बदायूं के इस्लामनगर में बुधवार दोपहर पत्नी से विवाद के बाद एक युवक पानी की टंकी पर चढ़ गया। नगर पंचायत परिसर में हुई इस घटना में युवक करीब चार घंटे तक टंकी पर रहा। पुलिस ने सूझबूझ से योजना बनाकर उसे सुरक्षित नीचे उतारा और थाने ले गई। यह घटना दोपहर 12:20 बजे हुई, जब नगर पंचायत में सफाईकर्मी दीपक अपनी पत्नी से हुए विवाद के बाद टंकी पर चढ़ गया। उसने अपनी पत्नी को मौके पर बुलाने की जिद की। सूचना मिलने पर इस्लामनगर थाना पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची। पुलिस और स्थानीय लोगों ने दीपक को समझाने का कई घंटों तक प्रयास किया, लेकिन वह नीचे उतरने को तैयार नहीं हुआ। इस दौरान नगर पंचायत परिसर में लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई, जिससे हाईवोल्टेज ड्रामा की स्थिति बन गई। करीब चार घंटे तक चले इस गतिरोध के बाद, पुलिस ने उसे सुरक्षित नीचे उतारने के लिए एक विशेष योजना बनाई। योजना के तहत, पानी और खाना देने के बहाने एक व्यक्ति को टंकी पर भेजा गया। उस व्यक्ति ने मौका मिलते ही दीपक को पकड़ लिया। इसके बाद, पुलिसकर्मी और अन्य लोग भी टंकी पर पहुंच गए और युवक को सुरक्षित नीचे उतार लिया। पुलिस दीपक को जीप में बैठाकर थाने ले गई, जहां उससे पूछताछ की जा रही है। पुलिस इस मामले में आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है।
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बारिश की पहली फुहार पड़ते ही दिल्ली वाले सबसे पहले क्या खाते हैं?
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Best Delhi Monsoon Food: दिल्ली में बारिश सिर्फ मौसम नहीं बदलती, बल्कि लोगों की खाने की आदतें भी बदल देती है. जैसे ही तपती सड़कों पर पहली फुहार गिरती है और हवा में भीगी मिट्टी की खुशबू घुलती है, राजधानी की गलियां एक बार फिर अपने मशहूर स्ट्रीट फूड की महक से भर उठती हैं. कोई चांदनी चौक की कचौड़ी की ओर निकल पड़ता है तो कोई करोल बाग के गरमा-गरम पकौड़ों के लिए लाइन में लग जाता है. लाजपत नगर के राम लड्डू, कमला नगर का भुट्टा, पहाड़गंज के छोले-भटूरे और मजनू का टीला के मोमोज़ भी मानसून के साथ लोगों की पहली पसंद बन जाते हैं. यही वजह है कि दिल्ली का मानसून सिर्फ बारिश का मौसम नहीं, बल्कि स्वाद, यादों और पुराने ठिकानों तक लौटने का भी मौसम माना जाता है.
