मेरठ में आने वाले 2 नवंबर को उत्तर प्रदेश निर्वाचन आयोग की तरफ से बड़ी बैठक होने जा रही है। बैठक में यूपी के 18 जिलों के अफसर पहुंचेंगे। उनके साथ चुनावी तैयारियों की समीक्षा होगी। उत्तर प्रदेश निवार्चन अधिकारी नवदीप सिंह रिणवा भी इस बैठक में मुख्य रूप से मौजूद रहेंगे। चार मंडल के कमिश्नर, जनपदों के डीएम, पुलिस आयुक्त, एसएसपी इसमें प्रजेंटेशन करेंगे।
चार मंडलों के कमिश्नर रहेंगे मौजूद
उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव की तैयारी में भारत निर्वाचन आयोग अब पूरे जी जान से जुट गया है। पश्चिम के चार मंडल के 18 जनपदों की विधानसभा चुनाव की तैयारियों की दो नवंबर को मेरठ में समीक्षा होगी। जिसमें चारों कमिश्नर, पुलिस कमिश्नर, जनपदों के डीएम, एसएसपी अपनी चुनाव की तैयारियों का प्रजेंटेशन करेंगे। भारत निर्वाचन आयोग से उच्च अधिकारियों के साथ साथ प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी तैयारियों की समीक्षा करके उसमें सुधार के निर्देश देंगे। वेस्ट यूपी से चुनाव आयोग की शुरूआत
चुनाव आयोग ने उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियां शुरू करते हुए सबसे पहले पश्चिम उत्तर प्रदेश की तैयारियों को परखने का निर्णय लिया है। इसके लिए 2 नवंबर को मेरठ में मेरठ, सहारनपुर, मुरादाबाद और अलीगढ़ मंडल के 18 जनपदों की तैयारियों की समीक्षा होगी। समीक्षा करने के लिए भारत निर्वाचन आयोग से वरिष्ठ अधिकारी मेरठ आएंगे। प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा के साथ अपर और उप मुख्य निर्वाचन अधिकारी भी रहेंगे।
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मेरठ में 2 नवंबर को होगी चुनावी तैयारियों की समीक्षा: UP के मुख्य निर्वाचन अधिकारी यूपी के 18 जिलों के अफसरों के साथ लेंगे अहम बैठक – Meerut News
रीवा में NH-30 बायपास पर अंडरपास की मांग: 8 गांवों के लोग 3 नवंबर को करेंगे प्रदर्शन; हाईवे ने गांवों को दो हिस्सों में बांटा – Rewa News
रीवा शहर के NH-30 बायपास पर अंडरपास या सड़क पार करने की सुरक्षित व्यवस्था नहीं होने से आसपास के गांवों के लोग परेशान हैं। ग्रामीणों का कहना है कि बायपास बनने के बाद गांव दो हिस्सों में बंट गए हैं। अब खेतों, स्कूल और दूसरी जरूरी जगहों पर जाने के लिए ल
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खेत और स्कूल जाने के लिए तय करना पड़ता है लंबा रास्ता
30 अक्टूबर को कलेक्टर के नाम दिए गए आवेदन में करहिया, मेदानी, दुआरी, धौचट, जुड़मिया, केमार, तिघरा और कचूर समेत आसपास के गांवों का जिक्र किया गया है। ग्रामीणों के मुताबिक, इन गांवों के लोगों का बायपास के दोनों तरफ आना-जाना रहता है। कई परिवारों के खेत सड़क के दूसरी तरफ हैं। स्कूली बच्चों को भी इसी रास्ते से गुजरना पड़ता है। अंडरपास या क्रॉसिंग नहीं होने से उन्हें लंबा रास्ता तय करना पड़ता है।
स्थानीय निवासी पुष्पेंद्र सिंह ने बताया कि बायपास बनने के बाद गांव के लोगों की परेशानी बढ़ गई है। खेतों और दूसरी जरूरी जगहों पर जाने के लिए लंबा रास्ता तय करना पड़ता है। अंडरपास बनने से ग्रामीणों को राहत मिलेगी।
