Thursday, May 14, 2026
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अहमदाबाद प्लेन क्रैश के पीड़ित परिवारों का दर्द: 11 महीने बाद भी मुआवजा नहीं मिला, नौकरी का वादा था, लेकिन अब जवाब नहीं देते – Gujarat News


12 जून 2025 को अहमदाबाद से लंदन जा रही बोइंग 787-8 फ्लाइट टेकऑफ के कुछ ही सेकेंड बाद क्रैश हो गई थी।

अहमदाबाद में 12 जून, 2025 को हुए एआई 171 विमान हादसे को एक साल पूरा होने में एक महीने से भी कम समय बचा है। जबकि,मृतकों के पीड़ित परिवार न्याय के लिए अब तक संघर्ष कर रहे हैं। उनका आरोप है कि कई बार गुहार लगाने के बावजूद उन्हें न्याय नहीं मिला है। यहां

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पीड़ितों के कुछ परिवारों ने अहमदाबाद के सोला भगवत में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस आयोजित की। इसमें उन्होंने मुआवजे, दुर्घटनास्थल पर एक वर्ष के भीतर भूमि शुद्धिकरण और विभिन्न धर्मों के लोगों को धार्मिक अनुष्ठान करने की अनुमति देने की मांग की।

इसके अलावा, मृतकों के परिवारों समेत कई लोग अभी भी दुर्घटना के सटीक कारण का पता नहीं लगा पाए हैं। हालांकि सरकार ने एक महीने के भीतर रिपोर्ट जारी करने की बात कही है, लेकिन पीड़ितों के परिवार ब्लैक बॉक्स डेटा जारी करने की मांग कर रहे हैं।

हेतल प्रजापति की पति महेश जीरावाला के साथ। (फाइल फोटो)

हादसे में जान गंवाने वाले फिल्म निर्माता महेश जीरावाला की पत्नी हेतलबेन प्रजापति ने कहा- टाटा समूह के कुछ लोगों ने मुझे मेरी एजुकेशन के आधार पर नौकरी दिलाने का आश्वासन दिया था। नौकरी का आश्वासन दिए हुए 11 महीने बीत चुके हैं। हमने कई बार ईमेल किया, लेकिन कोई जवाब नहीं आया। अब एयरलाइन और टाटा समूह किसी भी तरह से सहयोग नहीं कर रहे हैं।

वहीं, घटना के समय पुलिस ने कोई सहयोग नहीं दिया। जब हमने जांच की तो पता चला कि डीएनए मिलान हो गया है और मेरे पति की मृत्यु हो चुकी है। इसके बाद एयरलाइन और टाटा समूह के कुछ लोग हमसे मिलने हमारे घर आए। उन्होंने भविष्य में किसी भी तरह की समस्या आने पर मदद का आश्वासन दिया था।

टाटा समूह की ओर से कोई मुआवजा नहीं दिया गया विमान दुर्घटना में अपने बेटे को खोने वाले मोहम्मद रफीकभाई ने कहा- विमान दुर्घटना में मेरे बेटे की मृत्यु हो गई। लेकिन 11 महीने बीत जाने के बाद भी टाटा समूह की ओर से कोई मुआवजा नहीं दिया गया है। साथ ही, कोई जवाब भी नहीं मिल रहा है।

यहां तक ​​कि ईमेल करने पर भी हमें कोई उचित जवाब नहीं मिल रहा है। हमारा फोन भी अब नहीं उठाया जा रहा है। हम मांग करते हैं कि मुझे न्याय मिले और उचित मुआवजा दिया जाए। साथ ही, हमें इस घटना के बारे में भी स्पष्ट जानकारी दी जाए कि यह कैसे हुई।

वहीं, सामाजिक कार्यकर्ता कविराज ने कहा कि 12 जून 2026 को हुए विमान हादसे को एक साल पूरा हो जाएगा। अब एक महीने से भी कम समय बचा है। इसलिए पीड़ितों के परिवार दुर्घटनास्थल की भूमि को शुद्ध करना चाहते हैं और धार्मिक कार्यक्रम की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कई बार ब्लैक बॉक्स का डेटा उपलब्ध कराने के लिए पत्र भेजे हैं, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला है।

जून में प्लेन क्रैश की फाइनल रिपोर्ट आने की संभावना

गुजरात के अहमदाबाद में 12 जून 2025 को एअर इंडिया का AI17 प्लेन क्रैश हुआ था। यह फ्लाइट अहमदाबाद से लंदन जा रही थी लेकिन टेक-ऑफ के तुरंत बाद क्रैश हो गई थी। इस हादसे में 270 लोगों की मौत हुई थी।

पीड़ित परिवारों ने लेटर की कॉपी एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB), डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ सिविल एविएशन (DGCA) और गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल को भी भेजी हैं। इस मामले में एअर इंडिया की प्रतिक्रिया का इंतजार है।

