Sunday, May 31, 2026
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ये सरकार गाय को माता नहीं कह पाएगी: गाय पूरे देश के लिए बड़ा मुद्दा बन गया है, कानपुर पहुंचे अविमुक्तेश्वरानंद ने सरकार को घेरा – Kanpur News




81 दिनों की यात्रा पर कानपुर पहुंचे अविमुक्तेश्वरानंद ने आज बड़ा बयान दिया है। उन्होंने ने कहा हम लोग एक दिन में 5 विधानसभा घूम रहे है। इस दौरान उनके निशाने पर गाय रही। उनका कहना है, 12 साल से सीएम गोरख नाथ पीठ के महंत मुख्यमंत्री हैं, लेकिन ये सरकार गाय को माता नहीं कह पाएगी। यदि किसी सच्चे और ताकतवर को सत्ता मिल जाएगी तो पहले ही दिन गाय की रक्षा हो जायेगी। गाय का मुद्दा देश के लिए एक बड़ा मुद्दा बन चुकी है। अब समय आ गया है, जनता को अपना रिपोर्ट कार्ड देना पड़ेगा। 24 जुलाई को लखनऊ में आखिरी रणनीति की घोषणा की जाएगी। इन्ही मुद्दे पर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने दैनिक भास्कर से बात की। पढिए पूरी रिपोर्ट… सवाल: यदि गौ रक्षा पर आपकी मांगें नहीं मानी जातीं, तो क्या आप यूपी में किसी बड़े जनआंदोलन या राजनीतिक विकल्प का समर्थन करेंगे? जवाब: यूपी में क्या करेंगे ये तो एक अलग बात है। हम ये मानने को तैयार नहीं है कि ये जो सरकार है ये गाय को माता नहीं कह पाएगी। अभी तक तो हमको ये आशा करते है, अभी तक नहीं जो ये नहीं कर पाए है। आगे ये कर देंगे। आगे हमको जरूरत नहीं पड़ेगी। हम 24 जुलाई को मान्यवर कांशीराम जी के स्मृति स्थल मैदान हम लोग एक अक्षुणीय सेना के साथ एकत्रित होंगे। जिसके बाद अगला कार्यक्रम घोषित किया जाएगा। सवाल: आपने कई बार कहा कि सत्ता में आने के बाद भी गौ रक्षा के वादे पूरे नहीं हुए। क्या इससे हिंदुत्व की राजनीति करने वाले दलों की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े होते हैं? जवाब: हां बिल्कुल सवाल ही तो है, अगर कोई सच्चा और ताकतवर हिन्दू होगा अगर उसको पावर मिल जाएगी तो पहले ही दिन रक्षा कर देगी। इनको 12 साल हो गए है, लेकिन कुछ नहीं हो रहा है। ये तो बहुत बड़ी विफलता है। भाजपा की नीतियों से इस समय संत समाज नाराज है। सवाल: क्या यूपी में “बुलडोजर राजनीति” गौ रक्षा से बड़ा मुद्दा बन गई है? जवाब: यूपी में गौ रक्षा बड़ा मुद्दा है। यहां गौ भक्त रहते हैं। यहां का मुख्यमंत्री गोरक्ष पीठ महंत 12 साल से मुख्यमंत्री है। गाय का मुद्दा बहुत बड़ा मुद्दा है। उसके बाद भी नहीं हो रहा है। ये एक बड़ा सवाल है। सवाल: क्या हिंदुत्व के नाम पर वोट लेने वाले दलों को अब अपने धार्मिक वादों का रिपोर्ट कार्ड जनता के सामने रखना चाहिए? जनता के सामने अपना रिपोर्ट कार्ड रखना पड़ेगा। अब समय आ गया है, रिपोर्ट कार्ड देना ही पड़ेगा। उसके बाद में आपकी या तो छटनी होगी या प्रमोशन किया जाएगा। सवाल: क्या 2027 का चुनाव “राम मंदिर बनाम गौ रक्षा” की बहस में बदल सकता है? इस समय गौ रक्षा बहुत बड़ा मुद्दा है। इस समय देश में गौ रक्षा बड़ा मुद्दा है और बनेगा। लोग चाहते है अब ये काम हो जाए। सवाल: क्या संत समाज भाजपा से नाराज़ है या सिर्फ दबाव की राजनीति कर रहा है? भाजपा से पूरा संत समाज नाराज है। लेकिन कुछ संतों को आश्वासन देकर बरगलाया है। हम करेंगे और कुछ लोगों को दूसरे मामलों में उलझा करके रखा है। जिसके लिए ये आए थे, वो काम इन्होंने नहीं किया है। सवाल: अगर संत समाज खुलकर चुनावी मैदान में उतरता है, तो सबसे ज्यादा नुकसान किस दल को होगा? किसका नुकसान और फायदा होगा। ये राजनीति करने वाले लोग जाने। हमारे देश वहीं सरकार होनी चाहिए जो हमारी भावनाओं के अनुरूप हो। हमारी मांग ये है उनको गौ माता कहा जाए, पशु न कहा जाए। उनकी हत्या न की जाए। स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने बताया हमारी ये यात्रा 81 दिनों से चल रही है। उसके एक दिन गैप देकर के अपनी सेना के साथ लखनऊ में बैठक करेंगे। उसके बाद घोषणा करेंगे। गौ माता के मुद्दे को छोड़ेंगे नहीं, लड़ना जारी रखेंगे। 78 सालों से ये सरकार वो सरकार ये नेता वो नेता सबसे बात रख के देख ली। लेकिन हुआ कुछ नहीं। अब जब कोई कुछ करने के लिए तैयार नहीं है तो ये अब अंतिम निर्णय का समय आ गया है।



