जोधपुर नगर निगम के चुनाव के बाद भाजपा के सभी 100 पार्षद प्रत्याशियों की बालोतरा के पास एक रिसॉर्ट में बाड़ेबंदी की गई है। केंद्रीय मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत रविवार को बाड़ेबंदी में प्रत्याशियों के बीच पहुंचे। यहां उन्होंने पार्षद प्रत्याशियों के साथ ‘पल-पल दिल के पास…’ और ‘ओ मेरे दिल के चैन…’ गाने गाए। पूरा वीडियो देखने के लिए कवर इमेज पर क्लिक करें।
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शहरी सरकार का चुनाव: बाड़ेबंदी में केंद्रीय मंत्री ने पार्षद प्रत्याशियों के साथ गाना गाया – Rajasthan News
विशेष टीईटी से बाहर रखने पर शिक्षामित्रों में आक्रोश: प्रयागराज में आंदोलन का ऐलान, सुपर टेट में छूट और नियमितीकरण की मांग – Prayagraj (Allahabad) News
विशेष टीईटी में शामिल नहीं किए जाने से प्रदेशभर के शिक्षामित्रों में नाराजगी है। रविवार को प्रयागराज के चंद्रशेखर आजाद पार्क में प्राथमिक शिक्षामित्र संघ की बैठक हुई। इसमें प्रदेश सरकार के खिलाफ आंदोलन का ऐलान किया गया। बैठक में शिक्षामित्रों को विशेष टीईटी में शामिल करने की मांग उठाई गई। साथ ही टीईटी पास शिक्षामित्रों को उनके अनुभव के आधार पर सुपर टीईटी में छूट देने और नियमित करने की मांग की गई। अनुभव को चयन प्रक्रिया में महत्व देने की मांग प्रदेश अध्यक्ष शिव कुमार शुक्ला ने कहा कि शिक्षामित्रों ने वर्षों तक ग्रामीण और दूरदराज के स्कूलों में शिक्षा व्यवस्था संभाली है। इतने लंबे समय तक बच्चों को पढ़ाने वाले शिक्षकों के अनुभव को किसी भी चयन प्रक्रिया में नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षामित्रों की स्थिति को समझे और उन्हें विशेष टीईटी में शामिल करे। टीईटी पास शिक्षामित्रों को उनके अनुभव के आधार पर सुपर टीईटी में उचित छूट दी जाए। साथ ही नियमितीकरण पर भी सरकार को जल्द कोई ठोस फैसला लेना चाहिए। शिव कुमार शुक्ला ने कहा कि सरकार सकारात्मक पहल करती है तो संगठन उसका स्वागत करेगा। मांगों की अनदेखी होने पर शिक्षामित्र कोर्ट जाएंगे और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेंगे। जरूरत पड़ी तो सड़क से लेकर सदन तक अपनी आवाज उठाई जाएगी। विशेष टीईटी और नियमितीकरण सबसे बड़ा मुद्दा प्रदेश उपाध्यक्ष और वाराणसी जिलाध्यक्ष अजय सिंह ने कहा कि संगठन के संघर्षों से मानदेय बढ़ाने और चिकित्सा सुविधा जैसे मामलों में सफलता मिली है। अब विशेष टीईटी और नियमितीकरण शिक्षामित्रों के भविष्य से जुड़े सबसे अहम मुद्दे हैं। उन्होंने कहा कि सरकार को टीईटी पास शिक्षामित्रों की योग्यता के साथ उनके लंबे अनुभव को भी महत्व देना चाहिए। प्रदेश उपाध्यक्ष और प्रयागराज जिलाध्यक्ष वसीम अहमद ने कहा कि शिक्षामित्रों को विशेष टीईटी से अलग रखना किसी भी हाल में स्वीकार नहीं किया जाएगा। लंबे समय तक सेवा देने के बाद उन पर नई व्यवस्था थोपना ठीक नहीं है। उन्होंने शासनादेश में तत्काल बदलाव करने, टीईटी पास शिक्षामित्रों को सुपर टीईटी में अनुभव के आधार पर छूट देने और नियमितीकरण की स्पष्ट नीति बनाने की मांग की। शिक्षामित्रों ने कहा- यह भविष्य और सम्मान का सवाल कौशांबी जिलाध्यक्ष रत्नाकर सिंह ने कहा कि जब विशेष टीईटी में अलग-अलग श्रेणियों के शिक्षकों और स्पेशल एजुकेटर को मौका दिया जा रहा है, तो वर्षों से स्कूलों में सेवा दे रहे शिक्षामित्रों को इससे बाहर रखना समझ से परे है। उन्होंने कहा कि शिक्षामित्रों को केवल एक श्रेणी