Saturday, June 6, 2026
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युवा किसी के हाथ की कठपुतली नहीं, कॉकरोच जनता पार्टी पर बरसे नितिन नवीन


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युवा किसी के हाथ की कठपुतली नहीं, कॉकरोच जनता पार्टी पर बरसे नितिन नवीन

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कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके का ज़िक्र करते हुए नितिन नवीन ने कहा, “विदेश में बैठे कुछ लोग सोचते हैं कि वे भारत के युवाओं को दिशा दे सकते हैं.” रांची में बुद्धिजीवियों के साथ बातचीत के दौरान नवीन ने कहा, “आज के युवा राष्ट्र-निर्माण और अपने भविष्य को सुरक्षित करने की दिशा में काम करना चाहते हैं. लेकिन कुछ ताकतें देश के युवाओं को व्यवस्था-विरोधी बनाने की कोशिश कर रही हैं.”

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नितिन नवीन ने कहा कि कुछ ताकतें देश के युवाओं को व्यवस्था-विरोधी बनाने की कोशिश कर रही हैं.

नई दिल्ली. झारखंड दौरे पर पहुंचे भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने शनिवार को उन ताकतों पर तीखा हमला बोला, जो उनके मुताबिक देश के युवाओं को “नकारात्मक राजनीति” की ओर धकेलने की कोशिश कर रही हैं. रांची में बुद्धिजीवियों के साथ संवाद कार्यक्रम के दौरान उन्होंने बिना किसी का नाम लिए कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) पर हमला बोला और कहा कि विदेश में बैठे कुछ लोग यह समझते हैं कि वे भारत के युवाओं को दिशा दे सकते हैं, लेकिन देश का युवा किसी के हाथ की कठपुतली बनने वाला नहीं है.

उन्होंने कहा कि आज का भारतीय युवा राष्ट्र निर्माण, इनोवेशन और अपने बेहतर भविष्य पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, जबकि कुछ ताकतें उसे व्यवस्था विरोधी राजनीति की ओर मोड़ने का प्रयास कर रही हैं. नितिन नवीन ने स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत का युवा नकारात्मकता नहीं, बल्कि सकारात्मक और रचनात्मक राजनीति का रास्ता चुनेगा.

बीजेपी अध्यक्ष ने कहा कि विरोध करना लोकतंत्र का अधिकार है, लेकिन यह लोकतांत्रिक मर्यादाओं के भीतर होना चाहिए. उन्होंने दावा किया कि युवाओं की मेहनत और इनोवेशन के कारण देश में लगभग दो लाख स्टार्टअप खड़े हुए हैं और भारत तेजी से वैश्विक आईटी हब बनने की दिशा में आगे बढ़ रहा है. उन्होंने पड़ोसी देशों में चले व्यवस्था-विरोधी अभियानों का उल्लेख करते हुए कहा कि इस तरह की राजनीति भारत के युवाओं के हित में नहीं है. उनका कहना था कि भारतीय युवा अनुशासन और समर्पण के साथ देश को विकसित राष्ट्र बनाने में योगदान देना चाहता है.

नितिन नवीन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘विकसित भारत 2047’ विजन का जिक्र करते हुए कहा कि पिछले 12 वर्षों में देश में व्यापक बदलाव हुए हैं. उन्होंने दावा किया कि 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी से बाहर आए हैं, 80 करोड़ लोगों को मुफ्त राशन मिल रहा है, 54 करोड़ जनधन खाते खोले गए हैं और करोड़ों परिवार विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जुड़े हैं. उन्होंने यह भी कहा कि भारत जल्द ही आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में वैश्विक केंद्र बनने जा रहा है. साथ ही महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण देने की पार्टी की प्रतिबद्धता भी दोहराई.

रांची पहुंचने पर नितिन नवीन का भव्य स्वागत किया गया. उन्होंने बिरसा मुंडा की प्रतिमा पर श्रद्धांजलि अर्पित की और पार्टी के सांसदों, विधायकों तथा कोर कमेटी के सदस्यों के साथ संगठनात्मक बैठकें भी कीं. उनका यह दौरा झारखंड में होने वाले राज्यसभा चुनावों से पहले राजनीतिक रूप से बेहद अहम माना जा रहा है.

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Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें



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‘मैं वहां मरते-मरते बचा’, विक्रम भट्ट ने जेल में बिताए 70 दिनों का अनुभव बयां किया


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फिल्ममेकर विक्रम भट्ट के उदयपुर जेल में बिताए 70 दिनों का अनुभव बयां किया है. उन्हें एक बायोपिक से जुड़े फाइनेंशियल विवाद के कारण गिरफ्तार किया गया था. जेल में विक्रम भट्ट को ‘एक्सियल स्पॉन्डिलोआर्थराइटिस’ और पीलिया जैसी गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा, जिससे वे बमुश्किल उबरे. हालांकि, मुश्किल दौर में उन्हें कैदियों और जेल स्टाफ से भरपूर सम्मान और सुरक्षा मिली, जो उन्हें प्यार से ‘भीष्म पितामह’ बुलाते थे. विक्रम की मानें, तो इस सफर ने उन्हें सिनेमा के असली दर्शकों से दोबारा जोड़ा. उन्होंने अपने खिलाफ लगे आरोपों को पूरी तरह बकवास बताया है.

