Friday, July 17, 2026
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उदयपुर से सिरोही, गुजरात जाना महंगा होगा: ईडर, गोगुंदा और डाकनकोटड़ा टोल पर NHAI ने बढ़ाई दरें; जानिए- कितने रुपए देने होंगे – Udaipur News




नेशनल हाईवे ऑथोरिटी ऑफ इंडिया (NHAI) ने उदयपुर से अलग-अलग शहरों के लिए जाने वाले नेशनल हाईवे की टोल दरों में बढ़ोतरी की है। इसमें उदयपुर में पिंडवाडा, उदयपुर-ईडर और उदयपुर के देबारी से अहमदाबाद जाने वाले काया बाईपास पर बने टोल प्लाजा शामिल हैं। ये बढ़ोतरी 18 जुलाई से लागू होगी। ​NHAI की तरफ से जारी नोटिफिकेशन में टोल बूथ पर बढ़ोतरी की है। इसके तहत अब इन मार्गों से गुजरने वाले वाहनों का टोल चार्ज महंगा होगा। अलग-अलग टोल मैनेजमेंट और एनएचएआई से जारी नोटिफिकेशन के मुताबिक, ये बढ़ोतरी 5 से लेकर 20 रुपए तक की है। किसी प्लाजा पर कार, जीप पर 5 रुपए तो किसी पर मासिक शुल्क में 20 से 30 रुपए की बढ़ोतरी की है। गोगुंदा के जसवंतगढ़ टोल की नई दरें गोगुंदा-पिंडवाडा के बीच मालेरा टोल की नई दरें देबारी-काया के बीच डाकनकोटड़ा टोल की नई दरें उदयपुर-ईडर के बीच पीपलवास टोल की नई दरें उदयपुर-ईडर के बीच करेल टोल की नई दरें कैसे तय होता है टोल रेट टोल टैक्स की दरें होलसेल प्राइस इंडेक्स (WPI) के आधार पर तय की जाती हैं। हर साल के अंत में इंडेक्स का मूल्यांकन कर सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय नए रेट जारी करता है। टोल की राशि सड़क की लंबाई और उस पर बने इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे फ्लाईओवर, अंडरपास, टनल के आधार पर भी तय होती हैं। जहां ज्यादा सुविधाएं होती हैं, वहां टोल भी अधिक लगता है।



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घर में घुसकर महिला पर धारदार हथियार से हमला: आजमगढ़ के पवई थाना क्षेत्र में हुई घटना, मामले की छानबीन में जुटी पुलिस – Azamgarh News




आजमगढ़ के पवई थाना क्षेत्र में गुरुवार की देर रात अज्ञात हमलावरों ने घर में घुसकर महिला पर धारदार हथियार से हमला कर दिया। गंभीर रूप से घायल महिला को निजी अस्पताल में इलाज के लिए भर्ती कराया गया है। यह घटना गुरुवार की रात 11बजे के लगभग की बताई जा रही है। पवई थाना क्षेत्र की रहने वाली दुर्गावती 48 पत्नी स्वर्गीय राजेंद्र प्रसाद अपने घर में अकेली रहती थी। दुर्गावती ने अपने घर का दरवाजा अंदर से बंद रखा था इसी दौरान अज्ञात हमलावर उनके घर पहुंचे और धारदार हथियार से गर्दन और हाथ पर चाकू से हमला कर दिया। महिला की की पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। लेकिन मुख्य दरवाजा अंदर से बंद होने के कारण कोई भी अंदर नहीं जा सका। आसपास के लोगों ने मामले की सूचना पुलिस को दी मौके पर पहुंची पुलिस ने पड़ोसियों की मदद से दरवाजा खुलवाया और दूसरी मंजिल पर महिला खून से लथपथ हालत में मिली। ग्रामीणों की मदद से पुलिस ने गंभीर रूप से घायल महिला को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र भेजा। जहां डॉक्टरों ने हालत गंभीर देखते हुए रेफर कर दिया इसके बाद महिला को जौनपुर जिले के शाहगंज में एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया है। जहां महिला का इलाज चल रहा है। मौके पर पहुंची पुलिस जांच में जुटी
मामले की सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस मामले की छानबीन में जुड़ गई है। पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का निरीक्षण किया है। इसके साथ ही आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज की तलाश की जा रही है। वही इस मामले में घायल महिला के भाई बृजेश दौड़ने पुलिस को शिकायती पत्र दिया है। पुलिस मामले की छानबीन में जुटी हुई है।



