Tuesday, July 7, 2026
Home Blog

मां-बाप को मिला ठेले के नीचे छोड़ा गया मासूम: गरीबी में लिया था कलेजा चीर देने वाला फैसला, मीडिया में खबर देखकर लौटे बरेली – Bareilly News




बरेली के सैटेलाइट बस स्टैंड पर ठेले के नीचे लावारिस हालत में मिला 3 महीने का मासूम आखिरकार अपने मां-बाप की गोद में लौट गया। दो दिन पहले जिस बच्चे को देखकर हर किसी की आंखें नम हो गई थीं और लोग उसके मां-बाप को कोस रहे थे, वही मां-बाप अब उसे लेने हरदोई से बरेली पहुंचे। उनका कहना है कि गरीबी और बच्चे की बीमारी ने उन्हें ऐसा कदम उठाने पर मजबूर कर दिया था। मीडिया में खबरें देखने के बाद उनका दिल नहीं माना और वे अपने कलेजे के टुकड़े को वापस लेने चले आए। गरीबी और बीमारी ने लिया गलत फैसला
मामला बारादरी थाना क्षेत्र के सैटेलाइट बस स्टैंड का है। हरदोई निवासी स्वाति पत्नी सचिन अपने 3 महीने के बेटे को बस स्टैंड पर एक ठेले के नीचे छोड़कर चले गए थे। मासूम लगातार रोता रहा। उसकी आवाज सुनकर आसपास मौजूद लोगों ने ठेले के नीचे देखा तो बच्चा अकेला पड़ा मिला। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और एंबुलेंस की मदद से उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। इलाज के बाद बच्चे को चाइल्ड हेल्पलाइन की निगरानी में रखा गया। मीडिया में खबर देखकर बदल गया फैसला
घटना की खबर मीडिया में प्रकाशित हुई। खबर देखने के बाद बच्चे के मां-बाप का मन बदल गया। उन्होंने अपनी गलती स्वीकार की और हरदोई से सीधे बरेली पहुंच गए। आवश्यक दस्तावेज और पहचान संबंधी प्रक्रिया पूरी करने के बाद उन्होंने अपने बेटे को वापस लेने की इच्छा जताई। जब लोग दे रहे थे बद्दुआ, तब कोई नहीं जानता था सच्चाई
जिस समय मासूम ठेले के नीचे मिला था, वहां मौजूद लोग उसके मां-बाप को कोस रहे थे। हर किसी के मन में यही सवाल था कि आखिर कौन ऐसे मां-बाप होंगे जो अपने पांच महीने के मासूम को इस तरह बेसहारा छोड़ सकते हैं। लोगों का कहना था कि अगर बच्चे तक कोई आवारा कुत्ता या बंदर पहुंच जाता तो उसकी जान भी जा सकती थी। गनीमत रही कि समय रहते लोगों ने उसके रोने की आवाज सुन ली और उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया। कागजी प्रक्रिया के बाद सौंपा गया बच्चा
बच्चे के मिलने के बाद उसे चाइल्ड हेल्पलाइन की देखरेख में रखा गया था। सोमवार को हरदोई से पहुंचे उसके मां-बाप से पूछताछ की गई। उनकी पहचान और पारिवारिक दस्तावेजों का सत्यापन करने के बाद नियमानुसार लिखापढ़ी पूरी की गई। इसके बाद चाइल्ड हेल्पलाइन ने बच्चे को उसके माता-पिता के सुपुर्द कर दिया। एसपी सिटी मानुष पारीक ने बताया कि हरदोई निवासी दंपती अपने 3 महीने के बेटे को लेने बरेली आए थे। उन्होंने बताया कि प्रारंभिक जानकारी में सामने आया है कि आर्थिक तंगी और बच्चे की बीमारी के कारण उन्होंने उसे बस स्टैंड पर छोड़ दिया था। मीडिया में खबरें देखने के बाद वे दोबारा बरेली पहुंचे और बच्चे को वापस ले जाने की इच्छा जताई। आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी होने के बाद बच्चे को उनके सुपुर्द कर दिया गया।
दंपती को कड़ी चेतावनी दी गई है कि भविष्य में यदि इस तरह की लापरवाही दोबारा की गई तो उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



Source link

12 साल के हेम के 2 हत्यारों को उम्रकैद: गर्लफ्रेंड की शादी कहीं और होने से बौखलाकर की थी उसके भाई की हत्या – Gwalior News




