मुजफ़्फ़रनगर के भोपा रोड स्थित चर्चित इवान अस्पताल में करोड़ों रुपये के कथित गबन का मामला सामने आया है। अस्पताल के CEO की शिकायत पर SSP के आदेश के बाद थाना नई मंडी पुलिस ने अस्पताल के तीन पूर्व कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। शिकायत में दो वर्षों के दौरान एक करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि के गबन और वित्तीय रिकॉर्ड में हेराफेरी का आरोप लगाया गया है। अस्पताल के सीईओ विजय कुमार जैन ने पुलिस को दिए गए शिकायती पत्र में बताया कि आरोपी कर्मचारी वर्षों से संस्थान से जुड़े हुए थे। उन्हें नकद लेन-देन, बैंकिंग कार्य, कंप्यूटर संचालन और अन्य वित्तीय जिम्मेदारियां सौंपी गई थीं। आरोप है कि इसी विश्वास का दुरुपयोग करते हुए उन्होंने नकद पुस्तिका, बैंक खातों, यूपीआई ट्रांजैक्शन और कंप्यूटर डेटा में कथित हेराफेरी कर बड़ी धनराशि का गबन किया। शिकायत में मुख्य आरोपी के रूप में अक्षय बंसल का नाम दर्ज कराया गया है। इसके अलावा जांच के दौरान तृप्ति गुप्ता और अमित गुप्ता की भूमिका भी सामने आने का दावा किया गया है। अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि प्रारंभिक जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पिछले दो वर्षों में एक करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितता की आशंका है। उनका यह भी कहना है कि इतनी बड़ी हेराफेरी किसी एक व्यक्ति के लिए संभव नहीं थी और इसमें अन्य लोगों की संलिप्तता की भी जांच होनी चाहिए। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसएसपी के निर्देश पर थाना नई मंडी में मुकदमा दर्ज कर लिया गया है। पुलिस अब बैंक रिकॉर्ड, नकद लेन-देन, कंप्यूटर डेटा और अन्य वित्तीय दस्तावेजों की जांच कर रही है। अधिकारियों का कहना है कि विवेचना के दौरान जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल मामला जांच के अधीन है। शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोपों की पुष्टि पुलिस जांच और साक्ष्यों के परीक्षण के बाद ही हो सकेगी। वहीं, जिन पूर्व कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ है, उनका पक्ष अभी सामने नहीं आया है।
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इवान अस्पताल में करोड़ों का गबन, मुकदमा दर्ज: 2 साल में 1 करोड़ से ज्यादा की गड़बड़ी, बैंक रिकॉर्ड और कंप्यूटर डेटा खंगाल रही पुलिस – Muzaffarnagar News
भारत बोध और सांस्कृतिक अवधारणा पर सेमिनार: सीवान में सनातन संस्कृति और राष्ट्र चेतना पर की चर्चा – Siwan News
प्रज्ञा प्रवाह इकाई, सीवान द्वारा आयोजित “भारत बोध और सांस्कृतिक अवधारणा” विषयक बौद्धिक संगोष्ठी गुरुवार को आंदर रोड स्थित दयानंद आयुर्वेदिक मेडिकल कॉलेज परिसर में संपन्न हुई। कार्यक्रम में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के वरिष्ठ प्रचारक एवं प्रज्ञा प्रवाह केंद्र काशी की केंद्रीय कार्यकारिणी के सदस्य रामाशीष सिंह मुख्य वक्ता के रूप में शामिल हुए। नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल उन्होंने भारतीय संस्कृति, राष्ट्र चेतना और सनातन ज्ञान परंपरा के विभिन्न आयामों पर विस्तार से प्रकाश डालते हुए भारत की सांस्कृतिक विरासत को समझने और उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाने की आवश्यकता पर बल दिया। अपने संबोधन में रामाशीष सिंह ने कहा कि भारत केवल एक भौगोलिक इकाई नहीं, बल्कि हजारों वर्षों की सांस्कृतिक चेतना, आध्यात्मिक