कहलगांव (भागलपुर)। कहलगांव श्मशान घाट के समीप गंगा स्नान के दौरान डूबे अनादीपुर गांव निवासी 24 वर्षीय अमित कुमार झा का दूसरे दिन शनिवार को भी कोई सुराग नहीं मिल पाया है। घटना के बाद से ही एसडीआरएफ की टीम स्थानीय प्रशासन के सहयोग से गंगा में लगातार तलाश अभियान चला रही है। जानकारी के अनुसार, अमित कुमार झा शुक्रवार को एक अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होने कहलगांव श्मशान घाट पहुंचे थे। दाह संस्कार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वे गंगा स्नान करने गए थे। इसी दौरान वे तेज बहाव की चपेट में आ गए और गहरे पानी में चले जाने के बाद लापता हो गए। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और एसडीआरएफ की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और खोजबीन शुरू की। शनिवार को भी दिनभर नदी में सघन अभियान चलाया गया। हालांकि, गंगा का जलस्तर बढ़ा होने और तेज धारा के कारण बचाव दल को तलाशी अभियान में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कहलगांव थाना प्रभारी मृत्युंजय कुमार ने बताया कि लापता युवक की तलाश लगातार जारी है। प्रशासन और एसडीआरएफ की टीम पूरी तत्परता के साथ इस अभियान में जुटी हुई है।
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गंगा में डूबे युवक का दूसरे दिन भी सुराग नहीं: एसडीआरएफ का सर्च ऑपरेशन जारी, अंतिम संस्कार के दौरान हुई थी घटना – Bhagalpur News
कटनी में पठरा सरपंच अशोक सिंह सस्पेंड: महिला से रेप के आरोप में जेल गया, एसडीएम ने की कार्रवाई – Katni News
कटनी जिले के बड़वारा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत पठरा के सरपंच अशोक सिंह गौड़ को पद से निलंबित कर दिया गया है। उन पर एक महिला से दुष्कर्म का गंभीर आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई कटनी एसडीएम और विहित प्राधिकारी प्रमोद चतुर्वेदी ने कलेक्टर आशीष तिवारी के निर्देश पर की है। यह निलंबन मध्यप्रदेश पंचायतराज और ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 39 के तहत किया गया है। बड़वारा जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के 21 जुलाई भेजी गई रिपोर्ट और बड़वारा थाने की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की गई। गंभीर धाराओं में केस दर्ज बड़वारा पुलिस ने आरोपी सरपंच अशोक सिंह गौड़ के खिलाफ अपराध क्रमांक 330/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64(2)एम, 332बी, और 2351(3) के अंतर्गत विभिन्न गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस ने मामले की कानूनी जांच शुरू कर दी है। सूने मकान का फायदा उठाकर किया दुष्कर्म घटना 4 जुलाई को सामने आई थी, जब बड़वारा थाना क्षेत्र की पीड़िता ने महिला थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़िता ने अपनी लिखित शिकायत में आरोप लगाया था कि सरपंच अशोक सिंह गौड़ ने अलग-अलग तारीखों पर उसके सूने मकान का फायदा उठाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। आरोपी सरपंच को भेजा गया जेल शिकायत की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत केस दर्ज कर आरोपी सरपंच को गिरफ्तार कर लिया था। गिरफ्तारी के बाद आरोपी सरपंच को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उसे जेल भेज दिया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसडीएम प्रमोद चतुर्वेदी ने अपने कानूनी अधिकारों का प्रयोग करते हुए आरोपी सरपंच को निलंबित करने का आदेश जारी किया।
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रघुवीर मीणा बोले-अहंकारी भाजपा सरकार को जवाब देना होगा: केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कांग्रेस ने मनाया जश्न, कांग्रेसी बोले- यह तो शुरूआत – Udaipur News
केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर उदयपुर में कांग्रेस ने शनिवार शाम को जश्न मनाया। उदयपुर शहर और देहात जिला कांग्रेस कमेटी के संयुक्त नेतृत्व में हिरणमगरी सेक्टर-4 चौराहा पर आतिशबाजी की गई और कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए इसे केंद्र की मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ जनता की जीत बताया। शहर कांग्रेस अध्यक्ष फतह सिंह राठौड़ ने कहा कि केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा केवल शुरुआत है। आने वाले दिनों में केंद्र सरकार के कई मंत्रियों और भाजपा नेताओं के मामले जनता के सामने आएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, महंगाई और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ के कारण जनता का भाजपा से मोहभंग हो चुका है और अब सरकार के पतन की उलटी गिनती शुरू हो गई है। देहात कांग्रेस अध्यक्ष रघुवीर सिंह मीणा ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ जनता और कांग्रेस के संघर्ष की जीत है। उन्होंने कहा कि सत्ता के अहंकार में बैठी भाजपा सरकार को अब जनता के सवालों का जवाब देना होगा और उसकी हर नाकामी का हिसाब लिया जाएगा। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि नीट सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं और पेपर लीक की घटनाओं ने करोड़ों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। कांग्रेस ने दावा किया कि वह छात्रों और युवाओं के अधिकारों की लड़ाई आगे भी सड़क से सदन तक लड़ती रहेगी। कार्यक्रम में कांग्रेस नेता ताराचंद मीणा, पूर्व विधायक प्रीति शक्तावत, पूर्व देहात अध्यक्ष लाल सिंह झाला, विवेक कटारा, जगदीश राज श्रीमाली, पंकज शर्मा, कचरूलाल चौधरी, लक्ष्मीनारायण पंड्या, डॉ. कल्याण सिंह राव, डॉ. कौशल नागदा सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। उदयपुर की ये खबरें भी पढ़े… राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में कांग्रेस ने निकाली रैली:नेता बोले- दोषी कितना प्रभावशाली हो, उसका नाम सामने लेकर आए सरकार उदयपुर में एक घंटे तक झमाझम बरसात:कई इलाकों में भरा, जयसमंद झील का जलस्तर 6 सेमी बढ़ा; अगले 3 दिन भारी बारिश का अलर्ट होटल की खिड़की से झील में गिरी बच्ची, मौत:दिल्ली से उदयपुर घूमने आया था परिवार, पिता गोद में शव लेकर घर रवाना उदयपुर में पुलिस अफसर बनकर दंपती से लूट की कोशिश:बढ़ती वारदातों का हवाला देकर गहने उतारने के लिए कहा, लोगों को आता देख बाइक छोड़कर भागे बदमाश चतुर्थ-श्रेणी कर्मचारी भर्ती में उदयपुर में काउंसलिंग 28 जुलाई से:विशेष छूट के लिए 27 जुलाई तक जमा करें दस्तावेज, जानिए किन अभ्यर्थियों को मिलेगी प्राथमिकता
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प्रोटीन-फाइबर से भरपूर ये पहाड़ी दाल, जानें रेसिपी
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Kulti dal Recipe: दाल कई तरह के होते हैं, लेकिन क्या आप जानते हैं पहाड़ी इलाकों में कुल्थी दाल ज्यादा खाया जाता है. ये दाल वहां की पारंपारिक थाली का हिस्सा भी है. सबसे खास बात ये है कि ये दाल सिर्फ स्वादिष्ट ही नहीं बल्कि कई सेहतमंद गुणों से भी भरपूर होती है. यहां आप इसे बनाने का आसान तरीका जान सकते हैं.
भारत के पहाड़ी इलाकों में कई ऐसी पारंपरिक दालें खाई जाती हैं, जो स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए भी बेहद फायदेमंद मानी जाती हैं. इन्हीं में से एक है कुल्थी दाल, जिसे अंग्रेजी में हॉर्स ग्राम कहा जाता है. उत्तराखंड में यह दाल खास तौर पर पहाड़ी अंदाज में बनाई जाती है और वहां के पारंपरिक भोजन का अहम हिस्सा है. इसका स्वाद थोड़ा मिट्टी जैसा और देसी होता है, जो इसे दूसरी दालों से अलग बनाता है.
उत्तराखंड के अलावा हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु, ओडिशा और महाराष्ट्र के कई हिस्सों में भी कुल्थी दाल को अलग-अलग तरीकों से बनाया जाता है. यह दाल प्रोटीन, फाइबर और कई जरूरी पोषक तत्वों से भरपूर होती है, इसलिए सर्दियों के मौसम में इसे खास तौर पर खाने की सलाह दी जाती है. अगर आप स्वादिष्ट और पौष्टिक भारतीय भोजन पसंद करते हैं, तो उत्तराखंड की पारंपरिक कुल्थी दाल की यह रेसिपी जरूर ट्राई कर सकते हैं.
