Sunday, July 26, 2026
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ग्रामीण उद्यानिकी विकास अधिकारी से ठगी: क्रेडिट कार्ड सर्विस डीएक्टिवेट कराने के नाम पर फाइल भेजी, ओपन करते ही ठगे ₹2.25 लाख – Gwalior News




शहर के महाराज बाड़ा क्षेत्र में खरीदारी कर रहे ग्रामीण उद्यानिकी विकास अधिकारी को क्रेडिट कार्ड की ‘अनावश्यक सेवाएं’ (अनवांटेड सर्विसेज) बंद कराने का झांसा देकर साइबर ठगों ने ₹2,25,190 की चपत लगा दी। विकास अधिकारी उस वक्त अपने छोटे भाई की शादी की शॉपिंग में व्यस्त थे, जिसका फायदा उठाकर ठगों ने व्हाट्सएप पर एक लिंक भेजी। जैसे ही उन्होंने ने लिंक खोलकर क्लिक किया, ठगों ने उनके क्रेडिट कार्ड का एक्सेस हासिल कर सवा दो लाख रुपए ठग लिए। घटना 01 जुलाई 2026 महाराज बाड़ा ग्वालियर की है। विकास अधिकारी ने अपने बैंक पहुंचकर डिटेल निकाली फिर हेल्पलाइन नंबर पर शिकायत की थी। जहां से रविवार को विश्वविद्यालय थाना पुलिस ने मामला दर्ज किया है।
छोटे भाई की शादी की शॉपिंग के दौरान आया ठग का कॉल विश्वविद्यालय थाना क्षेत्र के महलगांव स्थित कर्मचारी आवास कॉलोनी निवासी अजय कुमार द्विवेदी पुत्र सुरेंद्र कुमार द्विवेदी दमोह जिले के हटा में ‘ग्रामीण उद्यानिकी विकास अधिकारी’ के पद पर पदस्थ हैं। उनके छोटे भाई और अन्य परिजन ग्वालियर में रहते हैं। वे 15 जून को छुट्टी लेकर अपने भाई की शादी के सिलसिले में ग्वालियर आए हुए थे। 1 जुलाई को अजय द्विवेदी अपने परिवार के साथ महाराज बाड़ा पर शादी की खरीदारी कर रहे थे। उसी दौरान उनके मोबाइल पर एक अज्ञात नंबर से फोन आया। कॉल करने वाले ने खुद को बैंक प्रतिनिधि बताते हुए कहा कि ‘आपके एक्सिस बैंक क्रेडिट कार्ड ऐप पर कुछ ऐसी सेवाएं चालू हैं जो आपके काम की नहीं हैं। यदि इन्हें तुरंत डीएक्टिवेट नहीं किया गया, तो आपके कार्ड से हर महीने भारी चार्जेस कटते रहेंगे।’ठग की बातों में आकर अजय, अनावश्यक सेवाएं बंद कराने के लिए तैयार हो गए। शातिर ठग ने उनके व्हाट्सएप पर एक अनधिकृत लिंक भेजी। खरीदारी की आपाधापी में अजय द्विवेदी ने लिंक ओपन कर उसमें दिए गए ऑप्शन पर क्लिक कर दिया और फिर अपना मोबाइल जेब में रख लिया। शाम करीब 8 बजे जब उन्होंने शॉपिंग खत्म कर अपना मोबाइल देखा, तो उनके बैंक मैसेजेस देखकर होश उड़ गए। शातिर ठगों ने उनके एक्सिस बैंक क्रेडिट कार्ड से 4 अलग-अलग ट्रांजैक्शन के जरिए कुल ₹2,25,190 पार कर दिए थे। ई-एफआईआर दर्ज, पुलिस कर रही साइबर जांच ठगी का अहसास होते ही पीड़ित ने तुरंत साइबर क्राइम हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल कर शिकायत दर्ज कराई। हेल्पलाइन की प्राथमिक जांच के बाद मामले में ई-एफआईआर दर्ज कर असल कायमी के लिए मामला विश्वविद्यालय थाने भेजा गया, जहां पुलिस ने अज्ञात साइबर ठगों के खिलाफ धोखाधड़ी व आईटी एक्ट के तहत केस दर्ज कर लिया है।



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मधुबनी में गांजा तस्कर गिरफ्तार: 250 ग्राम मादक पदार्थ बरामद, पूछताछ जारी – Madhubani News




