Monday, June 22, 2026
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बलिया के करीहरा में श्रीराम कथा का शुभारंभ: राजन जी महाराज बोले- गंगा-सरयू के बीच कथा का प्रवाह – Ballia News




बलिया के करीहरा गांव में सोमवार शाम प्रख्यात कथावाचक राजन जी महाराज की श्रीराम कथा का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा से पूर्व श्रद्धालुओं ने भव्य कलश यात्रा निकाली, जिसमें बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष भक्तों ने भाग लिया। वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और जयघोष से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा। कथा स्थल पर बांसडीह विधायक केतकी सिंह ने सपरिवार व्यासपीठ का पूजन-अर्चन और आरती की। राजन जी महाराज ने मंच पर चढ़ते ही भगवान श्रीराम व अन्य देवी-देवताओं का पूजन किया और सभी के समक्ष शीश झुकाया। विधायक सहित विभिन्न लोगों ने अंगवस्त्रम भेंट कर राजन जी महाराज का स्वागत किया। देखें, 2 तस्वीरें… इसके बाद राजन जी महाराज ने ‘श्रीराम जै राम जै जै राम’ के उच्चारण के साथ कथा की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि एक तरफ गंगा की धारा और दूसरी तरफ सरयू की धारा के बीच श्रीराम कथा का प्रवाह हो रहा है। महाराज ने बलिया को अपनी पहली कथा भूमि बताते हुए कहा कि वे इस भूमि को कभी नहीं भूल सकते।
राजन जी महाराज ने श्रीराम कथा का महत्व बताते हुए कहा कि कथा वही है जो जीवन की व्यथा को समाप्त कर दे। उन्होंने जोर दिया कि भगवान की कथा ही भगवत स्वरूप है और भगवत शरणागति जीवन के सभी दुखों को दूर कर देती है। उनके अनुसार, भगवत शरणागति सौ बीमारियों की एक दवाई है, जिसे मन से करना चाहिए। कथा के प्रथम दिवस बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति देखी गई। आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पांडाल में कूलर, पंखे, स्प्रिंकलर, पेयजल, प्रसाद और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की थीं। कथा के शुभारंभ के साथ ही पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह और श्रद्धा का वातावरण व्याप्त हो गया है।



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मधुबनी में डिलीवरी के समय नवजात की मौत: प्राइवेट नर्सिंग होम में परिजनों ने किया हंगामा – Madhubani News




मधुबनी के कोतवाली चौक स्थित एक निजी नर्सिंग होम में डिलीवरी के दौरान नवजात शिशु की मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। पीड़ित महिला के परिजन शशि झा ने बताया कि प्रसव पीड़ा होने पर गर्भवती महिला को इलाज के लिए कोतवाली चौक स्थित निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। डिलीवरी की प्रक्रिया के दौरान नवजात शिशु की मौत हो गई। अस्पताल परिसर में विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल में आवश्यक संसाधनों और विशेषज्ञ चिकित्सकीय व्यवस्था का अभाव था, जिसके कारण समय पर समुचित उपचार नहीं मिल सका। घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने अस्पताल परिसर में विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। निजी नर्सिंग होम के स्टाफ मनीष कुमार ने घटना के संबंध में बताया कि प्रसव के दौरान नवजात शिशु की मौत नहीं हुई थी, बल्कि गर्भवती महिला के पेट में ही शिशु की मृत्यु हो चुकी थी। उन्होंने कहा कि शिशु की मौत की सूचना परिजनों को देने के बाद ही हंगामा शुरू हो गया। बार-बार ऑपरेशन से प्रसव की जानकारी दी गई थी मनीष कुमार के अनुसार, गर्भवती महिला के परिजनों को बार-बार ऑपरेशन से प्रसव की जानकारी दी गई थी, लेकिन उन्होंने ऑपरेशन कराने से मना कर दिया। जब महिला को अधिक दर्द होने लगा और उसे ऑपरेशन रूम में ले जाया गया, तब देखा गया कि नवजात शिशु महिला के पेट में ही दम तोड़ चुका था। हंगामे की सूचना मिलने पर नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और आक्रोशित परिजनों को शांत कराया। पुलिस अधिकारियों ने परिजनों और अस्पताल प्रबंधन से घटना के संबंध में जानकारी ली। पुलिस ने कागजी प्रक्रिया पूरी कर नवजात शिशु के शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया। नगर थाना अध्यक्ष मनोज कुमार ने बताया कि पीड़ित पक्ष की ओर से अभी तक कोई लिखित आवेदन नहीं मिला है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और आवेदन मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।



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बाड़ तोड़ने से मना करने पर किसान पर हमला: आरोपी ने लाठी से पैर तोड़ा, जान से मारने की धमकी दी – Panna News




देवेन्द्रनगर थाना क्षेत्र के ग्राम बड़ी गुखौर में खेत की बाड़ से लकड़ी तोड़ने से मना करने पर एक किसान पर जानलेवा हमला किया गया। आरोपी ने किसान की पत्नी के सामने ही उसे लाठी से पीटा और जान से मारने की धमकी देकर फरार हो गया। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, यह घटना उस समय हुई जब ग्राम बड़ी गुखौर निवासी किसान बृजकिशोर कुशवाहा (36 वर्ष) अपनी पत्नी सुशीला कुशवाहा के साथ गेवडा हार स्थित अपने खेत में धान की रोपाई कर रहे थे। इसी दौरान पड़ोस के खेत में मौजूद माधव यादव नामक युवक बृजकिशोर के खेत की बाड़ से लकड़ी तोड़ने लगा।
जब किसान बृजकिशोर ने माधव को लकड़ी तोड़ने से रोका, तो आरोपी आक्रोशित हो गया और अभद्र गालियां देने लगा। विरोध करने पर माधव यादव ने पास पड़े एक डंडे से बृजकिशोर के बाएं पैर पर हमला कर दिया। जब पीड़ित ने खुद को बचाने का प्रयास किया और डंडा पकड़ा, तो आरोपी ने उसका दाहिना हाथ बुरी तरह मरोड़ दिया। युवक ने किया बचाव किसान की चीख-पुकार सुनकर उसकी पत्नी सुशीला और पास के खेत में काम कर रहे दिनेश कुशवाहा मौके पर पहुंचे। दिनेश ने बीच-बचाव कर बृजकिशोर को आरोपी से छुड़ाया। घटना के बाद आरोपी माधव यादव ने पीड़ित को धमकी दी कि यदि थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई, तो उसे जान से मार दिया जाएगा। इस हमले में किसान बृजकिशोर के बाएं पैर की पिंडली और दाहिने हाथ के कंधे में गंभीर चोटें आई हैं। पीड़ित किसान ने देवेन्द्रनगर थाने पहुंचकर मामले की शिकायत दर्ज कराई।



