हरदा जिले में शुक्रवार रात और शनिवार सुबह हुई तेज बारिश ने ग्रामीण क्षेत्रों में जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। भारी वर्षा के कारण छोटी नदियां और नाले उफान पर आ गए, जिससे कई निचले इलाकों में पानी भर गया। सड़कें और पुल-पुलियाएं जलमग्न होने से कई गांवों का जिला मुख्यालय से संपर्क टूट गया है। जिले के ग्राम मांदला के पास काली माचक नदी उफान पर है। पुल पर करीब तीन फीट पानी आने के कारण नर्मदापुरम-खंडवा स्टेट हाईवे बंद हो गया है। इसके चलते सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गई हैं। ग्राम कमताड़ा में शनिवार सुबह लगभग 5 बजे एक नाला उफान पर आने से गांव की सड़क तालाब में बदल गई। इससे कई घरों और दुकानों में पानी भर गया। इसी तरह, ग्राम रोलगांव में माचक नदी के उफान पर आने से भी घरों में पानी घुस गया है। ग्राम पहटकला में स्यानी नदी भी रौद्र रूप में बह रही है, जो नए पुल से गुजर रही है। आमासेल, रहटाकला, मांदला, ढोलगांव, कडोला, बारंगा, टेमलावाड़ी और सारंगपुर सहित दर्जनों अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में भी जलभराव की स्थिति बनी हुई है। हालांकि, बारिश थमने से लोगों ने राहत की सांस ली है। प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि वे जलमग्न रास्तों और उफनते नालों को पार करने का जोखिम न लें। ग्रामीण क्षेत्रों में कुछ लोग जान जोखिम में डालकर उफनती नदियों के बीच से लकड़ियां पकड़ते हुए भी दिखाई दिए। इन लोगों को रोकने के लिए मौके पर कोई जवान तैनात नहीं था।
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हरदा में उफनाई नदियों ने कई गांवों का संपर्क तोड़ा: तीन फीट पानी से स्टेट हाईवे बंद, घरों-दुकानों में घुसा बारिश का पानी – Harda News
छप्पर के नीचे सजती है छपरा की यह 50 साल पुरानी मिठाई की दुकान, इनके कलाकंद की दुबई तक मांग
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Chapra Famous Kalakand Shop: छपरा के गरखा प्रखंड में 50 साल पुराना शंभू मिष्ठान भंडार है जहां का कलाकंद दुबई तक मशहूर है. शुद्ध दूध से बना यह कलाकंद इतना स्वादिष्ट होता है कि जिसने एक बार चख लिया वो लौटकर जरूर आता है. कई ग्राहक तो ऐसे हैं जो बचपन से आज तक इसी दुकान का कलाकंद खा रहे हैं.
छपरा. छपरा शहर में ही नहीं, ग्रामीण क्षेत्र के बाजार में भी एक काफी स्वादिष्ट और मशहूर मिठाई मिलती है, जिसे खरीदने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं. आज हम जिले के एक ऐसे मशहूर कलाकंद के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां से कलाकंद खरीदकर दुबई में रहने वाले लोग भी ले जाते हैं. शुद्ध दूध से इसको तैयार किया जाता है. दूसरी पीढ़ी के लोग इस दुकान को संभाल रहे हैं. सबसे खास बात यह है कि जो स्वाद पहले मिलता था, वही स्वाद मिठाई में आज भी मिलता है. इसका कारण यह है कि ग्रामीण क्षेत्र से आसानी से दूध मिल जाता है.
करीब 50 साल पुरानी है दुकान
कोयले की आग पर लोगों के सामने खोवा निकालकर कलाकंद तैयार किया जाता है. यह मशहूर कलाकंद जिले के गरखा प्रखंड अंतर्गत बसंत बाजार में तैयार होता है, जहां दूसरी पीढ़ी के रूप में बबलू प्रसाद और उनके पुत्र मिलकर कलाकंद तैयार करते हैं. इस दुकान की शुरुआत उनके पिताजी ने की थी. लगभग 50 वर्ष से अधिक पुरानी यह दुकान बताई जा रही है. जो स्वाद 50 वर्ष पहले मिलता था, वही स्वाद आज भी मिलता है. जिसकी वजह से यहां मिठाई खाने वाले पुराने से पुराने ग्राहक भी आते हैं.
बचपन से आ रहे कलाकंद खाने
लोकल 18 से ग्राहक जयप्रकाश सिंह ने बताया कि ‘यह काफी पुरानी यह दुकान है. मैं जब छोटा था, तो अपने पिताजी के साथ यहीं पर कलाकंद खाने के लिए आता था और आज भी मैं यहीं का कलाकंद खाता हूं. जो पहले स्वाद मिलता था, वही स्वाद आज भी मिलता है. पहले बबलू प्रसाद के पिताजी शंभू प्रसाद जी यहां पर मिठाई बनाते थे.
अब बबलू प्रसाद और उनके पुत्र के द्वारा कलाकंद तैयार किया जा रहा है. यह आज भी काफी स्वादिष्ट लगता है. शंभू मिष्ठान भंडार के नाम से यह दुकान पूरे जिले में मशहूर है. यहां के कलाकंद बहुत मशहूर हैं. दूर-दूर के लोग यहां के कलाकंद खाने आते हैं. यहां की मिठाई में आज भी शुद्धता बरकरार है.’
शुद्धता का रखते हैं ख्याल
दुकानदार बबलू प्रसाद ने बताया कि ‘ग्रामीण क्षेत्र से शुद्ध दूध लाकर कोयले की आग पर खोवा निकाला जाता है, जिसमें इलायची, किशमिश, काजू सहित कई सामग्री स्वाद बढ़ाने के लिए डाली जाती है. शुद्धता में कोई कमी नहीं है. उन्होंने बताया कि लगभग 50 वर्ष से इस बाजार में दुकान संचालित हो रही है. मेरे पिता शंभू प्रसाद ने इस दुकान की शुरुआत की थी. अब हम और मेरे पुत्र इसे संभाल रहे हैं. जिले के कोने-कोने से लोग मिठाई खाने के लिए आते हैं.
