Thursday, May 7, 2026
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दीपू के घर में डांस करते मदरसा छात्रा का वीडियो: कन्नौज में दलित युवक पर अपहरण और रेप के आरोप, बहन ने कहा- शादी हुई थी – Kannauj News




कन्नौज में मदरसे से बाहर निकली छात्रा के अपहरण और रेप के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। आरोपी के घर में साड़ी और मंगलसूत्र पहनकर छात्रा के डांस करने का वीडियो वायरल हो रहा है। आरोपी की बहनों ने पुलिस के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए कहा कि छात्रा ने शादी की थी और अपनी पहचान व उम्र छिपाई थी। शहर के हम्मालीपुरा मोहल्ले में रहने वाले दीपू के घर 5 अप्रैल को करीब 50 से 60 लोग अचानक पहुंच गए। उन्होंने उसकी छत पर मौजूद छात्रा को नीचे उतारा और परिजनों के साथ मारपीट की। इस दौरान मोहल्ले के अन्य घरों में भी तोड़फोड़ और हंगामा किया गया। छात्रा के परिजनों ने दीपू और उसके दो साथियों धीरज व संजीव पर अपहरण और रेप का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। हालांकि मामले में नया मोड़ तब आया, जब दीपू के घर से छात्रा के साड़ी और मंगलसूत्र पहनकर डांस करने के वीडियो वायरल होने लगे। इसके बाद दीपू की बहनें कंचन और नीतू सदर कोतवाली पहुंचीं और वीडियो सहित अन्य साक्ष्य पेश करते हुए आरोपों को झूठा बताया। उनका कहना है कि छात्रा ने अपनी उम्र और पहचान छिपाकर शादी की थी। छात्रा ने अपना नाम पूनम बताया दीपू की बहन कंचन और पड़ोस की रहने वाली रीमा ने बताया कि छात्रा अक्सर मोहल्ले में भीख मांगने आती थी। पूछने पर उसने बताया था कि उसके पिता का निधन हो चुका है और मां को चाचा अपने साथ ले गए हैं। घर बिक जाने के कारण वह बेसहारा है और मांगकर खाने को मजबूर है। पहले उसने अपना नाम शकीना बताया था, बाद में पूनम बताया। रीमा के अनुसार, जब महिलाओं ने उससे शादी के बारे में पूछा तो उसने सहमति दी। 1 अप्रैल को उससे आधार कार्ड लाने को कहा गया, जिसके बाद वह घर चली गई और 3 अप्रैल को वापस कपड़े लेकर लौटी। उसने बताया कि आधार कार्ड खो गया है और वह बालिग है। इसके बाद मोहल्ले के लोगों की मौजूदगी में कथित तौर पर शादी कराई गई, जिसके बाद छात्रा ने घर में डांस भी किया और उसे न्योछावर भी दिया गया। दीपू के घर के बाहर पुलिस तैनात घटना स्थल के पास शेखपुरा मोहल्ला मुस्लिम बहुल क्षेत्र है, जिसके चलते दो समुदायों के बीच तनाव की आशंका को देखते हुए दीपू के घर के बाहर पुलिस बल तैनात किया गया है। दीपू की दोनों बहनों को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया है। दीपू के माता-पिता पहले ही निधन हो चुका है, जिसके चलते घर खाली पड़ा थ



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BNMU में UDC पोस्ट पर अपॉइंटमेंट रोकने का आदेश रद्द: हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय और सरकार को बकाया वेतन 6% ब्याज सहित देने का दिया निर्देश – Madhepura News



पटना हाईकोर्ट ने BNMU के उच्च वर्गीय लिपिक पद पर नियुक्त कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। न्यायालय ने राज्य सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें इन नियुक्तियों को दी गई स्वीकृति रोक दी गई थी। कोर्ट ने विश्वविद्यालय और राज्य सरकार को कर्मचारियों

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न्यायमूर्ति आलोक कुमार सिन्हा की एकलपीठ ने सिविल रिट अधिकारिता वाद संख्या 7250/2025 में यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2017 में की गई नियुक्तियों को केवल इस आधार पर अवैध नहीं ठहराया जा सकता कि यूडीसी का पद पदोन्नति की श्रेणी में आता है। यह विशेष रूप से तब जब पूरी चयन प्रक्रिया न्यायालय के निर्देशों और राज्य सरकार की सहभागिता से पूरी हुई हो।

यूडीसी का पद पदोन्नति के माध्यम से भरा जाना चाहिए

याचिकाकर्ता चंद्र किशोर गुप्ता और राजेश कुमार ने 13 फरवरी 2025 को जारी उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी नियुक्ति की स्वीकृति रोक दी गई थी। इस आदेश में कहा गया था कि यूडीसी का पद पदोन्नति के माध्यम से भरा जाना चाहिए, न कि सीधी भर्ती से। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि वे वर्ष 1992 और 1995 से विश्वविद्यालय में दैनिक वेतनभोगी के रूप में कार्यरत थे।

बाद में, न्यायालय के निर्देशों के तहत वर्ष 2017 में एक विधिवत चयन प्रक्रिया के माध्यम से उनकी नियुक्ति की गई थी। उन्हें वर्ष 2019 में राज्य सरकार द्वारा स्वीकृति भी मिली थी और मई 2023 तक उन्हें नियमित वेतन मिलता रहा। हालांकि, इसके बाद अचानक उनका वेतन रोक दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया।

नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह वैध थी

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने दलील दी कि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह वैध थी और इसमें राज्य सरकार की सक्रिय भूमिका रही थी। वहीं, राज्य सरकार और विश्वविद्यालय की ओर से तर्क दिया गया कि यूडीसी का पद पदोन्नति का है, इसलिए सीधी नियुक्ति अवैध है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने पाया कि 2017 की नियुक्तियां न्यायालय के निर्देशों और राज्य सरकार द्वारा तय मानकों के तहत की गई थीं।

उस समय पद की प्रकृति को लेकर कोई आपत्ति नहीं उठाई गई थी, ऐसे में कई वर्षों बाद उसी आधार पर नियुक्ति को अस्वीकार करना कानून के विरुद्ध है।

