मिर्जापुर के राजगढ़ थाना क्षेत्र के न्याय पंचायत धौरहा के रैकरी ग्राम सभा में गुरुवार रात एक भीषण सड़क हादसे ने हंसते-खेलते परिवार की खुशियां छीन लीं। खेत से काम निपटाकर घर लौट रहे एक युवक की बाइक ट्रैक्टर-ट्रॉली से टकरा गई। हादसे में युवक की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि बाइक पर पीछे बैठा उसका साथी घायल हो गया। मृतक की पहचान रैकरी निवासी विजय बिंद (27 वर्ष), पुत्र झब्बू लाल बिंद के रूप में हुई है। साइड लेते समय अनियंत्रित होकर टकराई बाइक जानकारी के मुताबिक, विजय बिंद अपने खेत में बादाम बोने के बाद साथी संजय बिंद (पुत्र सियाराम) के साथ बाइक से वापस घर लौट रहे थे। इसी दौरान चीखुड़ियां की ओर से भस्सी (खनिज) लादकर आ रही एक ट्रैक्टर-ट्रॉली के बगल से गुजरते समय उनकी बाइक अचानक अनियंत्रित हो गई और सीधे ट्रॉली से जा टकराई। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि दोनों सड़क पर दूर जा गिरे। हादसे के बाद मौका पाकर ट्रैक्टर चालक वाहन समेत फरार हो गया। 25 दिन पहले ही सिर पर सजा था सेहरा इस दर्दनाक हादसे ने पूरे गांव को झकझोर कर रख दिया है। विजय बिंद की शादी पिछले महीने ही 21 जून को सक्तेशगढ़ क्षेत्र के एक गांव में हुई थी। अभी शादी की रस्में और हाथों की मेहंदी भी ठीक से नहीं छूटी थी कि 25 दिनों के भीतर ही पत्नी शिला का सुहाग उजड़ गया। अचानक हुए इस वज्रपात से नवविवाहिता पत्नी और परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। राजगढ़ थाना प्रभारी बालमुकुंद मिश्रा ने बताया- ट्रैक्टर-ट्रॉली की टक्कर से बाइक सवार युवक की मौत हुई है। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है और फरार ट्रैक्टर चालक व वाहन की तलाश की जा रही है।
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मिर्जापुर में ट्रैक्टर-ट्रॉली की टक्कर में बाइक सवार की मौत: खेत से लौट रहा था घर, एक महीने पहले हुई थी शादी – Dhaurahan(Marihan) News
पूर्णिया में महिला पर चाकू से हमला: हस्ताक्षर का विरोध करने पर जमीन ब्रोकरों ने किया घायल, पीड़िता के बेटे ने की कानूनी कार्रवाई की मांग – Purnia News
पूर्णिया जिले के रानीपतरा मुफस्सिल थाना क्षेत्र के चांदी कटुआ गांव में एक महिला पर चाकू से हमला किया गया है। यह घटना जमीन ब्रोकरों द्वारा स्टांप पेपर पर हस्ताक्षर करवाने के प्रयास के दौरान हुई, जब महिला ने इसका विरोध किया तो उसे चाकू मारकर घायल कर दिया गया। घायल महिला की पहचान चांदी कटुआ गांव निवासी राम प्रसाद राय की पत्नी सीता देवी के रूप में हुई है। उन्हें इलाज के लिए जीएमसीएच में भर्ती कराया गया है। सीता देवी ने बताया कि गुरुवार दोपहर उनके पड़ोस में रहने वाले जमीन ब्रोकर छोटू राय कुछ अज्ञात लोगों के साथ उनके घर में घुस आए। उन्होंने चाकू दिखाकर स्टांप पेपर पर हस्ताक्षर करने के लिए धमकाया। जब सीता देवी ने हस्ताक्षर करने से इनकार किया, तो उन लोगों ने उन पर हमला कर दिया, जिससे वह घायल हो गईं। महिला के चीखने-चिल्लाने पर आसपास के लोग मौके पर पहुंचे, जिसके बाद हमलावर वहां से भाग गए। सीता देवी को लहूलुहान हालत में अस्पताल ले जाया गया। घायल महिला के बेटे गौरव कुमार ने बताया कि यह घटना जमीनी विवाद से जुड़ी है। जमीन ब्रोकरों ने दोपहर के समय घर में घुसकर उनकी मां पर स्टांप पेपर पर हस्ताक्षर करने का दबाव बनाया। विरोध करने पर उनकी मां पर धारदार चाकू से हमला किया गया। गौरव कुमार ने अस्पताल में इलाज के बाद स्थानीय थाने में आवेदन देकर उचित कानूनी कार्रवाई की मांग की है। इस मामले पर मुफस्सिल थानाध्यक्ष ने बताया कि घायलों का इलाज अस्पताल में चल रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि अस्पताल से छुट्टी मिलने और थाना में आवेदन प्राप्त होने के बाद निश्चित तौर पर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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भिंड में नायब तहसीलदार समेत 7 पर होगी FIR: फर्जी जन्म प्रमाण पत्र के मामले सुनवाई, सीजेएम कोर्ट ने दिए आदेश – Bhind News
