सीकर जिले में 33 साल की महिला से छेड़छाड़ का मामला सामने आया है। नहाते वक्त गांव का ही रहने वाला युवक बाथरूम में घुस गया। आरोपी ने महिला से रेप करने की कोशिश की, लेकिन महिला के चिल्लाने पर आरोपी फरार हो गया। मामले में महिला ने पुलिस में मुकदमा दर्ज करवाया है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। महिला ने पुलिस में शिकायत देकर बताया कि 1 जून की शाम वह घर पर अकेली थी। इसी दौरान करीब 7 बजे के लगभग वह बाथरूम में नहाने के लिए गई। तब गांव का ही रहने वाला आरोपी युवक बाथरूम में घुस गया और फिर महिला के साथ छेड़छाड़ करने लगा। महिला ने विरोध किया तो आरोपी उसका मुंह बंद करके धमकियां देने लगा। लेकिन महिला ने जोर से चिल्लाना शुरू कर दिया। तब आरोपी डरकर वहां से फरार हो गया। पति के आने पर महिला ने यह बात उसे बताई। इसके बाद पुलिस में पहुंचकर मामला दर्ज करवाया। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर रही है। पढ़ने के लिए आई 21 साल की युवती लापता सीकर जिले में पढ़ाई के लिए आई 21 साल की युवती के लापता होने का मामला सामने आया है। युवती के बड़े भाई ने पुलिस में शिकायत देकर बताया कि उसकी 21 साल की बहन 1 जून को पढ़ाई करने के लिए सीकर गई थी। जो वापस नहीं लौटी। उसकी काफी तलाश की लेकिन कुछ पता नहीं चल पाया।
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बाथरूम में घुसकर महिला से रेप की कोशिश: चिल्लाने पर भागा आरोपी, पढ़ने गई 21 साल की युवती घर नहीं लौटी – Sikar News
UPPSC APS 2023 की परीक्षा में सारे अभ्यर्थी फेल, एक मिनट में 80 शब्द टाइपिंग नहीं कर पाया कोई; 331 पद रह गए खाली
लखनऊः यूपीपीसीएस अपर निजी सचिव परीक्षा-2023 की परीक्षा में शामिल होने वाले 4,240 अभ्यर्थियों में से किसी ने भी यह परीक्षा नहीं पास कर पाया। इस परीक्षा में शामिल सभी अभ्यर्थी फेल हो गए। इसकी वजह से 331 रिक्त पद को खाली घोषित किया गया है। इस परीक्षा में एक भी अभ्यर्थी पास नहीं हुआ। एक मिनट में 80 शब्द भी कोई टाइप नहीं कर पाया। यूपीपीसीएस की तरफ से बताया गया है कि द्वितीय चरण की परीक्षा के आधार पर तृतीय चरण की परीक्षा हेतु किसी भी अभ्यर्थी के सफल नहीं होने के कारण 331 पद रिक्त घोषित किए गए हैं।
4240 अभ्यर्थी ने दी थी परीक्षा
लोक सेवा आयोग की तरफ से जारी प्रेस रिलीज में बताया गया है कि अपर निजी सचिव परीक्षा-2023 की कुल 331 रिक्तियों के सापेक्ष दिनांक-07.01.2024 को आयोजित प्रथम चरण की परीक्षा का परिणाम दिनांक-04.03.2024 को घोषित किया गया था, जिसमें कुल 5889 अभ्यर्थियों को द्वितीय चरण की परीक्षा हेतु सफल घोषित किया गया था। प्रश्नगत चयन की द्वितीय चरण की परीक्षा दिनांक-28.06.2024 से 18.07.2024 तक 02 सत्रों में जनपद-लखनऊ में आयोजित की गयी थी, जिसमें कुल 4240 अभ्यर्थी सम्मिलित हुए थे।
एक मिनट में 80 शब्द भी टाइप नहीं कर पाए
द्वितीय चरण की परीक्षा में दो विषयों-हिन्दी आशुलेखन और हिन्दी टाइपिंग की परीक्षा हुई थी जिनका पूर्णांक क्रमशः 75 अंक और 25 अंक था। हिन्दी आशुलेखन में त्रुटिरहित न्यूनतम 80 शब्द प्रति मिनट टाइपिंग करना अनिवार्य है। लेकिन कोई भी अभ्यर्थी एक मिनट में 80 शब्द को बिना गलती के टाइप नहीं कर पाया। इसकी वजह से तृतीय चरण की परीक्षा हेतु किसी भी अभ्यर्थी के सफल घोषित नहीं किया गया।
UPPSC APS 2023 पात्रता मानदंड
UPPSC APS भर्ती के लिए पात्र माने जाने हेतु उम्मीदवारों को APS आवेदन के लिए निर्धारित पात्रता मानदंडों को पूरा करना आवश्यक है। UPPSC APS भर्ती के लिए आवेदन करने वाले उम्मीदवारों की आयु 21 वर्ष से 40 वर्ष के बीच होनी चाहिए। निर्धारित मानदंडों के अनुसार, आरक्षित श्रेणियों से संबंधित उम्मीदवारों के लिए आयु सीमा में विशेष छूट के प्रावधान लागू होंगे।
UPPSC APS के लिए शैक्षणिक योग्यता
उम्मीदवारों के पास किसी मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री होनी चाहिए। उम्मीदवारों की हिंदी शॉर्टहैंड में टाइपिंग गति कम से कम 80 शब्द प्रति मिनट और हिंदी टाइपराइटिंग में 25 शब्द प्रति मिनट होनी चाहिए। उम्मीदवारों को कंप्यूटर का ज्ञान होना चाहिए, जो DOEACC सोसाइटी द्वारा संचालित ‘सर्टिफिकेट कोर्स इन कंप्यूटिंग’ (CCC) के लिए निर्धारित पाठ्यक्रम के अनुरूप हो। यह कोर्स ‘हाई स्कूल और इंटरमीडिएट शिक्षा बोर्ड, उत्तर प्रदेश’ द्वारा संचालित किया जाता है, या सरकार द्वारा इसके समकक्ष मान्यता प्राप्त कोई अन्य कोर्स हो।
3 साल में एक बार आने वाली परमा एकादशी, जानें व्रत की तिथि और महत्व
