रक्षाबंधन पर्व पर दो दिन रोडवेज बसों में महिलाएं निशुल्क यात्रा कर सकेंगी। राज्य सरकार की ओर से शुक्रवार और शनिवार को यह सुविधा रहेगी। पंडित राजेश दवे ने बताया- इस साल रक्षाबंधन पर्व पर भद्रा नहीं है। ऐसे में पूरे दिन राखी बांधी जा सकेगी। इसका श्रेष्ठ समय सुबह 7:52 बजे से सुबह 11:14 बजे तक लाभ और अमृत का चौघड़िया है। दिन में 12:14 बजे से 2:08 बजे तक अभिजीत एवं शुभ का श्रेष्ठ शुभ मुहूर्त है। शाम को 5:21 बजे से 6:58 बजे तक राखी बांधने का श्रेष्ठ और उत्तम मुहूर्त है। इस समय बहनें अपने भाई की कलाई में राखी बांधकर दीर्घ आयु की कामना करें। राखी बांधने का शुभ मुहूर्त चंचल (मध्यम) सुबह- 6:26 से 7:52 लाभ (श्रेष्ठ)- सुबह- 7:52 से 9:28 अमृत (श्रेष्ठ)- 9:28 से 11:14 तक अभिजीत एवं शुभ (श्रेष्ठ)-12:14 से 2:08 चंचल- शाम 5:21 से 6:58 दो दिन महिलाओ के लिए निशुल्क यात्रा राज्य सरकार ने रक्षाबंधन पर्व पर महिलाओं को राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (रोडवेज) की बसों में दो दिन तक निशुल्क यात्रा की सुविधा दी है। इस निर्णय से हजारों महिलाओं को आने-जाने में सुविधा मिलेगी। निशुल्क यात्रा सुविधा 28 अगस्त को रात 12 बजे से शुरू होकर 29 अगस्त की रात 12 बजे तक लागू रहेगी। इस अवधि में प्रदेशभर में संचालित रोडवेज बसों में महिलाएं बिना किराया दिए यात्रा कर सकेंगी। रक्षाबंधन पर बड़ी संख्या में महिलाएं अपने भाइयों को राखी बांधने के लिए पीहर जाती हैं। ऐसे में महिलाओं को यात्रा में सुविधा होगी।
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रक्षाबंधन पर रोडवेज-बसों में महिलाओं के लिए दो दिन निशुल्क-यात्रा: इस बार भद्रा नहीं; जानिए राखी बांधने का शुभ मुहूर्त – Jodhpur News
अखिलेश यादव की टिप्पणी पर संगीत सोम का पलटवार: रालोद को कहा कि जिसे चवन्नी कहा वो सवा रुपया साबित होगा – Meerut News
मेरठ सरधना सीट से भाजपा नेता व पूर्व विधायक संगीत सोम अब राष्ट्रीय लोकदल के साथ खुलकर नजर आ रहे हैं। गठबंधन की पार्टी रालोद व राष्ट्रीय अध्यक्ष जयंत चौधरी के लिए अक्सर संगीत सोम समर्थन में खड़े दिखते हैं।
अब भी अखिलेश यादव के चवन्नी वाले बयान का संगीत सोम ने पलटवार किया है। सोम ने एक आयोजन में कहा कि अखिलेश यादव ने जिसे चवन्नी कहा है वो चवन्नी जल्द एक रुपया साबित होगी इसको अखिलेश यादव देख और समझ लें। पश्चिमी यूपी में एक भी सीट नहीं जीतेगी सपा संगीत सोम ने अपने यहां रक्षाबंधन पर्व का आयोजन किया था। इसमें विधानसभा की बहनों से राखी बंधवाई थी। इस दौरान उनके साथ पत्नी प्रीति सोम भी नजर आईं। इस समारोह में अपने संबोधन में संगीत सोम ने अखिलेश यादव के चवन्नी वाले बयान का जिक्र करते हुए उसका पलटवार किया। उन्होंने दावा किया कि आगामी चुनाव में अखिलेश यादव पश्चिमी उत्तर प्रदेश में एक भी सीट जीतने की स्थिति में नहीं होंगे। जनता पूरी तरह भाजपा के साथ है
संगीत सोम ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता का रुख भाजपा के पक्ष में है। उन्होंने अखिलेश यादव पर निशाना साधते हुए कहा कि वह जिस तरह के बयान दे रहे हैं, उसका जवाब जनता चुनाव में देगी।
रालोद समर्थक अखिलेश यादव को अठन्नी का भी नहीं छोड़ेंगे
अखिलेश यादव द्वारा किसी को ‘चवन्नी’ कहे जाने के सवाल पर संगीत सोम ने तंज कसते हुए कहा कि “उन्होंने जिसे चवन्नी का कहा है, उनके समर्थक अखिलेश यादव को अठन्नी का भी नहीं छोड़ेंगे।” उनके इस बयान के बाद कार्यक्रम में राजनीतिक चर्चा तेज हो गई। संगीत सोम ने कहा कि पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाजपा का संगठन मजबूत है और कार्यकर्ता लगातार जनता के बीच सक्रिय हैं। उन्होंने दावा किया कि आगामी चुनाव में विपक्षी दलों को पश्चिमी यूपी में बड़ा झटका लगेगा।
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खगड़िया में छात्राओं ने बांधी जिलाधिकारी को राखी: सरस्वती शिशु मंदिर और विद्या मंदिर के विद्यार्थी कलेक्ट्रेट पहुंचे, प्रेम का संदेश – Khagaria News
