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बंगाल में शिक्षा क्रांति: NEP 2020 और पीएम-श्री योजना को मिली हरी झंडी
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पूर्व सीएम ममता बनर्जी ने नई शिक्षा नीति को रोक रखा था. केंद्र की पीएम श्री योजना से भी दूरी बनाई गई थी. नई सरकार ने केंद्र के साथ तालमेल का एक्शन लिया है. 15 मई को दिल्ली में एमओयू साइन हुआ है. शिक्षा मंत्रालय के सचिव संजय कुमार की मौजूदगी में ये हुआ. बंगाल सरकार के अतिरिक्त मुख्य सचिव बिनोद कुमार ने एमओयू पर साइन किए. अब बंगाल में शिक्षा सुधार का एक नया दौर शुरू हुआ.
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पीएम श्री योजना से पश्चिम बंगाल के सरकारी स्कूल उत्कृष्ट शिक्षण संस्थान बन जाएंगे. (सांकेतिक तस्वीर)
नई दिल्ली. पश्चिम बंगाल में शिक्षा के क्षेत्र में नए और महत्वपूर्ण बदलाव आने जा रहे हैं. यहां स्कूलों में राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के अनुरूप कार्यक्रम लागू किए जाएंगे. साथ ही स्कूलों को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ने के लिए पीएम श्री योजना लागू की जा रही है. केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और राज्य सरकार ने इस विषय पर बड़ी पहल की है.
दरअसल पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद अब शिक्षा व्यवस्था में भी बड़े बदलाव की शुरुआत हो गई है. लंबे समय तक केंद्र सरकार की कई योजनाओं से दूरी बनाए रखने वाले पश्चिम बंगाल ने अब राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 और पीएम-श्री स्कूल योजना को लागू करने की दिशा में निर्णायक कदम उठाया है
शुक्रवार को नई दिल्ली में केंद्र सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच महत्वपूर्ण एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए. इस महत्वपूर्ण कदम को राज्य में शिक्षा सुधार के नए दौर की शुरुआत माना जा रहा है. केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय के अनुसार, 15 मई को मंत्रालय के स्कूल शिक्षा एवं साक्षरता विभाग, भारत सरकार और पश्चिम बंगाल सरकार के बीच पीएम-श्री स्कूल पहल लागू करने के लिए औपचारिक समझौता हुआ.
यह एमओयू शिक्षा मंत्रालय के सचिव संजय कुमार की मौजूदगी में साइन किया गया. पश्चिम बंगाल सरकार की ओर से अतिरिक्त सचिव धीरज साहू और अतिरिक्त मुख्य सचिव बिनोद कुमार ने समझौते पर हस्ताक्षर किए. इस समझौते को बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है क्योंकि पूर्ववर्ती ममता बनर्जी सरकार ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 के कई प्रावधानों और केंद्र की पीएम-श्री योजना को राज्य में लागू करने से परहेज किया था.
केंद्र और राज्य के बीच इस मुद्दे पर लंबे समय तक टकराव की स्थिति बनी रही थी, लेकिन सत्ता परिवर्तन के बाद अब नई सरकार ने केंद्र के साथ तालमेल बढ़ाते हुए शिक्षा सुधारों को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है. पीएम-श्री योजना राष्ट्रीय शिक्षा नीति 2020 की सोच पर आधारित है. इसके तहत राज्य के चुनिंदा सरकारी स्कूलों को आधुनिक मॉडल स्कूल के रूप में विकसित किया जाएगा.
इन स्कूलों में स्मार्ट क्लासरूम, डिजिटल शिक्षा, आधुनिक प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, खेल सुविधाएं और कौशल विकास कार्यक्रम शुरू किए जाएंगे. साथ ही विद्यार्थियों के समग्र विकास, रचनात्मक सोच और अनुभव आधारित पढ़ाई पर विशेष जोर रहेगा.
योजना का उद्देश्य केवल स्कूलों का बुनियादी ढांचा मजबूत करना नहीं, बल्कि उन्हें उत्कृष्ट शिक्षण संस्थानों में बदलना है ताकि आसपास के दूसरे स्कूल भी उनसे प्रेरणा लेकर अपनी शिक्षा गुणवत्ता सुधार सकें. नई शिक्षा नीति के तहत मातृभाषा में प्रारंभिक शिक्षा, तकनीक आधारित शिक्षण, व्यावहारिक ज्ञान और कौशल आधारित पढ़ाई को भी बढ़ावा दिया जाएगा.
विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला पश्चिम बंगाल की शिक्षा व्यवस्था को राष्ट्रीय स्तर की नई संरचना से जोड़ने की दिशा में बड़ा कदम है. इससे राज्य के लाखों विद्यार्थियों को आधुनिक और गुणवत्तापूर्ण शिक्षा का लाभ मिल सकेगा. इस अवसर पर पश्चिम बंगाल के राज्य परियोजना निदेशक विभु गोयल, संयुक्त सचिव डॉ. अमरप्रीत दुग्गल और निदेशक यूपी सिंह भी मौजूद रहे.
राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें
नीट-यूजी परीक्षा में कथित पेपर लीक और रद्द होने के मुद्दे पर कांग्रेस ने देशभर में विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया है। इसी कड़ी में शुक्रवार शाम विदिशा में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार के खिलाफ प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने माधवगंज चौराहे पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला दहन कर उनके इस्तीफे की मांग की। शुक्रवार शाम बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता विदिशा के माधवगंज चौराहे पर इकट्ठा हुए। उन्होंने नीट-यूजी परीक्षा में पेपर लीक और धांधली के आरोपों को लेकर केंद्र सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का पुतला भी फूंका गया। पुलिस ने पुतले को आग लगने से रोकने का प्रयास किया, लेकिन कार्यकर्ताओं के विरोध के चलते पुतला पूरी तरह जल गया। कांग्रेस नेताओं ने आरोप लगाया कि भाजपा सरकार के कार्यकाल में लगातार पेपर लीक और भर्ती परीक्षाओं में गड़बड़ी के मामले सामने आ रहे हैं। इससे देश के लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है। नेताओं ने कहा कि 22 लाख से अधिक छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ हुआ है, जिसकी नैतिक जिम्मेदारी लेते हुए केंद्रीय शिक्षा मंत्री को इस्तीफा देना चाहिए। कांग्रेस नेता महेंद्र वर्मा ने बताया कि पिछले 10 वर्षों में कई बार पेपर लीक की घटनाएं हुई हैं, जिससे छात्र और युवा वर्ग में भारी आक्रोश है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस पूरे मामले में बड़े कोचिंग संस्थान और प्रभावशाली लोग शामिल हैं, इसलिए छोटे लोगों के बजाय ‘बड़े मगरमच्छों’ पर कार्रवाई होनी चाहिए। कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि सरकार ने इस मामले में सख्त कदम नहीं उठाए, तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और उग्र किया जाएगा।
बॉलीवुड स्टार की शख्सियत सिर्फ एक्टर होने तक सीमित नहीं थी. उन्होंने मुसीबत के वक्त दोस्तों की खूब मदद की. उनका जब निधन हुआ, तब फिल्म इंडस्ट्री पर उनका करीब 1.27 करोड़ रुपये बकाया था. एक्टर के निधन के बाद जब परिवार पर आफत आई, तो फिल्ममेकर्स ने अपने हाथ पीछे खींच लिए. तब अंडरवर्ल्ड ने खुद फोन करके पैसा वसूलने की पेशकश की थी, पर उनके परिवार ने मदद को ठुकराते हुए अपने उसूलों और आत्मसम्मान को बरकरार रखा. उन्होंने गलत रास्ते के बजाय अपनी मेहनत पर भरोसा किया और खुद का बिजनेस शुरू कर परिवार को संभाला. अमजद खान के बेटे शादाब खान का सालों बाद दर्द बयां हुआ. उनका कहना है कि जो प्रोड्यूसर्स पैसा लौटाने में सक्षम थे, उन्होंने भी बकाया नहीं लौटाया.
नई दिल्ली: फिल्म ‘शोले’ का खूंखार विलेन ‘गब्बर सिंह’ यानी अमजद खान का नाम आज भी लोगों के जेहन में ताजा है. साल 1992 में उनके निधन से फिल्म इंडस्ट्री को बड़ा झटका लगा था. मगर उनके गुजरने से परिवार के सामने एक ऐसी चुनौती आई, जिसके बारे में किसी ने सोचा भी नहीं था. उस दौर में अंडरवर्ल्ड का बॉलीवुड पर काफी दबदबा हुआ करता था. अमजद खान की मौत के कुछ वक्त बाद उनके परिवार के पास एक अंजान नंबर से कॉल आया था. (फोटो साभार: AI से जेनरेटेड इमेज)
अमजद खान के बेटे शादाब खान ने विक्की लालवानी को दिए इंटरव्यू में बताया था कि उनके पिता के निधन के समय फिल्म इंडस्ट्री के कई बड़े लोगों पर उनका पैसा बकाया था. उस जमाने में अंडरवर्ल्ड अक्सर सितारों और डायरेक्टर्स को धमकाने या वसूली के लिए फोन किया करता था. इसलिए जब परिवार को फोन आया, तो वे डर गए कि कहीं कोई मुसीबत न आ जाए. लेकिन वह कॉल धमकी भरा नहीं था, बल्कि वह तो मदद के लिए किया गया था. (फोटो साभार: IMDb)
शादाब खान ने खुलासा किया कि उनके पिता का इंडस्ट्री पर करीब 1.27 करोड़ रुपये बकाया था. उन दिनों एक्टर्स को प्रोड्यूसर्स से ‘लैब लेटर’ मिलते थे, जो पेमेंट के वादे का एक ऑफिशियल कागज होता था. अमजद खान के पास ऐसे ढेरों लेटर्स थे, जिनकी कुल कीमत करोड़ों में थी. आज के हिसाब से देखें तो यह रकम बांद्रा जैसे इलाके में 3-4 आलीशान फ्लैट खरीदने के बराबर थी, जो उस समय के लिहाज से बहुत बड़ी बात थी. (फोटो साभार: IMDb)
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हैरानी की बात यह है कि अमजद खान ने उन लोगों का कर्ज पहले ही माफ कर दिया था, जिनकी माली हालत खराब थी. लेकिन यह 1.27 करोड़ रुपये उन बड़े और अमीर प्रोड्यूसर्स पर बकाया थे, जो आसानी से पैसा दे सकते थे. इसके बावजूद, उन नामी फिल्ममेकर्स में से कोई भी आगे नहीं आया और न ही किसी ने परिवार को वह पैसा लौटाने की जहमत उठाई. (फोटो साभार: IMDb)