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एकादशी तिथि के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना चाहिए.पूजा घर को गंगाजल से छिड़काव करना चाहिए. एक चौकी पर पीला वस्त्र डाल कर भगवान श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा को स्थापित करना चाहिए. उसके बाद विधि विधान पूर्वक पूजा आराधना करनी चाहिए. भगवान विष्णु के सहस्त्र नाम का पाठ करना चाहिए. ऐसा करने से कहा जाता है जीवन की समस्त मनोकामना की
अयोध्या: सनातन धर्म में एकादशी का व्रत बेहद महत्वपूर्ण माना जाता है. साल में 24 एकादशी का व्रत रखा जाता है. यानी कि प्रत्येक महीने दो एकादशी का व्रत होता है.ऐसी स्थिति में हिंदू पंचांग के अनुसार अधिक मास के दौरान ही परमा एकादशी का व्रत रखा जाता है. परमा एकादशी का व्रत अधिक मास के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि को रखा जाता है. एकादशी तिथि के दिन भगवान श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि विधान पूर्वक पूजा आराधना की जाती है. लेकिन खास बात यह है कि परमा एकादशी का व्रत 3 साल में एक बार ही रखा जाता है. कहा जाता है इस दिन व्रत और पूजा पाठ करने से जीवन के समस्त पापों से मुक्ति मिलती है. और मोक्ष की प्राप्ति होती है ऐसी स्थिति में आईए जानते हैं कब है परमा एकादशी क्या है शुभ मुहूर्त और पूजा विधि.
सर्वार्थ सिद्धि योग और शोभन योग
दरअसल, अयोध्या के ज्योतिष पंडित कल्कि राम बताते हैं कि हिंदू पंचांग के अनुसार ज्येष्ठ माह के अधिक मास महीने के कृष्ण पक्ष की एकादशी तिथि 11 जून को प्रारंभ हो रहा है. ऐसी स्थिति में उदया तिथि के अनुसार परमा एकादशी का व्रत 11 जून दिन गुरुवार को रखा जाएगा. इस दिन कई शुभ योग का निर्माण भी हो रहा है, जिसमें सर्वार्थ सिद्धि योग और शोभन योग भी बन रहा है. जो शुभ कार्य के लिए बेहद शुभ माना जाता है.
पूजा-पाठ की विधि
एकादशी तिथि के दिन सुबह ब्रह्म मुहूर्त में स्नान करना चाहिए. पूजा घर को गंगाजल से छिड़काव करना चाहिए. एक चौकी पर पीला वस्त्र डाल कर भगवान श्री हरि विष्णु और माता लक्ष्मी की प्रतिमा को स्थापित करना चाहिए. उसके बाद विधि विधान पूर्वक पूजा आराधना करनी चाहिए. भगवान विष्णु के सहस्त्र नाम का पाठ करना चाहिए. ऐसा करने से कहा जाता है जीवन की समस्त मनोकामना की पूर्ति होती है.
क्या है मान्यता
धार्मिक मान्यता के अनुसार परमा एकादशी का व्रत करने से जीवन के सभी दुख कष्ट और पाप से मुक्ति मिलती है. सुख समृद्धि में वृद्धि होती है व्यक्ति को मोक्ष की प्राप्ति होती है. क्योंकि परमा एकादशी का व्रत प्रत्येक साल नहीं होता है यह हर 3 साल में एक बार आता है. ऐसी स्थिति में इस व्रत को करने से विधि विधान पूर्वक पूजा आराधना करने से भगवान श्री हरि विष्णु की विशेष कृपा प्राप्त होती है.
About the Author
विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें
पर्दे पर ‘जज’ जो अपनी ही बदहाली का न कर सका इंसाफ, असल जिंदगी में रहा ‘लाचार’
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हिंदी सिनेमा के इतिहास में कई ऐसे कलाकार हुए हैं, जिन्होंने पर्दे पर अपार सफलता हासिल की, लेकिन निजी जिंदगी में आर्थिक संघर्षों का सामना किया. ऐसे ही कलाकारों में उस एक्टर का भी नाम है, जिन्होंने चार दशक से ज्यादा लंबे करियर में 500 से ज्यादा फिल्मों में काम किया. पर्दे पर वे कभी जज बने, कभी राजा और कभी प्रभावशाली पिता के किरदार में नजर आए, लेकिन वास्तविक जीवन में उनका अंतिम समय आर्थिक तंगी और सादगी के बीच गुजरा.
नई दिल्ली. सिनेमा की दुनिया में वह चेहरा न्याय, रुतबे और अधिकार का प्रतीक माना जाता था. अदालत का सीन हो और जज की कुर्सी पर वही शख्स न दिखे, ऐसा कम ही होता था. पर्दे पर उसने सैकड़ों बार फैसले सुनाए, राजाओं और प्रभावशाली किरदारों को जीवंत किया. लेकिन किस्मत ने उसकी अपनी जिंदगी के साथ कुछ और ही फैसला लिख रखा था. एक नवाब के फरमान ने उसे अपना शहर छोड़ने पर मजबूर कर दिया और फिर शुरू हुआ संघर्षों का लंबा सफर. फिल्मों में पहचान, शोहरत और कामयाबी मिलने के बावजूद आर्थिक सुरक्षा उससे कोसों दूर रही. जिस कलाकार को करोड़ों दर्शक जानते थे, उसके परिवार को अभावों में दिन गुजारने पड़े. यहां तक कि घर में बिजली जैसी बुनियादी सुविधा भी नहीं थी. 500 से ज्यादा फिल्मों में काम करने वाले इस एक्टर की कहानी बताती है कि पर्दे की चमक हमेशा असल जिंदगी की हकीकत नहीं होती, चलिए बताते हैं कि वो एक्टर कौन हैं?

