Friday, August 21, 2026
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एग्रीगेटर पॉलिसी का पोर्टल शुरू, बिना लाइसेंस नहीं चलेंगी सेवाएं: ऑनलाइन करना होगा लाइसेंस के लिए आवेदन, पांच लाख रुपये लाइसेंस फीस – Lucknow News




उत्तर प्रदेश में ऐप और डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए यात्री व डिलीवरी सेवाएं देने वाले एग्रीगेटर्स के लिए परिवहन विभाग ने लाइसेंस की प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी है। एग्रीगेटर पॉलिसी के तहत विभाग ने upmyfleet.com पोर्टल शुरू किया है। अब एग्रीगेटर और डिलीवरी सेवा प्रदाताओं को लाइसेंस के लिए इसी पोर्टल पर आवेदन करना होगा। पहले से सेवाएं दे रही कंपनियों को भी जल्द लाइसेंस के लिए आवेदन करना होगा, जबकि नई कंपनी बिना लाइसेंस के एग्रीगेटर या डिलीवरी सेवा शुरू नहीं कर सकेगी। परिवहन राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने बताया कि केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय (MoRTH) की गाइडलाइन के तहत पोर्टल तैयार किया गया है। आवेदन के समय 25 हजार रुपये फीस देनी होगी। लाइसेंस जारी करने की फीस पांच लाख रुपये तय की गई है। ऑनलाइन आने वाले आवेदनों पर संबंधित प्राधिकरण फैसला करेगा। वाहनों की संख्या के हिसाब से देनी होगी सिक्योरिटी मनी पॉलिसी में एग्रीगेटर की फ्लीट के हिसाब से सिक्योरिटी मनी भी तय की गई है। 100 बसों या 1,000 अन्य मोटर वाहनों तक के लिए 10 लाख रुपये की सुरक्षा राशि देनी होगी। 1,000 बसों या 10 हजार अन्य वाहनों तक यह राशि 25 लाख रुपये होगी। इससे अधिक वाहनों की फ्लीट होने पर 50 लाख रुपये की सिक्योरिटी मनी जमा करनी होगी। ड्राइवर का चरित्र सत्यापन और मनोवैज्ञानिक परीक्षण यात्रियों, खासकर महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा को लेकर पॉलिसी में कई प्रावधान किए गए हैं। वाहनों की लाइव ट्रैकिंग के साथ प्रत्येक ऑनबोर्ड ड्राइवर का चरित्र सत्यापन और मनोवैज्ञानिक परीक्षण कराया जाएगा। ड्राइवरों को समय-समय पर रिफ्रेशर ट्रेनिंग भी दी जाएगी। यात्रियों की शिकायतों के निस्तारण के लिए हर एग्रीगेटर को ग्रीवांस रिड्रेसल ऑफिसर नियुक्त करना होगा। पॉलिसी में यात्रियों के लिए बीमा की व्यवस्था भी शामिल है। वहीं प्रत्येक चालक के कल्याण के लिए एग्रीगेटर को पांच लाख रुपये का हेल्थ इंश्योरेंस और 10 लाख रुपये का टर्म इंश्योरेंस उपलब्ध कराना होगा। बेस फेयर से 50% से ज्यादा नहीं बढ़ सकेगा किराया एग्रीगेटर कंपनियों की मनमानी किराया बढ़ोतरी पर भी रोक लगाने की व्यवस्था की गई है। डायनेमिक प्राइसिंग के दौरान निर्धारित बेस फेयर से अधिकतम 50 प्रतिशत ज्यादा किराया ही लिया जा सकेगा। वहीं ट्रिप बुक होने के बाद निर्धारित समय तक यात्री को पिकअप नहीं करने पर चालक पर 100 रुपये की पेनाल्टी लगेगी। इसका लाभ यात्री को अगली ट्रिप में दिया जाएगा। इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा, NCR में निगरानी पॉलिसी में वाहनजनित वायु प्रदूषण कम करने और एग्रीगेटर की फ्लीट को धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक मोबिलिटी की ओर ले जाने का प्रावधान भी किया गया है। खासकर एनसीआर में चलने वाले वाहनों की पोर्टल के जरिए लगातार निगरानी की जाएगी। इसके अलावा लाइसेंस की शर्तों या मोटर वाहन अधिनियम और नियमावली के प्रावधानों का उल्लंघन करने पर पेनाल्टी लगाई जा सकेगी। परिवहन विभाग के मुताबिक पॉलिसी का उद्देश्य यात्रियों को सुरक्षित, किफायती और आसानी से उपलब्ध परिवहन सेवा देना है। इसके दायरे में डिजिटल प्लेटफॉर्म के जरिए कुरियर, पैकेज और पार्सल की डिलीवरी के लिए चालक को विक्रेता, ई-कॉमर्स इकाई या खरीदार से जोड़ने वाली सेवाएं भी शामिल होंगी।



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पेरू में 6.7 तीव्रता का भूकंप आया: झटके कई इलाकों में महसूस हुए, नुकसान की खबर नहीं


