वाराणसी के पुलिस कमिश्नर मोहित अग्रवाल ने शनिवार की रात तीन जोन के अपराधों की समीक्षा की। सीपी ने अफसरों समेत थानेदारों को 12 प्वाइंट पर चेतावनी दी। डीसीपी, एडीसीपी, एसीपी समेत सभी थानेदार और प्रमुख अफसरों को बिंदुवार प्राथमिकताएं गिनाईं। सीपी ने सभी जोन में अपराध नियंत्रण, लंबित विवेचनाओं, महिला सुरक्षा, कानून-व्यवस्था एवं जनसुनवाई की गहन समीक्षा की गई। स्पष्ट संदेश दिया कि जनसुनवाई, अपराध नियंत्रण, विवेचना एवं कानून-व्यवस्था में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले अधिकारी ही थानाध्यक्ष पद पर रहेंगे, कार्य में लापरवाही एवं निष्क्रियता स्वीकार नहीं की जाएगी। D-60 एवं D-90 श्रेणी की लंबित विवेचनाओं के शीघ्र निस्तारण किया जाए। महिला अपराधों में त्वरित कार्रवाई तथा लूट एवं चेन स्नैचिंग की घटनाओं के प्रभावी अनावरण के निर्देश दिए। दूसरे थाना क्षेत्र अथवा जनपद में अपराध करने वाले अपराधियों की निगरानी एवं उनके विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने को कहा गया। सीपी ने बताया जिस थाना क्षेत्र का अपराधी गैरजनपद में भी वारदात करेगा, थानेदार उसके लिए जिम्मेदार होगा। इसलिए अपराधियों पर नकेल कसें। वित्तीय फ्रॉड में प्रभावी प्रयोग कर पीड़ित को धनराशि वापस दिलाने पर जोर दिया। यातायात व्यवस्था सुधारने, अतिक्रमण हटाने एवं पैदल गश्त बढ़ाने के निर्देश दिए गए। स्कूल, कोचिंग व हॉस्टल में CCTV की जांच, शोहदों पर कार्रवाई, थानों के CCTV को क्रियाशील रखने तथा प्रत्येक FIR और गुमशुदगी की ACP स्तर पर समीक्षा के निर्देश दिए गए। आगामी जन्माष्टमी एवं गणेश चतुर्थी के तहत सतर्कता एवं सजगता बरतने हेतु निर्देशित किया गया। इन 12 बिंदुओं पर सीपी का निर्देश 1.जनसुनवाई सर्वोपरि: सभी थानेदार रोजाना जनसुनवाई करें, CUG मोबाइल हर हाल में उठाएं, अगर नहीं उठा पाए तो कॉल बैक अनिवार्य करें। आमजन से शालीन व्यवहार करें। 2. लंबित विवेचना खत्म करो: D-60 (10 साल से कम सजा वाले) और D-90 (10 साल से अधिक सजा वाले) अपराधों की लंबित विवेचनाओं का गुणवत्तापूर्ण निस्तारण। 3. महिला अपराधों पर जीरो टॉलरेंस: महिला संबंधी अपराधों में तत्काल FIR और त्वरित निस्तारण। 4. लूट-चेन स्नैचिंग का अनावरण: ऐसी घटनाओं में विशेष टीम लगाकर 100% अनावरण के निर्देश। 5. SOG-2 ले एक्शन: जुआ, सट्टा, देह व्यापार, अवैध हुक्का बार, मादक पदार्थों की बिक्री पर विशेष निगरानी के लिए नई टीम एक्शन लेगी। 6. दूसरे थाना/जनपद में अपराध: अगर वाराणसी का कोई अपराधी दूसरे जनपद में अपराध करता है तो संबंधित थानेदार की जिम्मेदारी तय होगी। 7. वित्तीय फ्रॉड में पैसा वापसी: साइबर ठगी में धारा 111 BNS और 107 BNSS का प्रयोग कर पीड़ित को उसका पैसा वापस दिलाने पर फोकस। 8. यातायात और अतिक्रमण: सड़क-फुटपाथ पर अतिक्रमण कर व्यापार करने वालों पर कार्रवाई, रोजाना पैदल गश्त। 