लखनऊ विश्वविद्यालय में बढ़ी फीस, वित्तीय अनियमितताओं और छात्रों के निष्कासन के विरोध में लगातार पांचवें दिन आंदोलन चलता रहा। मौके पर अयोध्या से सपा सांसद अवधेश प्रसाद और पूर्व सांसद कांग्रेस नेता पीएल पुनिया भी पहुंचे। उन्होंने धरना स्थल पर छात्रों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा दर्ज FIR एवं निष्कासन की कार्रवाई पर गंभीर चिंता व्यक्त की। अवधेश बोले लोक तांत्रिक तरीके से बात कहना अपराध नहीं अवधेश प्रसाद ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना अपराध नहीं है। छात्रों पर दंडात्मक कार्रवाई के बजाय संवाद के माध्यम से समाधान निकाला जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालयों को भय का नहीं। बल्कि विचार-विमर्श और लोकतांत्रिक मूल्यों का केंद्र होना चाहिए।छात्रों द्वारा प्रस्तुत किए गए मुद्दों फीस वृद्धि, पारदर्शिता की कमी और निष्कासन पर नेताओं ने आश्वासन दिया कि इन मामलों को संबंधित उच्च स्तरों तक उठाया जाएगा। अवधेश प्रसाद ने कहा कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की बात नहीं सुनता है तो वे इस मुद्दे को राज्यपाल तक ले जाएंगे और आवश्यकता पड़ने पर संसद में भी उठाया जाएगा। FIR दर्ज करना गंभीर सवाल खड़े करता है उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए विश्वविद्यालय में आना चाहिए, न कि उन्हें अपराधी बनाकर प्रस्तुत किया जाए। उनके अनुसार FIR दर्ज कर छात्रों को अनावश्यक रूप से दबाव में लाया जा रहा है, जो उचित नहीं है।पूर्व सांसद पीएल पुनिया ने कहा कि जब छात्र फीस पारदर्शिता जैसे महत्वपूर्ण सवाल उठा रहे हैं। उनके जवाब देने के बजाय उन्हें निष्कासित करना और FIR दर्ज करना गंभीर प्रश्न खड़े करता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा एक मौलिक अधिकार है और इसे सभी के लिए सुलभ एवं किफायती होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान कार्रवाई विश्वविद्यालय प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाती है और यह सोचने पर मजबूर करती है कि कहीं शिक्षा को केवल राजस्व का साधन तो नहीं बनाया जा रहा। छात्र नेता बोले आंदोलन को समर्थन दिया पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रमेश श्रीवास्तव ने भी आंदोलन को समर्थन दिया और धरना स्थल पर बैठकर छात्रों के साथ एकजुटता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का दृष्टिकोण ऐसा प्रतीत होता है, जिसमें उच्च शिक्षा केवल उन्हीं के लिए सुलभ होती जा रही है जो आर्थिक रूप से सक्षम हैं, जबकि कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए अवसर सीमित होते जा रहे हैं। यह स्थिति समान अवसर की अवधारणा के विरुद्ध है।छात्रों ने बताया कि वे लंबे समय से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें उठा रहे हैं, लेकिन संवाद के बजाय उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है। इस अवसर पर छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्रवाई अन्यायपूर्ण और दमनकारी है तथा जब तक उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा।
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लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्र आंदोलन: निष्कासन के विरोध में छात्रों के साथ अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद ने दिया धरना – Lucknow News
देहदान के लिए मरणोपरांत सम्मानित हुए बेगूसराय निवासी: लोगों ने दी श्रद्धांजलि; पत्नी को सौंपा सर्टिफिकेट-स्मृति चिन्ह – Begusarai News
बेगूसराय में दधीचि देहदान समिति की राज्य एवं जिला कार्यकारिणी की ओर से पहसारा निवासी फूलेना प्रसाद सिंह के मरणोपरांत नेत्र दान और देहदान किए जाने पर प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह दी गई है। इस अवसर पर स्वर्गीय फुलेना सिंह की पत्नी सुशीला देवी को दधिचि देहदान समिति की ओर से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही स्वर्गीय फुलेना सिंह की याद में श्रद्धांजलि अर्पित की गई। प्रदेश कमेटी के शैलेश महाजन ने उनके परिवार के कृतित्व की चर्चा करते हुए कहा कि फुलेना बाबू ने नेत्रदान और देहदान कर अमृतत्व की प्राप्ति