Friday, October 23, 2026
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ऑडी संग CCTV में दिखा विक्रांत जैसा शख्स: अलीगढ़ हिट एंड रन केस में हादसे से आधा घंटे पहले का मिला सीसीटीवी, टहलते और सिगरेट पीते भाजपा नेता के भतीजे जैसा युवक – Aligarh News




हलवाई मनोज की मौत के हिट एंड रन मामले में देर रात सामने आए नए सीसीटीवी फुटेज ने जांच को अहम मोड़ दे दिया है। फुटेज में एक शख्स हादसे से करीब आधा घंटे पहले जीटी रोड पर ऑडी रोककर टहलता और सिगरेट पीता दिखाई दे रहा है। उसकी शक्ल भाजपा नेता देवराज सिंह के भतीजे विक्रांत से हूबहू मिलती-जुलती बताई जा रही है। इसी आधार पर पुलिस ने विक्रांत की तलाश तेज कर दी है। हादसे के समय मनोज के साथ बाइक पर सवार घायल भी विक्रांत की पहचान कर चुका है। जिस उत्तराखंड नंबर की ऑडी से हादसा हुआ, वह देवराज सिंह के नाम पंजीकृत है। मामले में हत्या की धारा में मुकदमा दर्ज है। हालांकि, सीसीटीवी में दिख रहा शख्स विक्रांत ही है और हादसे के वक्त कार कौन चला रहा था, इसकी पुष्टि आरोपी के पकड़े जाने और पूछताछ के बाद ही होगी।
दिनभर की जांच के बाद देर रात मिला फुटेज
पुलिस दिनभर हादसे से जुड़े साक्ष्य जुटाने में लगी रही। इसी पड़ताल के बाद देर रात जीटी रोड का सीसीटीवी फुटेज मिला। इसमें शख्स गाड़ी रोककर बाहर टहलता और सिगरेट पीता नजर आ रहा है। फुटेज हादसे से करीब आधा घंटे पहले का बताया जा रहा है। उसकी शक्ल विक्रांत से काफी मिलती-जुलती होने के कारण पुलिस इस सुराग को गंभीरता से ले रही है। बाइक पर मनोज के साथ मौजूद घायल की ओर से विक्रांत की पहचान किए जाने के बाद जांच में यह पहलू और अहम हो गया है।
विक्रांत की तलाश तेज, एसपी सिटी कर रहे मॉनिटरिंग
सीसीटीवी फुटेज और घायल के बयान के आधार पर पुलिस विक्रांत की तलाश में जुटी है। एसपी सिटी खुद मामले की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। अब तक सामने आए साक्ष्यों के आधार पर जांच का फोकस विक्रांत पर है। पुलिस उसे पकड़कर पूछताछ करना चाहती है, ताकि फुटेज में दिख रहे शख्स की पहचान और हादसे के समय कार चला रहे व्यक्ति की भूमिका स्पष्ट हो सके।
उत्तराखंड नंबर की ऑडी देवराज के नाम
हादसे में इस्तेमाल ऑडी उत्तराखंड नंबर की है और भाजपा नेता देवराज सिंह के नाम पंजीकृत है। देवराज का कहना है कि दुर्घटना के समय कार उनका ड्राइवर चला रहा था। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है। फिलहाल नए फुटेज में दिख रहे शख्स की पहचान की पुष्टि और हादसे के समय चालक की भूमिका तय करना जांच के प्रमुख बिंदु हैं।
एसएसपी बोले- पकड़े जाने पर स्पष्ट होगी तस्वीर
एसएसपी नीरज जादौन ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज हादसे से करीब आधा घंटे पहले का है। इसमें संबंधित व्यक्ति जीटी रोड पर दिखाई दे रहा है। वह विक्रांत जैसा ही लग रहा है। उसे लोग पहचान भी रहे हैं। अब विक्रांत के पकड़े जाने और पूछताछ के बाद स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है।



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उदयपुर में 6 साल में बदला वोटिंग पैटर्न: झाड़ोल-फलासिया में बंपर वोटिंग, भींडर-वल्लभनगर और मावली समेत 4 समितियों में गिरा ग्राफ; 3 नई समितियों में दिखा उत्साह – Udaipur News




