Thursday, July 30, 2026
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उदयपुर में ग्रामीणों के चंगुल से छुड़ाकर भागे चोर, VIDEO: बिजली डीपी से तेल चोरी करने गए थे, दो बाइक से पहुंचे थे 6 बदमाश – Udaipur News




उदयपुर में देर रात बिजली की चालू डीपी में से तेल चोरी करने आए बदमाश ग्रामीणों के चंगुल से छुड़ाकर भाग गए। 6 चोर दो बाइकों पर सवार होकर वारदात को अंजाम देने पहुंचे थे, लेकिन ग्रामीणों की सतर्कता के चलते उन्हें मौके से भागना पड़ा। घटना का वीडियो भी सामने आया है, जिसमें बदमाश ग्रामीणों के चंगुल से बचकर भागते हुए दिखाई दे रहे हैं। फिलहाल पुलिस मामले की जांच कर आरोपियों की तलाश में जुटी है। घटना डबोका थाना क्षेत्र के दरौली गांव में बुधवार देर रात करीब 1 बजे की है, जहां दो बाइक पर सवार होकर आए 6 बदमाशों ने बिजली की चालू डीपी में से लाइट काटकर तेल चोरी करने लग गए। एक डीपी में से तेल चोरी करने में सफल रहे, लेकिन दूसरी डीपी में से तेल चोरी करने वाले थे। करीब आधा घंटे तक लाइट नहीं आने पर ग्रामीण डीपी के पास पहुंचे, तो चोरों ने ग्रामीणों को दूर से ही देख लिया और भागने लगे। ग्रामीणों ने चोरों की पकड़ने की कोशिश की लेकिन चोर भाग निकलने में कामयाब रहे। चोर अपने साथ लेकर आए पाने, पिलास, रस्सी सहित अन्य लोहे के औजार वहीं पर छोड़ गए। सूचना के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने सामानों को जब्त कर लिया और जांच में जुट गई। इधर, पूरी रात बिजली गुल रहने से ग्रामीण परेशान होते रहे। सुबह बिजली विभाग के कर्मचारी पहुंचे और डीपी रिपेयर का काम शुरू किया। ग्रामीण पकड़ने दौड़े तो बचकर भागे चोर क्षेत्रवासी रवि सेन और लोकेश पटेल ने बताया कि दरोली गांव में तंबोलियों के मोहल्ले में बीती रात करीब 1 बजे लाइट गुल हो गई। हम गर्मी से परेशान हो रहे थे। आधे घंटे तक लाइट नहीं आई तो हम दो-तीन लोग डीपी चेक करने गए थे। तभी दूर से हमारी आवाज सुनकर डीपी के पास खड़े चोर सतर्क हो गए और बाइक स्टार्ट कर भागने लगे। हमने तुरंत दौड़कर उन्हें पकड़ने की कोशिश की, लेकिन वे हाथ छुड़ाकर भाग गए। सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और घटना की जानकारी ली। शिकायत के बाद पुलिस आरोपियों की तलाश में जुटी है।



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नीली नहीं, हॉकी वर्ल्ड कप में अब भगवा जर्सी में नजर आएंगी भारतीय टीमें


हॉकी इंडिया ने अपने सोशल मीडिया पेज पर नयी जर्सी का अनावरण करते हुए कहा कि जर्सी का डिजाइन और रंग एक कहानी बताने और भारत का गौरव दिखाने के लिये है। हॉकी इंडिया ने कहा कि भगवा रंग साहस, बलिदान और जीत का प्रतीक है।

भारतीय पुरूष और महिला हॉकी टीमें अगले महीने नीदरलैंड और बेल्जियम में होने वाले एफआईएच वर्ल्ड कप में पारंपरिक नीली जर्सी नहीं बल्कि भगवा रंग की जर्सी पहनेगी। इस फैसले पर हालांकि पूर्व कप्तान वीरेन रासकिन्हा ने सवाल उठाया है। हॉकी इंडिया ने अपने सोशल मीडिया पेज पर नयी जर्सी का अनावरण करते हुए कहा कि जर्सी का डिजाइन और रंग एक कहानी बताने और भारत का गौरव दिखाने के लिये है। हॉकी इंडिया ने कहा कि भगवा रंग साहस, बलिदान और जीत का प्रतीक है। वर्ल्ड कप 15 से 30 अगस्त के बीच खेला जायेगा।

हॉकी इंडिया ने अपनी रिलीज में लिखा, ‘हम आपको बताना चाहते हैं कि यूनिफॉर्म का रंग बदलने का फैसला सपोर्ट स्टाफ और खिलाड़ियों की सलाह और उनके साथ डिटेल में बातचीत के आधार पर लिया गया था। सबसे पहली बात टेक्निकल थी। यह देखा गया कि नीली खेलने वाली यूनिफॉर्म, नीले सिंथेटिक खेलने वाले मैदान के साथ मिल जाती थी, जो अब इंटरनेशनल हॉकी पिचों का स्टैंडर्ड रंग है। इस दिखने में एक जैसी होने की वजह से खिलाड़ियों के लिए मैदान पर साफ-सफाई और विजिबिलिटी पर असर पड़ा।

इस बात को ध्यान में रखते हुए, कोच और खिलाड़ियों ने पीले या केसरिया जैसे दूसरे रंगों का सुझाव दिया। ध्यान से सोचने के बाद, केसरिया को फाइनल किया गया। टेक्निकल जरूरतों को पूरा करने के अलावा, केसरिया हमारे नेशनल फ़्लैग के रंगों में से एक होने के नाते भी बहुत अहमियत रखता है, जो हिम्मत, कुर्बानी और देश के गर्व की निशानी है।

