Friday, May 15, 2026
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NTA से CBSE तक सभी एजेंसियां एक्टिव, NEET परीक्षा को लेकर बना नया ब्लूप्रिंट


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NTA से CBSE तक सभी एजेंसियां एक्टिव, NEET परीक्षा को लेकर आधी रात बैठक

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सरकार के सामने फिलहाल दो बड़ी चुनौतियां हैं. पहली, जल्द से जल्द NEET परीक्षा को दोबारा आयोजित करना और दूसरी, परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह लीक-प्रूफ बनाना, ताकि छात्रों का भरोसा बहाल हो सके और परीक्षा निष्पक्ष तरीके से संपन्न हो.

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नीट परीक्षा की नई तारीख का ऐलान जल्द किए जाने की उम्मीद है. (पीटीआई)

नई दिल्ली. नए सिरे से राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट)- स्नातक आयोजित करने की तैयारियों की समीक्षा के लिए बृहस्पतिवार देर रात यहां केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के आवास पर एक उच्च स्तरीय बैठक हुई. आधिकारिक सूत्रों ने यह जानकारी दी. उन्होंने बताया कि बैठक में चिकित्सा पाठ्यक्रमों में प्रवेश परीक्षा के संचालन से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर विस्तृत चर्चा हुई.

इस बैठक में सचिव (उच्च शिक्षा) विनीत जोशी, सचिव (विद्यालय शिक्षा) संजय कुमार, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) के महानिदेशक अभिषेक सिंह, सीबीएसई के अध्यक्ष और केंद्रीय विद्यालय संगठन (केवीएस) और नवोदय विद्यालय समिति (एनवीएस) के आयुक्तों के साथ-साथ अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी उपस्थित थे।

यह बैठक एनटीए द्वारा परीक्षा से जुड़ी अनियमितताओं के आरोपों के बाद तीन मई की परीक्षा को रद्द करने की घोषणा किये जाने के बाद हुई है. बैठक का मुख्य उद्देश्य आगामी दोबारा होने वाली NEET परीक्षा को पूरी तरह सुरक्षित और पारदर्शी तरीके से कराने की रणनीति तैयार करना था. इसे लेकर एजुकेशनिस्ट और सीनियर ब्यूरोक्रेट्स के साथ विस्तार से विचार-विमर्श किया गया.

इस दौरान उन सभी कमजोर क्षेत्रों की पहचान करने पर जोर दिया गया, जहां सुधार कर पेपर लीक जैसी घटनाओं की संभावना को पूरी तरह खत्म किया जा सके. केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय चाहता है कि इस बार परीक्षा में किसी भी तरह की खामी न रहे. खासतौर पर सुरक्षा व्यवस्था को सबसे बड़ी चुनौती मानते हुए हर स्तर पर तैयारियों को मजबूत किया जा रहा है.

राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (एनटीए) ने तीन मई को आयोजित नीट यूजी परीक्षा प्रश्नपत्र लीक होने के कारण रद्द कर दी थी. राजस्थान विशेष अभियान समूह (एसओजी) ने इस मामले में 150 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया था, जिनमें अभ्यर्थी और उनके परिजन शामिल हैं.

सीबीआई ने बीते 13 मई को राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (नीट)-स्नातक (यूजी) मामले में पांच लोगों को गिरफ्तार किया था, जिनमें से तीन जयपुर के हैं. गिरफ्तार आरोपियों में जयपुर के मंगीलाल बिवाल, विकास बिवाल और दिनेश बिवाल शामिल हैं, जबकि अन्य दो आरोपी गुरुग्राम के यश यादव और नासिक के शुभम खैरनार हैं. टीम मंगीलाल बिवाल और दिनेश बिवाल के घर पहुंची. विकास बिवाल भी इसी परिवार से हैं. स्थानीय पुलिस सूत्रों ने बताया कि टीम ने परिजनों के बयान दर्ज किए.

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रवि सिंह Special Correspondent

रवि सिंह News 18 India में कार्यरत हैं. पिछले 20 वर्षों से इलेक्ट्रानिक मीडिया में सक्रिय हैं. उनकी मुख्य रूप से रेलवे,स्वास्थ्य,शिक्षा मंत्रालय,VHP और राजनीतिक गतिविधियों पर पकड़ है. अयोध्या में मंदिर की कवरेज…और पढ़ें



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लखनऊ में 29 साल से जल सेवा जारी: श्री दुर्गा जी मंदिर समिति भीषण गर्मी में दे रही राहत – Lucknow News




