Saturday, July 25, 2026
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भारत पर 10 फीसदी टैरिफ का कितना असर, किन सामानों पर नहीं लागू होगा शुल्क


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Tariff Effect on India : अमेरिका ने बंधुआ मजदूरी के आरोपों पर भारत के खिलाफ 10 फीसदी टैरिफ लगा दिया है. इस कदम के बाद वाणिज्य मंत्रालय ने बताया कि भारत पर 10 फीसदी का लोअर टैरिफ लगा है, जिसका असर भी सीमित है. यह टैरिफ भारत से अमेरिका को निर्यात होने वाले 45 फीसदी सामानों पर कोई असर नहीं डालेंगे.

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बंधुआ मजदूरी के आरोपों में भारत पर 10 फीसदी टैरिफ लगा है.

नई दिल्ली. अमेरिका ने भारत के साथ चल ही व्यापार डील के बीच 10 फीसदी टैरिफ लगा ही दिया. अमेरिका लंबे समय से बंधुआ मजदूरी जैसे आरोपों की जांच कर रहा था और इस मामले में भारत सरकार की दलीलों को दरकिनार करते हुए टैरिफ लगाने का फैसला कर लिया है. इसके बाद सरकार की ओर से कहा गया है कि इस टैरिफ का सिर्फ आधे सामानों पर ही असर दिखेगा और भारत से निर्यात होने वाले 45 फीसदी उत्पाद आगे भी टैरिफ के दायरे से बाहर रहेंगे.

वाणिज्य मंत्रालय ने शनिवार को बताया कि अमेरिका ने कथित बंधुआ मजदूरी से जुड़ी धारा 301 में जांच के तहत उठाए गए कदमों के अंतर्गत भारत को 10 फीसदी अतिरिक्त शुल्क की निचली श्रेणी में रखा है. अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (यूएसटीआर) के कार्यालय ने 23 जुलाई को अमेरिकी व्यापार अधिनियम, 1974 की धारा 301 के तहत संबंधित देशों पर अतिरिक्त शुल्क लगाने की घोषणा की थी.

अमेरिका ने 60 देशों पर लगाया है शुल्क
अमेरिका ने धारा 301 के तहत भारत सहित 60 देशों पर शुल्क लगाया है. इन अर्थव्यवस्थाओं पर बंधुआ मजदूरी का आरोप लगा है और यहां के सामान आयात करने पर टैरिफ लगा दिया है. यूएसटीआर ने भारत से आयात पर अतिरिक्त 10 फीसदी शुल्क लगाया है. हालांकि, शुरुआत में अमेरिका ने 12.5 फीसदी शुल्क लगाने का प्रस्ताव रखा था. बंधुआ मजदूरी से तैयार उत्पादों के आयात को लेकर की गई जांच के दौरान भारत ने अपना पक्ष रखा था, लेकिन अमेरिका ने इन सभी दलीलों से इनकार कर दिया.

कम शुल्क पर सरकार ने जताई राहत
वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि आरोपों की जांच के बाद से लगातार किए गए प्रयासों का नतीजा यह है कि भारत को अंतिम उपायों के तहत अतिरिक्त शुल्क के लोअर स्लैब में रखा गया है. इससे देश के कई निर्यात क्षेत्रों को कम टैरिफ का फायदा मिलेगा. मंत्रालय ने बताया है कि भारत के अमेरिका को होने वाले निर्यात का एक बड़ा हिस्सा, जिस पर वर्तमान में कोई अतिरिक्त शुल्क नहीं लगता. अतिरिक्त 10 फीसदी शुल्क के दायरे से बाहर बना हुआ हैं. इनमें जेनेरिक दवाएं, स्मार्टफोन और कुछ अन्य उत्पाद शामिल हैं.

किन प्रोडक्ट पर नहीं लगेगा शुल्क
यूएसटीआर की धारा 232 उपायों के तहत पहले से शामिल इस्पात, एल्युमिनियम और वाहन कलपुर्जे जैसे उत्पाद इस अतिरिक्त 10 फीसदी शुल्क के अधीन नहीं हैं. अमेरिका व्यापार प्रशासन की धारा 232 में शामिल शुल्क सीमित अपवादों के साथ व्यापक रूप से सभी देशों पर लागू होते हैं. मंत्रालय ने कहा कि इन छूटों के कारण भारत के अमेरिका को होने वाले निर्यात का 45 फीसदी हिस्सा अतिरिक्त 10 फीसदी शुल्क के दायरे से बाहर बना हुआ है.

