बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने SIR के दौरान वोटर लिस्ट से नाम हटाने और फॉर्म 8 को रिजेक्ट करने की प्रक्रिया पर चुनाव आयोग को फटकार लगाई। बेंच ने कहा- आयोग का मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि नागरिक वोट डालें और इस मकसद को दरकिनार नहीं किया जा सकता। जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस और जस्टिस अमित एस. जामसांडेकर की बेंच ने टिप्पणी की कि SIR प्रक्रिया परेशान करने वाली है। कोर्ट ने कहा कि इसमें कानून की जगह सॉफ्टवेयर के हिसाब से काम करने की स्थिति नहीं बननी चाहिए। वोटर का नाम हटाने से पहले उसे सुनवाई का मौका मिलना चाहिए। मामला सांता क्रूज विधानसभा क्षेत्र के एक परिवार के छह सदस्यों से जुड़ा है। परिवार के लोग उसी विधानसभा क्षेत्र में दूसरे घर में शिफ्ट हुए थे। उन्होंने पता बदलने के लिए फॉर्म 8 भरा था, लेकिन SIR के दौरान उनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए। पुराने पते का सर्वे फॉर्म भरने पर सवाल SIR के तहत बूथ लेवल अधिकारी घर-घर जाकर पहले से भरे हुए सर्वे फॉर्म के जरिए वोटरों का सत्यापन करते हैं। ये फॉर्म पुराने वोटर डेटा के आधार पर तैयार किए जाते हैं। कोर्ट के सामने सवाल उठा कि जो व्यक्ति पुराने पते से दूसरे स्थान पर जा चुका है, उससे उसी पुराने पते का सर्वे फॉर्म भरने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। बेंच ने कहा कि ऐसे लोगों की संख्या सैकड़ों-हजारों हो सकती है, जो पुराने पते पर नहीं रहने के कारण वह फॉर्म साइन नहीं करना चाहेंगे। फॉर्म 8 अपने आप रिजेक्ट कर रहा सॉफ्टवेयर कोर्ट को बताया गया कि चुनाव आयोग के ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर में फॉर्म 8 का आवेदन तब रिजेक्ट हो जाता है, जब आवेदक पुराने पते पर दिया गया पहले से भरा सर्वे फॉर्म जमा नहीं करता। कुछ रिजेक्शन आदेशों में ‘सिस्टम ग्लिच’ का भी जिक्र था। इस पर कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या पोर्टल अधिकारियों को आवेदन स्वीकार या लंबित रखने का विकल्प ही नहीं देता और उन्हें रिजेक्ट करने के लिए मजबूर करता है। चुनाव आयोग ने बताया- फॉर्म 6 क्यों जरूरी चुनाव आयोग के वकील गौरीश अग्नि ने कहा कि SIR के दौरान अगर किसी व्यक्ति का नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं है तो उसे फॉर्म 6 के जरिए नाम शामिल कराने का रास्ता उपलब्ध है। चुनाव आयोग के मुताबिक, फॉर्म 8 का इस्तेमाल पहले से मौजूद वोटर एंट्री में पता बदलने के लिए होता है। अगर सर्वे फॉर्म जमा नहीं हुआ और पुराना नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं आया, तो फॉर्म 8 के बजाय फॉर्म 6 की प्रक्रिया अपनानी होगी। आयोग बोला- फॉर्म स्वीकार करने का अधिकार है तो खारिज करने का भी चुनाव आयोग की ओर से दलील दी गई कि अगर सर्वे फॉर्म मौजूद नहीं है तो फॉर्म 8 को स्वीकार नहीं किया जा सकता। वकील ने कहा कि आयोग के पास आवेदन स्वीकार करने की शक्ति है तो उसे खारिज करने की शक्ति भी है। कोर्ट ने इसी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आवेदन को तुरंत खारिज करने के बजाय लंबित क्यों नहीं रखा जा सकता। बेंच ने सुझाव दिया कि वोटर लिस्ट को पूरा और अंतिम रूप देने के बाद ऐसे आवेदनों पर कार्रवाई की जा सकती है, ताकि वोटर छूट न जाएं। वोटर की जिम्मेदारी पर भी चुनाव आयोग की दलील चुनाव आयोग ने कहा कि वोटर की भी जिम्मेदारी है कि घर बदलने के बाद वह आयोग को अपने नए पते की जानकारी दे। आयोग की ओर से यह भी कहा गया कि संबंधित लोगों ने कई साल तक पता अपडेट नहीं कराया और अब SIR के दौरान फॉर्म 8 के जरिए बदलाव की मांग की। चुनाव आयोग के मुताबिक, ऐसे लोगों के लिए फॉर्म 6 का विकल्प उपलब्ध है। वकील ने पुराने पते की जानकारी समय पर नहीं देने वाले वोटरों की जिम्मेदारी का भी मुद्दा उठाया। कोर्ट ने लगातार अपडेट करने की जरूरत