की है। उनकी ओर से नेत्रदान किए जाने से कई लोगों की आंखों की रोशनी आ गई है। इस अवसर पर जिला कमेटी के मुख्य संरक्षक दिलीप सिंह ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि फुलेना प्रसाद सिंह एक सच्चे शिक्षक थे। जिन्होंने मृत्यु के उपरांत भी मेडिकल के छात्रों के लिए अपना देह दान कर योग्य चिकित्सक बनाने का काम किया है। ऐसे समाज से ही देश और अपना समाज विकास के रास्ते पर आगे बढ़ता है। नाम इतिहास के पन्नों में अमर हुआ श्रद्धांजलि सभा में जिलाध्यक्ष सुशील राय और सचिव निरंजन कुमार सिन्हा ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि जिला में फुलेना बाबू ऐसे दूसरे व्यक्ति हैं, जिन्होंने अपना देहदान किया है। इनका नाम इतिहास के पन्नों में अमर हो गया है। जिला में जब कभी भी देहदान की चर्चा होगा, फुलेना प्रसाद सिंह के नाम बिना अधूरा रहेगा। कार्यक्रम को इंद्रजीत राय औरनीरज कुमार ने भी संबोधित किया। मौके पर मृतक की पत्नी सुशीला देवी, बेटा पंकज कुमार, अंकुर कुमार, पुत्रवधु डॉक्टर सगीता राजन, मौसम कुमारी, देवेंद्र सिंह, नूतन कुमारी, संगम कुमारी, पूनम कुमारी, पौत्र अंकुर कुमार, सूरज, शिवेश रंजन, शिवम वत्स, भोला, प्रमोद, गणेश और रंजन आदि उपस्थित थे।
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कमजोर हड्डियों को मजबूत बनाएगा देहरादून का यह स्पेशल पहाड़ी मटन पाया
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Dehradun Mutton Kharoda: देहरादून के राजपुर रोड पर मिलने वाले मशहूर ‘मटन खरोड़ा’ (मटन पाया) का स्वाद नॉन-वेज लवर्स का दिल जीत रहा है. यहां घंटाघर के पास पिछले 35 सालों से राजू अपने ठेले पर इस पारंपरिक पहाड़ी डिश को घरेलू मसालों के साथ धीमी आंच पर घंटों उबालकर तैयार करते हैं. इसका ज़ायका इतना लाजवाब है कि मसूरी जाने वाले पर्यटक भी यहां खिंचे चले आते हैं. स्वाद के साथ-साथ यह सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है. डॉक्टर भी कमजोर हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए इसे खाने की सलाह देते हैं. मात्र 150 रुपये में आप भी इस बेहतरीन पहाड़ी स्वाद का आनंद ले सकते हैं.
Dehradun Mutton Kharoda: पहाड़ों की ठंडी हवाएं, हसीन वादियां और हाथ में गरमा-गरम, मसालेदार नॉन-वेज का कटोरा… अगर आप देहरादून घूमने आए हैं और खाने-पीने के शौकीन हैं तो यह कॉम्बिनेशन आपका दिल जीत लेगा. वैसे तो देहरादून में बेकरी और कैफे कल्चर काफी मशहूर है, लेकिन अगर आप यहां के असली पहाड़ी और देसी स्वाद से रूबरू होना चाहते हैं तो आपको यहाँ का ‘मटन खरोड़ा’ (मटन पाया) जरूर ट्राई करना चाहिए. यह कोई आम मटन करी नहीं है, बल्कि इसे बकरे के पायों को बेहद खास मसालों के साथ घंटों उबालकर तैयार किया जाता है. इसके बाद इसे पहाड़ी मसालों से तैयार करके गरमा-गरम परोसा जाता है. नॉन-वेज लवर्स के लिए यह बेहद अलग और लाजवाब स्वाद है.
35 साल पुराना है राजू के पहाड़ी स्वाद का यह सफर
राजपुर रोड पर घंटाघर से थोड़ी ही दूरी पर शाम 5 बजते ही राजू अपने ठेले पर यह पहाड़ी स्टाइल में तैयार की गई स्पेशल डिश लोगों को खिलाते हैं. राजू ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि वह पिछले 35 सालों से इस काम में लगे हुए हैं. इससे पहले उनके पिता ठेले पर पहाड़ी डिश परोसते थे, जिसमें ज्यादातर चिकन और मटन की डिशेज होती थीं. उन्होंने कहा कि बचपन से ही वह अपने पिता के साथ लगकर काम करते थे, जिससे उनके टेस्ट के फॉर्मूले को उन्होंने भी सीख लिया.
मसूरी जाने वाले पर्यटक भी लेते हैं मटन पाए का स्वाद
राजू ने कहा कि वैसे तो यह एक पहाड़ी डिश है, लेकिन मैदानी इलाकों के लोग भी इसे बेहद खुश होकर खाते हैं. उन्होंने बताया कि जो लोग देहरादून घूमने के लिए आते हैं, वे मसूरी जाते हुए उनके ठेले पर जरूर रुकते हैं और इसे एक बार ट्राई करते हैं. राजू बताते हैं कि मसूरी से भी कई ग्राहक उनके पास सिर्फ इस मटन पाए का स्वाद लेने के लिए आते हैं. इसमें अच्छा फ्लेवर देने के लिए वह अपने घर के पिसे हुए मसाले ही इस्तेमाल करते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि वह चिकन और अंडा करी भी तैयार करते हैं. कई लोग मटन सूप के साथ उबले अंडे खाना भी पसंद करते हैं.
