Tuesday, June 2, 2026
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सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने पर चर्चा: सहकारी समितियों के बैंक खाते, माइक्रो एटीएम, रूपे किसान क्रेडिट कार्ड वितरण पर जोर – jhalawar News




झालावाड़ में मंगलवार को केंद्रीय सहकारी बैंक मुख्यालय स्थित सहकार भवन में ‘सहकारिता में सरकार’ विषय पर एक जिला स्तरीय कार्यशाला एवं समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता केंद्रीय सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशक ओमप्रकाश जैन ने की। कार्यशाला में सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने, किसानों को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने और केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने पर विस्तृत चर्चा हुई। अभियान के तहत सहकारी समितियों और उनके सदस्यों के खाते केंद्रीय सहकारी बैंक में खोलने पर जोर दिया गया। इसके अतिरिक्त डेयरी और अन्य प्राथमिक सहकारी समितियों को बैंक मित्र नियुक्त कर माइक्रो एटीएम उपलब्ध कराने और दुग्ध उत्पादक किसानों को रूपे किसान क्रेडिट कार्ड वितरित करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। जिले की 19 प्राथमिक डेयरी समितियों और 48 पैक्स समितियों को रियायती दरों पर माइक्रो एटीएम वितरित किए गए हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं की पहुंच आसान होगी। प्रबंध निदेशक ओमप्रकाश जैन ने बताया कि बैंक कार्यक्षेत्र में संचालित सभी 294 सक्रिय दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों के खाते केंद्रीय सहकारी बैंक में हैं, जिनमें 128.63 लाख रुपए से अधिक की राशि जमा है। मत्स्य पालन विभाग की समितियों के खातों को भी नियमित रूप से बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। रूपे किसान क्रेडिट कार्ड वितरण अभियान के तहत बैंक ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू कर दी है। बैंक कार्यक्षेत्र के लिए लगभग 5000 रूपे किसान क्रेडिट कार्ड के आवेदन प्राप्त हुए हैं। कार्ड मिलने पर डेयरी समितियों से जुड़े पात्र खाताधारकों को इनका वितरण किया जाएगा। इस दौरान 10 एटीएम कार्ड भी वितरित किए गए। कार्यशाला में नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक ने भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के राष्ट्रव्यापी अभियान ‘सहकारिता में सरकार’ की जानकारी दी। उन्होंने सभी सहकारी संस्थाओं और हितधारकों को अपने-अपने क्षेत्र में ब्लॉक स्तर पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए। कार्यशाला के अंत में सहकारिता क्षेत्र को और अधिक सशक्त एवं जनहितैषी बनाने के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने तथा अभियान को जमीनी स्तर तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया। दो दिवसीय “टाइगर प्रदर्शनी” का आयोजन 5 से जिला प्रशासन झालावाड़ की ओर से संचालित “वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान ” के तहत विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 5 एवं 6 जून को विजया राजे सिंधिया राजकीय खेल संकुल, झालावाड़ में दो दिवसीय “टाइगर प्रदर्शनी” का आयोजन किया जाएगा। प्रदर्शनी का शुभारंभ 5 जून को सवेरे 9 बजे होगा। जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने बताया कि प्रदर्शनी का उद्देश्य आमजन, विशेषकर युवाओं एवं स्टूडेंट्स में वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित करना है। बाघों के जीवन चक्र, व्यवहार, संरक्षण प्रयासों, वन पारिस्थितिकी तंत्र में उनकी भूमिका तथा वन्यजीवों के संरक्षण से जुड़े प्रेरक संदेशों को आकर्षक चित्रों, फोटोग्राफ्स एवं जानकारीपूर्ण सामग्री के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। आयोजन भविष्य में टाइगर सफारी एवं ईको-टूरिज्म जैसी अवधारणाओं के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध होंगे। प्रदर्शनी के माध्यम से आमजन को वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन विकास के बीच के संबंध से अवगत कराया जाएगा, जिससे प्राकृतिक धरों के संरक्षण के साथ-साथ क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहन मिल सके। यह आयोजन प्रकृति, वन्यजीव एवं पर्यावरण के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करते हुए आने वाली पीढ़ियों में संरक्षण की भावना को सुदृढ़ करेगा। जिला प्रशासन द्वारा आमजन से प्रदर्शनी में अधिकाधिक संख्या में पहुंचकर पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति अपनी सहभागिता सुनिश्चित करने की अपील की गई है। अभियान के तहत आयोजित यह प्रदर्शनी पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनभागीदारी को बढ़ावा देने के साथ-साथ प्रकृति और वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने, पर्यटन संभावनाओं को रेखांकित करने और वन्यजीव संरक्षण के प्रति व्यापक जनजागरूकता उत्पन्न करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।



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1968 की वो ब्लॉकबस्टर फिल्म, जिसमें था लता मंगेशकर का सुपरहिट गाना, मूवी ने रचा इतिहास


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रामायण जैसा कालजयी टीवी सीरियल बनाने वाले रामानंद सागर ने फिल्म इंडस्ट्री में अपना सफर स्क्रीनप्ले राइटर के रूप में शुरुआत की. राज कपूर की 1949 में आई क्लासिक फिल्म बरसात के राइटर थे. ‘रामायण’ से पहले रामानंद सागर ने 60-70 के दशक में कई सफल फिल्में भी बनाईं. अमिताभ बच्चन-रेखा से हमेशा उन्होंने दूरी ही बरती. बॉलीवुड के एक किलर लुक हीरो को बहुत पसंद करते थे. 8 साल में इस हीरो के साथ दो फिल्में बनाईं, दोनों ही मैसिव रहीं.

