Sunday, June 28, 2026
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सिया और केतन ने गूगल पर ‘डेथ पॉइंट खोजा: लोहगढ़ किले पर केतन को मारने की रिहर्सल की, पुलिस के सवालों के जवाब भी सर्च किए


पुणे7 मिनट पहले

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चेतन और सिया 17 जून को पुणे के एक कैफे में मिले थे। यहीं पर केतन का मर्डर प्लान किया था।

पुणे के केतन अग्रवाल मर्डर केस में पुलिस को साजिश से जुड़े कई सबूत मिले हैं। पुलिस के मुताबिक, सिया गोयल और उसके प्रेमी चेतन चौधरी ने गूगल मैप पर लोहगढ़ किले की पगडंडियों, खतरनाक जगहों और खाइयों की जानकारी जुटाई।

दोनों ने गूगल पर ‘डेथ पॉइंट’ और ‘जहर देकर कैसे मारें, ताकि पुलिस को शक न हो’ जैसी सवाल भी गूगल पर सर्च किया था।

दोनों ने पहले से यह भी तय कर लिया था कि पूछताछ के दौरान क्या जवाब देना है। कौन-कौन से व्हाट्सएप मैसेज डिलीट करने हैं। मोबाइल लोकेशन और कॉल रिकॉर्ड से भी साजिश की पुष्टि हुई है।

चेतन ने अपनी पहचान छिपाने के लिए मर्डर के दिन अपना मोबाइल एक दुकान पर छोड़ दिया था। इसके बाद उसने दूसरे मोबाइल का इस्तेमाल किया। पुलिस डिलीट किए गए व्हाट्सएप मैसेज की भी फोरेंसिक जांच करा रही है।

क्रिकेट मैच के दौरान पहचान हुई थी

पुलिस के मुताबिक, सिया की चेतन से पहचान क्रिकेट मैच के दौरान हुई थी। सिया के भाई साहिल ने भी पूछताछ में स्वीकार किया है कि वह चेतन को पहले से जानता था। जांच एजेंसियां दोनों के बीच संबंध और साजिश की पूरी टाइमलाइन खंगाल रही हैं।

सिया और चेतन का ये वीडियो सामने आया है, जिसमें दोनों महाराष्ट्र क्रिकेट लीग का मैच देखती नजर आ रहे है। हालांकि, यह वीडियो कब का है, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।

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केतन की मां बोलीं- दोनों के फांसी की सजा मिले

केतन अग्रवाल को श्रद्धांजलि देने के लिए पिंपरी-चिंचवड़ में परिवार और सोसाइटी के लोगों ने कैंडल मार्च निकाला। उन्होंने आरोपियों को कड़ी सजा देने की मांग की।

केतन के पिता विशाल अग्रवाल ने कहा, ‘मेरा 26 साल का बेटा बिना किसी गलती के मारा गया। मैं उसकी शादी कराने निकला था, लेकिन बेटे की अर्थी उठानी पड़ी। मेरी सिर्फ एक मांग है कि दोषियों को फांसी की सजा मिले।’

केतन की मां राखी अग्रवाल ने कहा, ‘मैं एक मां हूं और सिया की भी मां है। इसके बावजूद मैं चाहती हूं कि सिया और चेतन, दोनों को फांसी की सजा मिले। मुझे सिर्फ अपने बेटे के लिए न्याय चाहिए।’

सिया के परिवार से पूछताछ की 2 तस्वीरें…

गोयल के माता-पिता प्रवीण गोयल और पूजा गोयल से शनिवार को लोणावला पुलिस स्टेशन में पूछताछ हुई। इससे पहले शुक्रवार को सिया के भाई साहिल गोयल से करीब 10 घंटे पूछताछ की। पुलिस के मुताबिक, साहिल चेतन चौधरी को जानता है।

शनिवार को सिया गोयल के माता-पिता को पुणे पुलिस ने पूछताछ के लिए बुलाया।

शनिवार को सिया गोयल के माता-पिता को पुणे पुलिस ने पूछताछ के लिए बुलाया।

शुक्रवार को आरोपी सिया गोयल के भाई साहिल गोयल से करीब 10 घंटे पूछताछ की।

शुक्रवार को आरोपी सिया गोयल के भाई साहिल गोयल से करीब 10 घंटे पूछताछ की।

केतन मर्डर केस में अब तक क्या-क्या खुलासे हुए…

दावा- केतन का सिर कुचला हुआ था

नया दावा सामने आया है। केतन का शव रेस्क्यू करने वाले सुनील गायकवाड़ ने बताया है कि केतन के सिर पर गंभीर चोटें थीं, खोपड़ी कुचली हुई थी और हाथ-पैरों पर भी कई जगह चोट थीं। अन्य लोग रो रहे थे और मदद के लिए चिल्ला रहे थे, लेकिन सिया गोयल शांत खड़ी थी। ‘

सुनील ने कहा- शव को जंगल के रास्ते बाहर लाया गया। पुलिस को 18 जून की सुबह करीब 10:30 बजे घटना की सूचना मिली थी। बचाव अभियान दोपहर 12:30 बजे तक चला और करीब 1:30 बजे शव एंबुलेंस में पहुंचाया गया था।

केतन के पिता बोले- घटना वाले दिन ही सिया पर शक हुआ

केतन के पिता विशाल अग्रवाल के मुताबिक, घटना वाले दिन ही परिवार को सिया गोयल पर शक हो गया था। मौके पर मौजूद महिला पुलिसकर्मी ने जब कहा कि केतन अभी जिंदा है। उसे तुरंत अस्पताल ले जाना चाहिए, तब सिया के हावभाव बदल गए थे। इसके बाद सिया ने परिवार के सवालों का भी जवाब नहीं दिया।

चेतन के पिता ने दैनिक भास्कर को बताया कि 18 जून को सिया की मां का फोन आया था कि केतन लोहगढ़ किले से गिर गया है। परिवार मौके पर पहुंचा तो केतन को खाई से निकाला जा चुका था। उन्होंने देखा कि केतन का मुंह बंधा हुआ था। चेहरा खुलवाकर उसकी पहचान की गई।

दरअसल, सिया और केतन 18 जून को पुणे के लोहगढ़ किले पर घूमने गए थे। इसी दौरान केतन की खाई में गिरने से मौत हुई थी। सिया पर बॉयफ्रेंड चेतन चौधरी के साथ मंगेतर की हत्या का आरोप है। दोनों पुलिस हिरासत में हैं और उनसे पूछताछ की जा रही है।

बुआ सिया को ले गई, तभी परिवार का शक गहराया

केतन की बहन ने सिया से पूछा कि वह कहां बैठी थी, केतन कैसे गिरा और वह किले के उस किनारे तक कैसे पहुंचा। सिया ने किसी सवाल का जवाब नहीं दिया। उसका रोना भी परिवार को बनावटी लगा।

अगले दिन जब वह उनके घर आई, तब भी परिवार ने पूछा कि केतन का कौन सा पैर फिसला था, लेकिन वह चुप रही। सवाल-जवाब के दौरान शादी तय कराने वाली सिया की बुआ उसे “तू चल-चल” कहकर वहां से ले गई। इसके बाद परिवार का शक और गहरा हो गया।

सिया गोयल और केतन अग्रवाल की सगाई नवंबर, 2025 में हुई थी। दोनों के परिवार शादी की तैयारियां कर रहे थे।