रहिका थाना पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर छापेमारी कर 250 ग्राम गांजा के साथ एक तस्कर को गिरफ्तार किया है। आरोपी से पूछताछ की जा रही है और उसके खिलाफ कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) योगेंद्र कुमार ने रविवार रात करीब 8 बजे इस संबंध में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि जिले में नशीले पदार्थों की तस्करी पर प्रभावी नियंत्रण के लिए लगातार विशेष अभियान चलाया जा रहा है। इसी क्रम में रविवार को रहिका थाना पुलिस को सूचना मिली थी कि एक व्यक्ति गांजा लेकर क्षेत्र से गुजरने वाला है। सूचना मिलते ही पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए बसौली बलाट चेक पोस्ट के समीप सघन वाहन और संदिग्ध व्यक्तियों की जांच शुरू कर दी। जांच के दौरान पुलिस ने एक संदिग्ध व्यक्ति को रोककर तलाशी ली, जिसमें उसके पास से 250 ग्राम गांजा बरामद हुआ। पुलिस ने उसे मौके पर ही गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपी की पहचान रहिका थाना क्षेत्र के गजवा गांव निवासी रामप्रीत मंडल के पुत्र रामकुमार मंडल के रूप में हुई है। एसएसपी योगेंद्र कुमार ने बताया कि आरोपी से गांजा की खरीद-बिक्री के नेटवर्क और उसके स्रोत के संबंध में गहन पूछताछ की जा रही है। पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि बरामद गांजा कहां से लाया गया था और इसे किस स्थान पर पहुंचाया जाना था। मामले से जुड़े अन्य लोगों की पहचान कर उनके विरुद्ध भी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध संबंधित धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। बरामद गांजा को जब्त कर विधिसम्मत कार्रवाई की जा रही है।



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अवैध बजरी से भरे डंपर और ट्रैक्टर जब्त: बिना नंबर के वाहन जब्त; दोनों के ड्राइवर गिरफ्तार – Udaipur News




उदयपुर में अवैध बजरी से भरे एक डंपर और एक ट्रैक्टर को पुलिस ने जब्त किया। साथ ही दोनों वाहनों के ड्राइवरों को गिरफ्तार कर लिया गया। कार्रवाई के बाद क्षेत्र में अवैध बजरी कारोबार से जुड़े लोगों में हड़कंप मच गया। अवैध बजरी परिवहन और खनन के खिलाफ सायरा पुलिस ने यह कार्रवाई की। थानाधिकारी शैतान सिंह नाथावत ने बताया- जिला पुलिस अधीक्षक डॉ. अमृता दुहन के निर्देश पर अवैध बजरी परिवहन और अवैध खनन के खिलाफ अभियान चलाया जा रहा है। इसी के तहत सायरा थाना क्षेत्र के कोविया रोड पर ढीकोड़ा में कार्रवाई करते हुए अवैध बजरी से भरे डंपर को रोककर जांच की। पुलिस ने डंपर ड्राइवर ढोलाराम पुत्र हमेरा निवासी गाडरिया बेकरिया को गिरफ्तार कर डंपर जब्त कर लिया। बिना नंबर के ट्रैक्टर को पकड़ा, ड्राइवर गिरफ्तार वहीं, दूसरी कार्रवाई में ढोल चौकी प्रभारी एएसआई शंभू सिंह की टीम ने नांदेशमा क्षेत्र के तिरोल में अवैध बजरी से भरे एक बिना नंबर के ट्रेक्टर को पकड़ा। पुलिस ने ट्रैक्टर चालक कालू पुत्र चंद्रा बसलिया को गिरफ्तार कर ट्रैक्टर को भी जब्त कर लिया। पुलिस ने दोनों वाहनों को सायरा थाने पर खड़ा करवाकर संबंधित धाराओं में मामला दर्ज किया है। साथ ही अवैध बजरी के संबंध में खनन विभाग के अधिकारियों को सूचना दी गई है। थानाधिकारी शैतान सिंह नाथावत ने बताया- क्षेत्र में अवैध बजरी परिवहन और अवैध खनन के खिलाफ पुलिस कार्रवाई जारी रहेगी।



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पूर्वी राजस्थान की फेमस देसी डिश! गुड़, घी और आटे से मिनटों में तैयार


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Gud Ghee Atta Recipe: पूर्वी राजस्थान का यह पारंपरिक व्यंजन अपने सादे लेकिन लाजवाब स्वाद के कारण हर मौसम में लोगों की पहली पसंद बना रहता है. गुड़, शुद्ध घी और गेहूं के आटे से तैयार होने वाला यह देसी पकवान स्वाद के साथ पोषण भी देता है. त्योहारों, पारिवारिक आयोजनों और विशेष अवसरों पर इसे बड़े चाव से बनाया जाता है. इसकी पारंपरिक विधि पीढ़ियों से चली आ रही है, जो इसे खास पहचान दिलाती है. कम सामग्री में बनने वाली यह रेसिपी आज भी ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में समान रूप से लोकप्रिय है और राजस्थान की समृद्ध खानपान संस्कृति की झलक पेश करती है.