हड्डियों को मजबूत करता है मटन खरोड़ा, डॉक्टर भी देते हैं सलाह
वहीं, दुकान पर आए नियमित ग्राहक राजेश कुमार ने बताया कि वह पिछले 20 से 25 सालों से यहां मटन खरोड़ा खाने के लिए आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह डिश इसलिए अलग और खास होती है क्योंकि डॉक्टर उन लोगों को इसे खाने की सलाह देते हैं जिनकी हड्डियां कमजोर होती हैं. उन्होंने आगे बताया कि इसे भट्टी पर धीमी आंच पर पकाया जाता है; इसे जितनी देर तक पकाया जाता है, इसका स्वाद उतना ही ज्यादा बढ़ जाता है. उन्होंने कहा कि यह महंगा भी इसीलिए मिलता है क्योंकि कच्चे माल (पायों) की कीमत भी बहुत ज्यादा है और फिर मसाले लगाकर इसे तैयार करना बेहद मेहनत का काम है. अगर आप भी इस बेहतरीन स्वाद का लुत्फ उठाना चाहते हैं, तो मात्र 150 रुपये प्रति प्लेट में इसका स्वाद ले सकते हैं.
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राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें
सागर में पिता ने की थी बेटे की हत्या, गिरफ्तार: शराब के नशे में आए दिन विवाद करता था बेटा, घर के बाहर पड़ा मिला था शव – Sagar News
सागर के बिलहरा चौकी पुलिस ने हत्या के मामले में शनिवार को आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी मृतक का पिता है। मृतक बेटे आए दिन शराब के नशे में विवाद करता था। इसी विवाद में मारपीट कर पिता ने अपने ही बेटे की हत्या कर दी थी। पूछताछ में आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। पुलिस के अनुसार, 4 जून को फरियादी जमना पिता नन्ना अहिरवार उम्र 55 वर्ष निवासी खिरका मोहल्ला बिलहरा ने पुलिस चौकी में सूचना दी थी कि उसका बड़ा बेटे सोनू अहिरवार उम्र 25 वर्ष घर के आंगन में बनी ढलान पर मृत अवस्था में पड़ा है। उसके सिर और माथे से खून निकल रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। शव का पंचनामा बनाकर जांच शुरू की। शव का पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और प्रारंभिक जांच में हत्या की पुष्टि हुई। जिस पर आधार पर हत्या का मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू की गई। जांच करते हुए आरोपी पिता जमना अहिरवार को हिरासत में लिया गया। कपड़ा धोने की मोगरी से मारपीट कर हत्या की थी
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसका बेटा सोनू अहिरवार आए दिन शराब के नशे में घर आता था और परिवार के सदस्यों के साथ गाली-गलौज व मारपीट करता था। बेटे की इन हरकतों से वह लंबे समय से परेशान था। इसी बात से परेशान होकर 3 जून की रात कपड़े धोने की मोंगरी (लकड़ी के डंडे) से वार कर बेटे की हत्या कर दी। बिलहरा चौकी प्रभारी सत्यव्रत धाकड़ ने बताया कि हत्या के मामले में पिता को गिरफ्तार किया है। बेटा आए दिन शराब के नशे में विवाद करता था। इस बात को लेकर पिता परेशान था। इसी के चलते उसने बेटे की हत्या कर दी। आरोपी को गिरफ्तार कर पूछताछ की गई। पूछताछ के बाद आरोपी को कोर्ट में पेश किया है।
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देश के लिए योगदान देने का अवसर हम सबके पास: दिल्ली सीएम रेखा बोलीं- 140 करोड़ का देश तभी आगे बढ़ेगा, जब हर युवा एक कदम आगे बढ़ाएगा – New Delhi News
नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता शनिवार को त्यागराज स्टेडियम में युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अंतर्गत आयोजित विकसित भारत के लिए युवा भारत सम्मेलन’ कार्यक्रम में शामिल हुईं। देशभर से आए 6 हजार से अधिक युवाओं की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, युवा मामलों की सचिव डॉ. पल्लवी जैन गोविल सहित विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियों की उपस्थिति में सीएम ने युवा उद्यमियों, खिलाड़ियों, कलाकारों, कंटेंट क्रिएटर्स, यूपीएससी अभ्यर्थियों और विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल करने वाले युवाओं को संबोधित किया। उन्होंने इस मौके पर कहा कि आज का यह मंच वास्तव में भारत की युवा शक्ति का उत्सव है। सीएम ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा विभिन्न क्षेत्रों के इतने प्रतिभाशाली युवा और प्रेरणास्रोत व्यक्तित्वों की उपस्थिति इस आयोजन को वास्तव में ‘तारे जमीं पर’ जैसा स्वरूप देती है। जब एक ही मंच पर युवा उद्यमी, खिलाड़ी, कलाकार, जनप्रतिनिधि, कंटेंट क्रिएटर्स और यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने वाले युवा उपस्थित