‘रामायण’ जैसा सीरियल बनाने वाले मशहूर निर्माता-निर्देशक रामानंद सागर ने करीब तीन दशक फिल्में बनाईं. फिल्म इंडस्ट्री में वैसे तो उन्होंने अपनी शुरुआत पटकथा लेखक के तौर पर की थी. उन्होंने घूंघट, जिंदगी और आरजू (1965) जैसी हिट फिल्में बनाई. रामानंद सागर धर्मेंद्र के फैन थे. उन्होंने धर्मेंद्र के साथ 8 साल के अंतराल में दो फिल्में बनाईं. दोनों ही फिल्में मैसिव हिट रहीं. ये फिल्में थीं : आंखें और चरस. आइये जानते हैं इन फिल्मों से जुड़े दिलचस्प फैक्ट्स…….

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सबसे पहले बात करते हैं 1968 में रिलीज हुई फिल्म ‘आंखें’ की. धर्मेंद्र-माला सिन्हा स्टारर इस फिल्म की शुरुआत में एक शेर ‘उस मुल्क की सरहद को कोई छू नहीं सकता, जिस सरहद पर निगाहबान हैं आंखें’ सुनाई देता है. फिल्म के कुछ हिस्से की शूटिंग जापान में भी हुई थी. आंखें एक स्पाइ थ्रिलर फिल्म थी. महमूद, ललिता पवार, जीवन और मदन पुरी भी सहायक भूमिकाओं में थे. फिल्म का सदाबहार म्यूजिक रवि ने कंपोज किया था. गीतकार साहिर लुधियानवी थे.

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फिल्म का सबसे पॉप्युलर गाना ‘मिलती है जिंदगी में मुहब्बत कभी-कभी’ था. इसके अलावा ‘गैरों पे करम, अपनों पे सितम, ऐ जाने वफा ये जुल्म ना कर’ गाना भी खूब पॉप्युलर हुआ. ‘मिलती है जिंदगी में मुहब्बत कभी-कभी’ गाना जापान में शूट हुआ था. यह गाना साहिर लुधियानवी ने नाजिर काजमी के शेर ‘ऐ दिल कैसे नसीब ये तौफीक-ए-इजतराब, मिलती है जिंदगी में ये राहत कभी-कभी’ से इंस्पायर्ड होकर लिखा था. रामानंद सागर की पहली फिल्म थी जिसकी शूटिंग विदेश में हुई थी. यह पहली हिंदी फिल्म है जिसकी शूटिंग इजराइल के बेरुत में हुई थी.

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‘आंखें’ फिल्म से जुड़ा सबसे दिलचस्प किस्सा राज कुमार से जुड़ा है. रामानंद सागर ने उन्हें लीड रोल ऑफर किया था. स्क्रिप्ट सुनने के बाद उन्होंने अपने कुत्ते को बुलाया और पूछा कि क्या वो इस फिल्म में काम करना चाहेगा. कुत्ते ने कुछ रिस्पांस नहीं दिया. राज कुमार ने कहा कि मेरा कुत्ता भी यह रोल नहीं करना चाहता तो मैं कैसे कर लूं?

फिल्म का एक गाना ‘मेरी सुन ले अर्ज बनवारी, तेरे द्वार खड़ी दुखियारी’ में भगवान कृष्ण की मूर्ति आर्ट डायरेक्टर ने मंगवाई थी. गाना फिल्माने के बाद रामानंद सागर इस मार्बल की मूर्ति घर ले गए थे. वो कृष्ण के बहुत बड़े उपासक थे. उन्होंने फिल्म के क्लाइमैक्स में भगवान कृष्ण की शक्ति भी बहुत ही रोमांचक अंदाज में दिखाई थी. 1.2 करोड़ के बजट में बनी ‘आंखें’ ने 3.25 करोड़ का कलेक्शन किया था. यह एक ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई थी.

