लंदन से 120 किमी दूर पीटरबरो में 40 साल पुराने मंदिर और कम्युनिटी सेंटर की बिक्री को पर विवाद हो गया है। पीटरबरो सिटी काउंसिल ने न्यू इंग्लैंड कॉम्प्लेक्स को नीलामी के बाद एक मुस्लिम संस्था, यूनाइटेड किंगडम इस्लामिक मिशन, को बेचने का फैसला किया है। इसी परिसर में भारत हिंदू समाज का मंदिर चलता है, जो शहर और आसपास रहने वाले हजारों हिंदुओं का प्रमुख पूजा और सांस्कृतिक केंद्र है। फैसले से नाराज भारत हिंदू समाज ने हाई कोर्ट में याचिका दायर कर बिक्री प्रक्रिया को चुनौती दी है। भारत हिंदू समाज संगठन का आरोप है कि काउंसिल ने मंदिर की करीब 40 साल पुरानी धार्मिक और सामुदायिक भूमिका को नजरअंदाज किया। नीलामी के मूल्यांकन में भी गंभीर खामियां रहीं। बता दें कि फरवरी 2026 में हाई कोर्ट ने अंतरिम रोक लगाते हुए काउंसिल को बिक्री पूरी करने जैसे किसी भी कदम से रोक दिया था। अब न्यायिक समीक्षा में यह जांच हो रही है कि फैसला लेने की प्रक्रिया कानून के मुताबिक थी या नहीं। मंदिर प्रबंधन ने साफ किया है कि उसका विरोध मुस्लिम संस्था से नहीं, बल्कि काउंसिल के फैसले और प्रक्रिया से है। अब कोर्ट जांच करेगा कि संपत्ति बेचने का फैसला कानून और समानता के नियमों के मुताबिक लिया गया था या नहीं। मंदिर बंद होने से 56 किमी दूर जाने को मजबूर होंगे हिंदू भारत हिंदू समाज का कहना है कि पीटरबरो का यह मंदिर केवल धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि इलाके के 4,000 हिंदुओं का एकमात्र सामाजिक-सांस्कृतिक केंद्र भी है। यदि यह परिसर बंद होता है, तो हिंदुओं को पूजा-अर्चना व त्योहारों के लिए निकटतम मंदिर (कैंब्रिज-56 किमी) या (लेस्टर-64 किमी) का रुख करना पड़ेगा। घाटे के चलते बेचने पड़ रहे हैं परिसर, स्पोर्ट्स सेंटर व क्लब पीटरबरो का विवाद ब्रिटेन में अकेला नहीं है। यहां की काउंसिलें बढ़ते खर्च व कम सरकारी मदद के कारण सामाजिक परिसर, स्पोर्ट्स सेंटर व कम्युनिटी भवन बेचकर बजट संभाल रही हैं। 2025 के ‘की सिटीज’ सर्वे में 60% काउंसिलों ने संपत्ति बिक्री को घाटा भरने का रास्ता बताया। बर्मिंघम को 24-25 का बजट संतुलित करने के लिए 2,883 करोड़ रु. की संपत्तियां बेचने का लक्ष्य रखना पड़ा। नॉटिंघम का 2025-26 घाटा 267 करोड़ और चार वर्षों का कुल अनुमानित अंतर 689 करोड़ रु. था। नीलामी में खामियां, समीक्षा बिना मंजूरी दी गई भारत हिंदू समाज का आरोप है कि बिक्री के दौरान दोनों पक्षों की बोलियों का ठीक मूल्यांकन नहीं हुआ। अदालत में संगठन ने कहा कि काउंसिल ने जांच और स्कोरिंग में गलतियां कीं। इसके बाद काउंसिल सदस्यों ने उन्हीं सिफारिशों को पड़ताल के बिना स्वीकार कर लिया। संगठन का कहना है कि मामला केवल ऊंची बोली का नहीं, बल्कि धार्मिक स्थल का भी है। ——————————————— ये खबर भी पढ़ें…
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ब्रिटेन में मंदिर की जगह मुस्लिमों को बेचने पर विवाद: हिंदू समाज ने हाई कोर्ट में याचिका लगाई; नीलामी की प्रक्रिया गलत होने का आरोप
‘लापता लड़कियों को ढूंढने में पुलिस गंभीर नहीं’: हाईकोर्ट ने लगाई फटकार, कहा- जांच अधिकारियों को सिर्फ फेसबुक-इंस्टाग्राम का ही पता – Gwalior News
मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय की ग्वालियर खंडपीठ ने राज्य में लापता लड़कियों और गुमशुदा इंसानों की बरामदगी को लेकर पुलिस प्रशासन के ढीले रवैये पर तीव्र आक्रोश व्यक्त किया है। कोर्ट ने बेहद सख्त लहजे में कहा कि पुलिस ऐसे मामलों को अत्यंत हल्के में ले रही है और जांच का जिम्मा ऐसे लापरवाह और अक्षम अधिकारियों को सौंप दिया जाता है, जिन्हें आधुनिक या प्रभावी तफ्तीश का ककहरा तक नहीं मालूम। भिंड के आलमपुर थाने में दर्ज एक गुम इंसान मामले में गंभीरता से कार्रवाई नहीं करने के केस पर हाईकोर्ट की डबल बेंच सुनवाई कर रही थी। मामले की गंभीरता को देखते हुए माननीय न्यायालय ने भिंड एसपी को वर्तमान जांच अधिकारी को तत्काल हटाने और मामले की कमान ‘अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक’ स्तर के वरिष्ठ अधिकारी को सौंपने के कड़े निर्देश दिए हैं। ASI बोले- इंस्टाग्राम-फेसबुक देख लिया, सुराग नहीं मिला यह पूरा मामला भिंड जिले के आलमपुर थाने से जुड़ा है, जहां एक पिता ने अपनी लापता बेटी की बरामदगी के लिए हाईकोर्ट में बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दायर की है। जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की डबल बेंच के समक्ष आलमपुर थाने में तैनात एएसआई ओंकार सिंह तोमर केस डायरी लेकर व्यक्तिगत रूप से पेश हुए थे। कोर्ट ने जब उनसे लड़की की तलाश को लेकर किए गए प्रयासों पर सवाल दागे, तो एएसआई को जवाब देते नहीं बना। उन्होंने अदालत को बेहद गैर-जिम्मेदाराना जवाब देते हुए कहा कि ‘मैंने लड़की का इंस्टाग्राम और फेसबुक खंगाला है, लेकिन वहां कोई सुराग नहीं मिला।’ वैसे, संदिग्ध को गांव में ही देखा गया था।” 24 घंटे के भीतर जांच अधिकारी को हटाएं इस पर कोर्ट ने काफी नाराजगी जताई और कहा कि विवेचना अधिकारी सिर्फ फेसबुक व इंस्टाग्राम तक ही सीमित हैं। ASI के इस जवाब पर कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताते हुए कहा कि आईओ जांच करने में पूरी तरह नाकाम साबित हुए हैं। क्या पुलिस की तफ्तीश अब सिर्फ सोशल मीडिया स्क्रॉल करने तक सीमित रह गई है? बेंच ने सख्त संदेश देते हुए निर्देशित किया है। भिंड एसपी से मांगा व्यक्तिगत हलफनामा हाईकोर्ट ने केवल निचले स्तर के अधिकारी को ही नहीं, बल्कि भिंड पुलिस अधीक्षक को भी आड़े हाथों लिया। कोर्ट ने कहा कि ऐसा प्रतीत होता है कि एसपी खुद जांच अधिकारियों की सक्षमता को परखे बिना ही लापरवाही से केस सौंप रहे हैं। अदालत ने भिंड एसपी से अगली सुनवाई तक व्यक्तिगत हलफनामा मांगते हुए 3 बिंदुओं पर जवाब तलब किया है।
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लौकी के छिलके से बनाएं चटपटी भुजिया, रोटी-दाल के साथ लगेगी सबसे टेस्टी, बढ़ जाएगा स्वाद
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Lauki Ke Chilke Ki Bhujia: लौकी जिसे बिहार-झारखंड की तरफ कद्दू कहा जाता है की सब्जी बनाने के बाद लोग इसके छिलके को अक्सर फेंक देते हैं. हालांकि अगर आप मिथिलांचल स्टाइल में इसकी भुजिया बनाते हैं, तो आगे से कभी छिलके नहीं फेंकेगे बल्कि इसे भी चटखारा लगाकर खाएंगे. छिलकों से आप इसकी स्वादिष्ट भुजिया बना सकते हैं. ये खाने में बहुत स्वादिष्ट होती है और सेहत के लिए भी फायदेमंद मानी जाती है. छिलके की भुजिया बनने में 10 से 12 मिनट का समय लगता है. इसमें घी का बस थोड़ा सा तड़का लगाना है, फिर आप इसे रोटी, चावल या दाल के साथ मजे से खा सकते हैं.