बताई बेंच ने कहा कि वोटर लिस्ट में बदलाव की प्रक्रिया नियमित रूप से होती रहनी चाहिए। कोर्ट ने जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड के आधार पर वोटर लिस्ट को अपडेट करने का सुझाव दिया, ताकि लंबे अंतराल के बाद बड़े स्तर पर संशोधन की जरूरत कम हो। कोर्ट ने कहा कि अंतिम कोशिश ऐसी वोटर लिस्ट तैयार करने की होनी चाहिए, जिसमें वास्तव में वही लोग शामिल हों जो वोटर हैं। सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला चुनाव आयोग के वकील ने बिहार में पहले हुई SIR प्रक्रियाओं को बरकरार रखने वाले सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला दिया। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग के व्यापक पर्यवेक्षण अधिकारों की भी दलील दी। कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूरी प्रक्रिया को इन दलीलों के साथ जोड़कर स्पष्ट करने को कहा। इस मामले में 5 अक्टूबर को आगे की सुनवाई होगी। उस दिन फॉर्म 8 की प्रक्रिया और SIR के दौरान पता बदलने वाले वोटरों के नाम से जुड़े सवालों पर आगे दलीलें सुनी जाएंगी।
Source link
बॉम्बे हाईकोर्ट बोला- SIR ने पूरी व्यवस्था दरकिनार कर दी: चुनाव आयोग को फटकार, कहा- कानून भूलकर सॉफ्टवेयर के हिसाब से काम नहीं हो सकता
भारत 114 राफेल खरीदेगा, इस साल डील पर फैसला संभव: विमानों में स्वदेशी सिस्टम के इस्तेमाल पर जोर; फ्रांस की कंपनी भारतीय हथियार लगाने को तैयार
2 घंटे पहले
- कॉपी लिंक
अभी भारतीय वायुसेना के पास 36 राफेल लड़ाकू विमान हैं।
भारत की 114 राफेल लड़ाकू विमान खरीदने की योजना आगे बढ़ रही है। डिफेंस सेक्रेटरी राजेश कुमार सिंह ने कहा कि इस प्रोजेक्ट पर इस वित्त वर्ष के अंत तक फैसला हो सकता है।
अभी कंपनियों से मिले प्रस्तावों की जांच की जा रही है। भारत इस डील में ज्यादा से ज्यादा स्वदेशी तकनीक का इस्तेमाल करना चाहता है। योजना के मुताबिक, ज्यादातर राफेल विमान भारत में असेंबल किए जाएंगे।
इनमें भारत में बने हथियार और दूसरे सिस्टम लगाए जाएंगे। डिफेंस सेक्रेटरी ने बताया कि फ्रांस की कंपनी पहले खरीदे गए राफेल मरीन विमानों में भी भारतीय हथियार लगाने पर सहमत हो गई है।

राफेल की खरीद कैसे होगी?
यह खरीद ‘बाय एंड मेक’ मॉडल के तहत होगी। इसके तहत राफेल बनाने वाली कंपनी के साथ मिलकर भारत में विमानों की असेंबली और उत्पादन से जुड़े काम किए जाएंगे।
रक्षा मंत्रालय को मिले प्रस्तावों का मूल्यांकन पूरा होने के बाद खरीद प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। डिफेंस सेक्रेटरी के मुताबिक, इस साल के अंत तक इस प्रक्रिया में कोई निष्कर्ष निकल सकता है।
राफेल मरीन में लगेंगे भारतीय हथियार
भारत पहले ही राफेल मरीन विमान खरीद चुका है। अब फ्रांस की कंपनी इन विमानों में भारतीय हथियार लगाने के लिए तैयार है।
इससे भारत के बनाए हथियारों को राफेल के साथ इस्तेमाल करने की क्षमता बढ़ेगी। नई खरीद में भी भारतीय हथियारों और सिस्टम का इस्तेमाल बढ़ाने की योजना है।

2027 में तेजस Mk2 की पहली उड़ान
डिफेंस सेक्रेटरी ने बताया कि तेजस Mk2 की पहली उड़ान 2027 के मध्य में होने की योजना है। पहले इसके प्रोटोटाइप तैयार होंगे और फिर भारतीय वायुसेना उनका परीक्षण करेगी।
वायुसेना ने शुरुआत में करीब 120 तेजस Mk2 विमानों की जरूरत बताई थी। इनकी संख्या पर अंतिम फैसला प्रोटोटाइप के परीक्षण के बाद किया जाएगा।
तेजस Mk2 में निजी कंपनियों की भी भूमिका
तेजस Mk2 को विकसित करने की मुख्य जिम्मेदारी हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड यानी HAL की होगी। इसे फेज वाइज तरीके से विकसित किया जाएगा और जरूरत के हिसाब से इसमें नए बदलाव किए जाएंगे।
इस काम में निजी कंपनियां और MSME सेक्टर भी शामिल होंगे। निजी कंपनियां सब-असेंबली के साथ फ्यूजलेज जैसे बड़े हिस्से बनाने में मदद कर रही हैं। कुछ हिस्सों के लिए निजी क्षेत्र की प्रोडक्शन लाइन भी शुरू की गई है।