दृष्टि और मानव कल्याण की भावना का जीवंत स्वरूप है। अपनी जड़ों से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता उन्होंने कहा कि भारत बोध का अर्थ केवल इतिहास और परंपराओं की जानकारी प्राप्त करना नहीं है, बल्कि भारतीय जीवन मूल्यों, संस्कृति, राष्ट्रीय चिंतन और सामाजिक दायित्वों को आत्मसात करना भी है। उन्होंने कहा कि वर्तमान दौर में युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ना समय की सबसे बड़ी आवश्यकता है, ताकि राष्ट्र की सांस्कृतिक पहचान और एकता को और अधिक सुदृढ़ किया जा सके। व्यापक प्रसार की आवश्यकता पर जोर दिया कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ.प्रजापति त्रिपाठी ने अपने अध्यक्षीय संबोधन में भारतीय संस्कृति की वैश्विक प्रासंगिकता पर चर्चा करते हुए कहा कि भारतीय ज्ञान परंपरा आज भी विश्व को मार्गदर्शन देने की क्षमता रखती है। वहीं विषय प्रवेश कराते हुए डॉ.अशोक प्रियंबद ने भारत की सांस्कृतिक अवधारणा, उसके ऐतिहासिक विकास और वर्तमान संदर्भ में उसकी उपयोगिता पर विस्तार से विचार व्यक्त किए। उन्होंने कहा कि भारतीय संस्कृति विविधताओं में एकता, सहिष्णुता, समन्वय और सर्वधर्म समभाव की अनूठी परंपरा को अपने भीतर समेटे हुए है। भारतीय संस्कृति और राष्ट्र चेतना से जुड़े विषयों पर गंभीर विमर्श संगोष्ठी में शिक्षकों, विद्यार्थियों,बुद्धिजीवियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं तथा विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोगों की उल्लेखनीय भागीदारी रही। प्रतिभागियों ने विषय से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर अपने विचार रखे और भारतीय ज्ञान परंपरा के संरक्षण, संवर्धन तथा उसके व्यापक प्रसार की आवश्यकता पर जोर दिया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित लोगों ने भारतीय संस्कृति और राष्ट्र चेतना से जुड़े विषयों पर गंभीर विमर्श किया। अंत में प्रज्ञा प्रवाह इकाई, सीवान की ओर से सभी अतिथियों, वक्ताओं एवं प्रतिभागियों के प्रति आभार व्यक्त किया गया।
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ग्वालियर में प्रहलाद पटेल का राहुल गांधी पर हमला: बोले- संविधान को ध्वस्त करने वाले आज संविधान की कॉपी लेकर घूम रहे – Gwalior News
गुरुवार को ग्वालियर पहुंचे मध्य प्रदेश सरकार के मंत्री प्रहलाद पटेल ने कांग्रेस नेता राहुल गांधी पर तीखा निशाना साधा। उन्होंने कहा कि संविधान को ध्वस्त करने वाले लोग आज संविधान की कॉपी हाथ में लेकर घूम रहे हैं और इसकी सच्चाई देश का युवा अच्छी तरह समझता है। मंत्री पटेल ने यह बयान राहुल गांधी द्वारा शुरू किए गए “देश में छात्रों की गूंज” अभियान पर प्रतिक्रिया देते हुए दिया। साथ ही उन्होंने नीट परीक्षा को लेकर कहा कि परीक्षा सफलतापूर्वक संपन्न हुई है और परिणाम का इंतजार किया जाना चाहिए। इमरजेंसी को स्कूली पाठ्यक्रम में शामिल किए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि आपातकाल को पढ़ाए बिना देश का इतिहास अधूरा रहेगा। दरअसल, राहुल गांधी द्वारा छात्रों से जुड़े मुद्दों को लेकर “देश में छात्रों की गूंज” अभियान शुरू किया गया है। इसी पर प्रतिक्रिया देते हुए मंत्री प्रहलाद पटेल ने कांग्रेस पर हमला बोला। उन्होंने कहा कि संविधान की रक्षा की बात करने वालों का इतिहास सभी जानते हैं और युवा वर्ग भी सब समझता है। नीट परीक्षा को लेकर उठ रहे सवालों पर मंत्री पटेल ने कहा कि केंद्रीय शिक्षा मंत्री पहले ही सभी आवश्यक