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धार में 9 दिन से बारिश नहीं, सोयाबीन मुरझाने लगी: तेज धूप से खेत सूख रहे, किसानों को बड़े नुकसान की आशंका – Dhar News




धार शहर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में पिछले नौ दिनों से बारिश पूरी तरह थमी हुई है। लगातार तेज धूप और बढ़ती गर्मी के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। शुरुआती बारिश के बाद अच्छी बढ़वार कर रही सोयाबीन की फसल अब नमी की कमी से प्रभावित होने लगी है। खेतों की मिट्टी सूख रही है और कई स्थानों पर फसल मुरझाने के संकेत दिखाई देने लगे हैं। नमी की कमी से प्रभावित हो रही फसल बारिश नहीं होने से खेतों में लगातार नमी कम हो रही है। किसान फिलहाल खेतों में खरपतवार हटाने का काम कर रहे हैं, लेकिन उनकी सबसे बड़ी चिंता फसल को बचाने की है। यदि अगले कुछ दिनों तक अच्छी बारिश नहीं हुई, तो सोयाबीन की पैदावार पर गंभीर असर पड़ सकता है। किसानों की बढ़ी चिंता किसान महेंद्र सिंह राजपूत ने बताया कि पिछले नौ दिनों से बारिश नहीं होने के कारण खेत सूखने लगे हैं और सोयाबीन की फसल मुरझाने की कगार पर पहुंच गई है। उनका कहना है कि यदि जल्द अच्छी बारिश नहीं हुई तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। आम जनजीवन भी प्रभावित बारिश थमने के साथ ही जिले में तेज धूप और उमस भरी गर्मी का असर आम जनजीवन पर भी दिखाई देने लगा है। दोपहर के समय सड़कों पर आवाजाही कम हो गई है और लोग गर्मी से परेशान हैं। किसानों के साथ-साथ आम लोगों की नजरें भी अब मानसून की वापसी पर टिकी हैं।



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भोजपुर में करंट लगने से किसान की मौत: बारिश के बीच घर से बाहर निकले थे, बिजली के पोल में हाथ सटने से लगा झटका – Bhojpur News




भोजपुर में करंट लगने से किसान की मौत हो गई। मृतक की पहचान डुमरिया गांव निवासी कुंवर यादव(52) के तौर पर हुई है। घटना शाहपुर थाना क्षेत्र की है। मृतक के बेटे बबलू यादव ने बताया कि घर बाहर ही बिजली का पोल गड़ा हुआ है। तेज बारिश हो रही थी। इसी बीच पिताजी बाहर चले गए। वापस लौटते समय उनका हाथ पोल में सट गया। झटका लगते ही जमीन पर गिर पड़े। कुछ देर बाद मैं जब बाहर निकला, देखा कि मृत अवस्था में पड़े हुए हैं। जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। घर में मचा कोहराम सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने परिजनों को शव सौंप दिया। मृतक पांच भाई-बहन में तीसरे नंबर पर थे। परिवार में पत्नी धमरजिया देवी, चार पुत्र पवन यादव, बबलू यादव, पप्पू यादव, राजा यादव और एक पुत्री रेखा कुमारी है। मौत के बाद घर में कोहराम मच गया। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है।



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सरकार मानसून सत्र में 7 बिल ला सकती है: वंदे मातरम के अपमान और विदेशी चंदे पर सख्ती की तैयारी; सत्र 20 जुलाई से शुरू होगा


नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले

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20 जुलाई से शुरू होने वाले संसद के मानसून सत्र सरकार लोकसभा में सात अहम बिल पेश कर सकती है। न्यूज एजेंसी PTI के मुताबिक सरकार ने वंदे मातरम के अपमान और विदेशी चंदा कानून में संशोधन से जुड़ा बिल लिस्ट किया है।

लोकसभा में पेश किए जाने वाले सात बिलों में विदेशी चंदा कानून में संशोधन (FCRA), वंदे मातरम को कानूनी सुरक्षा, हायर एजुकेशन सिस्टम में बड़ा बदलाव, सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या बढ़ाने, जन्म-मृत्यु पंजीकरण, MSME और इनकम टैक्स से जुड़े संशोधन शामिल हैं।

