Monday, June 22, 2026
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म्यूचुअल फंड में बने रहें या निकाल लें पैसा? 5 बड़े संकेत जो बताते हैं सही समय


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म्यूचुअल फंड को लंबे समय में संपत्ति बनाने का एक प्रभावी माध्यम माना जाता है. यह निवेशकों को महंगाई को मात देने, बेहतर रिटर्न हासिल करने और कंपाउंडिंग की ताकत से बड़े वित्तीय लक्ष्य पूरे करने में मदद करता है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर म्यूचुअल फंड को हमेशा के लिए होल्ड करके रखा जाए. समय-समय पर निवेश की समीक्षा करना और जरूरत पड़ने पर बदलाव करना भी उतना ही जरूरी होता है.

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म्यूचुअल फंड से एग्जिट का सही समय कैसे पहचानें? एक्सपर्ट्स ने बताए अहम संकेत. (Representative Image:AI)

नई दिल्ली. वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि ‘खरीदो और भूल जाओ’ वाली रणनीति हर परिस्थिति में सही साबित नहीं होती. कई बार निवेशक के लक्ष्य बदल जाते हैं, जोखिम उठाने की क्षमता कम या ज्यादा हो जाती है या फिर बाजार की परिस्थितियां बदल जाती हैं. ऐसे में पोर्टफोलियो को दोबारा संतुलित करना, कुछ मुनाफा बुक करना या कमजोर प्रदर्शन करने वाले फंड से बाहर निकलना समझदारी भरा कदम हो सकता है. नियमित समीक्षा से यह सुनिश्चित होता है कि निवेश अभी भी आपके वित्तीय उद्देश्यों के अनुरूप है.

लगातार कमजोर प्रदर्शन सबसे बड़ा संकेत
यदि कोई म्यूचुअल फंड लंबे समय तक अपनी श्रेणी के अन्य फंडों की तुलना में कमजोर प्रदर्शन कर रहा है, तो यह चिंता का विषय हो सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार केवल कुछ महीनों की गिरावट देखकर फैसला नहीं लेना चाहिए. किसी इक्विटी फंड का मूल्यांकन कम से कम तीन साल और बेहतर हो तो पांच साल के प्रदर्शन के आधार पर करना चाहिए. यदि फंड लगातार अपेक्षित रिटर्न नहीं दे पा रहा है और जोखिम के मुकाबले उसका प्रदर्शन कमजोर है, तो निवेशक को दूसरे विकल्पों पर विचार करना चाहिए.

फंड की रणनीति में बदलाव भी है चेतावनी
कई बार निवेशक किसी खास रणनीति या निवेश शैली को देखकर फंड चुनते हैं. लेकिन अगर समय के साथ फंड अपनी घोषित रणनीति से हटने लगे या उसके निवेश का तरीका बदल जाए, तो यह एक बड़ा रेड फ्लैग माना जा सकता है. उदाहरण के लिए, यदि कोई फंड खुद को बड़े शेयरों में निवेश करने वाला बताता है लेकिन धीरे-धीरे अधिक जोखिम वाले शेयरों में निवेश बढ़ा देता है, तो निवेशक का मूल उद्देश्य प्रभावित हो सकता है. ऐसी स्थिति में फंड की दोबारा समीक्षा जरूरी हो जाती है.

प्रबंधन और लागत पर भी रखें नजर
फंड मैनेजर और निवेश टीम की भूमिका म्यूचुअल फंड के प्रदर्शन में महत्वपूर्ण होती है. यदि लगातार बदलाव हो रहे हों या प्रबंधन की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हों, तो निवेशक को सतर्क हो जाना चाहिए. इसके अलावा, यदि फंड का खर्च अनुपात (एक्सपेंस रेशियो) बढ़ता जा रहा है और इससे संभावित रिटर्न प्रभावित हो रहे हैं, तो यह भी फंड बदलने का एक कारण बन सकता है. बढ़ती लागत लंबे समय में निवेशकों की कमाई को कम कर सकती है.

