पश्चिमांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (पीवीवीएनएल) ने कांवड़ यात्रा को लेकर तैयारियां तेज कर दी हैं। बुधवार को प्रबंध निदेशक रवीश गुप्ता ने मेरठ, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर होते हुए उत्तराखंड बॉर्डर तक कांवड़ मार्ग का व्यापक स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने विद्युत सुरक्षा व्यवस्थाओं, उपकेंद्रों और कांवड़ मार्ग पर मौजूद बिजली तंत्र की तैयारियों का जायजा लेते हुए अधिकारियों को सभी कार्य 22 जुलाई तक पूरा करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान एमडी ने कांवड़ मार्ग पर लगे बिजली के पोलों को आठ फीट ऊंचाई तक पॉलीथीन और पीवीसी कवर से सुरक्षित करने, ट्रांसफार्मरों की मजबूत बैरीकेडिंग कराने, विद्युत लाइनों की गार्डिंग सुनिश्चित करने और पूरे बिजली तंत्र को सुरक्षा मानकों के अनुरूप व्यवस्थित करने के निर्देश दिए। शाकुंभरी उपकेंद्र में परखी व्यवस्थाएं
सहारनपुर पहुंचकर प्रबंध निदेशक ने 33/11 केवी विद्युत उपकेंद्र शाकुंभरी का भी निरीक्षण किया। यहां उन्होंने मेंटेनेंस, प्रोटेक्शन सिस्टम, अर्थिंग उपकरणों की कार्यक्षमता, सुरक्षा मानकों और रखरखाव व्यवस्था की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि सभी उपकेंद्रों पर सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह सुदृढ़ रखी जाए और किसी भी तकनीकी कमी को तत्काल दूर किया जाए। पोल टू पोल होगी चेकिंग
एमडी ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि कांवड़ मार्ग पर पोल टू पोल जांच कर यह सुनिश्चित किया जाए कि कहीं भी करंट लीकेज की संभावना न रहे। साथ ही बिजली लाइनों के पास मौजूद पेड़ों की समयबद्ध कटाई-छंटाई कर संभावित व्यवधानों को समाप्त किया जाए ताकि यात्रा के दौरान निर्बाध और सुरक्षित विद्युत आपूर्ति बनी रहे। लापरवाही पर होगी कार्रवाई
रवीश गुप्ता ने कहा कि कांवड़ यात्रा के दौरान विद्युत सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता है और इसमें किसी भी स्तर की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने सभी फील्ड अधिकारियों और कर्मचारियों को नियमित सेफ्टी ड्रिल आयोजित करने तथा सुरक्षा उपकरणों का अनिवार्य रूप से उपयोग करने के निर्देश दिए। सुरक्षा मानकों की अनदेखी करने वाले कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई करने के भी निर्देश दिए गए। बोले- फील्ड पर रहें अधिकारी
पीवीवीएनएल एमडी रवीश गुप्ता ने कहा कि कांवड़ श्रद्धालुओं की सुरक्षा और निर्बाध विद्युत आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सभी अधिकारी लगातार फील्ड में रहकर कार्यों की निगरानी करें और प्रत्येक निर्देश का समयबद्ध अनुपालन सुनिश्चित करें, ताकि कांवड़ यात्रा शांतिपूर्ण, सुरक्षित और सुचारु रूप से संपन्न हो सके।
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कांवड़ यात्रा को लेकर पीवीवीएनएल अलर्ट, एमडी उतरे सड़क पर: पोलों की पीवीसी कवरिंग से लेकर ट्रांसफार्मरों की बैरीकेडिंग के दिए निर्देश, 22 को समीक्षा – Meerut News
गोपालगंज में युवक-रिश्तेदार पर चाकू से हमला: आपसी रंजिश में हमला, एक की हालत गंभीर; गोरखपुर रेफर – Gopalganj News
गोपालगंज के नगर थाना क्षेत्र के तिरबिरवा गांव के पास आपसी रंजिश में दो लोगों पर चाकू से हमला किया गया। इस हमले में एक युवक और उसका रिश्तेदार गंभीर रूप से घायल हो गए। घायलों को इलाज के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां एक की नाजुक हालत को देखते हुए उसे गोरखपुर रेफर कर दिया गया है। घायलों की पहचान तिरबिरवा गांव निवासी 45 वर्षीय छोटे लाल यादव, जो स्वर्गीय सुरेंद्र यादव के बेटे हैं, और 30 वर्षीय बिपिन राम, जो बांका राम के बेटे हैं, के रूप में हुई है। दोनों पड़ोसी हैं। जानकारी