वहीं, शिवम द्विवेदी ने कहा कि स्कूल जाने वाले बच्चों और किसानों को रोजाना परेशानी होती है। सड़क पार करने के लिए कई बार काफी दूर तक जाना पड़ता है। उन्होंने प्रशासन से इस मांग पर जल्द फैसला लेने की अपील की है।
कई विभागों को पत्र लिखने के बाद भी कार्रवाई नहीं हुई
ग्रामीणों का कहना है कि NH-30 बायपास पर अंडरपास या सुरक्षित क्रॉसिंग बनाना जरूरी है। इसके लिए मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम, मध्यप्रदेश ग्रामीण सड़क विकास प्राधिकरण, रीवा संभाग आयुक्त, कलेक्टर और हुजूर एसडीएम को पहले भी पत्र भेजे गए हैं। इसके बावजूद अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई। ग्रामीणों ने बायपास बनाने वाली कंपनी पर भी क्रॉसिंग की व्यवस्था नहीं करने का आरोप लगाया है।
ढोल-मंजीरे के साथ करेंगे प्रदर्शन
ग्रामीण 3 नवंबर को सुबह 11 बजे चोरहटा-दुआरी बायपास पर प्रदर्शन करेंगे। आवेदन में ढोल, झांझ और सीमित ध्वनि विस्तारक यंत्रों के साथ सांकेतिक आंदोलन करने की बात कही गई है। आवेदन की प्रतिलिपि पुलिस अधीक्षक और हुजूर तहसील के अनुविभागीय अधिकारी को भी भेजी गई है।
ग्रामीणों की मांग है कि बायपास पर अंडरपास या सुरक्षित क्रॉसिंग बनाई जाए, ताकि आसपास के गांवों के लोगों को रोजाना लंबा रास्ता तय न करना पड़े।
DRDA संविदा कर्मियों ने हड़ताल की चेतावनी दी: मांगें पूरी नहीं होने पर 17 नवंबर से किशनगंज में अनिश्चितकालीन हड़ताल – Kishanganj (Bihar) News
किशनगंज में जिला ग्रामीण विकास अभिकरण (डीआरडीए) के संविदा कर्मियों ने मानदेय बढ़ाने, बकाया वेतन देने और सेवा समायोजन की मांग की है। मांगें 15 दिन में पूरी नहीं हुईं तो वे 17 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर जाएंगे। डीडीसी को विभाग के नाम ज्ञापन सौंपा जिला ग्रामीण विकास अभिकरण के प्रशासन शीर्ष में वर्ष 2007 से संविदा कर्मी पदस्थापित हैं। राज्यभर के डीआरडीए कर्मियों ने 28 अक्टूबर को पटना में ग्रामीण विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव से मिलकर अपनी मांगें रखीं। शुक्रवार को किशनगंज के कर्मियों ने इन्हीं मांगों को लेकर डीडीसी को विभाग के नाम ज्ञापन सौंपा। संघ के प्रमोद कुमार ने बताया कि पटना में हुई वार्ता के दौरान अपर मुख्य सचिव ने 15 दिन के भीतर मांगों पर ठोस निर्णय लेने का आश्वासन दिया। पिछले 5 साल में समायोजन पर फैसला नहीं प्रमोद कुमार ने कहा कि तय समय में मांगें पूरी नहीं हुईं तो किशनगंज समेत बिहार के संविदा कर्मी 17 नवंबर से अनिश्चितकालीन हड़ताल और सामूहिक अवकाश पर जाएंगे। डीआरडीए में पदस्थापित संविदा कर्मियों प्रमोद कुमार, दीपक गुप्ता, राजन मिश्रा, संजय सिंह, अजय कुमार सिंह और दीपक कुमार साहा ने बताया कि उन्हें पिछले 8 महीने से वेतन नहीं मिला है। वर्ष 2017 के बाद से उनके मानदेय में कोई बढ़ोतरी नहीं हुई है। उनके मुताबिक, केंद्र सरकार ने 1 अप्रैल 2022 से डीआरडीए के प्रशासन शीर्ष को खत्म करने और कर्मियों को दूसरे विभागों में समायोजित करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद राज्य के ग्रामीण विकास विभाग ने पिछले 5 साल में समायोजन पर कोई फैसला नहीं लिया है।