बदलते लक्ष्य और जरूरतें भी तय करती हैं एग्जिट
कई बार समस्या फंड में नहीं बल्कि निवेशक की परिस्थितियों में होती है. यदि किसी व्यक्ति का वित्तीय लक्ष्य बदल गया है, बच्चों की पढ़ाई, घर खरीदने या किसी अन्य जरूरत के लिए धन चाहिए, तो निवेश रणनीति में बदलाव करना स्वाभाविक है. ऐसे मामलों में फंड से आंशिक या पूर्ण निकासी उचित हो सकती है. हालांकि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि एग्जिट की योजना सोच-समझकर बनानी चाहिए ताकि टैक्स, एग्जिट लोड और बाजार के समय से जुड़े जोखिमों को कम किया जा सके.

भावनाओं नहीं, तथ्यों के आधार पर लें फैसला
विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में गिरावट, नकारात्मक खबरों या अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के कारण जल्दबाजी में म्यूचुअल फंड से बाहर निकलना अक्सर नुकसानदायक साबित होता है. इसके बजाय निवेशकों को ठोस आंकड़ों, प्रदर्शन के रिकॉर्ड और अपने वित्तीय लक्ष्यों के आधार पर निर्णय लेना चाहिए. अच्छी गुणवत्ता वाले और लक्ष्य के अनुरूप चुने गए म्यूचुअल फंड सामान्य बाजार चक्रों के दौरान लंबे समय तक बनाए रखे जा सकते हैं. लेकिन नियमित निगरानी और अनुशासित समीक्षा यह सुनिश्चित करती है कि आपका पोर्टफोलियो हमेशा आपके वित्तीय भविष्य की जरूरतों को पूरा करता रहे.

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Rakesh Singh

Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें



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अक्षय की ‘वेलकम टू द जंगल’ पर चली सेंसर बोर्ड की कैंची, 18 कट के बाद मिली मंजूरी


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बॉलीवुड के एक्शन स्टार अक्षय कुमार की आने वाली फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ पर अब सेंसर बोर्ड ने कैंची चला दी है. दरअसल फिल्म 26 जून को रिलीज होने वाली है. लेकिन इससे पहले सेंसर बोर्ड ने फिल्म में 18 कट्स लगाकर इसे यूए 16+ सर्टिफिकेट दे दिया है.

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नई दिल्ली. अक्षय कुमार की मोस्ट अवेटेड फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ रिलीज के बेहद करीब है. लेकिन रिलीज से पहले ही फिल्म पर सेंसर बोर्ड ने कट लगा दिए हैं. फिल्म से जैकलीन फर्नाडिज और दिशा पाटनी के कई सीन हटा दिए गए है.

‘वेलकम टू द जंगल’ अपने रिलीज के बेहद करीब है. फिल्म में अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी, दिशा पाटनी और जैकलीन फर्नांडिस समेत कई स्टार नजर आने वाले हैं. फिल्म को फाइनली सेंसर बोर्ड (CBFC) से U/A 16+ सर्टिफिकेट मिल गया है. लेकिन मेकर्स को फिल्म में कई बदलाव भी करने पड़े.

18 कट के बाद मिली मंजूरी

अक्षय कुमारी की फिल्म को कुल 18 कट्स और बदलाव के सुझाव के बाद फाइनली रिलीज की मंजूरी मिल गई है.अब तक सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, फिल्म के कई डायलॉग्स को भी बदला गया है. ‘पानी ऑफ कश्मीर’ वाली लाइन तो पूरी तरह काट दी गई है. इसके अलावा ‘देश की टट्टी जैसे शब्दों को भी फिल्म से पूरी तरह हटा दिया गया है. फिर गोरखा रेजिमेंट की जगह ‘तुम आर्मी से हो? कर बदलाव किया है. फिल्म में यूज होने वाले शब्द जरनल को सर या ऑफिसर कर दिया गया है.

कई डायलॉग को बदलकर किया गया चेंज

इन सभी बदलावों के अलावा फिल्म के कई मजाकिया डायलॉग भी बदले गए हैं, जैसे ‘काला पैदा हुआ है, कोयला है. इनकी जगह फिल्म में सादा पैदा हुआ है, नमूना हुआ है, जैसे शब्द शामिल किए गए हैं. इसके अलावा ‘याद करो कुर्बानी, मुंह में भर लो पानी’ की जगह अब ‘जो शहीद होने जा रहा था, उसके मुंह में भर लो पानी किया गया है.

