बॉलीवुड को ‘जब वी मेट’, ‘रॉकस्टार’ और ‘तमाशा’ जैसी यादगार फिल्में देने वाले निर्देशक इम्तियाज अली आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं. दिलचस्प बात यह है कि वह डायरेक्टर नहीं एक्टर बनने का सपना लेकर मुंबई आए थे. हालांकि किस्मत ने उन्हें कैमरे के सामने नहीं, बल्कि कैमरे के पीछे खड़ा किया और यही फैसला उन्हें हिंदी सिनेमा के सबसे सफल निर्देशकों में शामिल कर गया.इम्तियाज अली का जन्म 16 जून 1971 को झारखंड के जमशेदपुर में हुआ था.
नई दिल्ली. बॉलीवुड के मशहूर निर्देशक इम्तियाज अली आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं. ‘जब वी मेट’, ‘रॉकस्टार’, ‘हाइवे’ और ‘तमाशा’ जैसी यादगार फिल्में बनाने वाले इम्तियाज ने अपनी कहानियों और किरदारों से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि वह निर्देशक नहीं, बल्कि अभिनेता बनने का सपना लेकर मुंबई आए थे. किस्मत ने हालांकि उनके लिए कुछ और ही सोच रखा था और यही फैसला उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट बन गया.
‘लव आज कल’, ‘रॉकस्टार’, ‘हाइवे’, ‘तमाशा’ और हाल ही में ‘अमर सिंह चमकीला’ जैसी फिल्मों ने उनकी पहचान को और मजबूत किया. अपने शानदार काम के लिए उन्हें आईफा, जी सिने अवॉर्ड, इंडियन टेली अवॉर्ड और कई प्रतिष्ठित सम्मान भी मिल चुके हैं. अभिनेता बनने का सपना लेकर मुंबई पहुंचे इम्तियाज अली ने निर्देशन की दुनिया में ऐसा मुकाम हासिल किया, जिसकी मिसाल आज भी दी जाती है.
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40% Companies Prefer Degree+AI Skills; China Scraps 12K Degrees, Launches AI Courses
नई दिल्ली4 मिनट पहले
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देश में आईटी, कानून, वाणिज्य, अनुवाद, डिजाइन और पुस्तकालय विज्ञान जैसे क्षेत्रों में बड़ा उलटफेर शुरू हो चुका है। AI के टूल्स ने उन कामों को या तो खत्म कर दिया है या बेहद सिकोड़ दिया है, जिनके लिए लाखों छात्र हर साल डिग्रियां लेते हैं।
टीमलीज जैसी बड़ी एचआर कंपनी का कहना है कि 40% कंपनियां ‘हाइब्रिड स्किल’ यानी डिग्री के साथ AI टूल्स की जानकारी को अनिवार्य मानती हैं। नैस्कॉम की 2024 की रिपोर्ट कहती है कि देश में 82% बीसीए और एमसीए स्नातकों को AI टूल्स की औपचारिक ट्रेनिंग नहीं है।
वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट के अनुसार, नौकरियां उन लोगों के पास रहेंगी जो AI टूल का उपयोग करके उत्पादकता 40% तक बढ़ा सकते हैं।
आईबीएम इंस्टीट्यूट फॉर बिजनेस वैल्यू की रिपोर्ट कहती है कि AI लोगों की जगह नहीं लेगा, पर जो AI का उपयोग करते हैं, वे उनकी जगह ले लेंगे जो ऐसा नहीं करते। ‘फ्यूचर ऑफ जॉब्स रिपोर्ट 2025’ के अनुसार, 2030 तक 22% नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं।
इधर, चीन ने 2021 और 2025 के बीच अपने विश्वविद्यालयों ने 12,200 से अधिक स्नातक (अंडरग्रेजुएट) कार्यक्रमों को रद्द या निलंबित कर दिया, जबकि लगभग 10,200 नए कार्यक्रम शुरू किए।
एक्सपर्ट बोले- तरीका नहीं बदला तो डिग्रियों की कोई वैल्यू नहीं रहेगी
दैनिक भास्कर ने टेक कंपनी ‘पीपुलस्ट्रॉन्ग’ और ‘टैग्ड’ के सह-संस्थापक और एचआर पंकज बंसल से AI के असर पर चर्चा की और उनके 10 सवाल किए, जिन्हें उन्होंने जवाब दिए हैं।
पारंपरिक डिग्री वालों का क्या होगा?पारंपरिक डिग्रियां पूरी तरह बेकार नहीं होंगी, लेकिन उनका स्वरूप अप्रासंगिक हो रहा है। पढ़ाई का तरीका और कंटेंट न बदला, तो उन डिग्रियों की कोई वैल्यू नहीं बचेगी। बाजार में केवल थ्योरी या रट्टा वाले औसत छात्रों की जरूरत खत्म हो रही है। अपग्रेड करना होगा।
जो डिग्री ले रहे हैं, वे क्या कर सकते हैं?जो छात्र अभी सेकंड या थर्ड ईयर में हैं, वे लाइव प्रोजेक्ट पर काम शुरू करें। AI टूल्स का प्रोफेशनल लाइसेंस लें, उस पर 6 महीने रात-दिन काम करें और सॉफ्टवेयर या वेबसाइट्स बनाएं।
जो डिग्री पूरी कर चुके हैं, वे क्या करें?सबसे बेहतरीन रास्ता है- इंटर्नशिप और प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट। अगर आपको किसी बड़ी कंपनी में मौका नहीं मिल रहा है, तो छोटे स्टार्टअप, एनजीओ या अपने स्थानीय क्षेत्र की किसी फैक्ट्री या दुकान के पास जाएं। उनकी समस्याओं को समझें और AI से उन्हें सुलझाएं।
‘ग्रेजुएशन’ की वैल्यू कितनी बचेगी?भारत में अभी नौकरी के आवेदन शॉर्टलिस्ट करने के लिए ग्रेजुएशन की ‘स्टैम्पिंग’ जरूरी है और यह स्थिति अगले 3 से 5 साल तक बनी रहेगी। लेकिन इसके बाद न्यू एजुकेशन पॉलिसी (NEP) का ‘5.5 क्रेडिट स्कोर’ इसे रिप्लेस कर देगा, जहां प्रैक्टिकल काम और प्रोफेशनल कोर्सेज के जरिए अंक मिलेंगे। आने वाले समय में लोग पूछेंगे कि आप ‘5.5 स्केलर’ हैं या नहीं। टेक वर्ल्ड में पहली नौकरी के बाद कोई आपकी डिग्री नहीं पूछेगा।
