Wednesday, June 3, 2026
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लखनऊ में झोलाछाप के इलाज से मासूम की मौत: बुखार की शिकायत पर मेडिकल स्टोर ले गए थे परिजन, इंजेक्शन लगते ही अचानक बिगड़ी तबीयत – Lucknow News




लखनऊ के फैजुल्लागंज स्थित पुराना दाऊदनगर निवासी छह साल की मासूम सौम्या विश्वकर्मा की इंजेक्शन लगने के बाद मौत हो गई। परिवारीजनों का आरोप है कि इलाके के झोलाछाप डॉक्टर की दवा से बच्ची की हालत बिगड़ी थी। नाराज परिवारीजनों ने क्लीनिक के बाहर हंगामा किया। पुलिस ने शव का पोस्टमार्टम कराया। ये था पूरा मामला
पुराना दाऊदनगर निवासी अनूप विश्वकर्मा पुताई मजदूर है। जबकि पत्नी गुड़िया गृहणी हैं। 10 साल का बेटा शिवम कक्षा छह का छात्र है। मामा कौशल ने बताया भांजी सौम्या को बीते कुछ दिनों से बुखार आ रहा था। सोमवार सुबह बुखार तेज हो गया। मां गुड़िया बच्ची को लेकर घर के नजदीक मेडिकल स्टोर पहुंची। मेडिकल स्टोर का संचालन खुद को डॉक्टर बताता था। उसने बच्ची की सेहत की जांच की। एक इंजेक्शन लगाया। तीन खुराक दवा दी। फीस के नाम पर 100 रुपये वसूले। शरीर पड़ गया था नीला
घर पहुंचने के बाद मां ने बेटी को एक खुराक दवा खिलाई। कुछ समय बाद बेटी की तबीयत बिगड़ने लगी। उसका शरीर नीला पड़ने लगा। शरीर पर चक्कते पड़ने लगे। पेट में भीषण दर्द होने लगा। आनन-फानन परिवारीजन बच्चे को लेकर दूसरे अस्पताल पहुंचे। जहां कुछ देर बाद सौम्या की मौत हो गई। क्लीनिक बंद कर फरार हुआ झोलाछाप
पिता ने मेडिकल स्टोर संचालक पर गलत इंजेक्शन लगाने का आरोप लगाया। उन्होंने बताया कि झोलाछाप के गलत इलाज से बेटी की सांसें थमी। नाराज परिवारीजन शव लेकर मेडिकल स्टोर पहुंचे। हंगामा शुरू कर दिया। माहौल बिगड़ता देख झोलाछाप मेडिकल स्टोर बंद कर फरार हो गया। हंगामे की सूचना पर पहुंची पुलिस ने किसी तरह परिवारीजनों को समझाया। इंसाफ का भरोसा दिलाया। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। परिवारीजनों का आरोप है कि झोलाछाप हर प्रकार की बीमारी का इलाज करता था। स्थानीय लोगों ने बताया कि झोलाछाप मेडिकल स्टोर का संचालन करता था। उसमें मरीजों को इलाज मुहैया कराता था। स्टोर में बैठने के दौरान झोलाछाप के गले में हमेशा आला पड़ा रहता था। ताकि लोग उसे डॉक्टर समझे। इलाज कराएं। वह सभी को हमेशा खुद को डॉक्टर बताता था। डिग्री पूछने पर चुप्पी साध लेता था।



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5 दिन बाद कब्र से निकाला बच्ची का शव: इंदौर के निजी क्लिनिक में 5 ड्रिप के बाद गई थी जान; डॉक्टर पर लापरवाही के आरोप – Indore News