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IGI एयरपोर्ट को मिलेगी नई मेट्रो कनेक्टिविटी: 2.3 किमी लंबा कॉरिडोर बनेगा, शटल बसों से मिलेगी छुट्टी; टर्मिनल-1 बनेगा प्रमुख इंटरचेंज स्टेशन – New Delhi News



दिल्ली में स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट।

दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (आईजीआई) एयरपोर्ट पर 2.3 किलोमीटर लंबे एयरोसिटी-टर्मिनल-1 मेट्रो कॉरिडोर का निर्माण किया जाएगा। गोल्डन लाइन के इस विस्तार के पूरा होने के बाद टर्मिनल-1 को मैजेंटा लाइन से जोड़ते हुए इंटरचेंज स्टेशन के रूप में विकस

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डीएमआरसी अधिकारियों के अनुसार, एयरोसिटी स्टेशन को एक प्रमुख मल्टी-मॉडल ट्रांजिट हब के रूप में विकसित किया जाएगा। नया कॉरिडोर एयरपोर्ट एक्सप्रेस (ऑरेंज लाइन), गोल्डन लाइन और प्रस्तावित दिल्ली-एसएनबी-अलवर आरआरटीएस कॉरिडोर को आपस में जोड़ेगा, जिससे एयरपोर्ट तक पहुंचने और विभिन्न टर्मिनलों के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलेगी।

शटल बस बदलने की आवश्यकता नहीं होगी

वर्तमान में टर्मिनल-1 से अन्य टर्मिनलों तक जाने के लिए यात्रियों को 20 मिनट के अंतराल पर चलने वाली शटल बसों पर निर्भर रहना पड़ता है। लेकिन नए कॉरिडोर के चालू होने के बाद घरेलू और अंतरराष्ट्रीय टर्मिनलों के बीच शटल बस बदलने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी और यात्री सीधे मेट्रो के जरिए सफर कर सकेंगे।

अधिकारियों ने बताया कि एयरपोर्ट पर बढ़ते यात्री दबाव को देखते हुए एयरोसिटी स्टेशन पर गोल्डन लाइन का प्लेटफॉर्म 290 मीटर लंबा बनाया जाएगा, जो सामान्य इंटरचेंज स्टेशनों की तुलना में लगभग 30 मीटर अधिक होगा। पूरा कॉरिडोर भूमिगत (अंडरग्राउंड) होगा और इसका डिजाइन एयरपोर्ट सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। परियोजना को दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।

परियोजना की प्रमुख बातें

2.3 किमी लंबा एयरोसिटी-टर्मिनल-1 मेट्रो कॉरिडोर बनेगा गोल्डन लाइन का विस्तार कर टर्मिनल-1 को इंटरचेंज स्टेशन बनाया जाएगा एयरपोर्ट एक्सप्रेस, गोल्डन लाइन और प्रस्तावित आरआरटीएस को मिलेगा आपसी कनेक्शन टर्मिनलों के बीच चलने वाली शटल बसों की आवश्यकता समाप्त होगी एयरोसिटी स्टेशन पर 290 मीटर लंबा विशेष प्लेटफॉर्म बनाया जाएगा पूरा कॉरिडोर भूमिगत होगा और एयरपोर्ट सुरक्षा मानकों के अनुरूप तैयार किया जाएगा दिसंबर 2028 तक परियोजना पूरी होने की संभावना



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धूप में सुखाने का झंझट खत्म, 10 मिनट में बनाएं हरी मिर्च का अचार, महीनों तक नहीं होगा खराब


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Green Chilli Pickle Recipe: हरी मिर्च का चटपटा अचार बनाने के लिए अब कई दिनों तक इंतजार करने की जरूरत नहीं है. एक आसान रेसिपी से सिर्फ 10 मिनट में अचार तैयार किया जा सकता है और सही तरीके से रखने पर यह लंबे समय तक स्वादिष्ट बना रहता है. हरी मिर्च का अचार बनाने की यह रेसिपी सभी को जान लेनी चाहिए.

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घर पर आसानी से 10 मिनट में हरी मिर्च का अचार बनाया जा सकता है.

Hari Mirch Ka Achar Recipe: मिर्च का अचार सबसे ज्यादा पंसद किया जाता है और यह हर खाने का स्वाद बढ़ा देता है. खाने में अचार का स्वाद अलग ही मायने रखता है. पराठे हों या दाल-चावल, थोड़ा सा अचार पूरे खाने का स्वाद बढ़ा देता है. खासकर हरी मिर्च का अचार उन लोगों को बेहद पसंद आता है, जिन्हें खाने में थोड़ा तीखापन और चटपटा स्वाद पसंद होता है. कई बार अचार बनाने में धूप में सुखाने और कई दिनों तक इंतजार करने की जरूरत पड़ती है. अगर आप भी जल्दी बनने वाला हरी मिर्च का अचार बनाना चाहते हैं, तो यह आसान तरीका आपके काम आ सकता है. इस तरीके से बिना धूप में सुखाए सिर्फ 10 मिनट में स्वादिष्ट हरी मिर्च का अचार तैयार किया जा सकता है.

मिर्च का अचार बनाने के लिए सामग्री

इस झटपट अचार के लिए आपको ज्यादा चीजों की जरूरत नहीं पड़ेगी. इसके लिए ताजी हरी मिर्च, सरसों का तेल, नमक, हल्दी, सौंफ, राई, मेथी दाना और थोड़ा सा नींबू का रस चाहिए. हरी मिर्च का चुनाव करते समय कोशिश करें कि मिर्च ताजी और बिना दाग वाली हो. अच्छी क्वालिटी की मिर्च से अचार का स्वाद भी बेहतर आता है.

