Haryana NEET Result Controversy | OMR Marksheet Score Discrepancy Update
नई दिल्ली/कोटा56 मिनट पहले
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NTA ने 16 जुलाई को फाइनल आंसर-की जारी करने के 3-4 घंटे बाद ही रिजल्ट जारी कर दिया था।
री-नीट के नतीजों के बाद भी छात्रों के बीच भारी असंतोष है। OMR शीट और जारी मार्कशीट के अंकों में बड़ा अंतर होने से विवाद खड़ा हो गया है। ऐसा एक या दो नहीं, बल्कि कई छात्रों के साथ हुआ है। छात्रों का कहना है कि उन्होंने जब अपनी OMR शीट का मिलान ‘फाइनल आंसर-की’ से किया, तो उनके अंक काफी अधिक थे, लेकिन मार्कशीट में नंबर अचानक घट गए।
कई छात्रों के अंक 15 से लेकर 600 तक कम हो गए हैं। इस वजह से वे छात्र जो OMR के अनुसार परीक्षा पास कर रहे थे, अब वे ‘क्वालिफाई’ भी नहीं कर पा रहे हैं। विवाद का मुख्य कारण नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की जल्दबाजी मानी जा रही है। एजेंसी ने फाइनल आंसर-की जारी करने के महज 3-4 घंटे बाद ही रिजल्ट घोषित कर दिया।
NTA ने 16 जुलाई की देर रात नीट का रिजल्ट जारी किया था। इस साल करीब 20 लाख स्टूडेंट्स ने परीक्षा दी थी, जिनमें से 11.21 लाख स्टूडेंट्स मेडिकल, डेंटल, AYUSH और अन्य मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए क्वालिफाई हुए हैं। 2020 और 2021 के बाद पहली बार कोई भी छात्र 720 का परफेक्ट स्कोर हासिल नहीं कर पाया।
न्याय के लिए हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहे छात्र
अभिभावक और छात्र इसे बड़ी लापरवाही मान रहे हैं। डॉ. राजेश कुमार सिंह जैसे अभिभावकों ने एनटीए को पत्र लिखकर अपनी शिकायत दर्ज कराई है और वे अब न्याय के लिए हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं।
वहीं, एनटीए ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा- हम सभी शिकायतों की जांच कर रहे हैं। छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि वे जांच के लिए केवल मूल ओएमआर ही जमा करें। फर्जी/एआई जनरेटेड ओएमआर के मामले में शिकायतकर्ता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।’
हरियाणा में एक ही छात्र के दो अलग रिजल्ट
नीट रिजल्ट को लेकर एक और चौंकाने वाला मामला हरियाणा से सामने आया है। हरियाणा के अभ्यर्थी मुकुल काजल ने एनटीए के महानिदेशक को शिकायत भेजकर आरोप लगाया है कि उनके स्कोरकार्ड में बिना किसी सूचना के बड़ा फेरबदल कर दिया गया। इसे दुरुस्त कराया जाए।
शिकायत के अनुसार, 17 जुलाई 2026 को आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड किए गए स्कोरकार्ड में मुकुल के 605/720 अंक (ऑल इंडिया रैंक 9551) दर्ज थे। लेकिन महज कुछ घंटों बाद 18 जुलाई की सुबह जब दोबारा स्कोरकार्ड डाउनलोड किया गया, तो उनके अंक घटकर सिर्फ 60/720 अंक दिखाए।
इससे मुकुल की ऑल इंडिया रैंक घटकर 18,76,324 हो गई। छात्र का दावा है कि उनके पास 17 जुलाई का मूल स्कोरकार्ड सुरक्षित है। साथ ही, ओएमआर रिस्पॉन्स शीट और एनटीए की फाइनल आंसर-की के मिलान से भी उनका स्कोर 605 अंक ही बनता है।
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NEET में सफल होने वालों में करीब आधे OBC:हर दूसरा सफल छात्र इसी वर्ग से; SC परीक्षार्थी 63% और EWS 76% बढ़े