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नगर निगम के सशक्त स्थाई समिति सदस्यों का सम्मान: समस्तीपुर में पूर्व मंत्री बोले- विकास योजनाओं पर रखेंगे नजर, भ्रष्टाचार पर लगाएंगे रोक – Samastipur News




समस्तीपुर नगर निगम के कार्यकाल खत्म होने में अब महज 1 साल का समय रह गया है। अंतिम साल में सशक्त स्थाई समिति का चुनाव किया गया। जिसमें शिव कुमार शंभू, अर्चना कुमारी, रंजीत कुमार शाह, विकास कुमार, चंदन कुमार राफिया जबी, और ममता कुंवर सदस्य चुने गए। सशक्त स्थाई सदस्यों का सम्मान समारोह भारतीय जनता पार्टी के वरीय नेता मनोज कुमार गुप्ता के सौजन्य से रविवार को शहर के मोहनपुर रोड स्थित एक होटल में आयोजित हुआ। 25 पैसे का सामान ₹1 में खरीदा जा रहा मौके पर नवनिर्वाचित सदस्यों को मिथिला की संस्कृति के अनुसार पाग, चादर और गुलदस्ता भेंट कर उन्हें सम्मानित किया गया। इस मौके पर भाजपा नेता ने कहा कि समस्तीपुर नगर निगम में लूट मची हुई है। 25 पैसे का सामान ₹1 में खरीदा जा रहा है। पिछले 4 सालों में हुए सभी योजनाओं की जांच होनी चाहिए। उन्होंने दावा किया कि नगर निगम में भ्रष्टाचार के बहुत बड़े मामले का खुलासा होगा। मौके पर पूर्व मंत्री रामाश्रय सहनी ने कहा कि नगर निगम में भ्रष्टाचार पर वह लंबे समय से संघर्ष करते आ रहे हैं। सशक्त स्थाई समिति गठन को लेकर लंबे संघर्ष के बाद चुनाव संपन्न कराया गया। सशक्त स्थाई समिति के सदस्य अब किसी भी कीमत पर नगर निगम में लूट नहीं होने देंगे । सरकार की ओर से भेजी जा रहे राशि का सदुपयोग हो इस दिशा में काम किया जाएगा। विकास की योजनाएं समान रूप से सभी वार्डों में चलाई जाएगी। उन्होंने दावा किया कि नगर निगम की अध्यक्ष अनीता राम के वार्ड में सर्वाधिक राशि का खर्च किया गया है। इस पूरे मामले की जांच होनी चाहिए।



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पत्नी पर एसिड डाला, कैंची से चोटी काटी: लोहे की रॉड से पीटकर ली जान; बच्चे भी झुलसे, बचने के लिए गढ़ी थी झूठी कहानी – Barwani News




बड़वानी में चरित्र शंका के चलते पत्नी की हत्या का मामला सामने आया है। राजपुर थाना पुलिस ने 24 वर्षीय पत्नी पर एसिड फेंककर और लोहे की रॉड से पीटकर हत्या करने वाले पति को 24 घंटे के भीतर गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी ने अपने बच्चों पर भी एसिड फेंका था। यह घटना 29 मई 2026 को सामने आई, जब जिला अस्पताल बड़वानी से सालखेड़ा मोहनपुरा निवासी 24 वर्षीय पिंकी की एसिड से जलने के कारण मौत की सूचना मिली। पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की। शव पर चोट और एसिड के घाव तथा घटनास्थल के हालात और परिजनों के बयानों के आधार पर पुलिस ने इसे हत्या का मामला माना। आरोपी पति विजय चौहान के खिलाफ अपराध क्रमांक 325/2026, धारा 103(1), 109(2), 124(1) बीएनएस के तहत प्रकरण दर्ज किया गया।
घर से किया आरोपी को गिरफ्तार मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक पद्मविलोचन शुक्ल ने तत्काल गिरफ्तारी के निर्देश दिए। एएसपी धीरज बब्बर के मार्गदर्शन में एसडीओपी आयुष कुमार अलावा और टीआई माधवसिंह ठाकुर के नेतृत्व में एक विशेष टीम गठित की गई। वैज्ञानिक, तकनीकी और मुखबिर तंत्र की मदद से आरोपी की लोकेशन ट्रेस की गई। मुखबिर से सूचना मिली कि आरोपी मोहनपुरा इंद्रपुर स्थित अपने घर में छिपा है। पुलिस टीम ने दबिश देकर 31 वर्षीय विजय पिता झबरसिंह चौहान को घेराबंदी कर गिरफ्तार कर लिया। पूछताछ में आरोपी विजय चौहान ने अपना जुर्म कबूल कर लिया। लोहे की रॉड से पीटा, कैंची से चोटी काटी उसने बताया कि 28 मई की रात करीब 3:30 बजे पत्नी पिंकी के सो जाने के बाद उसने ड्रिप साफ करने वाला एसिड एक मग्गे में निकाला। दस्ताने पहनकर उसने सो रही पिंकी पर एसिड डाल दिया। पास सो रहे बच्चों पर भी एसिड फेंका, जिससे वे भी झुलस गए। एसिड से जलने पर जब पत्नी भागने लगी, तो आरोपी ने उसे लोहे की रॉड से बेरहमी से पीटा और कैंची से उसकी चोटी काट दी। सुबह जब पिंकी की हालत बिगड़ी, तो आरोपी ने एम्बुलेंस बुलाकर उसे राजपुर होते हुए बड़वानी अस्पताल ले गया, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। बचने के लिए मनगढ़ंत कहानी फैलाई खुद को बचाने के लिए आरोपी ने अखबारों में ‘चूहों द्वारा एसिड गिरने’ की मनगढ़ंत कहानी फैलाई और अस्पताल से फरार हो गया था। पुलिस ने आरोपी की निशानदेही पर हत्या में प्रयुक्त लोहे की रॉड, प्लास्टिक मग्गा, दस्ताने, कैंची और आरोपी के कपड़े जब्त कर लिए हैं। आरोपी को जेएमएफसी न्यायालय राजपुर के समक्ष पेश किया जा रहा है। ये भी देखें सोते परिवार पर गिरी एसिड गैलन, मां की मौत:दो बच्चे गंभीर रूप से झुलसे; डॉक्टर बोले-अगले 48 घंटे बच्चों के लिए बेहद अहम बड़वानी में गुरुवार-शुक्रवार की दरमियानी रात खेत में सो रहे एक परिवार पर ड्रिप लाइन साफ करने के लिए रखी एसिड की गैलन पलट गई। हादसे में एक महिला (मां) की मौत हो गई, जबकि उनके दो मासूम बच्चे गंभीर रूप से झुलस गए। मामला राजपुर थाना क्षेत्र के ग्राम मोहनपुरा का है। जानकारी के अनुसार, सालखेड़ा निवासी विजय चौहान (28) पत्नी पिंकी और बच्चों के साथ रात में जब परिवार सो रहा था, तभी अचानक गैलन पलट गई। परिवार मोहनपुरा स्थित खेत में रहकर खेती का काम करते हैं। गुरुवार रात खेत में ड्रिप लाइन साफ करने के लिए एसिड की गैलन लाकर रखी गई थी।



