Sunday, August 2, 2026
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नालंदा में करंट लगने से किसान की मौत: खेत पर पटवन के लिए गए थे, बिजली का तार टूटकर हाथ पर गिरा – Nalanda News




नालंदा में करंट लगने से किसान की मौत हो गई। खेत की सिंचाई(पटवान) के दौरान हादसा हुआ है। मृतक की पहचान बरनौसा गांव निवासी नरेश सिंह(50) के रूप में की गई है। घटना सिलाव थाना क्षेत्र की है।
तार में ‘टोका’ फंसाने के दौरान हुआ हादसा मृतक के भाई मुनील सिंह ने बताया कि नरेश सिंह अपने खेत में पटवन करने के लिए गए हुए थे। पाइप बिछाने और सेट करने के बाद मोटर चालू करने के लिए बिजली के तार में ‘टोका’ फंसा रहे थे। इसी दौरान अचानक एक टोका टूटकर उनके हाथ पर गिर गया, जिससे उन्हें बिजली का जोरदार झटका लगा। करंट लगने से जान चली गई। छानबीन में जुटी पुलिस सिलाव थानाध्यक्ष धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस टीम तुरंत मौके पर पहुंची। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। परिजनों की ओर से अभी लिखित आवेदन नहीं मिला है। आवेदन मिलते ही नियमानुसार आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है।



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बालाघाट में आंदोलनकारी महिलाओं से मिलीं विधायक: शराब हटाने की मांग पर बोली-मुद्दा सदन तक ले जाएंगे; चार महीने से जारी है आंदोलन – Balaghat (Madhya Pradesh) News




बालाघाट मुख्यालय के बुढ़ी क्षेत्र में शराब दुकान हटाने की मांग को लेकर पिछले चार महीने से आंदोलन कर रही महिलाओं के समर्थन में शनिवार रात कांग्रेस विधायक अनुभा मुंजारे पहुंचीं। उन्होंने आंदोलनकारी महिलाओं से मुलाकात कर उनकी मांगों का समर्थन किया और सरकार के महिला हितैषी होने के दावों पर सवाल उठाए। साथ ही पुलिस के ‘नशे से दूरी है जरूरी’ अभियान की प्रासंगिकता पर भी सवाल खड़े किए। चार महीने से जारी है महिलाओं का आंदोलन बुढ़ी क्षेत्र की महिलाएं रहवासी इलाके से शराब दुकान हटाने की मांग को लेकर पिछले चार माह से आंदोलन कर रही हैं। उनका आरोप है कि लगातार विरोध के बावजूद प्रशासन ने अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की है। इस मामले में महिलाओं ने हाईकोर्ट का भी दरवाजा खटखटाया था, जहां से प्रशासन को समन्वय बनाकर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए थे। विधायक अनुभा मुंजारे ने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि चार महीने से महिलाएं आंदोलन कर रही हैं, लेकिन शासन-प्रशासन उनकी मांगों को गंभीरता से नहीं ले रहा। उन्होंने कहा कि जब रहवासी क्षेत्र से शराब दुकान नहीं हटाई जा रही है, तो पुलिस का ‘नशे से दूरी है जरूरी’ अभियान भी सवालों के घेरे में आता है। ‘सड़क से सदन तक उठाएंगे मुद्दा’ मुंजारे ने कहा कि प्रशासन को हाईकोर्ट के निर्देशों का पालन करते हुए मामले की निष्पक्ष जांच कर जल्द निर्णय लेना चाहिए। उन्होंने भरोसा दिलाया कि इस मुद्दे को सड़क से लेकर विधानसभा तक उठाया जाएगा। साथ ही बताया कि बालाघाट में नए कलेक्टर से उनकी पहली मुलाकात भी इसी विषय को लेकर होगी। महिलाओं ने दोहराई आंदोलन जारी रखने की चेतावनी आंदोलन का नेतृत्व कर रहीं महिला वाणी अड़मे ने कहा कि जब तक रहवासी क्षेत्र से शराब दुकान नहीं हटाई जाती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। महिलाओं ने प्रशासन से जल्द समाधान निकालने की मांग की है।



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उबलते पानी में चावल का आटा डालकर बनाएं चावल का फरा, जानिए आसान रेसिपी


Chawal Ka Fara Recipe: अगर आप रोज-रोज पोहा, पराठा, उपमा या ब्रेड खाकर बोर हो चुके हैं और नाश्ते में कुछ नया, स्वादिष्ट और हल्का बनाना चाहते हैं, तो उत्तर प्रदेश का पारंपरिक चावल का फरा आपके लिए बेहतरीन विकल्प हो सकता है. यह एक ऐसा पारंपरिक व्यंजन है जो स्वाद और सेहत दोनों का शानदार मेल माना जाता है. खास बात यह है कि इसे तलने की बजाय भाप में पकाया जाता है, जिससे इसमें तेल की मात्रा बहुत कम रहती है. इसके अंदर चने की दाल की मसालेदार स्टफिंग भरी जाती है और बाद में राई, जीरा और हींग के चटपटे तड़के के साथ इसे तैयार किया जाता है.

बाहर से हल्का और अंदर से स्वाद से भरपूर यह नाश्ता बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आता है. अगर सही तरीके से चावल का आटा गूंथा जाए और दाल की स्टफिंग तैयार की जाए, तो पहली बार में भी बिल्कुल परफेक्ट फरे बन सकते हैं. आइए जानते हैं इस पारंपरिक रेसिपी को बनाने का आसान तरीका.

क्या है चावल का फरा?
चावल का फरा उत्तर प्रदेश, खासकर पूर्वांचल और आसपास के इलाकों का लोकप्रिय पारंपरिक नाश्ता है. इसे चावल के आटे और चने की दाल की स्टफिंग से बनाया जाता है. पहले इसे भाप में पकाया जाता है और फिर हल्का तड़का लगाया जाता है. कम तेल में बनने की वजह से यह स्वादिष्ट होने के साथ हल्का भी माना जाता है.

बनाने के लिए जरूरी सामग्री
इस रेसिपी के लिए एक कप चावल का आटा, एक कप भीगी हुई चने की दाल, आधा कप पानी, थोड़ा देसी घी, अदरक, 2 से 3 हरी मिर्च, एक छोटा चम्मच जीरा, चुटकी भर हींग, हल्दी, लाल मिर्च पाउडर, राई, स्वादानुसार नमक, थोड़ा तेल और बारीक कटा हरा धनिया लें.

