Sunday, September 13, 2026
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कांग्रेस की बाडे़बंदी में घुसी पुलिस,एक घंटे तक हंगामा: थानाधिकारी बोले- अपहरण की शिकायत मिली है, प्रत्याशी ने कहा- मैं अपनी मर्जी से आया हूं – Alwar News




अलवर के रामगढ़ नगर पालिका चुनाव में कांग्रेस की बाड़ेबंदी के दौरान शनिवार को अकबरपुर के धवला रिसॉर्ट में उस समय हंगामा हो गया, जब अकबरपुर थाना पुलिस और रामगढ़ थाना पुलिस की टीम वार्ड 10 से निर्दलीय प्रत्याशी योगेश मिश्रा को अपने साथ ले जाने पहुंची। पुलिस का कहना था कि योगेश के अपहरण की शिकायत मिली है। वहीं योगेश ने मौके पर ही पुलिस के सामने स्पष्ट किया कि उसका कोई अपहरण नहीं हुआ और वह अपनी मर्जी से कांग्रेस की बाड़ेबंदी में आया है। पुलिस योगेश को अपने साथ ले जाने की कोशिश करती रही। इस दौरान कांग्रेस नेताओं और पुलिस के बीच जमकर नोकझोंक और खींचतान हुई। कभी पुलिस योगेश को अपनी ओर खींचती नजर आई तो कभी कांग्रेस कार्यकर्ता और नेता उन्हें अपनी ओर खींचते रहे। करीब एक घंटे तक चले हंगामे के बाद पुलिस योगेश को अपने साथ ले जाने में सफल नहीं हो सकी और वहां से लौट गई। देखे PHOTOS.. योगेश बोले- मेरा अपहरण नहीं हुआ, मैं अपनी मर्जी से आया हूं निर्दलीय प्रत्याशी योगेश मिश्रा ने पुलिस के सामने कहा कि उसका किसी ने अपहरण नहीं किया है। वह अपनी इच्छा से यहां आया है और यहीं रहना चाहता है। इसके बावजूद पुलिस उसे अपने साथ ले जाने की कोशिश करती रही। कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं ने पुलिस की इस कार्रवाई का विरोध किया। आर्यन जुबेर खान बोले- सरकार के दबाव में काम कर रहा प्रशासन रामगढ़ से कांग्रेस के पूर्व विधानसभा प्रत्याशी आर्यन जुबेर खान ने आरोप लगाया कि पुलिस और प्रशासन सरकार के दबाव में काम कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि कांग्रेस के साथ रह रहे प्रत्याशियों पर दबाव बनाया जा रहा है। उनका आरोप है कि प्रशासन और पुलिस मिलकर भाजपा का बोर्ड बनवाने का प्रयास कर रहे हैं, लेकिन प्रत्याशी खुद कांग्रेस के साथ रहना चाहते हैं। आर्यन जुबेर खान ने कहा कि सरकार ने प्रशासन पर दबाव बनाया हुआ है कि किसी भी तरह भाजपा का बोर्ड बने। उन्होंने कहा कि यदि पार्षद प्रत्याशी अपनी इच्छा से कांग्रेस के साथ हैं तो पुलिस द्वारा उन्हें वहां से ले जाने की कोशिश करना गलत है। एक दिन पहले जयपुर के रिसोर्ट में भी हुआ था हंगामा नगर निकाय चुनाव में बाड़ेबंदी को लेकर यह दूसरा मामला है। शुक्रवार को जयपुर के तुंगा स्थित एक रिसॉर्ट में कांग्रेस की बाड़ेबंदी में वन विभाग के अधिकारी, पुलिसकर्मी और भाजपा से जुड़े लोग पहुंच गए थे। वहां से एक निर्दलीय प्रत्याशी को अपने साथ अलवर लाया गया था। इसके बाद शनिवार को अकबरपुर के धवला रिसॉर्ट में कांग्रेस की बाड़ेबंदी में पुलिस के पहुंचने और निर्दलीय प्रत्याशी को ले जाने की कोशिश से फिर हंगामा हो गया।



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एक ही रात में सात नलकूपों से चोरी: चोर स्टार्टर-केबल और कटआउट समेत अन्य कीमती सामान ले गए – Shamli News




शामली जिले के टिटौली गांव में शुक्रवार रात चोरों ने सात किसानों के नलकूपों से स्टार्टर, केबल और कटआउट समेत अन्य कीमती सामान चोरी कर लिया। शनिवार सुबह खेत पर पहुंचे किसानों को इस घटना का पता चला। लगातार हो रही नलकूप चोरी की घटनाओं को लेकर किसानों में रोष है। चोरों ने किसान राजीव कुमार, अनिल, धर्मेंद्र, मांगेराम, विनोद, प्रवीण और राहुल के नलकूपों को निशाना बनाया। उन्होंने नलकूपों में तोड़फोड़ कर सामान निकाला। किसानों को सुबह नलकूपों के ताले टूटे और सामान बिखरा मिला। इसके बाद आसपास के किसानों को भी वारदात की जानकारी दी गई। पीड़ित किसानों ने आदर्श मंडी थाने में पुलिस को शिकायत दी है। उन्होंने चोरों को जल्द गिरफ्तार करने की मांग की है। किसानों का कहना है कि नलकूपों पर लगातार चोरी हो रही है, लेकिन इन घटनाओं पर रोक नहीं लग पा रही है।
पिछले दो दिनों में कुल 11 नलकूपों से चोरी की घटनाएं सामने आई हैं। टिटौली की घटना से एक दिन पहले बृहस्पतिवार रात शहर कोतवाली क्षेत्र के लिसाढ़ गांव में भी चार नलकूपों से चोरी हुई थी। चोर किसान संसार सिंह, रामपाल, ब्रह्मपाल और राममेहर सिंह के नलकूपों से कीमती सामान ले गए थे। चारों किसानों ने शहर कोतवाली में शिकायत दी थी। सीओ सिटी जितेंद्र सिंह ने बताया कि नलकूपों से चोरी के मामलों की जांच चल रही है। उन्होंने कहा कि चोरों को जल्द गिरफ्तार कर इन वारदातों का खुलासा किया जाएगा।



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छठे दिन खत्म हुई AISF की भूख हड़ताल: राजभवन ने 10 सूत्री मांगों पर दिया लिखित आश्वासन, 5 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को बुलाया था – Patna News


