अमेरिका की एक फिनटेक कंपनी ने तो बेरहमी की सारी हदें ही पार कर दीं. सिर्फ 5 मिनट की एक Google Meet कॉल और भारत में काम कर रहे 80 कर्मचारियों को एक झटके में सड़क पर ला दिया.
अमेरिकी कंपनी ने एक झटके में 80 लोगों को नौकरी से निकाला.
अमेरिका की एक बड़ी फिनटेक कंपनी ने धोखेबाजी की सारी हदें पार कर दी हैं. कोई सूचना नहीं, कोई नोटिस पीरियड नहीं, यहां तक कि एचआर का कोई आमना-सामना भी नहीं. सिर्फ 5 मिनट की एक गूगल मीट कॉल हुई, स्क्रीन पर एक फरमान गूंजा, और भारत में काम कर रही पूरी की पूरी कस्टमर सपोर्ट टीम को एक झटके में निकाल फेंका गया. महज 300 सेकंड के अंदर 80 कर्मचारियों का करियर तबाह कर दिया गया और रातों-रात 80 परिवारों के सामने रोजी-रोटी का गहरा संकट खड़ा कर दिया गया.
कर्मचारियों को बताया गया कि ऑपरेशनल कारणों से आज सबको दफ्तर आने के बजाय वर्क फ्रॉम होम करना है. बेचारे कर्मचारी रोज की तरह अपने घरों में सिस्टम खोलकर बैठ गए. शाम 6:30 बजे शिफ्ट शुरू हुई. सब अपना-अपना काम निपटा ही रहे थे कि तभी रात 9:30 बजे सीनियर मैनेजमेंट की तरफ से अचानक गूगल मीट का एक लिंक आता है.
5 मिनट में खत्म कर दिया खेल
कर्मचारियों ने जैसे ही कॉल जॉइन की, उन्हें ऐसा झटका लगा जिसकी उन्होंने सपने में भी उम्मीद नहीं की थी. मीटिंग में कोई हालचाल नहीं, कोई चर्चा नहीं, बल्कि सीधे फरमान सुनाया गया- पूरी इंडियन कस्टमर सर्विस टीम को निकाला जा रहा है. कॉल कट. जो लोग नौकरी जाने के डर से अपनी क्षमता से ज्यादा काम कर रहे थे, उन्हें बिना कोई सफाई दिए बाहर का रास्ता दिखा दिया गया.
कौन है ये कंपनी और क्या दिया बहाना?
सोशल मीडिया पर जब एक पीड़ित कर्मचारी ने अपना दर्द बयां किया, तो लोगों का गुस्सा फूट पड़ा. सबके पूछने पर उस कंपनी का नाम सामने आया- ब्लूवाइन (Bluevine). ये अमेरिका की एक फिनटेक कंपनी है जो छोटे बिजनेसेस को बैंकिंग और वित्तीय सेवाएं देती है. कंपनी ने इतने लोगों को निकालने की वजह बताई कि आपकी टीम का परफॉर्मेंस हमारी उम्मीदों पर खरा नहीं उतरा.