AMCA पर भारत का फोकस
भारत ने फिलहाल किसी विदेशी पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमान प्रोजेक्ट में शामिल होने का फैसला नहीं किया है। अभी भारत अपने AMCA यानी एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट प्रोजेक्ट पर फोकस कर रहा है।
AMCA के लिए शॉर्टलिस्ट की गई कंपनियों से प्रस्ताव मांगे गए हैं। कंपनियों ने प्रोजेक्ट की जटिलता और इस क्षेत्र में पहली बार काम करने की वजह से ज्यादा समय मांगा है।
सरकार उन्हें कुछ और समय देने जा रही है। डिफेंस सेक्रेटरी के मुताबिक, फिलहाल भारत का फोकस AMCA प्रोजेक्ट को आगे बढ़ाने पर है।
——————————–
यह खबर भी पढ़ें…
114 राफेल फाइटर जेट के लिए फ्रांस ने प्रस्ताव सौंपा:भारत में ही बनाने और स्वदेशी कलपुर्जे लगाने का ऑफर

फ्रांस ने भारत को 114 राफेल फाइटर जेट देने का प्रस्ताव सौंप दिया है। 3.25 लाख करोड़ रुपए के सौदे में फाइटर जेट का बड़े पैमाने पर स्थानीय स्तर पर निर्माण और उत्पादन शामिल है। यानी इसमें लगने वाले कलपुर्जे स्वदेशी फैक्टरियों में बनाए जा सकेंगे। पूरी खबर पढ़ें…
विमान अपहरण की कोशिश करने वाला पायलट कट्टरपंथी था: साथी बोला- महिलाओं से हाथ नहीं मिलाता था; यात्रियों ने पकड़ा तो चिल्लाया- मुझे मार दो
रियाद3 घंटे पहले
- कॉपी लिंक
दुबई से इजराइल जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट को हाईजैक करने की कोशिश करने वाला ओमानी को-पायलट धार्मिक कट्टरपंथी था। यह दावा उसके साथ काम कर चुके एक पायलट ने इजराइली न्यूज चैनल 16 से बातचीत में किया।
सहकर्मी की पहचान सार्वजनिक नहीं की गई है। उसके मुताबिक, आरोपी महिलाओं से हाथ भी नहीं मिलाता था। उसने कहा, ‘कंपनी ने एक आतंकवादी को नौकरी पर रखा, जिसकी वजह से करीब 180 यात्रियों की जान खतरे में पड़ गई।
इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के मुताबिक, पकड़े जाने के बाद आरोपी चिल्ला रहा था- ‘मुझे मार दो।’
कैप्टन पर चाकू से हमला किया, विमान हजारों फीट नीचे आया
ओमानी को-पायलट ने कॉकपिट में भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर पर चाकू से हमला किया और विमान को हाईजैक करने की कोशिश की इस दौरान विमान कुछ ही मिनटों में हजारों फीट नीचे आ गया।
गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद कैप्टन ने कॉकपिट का दरवाजा खोला। इसके बाद यात्रियों और क्रू मेंबर्स ने आरोपी को काबू कर लिया। दूसरे पायलटों ने विमान को संभाला और सऊदी अरब के तबुक में सुरक्षित लैंडिंग कराई। हमले के पीछे की वजह की जांच अभी जारी है।

फुटेज घायल पायलट कैप्टन स्मित का है, सऊदी में लैंड होने के बाद इलाज के लिए ले जाया गया।
9 महीने पहले ही फ्लाईदुबई में नौकरी शुरू की थी
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, आरोपी ने फ्लाईदुबई में करीब 9 महीने पहले नौकरी शुरू की थी। ओमान के एक अधिकारी ने अमेरिकी न्यूज चैनल CBS को इसकी पुष्टि की थी। आरोपी का नाम सार्वजनिक नहीं किया गया है।
घटना के बाद यह सवाल भी उठा कि आरोपी को इजराइल जाने वाली फ्लाइट में ड्यूटी कैसे मिली। इजराइल और ओमान के बीच औपचारिक राजनयिक संबंध नहीं हैं। हालांकि, अभी तक यह साफ नहीं हुआ है कि आरोपी की सुरक्षा जांच में कोई चूक हुई थी या नहीं।
UAE जांच करेगा कि हमला आतंकवादी साजिश थी या नहीं
UAE यह जांच कर रहा है कि हमला आतंकवाद से जुड़ा था या पहले से इसकी योजना बनाई गई थी। इजराइल के रक्षा मंत्री इजराइल काट्ज ने घटना को ‘जिहादी आतंकवादी हमला’ बताया था।
————————
ये खबर भी पढ़ें…
कॉकपिट में भिड़े, चाकू लगे, लेकिन फ्लाइट कंट्रोल नहीं छोड़ा: पायलट स्मित मच्छर ने 4 साल पहले फ्लाईदुबई जॉइन की, पहले स्पाइसजेट में थे

भारतीय पायलट स्मित मच्छर ने दुबई से इजराइल जा रही फ्लाइट को क्रैश होने से बचा लिया। स्मित पर उनके साथी पायलट ने ही चाकू से हमला कर दिया था। पूरी खबर पढ़ें…