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सबसे पहले तैयार करें दाल की स्टफिंग
भीगी हुई चने की दाल को मिक्सर में डालें. इसमें अदरक, हरी मिर्च, जीरा, चुटकी भर हींग और बहुत थोड़ा पानी डालकर दरदरा पीस लें. अब इस मिश्रण में नमक और हल्दी मिलाकर अच्छी तरह मिक्स करें. आपकी स्वादिष्ट स्टफिंग तैयार है.

उबलते पानी से गूंथें चावल का आटा
एक पैन में आधा कप पानी, थोड़ा नमक और थोड़ा सा देसी घी डालकर उबाल लें. जैसे ही पानी उबलने लगे, गैस बंद कर दें और तुरंत चावल का आटा डाल दें. चम्मच से अच्छी तरह मिलाएं और बर्तन को ढककर 5 से 10 मिनट के लिए छोड़ दें. इसके बाद हल्के गीले हाथों से आटे को अच्छी तरह मसलकर मुलायम और चिकना गूंथ लें.

ऐसे तैयार करें फरे
आटे की छोटी-छोटी लोइयां बनाएं और उन्हें पतला बेल लें. अब किसी कटोरी या कटर की मदद से गोल आकार निकाल लें. बीच में चने की दाल की स्टफिंग रखें और इसे आधा मोड़ दें. ध्यान रखें कि किनारों को हल्का दबाएं लेकिन पूरी तरह बंद न करें. यही इसकी पारंपरिक पहचान है.

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भाप में पकाने का सही तरीका
स्टीमर या छलनी वाली प्लेट को हल्का सा तेल लगाकर ग्रीस करें. तैयार फरे उसमें रखें और ढक्कन लगाकर 10 से 15 मिनट तक मध्यम आंच पर भाप में पकाएं. जब फरे पक जाएं तो उन्हें बाहर निकालकर थोड़ा ठंडा होने दें.

तड़का लगाए बिना अधूरा है स्वाद
स्टीम किए हुए फरों को छोटे टुकड़ों में काट लें. अब एक पैन में थोड़ा तेल गर्म करें. इसमें राई, जीरा, हींग, हल्दी और लाल मिर्च पाउडर डालें. मसाले चटकने पर कटे हुए फरे डालें और हल्के हाथों से अच्छी तरह टॉस करें. आखिर में बारीक कटा हरा धनिया डालकर मिला दें.

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Gold-Siver Rate :हफ्तेभर में सोना ₹1,672 तो चांदी ₹6,476 सस्ती हुई


नई दिल्ली. अमेरिकी डॉलर की बढ़ती ताकत और ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में आए उछाल ने सोने-चांदी की स्‍पीड पर ब्रेक लगा दिया है. अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में सोने में सुस्‍ती का असर भारत के सर्राफा बाजार से लेकर वायदा बाजार (MCX) तक दिखा. इंडिया बुलियन एंड ज्वैलर्स एसोसिएशन (IBJA) के मुताबिक, 24 कैरेट वाले 10 ग्राम सोने का भाव हफ्ते भर में 1672 रुपये टूट गया तो चांदी भी 6476 रुपये प्रति किलो सस्‍ती हो गई.

सोमवार को 24 कैरेट सोने का भाव ₹1,44,532 था, जो शुक्रवार तक गिरकर ₹1,42,860 पर आ गया. यानी महज पांच दिनों में सोने का भाव 1.15% टूट गया. इसी तरह सोमवार को ₹2,24,771 प्रति किलो बिकने वाली चांदी हफ्ते के अंत तक ₹2,18,295 पर आ गई.

क्‍यों गिरा सोना-चांदी का भाव

बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, चांदी अपेक्षाकृत सीमित दायरे में कारोबार करती रही, जबकि निवेशक फेडरल रिजर्व की आगे की मौद्रिक नीति और नए वैश्विक आर्थिक संकेतों का इंतजार करते रहे. इसी वजह से कीमती धातुओं के बाजार में सतर्कता का माहौल बना रहा. विश्लेषकों का कहना है कि इस सप्ताह कमोडिटी बाजार में भी काफी उतार-चढ़ाव देखने को मिला. अमेरिका और ईरान के बीच तनाव कई बार कम होने और फिर बढ़ने की स्थिति में रहा. हालांकि कच्चे तेल की कीमतों में कुछ नरमी आई, लेकिन बढ़ती महंगाई की आशंकाओं ने अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और डॉलर को मजबूती दी, जिससे बिना ब्याज वाले निवेश विकल्पों जैसे सोने की मांग प्रभावित हुई.

फेडरल रिजर्व के अपेक्षाकृत सख्त रुख, मजबूत श्रम बाजार और तेल कीमतों में हालिया बढ़ोतरी से बढ़ी महंगाई की आशंकाओं के कारण निकट भविष्य में ब्याज दरों में कटौती की उम्मीद कमजोर हुई है. बाजार अब सितंबर में ब्याज दर बढ़ने की संभावना लगभग 63 प्रतिशत मान रहा है. इधर, ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य में टैंकरों को रोके जाने और हूती विद्रोहियों की नाकेबंदी के बाद सऊदी अरब द्वारा लाल सागर में समुद्री सुरक्षा के लिए 43 देशों का गठबंधन बनाने की पहल ने भू-राजनीतिक तनाव को और बढ़ा दिया है.

युद्धविराम हो जाए तो और गिरे भाव

बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में स्थायी युद्धविराम होता है तो ऊर्जा कीमतों पर दबाव कम होगा, वैश्विक निवेशकों का जोखिम उठाने का रुझान सुधरेगा और इससे सोने-चांदी जैसी कीमती धातुओं को भी अतिरिक्त समर्थन मिल सकता है. तकनीकी स्तर पर कॉमेक्स पर सोने के लिए तत्काल 4,160-4,180 डॉलर प्रति औंस का स्तर प्रमुख प्रतिरोध माना जा रहा है, जबकि 4,090-4,070 डॉलर का स्तर मजबूत समर्थन है. वहीं, एमसीएक्स गोल्ड के लिए 1,44,000-1,44,300 रुपए का स्तर निकटतम रेजिस्टेंस और 1,43,000-1,43,300 रुपए का स्तर प्रमुख सपोर्ट माना जा रहा है.