ग्वालियर सेशन कोर्ट ने सोमवार को 12 वर्षीय मासूम हेमसिंह राजपूत की निर्मम और रूह कंपा देने वाली हत्या के दो आरोपियों को उम्रकैद की सजा सुनाई। अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश धीरेंद्र सिंह परिहार की अदालत ने मुख्य आरोपी शिवम उर्फ तोता कुशवाह (23 वर्ष) और उसके साथी अमन गोस्वामी उर्फ योगी (21 वर्ष) को अपहरण, हत्या और साक्ष्य छिपाने का दोषी पाया। दोनों पर भारी अर्थदंड भी लगाया। कोर्ट ने इस हत्याकांड को बेहद क्रूर माना। महज 19 महीने के भीतर डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों को दोषी साबित किया गया। शादी से इनकार किया तो भाई को मार डाला
अदालत के समक्ष पेश अभियोजन और पुलिस के साक्ष्यों के अनुसार, यह पूरी खौफनाक कहानी प्रतिशोध की आग से जुड़ी थी। मुख्य आरोपी शिवम कुशवाह का मृतक हेम की बड़ी बहन नंदनी के साथ प्रेम-प्रसंग था। दोनों के परिवार पहले शादी के लिए राजी थे, लेकिन नंदनी के सौतेले पिता विजय सेन इस रिश्ते के सख्त खिलाफ थे। बाद में परिजनों ने नंदनी की शादी शेरू नाम के युवक से कर दी। अपनी प्रेमिका की दूसरी जगह शादी होने से बौखलाए शिवम ने नंदनी के सौतेले पिता को सबक सिखाने और बदला लेने के लिए उसके छोटे भाई हेम की हत्या की साजिश रच डाली। मेला दिखाने के बहाने बुलाया, फिर पत्थरों से तोड़ा जबड़ा
सरकारी वकील ने कोर्ट को बताया कि 29 जुलाई 2024 को हेम की मां कमलेश ने बेटे को गुप्तेश्वर महादेव का मेला देखने के लिए घर से ऑटो में बैठाकर रवाना किया था। रास्ते में आरोपी शिवम ने हेम को फोन किया और मेला दिखाने के बहाने बहला-फुसलाकर अपने पास बुला लिया। इसके बाद वह अपने साथी अमन गोस्वामी के साथ उसका अपहरण कर देव खो रोड (तिघरा थाना क्षेत्र) स्थित सुनसान जंगल की झाड़ियों में ले गया। वहां आरोपियों ने पहले शराब पी और फिर हेम पर भारी पत्थरों से ताबड़तोड़ हमला कर दिया। हमले में बच्चे का जबड़ा पूरी तरह टूट गया और सिर में गंभीर चोट लगने से उसकी मौके पर ही मौत हो गई। पहचान छिपाने के लिए आरोपियों ने शव को भारी पत्थरों के नीचे दबा दिया। डिजिटल सबूतों ने खोला राज, ऐसे पकड़े गए कातिल
वारदात के अगले दिन 30 जुलाई 2024 को तिलकुंडा नरिया के पास जंगल में एक चरवाहे ने पत्थरों के बीच मक्खियां भिनभिनाते देखीं। पास जाकर देखा तो बच्चे की उंगलियां बाहर निकली हुई थीं। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस और साइबर टीम ने आधुनिक तकनीक की मदद से इस अंधे कत्ल की गुत्थी सुलझाई। कोर्ट की टिप्पणी- मानवीय संवेदनाओं को झकझोरने वाला अपराध कोर्ट ने सजा सुनाते हुए कहा कि ‘मासूम और बेकसूर बच्चे की इस प्रकार पत्थरों से कुचलकर हत्या करना मानवीय संवेदनाओं को झकझोरने वाला कृत्य है। प्रेम-प्रसंग या पारिवारिक असहमति का बदला 12 वर्षीय बच्चे की जान लेकर पूरा करना समाज में किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता। ऐसे अपराधियों के प्रति कानून सख्त रुख अपनाता है।’



Source link

हथियार के साथ फोटो पोस्ट करने पर युवक अरेस्ट: कैमूर में सोशल मीडिया पर वायरल फोटो पर पुलिस की कार्रवाई, देवर्जीकला से आरोपी को भेजा जेल – Kaimur News




