Tuesday, August 25, 2026
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ग्रेटर नोएडा-20 लाख की ड्रग्स के साथ 2 विदेशी गिरफ्तार: महिला भी शामिल, 1.07 किलो सफेद पाउडर बरामद; पासपोर्ट नहीं दिखा सके – Noida (Gautambudh Nagar) News




ग्रेटर नोएडा की सूरजपुर पुलिस और अभिसूचना इकाई ने ड्रग्स तस्करी के आरोप में मंगलवार को एक महिला सहित दो विदेशी नागरिकों को गिरफ्तार किया है। इनके पास से 1.07 किलोग्राम सफेद पाउडर (ड्रग्स) बरामद किया गया है, जिसकी अनुमानित कीमत 20 लाख रुपये बताई जा रही है। सूरजपुर थाना प्रभारी संजय सिंह ने बताया कि पुलिस और अभिसूचना इकाई ने संयुक्त रूप से कार्रवाई की। मैनुअल इंटेलिजेंस और गोपनीय सूचना के आधार पर ग्राम भूड़ा में स्टेडियम के सामने बने एक मकान से इन आरोपियों को पकड़ा गया। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान साबी जोएल (उम्र लगभग 32 वर्ष) पुत्र साबी नेल्सन निवासी केमरून और नाइजीरिया निवासी अमादा लतीफा (उम्र लगभग 33 वर्ष) पुत्री अमादा के रूप में हुई है। पुलिस ने इनके कब्जे से 1.07 किलोग्राम सफेद पाउडर (ड्रग्स), चार मोबाइल फोन, दो इलेक्ट्रॉनिक तराजू, एक काला बैग और चार पैकेट पॉलीथिन (पैकिंग सामग्री) बरामद की है। बरामद ड्रग्स की अनुमानित कीमत 20 लाख रुपये है। आरोपियों से पासपोर्ट के संबंध में पूछताछ की गई, लेकिन उन्होंने मौके पर कोई दस्तावेज प्रस्तुत नहीं किया। अभिसूचना इकाई संबंधित दूतावासों को इस मामले की जानकारी दे रही है। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि ये आरोपी फरवरी में बेंगलुरु आए थे और उसके बाद ग्रेटर नोएडा पहुंचे थे।



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बक्सर में गंगा का जलस्तर घटा: खतरे के निशान से 15 सेंटीमीटर नीचे; नौका विहार पर रोक, रील बनाने वालों को चेतावनी – Buxar News




बक्सर जिले में गंगा नदी के जलस्तर में लगातार कमी दर्ज की जा रही है। केंद्रीय जल आयोग की मंगलवार दोपहर 2 बजे की रिपोर्ट के अनुसार, गंगा का जलस्तर 59.17 मीटर पर पहुंच गया है। यह चेतावनी बिंदु 59.32 मीटर से 15 सेंटीमीटर नीचे है। नदी का जलस्तर फिलहाल करीब एक सेंटीमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से घट रहा है। जलस्तर में कमी आने से गंगा के तटीय इलाकों में रहने वाले लोगों ने राहत की सांस ली है। पिछले दिनों नदी का जलस्तर लगातार बढ़ने से जिले के कई इलाकों में बाढ़ का खतरा बढ़ गया था। पानी चेतावनी बिंदु को पार कर खतरे के निशान के करीब पहुंच गया था। इसके बाद प्रशासन लगातार स्थिति पर नजर बनाए हुए था। घाटों पर अभी भी खतरा बरकरार जलस्तर घटने के बावजूद प्रशासन किसी तरह की लापरवाही के पक्ष में नहीं है। गंगा के घाटों पर अभी भी खतरा बना हुआ है। नदी में पानी का बहाव तेज है और कई स्थानों पर घाटों का बड़ा हिस्सा पानी में डूबा हुआ है। लोगों की सुरक्षा को देखते हुए जिला प्रशासन ने नौका विहार पर रोक लगा दी है। इसके साथ ही बाढ़ के पानी में जाने पर भी प्रतिबंध लगाया गया है। रील बनाने के लिए जान जोखिम में न डालें प्रशासन ने लोगों से नदी और बाढ़ के पानी के आसपास किसी भी तरह की जोखिम भरी गतिविधि नहीं करने की अपील की है। खासकर युवाओं को बाढ़ के पानी और गंगा के घाटों पर रील या वीडियो बनाने के लिए जान जोखिम में नहीं डालने की सलाह दी गई है। प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि ऐसे स्थानों पर थोड़ी सी लापरवाही भी गंभीर हादसे का कारण बन सकती है। जलस्तर पर लगातार नजर गंगा का जलस्तर घटने के बावजूद प्रशासन और संबंधित विभाग लगातार निगरानी कर रहे हैं। अधिकारी नदी के जलस्तर और बहाव पर नजर बनाए हुए हैं। आने वाले घंटों में जलस्तर में और कमी आती है या दोबारा बढ़ोतरी होती है, इस पर भी लगातार निगरानी की जा रही है।



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कलेक्ट्रेट में धरने पर बैठे वार्ड 25 के रहवासी: गुना में नगरपालिका क्षेत्र से बाहर बताया, नहीं मिल पा रहा योजनाओं का लाभ – Guna News




गुना के वार्ड क्रमांक 25 स्थित सांई सिटी कॉलोनी के रहवासी मंगलवार को अपनी समस्याओं को लेकर कलेक्टोरेट पहुंचे। रहवासियों ने मुख्य गेट के बाहर बैठकर नारेबाजी की। उन्होंने नगरपालिका के कर्मचारी विनोद शर्मा की कार्यप्रणाली पर नाराजगी जताई। प्रदर्शन की सूचना मिलने पर जिला प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। उन्होंने रहवासियों से ज्ञापन लिया और उनकी समस्याएं सुनीं। अधिकारियों ने उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। नगर पालिका कर्मचारी ने बताया सीमा से बाहर रहवासियों ने ज्ञापन में आरोप लगाया कि नगरपालिका कर्मचारी विनोद शर्मा कॉलोनी से जुड़े कामों में लगातार अड़चन डाल रहे हैं। उनका कहना है कि पहले उन्हें बताया गया था कि कॉलोनी नगरपालिका के नक्शे में नहीं है। इसलिए यहां जनगणना नहीं हो सकती। इसके बाद रहवासियों ने प्रयास कर जनगणना की प्रक्रिया पूरी कराई। रहवासियों का आरोप है कि अब उन्हें कॉलोनी को नगरपालिका क्षेत्र में शामिल नहीं होने की बात कही जा रही है। इससे प्रधानमंत्री आवास योजना सहित नगरपालिका से जुड़े अन्य कामों और सुविधाओं का लाभ लेने में परेशानी हो रही है। रहवासियों ने पूछा- सुविधाएं दी गईं तो क्षेत्र से बाहर कैसे? प्रदर्शनकारियों ने कहा कि नगरपालिका ने कॉलोनी में दो सड़कों का निर्माण कराया है। यहां संजीवनी क्लीनिक बनाया गया और मुरम भी डलवाई गई है। बिजली के खंभे भी लगाए हैं। रहवासियों ने पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है। उन्होंने कॉलोनी की स्थिति स्पष्ट करने और लंबित कामों के साथ सरकारी योजनाओं का लाभ दिलाने की मांग रखी है।



