गोरखपुर के चौरी चौरा में 7वीं के छात्र ने दोस्त की गला घोटकर घोटकर हत्या कर दी। अगले दिन उसने भी ट्रेन से कटकर जान दे दी। चौरी चौरा पुलिस ने घटना का पर्दाफाश कर दिया। पुलिस ने बताया कि 23 सितंबर को दोनों एक साथ घर से निकले थे। 24 सितंबर को रेलवे ट्रैक पर श्याम राजभर (17) का शव मिला। अगले दिन 25 सितंबर को जलकर परिसर के एक कमरे से दूसरे दोस्त शिव (14) का सड़ा हुआ शव मिला था। सीसीटीवी खंगालने के बाद पुलिस ने इस केस का पर्दाफाश करने का दावा किया है। वहीं परिजनों का कहना है कि दोनों अच्छे दोस्त थे, फिर हत्या की बात कहां से आ गई। हत्या की कोई वजह तो होनी चाहिए। इसलिए पुलिस गहनता से इस मामले की जांच करे। पुलिस भी परिजनों और दोस्तों से पूछताछ कर हत्या और सुसाइड की वजह पता कर रही है। दोनों किशोरों की मौत के बाद दफन हो गए राज पुलिस के मुताबिक, चौरी टोला भरटोलिया के शिवा राजभर की उसके ही दोस्त श्याम राजभर ने गला घोंटकर हत्या कर दी। इसके अगले ही दिन श्याम की भी ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर शिवा की हत्या की कड़ी श्याम से जोड़ते हुए घटना का खुलासा किया गया। हालांकि, शिवा की हत्या के पीछे की वजह अभी स्पष्ट नहीं हो सकी है। श्याम ने ऐसा कदम क्यों उठाया और फिर खुद अपनी जान क्यों दे दी, इसका जवाब दोनों किशोरों की मौत के साथ ही दफन हो गया। 23 सितंबर का साथ निकले थे दोनों दोस्त
पुलिस के मुताबिक, चौरी चौरा में शिवा और श्याम 7वीं क्लास में साथ में पढ़ते थे। 23 सितंबर को दोपहर करीब एक बजे शिवा और श्याम चकदेइया गांव स्थित जलकल परिसर में पहुंचे थे। दोनों के परिसर में प्रवेश करने की तस्वीर सीसीटीवी कैमरे में कैद हुई है। करीब सवा घंटे बाद श्याम अकेले बाहर निकलता दिखाई दिया। वह कपड़े साफ करते हुए परिसर से निकला और घर चला गया। अगले दिन 24 सितंबर को उसका शव सतहवा के पास रेलवे ट्रैक पर मिला। पुलिस के मुताबिक उसकी मौत ट्रेन की चपेट में आने से हुई। सड़ गया था शिवा का शव इधर, 25 सितंबर को जलकल परिसर के कमरे से शिवा का शव मिला था। शव से दुर्गंध उठने पर आस-पास के लोगों ने पुलिस को सूचना दी थी। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में गला घोंटकर हत्या किए जाने की पुष्टि हुई। इसके बाद पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज की कड़ियां जोड़ीं तो घटना में श्याम की भूमिका सामने आई। अब जांच का केंद्र हत्या की वजह है। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि दोनों किशोरों के बीच ऐसा क्या हुआ था कि दोस्ती का रिश्ता अचानक हत्या तक पहुंच गया। घटना से पहले दोनों की गतिविधियों और आपसी संबंधों के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। दोनों किशोर के परिजन बोले, यकीन नहीं हो रहा है शिवा की मां मीना ने बताया कि मेरे बेटे को साजिश करके मारा गया है। मेरे लड़के के साथ क्या हुआ, किसने मारा है, इसकी गहनता से जांच होनी चाहिए। शिवा के पिता कमलेश राजभर पेंट पालिश का काम करते हैं। उन्होंने किसी से दुश्मनी की बात से भी इन्कार किया है। श्याम के पिता रविंद्र राजभर ने बताया कि एक आदमी अकेले किसी को नहीं मार सकता है। मेरे बेटे की लाश रेलवे ट्रैक पर मिली है। बताया जा रहा है कि उसने शिवा का गला घोटकर हत्या किया है। लेकिन यकीन नहीं हो रहा है। दोनों हमेशा साथ ही घूमते थे, फिर ऐसा कैसे हो सकता है। इस संबंध में चौरी चौरा थाना प्रभारी वेद प्रकाश शर्मा ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज और पोस्टमार्टम रिपोर्ट से श्याम द्वारा शिवा की गला घोंटकर हत्या किए जाने की बात सामने आई है। अगले दिन श्याम की ट्रेन से कटकर मौत हुई। हत्या की वजह अभी स्पष्ट नहीं है। परिजनों से पूछताछ कर घटना के कारण का पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है।