यह भी ध्यान दें कि भारतीय हॉकी में जर्सी के रंग में बदलाव कोई नई बात नहीं है। समय-समय पर, नेशनल टीम की खेलने वाली किट का रंग काम और दूसरी ज़रूरतों के हिसाब से बदला गया है। जैसे, 2014 FIH हॉकी वर्ल्ड कप के दौरान, टीम की जर्सी का रंग बदलकर पीला कर दिया गया था और 2018 FIH हॉकी वर्ल्ड कप के दौरान रंग बदलकर आसमानी नीला कर दिया गया था, जिसका डिज़ाइन बिल्कुल अलग था।

केसरिया रंग में मौजूदा बदलाव कोच और खिलाड़ियों से मिले टेक्निकल फीडबैक और हमारे नेशनल फ्लैग का हिस्सा होने के कारण इस रंग से जुड़ी सिंबॉलिक वैल्यू, दोनों को ध्यान में रखकर किया गया है।’

जर्सी पर ‘मंडाला’ कला से प्रेरित पैटर्न हैं जो भारत की सांस्कृतिक विरासत दर्शाते हैं । हॉकी इंडिया ने कहा कि इस पर गहरा नेवी ब्लू रंक अशोक चक्र से प्रेरित है जो प्रगति, शांति और फोकस का प्रतीक है ।

हॉकी इंडिया ने कहा कि छाती पर बना ग्राफिक सुदर्शन चक्र का एक आधुनिक रूप है, जो “ताकत, एकता और गति” का प्रतीक है।

कंधों और बाजुओं पर तिरंगे की पाइपिंग है जो राष्ट्रीय गौरव की द्योतक है ।

जर्सी के आगे के हिस्से पर देवनागरी लिपि में ‘इंडिया’ लिखा है जो भारत की भाषाई और सांस्कृतिक विविधता को दर्शाता है ।

हॉकी इंडिया ने कहा ,” नयी जर्सी ‘एक भारत, श्रेष्ठ भारत’ की भावना की परिचायक है।”

भारतीय टीम के पास भगवा के साथ इसी तरह की सफेद जर्सी भी होगी।

पूर्व कप्तान रासकिन्हा ने हालांकि जर्सी का रंग बदलने के फैसले पर सवाल किया था। उन्होंने एक्स पर लिखा ,” हॉकी इंडिया ने खेल के लिये बहुत कुछ किया है लेकिन यह निराशाजनक है। भारतीय टीम की विरासत और पहचान नीला रंग रही है। मैंने कई साल तक गर्व से नीली जर्सी पहनी है। प्रशंसक हमारी टीम को नीले रंग में देखना चाहते हैं। यह भगवा का क्या तुक है।”

ओलंपिक गोल्ड क्वेस्ट के सीईओ ने कहा, ‘’मेरा सरल और सीधा प्रश्न अपने गर्व, पहचान और विरासत से जुड़ा है।”

हॉकी इंडिया ने हालांकि इस फैसले का बचाव किया और एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा ,”इसमें कुछ भी राजनीतिक नहीं है। भगवा जर्सी होने में क्या खराबी है। यह हमारे तिरंगे का एक रंग है और परिवर्तन तो होते रहना चाहिये।”



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सावन के पहले दिन मंदिर में श्रद्धालुओं की भीड़: तामेश्वर धाम, भागेश्वर नाथ और कुबेरनाथ मंदिरों में विशेष सजावट; सोमवारी पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम – Sant Kabir Nagar News




संतकबीर नगर में पवित्र सावन माह का शुभारंभ गुरुवार से हो गया। जिले के सभी शिवालय श्रद्धालुओं के स्वागत के लिए पूरी तरह तैयार हैं। पूरे सावन माह में भगवान शिव के दर्शन, जलाभिषेक और पूजा-अर्चना के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिरों में पहुंचेंगे। जिले के प्रमुख शिव मंदिरों में तामेश्वर धाम, भागेश्वर नाथ और मेंहदावल स्थित कुबेरनाथ मंदिर को आकर्षक ढंग से सजाया गया है। मंदिरों में देर रात तक तैयारियां चलती रहीं और सभी व्यवस्थाओं को अंतिम रूप दिया गया। दूध, जल और बेलपत्र से होगा जलाभिषेक सावन के दौरान श्रद्धालु भगवान शिव को फूल-माला, बेलपत्र, रोली, अक्षत, भांग, धतूरा समेत अन्य पूजन सामग्री अर्पित करेंगे। इसके अलावा दूध, दही और पवित्र जल से शिवलिंग का अभिषेक किया जाएगा। मंदिरों में पूरे माह सुबह और शाम विशेष आरती का आयोजन भी होगा। सोमवारी पर भीड़ को लेकर विशेष इंतजाम सावन की सोमवारी पर श्रद्धालुओं की अधिक भीड़ की संभावना को देखते हुए मंदिर प्रबंधन ने पुलिस प्रशासन के सहयोग से सुरक्षा और भीड़ नियंत्रण की व्यापक व्यवस्था की है। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रवेश, निकास और दर्शन व्यवस्था को व्यवस्थित किया गया है, ताकि किसी को परेशानी न हो।



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बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के दो वनरक्षक भोपाल में सम्मानित: वन्यजीव संरक्षण में उत्कृष्ट कार्य पर सीएम ने सम्मान दिया – Umaria News