उदयपुर में 6 साल बाद हुए चुनाव का वोटिंग पैटर्न भी पूरा तरह बदला हुआ नजर आया। आदिवासी बाहुल्य झाड़ोल-फलासिया में बंपर वोटिंग हुई। तो मैदानी इलाकों की भींडर, वल्लभनगर और मावली समेत 4 समितियों में वोटिंग ग्राफ गिरा। हालांकि इस बार नई बनाई गई 3 पंचायत समितियों में अच्छा उत्साह देखने को मिला। गांवों की सरकार चुनने के लिए गुरुवार को पहले चरण का मतदान हुआ। इस चरण में जिले की 10 पंचायत समितियों के सदस्यों और इन क्षेत्रों में आने वाले जिला परिषद सदस्यों के लिए वोट डाले गए। इन सभी 10 पंचायत समितियों में कुल 66.88 फीसदी मतदान हुआ। चुनाव में नई बनी नाई पंचायत समिति 81.05 फीसदी वोटिंग के साथ पूरे जिले में टॉप पर रही। वहीं, कुराबड़ पंचायत समिति में सबसे कम 58.97 फीसदी वोट पड़े। पहले चरण के 160 निर्वाचन क्षेत्रों में कुल 7,33,784 मतदाता पंजीकृत थे। इनमें से 4,90,757 मतदाताओं ने बूथ पर पहुंचकर वोट डाले। अभी जिले में दो और चरणों में पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के लिए वोटिंग होनी बाकी है। नई पंचायत समितियों में पहली बार वोटिंग, मतदाताओं में दिखा उत्साह इस बार नाई, ओगणा और घासा को नई पंचायत समिति बनाया गया है। इन तीनों जगहों पर पहली बार पंचायत समिति सदस्यों के लिए चुनाव हुए हैं। पहली बार वोटिंग होने से यहां के ग्रामीणों में काफी उत्साह देखा गया। नाई में सबसे अधिक 81.05 फीसदी मतदान दर्ज किया गया। इसी तरह ओगणा में 74.77 फीसदी और घासा में 65.51 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। आदिवासी इलाकों में बढ़ा मतदान, 4 समितियों में गिरा ग्राफ इस बार आदिवासी बहुल इलाकों में वोटिंग का प्रतिशत बढ़ा है, जबकि मैदानी क्षेत्रों की चार पंचायत समितियों में मतदान कम हुआ है। झाड़ोल में पिछली बार 74.04 फीसदी वोट पड़े थे, जो इस बार 1.32 फीसदी बढ़कर 75.36 फीसदी हो गए। फलासिया में भी वोटिंग 69.51 फीसदी से बढ़कर 73.57 फीसदी पर पहुंच गई। यहां 4.06 फीसदी का उछाल आया है। गिर्वा में भी मतदान 68.8 फीसदी से मामूली बढ़कर 69.41 फीसदी रहा। दूसरी तरफ, भींडर में सबसे ज्यादा 6.47 फीसदी की गिरावट आई है। यहां पिछली बार 66.65 फीसदी वोटिंग हुई थी, जो इस बार घटकर 60.18 फीसदी ही रह गई। कुराबड़ में भी मतदान 63.8 फीसदी से गिरकर 58.97 फीसदी पर आ गया। इसी तरह मावली में वोटिंग 66.79 से घटकर 62.15 फीसदी और वल्लभनगर में 63.13 से घटकर 61.29 फीसदी रही। पिछली बार 63.97% वोटिंग हुई थी, इस बार 4 वार्ड बढ़े छह साल पहले वर्ष 2020 में हुए चुनावों में उदयपुर जिला परिषद के सभी वार्डों को मिलाकर औसत 63.97 फीसदी मतदान हुआ था। उस समय जिला परिषद में कुल 43 वार्ड थे। इस बार 4 नए वार्ड बढ़ने से जिला परिषद में कुल 47 वार्ड हो गए हैं। वर्ष 2020 के चुनाव में 43 में से 27 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी। वहीं कांग्रेस को 15 सीटें मिली थीं और 1 सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी जीता था। तब जिला परिषद में बोर्ड बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा 22 सीट का था। बहुमत से 5 सीट ज्यादा जीतने पर भाजपा का बोर्ड बना था और ममता कुंवर पंवार को जिला प्रमुख बनाया गया था। 10 पंचायत समितियों में 2020 और 2026 के मतदान की तुलना चुनाव की तस्वीर देखें…



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दिग्विजय सिंह की पदयात्रा पर NHRC का नोटिस: बच्चों से नारे लगवाने की शिकायत पर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने मांगा जवाब – Bhopal News


पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की यात्रा में बच्चों को शामिल करने और उनसे राजनीतिक नारे लगवाने के आरोपों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने संज्ञान लिया है।

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आयोग ने मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस जारी कर मामले की जांच कराने और दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।

आयोग के 22 अक्टूबर 2026 के पत्र के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि दिग्विजय सिंह की यात्रा में बच्चों से राजनीतिक नारे लगवाए गए। इस कथित घटना के वीडियो और तस्वीरें 22 अक्टूबर को फेसबुक पर साझा किए जाने का भी उल्लेख शिकायत में किया गया है।

शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि बच्चों को यात्रा में लाने के लिए पैसे दिए गए होंगे। उसने मामले की जांच कर आयोजकों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।

बाल अधिकारों के उल्लंघन के आरोपों की जांच होगी

राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने संरक्षण मानवाधिकार अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत मामले का संज्ञान लिया है। आयोग ने शिकायत में लगाए गए आरोपों को प्रथम दृष्टया बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन प्रतीत होने वाला बताया है।

आयोग ने मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव और डीजीपी को निर्देश दिए हैं कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कराई जाए। जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि क्या बच्चों को पैसे देकर यात्रा में शामिल किया गया था या किसी तरह से उनका इस्तेमाल किया गया। इसके साथ ही लागू बाल संरक्षण कानूनों के संभावित उल्लंघन की भी जांच करने को कहा गया है।

बच्चों के नारे लगाते हुए पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने गुरुवार सुबह वीडियो अपने फेसबुक पेज पर शेयर किया था।

इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को भी नोटिस

आयोग ने केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव को भी निर्देश दिए हैं कि कथित घटना से जुड़े बच्चों के वीडियो और तस्वीरों के इस्तेमाल के मामले को देखें और अपनी कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करें।

आयोग ने सभी संबंधित अधिकारियों से पत्र प्राप्त होने के दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। फिलहाल आयोग के पत्र में आरोपों की जांच के निर्देश दिए गए हैं। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि या किसी की जिम्मेदारी तय होने का उल्लेख नहीं है।