दुबई तक जाती है मिठाई
यहां से दुबई में रहने वाले लोग भी मिठाई खरीदकर ले जाते हैं. कल ही यहां से 3 किलो कलाकंद खरीदकर लोग दुबई ले गए हैं. यहां सफाई और शुद्धता पर विशेष ध्यान दिया जाता है. यही वजह है कि आज भी स्वाद बरकरार है. जिसकी वजह से ग्राहकों का मेरी दुकान की मिठाई पर विश्वास है. छोटी दुकान है, लेकिन बड़े-बड़े दुकानों में भी इस तरह की स्वादिष्ट और शुद्ध मिठाई नहीं मिलती है. यही वजह है कि लोग मेरी मिठाई पर विश्वास करते हैं.’
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बुंदेलखंड यूनिवर्सिटी से मास कम्यूनिकेशन एंड जर्नलिज़्म में मास्टर्स, गोल्ड मेडलिस्ट. पत्रकारिता का सफर दैनिक जागरण से शुरू हुआ, फिर प्रभात खबर और ABP न्यूज़ से होते हुए News18 Hindi तक पहुंचा. करियर और देश की …और पढ़ें
अमेरिका 250 साल के लिए टाइम कैप्सूल दफन करेगा: 408 किलो वजन, इसमें व्हेल की हड्डी से AI की भविष्यवाणी तक; आखिर इसकी जरूरत क्यों
वॉशिंगटन डीसी51 मिनट पहले
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अमेरिकाज टाइम कैप्सूल में 50 राज्यों और 5 केंद्र शासित प्रदेशों की तरफ से भेजी गई खास चीजें रखी गई हैं।
4 जुलाई को अमेरिका की आजादी के 250 साल पूरे होने के मौके पर 408 किलो का एक टाइम कैप्सूल जमीन में दफनाया जाएगा। इसे फिलाडेल्फिया के इंडिपेंडेंस नेशनल हिस्टोरिकल पार्क में दफनाया जाएगा और 250 साल बाद यानी 2276 में खोला जाएगा।
इसकी जानकारी नेशनल पार्क सर्विस के आधिकारिक रिकॉर्ड में भी दर्ज की गई है, ताकि 250 साल बाद आने वाली पीढ़ियां इसे ढूंढ़ सकें और इसके बारे में जान सकें।
इस कैप्सूल में 50 राज्यों और आम लोगों की ओर से चुनी गई यादगार चीजें रखी गई हैं, जिसमें व्हेल की हड्डी, दुनिया के सबसे बड़े जिप्सम रेगिस्तान की रेत, राइट बंधुओं के विमान का कपड़ा, AI की भविष्यवाणी और कई ऐतिहासिक दस्तावेज शामिल हैं।
टाइम कैप्सूल बंद पेटी या कंटेनर होता है, जिसमें किसी दौर की चीजें सुरक्षित रखी जाती हैं, ताकि भविष्य की पीढ़ियां उस समय के समाज, तकनीक, संस्कृति और जीवन को समझ सकें।

फिलाडेल्फिया को अमेरिका की आजादी का जन्मस्थान माना जाता है। 4 जुलाई 1776 को यहीं स्वतंत्रता घोषणा पत्र (डिक्लेरेशन ऑफ इंडिपेंडेंस) को मंजूरी दी गई थी। इसी वजह से टाइम कैप्सूल को दफनाने के लिए इस शहर को चुना गया।
कैप्सुल सुरक्षित रखने के लिए अपनाई गई खास तकनीकें
टाइम कैप्सूल बनाना जितना मुश्किल नहीं था, उससे बड़ी चुनौती उसे 250 साल तक सुरक्षित रखना था। वैज्ञानिकों के सामने सबसे बड़ा सवाल था कि जमीन के नीचे रखी चीजें ढाई सौ साल बाद भी सुरक्षित कैसे मिले।
इस वजह से प्रोजेक्ट से जुड़े कई विशेषज्ञों को इसमें शामिल किया गया। कई साल की रिसर्च के बाद ऐसा डिजाइन तैयार किया गया, जो पानी, नमी, जंग और मौसम के असर से कैप्सूल को बचा सके।
यह कैप्सूल चौकोर नहीं, बल्कि बेलन (सिलेंडर) के आकार का है। वैज्ञानिकों के अनुसार चौकोर डिब्बों के कोने समय के साथ कमजोर पड़ जाते हैं और वहीं से पानी अंदर जाने का खतरा सबसे ज्यादा रहता है।

टाइम कैप्सूल के सिलेंडर को प्रिसिजन-माइल्ड स्टेनलेस स्टील से बनाया गया है। इसका इस्तेमाल जंग से बचाने वाले वैज्ञानिक उपकरणों में होता है।
टाइम कैप्सूल को कैसे सील किया गया?