सरकारी अधिकारी पर जानलेवा हमला, एक आरोपी गिरफ्तार: नारायण विहार में 6 नकाबपोशों ने लाठी-डंडों और सरियों से किया था हमला, पुरानी कहासुनी बनी वारदात की वजह – Jaipur News
जयपुर के नारायण विहार थाना क्षेत्र में सरकारी अधिकारी पर लाठी-डंडों और सरियों से जानलेवा हमला करने के मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने सैकड़ों CCTV फुटेज, BTS डेटा और तकनीकी साक्ष्यों का विश्लेषण कर आरोपी की पहचान की। वारदात में दो मोटरसाइकिलों पर सवार होकर आए 6 नकाबपोश बदमाश शामिल थे। पुलिस अन्य आरोपियों और वारदात में इस्तेमाल वाहनों की तलाश कर रही है। घर के बाहर टहलते समय किया हमला डीसीपी साउथ राजर्षि राज ने बताया कि 18 सितंबर को परिवादी डॉ. मदन यादव रात करीब 8 बजे घर के बाहर कॉलोनी में टहल रहे थे। इसी दौरान दो मोटरसाइकिलों पर सवार होकर आए 6 नकाबपोश बदमाशों ने लाठी-डंडों और सरियों से उन पर हमला कर दिया। हमले के बाद आरोपी मौके से फरार हो गए। मामले में नारायण विहार थाने में मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की गई। पुरानी कहासुनी के चलते रची हमले की साजिश मामले की गंभीरता को देखते हुए नारायण विहार थाना पुलिस, साइबर सेल और जिला विशेष टीम की संयुक्त टीम गठित की गई। जांच में सामने आया कि परिवादी के पड़ोस में रहने वाले सुभाष मटोरिया से पहले विवाद और कहासुनी हो चुकी थी। तकनीकी साक्ष्यों और जांच के आधार पर सुभाष के भतीजे रमण मटोरिया की भूमिका संदिग्ध पाई गई। पुलिस के अनुसार रमण ने अपने साथियों के साथ मिलकर परिवादी की दिनचर्या और आने-जाने के रास्तों की जानकारी जुटाई। इसके बाद योजनाबद्ध तरीके से घर से बाहर निकलने के दौरान उन पर हमला किया गया। सैकड़ों CCTV फुटेज खंगालकर आरोपी तक पहुंची पुलिस पुलिस टीम ने घटनास्थल का बारीकी से निरीक्षण कर सीन रीक्रिएशन किया। घटनास्थल और संदिग्धों के संभावित आने-जाने के रास्तों के CCTV फुटेज, BTS डेटा और अन्य तकनीकी साक्ष्य जुटाए गए। इनका घटनाक्रम और संदिग्धों की गतिविधियों से मिलान कर आरोपी की पहचान की गई। जांच के बाद पुलिस ने रमण मटोरिया (23) को गिरफ्तार कर लिया। अन्य आरोपियों और हथियारों की तलाश जारी पुलिस आरोपी से पूछताछ कर रही है। वारदात में इस्तेमाल मोटरसाइकिलों और हथियारों की बरामदगी के साथ अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के प्रयास जारी हैं।
Source link
जबलपुर में 7.5 लाख की शराब जब्त: घर में छिपाकर रखी थी; ड्राई डे पर बेची जानी थी – Jabalpur News
जबलपुर में 2 अक्टूबर के शुष्क दिवस से पहले अवैध शराब के स्टॉक का मामला सामने आया है। गुरुवार रात पुलिस ने रांझी और पाटन थाना क्षेत्रों में कार्रवाई करते हुए करीब 7.50 लाख रुपए की देशी-विदेशी शराब जब्त की। रांझी पुलिस ने गांधी व्यायामशाला के पास बब्लू पटवा के घर से करीब 6 लाख रुपए की शराब जब्त की है। वहीं, पाटन पुलिस ने कटरा बेलखेड़ा बस स्टैंड के पास कार्रवाई कर 1,650 पाव देशी शराब जब्त की, जिसकी कीमत करीब 1.50 लाख रुपए बताई गई है। 2 अक्टूबर को दुकानें बंद, इसलिए शराब स्टॉक करने की आशंका रांझी पुलिस के मुताबिक, 2 अक्टूबर को शुष्क दिवस के कारण शराब दुकानें बंद रहेंगी। पुलिस को सूचना मिली थी कि बब्लू पटवा के घर पर अवैध शराब का जखीरा रखा गया है, जिसे 2 अक्टूबर को क्षेत्र के अलग-अलग इलाकों में बेचने की तैयारी थी। मुखबिर की सूचना पर सीएसपी सतीश साहू के निर्देश पर टीआई उमेश गोल्हानी के नेतृत्व में पुलिस की तीन टीमें गठित की गईं। टीमों ने एक साथ कार्रवाई करते हुए बब्लू पटवा के घर पर छापा मारा। यहां से 112 लीटर शराब जब्त की गई। पुलिस ने दो आरोपियों महेश यादव और जानी एंथेनी को गिरफ्तार किया है। बबलू पटवा फरार, शराब किस ठेकेदार से आई इसकी जांच सीएसपी सतीश साहू ने बताया कि मुख्य आरोपी बबलू पटवा पुलिस के पहुंचने से पहले ही फरार हो गया। उसकी तलाश की जा रही है। पुलिस ने शराब जब्त