Saturday, September 12, 2026
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रूसी पुलिस ने कानपुर के इंजीनियर का हाथ बांधकर उठाया: बोला- अब विदेश नहीं जाऊंगा, जान से मारने की धमकी दी; 48 घंटे टॉर्चर किया – Kanpur News




मॉस्को में रूसी पुलिस ने कानपुर के इंजीनियर को 48 घंटे हिरासत में रखा, टॉर्चर किया। इंजीनियर पत्नी और 10 साल के बेटे के साथ गुरुवार रात कानपुर घर लौटे। दैनिक भास्कर से बातचीत में इंजीनियर चंदन गुप्ता ने कहा- दोस्त और मेरा हाथ बांधकर पुलिस वैन में ले गई। पुलिसवालों ने गालियां दीं और जान से मारने की धमकी दी। मेरे दोस्त को अलग कमरे में ले जाकर डंडे से पीटा। परिवार से बात करने की अनुमति नहीं दी। फोन और ट्रांसलेटर भी नहीं दिया। पुलिस ने मेरे ऊपर नशे में एंबुलेंस का शीशा तोड़ने का झूठा आरोप लगाया। चंदन ने कहा- इस घटना के बाद अब मेरा दोबारा रूस जाकर नौकरी करने का कोई इरादा नहीं है। बल्कि, दोबारा विदेश में नौकरी करने नहीं जाऊंगा। मैं मॉस्को में साल 2023 से पत्नी और बेटे के साथ रह रहा था। इससे पहले भी दो साल तक मॉस्को में रह चुका हूं। पत्नी स्नेहा ने कहा- अगर एंबुलेंस का शीशा तोड़ा गया था तो उसका सबूत कहां है। पढ़ें इंजीनियर और उनकी पत्नी से बातचीत पर खास रिपोर्ट… हाथ बांधकर पुलिस ले गई, पासपोर्ट छीन लिया इंजीनियर चंदन गुप्ता नोएडा सेक्टर-62 स्थित एक पॉलीफिल्म कंपनी के जरिए हाई-क्वालिफाइड वीजा पर मॉस्को में नौकरी कर रहे थे। वह कानपुर के यशोदा नगर के रहने वाले हैं। पत्नी स्नेहा ने LLB की पढ़ाई की है। चंदन ने कहा- 5 सितंबर को दोस्त आशीष और एक अन्य दोस्त के साथ डिनर के बाद टहलने निकले थे। हम लोग हैंगिंग ब्रिज, रेड स्क्वायर होते हुए कितईगार्ड मेट्रो स्टेशन पहुंच रहे थे। जहां पुलिस ने आशीष और मुझे दोनों को पकड़ लिया, जबकि एक दूसरा दोस्त थोड़ा दूर था, तो वह बच गया। इसके बाद पुलिस ने दोनों के एक-एक हाथ बांध दिए और करीब 400 मीटर दूर खड़ी पुलिस की गाड़ी तक ले गए। इस दौरान मेरे मोबाइल, पासपोर्ट और दूसरे डॉक्यूमेंट भी ले लिए। चंदन का कहना है कि हम लगातार पुलिस से पूछते रहे कि आखिर मुझे क्यों पकड़ा जा रहा है, लेकिन पुलिसकर्मियों ने कोई जवाब नहीं दिया। पुलिसवालों ने कहा नशे में हो, एंबुलेंस का ग्लास तोड़ा चंदन ने कहा- पुलिस ने गाड़ी में बैठाने के बाद मुझसे कहा कि मैंने एंबुलेंस का शीशा तोड़ा है। पुलिसकर्मी बार-बार कहते रहे ‘यू ब्रोक एंबुलेंस ग्लास।’ पुलिस से पूछा कि मैंने एंबुलेंस का शीशा कब और कहां तोड़ा? मुझे कोई वीडियो या अन्य सबूत नहीं दिखाया गया। शराब के नशे में होने की बात पुलिस ने कही, लेकिन मैंने ड्रिंक नहीं की थी। पुलिसवालों का व्यवहार बेहद गलत था। पुलिस मुझे धक्का दे रही थी और सवाल पूछने पर मारने की धमकी दे रही थी। मेरे साथ पकड़े गए दोस्त ने पुलिसवालों से बार-बार पूछा कि क्यों पकड़ा गया है। इसके बाद उसे अलग ले जाया गया और कई डंडे मारे गए। कोर्ट जाने तक फोन और ट्रांसलेटर नहीं दिया चंदन ने बताया- पुलिस की गाड़ी हम दोनों को लेकर करीब एक घंटे तक घूमती रही। रास्ते में पुलिसकर्मियों ने एक जगह रुककर किसी अधिकारी से बातचीत भी की। इसके बाद दोनों को बॉन्सकायर पुलिस स्टेशन ले जाया गया। रात करीब एक बजे तक हमें ये नहीं पता था कि आखिर क्या कार्रवाई की जा रही है। चंदन ने बताया- पुलिस स्टेशन में उन्हें किसी से फोन पर बात करने की परमिशन नहीं दी गई। उनके पास फोन नहीं था और न ही कोई ट्रांसलेटर उपलब्ध कराया गया। उनका कहना है कि कोर्ट जाने तक उन्हें किसी से मिलने नहीं दिया गया। चंदन के मुताबिक, भाषा की समस्या के कारण उनके लिए स्थिति और मुश्किल हो गई थी। हालांकि उन्हें भरोसा था कि उनकी फैमिली और कंपनी उनकी मदद के लिए प्रयास कर रही होगी। पुलिसवालों ने अपनी मर्जी से लिखवाकर साइन कराए चंदन ने बताया- रिहाई से पहले रूसी पुलिस ने हमसे कुछ प्रोटोकॉल और डॉक्यूमेंट पर हस्ताक्षर करवाए। पुलिसवालों ने कहा कि जैसा बता रहे हैं, वैसा ही लिखना होगा। पुलिस ने मुझे धमकी दी कि अगर मैंने बात नहीं मानी तो अभी तो छोड़ दिया जाएगा, लेकिन दोबारा हिरासत में लेकर लंबी रिमांड मांगी जा सकती है। मुझे डर था कि अगर मैं मॉस्को में रुका तो दोबारा किसी मामले में फंसाया जा सकता है। इसी वजह से मैंने परिवार के साथ भारत लौटने का फैसला किया। चंदन ने कहा- पिछले करीब 5 महीने से रूस में भारतीयों को पुलिस द्वारा परेशान किए जाने की घटनाओं के बारे में सुनने को मिल रहा था। मेरे परिचितों और कंपनी के लोगों ने बताया था कि पुलिस भारतीयों को रोकती है। कई घंटों तक बैठाकर रखती है, डॉक्यूमेंट और पैसे ले लेती है। चंदन बोले- भारतीय दूतावास ने मुझसे बात तक नहीं की चंदन ने मॉस्को स्थित भारतीय दूतावास पर भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि हिरासत के करीब 48 घंटों के दौरान भारतीय दूतावास के किसी अधिकारी ने मुझसे संपर्क नहीं किया। मेरी पत्नी स्नेहा ने सोशल मीडिया के जरिए भारत सरकार से मदद की अपील की थी। इसके बावजूद भारतीय दूतावास से न तो कोई अधिकारी मुझसे मिलने आया और न ही फोन पर मुझसे घटना के बारे में बात की गई। मुझे इस बात का सबसे ज्यादा दुख है कि भारतीय दूतावास ने मेरा पक्ष जाने बिना ही रूसी पुलिस के बयान को आधार बनाकर जानकारी जारी की। स्नेहा बोलीं- बयान जारी करने से पहले सबूत कहां था? चंदन की पत्नी स्नेहा गुप्ता ने भी भारतीय दूतावास पर सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि पति के बारे में बयान जारी करने से पहले भारतीय दूतावास ने मुझसे या मेरे पति से घटना की पूरी जानकारी नहीं ली। अगर चंदन ने शराब पी थी तो क्या उनका मेडिकल कराया गया? अगर उन्होंने एंबुलेंस का शीशा तोड़ा था तो उसका वीडियो या फोटो कहां है? एंबुलेंस की लोकेशन क्या थी और पति की लोकेशन क्या थी? उन्होंने कहा कि इन सवालों का जवाब सामने आना चाहिए। स्नेहा ने कहा कि अगर एंबुलेंस का शीशा तोड़ने का आरोप है तो उसके सबूत सामने रखे जाने चाहिए। उन्होंने भारतीय दूतावास से पूरे मामले पर स्पष्टीकरण देने की मांग की। स्नेहा ने कहा कि मैं चाहती हैं कि इस मामले की जांच हो। ————————– ये खबर भी पढ़िए- करोड़पति कारोबारी के बेटे ने नौकर को क्यों नहीं पहचाना: कानपुर में 309 कॉल कीं, 3 बार साथ घूमा; बेटे पर शक गहराने की 5 वजह कानपुर के करोड़पति दवा कारोबारी विनीत मिनोचा हत्याकांड में बहू शालू के बाद अब बेटे सुब्रत पर भी पुलिस का शक गहरा गया है। जांच में सामने आया है कि सुब्रत ने सुपारी किलर विशाल गौतम से तीन महीने में करीब 309 बार फोन पर बात की थी। पढ़ें पूरी खबर…