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कच्चे केले से बनती है मिथिलांचल की ‘वेज फिश’, स्वाद में मछली भी पड़ जाए फीकी, जानें रेसिपी


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कच्चे केले से बनती है मिथिलांचल की ‘वेज फिश’, स्वाद में मछली भी पड़ जाए फीकी

 

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मिथिलांचल में कच्चे केले से बनने वाली एक खास डिश काफी लोकप्रिय है, जिसे लोग ‘वेजीटेरियन मछली’ के नाम से जानते हैं. यह पूरी तरह शाकाहारी होती है, लेकिन इसका स्वाद मछली की करी जैसा माना जाता है. यही वजह है कि यह व्यंजन क्षेत्र के लोगों के बीच काफी पसंद किया जाता है. ‘वेज मछली’ बनाने के लिए सबसे पहले कच्चे केले को छीलकर मछली के टुकड़ों की तरह काट लें. इसमें हल्दी, नमक और लाल मिर्च मिलाकर 10 मिनट तक रखें. इसके बाद सरसों के तेल में सुनहरा होने तक तल लें. ग्रेवी बनाने के लिए सरसों, अदरक, लहसुन और प्याज को पीस लें. कड़ाही में सरसों का तेल गर्म कर मसाले को भूनें. फिर हल्दी, मिर्च, धनिया और गरम मसाला डालें. मसाला पकने के बाद पानी डालकर उबाल लें और तले हुए केले के टुकड़े डालकर 2-3 मिनट तक पकाएं. ऊपर से हरा धनिया डालकर परोसें.

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डूंगरपुर में हरे पेड़ काटकर तस्करी: लकड़ियों से भरा ट्रक और क्रेन जब्त, हिरासत में ड्राइवर – Dungarpur News




डूंगरपुर के सागवाड़ा थाना क्षेत्र के गोवाड़ी गांव में हरे पेड़ों की अवैध कटाई और लकड़ियों के परिवहन का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस ने मौके पर छापा मारकर हरी लकड़ियों से भरा एक ट्रक और लकड़ियां लोड करने में इस्तेमाल की गई क्रेन को जब्त किया है। इस मामले में ट्रक ड्राइवर को भी हिरासत में लिया गया है। डीएसटी प्रभारी पुलिस निरीक्षक मदनलाल के नेतृत्व में टीम ने यह कार्रवाई की। पुलिस को सूचना मिली थी कि क्षेत्र में विभिन्न प्रजातियों के हरे पेड़ों की अवैध कटाई कर उनकी लकड़ियों को गुजरात तस्करी के लिए भेजने की तैयारी की जा रही है। सूचना के आधार पर डीएसटी टीम ने मौके पर दबिश दी, जहां क्रेन की सहायता से हरी लकड़ियां ट्रक में भरी जा रही थीं। पुलिस ने गुजरात नंबर के ट्रक को लकड़ियों सहित और क्रेन को जब्त कर लिया। कार्रवाई के दौरान ट्रक ड्राइवर शंकरलाल पुत्र रंगाजी रोट, निवासी गरियाता, थाना चितरी को हिरासत में लिया गया। जब्त किए गए ट्रक, क्रेन और हिरासत में लिए गए ड्राइवर को अग्रिम कार्रवाई के लिए सागवाड़ा थाना पुलिस को सुपुर्द कर दिया गया है। साथ ही, मामले की जानकारी वन विभाग को भी दी गई है। पुलिस ने बताया कि पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने वाले तत्वों और हरे पेड़ों की अवैध कटाई करने वालों के खिलाफ अभियान लगातार जारी रहेगा। दोषियों के विरुद्ध सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी। डीएसटी टीम में प्रभारी मदनलाल के साथ मोहनपाल सिंह, मगन, जितेंद्र और अन्य पुलिसकर्मी शामिल रहे।



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दिल्ली में ‘प्रथम सिंधु कुंभ’ पुस्तक का विमोचन: विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता रहे, बोले-सांस्कृतिक परंपराओं और नैतिक मूल्यों में निहित – New Delhi News