पूर्वी राजस्थान की खानपान परंपरा में पुआ एक ऐसा व्यंजन है. जो हर मौसम में लोगों की पसंद बनी रहती है. खासकर ग्रामीण इलाकों में पुआ का स्वाद न सिर्फ घरों में बल्कि मेलों भंडारों और स्थानीय बाजारों में भी खूब देखने को मिलता है. मीठा, नरम और घी में तला हुआ यह व्यंजन अपनी खास खुशबू और स्वाद के कारण लोगों के दिलों में अलग जगह बनाए हुए है.

पुआ को सबसे ज्यादा पसंद का सबसे बड़ा कारण इसका पारंपरिक और देसी अंदाज है. यह कोई आधुनिक फास्ट फूड नहीं बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही एक ऐसी रेसिपी है. जो आज भी उसी सादगी और स्वाद के साथ तैयार की जाती है. पूर्वी राजस्थान भरतपुर, धौलपुर, करौली और डीग के कई गांव में त्योहारों, खास अवसरों और धार्मिक आयोजनों में पुआ बनाना शुभ माना जाता है. यही वजह है.

पुआ बनाने की प्रक्रिया भी बेहद खास और पारंपरिक है. इसे बनाने के लिए सबसे पहले गुड़ या चीनी का घोल तैयार किया जाता है. जिसे स्थानीय भाषा में घोल कहा जाता है. इस घोल में गेहूं का आटा मिलाया जाता है और उसे अच्छे से फेंटा जाता है.इस मिश्रण को कुछ समय तक रखा जाता है. ताकि इसका स्वाद बेहतर हो सके यही प्रक्रिया पुआ को उसका खास नरमपन और मिठास देती है.

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जब यह मिश्रण पूरी तरह तैयार हो जाता है. तब इसे धीमी आंच पर घी में तला जाता है. पुआ को गोल आकार में डालकर तब तक पकाया जाता है. जब तक वह सुनहरा और कुरकुरा न हो जाए घी में तलने के कारण इसकी खुशबू और स्वाद और भी बढ़ जाता है. बाहर से हल्का क्रिस्प और अंदर से नरम पुआ खाने में बेहद लाजवाब लगता है.

पुआ को आमतौर पर खीर या सब्जी के साथ परोसा जाता है. जिससे इसका स्वाद और भी बढ़ जाता हैं. खासकर भंडारों और धार्मिक आयोजनों में पुआ-खीर काफी लोकप्रिय है. वहीं बाजारों में भी यह आसानी से मिल जाता है और लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं. कई जगहों पर इसे नाश्ते और मिठाई दोनों के रूप में परोसा जाता है.

आज के दौर में जहां फास्ट फूड का चलन तेजी से बढ़ रहा है.वहीं पुआ जैसे पारंपरिक व्यंजन अपनी पहचान बनाए हुए हैं.पूर्वी राजस्थान में इसकी मांग बनी रहती है और लोग आज भी इसके देसी स्वाद को उतना ही पसंद करते हैं. पुआ न सिर्फ एक व्यंजन है. बल्कि यह यहां की संस्कृति, परंपरा और स्वाद की एक मीठी पहचान बन चुका है.

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लोगों को दौड़ाएं नहीं, उनकी सेवा करें; आयकर विभाग के अधिकारियों को वित्त मंत्री की नसीहत


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वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आयकर विभाग के अधिकारियों को साफ संदेश दिया है कि उनका काम सिर्फ टैक्स वसूलना नहीं, बल्कि लोगों को बिना परेशानी के समय पर सेवाएं देना भी है. उन्होंने कहा कि आम नागरिकों को उनका जायज हक पाने के लिए बार बार दफ्तरों के चक्कर नहीं लगाने पड़ने चाहिए. साथ ही सरकारी जमीनों पर अतिक्रमण और विभागीय सुस्ती पर भी नाराजगी जताई.

