Thursday, May 21, 2026
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NGT आदेशों का पालन नहीं करने का आरोप: जोधपुरा समिति ने सीमेंट कंपनी के खिलाफ कलेक्टर को सौंपा ज्ञापन – Kotputli-Behror News




जोधपुरा संघर्ष समिति के सदस्य आज जिला कलेक्टर की जनसुनवाई में पहुंचे। उन्होंने सीमेंट प्लांट से संबंधित राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के आदेशों का पालन न होने का आरोप लगाते हुए कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा। नियमों का पालन नहीं करने का आरोप लगाया समिति के सचिव कैलाश यादव, सुमन देवी और सतपाल यादव ने ज्ञापन में बताया कि कोटपूतली माइनिंग विभाग और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के क्षेत्रीय अधिकारी हमेशा सीमेंट प्लांट के पक्ष में रिपोर्ट जारी करते हैं। समिति ने आरोप लगाया कि आज भी 500 मीटर की परिधि में ब्लास्टिंग की जा रही है, जबकि कहीं भी 500 मीटर सीमांकन या चेतावनी बोर्ड नहीं लगाए गए हैं। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड का कहना है कि क्षेत्र में कोई प्रदूषण नहीं हो रहा है। 1260वें दिन भी जारी रहा धरना ज्ञापन में यह भी कहा गया कि प्रशासन अभी तक पुनर्वास पर कोई रिपोर्ट नहीं दे पाया है। समिति ने कोटपूतली प्रशासन, माइनिंग विभाग और प्रदूषण बोर्ड पर कंपनी के सिपहसालार की तरह काम करने का गंभीर आरोप लगाया। जोधपुरा संघर्ष समिति का अनिश्चितकालीन धरना आज 1260वें दिन भी जारी रहा। समिति ने हाईकोर्ट के उस आदेश का भी जिक्र किया, जिसमें शुक्लावास की मंदिर भूमि से क्रेशर के डंपरों का अवैध रास्ता हटाने के निर्देश दिए गए थे। इस आदेश को जारी हुए दो माह हो चुके हैं, लेकिन प्रशासन अब तक इसका पालन कराने में विफल रहा है। इस पर जिला कलेक्टर ने तहसीलदार रामधन गुर्जर को जनसुनवाई में ही निर्देशित किया, जिस पर तहसीलदार ने सोमवार तक हाईकोर्ट के आदेश का पालन कराने का ठोस आश्वासन दिया। महापड़ाव की चेतावनी दी एक अन्य मामले में, परिवादी ग्यारसी लाल आर्य ने बताया कि पवाना (अहीर) में स्कूल, कस्तूरबा गांधी बालिका आवासीय छात्रावास और अनुसूचित जाति मोहल्ले के नजदीक रात में किसी भी खनन पट्टे में सूर्यास्त से सूर्योदय तक खनन कार्य न करने के आदेश खान सुरक्षा विभाग अजमेर और जिला कलेक्टर ने जारी किए हैं। इसके बावजूद माइनिंग विभाग की मिलीभगत से इन आदेशों का पालन नहीं हो रहा है। आर्य ने चेतावनी दी कि यदि सुनवाई नहीं हुई तो महापड़ाव किया जाएगा। जिला कलेक्टर ने डीजीएमएस (खान सुरक्षा महानिदेशालय) के आदेशों का पालन कराने की बात कही।



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भारत से 5 क‍िस्‍म के चावल ले गए थे पीएम मोदी, व‍िदेश में उपहार में द‍िए


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी गुरुवार को संयुक्त अरब अमीरात, इटली, नीदरलैंड, स्वीडन, और नॉर्वे की पांच देशों की यात्रा कर स्वदेश लौट आए है. पीएम मोदी ने अपनी पांच देशों की यात्रा के दौरान कई रणनीतिक और द्विपक्षीय मसलों पर वार्ता की. प्रधानमंत्री मोदी ने संयुक्त राष्ट्र के खाद्य व कृषि संगठन (एफएओ) के महानिदेशक क्यू डोंगयु को भारत के प्रसिद्ध चावल की विभिन्न किस्मों के नमूने भी भेंट किए.

इनमें केरल का पलक्कड़ रेड राइस, पश्चिम बंगाल का गोविंदभोग चावल, इंडो-गंगेटिक क्षेत्र का बासमती चावल, असम का जोहा राइस और उत्तर प्रदेश का कालानमक चावल शामिल है. इन सभी किस्मों की अपनी विशेष सुगंध, स्वाद और पोषण संबंधी खूबियां हैं. कालानमक चावल को “बुद्धा राइस” भी कहा जाता है, जबकि बासमती को “क्वीन ऑफ फ्रेगरेंस” के नाम से जाना जाता है.

इसके अलावा प्रधानमंत्री मोदी ने एफएओ महानिदेशक को हेल्दी मिलेट बार्स भी भेंट किए. भारत में उगाए जाने वाले ज्वार और बाजरा जैसे मोटे अनाज पोषण, फाइबर और प्रोटीन से भरपूर माने जाते हैं. ये जलवायु के अनुकूल फसलें हैं और आधुनिक स्वास्थ्यवर्धक खाद्य उत्पादों के रूप में भी तेजी से लोकप्रिय हो रही हैं.