ऐसे में जॉब पाने का अच्छा तरीका क्या?सबसे अच्छा तरीका है कि आप ‘10x इंजीनियर’ या ‘10x प्रोफेशनल’ बनें, यानी जो अकेले 10 सामान्य लोगों का काम संभाल सके। अगर आप AI की मदद से किसी कंपनी का समय और लागत बचा सकते हैं, तो जहां पहले 5 लाख रु. का शुरुआती पैकेज मिलता था, वहां आज कंपनियां 25 लाख रु. की शुरुआती तनख्वाह देने को तैयार हैं। कंपनियों को ‘औसत’ लोग नहीं, बल्कि काम के लोग चाहिए।
AI कोर्सेज से जॉब के दावे सही हैं?बिल्कुल नहीं। नुक्कड़ पर चल रहे किसी भी संस्थान से AI का सर्टिफिकेट ले लेने से नौकरी की कोई गारंटी नहीं मिलती। AI सर्टिफिकेट सीवी को शॉर्टलिस्ट होने में मदद कर सकता है, पर नौकरी तभी मिलेगी जब बुनियादी योग्यता होगी, AI का व्यावहारिक ज्ञान होगा और असेसमेंट टेस्ट क्लियर करेंगे।
एंट्री लेवल यानी फ्रेशर्स की जॉब्स पर इसका क्या और कितना असर पड़ रहा है?शुरुआती दौर में दबाव जरूर है क्योंकि जो बुनियादी काम पहले 10 लोग मिलकर करते थे, वह अब दो लोग AI की मदद से निपटा रहे हैं। इंफोसिस, विप्रो और टीसीएस जैसी ट्रेडिशनल कंपनियों ने शुरुआत में फ्रेशर्स की हायरिंग रोकी या टाली है। लेकिन यह केवल शॉर्ट-टर्म ट्रेंड है, लॉन्ग-टर्म में जॉब मार्केट में नेट एडिशन (नौकरियों की बढ़ोतरी) ही होने वाला है।
जब आईटी कंपनियां भर्तियां रोक रही हैं, तो नए युवाओं को जॉब कहां मिलेगी?भारत में इस समय ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स यानी जीसीसी (GCCs) की बाढ़ आई हुई है। देश में 4000 से ज्यादा जीसीसी हैं और हर हफ्ते दो नए सेंटर खुल रहे हैं। ये सेंटर्स AI स्किल्स वाले युवाओं को बहुत भारी पैकेज और ऊंची सैलरी पर हायर कर रहे हैं। इसके अलावा धीरे-धीरे ट्रेडिशनल कंपनियों में भी नियुक्तियां दोबारा खुलने लगी हैं।
क्या AI इंसानों को पूरी तरह रिप्लेस कर देगा, क्या इसकी लागत इंसानों से कम है?वैश्विक संगठनों को समझ आने लगा है कि AI की कॉस्ट (टोकन और जीपीयू प्रोसेसिंग लागत) इंसानी लागत से कम नहीं है। कई स्टार्टअप्स का AI बिल इतना ज्यादा आ रहा है कि वे AI टूल्स के बजाय दो इंसानों को हायर करना बेहतर समझ रहे हैं। इसके अलावा, जिन कामों में मानवीय निर्णय और लोगों से जुड़ने की जरूरत होती है, वहां AI कभी रिप्लेस नहीं कर सकता।
वो कौन-सी मानवीय खूबियां और सेक्टर्स हैं, जहां इंसान ही सबसे आगे रहेंगे?AI के दौर में चार मानवीय खूबियां सबसे कीमती हो गई हैं- एग्रीगेशन एबिलिटी (चीजों को आपस में जोड़ने की समझ), डिसीजन मेकिंग (निर्णय क्षमता), हाई ईक्यू (इमोशनल कोशेंट) और अपनी बात को प्रभावी ढंग से बयां करने का हुनर। अगर सेक्टर्स की बात करें, तो हॉस्पिटैलिटी, डेटा साइंसेज, सेल्स और AI-असिस्टेड स्पेशलिस्ट्स (जैसे डॉक्टर या जर्नलिस्ट जो AI जानते हों) के रोल्स हमेशा सुरक्षित और मजबूत रहेंगे।
चीन ने 12 हजार डिग्रियां खत्म कीं, AI कोर्स शुरू
चीन ने 2021 और 2025 के बीच अपने विश्वविद्यालयों ने 12,200 से अधिक स्नातक (अंडरग्रेजुएट) कार्यक्रमों को रद्द या निलंबित कर दिया, जबकि लगभग 10,200 नए कार्यक्रम शुरू किए।
इनमें से कई कटौतियां कला, मानविकी, विदेशी भाषाओं और प्रबंधन में केंद्रित थीं, क्योंकि चीन सरकार विश्वविद्यालयों पर AI, सेमीकंडक्टर्स, रोबोटिक्स और अन्य रणनीतिक उद्योगों के लिए प्रतिभाएं तैयार करने का दबाव बना रही है।
भारत में कर्नाटक सरकार ने 1300 कोर्स की सीटें घटाईं
भारत में फिलहाल कर्नाटक सरकार ने कम दाखिले और अन्य कारकों का हवाला देते हुए शैक्षणिक 2026-27 के लिए सरकारी कॉलेजों में 458 बीए, बीएससी, बीकॉम कार्यक्रम संयोजनों (कॉम्बिनेशन्स) को बंद कर दिया है। 1,300+ कोर्स में सीटें घटाईं।
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सैम ऑल्टमैन बोले- AI से नौकरी जाने का खतरा नहीं: रोजगार में इंसानी हिस्सा बदलना नामुमकिन; शुरुआती डर गलत साबित हुआ
ओपन-AI के CEO सैम ऑल्टमैन ने कहा कि AI की तेज ग्रोथ और इस्तेमाल से दुनिया में जॉब्स एपोकैलिप्स यानी नौकरियों का संकट नहीं आएगा। उन्होंने माना कि तकनीक ने उतने व्हाइट कॉलर जॉब्स खत्म नहीं किए हैं, जितने का उन्हें पहले डर था।CBA के चीफ एग्जीक्यूटिव मैट कॉम्यन को दिए इंटरव्यू में ऑल्टमैन ने कहा कि शुरुआत में वह ग्लोबल एम्प्लॉयमेंट लेवल पर AI के प्रभाव को लेकर चिंतित थे। पूरी खबर पढ़ें…