नई दिल्ली: मशहूर बॉलीवुड फिल्ममेकर विक्रम भट्ट धोखाधड़ी के आरोप के चलते 70 दिन जेल में बंद रहे थे. उन्होंने जेल में बिताए खौफनाक और चौंकाने वाले अनुभवों पर खुलकर बात की. उन्हें इंदिरा आईवीएफ के फाउंडर की दिवंगत पत्नी की बायोपिक को लेकर हुए विवाद के चलते गिरफ्तार किया गया था. विक्रम ने मुश्किल घड़ी को याद करते हुए बताया कि कैसे जेल की उस सलाखों के पीछे उन्हें कुछ अजीबो-गरीब दोस्त मिले. उन्हें गंभीर बीमारियों से जूझना पड़ा और ऐसा अनुभव मिला जिसने उन्हें जमीनी हकीकत से दोबारा जोड़ दिया. (फोटो साभार: IMDb)

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विक्रम भट्ट ने सिद्धार्थ कन्नन को दिए एक इंटरव्यू में बताया कि जेल के अंदर वे कोई अकेले नहीं थे, बल्कि एक ही बैरक में उनके साथ करीब 60 से 80 कैदी बंद थे. लेकिन वहां उन्हें जो अपनापन, इज्जत और देखभाल मिली, उसने उनके होश उड़ा दिए. कैदी उन्हें ‘भीष्म पितामह’ कहकर बुलाते थे और उनका इतना ख्याल रखते थे कि उन्हें खुद का कोई काम भी नहीं करने देते थे. खाना लाने से लेकर कपड़ों तक का ध्यान वही कैदी रखते थे. (फोटो साभार: Instagram@thevikrambhatt)

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विक्रम भट्ट ने एक मजेदार किस्सा शेयर करते हुए बताया कि हर रात करीब 60-65 कैदी उनके पास इकट्ठा हो जाते थे और उनसे हॉरर स्टोरियां सुनाने की जिद करते थे. यह अपनापन सिर्फ कैदियों तक ही सीमित नहीं था, बल्कि जेल का स्टाफ और कांस्टेबल भी उनके प्रति काफी दयालु निकले. विक्रम बताते हैं कि वहां दो कैदी रात भर उनके दोनों तरफ सोते थे ताकि उन्हें कोई नुकसान न पहुंचा सके, जबकि उन्होंने उन कैदियों के लिए कभी कुछ नहीं किया था. (फोटो साभार: Instagram@khesari.lover.deepak)

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फिल्ममेकर की मानें, तो जेल यात्रा ने उन्हें उस असली भारत से दोबारा मिलने और जुड़ने का मौका दिया जिससे वे मुंबई की चकाचौंध में दूर हो गए थे. उन्होंने कहा कि आमतौर पर जिन लोगों से वे कभी नहीं मिल पाते, उनके साथ रहकर उन्हें समझ आया कि आम जनता कैसे सोचती है और हॉरर कहानियों पर उनका क्या रिएक्शन होता है. विक्रम ने माना कि बैरक में रहने वाले ये आम लोग ही असल में वो दर्शक हैं जो थिएटर में जाकर उनकी फिल्में देखते हैं. (फोटो साभार: Instagram@thevikrambhatt)

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जेल के सफर में विक्रम भट्ट मौत के मुंह से भी बाहर निकलकर आए. दरअसल, उन्हें ‘एक्सियल स्पॉन्डिलोआर्थराइटिस’ नाम की एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें जोड़ों और मांसपेशियों में भयंकर दर्द होता है. दिसंबर और जनवरी की कड़कड़ाती ठंड में जेल के फर्श पर सिर्फ एक पतली सी चटाई बिछाकर सोने से उनकी हालत बेहद खराब हो गई थी. इस दर्दनाक माहौल ने उनकी शारीरिक दिक्कतों को कई गुना बढ़ा दिया था.(फोटो साभार: Instagram@thevikrambhatt)

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हद तो तब हो गई, जब जेल के अंदर उन्हें पीलिया भी हो गया. वे ठंड के मारे रात भर कांपते थे और बैरक के दूसरे कैदी अपनी रजाई भी उन्हें उढ़ा देते थे. मेडिकल ट्रीटमेंट और अस्पताल ले जाने की उनकी बार-बार की गुहार को जेल प्रशासन सुरक्षा और गार्ड्स की कमी का बहाना बनाकर टालता रहा. जब विक्रम को समझ आ गया कि उन्हें इलाज नहीं मिलेगा, तो उन्होंने खुद ही सिर्फ उबले चने, पानी और फल खाकर सख्त डाइट से खुद को ठीक किया और भगवान पर भरोसा रखा.(फोटो साभार: IMDb)