कैमूर के भभुआ में सोशल मीडिया पर अवैध हथियार के साथ फोटो पोस्ट कर रौब झाड़ना एक युवक को महंगा पड़ गया। वायरल तस्वीर का संज्ञान लेते हुए भभुआ थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और आरोपी युवक को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेज दिया। वायरल फोटो के बाद हुई कार्रवाई भभुआ थानाध्यक्ष मुकेश कुमार ने बताया कि गिरफ्तार युवक की पहचान देवर्जीकला गांव निवासी नरेश राम के 20 वर्षीय पुत्र बल्लू राम के रूप में हुई है। सोशल मीडिया पर हथियार के साथ उसकी तस्वीर वायरल होने के बाद पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विशेष टीम का गठन किया गया। तकनीकी जांच के बाद दबोचा गया आरोपी गठित टीम में तकनीकी शाखा और भभुआ थाना के पुलिसकर्मी शामिल थे। पुलिस ने पहले वायरल तस्वीर की सत्यता और आरोपी की पहचान की पुष्टि की। इसके बाद उसके ठिकाने पर छापेमारी कर उसे गिरफ्तार कर लिया। आर्म्स एक्ट के तहत केस दर्ज थानाध्यक्ष ने बताया कि आरोपी के खिलाफ आर्म्स एक्ट एवं अन्य संबंधित धाराओं में मामला दर्ज कर उसे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि वायरल तस्वीर में दिख रहा हथियार अवैध था या नहीं और उसे कहां से प्राप्त किया गया। पुलिस की चेतावनी पुलिस ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि सोशल मीडिया पर अवैध हथियारों का प्रदर्शन कर कानून-व्यवस्था को चुनौती देने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। ऐसे मामलों पर पुलिस लगातार नजर रख रही है और किसी भी आरोपी को बख्शा नहीं जाएगा।



Source link

इस मिठाई को खाने के लिए लोग घंटों लाइन में लगते हैं, देश-विदेश में है मशहूर


Last Updated:

भारत में मिठाइयों की भरमार है, लेकिन कुछ मिठाइयों का स्वाद ऐसा होता है कि लोग उन्हें खरीदने के लिए घंटों तक इंतजार करने से भी नहीं हिचकिचाते. ऐसी ही एक खास मिठाई है, जिसे चखने के लिए लोग दूर-दूर से कोलकाता पहुंचते हैं. इसका स्वाद इतना अलग और लाजवाब है कि एक बार खाने वाला इसे दोबारा जरूर खाना चाहता है.

Zoom

बेक्ड रसगुल्ले

कोलकाता को भारत की मिठाइयों की राजधानी भी कहा जाता है. यहां रसगुल्ला, संदेश, मिष्टी दोई और चमचम जैसी कई पारंपरिक मिठाइयां मशहूर हैं, लेकिन पिछले कुछ वर्षों में बेक्ड रसगुल्ला ने अपनी अलग पहचान बना ली है. यह मिठाई अब सिर्फ पश्चिम बंगाल तक सीमित नहीं है, बल्कि देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों की भी पहली पसंद बन चुकी है. इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि मशहूर मिठाई की दुकानों के बाहर इसे खरीदने के लिए अक्सर लंबी-लंबी कतारें देखने को मिलती हैं.

बेक्ड रसगुल्ला पारंपरिक रसगुल्ले का ही एक नया और स्वादिष्ट रूप है. इसे बनाने के लिए सबसे पहले ताजे छेना से मुलायम रसगुल्ले तैयार किए जाते हैं. इसके बाद इन्हें खास क्रीमी मिश्रण के साथ ओवन में बेक किया जाता है. बेक होने के बाद इसकी ऊपरी परत हल्की सुनहरी हो जाती है, जबकि अंदर का हिस्सा रसदार और मुलायम बना रहता है. यही वजह है कि इसका स्वाद सामान्य रसगुल्ले से काफी अलग और रिच महसूस होता है.

क्यों लगती है लोगों की भीड़?
कोलकाता की प्रसिद्ध मिठाई की दुकान बलराम मलिक एंड राधारमण मलिक को बेक्ड रसगुल्ले को लोकप्रिय बनाने का श्रेय दिया जाता है. यहां हर दिन बड़ी संख्या में ग्राहक इस मिठाई को खरीदने पहुंचते हैं. त्योहारों, वीकेंड और छुट्टियों के दौरान दुकानों के बाहर लंबी लाइन लगना आम बात है. कई लोग अपने रिश्तेदारों और दोस्तों के लिए इसे पैक करवाकर दूसरे शहरों में भी लेकर जाते हैं.

क्या है इसके स्वाद का राज?
बेक्ड रसगुल्ले का सबसे बड़ा राज इसकी बेकिंग प्रक्रिया है. बेक होने के बाद इसकी ऊपरी परत हल्की कैरेमलाइज हो जाती है, जिससे इसमें अलग तरह की मिठास और फ्लेवर आता है. वहीं अंदर का रसगुल्ला पहले की तरह नरम और रस से भरा रहता है. इसे ठंडा परोसने पर इसका स्वाद और भी बेहतर हो जाता है. यही वजह है कि इसे खाने वाले लोग इसकी तारीफ किए बिना नहीं रहते.