के अनुसार, छोटे लाल यादव और बिपिन राम काम के सिलसिले में कहीं जा रहे थे। रास्ते में पहले से घात लगाए नामजद आरोपियों ने बिपिन राम के साथ पुराने विवाद को लेकर हाथापाई शुरू कर दी। इसी दौरान आरोपियों ने चाकू निकालकर बिपिन पर हमला कर दिया। छोटे लाल यादव जब बीच-बचाव करने आए, तो उन पर भी हमला किया गया। चाकू लगने से दोनों बुरी तरह जख्मी हो गए। उनकी चीख-पुकार सुनकर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, जिसके बाद सभी आरोपी फरार हो गए। लहूलुहान हालत में दोनों घायलों को तुरंत स्थानीय अस्पताल पहुंचाया गया। अत्यधिक खून बह जाने के कारण डॉक्टरों ने बिपिन राम को प्राथमिक उपचार के बाद बेहतर इलाज के लिए गोरखपुर रेफर कर दिया। इस घटना की सूचना स्थानीय पुलिस को दे दी गई है। पुलिस ने घटनास्थल का मुआयना किया है और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी है। मामले की जांच जारी है।
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मैहर में 5 वाहनों पर 10 हजार का जुर्माना लगा: स्कूली बस में इमरजेंसी गेट के सामने सीट, आग बुझाने फायर सिलेंडर नहीं था – Maihar News
मैहर जिले में बुधवार को परिवहन विभाग की टीम ने चेकिंग अभियान चलाया। नियमों की अनदेखी करने वाले 5 वाहनों पर कार्रवाई की गई और उनसे कुल 10 हजार रुपए का जुर्माना वसूला गया। परिवहन विभाग की टीम ने शहर के अलग-अलग रास्तों पर नाकेबंदी कर स्कूली बसों और माल ढोने वाली गाड़ियों को रोककर उनकी जांच की। इस दौरान गाड़ियों के फिटनेस सर्टिफिकेट, जरूरी कागजात और सुरक्षा इंतजामों को बारीकी से देखा गया। जांच में 5 वाहनों में बड़ी कमियां मिलीं—किसी में आग बुझाने वाला सिलेंडर (फायर सिलेंडर) नहीं था, तो किसी में फर्स्ट एड बॉक्स (प्राथमिक उपचार पेटी) गायब थी। कुछ गाड़ियों में तो इमरजेंसी गेट के ठीक सामने ही सीट लगा दी गई थी, जिससे आपातकालीन रास्ता बंद हो गया था। नियमों की इस अनदेखी पर टीम ने तुरंत जुर्माना ठोक दिया। कागजात दुरुस्त रखने की दी गई सख्त चेतावनी चेकिंग के दौरान आरटीओ रवि बरेलिया और परिवहन विभाग की टीम ने सभी चालकों और वाहन मालिकों को सख्त लहजे में समझाया कि गाड़ियों के कागजात और फिटनेस को समय-समय पर अपडेट रखें। सुरक्षा मानकों से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। अधिकारियों ने साफ चेतावनी दी है कि बच्चों और यात्रियों की सुरक्षा में लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह की सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। सड़क हादसे में मदद करने वालों को मिलेगा इनाम इस चेकिंग अभियान के साथ-साथ पुलिस और प्रशासन ने लोगों को सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक करने का काम भी किया। इसके लिए ‘राहबीर योजना’ का प्रचार-प्रसार किया गया। अफसरों ने बताया कि इस योजना के तहत अगर कोई व्यक्ति सड़क हादसे में घायल हुए किसी शख्स को समय पर अस्पताल पहुंचाता है और उसकी जान बचाता है, तो सरकार उसे इनाम देकर प्रोत्साहित करेगी। इस योजना के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए मैहर जिला अस्पताल और कलेक्टर कार्यालय परिसर में बड़े-बड़े बैनर भी लगाए गए हैं।
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स्वीट कॉर्न से बनाएं 5 टेस्टी स्नैक्स, बच्चों से बड़ों तक सबको आएगा पसंद
आजकल स्वीट कॉर्न लोगों के पसंदीदा हेल्दी स्नैक्स में से एक बन चुका है. इसका हल्का मीठा स्वाद बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आता है. स्वादिष्ट होने के साथ-साथ स्वीट कॉर्न में फाइबर, विटामिन और कई जरूरी मिनरल्स पाए जाते हैं, जो इसे पोषण से भरपूर बनाते हैं. यही वजह है कि इसे नाश्ते, शाम के स्नैक्स या हल्की भूख मिटाने के लिए एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है.