बारिश आते ही क्यों बदल जाता है दिल्ली का स्वाद? दिल्ली की पहचान उसकी ऐतिहासिक इमारतों से जितनी है, उतनी ही उसकी स्ट्रीट फूड संस्कृति से भी है. मानसून के दौरान यह संस्कृति और जीवंत हो जाती है. हल्की बारिश, ठंडी हवा और गर्मागर्म स्नैक्स का मेल ऐसा होता है जिसे दिल्लीवाले हर साल बेसब्री से इंतजार करते हैं. यही कारण है कि मौसम बदलते ही शहर के मशहूर फूड स्पॉट पर भीड़ बढ़ने लगती है. (Image-AI generated)
चांदनी चौक की कचौड़ी आज भी लोगों की पहली पसंद पुरानी दिल्ली की गलियों में बारिश के दिनों में सबसे ज्यादा रौनक कचौड़ी की दुकानों पर दिखाई देती है. कई दशकों से चल रही पुरानी दुकानों पर सुबह से ही लोगों की कतारें लग जाती हैं. यहां आने वाले सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि उन यादों के लिए भी लौटते हैं जो बचपन से इस जगह से जुड़ी रही हैं. ग्रेटर कैलाश की रहने वाली मीना बताती हैं कि वह करीब चार दशक से बारिश के मौसम में यहां कचौड़ी खाने जरूर आती हैं. उनके मुताबिक, “बारिश होते ही सबसे पहले यही स्वाद याद आता है.” (Image-AI generated)
राम लड्डू और छोले-भटूरे का भी रहता है जलवा लाजपत नगर का नाम आते ही राम लड्डू याद आ जाते हैं. मूंग दाल से बने इन गर्मागर्म लड्डुओं पर कद्दूकस की हुई मूली और तीखी हरी चटनी का स्वाद बारिश में और भी खास लगने लगता है. वहीं छोले-भटूरे के बिना दिल्ली का फूड कल्चर अधूरा माना जाता है. करोल बाग, पहाड़गंज, सरोजिनी नगर और चांदनी चौक की कई दुकानें मानसून में पहले से ज्यादा व्यस्त दिखाई देती हैं. लोगों का मानना है कि बारिश के दिन मसालेदार छोले और फूले हुए भटूरे खाने का मजा ही अलग होता है. (Image-AI generated)
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भुट्टा, जो हर बारिश का स्थायी साथी है सड़क किनारे अंगारों पर सिकता हुआ भुट्टा शायद मानसून की सबसे खूबसूरत तस्वीरों में से एक है. कमला नगर, इंडिया गेट और विश्वविद्यालय क्षेत्र में बारिश के दौरान भुट्टे के ठेले खूब नजर आते हैं. नींबू, नमक और मसाले के साथ परोसा गया भुट्टा लोगों को मौसम का अलग ही आनंद देता है. (Image-AI generated)
मजनू का टीला में तिब्बती स्वाद भी खींचता है भीड़ अगर पारंपरिक स्ट्रीट फूड से अलग कुछ खाने का मन हो तो बारिश में मजनू का टीला भी लोगों की पसंदीदा जगह बन जाता है. यहां गर्मागर्म मोमोज़, थुकपा और अन्य तिब्बती व्यंजन ठंडे मौसम में अलग ही सुकून देते हैं. शाम होते-होते यहां युवाओं की अच्छी-खासी भीड़ देखने को मिलती है. (Image-AI generated)
पकौड़े और चाय, मानसून की सबसे पुरानी जोड़ी अगर किसी से पूछा जाए कि बारिश का पहला स्वाद क्या है, तो ज्यादातर लोगों का जवाब होगा पकौड़े और चाय. करोल बाग, राजौरी गार्डन और कई पुराने बाजारों में मानसून शुरू होते ही पकौड़ों की बिक्री तेजी से बढ़ जाती है. दुकानदारों का कहना है कि गर्मियों के मुकाबले बारिश में ग्राहकों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है. आलू, प्याज, पनीर, पालक और हरी मिर्च के पकौड़े सबसे ज्यादा पसंद किए जाते हैं. कई जगहों पर करेला पकौड़ा भी लोगों की पसंद बन चुका है. (Image-AI generated)
आखिर में एक कप चाय सबको जोड़ देती है दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में लोगों की पसंद भले अलग हो, लेकिन एक चीज लगभग हर जगह समान मिलती है चाय. बारिश में दोस्तों के साथ सड़क किनारे चाय पीना, परिवार के साथ पकौड़े खाना या ऑफिस के बाद किसी ठेले पर रुक जाना, यही छोटे-छोटे पल मानसून को खास बना देते हैं. दिल्ली का मानसून केवल खाने का मौसम नहीं, बल्कि उन यादों का हिस्सा है जो हर साल पहली बारिश के साथ लौट आती हैं. शायद यही वजह है कि राजधानी में बारिश का मतलब सिर्फ भीगना नहीं, बल्कि अपने पसंदीदा स्वादों तक फिर से पहुंच जाना भी है. (Image-AI generated)
शाजापुर दोस्ताना ढाबा हत्याकांड, संचालक-रसोइए को उम्रकैद: लास्ट सीन थ्योरी और मोबाइल वीडियो से मिली सजा; बोरी में मिली थी लाश – shajapur (MP) News
