Thursday, July 9, 2026
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कैंसर संस्थान में लिम्फेडेमा के इलाज के लिए OPD शुरू: स्तन कैंसर मरीजों को निशुल्क प्रेशर स्टॉकिंग्स और ब्रेस्ट प्रोस्थेसिस भी मिलेंगे – Lucknow News




लखनऊ के कल्याण सिंह सुपर स्पेशियलिटी कैंसर संस्थान के सर्जिकल ऑन्कोलॉजी विभाग ने अस्तित्व फाउंडेशन के सहयोग से लिम्फेडेमा की रोकथाम और उपचार के लिए मुफ्त विशेष ओपीडी शुरू की है। संस्थान के निदेशक डॉ. एमएलबी भट्ट ने इसका उद्घाटन किया। पहले ही दिन 30 से अधिक स्तन कैंसर मरीजों का पंजीकरण कर उनका इलाज शुरू किया गया। मरीजों को मिलेंगी मुफ्त सुविधाएं विशेष ओपीडी में मरीजों को नि:शुल्क प्रेशर स्टॉकिंग्स और ब्रेस्ट प्रोस्थेसिस उपलब्ध कराए गए। संस्थान का उद्देश्य स्तन कैंसर की सर्जरी के बाद होने वाली जटिलताओं से मरीजों को समय पर राहत दिलाना है। क्या है लिम्फेडेमा? निदेशक डॉ.एमएलबी भट्ट ने बताया कि स्तन कैंसर की सर्जरी या रेडियोथेरेपी के बाद लिम्फेडेमा एक सामान्य जटिलता है। इसमें हाथ या शरीर के प्रभावित हिस्से में लिम्फ द्रव जमा होने से सूजन, दर्द, जकड़न और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है। समय पर इलाज न मिलने पर मरीज की रोजमर्रा की गतिविधियां भी प्रभावित होने लगती हैं। समय पर इलाज से मिल सकती है राहत उन्होंने बताया कि नियमित व्यायाम, हाथ को चोट और संक्रमण से बचाना, वजन नियंत्रित रखना, समय-समय पर जांच कराना और शुरुआती लक्षण दिखाई देने पर विशेषज्ञ से परामर्श लेने से लिम्फेडेमा की गंभीरता को काफी हद तक रोका जा सकता है। जीवन गुणवत्ता बेहतर बनाने की पहल चिकित्सा अधीक्षक डॉ.वरुण विजय ने कहा कि यह विशेष ओपीडी मरीजों को बीमारी की पहचान, बचाव और आधुनिक उपचार की जानकारी देकर उनकी जीवन गुणवत्ता बेहतर बनाने में मदद करेगी। कार्यक्रम में डीन डॉ. प्रमोद गुप्ता सहित अन्य चिकित्सक भी मौजूद रहे।



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प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण पत्र मामले में नया मोड़: मुनादी कराने वाले अधिकारी पर कार्रवाई की मांग लेकर मुख्यमंत्री से मिले छह मंत्री – Bhopal News


नगरीय विकास एवं आवास राज्यमंत्री प्रतिमा बागरी के जाति प्रमाण-पत्र विवाद में जांच समिति की सुनवाई पूरी होने से पहले कराई गई मुनादी को लेकर राजनीतिक हलचल तेज हो गई है। मामले में मुनादी का आदेश जारी करने वाले अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर प

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मंगलवार को कैबिनेट बैठक के बाद उपमुख्यमंत्री जगदीश देवड़ा, जनजातीय कार्य मंत्री विजय शाह, राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दिलीप जायसवाल, गौतम टेटवाल, लखन पटेल और राज्य मंत्री दिलीप अहिरवार ने मुख्यमंत्री से मुलाकात की।

मंत्रियों ने सुनवाई पूरी होने से पहले मुनादी कराने के निर्णय पर आपत्ति जताते हुए संबंधित अधिकारी के खिलाफ कार्रवाई की मांग रखी।

दो सप्ताह में आ सकता है फैसला

सूत्रों के अनुसार, जाति प्रमाण-पत्र मामले की जांच कर रही छानबीन समिति ने 6 जुलाई को सभी पक्षों की सुनवाई पूरी कर ली है। अब समिति अगले दो सप्ताह में अपना निर्णय दे सकती है। माना जा रहा है कि समिति की रिपोर्ट के बाद पूरे मामले की स्थिति स्पष्ट हो जाएगी।

