Tuesday, June 9, 2026
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बीजेपी में व‍िलय करेंगे ममता के सांसद? शताब्‍दी रॉय के घर क्‍या हुई चर्चा


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बीजेपी में व‍िलय करेंगे ममता के सांसद? शताब्‍दी रॉय के घर क्‍या हुई चर्चा

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टीएमसी के दो तिहाई से ज्यादा सांसद और विधायक ममता बनर्जी के खिलाफ बगावत कर नया गुट बनाने की तैयारी कर रहे हैं. लेकिन इसमें नया मोड़ तब आ गया जब सोमवार शाम सांसद शताब्‍दी रॉय के घर सांसदों की मीटिंग हुई और उसमें सुवेंदु अध‍िकारी पहुंचे. सवाल ये क‍ि क्‍या सांसद बीजेपी में व‍िलय करने जा रहे हैं?

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टीएमसी में टूट के बाद सवाल क‍ि क्‍या बागी गुट बीजेपी में व‍िलय करेगा.

ममता बनर्जी को अकेला छोड़कर बागी हुए टीएमसी के सांसदों ने सोमवार देर रात तक शताब्‍दी रॉय के घर पर चर्चा की. इस मीटिंग में पश्च‍िम बंगाल के मुख्‍यमंत्री सुवेंदु अध‍िकारी भी शाम‍िल हुए. हालांक‍ि , सुवेंदु कुछ ही देर में सांसदों से म‍िलकर न‍िकल गए, लेकिन बाद में जो बातें सामने आईं, वह काफी कुछ कह रही हैं. सूत्रों का कहना है क‍ि टीएमसी के बागी सांसदों ने इस बात पर लंबी चर्चा की है क‍ि बीजेपी में व‍िलय करना चाह‍िए, या फ‍िर पार्टी पर दावा ठोककर उसे एनडीए का ह‍िस्‍सा बनाना चाह‍िए.

सूत्रों का कहना है क‍ि सभी सांसद मंगलवार को एक साथ फ‍िर मीटिंग करेंगे और बाद में मीडिया के सामने अपने फैसले का ऐलान करेंगे. इस बात की चर्चा है क‍ि पहले ये सांसद नया गुट बनाएंगे और फ‍िर बीजेपी में व‍िलय कर जाएंगे. हालांकि, इस पर आख‍िरी फैसला सांसदों को खुद लेना है और मंगलवार को वे मीडिया से इस बारे में बात कर सकते हैं.

जिसकी संख्या ज्‍यादा, उसका चुनाव च‍िह्न

कोलकाता के बाद अब दिल्ली में भी तृणमूल कांग्रेस दो हिस्सों में बंट गई है. लोकसभा में तृणमूल के दो-तिहाई से अधिक सांसदों ने ममता बनर्जी के खिलाफ बगावत का ऐलान कर दिया है. नतीजतन, अब यह अटकलें लगने लगी हैं कि कोलकाता और दिल्ली में मिले इन दोहरे झटकों में ममता बनर्जी अपनी पार्टी और चुनाव चिह्न दोनों खो देंगी. विधानसभा में तृणमूल के दो-तिहाई से अधिक विधायक ऋतब्रता बनर्जी के नेतृत्व वाले विपक्षी खेमे में शामिल हो चुके हैं. इनकी संख्या 60 से अधिक हो गई है. विधानसभा चुनावों के बाद, लोकसभा के दो-तिहाई से अधिक सांसदों ने भी बगावत का ऐलान कर दिया है. लोकसभा में तृणमूल के 28 सांसद थे. इनमें से कम से कम 20 से 22 सांसद बागी खेमे में शामिल हो चुके हैं.

… तो पार्टी पर भी होगा बाग‍ियों का कब्‍जा

विधानसभा और लोकसभा के बाद, अगर राज्यसभा में भी तृणमूल सांसदों के दो-तिहाई सदस्य बगावत कर देते हैं, तो ममता बनर्जी का दबाव और बढ़ जाएगा. क्योंकि चुनाव आयोग के नियम के अनुसार, अगर विधानसभा, लोकसभा, राज्यसभा और नगर एवं पंचायत स्तर पर तृणमूल के अधिकांश जन प्रतिनिधि बागी खेमे का समर्थन करते हैं, तो पीड़ित पक्ष चुनाव आयोग से तृणमूल पार्टी का नाम और चुनाव चिन्ह मांग सकते हैं. साथ ही, पार्टी पदाधिकारियों का समर्थन भी बागियों के साथ होना चाहिए.