भारत के कितने सामान पर लगेगा शुल्क 
मंत्रालय के मुताबिक, 55 फीसदी निर्यात पर अतिरिक्त 10 फीसदी शुल्क लगेगा, लेकिन भारत पर शुल्क का प्रभाव जांच में शामिल अधिकांश अर्थव्यवस्थाओं की तुलना में अपेक्षाकृत कम है. सरकार ने यह भी कहा कि भारत अभी अमेरिका के साथ व्यापार वार्ता कर रहा है, जिसमें शुल्क पर भी चर्चा की जाएगी. सरकार इस साल 2 फरवरी को घोषित और सात फरवरी को जारी संयुक्त बयान के अनुरूप भारत-अमेरिका द्विपक्षीय व्यापार समझौते को शीघ्र पूरा करने की दिशा में अमेरिका के साथ बातचीत कर रही है.

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Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…

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जमीन नापने के नाम पर लेखपाल पर रिश्वत का आरोप: मैनपुरी में महिला ने डीएम से की शिकायत, लेखपाल बोले- मै तुम्हारा नौकर नहीं – Mainpuri News




मैनपुरी के बिछवां में महिला ने डीएम से शिकायत की है। उसने आरोप लगाया है कि उसकी खेती की जमीन पर अवैध कब्जा कर लिया गया है और संबंधित लेखपाल ने रिश्वत लेकर गलत रिपोर्ट प्रस्तुत की है। महिला ने आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई और जमीन से अवैध कब्जा हटवाने की मांग की है। रामप्यारी पत्नी लल्लू सिंह ने डीएम को दिए प्रार्थना पत्र में बताया कि मौजा बिछवां स्थित गाटा संख्या 1024 रकबा 0.308 हेक्टेयर भूमि उनके और उनके पति के नाम दर्ज है। उन्होंने आरोप लगाया है कि गांव के आदेश कुमार, दुर्गेश कुमार, सर्वेश कुमार और प्रवेश कुमार ने उनकी जमीन के आधे से अधिक हिस्से पर अवैध कब्जा कर लिया है। महिला के अनुसार, करीब दो माह पहले उन्होंने इस मामले की शिकायत उप जिलाधिकारी कुरावली से की थी। शिकायत के बाद लेखपाल मौके पर पहुंचे और जमीन की पैमाइश की, लेकिन मेड़बंदी नहीं कराई। आरोप है कि लेखपाल के लौटते ही कथित आरोपियों ने मेड़ नहीं बनने दी और दोबारा जमीन पर कब्जा कर लिया।
शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि इसके बाद से संबंधित लेखपाल उनकी सुनवाई नहीं कर रहे हैं और फोन तक नहीं उठा रहे। महिला का आरोप है कि लेखपाल दीपक भदौरिया ने जमीन की पैमाइश कराने के नाम पर उनसे 5 हजार रुपये भी लिए। इसके बावजूद न तो मेड़बंदी कराई गई और न ही कब्जा हटवाया गया। महिला ने यह भी बताया कि 9 मई 2026 को लेखपाल ने अधिकारियों को रिपोर्ट भेजी थी कि जमीन चिन्हित कर पूरी पैमाइश करा दी गई है और मेड़बंदी भी करा दी गई है। हालांकि, महिला का कहना है कि वास्तविकता में मेड़ नहीं बंधवाई गई है और दबंग अब भी जमीन पर कब्जा किए हुए हैं।



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धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर सीएम रेखा गुप्ता का समर्थन: बोलीं- राष्ट्रहित और नैतिक मूल्यों को सर्वोपरि रखा – New Delhi News




दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर उनके फैसले की सराहना करते हुए इसे राष्ट्रहित और सार्वजनिक जीवन में नैतिक मूल्यों के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक बताया। रेखा गुप्ता ने अपने संदेश में कहा कि धर्मेंद्र प्रधान ने सार्वजनिक जीवन में हर जिम्मेदारी को निष्ठा, ईमानदारी और पूर्ण समर्पण के साथ निभाया है। उन्होंने केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी)-2020 के प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और शिक्षा व्यवस्था में कई सार्थक सुधारों को आगे बढ़ाया। मुख्यमंत्री ने कहा कि उनके कार्यकाल में भारतीय भाषाओं में शिक्षा को बढ़ावा मिला, तकनीकी और उच्च शिक्षा का विस्तार हुआ तथा विद्यार्थियों के लिए नए अवसर उपलब्ध हुए। उन्होंने शिक्षा क्षेत्र में किए गए योगदान को देश के भविष्य के लिए महत्वपूर्ण बताया। रेखा गुप्ता ने अपने पोस्ट में आगे लिखा कि राष्ट्रहित को सर्वोपरि मानते हुए धर्मेंद्र प्रधान ने अपने पद से इस्तीफा दिया है। उनके अनुसार यह निर्णय सार्वजनिक जीवन में नैतिक मूल्यों, मर्यादा और सिद्धांतों के प्रति उनकी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है। मुख्यमंत्री ने धर्मेंद्र प्रधान के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि राष्ट्रसेवा के उनके सतत प्रयास आगे भी नई ऊंचाइयों को प्राप्त करें। उन्होंने उनके बेहतर भविष्य के लिए शुभकामनाएं भी दी।



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दो बाइक टकराईं, मौके पर तीन की मौत: हादसे का वीडियो सामने आया, दो बाइक सवार डिंडौरी की तरफ आ रहे थे – Dindori News




डिंडौरी में शनिवार दोपहर दो बजकर 6 मिनट पर मंडला-डिंडौरी नेशनल हाईवे पर सक्का गांव के पास कचनारी तिराहे पर दो बाइकों की आमने-सामने टक्कर हो गई। दुर्घटना में तीन लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। घटना का लाइव सीसीटीवी वीडियो भी सामने आया है। सिटी कोतवाली पुलिस ने मामले में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। मृतकों के शवों को पोस्टमार्टम के लिए जिला अस्पताल भेजा गया है। सिटी कोतवाली निरीक्षक दुर्गा प्रसाद नगपुरे ने बताया कि दुर्घटना में शामिल बाइकों और मृतकों की पहचान कर ली गई है। युवक डिंडौरी की ओर जा रहे थे पुलिस के अनुसार, बाइक नंबर MP 20ZY 5185 पर सवार राम कुमार टेकाम (35 वर्ष) और प्रेम सिंह मलगाम मेहदवानी थाना क्षेत्र के राई गांव से डिंडौरी की ओर जा रहे थे। दूसरी बाइक नंबर MP 20ZF 6903 पर रोहित साहू (निवासी कठोतिया, डिंडोरी) सवार थे, जो डिंडौरी से राई की तरफ जा रहे थे। रोहित साहू कमल फिनकैप माइक्रो फाइनेंस लिमिटेड कंपनी में कलेक्शन का काम करते थे और घटना वाले दिन सुबह फील्ड के लिए निकले थे। मृतक रोहित साहू के परिजन ने बताया कि उनकी शादी डेढ़ साल पहले खुशबू से हुई थी। पंद्रह दिन पहले ही मंडला जिला अस्पताल में उनकी बेटी का जन्म हुआ था। पुलिस ने तीनों मृतकों के परिजन को घटना की सूचना दे दी है।



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बया नदी में नहाने गए तीन किशोर की डूबकर मौत: मुजफ्फरपुर में एक ने तैरकर बचाई जान; NDRF पर देरी से पहुंचने का आरोप – Muzaffarpur News




मुजफ्फरपुर के साहेबगंज नगर परिषद क्षेत्र में शनिवार दोपहर एक हादसा हुआ है। इसमें बया नदी में डूबने से तीन किशोरों की मौत हो गई। वहीं, उनके साथ नदी में नहाने गया चौथा किशोर किसी तरह तैरकर बाहर निकल आया और उसकी जान बच गई। घटना बैद्यनाथपुर शिवालय मंदिर के सामने बया नदी की है। मृतकों की पहचान वार्ड संख्या-8 निवासी अमृत कुमार (14 ), पिता– गुड्डू साह, साहिल उर्फ झुन्नू (12 ), पिता– मनोज साह और मोहम्मद रेहान (13 ), पिता– मोहम्मद ऐनुल के रूप में हुई है। वहीं गुड्डू (13 ), पिता– मोहम्मद मुन्ना किसी तरह तैरकर नदी से बाहर निकल आया। नहाने के दौरान गहरे पानी में चले गए चार बच्चे जानकारी के अनुसार, शनिवार दोपहर चारों किशोर बया नदी में नहाने गए थे। इसी दौरान वे गहरे पानी में चले गए। गुड्डू ने किसी तरह तैरकर अपनी जान बचा ली, जबकि बाकी तीन किशोर नदी में डूब गए। स्थानीय लोगों ने तीन घंटे तक चलाया रेस्क्यू घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण मौके पर जुट गए। स्थानीय लोगों ने करीब दो से तीन घंटे तक लगातार नदी में खोजबीन की। काफी मशक्कत के बाद तीनों किशोरों के शव बाहर निकाले गए। इसके बाद उन्हें साहेबगंज सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद तीनों को मृत घोषित कर दिया। एनडीआरएफ पर देरी से पहुंचने का आरोप स्थानीय लोगों का आरोप है कि एनडीआरएफ को सूचना देने के बावजूद टीम काफी देर तक मौके पर नहीं पहुंची, जिसके कारण शवों की तलाश स्थानीय लोगों को ही करनी पड़ी। घटना की सूचना मिलते ही साहेबगंज थानाध्यक्ष सुनील कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया। पूरे इलाके में पसरा मातम इस हादसे के बाद साहेबगंज नगर परिषद के वार्ड संख्या-8 में मातम का माहौल है। पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी कर शवों को पोस्टमार्टम के लिए भेजने की कार्रवाई शुरू कर दी है।



