Thursday, September 3, 2026
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यहां 2 रुपये प्रति किलो आलू, ₹20 किलो प्याज, जानें सब्जियों और फलों का रेट


सब्जियों और फलों के बढ़ते दामों ने रसोई के बजट पर बोझ बढ़ा दिया है. दिल्ली के कई बाजारों में जहां सब्जियां 60 से 100 रुपये किलो तक बिक रही हैं, वहीं आजादपुर मंडी के थोक भाव देखकर आपको जरूर राहत मिलेगी. जिस आलू के लिए स्थानीय बाजार में करीब 20 रुपये किलो तक देने पड़ रहे हैं, वही आजादपुर मंडी में न्यूनतम 2 रुपये किलो के भाव पर मिल रहा है. इसी तरह प्याज भी मंडी में 20 रुपये किलो से शुरू हो रहा है, जबकि कई स्थानीय बाजारों में इसका भाव 60 से 70 रुपये किलो तक पहुंच गया है. यानी मंडी और फुटकर बाजार के दाम में बड़ा अंतर देखने को मिल रहा है.

आजादपुर मंडी में सिर्फ आलू और प्याज ही सस्ते नहीं हैं. टमाटर, तुरई, बैंगन और खीरे जैसी कई सब्जियां भी कम कीमत पर उपलब्ध हैं. हालांकि, यहां सब्जियों के दाम उनकी क्वालिटी और साइज के हिसाब से ऊपर-नीचे होते रहते हैं. इसलिए किसी सब्जी का न्यूनतम भाव और अधिकतम भाव अलग हो सकता है.

आलू से लेकर फूलगोभी तक के थोक भाव

मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, 2 सितंबर की मंडी लिस्ट के अनुसार आलू का भाव करीब 2 से 18.40 रुपये किलो रहा है. टमाटर 10 से 34 रुपये किलो के बीच बिक रहा है. बींस के दाम 30 से 60 रुपये, बैंगन 10 से 30 रुपये और फूलगोभी 15 से 40 रुपये किलो रही. वहीं, खीरा 10 से 30 रुपये, तुरई 10 से 30 रुपये और कद्दू 8 से 15 रुपये किलो के भाव पर मिला. अदरक 45 से 100 रुपये, भिंडी 30 से 50 रुपये, शिमला मिर्च 20 से 45 रुपये और मटर 50 से 100 रुपये किलो तक रही. मूली के भाव 4 से 16 रुपये किलो के बीच रहे.

प्याज का दाम भी कम

प्याज की बढ़ती कीमतों को कम करने को लेकर तमाम सरकारी प्रयास किए जा रहे हैं खुदरा बाजार में प्याज की कीमत 60, 70, 80 रुपए प्रति किलो है जबकि आजदपुर मंडी में 20 से 45 रुपये तक कीमत है.

फलों में भी कई चीजें सस्ती

मंडी में फलों के दाम भी अलग-अलग क्वालिटी के हिसाब से काफी बदल रहे हैं. सेब 25 से 180 रुपये किलो तक बिक रहा है. अमरूद 10 से 90 रुपये, केला 12 से 25 रुपये और मौसमी 12 से 40 रुपये किलो के भाव पर उपलब्ध है. पपीता 10 से 30 रुपये, अनानास 19 से 70 रुपये और तरबूज 12 से 17 रुपये किलो तक बिक रहा है.

स्थानीय बाजार में कीमत कई गुना ज्यादा

दिल्ली के कुछ स्थानीय और साप्ताहिक बाजारों में मंडी के मुकाबले सब्जियों के दाम काफी ज्यादा हैं. यहां प्याज करीब 70 रुपये किलो, तुरई 40 रुपये और करेला, भिंडी, मूली, बैंगन, पत्तागोभी और परवल करीब 60 रुपये किलो तक बिक रहे हैं. खीरे का भाव 50 रुपये, शिमला मिर्च 80 रुपये और लौकी करीब 40 रुपये किलो है. वहीं फूलगोभी, ककड़ी, टिंडा, जिमीकंद और गाजर जैसी कुछ सब्जियां 100 रुपये किलो तक पहुंच गई हैं. मशरूम करीब 250 रुपये और कटहल 120 रुपये किलो में मिल रहा है.

मुंबई में कितना है सब्जियों का रेट?

इसके अलावा मुंबई के बाजार में कई सब्जियों के भाव दिल्ली के स्थानीय बाजार से कम नजर आ रहे हैं. वहां भिंडी करीब 40 रुपये, परवल 60 रुपये, ककड़ी 40 रुपये और फूलगोभी 40 से 50 रुपये किलो है. पत्तागोभी 30 रुपये, तुरई और करेला 40 रुपये तथा बींस 60 रुपये किलो है. मुंबई में मटर करीब 80 रुपये, धनिया 30 रुपये, बैंगन 40 रुपये और अदरक करीब 200 रुपये किलो बिक रहा है.