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Gyanendra Mishra

Mr. Gyanendra Kumar Mishra is associated with hindi.news18.com. working on home page. He has 20 yrs of rich experience in journalism. He Started his career with Amar Ujala then worked for ‘Hindustan Times Group…और पढ़ें



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इंदिरा मार्केट में शॉर्ट सर्किट से भड़की चिंगारी: चंद मिनटों में राख की ढेर में तब्दील हुईं कपड़े की दुकान, लाखों रुपये के रेडीमेड कपड़े जलकर खाक – Bareilly News




बरेली के कोतवाली थाना क्षेत्र में आने वाले व्यस्त इंदिरा मार्केट में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब कपड़ों की दुकान से अचानक धुएं का गुबार उठने लगा। देखते ही देखते चंद मिनटों में आग ने इतना विकराल रूप ले लिया। रेडीमेड कपड़ों का बाजार होने के कारण आग बहुत तेजी से फैली। स्थानीय दुकानदारों ने अपने स्तर पर पानी डालकर आग बुझाने का प्रयास किया, लेकिन कपड़ों की वजह से लपटें लगातार उग्र होती गईं। शुरुआती जांच में आग लगने की वजह बिजली के पोल या दुकान में हुआ शॉर्ट सर्किट बताई जा रही है। मौके पर पहुंची फायर ब्रिगेड की टीम ने मोर्चा संभाला। दमकल कर्मियों ने आग पर काबू पाया। इस अग्निकांड में किसी जनहानि की खबर नहीं है, जो एक बड़ी राहत की बात है। हालांकि, दुकानदारों का कहना है कि सीजन के लिए मंगाया गया लाखों रुपये का रेडीमेड स्टॉक पूरी तरह जलकर बर्बाद हो गया है।



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उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने जयपुर में देखी ‘कृष्णावतारम’ फिल्म: कहा- भारतीय संस्कृति और महिला सशक्तिकरण का प्रेरक संदेश देती है फिल्म, स्टारकास्ट भी रही मौजूद – Jaipur News




उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने जयपुर के ईपी मिराज सिनेमा में आयोजित फिल्म ‘कृष्णावतारम’ की विशेष स्क्रीनिंग में हिस्सा लिया। इस अवसर पर फिल्म में भगवान श्रीकृष्ण की भूमिका निभाने वाले अभिनेता सिद्धार्थ और सत्यभामा की भूमिका निभाने वाली अभिनेत्री संस्कृति भी मौजूद रहीं। स्क्रीनिंग के दौरान जनप्रतिनिधियों, सामाजिक हस्तियों, उद्योग जगत से जुड़े लोगों और बड़ी संख्या में लोगों ने भी फिल्म का अवलोकन किया। फिल्म देखने के बाद मीडिया से बातचीत करते हुए उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा कि उन्हें पहले से ही बताया गया था कि ‘कृष्णावतारम’ एक अच्छी फिल्म है, लेकिन फिल्म देखने के बाद यह उनकी अपेक्षाओं से भी कहीं अधिक प्रभावशाली और शानदार लगी। उन्होंने कहा कि फिल्म का निर्देशन बेहद सुंदर है। कलाकारों की अभिनय क्षमता भी शानदार है। मुझे लगता है कि यह फिल्म हर व्यक्ति को अपने परिवार के साथ जाकर देखनी चाहिए। इसमें मनोरंजन के साथ-साथ भारतीय संस्कृति, धर्म और जीवन मूल्यों को समझने का अवसर भी मिलता है। दिया कुमारी ने कहा कि वर्तमान समय में लोगों के पास धार्मिक और सांस्कृतिक विषयों को विस्तार से जानने का समय कम होता जा रहा है, ऐसे में ‘कृष्णावतारम’ जैसी फिल्में समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने का कार्य करती हैं। उन्होंने कहा कि फिल्म के माध्यम से भगवान श्रीकृष्ण के जीवन, उनके आदर्शों और उनकी शिक्षाओं को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत किया गया है। दिया कुमारी ने कहा कि फिल्म केवल धार्मिक कथा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह महिला सशक्तिकरण और महिला उत्थान का भी मजबूत संदेश देती है। उन्होंने कहा कि समाज में महिलाओं की भूमिका, सम्मान और उनकी शक्ति को जिस तरह फिल्म में दर्शाया गया है, वह दर्शकों को सकारात्मक सोच के लिए प्रेरित करेगा। उन्होंने कहा कि भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं के बारे में जितना कहा जाए उतना कम है। पूरी फिल्म में ऐसे कई प्रसंग हैं, जिनसे दर्शकों को बहुत कुछ सीखने, समझने और जानने का अवसर मिलेगा। यह फिल्म सिर्फ मनोरंजन नहीं बल्कि एक प्रेरणादायक अनुभव है। दिया कुमारी ने फिल्म के सभी कलाकारों के अभिनय की सराहना करते हुए कहा कि प्रत्येक कलाकार ने अपने किरदार को जीवंत बनाने में पूरी मेहनत की है। उन्होंने फिल्म के निर्देशन, प्रस्तुति, तकनीकी पक्ष और निर्माण टीम की भी प्रशंसा की और फिल्म की सफलता के लिए शुभकामनाएं दीं। विशेष स्क्रीनिंग के दौरान जयपुर सांसद मंजू शर्मा, जयपुर जिला प्रमुख राम चोपड़ा, भाजपा जिला अध्यक्ष अमित गोयल, आदर्श नगर विधानसभा क्षेत्र से भाजपा नेता रवि नैय्यर, किशनपोल विधानसभा क्षेत्र से भाजपा नेता चंद्र मनोहर बटवाड़ा, ईपी के जनरल मैनेजर अरुण टाक सहित भाजपा पदाधिकारी, कार्यकर्ता उपस्थित रहे।