कद्दू के छिलके की भुजिया बनाने के लिए जब आप इसे छीलें, तो उसकी थोड़ी मोटी परत रहने दें. उसके बाद इन छिलकों को पतली भुजिया के आकार में काट लें. फिर कढ़ाई में थोड़ा सा तेल, जीरा और लाल मिर्च का तड़का लगाकर इसे पकाएं. यह 10 से 12 मिनट में अच्छी तरह पक जाता है. जब गैस बंद करें, तब इसमें एक चम्मच घी डाल दें. घी का एक छोटा चम्मच कद्दू के छिलके की भुजिया का स्वाद चार गुना बढ़ा देता है.

कद्दू के छिलके से पकते समय थोड़ा तेल जैसा रस निकलता है. ऐसे में अगर आखिर में घी का तड़का लगाया जाए, तो इसका स्वाद और भी लाजवाब हो जाता है. घी स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद माना जाता है और कद्दू भी सेहत के लिए लाभदायक है.

एक बार आपने मिथिलांचल स्टाइल में यह भुजिया बनाकर खा ली, तो बार-बार खाएंगे और कभी छिलका नहीं फेंकेंगे. इसमें कुछ भी अलग से नहीं डालना है. सिर्फ नमक और हल्दी डालनी है. भुजिया पक जाने के बाद आखिर में एक चम्मच घी डाल देना है.
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कुछ लोग इस भुजिया में बारीक आलू काटकर डालते हैं तो कुछ लोग छिलके सहित आलू डालते हैं. यह आपकी पसंद पर निर्भर करता है कि आप साथ में कुछ डालना चाहते हैं या केवल छिलकों की भुजिया छौंकना चाहते हैं.

यही बात मसालों पर भी लागू होती है. आप अपने परिवार की पसंद के हिसाब से इसमें मसाले घटा या बढ़ा सकते हैं. आमतौर पर इसमें हींग-जीरे का तड़का देकर, हल्दी, धनिया, मिर्च जैसे बेसिक मसाले डाले जाते हैं. हालांकि कैसे भी बनाएं, स्वाद लाजवाब ही होता है.
लखनऊ में 32वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 की तैयारियां शुरू: 10 से 17 वर्ष के बच्चे जिला से राष्ट्रीय स्तर तक पेश करेंगे प्रोजेक्ट – Lucknow News
अतुल कुमार सिंह | लखनऊ2 मिनट पहले
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बच्चों में विज्ञान के प्रति जिज्ञासा और वैज्ञानिक सोच विकसित करने में शिक्षकों की सबसे अहम भूमिका है। शिक्षक विद्यार्थियों को विज्ञान रटाने के बजाय प्रयोग और अनुभव के माध्यम से सीखने के लिए प्रेरित करें। यह बात संयुक्त शिक्षा निदेशक डॉ. प्रदीप कुमार ने सोमवार को आंचलिक विज्ञान नगरी में राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस (एनसीएससी) पश्चिमी उत्तर प्रदेश की ओर से आयोजित शिक्षक कार्यशाला में कही।
कार्यशाला में लखनऊ और कानपुर मंडल के चयनित शिक्षकों ने जिला एवं अकादमिक समन्वयक के रूप में हिस्सा लिया। आंचलिक विज्ञान नगरी के प्रमुख स्वरूप मंडल ने शिक्षकों से अपील की कि वे विद्यार्थियों को अपने आसपास की समस्याओं के वैज्ञानिक समाधान खोजने के लिए प्रेरित करें।
राष्ट्रीय स्तर पर वैज्ञानिक प्रोजेक्ट पेश करते हैं
राज्य समन्वयक दीपक शर्मा ने बताया कि राष्ट्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी संचार परिषद, भारत सरकार पिछले 31 वर्षों से इस कार्यक्रम का आयोजन कर रही है। राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस में 10 से 17 वर्ष आयु वर्ग के बच्चे जिला, राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर अपने वैज्ञानिक प्रोजेक्ट प्रस्तुत करते हैं।
नोडल एजेंसी इंडियन साइंस कम्युनिकेशन सोसाइटी (आईएससीओएस) के कार्यकारी सचिव एवं राज्य प्रधान अन्वेषक डॉ. वी.पी सिंह ने शिक्षकों से अधिक से अधिक विद्यार्थियों का पंजीकरण कराने की अपील की। वहीं, बीएसआईपी की वरिष्ठ वैज्ञानिक डॉ. शिल्पा पांडेय ने कहा कि विद्यार्थियों को क्षेत्र भ्रमण कराया जाए, ताकि वे वास्तविक परिस्थितियों को समझते हुए सीख सकें।

राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेंगे
आंचलिक विज्ञान नगरी के वरिष्ठ शिक्षा अधिकारी रामकुमार ने ऐसे प्रशिक्षण कार्यक्रमों को उपयोगी बताया। केएमसी भाषा विश्वविद्यालय के प्रो. सुमन कुमार मिश्रा ने आभार जताया। प्रशिक्षण सत्र में शिक्षकों को समूहों में बांटकर प्रो. डी. राम, प्रो. ओम प्रकाश और प्रो. अरविंद कुमार सिंह ने परियोजना निर्माण और मार्गदर्शन की जानकारी दी। शिक्षकों को विज्ञान नगरी की प्रयोगशालाओं और अन्य सुविधाओं से भी अवगत कराया गया।
इस वर्ष 32वीं राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस-2026 का विषय ‘सतत विकास के लिए विज्ञान एवं नवाचार’ रखा गया है। कार्यशाला में प्रशिक्षित शिक्षक अपने-अपने जिलों में बाल वैज्ञानिकों को तैयार करेंगे। जनपद स्तर पर चयनित प्रतिभागी राज्य और राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेंगे।
मोतिहारी में फर्जी शिक्षक बहाली का आरोप: डीएम ने डीईओ को जांच के आदेश दिए, टीम गठित; बोले-नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी – Motihari (East Champaran) News
मोतिहारी में शिक्षक नियोजन से जुड़ा एक गंभीर मामला सामने आया है। जिलाधिकारी सौरभ सुमन यादव के समक्ष फर्जी बहाली की शिकायत दर्ज कराई गई है, जिसके बाद डीएम ने जिला शिक्षा पदाधिकारी (डीईओ) को जांच का निर्देश दिया है। निष्पक्ष जांच की मांग की-शिकायतकर्ता शिकायतकर्ता प्रियांशु राज ने डीएम को पत्र लिखकर पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। आरोप है कि रौशन आरा खातून, जो वर्तमान में राजकीय मध्य विद्यालय, टिकैता (पिपराकोठी) में विशिष्ट शिक्षिका के रूप में कार्यरत हैं, उनकी नियुक्ति शुरू से ही संदिग्ध रही है। शिकायत के अनुसार, फरवरी 2005 में पंचायत शिक्षक नियोजन के लिए विज्ञापन प्रकाशित हुआ था। उस समय रौशन आरा खातून की जन्म तिथि 14 अप्रैल 1987 के आधार पर उनकी उम्र मात्र 17 वर्ष 10 माह थी, जो नियोजन के लिए निर्धारित न्यूनतम आयु सीमा से कम है। रोस्टर में उनका नाम शामिल नहीं था यह भी आरोप है कि उन्होंने अपने पति इजहार अंसारी और तत्कालीन पंचायत सचिव की मिलीभगत से आवेदन जमा किया था। उस समय तैयार रोस्टर में उनका नाम शामिल नहीं था। मई 2005 में लगभग 22-23 लोगों को शिक्षा मित्र के रूप में नियोजन पत्र जारी किए गए थे, जिनमें उनका नाम नहीं था। इसके बावजूद, कथित तौर पर तत्कालीन मुखिया के फर्जी हस्ताक्षर से बिना पत्रांक और दिनांक के नियोजन पत्र तैयार कर उनका योगदान करा दिया गया। आरोप है कि नियोजन पत्र पर आवश्यक पदाधिकारियों के हस्ताक्षर भी नहीं थे। विभागीय स्तर पर संरक्षण मिलता रहा शिकायत में कहा गया है कि इन अनियमितताओं के बावजूद उन्हें वर्षों तक विभागीय स्तर पर संरक्षण मिलता रहा और कभी जांच नहीं हुई। उनकी शैक्षणिक योग्यता और परीक्षाओं को लेकर भी सवाल उठाए गए हैं। आरोप है कि उन्होंने 2009 की दक्षता परीक्षा सामान्य वर्ग में पास की, जबकि 2024 की सक्षमता परीक्षा उर्दू विषय से उत्तीर्ण की, जिसे विभागीय नियमों के विपरीत बताया जा रहा है। बताया गया है कि सक्षमता परीक्षा के बाद विशिष्ट शिक्षिका के रूप में उनके योगदान को वर्तमान प्रधानाध्यापक ने भी स्वीकृति नहीं दी है। इधर, शिकायत पत्र मिलने के बाद डीएम सौरभ सुमन यादव ने त्वरित कार्रवाई करते हुए डीईओ को जांच का आदेश दिया है। इस संबंध में डीईओ राजन गिरी ने बताया कि शिकायत प्राप्त हुई है और जांच के लिए टीम गठित की जा रही है। उन्होंने कहा कि जांच रिपोर्ट आने के बाद नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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पब्लिक प्लेस पर पोर्न देखने पर रोक की मांग खारिज: सुप्रीम कोर्ट बोला- सरकार के पास जाएं, यह कानून बनाने वालों का मामला है