ज्ञानेंद्र कुमार मिश्रा हिंदी पत्रकारिता का एक जाना-पहचाना नाम हैं. उन्हें मीडिया में करीब 20 साल का एक्सपीरियंस है. वर्तमान में वह News18 हिंदी के साथ डिप्टी न्यूज एडिटर के तौर पर जुड़े हैं …
राज्य के हर थाने में अब चाइल्ड हेल्प डेस्क या चाइल्ड कॉर्नर बनाया जाएगा। पुलिस मुख्यालय के कमजोर वर्ग और अपराध अनुसंधान विभाग ने इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। 2 अक्टूबर 2026 यानी गांधी जयंती तक राज्य के सभी थानों में यह व्यवस्था शुरू करना अनिवार
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इस पहल का मकसद बच्चों और उनके माता-पिता को थाने में शिकायत या मदद के लिए आने पर सुरक्षित, आरामदायक और डर-मुक्त माहौल देना है। चाइल्ड हेल्प डेस्क को थाने के सामान्य लॉकअप से अलग जगह पर बनाया जाएगा। इससे बच्चों का संपर्क लॉकअप या उससे जुड़े माहौल से नहीं होगा। डेस्क को ऐसी जगह बनाने के निर्देश हैं, जो आसानी से दिखे और जरूरतमंद बच्चे या उनके माता-पिता वहां आसानी से पहुंच सकें।
चाइल्ड हेल्प डेस्क या कॉर्नर का संचालन बाल कल्याण पुलिस पदाधिकारी (CWPO) के नेतृत्व में होगा। डेस्क पर संबंधित CWPO के साथ-साथ जिला बाल संरक्षण पदाधिकारी (DCPO) का नाम, पदनाम और मोबाइल नंबर भी साफ तौर पर दिखाया जाएगा।
इसका मकसद है कि बच्चों या उनके परिवार को किसी मदद या शिकायत के लिए संबंधित अधिकारी से संपर्क करने में दिक्कत न हो। दिखाए गए मोबाइल नंबरों को चालू रखने और मिली शिकायतों पर तय समय में कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं।
बच्चों से जुड़े मामलों में बातचीत और शिकायत दर्ज कराते समय आरामदायक माहौल देने पर भी खास जोर दिया गया है। खासकर लड़कियों से जुड़े मामलों के लिए योग्य महिला पुलिसकर्मियों को तैनात किया जाएगा।
महिला पुलिसकर्मी लड़कियों से जुड़ी समस्याओं को समझेंगी, उनकी बात सुनेंगी और जरूरी पुलिस कार्रवाई में मदद करेंगी। इससे बच्चों को अपनी परेशानी खुलकर बताने के लिए सुरक्षित और भरोसेमंद माहौल मिल पाएगा।
शिकायत मिलते ही शुरू होगी कार्रवाई
चाइल्ड हेल्प डेस्क पर बच्चों और उनके अभिभावकों की ओर से मिलने वाली शिकायतों तथा सहायता अनुरोधों पर त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। शिकायतों के निपटारे के साथ-साथ उनका उचित रिकॉर्ड भी रखा जाएगा। वरिष्ठ अधिकारी करेंगे नियमित निगरानी
सिर्फ डेस्क स्थापित करना ही नहीं, बल्कि उसकी कार्यप्रणाली की मॉनिटरिंग भी निरंतर की जाएगी। संबंधित पुलिस उपाधीक्षक, विशेष अपराध-सह-प्रभारी SJPU और अन्य वरीय जिला पदाधिकारी चाइल्ड हेल्प डेस्क की व्यवस्था और कामकाज की नियमित समीक्षा करेंगे। निगरानी के दौरान यह देखा जाएगा कि डेस्क निर्धारित स्थान पर संचालित हो रहा है या नहीं, संबंधित अधिकारियों के संपर्क नंबर प्रदर्शित हैं या नहीं, शिकायतों पर समय से कार्रवाई की जा रही है या नहीं और मामलों का रिकॉर्ड ठीक से रखा जा रहा है या नहीं। 2 अक्टूबर तक सभी थानों में स्थापना का लक्ष्य पुलिस मुख्यालय ने 2 अक्टूबर 2026 की समयसीमा तय की है। गांधी जयंती तक राज्य के प्रत्येक थाने में Child Help Desk/Child Corner स्थापित करना अनिवार्य होगा। व्यवस्था लागू होने के बाद सभी संबंधित जिलों को इसकी अनुपालन रिपोर्ट 5 अक्टूबर 2026 तक कमजोर वर्ग, अपराध अनुसंधान विभाग, बिहार को उपलब्ध करानी होगी। इस रिपोर्ट के जरिए यह जानकारी ली जाएगी कि संबंधित थानों में निर्देश के अनुसार चाइल्ड हेल्प डेस्क/कॉर्नर स्थापित किया गया है या नहीं। बच्चों के लिए थाने का माहौल बदलने की कोशिश पुलिस मुख्यालय की इस पहल का व्यापक उद्देश्य बच्चों से संबंधित मामलों में पुलिस व्यवस्था को अधिक बाल-संवेदनशील और सहयोगपूर्ण बनाना है। थाने में अलग और बाल-मित्र स्थान उपलब्ध होने से बच्चों तथा उनके अभिभावकों को अपनी शिकायत या समस्या रखने में सहूलियत मिलने की उम्मीद है। लॉकअप से अलग स्थान, CWPO की जिम्मेदारी, महिला