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बांग्लादेश ने शुरू की भारत से बात, कारोबार सामान्य हुए तो किसे होगा फायदा


नई दिल्ली. करीब 2 साल से भारत के खिलाफ जहर उगलने और पाकिस्तान से गलबहियां करने के बाद बांग्लादेश ने अपना रुख बदल दिया है. भारत के हाई कमिश्नर दिनेश त्रिवेदी ने बांग्लादेश के वाणिज्य, उद्योग, कपड़ा एवं जूट मंत्री खांडकर अब्दुल मुक्तादिर से मुलाकात की और द्विपक्षीय आर्थिक एवं वाणिज्यिक सहयोग के विभिन्न पहलुओं पर चर्चा करते हुए दोनों देशों के बीच कारोबार को बढ़ाने पर सहमति बनती दिखी. अगर दोनों देशों के बीच दोबारा व्यापारिक रिश्ते सामान्य होते हैं तो इसका फायदा किसे ज्यादा मिलेगा.

भारत और बांग्लादेश के बीच कारोबार के आंकड़े और उससे होने वाले नफा-नुकसान की पड़ताल करने से पहले आपको यह बताते हैं कि हमारे पड़ोसी देश ने पिछले 2 साल से क्यों जहर उगलना शुरू किया और इसका क्या असर हुआ. बांग्लादेश ने भारत से दूरी तो राजनीतिक कारणों से बनाई थी, लेकिन इसका असर सबसे ज्यादा आर्थिक रूप से दिखा. हमारी सीमाएं जुड़ने की वजह से बांग्लादेश के लिए ज्यादातर सामान खरीदना आसान होता रहा है, लेकिन राजनीतिक विरोध के कारण उसने कई चीजों की खरीदारी बंद कर दी. पाकिस्तान और चीन के झांसे में आकर बांग्लादेश ने भारत से कई सामान का आयात बंद किया और कुछ पर भारत ने खुद पाबंदी लगा दी. असर ये हुआ कि ग्लोबल मार्केट के बढ़ते दबाव में बांग्लादेश आर्थिक रूप से काफी परेशान हो गया. यही वजह है कि अभी तक भारत के साथ बातचीत से दूरी बनाने वाले बांग्लादेश ने इस बार खुद अपनी तरफ से कदम बढ़ाया है.

भारत का पलड़ा होगा भारी
बांग्लादेश के साथ कारोबार में भारत का पलड़ा हमेशा भारी रहा है. 2 साल पहले जब सबकुछ सामान्य था, तो वित्तवर्ष 2024-25 में दोनों देशों के बीच कुल करीब 13.7 अरब डॉलर (1.31 लाख करोड़ रुपये) का करोबार हुआ था. इसमें से भारत ने 11.38 अरब डॉलर का निर्यात किया था, जबकि 2.33 अरब डॉलर का आयात किया था. इसका मतलब है कि भारत का कारोबार सरप्लस करीब 9 अरब डॉलर का रहा था. जाहिर है कि अगर कारोबारी रिश्ते दोबारा सामान्य होते हैं तो भारत ही फायदे में रहेगा. भारत से ज्यादातर कपास, ईंधन, वाहन, अनाज और मशीनरी का निर्यात होता है. दूसरी ओर, बांग्लादेश से रेडीमेड कपड़े, फाइबर, जूट के धागे और चमड़े के जूतों का आयात करता है.

क्यों फायदे में रहेगा भारत
बांग्लादेश भले ही एशिया का छोटा सा देश है, लेकिन भारत के लिए वह दक्षिण एशिया का सबसे बड़ा व्यापारिक भागीदारी है. भारतीय उत्पाद का इस्तेमाल सिर्फ बांग्लादेश के घरेलू बाजार में ही नहीं होता है, बल्कि उसके निर्यात के लिए कच्चे माल के तौर पर हमारे उत्पादों का काफी इस्तेमाल होता है. हमारे यहां से जाने वाले कपास, धागे, रसायन, मशीनरी और ईंधन का इस्तेमाल बांग्लादेश की गार्मेंट फैक्ट्रियों में होता है. इनसे फाइनल प्रोडक्ट तैयार करके बांग्लादेश निर्यात करता है. लिहाजा अगर कारोबार सामान्य होता है तो भारत का निर्यात 12 से 14 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है.

बांग्लादेश को भी जमकर फायदा
वैसे तो बांग्लादेश की सबसे बड़ी समस्या भारत के साथ व्यापार घाटा है. वित्तवर्ष 2025 में तो उसे करीब 9 अरब डॉलर का नुकसान हुआ था. बावजूद इसके रिश्ते सामान्य होते हैं तो बांग्लादेश को कच्चे माल, खाने-पीने के सामान और औद्योगिक सामानों की सप्लाई को लेकर काफी फायदा होगा. बाजार एक्सपर्ट का तो यह भी अनुमान है कि दोनों देशों का अतिरिक्त कारोबार 25 हजार करोड़ तक पहुंच सकता है. हालिया घटनाक्रम को देखें तो भारत ने 25 अगस्त को गेहूं और गेहूं से बने उत्पादों के निर्यात पर प्रतिबंध हटा लिए हैं. बांग्लादेश में इन दोनों ही उत्पादों की काफी मांग रहती है. ऐसे में अगर व्यापारिक रिश्ते सामान्य होते हैं तो यह भारत के लिए काफी फायदेमंद हो सकता है.