दुकानदारों पर भी बड़ा असर

महंगाई का असर सिर्फ ग्राहकों की जेब पर ही नहीं पड़ रहा, बल्कि छोटे दुकानदार भी इससे परेशान हैं. दुकानदारों के मुताबिक, थोक बाजार में सामान महंगा होने से अब पहले से ज्यादा पैसा लगाना पड़ रहा है. जहां पहले 50 हजार रुपये में सामान खरीदकर जितना मुनाफा हो जाता था, अब उसी कमाई के लिए करीब 60 हजार रुपये लगाने पड़ रहे हैं. वहीं, फलों और सब्जियों के दाम बढ़ने से ग्राहक भी कम मात्रा में खरीदारी कर रहे हैं. इसका सीधा असर दुकानदारों की बिक्री और कमाई पर पड़ रहा है.



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रूस-यूक्रेन ने ब्लैक सी में 300 जहाजों पर हमले किए: दुनिया में गेहूं-मक्का महंगा होने का खतरा; रूस का अनाज निर्यात 71% घटा


5 मिनट पहले

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रूस-यूक्रेन युद्ध में अब ब्लैक सी सबसे बड़ा संघर्ष क्षेत्र बनता जा रहा है। पिछले करीब डेढ़ महीने में दोनों देशों ने 300 से अधिक जहाजों को निशाना बनाया है। इनमें अनाज ढोने वाले जहाज, तेल टैंकर और अन्य मालवाहक पोत शामिल हैं।

लगातार हमलों के कारण वैश्विक खाद्य आपूर्ति पर दबाव बढ़ रहा है और गेहूं व मक्का जैसी जरूरी फसलों की कीमतों में तेजी आने लगी है।

दुनिया के कुल गेहूं निर्यात में रूस और यूक्रेन की हिस्सेदारी करीब 30% है। इन दोनों देशों का अधिकांश अनाज ब्लैक सी के रास्ते दुनिया के विभिन्न देशों तक पहुंचता है।

लेकिन बंदरगाहों और जहाजों पर बढ़ते हमलों के कारण समुद्री व्यापार प्रभावित हो रहा है। जहाज मालिक इस मार्ग पर आने से बच रहे हैं और माल ढुलाई की लागत भी तेजी से बढ़ गई है।

अनाज निर्यात पर असर

यूक्रेन पिछले महीने अपनी क्षमता का केवल सीमित हिस्सा ही निर्यात कर पाया। वहीं रूस का अनाज निर्यात भी पिछले वर्ष की तुलना में तेजी से घटा है।

दोनों देशों के गोदामों में अनाज मौजूद है, लेकिन उसे खरीदार देशों तक पहुंचाने में मुश्किलें आ रही हैं।

इसका असर अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी दिख रहा है, जहां गेहूं की कीमतें पिछले एक साल में लगभग 30% बढ़ चुकी हैं।

सड़क और रेल मार्ग बने विकल्प

समुद्री मार्ग बाधित होने के बाद यूक्रेन सड़क और रेल नेटवर्क के जरिए अनाज निर्यात करने की कोशिश कर रहा है। हालांकि इन मार्गों की क्षमता ब्लैक सी के बंदरगाहों जितनी नहीं है।

डेन्यूब नदी के जरिए भी सीमित मात्रा में अनाज भेजा जा रहा है, लेकिन जलस्तर और परिवहन क्षमता की वजह से यह विकल्प पर्याप्त नहीं माना जा रहा।

मक्का की सप्लाई पर संकट

ब्लैक सी में बढ़ते तनाव का असर केवल गेहूं पर ही नहीं, बल्कि मक्का पर भी पड़ सकता है।

वर्ष 2025-26 में यूक्रेन ने 2.3 करोड़ टन मक्का निर्यात किया था, जो दुनिया के कुल मक्का निर्यात का लगभग 12% था। मौजूदा हालात जारी रहे तो मक्का की वैश्विक सप्लाई भी प्रभावित हो सकती है।

रूस के अनाज निर्यात में 71% गिरावट

ब्लैक सी में बढ़ते हमलों का असर रूस के अनाज कारोबार पर भी पड़ा है। अगस्त में रूस का कुल अनाज निर्यात पिछले साल के 59 लाख टन से घटकर 17 लाख टन रह गया, यानी करीब 71% की गिरावट दर्ज की गई।

गेहूं निर्यात 50 लाख टन से घटकर 13 लाख टन रह गया। रूसी गेहूं खरीदने वाले देशों की संख्या 43 से घटकर 16 रह गई है, जबकि अनाज भेजने वाले बंदरगाह 47 से घटकर केवल 10 रह गए हैं।

रूस के सबसे बड़े बंदरगाह नोवोरोसिस्क से शिपमेंट भी 24.9 लाख टन से घटकर 10.4 लाख टन रह गया।

