Friday, August 21, 2026
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पटना में प्रेमजाल में फंसाकर 70 लाख की साइबर ठगी: फेसबुक पर दोस्ती, फिर ऑनलाइन बिजनेस में निवेश कराया; पैसे मिलते ही युवती फरार – Patna News




पटना में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। फेसबुक पर एक युवती से दोस्ती के बाद एक युवक को ऑनलाइन बिजनेस में निवेश कर मोटा मुनाफा कमाने का झांसा दिया गया। भरोसा कायम होने के बाद युवक ने अपनी वर्षों की जमा पूंजी से करीब 70 लाख रुपये निवेश कर दिए। रकम वापस निकालने की कोशिश की तो ठगी का खुलासा हुआ। पीड़ित ने मामले की शिकायत साइबर थाने में दर्ज कराई है। पीड़ित मूल रूप से गया का रहने वाला है और वर्ष 2006 से पटना में एक निजी कंपनी में काम कर रहा है। फेसबुक पर पहले दोस्ती, फिर प्रेम का इजहार पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक, फेसबुक पर एक युवती ने उसे फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी थी। प्रोफाइल सामान्य लगने पर उसने रिक्वेस्ट स्वीकार कर ली। इसके बाद दोनों के बीच मैसेंजर पर बातचीत शुरू हुई। शुरुआत में दोनों के बीच सामान्य बातचीत होती थी। धीरे-धीरे युवती ने व्यक्तिगत बातें करनी शुरू कर दीं और युवक के प्रति प्रेम का इजहार भी किया। लगातार बातचीत के कारण युवक का उस पर भरोसा बढ़ता गया। इसके बाद युवती ने उसका मोबाइल नंबर लिया। दोनों फोन और फिर व्हाट्सऐप पर बातचीत करने लगे। वीडियो कॉल के जरिए भी संपर्क होने लगा। इसी दौरान युवती ने उसका भरोसा पूरी तरह जीत लिया। ‘ई-रोजर शॉप’ में निवेश का दिया झांसा भरोसा कायम होने के बाद युवती ने युवक को ऑनलाइन बिजनेस के जरिए अच्छी कमाई का ऑफर दिया। उसने ‘ई-रोजर शॉप’ नाम के ऑनलाइन बिजनेस मॉडल के बारे में बताया और दावा किया कि इसमें पैसा लगाकर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। युवक उसके झांसे में आ गया और उसने शुरुआत में छोटी रकम निवेश की। उसे कथित तौर पर बताया गया कि उसके निवेश पर मुनाफा हो रहा है और खाते में रकम लगातार बढ़ रही है। मुनाफे की बातों में आकर युवक ने धीरे-धीरे बड़ी रकम निवेश किया। उसे लगातार यही बताया जाता रहा कि उसका पैसा सुरक्षित है और निवेश के साथ उसका रिटर्न बढ़ रहा है। 70 लाख लगाए, निकालने की कोशिश की तो खुला राज

मुनाफे के लालच और अंजान युवती पर अधिक भरोसे के चलते युवक ने अपनी जिंदगी भर की जमा पूंजी से करीब 70 लाख रुपए ऑनलाइन बिजनेस में लगा दिए। उसे उम्मीद थी कि निवेश के बाद उसे अच्छी रकम वापस मिलेगी। जब उसने निवेश की रकम वापस निकालने की कोशिश की तो पैसे नहीं निकले। इसके बाद उसे शक हुआ। उसने युवती से संपर्क कर रकम वापस मांगी, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उसने युवती से संपर्क करने की कोशिश की और निवेश की गई रकम वापस मांगने लगा। जब पैसे वापस नहीं मिले तो उसे समझ में आया कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुका है। ठगी का एहसास होने के बाद युवक के पैरों तले जमीन खिसक गई। नौकरी कर वर्षों से जमा की गई उसकी बड़ी रकम एक झटके में चली गई थी। साइबर थाने में शिकायत, जांच शुरू ठगी का एहसास होने के बाद युवक ने पटना साइबर थाने में लिखित शिकायत दी। उसने पुलिस को फेसबुक और व्हाट्सऐप पर हुई बातचीत से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई है। साथ ही उस मोबाइल नंबर की जानकारी भी पुलिस को दी गई है, जिससे युवती उससे बातचीत करती थी। पुलिस अब मोबाइल नंबर, डिजिटल लेनदेन और जिन खातों में रकम ट्रांसफर हुई है, उनकी जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि युवती कौन है और कहीं इसके पीछे कोई संगठित साइबर ठगी गिरोह तो काम नहीं कर रहा। सोशल मीडिया की दोस्ती से रहें सावधान यह मामला सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से दोस्ती और ऑनलाइन निवेश के नाम पर होने वाली ठगी के खतरे को सामने लाता है। साइबर अपराधी पहले दोस्ती या भावनात्मक संबंध बनाकर भरोसा हासिल करते हैं और बाद में निवेश या बिजनेस में अधिक मुनाफे का लालच देकर बड़ी रकम ट्रांसफर करा लेते हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि सोशल मीडिया पर मिले किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर निवेश न करें। किसी भी ऑनलाइन बिजनेस या निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले उसकी स्वतंत्र रूप से जांच करें और असामान्य रूप से अधिक मुनाफे के दावे को ठगी का संभावित संकेत मानें।



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जनवरी में आई थी खबर, जुलाई तक सोता रहा सिस्टम: बालाघाट में जानलेवा बनी मिजल्स-रूबेला बीमारी; 20 बैगा बच्चों की मौत की 5 वजह – Madhya Pradesh News