लखनऊ के महानगर इलाके में फर्जी आईपीएस पकड़ा गया। जलसाज पुलिस को अर्दब में लेने का प्रयास कर रहा था। इसके बाद शक होने पर पुलिस ने आईडी कार्ड मांगा तो नहीं दिखा सका। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की तब मामले का खुलासा हुआ। पुलिस के मुताबिक सोमवार शाम गोल मार्केट चौराहे पर चेकिंग के दौरान सूचना मिली एक व्यक्ति दुकानदारों से झगड़ा कर रहा है। मौके पर पहुंचने पर जानकारी हुई एक युवक को आईपीएस अधिकारी बताकर दुकानदार पर जब गांठ रहा है। इसके बाद पुलिस ने पूछताछ की तो उनसे भी सैल्यूट करने का दबाव बनाने लगा। पुलिस को संदेह हुआ तो उन्होंने आईडी कार्ड मांगा। इस पर जालसाज नाराज हो गया और उनके नाम पूछने लगा। उसके हाव-भाव से संदेह होने पर पुलिस ने हिरासत में ले लिया। मामले में चौकी प्रभारी आर्यन शर्मा ने बताया हिरासत में लिए गए व्यक्ति का नाम मिथलेश शुक्ला (40) है। लखनऊ के मड़ियांव थाना क्षेत्र स्थित भारत नगर में रहता है। मिथिलेश खुद को नोएडा में पोस्टेड आईपीएस बता रहा था। आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके आगे की कार्रवाई की जा रही है।
जवाहर सर्किल थाना पुलिस ने मालवीय नगर स्थित क्वीन्स हब क्लब में चल रहे अवैध हुक्का बार पर देर रात छापा मारकर क्लब के मैनेजर को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से 3 हुक्के, 17 पाइप, 5 चिलम और विभिन्न प्रकार के नशीले फ्लेवर जब्त किए हैं। वहीं हुक्का पार्टी कर रहे दो युवकों के खिलाफ कोटपा एक्ट के तहत चालान भी किया गया है। डीसीपी ईस्ट रंजिता शर्मा ने बताया किपुलिस को 15 जून को मुखबिर से सूचना मिली थी कि मालवीय नगर के गिरधर मार्ग स्थित क्वीन्स हब क्लब में ग्राहकों को खाने-पीने की सामग्री के साथ हुक्का परोसा जा रहा है। सूचना पर पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर क्लब में दबिश दी। जांच के दौरान क्लब के अंदर कुछ युवक टेबल पर रखे हुक्कों के जरिए तंबाकूयुक्त फ्लेवर का सेवन करते मिले। पुलिस ने टेबल पर रखे 3 हुक्के, 17 पाइप, 5 चिलम और फ्लेवर के पैकेट जब्त कर लिए। पूछताछ में क्लब मैनेजर इरशाद कोई वैध लाइसेंस प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद पुलिस ने क्लब मैनेजर इरशाद (31) निवासी जिला नूंह, हरियाणा को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही हुक्का पी रहे दो युवकों के खिलाफ कोटपा अधिनियम के तहत चालान कर जुर्माना वसूला गया। पुलिस का कहना है कि शहर में अवैध हुक्का बार और देर रात पार्टियां आयोजित करने वालों के खिलाफ आगे भी अभियान जारी रहेगा।
ग्वालियर के मुरार थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रहने वाली एक 26 वर्षीय विवाहिता के साथ छल-कपट और ब्लैकमेलिंग का गंभीर मामला उजागर हुआ है। आरोपी ने महिला की मजबूरी का फायदा उठाते हुए पहले नौकरी लगवाने का लालच दिया और फिर शादी का झांसा देकर उसका लगातार शारीरिक शोषण किया। पीड़ित ने सुनवाई न होने का आरोप लगाते हुए सोमवार रात मुरार थाना में जहर खाने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने समय रहते उसे बचाकर अस्पताल पहुंचाया है। पीड़िता की लिखित शिकायत पर मुरार थाना पुलिस ने आरोपी युवक के खिलाफ दुष्कर्म सहित विभिन्न गंभीर धाराओं मामला दर्ज कर लिया है। एक बार पहले भी महिला शिकायत कराने आई थी और फिर मना कर गई थी। साथ ही जहर खाने की हरकत पहले भी कर चुकी है। बच्ची को पढ़ाने ग्वालियर आई थी पीड़िता
मुरार थाना पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, मूल रूप से भिंड की रहने वाली महिला की शादी वर्ष 2016 में भिंड में ही हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी। शादी के बाद उसकी दो छोटी बच्चियां (5 वर्ष और 3 वर्ष) हैं। करीब 4 साल पहले पीड़िता अपनी बड़ी बेटी को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए ग्वालियर में किराये का मकान लेकर रहने आई थी। मोहल्ले में ही आरोपी गजेंद्र केवट की एक ऑनलाइन (कियोस्क सेंटर) दुकान थी। पीड़िता अक्सर अपने बैंक खाते से पैसे निकालने के लिए गजेंद्र की दुकान पर जाती थी, जिसके चलते दोनों के बीच जान-पहचान हो गई और मोबाइल नंबरों का आदान-प्रदान होने के बाद बातचीत शुरू हो गई। मजबूरी का उठाया फायदा, मई 2024 में पहली बार बनाए संबंध
बातचीत के दौरान आरोपी गजेंद्र केवट को पता चला कि महिला अपने पति से दूर बच्चों की पढ़ाई के लिए ग्वालियर में अकेली रहती है। उसने महिला की आर्थिक स्थिति का फायदा उठाने के लिए जाल बुना। गजेंद्र ने पीड़िता से कहा कि “तुम बच्चों के साथ अकेली रहती हो, तुम्हें पैसों की सख्त जरूरत होगी। मैं तुम्हारी एक अच्छी जगह नौकरी लगवा दूंगा।” इसी बहाने से माह मई 2024 में आरोपी नौकरी का झांसा देकर महिला के किराये के कमरे पर पहुंचा और वहां उसके साथ पहली बार जबरन शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद आरोपी लगातार नौकरी लगवाने का लालच देकर महिला का शारीरिक शोषण करता रहा। जब महिला ने विरोध किया, तो आरोपी ने उसे अपने जाल में फंसाए रखने के लिए कहा कि “तुम अपने पति से कानूनी तौर पर तलाक ले लो, तो मैं तुमसे कोर्ट मैरिज (शादी) कर लूंगा।”इसके बाद से लगाकार ब्लैकमेल कर संबंध बना रहा था। 23 मई 2026 तक आरोपी ने संबंध बनाए अब शादी से मुकर गया है। सुनवाई न होने पर जहर खाने का किया प्रयास
