Saturday, June 6, 2026
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जोधपुर रेलवे स्टेशन का ‘वात्सल्य कक्ष’ बना माताओं के लिए सुविधाजनक स्थान


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Breastfeeding Room Jodhpur: जोधपुर रेलवे स्टेशन पर महिला यात्रियों और नवजात शिशुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए ‘वात्सल्य कक्ष’ की शुरुआत की गई है. इस विशेष कक्ष का उद्देश्य माताओं को शिशुओं को स्तनपान कराने के लिए सुरक्षित, आरामदायक और गोपनीय वातावरण उपलब्ध कराना है. रेलवे स्टेशन जैसे व्यस्त सार्वजनिक स्थानों पर अक्सर माताओं को शिशु देखभाल और स्तनपान के दौरान असुविधा का सामना करना पड़ता है. नई सुविधा के शुरू होने से वे बिना किसी झिझक और परेशानी के अपने बच्चों की देखभाल कर सकेंगी. वात्सल्य कक्ष में बैठने की व्यवस्था, स्वच्छ वातावरण और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे माताओं और शिशुओं दोनों को आराम मिलेगा. भारतीय रेलवे द्वारा यात्री सुविधाओं के विस्तार की दिशा में यह महत्वपूर्ण पहल मानी जा रही है.

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जोधपुर: जोधपुर रेलवे स्टेशन पर महिला यात्रियों और नवजात शिशुओं के साथ सफर करने वाले परिवारों के लिए एक महत्वपूर्ण सुविधा शुरू की गई है. प्लेटफॉर्म संख्या-1 स्थित एसी वेटिंग रूम में विशेष रूप से बेबी फीडिंग रूम यानी वात्सल्य कक्ष तैयार किया गया है. इसका उद्देश्य माताओं को ऐसा स्थान उपलब्ध कराना है, जहां वे यात्रा के दौरान अपने शिशुओं की देखभाल सहजता और आरामदायक माहौल में कर सकें. रेलवे प्रशासन का यह कदम महिला यात्रियों की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए उठाया गया है. नवजात शिशुओं के साथ यात्रा करने वाली माताओं को अक्सर भीड़भाड़ वाले प्लेटफॉर्म और प्रतीक्षालय में असुविधा का सामना करना पड़ता है. इसी आवश्यकता को समझते हुए वात्सल्य कक्ष में ऐसा वातावरण तैयार किया गया है.

जहां माताएं पूरी निजता के साथ शिशुओं को स्तनपान करा सकें. कक्ष में स्वच्छता और आराम से जुड़ी आवश्यक व्यवस्थाएं उपलब्ध कराई गई हैं, जिससे महिलाओं को सार्वजनिक स्थानों पर होने वाली झिझक और असहजता से राहत मिलेगी. यह सुविधा यात्रा को अधिक सम्मानजनक और सुविधाजनक बनाने की दिशा में एक सकारात्मक पहल मानी जा रही है.

यात्री सुविधाओं के विस्तार की दिशा में कदम
जोधपुर मंडल के वरिष्ठ मंडल वाणिज्य प्रबंधक हितेश यादव के अनुसार, रेलवे लगातार यात्रियों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए प्रयासरत है. स्टेशन पर आधुनिक सुविधाओं को बढ़ाने के साथ-साथ विभिन्न वर्गों की जरूरतों के अनुरूप व्यवस्थाएं विकसित की जा रही हैं. वात्सल्य कक्ष की शुरुआत भी इसी सोच का हिस्सा है, ताकि महिलाओं और छोटे बच्चों के साथ सफर करने वाले परिवारों को बेहतर अनुभव मिल सके. इससे स्टेशन पर उपलब्ध सुविधाओं का दायरा और अधिक व्यापक हुआ है.

महिला यात्रियों के लिए राहतभरी पहल
रेल यात्रा के दौरान बच्चों की देखभाल माताओं के लिए सबसे बड़ी जिम्मेदारी होती है. ऐसे में स्टेशन परिसर में उपलब्ध यह विशेष कक्ष उन्हें मानसिक सुकून और सुविधा दोनों प्रदान करेगा. इससे न केवल महिलाओं को बेहतर माहौल मिलेगा, बल्कि शिशुओं की देखभाल भी अधिक सहज तरीके से हो सकेगी. रेलवे को उम्मीद है कि यह सुविधा महिला यात्रियों के बीच काफी उपयोगी साबित होगी और भविष्य में अन्य स्टेशनों पर भी ऐसी व्यवस्थाओं को बढ़ावा देने की दिशा में प्रेरणा बनेगी.

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Jagriti Dubey

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मानसून में लगाएं आम की ये 5 बेहतरीन किस्में, कम देखभाल में देंगी बंपर उत्पादन


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मानसून में लगाएं आम की ये 5 बेहतरीन किस्में, कम देखभाल में देंगी बंपर उत्पादन

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कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर के एस यादव ने कहा कि सबसे पहले तो जहां पर आम के पौधे लगाने की तैयारी की जा रही है. वहां यह सुनिश्चित कर लें कि कम से कम 2 मीटर की गहराई तकरीली और पथरीली जमीन ना हो, नहीं तो पौधे सूख जाते हैं अगर दोमट मिट्टी है तो यह बहुत अच्छा होता है काली मिट्टी है तो उसमें कुछ रेत मिलाकर पौधे का ट्रांसप्लांट करना चाहिए.