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जेल से बाहर आने के बाद बॉलीवुड के कई बड़े सितारों ने उनसे संपर्क किया. मिथुन चक्रवर्ती और संजय दत्त जैसे दिग्गजों ने फोन करके उनका हालचाल लिया, जबकि संजय दत्त के साथ उन्होंने कभी काम भी नहीं किया था. जब उनसे अक्षय कुमार के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने साफ कहा कि अक्षय उनके दोस्त नहीं हैं तो वो क्यों फोन करेंगे. वहीं उनके बचपन के दोस्त अजय देवगन ने उन्हें तुरंत फोन किया, क्योंकि पुराना याराना था. (फोटो साभार: IMDb)

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विक्रम भट्ट और उनकी पत्नी श्वेतांबरी को दिसंबर 2025 में बायोपिक विवाद में गिरफ्तार किया गया था और फरवरी में उन्हें जमानत मिली. विक्रम ने अपने खिलाफ लगे आरोपों को पूरी तरह बकवास बताते हुए कहा कि चार्जशीट में उनके खिलाफ कुछ भी साबित नहीं हुआ है और उन्हें कोर्ट पर पूरा भरोसा है. फिलहाल, वे इन सब विवादों को पीछे छोड़कर अपनी अगली हॉरर थ्रिलर फिल्म ‘हॉन्टेड 3डी: एकोज ऑफ द पास्ट’ की रिलीज की तैयारियों में जुट गए हैं. (फोटो साभार: IMDb)

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लखनऊ विश्वविद्यालय में छात्र आंदोलन: निष्कासन के विरोध में छात्रों के साथ अयोध्या सांसद अवधेश प्रसाद ने दिया धरना – Lucknow News




लखनऊ विश्वविद्यालय में बढ़ी फीस, वित्तीय अनियमितताओं और छात्रों के निष्कासन के विरोध में लगातार पांचवें दिन आंदोलन चलता रहा। मौके पर अयोध्या से सपा सांसद अवधेश प्रसाद और पूर्व सांसद कांग्रेस नेता पीएल पुनिया भी पहुंचे। उन्होंने धरना स्थल पर छात्रों से मुलाकात कर उनकी समस्याएं सुनीं और विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा दर्ज FIR एवं निष्कासन की कार्रवाई पर गंभीर चिंता व्यक्त की। अवधेश बोले लोक तांत्रिक तरीके से बात कहना अपराध नहीं अवधेश प्रसाद ने कहा कि लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखना अपराध नहीं है। छात्रों पर दंडात्मक कार्रवाई के बजाय संवाद के माध्यम से समाधान निकाला जाना चाहिए। उन्होंने यह भी कहा कि विश्वविद्यालयों को भय का नहीं। बल्कि विचार-विमर्श और लोकतांत्रिक मूल्यों का केंद्र होना चाहिए।छात्रों द्वारा प्रस्तुत किए गए मुद्दों फीस वृद्धि, पारदर्शिता की कमी और निष्कासन पर नेताओं ने आश्वासन दिया कि इन मामलों को संबंधित उच्च स्तरों तक उठाया जाएगा। अवधेश प्रसाद ने कहा कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन छात्रों की बात नहीं सुनता है तो वे इस मुद्दे को राज्यपाल तक ले जाएंगे और आवश्यकता पड़ने पर संसद में भी उठाया जाएगा। FIR दर्ज करना गंभीर सवाल खड़े करता है उन्होंने यह भी कहा कि छात्रों को शिक्षा प्राप्त करने के लिए विश्वविद्यालय में आना चाहिए, न कि उन्हें अपराधी बनाकर प्रस्तुत किया जाए। उनके अनुसार FIR दर्ज कर छात्रों को अनावश्यक रूप से दबाव में लाया जा रहा है, जो उचित नहीं है।पूर्व सांसद पीएल पुनिया ने कहा कि जब छात्र फीस पारदर्शिता जैसे महत्वपूर्ण सवाल उठा रहे हैं। उनके जवाब देने के बजाय उन्हें निष्कासित करना और FIR दर्ज करना गंभीर प्रश्न खड़े करता है। उन्होंने कहा कि शिक्षा एक मौलिक अधिकार है और इसे सभी के लिए सुलभ एवं किफायती होना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्तमान कार्रवाई विश्वविद्यालय प्रशासन की मंशा पर सवाल उठाती है और यह सोचने पर मजबूर करती है कि कहीं शिक्षा को केवल राजस्व का साधन तो नहीं बनाया जा रहा। छात्र नेता बोले आंदोलन को समर्थन दिया पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष रमेश श्रीवास्तव ने भी आंदोलन को समर्थन दिया और धरना स्थल पर बैठकर छात्रों के साथ एकजुटता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय का दृष्टिकोण ऐसा प्रतीत होता है, जिसमें उच्च शिक्षा केवल उन्हीं के लिए सुलभ होती जा रही है जो आर्थिक रूप से सक्षम हैं, जबकि कमजोर वर्ग के छात्रों के लिए अवसर सीमित होते जा रहे हैं। यह स्थिति समान अवसर की अवधारणा के विरुद्ध है।छात्रों ने बताया कि वे लंबे समय से शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगें उठा रहे हैं, लेकिन संवाद के बजाय उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जा रही है। इस अवसर पर छात्रों का कहना है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्रवाई अन्यायपूर्ण और दमनकारी है तथा जब तक उनकी मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होती, आंदोलन शांतिपूर्ण तरीके से जारी रहेगा।