10 मिनट में ऐसे बनाएं मिर्च का अचार

सबसे पहले हरी मिर्च को अच्छी तरह धोकर कपड़े से पूरी तरह सुखा लें, ताकि उनमें पानी न रह जाए. अब मिर्च को बीच से लंबा काट लें या छोटे टुकड़ों में काट लें. एक पैन में थोड़ा सरसों का तेल गर्म करें. तेल हल्का गर्म होने के बाद उसमें राई, सौंफ और मेथी दाना डालकर कुछ सेकंड भूनें. अब इसमें कटी हुई हरी मिर्च डालें और हल्की आंच पर 2 से 3 मिनट तक चलाते हुए पकाएं.

इसके बाद इसमें नमक, हल्दी और बाकी मसाले डालकर अच्छी तरह मिला दें. आखिर में नींबू का रस डालें और गैस बंद कर दें. आपका चटपटा हरी मिर्च का अचार तैयार है. अगर आप चाहते हैं कि अचार कई महीनों तक चले, तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है. सबसे पहले अचार को हमेशा साफ और सूखे कांच के जार में भरें. जार में नमी बिल्कुल नहीं होनी चाहिए.

अचार निकालते समय हमेशा सूखा चम्मच इस्तेमाल करें. गीला चम्मच लगाने से अचार जल्दी खराब हो सकता है. साथ ही, अचार को हमेशा ढककर रखें और कोशिश करें कि इसमें पर्याप्त मात्रा में तेल रहे. हरी मिर्च के अचार में थोड़ा सा अजवाइन या कलौंजी डालने से इसका स्वाद और खुशबू बढ़ सकती है. अगर आपको ज्यादा तीखा पसंद नहीं है, तो कम तीखी हरी मिर्च का इस्तेमाल कर सकते हैं.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें



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डीआरएम से मिला भाजपा प्रतिनिधिमंडल: खैरथल प्लेटफॉर्म-2 तक सीधी एंट्री सहित कई मांगें रखीं – Khairthal-Tijara News




खैरथल। जिला मुख्यालय खैरथल के रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाओं के विस्तार और लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर भाजपा नेताओं का प्रतिनिधिमंडल सोमवार को मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने स्टेशन पर आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए कई महत्वपूर्ण मांगें उठाईं। खैरथल भाजपा मंडल अध्यक्ष मनीष शर्मा ने पूर्व विधायक रामहेत सिंह यादव के नेतृत्व में डीआरएम को ज्ञापन सौंपते हुए बताया कि खैरथल स्टेशन पर यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन सुविधाएं अभी भी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाई हैं। उन्होंने मुख्य बाजार स्थित 93 एलसी से प्लेटफॉर्म नंबर-2 तक सीधा रास्ता विकसित करने, प्लेटफॉर्म पर टिनशेड का विस्तार करने तथा पटवार घर वाली गली से मंदिर तक रास्ता खुलवाने की मांग रखी। प्रतिनिधिमंडल ने पड़ीसल क्षेत्र में रेलवे स्टेशन के निकट आवागमन की बेहतर व्यवस्था करने तथा प्लेटफॉर्म का विस्तार कराने की भी मांग की। इसके अलावा यात्रियों को धूप और बारिश से राहत देने के लिए स्टेशन पर दोनों प्लेटफॉर्मों पर 100 मीटर अतिरिक्त टिनशेड निर्माण कराने का आग्रह किया गया। भाजपा नेताओं ने कहा कि खैरथल अब जिला मुख्यालय है, ऐसे में रेलवे स्टेशन पर सुविधाओं का विस्तार समय की जरूरत बन चुका है। यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्टेशन के विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मंडल रेल प्रबंधक ने प्रतिनिधिमंडल की मांगों को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को शीघ्र मौके पर भेजकर निरीक्षण कराने तथा आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। इस दौरान प्रदेश कार्यसमिति सदस्य एवं पूर्व विधायक रामहेत सिंह यादव, सरस डेयरी चेयरमैन नितिन सांगवान, भाजपा मंडल अध्यक्ष मनीष शर्मा, पूर्व जिला अध्यक्ष संजय नरुका, व्यापार प्रकोष्ठ जिला अध्यक्ष दीनदयाल गुप्ता, योगेश गोयल तथा युवा नेता इंदर यादव सहित कई भाजपा पदाधिकारी मौजूद रहे।



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ब्रिटेन के नए प्रधानमंत्री बन सकते हैं एंडी बर्नहैम: किंग ऑफ द नॉर्थ के नाम से मशहूर, दो बार पीएम पद की रेस हारे


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लंदन59 मिनट पहले

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ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर ने इस्तीफा दे दिया है। उनकी जगह एंडी बर्नहैम नए प्रधानमंत्री बन सकते हैं। बर्नहैम ने पीएम पद के लिए दावेदारी भी पेश कर दी है।

बर्नहैम 19 जून को मेकरफील्ड से उपचुनाव जीतकर सांसद बने थे। पार्टी में उनकी लोकप्रियता के चलते तभी से ही स्टार्मर की मुश्किलें बढ़ गईं थी।

इस स्टोरी में जानिए पत्रकारिता से करियर की शुरुआत करने वाले बर्नहैम कैसे इंग्लैंड के ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ बने…

टीवी सीरियल देखने के बाद राजनीति में आए बर्नहैम

बर्नहैम का जन्म 1970 में लिवरपूल में हुआ था, लेकिन उनका बचपन चेशायर के कुलचेथ गांव में बीता। उनके पिता टेलीकॉम कंपनी BT में इंजीनियर थे, जबकि मां एक क्लिनिक में रिसेप्शनिस्ट थीं। दोनों लेबर पार्टी के समर्थक थे।

एंडी बर्नहैम का राजनीति में आने का फैसला किसी नेता के भाषण से नहीं, बल्कि एक टीवी ड्रामा देखकर हुआ था।

उन्होंने बताया है कि 14 साल की उम्र में BBC का फेमस सीरियल बॉयज फ्रॉम द ब्लैकस्टफ देखने के बाद उन्होंने लेबर पार्टी से जुड़ने का मन बनाया। यह ड्रामा लिवरपूल में बेरोजगारी और आर्थिक संकट की कहानी पर आधारित था।

आयरिश मूल के बर्नहैम की पहचान सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है। वह लिवरपूल के एवर्टन फुटबॉल क्लब के बड़े फैन हैं।

स्कूल के दिनों की तस्वीर11 साल के एंडी बर्नहैम (दाएं), अपने भाइयों निक (बाएं) और जॉन (सामने) और मां एलीन के साथ।

स्कूल के दिनों की तस्वीर11 साल के एंडी बर्नहैम (दाएं), अपने भाइयों निक (बाएं) और जॉन (सामने) और मां एलीन के साथ।