रामानंद सागर ने 70 के दशक में एक बार फिर से धर्मेंद्र के साथ फिल्म बनाई. 1972 में युगांडा से एशियाई देश के रहवासियों को निकाला जा रहा था. इस बात को ‘चरस’ की कहानी का आधार फिल्म बनाई गई. धर्मेंद्र-हेमा मालिनी लीड रोल में थे. टॉम अल्टर की यह पहली फिल्म थी. डायलॉग वेद राही ने लिखे थे. स्क्रीनप्ले मोती सागर ने लिखे थे. फिल्म के लेखक-निर्माता-निर्देशक रामानंद सागर थे. फिल्म के प्रमोशन में ‘हॉटेस्ट रोमांस ऑफ द ईयर’ शब्द यूज किया गया था क्योंकि उन दिनों धर्मेंद्र-हेमा मालिनी का रोमांस पीक पर था. फिल्म की शूटिंग यूरोप के कई देशों जैसे इटली, स्विस, फ्रांस और माल्टा में की गई थी.

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फिल्म का म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने कंपोज किया था. फिल्म के दो गाने असाधारण थे. ये गाने थे : कल की हसीन मुलाकात के लिए, हम तुम जुदा हो जाते हैं, अच्छा चलो सो जाते हैं और ‘आ जा तेरी याद आई.’ यह गाना फिल्म की बैकबोन था. गानों का प्लेसमेंट लाजवाब था. ‘चरस’ से पहले अमजद खान की फिल्म ‘शोले’ 1975 में ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी. अमजद खान को लोग ‘गब्बर सिंह’ के नाम से जानते थे. इसका फायदा रामानंद सागर को मिला. डिस्ट्रीब्यूटर्स से उन्हें मुंहमागा पैसा मिला. फिल्म का बजट 1.45 करोड़ था और मूवी ने 1.8 करोड़ रुपये की कमाई की थी. फिल्म हिट रही थी. हकीकत यह थी कि फिल्म से इससे कहीं ज्यादा कमाई हुई थी. यह मामला 2017 में सामने आया था. सागर परिवार पर इनकम टैक्स की चोरी का आरोप लगा. परिवार को 6 लाख का जुर्माना भरना पड़ा था.

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महाराजगंज के सोहगीबरवा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के बीच सदियों से खड़ा है यह लकड़ी का पुल


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जहां आज के आधुनिक दौर में आधुनिक टेक्नोलॉजी का प्रयोग हो रहा है तो वहीं यह लकड़ी का पूल आज भी इन दूर दराज के क्षेत्र में अपनी उपयोगिता साबित कर रहा है. सोहगीबरवा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के बीच मौजूद इस पूल को देखने पर हमें पुराने ऐतिहासिक दृश्य जैसा लगता है. इसमें प्रयोग हुए लकड़ी काफी जर्जर हो चुके हैं इसके बावजूद भी यहां से लोगों को गुजरते हुए देखा जाता है.

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महराजगंज: महराजगंज जिले के चौक क्षेत्र के घने जंगलों के बीच में एक बहुत ही अनोखा लकड़ी से बना पुल देखने को मिलता है. जो देखने में काफी आकर्षक लगता है. इसकी बनावट देखकर ऐसा लगता है कि यह आज से नहीं बल्कि सदियों से यहां खड़ा है, जो अपनी मजबूत और टिकाऊ होने की वजह से आज भी इस स्थिति में है. लकड़ी से बने इस पूल की बात करें तो यह एक नाले के ऊपर बना है जहां से जंगल के बीच रहने वाले लोग और आसपास के लोग इधर से आवागमन करते हैं.

जहां आज के आधुनिक दौर में आधुनिक टेक्नोलॉजी का प्रयोग हो रहा है तो वहीं यह लकड़ी का पूल आज भी इन दूर दराज के क्षेत्र में अपनी उपयोगिता साबित कर रहा है. सोहगीबरवा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के बीच मौजूद इस पूल को देखने पर हमें पुराने ऐतिहासिक दृश्य जैसा लगता है. इसमें प्रयोग हुए लकड़ी काफी जर्जर हो चुके हैं इसके बावजूद भी यहां से लोगों को गुजरते हुए देखा जाता है.

पुल की ज्यादातर पटरियां टूटी

सदियों बीत जाने के बावजूद भी यह पूल यूंही खड़ा है. खास बात है कि इसके नीचे पिलर से बना लकड़ी का बेस पूरी तरह पानी में रहता है लेकिन आज भी बहुत कमजोर नहीं दिखता बल्कि इस पूल का पूरा भार अपने ऊपर लिए खड़ा है. मौजूदा समय में यह काफी सकरा हो गया है लेकिन पहले ऐसा नहीं था यह पूल पहले काफी चौड़ा होता था. जब आप इसके स्ट्रक्चर को देखेंगे तो इस बात का अंदाजा लगा सकते हैं कि यह पहले कितना चौड़ा हुआ करता था. पूल इतना पुराना है कि इसकी ज्यादातर पटरियां उखड़ चुकी हैं लेकिन स्थानीय लोगों ने आवागमन की सुविधा के लिए टूटे हुए पटरियों की जगह पर पेड़ की शाखों का इस्तेमाल किया है. वर्तमान समय में भी यहां के स्थानीय लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं और रोजाना इसी पूल से होकर आते जाते भी है. बीच जंगल में खड़ा यह पूल वर्षों से यहां के लोगों को मुख्य धारा से जोड़ने का काम कर रहा है. जंगल में कई ऐसे गांव हैं जिनके लिए यह पूल बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाता है.