सिया गोयल और केतन अग्रवाल की सगाई नवंबर, 2025 में हुई थी। दोनों के परिवार शादी की तैयारियां कर रहे थे।

परिवार ने CCTV देखे, फिर पुलिस को सूचना दी

विशाल अग्रवाल ने बताया कि उसी शाम परिवार ने बैठकर पूरी घटना पर चर्चा की। उनकी बेटी ने कहा कि कुछ ठीक नहीं लग रहा। परिवार ने पूरी घटना को जोड़कर देखा और सोसायटी के CCTV फुटेज खंगाले। फुटेज में दिखा कि लौटते समय सिया रो भी नहीं रही थी। शक बढ़ने पर परिवार ने पुलिस को सूचना दी।

विशाल अग्रवाल ने कहा कि केतन को सिया के अफेयर की जानकारी नहीं थी। हालांकि, उसे कई बार सिया का फोन लगातार बिजी मिलने पर शक हुआ था। उसने परिवार से पूछा भी था कि क्या सिया के बारे में पूरी जानकारी ली गई है

परिवार ने उसे भरोसा दिलाया कि रिश्तेदारों ने पूरी पड़ताल की है। इसके बाद उसने दोबारा इस बारे में बात नहीं की। उन्होंने कहा कि अगर सिया के अफेयर की जानकारी होती तो यह रिश्ता कभी तय नहीं होता।

सिया-चेतन ने चैट डिलीट की

पुलिस के मुताबिक, आरोपी सिया गोयल और चेतन चौधरी ने हत्या से पहले और बाद में अपने मोबाइल की चैट हिस्ट्री डिलीट कर दी थी। दोनों ने रीसायकल बिन भी खाली कर दिया था। डेटा रिकवर करने के लिए दोनों के मोबाइल फॉरेंसिक लैब भेजे गए हैं।

पुलिस ने सिया के कॉल-रिकॉर्ड खंगाले। इनमें एक मोबाइल नंबर पर जनवरी से केतन की हत्या वाले दिन सुबह 7 बजे तक सिया ने 2004 कॉल में करीब 338 घंटे की बातचीत की थी यानी दोनों रोज करीब 11 कॉल्स में 2 घंटे बात करते थे।

ये नंबर पुणे के ही एक और व्यापारी परिवार के लड़के चेतन चौधरी का था। चेतन का घर पुणे के उसी इलाके में था, जहां सिया के पिता का ऑफिस है।

पुलिस का दावा- विग और हकलाने की वजह से की हत्या

पुलिस के मुताबिक, पूछताछ में सिया ने बताया कि उसे केतन का विग लगाना और हकलाना पसंद नहीं था। इसी वजह से उसने हत्या की साजिश रची। हालांकि, केतन के पिता के मुताबिक शादी तय होने से पहले ही सिया और उसके परिवार को केतन के विग के बारे में जानकारी दे दी गई थी।

सिया की मां पूजा गोयल बोलीं- बेटी शादी को लेकर खुश थी

सिया की मां पूजा बोलीं- इस मामले में कोई भी दोषी है तो उसे सबसे कड़ी सजा मिलनी चाहिए। अगर मेरी बेटी दोषी है, तो उसे भी उसी जगह से नीचे फेंक देना चाहिए, जहां से केतन को धक्का दिया गया था।

सिया ने पिता प्रवीण ने कहा कि सिया ने खुद कहा था कि केतन से उसका रिश्ता करवा दीजिए। केतन ने ही सिया को फोन कर लोहगढ़ किला जाने के लिए कहा था। वही कार लेकर आया था। केतन सिया एक-दूसरे से बहुत प्यार करते थे। एक बार तो केतन सुबह 4 बजे ही सिया से मिलने घर आ गया था।

सिया के माता-पिता ने गुरुवार को पहली बार मीडिया से इस केस पर बात की। पिता ने कहा कि केतन और सिया को एक-दूसरे से प्यार था।

सिया के माता-पिता ने गुरुवार को पहली बार मीडिया से इस केस पर बात की। पिता ने कहा कि केतन और सिया को एक-दूसरे से प्यार था।

केतन की हत्या के पहले कैफे में मिले थे सिया-चेतन

केतन की मौत से एक दिन पहले 17 जून को सिया और चेतन पुणे के कोंढवा इलाके में स्थित एक कैफे गए थे।

केतन की मौत से एक दिन पहले 17 जून को सिया और चेतन पुणे के कोंढवा इलाके में स्थित एक कैफे गए थे।

केतन की हत्या के एक दिन पहले 17 जून को आरोपी सिया और प्रेमी चेतन चौधरी एक कैफे में मिले थे। न्यूज एजेंसी IANS ने पुलिस सूत्रों के हवाले से बताया कि यहीं लोहगढ़ किले पर केतन को खाई में धक्का देने का प्लान बनाया था। दोनों ने वह पॉइंट भी ढूंढ लिया, जहां से केतन को धक्का देना था। यदि केतन इससे भी बच जाता तो 20 जून के बाद सड़क हादसे में मारने का बैकअप प्लान तैयार था।

31 मई को मारने का आइडिया आया, 18 जून को मर्डर

31 मई: सिया को केतन की हत्या का प्लान सूझा

11 फरवरी को सगाई के बाद केतन, सिया को घर लेकर आता था, साथ घुमाने ले जाता था। उसे ट्रैकिंग यानी पहाड़ी चढ़ने का शौक था। उसने सिया से ट्रैकिंग के लिए लोहगढ़ किले चलने को कहा। यहीं सिया को केतन की हत्या की प्लान सूझा।

5 जून: किले पर जाने की जिद की, केतन नहीं गया

सिया ने 4 जून को केतन से दोबारा लोहगढ़ किला जाने की जिद की। केतन नहीं माना। 6 जून को केतन, उनकी बहन, एक दोस्त और सिया के इंडोनेशिया के बाली जाने के टिकट बुक थे। पुणे पुलिस के मुताबिक बाली न जाना पड़े, इसलिए सिया ने केतन का पासपोर्ट छिपा लिया।

14 जून: दूसरी कोशिश, धक्का दिया, लेकिन केतन बच गया

सिया ने केतन से दोबारा किले पर चलने को कहा। पुलिस के मुताबिक 14 जून को दोनों किले पहुंचे। सिया ने केतन को धक्का दिया। लेकिन पेड़ का सहारा मिलने से केतन बच गया। उसने पूछा- धक्का क्यों दिया? सिया ने कहा, ‘एक सांप था, तुम्हें उससे बचाने के लिए धक्का दिया।’ केतन ने घर आकर सबको बताया कि सिया की वजह से उसकी जान बच गई।

18 जून: तीसरी कोशिश में बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर धक्का दिया

19 जून को सिया का जन्मदिन मनाने के लिए केतन ने महाबलेश्वर में एक लग्जरी रिजॉर्ट बुक किया था। सिया ने उससे पहले केतन को प्री-वेडिंग फोटोशूट की बात कहकर लोहगढ़ किले पर जाने के लिए मना लिया। इस बार पीछे-पीछे चेतन भी था। एक जगह जब केतन पहाड़ियों की तरफ देख रहा था, तभी दोनों ने उसे पीछे से धक्का दे दिया।

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घटना से जुड़ी ये 3 खबरें भी पढ़ें…