खगड़िया में रक्षाबंधन पर्व से पहले सरस्वती शिशु मंदिर और सरस्वती विद्या मंदिर के विद्यार्थियों तथा आचार्यों ने समाहरणालय पहुंचकर जिलाधिकारी विक्रम विरकर सहित प्रशासनिक अधिकारियों और कर्मचारियों को रक्षासूत्र बांधा। यह आयोजन बुधवार को हुआ। इस दौरान विद्यार्थियों ने रक्षासूत्र के माध्यम से भाई-बहन के पवित्र रिश्ते के साथ-साथ समाज में प्रेम, विश्वास, आपसी सहयोग और भाईचारे का संदेश दिया। समाहरणालय में बच्चों द्वारा अधिकारियों को रक्षासूत्र बांधने के दौरान आत्मीय और उत्साहपूर्ण माहौल देखने को मिला। देखे, मौके से आई तस्वीरें… बच्चों को मिठाइयां व चॉकलेट बांटी इस अवसर पर जिलाधिकारी विक्रम विरकर ने बच्चों का उत्साहवर्धन किया और उन्हें मिठाइयां व चॉकलेट वितरित कीं। उन्होंने विद्यार्थियों को रक्षाबंधन की हार्दिक शुभकामनाएं दीं और उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए मन लगाकर पढ़ाई करने तथा बेहतर शिक्षा के माध्यम से जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। कार्यक्रम के दौरान रक्षाबंधन के सामाजिक और सांस्कृतिक महत्व पर भी प्रकाश डाला गया। वक्ताओं ने बताया कि रक्षासूत्र केवल भाई-बहन के बीच प्रेम और सुरक्षा का प्रतीक नहीं है, बल्कि यह समाज में एक-दूसरे के प्रति सम्मान, विश्वास, जिम्मेदारी और सहयोग की भावना को भी मजबूत करता है। विद्यार्थियों और आचार्यों की इस पहल ने प्रशासन और आम समाज के बीच संवाद तथा आत्मीयता बढ़ाने का संदेश दिया। अधिकारियों को रक्षासूत्र बांधने के इस आयोजन के माध्यम से बच्चों ने सामाजिक समरसता, सद्भाव और भाईचारे की भावना को आगे बढ़ाने का संकल्प भी व्यक्त किया। यह कार्यक्रम बच्चों और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच स्नेह एवं विश्वास का सुंदर उदाहरण बना।
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छात्राओं ने बनाए दिल्ली पुलिस के लिए 75 सर्विलांस ड्रोन: प्रबोधन इंडक्शन प्रोग्राम-2026 की वेलीडिक्टरी सेरेमनी, अत्याधुनिक लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स का उद्घाटन – New Delhi News
इंदिरा गांधी दिल्ली टेक्निकल यूनिवर्सिटी फॉर वुमेन (आईजीडीटीयूडब्ल्यू) की छात्राएं तकनीकी शिक्षा और इनोवेशन के क्षेत्र में नई उपलब्धियां हासिल कर रही हैं। दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने गुरुवार को विश्वविद्यालय में आयोजित ‘प्रबोधन’ इंडक्शन प्रोग्राम-2026 की वेलीडिक्टरी सेरेमनी में हिस्सा लिया। इस दौरान अत्याधुनिक लेक्चर हॉल कॉम्प्लेक्स का भी उद्घाटन किया गया। कार्यक्रम में शिक्षा मंत्री आशीष सूद भी मौजूद रहे। विश्वविद्यालय की छात्राओं ने दिल्ली पुलिस के लिए 75 सर्विलांस ड्रोन विकसित कर उनका प्रदर्शन किया। सरकार की ओर से छात्राओं को आधुनिक तकनीकी शिक्षा, रिसर्च और इनोवेशन से जोड़कर भविष्य की तकनीकों के लिए तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। एडवांस्ड ड्रोन टेक्नोलॉजी के सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के लिए करीब 8 करोड़ रुपए की फंडिंग दी गई है। वहीं, साइबर सिक्योरिटी में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस की स्थापना की दिशा में भी काम किया जा रहा है। विश्वविद्यालय में रोबोटिक्स एंड आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, साइबर सिक्योरिटी तथा मैथेमेटिक्स एंड कंप्यूटिंग जैसे न्यू-एज क्षेत्रों में शिक्षा और स्किल डेवलपमेंट के अवसर बढ़ाए गए हैं। ड्रोन और सर्विलांस तकनीक में छात्राओं व महिला पुलिसकर्मियों को प्रशिक्षण देने के लिए ‘नेत्र-नारी-नेतृत्व’ जैसी पहल भी आगे बढ़ाई जा रही हैं। इंडस्ट्री साझेदारी के जरिए छात्राओं को प्रैक्टिकल लर्निंग और रोजगारपरक कौशल से जोड़ा जा रहा है। बजाज ऑटो फाउंडेशन के सहयोग से बेस्ट सेंटर के लिए