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अधिकारियों को यह समझना होगा कि आम नागरिक के लिए हर देरी परेशानी बढ़ाती है: वित्त मंत्री

नई दिल्ली. वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने आयकर विभाग के अधिकारियों को साफ शब्दों में कहा है कि उनका काम सिर्फ टैक्स जमा कराना नहीं है. विभाग की जिम्मेदारी यह भी है कि लोगों को बिना किसी परेशानी के समय पर सेवाएं मिलें और उन्हें बेवजह दफ्तरों के चक्कर न लगाने पड़ें. उन्होंने कहा कि सरकारी अधिकारी नियमों के दायरे में रहते हुए भी लोगों का काम आसान बना सकते हैं.

मुंबई के नरीमन पॉइंट में आयकर विभाग की नई 13 मंजिला इमारत ‘आयकर सिंधु’ के उद्घाटन के दौरान उन्होंने कहा कि सरकारी विभागों को अपनी सोच बदलनी होगी. लोगों को उनका जायज हक दिलाने के लिए उन्हें इधर उधर दौड़ाना सही तरीका नहीं है. अधिकारियों को यह समझना होगा कि आम नागरिक के लिए हर देरी परेशानी बढ़ाती है.

1973 से पड़ी जमीन पर हुआ था अतिक्रमण

निर्मला सीतारमण ने बताया कि जिस जमीन पर यह नई इमारत बनी है, वह 1973 से आयकर विभाग के पास थी. लेकिन लंबे समय तक उसका इस्तेमाल नहीं होने की वजह से वहां अवैध कब्जे हो गए. उन्होंने कहा कि सरकारी संपत्तियों की सुरक्षा करना अधिकारियों की जिम्मेदारी है और ऐसी लापरवाही नहीं होनी चाहिए.

मंजूरी में देरी से आम लोगों की मुश्किल समझिए

वित्त मंत्री ने कहा कि इस इमारत के निर्माण के दौरान अलग अलग मंजूरियां लेने में काफी समय लगा. उन्होंने कहा कि अगर एक बड़े सरकारी विभाग को इतनी दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है, तो आम नागरिकों को कितनी परेशानी होती होगी, इसका आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है. उन्होंने अधिकारियों से कहा कि वह नियम तोड़ने की बात नहीं कर रहीं, लेकिन जहां प्रक्रिया को आसान बनाया जा सकता है, वहां लोगों को राहत मिलनी चाहिए. अनावश्यक देरी और फाइलों को लंबा खींचने की आदत बदलनी होगी.

सरकारी आवास की समस्या भी उठाई

सीतारमण ने मुंबई और नवी मुंबई में आयकर अधिकारियों के सरकारी आवास का मुद्दा भी उठाया. उन्होंने कहा कि कई अधिकारियों को सरकारी मकान नहीं मिल पाते और उन्हें रोज लंबी दूरी तय करके दफ्तर आना पड़ता है. उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस समस्या के समाधान के लिए जमीन के ट्रांसफर की प्रक्रिया को प्राथमिकता दी जाएगी. हालांकि इसके बाद निर्माण, मंजूरी, टेंडर और दूसरे प्रशासनिक काम विभाग को ही पूरे करने होंगे. वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार चाहती है कि आयकर विभाग एक ऐसा संस्थान बने, जहां लोगों को समय पर सेवा मिले, प्रक्रियाएं आसान हों और आम नागरिक को अपने अधिकार के लिए बेवजह संघर्ष न करना पड़े.

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जय ठाकुरSenior-Sub Editor

मैं जय ठाकुर, न्यूज18 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहा हूं. मेरा मुख्य काम बिजनेस की पेचीदा खबरों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. फिर चाहे वह शेयर बाजार की हलचल हो, देश की इकोनॉमी क…

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होटल और ट्रेन में रंगीन नहीं, सफेद चादर ही क्यों बिछाई जाती है? जानिए इसके पीछे की खास वजह


क्या आपने कभी गौर किया है कि होटल और ट्रेन में ज्यादातर सफेद चादर ही बिछाई जाती है? इसके पीछे सिर्फ सफाई ही नहीं, बल्कि कई कारण हैं। जानिए आखिर क्यों सफेद चादर ही बन गई है दुनिया भर के होटल और रेलवे की पहली पसंद।

होटल के कमरों और ट्रेन की सीटों पर आपको हमेशा सफेद चादरें ही बिछी हुई दिखाई देंगी। रंगीन चादरें शायद ही कभी नजर आती हैं। क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर ऐसा क्यों होता है? सिर्फ सफेद चादरों का ही इस्तेमाल क्यों किया जाता है, रंगीन चादरों का नहीं? दरअसल, इसके पीछे एक बड़ा और बेहद दिलचस्प लॉजिक छिपा है। यह फैसला केवल दिखावे के लिए नहीं लिया जाता, बल्कि इसका सीधा संबंध साफ-सफाई, रखरखाव, लोगों की सुविधा से भी है। आइए जानते हैं कि होटलों और ट्रेनों में सफेद चादरें ही क्यों बिछाई जाती हैं।