लखनऊ में आषाढ़ माह की भीषण गर्मी के बीच, परिवर्तन चौराहा पर श्री दुर्गा जी मंदिर धर्म जागरण एवं सेवा समिति पिछले 29 वर्षों से नि:शुल्क जल सेवा प्रदान कर रही है। इस पहल से प्रतिदिन हजारों राहगीरों को राहत मिल रही है। समिति द्वारा संचालित यह सेवा प्रतिदिन सुबह से शुरू होकर मध्य रात्रि तक जारी रहती है। इसके तहत राहगीरों, रिक्शा चालकों, मजदूरों और आम नागरिकों को शीतल जल उपलब्ध कराया जाता है, जिससे उन्हें चिलचिलाती गर्मी से काफी राहत मिलती है। जल सेवा के प्रभारी प्रदीप शुक्ला ने बताया कि श्री दुर्गा जी मंदिर, शास्त्रीय नगर में स्थित एक पौराणिक कुएं से विशेष रूप से जल लाकर वितरित किया जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि समिति का लक्ष्य केवल जल पिलाना नहीं है, बल्कि मानव सेवा के माध्यम से समाज में सद्भाव और सहयोग की भावना को मजबूत करना है।



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उदयपुर में कार मिनी ट्रक में घुसी, दो की मौत: अंबेरी पुलिया के पास रात को हुआ हादसा, मृतक झालावाड़ के – Udaipur News




उदयपुर-गोगुंदा रोड पर शहर से सटे अंबेरी पुलिया पर एक मिनी ट्रक के पीछे एक कार घुस गई। हादसे में दो जनों की दर्दनाक मौत हो गई। पिंडवाड़ा हाईवे पर सुखेर थाना क्षेत्र के अंबेरी पुलिया के पास रात करीब सवा दस बजे 407 मिनी ट्रक के पीछे एक तेज रफ्तार कार घुस गई और भीषण हादसा हो गया। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार मिनी ट्रक में टेंट के सामान थे और बेरियर पर जैसे ही उसने ​ब्रेक लगाया और पीछे से आ रही कार उसमें घुस गई। सूचना पर सुखेर थानाधिकारी भरत योगी मौके पर पहुंचे और इस बीच 108 एंबुलेंस भी वहां पहुंच गई। पुलिस ने ग्रामीणों की मदद से दोनों शवों को कड़ी मशक्कत से कार के अंदर से बाहर निकाला। पुलिस ने दोनों शवों को जिला अस्पताल की मॉच्युरी में रखवाया और वहीं वहीं गंभीर घायल एक युवक को जिला अस्पताल में भर्ती करवाया। हादसे के वक्त मिनी ट्रक का चालक मौके से फरार हो गया। सुखेर थानाधिकारी भरत योगी ने बताया कि दोनों मृतकों के शव मॉच्युरी में मोर्चरी रखवा दिए है और उनकी शिनाख्त अभी नहीं हुई है। दोनों गाड़िया पुलिस ने जब्त कर ली है। कार सवार लोग झालावाड़ के रहने वाले है। इनपुट : गोपाल लोढ़ा



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ग्वालियर में चोरी के जेवर खरीदने वाला सराफा कारोबारी गिरफ्तार: 8 लाख के गहने बरामद; चोर गैंग के दो सदस्य एक दिन पहले पकड़े गए थे – Gwalior News




ग्वालियर में सूने मकानों को निशाना बनाने वाले चोरी गिरोह के खिलाफ इंदरगंज थाना पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। गुरुवार को चोरी की वारदातों का खुलासा करते हुए पुलिस ने अब चोरी के जेवर खरीदने वाले एक सराफा कारोबारी को भी गिरफ्तार किया है। आरोपी के कब्जे से करीब 8 लाख रुपए कीमत के सोने-चांदी के आभूषण बरामद किए गए हैं। मामले में अब तक एक नाबालिग समेत तीन आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है, जबकि गिरोह के अन्य सदस्य फरार हैं। थाना प्रभारी दीप्ति तोमर के अनुसार, बृज बिहार कॉलोनी में हुई चोरी के मामले में गिरफ्तार आरोपी आकाश माहौर से पूछताछ की गई थी। पूछताछ में उसने बताया कि चोरी के जेवर उसने अपने साथी की मदद से सराफा कारोबारी विशाल सोनी को बेचे थे। सूचना मिलने पर पुलिस टीम ने सराफा बाजार स्थित राजस्थान ज्वेलर्स पर दबिश देकर संचालक विशाल सोनी को हिरासत में लिया। पूछताछ में उसने चोरी का माल खरीदने की बात स्वीकार कर ली। पुलिस ने बरामद किए लाखों के जेवर कार्रवाई के दौरान पुलिस ने आरोपी कारोबारी के पास से बड़ी मात्रा में सोने-चांदी के आभूषण जब्त किए। इनमें सोने की चेन, अंगूठियां, मंगलसूत्र, झुमके सहित कई कीमती गहने शामिल हैं। बरामद आभूषणों की अनुमानित कीमत करीब 8 लाख रुपए बताई जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि जब्त किए गए गहने शहर की अन्य चोरी की वारदातों से जुड़े हैं या नहीं। नाबालिग करता था चोरी के माल का सौदा जांच में सामने आया है कि गिरोह के साथ एक 17 वर्षीय नाबालिग भी जुड़ा था। पुलिस के मुताबिक, वह चोरी के जेवर सराफा कारोबारियों तक पहुंचाने और सौदा कराने का काम करता था। पुलिस ने उसे पकड़कर किशोर न्याय बोर्ड में पेश किया, जहां से उसे बाल संप्रेक्षण गृह भेज दिया गया। फरार आरोपियों की तलाश जारी मामले में फरमान खान और विवेक प्रजापति अब भी फरार हैं। उनकी तलाश में पुलिस लगातार संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। अधिकारियों का कहना है कि दोनों आरोपियों की गिरफ्तारी के बाद शहर की अन्य चोरी की घटनाओं का भी खुलासा हो सकता है।