हों तो यह भारत की विविध प्रतिभा और असीम क्षमता का सशक्त प्रतिबिंब बन जाता है। सीएम ने केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया को इस अभिनव पहल के लिए बधाई देते हुए कहा मेरा भारत युवा सम्मेलन युवाओं को सम्मानित करने के साथ-साथ उन्हें राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करने का एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है। युवा देश की जिम्मेदारी उठाने के लिए पूरी तरह तैयार समारोह में सीएम ने कहा आज का कार्यक्रम इस बात का प्रमाण है कि भारत का युवा देश की जिम्मेदारी उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है। दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी युवा आबादी है, जो मेहनती, दूरदर्शी, रचनात्मक और साहसी है। किसी भी क्षेत्र में सफलता के पीछे अथक परिश्रम, अनुशासन और समर्पण होता है। यही समर्पण भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ा रहा है। सीएम ने युवाओं से आह्वान करते हुए कहा अगर देश का प्रत्येक युवा एक कदम आगे बढ़ाता है, तो 140 करोड़ भारतीयों का देश भी उसी गति से आगे बढ़ता है।
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बूंदी के तालाब में दिखा मगरमच्छ: आबादी क्षेत्र के पास होने से ग्रामीणों में दहशत, विभाग नहीं पहुंचा – Bundi News
बूंदी के देईखेड़ा कस्बे में एक तालाब में मगरमच्छ दिखने से ग्रामीणों में दहशत फैल गई है। यह तालाब आबादी क्षेत्र के करीब है, जिससे लोगों और मवेशियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों, जिनमें हनुमान गुर्जर, अजय मीणा और गौरव सैनी शामिल हैं, के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से तालाब में मगरमच्छ देखा जा रहा है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण और मवेशी इस तालाब पर पानी पीने आते हैं, जिससे किसी भी समय दुर्घटना होने का खतरा बना हुआ है। मगरमच्छ की मौजूदगी के कारण ग्रामीणों ने बच्चों को तालाब के आसपास जाने से रोक दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग को इस मामले की सूचना दी जा चुकी है। हालांकि, अब तक मगरमच्छ को पकड़ने या उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इससे विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर लोगों में नाराजगी है। ग्रामीणों ने स्थानीय पंचायत प्रशासन और वन विभाग से जल्द कार्रवाई कर मगरमच्छ को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे संभावित दुर्घटनाओं से बचा जा सकेगा और लोगों में व्याप्त भय का माहौल खत्म होगा। कंटेंट: दिनेश व्यास, देईखेड़ा
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कैप्टन अमरिंदर सिंह की कांग्रेस में वापसी की अटकलें तेज, पंजाब में मचेगा गदर?
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Punjab Politics: पंजाब चुनाव से पहले पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह की वापसी की फाइल दिल्ली दरबार में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के टेबल पर पहुंचने की खबर है. पंजाब से कांग्रेस सांसद अमर सिंह ने इस पर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि कैप्टन एक बेहद सीनियर नेता हैं और उनकी वापसी पर अंतिम फैसला सीधे हाईकमान ही करेगा. अगर कैप्टन की कांग्रेस में वापसी होती है, क्या पंजाब चुनाव के समीकरण पूरी तरह बदल जाएंगे?
चंडीगढ़. पंजाब की सियासत इस समय एक बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाले मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है. शिरोमणि अकाली दल के भीतर मचे घमासान और भारतीय जनता पार्टी के जमीनी संघर्ष के बीच, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और पटियाला के महाराजा कैप्टन अमरिंदर सिंह की एक बार फिर कांग्रेस में वापसी की अटकलें तेज हो गई हैं. दिल्ली से लेकर चंडीगढ़ तक के राजनीतिक गलियारों में इस बात की पुरजोर चर्चा है कि पंजाब की राजनीति के सबसे कद्दावर चेहरों में से एक रहे कैप्टन अमरिंदर सिंह अपनी पुरानी पार्टी का हाथ थाम सकते हैं. हालांकि, इस खबर के बीच शनिवार को कैप्टन अमरिंदर सिंह और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मुलाकात हुई है. कैप्टन सिंह लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हुए थे. इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस के लोकसभा सांसद अमर सिंह के एक बयान ने इन अटकलों को और अधिक हवा दे दी है.