रेड राइस: रेड राइस, जिसे ‘मट्टा’ या ‘पालक्काडन मट्टा’ के नाम से भी जाना जाता है. केरल के पलक्कड़ की काली मिट्टी में उगाई जाने वाली एक पारंपरिक स्वदेशी धान किस्म है. इसका प्रमुख आकर्षण इसका लाल-भूरा रंग और मोटा, भरा हुआ दाना है, जो न्यूनतम पॉलिशिंग के कारण सुरक्षित रहता है. यह चावल फाइबर, मैग्नीशियम और विटामिन बी6 से भरपूर होता है. जीआई टैग प्राप्त यह उत्पाद पश्चिमी घाट की पारंपरिक कृषि विरासत को संरक्षित करता है.

गोबिंदभोग चावल : गोबिंदभोग चावल पश्चिम बंगाल की एक प्रीमियम, सुगंधित और छोटे दाने वाली धान किस्म है, जिसे अक्सर “बंगाल का राइस बाउल” कहा जाता है. इसका छोटा अंडाकार आकार और दूधिया चमक इसकी पहचान है. यह अपनी मक्खन जैसी मीठी सुगंध के लिए विश्व प्रसिद्ध है. पकने पर इसका हल्का चिपचिपा बनावट विकसित होता है, जिससे यह पायेश और खिचुड़ी जैसे पारंपरिक व्यंजनों के लिए आदर्श माना जाता है.

बासमती चावल : बासमती चावल, जिसे “सुगंध की रानी” कहा जाता है, उपजाऊ इंडो-गंगेटिक मैदानों की एक प्रीमियम लंबी दाने वाली किस्म है. इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसके पतले और लंबे दाने हैं, जो पकने पर लगभग दोगुने हो जाते हैं. इसकी विशिष्ट सुगंध और हल्के, अलग-अलग दानों वाली बनावट के लिए इसे विशेष रूप से परिपक्व किया जाता है. यह ग्लूटेन-फ्री होता है और इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स मध्यम होता है, जिससे इसे अपेक्षाकृत स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है.

जोहा चावल : जोहा चावल असम की ब्रह्मपुत्र घाटी में उगाई जाने वाली एक विशिष्ट सुगंधित स्वदेशी धान किस्म है. यह ‘साली’ (शीतकालीन) धान की श्रेणी में आता है. इसके छोटे दाने और तीव्र मीठी सुगंध इसकी पहचान हैं, जो इसमें मौजूद वाष्पशील तेलों की अधिक मात्रा के कारण होती है. यह चावल एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है और इसका स्वाद हल्का मक्खन जैसा होता है.

काला नमक चावल : काला नमक चावल को “बुद्धा राइस” भी कहा जाता है. यह उत्तर प्रदेश के तराई क्षेत्र, विशेषकर सिद्धार्थनगर जिले में उत्पन्न एक प्राचीन सुगंधित धान की किस्म है. इसकी विशेष पहचान इसका काला छिलका और मध्यम-पतले दाने हैं. यह चावल आयरन, जिंक और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है तथा इसका ग्लाइसेमिक इंडेक्स कम होता है, जिससे यह स्वास्थ्य के लिए लाभकारी माना जाता है.

मिलेट बार्स : मिलेट्स (मोटे अनाज) महाराष्ट्र की कृषि विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और इनकी खेती विशेष रूप से सोलापुर, अहमदनगर और मराठवाड़ा क्षेत्र में बड़े पैमाने पर की जाती है. यहां मुख्य रूप से ज्वार (सोरघम) और बाजरा (पर्ल मिलेट) की खेती होती है, जो राज्य की अर्ध-शुष्क जलवायु और कम वर्षा वाली परिस्थितियों के लिए बेहद उपयुक्त माने जाते हैं.

इनमें प्रचुर मात्रा में आहार फाइबर, प्रोटीन और आवश्यक खनिज पाए जाते हैं. आजकल मिलेट्स का उपयोग आधुनिक और स्वादिष्ट रूपों में भी किया जा रहा है, जैसे कि ये मिलेट बार्स, जो स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता और चलते-फिरते आसानी से सेवन की सुविधा को एक साथ जोड़ते हैं. इस रूप में मिलेट्स भारत की प्राचीन कृषि परंपरा और आधुनिक जीवनशैली का सुंदर संगम प्रस्तुत करते हैं.



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सोना ₹1.70 लाख, चांदी होगी ₹3,00,000 ! एनालिस्ट ने की चौंकाने वाली भविष्यवाणी


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सोना ₹1.70 लाख, चांदी होगी ₹3,00,000 ! एनालिस्ट ने की चौंकाने वाली भविष्यवाणी

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Gold Silver Price Prediction: सोने और चांदी की कीमतों में पिछले कई दिनों से उतार-चढ़ाव के बावजूद MCX पर दोनों धातुओं में पॉजिटिव रुझान बना हुआ है. विशेषज्ञों का अनुमान है कि सोना जल्द ही ₹1,70,000 प्रति 10 ग्राम तक पहुंच सकता है, जबकि चांदी ₹3,00,000 प्रति किलो के स्तर को छू सकती है. इंपोर्ट ड्यूटी में बढ़ोतरी और ग्लोबल अनिश्चितता के कारण कीमतों में मजबूती आ रही है. हालांकि शॉर्ट टर्म में उतार-चढ़ाव बना रहेगा, इसलिए ट्रेडिंग करते समय सख्त स्टॉप लॉस लगाना जरूरी है.

