Wednesday, May 6, 2026
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जिसपर अमेरिका को आंख दिखाता रहा ड्रैगन, भारत ने 27 साल बाद वही दुखती नस दबा दी


Indian Deligation to Taiwan: भारत ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में कूटनीतिक सरगर्मी तेज कर दी है. चीन के कड़े विरोध और ‘वन चाइना पॉलिसी’ की धमकियों के बीच, भारत के युवा राजनेताओं का एक उच्च-स्तरीय सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल इस समय ताइवान की यात्रा पर है. यह दौरा न केवल व्यापारिक और तकनीकी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके राजनीतिक निहितार्थ बीजिंग की नींद उड़ाने के लिए काफी हैं. बता दें कि ये दौरा इस मामले में भी खास है कि क्योंकि 27 साल पहले 1999 में नरेंद्र मोदी (पीएम मोदी) ताइवान के दौरे पर गए थे. भारतीय डेलिगेशन से पहले साल 2022 में नेन्सी पेलोसी के नेतृत्व में अमेरिकी डेलिगेशन ताइवान के यात्रा पर पहुंचा था. जिसका चीन ने जमकर विरोध किया था. साथ ही उसने ताइवान की खाड़ी में अपने सैन्य पेट्रोलिंग बढ़ा दिए थे.

ताइवान के विदेश मंत्रालय (MOFA) द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, भारत का यह प्रतिनिधिमंडल 4 मई से 9 मई 2026 तक ताइवान के दौरे पर रहेगा. इस डेलिगेशन की सबसे बड़ी खासियत इसकी विविधता है. इसमें सत्तापक्ष और विपक्ष के कई प्रमुख दलों के युवा चेहरे शामिल हैं, जिसमें भारतीय जनता पार्टी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, राष्ट्रीय पीपल्स पार्टी और शिवसेना (यूबीटी) शामिल है. प्रतिनिधिमंडल के सदस्य अपने प्रवास के दौरान ताइवान की विभिन्न सरकारी एजेंसियों के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे और द्विपक्षीय हितों पर चर्चा करेंगे.

भारत और ताइवान दोस्ती की नई इबारत लिख रहे हैं.

सिर्फ राजनीति नहीं, तकनीक पर समझौता

प्रतिनिधिमंडल का यह दौरा काफी खास है. ताइवान के बयान के अनुसार, भारतीय नेता मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेंगे:

  • आर्थिक और व्यापारिक टेक्नोलॉजी: ताइवान सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स का वैश्विक केंद्र है.
  • शिक्षा और संस्कृति: दोनों देशों के बीच अकादमिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना.
  • लोकतंत्र और मानवाधिकार: एक लोकतांत्रिक देश के रूप में ताइवान की कार्यप्रणाली को समझना.

ताइवान सरकार ने भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक ‘अहम साझेदार’ बताया है और विस्तृत कूटनीति के तहत सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है.

1999 का वो दौरा

इस दौरे की चर्चा के बीच साल 1999 का वह वाकया भी ताजा हो गया है. जब वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (तब वे भाजपा के महासचिव थे) ताइवान के दौरे पर गए थे. उस समय भी चीन ने भारतीय नेताओं के ताइवान जाने का पुरजोर विरोध किया था. हालांकि, मोदी ने उस दौर में भी भारत-ताइवान संबंधों की संभावनाओं को भांप लिया था. आज, जब भारत ‘एक्ट ईस्ट’ नीति पर काम कर रहा है, तो युवा नेताओं का यह दौरा उसी कड़ी का विस्तार माना जा रहा है.

चीन की तिलमिलाहट; भारत की कूटनीति

चीन हमेशा से ताइवान को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है. दुनिया के किसी भी देश के प्रतिनिधिमंडल के वहां जाने को अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करार देता है. पहले भी कई बार भारतीय सांसदों के ताइवान दौरे पर चीन ने आधिकारिक विरोध दर्ज कराया है. लेकिन भारत ने ‘सामरिक स्वायत्तता’ का परिचय देते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी कूटनीतिक यात्राओं और व्यापारिक संबंधों के लिए स्वतंत्र है.

अमेरिका के डेलिगेशन पर भी बिलबिलाया था चीन

अगस्त 2022 में तत्कालीन अमेरिकी हाउस स्पीकर नैन्सी पेलोसी के नेतृत्व में जब अमेरिकी डेलिगेशन ताइवान पहुंचा, तो बीजिंग की प्रतिक्रिया ने पूरी दुनिया को युद्ध की दहलीज पर लाकर खड़ा कर दिया था. चीन ने इसे अपनी ‘वन चाइना पॉलिसी’ का सीधा उल्लंघन और संप्रभुता पर हमला करार दिया. जवाब में चीनी सेना (PLA) ने ताइवान को छह तरफ से घेरकर अब तक का सबसे बड़ा और आक्रामक सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया, जिसमें पहली बार ताइवान के ऊपर से मिसाइलें दागी गईं. इस तनाव के कारण न केवल वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई, बल्कि वाशिंगटन और बीजिंग के बीच कूटनीतिक रिश्ते अपने सबसे निचले स्तर पर पहुँच गए.

संबंध खराब हो गए थे

इस ऐतिहासिक यात्रा के बाद अमेरिका और चीन के बीच सैन्य संवाद और जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत पूरी तरह ठप हो गई थी. चीन ने ताइवान पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए और अपने युद्धपोतों व लड़ाकू विमानों की घुसपैठ को एक ‘न्यू नॉर्मल’ (नया सामान्य) बना दिया, जो आज भी जारी है. वहीं, अमेरिका ने पीछे हटने के बजाय ताइवान के साथ अपने ‘अनौपचारिक’ संबंधों को और मजबूत किया और क्षेत्र में अपनी नौसैनिक मौजूदगी बढ़ा दी.

भारतीय प्रतिनिधिमंडल ताइवान के दौरे पर कब से कब तक है?
ताइवान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह प्रतिनिधिमंडल 4 मई से 9 मई 2026 तक के दौरे पर है.