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प्रधान के इस्तीफे पर वर्ल्ड मीडिया: BBC बोला- छात्रों के आगे झुकी मोदी सरकार: गार्डियन ने लिखा- जनता के दबाव में 12 साल में पहला इस्तीफा


2 मिनट पहले

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शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो गया है। NEET पेपर लीक केस में उनके इस्तीफे की मांग करते हुए कॉकरोच जनता पार्टी पिछले 36 दिन से जंतर-मंतर पर धरना दे रही है।

इस्तीफे के बाद BBC ने लिखा कि मोदी सरकार को छात्रों के आगे झुकना पड़ा है। वहीं गार्डियन ने लिखा कि मोदी सरकार के 12 साल में पहली बार जनता के दबाव में किसी मंत्री का इस्तीफा हुआ।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को न्यूयॉर्क टाइम्स, CNN, अलजजीरा समेत कई अंतरराष्ट्रीय मीडिया संस्थानों ने भी टॉप स्टोरीज में जगह दी है।

BBC: मोदी सरकार ने छात्रों के गुस्से का सही अंदाजा नहीं लगाया

2014 में सत्ता में आने के बाद से प्रधानमंत्री मोदी सरकार आम तौर पर विरोध प्रदर्शनों के प्रति सख्त रुख अपनाती रही है और शायद ही कभी किसी बड़े आंदोलन के आगे झुकी हो।

इससे पहले सरकार ने केवल एक बड़े मामले में अपना फैसला वापस लिया था, जब करीब एक साल तक चले किसान आंदोलन के बाद तीनों कृषि कानूनों को रद्द करना पड़ा था।

इस बार सरकार ने छात्र आंदोलन को लेकर हो रही नाराजगी और लंबे समय तक टिके रहने की क्षमता का सही आकलन नहीं किया।

शुरुआत में कई हफ्तों तक आंदोलन को नजरअंदाज किया गया, लेकिन इस सप्ताह संसद की ओर मार्च कर रहे प्रदर्शनकारियों पर पुलिस की सख्ती के बाद देशभर में तीखी प्रतिक्रिया हुई और सरकार पर दबाव काफी बढ़ गया।

धर्मेंद्र प्रधान जैसे वरिष्ठ केंद्रीय मंत्री वास्तव में इस्तीफा देंगे या नहीं, इसे लेकर आखिरी समय तक कुछ पता नहीं चल पा रहा था। उनके इस्तीफे के बाद आंदोलन में शामिल छात्रों, खासकर पहली बार किसी बड़े प्रदर्शन का हिस्सा बने युवाओं को अपनी जीत का अहसास हो रहा है।

द गार्डियन: मोदी के सबसे करीबी मंत्रियों में से एक प्रधान का इस्तीफा

भाजपा के 12 वर्षों के शासन में यह पहली बार है, जब प्रधानमंत्री मोदी के सबसे करीबी और भरोसेमंद मंत्रियों में से एक को सार्वजनिक दबाव के कारण इस्तीफा देना पड़ा है। इनका नेतृत्व नए बने युवा राजनीतिक संगठन कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने किया। इस सप्ताह यह आंदोलन देशभर में युवाओं के बड़े विरोध प्रदर्शन में बदल गया।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की खबर मिलते ही दिल्ली में जुटे हजारों सीजेपी समर्थकों में खुशी की लहर दौड़ गई। प्रदर्शनकारियों ने जश्न मनाया और इसे सरकार से जवाबदेही की अपनी मांग की बड़ी जीत बताया।