कुल्थी दाल के फायदे
कुल्थी दाल को सेहत के लिए काफी लाभकारी माना जाता है. इसमें भरपूर मात्रा में प्लांट-बेस्ड प्रोटीन पाया जाता है, जो शाकाहारी लोगों के लिए अच्छा विकल्प है. इसके अलावा इसमें मौजूद फाइबर पाचन को बेहतर बनाने और पेट को लंबे समय तक भरा रखने में मदद करता है. कुल्थी दाल में आयरन, कैल्शियम, फॉस्फोरस और एंटीऑक्सीडेंट्स भी पाए जाते हैं, जो शरीर को जरूरी पोषण देते हैं. यह वजन नियंत्रित रखने में भी मददगार हो सकती है और सर्दियों में शरीर को गर्माहट देने वाला भोजन मानी जाती है.
कुल्थी दाल बनाने की रेसिपी
- इसे बनाने के लिए सबसे पहले 1 कप कुल्थी दाल को अच्छी तरह धोकर 6 से 8 घंटे या पूरी रात के लिए पानी में भिगो दें. इसके बाद पानी निकालकर दाल को ताजे पानी, हल्दी और थोड़ा नमक डालकर प्रेशर कुकर में नरम होने तक पकाएं.
- दाल पकने के बाद उसे हल्का सा मैश कर लें, ताकि उसका टेक्सचर थोड़ा गाढ़ा हो जाए.
- अब एक पैन में सरसों का तेल या घी गर्म करें. इसमें जीरा और एक चुटकी हींग डालें. जब जीरा चटकने लगे तो बारीक कटा प्याज डालकर सुनहरा होने तक भूनें. फिर अदरक-लहसुन का पेस्ट और हरी मिर्च डालें.
- इसके बाद कटे हुए टमाटर, धनिया पाउडर और लाल मिर्च पाउडर मिलाकर मसाले को अच्छी तरह पकाएं.
- जब मसाले से तेल अलग होने लगे, तब इसमें पकी हुई दाल डालकर अच्छी तरह मिलाएं. इसे 8 से 10 मिनट तक धीमी आंच पर पकने दें ताकि सभी स्वाद आपस में अच्छी तरह मिल जाएं. जरूरत के अनुसार नमक भी एडजस्ट कर सकते हैं.
- अंत में हरे धनिये से सजाकर गर्मागर्म परोसें. इसे चावल, मंडुवे की रोटी या साधारण रोटी के साथ खाया जा सकता है. स्वाद और पोषण से भरपूर यह पहाड़ी कुल्थी दाल रोजमर्रा के भोजन को खास बना सकती है.
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शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…
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Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.
भारत पर 10 फीसदी टैरिफ का कितना असर, किन सामानों पर नहीं लागू होगा शुल्क
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Tariff Effect on India : अमेरिका ने बंधुआ मजदूरी के आरोपों पर भारत के खिलाफ 10 फीसदी टैरिफ लगा दिया है. इस कदम के बाद वाणिज्य मंत्रालय ने बताया कि भारत पर 10 फीसदी का लोअर टैरिफ लगा है, जिसका असर भी सीमित है. यह टैरिफ भारत से अमेरिका को निर्यात होने वाले 45 फीसदी सामानों पर कोई असर नहीं डालेंगे.
बंधुआ मजदूरी के आरोपों में भारत पर 10 फीसदी टैरिफ लगा है.
नई दिल्ली. अमेरिका ने भारत के साथ चल ही व्यापार डील के बीच 10 फीसदी टैरिफ लगा ही दिया. अमेरिका लंबे समय से बंधुआ मजदूरी जैसे आरोपों की जांच कर रहा था और इस मामले में भारत सरकार की दलीलों को दरकिनार करते हुए टैरिफ लगाने का फैसला कर लिया है. इसके बाद सरकार की ओर से कहा गया है कि इस टैरिफ का सिर्फ आधे सामानों पर ही असर दिखेगा और भारत से निर्यात होने वाले 45 फीसदी उत्पाद आगे भी टैरिफ के दायरे से बाहर रहेंगे.
वाणिज्य मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि अमेरिका ने कथित बंधुआ मजदूरी से जुड़ी धारा 301 में जांच के तहत उठाए गए कदमों के अंतर्गत भारत को 10 फीसदी अतिरिक्त शुल्क की निचली श्रेणी में रखा है. अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) के कार्यालय ने 23 जुलाई को अमेरिकी व्यापार अधिनियम, 1974 की धारा 301 के तहत संबंधित देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा की थी.