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दोस्त की हत्या कर ट्रेन से कटा 7वीं का छात्र: गोरखपुर में कमरे में मिली एक सड़ी लाश, रेलवे ट्रैक पर मिला दूसरे किशोर का शव – Gorakhpur News
अंडरग्राउंड मेट्रो के विरोध में सड़क पर उतरे रहवासी: बंगाली चौराहे पर एक दीया उम्मीद का जलाया, कैंडल मार्च निकाला, बोले- रातों की नींद उड़ गई – Indore News
इंदौर में मेट्रो नेटवर्क के विस्तार के बीच प्रस्तावित भूमिगत रूट को लेकर तिलक नगर, गोयल नगर, साईंनाथ कॉलोनी और आसपास के रहवासियों का विरोध तेज हो गया है। सोमवार रात को बड़ी संख्या में रहवासी बंगाली चौराहे पर एकत्रित हुए। यहां उन्होंने एक दिया उम्मीद का जलाया और कैंडल मार्च निकालकर अपनी आपत्ति दर्ज कराई। विरोध के दौरान टेंडर की कॉपी फाड़कर नारेबाजी भी की गई। रहवासियों ने कहा कि उनका विरोध मेट्रो परियोजना से नहीं है। वे चाहते हैं कि घनी आबादी, पुराने मकानों और बड़ी संख्या में बोरिंग वाले इलाकों के नीचे से प्रस्तावित सुरंग के बजाय दूसरे संभावित रूट का भी तकनीकी अध्ययन कराया जाए। प्रदर्शन रात 9 बजे शुरू हुआ और 10.30 बजे तक जारी रहा। अभियान चलाकर लोगों को बताया प्रस्तावित रूट
रहवासी सीए मनीष जैन, राजेश अग्रवाल और राजीव जैन ने बताया कि इलाके के कई लोगों को प्रस्तावित भूमिगत रूट की पूरी जानकारी नहीं थी। अभियान के दौरान लोगों को रूट और इससे जुड़े संभावित प्रभावों की जानकारी दी गई। इसके बाद रहवासियों से उनकी आपत्तियां और सुझाव भी दर्ज किए गए। प्रदर्शन के दौरान विपुल जैन, विकास मिश्रा, राजेश जैन सहित महिलाएं भी शामिल रही। हमारी रातों की नींद उड़ गई
रहवासियों ने बताया कि हमारी रातों की नींद उड़ गई है, जबसे हमें पता चला है कि अंडरग्राउंड मेट्रो निकलने वाली है। तिलक नगर और आसपास के क्षेत्रों में कई परिवार घरेलू जरूरतों के लिए बोरिंग के पानी पर निर्भर हैं। रहवासियों ने आशंका जताई है कि टनल बोरिंग मशीन से भूमिगत निर्माण के दौरान स्थानीय जलस्रोतों और मौजूदा बोरिंग पर असर पड़ सकता है। बड़ी संख्या में बोरिंग प्रभावित हुए तो आने वाले समय में इलाके में जलसंकट की स्थिति पैदा हो सकती है। 50-60 साल पुराने मकानों की सुरक्षा का मुद्दा
विरोध कर रहे लोगों के मुताबिक इलाके में बड़ी संख्या में मकान 50 से 60 वर्ष पुराने हैं। ऐसे में रहवासियों का सवाल है कि भूमिगत निर्माण के दौरान जमीन में होने वाले बदलाव और कंपन का इन पुराने भवनों की नींव पर क्या असर पड़ेगा।
तिलक नगर के रहवासी सीए मनीष जैन हमने उम्मीद का एक दिया जलाकर प्रशासन को बताया है कि हमारी उम्मीद अभी भी जारी है। रहवासी क्षेत्र से मेट्रो निकलेगी तो सभी की समस्या बढ़ जाएगी। पुराने मकान के टूटने का खतरा होगा। लिखित आश्वासन मिलने तक जारी रहेगा आंदोलन
गोयल नगर के रहवासी राजेश अग्रवाल ने बताया कि शासन, प्रशासन, मेट्रो प्रबंधन और जनप्रतिनिधि जब तक हमें लिखित में आश्वासन नहीं देंगे, तब तक हमारा आंदोलन जारी रहेगा। हमने कोर्ट में भी याचिका लगा दी है। हमारे साथ धोखा हुआ है, इन्होंने बिना जानकारी देते हुए टेंडर बदला है। जेन जी भी आंदोलन में शामिल होने की तैयारी में