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7 मिनट पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने पब्लिक प्लेस पर पोर्नोग्राफी देखने पर रोक लगाने के लिए राष्ट्रीय नीति बनाने की मांग वाली जनहित याचिका खारिज कर दी। अदालत ने कहा कि यह कानून का नहीं बल्कि पॉलिसी का मामला है। इस पर फैसला केंद्र सरकार और विषय विशेषज्ञों को करना चाहिए।
कोर्ट ने कहा कि यह मुद्दा निश्चित रूप से अहम है, लेकिन इसमें ऐसा कोई कानूनी प्रश्न नहीं है जिस पर कोर्ट को विचार करना पड़े। यह तकनीकी विकास और विशेषज्ञों की स्टडी से जुड़ा नीतिगत विषय है, जो मुख्य रूप से सूचना मंत्रालय के अधिकार क्षेत्र में आता है।
CJI सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहन की बेंच ने याचिकाकर्ता को केंद्र सरकार के सामने अपनी बात रखने की सलाह दी। साथ ही कहा कि इस मामले में अदालत के हस्तक्षेप जरूरी नहीं है।
याचिकाकर्ता के 2 दावे…
- इंटरनेट पर हर सेकंड 5,000 पोर्न साइट्स देखी जाती हैं।
- इंटरनेट के जरिए 2 करोड़ से ज्यादा पोर्न वीडियो/क्लिप्स जारी किए जा रहे हैं।
याचिका में दावा- इंटरनेट पर अश्लील सामग्री तक पहुंच आसान
यह याचिका सामाजिक कार्यकर्ता बीएल जैन ने दायर की थी। याचिका में केंद्र सरकार को राष्ट्रीय नीति और कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश देने की मांग की गई थी ताकि विशेषकर नाबालिगों के बीच पोर्नोग्राफी की पहुंच को रोका जा सके।
याचिका में दावा किया गया कि इंटरनेट पर पोर्नोग्राफी कंटेट आसानी से मिल जाता है। और यह लगातार बढ़ रहा है। हर सेकंड हजारों पोर्न वेबसाइट देखी जा रही हैं। अश्लील सामग्री की आसान उपलब्धता के कारण इसकी लत बढ़ रही है और इससे यौन अपराधों में भी बढ़ोतरी हो रही है।
याचिका में सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 की धारा 69A का हवाला देते हुए कहा गया था कि केंद्र सरकार के पास आपत्तिजनक ऑनलाइन सामग्री तक सार्वजनिक पहुंच रोकने की शक्ति है।

क्या भारत में पोर्न देखना अपराध है?
भारतीय कानून में वयस्क व्यक्ति द्वारा निजी स्थान पर पोर्न देखना अपने-आप में अलग से अपराध घोषित नहीं किया गया है। लेकिन ये कार्य अपराध हो सकते हैं, जब कोई पोर्न बनाता है या बेचता है। सार्वजनिक रूप से अश्लील सामग्री दिखाना, बच्चों से जुड़ी अश्लील सामग्री रखना, देखना या शेयर करना भी अपराध के दायरे में आता है।
इसके अलावा बिना सहमति किसी का निजी वीडियो फैलाना, अश्लील सामग्री का इलेक्ट्रॉनिक प्रसारण करना भी कानूनन अपराध माना जाएगा।
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सुप्रीम कोर्ट ने POCSO के दुूरुपयोग पर चिंता जताई: कहा- लड़का-लड़की को भागने से सरकार कैसे रोकेगी, यह नई चीजें आजमाने की उम्र

सुप्रीम कोर्ट ने किशोर-किशोरियों के बीच सहमति से बने संबंधों में पॉक्सो (POCSO) कानून के कथित दुरुपयोग पर चिंता जताई है। अदालत ने सोमवार को कहा कि जब किसी लड़के और लड़की के बीच संबंध हो और वे साथ चले जाएं, तो हर मामले को स्वतः पॉक्सो का केस नहीं माना जा सकता।पढ़ें पूरी खबर…
गैस पाइपलाइन हादसा: हाईकोर्ट ने जांच पर जताई नाराजगी: ACP को किया तलब, केस डायरी देखकर बोरिंग मशीन की सुपुर्दगी पर भी उठाए सवाल – Indore News