सफेद चादर से लगता है सफाई का पता

सफेद कपड़ा हो या फिर चादर उस पर गंदगी या दाग आसानी से दिख जाते हैं। ऐसे में सफेद चादर स्वच्छता दिखाती है। सफेद चादर जब बिल्कुल साफ दिखती है, तो हमारे मन को भी शांति मिल जाती है कि ये साफ-सुथरी है। साथ ही अगर किसी भी तरह का पीलापन, दाग या गंदगी चादर पर दिखती है, तो उसे दोबारा साफ किया जाता है या बदल दिया जाता है।

सफाई करने में होती है आसानी

सफेद चादरों की सफाई करना भी आसान होता है। अगर रंगीन चादर बिछाते हैं, तो कलर छूटने का फीका पड़ने का डर रहता है लेकिन सफेद चादरों के साथ ऐसा नहीं होता। उन्हें एक साथ मशीन में डालकर धोया जा सकता है और जिद्दी दागों को साफ करने के लिए ब्लीच का इस्तेमाल भी कर सकते हैं। रंगीन चादरों पर ब्लीच डालने पर रंग उड़ जाता है। सफेद चादर साफ दिखने के साथ खुशबू से महकती रहती हैं।

दिमाग को मिलता है सुकून

साइकोलॉजी कहती है कि सफेद रंग सिर्फ स्वच्छता ही नहीं शांति भी देता है और दिमाग को सुकून भी मिलता है। जब हम सफेद चादर वाला बिस्तर देखते हैं, तो उसे साफ और आरामदायक मान लेते हैं और फिर हमें उस माहौल में अच्छा लगने लगता है। यही कारण है कि लग्जरी होटल हो या फिर हाई-फाई ट्रेन सभी व्हाइट बेडशीट का ही इस्तेमाल करते हैं।

रखरखाव रहता है आसान

होटलों और रेलवे में हर दिन बड़ी संख्या में चादरों की धुलाई होती है। यदि अलग-अलग रंगों की चादरें हों, तो उन्हें अलग-अलग धोना पड़ता है। लेकिन सफेद चादरों को एक साथ धोया जा सकता है, जिससे समय, मेहनत और लागत तीनों की बचत होती है। सफेद रंग रोशनी को बेहतर तरीके से परावर्तित करता है। इससे होटल का कमरा या ट्रेन का केबिन अधिक उजला दिखता है।



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चीन से लौटे अंतरराष्ट्रीय वॉलीबॉल खिलाड़ी का सम्मान: भाजपा नेता बोले- अयोध्या के लाल ने देश-प्रदेश का बढ़ाया मान – Ayodhya News




