पूर्वांचल में भाजपा के 16 संगठनात्मक जिलों यानि काशी क्षेत्र के प्रभारी और भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष रमेश सिंह आज दो दिवसीय दौरे पर वाराणसी आएंगे। रमेश सिंह काशी क्षेत्र में संगठन का मन, मिजाज, कार्यकर्ताओं की सक्रियता परखेंगे। सर्किट हाउस में मंत्रियों, विधायकों, जिलाध्यक्षों समेत 16 जिलों के जनप्रतिनिधि व पदाधिकारियों के साथ संगठन की मजबूती पर मंथन करेंगे। विधानसभा चुनाव में कार्यकर्ताओं की सक्रियता, सजगता और भूमिका पर चर्चा करेंगे। मंगलवार को आगमन पर काशी क्षेत्र के जिलों की सीमा में भव्य स्वागत किया जाएगा। सुल्तानपुर के जगदीशपुर से लेकर सर्किट हाउस तक जगदीशपुर, सुल्तानपुर, जौनपुर, मछलीशहर और बाबतपुरजगह-जगह कार्यकर्ता फूल माला पहनाएंगे।
भाजपा के संगठनात्मक अभियान और आगामी कार्यक्रमों के बीच प्रदेश उपाध्यक्ष एवं काशी क्षेत्र के नवनियुक्त प्रभारी रमेश सिंह आज काशी पहुंच रहे हैं। वे लखनऊ से प्रवास पर पहली बार काशी पहुंचेंगे। उनके आगमन को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह है और भव्य स्वागत की तैयारियों के बीच जगह-जगह होर्डिंग्स लगाए गए हैं। क्षेत्र प्रभारी रमेश सिंह सर्किट हाउस में क्रमवार तीन संगठनात्मक बैठकों को संबोधित करेंगे। पहली बैठक दोपहर 1 बजे सभागार में होगी। जिसमें काशी क्षेत्र के सभी 16 संगठनात्मक जिलों के लोकसभा एवं राज्यसभा सांसद, विधायक, महापौर, जिला पंचायत अध्यक्ष, नगर पालिका एवं नगर पंचायत अध्यक्ष, काशी क्षेत्र में रहने वाले प्रदेश पदाधिकारी, क्षेत्र पदाधिकारी, सातों मोर्चों के क्षेत्र अध्यक्ष, सभी 16 जिलों के जिलाध्यक्ष एवं जिला प्रभारी शामिल होंगे। दूसरी बैठक अपराह्न 3 बजे शुरू होगी। इसमें वाराणसी महानगर एवं जिले के सभी पदाधिकारी, सातों मोर्चों के महानगर एवं जिलाध्यक्ष तथा जिले-महानगर के कुल 33 मंडल अध्यक्ष और मंडल प्रभारी शामिल होंगे। तीसरी बैठक शाम 5 बजे होगी, जिसमें 13 अगस्त को जिले में प्रस्तावित तिरंगा यात्रा की व्यवस्था टोली के साथ तैयारियों की समीक्षा की जाएगी। बाबा विश्वनाथ के दरबार में करेंगे दर्शन क्षेत्र प्रभारी रमेश सिंह तीनों बैठकों के बाद लगभग शाम 6 बजे श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन करेंगे। इसके बाद वे सर्किट हाउस में रात्रि विश्राम करेंगे और अगले दिन सुबह लखनऊ के लिए रवाना होंगे। रमेश सिंह के स्वागत को लेकर लखनऊ से वाराणसी के बीच पड़ने वाले जगदीशपुर, सुल्तानपुर, जौनपुर, मछलीशहर, बाबतपुर समेत विभिन्न स्थानों पर कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी गई है।
Source link
काशी-क्षेत्र प्रभारी रमेश सिंह परखेंगे 16 जिलों का संगठन: 3 मीटिंग में जानेंगे सक्रियता-तैयारी, विधायक-मंत्री और जिलाध्यक्षों समेत 200 संग मंथन – Varanasi News
बक्सर में बधार में मिला अधेड़ का शव: चप्पल कुछ दूरी पर पड़ी मिली, करंट से मौत की आशंका; पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से खुलेगा मौत का राज – Buxar News
बक्सर के कृष्णाब्रह्म थाना क्षेत्र के सोवा गांव से पश्चिम बधार में सोमवार को एक अधेड़ व्यक्ति का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। शव की पहचान नोनियापुरा गांव निवासी रमई केवट (50) के रूप में हुई है। शव मिलने की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीणों की भीड़ मौके पर जुट गई। सूचना पर कृष्णाब्रह्म थानाध्यक्ष रवि कुमार पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू की। शव मिलने की परिस्थितियों ने पुलिस की जांच को गंभीर बना दिया है। घटनास्थल से कुछ दूरी पर मृतक की चप्पल मिली है। वहीं, शरीर पर मिले कुछ निशानों के आधार पर प्रथमदृष्टया बिजली का करंट लगने से मौत की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, पुलिस ने अभी मौत के कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। खेत की ओर जा रहे ग्रामीणों ने देखा शव सोमवार को कुछ ग्रामीण खेत की ओर जा रहे थे। इसी