विजय नगर स्थित अवंतिका गैस पाइपलाइन हादसे को लेकर सोमवार को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंट में हुई सुनवाई के दौरान कोर्ट ने लचीली जांच को लेकर गहरी नाराजगी जताई। सुनवाई के दौरान जांच अधिकारी कोर्ट में उपस्थित हुए और केस डायरी पेश की। केस डायरी का अवलोकन करने के बाद कोर्ट ने जांच की दिशा और गंभीरता पर सवाल उठाते हुए असंतोष व्यक्त किया। कोर्ट ने कहा कि यदि जांच की स्थिति ऐसी ही है तो फिर यह मामला किसी अन्य एजेंसी को सौंपने की आवश्यकता क्यों न समझी जाए। कोर्ट ने मामले को गंभीर मानते हुए संबंधित एसीपी को स्वयं अगली सुनवाई में उपस्थित होकर जवाब देने के निर्देश दिए हैं। बोरिंग मशीन की सुपुर्दगी पर भी कोर्ट सख्त सुनवाई के दौरान कोर्ट के संज्ञान में यह बात भी आई कि हादसे से जुड़ी बोरिंग मशीन और वाहन को जिला कोर्ट द्वारा वाहन मालिक की सुपुर्दगी में दिए जाने के आदेश पारित किए गए हैं। इस तथ्य पर भी कोर्ट ने पुलिस जांच परसवाल उठाए और जांच अधिकारी से जवाब मांगा कि जांच लंबित रहने के दौरान इस संबंध में क्या कार्रवाई की गई। कोर्ट ने संकेत दिए कि मामले की जांच में अपेक्षित गंभीरता दिखाई नहीं दे रही है और कई महत्वपूर्ण पहलुओं पर पर्याप्त स्पष्टता नहीं है। जांच की प्रक्रिया और उसकी गति पर भी सवाल खड़े किए। पीड़ितों के अंतरिम मुआवजे पर मांगी सरकार की नीति हादसे में झुलसे पीड़ितों को अब तक राहत राशि नहीं मिलने का मुद्दा भी सुनवाई के दौरान उठा। कोर्ट ने राज्य शासन से पूछा कि ऐसे हादसों में पीड़ितों को अंतरिम मुआवजा देने के संबंध में सरकार की क्या नीति है। कोर्ट ने निर्देश दिए कि अगली सुनवाई तक शासन इस संबंध में अपना स्पष्ट पक्ष और नीति कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत करे। अगली सुनवाई 21 जुलाई को निर्धारित की है। इस दौरान एसीपी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने, जांच की प्रगति से अवगत कराने और मुआवजा नीति पर शासन की रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
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बेलसंड के संदीप दास बने हनुमानगढ़ी के नए महंथ: अयोध्या संत समाज ने सर्वसम्मति से सौंपी गद्दी, मिथिलांचल में खुशी – Sitamarhi News
सीतामढ़ी जिले के बेलसंड प्रखंड स्थित मारर गांव के निवासी संदीप दास जी महाराज को अयोध्या की विश्व प्रसिद्ध श्री हनुमानगढ़ी की उजैनिया पट्टी का नया श्री महंथ नियुक्त किया गया है। यह पद पूर्व महंथ के निधन के बाद रिक्त था। अयोध्या के संत समाज और प्रमुख महंथों ने सर्वसम्मति से संदीप दास जी महाराज का चयन किया। पारंपरिक विधि-विधान, मंत्रोच्चार और चादरपोशी के साथ उन्हें गद्दी की जिम्मेदारी सौंपी गई। 9 वर्ष की आयु में चले गए थे अयोध्या संदीप दास जी महाराज स्वर्गीय रघुनाथ मिश्रा के पुत्र हैं। वे मूल रूप से सीतामढ़ी के बेलसंड प्रखंड के मारर गांव के रहने वाले हैं। परिवार के अनुसार, उन्होंने मात्र 9 वर्ष की आयु में शिक्षा के लिए अयोध्या प्रस्थान किया था। वहीं उन्होंने पूर्व महंथ रमेश दास जी महाराज से दीक्षा ग्रहण कर सनातन परंपरा की सेवा आरंभ की। उनके श्री महंथ बनने की खबर मिलते ही मारर गांव, बेलसंड और पूरे मिथिलांचल में हर्ष का माहौल है। ग्रामीणों और श्रद्धालुओं ने इसे बिहार और मिथिला के लिए गौरवपूर्ण क्षण बताया है। कई संत-महात्माओं, सामाजिक कार्यकर्ताओं, जनप्रतिनिधियों और स्थानीय लोगों ने उन्हें बधाई दी है और सफल कार्यकाल की शुभकामनाएं व्यक्त की हैं।
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इसमें आलू नहीं पड़ता…क्या आपने कभी खाया दूध और मखाने वाला बलिया का समोसा?