सरकारी सूत्रों का कहना है कि जांच रिपोर्ट आने के बाद ही आगे की प्रशासनिक कार्रवाई पर निर्णय लिया जाएगा।

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मंत्री प्रतिमा बोलीं- मैं बागरी..मेरे पास 110 साल के दस्तावेज

मध्य प्रदेश की नगरीय प्रशासन राज्य मंत्री प्रतिमा बागरी की जाति प्रमाणपत्र विवाद मामले में राज्य स्तरीय छानबीन समिति ने सुनवाई की। मंत्री प्रतिमा ने वंशावली से संबंधित दस्तावेज समिति को दिए। उन्होंने कहा कि वह बागरी समाज से हैं, जो प्रदेश में अनुसूचित जाति में शामिल है। जाति साबित करने के लिए गांव में मुनादी कराई गई। अपराधियों जैसा व्यवहार किया गया।पूरी खबर पढ़ें



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दादी-नानी का सीक्रेट! इस तरीके से बनाएं लसोड़े का अचार, सालभर रहेगा स्वाद बरकरार


लसोड़ा (Lasoda), जिसे कई जगह गोंदा (Gunda) या निसोरा भी कहा जाता है, एक जंगली पेड़ पर लगने वाला छोटा हरे रंग का फल है. इसका वैज्ञानिक नाम Cordia dichotoma है. यह मुख्य रूप से राजस्थान, हरियाणा, पंजाब, मध्य प्रदेश, गुजरात और उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों में पाया जाता है. गर्मियों के मौसम में इस फल की अच्छी पैदावार होती है और इसी समय इससे स्वादिष्ट अचार तैयार किया जाता है.

लसोड़े के अचार की सबसे बड़ी खासियत इसकी बनावट है. इस फल के अंदर हल्का चिपचिपा गूदा होता है, जिसकी वजह से मसाले अच्छी तरह इसमें समा जाते हैं.

घर पर कैसे बनाएं स्वादिष्ट लसोड़े का अचार?
लसोड़े का अचार राजस्थान, हरियाणा, पंजाब और गुजरात के कई घरों में बड़े चाव से बनाया जाता है. इसका स्वाद हल्का खट्टा, तीखा और मसालेदार होता है. अगर इसे सही तरीके से तैयार किया जाए, तो यह कई महीनों तक खराब नहीं होता.

सामग्री
500 ग्राम ताजे लसोड़े
200-250 मिली सरसों का तेल
2 बड़े चम्मच राई (दरदरी पिसी हुई)
1 बड़ा चम्मच मेथी दाना (हल्का भुना और दरदरा कुटा हुआ)
2 बड़े चम्मच सौंफ (दरदरी कुटी हुई)
2 बड़े चम्मच लाल मिर्च पाउडर
1 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर
2 बड़े चम्मच नमक (स्वादानुसार)
1 छोटा चम्मच हींग
1 बड़ा चम्मच साबुत कलौंजी (वैकल्पिक)
2 बड़े चम्मच सफेद सिरका या 2-3 बड़े चम्मच नींबू का रस (वैकल्पिक)

स्टेप 1: लसोड़े तैयार करें
सबसे पहले लसोड़ों को अच्छी तरह धो लें. इसके बाद इन्हें 5-7 मिनट तक हल्के नमक वाले पानी में उबाल लें. ज्यादा न उबालें, वरना ये बहुत नरम हो जाएंगे. अब इन्हें छलनी में निकालकर पूरी तरह ठंडा और सूखा होने दें. ध्यान रखें कि इनमें बिल्कुल भी पानी न रहे, क्योंकि नमी अचार को जल्दी खराब कर सकती है.

स्टेप 2: मसाला तैयार करें
एक बाउल में दरदरी राई, मेथी, सौंफ, लाल मिर्च, हल्दी, हींग, कलौंजी और नमक डालकर अच्छी तरह मिला लें. यही मसाला अचार का स्वाद तय करता है.

स्टेप 3: सरसों का तेल गर्म करें
सरसों के तेल को कड़ाही में तब तक गर्म करें, जब तक उसका कच्चापन खत्म न हो जाए. इसके बाद गैस बंद कर दें और तेल को पूरी तरह ठंडा होने दें.