9. स्कूल-कोचिंग-हॉस्टल सुरक्षा: सभी थानेदार अपने क्षेत्र के स्कूल/कोचिंग/हॉस्टल में लगे CCTV चेक करें, मनचलों/शोहदों पर कार्रवाई करें। 10. थानों के CCTV: सभी थानों के CCTV 24 घंटे चालू रहें, रिकॉर्डिंग सुरक्षित रहे। 11. हर FIR की ACP समीक्षा: प्रत्येक FIR और गुमशुदगी की ACP स्तर पर नियमित समीक्षा होगी। 12. त्योहार अलर्ट: श्रीकृष्ण जन्माष्टमी और गणेश चतुर्थी को देखते हुए संवेदनशील स्थानों पर विशेष पुलिस प्रबंध।
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अपराधी-गैंगस्टर गैरजनपद में करेगा वारदात तो वाराणसी के थानेदार जिम्मेदार: CP बोले-हर हाल में उठाएं CUG फोन, हर FIR की ACP करेंगे समीक्षा – Varanasi News
भास्कर अपडेट्स: महाराष्ट्र में समृद्धि एक्सप्रेसवे पर गैस पाइपलाइन लीक, 24 किमी तक ट्रैफिक डायवर्ट
महाराष्ट्र के छत्रपति संभाजीनगर जिले में गैस पाइपलाइन लीक होने के बाद समृद्धि एक्सप्रेसवे के 24 किलोमीटर हिस्से पर ट्रैफिक डायवर्ट कर दिया गया। अधिकारियों के मुताबिक, शनिवार शाम करीब 5 बजे गंगापुर तहसील के तकलीवाड़ी के पास GAIL की पाइपलाइन से गैस रिसाव की सूचना मिली। सावधानी के तौर पर हादसे वाली जगह पर दमकल उपकरण तैनात किए गए और GAIL के विशेषज्ञों को मौके पर बुलाया गया। हडस पिंपलगांव से मालीवाड़ा के बीच चेनज 447 से 470 तक का ट्रैफिक धुले-सोलापुर हाईवे की तरफ मोड़ा गया है। मुंबई जाने वाले वाहन हडस पिंपलगांव इंटरचेंज से निकलकर धुले-सोलापुर हाईवे के रास्ते मालीवाड़ा से दोबारा एक्सप्रेसवे पर प्रवेश कर रहे हैं। वहीं, नागपुर जाने वाले वाहन मालीवाड़ा से बाहर निकलकर इसी रास्ते से हडस पिंपलगांव में वापस एक्सप्रेसवे पर पहुंच रहे हैं। GAIL के विशेषज्ञों ने पाइपलाइन के प्रभावित हिस्से के दोनों तरफ के वाल्व बंद कर दिए हैं। इससे पाइपलाइन के अंदर का दबाव धीरे-धीरे कम हो रहा है। जिला प्रशासन और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं और जल्द यातायात सामान्य करने की कोशिश की जा रही है।
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फलोदी नगरपरिषद चुनाव: दो दिन में भरे गए 47 नामांकन: 34 उम्मीदवारों ने जमा करवाए पर्चे, भाजपा-कांग्रेस की सूची का इंतजार – Phalodi News
फलोदी नगरपरिषद और बाप नगरपालिका चुनाव 2026 के लिए नामांकन प्रक्रिया जारी है। शनिवार को नामांकन के दूसरे दिन दोनों निकायों में दावेदारों की सक्रियता बढ़ी, लेकिन अब तक नामांकन की रफ्तार धीमी बनी हुई है। दो दिनों में फलोदी में 34 उम्मीदवारों ने 47 नामांकन पत्र, जबकि बाप में 35 उम्मीदवारों ने 39 नामांकन पत्र दाखिल किए हैं। फलोदी नगरपरिषद में शनिवार को 33 उम्मीदवारों ने 45 नामांकन पत्र सहायक निर्वाचन अधिकारी पूजा चौधरी के समक्ष प्रस्तुत किए। दो दिनों में अब तक 34 