मिजल्स-रूबेला बीमारी से सबसे ज्यादा प्रभावित अडोरी, मछुरदा और लालपुर ग्राम पंचायतें हैं।

बालाघाट के बिरसा ब्लॉक में मिजल्स-रूबेला से विशेष संरक्षित बैगा आदिवासी परिवारों के 20 बच्चों की मौत हो चुकी है। प्रशासन को बच्चों में बीमारी की जानकारी जनवरी 2026 में ही मिल गई थी, लेकिन प्रभावी कार्रवाई में देरी हुई।

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बिरसा ब्लॉक के आदिवासी गांवों में बीमारी फैलने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी नहीं थी। 22 जुलाई को अडोरी के सरपंच परशुराम धुर्वे ने एसडीएम को फोन कर स्थिति बताई। इसके बाद उसी दिन स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची और 23 जुलाई से इलाज शुरू हुआ।

स्वास्थ्य टीम के पहुंचने तक 9 बच्चों की मौत हो चुकी थी। बीमारी आसपास के गांवों तक फैल चुकी थी और कई परिवारों में बच्चे बीमार थे। कुछ बच्चों की हालत इतनी गंभीर थी कि अस्पताल पहुंचने के बाद भी उनकी जान नहीं बच सकी।

भास्कर की इस रिपोर्ट में जानिए कि बीमारी की जानकारी मिलने के बावजूद कार्रवाई में कहां चूक हुई? स्वास्थ्य, टीकाकरण और पोषण की योजनाएं जमीन पर क्यों असर नहीं दिखा सकीं?

बच्चों की मौत के पीछे 5 बड़ी वजहें

1. अस्पताल दूर, झोलाछाप डॉक्टर पर निर्भरता

बीमारी से सबसे ज्यादा प्रभावित अडोरी, मछुरदा और लालपुर ग्राम पंचायतें हैं। यहां से प्राथमिक उप स्वास्थ्य केंद्र 15 से 20 किमी और कम्युनिटी अस्पताल 35 से 40 किमी दूर है। इतनी दूरी के कारण कई परिवार झोलाछाप डॉक्टरों या पारंपरिक इलाज पर निर्भर थे।

सरकारी टीम के पहुंचने के बाद भी कई परिवार इलाज के लिए तैयार नहीं थे। उन्हें समझाने में समय लगा, जिससे गंभीर मरीजों के अस्पताल पहुंचने में देरी हुई।

2. समय पर नहीं मिली मिजल्स-रूबेला की जानकारी

ICMR यानी भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद की रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चों की मौत मिजल्स-रूबेला (खसरा) से हुई। बच्चों में त्वचा पर इसके लक्षण भी मिले। गांवों में आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं का नेटवर्क होने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग को प्रकोप की जानकारी समय पर नहीं मिल सकी।

3. जागरूकता की कमी, टीकाकरण में चूक

मिजल्स-रूबेला से बचाव के लिए बच्चों को 9 महीने और 2 साल की उम्र में टीके लगाए जाते हैं। लेकिन पड़ताल में कई ऐसे गांव सामने आए, जहां बच्चों का टीकाकरण नहीं हुआ था। कई क्षेत्रों में ANM की तैनाती भी नहीं है। इसके अलावा परिवारों का पलायन, जागरूकता की कमी और टीकाकरण को लेकर हिचकिचाहट भी वैक्सीनेशन कवरेज कम रहने की वजह रही।

4. कुपोषण से प्रतिरोधक क्षमता कम हुई

इस क्षेत्र के कई बच्चे गंभीर कुपोषण से जूझ रहे थे। कुपोषित बच्चों को मिलने वाला सरकारी पोषण आहार भी कई महीनों से नहीं मिला था। कुपोषण के कारण बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हुई, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ा।

5. बिरसा ब्लॉक को नहीं मिली जनमन एम्बुलेंस

PVTG यानी विशेष रूप से संवेदनशील जनजातीय समूह के लिए प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत मोबाइल एम्बुलेंस की व्यवस्था है। इसमें एमबीबीएस डॉक्टर समेत स्वास्थ्यकर्मी तैनात होते हैं। बालाघाट में ऐसी 4 एम्बुलेंस हैं, लेकिन बैगा आबादी वाले बिरसा ब्लॉक को इनमें से एक भी नहीं मिली।

किस स्तर पर क्या चूक हुई?

तत्कालीन कलेक्टर: हेल्थ कैंप की मॉनिटरिंग पर सवाल

जनवरी 2026 में मीडिया के जरिए तत्कालीन कलेक्टर मृणाल मीणा को बच्चों में त्वचा संबंधी बीमारी की जानकारी मिली थी। जनवरी-फरवरी में हेल्थ कैंप लगाए गए, लेकिन फरवरी के बाद कैंप बंद हो गए। सवाल यह है कि कैंप के बाद बीमारी की निगरानी क्यों जारी नहीं रही? यदि उसी समय मिजल्स के प्रकोप की पहचान हो जाती, तो समय पर उपचार की संभावना बन सकती थी।

सीएमएचओ, जिला टीकाकरण अधिकारी: वैक्सीनेशन पर ध्यान नहीं

विशेष संरक्षित जनजाति क्षेत्र होने के बावजूद टीकाकरण की जमीनी स्थिति पर सवाल हैं। सीएमएचओ परेश उपलव के मुताबिक, क्षेत्र में 80% टीकाकरण हुआ जबकि पड़ताल में दर्जनों ऐसे परिवार मिले, जिनके बच्चों को एक भी टीका नहीं लगा था। सरकार के टीकाकरण अभियान के बावजूद कई बच्चों तक मिजल्स-रूबेला का टीका क्यों नहीं पहुंचा, इस पर सीएमएचओ से स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका।