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देहदान के लिए मरणोपरांत सम्मानित हुए बेगूसराय निवासी: लोगों ने दी श्रद्धांजलि; पत्नी को सौंपा सर्टिफिकेट-स्मृति चिन्ह – Begusarai News




बेगूसराय में दधीचि देहदान समिति की राज्य एवं जिला कार्यकारिणी की ओर से पहसारा निवासी फूलेना प्रसाद सिंह के मरणोपरांत नेत्र दान और देहदान किए जाने पर प्रशस्ति पत्र और स्मृति चिन्ह दी गई है। इस अवसर पर स्वर्गीय फुलेना सिंह की पत्नी सुशीला देवी को दधिचि देहदान समिति की ओर से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही स्वर्गीय फुलेना सिंह की याद में श्रद्धांजलि अर्पित की गई। प्रदेश कमेटी के शैलेश महाजन ने उनके परिवार के कृतित्व की चर्चा करते हुए कहा कि फुलेना बाबू ने नेत्रदान और देहदान कर अमृतत्व की प्राप्ति की है। उनकी ओर से नेत्रदान किए जाने से कई लोगों की आंखों की रोशनी आ गई है। इस अवसर पर जिला कमेटी के मुख्य संरक्षक दिलीप सिंह ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि फुलेना प्रसाद सिंह एक सच्चे शिक्षक थे। जिन्होंने मृत्यु के उपरांत भी मेडिकल के छात्रों के लिए अपना देह दान कर योग्य चिकित्सक बनाने का काम किया है। ऐसे समाज से ही देश और अपना समाज विकास के रास्ते पर आगे बढ़ता है। नाम इतिहास के पन्नों में अमर हुआ श्रद्धांजलि सभा में जिलाध्यक्ष सुशील राय और सचिव निरंजन कुमार सिन्हा ने श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि जिला में फुलेना बाबू ऐसे दूसरे व्यक्ति हैं, जिन्होंने अपना देहदान किया है। इनका नाम इतिहास के पन्नों में अमर हो गया है। जिला में जब कभी भी देहदान की चर्चा होगा, फुलेना प्रसाद सिंह के नाम बिना अधूरा रहेगा। कार्यक्रम को इंद्रजीत राय औरनीरज कुमार ने भी संबोधित किया। मौके पर मृतक की पत्नी सुशीला देवी, बेटा पंकज कुमार, अंकुर कुमार, पुत्रवधु डॉक्टर सगीता राजन, मौसम कुमारी, देवेंद्र सिंह, नूतन कुमारी, संगम कुमारी, पूनम कुमारी, पौत्र अंकुर कुमार, सूरज, शिवेश रंजन, शिवम वत्स, भोला, प्रमोद, गणेश और रंजन आदि उपस्थित थे।



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कमजोर हड्डियों को मजबूत बनाएगा देहरादून का यह स्पेशल पहाड़ी मटन पाया


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Dehradun Mutton Kharoda: देहरादून के राजपुर रोड पर मिलने वाले मशहूर ‘मटन खरोड़ा’ (मटन पाया) का स्वाद नॉन-वेज लवर्स का दिल जीत रहा है. यहां घंटाघर के पास पिछले 35 सालों से राजू अपने ठेले पर इस पारंपरिक पहाड़ी डिश को घरेलू मसालों के साथ धीमी आंच पर घंटों उबालकर तैयार करते हैं. इसका ज़ायका इतना लाजवाब है कि मसूरी जाने वाले पर्यटक भी यहां खिंचे चले आते हैं. स्वाद के साथ-साथ यह सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद है. डॉक्टर भी कमजोर हड्डियों को मजबूत बनाने के लिए इसे खाने की सलाह देते हैं. मात्र 150 रुपये में आप भी इस बेहतरीन पहाड़ी स्वाद का आनंद ले सकते हैं.

Dehradun Mutton Kharoda: पहाड़ों की ठंडी हवाएं, हसीन वादियां और हाथ में गरमा-गरम, मसालेदार नॉन-वेज का कटोरा… अगर आप देहरादून घूमने आए हैं और खाने-पीने के शौकीन हैं तो यह कॉम्बिनेशन आपका दिल जीत लेगा. वैसे तो देहरादून में बेकरी और कैफे कल्चर काफी मशहूर है, लेकिन अगर आप यहां के असली पहाड़ी और देसी स्वाद से रूबरू होना चाहते हैं तो आपको यहाँ का ‘मटन खरोड़ा’ (मटन पाया) जरूर ट्राई करना चाहिए. यह कोई आम मटन करी नहीं है, बल्कि इसे बकरे के पायों को बेहद खास मसालों के साथ घंटों उबालकर तैयार किया जाता है. इसके बाद इसे पहाड़ी मसालों से तैयार करके गरमा-गरम परोसा जाता है. नॉन-वेज लवर्स के लिए यह बेहद अलग और लाजवाब स्वाद है.