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Vivo S70 जल्द होगा लॉन्च, मिलेगा 50MP का ट्रिपल कैमरा सेटअप
Vivo S सीरीज में एक और दमदार फोन जल्द लॉन्च होगा। चीनी कंपनी अपने इस स्मार्टफोन को लॉन्च करने की तैयारी में है। इस स्मार्टफोन के कई फीचर्स हाल ही में सामने आए हैं। वीवो का यह फोन साल की शुरुआत में आई Vivo S60 सीरीज के अपग्रेड के तौर पर पेश किया जाएगा। चीनी कंपनी ने साल की शुरुआत में Vivo S60 और Vivo S60 Vitality Edition पेश किया था।
लीक हुए फीचर्स
चीनी टिप्स्टर डिजिटल चैट स्टेशन (DCS) ने दावा किया है कि Vivo S70 में कंपनी ऑक्टाकोर Qualcomm Snapdragon 8s Gen 4 चिपसेट इस्तेमाल करने वाली है। यह क्वालकॉम का फ्लैगशिप चिपसेट है, जो 4nm प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी पर काम करता है। रिपोर्ट के मुताबिक, वीवो के इस फोन में 6.59 इंच का OLED डिस्प्ले मिलेगा, जो 1.5K रेजलूशन को सपोर्ट करेगा।
टिप्स्टर के मुताबिक, वीवो का यह फोन ट्रिपल कैमरा सेटअप के साथ लॉन्च किया जाएगा। इसमें 50MP का प्राइमरी कैमरा दिया जाएगा। इसके साथ 8MP का अल्ट्रा वाइड कैमरा भी दिया जाएगा। इस फोन में कंपनी 64MP का पेरीस्कोप कैमरा मिलेगा। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए इसमें 50MP का कैमरा दिया जाएगा।
Vivo S60 के फीचर्स
Vivo S60 को कंपनी ने इस साल मई में लॉन्च किया था। मई में लॉन्च हुए इस स्मार्टफोन की कीमत चीन में CNY 3599 यानी लगभग 50,000 रुपये है। इस फोन को कंपनी ने 12GB रैम और 256GB स्टोरेज के साथ पेश किया गया है। इसमें 7,200mAh की दमदार बैटरी दी गई है, जिसके साथ फास्ट चार्जिंग फीचर मिलता है।
वीवो का यह स्मार्टफोन Qualcomm Snapdragon 8s Gen 3 चिपसेट के साथ आता है। इसमें भी कंपनी ने 50MP का मेन कैमरा दिया है। इसके साथ 8MP का अल्ट्रा वाइड कैमरा और 50MP का टेलीफोटो कैमरा मिलता है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए इसमें 50MP का कैमरा मिलेगा। यह Android 16 पर बेस्ड OriginOS 6 के साथ आता है।
Vivo S सीरीज में कंपनी ने हाल ही में एक मिड बजट स्मार्टफोन भारत में लॉन्च किया है। वीवो ने करीब 6 साल के बाद S सीरीज का कोई फोन भारतीय बाजार में पेश किया है। यह फोन दमदार बैटरी और तगड़े कैमरे के साथ आता है।
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पूर्व बांग्लादेशी अफसर पर RAW का जासूस होने का शक: एक दिन पहले शव मिला; हसीना के भागने का वीडियो बनाने के बाद नौकरी से निकाला गया
बांग्लादेश में शेख हसीना के भारत भागने का वीडियो बनाने वाले एयरफोर्स अधिकारी केएम तौसीफ सौरी 28 अक्टूबर को ढाका की तुराग नदी में मिला। उन पर भारत की खुफिया एजेंसी RAW से जुड़े होने का आरोप लगा था। बांग्लादेश के अखबार अमर देश ने आरोप लगाया था कि एयरफोर्स की जांच में कुछ अधिकारियों के RAW से संबंध सामने आए हैं। हालांकि, बांग्लादेश के सैन्य जनसंपर्क निदेशालय ने इन आरोपों को खारिज कर दिया था। जेब में मिले आईफोन से पहचान हुई बांग्लादेशी अखबार द डेली स्टार के मुताबिक अधिकारी का शव राजाबाड़ी