करीब 9 करोड़ रुपए का सहयोग मिला है। इससे एडवांस्ड मैन्युफैक्चरिंग और उभरती तकनीकों पर काम को बढ़ावा मिलेगा। बेटियों की प्रतिभा को मिल रहे बड़े अवसर हालिया प्लेसमेंट सीजन में आईजीडीटीयूडब्ल्यू की छात्राओं को 1,000 से अधिक प्लेसमेंट ऑफर मिले, जबकि सबसे अधिक पैकेज **एक करोड़ रुपए रहा। कार्यक्रम में ‘आईजीडीटीयूडब्ल्यू टाइम्स’ बुकलेट का विमोचन किया गया, जिसमें विश्वविद्यालय की अकादमिक उपलब्धियों, रिसर्च और इनोवेशन से जुड़ी प्रमुख पहलों को शामिल किया गया है। उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाली छात्राओं और बेस्ट वाइस चांसलर इंटर्न्स को सम्मानित भी किया गया। एलजी ने इनोवेटर और लीडर बनने के लिए किया प्रेरित उपराज्यपाल एवं आईजीडीटीयूडब्ल्यू के चांसलर सरदार तरनजीत सिंह संधू ने छात्राओं को गुणवत्तापूर्ण तकनीकी शिक्षा हासिल कर भविष्य में इनोवेटर और लीडर बनने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि तकनीकी शिक्षा के माध्यम से महिलाओं को सशक्त बनाना व्यक्तिगत विकास के साथ राष्ट्रीय विकास और नेतृत्व में उनकी भागीदारी बढ़ाने के लिए भी महत्वपूर्ण है।
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न्यू कैफे मयूरम’ की 54 किलो संदिग्ध मिठाई नष्ट की: एनालॉग मिल्क केक की श्रेणी की मिठाई पर खाद्य विभाग की कार्रवाई से हड़कंप – Ujjain News
उज्जैन में आगामी त्योहारों को देखते हुए खाद्य सुरक्षा प्रशासन ने मिलावटी और अमानक खाद्य सामग्री के खिलाफ अभियान शुरू किया है। गुरुवार को विभाग की टीम ने शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में कई खाद्य प्रतिष्ठानों का निरीक्षण किया। सबसे बड़ी कार्रवाई शहीद पार्क, फ्रीगंज स्थित न्यू कैफे मयूरम पर हुई, जहां से 54 किलो संदिग्ध मिठाई जब्त कर नष्ट कराई गई। खाद्य सुरक्षा विभाग को सूचना मिली थी कि प्रतिष्ठान पर अमानक मिठाई बेची जा रही है। निरीक्षण के दौरान टीम को जोधपुर के पते वाले कार्टन में पैक मिठाई मिली। मौके पर 19 खाली डिब्बे भी मिले। जांच में सामने आया कि संचालक इन डिब्बों से मिठाई निकालकर उसे मिल्क केक के रूप में जमाकर ग्राहकों को बेच रहा था। मिठाई के पैकेट पर वेजिटेबल ऑयल, शुगर और मिल्क पाउडर लिखा था। विभाग के अनुसार यह उत्पाद एनालॉग मिल्क केक की श्रेणी में आता है। टीम ने मौके से 54 किलो मिठाई जब्त कर उसे नष्ट करा दिया। इन प्रतिष्ठानों से लिए नमूने भोपाल भेजे गए नमूने खाद्य सुरक्षा अधिकारी बसंत शर्मा ने बताया कि जब्त मिठाई और लिए गए सभी नमूने राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला, भोपाल भेजे गए हैं। रिपोर्ट आने के बाद खाद्य सामग्री की गुणवत्ता के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई और दंड तय किया जाएगा।
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बागेश्वर: बाल मिठाई ही नहीं, देसी घी वाले बेसन के लड्डू भी जीत रहे दिल
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Besan ke Laddu: देवभूमि उत्तराखंड का बागेश्वर जिला केवल अपने पौराणिक मंदिरों और नैसर्गिक सौंदर्य के लिए ही नहीं, बल्कि अपने बेमिसाल खान-पान और पारंपरिक जायके के लिए भी जाना जाता है. मशहूर बाल मिठाई के साथ-साथ अब यहां के देसी घी में तैयार बेसन के लड्डू भी पर्यटकों और स्थानीय लोगों की पहली पसंद बने हुए हैं.
बागेश्वर की पहचान जहां एक ओर प्राकृतिक खूबसूरती और धार्मिक स्थलों से है, वहीं यहां की मिठाइयां भी लोगों को खूब आकर्षित करती हैं. कुमाऊं की प्रसिद्ध बाल मिठाई के साथ बेसन के लड्डू भी स्थानीय लोगों और बाहर से आने वाले लोगों की पसंद बने हुए हैं. बागेश्वर बस स्टेशन के समीप स्थित सैनिक स्वीट्स में तैयार किए जाने वाले बेसन के लड्डू अपने स्वाद के लिए खास माने जाते हैं. यहां आने वाले लोग ताजे लड्डू खरीदकर घर भी ले जाते हैं. देसी घी की खुशबू और बेसन का स्वाद इन लड्डुओं को खास बनाता है.