35 साल पुराना है राजू के पहाड़ी स्वाद का यह सफर
राजपुर रोड पर घंटाघर से थोड़ी ही दूरी पर शाम 5 बजते ही राजू अपने ठेले पर यह पहाड़ी स्टाइल में तैयार की गई स्पेशल डिश लोगों को खिलाते हैं. राजू ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि वह पिछले 35 सालों से इस काम में लगे हुए हैं. इससे पहले उनके पिता ठेले पर पहाड़ी डिश परोसते थे, जिसमें ज्यादातर चिकन और मटन की डिशेज होती थीं. उन्होंने कहा कि बचपन से ही वह अपने पिता के साथ लगकर काम करते थे, जिससे उनके टेस्ट के फॉर्मूले को उन्होंने भी सीख लिया.

मसूरी जाने वाले पर्यटक भी लेते हैं मटन पाए का स्वाद
राजू ने कहा कि वैसे तो यह एक पहाड़ी डिश है, लेकिन मैदानी इलाकों के लोग भी इसे बेहद खुश होकर खाते हैं. उन्होंने बताया कि जो लोग देहरादून घूमने के लिए आते हैं, वे मसूरी जाते हुए उनके ठेले पर जरूर रुकते हैं और इसे एक बार ट्राई करते हैं. राजू बताते हैं कि मसूरी से भी कई ग्राहक उनके पास सिर्फ इस मटन पाए का स्वाद लेने के लिए आते हैं. इसमें अच्छा फ्लेवर देने के लिए वह अपने घर के पिसे हुए मसाले ही इस्तेमाल करते हैं. उन्होंने यह भी बताया कि वह चिकन और अंडा करी भी तैयार करते हैं. कई लोग मटन सूप के साथ उबले अंडे खाना भी पसंद करते हैं.

हड्डियों को मजबूत करता है मटन खरोड़ा, डॉक्टर भी देते हैं सलाह
वहीं, दुकान पर आए नियमित ग्राहक राजेश कुमार ने बताया कि वह पिछले 20 से 25 सालों से यहां मटन खरोड़ा खाने के लिए आ रहे हैं. उन्होंने कहा कि यह डिश इसलिए अलग और खास होती है क्योंकि डॉक्टर उन लोगों को इसे खाने की सलाह देते हैं जिनकी हड्डियां कमजोर होती हैं. उन्होंने आगे बताया कि इसे भट्टी पर धीमी आंच पर पकाया जाता है; इसे जितनी देर तक पकाया जाता है, इसका स्वाद उतना ही ज्यादा बढ़ जाता है. उन्होंने कहा कि यह महंगा भी इसीलिए मिलता है क्योंकि कच्चे माल (पायों) की कीमत भी बहुत ज्यादा है और फिर मसाले लगाकर इसे तैयार करना बेहद मेहनत का काम है. अगर आप भी इस बेहतरीन स्वाद का लुत्फ उठाना चाहते हैं, तो मात्र 150 रुपये प्रति प्लेट में इसका स्वाद ले सकते हैं.

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Rahul Goel

राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें



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सागर में पिता ने की थी बेटे की हत्या, गिरफ्तार: शराब के नशे में आए दिन विवाद करता था बेटा, घर के बाहर पड़ा मिला था शव – Sagar News




सागर के बिलहरा चौकी पुलिस ने हत्या के मामले में शनिवार को आरोपी को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपी मृतक का पिता है। मृतक बेटे आए दिन शराब के नशे में विवाद करता था। इसी विवाद में मारपीट कर पिता ने अपने ही बेटे की हत्या कर दी थी। पूछताछ में आरोपी ने अपना अपराध स्वीकार कर लिया। पुलिस के अनुसार, 4 जून को फरियादी जमना पिता नन्ना अहिरवार उम्र 55 वर्ष निवासी खिरका मोहल्ला बिलहरा ने पुलिस चौकी में सूचना दी थी कि उसका बड़ा बेटे सोनू अहिरवार उम्र 25 वर्ष घर के आंगन में बनी ढलान पर मृत अवस्था में पड़ा है। उसके सिर और माथे से खून निकल रहा है। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। शव का पंचनामा बनाकर जांच शुरू की। शव का पोस्टमार्टम कराया गया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और प्रारंभिक जांच में हत्या की पुष्टि हुई। जिस पर आधार पर हत्या का मामला दर्ज कर आरोपी की तलाश शुरू की गई। जांच करते हुए आरोपी पिता जमना अहिरवार को हिरासत में लिया गया। कपड़ा धोने की मोगरी से मारपीट कर हत्या की थी
पूछताछ में आरोपी ने बताया कि उसका बेटा सोनू अहिरवार आए दिन शराब के नशे में घर आता था और परिवार के सदस्यों के साथ गाली-गलौज व मारपीट करता था। बेटे की इन हरकतों से वह लंबे समय से परेशान था। इसी बात से परेशान होकर 3 जून की रात कपड़े धोने की मोंगरी (लकड़ी के डंडे) से वार कर बेटे की हत्या कर दी। बिलहरा चौकी प्रभारी सत्यव्रत धाकड़ ने बताया कि हत्या के मामले में पिता को गिरफ्तार किया है। बेटा आए दिन शराब के नशे में विवाद करता था। इस बात को लेकर पिता परेशान था। इसी के चलते उसने बेटे की हत्या कर दी। आरोपी को गिरफ्तार कर पूछताछ की गई। पूछताछ के बाद आरोपी को कोर्ट में पेश किया है।