इस प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन से भारतीय राजनीतिक दल शामिल हैं?
इस डेलिगेशन में भारतीय जनता पार्टी (BJP), राष्ट्रीय पीपल्स पार्टी (NPP), कांग्रेस, और शिवसेना (यूबीटी) समेत कई अन्य दलों के युवा राजनेता शामिल हैं.

प्रतिनिधिमंडल के सदस्य ताइवान में किन विषयों पर चर्चा करेंगे?
सदस्य मुख्य रूप से आर्थिक और व्यापारिक टेक्नोलॉजी, शिक्षा, संस्कृति, लोकतंत्र और मानवाधिकारों से जुड़े विषयों को समझने और सहयोग बढ़ाने पर चर्चा करेंगे.

नरेंद्र मोदी ने ताइवान का दौरा कब किया था?
नरेंद्र मोदी ने साल 1999 में ताइवान का दौरा किया था, जब वे भाजपा के पदाधिकारी थे.

ताइवान के विदेश मंत्रालय ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की क्या भूमिका बताई है?
ताइवान के आधिकारिक बयान में भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक ‘अहम साझेदार’ बताया गया है.



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2 एक्ट्रेस, पर्दे पर बहन, रियल लाइफ में ‘दुश्मन’, दोनों ने शादीशुदा मर्द को दिया दिल


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80 के दशक में हिंदी सिनेमा साउथ की दो एक्ट्रेस ने रातोंरात बॉलीवुड में जगह बनाई. दोनों ने अपनी एक्टिंग से सबको दीवाना बना लिया. दोनों एक्ट्रेस की किस्मत का सितारा ऐसा बुलंद हुआ कि बॉलीवुड में पूरे एक दशक राज किया. दोनों एक्ट्रेस ने कई बार पर्दे पर सगी बहनों का भी रोल निभाया. दोनों एक्ट्रेस ने त्याग की मूरत बनकर दर्शकों का खूब दिल जीता. रियल लाइफ की हकीकत चौंकाने वाली है. दोनों एक्ट्रेस एकदूसरे की शक्ल भी देखना पसंद नहीं करती थीं. सबसे दिलचस्प बात यह है कि दोनों ने शादीशुदा मर्द को दिल दिया. खुशी-खुशी दूसरी बीवी बन गईं. ये दोनों एक्ट्रेस कौन थीं, आइये जानते हैं…….

बॉलीवुड के इतिहास पर गौर से नजर डाले तो साफ पता चलता है कि साउथ से आने वाली एक्ट्रेस का 60 के दशक से ही दबदबा रहा है. पहले वैजयंती माला, फिर हेमा मालिनी और रेखा ने बॉलीवुड में दशकों राज किया. रेखा 1970 के आसपास बॉलीवुड में आई थीं. इसके बाद दो और एक्ट्रेस ने बॉलीवुड में एंट्री ली. इन दोनों को बॉलीवुड इंडस्ट्री में लाने का श्रेय जीतेंद्र को जाता है. दोनों ने एक दशक तक राज किया. हम जया प्रदा और श्रीदेवी की बात कर रहे हैं. दोनों एक्ट्रेस ने साथ में कई फिल्में कीं. यहां तक कि फिल्मों में सगी बहनों का रोल निभाया लेकिन रियल लाइफ में एकदूसरे से बात नहीं की. आइये जानते हैं दोनों एक्ट्रेस की जिंदगी से जुड़े किस्से….

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जया प्रदा और श्रीदेवी के साथ में फोटो देखकर कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता कि दोनों अभिनेत्रियों के बीच किसी तरह का ‘कोल्ड वॉर’ रहा होगा. दोनों ही एक्ट्रेस फोटो में खुश नजर आ रही हैं लेकिन असल जिंदगी की सच्चाई बेहद चौंकाने वाली है. दोनों एक्ट्रेस ने सिल्वर स्क्रीन पर सगी बहनों का रोल भी किया. दोनों ने साउथ इंडस्ट्री में नाम कमाने के बाद हिंदी सिनेमा में नाम कमाया. जीतेंद्र ही दोनों को लेकर बॉलीवुड में आए थे. खुद जया प्रदा ने अपने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि श्रीदेवी की उनसे कोई बातचीत नहीं होती थी. दोनों के बीच ईगो की लड़ाई थी.

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दोनों ने 1980 के दशक की शुरुआत में तेलुगू सिनेमा में काम किया. बॉलीवुड में जया प्रदा-श्रीदेवी ने 8 फिल्मों में एकसाथ काम किया है. ये फिल्में थीं : मवाली (1983), तोहफा (1984), मकसद (1984), नया कदम (1984) आखिरी रास्ता (1986), औलाद (1987), मजाल (1987), मैं तेरी दुश्मन (1989) और फरिश्ते (1991). मवाली और तोहफा फिल्म से ही दोनों की जोड़ी हिट हो गई. दिलचस्प बात यह है कि ज्यादातर फिल्मों में दोनों एक्ट्रेस ने बहनों का किरदार निभाया. सिल्वर स्क्रीन पर एकदूसरे पर प्यार लुटाया और दर्शकों का दिल लूट लिया मगर सच्चाई यह है कि दोनों एक्ट्रेस सेट पर दूर-दूर बैठती थीं.

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एक बार राजेश खन्ना और जीतेंद्र ने श्रीदेवी-जयाप्रदा के बीच दोस्ती कराने की ठानी. दोनों को एक कमरे में बंद कर दिया. जयाप्रदा ने दिलचस्प किस्सा शेयर करते हुए बताया था कि राजेश खन्ना और जीतेंद्र ने हम दोनों को लंच टाइम पर एक कमरे में एक घंटे के लिए बंद कर दिया था. उनका मानना था कि एकदूसरे के पास बैठने से हमारी बातचीत शुरू हो जाएगी. आपस में बातचीत का माहौल बनेगा लेकिन जब उन्होंने दरवाजा खोला और पूछा कि बताओ क्या हुआ? मैंने कहा कुछ नहीं. श्रीदेवी हंसकर चली गईं और मैं भी चली गई. हम दोनों अलग-अलग दिशा में मुंह करके बैठे रहे थे. कोई बातचीत ही नहीं हुई. यह किस्सा ‘मकसद’ फिल्म की शूटिंग के दौरान का है.

