हिंडन नदी के डूब क्षेत्र को नए सिरे से विकसित करने और व्यवस्थित करने की एक प्लानिंग को लेकर सोमवार को नोएडा प्राधिकरण के वरिष्ठ अधिकारियों के सामने पर्यावरणविद् ने प्रस्तुतीकरण दिया। इसमें डूब क्षेत्र में सड़क, भूमि विकास, तटबंध और पुनर्वास समेत कई कामों का प्रस्ताव रखा गया है। हालांकि, नोएडा प्राधिकरण अपने स्तर पर इस पूरे प्लान को लागू नहीं कर सकता। प्रस्ताव को शासन स्तर पर रखा जाएगा। वहां चर्चा और मंजूरी के बाद ही इसे आगे मूर्त रूप दिया जा सकेगा। प्रस्तुतीकरण में पूरे प्रोजेक्ट को तीन चरणों में बांटा गया है। तीनों चरणों को पूरा करने में कुल 29,315 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है।
जमीन खरीद पर 15 हजार करोड़
प्रस्ताव के मुताबिक, हिंडन डूब क्षेत्र की योजना में सबसे बड़ा खर्च जमीन खरीद पर होगा। इसके लिए करीब 15,000 करोड़ रुपए का प्रावधान बताया गया है। इसके अलावा मिट्टी भराई यानी अर्थवर्क पर 380 करोड़ रुपए, तटबंध के ऊपर छह लेन सड़क बनाने पर 2,425 करोड़ रुपए और तटबंध पर पत्थर की पिचिंग के काम पर 120 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। नदी में वीयर कम फॉल बनाने के लिए 150 करोड़ रुपए का खर्च प्रस्तावित है। वहीं उपलब्ध जमीन के विकास पर 7,240 करोड़ रुपए खर्च किए जाने का अनुमान है।
10 हजार परिवारों के पुनर्वास
योजना में डूब क्षेत्र से प्रभावित परिवारों के पुनर्वास का भी प्रावधान किया गया है। करीब 10 हजार परिवारों के पुनर्वास पर 4,000 करोड़ रुपए खर्च होने का अनुमान है। इस तरह सभी मदों को मिलाकर परियोजना की कुल अनुमानित लागत 29,315 करोड़ रुपए बैठती है। 2,413 हेक्टेयर जमीन के विकास का प्रस्ताव
प्रस्तुतीकरण में उपलब्ध जमीन के विकास का भी हिसाब दिया गया है। इसमें 2,413 हेक्टेयर जमीन के विकास पर प्रति हेक्टेयर 3 करोड़ रुपए की दर से करीब 7,239 करोड़ रुपए का खर्च बताया गया है। इसे लगभग 7,240 करोड़ रुपए माना गया है। इसी तरह 10 हजार परिवारों के पुनर्वास के लिए प्रति परिवार 40 लाख रुपए की दर से 4,000 करोड़ रुपए का अनुमान लगाया गया है।
तीन फेज में होगा विकास फेज-1: डीएससी रोड से एक्सप्रेसवे तक बनेगा पहला हिस्सा
प्रस्तावित योजना का पहला चरण डीएससी रोड से एक्सप्रेसवे तक रखा गया है। इस हिस्से में छह लेन सड़क को तटबंध के ऊपर बनाने का प्रस्ताव है। इसके साथ तटबंध पर पत्थर की पिचिंग, मिट्टी का काम, जमीन का विकास और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास की व्यवस्था शामिल है। फेज-1 की कुल अनुमानित लागत: 12,370 करोड़ रुपए। 1,000 परिवारों का पुनर्वास पर 400 करोड़ रुपए खर्च का अनुमान है। फेज-2: बिसरख रोड ब्रिज से डीएससी रोड तक होगा दूसरा हिस्सा
दूसरे चरण में बिसरख रोड ब्रिज से डीएससी रोड तक का हिस्सा शामिल किया गया है। इस हिस्से में भी तटबंध के ऊपर छह लेन सड़क बनाने और उससे जुड़े विकास कार्यों का प्रस्ताव है। फेज-2 की कुल अनुमानित लागत: 6,449 करोड़ रुपए। फेज-3: एनएच-24 से बिसरख रोड ब्रिज तक बनेगा तीसरा हिस्सा
तीसरे चरण में एनएच-24 से बिसरख रोड ब्रिज तक का हिस्सा प्रस्तावित किया गया है। यह योजना का एक बड़ा हिस्सा होगा। इसमें जमीन खरीद से लेकर छह लेन सड़क, तटबंध की पिचिंग, जमीन विकास और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास का खर्च शामिल है। 5,000 परिवारों का पुनर्वास और फेज-3 की कुल अनुमानित लागत: 10,496 करोड़ रुपए।
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नगर निगम: खराब सड़कों को लेकर हाई कोर्ट सख्त, निगम परिषद की बैठक में भी हुआ हंगामा – Gwalior News
