बेहद जरूरी होता है. गुणवत्ता वाला आंवला ही मुरब्बे के स्वाद को बेहतरीन बनाता है. चयन के बाद इन आवलों को साफ पानी में अच्छी तरह धोया जाता है.ताकि उनमें मौजूद धूल-मिट्टी पूरी तरह निकल जाए.

इसके बाद अगला चरण आता है. आवलों को उबालने का आवलों को हल्का सा उबाल लिया जाता है जिससे वे नरम हो जाएं और उनमें मिठास अच्छी तरह समा सके. उबालने के बाद प्रत्येक आवले में हल्के-हल्के छेद किए जाते हैं. यह प्रक्रिया बेहद महत्वपूर्ण होती है क्योंकि इसी से चाशनी और मसाले आवले के अंदर तक पहुंच पाते हैं.

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अब बारी आती है मसालों की जो इस मुरब्बे को खास स्वाद देते हैं. आमतौर पर इसमें काली मिर्च सहित कई पारंपरिक मसालों का उपयोग किया जाता है. ये मसाले न सिर्फ स्वाद बढ़ाते हैं बल्कि इसे स्वास्थ्यवर्धक भी बनाते हैं. सही मात्रा में मसालों का मिश्रण इस मुरब्बे की पहचान है.

इसके बाद तैयार की जाती है चाशनी. चीनी को पानी में डालकर अच्छी तरह पकाया जाता है. जब तक कि गाढ़ी चाशनी तैयार न हो जाए. चाशनी तैयार होने के बाद उबले हुए आवलों को एक-एक करके इसमें डाल दिया जाता है. फिर इसे ढककर कुछ दिनों के लिए रखा जाता है ताकि आवले पूरी तरह चाशनी को सोख लें.

कुछ दिनों बाद यह मुरब्बा पूरी तरह तैयार हो जाता है. इसका स्वाद बेहद लाजवाब होता है और यह लंबे समय तक सुरक्षित भी रहता है. भुसावर का यह पारंपरिक मुरब्बा न सिर्फ खाने में स्वादिष्ट है बल्कि शरीर के लिए भी लाभकारी माना जाता है. ऐसे में अब आप भी इसे घर पर बनाकर इसके स्वाद और सेहत के फायदों का आनंद ले सकते हैं.

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ATM में कैश डालने वाले 2 कर्मचारी करोड़ो लेकर फरार: दो दिन तक सिस्टम को नहीं लगी भनक; ड्राइवर के घर खड़ी मिली कैश वैन – Jhunjhunu News