पटना यूनिवर्सिटी में छात्रों की 10 सूत्री मांगों को लेकर ऑल इंडिया स्टूडेंट्स फेडरेशन (AISF) की ओर से जारी अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल शनिवार को छठे दिन खत्म हो गई। AISF के 5 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल को राजभवन में बात के लिए बुलाया गया था।

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राज्यपाल के मुख्य सचिव के समक्ष प्रतिनिधिमंडल ने छात्रों की 10 सूत्री मांगें रखीं। मुख्य सचिव ने मांगों पर बिंदुवार सहमति जताते हुए उन्हें जल्द पूरा करने का आश्वासन दिया। राजभवन ने छात्रों की मांगों पर जल्द कार्रवाई का लिखित आश्वासन दिया है।

जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया गया।

जूस पिलाकर समाप्त कराया गया अनशन

राजभवन में वार्ता के बाद AISF का प्रतिनिधिमंडल भूख हड़ताल स्थल पर पहुंचा। यहां आंदोलनरत छात्रों और समर्थकों की मौजूदगी में पटना कॉलेज के पूर्व प्राचार्य प्रो. नवल किशोर चौधरी, सेफाली राय, अनीश कुमार, निखिल झा, पटना विश्वविद्यालय की रजिस्ट्रार डॉ. शालिनी और प्रो. मनोज सहित अन्य लोगों ने भूख हड़ताल पर बैठे छात्र नेताओं बिट्टू भारद्वाज, किशलय और प्रिंस राज को जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया।

इस मौके पर प्रो. नवल किशोर चौधरी ने कहा कि कभी पटना विश्वविद्यालय को गर्व की नजर से देखा जाता था, लेकिन आज छात्रों को पढ़ाई से जुड़ी मांगों के लिए आंदोलन करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि कुलपति को संवेदनशीलता के साथ छात्रों की समस्याएं सुनकर उनका समाधान करना चाहिए।

पटना विश्वविद्यालय शिक्षक संघ के नेता प्रो. शिवशंकर ने भी छात्रों की दस सूत्री मांगों का समर्थन किया। उन्होंने कहा कि इन मांगों का समाधान विश्वविद्यालय स्तर पर ही किया जा सकता था, लेकिन छात्रों से बातचीत तक नहीं की गई।

आंदोलन जारी रखने की चेतावनी

AISF के पटना जिला सचिव मीर सैफ अली ने छात्रों, शिक्षकों और कर्मचारियों के प्रति आभार जताते हुए कहा कि सभी के सहयोग से आंदोलन को सफलता मिली है। उन्होंने कहा कि भविष्य में छात्रों की समस्याओं को लेकर बातचीत की मांग उठेगी तो विश्वविद्यालय प्रशासन को उनकी बात सुननी होगी।

भूख हड़ताल पर बैठे बिट्टू भारद्वाज, प्रिंस राज और किशलय ने संयुक्त रूप से कहा कि छात्रों की मांगों को लेकर AISF का संघर्ष आगे भी जारी रहेगा। उन्होंने विश्वविद्यालय प्रशासन पर तानाशाही रवैया अपनाने का आरोप लगाते हुए कहा कि पटना विश्वविद्यालय को बचाने के लिए संगठन हर स्तर पर आंदोलन करेगा।

AISF ने स्पष्ट किया कि राजभवन के आश्वासन के बावजूद छात्रों की समस्याओं के समाधान और विश्वविद्यालय की स्थिति में सुधार के लिए उसका संघर्ष जारी रहेगा।



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ट्रेन की चपेट में आए बुजुर्ग की मौत: शाजापुर में रेलवे फाटक पार करते समय हादसा – shajapur (MP) News




शाजापुर के बेरछा थाना क्षेत्र में बेरछी गांव के पास शनिवार को एक हादसे में 70 वर्षीय बुजुर्ग करण गुजराती की मौत हो गई। यह घटना बेरछा रेलवे स्टेशन के पास बेरछी रेलवे फाटक पर हुई। जानकारी के अनुसार, करण गुजराती किसी काम से बाहर निकले थे। रेलवे फाटक पार करते समय वे अचानक ट्रेन की चपेट में आ गए और गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना की सूचना मिलने पर 108 एंबुलेंस की मदद से उन्हें गंभीर हालत में शाजापुर जिला अस्पताल पहुंचाया गया। डॉक्टर ने इलाज शुरू किया, लेकिन हालत गंभीर होने के कारण इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। परिजन के अनुसार, करण गुजराती घर में अकेले रहते थे। सूचना मिलने पर परिजन जिला अस्पताल पहुंचे। पुलिस ने जरूरी कानूनी कार्रवाई पूरी कर शव का पोस्टमार्टम कराया और अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंप दिया। पुलिस ने केस दर्ज कर हादसे की जांच शुरू कर दी है।



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रिजर्व बैंक ने दिया टाटा समूह को बड़ा झटका, शेयर बाजार निवेशकों के आने वाले अच्छे दिन


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RBI vs Tata Sons : रिजर्व बैंक ने टाटा संस की उस अपील को खारिज कर दिया है, जिसमें कंपनी ने खुद को एनबीएफसी की लिस्ट से बाहर रखने की गुहार लगाई थी. कंपनी ने कहा था कि वह अपना एनबीएफसी लाइसेंस भी सरेंडर करना चाहती है, लेकिन आरबीआई ने इससे साफ इनकार कर दिया और कहा कि टाटा संस को एनबीएफसी की कैटेगरी में ही रखा जाएगा.

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आरबीआई ने टाटा संस को अपर लेयर की एनबीएफसी लिस्ट में रखा है.

नई दिल्ली. करीब तीन साल से चल रही रस्साकसी में आखिरकार रिजर्व बैंक ने टाटा समूह को तगड़ा झटका दे दिया है. आरबीआई ने टाटा संस की उस अर्जी को सिरे से खारिज कर दिया जिसमें समूह ने अपना गैर बैंकिंग फाइनेंशियल कंपनी (NBFC) का रजिस्ट्रेशन सिर्टफिकेट सरेंडर करने की अपील की थी. आरबीआई के फैसले का मतलब है कि अब टाटा संस को खुद को शेयर बाजार में लिस्ट कराना ही पड़ेगा. कंपनी ने यह अर्जी इसलिए दी थी कि उसका एनबीएफसी लाइसेंस सरेंडर हो जाए तो शायद उसे आरबीआई के नियमों से राहत मिल जाएगी और खुद को लिस्ट नहीं कराना पड़ेगा.