रहवासी अंकित दुबे ने कहा कि इस आंदोलन में अब जेन जी (Gen Z) भी जुड़ रहे हैं। उन्होंने बताया कि जल्द ही युवाओं की ओर से भूमिगत मेट्रो के प्रस्तावित रूट को लेकर बड़ा प्रदर्शन किया जाएगा।आने वाले दिनों में अभियान को और व्यापक किया जाएगा और क्षेत्र के अधिक से अधिक लोगों को इससे जोड़ा जाएगा। हमारे बोरिंग खत्म हो जाएंगे
गोयल नगर की रहवासी स्मिता ने बताया कि हमारे बोरिंग खत्म हो जाएंगे। हमारे मकानों में दरार आने की आशंका है। हम हमारे घर के नीचे से मेट्रो नहीं निकलने देंगे। एडवोकेट सपना ने बताया कि रहवासी क्षेत्र से अंडरग्राउंड निकल रही है। पहले यहां से एलिटिवेटेड मेट्रो निकलने वाली थी, लेकिन इन्होंने योजना में बदलाव कर दिया। छह हजार से अधिक मकान है, अंडरग्राउंड मेट्रो से सभी प्रभावित होंगे। रहवासियों की प्रमुख मांगें
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छोटा सा स्टॉल, बड़ा मेन्यू और बढ़ती भीड़, सीतामढ़ी में दो भाइयों ने बनाया फूड हॉटस्पॉट
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बिहार के सीतामढ़ी के शंकर चौक पर दो भाइयों का छोटा सा फूड स्टॉल पिछले ढाई महीनों में लोगों के बीच खास पहचान बना चुका है. शुरुआत में जहां रोजाना 20-25 स्टिक ही बिकती थीं, वहीं अब मांग बढ़कर 35 से 50 या उससे ज्यादा स्टिक तक पहुंच गई है. स्टॉल पर सोया मसाला चाप, मलाई चाप, अफगानी और ईरानी चाप के साथ मशरूम टिक्का, पनीर टिक्का, फ्रैंकी रोल और खास मशरूम व वेज शेक भी मिलते हैं. खास बात यह है कि यहां व्यंजनों की कीमत 70 रुपये से शुरू होकर 120 रुपये तक है, जिससे किफायती दाम में अलग-अलग स्वाद का आनंद लेने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंच रहे हैं.
बिहार के सीतामढ़ी के व्यस्त शंकर चौक पर इन दिनों स्वाद के शौकीनों की भारी भीड़ देखने को मिल रही है. यहां दो भाइयों द्वारा संचालित एक छोटा सा फूड स्टॉल शहर का नया हॉटस्पॉट बन चुका है. पिछले करीब ढाई महीनों में इस स्टॉल ने अपनी एक खास पहचान बनाई है. पहले जहां लोग इसके बारे में ज्यादा नहीं जानते थे, वहीं अब दूर-दूर से लोग यहां के लजीज व्यंजनों का स्वाद लेने पहुंच रहे हैं.
यहां मिलने वाले व्यंजनों की बात करें तो मेन्यू में वैरायटी की कोई कमी नहीं है. दुकानदार दीपक कुमार ने बताया कि ग्राहकों के लिए सोया मसाला चाप, सोया मलाई चाप, अफगानी चाप और ईरानी चाप उपलब्ध हैं. इसके अलावा मशरूम टिक्का, पनीर टिक्का, अचारी, मलाई फ्लेवर और फ्रैंकी रोल भी तैयार किए जाते हैं. साथ ही यहां का खास ‘मशरूम शेक’ और वेज शेक लोगों के बीच काफी पसंद किया जा रहा है.
दुकानदार के अनुसार, शुरुआती दिनों की तुलना में अब उनके व्यंजनों की मांग काफी बढ़ चुकी है. पहले जहां वे रोजाना केवल 20 से 25 स्टिक ही बेच पाते थे, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 35, 40, 50 और कभी-कभी इससे भी ज्यादा हो जाता है. बाजार में उनके स्वाद की पहचान बनने से बिक्री में काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इससे दोनों भाइयों के चेहरे पर खुशी साफ झलकती है.
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दुकानदार के अनुसार, शुरुआती दिनों की तुलना में अब उनके व्यंजनों की मांग काफी बढ़ चुकी है. पहले जहां वे रोजाना केवल 20 से 25 स्टिक ही बेच पाते थे, वहीं अब यह आंकड़ा बढ़कर 35, 40, 50 और कभी-कभी इससे भी ज्यादा हो जाता है. बाजार में उनके स्वाद की पहचान बनने से बिक्री में काफी बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इससे दोनों भाइयों के चेहरे पर खुशी साफ झलकती है.