झुंझुनूं में एटीएम में कैश डालने वाले दो कर्मचारी 1 करोड़ 13 लाख 95 हजार रुपए लेकर फरार हो गए। तीन दिन तक चली कंपनी की जांच में 28 एटीएम चेक किए गए, जिनमें 9 एटीएम में गड़बड़ी मिली। सबसे ज्यादा चौंकाने वाली बात यह रही कि 3 एटीएम में कैश ही नहीं डाला गया। सिर्फ इन्हीं तीन एटीएम में करीब 59.50 लाख रुपए की कमी मिली। आरोप है कि दोनों कर्मचारी बैंक से कैश लेकर निकले, लेकिन पूरी रकम एटीएम में नहीं डाली और फरार हो गए। उनकी कैश वैन बाद में ड्राइवर के घर के बाहर खड़ी मिली। हैरानी की बात यह है कि करीब 48 घंटे तक कंपनी को इस गड़बड़ी की भनक तक नहीं लगी। फिलहाल पुलिस ने मामला दर्ज कर दोनों आरोपियों की तलाश शुरू कर दी है। जानें कैसे की लूट की तैयारी 1. एक ही गांव से थे दोनों आरोपी हर एटीएम की सुरक्षा दो स्तर पर होती है। पहली तकनीक और दूसरी इंसान। मशीन की सुरक्षा तकनीक करती है, लेकिन मशीन में कैश भरने की जिम्मेदारी कर्मचारियों की होती है। इसी वजह से कैश मैनेजमेंट कंपनियां अपने कर्मचारियों पर सबसे ज्यादा भरोसा करती हैं। जांच के अनुसार मुख्य आरोपी सुमेर सिंह नवंबर 2025 में कंपनी से जुड़ा था। इसके कुछ महीने बाद मार्च 2026 में उसने अपने गांव सुजडोला निवासी संदीप सिंह को भी कंपनी में नौकरी दिला दी। दोनों एक ही टीम में काम करने लगे। रोज एटीएम में कैश भरते-भरते दोनों ने पूरी कैश लोडिंग व्यवस्था समझ ली। किस एटीएम में कितना कैश जाता है, किस मशीन में सबसे ज्यादा ट्रांजेक्शन होता है, कौन-सा एटीएम कितनी जल्दी खाली होता है और कंपनी किस तरह निगरानी करती है। जांच एजेंसियों का मानना है कि यहीं से पूरी योजना तैयार हुई। 2. खुद कैश वैन लेकर अलग-अलग एटीएम पहुंचे आरोपी जांच में सामने आया है कि 25 जून को दोनों कर्मचारी कैश लेकर निकले। आरोप है कि कुछ समय बाद उन्होंने ड्राइवर और गनमैन को वापस भेज दिया। इसके बाद दोनों खुद कैश वैन लेकर अलग-अलग एटीएम तक पहुंचे। यहीं से पूरा खेल शुरू हुआ। कुछ मशीनों में पूरी नकदी नहीं डाली गई। कुछ मशीनों में कम नकदी डाली गई। तीन मशीनों में कंपनी के रिकॉर्ड के अनुसार कैश डाला ही नहीं गया, लेकिन रिपोर्ट में कैश लोडिंग पूरी दिखाई गई। अगर जांच में यह सही साबित होता है, तो यह सिर्फ गबन नहीं बल्कि पूरी कैश लोडिंग व्यवस्था को समझकर किया गया ऑपरेशन माना जाएगा। 3. ज्यादा ट्रांजेक्शन वाले एटीएम चुने ऑडिट रिपोर्ट में सामने आया कि जिन एटीएम में रोज सबसे ज्यादा ग्राहक आते थे, वहां कुछ कैश डाल दिया गया। इससे मशीनें तुरंत खाली नहीं हुईं। बैंक को तुरंत अलर्ट नहीं मिला और कंपनी को भी शुरुआत में शक नहीं हुआ। जांच के अनुसार आरोपियों ने सबसे पहले समय का पूरा हिसाब लगाया। 4. दो दिन की छुट्टी, सिस्टम को नहीं लगी भनक 25 जून के बाद 26 जून और फिर शनिवार व रविवार की छुट्टियां रहीं। लगातार चार दिन तक नियमित निगरानी प्रभावित रही। इस दौरान कई एटीएम धीरे-धीरे खाली होते गए। कुछ ग्राहकों को परेशानी हुई, लेकिन किसी को अंदाजा नहीं था कि मामला करोड़ों रुपए के गबन का है। 29 जून को जब दोनों कर्मचारी ड्यूटी पर नहीं पहुंचे और उनके मोबाइल बंद मिले, तब कंपनी को बड़ा शक हुआ। 5. तीन दिन की ऑडिट में खुला पूरा मामला इसके बाद जयपुर से विशेष ऑडिट टीम झुंझुनूं पहुंची। 29 जून, 30 जून और 1 जुलाई तक लगातार जांच की गई। कुल 28 एटीएम की जांच हुई। इनमें 9 एटीएम में गड़बड़ी मिली। तीन एटीएम में कैश नहीं मिला, जबकि छह एटीएम में तय राशि से कम नकदी मिली। जांच में कुल 1 करोड़ 13 लाख 3 हजार रुपए की कमी सामने आई। इसके अलावा ग्राहकों के 92 हजार रुपए के लेनदेन भी जमा नहीं किए गए। इस तरह कुल कथित गबन 1 करोड़ 13 लाख 95 हजार रुपए का सामने आया। कैश वैन मिली, लेकिन दोनों कर्मचारी गायब करोड़ों रुपए ले जाने वाली कैश वैन चिड़ावा में ड्राइवर के घर खड़ी मिली। लेकिन जिन दो कर्मचारियों के जिम्मे कैश था, वे दोनों गायब मिले। उनके मोबाइल बंद हैं और उनसे कोई संपर्क नहीं हो पा रहा है। अब पुलिस मोबाइल लोकेशन, जीपीएस रिकॉर्ड, सीसीटीवी फुटेज, बैंकिंग लॉग और दूसरे डिजिटल रिकॉर्ड के जरिए पूरी कड़ी जोड़ रही है। एसपी और एएसपी को दी गई जानकारी एएसपी देवेंद्र राजावत ने बताया कि CMS कंपनी बैंकों से नकदी लेकर एटीएम में जमा करने का काम करती है। चिड़ावा थाना क्षेत्र में दर्ज मामले में सुजडोला गांव के सुमेर सिंह और संदीप सिंह पर आरोप है कि उन्होंने बैंक से ली गई करीब 1 करोड़ 13 लाख रुपए से ज्यादा की राशि एटीएम में जमा नहीं की और फरार हो गए। पुलिस ने मामला दर्ज कर लिया है। आरोपियों की तलाश के लिए कई टीमें बनाई गई हैं। जल्द ही दोनों आरोपियों को गिरफ्तार कर गबन की गई राशि बरामद करने का प्रयास किया जा रहा है।