2 मिनट पहले

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यह तस्वीर पेरू के इका शहर के पास की है। जहां भूकंप के झटके लगने के बाद लोग सड़क पर निकल आए।

पेरू के दक्षिणी हिस्से में गुरुवार को 6.7 तीव्रता का भूकंप आया। भूकंप से नुकसान की कोई खबर नहीं मिली।

भूकंप स्थानीय समय के अनुसार दोपहर 1 बजे (भारतीय समयानुसार रात 11:30 बजे) आया।

इसका केंद्र आयाकूचो क्षेत्र के पैरिनाकोचास प्रांत में उपाहुआचो शहर से 38 किलोमीटर उत्तर-पश्चिम में था।

भूकंप की गहराई 66.7 किलोमीटर थी। दक्षिणी पेरू के कई इलाकों में इसके झटके महसूस किए गए, जिनमें इका और अरेकिपा भी शामिल हैं।

भूकंप से सबसे ज्यााद प्रभावित इलाका एडीज पर्वतीय रेंज के आसपास का है। भूकंप के झटके लगने के बाद पहाड़ों से चट्टानें गिरने लगीं।

भूकंप से सबसे ज्यााद प्रभावित इलाका एडीज पर्वतीय रेंज के आसपास का है। भूकंप के झटके लगने के बाद पहाड़ों से चट्टानें गिरने लगीं।

पेरू रिंग ऑफ फायर का हिस्सा, अक्सर आते हैं भूकंप

पेरू प्रशांत महासागर के रिंग ऑफ फायर का हिस्सा है। यह इलाका भूकंपीय गतिविधियों के लिए जाना जाता है, इसलिए यहां अक्सर भूकंप आते हैं।

साल 2007 में इका क्षेत्र के एक प्रांत में 7.9 तीव्रता का भूकंप आया था। इसमें करीब 600 लोगों की मौत हुई थी।

साल 2026 में वेनेजुएला में आया सबसे बड़ा भूकंप, 6 हजार मौतें

इस साल वेनेजुएला में सबसे बड़ा भूकंप आया। 24 जून को 7.2 की तीव्रता से आए भूकंप में 6 हजार से ज्यादा मौतें हुईं थीं। इसके अलावा कोलंबिया में 10 अगस्त को आए भूकंप में 70 से ज्यादा जानें गईं थीं।

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भूकंप से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें…

कोलंबिया में भूकंप से 224 लोगों की मौत, 1200 घायल: 86 इमारतें गिरीं

साउथ अमेरिकी देश कोलंबिया में 11 अगस्त की रात आए 7.4 तीव्रता के भूकंप से अब तक 224 लोगों की मौत हो गई है। पूरी खबर यहां पढ़ें…



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9 मौतों वाले जहरीली शराब कांड में MP कनेक्शन: उज्जैन से मुख्य आरोपी रईस गिरफ्तार; मुरैना के ‘डॉक्टर’ ने बनाई थी शराब, उसकी भी मौत – Bhopal News


गुजरात के भावनगर में जहरीली शराब पीने के कारण हुई 9 लोगों की मौत के मामले में गुजरात पुलिस ने मामले के मुख्य आरोपी रईस को उज्जैन से गिरफ्तार किया है। बताया जा रहा है कि रईस की ससुराल भोपाल के करोंद इलाके में है। उसका नाम सामने आने के बाद से ही पुलिस

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मुरैना का नरेंद्र था एक्सपर्ट

जांच के दौरान मुरैना निवासी नरेंद्र यादव उर्फ ‘डॉक्टर’ की भूमिका भी उजागर हुई है। पुलिस के अनुसार, रईस नरेंद्र की अवैध शराब बनाने में हासिल महारत से अच्छी तरह वाकिफ था, इसलिए उसने नरेंद्र को गुजरात आमंत्रित किया था। वहां दोनों ने भावनगर के स्थानीय शराब तस्कर गौतम सोलंकी के साथ हाथ मिला लिया।

आरोप है कि नरेंद्र और उसके साथियों की मौजूदगी में जहरीली शराब की 25 पेटियां तैयार की गई थीं। यही शराब पीने की वजह से लोगों की जान गई। विडंबना यह रही कि खुद नरेंद्र ने भी वही शराब पी, जिससे उसकी भी मौत हो गई।

FSL (फॉरेंसिक) जांच में भी पुष्टि हुई है कि जप्त किए गए शराब के नमूनों में 38.59% मिथाइल अल्कोहल (मेथनॉल) और मात्र 0.94% इथाइल अल्कोहल (एथेनॉल) पाया गया।

नरेंद्र को कहते थे डॉक्टर

मुरैना के डूंगरपुर किरार गांव का रहने वाला नरेंद्र नकली शराब तैयार करने में बेहद माहिर था, इसी कारण उसे ‘डॉक्टर’ कहा जाने लगा। हालांकि उसके परिवार का दावा है कि वह सामान्य मजदूर था और 15 अगस्त को पहली बार काम के सिलसिले में गुजरात गया था।

