देवरिया में अमर स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद की जयंती गुरुवार को मनाई गई। इस अवसर पर भाजपा किसान मोर्चा के कार्यकर्ताओं ने मेडिकल कॉलेज गेट स्थित उनकी प्रतिमा की साफ-सफाई कर माल्यार्पण किया और पुष्पांजलि अर्पित की। कार्यकर्ताओं ने आजाद के योगदान को याद करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। किसान मोर्चा के जिलाध्यक्ष पवन कुमार मिश्र ने चंद्रशेखर आजाद के जीवन और योगदान पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को मध्य प्रदेश के भाबरा में हुआ था। मिश्र ने कहा कि आजाद ने संकल्प लिया था कि वे जीवित रहते अंग्रेजों के हाथ नहीं आएंगे, जिसके कारण उन्हें ‘आजाद’ की उपाधि मिली। पवन कुमार मिश्र ने आगे कहा कि काकोरी कांड में चंद्रशेखर आजाद की महत्वपूर्ण भूमिका थी। उन्होंने स्वतंत्रता संग्राम में अद्वितीय साहस और बलिदान का परिचय दिया और देश को आजाद कराने के लिए अपना सर्वोच्च बलिदान दिया। भाजपा नेता अम्बिकेश पांडेय ने कहा कि चंद्रशेखर आजाद का नाम भारतीय इतिहास में वीरता, साहस और देशभक्ति के प्रतीक के रूप में सदैव स्वर्ण अक्षरों में अंकित रहेगा। उन्होंने युवाओं से आजाद के आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। कार्यक्रम के दौरान उपस्थित कार्यकर्ताओं ने “चंद्रशेखर आजाद अमर रहें” और “भारत माता की जय” के नारे लगाए। इस अवसर पर अरुण मिश्र, विजेंद्र चौहान, डॉ. विनोद पांडेय, विजय कुशवाहा, वीरेंद्र पाठक, अशोक उपाध्याय, सोनू और सुमंत चतुर्वेदी सहित भाजपा किसान मोर्चा के कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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चंद्रशेखर आजाद की जयंती पर श्रद्धांजलि: देवरिया में भाजपा कार्यकर्ताओं ने प्रतिमा पर माल्यार्पण कर योगदान याद किया – Deoria News
बक्सर में कांग्रेस नेता बुच्चा उपाध्याय की मौत: नीलगाय से टकराई बाइक, अस्पताल में डॉक्टरों ने मृत घोषित किया – Buxar News
बक्सर जिले के चौसा प्रखंड के खिलाफतपुर निवासी कांग्रेस नेता और बनारपुर पंचायत के पूर्व मुखिया रविंद्र नाथ उपाध्याय उर्फ बुच्चा उपाध्याय (55) का गुरुवार दोपहर सड़क दुर्घटना में निधन हो गया। उनके निधन पर कांग्रेस कार्यकर्ताओं, सामाजिक संगठनों और स्थानीय लोगों ने दुख व्यक्त किया है। जानकारी के अनुसार, बुच्चा उपाध्याय गुरुवार दोपहर बक्सर से अपने गांव खिलाफतपुर मोटरसाइकिल से लौट रहे थे। रास्ते में अचानक एक नीलगाय उनके वाहन के सामने आ गई, जिससे बाइक नीलगाय से टकरा गई। इस दुर्घटना में वह गंभीर रूप से घायल हो गए। चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया
स्थानीय लोगों ने उन्हें तुरंत इलाज के लिए सदर अस्पताल, बक्सर पहुंचाया। वहां चिकित्सकों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। घटना की सूचना मिलने पर मुफस्सिल थाना पुलिस सदर अस्पताल पहुंची। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। रविंद्र उपाध्याय उर्फ बुच्चा उपाध्याय की उम्र लगभग 55 वर्ष थी। वह लंबे समय से कांग्रेस से जुड़े थे और पार्टी ने उन्हें प्रखंड से लेकर जिला स्तर तक कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां सौंपी थीं। वर्ष 2008 में बनारपुर पंचायत के उपचुनाव में वह लगभग ढाई महीने तक मुखिया रहे थे। निधन कांग्रेस परिवार के लिए बड़ी क्षति