बीएमओ: बीमारी की जानकारी ही नहीं मिली

रिपोर्ट के मुताबिक, त्रासदी से पहले बीएमओ निमिष गौतम ने इन सुदूर क्षेत्रों का दौरा नहीं किया था। उन्हें क्षेत्र में बीमारी की जानकारी सरपंच के एसडीएम को फोन करने के बाद मिली।

जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी: आंकड़ों पर नजर नहीं रखी

बैगा परिवारों को पोषण आहार नहीं मिलने और बच्चों की मौत के आंकड़ों की निगरानी को लेकर विभाग की भूमिका पर सवाल उठते हैं। स्थानीय आशा और ANM कार्यकर्ताओं के जन्म-मृत्यु रजिस्टर में बच्चों की मौत दर्ज थी, लेकिन इस डेटा पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई, यह भी जांच का विषय है।

जब स्थिति ज्यादा खराब हुई तो बच्चों और महिलाओं को अस्पताल में भर्ती कराया गया।

जब स्थिति ज्यादा खराब हुई तो बच्चों और महिलाओं को अस्पताल में भर्ती कराया गया।

प्रशासन बोला- इलाका चुनौतीपूर्ण है, बीमारी पर नियंत्रण किया

बालाघाट के वर्तमान कलेक्टर कुमार सत्यम ने कहा कि यह स्वास्थ्य के लिहाज से चुनौतीपूर्ण इलाका है। यह मलेरिया प्रभावित क्षेत्र है, जहां हर साल सितंबर, अक्टूबर और नवंबर में मेडिकल कैंप लगाए जाते हैं। इस साल भी इसकी तैयारी थी। नई बीमारी की जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य टीम को सक्रिय किया गया और स्थिति को नियंत्रित किया गया।

उन्होंने ब्लॉक में बच्चों के कुपोषित होने की बात भी स्वीकार की और कहा- कुपोषण से निपटने के लिए मध्यम और दीर्घकालीन योजना बनाई जा रही है। स्वास्थ्य टीमें घर-घर जाकर कुपोषित बच्चों की पहचान और उपचार कर रही हैं। जिन तीन गांवों में बच्चों की मौत हुई, वहां स्थिति नियंत्रण में है।

पीने के पानी के स्रोतों की पहचान कर क्लोरीनेशन किया जा रहा है और मच्छरों की रोकथाम के लिए फॉगिंग कराई जा रही है।

मामले से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…

रहस्यमयी बीमारी…8 बच्चों की मौत, कारण नहीं ढूंढ पाए डॉक्टर

बालाघाट जिले के आदिवासी इलाकों में रहस्यमयी बीमारी के चलते 26 जून से अब तक 8 बच्चों की जान चली गई है। जबलपुर मेडिकल कॉलेज और बालाघाट के डॉक्टरों की टीम ने प्रभावित इलाकों का दौरा किया। टीम के मुताबिक, बीमार बच्चों में न्युमोनिया, एनीमिया यानी खून की कमी, डिहाइड्रेशन, बुखार, खुजली, मलेरिया और किडनी पर असर जैसे लक्षण मिले हैं। पढे़ं पूरी खबर…



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बिना मैदा बनाए कुरकुरे समोसे, स्वाद और सेहत दोनों के लिए बेस्ट, जानें रेसिपी

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यदि आप भी समोसे को सिर्फ इसलिए नहीं खाते हैं क्योंकि ये मैदे से बने होते हैं, तो ये लेख आपके लिए है. यहां हम आपको समोसे की एक ऐसी रेसिपी बता रहे हैं, जिससे आप बिना मैदा समोसा बना सकते हैं. खास बात ये है कि इस समोसे को खाने आपको फायदे भी मिलेंगे. चलिए जानते हैं बिना मैदा समोसे कैसे बनाए जाते हैं.

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बारिश का मौसम आते ही शाम की चाय के साथ कुछ गरमागरम और कुरकुरा खाने का मन करने लगता है. ऐसे में समोसा ज्यादातर लोगों की पहली पसंद होता है. लेकिन मैदा और ज्यादा तेल में डीप फ्राई होने के कारण इसे अक्सर खाने से बचते हैं. ऐसे में रागी से बना समोसा ट्राई कर सकते हैं.

रागी को फिंगर मिलेट भी कहा जाता है और इसमें फाइबर, कैल्शियम और आयरन जैसे पोषक तत्व पाए जाते हैं. रागी के आटे से तैयार समोसा स्वाद में भी अच्छा लगता है और यह आपको लंबे समय तक पेट भरा महसूस कराने में मदद कर सकता है. हालांकि इसे भी तेल में तला जाता है, इसलिए इसे संतुलित मात्रा में खाना बेहतर है। आइए जानते हैं घर पर रागी समोसा बनाने का आसान तरीका.

रागी समोसे के लिए तैयार करें स्टफिंग
सबसे पहले समोसे के अंदर भरने वाली स्टफिंग तैयार करें. इसके लिए एक पैन में थोड़ा तेल गर्म करें और उसमें जीरा डालें. जीरा चटकने लगे तो बारीक कटी हरी मिर्च और प्याज डालकर हल्का भून लें. अब इसमें हल्दी और स्वादानुसार नमक डालें. इसके बाद उबले हुए आलू को मैश करके डालें और साथ में हरी मटर भी मिला दें. सभी सामग्री को अच्छी तरह मिलाकर कुछ मिनट तक पकाएं. स्वाद बढ़ाने के लिए आखिर में थोड़ा इमली का अर्क डाल सकते है. इससे स्टफिंग में हल्का खट्टा स्वाद आएगा. तैयार मिश्रण को ठंडा होने के लिए रख दें.