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान फुटबॉल खेलते एंडी बर्नहैम (सबसे बाएं), यूनिवर्सिटी एफसी टीम के साथ।

कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान फुटबॉल खेलते एंडी बर्नहैम (सबसे बाएं), यूनिवर्सिटी एफसी टीम के साथ।

कैम्ब्रिज में पढ़ाई के दौरान नीदरलैंड की मैरी से प्यार हुआ

एंडी बर्नहैम ने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से इंग्लिश लिटरेचर की पढ़ाई की, लेकिन वहां का माहौल उनके लिए आसान नहीं था। अपनी किताब ‘हेड नॉर्थ’ में उन्होंने लिखा है कि कई बार उन्हें लगता था कि वे वहां के नहीं हैं और खुद को एक ‘बाहरी’ की तरह महसूस करते थे।

पढ़ाई के दौरान उनकी रुचि म्यूजिक में बढ़ी। मैनचेस्टर के इंडी बैंड्स- द स्मिथ्स और द स्टोन रोजेज के गानों ने उनकी सोच और व्यक्तित्व को काफी प्रभावित किया। बर्नहैम के मुताबिक, इसी म्यूजिक कल्चर ने उन्हें अपनी अलग पहचान दी।

एंडी बर्नहैम की लव स्टोरी की शुरुआत कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से हुई थी। यहीं उनकी मुलाकात नीदरलैंड में जन्मीं मैरी-फ्रांस वैन हील से हुई। दोनों इंग्लिश लिटरेचर की पढ़ाई के दौरान करीब आए और कई साल बाद 2000 में शादी कर ली। आज उनके तीन बच्चे हैं।

बर्नहैम ने 2009 में द गार्जियन को दिए इंटरव्यू में बताया था कि शुरुआती दौर में वे परिवार बढ़ाने की योजना नहीं बना रहे थे। उनका मानना था कि जिंदगी में पहले स्थिरता हासिल करना जरूरी है।

एंडी बर्नहैम अपनी पत्नी मैरी फ्रांस वैन हील और पहले बच्चे जिमी के साथ।

एंडी बर्नहैम अपनी पत्नी मैरी फ्रांस वैन हील और पहले बच्चे जिमी के साथ।

31 साल की उम्र में पहली बार सांसद बने

एंडी बर्नहैम ने करियर की शुरुआत राजनीति से नहीं, बल्कि पत्रकारिता से की थी। ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने टैंक वर्ल्ड और पैसेंजर वर्ल्ड मैनेजमेंट जैसी पत्रिकाओं में काम किया। 20 साल की उम्र में उन्हें राजनीति में पहला मौका मिला, जब वह लेबर सांसद टेसा जोवेल के रिसर्चर बने।

इसके बाद बर्नहैम ने तेजी से राजनीति में पहचान बनाई। वह संस्कृति मंत्री क्रिस स्मिथ के सलाहकार रहे और 2001 में ग्रेटर मैनचेस्टर के लीघ सीट से पहली बार सांसद चुने गए। संसद पहुंचने के बाद बर्नहैम ने टोनी ब्लेयर सरकार में जूनियर मंत्री के तौर पर काम किया।

गॉर्डन ब्राउन के कार्यकाल में उनका कद और बढ़ा और उन्हें कैबिनेट में जगह मिली। इस दौरान उन्होंने वित्त, संस्कृति और स्वास्थ्य जैसे अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली।

2010 में स्वास्थ्य सचिव के रूप में एंडी बर्नहैम, तत्कालीन प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन के साथ।

2010 में स्वास्थ्य सचिव के रूप में एंडी बर्नहैम, तत्कालीन प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन के साथ।

दो बार लेबर पार्टी का चुनाव हारे, फिर भी नहीं छोड़ी दावेदारी

2010 में लेबर पार्टी की चुनावी हार के बाद एंडी बर्नहैम ने पहली बार पार्टी नेता बनने की कोशिश की, लेकिन पांच उम्मीदवारों में चौथे स्थान पर रहे। पार्टी की कमान एड मिलिबैंड के हाथ में चली गई।

पांच साल बाद 2015 में बर्नहैम ने दूसरी बार किस्मत आजमाई। इस बार उन्हें जेरेमी कॉर्बिन ने हरा दिया। लगातार दो हार के बावजूद उन्होंने पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने पर काम जारी रखा।

आलोचक अक्सर बर्नहैम पर राजनीतिक रुख बदलने के आरोप लगाते रहे हैं। हालांकि, ब्रेक्जिट के मुद्दे पर वह लगातार यूरोपीय यूनियन के पक्ष में रहे। 2016 के जनमत संग्रह में उन्होंने ब्रिटेन के EU में बने रहने का समर्थन किया था। बाद में उन्होंने कहा कि वह अपने जीवनकाल में ब्रिटेन को दोबारा यूरोपीय संघ का हिस्सा बनते देखना चाहते हैं।

गॉर्डन ब्राउन ने एंडी बर्नहैम को अपनी कैबिनेट में शामिल किया था।

गॉर्डन ब्राउन ने एंडी बर्नहैम को अपनी कैबिनेट में शामिल किया था।

सरकार से भिड़े तो ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ का नाम मिला

दो बार लेबर पार्टी का नेता बनने से चूकने के बाद एंडी बर्नहैम ने 2017 में नई पारी शुरू की। उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति छोड़ ग्रेटर मैनचेस्टर के पहले सीधे चुने गए मेयर का चुनाव लड़ा और 60% से ज्यादा वोटों के साथ जीत दर्ज की। 2021 में उन्होंने और बड़े अंतर से दोबारा जीत हासिल की।

कोविड महामारी के दौरान बर्नहैम ने नॉर्थ इंग्लैंड के साथ भेदभाव का आरोप लगाते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोला। उस समय लंदन की सत्ता से उनकी टक्कर ने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई और मीडिया ने उन्हें ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ कहना शुरू कर दिया।

अपनी ही पार्टी की सरकार पर सवाल उठाए

स्टार्मर की सरकार बनने के बाद भी बर्नहैम ने चुप्पी नहीं साधी। उन्होंने सरकार की खर्च और कर्ज से जुड़ी आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए, जिसके चलते पार्टी के भीतर ही उनके खिलाफ आवाजें उठने लगीं।