खास बात ये है कि स्वीट कॉर्न से बनने वाली ज्यादातर रेसिपीज बहुत कम समय में तैयार हो जाती हैं और इसके लिए किसी खास सामग्री की जरूरत भी नहीं पड़ती. अगर अचानक मेहमान आ जाएं, बच्चों को कुछ स्वादिष्ट खाने की इच्छा हो या आप खुद कुछ हल्का और टेस्टी खाना चाहते हों, तो स्वीट कॉर्न की रेसिपीज आपके काम आ सकती हैं. आइए जानते हैं ऐसी 5 आसान रेसिपीज के बारे में, जिन्हें आप कुछ ही मिनटों में तैयार कर सकते हैं.
स्वीट कॉर्न चाट
अगर आपको चटपटा और झटपट बनने वाला स्नैक पसंद है, तो स्वीट कॉर्न चाट ट्राई कर सकते हैं. इसके लिए उबले हुए स्वीट कॉर्न में बारीक कटा प्याज, टमाटर, हरी मिर्च, चाट मसाला, काला नमक और नींबू का रस डालकर अच्छी तरह से मिक्स कर दें. फिर ऊपर से हरा धनिया डालकर तुरंत सर्व करें.
चीजी स्वीट कॉर्न सैंडविच
यह बच्चों की पसंदीदा रेसिपी है. इसे बनाने के लिए ब्रेड पर मक्खन लगाकर उसमें उबला स्वीट कॉर्न और कद्दूकस किया हुआ चीज भरें. फिर ऊपर से काली मिर्च और ऑरेगैनो डालें. अब सैंडविच को दोनों तरफ से सुनहरा होने तक सेक लें और सर्व करें.
स्वीट कॉर्न सूप
ठंड के मौसम में ये सूप स्वाद और सेहत दोनों के लिए अच्छा होता है. इसे बनाने के लिए उबले हुए कॉर्न का आधा हिस्सा पीस लें. फिर इसमें लहसुन, अदरक, नमक, काली मिर्च और थोड़ा कॉर्नफ्लोर मिलाकर 8 से 10 मिनट तक पकाएं. इस तरह से गर्मागर्म सूप तैयार है.
स्वीट कॉर्न मसाला
ये रेसिपी सिर्फ 10 मिनट में बन जाती है. पैन में थोड़ा मक्खन गर्म करें और उसमें स्वीट कॉर्न डालकर 2-3 मिनट भूनें. फिर लाल मिर्च पाउडर, काली मिर्च और चाट मसाला मिलाएं. आखिर में नींबू का रस डालकर अच्छी तरह मिक्स करें. इस तरह से तैयार है स्वीट कॉर्न मसाला.
स्वीट कॉर्न टिक्की
शाम की चाय के साथ खाने के लिए ये एक बेहतरीन स्नैक है. उबले स्वीट कॉर्न, उबले आलू, ब्रेडक्रम्ब्स, हरा धनिया, हरी मिर्च और मसालों को मिलाकर टिक्की बना लें. इन्हें तवे पर हल्के तेल के साथ दोनों तरफ से सुनहरा होने तक सेंक लें.
