अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में छात्रसंघ बहाली और निलंबित छात्र यासिर फहद की बहाली को लेकर चल रहा आंदोलन 19वें दिन शुक्रवार तड़के तक भी निर्णायक मोड़ पर नहीं पहुंच सका। धरना खत्म कराने के लिए कुलपति स्तर से शुरू हुई पहल गुरुवार देर रात तक चली, लेकिन प्रॉक्टर प्रो. मोहम्मद नवेद खान के इस्तीफे की मांग पर मामला अटक गया। कुलपति आवास पर दूसरे प्रतिनिधिमंडल के साथ रात 3 बजे तक चली वार्ता भी बेनतीजा रही। इसके बाद छात्रों ने धरना जारी रखने का ऐलान कर दिया। अब शुक्रवार को आंदोलन और उग्र होने के संकेत हैं।
आंदोलन खत्म होने की उम्मीद उस समय जगी, जब बुधवार से कुलपति की ओर से छात्रों के प्रतिनिधिमंडलों के साथ वार्ता शुरू हुई। शुरुआती दौर में संकेत मिले कि छात्रसंघ बहाली और यासिर फहद का निलंबन वापस होने पर सहमति बन सकती है। लेकिन बातचीत आगे बढ़ी तो छात्रों ने अपने खिलाफ दर्ज मुकदमे वापस लेने और प्रॉक्टर को पद से हटाने की मांग भी सामने रख दी। यहीं से वार्ता का रुख बदल गया।
खुद यासिर ने जारी किए थे 12 छात्रों के नाम देर रात दूसरे दौर की वार्ता के लिए 12 छात्रों का प्रतिनिधिमंडल कुलपति आवास पहुंचा। इसमें कौन-कौन शामिल होगा, यह नाम खुद भूख हड़ताल पर बैठे यासिर फहद ने तय किए थे। रात करीब एक बजे प्रतिनिधिमंडल के मिलने जाने से पहले यासिर ने सोशल मीडिया पर अपनी वीडियो बाइट के साथ पोस्ट साझा की। इसमें उन्होंने प्रतिनिधिमंडल में शामिल होकर जाने वाले लोगों के बारे में जानकारी दी और खुद वार्ता में शामिल नहीं हो पाने की वजह बताई। खराब तबीयत के चलते यासिर प्रतिनिधिमंडल के साथ नहीं जा सके। 12 छात्रों का प्रतिनिधिमंडल रात 3 बजे तक डटा रहा
देर रात दूसरे दौर की वार्ता के लिए 12 छात्रों का प्रतिनिधिमंडल कुलपति आवास पहुंचा। कुलपति के सामने हुई इस बैठक में विश्वविद्यालय के वरिष्ठ अधिकारियों, रजिस्ट्रार और प्रॉक्टर की मौजूदगी भी रही। छात्रों से मिली जानकारी के मुताबिक, वार्ता के दौरान कुलपति ने छात्रसंघ बहाली के लिए मुख्य चुनाव अधिकारी नियुक्त करने और चुनाव कराने की घोषणा करने पर सहमति के संकेत दिए। यासिर फहद का निलंबन वापस लेने पर भी सकारात्मक रुख सामने आने की बात कही गई। मगर छात्र प्रॉक्टर प्रो. मोहम्मद नवेद खान के इस्तीफे की मांग पर अड़े रहे। कुलपति की ओर से इस मांग पर सहमति नहीं बनने के कारण रात 3 बजे तक चली वार्ता किसी निर्णय पर नहीं पहुंच सकी। प्रतिनिधिमंडल बाहर आया और छात्रों ने धरना स्थल पर लौटकर आंदोलन जारी रखने का ऐलान कर दिया।
प्रॉक्टर के इस्तीफे पर फंसा पूरा मामला
आंदोलन अब सिर्फ छात्रसंघ बहाली और यासिर फहद के निलंबन वापसी तक सीमित नहीं रह गया है। छात्रों ने अपने खिलाफ दर्ज मुकदमों की वापसी और प्रॉक्टर को हटाने की मांग भी जोड़ दी है। ऐसे में छात्रसंघ चुनाव और निलंबन वापसी पर सहमति के संकेत मिलने के बावजूद गतिरोध खत्म नहीं हो सका। फिलहाल प्रॉक्टर के इस्तीफे की मांग ही वार्ता में सबसे बड़ी अड़चन बनकर उभरी है। छात्रों के रुख से साफ है कि वे मांगों के एक हिस्से पर आश्वासन मिलने भर से धरना खत्म करने के लिए तैयार नहीं हैं। शुक्रवार तड़के तीन बजे तक आंदोलनकारी छात्रों ने स्पष्ट कर दिया कि धरना जिस तरह चल रहा था, उसी तरह जारी रहेगा।
यासिर फहद की बिगड़ती हालत, दो नए छात्रों के भूख हड़ताल पर बैठने की तैयारी