दौरान उनकी नजर बधार में पड़े एक व्यक्ति के शव पर पड़ी। शव देखते ही ग्रामीणों ने आसपास के लोगों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद तत्काल पुलिस को सूचना दी गई। कुछ ही देर में घटनास्थल पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलने के बाद कृष्णाब्रह्म थानाध्यक्ष रवि कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव की स्थिति का जायजा लिया और आसपास के इलाके में छानबीन की। प्रथमदृष्टया पुलिस को शव करीब दो दिन पुराना होने का अनुमान है। हालांकि, शव कितने समय से वहां पड़ा था, इसकी स्पष्ट जानकारी पोस्टमार्टम और जांच के बाद ही सामने आएगी। शव से कुछ दूरी पर मिली मृतक की चप्पल घटनास्थल पर शव मिलने के बाद एक और तथ्य पुलिस के लिए जांच का अहम बिंदु बन गया। शव मिलने वाली जगह से कुछ दूरी पर रमई केवट की चप्पल पड़ी मिली। चप्पल का शव से दूर मिलना पुलिस के लिए कई सवाल खड़े कर रहा है। पुलिस इस बिंदु पर भी जांच कर रही है कि रमई की मौत उसी स्थान पर हुई थी या फिर किसी दूसरे स्थान पर मौत होने के बाद शव को बधार में लाकर छोड़ा गया। हालांकि, अभी तक पुलिस को शव को कहीं और से लाकर फेंके जाने की पुष्टि करने वाला कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला है। शरीर पर मिले निशान, करंट लगने की आशंका शव की प्रारंभिक जांच के दौरान शरीर पर कुछ निशान मिले हैं। इन्हीं निशानों के आधार पर प्रथमदृष्टया बिजली का करंट लगने से मौत की आशंका जताई जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यदि करंट से मौत हुई है तो घटना कहां और किन परिस्थितियों में हुई। इसके लिए पुलिस ने आसपास के खेतों और बिजली के तारों की भी जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। संभावित घटनास्थलों की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि मृतक कब घर से निकला था और आखिरी बार उसे किस स्थान पर देखा गया था। दो दिन पुराना बताया जा रहा शव पुलिस के अनुसार शव की स्थिति देखकर उसके करीब दो दिन पुराना होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इस दौरान रमई केवट के परिजन भी उसकी तलाश कर रहे थे। शव की पहचान होने के बाद परिवार के लोगों को इसकी सूचना दी गई। शव मिलने की खबर गांव पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजन घटनास्थल पर पहुंचे और शव की पहचान की। पुलिस ने परिवार के सदस्यों से भी पूछताछ कर मृतक के पिछले कुछ दिनों की गतिविधियों और उसके आने-जाने के बारे में जानकारी जुटाई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट होगा मौत का कारण घटनास्थल पर आवश्यक जांच और साक्ष्य जुटाने के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लिया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल बक्सर भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारण का स्पष्ट पता चल सकेगा। कृष्णाब्रह्म थानाध्यक्ष रवि कुमार ने बताया कि मौत के कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से होगी। घटनास्थल और उसके आसपास के क्षेत्र की जांच की जा रही है। शव मिलने की परिस्थितियों को देखते हुए पुलिस सभी संभावित बिंदुओं पर जांच कर रही है। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि रमई केवट की मौत कैसे हुई और उसकी चप्पल शव से कुछ दूरी पर कैसे पहुंची। यदि करंट लगने की बात सामने आती है तो घटना के स्थान और परिस्थितियों की भी जांच की जाएगी। वहीं, जांच में यदि कोई संदिग्ध तथ्य सामने आता है तो उस दिशा में भी कार्रवाई की जाएगी।
Source link
चीन बोला- भारत का अरुणाचल का मैप जारी करना गलत: कहा- इससे चीन का दावा नहीं बदलेगा; भारत ने 3 दिन पहले नक्शा जारी किया था