NEET 2026 के नतीजों में मेडिकल शिक्षा के सामाजिक-शैक्षणिक रुझानों में बड़ा बदलाव दिखा है। इस साल परीक्षा देने वालों में OBC सबसे बड़ा वर्ग रहा। कुल रजिस्ट्रेशन में OBC की हिस्सेदारी 41.8% थी, जबकि क्वालिफाई करने वालों में यह बढ़कर 45.7% हो गई। यानी लगभग हर दूसरा सफल छात्र OBC वर्ग से है। पूरी खबर पढ़ें…
उज्जैन में शनिवार रात दो पक्षों के बीच पुरानी रंजिश खूनी संघर्ष में बदल गई। दरबार फूड रेस्टोरेंट के सामने घर के बाहर लोकेश गोरकर की गोली मारकर हत्या कर दी गई। उसे बचाने पहुंचे उसके भाई और परिवार के तीन अन्य सदस्यों पर भी हमला किया गया। मामला नीलगंगा थाना क्षेत्र का है। हमले में उसके भाई जय, दिलीप समेत गोरकर परिवार के अन्य सदस्य गंभीर घायल हुए। घायलों को निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। वारदात के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। पहले हमला, फिर ताबड़तोड़ फायरिंग चश्मदीदों के मुताबिक, शनिवार रात करीब 11 बजे दरबार फूड रेस्टोरेंट के सामने दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। विवाद बढ़ने पर हमलावरों ने लाठी, डंडों, तलवार और पत्थरों से हमला कर दिया। इसके बाद ताबड़तोड़ चार राउंड फायर किए गए। एक गोली लोकेश गोरकर को लगी, जिससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई। उसे बचाने पहुंचे परिवार के अन्य सदस्य भी घायल हो गए। होली के विवाद से शुरू हुई थी रंजिश एडिशनल एसपी गुरु प्रसाद पराशर ने बताया कि पासी परिवार और गोरकर परिवार के बीच बीते होली के त्योहार पर एक महिला को लेकर विवाद हुआ था। उस समय पुलिस ने मामला शांत करा दिया था, लेकिन दोनों पक्षों के बीच रंजिश खत्म नहीं हुई। शनिवार रात इसी तनाव ने खूनी संघर्ष का रूप ले लिया। पुलिस ने कुछ लोगों को हिरासत में लिया घटना की सूचना मिलते ही वरिष्ठ पुलिस अधिकारी और भारी पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवाया और घायलों को अस्पताल पहुंचाया। फिलहाल कुछ लोगों को हिरासत में लिया गया है। अन्य आरोपियों की तलाश की जा रही है।
कोडरमा की गृहिणी राधिका प्रजापति ने बच्चों के लिए घर पर बनने वाले हेल्दी कुकीज की आसान रेसिपी साझा की है. इन कुकीज में मैदा और चीनी की जगह दरदरा गेहूं का आटा और गुड़ का उपयोग किया जाता है, जबकि सूखा नारियल और सौंफ स्वाद व पोषण बढ़ाते हैं. बिना प्रिजर्वेटिव, कृत्रिम रंग और पाम ऑयल के तैयार होने वाले ये कुकीज बच्चों के लिए स्वादिष्ट और बेहतर होते हैं
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कोडरमा: बच्चों को कुकीज और बिस्कुट काफी पसंद होते हैं. बाजार में कई तरह के कुकीज मिलते हैं. हालांकि, बाजार में मिलने वाले अधिकतर कुकीज में मैदा, अधिक मात्रा में चीनी, प्रिजर्वेटिव और पाम ऑयल का इस्तेमाल किया जाता है. ऐसे में बच्चों के साथ ही बड़ों की सेहत को भी नुकसान पहुंचाते हैं. अभिभावक भी बच्चों की जिद के आगे उन्हें बिस्कुट और कुकीज दिलाते तो हैं लेकिन, उनकी सेहत को लेकर चिंतित भी रहते हैं. हालांकि, बहुत से लोग घरों पर सेहतमंद चीजों से बिस्कुट और कुकीज बनाते हैं. कोडरमा की गृहिणी राधिका प्रजापति भी अपने घर पर गेहूं के आटे और गुड़ से तैयार होने वाले हेल्दी कुकीज बनाती हैं. उन्होंने बाकी लोगों के लिए इसकी रेसिपी भी बताई है.