जानकारी दे चुके हैं। परीक्षा शांतिपूर्ण और सफलतापूर्वक संपन्न हुई है तथा अब सभी को परिणाम का इंतजार करना चाहिए। वहीं इमरजेंसी को स्कूल पाठ्यक्रम में शामिल करने के मुद्दे पर उन्होंने कहा कि आपातकाल भारतीय लोकतंत्र का एक महत्वपूर्ण अध्याय है। इसे पढ़ाए बिना न तो स्वतंत्रता का इतिहास पूरा हो सकता है और न ही लोकतंत्र को बचाने के संघर्ष की सही जानकारी मिल सकती है। आपको बता दें कि मंत्री प्रहलाद पटेल ग्वालियर के राजमाता विजयराजे सिंधिया कृषि विश्वविद्यालय के सभागार में आयोजित “आपातकाल एक काला अध्याय” कार्यक्रम में शामिल होने पहुंचे थे, जहां वक्ताओं ने आपातकाल के दौर और उसके लोकतांत्रिक प्रभावों पर अपने विचार व्यक्त किए।
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प्याज के साथ भूलकर भी न रखें यह सब्जी, जल्दी हो जाएगी खराब, अधिकतर लोग कर रहे गलती
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Potatoes Storage Mistakes: अक्सर लोग आलू और प्याज को एक साथ स्टोर कर देते हैं, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं करना चाहिए. फूड एक्सपर्ट्स के अनुसार प्याज से निकलने वाली नमी और गैसें आलू के सड़ने की प्रक्रिया को तेज कर सकती हैं. आलू को हमेशा प्याज से दूर रखना चाहिए, ताकि आलू कई सप्ताह तक खराब न हो.
प्याज के साथ आलू को नहीं रखना चाहिए, क्योंकि प्याज से निकलने वाली गैस आलू खराब कर सकती हैं.
Useful Kitchen Storage Tips: भारतीय रसोई में आलू और प्याज का इस्तेमाल सबसे ज्यादा किया जाता है. अधिकतर सब्जियों में प्याज और आलू को मिक्स किया जाता है. यही वजह है कि आलू और प्याज को लोग थोक में खरीदकर घर में स्टोर कर लेते हैं. आमतौर पर प्याज और आलू कई सप्ताह तक खराब नहीं होते हैं. कई लोग आलू और प्याज को एक ही टोकरी या बैग में रख देते हैं, लेकिन यह आदत आपकी सब्जियों की शेल्फ लाइफ कम कर सकती है. जी हां, सुनकर चौंक रहे होंगे, लेकिन आलू और प्याज को एक साथ रखना ठीक नहीं है. इससे आलू जल्दी खराब हो सकते हैं.
यूएस डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर (USDA) की फूड स्टोरेज गाइडलाइंस के मुताबिक प्याज से प्राकृतिक रूप से नमी और कुछ गैसें निकलती हैं, जिनमें एथिलीन गैस भी शामिल हो सकती है. ये गैस आसपास रखी सब्जियों के पकने और खराब होने की प्रक्रिया को तेज कर सकती हैं. जब आलू और प्याज को लंबे समय तक एक साथ रखा जाता है, तो आलू जल्दी अंकुरित होने लगते हैं या उनमें सड़न की आशंका बढ़ जाती है. यही कारण है कि एक्सपर्ट्स आलू और प्याज को अलग-अलग जगहों पर स्टोर करने की सलाह देते हैं. आलू को हमेशा ठंडी, सूखी और अंधेरी जगह पर रखना चाहिए. बहुत अधिक रोशनी या नमी के संपर्क में आने से आलू हरे पड़ सकते हैं और जल्दी खराब होने लगते हैं.
फूड एक्सपर्ट्स का कहना है कि आलू को प्लास्टिक बैग में बंद करके रखने के बजाय जालीदार टोकरी, पेपर बैग या अच्छे वेंटिलेशन वाले कंटेनर में रखना बेहतर माना जाता है. प्याज को ऐसी जगह रखना चाहिए, जहां हवा का अच्छा आवागमन हो. नमी वाली जगह पर रखने से प्याज नरम पड़ सकती है और उसमें फफूंदी लगने का खतरा बढ़ जाता है. प्याज को भी टोकरी या जालीदार बैग में रखना अच्छा विकल्प माना जाता है. सामान्य परिस्थितियों में साबुत आलू और प्याज को फ्रिज में रखने की जरूरत नहीं होती है. फ्रिज का तापमान इनके स्वाद और बनावट को प्रभावित कर सकता है. हालांकि कटे हुए आलू या प्याज को सीमित समय के लिए फ्रिज में सुरक्षित रखा जा सकता है.