हकलाने-हेयरविग की वजह से सिया को केतन पसंद नहीं था: पुणे पुलिस को बताया- शादी के लिए मना किया, लेकिन केतन माना नहीं

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‘वेलकम टू द जंगल’ ने बॉक्स ऑफिस पर उड़ा दिया गर्दा, दूसरे दिन कलेक्शन में 31 फीसदी उछाल


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सुपरस्टार अक्षय कुमार की मल्टीस्टारर कॉमेडी ड्रामा ‘वेलकम टू द जंगल’ ने बॉक्स ऑफिस पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है. ‘वेलकम’ फ्रेंचाइजी की तीसरी किश्त को दर्शकों का शानदार रिस्पॉन्स मिल रहा है, जिसके चलते दूसरे दिन फिल्म की कमाई में बड़ा उछाल देखा गया. पेड प्रिव्यूज और शनिवार के दमदार कलेक्शन की बदौलत फिल्म ने महज दो दिनों में 40 करोड़ के करीब पहुंच गई है. वीकेंड पर फिल्म की यह रफ्तार बॉक्स ऑफिस पर बड़े रिकॉर्ड की तरफ इशारा कर रही है.

नई दिल्ली. सुपरस्टार अक्षय कुमार की कॉमेडी-एक्शन ड्रामा ‘वेलकम टू द जंगल’ सिनेमाघरों में रिलीज हो चुकी है. इस मल्टीस्टारर फिल्म को दर्शकों का भरपूर प्यार मिल रहा है, जिसके दम पर मूवी ने बॉक्स ऑफिस पर बेहद शानदार शुरुआत की. पहले दिन ही फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर डबल डिजिट के साथ धुआंधार बिजनेस किया.

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अब ‘वेलकम टू द जंगल’ ने दूसरे दिन भी डबल डिजिट में ही कलेक्शन किया है. कमाल की बात है कि शनिवार को फिल्म की कमाई में 31.1 फीसदी का जबरदस्त उछाल आया है. ट्रे़ड वेबसाइट सैकनिल्क के ताजा आंकड़ों के मुताबिक, फिल्म ने रिलीज के दूसरे दिन 20 करोड़ रुपये का दमदार कलेक्शन किया.

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यह आंकड़ा पहले दिन हुई 15.25 करोड़ की कमाई से भी बेहतर है. वहीं, पेड प्रिव्यूज से मिले 3.75 करोड़ को मिलाकर ‘वेलकम टू द जंगल’ का इंडिया में नेट कलेक्शन 39 करोड़ रुपये पहुंच गया है, जबकि इसका इंडिया ग्रोस कलेक्शन 46.80 करोड़ रुपये हो चुका है.

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इसी के साथ अक्षय कुमार की कॉमेडी फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ इस साल बॉलीवुड की तीसरी सबसे बड़ी ओपनिंग करने वाली फिल्म बन गई है. इस लिस्ट में पहले दो नंबर पर ‘धुरंधर: द रिवेंज’ (238.60 करोड़ रुपये) और ‘बॉर्डर 2’ (43.50 करोड़ रुपये ) का कब्जा है.

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फिल्म की कहानी एक चालाक पॉलिटिशियन के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपनी 2000 करोड़ की अघोषित दौलत को टैक्स रेड से बचाने के लिए नकली फिल्म बनाने का ढोंग रचता है. वह इस मनगढ़ंत फिल्म में फ्लॉप एक्टर्स और नौसिखिए डायरेक्टर को जबरदस्ती कास्ट करता है. असली ट्विस्ट तब आता है, जब नेता का सारा पैसा गायब हो जाता है. अब इस अतरंगी टीम को 24 घंटे में फिल्म सुपरहिट बनानी है, जहां उनका सामना खतरनाक आतंकवादियों से होता है.

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इस फिल्म को एए नाडियाडवाला, केप ऑफ गुड फिल्म्स और स्टार स्टूडियो18 द्वारा सीता फिल्म्स और राकेश डांग के सहयोग से पेश किया गया है. मशहूर ‘वेलकम’ फ्रेंचाइजी की इस तीसरी किश्त में अक्षय कुमार के अलावा कई सितारों की फौज है, जो शायद ही बॉलीवुड के इतिहास में किसी फिल्म में नजर आई होगी.

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अहमद खान के डायरेक्शन में बनी ‘वेलकम टू द जंगल’ में सुनील शेट्टी, परेश रावल, फरीदा जलाल, जॉनी लीवर, श्रेयस तलपड़े, राजपाल यादव, कृष्णा अभिषेक, कीकू शारदा और दलेर मेहंदी जैसे सितारे शामिल हैं. अक्षय कुमार की इस कॉमेडी मूवी में लगभग 34 सितारों ने काम किया है.

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इसके साथ ही आफताब शिवदासानी, मुकेश तिवारी, यशपाल शर्मा, किरण कुमार, जाकिर हुसैन, विंदु दारा सिंह, उर्वशी रौतेला, हेमंत पांडे, बृजेंद्र काला, फिरोज खान, पुनीत इस्सर, सुदेश बेरी, जीतू वर्मा, वृही कोदवारा, आदित्य सिंह और भाग्य भानुशाली जैसे कई और जाने-माने चेहरे भी इस फिल्म में अपनी कॉमेडी और एक्टिंग का तड़का लगाया है.

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बर्बाद कर देता है प्रॉपर्टी का झगड़ा, विवाद से बचने के लिए जरूर करें ये 5 काम


नई दिल्ली. पैसों या प्रॉपर्टी को लेकर होने वाला विवाद किसी भी हंसते-खेलते परिवार को बर्बाद कर सकता है. भारत में आज भी अदालतों में चल रहे ज्यादातर पारिवारिक मुकदमों की मुख्य वजह संपत्ति का बंटवारा ही है- फिर चाहे वह मकान हो, जमीन हो, कैश हो या कोई बिजनेस.

कई बार मामला लालच का नहीं होता, बल्कि लोग अपने किसी करीबी की आखिरी इच्छा को ठीक से समझ नहीं पाते या फिर उन्हें संपत्ति के सही कागजात ही नहीं मिलते. इन कानूनी चक्करों में सालों बर्बाद हो जाते हैं और समय के साथ-साथ ढेर सारा पैसा भी पानी की तरह बह जाता है. अच्छी बात यह है कि सही प्लानिंग से इस पूरी परेशानी से बचा जा सकता है.

1. साफ और कानूनी रूप से वैध वसीयत बनाएं
भविष्य के झगड़ों से बचने का सबसे बेहतरीन तरीका है एक कानूनी रूप से मजबूत वसीयत बनाना. वसीयत में साफ लिखा होता है कि आपके जाने के बाद किसे क्या मिलेगा. अगर वसीयत नहीं होगी, तो संपत्ति का बंटवारा उत्तराधिकार कानून के हिसाब से होगा, जो शायद आपकी इच्छा के मुताबिक न हो. वसीयत में सभी वारिसों के नाम और संपत्ति का पूरा ब्योरा साफ-साफ होना चाहिए.

2. नॉमिनेशन अपडेट रखें
ज्यादातर लोग सोचते हैं कि बैंक अकाउंट, बीमा या इन्वेस्टमेंट में जिसे नॉमिनी बनाया है, वही उस संपत्ति का मालिक होगा. लेकिन ऐसा नहीं है बल्कि कई मामलों में नॉमिनी सिर्फ एक केयरटेकर होता है, असली मालिक नहीं. इसलिए शादी, तलाक, बच्चे के जन्म या किसी हादसे के बाद नॉमिनेशन को तुरंत अपडेट करें और इसे अपनी वसीयत के हिसाब से ही रखें ताकि कोई भ्रम न रहे.

