जलशक्ति विभाग के कैबिनेट मंत्री स्वतंत्र देव सिंह 19 और 20 सितंबर को मिर्जापुर दौरे पर रहेंगे। तय कार्यक्रम के अनुसार मंत्री 19 सितंबर की रात विंध्याचल स्थित अष्टभुजा गेस्ट हाउस पहुंचेंगे और वहीं रात्रि विश्राम करेंगे। अगले दिन वे विभागीय अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक करेंगे। इसके बाद चुनार के कैलहट में आयोजित ‘चुनार के रतन’ पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में शामिल होंगे। मंत्री 19 सितंबर को सुबह 11 बजे मथुरा के वृंदावन स्थित पीडब्ल्यूडी गेस्ट हाउस से मिर्जापुर के लिए रवाना होंगे। वे आगरा-लखनऊ एक्सप्रेसवे, गंगा एक्सप्रेसवे और गोपीगंज होते हुए कार से रात करीब 8:30 बजे विंध्याचल के अष्टभुजा गेस्ट हाउस पहुंचेंगे। यहां रात्रि विश्राम के बाद अगले दिन का कार्यक्रम शुरू होगा। 20 सितंबर को सुबह 10:30 से 11:30 बजे तक अष्टभुजा गेस्ट हाउस में अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक होगी। इसमें सिंचाई एवं जल संसाधन, सिंचाई यांत्रिक, बाढ़ नियंत्रण, परती भूमि विकास, लघु सिंचाई, भूगर्भ जल, नमामि गंगे और जल जीवन मिशन से जुड़े अधिकारी शामिल होंगे। बैठक में विभागीय योजनाओं और विभिन्न कार्यों की प्रगति की समीक्षा की जाएगी। सिंचाई से लेकर जल जीवन मिशन तक योजनाओं की होगी समीक्षा समीक्षा बैठक में सिंचाई एवं जल संसाधन विभाग के साथ सिंचाई यांत्रिक, बाढ़ नियंत्रण, परती भूमि विकास, लघु सिंचाई और भूगर्भ जल विभाग के अधिकारी मौजूद रहेंगे। नमामि गंगे और जल जीवन मिशन से जुड़े अधिकारी भी बैठक में शामिल होंगे। मंत्री संबंधित योजनाओं और चल रहे कार्यों की प्रगति की जानकारी लेंगे। कैलहट में ‘चुनार के रतन’ पुस्तक का करेंगे विमोचन समीक्षा बैठक के बाद मंत्री सुबह 11:40 बजे चुनार के लिए रवाना होंगे। दोपहर एक बजे तक वे कैलहट स्थित राजदीप महाविद्यालय पहुंचेंगे। यहां ‘चुनार के रतन’ पुस्तक के विमोचन कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। कार्यक्रम के आयोजक राजेश पटेल और सुरेंद्र सिंह पटेल हैं। ग्राम ओड़ी में भी तय है कार्यक्रम दोपहर तीन बजे मंत्री कैलहट से जमालपुर ब्लॉक के ग्राम ओड़ी के लिए रवाना होंगे। यहां उनका कार्यक्रम दोपहर 3:45 बजे से शाम 5 बजे तक रहेगा। इसके बाद शाम 5 बजे वे मिर्जापुर से वाराणसी के लिए रवाना होंगे और रामनगर के रास्ते शाम 6:30 बजे वाराणसी सर्किट हाउस पहुंचेंगे। 21 सितंबर को चार जिलों के जल संसाधन कार्यों की समीक्षा मंत्री 21 सितंबर को भी वाराणसी में समीक्षा बैठक करेंगे। सुबह 11 बजे वाराणसी सर्किट हाउस में होने वाली बैठक में मिर्जापुर, सोनभद्र, प्रयागराज और चंदौली में स्थित बांध, बंधी, तालाब और जलाशयों से जुड़े कार्यों की समीक्षा की जाएगी। बैठक के बाद दोपहर एक बजे मंत्री वाराणसी से अगले गंतव्य के लिए रवाना होंगे।