क्यों अहम है ब्लैक सी

ब्लैक सी दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। रूस और यूक्रेन से होने वाले अधिकांश गेहूं, मक्का और सूरजमुखी तेल का निर्यात इसी रास्ते से होता है।

दोनों देश मिलकर वैश्विक गेहूं निर्यात का करीब 30% हिस्सा रखते हैं, इसलिए इस क्षेत्र में किसी भी तरह का सैन्य तनाव सीधे खाद्य बाजार को प्रभावित करता है।

2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद जब ब्लैक सी के रास्ते अनाज निर्यात बाधित हुआ था, तब दुनिया भर में खाद्य कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखी गई थी। बाद में संयुक्त राष्ट्र और तुर्किये की मध्यस्थता से ब्लैक सी ग्रेन डील लागू की गई, जिससे लाखों टन अनाज अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंच सका।

अब एक बार फिर ब्लैक सी में जहाजों और बंदरगाहों पर हमले बढ़ने से वैश्विक खाद्य आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह समुद्री मार्ग लंबे समय तक प्रभावित रहा, तो गेहूं, मक्का और खाद्य तेल की कीमतों में नई बढ़ोतरी देखने को मिल सकती है।

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70 साल से स्वाद का जादू कायम, जानें पाली का धनपत लॉज क्यों है इतना खास?

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Pali Food Destination: अगर आप पाली में कम कीमत में राजस्थानी घर जैसा स्वाद तलाश रहे हैं तो धनपत लॉज आपके लिए खास जगह हो सकती है. करीब छह दशक से ज्यादा समय से लोगों को भोजन परोस रहा यह प्रतिष्ठान अपने पारंपरिक स्वाद के लिए जाना जाता है. यहां बाजार के तेज मसालों के बजाय सादे और देसी तरीके से सब्जियां और दाल तैयार की जाती हैं. थाली में रोटी के साथ गट्टे की सब्जी, भिंडी और दाल मिलती है, जिसे देसी घी के साथ परोसा जाता है. करीब 100 रुपये की भरपेट थाली इस जगह की बड़ी खासियत है. यही वजह है कि वर्षों बाद भी पाली के लोगों और राहगीरों के बीच धनपत लॉज का स्वाद अपनी जगह बनाए हुए है.

पाली के धनपत लॉज में खाने का असली जादू इसके पारंपरिक पकाने के अंदाज में छिपा है. बाजार के भारी-भरकम मसालों से अलग, यहां के भोजन में ठेठ राजस्थानी तड़का और घर जैसा सादापन मिलता है. यहां खाने के बाद पेट में भारीपन महसूस नहीं होता, बल्कि मन को मां के हाथों के खाने जैसी तृप्ति मिलती है. सबसे मजे की बात यह है कि महंगाई के इस दौर में भी धनपत लॉज का मकसद जेब काटना नहीं, बल्कि दिल से खाना खिलाना है.

यह प्रसिद्ध भोजन स्थल राजस्थान के पाली शहर में वीर दुर्गादास नगर में स्थित है. पाली के निवासियों के साथ-साथ यहाँ से गुजरने वाले हर मुसाफिर और देसी जायके के शौकीनों के लिए ‘धनपत लॉज’ (धनराज लॉज) एक जाना-माना और पसंदीदा ठिकाना बना हुआ है. यहां का असली जादू छिपा है इनकी राजस्थानी सब्जियों और बनाने के पारंपरिक अंदाज में, जहां खाने के बाद भारीपन नहीं बल्कि मां के हाथों के खाने जैसी तृप्ति महसूस होती है.

यहां मिलने वाली थाली में ग्राहकों को दो बड़ी और गरमा-गरम रोटियां परोसी जाती हैं. इसके साथ राजस्थानी स्वाद से भरपूर देसी गट्टे की सब्जी, मसालेदार भिंडी की सब्जी और गाढ़ी दाल दी जाती है. इस पूरी थाली की सबसे बड़ी खासियत यह है कि सब कुछ शुद्ध देसी घी के साथ परोसा जाता है.

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इस लॉज की शुरुआत साल 1967 में हुई थी. पिछले लगभग 60 से 70 सालों से यह दुकान बिना अपना स्वाद और पहचान बदले लगातार सेवा दे रही है. सात दशक बीत जाने के बाद भी यहां खाने की गुणवत्ता, ताजगी और पारंपरिक मिठास में जरा सा भी बदलाव नहीं आया है.

महंगाई के इस दौर में जहां हर जगह खाने की कीमतें आसमान छू रही हैं, वहीं धनपत लॉज का मकसद जेब काटना नहीं बल्कि दिल से भोजन कराना है. महज 100 रुपये में यहां भरपेट, शुद्ध और पौष्टिक खाना मिलता है. यही वजह है कि सालों बाद भी यहां खाने वालों का जमावड़ा कम नहीं होता.