एयरक्राफ्ट एक्सीडेंट इन्वेस्टिगेशन ब्यूरो (AAIB) ने पिछले साल जुलाई में प्लेन क्रैश की प्रारंभिक जांच रिपोर्ट सौंपी थी। फाइनल रिपोर्ट इस साल जून में, यानी हादसे की पहली बरसी के आसपास आने की संभावना है।

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अहमदाबाद प्लेन हादसे से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…

अहमदाबाद प्लेन क्रैश- विमान में पहले से खराबी थी:अमेरिकी रिपोर्ट में इलेक्ट्रिकल फेलियर की आशंका

अहमदाबाद में 12 जून 2025 को क्रैश हुए एअर इंडिया के बोइंग 787 विमान में पहले से कई गंभीर तकनीकी दिक्कतें थीं। चार साल पहले प्लेन में आग भी लगी थी। अमेरिका स्थित फाउंडेशन फॉर एविएशन सेफ्टी (FAS) ने दावा किया है कि विमान में इलेक्ट्रिकल सिस्टम फेल होने से एक के बाद एक कई सिस्टम बंद हुए। पूरी खबर पढ़ें…



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‘मैं जो चोगा पहनती हूं वो…’ जस्‍ट‍िस स्‍वर्णकांता ने ऐसा ये क्‍यों कहा?


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‘मैं जो चोगा पहनती हूं वो…’ जस्‍ट‍िस स्‍वर्णकांता ने ऐसा ये क्‍यों कहा?

Last Updated:

Arvind Kejriwal News: द‍िल्‍ली शराब घोटाले केस में कई आरोपियों को बरी किए जाने को चुनौती देने वाली सीबीआई की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस शर्मा ने पाया क‍ि कई लोगों ने अदालत की अवमानना की है. जस्‍ट‍िस स्‍वर्णकांता ने कहा था क‍ि वह ऐसे आरोपों के सामने चुप नहीं रह सकतीं और संकेत दिया कि अवमानना ​​की कार्रवाई शुरू की जाएगी और अब वह इस मामले में ही फैसला दे रही हैं…

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अरव‍िंद केजरीवाल केस में जस्‍ट‍िस स्‍वर्णकांता शर्मा ने क्‍या क्‍या कहा (Photo AI)

नई द‍िल्‍ली. ‘मैं जो चोगा पहनती हूं वो इतना कमज़ोर नहीं है कि कुछ आलोचनाओं से उस पर असर पड़े’ अरव‍िंद केजरीवाल समेत 22 आरोप‍ियों को द‍िल्‍ली आरोप मुक्‍त करने के मामले की सुनवाई के दौरान जस्‍ट‍िस स्‍वर्णकांता ने यह ट‍िप्‍पणी की.दिल्ली हाई कोर्ट ने गुरुवार को कहा था कि वह कुछ प्रतिवादियों और व्यक्तियों के खिलाफ अवमानना ​​की कार्यवाही शुरू करेगा जब दिल्ली शराब घोटाले मामले के संबंध में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा के खिलाफ कथित तौर पर ‘बेहद मानहानिकारक सामग्री’ फैलाई गई थी.

दरअसल, कोर्ट ने साफ किया कि अवमानना की ये कार्यवाही अचानक या किसी निजी नाराजगी की वजह से शुरू नहीं हुई. फैसला सुनाने के बाद कोर्ट के संज्ञान में आया कि सोशल मीडिया पर एक सुनियोजित डिजिटल कैंपेन चलाया गया था. एडिट किए हुए वीडियो, चिट्ठियां और पोस्ट बड़े पैमाने पर फैलाए गए जिनका मकसद सिर्फ आलोचना नहीं, बल्कि पूरी न्यायपालिका की छवि को निशाना बनाना था.

‘जज का चोगा पहनने वाले से शांत रहने की अपेक्षा होती है’
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कहा कि उन्हें निष्पक्ष आलोचना और असहमति स्वीकार करने की ट्रेनिंग दी गई है, और जज का चोगा पहनने वाले से शांत रहने की अपेक्षा की जाती है. लेकिन उन्होंने ये भी स्पष्ट किया कि हर बार चुप रहना न्यायिक संयम नहीं होता. इस मामले में की गई टिप्पणियां सिर्फ असहमति नहीं थीं बल्कि एक बदनामी अभियान का हिस्सा थीं, जिसमें कुछ लोगों के पास राजनीतिक ताकत भी थी.

‘डराने-धमकाने की कोशिश की गई’
जस्‍ट‍िस शर्मा ने कहा क‍ि उन्हें डराने-धमकाने की कोशिश की गई. कोर्ट के खिलाफ मनगढ़ंत कहानियां गढ़ी गईं और यहां तक कि उनके परिवार को भी इन कहानियों में घसीटा गया ताकि सोच-समझकर उनका अपमान किया जा सके. जब कोर्ट के अंदर कानूनी प्रक्रिया चल रही थी तब बाहर समानांतर डिजिटल नैरेटिव खड़ा किया जा रहा था जो सीधे इस कोर्ट और न्यायपालिका को टारगेट कर रहा था.