भिंड में फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार कर एक आरोपी को कानूनी कार्रवाई से बचाने के गंभीर मामले में मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट (सीजेएम) निधि नीलेश श्रीवास्तव ने तत्कालीन नायब तहसीलदार, सचिव, पटवारी और आंगनबाड़ी कार्यकर्ता समेत सात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं। कोर्ट ने थाना सिटी कोतवाली भिंड को भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 336(2), 336(3), 340(1) और 340(2) के तहत मामला दर्ज कर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार किया था
यह आदेश गौरव शर्मा द्वारा दायर एक अपंजीकृत परिवाद पर भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (बीएनएसएस) 2023 की धारा 75(3) के तहत सुनवाई करते हुए दिया गया। परिवाद में आरोप लगाया गया था कि आरोपियों ने आपसी मिलीभगत से विमल यादव का फर्जी जन्म प्रमाण पत्र तैयार कराया, ताकि उसे एक अन्य मामले में कानूनी कार्रवाई से बचाया जा सके। कोर्ट ने जिन लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए हैं, उनमें तत्कालीन नायब तहसीलदार मोहनलाल शर्मा, विमल यादव पुत्र निहाल यादव निवासी यादवन का पुरा, आशुतोष सिंह यादव पुत्र यजवेंद्र सिंह यादव निवासी ग्राम रेंजा, तहसील उमरी, सचिव शेरसिंह यादव पुत्र रामवीर यादव, पटवारी संजीव शर्मा, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता रजनी जादौन निवासी यादवन का पुरा बिलाव और राजकुमार दुबे निवासी ग्राम बिलाव शामिल हैं। हेरफेर कर गलत जानकारी दर्ज की
परिवाद के अनुसार, जन्म तिथि से जुड़े रिकॉर्ड में हेरफेर कर गलत जानकारी दर्ज की गई और उसके आधार पर जन्म प्रमाण पत्र जारी कराया गया। शिकायतकर्ता ने इसे सुनियोजित षड्यंत्र बताते हुए राजस्व और पंचायत विभाग के कर्मचारियों की भूमिका पर सवाल उठाए थे। कोर्ट ने उपलब्ध दस्तावेजों और प्रस्तुत तथ्यों का परीक्षण करने के बाद माना कि प्रथम दृष्टया संज्ञेय अपराध बनता है। इसलिए मामले की पुलिस जांच जरूरी है। कोर्ट ने थाना प्रभारी सिटी कोतवाली को आदेश का तत्काल पालन करते हुए सभी आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने और इसकी जानकारी कोर्ट में प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। इस आदेश के बाद राजस्व और पंचायत विभाग में हड़कंप की स्थिति बताई जा रही है। अब पुलिस एफआईआर दर्ज कर दस्तावेजों की जांच, संबंधित रिकॉर्ड का सत्यापन और आरोपियों की भूमिका की पड़ताल करेगी। इस मामले में एसआई देवीदीन अनुरागी ने बताया कि कोर्ट के आदेश के बाद वरिष्ठ अधिकारियों से मार्गदर्शन लिया गया है।
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हाईकोर्ट ने नारी निकेतनों की बदहाली पर अफसरों को फटकार: कहा- वास्तविक जानकारी देने के बजाय कॉपी-पेस्ट रिपोर्ट थमा दी, बिना देखे कर दिए दस्तखत’ – Jodhpur News