आंदोलन के 19वें दिन पहुंचने के साथ यासिर फहद की सेहत भी बड़ा मुद्दा बन गई है। वह लगातार भूख हड़ताल पर बैठे हैं और उनकी तबीयत बिगड़ने की जानकारी सामने आ रही है। इसी वजह से वह कुलपति से वार्ता करने गए प्रतिनिधिमंडल में शामिल नहीं हुए। छात्रों की ओर से संकेत दिए गए हैं कि यदि यासिर की मेडिकल रिपोर्ट में अस्पताल में भर्ती कराने की जरूरत सामने आती है, तो भूख हड़ताल जारी रखने के लिए दो अन्य छात्र तैयार हैं। यासिर की बिगड़ती सेहत के बीच आंदोलन को जारी रखने की यह तैयारी प्रशासन की चिंता बढ़ा सकती है। आधी रात के बाद वायरल हुए मैसेज, प्रॉक्टर पर मांगें पूरी न करने का आरोप
तीन बजे छात्रों के वीसी आवास से वापस आने के बाद सोशल मीडिया पर मैसेज वायरल हो रहे हैं। वायरल मैसेज में दावा किया जा रहा है कि छात्रों की कोई मांग पूरी नहीं हुई है। प्रॉक्टर के सामने बैठकर बातचीत करने के बावजूद केवल उनके इस्तीफे को लेकर सफाई दी जा रही थी। मैसेज में आरोप लगाया गया है कि बातचीत में छात्रों की मांगों पर ठोस प्रगति नहीं हुई और केवल बातें सुनकर छोड़ दिया गया। बाहरी समर्थन से आंदोलन को मिल रहा विस्तार
शुरुआत में विश्वविद्यालय परिसर तक सीमित दिख रहा यह आंदोलन अब बाहरी समर्थन भी जुटा रहा है। एएमयू के पूर्व छात्र यानी अलीग्स और कॉकरोच जनता पार्टी सहित अन्य नीतिक दलों से जुड़े लोगों की सक्रियता बढ़ने से धरने का दायरा विस्तृत हुआ है। ऐसे में प्रशासन के सामने चुनौती सिर्फ छात्रों को वार्ता की मेज पर लाने की नहीं, बल्कि सभी प्रमुख मांगों पर सहमति बनाने की भी है।
साइन-डाई की आशंका के बीच सर सैयद डे की तैयारी
विश्वविद्यालय में 17 अक्टूबर को होने वाला सर सैयद डे सालाना आयोजन है। ऐसे में आंदोलन का लंबा खिंचना प्रशासन के लिए अतिरिक्त चुनौती बन सकता है। यदि गतिरोध नहीं टूटा तो परिसर में शैक्षणिक गतिविधियों पर असर पड़ने और विश्वविद्यालय में अनिश्चितकालीन बंदी यानी साइन-डाई जैसी स्थिति बनने की आशंका भी जताई जा रही है। हालांकि, विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से ऐसी किसी घोषणा की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है। फिलहाल एक तरफ प्रशासन आंदोलन समाप्त कराने के लिए वार्ता के रास्ते तलाश रहा है, तो दूसरी तरफ छात्र प्रॉक्टर के इस्तीफे की मांग छोड़े बिना धरना जारी रखने पर अड़े हैं। रात 3 बजे वार्ता खत्म होने के बाद छात्रों के रुख ने साफ कर दिया है कि शुक्रवार को आंदोलन खत्म होने के बजाय और तेज हो सकता है। छात्राओं की बढ़ती भागीदारी, गाना-बजाना और नाटक से प्रदर्शन
शुरुआत में विश्वविद्यालय परिसर तक सीमित दिख रहा यह आंदोलन अब कैंपस के दूसरे हिस्सों तक फैल रहा है। अब्दुल्ला कॉलेज की छात्राओं के साथ अन्य छात्र-छात्राएं और हॉस्टलों से जुड़े विद्यार्थी भी लगातार आंदोलन में शामिल हो रहे हैं। छात्राओं की बढ़ती भागीदारी से धरना स्थलों पर आंदोलन को समर्थन मिल रहा है। डक प्वाइंट और अब्दुल्ला कॉलेज के गेट पर चल रहे धरनों के बीच रात में भी लगातार संपर्क बना रहता है। दोनों स्थानों के छात्र एक-दूसरे से संपर्क में रहकर गतिविधियों का तालमेल बनाते हैं। इसी संवाद के साथ आंदोलन की गतिविधियों को गति मिल रही है। प्रदर्शन के तरीके भी बदल रहे हैं। धरना स्थलों पर नारेबाजी और भाषणों के साथ गाना-बजाना और नाटक जैसी गतिविधियां भी शुरू हो गई हैं। दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए धरनों में दिखाई देने वाले रचनात्मक विरोध के तरीकों की तर्ज पर छात्र सांस्कृतिक प्रस्तुतियों के जरिए भी अपनी बात रख रहे हैं।