विशेषज्ञों के अनुसार, आने वाले दिनों में निवेशकों की नजर अमेरिकी महंगाई और रोजगार संबंधी आंकड़ों, फेडरल रिजर्व के अधिकारियों की टिप्पणियों, अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड और यूएस डॉलर इंडेक्स की चाल पर रहेगी. यही कारक आगे सोने और चांदी की कीमतों की दिशा तय करेंगे.



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ट्रम्प बोले- ईरान पर हमला फिलहाल टाला: होर्मुज खोलने और परमाणु खतरा खत्म करने पर सहमति बनी; सऊदी ने कार्रवाई रोकने को कहा था




अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि ईरान पर प्रस्तावित सैन्य हमला फिलहाल टाल दिया गया है। उनके मुताबिक, ईरान और कुछ मिडिल ईस्ट देशों की ओर से समझौते का प्रस्ताव आने के बाद यह फैसला लिया गया। ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दावा किया कि अमेरिका ईरान पर बड़े सैन्य हमले के लिए पूरी तरह तैयार था। उन्होंने दावा किया कि समझौते की रूपरेखा पर सहमति बनी है, जिसमें होर्मुज स्ट्रेट को तुरंत खोलना और ईरान के परमाणु खतरे को खत्म करना शामिल है। ट्रम्प ने यह भी कहा कि इजराइल भी इस फैसले में अमेरिका के साथ है। इससे पहले एक्सियोस की रिपोर्ट में दावा किया गया था कि सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने ट्रम्प से फोन पर बात कर ईरान पर संभावित बड़े हमले को टालने और संयम बरतने की अपील की थी। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स.. 1. अमेरिका ने मिडिल ईस्ट छोड़ने की एडवाइजरी जारी की: अमेरिकी विदेश विभाग ने अपने नागरिकों से कहा है कि अगर सुरक्षा हालात और बिगड़ते हैं तो वे पश्चिम एशिया छोड़ने की तैयारी रखें। एडवाइजरी ट्रम्प की ईरान पर कड़ी कार्रवाई की चेतावनी के बीच जारी की गई। 2. ईरान बोला- हर अमेरिकी हमले का उसी तरह जवाब देंगे: ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने कहा कि तेहरान किसी भी अमेरिकी सैन्य हमले का जवाब देने के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने पाकिस्तान और तुर्किये के नेताओं से बातचीत में भी यही संदेश दोहराया। 3. अमेरिका के पास इजराइल की रक्षा के लिए संसाधन कम पड़ रहे: वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी सेना के वरिष्ठ जनरल ने पेंटागन को चेतावनी दी है कि ईरान के लगातार हमलों से इजराइल की रक्षा के लिए मौजूदा नौसैनिक संसाधन पर्याप्त नहीं हैं। 4. जयशंकर ने ईरान से कहा- कारोबारी जहाजों को निशाना न बनाएं: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने ईरानी विदेश मंत्री से फोन पर बात कर कारोबारी जहाजों और नाविकों की सुरक्षा सुनिश्चित करने की अपील की। सरकार ने बताया कि पश्चिम एशिया संघर्ष में अब तक 16 भारतीयों की मौत और 75 लोग घायल हुए हैं। 5. अमेरिका इजराइल में 40 रीफ्यूलिंग विमान तैनात करेगा: इजराइली मीडिया के मुताबिक, अमेरिका बेन गुरियन एयरपोर्ट पर 10 और रीफ्यूलिंग विमान भेज रहा है। इसके बाद वहां ऐसे विमानों की कुल संख्या 40 हो जाएगी, जिससे क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य तैयारियां और मजबूत होंगी। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…



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मैं IAS अफसर हूं, बोलकर -3 नाबालिग बहनों से दरिंदगी: एक से कहा- एयरहोस्टेस लगवा दूंगा, स्टूडेंट्स को फंसाने के लिए पेट्रोल पंप बेचकर खरीदी कार – Rajasthan News


खुद को IAS अफसर बताकर 3 नाबालिग स्टूडेंट्स बहनों से दरिंदगी के आरोपी उम्मेदाराम ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। नाबालिग बच्चियों को झांसे में लेने और अफसर जैसा रौब दिखाने के लिए उसने पेट्रोल पंप और जमीन बेचकर नई कार खरीदी।

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मासूमों को टारगेट करने के लिए जोधपुर के कोचिंग ऐरिया में कार से चक्कर काटता। किसी तरीके से नंबर हासिल कर उन्हें सरकारी नौकरी लगवाने का झांसा देता।

एक पीड़ित को उसने कहा- तुम बहुत खूबसूरत हो, तुम्हें एयरहोस्टेस बनवा दूंगा। वहीं, दूसरी को RPSC में बिना एग्जाम-इंटरव्यू के नौकरी लगवाने का झांसा देकर ज्यादती की।

47 साल का अरोपी उम्मदेराम की नशे और अय्याशी की लत के चलते पत्नी भी घर छोड़कर चली गई थी। वहीं, परिवार के लोगों (भाई) ने भी उससे रिश्ता तोड़ रखा है। संडे बिग स्टोरी में पढ़िए- फर्जी आईएएस के काले कारनामों का सच…।

आरोप है कि आरोपी ने नाबालिग की दो बहनों के साथ भी ज्यादती की।

सबसे पहले पढ़िए- कैसे सामने आया मामला

जोधपुर ईस्ट डीसीपी मनीष चौधरी ने बताया कि 26 जुलाई को एक पीड़ित ने मुकदमा दर्ज करवाया था। उसमें बताया कि साल 2024 में उसे एक अनजान नंबर से फोन आया।

कॉल करने वाले ने खुद को IAS अधिकारी बताया और बोर्ड परीक्षा में नंबर बढ़वाने का लालच दिया। इस बहाने मिलने के लिए मजबूर किया और होटल ले जाकर उसके साथ रेप किया।

इसके बाद आरोपी ने उसकी दो रिश्तेदार बहनों से भी इसी तरह झांसा देकर ज्यादती की।

कार में बैठते ही आरोपी को पकड़ा

पीड़ित के पास आरोपी की फोटो, घर का एड्रेस और उसकी ब्रेजा कार के नंबर थे। पुलिस ने इन सभी फैक्ट्स के साथ आरोपी की तलाश में दबिश दी। मगर न तो वो खुद मिला और न ही उसकी कार।