मौत के बाद परिजन बिना पुलिस को सूचित किए उसका शव मुरैना ले आए थे। इस पर गुजरात पुलिस ने मुरैना पुलिस से शव वापस भेजने को कहा, लेकिन परिजनों के कड़े विरोध के बाद स्थानीय स्तर पर ही पोस्टमार्टम संपन्न कराया गया।

5 साल पहले मुरैना में भी हुई थीं 24 मौतें

मुरैना जिले में 10 जनवरी 2021 को ज़हरीली शराब पीने से 24 लोगों ने अपनी जान गंवाई थी। अब भावनगर कांड में नरेंद्र का नाम जुड़ने से मध्य प्रदेश और गुजरात के बीच फैले इस नेटवर्क की जांच और संवेदनशील हो गई है।

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जहरीली शराब मामले में कांग्रेस का आबकारी कार्यालय पर धरना

गुजरात में जहरीली शराब से हुई मौतों का मामला अब उज्जैन में भी राजनीतिक रंग ले चुका है। गुरुवार को उज्जैन जिला कांग्रेस ने रेलवे स्टेशन स्थित आबकारी कार्यालय पर धरना प्रदर्शन किया। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं ने अधिकारियों से लगभग एक घंटे तक मामले को लेकर सवाल-जवाब किए।पूरी खबर पढ़ें



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न मावा चाहिए, न ज्यादा घी! मिल्क पाउडर से बनाएं स्वादिष्ट रोल बर्फी, जानिए रेसिपी

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Milk Powder Barfi Recipe: घर पर मिठाई बनाने के लिए हर बार मावा और ज्यादा घी की जरूरत नहीं होती. मिल्क पाउडर, दूध, चीनी और थोड़े से देसी घी से आसान रोल बर्फी तैयार की जा सकती है. खजूर, काजू और पिस्ता की स्टफिंग इसके स्वाद को और खास बनाती है. तैयार मिश्रण को रोल बनाकर करीब 30 मिनट फ्रीजर में रखने से यह अच्छी तरह सेट हो जाता है. सेट होने के बाद इसे गोल स्लाइस में काटकर खूबसूरत बर्फी तैयार की जा सकती है. त्योहार, पूजा या अचानक आए मेहमानों के लिए यह झटपट बनने वाली मिठाई अच्छा विकल्प हो सकती है.

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खजूर काजू पिस्ता बर्फी (इमेज AI)

Milk Powder Barfi: कभी-कभी घर में मिठाई खाने का मन तो बहुत करता है, लेकिन मावा खरीदने या उसे घंटों तक भूनने का झंझट बिल्कुल नहीं भाता. खासकर जब अचानक मेहमान आ जाएं या त्योहार के मौके पर कुछ मीठा बनाना हो, तब ऐसी रेसिपी की तलाश रहती है जो कम सामग्री में जल्दी तैयार हो जाए, अगर आप भी कुछ ऐसा ही आसान विकल्प ढूंढ रहे हैं, तो सुमित्रा चंदा की रसोई से मिली मिल्क पाउडर रोल बर्फी की यह रेसिपी काम की हो सकती है. इसमें न मावा चाहिए और न ही ज्यादा घी. सिर्फ आधा कप दूध, दो कप मिल्क पाउडर और एक चम्मच देसी घी की मदद से स्वादिष्ट मिठाई तैयार की जा सकती है.

ऊपर से ड्राई फ्रूट्स की स्टफिंग इसे देखने में भी खास बनाती है. सबसे अच्छी बात यह है कि इसे बनाने का तरीका इतना सीधा है कि पहली बार मिठाई बनाने वाला भी इसे आसानी से ट्राई कर सकता है.

मिल्क पाउडर बर्फी बनाने के लिए सामग्री
इस आसान मिठाई के लिए आपको दो कप मिल्क पाउडर, एक चौथाई कप चीनी, आधा कप दूध और एक छोटा चम्मच देसी घी चाहिए. स्वाद और रंग को थोड़ा आकर्षक बनाने के लिए कुछ बूंदें पीला फूड कलर लिया जा सकता है. स्टफिंग के लिए कटे हुए खजूर, काजू और पिस्ता इस्तेमाल करें. चाहें तो अपनी पसंद के दूसरे ड्राई फ्रूट्स भी इसमें शामिल कर सकते हैं.

ऐसे तैयार करें बर्फी का मिश्रण
सबसे पहले एक नॉन-स्टिक पैन लें और उसमें मिल्क पाउडर डालें. अब इसमें चीनी और आधा कप दूध मिलाएं. ध्यान रखें कि गैस तेज न हो. मिश्रण को अच्छी तरह चलाते रहें, ताकि मिल्क पाउडर में गुठलियां न बनें. शुरुआत में मिश्रण थोड़ा पतला लगेगा, लेकिन गर्म होते ही धीरे-धीरे गाढ़ा होने लगेगा. जब मिश्रण गाढ़ा होने लगे, तब इसमें पीले फूड कलर की कुछ बूंदें डालकर अच्छी तरह मिला दें. बहुत ज्यादा कलर डालने की जरूरत नहीं है. हल्का रंग भी बर्फी को सुंदर लुक देने के लिए काफी रहेगा.