व्यापारी सुनीता भट्ट बताती हैं कि सैनिक स्वीट्स में बेसन के लड्डू तैयार करने में देसी घी का इस्तेमाल किया जाता है. देसी घी में भुने बेसन की खुशबू और स्वाद लड्डुओं को अलग पहचान देता है. लड्डू तैयार करते समय बेसन को अच्छी तरह भूनने पर उसका स्वाद और खुशबू उभरकर सामने आती है. इसके बाद इसमें आवश्यक सामग्री मिलाकर लड्डू तैयार किए जाते हैं. खास बात यह है कि ग्राहकों को ताजे लड्डू उपलब्ध कराने पर जोर दिया जाता है.
सैनिक स्वीट्स के बेसन के लड्डुओं में ड्राई फ्रूट्स का भी इस्तेमाल किया जाता है. इससे लड्डुओं का स्वाद और बनावट दोनों बेहतर होती हैं. बेसन, घी और मिठास के साथ काजू, बादाम, किशमिश जैसे मेवों का इस्तेमाल लड्डुओं को अधिक स्वादिष्ट बनाता है. ड्राई फ्रूट्स लड्डुओं में कुरकुरापन भी लाते हैं. ऐसे में चाय के साथ इन्हें नाश्ते या मिठाई के तौर पर खाया जा सकता है. त्योहारों और विशेष अवसरों पर बेसन के लड्डू घर ले जाने के लिए भी लोग पसंद करते हैं.
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सैनिक स्वीट्स बागेश्वर के बस स्टेशन के समीप स्थित है, जिससे बाहर से आने वाले यात्रियों के लिए यहां पहुंचना आसान है. बस से बागेश्वर पहुंचने वाले लोग बाजार जाने के दौरान यहां से ताजे बेसन के लड्डू खरीद सकते हैं. दुकान की लोकेशन ऐसी है कि स्थानीय लोगों के साथ पर्यटकों की पहुंच भी आसानी से हो जाती है. बागेश्वर घूमने आने वाले पर्यटक अक्सर स्थानीय स्वाद को यादगार के रूप में अपने साथ ले जाना पसंद करते हैं. ऐसे में देसी घी से तैयार बेसन के लड्डू एक बेहतरीन विकल्प हो सकते हैं.
उत्तराखंड के पहाड़ी क्षेत्रों में पारंपरिक तरीके से तैयार होने वाली मिठाइयों की अपनी अलग पहचान है. बेसन के लड्डू भी इसी घरेलू और पारंपरिक स्वाद की याद दिलाते हैं. घी में भुने बेसन की खुशबू और मेवों का स्वाद इन्हें खास बनाता है. बागेश्वर जैसे पहाड़ी जिले में स्थानीय स्तर पर तैयार मिठाइयां पर्यटकों को क्षेत्र के खानपान से जोड़ने का काम करती हैं. सैनिक स्वीट्स के लड्डू भी इसी स्वाद को लोगों तक पहुंचाने का जरिया हैं, खासकर अगर आप बागेश्वर की यात्रा पर हैं और कुछ मीठा खाने का मन है.
मिठाई की गुणवत्ता और स्वाद में ताजगी की महत्वपूर्ण भूमिका होती है. बेसन के लड्डू ताजे होने पर उनमें बेसन और घी की खुशबू अधिक महसूस होती है. सैनिक स्वीट्स में ग्राहकों को ताजे तैयार लड्डू उपलब्ध कराने की कोशिश की जाती है. दुकान पर आने वाले लोग अपनी जरूरत के अनुसार मिठाई खरीद सकते हैं. परिवार के साथ बागेश्वर घूमने आए लोग भी यहां से लड्डू लेकर जा सकते हैं. खासकर लंबी यात्रा के दौरान स्थानीय मिठाई खरीदना पर्यटकों के लिए एक सुखद अनुभव हो सकता है.
बेसन के लड्डू केवल त्योहार या विशेष अवसरों तक सीमित नहीं हैं. इन्हें चाय के साथ भी मिठाई के तौर पर खाया जा सकता है. घी में तैयार बेसन और ड्राई फ्रूट्स का मेल इसे स्वादिष्ट बनाता है. पहाड़ों में चाय के साथ स्थानीय स्वाद वाली मिठाई खाने का अपना अलग आनंद है. बागेश्वर घूमने आए लोग बाजार में खरीदारी के बाद सैनिक स्वीट्स पहुंचकर बेसन के लड्डू का स्वाद ले सकते हैं. स्थानीय लोगों के लिए भी यह रोजमर्रा की मिठाई के रूप में पसंद की जा सकती है.
बागेश्वर की यात्रा को यादगार बनाने के लिए पर्यटक यहां के स्थानीय खानपान का स्वाद लेना पसंद करते हैं. बाल मिठाई के अलावा बेसन के लड्डू भी लोगों को आकर्षित कर रहे हैं. बस स्टेशन के समीप सैनिक स्वीट्स से खरीदे गए ताजे बेसन के लड्डू परिवार और परिचितों के लिए भी ले जाए जा सकते हैं. देसी घी, बेसन और ड्राई फ्रूट्स से तैयार होने के कारण इनका स्वाद पारंपरिक मिठाई जैसा महसूस होता है.