श्रीदेवी को हिंदी सिनेमा में लाने का श्रेय जीतेंद्र को जाता है. दिलचस्प बात यह है कि रेखा ने जीतेंद्र को चिढ़ाया था. दरअसल, दोनों श्रीदेवी की तेलुगू पिक्चर देख रहे थे. इसी बीच रेखा ने कहा कि तुम अगली फिल्म इस हीरोइन के साथ कर लो. जीतेंद्र ने प्रोड्यूसर राघवेंद्र राव ने बात की. तेलुगू में हिम्मतवाला में जया प्रदा ने काम किया था. जब हिंदी में इसका रीमेक बनाया गया यह फिल्म जीतेंद्र-श्रीदेवी के साथ बनाई गई. हिम्मतवाला ने श्रीदेवी को हिंदी सिनेमा में गजब की पॉप्युलैरिटी दी. वो रातोंरात फेमस हो गईं.

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स्टारडम की रेस में श्रीदेवी ने बाजी मारी. कर्मा (1986) और जाबांज (1986) के बाद 1986 की ‘नागिन’ फिल्म श्रीदेवी के करियर के लिए टर्निंग प्वॉइंट साबित हुई. फिर मिस्टर इंडिया ने उनके सितारे बुलंद कर दिए. वो पहली लेडी सुपर स्टार बन गई. ‘मिस्टर इंडिया’ के लिए श्रीदेवी को 11 लाख रुपये की फीस मिली थी, जो उस समय किसी भी अभिनेत्री के लिए बहुत बड़ी रकम थी. श्रीदेवी की मां ने 10 लाख रुपये मांगे थे, लेकिन बोनी कपूर ने उन्हें 11 लाख रुपये दिए थे. बाद में 1996 में श्रीदेवी ने बोनी कपूर से शादी की.

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बोनी कपूर और श्रीदेवी की लव स्टोरी बहुत ही रोचक है. इसकी शुरुआत बोनी कपूर के एकतरफा प्यार से हुई थी. बोनी ने 28 साल की उम्र में पहली शादी मोना शौरी से की थी. बेटे अर्जुन कपूर और बेटी अंशुला के पिता होने होने के बावजूद वो श्रीदेवी को दिल दे बैठे थे. मोना-बोनी कपूर के बीच श्रीदेवी की एंट्री हुई तो 13 साल बाद दोनों अलग हो गए. 1996 में मोना से बोनी कपूर ने तलाक लिया और श्रीदेवी से जल्दबाजी में शादी कर ली थी. जब श्रीदेवी ने शादी की तो वो प्रेग्नेंट थीं.

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फिल्म इंडस्ट्री में अक्सर श्रीदेवी और मिथुन चक्रवती के अफेयर की चर्चा होती है. दोनों ने वतन के रखवाले (1987) , वक्त की आवाज (1987), जाग उठा इंसान (1984) और गुरु (1989) जैसी फिल्मों में साथ में काम किया. कहा तो यह भी जाता है कि मिथुन के दबाव में श्रीदेवी ने बोनी कपूर को राखी भी बांधी थी. मिथुन शादीशुदा थे और अपनी पत्नी योगिता बाली से तलाक नहीं लेना चाहते थे. दोनों में अलगाव हो गया. ऐसे में बोनी ने श्रीदेवी से अपनी नजदीकियां बढ़ाईं. इस कहानी में अहम मोड़ तब आया, जब श्रीदेवी की मां बहुत बीमार हुईं. अमेरिका में उनके इलाज की व्यवस्था बोनी कपूर ने करवाई. हॉस्पिटल के बिल बोनी ने चुकाए. ऐसे में श्रीदेवी उनसेबेहद प्रभावित हुईं और उन्होंने बोनी से शादी के लिए हामी भर दी.

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जया प्रदा की लव लाइफ की बात करें तो ‘शराबी’ और ‘संजोग’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अपने अभिनय की अमिट छाप दर्शकों के दिल में छोड़ी. साल 1984 में ‘तोहफा’ के बाद हिट होने के बाद जयाप्रदा रातोंरात स्टार बन गईं. उन्होंने शादीशुदा फिल्म प्रोड्यूसर श्रीकांत नाहटा से प्यार हुआ और 1986 में जया से शादी कर ली. दिलचस्प बात यह है कि श्रीकांत नाहटा ने जया प्रदा से शादी तो कर ली लेकिन अपनी पहली पत्नी को तलाक नहीं दिया. ऐसे में जया प्रदा का उनसे खूब विवाद हुआ. श्रीकांत नाहटा ने पहली शादी चंद्रा से की थी. वो तीन बच्चों के पिता थे. कहा जाता है कि जया मां बनना चाहती थीं लेकिन श्रीकांत इसके लिए तैयार नहीं हुए. जया प्रदा ने श्रीकांत से शादी की. अपनी मांग में सिंदूर सजाया लेकिन पत्नी का दर्जा कभी नहीं मिल पाया.

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गाजियाबाद में लिफ्ट सुरक्षा पर बड़ा संकट, 5000 में से 1900 का रजिस्ट्रेशन नहीं


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Ghaziabad News: गाजियाबाद की गौर ग्रीन व्यू सोसाइटी में भीषण आग के बाद प्रशासन हाईराइज इमारतों की सुरक्षा को लेकर सख्त है. विद्युत सुरक्षा विभाग की जांच में सामने आया कि जिले की 5000 में से 1900 लिफ्ट बिना पंजीकरण के चल रही हैं, जबकि 200 सोसाइटियों के पास बिजली सुरक्षा की NOC तक नहीं है. मानकों की अनदेखी पर अब तक 10 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना वसूला जा चुका है. प्रशासन ने सभी बिल्डर्स और AOA को सुरक्षा दुरुस्त करने के कड़े निर्देश दिए हैं.