न्यूयॉर्क टाइम्स: प्रदर्शनकारियों को ‘आतंकियों की बी-टीम’ कहा था, अब इस्तीफा

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने इस्तीफा दे दिया। इसे छात्र आंदोलन की बड़ी जीत माना जा रहा है। यह आंदोलन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के सामने सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक बन गया था। इस आंदोलन की अगुआई खुद को कॉकरोच कहने वाले छात्र समूह कर रहे थे। यह नाम भारत के चीफ जस्टिस की कथित अपमानजनक टिप्पणी से प्रेरित था।

यह संगठन शुरुआत से ही धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफा मांग रहा था। इस महीने प्रदर्शनकारियों पर हुए बल प्रयोग ने इस आंदोलन को भारत के कई शहरों तक फैला दिया।

धर्मेंद्र प्रधान पहले इन प्रदर्शनों को गंभीरता से नहीं ले रहे थे। उन्होंने सोशल मीडिया पर विपक्षी दलों पर छात्रों का इस्तेमाल कर अव्यवस्था फैलाने का आरोप लगाया था। जून में दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने छात्र प्रदर्शनकारियों को ‘आतंकवादियों की बी-टीम’ तक कह दिया था।

धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को छात्र आंदोलन की बड़ी सफलता माना जा रहा है। इससे आंदोलन को और बल मिल सकता है और छात्र अपनी अन्य मांगों को लेकर भी सरकार पर दबाव बढ़ा सकते हैं।

अल-जजीरा: छात्र आंदोलन की बड़ी जीत हुई

छात्रों के आंदोलन के बीच शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया। इसे देशभर में चल रहे छात्र आंदोलन की बड़ी जीत माना जा रहा है।

हाल के वर्षों में यह आंदोलन मोदी सरकार के खिलाफ सार्वजनिक असंतोष के सबसे बड़े प्रदर्शनों में से एक माना जा रहा है। इस आंदोलन ने बेरोजगारी, भ्रष्टाचार और सरकार की जवाबदेही जैसे मुद्दों पर युवाओं के बढ़ते गुस्से को भी सामने ला दिया है।

CNN- शिक्षा मंत्री का इस्तीफा, सीजेपी ने कहा- लड़ाई अभी बाकी

शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने शनिवार को अपने इस्तीफे की घोषणा की। इसे देशभर में चल रहे छात्र आंदोलन की बड़ी जीत माना जा रहा है। मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं के कथित पेपर लीक और उनकी बिक्री के आरोपों के बाद छात्र सरकार से जवाबदेही की मांग कर रहे थे।

धर्मेंद्र प्रधान ने बढ़ते जनदबाव के बीच इस्तीफा देने का फैसला किया। पिछले कुछ दिनों में हजारों छात्र और उनके समर्थक सड़कों पर उतर आए थे और उनकी बर्खास्तगी के साथ-साथ देश की परीक्षा व्यवस्था में व्यापक सुधार की मांग कर रहे थे। हालांकि, प्रधानमंत्री मोदी ने अभी तक सार्वजनिक रूप से उनके इस्तीफे को स्वीकार करने की घोषणा नहीं की है।



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पहाड़ों की मैगी खाने का हो मन, घर पर तैयार करें रेसिपी, फूड एक्सपर्ट रितिका ने बताया तरीका


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आगरा की फूड एक्सपर्ट रितिका ने बताया की घर पर आसानी से पहाड़ो वाली मैगी बनाई जा सकती है. उन्होंने कहा की इसके लिए टमाटर, प्याज़, हरा ताज़ा धनिया, हरी मिर्च, मटर आदि एकत्र कर लेना है. टमाटर और प्याज़ को बारीक़ बारीक़ काट लेना है. अब किसी साफ बर्तन में इसे बनाने के लिए तेल घी या बटर का उपयोग किया जाता है. प्याज़ को अच्छे से भून लें, फिर टमाटर और सभी सब्जियों को अच्छे से मिक्स कर लें.