Samsung Galaxy S26 सीरीज में नए मेंबर की एंट्री, लॉन्च हुआ Fan Edition स्मार्टफोन
Highlights
- Samsung Galaxy S26 FE की भारत समेत ग्लोबल मार्केट में एंट्री हो गई है।
- सैमसंग का यह फ्लैगशिप फोन Exynos 2500 चिपसेट के साथ आता है।
- फोन के फीचर्स लगभग Galaxy S26 जैसे ही हैं।
Samsung Galaxy S26 सीरीज के सबसे अफोर्डेबल फोन को दक्षिण कोरियाई कंपनी ने ग्लोबली लॉन्च कर दिया है। सैमसंग का यह फ्लैगशिप फोन साल की शुरुआत में लॉन्च हुई Galaxy S26 सीरीज का सबसे लेटेस्ट फोन है। कंपनी इस सीरीज में Samsung Galaxy S26, Galaxy S26+ और Galaxy S26 Ultra लॉन्च कर चुकी है। ये फोन Qualcomm Snapdragon 8 Elite Gen 5 चिपसेट के साथ आते हैं। हाल में लॉन्च हुए Samsung Galaxy Z Fold 8 सीरीज में भी कंपनी ने यही प्रोसेसर दिया है।
Samsung Galaxy S26 FE की कीमत
सैमसंग का यह फ्लैगशिप फोन तीन स्टोरेज वेरिएंट्स- 8GB RAM + 128GB, 8GB RAM + 256GB और 8GB RAM + 512GB है। इसकी शुरुआती कीमत 799 यूरो (लगभग 89,000 रुपये) है। वहीं, इसके अन्य वेरिएंट्स की कीमत क्रमशः 899 यूरो (लगभग 1,00,000 रुपये) और 1,099 यूरो (लगभग 1,22,000 रुपये) है। इस स्मार्टफोन को 4 सितंबर से चुनिंदा ग्लोबल मार्केट में सेल के लिए उपलब्ध करा दिया जाएगा। Samsung Galaxy S26 FE को तीन कलर ऑप्शन- Blueberry, Graphite और Pistachio में खरीदा जा सकेगा।
- 8GB RAM + 128GB – 799 यूरो (लगभग 89,000 रुपये)
- 8GB RAM + 256GB – 899 यूरो (लगभग 1,00,000 रुपये)
- 8GB RAM + 512GB – 1,099 यूरो (लगभग 1,22,000 रुपये)
Samsung Galaxy S26 FE के फीचर्स
सैमसंग का यह फोन 6.7 इंच के FHD+ डायनैमिक AMOLED 2X डिस्प्ले के साथ आता है। फोन का डिस्प्ले 120Hz रिफ्रेश रेट और 1900 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस को सपोर्ट करता है। फोन में इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर और IP68 रेटिंग दी गई है, जिसकी वजह से फोन पानी में डूबने पर भी खराब नहीं होगा।
| Samsung Galaxy S26 FE | फीचर्स |
| डिस्प्ले | 6.7 इंच, AMOLED, 120Hz |
| प्रोसेसर | Exynos 2500 |
| स्टोरेज | 8GB, 512GB |
| बैटरी | 4900mAh, 45W, 15W |
| कैमरा | 50MP + 12MP + 8MP, 12MP |
| OS | Android 16, OxygenOS 9 |
दक्षिण कोरियाई कंपनी के इस स्मार्टफोन में इन-हाउस Exynos 2500 चिपसेट दिया गया है। यह प्रोसेसर 3nm टेक्नोलॉजी पर काम करता है। इसके साथ 8GB रैम और 512GB तक स्टोरेज का सपोर्ट मिलेगा। यह फोन 4,900mAh की दमदार बैटरी के साथ आता है, जिसके साथ 45W वायर्ड और 15W वायरलेस चार्जिंग का सपोर्ट मिलेगा।
सैमसंग गैलेक्सी एस26 एफई
इसके बैक में ट्रिपल कैमरा सेटअप दिया गया है। फोन में 50MP का मेन OIS कैमरा दिया गया है। इसके साथ 12MP का अल्ट्रा वाइड और 8MP का टेलीफोटो कैमरा मिलेगा। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए सैमसंग के इस फोन में 12MP का कैमरा मिलता है। यह Android 17 पर बेस्ड OneUI 9 पर काम करता है। कनेक्टिविटी के लिए फोन में WiFi, Bluetooth, NFC जैसे फीचर्स दिए गए हैं।
यह भी पढ़ें – 2000 रुपये सस्ते में मिल रहा Poco का 7900mAh बैटरी वाला फोन, पहली सेल में तगड़ा ऑफर
आज का एक्सप्लेनर: ‘चीन ने जानबूझकर नेपाल को तबाही का अलर्ट नहीं दिया’, इस दावे में कितनी सच्चाई; क्या वाकई बच सकती थीं सैकड़ों जिंदगियां
26 अगस्त को नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर आई बाढ़ में 200 से ज्यादा लोगों की मौत की पुष्टि हो गई है। करीब 1,500 लोग अब भी लापता हैं। दावा किया जा रहा कि काफी जानें बचाई जा सकती थीं, अगर चीन ने समय पर चेता दिया होता।
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तो क्या वाकई नेपाल में हुई भीषण तबाही के पीछे चीन जिम्मेदार है; दोनों देशों के बीच आपदाओं की वार्निंग देने का क्या सिस्टम है, इसी पर आज का एक्सप्लेनर…
सवाल-1: नेपाल में आई बाढ़ के पीछे चीन पर क्या आरोप लग रहे?