3. अपनी सभी संपत्तियों का पूरा रिकॉर्ड रखें
कई बार झगड़ा सिर्फ इसलिए होता है क्योंकि परिवार वालों को पता ही नहीं होता कि कुल कितनी संपत्ति है. बैंक खाते, एफडी, म्यूचुअल फंड, शेयर और बीमा के कागजात अलग-अलग जगह बिखरे होने के कारण बाद में उन्हें ढूंढना मुश्किल हो जाता है. अपनी सभी संपत्तियों और कर्ज की एक लिस्ट बनाकर रखें, जिससे परिवार के लिए चीजें आसान हो जाएं.

4. अपने प्लान के बारे में परिवार से बात करें
संपत्ति और मौत जैसे विषयों पर बात करना थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन चुप्पी और भी खतरनाक हो सकती है. अगर आप कोई बड़ा फैसला ले रहे हैं, तो उस पर परिवार से खुलकर बात करें. आपको अपनी पूरी संपत्ति की पाई-पाई बताने की जरूरत नहीं है, बस उन्हें अपने फैसले की वजह समझा दें ताकि बाद में उन्हें कोई झटका न लगे.

5. समय-समय पर अपने प्लान की समीक्षा करें
जिंदगी बदलती रहती है, इसलिए आपकी संपत्ति की प्लानिंग भी बदलनी चाहिए. शादी, बच्चे का होना या कोई नई बड़ी प्रॉपर्टी खरीदने पर अपनी वसीयत और नॉमिनेशन को दोबारा चेक करें और जरूरत पड़ने पर बदलें. एक पुरानी और अधूरी वसीयत, वसीयत न होने जितनी ही खतरनाक हो सकती है.



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मां की मधुर आवाज से सीखा संगीत का ककहरा, बना बॉलीवुड का टॉप म्यूजिक कंपोजर


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मुंबई के एक सफल बिजनेस परिवार में जन्मे मशहूर म्यूजिक कंपोजर का बचपन सुख-सुविधाओं में बीता. पिता एक सफल बिल्डर थे, लेकिन बिजनेस संभालने के बजाय उनका दिल संगीत के लिए धड़का. उन्हें संगीत की शुरुआती प्रेरणा अपनी मां से मिली, जिन्हें घर में गुनगुनाते देख उन्होंने सुरों का ककहरा सीखा. मां की उसी सीख की बदौलत उन्होंने पहले एक रॉक बैंड बनाया और फिर बॉलीवुड में शानदार म्यूजिक जोड़ी के रूप में पहचान बनाकर इंडस्ट्री को अनगिनत ब्लॉकबस्टर गाने दिए.

नई दिल्ली. मशहूर म्यूजिक कंपोजर और सिंगर विशाल ददलानी आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं. 28 जून 1973 को मुंबई के एक समृद्ध सिंधी परिवार में जन्मे विशाल का पालन-पोषण बांद्रा में हुआ. उनके पिता मोती ददलानी एक सफल बिल्डर थे, जिसके चलते उनका बचपन काफी सुख-सुविधाओं में बीता. लेकिन आगे चलकर उन्होंने म्यूजिक को अपना करियर चुना, जिसने उन्हें बॉलीवुड का रॉकस्टार बना दिया.

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हिल ग्रेंज हाई स्कूल और एचआर कॉलेज से वाणिज्य में स्नातक की डिग्री प्राप्त करने वाले विशाल को संगीत का प्रारंभिक ज्ञान अपनी मां रेशमा ददलानी से मिला, जो अक्सर घर में मधुर आवाज में गुनगुनाया करती थीं. व्यावसायिक पृष्ठभूमि वाले परिवार से होने के बावजूद उन्होंने संगीत को अपनी अभिव्यक्ति का माध्यम बनाया, जिसने उनके जीवन को सकारात्मक और रचनात्मक दिशा दी. (फोटो साभार: Instagram@vishaldadlani)

साल 1994 में गठित ‘पेंटाग्राम’ भारतीय रॉक बैंड ने भारतीय स्वतंत्र संगीत (इंडी रॉक) के परिदृश्य को पूरी तरह से बदल दिया. वैकल्पिक रॉक से इलेक्ट्रॉनिक-रॉक की ओर बढ़ते हुए इस बैंड ने साल 1996 में अपना पहला एल्बम ‘वी आर नॉट लिशनिंग’ जारी किया. कारगिल युद्ध के दौरान पेंटाग्राम ने प्रसिद्ध गीतकार जावेद अख्तर और शास्त्रीय गायक शंकर महादेवन के साथ मिलकर भारत का पहला इंटरनेट-विशेष गीत ‘द प्राइस ऑफ बुलेट’ रिकॉर्ड किया. (फोटो साभार: Instagram@vishaldadlani)

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हालांकि, राजनीतिक रूप से संवेदनशील विषय होने के कारण कई टेलीविजन चैनलों ने इसका प्रसारण नहीं किया. साल 2005 में पेंटाग्राम प्रतिष्ठित ‘ग्लास्टनबरी संगीत समारोह’ (यूके) में प्रदर्शन करने वाला पहला भारतीय बैंड बना. स्वतंत्र संगीत को बढ़ावा देने के लिए विशाल ददलानी ने साल 2002 में विजय नायर के साथ मिलकर ‘ओनली मच लाउडर’ (ओएमएल) की सह-स्थापना की और साल 2015 में अपना खुद का लेबल ‘वीएलटी’ (विशाल लाइक दिस) लॉन्च किया. (फोटो साभार: Instagram@vishaldadlani)

साल 1999 में शेखर रवजियानी के साथ मिलकर बनी ‘विशाल-शेखर’ की जोड़ी ने बॉलीवुड संगीत के ढांचे को आधुनिक तकनीक से संवारा. फिल्म ‘झंकार बीट्स’ (2003) की सफलता ने उन्हें मुख्यधारा में स्थापित किया और प्रतिष्ठित आरडी बर्मन पुरस्कार दिलाया.
पिछले दो दशकों में उन्होंने ‘ओम शांति ओम’ (2007) और ‘टाइगर जिंदा है’ (2017) जैसी कई सफल फिल्मों के लिए संगीत तैयार किया. इसके अलावा उन्होंने इमोजेन हीप, डिप्लो और द वैम्प्स जैसे अंतरराष्ट्रीय कलाकारों के साथ भी काम किया, जिससे भारतीय संगीत की वैश्विक पहुंच और मजबूत हुई. (फोटो साभार: Instagram@vishaldadlani)

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विशाल ददलानी के चर्चित गीतों में ‘अजब सी’ (ओम शांति ओम), ‘जी ले जरा’ (तलाश), ‘शीला की जवानी’ (तीस मार खां), ‘छम्मक छल्लो’ (रा.वन), ‘जय जय शिवशंकर’ और ‘घुंघरू’ (वॉर), ‘झूमे जो पठान’ (पठान), ‘बेबी को बेस पसंद है’ (सुल्तान), ‘बिन तेरे’ (आई हेट लव स्टोरीज़) और ‘बॉयज आर बैक’ (तारा रम पम) प्रमुख हैं. (फोटो साभार: Instagram@vishaldadlani)