जूट उद्योग को कितना फायदा
भारत भले ही ज्यादातर सामान बांग्लादेश को निर्यात करता है, लेकिन जूट के मामले में वह खरीदार ही बना हुआ है. भारत ने साल 2024 तक भारत से करीब 1.28 लाख टन जूट खरीदा था, जिसकी कीमत करीब 87 करोड़ डॉलर है. भारत में भले ही पश्चिम बंगाल, बिहार और असम में भारी मात्रा में जूट का उत्पादन होता है लेकिन यह उसकी खपत का काफी कम हिस्सा है. यही वजह है कि भारतीय जूट उद्योग को ऊंची कीमत पर इसे आयात करना पड़ रहा है. बांग्लादेश के साथ कारोबारी रिश्ते सामान्य होते हैं तो भारत को वहां से कम कीमत पर जूट की सप्लाई हो सकेगी. इस बार भारत का आयात करीब 2 लाख टन तक जा सकता है.



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आज का एक्सप्लेनर: क्या बांग्लादेश मक्का पैक्ट में शामिल होकर सऊदी-पाक-तुर्किये के साथ लड़ेगा; भारत के तीन तरफ से घिरने का खतरा


18 दिन पहले सऊदी, तुर्किये और पाकिस्तान के बीच मक्का में एक डिफेंस एग्रीमेंट हुआ। इसमें NATO की तरह करार है कि तीनों में से किसी एक देश पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा। अब इसमें कुछ और इस्लामिक देशों के शामिल होने की अटकलें लग रही हैं। इनमें सबसे बड़ा

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क्या वाकई ‘इस्लामिक NATO’ जॉइन करेगा बांग्लादेश, ये भारत के लिए कितना बड़ा खतरा और सरकार कैसे काउंटर करेगी; आज के एक्सप्लेनर में जानेंगे…

सवाल-1: मक्का एग्रीमेंट में बांग्लादेश के शामिल होने की चर्चा क्यों उठी?

जवाबः कोई औपचारिक ऐलान नहीं हुआ है, लेकिन बांग्लादेश के दो मंत्रियों ने बयानों से चर्चा शुरू हुई…

  • बांग्लादेश के पीएम तारिक रहमान के विदेश मामलों के सलाहकार हुमायूं कबीर 21 अगस्त को बांग्लादेश के विदेश राज्य मंत्री बने। उसी रोज उन्होंने कहा, ‘सऊदी अरब, पाकिस्तान और तुर्किये के फ्रेमवर्क में शामिल होने को लेकर बांग्लादेश का रुख पॉजिटिव है। ये फैसला बांग्लादेश अपने हितों को ध्यान में रखकर लेगा।’
  • 21 अगस्त को ही दूसरी विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद ने भी कहा, ‘हमारा किसी भी पैक्ट में शामिल होना इस बात से तय होगा कि इससे बांग्लादेश के हित सुरक्षित रहेंगे या नहीं।
  • हुमायूं कबीर ने कहा, ‘बांग्लादेश की अब अपनी पहचान है। मिडिल ईस्ट और इसके हिस्सेदार इस्लामिक देश बांग्लादेश की लीडरशिप को मक्का पैक्ट में शामिल होने का न्योता दे रहे हैं।
  • हुमायूं कबीर ने ये भी बताया कि पीएम तारिक रहमान को सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने राजधानी रियाद आने का न्योता दिया है।

सवाल-2: तो बांग्लादेश मक्का पैक्ट में शामिल होगा या नहीं?

जवाब: सीनियर डिफेंस जर्नलिस्ट मनोज जोशी कहते हैं, ‘अगर ये सुन्नी देशों के बीच का पैक्ट है, तो बांग्लादेश भी इसमें शामिल हो सकता है। अगर इसका मकसद मिडिल ईस्ट की रीजनल सिक्योरिटी है, तो इसमें बांग्लादेश की कोई खास अहमियत नहीं है।’

स्ट्रैटेजिक एनालिस्ट ब्रह्म चेलानी भी कहते हैं, ‘ये पैक्ट 4 सुन्नी देशों का गठबंधन बन सकता है। सत्ताधारी बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी, BNP के इस्लामिक ताकतों के साथ गहरे रिश्ते रहे हैं। रहमान की विदेश नीति उनकी पार्टी की उसी पुरानी स्ट्रैटेजी की तरफ जाती दिख रही है।’

दरअसल, बांग्लादेश में इस वक्त BNP की सरकार है, जो अपने कट्टर सुन्नी इस्लामिक रुख के लिए जानी जाती है। बीते कुछ समय से ये कट्टर रुख बढ़ रहा है, इसके कुछ संकेत हैं…

  • हुमायूं कबीर ने समझौते के बारे में बयान देते हुए कहा कि मक्का बांग्लादेश के लोगों के दिल में बसा हुआ है।
  • बांग्लादेश के मौजूदा सेना प्रमुख जनरल वाकर-उज-जमान ने मई 2026 में हज से लौटने के बाद दाढ़ी बढ़ा ली है। वो इस्लामिक संदेश देते हैं।
  • वाकर-उज-जमान ने सेना की चार यूनिट्स के नाम इस्लाम के 4 खलीफाओं के नाम पर रखे हैं।

पैक्ट में शामिल होने से बांग्लादेश को सऊदी अरब से विदेशी रोजगार, निवेश और तेल मिल सकता है। तुर्किये से डिफेंस टेक्नोलॉजी, हथियार और ट्रेनिंग मिल सकती है। पाकिस्तान इस्लामी मंचों पर राजनीतिक समर्थन दे सकता है।

हालांकि बांग्लादेश के पूर्व राजनयिक एम शाहिदुल इस्लाम लिखते हैं, ‘बांग्लादेश को अपने फैसले दूसरों को खुश करने के लिए नहीं लेने चाहिए। मक्का पैक्ट की लागत बहुत ज्यादा है, लेकिन फायदा स्पष्ट नहीं है। समझौते में शामिल दूसरे देश बांग्लादेश जैसे छोटे देश पर दबाव भी बना सकते हैं। बांग्लादेश को पूछना होगा कि क्या उसे भारत-पाकिस्तान या ईरान-सऊदी के संघर्ष से दूर रहने की आजादी होगी।’

सवाल-3: अगर बांग्लादेश मक्का-पैक्ट में शामिल हुआ, तो भारत के लिए क्या खतरा?