अयोध्या जिले के हैरिंग्टनगंज ब्लॉक स्थित मलेथू बुजुर्ग गांव निवासी अंतरराष्ट्रीय वॉलीबॉल खिलाड़ी कुशल सिंह का चीन से लौटने के बाद सम्मान का सिलसिला जारी है। रविवार 26 जुलाई दोपहर बाद सहकारी गन्ना विकास समिति मसौधा के अध्यक्ष और भाजपा नेता संतोष सिंह ने अपने समर्थकों के साथ गांव पहुंचकर कुशल सिंह का माल्यार्पण, अंगवस्त्र और स्मृति चिन्ह भेंट कर स्वागत किया। इस अवसर पर संतोष सिंह ने कहा कि ग्रामीण पृष्ठभूमि से आने वाले कुशल सिंह ने चीन में आयोजित एशियन वॉलीबॉल कप प्रतियोगिता में भारतीय टीम का प्रतिनिधित्व कर जिले, प्रदेश और देश का नाम रोशन किया है। उन्होंने कुशल सिंह की सफलता को क्षेत्र के युवाओं के लिए प्रेरणा बताया और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। उल्लेखनीय है कि एशियन वॉलीबॉल कप प्रतियोगिता में अंडर-18 भारतीय पुरुष वॉलीबॉल टीम के सदस्य रहे कुशल सिंह के गांव पहुंचने पर ग्रामीणों ने भी उनका स्वागत किया था। उनकी स्वदेश वापसी की खबर से गांव में उत्सव का माहौल बन गया था। गन्ना परिषद की पूर्व अध्यक्ष महादेव यादव ने कहा कि सीमित संसाधनों के बावजूद कुशल सिंह ने कड़ी मेहनत, अनुशासन और समर्पण के दम पर यह उपलब्धि हासिल की है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि इससे युवाओं में खेलों के प्रति नया उत्साह पैदा होगा और दृढ़ इच्छाशक्ति से कोई भी लक्ष्य प्राप्त किया जा सकता है। सम्मान से अभिभूत कुशल सिंह ने सभी का आभार व्यक्त करते हुए कहा कि यह सम्मान केवल उनका नहीं, बल्कि पूरे अयोध्या और देशवासियों का है। उन्होंने युवाओं से खेलों में आगे बढ़ने के लिए निरंतर मेहनत, अनुशासन और समर्पण के साथ प्रयास करने की अपील की। कुशल सिंह 10 जुलाई को दिल्ली से चीन के लिए रवाना हुए थे। उनका चयन एशियन वॉलीबॉल कप के लिए अंडर-18 राष्ट्रीय पुरुष वॉलीबॉल टीम में हुआ था। 22 सदस्यीय भारतीय टीम का हिस्सा बनकर उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर शानदार प्रदर्शन करते हुए अयोध्या का गौरव बढ़ाया। इस अवसर पर सूर्यभान सिंह, भूपेंद्र सिंह, रविंद्र सिंह, सीताराम सिंह, पंकज सिंह, धर्मेंद्र सिंह कल्लू, दुर्गेश सिंह, राहुल सिंह, शिवम सिंह सहित कई गणमान्य लोग उपस्थित रहे।



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प्रॉपर्टी डीलर की हत्या 3.5 लाख की सुपारी में हुई: जमीन के पैसों के विवाद में शूटर किए थे हायर, लाइनर समेत 2 गिरफ्तार – Muzaffarpur News




मुजफ्फरपुर में प्रॉपर्टी डीलर और राष्ट्रीय लोक जनशक्ति पार्टी (रालोजपा) के नेता प्रभाकर सिंह (45) की हत्या 3.5 लाख रुपए सुपारी देकर कराई गई। प्रभाकर ने उदय पटेल-तुलसी राय जमीन खरीदी थी। पैसों के लेन-देन में प्रभाकर का विवाद हो गया। जिसके बाद पटेल-तुलसी राय ने सुपारी देकर प्रभाकर की हत्या करा दी थी। पटेल और तुलसी की गिरफ्तारी पहले हो चुकी है। आज मामले में शूटर सत्यम कुमार सिंह (22) और लाइनर डब्लू कुमार (35) की गिरफ्तारी हुई है। मर्डर के पीछे का कारण पुलिस की पूछताछ में इन्होंने ही बताया। मामले अबतक 4 गिरफ्तारी हो चुकी है, दूसरा शूटर अभी भी फरार है। घटना 30 मार्च को अहियापुर थाना क्षेत्र के बड़ा जगन्नाथ चौक के पास हुई थी। मुख्य शूटर का आपराधिक इतिहास भी सामने आया पुलिस जांच में यह भी पता चला है कि गिरफ्तार मुख्य शूटर सत्यम कुमार सिंह का पहले से आपराधिक रिकॉर्ड रहा है। उसके खिलाफ शराब से जुड़े मामले दर्ज हैं। अब पुलिस फरार दूसरे शूटर और साजिश से जुड़े अन्य लोगों की तलाश में लगातार छापेमारी कर रही है।
पैसे लौटाने से एक दिन पहले मर्डर पत्नी पिंकी देवी ने एफआईआर दर्ज कराई थी, जिसमें उन्होंने इस हत्या को प्रॉपर्टी डीलिंग और पैसों के लेनदेन से जुड़ा बताया था। पिंकी देवी ने पुलिस को बताया था कि तुलसी राय और उदय पटेल पति के काफी करीबी थे। उदय पटेल ने शेखपुर इलाके में एक प्लॉट की डील तुलसी राय के माध्यम से कराई थी, जिसके लिए प्रभाकर सिंह ने उदय को 30 लाख रुपए दिए थे। जब प्लॉट की डील फाइनल नहीं हो सकी, तो तुलसी राय को वह रकम लौटानी थी। पैसे वापस करने के लिए 31 मार्च की तारीख तय की गई थी। रकम लौटाने से ठीक एक दिन पहले यानी 30 मार्च को सोची-समझी साजिश के तहत प्रभाकर सिंह की हत्या करा दी गई। चलती बाइक पर 4 गोलियां मारी थी मृतक प्रभाकर सिंह गायघाट के बेरुआ गांव के रहने वाले हैं। वे परिवार के साथ चाणक्यपुरी मोहल्ले में रहते थे। रालोजपा के गायघाट प्रखंड के पूर्व अध्यक्ष भी रह चुके थे। 30 मार्च को वो किसी काम से जीरोमाइल चौक गए थे। दोपहर करीब 12:45 बजे बाइक से घर लौट रहे थे। जैसे ही चाणक्यपुरी स्थित अपने घर की गली के मोड़ के पास पहुंचे, पीछे से बाइक सवार 2 बदमाशों ने फायरिंग शुरू कर दी। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, चलती बाइक से अपराधियों ने कई राउंड गोलियां चलाईं, जिनमें 4 गोलियां प्रभाकर सिंह को लगीं। गोली लगते ही वह सड़क पर गिर पड़े। स्थानीय लोगों ने उन्हें बैरिया स्थित एक निजी अस्पताल पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया था।
पुलिस का दावा- जल्द पकड़ा जाएगा फरार शूटर पुलिस का कहना है कि गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ में मिले इनपुट के आधार पर फरार दूसरे शूटर और अन्य संदिग्धों की तलाश में लगातार छापेमारी की जा रही है। तकनीकी साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर जल्द ही पूरे हत्याकांड का पूर्ण खुलासा कर लिया जाएगा।