भारत आम उत्पादन के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा देश है. यहां की अलग-अलग जलवायु अलग-अलग क्षेत्र में सैकड़ो वैरायटी के आम का उत्पादन देती हैं. यह आम की उद्यान किसानों के लिए मोटी कमाई भी करवा रहे हैं सरकारों के द्वारा भी फलों की खेती करने के लिए बढ़ावा दिया जा रहा है. इसके अलावा मानसून का सीजन ठीक वह सीजन होता है जब हम उद्यान लगाने की पहली सीढ़ी चढ़ते हैं. मानसून से ही फलदार वृक्ष का लगना शुरू होता है.

ऐसे में जो किसान भाई मानसून के सीजन में आम के वृक्षों का उद्यान लगाने की तैयारी कर रहे हैं तो उन्हें ऐसी कौन सी वेराइटी लगानी चाहिए जो कम समय में कम मेहनत में और काम देखरेख में अच्छी ग्रोथ के साथ जल्दी फलों का उत्पादन देने लगे खासकर बुंदेलखंड और मध्य प्रदेश के क्षेत्र में वह कौन सी वेराइटी हैं.जो बिना किसी एक्स्ट्रा मेहनत के आसानी से उगाई जा सकती हैं. उनकी बाजार में भी अच्छी डिमांड रहती है. इसके लिए हम सागर कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर के एस यादव से जानेंगे, इन्होंने आम पर पीएचडी भी की है.

दोमट मिट्टी में लगाएं आम के पौधे
डॉक्टर यादव बताते हैं कि सबसे पहले तो जहां पर आम के पौधे लगाने की तैयारी की जा रही है. वहां यह सुनिश्चित कर लें कि कम से कम 2 मीटर की गहराई तकरीली और पथरीली जमीन ना हो, नहीं तो पौधे सूख जाते हैं अगर दोमट मिट्टी है तो यह बहुत अच्छा होता है काली मिट्टी है तो उसमें कुछ रेत मिलाकर पौधे का ट्रांसप्लांट करना चाहिए. आम की वैरायटी की बात करें तो यह दो तरह के होते हैं. एक शंकर किस्मे होती हैं जो हर साल फलते हैं दूसरा व्यावसायिक फसले होती हैं. अगर कमर्शियल फसलों की बात करें. सामान्य तौर पर लंगड़ा चौसा फजली दशहरा है. उनकी समस्या है कि इनके पेड़ काफी बड़े होते हैं. इसके साथ-साथ में एकांतर फलन की समस्या भी आती है. एक साल फल काफी ज्यादा लगते हैं. 1 साल बहुत कम आते हैं.

आम लगाने के लिए यह है बेस्ट पांच वैरायटी
यह इन वैरायटी की कमी है. दूसरी तरफ शंकर किस्म की बात करें तो यह बहुत सारी बाजार में आ गई हैं जैसे आम्रपाली है मल्लिका है जो हमारे यहां काफी अच्छी किस्म मानी जाती हैं.इनको लगाने से फलन भी बहुत जल्दी आता है इसमें तुड़ाई में सुविधा रहती है देखभाल में सुविधा रहती है इसमें कुछ ऐसी किस्म भी है जो बहुत जल्दी आ जाती है उसमें बादाम है. हाइब्रिड किस्म में थोड़ी देर से आती हैं. अलग-अलग वैरायटी के आम अलग-अलग समय पर आते रहते हैं. मध्य प्रदेश की जलवायु में यह सभी बहुत स्वीटवल है.आम के पेड़ लगाने के लिए 2 मीटर गहरा 2 मीटर चौड़ा 2 मीटर लंबा गड्ढा खोदना चाहिए और कुछ दिन के लिए धूप लगने के लिए छोड़ देना चाहिए इसकी वजह से मिट्टी और गड्ढे में जो शत्रु किट होते हैं. वह खत्म हो जाते हैं. फिर जब पौधा ट्रांसप्लांट करते हैं तो इसमें आधा गोबर आदि मिट्टी और कुछ रासायनिक उर्वरक मिक्स करके रोप देते हैं.



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शेखर सुमन का भगोड़े भारतियों पर तीखा वार: बोले- ‘देश को लूटकर विदेश में ऐश कर रहे हैं’


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करोड़ों का चूना लगाकर विदेश भागने वाले शातिर ठगों पर दिग्गज अभिनेता शेखर सुमन ने तीखा तंज कसा है. अपनी नई वेब सीरीज के प्रमोशन के दौरान दिए इंटरव्यू में उन्होंने भगोड़े भारतीयों का नाम लिए बिना उन पर ऐसा निशाना साधा, जिसकी हर तरफ चर्चा हो रही है.

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शेखर सुमन

नई दिल्ली:  मशहूर अभिनेता शेखर सुमन  सुर्खियों में हैं. एक्टर हमेशा ही अपनी बेबाकी के लिए जाने जाते हैं. इस बार उन्होंने देश का पैसा लूटकर विदेशों में जाकर छिपने वाले रईस भगोड़ों पर ऐसा करारा तंज कसा है, जो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहा है. लोग इसकी काफी ज्यादा चर्चा कर रहे हैं.