देशभर में बढ़ रही है लोकप्रियता
सोशल मीडिया, फूड ब्लॉग्स और ट्रैवल व्लॉग्स की वजह से बेक्ड रसगुल्ले की लोकप्रियता तेजी से बढ़ी है. अब कई ऑनलाइन मिठाई ब्रांड भी इसे अलग-अलग शहरों तक पहुंचा रहे हैं. हालांकि, फूड एक्सपर्ट्स का मानना है कि इसका असली स्वाद कोलकाता में ताजा तैयार किए गए बेक्ड रसगुल्ले में ही मिलता है.

About the Author

authorimg

Vividha SinghSub Editor

विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें



Source link

Dy. CM ने चूक मानने के साथ दिया चुनावी संदेश: प्रयागराज में केशव बोले- लोकसभा चुनाव की चूक का हम सभी को पछतावा – Prayagraj (Allahabad) News




उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य ने सोमवार को प्रयागराज में प्रेरणा स्थल के लोकार्पण समारोह के मंच से राजनीतिक संदेश देते हुए वर्ष 2024 के लोकसभा चुनाव में हुई “चूक” को स्वीकार किया। उन्होंने कहा कि उस चूक का सभी को पछतावा है, लेकिन अब लक्ष्य वर्ष 2027 का विधानसभा चुनाव है। इसके लिए प्रयागराज की सभी 12 विधानसभा सीटों पर भाजपा को जीत दिलाने का संकल्प लेने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि 2027 में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार भाजपा सरकार बनानी है।
डॉ. मुखर्जी के बलिदान को किया याद
अपने संबोधन में मौर्य ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती का उल्लेख करते हुए उन्हें श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि जिस धारा 370 को हटाने के लिए डॉ. मुखर्जी ने बलिदान दिया था, वह अब समाप्त हो चुकी है। साथ ही अटल बिहारी वाजपेयी और अशोक सिंघल के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि उनके सपने आज साकार हो रहे हैं।
मोदी सरकार की उपलब्धियां गिनाईं
उन्होंने कहा कि कभी किसी ने नहीं सोचा था कि भाजपा अपने दम पर पूर्ण बहुमत की सरकार बनाएगी, लेकिन प्रयागराज की जनता ने कमल का बटन दबाकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में लगातार तीसरी बार सरकार बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उन्होंने दावा किया कि आज पूरी दुनिया में भारत का सम्मान बढ़ा है और इसका श्रेय देश की जनता को जाता है।
सपा सरकार और कानून व्यवस्था पर हमला
डिप्टी सीएम ने उत्तर प्रदेश की पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी सरकार पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि वर्ष 2017 से पहले प्रयागराज में विकास और कानून व्यवस्था की स्थिति खराब थी। अतीक अहमद और उसके गिरोह का आतंक था, लेकिन मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में अपराधियों को “मिट्टी में मिलाने” का काम किया गया।
2027 में 12 की 12 सीटें जीतने का आह्वान
भाषण के अंत में मौर्य ने कार्यकर्ताओं और समर्थकों से संकल्प दिलाते हुए कहा कि 2027 में प्रयागराज की 12 की 12 विधानसभा सीटों पर कमल खिलाना होगा। उन्होंने कहा कि 2017 का इतिहास दोहराते हुए समाजवादी पार्टी का “सूपड़ा साफ” करना है। उन्होंने यह भी कहा कि 2024 के लोकसभा चुनाव में हुई चूक से सबक लेकर भाजपा को और अधिक मजबूती के साथ मैदान में उतरना होगा। उनके अनुसार उत्तर प्रदेश में तीसरी बार भाजपा सरकार बनने से 2029 के लोकसभा चुनाव का रास्ता भी और मजबूत होगा।
बूथ स्तर से संगठन मजबूत करने का आह्वान
अपने पूरे संबोधन में डिप्टी सीएम का फोकस आगामी विधानसभा चुनाव पर रहा। उन्होंने कार्यकर्ताओं से बूथ स्तर तक जुटने, संगठन को मजबूत करने और भाजपा को लगातार तीसरी बार सत्ता में लाने के लिए अभी से जुट जाने का आह्वान किया।



Source link

पीपल के नीचे खड़े दो ग्रामीणों पर गिरी आकाशीय बिजली: शरीर का लगभग आधा हिस्सा झुलसा, पन्ना जिला अस्पताल में आईसीयू में भर्ती – Panna News