अमजद खान के गुजरने के कुछ वक्त बाद मिडिल ईस्ट के एक गैंगस्टर का फोन शादाब के पास आया. उस शख्स ने कहा कि उसने सुना है कि अमजद साहब का बहुत सारा पैसा लोगों पर उधार है. उसने पेशकश की कि अगर परिवार चाहे, तो वह तीन दिन के अंदर सारा पैसा वसूल करके उनके घर पहुंचा सकता है. शादाब के लिए यह सुनना किसी फिल्मी सीन से कम नहीं था कि अंडरवर्ल्ड खुद उनकी मदद करना चाहता है. (फोटो साभार: IMDb)
शादाब की मां यानी अमजद खान की पत्नी ने इस मदद को लेने से साफ इनकार कर दिया. उन्होंने बहुत ही हिम्मत और आत्मसम्मान के साथ कहा कि अमजद खान ने अपने जीते जी कभी किसी के सामने हाथ नहीं फैलाया और न ही कभी अंडरवर्ल्ड से कोई एहसान लिया. वह नहीं चाहती थीं कि उनके जाने के बाद परिवार किसी गलत रास्ते से पैसा हासिल करे. (फोटो साभार: IMDb)
शादाब बताते हैं कि उनकी मां ने यह फैसला अपने उसूलों के लिए लिया था. उन्होंने साफ कह दिया था कि अगर लोग खुद से पैसा देना चाहें तो ठीक है, वरना ऊपरवाला उनका ख्याल रखेगा. उनकी मां ने किसी के आगे झुकने के बजाय खुद का बिजनेस शुरू किया और अपने दम पर परिवार को संभाला. उन्होंने अमजद खान की विरासत को ईमानदारी के साथ आगे बढ़ाया. (फोटो साभार: IMDb)
शादाब का खुलासे से पता चलता है कि बॉलीवुड की अंदरूनी दुनिया कितनी पेचीदा थी. जहां एक तरफ करण जौहर और राकेश रोशन जैसे दिग्गजों को अंडरवर्ल्ड से धमकियां मिलीं, वहीं अमजद खान के प्रति अंडरवर्ल्ड का यह नजरिया उनके ऊंचे कद को बयां करता है. (फोटो साभार: IMDb)
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पीएम मोदी ने कहा है इस तरह की पाबंदियां लगाने का तो कोई सवाल ही नहीं उठता। File
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विदेश यात्रा पर भारत सरकार के टैक्स-सैस लगाने की खबरों को गलत बताया। उन्होंने एक्स पोस्ट में लिखा- यह पूरी तरह से गलत है। इसमें जरा भी सच्चाई नहीं है।
उन्होंने लिखा कि विदेश यात्रा पर इस तरह की पाबंदियां लगाने का तो कोई सवाल ही नहीं उठता। हम अपने लोगों के लिए ईज ऑफ डूइंग बिजनेस और ईज ऑफ लिविंग को बेहतर बनाने के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध हैं।
मोदी का यह पोस्ट उन मीडिया पर आया, जिनमें दावा किया गया कि भारत सरकार विदेश यात्रा पर टैक्स/सेस/सरचार्ज लगाने पर विचार कर रही है। इसके लिए हाईलेवल पर चर्चा हो रही है।
2 दिन- 2 जगह: PM की विदेश यात्रा न करने, ईंधन कम उपयोग की अपील
11 मई: वडोदरा में मोदी बोले- पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करें
जहां संभव हो पेट्रोल डीजल का उपयोग कम करें और मेट्रो, इलेक्ट्रिक बस और पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करें।
विदेश में रहने वाले भारतीयों से कहूंगा कि विदेश यात्रा से बचें। कम से कम पांच विदेशी मेहमानों को भारत घुमाने लाइए।
सोने के आयात पर भी देश का बहुत बड़ा पैसा विदेश जाता है। जब तक हालात सामान्य न हों, हम सोने की खरीद टालें। गोल्ड की जरूरत नहीं है।
अगर लोग खाने के तेल का कम उपयोग करें तो इससे देश और शहर दोनों को फायदा होगा।
10 मई: हैदराबाद में पीएम बोले- विदेश यात्रा को टाल दें
देशहित में लोगों को एक साल तक सोना खरीदने और दान करने से बचना चाहिए।
अनावश्यक वाहन उपयोग कम करें, मेट्रो में सफर और कार पूलिंग करें। ज्यादा से ज्यादा लोगों को उसमें बैठाकर ले जाएं।
देश को रासायनिक उर्वरकों की खपत आधी करने का लक्ष्य रखना चाहिए और तेजी से प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ना चाहिए।
शादियों, छुट्टियों और अन्य कारणों से विदेश यात्रा कुछ समय के लिए टालना देशहित में होगा।
PM मोदी की 5 अपील
एक साल तक सोना न खरीदें- सोने के आयात में बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा खर्च होती है। देशहित में लोगों को एक साल तक सोना खरीदने और दान करने से बचना चाहिए।
पेट्रोल-डीजल बचाएं, कारपूलिंग करें- अनावश्यक वाहन उपयोग कम करें, मेट्रो में सफर और कारपूलिंग करें। ज्यादा से ज्यादा लोगों को उसमें बिठाकर ले जाएं।
खाद्य तेल की खपत कम करने पर जोर- हर परिवार अगर खाने के तेल का इस्तेमाल थोड़ा कम करे, तो इससे विदेशी मुद्रा की बचत होगी और लोगों की सेहत भी बेहतर रहेगी।
रासायनिक खाद की जगह प्राकृतिक खेती अपनाएं- देश को रासायनिक उर्वरकों की खपत आधी करने का लक्ष्य रखना चाहिए और तेजी से प्राकृतिक खेती की ओर बढ़ना चाहिए।