बता दें कि सेंसर बोर्ड ने कुछ शब्दों पर भी आपत्ति जताई थी. उन शब्दों को भी फिल्म से बदल दिया गया है. इसके अलावा करीब 10 सेकेंड का एक सीन को तो डिलीट ही करा दिया गया है. फिल्म के कई सीन पर भी सीधी कैंची चलाई गई हैं, इनमें बिकिनी में फिल्माए गए कुछ ग्लैमरस शॉट्स, महिलाओं के हिप्स, जो बहुत ही क्लोज-अप और बार-बार दिखाए जा रहे थे. इसके अलावा दिशा पाटनी और जैकलीन फर्नांडिस के भी कई सेंसुअस सींस काट दिए गए हैं. लेकिन इतने कट के बाद भी फिल्म की लंबाई में कोई बड़ा अंतर नहीं आया है. इस कॉमेडी फिल्म का रनटाइम 2 घंटे 44 मिनट 50 सेकेंड है. अहमद खान फिल्म के निर्देशन की कमान संभाल रहे हैं, फिल्म 26 जून 2026 को थिएटर में रिलीज होने जा रही है.

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Munish KumarSenior sub editor

न्यूज 18 हिंदी में एंटरटेनमेंट सेक्शन में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे मुनीष कुमार दिल्ली के रहने वाले हैं. डिजिटल मीडिया में उन्हें 10 साल का अनुभव है.राजधानी कॉलेज (DU) से पॉलिटिकल साइंस (ऑनर्स) की पढ…और पढ़ें





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श्री कृष्ण जन्मस्थान के सचिव ने मुख्यमंत्री को लिखा पत्र: दिनेश फलाहारी की ओर से लगाए आरोपों की जांच की मांग – Mathura News




श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर में चढ़ावे और वित्तीय अनियमितताओं को लेकर उठे विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान के सचिव कपिल शर्मा ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को पत्र भेजकर अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों की सक्षम प्राधिकारी से जांच कराने की मांग की है। उनका कहना है कि जांच होने पर सच्चाई सामने आ जाएगी। अब विस्तार से पढ़िए पूरा मामला दरअसल, श्रीकृष्ण जन्मभूमि संघर्ष न्यास के अध्यक्ष दिनेश शर्मा फलाहारी ने हाल ही में श्रीकृष्ण जन्मस्थान मंदिर में चढ़ावे, दान और आभूषणों में गड़बड़ी के आरोप लगाए थे। उन्होंने संस्थान के सचिव कपिल शर्मा पर वित्तीय अनियमितताओं का आरोप लगाते हुए मामले की CBI जांच कराने की मांग की थी। फलाहारी ने आरोप लगाया था कि मंदिर में दान और चढ़ावे के प्रबंधन में पारदर्शिता नहीं है। उन्होंने फूल बंगला और 56 भोग जैसी सेवाओं के नाम पर भारी कमीशन वसूले जाने का भी दावा किया था। साथ ही उत्तराखंड में कीमती जमीन खरीदने जैसे आरोप भी लगाए थे। कपिल शर्मा बोले- आरोप पूरी तरह निराधार मीडिया से बातचीत में कपिल शर्मा ने कहा कि उनके खिलाफ लगाए गए सभी आरोप मनगढ़ंत, तथ्यहीन और मिथ्या हैं। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री को भेजे गए पत्र में उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग की है ताकि वास्तविकता सामने आ सके। कपिल शर्मा ने कहा कि वे पिछले 27 वर्षों से श्रीकृष्ण जन्मस्थान सेवा संस्थान से जुड़े हुए हैं और इस दौरान उन्होंने कभी वेतन, मानदेय, यात्रा भत्ता या अन्य कोई सुविधा नहीं ली। उन्होंने दावा किया कि संस्थान से जुड़े कार्यों के लिए होने वाला खर्च भी वह अपनी निजी आय से वहन करते हैं। फलाहारी पर भी लगाए गंभीर आरोप कपिल शर्मा ने दिनेश शर्मा फलाहारी पर भी कई गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने कहा कि फलाहारी पूर्व में समाजवादी पार्टी से जुड़े रहे हैं और विधानसभा चुनाव लड़ने की कोशिश कर चुके हैं। उन्होंने दावा किया कि फलाहारी के खिलाफ ठगी, चोरी और आपराधिक षड्यंत्र समेत कई मामले दर्ज हैं, जिनमें से कुछ में चार्जशीट भी दाखिल हो चुकी है। ‘सरकारी सुरक्षा के लिए करते हैं बयानबाजी’ मुख्यमंत्री को लिखे पत्र में कपिल शर्मा ने आरोप लगाया कि दिनेश शर्मा फलाहारी सरकारी सुरक्षा हासिल करने के उद्देश्य से विवादित बयान देते रहते हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व में भी ऐसे बयान देकर सामाजिक माहौल प्रभावित करने का प्रयास किया गया था। साथ ही उन्होंने आरोप लगाया कि फलाहारी ने श्रीकृष्ण जन्मस्थान ट्रस्ट के नाम से मिलता-जुलता एक अलग ट्रस्ट बनाकर श्रद्धालुओं को भ्रमित करने का प्रयास किया है। अब इस पूरे मामले में सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि मुख्यमंत्री कार्यालय और संबंधित प्रशासनिक एजेंसियां जांच की मांग पर क्या निर्णय लेती हैं।



