नई दिल्ली. पैसों या प्रॉपर्टी को लेकर होने वाला विवाद किसी भी हंसते-खेलते परिवार को बर्बाद कर सकता है. भारत में आज भी अदालतों में चल रहे ज्यादातर पारिवारिक मुकदमों की मुख्य वजह संपत्ति का बंटवारा ही है- फिर चाहे वह मकान हो, जमीन हो, कैश हो या कोई बिजनेस.
कई बार मामला लालच का नहीं होता, बल्कि लोग अपने किसी करीबी की आखिरी इच्छा को ठीक से समझ नहीं पाते या फिर उन्हें संपत्ति के सही कागजात ही नहीं मिलते. इन कानूनी चक्करों में सालों बर्बाद हो जाते हैं और समय के साथ-साथ ढेर सारा पैसा भी पानी की तरह बह जाता है. अच्छी बात यह है कि सही प्लानिंग से इस पूरी परेशानी से बचा जा सकता है.
1. साफ और कानूनी रूप से वैध वसीयत बनाएं
भविष्य के झगड़ों से बचने का सबसे बेहतरीन तरीका है एक कानूनी रूप से मजबूत वसीयत बनाना. वसीयत में साफ लिखा होता है कि आपके जाने के बाद किसे क्या मिलेगा. अगर वसीयत नहीं होगी, तो संपत्ति का बंटवारा उत्तराधिकार कानून के हिसाब से होगा, जो शायद आपकी इच्छा के मुताबिक न हो. वसीयत में सभी वारिसों के नाम और संपत्ति का पूरा ब्योरा साफ-साफ होना चाहिए.
2. नॉमिनेशन अपडेट रखें
ज्यादातर लोग सोचते हैं कि बैंक अकाउंट, बीमा या इन्वेस्टमेंट में जिसे नॉमिनी बनाया है, वही उस संपत्ति का मालिक होगा. लेकिन ऐसा नहीं है बल्कि कई मामलों में नॉमिनी सिर्फ एक केयरटेकर होता है, असली मालिक नहीं. इसलिए शादी, तलाक, बच्चे के जन्म या किसी हादसे के बाद नॉमिनेशन को तुरंत अपडेट करें और इसे अपनी वसीयत के हिसाब से ही रखें ताकि कोई भ्रम न रहे.
3. अपनी सभी संपत्तियों का पूरा रिकॉर्ड रखें
कई बार झगड़ा सिर्फ इसलिए होता है क्योंकि परिवार वालों को पता ही नहीं होता कि कुल कितनी संपत्ति है. बैंक खाते, एफडी, म्यूचुअल फंड, शेयर और बीमा के कागजात अलग-अलग जगह बिखरे होने के कारण बाद में उन्हें ढूंढना मुश्किल हो जाता है. अपनी सभी संपत्तियों और कर्ज की एक लिस्ट बनाकर रखें, जिससे परिवार के लिए चीजें आसान हो जाएं.
4. अपने प्लान के बारे में परिवार से बात करें
संपत्ति और मौत जैसे विषयों पर बात करना थोड़ा अजीब लग सकता है, लेकिन चुप्पी और भी खतरनाक हो सकती है. अगर आप कोई बड़ा फैसला ले रहे हैं, तो उस पर परिवार से खुलकर बात करें. आपको अपनी पूरी संपत्ति की पाई-पाई बताने की जरूरत नहीं है, बस उन्हें अपने फैसले की वजह समझा दें ताकि बाद में उन्हें कोई झटका न लगे.
5. समय-समय पर अपने प्लान की समीक्षा करें
जिंदगी बदलती रहती है, इसलिए आपकी संपत्ति की प्लानिंग भी बदलनी चाहिए. शादी, बच्चे का होना या कोई नई बड़ी प्रॉपर्टी खरीदने पर अपनी वसीयत और नॉमिनेशन को दोबारा चेक करें और जरूरत पड़ने पर बदलें. एक पुरानी और अधूरी वसीयत, वसीयत न होने जितनी ही खतरनाक हो सकती है.



