‘न्‍याय‍िक चोगा इतना कमजोर नहीं होता’
इसी पृष्ठभूमि में जस्टिस स्वर्णकांता ने यह टिप्पणी की कि वे जो न्यायिक चोगा पहनती हैं, वह इतना कमज़ोर नहीं कि आलोचनाओं से हिल जाए लेकिन जब आलोचना की आड़ में न्यायपालिका की संस्थागत साख पर सुनियोजित हमला हो तो कोर्ट का चुप रहना भी न्यायिक संयम नहीं माना जा सकता. यही वह क्षण था जब उन्होंने अवमानना की कार्यवाही आगे बढ़ाने का संकेत दिया.



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अजय देवगन की हीरोइन, गोविंदा संग किया था जमकर रोमांस, संगीतकार के प्यार में डूब गया करियर


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प्रतिभा सिन्हा बॉलीवुड की दिग्गज एक्ट्रेस माला सिन्हा की बेटी हैं. फिल्मी बैकग्राउंड से आई प्रतिभा के लिए एक्टिंग में करियर बनाना ज्यादा मुश्किल नहीं था.अपने करियर में उन्होंने अजय देवगन, गोविंदा और आमिर खान जैसे स्टार्स संग काम किया था.

नई दिल्ली. एक्टिंग की दुनिया में प्रतिभा सिन्हा ने अलग जगह बनाई थी. आमिर खान और करिश्मा कपूर संग एक गाने ने तो उन्हें कभी न मिटने वाली पहचान दी. लेकिन एक संगीतकार के चलते उन्होंने अपना बना बनाया करियर बर्बाद कर लिया.

जब प्रतिभा एक्टिंग की दुनिया में आईं, तो लोगों को उम्मीद थी कि वह भी अपनी मां की तरह बड़ा नाम बनेंगी. उनकी खूबसूरती और स्क्रीन प्रेजेंस को देखकर माना जा रहा था कि वह 90s की बड़ी स्टार बन सकती हैं. लेकिन असल जिंदगी में ऐसा नहीं हो सका.

प्रतिभा सिन्हा ने अपने करियर की शुरुआत साल 1992 में आई फिल्म ‘महबूब मेरे महबूब’ से की थी. लेकिन उनकी ये फिल्म बॉक्स ऑफिस पर कुछ खास कमाल नहीं दिखा पाई. इसके बाद भी प्रतिभा ने हार नहीं मानी और कई फिल्मों में कई बड़े स्टार्स संग काम किया.

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अजय देवगन के साथ वह फिल्म दिल है बेताब में भी नजर आई थीं. उस दौरान अजय देवगन की फिल्में बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा देती थीं. ये वो वक्त था, जब वह अपने करियर में उभरते सितारे के तौर पर पहचान बना रहे थे. इस फिल्म से लोगों ने उन्हें नोटिस करना शुरू किया था.

फिल्म दीवाना मस्ताना में वह गोविंदा के साथ नजर आई थीं. इस फिल्म के गाने खिड़की खुली जरा, जरा पर्दा सरक गया, कमरा था दिल का खाली कोई चुपके से आ गया. इस गाने में उन्होंने गोविंदा संग टूटकर रोमांस किया था.

इसके बाद साल 1996 में आई फिल्म ‘राजा हिंदुस्तानी’ में भी प्रतिभा नजर आई थीं. इस फिल्म के 7 मिनट 12 सेकंड के गाने ‘परदेसी परदेसी जाना नहीं’ सिर्फ एक गाना नहीं, बल्कि 90 के दशक की सबसे गहरी मोहब्बत और बेबसी की पहचान बन गया था.

इस गाने में प्रतिभा सिन्हा ने ऐसा डांस किया था कि लोग उन्हें आज तक नहीं भूल पाए हैं. माधुरी दीक्षित की हमशक्ल कही जाने वाली प्रतिभा सिन्हा की सादगी और एक्सप्रेशन ने गाने को ब्लॉकबस्टर बना दिया था. लेकिन करियर के पीक पर उन्हें संगीतकार नदीम सैफी से प्यार हो गया. दोनों के प्यार के खूब चर्चे होने लगे थे. उस समय नदीम पहले से शादीशुदा थे, लेकिन मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक प्रतिभा उनसे बेहद प्यार करती थीं. दोनों के रिश्ते ने खूब सुर्खियां बटोरीं.

नदीम सैफी का नाम बाद में कई विवादों में भी आया. इन विवादों का असर प्रतिभा सिन्हा के करियर पर भी पड़ा. धीरे-धीरे उन्हें फिल्मों के ऑफर मिलने कम हो गए. जो करियर तेजी से आगे बढ़ सकता था, वह पटरी से उतरने लगा. देखते ही देखते वह एक्टिंग की दुनिया से गुमनाम हो गईं.