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सीकर में भाजपा-कांग्रेस प्रत्याशियों की आधीरात बाड़ेबंदी: भाजपा प्रत्याशियों को जयपुर लेकर गई,कांग्रेस मैरिज गार्डन में रुकवाने के बाद बस में बैठाकर ले गई – Sikar News




सीकर नगर परिषद निकाय चुनाव के तहत 64 वार्डों में हुए मतदान के बाद कांग्रेस और भाजपा दोनों ने ही अपने प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी कर ली है। भाजपा अपने प्रत्याशियों को जयपुर लेकर गई है। वहीं कांग्रेस पार्टी ने पहले तो अपने प्रत्याशियों को सीकर के एक मैरिज गार्डन में रुकवाया और इसके बाद बस में बैठाकर सीकर से बाहर ले गए हैं। दोनों ही पार्टियों ने 7 बजे से अपने प्रत्याशियों को कॉल करना शुरू किया। भाजपा प्रत्याशियों को पूर्व विधायक रतनलाल जलधारी के आवास पर बुलाया गया। इसके बाद एक बस में बैठाकर उन्हें जयपुर ले जाया गया है। इधर कांग्रेस पार्टी ने पहले तो अपने सभी प्रत्याशियों को सीकर में रानी सती रोड पर प्रधानजी का जाव मैरिज गार्डन में बुलाया। इसके बाद उन्हें बस में बैठाकर सीकर से बाहर ले जाया गया है। सीकर में भाजपा के प्रत्याशियों के साथ पूर्व विधायक रतनलाल जलधारी भी गए हैं। हालांकि कांग्रेस पार्टी में कोई बड़ा नेता प्रत्याशियों के साथ नजर नहीं आया। निर्दलीय प्रत्याशियों पर सस्पेंस अभी भी जारी सीकर में कांग्रेस और भाजपा दोनों ही पार्टियों ने भले ही अपने प्रत्याशियों की बाड़ेबंदी कर ली हो। लेकिन अभी भी निर्दलीय प्रत्याशियों पर सस्पेंस जारी है। 14 सितंबर को परिणाम आने के बाद ही यह सस्पेंस दूर होगा।