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ग्राम रोजगार सहायकों के एग्रीमेंट में बदलाव: सचिव नहीं तो APO करेगा एग्रीमेंट: खुद के साथ नहीं कर सकेंगे अनुबंध – Bhopal News




प्रदेश की 23 हजार से अधिक ग्राम पंचायतों में काम कर रहे ग्राम रोजगार सहायकों (जीआरएस) के संविदा एग्रीमेंट को लेकर मध्य प्रदेश राज्य ग्रामीण रोजगार गारंटी परिषद ने व्यवस्था में बदलाव किया है। अब जिन ग्राम पंचायतों में पंचायत सचिव का पद रिक्त है, सचिव पदस्थ नहीं हैं या ग्राम रोजगार सहायक को ही सचिव का प्रभार मिला हुआ है, वहां जीआरएस का एग्रीमेंट जनपद पंचायत स्तर पर पदस्थ अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी (APO) मनरेगा के साथ किया जाएगा। परिषद के सीईओ ने 1 सितंबर को इस संबंध में निर्देश जारी किए हैं। इसमें सभी जिलों के कलेक्टर, जिला कार्यक्रम समन्वयक और मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को नए प्रावधान का कड़ाई से पालन कराने के निर्देश दिए गए हैं। खुद के साथ एग्रीमेंट की स्थिति बनी सामान्य स्थिति में ग्राम रोजगार सहायक का संविदा अनुबंध ग्राम पंचायत सचिव और जीआरएस के बीच होता है। लेकिन कई पंचायतों में सचिव का पद रिक्त होने या सचिव के उपलब्ध नहीं होने के कारण जीआरएस को ही सचिव का प्रभार दिया गया है। ऐसी स्थिति में वही कर्मचारी अपने ही साथ संविदा अनुबंध करने की प्रक्रिया में आ रहे थे। परिषद के संज्ञान में ऐसी शिकायतें आने के बाद इस विसंगति को दूर करने के लिए नया प्रावधान किया गया है। परिषद ने माना कि स्वयं के साथ संविदा अनुबंध करना प्रशासनिक और विधिक दृष्टि से उचित नहीं है। अब APO करेगा अनुबंध नए प्रावधान के मुताबिक पंचायत में सचिव उपलब्ध होने पर एग्रीमेंट पहले की तरह सचिव और ग्राम रोजगार सहायक के बीच ही होगा। वहीं सचिव का पद रिक्त होने, सचिव पदस्थ नहीं होने या जीआरएस के ही सचिव के प्रभार में होने पर अनुबंध जनपद पंचायत के संबंधित अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी (APO) मनरेगा द्वारा किया जाएगा। यदि जनपद पंचायत में भी APO का पद रिक्त है तो प्रभारी अतिरिक्त कार्यक्रम अधिकारी एग्रीमेंट की कार्रवाई पूरी करेंगे। इस व्यवस्था से सचिव विहीन पंचायतों में ग्राम रोजगार सहायकों के नए अनुबंध और नवीनीकरण की प्रक्रिया आसान होगी, साथ ही खुद के साथ एग्रीमेंट करने की स्थिति भी खत्म हो जाएगी।



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विधायक अमित रानू के खिलाफ केस में बयान दर्ज: जमीन रजिस्ट्री के बाद भुगतान नहीं करने का आरोप, फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी – Muzaffarpur News