इसी बीच 28 जुलाई को इंफॉर्मेशन मिली कि जिस गाड़ी की पुलिस को तलाश है, उन नंबरों की एक लाल पट्टी लगी कार किसी दूसरी लोकेशन पर खड़ी है।

पुलिस वहां पहुंची तो कार वहीं खड़ी मिली, मगर आरोपी वहां नहीं था। पुलिस ने इंतजार किया। करीब दो घंटे बाद जैसे ही एक शख्स आकर कार में बैठा तो उसे दबोच लिया। ये वही राज उदावत था, जिसकी फोटो पीड़ित ने पुलिस को दी थी।

IAS बताने वाला निकला नशेड़ी

पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि न तो उसका नाम राज उदावत है और न ही वो कोई IAS अफसर है। लोहावट के सदरी गांव का उम्मेदाराम बिश्नोई है।

नशा करने का आदी है। उसके दो बेटियां हैं और वह नाना भी बन चुका है। महज बीए पास उम्मेदाराम गांव में अच्छी जमीन-जायदाद होने के बाद भी जोधपुर शहर में किराए का मकान लेकर रह रहा था।

लोगों पर रौब झाड़ने और टोल फ्री करवाने के लिए कई RAS व IAS अधिकारियों के फर्जी आइडेंटिटी कार्ड तक बनवा रखे थे। इन कार्डों की बदौलत वह कई बार टोल फ्री करवा चुका था।

कोचिंग ऐरिया में कार से चक्कर काटता, स्टूडेंट्स को बनाता शिकार

पुलिस पड़ताल में सामने आया कि उम्मेदाराम ने जोधपुर में अय्याशी करने के लिए प्रॉपर्टी और एक पेट्रोल पंप बेच दिया। उन पैसों से साल 2024 में एक नई ब्रेजा कार खरीदी।

अपनी कार लेकर लाइब्रेरी, कोचिंग ऐरिया और गर्ल्स कॉलेज के बाहर चक्कर काटता था। चाय की थड़ियों, ईमित्र और फोटो स्टेट की दुकानों पर घंटों बैठकर लड़कियों को घूरता।

उनसे बात कर कॉन्टैक्ट नंबर मांगता। इसी दौरान उसे एक प्रतियोगी परीक्षा का फॉर्म भरने आई एक नाबालिग बच्ची का मोबाइल नंबर उसे मिला था।

आरोपी के कब्जे से मिले फर्जी कार्ड। एक कार्ड में उसने खुद को राज्य प्रशासनिक सेवा का अफसर दिखा रखा है।

आरोपी के कब्जे से मिले फर्जी कार्ड। एक कार्ड में उसने खुद को राज्य प्रशासनिक सेवा का अफसर दिखा रखा है।

रौब दिखाने के लिए कमिश्नरेट-कलेक्ट्रेट में कटवाए चक्कर

उम्मेदाराम ने पहली बार उस नाबालिग पीड़िता के नंबर पर कॉल किया। खुद को IAS अधिकारी राज उदावत बताते हुए कहा कि वो प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले बच्चों की मदद करता है।

उसने बताया कि उसकी पहुंच ऊपर तक है और सरकारी नौकरी लगवा देगा। झांसा देकर दोस्ती और जान-पहचान कर ली। इसके बाद वो उसे अक्सर अपनी कार में बैठा कर बड़े-बड़े सरकारी दफ्तरों में ले कर जाता।

पुलिस पड़ताल में सामने आया आरोपी पीड़ित को कई बार जोधपुर कलेक्ट्रेट और कमिश्नरेट परिसर लेकर गया था। इससे पीड़ित को ये विश्वास हो गया था कि वह IAS ही है और उसकी सरकारी नौकरी लगवा देगा।

अप्रैल 2024 में उम्मेदाराम पीड़ित को एक होटल में ले गया और वहां ज्यूस में नशा मिलाकर बेहोशी की हालत में उसके साथ ज्यादती की। कई बार ऐसा ही किया।

आरोपी कार की नंबर प्लेट पर लाल पट्टी लगवाकर रखता था, जो सरकारी अफसरों की गाड़ियों पर ही इस्तेमाल होती है।

आरोपी कार की नंबर प्लेट पर लाल पट्टी लगवाकर रखता था, जो सरकारी अफसरों की गाड़ियों पर ही इस्तेमाल होती है।

पीड़ित की दो बहनों को भी बनाया शिकार

साल 2026 में उम्मेदाराम की मुलाकात पीड़ित की बुआ की 2 नाबालिग बेटियों से हुई। उन्हें भी उम्मेदाराम ने खुद को IAS राज उदावत उर्फ अक्की नाम ही बताया।

मौका पाकर एक से कहा- आप तो बहुत सुंदर हो, मैं आपको एयर होस्टेस बनवा दूंगा…डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ सिविल एविएशन (DGCA) में मेरे कई बैचमेट हैं।

दोनों मासूम बच्चियां भी उसके झांसे में आ गईं। दोनों को अलग-अलग दिन बहला फुसलाकर वो अपने किराए के घर में ले गया और ज्यादती की।

इसी तरह उम्मेदाराम ने दूसरी बहन को भी झांसे में लिया। उससे कहा कि RPSC में उसकी अच्छी जान पहचान है। बिना एग्जाम और इंटरव्यू के नौकरी लगवा देगा।

एक दिन उम्मेदाराम ने उसे फोन कर कहा कि वह अजमेर RPSC में आया हुआ है और उसकी नौकरी की बात फाइनल हो गई है।

आरोपी ने उसे डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बहाने अजमेर बुला लिया। इसके बाद एक होटल में ले जाकर ज्यादती की और अपनी कार से जोधपुर छोड़ दिया।

अजमेर के होटल में आरोपी ने टिफिन से लड्डू निकाला और 'प्रसाद' बताकर छात्रा को खिला दिया।

अजमेर के होटल में आरोपी ने टिफिन से लड्डू निकाला और ‘प्रसाद’ बताकर छात्रा को खिला दिया।

तीनों बहनों ने बातचीत में खोला राज

काफी समय बीतने के बाद भी नौकरी नहीं लगी तो तीनों बहनों ने आपस में बातचीत शुरू की। इसी दौरान उन्हें खुद के साथ हुए इस धोखे का पता चला।