शाजापुर के करीब ढाई साल पुराने चर्चित ‘दोस्ताना ढाबा’ हत्याकांड में कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है। प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश ने ढाबा संचालक राजेश सौराष्ट्रीय और रसोइए जितेंद्र सौराष्ट्रीय को हत्या का दोषी मानते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोनों पर दो-दो हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। लापता होने के बाद बोरी में मिली थी लाश मंगलाज गांव के रहने वाले सुनील पाटीदार 21 दिसंबर 2023 को इंदौर नौकरी के इंटरव्यू के लिए निकले थे, लेकिन वापस नहीं लौटे। परिजनों ने जब गूगल मैप से उनके मोबाइल की लोकेशन ट्रेस की, तो वह बायपास के पास मिली। 24 दिसंबर को परिजनों ने संदेह होने पर दोस्ताना ढाबा खोलकर देखा, तो अंदर बोरी में सुनील की लाश मिली। साक्ष्य छिपाने पर भी मिली सजा अतिरिक्त जिला लोक अभियोजन अधिकारी रमेश सोलंकी ने बताया कि हत्या के अलावा दोनों आरोपियों को सबूत मिटाने का भी दोषी पाया गया। इसके लिए उन्हें आईपीसी की धारा 201 के तहत तीन-तीन साल की जेल और एक-एक हजार रुपये के अर्थदंड की सजा अलग से भुगतनी होगी। मोबाइल के वीडियो से खुला राज जांच के दौरान तत्कालीन थाना प्रभारी ब्रजेश मिश्रा ने ढाबा संचालक राजेश को गिरफ्तार किया था। राजेश के मोबाइल की साइबर जांच कराने पर 21 दिसंबर 2023 की रात का एक वीडियो मिला। इस वीडियो में मृतक सुनील पाटीदार ढाबे पर जीवित हालत में कुर्सी पर बैठा दिखाई दे रहा था। कोर्ट में टिके वैज्ञानिक सबूत अदालत में अभियोजन पक्ष ने ‘लास्ट सीन थ्योरी’, मोबाइल टावर लोकेशन और साइबर फोरेंसिक रिपोर्ट जैसे पुख्ता वैज्ञानिक सबूत पेश किए। सहायक जिला लोक अभियोजन अधिकारी प्रतीक श्रीवास्तव के अनुसार, कोर्ट ने इन सभी सबूतों को विश्वसनीय मानते हुए दोनों आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई।
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भारत की नई ‘चिप’ क्रांति, सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 को सरकार की मंजूरी, मोबाइल मैन्युफैक्चरिंग स्कीम भी हुआ अपग्रेड
भारत में नई चिप क्रांति का आगाज हो गया है। पीएम मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय कैबिनेट ने इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 को मंजूरी दे दी है। यह भारत को ग्लोबल सेमीकंडक्टर हब बनाने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इसके अलावा सरकार ने घरेलू मोबाइल फोन मैन्युफैक्चरिंग स्कीम (MPMS) को भी अपग्रेड करने का फैसला किया है। मोदी सरकार का यह कदम भारत में घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग इकोसिस्टम को बढ़ावा देगा।
क्या है इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन (ISM) 2.0?
मोदी सरकार ने 2021 में इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन की शुरुआत की थी, जिसके पहले फेज में चिप मैन्युफैक्चरिंग और पैकेजिंग यूनिट्स को आकर्षित करने पर फोकस किया गया। अब सरकार ने इसके दूसरे चरण की घोषणा की है, जिसमें केवल चिप मैन्युफैक्चरिंग पर ही फोकस नहीं किया जाएगा, बल्कि ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की स्तिथि को मजबूत करने का काम किया जाएगा। MeitY ने इस मिशन के लिए 1.25 लाख करोड़ रुपये के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। सरकार ने इस साल बजट में ही सेमीकंडक्टर मिशन 2.0 का ऐलान कर दिया था।
ISM 2.0 में सरकार का फोकस भारत में फुल स्टैक सेमीकंडक्टर इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी तैयार करने पर है। यह भारत में चिप निर्माण के लिए एक मजबूत इकोसिस्टम तैयार करेगा, जिसमें चिप डिजाइनिंग और फेब्रिकेशन से लेकर एडवांस टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट पर जोर दिया जाएगा। केंद्रीय कैबिनेट की तरफ से सेमीकंडक्टर मिशन के लिए यह फंडिंग प्रोडक्शन कैपेसिटी बढ़ाने से लेकर ग्लोबल सप्लाई चेन में भारत की हिस्सेदारी को मजबूत करने का काम करेगा।
इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन 2.0
सरकार का अनुमान है कि ISM 2.0 के जरिए भारत का सेमीकंडक्टर मार्केट 2030 तक 100 से 115 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है। इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के पहले चरण में भारत का सेमीकंडक्टर मार्केट 45 से 50 बिलियन डॉलर के करीब तक पहुंच गया है। ऐसे में अगले 5 साल में यह मार्केट दोगुना होने की संभावना है।
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ISM 2.0 से क्या होगा फायदा?