जिस घर में कुछ दिन पहले तक दो साल की काशवी की किलकारियां गूंजती थीं, वहां अब सन्नाटा पसरा है। मासूम की संदिग्ध परिस्थितियों में हुई मौत ने पूरे परिवार को झकझोर कर रख दिया है। परिजनों का आरोप है कि एक निजी क्लिनिक में हुए गलत इलाज के कारण उनकी बेटी की जान चली गई। मामले की सच्चाई जानने के लिए मौत के 5 दिन बाद प्रशासन की अनुमति से मंगलवार को बच्ची का शव श्मशान घाट से निकालकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है। मामला बालदा कॉलोनी निवासी नितिन यादव की दो वर्षीय बेटी काशवी का है। उसे 27 मई को हल्के उल्टी-दस्त की शिकायत हुई थी। उन्होंने उसे भोलाराम उस्ताद मार्ग स्थित ‘द हेल्थ केयर क्लिनिक’ पर दिखाया। 28 मई को काशवी की मौत हो गई थी। ड्रिप लगाई फिर हालत बिगड़ने लगी आरोप है कि क्लिनिक पर डॉ. अनिल घई ने उसे देखा और ड्रिप लगवाई थी। पहले चार बोतल ड्रिप लगाई। इसके बाद उसे एक उल्टी हुई। परिजन का आरोप है कि डॉ. घई ने कहा कि अभी उसे एक डोज और दिया जाना है। इसके बाद उसे फिर ड्रिप लगाई गई। फिर कुछ समय बाद ही उसकी हालत बिगड़ने लगी। उसकी हार्ट बीट तेज हो गई। परिजन ने बात की तो डॉक्टर ने विश्वास दिलाया कि वह ठीक हो जाएगी। इसके बाद जब हालत और बिगड़ी तो डॉक्टर ने परिजन को कहा कि ड्रिप पूरी हो चुकी है। इसे घर ले जाओ, ठीक हो जाएगी। इसके बाद परिजन उसे रात को घर ले आए। फिर रात को उसके हाथ-पैर और होंठ नीले पड़ गए तो परिजन सुबह उसे एक प्राइवेट हॉस्पिटल ले गए। वहां डॉक्टरों ने उसकी हालत देखी तो सरकारी चाचा नेहरू बाल चिकित्सालय ले गए। यहां उसकी गंभीर हालत देख उसे वेंटिलेटर पर रखा गया, लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद उसकी जान नहीं बचाई जा सकी। घटना के बाद सदमे में मां निशा तो बदहवास हो गई। परिजन ने मांग की तो पीएम की अनुमति मिली मामले में परिजन को शुरू से ही डॉ. घई द्वारा किए गए इलाज को लेकर शक है। उन्होंने भंवरकुआ पुलिस को शिकायत की तो पुलिस ने कहा कि जब तक पोस्टमॉर्टम नहीं होगा तब तक मौत का कारण स्पष्ट नहीं होगा। इसके बाद परिजन ने एसडीएम से अनुमति ली। मंगलवार दोपहर को पुलिस की मौजूदगी में पचकुइया शमशान से मासूम का शव कब्र से निकाला गया और उसे पोस्टमॉर्टम के लिए एमवाय अस्पताल भेजा। शाम को काशवी का पोस्टमॉर्टम के बाद परिजन ने उसका अंतिम संस्कार किया और फूट पड़े। मां की आंखों से नहीं थम रहे आंसू मासूम की मौत के बाद मां निशा की हालत बेहद खराब है। परिवार के सदस्य बताते हैं कि बेटी को खोने का दर्द पूरे परिवार को भीतर तक तोड़ गया है। एक माह पहले ही परिवार ने उसका जन्मदिन मनाया थाथ काशवी की तस्वीरें और उसकी छोटी-छोटी यादें अब घरवालों की आंखें नम कर देती हैं। मेरी बेटी तो चली गई, किसी और बच्चे के साथ ऐसा न हो पोस्टमॉर्टम के बाद अंतिम संस्कार के दौरान पिता नितिन यादव भावुक हो उठे। उन्होंने कहा मेरी बेटी अब वापस नहीं आ सकती, लेकिन मैं चाहता हूं कि किसी और परिवार को यह दर्द न झेलना पड़े। यदि किसी की लापरवाही से मेरी बच्ची की जान गई है तो सच सामने आना चाहिए और दोषियों को सजा मिलनी चाहिए। पिता का कहना है कि इलाज से संबंधित दस्तावेज, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों की निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए, ताकि पूरे घटनाक्रम की सच्चाई सामने आ सके। 5 डॉक्टरों की स्पेशल टीम किया पोस्टमॉर्टम भंवरकुआं पुलिस के अनुसार परिजनों की शिकायत के बाद एसडीएम की अनुमति से बच्ची का शव निकालकर पोस्टमॉर्टम कराया गया है। पीएम 5 डॉक्टरों की स्पेशल टीम ने किया है। जांच अधिकारी एएसआई दिवेश कलेश ने बताया कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट और अन्य साक्ष्यों के आधार पर ही मौत के वास्तविक कारणों का पता चल सकेगा। फिलहाल मामले की जांच जारी है। मामले में अब अस्पतालों से भी दस्तावेज मांगे गए हैं। वहीं आरोपों से घिरे डॉक्टर घई से भास्कर ने बातचीत करने की कोशिश की लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।



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ईरान-अमेरिका तनाव का असर अलवर की मंडी तक, सरसों ने पकड़ी रफ्तार, 9000 रुपये क्विंटल पहुंचने की उम्मीद


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ईरान-अमेरिका तनाव का असर अलवर की मंडी तक, सरसों ने पकड़ी रफ्तार

 

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अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बढ़ते तनाव का असर अब राजस्थान की कृषि मंडियों में भी साफ दिखाई देने लगा है. अलवर और खैरथल-तिजारा की अनाज मंडियों में सरसों के भाव लगातार नई ऊंचाइयों को छू रहे हैं. मंडी में सरसों के दाम दो महीने में करीब 1700 रुपये प्रति क्विंटल तक बढ़ चुके हैं और कई जगह 7900 रुपये प्रति क्विंटल तक कारोबार हो रहा है. व्यापारियों का मानना है कि यदि वैश्विक परिस्थितियां इसी तरह बनी रहीं तो सरसों 9000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच सकती है.

किसानों का कहना है कि लंबे समय बाद उन्हें अपनी उपज के अच्छे दाम मिल रहे हैं, जिससे उत्पादन लागत निकलने के साथ बेहतर मुनाफा भी हो रहा है. मंडियों में बड़ी मात्रा में सरसों की आवक हो रही है, जबकि जिन किसानों ने अपनी फसल घरों में स्टॉक कर रखी थी, वे भी अब ऊंचे भाव का लाभ लेने के लिए बाजार पहुंच रहे हैं. आखिर क्यों बढ़ रहे हैं सरसों के दाम, किसानों को कितना फायदा हो रहा है और आगे बाजार का क्या रहेगा रुख. देखिए अलवर और खैरथल-तिजारा मंडियों से यह खास रिपोर्ट.