याचिकाकर्ताओं ने लंबे समय तक कार्य किया

न्यायालय ने यह भी कहा कि सरकार और विश्वविद्यालय पहले इस प्रक्रिया में शामिल होकर बाद में उससे मुकर नहीं सकते, क्योंकि यह ‘प्रोमिसरी एसटॉपल’ और ‘वैध अपेक्षा’ जैसे सिद्धांतों के खिलाफ है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं ने लंबे समय तक कार्य किया है, इसलिए उन्हें उनके काम का वेतन मिलना उनका अधिकार है।

काम किया है तो वेतन मिलेगा के सिद्धांत को लागू करते हुए न्यायालय ने जून 2023 से लंबित वेतन और बकाया राशि के भुगतान का निर्देश दिया। साथ ही, बकाया वेतन पर 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देने को कहा गया है, जिसकी गणना वेतन देय तिथि से भुगतान तक की जाएगी। न्यायालय ने उच्च शिक्षा विभाग द्वारा 13 फरवरी 2025 को पत्र को रद्द करते हुए राज्य सरकार और विश्वविद्यालय को आदेश दिया कि वे आठ सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ताओं का बकाया वेतन और ब्याज सहित भुगतान सुनिश्चित करें।



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महिला कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष को दस करोड़ की मानहानि का नोटिस: बीजेपी विधायक चिंतामणि मालवीय पर लगाए थे महिला उत्पीड़न के आरोप – Bhopal News


भोपाल10 मिनट पहले

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रतलाम जिले की आलोट से बीजेपी विधायक डॉ चिंतामणि मालवीय ने मप्र महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रीना बोरासी सेतिया को मानहानि का नोटिस भेजा है।

विधायक ने अपने वकील के माध्यम से रीना बोरासी को 10 करोड़ रुपए का मानहानि नोटिस दिया है। रीना बोरासी द्वारा मीडिया में दिए गए उन बयानों को लेकर यह नोटिस भेजा गया है जिनमें बोरासी ने विधायक पर यौन शोषण और अवैध कब्जे जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। विधायक ने एक स्थानीय चैनल को भी लीगल नोटिस भेजा है।

राज्यपाल से की थी शिकायत

रीना बोरासी ने कुछ दिन पहले राज्यपाल मंगुभाई पटेल से लोकभवन भोपाल में मुलाकात के बाद मीडिया को बयान दिया था। जिसमें उन्होंने विधायक पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने एक महिला को लेकर कहा था कि उस महिला ने मुझे एफिडेविट के साथ सुबूत दिए हैं। वही राज्यपाल को देने आई हूं। मप्र का एक नेता, विधायक और पूर्व सांसद इस तरह से महिलाओं पर अत्याचार करेगा। उनका योन शोषण करेगा, उसके घर और पैतृक जमीन पर कब्जा करेगा। अपने 25-30 गुंडों काे भिजवाकर यशटर तोड़े, 70 साल की महिला पर अत्यावार किया। मेरी सरकार और राज्यपाल से मांग है कि संबंधित की विधायकीर रद्द की जाए।

विधायक से चुनावी रंजिश रखती हैं रीना

नोटिस में विधायक की ओर से कहा गया है कि वे एक उच्च शिक्षित जनप्रतिनिधि हैं और समाज में उनकी प्रतिष्ठा है। रीना बोरासी ने बिना किसी ठोस प्रमाण के केवल चुनावी रंजिश और राजनीतिक द्वेष के चलते उनकी छवि धूमिल करने के उद्देश्य से ये झूठे आरोप लगाए हैं। विधायक का तर्क है कि ‘पृथ्वीचक्र’ चैनल और सोशल मीडिया पर प्रसारित यह इंटरव्यू पूरी तरह से षड्यंत्र का हिस्सा है।

7 दिन की मोहलत और कानूनी चेतावनी

एडवोकेट शेखर श्रीवास्तव द्वारा भेजे गए इस नोटिस में रीना बोरासी को 7 दिन का समय दिया गया है। इन 7 दिनों के भीतर उन्हें उन सभी दस्तावेजों और साक्ष्यों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध करानी होंगी, जिनके आधार पर उन्होंने ये आरोप लगाए हैं। यदि वे ऐसा करने में विफल रहती हैं, तो उनके विरुद्ध 10 करोड़ रुपए की क्षतिपूर्ति का दीवानी मामला और आपराधिक मानहानि का केस दर्ज किया जाएगा।

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आलोट विधायक पर महिलाओं को प्रताड़ित करने का आरोप

मध्यप्रदेश में महिलाओं के साथ हो रहे कथित शोषण और प्रताड़ना के मामलों को लेकर सियासत गर्मा गई है। महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रीना बोरासी ने भाजपा के आलोट विधायक और पूर्व सांसद चिंतामणि मालवीय के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने गुरुवार को राज्यपाल से मुलाकात कर विधायक पर गंभीर आरोप लगाए और उन पर तुरंत कार्रवाई की मांग की है। रीना बोरासी का कहना है कि विधायक के रसूख के आगे पीड़ित महिलाओं की सुनवाई नहीं हो रही है और प्रशासन मौन बना हुआ है। पढ़ें पूरी खबर…



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अनचाहे गर्भ पर दो कोर्ट दो फैसले; सुप्रीम कोर्ट से HC तक डॉक्टरों की शामत


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अनचाहे गर्भ पर दो कोर्ट दो फैसले; सुप्रीम कोर्ट से HC तक डॉक्टरों की शामत

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Unwanted Pregnancy Case: अनचाहे गर्भ और मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी के दो मामलों में दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों और मेडिकल बोर्डों पर सख्त टिप्पणी की है. दिल्ली हाईकोर्ट ने 27 हफ्ते की गर्भवती महिला के मामले में आरएमएल अस्पताल के डॉक्टरों को फटकार लगाई. सुप्रीम कोर्ट ने 15 साल की रेप पीड़िता के मामले में AIIMS के रवैये पर नाराजगी जताई. अदालतों ने कहा कि महिलाओं की प्रजनन स्वतंत्रता संवैधानिक अधिकार है और मेडिकल संस्थानों को अपनी जिम्मेदारी स्पष्ट तरीके से निभानी होगी.