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क्या था 1970 का वो ‘ग्रहण’, सिंगापुर PM अब तक खौफ में, फिर लौटेगा वह दौर?


नई दिल्ली. पश्चिम एशिया में जारी तनाव के बीच सिंगापुर के प्रधानमंत्री लॉरेंस वोंग (Lawrence Wong) का बयान पूरी दुनिया के लिए एक गंभीर चेतावनी माना जा रहा है. उनका कहना है कि अभी दुनिया ने आर्थिक संकट का सबसे बुरा दौर देखा ही नहीं है. होर्मुज स्ट्रेट पिछले दो महीनों से बंद है और इसका असर अब केवल तेल बाजार तक सीमित नहीं रह गया है. ग्लोबल सप्लाई चेन टूटने लगी है, ऊर्जा संकट गहराता जा रहा है और एशियाई देशों के सामने सबसे बड़ा खतरा खड़ा हो गया है. इसी दौरान उन्होंने 1970 के दशक के उस ऐतिहासिक आर्थिक ग्रहण का जिक्र किया जिसे दुनिया आज भी डर के साथ याद करती है.

लॉरेंस वोंग ने खास तौर पर स्टैगफ्लेशन शब्द का इस्तेमाल किया. यह अर्थशास्त्र का ऐसा शब्द है जिसे किसी भी देश की अर्थव्यवस्था के लिए सबसे खतरनाक स्थिति माना जाता है. सामान्य तौर पर जब महंगाई बढ़ती है तो अर्थव्यवस्था भी बढ़ती है और रोजगार के अवसर पैदा होते हैं. लेकिन स्टैगफ्लेशन बिल्कुल उल्टा होता है. इसमें अर्थव्यवस्था रुक जाती है, बेरोजगारी बढ़ती जाती है और दूसरी तरफ जरूरी सामानों के दाम तेजी से ऊपर जाते रहते हैं. यानी लोगों की आमदनी घटती है लेकिन खर्च लगातार बढ़ता रहता है. यही वजह है कि इसे आर्थिक दुनिया का सबसे बड़ा डर माना जाता है.

1970 में कैसे शुरू हुआ था आर्थिक संकट?

1970 के दशक में दुनिया ने पहली बार इतने बड़े स्तर पर स्टैगफ्लेशन का सामना किया था. इसकी शुरुआत 1973 के अरब इजरायल युद्ध के बाद हुई. उस समय तेल उत्पादक अरब देशों के संगठन ओपेक (OPEC) ने अमेरिका और उसके सहयोगी देशों को तेल सप्लाई रोक दी थी क्योंकि वे इजरायल का समर्थन कर रहे थे. देखते ही देखते कच्चे तेल की कीमतें 300 प्रतिशत से ज्यादा बढ़ गईं. उस दौर में दुनिया की लगभग हर फैक्ट्री, ट्रांसपोर्ट सिस्टम और इंडस्ट्री तेल पर निर्भर थी. जैसे ही तेल महंगा हुआ, हर चीज की लागत बढ़ गई. कंपनियों का प्रोडक्शन धीमा पड़ गया, रोजगार खत्म होने लगे और महंगाई बेकाबू हो गई.

सिर्फ तेल नहीं, डॉलर संकट ने भी बढ़ाई थी तबाही

केवल तेल संकट ही इस आर्थिक तबाही की वजह नहीं था. उसी समय अमेरिका ने एक और बड़ा फैसला लिया जिसने पूरी वैश्विक वित्तीय व्यवस्था को हिला दिया. 1971 में अमेरिकी राष्ट्रपति रिचर्ड निक्सन (Richard Nixon) ने डॉलर का सोने से संबंध खत्म कर दिया. इससे पहले पूरी दुनिया की करेंसी अप्रत्यक्ष रूप से सोने से जुड़ी हुई थी. जैसे ही डॉलर गोल्ड स्टैंडर्ड से अलग हुआ, दुनियाभर की करेंसी में भारी अस्थिरता आ गई. डॉलर कमजोर होने लगा और आयात महंगा होता चला गया. इसके साथ ही कई देशों की सरकारों ने बेरोजगारी कम करने के लिए बाजार में जरूरत से ज्यादा पैसा डाल दिया. नतीजा यह हुआ कि महंगाई और तेज हो गई लेकिन रोजगार नहीं बढ़ा.