CNBC-TV18 ने सूत्रों के हवाले से बताया है कि आरबीआई के इस फैसले से टाटा संस को तगड़ा झटका लगा है. उसकी अपील रिजेक्ट होने का सीधा मतलब है कि अब समूह को आरबीआई के उन नियमों का पालन करना ही पड़ेगा, जो उसने अपर लेयर एनबीएफसी के लिए बनाया है. इस नियम के तहत सभी अपर लेयर की एनबीएफसी को शेयर बाजार में लिस्ट होना जरूरी है. टाटा संस ने मार्च, 2024 में ही आरबीआई के पास अपना कोर इंवेस्टमेंट कंपनी (CIC) रजिस्ट्रेशन सरेंडर करने का आवेदन दिया था. इसके लिए कंपनी ने बाकायदा 21,813 करोड़ रुपये का कर्ज भी चुका दिया था.

अपर लेयर एनबीएफसी बनी रहेगी टाटा संस
रिजर्व बैंक ने साफ कह दिया कि है कि टाटा संस को अपर लेयर एनबीएफसी फ्रेमवर्क में ही रखा जाएगा. अगस्त, 2026 में भी आरबीआई ने टाटा संस को देश की 17 अपर लेयर वाली एनबीएफसी की लिस्ट में शामिल रखा था. तब भी आरबीआई ने कहा था कि उसका रजिस्ट्रेशन खारिज करने का आवेदन फिलहाल समीक्षाधीन है और इस पर बाद में फैसला लिया जाएगा. अब करीब महीनेभर बाद आरबीआई ने साफ कर दिया है कि टाटा संस को अपर लेयर की एनबीएफसी वाली कैटैगरी में ही रखा जाएगा.

टाटा संस कब बनी एनबीएफसी
रिजर्व बैंक ने सितंबर, 2022 में ही टाटा संस को अपर लेयर एनबीएफसी के तौर पर क्लासीफाई किया था. शुरुआती फ्रेमवर्क में आरबीआई ने कहा था कि टाटा संस को तीन साल के भीतर लिस्ट कराना जरूरी होगा. इस लिहाज से आरबीआई की डेडलाइन तो सितंबर, 2025 में ही बीत चुकी है. इस डेडलाइन के भी एक साल बाद तक टाटा संस की शेयर बाजार में लिस्टिंग नहीं हुई है. कंपनी अभी तक इसी कोशिश में है कि उसका एनबीएफसी लाइसेंस सरेंडर करके उसे लिस्टिंग से छूट दे दी जाए.

टाटा संस लपेटे में क्यों आई और इसके क्या मायने
आरबीआई ने 4 साल पहले जब एनबीएफसी का फ्रेमवर्क बनाया था तो यह तय किया था कि जिसका बाजार पूंजीकरण 1 लाख करोड़ से ज्यादा है, उन एनबीएफसी को शेयर बाजार में लिस्ट होना जरूरी होगा. ऐसी कंपनियों को अपर लेयर एनबीएफसी घोषित किया गया था. टाटा संस का मार्केट कैप तो इस लिमिट से भी काफी ज्यादा है, लिहाजा आरबीआई ने इसे भी लिस्ट में शामिल कर लिया था. टाटा संस, टाटा समूह की होल्डिंग कंपनी है, जिसकी टाटा ट्रस्ट में करीब 66 फीसदी हिस्सेदारी है. अगर यह कंपनी शेयर बाजार में लिस्ट होती है तो निवेशकों को पैसे कमाने का एक अच्छा साधन मिल सकता है, क्योंकि इस कंपनी का आकार काफी बड़ा है और इसका आईपीओ देश का सबसे बड़ा आईपीओ भी बन सकता है.

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Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…

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दिल्ली में निर्माण श्रमिकों के लिए हेल्थ स्कीम को मंजूरी: 2.7 लाख से ज्यादा श्रमिकों और परिवारों को कैशलेस इलाज – New Delhi News




दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार टीएस संधू ने पंजीकृत भवन एवं अन्य निर्माण श्रमिकों और उनके पात्र आश्रित परिवार के सदस्यों के लिए दिल्ली बिल्डिंग वर्कर्स हेल्थ स्कीम को मंजूरी दे दी है। योजना से राजधानी में पंजीकृत 2.7 लाख से अधिक निर्माण श्रमिकों और उनके परिवारों को कैशलेस स्वास्थ्य सेवाएं मिलेंगी। मुख्यमंत्री और दिल्ली सरकार की कैबिनेट पहले ही योजना को मंजूरी दे चुकी है। योजना के तहत प्रत्येक पात्र लाभार्थी को सालाना 2 लाख रुपए तक का इलाज मिलेगा, जबकि एक परिवार के लिए उपचार की अधिकतम सीमा 10 लाख रुपए प्रतिवर्ष होगी। लाभार्थियों को सीजीएचएस दरों पर सूचीबद्ध अस्पतालों के नेटवर्क में कैशलेस ओपीडी परामर्श, जांच, दवाएं और भर्ती होने पर इलाज की सुविधा मिलेगी। आपातकालीन इलाज से मातृत्व सेवाओं तक कवर
योजना में पंजीकृत निर्माण श्रमिक और उनके पात्र जीवनसाथी के लिए सालाना स्वास्थ्य जांच भी शामिल है। इसके अलावा आपातकालीन उपचार, व्यावसायिक और पुरानी बीमारियां, विशेष उपचार, मातृत्व स्वास्थ्य सेवाएं और पुनर्वास को भी कवर किया गया है। कार्यस्थल पर दुर्घटना या अचानक मेडिकल इमरजेंसी की स्थिति में लाभार्थी निकटतम गैर-सूचीबद्ध अस्पताल में भी इलाज करा सकेंगे। इलाज की जरूरी अवधि के लिए ऐसे अस्पताल को अस्थायी रूप से सूचीबद्ध अस्पताल माना जाएगा। मोबाइल मेडिकल यूनिट और डिजिटल सिस्टम होगा
योजना के क्रियान्वयन के लिए क्वालिटी एंड कॉस्ट बेस्ड सिलेक्शन प्रक्रिया से प्रोजेक्ट इंप्लीमेंटिंग एजेंसी नियुक्त की जाएगी। एजेंसी की प्रारंभिक अवधि तीन वर्ष होगी, जिसे प्रदर्शन के आधार पर एक वर्ष बढ़ाया जा सकेगा। निर्माण स्थलों पर मोबाइल मेडिकल यूनिट्स तैनात की जाएंगी। ये श्रमिकों को अस्पताल तक पहुंचाने, स्वास्थ्य जांच और योजना के प्रति जागरूकता में मदद करेंगी। लाभार्थियों का रिकॉर्ड, उपचार का इतिहास और क्लेम प्रोसेसिंग डिजिटल तरीके से संभालने के लिए सॉफ्टवेयर सिस्टम भी विकसित किया जाएगा। हर क्लेम का थर्ड पार्टी वेरिफिकेशन
वित्तीय पारदर्शिता के लिए पीआईए की ओर से पेश हर क्लेम का थर्ड पार्टी वेरिफिकेशन होगा। बोर्ड की जरूरी जांच पूरी होने के बाद ही भुगतान किया जाएगा। योजना की प्रगति पर नजर रखने के लिए एजेंसी को समय-समय पर रिपोर्ट भी देनी होगी। योजना की निगरानी के लिए बिल्डिंग वर्कर्स हेल्थ कमेटी गठित होगी। इसमें डीबीओसीडब्ल्यूडब्ल्यू बोर्ड के अध्यक्ष, सचिव-सह-श्रम आयुक्त, स्वास्थ्य सेवाओं के निदेशक, बोर्ड के वरिष्ठ लेखा अधिकारी और सचिव शामिल होंगे।