वहीं 13 अगस्त तक चलने वाले मानसून सत्र में कांग्रेस समेत विपक्षी दल NEET-UG पेपर लीक, अन्य भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी, अयोध्या राम मंदिर दान विवाद, E20 ईंधन और विदेश नीति जैसे मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारी में हैं।

सुप्रीम कोर्ट में बढ़ेंगे जज, इनकम टैक्स में होगा बदलाव, 7 बिल के बारे में जानें…

1. FCRA कानून में होंगे बड़े बदलाव

  • फॉरेन कंट्रीब्यूशन (रेगुलेशन) संशोधन बिल, 2026 से विदेश से मिलने वाले चंदे के इस्तेमाल में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
  • नए नियमों के मुताबकि, अगर किसी संस्था का FCRA रजिस्ट्रेशन खत्म हो जाता है और उसका नवीनीकरण नहीं होता या सरकार उसे नवीनीकरण देने से इनकार कर देती है।
  • ऐसे स्थिति में उस संस्था को मिले विदेशी चंदे और उससे बनी संपत्तियों की निगरानी सरकार कर सकेगी। जरूरत पड़ने पर सरकार इन संपत्तियों को अपने नियंत्रण में भी ले सकेगी। इसके लिए एक अलग अथॉरिटी भी बनाई जाएगी।
  • इस बिल का केरल के कई ईसाई संगठनों और गैर-सरकारी संस्थाओं (NGO) ने विरोध किया है। उनका कहना है कि इससे उनके कामकाज पर असर पड़ सकता है। हाल ही में ईसाई नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर अपनी चिंताएं भी बताई थीं।

2. वंदे मातरम को मिलेगी कानूनी सुरक्षा

  • राष्ट्रीय सम्मान के अपमान की रोकथाम (संशोधन) विधेयक, 2026 का मकसद वंदे मातरम को भी जन गण मन की तरह कानूनी सुरक्षा देना है।
  • अगर यह बिल कानून बन जाता है, तो जानबूझकर वंदे मातरम का अपमान करने, उसके गायन में बाधा डालने या उसका अनादर करने पर उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी। इसे दंडनीय अपराध माना जाएगा।

3. उच्च शिक्षा के नियामक ढांचे में बड़ा बदलाव

  • विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान विधेयक, 2025 को पहले हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया (HECI) बिल के नाम से जाना जाता था।
  • इस बिल के तहत UGC, AICTE और NCTE की जगह उच्च शिक्षा के लिए एक ही नियामक संस्था बनाई जाएगी। इसके दायरे में पहली बार राष्ट्रीय महत्व के संस्थानों (INI) को भी शामिल किया जाएगा।
  • हालांकि, इस बिल के एक प्रावधान को लेकर विवाद है। इसमें कहा गया है कि नए आयोग को केंद्र सरकार के नीति संबंधी निर्देश मानने होंगे। अगर किसी मुद्दे पर आयोग और सरकार के बीच मतभेद होता है तो सरकार का फैसला अंतिम होगा।
  • सरकार का कहना है कि इस व्यवस्था से मौजूदा कानूनों में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा। इस विधेयक की समीक्षा संयुक्त संसदीय समिति (JPC) पहले ही कर चुकी है।

4. इनकम टैक्स कानून में भी संशोधन

  • इनकम टैक्स (संशोधन) विधेयक, 2026 पहले जारी किए गए अध्यादेश की जगह लेगा। सरकार का कहना है कि इस कानून का मकसद विदेशी निवेशकों को भारत की सरकारी प्रतिभूतियों (G-Secs) में निवेश के लिए प्रोत्साहित करना है।
  • इससे भारत का सरकारी कर्ज (सॉवरेन डेट) बाजार मजबूत होगा और दुनिया में आर्थिक अनिश्चितता के बावजूद देश में विदेशी निवेश बढ़ाने में मदद मिलेगी।

5. सुप्रीम कोर्ट में बढ़ेंगे जज

  • सुप्रीम कोर्ट (जजों की संख्या) संशोधन विधेयक, 2026 के जरिए सुप्रीम कोर्ट में जजों की संख्या 33 से बढ़ाकर 37 करने के अध्यादेश को कानून का रूप दिया जाएगा।