सोमवार को महिला मुरार थाना पहुंची और सुनवाई न होने का आरोप लगाते हुए जहर खाने का प्रयास किया। जिस पर वहां मौजूद पुलिस कर्मियों ने तत्काल उसे रोक लिया और तत्काल मेडिकल के लिए हॉस्पिटल पहुंचाया है। पुलिस ने महिला के लौटने पर तत्काल आरोपी के खिलाफ नौकरी व शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का मामला दर्ज किया है। पहले भी कर चुकी है ऐसा पुलिस ने बताया कि महिला पहले भी मामला दर्ज कराने आई थी और पूरी रिपोर्ट टाइप कराने के बाद जब मामला दर्ज करने की बारी आई तो आरोपी से समझौता कर चली गई थी। इसके बाद एक बार पहले भी वह जहर खाने का प्रयास कर चुकी है। सीएसपी मुरार अतुल कुमार सोनी ने बताया एक महिला ने अपने साथ नौकरी के नाम पर दुष्कर्म की शिकायत की है। महिला की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है। आरोपी की तलाश की जा रही है, जल्द ही आरोपी को पकड़ लिया जाएगा।
बेतिया में दहेज की मांग पूरी न होने पर एक शादी टूट गई। घटना सोमवार की है। लड़की पक्ष के लोगों ने बताया कि शादी के दिन लड़के पक्ष के लोगों ने अतिरिक्त 50 हजार रुपये की मांग की जिसे हम नहीं दे पाएं। उन्होंने आगे बताया कि इसके बाद बारात का इंतजार करते रहे लेकिन बारात नहीं आई। वहीं सूचना पर पुलिस भी पहुंची। पूरा मामला योगापट्टी प्रखंड के मच्छरगांवा बाजार की है। सभी तैयारियां पूरी हो गई थी लड़की के पिता जनाब साहब ने बताया कि उन्होंने अपनी बेटी शबनम खातून की शादी जिले के ही रूदलपुर के जनाब गुलाब अंसारी के बेटे अरमान साहब से तय की थी। लेकिन बारात न लाने की वजह से शादी नहीं हो सकी। उन्होंने यह भी कहा कि विवाह के लिए घर में सभी तैयारियां पूरी हो चुकी थीं। रिश्तेदार और मेहमान भी पहुंच गए थे और बारात के स्वागत की व्यवस्था की गई थी। शादी के दिन 50 हजार की डिमांड लडकी के पिता ने बताया कि शादी तय होने के समय लड़के पक्ष को मोटरसाइकिल, फर्नीचर और लगभग डेढ़ लाख रुपये नकद दिए गए थे। इसके बावजूद, शादी के दिन लड़के पक्ष ने अतिरिक्त 50 हजार रुपये की मांग की। परिजनों ने बताया कि वे यह अतिरिक्त राशि देने में असमर्थ थे। सूचना पर पहुंची पुलिस घटना के बाद स्थानीय लोगों ने मामले की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है। वहीं थानाध्यक्ष धुर्व नारायण सिंह ने जानकारी मिलते ही 112 की पुलिस ने बताया कि यदि पीड़ित परिवार द्वारा शिकायत दर्ज कराई जाती है, तो मामले की जांच कर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अहमदाबाद प्लेन क्रैश में अपनी बहन को खोने वाले फिल्ममेकर मिलान शर्मा अब इस दर्दनाक हादसे पर एक फिल्म बनाने जा रहे हैं. उनका कहना है कि यह सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि उनके लिए एक निजी मिशन है. उन्होंने यहां तक कहा कि यह उनके करियर का आखिरी प्रोजेक्ट भी हो सकता है.
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फिल्ममेकर ने बताया क्यों बनाई फिल्म
नई दिल्ली. वडोदरा में रहने वाले 38 वर्षीय मिलान शर्मा मूल रूप से हरियाणा के कुरुक्षेत्र के रहने वाले हैं. पिछले साल अहमदाबाद में हुए एयर इंडिया प्लेन क्रैश में उन्होंने अपनी 56 साल की बहन अंजू शर्मा को खो दिया था. हादसे के कुछ ही दिनों बाद उन्होंने तय कर लिया था कि इस त्रासदी की कहानी बड़े पर्दे पर जरूर लाएंगे.
मिलान ने बताया कि हादसे के एक हफ्ते के भीतर ही उन्होंने इस पर फिल्म बनाने का फैसला कर लिया था और वह पहले से ही इस प्रोजेक्ट पर काम कर रहे हैं. उनका कहना है कि एक साल बीत जाने के बाद भी लोग हादसे की अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतजार कर रहे हैं और पीड़ित परिवार जानना चाहते हैं कि आखिर उस दिन हुआ क्या था.
हादसे के बाद बदली जिंदगी पर होगी आधारित
मिलान शर्मा के मुताबिक, यह फिल्म सिर्फ विमान हादसे तक सीमित नहीं रहेगी. इसमें उन परिवारों की कहानी भी दिखाई जाएगी, जिनकी जिंदगी इस दुर्घटना के बाद पूरी तरह बदल गई. मिलान अब तक 20 से 25 प्रभावित परिवारों से मिल चुके हैं और ज्यादा से ज्यादा लोगों की कहानी जुटाने की कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने बताया कि वह परिवारों से फिल्म के लिए नहीं, बल्कि उनका दुख समझने और बांटने के लिए मिले. इसी दौरान उन्होंने कई ऐसे लोगों से भी बात की, जो हादसे के समय मौके पर मौजूद थे. वह पीड़ितों की यादें, तस्वीरें और उनके आखिरी पलों से जुड़ी बातें भी इकट्ठा कर रहे हैं.