Ghaziabad News: इंदिरापुरम की गौर ग्रीन व्यू सोसाइटी में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे प्रशासन को हिलाकर रख दिया है. 9 फ्लैट्स को खाक करने वाली इस आग के बाद अब गाजियाबाद जिला प्रशासन हाईराइज इमारतों की सुरक्षा को लेकर आर-पार के मूड में है. जिलाधिकारी के सख्त निर्देशों के बाद 17 विभागों की टीम एक्शन मोड में है, जिसमें विद्युत सुरक्षा विभाग ने सोसाइटियों की कुंडली खंगालना शुरू कर दिया है. जांच में जो आंकड़े सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले और डराने वाले हैं.

बिजली, फायर और लिफ्ट संचालन की हो रही है बारीकी से जांच
गौर ग्रीन व्यू सोसाइटी की घटना के बाद जिलाधिकारी ने जिले की सभी बहुमंजिला इमारतों के सुरक्षा ऑडिट के निर्देश दिए थे. इसी क्रम में विद्युत सुरक्षा विभाग जिलेभर की हाईराइज सोसाइटियों में सघन जांच अभियान चला रहा है. ऑडिट के दौरान मुख्य रूप से बिजली सुरक्षा इंतजाम, फायर फाइटिंग सिस्टम, इलेक्ट्रिकल वायरिंग, ट्रांसफार्मर की स्थिति और लिफ्ट संचालन के मानकों की बारीकी से जांच की जा रही है.

गाजियाबाद में 1900 लिफ्ट बिना पंजीकरण के संचालित
जांच में सुरक्षा को लेकर एक बड़ी लापरवाही सामने आई है. विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, गाजियाबाद में करीब 5000 लिफ्ट चल रही हैं, जिनमें से लगभग 1900 लिफ्ट का अभी तक कोई पंजीकरण नहीं कराया गया है. बिना रजिस्ट्रेशन के चल रही ये लिफ्ट रेजिडेंट्स की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बनी हुई हैं. विभाग ने ऐसी सोसाइटियों के बिल्डर्स और अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AOA) को नोटिस थमाना शुरू कर दिया है.

लगाया जा रहा जुर्माना, सुरक्षा मानकों के साथ कोई समझौता नहीं
विद्युत सुरक्षा विभाग के अनुसार, कई सोसाइटियों ने 15 फरवरी 2026 की समयसीमा बीत जाने के बाद भी लिफ्ट पंजीकरण नहीं कराया है. अब ऐसे मामलों में 10 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा रहा है. विभाग पिछले एक महीने में 10 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना वसूल चुका है. अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा मानकों के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा.

200 हाईराइज इमारतों के पास नहीं है बिजली सुरक्षा NOC
सहायक निदेशक विद्युत सुरक्षा सौरभ सिंह ने बताया कि जांच के दौरान गौर ग्रीन व्यू सोसाइटी के पास भी इलेक्ट्रिकल सेफ्टी एनओसी नहीं पाई गई. हालांकि, जांच में आग की वजह शॉर्ट सर्किट नहीं मिली है, लेकिन जिले की 200 से अधिक ऐसी हाईराइज इमारतें चिन्हित की गई हैं जिनके पास एनओसी नहीं है. विभाग ने सभी को जल्द से जल्द मानक पूरा करने और लिफ्ट का रजिस्ट्रेशन कराने की अपील की है ताकि भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके.

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Rahul Goel

राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें



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पत्नी के तर्क के आगे झुके गुरुदत्त, मोहम्मद रफी से गाना छीनकर हेमंत कुमार से गवाया


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गुरुदत्त फिल्म ‘प्यासा’ को लेकर कोई रिस्क नहीं लेना चाहते थे, इसलिए सभी गाने मोहम्मद रफी से गवाना चाहते थे. मगर उन्हें पत्नी गीता दत्त और अबरार अलवी की सिफारिश पर एक गाना हेमंत कुमार से गवाना पड़ा. आज उस सदाबहार गाने की गिनती हिंदी सिनेमा के सबसे दर्दभरे गानों में होती है. साहिर लुधियानवी के लिखे शब्दों को हेमंत कुमार की मखमली आवाज ने अमर बना दिया. गाना प्यार में मिलने वाली नाकामी को बड़ी शिद्दत से बयां करता है.

नई दिल्ली: 1957 में आई फिल्म ‘प्यासा’ के लगभग सभी गीत साहिर लुधियानवी ने लिखे थे और इनका संगीत एसडी बर्मन ने दिया था. फिल्म में जितने भी मेल ट्रैक थे, वह गायक मोहम्मद रफी को सोच कर लिखे गए थे. फिल्म के प्रोड्यूसर-डायरेक्टर गुरु दत्त भी उनसे ही गाना गवाने के पक्ष में थे. दरअसल, फिल्म ‘प्यासा’ के सभी गाने गहरे भाव और जज्बातों को समेटे हुए हैं, इसलिए गुरुदत्त कोई रिस्क न उठाते हुए उन्हें सिर्फ मोहम्मद रफी से गवाना चाहते थे. (फोटो साभार: IMDb)

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मगर जब ‘प्यासा’ के एक गाने को रिकॉर्ड करने की तैयारी चल रही थी, तब अचानक मोहम्मद रफी से वो गाना छींनकर हेमंत कुमार को दे दिया. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो गुरुदत्त जब गानों की मेकिंग पर बैठकें कर रहे थे, तब गीता दत्त और फिल्म के लेखक अबरार अलवी से उनकी बातचीत हुई. (फोटो साभार: AI से जेनरेटेड इमेज)

तीनों सितारे एक दिन कार से कहीं जाते वक्त गीतों पर बात कर रहे थे. जब गाने ‘जाने वो कैसे लोग थे जिनके प्यार को प्यार मिला’ का जिक्र आया, तो अबरार अलवी ने कहा कि क्यों न इस गीत को हेमंत कुमार से गवाया जाए. गुरुदत्त ने इनकार करते हुए कहा कि ‘प्यासा’ के सभी गाने मोहम्मद रफी साहब गा रहे हैं, हेमंत कुमार से क्यों गवाएं?