चीन ने सोमवार को अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों और भौगोलिक विशेषताओं के भारतीय मानचित्र पर मानक नाम दर्ज करने के कदम को अवैध बताया। चीन ने इसे ‘शून्य और अमान्य’ करार दिया। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने भारत की हाल की घोषणा पर सवाल के जवाब में यह बात कही। उन्होंने कहा कि चीन भारत की ओर से बनाए गए तथाकथित अरुणाचल प्रदेश को मान्यता नहीं देता। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को अरुणाचल प्रदेश की 27 जगहों और उनकी भौगोलिक विशेषताओं को आधिकारिक नक्शे पर दर्ज किया था। यह कदम चीन की ओर से राज्य की जगहों के नाम बदलने की कोशिशों के बीच उठाया गया है। गृह मंत्रालय के मुताबिक, यह काम अरुणाचल प्रदेश सरकार से सलाह लेकर किया गया है। इसका मकसद इन जगहों की सही पहचान बताना और आम लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। म सरकार ने ऐसा क्यों किया इन नामों को आधिकारिक मानचित्रों में शामिल करने का मकसद प्रशासन को बेहतर बनाना है। इससे सरकारी रिकॉर्ड में एकरूपता आएगी, अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर तालमेल होगा और आपदा के समय मदद पहुंचाने में आसानी होगी। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि इन नामों के आधार पर लोगों के पासपोर्ट या दूसरे निजी दस्तावेजों में कोई बदलाव किया जाएगा। सरकार का मुख्य उद्देश्य इन क्षेत्रों की आधिकारिक पहचान तय करना और भारत के प्रशासनिक रिकॉर्ड में उन्हें शामिल करना है। चीन अरुणाचल की जगहों के नाम जारी करता रहा है चीन ने कई बार अरुणाचल प्रदेश की जगहों के चीनी नामों की सूची जारी करता रहा है। वह अरुणाचल प्रदेश को जांगनान कहता है। भारत ने चीन की इन कोशिशों को लगातार खारिज किया है। भारत का कहना है कि इनका भारत की राज्य पर संप्रभुता पर कोई असर नहीं पड़ता।
Source link
वेल्डिंग की नई तकनीक पर जोधपुर IIT की रिसर्च: परमाणु रिएक्टर से लेकर पावर प्लांट तक में हो सकेगा यूज; टीम डवलप कर रही इलेक्ट्रोड कोटिंग – Jodhpur News
आईआईटी जोधपुर के वैज्ञानिकों ने वेल्डिंग की नई तकनीकों और इसके कम्पोनेंट पर महत्वपूर्व रिसर्च किया है। इसका उद्देश्य परमाणु रिएक्टर, ऊर्जा पाइपलाइन, पुल और अन्य महत्वपूर्ण औद्योगिक संरचनाओं को अधिक सुरक्षित, मजबूत और टिकाऊ बनया जा सके। इस रिसर्च का नेतृत्व आईआईटी जोधपुर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर राहुल निब्बर कर रहे हैं। उनके वेल्डिंग एंड जॉइनिंग रिसर्च ग्रुप की ओर से उन्नत वेल्डिंग सामग्री, नई जॉइनिंग तकनीक और मटेरियल इंजीनियरिंग से जुड़े समाधान विकसित किए जा रहे हैं। इलेक्ट्रोड कोटिंग कर रहे है डवलप शोध समूह SMAW और SAW जैसी इंडस्ट्रीयल वेल्डिंग प्रोसेस के लिए विशेष फ्लक्स और इलेक्ट्रोड कोटिंग विकसित कर रहा है। इसमें रेड ओखर (Red Ochre) जैसे प्राकृतिक और पर्यावरण-अनुकूल खनिजों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। टीम यह भी स्टडी कर रही है कि वेल्डिंग के दौरान बहुत छोटे स्तर पर होने वाले बदलाव से कैसे मजबूती आए और ये लंबे समय तक चले। टीम डुप्लेक्स स्टेनलेस स्टील, इनकोनेल (Inconel) जैसे निकेल-आधारित सुपरएलॉय और उच्च-प्रदर्शन पाइपलाइन स्टील की वेल्डिंग पर काम कर रही है। वेल्डिंग के अलावा प्रोफेसर निब्बर का रिसर्व फाइबर पॉलिमर नैनो-कंपोजिट्स पर भी है। ये टेक्निक समुद्री एनवायरमेंट के लिए डेवलप की जा रही है। इसमें नमी और तापमान के प्रभाव के बाद भी कैसे इसे मजबूत किया जाए,इस पर स्टडी की जा रही है।
Source link
पटना की सबसे पुरानी मिठाई दुकान, नमकीन खस्ता से शुरू हुआ सफर, आज 12 से ज्यादा आइटम
Last Updated:
Patna Oldest Mithai Shop: पटना. शहर में ऐसी कई पुरानी दुकानें हैं, जो अपने स्वाद के दम पर दशकों से लोगों की पसंद बनी हुई हैं. इन्हीं में से एक है पटना जंक्शन के पास न्यू मार्केट में स्थित बाबा शाही लस्सी वाला. करीब 66 साल पुरानी यह दुकान आज भी अपने पारंपरिक स्वाद और शुद्धता के लिए जानी जाती है. यहां हर दिन बड़ी संख्या में लोग लस्सी, रसगुल्ला और दूसरी मिठाइयों का स्वाद लेने पहुंचते हैं. खासकर मंगलवार और शनिवार को यहां इतनी भीड़ होती है कि ग्राहकों की सुविधा के लिए टोकन सिस्टम से बिक्री की जाती है.
