Thursday, May 7, 2026
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लहूलुहान पड़े थे चंद्रनाथ, रो रहा था ड्राइवर… सुवेंदु के पीए को कैसे मारा गया?


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लहूलुहान पड़े थे चंद्रनाथ, रो रहा था ड्राइवर… सुवेंदु के पीए को कैसे मारा गया?

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Suvendu Adhikari PA Chandranath Rath Murder Case: पश्चिम बंगाल के मध्यमग्राम में सुवेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की हत्या कर दी गई. 6 मई की रात घात लगाकर किए गए इस हमले में ऑस्ट्रियाई ग्लॉक पिस्टल का इस्तेमाल हुआ है. बीजेपी ने इसे सोची-समझी साजिश और सुवेंदु अधिकारी पर हमले की कोशिश करार दिया है. वहीं टीएमसी ने भी कोर्ट की निगरानी में सीबीआई जांच की मांग की है.

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Chandranath Rath Murder Case Details: सुवेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ की हत्या: मध्यमग्राम हत्याकांड की पूरी जानकारी. (Photo : PTI)

Suvendu Adhikari PA Murder: पश्चिम बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष और कद्दावर बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी के निजी सहायक (पीए) चंद्रनाथ रथ की सरेआम गोली मारकर हत्या कर दी गई. वारदात उत्तर 24 परगना जिले के मध्यमग्राम में बुधवार (06 मई 2026) रात करीब सवा 10 बजे हुई. पुलिस की शुरुआती जांच और चश्मदीदों के बयान बताते हैं कि हमलावरों ने बाकायदा इलाके की रेकी की थी और एक सोची-समझी प्लानिंग के तहत इस हत्याकांड को अंजाम दिया. घटना उस वक्त हुई जब चंद्रनाथ अपने घर से महज 200 मीटर की दूरी पर थे. हमलावरों के पास विदेशी हथियार थे और उन्होंने जिस गाड़ी का इस्तेमाल किया, उस पर लगी नंबर प्लेट भी जाली पाई गई है. इस वारदात के बाद से मध्यमग्राम और आसपास के इलाकों में भारी तनाव है.

बीजेपी ने आरोप लगाया है कि यह हमला सुवेंदु अधिकारी को डराने या शायद उन पर हमला करने की एक बड़ी साजिश का हिस्सा था. वहीं, अस्पताल पहुंचे सुवेंदु अधिकारी ने राज्य पुलिस की जांच पर अविश्वास जताते हुए सीबीआई जांच की मांग की है.
बीजेपी नेता सुवेंदु अधिकारी के पीए चंद्रनाथ रथ. (File Photo : PTI)

मध्यमग्राम में बुधवार रात 10 बजे के बाद क्या-क्या हुआ? चंद्रनाथ रथ मर्डर केस की टाइमलाइन

6 मई की रात करीब 10:10 बजे : चंद्रनाथ रथ की स्कॉर्पियो जेसोर रोड स्थित मध्यमग्राम के दोहरिया इलाके में दाखिल हुई. चंद्रनाथ अपने एक साथी बुद्धदेव बेरा के साथ घर की ओर बढ़ रहे थे.

रात 10:15 बजे : उनका घर सिर्फ 200 मीटर दूर था. तभी अचानक एक अनजान कार ने उनकी स्कॉर्पियो का रास्ता रोक लिया. जैसे ही गाड़ी की रफ्तार धीमी हुई, बाइक पर सवार हमलावरों ने अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी.

रात 10:20 बजे : गोलियों की आवाज सुनकर स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे. वहां का नजारा बेहद डरावना था. स्कॉर्पियो के भीतर चंद्रनाथ और बुद्धदेव खून से लथपथ पड़े थे.

रात करीब 10:40 बजे : उन्हें पास के डाइवर्सिटी नर्सिंग होम ले जाया गया, लेकिन डॉक्टरों ने चंद्रनाथ को मृत घोषित कर दिया. उनके सीने के बाईं तरफ दो गोलियां लगी थीं. वहीं उनके साथी बुद्धदेव को तीन गोलियां लगी हैं, जिनकी हालत गंभीर बनी हुई है

रात 11:30 बजे : घटना की खबर जंगल की आग की तरह फैली और वहां भारी पुलिस बल के साथ बीजेपी के बड़े नेता पहुंचने लगे.

Suvendu Adhikari’s PA Shot Dead: सुवेंदु अधिकारी के पर्सनल असिस्टेंट चंद्रनाथ रथ की गोली मारकर हत्या. 06 मई 2026 की रात कब क्या हुआ? (Infographics made with AI)

Suvendu Adhikari PA Chandra Murder: चश्मदीद ने अपनी आंखों से क्या-क्या देखा?

  • News18 इंडिया से बात करते हुए चश्मदीद सुशांत सरकार ने उस खौफनाक मंजर की पूरी कहानी बताई. सुशांत ने कहा कि उन्होंने घर के अंदर गोलियों की आवाज सुनी और बाहर भागे.
  • जब वह मौके पर पहुंचे तो देखा कि एक स्कॉर्पियो खड़ी थी और उसका ड्राइवर बुरी तरह रो रहा था. ड्राइवर बार-बार कह रहा था, ‘सर, यह क्या हो गया!’ ड्राइवर ने बताया कि कुछ लोग गोलियां बरसाकर फरार हो गए हैं.
  • सुशांत के मुताबिक, गाड़ी की दूसरी सीट पर बैठे शख्स (चंद्रनाथ) के शरीर से काफी खून निकल रहा था. वह उस वक्त जिंदा थे लेकिन कुछ बोल पाने की हालत में नहीं थे. उनके मुंह से बस हल्की आवाजें निकल रही थीं और सीना खून से लथपथ था.
  • सुशांत और अन्य लोगों ने तुरंत ड्राइवर से कहा कि वह इन्हें लेकर अस्पताल भागे और उन्होंने खुद पुलिस को फोन किया. वारदात के समय हमलावर इतनी तेजी से आए और गए कि किसी को संभलने का मौका तक नहीं मिला.