आखिरकार पहली पीड़ित ने एक रिश्तेदार को खुद के साथ हुई ज्यादती के बारे में बताया। इसके बाद बात घर तक पहुंची। पीड़ितओं के परिजनों ने हिम्मत जुटा कर जोधपुर के एक थाने में आरोपी फर्जी IAS के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया।

आरोपी के परिवार ने उससे रिश्ता तोड़ा

उम्मेदाराम के पिता गणपतराम विश्नोई की 6 साल पहले कोरोना के दौरान तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई थी। सदरी गांव में अच्छी साख थी। पंचायत समिति सदस्य रह चुके थे।

देचू के पास कलाऊ गांव में एक पेट्रोल पंप, 2-3 ट्यूबवेल और अच्छी-खासी जमीन थी। बड़े बेटे उम्मेदाराम (बीए पास) की शादी रिटायर्ड पीडब्ल्यूडी एईएन की बेटी से कराई थी। दोनों की दो बेटियां हैं। एक की शादी हो चुकी है।

परिजनों और ग्रामीणों के अनुसार, उम्मेदाराम को शुरू से नशे और अय्याशी की लत थी। शादी के बाद भी कई महिलाओं से उसके संबंध रहे। वह ज्यादातर जोधपुर में रहता था।

इसी दौरान एक महिला ने मंडोर थाने में शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था। छोटे भाई अशोक का दावा है कि उस केस में समझौते के लिए पिता को बड़ी रकम चुकानी पड़ी थी।

इसके बाद भी उम्मेदाराम की आदतें नहीं बदलीं। बाद में दोनों भाइयों के संबंध भी टूट गए।

पत्नी के छोड़कर जान के बाद भी उम्मेदाराम की आदतें नहीं बदलीं। इसे परेशान परिवार उससे अब कोई संबंध नहीं रखता।

पत्नी के छोड़कर जान के बाद भी उम्मेदाराम की आदतें नहीं बदलीं। इसे परेशान परिवार उससे अब कोई संबंध नहीं रखता।

हरकतों से परेशान पत्नी भी चली गई थी पीहर

ग्रामीणों के मुताबिक, उम्मेदाराम पत्नी के जाने के बाद दूसरी महिला के साथ लिव-इन में रहने लगा था। लेकिन वह भी कुछ समय बाद उसे छोड़कर चली गई। उसके खिलाफ मुंडवा, मंडोर, देचू और लोहावट थानों में दुष्कर्म, मारपीट समेत कई मामले पहले से दर्ज हैं।

रातानाड़ा सीआई मोहम्मद शफीक ख़ान ने बताया कि उम्मेदाराम को पहले मामले में गिरफ्तारी और पूछताछ के बाद 30 जुलाई को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। अब अन्य दो मामलों में पुलिस उसे फिर से गिरफ्तार कर पूछताछ की तैयारी में है।

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IAS अफसर बनकर NEET छात्रा से रेप किया:बहन के बॉयफ्रेंड ने पास कराने का झांसा देकर होटल बुलाया; 2 नाबालिग से भी कर चुका दरिंदगी

अजमेर की 18 साल की नीट छात्रा से उसकी बहन के बॉयफ्रेंड ने रेप किया। आरोपी ने खुद को IAS अधिकारी बताकर पहले दोस्ती की। फिर NEET का पेपर दिलाने और परीक्षा पास कराने का झांसा देकर होटल बुलाया….(CLICK कर पढ़ें)



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सिपाही जिम वाली कांवड़ लेकर चल रहा: कोई सुपर कार से तो कोई पैदल ला रहा जल; VIDEO में देखिए यूपी की रंग-बिरंगी कांवड़ – Uttar Pradesh News


उत्तर प्रदेश5 मिनट पहले

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यूपी में कांवड़ यात्रा चल रही है। तरह-तरह की कांवड़ से सड़कें गुलजार हैं। कोई 8 लाख की सुपर कार जैसी कांवड़ लेकर तो कोई बेटी को कांवड़ पर बैठाकर पैदल सफर कर रहा है। शामली में हरियाणा से आए शिवभक्त 13 फीट ऊंची कांवड़ के साथ पहुंचे, जबकि 5 साल का ऋतिक और



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सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद भी प्रक्रिया सुस्त: एक साल का समय पूरा, 29 हजार एकड़ वन भूमि अब भी कब्जे में – Bhopal News




मप्र में सुप्रीम कोर्ट के कड़े निर्देशों के बावजूद वन भूमि के हस्तांतरण की प्रक्रिया सुस्त चाल से चल रही है। सर्वोच्च न्यायालय द्वारा राज्य सरकार को निजी व्यक्तियों, संस्थाओं और राजस्व विभाग के अवैध कब्जे वाली वन भूमि को वापस वन विभाग के नियंत्रण में सौंपने के दिए गए आदेश की एक साल की समय-सीमा पूरी हो चुकी है। इसके बावजूद बाद भी करीब 29906 एकड़ (12,102.78 हेक्टेयर) का बड़ा भू-भाग अब भी वन विभाग के नियंत्रण से बाहर है। इसमें वन विभाग का ऐसा बहुत बड़ा हिस्सा है, जिस पर कमर्शियल गतिविधियां चल रही है। मप्र में कुल 1,27,170 एकड़ वन भूमि ऐसी पाई गई थी जो निजी व्यक्तियों, संस्थाओं या अन्य विभागों के पास आवंटित थी। इसमें से अब तक केवल 39,361.06 हेक्टेयर भूमि को ही डी-नोटीफाई या ट्रांसफर की प्रक्रिया में शामिल किया गया है। शीर्ष अदालत ने 15 मई 2025 को पारित निर्णय में निर्देश दिया था कि संरक्षित वन के रूप में दर्ज, लेकिन राजस्व विभाग के नियंत्रण में या निजी संस्थाओं को दी गई सभी भूमियों को एक साल के भीतर खाली कराकर वन विभाग के सुपुर्द किया जाए।



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भागलपुर- सावन की पहली सोमवारी कल, सुल्तानगंज में जुटे कावंड़िए: 8 लाख शिवभक्त भरेंगे जल; श्रद्धालु के वेश में रहेंगे मजिस्ट्रेट सिपाही, सीसीटीवी से मॉनिटरिंग – Bhagalpur News