नगर निगम ने शहर में कैसी सड़कें बनाईं, अब इसकी जांच के लिए अब सड़कों की खुदाई होगी। हाईकोर्ट इसके लिए कमीशन नियुक्त करेगा। इसकी कमान एक अधिवक्ता के हाथ में होगी। तकनीकी टीम भी साथ रहेगी। कमीशन सड़कें खुदवाकर देखेगा कि निर्माण तय मापदंडों के मुताबिक हुआ था या नहीं। जांच के दौरान नगर निगम का कोई अधिकारी मौजूद नहीं रहेगा। जस्टिस जीएस अहलूवालिया और जस्टिस अनुराधा शुक्ला की डिवीजन बेंच ने सोमवार को कैलाश चंद अग्रवाल की याचिका पर सुनवाई की। सिटी प्लानर सुरेश अहिरवार भी कोर्ट में उपस्थित हुए। उनके जवाब पर कोर्ट ने नाराजगी जताई। आदेश में साफ लिखा कि सिटी प्लानर कोर्ट को गुमराह करने की कोशिश कर रहे थे। इसके बाद नगर निगम से सड़क निर्माण का पूरा रिकॉर्ड तलब कर लिया गया। कोर्ट ने पिछले पांच साल में सड़क निर्माण पर खर्च की गई राशि का पूरा हिसाब मांगा है। निर्माण के समय सड़कों की जो माप ली गई थी, उसका रिकॉर्ड भी पेश करना होगा। कमीशन मौके पर जाकर सड़कें खोदेगा। इसके बाद देखा जाएगा कि निर्माण निर्धारित स्पेसिफिकेशन के मुताबिक हुआ था या नहीं। हालांकि कमीशन की जांच के दौरान नगर निगम के वकील गौरव मिश्रा निगम का प्रतिनिधित्व कर सकेंगे। मामले में अगली सुनवाई 11 अगस्त को होगी। इस तरीख को निगम को सड़क निर्माण का जुड़ा पूरा रिकॉर्ड को पेश करना होगा। साथ ही पूर्व सिटी प्लानर प्रदीप वर्मा पर चल रहे मुकदमे की प्रति भी देनी होगी। निगम का दावा- 65.30 किलोमीटर सड़कें ठीक निगम ने हाई कोर्ट में जो जवाब पेश किया, उसमें सड़कों को 4 श्रेणी में विभाजित किया। पहली- ठीक सड़कें। ऐसी 62 सड़कें (65.30 किलोमीटर) बताई गईं। इसी तरह 34 सड़कें (36.75 किलोमीटर) आंशिक रूप से क्षतिग्रस्त बताई गईं। 24 सड़कें (28.05 किलोमीटर) क्षतिग्रस्त बताई, जबकि 9 ऐसी सड़कें हैं, जहां कार्य प्रगति पर है। यानी कि निगम के जिम्मे 129 सड़कें हैं, जिनकी कुल लंबाई 140.58 किलोमीटर है। भास्कर ने जब निगम की रिपोर्ट का रिएलिटी चेक किया तो कलई खुल गई। नागदेवता मंदिर से ढोलीबुआ का पुल निर्माण कार्य तक और तारागंज पुल नागदेवता मंदिर से आंग्रे पुल तक की रोड को ठीक बताया गया। जबकि यहां एक तरफ की सड़क का बड़ा हिस्सा अतिक्रमण की चपेट में है। दूसरी तरफ जर्जर सड़क को सही करने के लिए गिट्टी डाली दी गई है। इसके अलावा, कुछ स्थान पर मलबे से गड्ढे को भर दिया है। स्थानीय निवासी राजू जाटव ने बताया कि एलिवेटेड रोड बनाने का काम कर रही कंपनी से यहां गिट्टी डलवाई है। पूर्व सिटी प्लानर प्रदीप वर्मा का रिकॉर्ड भी तलब किया
सुनवाई में पूर्व सिटी प्लानर प्रदीप वर्मा का मामला भी सामने आया। मौजूदा सिटी प्लानर ने कोर्ट को बताया कि वर्मा रिश्वत लेते हुए ट्रैप हुए थे। उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा चल रहा है। वे निलंबित हैं और उनका मुख्यालय नगर निगम ग्वालियर है। हाईकोर्ट ने नगर निगम के वकील गौरव मिश्रा को वर्मा के खिलाफ चल रहे मुकदमे की प्रमाणित प्रति पेश करने के निर्देश दिए हैं। सड़कों पर समिति, होर्डिंग-गेंट्री पर जांच रिपोर्ट के बाद फैसला शहर की खराब सड़कों को लेकर सोमवार को जल विहार स्थित निगम परिषद की बैठक में हंगामा हुआ। पार्षदों ने सड़कों की बदहाल स्थिति को लेकर अधिकारियों को घेरा। बैठक में पार्षदों ने मोबाइल पर भास्कर में प्रकाशित खबर सड़कें टूटी और नालियां फूटीं, इधर भूमिपूजन के इंतजार…. का मुद्दा भी उठाया। इसके बाद खराब सड़कों को लेकर हंगामा और बढ़ गया। पार्षद सुरेश सोलंकी और आशा चौहान ने आसंदी के पास धरना भी दिया। 