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इंदौर में 8 महीने बाद MIC में जीतू की वापसी: बिजली-यांत्रिकी विभाग की जिम्मेदारी मिली – Indore News




इंदौर के पार्षद कमलेश कालरा से विवाद के बाद पार्टी से निष्कासन और MIC से हटाए गए जीतू यादव की अब पूरी तरह वापसी हो गई है। महापौर पुष्यमित्र भार्गव ने शुक्रवार देर रात को आदेश जारी कर जितेंद्र कुमार उर्फ जीतू यादव को मेयर-इन-काउंसिल (MIC) का सदस्य नियुक्त कर दिया है। इसके साथ ही उन्हें विद्युत एवं यांत्रिकी विभाग का प्रभार भी सौंपा गया है। इससे पहले पुलिस से क्लीन चिट मिलने के बाद 18 अगस्त को जीतू यादव की बीजेपी में वापसी हुई थी, लेकिन उन्हें MIC में शामिल नहीं किया गया था। अब पार्टी स्तर पर हुई चर्चा के बाद उन्हें फिर से MIC में लेने पर सहमति बनी और महापौर ने इसकी औपचारिक घोषणा कर दी। भोपाल में बैठक के बाद रास्ता साफ
जीतू यादव की MIC में वापसी को लेकर भोपाल में बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल के साथ उनके करीबी नेताओं की मुलाकात हुई थी। इस बैठक में विधायक रमेश मेंदोला, विधायक गोलू शुक्ला समेत अन्य नेताओं के शामिल होने की बात सामने आई है। बैठक में जीतू यादव का पक्ष रखा गया और उन्हें दोबारा MIC में शामिल करने की मांग की गई। चर्चा के बाद पार्टी ने उनकी वापसी को हरी झंडी दे दी। इसके बाद इंदौर महापौर की ओर से MIC सदस्य बनाने का औपचारिक आदेश जारी कर दिया गया। कालरा विवाद के बाद हुई थी कार्रवाई
जनवरी 2025 में बीजेपी के वार्ड 65 के पार्षद कमलेश कालरा के घर पर कुछ लोगों ने हमला किया था। इस मामले में जीतू यादव के समर्थकों के नाम सामने आने के बाद पार्टी ने उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें छह साल के लिए पार्टी से बाहर कर दिया था। कार्रवाई के चलते उनका MIC पद भी चला गया था। यह पूरा विवाद एक ऑडियो सामने आने के बाद शुरू हुआ था। ऑडियो में कमलेश कालरा द्वारा नगर निगम के एक कर्मचारी के साथ कथित तौर पर अपशब्द कहे जाने का मामला सामने आया था। इसके बाद विवाद बढ़ता गया और मामला कालरा के घर पर हुए हमले तक पहुंच गया। अब जीतू के पास बिजली और यांत्रिकी विभाग
महापौर पुष्यमित्र भार्गव के आदेश के मुताबिक मध्यप्रदेश नगर पालिक निगम अधिनियम 1956 की धारा 37 के तहत जितेन्द्र कुमार (जीतू यादव) को मेयर-इन-काउंसिल का सदस्य नियुक्त किया गया है। MIC सदस्य निरंजनसिंह (गुड्डू) चौहान को सौंपे गए विद्युत एवं यांत्रिकी विभाग के प्रभार से मुक्त किया जाता है। विजयवर्गीय-मेंदोला खेमे के करीबी माने जाते हैं
जीतू यादव को भाजपा के वरिष्ठ नेता और मंत्री कैलाश विजयवर्गीय तथा विधायक रमेश मेंदोला के करीबी नेताओं में माना जाता है। भाजपा से बाहर रहने के दौरान भी जीतू यादव स्थानीय राजनीति में सक्रिय रहे। वे कई मौकों पर भाजपा नेताओं के साथ नजर आए और नगर निगम परिषद की बैठकों में निर्दलीय पार्षद के रूप में शामिल होते रहे। इस दौरान वे कांग्रेस पार्षदों के खिलाफ भी मुखर नजर आए। कालरा विवाद के बाद हुई थी पार्टी की किरकिरी
जीतू यादव और भाजपा पार्षद कमलेश कालरा के विवाद ने जनवरी 2025 में इंदौर की राजनीति को गरमा दिया था। कालरा के घर में तोड़फोड़ और उनके नाबालिग बेटे से कथित अभद्रता के आरोपों के बाद मामला गंभीर हो गया था। घटनाक्रम की गूंज प्रदेश भाजपा से लेकर दिल्ली तक पहुंची थी। इसके बाद पार्टी ने जीतू यादव के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करते हुए उन्हें छह साल के लिए प्राथमिक सदस्यता से निष्कासित कर दिया था। लेकिन डेढ़ साल बाद यह कार्रवाई तय अवधि से पहले ही समाप्त कर दी गई है।



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मोतीपुर में सड़क मरम्मत के लिए टावर पर चढ़ा युवक: BDO के आश्वासन पर नीचे उतरा, मिट्टी-मोरम डालकर चलने के लायक बनाया – Motipur(Muzaffarpur) News