जवाब: दो बड़े खतरे हैं…

1. साउथ एशिया में भारत का प्रभाव, सिक्योरिटी, आर्थिक रिश्तों पर असर

  • ब्रह्म चेलानी कहते हैं, ‘पैक्ट में बांग्लादेश के शामिल होने से अरब सागर, बंगाल की खाड़ी और भूमध्य सागर के इलाके में सिक्योरिटी से जुड़ा पूरा इन्फ्रास्ट्रक्चर बदलेगा। बांग्लादेश से भी भारत के राजनयिक और आर्थिक रिश्ते बदल जाएंगे।’
  • भारत की घेराबंदी बढ़ सकती है, क्योंकि तारिक रहमान चीन से भी रिश्ते बढ़ा रहे हैं। जून में चीन दौरे पर उन्होंने चीन को ‘सबसे कीमती और भरोसेमंद पार्टनर’ कहा था।
  • तुर्किये भी यूरोप, मिडिल ईस्ट से लेकर साउथ एशिया तक भारत के मुकाबले प्रभाव बढ़ाना चाहता है। तुर्किये एशिया और यूरोप के बीच लैंड-ब्रिज का काम करता है।
  • भारत के ज्यादातर इस्लामिक देशों के साथ आर्थिक रिश्ते हैं। सऊदी अरब भारत के टॉप-5 ट्रेड पार्टनर्स में हैं। अब इन व्यापारिक रिश्तों पर असर पड़ सकता है।
पीएम नरेंद्र मोदी 15 मई को UAE की यात्रा पर गए थे। राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ उनकी मुलाकात की तस्वीर।

पीएम नरेंद्र मोदी 15 मई को UAE की यात्रा पर गए थे। राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के साथ उनकी मुलाकात की तस्वीर।

2. पाकिस्तान से जंग हुई, तो मुश्किल बढ़ेगी

  • बांग्लादेश शामिल हुआ, तो सऊदी-पाकिस्तान-तुर्किये को साउथ एशिया में मजबूत पकड़ मिल जाएगी। इनकी पहुंच भारत के पूर्व तक हो जाएगी।
  • मई 2025 में ऑपरेशन सिंदूर के दौरान, तुर्किये ने पाकिस्तान को सैन्य मदद- खास तौर पर एडवांस्ड ड्रोन दिए और पाक के समर्थन में बयान भी दिए।
  • ब्रह्म चेलानी के मुताबिक, ‘पैक्ट के चलते आगे कोई जंग हो, तो भारत के लिए जवाबी कार्रवाई मुश्किल हो जाएगी। भारत, पाकिस्तान में कोई एक्शन ले, तो पाकिस्तान, भारत के खिलाफ ये पैक्ट लागू कर सकता है।’
  • ‘सऊदी का पैसा, तुर्किये की डिफेंस टेक्नोलॉजी, पाकिस्तान और बांग्लादेश की स्ट्रैटेजिक पोजिशन से चौतरफा इन्फ्रास्ट्रक्चर तैयार होता है। इससे उनको डिफेंस रिसर्च, खुफिया जानकारी शेयर करने में भी मदद आएगी।’
पाकिस्तान भारत से संघर्ष में बांग्लादेशी सैन्य ठिकानों का भी इस्तेमाल कर सकता है। सऊदी का पैसा और तुर्किये की टेक्नोलॉजी भी भारत के खिलाफ इस्तेमाल हो सकती है।

पाकिस्तान भारत से संघर्ष में बांग्लादेशी सैन्य ठिकानों का भी इस्तेमाल कर सकता है। सऊदी का पैसा और तुर्किये की टेक्नोलॉजी भी भारत के खिलाफ इस्तेमाल हो सकती है।

सवाल-4: भारत इसे कैसे काउंटर करेगा?

जवाब: भारत को घेरने का इरादा तो दिखता है, लेकिन लंबे समय तक भारत जैसी इकॉनोमिक पावर का विरोध करना मुमकिन नहीं है। भारत 3 तरह की तैयारी कर सकता है…

1. सऊदी, तुर्किये जैसे देशों से रिश्ते बेहतर करना

  • भारत के पूर्व राजदूत अनिल त्रिगुनायत कहते हैं, ‘हमें दूसरे देशों से आउटरीच पर जोर देना होगा। सऊदी से हमारे रिश्ते बहुत अच्छे हैं और हम तुर्किये से भी अच्छे रिश्ते बना सकते हैं।’
  • भारत ग्रीस और साइप्रस के साथ पार्टनरशिप बढ़ा रहा है, जिनसे तुर्किये का पुराना विवाद है।
  • डॉ. राजन कुमार कहते हैं, ‘मुस्लिम से भारत के अच्छे संबंध रहे हैं। भारत चाहेगा कि उसके करीबी इंडोनेशिया और मलेशिया जैसे देश, इस पैक्ट में न जाएं। इसके लिए कोशिश करनी चाहिए।’

2. अहम समुद्री रूट्स पर नेवी को मजबूत करना

  • सऊदी-पाकिस्तान, तुर्किये और बांग्लादेश अहम समुद्री रूट्स पर मौजूद हैं।
  • होर्मुज की तरह बॉस्फोरस और डार्डेनेल्स दो स्ट्रेट हैं, इन्हें तुर्किये स्ट्रेट कहते हैं। ये काला सागर से भूमध्य सागर जाने का इकलौता रास्ता है। तुर्किये का इन पर कंट्रोल है।
  • लाल सागर के किनारे बसा सऊदी अरब बाब-अल-मंदेब स्ट्रेट के नजदीक है। इस स्ट्रेट के रास्ते से दुनिया का करीब 10% समुद्री व्यापार है। सऊदी का एक तट पर्शियन गल्फ में भी है।
  • वहीं अरब सागर से पाकिस्तान की करीब एक हजार किमी लंबी कोस्टलाइन मिलती है। ग्वादर और कराची पोर्ट पाकिस्तान के अहम समुद्री ट्रेड स्पॉट हैं। जबकि बंगाल की खाड़ी, भारत के पूर्वी किनारे पर मौजूद है।
  • ब्रह्म चेलानी कहते हैं, ‘इन देशों की इस मजबूत मरीन पोजीशन को काउंटर करने के लिए हिंद महासागर में नेवी बढ़ाने पर काम करना होगा।’