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अनचाहे गर्भ और MTP मामलों में सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट ने डॉक्टरों और मेडिकल बोर्डों को फटकार लगाई. (सांकेतिक फोटो)

Unwanted Pregnancy Case: अनचाहे गर्भ और मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) को लेकर अदालतों की सख्ती अब सिर्फ कानूनी बहस तक सीमित नहीं रह गई है. दिल्ली हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जजों ने साफ संकेत दिया है कि किसी महिला की प्रजनन स्वतंत्रता को सरकारी मेडिकल बोर्डों की हिचकिचाहट या डॉक्टरों की ढुलमुल राय के हवाले नहीं छोड़ा जा सकता. एक तरफ दिल्ली हाईकोर्ट ने 27 हफ्ते की गर्भवती महिला के मामले में राम मनोहर लोहिया अस्पताल के डॉक्टरों को फटकार लगाई. क्योंकि मेडिकल बोर्ड कोर्ट के सीधे आदेश के बावजूद यह नहीं बता पाया कि अबॉर्शन संभव है या नहीं. दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट ने 15 साल की रेप पीड़िता की 30 हफ्ते की गर्भावस्था खत्म कराने के मामले में AIIMS के खिलाफ अवमानना कार्यवाही तक शुरू कर दी थी. दोनों मामलों ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कानून साफ होने के बावजूद मेडिकल संस्थान निर्णय लेने से क्यों बचते हैं. अदालतों की टिप्पणी यह भी बताती है कि अब महिला की ‘रिप्रोडक्टिव ऑटोनॉमी’ को केवल मेडिकल राय नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकार के रूप में देखा जा रहा है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के इन दोनों फैसलों में एक समान बात दिखाई देती है. अदालतें डॉक्टरों से सिर्फ मेडिकल राय नहीं, बल्कि संवेदनशील और स्पष्ट जवाब चाहती हैं. हाईकोर्ट ने कहा कि मेडिकल बोर्ड ने अपनी वैधानिक जिम्मेदारी से मुंह मोड़ा. जबकि सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि किसी नाबालिग लड़की को उसकी इच्छा के खिलाफ गर्भ ढोने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता. जस्टिस बी वी नागरत्ना ने यहां तक कहा कि अगर बड़े अस्पताल मदद नहीं करेंगे तो महिलाएं झोलाछाप डॉक्टरों के पास जाएंगी और उनकी जान खतरे में पड़ जाएगी. वहीं दिल्ली हाईकोर्ट ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट को कानूनी दायित्व की अनदेखी बताया. अदालतों का यह कड़ा रुख इसलिए भी अहम है क्योंकि हाल के सालों में ऐसे मामलों की संख्या तेजी से बढ़ी है जहां गर्भ में गंभीर असामान्यताएं या रेप पीड़िता की स्थिति अदालत तक पहुंच जाती है और हर दिन की देरी महिला के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भारी पड़ती है.
मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट के तहत 24 हफ्ते तक कुछ शर्तों के साथ अबॉर्शन की अनुमति दी जा सकती है.

मेडिकल बोर्ड की चुप्पी पर हाईकोर्ट नाराज

  • दिल्ली हाईकोर्ट में 29 वर्षीय महिला ने 27 हफ्ते की गर्भावस्था खत्म करने की अनुमति मांगी थी. महिला का कहना था कि भ्रूण में गंभीर असामान्यताएं हैं और गर्भ जारी रखने से गर्भ में ही बच्चे की मौत का खतरा है. कोर्ट ने RML अस्पताल और ABVIMS को मेडिकल जांच कर स्पष्ट राय देने का आदेश दिया था. लेकिन मेडिकल बोर्ड ने यह बताने के बजाय कि अबॉर्शन संभव है या नहीं, महिला को गर्भ जारी रखने की सलाह दे दी.
  • जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने इसे अदालत के आदेश की अनदेखी माना. कोर्ट ने कहा कि डॉक्टरों ने MTP एक्ट की भावना और अपने वैधानिक दायित्वों को नजरअंदाज किया. अदालत ने यहां तक चेतावनी दी कि भविष्य में कोर्ट के आदेशों का अक्षरश: पालन होना चाहिए. इसके बाद महिला को जांच के लिए AIIMS भेजा गया.
  • दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि महिलाओं की प्रजनन स्वतंत्रता को सर्वोच्च महत्व दिया जाना चाहिए. कोर्ट ने केंद्र सरकार के वकील से कहा कि मेडिकल बोर्ड को साफ-साफ बताना चाहिए था कि वे अबॉर्शन के पक्ष में हैं या निजी डॉक्टरों की राय से असहमत हैं.

सुप्रीम कोर्ट में AIIMS पर अवमानना की तलवार

  • दूसरा मामला 15 साल की रेप पीड़िता से जुड़ा था, जिसकी 30 हफ्ते की गर्भावस्था खत्म करने की अनुमति सुप्रीम कोर्ट ने दी थी. लेकिन AIIMS ने पहले इस आदेश पर हिचक दिखाई और बाद में पुनर्विचार तथा क्यूरेटिव याचिका तक दायर कर दी. अस्पताल का कहना था कि इतने समय बाद अबॉर्शन में बच्चा जीवित पैदा हो सकता है और उसमें गंभीर विकलांगताएं हो सकती हैं.
  • हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इसे महिला की व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा मामला माना. कोर्ट ने कहा कि किसी नाबालिग लड़की को अनचाहे गर्भ के साथ जीने के लिए मजबूर करना उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होगा. बाद में AIIMS ने कोर्ट के आदेश के अनुसार प्रक्रिया पूरी की. बच्चा जीवित पैदा हुआ और उसे NICU में रखा गया. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना की कार्यवाही बंद कर दी.