स्वाद के साथ-साथ यहां के दाम भी आम लोगों की जेब के अनुकूल रखे गए हैं. स्टॉल पर व्यंजनों की कीमत मात्र 70 रुपये से शुरू होती है. यहां 70, 80, 90, 100, 110 और 120 रुपये तक की प्लेट उपलब्ध हैं. किफायती दाम, बेहतरीन क्वालिटी और अलग अंदाज में परोसे जाने वाले इस भोजन ने शंकर चौक को खाने-पीने के शौकीनों के लिए पसंदीदा जगह बना दिया है. तो अगर आप भी हैं खाने के शौकीन तो यहां एक बार जरूर जाएं.
शिवदाहा में इंद्र पूजा का आयोजन: 14 साल से हो रहा आयोजन, जुटी श्रद्धालुओं की भीड़ – gaighat News
मुजफ्फरपुर जिले के गायघाट प्रखंड के शिवदाहा गांव में इंद्र पूजा हो रही है। रविवार को मौसम साफ होने पर देर रात तक पूजा स्थल पर दूर-दराज से सैकड़ों श्रद्धालु पहुंचे। कलश यात्रा के बाद खराब मौसम से मेले का रंग फीका पड़ गया था। मौसम साफ होते ही श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ गई। राजद के युवा नेता प्रभात किरण भी पहुंचे, समिति ने उन्हें अंगवस्त्र देकर सम्मानित किया। यह पूजा पिछले 14 सालों से हर साल होती है। भगवान इंद्र की पूजा कर इलाके के विकास और किसानों की तरक्की की दुआ मांगी जाती है। इसमें आसपास के गांवों के साथ दूर-दराज से भी लोग आते हैं। मौके पर वीरेंद्र प्रसाद यादव, भोला राय, ललित कुमार यादव, अयोधि लाल देव, लाल बाबू राय, कुंदन कुमार, सुशील यादव, सरोज यादव, सरपंच सीताराम महतो, रौशन मिश्रा, राजा मिश्र, सतनाम ये, पत्रकार चंद्रशेखर उपाध्याय, मनीष कुमार यादव समेत कई लोग मौजूद थे।
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मेरठ में युवक ने पेड़ से लटककर की खुदकुशी: खेतों पर गए ग्रामीणों ने देखा, पत्नी से विवाद के बाद ससुराल से लौटा था – Rohta(Meerut) News
मेरठ के कैथवाड़ी के रोहटा थाना क्षेत्र के कैथवाड़ी गांव के जंगल में रविवार सुबह एक 30 वर्षीय युवक का शव पेड़ से लटका मिलने से हड़कंप मच गया। सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। पुलिस के मुताबिक, पारिवारिक विवाद के चलते युवक ने यह आत्मघाती कदम उठाया है। रविवार सुबह जब कैथवाड़ी गांव के ग्रामीण खेतों की ओर गए, तो उन्होंने जंगल में पेड़ पर रस्सी से एक युवक का शव लटका देखा। देखते ही देखते मौके पर ग्रामीणों की भीड़ जमा हो गई। ग्रामीणों ने तुरंत इसकी सूचना रोहटा पुलिस और यूपी कंट्रोल रूम को दी। ससुराल में पत्नी से हुआ था विवाद थानाध्यक्ष पूजा पंवार ने बताया कि मृतक की पहचान कैथवाड़ी निवासी रघुवीर प्रजापत के 30 वर्षीय बेटे मोनू के रूप में हुई है। मोनू अपनी पत्नी पिंकी के साथ मुजफ्फरनगर के हड़ौली गांव (ससुराल) में रहकर मजदूरी करता था। पुलिस जांच में सामने आया है कि शनिवार रात किसी बात को लेकर मोनू का अपनी पत्नी से विवाद हो गया था। पोस्टमार्टम के लिए भेजा शव विवाद के बाद रविवार सुबह मोनू ससुराल से वापस अपने गांव कैथवाड़ी पहुंचा और खेतों की तरफ जाकर फांसी लगा ली। पुलिस ने घटनास्थल का निरीक्षण कर पंचनामा भरा और शव को पोस्टमार्टम के लिए मर्चरी भेज दिया है। फिलहाल पुलिस मामले की आगे की कानूनी कार्रवाई में जुटी है।
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गया की पुष्पा ने नीरा से तैयार की मिठाई, नेपाल-तिब्बत तक पहुंचा स्वाद
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Gaya Business Women Success Story: बिहार के गया जिले के इलरा गांव की रहने वाली कुमारी पुष्पा राज ने घर संभालने से लेकर अपना कारोबार खड़ा करने तक का सफर तय किया है. करीब 5 साल पहले तक घरेलू कामकाज संभालने वाली पुष्पा ने 2022 में जीविका समूह से जुड़कर बोधगया महाबोधि मंदिर के बाहर एक गुमटी में नीरा से बनी मिठाई बेचने का काम शुरू किया. इसके लिए उन्होंने समूह से 80 हजार रुपये का लोन लिया और सरकार से गुमटी व नीरा कूलिंग मशीन की मदद मिली. शुरुआत में ग्राहकों की संख्या कम थी और दिनभर में 500 रुपये की कमाई भी मुश्किल होती थी, लेकिन धीरे-धीरे नीरा मिठाई का स्वाद लोगों को पसंद आने लगा. आज पुष्पा तीन स्टॉल और एक बड़ी दुकान का संचालन कर रही हैं, 6 लोगों को रोजगार दे रही हैं और उनके मुताबिक रोजाना करीब 3-4 हजार रुपये की आमदनी हो रही है, जबकि महीने की बचत 1 लाख रुपये से अधिक है.