शेखर सुमन ने साफ शब्दों में कहा है कि ये लोग अपनी मीठी-मीठी बातों और आकर्षण के दम पर पहले लोगों का भरोसा जीतते हैं और फिर बैंकों को करोड़ों का चूना लगाकर रफूचक्कर हो जाते हैं.

इंटरव्यू में किया बड़ा खुलासा

दरअसल, शेखर सुमन इन दिनों अपनी नई वेब सीरीज ‘द पिरामिड स्कीम’ को लेकर चर्चा में हैं. इसी सीरीज के प्रमोशन के दौरान आईएएनएस से खास बातचीत करते हुए उन्होंने असली ठगों के दिमाग और उनके काम करने के तरीके पर खुलकर बात की. शेखर सुमन ने इंटरव्यू में कहा, “एक ठग की सबसे बड़ी ताकत उसका चार्म होता है. हर कोई उसकी पर्सनालिटी और बातों से बहुत जल्दी इम्प्रेस हो जाता है.वे बहुत मीठी बातें करते हैं, बोलने में बेहद तेज-तर्रार होते हैं और गजब के बुद्धिमान होते हैं. दिक्कत बस ये है कि वे अपनी इस कमाल की बुद्धिमानी और एनर्जी का इस्तेमाल गलत दिशा में करते हैं. ”

इन लोगों पर साधा निशाना

शेखर सुमन यहीं नहीं रुके, उन्होंने आगे व्यंग्य करते हुए कहा, “आप ऐसे लोगों को जेल में डालते हैं, वे बाहर आ जाते हैं और फिर से कोई नया कांड शुरू कर देते हैं. वे कभी नहीं रुकते. “रियल लाइफ का उदाहरण देते हुए उन्होंने इशारों-इशारों में देश के बड़े भगोड़ों पर निशाना साधा. उन्होंने कहा, “ऐसे कई लोग अब भारत छोड़ चुके हैं और बैंकों का बहुत बड़ा पैसा डकार कर विदेशों में आराम की जिंदगी बिता रहे हैं. जरा उन्हें देखिए और उनकी बातें सुनिए. कोई पहले हवाई जहाज उड़ाता था, तो कोई क्रिकेट खेलता था. अगर आप इन सभी लोगों की लाइफ को ध्यान से देखें और सुनें, तो स्क्रीन के लिए आपका एक परफेक्ट किरदार आपके सामने तैयार हो जाता है. दरअसल उन्होंने विदेश भागे ललित मोदी, विजय माल्या जैसे लोगों पर बिना नाम लिए निशाना साधा था.

‘द पिरामिड स्कीम’ में निभा रहे हैं ठग का रोल

आपको बता दें कि शेखर सुमन अपनी इस नई वेब सीरीज में खुद एक शातिर ठग की भूमिका निभा रहे हैं. उन्होंने बताया कि इस रोल के लिए उन्होंने बहुत मेहनत की है और एक ठग जैसा आकर्षण अपने भीतर पैदा करना उनके लिए सबसे चुनौतीपूर्ण काम था.

क्या है यह सीरीज और कहां देखें?

‘द पिरामिड स्कीम’ नाम की यह वेब सीरीज पैसों के हेर-फेर और ठगी के मशहूर ‘पिरामिड स्कैम’ की दुनिया पर आधारित है. इसे मशहूर क्रिएटर ‘द वायरल फीवर’ (TVF) ने प्रोड्यूस किया है. शो के क्रिएटर श्रेयांश पांडे हैं और इसका डायरेक्शन आशीष आर. शुक्ला व श्रेयांश पांडे ने मिलकर किया है. इस दिलचस्प सीरीज में शेखर सुमन के साथ रणवीर शौरी, श्रेयांश पांडे, परमवीर चीमा, अंजन श्रीवास्तव, स्मिता बंसल और अखिलेंद्र मिश्रा जैसे दमदार कलाकार हैं. अगर आप भी इस थ्रिलर ड्रामे को देखना चाहते हैं, तो यह सीरीज प्राइम वीडियो पर देखने के लिए  अवेलेबल है.

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गार्गी द्विवेदीSub Editor

मैं इस समय News18 App टीम का हिस्सा हूं. News18 App पर आप आसानी से अपनी मनपसंद खबरें पढ़ सकते हैं. मुझे खबरें लिखने का 3 साल से ज्यादा का अनुभव है और फिलहाल मैं सब एडिटर के पद पर हूं. इससे पहले मैंने, दैनिक जाग…और पढ़ें



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जालौन में ट्रैक्टर-ट्रॉली पलटने से युवक की मौत: सामने से आ रहे वाहन को बचाने में हादसा, झाड़ियों को हटवाने की मांग – Jalaun News




