Wednesday, May 6, 2026
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मामा के घर आए मासूम की तालाब में डूबकर मौत: मेरठ में डेढ़ साल के बच्चे का शव 5 घंटे बाद मिला – Meerut News




मेरठ के खरखौदा थाना क्षेत्र के चंदपुरा गांव में एक डेढ़ साल के मासूम बच्चे की तालाब में डूबने से मौत हो गई। बच्चा अपने मामा के घर आया हुआ था और खेलते समय लापता हो गया था। काफी तलाश के बाद उसका शव गांव के तालाब से बरामद किया गया। इस घटना से परिवार में शोक का माहौल है। गाजियाबाद के लोनी क्षेत्र निवासी चीकू बैंसला का डेढ़ साल का बेटा डुग्गू अपनी मां राखी के साथ कुछ दिन पहले चंदपुरा गांव स्थित अपने ननिहाल आया था। बुधवार को डुग्गू घर के बाहर खेल रहा था। खेलते-खेलते वह पास के तालाब की ओर चला गया और अचानक पानी में गिर गया। आसपास मौजूद लोगों को इस घटना का तत्काल पता नहीं चल सका। काफी देर तक बच्चा दिखाई न देने पर परिजनों ने उसकी तलाश शुरू की। पहले आसपास और रिश्तेदारों के यहां खोजबीन की गई। गांव में उद्घोषणा भी कराई गई, लेकिन बच्चे का कोई सुराग नहीं मिला। इसके बाद ग्रामीणों ने तालाब के आसपास तलाश शुरू की। करीब चार घंटे बाद मासूम का शव तालाब में मिला। घटना की सूचना मिलते ही आसपास के लोग मौके पर जमा हो गए। बाद में लोनी से पहुंचे परिजन मासूम के शव को अपने साथ ले गए। इस घटना के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन के प्रति नाराजगी व्यक्त की। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव का तालाब लंबे समय से गंदगी और कूड़े से भरा हुआ है, जिसकी सफाई पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। ग्रामीणों ने कुछ लोगों द्वारा तालाब की जमीन पर अवैध कब्जे की शिकायत भी की। ग्रामीणों का कहना है कि यदि तालाब की नियमित सफाई और उचित सुरक्षा व्यवस्था होती, तो शायद मासूम की जान बचाई जा सकती थी। इस घटना के बाद गांव में गम का माहौल है।



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मीटिंग में महिला अधिकारी बेहोश: कलेक्ट्रेट में मचा हड़कंप; आईसीयू में इलाज जारी, रात में अस्पताल पहुंचे कलेक्टर – Rewa News




बुधवार शाम कलेक्ट्रेट परिसर में उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब मोहन सभागार में चल रही एक महत्वपूर्ण बैठक के दौरान एक महिला अधिकारी अचानक बेहोश होकर गिर पड़ीं। सिरमौर जनपद में एपीओ पद पर पदस्थ सुनीता तिवारी (शुक्ला) की तबीयत बिगड़ते ही बैठक में मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों में हड़कंप मच गया। घटना के तुरंत बाद स्टाफ ने तत्परता दिखाते हुए उन्हें आनन-फानन में शहर के निजी मिनर्वा हॉस्पिटल ले जाया गया, जहां उन्हें आईसीयू में भर्ती कर इलाज शुरू किया गया। बताया जा रहा है कि महिला अधिकारी पिछले कुछ दिनों से शुगर और ब्लड प्रेशर की समस्या से जूझ रही थीं। इसी कारण उन्हें अचानक चक्कर आया और वे बेहोश हो गईं। घटना की जानकारी मिलने के बाद कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी रात में अस्पताल पहुंचे। उन्होंने डॉक्टरों से महिला अधिकारी की स्थिति की जानकारी ली और बेहतर इलाज के निर्देश दिए। कलेक्टर ने उन्हें “आयरन लेडी” बताते हुए जल्द स्वस्थ होने की कामना भी की। फिलहाल डॉक्टरों के अनुसार महिला अधिकारी की हालत स्थिर है और उनका उपचार जारी है।“मीटिंग के दौरान हमारी एक महिला अधिकारी की तबीयत अचानक खराब हो गई थी। उन्हें तत्काल अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों की टीम इलाज कर रही है। फिलहाल स्थिति स्थिर है और प्रशासन की ओर से हर संभव मदद दी जा रही है।”



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नींबू का रस निकालकर न फेंकें छिलके, बनाएं खट्टा-मीठा अचार, जानें रेसिपी


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अक्सर हम नींबू का रस इस्तेमाल करने के बाद उसके छिलकों को बेकार समझकर फेंक देते हैं, जबकि इनमें सेहत और ब्यूटी दोनों के लिए जबरदस्त गुण छिपे होते हैं. विटामिन C और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर ये छिलके न सिर्फ एक स्वादिष्ट खट्टा-मीठा अचार बनाने में काम आते हैं, बल्कि त्वचा और बालों के लिए भी फायदेमंद होते हैं. अगर सही तरीके से इस्तेमाल किया जाए, तो ये साधारण से छिलके आपके किचन और ब्यूटी रूटीन दोनों को खास बना सकते हैं.

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नींबू का अचार.

अक्सर हम नींबू का रस निकालने के बाद उसके छिलकों को बेकार समझकर फेंक देते हैं, लेकिन यही छिलके सेहत और ब्यूटी दोनों के लिए किसी खजाने से कम नहीं होते. नींबू के छिलकों में विटामिन C, एंटीऑक्सीडेंट और प्राकृतिक तेल भरपूर मात्रा में पाए जाते हैं, जो शरीर को डिटॉक्स करने के साथ-साथ त्वचा और बालों के लिए भी बेहद फायदेमंद होते हैं. इन्हीं छिलकों से आप घर पर स्वादिष्ट खट्टा-मीठा अचार बना सकते हैं, जो खाने में टेस्टी होने के साथ-साथ हेल्दी भी होता है.