कैप्सूल को कार्यक्रम के दिन सील नहीं किया जाएगा। इसे पहले ही पूरी तरह सील किया जा चुका है। 4 जुलाई को इसे सिर्फ फिलाडेल्फिया में जमीन के नीचे स्थापित किया जाएगा।
कैप्सूल को सील करने के लिए खास धातु इंडियम का इस्तेमाल किया गया है। यह नरम धातु ढक्कन बंद करते समय छोटी-से-छोटी दरार भर देती है। इससे कैप्सूल पूरी तरह सील रहता है और अंदर रखा सामान लंबे समय तक सुरक्षित रहता है।
अगर कैप्सूल में बहुत ज्यादा नमी होती तो कागज और दूसरी वस्तुएं खराब हो सकती थीं। वहीं नमी पूरी तरह खत्म करने पर कुछ चीजें सूखकर टूट सकती थीं। इसलिए वैज्ञानिकों ने कैप्सूल के अंदर 35% नमी रखी है।
कैप्सूल को करीब 10 फीट नीचे दफनाया जाएगा। इस गहराई पर तापमान में उतार-चढ़ाव कम होता है। तेज गर्मी, कड़ाके की ठंड और सतह पर आने वाले तूफानों का असर भी बहुत कम पड़ता है।

टाइम कैप्सूल को बनाने वाली टीम। कैप्सूल की तैयारी में 10 साल लगे।
250 साल तक न पानी पहुंचेगा, न जंग लगेगी
वैज्ञानिकों के मुताबिक, जमीन के नीचे रखे जाने वाले किसी भी टाइम कैप्सूल का सबसे बड़ा दुश्मन पानी होता है। इसीलिए कैप्सूल के ऊपर एक और स्टील का सिलेंडर लगाया जाएगा। दोनों के बीच हवा की एक परत रहेगी, जो बाहर से आने वाले पानी को रोकने में मदद करेगी।
यह ठीक उसी सिद्धांत पर काम करेगा, जैसे पानी में उल्टी बाल्टी डुबोने पर उसके अंदर हवा फंसी रहती है। अगर भविष्य में भूजल का स्तर बढ़ जाए या बाढ़ आ जाए, तब भी बेल जार के भीतर मौजूद हवा पानी को कैप्सूल तक पहुंचने से रोकेगी।
इसे बनाने वाली टीम के प्रमुख वैज्ञानिक माइकल बेरिला ने कहा,
अगर इस टाइम कैप्सूल में पानी पहुंचा, तो इसका मतलब होगा कि फिलाडेल्फिया शहर करीब 6 फीट पानी में डूब चुका है। और अगर ऐसा हुआ तो टाइम कैप्सूल नहीं, बल्कि पूरी दुनिया एक बड़े प्राकृतिक संकट से जूझ रही होगी।


आखिर अमेरिका टाइम कैप्सूल क्यों दफना रहा है?
संग्रहालय की चीजें समय के साथ बदली या दूसरी जगह भेजी जा सकती हैं। लेकिन टाइम कैप्सूल को एक बार सील करने के बाद तय समय तक नहीं खोला जाता। इसलिए 250 साल बाद लोग 2026 के अमेरिका को उसी रूप में देख पाएंगे, जैसा वह आज है।
इसका मकसद सिर्फ इतिहास बचाना नहीं, बल्कि यह दिखाना है कि 2026 का अमेरिका कैसा था। इसलिए इसमें सरकारी दस्तावेजों के साथ 50 राज्यों और आम लोगों की चुनी हुई चीजें भी रखी गई हैं।
टाइम कैप्सूल सिर्फ वस्तुएं नहीं, बल्कि उस दौर की सोच, जीवनशैली और पहचान भी सहेजता है। यानी यह 250 साल बाद के लोगों के लिए 2026 की दुनिया का एक संदेश है।
दुनिया के सबसे चर्चित टाइम कैप्सूल
- दुनिया के सबसे प्रसिद्ध टाइम कैप्सूल में सबसे पहला नाम क्रिप्ट ऑफ सिविलाइजेशन का आता है। इसे 6,000 साल तक बंद रखने के लिए बनाया गया है।
- इसे अमेरिका के अटलांटा राज्य के ओगलेथॉर्प यूनिवर्सिटी के परिसर में जमीन के नीचे बनाया गया था और उसी दिन स्टेनलेस स्टील का दरवाजा वेल्ड करके हमेशा के लिए बंद कर दिया गया।
- इसमें उस दौर किताबें, फिल्में, ऑडियो रिकॉर्डिंग, घरेलू सामान, अखबार, वैज्ञानिक उपकरण और रोजमर्रा की वस्तुएं रखी गई हैं। इसे साल 8113 में खोला जाएगा।
- इसी तरह न्यूयॉर्क में वेस्टिंगहाउस टाइम कैप्सूल को 1939 में दफनाया गया था। इसमें भी उस दौर के रोजमर्रा की चीजें रखी गई हैं। इसे साल 6939 में खोलने की योजना है।
- भारत में भी टाइम कैप्सूल दफन किए गए हैं। सबसे चर्चित उदाहरण 1973 का है, जब तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की सरकार ने दिल्ली के लाल किले के पास एक टाइम कैप्सूल दफन कराया था। इसका नाम ‘कलपात्र’ रखा गया था।
- इंदिरा सरकार का कहना था कि इसमें आजादी के बाद देश की 25 साल की उपलब्धियां लिखी हैं। वहीं, विरोधियों ने कहा इसमें सिर्फ नेहरू-इंदिरा परिवार का महिमामंडन है। 1977 में मोरारजी देसाई की सरकार बनने के बाद इसे जमीन से निकाल लिया गया। हालांकि यह पता नहीं चल सका कि उसमें लिखा क्या था।

इंदिरा गांधी ने 15 अगस्त 1973 को लाल किले में 32 फीट नीचे टाइम कैप्सूल को दबाया था। दावा किया जाता है कि इस टाइम कैप्सूल में आजादी के बाद 25 साल का घटनाक्रम सबूत के साथ मौजूद था।
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ट्रम्प ने जन्मदिन पर व्हाइट हाउस में UFC फाइट कराई:अब तक का सबसे महंगा शो, ₹567 करोड़ खर्च; जीत के बाद विजेता राष्ट्रपति से मिला

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने 14 जून को व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में अल्टीमेट फाइटिंग चैम्पियनशिप यानी UFC मुकाबलों के साथ अपना 80वां जन्मदिन मनाया। UFC ने इस आयोजन पर करीब 6 करोड़ डॉलर (567 करोड़ रुपए) खर्च किए। ये अब तक का सबसे महंगा UFC आयोजन है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
कोटा के 4 भाइयों का कमाल, सूई-धागे के बिजनेस से खड़ा किया बड़ा मुकाम
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Success Story: कोटा के गुमानपुरा में स्थित ‘जनता अल्टरेशन’ पिछले 45 सालों से कपड़ों की परफेक्ट फिटिंग के लिए पूरे शहर में मशहूर है. 3 कारीगरों और ₹3,000 की पगड़ी से शुरू हुए इस पुश्तैनी कारोबार को आज 4 भाई मिलकर संभाल रहे हैं और अब इसमें तीसरी पीढ़ी की भी एंट्री हो चुकी है. आज इस हुनर के दम पर 4 दुकानें संचालित हो रही हैं, जिससे न केवल इस परिवार का बल्कि 15 अन्य कारीगरों के परिवारों का भी भरण-पोषण हो रहा है. प्रतिदिन 100 से अधिक ग्राहकों का भरोसा ही इनकी सफलता की सबसे बड़ी कुंजी है.