6. जन्म और मृत्यु पंजीकरण के नियम होंगे सख्त

  • जन्म और मृत्यु पंजीकरण (संशोधन) विधेयक, 2026 के अनुसार, अगर जन्म या मृत्यु की जानकारी दो साल से ज्यादा देर से दी जाती है, तो उसका रजिस्ट्रेशन सिर्फ प्रथम श्रेणी के न्यायिक मजिस्ट्रेट के आदेश के बाद ही हो सकेगा।
  • अभी ऐसे मामलों में जिला मजिस्ट्रेट (DM), एसडीएम या कार्यपालक मजिस्ट्रेट की परमिशन से भी जन्म या मृत्यु का रजिस्ट्रेशन कराया जा सकता है। इस बिल के लागू होने पर यह अधिकार केवल न्यायिक मजिस्ट्रेट के पास होगा।

7. MSME के लिए भुगतान व्यवस्था होगी मजबूत

  • माइक्रो, स्मॉल एंड मीडियम एंटरप्राइजेज (MSME) डेवलपमेंट संशोधन विधेयक, 2026 का मकसद बदलते कारोबारी माहौल के हिसाब से MSME कानून को और बेहतर बनाना है।
  • इस बिल के तहत छोटे उद्योगों को समय पर पेमेंट न मिलने से जुड़े विवादों के निपटारे की व्यवस्था मजबूत की जाएगी। साथ ही मध्यस्थता के फैसलों को ज्यादा प्रभावी बनाया जाएगा।
  • इसके अलावा, राज्यों को माइक्रो और स्मॉल एंटरप्राइजेज फैसिलिटेशन काउंसिल (MSEFC) की संख्या बढ़ाने की परमिशन मिलेगी, ताकि विवादों का जल्दी समाधान हो सके।
  • सरकार का कहना है कि इससे कारोबार करना आसान होगा और MSME क्षेत्र में भरोसे पर आधारित व्यवस्था विकसित होगी।



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अमेरिका ने लगातार छठी रात ईरान पर एयरस्ट्राइक की: भारत के निवेश वाले चाबहार पोर्ट पर अटैक, कंट्रोल टावर को बनाया निशाना




अमेरिका ने लगातार छठी रात ईरान पर बड़े पैमाने पर एयरस्ट्राइक की। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बताया कि फाइटर जेट, ड्रोन और युद्धपोतों से ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर हमला किया गया। इसी दौरान भारत के निवेश वाले चाबहार पोर्ट पर भी मिसाइल हमला हुआ। ईरानी समाचार एजेंसी मेहर के मुताबिक, पोर्ट के मैरिटाइम कंट्रोल टावर को निशाना बनाया गया। पिछले एक हफ्ते में इस टावर पर यह तीसरा हमला है। CENTCOM ने कहा कि हमलों में तटीय निगरानी केंद्र, एयर डिफेंस सिस्टम, सैन्य लॉजिस्टिक्स और समुद्री सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया गया। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स… 1. ईरान बोला- अमेरिकी सैनिकों का कत्लेआम होगा: ईरानी सांसद बेहनाम सईदी ने अमेरिका को धमकी देते हुए कहा कि अगर अमेरिका ने ईरान पर जमीनी हमला किया, तो अमेरिकी सैनिकों का कत्लेआम कर दिया जाएगा। 2. बाब अल-मंदेब स्ट्रेट पर खतरा बढ़ा: ईरान ने यमन के हूती विद्रोहियों से कहा है कि अगर अमेरिका ईरान के बिजली ढांचे पर हमला करता है तो वे बाब अल-मंदेब स्ट्रेट को बंद करने के लिए तैयार रहें। 3. होर्मुज स्ट्रेट से सिर्फ 9 जहाज गुजरे: समुद्री डेटा कंपनी केप्लर के आंकड़ों के मुताबिक बुधवार को सिर्फ 9 जहाजों ने होर्मुज पार किया। मंगलवार को यह संख्या 13 थी। 4. होर्मुज में भारतीय नाविकों की तैनाती नहीं होगी: भारत सरकार ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले जहाजों पर भारतीय नाविकों की तैनाती फिलहाल रोकने के निर्देश दिए हैं। 5. कुवैत और बहरीन में अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमला: ईरान ने कुवैत और बहरीन स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर ड्रोन हमले किए गए। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…