नई दिल्ली में स्थित दिल्ली विश्वविद्यालय के शंकर लाल कॉन्सर्ट हॉल में रविवार को आयोजित एक भव्य समारोह में प्रथम सिंधु कुंभ, आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक महत्व पुस्तक का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि भारत की वास्तविक शक्ति केवल आर्थिक विकास और तकनीकी प्रगति में नहीं, बल्कि उसकी सभ्यतागत चेतना, सांस्कृतिक परंपराओं और नैतिक मूल्यों में निहित है। उन्होंने कहा कि देश की सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण केवल अतीत को याद करने का विषय नहीं, बल्कि राष्ट्र निर्माण की अनिवार्य आवश्यकता है। ‘भारत की शक्ति केवल आर्थिक वृद्धि और तकनीकी प्रगति में ही नहीं’ विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि यह कार्यक्रम केवल पुस्तक विमोचन तक सीमित नहीं है, बल्कि भारत की सांस्कृतिक चेतना और राष्ट्रीय आत्मा से पुनः जुड़ने का महत्वपूर्ण अवसर भी है। सिंधु दर्शन समिति द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में वरिष्ठ विचारक डॉ. इन्द्रेश कुमार, हिमालय परिवार के अध्यक्ष डॉ. दयालु महाराज सहित अनेक संत, शिक्षाविद, विद्वान और सामाजिक प्रतिनिधि मौजूद रहे। ‘सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण राष्ट्र निर्माण की अनिवार्य आवश्यकता’ विजेंद्र गुप्ता ने सिंधु दर्शन समिति की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि इस पुस्तक के माध्यम से सिंधु परंपरा के आध्यात्मिक और सांस्कृतिक महत्व को जन-जन तक पहुंचाने का महत्वपूर्ण कार्य किया गया है। उन्होंने कहा, भारत की शक्ति केवल आर्थिक वृद्धि और तकनीकी प्रगति में ही नहीं, बल्कि उसकी सभ्यतागत चेतना, सांस्कृतिक परंपराओं और नैतिक मूल्यों में भी निहित है।



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नेपाली पीएम बोले- हमने भी भारतीय जमीन पर कब्जा किया: सिर्फ भारत ने हमारे इलाके नहीं कब्जाए, लिपुलेख पर ब्रिटेन मध्यस्थ बने


काठमांडू42 मिनट पहले

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बालेन शाह इसी साल 5 मार्च को नेपाल के प्रधानमंत्री बने थे। करीब 2 महीने बाद उन्होंने पहली बार संसद को संबोधित किया।

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने रविवार को कहा कि सिर्फ भारत ने ही नेपाली जमीन पर कब्जा नहीं किया, बल्कि नेपाल ने भी कुछ भारतीय इलाकों पर कब्जा किया है।

बालेन पीएम बनने के 2 महीने बाद पहली बार नेपाली संसद को संबोधित कर रहे थे। काठमांडू पोस्ट के मुताबिक, इस दौरान एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री बनने के बाद उन्हें इस बारे में जानकारी मिली। दोनों देशों को मिलकर इस मामले की जांच करनी चाहिए।

भारत-चीन के बीच लिपुलेख और लिम्पियाधुरा मार्ग से होने वाले व्यापार पर शाह ने कहा कि विवाद का समाधान कूटनीतिक बातचीत से निकाला जाएगा। नेपाल इस मुद्दे पर भारत को राजनयिक नोट भेज चुका है और भारत की ओर से जवाब भी मिल चुका है।

शाह ने कहा कि लिपुलेख विवाद ब्रिटिश भारत के समय से जुड़ा है। इसलिए नेपाल ने इस मामले पर सिर्फ भारत और चीन ही नहीं, बल्कि ब्रिटेन से भी बातचीत की है।

काठमांडू का मेयर रहते हुए बालेन शाह ने ग्रेटर नेपाल का नक्शा अपने ऑफिस में लगाया था। इसमें हिमाचल के पश्चिमी कांगड़ा से लेकर पश्चिम बंगाल में पूर्वी तीस्ता के एरिया को ग्रेटर नेपाल का हिस्सा बताया गया है।

काठमांडू का मेयर रहते हुए बालेन शाह ने ग्रेटर नेपाल का नक्शा अपने ऑफिस में लगाया था। इसमें हिमाचल के पश्चिमी कांगड़ा से लेकर पश्चिम बंगाल में पूर्वी तीस्ता के एरिया को ग्रेटर नेपाल का हिस्सा बताया गया है।

पहली बार संसद को संबोधित किया

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह ने रविवार को नेपाल की संसद को संबोधित किया है। इस साल मार्च में हुए चुनावों के बाद सत्ता संभालने के बाद यह पहला मौका है, जब नेपाल के प्रधानमंत्री शाह ने संसद में अपनी बात रखी है।

दरअसल, विपक्षी दलों के सांसद लगातार मांग कर रहे थे कि प्रधानमंत्री संसद में आकर देश के महत्वपूर्ण मुद्दों पर अपनी बात रखें। इसके बाद बालेन शाह ने संसद को संबोधित किया और सांसदों के सवालों के जवाब दिए।

नेपाल में मार्च 2026 में बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनने के बाद से भारत और नेपाल के बीच पारंपरिक कूटनीतिक और रणनीतिक संबंधों में काफी बदलाव और असहजता देखी गई है।

4 घटनाएं जिसने भारत-नेपाल के रिश्ते पर असर डाला

1. लिपुलेख दर्रे से मानसरोवर यात्रा पर आपत्ति: भारत और चीन द्वारा लिपुलेख दर्रे के माध्यम से कैलाश मानसरोवर यात्रा को फिर से शुरू करने के फैसले पर बालेन शाह प्रशासन ने सख्त आपत्ति जताई। नेपाल के विदेश मंत्रालय ने कड़ा रुख अपनाते हुए दोहराया कि 1816 की सुगौली संधि के अनुसार लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा नेपाल का अभिन्न अंग हैं। पूरी खबर पढ़ें…