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100 करोड़ी मूवी देने वाली पहली हीरोइन, 2 साल में दी 3 सुपरहिट, करियर के पीक पर हुई गायब


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एक्ट्रेस ने जब बॉलीवुड में एंट्री मारी थी, तो लगा था कि वे प्रियंका चोपड़ा-करीना कपूर जैसी टॉप हीरोइनों को पीछे छोड़ देंगी. वे बॉलीवुड में एंट्री के साथ 100 करोड़ी फिल्म देने वाली पहली हीरोइन बन गई थीं. उन्होंने आमिर, सलमान और अक्षय कुमार जैसे बड़े सितारों के साथ ब्लॉकबस्टर फिल्में दी, फिर अचानक सिनेमा जगत को छोड़कर सबको चौंका दिया. उन्होंने 2016 में बिजनेसमैन से शादी कर ली. अक्षय कुमार ने उनकी निजी जिंदगी में बड़ा रोल प्ले किया था. एक्ट्रेस अपनी निजी जिंदगी की वजह से लाइमलाइट से दूर हैं.

नई दिल्ली: भारतीय फिल्म इंडस्ट्री में कुछ सितारे ऐसे होते हैं जो अपनी पहली ही फिल्म से धमाका कर देते हैं. एक्ट्रेस उनमें से एक थीं. वे बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ी फिल्म देने वाली पहली हीरोइन हैं. एक्ट्रेस की बॉलीवुड में एंट्री से प्रियंका चोपड़ा-करीना कपूर की बादशाहत को कड़ी चुनौती मिली थी. एक्ट्रेस ने बैक-टू-बैक हिट फिल्में देकर सबको हैरान कर दिया था. उन्होंने इंडस्ट्री के सबसे बड़े सुपरस्टार्स के साथ काम किया और बहुत ही कम समय में घर-घर में अपनी पहचान बना ली. मगर उन्होंने करियर की पीक पर एक्टिंग से दूरी बना ली.

She dominated the box office when Rs 100 crore was still a big deal, delivered back-to-back hits with the industry’s biggest stars, and became a household name almost overnight. Just when it felt like she was unstoppable, she made a shocking decision, stepping away from films at the absolute peak of her career, leaving fans wondering why. The actress? Asin Thottumkal, who not only ruled Bollywood but also made waves across the South Indian film industry.

अक्टूबर 1985 में जन्मी एक्ट्रेस का सफर मलयालम, तमिल और तेलुगू फिल्मों से शुरू हुआ था. हम असिन की बात कर रहे हैं. आपको जानकर हैरानी होगी कि उन्होंने महज 15 साल की उम्र में साल 2001 में अभिनय की शुरुआत कर दी थी. शुरुआत भले ही सादी रही हो, लेकिन उनकी मेहनत और टैलेंट ने उन्हें जल्द ही साउथ सिनेमा की सबसे पसंदीदा अभिनेत्रियों की लिस्ट में खड़ा कर दिया.

Born in October 1985, Asin carved a remarkable career across multiple film industries, seamlessly working in Malayalam, Tamil, Telugu, and later Hindi cinema. She stepped into films at a young age, making her acting debut in 2001 at just 15 with Narendran Makan Jayakanthan Vaka, directed by Sathyan Anthikkad. While her debut marked a modest beginning, it was only the start of a journey that would soon see her rise to become one of the most sought-after actresses in South Indian cinema, before eventually making a powerful transition to Bollywood.

साउथ सिनेमा में राज करने के बाद असिन ने साल 2008 में आमिर खान के साथ फिल्म ‘गजनी’ से बॉलीवुड में कदम रखा. यह फिल्म भारतीय सिनेमा के इतिहास में मील का पत्थर साबित हुई, क्योंकि यह घरेलू बॉक्स ऑफिस पर 100 करोड़ कमाने वाली पहली बॉलीवुड फिल्म बनी. इस एक फिल्म ने असिन को रातों-रात बॉलीवुड की टॉप स्टार्स की कतार में ला खड़ा किया.

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She made her much-anticipated Bollywood debut in 2008 with Ghajini, starring opposite Aamir Khan. The film turned out to be a massive game-changer, becoming the first Bollywood movie to cross the Rs 100 crore mark at the domestic box office, and instantly catapulting her into the big league. Riding on this success, she went on to star in a string of commercially successful entertainers, including Ready alongside Salman Khan, Bol Bachchan with Abhishek Bachchan and Ajay Devgn, and Khiladi 786 opposite Akshay Kumar. After a successful run in Bollywood, she was last seen on the big screen in All Is Well, marking the end of her acting career before she stepped away from the spotlight.

असिन का जादू सर चढ़कर बोला. उन्होंने सलमान खान के साथ ‘रेडी’, अक्षय कुमार के साथ ‘खिलाड़ी 786’ और अजय देवगन के साथ ‘बोल बच्चन’ जैसी सुपरहिट फिल्मों की झड़ी लगा दी. लेकिन जब हर किसी को लग रहा था कि वह बॉलीवुड पर लंबे समय तक राज करेंगी, तब उन्होंने फिल्म ‘ऑल इज वेल’ के बाद अचानक फिल्मों से दूरी बना ली, जिससे उनके फैंस काफी दंग रह गए.

In 2016, Asin chose to shift her focus from a thriving film career to her personal life, deciding to settle down and embrace a new chapter. She tied the knot with Rahul Sharma, co-founder of Micromax, in an intimate yet high-profile ceremony held at Dusit Devarana in Delhi. Following her marriage, Asin quietly stepped away from the film industry, opting for a life away from the arc lights and public glare. The couple welcomed their first child, a daughter named Arin, in October 2017, further cementing her decision to prioritise family life. Over the years, Rahul Sharma has built a successful business empire, with his net worth often reported to be around Rs 1,300 crore.

असिन ने साल 2016 में अपने करियर के शिखर पर फिल्मों को अलविदा कहकर अपनी निजी जिंदगी को चुनने का फैसला किया. उन्होंने माइक्रोमैक्स के को-फाउंडर राहुल शर्मा के साथ दिल्ली में एक निजी सेरेमनी में शादी कर ली. उन्होंने शादी के बाद ग्लैमर की दुनिया से पूरी तरह किनारा कर लिया और अपनी निजी जिदंगी में व्यस्त हो गईं. साल 2017 में इस कपल के घर एक प्यारी सी बेटी अरिन का जन्म हुआ.

