Thursday, August 20, 2026
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चीनी के भाव ने छुड़ाए पसीने, बाहर से 10 लाख टन मंगाएगा भारत, सरकार ने खोला रास्‍ता


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सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी है. DGFT ने 31 अक्टूबर तक के लिए यह फैसला लिया है.

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जब बाजार में किसी चीज के दाम बेकाबू होने लगें तो सरकार को बाहर का रास्ता भी खोलना पड़ता है. चीनी के मामले में कुछ ऐसा ही हुआ है. घरेलू बाजार में कीमतें करीब दो महीने में लगभग 40 फीसदी चढ़ चुकी हैं और त्योहारी सीजन सामने है. ऐसे में सरकार ने करीब एक दशक बाद कच्ची चीनी के आयात का रास्ता खोल दिया है. 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी बिना कस्टम ड्यूटी के भारत लाई जा सकेगी.

डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड यानी DGFT ने गुरुवार को कच्ची चीनी की इंपोर्ट पॉलिसी में बदलाव किया है. इसके तहत 10 लाख मीट्रिक टन तक कच्ची चीनी को Tariff Rate Quota यानी TRQ के तहत ड्यूटी फ्री आयात की अनुमति दी गई है. आसान भाषा में कहें तो सरकार ने चीनी की एक तय मात्रा के लिए आयात शुल्क हटा दिया है, ताकि बाहर से चीनी आए और घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़े.

अब सवाल है कि आखिर इसकी जरूरत क्यों पड़ी? दरअसल, देश में चीनी की सप्लाई पर दबाव बढ़ा है और इसी वजह से कीमतें तेजी से ऊपर गई हैं. पिछले दो महीनों में चीनी के भाव करीब 40 फीसदी तक बढ़ चुके हैं. भारत दुनिया में चीनी की सबसे बड़ी खपत करने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है. ऐसे में त्योहारों के मौसम से पहले कीमतों में इतनी तेजी सरकार के लिए चिंता का विषय बन गई.

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राम मंदिर चंदा-चढ़ावा चोरी को कांग्रेस बनाएगी मुद्दा: राजेंद्र पाल गौतम बोले-आस्था से धोखा, एक सप्ताह में घर-घर जाएंगे – Uttar Pradesh News




अयोध्या के राम मंदिर में चंदे और चढ़ावे चोरी को लेकर कांग्रेस देशव्यापी मुद्दा बनाने की तैयारी में है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने आरोप लगाया कि राम मंदिर के नाम पर करोड़ों-अरबों रुपए के चंदे और चढ़ावे में चोरी हुई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अगले एक सप्ताह में घर-घर जाकर अभियान चलाएगी और जनता के बीच कथित चंदा-चढ़ावा चोरी के मामले को बड़े स्तर पर उजागर करेगी। ‘SIT की रिपोर्ट सीलबंद तो मीडिया तक जानकारी कैसे पहुंची?’ राजेंद्र पाल गौतम ने SIT की जांच को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 17 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने SIT को अपनी प्रोग्रेस रिपोर्ट/स्टेटस रिपोर्ट बंद लिफाफे में दाखिल करने को कहा था। ऐसे में SIT की जांच से जुड़े गोपनीय तथ्य मीडिया में कैसे सामने आए? उन्होंने सवाल किया कि अगर मीडिया में आई खबरों के मुताबिक SIT की फाइनल रिपोर्ट में चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्र को क्लीन चिट दी गई है, तो सरकार पूरी SIT रिपोर्ट और क्लीन चिट का आधार जनता के सामने क्यों नहीं रख रही है? कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि मामले की वर्तमान कानूनी स्थिति क्या है? SIT में फोरेंसिक ऑडिटर शामिल है और सुप्रीम कोर्ट ने भी फोरेंसिक पहलू सहित जांच की प्रोग्रेस मांगी है। ऐसे में अब तक फोरेंसिक जांच में क्या सामने आया, दान और उपहार का कितना समाधान हुआ और कौन-कौन सी अनियमितताएं मिलीं, इसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। ‘सिर्फ 8 छोटे कर्मचारियों से इतनी बड़ी चोरी संभव नहीं’ राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि मामले में केवल 8 छोटे गणनाकर्मियों की गिरफ्तारी हुई है। सवाल यह है कि दान लेने, गणना कराने, बहुमूल्य धातुओं की जांच-माप, उनके रखरखाव और हिसाब-किताब की पूरी निगरानी की संस्थागत जिम्मेदारी किसकी थी? उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी गड़बड़ी केवल कुछ छोटे कर्मचारियों के स्तर पर नहीं हो सकती। इसमें बड़े लोगों की सहभागिता की जांच होनी चाहिए। कांग्रेस का आरोप है कि जिम्मेदार बड़े लोगों को बचाने के लिए मामले में लीपापोती की जा रही है। अजय राय बोले–जिस SIT पर सवाल उठे, उसी से जांच कराई गई प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि SIT गठन की घोषणा के समय ही उन्होंने इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा कि SIT के अध्यक्ष लखनऊ के तत्कालीन कमिश्नर विजय विश्वास पंत थे। अजय राय ने आरोप लगाया कि पंत खुद कुंभ मेले में हुई भगदड़ की जांच के घेरे में थे। ऐसे में जिस अधिकारी पर सवाल उठ रहे थे, वही SIT की निगरानी कर रहा था। अजय राय ने कहा कि बाद में सुप्रीम कोर्ट की दिशा में विजय विश्वास पंत को SIT से हटाया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब अपनी टीम तैयार कर रही है और गांव-गांव, घर-घर जाकर भाजपा और RSS पर चंदा-चढ़ावा चोरी के आरोपों को जनता के सामने रखेगी। SIT रिपोर्ट का हवाला देकर अनिल मिश्र पर उठाए सवाल अयोध्या के स्थानीय निवासी और युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष शरद शुक्ला ने दावा किया कि जिस SIT के प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर आरोपियों की गिरफ्तारी हुई, उसी रिपोर्ट में डॉ. अनिल मिश्र की भूमिका को लेकर गंभीर टिप्पणियां की गई थीं। शुक्ला के मुताबिक SIT ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि अनिल मिश्र अपने दायित्वों के प्रति उदासीन रहे, जिससे चोरी और गबन की घटना की परिस्थितियां बनीं। रिपोर्ट में उनके उत्तरदायित्व को वरिष्ठ पर्यवेक्षणीय स्तर पर बताया गया और सुरक्षा उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित नहीं करने की बात कही गई। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि यदि SIT की रिपोर्ट में इस तरह की टिप्पणियां हैं तो डॉ. अनिल मिश्र की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई? मंदिर ट्रस्ट की जमीन खरीद पर भी जांच की मांग कांग्रेस ने राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से खरीदी गई जमीनों की खरीद-फरोख्त की भी उच्चस्तरीय जांच की मांग की। शरद शुक्ला ने कहा कि वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बावजूद प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से अब तक जांच क्यों नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय तक इतनी बड़ी कथित चोरी बिना बड़े लोगों की संलिप्तता और संरक्षण के संभव नहीं है। कांग्रेस ने मीडिया के सामने दस्तावेज रखे प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेताओं ने जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़े दस्तावेज और SIT रिपोर्ट से संबंधित दस्तावेज मीडिया के सामने प्रस्तुत किए। पार्टी ने साफ किया कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे को लेकर अभियान को और तेज किया जाएगा। कांग्रेस इसे राम मंदिर और देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा मामला बताते हुए भाजपा और RSS को राजनीतिक रूप से घेरने की तैयारी में है।