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जलशक्ति मंत्री स्वतंत्र देव सिंह मिर्जापुर में करेंगे विभागीय समीक्षा: 20 सितंबर को पुस्तक विमोचन भी, 19 और 20 को जिले में रहेंगे – Mirzapur News
जिला-स्तरीय शैक्षिक सम्मेलन में शिक्षकों की समस्याओं पर हुआ मंथन: रेसटा विभाग को तबादले और प्रमोशन को लेकर ज्ञापन देंगे – Tonk News
शिक्षक संघ एलीमेंट्री सेकेंडरी टीचर एसोसिएशन (रेसटा) राजस्थान जिला शाखा टोंक का जिला स्तरीय शैक्षिक सम्मेलन आचार संहिता का पालन करते हुए स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल, टोडारायसिंह में आयोजित हुआ। सम्मेलन का शुभारंभ जिलाध्यक्ष देवेन्द्र प्रताप जाट, प्रधानाचार्य जगदीश प्रसाद टाण्डी एवं व्याख्याता प्रदीप टाण्डी ने मां सरस्वती की प्रतिमा के समक्ष दीप प्रज्ज्वलित कर किया। सम्मेलन में उपाध्यक्ष प्रधान चौपड़ा, वरिष्ठ उपाध्यक्ष रत्तिराम जांगिड़, कनिष्ठ सहायक बद्रीलाल कुम्हार, प्रयोगशाला सहायक प्रतिनिधि शिवजीराम बलोदा सहित बड़ी संख्या में शिक्षक शामिल हुए। इस दौरान शिक्षकों ने शिक्षा विभाग से संबंधित विभिन्न समस्याओं और लंबे समय से लंबित मांगों को संगठन के सामने रखा गया। तबादले और पदोन्नति प्रक्रिया जल्द पूरी करने की मांग जिलाध्यक्ष देवेन्द्र प्रताप ने बताया- सम्मेलन में शिक्षकों की समस्याओं और मांगों को विभाग के उच्च अधिकारियों एवं राज्य सरकार तक पहुंचाने का निर्णय लिया गया है। उन्होंने कहा कि शिक्षकों की जायज मांगों को लेकर संगठन लगातार प्रयासरत है। शिक्षकों ने तृतीय श्रेणी शिक्षकों के तबादले करने, बकाया छह सत्रों की पदोन्नति प्रक्रिया जल्द पूरी करने और विभिन्न संवर्गों की लंबित डीपीसी एवं पदोन्नति प्रक्रिया शीघ्र संपन्न करवाने की मांग की। साथ ही पदोन्नत हुए व्याख्याताओं के भी तबादले करने की मांग रखी गई। पे-प्रोटेक्शन आदेश वापस लेने की मांग सम्मेलन में पे-प्रोटेक्शन संबंधी आदेश प्रत्याहारित करने और शिक्षकों की वेतन विसंगतियां दूर करने की मांग की गई। शिक्षकों ने बीएड इंटर्नशिप के दौरान की जाने वाली वेतन कटौती के आदेश निरस्त करने की मांग भी उठाई। इसके अलावा उपार्जित अवकाश सहित सेवानिवृत्त होने वाले शिक्षकों के सभी भुगतान समय पर करने तथा ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाएं देने वाले शिक्षकों को 10 प्रतिशत अतिरिक्त परिवहन भत्ता देने की मांग की गई। रिक्त पदों को सीधी भर्ती से भरने पर जोर शिक्षकों ने शिक्षा विभाग में रिक्त पदों को सीधी भर्ती के माध्यम से भरने की मांग की। साथ ही प्राचार्य एवं डीईओ के 50 प्रतिशत पदों पर सीधी भर्ती की व्यवस्था लागू करने की मांग रखी गई। नव क्रमोन्नत उच्च माध्यमिक विद्यालयों में व्याख्याताओं के पद स्वीकृत करने की भी मांग की गई। जर्जर विद्यालयों के पुनर्निर्माण के लिए बजट की मांग सम्मेलन में जमींदोज विद्यालयों एवं कक्षा-कक्षों के पुनर्निर्माण के लिए पर्याप्त बजट जारी करने की मांग की गई। विद्यालयों में गैर-शैक्षणिक कार्यों के लिए अलग से पद सृजित करने तथा मॉडल स्कूल के जिन कार्मिकों का 5 साल का कार्यकाल पूरा हो गया है, उन्हें तुरंत रिलीव करने की मांग भी शिक्षकों ने रखी।