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गुरुदत्त के बगल में बैठी उनकी पत्नी गीता दत्त बातचीत को सुन रही थीं. चूंकि वह भी एक मशहूर गायिका थीं और गीतों की समझ रखती थीं, इसलिए उन्होंने अपना पक्ष रखना भी जरूरी समझा. वे बोलीं, ‘यह गाना दूसरी तरह का है. हेमंत कुमार की आवाज भी लॉ रेंज की है, तो इसमें हेमंत कुमार ही परफेक्ट रहेंगे. इसलिए, यह गाना हेमंत कुमार से ही गवाना चाहिए.’

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गुरुदत्त को पत्नी गीता दत्त की बातें तर्कसंगत लगीं. वे भी मशहूर गाने को हेमंत कुमार से गवाने को तैयार हो गए. फिल्म ‘प्यासा’ के सभी गाने गहरे भाव और जज्बातों को समेटे हुए हैं. मगर ‘जाने वो कैसे लोग थे’ गाने पर हेमंत कुमार की आवाज खूब जंची. (फोटो साभार: AI से जेनरेटेड इमेज)

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कहते हैं कि एसडी बर्मन ने हेमंत कुमार से वादा किया था कि वे हर साल उनसे एक गाना जरूर गवाएंगे. फिल्म का दर्दभरा गाना आज भी लोग गुनगुनाना पसंद करते हैं, जिस पर गुरुदत्त ने कमाल की परफॉर्मेंस दी थी. (फोटो साभार: AI से जेनरेटेड इमेज)

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‘प्यासा’ में वहीदा रहमान और माला सिन्हा भी हैं. फिल्म मतलबी समाज में कवि के पहचान के स्ट्रगल को दिखाती है. इस फिल्म का संगीत यादगार है, जिसे फिल्म की तरह क्लासिक का दर्जा मिला है. (फोटो साभार: IMDb)

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गुरु दत्त पर फिल्माया गाना ‘जाने वो कैसे लोग थे’ एक ऐसे इंसान का दर्द है, जिसने दुनिया से सिर्फ प्यार मांगा, लेकिन बदले में उसे केवल अकेलापन और तिरस्कार मिला. एसडी बर्मन का संगीत और ‘प्यासा’ की उदास थीम इस गीत को दिल के बेहद करीब ले आती है. आज भी जब कोई अपनी तन्हाई या टूटे हुए सपनों को महसूस करता है, तो यह गाना उसकी रूह की आवाज बनकर सुकून पहुंचाता है.(फोटो साभार: IMDb)

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स्मार्ट मीटर बिल व्यवस्था में बदलाव पर खुशी: संभल में मानव विकास जन सेवा समिति ने सरकार के फैसले का स्वागत किया – Sambhal News




संभल में मानव विकास जन सेवा समिति ने बिजली के स्मार्ट मीटर और प्रीपेड व्यवस्था में सरकार के बदलाव के फैसले पर खुशी जताई। बुधवार को सीएचसी कार्यालय के सामने समिति के पदाधिकारियों और स्थानीय लोगों ने मिठाई बांटकर इस निर्णय का स्वागत किया। सरकार ने प्रीपेड व्यवस्था को बदलकर पोस्टपेड करने का फैसला लिया है, जिसे जनता के हित में एक बड़ा कदम बताया गया। समिति के अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद नाज़िम ने बताया कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद आम जनता को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। बिजली के बिल कई गुना बढ़कर आ रहे थे, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग पर आर्थिक बोझ बढ़ गया था। उन्होंने यह भी कहा कि प्रीपेड व्यवस्था में रिचार्ज खत्म होते ही बिजली कट जाने से दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा था। डॉ. नाज़िम के अनुसार, कई जगहों पर 1000 रुपए का रिचार्ज कराने के कुछ ही दिनों बाद बिजली कटने के मामले सामने आए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मोहल्लों में बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं की बिजली आपूर्ति अचानक बंद हो जाती थी, जिससे जनता में असंतोष बढ़ रहा था। जनता की इन्हीं समस्याओं को देखते हुए सरकार ने प्रीपेड प्रणाली को हटाकर पोस्टपेड व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। समिति ने इसे जनहित में एक सराहनीय कदम बताया है। समिति का मानना है कि इस फैसले से आम जनता, खासकर गरीब वर्ग को बड़ी राहत मिलेगी। इस अवसर पर फारुख जमाल ने कहा कि सरकार के इस फैसले से लोगों में खुशी है, जिसके चलते मिठाई बांटकर जश्न मनाया गया। उन्होंने इस निर्णय को जनता की आवाज का सम्मान बताया। कार्यक्रम में मोहसिन अली, मास्टर सफदर, कमांडर अली, चौधरी वसीम अली, महावीर सिंह यादव, कैलाश सिंह और ग़ज़राम सिंह सहित कई स्थानीय लोग उपस्थित थे। इस आयोजन के दौरान लोगों में उत्साह और संतोष का माहौल देखा गया।



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जमुई में कचरा प्लांट 3 साल में जर्जर: घटिया निर्माण से दीवारें ढहीं, छत उड़ी; सफाई ठप, ग्रामीणों की जांच की मांग – Jamui News