करने के बाद आबकारी विभाग को सूचना दी है। अब यह पता लगाया जा रहा है कि शराब किस ठेकेदार के पास से लाई गई थी। कमरे में भूसे के बीच रखी थीं 17 पेटी शराब पुलिस के मुताबिक, शुभम सिंह के घर के सामने वाले कमरे की तलाशी लेने पर वहां शराब की पेटियां मिलीं। यह कमरा भूसा रखने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा था। यहां कुल 33 पेटी यानी कार्टून में 1,650 पाव देशी शराब मिली। पुलिस के अनुसार, शुभम सिंह ने 16 पेटी और सुखदेव सिंह ने 17 पेटी शराब रखना बताया। पुलिस ने दोनों आरोपियों के कब्जे से करीब 1.50 लाख रुपए कीमत की 33 पेटी देशी शराब जब्त की। दोनों के खिलाफ धारा 34(2) आबकारी एक्ट के तहत कार्रवाई की गई है। शुष्क दिवस पर खपाने की तैयारी का पुलिस को शक पुलिस के मुताबिक, जब्त की गई शराब को उस समय खपाने की तैयारी थी, जब 2 अक्टूबर को शुष्क दिवस के कारण शासकीय शराब दुकानें बंद रहेंगी। रांझी मामले में मुख्य आरोपी बब्लू पटवा की तलाश की जा रही है। साथ ही पुलिस यह पता लगा रही है कि जब्त शराब कहां से लाई गई थी। पाटन में 33 पेटी शराब जब्त, दो आरोपी गिरफ्तार रांझी के अलावा पाटन थाना पुलिस ने भी अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई की। टीआई पूजा उपाध्याय के मुताबिक, पुलिस को सूचना मिली थी कि कटरा बेलखेड़ा निवासी सुखदेव सिंह लोधी और शुभम सिंह लोधी भारी मात्रा में शराब छिपाकर रखे हैं। दोनों कटरा बेलखेड़ा बस स्टैंड स्थित हनुमान मंदिर के पास ग्राहक का इंतजार कर रहे थे। सूचना पर पुलिस ने मौके पर दबिश दी। पुलिस को देखकर दोनों भागने लगे, जिन्हें घेराबंदी कर पकड़ा गया। पूछताछ में दोनों ने अपने नाम सुखदेव सिंह लोधी पिता स्व. मेन सिंह, उम्र 30 वर्ष और शुभम सिंह लोधी पिता हल्ले सिंह लोधी, उम्र 20 वर्ष, निवासी कटरा बेलखेड़ा, पाटन बताए।
Source link
बिहार में ग्रीन एनर्जी में निवेश के बड़े मौके: ऊर्जा मंत्री ने निवेशकों को दिया भरोसा, बिजली क्षेत्र में ₹1.88 लाख करोड़ के निवेश की योजना – Patna News
बिहार में ऊर्जा और ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में निवेश की बड़ी संभावनाएं हैं। राज्य सरकार बिजली उत्पादन, पारेषण, वितरण और नवीकरणीय ऊर्जा से जुड़ी परियोजनाओं पर करीब ₹1.88 लाख करोड़ के निवेश की योजना पर काम कर रही है। इसमें सोलर पावर, बैटरी स्टोरेज, पंप्ड स्टोरेज और ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर जैसी परियोजनाएं शामिल हैं। पटना के होटल ताज सिटी सेंटर में आयोजित ‘राइजिंग बिहार इन्वेस्टर समिट-2026’ में ऊर्जा क्षेत्र को विशेष महत्व दिया गया। समिट में उद्योग जगत, निवेशकों और उद्यमियों समेत करीब 200 से 250 प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। कार्यक्रम का मुख्य विषय ‘बिहार-द इमर्जिंग इन्वेस्टमेंट डेस्टिनेशन ऑफ इंडिया’ रहा। ₹5 लाख करोड़ निवेश का लक्ष्य समिट में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के संदेश में कहा गया कि बिहार सरकार ने नवंबर 2026 तक ₹5 लाख करोड़ का निवेश आकर्षित करने का लक्ष्य रखा है। सरकार का कहना है कि राज्य में कारोबार के लिए बेहतर माहौल तैयार करने, औद्योगिक क्षेत्रों का विस्तार करने और जरूरी आधारभूत सुविधाएं विकसित करने पर काम किया जा रहा है। समिट में ऊर्जा, सौर ऊर्जा, ग्रीन हाइड्रोजन, बैटरी स्टोरेज, सोलर पार्क और बायोमास जैसे क्षेत्रों में निवेश की संभावनाओं पर चर्चा हुई। 