खेती और सप्लाई चेन संकट ने बिगाड़े हालात

उसी दौर में खेती और सप्लाई चेन संकट ने हालात और खराब कर दिए. कई देशों में खराब मौसम और फसल बर्बाद होने की वजह से अनाज की कमी हो गई. खाने पीने की चीजों के दाम तेजी से बढ़ने लगे. तेल पहले से महंगा था और अब खाद्य संकट ने आम लोगों की जिंदगी और मुश्किल बना दी. अमेरिका समेत कई देशों में लोग दूध, ब्रेड और पेट्रोल जैसी बेसिक चीजों के लिए परेशान होने लगे थे.

शेयर बाजार से लेकर नौकरियों तक सब पर पड़ा असर

1970 के दशक का आर्थिक संकट केवल महंगाई तक सीमित नहीं रहा. शेयर बाजारों में भारी गिरावट आई. अमेरिकी शेयर बाजार 1973 से 1974 के बीच लगभग 45 प्रतिशत तक टूट गया था. निवेशकों का भरोसा खत्म होने लगा था. बैंकिंग सिस्टम दबाव में आ गया था और कंपनियां बड़े पैमाने पर कर्मचारियों की छंटनी करने लगी थीं. मध्यम वर्ग की खरीदने की ताकत तेजी से खत्म हो रही थी क्योंकि सैलरी उतनी नहीं बढ़ रही थी जितनी तेजी से महंगाई बढ़ रही थी.

दुनिया को संकट से बाहर आने में लग गए 10 साल

दुनिया को इस संकट से बाहर निकलने में करीब एक दशक लग गया. अमेरिका और यूरोप के केंद्रीय बैंकों ने महंगाई रोकने के लिए ब्याज दरों को रिकॉर्ड स्तर तक बढ़ा दिया था. कई जगहों पर ब्याज दरें 20 प्रतिशत तक पहुंच गई थीं. इसका असर यह हुआ कि लोन लेना बेहद महंगा हो गया. बिजनेस ठप पड़ने लगे, घर खरीदना मुश्किल हो गया और लाखों लोग बेरोजगार हो गए. 1980 के दशक के मध्य तक जाकर दुनिया धीरे धीरे सामान्य स्थिति में लौट पाई.

आज का संकट क्यों ज्यादा खतरनाक माना जा रहा है?

अब लॉरेंस वोंग का डर इसलिए ज्यादा गंभीर माना जा रहा है क्योंकि आज की दुनिया 1970 के मुकाबले कहीं ज्यादा आपस में जुड़ी हुई है. उस समय सप्लाई चेन सीमित थीं लेकिन आज पूरी दुनिया एक दूसरे पर निर्भर है. अगर होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय तक बंद रहता है तो एशिया के देशों पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा क्योंकि चीन, भारत, जापान और सिंगापुर जैसे देश अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए खाड़ी देशों पर निर्भर हैं. तेल सप्लाई रुकने का मतलब केवल पेट्रोल और डीजल महंगा होना नहीं है बल्कि फैक्ट्री प्रोडक्शन, एयरलाइन, शिपिंग, बिजली उत्पादन और खाद्य सप्लाई तक सब प्रभावित होना है.

अगर फिर आया स्टैगफ्लेशन तो क्या होगा?

अगर मौजूदा हालात लंबे समय तक जारी रहते हैं तो दुनिया फिर स्टैगफ्लेशन जैसे दौर में पहुंच सकती है. इसका मतलब होगा कि लोगों की नौकरियां जाएंगी, महंगाई तेजी से बढ़ेगी और जरूरी सामानों की किल्लत शुरू हो सकती है. विकासशील देशों के लिए यह संकट और ज्यादा खतरनाक होगा क्योंकि उन पर पहले से भारी विदेशी कर्ज है. अगर डॉलर मजबूत हुआ और तेल महंगा बना रहा तो कई देशों के विदेशी मुद्रा भंडार तेजी से खत्म हो सकते हैं. श्रीलंका जैसा आर्थिक संकट दूसरे देशों में भी देखने को मिल सकता है.

सरकारों के लिए क्यों मुश्किल होता है इससे लड़ना?

विशेषज्ञ मानते हैं कि स्टैगफ्लेशन से लड़ना किसी भी सरकार के लिए सबसे मुश्किल चुनौती होती है. अगर सरकार महंगाई रोकने के लिए ब्याज दरें बढ़ाती है तो बिजनेस और रोजगार पर दबाव बढ़ जाता है. दूसरी तरफ अगर अर्थव्यवस्था को बचाने के लिए बाजार में ज्यादा पैसा डाला जाए तो महंगाई और बढ़ जाती है. यही वजह है कि 1970 का संकट आर्थिक इतिहास का सबसे जटिल दौर माना जाता है.