जवाब: नेपाली पत्रकार परशुराम काफ्ले ने X पर लिखा, ‘चीन ने अपनी जिम्मेदारी नहीं निभाई। अगर बीजिंग के डिजास्टर डिटेक्शन सिस्टम से अर्ली वार्निंग मिल जाती, तो नेपाल में ज्यादा जानें बचाई जा सकती थीं। नेपाल हमेशा चीन की चिंताओं का ध्यान रखता है। इस एकतरफा प्यार की कीमत चुकानी पड़ रही है।’
नेपाल के मौसम विज्ञान विभाग के मुताबिक, नेपाल और चीन के बीच मौसम से जुड़ी जानकारियां शेयर करने की व्यवस्था है, लेकिन इस घटना के बारे में पहले से कोई जानकारी नहीं दी गई।
नेपाल के मौसम विभाग की सीनियर साइंटिस्ट विभूति पोखरेल कहती हैं, ‘हम चीनी अधिकारियों के संपर्क में हैं, लेकिन अभी तक वे नहीं बता पाए हैं कि बाढ़ की वजह क्या है।’
2016 में भी नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर रसुवागढ़ी इलाके में भीषण बाढ़ आई थी। तब भी एक्सपर्ट्स ने कहा था कि दोनों देशों के बीच समय रहते इन्फॉर्मेशन शेयर की गई होती, तो नुकसान कम किया जा सकता था।
बाढ़ की वजह से नेपाल-चीन को जोड़ने वाला रसुवागढ़ी-ग्यिरोंग क्रॉस-बॉर्डर लैंड पोर्ट डैमेज हो गया। तिब्बत के इमिग्रेशन कॉम्पलेक्स के ऊपर से सैलाब आता हुआ दिख रहा है।
सवाल-2: दोनों देशों के बीच ऐसे हादसों की जानकारी देने का नियम है या नहीं?
जवाब: नेपाल और चीन के बीच मौसम और आपदा से जुड़ी जानकारियां साझा करने की बात तय हुई थी, लेकिन इस पर कोई औपचारिक समझौता नहीं हो पाया है।
दरअसल, 8 जुलाई 2025 को रसुवागढ़ी बॉर्डर पॉइंट से 35 किलोमीटर ऊपर चीन के इलाके में तिब्बत के पहाड़ों पर ‘पुरेपु’ नाम की ग्लेशियर झील फटी। इससे भोटेकोशी नदी के आसपास करीब 100 किमी तक के इलाके में बाढ़ का मलबा पहुंचा। एक दर्जन से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी।

पिछले साल भोटेकोशी नदी पर आई बाढ़ में 9 लोगों की मौत हुई थी। कई हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट डैमेज हुए थे।
इसके बाद नेपाल और चीन ने तीन बातें तय की थीं…
- दोनों देश आपस में बाढ़ वगैरह से जुड़ी रियल-टाइम जानकारी साझा करेंगे।
- इसके लिए एक अर्ली वार्निंग सिस्टम बनाया जाएगा।
- अगर पहाड़ों पर ग्लेशियर की झील फटने, यानी ‘ग्लेशियल आउटबर्स्ट फ्लड, GLOF का खतरा होगा, तो उसे भी फ्लैग करेंगे।
नेपाल की त्रिभुवन यूनिवर्सिटी में एनवायरनमेंट स्टडीज के प्रोफेसर सुदीप ठाकुर बताते हैं, ‘तिब्बत में मौसम से जुड़ी इन्फॉर्मेशन इकठ्ठा करने की व्यवस्था है, लेकिन उसे नेपाल के साथ साझा नहीं किया जाता है। चीन को वैज्ञानिक जानकारी देने में कोई परेशानी नहीं है, लेकिन शायद नेपाल सरकार ही मजबूती से अपनी मांग उनके सामने रख ही नहीं पाई है।’
नेपाल की डिजास्टर स्टडी सेंटर के डायरेक्टर वसंत अधिकारी भी कहते हैं कि अब तक जानकारी शेयर करने की कोई व्यवस्था नहीं है।
सवाल-3: जानकारी शेयर न करने के आरोप पर चीन ने क्या कहा है?