20 अक्टूबर को उज्जैन से शुरू हुई यात्रा

दिग्विजय सिंह की करीब 950 किलोमीटर की ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ 20 अक्टूबर को विजयादशमी के दिन उज्जैन से शुरू हुई थी। यात्रा का लक्ष्य ओरछा स्थित रामराजा सरकार मंदिर होते हुए अयोध्या के श्रीराम मंदिर तक पहुंचना है। यात्रा के घोषित उद्देश्यों में धार्मिक स्थलों पर चंदे और चढ़ावे में पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की जांच तथा वोट चोरी के आरोपों पर जवाबदेही की मांग शामिल है।

यात्रा की शुरुआत से पहले उज्जैन में चिंतामण गणेश और महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन-पूजन किया गया था। इसके बाद पार्थिव शिवलिंग पूजन, कन्या भोज और भंडारे के आयोजन के साथ पदयात्रा शुरू हुई।

गुरुवार को तराना पहुंची पदयात्रा

यात्रा के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 21 अक्टूबर को पदयात्रा उज्जैन से देवास जिले के सिंदुरिया गांव पहुंची। तीसरे दिन, 22 अक्टूबर को सिंदुरिया से तराना तक 15 किलोमीटर की पदयात्रा के बाद तराना में रात्रि विश्राम कर रही है।



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मोतिहारी में 2 बाइक की भिड़ंत, एक युवक की मौत: राजमिस्त्री का काम कर बाइक से घर लौट रहा था – Motihari (East Champaran) News




मोतिहारी के दरपा थाना क्षेत्र में देर शाम एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। श्यामपुर-नरकटिया रोड पर दो बाइकों की आमने-सामने की जोरदार टक्कर में एक युवक की मौत हो गई, जबकि दूसरा युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने घायल को इलाज के लिए अस्पताल भेजा और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। घटना दरपा थाना क्षेत्र के श्यामपुर-नरकटिया रोड पर गम्हरिया कला गांव से आगे छतवन के पास की है। बताया जा रहा है कि दोनों बाइक स्पलेंडर प्लस थीं, जिनकी आमने-सामने की टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों बाइक के परखच्चे उड़ गए और दोनों सवार सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से जख्मी हो गए। स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान बैकुंठवा निवासी 18 वर्षीय मुकेश कुमार के रूप में हुई है। वह अपनी बाइक से नरकटिया की तरफ जा रहा था। वहीं घायल युवक की पहचान गम्हरिया कला निवासी 24 वर्षीय रमेश कुमार बैठा के रूप में हुई है। रमेश प्रतिदिन की तरह राजमिस्त्री का काम कर बाइक से घर लौट रहा था। इसी दौरान गम्हरिया और नरकटिया के बीच छतवन के पास दोनों की बाइक आपस में टकरा गई। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई। लोगों ने तुरंत इसकी सूचना दरपा थाना पुलिस को दी। बाइकों को जब्त कर मामले की छानबीन जारी सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों के सहयोग से दोनों घायलों को अस्पताल पहुंचाया। पुलिस ने घायल मुकेश कुमार को आदापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। वहीं दूसरे घायल रमेश कुमार को उसके परिजन नरकटिया स्थित एक निजी अस्पताल लेकर गए, जहां उसका इलाज चल रहा है। उसकी स्थिति गंभीर बताई जा रही है। दरपा थानाध्यक्ष अनीश कुमार ने बताया कि बाइक की आमने-सामने की टक्कर में बैकुंठवा निवासी मुकेश कुमार की मौत हो गई है। शव को पोस्टमार्टम के लिए मोतिहारी सदर अस्पताल भेजा गया है। दूसरे घायल का इलाज चल रहा है। पुलिस दोनों बाइकों को जब्त कर मामले की छानबीन कर रही है।



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1 जनवरी से बदल जाएगा वॉट्सऐप इस्तेमाल करने का तरीका, फोन में सिम रखना होगा जरूरी!


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WhatsApp New Rule : अगले साल की शुरुआत से वॉट्सऐप चलाने वालों को नया नियम फॉलो करना पड़ सकता है. साइबर ठगी और फ्रॉड पर लगाम कसने के लिए दूरसंचार विभाग बिना सिम के वॉट्सऐप चलाने पर रोक लगा सकता है. इससे उन उपभोक्ताओं पर असर पड़ सकता है, जो बिना सिम के सिर्फ वाईफाई के सहारे अपना वॉट्सऐप चलाते हैं.

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1 जनवरी से बदलेगा वॉट्सऐप इस्तेमाल करने का तरीका, फोन में सिम रखना होगा जरूरी!Zoom

दूरसंचार विभाग बिना सिम के वॉट्सऐप चलाने पर रोक लगा सकता है.

नई दिल्ली. WiFi पर बिना SIM वाले फोन में WhatsApp चलाते हैं? तो आने वाले दिनों में आपकी परेशानी बढ़ सकती है. दूरसंचार विभाग (DoT) के SIM Binding निर्देशों के तहत WhatsApp, Telegram और Signal जैसे मैसेजिंग ऐप्स के इस्तेमाल के नियम बदल सकते हैं. नए नियम के तहत जिस मोबाइल नंबर से मैसेजिंग ऐप का अकाउंट जुड़ा है, उसका SIM उसी डिवाइस में होना जरूरी हो सकता है, जिस पर ऐप इस्तेमाल किया जा रहा है. ऐसे में फोन से SIM निकालने या SIM के निष्क्रिय होने पर ऐप की सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है.