(इमेज AI)

एक चम्मच घी से आएगी मिठास में नरमी
अब इस गाढ़े होते मिश्रण में एक छोटा चम्मच देसी घी डालें. घी मिलाने के बाद मिश्रण को लगातार चलाते रहें. कुछ देर में यह पैन के किनारों को छोड़ने लगेगा और एक जगह इकट्ठा होकर आटे जैसे डो का रूप लेने लगेगा. जब मिश्रण पूरी तरह से इकट्ठा हो जाए, तब गैस बंद कर दें. इसे एक प्लेट में निकालें और कुछ देर हल्का ठंडा होने दें. यहां एक बात का ध्यान रखना जरूरी है कि मिश्रण बहुत गर्म रहते हुए हाथों से न मसलें.

ड्राई फ्रूट्स से तैयार होगी स्टफिंग
मिश्रण हल्का ठंडा होने पर इसे हाथों से अच्छी तरह मसलकर मुलायम डो जैसा बना लें. अब इसके दो हिस्से करें. एक हिस्सा थोड़ा बड़ा और दूसरा छोटा रखें. बड़े हिस्से में कटे हुए खजूर, काजू और पिस्ता डालकर अच्छी तरह मिला दें. अब इसे हाथों की मदद से लंबा रोल जैसा आकार दें. कोशिश करें कि ड्राई फ्रूट्स पूरे मिश्रण में बराबर फैल जाएं, ताकि बर्फी की हर स्लाइस में स्टफिंग का स्वाद मिले.

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राजस्थान में 473 घुमंतू परिवारों को मिला स्थायी आशियाना: CM ने सौंपे फ्लैट; प्रवासी भारतीयों के सहयोग से शिक्षा-रोजगार की पहल भी तेज – Jaipur News




राजस्थान में लंबे समय से स्थायी आश्रय के लिए संघर्ष कर रहे घुमंतू, अर्ध-घुमंतू और विमुक्त समुदायों के 473 परिवारों को अब अपना पक्का घर मिल गया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 13 अगस्त को लाभार्थी परिवारों को आवास आवंटन सौंपे। स्थायी पता नहीं होने से इन परिवारों को सरकारी योजनाओं और बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच में परेशानी होती थी। आवास मिलने के बाद अब इन समुदायों के बच्चों की शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। घर से शिक्षा तक, घुमंतू परिवारों को मुख्यधारा से जोड़ने की पहल राजस्थान सरकार की यह आवासीय पहल उन परिवारों के लिए अहम मानी जा रही है, जो लंबे समय से सामाजिक और आर्थिक रूप से हाशिये पर रहे हैं। स्थायी घर मिलने से उन्हें न केवल सुरक्षित आश्रय मिलेगा, बल्कि स्थायी पते से दस्तावेज, शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है। न्यूयॉर्क स्थित राजस्थान एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका (RANA) के अध्यक्ष और चंद्रा–के.के. मेहता फैमिली फाउंडेशन के एडवाइजरी बोर्ड के चेयरमैन प्रेम भंडारी ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। उन्होंने जमीनी स्तर पर लंबे समय से काम कर रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं के योगदान को भी रेखांकित किया। दुर्गादास जी के प्रयासों की सराहना प्रेम भंडारी ने घुमंतू जाति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय प्रमुख दुर्गादास के कार्यों की विशेष रूप से सराहना की। उनके अनुसार दुर्गादास जी एक दशक से ज्यादा समय से घुमंतू, अर्ध-घुमंतू और विमुक्त समुदायों के कल्याण के लिए काम कर रहे हैं। इन समुदायों को सामाजिक और आर्थिक मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयासों में उनकी लंबे समय से चली आ रही जमीनी सेवा को महत्वपूर्ण बताया गया है। ब्रिटिश दौर के कलंक का असर आज भी घुमंतू और विमुक्त समुदायों का इतिहास सामाजिक भेदभाव से भी जुड़ा रहा है। ब्रिटिश शासन के दौरान एक कानून के तहत इन्हें ऐतिहासिक रूप से ‘अपराधी जनजातियों’ की श्रेणी में रखा गया था। यह कानून 1952 में निरस्त कर दिया गया, लेकिन इससे जुड़ा सामाजिक कलंक और आर्थिक पिछड़ापन लंबे समय तक बना रहा। आज भी कई परिवारों के पास स्थायी घर, औपचारिक दस्तावेज और सरकारी योजनाओं तक पर्याप्त पहुंच नहीं है। ऐसे में आवास उपलब्ध कराना इनके पुनर्वास और मुख्यधारा से जुड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पहले भी हुए रोजगार और जागरूकता से जुड़े प्रयास इन समुदायों के लिए पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान में सामाजिक और कल्याणकारी स्तर पर कई गतिविधियां हुई हैं। जनवरी 2025 में जयसिंहपुरा खोर की चेतना बस्ती में दो दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसका उद्देश्य सामाजिक और आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाना था। इसके बाद 29 नवंबर 2025 को रोजगार मेले का आयोजन किया गया। इसमें उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने सैकड़ों परिवारों को आजीविका से जुड़े साधन वितरित किए। आयोजकों के मुताबिक, इस कार्यक्रम को प्रेम भंडारी ने RANA और चंद्रा–के.के. मेहता फैमिली फाउंडेशन की ओर से व्यक्तिगत रूप से प्रायोजित किया था। RANA के सचिव रवि जारगढ़ भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। स्वच्छता के बाद अब बच्चों की शिक्षा पर फोकस इन संगठनों की ओर से स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों के अनुरूप स्वच्छता प्रोत्साहन अभियान को भी समर्थन दिया गया। आयोजकों का कहना है कि इससे बस्तियों में स्वच्छता की स्थिति सुधारने में मदद मिली। अब प्रेम भंडारी का फोकस इन परिवारों के बच्चों की शिक्षा पर है। उन्होंने कहा कि वह इन समुदायों के बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर और सिविल सेवक बनते देखना चाहते हैं। RANA और चंद्रा–के.के. मेहता फैमिली फाउंडेशन योग्य और जरूरतमंद बच्चों की पहचान कर उनकी शिक्षा का खर्च उठाने की योजना पर काम करेंगे। सरकार की योजना के खर्च का विवरण अभी सार्वजनिक नहीं यह पहल सरकारी योजनाओं के साथ सामाजिक संगठनों और प्रवासी भारतीय समुदाय की भागीदारी का उदाहरण भी है। हालांकि, राजस्थान सरकार ने अभी तक 473 फ्लैटों की योजना की कुल लागत और लाभार्थियों के चयन के विस्तृत मानदंड सार्वजनिक नहीं किए हैं। ऐसे में योजना के आर्थिक पक्ष और चयन प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है।



