टोंक| बग्घी खाना परिसर में संचालित महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल की करीब 150 साल पुरानी इमारत की जर्जर स्थिति पर एक साल बाद भी सुधार नहीं हुआ है। स्कूल में पिछले वर्ष एक कमरे को खतरनाक घोषित कर उस पर चेतावनी का निशान लगाया गया था, लेकिन मरम्मत या वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की गई। स्कूल प्रशासन के अनुसार परिसर में पांच कमरों में नौ कक्षाएं संचालित की जा रही हैं। शाला प्रधान ने बताया कि भवन की मरम्मत के लिए संबंधित विभाग और अधिकारियों को पहले ही सूचना दी गई थी। करीब 22 लाख रुपये का प्रस्ताव भी भेजा गया, लेकिन अब तक राशि आवंटित नहीं हुई। परिसर में पानी निकासी की व्यवस्था भी कमजोर बताई गई है। तेज बारिश के दौरान कक्षा-कक्षों में पानी भरने की शिकायत सामने आई है। पूर्व पार्षद शकील मियां के अनुसार कई बार पानी भरने पर स्कूल की छुट्टी करनी पड़ी, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। विद्यालय स्टाफ ने नगर परिषद में शिविर के दौरान शिकायत दर्ज कराई थी, पर कार्रवाई नहीं हुई। यह परिसर केवल एक स्कूल तक सीमित नहीं है। यहां महात्मा गांधी इंग्लिश मीडियम स्कूल के साथ एक बालिका सीनियर सेकंडरी स्कूल और एक उच्च प्राथमिक स्कूल भी संचालित होते हैं। तीनों स्कूलों की इमारतें जर्जर बताई जा रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि मरम्मत और नए निर्माण की जरूरत लंबे समय से बनी हुई है। झालावाड़ और ककोड़ में स्कूल भवन गिरने की घटनाओं के बाद प्रशासन और शिक्षा विभाग ने जर्जर स्कूलों की सूची पर काम शुरू किया था। हालांकि, स्थानीय स्तर पर आरोप है कि 60 से अधिक स्कूलों पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। जानकारी के अनुसार केवल छह विद्यालयों के लिए करीब साढ़े 9 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत हुई, जिसमें टोंक शहर के स्कूल शामिल नहीं हैं। कांग्रेस खेल प्रकोष्ठ के जिलाध्यक्ष इम्तियाज खान ने बताया कि इस मुद्दे को विधायक सचिन पायलट तक भी पहुंचाया गया, लेकिन अब तक कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। प्रोग्रेसिव वेलफेयर सोसायटी ने नगर परिषद से परिसर के बाहर पार्किंग स्थल विकसित करने की मांग भी रखी है, ताकि सफाई व्यवस्था सुधरे और मरीजों, स्कूल आने-जाने वालों तथा अन्य सेवाओं को सुविधा मिल सके। शिक्षा अधिकारियों का कहना है कि प्रस्ताव भेजे जा चुके हैं और राशि मिलने के बाद ही काम हो पाएगा।
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पानी निकासी की व्यवस्था नहीं होने से बढ़ी परेशानी, जिम्मेदार विभागों ने अब तक नहीं ली सुध – Tonk News
लखनऊ के विभिन्न इलाकों में हुई बिजली कटौती: दुबग्गा में ट्रांसफार्मर में लगी आग , कटौती से नाराज लोगों ने उपेंद्र घेरा, नाला निर्माण में अंडरग्राउंड केबल कटी – Lucknow News