हालांकि, 2025 तक उन्हें लेबर पार्टी के अगले बड़े चेहरे और संभावित नेता के तौर पर देखा जाने लगा था। जनवरी 2026 में जब ग्रेटर मैनचेस्टर के सांसद एंड्रयू ग्विन ने सीट छोड़ने का ऐलान किया, तो बर्नहैम की वेस्टमिंस्टर वापसी की चर्चा तेज हो गई। लेकिन उपचुनाव में पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया। माना गया कि यह फैसला प्रधानमंत्री और लेबर नेता कीर स्टार्मर की सहमति से लिया गया था।

पार्टी की हार से स्टार्मर पर सवाल उठे

मई 2026 में इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स के चुनावों में लेबर पार्टी का प्रदर्शन उम्मीद से खराब रहा। वहीं नाइजल फराज की रिफॉर्म UK तेजी से मजबूत हुई। उसने उन इलाकों में भी बढ़त बनाई, जिन्हें एंडी बर्नहैम का गढ़ माना जाता था।

खराब नतीजों के बाद कीर स्टार्मर के नेतृत्व पर सवाल उठने लगे। कुछ सांसदों ने नेतृत्व बदलने की मांग की, जबकि सरकार और पार्टी में इस्तीफों का दौर भी शुरू हो गया।

इसी बीच लेबर सांसद जोश साइमंस ने मेकरफील्ड सीट छोड़ने का ऐलान किया, ताकि बर्नहैम संसद में वापसी कर सकें। पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार बनाया और अगले महीने हुए उपचुनाव में उन्होंने जीत हासिल कर वेस्टमिंस्टर में वापसी कर ली।

इस जीत को सिर्फ उनकी संसदीय वापसी नहीं, बल्कि लेबर पार्टी के अगले नेता की दौड़ में उनकी एंट्री के तौर पर देखा गया। दरअसल, पार्टी का नेता बनने के लिए सांसद होना जरूरी है और बर्नहैम ने यह शर्त पूरी कर ली थी।

आम लोगों की भाषा बोलना बर्नहैम की सबसे बड़ी ताकत

मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी में राजनीति के प्रोफेसर रॉबर्ट फोर्ड के मुताबिक, एंडी बर्नहैम की सबसे बड़ी ताकत यह है कि वह मुश्किल और तकनीकी मुद्दों को भी आम लोगों की भाषा में समझा देते हैं।

फोर्ड का कहना है कि बर्नहैम सिर्फ अच्छे वक्ता ही नहीं, बल्कि बेहतरीन कहानीकार भी हैं। वह लोगों को आसानी से समझा देते हैं कि वह किसके लिए राजनीति कर रहे हैं और क्या हासिल करना चाहते हैं।

प्रोफेसर के मुताबिक, यही बात उन्हें कई दूसरे लेबर नेताओं और मौजूदा प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से अलग बनाती है। जहां स्टार्मर की राजनीति को अक्सर तकनीकी और प्रशासनिक माना जाता है, वहीं बर्नहैम आम मतदाताओं से भावनात्मक जुड़ाव बनाने में ज्यादा सफल दिखते हैं।

इसी वजह से लेबर पार्टी के भीतर कई लोग उन्हें ऐसा नेता मानते हैं, जो पार्टी की घटती लोकप्रियता को रोककर समर्थकों में नया उत्साह पैदा कर सकता है।

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कीर स्टार्मर ने सोमवार सुबह 10 डाउनिंग स्ट्रीट से पद छोड़ने का ऐलान किया।

कीर स्टार्मर ने सोमवार सुबह 10 डाउनिंग स्ट्रीट से पद छोड़ने का ऐलान किया।

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सोमवार को प्रधानमंत्री और लेबर पार्टी के नेता पद से इस्तीफा दे दिया है। 10 डाउनिंग स्ट्रीट के बाहर राष्ट्र को संबोधित करते हुए उन्होंने कहा कि लेबर पार्टी को नहीं लगता कि मैं अगले चुनाव में नेतृत्व करने के लिए सही व्यक्ति हूं। पूरी खबर पढ़ें

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Redmi Note 15 SE Review: बजट प्राइस में दमदार फीचर वाला फोन


Redmi ने Note 15 सीरीज में एक बजट फ्रेंडली फोन पिछले दिनों भारत में लॉन्च किया है। रेडमी का यह फोन कर्व्ड डिस्प्ले डिजाइन के साथ आता है। Redmi Note 15 सीरीज का यह स्पेशल एडिशन स्टैंडर्ड मॉडल जैसे फीचर के साथ आता है। इस फोन को हमने कुछ समय तक इस्तेमाल किया है। हमें यह फोन कैसा लगा है, आइए जानते हैं।

Redmi Note 15 SE का डिजाइन और डिस्प्ले

रेडमी के इस बजट फोन का लुक और डिजाइन हमें काफी इंप्रेसिव लगा। जैसे ही हमने इस फोन को बॉक्स से निकाला यह देखने में हमें अच्छा लगा। इसमें सबसे अच्छी बात ये लगी कि बैक में वीगन लेदर फिनिशिंग दी गई है। इसका Crimson Reserve कलर वाला मॉडल हमने रिव्यू किया है, जो देखने में बेहद आकर्षक है। इसके चारों ओर गोल्डेन फिनिश दी गई है। फ्रंट के बेजल बेहद ही पतले हैं और सेंटर अलाइंड कैमरा डिजाइन मिलेगा।

Image Source : INDIA TVरेडमी नोट 15 एसई रिव्यू

कंपनी ने इस स्पेशल एडिशन में Redmi Note 15 सीरीज के डिजाइन एलिमेंट का ही इस्तेमाल किया है। फोन की मोटाई 7.35mm है और इसका वजन महज 178 ग्राम है। कम वजन होने की वजह से इसे सिंगल हैंड ऑपरेट किया जा सकता है। कंपनी ने फोन के साथ प्रीमियम कवर दिया है, जो इसे प्रोटेक्ट करता है।

इस स्मार्टफोन में 6.7 इंच का कर्व्ड AMOLED डिस्प्ले दिया गया है। फोन का डिस्प्ले 120Hz रिफ्रेश रेट और 3200 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस को सपोर्ट करता है। डिस्प्ले की ब्राइटनेस अच्छी होने की वजह से आप डायरेक्ट सनलाइट में भी इसे यूज कर सकते हैं। वहीं, इंडोर में अडेप्टिव ब्राइटनेस फीचर मिलता है, जिसकी वजह से फोन पर कंटेंट स्ट्रीम करना और गेमिंग आपको अच्छा लगेगा। ओवरऑल इस फोन का डिजाइन और डिस्प्ले हमें काफी इंप्रेसिव लगा है।