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मैहर में वाहन की टक्कर से बुजुर्ग की मौत: शव क्षत-विक्षत हालत में मिला, NH-30 पर हादसा – Maihar News



मैहर जिले के राष्ट्रीय राजमार्ग-30 (NH-30) पर रविवार सुबह सड़क हादसे में एक बुजुर्ग की मौत हो गई। वाहन की जोरदार टक्कर से हादसा इतना भीषण था कि शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गया।

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यह घटना रविवार सुबह करीब 5 बजे ग्राम नरौरा के पास हुई। मृतक की पहचान 75 वर्षीय रामस्वरूप मिश्रा (पिता चिंतामणि मिश्रा), निवासी ग्राम नरौरा के रूप में हुई है। वे सड़क किनारे पैदल जा रहे थे, तभी हादसा हो गया, घटना के बाद चालक वाहन लेकर मौके से फरार हो गया।

पुलिस जांच में जुटी, आरोपी चालक की तलाश जारी

घटना के बाद स्थानीय ग्रामीणों ने डायल-112 और हाईवे पेट्रोलिंग टीम को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस टीम ने शव को कब्जे में लेकर सिविल अस्पताल मैहर पहुंचाया।

कोतवाली पुलिस ने मर्ग कायम कर पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया है। पुलिस वाहन की पहचान के लिए आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है और मामले की जांच में जुटी है।



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बरेली के मशहूर स्ट्रीट फूड, सुआल आलू से लेकर खस्ता कचौड़ी तक, जानें शहर के टॉप नाश्ते


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बरेली का सुआल आलू उत्तर प्रदेश के बरेली शहर का एक बेहद प्रसिद्ध और पारंपरिक स्ट्रीट फ़ूड नाश्ता है. यह मैदा से बनी एक बेहद कुरकुरी, खस्ता और सूखी पापड़ी (सुआल) होती है.जिसे तीखे और मसालेदार उबले आलू की सूखी सब्जी के साथ परोसा जाता है. बरेली के बिहारीपुर इलाके के सुआल आलू पूरे शहर में सबसे ज्यादा मशहूर हैं.बरसात के मौसम में सुबह के वक्त यह हल्का नाश्ता करना लोगों को बेहद पसंद है.

सुआल आलू उत्तर प्रदेश के बरेली शहर का एक बेहद प्रसिद्ध और पारंपरिक स्ट्रीट फ़ूड नाश्ता है. यह मैदा से बनी एक बेहद कुरकुरी, खस्ता और सूखी पापड़ी (सुआल) होती है.जिसे तीखे और मसालेदार उबले आलू की सूखी सब्जी के साथ परोसा जाता है. बरेली के बिहारीपुर इलाके के सुआल आलू पूरे शहर में सबसे ज्यादा मशहूर हैं.बरसात के मौसम में सुबह के वक्त यह हल्का नाश्ता करना लोगों को बेहद पसंद है.त्यागी रेस्टोरेंट बरेली शहर का सबसे मशहूर होटल बरेली के पुराना बस स्टैंड के पास नोवेल्टी चौराहे पर है. रेस्टोरेंट सुबह के समय छोले समोसे और चाय के लिए काफी प्रसिद्ध है. यहां पूरे दिन आप छोले भटूरे या आलू के पुड़ी का आनंद ले सकते हैं. साथ ही साथ उनके पास अन्य स्वीट डिश भी कस्टमर के लिए अवेलेबल है. लेकिन इनकी चाय कस्टमर बताते हैं की बहुत टेस्टी होती है.