फिल्म को लेकर किया दावा
मिलान का कहना है कि इस हादसे को लेकर हर व्यक्ति का अपना नजरिया है और वह इन सभी कहानियों को एक साथ लेकर आना चाहते हैं. हालांकि फिल्म की स्क्रिप्ट को अंतिम रूप देने से पहले वह जांच रिपोर्ट का इंतजार करेंगे. उनका कहना है कि हादसे की वजह चाहे मानवीय गलती निकले या तकनीकी खराबी, फिल्म जरूर बनेगी.
बता दें कि मिलान ने बताया कि यह एक बड़े स्तर का प्रोजेक्ट होगा, जिसमें उनके प्रोडक्शन पार्टनर और सहयोगी भी साथ होंगे. मिलान मानते हैं कि अगर उनका कोई अपना इस हादसे का शिकार नहीं भी होता, तब भी वह इस पर फिल्म बनाते, लेकिन शायद उतने जुनून के साथ नहीं. इस हादसे ने उनकी निजी जिंदगी पर भी गहरा असर डाला है. अब जब भी वह हवाई यात्रा करते हैं, तो घबराहट महसूस होती है. उन्होंने बताया कि हाल ही में फ्लाइट में बैठने से पहले उन्होंने अपने परिवार को तस्वीर भेजी, जबकि पहले कभी ऐसा नहीं किया था.
बता दें कि मिलान शर्मा ने 2007 में बतौर एक्टर एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री में कदम रखा था. बाद में उन्होंने प्रोडक्शन और डायरेक्शन की दुनिया में काम किया. वह पंजाबी फिल्म ‘इश्क वाला’ और गुजराती प्रोजेक्ट ‘अमे छिये’ को भी प्रोड्यूस कर चुके हैं.
न्यूज 18 हिंदी में एंटरटेनमेंट सेक्शन में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे मुनीष कुमार दिल्ली के रहने वाले हैं. डिजिटल मीडिया में उन्हें 10 साल का अनुभव है.राजधानी कॉलेज (DU) से पॉलिटिकल साइंस (ऑनर्स) की पढ…और पढ़ें
अडानी समूह के विमानन कारोबार के लिए वैश्विक मोर्चे से एक बेहद शानदार खबर आई है. पेरिस में यूनेस्को (UNESCO) मुख्यालय में दिए जाने वाले प्रतिष्ठित ‘प्रिक्स वर्साय वास्तुकला और डिजाइन पुरस्कार 2026’ ने दुनिया के 7 सबसे खूबसूरत हवाई अड्डों की सूची जारी की है, जिसमें भारत के दो हवाई अड्डों ने अपनी जगह पक्की कर ली है. अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड (AAHL) द्वारा संचालित नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और गुवाहाटी का लोकप्रिय गोपीनाथ बोरदोलोई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (टर्मिनल 2) इस वैश्विक सूची में शामिल हुए हैं. खास बात यह है कि इस साल भारत की तरफ से सिर्फ इन्हीं दो हवाई अड्डों को यह अंतरराष्ट्रीय सम्मान मिला है.
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अडानी समूह के इन दोनों टर्मिनलों को पारंपरिक और उबाऊ सरकारी इमारतों के ढर्रे से अलग हटकर तैयार किया गया है. (IANS)
नई दिल्ली. भारतीय विमानन क्षेत्र और बुनियादी ढांचे के लिहाज से एक बड़ी और गर्व करने वाली खबर आई है. पेरिस में यूनेस्को मुख्यालय द्वारा घोषित समकालीन वास्तुकला के सबसे प्रतिष्ठित पुरस्कार ‘प्रिक्स वर्साय 2026’ की सूची में भारत के दो हवाई अड्डों को दुनिया के सबसे खूबसूरत हवाई अड्डों में शामिल किया गया है. इस साल वैश्विक स्तर पर केवल सात एविएशन इंफ्रास्ट्रक्चर प्रोजेक्ट्स को उनकी बेहतरीन वास्तुकला, सांस्कृतिक पहचान और पर्यावरण अनुकूल डिजाइन के लिए चुना गया है. इनमें से 2 भारत के हैं. दोनों का संचालन गौतम अडानी की कंपनी ‘अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड’ करती है.
यह अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि इसलिए भी खास है क्योंकि भारत से इस पूरी सूची में सिर्फ इन्हीं दो हवाई अड्डों को जगह मिली है. इन एयरपोर्ट्स ने दुनिया के कई विकसित देशों के आधुनिक विमानन केंद्रों को पछाड़कर यह मुकाम हासिल किया है. अडानी समूह के इन दोनों टर्मिनलों को पारंपरिक और उबाऊ सरकारी इमारतों के ढर्रे से अलग हटकर तैयार किया गया है. यह न केवल वैश्विक मानकों को पूरा करते हैं बल्कि भारत की बढ़ती विमानन महत्वाकांक्षाओं और आधुनिक डिजाइन क्षमताओं का भी प्रतिनिधित्व करते हैं.
इन वैश्विक दिग्गजों के साथ मिली जगह
साल 2026 की इस प्रतिष्ठित सूची में शामिल होकर भारतीय हवाई अड्डों ने वैश्विक स्तर पर अपनी धाक जमाई है. इस सूची में शामिल अन्य देशों के प्रमुख नाम इस प्रकार हैं:
ग्वांगझू (चीन)
फ्रैंकफर्ट एम मेन (जर्मनी)
कंदल स्टुएंग (कंबोडिया)
पिट्सबर्ग (अमेरिका)
सैन डिएगो (अमेरिका)
डिजाइन में ऐसा क्या है जो दुनिया दीवानी हो गई?
इन दोनों हवाई अड्डों के निर्माण और उनकी वास्तुकला में स्थानीय संस्कृति और भविष्य की जरूरतों का बेहतरीन मेल देखने को मिलता है:
नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा (टर्मिनल 1): इस हवाई अड्डे के पूरे निर्माण को भारत के राष्ट्रीय फूल ‘कमल’ से प्रेरित होकर तैयार किया गया है. यह अत्याधुनिक वैश्विक तकनीक, भारतीय कला और कार्यशैली के बेहतरीन तौर-तरीकों का एक अनूठा उदाहरण पेश करता है, जो यात्रियों को विश्व स्तरीय अनुभव देता है.