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संत रविदास मंदिर में भाजपा ने किया कलश स्थापित: 650वीं जयंती के अवसर पर समरसता का दिया संदेश – Rohtas News




रोहतास। रोहतास प्रखंड के तुंबा बाजार स्थित संत शिरोमणि रविदास मंदिर में गुरुवार को भाजपा कार्यकर्ताओं ने संत रविदास के जन्मस्थल से लाई गई पवित्र मिट्टी और कलश स्थापित किया। इस कार्यक्रम की अध्यक्षता भाजपा ग्रामीण मंडल रोहतास के अध्यक्ष विवेक बहादुर ने की। संत शिरोमणि रविदास की 650वीं जयंती के अवसर पर भाजपा द्वारा विभिन्न स्थानों पर उनके जन्मस्थल की मिट्टी और कलश स्थापित किए जा रहे हैं। इसी क्रम में तुंबा बाजार स्थित मंदिर में भी कलश स्थापित कर सामाजिक समरसता और एकता का संदेश दिया गया। मंडल अध्यक्ष विवेक बहादुर ने इस अवसर पर कहा कि संत रविदास एक महान संत और समाज सुधारक थे। उन्होंने समाज में समानता, भाईचारे और समरसता का संदेश दिया। विवेक बहादुर ने यह भी उल्लेख किया कि संत रविदास की भक्ति से प्रसन्न होकर मां गंगा स्वयं उनकी कठौती में प्रकट हुई थीं। उन्होंने लोगों से संत रविदास के विचारों को अपनाकर समाज में आपसी भाईचारा और समरसता मजबूत करने की अपील की। इस अवसर पर राजेश राम, संजय कुमार सहित कई भाजपा कार्यकर्ता मौजूद रहे।



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MSME को आधुनिक कौशल, बाजार से जोड़ रही सरकार: सीएम रेखा गुप्ता बोलीं- 4-पी रिफॉर्म से दिल्ली की अर्थव्यवस्था को मिलेगी नई गति – New Delhi News




दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता ने गुरुवार को अनुव्रत भवन में ‘रेजिंग एंड एक्सेलरेटिंग एमएसएमई परफॉर्मेंस’ (RAMP) योजना के तहत आयोजित ‘मेगा कैपेसिटी बिल्डिंग प्रोग्राम’ में हिस्सा लिया। कार्यक्रम का आयोजन दिल्ली सरकार के दिल्ली राज्य औद्योगिक एवं अवसंरचना विकास निगम (DSIIDC) ने किया। इसमें 200 से अधिक एमएसएमई उद्यमियों ने भाग लिया। उद्योग मंत्री सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा सहित वरिष्ठ अधिकारी और उद्योग प्रतिनिधि मौजूद रहे। कारोबार का डिजिटल होना विकल्प नहीं मुख्यमंत्री ने कहा कि क्षमता निर्माण कार्यक्रम ‘4-पी रिफॉर्म’ यानी पॉलिसी, प्रोसेस, परफॉर्मेंस और पार्टनरशिप की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। सरकार का लक्ष्य एमएसएमई को आधुनिक कौशल, तकनीक, वित्त और नए बाजारों से जोड़ना है। उन्होंने कहा कि डिजिटल युग में कारोबार का डिजिटल होना अब विकल्प नहीं, बल्कि प्रतिस्पर्धा के लिए जरूरी है। 30 हजार एमएसएमई को प्रशिक्षण मुख्यमंत्री ने बताया कि केंद्र की RAMP योजना के तहत दिल्ली के लिए 49.74 करोड़ रुपए मंजूर किए गए हैं। इसके माध्यम से जनवरी 2027 तक 30 हजार से अधिक एमएसएमई को आधुनिक कौशल और प्रशिक्षण से जोड़ा जाएगा। वहीं, 10 हजार से अधिक कारोबारों को GEM और ONDC जैसे डिजिटल प्लेटफॉर्म से जोड़कर बड़े बाजार तक पहुंच दिलाई जाएगी। बिना गारंटी 10 करोड़ तक ऋण की सुविधा रेखा गुप्ता ने बताया कि दिल्ली क्रेडिट गारंटी योजना के तहत पात्र छोटे उद्यमों को बिना गारंटी 10 करोड़ रुपए तक ऋण उपलब्ध कराने में मदद की जा रही है। सरकार इस पर 95% तक क्रेडिट गारंटी देती है। 1 फरवरी 2026 के बाद चालू वित्त वर्ष में 10,505 गारंटियों के जरिए 4,806 करोड़ रुपए की गारंटी मंजूर की जा चुकी है। बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रही सरकार उद्योग मंत्री सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा ने कहा कि सरकार औद्योगिक क्षेत्रों के बुनियादी ढांचे को मजबूत कर रही है। करीब 500 करोड़ रुपए के विकास कार्यों के टेंडर जारी हो चुके हैं, जबकि 700 करोड़ रुपए के कार्य पाइपलाइन में हैं। औद्योगिक संपत्तियों को फ्रीहोल्ड अधिकार देने की नीति पर भी काम चल रहा है।



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चीनी के भाव ने छुड़ाए पसीने, बाहर से 10 लाख टन मंगाएगा भारत, सरकार ने खोला रास्‍ता


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सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी है. DGFT ने 31 अक्टूबर तक के लिए यह फैसला लिया है.

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जब बाजार में किसी चीज के दाम बेकाबू होने लगें तो सरकार को बाहर का रास्ता भी खोलना पड़ता है. चीनी के मामले में कुछ ऐसा ही हुआ है. घरेलू बाजार में कीमतें करीब दो महीने में लगभग 40 फीसदी चढ़ चुकी हैं और त्योहारी सीजन सामने है. ऐसे में सरकार ने करीब एक दशक बाद कच्ची चीनी के आयात का रास्ता खोल दिया है. 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी बिना कस्टम ड्यूटी के भारत लाई जा सकेगी.

डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड यानी DGFT ने गुरुवार को कच्ची चीनी की इंपोर्ट पॉलिसी में बदलाव किया है. इसके तहत 10 लाख मीट्रिक टन तक कच्ची चीनी को Tariff Rate Quota यानी TRQ के तहत ड्यूटी फ्री आयात की अनुमति दी गई है. आसान भाषा में कहें तो सरकार ने चीनी की एक तय मात्रा के लिए आयात शुल्क हटा दिया है, ताकि बाहर से चीनी आए और घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़े.

अब सवाल है कि आखिर इसकी जरूरत क्यों पड़ी? दरअसल, देश में चीनी की सप्लाई पर दबाव बढ़ा है और इसी वजह से कीमतें तेजी से ऊपर गई हैं. पिछले दो महीनों में चीनी के भाव करीब 40 फीसदी तक बढ़ चुके हैं. भारत दुनिया में चीनी की सबसे बड़ी खपत करने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है. ऐसे में त्योहारों के मौसम से पहले कीमतों में इतनी तेजी सरकार के लिए चिंता का विषय बन गई.

यह ख़बर बिल्कुल अभी आई है और इसे सबसे पहले आप News18Hindi पर पढ़ रहे हैं. जैसे-जैसे जानकारी मिल रही है, हम इसे अपडेट कर रहे हैं. ज्यादा बेहतर एक्सपीरिएंस के लिए आप इस खबर को रीफ्रेश करते रहें, ताकि सभी अपडेट आपको तुरंत मिल सकें. आप हमारे साथ बने रहिए और पाइए हर सही ख़बर, सबसे पहले सिर्फ Hindi.News18.com पर…



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राम मंदिर चंदा-चढ़ावा चोरी को कांग्रेस बनाएगी मुद्दा: राजेंद्र पाल गौतम बोले-आस्था से धोखा, एक सप्ताह में घर-घर जाएंगे – Uttar Pradesh News