उम्मीदवारों के 47 नामांकन दाखिल हो चुके हैं। हालांकि, संभावित उम्मीदवारों की ओर से 549 नामांकन पत्र लिए जा चुके हैं। ऐसे में जारी किए गए और दाखिल हुए नामांकन पत्रों के आंकड़ों में बड़ा अंतर है। बाप में 20 वार्डों के लिए 39 नामांकन बाप नगरपालिका के 20 वार्डों के लिए दो दिनों में 35 उम्मीदवारों ने कुल 39 नामांकन पत्र दाखिल किए हैं। पहले दिन एक भी नामांकन जमा नहीं हुआ था। शनिवार को नामांकन प्रक्रिया में तेजी देखने को मिली, लेकिन अभी भी बड़ी संख्या में दावेदारों के पर्चे दाखिल होना बाकी है। राजनीतिक दलों की सूची का इंतजार नामांकन की धीमी रफ्तार की प्रमुख वजह भाजपा और कांग्रेस सहित राजनीतिक दलों की ओर से अधिकृत प्रत्याशियों की सूची जारी नहीं होना माना जा रहा है। बड़ी संख्या में टिकट के दावेदार पार्टियों की सूची का इंतजार कर रहे हैं। ऐसे में 31 अगस्त को नामांकन के अंतिम दिन दोनों निकायों में भारी भीड़ और राजनीतिक गहमागहमी देखने को मिल सकती है। 31 अगस्त को नामांकन का अंतिम दिन 30 अगस्त रविवार को राजकीय अवकाश रहेगा। हालांकि, फलोदी और बाप के रिटर्निंग ऑफिसर कार्यालयों में हेल्प डेस्क खुले रहेंगे। यहां अभ्यर्थियों को नामांकन से संबंधित जानकारी और आवश्यक सहयोग उपलब्ध कराया जाएगा। 31 अगस्त को नामांकन पत्र दाखिल करने की अंतिम तिथि है। इसके बाद नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही फलोदी नगरपरिषद और बाप नगरपालिका में चुनावी मुकाबले की तस्वीर साफ होगी।
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बिहार में 27 DSP का तबादला: STF-निगरानी के अफसरों को मिली नई पोस्टिंग, कई जिलों में नए SDPO संभालेंगे कमान – Patna News
बिहार सरकार ने 27 पुलिस अधिकारियों का तबादला किया है। ये सभी डीएसपी रैंक के हैं। इसी अधिसूचना शनिवार को गृह विभाग की ओर से जारी की गई है। गृह विभाग ने कई अधिकारियों को पुलिस अनुमंडलों में SDPO की जिम्मेदारी दी गई है, जबकि कुछ अधिकारियों को विशेष सशस्
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गृह विभाग की ओर से जारी अधिसूचना के मुताबिक यह तबादला आदेश तत्काल प्रभाव से लागू होगा। सभी स्थानांतरित अधिकारियों को जल्द से जल्द अपने नए पदस्थापन स्थल पर योगदान देने का निर्देश दिया गया है।
इस फेरबदल में राज्य के कई महत्वपूर्ण पुलिस अनुमंडलों में नए SDPO की तैनाती की गई है। पटना, छपरा, आरा, बेगूसराय, गोपालगंज, पूर्णिया, वैशाली, समस्तीपुर, नालंदा, मोतिहारी, सीवान, सहरसा, सुपौल, मधेपुरा, मुंगेर और गयजी समेत कई जिलों में अधिकारियों की नई जिम्मेदारी तय की गई है।
वहीं, विशेष बल, STF और निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में तैनात कई अधिकारियों को अब मैदानी पुलिसिंग की जिम्मेदारी दी गई है।
किन अधिकारी को कहां मिली नई जिम्मेदारी?