चकाचौंध से भरी बॉलीवुड की दुनिया में जितने किस्से कामयाबी के मशहूर हैं, उतने ही दर्दनाक किस्से इसके स्याह पहलू के भी हैं. पर्दे पर राजा-महाराजा और जज की आलीशान भूमिकाएं निभाने वाले कलाकारों का असल जीवन कभी-कभी इस कदर तंगहाली में बीतता है, जिसकी कल्पना भी आम इंसान नहीं कर सकता. 1950 और 60 के दशक के मशहूर करेक्टर एक्टर मुराद की कहानी भी कुछ ऐसी ही है.

500 से ज्यादा फिल्मों में काम करने वाले इस दिग्गज कलाकार का अंतिम समय घोर गरीबी में बीता. उनके बेटे और बॉलीवुड के जाने-माने एक्टर रजा मुराद ने एक भावुक इंटरव्यू में अपने पिता के जीवन से जुड़े कई चौंकाने वाले और दर्दनाक खुलासे किए थे.
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एक्टर मुराद का शुरुआती जीवन भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं था. वे मूल रूप से उत्तर प्रदेश के रामपुर के रहने वाले थे. साल 1938 में रामपुर के नवाब रजा अली खान के साथ हुए एक विवाद के बाद मुराद को महज 24 घंटे के भीतर अपना गृहनगर छोड़ने का हुक्म सुना दिया गया. इस मजबूरी के कारण वे मुंबई आ गए. मुराद असल में एक लेखक बनना चाहते थे, लेकिन किस्मत को कुछ और ही मंजूर था और वे एक्टिंग की दुनिया में आ गए.

उन्होंने साल 1943 में महबूब खान के निर्देशन में बनी फिल्म ‘नजमा’ से बॉलीवुड में अपना डेब्यू किया. इसके बाद उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा और करीब चार दशकों तक इंडस्ट्री पर राज किया. मुराद ने अपने करियर में ‘मुगल-ए-आजम’, ‘दो बीघा जमीन’ और ‘अंदाज’ जैसी भारतीय सिनेमा की कालजयी फिल्मों में काम किया. इसके अलावा, उन्होंने हॉलीवुड फिल्म ‘टार्जन गोज टू इंडिया’ में भी अपनी अदाकारी का जलवा बिखेरा.

मुराद के नाम सिनेमा में सबसे ज्यादा बार ‘जज’ की भूमिका निभाने का एक अनोखा रिकॉर्ड दर्ज है. उन्होंने अपनी 500 फिल्मों में से लगभग 300 फिल्मों में जज का किरदार निभाया. उस दौर में जब भी किसी डायरेक्टर को जज के किरदार की जरूरत होती थी तो सबसे पहला चेहरा मुराद का ही सामने आता था. उन्होंने राजा, पुलिस अफसर और पिता की भी कई भूमिकाएं निभाईं, लेकिन उन्हें कभी किसी फिल्म में हीरो बनने का मौका नहीं मिला.

बेटे रजा मुराद ने इंटरव्यू में बताया कि पर्दे पर भले ही उनके पिता रईस दिखते थे, लेकिन असल जिंदगी में उनका परिवार भयानक गरीबी से जूझ रहा था. रजा मुराद ने अपने संघर्ष के दिनों को याद करते हुए कहा, ‘मैंने जीवन में बेहद कठिन दौर देखा है. भोपाल में हमारे घर में बिजली तक नहीं थी. परीक्षा के दिनों में मैं रात के 12 बजे से सुबह 6 बजे तक स्ट्रीट लाइट के नीचे बैठकर पढ़ाई करता था. पिता ने 500 से ज्यादा फिल्में की थीं, लेकिन हमारे पास खुद की कार तक नहीं थी. हम किराए के मकान में रहते थे और बस-ट्रेन से सफर करते थे.’

रजा मुराद ने फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया से पढ़ाई पूरी की और परिवार को आर्थिक संकट से निकालने के लिए खुद एक्टिंग में आए. रजा मुराद ने स्वीकार किया कि उन्होंने अपने पिता की जिंदगी से एक महत्वपूर्ण सबक सीखा. उन्होंने कहा कि फिल्म इंडस्ट्री में स्थापित होने के बाद सबसे पहले उन्होंने अपना घर खरीदा, ताकि भविष्य में परिवार को ऐसी परेशानियों का सामना न करना पड़े.