ऐसे तैयार करें रागी का आटा
एक बड़े बर्तन में रागी का आटा लें. इसमें थोड़ा गेहूं का आटा, जीरा, सौंफ और नमक मिलाएं. अब एक बड़ा चम्मच गर्म तेल डालकर सभी चीजों को अच्छी तरह मिला लें. धीरे-धीरे पानी डालते हुए नरम आटा गूंथ लें। आटे को कुछ देर ढककर रखने से यह अच्छी तरह सेट हो जाएगा.

बनाएं और तलें समोसे
आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाकर उन्हें पतला बेल लें. बेली हुई रोटी को बीच से काटें और एक हिस्से को मोड़कर कोन का आकार दें. इसमें तैयार आलू-मटर की स्टफिंग भरें और किनारों को पानी की मदद से अच्छी तरह बंद कर दें. अब कड़ाही में तेल गर्म करें. तेल गर्म होने पर समोसों को सावधानी से डालें और मध्यम आंच पर सुनहरा व कुरकुरा होने तक तलें. तैयार समोसों को टिश्यू पेपर पर निकालें, ताकि अतिरिक्त तेल निकल जाए. रागी समोसे को हरी चटनी, इमली की चटनी या गर्म मसाला चाय के साथ परोस सकते हैं.

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शारदा सिंहSenior Sub Editor

शारदा सिंह एक अनुभवी लाइफस्टाइल पत्रकार हैं, जिनके पास डिजिटल मीडिया और कंटेंट लेखन के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का अनुभव है. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से…

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MP के डिंडौरी और पन्ना में सभी स्कूल बंद: यूपी के 13 जिलों में बाढ़ जैसे हालात, हिमाचल में अब तक 205 की मौत




देश के कई राज्यों में लगातार बारिश जारी है। मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में भारी बारिश से नदी-नाले उफान पर हैं। टीकमगढ़, छतरपुर, पन्ना, सागर और दमोह में भारी बारिश का अलर्ट है। डिंडौरी और पन्ना में सभी स्कूल बंद हैं। यूपी में लगातार बारिश से नदियां उफान पर हैं। 13 जिलों में बाढ़ जैसे हालात हैं। 84 हजार से ज्यादा लोग प्रभावित हैं। काशी में विश्वनाथ मंदिर का गंगा द्वार बंद कर दिया गया। मणिकर्णिका-हरिश्चंद्र घाट के शवदाह स्थल जलमग्न हो गए। वहीं, प्रयागराज में तीन दिन से लगातार बारिश हो रही है। इससे सड़कें और गलियां तालाब में तब्दील हो गईं हैं। बिहार के कई जिलों में जोरदार बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने 21, 22 और 23 अगस्त को बिहार में भारी बारिश के साथ आकाशीय बिजली की चेतावनी जारी की है। इसमें उत्तर-पूर्वी बिहार के 7 जिलों में हैवी रेन और तेज हवा चलने को लेकर ऑरेंज अलर्ट है। हिमाचल प्रदेश में इस मानसून सीजन में बारिश, बाढ़, भूस्खलन और अन्य प्राकृतिक आपदाओं से अब तक करीब 1,033 करोड़ रुपए की संपत्ति को नुकसान पहुंच चुका है। वहीं, मानसून के दौरान अब तक 205 लोगों की मौत हो चुकी है। इनमें सबसे ज्यादा 121 लोगों की जान सड़क हादसों में गई। मौसम विभाग के मुताबिक उत्तर झारखंड, दक्षिण-पश्चिम बिहार और दक्षिण-पूर्व उत्तर प्रदेश के ऊपर वेल-मार्क्ड लो-प्रेशर एरिया बना हुआ है। मानसून ट्रफ भी इसी सिस्टम से होकर गुजर रही है। इसके असर से छत्तीसगढ़ में अगले कुछ दिनों तक बारिश की गतिविधियां बनी रहने की संभावना है। सैटेलाइट मैप में देखें मानसूनी बादलों की स्थिति देशभर से मौसम की तस्वीरें



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एग्रीगेटर पॉलिसी का पोर्टल शुरू, बिना लाइसेंस नहीं चलेंगी सेवाएं: ऑनलाइन करना होगा लाइसेंस के लिए आवेदन, पांच लाख रुपये लाइसेंस फीस – Lucknow News