1. सोनू कुमार राय- भोजपुर के रहने वाले सोनू कुमार राय वर्तमान में अपर पुलिस अधीक्षक, विशेष सशस्त्र पुलिस (BSAP)-14, पटना के पद पर थे। अब उन्हें पुलिस अधीक्षक (प्रशासन), पटना बनाया गया है।
2. उग्रेश्वर चौधरी- शेखपुरा निवासी उग्रेश्वर चौधरी रेलवे के अपर पुलिस अधीक्षक, जमालपुर में थे। उन्हें अब SDPO-II, फुलवारी शरीफ, पटना की जिम्मेदारी दी गई है।
3. प्रेमचंद सिंह- भभुआ निवासी प्रेमचंद सिंह पटना में BSAP-16 के अपर पुलिस अधीक्षक थे। नई तैनाती SDPO-II, सदर, छपरा की गई है।
4. पोलस्त कुमार- नालंदा निवासी पोलस्त कुमार डुमरांव, बक्सर के SDPO थे। अब उन्हें SDPO, महुआ, वैशाली बनाया गया है।
5. सुशील कुमार बक्सर निवासी सुशील कुमार SDPO-I, फुलवारी शरीफ, पटना के पद पर थे। अब वे SDPO-I, सदर, आरा की जिम्मेदारी संभालेंगे।
6. गुलशन कुमार- जहानाबाद निवासी गुलशन कुमार रजौली, नवादा के SDPO थे। अब उन्हें DSP, रेल, गयाजी के पद पर भेजा गया है।
7. प्रशांत कुमार- लखीसराय निवासी प्रशांत कुमार STF, बिहार, पटना में वरीय DSP के पद पर थे। उन्हें अब SDPO-I, सदर, बेगूसराय बनाया गया है।
8. राजेश कुमार- पटना निवासी राजेश कुमार STF, बिहार, पटना में DSP थे। अब उन्हें SDPO, हथुआ, गोपालगंज की जिम्मेदारी दी गई है।
9. अजीत प्रताप सिंह चौहान- पूर्वी चंपारण निवासी अजीत प्रताप सिंह चौहान साइबर क्राइम, लखीसराय में DSP थे। नई जिम्मेदारी SDPO, धमदाहा, पूर्णिया की मिली है।
10. अमरकांत- पटना निवासी अमरकांत DSP, यातायात, रोहतास के पद पर थे। अब उन्हें SDPO, मंझौल, बेगूसराय बनाया गया है।
11. सतीश सुमन- पटना निवासी सतीश सुमन जमुई के SDPO थे। अब उन्हें SDPO-I, सदर, समस्तीपुर की जिम्मेदारी दी गई है।
12. राकेश कुमार रंजन- मुजफ्फरपुर निवासी राकेश कुमार रंजन मुंगेर में साइबर क्राइम के DSP थे। अब वे SDPO-II, सदर बिहार शरीफ, नालंदा की जिम्मेदारी संभालेंगे।
13. पंकज कुमार मिश्रा- दरभंगा निवासी पंकज कुमार मिश्रा पटना में मद्य निषेध, स्वापक नियंत्रण ब्यूरो में DSP थे। उन्हें अब SDPO, अरेराज, मोतिहारी बनाया गया है।
14. गोरख राम- भोजपुर निवासी गोरख राम रोहतास में DSP (रक्षित) थे। अब उन्हें DSP, BSAP-4, डुमरांव की जिम्मेदारी दी गई है।
15. आनंद मोहन गुप्ता- बेगूसराय निवासी आनंद मोहन गुप्ता गोपालगंज के हथुआ SDPO थे। अब उन्हें SDPO-II, सदर, सीवान बनाया गया है।
16. निशिकान्त भारती- भागलपुर निवासी निशिकान्त भारती सीवान में यातायात DSP थे। नई जिम्मेदारी SDPO, सिमरी बख्तियारपुर, सहरसा की दी गई है।
17. चन्द्र भूषण- वैशाली निवासी चन्द्र भूषण सारण में साइबर क्राइम DSP थे। अब उन्हें औरंगाबाद के दाउदनगर में SDPO बनाया गया है।
18. अभिनव कुमार- बेगूसराय निवासी अभिनव कुमार पटना में विशेष सुरक्षा दल में DSP थे। अब वे गयाजी के वजीरगंज में SDPO की जिम्मेदारी संभालेंगे।
19. पंकज कुमार सिंह- जमुई निवासी पंकज कुमार सिंह बक्सर में मुख्यालय DSP थे। अधिसूचना में उनकी नई तैनाती SDPO, त्रिवेणीगंज, सुपौल बताई गई है।
20. राकेश कुमार भास्कर- गोपालगंज निवासी राकेश कुमार भास्कर सुपौल में BSAP-15 में DSP थे। अब उन्हें SDPO-II, सदर, बेतिया बनाया गया है।
21. सत्येन्द्र राम- सिवान निवासी सत्येन्द्र राम निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में DSP थे। अब उन्हें SDPO, रामनगर, बगहा की जिम्मेदारी दी गई है।