अयोध्या के राम मंदिर में चंदे और चढ़ावे चोरी को लेकर कांग्रेस देशव्यापी मुद्दा बनाने की तैयारी में है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने आरोप लगाया कि राम मंदिर के नाम पर करोड़ों-अरबों रुपए के चंदे और चढ़ावे में चोरी हुई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अगले एक सप्ताह में घर-घर जाकर अभियान चलाएगी और जनता के बीच कथित चंदा-चढ़ावा चोरी के मामले को बड़े स्तर पर उजागर करेगी। ‘SIT की रिपोर्ट सीलबंद तो मीडिया तक जानकारी कैसे पहुंची?’ राजेंद्र पाल गौतम ने SIT की जांच को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 17 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने SIT को अपनी प्रोग्रेस रिपोर्ट/स्टेटस रिपोर्ट बंद लिफाफे में दाखिल करने को कहा था। ऐसे में SIT की जांच से जुड़े गोपनीय तथ्य मीडिया में कैसे सामने आए? उन्होंने सवाल किया कि अगर मीडिया में आई खबरों के मुताबिक SIT की फाइनल रिपोर्ट में चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्र को क्लीन चिट दी गई है, तो सरकार पूरी SIT रिपोर्ट और क्लीन चिट का आधार जनता के सामने क्यों नहीं रख रही है? कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि मामले की वर्तमान कानूनी स्थिति क्या है? SIT में फोरेंसिक ऑडिटर शामिल है और सुप्रीम कोर्ट ने भी फोरेंसिक पहलू सहित जांच की प्रोग्रेस मांगी है। ऐसे में अब तक फोरेंसिक जांच में क्या सामने आया, दान और उपहार का कितना समाधान हुआ और कौन-कौन सी अनियमितताएं मिलीं, इसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। ‘सिर्फ 8 छोटे कर्मचारियों से इतनी बड़ी चोरी संभव नहीं’ राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि मामले में केवल 8 छोटे गणनाकर्मियों की गिरफ्तारी हुई है। सवाल यह है कि दान लेने, गणना कराने, बहुमूल्य धातुओं की जांच-माप, उनके रखरखाव और हिसाब-किताब की पूरी निगरानी की संस्थागत जिम्मेदारी किसकी थी? उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी गड़बड़ी केवल कुछ छोटे कर्मचारियों के स्तर पर नहीं हो सकती। इसमें बड़े लोगों की सहभागिता की जांच होनी चाहिए। कांग्रेस का आरोप है कि जिम्मेदार बड़े लोगों को बचाने के लिए मामले में लीपापोती की जा रही है। अजय राय बोले–जिस SIT पर सवाल उठे, उसी से जांच कराई गई प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि SIT गठन की घोषणा के समय ही उन्होंने इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा कि SIT के अध्यक्ष लखनऊ के तत्कालीन कमिश्नर विजय विश्वास पंत थे। अजय राय ने आरोप लगाया कि पंत खुद कुंभ मेले में हुई भगदड़ की जांच के घेरे में थे। ऐसे में जिस अधिकारी पर सवाल उठ रहे थे, वही SIT की निगरानी कर रहा था। अजय राय ने कहा कि बाद में सुप्रीम कोर्ट की दिशा में विजय विश्वास पंत को SIT से हटाया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब अपनी टीम तैयार कर रही है और गांव-गांव, घर-घर जाकर भाजपा और RSS पर चंदा-चढ़ावा चोरी के आरोपों को जनता के सामने रखेगी। SIT रिपोर्ट का हवाला देकर अनिल मिश्र पर उठाए सवाल अयोध्या के स्थानीय निवासी और युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष शरद शुक्ला ने दावा किया कि जिस SIT के प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर आरोपियों की गिरफ्तारी हुई, उसी रिपोर्ट में डॉ. अनिल मिश्र की भूमिका को लेकर गंभीर टिप्पणियां की गई थीं। शुक्ला के मुताबिक SIT ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि अनिल मिश्र अपने दायित्वों के प्रति उदासीन रहे, जिससे चोरी और गबन की घटना की परिस्थितियां बनीं। रिपोर्ट में उनके उत्तरदायित्व को वरिष्ठ पर्यवेक्षणीय स्तर पर बताया गया और सुरक्षा उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित नहीं करने की बात कही गई। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि यदि SIT की रिपोर्ट में इस तरह की टिप्पणियां हैं तो डॉ. अनिल मिश्र की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई? मंदिर ट्रस्ट की जमीन खरीद पर भी जांच की मांग कांग्रेस ने राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से खरीदी गई जमीनों की खरीद-फरोख्त की भी उच्चस्तरीय जांच की मांग की। शरद शुक्ला ने कहा कि वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बावजूद प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से अब तक जांच क्यों नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय तक इतनी बड़ी कथित चोरी बिना बड़े लोगों की संलिप्तता और संरक्षण के संभव नहीं है। कांग्रेस ने मीडिया के सामने दस्तावेज रखे प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेताओं ने जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़े दस्तावेज और SIT रिपोर्ट से संबंधित दस्तावेज मीडिया के सामने प्रस्तुत किए। पार्टी ने साफ किया कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे को लेकर अभियान को और तेज किया जाएगा। कांग्रेस इसे राम मंदिर और देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा मामला बताते हुए भाजपा और RSS को राजनीतिक रूप से घेरने की तैयारी में है।