वर्ष 2022 में चौसा नगर पंचायत चुनाव में महिला सीट आरक्षित होने के कारण उन्होंने अपनी पत्नी को चुनाव लड़वाया था। उनकी पत्नी को लगभग दो हजार मत मिले थे और वह चौथे स्थान पर रही थीं। बुच्चा उपाध्याय जिले में एक सक्रिय समाजसेवी के रूप में भी जाने जाते थे। सामाजिक कार्यों के साथ-साथ बच्चों के खेलकूद कार्यक्रमों के आयोजन में भी उनकी सक्रिय भागीदारी रहती थी। पूर्व सदर विधायक संजय तिवारी उर्फ मुन्ना तिवारी ने उनके निधन को अपूरणीय क्षति बताया और शोक संवेदना व्यक्त की। कांग्रेस के जिलाध्यक्ष पंकज उपाध्याय ने कहा कि बुच्चा उपाध्याय पार्टी के समर्पित और कर्मठ कार्यकर्ता थे। उनका निधन कांग्रेस परिवार के लिए बड़ी क्षति है। उन्होंने शोक संतप्त परिवार के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करते हुए दिवंगत आत्मा की शांति की कामना की।
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तीन बच्चों की मां ने घर में लगाई फांसी: पति मजदूरी करने गया था; बोला- परिवार में नहीं था विवाद – Vidisha News
विदिशा के पठारी हवेली गांव में एक 25 वर्षीय विवाहिता ने घर के अंदर फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। यह घटना बुधवार-गुरुवार की दरमियानी रात को हुई। परिजनों ने महिला का शव फंदे पर लटका देखा, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए अटल बिहारी वाजपेयी शासकीय मेडिकल कॉलेज भेज दिया। मृतका की पहचान शिल्पी बाई आदिवासी (25) के रूप में हुई। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी। मृतका के पति ने पुलिस को बताया कि वह मजदूरी करता है। बुधवार को वह धान रोपाई के काम पर गया था। शाम को घर लौटने पर पत्नी सामान्य थी और परिवार में सब कुछ ठीक था। देर रात वह शौच के लिए बाहर गया। कुछ देर बाद वापस लौटा तो देखा कि पत्नी ने घर के अंदर फांसी लगा ली थी। उसने तत्काल परिजनों को इसकी जानकारी दी। पति ने पुलिस को बताया कि उनकी शादी चार साल पहले हुई थी और उनके तीन छोटे बच्चे हैं, जिनमें दो बेटे और एक बेटी शामिल हैं। परिवार में किसी प्रकार का विवाद या तनाव नहीं था, और उसे समझ नहीं आ रहा कि पत्नी ने यह कदम क्यों उठाया। पुलिस का कहना है कि आत्महत्या के कारणों का फिलहाल पता नहीं चल सका है। परिजनों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं और मामले की सभी पहलुओं से जांच की जा रही है। पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
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पूड़ी और बाजरे के रोटले के साथ जमकर खाएं ये गुजराती डिश
Gujarati Undhiyu Recipe: रोज के खाने में जब दाल, रोटी और एक जैसी सब्जियों का स्वाद फीका लगने लगे, तब किचन में कुछ ऐसा बनाने का मन करता है जो स्वाद के साथ थोड़ा नया अनुभव भी दे. अगर आपके साथ भी ऐसा ही है, तो गुजरात की मशहूर डिश काठियावाड़ी उंधियू आपके लिए बढ़िया विकल्प हो सकती है. ढेर सारी हरी सब्जियों, कंद-मूल, मसालों और स्वादिष्ट मेथी मुठिया से तैयार होने वाली यह डिश साधारण मिक्स वेज से काफी अलग होती है. खास काठियावाड़ी मसाले का सोंधा स्वाद और सब्जियों की अलग-अलग बनावट इसे खास बनाती है. इसे पूड़ी, बाजरे के रोटले या छाछ के साथ परोसें तो घर का लंच भी किसी खास मौके जैसा महसूस हो सकता है.