22. अजय कुमार- खगड़िया निवासी अजय कुमार कटिहार के बारसोई में SDPO थे। अब उन्हें SDPO, सदर, मधेपुरा बनाया गया है।
23. पवन कुमार- नवादा निवासी पवन कुमार निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में DSP थे। अब उन्हें SDPO, वीरपुर, सुपौल की जिम्मेदारी मिली है।
24. पवन कुमार सिंह- कटिहार निवासी पवन कुमार सिंह अरवल में ट्रैफिक DSP थे। अब उन्हें SDPO, उदाकिशुनगंज, मधेपुरा बनाया गया है।
25. पंकज कुमार सिंह- जमुई निवासी पंकज कुमार सिंह के लिए अधिसूचना में एक और नई तैनाती SDPO, सदर, सहरसा दर्ज है।
26. कृपाचन्द्र जयसवाल- पटना निवासी कृपाचन्द्र जयसवाल निगरानी अन्वेषण ब्यूरो में DSP थे। अब उन्हें SDPO-II, सदर, गोपालगंज की जिम्मेदारी दी गई है।
27. अभय कुमार- रोहतास निवासी अभय कुमार BSAP-13, दरभंगा में DSP थे। अब उन्हें SDPO, खड़कपुर, मुंगेर बनाया गया है।
पुलिसिंग को मजबूत करने की कवायद
गृह विभाग के इस बड़े फेरबदल को राज्य में पुलिस प्रशासन को और प्रभावी बनाने की कवायद के तौर पर देखा जा रहा है। विशेष बल, STF, साइबर क्राइम और निगरानी जैसे विभागों में काम कर चुके कई अधिकारियों को अब अनुमंडल स्तर पर कानून-व्यवस्था और पुलिसिंग की सीधी जिम्मेदारी दी गई है।
अनुमंडल पुलिस अधिकारी के तौर पर इन अधिकारियों के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने, अपराध नियंत्रण, पुलिस टीमों की निगरानी और संवेदनशील मामलों में त्वरित कार्रवाई जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां होंगी।
आदेश तत्काल प्रभाव से लागू
गृह विभाग के अवर सचिव रत्नेश कुमार की ओर से जारी आदेश में सभी अधिकारियों को अपने नए पदस्थापन स्थल पर जल्द योगदान देने का निर्देश दिया गया है। यानी तबादले के साथ ही अधिकारियों को नई जिम्मेदारी संभालने की प्रक्रिया शुरू करनी होगी।
तेल वाला अचार भूल जाएंगे! बिना तेल बनाएं राजस्थानी पानी वाला मिर्च का अचार
Water Chili Pickle Recipe: राजस्थानी खाने की थाली में अचार की अपनी अलग जगह है. दाल-बाटी हो, पराठा हो या फिर सादा दाल-चावल, साथ में थोड़ा सा तीखा अचार मिल जाए तो खाने का स्वाद बदल जाता है, लेकिन अगर आप अचार में ज्यादा तेल पसंद नहीं करते, तो राजस्थान की यह पारंपरिक रेसिपी आपके काम की हो सकती है. इसे पानी वाला मिर्च का अचार या मिर्ची की कांजी भी कहा जाता है. खास बात यह है कि इसमें तेल डालने की जरूरत नहीं पड़ती. मिर्च, मसालों और पानी से तैयार होने वाला यह अचार कुछ दिनों में स्वाद पकड़ लेता है. इसकी खुशबू और खट्टा-तीखा स्वाद इसे आम अचार से थोड़ा अलग बनाता है. बरसात या गर्मियों में घर के खाने के साथ चटपटा स्वाद चाहिए, तो इसे जरूर आजमाया जा सकता है. हालांकि, इसे बनाते समय साफ-सफाई और सही स्टोरेज का ध्यान रखना बेहद जरूरी है.
क्यों खास है पानी वाला मिर्च का अचार?
आम तौर पर मिर्च के अचार में तेल, मसाले और नमक का इस्तेमाल ज्यादा होता है. पानी वाला अचार इस मामले में थोड़ा अलग है. इसमें मिर्च को हल्का नरम करके मसालों से भरा जाता है और फिर पानी में रखा जाता है. इससे मिर्च धीरे-धीरे मसालों का स्वाद सोखने लगती है. इस अचार में राई, सौंफ, मेथी और भुना जीरा जैसे मसाले इस्तेमाल होते हैं. यही मसाले इसे खुशबूदार और चटपटा बनाते हैं. कुछ घरों में इसमें खटास के लिए सिरका भी डाला जाता है. स्वाद के साथ-साथ यह रेसिपी उन लोगों को भी पसंद आ सकती है, जो अचार में ज्यादा तेल से बचना चाहते हैं.