पुलिसकर्मियों की तैनाती, संपर्क नंबरों का प्रदर्शन, शिकायतों का रिकॉर्ड और वरिष्ठ अधिकारियों की निगरानी, इन सभी व्यवस्थाओं को एक साथ लागू करने का लक्ष्य रखा गया है। इससे बच्चों से जुड़े मामलों में पुलिस की शुरुआती प्रतिक्रिया को अधिक व्यवस्थित और संवेदनशील बनाने की दिशा में काम होगा।
नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर लव कुश रामलीला कमेटी की ओर से गुरुवार को लालकिला मैदान में दिव्यांगजनों और जरूरतमंदों के लिए नि:शुल्क मेगा हेल्थ कैंप लगाया गया। कमेटी के अध्यक्ष अर्जुन कुमार ने बताया कि 17 सितंबर को आयोजित शिविर में भारत सरकार के सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय, नारायण सेवा संस्थान उदयपुर, तारा संस्थान और एलप्स के सहयोग से बड़ी संख्या में लोगों ने स्वास्थ्य जांच और सहायक उपकरणों की सुविधा का लाभ उठाया। ट्राईसाइकिल समेत अन्य आवश्यक सहायक उपकरण वितरित शिविर में विभिन्न श्रेणियों के दिव्यांगजनों को अत्याधुनिक जापानी तकनीक से निर्मित 3डी प्रिंटेड मॉड्यूलर कृत्रिम अंग और कैलिपर्स, ट्राईसाइकिल समेत अन्य आवश्यक सहायक उपकरण वितरित किए गए। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री डॉ. वीरेंद्र कुमार, राष्ट्रीय अनुसूचित जाति आयोग के अध्यक्ष किशोर मकवाना और चांदनी चौक के सांसद प्रवीण खंडेलवाल ने लाभार्थियों को कृत्रिम अंग व अन्य उपकरण वितरित किए। अर्जुन कुमार ने कहा कि ऐसे शिविर दिव्यांगजनों का जीवन सुगम बनाने और उन्हें आत्मनिर्भर बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
दतिया में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के जन्मदिन के अवसर पर गुरुवार रात को दतिया के किला चौक पर भाजपा कार्यकर्ताओं और जनप्रतिनिधियों ने ‘एक दिया सेवा के नाम’ कार्यक्रम के तहत दीप उत्सव मनाया। कार्यक्रम में प्रदेश के पूर्व गृहमंत्री और वरिष्ठ भाजपा नेता डॉ. नरोत्तम मिश्रा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने कार्यकर्ताओं और आमजन के साथ दीप प्रज्ज्वलित किए। इस दौरान नरोत्तम मिश्रा ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के कार्यों का उल्लेख करते हुए कहा कि उनका जीवन का कण-कण और क्षण-क्षण राष्ट्र, गरीब और गांव के लिए समर्पित रहा है। उन्होंने कहा कि गरीबों को 4 करोड़ से अधिक पक्के आशियाने देना, गांवों में नल से जल पहुंचाना और विद्युतीकरण जैसे काम हुए हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री ने 370 और 35ए हटाने, लद्दाख की आजादी, भगवान श्रीराम के मंदिर निर्माण और सीएए जैसे वचनों को पूरा करने की दिशा में काम किया है। नरोत्तम मिश्रा ने कहा कि ऐसे व्यक्ति का जन्मदिन मनाने का अवसर मिलना सभी के लिए सौभाग्य की बात है। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में भाजपा कार्यकर्ता, जनप्रतिनिधि, व्यापारी और आमजन मौजूद रहे।
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प और चीनी राष्ट्रपति जिनपिंग की 30 अक्टूबर 2025 को साउथ कोरिया में मुलाकात हुई थी।
ट्रम्प और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की 24 सितंबर को होने वाली मुलाकात से पहले ताइवान में डर बढ़ गया है। ताइवान को आशंका है कि चीन के साथ कोई बड़ा आर्थिक समझौता करने के लिए ट्रम्प उसके मुद्दे पर नरम रुख अपना सकते हैं। जापान और साउथ कोरिया समेत अमेरिका के सहयोगी देशों को भी यही चिंता सता रही है।