काठियावाड़ी उंधियू में क्या है खास?
उंधियू गुजरात के पारंपरिक व्यंजनों में शामिल है, लेकिन काठियावाड़ी अंदाज में इसका स्वाद और भी चटपटा और मसालेदार हो जाता है. इसमें एक-दो नहीं, बल्कि कई तरह की सब्जियां एक साथ पकाई जाती हैं. छोटे बैंगन, आलू, सुरती पापड़ी, मटर, रतालू और शकरकंद जैसी सामग्री इसके स्वाद को भरपूर बनाती है. इस रेसिपी की सबसे खास बात है *मेथी मुठिया*. बेसन, मेथी और गेहूं के आटे से बने ये छोटे-छोटे मुठिया जब सब्जियों के साथ धीमी आंच पर पकते हैं, तो मसालों का स्वाद अच्छी तरह सोख लेते हैं. यही वजह है कि उंधियू खाते समय हर निवाले में कुछ अलग स्वाद महसूस होता है.
Gujarati Undhiyu Recipe के लिए सामग्री
मुख्य सब्जियों के लिए
सुरती पापड़ी या सेम फली 1 कप, छोटे बैंगन 4, छोटे आलू 4, रतालू या कंद आधा कप, शकरकंद आधा कप और हरी मटर आधा कप लें. बैंगन में चीरा लगा लें, ताकि उसमें मसाला आसानी से भरा जा सके.
मेथी मुठिया के लिए
एक कप बारीक कटी मेथी, आधा कप बेसन, 2 चम्मच गेहूं का आटा, हल्दी, लाल मिर्च, अजवाइन, थोड़ी चीनी, नमक और तेल जरूरत के अनुसार लें.
काठियावाड़ी स्पेशल मसाला
एक कप हरा धनिया, 3 हरी मिर्च, एक इंच अदरक, 3 चम्मच भुनी मूंगफली का पाउडर, 3 चम्मच कद्दूकस किया नारियल, 2 चम्मच सफेद तिल, एक चम्मच गरम मसाला, नमक, थोड़ी चीनी और तेल लें.
कैसे बनाएं काठियावाड़ी उंधियू?
सबसे पहले तैयार करें मेथी मुठिया
एक बड़े बर्तन में कटी मेथी, बेसन, गेहूं का आटा, हल्दी, लाल मिर्च, अजवाइन, चीनी और नमक डालकर मिलाएं. थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए सख्त आटा गूंथ लें. अब इसके छोटे-छोटे ओवल शेप के मुठिया बनाएं और गर्म तेल में सुनहरा होने तक तलकर अलग रख दें. अब आलू, रतालू, शकरकंद और बैंगन को हल्का शैलो फ्राई कर लें. इन्हें पूरी तरह पकाने की जरूरत नहीं है. सुरती पापड़ी और मटर को भी हल्का उबालकर अलग रख दें.
मसाला तैयार करने का तरीका
मिक्सी में हरा धनिया, हरी मिर्च, अदरक, नारियल, सफेद तिल और भुनी मूंगफली का पाउडर डालें. इसे बारीक पेस्ट बनाने के बजाय थोड़ा दरदरा पीसें. अब इसमें नमक, थोड़ी चीनी और गरम मसाला मिला दें. बैंगन और आलू में लगे चीरे के बीच यह मसाला अच्छी तरह भरें. थोड़ा मसाला बचाकर रखें, क्योंकि इसे बाकी सब्जियों के साथ भी इस्तेमाल करना है.
अब धीमी आंच पर पकाएं उंधियू
एक भारी तले वाले बड़े बर्तन में 3-4 चम्मच तेल गर्म करें. इसमें अजवाइन और हींग का तड़का लगाएं. अब बची हुई सुरती पापड़ी, मटर, फ्राई की हुई सब्जियां और बचा हुआ मसाला डालकर हल्के हाथों से मिलाएं. लगभग आधा कप पानी छिड़कें और ऊपर से तले हुए मेथी मुठिया रखें. बर्तन को ढककर धीमी आंच पर करीब 10-12 मिनट पकाएं. अगर आप कुकर का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो एक सीटी पर्याप्त रहेगी. गैस बंद करने के बाद करीब 5 मिनट तक कुकर या बर्तन को ऐसे ही रहने दें. फिर ढक्कन खोलकर ऊपर से हरा धनिया और ताजा कद्दूकस किया नारियल डालें.