आलू को सेब और केले के पास रखने से भी बचना चाहिए, क्योंकि कुछ फल एथिलीन गैस छोड़ते हैं, जो पकने की प्रक्रिया को तेज कर सकती है. इसी तरह प्याज और आलू को एक-दूसरे से दूर रखने से दोनों की ताजगी लंबे समय तक बनी रह सकती है. अगर आप चाहते हैं कि आलू और प्याज ज्यादा दिनों तक ताजा बने रहें, तो उन्हें कभी भी एक साथ स्टोर न करें. दोनों को अलग-अलग, सूखी और हवादार जगह पर रखने से उनकी शेल्फ लाइफ बढ़ सकती है और खराब होने की संभावना कम हो सकती है. छोटी-सी यह स्टोरेज ट्रिक आपकी सेहत के लिए भी फायदेमंद साबित हो सकती है.
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अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें
एमसीडी सदन में स्वच्छता और जलभराव पर घमासान: सत्ता पक्ष ने गिनाईं तैयारियां, विपक्ष ने मांगे जवाब, सुरक्षा मुद्दों पर जवाबदेही का सवाल उठाया – New Delhi News
नई दिल्ली। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) की सदन बैठक गुरुवार को महापौर प्रवेश वाही की अध्यक्षता में आयोजित हुई। बैठक में स्वच्छता, जलभराव, नालों की सफाई और नागरिक सुविधाओं से जुड़े मुद्दे चर्चा के केंद्र में रहे। सत्ता पक्ष ने बैठक को जनहित के मुद्दों पर केंद्रित और सफल बताया, जबकि विपक्ष ने आरोप लगाया कि जनता से जुड़े कई अहम सवालों पर चर्चा से बचने का प्रयास किया गया। सदन में विभिन्न वार्डों के पार्षदों ने अपने-अपने क्षेत्रों की समस्याएं और सुझाव रखे। मानसून से पहले जलभराव की चुनौती मानसून से पहले जलभराव की चुनौती, नालों की डी-सिल्टिंग, कूड़ा प्रबंधन और बुनियादी सुविधाओं को लेकर व्यापक चर्चा हुई। निगम प्रशासन के अनुसार नागरिक हितों से जुड़े कई प्रस्ताव भी पारित किए गए, जो विकास कार्यों को गति देने में सहायक होंगे। महापौर प्रवेश वाही ने कहा सदन में पक्ष और विपक्ष के सभी पार्षदों को अपनी बात रखने का पूरा अवसर दिया गया। उन्होंने कहा कि जलभराव और स्वच्छता से जुड़े मुद्दों पर प्राप्त सुझावों पर गंभीरता से विचार कर आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित की जाएगी। निगम मानसून से पहले संवेदनशील क्षेत्रों में विशेष निगरानी और तैयारियों पर काम कर रहा है। आम आदमी पार्टी ने की नागरिक सुरक्षा से जुड़े मामलों पर चर्चा की मांग वहीं, आम आदमी पार्टी के पार्षदों ने हाल के दिनों में सामने आई इमारत ढहने की घटनाओं, अग्निकांडों, संभावित जलभराव और नागरिक सुरक्षा से जुड़े मामलों पर विस्तृत चर्चा की मांग की। विपक्ष का आरोप था कि इन विषयों पर निगम प्रशासन और सत्ता पक्ष की ओर से स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया। बैठक के दौरान निगम के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा मानसून तैयारियों को लेकर फील्ड स्तर पर काम तेज कर दिया गया है। जहां भी कमियां सामने आएंगी, वहां संबंधित अधिकारियों की जवाबदेही तय की जाएगी। उनका कहना था कि निगम का लक्ष्य नागरिकों को न्यूनतम परेशानी के साथ बेहतर सेवाएं उपलब्ध कराना है। बैठक ने साफ संकेत दिया कि मानसून प्रबंधन, स्वच्छता और शहरी बुनियादी ढांचे से जुड़े मुद्दे आने वाले दिनों में निगम प्रशासन और राजनीतिक दलों के बीच चर्चा के प्रमुख विषय बने रहेंगे।