5 साल पूर्व तक घर का कामकाज संभालने वाली कुमारी पुष्पा राज आज महीने की 1 लाख रुपए से अधिक की आमदनी कर रही हैं. बिहार के गया जिले के इलरा गांव की रहने वाली पुष्पा ने 2022 में बोधगया महाबोधि मंदिर के बाहर एक गुमटी में नीरा मिठाई का कारोबार शुरू किया था. जीविका समूह से जुड़े होने के कारण इन्हें सरकार से एक गुमटी और नीरा कूलिंग मशीन दी गई थी. फिर उन्होंने 80 हजार रुपए समूह से लोन लेकर मिठाई का काम शुरू किया और धीरे-धीरे इनका कारोबार बढ़ता ही चला गया.
शुरुआत के दिनों में नीरा से तैयार मिठाई की डिमांड कम थी. लेकिन जब लोगों को इसका टेस्ट पसंद आया तो इसकी डिमांड बढ़ने लगी. खासकर तिब्बत और नेपाल के विदेशी श्रद्धालु इसे ज्यादा पसंद करने लगे और हर दिन 500 से 800 रुपये की बचत होने लगी. धीरे-धीरे इन्होंने गया शहर में स्थित प्रमंडलीय कार्यालय के पास दूसरा स्टॉल लगाया और अब बोधगया के भागलपुर मोड़ के पास एक बड़ी दुकान खोल ली है. आज की तारीख में पुष्पा तीन स्टॉल का संचालन कर रही हैं.
इन्होंने 6 लोगों को रोजगार दे रखा है और अब इनकी महीने की बचत 1 लाख रुपए से अधिक है. लोकल 18 से बातचीत में पुष्पा राज बताती हैं कि जीविका समूह से जुड़ने के बाद नीरा को गुड़ तैयार कर मिठाई बनाने का प्रशिक्षण दिया गया. उसके बाद बोधगया में मिठाई स्टॉल खोलने के लिए सरकार से मदद भी की गई और 80 हजार रुपए लोन लेकर इस कारोबार को शुरू किया. हमारे स्टॉल का उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के द्वारा किया गया था. इतना ही नहीं, नीरा से तैयार गुड़ और मिठाई को देखने नीतीश कुमार हमारे गांव भी आए थे.
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शुरुआत के एक-दो साल काफी परेशानी हुई और ग्राहकों को नीरा मिठाई की खासियत के बारे में समझाना पड़ता था. ग्राहकों को नीरा के फायदे बताते थे, तब वे खरीदारी करते थे. एक-दो साल तो दिन भर में ₹500 भी कमाना मुश्किल होता था. लेकिन धीरे-धीरे जब लोगों की जुबान पर नीरा का स्वाद चढ़ गया तो इसकी डिमांड भरपूर आने लगी. अब तो लोग नीरा से तैयार मिठाई पैक करा कर नेपाल और तिब्बत तक ले जाते हैं.
एक गुमटी से शुरू हुआ यह कारोबार अब दो स्टॉल और एक बड़ी दुकान का रूप ले चुका है. बोधगया महाबोधि मंदिर के पास, गया शहर में प्रमंडलीय कार्यालय के नजदीक और तीसरा बोधगया के भागलपुर में दुकान खुल चुकी है. इन्होंने बताया अब हर दिन लगभग 3-4 हजार रुपए की आमदनी हो रही है और घर का हर सदस्य इसी कारोबार से जुड़ गया है.