सीतामढ़ी के बेलसंड से लोजपा (रामविलास) विधायक अमित कुमार रानू की जमीन विवाद और धोखाधड़ी से जुड़े मामलों में कानूनी मुश्किलें लगातार बढ़ती जा रही हैं। मुजफ्फरपुर ब्रह्मपुरा थाना क्षेत्र के कृष्णा टोली निवासी विधवा आशा देवी ने 28 अगस्त को विधायक अमित कुमार रानू, उनके भाई सोनू कुमार उर्फ अभिनव कुमार समेत पांच लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कराई थी। एफआईआर में आरोप लगाया गया है कि उनकी जमीन की रजिस्ट्री कराई गई, लेकिन तय रकम का भुगतान नहीं किया गया। महिला का आरोप है कि जमीन का सौदा 35 लाख रुपए में हुआ था, लेकिन उन्हें पूरी राशि नहीं मिली। मामले में चेक और जमीन रजिस्ट्री से जुड़े दस्तावेजों की भी जांच की जा रही है। बुधवार को पीड़ित महिला ने कोर्ट में अपना बयान दर्ज कराया। मामले में विधायक के अलावा उनके भाई और राहुल कुमार, कार्तिक कुमार तथा उज्ज्वल कुमार को आरोपित बनाया गया है। वहीं, अहियापुर के झपहां उदनडीह गांव में जेसीबी से घर और चहारदीवारी तोड़े जाने के मामले में फरार आरोपितों की तलाश तेज कर दी गई है। पुलिस टीम ने बुधवार को माड़ीपुर इलाके में भी छापेमारी की थी। विधायक से जुड़े केस अब विशेष MP-MLA कोर्ट में विधायक अमित कुमार रानू के खिलाफ जमीन और तोड़फोड़ से जुड़े मामलों की सुनवाई को लेकर भी कार्रवाई हुई है। विधायक से जुड़े दर्ज मामलों को विशेष MP-MLA कोर्ट में ट्रांसफर कर दिया गया है। इससे पहले झपहां उदनडीह गांव में तोड़फोड़ से जुड़े मामलों में कई पीड़ितों और गवाहों के बयान मजिस्ट्रेट के समक्ष दर्ज कराए जा चुके हैं। इनमें राजा कुमार, अमित कुमार और हरेंद्र कुमार यादव के बयान भी शामिल हैं। फरार आरोपित की तलाश में माड़ीपुर में छापेमारी फरार आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए बुधवार को डीआईयू की टीम ने काजी मोहम्मदपुर थाना पुलिस के साथ माड़ीपुर इलाके में छापेमारी की। पुलिस को सूचना मिली थी कि मामले से जुड़ा एक शातिर आरोपित इलाके में छिपा हुआ है। टीम ने कई संभावित ठिकानों पर तलाशी ली और स्थानीय लोगों से भी पूछताछ की। हालांकि देर शाम तक पुलिस को फरार आरोपित को पकड़ नहीं पाई। झपहां उदनडीह मामले में पुलिस लगातार फरार आरोपितों के संभावित ठिकानों की जानकारी जुटा रही है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि जांच के दौरान जिन लोगों की संलिप्तता सामने आएगी, उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल विधायक अमित कुमार रानू से जुड़े जमीन रजिस्ट्री, कथित धोखाधड़ी और झपहां उदनडीह तोड़फोड़ मामले में पुलिस और न्यायिक कार्रवाई एक साथ आगे बढ़ रही है। आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच और अदालत की प्रक्रिया के बाद ही होगी। 20 अगस्त को 50 से अधिक लोगों की संपत्ति में तोड़फोड़ का मामला अहियापुर थाना क्षेत्र के झपहां उदनडीह गांव में 20 अगस्त को बड़े पैमाने पर चहारदीवारी और निर्माणाधीन मकानों को जेसीबी से तोड़े जाने का मामला सामने आया था। पुलिस के अनुसार, घटना में 50 से अधिक लोगों के शामिल होने की बात सामने आई है। गिरफ्तार आरोपितों से पूछताछ के आधार पर पुलिस अन्य लोगों की भूमिका की जांच कर रही है। अबतक 28 केस दर्ज हो चुके हैं, 7 की गिरफ्तारी मुजफ्फरपुर में चहारदीवारी और मकानों में तोड़फोड़ मामले में पुलिस ने अब तक 28 केस दर्ज किए हैं। 7 की गिरफ्तारी हुई है। दो एफआईआर 29 अगस्त को हुई थी। इसी दिन 7वीं गिरफ्तारी जेसीबी मालिक सुबोध की हुई थी। इसी की जेसीबी से चहारदीवारी तोड़ी गई थी। वहीं, एफआईआर करने वाले आशा देवी और विजय कुमार हैं। दोनों ने अपनी-अपनी प्राथमिकी में बेलसंड विधायक अमित कुमार रानू को नामजद किया है। अब तक विधायक पर 10 मामले दर्ज हो चुके हैं।
ये हो चुके हैं गिरफ्तार नन्हे सिंह और छोटू यादव ये दोनों विधायक के बेलसंड ऑफिस से हथियार के साथ धराए थे। सुमित कुमार श्रीवास्तव और सनी सिंह ये दोनों मौके से गिरफ्तार हुए थे। जहां तोड़फोड़ किया गया था। शिवहर का विकास राठौड़ अहियापुर के अयाचीग्राम में किराए के मकान में रहता था। शराब का काम करता था। विधायक के लोगों के साथ उठना-बैठना था। इसके किराए के मकान से शराब मिली थी। जिसके बाद इसे भी गिरफ्तार किया गया था। आनंद कुमार इसकी गिरफ्तारी अहियापुर से हुई थी। अज्ञात लोगों के सत्यापन में इसका नाम सामने आया था। वहीं, अब जेसीबी मालिक सुबोध की गिरफ्तारी हुई है।



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23 किलो वजन घटाने के लिए छोड़ दी यें 8 आदतें, फिटनेस कोच ने शेयर की वेट लॉस जर्नी