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मुरैना में 604.8 मिमी बारिश, पिछले साल से 328.5 कम: सबलगढ़ में सबसे ज्यादा 777.5 मिमी, अंबाह में सिर्फ 314 मिमी हुई – Morena News
मुरैना जिले में इस मानसून सीजन में 1 जून से 18 सितंबर तक औसतन 604.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है। यह पिछले साल की समान अवधि की तुलना में 328.5 मिलीमीटर कम है। पिछले साल इसी अवधि में जिले में 933.3 मिलीमीटर औसत बारिश हुई थी। जिले की सामान्य वार्षिक औसत बारिश 706.9 मिलीमीटर है। 18 सितंबर को जिले में औसतन 23.8 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। तहसीलवार आंकड़ों में सबसे ज्यादा बारिश सबलगढ़ में 106 मिलीमीटर हुई। इसके बाद मुरैना में 14, कैलारस में 10, पोरसा में 6, जौरा में 4 और अंबाह में 2.5 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई। सबलगढ़ में सबसे ज्यादा, अंबाह में सबसे कम 1 जून से 18 सितंबर तक तहसीलवार बारिश में सबलगढ़ 777.5 मिलीमीटर के साथ सबसे आगे है। जौरा में 719, कैलारस में 676, पोरसा में 612.5, मुरैना में 529.8 और अंबाह में 314 मिलीमीटर बारिश हुई है। तहसीलवार बारिश (मिमी में) जिले की सामान्य वार्षिक औसत बारिश 706.9 मिलीमीटर है। इस लिहाज से सबलगढ़ और जौरा में सामान्य वार्षिक औसत से अधिक बारिश हो चुकी है, जबकि कैलारस, पोरसा, मुरैना और अंबाह में यह आंकड़ा अभी सामान्य औसत से नीचे है।
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दिल्ली एयरपोर्ट पर स्पाइसजेट की कई उड़ानें प्रभावित: देरी-कैंसिलेशन से यात्री परेशान; 4 दिन पहले दुबई जाने वाली फ्लाइट 30 घंटे लेट हुई थी
दिल्ली के IGI एयरपोर्ट पर शनिवार को ऑपरेशनल दिक्कतों के चलते स्पाइसजेट की कई फ्लाइट्स प्रभावित हुईं। कुछ फ्लाइट्स में देरी हुई, जबकि कुछ रद्द भी की गईं। इसके कारण सैंकड़ों यात्री परेशान हुए। दिल्ली एयरपोर्ट ने सोशल मीडिया पोस्ट में घटना के लिए यात्रियों से माफी मांगी। एयरपोर्ट के मुताबिक, ग्राउंड स्टाफ प्रभावित यात्रियों को जरूरी मदद दे रहा है और स्पाइसजेट के साथ मिलकर काम कर रहा है। स्पाइसजेट की ओर से फिलहाल कोई बयान नहीं आया है। स्पाइसजेट की उड़ानों में पिछले कुछ दिनों में लगातार देरी की घटनाएं सामने आई हैं। 