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जयपुर में छिपा था कफ सिरप तस्करी का आरोपी: बैतूल आते ही STF ने दबोचा, आरोपियों को रिमांड पर लेकर पूछताछ शुरू की – Bhopal News




भोपाल में 49,920 ऑनरेक्स कफ सिरप की बरामदगी मामले में फरार चल रहे 30 हजार रुपए के इनामी आरोपी अर्जुन मालवीय उर्फ निखिल को मध्यप्रदेश एसटीएफ ने गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए जयपुर भाग गया था, लेकिन एक परिचित से मिलने बैतूल पहुंचते ही एसटीएफ की टीम ने उसे पकड़ लिया। एसपी एसटीएफ भोपाल राजेश सिंह भदौरिया के अनुसार गांधी नगर इलाके में चल रही अवैध कफ सिरप फैक्ट्री के खुलासे के बाद अर्जुन का नाम जांच में सामने आया था। इसके बाद एसटीएफ लगातार उसकी लोकेशन और संपर्कों की निगरानी कर रही थी। अर्जुन ट्रेडर्स के नाम से लिया था लाइसेंस
जांच में पता चला कि बागसेवनिया स्थित सुरेंद्र पैलेस में अर्जुन ट्रेडर्स के नाम से ड्रग लाइसेंस लिया था। इसी लाइसेंस के माध्यम से ऑनरेक्स कफ सिरप की खरीद-बिक्री के दस्तावेज तैयार किए जा रहे थे। एसटीएफ की जांच में सामने आया कि मौके पर मौजूद दुकान केवल दिखावे के लिए थी। करीब 10 महीने पहले लाइसेंस लेने के लिए दुकान खोली गई थी, लेकिन वहां ऑनरेक्स कफ सिरप की एक भी शीशी नहीं मिली। आरोपी को 5 दिन की रिमांड पर भेजा एसटीएफ को आशंका है कि लाइसेंस का इस्तेमाल केवल कागजी रिकॉर्ड तैयार करने और अवैध सप्लाई को वैध दिखाने के लिए किया जा रहा था। गिरफ्तारी के बाद आरोपी को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से उसे पांच दिन की पुलिस रिमांड पर भेज दिया गया है। एसटीएफ अब आरोपी से नेटवर्क और सप्लाई चैन को लेकर पूछताछ कर रही है।



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‘पेद्दी’ विवाद के बीच जया बच्चन का बड़ा खुलासा, करीना कपूर बोलीं- ‘छोटे कपड़े पहनना…’


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जाह्नवी कपूर की ‘पेद्दी’ को लेकर एक विवाद छिड़ा हुआ है. एक्ट्रेक के रोल को लेकर काफी आलोचना हो रही है. फिल्म के डायरेक्टर बुची बाबू सना पर एक्ट्रेस को आब्जेक्टिफाई और सेक्शुअलाइज करने के भी आरोप लग रहे हैं. अब इसी विवाद के बीच जया बच्चन और करीना कपूर ने फिल्मों में महिलाओं को ऑब्जेक्टिफाई किए जाने पर खुलकर अपनी राय जाहिर की है.

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जया बच्चन, करीना ने शेयर किया एक्सपीरियंस

नई दिल्ली. फिल्म ‘पेद्दी’में जाह्नवी के रोल को लेकर खूब चर्चा हो रही है. फिल्म में जिस तरह से एक्ट्रेस को दिखाया गया है, लोग उस पर आपत्ति जता रहे हैं. सोशल मीडिया पर कई लोगों का कहना है कि फिल्म में उनके किरदार को जरूरत से ज्यादा ग्लैमरस और ऑब्जेक्टिफाई करके दिखाया गया है. अब इसी मुद्दे पर करीना और जया बच्चन ने भी अपनी बात रखी है.

जया बच्चन और करीना कपूर दोनों का ही मानना है कि पर्दे पर एक्ट्रेस को अट्रेक्टिव दिखाने के मतलब ये नहीं है कि महिलाओं को भड़काऊ अंदाज में दर्शाया जाए. जाह्नवी कपूर के किरदार को लेकर उठे विवाद के बीच उनके बयान ने इस मुद्दे को एक नई दिशा दी है.

जया बच्चन ने शेयर किया अपना अनुभव

‘पेद्दी’में जाह्नवी के रोल को लेकर हो रही चर्चाओं के बीच जया बच्चन का भी एक बयान वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने कहा कि यूं तो किसी ने उनके साथ ऐसा करने की कभी हिम्मत नहीं की. लेकिन एक बार करियर में एक बार उनके साथ ऐसा हुआ था, एक डायरेक्टर ने उन्हें ऑब्जेक्टिफाई करने की कोशिश की थी. लेकिन जया ने कभी दोबारा उनके साथ काम नहीं किया.