अंतरराष्ट्रीय बाघ दिवस के अवसर पर भोपाल में आयोजित राज्यस्तरीय कार्यक्रम में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के दो वनरक्षकों को उत्कृष्ट सेवाओं के लिए सम्मानित किया गया। वनरक्षक राजकुमार मिश्रा और आनंद मरावी को वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान के लिए सम्मान मिला। वनरक्षक राजकुमार मिश्रा को वन्यजीव अपराधों की रोकथाम और अन्वेषण में उत्कृष्ट कार्य के लिए मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने सम्मानित किया। वहीं आनंद मरावी को बाघ स्थानांतरण (टाइगर ट्रांसलोकेशन) अभियान में महत्वपूर्ण योगदान के लिए प्रधान मुख्य वन संरक्षक (पीसीसीएफ) ने सम्मान प्रदान किया। दोनों वनरक्षकों की उपलब्धि पर बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के अधिकारियों और कर्मचारियों ने उन्हें शुभकामनाएं दीं। अधिकारियों ने इसे पूरे बांधवगढ़ परिवार और उमरिया जिले के लिए गर्व का विषय बताया। मुख्यमंत्री से सम्मान मिलना प्रेरणादायक सम्मान प्राप्त करने के बाद राजकुमार मिश्रा ने कहा कि मुख्यमंत्री के हाथों सम्मान मिलना उनके लिए गर्व और प्रेरणा का क्षण है। उन्होंने कहा कि वरिष्ठ अधिकारियों और सहकर्मियों का मार्गदर्शन उन्हें वन्यजीव संरक्षण के क्षेत्र में बेहतर कार्य करने के लिए लगातार प्रेरित करता है।



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बांकीपुर उपचुनाव: मतदान करने पहुंचे वोटरों की 15 तस्वीरें: मतदान के लिए बूथों पर लंबी कतारें, वोटरों में दिखा उत्साह; दो जगहों पर बीजेपी-जनसुराज कार्यकर्ता भिड़े – Patna News




भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन की बांकीपुर सीट पर वोटिंग जारी है। मतदान के लिए बूथों पर वोटरों की कतार लगी है। पोलिंग बूछों पर सुरक्षा के लिए जवान भी तैनात हैं। सुबह से बांकीपुर की युवा, महिलाएं, बुजुर्ग और फर्स्ट टाइम वोटर अपने घरों से निकलकर मतदान केंद्र पहुंच रहे हैं और अपने मताधिकार का प्रयोग कर रहे हैं। पूर्व केंद्रीय मंत्री सी.पी. ठाकुर और नवादा सांसद विवेक ठाकुर ने बिहार राज्य पुस्तकालय प्राधिकार, डाकबंगला मतदान केंद्र पर मतदान किया। जदयू विधायक श्याम रजक ने फुलवारी शरीफ और मंत्री रामकृपाल यादव ने जीसस मैरी कॉन्वेंट स्कूल में वोट डाला। किदवईपुरी में बीजेपी-जनसुराज के समर्थकों में पुलिस के सामने धक्का-मुक्की हुई। जनसुराज कार्यकर्ताओं का आरोप है कि भाजपा के पूर्व प्रत्याशी बंटी बूथ पर दबंगई कर रहे हैं। लोगों को वोट डालने से रोक रहे हैं। PNT कॉलोनी में PK के समर्थकों ने हंगामा किया है। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि बूथ के अंदर कुछ लोग वोटर्स से भाजपा के पक्ष में वोट करने को कह रहे हैं। पुलिस से मांग किया कि उन्हें गिरफ्तार करे। अब देखिए बांकीपुर उपचुनाव में मतदान की 15 तस्वीरें… मतदान केंद्र पहुंचने वाले वोटरों की 5 तस्वीरें… मतदान करने पहुंचे नेताओं की 5 तस्वीर…
मतदान के दौरान विवाद की 5 तस्वीरें…



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Recipe: कम मसाले, भरपूर स्वाद… घर पर बनाएं बस्तर की फेमस बास्ता सब्जी, सीखें आसान रेसिपी


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Bastar: बस्तर में बरसात के मौसम में बास्ता की सब्जी की खूब मांग रहती है. यह देसी सब्जी कम मसालों में तैयार की जाती है और स्वाद के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी फायदेमंद मानी जाती है. यह बस्तर की फेमस सब्जी मानी जाती है. इसे बनाने में ज्यादा मेहनत नहीं लगती है. बास्ता की सब्जी स्वाद के साथ-साथ सेहत के लिए फायदेमंद मानी जाती है. आइए इसे बनाने की आसान रेसिपी समझें…

Basta ki sabji: बस्तर में बास्ता की सब्जी को बेहद पसंद किया जाता है. बस्तर में बास्ता का आमट और सब्जी अलग-अलग प्रकार से बनाई जाती है. यह सब्जी बस्तर में बेहद देशी स्टाइल से बनाई जाती है. यह सब्जी कुछ मिनटों में बन जाती है.आप भी इन स्टेप्स को फॉलो कर बस्तरिया स्टाइल बास्ता की देशी सब्जी बना सकते हैं. इस सब्जी को खाने के बाद बार-बार खाने का मन करता है.

बस्तर के ग्रामीण कम मसालों के साथ बास्ता की सब्जी बनाते हैं. यह सब्जी बेहद स्वास्थ्य के लिए फायदेमंद होती है. आप अपने घर वालों को यह देशी सब्जी खिलाकर घर के किचन किंग या किचन क्वीन बन सकते हैं. बरसात के दिनों में बस्तर के बाजारों में काफी बास्ता निकलने लगता है, जिसे खरीदने के लिए लोगों की काफी भीड़ लगती है. बास्ता बस्तर के जंगलों से निकलने वाली पारंपरिक सब्जी है.