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राशन कर्मी 20 से 26 अगस्त तक बांधेंगे काली पट्टी: बिहार आपूर्ति सेवा संघ की आंदोलन की घोषणा; कार्ड निर्माण, E-KYC ठप – Katihar News




कटिहार में राशन कार्ड निर्माण, ई-केवाईसी और सर्वर संबंधी समस्याओं से परेशान बिहार आपूर्ति सेवा संघ ने आंदोलन की घोषणा की है। संघ ने अपनी छह सूत्री मांगों के समर्थन में 20 से 26 अगस्त तक काला बिल्ला धारण कर सांकेतिक विरोध करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में जिला पदाधिकारी आशुतोष द्विवेदी को 19 अगस्त को एक पत्र सौंपकर सूचित किया गया है। संघ के अनुसार, राज्य में 11 अप्रैल 2025 से नए राशन कार्ड बनाने का अभियान चल रहा है। इसके साथ ही E-KYC का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है। लेटर में 6 मांगों का किया उल्लेख हालांकि, एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी आपूर्ति पदाधिकारियों और कर्मियों की मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है, जिसके विरोध में यह सांकेतिक आंदोलन किया जा रहा है। संघ ने जिला पदाधिकारी को सौंपे गए पत्र में अपनी छह प्रमुख मांगों का उल्लेख किया है। इन मांगों में कार्य की समय-सीमा, सर्वर संबंधी दिक्कतें, संसाधनों की कमी, पदोन्नति में देरी और कर्मचारियों के उत्पीड़न जैसे मुद्दे शामिल हैं। पहली मांग राशन कार्ड निर्माण की समय-सीमा से संबंधित है। विभाग ने इसके लिए T+1 की समय-सीमा तय की है, जिसे संघ अव्यावहारिक मानता है। संघ ने 30 दिनों की वैधानिक समय-सीमा निर्धारित करने की मांग की है। ‘प्रति लाभुक 2.50 से 3.00 रुपये दिए’ दूसरी समस्या सर्वर और डेटा से जुड़ी है, जहां 11 लाख 4 हजार 425 नए कार्डों का डेटा सर्वर से डाउनलोड नहीं हो पा रहा है और अपडेशन में भी दिक्कतें आ रही हैं। ई-केवाईसी के लिए लाभुक सूची निकालने की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। तीसरी मांग संसाधनों और मानदेय को लेकर है। ई-केवाईसी के लिए प्रति लाभुक मात्र 2.50 से 3.00 रुपये दिए जा रहे हैं, जबकि विभाग ने न तो वाहन, न डेटा एंट्री ऑपरेटर, न कंप्यूटर-स्कैनर उपलब्ध कराए हैं। काम का बोझ बढ़ गया – कर्मी इससे कर्मियों को अपने खर्च पर काम करना पड़ रहा है। चौथी मांग पदोन्नति से संबंधित है; विभाग में 2010 के बाद से कोई पदोन्नति नहीं हुई है और 200 पद रिक्त हैं। निचले स्तर के कर्मियों को लेवल-9 के बजाय लेवल-8 पर काम कराया जा रहा है। पांचवीं मांग उत्पीड़न के आरोप से जुड़ी है। संघ का कहना है कि 17 जुलाई 2026 को कोरम पूरा न होने के कारण कई पदाधिकारियों ने एक दिन का उपार्जित अवकाश लिया था,लेकिन उन्हें अनुपस्थित कर दिया गया। छठी और अंतिम मांग स्टाफ की भारी कमी को लेकर है। काम का बोझ बढ़ गया है, लेकिन उसके अनुसार पद और संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। आंदोलन के दौरान क्या बंद रहेगा संघ ने स्पष्ट किया है कि विरोध के 7 दिनों तक आवाहन वितरण, राशन कार्ड निर्माण और ई-केवाईसी सहित कोई भी जनहित का कार्य बाधित रहेगा। हालांकि खाद्यान्न वितरण सामान्य रूप से जारी रहेगा ताकि गरीबों को परेशानी न हो। सरकार से अपील संघ ने राज्य सरकार से मांग की है कि इन समस्याओं पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर अविलंब समाधान किया जाए। ताकि आपूर्ति पदाधिकारी और कर्मी पूर्व मनोबल के साथ सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतार सकें। जिला प्रशासन ने पत्र प्राप्त करने की पुष्टि की है। अब देखना होगा कि सरकार इस सांकेतिक विरोध से पहले कर्मियों की मांगों पर कोई निर्णय लेती है या नहीं।



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