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AMU में गतिरोध, रात 3 बजे तक वार्ता बेनतीजा: छात्रसंघ बहाली-निलंबन वापसी पर सहमति के संकेत, प्रॉक्टर के इस्तीफे पर अटका मामला; शुक्रवार को आंदोलन और तेज करने की तैयारी – Aligarh News
ट्रम्प ने मस्क को नेशनल साइंस मेडल से नवाजा: बोले- इलॉन हमारे दौर के थॉमस एडिसन हैं, साइंस को हकीकत में बदल दिया
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने गुरुवार को व्हाइट हाउस में आयोजित ‘साइंस: ए न्यू गोल्डन एज समिट’ में इलॉन मस्क को नेशनल मेडल ऑफ साइंस से सम्मानित किया। ट्रम्प ने अंतरिक्ष खोज, तकनीक और इनोवेशन में मस्क के योगदान की तारीफ करते हुए उन्हें ‘राष्ट्रीय धरोहर’ और ‘आधुनिक दौर का थॉमस एडिसन’ बताया। अवार्ड देने से पहले ट्रम्प ने मस्क को उद्योग जगत का दिग्गज, शानदार इंजीनियर और अब तक के सबसे महान टेक्नोलॉजी फाउंडर्स में से एक बताया। उन्होंने कहा कि मस्क की प्रतिभा और दृढ़ संकल्प ने विज्ञान-कथा को हकीकत में बदल दिया है। ट्रम्प ने टेस्ला में मस्क की भूमिका की तारीफ की ट्रम्प ने टेस्ला की स्थापना में मस्क की भूमिका की भी तारीफ की। उन्होंने टेस्ला को 75 साल से ज्यादा समय में सफल होने वाली पहली नई कार निर्माता कंपनी बताया और कहा कि कंपनी ने इलेक्ट्रिक कारों और सेल्फ-ड्राइविंग तकनीक को व्यावसायिक रूप से सफल बनाया। ट्रम्प ने अपने चाचा डॉ. जॉन ट्रम्प का भी जिक्र किया, जिन्हें अमेरिकी सरकार ने आविष्कारक निकोला टेस्ला के काम का आकलन करने के लिए नियुक्त किया था। उन्होंने मस्क के न्यूरालिंक और सुपरइंटेलिजेंस से जुड़े काम की भी तारीफ की। ट्रम्प ने कहा कि मस्क ऐसे लोगों की नजर, बोलने और चलने की क्षमता बहाल करने पर काम कर रहे हैं, जो इन्हें खो चुके हैं। नेशनल मेडल ऑफ साइंस की स्थापना 1959 में हुई थी नेशनल मेडल ऑफ साइंस से गूगल के को-फाउंडर सर्गेई ब्रिन, एनवीडिया के सीईओ जेंसन हुआंग और एएमडी की सीईओ लिसा सु को भी सम्मानित किया गया। वहीं, डेल टेक्नोलॉजीज के सीईओ माइकल डेल और माइक्रोसॉफ्ट के सीईओ सत्या नडेला को नेशनल मेडल ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन दिया गया। यह ट्रम्प के दोनों कार्यकालों में पहली बार था, जब उन्होंने नेशनल मेडल ऑफ साइंस और नेशनल मेडल ऑफ टेक्नोलॉजी एंड इनोवेशन दिए। —————- ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प ने टाटा-विप्रो को ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से सस्पेंड किया:8 आईटी कंपनियों के खिलाफ एक्शन, अमेरिका में काम कर रहे भारतीयों पर सीधा असर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के प्रशासन ने गुरुवार को 8 बड़ी आईटी कंपनियों को ग्रीन कार्ड प्रोग्राम से सस्पेंड कर दिया है। इनमें भारत की चार कंपनियां टाटा, इंफोसिस, विप्रो और HCL हैं। इनके अलावा माइक्रोसॉफ्ट, एडोबी, कॉग्निजेंट और कैपजेमिनी पर भी यह रोक लगाई गई है। पूरी खबर पढ़ें…
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डिप्टी सीएम के ओएसडी पर 50 लाख लेने का आरोप: 930 करोड़ की ठगी के आरोपी के बयान की कॉपी आई सामने – Bhopal News