चंडीगढ़ में पत्रकारों से बात करते हुए कांग्रेस सांसद अमर सिंह ने कैप्टन अमरिंदर सिंह की वापसी की संभावना पर बेहद सधा हुआ और गंभीर बयान दिया. उन्होंने कहा, “कैप्टन अमरिंदर सिंह एक बेहद वरिष्ठ नेता हैं. उन्होंने लंबे समय तक पंजाब के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की सेवा की है और पार्टी सहित सरकार में कई बड़ी जिम्मेदारियां संभाली हैं. हम उनके सामने काफी जूनियर हैं. इसलिए, अगर उनकी वापसी या इस विषय पर किसी भी तरह की चर्चा की आवश्यकता है, तो उसे सीधे हमारा शीर्ष नेतृत्व ही हैंडल करेगा.” सांसद अमर सिंह का यह बयान साफ इशारा करता है कि कैप्टन की वापसी की फाइल अब सीधे दिल्ली दरबार में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के टेबल पर पहुंच चुकी है.
पंजाब विधानसभा चुनाव पर क्या पड़ेगा असर?
अगर कैप्टन अमरिंदर सिंह की कांग्रेस में वापसी औपचारिक रूप से हो जाती है, तो आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव की पूरी बिसात ही बदल जाएगी. साल 2022 के चुनाव से ठीक पहले जिस तरह अपमानजनक ढंग से कैप्टन को मुख्यमंत्री पद से हटाया गया था और उसके बाद कांग्रेस ताश के पत्तों की तरह बिखर गई थी, उस गलती को सुधारने का मौका अब पार्टी के पास होगा.
हिंदू और सिख वोट बैंक का अनूठा समन्वय
कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब के इकलौते ऐसे नेता माने जाते हैं जिनकी पकड़ सिखों के साथ-साथ राज्य के शहरी हिंदू मतदाताओं पर भी समान रूप से मजबूत है.
जमीनी कैडर में नया जोश: नवजोत सिंह सिद्धू और अन्य प्रांतीय नेताओं की आपसी कलह के कारण जो पारंपरिक कांग्रेस कार्यकर्ता आज घर बैठा है या उदासीन है, कैप्टन का नाम सामने आते ही वह दोबारा सड़कों पर सक्रिय हो जाएगा.
राष्ट्रवाद और पंजाब की सुरक्षा का नैरेटिव: सीमावर्ती राज्य होने के नाते पंजाब में सुरक्षा एक बहुत बड़ा मुद्दा है. कैप्टन की फौजी पृष्ठभूमि और राष्ट्रवाद की मुखर छवि कांग्रेस को अकाली दल और भाजपा के मुकाबले एक मजबूत बढ़त दिलाएगी.
#WATCH | Chandigarh: On speculations of Captain Amarinder Singh’s return to Congress, Congress MP Amar Singh says, “… Captain Amarinder Singh is a very senior leader — he has served as Chief Minister and held many responsibilities. We are juniors. If any discussion is needed,… pic.twitter.com/DTYBzenYbc
जोधपुर रेलवे स्टेशन का ‘वात्सल्य कक्ष’ बना माताओं के लिए सुविधाजनक स्थान
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Breastfeeding Room Jodhpur: जोधपुर रेलवे स्टेशन पर महिला यात्रियों और नवजात शिशुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ‘वात्सल्य कक्ष’ की शुरुआत की गई है. इस विशेष कक्ष का उद्देश्य माताओं को शिशुओं को स्तनपान कराने के लिए सुरक्षित, आरामदायक और गोपनीय वातावरण उपलब्ध कराना है. रेलवे स्टेशन जैसे व्यस्त सार्वजनिक स्थानों पर अक्सर माताओं को शिशु देखभाल और स्तनपान के दौरान असुविधा का सामना करना पड़ता है. नई सुविधा के शुरू होने से वे बिना किसी झिझक और परेशानी के अपने बच्चों की देखभाल कर सकेंगी. वात्सल्य कक्ष में बैठने की व्यवस्था, स्वच्छ वातावरण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे माताओं और शिशुओं दोनों को आराम मिलेगा. भारतीय रेलवे द्वारा यात्री सुविधाओं के विस्तार की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है.
जोधपुर: जोधपुर रेलवे स्टेशन पर महिला यात्रियों और नवजात शिशुओं के साथ सफर करने वाले परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण सुविधा शुरू की गई है. प्लेटफॉर्म संख्या-1 स्थित एसी वेटिंग रूम में विशेष रूप से बेबी फीडिंग रूम यानी वात्सल्य कक्ष तैयार किया गया है. इसका उद्देश्य माताओं को ऐसा स्थान उपलब्ध कराना है, जहां वे यात्रा के दौरान अपने शिशुओं की देखभाल सहजता और आरामदायक माहौल में कर सकें. रेलवे प्रशासन का यह कदम महिला यात्रियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है. नवजात शिशुओं के साथ यात्रा करने वाली माताओं को अक्सर भीड़भाड़ वाले प्लेटफॉर्म और प्रतीक्षालय में असुविधा का सामना करना पड़ता है. इसी आवश्यकता को समझते हुए वात्सल्य कक्ष में ऐसा वातावरण तैयार किया गया है.