करीना ने काजोल-श्रीदेवी का दिया उदाहण

जया बच्चन के अलावा करीना कपूर ने इस विवाद पर अपनी बात रखी है. उन्होंने कहा कि स्क्रीन पर सेंशुअल दिखने का मतलब ये नहीं कि छोटे या रिवीलिंग कपड़े पहनना जरूरी है. तभी ग्लैमर नजर आएगा या ऑडियंस आएगी. करीना ने अपनी बात रखते हुए कहा कि ‘कभी खुशी कभी गम’ के गाने ‘सूरज हुआ मद्धम’ में काजोल ने बिना अपना बदन दिखाए, दर्शकों का दिल जीत लिया था. उन्होंने इसी बीच श्रीदेवी का भी जिक्र किया. कहा ‘चांदनी’ के गाने ‘तेरे मेरे होंठों पे’ श्रीदेवी ने साड़ी में ही दर्शकों का दिल जीत लिया था.

बता दें कि करीना ने अपनी सास शर्मिला टैगोर का भी जिक्र किया, उन्होंने कहा कि ‘आराधना’ के ब्लॉकबस्टर गाने ‘रूप तेरा मस्ताना’ में शर्मिला टैगोर पूरी तरीके से ढकी हुई थी. लेकिनि फिर भी वह इस गाने से छा गई थीं. पर्दे पर सेंशुअलिटी का कपड़ों या महिलाओं को ऑब्जेक्ट की तरह दिखाने से कोई मतलब नहीं है. दरअसल, पेद्दी को लेकर एक विवाद छिड़ गया है कि फिल्म में जाह्नवी कपूर के किरदार को जरूरत से ज्यादा ग्लैमराइज किया गया है. लोग निर्देशक बुच्ची बाबू सना पर सवाल उठा रहे हैं. लेकिन उनका कहना है कि सिनेमा का मकसद लोगों का मनोरंजन करना, उन्हें प्रेरित करना और उनसे जुड़ना है.

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Munish KumarSenior sub editor

न्यूज 18 हिंदी में एंटरटेनमेंट सेक्शन में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे मुनीष कुमार दिल्ली के रहने वाले हैं. डिजिटल मीडिया में उन्हें 10 साल का अनुभव है.राजधानी कॉलेज (DU) से पॉलिटिकल साइंस (ऑनर्स) की पढ…और पढ़ें





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बिना ओवन के सिर्फ 10 मिनट में बनाएं कड़ाही पिज्जा, मैदा की जरूरत नहीं, जानें आसान रेसिपी


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Kadai Pizza Simple Recipe: अगर आपके पास ओवन नहीं है और आप मैदा से बचना चाहते हैं, तो कड़ाही पिज्जा एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है. सूजी या गेहूं के आटे से तैयार यह हेल्दी पिज्जा सिर्फ 10 मिनट में बन जाता है और स्वाद में भी किसी रेस्टोरेंट पिज्जा से कम नहीं होता. यह बच्चों और बड़ों दोनों के लिए एक स्वादिष्ट स्नैक है.

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घर पर सिंपल रेसिपी से सिर्फ 10 मिनट में टेस्टी और हेल्दी पिज्जा बना सकते हैं.

Restaurant-Style Pizza Recipe: आजकल हर किसी को वीकेंड पर पिज्जा खाने का मन करता है. पिज्जा खाने के लिए तमाम लोग रेस्टोरेंट्स का रुख करते हैं. हर उम्र के लोगों को पिज्जा खूब पसंद आता है. पिज्जा को देखकर लगता है कि इसे घर पर बनाना बहुत मुश्किल काम होगा, लेकिन ऐसा नहीं है. घर पर पिज्जा बनाने का नाम आते ही सबसे पहले ओवन का ख्याल आता है. अगर आपके पास ओवन नहीं है, तो भी आप टेस्टी और हेल्दी पिज्जा बना सकते हैं. सूजी या गेहूं के आटे से तैयार होने वाला कड़ाही पिज्जा सिर्फ 10 मिनट में बनकर तैयार हो जाता है और इसका स्वाद भी किसी रेस्टोरेंट पिज्जा से कम नहीं लगता है.

कड़ाही पिज्जा बनाने के लिए सामग्री

हेल्दी पिज्जा को बनाने के लिए आपको 1 कप सूजी या गेहूं का आटा, आधा कप दही, 1 छोटा चम्मच बेकिंग पाउडर, नमक स्वादानुसार, 1 छोटा प्याज बारीक कटा हुआ, 1 छोटा टमाटर, शिमला मिर्च, कॉर्न, 2-3 चम्मच पिज्जा सॉस और आधा कप कद्दूकस किया हुआ चीज चाहिए. आप अपनी पसंद की अन्य सब्जियां भी इसमें शामिल कर सकते हैं, ताकि इसका स्वाद बढ़ाया जा सके और पिज्जा को पोषक तत्वों से लोड किया जा सके.