दौसा पहुंचे शिक्षा विभाग के अफसर, जर्जर-भवन गिराने के निर्देश: भंडाना और पालावास स्कूल का निरीक्षण, ACS बोले- बच्चों की सुरक्षा पहली प्राथमिकता – Dausa News
शिक्षा विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव(ACS) राजेश यादव ने बुधवार को दौसा क्षेत्र के दौरे पर रहे। उन्होंने राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय भण्डाना और पालावास का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्कूल भवनों की सुरक्षा, निर्माण गुणवत्ता, कक्षाओं और अन्य व्यवस्थाओं का जायजा लेकर निर्देश दिए। एसीएस ने एक स्कूल की छत पर चढ़कर निरीक्षण किया। इससे पहले कलक्ट्रेट में शिक्षा अधिकारियों की समीक्षा बैठक लेकर स्कूलों की सुरक्षा, शैक्षणिक गुणवत्ता और आधारभूत सुविधाओं की समीक्षा की। उन्होंने स्पष्ट कहा कि बच्चों की सुरक्षा और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के मामले में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। भवनों की गुणवत्ता जांच के लिए एनडीटी कराए बैठक में अधिकारियों को निर्देश दिए गए कि जर्जर स्कूल भवनों को तत्काल ध्वस्त किया जाए, क्षतिग्रस्त भवनों की मरम्मत कर उन्हें सुरक्षित बनाया जाए और निर्माणाधीन भवनों की गुणवत्ता जांच के लिए नॉन-डिस्ट्रक्टिव टेस्ट (एनडीटी) कराया जाए। यदि कोई भवन गुणवत्ता मानकों पर खरा नहीं उतरता है तो उसका पुनर्निर्माण कराया जाएगा। प्राइवेट स्कूलों की डिजिटल मॉनिटरिंग करें एसीएस ने सरकारी स्कूलों में नामांकन बढ़ाने, किसी भी बच्चे को स्कूल से बाहर नहीं रहने देने, शौचालयों की नियमित साफ-सफाई और पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं हर समय उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि राजशाला संबलन ऐप के माध्यम से प्राइवेट स्कूलों की डिजिटल मॉनिटरिंग की जाए, जिससे शैक्षणिक गुणवत्ता का प्रभावी मूल्यांकन हो सके। साथ ही ‘एसीएस एजुकेशन संपर्क फॉर्म’ के जरिए क्यूआर कोड स्कैन कर ऑनलाइन शिकायत दर्ज करने की सुविधा का भी अधिकतम उपयोग करने के निर्देश दिए। इस दौरान शिक्षा विभाग के अधिकारी मौजूद रहे।
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यूक्रेन के हमले से रूस में भी होर्मुज जैसा संकट: एजोव सागर में जहाजों की आवाजाही रुकी, 9 दिन में 116 जहाजों पर हमले हुए
मॉस्को1 घंटे पहले
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यूक्रेन ने पिछले 9 दिनों में एजोव सागर में रूस के 116 जहाजों को निशाना बनाया है।
यूक्रेन के लगातार ड्रोन हमलों के बाद रूस को बड़ा झटका लगा है। इस सप्ताह हमलों की वजह से रूस को एजोव सागर के अहम समुद्री रास्तों पर जहाजों की आवाजाही रोकनी पड़ी। इससे दुनिया के दूसरे देशों के साथ रूस का व्यापार प्रभावित होने लगा है।
एजोव सागर लंबे समय तक यूक्रेन की पहुंच से बाहर रहा था। रूस इसी समुद्री रास्ते का इस्तेमाल यूक्रेन पर हमले करने और दक्षिणी रूस से तेल, गेहूं, स्टील, सूरजमुखी का तेल और दूसरे सामान दुनिया के बाजारों तक पहुंचाने के लिए करता था। लेकिन हाल के महीनों में यूक्रेन के ड्रोन हमले काफी प्रभावी हो गए हैं और अब इस समुद्री रास्ते पर भी रूस का दबदबा कमजोर पड़ने लगा है।