जमुई जिले के बरहट प्रखंड की नुमर पंचायत में लाखों रुपये की लागत से निर्मित कचरा प्रबंधन इकाई तीन साल में ही जर्जर हो गई है। लोहिया स्वच्छ अभियान और स्वच्छ भारत मिशन फेज-2 के तहत बनी यह यूनिट अब पूरी तरह विफल साबित हो रही है, जिससे स्वच्छता व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यूनिट की छत पर लगे टिन उड़ गए हैं, दीवारों में चौड़ी दरारें पड़ गई हैं और इसके कई हिस्से ढह चुके हैं। इतनी कम अवधि में संरचना का यह हाल निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि घटिया सामग्री के उपयोग और लापरवाही के कारण यह योजना शुरू होने से पहले ही दम तोड़ गई। यूनिट में डालने के बजाय बाहर ही फेंक दिया जाता इस बदहाल यूनिट का सीधा असर पंचायत की सफाई व्यवस्था पर पड़ा है। कचरा उठाव लगभग ठप हो गया है, जिसके परिणामस्वरूप गांव की गलियों में फिर से कचरे का अंबार लगने लगा है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, कभी-कभार कचरा उठाया भी जाता है तो उसे यूनिट में डालने के बजाय बाहर ही फेंक दिया जाता है। स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब यूनिट के बाहर ही कचरा जलाया जाता है। इससे पर्यावरण प्रदूषण बढ़ रहा है और लोगों के स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडरा रहा है। प्लास्टिक और अन्य हल्का कचरा हवा के साथ उड़कर घरों तक पहुंच रहा है। जिम्मेदार अधिकारियों और संवेदकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग ग्रामीणों ने इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और संवेदकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। प्रखंड स्वच्छता समन्वयक सुमित कुमार रावत ने बताया कि वे हाल ही में पदस्थापित हुए हैं और मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इसी संबंध में प्रखंड मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी योगेंद्र सिंह ने भी कहा है कि यूनिट की गुणवत्ता की जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।



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रीवा में बंद लिफ्ट में 1 घंटे फंसे 9 यात्री: बाहर निकालकर रेल विभाग ने टैक्सी से घर भेजा; सांकेतिक न लगा होने से परेशानी – Rewa News




रीवा रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म क्रमांक 2 पर में बुधवार को बड़ा हादसा टल गया। इतवारी ट्रेन से उतरे 9 यात्री मरम्मत के दौरान बंद पड़ी लिफ्ट के बीच में ही फंस गए। लिफ्ट अचानक बंद हो गई, जिससे सभी यात्री करीब एक घंटे तक अंदर ही कैद रहे। बंद पड़ी लिफ्ट में किसी तरह का संकेतक नहीं लगाया गया था। जहां बुधवार दोपहर रेलवे प्रबंधन की लापरवाही से यात्री धोखे में पड़कर उसमें सवार हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही रेलवे प्रशासन में हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंचे कर्मचारियों ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद सभी का चिकित्सकों द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया, जिसमें सभी यात्री सामान्य पाए गए। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था भी की। इनमें से 8 यात्रियों को मऊगंज जिले के बरॉव तक आर्टिगा टैक्सी से भेजा गया, जबकि कोरवा (छत्तीसगढ़) से रामपुर नैकिन, जिला सीधी जा रही एक महिला यात्री को उसकी बच्ची सहित अलग से रवाना किया गया। घटना के बाद स्टेशन पर सुरक्षा व्यवस्था और लिफ्ट मरम्मत कार्य को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। यात्रियों ने बिना सुरक्षा मानकों के लिफ्ट चालू रहने पर नाराजगी भी जताई है।



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भूल जाओगे मटन-मशरूम, इतनी टेस्टी केले की सब्जी, ट्राई करें पहाड़ों की ये रेसिपी


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Banana Vegetable Recipe : अगर आप सोचते हैं कि केला सिर्फ फल है, तो पहाड़ों का ये तरीका जरूर ट्राई करें. यहां कच्चे केले की टेस्टी सब्जी बनती है. पहाड़ी इलाकों में लोग सीजन के हिसाब से, जो भी मिलता है, उसका बेहतरीन इस्तेमाल करना जानते हैं. कच्चे केले की ये सब्जी भी उसी में शामिल है. लोकल 18 से पिथौरागढ़ की नरवदा देवी बताती हैं कि कुछ ही मिनटों में आपकी पहाड़ी स्टाइल केले की सब्जी तैयार हो जाती है. इसे आप गरमा-गरम रोटी या चावल के साथ खा सकते हैं.

पिथौरागढ़. अगर आप सोचते हैं कि केला सिर्फ फल के तौर पर ही खाया जाता है, तो पहाड़ों का ये खास तरीका जानकर आपको जरूर हैरानी होगी. यहां केला सब्जी के रूप में भी खूब पसंद किया जाता है. कच्चे केले की सब्जी, जो स्वाद में जितनी अलग होती है, उतनी ही सेहत के लिए दमदार मानी जाती है. पहाड़ी इलाकों में लोग सीजन के हिसाब से, जो भी मिलता है, उसका बेहतरीन इस्तेमाल करना जानते हैं. कच्चे केले की ये सब्जी भी उसी का एक अच्छा उदाहरण है. इसे बनाने का तरीका बहुत ही आसान है और घर की साधारण सामग्री से ही तैयार हो जाती है. लोकल 18 से पिथौरागढ़ की नरवदा देवी बताती हैं कि सबसे पहले कच्चे केलों को अच्छे से धोकर उबाल लिया जाता है. जब केले नरम हो जाते हैं, तो उन्हें ठंडा करके छील लिया जाता है. आप चाहें तो इन्हें हल्का सा मैश कर सकते हैं या छोटे-छोटे टुकड़ों में काट सकते हैं.

क्यों डालते हैं छाछ

नरवदा देवी कहती हैं कि अब एक कढ़ाई में थोड़ा सा तेल या घी डालकर गरम करें. जैसे ही तेल गरम हो जाए, उसमें सरसों के दाने डालें. जब सरसों चटकने लगे, तो इसमें उबले हुए केले डाल दें. अब इसे अच्छे से चलाते हुए हल्का सा भून लें. इसके बाद इसमें डालें हल्दी, नमक और थोड़ा सा लाल मिर्च पाउडर. आप अपने स्वाद के अनुसार मसाले कम या ज्यादा कर सकते हैं. मसालों के साथ इसे अच्छे से मिलाकर कुछ मिनट तक पकाएं, ताकि केले में मसालों का स्वाद अच्छी तरह आ जाए. अब इस सब्जी का सबसे खास हिस्सा आता है छाछ. इसमें थोड़ा सा छाछ डाल दिया जाता है, जिससे सब्जी में हल्का खट्टापन और क्रीमी स्वाद आ जाता है. छाछ डालने के बाद इसे धीमी आंच पर कुछ देर पकने दें. धीरे-धीरे सब्जी गाढ़ी और खुशबूदार हो जाती है. बस, कुछ ही मिनटों में आपकी पहाड़ी स्टाइल केले की सब्जी तैयार हो जाती है. इसे आप गरमा-गरम रोटी या चावल के साथ खा सकते हैं.