इस क्षेत्र का इतिहास बन चुका है यह पुल

बहुत से लोग ऐसा बताते हैं कि यह पूल आज से नहीं बल्कि बहुत समय से यहां पर है. हालांकि इसकी उम्र का अंदाजा लगाना आज के समय में संभव नहीं है. आज के समय में यह पूल सिर्फ आवागमन का साधन ही नहीं है बल्कि इस क्षेत्र के इतिहास का एक हिस्सा बन चुका है. घने जंगलों के बीच मौजूद होने की वजह से इसके आसपास का प्राकृतिक सौंदर्य भी लोगों को खूब आकर्षित करता है. चारों तरफ फैली हरियाली, ऊंचे पेड़ और नीचे बहता पानी इसको और भी खूबसूरत बनाता है. समय समय पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इसके फोटोज और वीडियो देखने को मिलता है. स्थानीय लोगों की ऐसी मांग है कि इस पूल को सही करने की जरूरत है जिससे लोगों को आने-जाने में आसानी हो सके क्योंकि यह जर्जर हो चुका है जिस पर आना-जाना बहुत खतरे भरा हो गया है.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें



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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का वो रास्ता जहां छिपा है भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा!


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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने भारतीय शेयर बाजार को लेकर सकारात्मक तस्वीर पेश की है. ब्रोकरेज का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 में निफ्टी 50 कंपनियों की कमाई 18 फीसदी और अगले वित्त वर्ष में 14 फीसदी बढ़ सकती है. रिपोर्ट में चेतावनी भी दी गई है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई तो भारत के चालू खाता घाटे, महंगाई और राजकोषीय स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है. इसके बावजूद बैंकिंग, फाइनेंशियल, ग्लोबल सर्विसेज और यूटिलिटीज सेक्टर भारतीय बाजार को मजबूती देने की स्थिति में हैं.

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रिपोर्ट में भारतीय शेयर बाजार के वैल्यूएशन को लेकर भी अहम टिप्पणी की गई है. (AI)

नई दिल्ली. पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर एक अहम रिपोर्ट सामने आई है. दिग्गज ब्रोकरेज फर्म कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने अपनी ताजा स्ट्रेटेजी रिपोर्ट में कहा है कि तेल की ऊंची कीमतों के कारण भारत का व्यापक आर्थिक परिदृश्य पहले की तुलना में कमजोर हुआ है. इसके बावजूद भारतीय कॉरपोरेट सेक्टर और शेयर बाजार की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय कंपनियों की कमाई आने वाले दो वित्त वर्षों में तेज रफ्तार से बढ़ सकती है, जो बाजार को सहारा देने का काम करेगी.

कोटक के संजीव प्रसाद और उनकी टीम द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2025-26 में निफ्टी-50 पर लिस्टेड कंपनियों की आय में केवल 8 फीसदी की वृद्धि रहने का अनुमान है. लेकिन इसके बाद तस्वीर तेजी से बदल सकती है. ब्रोकरेज का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 में निफ्टी 50 कंपनियों की कमाई 18 फीसदी और वित्त वर्ष 2027-28 में 14 फीसदी बढ़ सकती है. हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर पश्चिम एशिया का संकट लंबा खिंचता है और तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो भारत के लिए महंगाई, चालू खाता घाटा और राजकोषीय घाटा जैसी चुनौतियां बढ़ सकती हैं.

बाजार वैल्यूएशन में दिख रहा बड़ा अंतर

रिपोर्ट में भारतीय शेयर बाजार के वैल्यूएशन को लेकर भी अहम टिप्पणी की गई है. कोटक का मानना है कि कंजम्पशन और इन्वेस्टमेंट आधारित कई सेक्टर इस समय महंगे वैल्यूएशन पर कारोबार कर रहे हैं. आईटी और फार्मा सेक्टर उचित से लेकर महंगे स्तर पर दिखाई दे रहे हैं, जबकि बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयर अभी भी आकर्षक वैल्यूएशन पर उपलब्ध हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि स्मॉलकैप, मिडकैप और कुछ सरकारी कंपनियों के शेयरों में जरूरत से ज्यादा तेजी देखने को मिली है. ऐसे शेयरों में निवेशकों को सावधानी बरतने की जरूरत हो सकती है क्योंकि मौजूदा वैल्यूएशन उनके वास्तविक प्रदर्शन से काफी आगे निकल चुका है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना भारत के लिए सबसे बड़ा जोखिम

कोटक की रिपोर्ट में सबसे बड़ी चिंता ऊर्जा सुरक्षा को लेकर जताई गई है. भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पश्चिम एशिया पर काफी निर्भर है. वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश का लगभग 42 फीसदी कच्चा तेल आयात, 55 फीसदी एलएनजी आयात और करीब 88 फीसदी एलपीजी आयात सीधे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और उससे जुड़े क्षेत्रों के रास्ते हुआ है.