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राशन कर्मी 20 से 26 अगस्त तक बांधेंगे काली पट्टी: बिहार आपूर्ति सेवा संघ की आंदोलन की घोषणा; कार्ड निर्माण, E-KYC ठप – Katihar News




कटिहार में राशन कार्ड निर्माण, ई-केवाईसी और सर्वर संबंधी समस्याओं से परेशान बिहार आपूर्ति सेवा संघ ने आंदोलन की घोषणा की है। संघ ने अपनी छह सूत्री मांगों के समर्थन में 20 से 26 अगस्त तक काला बिल्ला धारण कर सांकेतिक विरोध करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में जिला पदाधिकारी आशुतोष द्विवेदी को 19 अगस्त को एक पत्र सौंपकर सूचित किया गया है। संघ के अनुसार, राज्य में 11 अप्रैल 2025 से नए राशन कार्ड बनाने का अभियान चल रहा है। इसके साथ ही E-KYC का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है। लेटर में 6 मांगों का किया उल्लेख हालांकि, एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी आपूर्ति पदाधिकारियों और कर्मियों की मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है, जिसके विरोध में यह सांकेतिक आंदोलन किया जा रहा है। संघ ने जिला पदाधिकारी को सौंपे गए पत्र में अपनी छह प्रमुख मांगों का उल्लेख किया है। इन मांगों में कार्य की समय-सीमा, सर्वर संबंधी दिक्कतें, संसाधनों की कमी, पदोन्नति में देरी और कर्मचारियों के उत्पीड़न जैसे मुद्दे शामिल हैं। पहली मांग राशन कार्ड निर्माण की समय-सीमा से संबंधित है। विभाग ने इसके लिए T+1 की समय-सीमा तय की है, जिसे संघ अव्यावहारिक मानता है। संघ ने 30 दिनों की वैधानिक समय-सीमा निर्धारित करने की मांग की है। ‘प्रति लाभुक 2.50 से 3.00 रुपये दिए’ दूसरी समस्या सर्वर और डेटा से जुड़ी है, जहां 11 लाख 4 हजार 425 नए कार्डों का डेटा सर्वर से डाउनलोड नहीं हो पा रहा है और अपडेशन में भी दिक्कतें आ रही हैं। ई-केवाईसी के लिए लाभुक सूची निकालने की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। तीसरी मांग संसाधनों और मानदेय को लेकर है। ई-केवाईसी के लिए प्रति लाभुक मात्र 2.50 से 3.00 रुपये दिए जा रहे हैं, जबकि विभाग ने न तो वाहन, न डेटा एंट्री ऑपरेटर, न कंप्यूटर-स्कैनर उपलब्ध कराए हैं। काम का बोझ बढ़ गया – कर्मी इससे कर्मियों को अपने खर्च पर काम करना पड़ रहा है। चौथी मांग पदोन्नति से संबंधित है; विभाग में 2010 के बाद से कोई पदोन्नति नहीं हुई है और 200 पद रिक्त हैं। निचले स्तर के कर्मियों को लेवल-9 के बजाय लेवल-8 पर काम कराया जा रहा है। पांचवीं मांग उत्पीड़न के आरोप से जुड़ी है। संघ का कहना है कि 17 जुलाई 2026 को कोरम पूरा न होने के कारण कई पदाधिकारियों ने एक दिन का उपार्जित अवकाश लिया था,लेकिन उन्हें अनुपस्थित कर दिया गया। छठी और अंतिम मांग स्टाफ की भारी कमी को लेकर है। काम का बोझ बढ़ गया है, लेकिन उसके अनुसार पद और संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। आंदोलन के दौरान क्या बंद रहेगा संघ ने स्पष्ट किया है कि विरोध के 7 दिनों तक आवाहन वितरण, राशन कार्ड निर्माण और ई-केवाईसी सहित कोई भी जनहित का कार्य बाधित रहेगा। हालांकि खाद्यान्न वितरण सामान्य रूप से जारी रहेगा ताकि गरीबों को परेशानी न हो। सरकार से अपील संघ ने राज्य सरकार से मांग की है कि इन समस्याओं पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर अविलंब समाधान किया जाए। ताकि आपूर्ति पदाधिकारी और कर्मी पूर्व मनोबल के साथ सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतार सकें। जिला प्रशासन ने पत्र प्राप्त करने की पुष्टि की है। अब देखना होगा कि सरकार इस सांकेतिक विरोध से पहले कर्मियों की मांगों पर कोई निर्णय लेती है या नहीं।



