तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में ऐतिहासिक जीत दर्ज कर सूबे के 13वें मुख्यमंत्री बने थलपति विजय इन दिनों अपने सियासी फैसलों के साथ-साथ सदन में अपने पहनावे को लेकर भी भारी चर्चा में हैं. मुख्यमंत्री की कमान संभालते ही विधानसभा में उनके काला कोट पहनने पर विपक्ष और कई धड़ों ने सवाल खड़े कर दिए थे, जिस पर अब सीएम विजय ने तिरुचिरापल्ली की विशाल जनसभा में गरजते हुए बेहद संजीदा और करारा जवाब दिया है. इस पहनावे पर उठे विवाद को आड़े हाथों लेते हुए विजय ने तीखा सवाल किया कि क्या कोट और सूट पहनने का हक सिर्फ सत्ताधारियों या समाज की दबंग ताकतों को ही है? उन्होंने अपने इस खास पहनावे का राज खोलते हुए बताया कि उनके ब्लैक एंड व्हाइट कपड़े असल में इंसानी दिमाग के उजाले और अंधेरे पक्षों के बीच संतुलन का प्रतीक हैं और वे राजनीति में किसी को गुमराह करने या फैंसी रंगों में दिखने नहीं, बल्कि जनता के ‘पहले सेवक’ के रूप में काम करने आए हैं.
तिरुचिरापल्ली रैली में CM विजय के भाषण की 5 बड़ी बातें ड्रग्स और कानून व्यवस्था पर घेरा: मुख्यमंत्री विजय ने पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन पर हमला बोलते हुए कहा कि पिछली सरकार ने शुरुआती दौर में ड्रग्स पर काबू नहीं पाया, जिससे यह संकट हर गली तक फैल गया. अब वे इसका ठीकरा मेरी नई सरकार पर फोड़ रहे हैं. अब सिर्फ ‘DMK बनाम TVK’ का मुकाबला: सीएम विजय ने तमिलनाडु की राजनीति के भविष्य को लेकर बड़ा दावा किया. उन्होंने अन्नाद्रमुक (AIADMK) को किनारे करते हुए कहा कि अब राज्य में मुकाबला सिर्फ दो ताकतों डीएमके और उनकी अपनी पार्टी टीवीके (TVK) के बीच है, किसी तीसरे के लिए कोई जगह नहीं है. सिद्धांतों पर नो कॉम्प्रोमाइज: विजय ने एलान किया कि वे स्टालिन की तरह कमजोर या डगमगाने वाले नेता नहीं हैं. वे धर्मनिरपेक्षता, सामाजिक न्याय, राज्य के अधिकारों और नदी जल विवादों के मुद्दों पर कभी कोई समझौता नहीं करेंगे. विधानसभा में ‘कोट’ पहनने पर जवाब: सदन में उनके पहनावे (कोट-सूट) पर उठे विवाद का जवाब देते हुए टीवीके प्रमुख ने पूछा कि क्या कोट पहनने का हक सिर्फ सत्ताधारियों और दबंग ताकतों को ही है? उन्होंने ब्लैक एंड व्हाइट कपड़ों को इंसानी दिमाग के संतुलन का प्रतीक बताया. MGR और पेरियार के रास्ते पर: विजय ने अपनी पहली ही चुनावी जीत को ऐतिहासिक बताते हुए कहा कि लोगों ने उन्हें अपार समर्थन दिया है. वे खुद की तुलना एमजीआर (MGR) से नहीं कर रहे बल्कि एमजीआर, अन्ना और पेरियार के दिखाए रास्ते पर चलकर जनता के पहले सेवक के रूप में काम कर रहे हैं. तमिलनाडु में द्विध्रुवीय सियासत का नया दौर और AIADMK को साइडलाइन करने की रणनीति
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव (23 अप्रैल) में शानदार जीत दर्ज कर 10 मई को राज्य के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेने वाले विजय का यह बयान उनकी सोची-समझी राजनीतिक रणनीति का हिस्सा है. इस रैली के जरिए उन्होंने न केवल डीएमके को ड्रग्स के मुद्दे पर रक्षात्मक होने पर मजबूर किया, बल्कि राज्य की दशकों पुरानी ‘DMK बनाम AIADMK’ की जुगलबंदी को भी आधिकारिक रूप से खत्म घोषित कर दिया.
इस घटनाक्रम का सबसे बड़ा विश्लेषण यह है कि विजय अब खुद को जयललिता और करुणानिधि के दौर के बाद राज्य के एकमात्र और सबसे मजबूत विकल्प के रूप में स्थापित कर रहे हैं. विपक्ष द्वारा सरकार गठन के शुरुआती 6 दिनों में ही उन पर किए जा रहे हमलों को उन्होंने अपनी ताकत बताया. पेरंबूर सीट से विधायक रहने के बावजूद तिरुचिरापल्ली ईस्ट (जहां से उन्होंने इस्तीफा दिया) की जनता से खुद को जोड़ना यह दिखाता है कि वे जमीन पर अपनी पकड़ ढीली नहीं होने देना चाहते. यह साफ है कि आने वाले दिनों में तमिलनाडु की राजनीति अधिक आक्रामक और दिलचस्प होने वाली है.
सवाल-जवाब
मुख्यमंत्री विजय ने तिरुचिरापल्ली की रैली में पूर्व मुख्यमंत्री एमके स्टालिन और डीएमके सरकार पर क्या गंभीर आरोप लगाए?
सीएम विजय ने आरोप लगाया कि पिछली डीएमके सरकार ने तमिलनाडु के हर शहर और गली-मोहल्ले में ड्रग कल्चर को फैलने की खुली छूट दी. उन्होंने कहा कि अगर स्टालिन सरकार ने शुरुआती दौर में ही इस पर काबू पा लिया होता, तो आज राज्य की बेटियों और महिलाओं को प्रताड़ित नहीं होना पड़ता और न ही अपनी जान गंवानी पड़ती.
तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय की पार्टी ‘तमिलगा वेत्री कड़गम’ (TVK) का प्रदर्शन कैसा रहा और उन्होंने कब शपथ ली?
23 अप्रैल को हुए एक चरण के विधानसभा चुनाव के बाद 4 मई को हुई मतगणना में विजय की पार्टी TVK ने ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए 108 सीटें जीतीं और सरकार बनाई. इसके बाद 10 May को विजय ने तमिलनाडु के 13वें मुख्यमंत्री के रूप में शपथ लेकर राज्य में डीएमके-अन्नाद्रमुक के दशकों पुराने दबदबे को खत्म कर दिया.
सीएम विजय ने तमिलनाडु के राजनीतिक भविष्य और विपक्षी दल अन्नाद्रमुक (AIADMK) को लेकर क्या बड़ा बयान दिया?
विजय ने राज्य की राजनीति को पूरी तरह द्विध्रुवीय (Binary Contest) घोषित करते हुए कहा कि अब सीधा मुकाबला सिर्फ दो पार्टियों— डीएमके (DMK) और टीवीके (TVK) के बीच है. उन्होंने साफ लहजे में कहा कि इस मुकाबले के बीच में अब किसी तीसरे दल (AIADMK) के लिए कोई भूमिका या जगह नहीं बची है.
