राधिका प्रजापति ने बताया कि बच्चों को खुश रखने के साथ उनकी सेहत का ध्यान रखना भी जरूरी है. उन्होंने बताया कि घर पर आसानी से बनने वाले हेल्दी कुकीज तैयार करने के लिए मैदे की जगह दरदरा पिसा हुआ गेहूं का आटा, चीनी की जगह गुड़, कद्दूकस किए हुए सूखे नारियल और सौंफ का इस्तेमाल किया जाता है. इससे कुकीज का स्वाद भी बढ़ता है और पोषण भी मिलता है. उन्होंने बताया कि कुकीज बनाने के लिए सबसे पहले एक बर्तन में दरदरा पिसा हुआ गेहूं का आटा लें. इसमें कद्दूकस किया हुआ सूखा नारियल और सौंफ मिलाएं. इसके बाद थोड़ा सा रिफाइंड या देशी घी डालकर सभी सामग्री को अच्छी तरह मिला लें. अब इसमें गुड़ की चाशनी डालकर नरम आटा गूंथ लें.
बिना किसी प्रिजर्वेटिव और कृत्रिम रंग के कई दिनों तक कर सकते हैं इस्तेमाल उन्होंने बताया कि आटा तैयार होने के बाद उसकी छोटी-छोटी लोइयां बनाकर गोल आकार दें. चाहें तो किसी सांचे की मदद से कुकीज का आकार बनाया जा सकता है. ऊपर से कांटे या अन्य डिजाइनिंग टूल की सहायता से आकर्षक डिजाइन बनाएं. इसके बाद इन्हें धीमी आंच पर तब तक पकाएं, जब तक इनका रंग सुनहरा न हो जाए. कुकीज ठंडे होने के बाद इन्हें एयरटाइट कंटेनर में सुरक्षित रखा जा सकता है और कई दिनों तक इस्तेमाल किया जा सकता है. उन्होंने बताया कि घर पर बने ये कुकीज न केवल बच्चों को पसंद आते हैं. बल्कि इनमें किसी प्रकार का कृत्रिम रंग, प्रिजर्वेटिव या पाम ऑयल भी नहीं होता. गुड़ प्राकृतिक मिठास के साथ आयरन सहित कई पोषक तत्वों का स्रोत माना जाता है, जबकि गेहूं का आटा फाइबर प्रदान करता है. नारियल और सौंफ स्वाद के साथ सुगंध भी बढ़ाते हैं.
जी न्यूज, इंडिया डॉट कॉम, लोकमत, इंडिया अहेड, न्यूज बाइट्स के बाद अब न्यूज 18 के हाइपर लोकल सेगमेंट लोकल 18 के लिए काम कर रहा हूं. विभिन्न संस्थानों में सामान्य खबरों के अलावा टेक, ऑटो, हेल्थ और लाइफ स्टाइल बीट…और पढ़ें
पटना जिले के मसौढ़ी क्षेत्र और लखनौर-बिदौली पंचायत में 18 जुलाई को शाम 5:30 बजे से तेज बारिश हो रही है। लंबे समय से बारिश का इंतजार कर रहे किसानों को इससे बड़ी राहत मिली है, खासकर धान की रोपनी के लिए। बारिश न होने के कारण क्षेत्र में धान की रोपनी जैसे कृषि कार्यों में काफी परेशानी आ रही थी। खेतों में पानी की कमी के चलते किसान बुवाई शुरू नहीं कर पा रहे थे। लगातार हो रही बारिश से खेतों में पर्याप्त पानी जमा हो गया है, जिससे धान की रोपनी का कार्य शुरू हो गया है। किसान अब उत्साहपूर्वक खेती के कार्यों में जुट गए हैं। हालांकि, कुछ ऊंचे इलाकों में अभी भी पानी की समस्या बनी हुई है, लेकिन अधिकांश क्षेत्रों में पानी की पूर्ति हो गई है। कुछ स्थानों पर ठनका (बिजली) भी गिरी है, लेकिन किसी खास क्षति की सूचना नहीं है। लंबे समय से बारिश न होने के कारण भूजल स्तर भी घट गया था। इस बारिश से जमीन के साथ-साथ भूजल स्तर में भी वृद्धि की संभावना बढ़ गई है। लगातार मोटर पंपों से पानी खींचने के कारण बिजली पर भी दबाव था, जिससे बार-बार बिजली कटौती हो रही थी। अब बिजली की कमी के बावजूद खेती का काम शुरू हो गया है। धान के अलावा मक्का, ज्वार, जिनोरा, बाजरा और सब्जियों की खेती में भी यह बारिश सहायक सिद्ध हो रही है। आज की बारिश से लोगों को गर्मी से राहत मिली है और पेड़-पौधों में भी हरियाली छा गई है, जिससे मौसम खुशनुमा हो गया है।