के रूप में नहीं, बल्कि उनके शैक्षिक अनुभव और वर्षों की सेवा को ध्यान में रखकर देखा जाना चाहिए। बैठक में वक्ताओं ने कहा कि शिक्षामित्रों की मांग केवल एक परीक्षा में शामिल किए जाने तक सीमित नहीं है। यह उनके भविष्य, सम्मान और रोजगार की सुरक्षा से जुड़ा मुद्दा है। जनार्दन तिवारी और विनय पटेल समेत कई शिक्षामित्रों ने विचार रखे और नियमितीकरण की प्रक्रिया शुरू करने की मांग का समर्थन किया। चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा पर किया नमन बैठक से पहले प्रदेश अध्यक्ष शिव कुमार शुक्ला ने महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित कर उन्हें नमन किया। इसके बाद प्रदेश पदाधिकारियों का माल्यार्पण कर स्वागत किया गया। इस अवसर पर संतोष बाबू पाल, घनश्याम दत्त मिश्रा, जगदीश केसरी, प्रताप बहादुर सिंह, अमर बहादुर सिंह, वंदना श्रीवास्तव, नीलम गौतम, आयशा खान, अनामिका पांडेय, अनवर जहां, रीता शुक्ला, दशरथ भारती, सुमंत भार्गव, कमलेश यादव, आशीष जायसवाल, राकेश शुक्ला और कौशांबी से जितेंद्र कुमार, तिवारी, नितेंद्र मिश्रा, विजय बहादुर सरोज, तलत, प्रहलाद, बीरेंद्र कुमार समेत कई शिक्षामित्र मौजूद रहे।
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बक्सर- प्रतीक की टीम को इनोवेशन चैलेंज में दूसरा स्थान: 3600 छात्रों में 80 टीमें फाइनल में पहुंचीं; तकनीक और रेसिंग पर आइडिया दिया, ब्रिटेन जाने का मौका मिला – Buxar News
मोहाली में प्लाक्षा विश्वविद्यालय में आयोजित ट्रैकशिफ्ट इनोवेशन चैलेंज 2026 में बक्सर के सिविल लाइन निवासी प्रतीक राय की टीम सिनैप्स ने दूसरा स्थान हासिल किया। वाईसीसीई, नागपुर की टीम को 50 हजार रुपए का पुरस्कार मिला। प्रतियोगिता में देशभर से करीब 3600 प्रतिभागियों ने हिस्सा लिया था। अलग-अलग चरणों के बाद 80 टीमों का चयन किया गया था। तकनीक और मोटरस्पोर्ट्स इंजीनियरिंग पर रखे विचार
फाइनल में टीम सिनैप्स ने तकनीक और मोटरस्पोर्ट्स इंजीनियरिंग से जुड़े अपने विचार प्रस्तुत किए। टीम की अगुआई दिशत घुगे ने की। टीम के प्रदर्शन के आधार पर उसे उपविजेता घोषित किया गया। टीजीआर हास एफ1 टीम के सहयोग से हुआ आयोजन
ट्रैकशिफ्ट इनोवेशन चैलेंज 2026 का आयोजन टीजीआर हास एफ1 टीम, एमफैसिस और हैककल्चर के सहयोग से किया गया। प्रतियोगिता का कुल पुरस्कार 1.75 लाख रुपए था। इसमें विद्यार्थियों को तकनीकी क्षमता और रचनात्मक सोच दिखाने का अवसर मिला। विजेता टीमों को ब्रिटेन जाने का मौका
प्रतियोगिता के विजेताओं को ब्रिटेन के ब्रैनबेरी स्थित टीजीआर हास एफ1 सुविधा केंद्र की पूरी तरह प्रायोजित यात्रा कराई जाएगी। वहां विद्यार्थियों को फॉर्मूला वन रेसिंग और मोटरस्पोर्ट्स इंजीनियरिंग से जुड़ी जानकारी दी जाएगी। इससे उन्हें अंतरराष्ट्रीय स्तर की तकनीक और इंजीनियरिंग समझने का अवसर मिलेगा। प्रतीक ने 10 से ज्यादा प्रतियोगिताओं में हासिल किए स्थान
प्रतीक राय फिलहाल महाराष्ट्र के औरंगाबाद में रहते हैं और मूल रूप से बक्सर के सिविल लाइन के निवासी हैं। उनके पिता राजीव राय रेलवे में अधिकारी हैं और मां बीना राय गृहिणी हैं। बचपन से मेधावी रहे प्रतीक ने 10 से अधिक अलग-अलग प्रतियोगिताओं में पहला और दूसरा स्थान हासिल किया है। ट्रैकशिफ्ट चैलेंज में दूसरा स्थान उनकी उपलब्धियों में एक और जुड़ाव है।
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टीकमगढ़ में आकाशीय बिजली गिरी, 16 बकरियों की मौत: पशुपालक गंभीर रूप से घायल, परिवार ने की मुआवजे की मांग – Tikamgarh News