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थार की टक्कर से ओला-उबर बाइक चालक की मौत: महात्मा-गांधी के एमबीबीएस स्टूडेंट ने गाड़ी से 150 मीटर तक घसीटा; परिजनों ने पोस्टमार्टम पर उठाए सवाल – Jaipur News




जयपुर के जगतपुरा क्षेत्र में मंगलवार देर रात करीब डेढ़ से 2 बजे के बीच एक दर्दनाक सड़क हादसे में 28 वर्षीय राकेश मीणा की मौत हो गई। मौके पर मौजूद लोगों का आरोप है कि तेज रफ्तार थार ने ओला-उबर बाइक चालक को टक्कर मारने के बाद करीब 150 मीटर तक घसीटा। हादसे के बाद लोगों ने चालक पर शराब के नशे में वाहन चलाने का आरोप लगाते हुए निष्पक्ष जांच और गिरफ्तारी की मांग की है। दौसा निवासी राकेश मीणा अपने परिवार के साथ जगतपुरा स्थित आरती नगर में रह रहा था और देर रात कुंभा मार्ग से बॉम्बे हॉस्पिटल की ओर जा रहा था। इसी दौरान अक्षयपात्र चौराहे के पास तेज गति से आई थार ने उसकी बाइक को टक्कर मार दी। हादसे में गंभीर रूप से घायल राकेश को महात्मा गांधी अस्पताल ले जाया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने पकड़े आरोपी हादसे के समय दूसरी ओर से गुजर रहे अमर सिंह और सूर्यांश तंवर ने पीछा कर थार सवार युवकों को रोक लिया। दोनों का आरोप है कि वाहन में सवार तीन युवक नशे में थे और गाड़ी में बीयर की बोतलें तथा केन रखी हुई थीं। एमबीबीएस छात्र पर आरोप परिजनों और मददगार युवकों का आरोप है कि थार चला रहा युवक महात्मा गांधी अस्पताल का एमबीबीएस छात्र है। वहीं शिवदासपुरा थाना प्रभारी मनोहर ने भी बताया कि प्रारंभिक जानकारी के अनुसार वाहन चला रहा युवक एमबीबीएस का छात्र है। अस्पताल में हंगामे का आरोप हादसे के बाद करीब आठ अन्य लोग भी महात्मा गांधी अस्पताल पहुंचे। उनका आरोप है कि अस्पताल में आरोपी पक्ष और उनके साथियों ने गाली-गलौज और हाथापाई की। स्थिति बिगड़ने पर पुलिस को मौके पर पहुंचना पड़ा। पांच दिन पहले ही परिवार के साथ आया था जयपुर मृतक राकेश मीणा मूल रूप से दौसा जिले का रहने वाला था। वह कुछ समय से ब्यावर में रहकर परिवार का भरण-पोषण कर रहा था और मात्र पांच दिन पहले ही पत्नी और दो बेटों के साथ जयपुर शिफ्ट हुआ था। राकेश के दो पुत्र हैं—आठ वर्षीय दक्ष और चार वर्षीय कृष्णा। पोस्टमार्टम पर उठाए सवाल राकेश की बड़ी बहन ज्योति मीणा ने आरोप लगाया कि पोस्टमार्टम से पहले शव के साथ छेड़छाड़ की गई। उनका दावा है कि जेएनयू अस्पताल में पोस्टमार्टम के दौरान परिजनों ने सिर पर कट और अन्य निशान देखे, जिन्हें लेकर परिवार ने संदेह जताया है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि हादसे की सूचना परिजनों को देर से दी गई और शव की स्थिति के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं दी गई। पिता बोले—न्याय नहीं मिला तो होगा घेराव मृतक के पिता मुरलीधर मीणा ने कहा कि यदि मामले में निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई और दोषियों की गिरफ्तारी नहीं हुई तो परिवार पुलिस थाने और अस्पताल का घेराव करेगा। उन्होंने प्रशासन से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच की मांग की है। पुलिस जांच जारी रामनगरिया थानाधिकारी चंद्रभान ने बताया कि मृतक के पिता की रिपोर्ट पर मामला दर्ज कर लिया गया है। पुलिस ने हादसे में शामिल थार वाहन को जब्त कर लिया है। हालांकि उन्होंने जानकारी दी कि मामले में आरोपियों की गिरफ्तारी नहीं हुई थी। पुलिस मामले की जांच कर रही है। हालांकि जहां हादसे के बाद महात्मा गांधी हॉस्पिट में दो थानों की पुलिस पहुंचने के बाद भी आरोपियों तक पुलिस शिकंजा नहीं कस पाई। ऐसे आरोपी के वीडियो दैनिक भास्कर के पास है जो खुद वीडियो में अपना जुर्म कबुल रहा है। लेकिन खुद की लापरवाही का ठिकरा मौजूद लोगों पर फोड़ते हुए बचने के प्रयास में आरोपी कहता नजर आ रहा है कि मैंने घायल को सीपीआर देते हुए हॉस्पिटल तक लेकर आया। हालांकि लापरवाही से तेज रफ्तार के कारण युवक की जिंदगी छिनने का पश्चाताप नहीं दिखा।