स्टेप 4: अचार मिलाएं
अब सूखे लसोड़ों में तैयार मसाला डालें. ऊपर से ठंडा किया हुआ सरसों का तेल डालकर अच्छी तरह मिलाएं ताकि हर लसोड़े पर मसाले की परत चढ़ जाए. चाहें तो इस समय थोड़ा-सा सिरका या नींबू का रस भी मिला सकते हैं.

स्टेप 5: धूप दिखाएं
अचार को साफ और सूखे कांच के जार में भर दें. जार का ढक्कन बंद करके 4-5 दिनों तक रोज 3-4 घंटे धूप में रखें. बीच-बीच में साफ और सूखे चम्मच से अचार को हिलाते रहें. लगभग एक सप्ताह में अचार का स्वाद पूरी तरह विकसित हो जाएगा.

क्या लसोड़ा सेहत के लिए भी फायदेमंद है?
लसोड़ा केवल स्वाद के लिए ही नहीं, बल्कि पोषण के लिहाज से भी अच्छा माना जाता है. इसमें प्राकृतिक फाइबर, विटामिन C और कई तरह के एंटीऑक्सीडेंट पाए जाते हैं. फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर बनाए रखने में मदद करता है, जबकि एंटीऑक्सीडेंट शरीर को ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस से बचाने में सहायक हो सकते हैं. हालांकि, यह ध्यान रखना जरूरी है कि अचार में नमक और तेल की मात्रा अधिक होती है. इसलिए हाई ब्लड प्रेशर, किडनी की बीमारी या कम नमक वाला आहार लेने वाले लोगों को इसका सेवन सीमित मात्रा में ही करना चाहिए.

हर भोजन का स्वाद बढ़ा देता है
लसोड़े का अचार इतना बहुमुखी है कि इसे पराठे, पूरी, दाल-चावल, खिचड़ी, बाजरे की रोटी, मिस्सी रोटी और यहां तक कि सादी रोटी के साथ भी खाया जाता है. कई लोग इसे यात्रा के दौरान भी अपने साथ रखना पसंद करते हैं, क्योंकि यह लंबे समय तक सुरक्षित रहता है और साधारण भोजन को भी स्वादिष्ट बना देता है.



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घर में मिला सोना, आयकर विभाग कब करता है जब्त, कितना लगता है टैक्स?


नई दिल्ली. उत्तर प्रदेश विजिलेंस विभाग की कार्रवाई में आगरा में तैनात रहे पूर्व असिस्टेंट रीजनल ट्रांसपोर्ट ऑफिसर (ARTO) ललित कुमार के लखनऊ स्थित घर से 1.62 करोड़ रुपये नकद, 13 किलो सोना, 9 किलो चांदी और करीब 35 करोड़ रुपये की संपत्ति से जुड़े दस्तावेज मिलने का मामला सामने आया है. इस कार्रवाई के बाद एक बार कई लोगों के मन में सवाल है कि अगर किसी के घर से इतनी बड़ी मात्रा में सोना, चांदी या नकदी मिलती है तो कानून उसके साथ क्या करता है. आपको बता दें कि सिर्फ ज्यादा सोना या चांदी होना अपराध नहीं है. असली सवाल यह होता है कि क्या उस संपत्ति का वैध स्रोत साबित किया जा सकता है. अगर व्यक्ति खरीद का बिल, आय का स्रोत, बैंक रिकॉर्ड, वसीयत या उपहार से जुड़े दस्तावेज दिखा देता है तो आमतौर पर परेशानी नहीं होती. लेकिन अगर संपत्ति का कोई हिसाब नहीं मिलता, तब मामला गंभीर हो जाता है.

अगर आयकर विभाग की सर्च या छापेमारी के दौरान बड़ी मात्रा में सोना, चांदी या नकदी मिलती है और उसका कोई स्पष्ट रिकॉर्ड नहीं होता, तो अधिकारी उसे जब्त कर सकते हैं. इसके बाद संबंधित व्यक्ति को नोटिस देकर यह साबित करने का मौका दिया जाता है कि यह संपत्ति किस आय से खरीदी गई या उसे कैसे हासिल किया गया. अगर संतोषजनक जवाब नहीं मिलता, तो उसे अघोषित आय या अघोषित संपत्ति माना जा सकता है.