बास्ता की सब्जी बनाने के लिए सामग्री 
बास्ता- 100 ग्राम, प्याज- एक कटी हुई,  हरी मिर्च- तीन कटी हुई, नमक स्वादानुसार, हल्दी पाउडर – 1/4 छोटी चम्मच, हल्दी पाउडर – 1/4 छोटी चम्मच

बास्ता की सब्जी बनाने की रेसिपी
सबसे पहले एक कढ़ाई में तेल गर्म कर लीजिए. इसके बाद तेल गर्म होने पर इसमें कटी हुई प्याज और मिर्च डालकर सुनहरा होने तक भूनिए. अब इसमें कटा हुआ बास्ता डालकर पकाइए. थोड़ी देर बाद इसमें नमक, मिर्च और हल्दी पाउडर डालकर पकाइए. अब इसमें कटे हुए टमाटर डालकर पकाइए. लगभग दस मिनट पकने के बाद उतार लीजिए. अब बास्ता की देसी सब्जी तैयार है. इसे आप चावल या रोटी के साथ सर्व कर सकते हैं.

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Deepti Sharma

Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…

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महेंद्रगढ़ में लालच देकर युवक से ₹22.53 लाख हड़पे: ₹45 लाख का लोन दिलाने का झांसा; दिल्ली के ठग पर केस – Narnaul News




हरियाणा में महेंद्रगढ़ के गांव कैमला निवासी एक व्यक्ति से 45 लाख रुपए का लोन दिलाने का झांसा देकर 22.53 लाख रुपए की कथित ठगी करने के मामले में थाना सदर महेंद्रगढ़ पुलिस ने दिल्ली निवासी एक व्यक्ति के खिलाफ मामला दर्ज किया है। यह कार्रवाई आर्थिक अपराध शाखा नारनौल की जांच रिपोर्ट के आधार पर की गई है। पुलिस को दी शिकायत में गांव कैमला निवासी मनोज कुमार ने बताया कि उसके पास एक अज्ञात मोबाइल नंबर से फोन आया। फोन करने वाले ने खुद को एक फाइनेंस कंपनी का प्रतिनिधि बताते हुए कम ब्याज दर पर लोन उपलब्ध कराने की बात कही। लोन के लिए पैन कार्ड मांगा मनोज कुमार ने अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए 40 से 45 लाख रुपए के लोन की आवश्यकता बताई। इसके बाद कथित आरोपी ने आधार कार्ड और पैन कार्ड मांगे, जो शिकायतकर्ता ने भेज दिए। शिकायत के अनुसार कुछ समय बाद आरोपी ने बताया कि उसका सिबिल स्कोर खराब है और लोन पास कराने के लिए विभिन्न मदों में राशि जमा करानी होगी। आरोप है कि आरोपी ने अलग-अलग तारीखों में विभिन्न खातों और फोन-पे के माध्यम से कुल 22 लाख 53 हजार 900 रुपए जमा करवा लिए। धमकियां देने लगा आरोपी जब शिकायतकर्ता ने लोन या अपने पैसे वापस मांगे, तो आरोपी ने कथित रूप से धमकियां देनी शुरू कर दी। मामले की जांच आर्थिक अपराध शाखा नारनौल की प्रभारी उपनिरीक्षक सारिका की देखरेख में की गई। दिल्ली का रहने वाला ठग जांच के दौरान शिकायतकर्ता ने लेन-देन से संबंधित दस्तावेज और बातचीत की रिकॉर्डिंग प्रस्तुत की। वहीं आरोपी अजर सतीजा निवासी अशोक नगर, पश्चिम दिल्ली जांच में शामिल नहीं हुआ, हालांकि फोन पर उसने स्वयं को डीएसए (डायरेक्ट सेलिंग एजेंट) के रूप में कार्यरत बताया। जांच रिपोर्ट में कहा गया कि प्रथम दृष्टया शिकायतकर्ता को लोन दिलाने के नाम पर गुमराह कर विभिन्न खातों में रकम डलवाकर धोखाधड़ी की गई है। इसके आधार पर आर्थिक अपराध शाखा ने मामला दर्ज करने की सिफारिश की। केस दर्ज कर जांच में जुटी पुलिस थाना सदर महेंद्रगढ़ पुलिस ने 29 जुलाई 2026 को आरोपी अजर सतीजा के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज कर लिया है। मामले की आगे की जांच एएसआई राजेश कुमार को सौंपी गई है।



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वर्ल्ड अपडेट्स: न्यूयॉर्क टाइम्स ने PoK को ‘पाकिस्तानी कश्मीर’ बताया; भारत ने जताई आपत्ति, कहा- यह हमारा अभिन्न हिस्सा