गुवाहाटी हवाई अड्डा (टर्मिनल 2): पूर्वोत्तर भारत के इस अहम प्रवेश द्वार को असम की समृद्ध सांस्कृतिक और प्राकृतिक विरासत के रंग में रंगा गया है. इसका मुख्य डिजाइन वहां के मशहूर ‘बांस के ऑर्किड’ से प्रेरित है. इसमें प्राकृतिक सिद्धांतों का इस्तेमाल किया गया है, जो पर्यावरण को नुकसान पहुंचाए बिना यात्रियों को प्रकृति के करीब होने का अहसास कराता है.
कंपनी की साख और ब्रांड वैल्यू को मिलेगा बूस्ट
अडानी एयरपोर्ट होल्डिंग्स लिमिटेड के प्रवक्ता ने इस बड़ी अंतरराष्ट्रीय उपलब्धि पर कहा कि यह सम्मान देश में विश्व स्तरीय बुनियादी ढांचा खड़ा करने की हमारी प्रतिबद्धता पर मुहर लगाता है. हम ऐसे हवाई अड्डे विकसित कर रहे हैं जो न केवल सुंदरता बल्कि कार्यक्षमता और परिचालन दक्षता को भी सुनिश्चित करते हैं. व्यापार विशेषज्ञों का मानना है कि इस वैश्विक सम्मान से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अडानी समूह के इंफ्रा कारोबार की साख और मजबूत होगी. इस बड़ी वैश्विक पहचान का सकारात्मक असर आने वाले समय में समूह के विमानन क्षेत्र के शेयरों और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर नई परियोजनाएं हासिल करने की क्षमता पर साफ देखने को मिल सकता है.
मैं जय ठाकुर, न्यूज18 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहा हूं. मेरा मुख्य काम बिजनेस की पेचीदा खबरों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. फिर चाहे वह शेयर बाजार की हलचल हो, देश की इकोनॉमी क…और पढ़ें
Easy Dessert Recipes: अगर मीठा खाने का मन है, लेकिन गैस जलाने का झंझट नहीं चाहते, तो कुछ नो-कुक मिठाइयां आपके लिए बेहतरीन विकल्प हैं. बिस्किट चॉकलेट बॉल्स, ड्राई फ्रूट लड्डू, मैंगो योगर्ट डेजर्ट जैसी रेसिपीज मिनटों में तैयार हो जाती हैं और स्वाद में भी शानदार होती हैं. गर्मियों और अचानक आने वाले मेहमानों के लिए ये मिठाइयां परफेक्ट हैं.
ड्राई फ्रूट के लड्डू और मैंगो योगर्ट डेजर्ट को आप आसानी से तैयार कर सकते हैं.
No-Gas Dessert Ideas at Home: मिठाइयां खाना अधिकतर लोगों को अच्छा लगता है. अक्सर लोग हलवाई की दुकान पर जाकर मिठाई खा लेते हैं. लोगों को लगता है कि घर पर मिठाई बनाने में कई घंटे लग जाएंगे और उसके लिए ढेर सारा सामान चाहिए. खासकर गर्मी के मौसम में लोग गैस जलाने से बचते हैं, क्योंकि किचन में पसीने से बुरा हाल हो जाता है. अच्छी बात यह है कि कई ऐसी स्वादिष्ट मिठाइयां हैं, जिन्हें बनाने के लिए गैस जलाने की जरूरत ही नहीं पड़ती. अगर घर में अचानक मेहमान आ जाएं या बच्चों को कुछ मीठा खाने की इच्छा हो, तो आप बिना गैस जलाए ये मिठाइयां ट्राई कर सकते हैं.
बिस्किट चॉकलेट बॉल्स
अगर आप कम समय में मिठाई बनाना चाहते हैं, तो बिस्किट चॉकलेट बॉल्स एक शानदार विकल्प हैं. सबसे पहले अपनी पसंद के किसी भी बिस्किट को बारीक क्रश कर लें. अब इसमें कंडेंस्ड मिल्क और थोड़ा-सा कोको पाउडर मिलाकर एक मुलायम मिश्रण तैयार करें. स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें चॉकलेट चिप्स या बारीक कटे हुए ड्राई फ्रूट्स भी मिला सकते हैं. तैयार मिश्रण से छोटे-छोटे बॉल्स बनाएं और उन्हें नारियल के बुरादे, चॉकलेट स्प्रिंकल्स या क्रश किए हुए मेवों में रोल कर लें. इसके बाद इन्हें 20 से 30 मिनट के लिए फ्रिज में रख दें. ठंडे होने के बाद इनका स्वाद और टेक्सचर दोनों बेहतर हो जाते हैं.
ड्राई फ्रूट लड्डू
ड्राई फ्रूट लड्डू स्वाद के साथ सेहत का खजाना होते हैं. ये लड्डू बनाने के लिए खजूर, बादाम, काजू, अखरोट, पिस्ता और किशमिश जैसे सूखे मेवों को मिक्सर में दरदरा पीस लें. खजूर की प्राकृतिक मिठास इस रेसिपी में चीनी की जरूरत को खत्म कर देती है, जिससे यह ज्यादा हेल्दी बन जाती है. मिश्रण तैयार होने के बाद हाथों से छोटे-छोटे लड्डू बना लें. चाहें तो ऊपर से खसखस, नारियल का बुरादा या कटे हुए पिस्ते लगाकर इन्हें और आकर्षक बना सकते हैं. ये लड्डू प्रोटीन, फाइबर और हेल्दी फैट्स से भरपूर होते हैं.
मैंगो योगर्ट डेजर्ट
मैंगो योगर्ट डेजर्ट एक हल्की, फ्रेश और स्वादिष्ट स्वीट डिश है, जिसे बिना किसी झंझट के तैयार किया जा सकता है. इसके लिए ताजे आम का गूदा लें और उसे गाढ़े दही के साथ अच्छी तरह मिलाएं. इसमें शहद या मेपल सिरप भी मिला सकते हैं. इस मिश्रण को सर्विंग ग्लास में डालें और ऊपर से कटे हुए आम, अनार के दाने, ड्राई फ्रूट्स या ग्रेनोला से सजाएं. इसे कुछ देर फ्रिज में ठंडा होने के लिए रख दें. ठंडा परोसने पर इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है.