सीवान में हाइवा ने बाइक सवार पिता-पुत्र को रौंदा, मौत: घर से 500 मीटर दूर हादसा, हाइवा के नीचे फंसे; JCB से निकाला, चालक फरार – Siwan News
सीवान के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के बिद्रुति हाता गांव के पास रविवार शाम तेज रफ्तार हाइवा की चपेट में आने से बाइक सवार पिता-पुत्र की मौत हो गई। हादसा जवाहर नवोदय विद्यालय के समीप हाईवे पर हुआ। मृतकों की पहचान टड़वां गांव निवासी 35 वर्षीय मुकेश कुमार और उनके 10 वर्षीय बेटे बिट्टू कुमार के रूप में हुई है। घटना के बाद मौके पर अफरातफरी मच गई और परिजनों में कोहराम मच गया। बेटे को बाइक पर बैठाकर बाजार जा रहे थे मुकेश परिजनों के अनुसार, मुकेश कुमार हर रविवार की तरह रविवार शाम भी अपने बेटे बिट्टू को बाइक पर बैठाकर सब्जी खरीदने बाजार जा रहे थे। घर से करीब 500 मीटर दूर ही तेज रफ्तार हाइवा ने दोनों को अपनी चपेट में ले लिया। बताया गया कि हाइवा हकाम की ओर से आ रहा था और जवाहर नवोदय विद्यालय के पास विपरीत दिशा में जाकर बाइक में जोरदार टक्कर मार दी। बाइक समेत हाइवा के नीचे फंसे पिता-पुत्र टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक समेत मुकेश और उनका बेटा हाइवा के नीचे फंस गए। हादसे के बाद आसपास के लोग मौके पर पहुंचे और दोनों को निकालने का प्रयास किया। बाइक हाइवा के नीचे फंसी होने के कारण लोगों को काफी मशक्कत करनी पड़ी। बाद में जेसीबी की मदद से हाइवा को हटाकर दोनों को बाहर निकाला गया। अस्पताल पहुंचते ही डॉक्टरों ने मृत घोषित किया स्थानीय लोगों की मदद से दोनों को तत्काल अस्पताल पहुंचाया गया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद पिता-पुत्र को मृत घोषित कर दिया। एक ही परिवार के दो लोगों की मौत की सूचना मिलते ही गांव में मातम पसर गया। निजी स्कूल और कोचिंग में पढ़ाते थे मुकेश परिजनों के अनुसार, मुकेश कुमार निजी विद्यालय और कोचिंग संस्थान में पढ़ाकर परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनके एक पुत्र और एक पुत्री हैं। बेटे के साथ रविवार को बाजार जाना उनकी सामान्य दिनचर्या का हिस्सा था, लेकिन इसी दौरान हुए हादसे ने परिवार को गहरे सदमे में डाल दिया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। हाइवा छोड़कर चालक फरार, पुलिस ने किया जब्त बताया गया कि हादसे के बाद गिट्टी लदा हाइवा मौके पर छोड़कर चालक फरार हो गया। सूचना मिलते ही मुफस्सिल थाना पुलिस घटनास्थल पर पहुंची और दुर्घटनाग्रस्त हाइवा को जब्त कर लिया। मुफस्सिल थाना प्रभारी उपेंद्र कुमार सिंह ने बताया कि सड़क दुर्घटना में पिता-पुत्र की मौत हुई है। हाइवा जब्त कर लिया गया है और फरार चालक की पहचान व गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई की जा रही है।
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हाईकोर्ट के आदेश के बावजूद इलेक्ट्रिशियन-को काम पर नहीं रखा: आर्मी स्कूल प्रिंसिपल को 5 अक्टूबर को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट में किया तलब – Jodhpur News