Success Story Kota: वह समय जब एक चद्दर के नीचे दुकान लगाई जाती थी लेकिन फैशन के इस बदलते दौर में जहाँ हर दिन नए ब्रांड्स बाजार में आ जाते हैं, वहीं राजस्थान के कोटा शहर में कपड़ों की फिटिंग यानी ‘अल्टरेशन’ का एक ऐसा ठिकाना भी है, जिसने खुद में एक बड़ा इतिहास समेट रखा है. कोटा के गुमानपुरा में स्थित ‘जनता अल्टरेशन’ आज किसी पहचान का मोहताज नहीं है. कपड़ों को परफेक्ट शेप देने वाले इस हुनर को चमकाते-चमकाते आज इस परिवार की तीसरी पीढ़ी भी दुकान पर कैंची और फीता थाम चुकी है. सूई-धागे के इस पुश्तैनी कारोबार ने सफलता की एक अनोखी इबारत लिखी है.
जनता अल्टरेशन के साबिर हुसैन ने बताया कि यह सफर आज से करीब 45 साल पहले उनके वालिद (पिता) साहब ने शुरू किया था. उस दौर में कोटा शहर के लोग ‘अल्टरेशन’ शब्द से पूरी तरह वाकिफ भी नहीं थे. लोगों के लिए अल्टरेशन का मतलब सिर्फ पैंट की लंबाई कम करना या ढीली ढाली सिलाई को ठीक कर देना भर था. फैशन की समझ और कपड़ों के सही नाप की बारीकियों को इस दुकान ने पूरे शहर को सिखाया. बुजुर्गों ने पहले भी कई तरह के व्यापार आजमाए थे, लेकिन बरकत इसी टेलरिंग लाइन में लिखी थी. शुरुआत बेहद मुश्किलों भरी थी. एक छोटी सी दुकान किराए पर ली गई और उस ज़माने में ₹3,000 की पगड़ी देकर इस काम की मजबूत बुनियाद रखी गई, जो आज एक मिसाल बन चुकी है.
चार भाइयों का मजबूत साथ और तीसरी पीढ़ी की शानदार एंट्री
वक्त बदला, कोटा शहर बदला और यह देश के सबसे बड़े कोचिंग हब के रूप में स्थापित हो गया, लेकिन जनता अल्टरेशन पर लोगों का भरोसा कभी नहीं बदला. परिवार के सबसे बड़े भाई शाकिर हुसैन हैं और उनसे छोटे भाई इकबाल हुसैन हैं. दोनों ने इस काम को दिन-रात एक करके सींचा. अब साबिर हुसैन और उनके छोटे भाई भी इसी विरासत को आगे लेकर साथ चल रहे हैं. इस कहानी का सबसे खूबसूरत मोड़ यह है कि अब इस दुकान में परिवार की तीसरी पीढ़ी की भी शानदार एंट्री हो चुकी है. साबिर हुसैन का भतीजा भी अब इस पुश्तैनी काम को और आधुनिक व बड़ा करने के लिए पूरी शिद्दत से जुट गया है.
3 कारीगरों से शुरू हुआ सफर, आज 15 परिवारों का सहारा
साबिर हुसैन कहते हैं, “आज से 45 साल पहले जब काम शुरू हुआ था, तब हमारे पास सिर्फ 3 कारीगर हुआ करते थे. लेकिन आज हमारे पास 10 से ज्यादा पक्के कारीगर काम कर रहे हैं. इनमें से कुछ कारीगर तो ऐसे हैं जो पिछले 15 से 20 सालों से हमारे साथ एक परिवार की तरह जुड़े हुए हैं.” शुरुआत भले ही एक दुकान से हुई थी, लेकिन आज इनके पास 4 दुकानें हैं. जिनमें तीन दुकान किराए की है. ऊपर वाले के करम और मेहनत की बदौलत आज इस काम के जरिए केवल इस एक परिवार का ही नहीं, बल्कि दुकान में काम करने वाले 14 से 15 अन्य कारीगरों के परिवारों का भी पेट पल रहा है.
रोजाना 100 ग्राहक, ‘संतुष्टि’ ही सबसे बड़ी यूएसपी
इस दुकान पर रोजाना औसतन 100 से ज्यादा ग्राहक अपने कपड़ों की फिटिंग दुरुस्त कराने आते हैं. साबिर हुसैन पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताते हैं कि पहले के जमाने में भी इस काम से इतनी अच्छी कमाई हो जाती थी कि घर का खर्च आराम से चल जाए और आज भी मेहनत का पूरा फल मिल रहा है. ग्राहकों का अटूट विश्वास और उनके चेहरे की खुशी ही हमारी सबसे बड़ी यूएसपी है. 45 साल पहले बोया गया वो छोटा सा बीज आज एक ऐसा बरगद बन चुका है, जिसके सूई-धागे के मजबूत रिश्ते ने पूरे कोटा शहर को अपना मुरीद बना रखा है.