सोने और चांदी की कीमतों में पिछले कई दिनों से उतार-चढ़ाव देखा जा रहा है. MCX पर सोना और चांदी दोनों में पॉजिटिव रुझान बना हुआ है. विशेषज्ञों का कहना है कि सोना 1.70 लाख रुपये प्रति 10 ग्राम तक जा सकता है, जबकि चांदी 3 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर को छू सकती है. इंपोर्ट ड्यूटी में बढ़ोतरी और ग्लोबल अनिश्चितता के कारण कीमतों में मजबूती देखी जा रही है.

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ट्रेडिंग एक्सपर्ट्स का मानना है कि आने वाले भविष्य में गिरावट खरीदारी के अच्छे मौके दे सकती है. हालांकि बाजार में उतार-चढ़ाव बना रहेगा, इसलिए निवेशकों को सावधानी बरतनी चाहिए. MCX गोल्ड साप्ताहिक चार्ट पर साइडवेज से बुलिश ट्रेंड में है. यह कंसोलिडेशन फेज से ब्रेकआउट कर चुका है. इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ने से भी कीमतों को सपोर्ट मिल रहा है.

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फिलहाल, गोल्ड का भाव ₹1,58,800 के आसपास बना हुआ है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट में एनालिस्ट ने बताया है कि ₹1,54,500 स्तर मजबूत सपोर्ट है. अगर कीमत इस स्तर के ऊपर बनी रही तो ₹1,70,000 तक जाने की अच्छी संभावना है. आने वाले समय में किसी भी गिरावट को खरीदारी का मौका मानना चाहिए.

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MCX सिल्वर भी वीकली चार्ट पर मजबूत स्थिति में है. पिछले सप्ताह के हाई को टेस्ट कर रहा है. इंपोर्ट चार्ज बढ़ोतरी से इसमें भी नई तेजी आई है. वर्तमान भाव ₹2,72,800 प्रति किलो के आसपास है. ₹2,61,000 सपोर्ट लेवल है. अगर यह स्तर टिका रहा तो चांदी ₹2,85,000 और उसके बाद ₹3,00,000 तक पहुंच सकती है.

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ट्रेडिंग स्ट्रैटजी की बात करें तो टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार, गोल्ड के मौजूदा भाव से ₹1,70,000 का टारगेट रखें. स्टॉप लॉस ₹1,54,500 रखना उचित रहेगा. चांदी के लिए ₹3,00,000 का टारगेट संभव है. स्टॉप लॉस ₹2,61,000 के पास रखें.

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विशेषज्ञों का कहना है कि लंबी अवधि में दोनों का ही आउटलुक बुलिश है, लेकिन शॉर्ट टर्म में वॉलिटिलिटी रह सकती है. निवेशकों को रिस्क कैपेसिटी के अनुसार फैसला लेना चाहिए और बाजार की खबरों पर नजर रखनी चाहिए.

सोना और चांदी दोनों में तेजी का रुख बना हुआ है. अगर आप लंबे समय के लिए निवेश करना चाहते हैं तो गिरावट पर खरीदारी अच्छी रणनीति हो सकती है. लेकिन ट्रेडिंग के लिए सख्त स्टॉप लॉस लगाना जरूरी है.

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लता दी-सोनू निगम का वो गाना, 1 फिल्म में 3 बार 3 अलग अहसास में गुनगुनाया, हर मां का फेवरेट


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संगीत के इतिहास में वो मुकाम जहां एक ही बोल तीन बार, तीन अलग अंदाज में दिल को छू लेते हैं. जहां एक जादू दो अलग-अलग सुरों में पनपता है, कभी नर्म आवाज में बहता है तो कभी दर्द से कराहता है. एक रूहानी एहसास जो पल भर में गुलिस्तां बना देता है और एक आहट भर में ही वीराना भी. 2001 में एक ऐसा ही गाना आया. जो लोगों की जुबां पर ऐसा चढ़ा की आज भी उसकी खुमारी देखते बंधती है. 2001 में आई फिल्म ने एक गाना दिया जो तीन बार बजा, तीन बार गाया गया, लेकिन हर बार सुनने वाले के दिल के एक अलग तार को छेड़ा.

नई दिल्ली. कभी एक मां की टूटी हुई उम्मीद बनकर ये धुन आंखें नम कर देती है… कभी बेटे के बिछड़ने का दर्द बनकर दिल को चीर जाती है… और कभी पूरे परिवार को एक डोर में बांधकर रिश्तों की गर्माहट महसूस कराती है. साल 2001 में आई एक फिल्म का ये गाना सिर्फ म्यूजिक नहीं, बल्कि भावनाओं का ऐसा सफर बन गया था, जिसे हर पीढ़ी ने अपने-अपने तरीके से महसूस किया. खास बात ये रही कि एक ही गाने को तीन बार अलग-अलग एहसास के साथ फिल्म में पिरोया गया. दो बार दर्द भरे अंदाज में और एक बार पूरे शाही जश्न के साथ.

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2001 का वो साल, जब सिनेमाघरों में एक परिवार की कहानी ने पूरे देश को अपनी गिरफ्त में ले लिया. पर्दे पर अमिताभ बच्चन की गरिमा, जया बच्चन की ममता, शाहरुख खान की जोशीली अदाकारी, काजोल की मासूमियत, ऋतिक रोशन की एनर्जी और करीना कपूर की चुलबुली मौजूदगी… बीच-बीच में एक संगीत ऐसा कि दिल के तार झंकृत हो जाएं. वो संगीत जो खुशी के पलों में आशीर्वाद बनकर बरसता है, तो कभी दर्द के समंदर में डूबकर आंसू पोंछता है. वो आवाजें जो पीढ़ियों को एक सूत्र में बांध देती हैं. एक तरफ स्वर साम्राज्ञी लता मंगेशकर, दूसरी तरफ युवा स्वर का जादूगर सोनू निगम. ये फिल्म थी ‘कभी खुशी कभी गम’.