3. मक्का पैक्ट का उद्देश्य साफ नहीं, भारत को कड़ी नजर रखनी चाहिए

  • मनोज जोशी कहते हैं, ‘मक्का पैक्ट का असली गोल ही क्लियर नहीं है। क्या इसका निशाना ईरान है या अमेरिका है? बांग्लादेश खुद 3 तरफ से भारत से घिरा हुआ है। इसलिए फिलहाल भारत के लिए बेहतर है कि वह सिर्फ स्थिति पर नजर बनाए रखे।’
  • बांग्लादेश के सवाल पर भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने भी कहा, ‘हम पश्चिम एशिया में हो रहे घटनाक्रम पर करीबी नजर बनाए हुए हैं। फिलहाल मैं बस इतना ही कहूंगा।’

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क्या जम्मू-कश्मीर पर भारत के पाले में अमेरिका, अमेरिकी राजदूत सर्जियो बोले- ये भारत का अहम हिस्सा; ट्रम्प का असली मकसद क्या

19 अगस्त 2026 को भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर जम्मू-कश्मीर में सीएम उमर अब्दुल्ला से मिले। उन्होंने वहीं से बयान दिया- ‘जम्मू-कश्मीर भारत का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मैं यहां पहली बार आया। ये बहुत खूबसूरत जगह है।’ पूरी खबर पढ़िए…



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Sony ने लॉन्च किया Xperia 10 VIII, दमदार बैटरी के साथ मिलेगा तगड़ा प्रोसेसर


Sony ने अपना फ्लैगशिप स्मार्टफोन Xperia 10 VIII ग्लोबल मार्केट में लॉन्च कर दिया है। जापानी कंपनी का यह स्मार्टफोन Qualcomm के चिपसेट के साथ आता है। पिछले साल कंपनी ने UK समेत कई देशों में अपना बिजनेस बंद करने की घोषणा की थी। कंपनी को Apple और Samsung जैसे ब्रांड्स से कड़ी चुनौती मिल रही थी।

कितनी है कीमत?

Sony Xperia 10 VIII को 549 यूरो यानी लगभग 62,000 रुपये की कीमत में लॉन्च किया गया है। यह फोन Frosted Gray, Frozen White और Misty Lilac तीन कलर ऑप्शन में आता है। इसे जल्द ही ग्लोबल मार्केट में सेल के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इसे Sony Online स्टोर के माध्यम से खरीदा जा सकेगा। वहीं, चुनिंदा मार्केट में इसे रिटेल स्टोर के जरिए भी खरीदा जा सकेगा।

Sony Xperia 10 VIII के फीचर्स

सोनी का यह स्मार्टफोन 6.1 इंच के OLED डिस्प्ले के साथ आता है। फोन का डिस्प्ले FHD+ यानी 1080 x 2340 पिक्सल को सपोर्ट करता है। इस फोन का डिस्प्ले 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। साथ ही, इसके प्रोटेक्शन के लिए कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास विक्टस 2 दिया गया है। यह फोन Android 16 ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करता है।

Sony का यह फ्लैगशिप फोन लेटेस्ट Qualcomm Snapdragon 6 Gen 3 चिपसेट के साथ आता है। इस फोन में 8GB रैम और 128GB इंटरनल स्टोरेज का सपोर्ट दिया गया है। फोन की रैम को 6GB वर्चुअली एक्सपेंड किया जा सकता है। वहीं, इसकी स्टोरेज को भी माइक्रोएसडी कार्ड के जरिए 2TB तक बढ़ाया जा सकता है। फोन में डुअल 5G सिम कार्ड का सपोर्ट मिलता है। यह फोन IP65 और IP68 रेटिंग के साथ आता है, जिसकी वजह से पानी और धूल-मिट्टी में यह खराब नहीं होगा।










Sony Xperia 10 VIII 5G फीचर्स
डिस्प्ले 6.1 इंच OLED, 120Hz
प्रोसेसर Qualcomm Snapdragon 6 Gen 3
स्टोरेज 8GB, 128GB
बैटरी 5000mAh
कैमरा 50MP + 13MP, 8MP
OS Android 16

सोनी के इस फोन के बैक में डुअल कैमरा सेटअप मिलता है। फोन में 50MP का मेन सेंसर दिया गया है, जिसके साथ कंपनी ने एक Exmor RS सेंसर भी दिया है। इसके अलावा बैक में 13MP का अल्ट्रा वाइड कैमरा दिया गया है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए इसमें 8MP का कैमरा दिया गया है। इस स्मार्टफोन में 5000mAh की दमदार बैटरी दी गई है, जिसके साथ USB Type C चार्जिंग का सपोर्ट मिलता है। कनेक्टिविटी के लिए फोन में 3.5mm ऑडियो जैक, WiFi 6, Bluetooth 5.4 जैसे फीचर्स दिए गए हैं।

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लौकी जैसी बोरिंग सब्जी से बनाएं स्वादिष्ट रबड़ी, हलवाई भी पूछेगा रेसिपी

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लौकी का नाम सुनते ही अगर आपको भी यह सब्जी बोरिंग लगती है, तो एक बार इसकी रबड़ी जरूर ट्राई करें. लौकी से बनी रबड़ी स्वाद में इतनी मलाईदार और खुशबूदार लगती है कि इसे खाने के बाद आपको यकीन करना मुश्किल होगा कि इसमें लौकी का इस्तेमाल हुआ है. त्योहार, पूजा या घर में अचानक मीठा खाने का मन हो, तब यह रेसिपी आसानी से बनाई जा सकती है.

लौकी की रबड़ी बनाने के लिए सामग्री

1 किलो लौकी
1 लीटर फुल क्रीम दूध
5-6 बड़े चम्मच चीनी
2 बड़े चम्मच मिल्क पाउडर
4-5 हरी इलायची
8-10 बादाम
8-10 पिस्ता
1 बड़ा चम्मच काजू
1 चम्मच घी
कुछ केसर के धागे
1-2 बड़े चम्मच गर्म दूध

कैसे बनाएं लौकी की रबड़ी

सबसे पहले लौकी को अच्छी तरह धोकर छील लें. इसे बीच से काटकर बीज और अंदर का सख्त हिस्सा निकाल दें. अब लौकी को कद्दूकस कर लें. कद्दूकस की हुई लौकी को हाथ से अच्छी तरह दबाकर उसका अतिरिक्त पानी निकाल दें. यह स्टेप जरूरी है, क्योंकि ज्यादा पानी रहने से रबड़ी को गाढ़ा होने में ज्यादा समय लगेगा.