करीब ₹930 करोड़ की ठगी के आरोपी मोहित गोगिया के बयान की एक कॉपी में मध्य प्रदेश के डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा के OSD दीपम रायचूरा का नाम सीधे तौर पर लिया गया है। बयान में गोगिया ने दावा किया है कि उसे तनुज सेठी ने दीपम रायचूरा से मिलवाया था और बताया था कि वे आबकारी विभाग में सहायक आयुक्त हैं। बयान की कॉपी सोशल मीडिया में भी वायरल हो रही है। कथित बयान के मुताबिक, दीपम रायचूरा ने गोगिया को दीपक दुबे से मिलवाया और बताया कि दीपक उनका पूरा काम देखता है। इसके बाद वर्ष 2024-25 में टीटी नगर में शराब की दो दुकानों का ठेका जसवंत कुमार के नाम पर दिलवाने का दावा किया गया है। शालीमार फोर्ट लेजा फ्लैट में दिए ₹50 लाख कथित बयान में गोगिया ने आरोप लगाया है कि शराब दुकानों का ठेका दिलाने के एवज में दीपम रायचूरा ने उससे ₹50 लाख नकद लिए। बयान में कहा गया है कि यह रकम दीपक दुबे ने शालीमार फोर्ट लेजा स्थित फ्लैट से ली थी। इसके साथ ही गोगिया ने दावा किया है कि शराब ठेके के लिए बैंक गारंटी की जरूरत थी। इसके लिए फर्जी बैंक एफडीआर को गलत तरीके से स्वीकृत कराने में दीपम रायचूरा ने मदद की। बिना लाइसेंस शराब बेचने का भी आरोप कथित बयान में गोगिया ने दीपम रायचूरा पर उसकी उक्त शराब दुकानों से शराब बिक्री में मदद करने का भी आरोप लगाया है। बयान के अनुसार, उसे बिना लाइसेंस शराब दिलाने में भी मदद की जाती थी। कथित बयान में एक मोबाइल नंबर का भी उल्लेख है, जिस पर गोगिया के मुताबिक दीपम रायचूरा उसके साथ कॉल और चैट करते थे। फर्जी एफडीआर मंजूर कराने में मदद का दावा कथित बयान के मुताबिक, वर्ष 2024-25 में भोपाल के टीटी नगर क्षेत्र में शराब की दो दुकानें जसवंत कुमार के नाम पर दिलाने में मदद की गई। इसके बदले ₹1 करोड़ के भुगतान का दावा किया गया है। बयान में कहा गया है कि इसमें से ₹50 लाख नकद होशंगाबाद रोड स्थित शालीमार फोर्ट लेजा के एक फ्लैट से दीपक दुबे के जरिए लिए गए। बाकी ₹50 लाख आईएसबीटी के पास स्थित एक होटल मालिक के बैंक खाते में ट्रांसफर कराने का आरोप लगाया गया है। कथित बयान में इन शराब दुकानों के लिए बैंक गारंटी के तौर पर इस्तेमाल की गई फर्जी एफडीआर को स्वीकृत कराने में भी OSD की भूमिका होने का दावा किया गया है। इस संबंध में दीपम रायचूरा और डिप्टी सीएम जगदीश देवड़ा की तरफ से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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क्रेशर बस्ती महिला हत्याकांड का खुलासा: देवर ने गला दबाकर की हत्या, पानी से भरे प्लॉट में पत्थर से दबाया शव – Kota News
कोटा के अनंतपुरा थाना पुलिस ने क्रेशर बस्ती में मिले अज्ञात महिला के सड़े-गले शव के मामले का खुलासा करते हुए आरोपी देवा (29) को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी ने अपनी भाभी मति उर्फ निशा की गला दबाकर हत्या की थी। इसके बाद पहचान छिपाने के लिए शव को पानी से भरे एक प्लॉट में डालकर पत्थर से दबा दिया था। 29 सितंबर को क्रेशर बस्ती स्थित पानी से भरे प्लॉट में महिला का अर्धनग्न शव मिला था। पुलिस ने आसपास पूछताछ और मुखबिरों से जानकारी जुटाई। जांच में सामने आया कि घटनास्थल के पास एक मकान में देवा एक महिला के साथ रहता था। घटना के बाद मकान बंद मिला। पुलिस ने कनवास क्षेत्र में जानकारी जुटाई तो मृतका की पहचान मति उर्फ निशा के रूप में हुई। उसके दाहिने हाथ पर तीन स्टार का टैटू बना था, जिसके आधार पर परिजनों ने शव की पहचान की। परिजनों के अनुसार निशा का पति रवि कुमार करीब दो माह पहले मर चुका था। इसके बाद निशा अपने देवर देवा के साथ रहने लगी थी। पुलिस के मुताबिक 26 सितंबर की रात दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ। इसी दौरान देवा ने निशा का गला दबाकर हत्या कर दी। बाद में शव को क्रेशर बस्ती के पानी से भरे प्लॉट में फेंककर पत्थर से दबा दिया और मौके से फरार हो गया। आरोपी की तलाश में तकनीकी साक्ष्य और मुखबिर तंत्र सक्रिय किया गया। 8 अक्टूबर को सूचना मिली कि देवा कनवास के जंगल में छिपा है। पुलिस टीम ने दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपी से पूछताछ और मामले में आगे की जांच जारी है।
