Saturday, August 22, 2026
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भोपाल से कानपुर 6 तो रायपुर 7 घंटे में: एमपी में बन रहे 4 मेगा कॉरिडोर; सिंहस्थ और 2028 चुनाव से पहले बदलेगी तस्वीर – Madhya Pradesh News




भोपाल से रायपुर का सफर 15 से घटकर 7 घंटे और भोपाल से जबलपुर का 6 से 3 घंटे हो जाएगा। अगले दो साल में भोपाल को केंद्र मानकर चार बड़े इकोनॉमिक कॉरिडोर तैयार होने हैं। इनसे शहरों के बीच कनेक्टिविटी बेहतर होगी और आर्थिक गतिविधियों को भी रफ्तार मिलेगी। 2028 के सिंहस्थ और विधानसभा चुनाव से पहले इन प्रोजेक्ट्स को अहम माना जा रहा है। भोपाल से जुड़ने वाले बड़े कॉरिडोर एक नजर में भोपाल-विदिशा 4-लेन: कानपुर कॉरिडोर को मिलेगी मजबूती राज्य कैबिनेट ने पिछले सप्ताह भोपाल-विदिशा 4-लेन प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है। यह भोपाल-कानपुर कॉरिडोर का अहम हिस्सा होगा। क्यों जरूरत पड़ी: इस सड़क पर ट्रैफिक करीब 10,975 PCU है, जबकि 2-लेन सड़क की मानक क्षमता 10,000 PCU है। यानी मौजूदा ट्रैफिक क्षमता से अधिक है, इसलिए सड़क को 4-लेन किया जा रहा है। प्रोजेक्ट प्रोफाइल: 44.83 किमी लंबे प्रोजेक्ट की लागत ₹1,757.55 करोड़ है। यह भानपुरा टी-जंक्शन (अयोध्या बायपास रोड) से सांची-सलामतपुर जंक्शन तक बनेगा। क्या है HAM मॉडल: प्रोजेक्ट हाइब्रिड एन्युटी मॉडल (HAM) पर बनेगा। इसमें 40% निवेश सरकार और 60% निजी डेवलपर करता है। सड़क के निर्माण के बाद लंबे समय तक रखरखाव की जिम्मेदारी भी डेवलपर की होती है। भोपाल से रायपुर: सफर 15 से घटकर 7 घंटे होगा सरकार ने जबलपुर-भोपाल ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे और जबलपुर-मंडला-छत्तीसगढ़ सीमा 6-लेन मार्ग को मंजूरी दी है। एक्सप्रेसवे पर वाहनों की अधिकतम गति 120 किमी प्रति घंटा होगी। जबलपुर आउटर रिंग रोड: शहर के बाहर से गुजरेगा लंबी दूरी का ट्रैफिक जबलपुर में ₹3,540 करोड़ की लागत से 114 किमी लंबा 4-लेन आउटर रिंग रोड बनाया जा रहा है। 5 पैकेज में बनने वाले इस ग्रीनफील्ड कॉरिडोर में नर्मदा पर करीब 750 मीटर लंबा पुल भी होगा। यह बरेला, मानेगांव, NH-45, कुशनेर और अमझर को जोड़ेगा। इससे लंबी दूरी का ट्रैफिक शहर के बाहर से गुजर सकेगा। भोपाल-इंदौर: यात्रा का समय करीब 2.5 घंटे होगा भोपाल और इंदौर के बीच ₹4,000 करोड़ की लागत से 6-लेन ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे बनाया जा रहा है। इससे दोनों शहरों के बीच यात्रा का समय 4 घंटे से घटकर करीब 2.5 घंटे रह जाएगा। यह मौजूदा मार्ग का हाई-स्पीड विकल्प होगा। इसके साथ इंदौर के पूर्वी हिस्से में ₹3,617.08 करोड़ की लागत से 75.63 किमी लंबा इंदौर ईस्टर्न बायपास भी बनाया जा रहा है। यह देवास/इंदौर क्षेत्र को सिमरोल/दातोदा के रास्ते नांदेड से जोड़ेगा। सिंहस्थ 2028 से पहले उज्जैन के 3 बड़े सड़क प्रोजेक्ट पूरे करने का लक्ष्य 2028 के सिंहस्थ को देखते हुए सरकार ने उज्जैन से जुड़े सड़क प्रोजेक्ट्स को दीपावली 2027 तक पूरा करने के निर्देश दिए हैं। विधानसभा चुनाव 2028: किन क्षेत्रों को सड़क प्रोजेक्ट्स से फायदा? इन सड़क परियोजनाओं का असर 2028 के विधानसभा चुनाव में भी दिखाई दे सकता है।



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बिना बेकिंग सोडा- ईनो, जानें डोसा बैटर फर्मेंट करने का नायाब ट्रिक

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Dosa Batter Fermentation Trick: नाश्ते में साउथ इंडियन खाना पसंद करते हैं तो डोसा बैटर को जल्दी फर्मेंट करने की ट्रिक आपको जरूर पता होनी चाहिए. इस लेख में जानिए बिना बेकिंग सोडा और ईनो के यूज सिर्फ एक घंटे में डोसा का बैटर कैसे तैयार किया जा सकता है.

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इडली और डोसा सबसे ज्यादा पसंद किए जाने वाले साउथ इंडियन डिशेज में गिने जाते हैं. इनका हल्का स्वाद, मुलायम टेक्सचर और आसान पाचन इन्हें हर उम्र के लोगों की पसंद बनाता है. इन दोनों व्यंजनों की खासियत इनके फर्मेंटेड बैटर में छिपी होती है. सही तरीके से फर्मेंट हुआ बैटर इडली को स्पंजी और डोसा को कुरकुरा बनाने में मदद करता है.