रिपोर्ट के अनुसार यदि पश्चिम एशिया का तनाव सीमित समय में कम हो जाता है और कच्चे तेल की औसत कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहती है, तो भारत का चालू खाता घाटा जीडीपी के 2.5 फीसदी के आसपास रह सकता है. लेकिन यदि संघर्ष लंबा खिंचता है और तेल की कीमतें और बढ़ती हैं, तो चालू खाता घाटा 3 फीसदी तक पहुंच सकता है, जिससे अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बनेगा.

महंगाई और कमजोर मानसून बढ़ा सकते हैं मुश्किलें

कोटक ने वित्त वर्ष 2026-27 में महंगाई को लेकर भी चेतावनी दी है. रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष में जहां औसत खुदरा महंगाई दर करीब 2.5 फीसदी रही थी, वहीं नए वित्त वर्ष में यह बढ़कर 5 फीसदी तक पहुंच सकती है. इसके पीछे कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, बढ़ती उत्पादन लागत और खाद्य महंगाई प्रमुख कारण होंगे.

स्थिति इसलिए और चुनौतीपूर्ण हो सकती है क्योंकि भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने इस साल सामान्य से कमजोर मानसून का अनुमान जताया है. कमजोर बारिश से कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है और खाद्यान्न व सब्जियों की कीमतों में तेजी आ सकती है. अगर सरकार को पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ानी पड़ीं, तो परिवहन लागत बढ़ने से महंगाई का असर पूरे बाजार में फैल सकता है.

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए क्या है बड़ा संदेश

कोटक की रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि पश्चिम एशिया संकट के कारण भारत के मैक्रोइकोनॉमिक संकेतकों पर दबाव बढ़ सकता है, लेकिन कॉरपोरेट सेक्टर की कमाई फिलहाल मजबूत बनी हुई है. यही वजह है कि बाजार को निकट भविष्य में कंपनियों के बेहतर नतीजों से सहारा मिलने की उम्मीद है. हालांकि तेल की कीमतों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति पर निवेशकों की नजर लगातार बनी रहेगी क्योंकि यही आने वाले महीनों में भारतीय अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने वाला सबसे बड़ा फैक्टर साबित हो सकता है.

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जय ठाकुरSenior-Sub Editor

मैं जय ठाकुर, न्यूज18 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहा हूं. मेरा मुख्य काम बिजनेस की पेचीदा खबरों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. फिर चाहे वह शेयर बाजार की हलचल हो, देश की इकोनॉमी क…और पढ़ें



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CBSE का बड़ा बयान, रिवॉल्यूशन पोर्टल पर साइबर हमलों की बौछार हुई


नई दिल्ली: सीबीएसई के रिवॉल्यूशन पोर्टल से जुड़ी एक बड़ी खबर सामने आई है। सीबीएसई ने कहा है कि रिवॉल्यूशन पोर्टल पर साइबर हमलों की बौछार हुई है। सीबीएसई ने खुद अपने एक्स हैंडल पर पोस्ट करके ये जानकारी दी है।

सीबीएसई ने क्या बताया?

सीबीएसई ने बताया कि हमारी साइबर सुरक्षा टीम से अपडेट मिला है कि CBSE रिवॉल्यूशन पोर्टल पर वर्तमान में 8,000 से ज्यादा यूजर्स एक साथ काम कर रहे हैं। आज दोपहर 3:00 बजे तक, 16,000 से अधिक छात्रों ने सफलतापूर्वक अपना आवेदन जमा कर दिया है।

सीबीएसई ने बताया कि रिवॉल्यूशन पोर्टल का आज हजारों छात्रों ने इस्तेमाल किया है लेकिन कुछ दुर्भावनापूर्ण तत्वों ने साइबर हमलों की बौछार करके सेवाओं को बाधित करने का प्रयास किया। 

सीबीएसई ने कहा कि रिवॉल्यूशन पोर्टल पर मात्र 2 मिनट में 15 लाख से अधिक हिट्स आए और अनधिकृत रूप से फाइल एक्सेस करने के 1 लाख से अधिक प्रयास हुए। छात्रों की प्रतिक्रिया के आधार पर, हमने प्लेटफ़ॉर्म को और बेहतर बनाया है, जिसमें सत्र की समय सीमा भी बढ़ेगी और प्रक्रिया और ज्यादा सुविधाजनक होगी।

सीबीएसई ने साफ किया है कि हमारी टीमें पूरी तरह अलर्ट हैं और ये सुनिश्चित कर रही हैं कि छात्रों को हर संभव तरीके से सुविधा प्रदान की जा सके।

सीबीएसई 12वीं के रिवॉल्यूशन/सत्यापन प्रक्रिया के लिए कौन है पात्र?