अब एक भारी तले वाली कड़ाही में एक चम्मच घी गर्म करें और इसमें कद्दूकस की हुई लौकी डाल दें. इसे मध्यम आंच पर करीब 5-7 मिनट तक भूनें. लौकी का कच्चापन दूर होने और इसकी नमी कम होने तक इसे चलाते रहें.

दूसरी तरफ एक अलग पैन में फुल क्रीम दूध गर्म करें. दूध में उबाल आने के बाद आंच धीमी कर दें और इसे लगातार चलाते हुए पकाएं. दूध थोड़ा गाढ़ा होने लगे तो इसमें भुनी हुई लौकी डाल दें.

अब मिश्रण को धीमी आंच पर पकने दें. बीच-बीच में चलाते रहें ताकि दूध कड़ाही के तले में न लगे. जब दूध गाढ़ा होकर रबड़ी जैसी कंसिस्टेंसी में आने लगे, तब इसमें मिल्क पाउडर डालें. इसे अच्छी तरह मिलाकर 3-4 मिनट और पकाएं.

अब इसमें चीनी और इलायची पाउडर डाल दें. चीनी डालने के बाद रबड़ी थोड़ी पतली हो सकती है, इसलिए इसे कुछ मिनट और पकाएं. केसर के धागों को गर्म दूध में भिगोकर रबड़ी में डाल दें. इससे स्वाद के साथ-साथ खुशबू भी बढ़ जाएगी.

अंत में कटे हुए बादाम, पिस्ता और काजू डालकर गैस बंद कर दें. रबड़ी को कमरे के तापमान पर थोड़ा ठंडा होने दें और फिर इसे फ्रिज में रख दें. ठंडी लौकी की रबड़ी का स्वाद और भी बढ़िया लगता है.

स्वाद बढ़ाने के लिए ध्यान रखें ये बातें

लौकी हमेशा ताजी और कोमल लें. अगर लौकी कड़वी है तो उसका इस्तेमाल न करें. रबड़ी को धीमी आंच पर पकाना जरूरी है, क्योंकि तेज आंच पर दूध नीचे लग सकता है और स्वाद खराब हो सकता है. आप अपनी पसंद के अनुसार चीनी कम या ज्यादा कर सकते हैं.

अगर रबड़ी को और ज्यादा मलाईदार बनाना चाहते हैं तो दूध को अच्छी तरह पकाकर आधा होने तक गाढ़ा करें. ऊपर से गुलाब की पंखुड़ियां या थोड़े और ड्राई फ्रूट्स डालकर इसे सर्व करें. इस तरह साधारण सी लौकी एक ऐसी मिठाई में बदल जाएगी, जिसे देखकर और खाकर हर कोई इसकी तारीफ करेगा.



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कम दाम में खरीदें दमदार जूता: उपभोक्ताओं के पसंदीदा हैं रनिंग शूज के ये 8 विकल्प


बेस्ट ब्रांड्स के रनिंग शूज इस समय आपको सस्ते में उपलब्ध मिल जाएंगे, अगर लंबे समय से इन्हें खरीदने पर विचार कर रहे हैं, तो इन 6 विकल्पों पर एक नजर जरूर डालें!

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शारीरिक गतिविधियों में भाग लेना हो या रनिंग करना है, बेहतर उत्पादकता के लिए एक अच्छी क्वालिटी का जूता आप सभी के पास जरूर होना चाहिए। अगर आप भी फिटनेस को लेकर जागरूक होना चाहते हैं और गतिविधियों में भाग लेना चाहते हैं, तो इन रनिंग शूज पर एक नजर जरूर डालें! यहां सुझाए गए सभी जूते उपभोक्ताओं के पसंदीदा हैं, जिस पर लोगों ने सकारात्मक रिव्यू दिए हैं। हजारों रिव्यू पढ़ने के बाद हम आपके लिए लाए हैं, उपभोक्ताओं का भरोसेमंद ये 6 जूता।

रनिंग शूज.

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गलत जूते का चयन शारीरिक गतिविधियों के दौरान चोट का कारण बन सकता है, साथ ही पैरों को जल्दी थका देता है, जिससे उत्पादकता भी कम हो सकती है। ऐसी परिस्थिति में पड़ने से अच्छा है एक सही और प्रभावी जूते का चयन करें!

यहां खरीदें उपभोक्ताओं का भरोसेमंद जूता:

आजकल फिटनेस को लेकर जागरूक रहना बहुत जरूरी है, मगर मोटिवेशन के लिए एक अच्छी क्वालिटी का जूता आप सभी के पास होना चाहिए! जो गतिविधियों के दौरान पैरों को आराम दे और बिना थकान के उत्पादकता बनाए रखने में मदद कर सके। कैंपस का ये बजट फ्रेंडली जूता एक स्टाइलिश कंफर्टेबल विकल्प है, जिसे आप सभी शारीरिक गतिविधियों के अलावा कैजुअल आउटफिट्स के साथ भी स्टाइल कर सकते हैं। विशेष रूप से इसे इसके स्टाइल कर लिए पसंद किया जाता है, मगर इसकी खूबियां यही तक सीमित नहीं है, ये पैरों को बेहतर सपोर्ट देता है और संतुलन बनाए रखने में मदद करता है।

पैरों में दर्द रहता है या गतिविधियों में दौरान पैर जल्दी थक जाते हैं? अगर आपके साथ ऐसा होता है तो ये जूता एक बढ़िया विकल्प है। अगर आप भी बेफिक्र होकर बिना थके लंबे समय तक दौड़ना चाहते हैं, ये रनिंग शूज ट्राई कर सकते हैं। इसका डिजाइन पैरों को बेहतर सपोर्ट देता है और संतुलन बनाए रखता है। वहीं गद्देदार सोल पैरों का थकान काम करता है। जूते का डिजाइन भी काफी हल्का है, इस प्रकार गतिविधियों के दौरान थकान और चोट लगने की संभावना कम हो जाती है। साथ ही पैरों का दर्द भी ट्रिगर नहीं होता।

एक अच्छे जूते की मदद से शारीरिक गतिविधियों के दौरान आप बेहतर इंटेंसिटी के साथ अपना 100% दे सकते हैं! कैंपस के इस जूते पर नजर डालें, इसका गद्देदार सोल और फ्लैक्सिबल डिज़ाइन पैरों को बेहतर सपोर्ट देता है और लंबे समय तक सक्रिय रहने में मदद करता है। साथ ही ये देखने में भी आकर्षक है, आप इसे कैजुअल आउटफिट्स के साथ स्टाइल कर सकते हैं। इतनी खूबियां होने के बाद भी ये बजट फ्रेंडली दाम पर उपलब्ध है, तो ज्यादा न सोचें ऑफर्स का लाभ जरूर उठाएं!