2,554 कृषि फीडर होंगे सोलराइज ऊर्जा मंत्री शैलेश कुमार उर्फ बुलो मंडल ने कहा कि बिहार में ग्रीन एनर्जी के क्षेत्र में तेजी से काम हो रहा है। राज्य में बढ़ती बिजली की मांग को देखते हुए ऊर्जा क्षेत्र में निवेश के अच्छे अवसर हैं। उन्होंने निवेशकों से बिहार में ऊर्जा और हरित ऊर्जा परियोजनाओं में निवेश के लिए आगे आने की अपील की। उन्होंने बताया कि पीएम-कुसुम योजना के तहत राज्य के 2,554 कृषि फीडरों के सोलराइजेशन को मंजूरी दी गई है। इसके तहत करीब 2,585 मेगावाट क्षमता के सौर ऊर्जा संयंत्र लगाए जाएंगे। इसके अलावा पीएम सूर्य घर योजना के तहत रूफटॉप सोलर को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। ग्रीन हाइड्रोजन नीति को मिली मंजूरी ऊर्जा विभाग के सचिव-सह-अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक अजय यादव ने बताया कि बिहार सरकार ने ग्रीन हाइड्रोजन नीति-2026 को मंजूरी दी है। उन्होंने कहा कि राज्य में सौर ऊर्जा, स्टोरेज, ट्रांसमिशन और बिजली उत्पादन से जुड़ी कई परियोजनाओं पर काम चल रहा है। उन्होंने बताया कि किसानों की आय बढ़ाने और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए कृषि फीडरों के सोलराइजेशन की योजना महत्वपूर्ण है। इससे राज्य में नवीकरणीय ऊर्जा के इस्तेमाल को बढ़ावा मिलेगा। बैटरी स्टोरेज और पंप्ड स्टोरेज पर भी फोकस सेक्टोरल इन्वेस्टमेंट सेशन में बैटरी एनर्जी स्टोरेज सिस्टम (BESS) और पंप्ड स्टोरेज प्रोजेक्ट (PSP) में निवेश की संभावनाओं पर भी चर्चा हुई। राज्य में करीब 2.5 लाख रूफटॉप सोलर सिस्टम को बढ़ावा देने की दिशा में काम किया जा रहा है। इसके साथ ही सोलर पार्क, बायोमास आधारित परियोजनाओं और ग्रीन एनर्जी कॉरिडोर के विकास पर भी जोर दिया जा रहा है। सरकार का उद्देश्य नए उद्योगों को भरोसेमंद बिजली उपलब्ध कराने के लिए उत्पादन, पारेषण और वितरण व्यवस्था को एक साथ मजबूत करना है। निवेशकों ने उठाए कई मुद्दे ऊर्जा क्षेत्र के विशेष सत्र के बाद निवेशकों के साथ प्रश्नोत्तर और बी2जी (बिजनेस-टू-गवर्नमेंट) बैठक हुई। इसमें रिन्यूएबल एनर्जी पॉलिसी, पीएम-कुसुम-2.0, सौर ऊर्जा, स्टोरेज, न्यूक्लियर और थर्मल पावर, भूमि उपलब्धता, ग्रीन हाइड्रोजन नीति और परियोजनाओं के लिए आधारभूत सुविधाओं पर चर्चा हुई। बैठक में निवेशकों ने अपनी परियोजनाओं और निवेश से जुड़ी जरूरतों को अधिकारियों के सामने रखा। ऊर्जा विभाग की ओर से नीतिगत सहयोग और जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने का भरोसा दिया गया। सेक्टरल सत्र में एनबीपीडीसीएल एवं ब्रेडा के एमडी राहुल कुमार, बिहार स्टेट पावर ट्रांसमिशन कंपनी लिमिटेड के एमडी नवल किशोर चौधरी और बिहार स्टेट पावर जेनरेशन कंपनी लिमिटेड के एमडी विशाल राज समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
Source link
गुजरात बीजेपी राज्यसभा सांसद को हाईकोर्ट का समन: राजेश शुक्ल पर नामांकन-पत्र में आपराधिक मुकदमा छिपाने का आरोप
गुजरात हाईकोर्ट ने शुक्रवार को बीजेपी के राज्यसभा सांसद राजेश शुक्ल को समन जारी किया है। दरअसल, कांग्रेस नेता तुषार चौधरी ने आपराधिक मामलों की जानकारी छिपाने के आरोप में शुक्ला के खिलाफ हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। अदालत में याचिकाकर्ता की ओर से एआईसीसी के राष्ट्रीय प्रवक्ता और सीनियर एडवोकेट शक्तिसिंह गोहिल और उनके सहयोगी चिंतनभाई चंपानेरी ने इस मामले की जोरदार पैरवी की। गोहिल के मुताबिक, राजेशभाई ने अपने नामांकन के दौरान हलफनामे में आधिकारिक रूप से यह दावा किया था कि उनके खिलाफ कोई भी आपराधिक मामला लंबित नहीं है। जबकि वास्तविकता में उन पर धोखाधड़ी और जालसाजी से जुड़ी आईपीसी की धारा 406, 420, 465, 467, 468 और 471 के तहत मामले दर्ज थे। हालांकि, राजू शुक्ल ने दैनिक भास्कर से हुई बातचीत में बताया कि उन्हें अभी तक कोई नोटिस नहीं मिला है।
याचिकाकर्ता के वकील गोहिल ने कोर्ट में कहा- इन आपराधिक मामलों में शुक्ल को निचली अदालत द्वारा तलब भी किया जा चुका था। सांसद ने एफआईआर रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट में भी याचिका लगाई थी, लेकिन वहां से उन्हें कोई रिलीफ या स्टे नहीं मिला था। इन सब तथ्यों को जानते हुए भी उन्होंने चुनाव आयोग से यह जानकारी पूरी तरह छिपाई, जिसके आधार पर अब उनका निर्वाचन रद्द कर देना चाहिए। गोहिल ने एक वीडियो बयान जारी कर गुजरात हाईकोर्ट का आभार व्यक्त किया है। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून सभी के लिए समान है और हर प्रत्याशी के लिए अपने खिलाफ लंबित मुकदमों की जानकारी देना कानूनी रूप से अनिवार्य है।