रॉयटर्स के मुताबिक, ट्रम्प ने मई में ताइवान को अमेरिकी हथियारों की बिक्री को चीन से डील के लिए ‘सौदेबाजी का जरिया’ बताया था। अब जिनपिंग फिर ताइवान का मुद्दा ट्रम्प के सामने उठा सकते हैं।
ऐसे में ताइवान को डर है कि ट्रम्प चीन से कोई बड़ी डील निकालने के चक्कर में कहीं उसके मुद्दे पर पीछे न हट जाएं। अमेरिका के किसी नरम बयान से भी बीजिंग को ताइवान पर दबाव बढ़ाने का हौसला मिल सकता है।
पहले ताइवान का मामला समझिए…
ताइवान चीन के करीब स्थित एक द्वीप है। वहां अपनी सरकार है और लोग अपने नेताओं को चुनाव के जरिए चुनते हैं। ताइवान खुद को अलग तरीके से चलाता है, लेकिन चीन उसे अपना हिस्सा मानता है।
चीन चाहता है कि ताइवान एक दिन उसके साथ मिल जाए। बीजिंग ने यह भी साफ कर रखा है कि जरूरत पड़ी तो वह इसके लिए सैन्य ताकत का इस्तेमाल कर सकता है।
दूसरी तरफ, अमेरिका ताइवान को हथियार देता है ताकि वह अपनी सुरक्षा कर सके। लेकिन अमेरिका ने यह साफ नहीं किया है कि अगर चीन ताइवान पर हमला करता है, तो अमेरिकी सेना सीधे उसकी मदद के लिए युद्ध में उतरेगी या नहीं।
यही वजह है कि ताइवान को लेकर अमेरिका का रुख हमेशा से थोड़ा अस्पष्ट रहा है। वॉशिंगटन चीन को खुलकर चुनौती भी नहीं देता और ताइवान को अकेला भी नहीं छोड़ता।
जापान को किस बात की चिंता है?
ताइवान को लेकर सिर्फ वहां की सरकार ही चिंतित नहीं है। जापान भी ट्रम्प-शी की बैठक को करीब से देख रहा है।
रॉयटर्स के मुताबिक, जापान चाहता है कि अमेरिका ताइवान को लेकर अब तक इस्तेमाल की जाने वाली कूटनीतिक भाषा पर कायम रहे। टोक्यो यह भी चाहता है कि बैठक में ताइवान का मुद्दा इतना न छाए कि दोनों देशों के रिश्तों में तनाव और बढ़ जाए।
जापान के दो सीनियर नेताओं ने रॉयटर्स को बताया कि उनकी सबसे बड़ी चिंता यह है कि ट्रम्प चीन से अमेरिकी सामान खरीदने का बड़ा समझौता हासिल करने के बदले ताइवान के मामले में कोई रियायत न दे दें।
अमेरिका में अगले साल मिडटर्म चुनाव होने हैं। ऐसे में चीन के साथ बड़ा कारोबारी समझौता ट्रम्प के लिए घरेलू राजनीति में भी अहम हो सकता है।
बैठक से पहले ताइवान ने अपनी चिंता बताई
बैठक से पहले ताइवान सरकार लगातार अमेरिका के सामने अपना पक्ष रख रही है। ताइवान के सीनियर अधिकारी शेन यू-चुंग ने कहा कि उनकी उम्मीद है कि ऐसा कोई फैसला नहीं होगा जिससे ताइवान को नुकसान पहुंचे।
ताइवान के विदेश मंत्री लिन चिया-लुंग ने कहा कि उन्हें उम्मीद है कि शी बैठक में ताइवान का मुद्दा उठाएंगे। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि अमेरिका कई बार साफ कर चुका है कि ताइवान को लेकर उसकी नीति में बदलाव नहीं हुआ है।
अमेरिका की ‘वन चाइना पॉलिसी’ क्या है?
अमेरिका ने चीन के साथ राजनयिक रिश्ते शुरू किए: अमेरिका ने 1979 में बीजिंग की सरकार को चीन की सरकार के तौर पर मान्यता दी और ताइवान के साथ आधिकारिक राजनयिक रिश्ते खत्म कर दिए।
ताइवान को अलग देश की मान्यता नहीं: अमेरिका ताइवान को अलग देश के तौर पर आधिकारिक मान्यता नहीं देता। लेकिन ताइवान के साथ उसके अनौपचारिक रिश्ते बने हुए हैं।
चीन के दावे को भी पूरी तरह नहीं मानता: चीन ताइवान को अपना हिस्सा मानता है। अमेरिका ताइवान की संप्रभुता पर कोई फैसला नहीं देता यानी वह यह नहीं कहता कि ताइवान पर किसका अधिकार है।
ताइवान को हथियार भी देता है: अमेरिका ताइवान को अपनी सुरक्षा के लिए हथियार देता है। यह नीति 1979 के ताइवान रिलेशन एक्ट से भी जुड़ी है।
ताइवान की आजादी का समर्थन नहीं: अमेरिका कहता है कि वह ताइवान की औपचारिक आजादी का समर्थन नहीं करता और ताइवान-चीन का विवाद बातचीत से सुलझना चाहिए।
ट्रम्प के बयान पर इतनी नजर क्यों?