सबसे पहले नींबू के बचे हुए छिलकों को अच्छे से धो लें, ताकि उन पर लगी गंदगी और चिपचिपाहट पूरी तरह साफ हो जाए. अब इन्हें छोटे-छोटे टुकड़ों में काट लें. इसके बाद इन्हें 1–2 दिन के लिए धूप में हल्का सूखा लें, ताकि इनमें मौजूद अतिरिक्त नमी निकल जाए. यह स्टेप बहुत जरूरी है, क्योंकि नमी रहने पर अचार जल्दी खराब हो सकता है.

मसाले डालकर बनाएं खट्टा-मीठा अचार
अब एक बाउल में कटे हुए छिलके डालें और उसमें नमक, हल्दी, लाल मिर्च पाउडर और थोड़ा सा भुना हुआ मेथी पाउडर मिलाएं. इसके बाद इसमें गुड़ या चीनी डालें, जिससे अचार में खट्टा-मीठा स्वाद आए. अब इसमें थोड़ा सा सरसों का तेल डालकर अच्छे से मिक्स करें. चाहें तो इसमें थोड़ा सा सौंफ और कलौंजी भी डाल सकते हैं, जिससे स्वाद और खुशबू बढ़ जाती है.

सही तरीके से रखें और पकाएं अचार
अब तैयार अचार को एक साफ और सूखे कांच के जार में भर लें. इसे 4–5 दिनों तक रोजाना धूप में रखें और बीच-बीच में चम्मच से चलाते रहें. धूप लगने से मसाले अच्छी तरह से छिलकों में घुल जाते हैं और अचार का स्वाद और भी बढ़ जाता है. कुछ ही दिनों में आपका खट्टा-मीठा नींबू के छिलके का अचार तैयार हो जाएगा.

त्वचा और बालों के लिए भी फायदेमंद
नींबू के छिलकों में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट और विटामिन C त्वचा को चमकदार बनाने में मदद करते हैं. आप अचार के साथ-साथ इन छिलकों का इस्तेमाल स्किन केयर में भी कर सकते हैं. यह डेड स्किन हटाने और दाग-धब्बों को कम करने में मदद करता है. वहीं बालों के लिए भी यह फायदेमंद है, क्योंकि यह स्कैल्प को साफ करने और डैंड्रफ कम करने में सहायक होता है. इस तरह नींबू के छिलकों से बना यह खट्टा-मीठा अचार स्वाद और सेहत दोनों का शानदार मेल है. इसे आप रोजाना खाने के साथ एंजॉय कर सकते हैं और साथ ही इसके ब्यूटी बेनिफिट्स का भी फायदा उठा सकते हैं.

About the Author

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Vividha SinghSub Editor

विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें



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जिसपर अमेरिका को आंख दिखाता रहा ड्रैगन, भारत ने 27 साल बाद वही दुखती नस दबा दी


Indian Deligation to Taiwan: भारत ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में कूटनीतिक सरगर्मी तेज कर दी है. चीन के कड़े विरोध और ‘वन चाइना पॉलिसी’ की धमकियों के बीच, भारत के युवा राजनेताओं का एक उच्च-स्तरीय सर्वदलीय प्रतिनिधिमंडल इस समय ताइवान की यात्रा पर है. यह दौरा न केवल व्यापारिक और तकनीकी दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि इसके राजनीतिक निहितार्थ बीजिंग की नींद उड़ाने के लिए काफी हैं. बता दें कि ये दौरा इस मामले में भी खास है कि क्योंकि 27 साल पहले 1999 में नरेंद्र मोदी (पीएम मोदी) ताइवान के दौरे पर गए थे. भारतीय डेलिगेशन से पहले साल 2022 में नेन्सी पेलोसी के नेतृत्व में अमेरिकी डेलिगेशन ताइवान के यात्रा पर पहुंचा था. जिसका चीन ने जमकर विरोध किया था. साथ ही उसने ताइवान की खाड़ी में अपने सैन्य पेट्रोलिंग बढ़ा दिए थे.

ताइवान के विदेश मंत्रालय (MOFA) द्वारा जारी आधिकारिक बयान के अनुसार, भारत का यह प्रतिनिधिमंडल 4 मई से 9 मई 2026 तक ताइवान के दौरे पर रहेगा. इस डेलिगेशन की सबसे बड़ी खासियत इसकी विविधता है. इसमें सत्तापक्ष और विपक्ष के कई प्रमुख दलों के युवा चेहरे शामिल हैं, जिसमें भारतीय जनता पार्टी, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस, राष्ट्रीय पीपल्स पार्टी और शिवसेना (यूबीटी) शामिल है. प्रतिनिधिमंडल के सदस्य अपने प्रवास के दौरान ताइवान की विभिन्न सरकारी एजेंसियों के अधिकारियों से मुलाकात करेंगे और द्विपक्षीय हितों पर चर्चा करेंगे.

भारत और ताइवान दोस्ती की नई इबारत लिख रहे हैं.

सिर्फ राजनीति नहीं, तकनीक पर समझौता

प्रतिनिधिमंडल का यह दौरा काफी खास है. ताइवान के बयान के अनुसार, भारतीय नेता मुख्य रूप से निम्नलिखित क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित करेंगे:

  • आर्थिक और व्यापारिक टेक्नोलॉजी: ताइवान सेमीकंडक्टर और इलेक्ट्रॉनिक्स का वैश्विक केंद्र है.
  • शिक्षा और संस्कृति: दोनों देशों के बीच अकादमिक आदान-प्रदान को बढ़ावा देना.
  • लोकतंत्र और मानवाधिकार: एक लोकतांत्रिक देश के रूप में ताइवान की कार्यप्रणाली को समझना.

ताइवान सरकार ने भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक ‘अहम साझेदार’ बताया है और विस्तृत कूटनीति के तहत सहयोग जारी रखने की प्रतिबद्धता दोहराई है.