अपने दमदार करेक्टर एक्टर से वे दर्शकों के दिलों में अमर हो गए. साल 1997 में एक्टर मुराद का निधन हो गया, लेकिन उनकी फिल्में और उनकी संघर्षभरी कहानी आज भी प्रेरणा और सीख दोनों देती है.
लखनऊ में बढ़ेगी गर्मी; अगले छह दिन चढ़ेगा पारा: आज 38 डिग्री सेल्सियस रहेगा तापमान; अगले सोमवार तक 42 डिग्री पहुंचने के आसार – Lucknow News
लखनऊ में जून की शुरुआत के साथ ही गर्मी ने अपने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। बुधवार सुबह सात बजे ही तापमान 31 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जबकि महसूस होने वाला तापमान 36 डिग्री तक पहुंच गया। आज यानि बुधवार को अधिकतम तापमान 38 डिग्री और न्यूनतम तापमान 29 डिग्री रिकार्ड किया जाएगा।
वही मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक आने वाले छह दिनों में गर्मी का असर और बढ़ेगा तथा अधिकतम तापमान फिर 42 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच सकता है।
सुबह से तेज धूप, फिलहाल बारिश के कोई संकेत नहीं सुबह से ही तेज धूप निकलने के कारण लोगों को गर्मी और उमस का सामना करना पड़ रहा है। सुबह आठ बजे के बाद तापमान में तेजी से बढ़ोतरी शुरू हो गई और दोपहर तक इसके 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने का अनुमान है। फिलहाल आसमान साफ रहने के कारण बारिश की संभावना नहीं है।
मौसम के ताजा आंकड़ों के अनुसार हवा की गति महज दो किलोमीटर प्रति घंटा दर्ज की गई, जिससे गर्म हवाओं से राहत मिलने की संभावना कम है। वहीं, आर्द्रता का स्तर 63 प्रतिशत रहने के कारण उमस भी लोगों को परेशान कर सकती है।
आने वाले दिन में और उमस बढ़ने से लोगों को सताएगी गर्मी पूर्वानुमान के मुताबिक गुरुवार को अधिकतम तापमान 38 डिग्री, शुक्रवार और शनिवार को 39 डिग्री तथा रविवार तक इसके 41 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचने की संभावना है। इसके साथ ही न्यूनतम तापमान 29 से 30 डिग्री सेल्सियस के बीच बना रहेगा।
मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि अगले कुछ दिनों तक प्रदेश की राजधानी में मौसम शुष्क रहेगा और तापमान में लगातार बढ़ोतरी देखने को मिलेगी। ऐसे में दोपहर के समय घर से बाहर निकलने वाले लोगों को विशेष सावधानी बरतने और पर्याप्त मात्रा में पानी पीने की सलाह दी जा रही है।
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पिकअप ने बाइक में मारी टक्कर, 1 की मौत: पूर्णिया में दोनों रिश्तेदार के यहां जा रहे थे, हादसे के बाद चालक वाहन लेकर फरार – Purnia News
पूर्णिया के धमदाहा में पिकअप ने बाइक सवार दो लोगों को टक्कर मार दी। दोनों बाइक सवार सड़क पर गिर गए। हादसे में एक की मौत हो गई, जबकि दूसरा गंभीर रूप से घायल है। हादसे के बाद पिकअप फरार हो गया। मृतक की पहचान धमदाहा निवासी सुरेश पासवान के रूप में हुई है। वहीं, घायल दिलीप पासवान की हालत गंभीर बनी हुई है। दोनों आपस में रिश्तेदार बताए जा रहे हैं। स्थानीय लोगों ने पहुंचाया अस्पताल परिजन ने बताया कि दिलीप पासवान अपनी बाइक से सुरेश पासवान को किसी जरूरी काम से छोड़ने जा रहे थे। दोनों जैसे ही धमदाहा घाट के पास पहुंचे, पीछे से आ रही तेज रफ्तार पिकअप ने बाइक में टक्कर मार दी। टक्कर लगते ही दोनों सड़क पर गिर पड़े और गंभीर रूप से घायल हो गए। हादसे के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। स्थानीय लोगों ने तुरंत परिजनों को सूचना दी और दोनों घायलों को इलाज के लिए नजदीकी अस्पताल पहुंचाया।
एक को हायर सेंटर रेफर किया गया है डॉक्टरों ने शुरुआती जांच के बाद दोनों को बेहतर इलाज के लिए जीएमसीएच पूर्णिया रेफर कर दिया। जीएमसीएच में जांच के दौरान डॉक्टरों ने सुरेश पासवान को मृत घोषित कर दिया। वहीं दिलीप पासवान की हालत गंभीर होने के कारण उन्हें हायर सेंटर भेज दिया गया, जहां उनका इलाज जारी है। सुरेश पासवान की मौत की खबर मिलते ही परिवार में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। सूचना मिलते ही धमदाहा थाना पुलिस अस्पताल पहुंची और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम में जुट गई है। पुलिस ने अज्ञात पिकअप चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस का कहना है कि घटनास्थल के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। वाहन और चालक की पहचान कर जल्द गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है।
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डिप्टी कलेक्टर बोला- पटवारी से शारीरिक संबंध सहमति से बने: कोर्ट ने दलील खारिज करते हुए सुनाई थी सजा, सरकारी बंगले में किया था रेप – Madhya Pradesh News
मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स के पार्ट-1 में आपने पढ़ा कि बड़वानी निवासी नीलेश (परिवर्तित नाम) अपनी मंगेतर अनीता (बदला हुआ नाम) के साथ नई जिंदगी के सपने देख रहा था। तभी एक फोन कॉल ने सब कुछ बदल दिया।
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कॉल करने वाले ने खुद को बड़ा अधिकारी बताते हुए चेतावनी दी कि वह अनीता से दूर हो जाए, वरना उसकी जिंदगी बर्बाद कर दी जाएगी। कुछ ही देर बाद नीलेश के मोबाइल पर अनीता की मांग भरी तस्वीरें और धमकी भरे संदेश आने लगे।
अब सवाल यह था कि एक डिप्टी कलेक्टर और महिला पटवारी के बीच ऐसा क्या रिश्ता था, जो अदालत तक पहुंच गया? आगे पढ़िए…
अनीता ने नीलेश को बताया कि वह 2015 से अभय सिंह को जानती थी। उस समय अभय सेंधवा में एसडीएम था और 13 मार्च 2015 को उसने उसके अधीन पटवारी पद पर जॉइन किया था। एक परीक्षा का एडमिट कार्ड अभय के पास होने के कारण दोनों की मुलाकात हुई।
कुछ ही दिनों बाद अनीता एमपीपीएससी की तैयारी के लिए इंदौर चली गई। इसी दौरान उसके परिवार पर मुसीबतों का दौर शुरू हुआ। 24 मार्च 2015 को अभय की पत्नी उसके घर पहुंची और विवाद खड़ा कर दिया।
बाद में अभय की पत्नी की शिकायत पर अनीता के माता-पिता, भाई और भाभी के खिलाफ एफआईआर दर्ज हो गई।