आमतौर पर बैटर को तैयार होने में 6-7 घंटे लग जाते हैं. ऐसे में अगर अचानक नाश्ते या खाने में इडली-डोसा बनाने का मन हो जाए, तो इंतजार करना मुश्किल लगने लगता है. हालांकि, कुछ आसान घरेलू उपाय ऐसे हैं जो बैटर को जल्दी फर्मेंट होने में मदद करते हैं. हालांकि स्वाद और सेहत के लिए प्राकृतिक तरीके से फर्मेंट किया गया बैटर ही सबसे अच्छा माना जाता है, लेकिन समय की कमी होने पर ये टिप्स उपयोगी साबित हो सकते हैं.

डोसा बैटर को जल्दी फर्मेंट करने का तरीका

  • फर्मेंटेशन के लिए हल्का गर्म तापमान जरूरी होता है. यदि मौसम ठंडा है, तो बैटर वाले बर्तन को ऐसी जगह रखें जहां हल्की गर्माहट हो. उदाहरण के लिए, किचन में गैस स्टोव के आसपास या बंद माइक्रोवेव के अंदर रखा जा सकता है. इससे बैटर को फर्मेंट होने के लिए बेहतर माहौल मिल सकता है.
  • बैटर को स्टील के बर्तन में डालकर उसमें थोड़ा नमक मिला लें. अब एक प्रेशर कुकर को हल्का गर्म करें और उसके अंदर बैटर वाला बर्तन रख दें. कुकर का ढक्कन बंद कर दें और गैस बंद कर दें. कुछ समय तक अंदर बनी गर्माहट फर्मेंटेशन की प्रक्रिया को तेज करने में मदद कर सकती है.
  • बैटर को रखने के लिए स्टेनलेस स्टील या मिट्टी के बर्तन बेहतर माने जाते हैं. ये बर्तन तापमान को अपेक्षाकृत स्थिर रखने में मदद करते हैं, जिससे बैटर को फर्मेंट होने के लिए अनुकूल वातावरण मिल सकता है.
  • अगर जल्दी फर्मेंटेशन चाहिए, तो बैटर में थोड़ा दही और चुटकी भर चीनी मिलाई जा सकती है. कुछ लोग इसमें थोड़ा नींबू का रस और सेंधा नमक भी मिलाते हैं. इसके बाद बैटर को ढककर गर्म जगह पर रख दें.

रखें इस बात का ध्यान
ये सभी उपाय केवल समय की कमी होने पर ही अपनाने चाहिए. सबसे अच्छे स्वाद, बनावट और पाचन लाभ के लिए बैटर को प्राकृतिक रूप से 6 से 8 घंटे या आवश्यकता अनुसार फर्मेंट होने देना बेहतर माना जाता है. इसलिए यदि संभव हो, तो बैटर पहले से तैयार करके रखें.

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शारदा सिंहSenior Sub Editor

शारदा सिंह एक अनुभवी लाइफस्टाइल पत्रकार हैं, जिनके पास डिजिटल मीडिया और कंटेंट लेखन के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का अनुभव है. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से…

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गोरखपुर से GRP ने दबोचा गैंगस्टर अपराधी: गैंगस्टर एक्ट के वारंटी समेत कई मामलों में नाम, कोर्ट में पेश कर भेजा गया जेल – Gorakhpur News




जीआरपी पुलिस गोरखपुर ने शुक्रवार को एक गैंगस्टर अपराधी को गिरफ्तार किया। पुलिस ने उसे डोमिनगढ़ रेलवे स्टेशन के पास सूरजकुंड पोखरा क्षेत्र से पकड़ा। गोरखपुर में यात्रियों की सुरक्षा और रेलवे क्षेत्र में अपराध पर अंकुश लगाने के लिए जीआरपी की ओर से लगातार अभियान चलाया जा रहा है। इसी अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई। टीम ने गैंगस्टर एक्ट के मामले में वांछित वारंटी अभियुक्त को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। कोर्ट से जारी वारंट के आधार पर हुई गिरफ्तारी पुलिस के अनुसार गिरफ्तार अभियुक्त की पहचान सागर डोम के रूप में हुई है। वह सूरजकुंड कॉलोनी के डोम खाना, अंबेडकर नगर के तिवारिपुर थाना गोरखपुर का रहने वाला है और उसकी उम्र करीब 30 वर्ष है। उसके खिलाफ अलग अलग धाराओं में जीआरपी गोरखपुर थाने में मामला दर्ज है। इस मामले में अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश गोरखपुर की ओर से वारंट जारी किया गया था। वारंट के बाद जीआरपी टीम ने कार्रवाई करते हुए सागर डोम को गिरफ्तार किया। कई मामलों में दर्ज है मुकदमा पुलिस के मुताबिक सागर डोम का आपराधिक इतिहास भी सामने आया है। उसके खिलाफ मऊ जीआरपी थाने में 2022 में एनडीपीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज हुआ था। इसके अलावा मुगलसराय थाना, जनपद चंदौली में भी 2022 में एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज है। गोरखपुर जीआरपी थाने में साल 2023 में चोरी का माल रखने और उससे जुड़े अपराधों के आरोप में धारा 411, 413 और 414 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। इसके बाद साल 2024 में उसके खिलाफ उत्तर प्रदेश गैंगस्टर एक्ट की धारा 3(1) के तहत भी मुकदमा दर्ज किया गया। कोर्ट में पेश कर की गई कार्रवाई गिरफ्तारी के बाद जीआरपी ने आरोपी को आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद ADJ कोर्ट गोरखपुर के समक्ष पेश किया। पुलिस अधिकारियों के अनुसार वारंट के आधार पर गिरफ्तारी की यह कार्रवाई यात्रियों की सुरक्षा और रेलवे क्षेत्र में अपराधियों पर प्रभावी नियंत्रण के लिए चलाए जा रहे अभियान का हिस्सा है। इन पुलिसकर्मियों ने की गिरफ्तारी वारंटी की गिरफ्तारी करने वाली टीम में जीआरपी थाना गोरखपुर के प्रभारी निरीक्षक अनुज कुमार सिंह, उपनिरीक्षक अजीत प्रताप सिंह, हेड कांस्टेबल अजीत कुमार और कांस्टेबल सुनील यादव शामिल रहे। पुलिस टीम ने वारंट की तामीला करते हुए आरोपी को गिरफ्तार कर आगे की विधिक कार्रवाई पूरी की।