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दही बची हो तो फेंकें नहीं, बनाएं तमिलनाडु का झटपट तैयार होने वाला टेस्टी मोर कली

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Mor Kali Recipe: हर सुबह यही सवाल होता है कि नाश्ते में ऐसा क्या बनाया जाए जो जल्दी भी तैयार हो जाए, पेट पर भारी भी न पड़े और स्वाद में भी कोई कमी न रहे, अगर आप भी रोज़ के पोहा, उपमा या पराठों से थोड़ा अलग कुछ ट्राई करना चाहते हैं तो दक्षिण भारत की पारंपरिक डिश मोर कली आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकती है. तमिलनाडु में वर्षों से पसंद की जाने वाली यह डिश दही या छाछ और चावल के आटे से तैयार होती है. इसकी सबसे खास बात यह है कि इसमें बहुत कम तेल और मसालों का इस्तेमाल होता है, इसलिए यह हल्का और पौष्टिक माना जाता है.

व्यस्त सुबह हो या शाम की हल्की भूख, मोर कली कुछ ही मिनटों में तैयार हो जाती है. इसका स्वाद साउथ इंडियन तड़के की वजह से और भी खास हो जाता है, अगर आप घर पर आसान रेसिपी के साथ नया स्वाद आजमाना चाहते हैं तो यह डिश आपकी किचन की नई पसंद बन सकती है.

मोर कली क्या है और क्यों है इतनी खास?
मोर कली तमिलनाडु की एक पारंपरिक डिश है, जिसे आमतौर पर नाश्ते या शाम के स्नैक्स के रूप में खाया जाता है. इसे चावल के आटे और छाछ या पतले दही के मिश्रण से बनाया जाता है. हल्के मसालों और तड़के की वजह से इसका स्वाद बेहद संतुलित होता है. यह डिश उन लोगों को भी पसंद आती है जो कम तेल वाला खाना खाना चाहते हैं. बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक हर उम्र के लोग इसे आसानी से खा सकते हैं.

मोर कली बनाने के लिए जरूरी सामग्री

आसान सामग्री से तैयार होगी स्वादिष्ट डिश
एक कप चावल का आटा, दो कप छाछ या पतला किया हुआ दही, स्वादानुसार नमक, एक चम्मच सरसों, एक चम्मच चना दाल, एक चम्मच उड़द दाल, दो सूखी लाल मिर्च, दो बारीक कटी हरी मिर्च, कुछ करी पत्ते, एक चुटकी हींग और दो चम्मच नारियल या सरसों का तेल. अगर चाहें तो ऊपर से थोड़ा देसी घी डालकर भी इसका स्वाद बढ़ाया जा सकता है.

(इमेज AI)

मोर कली बनाने की आसान विधि
पहला स्टेप: सबसे पहले एक बड़े बाउल में चावल का आटा लें. इसमें छाछ या पतला किया हुआ दही डालें और अच्छी तरह मिलाएं ताकि कोई गांठ न रहे. अब स्वादानुसार नमक डालकर मिश्रण तैयार कर लें.

दूसरा स्टेप: अब एक पैन में तेल गर्म करें. इसमें सरसों डालें. सरसों चटकने लगे तो चना दाल, उड़द दाल, सूखी लाल मिर्च, हरी मिर्च, करी पत्ता और हींग डालकर हल्का सुनहरा होने तक भून लें. यही तड़का इस डिश को असली दक्षिण भारतीय स्वाद देता है.

तीसरा स्टेप: अब तैयार घोल को पैन में डाल दें और लगातार चलाते रहें. कुछ ही मिनटों में मिश्रण गाढ़ा होकर उपमा जैसी बनावट लेने लगेगा. जब मिश्रण अच्छी तरह पक जाए तो इसे एक बाउल या प्लेट में निकालकर हल्का दबाते हुए सेट कर दें. कुछ मिनट बाद इसे प्लेट में पलट लें. ऊपर से थोड़ा देसी घी डालें और गर्मागर्म परोसें.

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स्वाद बढ़ाने के लिए अपनाएं ये आसान टिप्स
अगर आप इस डिश में थोड़ा नया स्वाद जोड़ना चाहते हैं तो इसमें बारीक कटी गाजर, शिमला मिर्च या बीन्स मिला सकते हैं. इससे डिश और रंगीन भी लगेगी और पोषण भी बढ़ेगा. ऊपर से हल्की भुनी मूंगफली या भुना हुआ तिल डालने से इसका स्वाद और कुरकुरापन दोनों बढ़ जाते हैं. कई घरों में इसे नारियल की चटनी या अचार के साथ भी परोसा जाता है.

(इमेज AI)

हल्का नाश्ता पसंद करने वालों के लिए अच्छा विकल्प
आजकल बहुत से लोग सुबह ऐसा नाश्ता पसंद करते हैं जो पेट को लंबे समय तक भरा रखे और बहुत ज्यादा तला-भुना भी न हो. मोर कली इस जरूरत को काफी हद तक पूरा करती है. इसमें इस्तेमाल होने वाले दही और चावल का आटा इसे हल्का बनाते हैं, जबकि कम मसाले होने से इसका स्वाद प्राकृतिक बना रहता है. अगर आप वजन संतुलित रखने की कोशिश कर रहे हैं या रोज़ाना हल्का नाश्ता खाना चाहते हैं तो यह डिश आपके मेन्यू में शामिल की जा सकती है. हालांकि, किसी खास स्वास्थ्य समस्या या विशेष डाइट का पालन कर रहे हैं तो अपने डॉक्टर या डाइटिशियन की सलाह के अनुसार ही भोजन चुनें.