सरकारी बंगले पर बुलाकर रेप किया
अनीता के मुताबिक 2016 में उसने परिवार के खिलाफ दर्ज मामलों को खत्म कराने के लिए अभय से मदद मांगी। अभय ने उसे बड़वानी स्थित अपने सरकारी बंगले पर बुलाया।
अनीता का आरोप था कि 20 अप्रैल 2016 की शाम अभ्यसिंह ने उसके साथ वहां रेप किया। विरोध करने पर उसे नौकरी से निकलवाने और परिवार को फंसा देने की धमकी दी गई। साथ ही कहा कि यदि वह चुप रही तो परिवार के खिलाफ दर्ज मामले खत्म करवा दिए जाएंगे।
केसों का दबाव बनाकर उठाया फायदा
2017 में अभय की पत्नी ने एक और मामला दर्ज कराया, जिसमें अनीता, उसके भाइयों और अन्य लोगों के नाम शामिल थे। अनीता का आरोप था कि इसी दबाव का फायदा उठाकर अभय सिंह ने उस पर अपना नियंत्रण और मजबूत कर लिया।

तस्वीरों के जरिए ब्लैकमेल करता था
अनीता ने आरोप लगाया कि 22 दिसंबर 2023 की रात अभय सिंह उसके जुलवानिया स्थित किराए के मकान पर पहुंचा। वहां उसके साथ मारपीट की गई और कोल्ड ड्रिंक में नशीला पदार्थ मिलाकर पिलाया गया। इसी दौरान उसकी मांग में सिंदूर भरकर तस्वीरें खींची गईं।
महिला का आरोप था कि बाद में इन्हीं तस्वीरों का इस्तेमाल उसे ब्लैकमेल करने के लिए किया गया। जहां भी उसकी शादी की बात चलती, वहां फोन कर कहा जाता कि वह पहले से अभय सिंह की पत्नी है। नौकरी से निकलवाने, एसिड अटैक कराने और जान से मरवाने तक की धमकियां देता था।
अनीता ने यह भी बताया कि इलाज के दौरान इंदौर के पीसी सेठी अस्पताल की पर्ची में उसका नाम ‘वाइफ ऑफ अभय सिंह’ दर्ज कराया गया था। यह भी दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा था।
बचाव पक्ष की कहानी- सहमति से थे संबंध
दूसरी तरफ डिप्टी कलेक्टर अभय सिंह ने अदालत में पूरी तरह अलग तस्वीर पेश की। उसका दावा था कि दोनों के बीच संबंध पूरी तरह सहमति से थे। वह अनीता को पत्नी की तरह रखता था, दोनों कई वर्षों तक साथ रहे, घूमे-फिरे और एक-दूसरे के जीवन का हिस्सा रहे।
अभय ने यह भी दावा किया कि उसने अपनी संपत्ति में अनीता को 50 प्रतिशत हिस्सेदारी देने का फैसला किया था।

अदालत में सबसे विवादित दस्तावेज
मामले का सबसे पेचीदा पहलू एक कथित अनुबंध था। इस दस्तावेज में लिखा था कि अभय सिंह और अनीता पिछले लगभग 15 वर्षों से पति-पत्नी की तरह रह रहे हैं। अभय की आय, चल-अचल संपत्ति और भविष्य की पेंशन में भी अनीता को 50 प्रतिशत हिस्सेदारी देने का उल्लेख था।
दस्तावेज पर दोनों की तस्वीरें और अनीता के हस्ताक्षर मौजूद थे। लेकिन अनीता ने अदालत में इस दस्तावेज को सिरे से खारिज कर दिया। उसका कहना था कि उसने कभी अभय से शादी नहीं की और न ही पति-पत्नी की तरह उसके साथ रही।
उसके अनुसार उससे बिना पढ़ाए हस्ताक्षर करवाए गए थे और कहा गया था कि ऐसा करने पर परिवार के खिलाफ दर्ज मामले खत्म करवा दिए जाएंगे।
नीलेश से शादी तय होने पर अभय सिंह बौखलाया
मामले में नया मोड़ तब आया जब अनीता की शादी बड़वानी निवासी नीलेश से तय हुई। अनीता का आरोप था कि यह खबर मिलते ही अभय सिंह बौखला गया। जहां भी शादी की बात आगे बढ़ती, वहां फोन कर देता।
लोगों से कहता कि अनीता उसकी पत्नी है। नीलेश को भी धमकी भरे फोन आए और शादी न करने की चेतावनी दी गई। नीलेश ने इन कॉल्स की रिकॉर्डिंग शुरू कर दी। बाद में यही रिकॉर्डिंग अदालत में महत्वपूर्ण साक्ष्य बनीं। पुलिस ने पेन ड्राइव जब्त कर फॉरेंसिक जांच करवाई और रिकॉर्डिंग सुरक्षित की।
केस में देरी सबसे बड़ा सवाल बन गया
मामले में सबसे बड़ी चुनौती थी 2016 की कथित पहली घटना और 2024 में दर्ज एफआईआर के बीच लगभग आठ साल का अंतर। बचाव पक्ष ने इसी देरी को अपना सबसे मजबूत तर्क बनाया।
उनका कहना था कि यदि महिला पीड़ित थी तो उसने इतने वर्षों तक शिकायत क्यों नहीं की। दोनों के बीच लगातार संपर्क, यात्राएं, तस्वीरें और दस्तावेज इस बात की ओर संकेत करते थे कि रिश्ता पूरी तरह एकतरफा नहीं था।

अदालत ने 10 साल सश्रम कारावास की सजा सुनाई
हालांकि अदालत ने यह भी माना कि आरोपी का व्यवहार धमकीपूर्ण और मानसिक प्रताड़ना से भरा था। ऑडियो रिकॉर्डिंग्स, धमकी भरे फोन कॉल, शादी रुकवाने की कोशिशें और निजी तस्वीरों के इस्तेमाल को अदालत ने गंभीर माना।
कोर्ट ने कहा कि आरोपी एक प्रभावशाली प्रशासनिक अधिकारी था और उसने अपने पद तथा प्रभाव का इस्तेमाल कर महिला पर दबाव बनाया। बड़वानी की तृतीय अपर सत्र अदालत ने 31 जनवरी 2026 को डिप्टी कलेक्टर अभय सिंह खरारी को दोषी ठहराते हुए 10 वर्ष के सश्रम कारावास की सजा सुनाई।
क्राइम फाइल्स पार्ट-1 भी पढ़ें…
पटवारी बोली- डिप्टी कलेक्टर ने मेरे साथ रेप किया