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भोपाल के दीपशिखा हॉस्पिटल में लगी आग: ऑफिस में शॉर्ट सर्किट से हुआ हादसा; मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाला – Bhopal News




भोपाल के विद्या नगर स्थित दीपशिखा हॉस्पिटल के ऑफिस में शुक्रवार रात शॉर्ट-सर्किट के कारण आग लग गई। आग लगने की सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड की एक दमकल मौके पर पहुंची और करीब 11 बजे तक आग पर काबू पा लिया गया। घटना में किसी के घायल होने की सूचना नहीं है। फायर ब्रिगेड के अनुसार, आग हॉस्पिटल के ऑफिस वाले हिस्से में लगी थी। सूचना रात करीब 10:35 बजे मिली थी। इसके बाद दमकल को मौके पर भेजा गया। करीब आधे घंटे में आग पूरी तरह बुझा दी गई। घटना के दौरान बागसेवनिया पुलिस ने हॉस्पिटल में मौजूद सभी मरीजों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। आग पर समय रहते काबू पा लिए जाने से बड़ा हादसा टल गया। फिलहाल आग से हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। प्रारंभिक तौर पर आग लगने का कारण शॉर्ट सर्किट बताया जा रहा है।



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6 IAS और 7 RAS अफसरों के ट्रांसफर: निकाय चुनाव की आचार संहिता के बीच छोटा प्रशासनिक फेरबदल; उदयपुर संभाीय आयुक्त का तबादला – Jaipur News




राज्य सरकार ने निकाय चुनाव की आचाार संहिता के बीच 6 आईएएस और 7 आरएएस अफसरों के ट्रांसफर किए हैं। तीन एपीओ आईएएस अफसरों को पोस्टिंग दी गई है। उदयपुर संभागीय आयुक्त प्रज्ञा केवलरमानी का तबादला टीएडी आयुक्त के पद पर किया है। वहीं एपीओ चल रहे खजान सिंह को उदयपुर के संभागीय आयुक्त के पद पर पोस्टिंग दी गई है। एपीओ चल रहे एच. गुईटे को ओएसडी, एचसीएम रीपा जयपुर और अविचल चतुर्वेदी को आयुक्त खाद्य सुरक्षा के पद पर लगाया है। सोहनलाल का तबादला अतिरिक्त आयुक्त वाणिज्यिक कर से कृषि विभाग में संयुक्त सचिव के पद पर किया है। दिव्यांश सिंह को ब्यावर एसडीएम से शिक्षा विभाग में संयुक्त सचिव लगाया है। 7 आरएएस अफसरों के तबादले, एक का तबादला रद्द

7 आरएएस अफसरों के तबादले किए गए हैं। 1 आरएएस अधिकारी का तबादला रद्द किया है। सुशील कुमार सैनी का सहायक कलेक्टर सीकर से एसडीओ नोहर के पद पर किया गया तबादला रद्द कर दिया गया है। राजलक्ष्मी गहलोत को एडीएम चित्तौड़गढ़ से एडीएम भू-अवाप्ति चित्तौड़गढ़, जगत राजेश्वर को उपसचिव कृषि विभाग से उपसचिव महिला आयोग जयपुर के पद पर लगाया है। जयपाल सिंह राठौड़ को उपायुक्त अजमेर विकास प्राधिकरण से एसडीओ ब्यावर में पोस्टिंग दी है। कार्तिकेय मीणा को डीएसओ कोटा से एसडीओ अकलेरा, पूजा मीणा को भू-अवाप्ति अधिकारी ईआरसीपी प्रोजेक्ट जल संसाधन विभाग अलवर से एसडीओ भवानी मंडी के पद पर लगाया है। सुनीता यादव-3 को कार्यकारी निदेशक परिवेदना निस्तारण राजस्थान स्टेट हेल्थ एश्योरेंस एजेंसी जयपुर से एसडीओ नोहर हनुमानगढ़ और बनवारी लाल बैरवा को एसडीओ अकलेरा से सहायक कलेक्टर भादरा के पद पर पोस्टिंग दी गई है।



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सांसद-विधायकों के फोन का तुरंत देना होगा जवाब: बिहार सरकार ने अधिकारियों को जारी किए निर्देश, नहीं उठा पाए तो बाद में करना होगा कॉल – Patna News