प्रयागराज के मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MNNIT) में मंगल भूमि फाउंडेशन ने ‘भारतीय ज्ञान परंपरा में पर्यावरण संरक्षण’ विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया। इसमें विशेषज्ञों ने सर्वसम्मति से कहा कि पर्यावरण की रक्षा केवल सरकारी योजनाओं के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती, बल्कि पृथ्वी पर हरियाली वापस लाने के लिए इसे प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व बनाना होगा।
गोष्ठी के मुख्य वक्ता प्रो. राजेश गर्ग ने इस बात पर जोर दिया कि वेद, उपनिषद और पुराणों में जल, वायु, भूमि और वन संरक्षण को मानव का अनिवार्य धर्म माना गया है। उन्होंने कहा कि आज जब विश्व पर्यावरणीय असंतुलन से जूझ रहा है, तब प्रकृति के प्रति भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित श्रद्धा का भाव ही समाधान का मार्ग दिखाता है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत भारती के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष विनय पत्राले ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत हमेशा प्रकृति के साथ संतुलन और सह-अस्तित्व का संदेश देती है। उन्होंने आह्वान किया कि यदि समाज भारतीय जीवन मूल्यों को अपनी दैनिक दिनचर्या में अपना ले, तो पर्यावरण संरक्षण मात्र सरकारी प्रयास न रहकर एक सशक्त जन-आंदोलन का रूप ले सकता है।
अतिथि वक्ता प्रमोद द्विवेदी ने उपस्थित युवाओं और शोधार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि स्थानीय स्तर पर जैव विविधता और जल स्रोतों के संरक्षण में युवाओं की सक्रिय भूमिका निर्णायक होगी। उन्होंने यह भी कहा कि पर्यावरण की रक्षा के लिए अब समाज को स्वयं आगे आना होगा।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. श्रवण मिश्रा ने किया, जबकि रामबाबू तिवारी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर शिक्षाविदों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने जल संरक्षण, वृक्षारोपण और प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन हेतु सामूहिक प्रयास करने का संकल्प लिया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से समाज में पर्यावरण के प्रति नई चेतना जागृत करना था।
बिहार शहरी आयोजना एवं विकास नियमावली, 2014 के तहत अगले 20 वर्षों से अधिक की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए दरभंगा नगर निगम और आसपास के क्षेत्रों के संतुलित एवं सुनियोजित विकास के लिए GIS आधारित मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। साल 2019 में दरभंगा जिला आयोजना क्षेत्र की अधिसूचना जारी की गई थी और मास्टर प्लान तैयार करने की जिम्मेदारी Techmech International Pvt. Ltd. को दी गई है। दरअसल, शनिवार को आयुक्त कार्यालय सभागार में जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम यानी GIS बेस्ड मास्टर प्लान (स्टेज-V) के ड्राफ्ट पर समीक्षा एवं सुझाव बैठक आयोजित की गई। बैठक में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने सड़क, परिवहन, औद्योगिक विकास, सैटेलाइट टाउनशिप, जलनिकासी, हरित क्षेत्र और रोजगार सृजन समेत विभिन्न विषयों पर सुझाव दिए। दरभंगा जिला आयोजना क्षेत्र के लिए तैयार किए जा रहे GIS आधारित मास्टर प्लान (स्टेज-V) के ड्राफ्ट पर आयुक्त सह दरभंगा जिला आयोजना क्षेत्र प्राधिकार के अध्यक्ष हिमांशु कुमार राय की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक हुई। लगभग 17,400 