मध्य प्रदेश क्राइम फाइल्स में आज कहानी उस हाईप्रोफाइल रेप केस की, जिसने सत्ता, सिस्टम और प्रशासनिक गलियारों में ऐसा भूचाल ला दिया कि मंत्रालय से लेकर कलेक्टोरेट तक सिर्फ उसी की चर्चा होने लगी। कटघरे में कोई आम आरोपी नहीं, बल्कि एक ताकतवर डिप्टी कलेक्टर खड़ा था। पढ़ें पूरी खबर…
अमेरिका बोला- ईरान के पास अब कोई नौसेना नहीं: वो समुद्र की गहराई में पड़ी है; ईरान का कुवैत में अमेरिकी ठिकानों पर हमला
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने मंगलवार को ईरान के खिलाफ अमेरिका और इजराइल की सैन्य कार्रवाई को सफल बताया है। उन्होंने यह दावा किया कि ईरान की नौसैनिक क्षमता लगभग खत्म हो चुकी है। उन्होंने कहा, “आज ईरान की नौसेना जैसी कोई चीज नहीं बची है। वह समुद्र की गहराइयों में पड़ी है।” अमेरिकी सांसदों से बातचीत के दौरान रूबियो ने कहा कि ऑपरेशन एपिक फ्यूरी ने अपने मिलिट्री टारगेट हासिल किए हैं और इससे ईरान के डिफेंस इन्फ्रास्ट्रक्चर को बड़ा नुकसान पहुंचा है। दूसरी ओर, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) ने बुधवार को दावा किया कि उसने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी नौसेना के पांचवें बेड़े के हेडक्वार्टर, मिलिट्री एयरबेस और हेलीकॉप्टरों पर मिसाइल और ड्रोन से हमले किए है। वहीं अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने अपने बयान में कहा कि ईरान ने अपने पड़ोसी देशों की ओर कई मिसाइलें दागीं। हालांकि, सभी हमले फेल हो गए। कुवैत पर दागी गई दो मिसाइलें या तो टारगेट से चूक गईं या रास्ते में ही नष्ट कर दी गईं। बहरीन पर दागी गई 3 मिसाइलों को अमेरिकी और बहरीन एयर डिफेंस सिस्टम ने रोक दिया। इससे पहले अमेरिका ने ईरान के केश्म आईलैंड स्थित एक कम्युनिकेशन्स टावर पर अटैक किया था। पिछले 24 घंटे के 4 बड़े अपडेट्स… ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
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ड्रैगन की निकली हेकड़ी, पेंटागन हैरान… रुद्रम-2 बना भारत बना विश्व शक्तिमान
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Rudram II Missile Range: भारत की रुद्रम-II मिसाइल रफ्तार और मारक क्षमता में वैश्विक महाशक्तियों को कड़ी टक्कर देती है, जहां अमेरिका की HARM और चीन की ‘YJ-91’ जैसी मिसाइलों की गति सुपरसोनिक (मार्क 2 से 4) तक सीमित है, वहीं रुद्रम-II हाइपरसोनिक रेंज (मार्क 5+) को छूती है. रूस की Kh-31P भी एक मजबूत हथियार है, लेकिन रुद्रम-II का 200 किलोग्राम का भारी पेलोड और अत्याधुनिक स्वदेशी NavIC गाइडेंस सिस्टम इसे दुनिया के सबसे घातक और अचूक रडार डिस्ट्रॉयर हथियारों की कतार में सबसे आगे खड़ा करता है.
भारत ने बड़ी छलांग लगाई है.
वैश्विक रक्षा पटल पर भारत ने एक बार फिर अपनी स्वदेशी ताकत का लोहा मनवाया है. DRDO द्वारा विकसित रुद्रम-II एंटी-रेडिएशन मिसाइल ने आधुनिक युद्ध के मैदान में समीकरणों को पूरी तरह बदल दिया है. यह सिर्फ एक मिसाइल नहीं बल्कि भारतीय वायुसेना का वह अदृश्य काल है जो दुश्मन के एयर डिफेंस सिस्टम को उसकी ही सीमा में घुसकर अंधा करने की ताकत रखता है. जब बात अत्याधुनिक रडार डिस्ट्रॉयर मिसाइलों की आती है तो अब तक अमेरिका और चीन जैसी महाशक्तियों का दबदबा माना जाता था. लेकिन रुद्रम-II के सफल परीक्षणों ने ड्रैगन के घमंड को चूर-चूर कर दिया है और पेंटागन (अमेरिका) के सबसे घातक हथियारों को बराबरी की टक्कर दी है. अपनी हाइपरसोनिक गति और मारक क्षमता के दम पर रुद्रम-II ने साबित कर दिया है कि भारत अब किसी भी फ्रंट पर पीछे नहीं है.
रुद्रम-II एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में शक्ति संतुलन को भारत के पक्ष में झुकाता है. चीन का पूरा सैन्य तंत्र नेटवर्क और एडवांस रडार गाइडेड मिसाइलों पर टिका है. रुद्रम-II विशेष रूप से SEAD (Suppression of Enemy Air Defences) ऑपरेशन्स के लिए बनी है. इसका सीधा मतलब यह है कि युद्ध के शुरुआती चरणों में यह मिसाइल चीन और पाकिस्तान के रडार नेटवर्क को पंगु बना देगी. एक बार जब दुश्मन का रडार सिस्टम बंद हो जाएगा तो भारतीय वायुसेना के फाइटर जेट और बॉम्बर्स बिना किसी खतरे के दुश्मन के आसमान में घुसकर उसके बाकी ठिकानों को तबाह कर सकेंगे. गति के मामले में चीनी मिसाइलों (जैसे LD-10) को पछाड़कर भारत ने इस श्रेणी में अपनी बादशाहत कायम कर ली है.
रुद्रम-II: तकनीक का दम
रुद्रम-II को भारतीय वायुसेना के अग्रिम पंक्ति के लड़ाकू विमान सुखोई के लिए विशेष रूप से डिजाइन किया गया है:
• रेंज: लगभग 150 से 300 किलोमीटर (यह फाइटर जेट की लॉन्चिंग ऊंचाई पर निर्भर करती है).
• गति: मार्क 5+ (Supersonic से Hypersonic की ओर), जो इसे दुनिया की सबसे तेज एंटी-रेडिएशन मिसाइलों में से एक बनाती है.
• पेलोड: लगभग 200 किलोग्राम का भारी-भरकम वॉरहेड, जो कंक्रीट बंकरों को भी नष्ट कर सकता है.
• वजन: लगभग 600 से 700 किलोग्राम.
• लागत: स्वदेशी तकनीक से निर्मित होने के कारण इसकी निर्माण लागत विदेशी मिसाइलों (जैसे रूसी Kh-31) की तुलना में बेहद कम और किफायती है.
मुख्य फीचर्स और ताकत
• पैसिव रडार सीकर: यह मिसाइल दुश्मन के रडार और जैमर्स से निकलने वाले रेडियो सिग्नलों को खुद-ब-खुद ट्रैक करती है.