यूक्रेन की ड्रोन सेना के कमांडर रॉबर्ट ब्रोवदी ने बुधवार को दावा किया कि पिछले 9 दिनों में एजोव सागर में रूस के 116 जहाजों को निशाना बनाया गया है। पहले यूक्रेन के हमले मुख्य रूप से रूस के शैडो ऑयल टैंकरों और युद्धपोतों तक सीमित थे, लेकिन अब हमलों का दायरा बढ़ गया है।

रूस के दो अहम समुद्री रास्ते बंद
लगातार हमलों के बाद रूस ने डॉन-एजोव चैनल और केर्च स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही रोक दी है।
- डॉन-एजोव चैनल एजोव सागर को रूस की अंदरूनी नदियों और जलमार्गों से जोड़ता है।
- केर्च स्ट्रेट एजोव सागर को ब्लैक सी से जोड़ता है।
सैटेलाइट तस्वीरों और जहाजों की ट्रैकिंग करने वाली बेवसाइट्स के मुताबिक, इन दोनों रास्तों के दोनों ओर बड़ी संख्या में जहाज फंसे हुए हैं और आगे बढ़ने का इंतजार कर रहे हैं।
एक्सपर्ट्स का कहना है कि इसका असर सिर्फ रूस के तेल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा। इससे गेहूं, सूरजमुखी के तेल और दूसरे कृषि उत्पादों के निर्यात पर भी असर पड़ सकता है, जिन पर पश्चिमी देशों के प्रतिबंध लागू नहीं हैं।
अमेरिका के इंस्टीट्यूट फॉर द स्टडी ऑफ वॉर (ISW) का कहना है कि यूक्रेन के हमलों का मकसद क्रीमिया को रूस की सप्लाई लाइन से अलग करना और समुद्री रास्तों से होने वाले तेल व अनाज के निर्यात को बाधित करना है।

रूस में गेहूं की कीमतें बढ़ने लगीं
रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस के करीब 25% गेहूं का निर्यात एजोव सागर के रास्ते होता है। अगर यह संकट जारी रहा तो रूस को अरबों डॉलर का आर्थिक नुकसान हो सकता है।
रूस दुनिया का सबसे बड़ा गेहूं निर्यातक है और वैश्विक गेहूं निर्यात का लगभग 20% हिस्सा अकेले रूस से आता है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस के करीब 25% गेहूं का निर्यात एजोव सागर के रास्ते होता है। अगर यह संकट जारी रहा तो रूस को अरबों डॉलर का आर्थिक नुकसान हो सकता है।एजोव सागर में संकट बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में गेहूं के वायदा भाव (फ्यूचर्स) भी बढ़ने लगे हैं।
रूस का दावा है कि वह अपने गेहूं का निर्यात ब्लैक सी के दूसरे बंदरगाहों से कर सकता है। हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि निर्यात के सबसे व्यस्त मौसम में दूसरे बंदरगाहों की क्षमता इतनी नहीं है कि वे पूरा भार संभाल सकें।
रूस के लिए एजोव सागर इतना खास क्यों है
एजोव सी यूक्रेन और रूस के बीच स्थित एक अंदरूनी समुद्र है, जो केर्च स्ट्रेट के जरिए ब्लैक सी से जुड़ा है। 2003 में यूक्रेन और रूस ने इस समुद्री क्षेत्र को साझा इस्तेमाल करने का समझौता किया था। लेकिन 2014 में क्रीमिया पर कब्जे के बाद रूस ने इस समझौते का कई बार उल्लंघन किया।
फरवरी 2022 में यूक्रेन पर हमला करने के बाद रूस ने एजोव सागर के आसपास के लगभग पूरे यूक्रेनी तट पर कब्जा कर लिया। राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने इसे रूस का समंदर तक बता दिया था।
आकार में छोटा होने के बावजूद, एजोव सागर रूस की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम है। सोवियत काल में विकसित हुए नदियों और नहरों का विशाल नेटवर्क इसी समुद्री मार्ग से जुड़ता है। इसके जरिए दक्षिणी रूस से तेल, गेहूं, सूरजमुखी का तेल, इस्पात और अन्य सामान पहले ब्लैक सी और फिर दुनिया के कई देशों तक पहुंचाया जाता है।