श्रावण मास की पहली सोमवारी (3 अगस्त) के लिए करीब 8 लाख श्रद्धालु आज सुल्तानगंज के नमामि गंगे और उत्तरवाहिनी घाट से गंगाजल लेकर देवघर के बाबा बैद्यनाथ धाम के लिए निकलेंगे। सबसे ज्यादा भीड़ के नमामि गंगे घाट पर पहुंचने की उम्मीद है। दरअसल, ये घाट नया बना है। उत्तर वाहिनी के पुराने घाट के मुकाबले इसे अधिक बेहतर तरीके से सजाया गया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा और सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए गए हैं। मेला क्षेत्र में मजिस्ट्रेट और सिपाही श्रद्धालुओं के वेष में तैनात रहेंगे। पूरे मेला क्षेत्र और कच्ची कांवरिया पथ पर सुरक्षा के लिए 15 अस्थायी थाने बनाए गए हैं। 4 हजार पुलिस बल, दंडाधिकारी, होमगार्ड और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की गई है। संवेदनशील स्थलों पर CCTV कैमरों और ड्रोन के माध्यम से 24 घंटे निगरानी की जाएगी। श्रद्धालु को रहने के टेंट सिटी, स्विस कॉटेज, धर्मशाला और अस्थायी आवास की व्यवस्था की गई है। जिसमें लगभग 3 हजार श्रद्धालुओं की रहने की व्यवस्था है वही, जीविका दीदी के तरफ से कम कीमतों पर खाने की व्यवस्था की गई है। तीन तस्वीरों में देखिए कावंरियों की भीड़… मेला उद्घाटन के बाद 3 दिनों में करीब 9 लाख श्रद्धालुओं ने उठाए जल गुरुवार को श्रावणी मेला के उद्घाटन के बाद से शनिवार शाम तक तीन दिनों में करीब 9 लाख श्रद्धालुओं ने उत्तर वाहिनी और नमामि गंगे घाट से जल उठाया है। दोनों गंगा घाट पर श्रद्धालुओं के स्नान के लिए दो अलग-अलग घाट बनाए गए हैं। दोनों घाटों पर एक तरफ महिला तो दूसरी तरफ पुरुष गंगा में डुबकी लगा रहे हैं। घाट पर ही चेंजिंग रूम की व्यवस्था है। वही, दो दर्जन से ज्यादा अस्थाई शौचालय का भी व्यवस्था कराया गया है। रात में आवाजाही के लिए हाईमास्ट और एलईडी लाइटें भी लगाई गई हैं श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए कच्ची कांवरिया पथ की सफाई, समतलीकरण और मरम्मत कराई गई है। रात में आवागमन के लिए हाईमास्ट और एलईडी लाइटें लगाई गई हैं। जगह-जगह शुद्ध पेयजल, वाटर टैंकर, अस्थायी शौचालय, स्नानघर और विश्राम स्थलों की व्यवस्था की गई है। स्वास्थ्य सुविधाओं को लेकर मार्ग में चिकित्सा शिविर, एंबुलेंस, डॉक्टर और प्राथमिक उपचार केंद्र तैनात किए गए हैं। वहीं, खोया-पाया केंद्र, सूचना केंद्र और पब्लिक एड्रेस सिस्टम भी सक्रिय रहेंगे। किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए एसडीआरएफ, गोताखोर और आपदा राहत दल को अलर्ट मोड में रखा गया है। इस बार पहली बार कच्ची कांवरिया पथ पर हेड काउंट कैमरा और ऑटोमैटिक काउंटिंग डिवाइस लगाए गए हैं, जिससे श्रद्धालुओं की संख्या का रियल टाइम आकलन किया जा सकेगा। साथ ही खाद्य सामग्री और पेयजल की दुकानों पर खाद्य सुरक्षा एवं मूल्य नियंत्रण को लेकर नियमित जांच भी कराई जा रही है।



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कनाडा में प्रदर्शन कर रही पंजाबी छात्रा का दर्द: रोकर बोली- जमीन बेच पढ़ने भेजा, यहां वर्क परमिट नहीं दे रहे, घर में आटा भी नहीं आ रहा – Jalandhar News


प्रदर्शन के दौरान अपनी बात बताते हुए छात्रा रो पड़ी। उसने बताया कि उसके ससुराल वालों ने उसे जमीन बेचकर कनाडा भेजा था।

कनाडा के पोर्टाज कॉलेज में पढ़ रहे पंजाबी छात्रों का आंदोलन में दर्द छलका है। पोस्ट ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) के रिजेक्शन मिलने से स्टूडेंट्स 3 हफ्ते से सड़कों पर प्रदर्शन कर रहे हैं।

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छात्रों ने आंकड़े शेयर करते हुए बताया कि हालिया पोल्स के मुताबिक, 485 रिजेक्शन के मुकाबले 50 से भी कम अप्रूवल मिले हैं। जबकि, पोटाज कॉलेज ने एडमिशन के वक्त वादा किया था कि उन्हें PGWP मिलेगा और उनकी डिग्री वैध होगी। अब जब उनके लाखों रुपए कोर्स पर बर्बाद हो गए तो घर जाने के लिए कह रहे हैं।

पंजाब की एक छात्रा ने बताया- हालात ये हैं कि रेंट मांगकर भरना पड़ रहा है। 3 दिन भूखी रही। हफ्तों आटा नहीं आ पा रहा। मुझे भेजने के लिए ससुरालवालों ने जमीन तक बेच दी। 22 से 25 लाख रुपए बर्बाद हो गए। अब ससुराल वालों को क्या बताऊं, कैसे घर जाऊं? जो लोग सोचते हैं कि कनाडा में मजे हैं, वे देखे लें, ये यहां की कड़वी सच्चाई है।

एक अन्य स्टूडेंट ने बताया कि कनाडा में वर्क परमिट के चक्कर में वह दादा की मौत पर नहीं जा पाई। अब पैसा बर्बाद हो चुका है। घरवालों को क्या बताएं? यह कहते ही वह रोने लगी। पिता की मौत पर 1 साल पहले घर गई छात्रा को कनाडा इमिग्रेशन विभाग ने यह कहते हुए वर्क परमिट देने से इनकार कर दिया कि उसकी एंट्री 2024 में नहीं हुई है।