जजों की चिंता सिर्फ कानून नहीं, समाज भी

सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि नाबालिग लड़कियों में अनचाहे गर्भ के मामले बढ़ना चिंता का विषय है. उन्होंने कहा कि परिवार पहले सदमे में रहता है और फैसला लेने में देर हो जाती है, जिससे मामला सातवें महीने तक पहुंच जाता है. कोर्ट ने सरकार को MTP कानून में बदलाव पर भी विचार करने की सलाह दी.

कोर्ट की टिप्पणियां बताती हैं कि अब ऐसे मामलों को सिर्फ मेडिकल प्रक्रिया नहीं माना जा रहा. इसमें महिला की गरिमा, मानसिक स्वास्थ्य और संवैधानिक अधिकार को बराबर महत्व दिया जा रहा है. यही वजह है कि अदालतें अब मेडिकल बोर्डों की अस्पष्ट रिपोर्ट पर सख्त रुख अपना रही हैं.

अदालतें डॉक्टरों और मेडिकल बोर्डों से नाराज क्यों दिखीं?

जवाब: दोनों मामलों में कोर्ट को लगा कि मेडिकल बोर्ड और अस्पताल स्पष्ट जिम्मेदारी लेने से बच रहे थे. दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि डॉक्टरों ने कोर्ट के सीधे आदेश के बावजूद यह नहीं बताया कि अबॉर्शन संभव है या नहीं. वहीं सुप्रीम कोर्ट को लगा कि AIIMS बार-बार कानूनी प्रक्रिया में देरी कर रहा है. अदालतों का मानना है कि ऐसे मामलों में अस्पष्ट राय महिला के अधिकारों और स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित करती है.

MTP एक्ट महिलाओं को क्या अधिकार देता है?

मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट के तहत 24 हफ्ते तक कुछ शर्तों के साथ अबॉर्शन की अनुमति दी जा सकती है. लेकिन यदि भ्रूण में गंभीर असामान्यता हो या महिला के जीवन और मानसिक स्वास्थ्य पर खतरा हो, तो अदालतें 24 हफ्ते के बाद भी अनुमति दे सकती हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कई फैसलों में कहा है कि महिला की प्रजनन स्वतंत्रता संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार का हिस्सा है.

कोर्ट की सख्ती का आगे क्या असर पड़ सकता है?

इन फैसलों के बाद मेडिकल बोर्डों और सरकारी अस्पतालों पर दबाव बढ़ेगा कि वे ऐसे मामलों में स्पष्ट और समयबद्ध राय दें. अदालतों ने संकेत दिया है कि महिला की इच्छा और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. साथ ही सरकार पर भी दबाव बनेगा कि MTP कानून में बदलाव कर नाबालिग रेप पीड़िताओं और गंभीर भ्रूण असामान्यता वाले मामलों के लिए प्रक्रिया आसान बनाई जाए.

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Sumit KumarSenior Sub Editor

सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 4 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…और पढ़ें



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फिल्म के सेट पर मां नीतू के लिए परेशान थे रणबीर, चाहते थे छोड़ दें मूवी


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नीतू कपूर इन दिनों अपनी फिल्म दादी की शादी के प्रमोशन में व्यस्त है. ये फिल्म कपूर परिवार के लिए बेहद खास है क्योंकि इसमें उनके खानदान की 3 जेनरेशन एक साथ नजर आएगी. 45 की उम्र में नीतू कपूर की बेटी रिद्धिमा साहनी पहली बार फिल्म दादी की शादी में सिल्वर स्क्रीन पर नजर आएंगी. इसी फिल्म में नीतू कपूर की नातिन और रिद्धिमा की बेटी समायरा भी हैं.

नई दिल्ली. दादी की शादी 8 मई को सिनेमाघरों में रिलीज के लिए तैयार है. इन दिनों कपिल शर्मा और नीतू कपूर अपनी फिल्म को दर्शकों तक पहुंचाने में जी-जान से जुटे हुए हैं. प्रमोशन के दौरान दोनों कलाकारों ने फिल्म से जुड़े मजेदार किस्से और यादें भी शेयर की. नीतू कपूर और कपिल शर्मा बताते हैं कि पिछले साल भारत-पाकिस्तान टेंशन के बीच उन्होंने कैसे फिल्म की शूटिंग पूरी की.

नीतू कपूर ने बताया कि वो लोग शिमला के एक गांव में दादी की शादी की शूटिंग कर रहे थे. उस दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच टेंशन चल रही थी और ऑपरेशन सिंदूर के बाद युद्ध जैसी स्थिति बन रही थी. ऐसे में रणबीर कपूर अपनी मां की सुरक्षा को लेकर काफी चिंतित हो गए. (फोटो साभारः इंस्टाग्राम @Neetu54)

रणबीर कपूर नहीं चाहते थे कि नीतू शिमला में रहकर फिल्म की शूटिंग करें. वो बार-बार उन्हें वापस घर आने के लिए कहते रहते थे, लेकिन एक्ट्रेस ने अपने बेटे को आश्वासन दिलाया कि वो सुरक्षित जगह पर हैं और पूरी टीम और क्रू उनके साथ है. (फोटो साभारः इंस्टाग्राम @Neetu54)

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स्क्रीन के साथ बात करते हुए नीतू कपूर ने ये किस्सा साझा किया. वो कहती हैं कि उन्होंने रणबीर को यकीन दिलाया कि वहां कई बम नहीं फेकेगा. वो लोग वहां बिलकुल सुरक्षित हैं. इस फिल्म के बारे में सीनियर एक्ट्रेस ने शेयर किया कि कैसे छोटे से गांव ने उन्हें उम्र भर की यादें दीं. (फोटो साभारः इंस्टाग्राम @Neetu54)

फिल्म की स्टारकास्ट ने बताया कि दादी की शादी की शूटिंग शिमला के छोटे से गांव में हो रही थी. वहां वैनिटी वैंस की कोई जगह नहीं थी. यहां तक कि बड़े-बड़े होटल्स भी नहीं थे जिस वजह से पूरी टीम एक साथ एक ही जगह पर रहती थी. एक साथ ठहरने की वजह से टीम को बॉन्ड करने का मौका मिला. (फोटो साभारः इंस्टाग्राम @Neetu54)