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देश के लिए योगदान देने का अवसर हम सबके पास: दिल्ली सीएम रेखा बोलीं- 140 करोड़ का देश तभी आगे बढ़ेगा, जब हर युवा एक कदम आगे बढ़ाएगा – New Delhi News




नई दिल्ली। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता शनिवार को त्यागराज स्टेडियम में युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अंतर्गत आयोजित विकसित भारत के लिए युवा भारत सम्मेलन’ कार्यक्रम में शामिल हुईं। देशभर से आए 6 हजार से अधिक युवाओं की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम में केंद्रीय युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया, युवा मामलों की सचिव डॉ. पल्लवी जैन गोविल सहित विभिन्न क्षेत्रों की प्रतिष्ठित हस्तियों की उपस्थिति में सीएम ने युवा उद्यमियों, खिलाड़ियों, कलाकारों, कंटेंट क्रिएटर्स, यूपीएससी अभ्यर्थियों और विभिन्न क्षेत्रों में उत्कृष्ट उपलब्धियां हासिल करने वाले युवाओं को संबोधित किया। उन्होंने इस मौके पर कहा कि आज का यह मंच वास्तव में भारत की युवा शक्ति का उत्सव है। सीएम ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा विभिन्न क्षेत्रों के इतने प्रतिभाशाली युवा और प्रेरणास्रोत व्यक्तित्वों की उपस्थिति इस आयोजन को वास्तव में ‘तारे जमीं पर’ जैसा स्वरूप देती है। जब एक ही मंच पर युवा उद्यमी, खिलाड़ी, कलाकार, जनप्रतिनिधि, कंटेंट क्रिएटर्स और यूपीएससी जैसी कठिन परीक्षाओं में सफलता प्राप्त करने वाले युवा उपस्थित हों तो यह भारत की विविध प्रतिभा और असीम क्षमता का सशक्त प्रतिबिंब बन जाता है। सीएम ने केंद्रीय मंत्री डॉ. मनसुख मांडविया को इस अभिनव पहल के लिए बधाई देते हुए कहा मेरा भारत युवा सम्मेलन युवाओं को सम्मानित करने के साथ-साथ उन्हें राष्ट्र निर्माण के लिए प्रेरित करने का एक महत्वपूर्ण मंच बनकर उभरा है। युवा देश की जिम्मेदारी उठाने के लिए पूरी तरह तैयार समारोह में सीएम ने कहा आज का कार्यक्रम इस बात का प्रमाण है कि भारत का युवा देश की जिम्मेदारी उठाने के लिए पूरी तरह तैयार है। दुनिया के सबसे युवा देशों में से एक भारत की सबसे बड़ी शक्ति उसकी युवा आबादी है, जो मेहनती, दूरदर्शी, रचनात्मक और साहसी है। किसी भी क्षेत्र में सफलता के पीछे अथक परिश्रम, अनुशासन और समर्पण होता है। यही समर्पण भारत को विकसित राष्ट्र बनाने की दिशा में आगे बढ़ा रहा है। सीएम ने युवाओं से आह्वान करते हुए कहा अगर देश का प्रत्येक युवा एक कदम आगे बढ़ाता है, तो 140 करोड़ भारतीयों का देश भी उसी गति से आगे बढ़ता है।



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बूंदी के तालाब में दिखा मगरमच्छ: आबादी क्षेत्र के पास होने से ग्रामीणों में दहशत, विभाग नहीं पहुंचा – Bundi News