नारियल और कंडेंस्ड मिल्क बर्फी
नारियल और कंडेंस्ड मिल्क की बर्फी बनाने के लिए सूखे नारियल के बुरादे में कंडेंस्ड मिल्क मिलाकर अच्छी तरह मिक्स करें, जब तक कि एक गाढ़ा और चिपचिपा मिश्रण तैयार न हो जाए. अब इस मिश्रण को घी लगी ट्रे या किसी फ्लैट कंटेनर में समान रूप से फैला दें. ऊपर से कटे हुए बादाम, पिस्ता या केसर की कुछ लड़ियां डालकर सजाएं. इसे कुछ घंटों के लिए फ्रिज में रख दें ताकि मिश्रण अच्छी तरह सेट हो जाए. सेट होने के बाद इसे मनचाहे आकार में काट लें. यह मिठाई स्वाद में रिच होती है और बाजार जैसी बर्फी का एहसास देती है.
फ्रूट कस्टर्ड कप
फ्रूट कस्टर्ड कप एक रंग-बिरंगी और ताजगी से भरपूर मिठाई है. अगर आपके पास पहले से तैयार कस्टर्ड है, तो इसे बनाना बेहद आसान हो जाता है. एक बड़े बाउल में कटे हुए सेब, केला, अंगूर, आम, कीवी या अपनी पसंद के अन्य फल डालें. अब इनमें तैयार कस्टर्ड या गाढ़ा मीठा दही मिलाएं और अच्छी तरह मिक्स करें. इस मिश्रण को छोटे-छोटे सर्विंग कप्स में भरें और ऊपर से ड्राई फ्रूट्स, चेरी या अनार के दानों से सजाएं. कुछ देर फ्रिज में रखने के बाद यह डेजर्ट और भी स्वादिष्ट हो जाता है. यह मिठाई स्वाद के साथ-साथ विटामिन और मिनरल्स का भी अच्छा स्रोत होती है.
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अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें
Real Life Gangster Movies Bollywood : रियल लाइफ गैंगस्टर की पर्सनल लाइफ पर बेस्ड फिल्मों को बॉलीवुड में हमेशा पसंद किया गया. 1970 के दशक से ही बॉलीवुड में मुंबई और देश के अन्य राज्यों के गैंगस्टर की रियल लाइफ पर बेस्ड फिल्में बनने लगी थीं. 90 और 2000 के दशक में सबसे ज्यादा गैंगस्टर बेस्ड फिल्में बनाई गईं. राइटर सलीम-जावेद की जोड़ी ने गैंगस्टर की लाइफ फैंटेंसी को फिल्मों से जोड़ा और सिनेमा में नया रोमांच पैदा किया. 25 साल के अंतराल में तीन ऐसी फिल्में आईं जिनमें मुंबई अंडरवर्ल्ड डॉन की कहानी थी. इन तीन फिल्मों में से एक ब्लॉकबस्टर, एक हिट और एक हिट रही. एक फिल्म को नेशनल अवॉर्ड भी मिला.
बॉलीवुड की कई फिल्मों में मुंबई अंडरवर्ल्ड की दुनिया को करीब से दिखाया गया. इसकी शुरुआत 1970 के दशक से हुई. स्क्रीनप्ले राइटर सलीम-जावेद ने अपनी कहानियों में मुंबई अंडरवर्ल्ड से जुड़े किरदारों को फिल्म में रखा. इससे कहानियों में नया रोमांच आया. 1973 में आई ‘जंजीर’ फिल्म ने अमिताभ बच्चन को रातोंरात ‘एंग्री यंगमैन’ बनाया. इस फिल्म में प्राण साहब ‘शेर खान’ के किरदार में नजर आए थे. कहा जाता है कि ये किरदार मुंबई के पहले डॉन करीम लाला पर बेस्ड था. 60 के दशक में मुंबई में करीम लाला का बोलबोला था. वो जहां भी कदम रख दे, लोग डर से थर-थर कांपने लगते थे. आगे चलकर ऐसी तीन फिल्में आईं जिनमें रियल लाइफ गैंगस्टर की लाइफ को पर्दे पर दिखाया गया. ये फिल्में थीं : दीवार, अंगार और वास्तव.
बॉलीवुड के लिए 1975 का साल सबसे यादगार माना जाता है. इस साल अलग-अलग जॉनर की फिल्में आईं और बॉक्स ऑफिस पर छा गईं. ‘शोले’ के अलावा इस साल एक और आइकॉनिक फिल्म ‘दीवार’ आई थी. मूवी 24 जनवरी 1975 को रिलीज हुई थी. यह फिल्म हिंदी सिनेमा की 100 मस्ट वॉच लिस्ट शामिल है. इस फिल्म में कई कालजयी डायलॉग भी हैं. खासकर दो डायलॉग ‘मैं आज भी फेंके हुए पैसे नहीं उठाता’ और ‘मेरे पास मां है’ तो आपने भी सुने होंगे. वैसे तो ‘दीवार’ में अमिताभ बच्चन के अलावा शशि कपूर, नीतू सिंह, परवीन बॉबी, निरूपा रॉय, इफ्तिखार खान, मदन पुरी जैसे सितारे थे लेकिन असल मायने में यह फिल्म अमिताभ की थी. इस फिल्म ने अमिताभ बच्चन को सुपर स्टार बनाया. दीवार फिल्म का डायरेक्शन यश चोपड़ा ने किया था.
‘दीवार’ फिल्म ने इतिहास रचा. इसकी वजह फिल्म की कहानी थी. फिल्म में मुंबई के अंडरवर्ल्ड डॉन हाजी मस्तान की लाइफ की झलक दिखाई देती है. फिल्म के सीन और हाजी मस्तान की लाइफ में काफी समानताएं देखने को मिलती हैं. हाजी मस्तान ने भी मझगांव डाकयार्ड में कुली के तौर पर अपनी जिंदगी की शुरुआत की थी. और पठान गैंग के खिलाफ मोर्चा लिया था. ‘दीवार’ फिल्म में विजय वर्मा (अमिताभ बच्चन) भी यही करता है. वो हफ्ता देने से इनकार कर देता है. इससे दर्शक वर्ग की सहानुभूति विजय के साथ हो जाती है. सबसे मजेदार बात यह यह है कि फिल्म के प्रीमियर में इंडस्ट्री से जुड़े ज्यादातर लोगों का मानना था कि मूवी फ्लॉप हो जाएगी लेकिन हुआ इसके ठीक उलट. मूवी ने रिलीज होते ही इतिहास रच दिया. फिल्म ने 4.25 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया. 1975 में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों की लिस्ट में यह चौथे नंबर पर थी.