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Potato-free samosa recipe : बलिया अब केवल अपने बागी इतिहास तक सीमित नहीं, बल्कि एक नए और अनोखे स्वाद की खुशबू से लुभा रहा है. यहां ऐसा समोसा बन रहा है, जिसमें आलू नहीं, बल्कि दूध, काजू और मखाने का प्रयोग किया जाता है. यही अनोखेपन ने इसे लोगों की पहली पसंद बना दिया है. दुकानदार संजय कुमार लोकल 18 से बताते हैं कि जब सीक्रेट मसाले को समोसे की कुरकुरी परत में भरकर तला जाता है, तो इसकी खुशबू दूर से ही लोगों को आकर्षित करने लगती है. यही स्वाद इसे आम समोसों से अलग बनाती है. ग्राहकों की सुविधा के लिए राज स्वीट्स सिकंदरपुर वाले ने आर्य समाज रोड पर मनजीत सिंह कंपनी के सामने अपनी नई शाखा शुरू की है.
बलिया में तैयार होने वाला यह समोसा पारंपरिक समोसे से बिल्कुल अलग है. जहां अधिकांश समोसों की जान आलू होता है, इसमें आलू का इस्तेमाल बिल्कुल भी नहीं किया जाता है. इसकी जगह दूध, मखाना और खास मसालों से मिश्रण तैयार कर समोसे में भरा जाता है. इसी के कारण पहली बार इसे खाने वाला हर व्यक्ति इसके स्वाद और बनावट की तारीफ करता है.

इस अनोखे और स्पेशल समोसे की तैयारी सुबह से ही शुरू हो जाती है. प्रतिदिन लगभग 30 से 40 किलो ताजा दूध बड़े भगोनों में उबाला जाता है. लगभग दो किलो मखाना दूध में डालकर धीमी आंच पर पकाया जाता है. जब मखाना पूरी तरह दूध में घुल-मिल जाए, तब इससे एक विशेष प्रकार का पनीर तैयार किया जाता है, जो इस समोसे की बड़ी खासियत है.

दुकानदार संजय कुमार के मुताबिक, पनीर बनने के बाद उसमें इस्तेमाल किए जा रहे खास मसालों का मिश्रण गोपनीय रखा गया है, ताकि कोई इसका नकल न कर सके. इसमें स्वाद को बेहतर बनाने के लिए बारीक कटे काजू भी डाले जाते हैं. यह मिश्रण जब समोसे की कुरकुरी परत में भरकर सुनहरा तला जाता है, तो इसकी खुशबू दूर से ही लोगों को आकर्षित करने लगती है. यही स्वाद इसे आम समोसों से अलग बनाती है.
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अपने खासियत के चलते ही यह समोसा सुर्खियां बटोर रहा है. जनपद बलिया शहर और आसपास के कई इलाकों से लोग केवल इसका स्वाद लेने पहुंचते हैं. बलिया रेलवे स्टेशन के पास दुकान होने से बाहर से आने वाले यात्री भी यहां रुककर इस खास समोसे का आनंद लेते हैं और कई लोग पैक कराकर अपने घर भी ले जाते हैं. इस समोसे के स्वाद का जलवा दूर-दूर तक फैल चुका है.

पहले यह दुकान जिले के सिकंदरपुर में थी, जो सिकंदरपुर वाले मशहूर हो गई, बढ़ती मांग को देखते हुए यह स्वाद अब बलिया शहर तक पहुंच गया है. ग्राहकों की सुविधा के लिए राज स्वीट्स सिकंदरपुर वाले ने आर्य समाज रोड पर मनजीत सिंह कंपनी के सामने अपनी नई शाखा शुरू की है, जो मुख्य शहर में स्थित है. इससे शहर के लोगों को अब सिकंदरपुर तक जाने की जरूरत नहीं है.

बगैर आलू के इस समोसे की खासियत न केवल इसका अलग भरावन से है, बल्कि इसकी गुणवत्ता बेहतर है. ताजा दूध, मखाना, पनीर, काजू और चुने हुए मसालों का संतुलित मिश्रण ही इसको शाही स्वाद प्रदान करता है. इसी के चलते ग्राहक एक बार इसे चखता है, तो वह दोबारा आने को मजबूर हो जाता हैं. इसका स्वाद और गुणवत्ता दोनों लाजवाब है.