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ये कहानी है फिल्म ‘कभी खुशी कभी गम’ के उस टाइटल ट्रैक की, जिसने रिलीज के 20 साल बाद भी लोगों के दिलों में अपनी जगह कायम रखी है. ये फिल्म सिर्फ अपनी स्टारकास्ट की वजह से नहीं, बल्कि अपने संगीत के कारण भी इतिहास बन गई थी. शाहरुख खान, काजोल, अमिताभ बच्चन, जया बच्चन, ऋतिक रोशन और करीना कपूर खान जैसे सितारों से सजी इस फिल्म का टाइटल ट्रैक अपने आप में एक भावनात्मक अनुभव था.

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संगीतकार जतिन-ललित की धुन, समीर के बोल और लता दीदी व सोनू निगम की आवाज ने इसे कालजयी बना दिया. फिल्म का पहला भव्य टाइटल ट्रैक 7 मिनट 55 सेकंड का
है. फिल्म की शुरुआत में लता मंगेशकर की आवाज में यह गाना सुनाई देता है. नंदिनी रायचंद यानी जया बच्चन की आवाज बनकर यह प्रार्थना-सा गूंजता है. ‘कभी खुशी कभी गम… ना जुदा होंगे हम…’ यह संस्कारों, परिवार की एकता और ईश्वर में विश्वास का गान है. लता दी की मधुर, गहरी और भावपूर्ण आवाज इसे भजन की महिमा देती है. शाहरुख खान यानी राहुल के एंट्री सीन के साथ यह गाना फिल्म की नींव रखता है. यह संस्कृति, ममता और घरेलू मूल्यों का प्रतीक बन जाता है.

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इसी गाने को फिर एक बार सुना गया. लेकिन इस बार सैड वर्जन का पहला पार्ट था. जिसको सोनू निगम ने गाकर अमर किया. फिल्म में ये गाना तब आता है, जब राहुल घर छोड़कर अनजान राह पर निकल जाता है. लगभग 1:53 मिनट का यह छोटा सा टुकड़ा दिल को चीर देता है. सोनू की कोमल लेकिन दर्द भरी आवाज रोहन यानी ऋतिक रोशन के मनोभाव को बयां करती है. भाई के बिना अधूरापन, परिवार के टूटने का गम. यह वर्जन युवा पीढ़ी की पीड़ा, अलगाव और खामोश दर्द को छूता है.

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फिल्म के क्लाइमैक्स के पास, जब 10 साल बाद राहुल वापस लौटता है, तब लता मंगेशकर फिर से अपनी जादुई आवाज में सैड वर्जन पार्ट-2 गाती हैं. यह मां की छाती का दर्द, बेटे को गले लगाने की बेकरारी और सालों के इंतजार को शब्द देता है. लता जी की आवाज यहां आंसुओं का सैलाब ला देती है. ‘कभी खुशी कभी गम’ का यही रूप दर्शकों को सबसे ज्यादा रुलाता है.

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करण जौहर द्वारा निर्देशित यह फिल्म रायचंद परिवार की कहानी है. इस गाने ने फिल्म को भावनात्मक गहराई दी. पहला वर्जन परिवार की खुशियों का गान है, जबकि दोनों सैड वर्जन अलगाव और मिलन के दर्द-मधुर सफर को दर्शाते हैं. लता मंगेशकर और सोनू निगम की जोड़ी ने इसे पीढ़ियों का गाना बना दिया. मां-दादी-नानी इसे सुनकर रोती हैं, तो बच्चे भी इसके सुर में झूमते हैं.

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14 दिसंबर 2001 को रिलीज हुई यह फिल्म उस समय की सबसे महंगी भारतीय फिल्मों में शामिल थी. इसका बजट लगभग 30-40 करोड़ था. भारत में नेट कलेक्शन 55 करोड़ रुपये से ज्यादा, वर्ल्डवाइड कुल ग्रॉस 119-135 करोड़ रुपये के आसपास रहा. ये 2001 की सबसे बड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्म बनी. विदेशी बाजारों में भी फिल्म रिकॉर्ड तोड़े. फिल्म ने 5 फिल्मफेयर अवॉर्ड्स जीते. संगीत एल्बम भी सुपरहिट रहा. ‘कभी खुशी कभी गम’ के अलावा ‘बोले चूड़ियां’, सूरज हुआ मद्‍धम’, ‘ये लड़का है अल्लाह’ जैसे गाने भी यादगार बने, लेकिन टाइटल ट्रैक ने फिल्म को अमर बना दिया.