अमेरिकी अखबार न्यूयॉर्क टाइम्स (NYT) ने अपनी एक रिपोर्ट में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) को ‘पाकिस्तानी कश्मीर’ बताया। इसके बाद अमेरिका स्थित भारतीय दूतावास ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर आपत्ति दर्ज कराते हुए कहा कि ‘पाकिस्तानी कश्मीर’ जैसा कुछ नहीं है, केवल पाकिस्तान के कब्जे वाला कश्मीर (PoK) है। दूतावास ने कहा कि जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के पूरे केंद्र शासित प्रदेश भारत के अभिन्न और अविभाज्य हिस्से हैं तथा हमेशा रहेंगे। भारत ने पाकिस्तान पर जम्मू-कश्मीर के कुछ हिस्सों पर अवैध कब्जा करने और वहां रहने वाले लोगों के खिलाफ हिंसा करने का आरोप भी लगाया। साथ ही कहा कि इस मुद्दे पर भारत का रुख पहले से स्पष्ट और अपरिवर्तित है। दरअसल, न्यूयॉर्क टाइम्स ने पीओके में हालिया अशांति और स्थानीय चुनावों पर प्रकाशित रिपोर्ट में इस क्षेत्र को ‘पाकिस्तानी कश्मीर’ कहा था। रिपोर्ट में मीरपुर में सुरक्षा बलों और जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) के बीच झड़प, दो लोगों की मौत और चुनावी प्रक्रिया पर पड़े असर का भी जिक्र किया गया। अखबार ने यह भी कहा कि प्रदर्शनकारियों के कुछ दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… जापान में भूकंप से मौतों का आंकड़ा 28 पहुंचा; मॉल के मलबे में रेस्क्यू जारी जापान के कुमामोटो प्रांत में 28 जुलाई को आए 7.1 तीव्रता के भूकंप में मरने वालों की संख्या बढ़कर 28 हो गई है। कुमामोटो प्रशासन ने बताया है कि राहतकर्मी अब भी ढहे हुए एयॉन शॉपिंग मॉल के मलबे में फंसे लोगों की तलाश कर रहे हैं। वहीं, हजारों लोग बिजली-पानी के बिना भीषण गर्मी झेल रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, मॉल से अब तक 10 लोगों को बाहर निकाला गया है। इनमें 4 की मौत हो चुकी है, एक व्यक्ति की हालत गंभीर है और 5 लोग घायल हैं। राहतकर्मी अब भी मलबे में फंसे लोगों की तलाश में जुटे हैं। भूकंप के बाद हजारों घरों में बिजली और पानी की सप्लाई ठप है। गुरुवार सुबह तक करीब 22,670 घरों और संस्थानों में बिजली नहीं थी, जबकि 84 हजार से ज्यादा घरों में पानी की आपूर्ति बाधित रही। राहत शिविरों में भीषण गर्मी के बीच लोगों को ठहराया गया है और सरकार ने वहां एयर कंडीशनर भेजे हैं। यात्सुशिरो शहर की निप्पॉन पेपर इंडस्ट्रीज फैक्ट्री में चिमनी गिरने से 5 लोगों की मौत हुई है, जबकि 4 लोग अब भी लापता हैं।
BMW में 8 हजार नौकरियां जाएंगी: 2027 तक 5% वर्कफोर्स घटाने की तैयारी
जर्मनी की लग्जरी कार निर्माता BMW 2027 के अंत तक दुनियाभर में करीब 8,000 कर्मचारियों की छंटनी की तैयारी कर रही है। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, कंपनी बढ़ती उत्पादन लागत और चीन में बिक्री में आई गिरावट के कारण अपनी वैश्विक वर्कफोर्स का लगभग 5% घटाएगी। सबसे अधिक असर जर्मनी के कर्मचारियों पर पड़ने की संभावना है। रिपोर्ट्स के अनुसार, कंपनी अक्टूबर से स्वैच्छिक कर्मचारी कटौती कार्यक्रम शुरू कर सकती है, जो 2027 तक चलेगा। इसके तहत रिसर्च, डेवलपमेंट, प्लानिंग और अन्य कॉर्पोरेट विभागों के कर्मचारियों को वॉलंटरी बायआउट ऑफर किया जाएगा। हालांकि, फैक्ट्री कर्मचारियों को इस योजना में शामिल नहीं किया जाएगा। 2025 के अंत तक BMW के जर्मनी में 87,436 कर्मचारी थे, जो उसकी कुल वैश्विक वर्कफोर्स के आधे से अधिक हैं। कंपनी पहले ही 2024 की तुलना में अपने कर्मचारियों की संख्या में 2.3% की कमी कर चुकी है। जर्मनी की ऑटो इंडस्ट्री व्यापक दबाव का सामना कर रही है। Porsche ने 2035 तक अतिरिक्त 5,000 नौकरियां खत्म करने की घोषणा की है, जबकि Volkswagen भी बड़े पैमाने पर कर्मचारी संख्या घटाने पर विचार कर रही है। आतंकी सामग्री हटाने में लापरवाही का आरोप: ऑस्ट्रेलिया ने टेलीग्राम के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की
ऑस्ट्रेलिया के इंटरनेट सुरक्षा नियामक ने मैसेजिंग प्लेटफॉर्म टेलीग्राम के खिलाफ कानूनी कार्रवाई शुरू की है। आरोप है कि कंपनी ने आतंकवादी हमलों और चरमपंथी हिंसा से जुड़े वीडियो व अन्य सामग्री को शिकायत मिलने के बाद भी समय पर नहीं हटाया। नियमों के उल्लंघन पर कंपनी पर 5.46 करोड़ ऑस्ट्रेलियाई डॉलर तक का सिविल जुर्माना लगाया जा सकता है। अदालती दस्तावेज के अनुसार, जुलाई से अक्टूबर 2025 के बीच ऑस्ट्रेलियाई उपयोगकर्ताओं ने 12 पोस्ट की शिकायत की थी, जिनमें आतंकवाद समर्थक सामग्री थी। इनमें से तीन पोस्ट पहले से चिन्हित आतंकी सामग्री वाली थीं। आरोप है कि टेलीग्राम ने 10 पोस्ट नहीं हटाए और संबंधित खातों को भी निलंबित या ब्लॉक नहीं किया। टेलीग्राम ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि वह अदालत में अपना पक्ष रखेगा। टेलीग्राम के एक अरब से अधिक मासिक सक्रिय उपयोगकर्ता हैं। इसके संस्थापक पावेल दुरोव 2017 से दुबई में रहकर कंपनी का संचालन कर रहे हैं। हाल के दिनों में रूस ने भी दुरोव पर आरोप लगाया है कि ऐप का इस्तेमाल यूक्रेनी जासूस रूस के भीतर आतंकी गतिविधियों के समन्वय के लिए कर रहे हैं। सलमान रुश्दी पर हमले का दोषी आतंकवाद के आरोपों में भी दोषी करार
प्रसिद्ध लेखक सलमान रुश्दी पर 2022 में चाकू से हमला करने वाले हादी मातर को अमेरिका की संघीय अदालत ने आतंकवाद से जुड़े सभी आरोपों में दोषी ठहरा दिया है। पहले से हत्या के प्रयास के मामले में 25 साल की सजा काट रहे मातर को अब संघीय मामले में उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। इस मामले में सजा 3 नवंबर को सुनाई जाएगी। न्यूयॉर्क के बफेलो स्थित अमेरिकी जिला अदालत की जूरी ने करीब दो घंटे विचार-विमर्श के बाद मातर को लेबनान के ईरान समर्थित संगठन हिजबुल्लाह को सहयोग देने के प्रयास, अंतरराष्ट्रीय सीमा से जुड़े आतंकवाद और आतंकियों को सहायता उपलब्ध कराने सहित सभी आरोपों में दोषी पाया। अभियोजन पक्ष के अनुसार, मातर ने सलमान रुश्दी के विवादित उपन्यास ‘द सैटेनिक वर्सेज’ के खिलाफ जारी फतवे का एक वर्ष से अधिक समय तक अध्ययन किया और उसी से प्रेरित होकर 12 अगस्त 2022 को न्यूयॉर्क के चॉटाक्वा इंस्टीट्यूशन में मंच पर उन पर चाकू से हमला किया। 1989 में ईरान के तत्कालीन सर्वोच्च नेता अयातुल्ला रुहोल्लाह खुमैनी ने ‘द सैटेनिक वर्सेज’ को ईशनिंदा बताते हुए रुश्दी की हत्या का फतवा जारी किया था। बाद में ईरानी सरकार ने इससे दूरी बना ली, लेकिन यह फतवा समय-समय पर विभिन्न कट्टरपंथी संगठनों द्वारा समर्थन पाता रहा।