लॉरेंस वोंग की चेतावनी का मतलब क्या है?

सिंगापुर के प्रधानमंत्री का यह बयान केवल चेतावनी नहीं बल्कि दुनिया के लिए एक बड़ा संकेत है कि मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव केवल युद्ध का मुद्दा नहीं रह गया है. यह धीरे-धीरे वैश्विक आर्थिक संकट में बदल सकता है. अगर ऊर्जा सप्लाई, सप्लाई चेन और वैश्विक व्यापार पर दबाव बढ़ता रहा तो दुनिया को एक बार फिर उसी आर्थिक अंधेरे का सामना करना पड़ सकता है जिसने 1970 के दशक में पूरी वैश्विक व्यवस्था को हिला दिया था.



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Video: सैंडविच से बोर हो गए बच्चे? तो नाश्ते में बनाकर दें ब्रेड से ये 3 रेसिपी, कम मेहनत में मिलेगा लाजवाब टेस्ट


 

इस वीडियो में मास्टरशेफ पंकज भदौरिया ने ब्रेड की 3 बेहतरीन ब्रेकफास्ट रेसिपी शेयर की है. यदि आपके बच्चे नाश्ते में रोज सैंडविच खाकर बोर हो गए हैं, या आपको अपनी मॉर्निंग शिफ्ट के लिए जल्दी से टिफिन पैक करना है तो ये रेसिपीज आपके परेशानी का हल साबित हो सकते हैं. ये तीनों रेसिपी पेट भरने वाली और बनाने में आसान हैं. इनमें ब्रेड उपमा, ब्रेड कटलेट और चीज़ बर्स्ट ब्रेड पिज़्ज़ा शामिल हैं. आप इनमें से किसी भी रेसिपी को शाम के नाश्ते के रूप में भी बना सकते हैं.

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CM विजय ने पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी, फैसला हुआ तो ‘बल्‍ले-बल्‍ले’


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CM विजय ने पीएम मोदी को लिखी चिट्ठी, फैसला हुआ तो ‘बल्‍ले-बल्‍ले’

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तमिलनाडु के मुख्यमंत्री विजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से कपास पर 11 फीसदी आयात शुल्क शून्य करने की मांग की, कहा इससे टेक्सटाइल सेक्टर और लाखों नौकरियां बचेंगी.

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थलापति विजय

तमिलनाडु के मुख्यमंत्री व‍िजय ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखकर कपास पर लगने वाली 11 फीसदी आयात शुल्क को खत्म करने की मांग की है. मुख्यमंत्री ने कहा है कि अगर केंद्र सरकार यह फैसला लेती है तो राज्य की टेक्सटाइल और अपैरल इंडस्ट्री को बड़ी राहत मिलेगी और लाखों नौकरियां बच सकेंगी. अगर केंद्र ने यह फैसला ले ल‍िया तो इंडस्‍ट्री से जुड़े लोगों की बल्‍ले बल्‍ले हो जाएगी.

मुख्यमंत्री विजय ने अपने पत्र में कहा कि तमिलनाडु देश का सबसे बड़ा टेक्सटाइल और अपैरल एक्सपोर्ट करने वाला राज्य है. इस सेक्टर पर लाखों लोगों की रोजी-रोटी निर्भर है, जिनमें बड़ी संख्या ग्रामीण और अर्ध-शहरी इलाकों की महिलाओं की है. लेकिन पिछले कुछ महीनों में कपास और धागे की कीमतों में भारी बढ़ोतरी ने उद्योग को संकट में डाल दिया है.

कीमतों में आया उछाल

सीएम ने लिखा कि देश में कपास उत्पादन में कमी और ट्रेडिंग गतिविधियों में तेजी के कारण बाजार में कीमतें लगातार बढ़ रही हैं. मुख्यमंत्री के मुताबिक पिछले दो महीनों में कपास की कीमत 54,700 रुपये प्रति कैंडी से बढ़कर 67,700 रुपये प्रति कैंडी तक पहुंच गई है. यानी करीब 25 फीसदी का उछाल आया है. वहीं धागे की कीमत भी 301 रुपये प्रति किलो से बढ़कर 330 रुपये प्रति किलो हो गई है.

विजय ने कहा कि ऐसे हालात में टेक्सटाइल इंडस्ट्री के लिए कच्चे माल की लगातार उपलब्धता सुनिश्चित करना मुश्किल हो रहा है. उनका कहना है कि उद्योग को बचाने के लिए कपास आयात जरूरी हो गया है, लेकिन मौजूदा 11 फीसदी आयात शुल्क इसकी राह में सबसे बड़ी बाधा बना हुआ है.