विदेश यात्राएं टालें- वैश्विक हालात और महंगे ईंधन के कारण भारत पर आर्थिक दबाव बढ़ रहा है। ऐसे में शादियों, छुट्टियों और अन्य कारणों से विदेश यात्रा कुछ समय के लिए टालना देशहित में होगा।
दिल्ली: इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए पार्किंग शुल्क में 50% छूट
नई दिल्ली नगर पालिका परिषद (NDMC) ने 18 मई से इलेक्ट्रिक वाहनों (EV) के लिए पार्किंग शुल्क में 50% छूट देने का ऐलान किया है। NDMC के वाइस चेयरमैन कुलजीत सिंह चहल ने कहा कि यह कदम ग्रीन मोबिलिटी और ईंधन बचत को बढ़ावा देने के लिए उठाया गया है। यह सुविधा NDMC के सभी पार्किंग स्थलों पर लागू होगी।
इसके साथ ही NDMC कर्मचारियों के लिए फ्री शटल बस सेवा भी शुरू कर दी गई है, जो तय समय पर उनके घरों से दफ्तर तक चलेगी। यह सेवा पालिका आवास सरोजिनी नगर, पालिका ग्राम लक्ष्मीबाई नगर, अमृत काल निवास जोर बाग रोड और बापू धाम फ्लैट्स चाणक्यपुरी से चलाई जाएंगी।
16 बसें हर सुबह 9 बजे तय पॉइंट पर पहुंचेंगी और 9.30 बजे पालिका केंद्र के लिए रवाना होंगी। शाम को 5.30 बजे पालिका केंद्र से चलकर 6 बजे तक वापस रिहायशी इलाकों में पहुंचेंगी। हर रूट के लिए एक नोडल अधिकारी भी नियुक्त किया गया है।
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पेट्रोल-डीजल कीमतों में वृद्धि, कांग्रेस बोली- चुनाव खत्म, वसूली शुरू: राहुल ने कहा- ₹3 का झटका आया, बाकी वसूली किस्तों में; अखिलेश बोले- साइकिल ही विकल्प
देश में पेट्रोल और डीजल 3-3 रुपए प्रति लीटर महंगे हो गए हैं। प्रमुख शहरों में CNG भी 2 रुपए प्रति किलो तक महंगी हो गई है। नए दाम आज 15 मई से लागू हो गए हैं। करीब 2 साल बाद दामों में ये बढ़ोतरी की गई है। विपक्षी दलों ने केंद्र सरकार की कड़ी आलोचना की है। सरकार पर बढ़ती महंगाई और आर्थिक दबाव के बीच आम लोगों पर बोझ बढ़ाने का आरोप लगाया है। पूरी खबर पढ़ें…
बरौनी रिफाइनरी की सुरक्षा के लिए प्रशासन ने बड़े कदम उठाए हैं। सुरक्षा व्यवस्था सुदृढ़ बनाए रखने एवं पेट्रोलियम उत्पादों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए सदर एसडीओ अनिल कुमार ने BNSS की धारा-163 के तहत निषेधाज्ञा लागू कर दिया है। यह निषेधाज्ञा आज से 1 जून की सुबह 6:00 बजे तक के लिए लगाया गया है। यह आदेश रिफाइनरी के गेट संख्या-3-D, 4-A एवं 1-B तथा रिफाइनरी टाउनशिप के 500 मीटर की परिधि में प्रभावी रहेगा। निषेधाज्ञा अवधि के दौरान उक्त क्षेत्रों में किसी भी प्रकार के धरना-प्रदर्शन, जुलूस, नारेबाजी अथवा पिकेटिंग की अनुमति नहीं होगी। मान्यता प्राप्त यूनियन को भी कार्यक्रम के लिए एसडीओ अनुमति लेना होगा। डीएम श्रीकांत शास्त्री ने बताया कि आईओसीएल बरौनी रिफाइनरी के मानव संसाधन महाप्रबंधक ने सूचना दिया है कि विस्तार परियोजना BR-09 के तहत कार्यरत कुछ संविदा श्रमिकों द्वारा रिफाइनरी के विभिन्न प्रवेश द्वारों पर आंदोलन एवं धरना-प्रदर्शन की योजना बनाई जा रही है। बरौनी रिफाइनरी एक सार्वजनिक उपयोगिता उद्योग है। इसके संचालन में किसी भी प्रकार का व्यवधान जिला, राज्य एवं राष्ट्र की पेट्रोलियम आपूर्ति व्यवस्था को प्रभावित कर सकता है। उक्त परिस्थिति के मद्देनजर एहतियातन यह निषेधाज्ञा लागू की गई है। आदेश का उल्लंघन करने वाले व्यक्तियों के विरुद्ध विधि सम्मत दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी। आवश्यक कार्रवाई के एसपी को भी सूचना दी गई है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीदरलैंड और नॉर्वे की डिप्लोमैटिक यात्राएं केवल हाथ मिलाने या फोटो खिंचवाने तक सीमित नहीं होंगी. यह भारत की उस गहरी चाल का हिस्सा है, जहां दिल्ली खुद को एक शांत लेकिन बेहद ताकतवर टेक्नोलॉजी और क्लाइमेट हब के रूप में देख रहा है. हिंडोल सेनगुप्ता के एनालिसिस के मुताबिक, ये दोनों देश भले ही दुनिया के नक्शे पर छोटे लगें, लेकिन इनके पास वो चाभी है जो भारत को भविष्य की महाशक्ति बना सकती है. मोदी का यह विजन भारत को न केवल आत्मनिर्भर बनाना है, बल्कि ग्लोबल सिस्टम में अपनी मर्जी चलाने की ताकत देना भी है. यह दौरा भारत की 21वीं सदी की महत्वाकांक्षाओं के स्तंभों को मजबूती देने वाला है.
नीदरलैंड और सेमीकंडक्टर का तिलिस्म क्या है?
जब भी चिप या सेमीकंडक्टर की बात होती है, तो अक्सर लोग अमेरिका या चीन का नाम लेते हैं. लेकिन असली खिलाड़ी नीदरलैंड की एएसएमएल (ASML) है. यह कंपनी ईयूवी (EUV) लिथोग्राफी मशीनें बनाती है, जिसके बिना दुनिया का कोई भी मॉडर्न चिप नहीं बन सकता.