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कनाडा ने माना- एअर इंडिया फ्लाइट ब्लास्ट खालिस्तानियों ने किया: 41 साल पहले आतंकी हमले में 329 लोगों की मौत हुई, ज्यादातर भारतीय मूल के थे
ओटावा6 मिनट पहले
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कनाडा ने पहली बार आधिकारिक तौर पर माना है कि 1985 में एयर इंडिया की फ्लाइट 182 ‘कनिष्क’ में हुए बम धमाके के पीछे कनाडा में मौजूद खालिस्तानी आतंकियों का हाथ था। कनाडा की खुफिया एजेंसी कनाडियन सिक्योरिटी इंटेलिजेंस सर्विस( CSIS) ने इस घटना को ‘जघन्य आतंकवादी काम’ बताया है।
23 जून को इस घटना के 41 साल पूरे होने पर CSIS ने सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि दी। इस दौरान एजेंसी ने लिखा,
आतंकवाद के पीड़ितों की राष्ट्रीय स्मृति दिवस पर हम एयर इंडिया फ्लाइट 182 के उन 329 लोगों को याद करते हैं, जिन्होंने एक जघन्य आतंकी हमले में अपनी जान गंवाई।

इस हादसे में विमान में सवार सभी 329 लोगों की मौत हुई थी। इनमें 268 कनाडाई नागरिक थे, जिनमें ज्यादातर भारतीय मूल के थे। 24 लोग भारत के नागरिक थे।

कनिष्क विमान का मलबा इकठ्ठा करते आयरिश नेवल अथॉरिटी के जवान।
प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी दी श्रद्धांजलि
23 जून 1985 को एयर इंडिया की फ्लाइट 182 ‘कनिष्क’ मॉन्ट्रियल से लंदन होते हुए नई दिल्ली आ रही थी। लंदन के हीथ्रो एयरपोर्ट पहुंचने से करीब 45 मिनट पहले आयरलैंड के तट के पास अटलांटिक महासागर के ऊपर विमान में जोरदार विस्फोट हुआ और विमान हवा में ही टूटकर समुद्र में गिर गया। इसमें सवार सभी लोगों की मौत हो गई।
कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भी इस घटना को देश के इतिहास का सबसे घातक आतंकी हमला बताया है। उन्होंने कहा, “41 साल पहले एयर इंडिया फ्लाइट 182 बम धमाके में 329 निर्दोष लोगों की जान गई थी, जिनमें 268 कनाडाई नागरिक थे। यह आज भी कनाडा के इतिहास का सबसे बड़ा आतंकी हमला है। कनाडा हर तरह के हिंसक आतंकवाद के खिलाफ खड़ा है।”
जांच में सामने आया कि विस्फोटक एक सूटकेस में छिपाकर विमान के चेक-इन बैगेज में रखा गया था। यह सूटकेस जिस यात्री के नाम से चेक-इन हुआ था, वह खुद विमान में सवार ही नहीं हुआ।
कनाडाई जांच एजेंसियों ने निष्कर्ष निकाला था कि यह हमला 1984 में हुए ऑपरेशन ब्लू स्टार के जवाब में किया गया था। ऑपरेशन ब्लू स्टार के दौरान भारतीय सेना ने अमृतसर के स्वर्ण मंदिर परिसर में छिपे आतंकियों के खिलाफ अभियान चलाया था। जांच के मुताबिक, इसी के प्रतिशोध में सिख अलगाववादियों ने एयर इंडिया विमान को निशाना बनाया।
एयर इंडिया फ्लाइट 182 पर हुआ हमला आज भी किसी यात्री विमान पर हुआ दुनिया का सबसे घातक बम धमाका माना जाता है। हालांकि 2001 के 9/11 हमलों के बाद यह घटना वैश्विक स्तर पर कुछ हद तक चर्चा से बाहर हो गई, लेकिन कनाडा, भारत और आयरलैंड में इसे आज भी नहीं भुलाया गया है।

इस तस्वीर में आयरलैंड में एयर इंडिया बॉम्बिंग के बाद शवों को निकालते हुए रेस्क्यू वर्कर्स को देखा जा सकता है।
कनाडा ने यह बात कहने में 41 साल क्यों लगा दिए?