16 एजेंडों वाली अभियाचित बैठक 217 दिन बाद खत्म हुई। सभापति मनोज सिंह तोमर ने कहा कि जिन कार्यों का भूमिपूजन नहीं हो पा रहा है, उनमें प्रोटोकॉल का पालन करते हुए भूमिपूजन कराया जाए, अन्यथा 7 दिन में काम शुरू करा दिया जाए। महापौर डॉ. शोभा सिकरवार ने कहा कि पहले विधानसभा स्तर पर बैठकें होती थीं, लेकिन पार्षदों ने रुचि नहीं दिखाई। सभी तैयार हों तो फिर से ऐसी बैठकें कराई जा सकती हैं। पार्षद दीपक मांझी ने तत्कालीन जेडओ तनुजा वर्मा पर आरोप लगाया कि उन्होंने मेरी मौलिक निधि से दूसरे वार्ड में काम करा दिए। इस पर सभापति ने इसकी जांच कराने को कहा। पार्षद गिर्राज कंसाना ने झांसी रोड और डीडी नगर, मोहित जाट ने जीवाजीगंज खराब रोड का मुद्दा उठाया। सुरेश सोलंकी ने कहा कि पार्षद आपस में उलझते हैं, इसका फायदा अधिकारी उठा रहे हैं। यह मुद्दे उठे, लेकिन समाधान नहीं इन पर हुए फैसले
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‘जमीन नहीं चाहिए, 10 लाख वापस करो’: झगड़े के बाद फायरिंग; मरने से पहले वीडियो कॉल पर BPSC टीचर ने भाई से कहा-तुम्हारे जीजा ने गोली मारी – Purnia News
‘शालिनी और जीजा राजकुमार यादव ने 2 साल पहले पूर्णिया के बाघमारा में 2 कट्ठा जमीन करीब 32 लाख में खरीदी थी। जमीन बहन के नाम पर थी, जीजा ने उसमें करीब 10 लाख दिए थे, बाकी रुपए शालिनी ने लगाए थे। राजकुमार का कहना था कि उन्हें जमीन नहीं चाहिए, उन्हें10 लाख वापस चाहिए थे। इसी बात पर दोनों के बीच हमेशा मारपीट होती थी। 9 अगस्त की शाम भी इसी बात पर विवाद हुआ और राजकुमार ने शालिनी को गोली मार दी। जिसके बाद 9 साल के भांजे ने मुझे वीडियो कॉल किया था। मैंने देखा शालिनी को सीने में गोली लगी थी। उसकी सांसें चल रही थी। उसने बताया कि तुम्हारे जीजा गोली मारकर भाग गए हैं।’ ये जानकारी BPSC शिक्षिका शालिनी (32) के भाई विक्रम ने दी है। जिसके आरोपी जीजा राजकुमार (37) कॉपरेटिव बैंक में डाटा ऑपरेटर का काम करते थे, जो अभी फरार है। वारदात के हाट थाना क्षेत्र की है। टीचर के भाई ने एफआईआर में क्या लिखा, दोनों बच्चे कहां हैं, उन्होंने परिवार को घटना के बारे में क्या बताया, पढ़ें रिपोर्ट… पहले देखें परिवार की तस्वीर.. 12 साल पहले हुई थी शादी शालिनी और राजकुमारी की शादी 12 साल पहले हुई थी। दोनों के दो बेटे हैं। एक की उम्र 9 और दूसरे की 4 साल है। जिनके नाम परिजन ने नहीं बताए हैं। अभी ये दोनों नानी घर में हैं। परिजन बताते हैं कि शादी के बाद राजकुमार को बैंक में नौकरी मिली थी। वहीं, शालिनी की पिछले साल टीआरआई-3 से जॉब लगी। वो अररिया जिले के रानीगंज में पोस्टेड थी और प्लस-टू के स्टूडेंट्स को पढ़ाती थी। पूर्णिया के कॉलेज चौक के पास अपने पति और दो बच्चों के साथ किराए के मकान में रहती थी। हत्या से पहले मारपीट की थी- भाई शालिनी के भाई विक्रम ने बताया, ‘राजकुमार और शालिनी के बीच 9 अगस्त की शाम करीब 5 बजे से ही मारपीट हो रही थी। शालिनी के साथ बच्चों को भी राजकुमार ने पीटा था। साढ़े 5 बजे राजकुमार घर से निकल गया था। जिसके बाद शालिनी ने वीडियो कॉल किया और मुझे मारपीट की जानकारी दी थी। उसके गाल पर थप्पड़े के निशान थे। उस वक्त मैं मुजफ्फरपुर में था। मुझे बहन की चिंता होने लगी। इसलिए थोड़े-थोड़े देर में बहन को कॉल करता रहा। लास्ट कॉल मैंने रात 8 बजे किया था। उस वक्त भांजे ने बताया कि हम पढ़ रहे हैं और मां खाना बना रही है। कुछ देर के बाद भांजे ने मुझे कॉल किया और बताया कि पापा ने मम्मी को गोली मार दी है।’ खून से लथपथ पड़ी थी शालिनी- मामा मृतका के मामा गौरीशंकर ने कहा, ‘मैं घर पर ही था। तभी मुझे विक्रम ने फोन कर घटना की जानकारी दी। मैं शालिनी के घर पहुंचा तो वो खून से लथपथ पड़ी हुई थी। बच्चे बगल में डरे-सहमे बैठे हुए थे। मैंने बच्चों को संभाला। बच्चों ने मुझे बताया कि पापा-मम्मी के बीच लड़ाई हुई थी। पापा मम्मी को बोल रहे थे कि आज तुमको खत्म कर देंगे। हमें लगा कि पापा गुस्से में ऐसे ही बोल रहे हैं। तभी पापा ने पिस्टल निकाली और मम्मी को गोली मार दी।’ राजकुमार सरल स्वभाव का था- सहकर्मी कॉपरेटिव बैंक में राजकुमार के कुछ सहकर्मियों ने नाम न बताते की शर्त पर कहा, ‘राजकुमार सामान्य कर्मी की तरह आता था। सबसे बातें किया करता था और काफी सरल स्वभाव का था। उसे देखकर ऐसा लगता था कि किसी तरह की समस्या नहीं है। उसके चेहरे पर तनाव नजर नहीं आता था। शुक्रवार को राजकुमार बैंक आया था। शनिवार को छुट्टी पर था। रविवार को पता चला कि उसने पत्नी की हत्या कर दी है।’ अब जानें पुलिस की कार्रवाई और भाई ने एफआईआर में पुलिस को क्या बताया…. एफआईआर में दहेज प्रताड़ना का आरोप- एसडीपीओ पूर्णिया के सदर एसडीपीओ-1 अभिवन परासर ने बताया,’रविवार की रात के. हाट थाना क्षेत्र के कॉलेज चौक के पास रेणु नगर में शालिनी की हत्या हुई थी। उसके भाई विक्रम में थाने में आवेदन दिया है। जिसके आधार पर एफआईआर कर ली गई है। आवेदन में मृतका के भाई ने आरोपी राजकुमार पर दहेज प्रताड़ना का आरोप लगाया है।’ पोस्टमॉर्टम में बॉडी से 6 एमएम की बुलेट निकली फिलहाल पुलिस मामले की जांच में जुटी हुई है। फोरेंसिक टीम ने सबूत जुटाए हैं। मृतका की बॉडी से 6 एमएम की गोली पोस्टमॉर्टम में निकली है। पिस्टल कहां से आई, राजकुमार ने पूरी प्लानिंग कर हत्या की या गुस्से में आकर उसने वारदात को अंजाम दिया। इन सब एंगल पर पुलिस अभी जांच कर रही है। दूसरी तरफ राजकुमार की गिरफ्तारी को लेकर छापेमारी की जा रही है। शिक्षिका के अफेयर की भी चर्चा वहीं, दूसरी तरफ सूत्रों से पता चला है कि शालिनी का अफेयर चल रहा था। जिस स्कूल में पढ़ती थी, वहीं के किसी टीचर से अवैध संबंध थे। इस बात को लेकर भी दंपती के बीच झगड़ा होता था। अप्रैल में राजकुमार ने जहर खाकर सुसाइड की भी कोशिश की थी। इसके बाद शालिनी के घरवालों ने मामले में पंचायती की थी, मामले को शांत करा दिया था। इसके बाद भी शालिनी का अफेयर खत्म नहीं हुआ था। इस बात को लेकर राजकुमार में गुस्सा था।
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MP में भारी बारिश, भोपाल में सभी स्कूल बंद: यूपी में गंगा-यमुना समेत 10 नदियां उफान पर, बिहार के 12 जिलों में अलर्ट
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नई दिल्ली1 घंटे पहले
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देश के कई राज्यों में मानसून एक बार फिर जोर पकड़ चुका है। मध्यप्रदेश, राजस्थान, उत्तराखंड, उत्तरप्रदेश, हिमाचल प्रदेश और छत्तीसगढ़ के कई इलाकों में पिछले 24 घंटे से लगातार बारिश हो रही है।
राजधानी भोपाल में बारिश ने सबसे ज्यादा असर दिखाया है। यहां बीते 24 घंटे के दौरान करीब 7 इंच बारिश रिकॉर्ड की गई। भारी बारिश के अलर्ट के चलते मंगलवार को भोपाल में सभी स्कूल बंद रहेंगे।
दरअसल, MP में इस समय लो प्रेशर एरिया एक्टिव है। ग्वालियर से गुजर रही मानसून ट्रफ नमी लेकर आई है। इसे ही प्रदेश के 11 जिलों में जबरदस्त बारिश हुई है।
यूपी में सोमवार को लखनऊ-नोएडा समेत 30 से अधिक शहरों में बारिश हुई। गंगा-यमुना समेत 10 नदियां के उफान पर हैं। फर्रुखाबाद में 40 गांव बाढ़ की चपेट में हैं।
राजस्थान में झालावाड़,कोटा,बूंदी में सोमवार को तेज बारिश हुई। झालावाड़ में सबसे ज्यादा 12 इंच बारिश हुई। कालीसिंध और कोटा के नोनेरा ऐबरा बांध के गेट खोल दिए गए।
बिहार में मानसून एक्टिव है। प्रदेश के विभिन्न जिलों में पिछले कुछ दिनों से बारिश हो रही है। मौसम विभाग ने 12 जिलों में बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है।
सैटेलाइट मैप में देखें मानसूनी बादलों की स्थिति

देशभर से मौसम की तस्वीरें