यह मशीनें इतनी एडवांस हैं कि पूरी दुनिया में इनकी गिनती उंगलियों पर की जा सकती है. भारत को पता है कि अगर उसे चिप मेकिंग का हब बनना है, तो नीदरलैंड से दोस्ती बेहद जरूरी है. पीएम मोदी की यह कोशिश भारत को किसी एक सुपरपावर पर निर्भर रहने से बचाएगी.
भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षाएं घरेलू स्टार्टअप्स और इंटरनेशनल कोलैबोरेशन के बीच एक बैलेंस चाहती हैं. जब अमेरिका और चीन के बीच इस तकनीक को लेकर कोल्ड वॉर छिड़ा हो, तब भारत ने नीदरलैंड के साथ हाथ बढ़ाकर एक ‘तीसरा रास्ता’ चुन लिया है.
यह एक ऐसी पार्टनरशिप है जो न तो किसी देश पर दबाव डालती है और न ही तकनीक को लेकर किसी एक पर निर्भर करती है. भारत अपनी खुद की कैपेसिटी बिल्ड करने के लिए डच एक्सपर्ट्स की मदद ले रहा है, जो आने वाले समय में इलेक्ट्रॉनिक मार्केट में भारत को लीडर बना सकता है.
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खेती और निवेश का नया गेटवे कैसे बनेगा?
नीदरलैंड क्षेत्रफल में छोटा है, लेकिन खेती की तकनीक में दुनिया का उस्ताद है. भारत की बढ़ती जनसंख्या और बदलता मौसम खेती के लिए बड़ी चुनौती है. डच तकनीक के जरिए भारत वर्टिकल फार्मिंग और प्रिसिजन फार्मिंग को अपना सकता है. इससे न केवल पैदावार बढ़ेगी, बल्कि पानी की बचत भी होगी.
भारत में जिस तरह से क्लाइमेट चेंज का असर खेती पर दिख रहा है, उसे देखते हुए डच रिसर्च और बायोटेक्नोलॉजी एक वरदान साबित हो सकती है. मोदी चाहते हैं कि भारत के किसान केवल पेट भरने के लिए न उगाएं, बल्कि ग्लोबल मार्केट के लिए एक्सपोर्टर भी बनें.
इसके अलावा, नीदरलैंड यूरोप के फाइनेंशियल मार्केट का गेटवे है. एम्स्टर्डम का फाइनेंस स्ट्रक्चर भारतीय कंपनियों के लिए यूरोप के दरवाजे खोल देता है.
पीएम मोदी का यह दौरा भारतीय कंपनियों को इंटरनेशनल कैपिटल तक पहुंच दिलाने और यूरोप के बड़े निवेशकों को भारत की ओर खींचने की एक सोची-समझी रणनीति है.
नीदरलैंड के जरिए भारत अपने स्टार्टअप इकोसिस्टम को यूरोप के वेंचर कैपिटल से जोड़ना चाहता है, जो भारत के आर्थिक विकास की रफ्तार को दोगुना कर सकता है.
आर्कटिक में भारत की दिलचस्पी क्यों बढ़ रही है?
अक्सर लोग सोचते हैं कि भारत का आर्कटिक से क्या लेना-देना? सच तो यह है कि आर्कटिक की बर्फ पिघलने से भारत के मानसून पर सीधा असर पड़ता है. वहां छिपे खनिज और नए समुद्री रास्ते आने वाले समय में ग्लोबल ट्रेड का चेहरा बदल देंगे.
नॉर्वे इस क्षेत्र का सबसे बड़ा खिलाड़ी है. मोदी की नॉर्वे से दोस्ती का मतलब है कि भारत अब आर्कटिक के फैसलों में केवल दर्शक नहीं रहेगा.
हम वहां की राजनीति और संसाधनों में अपनी हिस्सेदारी तय करने जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर रूस और चीन के बढ़ते दबदबे को बैलेंस करेगा.
आर्कटिक की बदलती जिओपॉलिटिक्स में नॉर्वे एक लोकतांत्रिक और स्थिर पार्टनर है. भारत के वैज्ञानिक और कूटनीतिज्ञ नॉर्वे के अनुभव का फायदा उठाकर आर्कटिक गवर्नेंस में अपनी जगह बना सकते हैं.
यह भारत की समुद्री सुरक्षा और ट्रेड रूट के लिए भी अहम है. अगर नए रूट खुलते हैं, तो भारत के लिए ग्लोबल सप्लाई चेन में अपनी स्थिति मजबूत करने का यह सबसे बड़ा मौका होगा.
पीएम मोदी ने इसे भांप लिया है और नॉर्वे के साथ एक मजबूत ‘पोलर पार्टनरशिप’ की नींव रख दी है.
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एनर्जी ट्रांजिशन और क्लाइमेट का क्या है कनेक्शन?
नॉर्वे ने अपने तेल भंडार का इस्तेमाल तो किया, लेकिन साथ ही वह रिन्यूएबल एनर्जी और इलेक्ट्रिक गाड़ियों का ग्लोबल लीडर बन गया. भारत को अपनी एनर्जी जरूरतों के लिए कोयले और तेल पर निर्भरता कम करनी है.
नॉर्वे के पास वो मॉडल है जिससे हम सीख सकते हैं कि पर्यावरण को बचाते हुए विकास कैसे किया जाए.
नॉर्वे का सोवरेन वेल्थ फंड दुनिया के सबसे बड़े निवेश फंड्स में से एक है, और भारत की रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स में नॉर्वेजियन इन्वेस्टमेंट एक बड़ा बदलाव ला सकता है.