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टीकमगढ़ में 50 लाख की लागत से बनेगा नया मंदिर: मलूक पीठाधीश्वर महाराज ने खंदिया हनुमान मंदिर का भूमिपूजन – Tikamgarh News




टीकमगढ़ के नगर परिषद कारी स्थित खंदिया हनुमान मंदिर के नव निर्माण के लिए सोमवार को भूमिपूजन किया गया। मलूक पीठाधीश्वर महंत राजेंद्र दास महाराज ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ यह अनुष्ठान संपन्न कराया। इस नए मंदिर का निर्माण लगभग 50 लाख रुपए की लागत से किया जाएगा। यह खंदिया हनुमान मंदिर अत्यंत प्राचीन माना जाता है। नगर के भक्तों और मंदिर समिति ने मिलकर एक भव्य नए मंदिर के निर्माण का निर्णय लिया था। इसी क्रम में, भूमिपूजन के लिए मलूक पीठाधीश्वर महाराज से विशेष निवेदन किया गया था। महाराज, जो वर्तमान में ओरछा में श्री भागवत कथा कर रहे हैं, नगरवासियों के आग्रह पर कारी पहुंचे। भूमि पूजन के दौरान उन्होंने कहा कि नए मंदिर के निर्माण से अधिक पुण्य फल पुराने मंदिर के जीर्णोद्धार से प्राप्त होता है। इस अवसर पर बड़ी संख्या में नगर के लोग उपस्थित रहे और महाराज के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। मंदिर समिति के अनुसार, नए मंदिर के निर्माण में लगभग 50 लाख रुपए का खर्च आएगा, जिसके लिए पूरे नगर के लोग सहयोग कर रहे हैं। उम्मीद है कि यह निर्माण कार्य लगभग एक वर्ष में पूरा हो जाएगा। उल्लेखनीय है कि करीब एक वर्ष पहले भी मलूक पीठाधीश्वर महाराज ने आचार्य धाम गांव के पास स्थित प्राचीन हनुमान धारा मंदिर के जीर्णोद्धार और नए मंदिर के निर्माण के लिए भूमिपूजन किया था। उस मंदिर का निर्माण लगभग 3 करोड़ रुपए की लागत से शुरू हुआ है। दो दिन पूर्व महाराज ने हनुमान धारा मंदिर पहुंचकर निर्माण कार्य का निरीक्षण भी किया था। निर्माण कार्य देख रहे राजेश गंगेले ने बताया कि मंदिर का निर्माण राजस्थानी पत्थर से किया जा रहा है और यह लगभग आठ माह में पूरा होने की संभावना है।



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डॉ. शौर्य सुमन ने संभाली पूर्णिया एसएसपी की कमान: पदभार ग्रहण करते ही बोले- अपराध नियंत्रण और कानून-व्यवस्था पर रहेगा फोकस – Purnia News