लखनऊ में शुक्रवार को शहर के विभिन्न हिस्सों में बिजली गुल हुई। खराब मौसम के कारण बिजली कटौती और बाधा उपभोक्ताओं को झेलना पड़ा। LDA की लापरवाही बिजली सप्लाई ध्वस्त हो गई। कबीर नगर में नाला निर्माण के दौरान अंडरग्राउंड केबल कटने से एक दर्जन कॉलोनियों में देर रात तक अंधेरा रहा। बत्ती गुल होने के बाद स्थानीय लोगों को पानी की भी परेशानी उठानी पड़ी। कबीर नगर उपकेंद्र पर शुक्रवार शाम करीब 5.30 बजे बत्ती गुल हो गई । चुन्नूखेड़ा तिराहे के पास परसादी खेड़ा रोड पर एलडीए द्वारा नाले का निर्माण कार्य कराया जा रहा था। इस दौरान सड़क की खुदाई करते समय की अंडरग्राउंड केबल कट गई। केबल कटने से पंडितखेड़ा, काशीराम कॉलोनी सदरौना, शुभम सिटी, गोल्ड सिटी, कृष्ण विहार कॉलोनी, रामदास खेड़ा, बजरंग सिटी, परसादी खेड़ा, आर्यपुरम और राधेबाग कॉलोनी समेत एक दर्जन से अधिक वीआईपी और घनी आबादी वाले इलाकों की बिजली ठप हो गई। बिजली कटौती से लगभग 30 हजार आबादी परेशान हो गई। उपभोक्ताओं ने उपकेंद्र से लेकर टोल-फ्री नंबर 1912 पर कई बार शिकायत किया। सूचना पर जूनियर इंजीनियर और विभागीय कर्मचारी फाल्ट ठीक करने मौके पर पहुंचे, लेकिन केबल बुरी तरह क्षतिग्रस्त होने के कारण देर रात तक आपूर्ति बहाल नहीं की जा सकी थी। नगराम के 50 गांवों में ठप रही सप्लाई दुबग्गा के मछली मंडी इलाके में एक ट्रांसफार्मर में भीषण आग लग गई। आग लगते ही पूरे क्षेत्र की बिजली गुल हो गई। स्थानीय निवासियों ने तत्काल इसकी जानकारी देने के लिए उपकेंद्र से लेकर संबंधित एक्सईएन तक के मोबाइल पर फोन मिलाए। स्थानीयों के आरोप हैं किसी भी अधिकारी ने फोन नहीं उठाया । नाराज नागरिकों और भारतीय किसान यूनियन (हिन्दुस्तान) के पदाधिकारियों ने उपकेंद्र घेराव करके नारेबाजी और प्रदर्शन किया। चौक में गुल रही बत्ती पुराने लखनऊ के चौक घंटाघर उपकेंद्र के दुर्गा मार्ग फीडर में केबल फाल्ट होने से लगभग 4 घंटे तक बिजली गुल रही। फैजुल्लागंज के गायत्री नगर और हरिओम नगर में भी लोग बिजली कटौती से परेशान रहे । वहीं, सरोसा उपकेंद्र के शिवग्राम पंचायत में दिनभर बिजली की आंख-मिचौली चलती रही, जबकि अलीगंज के चंद्रलोक फीडर के तहत दिन में एक घंटे की अघोषित कटौती की गई। अचानक बिजली कटौती से लोगों ने काफी नाराजगी जताई।
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प्राथमिक शिक्षक व प्राथमिक विशेष शिक्षक के लिए वेरिफिकेशन: रिजल्ट आने के बाद DPI का फैसला, आज से तीन दिन तक चलेगी कार्यवाही – Bhopal News
हाईकोर्ट के आदेश के बाद प्राथमिक शिक्षक एवं प्राथमिक शिक्षक (विशेष शिक्षा) -2026 के चयनित उम्मीदवारों के लिए दस्तावेज अपलोड एवं सत्यापन की कार्यवाही शनिवार से शुरू होगी। कर्मचारी चयन मंडल द्वारा आयोजित वर्ष 2025 की परीक्षा के परिणाम के आधार पर चयनित
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चयनित प्रतिभागियों को 18 से 20 जुलाई 2026 तक एमपी ऑनलाइन पोर्टल trc.mponline.gov.in पर प्रोफाइल पंजीयन, दस्तावेज अपलोड तथा जिला विकल्प का चयन करना होगा। इसके बाद 19 से 21 जुलाई 2026 तक जिला स्तर पर दस्तावेजों का सत्यापन किया जाएगा।
संचालनालय ने स्पष्ट किया है कि उम्मीदवारों को दस्तावेज अपलोड करने के अगले दिन स्वयं चयनित दस्तावेज सत्यापन केंद्र पर उपस्थित होकर सत्यापन कराना अनिवार्य होगा। तय समय-सीमा में प्रक्रिया पूरी नहीं करने वाले प्रतिभागियों को चयन प्रक्रिया से बाहर माना जाएगा तथा उनकी नियुक्ति पर विचार नहीं किया जाएगा। अभ्यर्थियों को सलाह दी गई है कि वे नियमित रूप से एमपी ऑनलाइन पोर्टल पर उपलब्ध सूचनाओं पर नजर बनाए रखें।
राजन पासी हत्याकांड, पत्नी और सास गिरफ्तार: न्यायिक हिरासत में भेजा गया जेल, अन्य आरोपितों की तलाश जारी – Piro News