कितना टैक्स देना पड़ सकता है?

ऐसे मामलों में आयकर अधिनियम की धारा 115BBE लागू हो सकती है. इसके तहत अघोषित आय पर 60 फीसदी टैक्स लगाया जाता है. इसके साथ 25 फीसदी सरचार्ज और 4 फीसदी सेस भी जुड़ता है. कुल टैक्स देनदारी करीब 78 फीसदी तक पहुंच जाती है. इसके अलावा विभाग 10 फीसदी तक अतिरिक्त पेनल्टी भी लगा सकता है. यानी कई मामलों में सोने या चांदी की कुल कीमत का करीब 88 फीसदी हिस्सा टैक्स और जुर्माने के रूप में वसूला जा सकता है. अगर मामला भ्रष्टाचार, हवाला, तस्करी या किसी अन्य गंभीर अपराध से जुड़ा मिलता है, तो सिर्फ टैक्स ही नहीं बल्कि आपराधिक कार्रवाई और जेल तक की नौबत आ सकती है.

क्या घर में रखा हर सोना जब्त हो जाता है?

नहीं. सीबीडीटी (CBDT) की गाइडलाइंस के अनुसार, परिवार में सामान्य इस्तेमाल के गहनों को लेकर कुछ राहत दी गई है. जांच के दौरान शादीशुदा महिला के पास 500 ग्राम तक, अविवाहित महिला के पास 250 ग्राम तक और परिवार के प्रत्येक पुरुष सदस्य के पास 100 ग्राम तक सोने के आभूषणों को सामान्य परिस्थितियों में जब्त नहीं किया जाता. हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि इन पर कभी सवाल नहीं उठ सकता. अगर आयकर विभाग को आय के स्रोत पर संदेह हो, तो बाद में इनकी भी जांच की जा सकती है.

सोने के बिस्किट और सिक्कों पर क्या नियम हैं?

यह छूट मुख्य रूप से आभूषणों पर लागू होती है. अगर तलाशी के दौरान सोने के बिस्किट, सिक्के या बुलियन मिलते हैं, तो उनके लिए खरीद का बिल या वैध स्रोत बताना जरूरी होता है. ऐसा नहीं होने पर विभाग उन्हें अघोषित संपत्ति मानकर कार्रवाई कर सकता है.

चांदी के मामले में क्या नियम हैं?

सोने की तरह चांदी के लिए कोई तय ग्राम सीमा निर्धारित नहीं है. इसलिए अगर बड़ी मात्रा में चांदी मिलती है, तो उसके स्रोत का पूरा हिसाब देना पड़ सकता है. वैध दस्तावेज नहीं होने पर विभाग उसे भी अघोषित संपत्ति मानकर टैक्स और अन्य कार्रवाई कर सकता है. यानी कानून की नजर में सबसे अहम बात यह नहीं है कि घर में कितना सोना या चांदी है, बल्कि यह है कि उसका स्रोत कितना पारदर्शी और वैध है. अगर संपत्ति का पूरा रिकॉर्ड मौजूद है तो आमतौर पर परेशानी नहीं होती, लेकिन बिना हिसाब वाली संपत्ति मिलने पर टैक्स, पेनल्टी और गंभीर मामलों में आपराधिक कार्रवाई तक हो सकती है.



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15 अगस्त तक अभियान बसेरा का लक्ष्य पूरा करें: राजस्व विभाग के सचिव के सख्त निर्देश, 38 जिलों के अपर समाहर्ताओं के साथ की समीक्षा – Patna News




राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग के सचिव जय सिंह ने आज राज्य के सभी 38 जिलों के अपर समाहर्ताओं के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से राजस्व विभाग की विभिन्न योजनाओं और लंबित कार्यों की विस्तृत समीक्षा की। इस दौरान उन्होंने कहा कि सरकार की प्राथमिकता वाले सभी राजस्व कार्य निर्धारित समय-सीमा के भीतर हर हाल में पूरे किए जाएं। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि किसी भी स्तर पर लापरवाही, अनावश्यक विलंब या शिथिलता बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। 15 अगस्त तक वासविहीन परिवारों को मिले जमीन बैठक में सचिव जय सिंह ने अभियान बसेरा के तहत चल रहे कार्यों की जिला-वार समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिया कि 15 अगस्त 2026 तक सभी पात्र वासविहीन परिवारों को भूमि उपलब्ध कराने का लक्ष्य हर हाल में पूरा किया जाए। इसके लिए पात्र लाभार्थियों की पहचान, भूमि अभिलेखों का सत्यापन, बंदोबस्ती की प्रक्रिया और प्रमाण-पत्र वितरण जैसे सभी कार्य समय पर पूरे करने के निर्देश दिए गए। उन्होंने कहा कि किसी भी पात्र परिवार को योजना के लाभ से वंचित नहीं रहना चाहिए। राजस्व महा-अभियान के लंबित मामलों का जल्द करें निष्पादन समीक्षा बैठक में राजस्व महा-अभियान के तहत प्राप्त लंबित आवेदनों की भी विस्तार से समीक्षा की गई। सचिव ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि सभी लंबित मामलों का प्राथमिकता के आधार पर शीघ्र निष्पादन सुनिश्चित करें। उन्होंने कहा कि लोगों से जुड़े मामलों में अनावश्यक देरी स्वीकार नहीं की जाएगी और लंबित मामलों को जल्द से जल्द समाप्त किया जाए। स्थानांतरित अधिकारियों को 9 जुलाई तक नई जगह योगदान देना होगा बैठक में हाल ही में स्थानांतरित अंचल अधिकारियों और सहायक बंदोबस्त पदाधिकारियों के विरमण और योगदान की भी समीक्षा की गई। सचिव ने निर्देश दिया कि सभी स्थानांतरित अधिकारी 9 जुलाई तक हर हाल में अपने नए पदस्थापन स्थल पर योगदान दें। उन्होंने स्पष्ट किया कि जुलाई महीने का वेतन नए पदस्थापन वाले स्थान से ही देय होगा। साथ ही कहा कि स्थानांतरण की प्रक्रिया में किसी तरह की देरी नहीं होनी चाहिए, ताकि प्रशासनिक कार्य प्रभावित न हों। आरसीएमएस पर ऑनलाइन सुनवाई की तैयारी जल्द पूरी करें राजस्व सचिव ने आरसीएमएस (RCMS) पोर्टल के माध्यम से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए ऑनलाइन सुनवाई की तैयारियों की भी समीक्षा की। उन्होंने सभी जिलों को निर्देश दिया कि आवश्यक तकनीकी संसाधन, उपकरण और अधिकारियों-कर्मचारियों के प्रशिक्षण की व्यवस्था शीघ्र पूरी की जाए, ताकि ऑनलाइन सुनवाई की व्यवस्था समय पर शुरू की जा सके और आम लोगों को अधिक पारदर्शी एवं सुविधाजनक सेवा मिल सके। नियमित मॉनिटरिंग और जवाबदेही तय होगी बैठक के अंत में सचिव जय सिंह ने सभी अपर समाहर्ताओं को व्यक्तिगत जिम्मेदारी के साथ कार्यों की नियमित निगरानी करने का निर्देश दिया।उन्होंने अधिकारियों से समयबद्ध, पारदर्शी और जवाबदेह तरीके से कार्य करने की अपेक्षा जताई, ताकि आम लोगों को राजस्व सेवाओं का लाभ समय पर मिल सके।



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खातौली में 71 करोड़ के विकास कार्यों का लोकार्पण-शिलान्यास: स्पीकर ओम बिरला ने 132 केवी जीएसएस, सामुदायिक भवन समेत कई सौगातें दी – Khatoli (Etawah) News




लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार को खातौली स्थित कृषि उपज मंडी में आयोजित कार्यक्रम के दौरान 71 करोड़ रुपए के विकास कार्यों का लोकार्पणऔर शिलान्यास किया। इन कार्यों से क्षेत्र में आधारभूत संरचना को मजबूती मिलेगी इस अवसर पर ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर, पूर्व मंत्री रामगोपाल बेरवा, इटावा नगर पालिका अध्यक्ष रजनी सोनी, देहात जिला अध्यक्ष प्रेम गोचर, उपाध्यक्ष पवन हाडा, मंडल अध्यक्ष वीरेंद्र सुमन, भाजपा युवा नेता सत्येंद्र सिंह निमोला, श्याम सोनी और अखिल भारतीय वैष्णव महासभा के संभागीय अध्यक्ष भुवनेश शर्मा सहित कई व्यक्ति उपस्थित थे। कार्यक्रम के दौरान बिरला ने 36 करोड़ रुपए की लागत से बनने वाले 132 केवी जीएसएस का भी शिलान्यास किया। यह परियोजना क्षेत्र में बिजली आपूर्ति में सुधार लाएगी। जोरावरपुरा में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, बालूपा में उप स्वास्थ्य केंद्र, स्टेट हाईवे-70 का दो लेन से चार लेन चौड़ीकरण, विभिन्न गांवों को जोड़ने वाली नई सड़कें, पुलियों का जीर्णोद्धार और संपर्क मार्गों का निर्माण भी इन विकास कार्यों में शामिल है। कृषि उपज मंडी खातौली का विकास, हाट बाजार और सब्जी मंडी का निर्माण, राजीविका सीएलएफ भवन, सामुदायिक भवन, स्कूलों में अतिरिक्त कक्ष, मुक्तिधाम विकास, पेयजल सुविधाएं और पर्यटन स्थल झरेल के बालाजी का विकास जैसे कार्य भी इस सौगात का हिस्सा हैं।



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यूपी- सरोगेसी मामलों के नोडल अधिकारी होंगे डीजी परिवार कल्याण: डिप्टी सीएम की बैठक में फैसला, डॉ.पवन कुमार अरुण को सौंपी गई जिम्मेदारी – Lucknow News




यूपी में सरोगेसी के लंबित प्रकरणों की देखरेख के लिए नोडल अधिकारी को नामित किया गया है। डीजी परिवार कल्याण को यह महत्वपूर्ण जिम्मेदारी सौंपी गई है। इससे सरोगेसी के लंबित प्रकरणों के जल्द एवं समयबद्ध निस्तारण को गति मिलेगी। यह जानकारी प्रदेश के डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने दी। वे बुधवार को विधानसभा स्थित सभागार में सहायता प्राप्त जननीय प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम 2021 के अंतर्गत गठित राज्य सहायता प्राप्त जननीय प्रौद्योगिकी- सरोगेसी बोर्ड की दूसरी बैठक को संबोधित कर रहे थे। डॉ.पवन कुमार अरुण को मिली जिम्मेदारी ब्रजेश पाठक ने कहा कि यह बेहद संवेदनशील मामला है। इस पर हम सभी को संयुक्त रूप से कार्य करना है। उन्होंने बताया कि शासन के निर्देशानुसार प्रदेश के सरोगेसी के लंबित प्रकरणों की देखरेख के लिए नोडल अधिकारी के तौर पर महानिदेशक परिवार कल्याण डॉ. पवन कुमार अरुण को नामित किया गया है। इनकी देखरेख में सरोगेसी के सभी लंबित प्रकरणों की देखरेख की जाएगी और उनका समयबद्ध तरीके से निस्तारण किया जाएगा। उन्होंने बताया कि सरोगेसी का प्रकरण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में है। बैठक में अपर मुख्य सचिव (चिकित्सा, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण) अमित कुमार घोष, मिशन निदेशक, राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन डॉ० पिंकी जोएल एवं अन्य अधिकारीगण उपस्थित रहे।



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बालाघाट नपाध्यक्ष पर चहेतों को ठेका दिलाने का आरोप: सत्ताधारी पार्षद सुधीर चिले बोले- जनता द्वारा चुने गए सभापति ही बन गए ठेकेदार – Balaghat (Madhya Pradesh) News