उत्तर प्रदेश में ऐप और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए यात्री व डिलीवरी सेवाएं देने वाले एग्रीगेटर्स के लिए परिवहन विभाग ने लाइसेंस की प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी है। एग्रीगेटर पॉलिसी के तहत विभाग ने upmyfleet.com पोर्टल शुरू किया है। अब एग्रीगेटर और डिलीवरी सेवा प्रदाताओं को लाइसेंस के लिए इसी पोर्टल पर आवेदन करना होगा। पहले से सेवाएं दे रही कंपनियों को भी जल्द लाइसेंस के लिए आवेदन करना होगा, जबकि नई कंपनी बिना लाइसेंस के एग्रीगेटर या डिलीवरी सेवा शुरू नहीं कर सकेगी। परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने बताया कि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की गाइडलाइन के तहत पोर्टल तैयार किया गया है। आवेदन के समय 25 हजार रुपये फीस देनी होगी। लाइसेंस जारी करने की फीस पांच लाख रुपये तय की गई है। ऑनलाइन आने वाले आवेदनों पर संबंधित प्राधिकरण फैसला करेगा। वाहनों की संख्या के हिसाब से देनी होगी सिक्योरिटी मनी पॉलिसी में एग्रीगेटर की फ्लीट के हिसाब से सिक्योरिटी मनी भी तय की गई है। 100 बसों या 1,000 अन्य मोटर वाहनों तक के लिए 10 लाख रुपये की सुरक्षा राशि देनी होगी। 1,000 बसों या 10 हजार अन्य वाहनों तक यह राशि 25 लाख रुपये होगी। इससे अधिक वाहनों की फ्लीट होने पर 50 लाख रुपये की सिक्योरिटी मनी जमा करनी होगी। ड्राइवर का चरित्र सत्यापन और मनोवैज्ञानिक परीक्षण यात्रियों, खासकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर पॉलिसी में कई प्रावधान किए गए हैं। वाहनों की लाइव ट्रैकिंग के साथ प्रत्येक ऑनबोर्ड ड्राइवर का चरित्र सत्यापन और मनोवैज्ञानिक परीक्षण कराया जाएगा। ड्राइवरों को समय-समय पर रिफ्रेशर ट्रेनिंग भी दी जाएगी। यात्रियों की शिकायतों के निस्तारण के लिए हर एग्रीगेटर को ग्रीवांस रिड्रेसल ऑफिसर नियुक्त करना होगा। पॉलिसी में यात्रियों के लिए बीमा की व्यवस्था भी शामिल है। वहीं प्रत्येक चालक के कल्याण के लिए एग्रीगेटर को पांच लाख रुपये का हेल्थ इंश्योरेंस और 10 लाख रुपये का टर्म इंश्योरेंस उपलब्ध कराना होगा। बेस फेयर से 50% से ज्यादा नहीं बढ़ सकेगा किराया एग्रीगेटर कंपनियों की मनमानी किराया बढ़ोतरी पर भी रोक लगाने की व्यवस्था की गई है। डायनेमिक प्राइसिंग के दौरान निर्धारित बेस फेयर से अधिकतम 50 प्रतिशत ज्यादा किराया ही लिया जा सकेगा। वहीं ट्रिप बुक होने के बाद निर्धारित समय तक यात्री को पिकअप नहीं करने पर चालक पर 100 रुपये की पेनाल्टी लगेगी। इसका लाभ यात्री को अगली ट्रिप में दिया जाएगा। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा, NCR में निगरानी पॉलिसी में वाहनजनित वायु प्रदूषण कम करने और एग्रीगेटर की फ्लीट को धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर ले जाने का प्रावधान भी किया गया है। खासकर एनसीआर में चलने वाले वाहनों की पोर्टल के जरिए लगातार निगरानी की जाएगी। इसके अलावा लाइसेंस की शर्तों या मोटर वाहन अधिनियम और नियमावली के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर पेनाल्टी लगाई जा सकेगी। परिवहन विभाग के मुताबिक पॉलिसी का उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित, किफायती और आसानी से उपलब्ध परिवहन सेवा देना है। इसके दायरे में डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए कुरियर, पैकेज और पार्सल की डिलीवरी के लिए चालक को विक्रेता, ई-कॉमर्स इकाई या खरीदार से जोड़ने वाली सेवाएं भी शामिल होंगी।



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पेरू में 6.7 तीव्रता का भूकंप आया: झटके कई इलाकों में महसूस हुए, नुकसान की खबर नहीं


6 घंटे पहले

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यह तस्वीर पेरू के इका शहर के पास की है। जहां भूकंप के झटके लगने के बाद लोग सड़क पर निकल आए।

पेरू के दक्षिणी हिस्से में गुरुवार को 6.7 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप से नुकसान की कोई खबर नहीं मिली।

भूकंप स्थानीय समय के अनुसार दोपहर 1 बजे (भारतीय समयानुसार रात 11:30 बजे) आया।

इसका केंद्र आयाकूचो क्षेत्र के पैरिनाकोचास प्रांत में उपाहुआचो शहर से 38 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में था।

भूकंप की गहराई 66.7 किलोमीटर थी। दक्षिणी पेरू के कई इलाकों में इसके झटके महसूस किए गए, जिनमें इका और अरेकिपा भी शामिल हैं।

भूकंप से सबसे ज्यााद प्रभावित इलाका एडीज पर्वतीय रेंज के आसपास का है। भूकंप के झटके लगने के बाद पहाड़ों से चट्टानें गिरने लगीं।

भूकंप से सबसे ज्यााद प्रभावित इलाका एडीज पर्वतीय रेंज के आसपास का है। भूकंप के झटके लगने के बाद पहाड़ों से चट्टानें गिरने लगीं।

पेरू रिंग ऑफ फायर का हिस्सा, अक्सर आते हैं भूकंप

पेरू प्रशांत महासागर के रिंग ऑफ फायर का हिस्सा है। यह इलाका भूकंपीय गतिविधियों के लिए जाना जाता है, इसलिए यहां अक्सर भूकंप आते हैं।

साल 2007 में इका क्षेत्र के एक प्रांत में 7.9 तीव्रता का भूकंप आया था। इसमें करीब 600 लोगों की मौत हुई थी।

साल 2026 में वेनेजुएला में आया सबसे बड़ा भूकंप, 6 हजार मौतें

इस साल वेनेजुएला में सबसे बड़ा भूकंप आया। 24 जून को 7.2 की तीव्रता से आए भूकंप में 6 हजार से ज्यादा मौतें हुईं थीं। इसके अलावा कोलंबिया में 10 अगस्त को आए भूकंप में 70 से ज्यादा जानें गईं थीं।

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भूकंप से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें…