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अजय देवगन की 2 फिल्में, कुमार सानू-उदित नारायण के BLOCKBUSTER गाने, रचा इतिहास


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Superhit Movies with Same Story : फिल्में अलग-अलग लेकिन पैटर्न और कहानी एक जैसी हो तो सिने प्रेमियों को हैरानी तो होती ही है. बॉलीवुड में सुपरहिट फिल्मों की कहानी से मिलती-जुलती फिल्में बनाई जाती रही हैं. यह ट्रेंड बहुत पुराना है. 90 के दशक में दो साल के अंतराल में दो ऐसी म्यूजिकल रोमांटिक एक्शन फिल्में बनाई गईं जिनका पैटर्न एक जैसा था. दोनों की कहानी प्यार-धोखे पर बेस्ड थी. मजेदार बात यह है कि दोनों ही फिल्मों में हीरो सेम था. डायरेक्टर भी सेम था. दोनों ही फिल्में सुपरहिट साबित हुईं. दोनों फिल्मों में हीरो का लुक पूरे देश में पॉप्युलर हुआ.

‘जीता था जिसके लिए’, ‘कितना हसीन चेहरा, कितनी प्यारी आंखें’, ‘हो नहीं सकता’ जैसे रोमांटिक गाने आज भी दिलों के तार को छेड़ देते हैं. इन गानों के बोल-मेलोडी दिल में बसी हुई है. इन गाने को सुनते ही मन 90 के दशक की यादों में खो जाता है. दिल को अलग सुकून मिलता है. ये सभी गाने अजय देवगन की दो फिल्मों ‘दिलवाले’ और ‘दिलजले’ में सुनने को मिले थे. दोनों फिल्में दो साल के अंतराल में रिलीज हुई थीं. दोनों ही फिल्मों का डायरेक्शन हैरी बावेजा ने किया था. दोनों ही फिल्मों में और भी कई समानताए हैं. दोनों फिल्मों के गानों-कहानी का पैटर्न भी सेम था.

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किसी फिल्म की लोकप्रियता का पैमाना इससे ज्यादा क्या होगा कि हीरो के स्टाइल को देशभर के युवा फॉलो करने लगें. 90 के दशक में अजय देवगन ने अपनी हर बड़ी फिल्म से छाप छोड़ी. अजय देवगन की एक फिल्म ‘दिलवाले’ ऐसी ही फिल्म थी जिसका असर युवाओं पर हुआ. आशिक इस फिल्म के गाने गाकर अपना दर्द बयां करते थे. मूवी 4 फरवरी 1994 को रिलीज हुई ती. फिल्म में अजय देवगन-रवीना टंडन की लव स्टोरी, सुनील शेट्टी का एक्शन था. मूवी वैलेंटाइन वीक में रिलीज हुई थी और इसका डायरेक्शन हैरी बाबेजा ने किया था.

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फिल्म में एक्शन-रोमांस-इमोशंस के अलावा बेहतरीन म्यूजिक था जो मूवी के लिए टर्निंग प्वॉइंट साबित हुआ. फिल्म के गाने इतने पॉप्युलर थे कि 55 लाख ऑडियो कैसेट बिके थे. म्यूजिक नदीम-श्रवण का था. गीतकार समीर थे. फिल्म का एक गाना ‘एक ऐसी लड़की थी जिसे मैं प्यार करता था’ को आज भी प्यार में चोट खाए आशिक गुनगुनाते हैं. स्टोरी करण राजदान ने लिखी थी.

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‘दिलवाले’ एक मसाला फिल्म थी. दिल को कुरेदने वाले गाने, रवीना टंडन की खूबसूरती, बेहतरीन डायलॉग्स का संयोजन फिल्म में देखने को मिला था. फिल्म के ब्लॉकबस्टर गानों के बीच हीरो-हीरोइन के डायलॉग भी डाले गए थे. यह अपने आप में अनोखा प्रयोग था. इससे फिल्म देखने के लिए दर्शक सिनेमाघरों तक पहुंचे. फिल्म में परेश रावल ने मामा ठाकुर का रोल निभाया था.

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दिलचस्प बात यह है कि ‘दिलवाले’ फिल्म का क्लैश आमिर खान के भाई की फैसल खान की ‘मदहोश’ और जैकी श्रॉफ की ‘मिलन’ से हुआ था. ‘दिलवाले’ के सामने दोनों ही फिल्में नहीं टिक पाईं और डिजास्टर साबित हुईं. 1994 में पैसे कमाने के मामले में दिलवाले 9वें स्थान पर थी. 2 करोड़ के बजट में बनी इस मूवी ने 12 करोड़ का वर्ल्ड वाइड कलेक्शन किया था. यह एक सुपरहिट फिल्म साबित हुई थी. दिलवाले फिल्म के दौरान ही रवीना टंडन और अजय देवगन में विवाद हुआ. दोनों ने फिर कभी साथ में काम नहीं किया.

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दो साल बाद ही 20 सितंबर 1996 को अजय देवगन की एक और रोमांटिक एक्शन फिल्म ‘दिलजले’ रिलीज हुई. इस फिल्म के गाने-हीरो का लुक सबकुछ अनूठा था. सिने प्रेमियों में इस फिल्म को लेकर एक अलग ही क्रेज देखने को मिला था. फिल्म के डायलॉग लोगों को मुंह जुबानी याद हो गए थे. अमरीश पुरी के बेहतरीन डायलॉग ने फिल्म का रोमांच बढ़ा दिया था. इस फिल्म की दीवानगी का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि कई सिने लवर्स ने यह फिल्म 10 बार से भी ज्यादा देखी है. इस फिल्म के गानों में भी ‘दिलवाले’ की तरह डायलॉग का इस्तेमाल किया गया था.