यहां का रसगुल्ला और गुलाब जामुन मुंह में रखते ही घुल जाता है. लस्सी का स्वाद ऐसा है कि पीने से ज्यादा लोग उसे खाते हैं. हालांकि, इस दुकान की शुरुआत केवल एक नमकीन खस्ता से हुई थी, लेकिन आज यहां एक दर्जन से भी ज्यादा फूड आइटम उपलब्ध हैं.
दुकान की तीसरी पीढ़ी के नईम जी इसे चला रहे हैं. उन्होंने बताया कि इसकी शुरुआत 1960 के आसपास केवल नमकीन खस्ता यानी निमकी बेचने से हुई थी. महावीर मंदिर के बिल्कुल नजदीक होने की वजह से लोग हमेशा यहां आते थे. उस समय लोगों को ताजा और स्वादिष्ट नमकीन मिलता था.
धीरे-धीरे ग्राहकों का भरोसा बढ़ता गया और दुकान में नए-नए फूड आइटम और मिठाइयां जुड़ती चली गईं. आज यह दुकान पटना की पहचान बन चुकी है. यहां दही भल्ला, लिट्टी, समोसा, गुलाब जामुन, रसगुल्ला, चंद्रकला और लौंगलता मिलती है.
Add News18 as
Preferred Source on Google
समय के साथ यह कारोबार परिवार की दूसरी और अब तीसरी और चौथी पीढ़ी तक पहुंच चुका है. नई पीढ़ी भी पुरानी परंपरा और स्वाद को बरकरार रखते हुए ग्राहकों की पसंद का पूरा ध्यान रख रही है. यही वजह है कि वर्षों पुराने ग्राहक आज भी यहां आते हैं और नई पीढ़ी के लोग भी इस दुकान के स्वाद के दीवाने बन रहे हैं.
नईम जी ने बताया कि पहले यहां लस्सी 35 पैसे में मिलती थी, लेकिन अब इसकी कीमत 35 रुपये है. पनीर समोसा और खस्ता कचौड़ी 14 रुपये प्रति पीस, दही बड़ा 10 रुपये पीस, लौंगलता 15 रुपये प्रति पीस, गुलाब जामुन और रसगुल्ला भी 15 रुपये प्रति पीस, रसमलाई 30 रुपये पीस सहित अलग-अलग आइटम अलग-अलग कीमत पर उपलब्ध हैं.
पहले यहां एक काउंटर हुआ करता था, लेकिन आज की तारीख में चार काउंटर हैं.नईम जी का कहना है कि मंगलवार और शनिवार को यहां ग्राहकों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक रहती है. भीड़ को व्यवस्थित रखने के लिए टोकन सिस्टम लागू किया गया है.
ग्राहक पहले टोकन लेते हैं और फिर अपनी बारी आने पर ऑर्डर प्राप्त करते हैं. पटना जंक्शन के नजदीक होने की वजह से शहर के अलावा दूसरे जिलों और राज्यों से आने वाले लोग भी इस दुकान तक पहुंचते हैं. कई ग्राहक वर्षों से यहां आते रहे हैं और अपने परिवार और दोस्तों को भी इस दुकान का स्वाद चखाने लेकर आते हैं.