15 सितंबर को दिल्ली से दुबई जाने वाली दो फ्लाइट्स में घंटों की देरी हुई थी। इनमें एक फ्लाइट करीब 30 घंटे और दूसरी करीब 19 घंटे की देरी से रवाना हुई थी। इस दौरान करीब 200 यात्रियों ने एयरपोर्ट पर प्रदर्शन भी किया था। पहले से वित्तीय संकट से जूझ रही स्पाइसजेट स्पाइसजेट लंबे समय से वित्तीय और परिचालन चुनौतियों का सामना कर रही है। केंद्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री राम मोहन नायडू ने 3 सितंबर को बताया था कि सरकार एयरलाइंस के साथ हर महीने उनकी समस्याओं और चुनौतियों को लेकर चर्चा करती है। स्पाइसजेट के साथ भी संचालन बढ़ाने और उसकी वित्तीय स्थिति सुधारने को लेकर बातचीत की जा रही है। मंत्री के मुताबिक, सरकार स्पाइसजेट को अपना संचालन बढ़ाने के लिए लगातार कह रही है और एयरलाइन ने जल्द ऐसा करने का भरोसा दिया है। उन्होंने बताया कि स्पाइसजेट ने सरकार से किसी अतिरिक्त वित्तीय सहायता की मांग नहीं की है, लेकिन इमरजेंसी क्रेडिट लाइन गारंटी स्कीम (ECLGS) के जरिए फंड हासिल करने की कोशिश कर रही है। मई में एयरलाइंस के लिए ECLGS 5.0 को मंजूरी सरकार के मुताबिक, एयरलाइंस को बढ़ती ATF कीमतों, एयरस्पेस बंद होने, अंतरराष्ट्रीय उड़ानों में कमी, विमान के कम इस्तेमाल और नकदी की समस्या जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इन्हीं वित्तीय दबावों को देखते हुए मई में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने भारतीय एयरलाइंस को लक्षित कर्ज सहायता देने के लिए ECLGS 5.0 को मंजूरी दी थी। स्पाइसजेट के मामले में सरकार का फोकस एयरलाइन के संचालन को बढ़ाने के साथ उसकी वित्तीय परेशानियों को दूर करने पर है।
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मूली के पत्तों को न समझें बेकार! घर पर ऐसे बनाएं स्वादिष्ट भुजिया, स्वाद ऐसा..
Mooli Patta Bhujia Recipe : सर्दियों के मौसम में मूली से पराठे और सब्ज़ी जैसी कई डिशेज बनाई जाती हैं. लेकिन, मूली के हरे पत्तों को अक्सर बेकार समझकर फेंक दिया जाता है. अगर आप भी ऐसा करते हैं, तो अगली बार पत्तों को फेंकने के बजाय बचाकर रखें. इनसे आप घर पर ही स्वादिष्ट और चटपटी भुजिया बना सकते हैं. यह डिश रोटी, पराठे या दाल-चावल के साथ बहुत अच्छी लगती है. सबसे अच्छी बात यह है कि इसे बनाने में बहुत कम समय और आसान चीज़ें लगती हैं…
सामग्री
2 कप मूली के पत्ते, 1-2 हरी मिर्च, कटे हुए धनिया के पत्ते, 1 छोटा प्याज़, कटी हुई लाल मिर्च, 3-4 कलियां लहसुन, 1/2 छोटा चम्मच जीरा, 1/4 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर, 1/2 छोटा चम्मच धनिया पाउडर, नमक, 1-2 बड़े चम्मच लहसुन वाला तेल, थोड़ा सा अमचूर पाउडर.
भुजिया कैसे बनाएं
मूली के पत्तों की भुजिया के लिए सबसे पहले, मूली के पत्तों को अच्छी तरह साफ करें और पानी से धो लें ताकि सारी गंदगी निकल जाए. इन्हें दो-तीन बार धोना बेहतर रहता है. साफ होने के बाद, पत्तों को बारीक काट लें.
एक पैन में तेल गरम करें. जीरा डालें और उसे चटकने दें. इसके बाद, कटा हुआ लहसुन और हरी मिर्च डालें और कुछ मिनट तक भूनें. जब लहसुन सुनहरा हो जाए, तो तुरंत हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर और लाल मिर्च पाउडर डालें.