जवाब: चीन ने सीधे तौर पर इसका कोई जवाब नहीं दिया है, हालांकि चीनी दूतावास ने अपने बयान में कहा है कि भूकंप के चलते बाढ़ आई है और ये भूकंप नेपाल की तरफ आया था।
बयान में कहा गया, ‘रसुवा-ग्यिरोंग बॉर्डर इलाके में आई बाढ़ से चीन बेहद दुखी है। नेपाल की तरफ आए भूकंप के चलते हिमस्खलन हुआ और फिर मलबा बहा। इससे सीमा के दोनों तरफ लोगों की मौत हुई।’
दरअसल, पहले कहा गया था कि रिक्टर स्केल पर करीब 5 की तीव्रता के भूकंप के चलते बर्फ का ग्लेशियर टूटा, हालांकि बाद में अमेरिकी जियोलॉजिकल सर्वे ने साफ किया कि भूकंप जैसा झटका बर्फ और चट्टान के टूटने से पैदा हुआ था।
हालांकि चीनी दूतावास ने ये जरूर कहा है, ‘भविष्य में सीमा पार मौसम और आपदाओं से जुड़ी जानकारियां साझा करने के लिए बेहतर तरीके से काम करेंगे।’
सवाल-4: बर्फ का पहाड़ चीन में गिरा या नेपाल में?
जवाब: नेपाल की डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी, NDRRMA के मुताबिक, ग्लेशियर टूटने की जगह नेपाल-चीन सीमा चौकी से लगभग 20 किलोमीटर उत्तर-पूर्व में है। अथॉरिटी के वैज्ञानिक प्रकाश पोखरेल के मुताबिक, ‘ये इलाका नेपाली हिस्से में आता है, न कि चीन की तरफ।’
हालांकि, नेपाली मौसम वैज्ञानिक विभूति पोखरेल कहती हैं, ‘हम चीनी अधिकारियों के संपर्क में हैं, लेकिन अब तक ये पता नहीं है कि घटना नेपाल में हुई या चीन की तरफ हुई है।’
दरअसल, मानसून सीजन के चलते उस इलाके में काफी बादल हैं। इसलिए सेटेलाइट तस्वीरों से ये साफ नहीं हो पा रहा है कि ग्लेशियर टूटने की सटीक लोकेशन क्या है।

मोटे तौर पर जहां ग्लेशियर टूटा, वो इलाका सेंट्रल हिमालयन रेंज की क्रेस्टलाइन पर है। यानी अगर पहाड़ की एक तरफ की ढलान नेपाल में है, तो उसी पहाड़ की दूसरी तरफ की ढलान तिब्बत में है, जिस पर चीन का कंट्रोल है। करीब 8000 मीटर की ऊंचाई पर बर्फ और ग्लेशियर जमा रहते हैं, जो पिघलकर दोनों तरफ की नदियों के लिए पानी का सोर्स बनते हैं।
तकनीकी तौर पर अगर ऊंचाई पर कोई ग्लेशियर टूटे, तो उसका असर नीचे दोनों देशों के तरफ की नदियों पर पड़ सकता है।
पोइकू नदी तिब्बत के ग्लेशियर से निकलती है। फिर सीमा पार करके नेपाल में दाखिल होती है और वहां भोटेकोशी कही जाती है, इसी की सहायक नदी ल्हेंदे में बाढ़ आई।
एक बात और है- चीन के मुताबिक, पहले भूकंप आया और फिर ग्लेशियर टूटा। जबकि नेपाल सहित दुनियाभर के मौसम वैज्ञानिक मानते हैं कि पहले ग्लेशियर टूटा, जिससे भूकंप जैसा झटका महसूस हुआ।
सवाल-5: ग्लेशियर टूटने से नेपाल में इतनी भीषण तबाही कैसे आई? जवाबः पूरी घटना 3 स्टेप में समझिए….
1. ग्लेशियर टूटा: 26 अगस्त की सुबह करीब 17 हजार फीट की ऊंचाई पर करीब 2000 फीट का ग्लेशियर टूटा और 4 हजार फीट नीचे गिर गया।
2: नदी में पानी जमा हुआ: सुबह करीब 8:37 बजे पिघला ग्लेशियर अपने साथ चट्टानों और मलबे को लेकर ल्हेंदे नदी से टकराया। इससे ल्हेंदे नदी पर एक अस्थायी बांध बन गया और पीछे पानी जमा होने लगा।
3. नदी का बांध टूटने से सैलाब बह चला: सुबह करीब 9 बजे बढ़ते पानी के दबाव से नदी का बांध टूटा, तो एक विशाल सैलाब बनकर निचले इलाकों की तरफ बह चला। आगे भोटे कोशी और त्रिशुली नदी में मलबे वाली बाढ़ आ गई।

फ्लैश फ्लड की वजह से 30 फीट ऊपर तक पानी की लहरी उड़ रही थी। 175 लोगों की मौत हो गई है और1500 से ज्यादा लापता हैं।
नेपाल के रसुवा से नुवाकोट, धादिंग होते हुए चितवन तक भयावह बाढ़ का असर हुआ। रसुवा में करीब एक दर्जन बस्तियां प्रभावित हुईं। बाढ़ धादिंग जिले के गल्छी तक पहुंची और आगे मुग्लिन की ओर बढ़ने की चेतावनी दी गई।
खतरा अभी टला नहीं है। वैज्ञानिकों का कहना है कि नेपाल-चीन बॉर्डर के पास नदी में अब भी एक मलबे का अवरोध जमा है, जो किसी भी वक्त टूटकर सैलाब की एक दूसरी लहर छोड़ सकता है।