घर पर आसानी से मिलेगा तमिलनाडु का पारंपरिक स्वाद
मोर कली उन रेसिपी में शामिल है जो कम समय, कम सामग्री और आसान तरीके से तैयार हो जाती हैं. यही वजह है कि यह तमिलनाडु के साथ-साथ अब देश के दूसरे हिस्सों में भी पसंद की जा रही है, अगर आप इस सप्ताह कुछ नया और हल्का बनाने का सोच रहे हैं तो यह रेसिपी जरूर ट्राई करें.



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भाजपा में बाड़ेबंदी, कांग्रेस में प्रशिक्षण शिविर: प्रत्याशी बोले- मेयर चुनाव की जानकारी दे रहे, बीजेपी ने रिसॉर्ट में रुकवाया – Bikaner News




बीकानेर नगर निगम चुनाव के नतीजे आने से पहले ही बीकानेर में मेयर की कुर्सी को लेकर सियासी जोड़-तोड़ शुरू हो गई है। कांग्रेस और भाजपा ने अपने-अपने पार्षद प्रत्याशियों को एक साथ रखा है। कांग्रेस के 78 प्रत्याशी बीकानेर के नोखा रोड स्थित एक होटल में हैं, जबकि भाजपा के 78 प्रत्याशियों को जोधपुर रोड स्थित एक रिसोर्ट में रखा गया है। उधर, दोनों दलों ने निर्दलीय और बागी उम्मीदवारों की निगरानी रखनी शुरू कर दी है। कांग्रेस और भाजपा दोनों जीत की उम्मीद वाले निर्दलीय प्रत्याशियों से संपर्क की कोशिश में हैं। दोनों प्रमुख दलों की ओर से अपने प्रत्याशियों को एकजुट रखने के साथ मेयर चुनाव की रणनीति पर भी काम किया जा रहा है। हालांकि कांग्रेस इसे बाड़ेबंदी मानने से इनकार कर रही है। कांग्रेस बोली- बाड़ेबंदी नहीं, प्रशिक्षण शिविर कांग्रेस के पार्षद प्रत्याशी और मेयर पद के दावेदार माने जा रहे अनिल कल्ला ने कहा कि पार्टी ने प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी नहीं की है, बल्कि प्रशिक्षण शिविर चल रहा है। उनके अनुसार इस बार कांग्रेस ने कई नए चेहरों को टिकट दिया है। इन प्रत्याशियों को पार्टी की रीति-नीति और मेयर चुनाव की प्रक्रिया के बारे में जानकारी दी जा रही है। प्रत्याशियों को यह भी बताया जा रहा है कि मेयर चुनाव में किस तरह वोटिंग करनी है और पार्टी के विचार को किस तरह आगे बढ़ाना है। कांग्रेस के सभी 78 प्रत्याशी फिलहाल एक साथ हैं और पार्टी के आला नेताओं के संपर्क में हैं। रोज होटल पहुंच रहे बीडी कल्ला कांग्रेस प्रत्याशियों के साथ संवाद के लिए वरिष्ठ नेता और पूर्व कैबिनेट मंत्री डॉ. बी.डी. कल्ला भी रोज होटल पहुंच रहे हैं। वे प्रत्याशियों के साथ बातचीत कर रहे हैं और चुनावी रणनीति पर चर्चा कर रहे हैं। शहर अध्यक्ष मदनगोपाल मेघवाल और पूर्व शहर अध्यक्ष यशपाल गहलोत भी प्रत्याशियों से मिलने होटल पहुंच रहे हैं। भाजपा ने भी संभाले अपने 78 प्रत्याशी दूसरी ओर भाजपा ने भी अपने 78 पार्षद प्रत्याशियों को एक साथ रखा है। भाजपा के पार्षद प्रत्याशियों को जोधपुर रोड स्थित एक रिसोर्ट में रखा गया है। बीकानेर पश्चिम विधायक जेठानन्द व्यास भाजपा के पार्षद प्रत्याशियों का नेतृत्व कर रहे हैं, जबकि बीकानेर पूर्व क्षेत्र के प्रत्याशी शहर अध्यक्ष सुमन छाजेड़ के नेतृत्व में हैं। दोनों क्षेत्रों के प्रत्याशियों को एक ही स्थान पर रखा गया है। भाजपा में मेयर पद के लिए नाम तय करने का फैसला संगठन स्तर पर होने की बात कही जा रही है। पार्टी जिस प्रत्याशी के नाम पर फैसला करेगी, भाजपा के सभी पार्षद प्रत्याशियों को उसी के पक्ष में मतदान करना होगा। नतीजों से पहले मेयर की तैयारी नगर निगम बोर्ड में बहुमत के साथ मेयर बनाने के लिए दोनों दल अभी से अपने पार्षद प्रत्याशियों को एकजुट रखने में जुट गए हैं। चुनाव परिणाम आने के बाद मेयर पद के लिए होने वाली वोटिंग में एक-एक पार्षद का वोट महत्वपूर्ण होगा। ऐसे में नतीजों से पहले ही दोनों दलों की ओर से प्रत्याशियों को साथ रखना और पार्टी लाइन के अनुसार मतदान की तैयारी कराना सियासी तौर पर महत्वपूर्ण माना जा रहा है।



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आज का एक्सप्लेनर: क्या चीन-भारत एक ही पाले में आने वाले हैं; 7 साल बाद जिनपिंग के दिल्ली दौरे के मायने, क्या कुछ ठोस हासिल होगा


चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग 7 साल बाद भारत पहुंचे हैं। वो BRICS समिट के अलावा पीएम मोदी के साथ द्विपक्षीय बैठक भी करेंगे। जिनपिंग आखिरी बार अक्टूबर 2019 में अनौपचारिक बैठक के लिए भारत आए थे।

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1. डिप्लोमेसी: कारोबारी मजबूरी में भारत-चीन का सियासी तनाव कम होगा