जालौन के एट थाना क्षेत्र के पिरौना से जागेश्वर धाम जाने वाले मार्ग पर शनिवार सुबह एक सड़क हादसे में ट्रैक्टर चालक युवक की ट्रॉली के नीचे दबकर मौत हो गई। मृतक अपने माता-पिता का इकलौता पुत्र था। जानकारी के अनुसार, पिरौना निवासी धर्मेंद्र यादव उर्फ गोलू (27) पुत्र भारत यादव शनिवार सुबह ट्रैक्टर-ट्रॉली से घर के लिए मिट्टी भरने गया था। मिट्टी लेकर वापस लौटते समय जैसे ही वह माइनर के पास पहुंचा, तभी सामने से आ रहे वाहन को बचाने के प्रयास में उसने अचानक ब्रेक लगा दिए। इस दौरान ट्रैक्टर का संतुलन बिगड़ गया और मिट्टी से भरी ट्रॉली सड़क किनारे खेत में पलट गई। हादसे में धर्मेंद्र ट्रॉली के नीचे दब गया और गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना के बाद मौके पर पहुंचे राहगीरों ने परिजनों को सूचना दी। परिजन युवक को आनन-फानन में जिला मेडिकल कॉलेज लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। युवक की मौत की खबर मिलते ही परिवार में दुख का माहौल छा गया। बताया जा रहा है कि मृतक धर्मेंद्र उर्फ गोलू अपने पिता भारत यादव का इकलौता पुत्र था। उसकी असमय मौत से गांव में भी गम का माहौल है। सूचना मिलने पर पिरौना चौकी प्रभारी ब्रजेश कुमार मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का निरीक्षण किया। उन्होंने बताया कि प्रथम दृष्टया सामने से आ रहे वाहन को बचाने के प्रयास में हादसा होना प्रतीत हो रहा है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिरौना से जागेश्वर धाम तक जाने वाली सड़क के किनारे उगी कंटीली झाड़ियों के कारण सामने से आने वाले वाहन दिखाई नहीं देते, जिससे आए दिन दुर्घटनाएं होती रहती हैं। ग्रामीणों ने सड़क किनारे की झाड़ियों को हटवाने की मांग की है।



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पांचवीं के छात्र की नदी में डूबने से मौत: मधेपुरा में छुट्टी के बाद दोस्तों के साथ नहाने गया था, इकलौता बेटा था – Madhepura News




मधेपुरा शहर में एक निजी विद्यालय के पांचवीं कक्षा के छात्र गोलू कुमार (13 वर्ष) की नदी में डूबने से मौत हो गई। ग्वालपाड़ा प्रखंड के अरार सुखासन वार्ड नौ निवासी संतोष कुमार का इकलौता पुत्र गोलू पढ़ाई के लिए मधेपुरा में रह रहा था। यह घटना शुक्रवार दोपहर की है। गोलू अपने चार-पांच दोस्तों के साथ विद्यालय के पास बह रही नदी में नहाने गया था। नहाते समय वह अचानक गहरे पानी में चला गया और डूबने लगा। उसके दोस्तों ने शोर मचाया, जिसके बाद आसपास के लोग मौके पर पहुंचे। स्थानीय लोगों ने काफी प्रयास के बाद गोलू को नदी से बाहर निकाला। डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया घटना के तुरंत बाद गोलू को इलाज के लिए मधेपुरा सदर अस्पताल ले जाया गया। हालांकि, अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। छात्र की मौत की खबर मिलते ही उसके परिजन सदर अस्पताल पहुंचे। इकलौते पुत्र को खोने के बाद माता-पिता और परिजनों का बुरा हाल था। सूचना मिलने पर पुलिस भी अस्पताल पहुंची और मामले की जांच शुरू की। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया और फिर परिजनों को सौंप दिया गया। इस घटना से गांव में भी शोक का माहौल है।



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भोपाल के रायसेन रोड से हटाईं 70 दुकानें-42 झुग्गियां: सड़क चौड़ीकरण के लिए प्रशासन की कार्रवाई; जमीन का बाजार मूल्य ₹40 करोड़ – Bhopal News




भोपाल के रायसेन रोड के चौड़ीकरण के लिए शनिवार को जिला प्रशासन ने बड़ी कार्रवाई की। यहां से 70 दुकानें और 42 झुग्गियां हटाई गईं। प्रशासन के अनुसार, जिस जमीन से कब्जा हटाया, उसका बाजार मूल्य 40 करोड़ रुपए से ज्यादा है। इधर, कांग्रेसियों ने लोगों के पुर्नवास की मांग की। कई कांग्रेसी मौके पर भी पहुंचे। एसडीएम भुवन गुप्ता, तहसीलदार सौरभ वर्मा की मौजूदगी में यह कार्रवाई हुई। एसडीएम गुप्ता ने बताया, पिपलानी चमारन स्थित लेबर कॉलोनी झुग्गी बस्ती में ग्लोबल स्किल पार्क के सामने स्थित 70 दुकानें एवं 42 झुग्गीवासियों ने सड़क पर अवैध कब्जा कर रखा था। जिसे हटाने के लिए आज सुबह से कार्रवाई शुरू की गई। दोपहर तक प्रशासन, पुलिस और नगर निगम के अमले के साथ कार्रवाई कर दी। जमीन की इतनी कीमत प्रशासन के अनुसार, मौके पर 210 मीटर पीडब्लूडी सड़क के दोनों ओर करीब 4 हजार वर्ग मीटर यानी, 43 हजार वर्गफीट जमीन की कीमत करीब 40 करोड़ रुपए है। इसी जमीन पर लंबे समय से कब्जा था। जिसे अतिक्रमण से मुक्त कराया गया। यहां पर पीडब्ल्यूडी फोरलेन सड़क और ब्रिज का निर्माण कराएगा। कार्रवाई की 3 तस्वीरें… कांग्रेसियों ने कार्रवाई का विरोध जताया प्रशासन का कहना है कि सड़क चौड़ीकरण और यातायात व्यवस्था को सुगम बनाने के उद्देश्य से यह अभियान चलाया गया। वहीं, इस कार्रवाई को लेकर स्थानीय लोगों और कांग्रेस नेताओं ने विरोध दर्ज कराया। कांग्रेस का आरोप है कि प्रभावित परिवारों और दुकानदारों को पर्याप्त सूचना दिए बिना उनके मकान और दुकानें तोड़ी गई हैं। कार्रवाई का विरोध करते हुए श्रमिक नेता दीपक गुप्ता ने कहा कि विकास के नाम पर गरीब और मेहनतकश लोगों के साथ अन्याय किया जा रहा है। उनका आरोप है कि प्रशासन ने मानवीय संवेदनाओं को नजरअंदाज करते हुए बरसात के मौसम में लोगों को बेघर और बेरोजगार करने का काम किया है। पार्षद जीत राजपूत ने कहा, यदि सड़क चौड़ीकरण आवश्यक था तो प्रभावित लोगों को पहले उचित नोटिस देकर वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध कराई जानी चाहिए थी। उन्होंने सरकार और प्रशासन से मांग की कि प्रभावित परिवारों के पुनर्वास और मुआवजे की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए।