टीकमगढ़ के देहात थाना क्षेत्र के सुनौरा खिरिया गांव में रविवार शाम आकाशीय बिजली गिरने से 16 बकरियों की मौत हो गई। इस हादसे में बकरियां चरा रहा एक पशुपालक भी गंभीर रूप से घायल हो गया। उसे इलाज के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। कुछ अन्य बकरियां भी घायल हुई हैं, जिनका इलाज चल रहा है। पशुपालकों ने बताया कि गांव से लगे जंगल में नाले के पास अचानक आकाशीय बिजली गिरने से यह हादसा हुआ। घटना में 65 वर्षीय लच्छू पाल बिजली की चपेट में आकर झुलस गया। गंभीर हालत में परिजन उसे जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। प्राथमिक इलाज के बाद फिलहाल उसकी हालत में सुधार है। इस घटना में लच्छू पाल की 5, पप्पू पाल की 5, कमल पाल की 3 और काशीराम रजक की 3 बकरियों की मौत हुई है। हादसे से पशुपालकों को काफी आर्थिक नुकसान हुआ है। घटना के बाद पीड़ित पशुपालकों ने देहात थाना प्रभारी को आवेदन देकर सरकार से आर्थिक मदद मांगी है। उन्होंने आवेदन में बताया है कि पशुधन के नुकसान से उनके परिवारों के सामने आर्थिक संकट आ गया है। पीड़ितों ने प्रशासन से नुकसान का सर्वे कराकर नियमानुसार मुआवजा देने की मांग की है।
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चावल चिपचिपे बन गए? अगली बार बस ये 1 ट्रिक अपनाएं, एकदम खिले-खिले बनेंगे
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चावल बनाते समय अगर पानी का संतुलन बिगड़ जाए या उन्हें ज्यादा देर तक पकाया जाए, तो दाने आपस में चिपक सकते हैं और चावल खिले-खिले नहीं बनते. हालांकि, कुछ आसान किचन टिप्स अपनाकर चावल को चिपचिपा होने से बचाया जा सकता है.
चावल पकाते समय उन्हें बार-बार चम्मच से चलाने से भी दाने टूट सकते हैं.
चावल बनाना देखने में जितना आसान लगता है, उतना ही कई बार इसमें छोटी-सी गलती पूरा स्वाद और टेक्सचर बिगाड़ देती है. खासकर जब चावल पकने के बाद खिले-खिले होने के बजाय आपस में चिपक जाते हैं. बिरयानी, पुलाव या फ्राइड राइस बनाते समय तो ऐसे चावल बिल्कुल अच्छे नहीं लगते. ज्यादा पानी, चावल को ठीक से न धोना या जरूरत से ज्यादा पकाना इसके पीछे बड़ी वजह हो सकती है.
अगर आपके चावल भी अक्सर चिपचिपे हो जाते हैं, तो अगली बार कुछ आसान ट्रिक्स आजमाकर देखें.
चावल को अच्छी तरह धोएं
चावल के चिपचिपे होने की एक बड़ी वजह उसमें मौजूद अतिरिक्त स्टार्च हो सकता है. इसलिए चावल पकाने से पहले उसे 2 से 3 बार पानी से अच्छी तरह धोना चाहिए. जब तक पानी काफी हद तक साफ न दिखाई देने लगे, तब तक चावल धो सकते हैं. इससे अतिरिक्त स्टार्च निकलने में मदद मिलती है और चावल ज्यादा खिले-खिले बन सकते हैं.
पानी की मात्रा सही रखें
चावल पकाते समय पानी की मात्रा बहुत महत्वपूर्ण होती है. अगर पानी जरूरत से ज्यादा डाल दिया जाए तो चावल गल सकते हैं और आपस में चिपकने लगते हैं. अलग-अलग चावल के लिए पानी की जरूरत अलग हो सकती है, इसलिए चावल के पैकेट पर दिए निर्देश भी देख सकते हैं. बासमती चावल के लिए आमतौर पर चावल और पानी का अनुपात सामान्य चावल से अलग होता है.
चावल को भिगोकर रखें
अगर आप बासमती या लंबे दाने वाले चावल बना रहे हैं, तो उन्हें पकाने से पहले करीब 15 से 20 मिनट के लिए भिगोना फायदेमंद हो सकता है. इससे चावल समान रूप से पकने में मदद मिलती है. हालांकि बहुत ज्यादा देर तक भिगोने से चावल टूट भी सकते हैं, इसलिए समय का ध्यान रखें.