  • जून 2020 में गलवान घाटी में भारतीय और चीनी सेनाओं के बीच खूनी झड़प हुई। भारत के कैप्टन संतोष बाबू समेत 20 जवान शहीद हुए। हालात इतने बिगड़े कि दोनों ओर से फॉरवर्ड पोस्ट पर जवानों और हथियारों की भारी तैनाती की गई।
  • 4 साल बाद अक्टूबर 2024 में दोनों देशों के रिश्तों में कुछ नरमी आई। सीमा पर डिसइंगेजमेंट हुआ। रूस के कजान में मोदी-जिनपिंग की बातचीत हुई।
  • अगस्त 2025 में मोदी SCO समिट के लिए चीन गए और जिनपिंग से मिले। हाल ही में किर्गिस्तान में भी दोनों नेताओं ने हैंडशेक किया। अब जिनपिंग भारत आ रहे हैं और मोदी के साथ बातचीत की मेज पर बैठेंगे। ये लगातार तीसरा साल है जब दोनों नेता मिल रहे हैं।
अगस्त 2025 में चीन के तियानजिन में पीएम मोदी और राष्ट्रपति जिनपिंग ने बातचीत की थी। तब जिनपिंग ने कहा था कि हमें प्रतिद्वंद्वी के बजाय साझेदार बनना चाहिए।

अगस्त 2025 में चीन के तियानजिन में पीएम मोदी और राष्ट्रपति जिनपिंग ने बातचीत की थी। तब जिनपिंग ने कहा था कि हमें प्रतिद्वंद्वी के बजाय साझेदार बनना चाहिए।

  • ब्रिटिश थिंकटैंक चैथम हाउस के एशिया-पैसेफिक प्रोग्राम के सीनियर रिसर्च फेलो डॉ. चिएतिज बाजपेयी मानते हैं कि भारत-चीन के बीच यह स्ट्रैटेजिक रीसेट नहीं, बल्कि टैक्टिकल थॉ है। यानी रिश्तों में जमा बर्फ भले कुछ पिघली है, लेकिन सीमा विवाद और पाकिस्तान-चीन के रिश्ते को लेकर तनाव बना हुआ है।
  • डिप्लोमेसी में टैक्टिकल थॉ का मतलब होता है- आर्थिक जरूरतों के चलते 2 प्रतिद्वंद्वी देशों में राजनीतिक और सैन्य तनाव का अस्थायी तौर पर कम होना।

2. ऑप्टिक्स: जिनपिंग, पुतिन और मोदी एक साथ दिखना भी बड़ी बात

  • पिछले डेढ़ साल में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प की पॉलिसी का सीधा असर भारत, रूस और चीन पर पड़ा है। ट्रम्प ने भारत पर कुल 50% टैरिफ लगाया, जो सीरिया और म्यांमार जैसे देशों के बराबर था। वहीं चीन पर 145% तक टैरिफ और रूस पर कई तरह की आर्थिक और सैन्य पाबंदियां लगाईं।
  • 1 सितंबर 2025 को चीन के तियानजिन में हुई SCO समिट के दौरान पीएम मोदी, पुतिन और जिनपिंग की साथ वाली तस्वीरें वायरल हुईं। पूरी दुनिया में चर्चा शुरू हुई कि क्या भारत-रूस-चीन एक मेज पर आ गए हैं।
  • ट्रम्प की सोशल मीडिया पोस्ट से उनकी नाराजगी भी दिखी। उन्होंने ट्रुथ सोशल पर तीनों नेताओं की फोटो शेयर करते हुए लिखा, ‘ऐसा लगता है कि हमने भारत और रूस को चीन के हाथों खो दिया। उम्मीद करता हूं कि उनकी साझेदारी लंबी और समृद्ध हो।’
  • पिछले महीने किर्गिस्तान के बिश्केक में हुई SCO समिट के दौरान दोबारा ऐसी तस्वीरें आईं, जिन्हें फिर से अमेरिका और पश्चिमी देशों के खिलाफ देखा गया।
  • ऐसे में फिर से तीनों नेताओं का साथ आना, ऑप्टिक्स के लिहाज से काफी अहम होगा। इससे वॉशिंगटन को मैसेज जाएगा कि भारत के पास अमेरिका ही इकलौता विकल्प नहीं है। वहीं बीजिंग भी दिखाएगा कि पश्चिमी दुनिया ने भले ही उसे अलग-थलग करने की कोशिश की, लेकिन वो ग्लोबल स्टेज पर अकेला नहीं है, खासकर उस मंच पर है, जहां भारत और रूस भी हैं।
दिल्ली में हो रही BRICS समिट के दौरान राष्ट्रपति पुतिन, पीएम मोदी और और राष्ट्रपति जिनपिंग।

दिल्ली में हो रही BRICS समिट के दौरान राष्ट्रपति पुतिन, पीएम मोदी और और राष्ट्रपति जिनपिंग।

3. मैसेजिंग: BRICS कोई दिखावे का मंच नहीं, सभी देश एकजुट

  • BRICS अब सिर्फ 5 देशों- ब्राजील, रूस, भारत, चीन और साउथ अफ्रीका का ग्रुप नहीं रहा। इसमें ईरान, UAE, सऊदी अरब जैसे 6 और देश जुड़ चुके हैं, यानी कुल 11 ताकतें।
  • इन देशों में दुनिया की आधी आबादी रहती है और ग्लोबल GDP में इनकी 40% हिस्सेदारी है। दूसरी तरफ ग्लोबल ऑर्डर में उठापटक मची है। ट्रम्प मनमाने फैसले ले रहे हैं। दुनिया 25 युद्धों की मार झेल रही है। तेल-गैस, अनाज, कच्चे माल जैसी जरूरी चीजों की ग्लोबल सप्लाई चेन प्रभावित रही है।
2006 में BRICS की शुरुआती मीटिंग हुई, जिसमें भारत, चीन, रूस और ब्राजील के नेता शामिल हुए। बाद में इसमें साउथ अफ्रीका जुड़ा। तस्वीर- 2016 में भारत में हुए BRICS समिट की है।

2006 में BRICS की शुरुआती मीटिंग हुई, जिसमें भारत, चीन, रूस और ब्राजील के नेता शामिल हुए। बाद में इसमें साउथ अफ्रीका जुड़ा। तस्वीर- 2016 में भारत में हुए BRICS समिट की है।