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मंदसौर में शुक्रवार को 4 घंटे बिजली बंद: इंदिरा, जनता, किटियानी कॉलोनी समेत कई इलाकों में सप्लाई ठप रहेगी – Mandsaur News
मंदसौर में शुक्रवार को 4 घंटे बिजली सप्लाई बंद रहेगी। बिजली लाइनों के मानसून मेंटेनेंस के चलते मंदसौर के 2 नंबर फीडर पर सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक शटडाउन रहेगा। इससे चंबल कॉलोनी उपकेंद्र से जुड़े कई इलाकों में बिजली सप्लाई प्रभावित होगी। इन इलाकों में रहेगी बिजली बंद शटडाउन के दौरान आदिनाथ विहार, इंदिरा कॉलोनी, जनता कॉलोनी, किटियानी, नूर कॉलोनी, चौधरी कॉलोनी, पाटिल कॉलोनी और कंबल केंद्र रोड सहित आसपास के इलाकों में बिजली बंद रहेगी। बिजली कंपनी के अनुसार, इससे करीब 2933 उपभोक्ता प्रभावित होंगे। कंपनी ने लोगों से बिजली से जुड़े जरूरी काम शटडाउन से पहले करने की अपील की है। समय से पहले शुरू हो सकती है सप्लाई कंपनी ने बताया कि मेंटेनेंस का काम पूरा होने पर बिजली सप्लाई तय समय से पहले भी शुरू की जा सकती है। शटडाउन के कारण होने वाली असुविधा के लिए कंपनी ने नागरिकों से माफी मांगी है।
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सहरसा में दुकान का चदरा काटकर 1.10 लाख की चोरी: नगर परिषद गेट के पास हुई वारदात, चोरों ने CCTV कैमरे तोड़े; फुटेज में कैद – Saharsa News
सहरसा शहर के पश्चिम गंगजला मुख्य मार्ग पर स्थित ए.के. ट्रेडर्स में चोरों ने दुकान के पिछले हिस्से का चदरा काटकर करीब 1.10 लाख रुपये के सामान और नकदी पर हाथ साफ कर दिया।
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चोरों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरों को भी तोड़ दिया। गुरुवार को चोरी की वारदात का वीडियो सामने आने के बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया है।
दुकानदार धीरज कुमार सिंह ने सदर थाने में शिकायत दर्ज कराई है।
रात में दुकान बंद कर घर लौटे, सुबह खुला चोरी का राज
दुकानदार धीरज कुमार सिंह ने बताया कि बुधवार रात करीब 10 बजे वह दुकान बंद कर घर चले गए थे। गुरुवार सुबह करीब 9:30 बजे दुकान खोलने पहुंचे तो अंदर सामान बिखरा पड़ा था।
जांच करने पर पता चला कि चोरों ने दुकान के पिछले हिस्से का चदरा काटकर अंदर प्रवेश किया और चोरी की वारदात को अंजाम दिया।
CCTV कैमरे तोड़े, चदरा काटकर दुकान में घुसे चोर
चोरों ने दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरों को तोड़ दिया, ताकि उनकी पहचान सामने नहीं आ सके। चदरा काटे जाने के कारण बारिश का पानी भी दुकान के अंदर घुस गया, जिससे कई सामान खराब हो गए। पुलिस अब सामने आए वीडियो और घटनास्थल से मिले सुरागों के आधार पर चोरों की पहचान में जुटी है।
सरसों-धारा तेल और सुपारी-जर्दा समेत सामान चोरी
दुकानदार के अनुसार चोरों ने कैश काउंटर से खुले रुपये के अलावा करीब 1,10,248 रुपये का किराना सामान चोरी किया।
इसमें करीब 40 हजार रुपये का सरसों व धारा तेल, 35 हजार रुपये की रजनीगंधा, तुलसी, मयूर सुपारी और जर्दा शामिल है।