पकाते समय बार-बार न चलाएं
चावल पकाते समय उन्हें बार-बार चम्मच से चलाने से भी दाने टूट सकते हैं और ज्यादा स्टार्च निकल सकता है. इससे चावल चिपचिपे हो सकते हैं. इसलिए चावल को पकाते समय बार-बार हिलाने से बचें और जरूरत के मुताबिक ही चलाएं. चावल पक जाने के बाद गैस बंद करके उन्हें कुछ मिनट ढककर छोड़ दें. इसके बाद ढक्कन खोलकर चावल को कांटे की मदद से हल्के हाथ से फुलाएं. इससे दाने अलग करने में मदद मिलती है और चावल ज्यादा खिले हुए नजर आते हैं.
अगर चावल पहले ही चिपचिपे हो गए हैं
अगर चावल पकने के बाद बहुत ज्यादा चिपक गए हैं, तो उन्हें जोर से चलाने की गलती न करें. चावल को एक बड़ी प्लेट या ट्रे में फैला दें और कुछ देर ठंडा होने दें. इससे अतिरिक्त भाप निकल जाएगी और चावल कुछ हद तक अलग हो सकते हैं. इसके बाद कांटे से धीरे-धीरे दाने अलग करें.
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विविधा सिंह हिंदी डिजिटल पत्रकारिता का उभरता हुआ नाम हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया में साढ़े चार साल का अनुभव है. वर्तमान में वह News18 हिंदी में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. वह लाइफस्टाइल वर्टि…
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हर दिन गुल्लक में डालते 50 रुपए, आज 300 करोड़ का कारोबार कर रहे तनुज
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Business Success Story: बड़ा कारोबार शुरू करने के लिए सिर्फ पूंजी की जरूरत नहीं होती, बल्कि मेहनत, सीखने की इच्छा और आगे बढ़ने के जुनून की भी जरूरत होती है. कुछ ऐसी ही कहानी है नोएडा के एक कारोबारी की, जो हर दिन 50-50 रुपये बचाकर इक्ट्ठे किए, इसके बाद इलेक्ट्रॉनिक्स का काम सीखा, कूलर असेंबल और रिपेयर किए और धीरे-धीरे अपना कारोबार खड़ा किया.
नोएडा: कहते हैं कि बड़ा कारोबार शुरू करने के लिए हमेशा बड़ी पूंजी की जरूरत नहीं होती, जरूरत होती है मेहनत, सीखने की इच्छा और आगे बढ़ने के जुनून की. एक व्यापारी की ऐसी कहानी जो हर दिन 50-50 रुपये बचाकर इक्ट्ठे किए, इसके बाद इलेक्ट्रॉनिक्स का काम सीखा, कूलर असेंबल और रिपेयर किए और धीरे-धीरे अपना कारोबार खड़ा किया. आज यही सफर एक बड़ी कंपनी तक पहुंच चुका है. आज कंपनी करीब 300 करोड़ रुपये का टर्नओवर कर रही है. आइए जानते हैं इस पूरे सफर की कहानी.
किराना स्टोर पर शुरुआत में की थी नौकरी
तनुज गुप्ता ने लोकल18 से बातचीत में बताया कि उनके पिता राजीव गुप्ता ने पांचवीं कक्षा से ही पढ़ाई के साथ दुकान पर बैठना शुरू कर दिया था. वह परचून की छोटी सी परचून की दुकान पर काम करते थे और कमाई में से 50-50 रुपये जमा करते थे. समय के साथ वह शहर आ गए. यहां उन्होंने इलेक्ट्रॉनिक्स के काम को करीब से सीखा. खुद कूलर असेंबल किए, सर्विस की और इसी काम के दौरान कारोबार की बारीकियां समझीं. जैसे-जैसे पैसे जमा होते गए, वैसे-वैसे काम को भी आगे बढ़ाते गए. छोटी दुकान और छोटी बचत से शुरू हुआ यह सफर धीरे-धीरे एक बड़े कारोबार की नींव बन गया और आज थर्मोकूल होम अप्लायंसेज लिमिटेड कंपनी ने 300 करोड़ के टर्नओवर को पार किया है.
पहले की थी 25 हजार रुपए से शुरू
तनुज बताते हैं कि शुरुआत इलेक्ट्रिकल से हुई और इसके बाद मेटल कूलर बनाए गए. जब बाजार का ट्रेंड बदला तो कंपनी ने प्लास्टिक कूलर की तरफ कदम बढ़ाया. धीरे-धीरे प्रोडक्ट की रेंज बढ़ती गई और आज कंपनी के पास 150 से 200 से ज्यादा SKUs की रेंज है. कंपनी की यात्रा 25 साल पहले हुई थी और उस समय सिर्फ 25 हजार रुपए जमापूंजी से कंपनी की शुरुआत राजीव गुप्ता ने की थी. कोविड के बाद परिवार की नई पीढ़ी भी कारोबार में शामिल हुई. अब कंपनी इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल्स के क्षेत्र में काम कर रही है और पैन इंडिया सप्लाई पर फोकस कर रही है.