पन्ना जिले की इटवाकला ग्राम पंचायत में सोमवार शाम को आकाशीय बिजली गिरने से दो ग्रामीण गंभीर रूप से झुलस गए। तेज बारिश से बचने के लिए वे एक पीपल के पेड़ के नीचे खड़े हुए थे, तभी वे इस हादसे का शिकार हो गए। दोनों को बेहद नाजुक हालत में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है, जहां डॉक्टर उनका इलाज कर रहे हैं। जानकारी के मुताबिक, इटवाकला के रहने वाले मथुरा प्रसाद मिश्रा उर्फ बड्डे महाराज (48 साल) और चिरौंजी लाल चौधरी (50 साल) किसी निजी काम से गुनौर जा रहे थे। रास्ते में कोहनी इलाके में बने खेर माता मंदिर के पास अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। पानी से बचने के लिए दोनों पास ही मौजूद एक पीपल के पेड़ के नीचे जाकर खड़े हो गए। इसी बीच अचानक कड़कड़ाती हुई आकाशीय बिजली सीधे उसी पीपल के पेड़ पर आ गिरी। बिजली का झटका इतना जोरदार था कि दोनों ग्रामीण मौके पर ही बेहोश होकर जमीन पर गिर पड़े। कुछ देर बाद जब चिरौंजी लाल का बेटा उन्हें ढूंढते हुए वहां पहुंचा, तो उसने दोनों को अचेत हालत में पड़ा देखा। शरीर का आधा हिस्सा झुलसा, हालत गंभीर परिजन ने आनन-फानन में दोनों को बाइक पर लादकर इटवाकला पहुंचाया। वहां प्राथमिक इलाज देने के बाद उनकी गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टर ने तुरंत उन्हें जिला अस्पताल पन्ना के लिए रेफर कर दिया। अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि बिजली गिरने की वजह से दोनों ग्रामीणों के शरीर का लगभग आधा हिस्सा बुरी तरह झुलस गया है। जिला अस्पताल में उन्हें आईसीयू या स्पेशल वार्ड में रखकर लगातार इलाज दिया जा रहा है, लेकिन फिलहाल दोनों की हालत काफी चिंताजनक बनी हुई है।



Source link

कटौना ओवरब्रिज पर हादसा, 2 होमगार्ड घायल: जमुई में खड़ी ट्रैक्टर से टकराई बाइक, एक की हालत गंभीर – Jamui News




जमुई जिले के मलयपुर थाना क्षेत्र अंतर्गत कटौना ओवरब्रिज पर सोमवार शाम एक तेज रफ्तार बाइक खड़ी ट्रैक्टर से टकरा गई। इस हादसे में बाइक पर सवार दो होमगार्ड जवान गंभीर रूप से घायल हो गए, जिनमें से एक की हालत नाजुक बनी हुई है। घायलों की पहचान सोनो थाना क्षेत्र के आसन गांव निवासी शिव शंकर सिंह और घुटवे गांव निवासी अनुज सिंह के रूप में हुई है। घटना के बाद डायल-112 पुलिस टीम ने दोनों घायलों को तत्काल सदर अस्पताल, जमुई पहुंचाया। सदर अस्पताल में प्राथमिक उपचार के बाद चिकित्सकों ने उनकी गंभीर स्थिति को देखते हुए बेहतर इलाज के लिए रेफर कर दिया। चिकित्सक डॉ. घनश्याम सुमन के अनुसार, दोनों घायलों में से एक जवान की स्थिति अधिक नाजुक है। दोनों होमगार्ड जवान बटिया थाना से अपनी राइफल और कारतूस जमा करने के लिए पुलिस लाइन मलयपुर गए थे। ड्यूटी से संबंधित यह प्रक्रिया पूरी करने के बाद वे बाइक से अपने घर लौट रहे थे। बताया गया कि कटौना ओवरब्रिज पर पहुंचते ही सामने से आ रहे एक अज्ञात वाहन की तेज हेडलाइट के कारण बाइक चालक का संतुलन बिगड़ गया। बाइक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खड़ी ट्रैक्टर से जा टकराई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि दोनों जवान सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के बाद पुलिस पूरे मामले की जांच में जुट गई है।



Source link

हैदराबादी बिरयानी में क्या मिलाया जाता है? यही है इसके लाजवाब स्वाद का सीक्रेट


Last Updated:

हैदराबादी बिरयानी का नाम सुनते ही मसालों की खुशबू और लाजवाब स्वाद याद आ जाता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इसका असली स्वाद किस चीज़ से आता है? दरअसल, इसकी खास पहचान सिर्फ मसालों से नहीं, बल्कि दम कुकिंग, केसर, बासमती चावल और खास मेरिनेशन की वजह से बनती है.