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सिंगरौली: अंबेडकर चौराहे पर पुरुष-महिला ने की बीच सड़क मारपीट: स्थानीय लोगों बोले- दोनों नशे में थे; पुलिस चेकिंग पॉइंट पर उठे सवाल – Singrauli News




सिंगरौली जिले के बैढ़न थाना क्षेत्र के अंबेडकर चौराहे पर गुरुवार को एक पुरुष और महिला के बीच सड़क पर मारपीट का वीडियो सामने आया है। घटना के दौरान सड़क पर लोगों की आवाजाही जारी थी। एक राहगीर ने घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया। वीडियो में दिख रहे पुरुष और महिला की पहचान अब तक नहीं हो पाई है। हालांकि, पूछताछ में पता चला कि दोनों संभवतः पति-पत्नी हैं और मजदूरी करते हैं। दोनों के बीच विवाद किस बात को लेकर हुआ, यह भी सामने नहीं आया है। पुलिस के मुताबिक, अब तक किसी भी पक्ष ने थाने में लिखित शिकायत नहीं दी है। इसलिए मामले में कोई आधिकारिक कार्रवाई शुरू नहीं हुई है। स्थानीय लोग बोले- दोनों नशे में किसी बात पर झगड़ने लगे नगर पुलिस अधीक्षक ललित बैरागी ने बताया कि किसी भी पक्ष ने थाने में शिकायत नहीं की है। उन्होंने कहा कि पुलिस स्टाफ मौके पर गया था। स्थानीय लोगों के मुताबिक, दोनों नशे में थे और किसी बात पर झगड़ने लगे थे। कुछ देर बाद दोनों खुद शांत हो गए और वहां से चले गए। नगर पुलिस अधीक्षक ने कहा कि अगर कोई पक्ष शिकायत करता है तो पुलिस कार्रवाई करेगी। पुलिस के चेकिंग पॉइंट के पास हुआ विवाद स्थानीय लोगों ने बताया की अंबेडकर चौराहे पर पहले भी विवाद और मारपीट की घटनाएं सामने आती रही हैं। यह स्थान पुलिस का चेकिंग पॉइंट है, फिर भी यहां ऐसी घटनाएं होती रहती हैं। स्थानीय लोगों ने चौराहे की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि यहां नियमित निगरानी के बावजूद ऐसी घटनाएं हो रही हैं।



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आगरा में यहां 70 रुपए में मिल रहा चीज पनीर बर्गर, लोगों को खूब आ रहा पसंद

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Agra Best Burger Shop: आगरा के शास्त्रीपुरम स्थित आंगन रेस्टोरेंट का चीज पनीर बर्गर युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय है, जो महज 70 रुपये में मिलता है. भारतीय स्वाद और ताजी सामग्री से तैयार यह बर्गर शाम के समय युवाओं की भीड़ खींचता है.

आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित शास्त्रीपुरम के आंगन रेस्टोरेंट का बर्गर इन दिनों युवाओं के बीच खासा पसंद किया जा रहा है. यहां मिलने वाले स्पेशल बर्गर का स्वाद लेने के लिए युवा बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं. रेस्टोरेंट के संचालक संतोष ने बताया कि उनके यहां दो तरह के स्पेशल बर्गर सबसे ज्यादा पसंद किए जाते हैं. इनमें पहला वेज बर्गर और दूसरा चीज बर्गर है. दोनों ही बर्गर की डिमांड लगातार बनी हुई है.

दुकानदार संतोष ने बताया कि उनके बर्गर की खासियत यह है कि इन्हें भारतीय स्वाद और स्टाइल को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है. बर्गर में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और मसालों का संयोजन इसे अलग स्वाद देता है. चीज बर्गर में चीज की अच्छी मात्रा युवाओं को खासतौर पर आकर्षित करती है. वहीं, वेज बर्गर भी अपने स्वाद और भरपूर फिलिंग के कारण लोगों की पसंद बना हुआ है. शाम के समय यहां युवाओं की भीड़ अधिक देखने को मिलती है.

भारतीय स्टाइल वेज बर्गर युवाओं को है पसंद
आगरा के शास्त्रीपुरम स्थित आंगन रेस्टोरेंट के संचालक संतोष कुमार बघेल ने बताया कि उनके यहां इंदौर बर्गर सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है. इस बर्गर को खास भारतीय स्टाइल में तैयार किया जाता है, जिसकी वजह से इसका स्वाद युवाओं को काफी आकर्षित करता है. संतोष कुमार बघेल ने यह भी कहा कि उनके यहां के बर्गर में भरपूर मात्रा में ताजी सब्जियों का इस्तेमाल किया जाता है. इसमें खीरा, टमाटर, प्याज, पत्ता गोभी और पनीर समेत कई सामग्री शामिल की जाती हैं.