During an appearance on Raj Shamani’s podcast, Asin’s businessman husband revealed Akshay Kumar played the matchmaker, where he met his wife for the first time, and why they connected. He shared, “We were going for an India vs Pakistan match (in 2012). Akshay's movie was coming up, Housefull (2), and she was acting in that movie. And then Akshay said, ‘There’s a movie coming. We want to promote the movie.' Since Micromax was the sponsor of Asia Cup, it was happening in Dhaka, Bangladesh. So if somebody asks me where you met your wife, I say the most romantic place on Earth – Dhaka.”

असिन और राहुल की इस लव स्टोरी के पीछे असली ‘क्युपिड’ बॉलीवुड खिलाड़ी अक्षय कुमार थे. राहुल शर्मा ने एक पॉडकास्ट में बताया कि उनकी पहली मुलाकात 2012 में ढाका में हुई थी. अक्षय कुमार अपनी फिल्म ‘हाउसफुल 2’ को प्रमोट कर रहे थे और राहुल की कंपनी माइक्रोमैक्स उस एशिया कप को स्पॉन्सर कर रही थी. अक्षय को लगा कि राहुल और असिन की वैल्यूज और बैकग्राउंड एक जैसे हैं, इसलिए उन्होंने दोनों के नंबर एक-दूसरे को दिए.

He continued, “Then Akshay said she's a girl who's very, very simple, down-to-earth, similar to you. She just comes, does her work, and goes back, very professional. Her mother is a doctor, father is into services, so fantastic. Then he gave her number to me and my number to her. He just felt there's so much common in us. We come from the same values and backgrounds.”

अक्षय कुमार ने खुद एक बार मजाक में बताया था कि उन्होंने इन दोनों को मिलाने के लिए काफी चालाकी से काम किया था. ‘हाउसफुल 2’ की शूटिंग के दौरान जब सब दिल्ली में थे, तो अक्षय ने एक खेल के बहाने राहुल और असिन को एक ही अलमारी में छिपा दिया था. अक्षय का यह मजेदार आइडिया काम कर गया और वहीं से दोनों के बीच बातचीत और प्यार का सिलसिला शुरू हुआ.

Akshay Kumar had also spoken about playing cupid in Asin and Rahul’s love story in 2016. He had said, “I’ve been hiding this for three-and-a-half to four years. Yes, I got them to meet and Jacqueline (Fernandez, actor) was also a part of it, but she didn’t realise it because I played it very slyly. It was ­during Housefull 2 and we were in Delhi. Don’t laugh, but we were ­playing hide and seek, and I made the two of them hide ­together in one ­cupboard. That is how it started and it is so nice that they are getting ­married now.”

आज असिन लाइमलाइट से दूर एक खुशहाल जिंदगी बिता रही हैं. एक्टर के पति राहुल शर्मा एक सफल बिजनेस टाइकून हैं, जिनकी नेटवर्थ करीब 1300 करोड़ रुपये बताई जाती है. असिन का फिल्मों को छोड़ने का फैसला भले ही फैंस के लिए चौंकाने वाला था, लेकिन उनकी कहानी दिखाती है कि कभी-कभी करियर की ऊंचाइयों से ज्यादा सुकून अपनी निजी खुशियों में मिलता है.

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मामा के घर आए मासूम की तालाब में डूबकर मौत: मेरठ में डेढ़ साल के बच्चे का शव 5 घंटे बाद मिला – Meerut News




मेरठ के खरखौदा थाना क्षेत्र के चंदपुरा गांव में एक डेढ़ साल के मासूम बच्चे की तालाब में डूबने से मौत हो गई। बच्चा अपने मामा के घर आया हुआ था और खेलते समय लापता हो गया था। काफी तलाश के बाद उसका शव गांव के तालाब से बरामद किया गया। इस घटना से परिवार में शोक का माहौल है। गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र निवासी चीकू बैंसला का डेढ़ साल का बेटा डुग्गू अपनी मां राखी के साथ कुछ दिन पहले चंदपुरा गांव स्थित अपने ननिहाल आया था। बुधवार को डुग्गू घर के बाहर खेल रहा था। खेलते-खेलते वह पास के तालाब की ओर चला गया और अचानक पानी में गिर गया। आसपास मौजूद लोगों को इस घटना का तत्काल पता नहीं चल सका। काफी देर तक बच्चा दिखाई न देने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। पहले आसपास और रिश्तेदारों के यहां खोजबीन की गई। गांव में उद्घोषणा भी कराई गई, लेकिन बच्चे का कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद ग्रामीणों ने तालाब के आसपास तलाश शुरू की। करीब चार घंटे बाद मासूम का शव तालाब में मिला। घटना की सूचना मिलते ही आसपास के लोग मौके पर जमा हो गए। बाद में लोनी से पहुंचे परिजन मासूम के शव को अपने साथ ले गए। इस घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन के प्रति नाराजगी व्यक्त की। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव का तालाब लंबे समय से गंदगी और कूड़े से भरा हुआ है, जिसकी सफाई पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। ग्रामीणों ने कुछ लोगों द्वारा तालाब की जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत भी की। ग्रामीणों का कहना है कि यदि तालाब की नियमित सफाई और उचित सुरक्षा व्यवस्था होती, तो शायद मासूम की जान बचाई जा सकती थी। इस घटना के बाद गांव में गम का माहौल है।



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मीटिंग में महिला अधिकारी बेहोश: कलेक्ट्रेट में मचा हड़कंप; आईसीयू में इलाज जारी, रात में अस्पताल पहुंचे कलेक्टर – Rewa News




बुधवार शाम कलेक्ट्रेट परिसर में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब मोहन सभागार में चल रही एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान एक महिला अधिकारी अचानक बेहोश होकर गिर पड़ीं। सिरमौर जनपद में एपीओ पद पर पदस्थ सुनीता तिवारी (शुक्ला) की तबीयत बिगड़ते ही बैठक में मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। घटना के तुरंत बाद स्टाफ ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें आनन-फानन में शहर के निजी मिनर्वा हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां उन्हें आईसीयू में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। बताया जा रहा है कि महिला अधिकारी पिछले कुछ दिनों से शुगर और ब्लड प्रेशर की समस्या से जूझ रही थीं। इसी कारण उन्हें अचानक चक्कर आया और वे बेहोश हो गईं। घटना की जानकारी मिलने के बाद कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी रात में अस्पताल पहुंचे। उन्होंने डॉक्टरों से महिला अधिकारी की स्थिति की जानकारी ली और बेहतर इलाज के निर्देश दिए। कलेक्टर ने उन्हें “आयरन लेडी” बताते हुए जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की। फिलहाल डॉक्टरों के अनुसार महिला अधिकारी की हालत स्थिर है और उनका उपचार जारी है।“मीटिंग के दौरान हमारी एक महिला अधिकारी की तबीयत अचानक खराब हो गई थी। उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों की टीम इलाज कर रही है। फिलहाल स्थिति स्थिर है और प्रशासन की ओर से हर संभव मदद दी जा रही है।”