गोहिल ने मध्य प्रदेश के हालिया चुनावों का संदर्भ देते हुए बताया कि वहां तकनीकी आधार पर कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन तुरंत रद्द कर दिया गया था। इसी समानता और तकनीकी पहलुओं की गहराई से जांच करने के बाद कांग्रेस की ओर से इलेक्शन पिटीशन (3/2026) हाईकोर्ट में दाखिल की गई। अदालत ने बुधवार को इस मामले पर विस्तार से सुनवाई की थी और आज सांसद को विधिवत समन (नोटिस) जारी कर दिया है। शक्तिसिंह गोहिल ने कहा कि चूंकि यह मामला अभी अदालत के विचाराधीन है, इसलिए वह इस विषय पर कोई अतिरिक्त टिप्पणी नहीं करेंगे, लेकिन कोर्ट के इस कदम से न्याय की उम्मीद जगी है।
—————
ये खबर भी पढ़ें… एमपी-राज्यसभा उम्मीदवार नटराजन का नामांकन खारिज:कांग्रेस बोली-इसके खिलाफ कोर्ट जाएंगे मध्य प्रदेश की तीसरी राज्यसभा सीट से कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन मंगलवार को खारिज कर दिया गया। बीजेपी की आपत्ति पर रिटर्निंग ऑफिसर अरविंद शर्मा ने ये फैसला लिया। पूरी खबर पढ़ें…
Source link
अपहरण-दुष्कर्म मामले में आरोपी को 10 साल की सजा: बिजनौर में महिला समेत दो आरोपियों को 7-7 साल कैद, कोर्ट ने लगाया जुर्माना – Bijnor News
बिजनौर की अपर जिला एवं सत्र न्यायालय तथा फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम ने अपहरण और दुष्कर्म के मामले में फैसला सुनाया है। न्यायाधीश कमलदीप ने मुख्य आरोपी अरुण कुमार को दुष्कर्म के मामले में 10 साल की कैद और 61 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं, अपहरण में सहयोग करने के दोषी जगमोहन और उसकी मां रोशन देवी को सात-सात साल की कैद और 10-10 हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया। एडीजीसी मुकुल कुमार और आनंद जंघाला के अनुसार, कोर्ट के आदेश पर महिला ने अरुण कुमार, जगमोहन और रोशन देवी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। जगमोहन और रोशन देवी महिला के पिता के पड़ोसी हैं, जबकि अरुण कुमार जगमोहन का मौसेरा भाई है। महिला की शादी 14 जुलाई 2016 को हुई थी। आरोप के अनुसार, अरुण कुमार ने महिला के मोबाइल से उसकी फोटो खींच ली थीं और जगमोहन के फोन से उससे बातचीत करता था। आरोप है कि उसने महिला का रिश्ता तुड़वा दिया। इसके बाद 4 सितंबर 2016 को अरुण ने धमकी दी कि बैंक नहीं आने पर फोटो और रिकॉर्डिंग उसके पति को भेजकर तलाक करवा देगा। महिला के अनुसार, डर के कारण वह 5 सितंबर को बताए गए बैंक पहुंची। वहां अरुण कुमार, जगमोहन और रोशन देवी कार में मिले। आरोप है कि तीनों उसे कार में बैठाकर मुरादाबाद में अरुण की बहन गुड्डी के घर ले गए। वहां अरुण ने महिला पर पति को तलाक देकर उससे शादी करने का दबाव बनाया। मना करने पर जान से मारने की धमकी देने और जबरन कई बार दुष्कर्म करने का आरोप लगाया गया। 7 सितंबर को अरुण के जीजा की तबीयत अचानक खराब होने पर आरोपी अस्पताल गए। इसी दौरान महिला मौका पाकर वहां से निकल गई और अपने पति को घटना की जानकारी दी। पुलिस ने विवेचना के बाद तीनों आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने अरुण कुमार को दुष्कर्म में 10 वर्ष की कैद और 61 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं, अपहरण में दोषी पाए गए अरुण कुमार, जगमोहन और रोशन देवी को सात-सात वर्ष की कैद की सजा दी गई।
Source link
आरक्षण में सुधार को लेकर 25अक्टूबर को दिल्ली में प्रदर्शन: भिंड से एक हजार से अधिक लोग पहुंचेंगे, सवर्ण समाज के सदस्यों की बैठक – Bhind News