उन्होंने बताया कि सब्जियों और मसालों का सही मिश्रण बर्गर को स्वादिष्ट और अलग बनाता है. भारतीय स्वाद को ध्यान में रखकर तैयार किया गया यह बर्गर युवाओं के साथ-साथ परिवार के लोगों को भी काफी पसंद आ रहा है. शाम के समय इसे खाने के लिए रेस्टोरेंट में अच्छी भीड़ रहती है.

60 रुपए वेज और 70 रुपए चीज बर्गर की है कीमत
आगरा के शास्त्रीपुरम स्थित आंगन रेस्टोरेंट के संचालक संतोष कुमार बघेल ने बताया कि उनके यहां स्वाद के साथ किफायती कीमत पर बर्गर उपलब्ध कराया जाता है. उन्होंने बताया कि वेज बर्गर की कीमत महज 60 रुपये है, जबकि चीज बर्गर मात्र 70 रुपये में मिलता है. कम कीमत होने के बावजूद बर्गर की क्वालिटी और स्वाद से कोई समझौता नहीं किया जाता. बर्गर तैयार करने में ताजी सामग्री और अच्छी गुणवत्ता वाले उत्पादों का इस्तेमाल किया जाता है.

संतोष कुमार ने कहा कि यही वजह है कि युवाओं के बीच दोनों बर्गर काफी लोकप्रिय हैं. खासकर शाम के समय बड़ी संख्या में युवा यहां बर्गर का स्वाद लेने पहुंचते हैं. कम बजट में स्वादिष्ट और अच्छी क्वालिटी का खाना मिलने के कारण आंगन रेस्टोरेंट की ओर लोगों का रुझान लगातार बढ़ रहा है.

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आर्यन सेठ

आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ली से साल 2024 में…

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8,499 रुपये में लॉन्च हुआ Smart प्रोजेक्टर, घर की दीवार बन जाएगी 200 इंच की स्क्रीन


देसी ब्रांड XElectron ने एक और सस्ता स्मार्ट प्रोजेक्टर लॉन्च किया है। यह स्मार्ट प्रोजेक्टर Android ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करता है। इसकी खास बात ये है कि इसमें 200 इंच तक की स्क्रीन का प्रोजेक्शन मिलता है। आप अपने घर की दीवार को थिएटर की तरह बड़ी स्क्रीन में बदल सकते हैं। इस प्रोजेक्टर में इन-बिल्ट स्पीकर, चार्जेबल बैटरी आदि भी दी गई है। इसे आप आराम से कहीं भी पोर्ट कर सकते हैं।

कितनी है कीमत?

XElectron ने इससे पहले इस सीरीज में Techno Android 14 Smart HD लॉन्च किया था, जिसकी कीमत 6,990 रुपये है। इसमें 40 से 200 इंच तक का प्रोजेक्शन मिलता है। कंपनी का नया स्मार्ट प्रोजेक्टर Techno Plus Android 14 Smart Home के नाम से लॉन्च हुआ है। इसकी कीमत 8,499 रुपये है। इसमें भी 200 इंच तक का प्रोजेक्शन फीचर मिलता है। इसका लुक और डिजाइन भी Techno Android 14 Smart HD की तरह ही है। साथ ही, इसके कई फीचर्स भी सीरीज के स्टैंडर्ड मॉडल की तरह ही हैं।

क्या हैं फीचर्स?

इस स्मार्ट प्रोजेक्टर में 1080 पिक्सल वाला लेंस दिया गया है, जो 4K रेजलूशन को सपोर्ट करता है। इसके स्क्रीन का रेजलूशन 1920 x 1080 पिक्सल है। यह प्रोजेक्टर स्मार्ट स्ट्रीमिंग और इलेक्ट्रिक फोक्स जैसे फीचर्स के साथ आता है। इसमें ऑटोफोकस फीचर दिया गया है, जिसकी वजह से दीवार पर प्रोजेक्ट करते समय यह अपने आप इसके प्रोजेक्शन को एडजस्ट कर देता है। इसमें 9000 ल्यूमन्स की ब्राइटनेस वाला का लेंस यूज किया गया है। साथ ही, यह 180 डिग्री तक रोटेट हो सकता है।

यह Android 14 ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करता है। इसमें पहले से ही कई OTT ऐप्स जैसे कि Netflix, YouTube, Prime Video, JioCinema, Zee5 और SonyLIV इंस्टॉल्ड हैं। यह प्रोजेक्टर 40 से 200 इंच की स्क्रीन में बदल सकता है। इसे आप 4 से लेकर 16 फीट की दूरी से प्रोजेक्ट कर सकते हैं। यही नहीं, यह 180 डिग्री तक रोटेट हो सकता है।

कनेक्टिविटी की बात करें तो इस प्रोजेक्टर में डुअल बैंड WiFi6, Bluetooth 5.0, HDMI और USB जैसे पोर्ट्स मिलते हैं। इसके साथ आप स्पीकर्स को अटैच कर सकते हैं। इसके अलावा इस प्रोजेक्टर में आप अपने स्मार्टफोन को भी स्क्रीन मिररिंग के जरिए कनेक्ट कर पाएंगे। यह प्रोजेक्टर पोर्टेबल डिजाइन के साथ आता है, जिसे आप अपने साथ कहीं भी कैरी कर सकते हैं। साथ ही, इसमें 25 ग्लोबल लैंग्वेज का सपोर्ट मिलता है, जिनमें हिन्दी, अंग्रेजी, बांग्ला आदि शामिल है। इस स्मार्ट प्रोजेक्टर के साथ आप अपने लैपटॉप, टीवी, टैबलेट आदि को भी कनेक्ट कर सकते हैं।