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नींबू का रस निकालकर न फेंकें छिलके, बनाएं खट्टा-मीठा अचार, जानें रेसिपी


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अक्सर हम नींबू का रस इस्तेमाल करने के बाद उसके छिलकों को बेकार समझकर फेंक देते हैं, जबकि इनमें सेहत और ब्यूटी दोनों के लिए जबरदस्त गुण छिपे होते हैं. विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर ये छिलके न सिर्फ एक स्वादिष्ट खट्टा-मीठा अचार बनाने में काम आते हैं, बल्कि त्वचा और बालों के लिए भी फायदेमंद होते हैं. अगर सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए, तो ये साधारण से छिलके आपके किचन और ब्यूटी रूटीन दोनों को खास बना सकते हैं.

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नींबू का अचार.

अक्सर हम नींबू का रस निकालने के बाद उसके छिलकों को बेकार समझकर फेंक देते हैं, लेकिन यही छिलके सेहत और ब्यूटी दोनों के लिए किसी खजाने से कम नहीं होते. नींबू के छिलकों में विटामिन C, एंटीऑक्सीडेंट और प्राकृतिक तेल भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को डिटॉक्स करने के साथ-साथ त्वचा और बालों के लिए भी बेहद फायदेमंद होते हैं. इन्हीं छिलकों से आप घर पर स्वादिष्ट खट्टा-मीठा अचार बना सकते हैं, जो खाने में टेस्टी होने के साथ-साथ हेल्दी भी होता है.

सबसे पहले नींबू के बचे हुए छिलकों को अच्छे से धो लें, ताकि उन पर लगी गंदगी और चिपचिपाहट पूरी तरह साफ हो जाए. अब इन्हें छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें. इसके बाद इन्हें 1–2 दिन के लिए धूप में हल्का सूखा लें, ताकि इनमें मौजूद अतिरिक्त नमी निकल जाए. यह स्टेप बहुत जरूरी है, क्योंकि नमी रहने पर अचार जल्दी खराब हो सकता है.

मसाले डालकर बनाएं खट्टा-मीठा अचार
अब एक बाउल में कटे हुए छिलके डालें और उसमें नमक, हल्दी, लाल मिर्च पाउडर और थोड़ा सा भुना हुआ मेथी पाउडर मिलाएं. इसके बाद इसमें गुड़ या चीनी डालें, जिससे अचार में खट्टा-मीठा स्वाद आए. अब इसमें थोड़ा सा सरसों का तेल डालकर अच्छे से मिक्स करें. चाहें तो इसमें थोड़ा सा सौंफ और कलौंजी भी डाल सकते हैं, जिससे स्वाद और खुशबू बढ़ जाती है.

सही तरीके से रखें और पकाएं अचार
अब तैयार अचार को एक साफ और सूखे कांच के जार में भर लें. इसे 4–5 दिनों तक रोजाना धूप में रखें और बीच-बीच में चम्मच से चलाते रहें. धूप लगने से मसाले अच्छी तरह से छिलकों में घुल जाते हैं और अचार का स्वाद और भी बढ़ जाता है. कुछ ही दिनों में आपका खट्टा-मीठा नींबू के छिलके का अचार तैयार हो जाएगा.

त्वचा और बालों के लिए भी फायदेमंद
नींबू के छिलकों में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन C त्वचा को चमकदार बनाने में मदद करते हैं. आप अचार के साथ-साथ इन छिलकों का इस्तेमाल स्किन केयर में भी कर सकते हैं. यह डेड स्किन हटाने और दाग-धब्बों को कम करने में मदद करता है. वहीं बालों के लिए भी यह फायदेमंद है, क्योंकि यह स्कैल्प को साफ करने और डैंड्रफ कम करने में सहायक होता है. इस तरह नींबू के छिलकों से बना यह खट्टा-मीठा अचार स्वाद और सेहत दोनों का शानदार मेल है. इसे आप रोजाना खाने के साथ एंजॉय कर सकते हैं और साथ ही इसके ब्यूटी बेनिफिट्स का भी फायदा उठा सकते हैं.

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Vividha SinghSub Editor

विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें



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जिसपर अमेरिका को आंख दिखाता रहा ड्रैगन, भारत ने 27 साल बाद वही दुखती नस दबा दी


Indian Deligation to Taiwan: भारत ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में कूटनीतिक सरगर्मी तेज कर दी है. चीन के कड़े विरोध और ‘वन चाइना पॉलिसी’ की धमकियों के बीच, भारत के युवा राजनेताओं का एक उच्च-स्तरीय सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल इस समय ताइवान की यात्रा पर है. यह दौरा न केवल व्यापारिक और तकनीकी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके राजनीतिक निहितार्थ बीजिंग की नींद उड़ाने के लिए काफी हैं. बता दें कि ये दौरा इस मामले में भी खास है कि क्योंकि 27 साल पहले 1999 में नरेंद्र मोदी (पीएम मोदी) ताइवान के दौरे पर गए थे. भारतीय डेलिगेशन से पहले साल 2022 में नेन्सी पेलोसी के नेतृत्व में अमेरिकी डेलिगेशन ताइवान के यात्रा पर पहुंचा था. जिसका चीन ने जमकर विरोध किया था. साथ ही उसने ताइवान की खाड़ी में अपने सैन्य पेट्रोलिंग बढ़ा दिए थे.

ताइवान के विदेश मंत्रालय (MOFA) द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, भारत का यह प्रतिनिधिमंडल 4 मई से 9 मई 2026 तक ताइवान के दौरे पर रहेगा. इस डेलिगेशन की सबसे बड़ी खासियत इसकी विविधता है. इसमें सत्तापक्ष और विपक्ष के कई प्रमुख दलों के युवा चेहरे शामिल हैं, जिसमें भारतीय जनता पार्टी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, राष्ट्रीय पीपल्स पार्टी और शिवसेना (यूबीटी) शामिल है. प्रतिनिधिमंडल के सदस्य अपने प्रवास के दौरान ताइवान की विभिन्न सरकारी एजेंसियों के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे और द्विपक्षीय हितों पर चर्चा करेंगे.