आगराः उत्तर प्रदेश के आगरा को खास व्यंजनों के लिए बेहद प्रसिद्ध माना जाता है. हर तरह का फ़ूड आगरा में आसानी से उपलब्ध हो जाता है. आज हम आपको स्पेशल पहाड़ो वाली मैगी की पुरे रेसिपी बताने जा रहे है, जिसे आप आसानी से घर में बना कर बच्चों और दोस्तों को खिला सकते है. आगरा की फ़ूड एक्सपर्ट रितिका ने बताया पहाड़ो में मिलने वाली मैगी के लिए, टमाटर, मटर, हरा धनिया, प्याज़ आदि की जरूरत पड़ती है. उन्होंने कहा की आसानी से इसे घर में बनाया जा सकता है जो आपको एकदम पहाड़ो वाला स्वाद देगा.

ये चीज डालते ही मैगी तैयार

आगरा की फूड एक्सपर्ट रितिका ने बताया की घर पर आसानी से पहाड़ो वाली मैगी बनाई जा सकती है. उन्होंने कहा की इसके लिए टमाटर, प्याज़, हरा ताज़ा धनिया, हरी मिर्च, मटर आदि एकत्र कर लेना है. टमाटर और प्याज़ को बारीक़ बारीक़ काट लेना है. अब किसी साफ बर्तन में इसे बनाने के लिए तेल घी या बटर का उपयोग किया जाता है. प्याज़ को अच्छे से भून लें, फिर टमाटर और सभी सब्जियों को अच्छे से मिक्स कर लें.

इससे पहले तेल या घी में जीरा या राई जरूर डालें उसी से इसमें स्वाद आता है. इसके बाद इसमें थोड़ा पानी एड कर लें और अब कच्ची या उबली मैगी को उसमे डाल लें. करीब 5 से 10 मिनट तक उसे पकने दें, आप देखेंगे की मैगी का कलर निकल कर सामने आने लगा है वहीं इसकी खुश्बू आपको पहाड़ो की याद दिला देगी. इस तरह से आपकी पहाड़ो वाली मैगी बनकर तैयार है.

खाने वाले करेंगे तारीफ

आगरा की फ़ूड एक्सपर्ट रितिका ने कहा कि जो भी इस रेसिपी से पहाड़ो वाली मैगी खायेगा वह आपकी तारीफ करता रहेगा. उन्होंने कहा कि दरअसल घर में बनी यह मैगी स्वास्थ्य के लिए उतनी नुकसानदेय नहीं है जितनी बाजार की होती है, रितिका ने कहा की घर में ज़ब इसे बनाया जाता है तो साफ सफाई, ताज़ा और स्वच्छ सब्ज़ीयां आदि का ध्यान रखा जाता है. इसके आलावा कोई नुकसान वाले मसाले भी नहीं डाले जाते है. घर में अपने हिसाब से सब्जियों का डाला जा सकता है जिससे इसका स्वाद और भी ज्यादा बढ़ जाता है…

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …

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अशोक शर्मा के बाद यश ठाकुर ने किया डेब्यू, भारतीय टीम ने दूसरे मैच की प्लेइंग इलेवन में किया बदलाव


तेज गेंदबाज यश ठाकुर ने जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे मैच में भारत के लिए डेब्यू किया है। जिम्बाब्वे ने मैच में टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया।

भारतीय टीम ने शनिवार को जिम्बाब्वे के खिलाफ दूसरे मुकाबले में प्लेइंग इलेवन में एक बदलाव किया है। तेज गेंदबाज यश ठाकुर भारत के लिए डेब्यू कर रहे हैं। जिम्बाब्वे ने हरारे में खेले जा रहे मुकाबले में टॉस जीतकर पहले गेंदबाजी करने का फैसला किया है।

यश ठाकुर ने किया डेब्यू

जिम्बाब्वे के कप्तान सिकंदर रजा ने तीन मैचों की श्रृंखला के दूसरे टी20 में शनिवार को यहां टॉस जीत कर भारत को पहले बल्लेबाजी का न्योता दिया। भारत ने अशोक शर्मा की जगह यश ठाकुर को मौका दिया है जबकि जिम्बाब्वे ने अपनी एकादश में कोई बदलाव नहीं किया है।

श्रेयस अय्यर-सिकंदर रजा का बयान

जिम्बाब्वे के कप्तान सिंकर रजा ने कहा कि हम पहले गेंदबाजी करना चाहते हैं। विकेट पिछले मुक़ाबले से अलग रही है, लेकिन हम जानते हैं कि हरारे में शुरुआत में गेंदबाज़ों को मदद मिलती है इसलिए हम इसका फायदा उठाने चाहेंगे और देखेंगे कि बाद में बल्लेबाज़ी के लिए हमारे सामने क्या लक्ष्य आता है। हमारी टीम में कोई बदलाव नहीं है।