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Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with News18 Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
भास्कर अपडेट्स: विदेश मंत्रालय बोला- सिंधु जल संधि पर भारत का रुख नहीं बदला; पाकिस्तान को आतंकवाद को सपोर्ट देना छोड़ना होगा
विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को कहा कि सिंधु जल संधि पर भारत का रुख एक जैसा है और पाकिस्तान के सीमा पार आतंकवाद को लगातार सपोर्ट देने के जवाब में यह संधि रोक दी गई है। 22 अप्रैल को पहलगाम में हुए आतंकी हमले में 26 लोगों की मौत के बाद भारत ने 2025 में इस संधि को रोक दिया था। MEA के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इस्लामाबाद में हाल ही में हुए संधि पर एक सेमिनार के बारे में एक सवाल के जवाब में अपनी साप्ताहिक मीडिया ब्रीफिंग में कहा, “IWT पर, मैं वही दोहराऊंगा जो हमने पहले भी कहा है। सिंधु जल संधि पर भारत का रुख एक जैसा है।” वर्ल्ड बैंक की मध्यस्थता वाली यह ट्रीटी 1960 से भारत और पाकिस्तान के बीच सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियों के पानी के बंटवारे और इस्तेमाल को कंट्रोल करती है। इस्लामाबाद में हुए एक सेमिनार में पाकिस्तानी डिप्टी पीएम इशाक डार ने कहा था कि पाकिस्तान भारत के IWT को रद्द करने के फैसले को खारिज करता है। कोई भी पार्टी ऐसी ट्रीटी के तहत अपनी जिम्मेदारियों को एकतरफा तौर पर सस्पेंड या खत्म नहीं कर सकती जिसमें ऐसा कोई प्रोविजन न हो। आज की बाकी बड़ी खबरें… महाराष्ट्र में स्कूलों के 500 मीटर क्षेत्र में एनर्जी ड्रिंक बैन महाराष्ट्र सरकार ने राज्य के सभी स्कूलों के 500 मीटर के दायरे में एनर्जी ड्रिंक और अन्य नशीले पदार्थों की बिक्री पर प्रतिबंध लगाने का फैसला किया है। सरकार ने खाद्य एवं औषधि प्रशासन (एफडीए) को इस प्रतिबंध को सख्ती से लागू करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही स्कूलों में एनर्जी ड्रिंक के नुकसान को लेकर जागरूकता अभियान चलाने के निर्देश भी दिए गए हैं। सावरकर के प्रपौत्र ने कोर्ट में कहा- राजनीतिक प्रयासों से हुई थी सावरकर की रिहाई स्वतंत्रता सेनानी विनायक दामोदर सावरकर की रिहाई दया याचिकाओं के कारण नहीं, बल्कि राजनीतिक प्रयासों के चलते हुई थी। उनके प्रपौत्र सत्यकी सावरकर ने पुणे की विशेष अदालत में यह बयान दिया है।
यह मामला कांग्रेस नेता राहुल गांधी के खिलाफ दायर मानहानि याचिका से जुड़ा है। अगली सुनवाई 7 जुलाई को निर्धारित की गई है। सत्यकी ने यह भी कहा कि वे यह निश्चित रूप से नहीं कह सकते कि सावरकर ने ब्रिटिश सरकार को किसी शर्त के तहत राजनीतिक गतिविधियों से दूर रहने का आश्वासन दिया था या नहीं। या सावरकर ने दया याचिकाओं में ‘आपका आज्ञाकारी सेवक’ जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया था या नहीं। हालांकि अदालत में मौजूद दस्तावेजों में 1920 की एक याचिका में ऐसे शब्द दर्ज होने का उल्लेख सामने आया है। महाराष्ट्र के ठाणे में कॉलेज में एडमिशन न मिलने पर 18 साल की लड़की ने आत्महत्या की ठाणे के कल्याण में 18 साल की एक लड़की ने कॉलेज में एडमिशन न मिलने पर आत्महत्या कर ली। मृतक की पहचान अक्षदा वाल्वी के तौर पर हुई। पुलिस के मुताबिक उसने कॉमर्स स्ट्रीम से 12वीं की परीक्षा पास की थी और बैचलर ऑफ कम्प्यूटर एप्लीकेशन (BCA) कोर्स करना चाहती थी। परीक्षा के बाद वह अपनी बहन के साथ नंदुरबार में मामा के घर चली गई थी। 14 जून को जब अक्षदा लौटी, तो उसे पता चला कि मुंबई यूनिवर्सिटी का BCA के लिए ऑनलाइन एडमिशन पोर्टल बंद हो चुका था। परेशान और तनाव में आकर, उसने 18 जून को अपने घर पर चूहे मारने की दवा खा ली। हालत बिगड़ने पर उसने अपनी मां को बताया कि उसने चूहामार दवा खाई है। घर वाले उसे हॉस्पिटल लेकर गए। अक्षदा के माता-पिता प्राइवेट अस्पताल में इलाज का खर्च नहीं उठा सकते थे, इसलिए उसे मुंबई के सरकारी जेजे अस्पताल में शिफ्ट कर दिया गया, जहां 28 जून को उसकी मौत हो गई। 30 जून को कल्याण के खड़कपाड़ा पुलिस स्टेशन में एक्सीडेंटल डेथ (दुर्घटना से मौत) का मामला दर्ज किया गया। लड़की की मौत की खबर शुक्रवार को सामने आई। चुनाव आयोग ने ओडिशा में SIR की देखरेख के लिए 10 IAS अधिकारियों को इलेक्टोरल रोल ऑब्जर्वर नियुक्त किया इलेक्शन कमीशन ने ओडिशा में चल रहे स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) की देखरेख के लिए 10 सीनियर IAS अधिकारियों को इलेक्टोरल रोल ऑब्जर्वर (ERO) नियुक्त किया है। ओडिशा के लिए वोटर लिस्ट का ड्राफ़्ट 5 जुलाई को पब्लिश होने वाला है। शुक्रवार को जारी नोटिफिकेशन में कहा गया है कि इन अधिकारियों को SIR के काम के दौरान उन्हें दिए गए जिलों का कम से कम तीन बार दौरा करने के लिए कहा गया है।