बिहार सरकार ने सांसदों और विधायकों समेत जनप्रतिनिधियों के साथ अधिकारियों के व्यवहार और प्रोटोकॉल को लेकर सख्त निर्देश जारी किए हैं। सामान्य प्रशासन विभाग की ओर से जारी पत्र में सभी अपर मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, सचिव, विभागाध्यक्ष, पुलिस महानिदेशक, सभी प्रमंडलीय आयुक्त और जिलाधिकारियों को इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है। सरकार ने स्पष्ट किया है कि जनप्रतिनिधि जनता और शासन के बीच महत्वपूर्ण कड़ी होते हैं। ऐसे में उनके फोन कॉल, पत्राचार और अधिकारियों से मुलाकात के दौरान उचित प्रोटोकॉल और शिष्टाचार का पालन किया जाना चाहिए। विधानसभा अध्यक्ष की बैठक के बाद जारी हुआ निर्देश सामान्य प्रशासन विभाग के पत्र में कहा गया है कि बिहार विधानसभा अध्यक्ष की अध्यक्षता में 17 जुलाई 2026 को वरिष्ठ पदाधिकारियों की बैठक हुई थी। इस बैठक में राज्य के अधिकारियों द्वारा बिहार विधानसभा के सदस्यों के प्रति अपेक्षित प्रोटोकॉल और शिष्टाचार के प्रभावी अनुपालन के संबंध में दिशा-निर्देश जारी करने की अपेक्षा की गई थी। इसी के आधार पर सरकार ने सभी संबंधित अधिकारियों को इन निर्देशों का कड़ाई से पालन करने को कहा है। विधायकों के फोन का जल्द देना होगा जवाब सरकार ने निर्देश दिया है कि बिहार विधानसभा के सदस्यों की ओर से किए गए दुर्भाष कॉल (फोन कॉल) का यथासंभव तुरंत जवाब दिया जाए। अगर किसी अपरिहार्य कारण से अधिकारी उस समय फोन नहीं उठा पाते हैं, तो बाद में संबंधित विधायक या जनप्रतिनिधि को फोन कर आवश्यक संवाद स्थापित करना होगा। यानी अधिकारियों को जनप्रतिनिधियों के फोन को नजरअंदाज नहीं करने की हिदायत दी गई है। विधायकों के पत्र मिलने की सूचना भी देनी होगी सरकार ने जनप्रतिनिधियों से प्राप्त पत्राचार को लेकर भी स्पष्ट निर्देश दिए हैं। विधायक या अन्य जनप्रतिनिधि की ओर से भेजे गए पत्र की प्राप्ति की सूचना तत्काल उपलब्ध कराने को कहा गया है। इसके साथ ही पत्र में उठाए गए मुद्दे पर की गई कार्रवाई या मामले की वर्तमान स्थिति की जानकारी भी संबंधित जनप्रतिनिधि को निर्धारित समय-सीमा के भीतर उपलब्ध करानी होगी। इसका मतलब है कि किसी विधायक के पत्र को कार्यालय में लंबित रखकर छोड़ देने के बजाय उस पर कार्रवाई और उसकी स्थिति की जानकारी देना जरूरी होगा। मुलाकात के दौरान प्रोटोकॉल और सम्मान का ध्यान रखना होगा सरकार ने अधिकारियों को यह भी निर्देश दिया है कि जब कोई जनप्रतिनिधि किसी अधिकारी के कार्यालय में मुलाकात के लिए आए, तो उनके पद और गरिमा के अनुरूप अपेक्षित प्रोटोकॉल, शिष्टाचार और सम्मानजनक व्यवहार का पालन किया जाए। यानी सांसद या विधायक के कार्यालय पहुंचने पर उनके साथ निर्धारित प्रोटोकॉल के अनुसार व्यवहार करना होगा और उनकी गरिमा का ध्यान रखना होगा। पहले भी जारी होते रहे हैं ऐसे निर्देश सामान्य प्रशासन विभाग ने अपने पत्र में बताया है कि इस तरह के निर्देश पहले भी समय-समय पर जारी किए जाते रहे हैं। विभाग ने 2012, 2017, 2018, 2021 समेत अलग-अलग समय पर जारी किए गए पत्रों का उल्लेख किया है। इसके अलावा संसदीय कार्य विभाग की ओर से भी फरवरी 2021 में संबंधित विषय पर निर्देश जारी किए गए थे। अब सरकार ने एक बार फिर इन निर्देशों को दोहराते हुए अधिकारियों और कर्मचारियों से इसका प्रभावी तरीके से पालन कराने को कहा है। अधीनस्थ कार्यालयों में भी लागू होंगे निर्देश सरकार ने केवल वरिष्ठ अधिकारियों तक ही इन निर्देशों को सीमित नहीं रखा है। पत्र में कहा गया है कि अपने अधीनस्थ कार्यालयों के पदाधिकारियों और कर्मचारियों को भी इन निर्देशों से अवगत कराया जाए और इसका दृढ़ता से अनुपालन सुनिश्चित किया जाए। यानी जिलों और विभागों के अधीन आने वाले कार्यालयों में भी सांसदों और विधायकों के फोन, पत्राचार और मुलाकात के दौरान तय प्रोटोकॉल का पालन करना होगा।



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शिवपुर के पेड़ा से लेकर बरकछा कलां के गुलाब जामुन तक…मिर्जापुर के ये 5 सबसे फेमस फूड

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Mirzapur famous food : हर जिले में खाने-पीने की कुछ न कुछ ऐसी चीज जरूर होती है, जो उसकी पहचान से जुड़ जाती है. मिर्जापुर के साथ भी यही है. यहां एक नहीं बल्कि ऐसी पांच चीजें हैं जो मिर्जापुर का पर्याय बन चुकी हैं. यहां के शिवपुर का पेड़ा विश्व प्रसिद्ध है. बरकछा कलां में मिलने वाले गुलाब जामुन का कोई तोड़ नहीं. यह कई दिनों तक खराब नहीं होता है. रमईपट्टी में मिलने वाली खोए की जलेबी भी बेहद फेमस है. इसी तरह अहरौरा की मलाई लस्सी का दीवाना कौन नहीं.

अगर आप भी मिर्जापुर जिले में आ रहे हैं और यहां के स्वाद का आनंद लेना चाहते हैं तो यह पांच चीज बेहद फेमस हैं. अगर इनका स्वाद नहीं लिया तो मिर्जापुर के फेमस खाने वाले चीजों से रूबरू नहीं हो सकेंगे. मिर्जापुर की यह पांच खाने वाली चीज जो आपके दिलों को छू जाएंगी. खोए की जलेबी से लेकर मलाई लस्सी तक मिर्जापुर जिले की पहचान को जीवित किए हुए हैं.