मार्केटिंग एक्सपर्ट के बड़े दावे
मार्केटिंग एक्सपर्ट तुषार गुप्ता ने बताया कि उनकी कंपनी थर्मोकूल होम अप्लायंसेज लिमिटेड इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रिकल्स के क्षेत्र में काम करती है. कंपनी का लक्ष्य कंज्यूमर ड्यूरेबल्स के क्षेत्र में अपनी मजबूत पहचान बनाना है. उनका कहना है कि पिछले कुछ सालों में कूलर इंडस्ट्री में भी काफी बदलाव आया है. एसी हर परिवार की पहुंच में नहीं है, ऐसे में बड़ी आबादी के लिए कूलर आज भी जरूरत का प्रोडक्ट है. कंपनी चाहती है कि पहले नॉर्थ इंडिया में अपनी पहुंच मजबूत की जाए और इसके बाद धीरे-धीरे पूरे देश में विस्तार किया जाए.
इन शहरों में सहित ऑफलाइन बढ़ी डिमांड
तुषार गुप्ता का कहना है कि ग्राहक अब सिर्फ सस्ता प्रोडक्ट नहीं चाहता, बल्कि अपनी जरूरत के हिसाब से बेहतर और अपग्रेडेड प्रोडक्ट लेना चाहता है. यही वजह है कि कंपनी लगातार अपनी प्रोडक्ट रेंज बढ़ाने पर काम कर रही है. कोविड के बाद ऑनलाइन खरीदारी ने भी बाजार को काफी बदला है. तुषार गुप्ता के मुताबिक, अब ग्राहक पहले ऑनलाइन किसी प्रोडक्ट की जानकारी देखता है और उसके बाद दुकान पर जाकर उसे देखने और समझने के बाद खरीदारी करना पसंद करता है. टियर-2 और टियर-3 शहरों में भी ऑनलाइन खरीदारी का चलन बढ़ा है. ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ने ग्राहकों तक जानकारी पहुंचाने का अंतर कम किया है. हालांकि इलेक्ट्रॉनिक्स में ग्राहक अक्सर प्रोडक्ट को सामने से देखकर उसकी डिजाइन, रंग और क्वालिटी को समझना चाहता है.
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आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ली से साल 2024 में…
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प्रदूषण पर लगाम के लिए दिल्ली में जांच व्यवस्था सख्त: कमर्शियल वाहनों की फिटनेस जांच के लिए तेकखंड और नंद नगरी में अत्याधुनिक ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन – New Delhi News
दिल्ली सरकार ने प्रदूषण की समस्या से निपटने के लिए वाहनों की फिटनेस और प्रदूषण जांच व्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में कदम उठाए हैं। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि प्रदूषण के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई के लिए निगरानी व्यवस्था को आधुनिक तकनीक से लैस करना जरूरी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि समाधान की प्रक्रिया के दौरान सरकार ने पाया कि कमर्शियल वाहनों को पुराने तकनीक वाले केंद्रों से फिटनेस प्रमाणपत्र मिल रहे थे, जबकि निजी वाहनों के लिए पेट्रोल पंपों के बाहर स्थित प्रदूषण जांच केंद्रों से प्रमाणपत्र जारी किए जा रहे थे। ऐसे में पूरी व्यवस्था की निगरानी और पारदर्शिता बढ़ाने की जरूरत महसूस हुई। उन्होंने बताया कि अब दिल्ली के सभी प्रदूषण जांच केंद्रों को अपग्रेड किया जाएगा और वहां कैमरे लगाए जाएंगे। इससे जांच प्रक्रिया की निगरानी बेहतर तरीके से हो सकेगी और नियमों के उल्लंघन पर कार्रवाई करना आसान होगा। कमर्शियल वाहनों की फिटनेस जांच के लिए तेकखंड और नंद नगरी में अत्याधुनिक ऑटोमेटेड टेस्टिंग स्टेशन शुरू किए गए हैं। प्रत्येक स्टेशन में हर साल करीब 72 हजार वाहनों की जांच करने की क्षमता है। ऑटोमेटेड प्रणाली से वाहनों की फिटनेस जांच को अधिक वैज्ञानिक, पारदर्शी और प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदूषण की समस्या का समाधान किसी एक कदम से संभव नहीं है। इसके लिए वाहनों की जांच, निगरानी, आधुनिक तकनीक और प्रभावी क्रियान्वयन समेत सभी पहलुओं पर एक साथ काम करना होगा। सीएम रेखा गुप्ता ने कहा कि प्रदूषण के खिलाफ 360 डिग्री दृष्टिकोण के साथ हम मिलकर समाधान तलाशेंगे। दिल्ली यह लड़ाई जरूर जीतेगी।