अमेरिका ने अभी तक यह साफ नहीं किया है कि अगर चीन ताइवान पर हमला करता है, तो क्या अमेरिकी सेना ताइवान की मदद करने जाएगी। इसलिए ट्रम्प ताइवान को लेकर क्या कहते हैं, इस पर सबकी नजर रहती है।
पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन ने अपने कार्यकाल में कई बार कहा था कि चीन ने हमला किया तो अमेरिका ताइवान की मदद करेगा। लेकिन ट्रम्प ने इस बारे में अब तक ऐसी साफ बात नहीं कही है।
जापान के दो सरकारी सूत्रों ने रॉयटर्स को बताया कि ट्रम्प का अचानक दिया गया कोई बयान भी ताइवान को लेकर चिंता बढ़ा सकता है। चीन लगातार अमेरिका से कहता रहा है कि वह ताइवान को अलग देश बनाने की बात का समर्थन न करे।
ताइवान का मुद्दा दुनिया की अर्थव्यवस्था से भी जुड़ा
ताइवान का मामला सिर्फ चीन और अमेरिका के बीच सत्ता की खींचतान तक सीमित नहीं है। इसका असर दुनिया के कारोबार पर भी पड़ सकता है।
ताइवान दुनिया की सबसे आधुनिक कंप्यूटर चिप्स का 90% से ज्यादा बनाता है। इन चिप्स का इस्तेमाल मोबाइल फोन, कार, कंप्यूटर से लेकर मिसाइल और दूसरे आधुनिक उपकरणों में होता है।
अगर यहां बड़ा सैन्य संघर्ष होता है तो चिप्स की सप्लाई रुक सकती है। इससे दुनिया के कई देशों में कार, इलेक्ट्रॉनिक्स और दूसरे सामानों का उत्पादन प्रभावित हो सकता है।
मलेशिया के राष्ट्रीय सुरक्षा महानिदेशक राजा नुशिरवान जैनल आबिदीन ने रॉयटर्स से कहा कि ताइवान में संघर्ष हुआ तो इसका असर पूरी दुनिया पर पड़ेगा।
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रिपोर्ट- ट्रम्प सरकार ने हूती विद्रोहियों से सीक्रेट डील की
अमेरिका ने यमन के हूती विद्रोहियों के साथ सीक्रेट डील की है। एक्सिओस की रिपोर्ट के मुताबिक इस डील के तहत हूतियों ने अमेरिका को भरोसा दिया है कि वे लाल सागर में अमेरिकी और अंतरराष्ट्रीय जहाजों को निशाना नहीं बनाएंगे। पूरी खबर पढ़ें…
iQOO अपने फ्लैगशिप फोन iQOO 16 के साथ-साथ iQOO Pad Ultra गेमिंग टैबलेट भी 29 सितंबर को लॉन्च करने वाला है। कंपनी ने आधिकारिक तौर पर अपने अपकमिंग टैबलेट के लॉन्च की घोषणा की है। इस टैबलेट को ई-स्पोर्ट्स टैबलेट के तौर पर पेश किया जाएगा, जिसमें डेडिकेटेड गेमिंग हार्डवेयर मिलेंगे।
डिस्प्ले डिटेल आई सामने
iQOO Ultra के डिस्प्ले की डिटेल सामने आई है। यह गेमिंग टैबलेट 8.8 इंच के कॉम्पैक्ट डिस्प्ले के साथ लॉन्च किया जाएगा। कंपनी ने कंफर्म किया है कि यह टैबलेट 298 ग्राम वजनी होगा और इसकी मोटाई 5.74mm होगा। कॉम्पैक्ट साइज होने की वजह से इस टैबलेट पर यूजर्स गेम खेल पाएंगे। साथ ही, यह काफी स्लिम डिजाइन के साथ आएगा। इस लैपटॉप के बैक में कैमरा मॉड्यूल के साथ Aura रिंग लाइट दिया मिलेगा। साथ ही, इसमें एक स्पीकर दिया जाएगा।
गीकबेंच लिस्टिंग के मुताबिक, iQOO Ultra में Qualcomm Snapdragon 8 Elite Gen 6 चिपसेट दिया जाएगा। रिपोर्ट के मुताबिक, इस टैबलेट में अब तक का सबसे बड़ा कूलिंग फऐन भी मिलेगा। वहीं, इसमें 9,000mAh की दमदार बैटरी दी जाएगी। यह गेमिंग टैबलेट दो कलर ऑप्शन- ब्लैक और सिल्वर में पेश किया जाएगा।
iQOO Pad 6 Pro