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Recipe: बारिश में बनाएं छत्तीसगढ़ की देसी मछली की सब्जी, भात के साथ मिलेगा लाजवाब स्वाद


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बारिश में बनाएं देसी मछली की सब्जी, भात के साथ मिलेगा लाजवाब स्वाद

 

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Fish Recipe: बिलासपुर समेत छत्तीसगढ़ के ग्रामीण इलाकों में बारिश का मौसम पारंपरिक खानपान का खास समय माना जाता है. इस दौरान नदियों और तालाबों का पानी खेतों तक पहुंचने पर कोतरी, लपची और टेंगना जैसी छोटी मछलियां खेतों में आ जाती हैं. ग्रामीण इन्हें पकड़कर देसी मसालों के साथ स्वादिष्ट मिक्स मछली की सब्जी तैयार करते हैं. इस रेसिपी की खासियत आमा खोईला (अमचूर) का उपयोग है, जो इसका स्वाद और बढ़ा देता है. सब्जी बनाने के लिए सबसे पहले मछलियों को अच्छी तरह साफ कर नमक और हल्दी लगाकर कुछ देर रखा जाता है. इसके बाद इन्हें तेल में सुनहरा और कुरकुरा होने तक तल लिया जाता है. फिर कड़ाही में तेल गर्म कर जीरा, हरी मिर्च और आमा खोईला का तड़का लगाया जाता है. इसमें टमाटर, कसूरी मेथी, हल्दी, लाल मिर्च, नमक और गरम मसाला डालकर मसाला अच्छी तरह पकाया जाता है. आखिर में पानी और तली हुई मछलियां डालकर 5–7 मिनट तक धीमी आंच पर पकाया जाता है. यह पारंपरिक छत्तीसगढ़िया डिश गरम भात के साथ परोसी जाती है और बरसात में लोगों की पसंदीदा रेसिपी मानी जाती है.

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करोड़ों की कमाई पर भी ₹0 टैक्स! भारत का वो राज्य जहां नहीं देना होता टैक्‍स


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income Tax Exemption : इनकम टैक्‍स रिटर्न दाखिल करने का सीजन चल रहा है. देश का हर आदमी, जिसकी वार्षिक आय एक तय सीमा से ज्‍यादा है, उसे इनकम टैक्‍स देना होता है. लेकिन, एक राज्‍य ऐसा भी है, जहां करोड़ों रुपये सालाना कमाने वाला भी सरकार को आयकर के रूप में एक पैसा भी नहीं देता. ऐसा क्‍यों है, आइये जानते हैं.

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सिक्किम में टैक्स न लगने की कहानी साल 1948 से जुड़ी है.

नई दिल्‍ली. न्यू टैक्स रिजीम के तहत अब 12 लाख रुपये तक की सालाना कमाई टैक्स फ्री हो चुकी है. इससे ज्यादा कमाने पर आपको सरकार को टैक्‍स देना पड़ता है. लेकिन, क्‍या आप जानते हैं कि भारत में राज्‍य ऐसा भी है, जहां यह नियम बेअसर है. वहां रहने वाले लोग चाहे करोड़ों कमाएं या अरबों, उन्हें सरकार को एक रुपया भी टैक्स नहीं देना पड़ता. यह अनोखा राज्य सिक्किम है. यहां के 95 फीसदी निवासियों को इनकम टैक्स से 100% छूट मिली हुई है.

सिक्किम को भारत का ‘टैक्स हेवन’ भी कहा जाता है. यहां के मूल निवासियों को यह छूट आज से नहीं, बल्कि भारत में सिक्किम के विलय के समय से ही मिली हुई है. हालांकि, अब इस टैक्स छूट पर सवाल भी उठने लगे हैं. इस खास रियायत को बंद करने की मांग तेज हो रही है. आरोप है कि बाहरी लोग भी टैक्स बचाने के लिए सिक्किम के इस नियम का गलत इस्तेमाल कर रहे हैं.