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ब्रिटेन से अलग हो सकते हैं स्कॉटलैंड-वेल्स और नॉर्दर्न आयरलैंड: कल नेताओं की मीटिंग, आजादी के फैसले पर जनमत संग्रह संभव
UK के एकजुट रहने पर फिर सवाल उठ रहे हैं। स्कॉटलैंड, वेल्स और नॉर्दर्न आयरलैंड के नेता सोमवार को वेल्स की राजधानी कार्डिफ में मिलने वाले हैं। तीनों की मांग अलग-अलग है, लेकिन सभी UK की मौजूदा व्यवस्था में बड़े बदलाव चाहते हैं। तीनों क्षेत्रों के फर्स्ट मिनिस्टर लोगों को अपना भविष्य खुद तय करने का अधिकार देने पर साझा बयान जारी कर सकते हैं। इसमें जरूरत पड़ने पर आजादी या UK से अलग होने जैसे बड़े फैसलों पर जनमत संग्रह कराने की बात भी हो सकती है। स्कॉटलैंड: यहां की सत्ताधारी SNP स्कॉटलैंड को UK से अलग कर स्वतंत्र देश बनाना चाहती है। वेल्स: राष्ट्रवादी पार्टी प्लाइड कम्री वेल्स को अलग देश बनाने की मांग करती है और ज्यादा अधिकार चाहती है। नॉर्दर्न आयरलैंड: सत्ताधारी सिन फेन UK से अलग होकर आयरलैंड के साथ जुड़ने के पक्ष में है। पार्टी की अध्यक्ष मैरी लू मैकडोनाल्ड भी बैठक में शामिल होंगी। तीनों हिस्से मिलकर UK पर बनाएंगे दबाव ब्रिटेन की केंद्र सरकार UK को एकजुट रखना चाहती है। वहीं स्कॉटलैंड, वेल्स और नॉर्दर्न आयरलैंड में ज्यादा अधिकार और मौजूदा व्यवस्था में बदलाव की मांग उठ रही है। द टेलीग्राफ के मुताबिक, स्कॉटलैंड के फर्स्ट मिनिस्टर जॉन स्विनी और वेल्स के फर्स्ट मिनिस्टर रुन एपी इओर्थवर्ट के साथ नॉर्दर्न आयरलैंड का नेतृत्व भी साझा बयान का समर्थन कर सकता है। ब्रिटिश PM के बयान पर विवाद स्कॉटलैंड की आजादी इस पूरी बहस का सबसे बड़ा मुद्दा है। प्रधानमंत्री एंडी बर्नहम ने हाल ही में कहा था कि अगर स्कॉटलैंड और नॉर्दर्न आयरलैंड में UK से अलग होने के पक्ष में सहमति बनती है, तो जनमत संग्रह पर विचार किया जा सकता है। SNP ने बर्नहम के इस बयान को तुरंत मुद्दा बना लिया। इसके बाद बर्नहम ने सफाई देते हुए कहा कि अगले आम चुनाव से पहले आजादी पर जनमत संग्रह नहीं कराया जाएगा। इसके बाद स्कॉटलैंड के फर्स्ट मिनिस्टर स्विनी ने कहा कि पहली बार स्कॉटलैंड, वेल्स और नॉर्दर्न आयरलैंड में ऐसे फर्स्ट मिनिस्टर हैं जो UK की मौजूदा व्यवस्था में बदलाव चाहते हैं। उनके मुताबिक, इससे ब्रिटेन को एकजुट रखने वाली व्यवस्था पर दबाव बढ़ रहा है। ट्रम्प के बयान से आयरलैंड के एकीकरण की चर्चा बढ़ी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भी हाल में आयरलैंड के एकीकरण पर बयान दिया है। शनिवार को डबलिन दौरे के दौरान ट्रम्प ने कहा कि वह आयरलैंड को एक देश के रूप में देखना पसंद करेंगे। अमेरिकी राष्ट्रपतियों का इस मुद्दे पर आमतौर पर सावधानी भरा रुख रहा है। ऐसे में ट्रम्प का बयान इस बहस को और चर्चा में ले आया है। मामला सिर्फ आजादी का नहीं, पैसा और यूरोप भी अहम कार्डिफ की बैठक सिर्फ UK से अलग होने की मांग तक सीमित नहीं है। तीनों जगहों की कई प्रमुख पार्टियां यूरोपीय यूनियन (EU) के साथ करीबी रिश्ते चाहती हैं। अगर भविष्य में स्कॉटलैंड या वेल्स UK से अलग होकर स्वतंत्र देश बनते हैं, तो वे EU की सदस्यता के लिए आवेदन कर सकते हैं। वहीं, अगर नॉर्दर्न आयरलैंड आयरलैंड के साथ जुड़ता है, तो वह EU का हिस्सा बन जाएगा, क्योंकि आयरलैंड पहले से EU का सदस्य है। UK 