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मुरादाबाद में करंट की चपेट में आने से 3 झुलसे: बिजली भागने पर छत पर सोने गया था परिवार, ऊपर से गुजर रही HT लाइन में फाल्ट हुआ – Moradabad News
मुरादाबाद में हाईटेंशन लाइन में हुए फाल्ट के बाद करेंट की चपेट में आने से एक ही परिवार के 3 लोग झुलस गए। झुलसने वालों में पति पत्नी और 7 साल का एक बच्चा शामिल है।
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घटना मुरादाबाद के मझोला थाना क्षेत्र में एकता नगर कॉलोनी की है। ओमपाल सिंह यहां अपने परिवार के साथ रहते हैं। ओमपाल सिंह के बड़े बेटे सतीश ने बताया की शुक्रवार रात करीब 12:30 पर बिजली भागने पर पूरा परिवार सोने के लिए छत पर चला गया था। कुछ देर बाद बिजली आई तो ओमपाल सिंह की पत्नी बबीता ने पति से पंखे के तार लगाने के लिए कहा। ओमपाल सिंह ने जैसे ही पंख का प्लग लगाकर स्विच ऑन किया इसी दौरान घर के ऊपर से गुजर रही हाई टेंशन लाइन में अचानक फाल्ट हुआ। सतीश का कहना है कि इसके बाद उनके पूरे घर की वायरिंग में आग लग गई और करंट दौड़ने लगा। करंट की चपेट में आने से ओमपाल सिंह; उनकी पत्नी बबीता और 7 साल का बेटा हर्षित गंभीर रूप से झुलस गए। घटना के बाद पीड़ित परिवार की चीख पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और घायलों को तुरंत जिला चिकित्सालय में भर्ती कराया गया। सूचना मिलते ही पुलिस प्रशासनिक अधिकारी भी मौके पर पहुंच गए। एसडीएम सदर और को सिविल लाइंस ने जिला अस्पताल पहुंचकर पीड़ित परिवार से घटना के बारे में जानकारी ली। इसके साथ ही चिकित्सकों को निर्देश दिए कि पीड़ित परिवार का समुचित इलाज किया जाए।
महिला की हालत नाजुक बताई जा रही है।
नवभारत हाउसिंग सोसायटी घोटाला में 4.64 करोड़ की हेराफेरी: ED की जांच तेज, सहकारी समिति की जमीन बेचकर फंड गबन का आरोप – Indore News
इंदौर की चर्चित नवभारत हाउसिंग सोसायटी में करोड़ों रुपए के घोटाले को लेकर प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने अपनी कार्रवाई तेज कर दी है। करीब 4.64 करोड़ रुपए की वित्तीय अनियमितताओं और जमीन घोटाले से जुड़े मामले में ईडी ने आरोपी श्रीकांत घंटे, सुभाष चंद्र दुबे, राकेश जैन, अंतिम जोशी और आनंद शाह के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए) के तहत विशेष न्यायालय, इंदौर में चालान पेश किया है। मामले में कोर्ट ने आरोपियों को नोटिस जारी कर सुनवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। यह मामला इंदौर के एमजी रोड थाने में दर्ज एफआईआर से जुड़ा है, जिसमें नवभारत गृह निर्माण सहकारी समिति के तत्कालीन पदाधिकारियों पर वित्तीय अनियमितताओं और धोखाधड़ी के आरोप लगाए गए थे। इसी एफआईआर के आधार पर ईडी ने धनशोधन (मनी लॉन्ड्रिंग) के पहलुओं की जांच प्रारंभ की थी। जमीन बेचकर सोसायटी फंड में सेंध लगाने का आरोप ईडी की जांच में सामने आया है कि सोसायटी के तत्कालीन अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और निदेशक मंडल के कुछ सदस्यों ने नियोजित तरीके से सोसायटी की संपत्तियों का दुरुपयोग किया। आरोप है कि सोसायटी के फंड से खरीदी गई जमीनों को विभिन्न संस्थाओं और पक्षों को बेच दिया गया और उससे प्राप्त राशि का हिसाब-किताब छिपाकर फंड का गबन किया गया। जांच एजेंसी का दावा है कि इस पूरी प्रक्रिया में सोसायटी के सदस्यों को धोखे में रखा गया और जमीन बिक्री से जुड़े कई रिकॉर्ड भी नष्ट कर दिए गए, ताकि वित्तीय लेन-देन की वास्तविक जानकारी सामने न आ सके। ईडी के अनुसार, घोटाले से प्राप्त धन को विभिन्न स्तरों पर खपाया गया और बाद में उससे अचल संपत्तियां खरीदी गईं। जांच में यह भी सामने आया है कि गबन की गई राशि को वैध दिखाने के लिए कई वित्तीय लेन-देन किए गए, जिन्हें धनशोधन की श्रेणी में माना गया है। 64 लाख की संपत्तियां पहले ही हो चुकी हैं अटैच ईडी ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए 12 फरवरी को पीएमएलए-2002 के तहत आरोपी श्रीकांत घंटे और सुभाष चंद्र दुबे के नाम पर दर्ज करीब 64 लाख रुपए मूल्य की अचल संपत्तियां अस्थायी रूप से कुर्क (अटैच) कर दी थीं। एजेंसी का कहना है कि मामले में अभी भी जांच जारी है और आगे और खुलासे हो सकते हैं।
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जयपुर में XUV ने युवक को रौंदा, मौत: दूसरी गाड़ी से कार टकराई; युवकों के मारपीट से बचने के लिए भागते समय हादसा – Jaipur News