मिर्जापुर के शिवपुर का पेड़ा विश्व प्रसिद्ध है. शिवपुर के पेड़ा को एक जिला एक फूड के तहत चयनित किया गया है. शिवपुर का पेड़ा को शुद्ध खोए से तैयार किया जाता है, जहां देसी विधि से तैयार किए जाने की वजह से इसकी मिठास और बढ़ जाती है. दूर-दूर से लोग शिवपुर के पेड़े का स्वाद लेने के लिए मिर्जापुर जिले में पहुंचते हैं.

मिर्जापुर जिले के बरकछा कलां में मिलने वाला गुलाब जामुन भी बेहद फेमस है. उपली और लकड़ी की मदद से शुद्ध खोए से यहां गुलाब जामुन को तैयार किया जाता है. यही वजह है कि अधिकारी से लेकर नेता तक सड़क से गुजरते वक्त गुलाब जामुन का स्वाद लिए बगैर नहीं जाते हैं. बरकछा का गुलाब जामुन कई दिनों तक खराब नहीं होता है.

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मिर्जापुर शहर के रमईपट्टी में मिलने वाले खोए की जलेबी भी बेहद फेमस है. खोए की जलेबी को बेहद ही संजीदगी के साथ तैयार किया जाता है. खास बात है की जलेबी में लाइट मीठा होता है, जो लोगों को खूब पसंद आता है. शुद्ध मावे से तैयार होने की वजह से इसका स्वाद बेहद ही लाजवाब रहता है.

मिर्जापुर के अहरौरा में मिलने वाली मलाई लस्सी भी खूब फेमस है. मलाई से लस्सी को तैयार किया जाता है. देसी तरीके से पहले दूध से मलाई निकाली जाती है. मलाई निकाले जाने के बाद उससे लस्सी तैयार किया जाता है. यहां की लस्सी का स्वाद लेने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं. कई लोग पैक करवा कर भी ले जाते हैं.

मिर्जापुर शहर में मिलने वाली हींग की कचौड़ी का दीवानगी हर कोई है. मिर्जापुर शहर के शिव इंटर कॉलेज के पास हींग की कचौड़ी मिलती है. हींग की कचौड़ी का स्वाद बेहद लाजवाब रहता है, जिसे खाने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं. सुबह के नाश्ते का ये हिस्सा बन चुका है. दुकान पर खूब भीड़ उमड़ती है.

यह मिर्जापुर के कुछ खास फेमस चीज थीं, जिसे अगर मिर्जापुर आ रहे हैं तो एक बार जरूर चखें. इनमें, मिर्जापुर का स्वाद छुपा हुआ है. मिर्जापुर के स्वाद के साथ ही अपनापन इसके स्वाद को कई गुना तक बढ़ा देता है. अगर आप भी आ रहे हैं तो अपने दोस्तों और परिवार के साथ एक बार इन खास खाने वाली चीजों का आनंद जरूर उठाएं.

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UN में चीफ गुटेरेस की जगह किसे मिलेगी: आज दूसरे दौर की वोटिंग, रेस में 8 दावेदार, कोस्टा रिका की ग्रिन्सपैन सबसे आगे