2020 में EU से बाहर हो गया था। इससे पहले 2016 में जनमत संग्रह हुआ था, जिसमें लोगों ने EU छोड़ने के पक्ष में वोट दिया था। अब जानिए कि ये तीनों इलाके ब्रिटेन से कैसे जुड़े और अब अलग होने की मांग क्यों हो रहे है… स्कॉटलैंड: महारानी की मौत के बाद इंग्लैंड से जुड़ा करीब 300 साल पहले स्कॉटलैंड और इंग्लैंड दो अलग-अलग देश थे। दोनों के अपने राजा, संसद और कानून थे। साल 1603 में इंग्लैंड की महारानी एलिजाबेथ प्रथम की मौत हो गई। उनका कोई वारिस नहीं था। तब स्कॉटलैंड के राजा जेम्स VI इंग्लैंड के भी राजा बन गए। यानी अब एक ही व्यक्ति दो देशों का राजा था, लेकिन दोनों देश फिर भी अलग-अलग थे। इसके करीब 100 साल बाद बड़ा फैसला हुआ। 1707 में स्कॉटलैंड और इंग्लैंड की संसद ने समझौता किया। दोनों देश मिलकर ग्रेट ब्रिटेन बन गए। इसके बाद दोनों की अलग-अलग संसद नहीं रही और एक साझा संसद बनी। अलग देश बनने की मांग कब तेज हुई वेल्स: इंग्लैंड के साथ जुड़ा, लेकिन पहचान नहीं छोड़ी 13वीं सदी में इंग्लैंड के राजा एडवर्ड प्रथम ने वेल्स पर कब्जा कर लिया। इसके बावजूद वेल्स ने अपनी भाषा, संस्कृति और अलग पहचान बनाए रखी। 19वीं-20वीं सदी में इन्हें बचाने के आंदोलन तेज हुए। 1925 में प्लाइड कम्री पार्टी बनी। शुरुआत में इसका फोकस वेल्श भाषा और संस्कृति बचाने पर था, लेकिन बाद में पार्टी ने वेल्स को ज्यादा अधिकार और फिर अलग देश बनाने की मांग शुरू कर दी। 1999 में वेल्स को अपनी संसद और सरकार मिली। हालांकि रक्षा और विदेश नीति जैसे बड़े फैसले अब भी UK सरकार के पास हैं। स्कॉटलैंड के मुकाबले वेल्स में आजादी का समर्थन कम है, लेकिन प्लाइड कम्री लगातार इस मुद्दे को उठाती रही है। नॉर्दर्न आयरलैंड: आयरलैंड से जुड़ने की मांग बढ़ी वेल्स, स्कॉटलैंड और इंग्लैंड ग्रेट ब्रिटेन का हिस्सा बन चुके थे। 1801 में आयरलैंड भी इसमें शामिल हो गया। हालांकि शुरुआत से ही आयरलैंड के कई हिस्से में इसका विरोध जारी रहा। लंबे संघर्ष के बाद 1922 में आयरलैंड का ज्यादातर हिस्सा UK से अलग होकर स्वतंत्र देश बन गया। लेकिन आयरलैंड का उत्तरी हिस्सा यानी नॉर्दर्न आयरलैंड UK के साथ ही रहा। नॉर्दर्न आयरलैंड में ब्रिटेन के समर्थकों को यूनियनिस्ट कहा जाता है। ये ईसाई धर्म के प्रोटेस्टेंट समुदाय के लोग थे। दूसरी तरफ आयरिश राष्ट्रवादी और ज्यादातर कैथोलिक समुदाय था, जिसका एक बड़ा हिस्सा आयरलैंड के साथ जुड़ना चाहता था। आज भी नॉर्दर्न आयरलैंड में दो तरह की सोच मौजूद है। कुछ लोग UK के साथ रहना चाहते हैं, जबकि कुछ आयरलैंड के साथ एकीकरण चाहते हैं। नॉर्दर्न आयरलैंड के पास आयरलैंड से जुड़ने का रास्ता ——————— ब्रिटेन से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… ब्रिटेन में एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम में खराबी: 1000 उड़ानें रद्द, ब्रिटिश एयरवेज और ईजीजेट समेत 5 से ज्यादा एयरलाइंस पर असर ब्रिटेन में एयर ट्रैफिक कंट्रोल सिस्टम में तकनीकी खराबी के चलते मंगलवार देर रात तक 1000 से ज्यादा फ्लाइट्स कैंसल कर दी गईं। पूरी खबर पढ़ें…
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कांग्रेस ने पार्षद प्रत्याशियों को डराने का लगाया आरोप: पुलिस की कार्यप्रणाली पर उठाए सवाल, निकाय चुनाव में पक्षपात की शिकायत – Karauli News