इस विधि से तैयार करें कड़ाही पिज्जा

सबसे पहले एक बाउल में सूजी या गेहूं का आटा लें और उसमें दही, नमक तथा बेकिंग पाउडर मिलाएं. जरूरत के अनुसार थोड़ा पानी डालकर गाढ़ा बैटर तैयार कर लें. बैटर को 5 मिनट के लिए ढककर रख दें, ताकि सूजी अच्छी तरह फूल जाए. इससे पिज्जा का बेस नरम और स्वादिष्ट बनेगा.

इसके बाद एक नॉन-स्टिक पैन या कड़ाही को हल्का गर्म करें और उसमें थोड़ा तेल लगाएं. तैयार बैटर को पैन में फैलाकर गोल आकार दें. अब इसके ऊपर पिज्जा सॉस लगाएं और प्याज, टमाटर, शिमला मिर्च, कॉर्न जैसी सब्जियां डालें. ऊपर से चीज छिड़क दें. कड़ाही को ढककर धीमी आंच पर 8 से 10 मिनट तक पकाएं.

जब चीज अच्छी तरह पिघल जाए और बेस नीचे से हल्का सुनहरा दिखने लगे, तो समझिए आपका कड़ाही पिज्जा तैयार है. इसे सावधानी से निकालें और मनपसंद सॉस के साथ सर्व करें. इसका कुरकुरा बेस और चीजी टॉपिंग बच्चों के साथ-साथ बड़ों को भी खूब पसंद आएगी. यह कड़ाही पिज्जा उन लोगों के लिए बेहतरीन विकल्प है जो कम समय में कुछ स्वादिष्ट और हेल्दी बनाना चाहते हैं. इसमें मैदे की जगह सूजी या गेहूं का आटा इस्तेमाल किया जाता है, जिससे यह पौष्टिक बन जाता है.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें



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बिहार में 3 IG समेत 8 IPS का ट्रांसफर: पंकज कुमार को SCRB की भी जिम्मेदारी, एस. प्रेमलथा मद्य निषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो गईं – Patna News




बिहार सरकार ने पुलिस महकमे में बड़ा प्रशासनिक फेरबदल करते हुए 8 आईपीएस अधिकारियों की जिम्मेदारियां बदल दी हैं। इसके साथ ही कुछ अधिकारियों को अतिरिक्त प्रभार देकर सरकार ने साफ संकेत दिया है कि कानून-व्यवस्था और सुरक्षा तंत्र को लेकर वह किसी तरह की ढिलाई के मूड में नहीं है। सबसे अहम बदलाव पंकज कुमार राज को लेकर हुआ है। नागरिक सुरक्षा के आईजी के तौर पर कार्यरत पंकज कुमार राज को अब राज्य अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (SCRB) की जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। इतना ही नहीं, उन्हें रेलवे आईजी का अतिरिक्त प्रभार देकर सरकार ने उन पर दोहरी जिम्मेदारी का भरोसा जताया है। एस. प्रेमलथा मद्य निषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो में तैनात मद्य निषेध एवं राज्य स्वापक नियंत्रण ब्यूरो में भी नई तैनाती की गई है। एस. प्रेमलथा को इस महत्वपूर्ण इकाई का आईजी बनाया गया है, जबकि सुधीर कुमार पोरिका को SCRB में डीआईजी की जिम्मेदारी मिली है। आतंकवाद और संगठित अपराध से निपटने वाली एजेंसियों में भी नए चेहरे उतारे गए हैं। सुशांत कुमार सरोज को एटीएस का डीआईजी और दीपक रंजन को सीआईडी का डीआईजी बनाया गया है। सुरक्षा व्यवस्था के लिहाज से इन दोनों पदों को बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है। कुमार गौतम को बी-सैप-5 का समादेष्टा बनाया बी-सैप और विशेष सुरक्षा इकाइयों में भी बदलाव देखने को मिला है। कुमार गौतम को बी-सैप-5 का समादेष्टा बनाया गया है। वहीं मनीष कुमार सिन्हा को अश्वारोही विशेष सशस्त्र पुलिस और अजय कुमार को विशेष सुरक्षा दल की कमान सौंपी गई है। इसके अलावा संजय कुमार को बी-सैप के आईजी का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। प्रशासनिक गलियारों में इस फेरबदल को पुलिस बल की कार्यक्षमता बढ़ाने और सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की कवायद के रूप में देखा जा रहा है।



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अमेरिकी कांग्रेस से इजरायल की नेसेट तक, PM मोदी की कूटनीतिक विजयगाथा


नई दिल्ली. जब कोई प्रधानमंत्री किसी विदेशी संसद में भाषण देता है, तो उस पल का महत्व प्रोटोकॉल से कहीं ज़्यादा होता है. इसका मतलब है कि दूसरा देश न सिर्फ़ भारत के नेता की मेज़बानी कर रहा है, बल्कि अपनी लोकतांत्रिक संसद में – कानून बनाने वालों, राजनयिकों, मीडिया और पूरी दुनिया के सामने – भारत की आवाज़ को जगह भी दे रहा है. यहीं पर नेहरू और पीएम मोदी के बीच का अंतर अहम हो जाता है. जवाहरलाल नेहरू ने अपने कार्यकाल के दौरान तीन विदेशी संसदों को संबोधित किया था. वहीं, पीएम नरेंद्र मोदी ने 2014 से 2026 के बीच 19 विदेशी संसदों को संबोधित किया है, जो किसी भी भारतीय कार्यकारी प्रमुख के लिए सबसे ज़्यादा है.