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‘दिलजले’ के डायरेक्शन भी हैरी बावेजा थे. स्क्रीनप्ले करन राजदान ने लिखा था. फिल्म में अजय देवगन, मधु और सोनाली बेंद्रे लीड रोल में थे. इसके अलावा परमीत सेठी, शक्ति कपूर, गुलशन ग्रोवर सपोर्टिंग रोल में थे. फिल्म के मेन विलेन अमरीश पुरी थे. ‘दिलजले’ फिल्म ने भी पूरे देश के हिंदी पट्टी के राज्यों के युवाओं पर गहरा असर छोड़ा. उन दिनों युवा अजय देवगन के लुक को कॉपी करते थे. उनके जैसे लंबे बाल-दाढ़ी में नजर आते थे.

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‘दिलजले’ फिल्म का म्यूजिक अनु मलिक ने कंपोज किया था. गीतकार जावेद अख्तर थे. म्यूजिक ब्लॉकबस्टर था. ‘मेरा मुल्क मेरा देश’ गाना आज भी पॉप्युलर है. हालांकि इसकी धुन अनु मलिक ने इजराइल के राष्ट्रगान से चुराई थी. वैसे अजय देवगन ‘शाका’ के लिए पहली पसंद नहीं थे. पहले यह पावरफुल रोल अक्षय कुमार को ऑफर हुआ था. फिल्म की सबसे मजबूत पक्ष इसके डायलॉग थे. ये पॉप्युलर डायलॉग थे : शाका का बस चले तो हर मंडप जला दे. यहां के 40 गांव में किसी की शादी न हो. आग जो दिल में लगी है, उसे दुनिया में लगा दूंगा मैंजो तेरी डोली उठी, ज़माने को जला दूंगा मैं. दिलजले…दिलजले… अरे लाले, यहां तो सभी दिलजले हैं. ये डायलॉग आज भी 90 के दशक के आशिकों को जुबानी रटे हुए हैं.

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मजेदार बात यह है कि ‘दिलवाले’ और ‘दिलजले’ की कहानी में काफी हद तक समानताएं थीं. दोनों ही फिल्मों में अजय देवगन एक कॉलेज स्टूडेंट थे. दोनों ही फिल्मों में उन्हें एक लड़की से प्यार हो जाता है. दोनों ही मूवी में लड़की के मां-बाप, रिश्तेदार इस रिश्ते के खिलाफ होते हैं. दोनों ही फिल्मों में लड़के के घरवाले लड़की को यकीन दिला देते हैं कि लड़का सही नहीं है. ‘दिलवाले’ में अजय देवगन पागल तो ‘दिलजले’ में आतंकवादी बने नजर आते हैं. दोनों ही फिल्मों में दूसरा हीरो, हीरोइन को पसंद करता है लेकिन प्यार पाने में कामयाब नहीं होता. ‘दिलजले’ फिल्म का बजट करीब 5.5 करोड़ रखा गया था. मूवी ने करीब 16 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. यह एक सुपरहिट फिल्म साबित हुई थी.

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तरबूज खरीदने से पहले जान लें ये 5 संकेत! एक थपकी बताएगी मीठा है या केमिकल वाला


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तरबूज खरीदने से पहले जान लें ये 5 संकेत! एक थपकी बताएगी मीठा है या केमिकल वाला

 

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गर्मी बढ़ते ही बाजारों में तरबूज की मांग तेज हो जाती है. तेज धूप और लू के बीच यह फल शरीर को ठंडक पहुंचाने के साथ पानी की कमी भी पूरी करता है. लेकिन हर लाल दिखने वाला तरबूज मीठा और सुरक्षित हो, यह जरूरी नहीं है. कई बार लोग दिखने में अच्छे तरबूज खरीद लेते हैं, लेकिन घर पहुंचने पर उसका स्वाद फीका निकलता है या फिर उसमें केमिकल से पकाने की आशंका सामने आती है.

फल विक्रेताओं और किसानों के अनुसार मीठे तरबूज की पहचान कुछ आसान तरीकों से की जा सकती है. तरबूज के नीचे बना क्रीमी पीला धब्बा इस बात का संकेत माना जाता है कि फल खेत में अच्छी तरह पक चुका है. वहीं हल्के से थपथपाने पर यदि गहरी और खोखली आवाज सुनाई दे तो वह रसदार और मीठा हो सकता है. इसके अलावा आकार के मुकाबले अधिक भारी महसूस होने वाला तरबूज आमतौर पर ज्यादा पानी और मिठास वाला माना जाता है.