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जौनपुर में टीईटी का अंतिम दिन: जूते-मोजे, बेल्ट और घड़ी उतरवाकर मिली एंट्री, 23 केंद्रों पर 9584 अभ्यर्थियों ने दी परीक्षा – Jaunpur News




जौनपुर में तीन दिवसीय शिक्षक पात्रता परीक्षा (टीईटी) का शनिवार को शांतिपूर्ण ढंग से समापन हो गया। जिले के 23 परीक्षा केंद्रों पर अंतिम दिन 9584 अभ्यर्थी परीक्षा में शामिल हुए। नकल रोकने के लिए प्रवेश से पहले अभ्यर्थियों की सघन जांच की गई। परीक्षा केंद्रों पर अभ्यर्थियों को प्रवेश से पहले जूते, मोजे, बेल्ट और घड़ी उतारनी पड़ी। शर्ट की बाहें और कॉलर खोलकर भी जांच की गई। पानी की बोतल ले जाने वाले अभ्यर्थियों के रैपर हटाकर उनकी भी जांच की गई, ताकि कोई प्रतिबंधित सामग्री परीक्षा कक्ष तक न पहुंच सके। 23 केंद्रों पर तीन दिन चली परीक्षा जिले के 23 परीक्षा केंद्रों पर 2 जुलाई से शुरू हुई टीईटी परीक्षा तीन दिनों तक चली। परीक्षा 2 और 3 जुलाई को दो-दो पालियों में आयोजित हुई, जबकि 4 जुलाई को केवल प्रथम पाली में परीक्षा संपन्न कराई गई। तीन दिवसीय परीक्षा में कुल 56,882 अभ्यर्थियों को शामिल होना था। निगरानी के लिए तैनात रहे मजिस्ट्रेट परीक्षा को नकलविहीन और पारदर्शी बनाने के लिए जिले में 23 सेक्टर मजिस्ट्रेट, 23 स्टैटिक मजिस्ट्रेट, 5 आरक्षित सेक्टर मजिस्ट्रेट और 8 आरक्षित स्टैटिक मजिस्ट्रेट तैनात किए गए। परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था और अन्य व्यवस्थाओं की लगातार निगरानी की गई। डीएम ने दिए थे सख्त निर्देश जिलाधिकारी ने परीक्षा से पहले तैयारियों की समीक्षा करते हुए आयोग के दिशा-निर्देशों का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए थे। उन्होंने सुरक्षा व्यवस्था, सीसीटीवी निगरानी, विद्युत आपूर्ति, पेयजल और स्वच्छता की व्यवस्था दुरुस्त रखने के साथ केंद्र अधीक्षकों को परीक्षा की गोपनीयता, पारदर्शिता और शुचिता बनाए रखने के निर्देश दिए। साथ ही नियमों के उल्लंघन पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी भी दी गई।



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हरदा में उफनाई नदियों ने कई गांवों का संपर्क तोड़ा: तीन फीट पानी से स्टेट हाईवे बंद, घरों-दुकानों में घुसा बारिश का पानी – Harda News




हरदा जिले में शुक्रवार रात और शनिवार सुबह हुई तेज बारिश ने ग्रामीण क्षेत्रों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। भारी वर्षा के कारण छोटी नदियां और नाले उफान पर आ गए, जिससे कई निचले इलाकों में पानी भर गया। सड़कें और पुल-पुलियाएं जलमग्न होने से कई गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। जिले के ग्राम मांदला के पास काली माचक नदी उफान पर है। पुल पर करीब तीन फीट पानी आने के कारण नर्मदापुरम-खंडवा स्टेट हाईवे बंद हो गया है। इसके चलते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं। ग्राम कमताड़ा में शनिवार सुबह लगभग 5 बजे एक नाला उफान पर आने से गांव की सड़क तालाब में बदल गई। इससे कई घरों और दुकानों में पानी भर गया। इसी तरह, ग्राम रोलगांव में माचक नदी के उफान पर आने से भी घरों में पानी घुस गया है। ग्राम पहटकला में स्यानी नदी भी रौद्र रूप में बह रही है, जो नए पुल से गुजर रही है। आमासेल, रहटाकला, मांदला, ढोलगांव, कडोला, बारंगा, टेमलावाड़ी और सारंगपुर सहित दर्जनों अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में भी जलभराव की स्थिति बनी हुई है। हालांकि, बारिश थमने से लोगों ने राहत की सांस ली है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे जलमग्न रास्तों और उफनते नालों को पार करने का जोखिम न लें। ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ लोग जान जोखिम में डालकर उफनती नदियों के बीच से लकड़ियां पकड़ते हुए भी दिखाई दिए। इन लोगों को रोकने के लिए मौके पर कोई जवान तैनात नहीं था।



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