  • जिन उम्मीदवारों ने उत्तर पुस्तिकाओं की फोटोकॉपी के लिए आवेदन किया है, वे ही जांच में पाई गई त्रुटियों के सत्यापन या पुनर्मूल्यांकन के लिए आवेदन करने के पात्र होंगे। आवेदक को संबंधित विषय की अंकन योजना देखनी होगी, जो प्रश्न पत्र के साथ वेबसाइट पर उपलब्ध होगी।
  • जो भी अनुरोध होंगे, उनकी स्थिते को अपलोड किया जाएगा और उम्मीदवार के लॉगिन विवरण पर वह उपलब्ध होगा। एक अंक की कटौती भी प्रभावी होगी।
  • रिवॉल्यूशन का जो भी रिजल्ट होगा, वह अंतिम होगा और रिवॉल्यूशन के खिलाफ कोई अपील या समीक्षा स्वीकार नहीं की जाएगी। बोर्ड द्वारा दिए गए अंक अंतिम होंगे और उम्मीदवारों पर बाध्यकारी होंगे।





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अन्नामलाई ने छोड़ा BJP का साथ, नितिन नवीन को सौंपा इस्तीफा, शाम 4 बजे अमित शाह से मिलेंगे


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अन्नामलाई ने छोड़ा BJP का साथ, नितिन नवीन को सौंपा इस्तीफा, शाम 4 बजे अमित शाह से मिलेंगे

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अन्नामलाई ने छोड़ा BJP का साथ, नितिन नवीन को सौंपा इस्तीफा, शाम 4 बजे अमित शाह से मिलेंगे

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तमिलनाडु में भाजपा के फायरब्रांड नेता अन्नामलाई ने फैसला ले लिया है. उन्होंने भाजपा से अलग होने का मन मना लिया. जी हां, पूर्व तमिलनाडु बीजेपी प्रमुख के. अन्नामलाई ने आज यानी मंगलवार को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की और अपना इस्तीफा सौंप दिया. हालांकि, उम्मीद है कि वे शाम 4 बजे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मिलेंगे.

ऐसी अटकलें तेज थीं कि अन्नामलाई पार्टी छोड़ना चाहते हैं. रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि अब वे बीजेपी में अपना भविष्य नहीं देख रहे हैं. अन्नामलाई को नैनार नागेन्द्रन के तमिलनाडु बीजेपी प्रमुख बनने के बाद से कम सक्रिय देखा जा रहा था.

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योगी आदित्यनाथ का जबरा फैन निकला कुली नं. 1 का ये एक्टर, बोला- जनता करे सम्मान


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Saharanpur News: कहते हैं कि हर इंसान किसी ना किसी एक्टर का फैन होता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक्टर भी किसी ना किसी के फैन होते हैं. आज ऐसे ही एक एक्टर के बारे में आपको बताने वाले हैं, जो सीएम योगी के जबरा फैन हैं और उनका नाम लेते ही एक्टर भावुक हो जाते हैं.

सहारनपुर: बॉलीवुड का अपने समय पर जलवा रहा है. हर कोई किसी न किसी फिल्म एक्टर का जबरा फैन रहा है. लेकिन आज हम जिस फिल्म एक्टर की बात करने जा रहे हैं, वह 90 के दशक की फिल्मों के स्टार रहे हैं. हरिश कुमार जिनका जन्म 1 अगस्त 1975 को हुआ था, 90 के दशक के एक लोकप्रिय भारतीय फिल्म अभिनेता और निर्माता हैं, जिन्होंने हिंदी, तेलुगु और तमिल फिल्मों में काम किया है. वह मुख्य रूप से बॉलीवुड फिल्म ‘प्रेम कैदी’ (1991) और ‘कुली नंबर 1’ (1995) में अपनी भूमिकाओं के लिए जाने जाते हैं. इसके साथ ही तिरंगा मूवी में भी उन्होंने बेहतरीन भूमिका निभाई है.

उन्होंने 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया. ज्यादातर फिल्में उनकी गोविंदा के साथ कॉमेडी के रूप में देखने को मिलीं. एक फिल्म एक्टर जिसके लाखों करोड़ों फैन होते हैं, लेकिन वह भी किसी का फैन हो सकता है, क्या आपने कभी सोचा है. फिल्म अभिनेता हरिश कुमार यूपी के सहारनपुर पहुंचे और उन्होंने लोकल 18 से बात करते हुए अपने कुछ खूबसूरत पलों को हमसे साझा किया.

हरिश कुमार का सहारनपुर से गहरा लगाव
हरिश कुमार ने कहा कि सहारनपुर आकर बहुत ही अच्छा लगा और सहारनपुर को पूरी दुनिया जानती है. यहां पर लकड़ी पर खूबसूरत नक्काशी की जाती है. लेकिन उससे भी ज्यादा खूबसूरत यहां के लोगों की जुबान है. वही उनके दिल में भी है और जो दिल में है वही जुबां पर है. इस बात को कहकर उन्होंने सहारनपुर के लोगों का दिल जीत लिया.