वेट लॉस करना चाहते हैं तो केवल राइट डाइट और वर्कआउट काफी नहीं। डेली रूटीन की कुछ आदतों को छोड़ना भी जरूरी है। जैसे फिटनेस कोच ने अपनी जर्नी शेयर करते हुए बताया कि उन्होंने ये 8 आदतें छोड़कर बॉडी को ट्रांसफार्म किया।

वेट लॉस की बात आती है तो सबसे पहले एक्सरसाइज और डाइट कंट्रोल पर सबका फोकस होता है। हम क्या खा रहे और कैसे एक्सरसाइज कर रहे ये दो ही चीजें सबसे ज्यादा मैटर करती हैं। इन दो बातों का सब ख्याल रखते हैं। लेकिन इंस्टाग्राम पर अपनी फिटनेस जर्नी शेयर करते हुए फिटनेस ट्रेनर ने बताया कि अपने बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन के लिए उसने ये 8 आदतों को सबसे पहले छोड़ा। जिससे उसका वजन 72 किलो से 49 पर आया। शिखा सुराना ने अपनी फिटनेस जर्नी को शेयर करते हुए बताया कि उन्होने 8 चीजों को करना बंद कर दिया। जिससे उनके लिए वेट लॉस करना आसान हो गया।

ब्रेकफास्ट छोड़ना

सुबह का ब्रेकफास्ट छोड़ना मतलब मेटाबॉलिज्म को स्लो करना। शिखा ने बताया कि अपनी 8 आदतों में पहली आदत ब्रेकफास्ट स्किप करने को छोड़ा। सुबह भूखे रहने के बाद वो रात को ज्यादा खा लेती थीं और नतीजा मेटाबॉलिज्म स्लो हो जाता था। तो भूखे रहने की आदत को छोड़कर सुबह उठने के अगले एक घंटे में वो खा लेती थीं।

कैलोरी ड्रिंक

जूस, दो चम्मच चीनी वाली चाय, कोल्ड कॉफी जैसी लिक्विड कैलोरी इनटेक को बंद किया। अक्सर हम कुछ ड्रिंक्स को हार्मलेस समझकर पीते हैं लेकिन ये गलत आदत हैं। उन्होंने बताया कि वो ब्लैक कॉफी, प्लेन चाय और पानी पीने लगी और बाकी ड्रिंक्स को ना पीने की आदत लगाई।

हेल्दी खाना लेकिन गलत पोर्शन में

शिखा बताती हैं कि वो मखाना, ड्राई फ्रूट्स, पीनट बटर जैसी हेल्दी चीजें ही खाती थीं लेकिन उनकी डबल मात्रा में, जबकि कैलोरी तो इन फूड्स से भी जाती है। तो हेल्दी फूड्स को भी सही मात्रा में थोड़ा-थोड़ा खाने की आदल लगाना।

केवल कॉर्डियो और वेट ट्रेनिंग नहीं

केवल कॉर्डियो करने से सबकुछ नहीं होगा। ट्रेडमिल पर घंटों पसीना बहाने से बॉडी चेंज नहीं होती। बॉडी को चेंज करने के लिए कॉर्डियो करना जरूरी होता है।

नींद कम लेने की वजह से स्ट्रेस

जब हम देर रात तक जागते हैं तो इससे कॉर्टिसोल लेवल हाई होता है, क्रेविंग्स बढ़ती है। 7-8 घंटे की नींद सबसे ज्यादा जरूरी है। गुड क्वालिटी नींद के साथ किसी भी तरह का समझौता नहीं करती थी।

बाहर का खाना खाने की मैटेंलिटी

रेस्टोरेंट का खाना खाया है लेकिन थोड़ा सा खाया है। ये वाली सोच को छोड़कर घऱ पर हेल्दी कुकिंग करना स्टार्ट किया और घर के खाने को ही सबसे पहले खाया।

सबकुछ खाना या कुछ नहीं

सबकुछ अनहेल्दी खा सकते हैं या फिर कुछ भी नहीं खाना है ये वाली सोच गलत है। अगर आपने पिज्जा की एक स्लाइस खा ली तो पूरा दिन ये सोचने में बर्बाद नहीं करना है कि मैंने पिज्जा खा लिया। एक पीस खा लेने से आपकी वेट लॉस जर्नी नहीं रुकती है। वेट लॉस के लिए कंसिस्टेंसी की जरूरत होती है, तभी शरीर में प्रोग्रेस नजर आती है।

मोटिवेशन फील करने का इंतजार करना

हर दिन ये सोचते हैं कि आज मोटिवेशन फील हो रहा और अब वर्कआउट शुरू करेंगे। ऐसा नहीं होता, मोटिवेशन से ज्यादा डिसिप्लिन की जरूरत होती है। राइट मंडे का इंतजार करना बंद करें और किसी भी दिन बस स्टार्ट कर दें। जैसे ही आप बिना सोचे-समझे वर्कआउट स्टार्ट करते हैं और ये आदतें छोड़कर डेडिकेशन के साथ कंसिस्टेंसी दिखाते हैं, बॉडी में असर नजर आने लगता है।