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जंतर-मंतर पर पुलिस एक्शन- सुप्रीम कोर्ट ने जांच कमेटी बनाई: इसमें रिटायर्ड जज, CBI-पुलिस के पूर्व अफसर; पैलेटगन चलाने और महिलाओं से बदसलूकी के आरोप


नई दिल्ली45 मिनट पहले

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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान 20 जुलाई कोे पुलिस ने बल प्रयोग किया था।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को संसद मार्च के दौरान पुलिस की कार्रवाई के आरोपों की जांच के लिए 5 सदस्यों की हाई पावर्ड कमेटी के नामों का ऐलान किया। कमेटी का अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस आर सुभाष रेड्डी को बनाया गया है।

इसमें पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व जज जस्टिस शलिंदर कौर, CBI के पूर्व डायरेक्टर ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के रिटायर्ड DGP डॉ. एलआर बिश्नोई शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त को सुनवाई के दौरान इस कमेटी को बनाने का फैसला लिया था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पैलेटगन इस्तेमाल करने और महिलाओं से बदसलूकी के आरोप लगाए थे।

नीट पेपर लीक और परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन जंतर-मंतर पर 36 दिन चला था। 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद खत्म हुआ था।

जंतर-मंतर पुलिस एक्शन की तस्वीरें

20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई थी। इसमें पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी घायल हो गए थे।

20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई थी। इसमें पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी घायल हो गए थे।

प्रदर्शन के दौरान 120 पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे।

प्रदर्शन के दौरान 120 पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे।

दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था- संसद मार्च गैरकानूनी था

सुप्रीम कोर्ट में 18 अगस्त को सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने कहा था कि 20 जुलाई का संसद मार्च गैरकानूनी था। इसकी परमिशन नहीं थी। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में कई हिस्ट्रीशीटर भी आ गए थे।

पुलिस ने बताया कि संसद मार्च में प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़े और पुलिस से मारपीट की, जिससे प्रदर्शन शांतिपूर्ण नहीं रहा। हालात संभालने के लिए बल प्रयोग किया गया था,लेकिन प्रदर्शनकारियों पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग नहीं किया गया।

डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस सचिन शर्मा ने हलफनामा दाखिल कर ये जानकारी दी। इसे पुलिस ज्यादती की कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग वाली याचिकाओं के जवाब के तौर पर पेश किया गया है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में हाई लेवल कमेटी बनाएगा।

कॉकरोच जनता पार्टी का प्रोटेस्ट 36 दिन चला था

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जंतर-मंतर प्रदर्शन पर रिजिजू बोले- गोली कहां चली:जेन-जी हमारे बच्चे, उनसे बातचीत जरूरी; अभिजीत दीपके AAP कार्यकर्ता, छात्र नेता कैसे बन गए

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने ANI को दिए इंटरव्यू में कहा कि जेन-जी हमारे अपने बच्चे हैं और उनसे लगातार बातचीत जरूरी है। रिजिजू ने जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का बचाव किया। पूरी खबर पढ़ें…

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डिलीवरी में बच्चेदानी में कट लगा, महिला की मौत: पति बोला- दोनों किडनियों पर असर आया था, डॉक्टरों पर लगाया आरोप – Kota News




कोटा में डिलीवरी के बाद महिला की मौत हो गई। उसे बूंदी से कोटा रेफर किया गया था। बच्चेदानी में कट के कारण खून बहने लगा और दोनों किडनियों पर असर आ गया था। पति ने बूंदी के डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दी है। टांकों से खून निकलने पर बिगड़ी तबीयत टोंक जिले के पनवाड़ की रहने वाली महिला सोनिया सैनी (24) की मौत हुई है। उनके पति राजू सैनी ने बताया कि पत्नी को 17 अगस्त को डिलीवरी के लिए बूंदी के हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। अगले दिन 18 अगस्त को सुबह करीब 10 बजे डॉक्टर ने ऑपरेशन के जरिए डिलीवरी करवाई। पत्नी ने एक बच्ची को दिया लेकिन डिलीवरी के बाद नर्सों ने पत्नी को नहीं संभाला। उसके टांकों से खून निकलने लगा। तब डॉक्टरों ने कोटा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया, जहां 19 अगस्त की शाम मौत हो गई। डिलीवरी के दौरान बच्चेदानी में लगा कट पति का आरोप है कि कोटा मेडिकल कॉलेज में जांच के दौरान डॉक्टरों ने बताया कि डिलीवरी के दौरान बच्चेदानी में कट लगने के कारण लगातार खून निकलता रहा। ज्यादा खून निकलने से महिला की हालत गंभीर हो गई और दोनों किडनियों पर भी असर पड़ा। पुलिस में शिकायत दर्ज बूंदी कोतवाली थाने के एएसआई देशराज चौधरी ने बताया कि मामले में परिजनों की ओर से पुलिस को शिकायत दी गई है। शिकायत के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया गया है।



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होर्मुज में अमेरिका पर ईरान भारी पड़ रहा: ट्रम्प की धमकी के बावजूद जहाज ईरानी रूट से जा रहे, सिर्फ 3 ने ओमानी रास्ता चुना


4 घंटे पहले

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होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले ज्यादातर जहाज अपनी पहचान या रास्ता छिपा रहे हैं। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, 1 से 19 अगस्त के बीच 236 जहाज यहां से गुजरे, लेकिन 148 जहाजों की राह साफ तौर पर पता नहीं चल सकी।