भारत शुरू से कहता रहा कि इस हमले की साजिश कनाडा की जमीन से सक्रिय खालिस्तानी आतंकियों ने रची थी। लेकिन कनाडा की सरकार और सरकारी संस्थाएं कई दशकों तक सार्वजनिक तौर पर ‘खालिस्तानी’ शब्द इस्तेमाल करने से बचती रहीं। इसके पीछे कई वजह रहे हैं।
1. जांच एजेंसियों की बड़ी नाकामी
2010 में कनाडा के पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जॉन मेजर की अध्यक्षता में हुई सार्वजनिक जांच में कहा गया कि कनाडा की सुरक्षा एजेंसियों की कई गंभीर गलतियों ने जांच को कमजोर कर दिया।
सबसे बड़ी चूक यह थी कि CSIS ने बब्बर खालसा के नेता तलविंदर सिंह परमार की निगरानी तो की, लेकिन बाद में उसकी सैकड़ों घंटे की फोन रिकॉर्डिंग नष्ट कर दी। इससे महत्वपूर्ण सबूत खत्म हो गए और मुकदमा कमजोर पड़ गया।
2. CSIS और RCMP के बीच तालमेल की कमी
कनाडा की खुफिया एजेंसी CSIS और पुलिस एजेंसी RCMP के बीच जानकारी साझा करने को लेकर मतभेद थे। इसका असर जांच पर पड़ा।
3. हमले को भारत का मामला समझा गया
जांच आयोग ने कहा कि चूंकि विमान एयर इंडिया का था, इसलिए कई राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर इसे मुख्य रूप से भारत से जुड़ा मामला माना गया। जबकि मारे गए अधिकांश लोग कनाडा के नागरिक थे। इससे इस हमले को कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे के रूप में उतनी गंभीरता नहीं मिली।
4. अदालत में केस कमजोर पड़ गया
मुख्य गवाहों को धमकियां मिलीं, कुछ की हत्या भी कर दी गई। सबूत कमजोर होने के कारण 2005 में मुख्य आरोपियों को अदालत ने पर्याप्त सबूत न होने के चलते बरी कर दिया।
5. सरकार ने माफी तो मांगी, लेकिन नाम लेने से बचती रही
2010 में तत्कालीन प्रधानमंत्री स्टीफन हार्पर ने पीड़ित परिवारों से माफी मांगी और माना कि सरकार इस मामले को संभालने में विफल रही। इसके बावजूद कई वर्षों तक कनाडा की सरकारी संस्थाएं चरमपंथी या उग्रवादी जैसे सामान्य शब्दों का इस्तेमाल करती रहीं और सीधे खालिस्तानी चरमपंथी नहीं कहा।

धमाके से करीब 2 हफ्ते पहले एअर इंडिया के कनिष्क विमान की तस्वीर
अब हालात कैसे बदले
हाल के कुछ साल में भारत और कनाडा के बीच खालिस्तानी गतिविधियों को लेकर तनाव लगातार बढ़ा है। भारत लंबे समय से आरोप लगाता रहा है कि कनाडा अभिव्यक्ति की आजादी और राजनीतिक गतिविधियों के नाम पर खालिस्तान समर्थक नेटवर्क को खुलकर काम करने देता है।
इसी बीच CSIS ने अपनी 2025 की वार्षिक रिपोर्ट में पहली बार कनाडा बेस्ट खालिस्तानी एक्सट्रीमिस्ट (CBKE) को कनाडा की राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बताया।
रिपोर्ट में कहा गया कि ऐसे कुछ नेटवर्क कनाडा की संस्थाओं का इस्तेमाल कर धन जुटाते हैं और उसे हिंसक गतिविधियों की ओर मोड़ते हैं। यह भी कहा गया कि इनकी हिंसक गतिविधियां कनाडा और उसके हितों के लिए राष्ट्रीय सुरक्षा का खतरा बनी हुई हैं।
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कनिष्क प्लेन क्रैश से जुड़े मामले को यहां विस्तार से पढ़ें…