ख़बरें फटाफट

Zoom

हैदराबादी बिरयानी भारत ही नहीं, बल्कि दुनिया की सबसे लोकप्रिय बिरयानियों में गिनी जाती है. इसका स्वाद इतना खास होता है कि एक बार खाने वाला इसे आसानी से नहीं भूलता. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इस बिरयानी का असली स्वाद किस चीज से आता है? आइए जानते हैं इसके पीछे की खास वजह.

हैदराबादी बिरयानी की सबसे बड़ी खासियत इसकी ‘दम’ तकनीक है. इसमें मेरिनेट किए गए मटन या चिकन और आधे पके हुए बासमती चावल को एक बर्तन में परतों में रखा जाता है. इसके बाद बर्तन का ढक्कन आटे से पूरी तरह सील कर दिया जाता है और धीमी आंच पर पकाया जाता है. इस प्रक्रिया में भाप बाहर नहीं निकलती और सभी मसालों की खुशबू चावल और मांस में अच्छी तरह समा जाती है. यही तकनीक बिरयानी को उसका अलग स्वाद और खुशबू देती है.

लंबे बासमती चावल का बड़ा योगदान
असली हैदराबादी बिरयानी में लंबे दाने वाले अच्छी गुणवत्ता के बासमती चावल का इस्तेमाल किया जाता है. पकने के बाद हर दाना अलग-अलग रहता है और उसमें मसालों का स्वाद अच्छी तरह समा जाता है. अगर चावल की गुणवत्ता अच्छी न हो, तो बिरयानी का स्वाद और टेक्सचर दोनों प्रभावित हो सकते हैं. यही वजह है कि चावल का चुनाव भी उतना ही महत्वपूर्ण माना जाता है जितना मसालों का.

केसर और देसी घी बढ़ाते हैं स्वाद
हैदराबादी बिरयानी की खुशबू में केसर (Saffron) की अहम भूमिका होती है. केसर को हल्के गर्म दूध में भिगोकर चावल पर डाला जाता है, जिससे बिरयानी को सुनहरा रंग और हल्की सुगंध मिलती है. इसके साथ ही देसी घी का इस्तेमाल स्वाद को और भी रिच बना देता है. कई पारंपरिक रेसिपी में गुलाब जल और केवड़ा जल की कुछ बूंदें भी डाली जाती हैं, जिससे इसकी खुशबू और बढ़ जाती है.

मसालों का सही संतुलन बनाता है इसे खास
हैदराबादी बिरयानी में इलायची, लौंग, दालचीनी, तेजपत्ता, जावित्री, जायफल, काली मिर्च और शाही जीरा जैसे साबुत मसालों का इस्तेमाल किया जाता है. इन मसालों की मात्रा संतुलित रखी जाती है ताकि कोई एक मसाला दूसरे पर हावी न हो. इसके अलावा चिकन या मटन को दही, अदरक-लहसुन का पेस्ट, लाल मिर्च, हल्दी और अन्य मसालों के साथ कई घंटों तक मेरिनेट किया जाता है. इससे मांस मुलायम होने के साथ-साथ मसालों का स्वाद भी अच्छी तरह अंदर तक पहुंच जाता है.

तले हुए प्याज और पुदीना भी हैं जरूरी
हैदराबादी बिरयानी में इस्तेमाल होने वाले ब्राउन फ्राइड अनियन (बिरिस्ता) इसका स्वाद और मिठास बढ़ाते हैं. वहीं ताजा पुदीना और हरा धनिया बिरयानी को ताजगी और अलग फ्लेवर देते हैं. ये छोटे-छोटे इंग्रीडिएंट्स मिलकर बिरयानी को संतुलित स्वाद देते हैं, जो इसे दूसरी बिरयानियों से अलग बनाता है.

इसी वजह से दुनिया भर में मशहूर है हैदराबादी बिरयानी
हैदराबादी बिरयानी का स्वाद किसी एक मसाले या सामग्री की वजह से नहीं, बल्कि दम कुकिंग, प्रीमियम बासमती चावल, केसर, देसी घी, मेरिनेट किया हुआ मटन या चिकन और संतुलित मसालों के सही मेल से तैयार होता है. यही कारण है कि इसे भारत की सबसे प्रतिष्ठित और स्वादिष्ट बिरयानियों में गिना जाता है और आज दुनिया के कई देशों में भी इसकी अलग पहचान बन चुकी है.