2. भारतीय विदेश सचिव को मिलने का समय न देना: मई 2026 में भारत के विदेश सचिव विक्रम मिस्री नेपाल के दौरे पर जाने वाले थे, ताकि वे प्रधानमंत्री मोदी की तरफ से बालेन शाह को भारत आने का आधिकारिक न्योता दे सकें। लेकिन पीएम बालेन शाह ने भारतीय विदेश सचिव को मुलाकात का समय देने से इनकार कर दिया, जिसके कारण भारत को यह दौरा टालना पड़ा।

3. भारतीय राजदूत से अलग से शिष्टाचार मुलाकात न करना: नेपाल में जब भी कोई नई सरकार बनती है, तो परंपरा के अनुसार वहां के नए पीएम भारतीय राजदूत से अलग से शिष्टाचार मुलाकात करते हैं। हालांकि, बालेन शाह ने भारतीय राजदूत से अलग मिलने के बजाय सभी विदेशी राजदूतों से एक साथ (सामूहिक रूप से) मुलाकात की। इससे नई दिल्ली को यह संदेश गया कि उनकी सरकार भारत को कोई विशेष या पारंपरिक तरजीह नहीं देना चाहती।

4. पहले वर्ष कोई विदेशी दौरा न करने की नीति: नेपाल में आम तौर पर परंपरा रही है कि पद संभलाने के बाद प्रधानमंत्री भारत का दौरा करते हैं। लेकिन बालेन ने कार्यभार संभालते ही यह घोषणा कर दी कि वे अपने कार्यकाल के पहले वर्ष किसी भी देश के आधिकारिक दौरे पर नहीं जाएंगे।

नेपाल का भारत के इन इलाकों पर कब्जा

1. उत्तराखंड

चम्पावत जिले में करीब 12.4 एकड़

2. बिहार

बिहार के पश्चिमी चंपारण जिले की लगभग 7100 एकड़

3. उत्तर प्रदेश

लखीमपुर खीरी, पीलीभीत, बहराइच और श्रावस्ती में करीब 500 एकड़

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नेपाली पीएम के 100 में से 88 वादे अधूरे:शपथ के 30 दिन में 2 मंत्रियों ने सरकार छोड़ी, जेन-जी बोले- क्या काबिल लोग नहीं

नेपाल के प्रधानमंत्री बालेन शाह को सत्ता संभाले अभी सिर्फ दो महीने हुए हैं, लेकिन उनकी सरकार पर सवाल उठने लगे हैं। बालेन ने 27 मार्च को शपथ लेने के बाद 100 पॉइंट सुधार एजेंडा लॉन्च किया था। हालांकि, प्रधानमंत्री कार्यालय की ट्रैकर वेबसाइट पर 88 वादे ओवरड्यू यानी तय समय से पीछे बताए जा रहे हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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80 KM वाले तूफान के लिए रहें तैयार, IMD का दिल्‍ली से बिहार तक बारिश का अलर्ट


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80 KM वाले तूफान के लिए रहें तैयार, IMD का दिल्‍ली से बिहार तक बारिश का अलर्ट

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AAJ Ka Mausam: उत्तर-पश्चिम भारत में मौसम का मिजाज और बिगड़ने वाला है. मौसम विभाग (IMD) ने राजस्थान में 80 किमी/घंटे की रफ्तार से तूफानी धूलभरी आंधी और अंधड़ चलने की गंभीर चेतावनी जारी की है. इसका असर दिल्ली-एनसीआर और पंजाब पर भी पड़ेगा, जहां 40-50 किमी/घंटे की रफ्तार से हवाएं चलेंगी. वहीं, हिमाचल और उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में भारी ओले गिरने का अलर्ट जारी किया गया है.

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बारिश के चलते लोगों को गर्मी से राहत मिली है. (PTI)

राजस्‍थान के आसमान में हमने धूल का एक बड़ा बवंडर उठते देखा. अब मौसम विभाग दावा कर रहा है कि रेगिस्तान की तपती रेत पर 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाएं चलने वाली हैं. IMD का कहना है कि प्रकृति एक बार फिर रौद्र रूप लेने जा रही है. राजस्थान की छाती पर धूल का गुबार खड़ा हो सकता है. जिसकी जद से दिल्ली-एनसीआर और पंजाब की सरहदें भी खुद को महफूज नहीं रख पाएंगी. जब मैदानी इलाकों में 80 की स्पीड से तूफानी थपेड़े चलेंगे, ठीक उसी वक्त उत्तराखंड और हिमाचल प्रदेश की हसीन वादियों में आसमान से सफेद आफत यानी ओलों का तांडव शुरू होगा. उत्‍तर भारत में इस वक्‍त गर्मी से राहत पाने के लिए लोगों में पहाड़ों की ओर रुख करने का ट्रेंड काफी ज्‍यादा है. ऐसे में घूमने फिरने के शौकीन लोगों को अलर्ट रहने की जरूरत है.