राजस्थान के बूंदी में सोमवार को तेज बारिश से सड़कों पर खड़ी गाड़ियां बहने लगीं।

मध्यप्रदेश के मंडला के छिताखुदरी-बिलटुकरी जलाशय में एक युवक बह गया।

छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले के नरहरा वाटरफॉल में 2 युवक बह गए, जिन्हें स्थानीय लोगों ने बचाया।

यूपी के सहारनपुर में भारी बारिश के बाद गंगराव नदी में अचानक सैलाब आने से नदी पर बना पुल क्षतिग्रस्त हो गया।

बिहार में खगड़िया के दियरा क्षेत्र से लोग पशुओं के साथ सुरक्षित स्थान के लिए पलायन कर रहे हैं।

हरियाणा के गोहाना में तेज बारिश से जींद रोड पर जलभराव हो गया।


काशी-क्षेत्र प्रभारी रमेश सिंह परखेंगे 16 जिलों का संगठन: 3 मीटिंग में जानेंगे सक्रियता-तैयारी, विधायक-मंत्री और जिलाध्यक्षों समेत 200 संग मंथन – Varanasi News
पूर्वांचल में भाजपा के 16 संगठनात्मक जिलों यानि काशी क्षेत्र के प्रभारी और भाजपा प्रदेश उपाध्यक्ष रमेश सिंह आज दो दिवसीय दौरे पर वाराणसी आएंगे। रमेश सिंह काशी क्षेत्र में संगठन का मन, मिजाज, कार्यकर्ताओं की सक्रियता परखेंगे। सर्किट हाउस में मंत्रियों, विधायकों, जिलाध्यक्षों समेत 16 जिलों के जनप्रतिनिधि व पदाधिकारियों के साथ संगठन की मजबूती पर मंथन करेंगे। विधानसभा चुनाव में कार्यकर्ताओं की सक्रियता, सजगता और भूमिका पर चर्चा करेंगे। मंगलवार को आगमन पर काशी क्षेत्र के जिलों की सीमा में भव्य स्वागत किया जाएगा। सुल्तानपुर के जगदीशपुर से लेकर सर्किट हाउस तक जगदीशपुर, सुल्तानपुर, जौनपुर, मछलीशहर और बाबतपुरजगह-जगह कार्यकर्ता फूल माला पहनाएंगे।
भाजपा के संगठनात्मक अभियान और आगामी कार्यक्रमों के बीच प्रदेश उपाध्यक्ष एवं काशी क्षेत्र के नवनियुक्त प्रभारी रमेश सिंह आज काशी पहुंच रहे हैं। वे लखनऊ से प्रवास पर पहली बार काशी पहुंचेंगे। उनके आगमन को लेकर पार्टी कार्यकर्ताओं में उत्साह है और भव्य स्वागत की तैयारियों के बीच जगह-जगह होर्डिंग्स लगाए गए हैं। क्षेत्र प्रभारी रमेश सिंह सर्किट हाउस में क्रमवार तीन संगठनात्मक बैठकों को संबोधित करेंगे। पहली बैठक दोपहर 1 बजे सभागार में होगी। जिसमें काशी क्षेत्र के सभी 16 संगठनात्मक जिलों के लोकसभा एवं राज्यसभा सांसद, विधायक, महापौर, जिला पंचायत अध्यक्ष, नगर पालिका एवं नगर पंचायत अध्यक्ष, काशी क्षेत्र में रहने वाले प्रदेश पदाधिकारी, क्षेत्र पदाधिकारी, सातों मोर्चों के क्षेत्र अध्यक्ष, सभी 16 जिलों के जिलाध्यक्ष एवं जिला प्रभारी शामिल होंगे। दूसरी बैठक अपराह्न 3 बजे शुरू होगी। इसमें वाराणसी महानगर एवं जिले के सभी पदाधिकारी, सातों मोर्चों के महानगर एवं जिलाध्यक्ष तथा जिले-महानगर के कुल 33 मंडल अध्यक्ष और मंडल प्रभारी शामिल होंगे। तीसरी बैठक शाम 5 बजे होगी, जिसमें 13 अगस्त को जिले में प्रस्तावित तिरंगा यात्रा की व्यवस्था टोली के साथ तैयारियों की समीक्षा की जाएगी। बाबा विश्वनाथ के दरबार में करेंगे दर्शन क्षेत्र प्रभारी रमेश सिंह तीनों बैठकों के बाद लगभग शाम 6 बजे श्री काशी विश्वनाथ मंदिर में दर्शन-पूजन करेंगे। इसके बाद वे सर्किट हाउस में रात्रि विश्राम करेंगे और अगले दिन सुबह लखनऊ के लिए रवाना होंगे। रमेश सिंह के स्वागत को लेकर लखनऊ से वाराणसी के बीच पड़ने वाले जगदीशपुर, सुल्तानपुर, जौनपुर, मछलीशहर, बाबतपुर समेत विभिन्न स्थानों पर कार्यकर्ताओं को जिम्मेदारी दी गई है।
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बक्सर में बधार में मिला अधेड़ का शव: चप्पल कुछ दूरी पर पड़ी मिली, करंट से मौत की आशंका; पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से खुलेगा मौत का राज – Buxar News