चीनी कंपनी ने इस साल मई में iQOO Pad 6 Pro लॉन्च किया है, जो 13,000mAh की दमदार बैटरी मिलती है। यह टैबलेट 16GB रैम और 512GB स्टोरेज के साथ आता है। यह भी Qualcomm के फ्लैगशिप चिपसेट Snapdragon 8 Elite Gen 5 चिपसेट पर काम करता है। इसके साथ 16GB LPDDR5x रैम और 512GB UFS 4.1 चिपसेट दिया गया है।
इस टैबलेट में 13.2 इंच का 4K डिस्प्ले दिया गया है। इसका डिस्प्ले 144Hz रिफ्रेश रेट और 1200 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस का सपोर्ट मिलेगा। इस टैबलेट में 3D कूलिंग सिस्टम मिलता है, जो इसे गर्म होने से बचाता है। इसमें 13000mAh की बैटरी दी गई है, जिसके साथ 80W फास्ट चार्जिंग फीचर दिया गया है।
यह टैबलेट Android 16 पर बेस्ड OriginOS पर काम करता है। इसके बैक में 13MP का कैमरा मिलता है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए 8MP का कैमरा दिया गया है। कनेक्टिविटी के लिए इसमें WiFi 7 और Bluetooth 5.4 दिया गया है।
डीग नगर परिषद सभापति पद पर भाजपा के अर्पित गुप्ता निर्विरोध चुने गए हैं। गुरुवार को निर्दलीय प्रत्याशी मालती देवी और राहुल लवानिया ने अपना नामांकन वापस ले लिया, जिसके बाद अर्पित गुप्ता को सभापति घोषित कर दिया। नगर परिषद के 40 वार्डों में भाजपा 16 और निर्दलीयों को 24 सीट मिली थी। निर्दलीय राहुल लवानिया और मालती देवी ने उपखंड अधिकारी और रिटर्निंग अधिकारी अमित कुमार मीणा के सामने अपने नामांकन पत्र वापस लिए। दोनों प्रत्याशियों के पर्चे वापस लेने के बाद सभापति पद के लिए चुनाव की जरूरत खत्म हो गई। इससे पहले बुधवार को सभापति पद के लिए तीन उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किए थे। इनमें भाजपा से अर्पित गुप्ता के अलावा निर्दलीय प्रत्याशी मालती देवी और राहुल लवानिया शामिल थे। तीन नामांकन होने के कारण सभापति पद के लिए चुनाव होना तय माना जा रहा था। गुरुवार को नामांकन वापसी के दौरान राजनीतिक स्तर पर सहमति बनाने की कोशिशें की गईं। विधायक डॉ. शैलेश सिंह दिगंबर की समझाइश के बाद ही मालती देवी और राहुल लवानिया ने अपने नामांकन वापस लिए। इसके बाद भाजपा प्रत्याशी अर्पित गुप्ता के सामने कोई और उम्मीदवार नहीं रहा। भाजपा का नगर परिषद में बोर्ड बनाने का रास्ता साफ
अर्पित गुप्ता के निर्विरोध सभापति निर्वाचित होने के साथ ही भाजपा के लिए नगर परिषद में बोर्ड गठन का रास्ता भी साफ हो गया है। हालांकि नगर परिषद के वार्ड चुनाव में भाजपा को स्पष्ट बहुमत नहीं मिला था और बड़ी संख्या में निर्दलीय पार्षद जीतकर आए हैं। ऐसे में सभापति पद के लिए हुए घटनाक्रम को नगर परिषद की आगामी राजनीतिक तस्वीर के लिहाज से महत्वपूर्ण माना जा रहा है। नगर परिषद परिसर में नामांकन वापसी के दौरान भाजपा कार्यकर्ताओं और समर्थकों में भी उत्साह नजर आया। अर्पित गुप्ता के निर्विरोध निर्वाचित होने के बाद समर्थकों ने उन्हें बधाई दी। अब नगर परिषद की नई कार्यकारिणी और बोर्ड गठन को लेकर आगे की राजनीतिक गतिविधियों पर नजर रहेगी।
घर पर अदरक-लहसुन पेस्ट बनाने की जानिये आसान विधि, अदरक और लहसुन को धोकर छीलें, फिर नमक व तेल के साथ पीसें. इसे फ्रिज या फ्रीजर में स्टोर कर सकते हैं.