किसके साथ परोसें उंधियू?
गरमा-गरम काठियावाड़ी उंधियू को पूड़ी, बाजरे के रोटले या रोटी के साथ परोसा जा सकता है. साथ में ठंडी छाछ हो तो स्वाद और बढ़ जाता है. कुछ लोग इसे जलेबी के साथ भी पसंद करते हैं, जहां मीठे और मसालेदार स्वाद का दिलचस्प मेल मिलता है. अगर घर में मेहमान आने वाले हैं या वीकेंड पर कुछ पारंपरिक और खास बनाने का मन है, तो यह रेसिपी आजमाई जा सकती है. हां, इसकी तैयारी में थोड़ी मेहनत जरूर लगती है, लेकिन जब सब्जियों, मसालों और मेथी मुठिया का स्वाद एक साथ प्लेट में आता है, तो मेहनत वाजिब लगती है.
OnePlus N6x की डेट हुई कंफर्म, 8000mAh की बैटरी के साथ जल्द भारत में होगा लॉन्च
OnePlus N6x की लॉन्च डेट कंपनी ने कंफर्म कर दी है। चीनी ब्रांड का यह फोन इसी महीने के आखिर में लॉन्च किया जाएगा। इससे पहले OnePlus N6x का मैक्रो पेज ई-कॉमर्स वेबसाइट अमेजन पर बनाया गया था, जहां फोन की पहली झलक देखने को मिली थी। अब कंपनी ने फोन का डिजाइन पूरी तरह से रिवील कर दिया है।
कब होगा लॉन्च?
वनप्लस का यह सस्ता 5G फोन 31 जुलाई को दिन के 12 बजे लॉन्च किया जाएगा। इस सीरीज के पिछले मॉडल OnePlus N6 की तरह ही इसे अमेजन स्पेशल फोन के तौर पर पेश किया जाएगा। फोन का बैक पैनल देखने में पिछले साल लॉन्च हुए OnePlus Nord CE 5 की तरह है। इसे दो कलर ऑप्शन- Burgundy Red और Ice Blue में पेश किया जाएगा। फोन के बैक पैनल में एक ही कैमरा दिया जा सकता है।
फोन के सामने आए डिजाइन के मुताबिक, वनप्लस के इस फोन में 3.5mm ऑडियो जैक दिया जाएगा। फोन के बैक पैनल में सिंगल कैमरा के साथ LED फ्लैश देखा जा सकता है। इसके अलावा साइड में वॉल्यूम रॉकर और पावर बटन देखे जा सकते हैं। वनप्लस की ब्रांडिंग फोन के बैक पैनल में देखी जा सकती है।
कितनी हो सकती है कीमत?