About the Author

authorimg

Vividha SinghSub Editor

विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें



Source link

डॉ. मुखर्जी की जयंती पर सिविक सेंटर में युवा सम्मेलन: गडकरी बोले-उनके विचार अमर हैं, सीएम ने कहा-सपनों का भारत तेजी से आगे बढ़ रहा – New Delhi News




डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचार अमर हैं: नितिन गडकरी – 125वीं जयंती पर युवा सम्मेलन में बोले केंद्रीय मंत्री; – मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा- डॉ. मुखर्जी के सपनों का भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है

डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के अवसर पर सोमवार को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी सिविक सेंटर के केदारनाथ साहनी सभागार में युवा सम्मेलन एवं व्याख्यानमाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने दीप प्रज्वलित कर किया। अपने संबोधन में नितिन गडकरी ने कहा कि भले ही आज डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके विचार हमेशा जीवित रहेंगे। उन्होंने कहा, “सत्ता किसी व्यक्ति या व्यवस्था को समाप्त कर सकती है, लेकिन विचारों को कभी समाप्त नहीं किया जा सकता।” उन्होंने भारतीय संस्कृति की समावेशी परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि समाज में व्यक्ति का मूल्य उसके गुणों से तय होता है। ‘डॉ. मुखर्जी के सपनों का भारत निरंतर आगे बढ़ रहा’ मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा कि 125 वर्ष बाद भी डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के विचार युवाओं को प्रेरित कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि स्वतंत्र भारत की दिशा और स्वरूप को लेकर डॉ. मुखर्जी की स्पष्ट सोच थी। मुख्यमंत्री ने कहा कि आज उन्हें यह देखकर खुशी होती है कि डॉ. मुखर्जी के सपनों का भारत निरंतर आगे बढ़ रहा है। उन्होंने जम्मू-कश्मीर से जुड़े मुद्दों पर डॉ. मुखर्जी के योगदान का भी उल्लेख किया। कार्यक्रम में भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं ने डॉ. मुखर्जी को पुष्पांजलि अर्पित की। इनमें प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीरेन्द्र सचदेवा, संगठन महामंत्री पवन राणा, विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता, उपाध्यक्ष मोहन सिंह बिष्ट, मंत्री प्रवेश साहिब सिंह, सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी, योगेंद्र चांदोलिया, बांसुरी स्वराज, महापौर प्रवेश वाही और अन्य जनप्रतिनिधि शामिल रहे।



Source link

सात दिन से लापता व्यक्ति नागौर में मिला: कर्ज से बचने के लिए घर छोड़कर गया था, परिवार के साथ मिलकर पुलिस को किया गुमराह – Chittorgarh News