सरकार का मकसद ऑनलाइन ठगी, फर्जी अकाउंट और मोबाइल नंबर के गलत इस्तेमाल पर लगाम लगाना है. आरोप है कि साइबर ठग भारतीय नंबर से अकाउंट का वेरिफिकेशन कराने के बाद भी SIM के बिना मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल जारी रखते हैं. SIM Binding से ऐसे मामलों को रोकने में मदद मिलने की उम्मीद है. इसी पर लगाम कसने के लिए 1 जनवरी, 2027 से वॉट्सऐप नियमों में बदलाव किया जा रहा है.

किन यूजर्स पर पड़ेगा असर?
इस बदलाव का असर उन लोगों पर पड़ सकता है, जो दो फोन इस्तेमाल करते हैं या पुराने स्मार्टफोन में केवल WiFi के जरिए WhatsApp चलाते हैं. eSIM इस्तेमाल करने वाले और iPhone यूजर्स के लिए भी तकनीकी व्यवस्था अहम होगी. हालांकि, इस नियम का अलग-अलग डिवाइस और यूजर्स पर कितना असर पड़ेगा, यह इसके तकनीकी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा. खासकर डुअल फोन, WiFi पर चलने वाले WhatsApp और eSIM यूजर्स को लेकर स्थिति स्पष्ट होना अभी बाकी है.

अभी क्या है वॉट्सऐप चलाने का तरीका
वर्तमान में आप किसी भी मोबाइल में सिम लगाकर वॉट्सऐप को इंस्टॉल कर सकते हैं. ऐप चलाने के लिए आपके मोबाइल नंबर पर ओटीपी आएगा और एक बार वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद आप सिम निकालने के बावजूद ऐप चला सकते हैं. दूरसंचार विभाग ने इसी नियम को बदलने की तैयारी कर ली है. विभाग का मानना है कि यूजर्स की पहचान बनाए रखने और फर्जीवाड़े या ऑनलाइन फ्रॉड पर लगाम कसने के लिए बिना सिम के वॉट्सऐप लगाने पर रोक लगानी होगी. हालांकि, इसका असर काफी हद तक यूजर्स पर भी पड़ेगा, लेकिन सुरक्षा के लिए यह कदम उठाना जरूरी माना जा रहा है.

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Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…

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425, 325 और 225…बिहार में लिट्टी का अनोखा कोडवर्ड, चोखे का भी अनोखा स्वाद

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Bihar Unique Codeword Litti: राजधानी पटना में लिट्टी-चोखा के शौकीनों की कमी नहीं है. यहां गली-मोहल्लों से लेकर बड़े बाजारों तक लिट्टी की कई दुकानें मिल जाएंगी, लेकिन क्या आपने कभी ऐसी दुकान के बारे में सुना है जहां लिट्टी खाने के लिए आपको अपना ऑर्डर नंबरों में देना पड़े? कोई 225 बोलता है तो कोई 325. पहली बार सुनने वालों को ये नंबर भले ही किसी पहेली जैसे लगें, लेकिन यहां के पुराने ग्राहकों के लिए यही लिट्टी ऑर्डर करने का खास अंदाज है. इतना ही नहीं, यहां लिट्टी बनाने का तरीका भी आम दुकानों से बिल्कुल अलग है. आटा पानी से नहीं, बल्कि दूध से गूंथा जाता है. यही वजह है कि पटना की इस करीब 45 साल पुरानी दुकान पर आज भी लिट्टी के शौकीन खिंचे चले आते हैं.

225 और 325 का क्या है चक्कर?
इस दुकान पर लिट्टी खाने पहुंचते ही सबसे पहले जो चीज आपका ध्यान खींचेगी, वह है ऑर्डर देने का अनोखा तरीका. यहां ग्राहक सीधे यह नहीं कहते कि हमें दो या तीन लिट्टी चाहिए. इसके बजाय कोई 225 बोलता है तो कोई 325. सुनने में ये नंबर किसी खास कोड जैसे लगते हैं, लेकिन इनके पीछे का गणित बेहद आसान है.

दरअसल, यहां लिट्टी को बटर में फ्राई करके परोसा जाता है. दुकानदार भोला कुमार ने बताया कि 225 का मतलब है दो लिट्टी और 25 ग्राम बटर, जबकि 325 का मतलब है तीन लिट्टी और 25 ग्राम बटर. इसी तरह ग्राहक अपनी पसंद के हिसाब से लिट्टी और बटर की मात्रा तय कर सकते हैं. किसी को 50 ग्राम बटर चाहिए तो कोई 100, 150 या 200 ग्राम तक बटर में अपनी लिट्टी फ्राई करवाता है. यानी यहां सिर्फ लिट्टी खाने का नहीं, बल्कि अपने स्वाद के हिसाब से उसे तैयार करवाने का भी पूरा इंतजाम है. दुकान का यह कोडवर्ड वाला अंदाज पुराने ग्राहकों के बीच इतना लोकप्रिय है कि वे बिना किसी उलझन के अपना ऑर्डर दे देते हैं.