भिंड में आरक्षण व्यवस्था में सुधार और आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू करने की मांग को लेकर 25 अक्टूबर को दिल्ली के जंतर-मंतर पर शांतिपूर्ण आंदोलन किया जाएगा। इसकी तैयारियों को लेकर गुरुवार को शहर के जगदीश मैरिज गार्डन में बैठक हुई। इसमें हर्ष दुबे ने सवर्ण समाज के लोगों से चर्चा कर ज्यादा से ज्यादा संख्या में शामिल होने की अपील की। हर्ष दुबे ने बताया कि इससे पहले 21 अगस्त 2026 को भी जंतर-मंतर पर आरक्षण में सुधार की मांग को लेकर प्रदर्शन किया गया था। उनके अनुसार, शाम को पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों का हवाला देकर प्रदर्शन स्थल खाली करा दिया था। उन्होंने आरोप लगाया कि उस दौरान प्रदर्शनकारियों को खाने-पीने की सामग्री तक पहुंचने में परेशानी हुई। कुछ लोगों को 10 से 15 किलोमीटर दूर ले जाकर छोड़ा गया। 25 अक्टूबर को फिर जंतर-मंतर पर जुटने की तैयारी हर्ष दुबे ने कहा कि आरक्षण व्यवस्था में सुधार और आर्थिक आधार पर आरक्षण की मांग को लेकर 25 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर फिर शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखी जाएगी। परशुराम सेना के जिलाध्यक्ष देवेश शर्मा ने बताया कि आंदोलन में भिंड से एक हजार से ज्यादा लोगों के शामिल होने की संभावना है। बैठक में समाज के अन्य सदस्य भी मौजूद रहे।
Source link
किशनगंज- ‘5 PDS डीलरों को सितंबर का अनाज नहीं मिला’: गेहूं-चावल की आपूर्ति में देरी से उपभोक्ताओं की बढ़ी परेशानी, समय-सीमा बढ़ाने की मांग – Kishanganj (Bihar) News
किशनगंज के ठाकुरगंज क्षेत्र में करीब 15 जनवितरण प्रणाली (PDS) विक्रेताओं को सितंबर 2026 का खाद्यान्न अब तक उपलब्ध नहीं कराया गया है। गेहूं और चावल की आपूर्ति नहीं होने से डीलरों के सामने उपभोक्ताओं को अनाज देने की चुनौती खड़ी हो गई है। उपभोक्ताओं के आक्रोश का सामना कर रहे डीलरों ने डीएम के नाम आवेदन देकर सितंबर माह का लंबित खाद्यान्न जल्द उपलब्ध कराने और वितरण की समय-सीमा बढ़ाने की मांग की है। 2 अक्टूबर तक वितरण, लेकिन 1 अक्टूबर तक नहीं मिला अनाज डीलरों के अनुसार सितंबर माह के खाद्यान्न वितरण की अंतिम तिथि 2 अक्टूबर 2026 निर्धारित है। इसके बावजूद 1 अक्टूबर तक कई PDS विक्रेताओं को सितंबर का खाद्यान्न नहीं मिला है। ऐसे में निर्धारित समय-सीमा के भीतर उपभोक्ताओं के बीच खाद्यान्न का वितरण करना मुश्किल हो गया है। गेहूं स्टॉक में नहीं, सिर्फ चावल मिलने की बात डीलरों का कहना है कि संबंधित स्तर से फिलहाल चावल उपलब्ध कराने की बात कही जा रही है, जबकि सितंबर माह का गेहूं स्टॉक में उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी जा रही है। डीलरों ने पहले सितंबर का लंबित गेहूं और चावल उपलब्ध कराने की मांग की है, ताकि वितरण पूरा किया जा सके। 25 अगस्त को मिला था सितंबर का आवंटन PDS विक्रेताओं ने बताया कि सितंबर माह का खाद्यान्न उन्हें 25 अगस्त 2026 को ही उपलब्ध कराया गया था। उस समय गेहूं और चावल दोनों मिले थे। वहीं, अक्टूबर माह का खाद्यान्न भी करीब 10 विक्रेताओं को उपलब्ध कराए जाने की बात सामने आई है। डीलरों का कहना है कि पहले सितंबर माह का लंबित खाद्यान्न उपलब्ध कराया जाना चाहिए। डीडीसी से मिले डीलर, जल्द समाधान की मांग मामले को लेकर जदयू नेता अहमद हुसैन के नेतृत्व में संबंधित PDS विक्रेताओं ने डीडीसी प्रदीप कुमार झा से मुलाकात की। डीलरों ने सितंबर माह के लंबित गेहूं-चावल के आवंटन और समय पर आपूर्ति नहीं होने की समस्या से उन्हें अवगत कराया। उन्होंने जल्द खाद्यान्न उपलब्ध कराने की मांग की। देरी का सीधा असर उपभोक्ताओं पर डीलरों रफीक आलम, मुजम्मिल हक, हरीश अंजुम, राजू कुमार राय, नाजिम अनवर, राजीव कुमार सिंह, इमरान अहमद और उस्मान गनी समेत अन्य ने बताया कि खाद्यान्न की आपूर्ति में देरी का सीधा असर उपभोक्ताओं पर पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से सितंबर माह का गेहूं और चावल अविलंब उपलब्ध कराने के साथ वितरण की अवधि पर्याप्त समय के लिए बढ़ाने की मांग की है।
Source link