चंदेरिया थाना पुलिस ने सात दिन से लापता एक व्यक्ति के मामले में ऐसा खुलासा किया है, जिसने पूरी कहानी बदल दी। जिस व्यक्ति की तलाश में पुलिस ने दिन-रात मेहनत की, दो कुओं का पानी खाली करवाया, सिविल डिफेंस और गोताखोरों की मदद ली, वह नागौर जिले में अपने पुराने परिचित के यहां रह रहा था। पुलिस जांच में सामने आया कि वह फाइनेंस कंपनियों के कर्ज और दूसरे विवादों के दबाव से बचने के लिए खुद ही घर छोड़कर चला गया था। इतना ही नहीं, पुलिस का दावा है कि उसके परिवार को भी उसकी जानकारी थी और वह लगातार उनसे फोन पर बात कर रहा था, लेकिन यह बात पुलिस से छिपाई गई। आखिरकार तकनीकी जांच और लगातार पड़ताल के बाद पुलिस उसे नागौर से लेकर चित्तौड़गढ़ पहुंची। कुएं के पास मिला मोबाइल और बाइक, पुलिस ने हर संभावना पर किया काम चंदेरिया थानाधिकारी मोतीराम सारण ने बताया कि 40 वर्षीय रतनलाल गाडरी पुत्र ओंकार गाडरी 28 जून को घर से निकलने के बाद लापता हो गया था। परिजनों ने उसकी गुमशुदगी दर्ज करवाई और आशंका जताई कि वह किसी कुएं में गिर गया होगा। जांच के दौरान एक कुएं के पास उसका मोबाइल मिला, जबकि दूसरे कुएं के पास उसकी बाइक खड़ी मिली। इससे पुलिस को लगा कि मामला किसी हादसे से जुड़ा हो सकता है। उसी रात पुलिस मौके पर पहुंच गई और अगले दिन सिविल डिफेंस तथा गोताखोरों की टीम को बुलाया गया। दो बड़े मोटरों से दोनों कुओं का पानी घंटों तक बाहर निकाला गया और पूरी तलाशी ली गई, लेकिन वहां कोई नहीं मिला। इसके बाद भी पुलिस ने तलाश जारी रखी और हर संभावित सुराग पर काम करती रही। जांच में खुली पूरी सच्चाई, कर्ज से बचने के लिए रची गई थी योजना उन्होंने बताया कि लगातार जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि रतनलाल ने फाइनेंस कंपनियों से पांच ट्रैक्टर, एक पिकअप, एक कार, एक बुलेट, एक प्लेटिना बाइक सहित कई गाड़ियां फाइनेंस करवा रखे थे। इसके अलावा उस पर कई छोटे-बड़े लोन भी थे। पुलिस का कहना है कि इन कर्जों और फाइनेंस कंपनियों के दबाव से बचने के लिए उसने खुद ही गायब होने की योजना बनाई। पुलिस जांच में यह भी सामने आया कि उसका पड़ोसियों से जमीन को लेकर विवाद चल रहा था। इस मामले में कोर्ट का फैसला भी उसके खिलाफ आया था, जिससे उस पर और दबाव बढ़ गया था। पुलिस के अनुसार इन सभी कारणों से उसने ऐसा माहौल बनाया कि लोगों को लगे उसके साथ कोई बड़ी घटना हो गई है। परिवार को थी पूरी जानकारी, फिर भी पुलिस को नहीं बताया पुलिस का दावा है कि रतनलाल घर छोड़ने के बाद भी लगातार अपने परिवार के संपर्क में था। वह फोन पर घरवालों से बात कर रहा था, लेकिन परिवार ने इसकी जानकारी पुलिस को नहीं दी। जांच में सामने आया कि उसके बेटे शंकरलाल और अन्य परिजनों को भी उसके सुरक्षित होने की जानकारी थी। इसके बावजूद वे लगातार गुमशुदगी की बात कहते रहे। इस दौरान परिवार की ओर से जिला कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक को कई ज्ञापन भी दिए गए। इतना ही नहीं, सोमवार को कलेक्ट्रेट पर धरना देने की तैयारी भी कर ली गई थी। आसपास के 15 से 20 गांवों में लोगों को बुलाने की सूचना भी दी गई थी। थानाधिकारी ने बताया कि अगर समय रहते सच्चाई सामने नहीं आती तो मामला और ज्यादा तूल पकड़ सकता था। पुराने परिचित के पास पहुंची पुलिस, नागौर से लेकर आई चित्तौड़गढ़ जांच के दौरान पुलिस को सूचना मिली कि रतनलाल पहले नागौर जिले के कुचेरा इलाके में रह चुका है और संभव है कि वहीं गया हो। इसके बाद चंदेरिया थाना पुलिस ने कुचेरा पुलिस से संपर्क किया। स्थानीय पुलिस की मदद से उसके पुराने परिचितों के बारे में जानकारी जुटाई गई। जांच करते हुए पुलिस नागौर जिले के कुचेरा क्षेत्र तक पहुंची, जहां रतनलाल मिल गया। इसके बाद पुलिस उसे अपने साथ चित्तौड़गढ़ लेकर रवाना हो गई। अधिकारियों का कहना है कि लगातार जांच, तकनीकी इनपुट और स्थानीय पुलिस के सहयोग से ही यह मामला सुलझ सका। सात दिन की मेहनत के बाद खुला मामला, अब आगे होगी कार्रवाई इस पूरे मामले में पुलिस ने सात दिन तक लगातार अलग-अलग स्तर पर जांच की। कुओं की तलाशी से लेकर तकनीकी जांच और दूसरे जिले तक पहुंचकर व्यक्ति को तलाशने तक हर पहलू पर काम किया गया। अब रतनलाल और उसके परिवार के खिलाफ पुलिस को गलत जानकारी देकर गुमराह करने और सरकारी संसाधनों का अनावश्यक इस्तेमाल करवाने के मामले में आगे कार्रवाई की जाएगी। वहीं इस घटनाक्रम ने यह भी दिखाया कि झूठी जानकारी के कारण पुलिस और बचाव टीमों का कितना समय और संसाधन खर्च हो सकता है, जबकि उसी समय उनकी जरूरत किसी वास्तविक आपात स्थिति में भी पड़ सकती थी।



Source link