पानी नहीं, दूध से गूंथा जाता है लिट्टी का आटा
लिट्टी की असली पहचान उसके स्वाद और सोंधी खुशबू में छिपी होती है. लेकिन इस दुकान में लिट्टी को खास बनाने की तैयारी आटा गूंथने के साथ ही शुरू हो जाती है. आमतौर पर लिट्टी बनाने के लिए आटे में पानी मिलाया जाता है, मगर यहां कारीगर दूध का इस्तेमाल करते हैं. दुकान में एक बार में करीब 30 से 35 किलो आटा गूंथा जाता है, जिसके लिए लगभग 20 किलो दूध का इस्तेमाल होता है. जब कारीगर से पूछा कि आटा पानी की जगह दूध से क्यों गूंथा जाता है, तो उनका सीधा जवाब था कि इससे खाने में अच्छा लगता है.

चोखा भी ऐसा कि मसालों का अंदाज कर देगा हैरान
लिट्टी के साथ चोखा न हो तो बिहारी स्वाद की बात अधूरी रह जाती है. इस दुकान में चोखा तैयार करने का तरीका भी काफी अलग है. यहां बैंगन और टमाटर को उबालकर उसमें उबले हुए आलू मिलाए जाते हैं. इसके बाद शुरू होता है मसालों का खेल. चोखे में जीरा, गोलकी, भुनी मिर्च, लहसुन, धनिया पत्ता और दूसरे मसालों के साथ हाजमोला पाउडर भी मिलाया जाता है. इन सामग्रियों को अच्छी तरह मिलाकर चोखे को खास स्वाद दिया जाता है. कारीगर की मानें तो यहां चोखा बनाने के लिए एक बार में करीब 40 किलो आलू, 20 किलो बैंगन और 15 किलो टमाटर का इस्तेमाल किया जाता है. आखिर में, सरसों का तेल भी मिलाया जाता है. इतनी बड़ी मात्रा में चोखा तैयार होने से अंदाजा लगाया जा सकता है कि दुकान पर लिट्टी के साथ चोखे की भी अच्छी मांग रहती है.

45 साल पुरानी दुकान, बचपन से स्वाद ले रहे ग्राहक
इस दुकान की खासियत सिर्फ लिट्टी बनाने का तरीका या ऑर्डर देने का कोडवर्ड नहीं है, बल्कि इसके साथ जुड़ी लोगों की पुरानी यादें भी हैं. यहां आने वाले कुछ ग्राहक ऐसे हैं जो बचपन से लिट्टी खाने के लिए पहुंच रहे हैं. इस लिट्टी दुकान का नाम गोपी कृष्णा लिट्टी भंडार है. इसको 1981 में गोपी कृष्णा जी ने शुरू किया था. आज भी वे अपने बेटे भोला के साथ इस दुकान को चलाते हैं.

पटना में कहां मिलेगी यह खास लिट्टी?
अगर आप भी दूध से गूंथे आटे और बटर में फ्राई की गई लिट्टी का स्वाद चखना चाहते हैं, तो आपको पटना के जीपीओ गोलंबर के पास पहुंचना होगा. यहां मल्टीमॉडल हब से सटे सबवे के एंट्री पॉइंट पर, कबाड़ी मार्केट में पीपल के पेड़ के पास गोपी कृष्णा जी की यह दुकान मौजूद है. दुकान पर लिट्टी खाने का समय शाम 4:30 बजे से रात 10:30 बजे तक बताया गया है. इसलिए अगर आप यहां जाने का प्लान बना रहे हैं, तो शाम के समय पहुंचना बेहतर रहेगा.



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तिब्बत में 7 तीव्रता का भूकंप: 10 किमी गहराई में था केंद्र; फिलहाल नुकसान की जानकारी नहीं


ल्हासा2 घंटे पहले

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तिब्बत में 7 तीव्रता का भूकंप आया है। भारतीय समयानुसार गुरुवार रात 8:03 बजे भूकंप के झटके महसूस हुए। इसका केंद्र तिब्बत की राजधानी ल्हासा से करीब 400 किलोमीटर दूर तिब्बत के नागकू क्षेत्र में जमीन से 10 किलोमीटर की गहराई पर था।

चीन के भूकंप नेटवर्क केंद्र (CENC) के मुताबिक भूकंप के झटके स्थानीय इलाके में साफ महसूस किए गए। फिलहाल जान-माल के नुकसान की जानकारी सामने नहीं आई है।

तिब्बत में पहले भी भूकंप मचा चुके तबाही

तिब्बत दुनिया के उन इलाकों में शामिल है, जहां भूकंप आने का खतरा ज्यादा रहता है। यहां भारतीय और यूरेशियन टेक्टोनिक प्लेटें आपस में टकराती हैं। इनकी हलचल से हिमालय पर्वत बना है, लेकिन इसी वजह से इलाके में भूकंप भी आते रहते हैं।

जनवरी 2025 में तिब्बत के तिंगरी काउंटी में 7.1 तीव्रता का भूकंप आया था। इसमें तिब्बत में करीब 400 लोगों की मौत हुई थी, जबकि पड़ोसी नेपाल में 13 लोगों की जान गई थी। इसके झटके उत्तर भारत समेत दक्षिण एशिया के कई हिस्सों में महसूस किए गए थे।

इससे पहले 2010 में पड़ोसी चीनी प्रांत छिंगहाई के युशू में 7.1 तीव्रता का भूकंप आया था। इसमें कम से कम 2,698 लोगों की मौत हुई थी और करीब 300 लोग लापता हो गए थे।

अगस्त में बाढ़ से भी मची थी तबाही

तिब्बत में इस साल 26 अगस्त को नेपाल सीमा के पास पहाड़ से बर्फ और चट्टानों का बड़ा हिस्सा टूटकर नदी में गिर गया था।