घाट के पास मिला। सौरी ने सफेद पेंट और काली शर्ट पहनी हुई थी। शुरुआत में पुलिस शव की पहचान नहीं कर सकी। उनकी जेब से मिले आईफोन की मदद से पहचान हुई। शव के साथ एक कलाई घड़ी भी मिली। इसके बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए ढाका के शहीद सुहरावर्दी मेडिकल कॉलेज अस्पताल भेज दिया गया। हसीना का वीडियो सामने आने के बाद नौकरी गई 5 अगस्त 2024 को बांग्लादेश में छात्र आंदोलन के बाद शेख हसीना की सरकार गिर गई थी। इसके बाद वे हेलिकॉप्टर से भारत आ गई थीं। उनका देश छोड़ने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इस घटना के कुछ दिन बाद सितंबर 2024 में सौरी को एयरफोर्स से हटा दिया गया। उनके पिता के मुताबिक, परिवार को बताया गया था कि उन्हें अनुशासन से जुड़ी वजहों से हटाया गया है। हालांकि, परिवार का कहना था कि सौरी का रिकॉर्ड अच्छा था और वे करीब 200 घंटे विमान उड़ा चुके थे। एयरफोर्स ने भी कहा था कि उन्हें हटाने का हसीना के वीडियो से कोई संबंध नहीं था। उन्हें नियमों के तहत सेवा से रिटायर किया गया था। पॉडकास्ट में बोले थे- RAW वाली रिपोर्ट प्रोपेगेंडा थी जुलाई 2026 में सौरी ‘स्पीक विद राशिद’ नाम के पॉडकास्ट में शामिल हुए थे। उनसे पूछा गया कि क्या हसीना का वीडियो बनाने की वजह से उनकी नौकरी गई थी? इस पर उन्होंने कहा था, ‘हो सकता है।’ RAW से संबंधों के आरोपों पर उन्होंने कहा था कि अमर देश की रिपोर्ट प्रोपेगेंडा थी। उनके मुताबिक, रिपोर्ट के जरिए उनके खिलाफ गलत बातें फैलाई गई थीं। इसी पॉडकास्ट में सौरी ने 21 जुलाई 2025 को हुए फाइटर जेट हादसे की जांच पर भी सवाल उठाए थे। बांग्लादेश एयरफोर्स का एक ट्रेनिंग विमान ढाका के मिलस्टोन स्कूल एंड कॉलेज में गिर गया था। हादसे में 37 लोगों की मौत हुई थी और 170 से ज्यादा घायल हुए थे। सौरी ने विमान के रखरखाव और हादसे की जांच पर सवाल उठाए थे। पिता बोले- बेटा अपनी सुरक्षा को लेकर डरता था सौरी के पिता इनायतुल करीम हेलाल ने बताया कि पॉडकास्ट वायरल होने के बाद उनका बेटा अपनी सुरक्षा को लेकर चिंतित रहने लगा था। उन्होंने कहा कि सौरी कभी-कभी डर लगने की बात करते थे, लेकिन इसकी वजह नहीं बताते थे। ढाका ट्रिब्यून के मुताबिक, सौरी के पिता और चचेरी बहन ने उनकी हत्या किए जाने का शक जताया है। हालांकि, अभी उनकी मौत की वजह साफ नहीं हुई है। पुलिस जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से ही पता चलेगा कि उनकी मौत कैसे हुई। ——————- यह खबर भी पढ़ें…. बांग्लादेश में साजिश से गिराई गई हसीना सरकार:तख्तापलट से 2 दिन पहले यूनुस छात्रों से मिले; विदेशी पत्रकार ने मीटिंग कराई, वहीं योजना बनी बांग्लादेश में साजिश के तहत शेख हसीना की सरकार गिराई गई थी। छात्र संगठन चाहते थे कि बांग्लादेश की सरकार मोहम्मद यूनुस चलाएं। छात्रों की यूनुस से मुलाकात करवाने में न्यूज एजेंसी AFP के पत्रकार कादरुद्दीन शिशिर ने मदद की। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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AI-डीपफेक पर कानून चुप हो तो संविधान हमें रास्ता दिखाए: CJI सूर्यकांत बोले- गरिमा, स्वतंत्रता और समानता तकनीक से नहीं बदलती
सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश जस्टिस सूर्यकांत ने कहा कि कानून में जवाब न हो, तो संविधान अदालतों का मार्गदर्शन करे। अदालतों के सामने AI से बने काम के कॉपीराइट और डीपफेक्स जैसे नए सवाल हैं। उन्होंने कहा कि कानून इन सवालों के तैयार जवाब शायद ही दे पाए। ऐसे हर सवाल का जवाब संविधान में दिए अधिकारों की रोशनी में देना होगा। क्योंकि संविधान में गरिमा, स्वतंत्रता और समानता का वादा तकनीक बदलने से नहीं बदलता। CJI सूर्यकांत ने शुक्रवार को दिल्ली हाईकोर्ट के 60 साल पूरे होने पर आयोजित समारोह में मौजूद थे। दस साल पहले एआई से जुड़े सवालों की कल्पना करना मुश्किल था CJI सूर्यकांत ने कहा कि कोर्ट के सामने अब ऐसे सवाल हैं, जिनकी एक दशक पहले कल्पना करना भी मुश्किल था। इनमें यह सवाल शामिल है कि क्या आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बने काम को कॉपीराइट मिल सकता है। कानून डीपफेक्स पर कैसे प्रतिक्रिया दे और तकनीकी विकास को बढ़ावा देते हुए व्यक्तिगत अधिकारों की रक्षा कैसे हो, यह भी चुनौती है। उन्होंने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट बदलती दुनिया और अनजाने सवालों का खुले मन से सामना कर सकता है। उसे उस व्यक्ति को नहीं भूलना चाहिए, जिसकी रक्षा के लिए अदालत मौजूद है। CJI ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का दिल्ली हाईकोर्ट से हमेशा खास संबंध रहा है। इसकी वजह दोनों अदालतों का पास-पास होना नहीं, बल्कि दिल्ली हाईकोर्ट का सुप्रीम कोर्ट पर दूसरे हाईकोर्ट की तुलना में ज्यादा बोझ कम करना है। सुप्रीम कोर्ट के जज बोले- हमसे ज्यादा ताकतवर दिखाई देते हैं दिल्ली HC जज सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस विक्रम नाथ ने भी समारोह को संबोधित किया। उन्होंने पिछले छह दशकों में कानून के विकास और संस्थागत प्रगति में दिल्ली हाईकोर्ट के योगदान की सराहना की। जस्टिस नाथ ने मजाकिया अंदाज में कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट के जज कभी-कभी सुप्रीम कोर्ट के जजों से ज्यादा शक्तिशाली दिखाई देते हैं। समारोह में सुप्रीम कोर्ट के अन्य जज, दिल्ली हाईकोर्ट के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश नितिन वासुदेव सांब्रे और हाईकोर्ट के मौजूदा व पूर्व जज भी मौजूद रहे। 1966 में हुई थी दिल्ली हाईकोर्ट की शुरुआत CJI सूर्यकांत ने कहा कि दिल्ली हाईकोर्ट की जिम्मेदारी असाधारण रूप से बड़ी है। 1966 में जब यह अदालत बनी, तब यह सिर्फ तेजी से बढ़ते शहर की सेवा करने वाला एक और हाईकोर्ट नहीं था। यह देश के राजनीतिक और प्रशासनिक जीवन के केंद्र में स्थित अदालत थी। इसलिए सरकारी अधिकार, व्यक्तिगत स्वतंत्रता और सार्वजनिक जवाबदेही से जुड़े मामले यहां पहुंचना तय था। उन्होंने कहा कि इन मामलों के असर राजधानी से कहीं आगे तक जाते थे। समय के साथ दिल्ली हाईकोर्ट की जिम्मेदारियां कई गुना बढ़ गई हैं। पिछले कुछ दशकों में दिल्ली हर दिशा में फैली है। शहर का कारोबार बढ़ा है और लाखों लोग यहां आकर बसे हैं। चार जजों के साथ हुई थी शुरुआत CJI सूर्यकांत ने कहा कि शहर के साथ मुकदमों की संख्या भी बढ़ी। अदालत में वकीलों और पक्षकारों की संख्या भी बढ़ी है। उन्होंने कहा कि चार जजों वाली अदालत अब कई तरह के जटिल विवादों का निपटारा करने वाली संस्था बन चुकी है। बढ़ती जरूरतों को पूरा करने के लिए हाईकोर्ट की सराहना होनी चाहिए। दिल्ली हाईकोर्ट ने सिविल और कारोबारी कानून से जुड़े मामलों को काफी समृद्ध किया है। 