भोजपुर जिले के पीरो थाना क्षेत्र में हुए चर्चित राजन पासी हत्याकांड में पुलिस ने दो नामजद आरोपितों को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया है। गिरफ्तार किए गए आरोपितों में मृतक की पत्नी खुशबू कुमारी और सास प्रभा देवी शामिल हैं। यह कार्रवाई बक्सर जिले के नवानगर निवासी शिव प्रसन पासी द्वारा पीरो थाने में दर्ज कराई गई प्राथमिकी के आधार पर की गई है। प्राथमिकी में शिव प्रसन पासी ने आरोप लगाया है कि उनके पुत्र राजन पासी की शादी वर्ष 2017 में भोजपुर के पीरो प्रखंड के ब्रम्हवार गांव निवासी खुशबू कुमारी से हुई थी। आरोप के अनुसार, 15 जुलाई 2026 की रात खुशबू कुमारी के पिता सोहन पासी, प्रभा देवी, मंटू पासी और अन्य लोगों ने मिलकर लाठी-डंडों और लात-घूंसों से राजन पासी की पीट-पीटकर हत्या कर दी। प्राथमिकी में यह भी कहा गया है कि हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने के उद्देश्य से शव का अंतिम संस्कार करने का प्रयास किया गया। जब इसमें सफलता नहीं मिली, तो शव को श्मशान घाट के पास स्थित आहर में फेंक दिया गया। अगले दिन ग्रामीणों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और शव को बरामद कर पोस्टमार्टम के लिए आरा सदर अस्पताल भेज दिया। पीरो थानाध्यक्ष दीपक कुमार साह ने बताया कि पीरो थाना कांड संख्या-231/2026, दिनांक 16 जुलाई 2026, धारा 103(1) बीएनएस के तहत मामला दर्ज कर अनुसंधान किया जा रहा है। उन्होंने पुष्टि की कि नामजद आरोपित खुशबू कुमारी और प्रभा देवी को गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया गया है। मामले के अन्य आरोपितों की गिरफ्तारी के लिए पुलिस लगातार छापेमारी कर रही है और जांच के आधार पर आगे की विधिसम्मत कार्रवाई की जाएगी।
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डीआईजी ने कांवड़ यात्रा की तैयारियों की समीक्षा की: देवरिया में कोतवाली का निरीक्षण किया, सुरक्षा व्यवस्था के निर्देश दिए – Deoria News
गोरखपुर परिक्षेत्र के पुलिस उप महानिरीक्षक (डीआईजी) एस. चन्नप्पा ने शुक्रवार शाम पांच बजे देवरिया का दौरा किया। उन्होंने आगामी श्रावण मास और कांवड़ यात्रा की तैयारियों के साथ-साथ अपराध नियंत्रण, साइबर अपराध, मिशन शक्ति और कानून-व्यवस्था की समीक्षा की। डीआईजी ने सदर कोतवाली का भी निरीक्षण किया और पुलिस अधीक्षक अभिजीत आर. शंकर के साथ शहर के प्रमुख बाजारों में पैदल गश्त कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। पुलिस लाइन सभागार में हुई समीक्षा बैठक में डीआईजी ने लंबित विवेचनाओं, वांछित अभियुक्तों की गिरफ्तारी, निरोधात्मक कार्रवाई और अपराध नियंत्रण की प्रगति की समीक्षा की। उन्होंने अधिकारियों को प्रभावी पुलिसिंग सुनिश्चित करने तथा कानून-व्यवस्था को मजबूत बनाए रखने के निर्देश दिए।
डीआईजी ने महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और स्वावलंबन से जुड़े मामलों में त्वरित एवं संवेदनशील कार्रवाई करने तथा जनजागरूकता अभियान तेज करने पर जोर दिया। उन्होंने पुलिस महानिदेशक के निर्देश पर संचालित ऑपरेशन “Cy-Vajra” के तहत साइबर थाना और थानों की साइबर टीमों की कार्यप्रणाली की भी समीक्षा की और साइबर अपराधों की रोकथाम के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। श्रावण मास और कांवड़ यात्रा की तैयारियों के संबंध में, डीआईजी ने कांवड़ मार्गों, नदी घाटों, जल पुलिस, नावों और अन्य सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की। उन्होंने इन आयोजनों के दौरान पुख्ता सुरक्षा इंतजाम सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