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यूपी के 5 शहरों में स्कूल बंद: ऋषिकेश-उत्तरकाशी में लैंडस्लाइड, ओडिशा, झारखंड और बिहार में भारी बारिश का अलर्ट




मध्य प्रदेश के सतना और चित्रकूट में नदियों का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है। इससे कई इलाकों में जलभराव है। सतना में सभी स्कूल-कॉलेज की आज छुट्‌टी कर दी गई है। मौसम विभाग ने उत्तरप्रदेश के 67 जिलों में बारिश का अलर्ट जारी किया है। मथुरा, आगरा समेत 15 जिलों में भारी बारिश की चेतावनी है। बलिया, वाराणसी, सोनभद्र, लखीमपुर खीरी और चित्रकूट में आज स्कूल बंद रहेंगे। बंगाल की खाड़ी और उससे सटे गंगीय इलाकों में निम्न दबाव का क्षेत्र बना है। इससे ओडिशा, झारखंड और बिहार में भारी बारिश की संभावना है। यह सिस्टम 5 सितंबर तक बना रहेगा। उत्तराखंड के मौसम विभाग ने नैनीताल, बागेश्वर और देहरादून में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। बाकी जिलों में येलो अलर्ट है। अगले तीन दिन भी बारिश से राहत की उम्मीद नहीं है। ऋषिकेश में मलबा आने से लक्ष्मणझूला-नीलकंठ मार्ग बाधित हुआ, जबकि उत्तरकाशी में गंगोत्री नेशनल हाईवे बंद है। सैटेलाइट मैप में देखें मानसूनी बादलों की स्थिति देशभर से मौसम की तस्वीरें देशभर में मौसम से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे लाइव ब्लॉग से देखें…



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मुरादाबाद में ईंट से सिर कूचकर फैक्ट्री कर्मी की हत्या: शराब की दुकान के पास सोया था फर्म कर्मी,3 युवकों ने नृशंसता से मारा – Moradabad News




मुरादाबाद में एक फैक्ट्री कर्मी की ईंट से सिर कूचकर नृशंसता से हत्या कर दी गई। फर्म कर्मी शराब की दुकान के पास सो रहा था। तीन युवकों ने ईंटों से उसका सिर कूचकर उसे मार डाला। पूरी घटना सीसीटीवी कैमरों में कैद हुई है। पुलिस ने फुटेज के आधार पर आरोपियों को ट्रेस कर लिया है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए एसएसपी सतपाल अंतिल ने टीमों का गठन किया है।
मुरादाबाद में मझोला थाना क्षेत्र के सूर्य नगर मानपुर नारायणपुर के रहने वाले सुरेश सैनी एक एक्सपोर्ट फैक्ट्री में काम करता था। मंगलवार शाम को अपने फर्म से काम खत्म करके घर लौटा था। परिजनों के अनुसार मंगलवार रात करीब 8 बजे वह पत्नी से कुछ देर में आने की बात कहकर घर से निकल गया था। लेकिन वापस नहीं लौटा। बुधवार सुबह मझोला क्षेत्र में एक शराब की दुकान के पास उसका खून से लथपथ शव बरामद हुआ। पुलिस ने जब आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली, तो फुटेज में तीन युवक शराब की दुकान के पास लेटे सुरेश को पहले लातों से मारते नजर आए बाद में पास में पड़ी ईंट से उनके सिर पर ताबड़तोड़ हमला कर उसकी हत्या कर दी। पुलिस को सीसीटीवी फुटेज में नजर आ रहा है कि हमलावरों ने एक ईंट टूटने के बाद दूसरी ईंट उठाकर उससे फैक्ट्री कर्मी के सिर को कूचकर उसे मार डाला। वारदात के बाद आरोपी मौके से भाग गए। खून से सनी ईंट भी पुलिस को मौके पर पड़ी मिली है। एसपी सिटी कुमार रणविजय सिंह के अनुसार, सीसीटीवी फुटेज की मदद से तीनों हमलावरों की पहचान अभय, तुषार (उर्फ चाऊ) और विवेक शर्मा के रूप में हुई है। मुख्य आरोपी विवेक शर्मा बेहद शातिर अपराधी है, जो पिछले साल जुलाई में हुई अमन शुक्ला की हत्या में भी शामिल था। वह इस वारदात से महज 15 दिन पहले ही जमानत पर जेल से बाहर आया था और बाहर आते ही उसने दूसरी हत्या को अंजाम दे डाला। पुलिस की शुरुआती जांच में पता चला है कि आरोपी तुषार कुछ महीने पहले चोरी के एक मामले में जेल गया था। तुषार को शक था कि सुरेश सैनी ने ही पुलिस से उसकी मुखबिरी की थी। इसी का बदला लेने के लिए उसने अपने साथियों के साथ मिलकर सुरेश की हत्या की योजना बनाई। मंगलवार की रात जब उन्होंने सुरेश को शराब की दुकान के पास अकेले देखा, तो मौका पाकर उसकी हत्या कर दी।