इतिहास में छुपा है टैक्‍स फ्री होने का राज

सिक्किम में टैक्स न लगने की कहानी साल 1948 से जुड़ी है. तब सिक्किम के चोग्याल शासक ने एक इनकम टैक्स मैनुअल जारी किया था. इसके मुताबिक, राज्य के लोगों से कोई टैक्स नहीं लिया जाता था. साल 1975 में जब सिक्किम का भारत में पूर्ण विलय हुआ, तो यह शर्त रखी कि उनकी पुरानी टैक्स छूट जारी रहेगी. भारत सरकार ने इस शर्त को स्वीकार कर लिया. संविधान के आर्टिकल 371-एफ के तहत सिक्किम को विशेष दर्जा दिया गया. इसी लिए आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 10 (26एएए) के तहत सिक्किम के मूल निवासियों को टैक्स छूट दी गई है.

95 फीसदी आबादी टैक्‍स छूट के दायरे में

पहले केवल सिक्किम सब्जेक्ट सर्टिफिकेट रखने वालों को ही मूल निवासी माना जाता था. इन्‍ही को केवल इनकम टैक्‍स नहीं देना होता था. लेकिन, सुप्रीम कोर्ट के एक फैसले के बाद सिक्किम की 95 फीसदी आबादी टैक्‍स छूट के दायरे में आ गई. कोर्ट ने आदेश दिया कि 26 अप्रैल 1975 यानी भारत में विलय से ठीक एक दिन पहले तक, सिक्किम में बस चुके भारतीय मूल के लोग भी वहां के मूल निवासी हैं.



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बड़ा हादसा टला: खेत में धान रोपाई के दौरान गिरा तार, ग्रामीणों ने डिस्कॉम से सप्लाई बंद करवाई – jhalawar News



पनवाड़ जीएसएस के पास चौथ माता मंदिर के पीछे एक खेत में गुरुवार को बड़ा हादसा टल गया। खेत में धान की रोपाई कर रहे 21 मजदूर उस समय बाल-बाल बच गए, जब चालू बिजली लाइन का तार सुबह 11 बजे अचानक टूटकर खेत में गिर गया। तार गिरते ही तेज स्पार्किंग शुरू हो गई। मजदूरों ने तुरंत खेत से बाहर भागकर जान बचाई। ग्रामीणों ने जयपुर डिस्कॉम को बताया और संबंधित फीडर की सप्लाई तुरंत बंद करवाई। समय रहते बिजली बंद होने से कोई जनहानि नहीं हुई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि कुछ पल की देरी होती तो करंट लग सकता था। खेत में पानी भरा होने से खतरा ज्यादा था। मजदूरों की सतर्कता से सभी सुरक्षित रहे। घटना के बाद ग्रामीणों में जर्जर लाइनों को लेकर नाराजगी दिखी। ग्रामीणों ने लाइनों की नियमित जांच, मरम्मत, समय पर बदलाव की मांग की। हादसे के समय खेत में जगदीश नाथ, मुकेश, धनी बाई, माया बाई, लक्ष्मण बाई, सुगनी बाई, रवीना बाई, राजाराम, मनीष, विनोद, भोजराज, राम, जोतिया बाई, महावीर, आरती बाई, प्रहलाद, हुकमचंद सहित कुल 21 मजदूर काम कर रहे थे। तार गिरते ही सभी सुरक्षित जगह पहुंच गए। जयपुर डिस्कॉम के पनवाड़ जेईएन यशवंत सिहगवार ने कहा कि चालू लाइन का तार टूटने की जानकारी नहीं है। जल्द ही लाइनों के मेंटिनेंस का प्रपोजल तैयार किया जाएगा।



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संतों के श्रीमुख से गूंजेगा ब्रज की स्वच्छता का संदेश: प्रवचन,सत्संग और श्रीमद्भागवत कथाओं के माध्यम से श्रद्धालुओं को दिलाया जाएगा संकल्प – Mathura News