संयुक्त राष्ट्र के मौजूदा महासचिव एंतोनियो गुटेरेस का दूसरा पांच साल का कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 को खत्म होगा। उनके बाद अगला महासचिव चुनने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। इस पद के लिए इस समय 8 उम्मीदवार मैदान में हैं। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के 15 मेंबर सीक्रेट वोटिंग के जरिए इन उम्मीदवारों के समर्थन का अंदाजा लगा रहे हैं। पिछले महीने हुए पहले अनौपचारिक मतदान में कोस्टा रिका की रेबेका ग्रिन्सपैन सबसे आगे रहीं। आज शुक्रवार को दूसरे दौर का अनौपचारिक मतदान होगा। इसके बाद भी कई अनौपचारिक पोल हो सकते हैं, जिनमें धीरे-धीरे उम्मीदवारों की संख्या कम होगी। अक्टूबर में औपचारिक चुनाव हो सकते हैं। UN चीफ कैसे चुना जाता है? संयुक्त राष्ट्र का महासचिव सीधे जनता या सभी देशों के वोट से नहीं चुना जाता। पहले सुरक्षा परिषद उम्मीदवारों पर विचार करती है और गुप्त मतदान के जरिए यह पता लगाती है कि किस उम्मीदवार को कितना समर्थन मिल रहा है। सुरक्षा परिषद में कुल 15 सदस्य होते हैं। किसी उम्मीदवार को आगे बढ़ने के लिए कम से कम 9 वोट मिलने जरूरी हैं। लेकिन 9 वोट हासिल करना ही काफी नहीं है। सुरक्षा परिषद के पांच स्थायी सदस्यों अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस में से किसी एक का वीटो भी उम्मीदवार के खिलाफ नहीं होना चाहिए। इसके बाद सुरक्षा परिषद जिस उम्मीदवार पर सहमत होती है, उसका नाम संयुक्त राष्ट्र महासभा के पास भेजा जाता है। महासभा की मंजूरी के बाद वह संयुक्त राष्ट्र का नया महासचिव बनता है। गुटेरेस का कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 को खत्म होगा। इसलिए उससे पहले नए महासचिव के चयन की प्रक्रिया पूरी करने की तैयारी है। इस रेस में शामिल 8 उम्मीदवारों का बैकग्राउंड अलग-अलग है। इनमें पूर्व राष्ट्रपति, वरिष्ठ राजनयिक और संयुक्त राष्ट्र के बड़े पदों पर काम कर चुके लोग शामिल हैं। जानते हैं कौन-कौन इस दौड़ में है और किसकी क्या दावेदारी है। 1. रेबेका ग्रिन्सपैन- कोस्टा रिका 70 साल की रेबेका ग्रिन्सपैन फिलहाल इस रेस में सबसे आगे चल रही हैं। पिछले महीने हुए पहले अनौपचारिक मतदान में उन्हें सबसे ज्यादा समर्थन मिला था। ग्रिन्सपैन कोस्टा रिका की पूर्व उपराष्ट्रपति हैं और संयुक्त राष्ट्र के व्यापार एवं विकास संगठन की प्रमुख हैं। उन्होंने महासचिव पद के लिए प्रचार करने के लिए अपनी मौजूदा जिम्मेदारियों से छुट्टी ली है। अगर ग्रिन्सपैन चुनी जाती हैं तो वह संयुक्त राष्ट्र की पहली महिला और पहली यहूदी महासचिव होंगी। उनके माता-पिता द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान यूरोप से भागे यहूदी शरणार्थी थे। विवाद: UNDP में काम करने के दौरान महंगे निजी विमान के इस्तेमाल को लेकर सवाल उठे थे। दुबई से ले जाने के लिए UN का चार्टर्ड विमान इस्तेमाल किया, जिसका खर्च करीब 40 हजार डॉलर था। 2. मिशेल बाचेलेट- चिली 74 साल की मिशेल बाचेलेट चिली की समाजवादी नेता हैं। वह 2006 में चिली की पहली महिला राष्ट्रपति बनी थीं। इसके बाद उन्होंने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख के रूप में काम किया। मानवाधिकार प्रमुख रहते हुए बाचेलेट ने चीन के शिनजियांग में उइगर मुसलमानों की स्थिति पर रिपोर्ट जारी की थी। इसे लेकर चीन ने उनकी आलोचना की थी। बाचेलेट को मेक्सिको और ब्राजील का समर्थन मिला है। हालांकि, दक्षिणपंथी राष्ट्रपति जोस एंतोनियो कास्ट के सत्ता में आने के बाद चिली ने उनका समर्थन वापस ले लिया। अमेरिका भी उनके गर्भपात के अधिकारों से जुड़े रुख को लेकर उनकी आलोचना करता रहा है। विवाद: बाचेलेट ने संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार प्रमुख रहते हुए भारत के कश्मीर और नागरिकता से जुड़े मामलों पर सवाल उठाए थे। 2019 में उन्होंने जम्मू-कश्मीर में संचार पर रोक और नेताओं की हिरासत पर चिंता जताई थी। भारत ने उनके बयान को गलत और अनुचित बताते हुए खारिज कर दिया था। 3. मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा- इक्वाडोर 61 साल की मारिया फर्नांडा एस्पिनोसा इक्वाडोर की पूर्व विदेश मंत्री हैं। वह संयुक्त राष्ट्र महासभा की अध्यक्ष भी रह चुकी हैं। एस्पिनोसा का कहना है कि दुनिया की साझा समस्याओं से निपटने के लिए संयुक्त राष्ट्र सबसे अहम वैश्विक मंच है। हालांकि, वह संगठन में बड़े सुधार की भी वकालत करती हैं। उनकी उम्मीदवारी को एंटीगुआ और बारबुडा का समर्थन मिला है, लेकिन उनके अपने देश इक्वाडोर ने उनका समर्थन नहीं किया है। विवाद: एस्पिनोसा के राजनीतिक करियर में विवाद भी रहे हैं। 2019 में इक्वाडोर की संसद में उन्हें पद से हटाने की कोशिश हुई थी। उन पर विदेश मंत्री रहते हुए जूलियन असांजे को नागरिकता देने और कोलंबिया सीमा पर सुरक्षा संकट से ठीक से न निपटने के आरोप लगे थे। हालांकि, उन्हें हटाने के लिए जरूरी वोट नहीं मिले और वह पद पर बनी रहीं। 4. राफेल मारियानो ग्रॉसी- अर्जेंटीना 65 साल के राफेल मारियानो ग्रॉसी अर्जेंटीना के करियर राजनयिक हैं। वह 2019 से अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के (IAEA) प्रमुख हैं। ईरान के परमाणु कार्यक्रम और यूक्रेन के जापोरिज्जिया परमाणु संयंत्र को लेकर ग्रॉसी पिछले कुछ सालों से चर्चा में रहे हैं। महासचिव पद के लिए चुनाव लड़ रहे हैं, लेकिन उन्होंने IAEA चीफ का पद नहीं छोड़ा है। उनका कहना है कि पद छोड़ना अपनी जिम्मेदारी से पीछे हटने जैसा होगा। ग्रॉसी चाहते हैं कि संयुक्त राष्ट्र दुनिया में होने वाले बड़े संकटों में ज्यादा सक्रिय भूमिका निभाए और संगठन में जरूरी बदलाव किए जाएं। विवाद: ईरान इन पर पक्षपात करने का आरोप लगाता रहा है। 2025 में IAEA की रिपोर्ट के बाद ईरान ने कहा था कि इससे उसके खिलाफ कार्रवाई का रास्ता खुला। ग्रॉसी ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि रिपोर्ट जांच के आधार पर तैयार की गई थी। 5. कैरोलिन रोड्रिग्स बिर्केट- गुयाना 52 साल की कैरोलिन रोड्रिग्स-बिर्केट गुयाना की पूर्व विदेश मंत्री हैं। वह गुयाना के आदिवासी समुदाय से आती हैं और सिर्फ 27 साल की उम्र में मंत्री बनी थीं फिलहाल वह संयुक्त राष्ट्र में अपने देश की राजदूत हैं। उनका कहना है कि संयुक्त राष्ट्र को दुनिया में अपनी विश्वसनीयता फिर से स्थापित करने की जरूरत है। विवाद: कोई बड़ा विवाद नहीं 6. इवोन ए-बाकी- इक्वाडोर 75 साल की इवोन ए-बाकी इक्वाडोर की राजनयिक और नेता हैं। वह अमेरिका में इक्वाडोर की राजदूत रह चुकी हैं। इस दौरान उनके अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से अच्छे संबंध रहे। उनकी उम्मीदवारी का प्रस्ताव टोंगा ने रखा है। खाड़ी देशों से भी उनके अच्छे रिश्ते हैं। वह कतर में इक्वाडोर की राजदूत रह चुकी हैं। विवाद: डोनाल्ड ट्रम्प से पुरानी दोस्ती है। 2004 में इक्वाडोर में मिस यूनिवर्स प्रतियोगिता कराने में भी उनकी भूमिका थी, तब ट्रम्प इस प्रतियोगिता के मालिक थे। विरोधी आरोप लगाते हैं कि ट्रम्प से उनके निजी संबंधों का इस्तेमाल इक्वाडोर-अमेरिका संबंधों में कितना किया जा रहा है। 7. मैकी साल- सेनेगल 64 वर्षीय मैकी साल सेनेगल के पूर्व राष्ट्रपति हैं। वह अफ्रीकी संघ के मौजूदा अध्यक्ष भी हैं। मैकी अपने अभियान में शांति और विकास को सबसे जरूरी मुद्दा बता रहे हैं। उनकी उम्मीदवारी का प्रस्ताव बुरुंडी ने रखा था और जुलाई में सेनेगल ने भी उनका समर्थन कर दिया। विवाद: राष्ट्रपति रहते हुए 2021 से 2024 के बीच सेनेगल में कई हिंसक प्रदर्शन हुए थे। इन प्रदर्शनों को संभालने के उनके तरीके पर सवाल उठे थे। इस दौरान कई लोगों की मौत हुई थी। 8. ओलारा ओटुन्नु- युगांडा 75 साल के ओलारा ओटुन्नु संयुक्त राष्ट्र में युगांडा के राजदूत भी रह चुके हैं। वह कुछ समय के लिए अपने देश के विदेश मंत्री भी रहे। 2011 में उन्होंने युगांडा पीपुल्स कांग्रेस की ओर से राष्ट्रपति चुनाव लड़ा था। हालांकि, वह लंबे समय से सत्ता में मौजूद राष्ट्रपति योवेरी मुसेवेनी से चुनाव हार गए। विवाद: कोई बड़ा विवाद नहीं पहले दौर की वोटिंग में ग्रिन्सपैन को 10 वोट पहले दौर की अनौपचारिक वोटिंग यानी पहला स्ट्रॉ पोल 30 जुलाई 2026 को हुआ था। इसमें कोस्टा रिका की रेबेका ग्रिन्सपैन सबसे आगे रहीं। तब रेस में 7 उम्मीदवार थे। इवोन ए-बाकी इस वोटिंग में शामिल नहीं थीं। वह 18 अगस्त को आठवीं उम्मीदवार बनीं।