2009 में इसने भारत का पहला हाईकोर्ट से जुड़ा आर्बिट्रेशन सेंटर शुरू किया था। CJI ने कहा कि इलेक्ट्रॉनिक फाइलिंग और डिजिटल प्रक्रियाओं की ओर अदालत का लगातार बढ़ना बदलाव को अपनाने की उसकी इच्छा दिखाता है।
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सोमनाथ मंदिर के पास नॉनवेज बेचने पर रोक नहीं: कहा- कलेक्टर का फैसला गलत; प्रशासन ने 3 महीने पहले बैन लगाया था
5 मिनट पहले
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कुछ रेस्टोरेंट मालिकों ने याचिका लगाई थी कि सोमनाथ मंदिर के आसपास नॉनवेज फूड की बिक्री पर लगी पाबंदी हटाई जाए।
गुजरात हाईकोर्ट ने सोमनाथ मंदिर के आसपास बिकने वाले नॉन-वेज खाने पर सरकार की लगाई रोक रद्द कर दी है। कोर्ट ने इस आदेश पर रोक लगाने की राज्य सरकार की मांग भी ठुकरा दी।
जस्टिस निशा एम ठाकोर की बेंच ने सरकार की दलील खारिज कर दी और प्रतिबंध को रद्द कर दिया। राज्य सरकार ने सोमनाथ मंदिर के आसपास नॉन-वेज खाना बेचने पर रोक लगाई थी।
कोर्ट ने माना कि कलेक्टर ने गुजरात पुलिस एक्ट की धारा 33(1)(w) के तहत अपनी शक्तियों से बाहर जाकर एक वैध व्यापार पर स्थायी रोक लगा दी, जो असंवैधानिक है।
सरकार अब इस फैसले के खिलाफ डिवीजन बेंच या सुप्रीम कोर्ट में जा सकती है, लेकिन फिलहाल के लिए बैन खत्म है।
गुजरात सरकार ने अगस्त 2026 में नोटिफिकेशन जारी किया था कि सोमनाथ मंदिर के 500 मीटर दायरे और मंदिर जाने वाले 6 मुख्य रास्तों पर नॉनवेज बनाना-बेचना पूरी तरह बैन होगा।
7 रेस्टोरेंट मालिकों ने लगाई थी याचिका
इस फैसले के खिलाफ सोमनाथ के 7 रेस्टोरेंट मालिक हाईकोर्ट गए। उनका दावा था कि- हम 20-25 साल से लाइसेंस लेकर चल रहे हैं, लेकिन सरकार इसे जबरदस्ती बंद करवा दिया।
साथ ही एक व्यापारी को तो पुलिस चौकी में ले जाकर लिखवाया कि भविष्य में नॉन-वेज नहीं बेचेंगे। ये हमारे आर्टिकल 19(1)(g)- व्यापार करने के मौलिक अधिकार का उल्लंघन है।
गुजरात सरकार की दलील- दुकान बंद नहीं करवाई
सुनवाई के दौरान गुजरात सरकार के वकील जीएच विर्क दलील दी- “सोमनाथ सिर्फ बाजार नहीं है। 1.16 करोड़ श्रद्धालु 9 महीने में आते हैं। हरिद्वार, ऋषिकेश, अमृतसर (स्वर्ण मंदिर), मथुरा-वृंदावन, अयोध्या में भी ऐसे बैन हैं और हाईकोर्ट ने उन्हें सही माना है। हम दुकान बंद नहीं करवा रहे, वे वेज बेच सकते हैं।”
सरकार का यह भी तर्क था कि अब सोमनाथ जिला नया बना है, एरिया बड़ा हो गया है। मंदिर का कॉरिडोर बना है, तो बैन का एरिया भी बढ़ाना जरूरी है।
इस पर याचिकाकर्ताओं का कहना था कि सरकार हर बार पुराने ऑर्डर के ऊपर नया ऑर्डर लगाकर धीरे-धीरे पूरे सोमनाथ टाउन को ही वेज जोन बना रही है, बिना कोई नया कारण बताए।