कोलंबिया में भूकंप से 224 लोगों की मौत, 1200 घायल: 86 इमारतें गिरीं

साउथ अमेरिकी देश कोलंबिया में 11 अगस्त की रात आए 7.4 तीव्रता के भूकंप से अब तक 224 लोगों की मौत हो गई है। पूरी खबर यहां पढ़ें…



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पेरू में 6.7 तीव्रता का भूकंप आया: झटके कई इलाकों में महसूस हुए, नुकसान की खबर नहीं


2 मिनट पहले

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यह तस्वीर पेरू के इका शहर के पास की है। जहां भूकंप के झटके लगने के बाद लोग सड़क पर निकल आए।

पेरू के दक्षिणी हिस्से में गुरुवार को 6.7 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप से नुकसान की कोई खबर नहीं मिली।

भूकंप स्थानीय समय के अनुसार दोपहर 1 बजे (भारतीय समयानुसार रात 11:30 बजे) आया।

इसका केंद्र आयाकूचो क्षेत्र के पैरिनाकोचास प्रांत में उपाहुआचो शहर से 38 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में था।

भूकंप की गहराई 66.7 किलोमीटर थी। दक्षिणी पेरू के कई इलाकों में इसके झटके महसूस किए गए, जिनमें इका और अरेकिपा भी शामिल हैं।

भूकंप से सबसे ज्यााद प्रभावित इलाका एडीज पर्वतीय रेंज के आसपास का है। भूकंप के झटके लगने के बाद पहाड़ों से चट्टानें गिरने लगीं।

भूकंप से सबसे ज्यााद प्रभावित इलाका एडीज पर्वतीय रेंज के आसपास का है। भूकंप के झटके लगने के बाद पहाड़ों से चट्टानें गिरने लगीं।

पेरू रिंग ऑफ फायर का हिस्सा, अक्सर आते हैं भूकंप

पेरू प्रशांत महासागर के रिंग ऑफ फायर का हिस्सा है। यह इलाका भूकंपीय गतिविधियों के लिए जाना जाता है, इसलिए यहां अक्सर भूकंप आते हैं।

साल 2007 में इका क्षेत्र के एक प्रांत में 7.9 तीव्रता का भूकंप आया था। इसमें करीब 600 लोगों की मौत हुई थी।

साल 2026 में वेनेजुएला में आया सबसे बड़ा भूकंप, 6 हजार मौतें

इस साल वेनेजुएला में सबसे बड़ा भूकंप आया। 24 जून को 7.2 की तीव्रता से आए भूकंप में 6 हजार से ज्यादा मौतें हुईं थीं। इसके अलावा कोलंबिया में 10 अगस्त को आए भूकंप में 70 से ज्यादा जानें गईं थीं।

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कोलंबिया में भूकंप से 224 लोगों की मौत, 1200 घायल: 86 इमारतें गिरीं

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9 मौतों वाले जहरीली शराब कांड में MP कनेक्शन: उज्जैन से मुख्य आरोपी रईस गिरफ्तार; मुरैना के ‘डॉक्टर’ ने बनाई थी शराब, उसकी भी मौत – Bhopal News


गुजरात के भावनगर में जहरीली शराब पीने के कारण हुई 9 लोगों की मौत के मामले में गुजरात पुलिस ने मामले के मुख्य आरोपी रईस को उज्जैन से गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि रईस की ससुराल भोपाल के करोंद इलाके में है। उसका नाम सामने आने के बाद से ही पुलिस

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मुरैना का नरेंद्र था एक्सपर्ट

जांच के दौरान मुरैना निवासी नरेंद्र यादव उर्फ ‘डॉक्टर’ की भूमिका भी उजागर हुई है। पुलिस के अनुसार, रईस नरेंद्र की अवैध शराब बनाने में हासिल महारत से अच्छी तरह वाकिफ था, इसलिए उसने नरेंद्र को गुजरात आमंत्रित किया था। वहां दोनों ने भावनगर के स्थानीय शराब तस्कर गौतम सोलंकी के साथ हाथ मिला लिया।

आरोप है कि नरेंद्र और उसके साथियों की मौजूदगी में जहरीली शराब की 25 पेटियां तैयार की गई थीं। यही शराब पीने की वजह से लोगों की जान गई। विडंबना यह रही कि खुद नरेंद्र ने भी वही शराब पी, जिससे उसकी भी मौत हो गई।

FSL (फॉरेंसिक) जांच में भी पुष्टि हुई है कि जप्त किए गए शराब के नमूनों में 38.59% मिथाइल अल्कोहल (मेथनॉल) और मात्र 0.94% इथाइल अल्कोहल (एथेनॉल) पाया गया।

नरेंद्र को कहते थे डॉक्टर

मुरैना के डूंगरपुर किरार गांव का रहने वाला नरेंद्र नकली शराब तैयार करने में बेहद माहिर था, इसी कारण उसे ‘डॉक्टर’ कहा जाने लगा। हालांकि उसके परिवार का दावा है कि वह सामान्य मजदूर था और 15 अगस्त को पहली बार काम के सिलसिले में गुजरात गया था।

मौत के बाद परिजन बिना पुलिस को सूचित किए उसका शव मुरैना ले आए थे। इस पर गुजरात पुलिस ने मुरैना पुलिस से शव वापस भेजने को कहा, लेकिन परिजनों के कड़े विरोध के बाद स्थानीय स्तर पर ही पोस्टमार्टम संपन्न कराया गया।

5 साल पहले मुरैना में भी हुई थीं 24 मौतें

मुरैना जिले में 10 जनवरी 2021 को ज़हरीली शराब पीने से 24 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। अब भावनगर कांड में नरेंद्र का नाम जुड़ने से मध्य प्रदेश और गुजरात के बीच फैले इस नेटवर्क की जांच और संवेदनशील हो गई है।