Nivia ब्रांड का हल्का और आरामदायक जूता कई लोगों का पसंदीदा है। इसे हवादार कपड़े से तैयार किया गया है, जिससे पैरों में हवा का बहन बना रहता है। साथ ही गद्देदार सोल पैरों का बेहतर समर्थन करते हैं और बैलेंस मेंटेन रखते हैं, इस तरह थकान की संभावना कम हो जाती है। इतना ही नहीं इसका मटेरियल ड्यूरेबल है, जिसे लंबे इस्तेमाल के बाद भी कोई नुकसान नहीं होगा। अगर आप भी लंबे समय से आरामदायक जूते की तलाश में हैं, तो इसे एक मौका जरूर दें।

सस्ते में दमदार जूता चाहिए तो Asian के इस जूते से बेहतर और कुछ भी नहीं! इस रनिंग शूज का सोल गद्देदार है, इस तरह ये जूता आप बेफिक्र होकर लंबे समय तक पहन सकते हैं। इसके जूते आमतौर पर सस्ते आते हैं, मगर उनकी क्वालिटी के साथ कोई कंप्रोमाइज नहीं किया गया है। बिना अधिक खर्च किए एक अच्छी क्वालिटी का जूता खरीद सकते हैं। इसे बहुत से लोगों ने खरीदा है और इस पर पॉजिटिव रिव्यू भी दिए हैं। इसका हल्का आरामदायक डिजाइन इसकी सबसे बड़ी खासियत है।

ये बजट फ्रेंडली जूता लोगों का पसंदीदा रनिंग शूज है, जिसे काफी लोगों ने सराहा है। इसका डिजाइन हो या इसका बनावट दोनों कमाल के हैं। विशेष रूप से ये फ्लैक्सिबल है, जो शारीरिक गतिविधियों के दौरान पैरों के अनुसार मुड़ जाता है। गतिविधियों में भाग लेने के अलावा आप ये जूता रोजाना ऑफिस वियर के तौर पर पहन सकते हैं। खासकर जो लोग लंबा ट्रैवल करते हैं, उनके लिए बढ़िया विकल्प है।

रनिंग शूज के क्या फायदे हैं:

1. ऊर्जा शक्ति बरकरार रहती है:

ज्यादतर रनिंग शूज के सोल को कुछ इस तरह डिजाइन किया जाता है, जो दौड़ते हुए पैरों को आगे की ओर धकेलता है। इस तरह आगे बढ़ने में मदद मिलती है और पैरों की मसल्स पर कम दबाव पड़ता है। साथ ही आप लंबे समय तक ऊर्जावान रहते हैं और अधिक उत्पादकता के साथ गतिविधियों में भाग ले पाते हैं।

2. कम हो जाती है चोट लगने की संभावना:

दौड़ते वक्त या अन्य शारीरिक गतिविधियों में भाग लेते हुए कई बार संतुलन बिगड़ सकता है, जिसकी वजह से आपको चोट लग सकती है। ऐसे में एक अच्छे क्वालिटी का रनिंग शूज इस स्थिति को नजरअंदाज करने में आपकी मदद कर सकता है। ये जूते न केवल पैरों को बेहतर समर्थन देते हैं, बल्कि संतुलन बनाए रखते हैं।

3. फोकस रहने में मदद करता है:

दौड़ते हुए पैरों में परेशानी होने पर आपका ध्यान गतिविधियों से भटक सकता है। रनिंग शूज के बेहतर संतुलन और समर्थन आपका ध्यान केवल गतिविधियों तक केंद्रित रखते हैं। इस प्रकार आप अधिक उत्पादकता के साथ शारीरिक गतिविधियों में भाग ले पाते हैं।

4. इनका हल्का डिजाइन प्रभावी माना जाता है:

रनिंग शूज अक्सर हल्के डिजाइन के होते हैं, ताकि इन्हें पहन कर पैरों पर अधिक दबाव न पड़े और आप लंबे समय तक सक्रिय रहें! दौड़ते हुए टखनों पर कम भार पड़ता है और आप कम समय में ज्यादा दूरी तय कर सकते हैं। साथ ही इससे रनिंग इंटेंसिटी और प्रोडक्टिविटी भी बढ़ जाती है।

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रनिंग शूज चोट से बचने और बेहतर संतुलन के लिए महत्वपूर्ण हैं।

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बजट-फ्रेंडली जूते भी उच्च गुणवत्ता के होते हैं और उपभोक्ताओं में लोकप्रिय हैं।

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सही जूता चयन आपके फिटनेस लक्ष्यों को हासिल करने में मदद कर सकता है।

Disclaimer: लाइव हिंदुस्तान में हम आपको नए ट्रेंड्स और प्रॉडक्ट्स के साथ अप-टू-डेट रहने में मदद करते हैं। आप हमारे जरिए खरीदारी करते हैं तो अफिलीएट पार्टनरशिप की वजह से हमें राजस्व का एक हिस्सा मिल सकता है। हम प्रोडक्ट्स के संबंध में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 सहित लागू कानूनों के तहत किसी भी दावे के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे। इस आर्टीकल में लिस्टेड प्रोडक्ट प्राथमिकता की किसी विशेष सीरीज में नहीं हैं।



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पूर्व CDS अनिल चौहान बोले- युद्ध और राजनीति अलग नहीं: सरकार को ऑप्शन देना सेना की जिम्मेदारी; ऑपरेशन सिंदूर विदेशों में भी चर्चा का विषय