नॉनवेज बैन से जुड़ी टाइमलाइन
- 2006 में पहला बैन: उस समय गिर-सोमनाथ जिला नहीं बना था। पुलिस ने आदेश दिया कि सोमनाथ मंदिर के 500 मीटर के दायरे में और मंदिर से बस स्टैंड तक जाने वाली सड़क पर अंडा, मांस, मछली बेचना, रखना मना है। ये आदेश आज तक कोर्ट में चैलेंज नहीं हुआ था, इसलिए वैध माना जाता रहा।
- 2018 में दूसरा बैन: वेरावल पाटण जॉइंट म्यूनिसिपैलिटी ने कहा कि सोमनाथ के कुछ मेन रोड्स को पूरा “वेजिटेरियन जोन” घोषित किया जाएगा। इस बार एरिया और बढ़ा दिया गया। मौजूदा 7 में से 3 याचिकाकर्ताओं ने 2018 में ही इसको हाईकोर्ट में चैलेंज किया था, पर कोर्ट ने कोई स्टे नहीं दिया था, इसलिए केस तब से पेंडिंग था।
- 2019 में तीसरा बैन: 2018 के एरिया में कुछ और नए रोड जोड़ दिए गए। इसे भी कोर्ट में चैलेंज नहीं किया गया।
- 2026 में चौथा बैन: सरकार ने 2019 वाले को रिप्लेस कर दिया और उसमें 3 नए रास्ते/जोन और जोड़ दिए। इनमें त्रिवेणी संगम, भालका तीर्थ जाने वाले रास्ते और वो नए सर्कल जो सोमनाथ कॉरिडोर प्रोजेक्ट के बाद बने हैं, उन्हें भी शामिल किया गया।

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सरकारी खजाने से सोमनाथ मंदिर बनवाने के खिलाफ थे गांधी: नेहरू उद्घाटन में क्यों नहीं गए; आज 75 साल पूरे होने पर मोदी पहुंचे

11 मई 1951, गुजरात का प्रभास पाटन क्षेत्र। 1300 सालों में 7वीं बार सोमनाथ मंदिर नए सिरे से बनकर तैयार था। उद्घाटन के लिए मंदिर ट्रस्ट के मुखिया और तब केंद्रीय मंत्री रहे केएम मुंशी ने प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू और राष्ट्रपति राजेंद्र प्रसाद को न्योता दिया था। लेकिन नेहरू ने आने से साफ मना कर दिया। उनके मना करने के बावजूद राजेंद्र प्रसाद मंदिर पहुंचे और उद्घाटन में शामिल हुए थे। पढ़ें पूरी खबर…
मिर्जापुर में रन फॉर यूनिटी कल: सरदार पटेल की जयंती पर सुबह 7:30 बजे से शुरू होगी, स्कूलों में होंगी प्रतियोगिताएं – Mirzapur News
मिर्जापुर में लौह पुरुष सरदार वल्लभ भाई पटेल की जयंती 31 अक्टूबर को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जायेगा। इस अवसर पर जिला प्रशासन की ओर से विभिन्न कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई है। सुबह 7:30 बजे से कार्यक्रम शुरू होगा, जिसमें एकता दौड़, प्रभात फेरी, मार्च पास्ट, विचार गोष्ठी, भाषण एवं वाद-विवाद प्रतियोगिता सहित सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। इन कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को राष्ट्रीय एकता, अखंडता और सुरक्षा के प्रति जागरूक किया जाएगा। तय कार्यक्रम के अनुसार, सुबह 7:30 बजे तहसील, ब्लाक और नगर निकाय स्तर पर समाज के सभी वर्गों की सहभागिता से रन फॉर यूनिटी का आयोजन होगा। इसकी जिम्मेदारी सभी एसडीएम, बीडीओ और नगर निकायों के अधिशासी अधिकारियों को सौंपी गई है। सुबह 8 बजे स्कूली बच्चों की प्रभात फेरी और माध्यमिक विद्यालयों के विद्यार्थियों की रैली निकाली जाएगी। नगर में प्रभात फेरी घंटाघर से शुरू होकर प्रमुख मार्गों से होते हुए कचहरी पहुंचेगी। सुबह 9 बजे विद्यालयों में सरदार पटेल के जीवन और राष्ट्रीय एकता दिवस पर आधारित स्लोगन संकलित किए जाएंगे। सुबह 10 बजे कलेक्ट्रेट सहित सभी सरकारी कार्यालयों में सरदार पटेल के चित्र पर माल्यार्पण और विचार गोष्ठी होगी। 