दिल्ली में भाजपा की तिरंगा यात्रा, हजारों कार्यकर्ता हुए शामिल: चांदनी चौक से हौज काजी तक निकली यात्रा; स्कूली छात्रों ने भी लिया हिस्सा – New Delhi News
भारत के 80वें स्वतंत्रता दिवस सप्ताह के तहत दिल्ली भाजपा ने पुरानी दिल्ली में तिरंगा यात्रा निकाली। प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा के नेतृत्व में चांदनी टाउन हॉल से हौज काजी तक निकली यात्रा में हजारों भाजपा कार्यकर्ता, स्कूली छात्र और स्थानीय नागरिक शामिल हुए। यात्रा के मार्ग को तिरंगे और तोरणद्वारों से सजाया गया था। चांदनी चौक के सांसद प्रवीन खंडेलवाल भी यात्रा में शामिल हुए। स्थानीय व्यापारिक और नागरिक संगठनों ने जगह-जगह मंच लगाकर यात्रा में शामिल नेताओं और कार्यकर्ताओं का स्वागत किया। हर्ष मल्होत्रा और प्रवीन खंडेलवाल ने लोगों को स्वतंत्रता दिवस की शुभकामनाएं दीं। पुरानी दिल्ली की पहचान गंगा-जमुनी तहजीब हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि पुरानी दिल्ली की धरती से तिरंगा यात्रा शुरू होना गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि लाल किला केवल ऐतिहासिक इमारत नहीं, बल्कि स्वतंत्रता और देश की लोकतांत्रिक परंपरा का प्रतीक है। प्रधानमंत्री हर वर्ष 15 अगस्त को यहीं से देश को संबोधित करते हैं। उन्होंने कहा कि पुरानी दिल्ली की पहचान गंगा-जमुनी तहजीब है, जहां विभिन्न धर्मों और समुदायों के लोग मिलकर त्योहार मनाते हैं। उन्होंने लोगों से हर घर तिरंगा अभियान से जुड़ने और देश की एकता व तिरंगे की शान बनाए रखने का संकल्प लेने की अपील की।
Source link
कोख से निकला बच्चा उधर शेयर मार्केट में खुल गया अकाउंट, बनेगा करोड़पति
घर में बच्चे की किलकारी गूंजती है तो परिवार के लोग भविष्य के सपने देखने लगते हैं. कोई नन्हे मेहमान के लिए कपड़े खरीदता है, कोई खिलौने लाता है और कोई उसके नाम पर सोने-चांदी का सामान रख देता है. भारत में भी इसी दौरान बच्चे की पढ़ाई और शादी के लिए बचत शुरू करने की बातें होने लगती हैं. लेकिन साउथ कोरिया में कुछ माता-पिता इससे भी आगे निकल गए हैं. वहां बच्चे ने अभी दुनिया देखना शुरू भी नहीं किया और उसके नाम पर इन्वेस्टमेंट अकाउंट खुल रहा है. यानी बच्चा चलना बाद में सीखेगा, उसके पैसे को शेयर बाजार में चलाने की तैयारी पहले हो रही है.
साउथ कोरिया की सबसे बड़ी ब्रोकरेज कंपनियों में से एक मिराए एसेट सिक्योरिटीज के आंकड़े इस बदलती सोच की कहानी बताते हैं. जून तक एक साल से कम उम्र के बच्चों के करीब 15,000 ब्रोकरेज अकाउंट खुल चुके थे. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि सिर्फ एक साल में ऐसे अकाउंट की संख्या करीब तीन गुना हो गई. यानी माता-पिता अब बच्चे के नाम पर सिर्फ बैंक में पैसा जमा करने के बजाय शेयर, ETF और दूसरे बाजार से जुड़े निवेश के बारे में भी सोच रहे हैं. और यह मामला सिर्फ नवजात बच्चों तक नहीं है. 9 साल से कम उम्र के बच्चों के नए अकाउंट भी करीब 60 फीसदी बढ़कर लगभग 1.85 लाख हो गए हैं. कंपनी ने डुप्लीकेट अकाउंट को अलग रखते हुए ये आंकड़े जारी किए हैं.
आखिर इतनी जल्दी किस बात की है?
अब सवाल यही है कि जब बच्चे को अभी स्कूल भी नहीं जाना, तो उसके नाम पर शेयर बाजार में पैसा लगाने की इतनी जल्दी क्यों? जवाब है- समय. साउथ कोरिया के कई माता-पिता मानते हैं कि बच्चों के भविष्य के लिए सिर्फ बड़ी रकम जमा करना जरूरी नहीं है. अगर निवेश जल्दी शुरू कर दिया जाए तो छोटी रकम को भी लंबे समय तक बढ़ने का मौका मिल सकता है. नर्स के तौर पर काम करने वाली ली ह्ये-वोन और उनके पति इसका उदाहरण हैं. उन्होंने अपने पहले बच्चे के लिए निवेश अकाउंट तब खोला था, जब वह चार साल का हो चुका था. लेकिन दूसरे बच्चे के जन्म तक उनकी सोच बदल चुकी थी. इस बार बच्चे के पैदा होते ही अकाउंट खोल दिया गया.