OnePlus N6x के किसी भी फीचर को लेकर कंपनी ने कुछ भी आधिकारिक तौर पर कंफर्म नहीं किया है। इसके ज्यादातर फीचर्स OnePlus N6 की तरह ही होंगे। साथ ही, इस फोन की कीमत भी OnePlus N6 के मुकाबले कम होगी। इसे भारत में 18,000 रुपये से 20,000 रुपये की प्राइस रेंज में लॉन्च किया जा सकता है।
OnePlus N6 के फीचर्स
OnePlus N6 के फीचर्स की बात करें तो यह अफोर्डेबल फोन 6.75 इंच के LCD डिस्प्ले के साथ आता है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। वनप्लस के इस फोन की पीक ब्राइटनेस 1200 निट्स तक की है। यह MediaTek Dimensity 6360Apex चिपसेट पर काम करता है।
इस फोन में 8000mAh की बैटरी, 45W वायर्ड फास्ट चार्जिंग के आलावा 50MP का कैमरा मिलता है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए इसमें 8MP का कैमरा दिया गया है। यह Android 16 पर बेस्ड OxygenOS पर काम करता है। यह फोन IP65 रेटेड है, जिसकी वजह से पानी में भींगने से खराब नहीं होगा।
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ईरान जंग के बीच अमेरिका का सऊदी से परमाणु समझौता: इजराइल के विरोध के बावजूद ट्रम्प की मंजूरी; एक्सपर्ट बोले- परमाणु हथियारों का खतरा बढ़ेगा
सऊदी अरब ने बुधवार को अमेरिका के साथ एक अहम परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। इसके तहत अमेरिका, सऊदी अरब को असैन्य (बिजली बनाने के लिए) परमाणु तकनीक देगा। यह समझौता ऐसे समय में हुआ है, जब पूरे मिडिल ईस्ट में युद्ध और तनाव का माहौल है। इस समझौते को सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान की बड़ी कूटनीतिक सफलता माना जा रहा है। वह पिछले पांच साल से भी ज्यादा समय से यह समझौता चाह रहे थे। रिपोर्ट्स के मुताबिक इजराइल समेत अमेरिका के कई अधिकारी और न्यूक्लियर एक्सपर्ट्स इसका विरोध कर रहे थे। उनका कहना था कि यदि सऊदी अरब को यूरेनियम संवर्धन की तकनीक मिल गई, तो भविष्य में वह परमाणु हथियार बनाने की दिशा में भी बढ़ सकता है। इससे पूरे मिडिल ईस्ट में परमाणु हथियारों की नई होड़ शुरू होने का खतरा पैदा हो सकता है। सऊदी अरब के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान पहले कई बार कह चुके हैं कि अगर ईरान परमाणु हथियार बना लेता है, तो सऊदी अरब भी परमाणु हथियार हासिल करने की दिशा में कदम उठाएगा। यह समझौता विवादों में क्यों है? ट्रम्प ने समझौते से इजराइल को हटाया इस समझौते की शुरुआत जो बाइडेन के राष्ट्रपति रहते हुई थी। तब अमेरिका चाहता था कि परमाणु समझौते के बदले सऊदी अरब, इजराइल को औपचारिक मान्यता दे और दोनों देश राजनयिक संबंध स्थापित करें। इस प्रस्ताव के तहत अमेरिका, सऊदी अरब को सुरक्षा की गारंटी, आधुनिक हथियार और असैन्य परमाणु कार्यक्रम में सहयोग देने को तैयार था। बदले में सऊदी अरब से उम्मीद थी कि वह इजराइल के साथ दूतावास खोलेगा, राजदूत नियुक्त करेगा और आधिकारिक संबंध शुरू करेगा। हालांकि, 7 अक्टूबर 2023 को हमास के इजराइल पर हमले और उसके बाद गाजा में शुरू हुए युद्ध की वजह से यह प्लान फेल हो गया। सऊदी कहने लगा कि जब तक एक अलग फिलिस्तीन राष्ट्र नहीं बन जाता तब तक वे इजराइल को मान्यता नहीं देंगे। बाद में ट्रम्प ने रणनीति बदली और इजराइल के साथ रिश्तों को इस समझौते से अलग कर दिया। मिडिल ईस्ट में सऊदी का प्रभाव बढ़ेगा परमाणु बिजलीघर (न्यूक्लियर रिएक्टर) बनने में 10 साल या उससे भी ज्यादा समय लग सकता है। इसलिए इस समझौते