मुजफ्फरपुर के मोतीपुर प्रखंड की पकड़ी पंचायत के बड़ा बैजनाथ गांव में एक युवक जर्जर सड़क की मांग को लेकर मोबाइल टावर पर चढ़ गया। युवक की पहचान कृष्णा पासवान के रूप में हुई है। ग्रामीणों ने बताया कि गांव की मुख्य सड़क लंबे समय से खराब है। बारिश में स्थिति और बिगड़ जाती है, जिससे स्कूल जाने वाले बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को काफी परेशानी होती है। कृष्णा पासवान ने बताया कि उसने सड़क बनवाने के लिए कई बार मुखिया, पंचायत समिति सदस्य और वार्ड सदस्य से अपील की थी। लेकिन किसी ने इस पर ध्यान नहीं दिया। जब कहीं सुनवाई नहीं हुई, तो कृष्णा पासवान शुक्रवार को गांव के मोबाइल टावर पर चढ़ गया। वह सड़क बनाने की मांग कर रहा था। युवक को टावर पर देख गांव में भीड़ जमा हो गई। ग्रामीण उससे नीचे उतरने की अपील करते रहे। घटना की खबर मिलते ही प्रशासन मौके पर पहुंचा। मोतीपुर के BDO अरविंद कुमार गुप्ता और बरुराज थाना अध्यक्ष कुनाल कुमार कश्यप वहां आए। काफी समझाने के बाद युवक को सुरक्षित नीचे उतारा गया। BDO अरविंद कुमार गुप्ता ने मीडिया से कहा कि ऐसा कदम उठाने से पहले स्थानीय प्रशासन को जानकारी देनी चाहिए। उन्होंने बताया कि यह सड़क पंचायत स्तर की नहीं, बल्कि विभागीय सड़क है। BDO ने भरोसा दिलाया कि सड़क की रिपोर्ट जुड़े विभाग, डीएम और एसडीएम को भेजी जाएगी। वहां से निर्देश मिलने के बाद आगे कार्रवाई होगी। उन्होंने यह भी कहा कि अभी अस्थायी तौर पर मिट्टी-मोरम डालकर सड़क को आवाजाही के लायक बनाया जाएगा। प्रशासन के भरोसे के बाद ग्रामीण शांत हुए। युवक को उसके परिवार को सौंप दिया गया।



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Viral Food Trend: रसोई की चीजें अब प्लेट में नहीं गिलास में हो रहीं सर्व

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Viral Food Trend: सोशल मीडिया पर फूड को प्लेट की जगह गिलास में परोसने का ट्रेंड लोगों का ध्यान खींच रहा है. अलग प्रेजेंटेशन साधारण डिश को भी नया लुक दे सकती है. हालांकि हर फूड के लिए यह तरीका सुविधाजनक नहीं है. स्वाद, सुरक्षा और खाने की आसानी को प्राथमिकता देना जरूरी है.

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Viral Food Trend: गिलास में परोसा जा रहा Food (Image-AI generated)

Viral Food Trend: खाने की टेबल पर रखी कोई चीज अचानक गिलास में नजर आए तो पहली नजर में समझ ही नहीं आता कि इसे खाएं या पिएं. सोशल मीडिया पर इन दिनों फूड को परोसने का ऐसा ही एक दिलचस्प ट्रेंड लोगों का ध्यान खींच रहा है. रसोई में आमतौर पर प्लेट या कटोरी में परोसी जाने वाली चीजों को अब गिलास में सजाकर सर्व किया जा रहा है. देखने में यह तरीका थोड़ा अजीब जरूर लगता है, लेकिन तस्वीर और वीडियो के लिए काफी आकर्षक नजर आता है.

यही वजह है कि कई लोग इस तरह की सर्विंग को अपने घर की छोटी पार्टी, मेहमानों की दावत या दोस्तों के साथ होने वाली गैदरिंग में आजमा रहे हैं. आखिर इस ट्रेंड में ऐसा क्या खास है?

प्लेट से गिलास तक पहुंचा फूड का नया अंदाज

खाने का स्वाद जितना मायने रखता है उतना ही आजकल उसकी प्रेजेंटेशन भी लोगों को आकर्षित करती है. किसी साधारण डिश को अलग तरीके से परोसने पर वही खाना देखने में बिल्कुल नया लग सकता है. वायरल फूड ट्रेंड इसी सोच के आसपास नजर आता है. इस ट्रेंड में ऐसी चीजों को गिलास में रखा जाता है जिन्हें आमतौर पर प्लेट, कटोरी या छोटे बाउल में परोसा जाता है. कभी गिलास को परोसने के लिए इस्तेमाल किया जाता है तो कभी उसमें फूड की अलग-अलग लेयर्स सजाई जाती हैं. ऊपर से चटनी, मसाले, सब्जियां या दूसरी टॉपिंग्स डालकर इसे थोड़ा और आकर्षक बनाया जाता है.

सोशल मीडिया पर इसका सबसे बड़ा आकर्षण इसका लुक है. कैमरे में गिलास के अंदर सजा हुआ खाना कई बार सामान्य प्लेटिंग से ज्यादा दिलचस्प दिखाई देता है. यही वजह है कि फूड ब्लॉगर्स और घर पर नए तरीके आजमाने वाले लोग ऐसी प्रेजेंटेशन को अपने वीडियो में शामिल कर रहे हैं.