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मऊ में युवक की पीट-पीटकर हत्या मामला, 3 गिरफ्तार: चार दिन बाद पुलिस ने अंडरपास के पास से पकड़ा – Mau News




मऊ के रानीपुर थाना क्षेत्र के खिरियां गांव में चार दिन पहले एक युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने गुरुवार को हत्या के प्रयास के आरोप में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के इटौरा अंडरपास के पास से हुई। अपर पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार ने पुलिस लाइन में प्रेसवार्ता के दौरान मामले का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि रानीपुर थाना क्षेत्र के खिरिया गांव निवासी 27 वर्षीय पंकज रविवार को अपने 57 वर्षीय चाचा अच्छे लाल के साथ बाइक पर शराब के ठेके से लौट रहा था। गांव के पास उनकी बाइक अनियंत्रित होकर पलट गई। जब पंकज अपने चाचा को उठा रहा था, तभी चौहान बस्ती निवासी आनंद चौहान से उसकी किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई। यह कहासुनी हाथापाई में बदल गई। इसके बाद आनंद चौहान ने अपने पांच अन्य साथियों को मौके पर बुला लिया। लाठी-डंडों से लैस छह युवकों ने पंकज की बेरहमी से पिटाई की और मौके से फरार हो गए। गंभीर रूप से घायल पंकज को पहले जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत गंभीर होने पर उसे वाराणसी रेफर कर दिया गया। सोमवार रात वाराणसी ले जाते समय रास्ते में पंकज की मौत हो गई। पंकज की मौत से आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद शव को अंबेडकर मूर्ति के पास रखकर आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की थी। बुधवार को रानीपुर पुलिस ने छह लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि तीन अन्य अभी फरार हैं। पुलिस फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है। अपर पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार ने बताया कि गुरुवार को पुलिस टीम आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही थी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि तीन आरोपित पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के इटौरा अंडरपास के पास आए हुए हैं। मुखबिर से सूचना मिलते ही थाना रानीपुर पुलिस टीम ने युवक की हत्या के प्रयास में शामिल तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की शिनाख्त आनंद चौहान, योगेश चौहान, अंकित चौहान निवासी निवासी बस्ती थाना रानीपुर के रूप में किया गया। जबकि घटना में शामिल तीन आरोपित अभी भी पुलिस पकड़ से दूर हैं। अपर पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार ने दावा किया कि जल्द ही फरार तीन अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।



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अनूपपुर से अगवा नाबालिग तेलंगाना में मिली, आरोपी गिरफ्तार: शादी का झांसा देकर भगाने वाला युवक पुलिस हिरासत में – Anuppur News




अनूपपुर पुलिस ने एक महीने पहले लापता हुई 17 वर्षीय नाबालिग को तेलंगाना से बरामद कर गुरुवार को अनूपपुर लेकर आई है। इस मामले में किशोरी को भगाने वाले आरोपी श्यामनारायण केवट को भी गिरफ्तार किया गया है। आरोपी को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है, जबकि किशोरी को उसके परिजनों को सौंप दिया गया है। कोतवाली थाना पुलिस ने गुरुवार को तेलंगाना राज्य के रंगारेड्डी जिले के सादनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत चटानपल्ली से किशोरी को दस्तयाब किया। आरोपी श्यामनारायण केवट (23 वर्ष) अनूपपुर के ग्राम बिजौडी का निवासी है। वह तेलंगाना में एक निजी कंपनी में मजदूरी का काम करता था। थाना प्रभारी अरविंद जैन ने बताया कि 15 अप्रैल को किशोरी के अचानक घर से लापता होने की रिपोर्ट परिजनों ने दर्ज कराई थी। जांच में सामने आया कि आरोपी श्यामनारायण केवट का किशोरी से पहले से परिचय था। उसने शादी का झांसा देकर नाबालिग को अपने साथ तेलंगाना ले गया था। परिजनों की शिकायत पर अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने परिजनों से पूछताछ और सायबर सेल की मदद से किशोरी की तलाश की। आरोपी पर कई धाराओं में मामला दर्ज कर उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है।



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खगड़िया में कार-ट्रक की भिड़ंत, 3 की मौत: ट्रक के पीछे आ रही बाइक भी टकराई, घायल का सदर हॉस्पिटल में इलाज जारी – Khagaria News