भारत और ताइवान दोस्ती की नई इबारत लिख रहे हैं.

सिर्फ राजनीति नहीं, तकनीक पर समझौता

प्रतिनिधिमंडल का यह दौरा काफी खास है. ताइवान के बयान के अनुसार, भारतीय नेता मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेंगे:

  • आर्थिक और व्यापारिक टेक्नोलॉजी: ताइवान सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स का वैश्विक केंद्र है.
  • शिक्षा और संस्कृति: दोनों देशों के बीच अकादमिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना.
  • लोकतंत्र और मानवाधिकार: एक लोकतांत्रिक देश के रूप में ताइवान की कार्यप्रणाली को समझना.

ताइवान सरकार ने भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक ‘अहम साझेदार’ बताया है और विस्तृत कूटनीति के तहत सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है.

1999 का वो दौरा

इस दौरे की चर्चा के बीच साल 1999 का वह वाकया भी ताजा हो गया है. जब वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (तब वे भाजपा के महासचिव थे) ताइवान के दौरे पर गए थे. उस समय भी चीन ने भारतीय नेताओं के ताइवान जाने का पुरजोर विरोध किया था. हालांकि, मोदी ने उस दौर में भी भारत-ताइवान संबंधों की संभावनाओं को भांप लिया था. आज, जब भारत ‘एक्ट ईस्ट’ नीति पर काम कर रहा है, तो युवा नेताओं का यह दौरा उसी कड़ी का विस्तार माना जा रहा है.

चीन की तिलमिलाहट; भारत की कूटनीति

चीन हमेशा से ताइवान को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है. दुनिया के किसी भी देश के प्रतिनिधिमंडल के वहां जाने को अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करार देता है. पहले भी कई बार भारतीय सांसदों के ताइवान दौरे पर चीन ने आधिकारिक विरोध दर्ज कराया है. लेकिन भारत ने ‘सामरिक स्वायत्तता’ का परिचय देते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी कूटनीतिक यात्राओं और व्यापारिक संबंधों के लिए स्वतंत्र है.

अमेरिका के डेलिगेशन पर भी बिलबिलाया था चीन

अगस्त 2022 में तत्कालीन अमेरिकी हाउस स्पीकर नैन्सी पेलोसी के नेतृत्व में जब अमेरिकी डेलिगेशन ताइवान पहुंचा, तो बीजिंग की प्रतिक्रिया ने पूरी दुनिया को युद्ध की दहलीज पर लाकर खड़ा कर दिया था. चीन ने इसे अपनी ‘वन चाइना पॉलिसी’ का सीधा उल्लंघन और संप्रभुता पर हमला करार दिया. जवाब में चीनी सेना (PLA) ने ताइवान को छह तरफ से घेरकर अब तक का सबसे बड़ा और आक्रामक सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया, जिसमें पहली बार ताइवान के ऊपर से मिसाइलें दागी गईं. इस तनाव के कारण न केवल वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई, बल्कि वाशिंगटन और बीजिंग के बीच कूटनीतिक रिश्ते अपने सबसे निचले स्तर पर पहुँच गए.

संबंध खराब हो गए थे

इस ऐतिहासिक यात्रा के बाद अमेरिका और चीन के बीच सैन्य संवाद और जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत पूरी तरह ठप हो गई थी. चीन ने ताइवान पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए और अपने युद्धपोतों व लड़ाकू विमानों की घुसपैठ को एक ‘न्यू नॉर्मल’ (नया सामान्य) बना दिया, जो आज भी जारी है. वहीं, अमेरिका ने पीछे हटने के बजाय ताइवान के साथ अपने ‘अनौपचारिक’ संबंधों को और मजबूत किया और क्षेत्र में अपनी नौसैनिक मौजूदगी बढ़ा दी.

भारतीय प्रतिनिधिमंडल ताइवान के दौरे पर कब से कब तक है?
ताइवान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह प्रतिनिधिमंडल 4 मई से 9 मई 2026 तक के दौरे पर है.

इस प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन से भारतीय राजनीतिक दल शामिल हैं?
इस डेलिगेशन में भारतीय जनता पार्टी (BJP), राष्ट्रीय पीपल्स पार्टी (NPP), कांग्रेस, और शिवसेना (यूबीटी) समेत कई अन्य दलों के युवा राजनेता शामिल हैं.

प्रतिनिधिमंडल के सदस्य ताइवान में किन विषयों पर चर्चा करेंगे?
सदस्य मुख्य रूप से आर्थिक और व्यापारिक टेक्नोलॉजी, शिक्षा, संस्कृति, लोकतंत्र और मानवाधिकारों से जुड़े विषयों को समझने और सहयोग बढ़ाने पर चर्चा करेंगे.

नरेंद्र मोदी ने ताइवान का दौरा कब किया था?
नरेंद्र मोदी ने साल 1999 में ताइवान का दौरा किया था, जब वे भाजपा के पदाधिकारी थे.

ताइवान के विदेश मंत्रालय ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की क्या भूमिका बताई है?
ताइवान के आधिकारिक बयान में भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक ‘अहम साझेदार’ बताया गया है.