इसके अलावा करीब 25 हजार रुपये का पतंजलि घी, एवरेडी घी, काजू और टाटा गोल्ड चायपत्ती भी चोरी हुई है।
चोरी के बाद व्यापारियों में सुरक्षा को लेकर चिंता
मुख्य मार्ग स्थित दुकान में चोरी की घटना के बाद आसपास के व्यापारियों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। व्यापारियों का कहना है कि रात के समय बाजार क्षेत्र में पुलिस गश्त और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किए जाने की जरूरत है।
पुलिस ने कार्रवाई का दिया आश्वासन
दुकानदार की शिकायत पर सदर थाना पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। सदर थानाध्यक्ष अजय कुमार पासवान ने कार्रवाई का आश्वासन दिया है। पुलिस चोरी के सामने आए वीडियो, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।
मनीषा हत्याकांड-इनाम घोषित होते ही 2 महिला-आरोपी कोर्ट में सरेंडर: मोतिहारी में ससुर गिरफ्तार, पति का भाई फरार – Motihari (East Champaran) News
मोतिहारी के संग्रामपुर थाना क्षेत्र के परसौना गांव की मनीषा देवी हत्याकांड में पुलिस को बड़ी सफलता मिली है। एसपी स्वर्ण प्रभात की ओर से फरार आरोपियों पर इनाम घोषित किए जाने के 24 घंटे के भीतर दो नामजद महिला आरोपियों ने कोर्ट में आत्मसमर्पण कर दिया। पुलिस ने मामले में मृतका के ससुर ललन सिंह को भी गिरफ्तार किया है। इनाम घोषित होते ही कोर्ट पहुंचीं दोनों आरोपी गुरुवार को चचेरी सास किरण देवी और ननद निक्कू कुमारी ने कोर्ट में सरेंडर किया। दोनों इस मामले में नामजद आरोपी थीं। पुलिस की लगातार कार्रवाई और गिरफ्तारी के दबाव के बीच दोनों के आत्मसमर्पण को अहम सफलता माना जा रहा है। ससुर गिरफ्तार, एक आरोपी अभी फरार पुलिस ने मनीषा के ससुर ललन सिंह को भी गिरफ्तार कर लिया है। वहीं मुख्य आरोपियों में शामिल पति का भाई रितिक कुमार अब भी पुलिस की गिरफ्त से बाहर है। पुलिस उसकी गिरफ्तारी के लिए संभावित ठिकानों पर तलाश कर रही है। तीनों पर घोषित था 10-10 हजार का इनाम एसपी स्वर्ण प्रभात ने फरार तीन नामजद आरोपियों रितिक कुमार, किरण देवी और निक्कू कुमारी पर 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। इनाम की घोषणा के अगले ही दिन दो महिला आरोपियों के सरेंडर करने से पुलिस कार्रवाई का असर सामने आया है। शुरुआत में आत्महत्या, बाद में सामने आया मारपीट का वीडियो मनीषा का शव 2 अक्टूबर 2025 को उसके ससुराल में फंदे से लटका मिला था। शुरुआती तौर पर इसे आत्महत्या बताया गया था। बाद में मारपीट का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ, जिसके बाद मृतका के भाई ने दहेज हत्या का आरोप लगाते हुए मामला उठाया। इसके बाद पुलिस ने जांच तेज करते हुए नामजद आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की।
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बिना दाखिल खारिज क्या बेकार है रजिस्ट्री, सुप्रीम कोर्ट ने उठा दिया इस कंफ्यूजन से पर्दा
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Mutation vs Registry : क्या आपको भी रजिस्ट्री और दाखिल खारिज को लेकर कोई कंफ्यूजन है तो सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में इन दोनों बातों को पूरी तरह क्लीयर कर दिया है. कोर्ट ने कहा है कि अगर किसी के पास म्यूटेशन दस्तावेज नहीं है तो इसका मतलब यह नहीं होगा कि वह अपनी संपत्ति को बेच नहीं सकता है. वैलिड सेल डीड ही मालिकाना हक को डिसाइड करने के लिए काफी है.