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जाएगी मिथिला ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप हिमांशु कुमार राय ने बताया कि जिला आयोजना क्षेत्र का कुल क्षेत्रफल 191.11 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें पांच प्रखंड- दरभंगा सदर, केवटी, बहादुरपुर, हनुमाननगर और हायाघाट के 186 राजस्व ग्राम शामिल हैं। कुल आबादी 6.13 लाख है, जिसमें शहरी आबादी 2.66 लाख है। बैठक में जानकारी दी गई कि प्रस्तावित मिथिला ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप लगभग 17,400 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जाएगी, जिसमें 102 राजस्व गांव शामिल होंगे। इसका कोर एरिया करीब 1,600 एकड़ निर्धारित किया गया है। आयुक्त हिमांशु कुमार राय ने कहा कि दरभंगा ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर है। एयरपोर्ट विस्तार के बाद यहां व्यापार, उद्योग और शहरी विकास की नई संभावनाएं बढ़ी हैं। ऐसे में सड़क, सार्वजनिक परिवहन, जलापूर्ति, सीवरेज, आवास, हरित क्षेत्र और औद्योगिक विकास जैसी आधारभूत सुविधाओं को मास्टर प्लान में प्राथमिकता दी जानी चाहिए। बैठक में उपमहापौर नाजिया हसन ने नगर निगम क्षेत्र के विस्तार का सुझाव दिया, जबकि महापौर अंजुम आरा ने नगर निगम क्षेत्र में होने वाली परियोजनाओं की जानकारी जनप्रतिनिधियों को देने की मांग की। विधायक डॉ. मुरारी मोहन झा ने आयोजना क्षेत्र के विस्तार, जबकि विधायक राजेश कुमार मंडल ने बेहतर सड़क और यातायात व्यवस्था पर जोर दिया। सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने GIS आधारित मास्टर प्लान को दरभंगा के भविष्य की आधारशिला बताते हुए इसे राष्ट्रीय परियोजनाओं के अनुरूप तैयार करने की आवश्यकता जताई। उन्होंने दरभंगा को उत्तर बिहार का हेल्थ, एजुकेशन, एविएशन, निवेश, व्यापार और पर्यटन हब बनाने की वकालत की। साथ ही मेडिकल सिटी, आईटी एवं स्टार्टअप कॉरिडोर, मखाना प्रोसेसिंग एवं एक्सपोर्ट हब, मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब, हेरिटेज एवं टूरिज्म सर्किट, सैटेलाइट टाउनशिप, रिंग रोड, स्पोर्ट्स सिटी और वैज्ञानिक बाढ़ प्रबंधन जैसी परियोजनाओं को मास्टर प्लान में शामिल करने का सुझाव दिया। बैठक में विभिन्न विभागों और संबंधित पक्षों से प्राप्त सुझावों के आधार पर GIS आधारित ड्राफ्ट मास्टर प्लान को और अधिक व्यवहारिक, समावेशी तथा भविष्य उन्मुख बनाने पर सहमति बनी। बैठक का समापन नगर आयुक्त राकेश कुमार गुप्ता के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
Melon Seeds Burfi Recipe: सावन का महीना शुरू होते ही घरों में पूजा-पाठ, व्रत और स्वादिष्ट पकवानों की रौनक बढ़ जाती है. इसके कुछ समय बाद श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार भी आता है, जब घरों में भगवान कृष्ण के लिए खास भोग तैयार किए जाते हैं. ऐसे समय में ज्यादातर लोग बाजार से मिठाई खरीद लेते हैं, लेकिन मिलावट की खबरें सुनकर मन में एक डर बना रहता है, अगर आप भी इस बार अपने परिवार और मेहमानों के लिए घर पर ही शुद्ध, स्वादिष्ट और खास मिठाई बनाना चाहते हैं तो मावा और खरबूजे के बीज की बर्फी एक शानदार विकल्प है. इस बर्फी की सबसे बड़ी खासियत इसका लाजवाब स्वाद और मुलायम बनावट है. मावा की मलाईदार मिठास और खरबूजे के बीजों का हल्का कुरकुरापन मिलकर ऐसा स्वाद तैयार करता है, जिसे एक बार खाने के बाद हर कोई इसकी तारीफ करेगा.