अमेरिका ने 60 देशों पर लगाया है शुल्क
अमेरिका ने धारा 301 के तहत भारत सहित 60 देशों पर शुल्क लगाया है. इन अर्थव्यवस्थाओं पर बंधुआ मजदूरी का आरोप लगा है और यहां के सामान आयात करने पर टैरिफ लगा दिया है. यूएसटीआर ने भारत से आयात पर अतिरिक्त 10 फीसदी शुल्क लगाया है. हालांकि, शुरुआत में अमेरिका ने 12.5 फीसदी शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा था. बंधुआ मजदूरी से तैयार उत्पादों के आयात को लेकर की गई जांच के दौरान भारत ने अपना पक्ष रखा था, लेकिन अमेरिका ने इन सभी दलीलों से इनकार कर दिया.
कम शुल्क पर सरकार ने जताई राहत
वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि आरोपों की जांच के बाद से लगातार किए गए प्रयासों का नतीजा यह है कि भारत को अंतिम उपायों के तहत अतिरिक्त शुल्क के लोअर स्लैब में रखा गया है. इससे देश के कई निर्यात क्षेत्रों को कम टैरिफ का फायदा मिलेगा. मंत्रालय ने बताया है कि भारत के अमेरिका को होने वाले निर्यात का एक बड़ा हिस्सा, जिस पर वर्तमान में कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगता. अतिरिक्त 10 फीसदी शुल्क के दायरे से बाहर बना हुआ हैं. इनमें जेनेरिक दवाएं, स्मार्टफोन और कुछ अन्य उत्पाद शामिल हैं.
किन प्रोडक्ट पर नहीं लगेगा शुल्क
यूएसटीआर की धारा 232 उपायों के तहत पहले से शामिल इस्पात, एल्युमिनियम और वाहन कलपुर्जे जैसे उत्पाद इस अतिरिक्त 10 फीसदी शुल्क के अधीन नहीं हैं. अमेरिका व्यापार प्रशासन की धारा 232 में शामिल शुल्क सीमित अपवादों के साथ व्यापक रूप से सभी देशों पर लागू होते हैं. मंत्रालय ने कहा कि इन छूटों के कारण भारत के अमेरिका को होने वाले निर्यात का 45 फीसदी हिस्सा अतिरिक्त 10 फीसदी शुल्क के दायरे से बाहर बना हुआ है.
भारत के कितने सामान पर लगेगा शुल्क
मंत्रालय के मुताबिक, 55 फीसदी निर्यात पर अतिरिक्त 10 फीसदी शुल्क लगेगा, लेकिन भारत पर शुल्क का प्रभाव जांच में शामिल अधिकांश अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अपेक्षाकृत कम है. सरकार ने यह भी कहा कि भारत अभी अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता कर रहा है, जिसमें शुल्क पर भी चर्चा की जाएगी. सरकार इस साल 2 फरवरी को घोषित और सात फरवरी को जारी संयुक्त बयान के अनुरूप भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते को शीघ्र पूरा करने की दिशा में अमेरिका के साथ बातचीत कर रही है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…
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जमीन नापने के नाम पर लेखपाल पर रिश्वत का आरोप: मैनपुरी में महिला ने डीएम से की शिकायत, लेखपाल बोले- मै तुम्हारा नौकर नहीं – Mainpuri News
मैनपुरी के बिछवां में महिला ने डीएम से शिकायत की है। उसने आरोप लगाया है कि उसकी खेती की जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया गया है और संबंधित लेखपाल ने रिश्वत लेकर गलत रिपोर्ट प्रस्तुत की है। महिला ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और जमीन से अवैध कब्जा हटवाने की मांग की है। रामप्यारी पत्नी लल्लू सिंह ने डीएम को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि मौजा बिछवां स्थित गाटा संख्या 1024 रकबा 0.308 हेक्टेयर भूमि उनके और उनके पति के नाम दर्ज है। उन्होंने आरोप लगाया है कि गांव के आदेश कुमार, दुर्गेश कुमार, सर्वेश कुमार और प्रवेश कुमार ने उनकी जमीन के आधे से अधिक हिस्से पर अवैध कब्जा कर लिया है। महिला के अनुसार, करीब दो माह पहले उन्होंने इस मामले की शिकायत उप जिलाधिकारी कुरावली से की थी। शिकायत के बाद लेखपाल मौके पर पहुंचे और जमीन की पैमाइश की, लेकिन मेड़बंदी नहीं कराई। आरोप है कि लेखपाल के लौटते ही कथित आरोपियों ने मेड़ नहीं बनने दी और दोबारा जमीन पर कब्जा कर लिया।