Redmi Note 15 SE Review

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Redmi Note 15 SE की परफॉर्मेंस

शाओमी ने अपने इस बजट फोन में Qualcomm Snapdragon 6 Gen 3 चिपसेट का इस्तेमाल किया है। हमने इसके 8GB RAM + 256GB वाला टॉप वेरिएंट यूज किया है। मल्टी टास्किंग और डेली यूज में हमें इस फोन की परफॉर्मेंस अच्छी लगी है। एक साथ कई ऐप्स ओपन करने के बाद भी फोन स्मूदली काम करता है। वहीं, गेमिंग के दौरान भी हमें फोन की परफॉर्मेंस में गिरावट देखने को नहीं मिली है। हालांकि, वीडियो स्ट्रीमिंग करते समय फोन का बैक हल्का गर्म होता है। वहीं, वीडियोग्राफी के दौरान भी इसमें हीटिंग की थोड़ी-बहुत दिक्कत आती है।

इस फोन में कंपनी ने Android 16 पर बेस्ड HyperOS 3 ऑपरेटिंग सिस्टम यूज किया है। शाओमी का नया HyperOS काफी इंप्रूव्ड है। इसमें आपको कई उपयोगी टूल्स मिल जाते हैं। हालांकि, फोन में कंपनी ने कई प्री-इंस्टॉल्ड ऐप्स भी दिए हैं, जिन्हें आप डिलीट कर सकते हैं। यही नहीं, इसमें PhonePe का Indus App Store भी मिलेगा, जहां से आप बिना गूगल में लॉग-इन किए ऐप डाउनलोड कर सकते हैं।

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Redmi Note 15 SE का बैटरी बैकअप

रेडमी के इस फोन में इन दिनों लॉन्च होने वाले फोन की तरह ज्यादा बड़ी बैटरी नहीं मिलेगी। कंपनी ने इसमें 5,800mAh की बैटरी दी है, जो दिन भर इस्तेमाल करने के लिए पर्याप्त है। एक बार फोन को फुल चार्ज करने के बाद पूरे दिन भर आप इसे यूज कर सकते हैं। फोन का बैटरी बैकअप भी अच्छा है। हालांकि, कंपनी ने इसके साथ 45W का चार्जिंग सपोर्ट दिया है, जिसकी वजह से बैटरी को चार्ज होने में थोड़ा ज्यादा समय लगता है। इसे फुल चार्ज होने में तकरीबन 80 से 85 मिनट का समय लगता है। बैटरी के मामले में भी फोन ने हमें इंप्रेस किया है।

Redmi Note 15 SE का कैमरा

रेडमी के इस बजट फोन के कैमरे की बात करें तो बैक में सेंटर अलाइंड कैमरा मॉड्यूल मिलेगा। इसमें दो कैमरे दिए गए हैं। इसके साथ एक LED फ्लैश दिया गया है। इसमें 50MP का मेन यानी प्राइमरी कैमरा दिया गया है। वहीं, फोन में 2MP का एक डेप्थ सेंसर मिलता है।

फोन के प्राइमरी कैमरा से दिन के समय ली गई तस्वीर में आपको डिटेलिंग देखने को मिलती है। हालांकि, ज्यादा जूम करने पर तस्वीर पिक्सलेट होती है। कैमरा ऐप में AI फीचर का इस्तेमाल किया गया है, जो खींची गई तस्वीर के डायनैमिक रेंज को इन्हांस करता है। इस फोन का कैमरा 4K वीडियो रिकॉर्डिंग 30fps पर सपोर्ट करता है। वहीं, लो लाइट में फोन से ली गई तस्वीर इतनी इंप्रेसिव नहीं है।

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सेल्फी की बात करें तो कंपनी ने इसमें 20MP का फ्रंट कैमरा यूज किया है। यह कैमरा भी अच्छी लाइट और रोशनी में ठीक-ठाक तस्वीर क्लिक कर सकता है। खास तौर पर सोशल मीडिया अपलोड्स और रील्स आदि बनाने के लिए फोन का फ्रंट कैमरा बेहतर काम करता है। लो-लाइट में सेल्फी कैमरा भी एवरेज ही काम करेगा।

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Redmi Note 15 SE हमें कैसा लगा?

रेडमी का यह फोन 22,999 रुपये की शुरुआती कीमत में आता है। इस प्राइस रेंज में आपको अन्य ब्रांड के भी फोन मिल जाएंगे, जो इससे थोड़े बेहतर फीचर्स के साथ आते हैं। हालांकि, फोन का डिजाइन और लुक हमें काफी प्रीमियम लगा है। परफॉर्मेंस के मामले में भी फोन ने हमें निराश नहीं किया है। फोन का कैमरा फीचर थोड़ा और बेहतर हो सकता था। वहीं, बैटरी को भी बढ़ाई जा सकती थी। अगर, आप 25,000 रुपये की प्राइस रेंज में Android फोन खोज रहे हैं तो इसे भी अपनी लिस्ट में शामिल कर सकते हैं।

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सुनील शेट्टी और सैफ की 5 फिल्म, 1 नंबर वाली की आंधी में उड़ गया था बॉक्स ऑफिस


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90 के दशक में बॉलीवुड में एक्शन हीरो का बोलबाला था. वहीं चॉकलेटी और शहरी किरदारों का दौर भी शुरू हो रहा था. जब भी सुनील शेट्टी की रफ एंड टफ इमेज और सैफ अली खान का चार्म बॉक्स ऑफिस पर साथ आता था, तो दर्शकों का खूब मनोरंजन होता था. इन दोनों स्टार्स ने अपने करियर में 5 फिल्मों में स्क्रीन स्पेस शेयर किया. 1993 में आई उनकी पहली फिल्म ‘पहचान’ ने बॉक्स ऑफिस पर धमाल मचा दिया था, जबकि 1995 में आई एक्शन-कॉमेडी ‘सुरक्षा’ ने दर्शकों का दिल जीत लिया था.