1999 का वो दौरा

इस दौरे की चर्चा के बीच साल 1999 का वह वाकया भी ताजा हो गया है. जब वर्तमान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (तब वे भाजपा के महासचिव थे) ताइवान के दौरे पर गए थे. उस समय भी चीन ने भारतीय नेताओं के ताइवान जाने का पुरजोर विरोध किया था. हालांकि, मोदी ने उस दौर में भी भारत-ताइवान संबंधों की संभावनाओं को भांप लिया था. आज, जब भारत ‘एक्ट ईस्ट’ नीति पर काम कर रहा है, तो युवा नेताओं का यह दौरा उसी कड़ी का विस्तार माना जा रहा है.

चीन की तिलमिलाहट; भारत की कूटनीति

चीन हमेशा से ताइवान को अपना अभिन्न हिस्सा मानता है. दुनिया के किसी भी देश के प्रतिनिधिमंडल के वहां जाने को अपने आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करार देता है. पहले भी कई बार भारतीय सांसदों के ताइवान दौरे पर चीन ने आधिकारिक विरोध दर्ज कराया है. लेकिन भारत ने ‘सामरिक स्वायत्तता’ का परिचय देते हुए यह स्पष्ट कर दिया है कि वह अपनी कूटनीतिक यात्राओं और व्यापारिक संबंधों के लिए स्वतंत्र है.

अमेरिका के डेलिगेशन पर भी बिलबिलाया था चीन

अगस्त 2022 में तत्कालीन अमेरिकी हाउस स्पीकर नैन्सी पेलोसी के नेतृत्व में जब अमेरिकी डेलिगेशन ताइवान पहुंचा, तो बीजिंग की प्रतिक्रिया ने पूरी दुनिया को युद्ध की दहलीज पर लाकर खड़ा कर दिया था. चीन ने इसे अपनी ‘वन चाइना पॉलिसी’ का सीधा उल्लंघन और संप्रभुता पर हमला करार दिया. जवाब में चीनी सेना (PLA) ने ताइवान को छह तरफ से घेरकर अब तक का सबसे बड़ा और आक्रामक सैन्य अभ्यास शुरू कर दिया, जिसमें पहली बार ताइवान के ऊपर से मिसाइलें दागी गईं. इस तनाव के कारण न केवल वैश्विक सप्लाई चेन प्रभावित हुई, बल्कि वाशिंगटन और बीजिंग के बीच कूटनीतिक रिश्ते अपने सबसे निचले स्तर पर पहुँच गए.

संबंध खराब हो गए थे

इस ऐतिहासिक यात्रा के बाद अमेरिका और चीन के बीच सैन्य संवाद और जलवायु परिवर्तन जैसे महत्वपूर्ण मुद्दों पर बातचीत पूरी तरह ठप हो गई थी. चीन ने ताइवान पर आर्थिक प्रतिबंध लगा दिए और अपने युद्धपोतों व लड़ाकू विमानों की घुसपैठ को एक ‘न्यू नॉर्मल’ (नया सामान्य) बना दिया, जो आज भी जारी है. वहीं, अमेरिका ने पीछे हटने के बजाय ताइवान के साथ अपने ‘अनौपचारिक’ संबंधों को और मजबूत किया और क्षेत्र में अपनी नौसैनिक मौजूदगी बढ़ा दी.

भारतीय प्रतिनिधिमंडल ताइवान के दौरे पर कब से कब तक है?
ताइवान के विदेश मंत्रालय के अनुसार, यह प्रतिनिधिमंडल 4 मई से 9 मई 2026 तक के दौरे पर है.

इस प्रतिनिधिमंडल में कौन-कौन से भारतीय राजनीतिक दल शामिल हैं?
इस डेलिगेशन में भारतीय जनता पार्टी (BJP), राष्ट्रीय पीपल्स पार्टी (NPP), कांग्रेस, और शिवसेना (यूबीटी) समेत कई अन्य दलों के युवा राजनेता शामिल हैं.

प्रतिनिधिमंडल के सदस्य ताइवान में किन विषयों पर चर्चा करेंगे?
सदस्य मुख्य रूप से आर्थिक और व्यापारिक टेक्नोलॉजी, शिक्षा, संस्कृति, लोकतंत्र और मानवाधिकारों से जुड़े विषयों को समझने और सहयोग बढ़ाने पर चर्चा करेंगे.

नरेंद्र मोदी ने ताइवान का दौरा कब किया था?
नरेंद्र मोदी ने साल 1999 में ताइवान का दौरा किया था, जब वे भाजपा के पदाधिकारी थे.

ताइवान के विदेश मंत्रालय ने इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में भारत की क्या भूमिका बताई है?
ताइवान के आधिकारिक बयान में भारत को इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में एक ‘अहम साझेदार’ बताया गया है.



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रक्सौल-हल्दिया एक्सप्रेसवे का वीरपुर में निरीक्षण: भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया तेज करने के निर्देश दिए – Begusarai News




रक्सौल-हल्दिया ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे परियोजना के तहत बुधवार को वीरपुर प्रखंड क्षेत्र में प्रशासनिक टीम ने स्थलीय निरीक्षण किया। इस दौरान प्रस्तावित मार्ग और भूमि अधिग्रहण से संबंधित प्रक्रियाओं का जायजा लिया गया। टीम ने नौला, वीरपुर, पकड़ी रसलपुर और सरौंजा सहित विभिन्न चिन्हित मौजों का दौरा किया। अधिकारियों ने भूमि की वर्तमान स्थिति, कुल रकबा और संभावित प्रभावित क्षेत्रों का आकलन किया। निरीक्षण के दौरान संबंधित पदाधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। भूमि अधिग्रहण प्रक्रिया को पारदर्शी, सुचारू और समयबद्ध तरीके से पूर्ण करने पर विशेष जोर दिया गया। इस निरीक्षण टीम में एडीएम, डीडीसी, डीसीएलआर और जिला भू-अर्जन पदाधिकारी सहित अन्य प्रशासनिक अधिकारी शामिल थे।



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2 एक्ट्रेस, पर्दे पर बहन, रियल लाइफ में ‘दुश्मन’, दोनों ने शादीशुदा मर्द को दिया दिल