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जहरीली शराब मामले में कांग्रेस का आबकारी कार्यालय पर धरना

गुजरात में जहरीली शराब से हुई मौतों का मामला अब उज्जैन में भी राजनीतिक रंग ले चुका है। गुरुवार को उज्जैन जिला कांग्रेस ने रेलवे स्टेशन स्थित आबकारी कार्यालय पर धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने अधिकारियों से लगभग एक घंटे तक मामले को लेकर सवाल-जवाब किए।पूरी खबर पढ़ें



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न मावा चाहिए, न ज्यादा घी! मिल्क पाउडर से बनाएं स्वादिष्ट रोल बर्फी, जानिए रेसिपी

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Milk Powder Barfi Recipe: घर पर मिठाई बनाने के लिए हर बार मावा और ज्यादा घी की जरूरत नहीं होती. मिल्क पाउडर, दूध, चीनी और थोड़े से देसी घी से आसान रोल बर्फी तैयार की जा सकती है. खजूर, काजू और पिस्ता की स्टफिंग इसके स्वाद को और खास बनाती है. तैयार मिश्रण को रोल बनाकर करीब 30 मिनट फ्रीजर में रखने से यह अच्छी तरह सेट हो जाता है. सेट होने के बाद इसे गोल स्लाइस में काटकर खूबसूरत बर्फी तैयार की जा सकती है. त्योहार, पूजा या अचानक आए मेहमानों के लिए यह झटपट बनने वाली मिठाई अच्छा विकल्प हो सकती है.

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खजूर काजू पिस्ता बर्फी (इमेज AI)

Milk Powder Barfi: कभी-कभी घर में मिठाई खाने का मन तो बहुत करता है, लेकिन मावा खरीदने या उसे घंटों तक भूनने का झंझट बिल्कुल नहीं भाता. खासकर जब अचानक मेहमान आ जाएं या त्योहार के मौके पर कुछ मीठा बनाना हो, तब ऐसी रेसिपी की तलाश रहती है जो कम सामग्री में जल्दी तैयार हो जाए, अगर आप भी कुछ ऐसा ही आसान विकल्प ढूंढ रहे हैं, तो सुमित्रा चंदा की रसोई से मिली मिल्क पाउडर रोल बर्फी की यह रेसिपी काम की हो सकती है. इसमें न मावा चाहिए और न ही ज्यादा घी. सिर्फ आधा कप दूध, दो कप मिल्क पाउडर और एक चम्मच देसी घी की मदद से स्वादिष्ट मिठाई तैयार की जा सकती है.

ऊपर से ड्राई फ्रूट्स की स्टफिंग इसे देखने में भी खास बनाती है. सबसे अच्छी बात यह है कि इसे बनाने का तरीका इतना सीधा है कि पहली बार मिठाई बनाने वाला भी इसे आसानी से ट्राई कर सकता है.

मिल्क पाउडर बर्फी बनाने के लिए सामग्री
इस आसान मिठाई के लिए आपको दो कप मिल्क पाउडर, एक चौथाई कप चीनी, आधा कप दूध और एक छोटा चम्मच देसी घी चाहिए. स्वाद और रंग को थोड़ा आकर्षक बनाने के लिए कुछ बूंदें पीला फूड कलर लिया जा सकता है. स्टफिंग के लिए कटे हुए खजूर, काजू और पिस्ता इस्तेमाल करें. चाहें तो अपनी पसंद के दूसरे ड्राई फ्रूट्स भी इसमें शामिल कर सकते हैं.

ऐसे तैयार करें बर्फी का मिश्रण
सबसे पहले एक नॉन-स्टिक पैन लें और उसमें मिल्क पाउडर डालें. अब इसमें चीनी और आधा कप दूध मिलाएं. ध्यान रखें कि गैस तेज न हो. मिश्रण को अच्छी तरह चलाते रहें, ताकि मिल्क पाउडर में गुठलियां न बनें. शुरुआत में मिश्रण थोड़ा पतला लगेगा, लेकिन गर्म होते ही धीरे-धीरे गाढ़ा होने लगेगा. जब मिश्रण गाढ़ा होने लगे, तब इसमें पीले फूड कलर की कुछ बूंदें डालकर अच्छी तरह मिला दें. बहुत ज्यादा कलर डालने की जरूरत नहीं है. हल्का रंग भी बर्फी को सुंदर लुक देने के लिए काफी रहेगा.

(इमेज AI)

एक चम्मच घी से आएगी मिठास में नरमी
अब इस गाढ़े होते मिश्रण में एक छोटा चम्मच देसी घी डालें. घी मिलाने के बाद मिश्रण को लगातार चलाते रहें. कुछ देर में यह पैन के किनारों को छोड़ने लगेगा और एक जगह इकट्ठा होकर आटे जैसे डो का रूप लेने लगेगा. जब मिश्रण पूरी तरह से इकट्ठा हो जाए, तब गैस बंद कर दें. इसे एक प्लेट में निकालें और कुछ देर हल्का ठंडा होने दें. यहां एक बात का ध्यान रखना जरूरी है कि मिश्रण बहुत गर्म रहते हुए हाथों से न मसलें.

ड्राई फ्रूट्स से तैयार होगी स्टफिंग
मिश्रण हल्का ठंडा होने पर इसे हाथों से अच्छी तरह मसलकर मुलायम डो जैसा बना लें. अब इसके दो हिस्से करें. एक हिस्सा थोड़ा बड़ा और दूसरा छोटा रखें. बड़े हिस्से में कटे हुए खजूर, काजू और पिस्ता डालकर अच्छी तरह मिला दें. अब इसे हाथों की मदद से लंबा रोल जैसा आकार दें. कोशिश करें कि ड्राई फ्रूट्स पूरे मिश्रण में बराबर फैल जाएं, ताकि बर्फी की हर स्लाइस में स्टफिंग का स्वाद मिले.