जब कुछ अलग बनाना हो…

नरवदा देवी कहती हैं कि हमारे यहां ये सब्जी बचपन से बनती आ रही है. कच्चे केले की इस सब्जी में छाछ डालने से इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है. घर में जब कुछ अलग बनाना होता है, तो हम यही बनाते हैं, सबको बहुत पसंद आती है. अगर आप भी कुछ नया और पहाड़ी स्वाद ट्राई करना चाहते हैं, तो एक बार इस पहाड़ी स्टाइल केले की सब्जी जरूर बनाकर देखें. यकीन मानिए, इसका स्वाद आपको जरूर पसंद आएगा.

About the Author

Priyanshu Gupta

प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें



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ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ जयपुर में मनाएगी सेना: रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के साथ तीनों सेना प्रमुख रहेंगे मौजूद, ऑपरेशन से जुड़ी फिल्म करेंगे रिलीज – Jaipur News


ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ सेना जयपुर में मनाएगी। जयपुर स्थित साउथ वेस्टर्न कमांड में गुरुवार को कार्यक्रम आयोजित होगा। इसमें शामिल होने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ तीनों सेनाओं के प्रमुख जयपुर आएंगे। कार्यक्रम में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ

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भारतीय सेना ने 7 मई 2025 को पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया था। तब पाकिस्तान से लगती लंबी सीमा, सैन्य ठिकानों की मौजूदगी और सीमावर्ती जिलों की संवेदनशीलता के कारण ऑपरेशन सिंदूर का प्रमुख केंद्र राजस्थान रहा था। ऐसे में सेना ने फिर ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ मनाने के लिए राजस्थान को चुना है।

ऑपरेशन से जुड़ी फिल्म करेंगे रिलीज

जयपुर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह गुरुवार दोपहर 12 बजे तीनों सेनाओं के प्रमुख के साथ खातीपुरा स्थित सप्त शक्ति कमांड में मीडिया को संबोधित करेंगे। वहीं शाम 5 बजे ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी फिल्म को रिलीज किया जाएगा। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो इस फिल्म के कई शॉट्स रियल हैं, जिन्हें ऑपरेशन सिंदूर के समय शूट किया गया था।

जयपुर में जनवरी में हुई आर्मी डे परेड में टैंक सहित कई मिसाइलों को दिखाया गया था।

आर्मी डे परेड का हुआ था आयोजन

सेना ने इस साल जयपुर को आर्मी डे परेड के लिए भी चुना था। जगतपुरा में महल रोड पर 15 जनवरी को आर्मी डे परेड का आयोजन किया गया था। पहली बार यह परेड आर्मी एरिया से बाहर आमजन के बीच हुई थी।

परेड में भारतीय सेनाओं की शौर्य और वीरता को पूरी दुनिया ने देखा था। जयपुर की सड़कों पर कदमताल करने सेना के जवान, टैंक, हेलीकॉप्टर और सेना की अत्याधुनिक हथियारों का प्रदर्शन किया गया था।

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आर्मी डे से जुड़ी ये खबरें भी पढ़िए…

आर्मी-डे पर पहली बार जयपुर में सेना ने दिखाया शौर्य:शहीद जवान की मां मेडल लेते बेहोश हुईं, राजनाथ सिंह बोले-ऑपरेशन सिंदूर अभी समाप्त नहीं हुआ

जयपुर के SMS स्टेडियम में आर्मी-डे पर 15 जनवरी की शाम शौर्य संध्या कार्यक्रम में सेना के पैराट्रूपर्स उतरे थे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया- ऑपरेशन सिंदूर अभी पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है। पूरी खबर पढ़िए…

सेना के खतरनाक हथियारों के साथ दिखीं महिला आर्मी ऑफिसर:जयपुर में सड़क पर नजर आई नाग-आकाश मिसाइल; देखें VIDEO

पहली बार भारतीय सेना की आर्मी डे परेड सैन्य क्षेत्र (आर्मी एरिया) से बाहर 15 जनवरी को जयपुर में हुई थी। इस आयोजन में सेना के वो हथियार भी दिखाए गए, जिनका इस्तेमाल ऑपरेशन सिंदूर में किया गया था। सबसे खतरनाक हथियारों के साथ आर्मी की महिला ऑफिसर परेड में चल रही थीं। (पूरी खबर पढ़ें)



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Vivo X300 Ultra का इंतजार खत्म, DSLR कैमरे वाला फोन भारत में लॉन्च, Apple और Samsung के उड़े होश


Vivo X300 Ultra का इंतजार खत्म हो गया है। चीनी कंपनी ने अपना सबसे दमदार कैमरे वाला फोन भारत में लॉन्च कर दिया है। इसके साथ Vivo X300 FE को भी भारतीय बाजार में पेश किया गया है। वीवो के ये फ्लैगशिप फोन DSLR क्वालिटी वाले कैमरा सेंसर के साथ आते हैं। ये फोन Apple, Samsung, Google के प्रीमियम फोन को कड़ी टक्कर देने वाले हैं। वीवो ने इन दोनों फोन की प्री-बुकिंग भारत में शुरू कर दी है।

DSLR वाला कैमरा

Vivo X300 Ultra में 200MP का मेन Sony LYT-901 कैमरा सेंसर दिया गया है। कंपनी का दावा है कि इसमें गिंबल जैसा ऑप्टिकल इमेज स्टेब्लाइजेशन मिलेगा। इसके अलावा फोन में 200MP का टेलीफोटो कैमरा भी दिया गया है। इस फोन में कंपनी ने Samsung HPO पेरीस्कोप चिप का यूज किया है, जो 3.7x ऑप्टिकल जूम को सपोर्ट करता है। इसके अलावा फोन के बैक में 50MP का Sony LYT-818 अल्ट्रा वाइड कैमरा मिलेगा। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए इस फोन में 50MP का कैमरा दिया गया है।