करौली में नगर निकाय चुनाव के बीच कांग्रेस ने पुलिस प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। पार्टी ने निर्वाचन आयोग के नाम एडीएम को एक ज्ञापन सौंपा है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि कुछ इलाकों में कांग्रेस समर्थित पार्षद प्रत्याशियों और उनके परिवार के लोगों पर दबाव बनाया गया, उन्हें डराया-धमकाया गया और जबरन साथ ले जाया गया। पार्टी का कहना है कि सिविल ड्रेस में आए पुलिसकर्मियों ने प्रत्याशियों और उनके परिवारजनों पर दबाव बनाया। कांग्रेस ने मांग की है कि अगर यह कार्रवाई कानूनी प्रक्रिया के बिना हुई है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए।
कांग्रेस ने कहा कि ऐसी कार्रवाई से प्रत्याशियों और उनके परिवारों में डर का माहौल बन सकता है। इससे स्वतंत्र चुनाव प्रक्रिया पर असर पड़ने की आशंका है। ADM को ज्ञापन सौंप रिकॉर्ड सुरक्षित रखने की मांग
कांग्रेस ने निर्वाचन आयोग से मांग की है कि संबंधित इलाकों के सीसीटीवी फुटेज, पुलिस वाहनों के जीपीएस रिकॉर्ड, लॉगबुक, पुलिस ड्यूटी चार्ट और मतदान से जुड़े सभी रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं। इससे किसी भी सबूत से छेड़छाड़ की आशंका नहीं रहेगी। पार्टी ने सभापति और उपसभापति के चुनाव को स्वतंत्र, निष्पक्ष और शांतिपूर्ण तरीके से कराने की भी मांग की है। कांग्रेस ने कहा कि चुनाव स्थल और उसके आसपास सिर्फ अधिकृत लोगों को ही एंट्री दी जाए। पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग
इसके साथ ही जिले से बाहर के जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक दलों के बाहरी पदाधिकारियों के अनावश्यक प्रवेश और दखल पर रोक लगाने की मांग की गई है। कांग्रेस का मानना है कि इससे चुने हुए पार्षदों पर बाहरी राजनीतिक दबाव, प्रभाव या लालच की स्थिति नहीं बनेगी। कांग्रेस ने पूरे मामले की स्वतंत्र और निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। पार्टी ने कहा है कि जांच में दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों या कर्मचारियों के खिलाफ नियमों के हिसाब से कार्रवाई की जाए।
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चारपाई बिछाने पर बुजुर्ग से मारपीट: लाठी और लोहे की वस्तु से हमला करने का आरोप, पुलिस जांच में जुटी – Banda News
बांदा जनपद के देहात कोतवाली क्षेत्र के कुलकुम्हारी गांव में चारपाई बिछाने को लेकर एक बुजुर्ग से मारपीट हुई है। बुजुर्ग ने गांव के ही दो लोगों पर लाठी और लोहे की वस्तु से हमला करने का आरोप लगाया है। पुलिस ने शिकायत दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। कुलकुम्हारी गांव के रहने वाले चैता नाम के बुजुर्ग ने बताया कि शनिवार रात करीब आठ बजे वह अपने घर के दरवाजे के पास चारपाई बिछा रहे थे। उनके रिश्तेदार आने वाले थे, जिनके बैठने के लिए उन्होंने चारपाई डाली थी। मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर जांच जारी बुजुर्ग का आरोप है कि इसी बात को लेकर गांव के बाबू और मोहनलाल ने उनके साथ मारपीट शुरू कर दी। चैता ने बताया कि मारपीट के दौरान एक व्यक्ति के हाथ में लोहे की वस्तु थी, जबकि दूसरे के हाथ में लाठी थी। दोनों ने मिलकर उन पर हमला किया, जिससे उन्हें चोटें आईं। घटना के बाद पीड़ित चैता ने पुलिस को जानकारी दी और आरोपियों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। पुलिस ने बुजुर्ग का मेडिकल कराया है। पीड़ित ने पुलिस से आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं, पुलिस का कहना है कि शिकायत और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर मामले की जांच की जा रही है। जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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