जैसे-जैसे पीएम मोदी 10 जून, 2026 को भारत के सबसे लंबे समय तक लोकतांत्रिक रूप से चुने गए और लगातार सेवा करने वाले प्रधानमंत्री के तौर पर नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ने के करीब पहुंच रहे हैं, ये भाषण दिखाते हैं कि कैसे भारत की ग्लोबल आवाज़ पहचान की शुरुआती कोशिशों से आगे बढ़कर दुनिया की राजधानियों में एक व्यापक और ज़्यादा आत्मविश्वास भरी मौजूदगी तक पहुंची है.

अमेरिकी सांसदों को नेहरू का संदेश
अमेरिकी सांसदों को नेहरू का 1949 का संबोधन तब हुआ था जब भारत-अमेरिका संबंध अभी शुरुआती दौर में थे. हाउस चैंबर की मरम्मत चल रही थी, इसलिए उन्होंने सीनेट जाने से पहले ‘वेज़ एंड मीन्स कमेटी रूम’ में एक स्वागत समारोह में लगभग 15 मिनट तक भाषण दिया; सीनेट की बैठक उस समय पुराने सुप्रीम कोर्ट चैंबर में हो रही थी, जहां उन्होंने वही भाषण फिर से दिया. उस समय, राष्ट्रपति हैरी एस. ट्रूमैन का वॉशिंगटन नेहरू की गुटनिरपेक्षता और समाजवादी सोच को समझने की कोशिश कर रहा था. वहीं भारत, शीत युद्ध के गुटों में तेज़ी से बँट रही दुनिया में अपनी नई-नई मिली आज़ादी की रक्षा करने की कोशिश कर रहा था.

नेहरू का संदेश सावधानी भरा लेकिन स्पष्ट था. उन्होंने कहा कि वह अमेरिका के “दिमाग और दिल” को “जानने-समझने की यात्रा” पर आए हैं और उसके सामने भारत का अपना “दिमाग और दिल” रखना चाहते हैं. उन्होंने तकनीकी और यांत्रिक सहयोग का स्वागत किया, लेकिन इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत सबसे पहले आत्मनिर्भरता पर भरोसा करेगा और अपनी “मुश्किल से हासिल की गई आज़ादी” के किसी भी हिस्से के बदले “कोई भौतिक फ़ायदा” नहीं चाहेगा. यह एक ऐसे नए आज़ाद देश की आवाज़ थी जो बिना निर्भरता के सहयोग चाहता था. मोदी ने कैसे बढ़ाई दुनिया में भारत की आवाज़

विदेशों की संसदों में पीएम मोदी का संबोधन भारत की वैश्विक यात्रा के एक अलग दौर का हिस्सा है. उनके भाषणों ने भारत का संदेश पड़ोसी देशों, प्रमुख पश्चिमी लोकतंत्रों, अफ्रीका, कैरिबियन, इंडो-पैसिफिक और पश्चिम एशिया की संसदों तक पहुंचाया है. 2014 में पद संभालने के तुरंत बाद, मोदी ने भूटान, नेपाल, ऑस्ट्रेलिया और फ़िजी की संसदों को संबोधित किया. 2015 में, उन्होंने मॉरीशस की नेशनल असेंबली, श्रीलंका की संसद, मंगोलिया की संसद, यूके की संसद और अफ़गानिस्तान की संसद को संबोधित किया. उन्होंने 2016 और फिर 2023 में अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित किया. बाद की सूची और भी बढ़ी: 2018 में युगांडा, 2019 में मालदीव, 2024 में गुयाना, 2025 में घाना, त्रिनिदाद और टोबैगो, नामीबिया और इथियोपिया, और 2026 में इज़रायल की नेसेट (संसद). नेसेट में, जो उनका हालिया संबोधन था, पीएम मोदी को इज़रायली संसद के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया गया.

अमेरिकी कांग्रेस में पीएम मोदी ने क्या कहा
पीएम मोदी का 2016 का संबोधन नेहरू के 1949 के भाषण से बिल्कुल अलग स्थिति में हुआ था. तब तक, राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में भारत-अमेरिका संबंध एक मज़बूत रणनीतिक दौर में पहुंच चुके थे; ओबामा अपने कार्यकाल के दौरान दो बार भारत का दौरा करने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बने थे. व्यापार 2009 में $60 बिलियन से बढ़कर 2015 में $107 बिलियन हो गया था, अमेरिका से भारत की रक्षा खरीद $14 बिलियन तक पहुंच गई थी, और अमेरिका में भारतीय FDI तीन गुना हो गया था. वह आत्मविश्वास पीएम मोदी की भाषा में झलकता था. अटल बिहारी वाजपेयी के ‘हिचकिचाहट की छाया’ से बाहर निकलने के आह्वान का ज़िक्र करते हुए, मोदी ने कहा कि भारत और अमेरिका ने ‘इतिहास की हिचकिचाहटों’ को पार कर लिया है. उन्होंने संबंधों को परिभाषित करने के लिए ‘सहजता, स्पष्टता और तालमेल’ (Comfort, Candour and Convergence) जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया और कहा कि अमेरिकी कांग्रेस ने ‘बाधाओं को साझेदारी के पुलों में बदलने’ में मदद की है.