बिहार पुलिस महकमे में हुए बड़े प्रशासनिक फेरबदल के बाद सोमवार को डॉ. शौर्य सुमन ने पूर्णिया के एसएसपी की कमान संभाल ली है। निवर्तमान एसपी स्वीटी सहरावत का तबादला विशेष शाखा, पटना में पुलिस अधीक्षक के पद पर किया गया है। डॉ. शौर्य सुमन पूर्णिया जिले के पहले एसएसपी बन गए हैं। पुलिस कार्यालय पहुंचने पर डॉ. शौर्य सुमन का अधिकारियों और जवानों ने स्वागत किया। इस दौरान जिले के कई वरीय पुलिस पदाधिकारी और कर्मी मौजूद रहे। सभी ने उन्हें नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं और पूर्णिया की कमान संभालने पर स्वागत किया। ‘जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान होगा’ बतौर एसएसपी पदभार ग्रहण करने के बाद मीडिया से मुखातिब हुए डॉ. शौर्य सुमन ने कहा कि अपराध नियंत्रण, कानून-व्यवस्था को और अधिक मजबूत बनाना और आम लोगों में सुरक्षा की भावना कायम रखना उनकी प्राथमिकता होगी। सीमांचल का प्रवेश द्वार माने जाने वाले पूर्णिया जिले की अपनी एक विशेष पहचान है। यह जिला सामाजिक, भौगोलिक और प्रशासनिक दृष्टि से काफी महत्वपूर्ण है। ऐसे जिले की जिम्मेदारी मिलना उनके लिए सम्मान की बात है। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था को सुदृढ़ करना, अपराध पर प्रभावी नियंत्रण, संगठित अपराध के खिलाफ कार्रवाई तथा आम लोगों और पुलिस के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करना उनकी प्राथमिकता रहेगी। जनता की समस्याओं का त्वरित समाधान सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा।

डॉ. शौर्य सुमन इससे पहले जमुई और पश्चिम चंपारण बेतिया के पुलिस अधीक्षक के रूप में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उनकी पहचान एक तेज-तर्रार, तकनीकी रूप से दक्ष और जमीनी स्तर पर काम करने वाले अधिकारी के रूप में रही है। अपराध नियंत्रण और प्रभावी पुलिसिंग को लेकर उनकी कार्यशैली की काफी सराहना होती रही है। अब सीमांचल के महत्वपूर्ण जिले पूर्णिया की कमान मिलने के बाद लोगों की निगाहें उनके नेतृत्व पर टिकी हैं। वहीं निवर्तमान एसपी स्वीटी सहरावत के कार्यकाल को भी जिले में काफी सराहा गया, जिनके नेतृत्व में नशा तस्करी और अपराध के खिलाफ कई महत्वपूर्ण अभियान चलाए गए थे।



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बाजार की चटनी को कहें अलविदा, घर पर ऐसे बनाएं जामुन की देसी और हेल्दी चटनी


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क्या आपने खाई जामुन की ये अनोखी चटनी, जानिए इसे बनाने का आसान तरीका

 

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Jamun Chutney Recipe: गर्मियों के मौसम में जामुन न केवल स्वाद में बेहतरीन होता है बल्कि सेहत के लिए भी अत्यंत लाभकारी माना जाता है. आमतौर पर लोग इसे सीधे फल के रूप में खाते हैं, लेकिन जामुन की स्वादिष्ट चटनी घर पर आसानी से तैयार की जा सकती है. गृहिणी दुर्गा देवी के अनुसार यह चटनी खट्टे-मीठे स्वाद के साथ पाचन में भी सहायक होती है. इसे बनाने के लिए पके जामुन, हरी मिर्च, हरा धनिया, पुदीना, भुना जीरा, काला नमक और गुड़ या चीनी का उपयोग किया जाता है. यह चटनी पराठे, पूरी और नाश्ते के साथ स्वाद को और बढ़ा देती है.

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ब्रिटिश PM स्टार्मर का इस्तीफा: कहा- पार्टी को नहीं लगता मैं अगला चुनाव जिता सकता हूं; एंडी बर्नहैम नए प्रधानमंत्री बन सकते हैं




ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सोमवार को प्रधानमंत्री और लेबर पार्टी के नेता पद से इस्तीफा दे दिया है। 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर राष्ट्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि लेबर पार्टी को नहीं लगता कि मैं अगले चुनाव में नेतृत्व करने के लिए सही व्यक्ति हूं। स्टार्मर का इस्तीफा ऐसे समय आया है जब लेबर पार्टी के भीतर उनके नेतृत्व को लेकर लंबे समय से असंतोष बढ़ रहा था। हाल के महीनों में कई सांसदों और मंत्रियों ने उनके नेतृत्व पर सवाल उठाए थे। स्थानीय चुनावों में पार्टी के खराब प्रदर्शन और गिरती लोकप्रियता ने भी उनके ऊपर दबाव बढ़ा दिया था। बीबीसी की रिपोर्ट के मुताबिक एंडी बर्नहैम उनके उत्तराधिकारी बनने की दौड़ में सबसे आगे हैं। बर्नहैम ने हाल ही में मेकरफील्ड उपचुनाव जीतकर संसद में वापसी की है और उन्हें लेबर सांसदों के बड़े वर्ग का समर्थन प्राप्त बताया जा रहा है। स्टार्मर पिछले 10 साल में कार्यकाल पूरा होने से पहले पद छोड़ने वाले छठे ब्रिटिश प्रधानमंत्री होंगे। उनसे पहले डेविड कैमरन, थेरेसा मे, बोरिस जॉनसन, लिज ट्रस और ऋषि सुनक भी बीच कार्यकाल में पद छोड़ चुके हैं स्टार्मर पर पद छोड़ने का दबाव क्यों बढ़ा स्टार्मर ने 2024 में लेबर पार्टी को बड़ी चुनावी जीत दिलाई थी, लेकिन उसके बाद उनकी लोकप्रियता लगातार घटी है। कई विवादों, नीतिगत यू-टर्न और जीवनस्तर में सुधार के वादों को पूरा नहीं कर पाने की वजह से उनकी इमेज को नुकसान पहुंचा। स्टार्मर की मुश्किलें तब और बढ़ गईं, जब उनके विरोधी एंडी बर्नहैम ने शुक्रवार को उपचुनाव जीत लिया। इस जीत के बाद बर्नहैम पार्टी की कमान संभालने की दावेदारी पेश कर सकते हैं। जीत के बाद बर्नहैम ने कहा कि वह देश को नई दिशा देना चाहते हैं। बर्नहैम के सहयोगी स्टार्मर से इस्तीफा देने की मांग कर रहे हैं। पूर्व स्वास्थ्य मंत्री वेस स्ट्रीटिंग ने भी संकेत दिया कि वह जरूरत पड़ने पर स्टार्मर को नेतृत्व के लिए चुनौती दे सकते हैं। हालांकि, स्टार्मर ने 19 जून को साफ कहा था कि मैं अपने नेतृत्व के खिलाफ आने वाली किसी भी चुनौती का सामना करूंगा। साथ ही लेबर पार्टी के नेताओं से आपसी खींचतान से बचने की अपील की थी। ब्रिटेन में प्रधानमंत्री बार-बार बदलने की वजह एक्सपर्ट्स के मुताबिक ब्रिटेन में प्रधानमंत्री बार-बार बदलने की बड़ी वजह वहां की संसदीय व्यवस्था है। वहां प्रधानमंत्री को लोग सीधे नहीं चुनते, बल्कि उनकी पार्टी के सांसद उनका समर्थन करते हैं। प्रधानमंत्री तब तक पद पर बने रहते हैं, जब तक पार्टी के सांसद उनके साथ खड़े हों। अगर सांसदों को लगने लगे कि किसी नेता की घटती लोकप्रियता से अगले चुनाव में पार्टी को नुकसान हो सकता है, तो वे बिना आम चुनाव कराए भी नया नेता चुनने की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। यही वजह है कि ब्रिटेन में पार्टी का समर्थन कमजोर पड़ते ही प्रधानमंत्री बदलने की नौबत जल्दी आ जाती है। ब्रिटेन की बड़ी पार्टियों के नियम भी नेताओं को हटाने का रास्ता आसान बना देते हैं। कंजर्वेटिव पार्टी में अगर 15% सांसद किसी नेता के खिलाफ चिट्ठी लिख दें, तो उसके खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव लाया जा सकता है। वहीं, लेबर पार्टी में कोई दूसरा नेता तब दावेदारी पेश कर सकता है, जब उसे पार्टी के 20% से ज्यादा सांसदों और सदस्यों का समर्थन मिल जाए।



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Nothing Phone 4(a) के बाद आएगा Phone 4(b)? भारत में लॉन्च से पहले डिजाइन लीक


Nothing ने भारत में एक और सस्ते फोन की लॉन्चिंग कंफर्म कर दी है। नथिंग का यह फोन Phone 4(b) के नाम से पेश किया जाएगा। हालांकि, कंपनी ने फिलहाल फोन का नाम कंफर्म नहीं किया है। इस फोन का एक टीजर वीडियो जारी किया है, जिसमें इसका डिजाइन रिवील हुआ है। कंपनी पहल भी भारतीय बाजार में Phone 4(a) और Phone 4(a) Pro लॉन्च कर चुकी है। अपकमिंग बजट फ्रेंडली फोन में सिंगल कैमरा सेटअप मिल सकता है।