बरेली चाय वाली के नाम से संचालित होने वाला यह प्वाइंट सोशल मीडिया पर काफी वायरल रहती है. इनके दो काउंटर संचालित किए जाते हैं.एक बरेली कॉलेज पर काउंटर संचालित किया जाता है. दूसरा काउंटर राजेंद्र नगर के संचालित किया जाता है.आपको बता दे चाय लवर के लिए बरेली चाय वाली का यह अड्डा युवाओं को काफी पसंद है और उनके पास चाय के अलग-अलग अनेकों वेरिएंट्स है.

बरसात का मौसम चल रहा है चाय समोसे खाना लोगों को काफी पसंद है. बरेली शहर के एयरफोर्स गेट स्थित नैनीताल रोड पर प्रवेश के समोसे सोशल मीडिया से लेकर लोगों की ज़ुबान तक इसका स्वाद बोलता है. और यहां लगने वाली भीड़ इस बात का प्रमाण है. कि प्रवेश के समोसे अपने नाम से प्रसिद्ध है. समोसे की बात की जाए तो समोसा इतनी क्वांटिटी में बनाया जाता है. कि यह समोसा इनके गरम-गरम छोले के साथ मीठी खट्टी चटनी डालकर लोग खाना पसंद करते हैं.और उनकी दुकान पूरे दिन ग्राहकों से भरी रहती है.

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बरेली स्टेशन के पास पंजाबी मार्केट के कॉर्नर पर लगने वाला स्टॉल अपनी पनीर की पकौड़ी आलू की टिक्की और मिक्स पकोड़ी समोसे और ब्रेड पकोड़े के लिए फेमस है. सर्दियों में बरसात के मौसम में यहां लगने वाली भीड़ और इनका स्वाद लोगों को काफी पसंद आता है. पूरे दिन यह दुकान संचालित की जाती है. स्टेशन के पास होने से यात्री भी इसका स्वाद आराम से ले सकते हैं.

बरेली शहर की मशहूर खस्ता कचौड़ी बिहारीपुर में मिलती है. सर्दियों के मौसम में बरसात के मौसम में सुबह के वक्त गरम-गरम जलेबी के साथ खस्ता कचौड़ी खाना कौन नहीं चाहता अगर आप भी बरेली में रहते हैं. और बरसात के मौसम में सुबह के वक्त खस्ता कचौड़ी और जलेबी का नाश्ता करना चाहते हैं. तो बरेली के बिहारीपुर की पुरानी गलियों में आपको यह नाश्ता मिल जाएगा.

मथुरा रोड बदायूं जाते वक्त बरेली चांडपुर के फेमस,समोसे, लस्सी मिठाई, चाय के साथ ब्रेड पकोड़ा और मिक्स पकोड़ी लोगों के लिए एक अच्छा पॉइंट रुकने के लिए बना हुआ है. अगर बरेली से मथुरा लोग जाते हैं तो इन्हीं क्या नाश्ता करते हैं लेकिन कई सारे फूड लवर्स इनके पास सिर्फ इनका नाश्ता करने ही नहीं इनके फेमस समोसे लस्सी और ब्रेड पकोड़े खाने के लिए जाते हैं. सर्दियों, बरसात के मौसम में इनकी दुकान पर लगने वाली भीड़ इस बात का प्रमाण है.

बरेली से 22 किलोमीटर दूर नवाबगंज पीलीभीत जाते वक्त अगर आप नवाबगंज के अंदर से जा रहे हैं. तो आपको शंकर वालों की लस्सी और उनकी मूंग की दाल की पकौड़ी के साथ समोसे ब्रेड पकोड़ा और पनीर की पकौड़ी लोगों को खाना काफी पसंद है. बरसात के मौसम में या सर्दियों के मौसम में यहां दूर-दूर से लोग इनकी पकौड़ी खाने के लिए आते हैं. समोसे से लेकर मिठाई इनकी दुकान पर मिलती है.अच्छी क्वालिटी के साथ नवाबगंज तहसील में प्रत्येक व्यक्ति की जुबान पर इनका नाम रहता है.

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