बक्सर के कृष्णाब्रह्म थाना क्षेत्र के सोवा गांव से पश्चिम बधार में सोमवार को एक अधेड़ व्यक्ति का शव मिलने से इलाके में सनसनी फैल गई। शव की पहचान नोनियापुरा गांव निवासी रमई केवट (50) के रूप में हुई है। शव मिलने की सूचना मिलते ही आसपास के ग्रामीणों की भीड़ मौके पर जुट गई। सूचना पर कृष्णाब्रह्म थानाध्यक्ष रवि कुमार पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू की। शव मिलने की परिस्थितियों ने पुलिस की जांच को गंभीर बना दिया है। घटनास्थल से कुछ दूरी पर मृतक की चप्पल मिली है। वहीं, शरीर पर मिले कुछ निशानों के आधार पर प्रथमदृष्टया बिजली का करंट लगने से मौत की आशंका जताई जा रही है। हालांकि, पुलिस ने अभी मौत के कारण की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्थिति स्पष्ट होगी। खेत की ओर जा रहे ग्रामीणों ने देखा शव सोमवार को कुछ ग्रामीण खेत की ओर जा रहे थे। इसी दौरान उनकी नजर बधार में पड़े एक व्यक्ति के शव पर पड़ी। शव देखते ही ग्रामीणों ने आसपास के लोगों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद तत्काल पुलिस को सूचना दी गई। कुछ ही देर में घटनास्थल पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलने के बाद कृष्णाब्रह्म थानाध्यक्ष रवि कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस ने शव की स्थिति का जायजा लिया और आसपास के इलाके में छानबीन की। प्रथमदृष्टया पुलिस को शव करीब दो दिन पुराना होने का अनुमान है। हालांकि, शव कितने समय से वहां पड़ा था, इसकी स्पष्ट जानकारी पोस्टमार्टम और जांच के बाद ही सामने आएगी। शव से कुछ दूरी पर मिली मृतक की चप्पल घटनास्थल पर शव मिलने के बाद एक और तथ्य पुलिस के लिए जांच का अहम बिंदु बन गया। शव मिलने वाली जगह से कुछ दूरी पर रमई केवट की चप्पल पड़ी मिली। चप्पल का शव से दूर मिलना पुलिस के लिए कई सवाल खड़े कर रहा है। पुलिस इस बिंदु पर भी जांच कर रही है कि रमई की मौत उसी स्थान पर हुई थी या फिर किसी दूसरे स्थान पर मौत होने के बाद शव को बधार में लाकर छोड़ा गया। हालांकि, अभी तक पुलिस को शव को कहीं और से लाकर फेंके जाने की पुष्टि करने वाला कोई ठोस साक्ष्य नहीं मिला है। शरीर पर मिले निशान, करंट लगने की आशंका शव की प्रारंभिक जांच के दौरान शरीर पर कुछ निशान मिले हैं। इन्हीं निशानों के आधार पर प्रथमदृष्टया बिजली का करंट लगने से मौत की आशंका जताई जा रही है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यदि करंट से मौत हुई है तो घटना कहां और किन परिस्थितियों में हुई। इसके लिए पुलिस ने आसपास के खेतों और बिजली के तारों की भी जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। संभावित घटनास्थलों की जांच की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने का प्रयास कर रही है कि मृतक कब घर से निकला था और आखिरी बार उसे किस स्थान पर देखा गया था। दो दिन पुराना बताया जा रहा शव पुलिस के अनुसार शव की स्थिति देखकर उसके करीब दो दिन पुराना होने का अनुमान लगाया जा रहा है। इस दौरान रमई केवट के परिजन भी उसकी तलाश कर रहे थे। शव की पहचान होने के बाद परिवार के लोगों को इसकी सूचना दी गई। शव मिलने की खबर गांव पहुंचते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजन घटनास्थल पर पहुंचे और शव की पहचान की। पुलिस ने परिवार के सदस्यों से भी पूछताछ कर मृतक के पिछले कुछ दिनों की गतिविधियों और उसके आने-जाने के बारे में जानकारी जुटाई। पोस्टमार्टम रिपोर्ट से स्पष्ट होगा मौत का कारण घटनास्थल पर आवश्यक जांच और साक्ष्य जुटाने के बाद पुलिस ने शव को कब्जे में लिया। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल बक्सर भेज दिया गया। पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारण का स्पष्ट पता चल सकेगा। कृष्णाब्रह्म थानाध्यक्ष रवि कुमार ने बताया कि मौत के कारणों की पुष्टि पोस्टमार्टम रिपोर्ट से होगी। घटनास्थल और उसके आसपास के क्षेत्र की जांच की जा रही है। शव मिलने की परिस्थितियों को देखते हुए पुलिस सभी संभावित बिंदुओं पर जांच कर रही है। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि रमई केवट की मौत कैसे हुई और उसकी चप्पल शव से कुछ दूरी पर कैसे पहुंची। यदि करंट लगने की बात सामने आती है तो घटना के स्थान और परिस्थितियों की भी जांच की जाएगी। वहीं, जांच में यदि कोई संदिग्ध तथ्य सामने आता है तो उस दिशा में भी कार्रवाई की जाएगी।
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चीन बोला- भारत का अरुणाचल का मैप जारी करना गलत: कहा- इससे चीन का दावा नहीं बदलेगा; भारत ने 3 दिन पहले नक्शा जारी किया था
चीन ने सोमवार को अरुणाचल प्रदेश के 27 स्थानों और भौगोलिक विशेषताओं के भारतीय मानचित्र पर मानक नाम दर्ज करने के कदम को अवैध बताया। चीन ने इसे ‘शून्य और अमान्य’ करार दिया। चीनी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने भारत की हाल की घोषणा पर सवाल के जवाब में यह बात कही। उन्होंने कहा कि चीन भारत की ओर से बनाए गए तथाकथित अरुणाचल प्रदेश को मान्यता नहीं देता। केंद्र सरकार ने शुक्रवार को अरुणाचल प्रदेश की 27 जगहों और उनकी भौगोलिक विशेषताओं को आधिकारिक नक्शे पर दर्ज किया था। यह कदम चीन की ओर से राज्य की जगहों के नाम बदलने की कोशिशों के बीच उठाया गया है। गृह मंत्रालय के मुताबिक, यह काम अरुणाचल प्रदेश सरकार से सलाह लेकर किया गया है। इसका मकसद इन जगहों की सही पहचान बताना और आम लोगों में जागरूकता बढ़ाना है। म सरकार ने ऐसा क्यों किया इन नामों को आधिकारिक मानचित्रों में शामिल करने का मकसद प्रशासन को बेहतर बनाना है। इससे सरकारी रिकॉर्ड में एकरूपता आएगी, अलग-अलग विभागों के बीच बेहतर तालमेल होगा और आपदा के समय मदद पहुंचाने में आसानी होगी। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि इन नामों के आधार पर लोगों के पासपोर्ट या दूसरे निजी दस्तावेजों में कोई बदलाव किया जाएगा। सरकार का मुख्य उद्देश्य इन क्षेत्रों की आधिकारिक पहचान तय करना और भारत के प्रशासनिक रिकॉर्ड में उन्हें शामिल करना है। चीन अरुणाचल की जगहों के नाम जारी करता रहा है चीन ने कई बार अरुणाचल प्रदेश की जगहों के चीनी नामों की सूची जारी करता रहा है। वह अरुणाचल प्रदेश को जांगनान कहता है। भारत ने चीन की इन कोशिशों को लगातार खारिज किया है। भारत का कहना है कि इनका भारत की राज्य पर संप्रभुता पर कोई असर नहीं पड़ता।
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वेल्डिंग की नई तकनीक पर जोधपुर IIT की रिसर्च: परमाणु रिएक्टर से लेकर पावर प्लांट तक में हो सकेगा यूज; टीम डवलप कर रही इलेक्ट्रोड कोटिंग – Jodhpur News
आईआईटी जोधपुर के वैज्ञानिकों ने वेल्डिंग की नई तकनीकों और इसके कम्पोनेंट पर महत्वपूर्व रिसर्च किया है। इसका उद्देश्य परमाणु रिएक्टर, ऊर्जा पाइपलाइन, पुल और अन्य महत्वपूर्ण औद्योगिक संरचनाओं को अधिक सुरक्षित, मजबूत और टिकाऊ बनया जा सके। इस रिसर्च का नेतृत्व आईआईटी जोधपुर के मैकेनिकल इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसर राहुल निब्बर कर रहे हैं। उनके वेल्डिंग एंड जॉइनिंग रिसर्च ग्रुप की ओर से उन्नत वेल्डिंग सामग्री, नई जॉइनिंग तकनीक और मटेरियल इंजीनियरिंग से जुड़े समाधान विकसित किए जा रहे हैं। इलेक्ट्रोड कोटिंग कर रहे है डवलप शोध समूह SMAW और SAW जैसी इंडस्ट्रीयल वेल्डिंग प्रोसेस के लिए विशेष फ्लक्स और इलेक्ट्रोड कोटिंग विकसित कर रहा है। इसमें रेड ओखर (Red Ochre) जैसे प्राकृतिक और पर्यावरण-अनुकूल