इसके बाद, डीआईजी ने सदर कोतवाली का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने मिशन शक्ति केंद्र, थाना कार्यालय, मालखाना, शस्त्रागार, सीसीटीएनएस, विवेचना कक्ष और अन्य अभिलेखों का गहनता से जायजा लिया और आवश्यक दिशा-निर्देश दिए। निरीक्षण के उपरांत, डीआईजी ने पुलिस अधीक्षक अभिजीत आर. शंकर और अन्य अधिकारियों के साथ प्रमुख बाजारों तथा मार्गों पर पैदल गश्त की। उन्होंने स्थानीय व्यापारियों और नागरिकों से संवाद भी किया। डीआईजी ने महिलाओं की सुरक्षा के लिए एंटी रोमियो टीमों को सक्रिय रखने, रात्रि गश्त बढ़ाने तथा संदिग्ध व्यक्तियों एवं वाहनों की सघन जांच के निर्देश दिए। इस बैठक और निरीक्षण के दौरान अपर पुलिस अधीक्षक (उत्तरी) आनंद कुमार पांडेय, अपर पुलिस अधीक्षक (दक्षिणी) सुनील कुमार सिंह, सभी क्षेत्राधिकारी, थाना प्रभारी और शाखा प्रभारी उपस्थित रहे।
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नाबालिग लड़की का शव फंदे पर लटका मिला: घर के कमरे में चुनरी से लगाई फांसी, बालाघाट में 11वीं कक्षा की छात्रा थी – Balaghat (Madhya Pradesh) News
बालाघाट जिले के खैरलांजी थाना क्षेत्र के आरंभा गांव में शुक्रवार को एक नाबालिग छात्रा का शव उसके घर में फांसी के फंदे पर लटका मिला। पुलिस ने 15 वर्षीय शिवानी ठाकरे के शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है।
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जानकारी के मुताबिक, शिवानी का शव घर के एक कमरे में चुनरी से बने फंदे पर लटका हुआ था। घटना के वक्त शिवानी की दादी ही घर पर मौजूद थीं, जबकि परिवार के बाकी सदस्य खेती-किसानी के काम से खेतों पर गए हुए थे।
सबसे पहले दादी ने ही अपनी पोती को फंदे पर लटका देखा और घबराकर शोर मचाया। दादी की आवाज सुनकर आसपास के पड़ोसी तुरंत मौके पर दौड़े। इसी बीच खेत गए माता-पिता और परिजनों को भी खबर दी गई, जिससे वे तुरंत घर पहुंचे। पड़ोसियों ने शिवानी को फंदे से नीचे उतारा, लेकिन तब तक उसकी सांसें थम चुकी थीं।
11वीं की छात्रा थी शिवानी, जांच में जुटी पुलिस
दम तोड़ने वाली शिवानी 11वीं कक्षा की छात्रा थी और आरंभा गांव के ही एक हायर सेकेंडरी स्कूल में पढ़ती थी। घटना की सूचना मिलते ही खैरलांजी पुलिस की टीम मौके पर पहुंची और शव को अस्पताल भिजवाया।
मामले की जांच कर रहे सब-इंस्पेक्टर (एसआई) किशोर मने ने बताया कि शव को फंदे से उतारकर पुलिस ने केस दर्ज कर लिया है और जांच शुरू कर दी है। छात्रा ने यह आत्मघाती कदम क्यों उठाया, इसका कारण अभी तक साफ नहीं हो पाया है।
पुलिस का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने और परिवार वालों से पूछताछ के बाद ही मौत की असली वजह का पता चल सकेगा।
अरवल सदर अस्पताल में ऑपरेशन के बाद महिला की मौत: चिकित्सीय लापरवाही का आरोप, परिजनों का हंगामा; प्रसव के लिए भर्ती कराया था – Arwal News