पानी वाला मिर्च का अचार बनाने की सामग्री
इसके लिए करीब 500 ग्राम ताजी, कम तीखी हरी मिर्च लें. मिर्च बहुत ज्यादा नरम या खराब नहीं होनी चाहिए. इसके अलावा राई, सौंफ, मेथी दाना, भुना जीरा, हल्दी, हींग और स्वाद के अनुसार नमक लें. खटास के लिए करीब 2 चम्मच सफेद सिरका इस्तेमाल किया जा सकता है.
(इमेज AI)
कैसे बनाएं राजस्थानी पानी वाला मिर्च का अचार?
सबसे पहले हरी मिर्च को अच्छी तरह धोकर साफ कपड़े से पूरी तरह सुखा लें. अब एक बर्तन में पानी गर्म करें. पानी उबलने लगे तो उसमें मिर्च डालें और गैस बंद कर दें. मिर्च को करीब 10 मिनट तक ढककर रखें. इससे मिर्च थोड़ी नरम हो जाएगी, लेकिन उसका स्वाद बना रहेगा. अब मसाले तैयार करें. राई, सौंफ, मेथी दाना और भुने जीरे को दरदरा पीस लें. इसमें हल्दी, हींग और नमक मिला दें. मिर्च को पानी से निकालकर ठंडा होने दें. इसके बाद हर मिर्च में लंबाई की ओर हल्का चीरा लगाएं. ध्यान रखें कि मिर्च पूरी तरह दो हिस्सों में न कटे.
अब तैयार मसाले को मिर्च के अंदर भरें. इसके बाद साफ और सूखे कांच के जार में सभी मिर्चियां एक-एक करके रखें. जिस पानी में मिर्च को गर्म किया था, उसे ठंडा करके जार में डालें. इसमें करीब दो चम्मच सफेद सिरका मिलाया जा सकता है. जार को तुरंत कसकर बंद करने के बजाय साफ सूती कपड़े से ढककर रखें. इसे 3 से 4 दिन तक धूप वाली साफ जगह पर रखा जा सकता है. इस दौरान अचार में खट्टापन और मसालों का स्वाद धीरे-धीरे आने लगता है. जब अचार स्वाद और खुशबू में तैयार लगे, तो इसे फ्रिज में रख दें.
अचार को स्टोर करते समय रखें ध्यान
अचार निकालने के लिए हमेशा साफ और सूखा चम्मच इस्तेमाल करें. जार में गंदा पानी या नमी जाने से अचार जल्दी खराब हो सकता है. तैयार अचार को फ्रिज में रखना बेहतर रहता है. कितने समय तक अचार सुरक्षित रहेगा, यह उसकी सफाई, सामग्री और स्टोरेज की स्थिति पर निर्भर करता है, इसलिए खराब गंध, फफूंदी या असामान्य बदलाव दिखने पर इसे न खाएं.
खाने के साथ ऐसे करें सर्व
इस अचार को दाल-चावल, पराठे, पूरी या राजस्थानी थाली के साथ परोसा जा सकता है. कुछ लोग इसके खट्टे-तीखे पानी को भी पसंद करते हैं. हालांकि, इसे किसी खास स्वास्थ्य लाभ का इलाज मानने के बजाय स्वाद बढ़ाने वाली पारंपरिक रेसिपी के तौर पर लेना बेहतर है.
पहले चेयरमैन ने कुर्सी छोड़ी और अब एचडीएफसी बैंक के सीईओ लेने जा रहे रिटायरमेंट
Last Updated:
HDFC Bank MD-CEO: एचडीएफसी बैंक के एमडी और सीईओ ने अक्टूबर के बाद अपना कार्यकाल नहीं बढ़ाने का ऐलान कर दिया है. उन्होंने कहा है कि 26 अक्टूबर को उनका मौजूदा कार्यकाल समाप्त हो रहा है और इसके बाद वह दोबारा अपनी नियुक्ति का प्रयास नहीं करेंगे.
एचडीएफसी बैंक के सीईओ जगदीशन ने रिटायरमेंट का ऐलान कर दिया है.