इससे नदी का रास्ता कुछ समय के लिए बंद हो गया। बाद में पानी का तेज बहाव नेपाल की ओर बढ़ा, जिससे कई गांवों, सड़कों और पुलों को नुकसान पहुंचा।

चीन के आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, तिब्बत के ग्यिरोंग इलाके में इस आपदा में 43 लोगों की मौत हुई थी, जबकि 519 लोग लापता हो गए थे। वहीं, नेपाल में बाढ़ से 1,455 लोगों की मौत हुई और 5,285 लोग लापता बताए गए थे।

तिब्बत के ग्यिरोंग पोर्ट पर अचानक आई बाढ़ और मलबे के तेज बहाव का मंजर CCTV कैमरे में कैद हुआ। हादसा 26 अगस्त 2026 को हुआ था।

तिब्बत के ग्यिरोंग पोर्ट पर अचानक आई बाढ़ और मलबे के तेज बहाव का मंजर CCTV कैमरे में कैद हुआ। हादसा 26 अगस्त 2026 को हुआ था।

तिब्बत में बार-बार भूकंप क्यों आते हैं?

  • जमीन के नीचे दो बड़ी प्लेटें हैं। भारत की प्लेट और यूरेशिया की प्लेट।
  • भारत की प्लेट धीरे-धीरे उत्तर की ओर बढ़ रही है और यूरेशिया की प्लेट को धक्का दे रही है।
  • दबाव की वजह से जमीन के नीचे की चट्टानों में हलचल होती है।
  • जब चट्टानें अचानक खिसकती हैं, तो जमीन हिलने लगती है। इसे ही भूकंप कहते हैं।
  • तिब्बत में जमीन के नीचे मौजूद दरारों में दबाव जमा होता रहता है। इसलिए यहां बार-बार भूकंप आते हैं।

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दुबई में डीजल दिल्ली से 28 रुपए महंगा हुआ:UAE सरकार ने इस महीने 12% कीमत बढ़ाई; जंग के बाद दोगुने हुए तेल के दाम

तेल के बड़े उत्पादक देशों में शामिल UAE में तेल की कीमतें भारत से भी ज्यादा हो गई हैं। 22 अक्टूबर के भाव के मुताबिक, दुबई में एक लीटर डीजल ₹123 का है, जबकि दिल्ली में यही डीजल ₹95 में मिल रहा है। यानी दिल्ली के मुकाबले वहां ₹28 ज्यादा चुकाने पड़ रहे हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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दिल्ली में 6 महीने में होंगी 12 हेरिटेज वॉक: 24 अक्टूबर से शुरुआत, डीडीए- इंटेक के बीच एमओयू, ऐतिहासिक, प्राकृतिक विरासत से रूबरू होंगे लोग – New Delhi News




दिल्ली की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत से लोगों को जोड़ने के लिए दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) अगले छह महीने में 12 हेरिटेज वॉक आयोजित करेगा। इसके लिए डीडीए ने इंडियन नेशनल ट्रस्ट फॉर आर्ट एंड कल्चरल हेरिटेज (इंटेक) के दिल्ली चैप्टर के साथ एमओयू किया है। उप-राज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधु के निर्देश पर शुरू इस पहल के तहत हर महीने दो गाइडेड वॉक होंगी। अभियान की शुरुआत 24 अक्टूबर को शाम 4 बजे मेहरौली आर्कियोलॉजिकल पार्क से होगी। इसमें विशेषज्ञ दिल्ली की ऐतिहासिक इमारतों, वास्तुकला और अनसुने इतिहास से लोगों को परिचित कराएंगे। इंटेक वॉक के रूट, थीम और गाइड की व्यवस्था करेगा, जबकि डीडीए प्रशासनिक सहयोग और जरूरी अनुमति देगा। बता दें कि, हाल ही में उपराज्यपाल ने संजय वन में हेरिटेज वॉक का नेतृत्व किया था। इस दौरान उन्होंने दिल्ली रिज की विरासत पर आधारित ई-बुक का विमोचन भी किया था। इन 6 स्थानों पर होंगी हेरिटेज वॉक… एक वॉक में 40 लोग, शुल्क 500 रुपए…



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177 नंबर पर भी मिली एमबीबीएस सीट: नीट-यूजी स्टेट कोटा, स्ट्रे-वैकेंसी राउंड में 11.93 लाख रैंक वाले छात्र को भी प्राइवेट कॉलेज में मिली जनरल सीट – Kota News