ब्रज की स्वच्छता को जनआंदोलन का स्वरूप देने की दिशा में अब संत समाज भी सक्रिय भूमिका निभाएंगे। गुरुवार की देर शाम को वृंदावन स्थित गीता शोध संस्थान में ‘हम सबने यह ठाना है, ब्रज को स्वच्छ बनाना है’ महाअभियान के अंतर्गत उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद की पहल पर संत, महंत एवं भागवताचार्यों की बैठक आयोजित की गई। बैठक में उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र की मौजूदगी में मंडलायुक्त नगेंद्र प्रताप, नगर आयुक्त ओजस्वी राज सहित प्रशासनिक अधिकारियों ने अभियान की रूपरेखा प्रस्तुत करते हुए संत समाज से सुझाव प्राप्त किए। बैठक में तय किया गया कि अब संत, महंत एवं भागवताचार्य अपने प्रवचनों, सत्संगों, श्रीमद्भागवत कथाओं एवं अन्य धार्मिक आयोजनों के माध्यम से श्रद्धालुओं को ब्रज की स्वच्छता एवं पवित्रता का संदेश देंगे तथा उन्हें स्वच्छता का संकल्प भी दिलाएंगे। संत करेंगे अपील संत समाज श्रद्धालुओं से अपील करेगा कि वे ब्रज में कहीं भी कूड़ा न फैलाएं, एकल-उपयोग प्लास्टिक का प्रयोग न करें तथा यमुना तट, कुंडों, घाटों, परिक्रमा मार्गों और सभी धार्मिक स्थलों की स्वच्छता बनाए रखने में अपना सक्रिय योगदान दें। बैठक में यह भी कहा गया कि प्रतिवर्ष करोड़ों श्रद्धालु ब्रजधाम आते हैं। यदि संत समाज अपने आध्यात्मिक मंचों से स्वच्छता का संदेश देगा तो यह अभियान जन-जन तक पहुंचेगा और एक व्यापक जनआंदोलन का रूप ले सकेगा। संतों ने दिया आश्वासन बैठक में संत समाज ने वृंदावन में गंदगी और सफाई व्यवस्था को लेकर चिंताजनक स्थिति पर कड़ी नाराजगी जाहिर की। साथ ही यह भी कहा कि स्वच्छता केवल प्रशासन की जिम्मेदारी नहीं, बल्कि हमारा और प्रत्येक श्रद्धालु का धार्मिक कर्तव्य है। भगवान श्रीकृष्ण की लीलास्थली को स्वच्छ रखना उनकी सेवा, ब्रज रज का सम्मान और अपनी आस्था के प्रति सच्ची श्रद्धा का प्रतीक है। सभी संतों ने अभियान को पूर्ण सहयोग देने का आश्वासन दिया। यह रहे मौजूद हम सबने यह ठाना है, ब्रज को स्वच्छ बनाना है’ महाअभियान उत्तर प्रदेश ब्रज तीर्थ विकास परिषद, जिला प्रशासन, नगर निगम एवं हार्टफुलनेस संस्था के संयुक्त तत्वावधान में विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं स्वयंसेवी संगठनों के सहयोग से संचालित किया जा रहा है। बैठक में महंत फूलडोल बिहारी दास महाराज, महंत हरिशंकर दास नागा महाराज, महंत सनत दास महाराज, संत गोविंदानंद तीर्थ महाराज, महंत राम स्वरूप ब्रह्मचारी महाराज, संत रामदेवानंद सरस्वती महाराज, महंत सुंदर दास महाराज, महंत लाडली दास महाराज, संत सच्चिदानंद दास महाराज, संत मदन मोहन दास, संत लाडली शरण दास महाराज,महा मंडलेश्वर नवल गिरी महाराज,समाजसेवी कपिल देव उपाध्याय , हार्टफुलनेस संस्था से निशांत शर्मा आदि लोग उपस्थित रहे। मुख्यमंत्री की मंशा ब्रज के स्वच्छता अभियान से जुड़े संत समाज : शैलजाकांत मिश्र ब्रज तीर्थ विकास परिषद के उपाध्यक्ष शैलजाकांत मिश्र ने कहा कि मुख्यमंत्री की मंशा है कि ब्रज की स्वच्छता को सेवा और जनभागीदारी का अभियान बनाया जाए। इससे संत समाज को भी जोड़ा जाए। उन्होंने कहा कि श्रद्धालु जब स्वच्छ और सुंदर ब्रज देखेंगे तो उनकी आस्था और भी प्रगाढ़ होगी। उन्होंने संतों से आह्वान किया कि आश्रमों, मंदिरों एवं भंडारों से ही स्वच्छता की शुरुआत करें और अपने प्रभाव क्षेत्र में लोगों को प्रेरित करें। उन्होंने कहा कि मथुरा में सीमित सफाईकर्मी हैं, इसलिए जनसहयोग ही इस अभियान की सबसे बड़ी ताकत बनेगा।



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