विशेषज्ञों का कहना है कि सिर्फ मिठास ही नहीं, बल्कि फल की सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है. कई बार अधिक वजन और ज्यादा मिठास दिखाने के लिए कुछ लोग केमिकल, सैक्रीन या इंजेक्शन का इस्तेमाल करते हैं, जो स्वास्थ्य के लिए नुकसानदायक हो सकते हैं. इसलिए तरबूज खरीदते समय उसके बाहरी हिस्से पर किसी संदिग्ध निशान या छेद की जांच जरूर करनी चाहिए. साथ ही काटने के बाद यदि उसमें असामान्य या केमिकल जैसी गंध महसूस हो तो उसका सेवन करने से बचना चाहिए. गर्मियों में सही तरबूज चुनने के ये आसान तरीके आपकी सेहत और स्वाद दोनों को सुरक्षित रखने में मदद कर सकते हैं.

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पटना में खान सर की कोचिंग में मारपीट-तोड़फोड़: गार्ड घायल; खान सर बोले- फायरिंग भी हुई, दूसरे कोचिंग वालों ने उड़ाने की धमकी दी थी – Patna News




पटना में मंगलवार रात चर्चित शिक्षक और यूट्यूबर खान सर की कोचिंग के अंदर कुछ लोगों ने घुसकर मारपीट की। ऑफिस में तोड़फोड़ भी की गई। हमले में ड्यूटी पर तैनात सिक्योरिटी गार्ड घायल हो गया। उसका सिर फूटा है। घटना की सूचना मिलने पर खान सर रात 11.30 बजे कोचिंग पहुंचे। उन्होंने कहा- क्लासेज खत्म हो चुकी थी। आज बिहार पुलिस भर्ती के रिजल्ट आए थे। हजारों लोग पास हो गए थे। सब लोग बच्चों को सम्मानित करके थके हुए थे। तभी कुछ असामाजिक तत्व आए और धमकाने लगे। हमलावर गार्डों को पीटने लगे। खान सर ने फायरिंग का भी दावा किया। उन्होंने कहा- चारों तरफ से गोलियां चल रही थीं। उन्होंने कहा- ये सब बगल के कोचिंग वालों ने किया है। उन्हें मेरे कम फीस लेने से परेशानी है। उन्होंने मेरे कोचिंग को दो दिनों के अंदर उड़ाने की धमकी दी थी। पुलिस की तरफ से फायरिंग की पुष्टि नहीं की गई है। SSP कार्तिकेय के शर्मा ने बताया कि मारपीट का मामला है। गार्ड का बयान लेकर आगे की कार्रवाई होगी। सीसीटीवी कैमरे का फुटेज जब्त किया गया है। गार्ड ने सभी हमलावरों को पहचान लिया है। कोचिंग से आई कुछ तस्वीरें देखिए… SSP बोले- CCTV खंगाल रहे, एक्शन लेंगे पटना SSP कार्तिकेय शर्मा ने बताया, कुछ स्टूडेंट्स ने कोचिंग में मारपीट की है। पोस्टर भी फाड़े हैं। गार्ड को चोट आई है। बयान दर्ज कर के एक्शन लेंगे। कोचिंग के CCTV देख रहे हैं। आसपास के लोगों के बयान ले रहे हैं। जो भी इसमें शामिल होगा उसपर कार्रवाई होगी। टाउन DSP राजेश रंजन ने बताया कि फायरिंग नहीं हुई है। फुटेज में इस तरीके का अभी कुछ भी नहीं मिला है। मारपीट और तोड़फोड़ हुई है। 10 से 12 की संख्या में सभी पैदल ही आए थे। इस फुटेज में ज्ञानबिंदु के गार्ड वगैरह दिखे हैं। पहले दो तीन कर के आए हैं और इसके बाद 10 से 12 की संख्या में पहुंचे हैं।



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CBSE के नए चेयरमैन और सचिव के नाम की हुई घोषणा, जानें उनके बारे में


नई दिल्ली: CBSE के नए चेयरमैन और सचिव के नाम की घोषणा हो गई है। सरकार ने मंगलवार को ओएसएम (ऑन-स्क्रीन मार्किंग) विवाद के बीच वरिष्ठ IAS अधिकारी लोखंडे प्रशांत सीताराम को सीबीएसई का नया प्रमुख नियुक्त किया है और 2008 बैच के भारतीय सूचना सेवा अधिकारी वरुण भारद्वाज को सीबीएसई का नया सचिव नियुक्त किया है।

सरकार ने राहुल सिंह और हिमांशु गुप्ता का किया था ट्रांसफर

इससे पहले सरकार ने सीबीएसई के चेयरमैन राहुल सिंह और सीबीएसई के सचिव हिमांशु गुप्ता का ट्रांसफर कर दिया था और सीबीएसई की ऑन-स्क्रीन मार्किंग (ओएसएम) प्रणाली के लिए सेवाओं की खरीद से संबंधित मुद्दों की जांच के लिए समिति का गठन किया था। मंगलवार को जारी कैबिनेट सचिवालय के ज्ञापन के अनुसार, इस समिति की अध्यक्षता क्षमता निर्माण आयोग की अध्यक्ष एस राधा चौहान करेंगी।

चौहान को अधिकार दिया गया है कि जरूरत पड़ने पर वह अन्य विभागों के अधिकारियों से सहायता ले सकती हैं। जबकि क्षमता निर्माण आयोग जांच पैनल को सचिवालयी सहायता प्रदान करेगा। पैनल को एक महीने के भीतर कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का कार्य सौंपा गया है।

कौन हैं नवनियुक्त अधिकारी?