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रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेसवे का वीरपुर में निरीक्षण: भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए – Begusarai News




रक्सौल-हल्दिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना के तहत बुधवार को वीरपुर प्रखंड क्षेत्र में प्रशासनिक टीम ने स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान प्रस्तावित मार्ग और भूमि अधिग्रहण से संबंधित प्रक्रियाओं का जायजा लिया गया। टीम ने नौला, वीरपुर, पकड़ी रसलपुर और सरौंजा सहित विभिन्न चिन्हित मौजों का दौरा किया। अधिकारियों ने भूमि की वर्तमान स्थिति, कुल रकबा और संभावित प्रभावित क्षेत्रों का आकलन किया। निरीक्षण के दौरान संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को पारदर्शी, सुचारू और समयबद्ध तरीके से पूर्ण करने पर विशेष जोर दिया गया। इस निरीक्षण टीम में एडीएम, डीडीसी, डीसीएलआर और जिला भू-अर्जन पदाधिकारी सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे।



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ड्यूटी के दौरान BSF जवान की हार्ट अटैक से मौत: सीकर में व्यापारियों ने बंद रखीं दुकानें, कल अलोदा से सांवलपुरा तक निकलेगी तिरंगा यात्रा – Sikar News




सीकर जिले के खाटूश्यामजी क्षेत्र के रहने वाले BSF जवान सुल्तान सिंह नटवाड़िया का ड्यूटी के दौरान निधन हो गया। सुल्तान सिंह नटवाड़िया BSF की 90वीं बटालियन में गुजरात के गांधीधाम में तैनात थे। उनके निधन की सूचना मिलते ही सांवलपुरा गांव स्थित उनके निवास पर शोक की लहर दौड़ गई और ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। शहीद सुल्तान सिंह को अंतिम सम्मान देने के लिए गुरुवार सुबह 9 बजे अलोदा सदर थाने से तिरंगा रैली निकाली जाएगी। यह रैली अलोदा से शुरू होकर उनके पैतृक गांव सांवलपुरा तक पहुंचेगी। इस तिरंगा यात्रा में स्थानीय जनप्रतिनिधि, प्रशासनिक अधिकारी, पूर्व सैनिक संगठन और आसपास के गांवों के ग्रामीण बड़ी संख्या में शिरकत करेंगे। शहादत पर गर्व, व्यापारियों ने बंद रखी दुकानें शहीद सुल्तान सिंह के पिता हरलाल सिंह नटवाड़िया और परिवार का रो-रोकर बुरा हाल है, लेकिन गमगीन माहौल के बीच उन्हें अपने बेटे की शहादत पर गर्व भी है। ग्रामीणों ने बताया- सुल्तान सिंह हमेशा ऊर्जावान रहते थे और क्षेत्र के युवाओं को सेना में भर्ती होने के लिए प्रेरित करते थे। शहीद के सम्मान में खाटूश्यामजी और सांवलपुरा क्षेत्र के व्यापारियों ने अपनी दुकानें स्वैच्छिक रूप से बंद रखने का निर्णय लिया है। प्रशासन ने शहीद की पार्थिव देह के पहुंचने से पहले सभी तैयारियां पूरी कर ली हैं। सुल्तान सिंह को गार्ड ऑफ ऑनर के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी।



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2 एक्ट्रेस, पर्दे पर बहन, रियल लाइफ में ‘दुश्मन’, दोनों ने शादीशुदा मर्द को दिया दिल


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80 के दशक में हिंदी सिनेमा साउथ की दो एक्ट्रेस ने रातोंरात बॉलीवुड में जगह बनाई. दोनों ने अपनी एक्टिंग से सबको दीवाना बना लिया. दोनों एक्ट्रेस की किस्मत का सितारा ऐसा बुलंद हुआ कि बॉलीवुड में पूरे एक दशक राज किया. दोनों एक्ट्रेस ने कई बार पर्दे पर सगी बहनों का भी रोल निभाया. दोनों एक्ट्रेस ने त्याग की मूरत बनकर दर्शकों का खूब दिल जीता. रियल लाइफ की हकीकत चौंकाने वाली है. दोनों एक्ट्रेस एकदूसरे की शक्ल भी देखना पसंद नहीं करती थीं. सबसे दिलचस्प बात यह है कि दोनों ने शादीशुदा मर्द को दिल दिया. खुशी-खुशी दूसरी बीवी बन गईं. ये दोनों एक्ट्रेस कौन थीं, आइये जानते हैं…….

बॉलीवुड के इतिहास पर गौर से नजर डाले तो साफ पता चलता है कि साउथ से आने वाली एक्ट्रेस का 60 के दशक से ही दबदबा रहा है. पहले वैजयंती माला, फिर हेमा मालिनी और रेखा ने बॉलीवुड में दशकों राज किया. रेखा 1970 के आसपास बॉलीवुड में आई थीं. इसके बाद दो और एक्ट्रेस ने बॉलीवुड में एंट्री ली. इन दोनों को बॉलीवुड इंडस्ट्री में लाने का श्रेय जीतेंद्र को जाता है. दोनों ने एक दशक तक राज किया. हम जया प्रदा और श्रीदेवी की बात कर रहे हैं. दोनों एक्ट्रेस ने साथ में कई फिल्में कीं. यहां तक कि फिल्मों में सगी बहनों का रोल निभाया लेकिन रियल लाइफ में एकदूसरे से बात नहीं की. आइये जानते हैं दोनों एक्ट्रेस की जिंदगी से जुड़े किस्से….

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जया प्रदा और श्रीदेवी के साथ में फोटो देखकर कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता कि दोनों अभिनेत्रियों के बीच किसी तरह का ‘कोल्ड वॉर’ रहा होगा. दोनों ही एक्ट्रेस फोटो में खुश नजर आ रही हैं लेकिन असल जिंदगी की सच्चाई बेहद चौंकाने वाली है. दोनों एक्ट्रेस ने सिल्वर स्क्रीन पर सगी बहनों का रोल भी किया. दोनों ने साउथ इंडस्ट्री में नाम कमाने के बाद हिंदी सिनेमा में नाम कमाया. जीतेंद्र ही दोनों को लेकर बॉलीवुड में आए थे. खुद जया प्रदा ने अपने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि श्रीदेवी की उनसे कोई बातचीत नहीं होती थी. दोनों के बीच ईगो की लड़ाई थी.

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दोनों ने 1980 के दशक की शुरुआत में तेलुगू सिनेमा में काम किया. बॉलीवुड में जया प्रदा-श्रीदेवी ने 8 फिल्मों में एकसाथ काम किया है. ये फिल्में थीं : मवाली (1983), तोहफा (1984), मकसद (1984), नया कदम (1984) आखिरी रास्ता (1986), औलाद (1987), मजाल (1987), मैं तेरी दुश्मन (1989) और फरिश्ते (1991). मवाली और तोहफा फिल्म से ही दोनों की जोड़ी हिट हो गई. दिलचस्प बात यह है कि ज्यादातर फिल्मों में दोनों एक्ट्रेस ने बहनों का किरदार निभाया. सिल्वर स्क्रीन पर एकदूसरे पर प्यार लुटाया और दर्शकों का दिल लूट लिया मगर सच्चाई यह है कि दोनों एक्ट्रेस सेट पर दूर-दूर बैठती थीं.