धरना दे रहे स्टूडेंट्स की ऐसी ही दर्द भरी कहानियां हैं। कुछ पर कर्ज का बोझ है तो कई पेरेंट्स को न बता पाने से डिप्रेशन में हैं। आइए जानते हैं, उनकी कहानी उन्हीं की जुबानी…

कनाडा में कॉलेज के बाहर प्रदर्शन करते प्रवासी छात्र।

सड़कों पर धरना दे रहे स्टूडेंट्स ने परेशानियां बताईं…

ससुरालवालों ने जमीन बेचकर भेजा, यहां भूखी रह रही हूं

अपना नाम न बताते हुए एक मैरिड छात्रा ने बताया कि वह 2 साल से ज्यादा वक्त से कनाडा के पोर्टाज कॉलेज में पढ़ रही है। ससुराल वालों ने अपनी जमीन बेचकर उसे यहां भेजा था। अब इमिग्रेशन विभाग ने कहा कि उनकी डिग्री मान्य नहीं है।

छात्रा ने बताया- हालात ये हैं कि किराए तक के पैसे नहीं हैं। गैस स्टेशन पर काम तक नहीं मिल रहा। मैं 3 दिन भूखी रही। 7-7 दिन घर पर आटा नहीं आ रहा है। अब मैं अपने ससुरालवालों से क्या कहूं और उनका 22 लाख रुपए का कर्ज कैसे लौटाऊं? जब यहां कोई काम ही नहीं मिल रहा है। 32 हजार डॉलर फीस भरी गई। हम 24 घंटे नियमों और कायदों के दायरे में रहे और कभी कोई गलत काम नहीं किया। मुझे पता है कि उन्होंने फीस के पैसे कैसे जुटाए थे।

कनाडा में वर्क परमिट के लिए आंदोलन कर रहे छात्र।

कनाडा में वर्क परमिट के लिए आंदोलन कर रहे छात्र।

कॉलेज के खिलाफ वकील तक नहीं कर सकते

पंजाबी स्टूडेंट जशन सिंह ने बताया कि किसी को भी इस बात की उम्मीद नहीं थी। वह अपना 2 साल का डिप्लोमा पूरा कर वर्क परमिट के लिए आए थे, लेकिन हाल ही में नियम बदलने के कारण बड़ी संख्या में रिजेक्शन मिलने लगे हैं। उनका सवाल यह है कि अगर मंजूरी या रिजेक्शन मिल रहा है, तो वह किस आधार पर दिया जा रहा है?

जशन ने कहा- हम मुख्य कैंपस भी गए थे और इस मुद्दे पर बात की थी, लेकिन वहां से कोई समाधान नहीं मिला। कॉलेज प्रशासन का साफ कहना था कि वे न तो वकील कर सकते हैं और न ही किसी तरह की मदद कर सकते हैं।

दादा की मौत पर पंजाब नहीं जा पाई, यहां भी सब बर्बाद हो गया

पंजाबी छात्रा जसमीत कौर ने रोते हुए बताया कि वह यहां 3 साल पहले एल्गोमा यूनिवर्सिटी आई थी, लेकिन फीस ज्यादा होने के कारण उसने अपनी पढ़ाई बदल ली। उसने यहां सब पता किया था कि कोर्स के बाद PGWP मिलेगा और इसका भविष्य में अच्छा स्कोप है। 2 साल पढ़ाई करने के बाद अब सब कुछ बेकार लग रहा है।

जसमीत कौर ने कहा- मेरे लगभग 32 हजार डॉलर डूब गए हैं। इसी दौरान मेरे दादा की मौत हो गई। अगर मुझे पहले से पता होता कि ऐसा सब होने वाला है, तो मैं सब कुछ छोड़कर तुरंत वापस चली जाती, ताकि कम से कम आखिरी बार अपने दादा को देख पाती। अब न तो वे वापस आ सकते हैं और न ही पैसे वापस मिल सकते हैं।

जसमीत कौर और उसकी दोस्त अपने दादा की मौत के बारे में बताकर भावुक हो गई।

जसमीत कौर और उसकी दोस्त अपने दादा की मौत के बारे में बताकर भावुक हो गई।

कॉलेज की भेजी हुई ईमेल भी, फिर भी नहीं मान रहे

एक अन्य स्टूडेंट ने बताया कि उनके कॉलेज की तरफ से उन्हें साफ कहा गया था कि वे PGWP के लिए एलिजिबल हैं। इसके लिए उनके पास कॉलेज की भेजी हुई ईमेल भी है। कॉलेज ने उन्हें एक पत्र भी दिया था, ताकि वे उसका उपयोग कर वर्क परमिट ले सकें, लेकिन अब इमिग्रेशन, रिफ्यूजी एंड सिटिजनशिप कनाडा (IRCC) उस पत्र को भी खारिज कर रही है और कह रही है कि यह मान्य कारण नहीं है। छात्र मई 2023 में पढ़ाई के लिए आए थे और जब नवंबर 2024 में नया नियम लागू हुआ, तब तक उनकी पढ़ाई लगभग पूरी हो चुकी थी।

आशीष बोले- सांसद और विधायक प्रदर्शन में साथ दें

स्टूडेंट आशीष बूरा ने कहा कि सभी छात्र आज अपनी मांग उठाने के लिए एकत्र हुए हैं। पहले वे सिटी हॉल गए थे, लेकिन वहां ज्यादा देर रुकने की अनुमति नहीं मिली, इसलिए फिर उन्होंने इस जगह पर इकट्ठा होने का फैसला किया। उन्होंने बताया कि अब उनके कई साथी भाई-बहन भूख हड़ताल पर बैठ गए हैं। वहां काफी संख्या में छात्र जमा हैं और उन्होंने लोगों से समर्थन मांगने के लिए हॉर्न बजाने की अपील करने वाले पोस्टर लगाए हैं, जिस पर सड़कों से गुजरने वाले लोग लगातार हॉर्न बजाकर अपना पूरा समर्थन दिखा रहे हैं।

आशीष ने स्थानीय सांसदों (MP) और विधायकों (MLA) से भी इस प्रदर्शन में साथ देने की अपील की है, क्योंकि यह पूरी बिरादरी और समाज का मामला है। उनकी सरकार से बस यही मांग है कि सभी छात्रों के साथ पूरा इंसाफ और न्याय किया जाए।

प्रदर्शन के दौरान समर्थन की अपील करते छात्र।

प्रदर्शन के दौरान समर्थन की अपील करते छात्र।

मानसिक और आर्थिक संकट से जूझ रहे पंजाबी स्टूडेंट्स

छात्रों ने आपबीती सुनाते हुए कहा कि वे मानसिक तनाव, चिंता, डिप्रेशन और आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं। उनके हेल्थ कार्ड और सिन (SIN) नंबर एक्सपायर हो चुके हैं, जिससे वे काम भी नहीं कर पा रहे हैं। छात्रों का तर्क है कि अगर छात्र कोई नियम तोड़ते हैं तो उन पर पेनल्टी लगती है या फीस दोबारा ली जाती है। अब जब IRCC और कॉलेज अपनी कही बातों से मुकर रहे हैं और अचानक नियम बदलकर गलतियां कर रहे हैं, तो वे इसका हर्जाना छात्रों को क्यों नहीं देते?