इन आंकड़ों से संकेत मिलता है कि ट्रम्प की धमकियों के बावजूद कई जहाज ईरानी रास्ते का इस्तेमाल कर रहे हैं। इससे यह सवाल उठता है कि होर्मुज स्ट्रेट में इस समय अमेरिका का दबदबा ज्यादा है या ईरान का।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का दावा है कि होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले समुद्री यातायात पर अमेरिकी सेना का नियंत्रण है। उन्होंने यह भी संकेत दिया है कि अमेरिका इस इलाके की जिम्मेदारी अपने हाथ में लेने की कोशिश कर सकता है।

वहीं, ईरान का कहना है कि तेहरान की मंजूरी के बिना कोई जहाज होर्मुज स्ट्रेट से नहीं गुजर सकता। ऐसे में दोनों देशों के दावों के बीच सबसे बड़ा सवाल यही है कि वास्तव में इस रास्ते पर किसका कंट्रोल है।

ईरान के बंदर अब्बास पोर्ट के पास होर्मुज से कॉमर्शियल जहाज गुजरते हुए।

ईरान के बंदर अब्बास पोर्ट के पास होर्मुज से कॉमर्शियल जहाज गुजरते हुए।

ईरान और अमेरिका के अलग-अलग दावे

ट्रम्प ने ओमान पर बमबारी की धमकी भी दी है। ओमान अमेरिका का सहयोगी है और होर्मुज स्ट्रेट के दूसरी तरफ ईरान के सामने स्थित है। स्ट्रेट का समुद्री इलाका ईरान और ओमान दोनों के अधिकार क्षेत्र में आता है।

ट्रम्प की धमकी का मकसद मस्कट को तेहरान के साथ होर्मुज स्ट्रेट का संयुक्त संचालन करने के समझौते से रोकना बताया गया है।

युद्ध के बाद दो रास्तों में बंटा होर्मुज

युद्ध शुरू होने से पहले होर्मुज को एक ही समुद्री रास्ता माना जाता था। जहाज तय रास्ते से गुजरते थे। उनका रास्ता बंदरगाह, जहाज के समझौते और सुरक्षा को देखकर तय होता था। लेकिन अमेरिका और ईरान के बीच तनाव बढ़ने के बाद यहां दो अलग रास्तों की बात होने लगी।

ईरानी रास्ता: यह होर्मुज के उत्तरी हिस्से में ईरान के तट के पास है। यह लारक और किश्म द्वीपों के करीब से गुजरता है और ईरान के बंदरगाहों और तेल टर्मिनलों तक जाता है।

ओमानी रास्ता: यह होर्मुज के दक्षिणी हिस्से में ओमान के करीब है और ईरान के तट से दूर है। अमेरिका इसी रास्ते से जहाजों को गुजरने पर जोर देता है। अमेरिकी नौसेना की सुरक्षा में चलने वाले कई कॉमर्शियल जहाज भी इसी रास्ते का इस्तेमाल करते हैं।

80% से ज्यादा जहाजों का रास्ता पता नहीं

समुद्री खुफिया कंपनी केप्लर के मुताबिक, 1 से 19 अगस्त के बीच 112 तेल, एलपीजी और एलएनजी ले जाने वाले जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरे।

इनमें से 21 जहाज खुले तौर पर ईरानी रास्ते से गए, जबकि सिर्फ 2 जहाजों ने ओमानी रास्ते का इस्तेमाल किया।

बाकी 89 जहाजों का रास्ता साफ नहीं था। यानी इस दौरान होर्मुज से गुजरने वाले 80% से ज्यादा तेल और गैस वाले जहाजों की आवाजाही पूरी तरह ट्रैक नहीं हो सकी।

ऐसा तब होता है जब जहाज अपना ऑटोमैटिक आइडेंटिफिकेशन सिस्टम (AIS) बंद कर देते हैं। कई बार जहाज का AIS डेटा केप्लर के तय ईरानी या ओमानी रास्तों से मेल भी नहीं खाता। ऐसे में यह पता लगाना मुश्किल हो जाता है कि जहाज वास्तव में किस रास्ते से गुजरा।

सभी तरह के जहाजों में भी ईरानी रास्ता आगे

1 से 19 अगस्त के बीच कुल 236 जहाज स्ट्रेट से गुजरे। इनमें तेल और गैस के अलावा सूखा माल और रसायन ले जाने वाले जहाज भी शामिल थे।

  • 83 जहाज ईरानी रास्ते से गए
  • 3 जहाज ओमानी रास्ते से गुजरे
  • 2 जहाज पुराने रास्ते से गए
  • 148 जहाजों के रास्ते का पता नहीं लगा

यानी हर 10 में से 6 से ज्यादा जहाज किस रास्ते से गुजरे, यह साफ तौर पर पता नहीं चल सका।

जहाज AIS क्यों बंद कर रहे हैं?