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भोपाल की दो मल्टीलेवल पाकिंग में अब फॉस्टैग: न्यू मार्केट-एमपी नगर में UPI सिस्टम; मोबाइल एप से भी दे सकेंगे शुल्क – Bhopal News




भोपाल शहर की दो मल्टी लेवल पार्किंग में अब आप फॉस्टैग के जरिए भी शुल्क दे सकेंगे। इसके अलावा यूपीआई एवं मोबाइल एप आधारित डिजिटल पार्किंग व्यवस्था भी रहेगी। इसी साल 9 जुलाई से शहर की 5 मल्टी लेवल पार्किंग्स में कैशलेस पार्किंग की व्यवस्था प्रारंभ करते हुए पार्किंग शुल्क का नकद भुगतान पूर्णतः प्रतिबंधित किया जा चुका है। स्मार्ट पार्किंग व्यवस्था के तहत पार्किंग स्थलों के प्रवेश द्वार पर ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकगनेशन (एएनपीआर) कैमरा वाहन की नंबर प्लेट को स्वतः पहचानकर फॉस्टैग रीडर के माध्यम से वाहन के प्रवेश को डिजिटल रूप में दर्ज करता है। इसके बाद पार्किंग रिकॉर्ड स्वतः जनरेट हो जाता है। इसी तरह वाहन के पार्किंग स्थल के बाहर निकलते समय एएनपीआर कैमरा और फॉस्टैग आधारित सिस्टम से वाहन की पहचान की जाती है और निर्धारित पार्किंग शुल्क फॉस्टैग के माध्यम से डिजिटली संधारित किया जाता है। इस तरह भुगतान प्रक्रिया पूर्ण होने पर वाहन बिना आवश्यक मैन्यूअल पार्किंग स्थल से बाहर निकलते हैं। नई व्यवस्था से जल्दी आ-जा सकेंगे वाहन
नई व्यवस्था से पार्किंग स्थल पर आने वाले वाहन के प्रवेश एवं निकास की प्रक्रिया अधिक तेज और सुव्यवस्थित होती है और नागरिकों को अनावश्यक प्रतीक्षा नहीं करनी पड़ती। पार्किंग स्थलों पर फॉस्टैग के माध्यम से भुगतान को प्राथमिकता दी जा रही है। यदि किसी कारण से किसी वाहन में फॉस्ट टैग कार्य नहीं करता तो वाहन चालक के लिए क्यूआर कोड एवं यूपीआई आधारित भुगतान की वैकल्पिक सुविधा भी उपलब्ध है। उपरोक्त स्थितियों के अतिरिक्त आवश्यकता पड़ने पर नकद भुगतान की सुविधा भी उपलब्ध है।



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जनसुनवाई में CM रेखा गुप्ता ने सुनीं दिल्लीवासियों की समस्याएं: अधिकारियों को दिए समयबद्ध समाधान के निर्देश – New Delhi News




मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने बुधवार को मुख्यमंत्री जनसेवा सदन में आयोजित जनसुनवाई के दौरान दिल्ली के विभिन्न क्षेत्रों से आए नागरिकों की समस्याएं सुनीं। उन्होंने लोगों से सीधे संवाद करते हुए एक-एक कर उनकी शिकायतें जानीं और संबंधित अधिकारियों को मामलों की गंभीरता के अनुसार आवश्यक कार्रवाई करते हुए समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का दरवाजा जनता के लिए हमेशा खुला रहना चाहिए। नागरिक अपनी समस्याएं सीधे सरकार तक पहुंचा सकें, उनकी बात संवेदनशीलता से सुनी जाए और समाधान के लिए उन्हें अनावश्यक रूप से सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, यही दिल्ली सरकार की कार्यसंस्कृति है। जनसुनवाई के दौरान शिक्षा, लंबित पुरस्कार राशि, जलभराव, सीवर, विद्युत सुरक्षा, सफाई, अवैध निर्माण और बिजली-पानी के कनेक्शन से जुड़ी शिकायतें मुख्यमंत्री के सामने रखी गईं। मुख्यमंत्री ने सभी मामलों को गंभीरता से सुनते हुए अधिकारियों को जांच कर आवश्यक कार्रवाई करने और निर्धारित समय में समाधान सुनिश्चित करने को कहा। उन्होंने विद्यार्थियों की सुरक्षा और शिक्षा से जुड़े मामलों में विशेष संवेदनशीलता बरतने के निर्देश दिए। साथ ही लंबे समय से लंबित शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण करने पर जोर दिया।



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