जिस त्रिशुली नदी में यह बाढ़ आई है वह आगे नारायणी नदी से मिलती है। यह भारत के बिहार तक आती है, जहां इसे गंडक नदी कहते हैं। इसे बिहार और यूपी के इलाके भी हाई अलर्ट पर रखे गए हैं।
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2000 फीट चौड़ा ग्लेशियर टूटा, बिना भूकंप कांपने लगी धरती:देखिए नेपाल की तबाही का शुरू से आखिर तक एक-एक सीन

26 अगस्त, सुबह 8:30 बजे। नेपाल-तिब्बत बॉर्डर पर मौसम साफ था। किसी को अंदाजा नहीं था कि अगले 30 मिनट में क्या होने वाला है। शुरुआत से आखिर तक नेपाल की तबाही का एक-एक सीन, वीडियो देखिए…
जलजीवन मिशन में ठेकेदारों को बिना जांच 122 करोड़ भुगतान: कैग रिपोर्ट में खुलासा; फर्जी बिलों से 7 करोड़ उठाए, शिलान्यास पर खर्च किए 3.25 करोड़ – Jaipur News
जयपुर11 मिनट पहले
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जल जीवन मिशन के कामों में कैग ने भारी फर्जीवाड़ा पकड़ते हुए तल्ख टिप्पणियां की हैं। कैग की रिपोर्ट के अनुसार- 26 क्षेत्रीय जल आपर्ति परियोजनाओं में थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन और सर्टिफिकेशन के प्रावधान का पालन किए बिना ही ठेकेदारों को दिसंबर 2024 तक 122.31 करोड रुपए का भुगतान कर दिया गया। फर्जी बिलों से 7.7 करोड़ का भुगतान भी किया गया।
ऑडिट में यह भी सामने आया कि चयनित कामों में मनगढ़ंत और फर्जी बिल बनाए गए। दूसरे ठेकेदारों के बिलों के आधार पर 7.7 करोड़ के अनियमित भुगतान किए गए। जेजेएम में करौली में निविदा खोलने से पहले ही पाइप खरीद लिए गए। वहीं बाद में एनओसी जारी होने से पहले ही उन्हें सोजत सिटी को ट्रांसफर कर दिया गया, जिससे पूरी टेंडर प्रक्रिया शक के दायरे में है।
कैग ने उठाए सवाल, सरकार का तर्क सिरे से खारिज
कैग रिपोर्ट के अनुसार- जेजेएम की गाइडलाइन के अनुसार सहायक गतिविधियों और प्रचार-प्रसार में प्रोजेक्ट के फंड का इस्तेमाल नहीं कर सकते थे। जून 2024 में रिकॉर्ड की जांच से पता चला कि साल 2022-23 के दौरान अलग-अलग जल आपूर्ति परियोजनाओं की आधारशिला रखने के आयोजन पर 3.28 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे।
कैग के मुताबिक- यह खर्च गलत था और जेजेएम गाइडलाइन का साफ उल्लंघन था। राज्य सरकार ने नवंबर 2025 में इसके जवाब में तर्क दिया कि शिलान्यास समारोह पर खर्च वित्त विभाग की मंजूरी लेकर किया गया था। कैग ने सरकार के इस जवाब को सिरे से खारिज करते हुए इसे जेजेएम की गाइडलाइन का उल्लंघन बताते हुए ऑडिट पैरा बनाकर आपत्ति जताई है।

इन मुद्दों पर भी उठाए सवाल
पानी की क्वालिटी जांच-मॉनिटरिंग पर 91.69% पैसा खर्च नहीं
साल 2019 से 20 जनवरी 2025 तक पानी की क्वालिटी की निगरानी और सर्वे एक्टिविटीज की गई। इसमें 486.23 करोड़ के बजट में से केवल 40.39 करोड़ रुपए ही खर्च किए, जबकि 445.84 करोड़ रुपए बिना खर्च पड़े रहे। इस काम में केवल 8.31% ही खर्च किए। कुल बजट के 91.69% रुपए बिना खर्च पड़े रहे।
विभाग की लापरवाही से टेंडर में देरी, तीन जिलों के 1.50 लाख से ज्यादा परिवार पानी से वंचित
कैग की रिपोर्ट के अनुसार- जलदाय विभाग की लापरवाही के कारण टेंडर रद्द हुए। इस वजह से सितंबर 2024 तक कोई काम नहीं हुआ। विभाग की लापरवाही के कारण बारां, झालावाड़ और कोटा जिले के 14 गांवों के 1,52,437 ग्रामीण परिवार 3 साल से ज्यादा समय तक जेजेएम के पानी से वंचित रहे।
कैग ने जलदाय विभाग की मंशा पर उठाए सवाल
कैग की रिपोर्ट के अनुसार- क्षेत्रीय जलापूर्ति परियोजना बारां में ठेकेदारों ने काम पूरा करने की अवधि को लगातार आगे बढ़ाया और देरी की। विभाग ने टेंडरों को अंतिम रूप देने में निष्क्रियता बरती। इससे निविदाओं को फाइनलाइज करने को लेकर विभाग पर संदेह होता है।
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