खगड़िया में गुरुवार दोपहर रोड एक्सीडेंट में 3 लोगों की मौत हुई है। घटना पसराहा थाना क्षेत्र में नेशनल हाईवे (NH) – 31 बंधु पेट्रोल पंप के पास हुई। ट्रक और कार की आमने-सामने टक्कर हुई, वहीं ट्रक के पीछे चल रही बाइक ट्रक के अचानक ब्रेक लगने से उसमें पीछे से टकरा गई। इस घटना में एक शिक्षिका सहित 3 लोगों की मौत हो गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल है। मृतकों की पहचान परबत्ता प्रखंड के खीराडीह पंचायत वार्ड संख्या-3 निवासी शिक्षिका कुमारी रूबी (34), नवगछिया के साहू परबत्ता निवासी नीतीश कुमार (38) और झंझड़ा निवासी कार ड्राइवर विकास कुमार (35) के रूप में हुई है। हादसे में घायल सोनू कुमार का इलाज खगड़िया सदर अस्पताल में चल रहा है। घटना से जुड़ी तस्वीरें देखिए…. अब जानें पूरी घटना…. बाइक ड्राइवर की मौके पर ही मौत प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, NH-31 पर तेज रफ्तार ट्रक और कार के बीच आमने-सामने की टक्कर हुई। टक्कर इतनी भीषण थी कि चार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। इसी दौरान पीछे से आ रही एक बाइक बेकाबू होकर ट्रक से जा टकराई। इस हादसे में बाइक ड्राइवर नीतीश कुमार की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पीछे बैठे सोनू कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए। बोलेरो में सवार शिक्षिका कुमारी रूबी और चालक विकास कुमार भी गंभीर रूप से जख्मी हुए। स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत-बचाव कार्य शुरू किया और पुलिस की मदद से सभी घायलों को अनुमंडलीय अस्पताल गोगरी पहुंचाया। इलाज के लिए अस्पताल ले जाते समय मौत गोगरी अस्पताल में इलाज के दौरान शिक्षिका कुमारी रूबी ने दम तोड़ दिया। गंभीर रूप से घायल चालक विकास कुमार को सदर अस्पताल खगड़िया रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी भी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पसराहा थानाध्यक्ष नवीन कुमार और अपर थानाध्यक्ष रिशु कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने दुर्घटनास्थल को अपने कब्जे में लेकर यातायात बहाल कराया। पुलिस ने तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल खगड़िया भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। 4 बच्चों की मां थी टीचर मृतक शिक्षिका कुमारी रूबी मध्य विद्यालय मंडल टोला चकरामी, नारायणपुर में कार्यरत थीं। विक्रमशिला पुल क्षतिग्रस्त रहने के कारण वह ससुराल से ही विद्यालय जाया करती थीं। उनके पति भारतीय थल सेना में कार्यरत हैं। शिक्षिका अपने पीछे 2 बेटे और 2 बेटियों को छोड़ गई हैं। उनका मायका सलारपुर गांव में बताया जा रहा है। इधर, घटना की खबर मिलते ही मृतकों के घरों में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है। स्थानीय लोगों ने NH-31 पर लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं पर चिंता जताते हुए प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।



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हरी मिर्च, लहसुन और सरसों तेल का कमाल! सिलबट्टे पर बनती है मिथिला की यह खास चटनी


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मिथिलांचल में तीखा और चटपटा खाना काफी पसंद किया जाता है. यहां सिलबट्टे पर बनी हरी मिर्च, काली मिर्च और लहसुन की देसी चटनी काफी लोकप्रिय है. मिथिला स्टाइल की यह चटनी सिर्फ 5 मिनट में तैयार हो जाती है. इसमें हरी मिर्च, काली मिर्च, लहसुन और नमक को पीसकर थोड़ा कच्चा सरसों तेल मिलाया जाता है.

मधुबनी: अगर आप तीखा और चटपटा खाने के शौकीन हैं, तो मिथिलांचल की देसी हरी मिर्च की चटनी का स्वाद आपको जरूर पसंद आएगा. मिथिला क्षेत्र में सिलबट्टे पर बनाई जाने वाली यह खास चटनी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है. यहां के लोग इसे खासकर चावल की रोटी, मक्का की रोटी और दूसरी मोटी रोटियों के साथ खाना पसंद करते हैं.

दरअसल, हर क्षेत्र का अपना अलग खान-पान और स्वाद होता है. कहीं लोग मीठा पसंद करते हैं तो कहीं खट्टा या चटपटा खाना ज्यादा पसंद किया जाता है. मिथिलांचल के लोग खास तौर पर तीखा और मसालेदार भोजन पसंद करते हैं. यहां पकौड़े, देसी सब्जियां और पारंपरिक व्यंजनों के साथ तीखी चटनियों का भी खूब चलन है.

मिथिला की यह पारंपरिक चटनी पूरी तरह देसी तरीके से सिलबट्टे पर तैयार की जाती है. इसे बनाने के लिए हरी मिर्च, काली मिर्च, लहसुन और ज्यादा मात्रा में नमक का इस्तेमाल किया जाता है. स्थानीय भाषा में काली मिर्च को ‘मरीच’ भी कहा जाता है. इन सभी चीजों को सिलबट्टे पर अच्छी तरह पीसकर चटनी तैयार की जाती है.