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एक बार राजेश खन्ना और जीतेंद्र ने श्रीदेवी-जयाप्रदा के बीच दोस्ती कराने की ठानी. दोनों को एक कमरे में बंद कर दिया. जयाप्रदा ने दिलचस्प किस्सा शेयर करते हुए बताया था कि राजेश खन्ना और जीतेंद्र ने हम दोनों को लंच टाइम पर एक कमरे में एक घंटे के लिए बंद कर दिया था. उनका मानना था कि एकदूसरे के पास बैठने से हमारी बातचीत शुरू हो जाएगी. आपस में बातचीत का माहौल बनेगा लेकिन जब उन्होंने दरवाजा खोला और पूछा कि बताओ क्या हुआ? मैंने कहा कुछ नहीं. श्रीदेवी हंसकर चली गईं और मैं भी चली गई. हम दोनों अलग-अलग दिशा में मुंह करके बैठे रहे थे. कोई बातचीत ही नहीं हुई. यह किस्सा ‘मकसद’ फिल्म की शूटिंग के दौरान का है.

श्रीदेवी को हिंदी सिनेमा में लाने का श्रेय जीतेंद्र को जाता है. दिलचस्प बात यह है कि रेखा ने जीतेंद्र को चिढ़ाया था. दरअसल, दोनों श्रीदेवी की तेलुगू पिक्चर देख रहे थे. इसी बीच रेखा ने कहा कि तुम अगली फिल्म इस हीरोइन के साथ कर लो. जीतेंद्र ने प्रोड्यूसर राघवेंद्र राव ने बात की. तेलुगू में हिम्मतवाला में जया प्रदा ने काम किया था. जब हिंदी में इसका रीमेक बनाया गया यह फिल्म जीतेंद्र-श्रीदेवी के साथ बनाई गई. हिम्मतवाला ने श्रीदेवी को हिंदी सिनेमा में गजब की पॉप्युलैरिटी दी. वो रातोंरात फेमस हो गईं.

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स्टारडम की रेस में श्रीदेवी ने बाजी मारी. कर्मा (1986) और जाबांज (1986) के बाद 1986 की ‘नागिन’ फिल्म श्रीदेवी के करियर के लिए टर्निंग प्वॉइंट साबित हुई. फिर मिस्टर इंडिया ने उनके सितारे बुलंद कर दिए. वो पहली लेडी सुपर स्टार बन गई. ‘मिस्टर इंडिया’ के लिए श्रीदेवी को 11 लाख रुपये की फीस मिली थी, जो उस समय किसी भी अभिनेत्री के लिए बहुत बड़ी रकम थी. श्रीदेवी की मां ने 10 लाख रुपये मांगे थे, लेकिन बोनी कपूर ने उन्हें 11 लाख रुपये दिए थे. बाद में 1996 में श्रीदेवी ने बोनी कपूर से शादी की.

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बोनी कपूर और श्रीदेवी की लव स्टोरी बहुत ही रोचक है. इसकी शुरुआत बोनी कपूर के एकतरफा प्यार से हुई थी. बोनी ने 28 साल की उम्र में पहली शादी मोना शौरी से की थी. बेटे अर्जुन कपूर और बेटी अंशुला के पिता होने होने के बावजूद वो श्रीदेवी को दिल दे बैठे थे. मोना-बोनी कपूर के बीच श्रीदेवी की एंट्री हुई तो 13 साल बाद दोनों अलग हो गए. 1996 में मोना से बोनी कपूर ने तलाक लिया और श्रीदेवी से जल्दबाजी में शादी कर ली थी. जब श्रीदेवी ने शादी की तो वो प्रेग्नेंट थीं.

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फिल्म इंडस्ट्री में अक्सर श्रीदेवी और मिथुन चक्रवती के अफेयर की चर्चा होती है. दोनों ने वतन के रखवाले (1987) , वक्त की आवाज (1987), जाग उठा इंसान (1984) और गुरु (1989) जैसी फिल्मों में साथ में काम किया. कहा तो यह भी जाता है कि मिथुन के दबाव में श्रीदेवी ने बोनी कपूर को राखी भी बांधी थी. मिथुन शादीशुदा थे और अपनी पत्नी योगिता बाली से तलाक नहीं लेना चाहते थे. दोनों में अलगाव हो गया. ऐसे में बोनी ने श्रीदेवी से अपनी नजदीकियां बढ़ाईं. इस कहानी में अहम मोड़ तब आया, जब श्रीदेवी की मां बहुत बीमार हुईं. अमेरिका में उनके इलाज की व्यवस्था बोनी कपूर ने करवाई. हॉस्पिटल के बिल बोनी ने चुकाए. ऐसे में श्रीदेवी उनसेबेहद प्रभावित हुईं और उन्होंने बोनी से शादी के लिए हामी भर दी.

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जया प्रदा की लव लाइफ की बात करें तो ‘शराबी’ और ‘संजोग’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अपने अभिनय की अमिट छाप दर्शकों के दिल में छोड़ी. साल 1984 में ‘तोहफा’ के बाद हिट होने के बाद जयाप्रदा रातोंरात स्टार बन गईं. उन्होंने शादीशुदा फिल्म प्रोड्यूसर श्रीकांत नाहटा से प्यार हुआ और 1986 में जया से शादी कर ली. दिलचस्प बात यह है कि श्रीकांत नाहटा ने जया प्रदा से शादी तो कर ली लेकिन अपनी पहली पत्नी को तलाक नहीं दिया. ऐसे में जया प्रदा का उनसे खूब विवाद हुआ. श्रीकांत नाहटा ने पहली शादी चंद्रा से की थी. वो तीन बच्चों के पिता थे. कहा जाता है कि जया मां बनना चाहती थीं लेकिन श्रीकांत इसके लिए तैयार नहीं हुए. जया प्रदा ने श्रीकांत से शादी की. अपनी मांग में सिंदूर सजाया लेकिन पत्नी का दर्जा कभी नहीं मिल पाया.