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बच्चों को खिलाएं ये 5 मछलियां, नहीं होते कांटे, गले में फंसने का डर भी नहीं


बच्चे चिकन, मटन तो आसानी से खा लेते हैं, लेकिन जब बात आती है मछली की, तो काफी पेरेंट्स घबराते हैं. खासकर, छोटे बच्चों को खुद से मछली खाने नहीं देते हैं, क्योंकि गले में कांटा चुभने-फंसने का डर रहता है. ऐसे में ये समझ नहीं आता है कि बच्चों को कौन सी मछली खिलाएं, ताकि वे सेफ तरीके से इसे आसानी से खा भी सकें और फायदे भी भरपूर मिले. यहां आपको कुछ ऐसी मछलियों के नाम बता रहे हैं, जो बेहद फायदेमंद तो होती ही हैं, साथ ही इनमें एक भी कांटा नहीं होता है. ये मछलियां ऐसी हैं, जिन्हें बच्चे खुद से भी खा सकते हैं.

बच्चों के लिए 5 बिना कांटे वाली मछली
मछली है तो कांटा तो होगा ही. फिर चाहे वो कोई भी मछली हो. बड़ी-छोटी मछली में साइज के अनुसार कांटे भी होते हैं. बच्चों को मछली खिलाना एक टेंशन भरा काम होता है. ऐसे में आप वे मछलियां खरीद सकते हैं, जिनमें कांटा ना हो या बहुत ही कम हो. हालांकि, आप जो भी मछली खरीद कर लाएं, उसे धोते, पकाते और खिलाते समय एक बार ध्यान से देख लें कि उसमें कांटे कितने हैं, क्योंकि कई बार बोनलेस मछली में भी कभी-कभी छोटे कांटे रह सकते हैं.

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बच्चों के लिए बोनलेस या कम कांटे वाली मछलियां
1. सैल्मन (Salmon)- सैल्मन एक ऐसी मछली है, जो बेहद टेस्टी, पौष्टिक होती है. ये एक बोनलेस या बेहद ही कम और सॉफ्ट कांटे वाली मछली होती है. इसमें ओमेगा-3 फैटी एसिड भरपूर होती है. बच्चों को इसे खिलाएंगे तो उनका ब्रेन, आंख सभी हेल्दी रहेंगे और ग्रोथ भी सही से होगा. इसका मांस बहुत ही मुलायम होता है.

2. बासा (Basa)-इस मछली में भी कांटे बहुत ही कम मात्रा में मौजूद होते हैं, इसलिए बच्चे इसे आसानी से खा सकते हैं. स्वाद में हल्का और प्रोटीन का अच्छा स्रोत है ये मछली.

3.तिलापिया (Tilapia)-तिलापिया मछली बच्चे खा सकते हैं, क्योंकि इसमें प्रोटीन, विटामिन डी, ओमेगा-3 फैटी एसिड, विटामिन B12 काफी मात्रा में होती है. ये बच्चों के फिजिकल और मेंटल ग्रोथ के लिए बेहद पौष्टिक फिश है. साथ ही ये जल्दी पक भी जाती है. इस मछली में पारा यानी मर्करी का लेवल बहुत कम होता है. इसमें रोहू या कतला मछली की तुलना में कांटे बहुत कम होते हैं. इसमें मुख्य रूप से सिंगल कांटा होता है, जो रीढ़ की हड्डी, पसलियों के कांटे होते हैं, जो आसानी से पकाने के बाद आप निकाल सकते हैं. खास बात तिलापिया मछली की ये है कि इसमें बेहद बारीक और छोटे कांटे यानी पिन बोन्स नहीं होते हैं.