के बाद सऊदी अरब लंबे समय तक अमेरिका की परमाणु तकनीक और मदद पर निर्भर रहेगा। इससे दोनों देशों के बीच सुरक्षा, कारोबार और आपसी रिश्ते पहले से ज्यादा मजबूत होने की उम्मीद है। कोलंबिया यूनिवर्सिटी के सेंटर ऑन ग्लोबल एनर्जी पॉलिसी की एक्सपर्ट कैरेन यंग के मुताबिक, सऊदी अरब सिर्फ आज के लिए नहीं, बल्कि भविष्य को ध्यान में रखकर यह कदम उठा रहा है। उनका कहना है कि यह समझौता सिर्फ परमाणु बिजली बनाने तक सीमित नहीं है। इससे सऊदी अरब की राजनीतिक ताकत बढ़ेगी और मिडिल ईस्ट में उसका प्रभाव भी पहले से ज्यादा मजबूत होगा। अमेरिका को क्या फायदा होगा? इस समझौते से अमेरिका को दो बड़े फायदे मिल सकते हैं। 1. अमेरिकी कंपनियों को सऊदी अरब में परमाणु बिजली संयंत्र बनाने के अरबों डॉलर के ठेके मिल सकते हैं। 2. अमेरिका को सऊदी अरब के परमाणु कार्यक्रम पर नजदीकी नजर रखने का मौका मिलेगा, जिससे उसे हथियारों के प्रसार को लेकर अपनी चिंताओं पर नियंत्रण रखने में मदद मिल सकती है। रूस-चीन भी मदद को तैयार थे अगर अमेरिका के साथ यह समझौता किसी वजह से नहीं हो पाता, तो सऊदी अरब के पास दूसरे विकल्प भी हैं। दरअसल, सऊदी कई बार चेतावनी दे चुका था कि अगर उसे अमेरिका इसमें मदद नहीं करेगा तो वे चीन, रूस, फ्रांस या दक्षिण कोरिया जैसे दूसरे देशों से परमाणु तकनीक ले लेंगे। चीन की सरकारी कंपनी चाइना नेशनल न्यूक्लियर कॉर्पोरेशन (CNNC) पहले ही न्यूक्लियर प्लांट बनाने में रुचि दिखा चुकी है। रूस की सरकारी परमाणु कंपनी रोसाटॉम भी सऊदी अरब के साथ शुरुआती समझौते कर चुकी है। इसके अलावा दक्षिण कोरिया और फ्रांस भी संभावित साझेदार माने जा रहे हैं। ट्रम्प का फैसला बदलना संसद के लिए मुश्किल अमेरिकी संसद (कांग्रेस) में डेमोक्रेटिक पार्टी के कई सांसदों ने इस समझौते का विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है न सिर्फ इससे मिडिल ईस्ट में परमाणु हथियारों की होड़ को बढ़ावा मिलेगा बल्कि ईरान के लिए भी अपने परमाणु कार्यक्रम पर रोक लगाने की संभावना कम कर देगा। हालांकि इन विरोधों के बावजूद संसद के लिए इस समझौते को रोकना आसान नहीं होगा। आने वाले दिनों में इस समझौते को मंजूरी के लिए संसद में पेश किया जाएगा। लेकिन यदि संसद इसे रोकना चाहती है, तो उसे इस संबंध में संयुक्त प्रस्ताव (जॉइंट रिजोल्यूशन) पारित करना होगा। यदि राष्ट्रपति उस प्रस्ताव पर वीटो लगा देते हैं, तो संसद को उस वीटो को पलटने के लिए दोनों सदनों में दो-तिहाई बहुमत जुटाना होगा। यही वजह है कि राजनीतिक विरोध के बावजूद इस समझौते के लागू होने की संभावना अधिक मानी जा रही है।
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अलवर में 7वीं के तीन छात्र स्कूल से लापता: परिजनों ने एनईबी थाने पर किया प्रदर्शन; स्कूल प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी – Alwar News
अलवर शहर के एनईबी थाना क्षेत्र में एक निजी स्कूल के 7वीं कक्षा के तीन छात्र बुधवार को स्कूल से अचानक लापता हो गए। तीनों की उम्र करीब 13 साल है। बच्चों के लापता होने के बाद स्कूल प्रशासन ने करीब एक घंटे बाद परिजनों को सूचना दी। इसके बाद परिजन एनईबी थाने पहुंचे और शिकायत देकर बच्चों की जल्द तलाश की मांग की। बुधवार देर रात तक बच्चों का कोई सुराग नहीं लगने पर गुरुवार दोपहर करीब 12:30 बजे परिजनों ने एनईबी थाने के बाहर स्कूल प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी करते हुए