भारत की सेमीकंडक्टर मार्केट में पैठ बढ़ने का फायदा खास तौर पर उन स्टार्ट-अप्स को मिलेगा, जो चिप डिजाइनिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग, सेमीकंडक्टर डिवाइस, ऑटोमेशन और हाई-टेक मैन्युफैक्चरिंग से जुड़े हैं। खास तौर पर तेजी से बढ़ रहे स्मार्टफोन की डिमांड, इलेक्ट्रिक वीकल्स, डेटा सेंटर, एआई, ऑटोमेशन और इंडस्ट्रियल इलेक्ट्रॉनिक्स मार्केट को सीधे तौर पर फायदा पहुंचने वाला है। इसे भारत में नई चिप क्रांति के तौर पर देखा जा सकता है।
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा-
मैं आपके सामने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में कैबिनेट और कैबिनेट की आर्थिक मामलों की समिति (CCEA) द्वारा लिए गए सात प्रमुख फैसले रख रहा हूं। पहले दो फैसले वाराणसी (काशी) में बिल्कुल नए तरीके से बुनियादी ढांचा विकसित करने के कार्यक्रम से जुड़े हैं। तीसरा, चौथा और पांचवां फैसला सेमीकॉन 2.0 मिशन (Semiconductor 2.0 Mission) से जुड़ा है, जिसे आज मंजूरी दी गई।
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सोनम वांगचुक के अनशन पर दिल्ली हाईकोर्ट में अर्जेंट सुनवाई: कोर्ट ने केंद्र-दिल्ली सरकार से जवाब मांगा; वांगचुक 18 दिन से भूख हड़ताल पर, सेहत बिगड़ी
नई दिल्ली1 घंटे पहले
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सोनम वांगचुक 28 जून से जंतर-मंतर पर भूख हड़ताल कर रहे हैं।
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को बहुत जरूरी माना। केंद्र और दिल्ली सरकार से गुरुवार सुबह तक जवाब मांगा है।
हाईकोर्ट ने यह सुनवाई एक जनहित याचिका पर की। इसमें वांगचुक को तुरंत मेडिकल सुविधा और इलाज देने की मांग की गई है।
वांगचुक NEET पेपर लीक और परीक्षाओं में गड़बड़ी के खिलाफ दिल्ली के जंतर-मंतर पर पिछले 18 दिन से भूख हड़ताल पर हैं। उनकी हालत लगातार गिरती जा रही है। 8:50 किग्रा तक वजन गिर गया है।
वांगचुक की भूख हड़ताल की 3 तस्वीरें…

वांगचुक का वजन 8.5 kg कम हो गया है और मंगलवार को उनका ब्लड प्रेशर 109/70 mm Hg रिकॉर्ड किया गया।

उनकी तबीयत बिगड़ने पर आंदोलन कर रहे साथियों ने उन्हें पकड़कर चलवाया।

जंतर-मंतर पर मेडिकल टीम समय-समय पर वांगचुक का चेकअप किया जा रहा है।
याचिका में इमरजेंसी ट्रीटमेंट देने की मांग
- सरकार सोनम वांगचुक को तुरंत इमरजेंसी ट्रीटमेंट, जीवनरक्षक उपचार और जरूरी पोषण उपलब्ध कराए। साथ ही सरकार उनके आंदोलन से जुड़े मुद्दों पर बातचीत भी शुरू करे।
- भूख हड़ताल के बाद से सोनम वांगचुक का करीब 8.25 किलो वजन घट गया है। उन्हें लो ब्लड शुगर, चक्कर, ज्यादा कमजोरी और मांसपेशियां कमजोर होने जैसी दिक्कतें हो रही हैं।
- किसी की जान खतरे में होने पर सरकार चुप नहीं रह सकती। भूख हड़ताल शांतिपूर्ण विरोध का अधिकार है, लेकिन नागरिक की जान बचाना भी सरकार की जिम्मेदारी है।
CJP का प्रदर्शन, शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग
कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) नीट पेपर लीक के विरोध में 20 जून से जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रही है। वे शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। सोनम वांगचुक भी उनके आंदोलन में शामिल हैं। CJP चीफ जस्टिस सूर्यकांत के बेरोजगार युवाओं की तुलना कॉकरोच से करने के बाद बनी थी।
लद्दाख को राज्य की मांग को लेकर वांगचुक 170 दिन जेल में रहे
लद्दाख को पूर्ण राज्य का दर्जा दिलाने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहे सोनम वांगचुक 170 दिन तक जोधपुर जेल में रहे। उनके अनशन के दौरान 24 सितंबर 2025 को लेह में हिंसा हुई, जिसमें 4 लोगों की मौत और 90 लोग घायल हुए।
सरकार ने हिंसा भड़काने का आरोप वांगचुक पर लगाया। इसके दो दिन बाद, 26 सितंबर को उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत हिरासत में लेकर जोधपुर जेल भेज दिया गया।

इरोम शर्मिला करीब 16 साल भूख हड़ताल पर रहीं
वांगचुक को भूख हड़ताल करते हुए 18 दिन हो गए हैं। महात्मा गांधी से लेकर जीडी अग्रवाल तक कई नेता-सामाजिक कार्यकर्ता अलग-अलग मांगों को लेकर भूख हड़ताल करते रहे हैं। इरोम शर्मिला मणिपुर से AFSPA हटाने की मांग को लेकर 16 साल भूख हड़ताल पर रहीं।

3 हफ्ते से ज्यादा भूखा रहने पर दूसरे बॉडी पार्ट्स पर असर

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वांगचुक 17 दिन से अनशन पर, 8.5kg वजन घटा, उद्धव-महुआ और अखिलेश की भूख हड़ताल खत्म करने की अपील

सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल को 17 दिन हो चुके हैं। उनका वजन 8.5kg कम हो गया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव, शिवसेना अध्यक्ष उद्धव ठाकरे, टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा, एक्टर नसीरुद्दीन शाह, रत्ना पाठक शाह, राइटर अरुंधति रॉय समेत कई प्रमुख हस्तियों ने सोनम से अनशन खत्म करने की अपील की है। पूरी खबर पढ़ें…
कॉकरोच पार्टी फाउंडर दीपके ने पुलिस के पैर पकड़े, जंतर-मंतर पर टेंट लगाने की इजाजत मांगी

नीट पेपर लीक के विरोध में कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) 20 दिन से जंतर-मंतर पर विरोध प्रदर्शन कर रही है। फाउंडर अभिजीत दीपके ने पुलिसवालों के पैर पकड़े और हाथ जोड़े। वे टेंट लगाने की इजाजत मांग रहे थे ताकि भूख हड़ताल पर बैठे छात्रों को बारिश से बचाया जा सके। पूरी खबर पढ़ें…
RGHS में OPD जांच नियम बदलने का विरोध: रेसटा ने नए नियमों को बताया कर्मचारी विरोधी, वापस लेने की रखी मांग – Tonk News
राजस्थान सरकार चकी ओर से राजस्थान गवर्नमेंट हेल्थ स्कीम (आरजीएचएस) के तहत ओपीडी में 2 हजार रुपए से अधिक की जांच के लिए प्री-अप्रूवल (पूर्व अनुमति) अनिवार्य करने का विरोध शुरू हो गया है। प्रदेश सरकार के इस फैसले ने वर्तमान में कार्यरत कर्मचारियों,पेंशनर्स और सेवानिवृत्त कर्मचारियों में चिंता बढ़ा दी है। फैसले के विरोध में शिक्षक संघ एलीमेंट्री सेकेंडरी टीचर एसोसिएशन (रेसटा) राजस्थान ने मोर्चा खोलते हुए। इसे मरीजों के हितों के खिलाफ बताया है। संघ के प्रदेशाध्यक्ष मोहर सिंह सलावद का कहना है कि आरजीएचएस योजना का उद्देश्य कर्मचारियों और पेंशनर्स को त्वरित एवं सरल चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना है, लेकिन नया