राजस्थान के मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में 85 प्रतिशत स्टेट कोटा सीटों पर दाखिले के लिए आयोजित स्ट्रे-वैकेंसी राउंड का प्रोविजनल सीट आवंटन परिणाम मेडिकल एवं डेंटल काउंसलिंग बोर्ड की ओर से जारी कर दिया गया है। कुल 1,064 अभ्यर्थियों को सीटें आवंटित की गई हैं। एजुकेशन एक्सपर्ट देव शर्मा ने बताया कि जारी परिणामों में 947 एमबीबीएस और 117 बीडीएस सीटें शामिल हैं। सूची के विश्लेषण में सबसे दिलचस्प तथ्य यह सामने आया है कि ऑल इंडिया 11,93,250वीं रैंक हासिल करने वाले अभ्यर्थी को कोटा के एक प्राइवेट मेडिकल कॉलेज में जनरल एमबीबीएस सीट आवंटित हुई है। इस स्टूडेंट ने नीट-यूजी में 720 में से मात्र 177 नंबर यानी 24.58 प्रतिशत नंबर हासिल किए हैं। देव शर्मा के अनुसार, स्ट्रे-वैकेंसी राउंड तक आते-आते सरकारी मेडिकल कॉलेजों की लगभग सभी सीटें भर चुकी थीं। इस लास्ट राउंड में केवल 6 गवर्नमेंट एमबीबीएस सीटें ही आवंटित हो सकी हैं। इन आवंटित सीटों में 4 लडके और दो लडकियां शामिल हैं। वर्गवार स्थिति की बात करें तो इनमें से 5 अभ्यर्थी जनरल,ओबीसी-एनसीएल श्रेणी के हैं, जबकि 1 अभ्यर्थी एससी श्रेणी से है। जोधपुर और कोटा मेडिकल कॉलेज की कट-ऑफ रही सबसे ऊपर
गवर्नमेंट एमबीबीएस सीटों के आवंटन में सबसे ऊंचा कट-ऑफ एसएन मेडिकल कॉलेज जोधपुर का रहा, जहां अनरिजर्व्ड बॉय कैटेगरी में 585 अंकों पर सीट आवंटित हुई। वहीं गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज कोटा में अनरिजर्व्ड बॉय कैटेगरी की कट ऑफ 584 अंक रही। अन्य सरकारी कॉलेजों में कट-ऑफ का गणित
अन्य जिलों के नए व क्षेत्रीय सरकारी मेडिकल कॉलेजों की बात करें तो गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज टोंक में 569 अंक, गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज जैसलमेर में 568 अंक तथा गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज बांसवाड़ा में 565 अंकों पर सामान्य श्रेणी की सीट आवंटित की गई। इसके अलावा, गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज जैसलमेर में ही एससी कैटेगरी के तहत अंतिम आवंटन 483 अंकों पर हुआ।



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गुजरात के स्कूलों में बिना परमिशन बाहरी लोगों को नो-एंट्री: उल्लंघन पर पॉक्सो के तहत कार्रवाई, विपक्षी नेता बोले- नाकामी छिपाने की कोशिश


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अहमदाबाद26 मिनट पहले

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शिक्षा मंत्रालय के शैक्षणिक सत्र 2025-26 का उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, गुजरात में कुल 34,734 सरकारी स्कूल हैं।

गुजरात में अब सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों को बिना अनुमति एंट्री नहीं मिलेगी। सरकार ने इसके लिए एक नोटिफिकेशन जारी किया है। सरकार ने स्कूलों में प्रवेश को लेकर पूरी गाइडलाइन जारी की है।

नए नियम के तहत किसी भी बाहरी व्यक्ति को स्कूल परिसर में प्रवेश के लिए प्रधानाचार्य/संस्था प्रमुख की लिखित अनुमति लेनी होगी। नियमों के उल्लंघन पर पॉक्सो के तहत कार्रवाई का प्रावधान है।

इतना ही नहीं, प्रधानाचार्य की पूर्व लिखित अनुमति के बिना स्टूडेंट्स, टीचर्स या स्कूल की गतिविधियों की फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी या लाइव स्ट्रीमिंग भी नहीं की जा सकेगी।

राज्य सरकार ने यह फैसला क्यों लिया, इसकी जानकारी नहीं दी है। लेकिन, माना जा रहा है कि सीजेपी के स्कूल अभियान के चलते यह कदम उठाया गया है। इस मामले पर अब राजनीतिक घमासान भी शुरू हो गया है।

शिक्षा मंत्री ने कहा- प्रवेश पर कोई प्रतिबंध नहीं

शिक्षा मंत्री प्रद्युमन वाजा ने साफ किया कि नोटिफिकेशन में किसी को भी स्कूल में प्रवेश लेने से प्रतिबंधित नहीं किया गया है। बस उन्हें प्रिंसिपल या स्कूल प्रमुख की अनुमति लेनी होगी।

यह परिपत्र बच्चों की प्राइवेसी बनाए रखने, उनके वीडियो रिकॉर्ड होने और मीडिया में प्रसारित होने की घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से जारी किया गया है। साथ ही इससे स्कूल में बच्चों को शांतिपूर्ण और सुरक्षित वातावरण भी मिल सकेगा।

किशोर न्याय अधिनियम, बीएनएस और अन्य कानूनों के तहत, केवल कानून का उल्लंघन करने पर ही कानूनी कार्रवाई की जाएगी। स्कूल में प्रवेश करने पर जुर्माना लगाने का कोई प्रावधान नहीं है।

AAP नेता ने कहा- बीजेपी ने सरकारी स्कूल बर्बाद कर दिए

गुजरात में आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता इसुदान गढ़वी ने कहा कि पिछले 30 सालों में बीजेपी ने गुजरात के सरकारी स्कूल बर्बाद कर दिए हैं। दूसरी तरफ बीजेपी नेता अपने निजी स्कूल खोलते जा रहे हैं, जिनका स्वागत किया जा रहा है।

दिल्ली का उदाहरण देते हुए गढ़वी ने कहा- अरविंद केजरीवाल ने दिल्ली के सरकारी स्कूलों की हालत दुनिया के सामने पेश की, जबकि गुजरात में बीजेपी सरकार इस कानून के जरिए स्कूलों की हकीकत छिपाने की कोशिश कर रही है।