2023 में, पीएम मोदी अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र को दो बार संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने. इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बाद, वे ऐसे दूसरे अंतरराष्ट्रीय नेता भी हैं जिन्हें एक से ज़्यादा बार यह सम्मान मिला है. उनके 2023 के भाषण से पता चला कि दुनिया में भारत की स्थिति कितनी बदल गई है. पीएम मोदी ने कहा कि जब वह पहली बार प्रधानमंत्री के तौर पर अमेरिका गए थे, तब भारत दुनिया की 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था, और अब यह पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है. उन्होंने कहा, ‘जब भारत आगे बढ़ता है, तो पूरी दुनिया आगे बढ़ती है.’ पीएम मोदी ने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ – यानी दुनिया एक परिवार है – के विचार के ज़रिए दुनिया के साथ भारत के जुड़ाव को भी पेश किया. इसे भारत की G20 थीम “एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य” से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया के साथ भारत का जुड़ाव सभी के फ़ायदे के लिए है.

दूसरे देशों की संसद में भाषण क्यों मायने रखते हैं
दूसरे देशों की संसद में दिए गए भाषण प्रतीकात्मक होते हैं, लेकिन कूटनीति में प्रतीकों का महत्व होता है. ऐसे निमंत्रण तब दिए जाते हैं जब कोई देश सम्मान दिखाना चाहता है, राजनीतिक संबंध मज़बूत करना चाहता है या आने वाले नेता के महत्व को मान्यता देना चाहता है. इसीलिए पीएम मोदी के 19 भाषण मायने रखते हैं. ये न सिर्फ़ व्यक्तिगत कूटनीति को दिखाते हैं, बल्कि एक ऐसे देश के तौर पर भारत की व्यापक स्वीकार्यता को भी दर्शाते हैं जिसकी स्थिति अलग-अलग क्षेत्रों और मुद्दों पर अहम है.



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कभी टीचर था धुरंधर में नजर आ चुका ये एक्टर, क्लास में हुई पत्नी से पहली मुलाकात


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बॉलीवुड के जाने माने एक्टर आर. माधवन ने अपने करियर में कई रोमांटिक रोल किए हैं. पर्दे पर उनका रोमांटिक अंदाज फैंस का दिल जीत लेता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि धुरंधर स्टार असल जिंदगी में भी काफी रोमांटिक हैं. उनकी लव स्टोरी किसी फिल्मी कहानी से कम नही. अपनी पत्नी सरिता संग अपनी लव स्टोरी पर उन्होंने खुलकर बात की है.

नई दिल्ली. बॉलीवुड और साउथ में एक्टिंग का डंका बजा चुके आर. माधवन कभी पब्लिक स्पीकिंग और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट की क्लासेस लिया करते थे. इसी बीच कोल्हापुर में उनकी मुलाकात सरिता बिरजे यानी उनकी पत्नी से हुई थी.

Madhavan was teaching public speaking and communication skills when he met Sarita during one of his sessions in Kolhapur. "I was teaching a personality development class in Kolhapur when I met Sarita. She was aspiring for a job in an airline and attended my classes. When she finally bagged the cat, she thought it was in part due to my classes and took me to a thank-you dinner. That's how it started,” he once told Times Of India.

सरिता उस दौरान एयरलाइन इंडस्ट्री में नौकरी करने के सपने देखा करती थीं. उन्होंने माधवन की क्लास भी जॉइन की थी.माधवन ने अपने एक इंटरव्यू खुलासा किया कि सरिता ने उनकी क्लास के बाद एयर होस्टेस की जॉब ली.

The two did not begin dating while she was his student. Their relationship began after Sarita completed the course and went on to become an air hostess. Grateful for his guidance, she invited him to dinner as a thank-you gesture. Recalling the moment, the actor shared that they met for dinner at a hotel in Kolhapur.

उन्होंने बताया कि इसमें माधवन की ट्रेनिंग का भी बड़ा अहम योगदान रहा है. नौकरी मिलने की खुशी में उन्होंने माधवन को डिनर पर भी इनवाइट किया था. इसके बाद दोनों की दोस्ती की शुरुआत हुई. लेकिन प्रेम कहानी उस वक्त नहीं शुरू हुई, जब वह उनकी स्टूडेंट थी.

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That dinner marked the beginning of a deeper connection between the two. Their bond gradually grew stronger and eventually turned into a relationship.