मौसम का महा-अलर्ट
मौसम विभाग (IMD) की रिपोर्ट के अनुसार, आगामी कुछ दिन देश के कई राज्यों के लिए बेहद संवेदनशील होने वाले हैं. प्रमुख राज्यों में स्थिति कुछ इस प्रकार रहेगी:
• राजस्थान (तूफानी बवंडर): राज्य के कई हिस्सों में 80 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से धूलभरी आंधी (Dust Storm) और थंडरस्कॉल चलने की गंभीर चेतावनी दी गई है.
• दिल्ली-एनसीआर (राहत के साथ आफत): राजधानी में 40 से 50 किमी/घंटा की रफ्तार से तूफानी हवाएं चलेंगी. हालांकि इससे गर्मी से कुछ राहत मिलेगी, लेकिन बारिश और कड़कती बिजली का खतरा बना रहेगा.
• पंजाब और हरियाणा (अंधड़ और बौछारें): पंजाब, हरियाणा और जम्मू-कश्मीर में तेज हवाओं के साथ गरज-चमक और बारिश का दौर शुरू होने वाला है.
• उत्तराखंड और हिमाचल (आसमानी आफत): इन पहाड़ी राज्यों के ऊंचाई वाले इलाकों में भारी मात्रा में ओले गिरने और तेज आंधी का ऑरेंज अलर्ट जारी किया गया है.
• तटीय आंध्र प्रदेश (70 की रफ्तार): दक्षिण भारत के इस हिस्से में हवा की रफ्तार 70 किमी/घंटा तक जा सकती है, जिससे तटीय इलाकों में अलर्ट है.

गहराता मौसम का संकट
इस बार का मौसम चक्र बेहद अप्रत्याशित नजर आ रहा है. एक तरफ जहां मानसून अरब सागर और बंगाल की खाड़ी के रास्ते केरल, तमिलनाडु और लक्षद्वीप की ओर तेजी से कदम बढ़ा रहा है, वहीं दूसरी तरफ उत्तर-पश्चिम भारत में बने कम दबाव के क्षेत्र और पश्चिमी विक्षोभ ने मिलकर मैदानी इलाकों को बवंडर के मुहाने पर लाकर खड़ा कर दिया है.

इस मौसमी उथल-पुथल का सबसे बड़ा असर हमारी अर्थव्यवस्था और आम जनजीवन पर पड़ने वाला है. 80 किमी/घंटे की हवाएं कमजोर मकानों, होर्डिंग्स और बिजली के खंभों को पलक झपकते ही मलबे में तब्दील कर सकती हैं. पहाड़ों में गिरने वाले ओले से सेब और अन्य नकदी फसलों को भारी नुकसान होने की आशंका है, जिसके लिए IMD ने किसानों को विशेष चेतावनी जारी की है. इसके साथ ही महाराष्ट्र के चंद्रपुर में पारा जहां 44.8°C तक जा पहुंचा है, वहीं देहरादून में यह न्यूनतम 17°C दर्ज हुआ है जो देश के भीतर मौसम के इस भारी विरोधाभास को साफ दर्शाता है.

राजस्थान के लिए मौसम विभाग ने विशेष रूप से क्या चेतावनी जारी की है?
मौसम विभाग (IMD) ने राजस्थान के कई हिस्सों के लिए धूलभरी आंधी (Dust Storm) का अलर्ट जारी किया है, जिसमें हवाओं की रफ्तार 80 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है. निवासियों को इस दौरान घरों के अंदर रहने की सलाह दी गई है.
क्या इस तूफानी मौसम से दिल्ली-एनसीआर को गर्मी से कोई राहत मिलेगी?
हां, दिल्ली में 40-50 किमी/घंटे की रफ्तार से चलने वाली हवाओं और गरज-चमक के साथ होने वाली छिटपुट बारिश से भीषण गर्मी और उमस से कुछ राहत जरूर मिलेगी, लेकिन इस दौरान तेज हवाओं के कारण सतर्क रहने की जरूरत है.
हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड जैसे पहाड़ी राज्यों में पर्यटकों और स्थानीय लोगों के लिए क्या खतरा है?
हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में भारी ओलावृष्टि (Hailstorm) और थंडरस्टॉर्म की चेतावनी है. ऐसे में भूस्खलन (Landslide) का खतरा बढ़ जाता है, इसलिए पर्यटकों को यात्रा टालने और सुरक्षित स्थानों पर रहने की सलाह दी गई है.
मौसम विभाग ने किसानों और आम नागरिकों को इस आपात स्थिति से निपटने के लिए क्या गाइडलाइंस दी हैं?
IMD ने नागरिकों को आंधी-तूफान के समय घरों के भीतर रहने, जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहने की सलाह दी है. साथ ही, किसानों को अपनी कटी हुई फसलों को सुरक्षित स्थानों पर रखने, ओलावृष्टि से बचाने और पशुधन को सुरक्षित छायादार स्थानों पर पर्याप्त पानी के साथ बांधने का आग्रह किया है.

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Sandeep GuptaChief Sub Editor

डिजिटल पत्रकारिता में खबरों की गहरी समझ रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. 16 वर्षों से सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में इन्होंने अपनी कलम से जटिल विषयों को …और पढ़ें



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‘फोन पर फूट-फूट कर रोती थीं’, मां श्रीदेवी को याद कर इमोशनल हुईं जाह्नवी कपूर


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श्रीदेवी सुपरस्टार होने के बावजूद घर-परिवार के लिए समर्पित थीं. उन्होंने कभी अपने स्टारडम का बोझ बच्चों पर नहीं आने दिया. एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर ने एक इंटरव्यू में जब अपनी दिवंगत मां श्रीदेवी को याद किया, तो उनके कई इमोशनल यादों से यही बयां हुआ. जाह्नवी कपूर अपनी अगली फिल्म ‘पेड्डी’ में राम चरण के साथ काम करना का अनुभव भी बयां किया. जाह्नवी का मानना है कि श्रीदेवी जैसा कोई दूसरा नहीं हो सकता, वह सिर्फ उनकी विरासत का सम्मान करना चाहती हैं. आज भी वह कैमरे के सामने और तिरुपति मंदिर में अपनी मां को सबसे करीब महसूस करती हैं.