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21वीं सदी में भी जब परिवार टूटने लगते हैं, रिश्ते बिखरने लगते हैं, तब यह गाना याद आता है. लता दीदी की आवाज मां की ममता है, सोनू की आवाज बेटे का दर्द. यह गाना सिर्फ संगीत नहीं, बल्कि भारतीय परिवार व्यवस्था का दर्शन है. जहां कभी खुशी, कभी गम है लेकिन साथ कभी नहीं छूटना. इस गाने की सबसे बड़ी खासियत यही रही कि इसे सिर्फ सुना नहीं गया, बल्कि महसूस किया गया. एक ही धुन को तीन अलग-अलग भावनाओं में ढालना आसान नहीं होता, लेकिन लता मंगेशकर और सोनू निगम की आवाज ने इसे अमर बना दिया. यही कारण है कि दो दशक बाद भी यह गाना हर उम्र के लोगों को अपने परिवार, रिश्तों और अपनों की याद दिला देता है.

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यमुनोत्री में 2 और श्रद्धालुओं की हार्ट अटैक से मौत: सीजन में मृतकों का आंकड़ा 19 पहुंचा; महाराष्ट्र और गुजरात के यात्री शामिल – Uttarkashi News




उत्तराखंड की चारधाम यात्रा के दौरान यमुनोत्री और गंगोत्री धाम में श्रद्धालुओं की मौत का सिलसिला जारी है। यमुनोत्री धाम में बुधवार को दो और श्रद्धालुओं की हृदय गति रुकने से मौत हो गई। इसके साथ ही इस यात्रा सीजन में अकेले यमुनोत्री धाम में मरने वालों की संख्या 11 हो गई है। गंगोत्री धाम में भी अब तक 8 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। दोनों धामों को मिलाकर कुल मृतकों का आंकड़ा 19 पहुंच गया है। अधिकतर मामलों में प्रारंभिक कारण हार्ट अटैक या अचानक तबीयत बिगड़ना बताया गया है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग लगातार यात्रियों को स्वास्थ्य जांच कराने, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतने और अस्वस्थ महसूस होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेने की सलाह दे रहे हैं। यात्रा फिलहाल सुचारु रूप से जारी है। महाराष्ट्र और गुजरात के श्रद्धालुओं की मौत मृतकों की पहचान महाराष्ट्र के अमरावती निवासी 64 वर्षीय वंदना विजय सिंह बघेल और गुजरात के भावनगर निवासी 68 वर्षीय पटेल नितिनभाई बलूभाई के रूप में हुई है। दोनों श्रद्धालु 21 मई 2026 को यमुनोत्री धाम में दर्शन के लिए पहुंचे थे। दर्शन के दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिजन उन्हें तत्काल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जानकीचट्टी लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, दोनों की मौत का संभावित कारण हार्ट अटैक माना जा रहा है। पुलिस ने आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। यमुनोत्री में सबसे ज्यादा मौतें चारधाम यात्रा के मौजूदा सीजन में यमुनोत्री धाम में अब तक 11 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। लगातार सामने आ रहे मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और यात्रियों की फिटनेस को लेकर चिंता बढ़ा दी है। प्रशासन का कहना है कि अधिकतर मृतकों की उम्र 60 वर्ष से ऊपर रही है और कई मामलों में पहले से स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें भी सामने आई हैं। गंगोत्री में भी 8 श्रद्धालुओं की जान गई गंगोत्री धाम में भी यात्रा शुरू होने के बाद से अब तक 8 श्रद्धालुओं की मौत दर्ज की गई है। दोनों धामों को मिलाकर कुल मौतों का आंकड़ा 19 तक पहुंच चुका है। यात्रा मार्ग पर स्वास्थ्य जांच, मेडिकल कैंप और एंबुलेंस सेवाएं बढ़ाई गई हैं, लेकिन ऊंचाई और मौसम के कारण बुजुर्ग यात्रियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। आज यमुनोत्री में 22 हजार, गंगोत्री में 25 हजार पंजीकरण चारधाम यात्रा के लिए श्रद्धालुओं का उत्साह लगातार बना हुआ है। बुधवार को यमुनोत्री धाम के लिए 22 हजार और गंगोत्री धाम के लिए 25 हजार पंजीकरण दर्ज किए गए। यमुनोत्री धाम के कपाट सुबह 6:30 बजे पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। मौसम साफ रहने से यात्रा सामान्य रूप से संचालित हो रही है और धामों में भीड़ भी सामान्य बनी हुई है।



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मुजफ्फरनगर में हीट स्ट्रोक का हाई अलर्ट जारी: दोपहर में बाहर निकलने से बचने की सलाह, इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर 24 घंटे सक्रिय – Muzaffarnagar News