जहां माताएं पूरी निजता के साथ शिशुओं को स्तनपान करा सकें. कक्ष में स्वच्छता और आराम से जुड़ी आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों पर होने वाली झिझक और असहजता से राहत मिलेगी. यह सुविधा यात्रा को अधिक सम्मानजनक और सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक सकारात्मक पहल मानी जा रही है.
यात्री सुविधाओं के विस्तार की दिशा में कदम
जोधपुर मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक हितेश यादव के अनुसार, रेलवे लगातार यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत है. स्टेशन पर आधुनिक सुविधाओं को बढ़ाने के साथ-साथ विभिन्न वर्गों की जरूरतों के अनुरूप व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं. वात्सल्य कक्ष की शुरुआत भी इसी सोच का हिस्सा है, ताकि महिलाओं और छोटे बच्चों के साथ सफर करने वाले परिवारों को बेहतर अनुभव मिल सके. इससे स्टेशन पर उपलब्ध सुविधाओं का दायरा और अधिक व्यापक हुआ है.
महिला यात्रियों के लिए राहतभरी पहल
रेल यात्रा के दौरान बच्चों की देखभाल माताओं के लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है. ऐसे में स्टेशन परिसर में उपलब्ध यह विशेष कक्ष उन्हें मानसिक सुकून और सुविधा दोनों प्रदान करेगा. इससे न केवल महिलाओं को बेहतर माहौल मिलेगा, बल्कि शिशुओं की देखभाल भी अधिक सहज तरीके से हो सकेगी. रेलवे को उम्मीद है कि यह सुविधा महिला यात्रियों के बीच काफी उपयोगी साबित होगी और भविष्य में अन्य स्टेशनों पर भी ऐसी व्यवस्थाओं को बढ़ावा देने की दिशा में प्रेरणा बनेगी.
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Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें
दावा- इजराइल ट्रम्प सरकार की जासूसी करा रहा: बर्नर फोन का इस्तेमाल कर रहे अमेरिकी अधिकारी; इजराइल बोला- आरोप झूठे
अमेरिका और इजराइल के बीच ईरान को लेकर मतभेद बढ़ रहे हैं। इस बीच अमेरिकी रक्षा विभाग (पेंटागन) के भीतर यह चिंता बढ़ गई है कि इजराइल अमेरिकी अधिकारियों और ट्रम्प सरकार की अंदरूनी जानकारी जुटाने के लिए जासूसी की कोशिश कर रहा है। NBC न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक दो मौजूदा और एक पूर्व अमेरिकी अधिकारी ने बताया कि पेंटागन की डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (DIA) ने हाल ही में इजराइल से जुड़े काउंटर-इंटेलिजेंस खतरे का स्तर बढ़ाकर ‘क्रिटिकल’ कर दिया है। यह एजेंसी का सबसे गंभीर अलर्ट माना जाता है। अमेरिका और इजराइल जैसे बेहद करीबी सहयोगियों के बीच ऐसा होना बेहद असाधारण माना जाता है। हालांकि इजराइल ने इन आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। इजराइली दूतावास का कहना है कि वह अमेरिकी अधिकारियों की जासूसी नहीं करता और उसकी खुफिया एजेंसियां सहयोगियों नहीं, बल्कि दुश्मनों पर नजर रखती हैं। फोन-कम्प्यूटर का इस्तेमाल नहीं करते अधिकारी काउंटर-इंटेलिजेंस खतरे का स्तर बढ़ाने का सबसे ज्यादा असर उन अमेरिकी अधिकारियों पर पड़ सकता है जो इजराइल की यात्रा करते हैं या इजराइली अधिकारियों के साथ सीधे संपर्क में रहते हैं। हालांकि अमेरिका और इजराइल के बीच खुफिया जानकारी साझा करने का सहयोग फिलहाल जारी रहेगा। एक अमेरिकी अधिकारी ने NBC को बताया कि अमेरिका पहले से ही अपने सीनियर अधिकारियों की इजराइल यात्रा के दौरान खास सावधानी बरतता है। इजराइल में रह रहे अमेरिकी अधिकारी अपने फोन-लैपटॉप का इस्तेमाल करने से बचते हैं। वे बर्नर फोन (इस्तेमाल कर फेंक दिए जाने वाले फोन) और खास कम्प्यूटर का इस्तेमाल करते हैं। कई बार वे होटल के कमरों या ऐसी जगहों पर संवेदनशील मुद्दों पर चर्चा करने से भी बचते हैं, जहां निगरानी का खतरा हो सकता है। इसकी वजह यह है कि इजराइली खुफिया एजेंसियां जानकारी जुटाने के मामले में काफी आक्रामक मानी जाती हैं। हालांकि अधिकारियों ने यह भी कहा कि ऐसा कोई एक बड़ा घटनाक्रम नहीं था जिसकी वजह से खतरे का स्तर अचानक बढ़ाया गया हो। इसके बजाय कई घटनाओं और आकलनों के आधार पर यह फैसला लिया गया। ट्रम्प ने फोन पर नेतन्याहू को गाली दी थी यह विवाद ऐसे समय सामने आया है जब ईरान को