आखिर गिलास में फूड परोसने का आइडिया क्यों पसंद आ रहा है

इसका एक कारण यह है कि लोग रोजमर्रा की चीजों में भी कुछ नया देखने की कोशिश करते हैं. जब कोई परिचित फूड बिल्कुल अलग तरीके से सामने आता है तो स्वाभाविक रूप से उत्सुकता बढ़ती है. मान लीजिए घर में कोई सामान्य चाट या हल्का स्नैक बन रहा है. उसे प्लेट में रखने के बजाय पारदर्शी गिलास में थोड़ी-थोड़ी मात्रा में सजाया जाए तो उसकी पूरी प्रेजेंटेशन बदल जाती है. अलग-अलग इंग्रीडिएंट्स की लेयर्स भी साफ नजर आती हैं. छोटी हाउस पार्टी में ऐसा सर्विंग स्टाइल टेबल को भी थोड़ा अलग लुक दे सकता है. यह तरीका खासतौर पर उन लोगों को पसंद आ सकता है जिन्हें खाना सजाकर परोसना अच्छा लगता है. इसके लिए किसी महंगे क्रॉकरी सेट की भी जरूरत नहीं होती. घर में मौजूद साफ और मजबूत ग्लास का इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि फूड और गिलास दोनों का चुनाव डिश के हिसाब से करना जरूरी है.

हर फूड के लिए सही नहीं है यह तरीका

वायरल होने का मतलब यह नहीं कि हर डिश को गिलास में परोसना बेहतर होगा. कुछ फूड ऐसे होते हैं जिन्हें प्लेट या बाउल में खाना ज्यादा आसान रहता है. बहुत गर्म चीजें साधारण पतले गिलास में डालना भी ठीक नहीं माना जाता. सर्विंग के लिए ऐसा गिलास चुनना चाहिए जो उस फूड के लिए उपयुक्त हो और हाथ में पकड़ने में सुरक्षित रहे. इसी तरह बहुत ज्यादा ग्रेवी वाली डिश को गिलास में परोसने पर खाने में परेशानी हो सकती है. इसलिए सिर्फ तस्वीर अच्छी दिखे इसके लिए प्रैक्टिकलिटी को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए.

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सोशल मीडिया ने बढ़ाई फूड प्रेजेंटेशन की चाह

फूड से जुड़े वीडियो और रील्स ने लोगों की खाने की आदतों के साथ उसकी प्रेजेंटेशन को लेकर भी दिलचस्पी बढ़ाई है. एक ही डिश को अलग तरीके से सजाकर पेश करने का चलन इसी बदलाव का हिस्सा है. आज घर में खाना बनाने वाला व्यक्ति भी सोचता है कि डिश को थोड़ा अलग कैसे दिखाया जाए. कभी रंग-बिरंगी टॉपिंग्स मदद करती हैं तो कभी सर्विंग का बर्तन ही पूरी प्रेजेंटेशन बदल देता है. गिलास वाला ट्रेंड इसी प्रयोग का एक उदाहरण है.

फिलहाल इसे किसी खास फूड का जरूरी तरीका मानने के बजाय एक क्रिएटिव सर्विंग आइडिया के तौर पर देखा जा सकता है. सोशल मीडिया पर ट्रेंड बदलते रहते हैं. आज जो तरीका नया लग रहा है वह कुछ समय बाद सामान्य भी हो सकता है, लेकिन खाने को खूबसूरती से पेश करने की यह आदत घर की छोटी-बड़ी दावतों में जरूर काम आ सकती है.

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Keerti Rajpoot

कीर्ति राजपूत हिंदी डिजिटल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की एक अनुभवी पत्रकार हैं. उन्हें मीडिया इंडस्ट्री में करीब 13 साल का अनुभव है. वर्तमान में वह साल 2021 से News18 हिंदी की धर्म टीम के साथ जुड़ी हैं, जहां…

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पीएम मोदी वर्ल्ड लीडर्स के साथ करेंगे डिनर: मेन्यू में यूपी के गलौटी कबाब, महाराष्ट्र की भाकरवड़ी और राजस्थान की कचौड़ी शामिल


नई दिल्ली4 घंटे पहले

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BRICS समिट की वजह से दिल्ली में होटलों की कीमत बढ़ रही है।

नई दिल्ली में 12 और 13 सितंबर को 18वां BRICS लीडर्स समिट होगा। यह आयोजन भारत मंडपम में किया जाएगा।

कल पीएम मोदी, पुतिन और शी जिनपिंग समेत कई वर्ल्ड लीडर्स को होस्ट करेंगे। डिनर के मेन्यू में यूपी के गलौटी कबाब, महाराष्ट्र की भाकरवड़ी और राजस्थान की कचौड़ी शामिल हैं।

वहीं, लग्ज़री होटलों में मेहमानों के स्वागत की तैयारी कई हफ्तों से चल रही है। इसमें क्षेत्रीय भारतीय खान-पान, खास मेन्यू, पारंपरिक उपहार और कस्टमाइज्ड व्यक्तिगत सुविधाएं शामिल हैं।

ITC मौर्या में रूस के राष्ट्रपति पुतिन और ताज पैलेस में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के ठहरने की उम्मीद है। वहीं, UAE के नेतृत्व वाला प्रतिनिधिमंडल द लीला पैलेस और मिस्र का प्रतिनिधिमंडल शेरेटन नई दिल्ली में ठहरेगा।

समिट से होटलों में मांग बढ़ी

समिट के बीच राजधानी के लग्जरी होटलों में कमरों की मांग तेजी से बढ़ी है। कई प्रमुख होटलों में समिट की तारीखों के आसपास कमरे बहुत कम बचे हैं या उपलब्ध नहीं हैं।

प्रतिनिधिमंडलों, सुरक्षा कर्मियों, मीडिया और दूसरे अधिकारियों की मांग के कारण कमरों के किराए में भी तेज बढ़ोतरी हुई है।