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भारत पर 100% टैरिफ लगा सकता है अमेरिका:रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर कार्रवाई की तैयारी; संसद में बिल पेश, 5 देश निशाने पर

अमेरिका ने रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर शिकंजा कसने की तैयारी शुरू कर दी है। अमेरिकी सीनेट में रूस पर प्रतिबंधों से जुड़ा एक संशोधित बिल पेश किया गया है। इसमें रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक टैरिफ लगाने का प्रस्ताव रखा गया है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
दिल्ली-एम्स ने 4 महीने के बच्चे के दोनों फेफड़े बचाए: जन्मजात बीमारी में की दुर्लभ लंग स्पेयरिंग सर्जरी, 48 घंटे में मिली छुट्टी – New Delhi News
नई दिल्ली। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) के डॉक्टरों ने जन्मजात फेफड़ों की गंभीर बीमारी से जूझ रहे चार महीने के बच्चे की दुर्लभ लंग स्पेयरिंग सर्जरी कर चिकित्सा क्षेत्र में महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। बच्चे के दोनों फेफड़े कॉन्जेनिटल पल्मोनरी एयरवे मालफॉर्मेशन (सीपीएएम) से प्रभावित थे। सामान्य परिस्थितियों में ऐसे मरीजों में फेफड़े का पूरा लोब निकालना पड़ता है, लेकिन विशेषज्ञों ने माइक्रो सर्जरी के जरिए केवल संक्रमित हिस्से को हटाकर स्वस्थ फेफड़े को सुरक्षित रखा। सफल ऑपरेशन के 48 घंटे बाद ही बच्चे को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई। डॉक्टरों के अनुसार, बीमारी की पहचान गर्भावस्था के दौरान ही हो गई थी। जांच में दोनों फेफड़ों में सिस्ट मिलने के कारण भविष्य में संक्रमण और सांस लेने में गंभीर दिक्कत की आशंका थी। इसी वजह से पारंपरिक लोबेक्टमी के बजाय सेगमेंटेक्टॉमी तकनीक अपनाई गई, ताकि बच्चे के फेफड़ों की कार्यक्षमता लंबे समय तक सुरक्षित रह सके। थोरेकोस्कोपिक तकनीक से निकाले सेगमेंट सर्जरी के दौरान दाहिने फेफड़े के सबसे जटिल माने जाने वाले सेगमेंट-9 और सेगमेंट-10 को थोरेकोस्कोपिक (की-होल) तकनीक से निकाला गया। ऑपरेशन के समय सिलेक्टिव लंग वेंटिलेशन तकनीक अपनाई गई, जिसमें एक फेफड़े पर सर्जरी के दौरान दूसरा फेफड़ा शरीर को ऑक्सीजन देता रहा। एम्स के अनुसार, कुछ महीनों बाद बाएं फेफड़े की भी इसी प्रकार सर्जरी की जाएगी। स्वस्थ ऊतक को सुरक्षित रखना सबसे बड़ी चुनौती इस ऑपरेशन को पीडियाट्रिक सर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ संदीप अग्रवाल, प्रो विशेष जैन, डॉ अभिषेक और पीडियाट्रिक सर्जरी, एनेस्थीसिया, रेडियोलॉजी व नवजात गहन चिकित्सा विभाग की संयुक्त टीम ने अंजाम दिया। डॉ संदीप अग्रवाल ने कहा, सबसे बड़ी चुनौती फेफड़े के गहरे प्रभावित हिस्से को निकालते हुए स्वस्थ ऊतक को सुरक्षित रखना थी। हमारा प्रयास केवल सर्जरी करना नहीं, बल्कि बच्चे के फेफड़ों की भविष्य की कार्यक्षमता को बचाना था, जिसे टीमवर्क और आधुनिक तकनीक की मदद से संभव बनाया गया।
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OnePlus N6 सीरीज में एक और फोन की एंट्री, भारत में लॉन्चिंग हुई कंफर्म
OnePlus N6 के लॉन्च के कुछ दिनों के बाद ही चीनी कंपनी भारत में इस सीरीज का एक और फोन लॉन्च करने की तैयारी में है। वनप्लस का यह फोन ई-कॉमर्स वेबसाइट Amazon पर लिस्ट किया गया है। इस फोन के लिए ई-कॉमर्स वेबसाइट ने डेडिकेटेड मैक्रो साइट भी बनाई है। वनप्लस का यह फोन OnePlus Nord N6x के नाम से पेश किया जाएगा। फोन का डिजाइन और फीचर्स OnePlus N6 से मिलते-जुलते होंगे।