बूंदी के देईखेड़ा कस्बे में एक तालाब में मगरमच्छ दिखने से ग्रामीणों में दहशत फैल गई है। यह तालाब आबादी क्षेत्र के करीब है, जिससे लोगों और मवेशियों की सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। ग्रामीणों, जिनमें हनुमान गुर्जर, अजय मीणा और गौरव सैनी शामिल हैं, के अनुसार, पिछले कुछ दिनों से तालाब में मगरमच्छ देखा जा रहा है। प्रतिदिन बड़ी संख्या में ग्रामीण और मवेशी इस तालाब पर पानी पीने आते हैं, जिससे किसी भी समय दुर्घटना होने का खतरा बना हुआ है। मगरमच्छ की मौजूदगी के कारण ग्रामीणों ने बच्चों को तालाब के आसपास जाने से रोक दिया है। ग्रामीणों का आरोप है कि वन विभाग को इस मामले की सूचना दी जा चुकी है। हालांकि, अब तक मगरमच्छ को पकड़ने या उसे सुरक्षित स्थान पर ले जाने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की गई है। इससे विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर लोगों में नाराजगी है। ग्रामीणों ने स्थानीय पंचायत प्रशासन और वन विभाग से जल्द कार्रवाई कर मगरमच्छ को पकड़कर सुरक्षित स्थान पर छोड़ने की मांग की है। उनका कहना है कि इससे संभावित दुर्घटनाओं से बचा जा सकेगा और लोगों में व्याप्त भय का माहौल खत्म होगा। कंटेंट: दिनेश व्यास, देईखेड़ा



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कैप्टन अमरिंदर सिंह की कांग्रेस में वापसी की अटकलें तेज, पंजाब में मचेगा गदर?


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Punjab Politics: पंजाब चुनाव से पहले पूर्व सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह की वापसी की फाइल दिल्ली दरबार में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के टेबल पर पहुंचने की खबर है. पंजाब से कांग्रेस सांसद अमर सिंह ने इस पर बड़ा बयान देते हुए कहा है कि कैप्टन एक बेहद सीनियर नेता हैं और उनकी वापसी पर अंतिम फैसला सीधे हाईकमान ही करेगा. अगर कैप्टन की कांग्रेस में वापसी होती है, क्या पंजाब चुनाव के समीकरण पूरी तरह बदल जाएंगे?

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चंडीगढ़. पंजाब की सियासत इस समय एक बेहद दिलचस्प और चौंकाने वाले मोड़ पर खड़ी नजर आ रही है. शिरोमणि अकाली दल के भीतर मचे घमासान और भारतीय जनता पार्टी के जमीनी संघर्ष के बीच, राज्य के पूर्व मुख्यमंत्री और पटियाला के महाराजा कैप्टन अमरिंदर सिंह की एक बार फिर कांग्रेस में वापसी की अटकलें तेज हो गई हैं. दिल्ली से लेकर चंडीगढ़ तक के राजनीतिक गलियारों में इस बात की पुरजोर चर्चा है कि पंजाब की राजनीति के सबसे कद्दावर चेहरों में से एक रहे कैप्टन अमरिंदर सिंह अपनी पुरानी पार्टी का हाथ थाम सकते हैं. हालांकि, इस खबर के बीच शनिवार को कैप्टन अमरिंदर सिंह और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की मुलाकात हुई है. कैप्टन सिंह लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस से इस्तीफा देकर बीजेपी में शामिल हुए थे. इस पूरे घटनाक्रम पर कांग्रेस के लोकसभा सांसद अमर सिंह के एक बयान ने इन अटकलों को और अधिक हवा दे दी है.

चंडीगढ़ में पत्रकारों से बात करते हुए कांग्रेस सांसद अमर सिंह ने कैप्टन अमरिंदर सिंह की वापसी की संभावना पर बेहद सधा हुआ और गंभीर बयान दिया. उन्होंने कहा, “कैप्टन अमरिंदर सिंह एक बेहद वरिष्ठ नेता हैं. उन्होंने लंबे समय तक पंजाब के मुख्यमंत्री के रूप में राज्य की सेवा की है और पार्टी सहित सरकार में कई बड़ी जिम्मेदारियां संभाली हैं. हम उनके सामने काफी जूनियर हैं. इसलिए, अगर उनकी वापसी या इस विषय पर किसी भी तरह की चर्चा की आवश्यकता है, तो उसे सीधे हमारा शीर्ष नेतृत्व ही हैंडल करेगा.” सांसद अमर सिंह का यह बयान साफ इशारा करता है कि कैप्टन की वापसी की फाइल अब सीधे दिल्ली दरबार में राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के टेबल पर पहुंच चुकी है.

पंजाब विधानसभा चुनाव पर क्या पड़ेगा असर?

अगर कैप्टन अमरिंदर सिंह की कांग्रेस में वापसी औपचारिक रूप से हो जाती है, तो आगामी पंजाब विधानसभा चुनाव की पूरी बिसात ही बदल जाएगी. साल 2022 के चुनाव से ठीक पहले जिस तरह अपमानजनक ढंग से कैप्टन को मुख्यमंत्री पद से हटाया गया था और उसके बाद कांग्रेस ताश के पत्तों की तरह बिखर गई थी, उस गलती को सुधारने का मौका अब पार्टी के पास होगा.

हिंदू और सिख वोट बैंक का अनूठा समन्वय

कैप्टन अमरिंदर सिंह पंजाब के इकलौते ऐसे नेता माने जाते हैं जिनकी पकड़ सिखों के साथ-साथ राज्य के शहरी हिंदू मतदाताओं पर भी समान रूप से मजबूत है.