अब, पैन में कटे हुए मूली के पत्ते डालें. शुरू में इनकी मात्रा ज़्यादा लग सकती है, लेकिन पकने पर पत्ते सिकुड़ जाएंगे. स्वादानुसार नमक डालें और सब कुछ अच्छी तरह मिलाएं पैन को ढक दें और मध्यम-धीमी आंच पर कुछ मिनट तक पकाएं.
भुजिया को बीच-बीच में चलाते रहें. इसमें पानी डालने की जरूरत नहीं है. जब पत्ते नरम हो जाएं और अतिरिक्त नमी सूख जाए, तो आंच बंद कर दें. आखिर में थोड़ा सा अमचूर पाउडर मिलाएं.
रोटी या पराठे के साथ परोसें
तैयार मूली के पत्तों की भुजिया को रोटी या पराठे के साथ गरमा-गरम परोसें. आप इसे दाल-चावल के साथ साइड डिश के तौर पर भी खा सकते हैं. स्वाद बढ़ाने के लिए, परोसने से पहले आप इस पर थोड़ा नींबू का रस भी निचोड़ सकते हैं. मूली के पत्तों को फेंकने के बजाय इस तरह इस्तेमाल करने से खाने की बर्बादी कम होती है और मूली की डिश को एक अनोखा स्वाद मिलता है.
नाटो देशों की रूस से संभावित टकराव की तैयारी: हथियार, सैनिक और सुरक्षा ढांचे पर ज्यादा खर्च करेंगे, ट्रम्प के दबाव के बाद बदली रणनीति
कोपेनहेगन/वॉशिंगटन36 मिनट पहले
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यूक्रेन में चल रही जंग के बीच यूरोप के नाटो देश रूस से संभावित टकराव की तैयारी में जुट गए हैं। अब नाटो देश हथियार, सैनिक और सुरक्षा ढाचे पर ज्यादा खर्च करेंगें।
रूस लगातार यूरोपीय देशों को चेतावनी दे रहा है। पिछले हफ्ते BRICS समिट के दौरान रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने कहा था कि अगर यूरोपीय देश यूक्रेन में अपने सैनिक तैनात करते हैं तो यह युद्ध माना जाएगा।
इधर ट्रम्प भी यूरोपीय देशों को अपनी सुरक्षा पर ज्यादा खर्च करने के लिए कई बार कह चुके हैं। ऐसे में शुक्रवार और शनिवार को डेनमार्क की राजधानी कोपेनहेगन में नाटो के 32 सदस्य देशों के रक्षा प्रमुख मिले हैं।
नाटो देश GDP का 5% सुरक्षा पर खर्च करेंगें
बैठक की अगुआई इटली के एडमिरल ज्यूसेप कावो द्रागोने ने की है। नाटो देशों ने 2035 तक रक्षा और सुरक्षा पर अपनी GDP का 5% खर्च करने का लक्ष्य रखा है।
इसमें 3.5% पैसा सीधे सेना और हथियारों पर खर्च होगा। बाकी 1.5% सड़कों, कम्यूनिकेशन, साइबर सुरक्षा और ऐसे दूसरे कामों पर लगाया जाएगा, जो युद्ध या बड़े संकट के समय काम आते हैं।
यानी आने वाले सालों में यूरोप के देश सिर्फ ज्यादा हथियार ही नहीं खरीदेंगे, बल्कि सैनिकों की ट्रेनिंग, सैन्य ठिकानों और दूसरी जरूरी सुविधाओं पर भी खर्च बढ़ाएंगे।
इसी तैयारी के तहत अलग-अलग देशों ने अपने स्तर पर भी कदम उठाने शुरू कर दिए हैं।

जर्मनी में पुराने मेडिकल बंकर फिर खोलने की तैयारी
जर्मनी में 1979 में बनाए गए मेडिकल बंकरों को दोबारा इस्तेमाल करने की तैयारी की जा रही है। इनका मकसद युद्ध या बड़े हमले की स्थिति में घायलों के इलाज की व्यवस्था करना है।
नॉर्वे भी युद्ध जैसी स्थिति के लिए अपने अस्पतालों की तैयारी बढ़ा रहा है। वहां 7 हजार बेड युद्ध में घायल सैनिकों और आम लोगों के इलाज के लिए उपलब्ध कराने की तैयारी है।