नई दिल्ली. प्राइवेट सेक्टर के सबसे बड़े बैंक एचडीएफसी ने एक बार फिर बाजार में हलचल मचा दी है. बैंक के एमडी और सीईओ शशिधर जगदीशन ने साफ कह दिया है कि वे अक्टूबर के बाद अपना कार्यकाल आगे नहीं बढ़ाएंगे. जगदीशन का कार्यकाल 26 अक्टूबर, 2026 को समाप्त हो रहा है. इससे पहले बैंक के कार्यकारी चेयरमैन ने भी अचानक अपने पद से इस्तीफा दे दिया था. अब सीईओ के अपना कार्यकाल न बढ़ाने की खबरों ने एक बार फिर बैंक को लेकर बाजार में चर्चाएं शुरू कर दी हैं.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…
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कुलपति ने सरकारी आवास के बावजूद लिया HRA: हाईकोर्ट ने खाली करवाया आवास, गाड़ी भी वापस ली – Prayagraj (Allahabad) News
प्रयागराज की डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की पहली कुलपति डॉ. उषा टंडन वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में विवादों में घिर गई हैं। उन पर सरकारी आवास आवंटित होने के बावजूद हर महीने 19,700 रुपये हाउस रेंट अलाउंस (HRA) लेने का आरोप है। इस मामले के सामने आने के बाद अप्रैल में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनसे सरकारी आवास खाली करवा लिया और आधिकारिक गाड़ी भी वापस ले ली। एक अधिवक्ता ने इस संबंध में मुख्यमंत्री से शिकायत की है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में सितंबर 2023 में डॉ. उषा टंडन को पहली कुलपति नियुक्त किया गया था। उन्होंने कार्यभार संभालने के बाद वर्ष 2024 से विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र शुरू करवाया। वर्ष 2023 में प्रयागराज आने पर डॉ. टंडन को डीएम आवास के निकट मिशन रोड पर एक बंगला आवंटित किया गया था। उन्होंने कुछ समय वहां निवास किया और प्रशासन से उसके रखरखाव का अनुरोध किया। लोक निर्माण विभाग ने मकान की मरम्मत के लिए 60 लाख रुपये का बजट बनाया, जो शासन से स्वीकृत भी हुआ, लेकिन मरम्मत का कार्य शुरू नहीं हो सका। बाद में, उन्हें हाईकोर्ट जजेज कॉलोनी में एक अन्य आवास आवंटित किया गया। साथ ही, उन्हें हाईकोर्ट की ओर से एक आधिकारिक वाहन भी उपलब्ध कराया गया। उन्होंने इस आवास और वाहन का उपयोग करना शुरू कर दिया। इस दौरान उनके नाम पर मिशन रोड वाला बंगला भी आवंटित रहा, जिससे उनके पास दो सरकारी आवास हो गए। दो सरकारी आवास आवंटित होने के बावजूद, डॉ. टंडन हर महीने सरकार से 19,700 रुपये हाउस रेंट अलाउंस (HRA) लेती रहीं। जब इस दोहरे आवंटन और HRA लेने की जानकारी हाईकोर्ट को मिली, तो अप्रैल में उनसे हाईकोर्ट जजेज कॉलोनी का आवास खाली करवा लिया गया और वाहन भी वापस ले लिया गया। कुछ महीने पहले, मिशन रोड स्थित डीएम कंपाउंड का आवास किसी अन्य अधिकारी को आवंटित कर दिया गया। सूत्रों के अनुसार, कुलपति से वाहन और आवास के किराए के रूप में लगभग छह लाख रुपये वसूलने की तैयारी थी, लेकिन यह मामला फिलहाल लंबित है। यूनिवर्सिटी का पक्ष
यूनिवर्सिटी के पीआरओ प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि हाईकोर्ट में जजों की संख्या बढ़ने पर कुलपति से आवास खाली करवाया गया था। यूनिवर्सिटी का कैंपस और कुलपति आवास झलवा में निर्माणाधीन है। सरकारी आवास मिलने के बावजूद एचआरए लेने का मामला वित्त का है। मुझे इसकी जानकारी नहीं है। यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती पर विवाद
कुलपति पर 12 असिस्टेंट प्रोफेसरों को बिना हस्ताक्षर वाले नियुक्ति पत्र के आधार पर जॉइन करवाने का भी आरोप है।