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80 के दशक में हिंदी सिनेमा साउथ की दो एक्ट्रेस ने रातोंरात बॉलीवुड में जगह बनाई. दोनों ने अपनी एक्टिंग से सबको दीवाना बना लिया. दोनों एक्ट्रेस की किस्मत का सितारा ऐसा बुलंद हुआ कि बॉलीवुड में पूरे एक दशक राज किया. दोनों एक्ट्रेस ने कई बार पर्दे पर सगी बहनों का भी रोल निभाया. दोनों एक्ट्रेस ने त्याग की मूरत बनकर दर्शकों का खूब दिल जीता. रियल लाइफ की हकीकत चौंकाने वाली है. दोनों एक्ट्रेस एकदूसरे की शक्ल भी देखना पसंद नहीं करती थीं. सबसे दिलचस्प बात यह है कि दोनों ने शादीशुदा मर्द को दिल दिया. खुशी-खुशी दूसरी बीवी बन गईं. ये दोनों एक्ट्रेस कौन थीं, आइये जानते हैं…….

बॉलीवुड के इतिहास पर गौर से नजर डाले तो साफ पता चलता है कि साउथ से आने वाली एक्ट्रेस का 60 के दशक से ही दबदबा रहा है. पहले वैजयंती माला, फिर हेमा मालिनी और रेखा ने बॉलीवुड में दशकों राज किया. रेखा 1970 के आसपास बॉलीवुड में आई थीं. इसके बाद दो और एक्ट्रेस ने बॉलीवुड में एंट्री ली. इन दोनों को बॉलीवुड इंडस्ट्री में लाने का श्रेय जीतेंद्र को जाता है. दोनों ने एक दशक तक राज किया. हम जया प्रदा और श्रीदेवी की बात कर रहे हैं. दोनों एक्ट्रेस ने साथ में कई फिल्में कीं. यहां तक कि फिल्मों में सगी बहनों का रोल निभाया लेकिन रियल लाइफ में एकदूसरे से बात नहीं की. आइये जानते हैं दोनों एक्ट्रेस की जिंदगी से जुड़े किस्से….

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जया प्रदा और श्रीदेवी के साथ में फोटो देखकर कोई अंदाजा भी नहीं लगा सकता कि दोनों अभिनेत्रियों के बीच किसी तरह का ‘कोल्ड वॉर’ रहा होगा. दोनों ही एक्ट्रेस फोटो में खुश नजर आ रही हैं लेकिन असल जिंदगी की सच्चाई बेहद चौंकाने वाली है. दोनों एक्ट्रेस ने सिल्वर स्क्रीन पर सगी बहनों का रोल भी किया. दोनों ने साउथ इंडस्ट्री में नाम कमाने के बाद हिंदी सिनेमा में नाम कमाया. जीतेंद्र ही दोनों को लेकर बॉलीवुड में आए थे. खुद जया प्रदा ने अपने एक इंटरव्यू में खुलासा किया था कि श्रीदेवी की उनसे कोई बातचीत नहीं होती थी. दोनों के बीच ईगो की लड़ाई थी.

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दोनों ने 1980 के दशक की शुरुआत में तेलुगू सिनेमा में काम किया. बॉलीवुड में जया प्रदा-श्रीदेवी ने 8 फिल्मों में एकसाथ काम किया है. ये फिल्में थीं : मवाली (1983), तोहफा (1984), मकसद (1984), नया कदम (1984) आखिरी रास्ता (1986), औलाद (1987), मजाल (1987), मैं तेरी दुश्मन (1989) और फरिश्ते (1991). मवाली और तोहफा फिल्म से ही दोनों की जोड़ी हिट हो गई. दिलचस्प बात यह है कि ज्यादातर फिल्मों में दोनों एक्ट्रेस ने बहनों का किरदार निभाया. सिल्वर स्क्रीन पर एकदूसरे पर प्यार लुटाया और दर्शकों का दिल लूट लिया मगर सच्चाई यह है कि दोनों एक्ट्रेस सेट पर दूर-दूर बैठती थीं.

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एक बार राजेश खन्ना और जीतेंद्र ने श्रीदेवी-जयाप्रदा के बीच दोस्ती कराने की ठानी. दोनों को एक कमरे में बंद कर दिया. जयाप्रदा ने दिलचस्प किस्सा शेयर करते हुए बताया था कि राजेश खन्ना और जीतेंद्र ने हम दोनों को लंच टाइम पर एक कमरे में एक घंटे के लिए बंद कर दिया था. उनका मानना था कि एकदूसरे के पास बैठने से हमारी बातचीत शुरू हो जाएगी. आपस में बातचीत का माहौल बनेगा लेकिन जब उन्होंने दरवाजा खोला और पूछा कि बताओ क्या हुआ? मैंने कहा कुछ नहीं. श्रीदेवी हंसकर चली गईं और मैं भी चली गई. हम दोनों अलग-अलग दिशा में मुंह करके बैठे रहे थे. कोई बातचीत ही नहीं हुई. यह किस्सा ‘मकसद’ फिल्म की शूटिंग के दौरान का है.

श्रीदेवी को हिंदी सिनेमा में लाने का श्रेय जीतेंद्र को जाता है. दिलचस्प बात यह है कि रेखा ने जीतेंद्र को चिढ़ाया था. दरअसल, दोनों श्रीदेवी की तेलुगू पिक्चर देख रहे थे. इसी बीच रेखा ने कहा कि तुम अगली फिल्म इस हीरोइन के साथ कर लो. जीतेंद्र ने प्रोड्यूसर राघवेंद्र राव ने बात की. तेलुगू में हिम्मतवाला में जया प्रदा ने काम किया था. जब हिंदी में इसका रीमेक बनाया गया यह फिल्म जीतेंद्र-श्रीदेवी के साथ बनाई गई. हिम्मतवाला ने श्रीदेवी को हिंदी सिनेमा में गजब की पॉप्युलैरिटी दी. वो रातोंरात फेमस हो गईं.