पीएम मोदी का नॉर्वे के साथ जुड़ना यह संदेश देता है कि भारत अपनी एनर्जी जरूरतों को लेकर गंभीर है. हम केवल जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) को छोड़ने की बात नहीं कर रहे, बल्कि उसे रिप्लेस करने के लिए दुनिया की सबसे बेहतरीन तकनीक को अपना रहे हैं.
नॉर्वे के एक्सपर्ट्स की मदद से भारत अपने रिन्यूएबल एनर्जी के लक्ष्यों को समय से पहले पूरा कर सकता है. यह पार्टनरशिप क्लाइमेट चेंज के खिलाफ भारत की लड़ाई को ग्लोबल लेवल पर एक नई पहचान देगी.
भारत की नई डिप्लोमैटिक जियोमेट्री कितनी घातक है?
यह पूरा दौरा किसी सैनिक गठबंधन से कम नहीं है. मोदी ने एक तरफ नीदरलैंड को चुना जो टेक्नोलॉजी का पावरहाउस है और दूसरी तरफ नॉर्वे को जो भविष्य की जियोपॉलिटिक्स का केंद्र है. भारत अब अपनी शर्तों पर डील कर रहा है. हम किसी गुट में शामिल नहीं हो रहे, बल्कि अपना खुद का रास्ता बना रहे हैं.
यह ‘न्यू इंडिया’ की वो पहचान है जहां हम छोटे देशों की बड़ी ताकतों को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करना जानते हैं. भारत अब केवल वस्तुओं के व्यापार पर फोकस नहीं कर रहा, बल्कि ‘टेक्नोलॉजिकल सोवरेनिटी’ पर काम कर रहा है.
इन दौरों का असली मकसद भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का एक अनिवार्य हिस्सा बनाना है. चाहे वो सेमीकंडक्टर हो, आर्कटिक के संसाधन हों या क्लीन एनर्जी की तकनीक – भारत हर उस मेज पर बैठना चाहता है जहां भविष्य के फैसले लिए जा रहे हैं.
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पीएम मोदी की यह ‘नॉर्डिक डिप्लोमेसी’ दिखाती है कि भारत अब केवल अपने पड़ोस तक सीमित नहीं है, बल्कि वह दुनिया के सबसे ऊंचे ध्रुवों और सबसे सूक्ष्म चिप्स तक अपनी पहुंच बना चुका है. यह डिप्लोमेसी आने वाले दशकों में भारत की ग्लोबल पोजिशन को तय करेगी.
2026 में बॉक्स ऑफिस पर ऐतिहासिक ₹3,000 करोड़ का आंकड़ा पार किया करने वाली रणवीर सिंह की फिल्म सीरीज ‘धुरंधर’ ने भारतीय सिनेमा में हाई-ऑक्टेन स्पाई-थ्रिलर और देशभक्ति जॉनर को एक नए लेवल पर पहुंचा दिया है. फिल्म के जबरदस्त एक्शन, सस्पेंस और देशभक्ति की भावना ने दर्शकों को थिएटर में खड़े होकर तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया. अगर आपको भी ‘धुरंधर’ के रोमांचक सफर, सीक्रेट मिशन और रोंगटे खड़े कर देने वाले ट्विस्ट एंड टर्न्स से प्यार हो गया है, तो बॉलीवुड के पास 6 और बेहतरीन फिल्में हैं जो आपकी पसंदीदा लिस्ट का हिस्सा बनने की गारंटी हैं. इनमें से एक फिल्म 2012 में हर कल्ट सिनेमा लवर की पहली पसंद बन गई थी. तो आइए, इन 6 ब्लॉकबस्टर फिल्मों के बारे में जानें.
नई दिल्ली. सिनेमा की दुनिया में जब कोई फिल्म ‘धुरंधर’ जैसी बड़ी सफलता हासिल करती है, तो यह न केवल रेवेन्यू जेनरेट करती है, बल्कि दर्शकों की एक अनोखे तरह के सिनेमा के लिए भूख भी बढ़ाती है. ‘धुरंधर’ में एक जासूस और देश के रक्षक के तौर पर रणवीर सिंह की एनर्जी ने दर्शकों को हॉलीवुड की ‘जेम्स बॉन्ड’ और ‘मिशन: इम्पॉसिबल’ को भूलने पर मजबूर कर दिया. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि बॉलीवुड में इंटेलिजेंस एजेंसियों (RAW) और अंडरकवर एजेंट्स की कहानियों का एक शानदार इतिहास रहा है? अगर आपको ‘धुरंधर’ का सस्पेंस, दुश्मन के ऑपरेशन्स में घुसपैठ और देशभक्ति वाला बैकग्राउंड म्यूजिक पसंद आया, तो नीचे दी गई 6 फिल्में आपके लिए एक खजाना हैं.
1. एक था टाइगर (2012): यह लिस्ट उस फिल्म से शुरू होनी चाहिए जिसने बॉलीवुड में स्पाई-थ्रिलर जॉनर को पूरी तरह से बदल दिया. हम 2012 की सबसे पसंदीदा और कल्ट फिल्म ‘एक था टाइगर’ की बात कर रहे हैं. कबीर खान के डायरेक्शन और सलमान खान और कैटरीना कैफ स्टारिंग इस फिल्म ने इतिहास रच दिया. कहानी टाइगर के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक टॉप RAW एजेंट है, जिसे एक साइंटिस्ट की एक्टिविटीज पर नजर रखने के लिए डबलिन भेजा जाता है, लेकिन वहां उसे ISI एजेंट जोया से प्यार हो जाता है. ‘धुरंधर’ की तरह, इस फिल्म में भी इंटरनेशनल लेवल के एक्शन सीन थे. यह फिल्म 2012 में सबकी पसंदीदा बन गई क्योंकि यह पहली फिल्म थी जिसमें एक जासूस की जिंदगी के इंसानी और इमोशनल पहलुओं को खूबसूरती से दिखाया गया था. अगर आपको ‘धुरंधर’ का स्टाइल और स्वैग पसंद आया, तो टाइगर का पहला मिशन आपको आज भी रोमांचित कर देगा.