चटनी तैयार होने के बाद इसमें थोड़ा कच्चा सरसों तेल भी मिलाया जाता है. हालांकि कुछ लोग बिना तेल के भी इसे खाते हैं, लेकिन सरसों तेल डालने से इसका स्वाद और खुशबू दोनों बढ़ जाते हैं. साथ ही तेल तीखेपन को थोड़ा संतुलित भी करता है.

ग्रामीण इलाकों में लोग शाम के नाश्ते में चावल की रोटी और इस तीखी चटनी का स्वाद लेना काफी पसंद करते हैं. यह चटनी बहुत कम मात्रा में खाई जाती है, क्योंकि इसका स्वाद काफी तीखा होता है. खास बात यह है कि इसे बनाने में सिर्फ 5 मिनट का समय लगता है.

स्थानीय लोगों का कहना है कि यह चटनी सिर्फ रोटी के साथ ही नहीं, बल्कि मुरही, भुजा और दूसरे हल्के नाश्ते के साथ भी काफी स्वादिष्ट लगती है. हरी मिर्च और काली मिर्च से बनी यह देसी चटनी आज भी मिथिलांचल की पारंपरिक रसोई की खास पहचान बनी हुई है.

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Amita kishor

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें



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बारां जिला अस्पताल में हेपेटाइटिस-बी का निःशुल्क टीकाकरण: हाई रिस्क ग्रुप के सदस्यों को मिलेगा लाभ, बैठक में हुआ निर्णय – Baran News




बारां में राष्ट्रीय वायरल हेपेटाइटिस नियंत्रण कार्यक्रम के तहत एसआरएम राजकीय जिला अस्पताल में हाई रिस्क ग्रुप (एचआरजी) के सदस्यों को हेपेटाइटिस-बी का निःशुल्क टीका लगाया जाएगा। इस संबंध में प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. नरेन्द्र मेघवाल की अध्यक्षता में जिला अस्पताल में एक बैठक आयोजित की गई। बैठक में जानकारी दी गई कि ओपीडी और आईपीडी में आने वाले हाई रिस्क ग्रुप के सदस्यों, जिनमें फीमेल सेक्स वर्कर (FSW), मेल सेक्स वर्कर (MSM), इंजेक्टिंग ड्रग यूजर (IDU) और ट्रांसजेंडर (TG) शामिल हैं, की हेपेटाइटिस-बी जांच नेगेटिव आने पर उन्हें मुफ्त टीकाकरण की सुविधा मिलेगी। डॉ. नरेन्द्र मेघवाल ने बताया कि जिला अस्पताल के नशा मुक्ति केंद्र पर प्रत्येक मंगलवार और शुक्रवार को टीकाकरण दिवस निर्धारित किया गया है। संबंधित विभागों को निर्देश दिए गए हैं कि वे हाई रिस्क ग्रुप के सदस्यों को टीकाकरण के लिए नशा मुक्ति केंद्र भेजना सुनिश्चित करें। इस कार्यक्रम की निगरानी और पर्यवेक्षण की जिम्मेदारी एनवीएचसीपी ट्रीटमेंट सेंटर के प्रभारी डॉ. हरिओम मीणा को सौंपी गई है। बैठक में जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. सुरेश मीणा, लिंक एआरटी सेंटर से अजय गुप्ता, नशा मुक्ति केंद्र प्रभारी डॉ. नीरज शर्मा, चर्म रोग विभाग के प्रभारी अधिकारी, एनएमसीएच टीकाकरण विभाग के अधिकारी, ब्लड बैंक से मीना गर्ग, सेंट्रल लैब प्रभारी ओमप्रकाश राठौर, फार्मासिस्ट अविनाश गर्ग, तथा सीएमएचओ कार्यालय से दिनेश साहु और हेमंत जोशी मौजूद थे।



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जस्टिस स्वर्णकांता बोलीं-मेरे और कोर्ट के खिलाफ अपमानजनक बातें कहीं: चुप नहीं रह सकती; शराब नीति घोटाला के आरोपियों पर अवमानना की कार्रवाई करूंगी


नई दिल्ली4 मिनट पहले

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13 अप्रैल को शराब नीति घोटाला मामले अरविंद केजरीवाल ने सुनवाई के दौरान कोर्ट में अपनी दलील खुद रखी थी।

दिल्ली हाईकोर्ट में गुरुवार को दिल्ली शराब नीति घोटाला मामले में सीबीआई की याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कहा कि वह इस मामले से जुड़े आरोपियों और अन्य लोगों के खिलाफ अवमानना (कंटेम्प्ट) की कार्रवाई करेंगी।

उन्होंने कहा कि इस मामले पर आदेश सुनाया जाएगा। सुनवाई के दौरान जस्टिस शर्मा ने कहा-

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मेरे और कोर्ट के खिलाफ कुछ आरोपियों और लोगों ने इंटरनेट पर अपमानजनक और मानहानिकारक पोस्ट की हैं। मैं इस पर चुप नहीं रह सकती। कुछ लोगों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करूंगी।