नई दिल्ली. 90 का दशक बॉलीवुड के लिए वह दौर था, जब दो हीरो वाली फिल्में बहुत हिट होती थीं. दर्शक अपने दो पसंदीदा सुपरस्टार को एक ही टिकट पर अलग-अलग रोल में देखने के लिए बेसब्री से तरसते थे. इसी दौर में एक अनोखी जोड़ी सामने आई, जो दो बिल्कुल अलग कल्चर और स्टाइल को दिखाती थी. एक तरफ सुनील शेट्टी थे, जो अपने जबरदस्त एक्शन से दर्शकों को रोमांचित करते थे और दूसरी तरफ सैफ अली खान थे, जो स्टाइलिश, चॉकलेटी आंखों वाले, विदेश से पढ़े-लिखे और अपनी कॉमिक टाइमिंग के लिए जाने जाते थे.

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इन दोनों एक्टर्स ने 5 फिल्मों में लीड रोल में साथ काम किया है. इन पांचों फिल्मों की परफॉर्मेंस काफी दिलचस्प है. हालांकि इस जोड़ी ने शुरुआत में लगातार दो बड़ी सफलताएं देखीं, लेकिन अगले सालों में उन्हें बॉक्स ऑफिस पर असफलता का भी सामना करना पड़ा. आइए सुनील शेट्टी और सैफ अली खान के इस फिल्मी सफर पर करीब से नजर डालते हैं.

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1. पहचान (1993): 1992 की फिल्म ‘बलवान’ से बॉलीवुड में एंट्री करने वाले सुनील शेट्टी अपनी पहली ही फिल्म से ‘एक्शन किंग’ बन चुके थे. वहीं, सैफ अली खान खुद को जमाने के लिए स्ट्रगल कर रहे थे. 1993 में डायरेक्टर दीपक शिवदासानी ने इन दो बिल्कुल अलग मिजाज वाले एक्टर्स को एक साथ लाकर फिल्म ‘पहचान’ बनाई. इसमें शिल्पा शिरोडकर और मधु खान भी लीड रोल में थीं. यह फिल्म पूरी तरह से एक्शन-फैमिली ड्रामा थी, जिसमें भाईचारा, बदला और इंसाफ की लड़ाई दिखाई गई थी. सुनील शेट्टी का एंग्री मैन लुक और सैफ अली खान की सीरियस परफॉर्मेंस ने दर्शकों को खूब पसंद आई. जब फिल्म थिएटर में रिलीज हुई, तो इसने इतनी पॉपुलैरिटी हासिल की कि सिंगल स्क्रीन के बाहर भी टिकटें बिक गईं. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर अपने बजट से कई गुना ज्यादा कमाई की और बॉक्स ऑफिस पर एक बड़ी हिट साबित हुई

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2. सुरक्षा (1995): ‘पहचान’ की जबरदस्त सफलता के ठीक 2 साल बाद, डायरेक्टर राजू मवानी ने एक बार फिर इस लकी जोड़ी पर भरोसा किया और 1995 में ‘सुरक्षा’ लेकर आए. यह फिल्म सिर्फ एक्शन ही नहीं थी, बल्कि इसमें कॉमेडी और सस्पेंस का भी तड़का था जिसने इसे युवाओं के बीच एक कल्ट फिल्म बना दिया. सैफ अली खान ने अमर नाम के एक बेफिक्र और अजीब लड़के का रोल किया, जबकि सुनील शेट्टी राजा नाम के एक टफ और ईमानदार फाइटर के रोल में दिखे. फिल्म में आदित्य पंचोली, दिव्या दत्ता और मोनिका बेदी ने भी अहम रोल निभाए थे. ‘सुरक्षा’ की सबसे बड़ी यूएसपी दोनों एक्टर्स के बीच ऑन-स्क्रीन केमिस्ट्री थी. सैफ ने अपने डायलॉग से दर्शकों को हंसाया, तो सुनील शेट्टी ने अपने दमदार स्टंट से थिएटर में तालियां बटोरीं. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर बहुत अच्छा परफॉर्म किया और दर्शकों का दिल पूरी तरह जीत लिया.

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3. एक था राजा (1996): 1996 की फिल्म ‘एक था राजा’ के मेकर्स ने एक बड़ा जुआ खेला. उन्होंने सुनील शेट्टी और सैफ अली खान के साथ उस दौर के एक और एक्शन स्टार आदित्य पंचोली को कास्ट किया. यह एक फैमिली-ओरिएंटेड क्राइम ड्रामा थी जिसमें बड़ी स्टार कास्ट थी. लेकिन, फिल्म के साथ दिक्कत यह थी कि इसका स्क्रीनप्ले बहुत पुराना और कमजोर था. डायरेक्शन में भी दर्शकों को बांधे रखने की धार नहीं थी और फिल्म का मिलाजुला असर बॉक्स ऑफिस पर देखने को मिला.

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4. हमसे बढ़कर कौन (1998): 1998 में रिलीज हुई ‘हमसे बढ़कर कौन’ सुनील शेट्टी और सैफ अली खान की एक बड़ी फिल्म थी. दीपक आनंद के डायरेक्शन में बनी इस हाई-वोल्टेज एक्शन-मसाला फिल्म में रजा मुराद, बीना बनर्जी और रंजीत जैसे पुराने एक्टर थे. मजबूत कास्ट और बेहतरीन फाइट सीन की वजह से इस कमर्शियल एंटरटेनर ने बॉक्स ऑफिस पर अच्छा परफॉर्म किया और दर्शकों का खूब मनोरंजन किया.

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5. एलओसी कारगिल (2003): सुनील और सैफ के कोलेबोरेशन का आखिरी और सबसे बड़ा चैप्टर 2003 में लिखा गया. डायरेक्टर जेपी दत्ता ने कारगिल युद्ध के बहादुर शहीदों को श्रद्धांजलि देने के लिए ‘एलओसी कारगिल’ नाम की एक मेगा-बजट फिल्म बनाई. इस मल्टी-स्टारर फिल्म के लिए आधी फिल्म इंडस्ट्री मौजूद थी, लेकिन इस फिल्म के लिए साल 2003 सुनील-सैफ की जोड़ी के लिए एक ग्रहण बनकर सामने आया. फिल्म में सुनील शेट्टी ने परमवीर चक्र अवॉर्डी राइफलमैन संजय कुमार का रोल किया था और सैफ अली खान ने वीर चक्र अवॉर्डी कैप्टन अनुज नायर का रोल किया था. दोनों एक्टर्स ने मिलिट्री यूनिफॉर्म में शानदार और दिल को छू लेने वाली परफॉर्मेंस दी. लड़ाई के सीन में उनका जोश साफ दिख रहा था. लेकिन, फिल्म की सबसे बड़ी कमजोरी इसकी बहुत ज्यादा लंबाई. क्रिटिक्स की तारीफ के बावजूद, फिल्म ज्यादा देर तक थिएटर में दर्शकों को रोक नहीं पाई और अपने ज्यादा बजट की वजह से यह बॉक्स ऑफिस पर अपनी लागत भी नहीं निकाल पाई, जिससे यह एक बहुत बड़ी ‘फ्लॉप’ साबित हुई.