प्रदर्शन किया। उनका आरोप है कि स्कूल परिसर से बच्चों के बाहर निकलने के बावजूद स्कूल प्रशासन ने समय पर सूचना नहीं दी और सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर लापरवाही बरती। तीनों का नहीं चला पता जानकारी के अनुसार, लापता तीनों बच्चों में से दो पहले भी स्कूल से गायब हो चुके थे और करीब तीन घंटे बाद घर लौट आए थे। इस बार उन्हीं दो बच्चों के साथ तीसरा छात्र भी चला गया। बुधवार से लेकर गुरुवार तक तीनों का कोई पता नहीं चल सका। बिना बैग के स्कूल से निकले मामले में एक बच्चे के परिजनों ने आरोप लगाया है कि बाकी दो बच्चों के परिजनों की मिलीभगत से बच्चे गायब हुए हैं। वहीं, आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों में तीनों बच्चे बिना स्कूल बैग के स्कूल से बाहर जाते दिखाई दिए हैं। पुलिस इन सभी पहलुओं की जांच कर रही है। खाटूश्यामजी जाने की चर्चा कर रहे थे स्कूल के अन्य छात्रों से पूछताछ में यह भी सामने आया है कि लापता छात्र आपस में खाटूश्यामजी जाने की चर्चा कर रहे थे। हालांकि पुलिस ने इस संबंध में अभी कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और इसे जांच का एक पहलू मानकर पड़ताल की जा रही है। पुलिस खंगाल रही सीसीटीवी फुटेज एनईबी थाना प्रभारी सीमा ने बताया कि परिजनों की रिपोर्ट पर मामला दर्ज कर लिया गया है। विभिन्न स्थानों के सीसीटीवी फुटेज खंगाले जा रहे हैं और बच्चों की तलाश के लिए पुलिस की टीमें लगातार प्रयास कर रही हैं। साथ ही परिजनों द्वारा लगाए गए आरोपों के संबंध में भी जांच की जा रही है।
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शहीद के नाम बना 4 लाख का RRC केंद्र दरका: दिन में मजदूरों का अड्डा, शाम को अराजक तत्वों का जमावड़ा – Sant Kabir Nagar News
संतकबीर नगर।4 मिनट पहले
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संत कबीरनगर के मेंहदावल विकास खंड के घुरापाली गांव में शहीद गणेश शंकर यादव के नाम पर बने रिसोर्स रिकवरी सेंटर (RRC) का दुरुपयोग हो रहा है। लगभग 4 लाख रुपये की लागत से निर्मित यह केंद्र गांव की स्वच्छता के उद्देश्य से बनाया गया था, लेकिन अब यह अराजक तत्वों और खेत मजदूरों का अड्डा बन गया है।
तीन साल पहले बने इस केंद्र का टीन शेड उखड़ गया है, जो इसकी खराब स्थिति को दर्शाता है। दिन के समय यह केंद्र मजदूरों और ग्रामीणों के बैठने का स्थान बन जाता है। शाम होते ही यहां अराजक तत्वों का जमावड़ा लगने लगता है, जिससे स्थानीय महिलाओं और लड़कियों को इस रास्ते से गुजरने में परेशानी होती है।
ग्रामीणों, जिनमें विधान, सूरज, कमलेश, राम धनी, केवल, परसुराम और रमेश शामिल हैं, ने बताया कि इस केंद्र का उपयोग आज तक इसके मूल उद्देश्य के लिए नहीं किया गया है।
ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि एडीओ पंचायत दलसिंगार यादव विकास खंड कार्यालय में बैठकर ही योजनाओं का निस्तारण कर रहे हैं, जिससे सरकारी योजनाओं के सुचारु संचालन में बाधा आ रही है। यह भी कहा गया है कि पूरे विकास खंड की लगभग तीन दर्जन पंचायतों में भी इसी तरह धन का दुरुपयोग किया गया है, जिसकी न तो निगरानी की जा रही है और न ही कोई जांच।
इस मामले पर मुख्य विकास अधिकारी (CDO) जयकेश त्रिपाठी ने कड़ा रुख अपनाया है। उन्होंने कहा कि ऐसी लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जल्द ही औचक निरीक्षण कर दोषी पाए जाने पर तत्काल कार्रवाई की जाएगी।