अरवल सदर अस्पताल में शुक्रवार देर शाम एक गर्भवती महिला की ऑपरेशन के बाद मौत हो गई। 24 वर्षीय महिला को प्रसव के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों ने चिकित्सीय लापरवाही का आरोप लगाते हुए अस्पताल परिसर में हंगामा किया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को शांत कराया और जांच का आश्वासन दिया। मृतका की पहचान अरवल जिले के सदर थाना अंतर्गत फखरपुर गांव निवासी 24 वर्षीय रागिनी कुमारी के रूप में हुई है। उन्हें प्रसव के लिए सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। परिजनों के मुताबिक, डॉक्टरों ने ऑपरेशन से प्रसव कराया, लेकिन ऑपरेशन के कुछ ही देर बाद रागिनी की तबीयत बिगड़ गई और इलाज के दौरान उनकी मृत्यु हो गई। चिकित्सीय लापरवाही का आरोप, परिजनों का हंगामा मृतका के पति आकाश कुमार ने आरोप लगाया कि ऑपरेशन के दौरान गंभीर चिकित्सीय लापरवाही बरती गई, जिसके कारण उनकी पत्नी की जान चली गई। घटना की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में परिजन और स्थानीय लोग सदर अस्पताल पहुंचे और अस्पताल प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने दोषी डॉक्टरों और संबंधित कर्मियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। घटना की सूचना पर सदर थाना अध्यक्ष दरबारी चौधरी, सिविल सर्जन, पूर्व विधायक महानंद सिंह सहित भारी संख्या में पुलिस और अस्पताल प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे। पुलिस ने आक्रोशित परिजनों को शांत करते हुए निष्पक्ष जांच का आश्वासन दिया। अस्पताल प्रशासन ने बताया कि पूरे मामले की जांच की जाएगी और यदि जांच में चिकित्सीय लापरवाही पाई जाती है, तो नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। त्रिस्तरीय जांच कमेटी गठित, नवजात शिशु सुरक्षित परिजनों को सौंपा गया फिलहाल, पुलिस और अस्पताल प्रशासन मामले की जांच में जुटे हैं। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही मृत्यु के कारणों और चिकित्सीय लापरवाही की स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। इस मामले में एक त्रिस्तरीय जांच कमेटी का गठन किया गया है और शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है। नवजात शिशु को अस्पताल प्रशासन द्वारा परिजनों को सुरक्षित सौंप दिया गया है।
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कमेटी ने माना- बिना जांचें प्रसूता को गलत-खून चढ़ाया था: रेजिडेंट डॉक्टर्स से लेकर नर्सिंग स्टाफ को देंगे नोटिस; प्रिंसिपल ने लापरवाहों के मांगें नाम – Jodhpur News
जोधपुर के उम्मेद असपताल में एक 24 साल की प्रसूता धापू भील को गलत खून चढ़ाने के मामले में कमेटी ने रिपोर्ट सौंप दी है। मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल को सौंपी इस रिपोर्ट में माना है कि बिना जांच किए गलत खून चढ़ाया गया।
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हालांकि 24 घंटे में दी इस रिपोर्ट को प्रिंसिपल ने अधूरा माना, क्योंकि इनमें लापरवाही बरतने वालों के नाम नहीं थे। ऐसे में मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल डॉ. बीएस जोधा ने सभी के नाम मांगें हैं।
डॉ. बीएस जोधा ने बताया कि इसमें रेजिडेंट डॉक्टर से लेकर लैब टेक्नीशियन और नर्सिंग स्टाफ की लापरवाही सामने आई है। इन सभी को नोटिस जारी किए जाएंगे।
11 को प्रसूता को किया था उम्मेद हॉस्पिटल में रेफर, 12 को चढ़ाया गलत खून