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स्टारडम की रेस में श्रीदेवी ने बाजी मारी. कर्मा (1986) और जाबांज (1986) के बाद 1986 की ‘नागिन’ फिल्म श्रीदेवी के करियर के लिए टर्निंग प्वॉइंट साबित हुई. फिर मिस्टर इंडिया ने उनके सितारे बुलंद कर दिए. वो पहली लेडी सुपर स्टार बन गई. ‘मिस्टर इंडिया’ के लिए श्रीदेवी को 11 लाख रुपये की फीस मिली थी, जो उस समय किसी भी अभिनेत्री के लिए बहुत बड़ी रकम थी. श्रीदेवी की मां ने 10 लाख रुपये मांगे थे, लेकिन बोनी कपूर ने उन्हें 11 लाख रुपये दिए थे. बाद में 1996 में श्रीदेवी ने बोनी कपूर से शादी की.

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बोनी कपूर और श्रीदेवी की लव स्टोरी बहुत ही रोचक है. इसकी शुरुआत बोनी कपूर के एकतरफा प्यार से हुई थी. बोनी ने 28 साल की उम्र में पहली शादी मोना शौरी से की थी. बेटे अर्जुन कपूर और बेटी अंशुला के पिता होने होने के बावजूद वो श्रीदेवी को दिल दे बैठे थे. मोना-बोनी कपूर के बीच श्रीदेवी की एंट्री हुई तो 13 साल बाद दोनों अलग हो गए. 1996 में मोना से बोनी कपूर ने तलाक लिया और श्रीदेवी से जल्दबाजी में शादी कर ली थी. जब श्रीदेवी ने शादी की तो वो प्रेग्नेंट थीं.

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फिल्म इंडस्ट्री में अक्सर श्रीदेवी और मिथुन चक्रवती के अफेयर की चर्चा होती है. दोनों ने वतन के रखवाले (1987) , वक्त की आवाज (1987), जाग उठा इंसान (1984) और गुरु (1989) जैसी फिल्मों में साथ में काम किया. कहा तो यह भी जाता है कि मिथुन के दबाव में श्रीदेवी ने बोनी कपूर को राखी भी बांधी थी. मिथुन शादीशुदा थे और अपनी पत्नी योगिता बाली से तलाक नहीं लेना चाहते थे. दोनों में अलगाव हो गया. ऐसे में बोनी ने श्रीदेवी से अपनी नजदीकियां बढ़ाईं. इस कहानी में अहम मोड़ तब आया, जब श्रीदेवी की मां बहुत बीमार हुईं. अमेरिका में उनके इलाज की व्यवस्था बोनी कपूर ने करवाई. हॉस्पिटल के बिल बोनी ने चुकाए. ऐसे में श्रीदेवी उनसेबेहद प्रभावित हुईं और उन्होंने बोनी से शादी के लिए हामी भर दी.

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जया प्रदा की लव लाइफ की बात करें तो ‘शराबी’ और ‘संजोग’ जैसी फिल्मों में उन्होंने अपने अभिनय की अमिट छाप दर्शकों के दिल में छोड़ी. साल 1984 में ‘तोहफा’ के बाद हिट होने के बाद जयाप्रदा रातोंरात स्टार बन गईं. उन्होंने शादीशुदा फिल्म प्रोड्यूसर श्रीकांत नाहटा से प्यार हुआ और 1986 में जया से शादी कर ली. दिलचस्प बात यह है कि श्रीकांत नाहटा ने जया प्रदा से शादी तो कर ली लेकिन अपनी पहली पत्नी को तलाक नहीं दिया. ऐसे में जया प्रदा का उनसे खूब विवाद हुआ. श्रीकांत नाहटा ने पहली शादी चंद्रा से की थी. वो तीन बच्चों के पिता थे. कहा जाता है कि जया मां बनना चाहती थीं लेकिन श्रीकांत इसके लिए तैयार नहीं हुए. जया प्रदा ने श्रीकांत से शादी की. अपनी मांग में सिंदूर सजाया लेकिन पत्नी का दर्जा कभी नहीं मिल पाया.

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सबरीमाला केस, सुप्रीम कोर्ट बोला बार-बार रुख नहीं बदल सकते: बोहरा समाज में बहिष्कार और धार्मिक अधिकारों पर 1986 की PIL की वैधता पर सवाल उठाए


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नई दिल्ली4 घंटे पहले

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सुप्रीम कोर्ट में बुधवार को सबरीमाला मामले की सुनवाई हुई। कोर्ट ने 40 साल पुरानी जनहित याचिका ( PIL) की वैधता पर सवाल उठाए। यह याचिका दाऊदी बोहरा समुदाय में बहिष्कार (एक्सकम्युनिकेशन) के अधिकार और उसके संवैधानिक संरक्षण से जुड़ी है। कोर्ट ने कहा कि उसे पुराने फैसले के साथ रहना होगा और वह अपना रुख अचानक नहीं बदल सकता।

नौ जजों की संविधान पीठ यह सुनवाई कर रही है। इसमें महिलाओं के धार्मिक स्थलों में प्रवेश, जैसे सबरीमाला मंदिर, और अलग-अलग धर्मों में धार्मिक स्वतंत्रता के दायरे पर भी विचार हो रहा है।

7 सवाल, जिन पर बहस हो रही…

क्या है मामला?

यह मामला 1986 में सेंट्रल बोर्ड ऑफ दाऊदी बोहरा कम्युनिटी की PIL से जुड़ा है। इसमें 1962 के उस फैसले को रद्द करने की मांग की गई थी, जिसमें बॉम्बे प्रिवेंशन ऑफ एक्सकम्युनिकेशन एक्ट, 1949 को रद्द कर दिया गया था। उस कानून के तहत किसी सदस्य को बहिष्कृत करना गैरकानूनी था।

1962 के फैसले में कहा गया था कि धार्मिक आधार पर बहिष्कार का अधिकार समुदाय के धार्मिक मामलों के प्रबंधन का हिस्सा है। इसलिए 1949 का कानून संविधान के अनुच्छेद 26(b) के तहत मिले अधिकारों का उल्लंघन करता है।