2. मद्रास कैफे (2013): ‘एक था टाइगर’ के कमर्शियल सिनेमा के बिल्कुल उलट, डायरेक्टर शूजित सरकार ने 2013 में एक ऐसी फिल्म दी जिसने दर्शकों को हैरान कर दिया. जॉन अब्राहम स्टारर ‘मद्रास कैफे’ एक बहुत ही दमदार, रॉ और रियलिस्टिक स्पाई थ्रिलर है. यह 1980 के दशक के आखिर और 1990 के दशक की शुरुआत में श्रीलंका के सिविल वॉर और एक पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री की हत्या के बैकग्राउंड पर बनी है. जॉन अब्राहम एक इंडियन आर्मी इंटेलिजेंस ऑफिसर का रोल कर रहे हैं जो एक सीक्रेट ऑपरेशन को लीड कर रहे हैं. फिल्म में घिसे-पिटे गाने या कमर्शियल ड्रामा नहीं है. ‘धुरंधर’ में नेशनल सिक्योरिटी और इंटेलिजेंस एजेंसियों के अंदरूनी कामकाज को लेकर जो सीरियस चिंता है, वही ‘मद्रास कैफे’ में शुरू से आखिर तक साफ दिखती है. यह फिल्म इंडियन सिनेमा की सबसे बेहतरीन पॉलिटिकल थ्रिलर में से एक है.
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3. बेबी (2015): जब बिना किसी फालतू ड्रामा के टेररिज्म के खिलाफ सीधे एक्शन की बात आती है, तो डायरेक्टर नीरज पांडे की ‘बेबी’ का कोई मुकाबला नहीं है. 2015 में रिलीज हुई इस फिल्म में अक्षय कुमार, राणा दग्गुबाती, अनुपम खेर और तापसी पन्नू ने लीड रोल किए थे. कहानी इंडिया की सीक्रेट इंटेलिजेंस विंग ‘बेबी’ के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे देश के खिलाफ टेररिस्ट हमलों को होने से पहले ही नाकाम करने का काम सौंपा गया है. फिल्म का स्क्रीनप्ले इतना जबरदस्त है कि देखने वाले एक सेकंड के लिए भी स्क्रीन से अपनी नजरें नहीं हटा पाते. खासकर दूसरा हाफ, जहां टीम सऊदी अरब से एक खतरनाक टेररिस्ट को इंडिया लाने के लिए एक सीक्रेट मिशन पर निकलती है, ‘धुरंधर’ के क्लाइमैक्स की याद दिलाता है. देशभक्ति के जोश से भरी यह फिल्म आपके रोंगटे खड़े कर देगी.
4. राजी (2018): जासूसी फिल्में सिर्फ बंदूकें चलाने और कारें उड़ाने के बारे में नहीं होतीं. इनमें बहुत ज्यादा मेंटल स्ट्रेस और पर्सनल सैक्रिफाइस भी शामिल होता है. मेघना गुलजार के डायरेक्शन में बनी ‘राजी’ इस साइकोलॉजिकल पहलू को खूबसूरती से दिखाती है. हरिंदर सिक्का के नॉवेल ‘कॉल्ड सहमत’ पर आधारित इस फिल्म में आलिया भट्ट और विक्की कौशल हैं. फिल्म की कहानी 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय की है, जहां एक जवान कश्मीरी लड़की ‘सहमत’ (आलिया भट्ट) को उसके पिता के कहने पर भारत के लिए जासूसी करने के लिए एक पाकिस्तानी मिलिट्री ऑफिसर के घर बहू के तौर पर भेजा जाता है. जहां ‘धुरंधर’ पूरी तरह से एक्शन के बारे में है, वहीं ‘राजी’ सस्पेंस और इमोशंस का ऐसा तूफान पेश करती है जो आपके दिल को छू जाएगा. आलिया भट्ट की परफॉर्मेंस और ‘ऐ वतन मेरे वतन’ के म्यूजिक ने इस फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर बना दिया और दर्शकों के दिलों में अमर कर दिया.
5. रोमियो अकबर वाल्टर – RAW (2019): जॉन अब्राहम की एक और बेहतरीन फिल्म जिसका ‘धुरंधर’ के फैंस को जरूर मजा आएगा, वह है ‘रोमियो अकबर वाल्टर’ (RAW), जो 2019 में रिलीज हुई थी. रॉबी ग्रेवाल के डायरेक्शन में बनी यह फिल्म भी 1971 के ऐतिहासिक समय के बैकग्राउंड पर बनी है. इस फिल्म में जॉन अब्राहम एक बैंक एम्प्लॉई से एक अंडरकवर RAW एजेंट में बदल जाते हैं, जिसे एक नई पहचान के साथ पाकिस्तान भेजा जाता है. फिल्म में गहराई से दिखाया गया है कि कैसे एक जासूस को अपने देश के लिए अपनी पहचान, अपने परिवार और अपनी भावनाओं को कुर्बान करना पड़ता है. फिल्म के ट्विस्ट इतने दिलचस्प हैं कि दर्शकों को आखिरी सीन तक समझ नहीं आता कि आगे क्या होने वाला है. ‘धुरंधर’ का रहस्यमयी और सीक्रेट पहलू इस फिल्म की जान है.