OnePlus N6x जल्द होगा लॉन्च
OnePlus N6x को लेकर टिप्स्टर योगेश बरार ने दावा किया है कि इसके फीचर OnePlus N6 जैसे ही होंगे। हालांकि, फोन के किसी फीचर को लेकर टिप्स्टर ने जानकारी शेयर नहीं की है। वहीं, वनप्लस ने भी इस फोन का केवल नाम रिवील किया है। इसके फीचर को लेकर कंपनी की तरफ से जानकारी शेयर नहीं की गई है।
OnePlus N सीरीज का यह दूसरा फोन होगा, जिसे भारत में लॉन्च किया जाएगा। इससे पहले कंपनी OnePlus N6 को भारत में लॉन्च कर चुकी है। इस फोन को पिछले महीने 30 जून को भारतीय बाजार में पेश किया गया है। फोन की कीमत 22,999 रुपये से शुरू होती है। यह फोन 4GB RAM और 128GB स्टोरेज वेरिएंट में आता है।
वनप्लस N6x
OnePlus N6 के फीचर्स
OnePlus N6 के फीचर्स की बात करें तो इसमें 6.75 इंच का LCD डिस्प्ले मिलता है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। यह फोन MediaTek Dimensity 6360 Apex चिपसेट पर काम करता है। फोन में 8,000mAh की दमदार बैटरी दी गई है, जिसके साथ 45W फास्ट चार्जिंग फीचर मिलता है। फोन के बैक में 50MP का कैमरा मिलता है, जो 10x डिजिटल जूम को सपोर्ट करेगा। वहीं, सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए फोन में 8MP का कैमरा दिया गया है।
वनप्लस से जुड़ी अन्य खबर की बात करें तो जर्मनी की एक पब्लिकेशन WinFuture ने दावा किया है कि वनप्लस की पैरेंट कंपनी Oppo इस सप्ताह बड़े अनाउंसमेंट की तैयारी कर ली है। कंपनी अपने स्ट्रेटेजी में बदलाव करने वाली है। इस बदलाव में OnePlus का यूरोप और अमेरिकी बाजार से एग्जिट होना शामिल है। इस गैप को भरने के लिए ओप्पो के फ्लैगशिप फोन खास तौर पर Find X सीरीज को इन दोनों मार्केट में पेश किया जाएगा।
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रेलवे को 3,907 करोड़ रुपये की बड़ी सौगात, 2 अहम रेल परियोजनाओं को मंजूरी
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केंद्र सरकार ने रेलवे इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है. आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) ने ओडिशा और झारखंड में दो बड़ी मल्टी ट्रैकिंग रेल परियोजनाओं को मंजूरी दे दी है. करीब 3,907 करोड़ रुपये की लागत वाली इन परियोजनाओं से रेल नेटवर्क का विस्तार होगा, माल ढुलाई तेज होगी और लाखों लोगों की कनेक्टिविटी बेहतर होगी. सरकार का कहना है कि इससे उद्योग, पर्यटन और पर्यावरण तीनों को फायदा मिलेगा.
सरकार के मुताबिक इन परियोजनाओं का लाभ ओडिशा और झारखंड के 4 जिलों को मिलेगा.
नई दिल्ली. रेलवे नेटवर्क को मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा फैसला लिया है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई आर्थिक मामलों की कैबिनेट समिति (CCEA) की बैठक में रेलवे की दो अहम मल्टी ट्रैकिंग परियोजनाओं को मंजूरी दे दी गई. इन परियोजनाओं पर करीब 3,907 करोड़ रुपये खर्च होंगे और इन्हें वर्ष 2030-31 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. सरकार का मानना है कि इन परियोजनाओं से न सिर्फ रेलवे की क्षमता बढ़ेगी, बल्कि माल ढुलाई तेज होगी, ट्रेनों की आवाजाही आसान होगी और पूर्वी भारत के औद्योगिक क्षेत्रों को भी बड़ा फायदा मिलेगा.