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जब एक झटके में 36 करोड़ लोग अंधेरे में डूब गए, ठप पड़ गया था उत्तर भारत


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भारतीय इतिहास में एक तारीख ऐसी भी है जिसे देश के सबसे बड़े बिजली संकट के लिए याद किया जाता है. यह तारीख है 30 जुलाई, 2012. इस दिन उत्तरी बिजली ग्रिड फेल होने से दिल्ली समेत उत्तर भारत के 7 राज्यों में एक साथ बिजली चली गई थी. इस घटना से करीब 36 करोड़ लोग प्रभावित हुए थे. इस तारीख पर कई और अहम घटनाएं भी दर्ज हैं. 

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इस तकनीकी खराबी का असर सिर्फ बिजली तक सीमित नहीं रहा था. (सांकेतिक तस्वीर)

नई दिल्ली. इतिहास की कुछ तारीखें इसलिए याद रहती हैं क्योंकि उन्होंने करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर गहरा असर डाला. 30 जुलाई ऐसी ही एक तारीख है. साल 2012 में इसी दिन भारत ने अपने इतिहास के सबसे बड़े बिजली संकटों में से एक का सामना किया, जब अचानक उत्तरी बिजली ग्रिड ठप पड़ गई और देखते ही देखते उत्तर भारत के बड़े हिस्से में अंधेरा छा गया.

इस तकनीकी खराबी का असर सिर्फ बिजली तक सीमित नहीं रहा. रेल सेवाएं प्रभावित हुईं, कई ट्रेनें बीच रास्ते में रुक गईं, मेट्रो संचालन पर असर पड़ा, दफ्तरों और उद्योगों का काम ठहर गया और करोड़ों लोगों की दिनचर्या पूरी तरह बदल गई. इस घटना ने यह भी दिखाया कि आधुनिक भारत की अर्थव्यवस्था और बुनियादी सेवाएं बिजली पर कितनी निर्भर हो चुकी हैं.

जब 7 राज्यों में एक साथ चली गई बिजली

30 जुलाई 2012 की सुबह उत्तरी बिजली ग्रिड में आई तकनीकी खराबी के कारण दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और चंडीगढ़ में एक साथ बिजली आपूर्ति बंद हो गई. इस ब्लैकआउट से करीब 36 करोड़ लोग प्रभावित हुए. कई ट्रेनों को बीच रास्ते में रोकना पड़ा और बिजली बहाल करने में कई घंटे लग गए. इसे उस समय दुनिया के सबसे बड़े बिजली संकटों में गिना गया था.

30 जुलाई की दूसरी प्रमुख घटनाएं

  • 1836: अमेरिका के हवाई में अंग्रेजी भाषा का पहला समाचार पत्र प्रकाशित हुआ.
  • 1886: भारत की पहली महिला विधायक और समाज सुधारक एस. मुथुलक्ष्मी रेड्डी का जन्म हुआ.
  • 1930: एनबीसी रेडियो पर ‘डेथ वैली डेज’ का पहला प्रसारण हुआ.
  • 1942: द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मन सेना ने बेलारूस के मिंस्क में हजारों यहूदियों की हत्या की.
  • 1957: एक्सपोर्ट रिस्क इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (प्राइवेट) लिमिटेड की स्थापना हुई.
  • 1966: इंग्लैंड ने पहली बार फुटबॉल विश्व कप का खिताब जीता.
  • 1980: वानुआतु को स्वतंत्र राष्ट्र का दर्जा मिला.
  • 2002: कनाडा ने अल कायदा समेत सात संगठनों को आतंकवादी संगठन घोषित किया.
  • 2007: चीनी वैज्ञानिकों ने झेंगझाऊ क्षेत्र में करीब 50 लाख वर्ष पुरानी चट्टानों की खोज की.
  • 2024: केरल के वायनाड में भीषण भूस्खलन में 200 से ज्यादा लोगों की मौत हुई.
  • 2025: इजराइली हमलों में 46 फलस्तीनी नागरिकों की मौत हुई.

क्यों याद रखा जाता है 30 जुलाई?

