कोलकाता. सोशल मीडिया पर लोग सर्च कर रहे हैं कि बंगाल में किस जाति के कितने विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं? भूमिहार, ब्राह्मण, राजपूत, यादव और कायस्थों की संख्या इनमें से कितनी है? कितने मुस्लिम, एससी और ओबीसी कैंडिडेट जीते हैं? इस बार के बंगाल चुनाव में यूपी-बिहार के कई राजपूत और भूमिहार चेहरे बीजेपी के टिकट पर जीते हैं. अगर भूमिहार कैंडिडेट की बात करें तो बीजेपी के टिकट पर उमेश राय, दिलीप सिंह और रितेश तिवारी चुनाव जीते हैं. अगर बात करें 293 सीटों पर जीतने वाले सभी कैंडिडेट की, तो ज्यादातर उम्मीदवार ब्राह्मण, कायस्थ, ओबीसी और एससी वर्ग के हैं. महिलाओं की संख्या में इस बार इजाफा हुआ है. वहीं, मुस्लिम विधायकों की संख्या इस बार घट गई है. जानिए बंगाल चुनाव 2026 में किस जाति के कितने विधायक जीतकर आए हैं.
सबसे पहले बात करते हैं कि बंगाल में दलितों के लिए आरक्षित 68 सीटों में से 52 पर इस बार बीजेपी ने जीत दर्ज की है. मतुआ और राजबंशी समुदायों ने इस बार अपना पाला पूरी तरह बदल लिया है. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के रण के बाद अब नई विधानसभा के सामाजिक और जातीय समीकरणों के आंकड़े सामने आ गए हैं. 293 सीटों पर आए परिणामों ने राज्य की भावी राजनीति की एक नई पटकथा लिख दी है. इस बार की विधानसभा में न केवल सत्ता परिवर्तन हुआ है, बल्कि सदन के अंदर प्रतिनिधित्व का चेहरा भी बदल गया है. सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा मुस्लिम विधायकों की संख्या को लेकर है, जिसमें पिछले चुनाव के मुकाबले कमी दर्ज की गई है.
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मुस्लमों की संख्या 38 पर सिमटी
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 की नई विधानसभा में कुल 38 मुस्लिम विधायक चुनकर आए हैं. यह संख्या 2021 के चुनाव 42 मुस्लिम विधायक के मुकाबले 4 कम है. इनमें सबसे ज्यादा 32 मुस्लिम विधायक तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर जीते हैं. हुमायूं कबीर अपनी पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) से 2 सीटों से जीतकर आए हैं. पहली बार ‘ऑल इंडिया सेकुलर फ्रंट’ (AISF) ने भी 01 मुस्लिम विधायक के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है.
ब्राह्मण-राजपूत-भूमिहार वर्गों का हाल
अगर यूपी-बिहार के भूमिहार जाति की बात करें तो इस बार उमेश राय हावड़ा उत्तर विधानसभा जीते हैं. वह गांव पलियां लोहारपुर जिला गाजीपुर यूपी के रहने वाले हैं. दिलीप सिंह चांपदानी विधानसभा से जीते हैं. वह भी यूपी बनारस पिंडरा के भूमिहार हैं. तीसरे भूमिहार रितेश तिवारी काशीपुर बेलगछिया विधानसभा से जीते हैं. वह बिहार सिवान के भूमिहार हैं. बीजेपी की 206 सीटों की बड़ी जीत के साथ विधानसभा में सवर्ण और पिछड़ा वर्ग (OBC) के प्रतिनिधित्व में इजाफा हुआ है. नई विधानसभा में लगभग 42 से 45 ब्राह्मण विधायक चुनकर पहुंचे हैं, जिनमें से बहुमत बीजेपी के खेमे से है. कल्याण चक्रवर्ती और शांतनु देय जैसे चेहरों ने अपनी सीटों पर जीत दर्ज की है.
बंगाल विधानसभा में संख्या के लिहाज से इस बार अनुसूचित जाति (SC) और पिछड़ा वर्ग (OBC) से सबसे ज्यादा विधायक सदन में दिखेंगे.
एससी, ओबीसी और महिलाओं का जलवा
बंगाल विधानसभा में संख्या के लिहाज से इस बार अनुसूचित जाति (SC) और पिछड़ा वर्ग (OBC) से सबसे ज्यादा विधायक सदन में दिखेंगे. उत्तर बंगाल और जंगलमहल में बीजेपी की क्लीन स्वीप ने राजबंशी और मतुआ समुदाय के प्रतिनिधियों की संख्या बढ़ा दी है. भले ही ममता बनर्जी की सत्ता चली गई हो, लेकिन उनके द्वारा शुरू की गई ‘महिला केंद्रित राजनीति’ का असर नतीजों में दिख रहा है. इस बार विधानसभा में 44 महिला विधायक चुनकर आई हैं. टीएमसी ने सबसे अधिक महिला उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से कई ने जीत हासिल की. यह आंकड़ा बताता है कि बंगाल की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी अब केवल वोट बैंक तक सीमित नहीं है, बल्कि वे नीति-निर्धारण में भी बड़ी भूमिका निभाएंगी.
1941 के बाद यह पहली बार है जब बंगाल की विधानसभा में हिंदुत्ववादी विचारधारा के समर्थकों की संख्या बहुमत के पार है. 38 मुस्लिम विधायकों की मौजूदगी के बावजूद, सदन का शक्ति केंद्र अब ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ की ओर झुक गया है. विश्लेषकों का मानना है कि मुस्लिम सीटों पर बीजेपी की सेंधमारी और ध्रुवीकरण के चलते टीएमसी के कई मुस्लिम बहुल किलों में भी ‘कमल’ खिला है, जिसका सीधा असर मुस्लिम विधायकों की कुल संख्या पर पड़ा है.





