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि इसके बाद से संबंधित लेखपाल उनकी सुनवाई नहीं कर रहे हैं और फोन तक नहीं उठा रहे। महिला का आरोप है कि लेखपाल दीपक भदौरिया ने जमीन की पैमाइश कराने के नाम पर उनसे 5 हजार रुपये भी लिए। इसके बावजूद न तो मेड़बंदी कराई गई और न ही कब्जा हटवाया गया। महिला ने यह भी बताया कि 9 मई 2026 को लेखपाल ने अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी थी कि जमीन चिन्हित कर पूरी पैमाइश करा दी गई है और मेड़बंदी भी करा दी गई है। हालांकि, महिला का कहना है कि वास्तविकता में मेड़ नहीं बंधवाई गई है और दबंग अब भी जमीन पर कब्जा किए हुए हैं।
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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सीएम रेखा गुप्ता का समर्थन: बोलीं- राष्ट्रहित और नैतिक मूल्यों को सर्वोपरि रखा – New Delhi News
दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उनके फैसले की सराहना करते हुए इसे राष्ट्रहित और सार्वजनिक जीवन में नैतिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया। रेखा गुप्ता ने अपने संदेश में कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने सार्वजनिक जीवन में हर जिम्मेदारी को निष्ठा, ईमानदारी और पूर्ण समर्पण के साथ निभाया है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और शिक्षा व्यवस्था में कई सार्थक सुधारों को आगे बढ़ाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके कार्यकाल में भारतीय भाषाओं में शिक्षा को बढ़ावा मिला, तकनीकी और उच्च शिक्षा का विस्तार हुआ तथा विद्यार्थियों के लिए नए अवसर उपलब्ध हुए। उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में किए गए योगदान को देश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया। रेखा गुप्ता ने अपने पोस्ट में आगे लिखा कि राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दिया है। उनके अनुसार यह निर्णय सार्वजनिक जीवन में नैतिक मूल्यों, मर्यादा और सिद्धांतों के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने धर्मेंद्र प्रधान के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि राष्ट्रसेवा के उनके सतत प्रयास आगे भी नई ऊंचाइयों को प्राप्त करें। उन्होंने उनके बेहतर भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दी।
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दो बाइक टकराईं, मौके पर तीन की मौत: हादसे का वीडियो सामने आया, दो बाइक सवार डिंडौरी की तरफ आ रहे थे – Dindori News
डिंडौरी में शनिवार दोपहर दो बजकर 6 मिनट पर मंडला-डिंडौरी नेशनल हाईवे पर सक्का गांव के पास कचनारी तिराहे पर दो बाइकों की आमने-सामने टक्कर हो गई। दुर्घटना में तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना का लाइव सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया है। सिटी कोतवाली पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है। सिटी कोतवाली निरीक्षक दुर्गा प्रसाद नगपुरे ने बताया कि दुर्घटना में शामिल बाइकों और मृतकों की पहचान कर ली गई है। युवक डिंडौरी की ओर जा रहे थे पुलिस के अनुसार, बाइक नंबर MP 20ZY 5185 पर सवार राम कुमार टेकाम (35 वर्ष) और प्रेम सिंह मलगाम मेहदवानी थाना क्षेत्र के राई गांव से डिंडौरी की ओर जा रहे थे। दूसरी बाइक नंबर MP 20ZF 6903 पर रोहित साहू (निवासी कठोतिया, डिंडोरी) सवार थे, जो डिंडौरी से राई की तरफ जा रहे थे। रोहित साहू कमल फिनकैप माइक्रो फाइनेंस लिमिटेड कंपनी में कलेक्शन का काम करते थे और घटना वाले दिन सुबह फील्ड के लिए निकले थे। मृतक रोहित साहू के परिजन ने बताया कि उनकी शादी डेढ़ साल पहले खुशबू से हुई थी। पंद्रह दिन पहले ही मंडला जिला अस्पताल में उनकी बेटी का जन्म हुआ था। पुलिस ने तीनों मृतकों के परिजन को घटना की सूचना दे दी है।