जोधपुर जिले के डावरा बावड़ी निवासी धापू भील (24) का 11 जुलाई को बावड़ी हॉस्पिटल में नॉर्मल डिलीवरी हुई थी। लेकिन, खून की कमी के चलते उसे 11 जुलाई को उम्मेद हॉस्पिटल के लिए रेफर कर दिया गया था।
प्रसूता की सास पप्पू देवी ने बताया कि 11 जुलाई को ओ पॉजिटिव ब्लड चढ़ाया गया था। इसके बाद 12 जुलाई की रात दोबारा जो ब्लड चढ़ाया वो गलत था। ब्लड चढ़ाते ही धापू को कंपकपी छूटने लगी। इसके साथ की यूरिन के लिए लगाई थैली में ब्लड आने लगा था। 13 जुलाई को उसे महात्मा गांधी हॉस्पिटल रेफर किया गया।
हालांकि अभी प्रसूता का इलाज महात्मा गांधी हॉस्पिटल के आईसीयू में चल रहा है। इसके साथ ही उसे लगातार डायलासिस किया जा रहा है।
मामला सामने आने के बाद बनाई थी जांच कमेटी
इधर, ये मामला सामने आने के बाद उम्मेद हॉस्पिटल के सुप्रीडेंट डॉ. मोहन मकवाना की ओर से पांच डॉक्टर्स की टीम बनाई गई थी। इस टीम में डॉ. रिजवाना शाहीन, डॉ. नीलम मीणा, डॉ. हर गोविंद मीणा, डॉ. सुरेंद्र सिंह राठौड़ और डॉ. गोविंद पटेल शामिल थे।
उन्होंने बताया कि इस टीम की ओर से शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल को रिपोर्ट सौंप दी गई थी। लेकिन, कुछ कमियां है, जिसे पूरी कर दोबारा रिपोर्ट सौंपी जाएगी।

ये प्रसूता का पति किशनाराम है। इनका कहना है कि उन्हें पता ही नहीं था कि उम्मेद हॉस्पिटल से उसकी पत्नी को एमजीएच क्यों लेकर आए। यहां आने के बाद पता चला कि गलत खून चढ़ा दिया था।
जांच कमेटी ने माना, बिना क्रॉस चेक किए खून चढ़ाया गया, अब होगा एक्शन
इस मामले को लेकर शुक्रवार को मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल को सौंपी रिपोर्ट में सामने आया कि बिना क्रॉस चेक किए प्रसूता को खून चढ़ाया गया।
ये लापरवाही इसलिए हुई क्योंकि प्रसूता और दूसरी महिला का नाम और उनके पति का नाम एक सा था। जिस महिला का बी पॉजिटिव ब्लड ग्रुप था, वह बेहोशी की हालत में थी। ऐसे में जब नाम पुकारा गया तो ये गफलत हुई।
प्रिंसिपल डॉ. बीएस जोधा ने बताया- इस मामले में जो रिपोर्ट मिली है, उनमें नाम नहीं थे। सैंपल कलेक्शन करने वाले, उसे रिलीज करने वाले और ब्लड देने वालों की इसमें गलती रही है।
इस मामले को लेकर रेजिडेंट डॉक्टर से लेकर लैब टेक्नीशियन और नर्सिंग स्टाफ तक पर एक्शन होगा। रिपोर्ट में इनके नाम नहीं थे। किन-किन लोगों ने लापरवाही बरती है, उन सभी के नाम मांगें गए है। इन सभी को नोटिस जारी किया जाएगा।
उन्होंने बताया कि वैसे महिला के बैड लगाते है लेकिन एक जैसे नाम होने की स्थिति में ज्यादा सावधानी बरतते हुए इसे क्रॉस चैक करना था, जो नहीं किया गया।
यूरिन आना बंद हो गया था
महात्मा गांधी हॉस्पिटल के सुप्रीडेंट फतेह सिंह ने बताया कि गलत ब्लड की वजह से यूरीन आना बंद हो गया था और उसकी किडनी पर इफेक्ट हुआ। महिला का लगातार डायलिसिस चल रहा है और हालत में सुधार है।
वहीं परिजनों ने बताया था- गलत खून चढ़ाने की वजह से यूरिन के लिए लगाई थैली में ब्लड आने लगा था। 13 जुलाई को उसे महात्मा गांधी हॉस्पिटल रेफर किया गया।
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गलत ब्लड से यूरिन बंद हुआ,प्रसूता की किडनी में इन्फेक्शन:उम्मेद हॉस्पिटल में O+ की जगह B+ ब्लड चढ़ाया; परिजन बोले-खून चढ़ाते ही कंपकपी छूटने लगी