सरकारी स्कूलों की सच्चाई को उजागर होने से रोकने के लिए पॉक्सो अधिनियम के तहत कार्रवाई की धमकी दी जा रही है।

बार काउंसिल के जकी शेख ने कहा- पॉक्सो के तहत कार्रवाई गलत

गुजरात बार काउंसिल के सदस्य अधिवक्ता जकी शेख ने कहा कि नोटिफिकेशन के कॉलम नंबर-9 के अनुसार, ऐसे मामलों में पॉक्सो अधिनियम या किशोर न्याय अधिनियम के तहत कार्रवाई करना गलत है। इसके लिए स्कूलों में अवैध प्रवेश की धारा लागू होनी चाहिए।

यदि किसी बच्चे के साथ छेड़छाड़ या कोई अन्य घटना होती है, तो केवल उसी स्थिति में पॉक्सो एक्ट का उपयोग करने की अनुमति दी जानी चाहिए। क्योंकि, पॉक्सो अधिनियम के दुरुपयोग के मामले बढ़ रहे हैं।

स्कूलों में पारदर्शिता बनाए रखने के लिए अंतरराष्ट्रीय स्कूलों की तरह पैरेंट्स को उनके बच्चों के स्कूलों तक सीधी एंट्री देने पर विचार करना चाहिए।

कांग्रेस नेता ने कहा- नाकामी छिपाने की कोशिश

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता डॉ. मनीष दोषी ने कहा कि गुजरात शिक्षा विभाग द्वारा स्कूल में प्रवेश, फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के लिए जारी किया गया सर्कुलर शिक्षा विभाग की विफलता छिपाने की कोशिश है।

राज्य में 3,000 ऐसे स्कूल हैं, जहां सिर्फ एक टीचर है। सरकार वहां शिक्षकों की नियुक्ति क्यों नहीं करती। गुजरात में 14,562 ऐसे स्कूल हैं, जहां एक से अधिक कक्षा के छात्रों को एक ही कक्षा में पढ़ने के लिए मजबूर हैं, सरकार इस मुद्दे पर कार्रवाई क्यों नहीं करती।

वहीं, नेताओं के प्राइवेट स्कूलों के लिए रेड कार्पेट बिछाया जा रहा है। सरकार की नीति और उसके इरादे दोनों ही गलत हैं। इसीलिए गुजरात एजुकेशन में पिछड़ रहा है। हम सरकार से अनुरोध करते हैं कि वह अपनी नाकामियों को छिपाने के लिए जारी किए ऐसे बेतुके नोटिफिकेशन को तुरंत वापस ले।

गुजरात सरकार का 21 अक्टूबर, 2026 को जारी किया गया परिपत्र।

गुजरात सरकार का 21 अक्टूबर, 2026 को जारी किया गया परिपत्र।

स्कूल में एंट्री करने से पहले रजिस्टर में एंट्री करानी होगी

  • जारी परिपत्र के नए नियमों के मुताबिक, किसी भी बाहरी व्यक्ति को स्कूल परिसर में प्रवेश करने के लिए प्रधानाचार्य/संस्था प्रमुख की पूर्व लिखित अनुमति लेनी होगी। केवल उन सरकारी अधिकारियों को इससे छूट होगी, जिन्हें उनके आधिकारिक कर्तव्यों का पालन करने के लिए विधिवत अधिकृत किया गया हो।
  • हरेक व्यक्ति को स्कूल परिसर में प्रवेश करने से पहले आगंतुक रजिस्टर में एंट्री करानी होगी।
  • किसी भी बाहरी व्यक्ति को कक्षा, प्रयोगशाला, पुस्तकालय, छात्रावास, खेल का मैदान, शौचालय में जाने की अनुमति नहीं होगी।
  • प्रधानाचार्य की पूर्व लिखित अनुमति के बिना छात्रों, शिक्षकों या स्कूल की गतिविधियों की फोटोग्राफी, वीडियोग्राफी या लाइव स्ट्रीमिंग नहीं की जा सकेगी।
  • यदि कोई व्यक्ति बिना अनुमति के स्कूल में प्रवेश करता है। अनधिकृत फोटोग्राफी/वीडियोग्राफी करने का प्रयास करता है या स्कूल के कामकाज में बाधा डालता है, तो प्रधानाचार्य को तत्काल स्थानीय पुलिस तथा जिला शिक्षा अधिकारी/जिला प्राथमिक शिक्षा अधिकारी/प्रशासनिक अधिकारी/तालुका प्राथमिक शिक्षा अधिकारी को सूचित करना होगा।
  • प्रधानाचार्य ऐसे किसी भी आगंतुक को विद्यालय परिसर में प्रवेश देने से मना कर सकते हैं, जिससे विद्यालय की सुरक्षा, गोपनीयता, अनुशासन या शैक्षणिक वातावरण पर प्रभाव पड़ने की संभावना हो।
  • प्रधानाचार्य की पूर्व लिखित अनुमति के बिना कोई भी आगंतुक किसी बालक/बालिका की व्यक्तिगत जानकारी एकत्र नहीं कर सकेगा और न ही उसकी पहचान या तस्वीर का प्रकाशन कर सकेगा।
  • प्रधानाचार्य/संस्था प्रमुख आवश्यकतानुसार किसी बाहरी व्यक्ति को विद्यालय परिसर छोड़ने का आदेश दे सकते हैं।

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