सुनवाई के दौरान वरिष्ठ वकील राजू रामचंद्रन ने सुधारवादी बोहराओं की ओर से दलील दी। उन्होंने कहा कि बहिष्कार सीधे तौर पर मानव गरिमा को प्रभावित करता है। उन्होंने यह भी बताया कि उनके मुवक्किल के पिता असगर अली इंजीनियर खुद बहिष्कार के शिकार रहे थे।

रामचंद्रन ने कहा कि दाऊदी बोहरा समुदाय में धार्मिक प्रमुख को “दाई” कहा जाता है, जिसे सर्वोच्च अधिकार प्राप्त है। उन्होंने बताया कि बच्चे बालिग होने पर दाई के प्रति पूर्ण निष्ठा की शपथ लेते हैं।

उन्होंने यह भी कहा कि हर धर्म में अनुशासन बनाए रखने के लिए कुछ नियम होते हैं। लेकिन असली सवाल सजा की सीमा और उसके मानव गरिमा पर असर का है।

इस दौरान जस्टिस नागरत्ना ने पूछा कि क्या याचिका आर्टिकल 32 के तहत 1962 के संविधान पीठ के फैसले को रद्द करने की मांग कर रही है। उन्होंने कहा कि कोर्ट अपने ही पुराने फैसले को ऐसे कैसे नजरअंदाज कर सकता है।

कॉन्सिट्यूशन बेंच का फैसला बदला तो यह गंभीर मुद्दा

उन्होंने कहा, “हम भी सख्त नियमों से बंधे हैं। अगर हर आर्टिकल 32 की याचिका पर कॉन्सिट्यूशन बेंच के फैसले को बदला जाएगा, तो यह गंभीर मुद्दा है।”

जस्टिस नागरत्ना ने यह भी कहा कि कोर्ट कल सबरीमाला मामले में इसी तरह की याचिकाओं पर सवाल उठा रहा था। ऐसे में अब अलग रुख नहीं अपनाया जा सकता।

इससे पहले मंगलवार को कोर्ट ने इंडियन यंग लॉयर्स एसोसिएशन से भी सवाल किए थे। इसी NGO की याचिका पर सबरीमाला मंदिर में सभी उम्र की महिलाओं के प्रवेश की अनुमति दी गई थी।

इसी बीच, वरिष्ठ वकील डेरियस खंबाटा ने पारसी महिला की ओर से दलील दी। उन्होंने कहा कि अगर आर्टिकल 26(b) को ज्यादा महत्व दिया गया तो यह व्यक्तिगत धार्मिक अधिकारों को खत्म कर सकता है।

खंबाटा के मुताबिक, आर्टिकल 26(b) का उद्देश्य धार्मिक संस्थाओं को सरकारी हस्तक्षेप से बचाना है, न कि व्यक्तियों के अधिकारों को दबाना।

बता दें कि यह मामला 1962 के फैसले को चुनौती देने से जुड़ा है, जिसे बॉम्बे हाई कोर्ट ने भी बरकरार रखा था। सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा है कि अगर कोई पारसी महिला दूसरे धर्म में शादी करती है और उसे समुदाय से बाहर कर दिया जाता है, तो यह पहली नजर में भेदभाव लगता है। सुनवाई गुरुवार को भी जारी रहेगी।

सबरीमाला मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई हुई

सबरीमाला मंदिर मामले पर 7 अप्रैल से सुनवाई शुरू हुई थी। इस दौरान केंद्र सरकार ने महिलाओं की एंट्री के विरोध में दलीलें रखीं। सरकार ने कहा था कि देश के कई देवी मंदिरों में पुरुषों की एंट्री भी बैन है, इसलिए धार्मिक परंपराओं का सम्मान किया जाना चाहिए।

पिछली 9 सुनवाई में क्या हुआ, पढ़िए…

7 अप्रैल : केंद्र की दलील- मंदिर में महिलाओं की एंट्री का फैसला गलत

8 अप्रैल- जो भक्त नहीं, वो धार्मिक परंपरा को चुनौती कैसे दे रहा

9 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- मंदिरों में एंट्री रोकने से समाज बंटेगा

15 अप्रैल- सबरीमाला मैनेजमेंट बोला- अयप्पा मंदिर रेस्टोरेंट नहीं, यहां ब्रह्मचारी देवता

17 अप्रैल- SC बोला- संविधान सबसे ऊपर, निजी धार्मिक मान्यताओं से उठकर फैसला जरूरी

21 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट ने पूछा-छूने से देवता अपवित्र कैसे होते हैं

22 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- हिंदू एकजुट रहें, संप्रदायों में बंटे नहीं

23 अप्रैल- इस्लाम में महिलाओं के मस्जिद आने पर रोक नहीं

28 अप्रैल- धार्मिक प्रथाओं के नाम पर सड़कें ब्लॉक नहीं कर सकते

29 अप्रैल- सुप्रीम कोर्ट बोला- धर्म के विनाश का हिस्सा नहीं बनेंगे

5 मई- सबरीमाला केस में वकीलों ने याचिका लगाई; जज ने कहा- अपने लोगों के लिए काम करें

खबरें और भी हैं…



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10,999 रुपये में लॉन्च हुआ QLED Smart TV, घर में मिलेगा थिएटर वाला एक्सपीरियंस


Thomson ने एक और सस्ता Smart TV भारतीय बाजार में लॉन्च किया है। होम अप्लायेंस बनाने वाली कंपनी का यह QLED यानी Quantum LED टीवी 10,999 रुपये की शुरुआती कीमत में आता है। इस स्मार्ट टीवी में कई तगड़े फीचर्स दिए गए हैं, जो आपके घर में थिएटर वाला एक्सपीरियंस देगा। इससे पहले भी कंपनी बजट प्राइस रेंज में कई Smart TV भारत में लॉन्च किए हैं, जिनकी कीमत 5,999 रुपये से शुरू होती है।