युद्ध शुरू होने के बाद ईरान और अमेरिका दोनों ने अपने बताए समुद्री रास्तों या नियमों का पालन नहीं करने वाले जहाजों को चेतावनी दी। कुछ मामलों में जहाजों पर हमले भी हुए।

इसी वजह से कई जहाज अपना ट्रांसपोंडर बंद कर रहे हैं। इससे उनकी सही स्थिति और वे किस रास्ते से जा रहे हैं, इसका पता लगाना मुश्किल हो जाता है।

ब्रिटेन के थिंक टैंक चैथम हाउस के एसोसिएट फेलो नील क्विलियम ने अल जजीरा से कहा कि ट्रांसपोंडर बंद करने से जहाज की आवाजाही कम दिखाई देती है। हालांकि, इससे समुद्री सुरक्षा का खतरा भी बढ़ जाता है।

उनके मुताबिक, कुछ जहाज कंपनियां खतरे के बावजूद अपना कारोबार जारी रखना चाहती हैं, क्योंकि उन्हें लगता है कि इससे होने वाला फायदा जोखिम से ज्यादा है।

पिछले सप्ताह अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के दो जहाजों पर होर्मुज स्ट्रेट में हमला हुआ था।

पिछले सप्ताह अबू धाबी नेशनल ऑयल कंपनी (ADNOC) के दो जहाजों पर होर्मुज स्ट्रेट में हमला हुआ था।

रास्ते में जहाजों के बीच सामान भी बदला जा रहा

ट्रांसपोंडर बंद करने की एक वजह समुद्र में दो जहाजों के बीच सामान का ट्रांसफर भी है।

एनर्जी एक्सपर्ट मार्क अयूब ने अल जजीरा से कहा कि सऊदी अरब, इराक और कुवैत समेत कुछ खाड़ी देशों ने ओमानी रास्ते से कुछ खेप भेजीं। इसके लिए कुछ जहाजों की ट्रैकिंग बंद की गई और रास्ते में दूसरे जहाजों को माल सौंपा गया।

उनके मुताबिक, कुछ ईरानी जहाज भी ओमानी रास्ते का इस्तेमाल कर रहे हैं। इसका मकसद प्रतिबंधों और अमेरिकी नाकाबंदी से बचना है।

क्या आंकड़े ईरान के दबदबे की ओर इशारा कर रहे हैं?

148 जहाजों का रास्ता साफ नहीं होने की वजह से यह तय करना मुश्किल है कि वास्तव में कितने जहाज ईरानी या ओमानी रास्ते से गुजरे।

फिर भी उपलब्ध आंकड़ों से एक बात सामने आती है। अमेरिकी नाकाबंदी और ट्रम्प की धमकियों के बावजूद हर पांच में से एक जहाज खुले तौर पर ईरानी रास्ते से गुजरा।

सभी तरह के जहाजों को मिलाकर देखें तो 35% जहाजों ने सार्वजनिक रूप से ईरानी रास्ते का इस्तेमाल किया। इसके मुकाबले ओमानी या पुराने रास्ते से गुजरने वाले जहाजों की संख्या बहुत कम रही।

इससे संकेत मिलता है कि कई जहाज अमेरिकी धमकियों के बावजूद ईरानी रास्ते का इस्तेमाल करने को तैयार हैं। यानी मौजूदा हालात में ईरान को नाराज करने का डर ट्रम्प की धमकियों से ज्यादा असरदार दिखाई दे रहा है।

होर्मुज दुनिया के लिए इतना अहम क्यों है

अमेरिका-इजराइल का ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू होने से पहले दुनिया के तेल और एलएनजी की करीब एक-पांचवीं सप्लाई होर्मुज स्ट्रेट से होकर गुजरती थी।

तब हर दिन करीब 130 जहाज यहां से गुजरते थे। इसके मुकाबले अगस्त के 19 दिनों में कुल 236 जहाज ही यहां से गुजरे।

ईरान ने मार्च की शुरुआत में स्ट्रेट बंद कर दिया था और सिर्फ अपने मित्र देशों के जहाजों को गुजरने दिया। 17 जून को अमेरिका के साथ MoU पर हस्ताक्षर होने के बाद भी यह जलमार्ग दोनों देशों की बातचीत का सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है।

इस संकट का असर वैश्विक तेल बाजार पर भी पड़ा। संघर्ष शुरू होने से पहले ब्रेंट कच्चा तेल करीब 66 डॉलर प्रति बैरल था। मार्च में यह 119 डॉलर तक पहुंच गया। बाद में कीमत घटी, लेकिन तनाव बढ़ने के साथ फिर चढ़ गई। गुरुवार सुबह ब्रेंट कच्चा तेल 92.9 डॉलर प्रति बैरल पर था।

नील क्विलियम के मुताबिक, अगर जहाजों की आवाजाही पर तेहरान का असर कम होता हुआ माना गया, तो अमेरिका के साथ बातचीत में दबाव बनाने का ईरान का एक अहम हथियार कमजोर पड़ सकता है।

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टीम इंडिया के लिए राउंड-2 में नहीं होगी गलती की गुंजाइश, नीदरलैंड्स से हो सकता है मैच

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हॉकी वर्ल्ड कप के पहले राउंड में पाकिस्तान के खिलाफ 3-0 और 4-1 से बढ़त बनाने के बाद जिस तरह से भारत ने पकड़ ढीली की, वह नीदरलैंड जैसी टीमों के खिलाफ भारी पड़ सकती है।

आखिरी पूल मैच में चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को हराकर दूसरे दौर पहुंची भारतीय पुरूष हॉकी टीम की राह अब आसान नहीं होगी और पहले ही मैच में शुक्रवार को उसका सामना पेरिस ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीदरलैंड से हो सकता है जिसमें गलती की कोई गुंजाइश नहीं होगी। पाकिस्तान के खिलाफ 3-0 और 4-1 से बढ़त बनाने के बाद जिस तरह से भारत ने पकड़ ढीली की, वह नीदरलैंड जैसी टीमों के खिलाफ भारी पड़ सकती है।