कैबिनेट ने दो रेल परियोजनाओं को हरी झंडी दी है. पहली परियोजना पारादीप से हरिदासपुर रेल लाइन का दोहरीकरण और दूसरी परियोजना राजखरसावां से डांगोआपोसी रेल लाइन पर चौथी लाइन का निर्माण है. इन दोनों परियोजनाओं के पूरा होने के बाद भारतीय रेलवे के नेटवर्क में करीब 145 किलोमीटर की बढ़ोतरी होगी.
लाखों लोगों को मिलेगा सीधा फायदा
सरकार के मुताबिक इन परियोजनाओं का लाभ ओडिशा और झारखंड के 4 जिलों को मिलेगा. इससे करीब 1,526 गांवों की रेल कनेक्टिविटी बेहतर होगी और लगभग 14 लाख लोगों को सीधा फायदा पहुंचेगा. रेल लाइन की क्षमता बढ़ने से ट्रेनों की आवाजाही पहले के मुकाबले ज्यादा सुचारु होगी. इससे कई रूट पर ट्रैफिक का दबाव कम होगा और यात्रियों को भी बेहतर सेवा मिलने की उम्मीद है.
माल ढुलाई होगी और तेज
इन परियोजनाओं का सबसे बड़ा फायदा उद्योगों को मिलने वाला है. पूर्वी भारत के इस क्षेत्र में कोयला, लौह अयस्क, डोलोमाइट, चूना पत्थर और जिप्सम जैसे खनिजों का बड़े पैमाने पर उत्पादन होता है. रेलवे नेटवर्क मजबूत होने के बाद इन खनिजों की ढुलाई तेज होगी. सरकार का अनुमान है कि इससे हर साल करीब 44 मिलियन टन अतिरिक्त माल ढुलाई की क्षमता विकसित होगी. इससे लॉजिस्टिक्स लागत कम होने और उद्योगों को बेहतर सप्लाई चेन मिलने की उम्मीद है.
पर्यटन को भी मिलेगा बढ़ावा
नई रेल परियोजनाओं से कई प्रमुख पर्यटन और धार्मिक स्थलों तक पहुंच आसान हो जाएगी. इनमें ललितगिरि बौद्ध परिसर, श्री बलदेवजीउ मंदिर और मेघाहातुबुरु हिल्स जैसे प्रमुख पर्यटन स्थल शामिल हैं. बेहतर रेल कनेक्टिविटी से इन क्षेत्रों में पर्यटन गतिविधियों को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है.
पर्यावरण को भी होगा फायदा
सरकार का कहना है कि रेल नेटवर्क मजबूत होने से सड़क परिवहन पर निर्भरता कम होगी. इसका सीधा असर ईंधन की खपत और कार्बन उत्सर्जन पर पड़ेगा. अनुमान है कि इन परियोजनाओं की वजह से हर साल करीब 6 करोड़ लीटर ईंधन की बचत होगी. साथ ही लगभग 29 करोड़ किलोग्राम कार्बन डाइऑक्साइड उत्सर्जन कम होगा. सरकार के मुताबिक यह लाभ करीब 1 करोड़ पेड़ लगाने के बराबर माना जा सकता है.
रेलवे क्षमता बढ़ाने पर सरकार का जोर
हाल के वर्षों में केंद्र सरकार रेलवे नेटवर्क के विस्तार, मल्टी ट्रैकिंग और माल ढुलाई क्षमता बढ़ाने पर लगातार निवेश कर रही है. नई परियोजनाओं का उद्देश्य बढ़ते रेल ट्रैफिक को संभालना, औद्योगिक गतिविधियों को गति देना और यात्रियों को बेहतर कनेक्टिविटी उपलब्ध कराना है. 3,907 करोड़ रुपये की ये दोनों परियोजनाएं भी इसी रणनीति का हिस्सा हैं.
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मैं जय ठाकुर, न्यूज18 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहा हूं. मेरा मुख्य काम बिजनेस की पेचीदा खबरों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. फिर चाहे वह शेयर बाजार की हलचल हो, देश की इकोनॉमी क…और पढ़ें