वहीं भारतीय टीम के कप्तान श्रेयस अय्यर ने कहा कि हम पहले बल्लेबाजी करना चाहते थे। यह पिच पिछले मैच की तरह टैकी नहीं लग रही है, और उछाल भी समान रहने की उम्मीद है। हमारी टीम में एक बदलाव है। अशोक शर्मा की जगह यश ठाकुर आए हैं।

श्रेयस अय्यर की अगुवाई वाली युवा भारतीय टीम ने पहले मैच में सात विकेट से शानदार जीत के साथ सीरीज पर अपनी मजबूत पकड़ बना ली है। टीम ने बल्ले और गेंद दोनों से बेहतरीन प्रदर्शन किया। एक और जीत भारत को सीरीज में 2-0 की अजेय बढ़त दिला देगी, जबकि हार जिम्बाब्वे को एक और घरेलू सीरीज हार की ओर धकेल देगी।

पहला मैच भारत ने जीता

भारत की शुरुआती जीत जबरदस्त बल्लेबाजी और अनुशासित गेंदबाजी रही। युवा सलामी बल्लेबाज वैभव सूर्यवंशी ने शानदार अंदाज बल्लेबाजी करते हुए 19 गेंदों में अपना पहला अंतरराष्ट्रीय अर्धशतक जड़कर जिम्बाब्वे के गेंदबाजी आक्रमण को ध्वस्त कर दिया, जबकि ईशान किशन (35) और कप्तान अय्यर (28 नाबाद) ने 40 गेंदें शेष रहते हुए 126 रन का लक्ष्य हासिल कर लिया।

इससे पहले, भारत के युवा तेज गेंदबाजो ने मैच का माहौल तैयार किया। मयंक यादव ने मैच की पहली ही गेंद पर ब्रायन बेनेट को आउट किया और 18 रन देकर 2 विकेट लिए, जिसके लिए उन्हें ‘प्लेयर ऑफ़ द मैच’ का पुरस्कार मिला। प्रिंस यादव ने दो विकेट लिए, जबकि रवि बिश्नोई और शिवम दुबे ने भी योगदान दिया, जिससे ज़िम्बाब्वे की टीम 7 विकेट पर 125 रन ही बना सकी।

इंडिया-जिम्बाब्वे प्लेइंग इलेवन

भारत (प्लेइंग इलेवन): वैभव सूर्यवंशी, अभिषेक शर्मा, इशान किशन (विकेटकीपर), श्रेयस अय्यर (कप्तान), तिलक वर्मा, रिंकू सिंह, शिवम दुबे, रवि बिश्नोई, प्रिंस यादव, यश ठाकुर, मयंक यादव

जिम्बाब्वे (प्लेइंग इलेवन): ब्रायन बेनेट, बेन कुरेन, डायोन मायर्स, सिकंदर रजा (कप्तान), रयान बर्ल, वेस्ली मधेवेरे, तदिवानाशे मारुमनी (विकेटकीपर), ब्रैड इवांस, न्यूमैन न्यामुरी, रिचर्ड नगारवा, ब्लेसिंग मुज़ारबानी



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जैसलमेर में बनकर तैयार हुआ 28 किमी बड़ा वाटर बैंक: 242 करोड़ से बना, नहरबंदी में भी मिलेगा 365 दिन पानी; CM करेंगे उद्घाटन – Jaisalmer News