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जस्टिस स्वर्णकांता दिल्ली शराब नीति घोटाला मामले में सुनवाई कर रही हैं। मामले में ट्रायल कोर्ट से बरी होने वाले दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जज को केस से हटाने की मांग की है। केजरीवाल का आरोप है कि जस्टिस शर्मा RSS के कार्यक्रम में 4 बार शामिल हो चुकी हैं। उनसे न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है।

27 अप्रैल को अरविंद केजरीवाल ने वीडियो जारी कर जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा पर कई आरोप लगाए थे।

27 अप्रैल को अरविंद केजरीवाल ने वीडियो जारी कर जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा पर कई आरोप लगाए थे।

27 अप्रैल: केजरीवाल बोले- हाईकोर्ट में पेश नहीं होऊंगा

अरविंद केजरीवाल ने वीडियो जारी कर कहा था- ‘शराब नीति घोटाला मामले में मैं हाईकोर्ट में न खुद पेश होऊंगा और न ही कोई मेरी तरफ से दलीलें रखेगा। हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है।

केजरीवाल ने आरोप लगाया था-

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सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता दोनों बच्चों को केस देते हैं। उनके बेटे को 2023 से 2025 के बीच करीब 5904 केस मिले। अगर जज के बच्चों का भविष्य सॉलिसिटर जनरल तय कर रहे हैं तो क्या जज साहिबा उनके खिलाफ फैसला सुना पाएंगी।

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अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और आम आदमी पार्टी के नेता दुर्गेश पाठक ने जस्टिस शर्मा की कोर्ट में पेश होना बंद कर दिया है। उन्होंने न तो व्यक्तिगत रूप से और न ही वकील के जरिए अदालत में उपस्थित होने का फैसला किया।

20 अप्रैल: AAP नेताओं ने जज से हटने की मांग की थी

दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने शराब नीति केस से जुड़े पूर्व CM अरविंद केजरीवाल की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें जज के केस से हटने की मांग की गई थी। जस्टिस स्वर्णकांता ने कहा था-

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मैं इस मामले से खुद को अलग नहीं करूंगी। मैं सुनवाई करूंगी। मैं हट गई तो संदेश जाएगा कि दबाव डालकर किसी भी केस से जज हटा सकते हैं।

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दरअसल, केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता पर पक्षपात और हितों के टकराव का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि जज RSS से जुड़े संगठन के कार्यक्रम में कई बार गई हैं। उनके बच्चे केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ काम करते हैं।

जस्टिस शर्मा ने केजरीवाल के आरोपों पर जवाब देते हुए कहा था- अगर कोई जज पद की शपथ लेता है तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसका परिवार भी इस पेशे में न आने की शपथ ले। जज के बच्चे या परिवार अपनी जिंदगी कैसे जिएंगे, यह कोई भी तय नहीं कर सकता।

एमिकस क्यूरी नियुक्त करने की तैयारी

AAP नेताओं की ओर से कोई वकील पेश नहीं हो रहा था, इसलिए हाईकोर्ट ने सीनीयर एडवोकेट को ‘एमिकस क्यूरी’ यानी कोर्ट की सहायता के लिए नियुक्त करने का फैसला किया था। जस्टिस शर्मा ने कहा कि कुछ वरिष्ठ वकीलों ने इसके लिए सहमति भी दे दी है।

इस बीच कोर्ट ने कहा कि सुनवाई के दौरान उसे सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर अदालत व जज के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री की जानकारी मिली, जिसके बाद अवमानना कार्रवाई का फैसला लिया गया।

CBI ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी

दरअसल हाईकोर्ट में सीबीआई की उस याचिका पर सुनवाई हो रही है जिसमें ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है। ट्रायल कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और 21 अन्य आरोपियों को शराब नीति मामले में डिस्चार्ज कर दिया था।

27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने कहा था कि यह मामला न्यायिक जांच में टिक नहीं पाया और पूरी तरह कमजोर साबित हुआ। इसी आधार पर कोर्ट ने केजरीवाल, सिसोदिया समेत 21 लोगों को राहत दी थी।

केजरीवाल 156 दिन, सिसोदिया 530 दिन तक जेल में रहे

दिल्ली सरकार ने 2021 में राजस्व बढ़ाने और शराब व्यापार में सुधार के लिए आबकारी नीति बनाई थी, जिसे बाद में अनियमितताओं के आरोप लगने के बाद वापस ले लिया गया।

इसके बाद उपराज्यपाल विनय सक्सेना ने CBI जांच के आदेश दिए थे। CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि इस नीति के जरिए निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया और इसमें भ्रष्टाचार हुआ।

इस मामले में केजरीवाल को 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान गिरफ्तार कर हिरासत में भेजा गया था। उन्हें 156 दिन की हिरासत के बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली। वहीं सिसोदिया इस मामले में 530 दिन तक जेल में रहे।