सीताराम 2001 बैच के भारतीय प्रशासनिक सेवा (आईएएस) अधिकारी हैं और वर्तमान में गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव हैं। वहीं, वरुण भारद्वाज वर्तमान में शिक्षा मंत्रालय में निदेशक के पद पर कार्यरत हैं। वह  2008 बैच के भारतीय सूचना सेवा अधिकारी हैं।

OSM प्रणाली विवाद क्या है?

CBSE उस समय विवादों में आ गया था, जब कक्षा 12 के कुछ छात्रों ने आरोप लगाया कि बोर्ड द्वारा अपलोड की गई उनकी उत्तर पुस्तिकाओं की स्कैन की गई प्रतियां उनकी लिखावट से मेल नहीं खा रहीं हैं। इससे OSM प्रणाली में उत्तर पुस्तिकाओं के मिलान में गड़बड़ी की आशंका पैदा हो गई।

इसके बाद CBSE बोर्ड परीक्षा प्रक्रिया में OSM प्रणाली के कार्यान्वयन को लेकर छात्रों और अभिभावकों ने चिंता व्यक्त की और ये मामला हाईलाइट हो गया और राष्ट्रीय स्तर पर इसकी चर्चा होने लगी क्योंकि इससे लाखों बच्चों का भविष्य जुड़ा हुआ है, इसलिए सरकार ने भी इस मामले को गंभीरता से लिया।

यही कारण है कि बोर्ड को भी तकनीकी खामियों, भुगतान विफलताओं और सत्यापन एवं पुनर्मूल्यांकन प्रक्रिया में देरी को लेकर आलोचनाओं का सामना करना पड़ा है, जिसके चलते अधिक पारदर्शिता और जवाबदेही की मांग उठाई गई है।





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कौन हैं प्रशांत सीताराम लोखंडे? सीबीएसई की चुनौतियों भरी ताज की जिम्मेदारी, क्या होंगी चुनौतियां


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कौन हैं प्रशांत सीताराम लोखंडे? सीबीएसई की चुनौतियों भरी ताज की जिम्मेदारी, क्या होंगी चुनौतियां

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Who is Prashant Sitaram Lokhande: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (सीबीएसई) को अपना नया मुखिया मिल गया है. वरिष्ठ आईएएस अधिकारी प्रशांत सीताराम लोखंडे को सीबीएसई का नया अध्यक्ष नियुक्त किया गया है. केंद्र सरकार के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा जारी आधिकारिक पत्र के अनुसार, कैबिनेट की नियुक्ति समिति (एसीसी) ने उनके नाम को हरी झंडी दे दी है. प्रशांत सीताराम लोखंडे एजीएमयूटी कैडर के 2001 बैच के आईएएस अधिकारी हैं, जो निवर्तमान चेयरमैन राहुल सिंह की जगह बोर्ड की कमान संभालेंगे. आइए जानते हैं कि कौन हैं सीबीएसई के नए चेयरमैन और उनका प्रशासनिक बैकग्राउंड क्या है.

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CBSE New Chairperson Prashant Sitaram Lokhande: देश के सबसे बड़े और महत्वपूर्ण शिक्षा बोर्ड, केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) में एक बड़ा प्रशासनिक फेरबदल हुआ है. केंद्र सरकार ने वरिष्ठ नौकरशाह प्रशांत सीताराम लोखंडे को सीबीएसई का नया अध्यक्ष (Chairperson) नियुक्त किया है. सरकार की तरफ से 2 जून 2026 को जारी आधिकारिक लेटर के अनुसार, यह नियुक्ति तत्काल प्रभाव से लागू की गई है.

सीबीएसई में मचे घमासान के बाद छात्र और अभिभावक यह जानना चाहते हैं कि बोर्ड का मुखिया कौन है. ऐसे में वर्तमान राहुल सिंह के ट्रांसफर के बाद, अब प्रशांत सीताराम लोखंडे बोर्ड के सभी बड़े फैसले लेंगे.

कौन हैं नए चेयरमैन प्रशांत सीताराम लोखंडे?

प्रशांत सीताराम लोखंडे भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) के बेहद अनुभवी और वरिष्ठ अधिकारी हैं.

  • कैडर और बैच: वे एजीएमयूटी (AGMUT: अरुणाचल प्रदेश, गोवा, मिजोरम और केंद्र शासित प्रदेश) कैडर के 2001 बैच के आईएएस अधिकारी हैं.
  • पिछली तैनाती: सीबीएसई के अध्यक्ष का पद संभालने से ठीक पहले, वे केंद्र सरकार के गृह मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव के महत्वपूर्ण पद पर अपनी सेवाएं दे रहे थे.
  • रैंक और वेतनमान: आधिकारिक आदेश के मुताबिक, उन्हें सीबीएसई चेयरमैन के पद पर अतिरिक्त सचिव के रैंक और वेतनमान में ही नियुक्त किया गया है.
  • प्रशासनिक हलकों में प्रशांत सीताराम लोखंडे को उनके अनुशासित काम करने के तरीके और नीतिगत मामलों में उनकी गहरी समझ के लिए जाना जाता है.