खनिजों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है। टीम यह भी स्टडी कर रही है कि वेल्डिंग के दौरान बहुत छोटे स्तर पर होने वाले बदलाव से कैसे मजबूती आए और ये लंबे समय तक चले। टीम डुप्लेक्स स्टेनलेस स्टील, इनकोनेल (Inconel) जैसे निकेल-आधारित सुपरएलॉय और उच्च-प्रदर्शन पाइपलाइन स्टील की वेल्डिंग पर काम कर रही है। वेल्डिंग के अलावा प्रोफेसर निब्बर का रिसर्व फाइबर पॉलिमर नैनो-कंपोजिट्स पर भी है। ये टेक्निक समुद्री एनवायरमेंट के लिए डेवलप की जा रही है। इसमें नमी और तापमान के प्रभाव के बाद भी कैसे इसे मजबूत किया जाए,इस पर स्टडी की जा रही है।
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पटना की सबसे पुरानी मिठाई दुकान, नमकीन खस्ता से शुरू हुआ सफर, आज 12 से ज्यादा आइटम
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Patna Oldest Mithai Shop: पटना. शहर में ऐसी कई पुरानी दुकानें हैं, जो अपने स्वाद के दम पर दशकों से लोगों की पसंद बनी हुई हैं. इन्हीं में से एक है पटना जंक्शन के पास न्यू मार्केट में स्थित बाबा शाही लस्सी वाला. करीब 66 साल पुरानी यह दुकान आज भी अपने पारंपरिक स्वाद और शुद्धता के लिए जानी जाती है. यहां हर दिन बड़ी संख्या में लोग लस्सी, रसगुल्ला और दूसरी मिठाइयों का स्वाद लेने पहुंचते हैं. खासकर मंगलवार और शनिवार को यहां इतनी भीड़ होती है कि ग्राहकों की सुविधा के लिए टोकन सिस्टम से बिक्री की जाती है.
यहां का रसगुल्ला और गुलाब जामुन मुंह में रखते ही घुल जाता है. लस्सी का स्वाद ऐसा है कि पीने से ज्यादा लोग उसे खाते हैं. हालांकि, इस दुकान की शुरुआत केवल एक नमकीन खस्ता से हुई थी, लेकिन आज यहां एक दर्जन से भी ज्यादा फूड आइटम उपलब्ध हैं.
दुकान की तीसरी पीढ़ी के नईम जी इसे चला रहे हैं. उन्होंने बताया कि इसकी शुरुआत 1960 के आसपास केवल नमकीन खस्ता यानी निमकी बेचने से हुई थी. महावीर मंदिर के बिल्कुल नजदीक होने की वजह से लोग हमेशा यहां आते थे. उस समय लोगों को ताजा और स्वादिष्ट नमकीन मिलता था.
धीरे-धीरे ग्राहकों का भरोसा बढ़ता गया और दुकान में नए-नए फूड आइटम और मिठाइयां जुड़ती चली गईं. आज यह दुकान पटना की पहचान बन चुकी है. यहां दही भल्ला, लिट्टी, समोसा, गुलाब जामुन, रसगुल्ला, चंद्रकला और लौंगलता मिलती है.
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समय के साथ यह कारोबार परिवार की दूसरी और अब तीसरी और चौथी पीढ़ी तक पहुंच चुका है. नई पीढ़ी भी पुरानी परंपरा और स्वाद को बरकरार रखते हुए ग्राहकों की पसंद का पूरा ध्यान रख रही है. यही वजह है कि वर्षों पुराने ग्राहक आज भी यहां आते हैं और नई पीढ़ी के लोग भी इस दुकान के स्वाद के दीवाने बन रहे हैं.
नईम जी ने बताया कि पहले यहां लस्सी 35 पैसे में मिलती थी, लेकिन अब इसकी कीमत 35 रुपये है. पनीर समोसा और खस्ता कचौड़ी 14 रुपये प्रति पीस, दही बड़ा 10 रुपये पीस, लौंगलता 15 रुपये प्रति पीस, गुलाब जामुन और रसगुल्ला भी 15 रुपये प्रति पीस, रसमलाई 30 रुपये पीस सहित अलग-अलग आइटम अलग-अलग कीमत पर उपलब्ध हैं.
पहले यहां एक काउंटर हुआ करता था, लेकिन आज की तारीख में चार काउंटर हैं.नईम जी का कहना है कि मंगलवार और शनिवार को यहां ग्राहकों की संख्या सामान्य दिनों की तुलना में काफी अधिक रहती है. भीड़ को व्यवस्थित रखने के लिए टोकन सिस्टम लागू किया गया है.
ग्राहक पहले टोकन लेते हैं और फिर अपनी बारी आने पर ऑर्डर प्राप्त करते हैं. पटना जंक्शन के नजदीक होने की वजह से शहर के अलावा दूसरे जिलों और राज्यों से आने वाले लोग भी इस दुकान तक पहुंचते हैं. कई ग्राहक वर्षों से यहां आते रहे हैं और अपने परिवार और दोस्तों को भी इस दुकान का स्वाद चखाने लेकर आते हैं.