मुज़फ़्फ़रनगर में भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान ने हालात चिंताजनक कर दिए हैं। जिले में हीट स्ट्रोक का खतरा तेजी से बढ़ने के बाद प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी किया है। जिला आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से एडवाइजरी जारी कर लोगों से दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक विशेष सतर्कता बरतने की अपील की गई है। प्रशासन ने कहा है कि इस दौरान तेज धूप और गर्म हवाएं सीधे शरीर पर असर डाल रही हैं और थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। एडीएम प्रशासन संजय कुमार ने बताया कि इंसानों के साथ-साथ पशु-पक्षी भी भीषण गर्मी से प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों, बुजुर्गों और जानवरों को बंद वाहनों में छोड़ना बेहद खतरनाक है, क्योंकि कुछ ही मिनटों में वाहन का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है। हीट स्ट्रोक के लक्षणों को पहचानने की सलाह डीएम उमेश कुमार मिश्रा ने बताया कि लंबे समय तक धूप में रहने से शरीर का तापमान तेजी से बढ़ जाता है, जिससे हीट स्ट्रोक की स्थिति बन सकती है। इसके प्रमुख लक्षणों में चक्कर आना, सिरदर्द, घबराहट, उल्टी, कमजोरी, अत्यधिक पसीना आना और बेहोशी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। हल्के कपड़े पहनें, ज्यादा तरल पदार्थ लें एडवाइजरी में लोगों को दोपहर के समय घरों में रहने की सलाह दी गई है। यदि जरूरी काम से बाहर निकलना पड़े तो सिर और चेहरे को ढककर रखें तथा हल्के और सूती कपड़े पहनें। प्रशासन ने शरीर में पानी की कमी न होने देने के लिए अधिक मात्रा में पानी, नींबू पानी, छाछ और अन्य तरल पदार्थों के सेवन की सलाह दी है। साथ ही बासी और संक्रमित भोजन से बचने को कहा गया है, क्योंकि गर्मी में भोजन जल्दी खराब हो जाता है। पशु-पक्षियों के लिए पानी रखने की अपील प्रशासन ने लोगों से पशु-पक्षियों के लिए भी पानी की व्यवस्था करने की अपील की है। घरों की छतों, बालकनी और बाहर पानी से भरे बर्तन रखने की सलाह दी गई है, ताकि भीषण गर्मी में परिंदों और आवारा पशुओं को राहत मिल सके। कलेक्ट्रेट स्थित इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर को 24 घंटे सक्रिय रखा गया है। किसी भी आपात स्थिति में लोग टोल फ्री नंबर 1077, 0131-2436918 और 9412210080 पर संपर्क कर सकते हैं।



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‘मुझे मरना है’, कहकर युवक गंगा में कूदा: छलांग लगाने से पहले एक से दूसरे नाव पर चढ़ रहा था, नाव स्टार्ट होते ही लगाई छलांग – Bhagalpur News




भागलपुर में गुरुवार को एक युवक ने गंगा में छलांग लगा दी। युवक की पहचान अभी नहीं हुई है। बताया जा रहा कि सुबह 10 बजे युवक बरारी घाट पहुंचा था। गंगा किनारे कुछ नाव खड़ी थी। युवक नाव पर चढ़ा, फिर बगल में खड़ी दूसरी नाव पर चढ़ गया। चश्मदीद अंकित कुमार पासवान ने कहा कि युवक एक नाव से दूसरे नाव पर जा रहा था। वो काफी संदिग्ध हरकतें कर रहा था। हमने उसे कहा भी कि तुमको मरना है क्या, इस तरह से क्यों कर रह हो ? युवक ने कहा कि हां मरना है…। इसके बाद उसने नदी में छलांग लगा दी। युवक अभी लापता है। एसडीआरएफ की टीम अभी उसे तलाश रही है। मामला बरारी घाट का है। नाव थोड़ी दूर आगे बढ़ी थी, तभी कूद गया नाव पर सवार यात्रियों ने कहा कि जिस नाव पर वो चढ़ा था नाविक ने उसे स्टार्ट कर दिया था। नाव कुछ ही दूर आगे बढ़ी थी, इतने में उसने नाव से छलांग लगी दी। लोगों ने घटना की जानकारी तुरंत बरारी पुलिस को दी। मौके पर पहुंची बरारी पुलिस ने एसडीआरफ की टीम ने बुलाया। अभी टीम युवक की तलाश कर रही है। हालांकि युवक ने गंगा में छलांग क्यों लगाई। अभी तक स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है।
पुलिस ने नाव किया जब्त बरारी पुलिस ने नाविक को हिरासत में ले लिया है। फिलहाल नाव को जब्त कर लिया गया है। अन्य यात्रियों को दूसरी नाव के जरिए नवगछिया के लिए भेज दिया गया है। बता दें कि भागलपुर से सीमांचल को जोड़ने वाली विक्रमशिला सेतु के पाया संख्या 133 का स्लैब टूटने के बाद सड़क मार्ग पूरी तरह बाधित हो गया है। लोगों का एकमात्र सहारा नाव ही है। नाव से लोग भागलपुर से नवगछिया और नवगछिया से भागलपुर आते-जाते हैं। बड़ी संख्या में नाविक बरारी गंगा घाट पर रहते हैं। फिलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।



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मलमास में 84 कोस परिक्रमा का क्या रहस्य है, जिसे जानने के लिए पैदल जाते हैं लोग


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मलमास में 84 कोस परिक्रमा का क्या रहस्य है, जिसके के लिए पैदल जाते हैं लोग

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Braj 84 Kosh Yatra: मलमास में ब्रज की 84 कोस परिक्रमा के लिए दिल्ली-एनसीआर से उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब. 46 डिग्री तापमान भी नहीं डिगा पाया आस्था श्रद्धालु पैदल तय कर रहे 268 किलोमीटर लंबी यात्रा. मान्यता है कि पुरुषोत्तम मास में परिक्रमा करने से अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य फल मिलता है.

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फरीदाबाद. मलमास में ब्रज की 84 कोस परिक्रमा का महत्व और बढ़ जाता है. यही वजह है कि इन दिनों फरीदाबाद, बल्लभगढ़ और पूरे दिल्ली एनसीआर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु ब्रज की ओर निकल पड़े हैं. कोई पैदल चलकर परिक्रमा कर रहा है तो कोई परिवार और साथियों के साथ भजन-कीर्तन करते हुए इस कठिन यात्रा को पूरा कर रहा है. तपती गर्मी और 46 डिग्री तापमान भी श्रद्धालुओं की आस्था को डिगा नहीं पा रहा. मान्यता है कि ब्रज की 84 कोस परिक्रमा करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति को अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य फल मिलता है.