शून्‍य करने की मांग

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री मोदी से अपील करते हुए कहा कि कपास पर लगने वाले आयात शुल्क को 11 फीसदी से घटाकर शून्य किया जाए. उनका तर्क है कि अगर ड्यूटी फ्री आयात की अनुमति मिलती है तो उद्योग अपनी बढ़ती निर्यात प्रतिबद्धताओं को पूरा कर सकेगा और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धी बना रहेगा.

विजय ने अपने पत्र में यह भी कहा कि कृषि के बाद टेक्सटाइल और अपैरल सेक्टर देश में रोजगार देने वाला सबसे बड़ा क्षेत्र है. खासतौर पर ग्रामीण महिलाओं के लिए यह सेक्टर आर्थिक सहारा बना हुआ है. ऐसे में सरकार की जिम्मेदारी है कि वह इस इंडस्ट्री को संकट से बाहर निकालने के लिए जरूरी कदम उठाए. उन्होंने कहा कि अगर कच्चे माल की लागत इसी तरह बढ़ती रही तो छोटे और मध्यम टेक्सटाइल यूनिट्स पर सबसे ज्यादा असर पड़ेगा. इससे उत्पादन घट सकता है, निर्यात प्रभावित हो सकता है और बड़ी संख्या में रोजगार पर खतरा पैदा हो सकता है.

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Gyanendra Mishra

Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें



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मंत्री शैलेंद्र साइकिल से जाएंगे दफ्तर: कार्यकर्ताओं से भी की अपील, कहा- हफ्ते में दो दिन साइकिल चलाएं भाजपा नेता-कार्यकर्ता – Munger News




बिहार सरकार के पथ निर्माण मंत्री कुमार शैलेंद्र ने भाजपा नेताओं और कार्यकर्ताओं से सप्ताह में दो दिन साइकिल का उपयोग करने की अपील की है। उन्होंने गुरुवार शाम भागलपुर से पटना जाते समय मुंगेर सर्किट हाउस में यह घोषणा की। मंत्री ने कहा कि यह पहल पर्यावरण संरक्षण और ईंधन की बचत के लिए आवश्यक है। मंत्री ने भाजपा जिलाध्यक्ष सहित विभिन्न पदाधिकारियों, नेताओं और कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे अंचल, थाना, प्रखंड या बाजार जाते समय बाइक और कार के साथ-साथ साइकिल का भी उपयोग करें। आवास से विभागीय कार्यालय तक साइकिल से जाएंगे
कुमार शैलेंद्र ने बताया कि वह स्वयं भी सप्ताह में दो दिन अपने विधायक आवास से विभागीय कार्यालय तक साइकिल से जाएंगे। उनका उद्देश्य आम लोगों के बीच एक सकारात्मक संदेश पहुंचाना है। उन्होंने जोर दिया कि केंद्र और राज्य सरकारें लगातार कम ईंधन खपत और पर्यावरण संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक कर रही हैं, ऐसे में जनप्रतिनिधियों और राजनीतिक कार्यकर्ताओं को उदाहरण प्रस्तुत करना चाहिए। लोहे का बेली ब्रिज तैयार किया जा रहा
इस दौरान मंत्री ने भागलपुर के विक्रमशिला पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से पर बनाए जा रहे बेली ब्रिज के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि पुल पर लोहे का बेली ब्रिज तैयार किया जा रहा है, जिसकी निगरानी इंजीनियरों की टीम कर रही है। निर्माण कार्य शुरू हो चुका है और अगले 15 दिनों के भीतर इसका इंफ्रास्ट्रक्चर तैयार कर लिया जाएगा। मंत्री ने दावा किया कि यह देश का पहला अत्याधुनिक बेली ब्रिज होगा, जिसकी संरचना 35 वर्षों तक सुरक्षित रहने की गारंटी के साथ बनाई जा रही है। मंत्री ने बिहार में सड़क निर्माण कार्यों की पारदर्शिता और गुणवत्ता पर भी बात की। उन्होंने कहा कि विभाग ने सभी कमिश्नरी में इंजीनियरों की तैनाती की है, जो सड़क परियोजनाओं की पूरी रूपरेखा तैयार करेंगे। उन्होंने बताया कि सड़क कब बनेगी, कितनी लागत आएगी और उसकी जीवन अवधि कितनी होगी, इसकी विस्तृत जानकारी विभागीय कार्यालय से उपलब्ध कराई जाएगी।



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‘अयोध्या ने मुझे चुना है’ राम नगरी में प्लॉट खरीदकर इमोशनल हुए रणबीर कपूर


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फिल्म स्टार रणबीर कपूर ने अयोध्या में सरयू नदी के तट पर 3.31 करोड़ रुपये की जमीन खरीदी है. उन्होंने ‘द सरयू’ नाम के लग्जरी प्रोजेक्ट में 2,134 वर्ग फीट का प्लॉट लिया है, जिसे वे अपने परिवार की विरासत मानते हैं. रणबीर कपूर के अनुसार, यह फैसला अयोध्या की सांस्कृतिक पुकार का जवाब है. दिलचस्प बात यह है कि रणबीर से पहले अमिताभ बच्चन भी अयोध्या में भारी निवेश कर चुके हैं. नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही ‘रामायण’ फिल्म में रणबीर के साथ साई पल्लवी, यश और सनी देओल जैसे दिग्गज कलाकार नजर आएंगे.