बनाइए अदरक और लहसुन का पेस्ट, और जानिये इसे स्टोर करने का तरीका. Image AI
भारतीय रसोई में अदरक-लहसुन पेस्ट का इस्तेमाल लगभग हर सब्जी, दाल, ग्रेवी और नॉनवेज डिश में किया जाता है. यह न केवल खाने का स्वाद बढ़ाता है बल्कि उसकी खुशबू भी बेहतर बनाता है. बाजार में आसानी से अदरक-लहसुन पेस्ट मिल जाता है, लेकिन घर पर तैयार किया गया पेस्ट अधिक ताजा, शुद्ध और हेल्दी होता है. इसमें किसी प्रकार के प्रिजर्वेटिव या कृत्रिम रंग का इस्तेमाल नहीं किया जाता. यदि आप भी घर पर अदरक-लहसुन पेस्ट बनाना चाहते हैं, तो यह आसान रेसिपी आपके लिए है.
आवश्यक सामग्री
अदरक – 250 ग्राम लहसुन – 250 ग्राम नमक – 1 छोटा चम्मच तेल – 2 बड़े चम्मच (सरसों या रिफाइंड) थोड़ा सा पानी (जरूरत अनुसार)
पेस्ट बनाने की विधि
सबसे पहले अदरक को अच्छी तरह धोकर उसका छिलका उतार लें. इसके बाद लहसुन की सभी कलियों को छीलकर अलग कर लें. अदरक को छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें ताकि उसे पीसने में आसानी हो.
अब मिक्सर जार में अदरक और लहसुन डालें. इसमें नमक और तेल भी मिला दें. तेल डालने से पेस्ट लंबे समय तक खराब नहीं होता और उसकी ताजगी बनी रहती है. अब सामग्री को बिना पानी डाले पीसने की कोशिश करें. यदि जरूरत महसूस हो तो एक-दो चम्मच पानी डाल सकते हैं.
मिक्सर को चलाकर एकदम स्मूद और गाढ़ा पेस्ट तैयार कर लें. ध्यान रखें कि पेस्ट में बड़े टुकड़े न रह जाएं. तैयार पेस्ट को साफ और सूखे कांच के एयरटाइट जार में भर लें.
लंबे समय तक स्टोर करने का तरीका
यदि आप पेस्ट को 15 से 20 दिनों तक इस्तेमाल करना चाहते हैं, तो इसे फ्रिज में रखें. वहीं एक से दो महीने तक स्टोर करने के लिए छोटे-छोटे हिस्सों में आइस ट्रे में भरकर फ्रीजर में जमा सकते हैं. जरूरत पड़ने पर एक-एक क्यूब निकालकर इस्तेमाल करें.
अदरक-लहसुन पेस्ट के फायदे
अदरक और लहसुन दोनों ही औषधीय गुणों से भरपूर होते हैं. अदरक पाचन को बेहतर बनाने में मदद करता है, जबकि लहसुन रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में सहायक माना जाता है. इसके अलावा यह पेस्ट खाना बनाने का समय भी बचाता है, क्योंकि हर बार अलग से अदरक और लहसुन तैयार करने की आवश्यकता नहीं पड़ती.
ध्यान रखने योग्य बातें
पेस्ट निकालने के लिए हमेशा सूखे चम्मच का उपयोग करें. जार में पानी न जाने दें. यदि रंग या गंध में बदलाव दिखाई दे तो पेस्ट का उपयोग न करें.