इस फोन के साथ वीवो ने Zeiss का टेलीफोटो एक्सटेंडर भी उतारा है। Gen 2 में 200mm का लेंस मिलेगा। वहीं, Gen 2 Ultra में 400mm का लेंस दिया गया है। यह फोन वाइल्ड फोटोग्राफी में DSLR की तरह काम करेगा।

Image Source : VIVOवीवो एक्स 300 अल्ट्रा

Vivo X300 Ultra के फीचर्स

Vivo X300 Ultra में कंपनी ने 6.82 इंच का LTPO OLED डिस्प्ले यूज किया है। फोन का डिस्प्ले 144Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। इसका रेजलूशन 1440 x 3168 पिक्सल है। इस फोन में Qualcomm Snapdragon 8 Elite Gen 5 चिपसेट दिया गया है। साथ ही, यह 16GB LPDDR5X रैम और 512GB तक इंटरनल स्टोरेज को सपोर्ट करता है। इसको कूल रखने के लिए 5800 स्क्वायर मिलीमीटर का वेपर चेंबर दिया गया है।










Vivo X300 Ultra फीचर्स
डिस्प्ले 6.82 इंच OLED, 144Hz
प्रोसेसर Qualcomm Snapdragon 8 Elite Gen 5
स्टोरेज 16GB, 512GB
बैटरी 6,600mAh, 100W, 40W
कैमरा 200MP + 200MP + 50MP, 50MP
OS Android 16, OriginOS

इस फोन में 6,600mAh की बैटरी दी गई है, जिसके साथ 100W वायर्ड और 40W वायरलेस चार्जिंग का सपोर्ट मिलता है। यह फोन Andorid 16 पर बेस्ड Origin OS 6 पर काम करता है। कंपनी फोन के साथ 5 साल तक OS और 7 साल तक सिक्योरिटी अपडेट का वादा करती है। इस फोन को दो कलर ऑप्शन- विक्ट्री ग्रीन और इक्लिप्स ब्लैक में खरीदा जा सकता है। फोन की मोटाई महज 8.2mm है और यह वाटर और डस्ट प्रूफ रेटिंग के साथ आता है। सिक्योरिटी के लिए फोन में अल्ट्रासोनिक इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर मिलता है।

Vivo X300 FE

वीवो का यह फ्लैगशिप फोन 6.31 इंच के LTPO AMOLED डिस्प्ले के साथ आता है। फोन का डिस्प्ले 120Hz रिफ्रेश रेट और 5000 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस को सपोर्ट करता है। इस फोन को तीन कलर ऑप्शन- अर्बल ओलिव, लिलाक पर्पल और नॉइर ब्लैक कलर में खरीदा जा सकता है। यह फोन भी IP68 और IP69 रेटेड है। इसमें Qualcomm Snapdragon 8 Gen 5 चिपसेट दिया गया है, जिसके साथ 12GB रैम और 256GB इंटरनल स्टोरेज का सपोर्ट दिया गया है।

Vivo X300 FE

Image Source : VIVOवीवो एक्स300 एफई

यह फोन 6,500mAh की बैटरी के साथ 80W वायर्ड और 40W वायरलेस चार्जिंग को सपोर्ट करता है। इसमें भी Android 16 पर बेस्ड Origin OS दिया गया है। कंपनी इस फोन के साथ भी 5 साल तक OS और 7 साल तक सिक्योरिटी अपडेट ऑफर करती है।

Vivo X300 FE के बैक में भी ट्रिपल कैमरा सेटअप दिया गया है। इसमें 50MP का मेन Sony IMX-921 चिपसेट मिलता है। इसके अलावा फोन में 50MP का Sony IMX 882 टेलीफोटो कैमरा मिलेगा, जो 3x ऑप्टिकल जूम को सपोर्ट करता है। इस फोन में 8MP का अल्ट्रा वाइड कैमरा दिया गया है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए इसमें भी 50MP का कैमरा मिलता है। यह फोन भी टेलीफोटो एक्सटेंडर Gen 2 और Gen 2 Ultra के साथ आता है।










Vivo X300 FE फीचर्स
डिस्प्ले 6.31 इंच AMOLED, 120Hz
प्रोसेसर Qualcomm Snapdragon 8 Gen 5
स्टोरेज 12GB, 512GB
बैटरी 6,500mAh, 80W, 40W
कैमरा 50MP + 50MP + 8MP, 50MP
OS Android 16, OriginOS

कितनी है कीमत?

Vivo X300 Ultra एक ही स्टोरेज वेरिएंट 16GB + 512GB में आता है। इसकी कीमत 1,59,999 रुपये है। वहीं, Vivo X300 FE दो स्टोरेज वेरिएंट्स- 12GB + 256GB और 12GB + 512GB में आता है। इसकी शुरुआती कीमत 79,999 रुपये है। वहीं, इसका टॉप वेरिएंट 89,999 रुपये में आता है। इन दोनों फोन की खरीद पर 10% का बैंक डिस्काउंट ऑफर किया जा रहा है। इन दोनों फोन के साथ कंपनी ने Telephot Extender Gen 2 Ultra और Vivo Imaging Grip Kit भी पेश किए हैं। जिनकी कीमत क्रमशः  27,999 रुपये और 11,999 रुपये है।

Vivo X300 Ultra

  • 16GB + 512GB – 1,59,999 रुपये

Vivo X300 FE

  • 12GB + 256GB – 79,999 रुपये
  • 12GB + 512GB – 89,999 रुपये

एक्सेसरीज

  • Telephot Extender Gen 2 Ultra – 27,999 रुपये
  • Vivo Imaging Grip Kit – 11,999 रुपये

वीवो के ये दोनों फ्लैगशिप फोन ई-कॉमर्स वेबसाइट Amazon और Flipkart से खरीदे जा सकेंगे। फोन की सेल 14 मई को आयोजित की जाएगी। फिलहाल ये दोनों फोन प्री-ऑर्डर के लिए उपलब्ध हैं।

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