नई दिल्ली: जाह्नवी कपूर इन दिनों अपनी नई तेलुगु फिल्म ‘पेड्डी’ को लेकर काफी चर्चा में हैं. उन्होंने हाल में एक इंटरव्यू में अपनी मां यानी दिग्गज एक्ट्रेस श्रीदेवी को याद किया. जाह्नवी कपूर ने बताया कि सुपरस्टार होने के बावजूद उनकी मां घर-परिवार के लिए कितनी समर्पित थीं और आज भी वो अपनी मां को कहां सबसे करीब पाती हैं. (फोटो साभार: Instagram@janhvikapoor)

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जाह्नवी कपूर ने बचपन के दिनों को याद करते हुए कहा कि उन्हें पता तो था कि उनकी मां बहुत मशहूर हैं, लेकिन उनकी स्टारडम का असली अंदाजा नहीं था. श्रीदेवी स्वभाव से काफी शर्मीली थीं, मगर कैमरे के सामने उनका कोई मुकाबला नहीं था. 4 साल की उम्र से काम करने वाली श्रीदेवी ने जब घर बसाने का फैसला किया, तो वो पूरी तरह फैमिली में ही रम गईं. (फोटो साभार: Instagram@janhvikapoor)

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जाह्नवी कपूर को अपनी मां की यही खूबी सबसे ज्यादा पसंद थी कि वो जो भी करती थीं, पूरे दिल से करती थीं. उन्होंने अपने करियर को पीछे छोड़कर एक मां और पत्नी की जिम्मेदारी बखूबी संभाली. जाह्नवी और खुशी के बड़े होने और श्रीदेवी के दोबारा फिल्मों में लौटने तक घर का माहौल ऐसा ही था. (फोटो साभार: Instagram@janhvikapoor)

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जाह्नवी ने ‘टाइम्स नाउ’ को दिए इंटरव्यू में ‘इंग्लिश विंग्लिश’ की शूटिंग का एक इमोशनल किस्सा भी शेयर किया. न्यूयॉर्क में शूटिंग का शेड्यूल बदलने की वजह से श्रीदेवी अपनी बेटी खुशी और पति बोनी कपूर का बर्थडे मिस कर गई थीं. वो इस बात पर इतनी दुखी हुईं कि पूरे एक हफ्ते तक हर दिन पैकअप के बाद फोन पर रोती थीं.
(फोटो साभार: Instagram@janhvikapoor)

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जाह्नवी ने बताया कि श्रीदेवी कभी भी अपने स्टारडम का घमंड घर नहीं लाती थीं. उनका पूरा ध्यान इस बात पर रहता था कि बाजार से अच्छी मछली लाकर चटनी के साथ परिवार के लिए क्या बनाया जाए. वो बोनी कपूर के सिर में प्यार से तेल मालिश भी किया करती थीं ताकि उनके बाल वापस आ जाएं.(फोटो साभार: Instagram@janhvikapoor)

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फिल्म ‘पेड्डी’ के बारे में बात करते हुए जाह्नवी ने बताया कि इसमें वो राम चरण के साथ काम कर रही हैं. यह उनके लिए बहुत इमोशनल पल है क्योंकि राम चरण के पिता चिरंजीवी और श्रीदेवी ने भी कई सुपरहिट फिल्मों में साथ काम किया था. दोनों परिवारों के संस्कार काफी मिलते-जुलते हैं.
(फोटो साभार: Instagram@janhvikapoor)

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जब जाह्नवी से उनकी मां के साथ होने वाली तुलना पर सवाल किया गया, तो उन्होंने साफ कहा कि श्रीदेवी जैसा कोई दूसरा नहीं हो सकता. लोग सिर्फ देखते हैं कि क्या वो अपनी मां की विरासत को आगे बढ़ा पाएंगी. जाह्नवी कपूर का मानना है कि वो बस पूरी मेहनत से अपनी मां का नाम रोशन करना चाहती हैं. (फोटो साभार: Instagram@janhvikapoor)

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जाह्नवी ने आखिर में बताया कि मां के जाने का गम कभी कम नहीं होता, लेकिन दो जगहें ऐसी हैं जहां वो श्रीदेवी को अपने सबसे करीब महसूस करती हैं. पहली जगह है कैमरे के सामने एक्टिंग करना और दूसरी जगह है तिरुपति मंदिर जाना. इन दोनों जगहों पर जाकर उन्हें सबसे ज्यादा शांति और अपनी मां का अहसास मिलता है. (फोटो साभार: Instagram@janhvikapoor)

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क्या देश में खत्म हुई क्रूड ऑयल की किल्लत, एक्सपोर्ट ड्यूटी घटाकर सरकार ने कर दिया इशारा?


नई दिल्ली. सरकार ने पेट्रोल, डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर लगने वाली ड्यूटी में कटौती कर दी है. 1 जून से शुरू होने वाले अगले पखवाड़े के लिए  पेट्रोल के निर्यात पर 1.5 रुपये प्रति लीटर शुल्‍क लगेगा. वहीं, डीजल पर 13.5 रुपये प्रति लीटर और एविएशन टर्बाइन फ्यूल (ATF) के निर्यात पर 9.5 रुपये प्रति लीटर एक्सपोर्ट ड्यूटी देनी होगी. इस फैसले के बाद एक बड़ा सवाल खड़ा हो गया है. क्या भारत के पास अब कच्चे तेल की इतनी पर्याप्त आपूर्ति होने लगी है कि वह पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात को बढ़ावा देने की स्थिति में पहुंच गया है. या फिर इसके पीछे कोई दूसरी मजबूरी और रणनीति काम कर रही है.