रजिस्ट्री और म्यूटेशन दोनों ही प्रॉपर्टी के लिए जरूरी होते हैं.
नई दिल्ली. प्रॉपर्टी खरीदने वालों को एक चीज को लेकर हमेशा कंफ्यूजन रहती है कि बिना दाखिल खारिज कराए जमीन या मकान की रजिस्ट्री पर्याप्त नहीं होती है. ज्यादातर लोगों को यही लगता है कि अगर प्रॉपर्टी का दाखिल खारिज यानी म्यूटेशन न कराया जाए तो सिर्फ उसकी रजिस्ट्री से पूरा मालिकाना हक नहीं मिलेगा. लेकिन, आपकी इस कंफ्यूजन को सुप्रीम कोर्ट ने पूरी तरह खत्म कर दिया है. शीर्ष अदालत ने अपने एक फैसले में कहा है कि अगर दाखिल खारिज नहीं है तो भी सेल डीड यानी रजिस्ट्री बेकार नहीं मानी जाएगी और मालिकाना हक को बनाए रखा जाएगा.
सुप्रीम कोर्ट ने साल समीउल्लाह वर्सेज स्टेट ऑफ बिहार, 2025 ( Samiullah vs State of Bihar, 2025) के मामले में रजिस्ट्रेशन और म्यूटेशन यानी दाखिल खारिज पर बड़ा फैसला दिया है. कोर्ट ने कहा है कि अगर कोई व्यक्ति अपनी जमीन बेचना चाहता है तो उसे म्यूटेशन यानी दाखिल खारिज का प्रूफ देना जरूरी नहीं है. बिना इस दस्तावेज के भी वह व्यक्ति अपने मालिकाना हक वाली प्रॉपर्टी को बेचने का अधिकार रखता है. कोर्ट ने साफ किया है कि रजिस्ट्री और दाखिल खारिज दोनों अलग-अलग चीजें हैं और इन दोनों को एकसाथ नहीं मिलाया जा सकता है.
क्या है रजिस्ट्री का मतलब
कोर्ट के फैसले से जाहिर होता है कि किसी प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री यानी सेल डीड उसके टाइटल का ट्रांसफर होती है. इस प्रक्रिया में किसी प्रॉपर्टी पर मालिकाना हक रखने वाला व्यक्ति अपने टाइटल को दूसरे के नाम पर ट्रांसफर कर देता है. सेल डीड यानी रजिस्ट्री एक तरह से टाइटल डॉक्यूमेंट है और संपत्ति के मामले में यही सबसे जरूरी दस्तावेज माना जाता है. अगर किसी के पास वैलिड रजिस्ट्री है तो वही संबंधित संपत्ति का मालिक होगा, भले ही उसने अपनी प्रॉपर्टी का दाखिल खारिज नहीं कराया है.
क्या होता है म्यूटेशन
शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में म्यूटेशन को भी पूरी तरह क्लीयर कर दिया है. कोर्ट ने कहा है कि म्यूटेशन यानी दाखिल खारिज किसी संपत्ति पर मालिकाना हक को डिफाइन नहीं करते हैं. यह सिर्फ रेवेन्यू अथवा म्यूनिसिपल रिकॉर्ड है, जो किसी तरह के मालिकाना हक का निर्णय नहीं करता है. लिहाजा अगर किसी व्यक्ति के पास म्यूटेशन का पेपर नहीं है तो इसका मतलब यह नहीं होगा कि संबंधित प्रॉपर्टी पर उसका मालिकाना हक नहीं रहेगी. उसकी वैलिड सेल डीड ही मालिकाना हक को डिसाइड करने के लिए काफी है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…
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CAPF अफसरों की भर्ती-सेवा का नया कानून लागू: 5 सुरक्षा बलों में IPS का डेपुटेशन-प्रमोशन हो सकेगा; कैडर अफसर बोले- आगे बढ़ने के मौके खत्म होंगे
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- CAPF General Administration Act 2026 | IPS Deputation Supreme Court Case
नई दिल्ली1 घंटे पहले
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देश में CAPF (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन) एक्ट 2026 लागू हो गया। गृह मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक, यह कानून 8 अक्टूबर से प्रभावी है। नया कानून, CAPF में ग्रुप-A जनरल ड्यूटी और दूसरे अधिकारियों की भर्ती, प्रमोशन, डेपुटेशन और सेवा शर्तों का एक जैसा ढांचा तय करता है।