राजस्थान हाईकोर्ट ने आर्मी पब्लिक स्कूल जोधपुर की प्रिंसिपल डॉ. तबस्सुम खान को 5 अक्टूबर को कोर्ट में तलब किया है। यह मामला इलेक्ट्रिशियन महेंद्र सिंह शेखावत को अंतरिम आदेश के बावजूद सेवा में जारी नहीं रखने से जुड़ा है। जस्टिस बलजिंदर सिंह संधू की बेंच ने इस पर सख्त रुख अपनाया है। महेंद्र सिंह ने अपनी सेवा नियमित करने की मांग को लेकर याचिका दायर की थी। याचिका दायर करते समय वह स्कूल में कार्यरत थे। हाईकोर्ट ने 14 मार्च 2022 को अंतरिम आदेश दिया था, लेकिन स्कूल ने इसका पालन नहीं किया। इलेक्ट्रिशियन का काम स्थायी अवमानना याचिका की सुनवाई में स्कूल ने कहा- कोर्ट ने कर्मचारी को काम पर रखने का निर्देश नहीं दिया था, बल्कि उसकी जगह किसी और को नियुक्त न करने को कहा था। स्कूल ने माना कि महेंद्र सिंह को सेवा में नहीं रखा गया। कोर्ट ने कहा- इलेक्ट्रिशियन का काम स्थायी होता है। महेंद्र सिंह 13 जनवरी 2014 से 15 मार्च 2022 तक इस पद पर काम करते रहे थे। कोर्ट ने प्रिंसिपल को खुद आकर स्थिति साफ करने का निर्देश दिया है।
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श्रीराम ने गुरु की आज्ञा से तोड़ा धनुष: प्रत्यंचा चढ़ाते ही दर्शकों ने लगाए जयकारे, सीता से विवाह; रामलीला का दूसरा दिन – Tikamgarh News
टीकमगढ़ जिले के बल्देवगढ़ नगर परिषद में इन दिनों पांच दिवसीय रामलीला महोत्सव की धूम है। रविवार रात ऐतिहासिक किला परिसर स्थित प्राचीन बलदाऊ जी मंदिर में रामलीला के दूसरे दिन का मंचन हुआ। कार्यक्रम की शुरुआत नगर परिषद अध्यक्ष शालिनी विश्व दीपक मिश्रा ने की। इस मौके पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु और स्थानीय लोग रामलीला देखने पहुंचे। मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग के सहयोग से आयोजित इस महोत्सव में चित्रकूट के गुरुकुल संस्थान के कलाकारों ने धनुष यज्ञ, श्रीराम विवाह, वन गमन और केवट प्रसंग का जीवंत मंचन किया। धनुष टूटते ही गूंजा जयकारा, चारों भाइयों का हुआ विवाह लीला के दौरान दिखाया गया कि राजा जनक की प्रतिज्ञा के अनुसार जब बड़े-बड़े राजा और योद्धा शिव धनुष ‘पिनाक’ को हिला भी नहीं सके, तब गुरु विश्वामित्र की आज्ञा पाकर भगवान श्रीराम ने सहजता से धनुष को उठा लिया। जैसे ही उन्होंने प्रत्यंचा चढ़ाई, धनुष टूट गया और पूरी जनकपुरी श्रीराम के जयकारों से गूंज उठी। माता सीता ने श्रीराम के गले में वरमाला डाली। इसके बाद राजा दशरथ जनकपुर पहुंचे और वैदिक रीती-रिवाज के साथ चारों भाइयों-श्रीराम-सीता, लक्ष्मण-उर्मिला, भरत-मांडवी और शत्रुघ्न-श्रुतकीर्ति का विवाह संपन्न हुआ। आगे ये होंगे प्रमुख प्रसंग एसडीएम निशांत भूरिया ने बताया कि महोत्सव में आगे के कार्यक्रम इस प्रकार रहेंगे। 28 सितंबर: दशरथ देवलोक गमन, भरत मिलाप और सीता हरण का मंचन। 29 सितंबर: शबरी प्रसंग, श्रीराम-सुग्रीव मित्रता और लंका दहन। 30 सितंबर: लंका युद्ध, रावण वध और श्रीराम राज्याभिषेक के साथ महोत्सव का समापन होगा। कार्यक्रम के दौरान एसडीएम निशांत भूरिया, तहसीलदार प्राची जैन, नगर परिषद अध्यक्ष शालिनी मिश्रा और संजय जैन समेत कई लोग मौजूद रहे।
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बारिश में उगने वाली इस देसी सब्जी को पहचानते हैं? फाइबर के साथ हैं कई पोषक तत्व
Kakora Benefits: बारिश के मौसम में जब खेतों और जंगलों के आसपास हरियाली बढ़ने लगती है तो कई ऐसी देसी सब्जियां भी नजर आने लगती हैं, जिन्हें शहरों में बहुत कम लोग जानते हैं. ककोरा उन्हीं मौसमी सब्जियों में से एक है. ग्रामीण इलाकों में इसे ककोड़ा या कंटोला भी कहा जाता है. बेल पर उगने वाला यह छोटा फल बरसात के दिनों में सब्जी के रूप में खाया जाता है. कई जगह इसे आलू के साथ पकाकर बनाया जाता है.
पारंपरिक खानपान में ककोरे की अपनी खास जगह है. इसमें फाइबर समेत कई पोषक तत्व पाए जाते हैं. हालांकि डायबिटीज या बालों से जुड़ी किसी समस्या के इलाज के तौर पर इसे देखना सही नहीं होगा. इसे संतुलित आहार का हिस्सा मानना ज्यादा उचित है.