  • BRICS की अहमियत तब और बढ़ जाती है, जब 100 से ज्यादा देशों वाले ग्लोबल साउथ के ज्यादातर देश इससे उम्मीदें रखते हैं और मानते हैं कि BRICS पश्चिमी देशों के मुकाबले एक मजबूत मंच साबित होगा।
  • हालांकि अलग-अलग सोच वाले BRICS के सभी 11 सदस्य देशों को एकजुट बनाए रखना आसान नहीं है। इनमें लोकतांत्रिक भारत है, तो सत्तावादी चीन-रूस भी हैं। ईरान का UAE और सऊदी अरब से संघर्ष जारी है। इथियोपिया और इजिप्ट भी आपस में विरोधी हैं। BRICS को एकजुट और कामयाब बनाए रखने की सबसे बड़ी शर्त है कि भारत और चीन आपस में खुले टकराव से बचें।
  • भारतीय थिंकटैंक ऑर्गनाइजेशन फॉर रिसर्च ऑन चाइना एंड एशिया की डायरेक्टर ईरिशिका पंकज मानती हैं कि इस बार की BRICS समिट जितनी नई दिल्ली के लिए अहम है, उतनी ही बीजिंग के लिए। क्योंकि अगले साल वो BRICS का मेजबान है। अगर जिनपिंग मौजूदा चेयर, यानी भारत नहीं आते, तो चीन की ही साख को नुकसान पहुंचता।

भारत और चीन के रिश्ते करवट ले रहे हैं, लेकिन 2 वजहों से फिलहाल दोनों देश एक पाले में नहीं आ सकते। पहला- ट्रस्ट डेफिसिट, यानी भरोसे की कमी और दूसरा- ट्रेड डेफिसिट, यानी व्यापार घाटा।

पहली चुनौती: भारत-चीन के बीच भरोसे की कमी

  • 1962 में दोनों देश जंग लड़ चुके हैं। सीमा विवाद के चलते 2013 में लद्दाख के देपसांग, 2014 में चुमार, 2017 में डोकलाम और 2020 में पूर्वी लद्दाख के गलवान में दोनों सेनाओं के बीच झड़पें हो चुकी हैं। अभी भी LAC पर करीब 50,000 भारतीय जवान तैनात हैं। जून 2026 में अरुणाचल प्रदेश की जनजातियों ने दावा किया है कि चीनी सेना उनकी पुश्तैनी जमीन पर कब्जा कर रही है। हालांकि भारत ने इसका खंडन किया।
  • चीन ने माना कि मई 2025 में भारत-पाकिस्तान के बीच हुए टकराव में उसने पाकिस्तान की मदद की। चीन-पाकिस्तान लगातार स्ट्रैटजिक पार्टनरशिप भी बढ़ा रहे हैं। भारत का एक और पड़ोसी बांग्लादेश भी चीनी खेमे में जा रहा है।
  • ग्लोबल अफेयर्स के एक्सपर्ट डॉ. डायलन लोह मानते हैं कि भारत-चीन का बातचीत की मेज पर आना रिस्क मैनेजमेंट है, न कि कोई स्ट्रैटेजिक रीसेट। दोनों के बीच सीमा विवाद और एक-दूसरे की विदेश नीति के कारण अविश्वास की इतनी गहरी खाई है, जिसे भरने में लंबा वक्त लग सकता है। अगर दोनों के रिश्ते सुधारने हैं, तो उन्हें कई मुद्दों पर पीछे हटना पड़ेगा, जो शायद ही हो।

दूसरी चुनौती: भारत को चीन से कारोबारी घाटा

  • 2025-26 में दोनों देशों के बीच 151 अरब डॉलर का कारोबार हुआ। इसमें से 132 अरब डॉलर का सामान भारत ने चीन से खरीदा, जबकि बेचा सिर्फ 19 अरब डॉलर का। यानी भारत को करीब 112 अरब डॉलर का घाटा हुआ, जो ऑल-टाइम हाई है।
  • भारत आज भी लौह अयस्क, नेफ्था और मसालों जैसी कच्ची चीजें चीन को बेचता है, जबकि उससे इलेक्ट्रॉनिक्स, मशीनरी, बैटरी और सोलर कंपोनेंट्स जैसे हाई-वैल्यू प्रोडक्ट खरीदता है।
  • भारत की इलेक्ट्रॉनिक्स, इलेक्ट्रिक व्हीकल, सोलर एनर्जी, फार्मास्युटिकल, टेलीकॉम जैसी इंडस्ट्रीज चीनी कच्चे माल, मशीनरी और कंपोनेंट्स पर निर्भर हैं।
  • भारत-चीन पॉलिसी एक्सपर्ट डॉ. श्रीपर्णा पाठक मानती हैं कि चीन के साथ 100 अरब डॉलर से ज्यादा का कारोबार घाटा भारत की सप्लाई चेन और इंडस्ट्रीज के लिए खतरा है। इसके चलते भारत स्ट्रैटेजिक मोर्चों पर सीमित हो जाता है। वहीं चीन चाहता है कि सीमा विवाद को अलग रखकर केवल कारोबार बढ़ाया जाए, जो भारत नहीं चाहता है।

जिनपिंग की भारत यात्रा से पहले NSA अजीत डोभाल चीन गए थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक उस दौरे में दोनों देशों के बीच कई बिंदुओं पर सहमति बनी थी। मसलन- सीमा विवाद पर बातचीत आगे बढ़ाना, सैन्य हॉटलाइन मजबूत करना, वीजा नियमों में ढील और व्यापार से जुड़े मुद्दे। यानी टेबल पहले से तैयार है।

सूत्रों के मुताबिक, जिनपिंग से द्विपक्षीय बातचीत में नई दिल्ली की टॉप प्रयॉरिटी आपसी सहयोग, कारोबार, पीपल-टू-पीपल एक्सचेंज और सीमा विवाद हैं। जिनपिंग के दौरे से ठीक पहले चाइना सदर्न एयरलाइंस ने 6 साल बाद ग्वांगझू-दिल्ली रूट पर फ्लाइट सर्विस बहाल कर दी है।

जियोस्ट्रैटजी एक्सपर्ट मनोज केवलरामानी के मुताबिक, ‘भारत-चीन की बातचीत में बीच कारोबार और निवेश जैसे मुद्दों पर फ्रेमवर्क बनने की उम्मीद है। वीजा नियमों में ढील भी मिल सकती है। लेकिन सीमा विवाद पर कुछ ठोस होता नहीं दिखता।’

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पुतिन से पहले पहुंच जाता है उनका टॉयलेट: जिनपिंग स्पेशल कार साथ लाते हैं; BRICS समिट में विदेशी नेताओं की सिक्योरिटी के क्या-क्या इंतजाम