राजस्थान हाईकोर्ट ने राज्य के नारी निकेतन, बालिका गृह, बाल गृह और फोस्टर होम की बदहाल व्यवस्थाओं को लेकर राज्य सरकार के अधिकारियों को फटकार लगाई है। कोर्ट ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा- हमारे समक्ष पेश किए गए हलफनामे वास्तविक जानकारी देने के बजाय एक जैसे तैयार किए गए (कॉपी-पेस्ट) दस्तावेज हैं, जिन पर अधिकारियों ने केवल हस्ताक्षर कर दिए हैं। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश संजीव प्रकाश शर्मा और न्यायाधीश संजीत पुरोहित की खंडपीठ ने जयपुर और जोधपुर से जुड़े मामलों की सुनवाई के दौरान यह टिप्पणी की। बता दें कि यह मामला अलवर बालिका गृह में रह रही बालिकाओं की शिकायत के आधार पर शुरू हुआ था, जिसमें संस्था को अनुदान नहीं मिलने और अन्य बुनियादी समस्याओं का उल्लेख किया गया था। 20 जुलाई को होगी अगली सुनवाई सुनवाई के दौरान विभिन्न जिलों के नारी निकेतन, बालिका गृह, ऑब्जर्वेशन होम और जिला बाल संरक्षण इकाइयों के अधिकारी कोर्ट में व्यक्तिगत रूप से उपस्थित हुए। कोर्ट ने नाराजगी जताते हुए कहा- पूर्व आदेश के अनुसार सभी संस्थानों की वास्तविक जरूरतों, उपलब्ध सुविधाओं, कर्मचारियों की स्थिति और कमियों का अलग-अलग विवरण प्रस्तुत किया जाना था, लेकिन ऐसा नहीं किया गया। खंडपीठ ने सख्त निर्देश दिए कि प्रत्येक जिले के अधिकारी अपने-अपने संस्थान की वर्तमान स्थिति का विस्तृत हलफनामा दाखिल करें। इसके साथ ही भवन, आवासीय व्यवस्था और अन्य सुविधाओं की नवीनतम तस्वीरें (फोटोग्राफ्स) भी रिकॉर्ड पर पेश करें। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि अब केवल औपचारिक रिपोर्टों से संतोष नहीं किया जाएगा। मामले की अगली सुनवाई अब 20 जुलाई को होगी।
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एग्जॉटिक लगने वाला स्ट्रॉबेरी सबसे गंदे फलों में से एक, जानें धोने का तरीका
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स्ट्रॉबेरी दिखने में जितना एग्जॉटिक होता है, उतनी ही इस पर गंदगी जमी होती है. यही कारण है कि इसे सबसे ज्यादा गंदे फलों में से एक भी माना जाता है. ऐसे में यदि आप स्ट्रॉबेरी खाना पसंद करते हैं, तो पहले इसे अच्छी तरह से जरूर धो लें. ध्यान रखें कई बार इसे सिर्फ साफ पानी से धोना काफी नहीं होता है. इस लेख में आप स्ट्रॉबेरी को साफ करने का सही और असरदार तरीका जान सकते हैं.
स्ट्रॉबेरी पोषक तत्वों से भरपूर फल मानी जाती है. इसका इस्तेमाल स्मूदी, डेजर्ट, फ्रूट सलाद और कई तरह की रेसिपीज में किया जाता है. हालांकि बाजार से लाई गई स्ट्रॉबेरी को बिना धोए खाना सही नहीं माना जाता. खेती, पैकिंग और परिवहन के दौरान इन पर मिट्टी, धूल, कीटनाशकों के अवशेष और छोटे कीड़े-मकोड़े चिपक सकते हैं. देखने में साफ लगने वाली स्ट्रॉबेरी भी कई बार दूषित हो सकती है.
इसलिए इसे खाने से पहले अच्छी तरह साफ करना जरूरी है. सही तरीके से सफाई करने से न केवल गंदगी और कीटनाशक कम हो सकते हैं. इसके अलावा साफ की गई स्ट्रॉबेरी का स्वाद बेहतर रहता है और यह लंबे समय तक ताजा भी रह सकती है. आइए जानते हैं स्ट्रॉबेरी को साफ करने के कुछ आसान तरीके.
स्ट्रॉबेरी साफ करने का सही तरीका
स्ट्रॉबेरी को साफ करने का सबसे आसान तरीका ठंडे पानी से धोना है. इसके लिए स्ट्रॉबेरी को एक छलनी में रखें और बहते ठंडे पानी के नीचे अच्छी तरह धो लें. इससे ऊपर जमी धूल और गंदगी हट जाती है.
अगर आप गहराई से सफाई करना चाहते हैं, तो सिरके का इस्तेमाल कर सकते हैं. एक बड़े बर्तन में तीन भाग पानी और एक भाग सफेद सिरका मिलाएं. स्ट्रॉबेरी को इसमें लगभग एक मिनट तक रखें और हल्के हाथों से घुमाएं. इसके बाद ठंडे पानी से अच्छी तरह धो लें ताकि सिरके का स्वाद न रहे.