लेकर ट्रम्प और इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बीच मतभेद बढ़ रहे हैं। अप्रैल में युद्धविराम के बाद ट्रम्प ईरान के साथ एक बड़े समझौते की कोशिश कर रहे हैं, जबकि नेतन्याहू का मानना है कि ईरान किसी समझौते का पालन नहीं करेगा। इस बीच लेबनान में हिजबुल्लाह के खिलाफ सैन्य अभियानों को लेकर भी अमेरिका और इजराइल के बीच मतभेद की खबरें सामने आई हैं। रिपोर्टों के मुताबिक, हाल ही में ट्रम्प और नेतन्याहू के बीच फोन पर तीखी बातचीत भी हुई थी। बाद में ट्रम्प ने स्वीकार किया कि उन्होंने इजराइली प्रधानमंत्री को अपशब्द कहे थे। इससे यह अटकलें और तेज हो गईं कि दोनों नेताओं के बीच मध्य पूर्व की रणनीति को लेकर गंभीर मतभेद हैं। अमेरिका-इजराइल के रिश्तों में पहले भी कड़वाहट दिखी भले ही अमेरिका और इजराइल बहुत पक्के दोस्त माने जाते हैं, लेकिन दोनों देशों के बीच खुफिया स्तर पर अविश्वास और जासूसी का पुराना इतिहास रहा है। अमेरिकी सुरक्षा एजेंसियां पहले भी कई बार इजराइल की जासूसी गतिविधियों को लेकर अलर्ट का स्तर बढ़ा चुकी हैं और दोनों के बीच बड़े विवाद हुए हैं। 1. जोनाथन पोलार्ड केस (1985) जोनाथन पोलार्ड अमेरिका की नौसेना खुफिया एजेंसी में काम करता था। 1985 में उस पर आरोप लगा कि उसने अमेरिका के कई गोपनीय दस्तावेज इजराइल को दिए। पोलार्ड का कहना था कि वह इजराइल की मदद करना चाहता था, लेकिन अमेरिका ने इसे जासूसी माना। जांच के दौरान वह इजराइल के दूतावास में शरण लेने की कोशिश कर रहा था, लेकिन उसे गिरफ्तार कर लिया गया। 1987 में अमेरिकी अदालत ने उसे उम्रकैद की सजा सुनाई। इस मामले से अमेरिका और इजराइल के रिश्तों में तनाव आ गया। करीब 30 साल जेल में रहने के बाद 2015 में पोलार्ड को पैरोल पर रिहा किया गया। 2020 में वह इजराइल चला गया, जहां उसका स्वागत एक राष्ट्रीय नायक की तरह किया गया। यह मामला आज भी अमेरिका में उन सबसे बड़े जासूसी मामलों में गिना जाता है, जिनमें किसी अमेरिकी नागरिक ने किसी सहयोगी देश के लिए जासूसी की थी। यह पहली बार था जब अमेरिका ने इजराइल को लेकर अपनी काउंटर-इंटेलिजेंस चौकसी को उच्चतम स्तर पर कर दिया था। 2. बेन-अमी कादिश केस (2008) बेन-अमी कादिश अमेरिकी सेना के लिए काम कर चुके एक मैकेनिकल इंजीनियर थे। 2008 में उन पर आरोप लगा कि उन्होंने 1980 के दशक में अमेरिका के कई गोपनीय दस्तावेज इजराइल को दिए थे। अमेरिकी जांच एजेंसियों के अनुसार, इन दस्तावेजों में मिसाइल रक्षा प्रणाली, लड़ाकू विमानों और परमाणु हथियारों से जुड़ी संवेदनशील जानकारी शामिल थी। आरोप था कि कादिश ने यह जानकारी एक इजराइली संपर्क को सौंपी थी। कादिश ने बाद में एक आरोप स्वीकार किया और 2009 में उन्हें सजा सुनाई गई। हालांकि उनकी उम्र को देखते हुए उन्हें जेल नहीं भेजा गया, बल्कि जुर्माना और निगरानी जैसी सजा दी गई। 3. स्टिंगरे जासूसी विवाद (2019) 2019 में अमेरिकी मीडिया में एक रिपोर्ट आई, जिसमें दावा किया गया कि व्हाइट हाउस और वाशिंगटन के कुछ संवेदनशील इलाकों के आसपास संदिग्ध ‘स्टिंगरे’ डिवाइस पाए गए थे। ये नकली मोबाइल टावर की तरह काम करके आसपास के मोबाइल फोनों से जानकारी जुटा रहे थे। जांच एजेंसियों को शक था कि इन उपकरणों के पीछे इजराइल हो सकता है और इनका मकसद राष्ट्रपति ट्रम्प और उनके करीबी अधिकारियों की गतिविधियों और बातचीत पर नजर रखना था। हालांकि, अमेरिकी सरकार ने कभी सार्वजनिक रूप से यह नहीं कहा कि इजराइल दोषी साबित हो गया है। दूसरी ओर, इजराइल ने आरोपों को पूरी तरह खारिज कर दिया और कहा कि वह अमेरिका में जासूसी नहीं करता।
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‘मैं इतनी गुस्सैल हूं’, शूटिंग के बीच नाना पाटेकर को मधु ने मारा था थप्पड़
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नाना पाटेकर की जबरदस्त एक्टिंग और उनका गुस्सैल स्वभाव अक्सर सुर्खियों में रहा है. ऐसा ही एक वाकया 1997 की फिल्म ‘यशवंत’ की शूटिंग के दौरान हुआ. इस फिल्म में लीड रोल निभाने वाली मधु ने बताया कि ‘यशवंत’ के एक सीन के दौरान नाना पाटेकर ने उन्हें थप्पड़ मारा था. इसके बाद उन्होंने भी नाना को थप्पड़ मार दिया था.