नीतू कपूर कहती हैं कि दादी की शादी बाकी फिल्मों की तरह नहीं थी. आज कल की फिल्मों में आउटडोर शूट काफी अकेला फील कराते हैं. ज्यादातर एक्टर्स अपनी वैनिटी में रहना पसंद करते हैं और सेट पर वो किसी के साथ बॉन्ड नहीं करते हैं. ऐसे में लोग अकेला महसूस करते हैं. (फोटो साभारः इंस्टाग्राम @Neetu54)

नीतू ने आगे बताया कि इस फिल्म की शूटिंग ने उन्हें पुराने दिनों की याद दिलाई जहां सब एक साथ इकट्ठे रहते थे. एक साथ मिलजुलकर बातें करते थे. वो कहती हैं कि एक साथ रहने की वजह से सेट पर लोगों की बॉन्डिंग भी काफी अच्छी रही और उन्हें इसमें बहुत मजा आया. (फोटो साभारः इंस्टाग्राम @Neetu54)

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एक्ट्रेस औऱ कपिल के मुताबिक फिल्म की पूरी टीम को शूटिंग में इतना मजा आ रहा था कि भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते टेंशन के बावजूद कोई वापस नहीं जाना चाहता था. वो लोग अपने-अपने कॉटेज में महफूज थे. (फोटो साभारः इंस्टाग्राम @Neetu54)

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ऑपरेशन सिंदूर का एक साल: PM मोदी ने सोशल मीडिया डीपी बदली, ऑपरेशन का लोगो लगाया, लिखा- देश सेनाओं के शौर्य को सलाम करता है


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नई दिल्ली1 घंटे पहले

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पीएम मोदी समेत केंद्र के कई मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने डिस्प्ले पिक्चर में ऑपरेशन सिंदूर का लोगो लगाया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी डिस्प्ले पिक्चर बदलकर ऑपरेशन सिंदूर का लोगो लगाया है। यह पहल पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किए गए सैन्य ऑपरेशन की पहली वर्षगांठ पर भारतीय सेना के साहस को ट्रिब्यूट देने के लिए की गई।

अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया था, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई थी। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में मौजूद आतंकी ठिकानों पर हमला किया था।

7 मई 2025 को लॉन्च किए गए ऑपरेशन सिंदूर में, भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoK) में नौ बड़े आतंकी लॉन्चपैड को नष्ट कर दिया था।

इस दौरान लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन की सुविधाओं को निशाना बनाया गया। भारतीय सशस्त्र बलों ने इस कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकवादियों को मार गिराया था।

पीएम मोदी का X अकाउंट, जिस पर डीपी बदली है…

पीएम ने संस्कृत के श्लोक से किया सेनाओं के पराक्रम को सलाम

पीएम मोदी ने संस्कृत श्लोक के लिए जरिए सेनाओं के पराक्रम को सलाम किया है। उन्होंने लिखा- उदीर्णमनसो योधा वाहनानि च भारत। यस्यां भवन्ति सेनायां ध्रुवं तस्यां जयं वदेत्…। यानी हे भारत, जिस सेना के योद्धा ऊंचे उत्साह और मजबूत मनोबल वाले हों, और जिसके पास अच्छे वाहन/साधन हों, उस सेना की विजय निश्चित मानी जाती है।

एक और पोस्ट में पीएम लिखते हैं…

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एक साल पहले, हमारी सेनाओं ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बेजोड़ साहस, सटीकता और संकल्प का प्रदर्शन किया था। उन्होंने उन लोगों को करारा जवाब दिया, जिन्होंने पहलगाम में बेकसूर भारतीयों पर हमला करने की हिम्मत की थी। पूरा देश हमारी सेनाओं के शौर्य को सलाम करता है।ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की मजबूत प्रतिक्रिया और राष्ट्र की सुरक्षा के लिए उसके अटूट संकल्प को दर्शाया। इसने हमारी सेनाओं के पेशेवरपन, तैयारी और समन्वित शक्ति को भी उजागर किया। साथ ही, इसने हमारी सेनाओं के बीच बढ़ते तालमेल को भी दिखाया और इस बात पर जोर दिया कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने की भारत की कोशिश ने हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा को कितनी ताकत दी है।आज, एक साल बाद भी, हम आतंकवाद को हराने और उसे बढ़ावा देने वाले पूरे तंत्र को तबाह करने के अपने संकल्प पर पहले की तरह ही अडिग हैं।

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ऐसे सिलेक्ट हुआ था नाम और लोगो

8 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर के बाद जब सेना के अधिकारियों जानकारी देने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई थी, तब बताया था कि ऑपरेशन के लिए 5 नाम तय हुए थे। सबसे आखिर में 2 नाम ऑपरेशन मंगलसूत्र और सिंदूर चुना गया। पहलगाम आतंकी हमले में कई महिलाओं के सुहाग उजाड़े गए थे, इसलिए पीएम मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर को मंजूरी दी।

पढ़िए 7 से 10 मई 2025 के बीच अजेय हिंदुस्तान के वो 88 घंटे, जब हमारे प्रहार से घुटनों पर आ गया था पाकिस्तान…

6-7 मई: रात 1.05 से 1.27 बजे

क्या हुआ: भारतीय वायुसेना ने 23 मिनट में पीओके और पाक के भीतर 9 आतंकी ठिकाने उड़ाए। 100 आतंकी मारे गए। शाम को पाक ने मिसाइलें दागीं। 15 शहर निशाने पर थे, पर हमारे एयर डिफेंस सिस्टम ने करारा जवाब दिया।

8 मई: देर रात 2 से सुबह 4 बजे

क्या हुआ: पाक ने लेह से गुजरात तक 1000 ड्रोन से 36 जगह हमला बोला। हमने 98% को मार गिराया। पाक के 4 एयर डिफेंस सिस्टम, एक रडार तबाह।