Local18 से बातचीत में बल्लभगढ़ के महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं 84 कोस में गिरिराज महाराज की परिक्रमा सबसे मुख्य मानी जाती है. मलमास को भगवान ने अपना नाम दिया है इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है. शास्त्रों में भगवान श्रीकृष्ण और श्री लक्ष्मी नारायण को पुरुषोत्तम कहा गया है. जो भक्त इस पुरुषोत्तम मास में परिक्रमा करता है उसे एक-एक कदम पर अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है. जैसे-जैसे श्रद्धालु आगे बढ़ता है वैसे-वैसे उसके पापों का नाश होता जाता है.

महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि ब्रज भूमि भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी की लीला भूमि है. वेद-पुराणों में इसका विशेष महत्व बताया गया है. वाराह पुराण के अनुसार पृथ्वी पर मौजूद 66 अरब तीर्थ चातुर्मास के दौरान ब्रज में आकर निवास करते हैं. यही कारण है कि मलमास में 84 कोस परिक्रमा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है. जो श्रद्धालु गोवर्धन महाराज और गिरिराज जी की परिक्रमा करता है उसके जन्म-जन्मांतर के पाप समाप्त हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है.

करीब 268 किलोमीटर लंबी यह परिक्रमा मथुरा के अलावा राजस्थान और हरियाणा के होडल क्षेत्र के गांवों से होकर गुजरती है. पूरे मार्ग में लगभग 25 पड़ाव स्थल बनाए गए हैं जहां श्रद्धालुओं के ठहरने और आराम करने की व्यवस्था रहती है. इस परिक्रमा मार्ग में करीब 1300 गांव, 1100 सरोवर, 36 वन-उपवन और कई पहाड़-पर्वत पड़ते हैं. श्रद्धालु उन स्थलों के भी दर्शन करते हैं जो भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं के साक्षी माने जाते हैं.

रोजाना चालीस किमी पैदल चलते हैं

बल्लभगढ़ निवासी कालीचरण मित्तल बताते हैं कि मैंने इस बार 84 कोस की परिक्रमा सात दिन में पूरी की. मैंने होडल से परिक्रमा शुरू की थी. हर तीसरे साल मलमास में यह परिक्रमा लगाई जाती है और इसका बहुत बड़ा महत्व है. हम रोज करीब 40 किलोमीटर चलते थे. सुबह हो दोपहर हो या शाम बस चलते ही रहते थे. रात को करीब 10 बजे रुकते थे. कालीचरण मित्तल बताते हैं भीषण गर्मी पड़ रही हैं इसलिए मैंने पूरी परिक्रमा चप्पल पहनकर की. 46 डिग्री तापमान था सड़क पूरी गर्म रहती थी इसलिए प्लास्टिक की चप्पल पहन ली थी. रास्ते में कोई परेशानी नहीं हुई. मैंने ज्यादा भंडारा या पकवान नहीं खाए. एक टाइम खाना खा लिया जूस पी लिया उसी में यात्रा चलती रही.

76 वर्षीय कालीचरण मित्तल भी यात्रा पर निकले

76 वर्षीय कालीचरण मित्तल बताते हैं कि इस उम्र में इतनी लंबी परिक्रमा पूरी करना मेरे लिए किसी आशीर्वाद से कम नहीं है. अब उम्र ज्यादा हो गई है शायद आगे परिक्रमा न कर पाऊं. लेकिन इस बार बहुत अच्छे से यात्रा पूरी हो गई. रास्ते में गद्दे, पंखे, कूलर और एसी तक की व्यवस्था थी. रात को थोड़ा आराम करते थे और सुबह तीन-चार बजे फिर परिक्रमा शुरू कर देते थे. सुबह नहाने-धोने के बाद दोबारा यात्रा पर निकल पड़ते थे. पूरी परिक्रमा श्रद्धालुओं से भरी हुई थी.

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Vinod Kumar Katwal

Vinod Kumar Katwal, a Season journalist with 14 years of experience across print and digital media. I have worked with some of India’s most respected news organizations, including Dainik Bhaskar, IANS, Punjab K…और पढ़ें



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शिवपुरी में बंद किराना दुकान में आग: गश्त कर रही पुलिस ने देखीं लपटें; पड़ोसी के बोरवेल से बुझाई आग, डेढ़ लाख का सामान खाक – Shivpuri News




शिवपुरी जिले के लुकवासा कस्बे में स्टेशन रोड स्थित एक किराना दुकान में बुधवार देर रात अचानक आग लग गई। इस घटना में दुकान के अंदर रखा करीब डेढ़ लाख रुपए का सामान जलकर राख हो गया। रात में गश्त कर रही पुलिस टीम ने शटर से लपटें उठती देख दुकानदार को सूचना दी और करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। दुकान संचालक पंकज गुप्ता ने बताया कि उन्होंने बुधवार रात करीब 10:30 बजे अपनी दुकान बंद की थी। इसके बाद रात लगभग 12 बजे गश्त पर निकली पुलिस टीम ने बंद दुकान से आग की लपटें उठती देखीं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल दुकानदार को घटना की सूचना देकर मौके पर बुलाया। पड़ोसी के बोरवेल से बुझाई आग
दुकानदार के मौके पर पहुंचने के बाद शटर का ताला तोड़ा गया। इसके बाद पड़ोस में लगे बोरवेल को चालू कर पानी से आग बुझाने का प्रयास शुरू किया गया। मौके पर मौजूद लोगों और पुलिस की मदद से करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका
फिलहाल आग लगने के स्पष्ट कारणों का पता नहीं चल सका है। हालांकि, प्रारंभिक जांच के आधार पर शॉर्ट सर्किट को आग लगने का संभावित कारण माना जा रहा है। इस घटना में दुकान का लगभग सारा किराना सामान जलकर नष्ट हो गया है, जिससे व्यापारी को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।