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‘काला हिरण’ पोस्टर रिलीज होते ही मचा बवाल, फिल्म निर्देशक ने तोड़ी चुप्पी


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Kala Hiran Controvercy: 1998 के चर्चित ‘ब्लैक बक शिकार’ वाले घटनाक्रम पर आधारित बताई जा रही फिल्म ‘काला हिरण द बैटल फॉर लेगेसी’ अब विवादों में घिर गई है. दरअसल फिल्म को लेकर सलमान खान की लीगल टीम ने कास्टिंग डायरेक्टर अक्षय पांडे को नोटिस भेजा है, जिसको लेकर अब निर्देशक भारत एस श्रीनेत ने अपनी चुप्पी तोड़ी है.

नोएडा: 1998 के चर्चित ‘ब्लैक बक शिकार’ वाले घटनाक्रम पर आधारित बताई जा रही फिल्म ‘काला हिरण द बैटल फॉर लेगेसी’ रिलीज से पहले ही विवादों में घिर गई है. फिल्म के पोस्टर लॉन्च होने के बाद ही अभिनेता सलमान खान की लीगल टीम ने निर्माता और निर्देशक को कानूनी नोटिस भेजा है. नोटिस में फिल्म की रिलीज पर रोक लगाने, पोस्टर और प्रचार सामग्री हटाने की मांग की गई है. साथ ही यह भी कहा गया है कि यदि मांगों का पालन नहीं किया गया तो आगे कानूनी कार्रवाई की जाएगी. इस घटनाक्रम के बाद फिल्म को लेकर बहस और तेज हो गई है और इसके रिलीज को लेकर भी अनिश्चितता बढ़ गई है.

सामाजिक और ऐतिहासिक घटनाक्रम दर्शाना उद्देश्य
विवाद के बीच फिल्म के निर्देशक भारत एस श्रीनेत ने अपनी चुप्पी तोड़ते हुए लोकल 18 की टीम को बताया कि जब कोई संवेदनशील और वास्तविक घटनाओं से जुड़ा विषय उठाया जाता है, तो विवाद होना स्वाभाविक है. उन्होंने कहा कि सच को सामने लाने की कोशिश हमेशा कुछ लोगों को असहज करती है. निर्देशक के मुताबिक, फिल्म का उद्देश्य किसी व्यक्ति विशेष को निशाना बनाना नहीं, बल्कि एक सामाजिक और ऐतिहासिक घटनाक्रम को दर्शाना है.

उन्होंने बताया कि फिल्म का पोस्टर जारी किया जा चुका है और 20 जून को इसका टीजर रिलीज किया जाएगा. साथ ही उन्होंने दावा किया कि फिल्म को काफी शोध और मेहनत के साथ तैयार किया गया है. इसकी रिलीज डेट भी जल्द घोषित की जाएगी.

फिल्म का ये है मकशद
भारत एस श्रीनेत का कहना है कि फिल्म का मुख्य उद्देश्य बिश्नोई समाज के संघर्ष, पर्यावरण संरक्षण और वन्यजीवों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को सामने लाना है. उनके अनुसार, यह फिल्म उस विरासत की कहानी है, जिसके लिए समाज ने वर्षों तक संघर्ष और बलिदान दिए हैं. निर्देशक ने दावा किया कि फिल्म निर्माण से पहले मामले से जुड़े प्रमुख गवाहों और संबंधित पक्षों से जरूरी अनुमति ली गई है. उनका कहना है कि फिल्म में वही तथ्य और घटनाएं दिखाई गई हैं, जो पहले से सार्वजनिक रिकॉर्ड और सार्वजनिक चर्चा का हिस्सा हैं. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कोई डॉक्यूमेंट्री नहीं, बल्कि एक फीचर फिल्म है, इसलिए सिनेमाई प्रस्तुति के साथ कहानी को दर्शाया गया है.

1998 से 2024 तक की घटनाओं को दर्शाया
फिल्म में लॉरेंस बिश्नोई से मिलते-जुलते किरदार को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. इस पर निर्देशक ने कहा कि फिल्म में 1998 से लेकर 2024 तक की घटनाओं को दर्शाया गया है. इसमें ‘लॉयन विश्रोई’ नाम का एक किरदार दिखाया गया है, जो कथित तौर पर घटना से प्रभावित होकर मुख्य पात्र के लिए खतरा बनता है. हालांकि उन्होंने जोर देकर कहा कि फिल्म में किसी भी व्यक्ति का महिमामंडन नहीं किया गया है.

मामला अदालत में होने के बावजूद फिल्म बनाए जाने के सवाल पर उन्होंने कहा कि न्यायालय सर्वोच्च है और अंतिम फैसला वही करेगा कि फिल्म रिलीज होगी या नहीं. उनके मुताबिक, समाज और कानून से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दे अदालतों में विचाराधीन रहते हैं और न्यायिक प्रक्रिया का सम्मान किया जाना चाहिए.

सोशल साइट के जरिए ये आरोप
उधर फिल्म के निर्माता अमित जानी ने भी सलमान खान की टीम की ओर से भेजे गए नोटिस पर प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर नोटिस साझा करते हुए आरोप लगाया कि फिल्म से जुड़े लोगों पर दबाव बनाने की कोशिश की जा रही है. अमित जानी इससे पहले भी कई विवादित और चर्चित घटनाओं पर आधारित फिल्मों के निर्माण को लेकर सुर्खियों में रह चुके हैं. 30 मई को फिल्म का पहला पोस्टर जारी किया गया था और निर्माताओं का दावा है कि इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रस्तुति और हॉलीवुड तर्ज के साथ तैयार किया गया है.

About the Author

आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.



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