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राजस्थान में 473 घुमंतू परिवारों को मिला स्थायी आशियाना: CM ने सौंपे फ्लैट; प्रवासी भारतीयों के सहयोग से शिक्षा-रोजगार की पहल भी तेज – Jaipur News




राजस्थान में लंबे समय से स्थायी आश्रय के लिए संघर्ष कर रहे घुमंतू, अर्ध-घुमंतू और विमुक्त समुदायों के 473 परिवारों को अब अपना पक्का घर मिल गया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 13 अगस्त को लाभार्थी परिवारों को आवास आवंटन सौंपे। स्थायी पता नहीं होने से इन परिवारों को सरकारी योजनाओं और बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच में परेशानी होती थी। आवास मिलने के बाद अब इन समुदायों के बच्चों की शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। घर से शिक्षा तक, घुमंतू परिवारों को मुख्यधारा से जोड़ने की पहल राजस्थान सरकार की यह आवासीय पहल उन परिवारों के लिए अहम मानी जा रही है, जो लंबे समय से सामाजिक और आर्थिक रूप से हाशिये पर रहे हैं। स्थायी घर मिलने से उन्हें न केवल सुरक्षित आश्रय मिलेगा, बल्कि स्थायी पते से दस्तावेज, शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है। न्यूयॉर्क स्थित राजस्थान एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका (RANA) के अध्यक्ष और चंद्रा–के.के. मेहता फैमिली फाउंडेशन के एडवाइजरी बोर्ड के चेयरमैन प्रेम भंडारी ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। उन्होंने जमीनी स्तर पर लंबे समय से काम कर रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं के योगदान को भी रेखांकित किया। दुर्गादास जी के प्रयासों की सराहना प्रेम भंडारी ने घुमंतू जाति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय प्रमुख दुर्गादास के कार्यों की विशेष रूप से सराहना की। उनके अनुसार दुर्गादास जी एक दशक से ज्यादा समय से घुमंतू, अर्ध-घुमंतू और विमुक्त समुदायों के कल्याण के लिए काम कर रहे हैं। इन समुदायों को सामाजिक और आर्थिक मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयासों में उनकी लंबे समय से चली आ रही जमीनी सेवा को महत्वपूर्ण बताया गया है। ब्रिटिश दौर के कलंक का असर आज भी घुमंतू और विमुक्त समुदायों का इतिहास सामाजिक भेदभाव से भी जुड़ा रहा है। ब्रिटिश शासन के दौरान एक कानून के तहत इन्हें ऐतिहासिक रूप से ‘अपराधी जनजातियों’ की श्रेणी में रखा गया था। यह कानून 1952 में निरस्त कर दिया गया, लेकिन इससे जुड़ा सामाजिक कलंक और आर्थिक पिछड़ापन लंबे समय तक बना रहा। आज भी कई परिवारों के पास स्थायी घर, औपचारिक दस्तावेज और सरकारी योजनाओं तक पर्याप्त पहुंच नहीं है। ऐसे में आवास उपलब्ध कराना इनके पुनर्वास और मुख्यधारा से जुड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पहले भी हुए रोजगार और जागरूकता से जुड़े प्रयास इन समुदायों के लिए पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान में सामाजिक और कल्याणकारी स्तर पर कई गतिविधियां हुई हैं। जनवरी 2025 में जयसिंहपुरा खोर की चेतना बस्ती में दो दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसका उद्देश्य सामाजिक और आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाना था। इसके बाद 29 नवंबर 2025 को रोजगार मेले का आयोजन किया गया। इसमें उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने सैकड़ों परिवारों को आजीविका से जुड़े साधन वितरित किए। आयोजकों के मुताबिक, इस कार्यक्रम को प्रेम भंडारी ने RANA और चंद्रा–के.के. मेहता फैमिली फाउंडेशन की ओर से व्यक्तिगत रूप से प्रायोजित किया था। RANA के सचिव रवि जारगढ़ भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। स्वच्छता के बाद अब बच्चों की शिक्षा पर फोकस इन संगठनों की ओर से स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों के अनुरूप स्वच्छता प्रोत्साहन अभियान को भी समर्थन दिया गया। आयोजकों का कहना है कि इससे बस्तियों में स्वच्छता की स्थिति सुधारने में मदद मिली। अब प्रेम भंडारी का फोकस इन परिवारों के बच्चों की शिक्षा पर है। उन्होंने कहा कि वह इन समुदायों के बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर और सिविल सेवक बनते देखना चाहते हैं। RANA और चंद्रा–के.के. मेहता फैमिली फाउंडेशन योग्य और जरूरतमंद बच्चों की पहचान कर उनकी शिक्षा का खर्च उठाने की योजना पर काम करेंगे। सरकार की योजना के खर्च का विवरण अभी सार्वजनिक नहीं यह पहल सरकारी योजनाओं के साथ सामाजिक संगठनों और प्रवासी भारतीय समुदाय की भागीदारी का उदाहरण भी है। हालांकि, राजस्थान सरकार ने अभी तक 473 फ्लैटों की योजना की कुल लागत और लाभार्थियों के चयन के विस्तृत मानदंड सार्वजनिक नहीं किए हैं। ऐसे में योजना के आर्थिक पक्ष और चयन प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है।



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