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म्यूजिक कंपोजर का निजी जीवन भी उतार-चढ़ाव से भरा रहा है. साल 1999 में उन्होंने प्रियाली कपूर से विवाह किया था. बाद में आपसी सहमति से साल 2017 में दोनों अलग हो गए. इसके बावजूद दोनों परिवारों के बीच आज भी सौहार्दपूर्ण संबंध बने हुए हैं. (फोटो साभार: Instagram@vishaldadlani)

53 साल के विशाल ददलानी मौजूदा समय में सिंगिंग रियलिटी शो ‘इंडियन आइडल 16’ में जज की भूमिका निभा रहे हैं. इसके साथ ही, वह अपने म्यूजिक पार्टनर शेखर रवजियानी (विशाल-शेखर) के साथ देश-विदेश में म्यूजिक कॉन्सर्ट और लाइव स्टेज शो करने में व्यस्त हैं. विशाल ददलानी ने बतौर जज ‘इंडियन आइडल’ में अपने सफर की शुरुआत सीजन 10 (2018) से की थी. हालांकि, बीच-बीच में उन्होंने कुछ सीजन्स के बाद ब्रेक भी लिया है. (फोटो साभार: Instagram@vishaldadlani)

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बेकाबू कार की टक्कर से मां–बेटे समेत 3 की मौत: अलीगढ़ में रामघाट रोड पर दो बाइकों को रौंदा, एक की हालत गंभीर – Aligarh News




​अलीगढ़ में शनिवार दोपहर हरदुआगंज थाना क्षेत्र के रामघाट रोड पर कलाई बम्बा के पास एक तेज रफ्तार बेकाबू कार ने सामने से आ रही दो मोटरसाइकिलों को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों बाइकों के परखच्चे उड़ गए। कार उन्हें रौंदते हुए करीब 15 मीटर दूर सड़क किनारे एक पेड़ से जा टकराई। इस हादसे में मां-बेटे समेत तीन लोगों की मौत हो गई। वहीं, एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गया, जिसका इलाज चल रहा है। ​रिश्तेदार की बीमारी का हाल जानकर लौट रहे थे मां-बेटे ​मृतकों की पहचान पालीमुकीमपुर थाना क्षेत्र के गांव मधुपुर निवासी सरोज देवी (55 वर्ष), उनके पुत्र अभिषेक (19 वर्ष) और बुलंदशहर के डिबाई क्षेत्र के गांव धीमरी निवासी दशरथ (62 वर्ष) के रूप में हुई है। ​परिजनों ने बताया कि सरोज देवी अपने बेटे अभिषेक के साथ अलीगढ़ के पंडित दीनदयाल उपाध्याय अस्पताल में भर्ती अपने एक बीमार रिश्तेदार को देखने आई थीं। दोपहर करीब 2:30 बजे जब दोनों वापस अपने गांव लौट रहे थे। जैसे ही वह हरदुआगंज क्षेत्र के कलाई बंबा के पास पहुंचे सामने से आ रही तेज रफ्तार कार ने टक्कर मार दी। दो बाइकों को मारी टक्कर ​घटनास्थल पर मौजूद जिला पंचायत सदस्य केपी सिंह ने बताया कि हादसा बेहद दर्दनाक था। तेज रफ्तार कार के चालक की लापरवाही के कारण यह दुर्घटना हुई। कार ने सामने से आ रही दोनों बाइकों को अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर के बाद कार भी पलट गई थी। ​वहीं, छर्रा युवा कल्याण एसोसिएशन के विधानसभा अध्यक्ष राजू बघेल ने बताया कि उनके भतीजे अभिषेक और भाभी सरोज देवी अस्पताल से लौट रहे थे, तभी सामने से आ रही अनियंत्रित कार ने उन्हें टक्कर मार दी। हादसे की जानकारी मिलने के बाद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पुलिस ने कार और ड्राइवर को दबोचा ​हादसे में दूसरी बाइक पर सवार भानु प्रताप गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। सूचना मिलते ही डायल 112 और स्थानीय पुलिस मौके पर पहुंची। सभी घायलों को तुरंत इलाज के लिए जेएन मेडिकल कॉलेज भेजा गया, जहां डॉक्टरों ने तीन लोगों को मृत घोषित कर दिया। ​सीओ हरदुआगंज अभिषेक कुमार पटेल ने बताया कि कलाई बम्बा के पास निर्माणाधीन सड़क पर कार और दो मोटरसाइकिलों के बीच एक्सीडेंट की सूचना मिली थी। हादसे में तीन लोगों की मृत्यु हो गई है, जबकि चौथे घायल व्यक्ति की स्थिति अब स्थिर है। वह खतरे से बाहर है। कार और उसके ड्राइवर को पुलिस ने हिरासत में ले लिया है। शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजकर आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।



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कांग्रेस बोली-सरकार ने ऑपरेशन सिंदूर के शहीदों की जानकारी छिपाई: रक्षा मंत्रालय बोला- शहीदों को शुरू से सम्मान मिला, राजनाथ का बयान गलत संदर्भ में दिखाया