30 जुलाई सिर्फ ऐतिहासिक घटनाओं की एक और तारीख नहीं है. यह दिन याद दिलाता है कि एक तकनीकी गड़बड़ी भी पूरे देश की रफ्तार को थाम सकती है. वहीं इस दिन हुई दूसरी घटनाएं भी राजनीति, विज्ञान, खेल और वैश्विक इतिहास के कई महत्वपूर्ण पड़ावों की गवाह रही हैं. इसलिए 30 जुलाई का इतिहास कई मायनों में खास माना जाता है.

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जय ठाकुरSenior-Sub Editor

मैं जय ठाकुर, न्यूज18 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहा हूं. मेरा मुख्य काम बिजनेस की पेचीदा खबरों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. फिर चाहे वह शेयर बाजार की हलचल हो, देश की इकोनॉमी क…

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मारू को लेने आधी रात में निकला ढोला: गहरी साजिशों और सुलगती रेत के संघर्ष से गुजर कर बनी अमर जोड़ी; ढोला-मारू प्रेम कहानी एपिसोड-4 – Rajasthan News


कल आपने पढ़ा कि नरवर के सैनिकों को चकमा देकर किसी तरह से ढाढी (लोक गायक) ढोला के महल तक पहुंचा और उसने मल्हार गाना शुरू कर दिया।

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पढ़िए आगे की कहानी….

मारू का संदेश अब शब्दों में नहीं, सुरों में था। जैसे ही सारंगी की दर्दभरी तान नरवर के महल तक पहुंची, ढोला की नींद टूट गई….गानों के बोल सुनकर उसका मन बेचैन हो उठा।

जाग उठीं बचपन की धुंधली यादें

ढोला ने सैनिकों को आदेश दिया कि महल के बाहर जो गायक गा रहे हैं, उन्हें तुरंत सामने पेश किया जाए। सैनिकों ने कालूराम (ढाढी) को उसके साथियों समेत राजा के सामने पेश कर दिया।

कौन हो तुम? और ये किसकी कहानी गा रहे हो? ये गीत सुनकर मन व्याकुल क्यों हो उठा है, ढोला बेचैन था।

ये किसी और की नहीं आपकी ही कहानी है महाराज। मैं पूगल से आया हूं।आपकी पत्नी मारू ने मुझे भेजा है। बरसों से वो आपकी राह देख रही हैं। कई संदेश भेजे, लेकिन कोई भी आप तक नहीं पहुंच सका..वो आपके इंतजार में बेजान सी हो गई हैं.. महाराज आप अब उन्हें ले आएं। अवसर न गंवाते हुए कालूराम ने एक सांस में मारू की पूरी व्यथा ढोला को सुना दी।

कहानी सुनने के साथ ही बचपन की धुंधली यादें एक-एक कर जैसे ढोला के सामने से गुजरने लगीं। उसे अपनी नन्हीं दुल्हन मारू की वो मासूम सूरत याद आई जो वक्त की धूल में कहीं दब गई थी…. एक छोटा सा हाथ, नन्हीं सी दुल्हन, पूगल और बचपन, ढोला को सब याद आ गया।

ढोला के महल के बाहर ढाढी (लोक गायक) ने मल्हार गाया था।

मालवणी की जिद और ‘करहा’ का साथ

अब ढोला के मन में सिर्फ एक ही तड़प थी- पूगल पहुंचना और अपनी मारू को वापस लाना। उसने बिना समय गंवाए पूगल जाने का निर्णय लिया। यह इतना आसान नहीं था। ढोला की पत्नी मालवणी को जब पता चला कि ढोला पूगल जाने की तैयारी कर रहा है तो उसने उसे रोकने के लिए साम-दाम-दंड-भेद सब आजमा लिए।

आधी रात को जब मालवणी सो रही थी और पूरा नरवर सन्नाटे में डूबा था, ढोला चुपके से अस्तबल पहुंचा। उसने सबसे फुर्तीले और वफादार ऊंट करहा को चुना और उस पर सवार रेगिस्तान के सीने को चीरते हुए पूगल के लिए निकल पड़ा।

चांदनी रात थी। चारों तरफ रेत के सुनहरे धोरों के बीच ऊंट के गले में बंधी घंटियां ‘टन-टन’ बज रही थीं। न भूख न प्यास, सारी चिंता पीछे छोड़े ढोला अपनी धुन में मगन था। उसके भीतर बस ढाढी के गीत के वो बोल गूंज रहे थे —

“पूगल री पद्मिनी जोवे थारी बाट!

रेत के धोरों को चीरता ढोला का संकल्प

जहां प्रेम होता है, वहां परीक्षा भी होती है। ढोला का ऊंट बिजली की रफ्तार से पूगल की तरफ बढ़ रहा था, लेकिन राह अभी भी आसान नहीं थी। कभी तपती रेत के बवंडर उठते, तो कभी रास्ता भटकाने वाली आवाजें आतीं। लेकिन ढोला का संकल्प पहाड़ जैसा था। कहा जाता है कि उस रात ढोला ने इतना लंबा सफर तय किया, जितना लोग कई दिनों में नहीं कर पाते।

खत्म हुआ सालों का इंतजार

उधर पूगल में मारू रोज की तरह महल की अटारी पर खड़ी राह तक रही थी। तभी दूर क्षितिज पर रेत का गुबार उठा और ढोला के ऊंट के गले की घंटियां सुनाई दीं। धूल छंटने के साथ ढोला ने महल के आंगन में कदम रखा। सालों का इंतजार, आंसू और विरह की तपती रातें… सब एक पल में खत्म हो गए। मारू को अपना बचपन का साथी, अपना ‘ढोला’ मिल गया था।

ढोला के आगमन की खुशी में रेगिस्तान में जैसे सावन आ गया था, पूरे पूगल में जश्न मनाया गया। ढोला कुछ दिन पूगल रुके, फिर मारू को साथ लेकर नरवर के लिए रवाना हुए। लेकिन मिलन की इस राह में अभी भी परीक्षा बाकी थी।