पहले बच्चे से मिली सीख, दूसरे के लिए जन्म के साथ निवेश
इस परिवार की रणनीति भी दिलचस्प है. माता-पिता बच्चों के लिए हर महीने करीब 3 लाख से 4 लाख कोरियन वॉन निवेश कर रहे हैं. भारतीय रुपये में यह रकम मोटे तौर पर करीब 20 हजार से ज्यादा बैठती है, हालांकि विनिमय दर के हिसाब से रकम बदलती रहती है. परिवार का निवेश मुख्य रूप से अमेरिका के ETF में जा रहा है, खासकर ऐसे ETF में जो S&P 500 को ट्रैक करते हैं. यानी उनका लक्ष्य किसी एक कंपनी के शेयर पर दांव लगाने के बजाय अमेरिकी बाजार की बड़ी कंपनियों के प्रदर्शन से लंबे समय में फायदा लेने का है. सोच बिल्कुल सीधी है- बच्चे के बड़े होने का इंतजार क्यों किया जाए, जब निवेश आज से शुरू किया जा सकता है?
ETF को ऐसे समझिए, मामला बिल्कुल आसान है
ETF का नाम सुनते ही अगर आपको लगे कि अब कोई भारी-भरकम फाइनेंस की क्लास शुरू होने वाली है, तो ऐसा बिल्कुल नहीं है. इसे ऐसे समझिए कि आपको अमेरिका की बड़ी कंपनियों में निवेश करना है, लेकिन आप यह तय नहीं कर पा रहे कि Apple खरीदें, Microsoft खरीदें या किसी और कंपनी का शेयर. ETF आपको एक ऐसा रास्ता देता है, जिसमें एक साथ कई कंपनियां शामिल हो सकती हैं. S&P 500 अमेरिका की करीब 500 बड़ी कंपनियों से जुड़ा प्रमुख इंडेक्स है. उसे ट्रैक करने वाले ETF में पैसा लगाने का मतलब है कि आपका निवेश एक ही कंपनी पर निर्भर नहीं रहता. हालांकि इसका मतलब जोखिम खत्म होना नहीं है. बाजार गिर सकता है और निवेश का मूल्य भी घट सकता है.
असली जादू रकम का नहीं, ‘कितने साल’ का है
मान लीजिए आपने 100 रुपये लगाए और उस पर 10 रुपये का फायदा हुआ. अब रकम 110 रुपये हो गई. अगर आगे मिलने वाला रिटर्न उस बढ़ी हुई रकम पर भी जुड़ता जाए तो पहले कमाया गया पैसा भी आगे पैसा बनाने लगता है. यही प्रक्रिया लंबे समय तक चलती रहे तो रकम तेजी से बढ़ सकती है. लेकिन कम्पाउंडिंग का सबसे बड़ा साथी है- समय. जन्म के समय शुरू किया गया निवेश बच्चे को 18 साल तक बढ़ने का मौका दे सकता है. वही निवेश अगर 10 साल की उम्र में शुरू हुआ तो उसके पास सिर्फ 8 साल होंगे. इसलिए साउथ कोरिया के इन माता-पिता के लिए असली सवाल यह नहीं है कि आज कितने पैसे लगाए जाएं, बल्कि यह है कि निवेश को कितने साल दिए जाएं.
बेटी पैदा हुई और पिता ने दिया ‘टाइम का तोहफा’
ऑफिस में काम करने वाले ली जुन-ह्योक ने भी अपनी बेटी के जन्म के तुरंत बाद उसका निवेश अकाउंट खोल दिया. उनकी सोच है कि बेटी को सिर्फ पैसा देना काफी नहीं है, उसे समय और कम्पाउंडिंग का फायदा भी दिया जाना चाहिए. वह नियमित रूप से छोटी-छोटी रकम निवेश कर रहे हैं. उनके निवेश का कुछ हिस्सा दक्षिण कोरिया के सेमीकंडक्टर सेक्टर में है, जबकि कुछ पैसा अमेरिका की फिजिकल एआई से जुड़ी कंपनियों में लगाया जा रहा है. उन्हें उम्मीद है कि भविष्य में इन क्षेत्रों में अच्छी संभावनाएं हो सकती हैं. लेकिन यहां सावधानी वाली घंटी भी बजती है- किसी सेक्टर को भविष्य का सितारा मान लेना और उसमें पैसा लगाने से मुनाफा मिलना दो अलग बातें हैं. शेयर बाजार में रिटर्न की कोई गारंटी नहीं होती.