10:30 बजे पुलिस, पीएसी, होमगार्ड, एनसीसी और अन्य वर्दीधारी बलों की ओर से मार्च पास्ट किया जाएगा। सुबह 11 बजे जिला कारागार में राष्ट्रीय एकता पर केंद्रित कार्यक्रम आयोजित होगा। वहीं, 11:30 बजे केबीपीजी कॉलेज में सरदार पटेल के व्यक्तित्व एवं कृतित्व पर विचार गोष्ठी होगी। दोपहर 12 बजे मंडलीय चिकित्सालय में राजपूत कारपेट के अनिल कुमार सिंह और जिला महिला अस्पताल में ओबीटी कंपनी की ओर से मरीजों को फल वितरित किए जाएंगे। दोपहर 2 बजे राजकीय इंटर कॉलेज में बालक एवं बालिका वर्ग की अलग-अलग भाषण और वाद-विवाद प्रतियोगिताएं होंगी। इसमें राष्ट्रीय एकता एवं अखंडता के समक्ष चुनौतियां विषय पर विद्यार्थी अपने विचार रखेंगे। विजेताओं को पुलिस अधीक्षक पुरस्कृत करेंगे। शाम 4 बजे सहायक श्रमायुक्त की ओर से सरदार पटेल के जीवन पर विचार गोष्ठी और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
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मंजरी बेगम हत्याकांड में SP ने घटनास्थल का किया निरीक्षण: आधी रात कड़ुआमुनि पहुंचे, परिवार और ग्रामीणों से पूछताछ की – Kishanganj (Bihar) News
किशनगंज में हुए मंजरी बेगम हत्याकांड मामले में पुलिस अधीक्षक ने खुद मोर्चा संभाला है। पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार ने गुरुवार देर रात्रि घटनास्थल पर पहुंचकर पूरे मामले का बारीकी से निरीक्षण किया है। घटना पौआखाली थाना क्षेत्र के ग्राम कड़ुआमुनि की है। निरीक्षण के दौरान एसपी संतोष कुमार ने मृतका मंजरी बेगम की बेटी, जो इस कांड की वादिनी है, उनसे विस्तार से पूछताछ की। इसके अलावा उन्होंने मृतका के पुत्र सहित परिवार के अन्य सदस्यों, रिश्तेदारों, पड़ोसियों और मौके पर मौजूद ग्रामीणों से भी घटना के संबंध में विस्तृत जानकारी प्राप्त की। SP ने लोगों से किया सवाल-जवाब एसपी ने एक-एक बिंदु पर लोगों से सवाल-जवाब कर घटना की कड़ी को जोड़ने की कोशिश की। इस दौरान उन्होंने घटनाक्रम से जुड़े विभिन्न पहलुओं की समीक्षा की और मौजूद अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी-2, पौआखाली थानाध्यक्ष शंखराज कर्ण और DIU प्रभारी को कई महत्वपूर्ण दिशा-निर्देश दिए। एसपी ने स्पष्ट निर्देश दिया कि इस कांड के अनुसंधान में सभी आवश्यक बिंदुओं पर गहनता से जांच की जाए और साक्ष्यों के आधार पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि दोषियों को जल्द सजा दिलाई जा सके। संदेहास्पद अवस्था में घर से बरामद हुआ था शव थाना अध्यक्ष शंखराज कर्ण ने बताया कि, बीते 16 अक्टूबर को मृतका मंजरी बेगम का शव संदेहास्पद अवस्था में उसके घर से बरामद हुआ था। परिजनों की सूचना पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया था और मामले की जांच शुरू की थी। इसी मामले में एसपी ने देर रात घटनास्थल का दौरा कर जांच में तेजी लाने का निर्देश दिया है।
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