देश के पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने कहा कि सेना, राजनीतिक इच्छा का सीधा विस्तार है। किसी देश के राजनीतिक हित सबसे ऊपर होते हैं और सेना उन हितों की रक्षा करने वाले कई माध्यमों में से एक हैं। पूर्व CDS ने कहा- “शुरुआत इस बात से करते हैं कि राजनीति और युद्ध अलग नहीं हैं। क्लॉजविट्ज ने कहा था कि युद्ध दूसरे माध्यमों से राजनीति को आगे बढ़ाना है।” पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (CDS) जनरल अनिल चौहान ने मंगलवार को नई दिल्ली में ऑपरेशन सिंदूर और उसके बाद के हालात पर चर्चा की।
यह आयोजन विवेकानंद इंटरनेशनल फाउंडेशन ने रखा था। इस दौरान पूर्व CDS ने राष्ट्रीय सुरक्षा और लोकतांत्रिक शासन के रिश्ते पर बात की। चौहान बोले- युद्ध और राजनीति अलग नहीं जनरल चौहान ने प्रूशियाई जनरल कार्ल वॉन क्लॉजविट्ज की बात जिक्र किया कि युद्ध दूसरे माध्यमों से राजनीति को आगे बढ़ाने का तरीका है। प्रूशियाई जनरल कार्ल वॉन क्लॉजविट्ज की किताब ‘ऑन वॉर’ (वॉम क्रिगे) आधुनिक पश्चिमी सैन्य सिद्धांत की आधारशिला मानी जाती है। यह किताब उनकी मौत के बाद 1832 में उनकी पत्नी मैरी वॉन ब्रुहल ने प्रकाशित की थी। क्लॉजविट्ज ने नेपोलियन के खिलाफ अभियान में हिस्सा लिया था। सरकार को सैन्य विकल्प देना सेना की जिम्मेदारी जनरल चौहान ने कहा कि लोकतंत्र में जब सरकार अपने राजनीतिक उद्देश्यों को हासिल करने के लिए बल प्रयोग का फैसला करती है, तब सेना की जिम्मेदारी दो तरह की होती है- पाकिस्तान हमलों के नतीजों के सबूत नहीं जुटा सका पूर्व चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ जनरल अनिल चौहान ने कहा कि पाकिस्तान ऑपरेशन सिंदूर के दौरान अपने हमलों के नतीजों का सबूत नहीं जुटा सका। उसने चीनी कंपनियों समेत कमर्शियल सैटेलाइट इमेजरी हासिल करने की कोशिश की, लेकिन यह साबित नहीं कर सका कि उसके हमलों से कोई टारगेट हिट हुआ। ट्रेनिंग और युद्धाभ्यास से बढ़ते हैं विकल्प जनरल चौहान ने कहा कि सैन्य विकल्पों की संख्या और उनकी गुणवत्ता अचानक तैयार नहीं होती। इसके लिए शांतिकाल में लगातार तैयारी करनी पड़ती है। इसमें कड़ी ट्रेनिंग, युद्धाभ्यास और अलग-अलग संभावित हालात की योजना बनाना शामिल है। विकल्प इस बात पर भी निर्भर करते हैं कि सैन्य नेतृत्व ने किस तरह की ट्रेनिंग दी है, किस तरह के युद्धाभ्यास किए हैं और किन संभावित हालात पर काम किया है। हर सैन्य विकल्प में किसी न किसी तरह का जोखिम होता है। वह उस राजनीतिक जरूरत को भी पूरा करता है, जिसके लिए उसका इस्तेमाल किया जाना है। ऑपरेशन सिंदूर पर अब भी नजर ऑपरेशन सिंदूर को करीब 15 महीने हो चुके हैं। जनरल चौहान ने कहा कि इसके बावजूद ऑपरेशन का रणनीतिक असर बना हुआ है और भारत के साथ विदेशों में भी रणनीतिक मामलों के जानकार इस पर नजर रख रहे हैं। ऐसे ऑपरेशन का आकलन सिर्फ सैन्य कार्रवाई तक सीमित नहीं होना चाहिए। इसमें ऑपरेशन से मिली सीख, सामने आई कमियों को दूर करने के लिए उठाए गए कदम, आधुनिक युद्ध के बदलते तरीके और दुनिया में बनी अनिश्चितताओं को एक साथ देखना जरूरी है।



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भूतेश्वर महादेव मंदिर परिसर में किया पौधारोपण: गाडरवाड़ा में ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के तहत फलदार और छायादार पौधे लगाए – jhalawar News




झालावाड़ के गाडरवाड़ा नूरजी देवरिया स्थित भूतेश्वर महादेव मंदिर विकास समिति ने मंदिर प्रांगण में पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया। यह आयोजन ‘एक पेड़ मां के नाम’ और ‘हरियालो राजस्थान’ अभियानों के तहत किया गया। समिति के अध्यक्ष एडवोकेट राजेन्द्र गर्ग और अन्य सदस्यों ने इसमें भाग लिया। इस दौरान कई प्रकार के फलदार और छायादार पौधे लगाए गए। इनमें पीपल, बरगद, नीम, पद्म, आंवला, आशापाला, बेलपत्र, रुद्राक्ष, मीठा नीम, कनेर पीला, आम, बोगनवेलिया और शमीपत्र जैसे पौधे शामिल थे।
पौधारोपण कार्यक्रम में समिति के उपाध्यक्ष मनीष गुर्जर, रामस्वरूप, सचिव रजनी गर्ग, महेन्द्र गोयल, भूपेन्द्र गौड़ और झालावाड़ के पर्यावरण प्रेमी महेश कश्यप सहित कई सदस्य मौजूद रहे। पंडित विष्णु नारायण भातखण्डे व दिगम्बर पलुस्कर की जयंती मनाई
राजकीय संगीत उच्च प्राथमिक विद्यालय झालावाड़ में पंडित विष्णु नारायण भातखण्डे व पंडित दिगम्बर पलुस्कर की जयंती हर्षोल्लास के साथ मनायी गई।
स्कूल की प्रधानाध्यापिका गायत्री धीमान ने बताया कि कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भंवरलाल वर्मा, विशिष्ट अतिथि पंकज खण्डेलवाल, भवानीलाल रहे। मुख्य अतिथि व विशिष्ठ अतिथियों ने मां सरस्वती की तस्वीर पर दीप प्रज्जवलित कर व माला पहनाकर कार्यक्रम की शुरूआत की। संगीत विद्यालय के बच्चों ने विभिन्न रागों की प्रस्तुतियां दी जिसमें हार्दिका पाटीदार ने राग केदार, लविश झांजिया व प्रभात ने राग भूपाली, हर्षिता धीमान ने राग हमीर, तिथि गुप्ता ने राग भैरवी, पुष्पेन्द्र धीमान ने राग पटदीप की प्रस्तुति दी गई।



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