जल्द भारत में होगा लॉन्च

Nothing India ने अपने आधिकारिक X हैंडल से अपकमिंग बजट फोन का टीजर वीडियो जारी किया है। 12 सेकेंड के इस वीडियो में एक सिंगल कैमरे वाले फोन का स्केच बनाते हुए देखा जा सकता है। फोन के बैक में कैमरे के साथ Glyph इंटरफेस देखा जा सकता है। इसमें साइड में वॉल्यूम कंट्रोल और पावर बटन देखा जा सकता है। इसके अलावा नीचे की तरफ USB Type C पोर्ट देखने को मिलेगा। कंपनी ने इस वीडियो के कैप्शन में (b)usted लिखा है, जो दर्शाता है कि इसका नाम Phone (b) हो सकता है।

नथिंग के इस अपकमिंग फोन का माइक्रोसाइट भी ई-कॉमर्स वेबसाइट फ्लिपकार्ट पर लाइव किया जा चुका है, जो दर्शाता है कि फोन जल्द ही भारतीय बाजार में लॉन्च किया जाएगा। फोन के बैक पैनल में फ्लैट डिजाइन देखने को मिलेगा। पिछले दिनों ही CMF ने अपने सभी मौजूदा स्मार्टफोन प्रोजेक्ट को Nothing को ट्रांसफर किया है। ऐसे में यह भी कयास लगाए जा रहे हैं कि यह फोन CMF द्वारा डिजाइन किया जा रहा था, जिसे अब नथिंग के अपकमिंग फोन के नाम से लॉन्च किया जा सकता है।

कितनी होगी कीमत?

कंपनी के संस्थापक और CEO कार्ल पे ने कंफर्म किया है कि इस साल नथिंग कोई फ्लैगशिप फोन लॉन्च नहीं करने वाला है। ऐसे में ब्रांड का मुख्य फोकस मिड और बजट स्मार्टफोन पर रहने वाला है। Nothing Phone 4a और Phone 4a Pro को कंपनी ने इस साल मार्च में लॉन्च किया ता। इस सीरीज की शुरुआती कीमत 31,999 रुपये है। नथिंग का यह अपकमिंग फोन 20,000 रुपये की प्राइस रेंज में पेश किया जा सकता है। CMF के अब तक लॉन्च हुए फोन इसी प्राइस रेंज में आते हैं।

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राम मंदिर का चंदा चोरी, केजरीवाल ने भाजपा को घेरा: CBI-ED की चुप्पी पर उठाए सवाल; बोले- किसे बचाने में जुटी सरकार – New Delhi News




आम आदमी पार्टी (आप) के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने अयोध्या स्थित राम मंदिर में कथित चंदा और चढ़ावे की चोरी के मामले को लेकर केंद्र और उत्तर प्रदेश सरकार पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने पूछा कि मामले में अभी तक एफआईआर क्यों दर्ज नहीं की गई और आखिर सरकार किसे बचाने का प्रयास कर रही है। केजरीवाल ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों हिंदुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे पवित्र स्थल से करोड़ों रुपए के चंदे और चढ़ावे की चोरी होना बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस मामले में अब तक न तो उत्तर प्रदेश पुलिस ने एफआईआर दर्ज की है और न ही ईडी अथवा सीबीआई ने कोई कार्रवाई की है। मंदिर से करोड़ों के चंदे की चोरी उन्होंने सोशल मीडिया मंच एक्स पर एक वीडियो साझा करते हुए कहा कि अयोध्या के राम मंदिर से करोड़ों रुपए के चंदे की चोरी हुई है। उनके अनुसार, लगभग 200 करोड़ रुपए नकद और हीरे-जवाहरात से जुड़े कई बक्से गायब होने की बात सामने आ रही है। इसके बावजूद जांच एजेंसियों की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया है। अभी तक कोई कार्रवाई नहीं आप संयोजक ने कहा कि केंद्र और उत्तर प्रदेश, दोनों जगह भाजपा की सरकार है, लेकिन अभी तक न कोई छापेमारी हुई है और न ही दोषियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू हुई है। उन्होंने मांग की कि मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाए और दोषी चाहे कितने भी प्रभावशाली क्यों न हों, उन्हें तुरंत जेल भेजा जाए। उन्होंने कहा कि करोड़ों लोगों की आस्था की रक्षा करना सरकार की जिम्मेदारी है।