आदेश इस व्यवस्था को आसान बनाने के बजाय और जटिल बना देगा। संगठन के अनुसार अधिकांश पेंशनर्स वरिष्ठ नागरिक है,जिन्हें समय-समय पर एमआरआई, सीटी स्कैन और अन्य महंगी जांचों की आवश्यकता पड़ती है। पूर्व अनुमति मरीजों के लिए बनेगी परेशानी इन जांचों की लागत सामान्यत 6 से 8 हजार रुपए या उससे अधिक होती है। ऐसे में हर बार पूर्व अनुमति लेने की बाध्यता मरीजों के लिए परेशानी का कारण बनेगी। संगठन ने आशंका जताई कि पूर्व अनुमति मिलने में यदि 3 से 6 घंटे का समय लगता है तो गंभीर मरीजों के उपचार में अनावश्यक देरी हो सकती है। कई मामलों में कुछ घंटों की देरी भी मरीज के स्वास्थ्य पर प्रतिकूल असर डाल सकती है। इसके अलावा ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में इंटरनेट, पोर्टल या तकनीकी समस्याओं के कारण मरीजों और उनके परिजनों की मुश्किलें बढ़ सकती है। स्वीकृति नहीं मिलने पर आवेदन अप्रूव होगा नई गाइडलाइन में मंजूरी की समय सीमा भी तय कर दी गई है। पोर्टल पर भेजे गए प्री-ऑथराइजेशन अनुरोध पर 1 से 3 घंटे के भीतर निर्णय किया जाएगा। यदि निर्धारित समय में कोई निर्णय नहीं होता है तो संबंधित रिक्वेस्ट ऑटो अप्रूव मानी जाएगी। यदि जांच अत्यंत आवश्यक है तो आवेदन पर शीघ्र निर्णय किया जाएगा, जबकि सामान्य मामलों में अधिकतम तीन घंटे के भीतर मंजूरी या अस्वीकृति का निर्णय देना होगा। सरकार से आदेश वापस लेने की मांग शिक्षक संघ रेसटा के प्रदेशाध्यक्ष सलावद का कहना है कि स्वास्थ्य सेवाओं में अनावश्यक प्रशासनिक प्रक्रिया जोड़ने के बजाय ऐसी व्यवस्था बनाई जानी चाहिए, जिससे मरीजों को तत्काल जांच और उपचार मिल सके। महासंघ ने सरकार से इस आदेश को वापस लेकर आरजीएचएस योजना के मूल उद्देश्य सरल, सुलभ और त्वरित चिकित्सा सुविधा को बरकरार रखने की मांग की है। इस संबंध में शिक्षक संघ रेसटा के प्रदेश महामंत्री नवल सिंह मीणा,प्रदेश प्रवक्ता राजीव चौधरी,प्रदेश वरिष्ठ उपाध्यक्ष मंसाराम खिजुरी,प्रदेश संरक्षक साफी मोहम्मद मंसूरी,प्रदेश सभाध्यक्ष सांवल राम सोनड़,प्रदेश सचिव राजकमल मीणा, प्रदेश संगठन मंत्री राजेश रेबारी, प्रदेश विधि सहलाकार अधिवक्ता हनुमान शर्मा, प्रदेश उपाध्यक्ष गजराज सिंह मोठपुर, प्रदेश कोषाध्यक्ष श्याम सुंदर विश्नोई, प्रदेश सहलाकार देवी सिंह मीणा ने इस आदेश का विरोध करते हुए इसे तत्काल वापस लेने की मांग की है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि दो हजार रुपए से अधिक की जांच के लिए पूर्व अनुमति की अनिवार्यता को तत्काल वापस लिया जाए अथवा पेंशनर्स और वरिष्ठ नागरिकों को इससे पूर्ण छूट प्रदान की जाए ताकि उन्हें बिना विलंब आवश्यक जांच एवं उपचार मिल सकें।
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भारत पर 100% टैरिफ लगा सकता है अमेरिका: रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर कार्रवाई की तैयारी; संसद में बिल पेश, 5 देश निशाने पर
अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर दी है। अमेरिकी सीनेट में रूस पर प्रतिबंधों से जुड़ा एक संशोधित बिल पेश किया गया है। इसमें रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। बिल के मुताबिक भारत, चीन, स्लोवाकिया, हंगरी और अजरबैजान पर 100% टैरिफ लगाया जा सकता है। यह बिल रिपब्लिकन और डेमोक्रेट दोनों पार्टियों के समर्थन से लाया जा रहा है। इसका मकसद रूस की तेल से होने वाली कमाई को कम करना है, ताकि उसकी युद्ध लड़ने की क्षमता कमजोर हो सके। इसके तहत रूस के अधिकारियों, शैडो टैंकर बेड़े, केंद्रीय बैंक और सरकारी ऊर्जा परियोजनाओं पर भी प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। पहले बिल के शुरुआती मसौदे में 500% टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था, लेकिन बाद में इसे घटाकर 100% कर दिया गया। अगर यह बिल पास हो जाता है, तो अमेरिका पहली बार किसी देश पर सिर्फ इसलिए टैरिफ लगाएगा, क्योंकि वह रूस से तेल खरीदकर उसकी कमाई बढ़ा रहा है। भारत ने पिछले महीने आधे से ज्यादा तेल रूस से खरीदा भारत ने जून 2026 में रूस से रिकॉर्ड 26.1 लाख बैरल प्रतिदिन कच्चा तेल खरीदा, जो देश के कुल तेल आयात का 52.4% था। यानी पिछले महीने भारत में आयात होने वाले हर दो बैरल तेल में एक से ज्यादा बैरल रूस से आया। रूस लगातार भारत का सबसे बड़ा तेल सप्लायर बना हुआ है। मई के मुकाबले जून में रूस से तेल आयात में करीब 39% की बढ़ोतरी दर्ज की गई। यूरोपीय देशों को टैरिफ में राहत देगा अमेरिका रूस से प्राकृतिक गैस खरीदने वाले चीन, फ्रांस, जापान, हंगरी और बेल्जियम को भी इसके दायरे में रखा गया है। हालांकि, जो देश रूस की कुल गैस निर्यात का 15% से कम आयात करते हैं और अपनी निर्भरता घटाने की दिशा में कदम उठा रहे हैं, उन्हें छूट मिल सकती है। सीनेट में पेश बिल के तहत 15 यूरोपीय देशों को प्रस्तावित 100% टैरिफ से छूट दी गई है। इन देशों को राहत इसलिए दी गई है, क्योंकि ये रूस से 15% से कम प्राकृतिक गैस खरीदते हैं और धीरे-धीरे उस पर अपनी निर्भरता भी कम कर रहे हैं। डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि यह बिल यूरोपीय सहयोगियों के खिलाफ नहीं है। इसका निशाना सिर्फ वे देश हैं, जो अब भी रूस के तेल कारोबार को सबसे ज्यादा आर्थिक सहारा दे रहे हैं। बिल में रूस के ऊर्जा उद्योग, वित्तीय संस्थानों, रक्षा औद्योगिक ढांचे, कारोबारियों और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तक पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। रूस पर सख्ती वाले बिल को दोनों दलों का समर्थन सीनेट में पेश रूस-विरोधी टैरिफ बिल को रिपब्लिकन और डेमोक्रेट, दोनों दलों का समर्थन मिला है। इसे अमेरिकी राजनीति में ‘बाइपार्टिसन बिल’ कहा जाता है। यानी ऐसा प्रस्ताव जिस पर सत्ता पक्ष और विपक्ष दोनों सहमत हों। आमतौर पर अमेरिका में कई बड़े विधेयक राजनीतिक मतभेदों की वजह से अटक जाते हैं। लेकिन जब दोनों दल किसी बिल के साथ खड़े होते हैं, तो उसके कांग्रेस से पारित होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। हालांकि, बिल को कानून बनने के लिए अभी सीनेट और प्रतिनिधि सभा (हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स) दोनों से मंजूरी लेनी होगी। इसके बाद राष्ट्रपति के हस्ताक्षर होने पर ही यह कानून बनेगा। ट्रम्प को मिलेगी छूट देने की शक्ति संशोधित बिल में अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प को यह अधिकार भी दिया गया है कि अगर उन्हें लगे कि यह अमेरिका के राष्ट्रीय हित में है, तो वे इन प्रतिबंधों या टैरिफ में छूट दे सकते हैं। यह बिल अप्रैल 2025 में रिपब्लिकन सीनेटर लिंडसे ग्राहम और डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने पेश किया था। 