इसे बनाना मुश्किल भी नहीं है और बहुत ज्यादा समय भी नहीं लगता. खास बात यह है कि यह मिठाई त्योहारों के साथ-साथ किसी भी खास मौके पर आसानी से बनाई जा सकती है, अगर आप चाहते हैं कि इस बार आपके घर आने वाले मेहमान मिठाई की तारीफ करते न थकें, तो इस आसान रेसिपी को एक बार जरूर आजमाएं.
मावा और खरबूजे के बीज की बर्फी बनाने के लिए जरूरी सामग्री 1. खरबूजे के बीज (मगज) – 1 कप 2. मावा या खोया – 1.5 कप (करीब 250 ग्राम) 3. चीनी – 1 कप 4. पानी – आधा कप 5. देसी घी – 2 चम्मच 6. हरी इलायची पाउडर – आधा छोटा चम्मच 7. पिस्ता कतरन – 1 चम्मच
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रेसिपी से जुड़ी जरूरी जानकारी 1. तैयारी का समय: 10 मिनट 2. पकाने का समय: 20 मिनट 3. कुल समय: लगभग 30 मिनट 4. कितने लोगों के लिए: 5 से 6
सबसे पहले खरबूजे के बीज भूनें एक भारी तले की कढ़ाई को हल्का गर्म करें. इसमें बिना घी डाले खरबूजे के बीज डालें और धीमी आंच पर 2 से 3 मिनट तक चलाते हुए भूनें. जैसे ही बीज हल्के फूलने लगें और खुशबू आने लगे, उन्हें तुरंत प्लेट में निकाल लें. ध्यान रखें कि ज्यादा भूनने पर उनका स्वाद कड़वा हो सकता है.
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मावा को सही तरीके से भूनना है जरूरी उसी कढ़ाई में दो चम्मच देसी घी डालें. अब कद्दूकस किया हुआ मावा डालकर धीमी आंच पर 4 से 5 मिनट तक भूनें. जब मावा हल्का सुनहरा होने लगे और अच्छी खुशबू आने लगे, तब गैस बंद कर दें. मावा को थोड़ा ठंडा होने दें.
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एक तार की चाशनी बनाएं एक अलग बर्तन में चीनी और आधा कप पानी डालकर मध्यम आंच पर पकाएं. जब चाशनी हल्की गाढ़ी हो जाए, तब उंगली और अंगूठे के बीच चिपकाकर देखें, अगर एक पतला तार बनता है तो समझिए चाशनी तैयार है.
अब तैयार करें बर्फी का मिश्रण तैयार चाशनी में भुना हुआ मावा, भुने हुए खरबूजे के बीज और इलायची पाउडर डाल दें. अब लगातार चलाते हुए मिश्रण को पकाएं. जब यह कढ़ाई छोड़ने लगे और गाढ़ा हो जाए, तब गैस बंद कर दें.
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बर्फी को सेट करने का सही तरीका एक थाली या बर्फी ट्रे में हल्का घी लगाकर चिकना कर लें. तैयार मिश्रण उसमें डालें और चम्मच या स्पैटुला की मदद से बराबर फैला दें. ऊपर से पिस्ता कतरन डालकर हल्का दबा दें. अब इसे 1 से 2 घंटे तक सेट होने दें. पूरी तरह जमने के बाद मनचाहे आकार में काट लें.