बेकिंग सोडा भी स्ट्रॉबेरी साफ करने का एक विकल्प है. इसके लिए चार कप पानी में एक चम्मच बेकिंग सोडा मिलाएं. स्ट्रॉबेरी को इस मिश्रण में पांच मिनट तक रखें और फिर साफ पानी से धो लें.
धोने के बाद स्ट्रॉबेरी को एक साफ किचन टॉवल पर कुछ मिनट के लिए फैलाकर रखें ताकि अतिरिक्त नमी सूख जाए. इससे फल जल्दी खराब होने से बच सकता है.
इन बातों का रखें ध्यान
स्ट्रॉबेरी को फ्रिज में रखने से पहले न धोएं. जब खाने या इस्तेमाल करने का समय हो, तभी साफ करें. इसके साथ ही फलों को धोने के लिए साबुन का इस्तेमाल न करें और सुखाने के लिए हमेशा साफ कपड़े का ही उपयोग करें.
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शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें
डीडीए की फ्लैट बिक्री में रिकॉर्ड उछाल: पहली तिमाही में 1,020 करोड़ का राजस्व; पिछले साल के मुकाबले 120% की वृद्धि, 1,284 फ्लैट बिके – New Delhi News
दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) ने वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में फ्लैट बिक्री और राजस्व के मामले में नया रिकॉर्ड बनाया है। डीडीए ने अप्रैल से जून के बीच 1,284 फ्लैट बेचकर 1,020 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित किया, जो पिछले वित्त वर्ष की समान अवधि के 462 करोड़ रुपए की तुलना में 120 प्रतिशत अधिक है। उपराज्यपाल सरदार तरनजीत सिंह संधू के नेतृत्व में उप-नगरों के विकास और बेहतर बुनियादी ढांचे पर किए गए कार्यों का असर अब स्पष्ट रूप से दिखाई देने लगा है। डीडीए का कहना है कि उसकी आवासीय योजनाओं में जनता का भरोसा लगातार बढ़ रहा है और सभी आय वर्गों के लोगों ने फ्लैट खरीदने में रुचि दिखाई है। 31 जुलाई तक बढ़ाई योजनाएं इस तिमाही में नरेला सबसे बड़ा आवासीय हॉटस्पॉट बनकर उभरा। यहां 1,153 फ्लैट बिके, जो कुल बिक्री का करीब 90 प्रतिशत है। अधिकारियों के अनुसार, अर्बन एक्सटेंशन रोड-II (यूईआर-II) और प्रस्तावित रिठाला-नरेला-कुंडली मेट्रो कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं से क्षेत्र की कनेक्टिविटी बेहतर होने के कारण नरेला की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है। डीडीए की वर्तमान योजनाओं- कर्मयोगी आवास योजना, नागरिक आवास योजना और टावरिंग हाइट्स (कड़कड़डूमा) के तहत फ्लैटों की बिक्री की जा रही है। ये योजनाएं 31 जुलाई 2026 तक बढ़ा दी गई हैं। सभी फ्लैट ‘रेडी-टू-मूव’ और फ्रीहोल्ड हैं तथा खरीद प्रक्रिया पूरी तरह ऑनलाइन है। पहली तिमाही के प्रमुख आंकड़े कुल बेचे गए फ्लैट: 1,284 कुल राजस्व: 1,020 करोड़ रुपए पिछले वर्ष की पहली तिमाही का राजस्व: 462 करोड़ रुपए राजस्व में वृद्धि: 120% नरेला में बिके फ्लैट: 1,153 (करीब 90%) किस श्रेणी में कितने फ्लैट बिके एमआईजी (मिडिल इनकम ग्रुप): 435 ईडब्ल्यूएस (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग): 336 एलआईजी (लो इनकम ग्रुप): 322 एचआईजी (हाई इनकम ग्रुप): 191 सफलता के पीछे ये कारण नरेला में बेहतर कनेक्टिविटी और इंफ्रास्ट्रक्चर। ‘पहले आओ, पहले पाओ’ के आधार पर ऑनलाइन बिक्री। आसान होम लोन विकल्प और डिजिटल हेल्पडेस्क। वॉट्सएप चैटबॉट और सैंपल फ्लैट जैसी सुविधाएं। वित्त वर्ष 2025-26 में भी डीडीए ने 11,764 फ्लैट बेचकर रिकॉर्ड बनाया था।
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TrueCaller जैसे ऐप्स के डेटा शेयरिंग को लेकर TRAI की सख्ती, नियमों में होगा बदलाव