सिद्धार्थनगर में बांसी पुलिस ने युवक पर चाकू से हमला करने के मामले में करीब तीन महीने से फरार चल रहे आरोपी को गिरफ्तार किया है। आरोपी की पहचान जोगिया उदयपुर के सुपाराजा निवासी मिथिलेश यादव पुत्र विजय उर्फ झिनकू यादव के रूप में हुई है। पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तारी के दौरान तलाशी में उसके पास से एक अवैध चाकू भी मिला। आरोपी को कोर्ट भेज दिया गया है। शादी समारोह से लौटते समय हुआ था हमला घटना 23 जून 2026 की रात की है। इटवा थाना क्षेत्र के सेनुरी गांव निवासी अकबर अली शादी समारोह में शामिल होकर लौट रहे थे। रात करीब दो बजे वह पेट्रोल लेने के लिए सुपा पेट्रोल पंप पहुंचे, लेकिन पंप बंद था। इसके बाद वह वापस लौटने लगे। आरोप है कि सुपा पुल के पास दो युवकों ने उन्हें रोक लिया और चाकू से हमला कर दिया। इसी दौरान वहां से एक मार्शल गाड़ी गुजरी, जिससे अकबर अली बच गए। घटना के बाद दोनों आरोपी पेट्रोल पंप की ओर भाग गए। बाद में उनकी पहचान मिथिलेश यादव और जितेंद्र के रूप में हुई। रानीगंज तिराहे के पास पकड़ा गया घटना के संबंध में 23 जून को ही बांसी कोतवाली में शिकायत दर्ज कराई गई थी। पुलिस आरोपियों की तलाश कर रही थी। 16 और 17 सितंबर की दरमियानी रात रानीगंज तिराहे के पास सूचना मिलने पर पुलिस टीम ने मिथिलेश यादव को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस के अनुसार, तलाशी में उसके पास से एक अवैध चाकू बरामद हुआ। इसके बाद उसके खिलाफ अवैध हथियार रखने के मामले में भी कार्रवाई की गई।
लखीसराय के नया बाजार स्थित पथला घाट पर किऊल नदी का जलस्तर बढ़ने से नदी किनारे बसे सैकड़ों महादलित परिवारों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। बाढ़ का पानी कई कच्चे घरों में घुसने के बाद पूरी तरह डूब गया। घरों में रखा कपड़ा, बर्तन और अन्य जरूरी सामान पानी में खराब हो गया। कई परिवारों के सामने अब रहने के साथ भोजन और रोजमर्रा की जरूरतों का संकट खड़ा हो गया है। देखें, मौके से आई तस्वीरें… कच्चे घरों में घुसा बाढ़ का पानी किऊल नदी में पानी बढ़ने के बाद पथला घाट के किनारे बसे परिवारों के घरों में पानी घुस गया। लगातार बढ़ते पानी के कारण कई कच्चे मकान पूरी तरह जलमग्न हो गए हैं। बाढ़ प्रभावित परिवारों के मुताबिक घर में रखा कपड़ा, बर्तन और अन्य जरूरी सामान पानी में खराब हो गया। कुछ सामान पानी के बहाव में बह जाने की भी बात कही जा रही है। नगर परिषद के आश्रय स्थल में ली शरण घर डूबने के बाद प्रभावित परिवारों ने फिलहाल नगर परिषद के आश्रय स्थल में शरण ली है। यहां परिवार किसी तरह अपना गुजारा कर रहे हैं। भोजन और जरूरी सामान का संकट बाढ़ से बेघर हुए लोगों का कहना है कि उनके सामने रहने की समस्या के साथ भोजन और रोजमर्रा के जरूरी सामान का भी संकट है। प्रभावित परिवारों को राहत के लिए प्रशासन से उम्मीद। आश्रय स्थल में रह रहीं प्रभावित महिलाओं ने बताया कि आपदा के तहत मिलने वाली सहायता राशि उन्हें अभी तक नहीं मिली है। परिवारों ने जल्द सहायता उपलब्ध कराने की मांग की है। राहत सामग्री उपलब्ध कराने की मांग बाढ़ प्रभावित महादलित परिवारों ने प्रशासन से राहत सामग्री, भोजन और अन्य जरूरी सामान उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही आपदा सहायता राशि जल्द देने की गुहार लगाई है।