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ताड़ का रस या एनर्जी ड्रिंक? मॉडर्न पैकेजिंग में खूब पसंद किया जा रहा है देसी नीरा


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Neera Cafe Hyderabad: हैदराबाद के नेकलेस रोड पर स्थित 13 करोड़ की लागत वाला ‘नीरा कैफे’ पारंपरिक ग्रामीण ताड़ के पेय ‘नीरा’ को आधुनिक रूप दे रहा है. कोल्ड-चेन टेक्नोलॉजी का उपयोग करके, इसे ताज़ा और नॉन-अल्कोहलिक बनाए रखा जाता है. यह पहल न केवल स्वास्थ्य के प्रति जागरूक युवाओं को प्राकृतिक विकल्प दे रही है, बल्कि ताड़ निकालने वाले गौड़ा समुदाय के लिए रोजगार और सम्मान के नए अवसर भी खोल रही है. यह भारत की सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक बाजार में सफलतापूर्वक स्थापित करने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है.

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हैदराबाद: आधुनिकता की चकाचौंध के बीच जहां पारंपरिक देसी पेय हाशिए पर जा रहे हैं वहीं तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में एक अनोखा प्रयोग देश का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है. हैदराबाद के प्रसिद्ध हुसैन सागर झील के किनारे, नेकलेस रोड पर बना नीरा कैफे आज के शहरी युवाओं के लिए एक नया हॉटस्पॉट बन चुका है. करीब 13 करोड़ रुपए की लागत से तैयार यह कैफे किसी इंटरनेशनल आउटलेट को टक्कर देता है लेकिन यहां मिलने वाला मेन्यू पूरी तरह से स्वदेशी है.

यह कैफे सिर्फ एक फूड आउटलेट नहीं है बल्कि यह पारंपरिक गौड़ा समुदाय के रोजगार को बचाने और एक प्राकृतिक हेल्थ ड्रिंक को ग्लोबल पहचान दिलाने का एक सफल सामाजिक-आर्थिक मॉडल है. ताड़ और खजूर के पेड़ों से निकलने वाला नीरा औषधीय गुणों से भरपूर और पूरी तरह से नॉन-अल्कोहलिक पेय है. हालांकि इसकी सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि सूर्योदय के बाद तापमान बढ़ते ही यह फर्मेंट होकर नशीली ताड़ी में बदल जाता है.

कोल्ड-चेन तकनीक और स्वच्छता का संगम
इस समस्या से निपटने के लिए सरकार ने कोल्ड-चेन टेक्नोलॉजी का सहारा लिया है. गांवों के कलेक्शन सेंटरों से नीरा को निकालते ही उसे तुरंत 4°C तापमान पर स्टोर कर सीधे कैफे तक पहुंचाया जाता है. कैफे में ग्राहकों को बिल्कुल हाइजीनिक, चिल्ड और आधुनिक पैकेजिंग में शुद्ध नीरा परोसा जाता है जिसकी कीमत करीब 50 रुपए प्रति ग्लास रखी गई है. वहीं दूसरी तरफ, बाजारों में पारंपरिक ताड़ी का दाम 30 से 40 रुपए प्रति लीटर के आसपास होता है. कम कीमत और सही रखरखाव न होने के कारण ताड़ी निकालने वाले कारीगरों को पहले बहुत कम मुनाफा मिलता था लेकिन नीरा कैफे मॉडल ने इस प्राकृतिक पेय की ब्रांड वैल्यू को कई गुना बढ़ा दिया है.

ग्रामीण हुनर को मिली कॉर्पोरेट पहचान
तेलंगाना सरकार की अनूठी नीरा पॉलिसी के तहत इस पेय को बेचने का विशेष अधिकार केवल इसी समुदाय के पास है. 300 से 500 लोगों की बैठने की क्षमता वाले इस आधुनिक कैफे ने यह साबित कर दिया है कि अगर सही मार्केटिंग और सरकारी संरक्षण मिले, तो भारत के ग्रामीण हुनर को एक हाई-एंड कॉर्पोरेट ब्रांड में बदला जा सकता है. यह प्रयोग न केवल स्वास्थ्य के प्रति जागरूक युवाओं को एक प्राकृतिक विकल्प दे रहा है, बल्कि ताड़ निकालने वाले गौड़ा समुदाय के लिए रोजगार और सम्मान के नए रास्ते भी खोल रहा है. रोजगार और संस्कृति को सहेजता यह प्रयोग वाकई देश में अपनी तरह का इकलौता और प्रेरणादायक मॉडल है जो भविष्य में अन्य राज्यों के लिए एक बेहतर उदाहरण साबित होगा.

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vicky Rathore

Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with News18 Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें



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