TRAI जल्द ही TrueCaller जैसे कॉल मैनेजमेंट ऐप्स के डेटा शेयरिंग को लेकर सख्ती दिखा सकता है। टेलीकॉम रेगुलेटर TCCCPR यानी टेलीकॉम कमर्शियल कम्युनिकेशन कस्टमर प्रिफरेंस रेगुलेशन में बदलाव की तैयारी में है। इस नियम में अमेंडमेंट की पेशकश की गई है, जिसमें प्रोविजन है कि कॉल मैनेजमेंट ऐप्स को यूजर द्वारा रिपोर्ट किए गए स्पैम की जानकारी रेगुलेटर के साथ शेयर करनी होगी।
दूरसंचार नियामक ने पिछले दिनों कॉल मैनेजमेंट ऐप्स द्वारा 1600 और 140 नंबरों से शुरू होने वाले कॉल्स को स्पैम बताकर ब्लॉक किए जाने को लेकर स्पष्टीकरण भी जारी की है। इसके लिए रेगुलेटर ने पिछले दिनों MeitY से कॉल मैनेजमेंट ऐप्स Truecaller, Hiya और Whoscall के खिलाफ एक्शन लेने की मांग की थी।
कॉल मैनेजमेंट ऐप्स पर सख्ती की तैयारी
TRAI के इस फैसले पर TrueCaller के सीईओ रिशित झुनझुनवाला ने आलोचना भी की थी। अब ट्राई ने इसे लेकर स्पष्टीकरण जारी कर दिया है। नियामक ने कमर्शियल कम्युनिकेशन के लिए बनाए गए रेगुलेशन TCCCPR में बदलाव की तैयारी की है। इस अमेंडमेंट को जल्द ही सरकार फाइनलाइज कर सकती है। इसे लेकर पहले स्टेकहोल्डर्स से फीडबैक लिया जा रहा है।
फिलहाल कॉल मैनेजमेंट ऐप्स पर यूजर्स द्वारा स्पैम फ्लैग किए जाने वाले नंबरों का डेटा दूरसंचार नियामक के साथ शेयर नहीं किया जाता है। TCCCPR में इस नए अमेंडमेंट के बाद TrueCaller जैसे ऐप्स को यह डेटा TRAI के साथ शेयर करना पड़ेगा। इस डेटा में ऐप्स पर यूजर्स द्वारा फ्लैग किए गए नंबरों, रिसीव करने वाले यूजर्स और कॉल किए जाने के समय की भी डिटेल ट्राई के साथ शेयर करनी पड़ेगी।
TRAI का स्पष्टीकरण
TRAI ने पिछले दिनों अपने लेटेस्ट गाइडलाइन्स में स्पष्ट किया है कि 1600 सीरीज वाले फोन नंबर केवल बैंकिंग, फाइनेंशियल सर्विस और इंश्योरेंस कंपनियों के लिए हैं, जो भारतीय रिजर्व बैंक, सेबी (SEBI) और इंश्योरेंस रेगुलेटर IRDA द्वारा अधिकृत किए गए हैं। इस नंबर सीरीज को सरकार से सिटीजन के बीच कम्युनिकेशन के लिए रिजर्व किया गया है। ऐसे में इससे शुरू होने वाले नंबर को किसी भी प्लेटफॉर्म या ऐप द्वारा TCCCPR के तहत ब्लॉक नहीं किया जा सकता है।
इसमें यह भी कहा गया है कि 1600 से शुरू होने वाले नंबर को न तो फिल्टर किया जा सकता है और न हीं स्पैम कॉल में टैग किया जा सकता है। केवल 140 सीरीज से आने वाले कॉल्स को TRAI DND ऐप के जरिए ही ब्लॉक किया जा सकता है।
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31 जुलाई तक सस्ते फ्लैट खरीदने का मौका, तीन महीने में बिक चुके हैं 1284 मकान
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DDA Flat Sale : दिल्ली विकास प्राधिकरण ने चालू वित्तवर्ष की पहली तिमाही में करीब 1300 फ्लैट की बिक्री की है. इस दौरान डीडीए को 1,020 करोड़ रुपये का राजस्व भी जुटाया है. सबसे खास बात ये है कि डीडीए के ज्यादातर फ्लैट नरेला इलाके में बने हैं, जहां मेट्रो की अच्छी कनेक्टिविटी है.
डीडीए के फ्लैट की डिमांड हर साल तेजी से बढ़ रही है.
नई दिल्ली. दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने राजधानी में सस्ते फ्लैट बेचने का मौका क्या दिया, लोग खरीदने के लिए टूट पड़े. डीडीए ने महज 3 महीने के भीतर ही दिल्ली में करीब 1300 मकान बेच डाले और 1,020 करोड़ रुपये की कमाई भी हुई है. राजधानी दिल्ली में नरेला अब सबसे हब बनकर उभरा है. इस इलाके में डीडीए ने अपना सबसे बड़ा प्रोजेक्ट शुरू किया था और चालू वित्तवर्ष की पहली तिमाही में बंपर बिक्री कर डाली.