नाना पाटेकर अपने गुस्से के लिए अक्सर चर्चा में रहे. सालस 1997 में आई फिल्म ‘यशवंत’ की शूटिंग के दौरान नाना पाटेकर ने अपनी को-स्टार मधु को एक सीन में थप्पड़ मार दिया. इसके बाद जो हुआ, वह भी चौंकाने वाला था, क्योंकि मधु ने तुरंत नाना को थप्पड़ मारकर जवाब दिया. मधु और नाना ने अनिल मट्टू के निर्देशन में इस फिल्म में पति-पत्नी की भूमिका निभाई थी.

मधु ने हाल ही में हिंदी रश को दिए इंटरव्यू में इस घटना को याद किया और बताया कि सीन में उन्हें रोना था, लेकिन जब उन्होंने ग्लिसरीन का इस्तेमाल करना चाहा तो नाना ने मना कर दिया. उन्होंने कहा, “नाना पाटेकर के साथ काम करके मैं मेथड एक्टर बन गई. एक सीन था जिसमें मुझे ग्लिसरीन लगानी थी, लेकिन उन्होंने मुझे लगाने नहीं दी.”

मधु ने कहा, “वह बोले, ‘फील करो, आंसू अपने आप आने चाहिए.’ लेकिन मुझसे नहीं हो पाया. फिर उन्होंने मुझे सच में थप्पड़ मार दिया. इतना जोर से मारा कि मेरी आंखों में अपने आप आंसू आ गए.” एक्ट्रेस ने माना कि अचानक थप्पड़ पड़ने से वह गुस्से में आ गई थीं, क्योंकि रिहर्सल के दौरान ऐसा कुछ नहीं हुआ था.
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मधु ने कहा, “मैं बहुत गुस्से में थी क्योंकि रिहर्सल में उन्होंने ऐसा कुछ नहीं किया था. अचानक थप्पड़ मारना मुझे चौंका गया. और मैं इतनी गुस्सैल हूं कि मैंने भी उन्हें थप्पड़ मार दिया. उन्होंने मारा और मेरा रिएक्शन था कि मैं भी मारूं.”

दिलचस्प बात यह रही कि यह तकरार फिल्म के लिए फायदेमंद साबित हुई. मधु ने बताया कि यह ‘यशवंत’ का सबसे अहम सीन था और डायरेक्टर अनिल मट्टू ने इसे शूट करने के लिए पूरा दिन रखा था.

मधु ने कहा, “यह ‘यशवंत’ का सबसे अहम सीन था और डायरेक्टर अनिल मट्टू ने इसके लिए पूरा दिन रखा था. लेकिन सब कुछ इतना नेचुरल हुआ कि आधे दिन में ही सीन खत्म हो गया. नाना बोले, ‘अब और क्या शूट करना है? खत्म. सीन ओवर.’ उनके साथ काम करके मैं मेथड एक्टर बन गई.”

इस घटना के बावजूद, मधु ने साफ किया कि नाना उनके साथ कभी बदतमीजी नहीं करते थे. उनके मुताबिक, नाना सिर्फ तब नाराज होते थे जब उन्हें लगता था कि वह और बेहतर कर सकती हैं.

मधू ने कहा, “नाना कभी मेरे साथ बदतमीजी नहीं करते थे. वह सिर्फ तब नाराज होते थे जब उन्हें लगता था कि मैं अपनी परफॉर्मेंस और बेहतर कर सकती हूं. जब मैं ग्लिसरीन लगाती या शॉट के बाद किरदार के मूड से बाहर आ जाती, तब वह नाराज हो जाते थे. मैं स्विच ऑन-स्विच ऑफ एक्टर हूं, लेकिन नानाजी इसके खिलाफ थे. वह मानते थे कि जिस किरदार को निभा रहे हो, उसमें जीना चाहिए.”