जयपुर में गुरुवार रात XUV गाड़ी के रौंदने से एक युवक की मौत हो गई। घर लौटते समय उसकी कार दूसरी गाड़ी से टच हो गई थी। गाड़ी सवार के मारपीट करने से बचकर भागने पर वह XUV की चपेट में आ गया। नारायण विहार थाना पुलिस ने पोस्टमॉर्टम के लिए शव को जयपुरिया हॉस्पिटल की मॉर्च्युरी भिजवाया। पुलिस ने पोस्टमॉर्टम करवाकर शव परिजनों को सौंप दिया। SHO (नारायण विहार) गुंजन सोनी ने बताया- हादसे में मानसरोवर के मांग्यावास निवासी अतुल मंडल (24) की मौत हो गई। वह कम्प्यूटर से डिजाइनिंग का काम करता था। परिजनों की ओर से दर्ज शिकायत में बताया- पिछले कुछ दिनों पहले ही अतुल ने नारायण विहार में रेस्टोरेंट खोला था। गुरुवार रात करीब 11 बजे वह अपनी ब्रेजा गाड़ी से घर लौटने के लिए निकला था। कार बैक लेते समय दूसरी गाड़ी से टच होने पर हुआ था विवाद वंदे मातरम रोड पर नारायण पेट्रोल पंप के पास अतुल की कार बैक लेते समय पीछे वाली कार से टच हो गई। इस बात पर गुस्साए कार सवारों ने पीछा कर उसे रुकवाया। कार से नीचे उतारकर अतुल के साथ मारपीट करने लगे। इससे बचने के लिए अतुल भागकर रोड क्रॉस करने लगा। इसी दौरान आई XUV गाड़ी ने उसे टक्कर मार दी। रोड पर गिरने के बाद XUV उसके ऊपर से निकल गई। हादसे के बाद झगड़ा करने वाले कार सवार और रौंदने वाली XUV गाड़ी दोनों मौके से फरार हो गए। एक्सीडेंट की सूचना पर पहुंची नारायण विहार थाना पुलिस ने गंभीर हालत में उसे जयपुरिया हॉस्पिटल पहुंचाया। डॉक्टर्स ने चेक करने के बाद अतुल को मृत घोषित कर दिया।
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बाजार जैसी अंगूरी रसमलाई घर पर बनाएं, मेहमान भी पूछेंगे कहां से लाए, नोट कर लें रेसिपी
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Angoori Rasmalai Recipe: अंगूरी रसमलाई का नाम सुनते ही मिठाई लवर्स के मुंह में पानी आ जाता है. आमतौर पर लोग इसे बाजार से खरीदकर खाना पसंद करते हैं, लेकिन अब आप इसे घर पर भी बना सकते हैं वो भी बिल्कुल हलवाई जैसी स्वादिष्ट और मुलायम. अंगूरी रसमलाई थोड़ी मेहनत और सही तरीके से बनाई जाए तो यह किसी भी खास मौके को और भी खास बना सकती है. देश के कई बड़े होटल्स में काम कर चुकी शेफ स्पर्श नरूला बताती हैं कि सॉफ्ट और स्पंजी अंगूरी रसमलाई बनाने के लिए दूध से छेना बनाने, छेना को छानने या फिर उसको मसलते समय कुछ सावधानियां बरतनी बहुत जरूरी हैं. अक्सर लोग इसमें एक गलती कर देते हैं, इस वजह से रसमलाई मनचाही रंगत नहीं ला पाती है.
अंगूरी रसमलाई बनाने के लिए सबसे पहले छेना तैयार करने के लिए 1 लीटर फुल क्रीम दूध, 2 से 3 बड़े चम्मच सिरका, आधा कप पानी, 1 छोटा चम्मच कॉर्नफ्लोर और एक चुटकी बेकिंग सोडा की जरूरत होगी. वहीं स्वादिष्ट रबड़ी बनाने के लिए 1 लीटर फुल क्रीम दूध, स्वादानुसार चीनी, कुछ केसर और आधा छोटा चम्मच इलायची पाउडर लें. अपने हिसाब से कोई भी ड्राई फ्रूट्स ले सकते हैं. इसके अलावा चाशनी तैयार करने के लिए डेढ़ कप चीनी और 4 कप पानी की जरूरत पड़ेगी. थोड़ी बर्फ भी रेडी रखें, आगे काम आएगी.

सबसे पहले एक लीटर दूध को किसी बड़े बर्तन में डालकर उसे उबाल लें. उबाल आने के बाद गैस बंद कर दें और दूध को थोड़ा ठंडा होने दें. इसके बाद 3 चम्मच सिरके को आधा कप पानी में मिलाकर धीरे-धीरे दूध में डालें और लगातार चलाते रहें. दूध पूरी तरह फट जाए तो इसे कॉटन के कपड़े में छान लें. छेना को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें ताकि सिरके का स्वाद निकल जाए. फिर कपड़े को करीब एक घंटे के लिए टांग दें ताकि अतिरिक्त पानी निकल जाए.

शेफ टिप्स की बात करें तो यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि दूध में उबाल आने के बाद उसे तुरंत न फाड़ें. पहले उसे 5 से 7 मिनट तक हल्का ठंडा होने दें. इसके बाद ही फाड़ने वाला आइटम डालें. ऐसा करने से छेना मुलायम और चिकना बनता है. वहीं अगर उबलते हुए दूध में सीधे सिरका डाल दिया जाए, तो छेना सख्त होने की संभावना बढ़ जाती है. इससे रसमलाई उतनी स्पंजी और नरम नहीं बन पाती.
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जब तक छेना से बचा हुआ पानी निकल रहा है, तब तक रबड़ी बना लेते हैं. इसके लिए एक लीटर दूध को बड़े बर्तन में डालकर आधा होने तक पकाएं. फिर इसमें कूटे हुए पिस्ता, बादाम, कूटी हुई इलायची, केसर और अपने अनुसार कोई भी ड्राई फ्रूट्स डालकर अच्छी तरह मिला लें. इसके बाद चीनी मिलाकर करीब 10 मिनट तक पकाएं. फिर गैस बंद कर ठंडा होने के लिए रख दें. यही रबड़ी अंगूरी रसमलाई का स्वाद बढ़ाएगी.