जोधपुर के उम्मेद अस्पताल में एक प्रसूता को गलत ब्लड चढ़ाने का मामला सामने आया है। जोधपुर जिले के डावरा बावड़ी निवासी धापू भील (24) को सामान्य प्रसव के बाद एनीमिया व अन्य कारणों से उम्मेद अस्पताल रेफर किया गया था। (यहां पढ़ें पूरी खबर)
भाजपा बोली- महाराष्ट्र में NCP के दोनों गुट मिल जाएं: फिर NDA में शामिल हों; केंद्रीय कैबिनेट में दो पद का भी ऑफर
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मुंबई38 मिनट पहले
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महाराष्ट्र में एनसीपी के दो गुट (सुनेत्रा पवार गुट और शरद पवार गुट) आपस में विलय कर सकते हैं। उन्हें साथ आने का ऑफर NDA की तरफ से मिला है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, केंद्र सरकार संसद में महिला आरक्षण विधेयक और परिसीमन विधेयक से जुड़े संविधान संशोधन विधेयक ला सकती है। इसके लिए सदन में दो-तिहाई बहुमत चाहिए।
इसलिए एनडीए के पार्टी नेतृत्व ने सुझाव दिया है कि नेशनलिस्ट कांग्रेस पार्टी (NCP) के दोनों गुट आपस में फिर से मिल जाएं और एनडीए की सहयोगी पार्टी बन जाएं।
सूत्रों के मुताबिक, भाजपा ने NCP के दोनों गुटों के बीच सत्ता का संतुलन बनाने के लिए केंद्रीय कैबिनेट में दो पद देने का भी ऑफर दिया है।

हाल ही में NCP के प्रफुल्ल पटेल और सुनील तटकरे की मुंबई में CM देवेंद्र फडणवीस के घर पर मुलाकात हुई थी।
शरद गुट और सुनेत्रा गुट के एक साथ आने में 5 चैलेंज…
- एनसीपी के भीतर ही मतभेद: पार्टी के वरिष्ठ नेताओं में सत्ता बंटवारे को लेकर एक राय नहीं है।
- राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की मांग: सुनेत्रा के बड़े बेटे और सांसद पार्थ पवार चाहते हैं कि विलय के बाद सुनेत्रा पवार एनसीपी की राष्ट्रीय अध्यक्ष बनें और महाराष्ट्र का वित्त विभाग उन्हें मिले।
- सीनियर लीडर्स की आपत्ति: सुनील तटकरे, प्रफुल्ल पटेल और छगन भुजबल का कहना है कि सत्ता और पदों का बंटवारा सभी नेताओं को ध्यान में रखकर होना चाहिए।
- अड़े रहे तो मुश्किल: यदि सुनेत्रा गुट राष्ट्रीय अध्यक्ष, वित्त मंत्रालय और अहम कैबिनेट विभाग पर अड़ा रहता है, तो समझौता मुश्किल हो सकता है।
- शरद गुट की सहमति पर सवाल: एनसीपी (शरद पवार) के इन सभी मांगों को स्वीकार करने की संभावना कम मानी जा रही है।
मुंबई में 8 जुलाई को शरद पवार और महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम एकनाथ शिंदे की मुलाकात हुई थी।
उधर शरद गुट की भाजपा-कांग्रेस दोनों से बातचीत
उधर महाराष्ट्र में NCP (शरद गुट) पार्टी कांग्रेस और भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए दोनों से बातचीत को तैयार है। सूत्रों के मुताबिक, NCP (SP) के 8 लोकसभा सांसद और 10 विधायक पार्टी के भविष्य को लेकर दो धड़ों में बंटे हुए हैं।
दावा है कि कुछ सांसद और विधायक NDA में शामिल होने के पक्ष में हैं, जबकि कुछ कांग्रेस के साथ विलय चाहते हैं। शरद पवार कांग्रेस में विलय के लिए तभी तैयार होंगे, जब सुप्रिया सुले को पार्टी में बड़ी जिम्मेदारी मिले। इसमें महाराष्ट्र कांग्रेस अध्यक्ष पद पर पवार समर्थक, सुप्रिया सुले को कांग्रेस का उपाध्यक्ष बनाने और कांग्रेस वर्किंग कमेटी (CWC) में पर्याप्त प्रतिनिधित्व जैसी मांगें शामिल बताई गई हैं।