पहली नजर में यह फैसला थोड़ा हैरान करने वाला लगता है. वजह यह है कि पश्चिम एशिया में तनाव अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया की सबसे अहम तेल आपूर्ति लाइन बना हुआ है और भारत अपनी जरूरत का 85 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है. ऐसे माहौल में सामान्य सोच यही कहती है कि सरकार को घरेलू बाजार के लिए ईंधन बचाने पर जोर देना चाहिए, न कि निर्यात को बढ़ावा देने पर.

क्या भारत में कच्चे तेल की आपूर्ति बढ़ गई है?

असलियत यह है कि भारत में घरेलू कच्चे तेल का उत्पादन कोई बड़ी छलांग नहीं लगा रहा है. देश आज भी अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए बड़े पैमाने पर आयात पर निर्भर है. इसलिए निर्यात शुल्क में कटौती का मतलब यह नहीं है कि भारत अचानक तेल उत्पादन में आत्मनिर्भर हो गया है या उसके पास अतिरिक्त कच्चे तेल का भंडार जमा हो गया है.

दरअसल भारत दुनिया के सबसे बड़े रिफाइनिंग केंद्रों में शामिल है. भारत बड़ी मात्रा में कच्चा तेल खरीदता है, उसे रिफाइन करता है और फिर पेट्रोल, डीजल तथा अन्य उत्पादों के रूप में दुनिया के कई देशों को बेचता है. यही वजह है कि कच्चा तेल आयात करने वाला देश होने के बावजूद भारत पेट्रोलियम उत्पादों का बड़ा निर्यातक भी है.

फिर सरकार ने टैक्स क्यों घटाया?

इसका जवाब रिफाइनिंग कंपनियों के कारोबार में छिपा है. जब निर्यात पर ड्यूटी ज्यादा होती है तो रिफाइनरियों का मार्जिन घट जाता है. इससे उनके लिए अंतरराष्ट्रीय बाजार में प्रतिस्पर्धा करना मुश्किल हो जाता है. सरकार समय-समय पर वैश्विक कीमतों और बाजार की स्थिति के आधार पर इन ड्यूटी को घटाती या बढ़ाती रहती है.

संकेत यह हैं कि फिलहाल सरकार को घरेलू बाजार में ईंधन की उपलब्धता को लेकर तत्काल कोई बड़ा संकट नहीं दिख रहा. इसलिए उसने रिफाइनिंग कंपनियों को कुछ राहत देने का फैसला किया है. हालांकि ड्यूटी पूरी तरह खत्म नहीं की गई है, बल्कि सिर्फ कम की गई है. इसका मतलब सरकार अभी भी हालात पर नजर बनाए हुए है.

एक और वजह

वैश्विक अनिश्चितताओं और कीमतों में भारी उछाल के बावजूद, भारत का क्रूड ऑयल इम्पोर्ट बढ़ा है. मई के आंकड़ों के मुताबिक, भारत का तेल आयात 11.2% बढ़कर 5.04 मिलियन बैरल प्रति दिन के स्तर पर पहुंच गया है. यह इस पूरे युद्ध काल का सबसे उच्चतम स्तर माना जा रहा है.रिफाइनरियों ने घरेलू स्टॉक को सुरक्षित करने के लिए खरीदारी तेज की है. यानी स्थिति अभी भले ही एकदम सामान्य न हो लेकिन पहले से बेहतर जरूर हुई है.

क्या इससे भारत में महंगाई बढ़ सकती है?

यही सबसे अहम चिंता है. अगर ज्यादा पेट्रोलियम उत्पाद निर्यात होने लगते हैं और घरेलू बाजार में आपूर्ति पर दबाव बनता है तो डीजल और पेट्रोल की कीमतों पर असर पड़ सकता है. खासतौर पर डीजल भारत की अर्थव्यवस्था की धुरी माना जाता है. ट्रकों से लेकर खेती और उद्योग तक, बड़ी गतिविधियां डीजल पर निर्भर हैं. अगर डीजल महंगा होता है तो माल ढुलाई की लागत बढ़ती है. इसका असर सब्जियों, अनाज, दूध और रोजमर्रा की वस्तुओं तक पहुंच सकता है. यानी महंगाई का जोखिम पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है. लेकिन भारत ने अपना काफी इम्पोर्ट डायवर्सिफाई कर दिया है और आयात लगभग नॉर्मल हो गया इसलिए निकट भविष्य में यह कोई परेशानी का कारण बनता नहीं नजर आता है.

सरकार का दांव क्या है?

सरकार फिलहाल एक संतुलन बनाने की कोशिश कर रही है. एक तरफ वह रिफाइनिंग सेक्टर की कमाई और निर्यात प्रतिस्पर्धा को बनाए रखना चाहती है, वहीं दूसरी तरफ घरेलू बाजार में कीमतों को भी नियंत्रण में रखना चाहती है. यही कारण है कि निर्यात शुल्क में सीमित कटौती की गई है, कोई बड़ा और आक्रामक फैसला नहीं लिया गया.

आगे क्या देखना होगा?

आने वाले हफ्तों में तीन चीजें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण रहेंगी. पहली, कच्चे तेल की अंतरराष्ट्रीय कीमतें किस दिशा में जाती हैं. दूसरी, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल आपूर्ति सामान्य रहती है या नहीं. और तीसरी, रुपये की चाल कैसी रहती है. अगर पश्चिम एशिया का संकट दोबारा गहराता है, तेल की कीमतें तेज उछाल लेती हैं या रुपये पर दबाव बढ़ता है, तो सरकार फिर से निर्यात ड्यूटी बढ़ाने जैसे कदम उठा सकती है. इसलिए आज की कटौती को भारत में तेल की भरमार का संकेत मानना गलत होगा. यह ज्यादा एक कारोबारी और रणनीतिक फैसला दिखता है, जिसका मकसद रिफाइनिंग उद्योग और घरेलू जरूरतों के बीच संतुलन बनाना है.



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