9 मई: रात 10:30 से 1:55 बजे

क्या हुआ: पाक ने 26 जगहों पर लंबी दूरी के हथियार दागे। भारत ने ड्रोन और सुखोई विमानों से ‘ब्रह्मोस’ दागी। इसने पाक के 11 एयरबेस और कई विमान तबाह किए।

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भारत में पहली बार 50 हजार जवानों की अलग ड्रोन फोर्स बनेगी, किसी भी सैन्य हमले में सबसे पहले यही प्रहार करेगी

ऑपरेशन सिंदूर और वैश्विक युद्धों (रूस-यूक्रेन व पश्चिम एशिया) से सबक लेते हुए भारतीय रक्षा प्रतिष्ठान ने एक ‘ड्रोन फोर्स’ बनाने का निर्णय लिया है। यह फोर्स किसी भी सैन्य कार्रवाई में ‘फर्स्ट रेस्पोंडर’ (पहली जवाबी कार्रवाई) के तौर पर तैनात की जाएगी। इसे डेटा और कॉग्निटिव वारफेयर फोर्स का तकनीकी समर्थन होगा। पढ़ें पूरी खबर…

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क्यों है ये कचोरी इतनी खास? जिसे खाने कि लिए इस दुकान पर लगती है मुसाफिरों की भीड़, Video


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क्यों है ये कचोरी इतनी खास? जिसे खाने कि लिए इस दुकान पर लगती है भीड़

 

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Ajmer Famous Balaji Mirchi Kachori Video: अजमेर के रूपनगढ़ बाईपास पर ‘बालाजी मिर्ची कचोरी’ अपनी पारंपरिक मिट्टी की भट्टी पर बनी कचोरियों के लिए मशहूर है. लकड़ी और कोयले की धीमी आंच पर तैयार होने वाला यह नाश्ता लोगों को पुराने ग्रामीण स्वाद का अनुभव कराता है. तीखी मिर्च और ताजे दही के साथ परोसी जाने वाली यह कचोरी ट्रक चालकों और मुसाफिरों की पहली पसंद बन गई है. आधुनिकता के दौर में भी यहाँ का देसी जायका बरकरार है, जहाँ हर सफर में यात्री स्वाद चखने के लिए जरूर रुकते हैं. राजस्थान में यह अपनी तरह का अनूठा स्वाद केंद्र है.

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भास्कर समाधान पर उजागर हो रही जयपुर की समस्याएं: कई कॉलोनियों में गंदगी, टूटी सड़कें और आवारा पशुओं से जनता परेशान, राहुल बने ‘पब्लिक के स्टार’ – Jaipur News


जयपुर शहर में बुनियादी समस्याओं को लेकर आमजन की शिकायतें लगातार सामने आ रही हैं, लेकिन ‘दैनिक भास्कर’ के समाधान सेगमेंट का असर अब साफ दिखाई देने लगा है। शहर के अलग-अलग इलाकों से जहां एक ओर जलभराव, कचरा और सड़क जैसी समस्याएं उठाई गईं, वहीं दूसरी ओर कई

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आमजन से जुड़ी जनसमस्या और शहर की जमीनी हकीकत को पोस्ट करने के लिए यहां क्लिक करें

मायापुरी में जलभराव के कारण आवागमन बाधित

जयपुर के जगतपुरा इलाके के मायापुरी से विजय गुप्ता ने लिखा कि, मायापुरी कॉलोनी में लोटस स्कूल वाली गली की सड़क का नवीनीकरण का काम बीच में ही छोड़ दिया गया है। जिसके कारण अधूरी सड़क पर जलभराव हो रहा है। बच्चों को स्कूल आने-जाने में समस्या हो रही है और बाकी लोग भी परेशान हो रहे है।

हादसे को न्योता दे रहा बिजली का खुला बॉक्स

प्रताप नगर के सेक्टर 29 से आयूष गौतम ने लिखा कि, गोदावरी अपार्टमेंट के पास बिजली का एक बॉक्स खुला हुआ पड़ा है। जिससे किसी को भी करंट लगने का खतरा है। उन्होंने बताया कि, इस मामले में पहले भी शिकायत की थी, लेकिन कोई स्थाई समाधान नहीं किया गया है।

शिव नगर 2 में निगम की लापरवाही

मुरलीपुरा के शिव नगर 2 से एम एल मीणा ने कचरे की समस्या समाधान सेगमेंट पर पोस्ट की है। जिसमें उन्होंने बताया कि, नगर निगम के कर्मचारी कुछ दिनों से यहां पर कचरा डाल रहे है। इस बारे में शिकायत भी की जा चुकी है लेकिन, कोई ध्यान नहीं दे रहा है। जिससे लोगों को समस्या हो रही है।

अनुपम विहार में वाहन चालकों को हो रही समस्या

लालारपुरा रोड के अनुपम विहार से विनीत जांगिड़ ने सड़क की समस्या के बारे में पोस्ट किया है। जिसमें विनीत ने बताया कि, जनवरी में सीवर लाइन का कार्य किया गया था। तब से लेकर आज तक सड़क को ठीक तरीके से नहीं बनाया गया है। जिससे वाहन चालकों और पैदल चलने वाले लोगों को भी काफी असुविधा हो रही है।

पानी की समस्या का हुआ समाधान

चांदपोल सब्जी मंडी क्षेत्र से निदन्द रावजी के रास्ते से महेंद्र कुमार जैन ने दैनिक भास्कर के समाधान सेगमेंट पर गंदे पानी की समस्या के बारे में पोस्ट किया था। जिसपर संबंधित विभाग के तुरंत एक्शन लिया और समस्या का समाधान करवा दिया है। जिससे लोगों में काफी खुशी है।

जयपुर के प्रताप नगर, सेक्टर 26 से अरविंद कुमार मेहरा ने पेड़ पर बिजली का तार पड़ा होने की समस्या पोस्ट की थी। जिसमें उन्होंने लिखा कि, घर के पास पेड़ पर बिजली का तार गिर गया है और पेड़ के टूटने पर कभी भी कोई बड़ा हादसा हो सकता है। समस्या पोस्ट होने के बाद नगर निगम के JEN ने कार्रवाई कर समाधान करवा दिया है।