Thomson QLED Smart TV Series

SPPL भारत में Thomson के स्मार्ट टीवी बनाती है। इसे एक्सक्लूसिवली Flipkart से खरीदा जा सकता है। कंपनी की यह नई स्मार्ट टीवी सीरीज 32 इंच, 40 इंच और 43 इंच स्क्रीन साइज में आती है। इस स्मार्ट टीवी सीरीज की शुरुआती कीमत 10,999 रुपये है। इसके 40 इंच और 43 इंच वाले मॉडल की कीमत क्रमशः 15,999 रुपये और 16,999 रुपये है। कंपनी इस नई स्मार्ट टीवी की खरीद पर 10% का डिस्काउंट भी ऑफर कर रही है। SBI कार्ड यूजर इस डिस्काउंट का लाभ ले सकते हैं।

  • 32 इंच – 10,999 रुपये
  • 40 इंच – 15,999 रुपये
  • 43 इंच – 16,999 रुपये

Thomson QLED Smart TV के फीचर्स

थॉमसन की ये नई स्मार्ट टीवी सीरीज Google TV 5.0 पर काम करती है। ये सभी मॉडल पर्सनलाइज्ड इंटरफेस के साथ आते हैं। इनमें डॉल्वी ऑडियो सपोर्ट, मल्टीपल पिक्चर मोड जैसे फीचर्स मिलते हैं। इस स्मार्ट टीवी सीरीज के डिस्प्ले की पीक ब्राइटनेस 350 निट्स तक की है। कंपनी इस स्मार्ट टीवी के साथ ब्लूटूथ रिमोट देती है, जिसमें Netflix, Amazon Prime Video, YouTube जैसे OTT प्लेटफॉर्म के लिए डेडिकेटेड बटन्स दिए गए हैं।

यूजर्स गूगल प्ले स्टोर के माध्यम से 10 हजार से ज्यादा OTT ऐप्स को इस स्मार्ट टीवी में एक्सेस कर सकते हैं। कनेक्टिविटी की बात करें तो ब्लूटूथ, WiFi, LAN, HDMI के अलावा गूगल क्रोमकास्ट बिल्ट-इन, गूगल असिस्टेंट जैसे फीचर्स मिलते हैं। यह ARM Cortex A55 क्वाड प्रोसेसर पर काम करता है। इसमें 1GB रैम के साथ 8GB स्टोरेज मिलेगा। ये सभी टीवी तीन HDMI और दो USB पोर्ट्स के साथ आते हैं।

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गाजियाबाद में लिफ्ट सुरक्षा पर बड़ा संकट, 5000 में से 1900 का रजिस्ट्रेशन नहीं


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Ghaziabad News: गाजियाबाद की गौर ग्रीन व्यू सोसाइटी में भीषण आग के बाद प्रशासन हाईराइज इमारतों की सुरक्षा को लेकर सख्त है. विद्युत सुरक्षा विभाग की जांच में सामने आया कि जिले की 5000 में से 1900 लिफ्ट बिना पंजीकरण के चल रही हैं, जबकि 200 सोसाइटियों के पास बिजली सुरक्षा की NOC तक नहीं है. मानकों की अनदेखी पर अब तक 10 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना वसूला जा चुका है. प्रशासन ने सभी बिल्डर्स और AOA को सुरक्षा दुरुस्त करने के कड़े निर्देश दिए हैं.

Ghaziabad News: इंदिरापुरम की गौर ग्रीन व्यू सोसाइटी में हुए भीषण अग्निकांड ने पूरे प्रशासन को हिलाकर रख दिया है. 9 फ्लैट्स को खाक करने वाली इस आग के बाद अब गाजियाबाद जिला प्रशासन हाईराइज इमारतों की सुरक्षा को लेकर आर-पार के मूड में है. जिलाधिकारी के सख्त निर्देशों के बाद 17 विभागों की टीम एक्शन मोड में है, जिसमें विद्युत सुरक्षा विभाग ने सोसाइटियों की कुंडली खंगालना शुरू कर दिया है. जांच में जो आंकड़े सामने आए हैं, वे चौंकाने वाले और डराने वाले हैं.

बिजली, फायर और लिफ्ट संचालन की हो रही है बारीकी से जांच
गौर ग्रीन व्यू सोसाइटी की घटना के बाद जिलाधिकारी ने जिले की सभी बहुमंजिला इमारतों के सुरक्षा ऑडिट के निर्देश दिए थे. इसी क्रम में विद्युत सुरक्षा विभाग जिलेभर की हाईराइज सोसाइटियों में सघन जांच अभियान चला रहा है. ऑडिट के दौरान मुख्य रूप से बिजली सुरक्षा इंतजाम, फायर फाइटिंग सिस्टम, इलेक्ट्रिकल वायरिंग, ट्रांसफार्मर की स्थिति और लिफ्ट संचालन के मानकों की बारीकी से जांच की जा रही है.

गाजियाबाद में 1900 लिफ्ट बिना पंजीकरण के संचालित
जांच में सुरक्षा को लेकर एक बड़ी लापरवाही सामने आई है. विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, गाजियाबाद में करीब 5000 लिफ्ट चल रही हैं, जिनमें से लगभग 1900 लिफ्ट का अभी तक कोई पंजीकरण नहीं कराया गया है. बिना रजिस्ट्रेशन के चल रही ये लिफ्ट रेजिडेंट्स की सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा बनी हुई हैं. विभाग ने ऐसी सोसाइटियों के बिल्डर्स और अपार्टमेंट ओनर्स एसोसिएशन (AOA) को नोटिस थमाना शुरू कर दिया है.

लगाया जा रहा जुर्माना, सुरक्षा मानकों के साथ कोई समझौता नहीं
विद्युत सुरक्षा विभाग के अनुसार, कई सोसाइटियों ने 15 फरवरी 2026 की समयसीमा बीत जाने के बाद भी लिफ्ट पंजीकरण नहीं कराया है. अब ऐसे मामलों में 10 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा रहा है. विभाग पिछले एक महीने में 10 लाख रुपये से अधिक का जुर्माना वसूल चुका है. अधिकारियों ने स्पष्ट कर दिया है कि सुरक्षा मानकों के साथ कोई समझौता नहीं किया जाएगा.