6. पठान (2023): अगर आपको ‘धुरंधर’ का बड़ा स्केल, विदेश में फिल्माए गए खतरनाक स्टंट और शानदार VFX काम पसंद आया, तो 2023 की मेगा-ब्लॉकबस्टर ‘पठान’ आपके लिए एक विजुअल ट्रीट है. सिद्धार्थ आनंद के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म ने शाहरुख खान की चार साल बाद बड़े पर्दे पर वापसी को दिखाया और इतिहास रच दिया. ‘पठान’ पूरी तरह से कमर्शियल और बड़ी जासूसी फिल्म है, जिसमें एक देश निकाला हुआ रॉ एजेंट देश को एक खतरनाक बायोलॉजिकल हमले से बचाने के लिए एक प्राइवेट आतंकवादी संगठन का सामना करता है. दीपिका पादुकोण और जॉन अब्राहम की परफॉर्मेंस ने भी फिल्म में आग लगा दी.
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भारतीय किसान यूनियन (बी.आर. अम्बेडकर) ने नीट (NEET) परीक्षा में धांधली और परीक्षा रद्द होने के विरोध में डीएम ऑफिस पर प्रदर्शन किया। उन्होंने इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारी को ज्ञापन भी दिया। उनका कहना है कि पेपर लीक करने वाले आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।
संगठन ने ज्ञापन के माध्यम से लाखों परीक्षार्थियों के भविष्य पर पड़ने वाले प्रभाव और नीट परीक्षा में हुई अनियमितताओं पर चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि किसान और मजदूर वर्ग के छात्र कड़ी मेहनत कर डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं, लेकिन हालिया परिणामों और पेपर लीक की खबरों ने उनके भरोसे को तोड़ा है।
सीबीआई से जांच करने की मांग यूनियन ने अपनी मुख्य मांगों में नीट परीक्षा में हुई धांधली की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की मांग की है। यह जांच सीबीआई या किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में सुनिश्चित करने की बात कही गई है।
इसके अतिरिक्त, भविष्य की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए एक सख्त कानून बनाने की मांग की गई है, ताकि पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोका जा सके। संगठन ने पेपर लीक माफिया और इस भ्रष्टाचार में लिप्त बड़े अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की भी मांग की है।
उनकी मांग है कि उन सभी योग्य छात्रों को न्याय मिले जिन्होंने अपनी मेहनत से अंक प्राप्त किए हैं, और पूरी प्रक्रिया को भ्रष्टाचार मुक्त बनाया जाए।
भारतीय किसान यूनियन (बी.आर. अम्बेडकर) संगठन के कार्यकर्ता आरिफ चौहान ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पेपर लीक माफिया बार-बार ऐसी घटनाओं को अंजाम देते हैं, जिससे छात्रों का भविष्य खराब होता है। चौहान ने मांग की कि पेपर लीक करने वाले या करवाने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। संगठन के सदस्यों ने अपनी मांगों को लेकर जिलाधिकारी से मुलाकात भी की।
प्रदर्शन में यह रहे मौजूद इस दौरान मोहित किनापुर जिला अध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन अंबेडकर, आरिफ चौहान पचपेड़ा प्रदेश अध्यक्ष, नीरज कश्यप युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष, वंश प्रधान हसनपुर, सुमित सैनी व अन्य पदाधिकारियों मौजूद रहे।
जमुई के खैरा प्रखंड में स्थित नरियाना-मांगोबंदर पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद शुक्रवार को जमुई सांसद अरुण भारती ने पुल स्थल का निरीक्षण किया। पुल की जर्जर स्थिति के कारण बड़े वाहनों का आवागमन पूरी तरह रोक दिया गया है। पैदल यात्रियों को भी आवाजाही में कठिनाई हो रही है। सांसद ने जिला प्रशासन से जल्द वैकल्पिक व्यवस्था करने को कहा है। पुल के दोनों छोर पर बैरिकेडिंग और लोहे की रेलिंग लगाई गई है, जिससे भारी, तीनपहिया और चारपहिया वाहनों का परिचालन पूरी तरह बंद है। इससे आसपास के गांवों के निवासियों की परेशानी बढ़ गई है। बाजार, अस्पताल, स्कूल-कॉलेज और दैनिक कार्यों के लिए लोगों को अब लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। ग्रामीण फिलहाल पैदल ही पुल पार कर रहे हैं। नरियाना पुल गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुका सांसद अरुण भारती ने निरीक्षण के दौरान बताया कि नरियाना पुल गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुका है, और बड़ी गाड़ियों का परिचालन सुरक्षित नहीं है। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए जिला प्रशासन ने पुल पर प्रतिबंध लगाया है। उन्होंने जानकारी दी कि एक अस्थायी डायवर्सन पुल के समानांतर बनाया जाएगा, जिससे छोटी गाड़ियों का परिचालन संभव हो सकेगा। डायवर्सन निर्माण का टेंडर चार या पांच जून तक जारी होने की संभावना है। डायवर्सन केवल एक अस्थायी समाधान होगा सांसद ने स्पष्ट किया कि यह डायवर्सन केवल एक अस्थायी समाधान होगा। स्थायी समाधान के लिए प्रयास किए जा रहे हैं कि इस पुल को एनएच-333ए से जोड़ा जाए। इससे राष्ट्रीय राजमार्ग मानकों के अनुरूप एक मजबूत और टिकाऊ पुल का निर्माण हो सकेगा। उन्होंने कहा कि इस दिशा में लगातार पहल की जा रही है और जल्द ही सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद है।