जमीनी कैडर में नया जोश: नवजोत सिंह सिद्धू और अन्य प्रांतीय नेताओं की आपसी कलह के कारण जो पारंपरिक कांग्रेस कार्यकर्ता आज घर बैठा है या उदासीन है, कैप्टन का नाम सामने आते ही वह दोबारा सड़कों पर सक्रिय हो जाएगा.

राष्ट्रवाद और पंजाब की सुरक्षा का नैरेटिव: सीमावर्ती राज्य होने के नाते पंजाब में सुरक्षा एक बहुत बड़ा मुद्दा है. कैप्टन की फौजी पृष्ठभूमि और राष्ट्रवाद की मुखर छवि कांग्रेस को अकाली दल और भाजपा के मुकाबले एक मजबूत बढ़त दिलाएगी.





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जोधपुर रेलवे स्टेशन का ‘वात्सल्य कक्ष’ बना माताओं के लिए सुविधाजनक स्थान


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Breastfeeding Room Jodhpur: जोधपुर रेलवे स्टेशन पर महिला यात्रियों और नवजात शिशुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ‘वात्सल्य कक्ष’ की शुरुआत की गई है. इस विशेष कक्ष का उद्देश्य माताओं को शिशुओं को स्तनपान कराने के लिए सुरक्षित, आरामदायक और गोपनीय वातावरण उपलब्ध कराना है. रेलवे स्टेशन जैसे व्यस्त सार्वजनिक स्थानों पर अक्सर माताओं को शिशु देखभाल और स्तनपान के दौरान असुविधा का सामना करना पड़ता है. नई सुविधा के शुरू होने से वे बिना किसी झिझक और परेशानी के अपने बच्चों की देखभाल कर सकेंगी. वात्सल्य कक्ष में बैठने की व्यवस्था, स्वच्छ वातावरण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे माताओं और शिशुओं दोनों को आराम मिलेगा. भारतीय रेलवे द्वारा यात्री सुविधाओं के विस्तार की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है.

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जोधपुर: जोधपुर रेलवे स्टेशन पर महिला यात्रियों और नवजात शिशुओं के साथ सफर करने वाले परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण सुविधा शुरू की गई है. प्लेटफॉर्म संख्या-1 स्थित एसी वेटिंग रूम में विशेष रूप से बेबी फीडिंग रूम यानी वात्सल्य कक्ष तैयार किया गया है. इसका उद्देश्य माताओं को ऐसा स्थान उपलब्ध कराना है, जहां वे यात्रा के दौरान अपने शिशुओं की देखभाल सहजता और आरामदायक माहौल में कर सकें. रेलवे प्रशासन का यह कदम महिला यात्रियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है. नवजात शिशुओं के साथ यात्रा करने वाली माताओं को अक्सर भीड़भाड़ वाले प्लेटफॉर्म और प्रतीक्षालय में असुविधा का सामना करना पड़ता है. इसी आवश्यकता को समझते हुए वात्सल्य कक्ष में ऐसा वातावरण तैयार किया गया है.

जहां माताएं पूरी निजता के साथ शिशुओं को स्तनपान करा सकें. कक्ष में स्वच्छता और आराम से जुड़ी आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों पर होने वाली झिझक और असहजता से राहत मिलेगी. यह सुविधा यात्रा को अधिक सम्मानजनक और सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक सकारात्मक पहल मानी जा रही है.

यात्री सुविधाओं के विस्तार की दिशा में कदम
जोधपुर मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक हितेश यादव के अनुसार, रेलवे लगातार यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत है. स्टेशन पर आधुनिक सुविधाओं को बढ़ाने के साथ-साथ विभिन्न वर्गों की जरूरतों के अनुरूप व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं. वात्सल्य कक्ष की शुरुआत भी इसी सोच का हिस्सा है, ताकि महिलाओं और छोटे बच्चों के साथ सफर करने वाले परिवारों को बेहतर अनुभव मिल सके. इससे स्टेशन पर उपलब्ध सुविधाओं का दायरा और अधिक व्यापक हुआ है.

महिला यात्रियों के लिए राहतभरी पहल
रेल यात्रा के दौरान बच्चों की देखभाल माताओं के लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है. ऐसे में स्टेशन परिसर में उपलब्ध यह विशेष कक्ष उन्हें मानसिक सुकून और सुविधा दोनों प्रदान करेगा. इससे न केवल महिलाओं को बेहतर माहौल मिलेगा, बल्कि शिशुओं की देखभाल भी अधिक सहज तरीके से हो सकेगी. रेलवे को उम्मीद है कि यह सुविधा महिला यात्रियों के बीच काफी उपयोगी साबित होगी और भविष्य में अन्य स्टेशनों पर भी ऐसी व्यवस्थाओं को बढ़ावा देने की दिशा में प्रेरणा बनेगी.

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Jagriti Dubey

Hi, I am Jagriti Dubey, a media professional with 6 years of experience in social media and content creation. I started my career with an internship at Gbn 24 news channel in 2019 and have worked with many repu…और पढ़ें



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