बेलों पर उगता है ककोरा
ककोरा बारिश के मौसम में बेलों पर दिखाई देता है. इसकी बेल अक्सर झाड़ियों और दूसरे पौधों का सहारा लेकर फैलती है. ग्रामीण इलाकों में लोग मौसम के दौरान इसे चुनकर घर लाते हैं और साफ करने के बाद इसकी सब्जी बनाते हैं. ककोरे का स्वाद हल्का अलग होता है. कई घरों में इसे आलू, प्याज और मसालों के साथ पकाया जाता है. देसी तरीके से बनी इसकी सब्जी रोटी के साथ खाई जाती है. यही वजह है कि जिन इलाकों में यह आसानी से मिलता है, वहां बरसात के मौसम में इसकी मांग बढ़ जाती है.
ककोरा और पारंपरिक खानपान
ककोरा यानी मोमोर्डिका डायोइका को अंग्रेजी में स्पाइनी गार्ड या स्पाइनी गॉर्ड भी कहा जाता है. यह कद्दूवर्गीय परिवार का पौधा है. इससे जुड़ी वैज्ञानिक सामग्री में इसके पारंपरिक उपयोग और पोषण संबंधी संभावनाओं पर अध्ययन मिलते हैं. एक अध्ययन में ककोरे के बीजों के अर्क पर मधुमेह से जुड़े प्रभावों की जांच चूहों पर की गई थी, लेकिन ऐसे परिणामों को सीधे इंसानों पर लागू नहीं किया जा सकता. इसलिए ककोरे को सामान्य मौसमी सब्जी के तौर पर खाना और इसे किसी बीमारी की दवा मानना, दोनों बातें अलग हैं.
(इमेज AI)
पाचन के लिए फायदेमंद हो सकता है फाइबर
ककोरे में फाइबर समेत कई पोषक तत्व पाए जाते हैं. फाइबर वाला भोजन सामान्य तौर पर पाचन तंत्र के लिए उपयोगी माना जाता है. रोज की डाइट में अलग-अलग तरह की सब्जियां शामिल करने से भोजन में फाइबर और दूसरे पोषक तत्वों की विविधता बढ़ती है. हालांकि केवल ककोरा खाने से कब्ज या पाचन की कोई समस्या ठीक होने की गारंटी नहीं है. इसे दाल, अनाज, दूसरी सब्जियों और पर्याप्त पानी के साथ संतुलित डाइट का हिस्सा बनाना ज्यादा बेहतर तरीका है.
क्या डायबिटीज में भी खा सकते हैं
ककोरे को लेकर पारंपरिक रूप से ब्लड शुगर से जुड़े फायदे बताए जाते हैं. ककोरे के बीजों पर किए गए कुछ प्रयोगशाला और पशु-अध्ययनों में ग्लूकोज से जुड़े प्रभाव देखे गए हैं, लेकिन यहां एक जरूरी बात समझना जरूरी है. ककोरा और करेला एक ही सब्जी नहीं हैं. करेला यानी मोमोर्डिका चारैंटिया पर डायबिटीज के संदर्भ में ज्यादा शोध हुआ है, फिर भी मानव अध्ययनों के आधार पर इसे डायबिटीज की दवा के विकल्प के रूप में मानने के लिए पर्याप्त प्रमाण नहीं हैं. इसलिए डायबिटीज वाले व्यक्ति ककोरे को सब्जी के रूप में खा सकते हैं, लेकिन दवा या डॉक्टर की सलाह को इसकी वजह से बंद या बदलना नहीं चाहिए.
बालों के लिए ककोरा कितना उपयोगी
ककोरे को बालों का झड़ना रोकने वाली सब्जी बताना थोड़ा ज्यादा दावा होगा. इसमें मौजूद पोषक तत्व संतुलित आहार का हिस्सा जरूर हो सकते हैं, लेकिन केवल ककोरा खाने से बालों का झड़ना रुकता है, ऐसा पुख्ता मानव प्रमाण उपलब्ध नहीं है. बालों का झड़ना कई कारणों से हो सकता है. अगर समस्या लगातार बनी हुई है तो सिर्फ किसी एक सब्जी पर निर्भर रहने के बजाय उसके कारण का पता लगाना जरूरी है.
(Disclaimer: इस लेख में दी गई जानकारियां और सूचनाएं सामान्य मान्यताओं पर आधारित हैं. Hindi news18 इनकी पुष्टि नहीं करता है. इन पर अमल करने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से संपर्क करें.)