4. कॉड (Cod)- कॉड फिश का मांस बेहद सॉफ्ट और रंग सफेद होता है. इसमें वसा बेहद कम, हाई प्रोटीन होता है. कॉड फिश को बच्चे आसानी से पचा सकते हैं. इसके फिलेट्स में कांटा नहीं होता है. यह एक बोनलेस फिश है, ऐसे में बेफिक्र होकर बच्चों को ये मछली खाने के लिए दे सकते हैं. कॉड फिश, आंखों, दिमाग, हड्डियों, शारीरिक विकास, इम्यूनिटी मजबूत करने, आसानी से पच जाने में बेहद फायदेमंद हैं. इसमें सेलेनियम, विटामिन बी12 इम्यूनिटी बूस्ट करते हैं. विटामिन डी हड्डियों, दांतों को हेल्दी और मजबूत रखते हैं. इसे आप सूप में डालकर दे सकते हैं. स्टीम करके पका सकते हैं, बेक या फिश नगेट्स भी बनाकर दे सकते हैं.

5. सोल फिश (Sole)- इस मछली का मांस बेहद ही सॉफ्ट होता है. इसे बच्चे आराम से खा सकते हैं, क्योंकि इसमें कांटा न के बराबर होता है. सोल फिश का स्वाद हल्का होता है. यह बच्चों के लिए हेल्दी विकल्प है. सोल मछली में भी पारा यानी मर्करी बहुत ही कम होता है, इसलिए ये बच्चों के लिए बेहद हेल्दी फिश है.

बच्चों को मछली खिलाने के फायदे
दिमाग का विकास सही तरीके से होगा.
ओमेगा-3 फैटी एसिड मस्तिष्क विकास को सपोर्ट करता है.
हड्डियां, दांत और मांसपेशियां स्ट्रॉन्ग होती हैं.
मछली में हाई क्वालिटी प्रोटीन होता है, जो शरीर की वृद्धि में मदद करता है.
आंखों की सेहत को बूस्ट करता है. कम उम्र में पावर वाला चश्मा पहनने की जरूरत नहीं होगी.
इम्यूनिटी को मजबूत बनाती हैं मछलियां, क्योंकि इनमें विटामिन डी, सेलेनियम होते हैं.

बच्चों को मछली खिलाते समय किन बातों का रखें ध्यान
यदि आपका बच्चा 1 साल से छोटा है तो डॉक्टर से पूछ कर ही मछली खिलाएं.
अधपकी मछली न खिलाएं वरना खुजली, एलर्जी, रेडनेस, पेट दर्द आदि हो सकता है.
पहली बार खिला रहे हैं तो स्किन पर खुजली, एलर्जी होने के लक्षणों पर नजर रखें.
छोटे बच्चों को मछली खुद से खाने के लिए दें तो पकाने के बाद एक बार मांस को हाथों से चेक कर लें कि कोई कांटा तो नहीं छूट गया.



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झुंझुनू में अवैध और ओवरलोड वाहनों पर एक्शन: पुलिस और परिवहन विभाग ने वसूला लाखों का जुर्माना – Jhunjhunu News




नियमों को ताक पर रखकर दौड़ने वाले अवैध और ओवरलोड (क्षमता से अधिक वजन वाले) वाहनों के खिलाफ प्रशासन ने कमर कस ली है। परिवहन विभाग और स्थानीय पुलिस ने एक बड़ा संयुक्त अभियान चलाते हुए नियमों का उल्लंघन करने वाले कई वाहनों को जब्त किया है। इस पूरी कार्रवाई के दौरान कुल 5 लाख 35 हजार रुपये का जुर्माना लगाया गया है, जिसमें से केवल ओवरलोडिंग के मामले में ही 3 लाख 75 हजार रुपये वसूले गए हैं। ​सड़कों पर अवैध रूप से चल रहे वाहनों को पकड़ने के लिए परिवहन और पुलिस विभाग ने मिलकर एक खास टीम तैयार की थी। टीम में ​रमेश कुमार यादव (जिला परिवहन अधिकारी – DTO), सुमित कुमार (परिवहन निरीक्षक), रोहिताश भागासरा (परिवहन निरीक्षक) तथा बीरबल (सहायक उपनिरीक्षक – ASI) टीम में शामिल थे। ये की गई कार्रवाई DTO रमेश यादव ने बताया कि टीम ने औचक निरीक्षण करते हुए सड़कों पर वाहनों की जांच शुरू की। क्षमता से बहुत ज्यादा माल लादकर चल रहे 4 वाहनों को पकड़ा गया और उनके खिलाफ कार्रवाई की गई। ​ टीम ने दो ऐसे वाहनों को भी सीज किया, जिनका रजिस्ट्रेशन (पंजीयन) सरकार द्वारा पहले ही सस्पेंड किया जा चुका था, लेकिन वे फिर भी अवैध रूप से सड़कों पर दौड़ रहे थे। ​ तीन अन्य ओवरलोड वाहनों को जब्त करके झुंझुनू जिला परिवहन अधिकारी (DTO) कार्यालय परिसर में खड़ा करवा दिया गया है। ​एक हरियाणा नंबर के ट्रांजिट मिक्सर (कंक्रीट मिलाने वाला बड़ा वाहन) को मुकुन्दगढ़ पुलिस थाने में बंद करवाया गया।



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वैष्णो देवी जा रही ट्रेन में हादसा: लुधियाना में 2 हिस्सों में बंटी, 1200 यात्री बाल-बाल बचे; हाईस्पीड में होती तो जानी नुकसान हो जाता – Ludhiana News