इससे पहले भी वह तीन बार सहारनपुर आ चुके हैं और उनका सहारनपुर से एक गहरा प्रेम जुड़ा है. हरिश कुमार ने बताया कि वह 5 साल की उम्र से काम कर रहे हैं, जिसमें पहली फिल्म उनकी ‘अंधा कानून’ थी, जिसमें उन्होंने रजनीकांत के साथ छोटे रजनीकांत का रोल किया था. जब बड़ा हुआ, तो हिंदी में पहली फिल्म प्रेम कैदी थी, लेकिन उससे पहले वह लगभग 30 पिक्चर साउथ में कर चुके थे.

योगी आदित्यनाथ का नाम लेते ही हुए भावुक
फिल्म अभिनेता हरिश कुमार योगी आदित्यनाथ का नाम आते ही भावुक हो उठे. उन्होंने कहा कि मैं हकीकत बोलूं तो आज तक मैं योगी आदित्यनाथ से मिला नहीं हूं, लेकिन अगर मैं फिल्म इंडस्ट्री में किसी को अपना गुरु मानता हूं, तो वह हैं गोविंदा जी और वैसे ही अगर राजनीति में कोई सच्चा ऑलराउंडर है तो वह हैं योगी आदित्यनाथ जी. यह बात योगी जी तक आप पहुंचा दीजिएगा, यह बात बोलने के लिए मैं तड़प रहा हूं. योगी जी का नाम आते ही मैं भावुक हो जाता हूं और मेरी आंखों में आंसू आ जाते हैं. अगर योगी जी को भी कुछ जनता को बोलना पड़े, यह गलत बात है. योगी जी को अगर जनता उनका पूरा समय दे, तो वह अपने स्टेट और इस देश को पता नहीं कहां से कहां ले जाएंगे.

तीन नेताओं को दिया भगवान का दर्जा
वहीं हरिश कुमार ने योगी आदित्यनाथ को भगवान का रूप, सच्चा भक्त और सच्चा सेवक बताया. साथ ही उन्होंने कहा कि क्या कभी आपने देखा है भगवान जनता के बीच में आकर कुछ मांगता है नहीं. योगी आदित्यनाथ के साथ भी जनता को मंदिर में बैठे भगवान की तरह ही करना चाहिए. योगी, मोदी और अमित शाह यह एक ऐसा कांबिनेशन है, जो बिल्कुल ब्रह्मा, विष्णु, महेश की तरह है. मोदी जी ब्रह्मा, अमित शाह महेश और योगी आदित्यनाथ विष्णु का अवतार हैं.

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आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.



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हापुड़ में नवजात की मौत पर अस्पताल में हंगामा, VIDEO: परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया, पुलिस ने शांत कराया मामला – Hapur News




हापुड़ के गढ़ रोड स्थित देवनंदिनी अस्पताल में मंगलवार को नवजात शिशु की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। जानकारी के अनुसार, गिरधारी नगर निवासी ऋषभ अग्रवाल अपनी पत्नी अपूर्वी (24) को प्रसव पीड़ा होने पर रविवार को देवनंदिनी अस्पताल लेकर पहुंचे थे। परिजनों के मुताबिक चिकित्सकों ने पहले सामान्य प्रसव कराने का प्रयास किया, लेकिन महिला की स्थिति को देखते हुए बाद में सिजेरियन ऑपरेशन की सलाह दी। परिजनों की सहमति के बाद सोमवार को ऑपरेशन किया गया, जिसमें अपूर्वी ने एक पुत्र को जन्म दिया। जन्म के बाद बिगड़ी नवजात की हालत परिजनों का आरोप है कि जन्म के कुछ समय बाद ही नवजात की तबीयत बिगड़ने लगी। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने बच्चे को विशेष निगरानी में रखते हुए मशीनों के सहारे उपचार शुरू किया। परिवार का कहना है कि उन्होंने बच्चे को किसी बड़े अस्पताल में रेफर करने की मांग की थी, लेकिन चिकित्सकों ने अपने स्तर पर इलाज करने का भरोसा दिलाया।
ऋषभ अग्रवाल के अनुसार, मंगलवार तड़के करीब 3:30 बजे अस्पताल से फोन कर बताया गया कि बच्चे की हालत गंभीर है और उसे एक विशेष इंजेक्शन लगाने की जरूरत है, जिस पर लगभग 30 हजार रुपये का खर्च आएगा। साथ ही बच्चे को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखने की बात भी कही गई। अस्पताल पहुंचने पर मिली मौत की सूचना परिजनों का कहना है कि जब वे अस्पताल पहुंचे तो उन्हें नवजात की मौत की जानकारी दी गई। इस सूचना के बाद परिवार में कोहराम मच गया। वहीं, मां अपूर्वी की तबीयत भी बिगड़ गई। नवजात की मौत से आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा करते हुए चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाया और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने कराया मामला शांत हंगामे की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों को समझाकर स्थिति को शांत कराया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन ने चिकित्सकीय लापरवाही के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि बच्चे को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए गए थे। कोतवाली प्रभारी नीरज कुमार ने बताया कि नवजात की मौत के बाद परिजन आक्रोशित हो गए थे, जिन्हें समझाकर शांत कराया गया। उन्होंने कहा कि यदि मामले में तहरीर प्राप्त होती है तो जांच के आधार पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