डीडीए की ओर से मिली जानकारी के अनुसार, दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA) ने वित् वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही (अप्रैल-जून) में आवासीय फ्लैटों की बिक्री में बड़ी सफलता हासिल की है. DDA ने इस दौरान 1,284 फ्लैट बेचकर ₹1,020 करोड़ का राजस्व कमाया है, जो पिछले वित्तवर्ष की समान अवधि के ₹462 करोड़ की तुलना में करीब 120% अधिक है. दिल्ली में अब नरेला सबसे बड़ा हाउसिंग हब बनकर उभरा है. कुल 1,284 में से 1,153 फ्लैट (करीब 90%) अकेले नरेला में बिके हैं.
नरेला क्यों है सबका पसंदीदा
DDA के अनुसार, UER-II और रिठाला-नरेला-कुंडली मेट्रो कॉरिडोर जैसी परियोजनाओं से नरेला की कनेक्टिविटी बेहतर होने के कारण लोगों का रुझान बढ़ा है. यही वजह रही कि इस इलाके में डीडीए सबसे ज्यादा फ्लैट बना रहा है. खरीदारों ने भी बेहतर कनेक्टिवटी को देखते हुए इस इलाके में निवेश करना और अपना आशियाना बनाना पसंद किया है.
किस कैटेगरी के हैं ज्यादा फ्लैट
- डीडीए के प्रोजेक्ट में EWS (आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग) के 336 फ्लैट बने हैं.
- LIG (लो इनकम ग्रुप) के भी 322 फ्लैट बनाए गए हैं.
- MIG (मिडिल इनकम ग्रुप) में डीडीए ने सबसे ज्यादा 435 फ्लैट (सबसे अधिक बिक्री) बेचे हैं.
- HIG (हाई इनकम ग्रुप) में भी डीडीए ने बीते तीन महीने में ही 191 फ्लैट बेच दिए हैं.
अब भी है खरीदने का मौका
डीडीए ने बताया कि नरेला में EWS फ्लैट लगभग पूरी तरह बिक गए, जिससे किफायती आवास की मजबूत मांग सामने आई. इन सभी फलैट को DDA की कर्मयोगी आवास योजना, नागरिक आवास योजना और टावरिंग हाइट्स, ईस्ट दिल्ली हब (कड़कड़डूमा) के तहत बनाया और बेचा है. हालांकि, DDA ने इन हाउसिंग योजनाओं की अंतिम तिथि 31 जुलाई 2026 तक बढ़ा दी है. इसका मतलब है कि अब भी इसमें निवेश का मौका है.
पिछले साल बेचे थे रिकॉर्ड फ्लैट
डीडीए ने अपनी सभी आवास योजनाओं को पहले आओ, पहले पाओ (FCFS) आधार पर बेचा है. इसकी पूरी प्रक्रिया ऑनलाइन है और खरीदार घर बैठे आवेदन कर सकते हैं. सभी फ्लैट फ्रीहोल्ड और रेडी-टू-मूव हैं. इसके अलावा खरीदारों के लिए सैंपल फ्लैट देखने की भी सुविधा उपलब्ध है. DDA ने बताया कि वित्तवर्ष 2025-26 में रिकॉर्ड 11,764 फ्लैटों की बिक्री हुई थी, जिनमें 90% से अधिक किफायती आवास श्रेणी के थे.
DDA का कहना है कि डिजिटल प्रक्रिया, आसान होम लोन विकल्प, हेल्पडेस्क, व्हाट्सएप चैटबॉट और पारदर्शी व्यवस्था के कारण लोगों का भरोसा बढ़ा है.