बालाघाट नगरपालिका अध्यक्ष भारती ठाकुर एक बार फिर विवादों के घेरे में हैं। इस बार विपक्ष के बजाय खुद उनकी ही पार्टी के वरिष्ठ पार्षद सुधीर चिले ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर गंभीर आरोप लगाए हैं। पार्षद चिले का कहना है कि नगरपालिका में जनता द्वारा निर्वाचित सभापति ही अब ठेकेदार और सप्लायर के रूप में काम कर रहे हैं। महिला सभापति के पति सहित कई पार्षदों पर आरोप पार्षद सुधीर चिले ने सीधे तौर पर महिला सभापति के पति खगेश कावरे, सभापति वकील वाधवा और कमलेश पांचे का नाम लेते हुए उन पर ठेकेदारी और सप्लायर होने के आरोप मढ़े। उन्होंने दावा किया कि नगरपालिका अध्यक्ष नियमों को ताक पर रखकर केवल अपने चहेतों को ही काम और ठेके बांट रही हैं। वार्ड के विकास कार्यों को मंजूरी न मिलने से फूटा गुस्सा पार्षद चिले की यह नाराजगी उनके खुद के वार्ड के विकास कार्यों को प्रेसिडेंट-इन-काउंसिल में स्वीकृति न मिलने के कारण सामने आई है। उन्होंने बताया कि उनके वार्ड में सड़क और बिजली जैसी मूलभूत समस्याएं मुंह बाए खड़ी हैं, लेकिन पीआईसी में इन विकास कार्यों को मंजूरी नहीं दी जा रही है। उन्होंने आरोप लगाया कि साथी पार्षद समीर जायसवाल के हस्तक्षेप के बाद ही उनके पांच में से केवल एक काम को जैसे-तैसे मंजूरी मिल सकी। पीआईसी को चेतावनी- ‘परिषद पीआईसी से बड़ी होती है’ पीआईसी के रवैए पर तीखी प्रतिक्रिया देते हुए चिले ने चेतावनी भरे लहजे में कहा कि वे यह न समझें कि पीआईसी में काम रुकने से वार्ड का विकास रुक जाएगा। उन्होंने कहा, “हम परिषद में इन कार्यों को हर हाल में स्वीकृत करा लेंगे, क्योंकि पूरी परिषद पीआईसी से बड़ी और सर्वोपरि होती है।” संगठन पर उठाए सवाल एक सवाल के जवाब में सुधीर चिले ने दुख जताते हुए कहा कि वे संगठन के समर्पित सदस्य हैं, इसके बावजूद उनके साथ इस तरह का भेदभावपूर्ण व्यवहार किया जा रहा है, जिस पर पार्टी संगठन को गंभीरता से विचार करना चाहिए। वर्तमान में बालाघाट नगरपालिका में अध्यक्ष के खिलाफ विपक्ष से ज्यादा उनकी खुद की पार्टी के पार्षद मोर्चा खोले हुए हैं। नगरपालिका अध्यक्ष कल रखेंगी अपना पक्ष मामले में नपाध्यक्ष ने बताया कि इन आरोपों का जवाब देने के लिए शनिवार को वह और सभापति संयुक्त रूप से प्रेस कॉन्फ्रेंस कर अपना पक्ष रख सकते हैं।



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शिवहर में SP का जनता दरबार: लोगों की शिकायतें सुनीं, लंबित मामलों के जल्द निपटारे के निर्देश, लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी – Sheohar News




शिवहर में पुलिस अधीक्षक शैलेंद्र सिंह ने बुधवार को अपने कार्यालय कक्ष में जनता दरबार का आयोजन किया। इस दौरान उन्होंने आम लोगों की शिकायतें सुनीं और लंबित मामलों के त्वरित निष्पादन के सख्त निर्देश दिए। जनता दरबार में जिले के विभिन्न प्रखंडों से आए फरियादियों ने भूमि विवाद, पारिवारिक कलह, मारपीट, धोखाधड़ी और अन्य आपराधिक मामलों से संबंधित शिकायतें सीधे एसपी के समक्ष रखीं। अनावश्यक विलंब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा
पुलिस अधीक्षक ने प्रत्येक शिकायत को गंभीरता से सुना और संबंधित थानाध्यक्षों व पुलिस पदाधिकारियों को निष्पक्ष, पारदर्शी तथा समयबद्ध जांच सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्पष्ट किया कि जनता की शिकायतों का शीघ्र निष्पादन पुलिस की सर्वोच्च प्राथमिकता है। किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनावश्यक विलंब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। एसपी ने चेतावनी दी कि शिकायतों के निस्तारण में कोताही बरतने वाले पुलिसकर्मियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई की जाएगी। पुलिस व्यवस्था के प्रति आमजन का भरोसा
जनता दरबार में अपनी बात सीधे पुलिस अधीक्षक के समक्ष रखने का अवसर मिलने पर लोगों ने संतोष व्यक्त किया। उनका मानना था कि इस व्यवस्था से उनकी शिकायतों पर त्वरित कार्रवाई की उम्मीद बढ़ी है। पुलिस अधीक्षक ने कहा कि जनता दरबार पुलिस और आमजन के बीच विश्वास व संवाद को मजबूत करने का एक प्रभावी माध्यम है। इसका उद्देश्य लोगों की समस्याओं का त्वरित, निष्पक्ष और पारदर्शी समाधान सुनिश्चित करना है, ताकि पुलिस व्यवस्था के प्रति आमजन का भरोसा और बढ़े।