200 हाईराइज इमारतों के पास नहीं है बिजली सुरक्षा NOC
सहायक निदेशक विद्युत सुरक्षा सौरभ सिंह ने बताया कि जांच के दौरान गौर ग्रीन व्यू सोसाइटी के पास भी इलेक्ट्रिकल सेफ्टी एनओसी नहीं पाई गई. हालांकि, जांच में आग की वजह शॉर्ट सर्किट नहीं मिली है, लेकिन जिले की 200 से अधिक ऐसी हाईराइज इमारतें चिन्हित की गई हैं जिनके पास एनओसी नहीं है. विभाग ने सभी को जल्द से जल्द मानक पूरा करने और लिफ्ट का रजिस्ट्रेशन कराने की अपील की है ताकि भविष्य में किसी भी अप्रिय घटना को रोका जा सके.

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Rahul Goel

राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें



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पत्नी के तर्क के आगे झुके गुरुदत्त, मोहम्मद रफी से गाना छीनकर हेमंत कुमार से गवाया


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गुरुदत्त फिल्म ‘प्यासा’ को लेकर कोई रिस्क नहीं लेना चाहते थे, इसलिए सभी गाने मोहम्मद रफी से गवाना चाहते थे. मगर उन्हें पत्नी गीता दत्त और अबरार अलवी की सिफारिश पर एक गाना हेमंत कुमार से गवाना पड़ा. आज उस सदाबहार गाने की गिनती हिंदी सिनेमा के सबसे दर्दभरे गानों में होती है. साहिर लुधियानवी के लिखे शब्दों को हेमंत कुमार की मखमली आवाज ने अमर बना दिया. गाना प्यार में मिलने वाली नाकामी को बड़ी शिद्दत से बयां करता है.

नई दिल्ली: 1957 में आई फिल्म ‘प्यासा’ के लगभग सभी गीत साहिर लुधियानवी ने लिखे थे और इनका संगीत एसडी बर्मन ने दिया था. फिल्म में जितने भी मेल ट्रैक थे, वह गायक मोहम्मद रफी को सोच कर लिखे गए थे. फिल्म के प्रोड्यूसर-डायरेक्टर गुरु दत्त भी उनसे ही गाना गवाने के पक्ष में थे. दरअसल, फिल्म ‘प्यासा’ के सभी गाने गहरे भाव और जज्बातों को समेटे हुए हैं, इसलिए गुरुदत्त कोई रिस्क न उठाते हुए उन्हें सिर्फ मोहम्मद रफी से गवाना चाहते थे. (फोटो साभार: IMDb)

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मगर जब ‘प्यासा’ के एक गाने को रिकॉर्ड करने की तैयारी चल रही थी, तब अचानक मोहम्मद रफी से वो गाना छींनकर हेमंत कुमार को दे दिया. मीडिया रिपोर्ट्स की मानें, तो गुरुदत्त जब गानों की मेकिंग पर बैठकें कर रहे थे, तब गीता दत्त और फिल्म के लेखक अबरार अलवी से उनकी बातचीत हुई. (फोटो साभार: AI से जेनरेटेड इमेज)

तीनों सितारे एक दिन कार से कहीं जाते वक्त गीतों पर बात कर रहे थे. जब गाने ‘जाने वो कैसे लोग थे जिनके प्यार को प्यार मिला’ का जिक्र आया, तो अबरार अलवी ने कहा कि क्यों न इस गीत को हेमंत कुमार से गवाया जाए. गुरुदत्त ने इनकार करते हुए कहा कि ‘प्यासा’ के सभी गाने मोहम्मद रफी साहब गा रहे हैं, हेमंत कुमार से क्यों गवाएं?

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गुरुदत्त के बगल में बैठी उनकी पत्नी गीता दत्त बातचीत को सुन रही थीं. चूंकि वह भी एक मशहूर गायिका थीं और गीतों की समझ रखती थीं, इसलिए उन्होंने अपना पक्ष रखना भी जरूरी समझा. वे बोलीं, ‘यह गाना दूसरी तरह का है. हेमंत कुमार की आवाज भी लॉ रेंज की है, तो इसमें हेमंत कुमार ही परफेक्ट रहेंगे. इसलिए, यह गाना हेमंत कुमार से ही गवाना चाहिए.’

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गुरुदत्त को पत्नी गीता दत्त की बातें तर्कसंगत लगीं. वे भी मशहूर गाने को हेमंत कुमार से गवाने को तैयार हो गए. फिल्म ‘प्यासा’ के सभी गाने गहरे भाव और जज्बातों को समेटे हुए हैं. मगर ‘जाने वो कैसे लोग थे’ गाने पर हेमंत कुमार की आवाज खूब जंची. (फोटो साभार: AI से जेनरेटेड इमेज)

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कहते हैं कि एसडी बर्मन ने हेमंत कुमार से वादा किया था कि वे हर साल उनसे एक गाना जरूर गवाएंगे. फिल्म का दर्दभरा गाना आज भी लोग गुनगुनाना पसंद करते हैं, जिस पर गुरुदत्त ने कमाल की परफॉर्मेंस दी थी. (फोटो साभार: AI से जेनरेटेड इमेज)

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‘प्यासा’ में वहीदा रहमान और माला सिन्हा भी हैं. फिल्म मतलबी समाज में कवि के पहचान के स्ट्रगल को दिखाती है. इस फिल्म का संगीत यादगार है, जिसे फिल्म की तरह क्लासिक का दर्जा मिला है. (फोटो साभार: IMDb)

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गुरु दत्त पर फिल्माया गाना ‘जाने वो कैसे लोग थे’ एक ऐसे इंसान का दर्द है, जिसने दुनिया से सिर्फ प्यार मांगा, लेकिन बदले में उसे केवल अकेलापन और तिरस्कार मिला. एसडी बर्मन का संगीत और ‘प्यासा’ की उदास थीम इस गीत को दिल के बेहद करीब ले आती है. आज भी जब कोई अपनी तन्हाई या टूटे हुए सपनों को महसूस करता है, तो यह गाना उसकी रूह की आवाज बनकर सुकून पहुंचाता है.(फोटो साभार: IMDb)

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