लुधियाना रेलवे स्टेशन पर वैष्णो देवी जा रही 1200 यात्रियों से भरी ट्रेन का हादसा हो गया। यहां ट्रेन के स्लीपर कोच का टॉयलेट अचानक धमाके जैसी आवाज के साथ टूट गया। जिसके बाद यह कोच अपने साथ वाले डिब्बे से अलग हो गया। धमाके जैसी आवाज सुनते ही यात्रियों में अफरातफरी मच गई। वह डिब्बे से बाहर आ गए। खुशकिस्मती की बात ये रही कि जिस वक्त हादसा हुआ, ट्रेन लुधियाना से चली ही थी। अगर हाईस्पीड के दौरान यह हादसा होता तो यात्रियों की जान को खतरा हो सकता है। न्यू दिल्ली-श्री माता वैष्णो देवी कटरा स्पेशल (04081) नाम की यह ट्रेन आज (शनिवार) तड़के ढ़ाई बजे के बाद नई दिल्ली से वैष्णो देवी के लिए रवाना हुई। सुबह 8.47 बजे पर यह लुधियाना स्टेशन पर पहुंची। पंजाब में ऑपरेशन ब्लू स्टार की बरसी के चलते वैसे ही कड़ी सुरक्षा है। इसके बीच ट्रेन के साथ हुए हादसे का पता चलते ही पुलिस तुरंत हाई अलर्ट पर आ गई। रेलवे के अफसर भी मौके पर पहुंच गए। जांच के बाद लुधियाना के ADCP समीर वर्मा ने कहा कि ट्रेन जब चलने लगी तो 2 कोच को जोड़ने वाला कपलर टूट गया। यह हादसा है, किसी तरह का ब्लास्ट नहीं हुआ है। फिरोजपुर डिवीजन के DRM संजीव कुमार ने कहा कि एक डिब्बे की उम्र 25 साल होती है। जो डिब्बा टूटा उसे अभी 15 ही साल हुए हैं। ऐसे में जांच की जाएगी। जब कुछ टूटता है तो आवाज आती ही है, इस वजह से जांच के बाद ही सारी बातों का पता चलेगा। वैष्णा देवी जा रहे यात्रियों ने बातचीत में कहा कि ये डिब्बा दिल्ली रेलवे स्टेशन पर जोड़ा गया। पुराना डिब्बा होने की वजह से हमें वहीं गड़बड़ी होने का शक था, जो सच साबित हुआ। फिलहाल ट्रेन में नए डिब्बे जोड़कर आगे रवाना करने की तैयारी की जा रही है। इस घटना से जुड़े 3 बड़े बयान पढ़िए:- 1. लुधियाना के ADCP समीर वर्मा:- 2. फिरोजपुर डिवीजन के DRM संजीव कुमार:- 3. ट्रेन में बैठा यात्री अमित चौहान:- इस घटना से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग देखें:-



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अमरोहा की पहचान हैं ये 5 लाजवाब खाने की चीजें, जरूर करें ट्राई


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यूपी के अमरोहा जनपद में वैसे तो खाने-पीने की बहुत सी चीज हैं. लेकिन पांच ऐसी चीज है. जो खाने पीने में बहुत लाजवाब है. इसके साथ ही दूर-दूर से लोग इनका स्वाद लेने के लिए आते हैं और लोग इन्हें खूब पसंद करते हैं.अमरोहा में जो भी घूमने आता है. वह इन चीजों का स्वाद जरूर लेता है.

यूपी के अमरोहा जनपद में खाने की कई चीजें मशहूर हैं. जिनमें नान गोश्त और नल्ली निहारी,अमरोहा की मशहूर बिरयानी,लजीज पकौड़े और चाट,मटन पाया और कीमा,अमरोहा के आम शामिल है. यह चीज शहर की मशहूर चीज हैं. जिन्हें खाने के लिए दूर-दूर से लोग आते हैं. और दूर-दूर तक इन चीजों की डिमांड रहती है. इसलिए अमरोहा शहर में जो भी आते हैं. वह इन चीजों का लुत्फ जरूर लेते हैं.

अमरोहा अपनी अन्य पहचान के साथ-साथ खाने-पीने के क्षेत्र में भी मशहूर है. यहां का नान गोश्त और नल्ली निहारी खाने के शौकीनों के लिए किसी जन्नत से कम नहीं है. सुबह से देर रात तक यहां की गलियां गोश्त और मसालों की खुशबू से महकती रहती हैं.यह अमरोहा की सबसे मशहूर डिश है. मिट्टी के तंदूर में सिकी गरमागरम नान ऊपर से करारी और अंदर से रुई जैसी नरम होती है. इस पर लगा देसी घी और कलौंजी इसका स्वाद बढ़ा देते हैं. गोश्त को देसी घी, खड़े मसाले, भुना प्याज, दही और लहसुन-अदरक के साथ बड़ी देग में धीमी आंच पर 4 से 5 घंटे पकाया जाता है. ग्रेवी इतनी गाढ़ी और दानेदार होती है कि नान पर लपेटते ही चिपक जाए. बकरे का गोश्त इतना गल जाता है कि हड्डी खुद-ब-खुद अलग हो जाती है. तीखा, चटपटा और शाही जायका हर निवाले में मिलता है।