स्वाद बढ़ाने के आसान टिप्स 1. हमेशा ताजा मावा इस्तेमाल करें. 2. चाशनी एक तार से ज्यादा गाढ़ी न होने दें. 3. बीजों को हल्का ही भूनें. 4. चाहें तो थोड़ा केसर डालकर स्वाद और खुशबू बढ़ा सकते हैं. 5. एयरटाइट डिब्बे में रखने पर यह बर्फी 4 से 5 दिन तक ताजा बनी रहती है.
त्योहारों के लिए क्यों है खास? सावन, जन्माष्टमी, रक्षाबंधन या किसी भी शुभ मौके पर यह मिठाई शानदार विकल्प बन सकती है. इसे भगवान श्रीकृष्ण को भोग में भी चढ़ाया जा सकता है. घर की बनी होने की वजह से इसमें शुद्धता और ताजगी बनी रहती है. यही कारण है कि यह बाजार की कई मिठाइयों से बेहतर साबित होती है.
कटनी जिले के बड़वारा ग्राम में हुई एक घंटे की बारिश ने ग्राम पंचायत और लोक निर्माण विभाग के विकास दावों की पोल खोलकर रख दी है। पहली ही तेज बारिश का पानी ग्रामीणों के घरों में घुस गया, जिससे पूरा जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। इस बारिश से सबसे ज्यादा प्रभावित बड़वारा ग्राम का इमामबाड़ा क्षेत्र रहा। यहां जलजमाव के कारण हालात इस कदर बिगड़े कि इमामबाड़ा निवासी जान मोहम्मद के घर में घुटनों से ऊपर तक पानी भर गया, जिससे परिवार को संभलने तक का मौका नहीं मिला। पीड़ित ने बताया कि नाली निर्माण में गड़बड़ी और लंबे समय से सफाई न होने के कारण यह नौबत आई है। पानी भरने से उनके घर में रखा पूरा अनाज बर्बाद हो गया और बच्चों की स्कूल की कॉपी-किताबें पानी में तैरती मिलीं, जिससे परिवार को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है। प्रशासन की लापरवाही पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा ग्रामीणों का आरोप है कि यह स्थिति प्रशासनिक उदासीनता का नतीजा है। मानसून की शुरुआत से पहले ही स्थानीय सरपंच और पंचायत प्रशासन से नाली निर्माण को ठीक करने और जल निकासी की व्यवस्था करने की गुहार लगाई गई थी, लेकिन समय रहते इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। पंचायत और अधिकारियों का पक्ष बड़वारा की सरपंच सुनैना सिंह ने बताया कि संबंधित नाली का निर्माण लोक निर्माण विभाग ने कराया था, जिसमें पानी की निकासी की कोई ठोस व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने कहा कि पंचायत ने मानसून से पहले ही पीडब्ल्यूडी विभाग को पत्र लिखकर व्यवस्था सुधारने का आग्रह किया था। पंचायत स्तर पर हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। क्षेत्रीय अधिकारी विवेक श्रीवास्तव ने कहा कि बड़वारा ग्राम में जलभराव की सूचना मिली है। मामले को गंभीरता से लेते हुए तकनीकी टीम मौके पर पहुंचेगी। स्थल निरीक्षण कर जलभराव की इस समस्या का स्थाई और त्वरित निराकरण किया जाएगा।
शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर के भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख का एक और मामला सामने आया है। कोटा में तबादलों के नाम पर पैसे वसूलने वाले एक आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मामला सांगोद पंचायत समिति से जुड़ा है, जहां पदस्थापित ग्राम विकास अधिकारी(VDO) मंजुला बैरागी ने मंत्री मदन दिलावर के आवास पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि बारां निवासी नरोत्तम बड़ारिया ने उनका तबादला करवाने के नाम पर उनसे पैसों की मांग की और राशि भी ली। शिक्षा मंत्री दिलावर ने जीरो एफआईआर दर्ज करने के दिए निर्देश शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मंत्री मदन दिलावर ने तत्काल महावीर नगर थाना प्रभारी को बुलाकर आरोपी के खिलाफ नामजद जीरो एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। इसके बाद महावीर नगर थाने में जीरो एफआईआर दर्ज की गई, जिसे सांगोद पुलिस को भेजा गया। सांगोद थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी नरोत्तम