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रणबीर कपूर ने ‘रामायण’ की रिलीज से पहले बड़ा कदम उठाया है.

नई दिल्ली: रणबीर कपूर इन दिनों अपनी अगली फिल्म ‘रामायण’ को लेकर हर तरफ छाए हुए हैं, लेकिन इस बार चर्चा फिल्म की शूटिंग से ज्यादा उनकी एक खास इनवेस्टमेंट को लेकर हो रही है. खबर है कि सिल्वर स्क्रीन पर भगवान राम का किरदार निभाने जा रहे रणबीर ने असल जिंदगी में भी राम नगरी अयोध्या से नाता जोड़ लिया है. उन्होंने अयोध्या में सरयू नदी के किनारे बसे एक बेहद आलीशान प्रोजेक्ट ‘द सरयू’ में करीब 3.31 करोड़ रुपये की जमीन खरीदी है. 2,134 वर्ग फीट का यह प्लॉट उनके परिवार के लिए एक खास विरासत की तरह होगा. रणबीर का कहना है कि अयोध्या ने उन्हें खुद चुना है और उन्होंने बस उस पुकार का सम्मान किया है. यह जमीन ‘हाउस ऑफ अभिनंदन लोढ़ा’ के उस भव्य प्रोजेक्ट का हिस्सा है, जो सरयू के किनारे 75 एकड़ में फैला हुआ है और जहां लग्जरी सुविधाओं के साथ-साथ एक बड़ा शाकाहारी होटल भी बन रहा है.

देखा जाए तो अयोध्या अब बॉलीवुड सितारों का पसंदीदा ठिकाना बनता जा रहा है. रणबीर कपूर से पहले सदी के महानायक अमिताभ बच्चन भी यहां भारी-भरकम निवेश कर चुके हैं. बिग बी ने तो अलग-अलग मौकों पर अयोध्या में करोड़ों की जमीन खरीदी है, जिससे साफ पता चलता है कि फिल्मी गलियारों में इस ऐतिहासिक शहर का महत्व कितना बढ़ गया है. रणबीर के लिए यह प्लॉट खरीदना न सिर्फ एक प्रॉपर्टी डील है, बल्कि एक इमोशनल फैसला भी है क्योंकि वह अयोध्या को भारतीय संस्कृति और इतिहास का सबसे अहम हिस्सा मानते हैं. यह प्रोजेक्ट न केवल प्राकृतिक सुंदरता से भरपूर है, बल्कि यहां रहने वालों को मॉडर्न सुविधाओं के साथ आध्यात्मिक शांति का अनुभव भी मिलेगा, जो रणबीर के इस फैसले को और भी खास बनाता है.

अयोध्या की मिट्टी से हुआ जुड़ाव
दूसरी ओर, रणबीर कपूर की फिल्म ‘रामायण’ को लेकर फैंस की एक्साइटमेंट सातवें आसमान पर है. नितेश तिवारी के निर्देशन में बन रही इस मेगा बजट फिल्म में रणबीर कपूर के साथ साई पल्लवी माता सीता के किरदार में नजर आएंगी. फिल्म की स्टार कास्ट काफी तगड़ी है, जिसमें रावण के रूप में यश, हनुमान के रोल में सनी देओल और लक्ष्मण के किरदार में रवि दुबे जैसे सितारे अपनी कला का जौहर दिखाएंगे. म्यूजिक की कमान एआर रहमान और हॉलीवुड के दिग्गज हंस जिमर के हाथों में है. ऐसे में रणबीर का फिल्म की रिलीज से पहले अयोध्या में घर बसाने की तैयारी करना उनके फैन्स के लिए किसी बड़े सरप्राइज से कम नहीं है. अुयोध्या की मिट्टी से जुड़ने का यह कदम उनके फिल्मी किरदार और असल जिंदगी, दोनों के लिहाज से एक नया चैप्टर शुरू करने जैसा है.

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Abhishek NagarSenior Sub Editor

अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और पॉल…और पढ़ें





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ऋतिक रोशन की हीरोइन, कभी को-स्टार को जड़ दिया था तमाचा, एक्टिंग छोड़ बनी इंटीरियर डिजाइजर


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एक्ट्रेस ने बॉलीवुड में ‘धूम’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्मों से अपनी पहचान बनाई, लेकिन उनका फिल्मी सफर काफी उतार-चढ़ाव भरा रहा. उन्होंने को-स्टार को थप्पड़ मारकर विवाद पैदा किया था. करीब एक दशक इंडस्ट्री में एक्टिव रहने के बाद एक्ट्रेस ने अब एक्टिंग छोड़कर इंटीरियर डिजाइनिंग में अपना करियर शुरू किया है. उन्होंने ‘ईशा धर्मेंद्र देओल डिजाइन’ नाम से अपना लेबल लॉन्च किया है, जिसका लोगो उनके पिता ने डिजाइन किया है. आज वे अलीबाग जैसे इलाकों में लग्जरी प्रोजेक्ट्स पर काम कर रही हैं.