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बया नदी में नहाने गए तीन किशोर की डूबकर मौत: मुजफ्फरपुर में एक ने तैरकर बचाई जान; NDRF पर देरी से पहुंचने का आरोप – Muzaffarpur News
मुजफ्फरपुर के साहेबगंज नगर परिषद क्षेत्र में शनिवार दोपहर एक हादसा हुआ है। इसमें बया नदी में डूबने से तीन किशोरों की मौत हो गई। वहीं, उनके साथ नदी में नहाने गया चौथा किशोर किसी तरह तैरकर बाहर निकल आया और उसकी जान बच गई। घटना बैद्यनाथपुर शिवालय मंदिर के सामने बया नदी की है। मृतकों की पहचान वार्ड संख्या-8 निवासी अमृत कुमार (14 ), पिता– गुड्डू साह, साहिल उर्फ झुन्नू (12 ), पिता– मनोज साह और मोहम्मद रेहान (13 ), पिता– मोहम्मद ऐनुल के रूप में हुई है। वहीं गुड्डू (13 ), पिता– मोहम्मद मुन्ना किसी तरह तैरकर नदी से बाहर निकल आया। नहाने के दौरान गहरे पानी में चले गए चार बच्चे जानकारी के अनुसार, शनिवार दोपहर चारों किशोर बया नदी में नहाने गए थे। इसी दौरान वे गहरे पानी में चले गए। गुड्डू ने किसी तरह तैरकर अपनी जान बचा ली, जबकि बाकी तीन किशोर नदी में डूब गए। स्थानीय लोगों ने तीन घंटे तक चलाया रेस्क्यू घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए। स्थानीय लोगों ने करीब दो से तीन घंटे तक लगातार नदी में खोजबीन की। काफी मशक्कत के बाद तीनों किशोरों के शव बाहर निकाले गए। इसके बाद उन्हें साहेबगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद तीनों को मृत घोषित कर दिया। एनडीआरएफ पर देरी से पहुंचने का आरोप स्थानीय लोगों का आरोप है कि एनडीआरएफ को सूचना देने के बावजूद टीम काफी देर तक मौके पर नहीं पहुंची, जिसके कारण शवों की तलाश स्थानीय लोगों को ही करनी पड़ी। घटना की सूचना मिलते ही साहेबगंज थानाध्यक्ष सुनील कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। पूरे इलाके में पसरा मातम इस हादसे के बाद साहेबगंज नगर परिषद के वार्ड संख्या-8 में मातम का माहौल है। पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की कार्रवाई शुरू कर दी है।
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प्रधान के इस्तीफे पर वर्ल्ड मीडिया: BBC बोला- छात्रों के आगे झुकी मोदी सरकार: गार्डियन ने लिखा- जनता के दबाव में 12 साल में पहला इस्तीफा
2 मिनट पहले
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शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो गया है। NEET पेपर लीक केस में उनके इस्तीफे की मांग करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी पिछले 36 दिन से जंतर-मंतर पर धरना दे रही है।
इस्तीफे के बाद BBC ने लिखा कि मोदी सरकार को छात्रों के आगे झुकना पड़ा है। वहीं गार्डियन ने लिखा कि मोदी सरकार के 12 साल में पहली बार जनता के दबाव में किसी मंत्री का इस्तीफा हुआ।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को न्यूयॉर्क टाइम्स, CNN, अलजजीरा समेत कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने भी टॉप स्टोरीज में जगह दी है।
BBC: मोदी सरकार ने छात्रों के गुस्से का सही अंदाजा नहीं लगाया
2014 में सत्ता में आने के बाद से प्रधानमंत्री मोदी सरकार आम तौर पर विरोध प्रदर्शनों के प्रति सख्त रुख अपनाती रही है और शायद ही कभी किसी बड़े आंदोलन के आगे झुकी हो।
इससे पहले सरकार ने केवल एक बड़े मामले में अपना फैसला वापस लिया था, जब करीब एक साल तक चले किसान आंदोलन के बाद तीनों कृषि कानूनों को रद्द करना पड़ा था।
इस बार सरकार ने छात्र आंदोलन को लेकर हो रही नाराजगी और लंबे समय तक टिके रहने की क्षमता का सही आकलन नहीं किया।
शुरुआत में कई हफ्तों तक आंदोलन को नजरअंदाज किया गया, लेकिन इस सप्ताह संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की सख्ती के बाद देशभर में तीखी प्रतिक्रिया हुई और सरकार पर दबाव काफी बढ़ गया।