ऑपरेशन सिंदूर में भारत के शहीद 6 जवानों के नाम शुक्रवार को सार्वजनिक किए। इसके एक दिन बाद कांग्रेस नेता पवन खेड़ा कहा, ‘सरकार ने इन जवानों की शहादत एक साल तक सार्वजनिक नहीं की। उन्हें वह सम्मान नहीं मिला, जिसके वे हकदार थे।’ पवन खेड़ा ने रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संसद में दिए गए बयान का वीडियो X पर शेयर किया। इसमें राजनाथ सिंह ने एक सवाल के जवाब में कहा था कि ऑपरेशन सिंदूर में किसी जवान को नुकसान नहीं हुआ। पोस्ट में पवन खेड़ा ने लिखा- दो ही संभावनाएं हैं। या तो रक्षा मंत्री को उस समय छह जवानों की शहादत की जानकारी नहीं थी या उन्होंने संसद को गुमराह किया। दोनों ही स्थितियां गंभीर हैं। रक्षा मंत्रालय ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि शहीदों को शुरू से सम्मान दिया गया और रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संसद में दिए गए बयान को संदर्भ से काटकर पेश किया जा रहा है। ऑपरेशन सिंदूर में शहीद हुए 6 जवान… रक्षा मंत्रालय बोला- आरोप तथ्यात्मक रूप से गलत रक्षा मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि कुछ मीडिया रिपोर्ट और सोशल मीडिया पोस्ट में यह गलत दावा किया जा रहा है कि छह शहीदों को पहली बार अब सार्वजनिक सम्मान मिला है। यह दावा तथ्यात्मक रूप से गलत है। ‘वार मेमोरियल पर नाम दर्ज करने की तय प्रक्रिया है’ रक्षा मंत्रालय ने कहा कि राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर शहीदों के नाम दर्ज करने की एक तय प्रक्रिया और प्रोटोकॉल है। सभी नाम उसी प्रक्रिया के तहत दर्ज किए जाते हैं। इसलिए यह कहना कि नाम दर्ज करने में देरी हुई या शहीदों को अब पहली बार सम्मान मिला है, सही नहीं है। मंत्रालय ने कहा कि सरकार ने शहीदों के परिवारों को शिक्षा, स्वास्थ्य और अन्य सभी निर्धारित सुविधाएं उपलब्ध कराई हैं। छहों शहीद राष्ट्रीय नायक हैं। उनका बलिदान हमेशा सम्मान के साथ याद रखा जाएगा। राजनाथ के बयान पर भी दी सफाई रक्षा मंत्रालय ने कहा कि सोशल मीडिया पर रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के संसद में दिए गए भाषण के एक हिस्से को संदर्भ से अलग करके पेश किया गया। इससे यह गलत संदेश देने की कोशिश की गई कि उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर में किसी भारतीय सैनिक के शहीद न होने की बात कही थी। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि राजनाथ सिंह का बयान ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय वायुसेना के पायलटों के मारे जाने के दावों का खंडन करने के लिए था। मंत्रालय के मुताबिक, सोशल मीडिया पर उनके बयान के एक हिस्से को संदर्भ से अलग करके पेश किया गया। पूरा भाषण देखने पर स्पष्ट है कि उन्होंने ऑपरेशन सिंदूर की सफलता और भारतीय सशस्त्र बलों के पराक्रम का जिक्र किया था। 6 मई 2025: सेना ने PoK में 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े 9 आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे। भारत सरकार ने कहा था कि इन हमलों में 100 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया था। इसके बाद 10 मई को भारत और पाकिस्तान के सैन्य अभियान महानिदेशकों (DGMO) के बीच बातचीत के बाद दोनों देशों ने सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति जताई थी। भारत की एयरस्ट्राइक में कई पाकिस्तानी एयरबेस तबाह हुए थे भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के कई एयरबेस तबाह किए थे। प्राइवेट कंपनी मक्सर (Maxar) के सैटेलाइट ने इन तबाह एयरबेस की फोटोज जारी की थीं। मक्सर ने पाकिस्तान के जिनकी फोटोज जारी की, उनमें सरगोधा, नूर खान, भोलारी और सुक्कुर के एयरबेस थे। फोटोज में साफ देखा जा सकता है कि हमले के पहले और बाद में वहां क्या स्थिति थी। सेना ने बताया था कहां-कहां की थी एयरस्ट्राइक सेना ने 7 मई 2025 की सुबह बताया था कि पाकिस्तान और पीओके में 9 टारगेट पहचाने गए थे। इन्हें हमने तबाह कर दिया। लॉन्चपैड, ट्रेनिंग सेंटर्स टारगेट किए गए। इनके नाम हैं.. …………… ये खबर भी पढ़ें… ऑपरेशन सिंदूर के 6 शहीदों के नाम पहली बार सार्वजनिक:5 सेना, 1 एयरफोर्स का जवान, 2 को वीरता सम्मान मिला; वॉर मेमोरियल में नाम दर्ज ऑपरेशन सिंदूर में भारत के 6 जवान शहीद हुए थे। केंद्र सरकार ने 13 महीनों बाद पहली बार आधिकारिक तौर पर इनके नाम सार्वजनिक किए। इन नामों को नेशनल वॉर मेमोरियल की वेबसाइट के ‘रोल ऑफ ऑनर’ में शामिल किया गया है। पूरी खबर पढ़ें…



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वर्ल्ड अपडेट्स: पाकिस्तान के कराची में पैरामिलिट्री हेडक्वार्टर पर आतंकी हमला, 4 रेंजर्स की मौत




पाकिस्तान के कराची में शनिवार को आतंकियों ने अर्धसैनिक बल पाकिस्तान रेंजर्स के हेडक्वार्टर पर हमला कर दिया। हमले में चार रेंजर्स जवानों की मौत हो गई। घटना के बाद सुरक्षा बलों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर तलाशी और जवाबी अभियान शुरू कर दिया। सिंध के पुलिस महानिरीक्षक जावेद आलम ओधो ने बताया कि आतंकी एक वाहन में सवार होकर आए और मुख्य गेट तोड़कर परिसर में घुस गए। हमला शुरू होते ही विस्फोट की आवाज भी सुनाई दी। हालांकि, पुलिस अभी इसकी जांच कर रही है कि विस्फोट किस वजह से हुआ। हमले के बाद मुठभेड़ शुरू ओधो ने बताया कि हमले के तुरंत बाद जवानों ने मोर्चा संभाल लिया और आतंकियों से मुठभेड़ शुरू कर दी। शुरुआती गोलीबारी में चार जवान मारे गए। इसके बाद आसपास की सड़कें बंद कर दी गईं और पूरे इलाके को सुरक्षा घेरे में ले लिया गया। SSU और एंटी टेररिस्ट फोर्स भी तैनात सिंध के गृह मंत्री जिया-उल-हसन लांझार ने बताया कि रेंजर्स की मदद के लिए स्पेशल सिक्योरिटी यूनिट (SSU) और एंटी टेररिस्ट फोर्स की टीमें भी मौके पर भेजी गई हैं। सुरक्षा बल परिसर में तलाशी अभियान चला रहे हैं, जबकि पुलिस हमले की साजिश और इसमें शामिल आतंकियों की पहचान में जुटी है।



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एमपी में 65 डीएसपी के तबादले: बालाघाट हॉक फोर्स में 18 अफसर पदस्थ; ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन के CSP बदले – Bhopal News


पीएचक्यू ने शनिवार रात आदेश जारी किए हैं।

मध्य प्रदेश में गृह विभाग ने शनिवार रात 65 पुलिस अफसर के तबादले किए हैं। राज्य पुलिस सेवा के अफसरों के तबादले में ग्वालियर, जबलपुर, उज्जैन, पीथमपुर के नगर पुलिस अधीक्षकों (CSP) के साथ ही भोपाल और इंदौर में इसी कैडर के अफसरों की शहरी क्षेत्र में पदस्थ

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आदेश में बालाघाट में हॉक फोर्स में भी डीएसपी स्तर के 18 अफसरों को सहायक सेनानी पदस्थ किया है। इसके अलावा बालाघाट जिले में ही एसडीओपी के पद पर भी 4 राज्य पुलिस सेवा (SPS) के अधिकारी पदस्थ किए हैं।

जिन अधिकारियों को बालाघाट जिले में हाफ फोर्स में पद्धति किया है उसमें उदित मिश्रा, अभिलाष कुमार भलावी, आकाश अमलकर, रवि सोनेर, उमेश प्रजापति, रितेश कुमार शिव, रविंद्र सिंह राठी, आयुष कुमार अलावा, सचिन पटेल, कुंदन मंडलोई, राहुल कुमार सय्याम, अक्षय चौधरी, अतुल कुमार सोनी अमन मिश्रा रोहित राठौर राकेश आर्य शामिल हैं।

वहीं, बालाघाट में दीपक तोमर एसडीओपी लांजी बालाघाट, चंद्रशेखर पांडे एसडीओपी बैहर बालाघाट, अभिषेक गौतम एसडीओपी परसवाड़ा, बालाघाट पदस्थ किए गए हैं।

देखें पूरी लिस्ट



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‘पुलिस ने खौलता पानी फेंका…’ भास्कर की खबर का असर: 8 दिन बाद हरकत में आई सरकार, पुलिसकर्मी लाइन हाजिर, आर्थिक सहायता और डेयरी बूथ देने की भी घोषणा – Jaipur News