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जैसलमेर LDC परीक्षा मामले में स्वतंत्र SIT की मांग: सांसद उम्मेदाराम बोले-लोकल प्रशासन मामला दबाने में जुटा; माफिया को संरक्षण – Jaisalmer News




बाड़मेर-जैसलमेर सांसद उम्मेदाराम बेनीवाल ने LDC सेकेंड ग्रेड भर्ती परीक्षा में नकल के मामले में सरकार से स्वतंत्र उच्च स्तरीय विशेष जांच दल (SIT) के गठन की मांग की है। बता दें कि 5 जुलाई को हुई एलडीसी द्वितीय ग्रेड भर्ती परीक्षा में जैसलमेर के स्वामी विवेकानंद मॉडल स्कूल केंद्र में नकल के आरोप लगे थे। बेनीवाल ने आरोप लगाया कि स्थानीय अधिकारियों और पुलिस के संरक्षण में आरोपियों को बचाने और धांधली को दबाने का सुनियोजित प्रयास किया जा रहा है। इससे स्थानीय स्तर पर निष्पक्ष जांच संभव नहीं है। खिड़की से प्रश्नपत्र बाहर फेंककर हल कराने का आरोप सांसद बेनीवाल ने सोशल मीडिया और सार्वजनिक बयानों के जरिए इस पूरी परीक्षा प्रणाली पर तीखे सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा- परीक्षा के दौरान एक रिलीवर और वीक्षक ने सुनियोजित तरीके से प्रश्नपत्र को परीक्षा कक्ष की खिड़की से बाहर फेंका। इसके बाद बाहर मौजूद साठ-गांठ वाले तत्वों से उसे हल करवाकर कुछ विशेष अभ्यर्थियों को अनुचित लाभ पहुंचाने का प्रयास किया गया। परीक्षार्थियों ने मौके पर ही विरोध दर्ज कराया और हंगामा मचाया। इसके बावजूद प्रशासन ने त्वरित कार्रवाई करने के बजाय मामले को रफा-दफा करने की कोशिश की। अधिकारियों की मिलीभगत और देर रात तक बैठक का दावा सांसद ने जिला शिक्षा कार्यालय के अधिकारियों की भूमिका को कटघरे में खड़ा करते सांसद ने कहा- प्रभावशाली राजनीतिक लोगों और चहेतों को फायदा पहुंचाने के लिए विवादित पृष्ठभूमि वाले कर्मचारियों की ड्यूटी जानबूझकर इसी केंद्र पर लगाई गई थी। बेनीवाल के अनुसार- सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि परीक्षा समाप्त होने के बाद देर रात तक अतिरिक्त जिला कलेक्टर (ADM) और स्थानीय पुलिस अधिकारियों ने परीक्षा केंद्र पर रुककर मामले को दबाने और साक्ष्यों को प्रभावित करने का प्रयास किया। जब जिला प्रशासन खुद संदेह के घेरे में है, तो उससे न्याय की उम्मीद नहीं की जा सकती। विपक्ष हमलावर: सरकार के पारदर्शी दावों की खुली पोल इस प्रकरण के बाद राजस्थान की सियासत में उबाल आ गया है। पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष गोविंदसिंह डोटासरा और नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित विपक्ष के तमाम शीर्ष नेताओं ने सरकार को आड़े हाथों लिया है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि एक तरफ मुख्यमंत्री मंचों से पेपर लीक और परीक्षा माफियाओं को पूरी तरह खत्म करने का दावा कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ जमीनी हकीकत इसके उलट है। प्रदेश में पेपर माफियाओं को सत्ता का खुला संरक्षण मिला हुआ है, जिससे युवाओं के भविष्य के साथ बार-बार खिलवाड़ हो रहा है।



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