नॉर्वे में सेना और अस्पताल मिलकर घायल लोगों को निकालने और उनका इलाज करने की तैयारी भी कर रहे हैं।
ट्रम्प ने कहा था- यूरोपीय देश अमेरिका पर ज्यादा निर्भर न रहें
नाटो देशों का रक्षा खर्च बढ़ाने के पीछे अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का दबाव भी एक बड़ी वजह है। ट्रम्प लंबे समय से यूरोपीय देशों से अपनी सुरक्षा पर ज्यादा पैसा खर्च करने की मांग करते रहे हैं।
उनका कहना है कि यूरोपीय देशों को अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिका पर बहुत ज्यादा निर्भर नहीं रहना चाहिए।
पिछले साल हेग में हुए नाटो सम्मेलन में सदस्य देशों ने 2035 तक GDP का 5% रक्षा और सुरक्षा पर खर्च करने का लक्ष्य रखा था।
इसके साथ यूक्रेन युद्ध ने भी यूरोप को अपनी सैन्य तैयारी बढ़ाने पर मजबूर किया है। युद्ध के दौरान ड्रोन, मिसाइल और एयर डिफेंस जैसे क्षेत्रों में यूरोपीय देशों की जरूरतें सामने आई हैं। नाटो अब इन कमियों को दूर करने पर भी जोर दे रहा है।
ब्रिटेन से लेकर पोलैंड तक तैयारी तेज
पोलैंड
2027 से हर साल 1 लाख लोगों को सैन्य ट्रेनिंग देने का लक्ष्य है। कुल 5 लाख लोगों को ट्रेनिंग देने की योजना है।
ब्रिटेन
गोला-बारूद और विस्फोटक बनाने की 6 नई फैक्ट्रियां बनाई जाएंगी। ब्रिटेन देश में बने लंबी दूरी के 7 हजार हथियार खरीदने की योजना भी बना रहा है।
लिथुआनिया
इस साल करीब 5 हजार युवाओं को अनिवार्य सैन्य सेवा के लिए बुलाने की योजना है।
स्वीडन
लोगों से संकट की स्थिति के लिए कम से कम 7 दिन की जरूरी चीजें घर में रखने को कहा गया है।
यूरोप में हथियारों की खरीद तेजी से बढ़ी
यूरोप के नाटो देश अपनी सैन्य जरूरतों के लिए बड़ी मात्रा में दूसरे देशों से हथियार खरीद रहे हैं।SIPRI के मुताबिक, 2016-20 के मुकाबले 2021-25 में यूरोप के 29 नाटो देशों का हथियार आयात 143% बढ़ा। इस दौरान इन देशों के हथियार आयात में अमेरिका की हिस्सेदारी 58% रही।

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यूरोप से 40 हजार सैनिक घटा सकता है अमेरिका

अमेरिका यूरोप में तैनात अपने 40 हजार सैनिक कम कर सकता है। फिलहाल यूरोप में करीब 80 हजार अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…
बिहार राज्य महिला आयोग के आज 25 साल पूरे: रजत जयंती के अवसर पर जारी होगा डाक टिकट; सीएम सम्राट चौधरी करेंगे उद्घाटन – Patna News
बिहार राज्य महिला आयोग आज अपना 25वां वर्षगांठ मनाएगी। इस रजत जयंती के अवसर पर बापू सभागार में भव्य कार्यक्रम का आयोजन किया जा रहा है। इस समारोह में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी सहित दोनों उपमुख्यमंत्री और कई मंत्रियों को आमंत्रित किया गया है। कार्यक्रम की सबसे खास बात यह रहेगी कि बिहार राज्य महिला आयोग अपना डाक टिकट जारी करेगी। डाक टिकट जारी की जाएगी राज्य महिला आयोग की सदस्य सजल झा ने कहा कि हमारा आयोग 25 साल का होने जा रहा है। इस मौके पर हम आयोग के लोगो पर एक डाक टिकट जारी करने जा