12 पदों पर भर्ती के लिए 22 से 30 जुलाई के बीच इंटरव्यू हुए थे। 31 जुलाई की शाम 4 बजे कार्य परिषद की बैठक बुलाई गई और उसी रात 10 बजे आनन-फानन में रिजल्ट घोषित कर दिया गया। भर्ती प्रक्रिया में कुछ खामियां दिखने पर जब रजिस्ट्रार ने जॉइनिंग लेटर पर साइन करने से मना कर दिया, तो कुलपति ने बिना हस्ताक्षर वाले पत्रों से ही 1 अगस्त को अभ्यर्थियों को जॉइन करवाकर अध्यापन शुरू करवा दिया। 70,000 रुपये एकेडमिक इंसेंटिव लेने के आरोप
कुलपति डॉ. ऊषा टंडन पर पिछले दो साल से वेतन के अतिरिक्त हर महीने 70 हजार रुपये ‘एकेडमिक इंसेंटिव’ लेने का आरोप लगा है। वित्त नियंत्रक सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी ने जुलाई में इस अतिरिक्त भुगतान पर रोक लगा दी है। यूनिवर्सिटी में अलग अलग कार्यो के लिए जो भी कमेटी बनती है, उसमें कुलपति को चेयरमैन के रूप रहना होता है। बताया जा रहा है कमेटी का चेयरमैन बनने का भी वह भत्ता लेती हैं।
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जनविश्वास शिविर में अफसरों पर भड़के महापौर: शिकायतों के निराकरण में लापरवाही पर लगाई फटकार; कहा- जनता की समस्याओं को गंभीरता से सुनें – Indore News
इंदौर के मुसाखेड़ी स्थित नगर निगम के जोन-18 कार्यालय में शनिवार को आयोजित मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान शिविर में अधिकारियों की कार्यप्रणाली को लेकर महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने नाराजगी जताई। लोगों की शिकायतों के समाधान में लापरवाही सामने आने पर उन्होंने अधिकारियों को फटकार लगाई। शिविर में कैबिनेट मंत्री तुलसीराम सिलावट, विधायक महेंद्र हार्डिया, महापौर पुष्यमित्र भार्गव और कलेक्टर शिवम वर्मा सहित विभिन्न विभागों के अधिकारी मौजूद रहे। अलग-अलग विभागों के स्टॉल लगाए गए थे, जहां बड़ी संख्या में लोगों ने अपनी समस्याएं और आवेदन अधिकारियों के सामने रखे। कई मामलों का मौके पर ही निराकरण किया गया। महापौर ने कहा कि जनता की समस्याओं को टालने और काम में देरी करने की शिकायतें मिल रही हैं। उन्होंने एक कर्मचारी को कलेक्टर से बातचीत के दौरान जेब से हाथ बाहर रखने की भी हिदायत दी। अतिक्रमण, दस्तावेज और सड़क से जुड़ी शिकायतें शिविर में अतिक्रमण, सड़क, व्यक्तिगत दस्तावेज, सामाजिक न्याय और सरकारी योजनाओं से संबंधित मामले सामने आए। कलेक्टर शिवम वर्मा ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि मौके पर निराकरण योग्य मामलों को तत्काल हल किया जाए और अन्य प्रकरणों का निर्धारित समय-सीमा में निराकरण सुनिश्चित किया जाए। सीएम हेल्पलाइन सहित अन्य माध्यमों से लंबित शिकायतों के समाधान पर भी विशेष जोर दिया गया। महापौर भार्गव ने कहा कि मुख्यमंत्री जनविश्वास अभियान का उद्देश्य सरकार और आम नागरिकों के बीच सीधा संवाद स्थापित करना है। अधिकारियों को लोगों की समस्याएं गंभीरता से सुनकर उनके समाधान में लापरवाही नहीं बरतनी चाहिए। योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने पर जोर कैबिनेट मंत्री तुलसीराम सिलावट ने कहा कि अभियान के माध्यम से लोगों की समस्याएं सीधे सुनी जा रही हैं और उनके समाधान के लिए कार्रवाई की जा रही है। प्रधानमंत्री और भाजपा सरकार की योजनाओं का लाभ अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाना सरकार की प्राथमिकता है। अभियान के तहत जनप्रतिनिधियों और जिला स्तरीय वरिष्ठ अधिकारियों ने क्षेत्र की विभिन्न शासकीय एवं जनसेवा संस्थाओं का निरीक्षण भी किया। टीम ने मुख्यमंत्री संजीवनी क्लिनिक, शासकीय हिंदी प्राथमिक विद्यालय, संदीपनी विद्यालय, लोकमान्य तिलक सहकारी उपभोक्ता भंडार, आरोग्य अस्पताल और आंगनबाड़ी केंद्रों सहित अन्य संस्थाओं की व्यवस्थाओं का जायजा लिया।
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