जब खालिस्तानियों ने हवा में उड़ा दिया भारतीय विमान:329 लोग सवार थे, कोई नहीं बचा

23 जून 1985 की सुबह
एअर इंडिया की फ्लाइट नंबर ‘182′ कनाडा से लंदन होते हुए भारत आ रही थी। इसमें 307 पैंसेजर्स और 22 क्रू मेंबर सवार थे। यह बोइंग 747 विमान था, जिसे एयर इंडिया ने कनिष्क नाम दिया था। पूरी खबर यहां पढ़ें…
सीनियर टीचर भर्ती अब 10 हजार 537 पदों पर होगी: RPSC ने 4037 पद बढ़ाए; 12 लाख से ज्यादा कैंडिडेट्स के एग्जाम 12 जुलाई से – Ajmer News
राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) ने सीनियर टीचर (माध्यमिक शिक्षा विभाग) भर्ती-2025 में 4037 पदों की बढ़ोतरी की है। अब ये भर्ती 10 हजार 537 पदों पर होगी।
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इसके लिए आयोग ने नोटिफिकेशन जारी किया है। इसके लिए 12 से 18 जुलाई तक एग्जाम होगा। इसमें 12 लाख से ज्यादा कैंडिडेट्स ने आवेदन किए हैं।
हिन्दी में 1865, अंग्रेजी में 2007 पद, संस्कृत में 1323 पद, गणित में 2181, विज्ञान में 2260 पद, सामाजिक विज्ञान में 802 पद, उर्दू में 82, पंजाबी में 14 पद, सिंधी में 2 पद, गुजराती में एक पद पर भर्ती होगी।
ये है एग्जाम शेड्यूल
अलग-अलग सब्जेक्ट की परीक्षाओं को चार ग्रुप (ए, बी, सी और डी) में बांटा है।
- ग्रुप-ए में सोशल साइंस विषय है। इसके अभ्यर्थियों की 12 जुलाई को सुबह 10 से 12 बजे तक सामान्य ज्ञान की परीक्षा होगी। दोपहर 3 से 5:30 बजे तक सोशल साइंस की परीक्षा होगी।
- ग्रुप-बी में हिंदी विषय है। इस सब्जेक्ट के अभ्यर्थियों की 13 जुलाई को सुबह 10 से 12 बजे तक सामान्य ज्ञान की परीक्षा होगी। दोपहर 3 से 5:30 बजे तक हिंदी की परीक्षा होगी।
- ग्रुप-सी में साइंस और संस्कृत सब्जेक्ट हैं। इन विषयों के सभी अभ्यर्थियों की 14 जुलाई को सुबह 10 से 12 बजे तक सामान्य ज्ञान की परीक्षा होगी। इसके बाद दोपहर 3 से 5:30 बजे तक साइंस विषय की परीक्षा होगी। 15 जुलाई को सुबह 10 से 12:30 बजे तक संस्कृत विषय के अभ्यर्थियों की परीक्षा होगी।
- ग्रुप-डी में गणित, इंग्लिश, उर्दू, पंजाबी, सिंधी और गुजराती सब्जेक्ट रखे गए हैं। इन सब्जेक्ट के सभी अभ्यर्थियों की 16 जुलाई को सुबह 10 से 12 बजे तक सामान्य ज्ञान की परीक्षा होगी। इसके बाद दोपहर 3 से 5:30 बजे तक गणित विषय के अभ्यर्थियों की परीक्षा आयोजित की जाएगी।
- 17 जुलाई को सुबह 10 से 12:30 बजे तक इंग्लिश और दोपहर 3 से 5:30 बजे तक उर्दू विषय के अभ्यर्थियों की परीक्षा का आयोजन किया जाएगा। 18 जुलाई को सुबह 10 से 12:30 बजे तक पंजाबी और दोपहर 3 से 5:30 बजे तक सिंधी और गुजराती सब्जेक्ट के अभ्यर्थियों की परीक्षा होगी।
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राजस्थान में 2005 पदों पर होगी भर्ती:बिजली निगमों में जेईएन, जूनियर अकाउंटेंट और जूनियर असिस्टेंट की वैकेंसी, जानें-कब शुरू होंगे आवेदन
राजस्थान सरकार ने बिजली निगमों में 2005 पदों पर भर्ती निकाली है। राजस्थान राज्य विद्युत उत्पादन निगम लिमिटेड (RRVUNL) ने बुधवार को भर्ती का नोटिफिकेशन जारी किया। इस भर्ती के तहत पांचों बिजली कंपनियों में जूनियर इंजीनियर (JEN), जूनियर अकाउंटेंट और जूनियर असिस्टेंट के पद भरे जाएंगे। (पूरी खबर पढ़ें)