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जज से बहस वाले वीडियो पर केजरीवाल को नोटिस, हाईकोर्ट ने पूछा- सबसे पहले अपलोड किसने किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पूर्व CM अरविंद केजरीवाल को नोटिस जारी किया। याचिका बिना इजाजत कोर्ट की कार्यवाही रिकॉर्ड करने और उसे सोशल मीडिया पर सर्कुलेट करने को लेकर है। कोर्ट ने सभी वीडियो डिलीट करने और लिंक हटाने के निर्देश दिए हैं। पूरी खबर पढ़ें…

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P-टाइप या N-टाइप? कौन सा सोलर पैनल है बेहतर? छत पर लगाने से पहले समझें पूरा गणित


सोलर पैनल आजकल बिजली का नया और लोकप्रिय स्त्रोत बनकर उभरा है। सरकार के सोलर मिशन की वजह से पारंपरिक पावरग्रिड का लोड सोलर पैनल से पैदा होने बिजली की वजह से कम हो रहा है। यही कारण है कि लोग अपने घर की छतों पर सोलर पैनल लगा रहे हैं, ताकि बिजली का बिल न के बराबर आए। हालांकि, सोलर सिस्टम लगाने का खर्च ज्यादा आता है, जिसकी वजह से सरकार इस पर सब्सिडी भी दे रही है। अगर, आप भी अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगाना चाहते हैं तो इसके टाइप और क्षमता के बारे में आपको पता होना चाहिए।

P-टाइप और N-टाइप सोलर पैनल

इन दिनों मार्केट में दो तरह- P टाइप और N- टाइप के सोलर पैनल उपलब्ध हैं। ये दोनों ही पैनल अलग-अलग टेक्नोलॉजी पर काम करती हैं, जिसकी वजह से इनकी कीमत और क्षमता में अंतर है। इन दोनों पैनल में से आपको किसका चुनाव करना चाहिए, इसके बारे में जानते हैं….

P- टाइप सोलर पैनल में सिलिकन और बोरॉन के बीच केमिकल रिएक्शन होता है, जिसकी वजह से इलेक्ट्रिसिटी जेनरेट होती है। यह सोलर पैनल आपको बाजार में आसानी से मिल जाएगा। वहीं, N टाइप सोलर पैनल में सिलिकन के साथ फास्फोरस का केमिकल रिएक्शन होता है। ये सोलर पैनल आसानी से नहीं मिलते हैं। केवल कुछ चुनिंदा कंपनियां ही N- टाइप का सोलर पैनल बनाती हैं।

Image Source : SOLAR SQUAREN टाइप सोलर पैनल

कौन सा सोलर पैनल है बेहतर?

P- टाइप सोलर पैनल में इस्तेमाल किया गया बोरॉन हवा में मौजूद ऑक्सीजन के साथ रिएक्ट होकर बोरॉन-ऑक्सीजन डिफेक्ट क्रिएट करता है। इस डिफेक्ट की वजह से सोलर पैनल में LID यानी लाइट इंड्यूस्ड डिग्रेडेशन क्रिएट होता है, जो पैनल की क्षमता को परमानेंट डिग्रेड यानी कम कर देती है। जैसे ही P टाइप सोलर पैनल पहली बार धूप के संपर्क में आता है, इसमें LID क्रिएट हो जाता है। इसी वजह से इसकी परफॉर्मेंस समय के साथ धीरे-धीरे कम होती जाती है।

N- टाइप सोलर पैनल में बोरॉन नहीं होता है, जिसकी वजह से LID केवल नाम मात्र का होता है, जिसकी वजह से पुराने होने पर भी इसकी क्षमता बरकरार रहती है। P- टाइप पैनल को एक बार इंस्टॉल करने के बाद 10 साल तक अच्छी बिजली पैदा की जा सकती है। वहीं, N टाइप पैनल से आप कम से कम 12 साल तक बिजली पैदा कर सकते हैं। क्योंकि इनमें डिग्रेडेशन न के बराबर होता है, इसलिए ये लंबे समय तक यूज किए जा सकते हैं।

Solar Panel

Image Source : SOLAR SQUAREP टाइप सोलर पैनल

कौन सा सोलर पैनल घर पर लगाएं?

P टाइप और N टाइप सोलर पैनल की परफॉर्मेंस की बात करें तो N टाइप में आपको बेहतर पावर जेनरेशन देखने को मिलता है। साथ ही, यह लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, इसकी कीमत P टाइप के मुकाबले बहुत ज्यादा होती है। N टाइप वाले सोलर पैनल खास तौर पर कमर्शियली और पावरग्रिड के लिए यूज होते हैं। वहीं, P टाइप वाले पैनल की कैपेसिटी N टाइप के मुकाबले 4% तक ही कम होती है। अफोर्डेबल और आसानी से उपलब्ध होने की वजह से इन्हें घरों की छतों पर लगाना फायदेमंद साबित हो सकता है।

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