बाजार कल गिरा तो बच्चों का पैसा भी गिरेगा?
यही वह सवाल है जो इस ट्रेंड के साथ सबसे जरूरी है. अभी बाजार में तेजी है, इसलिए बच्चों के नाम पर निवेश बढ़ रहा है. लेकिन अगर शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आ गई तो क्या माता-पिता अपना पैसा निकाल लेंगे? DePaul University के अर्थशास्त्र के प्रोफेसर जे-जून वू का मानना है कि ऐसा जरूरी नहीं है. उनका तर्क है कि अगर माता-पिता शेयर बाजार को लंबे समय में संपत्ति बनाने का माध्यम मानते रहे, तो बाजार के उतार-चढ़ाव के बावजूद बच्चों के लिए निवेश खाते खुलते रह सकते हैं. आखिर बच्चे के नाम पर किया गया निवेश आमतौर पर अगले महीने या अगले साल खर्च करने के लिए नहीं है. इसका लक्ष्य कई साल दूर है. यही लंबी अवधि बाजार की छोटी अवधि की हलचल को नजरअंदाज करने का मौका देती है.
बच्चे की पढ़ाई के लिए बचत से आगे निकल रही पैरेंटिंग
साउथ कोरिया की यह कहानी सिर्फ शेयर बाजार में पैसा लगाने की नहीं है. यह बताती है कि कुछ माता-पिता अब बच्चों की आर्थिक योजना को जन्म से ही शुरू करने लगे हैं. पहले बचत का मतलब बैंक में पैसा जमा करना था, फिर म्यूचुअल फंड और इंश्योरेंस जैसे विकल्प आए और अब शेयर बाजार व ETF भी बच्चों के भविष्य की प्लानिंग का हिस्सा बन रहे हैं. लेकिन यहां एक बात याद रखना जरूरी है- जल्दी निवेश का मतलब पक्का मुनाफा नहीं है. बाजार में जोखिम रहेगा, निवेश की कीमत घट भी सकती है और बढ़ भी सकती है. फिर भी साउथ कोरिया में चल रहा यह ट्रेंड एक दिलचस्प सवाल जरूर छोड़ता है- क्या आने वाले समय में बच्चे के जन्म प्रमाणपत्र के साथ उसका बैंक अकाउंट ही नहीं, इन्वेस्टमेंट अकाउंट भी खोलना सामान्य बात बन जाएगा?
अयोध्या में निकली भव्य तिरंगा यात्रा: हाथों में तिरंगा लेकर गूंजे देशभक्ति के नारे,दिखा राष्ट्रभक्ति का उत्साह – Ayodhya News
स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अयोध्या में भव्य तिरंगा यात्रा निकाली गई। घर-घर तिरंगा पहुंचाने और लोगों में राष्ट्रभक्ति की भावना मजबूत करने के उद्देश्य से आयोजित यात्रा में बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। रिकाबगंज चौराहे से शुरू हुई यात्रा नियावां चौराहे तक पहुंची। रास्तेभर हाथों में लहराते तिरंगे और देशभक्ति के नारों से पूरा इलाका राष्ट्रभक्ति के रंग में नजर आया। यात्रा की अगुवाई प्रदेश के कृषि मंत्री एवं अयोध्या के प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही, विधायक वेद प्रकाश गुप्ता समेत भाजपा के अन्य नेताओं ने की। कार्यकर्ताओं और आम लोगों ने हाथों में तिरंगा लेकर भारत माता के जयकारे लगाए। वीरों के बलिदान को याद करने का अवसर प्रभारी मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने कहा कि देश की आजादी के लिए वीरों ने अपना सर्वस्व न्योछावर किया। उनके बलिदान और संघर्ष को याद करते हुए तिरंगा यात्रा निकाली जा रही है। उन्होंने कहा कि देश की एकता और अखंडता को बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। शाही ने कहा कि राष्ट्रीय तिरंगा हमारी आजादी और गौरव का प्रतीक है। इसे घर-घर पहुंचाना प्रत्येक नागरिक का दायित्व है। तिरंगा यात्रा का उद्देश्य नई पीढ़ी को स्वतंत्रता संग्राम और वीरों के बलिदान से परिचित कराना भी है, ताकि युवा मातृभूमि के प्रति अपनी जिम्मेदारी समझें और राष्ट्र निर्माण में योगदान दें।