बलिया की पहचान अब न केवल ऐतिहासिक तक सीमित है, बल्कि यहां के स्थानीय व्यंजन भी नई पहचान बना रहे हैं. स्वाद का आनंद ले रही सिमरन बताती हैं कि दूध और मखाने से तैयार यह समोसा स्थानीय उद्यम और नवाचार का बेहतरीन उदाहरण है. पारंपरिक व्यंजन में नए प्रयोग ने इसे अलग ही पहचान दे दिया है और यह जिले में आकर्षण बनता जा रहा है.

अगर आप भी बलिया आने का प्लान बना रहे हैं और कुछ ऐसा चखना चाह रहे हैं, जो आम समोसे से बिल्कुल अलग हो, तो यह दूध-मखाना समोसा जरूर ट्राई करें. यकीन मानिए, इसका अनोखा स्वाद, खास बनाने की विधि और देसी अंदाज हर निवाले को यादगार बना देता है. इसी के कारण यह समोसा आज बलिया में नई स्वाद बनकर दूर-दूर तक अपनी खुशबू फैला रहा है.
सांवलिया सेठ के भंडार से निकले 10.11 करोड़ रुपए: पहले चरण की गिनती पूरी, अंतिम दिन होगी सोने-चांदी की भेंट की तौल – Chittorgarh News
मेवाड़ के कृष्णधाम श्री सांवलियाजी मंदिर में चतुर्दशी के मौके पर सोमवार को भंडार खोला गया। पहले ही राउंड में दानपात्र से निकली राशि की काउंटिंग 10 करोड़ 11 लाख 83 हजार रुपए तक पहुंच गई। पूरे दिन बैंक कर्मियों और मंदिर मंडल के कर्मचारियों ने मिलकर काउंटिंग की। अब मंगलवार को अमावस्या होने के कारण काउंटिंग नहीं होगी। इसके बाद 15 जुलाई, बुधवार को बाकी राशि की काउंटिंग का काम आगे बढ़ेगा। अभी चेक, ऑनलाइन मिले दान और सोने-चांदी के चढ़ावे का हिसाब भी बाकी है, जिसे आखिरी दिन पूरा किया जाएगा। सुबह आरती के बाद शुरू हुई काउंटिंग श्री सांवलियाजी मंदिर में तय परंपरा के अनुसार चतुर्दशी पर भंडार खोला गया। दिन की शुरुआत मंदिर में पूजा-अर्चना से हुई। बाद में राजभोग आरती की गई। इसके बाद दानपात्र खोले गए और उनमें से निकली राशि की काउंटिंग शुरू की गई। बैंक कर्मियों और मंदिर मंडल के कर्मचारियों ने पूरे दिन मिलकर नोटों और सिक्कों की गिनती की। शाम तक पहले राउंड की काउंटिंग पूरी होने पर कुल 10 करोड़ 11 लाख 83 हजार रुपए सामने आए। पहले ही दिन 10 करोड़ रुपए से ज्यादा की काउंटिंग होने से श्रद्धालुओं में भी चर्चा का विषय बना रहा। मंगलवार को नहीं होगी काउंटिंग मंदिर मंडल के अनुसार मंगलवार को अमावस्या होने की वजह से भंडार की काउंटिंग नहीं की जाएगी। इस दिन मंदिर की धार्मिक परंपराओं के अनुसार अन्य व्यवस्थाएं रहेंगी। इसलिए काउंटिंग का काम एक दिन के लिए रोका जाएगा। अब अगला राउंड 15 जुलाई, बुधवार को होगा। उसी दिन फिर से दानपात्र में निकली बाकी राशि की काउंटिंग शुरू की जाएगी। काउंटिंग पूरी होने के बाद ही इस बार भंडार में कुल कितना दान आया, इसकी अंतिम तस्वीर सामने आएगी। अभी चेक, ऑनलाइन दान और चढ़ावे का हिसाब बाकी पहले राउंड में सिर्फ दानपात्र से निकली नकद राशि की काउंटिंग की गई है। इसके अलावा मंदिर को श्रद्धालुओं की ओर से चेक और ऑनलाइन माध्यम से भी बड़ी संख्या में दान मिलता है। वहीं सोने-चांदी के आभूषण और अन्य कीमती चढ़ावे भी अलग से जमा होते हैं। इन सभी की काउंटिंग और वजन का काम आखिरी दिन किया जाएगा। इसके बाद मंदिर मंडल भंडार का अंतिम आंकड़ा जारी करेगा। हर महीने होने वाली इस काउंटिंग पर श्रद्धालुओं के साथ-साथ पूरे मेवाड़ की नजर रहती है, क्योंकि सांवलियाजी मंदिर देश के प्रमुख आस्था केंद्रों में शामिल है और यहां बड़ी संख्या में श्रद्धालु अपनी श्रद्धा के अनुसार दान अर्पित करते हैं।
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