12-13 सितंबर को BRICS समिट के लिए दिल्ली में 20 से ज्यादा देशों के नेता हो रहे हैं। इनमें जिनपिंग, पुतिन, पजशकियान जैसे बड़े खतरे वाले नेता शामिल हैं। इनके लिए दिल्ली की किलेबंदी की गई है। पूरी खबर पढ़िए…



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कभी 110 किलो था वजन! डॉक्टर ने घर के खाने से किया 50Kg वेट लॉस, बताया पूरा डाइट प्लान


वेट लॉस करना मुश्किल लगता है लेकिन अगर सही गाइडेंस मिल जाए तो चीजें आसान हो जाती हैं। न्यूट्रीशनिस्ट डॉ शिखा ने अपनी वेट लॉस जर्नी के साथ-साथ फुल डाइट प्लान शेयर किया है, जिसने उनकी 50 kg वेट लॉस में मदद की।

आजकल वजन बढ़ना एक आम समस्या हो गई है। हमारा लाइफस्टाइल ही कुछ ऐसा है कि ज्यादातर दिन बैठे बैठे ही निकल जाता है और फिर खानपान का तो पूछो ही मत। बस ऐसे करते करते वजन इतना ज्यादा बढ़ जाता है कि उसे कम कैसे करें ये समझ ही नहीं आता। अगर आप भी वेट लॉस करने का सोच रहे हैं तो क्लिनिकल न्यूट्रीशनिस्ट डॉ शिखा सिंह की जर्नी आपके लिए प्रेरणा बन सकती है। डॉक्टर एक इंस्टाग्राम पोस्ट के जरिए बताती हैं कि उन्हें खाने पीने का बहुत शौक था। बस इसी चलते उनका वजन पूरे 110 किलो तक पहुंच गया था। लेकिन अब उन्होंने पूरे 50 किलो वेट लॉस कर लिया है। आइए जानते हैं उनका डाइट प्लान क्या रहा।

घर के खाने से कम किया पूरे 50 किलो वजन

न्यूट्रीशनिस्ट डॉ शिखा सिंह शेयर करती हैं कि खाने-पीने के शौक की वजह से उनका वेट पहले 110 किलो तक पहुंच गया था। लोगों ने उनका मजाक उड़ाना शुरू कर दिया था। लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी डाइट में बदलाव करने शुरू किए। उन्होंने कोई फैंसी डाइट नहीं रखी, बल्कि घर के सादे खाने से ही वेट लॉस जर्नी शुरू की। अब उनका वेट सिर्फ 60 किलो है, यानी उन्होंने पूरे 50 किलो वजन कम किया है। आइए जानते हैं उनका कंप्लीट डाइट प्लान।

न्यूट्रीशनिस्ट ने फॉलो किया था ये डाइट प्लान

गोंद कतीरा के साथ करती थीं दिन की शुरुआत

न्यूट्रीशनिस्ट डॉ शिखा बताती हैं कि उनके दिन की शुरुआत गोंद कतीरा ड्रिंक के साथ होती थी। इसके लिए वो थोड़ा सा गोंद कतीरा रातभर के लिए पानी में भिगोकर रख देती थीं, फिर उसे पानी में मिलाकर पी लेती थीं। ये ड्रिंक क्रेविंग शांत करने में मदद करती है और वेट लॉस को सपोर्ट करती है।

प्रोटीन से भरपूर रखें ब्रेकफास्ट

डॉ शिखा बताती हैं कि उनका ब्रेकफास्ट प्रोटीन रिच होता है। जिसमें बिना चीनी की चाय, 70 ग्राम सब्जियों से भरी हुई रोटी और 50 ग्राम लो फैट पनीर की सब्जी शामिल है। ये मील उन्हें दिनभर के लिए एनर्जी भी देती है और साथ ही पेट को लंबे समय तक भरा हुआ रखने में मदद करती है।

मिड मॉर्निंग स्नैक में खाएं फ्रूटस

नाश्ते के बाद और लंच से पहले, यानी मिड मॉर्निंग स्नैक में आप कोई भी फल 100 ग्राम के करीब खा सकते हैं। न्यूट्रीशनिस्ट बताती हैं कि जो भी फल सीजन में चल रहा होता है वो उसे अपने स्नैक में शामिल करती हैं। इससे शरीर को जरूरी पोषक तत्व भी मिल जाते हैं।

लंच में खुद को भूखा ना रखें

कई लोग डाइटिंग के नाम पर खुद को भूखा रखते हैं। खासकर लंच वो कम खाते हैं, लेकिन ऐसा करने की जरूरत नहीं है। न्यूट्रीशनिस्ट बताती हैं कि उनका लंच प्रोटीन से भरपूर होता है और साथ में खूब सारी सलाद भी होती है। इससे उनका पेट लंबे समय तक भरा हुआ रहता है और शरीर को एनर्जी भी मिलती है। लंच ऑप्शन शेयर करते हुए वो बताती हैं कि आप खूब सारी सब्जियों के साथ बने एग फ्राइड राइस खा सकते हैं।

शाम की क्रेविंग हो तो क्या खाएं

डॉ शिखा कहती हैं कि शाम की क्रेविंग कंट्रोल करने के लिए वो रोस्टेड चना चाट और एक कप आइस्ड ब्लैक कॉफी पीती हैं।

डिनर है सबसे जरूरी मील

न्यूट्रीशनिस्ट कहती हैं कि डिनर दिन की सबसे जरूरी मील में से एक है। कोशिश करें कि सोने से ठीक 3 घंटे पहले ही अपना डिनर खत्म कर लें। डिनर में आप 100 ग्राम हल्का फ्राई किया हुआ तोफू और मौसमी सब्जियां ले सकते हैं।

ये टिप्स वेट लॉस में करेगी मदद

  • पूरे दिन में 3 लीटर पानी कम से कम जरूर पीएं।
  • रात को 7-8 घंटे की नींद जरूर लें।
  • रोजाना एक घंटे की ब्रिस्क वॉक जरूर करें।
  • बाहर का खाना पूरी तरह बंद कर दें।
  • दिन में कभी उल्टे-सीधे टाइम भूख लगे तो कोई स्नैक या पैकेट वाला फूड खाने की जगह सलाद खाएं।

नोट: यह लेख केवल सामान्य जानकारी के उद्देश्य से लिखा गया है। इसे किसी भी तरह से पेशेवर मेडिकल सलाह का विकल्प न मानें। किसी भी स्वास्थ्य समस्या या मेडिकल कंडीशन से जुड़े सवालों के लिए हमेशा अपने डॉक्टर की सलाह जरूर लें।



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