Source link
Vi ने लॉन्च किए दो सस्ते रिचार्ज प्लान, अपनी मर्जी से सेट करें इंटरनेट डेटा लिमिट
वोडाफोन-आइडिया ने अपने करोड़ों यूजर्स के लिए खास रिचार्ज प्लान पेश किया है। यूजर्स अपनी मर्जी से प्लान में मिलने वाले डेटा का चुनाव कर सकते हैं। फिलहाल ऐसी सुविधा कोई दूसरी टेलीकॉम कंपनी ऑफर नहीं कर रही है। वोडाफोन-आइडिया का यह एक्सपेरिमेंट कितना कामयाब होगा ये तो आने वाले समय में ही पता चलेगा। कंपनी ने 249 और 250 रुपये वाले प्लान उतारे हैं। ये प्लान खास तौर पर उन यूजर्स के लिए पेश किया गया है, जो कम खर्च में अपना सिम एक्टिव रखना चाहते हैं। कंपनी ने हाल ही में 200 रुपये वाला एक प्लान पेश किया है, जिसमें OTT ऐप्स समेत कई बेनिफिट्स मिलते हैं।
इन दिनों आने वाले रिचार्ज प्लान डेली डेटा लिमिट के साथ आते हैं। ऐसे में अगर किसी कारण आपने अपना पूरा डेटा खत्म कर दिया है तो इंटरनेट यूज करने के लिए अगले दिन का इंतजार करना होगा या फिर आपको डेटा ऐड-ऑन पैक लेना होगा। वोडाफोन-आइडिया ने यूजर्स की इसी समस्या को दूर करने का प्रयास किया है। यूज चाहे तो नंबर रिचार्ज करने के बाद डेली डेटा को एक साथ कल्ब करके ले सकते हैं, जिसमें उन्हें किसी डेली लिमिट का डर नहीं रहेगा। वो अपनी मर्जी से डेटा का इस्तेमाल कर सकते हैं।
249 रुपये वाला प्लान
Vi अपने इस सस्ते रिचार्ज प्लान में 28 दिनों की वैलिडिटी ऑफर कर रहा है। इस प्लान में यूजर्स को डेली 0.5GB और कुल 14GB डेटा ऑफर किया जा रहा है। यूजर्स अपने हिसाब से इस प्लान की डेटा लिमिट को बदल सकते हैं। इसके अलावा यूजर्स को इस प्लान में पूरे भारत में अनलिमिटेड वॉइस कॉलिंग और डेली 100 फ्री SMS का लाभ मिलेगा। इस प्लान को खास तौर पर उन यूजर्स के लिए पेश किया गया है, जो कम खर्च में अपना नंबर एक्टिव रखना चाहते हैं।
250 रुपये वाला प्लान
इस प्लान में भी यूजर्स को 28 दिनों की वैलिडिटी मिलती है। इसके अलावा यूजर्स को पूरे भारत में फ्री नेशनल रोमिंग और अनलिमिटेड वॉइस कॉलिंग का लाभ मिलता है। वोडाफोन-आइडिया अपने इस प्लान में यूजर्स को 2GB डेटा भी ऑफर कर रहा है। साथ ही, 28 दिनों के लिए Spotify Premium का भी लाभ मिलेगा। इस प्लान में यूजर्स अपने डेटा का चुनाव अपनी मर्जी से नहीं कर पाएंगे।
कैसे चुनें डेटा?
- वोडाफोन-आइडिया यूजर्स को अपना नंबर 249 रुपये वाले प्लान के साथ रिचार्ज करना होगा।
- इसके बाद फोन के डायलर पर जाकर *188# डायल करना होगा।
- फिर स्क्रीन पर दिए गए ऑप्शन में से वो एकमुश्त डेटा वाला ऑप्शन चुन सकते हैं।
- इसके बाद यूजर को एक साथ 14GB डेटा का लाभ मिल जाएगा।
- हालांकि, यूजर को इस बात का ध्यान देना होगा कि वो अपना नंबर रिचार्ज करने के तुरंत बाद इसका चुनाव कर लें। बाद में वो इसका लाभ नहीं ले पाएंगे।
यह भी पढ़ें – Google Pixel 10 को सस्ते में खरीदने का मौका, Flipkart Sale में हुआ बड़ा प्राइस कट