दैनिक भास्कर में “पुलिस ने खौलता पानी फेंका, युवती की छाती जली: पीड़िता बोलीं- शादी भी नहीं हुई, भविष्य की कल्पना करके रूह कांप जाती है” शीर्षक से प्रमुखता से खबर प्रकाशित होने के बाद राज्य सरकार हरकत में आ गई है। घटना के आठ दिन बाद सरकार ने मामले मे

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सरकार की ओर से जारी जानकारी के अनुसार, 19 जून को जयपुर के रामनगरिया क्षेत्र में मुख्यमंत्री के काफिले के गुजरने से पहले यातायात व्यवस्था के दौरान हुई घटना में रेशु गुप्ता अपने ठेले पर रखे गर्म पानी से झुलस गई थीं। मामले को गंभीरता से लेते हुए पुलिस विभाग ने संबंधित पुलिसकर्मी के खिलाफ विभागीय कार्रवाई करते हुए उसे तत्काल लाइन हाजिर किया है और निष्पक्ष जांच शुरू कर दी है।

वहीं, नगर निगम जयपुर ग्रेटर के आयुक्त ओम कसेरा और उपायुक्त नीलम मीना पीड़िता के घर पहुंचे। अधिकारियों ने परिवार से मुलाकात कर उनका हालचाल जाना और राज्य सरकार की ओर से हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया।

सरकार ने स्पष्ट किया है कि रेशु गुप्ता के उपचार का संपूर्ण खर्च राज्य सरकार वहन करेगी। इसके अलावा प्रभावित परिवार की आजीविका को दोबारा स्थापित करने के लिए आर्थिक सहायता उपलब्ध कराई जाएगी तथा स्थायी रोजगार के लिए डेयरी बूथ आवंटित करने की प्रक्रिया भी शुरू की जाएगी।

उल्लेखनीय है कि 19 जून को रामनगरिया थाना क्षेत्र में मोमोज का ठेला लगाने वाली रेशु गुप्ता के पुलिसकर्मियों से विवाद के दौरान गंभीर रूप से झुलसने का मामला सामने आया था। पीड़ित पक्ष ने आरोप लगाया था कि पुलिसकर्मी द्वारा ठेले को धक्का देने से खौलता पानी उस पर गिर गया। इस मामले में 22 जून को पीड़िता की बहन ने एफआईआर दर्ज कराई थी। भास्कर द्वारा पीड़िता की आपबीती प्रमुखता से प्रकाशित किए जाने के बाद मामले ने तूल पकड़ा और अब सरकार ने राहत और पुनर्वास संबंधी कदम उठाने की घोषणा की है।

यह भी पढ़े: पुलिस ने खौलता पानी फेंका, युवती की छाती जली:पीड़िता बोलीं- शादी भी नहीं हुई, भविष्य की कल्पना करके रूह कांप जाती है

जयपुर-मोमोज बेचने वाली युवती पर पुलिसवाले ने खौलता पानी फेंका:बुरी तरह जली; सीएम काफिले के लिए रोड क्लियर करवा रहे थे, एक-दूसरे पर आरोप



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3 अलग-अलग फिल्में, ‘सेम’ था विलेन का नाम, एक सुपरहिट-दूसरी ब्लॉकबस्टर, तीसरी रही फ्लॉप


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फिल्म में हीरो को टक्कर देने वाला विलेन जितना खूंखार होता है, मूवी देखने का रोमांच उतना ही बढ़ जाता है.70-80 और 90 के दशक में कुछ फिल्में आई जिनमें आइकॉनिक विलेन थे. ‘शोले’ के ‘गब्बर सिंह’, ‘शान’ मूवी के ‘शाकाल’, ‘मिस्टर इंडिया’ के ‘मोगेंबो’ को भला कौन भूल सकता है. इन खलनायकों के किरदार और इन्हें निभाने वाले एक्टर अमर हो गए. 22 साल के अंतराल में सिनेमाघरों में तीन ऐसी फिल्में आईं जिनके विलेन के नाम करीब-करीब एक जैसे थे. एक मूवी ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर साबित हुई तो दूसरी मूवी सुपरहिट रही. एक फ्लॉप होकर भी दिल में बस गई. दो फिल्मों में विनोद खन्ना तो एक फिल्म में राज कुमार नजर आए थे.

यह सच है कि बॉलीवुड फिल्म हो या हॉलीवुड, मूवी में विलेन का होना जरूरी है. जब तक विलेन नहीं होगा, फिल्म देखने में मजा नहीं आएगा. 70-80 और 90 के दशक में फिल्मों में डायरेक्टर-प्रोड्यूसर सबसे ज्यादा मेहनत ‘विलेन’ के किरदार, उसके स्क्रीन पर नाम पर करते थे. 70 के दशक में तो कई हीरो ही विलेन का रोल करते थे. शत्रुघ्न सिन्हा और विनोद खन्ना ने अपने फिल्मी करियर की शुरुआत निगेटिव रोल्स से की. अमजद खान से लेकर अमरीश पुरी तक निगेटिव रोल निभाने वाले एक्टर ने ‘विलेन’ के रूप में खूब नाम कमाया. 22 साल के अंतराल में बॉलीवुड में 3 ऐसी फिल्में भी आईं जिनमें विलेन के नाम लगभग एक जैसे थे. ये फिल्में थीं : मेरा गांव मेरा देश, शोले और इंसानियत के देवता. इन तीनों फिल्मों के विलेन का नाम मिलता-जुलता था.

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सबसे पहले बात करते हैं 13 अगस्त 1971 में रिलीज हुई ‘मेरा गांव मेरा देश’ फिल्म की जिसका डायरेक्शन राज खोसला ने किया था.
राज खोसला ने स्टोरी डिपार्टमेंट बना रखा था जिसमें कई लेखक स्टोरी लिखते थे. फिल्म की कहानी खोसला एंटरप्राइजेज स्टोरी डिपार्टमेंट ने लिखी थी. राज खोसला के भाई लेखराज खोसला और बोलू खोसला फिल्म के प्रोड्यूसर थे. स्क्रीनप्ले जीआर कामत ने लिखा था. डायलॉग अख्तर रोमानी ने लिखे थे. धर्मेंद्र, आशा पारेख और विनोद खन्ना लीड रोल में थे. सबसे दिलचस्प बात यह है कि विनोद खन्ना ही फिल्म के विलेन थे. उन्होंने ‘जब्बर सिंह’ डाकू का किरदार निभाया था. फिल्म के क्लाइमैक्स में उनकी फाइट धर्मेंद्र से होती है.

म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने तैयार किया था. गीतकार आनंद बक्शी थे. फिल्म के सभी गाने सुपरहिट थे. फिल्म के दो गाने ‘हाय शरमाऊं, किस-किस को बताऊं अपनी प्रेम कहानियां, ‘मार दिया जाए या छोड़ दिया जाए’ तब से लेकर आज तक हिट हैं. दोनों गाने लता मंगेशकर की सुरीली आवाज में थे. ‘मेरा गांव मेरा देश’ में धर्मेंद्र ने कॉमेडी, रोमांस और एक्शन हर डिपॉर्टमें में शानदार एक्टिंग से सबका दिल जीत लिया. फिल्म में गांव की पागल औरत का किरदार पूर्णिमा दास ने निभाया था. उनका असली नाम मेहरबानो था जो कि महेश भट्ट की सगी मौसी थीं. मुन्नी बाई का किरदार लक्ष्मी छाया ने निभाया था. राजस्थान के उदयपुर के एक गांव में फिल्म की शूटिंग हुई थी.