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आज तक से टीवी पत्रकारिता शुरू करने वाली प्रियंका कांडपाल को अब तक तकरीबन 11 साल का अनुभव है. तकरीबन चार साल आज तक में रिपोर्टिंग के साथ एंकरिंग भी कर चुकी हैं. उसके बाद इंडिया टीवी में पांच साल तक काम किया. 201…और पढ़ें
बंगाल की खाड़ी में दो नावें डूबीं,500 मौतों की आशंका: ज्यादातर रोहिंग्या सवार थे, खराब मौसम की वजह से हादसा
म्यांमार में हिंसा से बचकर भाग रहे 500 से ज्यादा लोगों के समुद्र में लापता होने की आशंका है। संयुक्त राष्ट्र की दो एजेंसियों के मुताबिक, म्यांमार के तट के पास खराब मौसम में दो नावें गायब हो गईं। इनमें सवार ज्यादातर लोग रोहिंग्या समुदाय के थे। अंतरराष्ट्रीय प्रवासन संगठन (IOM) और संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने संयुक्त बयान में बताया कि दोनों नावें जून के आखिर में म्यांमार के पश्चिमी रखाइन राज्य से रवाना हुई थीं। पहली नाव में करीब 250 लोग सवार थे। रवाना होने के कुछ ही समय बाद उससे संपर्क टूट गया। दूसरी नाव में करीब 280 यात्री सवार थे और माना जा रहा है कि वह 8 जुलाई को म्यांमार के अयेयारवाडी तट के पास डूब गई। रोहिंग्या लोगों के पास किसी देश की नागरिकता नहीं रोहिंग्या म्यांमार के रखाइन राज्य का एक मुस्लिम अल्पसंख्यक समुदाय है। दशकों से यह समुदाय सरकारी उत्पीड़न, हिंसा और भेदभाव का सामना कर रहा है। म्यांमार की बौद्ध बहुसंख्यक सरकार और वहां के स्थानीय लोग रोहिंग्याओं को म्यांमार का मूल निवासी नहीं मानते। उनका दावा है कि ये लोग ब्रिटिश शासनकाल के दौरान बांग्लादेश (तत्कालीन बंगाल) से आए अवैध अप्रवासी हैं। उन्हें आधिकारिक तौर पर ‘बंगाली’ कहकर पुकारा जाता है। रोहिंग्या समुदाय का कहना है कि वे रखाइन क्षेत्र में आठवीं सदी या उससे भी पहले से रह रहे हैं और वे वहीं के मूल निवासी हैं। साल 1982 में रोहिंग्याओं को नागरिकता देने से इनकार कर दिया गया। इसके कारण वे बिना किसी देश के नागरिक बन गए। उन्हें बुनियादी अधिकार जैसे शिक्षा, स्वास्थ्य, यात्रा और शादी करने तक की आजादी नहीं है। करीब 12 लाख रोहिंग्या फिलहाल बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों में रह रहे हैं। ये लोग म्यांमार की सेना की हिंसा से बचकर वहां पहुंचे थे। हाल के वर्षों में अमेरिका और अन्य देशों की विदेशी सहायता में कटौती के कारण इन शिविरों में खाद्य राशन भी कम कर दिया गया है। रोहिंग्या शरणार्थियों के पास सुरक्षित तरीके से म्यांमार लौटने का कोई रास्ता नहीं है। 2017 में म्यांमार की सेना पर रोहिंग्या समुदाय के खिलाफ बड़े पैमाने पर हिंसा करने के आरोप लगे थे, जिसे कई देशों ने नरसंहार (जेनोसाइड) माना है। जो रोहिंग्या अब भी म्यांमार में रह रहे हैं, उन्हें कड़ी पाबंदियों का सामना करना पड़ रहा है। इनमें से कई लोग नजरबंदी शिविरों में रहने को मजबूर हैं। मलेशिया पहुंचने के लिए उठा रहे जानलेवा जोखिम आमतौर पर रोहिंग्या इस मौसम में समुद्र के रास्ते यात्रा करने से बचते हैं, क्योंकि मानसून के दौरान समुद्र बेहद खतरनाक हो जाता है। हालांकि म्यांमार में हिंसा और बांग्लादेश के भीड़भाड़ वाले शरणार्थी शिविरों में खराब हालात के कारण रोहिंग्या समुदाय के लोग वर्षों से जर्जर लकड़ी की नावों में बैठकर मलेशिया, इंडोनेशिया और थाईलैंड जैसे देशों तक पहुंचने की कोशिश करते रहे हैं। खराब परिस्थितियों के कारण बड़ी संख्या में रोहिंग्या लोग जर्जर नावों के जरिए मलेशिया पहुंचने की कोशिश करते हैं। इस दौरान हजारों लोगों की जान जा चुकी है, जिनमें नवजात बच्चे, बच्चे और गर्भवती महिलाएं भी शामिल हैं। संयुक्त राष्ट्र का कहना है कि कई बार स्थानीय समुद्री एजेंसियां संकट में फंसी नावों की मदद भी नहीं करतीं। दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री रास्तों में एक संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, 2025 में अंडमान सागर और बंगाल की खाड़ी में करीब 900 रोहिंग्या शरणार्थी मारे गए या लापता हो गए थे। यह दुनिया में शरणार्थियों और प्रवासियों के लिए सबसे खतरनाक समुद्री मार्ग माना जाता है। IOM और UNHCR ने कहा कि यह संभावित हादसा दिखाता है कि रोहिंग्या संकट का अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं निकला है। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय से बांग्लादेश के शरणार्थी शिविरों में रह रहे लोगों की मदद बढ़ाने की अपील की। एजेंसियों ने कहा कि दुनिया के सबसे खतरनाक समुद्री मार्गों में से एक पर और लोगों की जान जाने से रोकने के लिए खोज एवं बचाव अभियान मजबूत करना, शरण देने की व्यवस्था बेहतर करना और मानव तस्करी के नेटवर्क के खिलाफ सख्त कार्रवाई जरूरी है। UNHCR के अनुसार, 2025 में 6,500 से ज्यादा रोहिंग्या समुद्र के रास्ते भागने की कोशिश कर रहे थे। इनमें से करीब 900 लोग मारे गए या लापता हो गए। यह रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए अब तक का सबसे घातक साल था और दुनिया के किसी भी प्रमुख शरणार्थी समुद्री मार्ग पर सबसे अधिक मृत्यु दर दर्ज की गई। भारत में कितने रोहिंग्या हैं? नोट: रोहिंग्याओं की संख्या को लेकर भारत सरकार और UNHCR के आंकड़े अलग-अलग हैं। UNHCR केवल अपने यहां पंजीकृत शरणार्थियों और शरण मांगने वालों की संख्या बताता है, जबकि भारत सरकार का अनुमान देश में मौजूद कुल रोहिंग्या आबादी पर आधारित है।
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एपीटीसी फॉलोअर की मौत, 14 घंटे प्रदर्शन के बाद FIR: आर्थिक सहायता, दो सदस्यों को नौकरी पर माने परिजन, फिर हुआ अंतिम संस्कार – Sitapur News
अभिषेक सिंह | सीतापुर4 मिनट पहले
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सीतापुर के एपीटीसी (APTC) कमांडेंट के सरकारी आवास पर कार्यरत निजी फॉलोअर शैलेन्द्र पाल की बुधवार को संदिग्ध मौत के मामले में करीब 14 घंटे तक चले धरना-प्रदर्शन के बाद पुलिस ने परिजनों की मांग पर एफआईआर दर्ज कर ली है।
खैराबाद थाना पुलिस ने एपीटीसी के तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया। कार्रवाई के बाद परिजन अंतिम संस्कार के लिए राजी हो गए और शैलेन्द्र का अंतिम संस्कार गुरुवार दोपहर करीब 1 बजे संपन्न कराया गया।

शैलेन्द्र पाल की मौत के बाद परिजनों ने एपीटीसी कमांडेंट शोगुन गौतम पर प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए थे। उनका कहना था कि चोरी के संदेह में शैलेन्द्र को लगातार मानसिक और शारीरिक रूप से प्रताड़ित किया गया, जिससे आहत होकर उसने जहरीला पदार्थ खा लिया। उपचार के लिए लखनऊ ले जाते समय उसकी मौत हो गई थी।
घटना की जानकारी मिलने पर बुधवार रात करीब 9 बजे कांग्रेस सांसद राकेश राठौर दिल्ली से सीधे सीतापुर पहुंचे और पीड़ित परिवार के साथ धरने पर बैठ गए। बुधवार देर रात शव गांव पहुंचने के बाद शुरू हुआ धरना करीब 14 घंटे तक चला। इस दौरान एएसपी, एसडीएम समेत कई प्रशासनिक अधिकारियों ने सांसद और परिजनों से वार्ता की, लेकिन परिजन एफआईआर दर्ज होने तक अंतिम संस्कार करने को तैयार नहीं हुए।

गुरुवार सुबह से चली लंबी वार्ता के बाद पुलिस ने एपीटीसी के तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। इसके साथ ही प्रशासन ने पीड़ित परिवार के दो सदस्यों को पुलिस विभाग में संविदा पर नौकरी देने, आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने और आवासीय पट्टा देने का आश्वासन दिया। इन मांगों पर सहमति बनने के बाद धरना समाप्त हुआ।

इसके बाद परिजनों ने शैलेन्द्र पाल के शव का अंतिम संस्कार किया। एएसपी आलोक सिंह का कहना है कि मुकदमा दर्ज मामले की निष्पक्ष जांच की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उनके आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी। सांसद राकेश राठौर ने कहा कि इस मामले में परिजनों के आरोप गंभीर है। कमांडेंट के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस मुख्यालय पत्राचार किया जाएगा।