समिट के दौरान द ललित के 460 कमरों में करीब 90% कमरे भरे होंगे। होटल का औसत दैनिक किराया सामान्य से 30 से 40% ज्यादा रहेगा।

द लीला पैलेस के मेन्यू में दाल मखनी, बिरयानी, दिल्ली स्टाइल चाट और भारतीय फलों के साथ सत्तू, बाजरा व रागी डोसा जैसे मिलेट व्यंजन शामिल हैं। यहाँ मिलेट्स कुकीज, ग्रेनोला बार और खास गुलाब, केसर व इलायची से बना खाने योग्य कमल भी परोसा जा रहा है।

द ललित और ताज महल होटल में भी खास मेन्यू

ताज महल होटल ने देश भर के मशहूर स्नैक्स पेश कर रहा है। इसमें कश्मीर के मसालेदार अखरोट, पुरानी दिल्ली का मैदा काजू, महाराष्ट्र की भाकरवड़ी, राजस्थान की मिनी कचौड़ी, बंगाल की कूचो निमकी और तमिलनाडु का मुरुक्कू शामिल हैं।

द ललित में गलौटी कबाब, तंदूरी रोटियां और दक्षिण भारतीय डोसा व अप्पम के साथ बाजरा-ज्वार के मिलेट व्यंजन मिल रहे हैं। यहां मिलेट्स कुकीज, ग्रेनोला बार और खास गुलाब, केसर व इलायची से बना खाने योग्य कमल भी परोसा जा रहा है।

डिनर डिप्लोमेसी के की अहमियत

ब्रिक्स शिखर सम्मेलन जैसे बड़े आयोजनों में ‘डिनर डिप्लोमेसी’ का मतलब होता है औपचारिक बैठकों और सख्त प्रोटोकॉल से हटकर, रात के खाने की मेज पर अनौपचारिक बातचीत करना।

एक साथ खाना खाते हुए नेताओं के बीच का माहौल सहज हो जाता है, जिससे तनाव कम करने, आपसी विश्वास बढ़ाने और विवादित मुद्दों पर खुलकर चर्चा करने में आसानी होती है।

कई बार जो मुश्किल समझौते बंद कमरों की औपचारिक चर्चा में नहीं सुलझ पाते, उनकी जमीन ऐसे ही डिनर के दौरान अनौपचारिक बातचीत से तैयार होती है।

भारत मंडपम में वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट के स्टॉल

ब्रिक्स सम्मेलन में ‘वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट’ प्रदर्शनी भी लगाई गई है। इसमें देश भर के 70 अनोखे कला और हथकरघा उत्पाद दिखाए गए हैं।

यह प्रदर्शनी 770 जिलों के 1,200 से अधिक अनोखे उत्पादों को दुनिया के सामने लाने की मुहिम का हिस्सा है।

इसमें तीन महिलाओं की आकृतियां हैं। इन्हें पारंपरिक साड़ियों और आभूषणों में रंगा गया है। यह शैली आंध्र प्रदेश के मशहूर 'कोंडापल्ली' या 'एटिकोप्पका' खिलौनों की पहचान है।

इसमें तीन महिलाओं की आकृतियां हैं। इन्हें पारंपरिक साड़ियों और आभूषणों में रंगा गया है। यह शैली आंध्र प्रदेश के मशहूर ‘कोंडापल्ली’ या ‘एटिकोप्पका’ खिलौनों की पहचान है।

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कार डिप्लोमेसी, मोदी-पुतिन फिर कार में बैठे:12 दिनों में दूसरी बार; 2014 से मोदी 11 वर्ल्ड लीडर्स के साथ गाड़ी में बैठ चुके

दिल्ली में शुक्रवार को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन की मुलाकात के बाद एक तस्वीर ने फिर ध्यान खींचा। पूरी खबर पढ़ें…



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बच्चों को भिक्षावृत्ति से निकालकर शिक्षा से जोड़ना प्राथमिकता: सीएम रेखा गुप्ता ने डीसीपीसीआर की बैठक में बाल सुरक्षा की समीक्षा की – New Delhi News




मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि दिल्ली को बाल भिक्षावृत्ति से मुक्त करना जरूरी है। बच्चों को भिक्षावृत्ति से निकालकर शिक्षा, कौशल और सम्मानजनक जीवन से जोड़ना सरकार की प्राथमिकता है। उन्होंने शुक्रवार को दिल्ली बाल अधिकार संरक्षण आयोग की बैठक की अध्यक्षता करते हुए बाल भिक्षावृत्ति मुक्त दिल्ली अभियान को जनभागीदारी से मजबूत करने के निर्देश दिए। सीएम ने कहा कि अभियान से इच्छुक गैर-सरकारी संगठनों, सिविल सोसायटी संगठनों और आरडब्ल्यूए को जोड़ा जाए, ताकि स्थानीय स्तर पर बच्चों तक पहुंच बढ़ाई जा सके। बैठक में डीसीपीसीआर अध्यक्ष डॉ. ओपी व्यास, आयोग के सदस्य और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। स्कूल स्टाफ का पुलिस सत्यापन जरूरी
मुख्यमंत्री ने बच्चों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता बताते हुए पॉस्को कानून के प्रति जागरूकता अभियान को लगातार चलाने की सलाह दी। उन्होंने स्कूलों में कार्यरत कर्मचारियों के साथ स्कूल बस और वैन चालकों, अटेंडेंट व सफाई कर्मचारियों का अनिवार्य पुलिस सत्यापन सुनिश्चित करने पर जोर दिया, ताकि बच्चों की सुरक्षा में किसी स्तर पर लापरवाही न हो। मिड-डे मील और आंगनवाड़ी की जांच
राष्ट्रीय पोषण माह के दौरान मुख्यमंत्री ने स्कूलों में मिड-डे मील तैयार करने वाली रसोइयों और आंगनवाड़ी केंद्रों पर बच्चों को दिए जाने वाले पोषण आहार की व्यवस्था का निरीक्षण करने के निर्देश दिए। कमी मिलने पर तत्काल रिपोर्ट देने को कहा गया। बैठक में आंगनवाड़ी और पालना केंद्रों की सुविधाओं तथा बच्चों के साथ कार्यकर्ताओं के व्यवहार की समीक्षा के लिए इंटर्न के माध्यम से रिपोर्ट तैयार कराने पर भी चर्चा हुई। मुख्यमंत्री ने सरकारी और निगम स्कूलों में विद्यार्थियों के लिए करियर गाइडेंस की व्यवस्था मजबूत करने की सलाह दी।