पश्चिमी राजस्थान के थार मरुस्थल में पेयजल संकट दूर करने के लिए बड़ी सफलता मिली है। नाचना तहसील के घांटियाली में इंदिरा गांधी नहर के आरडी-1356 पर 242 करोड़ रुपए की लागत से 28 किलोमीटर घेरे वाला विशाल कृत्रिम जलाशय तैयार किया गया है। जल जीवन मिशन के तहत बने इस प्रोजेक्ट से मानसून के दौरान पंजाब से आने वाला अतिरिक्त जल संचित किया जाएगा, जो पहले सीमा पार बहकर बेकार हो जाता था। लगभग 33 फीट (10 मीटर) गहरे इस जलाशय की क्षमता 1413 मिलियन क्यूबिक फीट (MCFT) है। इससे जैसलमेर, बाड़मेर और आसपास के इलाकों की करीब 50 लाख आबादी को सालभर पीने का शुद्ध पानी आसानी से उपलब्ध हो सकेगा। तीन साल में ये बनकर तैयार हुआ है और बताया जा रहा है कि बहुत जल्द प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इसका उद्घाटन करेंगे। 76 लाख वर्ग मीटर में बिछाई स्पेशल प्लास्टिक शीट रेगिस्तान की रेतीली जमीन में पानी के रिसाव को रोकने के लिए इंजीनियरिंग का अनोखा तरीका अपनाया गया है। लगभग 76 लाख स्क्वायर मीटर क्षेत्र में 300 माइक्रोन की स्पेशल एचडीपीई (HDPE) प्लास्टिक शीट बिछाई गई है। इस शीट को सुरक्षित रखने के लिए इसके ऊपर ढाई फीट मोटी मिट्टी की परत डाली गई है, जिससे पानी जमीन में नहीं रिसेगा। मोहनगढ़ फिल्टर प्लांट से होगी पानी की सप्लाई मानसून में नहर के अतिरिक्त पानी को 1 किलोमीटर लंबे एस्केप चैनल और दो बड़े गेटों के जरिए इसमें स्टोर किया जाएगा। यहां से पानी को पाइपलाइन के माध्यम से मोहनगढ़ फिल्टर प्लांट भेजा जाएगा, जहां से साफ होकर पानी सीधे जैसलमेर और बाड़मेर जिले के गांवों व कस्बों तक पहुंचेगा। नहरबंदी के समय मिलेगा 365 दिन बैकअप हर साल इंदिरा गांधी नहर की मरम्मत या सफाई (नहरबंदी) के दौरान पश्चिमी राजस्थान में पानी का संकट गहरा जाता था। यह नया जलाशय ‘वाटर बैंक’ की तरह काम करेगा, जिससे नहरबंदी के दिनों में भी जल आपूर्ति ठप नहीं होगी और लोगों को 365 दिन बिना रुकावट पानी मिलता रहेगा। साल 2023 में शुरू हुआ था निर्माण कार्य साल 2023 में शुरू हुई इस महत्वाकांक्षी परियोजना को 400 मजदूरों और 10 इंजीनियरों की टीम ने मिलकर पूरा किया है। 1356 एस्केप रिजर्वायर का काम पूरा होने के बाद अब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जल्द ही इसका औपचारिक उद्घाटन कर इसे जनता को समर्पित करेंगे।



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सरकारी मदद से मत्स्य पालक की तरक्की को लगे पंख: हरदोई में 30 लाख के सरकारी अनुदान और 8 टैंकों से मिली सफलता – Hardoi News




उत्तर प्रदेश सरकार के मत्स्य विभाग द्वारा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 30 लाख रुपये के सरकारी अनुदान और तकनीकी मार्गदर्शन से तहसील सण्डीला के युवा मत्स्य पालक अंकित विशाल ने सफलता की मिसाल पेश की है। उन्होंने 8 आधुनिक टैंकों (आरएएस) के जरिए सालाना 15 लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया है। शनिवार सुबह 1:06 बजे सहायक निदेशक मत्स्य डॉ. मुनीश कुमार ने प्रेस नोट के माध्यम से यह जानकारी दी। ग्रेजुएशन के बाद नौकरी न मिलने से अंकित की आर्थिक स्थिति बिगड़ने लगी थी, जिसके बाद उनके मन में मछली पालन व्यवसाय करने की उत्सुकता जगी। मछली पालन के बारे में कोई जानकारी न होने पर वे जिले के मत्स्य विभाग कार्यालय पहुंचे, जहाँ उन्होंने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना जैसी विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। मत्स्य विभाग, उत्तर प्रदेश के मार्गदर्शन में अंकित ने आईसीएआर-सीआईएफए, केंद्रीय मत्स्य शिक्षा संस्थान, सीआईएफआरआई और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों से आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों का विशेष प्रशिक्षण भी प्राप्त किया। वर्ष 2022-23 में उन्होंने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत री-सर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) की स्थापना की, जिसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार के मत्स्य विभाग द्वारा 30 लाख रुपये का अनुदान प्रदान किया गया। वर्तमान में उनकी इस इकाई में 8 टैंक संचालित हैं, जिनमें लगभग 60,000 मछलियों का पालन किया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज के उपयोग से उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 40 से 45 टन मत्स्य उत्पादन प्राप्त हो रहा है, जिससे वे 10 से 15 लाख रुपये तक का वार्षिक शुद्ध लाभ अर्जित कर रहे हैं। इस उद्यम से स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं।



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