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सिविल-जज बनने के लिए 3 साल की प्रैक्टिस जरूरी नहीं: सुप्रीम कोर्ट ने नियम बदले; 2027 से सर्टिफिकेट, ट्रेनिंग और क्लर्कशिप भी करनी होगी




सुप्रीम कोर्ट ने सिविल जज (जूनियर डिवीजन) बनने के लिए वकीलों की अनिवार्य प्रैक्टिस टाइम तीन साल से घटाकर एक साल कर दिया है। कोर्ट ने 2025 के उस फैसले में बदलाव किया है, जिसमें शुरुआती ज्यूडीशियल सर्विस में भर्ती के लिए तीन साल की प्रैक्टिस जरूरी की गई थी। चीफ जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह और जस्टिस के विनोद चंद्रन की बेंच ने यह निर्देश दिए। जस्टिस चंद्रन ने फैसले से असहमति जताते हुए कहा कि बार में तीन साल की प्रैक्टिस जरूरी करने वाले पुराने फैसले पर दोबारा विचार करने का कोई आधार नहीं है। कोर्ट ने कहा कि एक अप्रैल 2027 के बाद होने वाले सिविल जज (जूनियर डिवीजन) एग्जाम के हर उम्मीदवार के पास कम से कम 1 साल की प्रैक्टिस होनी चाहिए। सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकारों को संबंधित हाईकोर्ट से सलाह लेकर तीन महीने के भीतर लागू सेवा नियमों में बदलाव करने और उन्हें नोटिफाई करने का निर्देश दिया है। कोर्ट बोला- प्रैक्टिस सर्टिफिकेट और रिकॉर्ड जरूरी फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि कैंडिडेट की प्रैक्टिस को ‘सर्टिफिकेट ऑफ प्रैक्टिस’ के जरिए वैरिफाई किया जाएगा। यह सर्टिफिकेट तभी जारी होगा, जब उम्मीदवार की कोर्ट में मौजूदगी, कोर्ट की कार्यवाही में भागीदारी का रिकॉर्ड दर्ज हो। कोर्ट ने कहा- रिव्यू किए जा रहे फैसले को सुनाए हुए एक साल से ज्यादा समय बीत चुका है। इसलिए ट्रांजिशन पीरियड के लिए लॉ ग्रेजुएट 3 साल की प्रैक्टिस शर्त के बावजूद एप्लाई कर सकेंगे। इसके लिए उम्मीदवारों को एक साल की प्रैक्टिस कम्पलीट किया माना जाएगा। हालांकि प्रैक्टिकल एक्सपीरियंस की शर्त को पूरी तरह खत्म नहीं किया है। लेकिन इसका तरीका बदला है। बेंच ने कहा कि जज बनने वाले आवेदक को अदालती कामकाज की पर्याप्त समझ होना जरूरी है। थर्ड ऑल इंडिया जजेस एसोसिएशन केस का भी जिक्र सुप्रीम कोर्ट ने थर्ड ऑल इंडिया जजेस एसोसिएशन केस का भी जिक्र किया। उस मामले में कोर्ट ने 3 साल की प्रैक्टिस की शर्त हटा दी थी। लेकिन नई भर्ती के लिए एक से 2 साल की ट्रेनिंग की सिफारिश की थी। कोर्ट ने 2025 के फैसले से वकीलों को हुई परेशानी का भी जिक्र किया। इनमें वे वकील शामिल थे, जिन्होंने नियम बदलने के समय अपनी कानूनी पढ़ाई पूरी कर ली थी या कर रहे थे। 20 साल तक नए लॉ ग्रेजुएट बिना पहले से तय प्रैक्टिस टेन्योर के ज्यूडीशियल सर्विस में जा सकते थे। 2025 के फैसले में एग्जाम के लिए भी 3 साल की प्रैक्टिस जरूरी कर दी गई थी। जस्टिस चंद्रन मत अलग, 3 साल प्रैक्टिस की शर्त को सही ठहराया जस्टिस के. विनोद चंद्रन ने बेंच उस फैसले से असहमति जताई, जिसमें तीन साल की प्रैक्टिस की शर्त बदली गई है। उन्होंने कहा कि पुराना फैसला तीन जजों की बेंच का सोच-समझकर दिया गया फैसला था और उस पर दोबारा विचार करने का कोई आधार नीहीं है। उनके मुताबिक न्यायिक सेवा में आने वाले वकीलों के लिए बार का अनुभव जरूरी है। पढ़िए जस्टिस चंद्रन के कमेंट्स… जस्टिस चंद्रन ने ट्रेनिंग व्यवस्था का भी विरोध किया जस्टिस चंद्रन ने बेंच की तरफ से तय की गई ट्रेनिंग व्यवस्था का भी विरोध किया। उन्होंने कहा कि एक साल की प्रैक्टिस वाले उम्मीदवारों को ट्रेनिंग और क्लर्कशिप में 2 और साल लगाने होंगे। इससे सैलरी पर असर पड़ सकता है। रेगुलर सर्विस में एंट्री में देरी हो सकती है। उम्मीदवारों की अलग-अलग कैटेगरी के लिए एक जैसी या अलग ट्रेनिंग व्यवस्था लागू करना भी चिंताजनक है। ज्यादातर हाईकोर्ट बार में अनुभव की जरूरत के पक्ष में थे। केवल एकेडमिक क्वालिफिकेशन मुकदमेबाजी की असली परिस्थितियों के अनुभव की जगह नहीं ले सकती। उन्होंने कहा, “पूरे सम्मान और गहरे अफसोस के साथ मैं असहमति जताता हूं। मेरे विचार में सोच-समझकर दिए गए फैसले पर दोबारा विचार की कोई गुंजाइश नहीं है।” पांच साल बाद योजना की समीक्षा होगी सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नई योजना को हमेशा के लिए तय व्यवस्था नहीं माना जाना चाहिए। कोर्ट ने निर्देश दिया कि यह योजना फैसले की तारीख से 5 साल तक लागू रहेगी। पांच साल बाद भर्ती की गुणवत्ता, ट्रेनिंग और क्लर्कशिप की उपयोगिता, न्यायिक अधिकारियों के प्रदर्शन और बाकी आंकड़े कोर्ट के सामने रखे जाएंगे। जरूरत पड़ने पर फिर रिव्यू किया जा सकता है।



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एटा में सैकड़ों शिक्षकों ने निकाली तिरंगा यात्रा: पुरानी पेंशन बहाली और TET अनिवार्यता का किया विरोध – Etah News




एटा में सैकड़ों शिक्षकों और शिक्षिकाओं ने शुक्रवार शाम पुरानी पेंशन बहाली और शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) की अनिवार्यता के विरोध में तिरंगा यात्रा निकाली। यह यात्रा उत्तर प्रदेश प्राथमिक शिक्षक संघ के बैनर तले आयोजित की गई। शाम साढ़े छह बजे शहीद पार्क से शुरू हुई यह यात्रा जिला संयोजक ओमेंद्र प्रताप सिंह के नेतृत्व में निकाली गई। शिक्षकों ने हाथों में तिरंगा झंडा थामकर माया पैलेस चौराहा, जीटी रोड और कचहरी मार्ग से होते हुए धरना स्थल स्थित कलेक्ट्रेट तक मार्च किया। यात्रा के समापन पर संगठन के पदाधिकारियों ने मुख्यमंत्री और प्रधानमंत्री के नाम संबोधित एक लिखित ज्ञापन नायब तहसीलदार को सौंपा। इस संबंध में जानकारी देते हुए प्रांतीय जिला मंत्री वीरपाल सिंह जाटव ने बताया कि प्रांतीय अध्यक्ष विजय कुमार के नेतृत्व में पूरे प्रदेश में संगठन द्वारा तिरंगा यात्राएं निकाली जा रही हैं। इन यात्राओं का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन योजना की बहाली और उन शिक्षकों के लिए TET की अनिवार्यता का विरोध करना है, जो पिछले तीस वर्षों से अपनी सेवाएं दे रहे हैं। इस यात्रा में जिला संयोजक ओमेंद्र प्रताप, संयोजिका शिल्पी मिश्रा, जिलाध्यक्ष प्रवीण कुमार फौजी, मुकेश कुमार, आरजू पांडेय, सुमनलता, शौर्या मिश्रा, कामिनी सिंह, देवेंद्र यादव, राजीव वर्मा, सतेंद्र यादव सहित सैकड़ों शिक्षक और शिक्षिकाएं शामिल हुए।



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