धर्मेंद्र प्रधान जैसे वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री वास्तव में इस्तीफा देंगे या नहीं, इसे लेकर आखिरी समय तक कुछ पता नहीं चल पा रहा था। उनके इस्तीफे के बाद आंदोलन में शामिल छात्रों, खासकर पहली बार किसी बड़े प्रदर्शन का हिस्सा बने युवाओं को अपनी जीत का अहसास हो रहा है।
द गार्डियन: मोदी के सबसे करीबी मंत्रियों में से एक प्रधान का इस्तीफा
भाजपा के 12 वर्षों के शासन में यह पहली बार है, जब प्रधानमंत्री मोदी के सबसे करीबी और भरोसेमंद मंत्रियों में से एक को सार्वजनिक दबाव के कारण इस्तीफा देना पड़ा है। इनका नेतृत्व नए बने युवा राजनीतिक संगठन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने किया। इस सप्ताह यह आंदोलन देशभर में युवाओं के बड़े विरोध प्रदर्शन में बदल गया।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर मिलते ही दिल्ली में जुटे हजारों सीजेपी समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। प्रदर्शनकारियों ने जश्न मनाया और इसे सरकार से जवाबदेही की अपनी मांग की बड़ी जीत बताया।
न्यूयॉर्क टाइम्स: प्रदर्शनकारियों को ‘आतंकियों की बी-टीम’ कहा था, अब इस्तीफा

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। इसे छात्र आंदोलन की बड़ी जीत माना जा रहा है। यह आंदोलन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन गया था। इस आंदोलन की अगुआई खुद को कॉकरोच कहने वाले छात्र समूह कर रहे थे। यह नाम भारत के चीफ जस्टिस की कथित अपमानजनक टिप्पणी से प्रेरित था।
यह संगठन शुरुआत से ही धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा मांग रहा था। इस महीने प्रदर्शनकारियों पर हुए बल प्रयोग ने इस आंदोलन को भारत के कई शहरों तक फैला दिया।
धर्मेंद्र प्रधान पहले इन प्रदर्शनों को गंभीरता से नहीं ले रहे थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर विपक्षी दलों पर छात्रों का इस्तेमाल कर अव्यवस्था फैलाने का आरोप लगाया था। जून में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने छात्र प्रदर्शनकारियों को ‘आतंकवादियों की बी-टीम’ तक कह दिया था।
धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को छात्र आंदोलन की बड़ी सफलता माना जा रहा है। इससे आंदोलन को और बल मिल सकता है और छात्र अपनी अन्य मांगों को लेकर भी सरकार पर दबाव बढ़ा सकते हैं।
अल-जजीरा: छात्र आंदोलन की बड़ी जीत हुई

छात्रों के आंदोलन के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसे देशभर में चल रहे छात्र आंदोलन की बड़ी जीत माना जा रहा है।
हाल के वर्षों में यह आंदोलन मोदी सरकार के खिलाफ सार्वजनिक असंतोष के सबसे बड़े प्रदर्शनों में से एक माना जा रहा है। इस आंदोलन ने बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और सरकार की जवाबदेही जैसे मुद्दों पर युवाओं के बढ़ते गुस्से को भी सामने ला दिया है।
CNN- शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, सीजेपी ने कहा- लड़ाई अभी बाकी
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने इस्तीफे की घोषणा की। इसे देशभर में चल रहे छात्र आंदोलन की बड़ी जीत माना जा रहा है। मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं के कथित पेपर लीक और उनकी बिक्री के आरोपों के बाद छात्र सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहे थे।
धर्मेंद्र प्रधान ने बढ़ते जनदबाव के बीच इस्तीफा देने का फैसला किया। पिछले कुछ दिनों में हजारों छात्र और उनके समर्थक सड़कों पर उतर आए थे और उनकी बर्खास्तगी के साथ-साथ देश की परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग कर रहे थे। हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी ने अभी तक सार्वजनिक रूप से उनके इस्तीफे को स्वीकार करने की घोषणा नहीं की है।