• मेमोरी लॉकिंग सिस्टम: यदि दुश्मन को मिसाइल के आने का पता चल जाए और वह अपना रडार सिस्टम ऑफ (OFF) भी कर दे, तब भी रुद्रम-II अपनी मेमोरी के आधार पर उसकी आखिरी लोकेशन ढूंढकर उसे मलबे में बदल देती है.
• दोहरी भूमिका: यह न केवल रडार को नष्ट करती है बल्कि एयर-टू-सरफेस (हवा से सतह) मोड में दुश्मन के एयरस्ट्रिप्स, कमांड सेंटर्स और बंकरों पर भी पिन-पॉइंट निशाना लगा सकती है.
• NavIC बैकअप: इसमें अमेरिकी जीपीएस के अलावा भारत का अपना नेविगेशन सैटेलाइट सिस्टम (NavIC) इंटीग्रेटेड है जिससे युद्ध के समय भी इसकी सटीकता प्रभावित नहीं होती.
रुद्रम-II 5 मुख्य बातें
1. चीन के डिफेंस की छुट्टी: चीन ने वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर जो रडार और एयर डिफेंस सिस्टम तैनात किए हैं, रुद्रम-II युद्ध की स्थिति में पहले ही घंटे में उन्हें अंधा करने की क्षमता रखती है.
2. अमेरिका से सीधी टक्कर: अमेरिका की प्रसिद्ध AGM-88 HARM मिसाइल की गति जहां मार्क 2 से 4 के बीच है, वहीं भारत की रुद्रम-II मार्क 5+ की रफ्तार से हमला करती है, जो इसे अमेरिकी तकनीक के बराबर या उससे तेज बनाती है.
3. दुश्मन की सीमा से बाहर से प्रहार: 300 किमी की स्टैंड-ऑफ रेंज के कारण भारतीय पायलटों को दुश्मन की मिसाइल रेंज में घुसने की जरूरत नहीं है; वे अपनी सीमा में रहकर ही तबाही मचा सकते हैं.
4. भारी पेलोड क्षमता: जहां अमेरिकी मिसाइलों का वॉरहेड हल्का होता है, वहीं रुद्रम-II का 200 किलो का पेलोड पूरे रडार स्टेशन को इंफ्रास्ट्रक्चर समेत जमींदोज कर देता है.
5. पूर्ण आत्मनिर्भरता: इस मिसाइल के आने से भारत की विदेशी हथियारों पर निर्भरता पूरी तरह खत्म हो गई है, जिससे देश रक्षा क्षेत्र में पूरी तरह आत्मनिर्भर बना है.
रुद्रम-II बनाम अमेरिका, रूस और चीन के हथियार
| पैरामीटर / विशेषता | भारत (Rudram-II) | अमेरिका (AGM-88 HARM) | रूस (Kh-31P) | चीन (LD-10 / YJ-91) |
|---|---|---|---|---|
| मिसाइल का नाम | रुद्रम-II | AGM-88 HARM / AARGM-ER | Kh-31P / Krypton | LD-10 / YJ-91 |
| अधिकतम रेंज (Range) | 150 से 300 किमी | 150 से 300 किमी (लेटेस्ट वर्जन) | 110 से 200 किमी | 150 से 200 किमी |
| रफ्तार (Speed) | मार्क 5+ (हाइपरसोनिक के करीब) | मार्क 2 से 4 (सुपरसोनिक) | मार्क 3.5 (सुपरसोनिक) | मार्क 3+ (सुपरसोनिक) |
| वॉरहेड / पेलोड (Payload) | ~200 किलोग्राम | ~68 से 90 किलोग्राम | ~90 किलोग्राम | ~90 से 150 किलोग्राम |
| कुल वजन (Weight) | ~600 – 700 किलोग्राम | ~360 किलोग्राम | ~600 किलोग्राम | ~400 – 600 किलोग्राम |
| मुख्य गाइडेंस सिस्टम | INS + GPS + NavIC + पैसिव सीकर | INS + GPS + मिलिमीटर वेव | INS + पैसिव रडार सीकर | INS + GPS + पैसिव सीकर |
| विशेष खूबी | भारी तबाही + रडार बंद होने पर भी अचूक मेमोरी | दशकों का कॉम्बैट एक्सपीरियंस (युद्ध में जांची हुई) | बेहद तेज और स्क्रैमजेट इंजन तकनीक | रूसी तकनीक की कॉपी पर आधारित |
सवाल-जवाब
रुद्रम-II मिसाइल को ‘रडार का काल’ क्यों कहा जाता है?
क्योंकि यह मिसाइल दुश्मन के रडार और इलेक्ट्रॉनिक सर्विलांस सिस्टम से निकलने वाले सिग्नलों को पकड़कर सीधे उन पर हमला करती है. दुश्मन चाहकर भी इसके ट्रैक से बच नहीं सकता.
गति और मारक क्षमता के मामले में यह अमेरिका की HARM मिसाइल से कैसे मुकाबला करती है?
अमेरिका की AGM-88 HARM मिसाइल सुपरसोनिक गति (लगभग मार्क 3) से चलती है, जबकि भारत की रुद्रम-II हाइपरसोनिक रेंज (मार्क 5+) को छूती है. इसके अलावा रुद्रम-II का पेलोड अमेरिकी मिसाइल से लगभग दोगुना भारी है, जो अधिक तबाही मचाता है.
क्या दुश्मन अपना रडार बंद करके इस मिसाइल के हमले से बच सकता है?
बिलकुल नहीं. रुद्रम-II में एंटी-रेडिएशन मोड के साथ-साथ एडवांस इनर्शियल नेविगेशन (INS) और जीपीएस/नाविक मेमोरी गाइडेंस होती है. यदि रडार बंद भी कर दिया जाए, तो यह उसके अंतिम ज्ञात स्थान को लॉक कर उसे उड़ा देती है.
रुद्रम-II भारत के लिए किस प्रकार एक गेम-चेंजर हथियार है?
यह मिसाइल भारत को सीमा पार किए बिना ही दुश्मन के हवाई सुरक्षा तंत्र को नष्ट करने की क्षमता (Stand-off Capability) देती है, जिससे चीन या पाकिस्तान के साथ किसी भी टकराव में भारतीय वायुसेना को शुरुआती बढ़त मिलना तय है.
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डिजिटल पत्रकारिता में खबरों की गहरी समझ रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. 16 वर्षों से सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में इन्होंने अपनी कलम से जटिल विषयों को …और पढ़ें
अमिताभ की फिल्म, ऋषि कपूर संग एक्ट्रेस को करना था बाथटब सीन, डायरेक्टर ने की अजीब डिमांड
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80-90 के दशक में वो खूबसूरत एक्ट्रेस, जिसने अपने करियर में देवानंद से लेकर सनी देओल संग काम किया. लेकिन अमिताभ संग एक फिल्म में डायरेक्टर ने उनसे ऐसी डिमांड कर दी कि वह हैरान रह गईं. अब सालों बादु एक्ट्रेस ने खुलासा किया है.
नई दिल्ली. बला की खूबसूरत हसीना,जिसने अपने करियर में हर बड़े स्टार संग काम किया. लेकिन साल 1990 में एक चर्चित फिल्म में उन्हें ऋषि कपूर संग बाथटब सीन फिल्माना था. लेकिन डायरेक्टर ने उनसे बॉडीसूट हटाने की डिमांड कर डाली थी. अब एक्ट्रेस ने सालों बाद खुलासा किया है.