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सुप्रीम कोर्ट ने NRI को यौन-उत्पीड़न मामले में राहत दी: कहा-मां की असहमति पर शादी न होना बेईमानी नहीं; शादी के झूठे वादे का आरोप लगा था


2 घंटे पहले

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सुप्रीम कोर्ट ने जाम्बिया में रह रहे NRI व्यक्ति को यौन संबंध के मामले में राहत दी है। कोर्ट ने उसके खिलाफ दर्ज FIR रद्द कर दी।

महिला ने आरोप लगाया कि व्यक्ति ने दिसंबर 2024 तक उससे शादी करने का वादा किया था। लेकिन जनवरी 2025 में उसने कहा कि उसकी मां इस रिश्ते के लिए तैयार नहीं है। इसके बाद उसने शादी से इनकार कर दिया। उसके दावा किया कि पहली मुलाकात के बाद वे दो दिन होटल में रहे थे।

मामले में सुप्रीम कोर्ट ने 7 सितंबर के आदेश जारी कर कहा कि शिकायत में सहमति से बने संबंध का संकेत मिलता है। इसमें यह नहीं बताया गया कि व्यक्ति ने धोखे से महिला को यौन संबंध के लिए तैयार किया।

शादी का झूठा वादा करने पर 10 साल की सजा

यह मामला गुजरात के वडोदरा का है। FIR में भारतीय न्याय संहिता की धारा 69 लगाई गई थी। इस धारा में धोखे या शादी का झूठा वादा करके बनाए गए यौन संबंध पर 10 साल तक की सजा और जुर्माने का प्रावधान है।

शिकायत के अनुसार, महिला नवंबर 2022 में फेसबुक के जरिए व्यक्ति से जुड़ी थी। दोनों पहली बार फरवरी 2024 में वडोदरा में मिले।

महिला का आरोप था कि व्यक्ति उसे एक होटल में ले गया। दोनों वहां दो दिन रहे। महिला के अनुसार, व्यक्ति ने उससे शादी करने की बात कही और दोनों के बीच यौन संबंध बने।

गुजरात हाईकोर्ट का फैसला

गुजरात हाईकोर्ट ने मई में मामले में दखल देने और व्यक्ति के खिलाफ FIR रद्द करने से इनकार कर दिया था।

हाईकोर्ट ने कहा था कि शादी के उस वादे में अंतर करना होगा, जो अच्छे इरादे से किया गया लेकिन बाद में पूरा नहीं हो सका। दूसरे मामले में वादा शुरू से ही शादी करने के इरादे के बिना किया जाता है।

कोर्ट ने यह भी कहा था कि व्यक्ति की मां के शादी का विरोध करने वाली वजह को ‘सच्चा और उचित कारण’ नहीं माना जा सकता।

व्यक्ति का पक्ष

व्यक्ति ने इस आरोप से इनकार किया कि रिश्ता झूठे वादे पर आधारित था। उसके वकील ने गुजरात हाईकोर्ट में कहा था कि दोनों के बीच संबंध सहमति से बने थे।

वकील ने व्यक्ति की महिला की मां और मातृ पक्ष की मौसी से हुई बातचीत का भी हवाला दिया। हाईकोर्ट में दी गई दलीलों के अनुसार, व्यक्ति ने महिला की मां को 40 हजार रुपए भेजे थे। उसने मुंबई से करीब 32 हजार रुपए के मोबाइल फोन और कपड़े भी भेजे थे।

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बेटी की हत्या का केस दर्ज होते ही आरोपी फरार: घर पर ताला लटका मिला, पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी – Rampur News