आज के ‘पब्लिक के स्टार’ बने राहुल अग्रवाल

जयपुर के प्रताप नगर से बिजली के तार के पेड़ पर गिर जाने से संबंधित बड़ी समस्या पोस्ट की गई थी। जिसमें यूजर ने बड़े खतरे की भी संभावना जताई थी। जिसके बाद नगर निगम के JEN राहुल अग्रवाल ने एक्शन लेते हुए पेड़ को जरुरत के हिसाब के छटवाकर समाधान करवा दिया है और अब लोगों को डर भी नहीं है।

कुल मिलाकर, ‘भास्कर समाधान’ सेगमेंट अब आमजन की आवाज को प्रशासन तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बनता जा रहा है। जहां एक ओर समस्याएं उजागर हो रही हैं, वहीं जिम्मेदार अधिकारी त्वरित कार्रवाई कर लोगों का भरोसा भी जीत रहे हैं।

पब्लिक की आवाज बन रहा “भास्कर समाधान”

‘भास्कर समाधान’ सेगमेंट देशभर में इकलौता ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जहां शहरवासी सीधे अपने इलाके से जुड़े सिविक इश्यू खुद पोस्ट कर सकते हैं। ये सेगमेंट जनता को अपने गली-मोहल्ले की परेशानियां सामने रखने के लिए मदद कर रहा है। लोगों से मिले शानदार रिस्पॉन्स के बाद अब इसे और अधिक प्रभावी, सरल और यूजर-फ्रेंडली बनाया गया है।

अधिकारियों को सीधे मिल रही समस्याएं

दैनिक भास्कर के इस सेगमेंट में अधिकारी भी अपना एक्शन बता सकेंगे। शिकायत जिस विभाग से संबंधित है, वह अब सीधे उसके अधिकारियों तक पहुंचेगी। इसके बाद अधिकारी उस लोकेशन को मैप पर देख सकेंगे। यदि उन्होंने समाधान कर दिया है तो शिकायतकर्ता को इसकी जानकारी एप के जरिए ही दे सकेंगे या बता सकेंगे कि अभी काम जारी है। अधिकारी चाहेंगे तो जिस यूजर ने शिकायत की है, उसे भी कॉल कर सकेंगे।

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वर्ल्ड अपडेट्स: बंगाल चुनाव में जीत पर नॉर्वे के पूर्व मंत्री बोले- क्या शानदार बदला लिया है, PM मोदी की तारीफ की




पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में BJP की ऐतिहासिक जीत के बाद नॉर्वे के पूर्व मंत्री और राजनयिक एरिक सोल्हेम ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की खुलकर तारीफ करते हुए कहा कि क्या शानदार बदला लिया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर सोलहेम ने 2024 लोकसभा चुनाव का जिक्र करते हुए कहा कि तब पश्चिमी मीडिया ने BJP के बहुमत से नीचे रहने को मोदी युग के अंत की शुरुआत बताया था। लेकिन उसके बाद पार्टी ने ओडिशा, हरियाणा, दिल्ली, महाराष्ट्र, बिहार, असम और अब पश्चिम बंगाल में जीत दर्ज की, क्या शानदार बदला है। उन्होंने ये भी कहा कि पश्चिम बंगाल जैसे 10 करोड़ की आबादी वाले राज्य में 90% से ज्यादा वोटिंग होना बताता है कि भारत में लोकतंत्र कितना मजबूत है। यूरोप और अमेरिका के कई चुनावों में इतनी भागीदारी देखने को नहीं मिलती। भारत का लोकतंत्र दुनिया के लिए मिसाल है और पश्चिमी देशों को इसे समझने की जरूरत है। तमिलनाडु चुनाव पर भी सोलहेम ने प्रतिक्रिया दी। उन्होंने अभिनेता से नेता बने विजय की पार्टी TVK के प्रदर्शन को राज्य की राजनीति में बड़ा बदलाव बताया। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… जेपी मॉर्गन पर पूर्व बैंकर का गंभीर आरोप: यौन उत्पीड़न केस दबाने को 10 लाख डॉलर ऑफर किए, समझौता नहीं हुआ अमेरिकी बैंक जेपी मॉर्गन चेस पर उसके पूर्व कर्मचारी चिरायु राणा ने यौन उत्पीड़न, नस्लीय भेदभाव और कार्यस्थल पर प्रताड़ना के गंभीर आरोप लगाए हैं। न्यूयॉर्क स्टेट सुप्रीम कोर्ट में दायर मुकदमे में दावा किया गया है कि बैंक ने केस कोर्ट पहुंचने से पहले 10 लाख डॉलर का सेटलमेंट ऑफर दिया था, लेकिन बातचीत सफल नहीं हो सकी। मुकदमे में जेपी मॉर्गन की वरिष्ठ अधिकारी लोर्ना हजदिनी पर आरोप लगाया गया है कि उन्होंने अपने वरिष्ठ पद का इस्तेमाल कर राणा पर यौन संबंध बनाने का दबाव बनाया। शिकायतकर्ता का कहना है कि विरोध करने पर करियर और प्रमोशन प्रभावित करने की धमकी दी गई। कोर्ट दस्तावेजों में यौन उत्पीड़न, नस्लीय टिप्पणी, धमकी और ड्रग देने जैसे आरोप भी शामिल हैं। राणा ने दावा किया कि मई 2025 में आंतरिक शिकायत दर्ज कराने के बाद उन्हें प्रशासनिक अवकाश पर भेजा गया और धमकी भरे कॉल आने लगे। हालांकि जेपी मॉर्गन ने सभी आरोपों को निराधार बताया है। बैंक का कहना है कि आंतरिक जांच में कोई सबूत नहीं मिला। लोर्ना हजदिनी के वकीलों ने भी आरोपों को पूरी तरह झूठा और प्रतिष्ठा खराब करने वाला बताया है। मामले ने वाल स्ट्रीट में व्यापक चर्चा छेड़ दी है। मुकदमे में मानसिक पीड़ा, प्रतिष्ठा को नुकसान और आर्थिक हर्जाने की मांग की गई है। अब यह विवाद लंबी कानूनी लड़ाई की ओर बढ़ता दिख रहा है।