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म्यूचुअल फंड में बने रहें या निकाल लें पैसा? 5 बड़े संकेत जो बताते हैं सही समय


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म्यूचुअल फंड को लंबे समय में संपत्ति बनाने का एक प्रभावी माध्यम माना जाता है. यह निवेशकों को महंगाई को मात देने, बेहतर रिटर्न हासिल करने और कंपाउंडिंग की ताकत से बड़े वित्तीय लक्ष्य पूरे करने में मदद करता है. हालांकि इसका मतलब यह नहीं है कि हर म्यूचुअल फंड को हमेशा के लिए होल्ड करके रखा जाए. समय-समय पर निवेश की समीक्षा करना और जरूरत पड़ने पर बदलाव करना भी उतना ही जरूरी होता है.

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म्यूचुअल फंड से एग्जिट का सही समय कैसे पहचानें? एक्सपर्ट्स ने बताए अहम संकेत. (Representative Image:AI)

नई दिल्ली. वित्तीय विशेषज्ञों का मानना है कि ‘खरीदो और भूल जाओ’ वाली रणनीति हर परिस्थिति में सही साबित नहीं होती. कई बार निवेशक के लक्ष्य बदल जाते हैं, जोखिम उठाने की क्षमता कम या ज्यादा हो जाती है या फिर बाजार की परिस्थितियां बदल जाती हैं. ऐसे में पोर्टफोलियो को दोबारा संतुलित करना, कुछ मुनाफा बुक करना या कमजोर प्रदर्शन करने वाले फंड से बाहर निकलना समझदारी भरा कदम हो सकता है. नियमित समीक्षा से यह सुनिश्चित होता है कि निवेश अभी भी आपके वित्तीय उद्देश्यों के अनुरूप है.

लगातार कमजोर प्रदर्शन सबसे बड़ा संकेत
यदि कोई म्यूचुअल फंड लंबे समय तक अपनी श्रेणी के अन्य फंडों की तुलना में कमजोर प्रदर्शन कर रहा है, तो यह चिंता का विषय हो सकता है. विशेषज्ञों के अनुसार केवल कुछ महीनों की गिरावट देखकर फैसला नहीं लेना चाहिए. किसी इक्विटी फंड का मूल्यांकन कम से कम तीन साल और बेहतर हो तो पांच साल के प्रदर्शन के आधार पर करना चाहिए. यदि फंड लगातार अपेक्षित रिटर्न नहीं दे पा रहा है और जोखिम के मुकाबले उसका प्रदर्शन कमजोर है, तो निवेशक को दूसरे विकल्पों पर विचार करना चाहिए.

फंड की रणनीति में बदलाव भी है चेतावनी
कई बार निवेशक किसी खास रणनीति या निवेश शैली को देखकर फंड चुनते हैं. लेकिन अगर समय के साथ फंड अपनी घोषित रणनीति से हटने लगे या उसके निवेश का तरीका बदल जाए, तो यह एक बड़ा रेड फ्लैग माना जा सकता है. उदाहरण के लिए, यदि कोई फंड खुद को बड़े शेयरों में निवेश करने वाला बताता है लेकिन धीरे-धीरे अधिक जोखिम वाले शेयरों में निवेश बढ़ा देता है, तो निवेशक का मूल उद्देश्य प्रभावित हो सकता है. ऐसी स्थिति में फंड की दोबारा समीक्षा जरूरी हो जाती है.

प्रबंधन और लागत पर भी रखें नजर
फंड मैनेजर और निवेश टीम की भूमिका म्यूचुअल फंड के प्रदर्शन में महत्वपूर्ण होती है. यदि लगातार बदलाव हो रहे हों या प्रबंधन की गुणवत्ता को लेकर सवाल उठ रहे हों, तो निवेशक को सतर्क हो जाना चाहिए. इसके अलावा, यदि फंड का खर्च अनुपात (एक्सपेंस रेशियो) बढ़ता जा रहा है और इससे संभावित रिटर्न प्रभावित हो रहे हैं, तो यह भी फंड बदलने का एक कारण बन सकता है. बढ़ती लागत लंबे समय में निवेशकों की कमाई को कम कर सकती है.

बदलते लक्ष्य और जरूरतें भी तय करती हैं एग्जिट
कई बार समस्या फंड में नहीं बल्कि निवेशक की परिस्थितियों में होती है. यदि किसी व्यक्ति का वित्तीय लक्ष्य बदल गया है, बच्चों की पढ़ाई, घर खरीदने या किसी अन्य जरूरत के लिए धन चाहिए, तो निवेश रणनीति में बदलाव करना स्वाभाविक है. ऐसे मामलों में फंड से आंशिक या पूर्ण निकासी उचित हो सकती है. हालांकि विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि एग्जिट की योजना सोच-समझकर बनानी चाहिए ताकि टैक्स, एग्जिट लोड और बाजार के समय से जुड़े जोखिमों को कम किया जा सके.

भावनाओं नहीं, तथ्यों के आधार पर लें फैसला
विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार में गिरावट, नकारात्मक खबरों या अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के कारण जल्दबाजी में म्यूचुअल फंड से बाहर निकलना अक्सर नुकसानदायक साबित होता है. इसके बजाय निवेशकों को ठोस आंकड़ों, प्रदर्शन के रिकॉर्ड और अपने वित्तीय लक्ष्यों के आधार पर निर्णय लेना चाहिए. अच्छी गुणवत्ता वाले और लक्ष्य के अनुरूप चुने गए म्यूचुअल फंड सामान्य बाजार चक्रों के दौरान लंबे समय तक बनाए रखे जा सकते हैं. लेकिन नियमित निगरानी और अनुशासित समीक्षा यह सुनिश्चित करती है कि आपका पोर्टफोलियो हमेशा आपके वित्तीय भविष्य की जरूरतों को पूरा करता रहे.

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Rakesh Singh

Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें



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