11 जुलाई को लिंडसे ग्राहम का निधन हो गया। ट्रम्प ने कहा कि इस बिल को आगे बढ़ाना ग्राहम की प्राथमिकता थी और इसे उनकी याद में आगे बढ़ाया जा रहा है। अब तक 26 सीनेटर इस बिल को अपना समर्थन दे चुके हैं और आगे समर्थन बढ़ने की उम्मीद है। पहले नोटिफिकेशन से लग जाता था टैरिफ, अब संसद से पास क्यों करा रहे? पहले राष्ट्रपति ट्रम्प अंतरराष्ट्रीय आपातकालीन आर्थिक शक्तियां अधिनियम (IEEPA), 1977 के तहत नेशनल इमरजेंसी घोषित कर नोटिफिकेशन जारी कर सीधे टैरिफ लगा देते थे। लेकिन 20 फरवरी 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने इसके खिलाफ फैसला सुनाया और कहा कि IEEPA राष्ट्रपति को टैरिफ लगाने का अधिकार नहीं देता। कोर्ट ने कहा कि टैरिफ एक तरह का आयात शुल्क है और अमेरिकी संविधान के आर्टिकल-1 के अनुसार इसे लगाने का अधिकार मुख्य रूप से कांग्रेस (संसद) के पास है। इसी वजह से अब रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100% सेकेंडरी टैरिफ लगाने के लिए अलग विधेयक कांग्रेस में लाया गया है, ताकि राष्ट्रपति को स्पष्ट कानूनी अधिकार मिल सके और इस फैसले को अदालत में चुनौती देना या भविष्य में आसानी से बदलना मुश्किल हो। 100% टैरिफ से भारत पर 3 बड़े असर होंगे भारतीय सामान दोगुने महंगे हो जाएंगे: अमेरिका भारत का सबसे बड़ा बाजार है, जहां भारत सालाना करीब 6.5 लाख करोड़ रुपए का सामान निर्यात करता है। 100% टैक्स लगने से भारतीय सामान वहां दोगुने महंगे हो जाएंगे और बिक्री ठप हो जाएगी। बचत से 10 गुना बड़ा घाटा: रूसी तेल से भारत सालाना करीब 60,000 करोड़ रुपए बचाता है, लेकिन अमेरिकी बाजार खोने से होने वाला नुकसान इस बचत से 10 गुना ज्यादा होगा। नौकरियां जाएंगी और रुपया कमजोर होगा: 100% टैरिफ से अमेरिका को होने वाला ₹2.1 लाख करोड़ का कपड़ा, हीरा और दवा निर्यात ठप हो जाएगा। इससे इन उद्योगों में काम करने वाले करीब 15 से 20 लाख लोग प्रभावित हो सकते हैं। निर्यात घटने से देश में डॉलर की कमी होगी, जिससे भारतीय रुपया डॉलर के मुकाबले कमजोर हो सकता है। —————————– ये खबर भी पढ़ें… UK की व्हिस्की, कारें और ब्यूटी प्रोडक्ट्स सस्ते मिलेंगे:भारत-UK के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट आज से लागू, जानें किन चीजों के दाम बदलेंगे भारत में UK की कारें, व्हिस्की, कपड़े और फुटवियर आज से सस्ते मिलेंगे। आज से भारत-UK के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट लागू हो गया है। यानी अब भारत के 99% सामानों को UK में जीरो टैरिफ पर निर्यात किया जाएगा। वहीं UK के 99% सामान 3% एवरेज टैरिफ पर आयात होंगे। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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