रहे हैं। हमारे हर लिफाफे पर डाक टिकट लगता है, जितने भी नोटिस या समन जाती है उसमें ये लगी होती है। इसलिए एक मैसेज देने के लिए आयोग अब अपना डाक टिकट जारी करेगी। इस कार्यक्रम में हमने महिला मंत्रियों को विशेष रूप से आमंत्रित किया है क्योंकि वह अपने क्षेत्र में कार्य करके एक नाम बनाई है और यहां तक पहुंची है। उनका कार्य अन्य महिलाओं के लिए प्रेरणा है। इसके अलावा हमने बिहार के अलग-अलग क्षेत्रों और पेशों की महिलाओं को भी आमंत्रित किया है। महिला आयोग की 25 साल की यात्रा की दिखेगी डॉक्यूमेंट्री इसके अलावा महिला आयोग की पिछले 25 साल की यात्रा की एक डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई जाएगी। इस डॉक्यूमेंट्री में आयोग के अब तक के केस का पूरा आंकड़ा रहेगा। इसके साथ ही आयोग ने कितने लोगों के घर बसाया, सबसे मुश्किल कैसे कौन से थे, आयोग में कहां-कहां महिला कैंप लगाया, किस तरीके से इंसाफ दिलाया इस सब के बारे में जानकारी रहेगी। साइबर अपराध से जुड़े जागरूकता कार्यक्रम का भी आयोजन इस कार्यक्रम के लिए पूर्व में जितनी भी बिहार राज्य महिला आयोग की अध्यक्ष और सदस्य रही हैं, उन्हें भी आमंत्रित किया गया है। सजल झा ने कहा कि, हम लोग यह चाहते हैं सभी पूर्व अध्यक्ष इसकी साक्षी बने, जिन्होंने अपना योगदान महिला आयोग को दिया है। इसके अलावा जितनी भी महिला विधायक और सांसद हैं, उन्हें भी आमंत्रित किया गया है। इस प्रोग्राम में साइबर अपराध से जुड़े जागरूकता कार्यक्रम का भी आयोजन किया जाएगा।
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रात 10 बजे डा. संजय निषाद के घर पहुंचे तावड़े: पूरे परिवार से मिले प्रदेश प्रभारी; भाजपा से नाराजगी की चर्चा पर विराम लगा – Gorakhpur News
भाजपा के राष्ट्रीय महासचिव व उत्तर प्रदेश के प्रभारी विनोद तावड़े देर रात तक एक्टिव नजर आए। होटल में खाना खाने के बाद रात 10 बजे वह निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के पादरी बाजार स्थित आवास पहुंच गए। दिन में जनप्रतिनिधियों की बैठक में डा. संजय भी पहुंचे थे, वहीं घर आने का निमंत्रण दिया था। तावड़े का निषाद परिवार में जोरदार स्वागत किया गया। डा. संजय की पत्नी, तीनों बेटों, बहुओं और पोते-पोतियों ने तावड़े से मुलाकात की। काफी देर तक बातें होती रहीं। इस मुलाकात के साथ ही डा. संजय के भाजपा से नाराजगी की चर्चाओं पर विराम लग गया है। चुनाव में सहयोगी दलों की भूमिका भी महत्वपूर्ण होने वाली है। प्रदेश प्रभारी ने बैठक में ही यह संकेत दिया है कि निषाद मतदाताओं पर फोकस करना है। यही कारण है कि वह सहयोगी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष के बुलावे पर उनके घर पहुंचे। गेट से बाहर आकर डा. संजय, उनके पुत्रों अमित निषाद, पूर्व सांसद प्रवीण निषाद व विधायक ई. सरवन निषाद ने उनका स्वागत किया। उसके बाद उन्हें अपने बैठक कक्ष में ले गए, जहां परिवार की महिलाओं और बच्चों से भी मुलाकात करवायी। कुछ दिन पहले डा. संजय निषाद सपा