अब तैयार छेना को निकालकर करीब 8 मिनट तक अच्छी तरह मसलें. ध्यान रहे, छेने को मसलते हुए उसे इतना नहीं मसलना है कि उसका घी अलग होने लगे. बस इसे सॉफ्ट होने तक मसलना है. इसके बाद कॉर्नफ्लोर और बेकिंग सोडा मिलाकर दो मिनट और गूंथें. फिर कपड़े से ढककर थोड़ी देर के लिए छोड़ दें. इसके बाद छेना से कपड़ा हटाएं और उसे छोटे-छोटे अंगूर जैसे साइज के छोटे-छोटे बॉल्स बना लें.

एक चौड़े बर्तन में डेढ़ कप चीनी और चार कप पानी डालकर उबालें. जब चाशनी अच्छे से उबलने लगे तो उसमें छेना के बॉल्स डालें. बर्तन को ढककर लगभग 15 मिनट तक पकाएं. पकने के बाद इन्हें तुरंत बर्फ वाले ठंडे पानी में डाल दें और 5 मिनट तक रहने दें. इसके बाद बॉल्स को ठंडे पानी से निकालकर हल्के से हाथों से निचोड़कर इसको अलग बर्तन में बारी-बारी से रखें.

फिर उसमें रबड़ी को डाल दें. इसके ऊपर से आप पिस्ता, बादाम, इलायची पाउडर, केसर या फिर अपने हिसाब से कोई भी ड्राई फ्रूट्स डालकर कम से कम 5 से 6 घंटे या पूरी रात फ्रिज में रखें. जैसे ही आप फ्रिज खोलकर उसको निकालेंगे, तो रसमलाई अपनी रंगत में दिखाई देने लगेगी. सर्व करने से पहले बादाम, पिस्ता, केसर और सूखी गुलाब की पंखुड़ियों से इसको गार्निश कर सकते हैं. इस तरह ठंडी-ठंडी अंगूरी रसमलाई तैयार है. इसका स्वाद ऐसा होगा कि घर के लोग भी पूछ बैठेंगे कि मिठाई घर में बनी है या किसी मशहूर हलवाई की दुकान से लाई गई है.
लालू-राबड़ी को मिली Z सिक्योरिटी और बुलेटप्रूफ गाड़ी: बिहार सरकार ने वापस लौटाई सुरक्षा, बंगला विवाद के बीच घटाई गई थी सिक्योरिटी – Patna News
राजद सुप्रीमो लालू यादव और पूर्व सीएम राबड़ी देवी को Z कैटेगरी की सुरक्षा फिर से बहाल कर दी गई है। इसके साथ ही दोनों को बुलेट प्रूफ गाड़ी भी मुहैया कराई गई है। इसको लेकर बिहार सरकार ने शुक्रवार की शाम नोटिफिकेशन जारी किया है। बताया जा रहा है कि एक महीना पहले बिहार सरकार ने VVIP सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की थी। इस समीक्षा के बाद लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी की सुरक्षा श्रेणी में बदलाव किया गया था, जिसे लेकर राजनीतिक विवाद खड़ा हो गया था। सुरक्षा में बदलाव के विरोध में लालू प्रसाद यादव और राबड़ी देवी ने सरकार की ओर से उपलब्ध कराई गई सुरक्षा वापस कर दी थी। 10 सर्कुलर स्थित बंगले से वापस किया था सुरक्षा सुरक्षा में कटौती से नाराज लालू परिवार ने राज्य सरकार की नई सुरक्षा व्यवस्था को खारिज कर दिया था। पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी ने 10 सर्कुलर रोड स्थित बंगले पर तैनात सभी सरकारी सुरक्षा जवानों को वापस लौटा दिया था। इसके बाद से सांसद मीसा भारती और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव भी सुरक्षा जवानों को वापस कर दिए थे। वहीं, राजद ने आरोप लगाया था कि विपक्ष के प्रमुख नेताओं को राजनीतिक कारणों से निशाना बनाते हुए उनकी सुरक्षा घटाई गई है। आवास विवाद के बीच घटाई गई सुरक्षा सम्राट सरकार की तरफ से राबड़ी आवास को खाली करने का नोटिस दिया गया। इस नोटिस पर विवाद बढ़ा तो लालू परिवार की जेड प्लस सिक्योरिटी खत्म कर दी गई है। दोनों को बिहार पुलिस की विशेष सुरक्षा व्यवस्था दी गई थी, जिसमें एस्कॉर्ट, बुलेट प्रूफ कार और 8 से 16 गार्ड शामिल थे। इसके साथ ही लालू यादव के बेटे और जनशक्ति जनता दल (JJD) के राष्ट्रीय अध्यक्ष तेज प्रताप यादव की भी Y कैटेगरी की सुरक्षा खत्म कर दी गई। 29 मई को राबड़ी आवास खाली करने का नोटिस 29 मई को राबड़ी आवास खाली करने को लेकर आदेश जारी किया गया था, लेकिन लालू परिवार की ओर से अब तक बंगला खाली नहीं किया गया था। ऐसे में सरकार ने दोबारा सख्त रुख अपनाते हुए अब 15 दिनों का अल्टीमेटम दिया। 10 सर्कुलर रोड यानी राबड़ी आवास में पूर्व मुख्यमंत्री लालू यादव, पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव रहते थे। हालांकि, अब तेजस्वी यादव 1 पोलो रेड में शिफ्ट हो गए हैं और लालू-राबड़ी कौटिल्य नगर स्थिति निजी बंगले में शिफ्ट हो गए हैं।
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