साजिश का जाल और मारू की चतुराई

रास्ते में एक सामंत था- उमरा-सूमरा। वह खुद मारू से शादी करना चाहता था। उसे जब खबर मिली कि ढोला मारू को लेने पूगल जा रहा है, तो उसने रास्ते में एक जाल बिछाया। उसने ढोला को धोखे से रोक लिया और मेहमानवाजी का नाटक किया। उमरा-सूमरा की योजना थी कि ढोला को अफीम (कसूंबा) पिलाकर मदहोश कर उसे मार डालेगा।

चेहरे पर मुस्कान और मन में छल लिए उसने ढोला का स्वागत किया। ढोला उसके सम्मान में रुक गए। साथ आए ढाढी को उसकी साजिश का आभास हो गया। उसने इशारे से ढोल बजाकर मारू को सावधान किया। मारू इशारा समझ गई और बिना देर किए उसने ऊंट को एड़ लगाई। ऊंट जैसे ही दौड़ा ढोला उसे रोकने दौड़े, तभी मारू ने फुर्ती से ढोला को ऊपर खींच लिया।

उमरा-सूमरा ने दोनों का पीछा किया। रेगिस्तान के बीचों-बीच रोमांचक मुकाबला हुआ, लेकिन ढोला का साहस और मारू का साथ अटूट था। उन्होंने चतुराई और करहा ऊंट की फुर्ती से दुश्मनों को पछाड़ दिया। देखते ही देखते दोनों उमरा-सूमरा से बचकर दूर निकल गए।

ऊंट पर सवार ढोला-मारू का रेगिस्तानी सफर।

ऊंट पर सवार ढोला-मारू का रेगिस्तानी सफर।

मिलन और खुशहाली का आगाज

हर बाधा को पार कर ढोला और मारू नरवर पहुंचे तो वहां की हवाएं भी जैसे झूम उठीं। शुरुआत में मालवणी को ईर्ष्या हुई, लेकिन मारू की सादगी और ढोला के सच्चे प्रेम ने सबका दिल जीत लिया। कहते हैं इसके बाद नरवर में कभी खुशहाली की कमी नहीं हुई।

….और अमर हो गई ढोला- मारू की प्रेम कहानी

मारू थारे देस में, निपजै तीन रतन।

एक ढोला, दूजी मरवण, तीजो कसूमल रंग।।

राजस्थान की रेत पर जन्मी यह अमर प्रेमकथा राजस्थान की लोक संस्कृति में गहरी बसी है। ढोला और मारू आज भी लोकगीतों, लोक कथाओं और चित्रकला में जीवित हैं। चित्रों में ढोला-मारू को ऊंट पर सवार दिखाया जाता है, जो उनके रेगिस्तानी सफर और अमर प्रेम का प्रतीक है। ग्यारहवीं शताब्दी में कवि कलोल ने ढोला और मारू के प्रेम और विरह को दोहों में लिखा। लोक-प्रसिद्ध राजस्थानी काव्य ‘ढोला मारू रा दूहा’ इस रोमांचक प्रेम कहानी का लोकप्रिय काव्य है।

(यह लोक कथा पुरानी परंपराओं, ऐतिहासिक संदर्भ और सांस्कृतिक मान्यताओं पर आधारित है। बाल विवाह सामाजिक बुराई और कानूनन अपराध है। दैनिक भास्कर बाल विवाह जैसी किसी भी कुप्रथा का समर्थन नहीं करता।

कहानी को रोचक बनाने के लिए क्रिएटिव लिबर्टी का इस्तेमाल किया गया है। सोर्स : राजस्थानी साहित्य, लोक कथाएं व स्थानीय लोगों से बातचीत। )

इनपुट सहयोग– अनुराग हर्ष, सुजान सिंह, कपिल मिश्रा (शिवपुरी), सुनील जैन, भरत मूलचंदानी, स्वाति पाठक

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ढोला-मारू की प्रेम-कहानी के 3 एपिसोड यहां पढ़िए…

1- डेढ़ साल की ‘दुल्हन’ और तीन साल का ‘दूल्हा’:भीषण अकाल में पड़ी थी ढोला और मारू के प्रेम की नींव; 4 एपिसोड में ढोला-मारू की कहानी

राजस्थान की तपती रेत पर जब कमायचा और रावणहत्था के तार छिड़ते हैं तो एक ऐसी प्रेम कहानी गूंजती है जो सदियों बाद भी अमर है। यह कहानी है ‘ढोला-मारू’ की। पूरा एपिसोड…

2- ढोला-मारू के साथ हुआ था 300 जोड़ों का विवाह: कम उम्र में जिम्मेदारी और दूसरी शादी में छुप गया बचपन का सच; एपिसोड-2

उन दिनों बाल-विवाह की परंपरा थी और रिश्ते सिर्फ परिवारों को नहीं, बल्कि राज्यों को जोड़ते थे। जिसके चलते दोनों राजाओं ने अपनी गहरी दोस्ती को रिश्तेदारी में बदलने का निर्णय लिया था। पूरा एपिसोड…

3- पहरों का ऐसा जाल कि परिंदा पर न मार सके:आधी रात को ढोला के महल तक कैसे पहुंची मारू की पुकार?, ढोला-मारू प्रेम कहानी एपिसोड-3

समय बीतने के साथ मारू की अधिकतर सहेलियां ससुराल चली गईं, लेकिन मारू को विदा कराने अब तक कोई नहीं आया था। हर बीतते दिन के साथ मारू की आंखों में ढोला का इंतजार और गहरा होता गया। पूरा एपिसोड…



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