भारत ने पूल डी में वेल्स को 3 -1 से और पाकिस्तान को 5-3 से हराया जबकि इंग्लैंड से 2 -4 से हार गई। नए प्रारूप के तहत पूल डी की दोनों शीर्ष टीमें और पूल ए की दो शीर्ष टीमों से पूल ई बना है जिसमें से पहली दो टीमें सेमीफाइनल में जायेंगी। वहीं पूल बी और सी की शीर्ष दो टीमें पूल एफ में एक दूसरे से खेलेंगी और पहले दो स्थान की टीमें अंतिम चार में पहुंचेंगी।

पहले चरण में इंग्लैंड से हारने के कारण भारतीय टीम दूसरे दौर में उसके खिलाफ नहीं खेलेगी जबकि इंग्लैंड पहले दौर के तीन अंक लेकर इस दौर में पहुंची है। इसके मायने हैं कि भारत को बाकी दोनों टीमों से जीतना ही होगा।

पूल ए में दुनिया की दूसरे नंबर की टीम नीदरलैंड फिलहाल शीर्ष पर है जिसे गुरुवार को जापान से आखिरी ग्रुप मैच खेलना है। मौजूदा फॉर्म को देखते हुए नीदरलैंड का जीतना लगभग तय है क्योंकि जापान पहले दोनों मैच हारकर दौड़ से पहले ही बाहर हो चुका है।

वहीं दूसरे मैच में वर्ल्ड रैंकिंग में आठवें स्थान पर काबिज अर्जेंटीना का सामना 11 वीं रैंकिंग वाली न्यूजीलैंड से होगा जिसमें दूसरे दौर में जाने वाली एक और टीम का निर्धारण होगा। अर्जेंटीना और न्यूजीलैंड दोनों के नीदरलैंड से हारने के बाद तीन तीन अंक हैं लेकिन गोल औसत के आधार पर फिलहाल अर्जेंटीना दूसरे स्थान पर है।

तीन ओलंपिक और तीन विश्व कप जीत चुकी नीदरलैंड को उसके गढ में हराने की चुनौती भारत के लिये आसान नहीं होगी । इसी मैदान पर 1973 में पहली बार विश्व कप जीतने वाली नीदरलैंड ने 1990 और 1998 में फिर खिताब जीता जबकि पिछले चार विश्व कप में भी वह दो बार रजत और दो बार कांस्य पदक जीत चुकी है।

अपनी मजबूत हॉकी संस्कृति के लिये मशहूर नीदरलैंड टीम के हर मैच में दस हजार की क्षमता वाला स्टेडियम खचाखच भरा रहता है और मैदान में चारों तरफ आरेंज रंग नजर आता है हालांकि अब यह भारतीय जर्सी का भी रंग है।

पाकिस्तान पर जीत के बावजूद भारतीय कप्तान हरमनप्रीत ने स्वीकार किया था कि उन्हें डिफेंस में सुधार करने की जरूरत है।

उन्होंने कहा था ,”हमें आगे के कठिन मैचों में लिये डीप डिफेंस बेहतर करना होगा। अगर 25 मीटर के भीतर गेंद मिल रही है तो उसे अपने पास रखना होगा । हमने बेवकूफाना गलतियां की जिस पर पाकिस्तान को गोल करने का मौका मिल गया । हमें इनसे सबक लेकर आगे बेहतर प्रदर्शन करना होगा।”

अच्छी शुरूआत के बाद तीसरे या चौथे क्वार्टर में ढिलाई बरतने की कमजोरी इंग्लैंड और पाकिस्तान दोनों के खिलाफ नजर आई। इंग्लैंड के खिलाफ जहां हाफटाइम तक हरमनप्रीत सिंह और दिलप्रीत सिंह के गोल के दम पर 2 -1 से बढत बनाने के बाद तीसरे क्वार्टर में इंग्लैंड को दो गोल गंवाये तो पाकिस्तान को दूसरे क्वार्टर में चार मिनट के भीतर दो गोल करने के मौके दे दिए।

कोच क्रेग फुल्टोन ने पाकिस्तान के खिलाफ जीत के बावजूद कहा कि दूसरे क्वार्टर में टीम अच्छा नहीं खेल सकी लेकिन उन्होंने कहा कि इस तरह के मैच में कई बार जज्बात हावी हो जाते हैं।

उन्होंने कहा था ,” हमने अच्छी शुरूआत की लेकिन दूसरे क्वार्टर में खेल उतना अच्छा नहीं रहा। यह हालांकि बड़ा मैच था और कई बार जज्बात हावी हो जाते हैं लेकिन मैं प्रदर्शन से और टीम के संतुलन से खुश हूं।”

भारतीय टीम के लिये अच्छी बात यह है कि उसने जून में रोटरडम में एफआईएच प्रो लीग के 2025-26 सत्र के आखिरी मैच में नीदरलैंड को 3 -2 से हराया था । पहला मैच इसी अंतर से हारने के बाद भारत ने जु्गराज सिंह, अभिषेक और राजिंदर सिंह जैसे युवा खिलाड़ियों के गोल के दम पर जीत दर्ज की थी ।

ये तीनों खिलाड़ी टीम का हिस्सा हैं और खासकर अभिषेक शानदार फॉर्म में हैं जिन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ दो बेहतरीन फील्ड गोल भी किये थे । वहीं कप्तान हरमनप्रीत अभी तक टूर्नामेंट में सर्वाधिक पांच गोल कर चुके हैं और एक बार फिर उन पर बड़ा दारोमदार होगा जबकि 420 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके अनुभवी मिडफील्डर मनप्रीत सिंह और 291 मैच खेल चुके फॉरवर्ड मनदीप सिंह से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद होगी ।

मैच का समय : शाम छह बजे से (भारतीय समयानुसार रात 9.30 से )

भाषा मोना



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