दूसरी ओर, एक अन्य सूत्र का दावा है कि पार्टी का एक प्रभावशाली धड़ा भाजपा और NDA के साथ जाने का समर्थक है। बातचीत में सुप्रिया सुले के लिए केंद्रीय मंत्री पद और पवार समर्थकों के लिए दो मंत्री पद की चर्चा भी होने का दावा किया गया है। हालांकि, इस पर किसी पक्ष की ओर से आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है।

‘परिसीमन बिल’ के चलते मोदी सरकार को संख्या बल की जरूरत
NCP के NDA में शामिल होने से मोदी सरकार संसद में दो तिहाई बहुमत के और करीब आ जाएगी, जो संविधान संशोधन विधेयक पास करने के लिए अहम है।
सरकार महिला आरक्षण कानून लागू करने और परिसीमन विधेयक के जरिए संसद और राज्य विधानसभाओं की संख्या बढ़ाने वाले संविधान संशोधन विधेयक पास कराने के लिए जरूरी संख्या जुटानी की कोशिश कर रही है। अप्रैल में राज्यसभा के विशेष सत्र में सरकार की यह कोशिशें नाकाम हो गई थीं।
इसके बाद से विपक्ष की चार पार्टियों के 37 लोकसभा और राज्यसभा सांसद सत्ता पक्ष में शामिल हो चुके हैं। अप्रैल के मुकाबले दोनों सदनों में सरकार का समर्थन बढ़ा है, लेकिन दो-तिहाई बहुमत से अब भी पीछे है…

यह तस्वीर 17 अप्रैल की है। बिल गिरने के बाद पीएम मोदी ने कहा था, ‘आज हमारे पास पर्याप्त संख्या नहीं है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम हार गए हैं। भविष्य में हमें और अवसर मिलेंगे।’
लोकसभा: दो-तिहाई आंकड़े से 42 वोट पीछे
- 2024 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी 240 सीटों पर जीती थी। NDA में चंद्रबाबू नायडू की TDP के 16, नीतीश कुमार की पार्टी JDU के 12, शिवसेना (शिंदे गुट) के 7, LJP (राम विलास) के 5 और अन्य दलों के 13 सांसद भी शामिल थे। ये आंकड़ा बहुमत से 20 ज्यादा यानी 292 होता है।
- 14 जून 2026 को TMC नेता काकोली घोष दस्तीदार समेत लोकसभा 20 सांसद NDA समर्थित नेशनलिस्ट सिटिजन पार्टी से जुड़ गए, जिससे लोकसभा में BJP का नंबर 292 से बढ़कर 312 हो गया।
- जून में ही महाराष्ट्र में शिवसेना उद्धव गुट के 9 में से 6 सांसद भी NDA के सहयोगी दल शिवसेना (शिंदे गुट) में शामिल हो गए। इनके आने से लोकसभा में NDA का आंकड़ा 318 पहुंच गया है।
- फिलहाल 3 लोकसभा सीटें खाली हैं- असम की नागांव, पश्चिम बंगाल की बसीरहाट और मेघालय की शिलॉन्ग। यानी बिल पर लोकसभा में वोटिंग हो, तो अधिकतम 540 सांसद होंगे। इस हिसाब से दो-तिहाई के 360 के आंकड़े से NDA अभी 42 वोट पीछे हैं।
राज्यसभा: दो-तिहाई बहुमत से 11 वोट पीछे
- अप्रैल 2026 में पंजाब से AAP के 7 राज्यसभा सांसदों के बीजेपी जॉइन करने और जून में राज्यसभा चुनाव होने के बाद NDA के पास 149 सांसद हैं। इसमें से बीजेपी के 114 हैं। यानी 245 सीटों वाली राज्यसभा में NDA के पास सामान्य बहुमत से 27 सीटें ज्यादा हैं।
- TMC के 3 राज्यसभा सांसद- सुखेंदु शेखर रे, सुष्मिता देव और प्रकाश चिक बरैक ने पार्टी छोड़कर 9 जुलाई को बीजेपी जॉइन की। 17 जुलाई को निर्विरोध राज्यसभा सांसद चुन लिए गए। इससे राज्यसभा में NDA का नंबर बढ़कर 152 हो गया।
- 16 जुलाई को TMC की सांसद कोयल मलिक ने भी इस्तीफा दे दिया है। उनके बीजेपी में शामिल होने की अटकलें हैं।
- राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत के लिए 163 का आंकड़ा चाहिए। यानी NDA इससे सिर्फ 11 वोट पीछे है।
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