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सबरीमाला केस, सुप्रीम कोर्ट बोला बार-बार रुख नहीं बदल सकते: बोहरा समाज में बहिष्कार और धार्मिक अधिकारों पर 1986 की PIL की वैधता पर सवाल उठाए


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नई दिल्ली4 घंटे पहले

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सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सबरीमाला मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने 40 साल पुरानी जनहित याचिका ( PIL) की वैधता पर सवाल उठाए। यह याचिका दाऊदी बोहरा समुदाय में बहिष्कार (एक्सकम्युनिकेशन) के अधिकार और उसके संवैधानिक संरक्षण से जुड़ी है। कोर्ट ने कहा कि उसे पुराने फैसले के साथ रहना होगा और वह अपना रुख अचानक नहीं बदल सकता।

नौ जजों की संविधान पीठ यह सुनवाई कर रही है। इसमें महिलाओं के धार्मिक स्थलों में प्रवेश, जैसे सबरीमाला मंदिर, और अलग-अलग धर्मों में धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे पर भी विचार हो रहा है।

7 सवाल, जिन पर बहस हो रही…

क्या है मामला?

यह मामला 1986 में सेंट्रल बोर्ड ऑफ दाऊदी बोहरा कम्युनिटी की PIL से जुड़ा है। इसमें 1962 के उस फैसले को रद्द करने की मांग की गई थी, जिसमें बॉम्बे प्रिवेंशन ऑफ एक्सकम्युनिकेशन एक्ट, 1949 को रद्द कर दिया गया था। उस कानून के तहत किसी सदस्य को बहिष्कृत करना गैरकानूनी था।

1962 के फैसले में कहा गया था कि धार्मिक आधार पर बहिष्कार का अधिकार समुदाय के धार्मिक मामलों के प्रबंधन का हिस्सा है। इसलिए 1949 का कानून संविधान के अनुच्छेद 26(b) के तहत मिले अधिकारों का उल्लंघन करता है।

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन ने सुधारवादी बोहराओं की ओर से दलील दी। उन्होंने कहा कि बहिष्कार सीधे तौर पर मानव गरिमा को प्रभावित करता है। उन्होंने यह भी बताया कि उनके मुवक्किल के पिता असगर अली इंजीनियर खुद बहिष्कार के शिकार रहे थे।

रामचंद्रन ने कहा कि दाऊदी बोहरा समुदाय में धार्मिक प्रमुख को “दाई” कहा जाता है, जिसे सर्वोच्च अधिकार प्राप्त है। उन्होंने बताया कि बच्चे बालिग होने पर दाई के प्रति पूर्ण निष्ठा की शपथ लेते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि हर धर्म में अनुशासन बनाए रखने के लिए कुछ नियम होते हैं। लेकिन असली सवाल सजा की सीमा और उसके मानव गरिमा पर असर का है।

इस दौरान जस्टिस नागरत्ना ने पूछा कि क्या याचिका आर्टिकल 32 के तहत 1962 के संविधान पीठ के फैसले को रद्द करने की मांग कर रही है। उन्होंने कहा कि कोर्ट अपने ही पुराने फैसले को ऐसे कैसे नजरअंदाज कर सकता है।

कॉन्सिट्यूशन बेंच का फैसला बदला तो यह गंभीर मुद्दा

उन्होंने कहा, “हम भी सख्त नियमों से बंधे हैं। अगर हर आर्टिकल 32 की याचिका पर कॉन्सिट्यूशन बेंच के फैसले को बदला जाएगा, तो यह गंभीर मुद्दा है।”

जस्टिस नागरत्ना ने यह भी कहा कि कोर्ट कल सबरीमाला मामले में इसी तरह की याचिकाओं पर सवाल उठा रहा था। ऐसे में अब अलग रुख नहीं अपनाया जा सकता।

इससे पहले मंगलवार को कोर्ट ने इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन से भी सवाल किए थे। इसी NGO की याचिका पर सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दी गई थी।

इसी बीच, वरिष्ठ वकील डेरियस खंबाटा ने पारसी महिला की ओर से दलील दी। उन्होंने कहा कि अगर आर्टिकल 26(b) को ज्यादा महत्व दिया गया तो यह व्यक्तिगत धार्मिक अधिकारों को खत्म कर सकता है।

खंबाटा के मुताबिक, आर्टिकल 26(b) का उद्देश्य धार्मिक संस्थाओं को सरकारी हस्तक्षेप से बचाना है, न कि व्यक्तियों के अधिकारों को दबाना।

बता दें कि यह मामला 1962 के फैसले को चुनौती देने से जुड़ा है, जिसे बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा था। सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा है कि अगर कोई पारसी महिला दूसरे धर्म में शादी करती है और उसे समुदाय से बाहर कर दिया जाता है, तो यह पहली नजर में भेदभाव लगता है। सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी।

सबरीमाला मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई हुई

सबरीमाला मंदिर मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई शुरू हुई थी। इस दौरान केंद्र सरकार ने महिलाओं की एंट्री के विरोध में दलीलें रखीं। सरकार ने कहा था कि देश के कई देवी मंदिरों में पुरुषों की एंट्री भी बैन है, इसलिए धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए।

पिछली 9 सुनवाई में क्या हुआ, पढ़िए…

7 अप्रैल : केंद्र की दलील- मंदिर में महिलाओं की एंट्री का फैसला गलत

8 अप्रैल- जो भक्त नहीं, वो धार्मिक परंपरा को चुनौती कैसे दे रहा

9 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- मंदिरों में एंट्री रोकने से समाज बंटेगा

15 अप्रैल- सबरीमाला मैनेजमेंट बोला- अयप्पा मंदिर रेस्टोरेंट नहीं, यहां ब्रह्मचारी देवता

17 अप्रैल- SC बोला- संविधान सबसे ऊपर, निजी धार्मिक मान्यताओं से उठकर फैसला जरूरी

21 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट ने पूछा-छूने से देवता अपवित्र कैसे होते हैं

22 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- हिंदू एकजुट रहें, संप्रदायों में बंटे नहीं

23 अप्रैल- इस्लाम में महिलाओं के मस्जिद आने पर रोक नहीं

28 अप्रैल- धार्मिक प्रथाओं के नाम पर सड़कें ब्लॉक नहीं कर सकते

29 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- धर्म के विनाश का हिस्सा नहीं बनेंगे

5 मई- सबरीमाला केस में वकीलों ने याचिका लगाई; जज ने कहा- अपने लोगों के लिए काम करें

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