निहारी अमरोहा की सुबह की शान है.बड़े की नल्ली और गोश्त को रातभर कोयले की धीमी आंच पर पकाया जाता है. इसमें सोंठ, सौंफ, पीपली, जावित्री और खास निहारी मसाला डाला जाता है. 8 से 10 घंटे पकने के बाद ग्रेवी गाढ़ी हो जाती है और ऊपर सुनहरा तेल तैरने लगता है. इसे खमीरी रोटी, कुलचा या शीरमाल के साथ खाया जाता है. परोसते समय ऊपर से बारीक कटा अदरक, हरी मिर्च, हरा धनिया और नींबू डाला जाता है. एक चम्मच मुंह में जाते ही सारा स्वाद घुल जाता है. सर्दियों में तो इसका मजा दोगुना हो जाता है।

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अमरोहा की बिरयानी सिर्फ एक डिश नहीं, यह यहां की तहजीब और खाने की विरासत का हिस्सा है. अपने अनोखे जायके, खुशबू और बनाने के तरीके के कारण यह दूर दूर तक मशहूर है. लखनवी और मुरादाबादी बिरयानी से इसका अंदाज थोड़ा अलग और खास है.यहां की बिरयानी असली दम पुख्त तरीके से तैयार होती है. सबसे पहले बकरे के गोश्त को दही, अदरक लहसुन का पेस्ट, हरी मिर्च, तला हुआ प्याज, केवड़ा जल, गुलाब जल और खास गरम मसालों में 5 से 6 घंटे तक मैरिनेट किया जाता है. इससे गोश्त रसीला और खुशबूदार हो जाता है।

लंबे दाने वाले बासमती चावल को तेज पत्ते, दालचीनी और नमक के साथ आधा उबाला जाता है.फिर बड़ी तांबे की देग में नीचे मैरिनेट किया हुआ गोश्त और ऊपर आधे पके चावल की परत लगाई जाती है. बीच में तला प्याज, पुदीना, केसर वाला दूध और देसी घी डाला जाता है. देग का मुंह आटे से सील करके कोयले की धीमी आंच पर दम दिया जाता है.इसकी सबसे बड़ी खासियत है इसका हल्का सुनहरा पीला रंग और ऐसी भीनी खुशबू जो गली में आते ही भूख बढ़ा दे.चावल का एक एक दाना खिला हुआ होता है. गोश्त इतना नरम कि हड्डी से खुद अलग हो जाए. इसमें मिर्च और तेल कम होता है पर जायका पूरा शाही मिलता है. हर निवाले में केवड़े और गरम मसाले का स्वाद घुला होता है।

अमरोहा के पकोड़े और चाट का स्वाद पूरे इलाके में मशहूर है. यहां के आलू, पालक और पनीर के पकोड़े बेसन में अजवाइन और हींग डालकर कुरकुरे तले जाते हैं. इन्हें हरी चटनी और इमली की खट्टी मीठी चटनी के साथ गरमागरम परोसा जाता है. यहां की आलू टिक्की चाट और दही भल्ले की बात ही अलग है. आलू टिक्की को करारा सेंककर उस पर दही, हरी चटनी, मीठी चटनी, चाट मसाला और सेव डाला जाता है. दही भल्ले मुंह में जाते ही घुल जाते हैं.मंडी चौक और रेलवे रोड की पुरानी दुकानों पर शाम को भीड़ लगती है.तीखा, चटपटा और खट्टा मीठा स्वाद हर किसी को अपना दीवाना बना देता है।

अमरोहा का मटन पाया और कीमा खाने वालों की पहली पसंद है. पाया को रातभर धीमी आंच पर अदरक लहसुन, गरम मसाले और देसी घी में पकाया जाता है. सुबह तक शोरबा गाढ़ा और लजीज हो जाता है. पाया इतना गल जाता है कि हड्डी का सारा रस ग्रेवी में उतर आता है. इसे कुलचा या तंदूरी रोटी के साथ खाया जाता है. यहां का कीमा भी खास है. बकरे के कीमे को भुने प्याज, टमाटर, दही और खास मसालों में भूनकर तैयार किया जाता है. इसमें तेल कम और खुशबू ज्यादा होती है.मंडी चौक और कोट की पुरानी दुकानों पर सुबह से ही पाया और कीमे की महक गली में फैल जाती है. एक बार खाएंगे तो भूल नहीं पाएंगे।

अमरोहा के दशहरी, लंगड़ा और चौसा आम पूरे देश में मशहूर हैं. यहां के आमों का स्वाद, खुशबू और मिठास बेमिसाल है. अमरोहा के आम दिल्ली, मुंबई, कोलकाता तक जाते हैं. साथ ही दुबई, सऊदी अरब और यूरोप के कई देशों में भी निर्यात होते है. हर साल हजारों टन आम विदेश भेजे जाते हैं.यहां आम का सीजन मई के आखिरी हफ्ते से शुरू होकर अगस्त तक चलता है.सबसे पहले दशहरी, फिर लंगड़ा और आखिर में चौसा बाजार में आता है. अमरोहा को आमों की नगरी भी कहा जाता है. यहां की मिट्टी और मौसम आम को खास मिठास देते हैं. एक बार खाएंगे तो स्वाद कभी नहीं भूलेंगे.

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