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सीधी में जनसुनवाई में साइकिल से आए कलेक्टर: जमीन पर जानी लोगों की समस्याएं, मोबाइल चलाते रहे कर्मचारी – Sidhi News




सीधी जिला पंचायत सभागार में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था में एक विरोधाभासी दृश्य सामने आया। जहां जिले के कलेक्टर विकास मिश्रा आम लोगों के बीच जमीन पर बैठकर उनकी समस्याएं सुनते दिखे, वहीं अधिकांश अधिकारी और कर्मचारी कुर्सियों पर आराम फरमाते और मोबाइल फोन चलाते नजर आए। कलेक्टर विकास मिश्रा ने जनसुनवाई में पहुंचे ग्रामीणों और फरियादियों के बीच बैठकर सीधे संवाद स्थापित किया। उनका यह व्यवहार एक संवेदनशील प्रशासनिक अधिकारी की छवि को दर्शाता है, जो आमजन से सीधा जुड़ाव स्थापित करने का प्रयास कर रहे थे। इसके विपरीत, सभागार में मौजूद कई अधिकारी और कर्मचारी कुर्सियों पर बैठे रहे। कुछ तो जनसुनवाई के दौरान अपने मोबाइल फोन में व्यस्त दिखाई दिए, जिससे ऐसा प्रतीत हुआ कि उन्हें आमजन की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है। हैरानी की बात यह भी रही कि कलेक्टर विकास मिश्रा स्वयं साइकिल चलाकर कलेक्ट्रेट से जिला पंचायत सभागार पहुंचे। वहीं, अधिकांश अधिकारी और कर्मचारी महज कुछ सौ मीटर की दूरी तय करने के लिए भी चारपहिया वाहनों का उपयोग करते नजर आए। उल्लेखनीय है कि रीवा संभाग के कमिश्नर बी.एस. जामोद पहले ही अधिकारियों को अनावश्यक रूप से चारपहिया वाहनों का उपयोग कम करने की सलाह दे चुके हैं। जनसुनवाई के दौरान कई अधिकारियों और कर्मचारियों के गले में परिचय-पत्र (आईडी कार्ड) भी नहीं दिखाई दिए। जबकि कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि सभी अधिकारी और कर्मचारी अपने कार्यालय एवं संस्थान में प्रवेश के दौरान परिचय-पत्र अनिवार्य रूप से धारण करें। मंगलवार दोपहर करीब 12:30 बजे आयोजित इस जनसुनवाई में इन निर्देशों की खुली अनदेखी देखने को मिली, जिसने शासन-प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं।



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मधुबनी के चूड़ी बाजार में भीषण ट्रैफिक जाम: अतिक्रमण बना मुख्य कारण, गर्मी में घंटों फंसे रहे राहगीर – Madhubani News




मधुबनी शहर के थाना चौक से शंकर चौक तक जाने वाली मुख्य सड़क पर स्थित चूड़ी बाजार में मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे से भारी ट्रैफिक जाम लग गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़क पर हुए अतिक्रमण के कारण यातायात व्यवस्था पूरी तरह बाधित हो गई, जिससे राहगीरों, छात्रों और मरीजों के परिजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। भीषण गर्मी के बीच सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे जाम में फंसे लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ा। स्कूल से घर लौट रहे छात्र सौरभ कुमार और उमेश कुमार ने बताया कि अत्यधिक गर्मी में जाम में फंसे रहने के कारण उन्हें काफी दिक्कत हुई। उन्होंने प्रशासन से इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए कदम उठाने की अपील की। विवेक कुमार ने बताया कि वह अपने बीमार भाई के लिए दवा खरीदने जा रहे थे, लेकिन जाम में फंसने के कारण उन्हें समय पर दवा लाने में कठिनाई हुई। वहीं, कोचिंग के लिए जा रही छात्राएं अंकिता कुमारी और रचना कुमारी ने कहा कि जाम के कारण उन्हें अपनी कक्षाएं छूटने की चिंता सता रही थी। उन्होंने यह भी कहा कि शहर में लगातार बढ़ती जाम की समस्या विद्यार्थियों के लिए एक गंभीर परेशानी बनती जा रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क किनारे अतिक्रमण कर दुकानें चलाने के कारण सड़क की चौड़ाई काफी कम हो गई है। इसके बावजूद अतिक्रमणकारियों द्वारा स्थिति की गंभीरता को नजरअंदाज किया जा रहा है। जाम में फंसे लोगों की परेशानी से बेपरवाह होकर वे अपने कार्यों में व्यस्त दिखाई दिए। इस मामले पर मधुबनी ट्रैफिक इंस्पेक्टर नीलमणि रंजन ने कहा कि समस्या की जानकारी मिलते ही आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही जाम की समस्या का समाधान किया जाएगा और सड़क पर अतिक्रमण करने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी, ताकि आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा न हो।



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