एक्टिंग की दुनिया की वो जानी मानी एक्ट्रेस कोई और नहीं, सोनम खान हैं. हाल ही में उन्होंने ‘अजूबा’ के एक बाथटब सीन को लेकर बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने बताया कि इस सीन की शूटिंग के दौरान वह पूरी तरह कपड़ों में थीं और उन्होंने स्किन कलर बॉडीसूट के बिना शूट करने से साफ इनकार कर दिया था, जबकि फिल्म के मेकर्स उन्हें मनाने की कोशिश कर रहे थे.

सोनम ने अपने करियर के पीक पर शादी कर फिल्मी दुनिया को अलविदा कह दिया था. अपनी लव लाइफ को लेकर भी एक्ट्रेस काफी चर्चा में रही थीं. अब उन्होंने अमिताभ संग अपनी फिल्म का एक किस्सा शेयर किया है,जिसे उ्न्होंने ऋषि कपूर संग फिल्माया था.
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सोनम खान ने साल 1990 में अमिताभ बच्चन और ऋषि कपूर संग फिल्म ‘अजूबा’ में काम किया था. इस फिल्म में वह ऋषि कपूर संग नजर आई थीं. अब उन्होंने फिल्म के बाथटब सीन को लेकर बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने बताया कि इस सीन की शूटिंग के दौरान वह पूरी तरह कपड़ों में थीं. उन्होंने स्किन कलर बॉडीसूट के साथ शूट किया था.

हाल ही में सोनम खान ने एक पोस्ट शेयर कर खुलासा किया है कि उनसे डिमांड की गई थी कि ये सीन वह बिना बॉडीसूट के करें. लेकिन उन्होंने साफ इनकार कर दिया था, जबकि फिल्म के मेकर्स उन्हें मनाने की कोशिश कर रहे थे.

अपनी इस पोस्ट में उन्होंने लिखा है कि 80 के दशक की यादें. कहानी में ट्विस्ट ये है कि मैं हमाम में थी, लेकिन पूरी तरह कपड़ों में. मैंने स्किन कलर की लेगिंग्स और बस्टियर पहन रखा था. इसलिए कृपया अपनी कल्पनाओं को यहीं रोक दें. ये सीन 1 घंटे में ही शूट कर लिया गया था.

सोनम ने अपनी पोस्ट में बताया है कि मल्टी मिरर वाले सीन के लिए फिल्म में बॉडी डबल का इस्तेमाल किया गया था. उसे भी पूरा स्किन कलर सूट पहनाया गया था. लेकिन मैंने ऐसा करने से मना कर दिया था.शशि कपूर ने भी उन्होंने समझाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं मानी.

बता दें कि साल 1991 में आई ‘अजूबा’ में सोनम के अलावा अमिताभ बच्चन, ऋषि कपूर, डिंपल कपाड़िया, शम्मी कपूर और अमरीश पुरी नजर आए थे. इस फिल्म का निर्देशन शशि कपूर और सोवियत फिल्ममेकर गेन्नादी वासिलिएव ने किया था.फिल्म में उनके अपोजिट ऋषि कपूर नजर आए थे.