माधवन ने अपनी बातचीत में बताया था कि कोर्स पूरा होने और नौकरी मिलने के बाद दोनों एक दूसरे के करीब आने लगे थे. कैसे एक डिनर मीटिंग दोनों को मिलाने की वजह बन गई. इसके बाद दोनों ने एक-दूसरे को 8 साल तक डेट किया. लेकिन दोनों ने किसी को इस बात की भनक तक नहीं लगने दी थी.

The couple dated for around eight years before deciding to get married. Their relationship remained away from the spotlight during this period.

साल 1999 में जब दोनों एक दूसरे के प्यार में डूब चुके थे, तब माधवन और सरिता ने चेन्नई में तमिल रीति-रिवाजों से शादी रचाई. लेकिन इस शादी में भी खास ही लोगों को शामिल किया गया था. फिर 6 साल बाद दोनों साल 2005 में उनके बेटे वेदांत का जन्म हुआ.

In 1999, Madhavan and Sarita tied the knot in a traditional Tamil wedding in Chennai, attended by close family and friends. Six years after tying the knot, the couple embraced parenthood. They welcomed their son, Vedaant, in 2005, marking a new chapter in their journey together.

इसके बाद माधवन एक्टिंग की दुनिया में दिन दोगुनी और रात चौगुनी तरक्की करते गए. लेकिन सरिता हमेशा उनके साथ हर मौके पर खड़ी रहीं. दोनों ने अपने रिश्ते को भरोसे, सम्मान और समझदारी के साथ हर उतार चढ़ाव को देखा.

As Madhavan’s film career took off, Sarita remained a constant presence in his life. The couple built their relationship on trust and mutual understanding. The couple recently celebrated 27 years of marriage, proving that their love story has stood the test of time.

माधवन और सरिता की शादी को हाल ही में 27 साल पूरे हुए हैं. लेकिन सालों बाद भी दोनों का रिश्ता मजबूती से टिका हुआ है. ठीक वैसे ही जैसा कि शादी से पहले शुरुआत में बना हुआ था. आज लोग उनकी प्रेम कहानी की मिसाल देते हैं.

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एलजी की अध्यक्षता में हुई डीडीएमए की बैठक: रिटायर्ड अग्निवीरों को फायर डिपार्टमेंट में रखने की तैयारी; मानसून और हीटवेव तैयारियों की समीक्षा – New Delhi News




दिल्ली के उपराज्यपाल सरदार टीएस संधू की अध्यक्षता में सोमवार को दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (डीडीएमए) की एक बैठक आयोजित की गई। बैठक में राजधानी में अग्नि सुरक्षा, अवैध निर्माण, हीट वेव प्रबंधन और मानसून पूर्व तैयारियों की व्यापक समीक्षा की। बैठक में मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता, मंत्री आशीष सूद और प्रवेश वर्मा सहित वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। एलजी ने अग्निशमन विभाग में रिक्त पदों को भरने के लिए पूर्व अग्निवीरों की सेवाएं लेने और राजधानी में नए फायर स्टेशनों की संख्या बढ़ाने पर भी विचार किया गया। अवैध निर्माण की निगरानी के लिए एमसीडी के 311 पोर्टल पर नागरिकों को तस्वीरें अपलोड करने की सुविधा देने का सुझाव भी दिया गया। अवैध निर्माण और अनधिकृत प्लॉटिंग पर रोक लगाने के निर्देश बैठक में अवैध और जर्जर भवनों के खिलाफ चल रही कार्रवाई और अग्नि सुरक्षा संबंधी लाइसेंसों के दुरुपयोग की स्थिति पर चर्चा की गई। बैठक में एलजी ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा नियमों का पालन हर हाल में सुनिश्चित किया जाए, लेकिन कार्रवाई के नाम पर आम नागरिकों को परेशान नहीं किया जाना चाहिए। साथ ही उन्होंने शहर में जारी अवैध निर्माण और अनधिकृत प्लॉटिंग पर तत्काल रोक लगाने के निर्देश दिए। बहुमंजिला इमारतों में अनिवार्य हो अग्नि सुरक्षा उपाय दिल्ली अग्निशमन सेवा द्वारा अब तक एक भी नोटिस जारी नहीं किए जाने पर एलजी ने नाराजगी जताई और संबंधित अधिकारियों को तुरंत कार्रवाई कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा लापरवाही या कार्य में ढिलाई बरतने वाले अधिकारियों की वार्षिक गोपनीय रिपोर्ट (एसीआर) पर इसका सीधा असर पड़ेगा। वहीं बैठक में गृहमंत्री आशीष सूद के सुझाव पर दिल्ली फायर सर्विसेज एक्ट, 2007 की धारा-32 को सख्ती से लागू करने का निर्णय लिया गया। जिसके तहत बहुमंजिला इमारतों में अग्नि सुरक्षा उपाय अनिवार्य होंगे। वहीं मानसून तैयारियों की समीक्षा करते हुए एलजी ने जलभराव और बाढ़ के प्रति “शून्य सहिष्णुता” की नीति अपनाने तथा नालों की समयबद्ध सफाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों से हर व्यावहारिक सुझाव को अपनाकर आपदा प्रबंधन को और प्रभावी बनाने का आह्वान किया।



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