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भारत में LPG और तेल पर मिलने वाली है बड़ी राहत, अब हमेशा के लिए खुलने वाला है होर्मुज


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भारत में LPG-तेल पर मिलने वाली है राहत, अब हमेशा के लिए खुलने वाला है होर्मुज

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Hormuz News: स्ट्रेट ऑफ होर्मुज पर नाकाबंदी हटने वाली है. अमेरिका और ईरान डील के करीब पहुंचते दिख रहे हैं. डोनाल्ड ट्रंप के संकेत से पूरी दुनिया को राहत मिल सकती है. इतना ही नहीं, तेल सप्लाई सामान्य होने से भारत में ईंधन दाम स्थिर रहने की उम्मीद है. साथ ही होर्मुज में फंसे जहाज भी आसानी से आ सकेंगे.

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होरमुज़ फिर से खुलने को तैयार, US और ईरान ने नाकाबंदी हटाने का ऐलान किया.

LPG Update / Hormuz News | भारत में एलपीजी और तेल को लेकर जो शंका है, वह बहुत जल्द दूर होने वाली है. अब न तो एलपीजी गैस सिलेंडर मिलने में देरी होगी और न पेट्रोल-डीजल के बहुत दाम बढ़ेंगे. कारण कि जिस संकट से पूरी दुनिया जूझ रही है, वह अब हमेशा-हमेशा के लिए खत्म होने को है. जी हां, स्ट्रेट ऑफ होर्मुज अब बहुत जल्द खुलने वाला है. इसके संकेत अब मिलने लगे हैं. ईरान ही नहीं, अब अमेरिका भी नाकाबंदी हटाने को तैयार है. खुद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप का कहना है कि ईरान के साथ अच्छी बातचीत हो रही है. इसका मतलब है कि ईरान और अमेरिका में डील होने ही वाली है और डील होते ही होर्मुज हमेशा-हमेशा के लिए खुल जाएगा.

दरअसल, जिस होर्मुज संकट के कारण पूरी दुनिया में तेल-गैस का हाहाकार मचा है. अब वही स्ट्रेट ऑफ होर्मुज फिर से खुलने को तैयार है. अमेरिका और ईरान ने नाकाबंदी हटाने का ऐलान कर दिया है. बुधवार को अमेरिका और ईरान ने ऐलान किया है कि वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम इस जलमार्ग पर लगी नाकाबंदी हटाई जा रही है. इससे पहले डोनाल्ड ट्रंप ने कहा था कि वह होर्मुज पर नाकाबंदी को कुछ समय के लिए रोक रहे हैं ताकि यह देखा जा सके कि क्या ईरान के साथ कोई समझौता हो सकता है. इसके बाद बुधवार को ईरान की सेना, इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने कहा कि वह जहाजों को होर्मुज़ जलडमरूमध्य से गुज़रने की इजाज़त देगी.

जी हां, पश्चिम एशिया में अब अमन-चैन के संकेत मिलने लगे हैं. ईरान और खाड़ी देशों में शांति की दिशा में एक बड़ी कामयाबी मिलने के संकेत मिल रहे हैं. उधर पाकिस्तान का भी दावा किया है कि अमेरिका और ईरान के बीच अगले 24 से 72 घंटों में एक ‘महाडील’ का ऐलान हो सकता है. इधर लीक हुई जानकारी की माुनें तो इस समझौते के तहत ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को रोकने और अंतरराष्ट्रीय जांच के लिए तैयार हो गया है, जिसके बदले में अमेरिका ने भी कुछ ढील देने का फैसला किया है. दावा किया गया कि अगले एक-दो दिनों में अमेरिका और ईरान एक बार फिर जंग खत्म करने और डील करने के लिए बातचीत की मेज पर बैठेंगे.

ईरान-अमेरिका में बन रही बात

सबसे खास बात यह है कि अमेरिका और ईरान दोनों होर्मुज पर एकमत होते दिख रहे हैं. डील की मानें तो इधर ईरान का कहना है वह होर्मुज खोल देगा. वहीं अमेरिका कहना है कि अगर ईरान होर्मुज खोलता है तो अमेरिका भी ब्लॉकेड हटा लेगा. ईरान ने डील के तहत अमेरिका को गारंटी दी है कि दुनिया के सबसे अहम व्यापारिक रूट होर्मुज जलडमरूमध्य को वह कभी ब्लॉक नहीं करेगा. गौरतलब है कि ईरान ने इस होर्मुज जलडमरूमध्य को तब बंद कर दिया था, जब अमेरिका और इजरायल ने मिलकर ईरान पर अटैक किया था. होर्मुज से दुनिया का लगभग 20 प्रतिशत तेल और गैस गुजरता है.

ट्रंप ने दिए संकेत

बहरहाल, डोनाल्ड ट्रंप ने ‘ट्रुथ सोशल’ पर अपनी पोस्ट में यह संकेत दिया कि शायद कोई समझौता हो गया है और ईरान को उसका पालन करना होगा. उन्होंने लिखा कि ‘यह मानते हुए कि ईरान उन बातों को देने पर सहमत है जिन पर सहमति बनी थी. जो शायद एक बहुत बड़ी उम्मीद है. इसका मतलब है कि यह जलडमरूमध्य ईरान समेत सभी के लिए खुल जाएगा और ‘ऑपरेशन एपिक फ्यूरी’ खत्म हो जाएगा. वहीं, ईरानी सरकार के ‘प्रेस टीवी’ ने बताया कि IRGC ने कहा है कि वह जलडमरूमध्य को खोल रहा है.

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Shankar Pandit

Shankar Pandit has more than 10 years of experience in journalism. Before News18 (Network18 Group), he had worked with Hindustan times (Live Hindustan), NDTV, India News Aand Scoop Whoop. Currently he handle ho…और पढ़ें

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