राज्य में मानसून पूरी तरह सक्रिय है। शुक्रवार, 10 जुलाई को कटिहार सहित राज्य के एक दर्जन से अधिक जिलों में मूसलाधार बारिश हुई। कटिहार शहर में तीन घंटे की लगातार बारिश के कारण निचले इलाकों में जलजमाव हो गया और कई दुकानों में पानी घुस गया। कटिहार में सुबह से ही आसमान बादलों से घिरा रहा और दिनभर हल्की बूंदाबांदी जारी रही। दोपहर 4 बजे से शाम 7 बजे तक, लगभग तीन घंटे की मूसलाधार बारिश ने जिले के सभी प्रखंडों में जनजीवन को प्रभावित किया। देखें, मौके से आई तस्वीरें… कई क्षेत्रों में जलजमाव से लोग परेशान इसका सबसे अधिक असर कटिहार नगर निगम क्षेत्र के शहरी इलाकों पर पड़ा, जहाँ समुचित जल निकासी के अभाव में कई क्षेत्रों में गंभीर जलजमाव की स्थिति उत्पन्न हो गई। एमजी रोड, मंगल बाजार, चूड़ी पट्टी, फल पट्टी, बड़ा बाजार, शिव मंदिर चौक, पानी टंकी चौक, दुर्गा स्थान चौक, नवनीत नगर, वार्ड संख्या 1 टीवी मोहल्ला, जयप्रकाश नगर शिवपुरी, महानंदा कॉलोनी, सदर अस्पताल कालीबाड़ी रोड, राज हाता और वार्ड संख्या 2 इंद्रपुरी शिवपुरी मोहल्ला जैसे प्रमुख इलाके जलमग्न हो गए। शहर की मुख्य सड़कों पर लगा पानी टीवी सेंटर मोहल्ला में प्राथमिक विद्यालय के सामने मुख्य सड़क पर दो फीट तक पानी जमा हो गया। चूड़ी पट्टी, फल पट्टी, मंगल बाजार और न्यू मार्केट की मुख्य सड़कों पर दो से तीन फीट पानी भर जाने से अधिकांश दुकानों में वर्षा का पानी घुस गया, जिससे दुकानदारों, ग्राहकों और बड़े पैमाने पर कारोबार पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा। मौसम विभाग बोला-अमदाबाद में अधिक वर्षा मौसम विभाग के अनुसार, पिछले 24 घंटे में जिले में सबसे अधिक वर्षा अमदाबाद में 108.2 मिलीमीटर दर्ज की गई। नगर निगम और प्रशासन की टीमें जलजमाव वाले क्षेत्रों में पानी निकासी के लिए सक्रिय रूप से जुटी हुई हैं। इस बीच, कुर्सेला में कोसी नदी और आजमनगर प्राणपुर से बहने वाली महानंदा नदी का जलस्तर बढ़ने से कटाव भी जारी है।
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Palamu Sonu Farming Story: डिग्री हाथ में आते ही जहां युवा बड़े शहरों की ओर नौकरी के लिए भागते हैं. वहीं पलामू के खामडीह निवासी सोनू कुमार गुप्ता ने खेती को ही अपना फुल-टाइम करियर बना लिया. साल 2018 में ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद सोनू ने नौकरी की अंधी दौड़ में शामिल होने के बजाय सब्जी उत्पादन का रुख किया, जिसने आज उनके परिवार की किस्मत बदल दी है. पहले उनका परिवार पारंपरिक रूप से सिर्फ धान-गेहूं उगाता था. जिसमें अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा था. सोनू ने इस ढर्रे को बदला और करीब डेढ़ एकड़ भूमि पर करैला, नेनुआ, झिंगी, कद्दू और खीरा जैसी मौसमी सब्जियों की खेती शुरू की. आज वे तमाम लागत निकालकर सालाना 3 से 4 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं. अब सोनू का अगला लक्ष्य ‘ट्रिपल लेयर’ (मल्टीलेयर) फार्मिंग जैसे आधुनिक वैज्ञानिक मॉडल को अपनाना है, ताकि एक ही जमीन से तीन गुना उत्पादन लिया जा सके. हालांकि, पलामू में बिजली संकट के कारण सिंचाई एक बड़ी बाधा है. सोनू का कहना है कि अगर सरकार से उन्हें सोलर पंप का सहयोग मिल जाए, तो वे लागत घटाकर इस मॉडल को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं.