पूर्व सांसद छात्रों के समर्थन में

प्रेस कॉन्फ्रेंस में कैलगरी के पूर्व सांसद और वकील देवेंद्र शौरी ने छात्रों के समर्थन में कहा कि कनाडा सरकार को अपने नियमों में मानवीय दृष्टिकोण रखना चाहिए। छात्रों को एक रास्ता दिखाया गया था, उन्होंने पैसे और समय लगाया और जब वे मंजिल के पास पहुंचे तो उनसे सीढ़ी खींच ली गई, जो पूरी तरह से गलत है।

PGWP किसे मिलता है?

PGWP एक ऐसा ओपन वर्क परमिट है जो अंतर्राष्ट्रीय छात्रों को कनाडा में अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद काम करने की अनुमति देता है। इसके लिए जरूर है कि छात्र ने किसी डेजिग्नेटेड लर्निंग इंस्टीट्यूशन (DLI) से पढ़ाई पूरी की हो जो PGWP देने के लिए पात्र हो।

इसके अलावा, प्रोग्राम की अवधि कम से कम 8 महीने की होनी चाहिए। 8 महीने से छोटे कोर्स के लिए PGWP नहीं मिलता। पढ़ाई के दौरान छात्र का लगातार फुल-टाइम स्टूडेंट रहना अनिवार्य है। कोर्स पूरा होने के 180 दिनों के भीतर आवेदन करना होता है। आवेदन के समय छात्र के पास वैध स्टडी परमिट या लीगल टेंपररी स्टेटस होना चाहिए।

वे नॉन-क्रेडिट प्रोग्राम जिन पर PGWP नहीं मिल रहा

क्रेडिट प्रोग्राम वे कोर्स हैं जो किसी आधिकारिक डिग्री, डिप्लोमा या सर्टिफिकेट की ओर ले जाते हैं। इनके अंक यूनिवर्सिटी या कॉलेज की मुख्य शैक्षणिक डिग्री में जुड़ते हैं। वहीं, नॉन-क्रेडिट प्रोग्राम ऐसे कोर्स होते हैं जो आमतौर पर व्यक्तिगत विकास, भाषा सीखने, स्किल ट्रेनिंग, या कम अवधि के वोकेशनल सर्टिफिकेट के लिए होते हैं। इनके अंक मुख्य डिग्री में नहीं जुड़ते।

कनाडा के अप्रवासन नियमों के तहत नॉन-क्रेडिट प्रोग्राम PGWP के लिए पात्र नहीं होते। यदि किसी छात्र ने ऐसा कोर्स किया है जिसमें एकेडमिक क्रेडिट नहीं मिलते, तो उसे पढ़ाई के बाद वर्क परमिट नहीं दिया जाता।

IRCC ने ये नियम बदले

  • PPP कॉलेजों पर रोक: कनाडा सरकार (IRCC) ने अंतरराष्ट्रीय छात्रों की बढ़ती संख्या को नियंत्रित करने और अप्रवासन प्रणाली को व्यवस्थित करने के लिए कई बड़े बदलाव किए हैं। पहले कई निजी कॉलेज सरकारी कॉलेजों के साथ लाइसेंसिंग समझौता कर अपने छात्रों को PGWP दिलवाते थे। सरकार ने ऐसे निजी कॉलेजों के PPP मॉडल वाले पाठ्यक्रमों को PGWP की पात्रता से बाहर कर दिया है।
  • फील्ड ऑफ स्टडी की शर्त: अब केवल कॉलेज का पात्र होना ही काफी नहीं है। सरकार ने उन कोर्सों की सूची सीमित कर दी है जो देश में श्रमिकों की कमी (जैसे हेल्थकेयर, STEM, ट्रेड, एग्रीकल्चर आदि) को पूरा करते हैं। इन खास क्षेत्रों के बाहर के कई कोर्सों को नए PGWP नियमों से बाहर किया जा रहा है।
  • भाषा और पढ़ाई की शर्त: वर्क परमिट के लिए भाषा परीक्षा (IELTS/CELPIP) का न्यूनतम स्कोर (CLB लेवल) अनिवार्य कर दिया गया है। इसके अलावा, छात्रों के पास पूरे कोर्स के दौरान लीगल स्टेटस होना और ऑनलाइन क्लासेस की सीमा (30-50% से अधिक नहीं) का पालन करना जरूरी है।
  • वर्क परमिट की अवधि: 2 साल से छोटे क्रेडिट डिप्लोमा के लिए वर्क परमिट की अवधि कोर्स की अवधि के बराबर ही मिलती है। मास्टर डिग्री के स्नातकों को अब कोर्स की अवधि छोटी होने पर भी 3 साल का PGWP मिल सकता है।

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कनाडा में आंधी-बारिश में सड़कों पर 500 पंजाबी छात्र, बोले- लाखों का कोर्स किया, अब वर्क परमिट से इनकार

कनाडा में पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) के आवेदन खारिज होने के बाद करीब 1000 भारतीय छात्र संकट में हैं। ये पिछले 3 हफ्ते से अल्बर्टा के कैलगरी में प्रदर्शन कर रहे हैं, जबकि कुछ ने 29 जुलाई से भूख हड़ताल शुरू कर दी है। इनमें 500 छात्र पंजाबी हैं। जो बारिश, तेज धूप और खराब मौसम के बावजूद छात्र अल्बर्टा के कैलगरी में सड़कों पर डटे हुए हैं। पढ़ें पूरी खबर…



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