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1975 में ही गैंगस्टर बेस्ड एक और फिल्म ‘धर्मात्मा’ भी सिनेमाघरों में खूब चली थी. फिर 1992 में एक और क्राइम एक्शन ड्रामा फिल्म ‘अंगार’ रिलीज हुई था. इस मल्टी स्टाटरर फिल्म में जैक श्रॉफ, कादर खान, मजहर खान, नाना पाटेकर लीड रोल में थे. डिंपल कपाड़िया भी अहम किरदार में थीं. ‘अंगार’ फिल्म मुंबई के पहले अंडरवर्ल्ड डॉन करीम लाला की लाइफ पर बेस्ड मानी जाती है. संगीतकार आदेश श्रीवास्तव भी एक छोटे से रोल में नजर आए थे. डायरेक्टर शशिलाल के. नायर थे. अंगार फिल्म की स्टोरी-स्क्रीनप्ले सुजीत सेन ने लिखा थी. डायलॉग कादर खान ने लिखे थे. प्रोड्यूस शशिलाल के. नायर और एसएम आरिफ ने किया था. फिल्म में कादर खान ने जहांगीर खान का रोल निभाया जाता है. माना जाता है कि यह किरदार मुंबई के डॉन करीम लाला से इंस्पायर्ड था. करीम लाला को मुंबई का पहला अंडरवर्ल्ड डॉन माना जाता है.
फिल्म की कहानी का दूसरा सिरा मुंबई के स्लम एरिया में रहने वाले बेरोजगार युवक जयकिशन (जैकी श्रॉफ) से जुड़ता है. वो अपनी बस्ती में हफ्ता देने से इनकार करता है. इसी के चलते उसका टकराव जहांगीर खान की गैंग से होता है. माना जाता है कि जैकी श्रॉफ का किरदार मुंबई के गैंगस्टर अमर नाइक से इंस्पार्ड था. अमर नाइक का परिवार कभी सड़क पर सब्जी का ठेला लगाया करता था. अमर नाइक ने हफ्ता देने से इनकार किया और गुंडों की सरेआम पिटाई की थी. उसी दिन से वह मांटुका इलाके का सरगना बन गया. अमर नाइक को लोग ‘मुंबई का रावण’ कहकर बुलाते थे. अरुण गवली गैंग से उसकी अदावत थी. 10 जुलाई 1996 को मुंबई के एगीपाड़ा में आमिर नाइक का एनकाउंटर किया गया था. इस फिल्म में नाना पाटेकर ने विलेन की भूमिका निभाई थी. अंगार फिल्म को 3 फिल्मफेयर अवॉर्ड और एक नेशनल अवॉर्ड भी मिला था. बेस्ट डायलॉग का अवॉर्ड कादर खान को मिला था. 2 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने करीब 7.5 करोड़ का कलेक्शन किया था. यह फिल्म बॉक्स ऑफिस पर हिट साबित हुई थी.
गैंगस्टर की रियल लाइफ पर बेस्ड एक और फिल्म आई थी ‘वास्तव – द रियल्टी’ टाइटल से 1999 में आई थी. 7 अक्टूबर 1999 को रिलीज यह एक एक्शन-क्राइम फिल्म थी. स्टोरी-स्क्रीनप्ले और डायरेक्शन महेश मांजरेकर का था. डायलॉग्स इम्तियाज हुसैन ने लिखे थे. बतौर डायरेक्टर यह उनकी पहली फिल्म थी. संजय दत्त, नम्रता शिरोडकर, दीपक तिजोरी, मोहन जोशी, शिवाजी सटाम, रीमा लागू, परेश रावल और संजय नारवेकर जैसे सितारों ने फिल्म में अपनी अदाकारी का जलवा बिखेरा था. संजय दत्त ने रघुनाथ उर्फ रघु नामदेव शिवाकर का तो संजय नारवेकर ने डेढ़ फुटिया का किरदार निभाया था. संजय दत्त को बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था. म्यूजिक जतिन-ललित का था. गीत समीर ने लिखे थे. फिल्म का एक गाना ‘मेरी दुनिया है तुझमें कहीं’ पॉप्युलर हुआ था.
‘वास्तव : द रियलटी’ फिल्म की कहानी मुंबई अंडरवर्ल्ड डॉन छोटा राजन की लाइफ पर बेस्ड थी. साधारण से परिवार का लड़का हालात के आगे मजबूर होकर कैसे अपराध की दुनिया में आता है, इस कहानी को फिल्म दिखाती है. छोटा राजन का असली नाम राजेंद्र सदाशिव निखिल्जे था. परिवार के साथ मुंबई के चेंबूर के तिलक नगर में रहता था. राजेंद्र सदाशिव शंकर सिनेमा के बाहर ब्लैक में टिकट बेचा करता था. पुलिस ने पकड़ा तो राजेंद्र सदाशिव ने पुलिसकर्मी से लाठी छीनकर उसे ही पीट दिया. अपने इस कारनामे से वह रातोंरात चर्चा में आ गया. जेल से लौटकर गैंगस्टर राजन नायर उर्फ बड़ा राजन की गैंग ज्वाइन कर ली. 1982 में पठान भाइयों ने बड़ा राजन की हत्या कर दी तो गैंग की कमान राजेंद्र सदाशिव के हाथ में आ गई. यहीं से उसका नाम छोटा राजन पड़ गया. ‘वास्तव – द रियल्टी’ को छोटा राजन के भाई दीपक निखिल्जे ने ही प्रोड्यूस किया था. रियल स्टेट कारोबार से जुड़े दीपक 2004-2009 में लोकसभा चुनाव लड़ चुके हैं. 7.5 करोड़ के बजट में बनी इस मूवी ने 20 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. यह एक सेमी हिट फिल्म साबित हुई थी. फिल्म को 8 IMDB रेटिंग मिली हुई है.
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