रामपुर में बेटी की हत्या के आरोप में मुकदमा दर्ज होने के बाद नामजद आरोपी परिवार घर से फरार हो गया। शुक्रवार शाम करीब 6 बजे सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के अजीतपुर स्थित उनके मकान पर ताला लटका मिला। पुलिस आरोपियों की तलाश में संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। मोहल्ले के लोगों के मुताबिक, हबीब अहमद का परिवार करीब 15 साल से अजीतपुर में रह रहा था। 20 अगस्त को बेटी आशिया की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत के बाद से ही परिवार के लोग घर पर नजर नहीं आए। अब हत्या का मुकदमा दर्ज होने के बाद मकान पर ताला मिलने से उनके फरार होने की बात सामने आई है। एक साल पहले की थी कोर्ट मैरिज आशिया ने करीब एक साल पहले मुरादाबाद के दलपतपुर निवासी हमजा से कोर्ट मैरिज की थी। शादी के बाद दोनों दिल्ली के मालवीय नगर में रह रहे थे। आशिया गाजियाबाद के यशोदा अस्पताल में नर्स थी। पति हमजा के मुताबिक, 18 अगस्त को आशिया दिल्ली से अपने मायके आई थीं। इसके दो दिन बाद 20 अगस्त को उनकी मौत हो गई। आरोप है कि मायके वालों ने हमजा को सूचना दिए बिना शव को भोट थाना क्षेत्र के पैतृक गांव तराना में दफना दिया। पति की शिकायत के बाद कब्र से निकाला शव आशिया की मौत की जानकारी मिलने के बाद हमजा ने डीआईजी मुनिराज से शिकायत की। डीआईजी के आदेश पर हुई जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई शुरू की। इसके बाद डीएम की अनुमति लेकर पुलिस टीम ने कब्र से शव निकलवाया। गुरुवार को शव का पोस्टमार्टम कराया गया। पति के मुताबिक, पोस्टमॉर्टम में सिर में चोट की बात सामने आने के बाद मायके पक्ष के लोगों पर हत्या का मुकदमा दर्ज कराया गया। पिता-मां समेत चार पर FIR सिविल लाइंस पुलिस ने हमजा की तहरीर पर आशिया के पिता हबीब अहमद, मां समीना बेगम और दोनों भाइयों अलीशान व फैजुल उर रहमान के खिलाफ हत्या की प्राथमिकी दर्ज की है। सीओ सिटी अभिषेक श्रीवास्तव ने बताया कि मामले की गहनता से विवेचना की जा रही है। आरोपियों के खिलाफ साक्ष्य जुटाए जा रहे हैं और उनकी गिरफ्तारी के प्रयास किए जा रहे हैं।



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₹2.5 लाख से आज ₹2 करोड़ टर्नओवर, ऐसे ‘मशरूम किंग’ बने उपेंद्र कुशवाहा


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Business Success Story: बिहार के उपेंद्र कुशवाहा ने महज ₹2.5 लाख से मशरूम बिजनेस शुरू किया. अपनी मेहनत व बेहतर तकनीक के दम पर इसे बड़े कारोबार में बदल दिया. आज उनका मशरूम कारोबार ₹2 करोड़ सालाना टर्नओवर तक पहुंच चुका है. उनकी यह कहानी कम निवेश में खेती आधारित बिजनेस शुरू करने वाले युवाओं के लिए प्रेरणादायक है.

पश्चिमी चंपारण के नौतन निवासी 32 वर्षीय उपेंद्र कुशवाह मशरूम किंग के रूप में प्रसिद्ध हो रहे हैं. महज पांच वर्ष पहले उन्होंने करीब 2.50 लाख की लागत से बटन मशरूम का कारोबार शुरू किया, जो आज सालाना दो करोड़ से ऊपर की टर्न ओवर तक पहुंच चुका है.इस लेख में हम आपको उपेंद्र के संघर्ष से लेकर सफलता तक की पूरी कहानी साझा कर रहे हैं.

Local 18 से बात करते हुए उपेंद्र बताते हैं कि एग्रीकल्चर से बैचलर की पढ़ाई पूरी करने के बाद वो घर वापस लौट आयें. वर्ष 2019 की आखिरी तक Covid 19 की शुरुवात होने के साथ उनके बाहर जाकर काम करने का सपना भी टूट गया. इस दौरान उन्होंने घर पर रहकर ही खुद का कारोबार शुरू करने का विचार किया और फिर मशरूम उत्पादन में लग गए.

मशरूम की फार्मिंग के लिए पहले उन्होंने प्रशिक्षण लिया और फिर छोटी से मड़ई में 50 बैग्स लगाकर फार्मिंग की शुरुवात की. बकौल उपेंद्र, उस वक्त इन सभी चीजों को तैयार करने में क़रीब ढाई लाख रुपए का इनवेस्टमेंट हुआ. चुकी तैयार बैग से मशरूम के फलन की शुरुवात 45 दिनों से हो जाती है, इसलिए दो से तीन महीनों में उन्हें आमदनी का हिसाब किताब समझ में आने लगा.

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कारोबार में लाभ दिखने के साथ उपेंद्र ने इसके दायरे में विस्तार किया और मड़ई से पक्के की यूनिट पर आ गए. 2.50 लाख का कारोबार जब 50 लाख के टर्न ओवर पर पहुंचा तब उन्होंने यूनिट्स की संख्या में वृद्धि की और स्पॉन के बैग्स (मशरूम किट)भी तैयार करने लगें. बेहतर क्वालिटी और भरपूर सप्लाई की वजह से ज़िले भर के मशरूम व्यापारी उपेन्द्र से व्यापार करने लगें, जिससे उनकी आमदनी में बड़ी बढ़ोतरी हुई.

वर्तमान में उपेंद्र को मशरूम उत्पादन का कारोबार शुरू किए हुए 5 साल से ऊपर हो रहे हैं, जिससे उनका सालाना टर्न ओवर क़रीब दो करोड़ से ऊपर पहुंच चुका है. उन्होंने 1800 मशरूम बैग्स की क्षमता वाले करीब 8 आधुनिक यूनिट्स तैयार करवाए हैं, जिनसे हर फसल चक्र पूरा होने पर ( 45 दिन) 12 टन तक मशरूम की हार्वेस्टिंग होती है. हार्वेस्टिंग के बाद उपेंद्र इनकी सप्लाई बिहार के कई ज़िलों सहित यूपी, झारखंड और पश्चिम बंगाल तक करते हैं.

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