नई दिल्ली: बॉलीवुड के सबसे बड़े फिल्मी घरानों में से एक की बेटी ने कभी पर्दे पर धूम मचाई तो कभी विवादों के कारण चर्चा में रहीं. वे आज अपनी एक अलग पहचान बना चुकी हैं. हम बात कर रहे हैं ईशा देओल की, जिन्होंने चकाचौंध भरी दुनिया से निकलकर अब इंटीरियर डिजाइनिंग की दुनिया में कदम रखा है. ईशा का सफर किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं है, जिसमें कामयाबी भी है और बड़े सबक भी.

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ईशा देओल बॉलीवुड के ‘ही-मैन’ धर्मेंद्र और ‘ड्रीम गर्ल’ हेमा मालिनी की बेटी हैं. इतने बड़े सितारों की बेटी होने के नाते जब उन्होंने 2002 में फिल्म ‘कोई मेरे दिल से पूछे’ से डेब्यू किया, तो उन पर उम्मीदों का भारी बोझ था. हालांकि उन्हें इस फिल्म के लिए अवॉर्ड्स मिले, लेकिन फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कोई खास कमाल नहीं दिखा पाई.

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ईशा का शुरुआती दौर काफी स्ट्रगल से भरा रहा. उनकी कई फिल्में जैसे ‘ना तुम जानो ना हम’ और ‘कुछ तो है’ दर्शकों को लुभाने में नाकाम रहीं. उन्हें वह एक बड़ी हिट नहीं मिल पा रही थी, जिसकी तलाश हर स्टार को होती है. लेकिन 2004 में आई फिल्म ‘धूम’ ने सबकुछ बदल दिया और ईशा को करियर की पहली सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर मिली.

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‘धूम’ और ‘नो एंट्री’ जैसी मल्टी-स्टारर फिल्मों में ईशा को बहुत पसंद किया गया, लेकिन सोलो एक्ट्रेस के तौर पर उनकी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर लड़खड़ाती रहीं. उन्होंने लगभग एक दशक तक इंडस्ट्री में रहने के बाद धीरे-धीरे फिल्मों से दूरी बना ली. उन्होंने महसूस किया कि शायद उनकी मंजिल कहीं और है और उन्होंने अपनी निजी जिंदगी और नए प्रोजेक्ट्स पर ध्यान देना शुरू किया.

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ईशा करियर के उतार-चढ़ाव के अलावा एक बड़े विवाद के लिए भी सुर्खियों में रहीं. साल 2005 में फिल्म ‘प्यारे मोहन’ की शूटिंग के दौरान उनकी अपनी को-स्टार अमृता राव के साथ बहस हो गई थी. बात इतनी बढ़ गई कि ईशा ने अमृता को थप्पड़ जड़ दिया. बाद में ईशा ने साफ कहा कि उन्हें इसका कोई पछतावा नहीं है क्योंकि बात उनके आत्मसम्मान पर आ गई थी.

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धर्मेंद्र और हेमा मालिनी के रिश्ता पर हमेशा बातें हुईं, क्योंकि 1980 में शादी के समय धर्मेंद्र पहले से शादीशुदा थे. तमाम सामाजिक और पारिवारिक विरोध के बावजूद दोनों ने एक-दूसरे का हाथ थामे रखा. वे न केवल पर्दे पर एक सुपरहिट जोड़ी साबित हुए, बल्कि असल जिंदगी में भी उन्होंने एक मजबूत और अटूट रिश्ता बनाकर दिखाया.

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दिलचस्प बात यह है कि ईशा के इस नए ब्रांड का लोगो खुद उनके पिता धर्मेंद्र ने डिजाइन किया था. ईशा अक्सर कहती हैं कि उनके काम पर उनके पिता की पसंद और उनकी कला की झलक साफ दिखती है. अपनी नई शुरुआत पर वे काफी भावुक भी नजर आईं और सोशल मीडिया के जरिए अपनी खुशी जाहिर की.

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ईशा के इस नए सफर में उनके भाई बॉबी देओल ने भी उन्हें खूब सपोर्ट किया है. एक्टिंग की दुनिया से इंटीरियर डिजाइनिंग तक का यह सफर दिखाता है कि अगर आपमें कुछ नया करने का जज्बा हो, तो आप किसी भी मोड़ पर अपनी पहचान बदल सकते हैं. आज ईशा अपनी इस नई क्रिएटिव दुनिया में बेहद खुश और सफल हैं.

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