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‘मेरा गांव मेरा देश’ ही वो फिल्म है जिसने धर्मेंद्र को एक्शन हीरो के तौर पर बॉलीवुड में पहचान दी. एक्शन हीरो के तौर पर धर्मेंद्र छा गए थे. आगे चलकर ‘शोले’ और ‘प्रतिज्ञा’ जैसी कई एक्शन फिल्में धर्मेंद्र सुपरस्टार बनकर उभरे. वहीं विनोद खन्ना बहुत ही डोमिनेटिंग रहे. वो जब-जब पर्दे पर आए दर्शक सीटियां बजाने के लिए मजबूर हुए. यह फिल्म जब रिलीज हुई तब कोई नहीं जानता था कि यह मूवी हिंदी सिनेमा के इतिहास की आइकॉनिक फिल्म के लिए प्लॉट तैयार करेगी. जब भी शोले फिल्म का नाम लिया जाता है तो मेरा गांव मेरा देश की भी चर्चा होती है. दिलचस्प बात यह भी है कि दोनों ही फिल्मों में धर्मेंद्र ने काम किया है. यह फिल्म सुपरहिट साबित हुई थी. फिल्म में विनोद खन्ना ‘जब्बर सिंह’ के रोल में छाए रहे.

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इस कड़ी में दूसरी फिल्म ‘शोले’ है जो हिंदी सिनेमा की सर्वेश्रेष्ठ फिल्मों में शामिल है. सच ही कहा जाता है कि ‘शोले’ जैसी आइकॉनिक फिल्में बस बन जाती हैं. ‘मेरा गांव मेरा देश’ फिल्म की कहानी को सलीम-जावेद ने नए अंदाज में लिखा. यह भी दिलचस्प है कि जहां ‘मेरा गांव मेरा देश’ 13 अगस्त 1971 में रिलीज हुई वहीं ‘शोले’ फिल्म 15 अगस्त 1975 को सिनेमाघरों में आई थी. धर्मेंद्र, हेमा मालिनी, अमिताभ बच्चन, जया बच्चन, संजीव कुमार, अमजद खान लीड रल में थे. फिल्म का डायरेक्शन रमेश सिप्पी ने किया था. प्रोड्यूसर जीपी सिप्पी थे. जय-वीरू यानी अमिताभ बच्चन-धर्मेंद्र की जोड़ी इसी फिल्म में नजर आई थी. हेमा मालिनी ने बसंती का कालजयी किरदार निभाया था.

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यह भी दिलचस्प है कि ‘शोले’ फिल्म में जहां अमजद खान ने गब्बर सिंह डाकू बनकर अपना नाम इतिहास में दर्ज कराया वहीं ‘मेरा गांव मेरा देश’ फिल्म में अमजद खान के पिता जयंत ने मेजर जसवंत सिंह का किरदार निभाया था. उनका वास्तविक नाम जकरिया खान था. एक फिल्म में जहां पिता ने किरदार निभाया, वहीं दूसरी फिल्म में बेटे ने शानदार एक्टिंग की. हिंदी सिनेमा के इतिहास में ऐसा सुखद संयोग बहुत ही काम देखने को मिलता है. यह भी हैरान करने वाली बात है कि फिल्म में 66 मिनट बाद गब्‍बर सिंह की एंट्री होती है. इतनी देर बाद मिली एंट्री के बाद वो भी छा गए. ‘शोले’ ने अमजद खान को फिल्म इंडस्ट्री में स्‍थापित किया. उन्हें ‘गब्‍बर सिंह’ के तौर पर अमर पहचान दी. उन्होंने ऐसा किरदार गढ़ा, जो बॉलीवुड के विलेन की कसौटी बन गया. अमजद खान ने खास तरह की संवाद अदायगी के चलते इस कैरेक्टर को ‘लार्जर दैन लाइफ’ बना दिया.

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मेरा गांव मेरा देश औ शोले दोनों फिल्मों में कई समानताए हैं. फिल्म में हर किसी का काम असाधारण था. ‘मेरा गांव मेरा देश’ में अजित बने धर्मेंद्र जहां सिक्का उछालकर कोई बड़ा फैसला लेते हैं, वहीं ‘शोले’ फिल्म में जय (अमिताभ बच्चन) सिक्का उछालते हैं. मजेदार बात यह भी है कि विनोद खन्ना का नाम फिल्म में जब्बर सिंह रहता है, वही शोले फिल्म में हमें ‘गब्बर सिंह’ नाम का डाकू अमजद खान के रूप में दिखाई देता है. मेरा गांव मेरा देश में अजित शराब पीता है. बाद में शराब छोड़ देता है. शोले में वीरू शराब पीता है. बसंती से प्यार का इजहार शराब पीकर ही गांववालों के सामने करता है. मेरा गांव मेरा देश में धर्मेंद्र, आशा पारेख को बंदूक चलाना सिखाते हैं. कुछ इसी तरह का सीन हमें शोले फिल्म में भी दिखाई देता है जहां धर्मेंद्र, बसंती यानी हेमा मालिनी को बंदूक चलाना सिखाते हैं. मेरा गांव मेरा देश में पौने घंटे बाद ‘जब्बर सिंह’ यानी विनोद खन्ना की एंट्री होती है. वहीं शोले में एक घंटे बाद पर्दे पर गब्बर सिंह यानी अमजद खान की एंट्री होती है.

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शोले फिल्म जब रिलीज हुई तो पूरे एक हफ्ते तक नहीं चली थी. प्रोड्यूसर समेत पूरी टीम को यकीन हो गया था कि फिल्म फ्लॉप हो जाएगी. फिल्म का क्लाइमैक्स बदलने के लिए अमिताभ बच्चन के घर पर सलीम-जावेद और रमेश सिप्पी की बैठक भी हुई थी. फिर ऐसा चमत्कार हुआ कि फिल्म ने इतिहास रच दिया. यह ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्म में शुमार है. हिंदी सिनेमा के इतिहास में सबसे ज्यादा टिकट इस फिल्म के बिकने का वर्ल्ड रिकॉर्ड भी शोले के नाम है. शोले ने उस समय 50 करोड़ का कलेक्शन किया था.

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इस लिस्ट में सबसे आखिरी नाम ‘इंसानियत के देवता’ फिल्म का है जो कि 12 फरवरी 1993 में रिलीज हुई थी. डायरेक्शन केसी बोकाड़िया ने किया था. फिल्म में रजनीकांत, विनोद खन्ना, राज कुमार, जया प्रदा, मनीषा कोइराला, वर्षा उसगांवकर और विवेक मुश्रान ने अपनी एक्टिंग का जलवा बिखेरा था. म्यूजिक आनंद-मिलिंद का था. यह एक एक्शन फिल्म थी. राज कुमार साहब को इस फिल्म के लिए 25 लाख रुपये की फीस दी गई थी. पहले इस फिल्म का टाइटल ‘कसम मेरे देश की’ था. फिल्म में विलेन रामी रेड्डी के किरदार का नाम ‘जब्बर सिंह’ था. यही नाम विनोद खन्ना का ‘मेरा गांव मेरा देश’ में था. यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर फ्लॉप रही थी.

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