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BDK अस्पताल में सोनोग्राफी मशीन पर लगा ‘ताला’: मरीजों पर दोहरी मार, बाहर से 800 रुपए देकर करवानी पड़ रही है सोनोग्राफी, अस्पताल में डॉक्टर नहीं, PMO बोले अभी प्रस्ताव बनाकर भेजा – Jhunjhunu News




सरकारी अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं और निशुल्क जांच के दावे भले ही बड़े-बड़े किए जा रहे हों, लेकिन जमीनी स्तर पर हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है। झुंझुनू जिले के सबसे बड़े बीडीके अस्पताल में पिछले करीब तीन-चार महीने से सोनोग्राफी जांच पूरी तरह से बंद पड़ी है। अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट और सोनोलॉजिस्ट जैसे महत्वपूर्ण स्टाफ की कमी के कारण यहां आने वाले गरीब और ग्रामीण मरीजों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। ​अस्पताल की इस व्यवस्था को लेकर ‘भास्कर’ ने वहां आए मरीजों और अस्पताल प्रशासन दोनों का पक्ष जाना।
​मरीजों पर दोहरी मार, मुफ्त इलाज के नाम पर जेब हो रही ढीली
​ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के लोग इस उम्मीद के साथ सरकारी अस्पताल पहुंचते हैं कि उन्हें यहां निशुल्क जांच और इलाज मिल सकेगा। लेकिन बीडीके अस्पताल पहुंचने के बाद डॉक्टरों द्वारा सोनोग्राफी की पर्ची तो थमा दी जाती है, पर साथ ही यह भी कह दिया जाता है कि यहां सोनोग्राफी नहीं होगी, बाहर से करवानी पड़ेगी। ​अस्पताल में जांच कराने आए मरीजों का दर्द ​ खतेहपुरा निवासी सरोज ने बताया कि वह सोनोग्राफी करवाने के लिए अस्पताल आई थीं, लेकिन यहां आकर पता चला कि मशीन बंद है। उन्हें बाहर से जांच करवाने के लिए कहा गया, जिससे ग्रामीण क्षेत्र से आने वाले मरीजों को बेहद परेशानी हो रही है। ​बोई गांव से बुजुर्ग ने बताया कि वे अपनी गुड़िया की तबीयत खराब होने पर उसे दिखाने आए थे। डॉक्टर ने सोनोग्राफी लिख तो दी, लेकिन अस्पताल में सुविधा न होने के कारण उन्हें मजबूरन निजी सेंटर जाना पड़ा। जहां उन्हें कम से कम 800 रुपए देकर सोनोग्राफी करवानी पड़ी। उन्होंने कहा कि सरकारी अस्पताल में इस तरह की अव्यवस्था से आम जनता पर भारी आर्थिक बोझ पड़ रहा है। ​गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान के लिए सोनोग्राफी बेहद जरूरी होती है।
​ क्यों बंद है व्यवस्था, इस पर PMO बोले
​इस पूरे मामले पर बीडीके अस्पताल के पीएमओ डॉ. जितेंद्र भाम्बू ने अस्पताल का पक्ष रखते हुए बताया कि स्टाफ की कमी एक बड़ी चुनौती बनी हुई है: ​सोनोग्राफी विभाग के लिए हमारे पास रेडियोलॉजिस्ट और सोनोलॉजिस्ट का पद रिक्त है। इसके लिए बाकायदा प्रस्ताव बनाकर राज्य सरकार को भिजवा दिया गया है। पूर्व में यहां एक चिकित्सक का पदस्थापन (पोस्टिंग) किया भी गया था, लेकिन उनका पीजी (Post Graduation) में चयन हो जाने के कारण वे जयपुर चले गए। फिलहाल हमने नवीन पदस्थापन के तहत नए स्टाफ की डिमांड भेजी है और पूरी संभावना है कि आगामी दिनों में यहां पदस्थापन होते ही व्यवस्था को सुचारू कर दिया जाएगा।



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