VDO भर्ती परीक्षा का फाइनल रिजल्ट जारी:जनरल वर्ग की कटऑफ 169.38 रही; 850 पद के लिए 5 लाख अभ्यर्थियों ने दी थी परीक्षा

राजस्थान कर्मचारी चयन बोर्ड (RSSB) ने ग्राम विकास अधिकारी (VDO) भर्ती-2025 का फाइनल रिजल्ट बुधवार देर रात जारी कर दिया। लंबे समय से इंतजार कर रहे अभ्यर्थियों के लिए यह राहत भरी खबर है। (पूरी खबर पढ़ें)
लॉन्च हुआ प्रोजेक्टर वाला Smartphone, मिलेगी 17600mAh की बैटरी, घर बन जाएगा थिएटर
रग्ड स्मार्टफोन बनाने वाले चीनी ब्रांड ने एक दमदार फ्लैगशिप फोन Tank 5 लॉन्च किया है। इस फोन की खास बात ये है कि इसमें 17,600mAh की जंबो बैटरी मिलती है। साथ ही, इसमें एक प्रोजेक्टर लगा है, जिसे आप घर की दीवार को थिएटर में बदल सकेंगे। यह रग्ड फोन दमदार बैटरी और फीचर्स के साथ जबरदस्त कैमरे से लैस है।
दमदार डिस्प्ले
Tank 5 फ्लैगशिप फोन में ब्रांड ने इन-बिल्ट 2K DLP प्रोजेक्टर दिया है। यह स्मार्टफोन 6.73 इंच के 3K AMOLED डिस्प्ले के सात आता है। फोन के डिस्प्ले का रेजलूशन 1440 x 3200 पिक्सल है। यह 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। साथ ही, 300 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस का सपोर्ट दिया गया है।
MediaTek का प्रोसेसर
इस रग्ड फोन में MediaTek Dimensity 9400e प्रोसेसर दिया गया है। इस फोन में 18GB रैम और 512GB तक इंटरनल स्टोरेज दिया गया है। फोन की स्टोरेज को माइक्रोएसडी कार्ड के जरिए 2TB तक एक्सपेंड किया जा सकता है। यह फोन Android 16 पर काम करता है। इसके साथ 5 साल तक सिक्योरिटी अपडेट मिलेगा।
17600mAh की बैटरी
फोन में 17600mAh की बैटरी दी गई है, जिसके साथ 120W वायर्ड और 25W रिवर्स वायर्ड चार्जिंग का सपोर्ट मिलता है। कनेक्टिविटी के लिए इसमें 3.5mm ऑडियो जैक, साइड माउंटेड फिंगरप्रिंट सेंसर, WiFi 7, NFC, Bluetooth 5.4 और eSIM का सपोर्ट मिलेगा। इस फोन में इन-बिल्ट प्रोजेक्टर दिया गया है।
कैमरा
कैमरे की बात करें तो इसके बैक में 50MP के तीन कैमरे दिए गए हैं। इसमें 50MP का मेन, 50MP का नाइट विजन और 50MP का टेलीफोटो कैमरा मिलेगा। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए इस फोन में 12MP का कैमरा दिया गया है। 8849 Tank 5 स्मार्टफोन को कंपनी ने 899.99 डॉलर यानी लगभग 85,306 रुपये की प्राइस में लॉन्च किया है।
इस रग्ड फोन में IP68 और IP69K वाटर रेसिस्टेंट फीचर मिलता है। फोन पानी और धूल-मिट्टी से बच सकता है। इस रग्ड फोन का वजन लगभग 715 ग्राम है और इसकी मोटाई 33.8mm है। इस स्मार्टफोन को खास तौर पर ट्रैकिंग और ट्रैवल करने वाले यूजर्स के लिए बनाया गया है। फोन का इस्तेमाल न सिर्फ कॉल और मैसेज के लिए किया जा सकता है। इसमें लगे प्रोजेक्टर पर यूजर्स अपने पसंदीदा OTT प्लेटफॉर्म को बड़ी स्क्रीन पर देख सकेंगे।
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