के नेता प्रतिपक्ष माता प्रसाद पांडेय से मिलने पहुंचे थे। उनकी तबीयत खराब थी। जिसके बाद राजनीतिक गलियारों में तरह-तरह की चर्चा शुरू हो गई थी। उसके बाद उन्होंने आशीष पटेल से मिले। आशीष ने इस मुलाकात के बाद कहा था कि डा. संजय को कुछ दुख है। शायद इन्हीं चर्चाओं को विराम देने के लिए डा. संजय ने उन्हें अपने घर बुलाया। हारी हुई सीटें मांग रही निषाद पार्टी निषाद पार्टी ने यह मांग रखी है कि भाजपा अपनी हारी हुई सीटें दे दे। इसी बहाने वे अधिक सीट पाने की जुगत में हैं। विधानसभा चुनाव 2027 को को लेकर भाजपा भी निषाद मतदाताओं के मामले में कोई रिस्क लेने के मूड में नहीं है। डा. संजय निषाद के घर राष्ट्रीय महामंत्री के जाने के बाद राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज है।
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शिक्षक थे तो OBC, DSP बने तो ST: फर्जी जाति प्रमाण-पत्र मामले में रिटायर IPS रघुवीर सिंह मीणा पर केस – Bhopal News
भोपाल में फर्जी जाति प्रमाण-पत्र के जरिए आरक्षित वर्ग का लाभ लेने के आरोप में रिटायर IPS अधिकारी रघुवीर सिंह मीणा के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। आरोप है कि मीणा ने ST वर्ग के प्रमाण-पत्र के आधार पर MPPSC से DSP पद पर चयन हासिल किया और बाद में सेवा के दूसरे लाभ भी लिए। पुलिस मुख्यालय की सतर्कता शाखा ने धोखाधड़ी, साजिश, लोक सेवक द्वारा गलत दस्तावेज तैयार करने और SC-ST अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराओं में FIR दर्ज की है। DSP बनने से पहले सरकारी शिक्षक थे, रिकॉर्ड में OBC जांच में सामने आया कि पुलिस सेवा में आने से पहले रघुवीर सिंह मीणा मध्यप्रदेश में शासकीय शिक्षक के पद पर थे। उस समय उनके दस्तावेजों में उन्हें OBC वर्ग का बताया गया था। बाद में MPPSC में उन्होंने खुद को ST वर्ग का बताया। इसी आधार पर DSP पद पर उनका चयन हुआ। जांच एजेंसी अब इसी बदलाव से जुड़े दस्तावेज और रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। विदिशा से 1984 में जारी हुआ था ST प्रमाण-पत्र मीणा का ST जाति प्रमाण-पत्र वर्ष 1984 में विदिशा के आदिम जाति कल्याण विभाग से जारी हुआ था। उच्च स्तरीय जांच में प्रमाण-पत्र और इससे जुड़े रिकॉर्ड की जांच की गई। समिति ने इसे अमान्य घोषित कर दिया। जांच में मध्यप्रदेश के मूल निवासी होने से जुड़े दस्तावेजों पर भी सवाल उठे हैं। प्रमाण-पत्र जारी करने वाले कर्मचारी भी जांच के दायरे में हैं। शिकायत के बाद शासन की उच्च स्तरीय समिति ने की जांच मामले की शुरुआत गुना के राघौगढ़ निवासी हरवीर सिंह रघुवंशी की शिकायत से हुई। शिकायत के बाद मामले की जांच की गई। शासन की उच्च स्तरीय छानबीन समिति ने रघुवीर सिंह मीणा के जाति प्रमाण-पत्र और संबंधित रिकॉर्ड की जांच की। समिति की जांच में प्रमाण-पत्र अमान्य पाए जाने के बाद अब पुलिस मुख्यालय की सतर्कता शाखा ने केस दर्ज किया है।
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