कानून ऐसे समय लागू हुआ है, जब सुप्रीम कोर्ट में हजारों CAPF अफसर इसकी वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। यह कानून संसद ने अप्रैल में पास किया था।
यह कानून केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), सीमा सुरक्षा बल (BSF), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और सशस्त्र सीमा बल (SSB) में अफसरों की भर्ती और सेवा नियमों को नियंत्रित करेगा।
इसके तहत IPS से डेपुटेशन यानी प्रतिनियुक्ति के जरिए अफसरों की नियुक्ति भी की जाएगी।

कैडर अफसरों ने जताई आपत्ति
इन बलों के कैडर अफसरों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की हैं। उन्होंने एक अवमानना याचिका भी दाखिल की है। अफसरों का कहना है कि यह कानून IPS से डेपुटेशन पर आने वाले अफसरों की तुलना में उनके करियर में आगे बढ़ने के मौके खत्म करता है।
इन अफसरों ने सुप्रीम कोर्ट से केंद्र सरकार को मई 2025 के फैसले को लागू करने का निर्देश देने की मांग की है। मई 2025 के फैसले में कोर्ट ने कहा था कि CAPF में इंस्पेक्टर जनरल तक के पदों पर IPS अफसरों की डेपुटेशन को दो साल में धीरे-धीरे कम किया जाए।
कोर्ट ने कहा था कि इससे कैडर अफसरों को अधिक अवसर मिलेंगे। देरी से होने वाली उनकी प्रमोशन इन बलों के मनोबल पर प्रतिकूल असर डाल सकती है।

नए कानून में डेपुटेशन का प्रावधान
नए कानून के तहत इंस्पेक्टर जनरल रैंक के 50% पद IPS से डेपुटेशन के जरिए भरे जाएंगे। एडिशनल डायरेक्टर जनरल स्तर के कम से कम 67% पद डेपुटेशन से भरने का प्रावधान है। स्पेशल डायरेक्टर जनरल और डायरेक्टर जनरल रैंक के पद केवल डेपुटेशन से भरे जाएंगे।
सुप्रीम कोर्ट के 2025 के फैसले में क्या था
यह कानून CAPF में IPS अफसरों के डेपुटेशन पर सुप्रीम कोर्ट के मई 2025 के फैसले से जुड़ा है। पिछले साल अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट ने अपने 2025 के फैसले का रिव्यू करने की मांग करने वाली केंद्र की याचिका खारिज कर दी थी।
कोर्ट ने कहा था कि CAPF में SAG लेवल तक डेपुटेशन के लिए तय पदों की संख्या समय के साथ धीरे-धीरे कम की जानी चाहिए। इसके लिए अधिकतम दो साल की समय-सीमा तय की गई थी। कोर्ट ने कैडर रिव्यू का भी निर्देश दिया था।
अलग-अलग नियमों की जगह एक कानून
कानून के उद्देश्य और कारणों में कहा गया है कि CAPF की ऑपरेशनल जरूरतें बढ़ी हैं। इससे इन बलों का अलग ढांचा भी डेवलप हुआ है। इसमें कहा गया कि हाल के सालों में अम्ब्रेला कानून नहीं होने से नियम अलग-अलग तरीके से विकसित हुए।
इस वजह से सेवा से जुड़े कई मुकदमे हुए। इससे बलों के कामकाज और प्रशासन में कुछ दिक्कतें पैदा हुईं।
यह कानून पांचों CAPF में ग्रुप-A जनरल ड्यूटी और अन्य अधिकारियों के अलग-अलग नियमों की जगह साझा कानूनी ढांचा लागू करता है।
रिटायर्ड अफसरों ने भी दायर की थी अवमानना याचिका
रिटायर्ड CAPF अफसरों के एक समूह ने तत्कालीन गृह सचिव गोविंद मोहन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की थी। समूह ने उन पर सुप्रीम कोर्ट के अक्टूबर 2025 के आदेश को लागू नहीं करने का आरोप लगाया था।
समूह ने कहा था कि CAPF की कमान व्यवस्था, सेवा शर्तों और नेतृत्व के अवसरों को प्रभावित करने वाला कोई भी कानूनी हस्तक्षेप मनोबल पर असर डाल सकता है।
उसने कहा था कि इससे देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमा सुरक्षा के लिए जिम्मेदार बलों की संचालन क्षमता भी प्रभावित हो सकती है।
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