बड़ारिया को बारां से गिरफ्तार कर लिया है। फिलहाल पुलिस उससे पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि उसने कितने लोगों से तबादलों के नाम पर ठगी की है। इस मामले में केवल मंजुला बैरागी ही नहीं, बल्कि दो अन्य ग्राम विकास अधिकारियों भूपेंद्र सिंह और संदीप सिंह चौहान ने भी आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस को आशंका है कि आरोपी ने कई अन्य लोगों को भी अपना शिकार बनाया हो सकता है। फिलहाल पुलिस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है और आरोपी के नेटवर्क तथा उसके संपर्कों की भी पड़ताल की जा रही है।
अमेरिका के साथ युद्धविराम समझौते के बाद ईरान के भीतर राजनीतिक टकराव खुलकर सामने आ गया है। राष्ट्रपति मसूद पजशकियान, विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ पर अब ईरान के कट्टरपंथी धड़े ‘सॉफ्ट कूप’ यानी बिना हथियारों के सत्तापलट करने का आरोप लगा रहे हैं।
कट्टरपंथियों का कहना है कि इन नेताओं ने अमेरिका से समझौता करके ईरान के सिद्धांतों से समझौता किया है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सप्ताह तेहरान में सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान यह नाराजगी खुलकर दिखाई दी।
राष्ट्रपति मसूद पजशकियान जब खामेनेई के ताबूत के साथ चल रहे थे, तब काले कपड़े पहने कुछ लोगों ने राष्ट्रपति के खिलाफ नारे लगाए। वहीं, अंतिम संस्कार स्थल से कुछ दूरी पर विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर पत्थर फेंके गए और उन्हें देश बेचने वाला गद्दार कहा गया। हालात इतने बिगड़ गए कि उन्हें वहां से भागना पड़ा।
तेहरान में 3 जुलाई को एक कार्यक्रम में पहुंचे, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के सीनियर कमांडर जनरल मोहसिन रेजाई, विदेश मंत्री अब्बास अराघची, मुख्य न्यायाधीश गुलाम-हुसैन मोहसेनी एजेई, ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ, राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ये सभी मिलकर ही अभी देश चला रहे हैं।
कट्टरपंथियों का आरोप- अमेरिका के सामने सरकार झुक गई
CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, कट्टरपंथी गुटों का मानना है कि अली खामेनेई की हत्या का बदला लेने के बजाय सरकार ने अमेरिका के सामने झुककर समझौता कर लिया। उनका कहना है कि यह समझौता नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई के आदेशों के खिलाफ किया गया।
मुजतबा खामेनेई अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। उन्होंने न तो देश को संबोधित किया है और न ही खुलकर अपनी सत्ता का प्रदर्शन किया है, जबकि उनके नाम पर सरकार बातचीत भी कर रही है और देश भी चला रही है।
कट्टरपंथियों का आरोप है कि मुजतबा की गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर मौजूदा सरकार अपनी ताकत बढ़ाने में लगी है। उनका दावा है कि वे संसद को कमजोर करना चाहती है।
मुजतबा खामेनेई के लगातार सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आने के कारण राष्ट्रपति मसूद पजशकियान, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची युद्ध के बाद ईरान के सबसे प्रमुख चेहरे बन गए हैं। कट्टरपंथियों की नाराजगी की एक बड़ी वजह यही है।
14 जुलाई को तेहरान के इमाम खुमैनी मुसल्ला ग्रैंड मस्जिद में आयोजित दिवंगत सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की श्रद्धांजलि सभा में शामिल शोकाकुल लोग मुट्ठियां उठाकर नारे लगाते हुए।
अंतिम संस्कार में जंग का संदेश, कुछ दिन बाद ही टूट गया युद्धविराम
ईरान में युद्ध के दौरान राष्ट्रीय एकता बनाए रखने की लगातार अपील की जा रही थी, लेकिन अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में कट्टरपंथी गुटों का दबदबा साफ दिखाई दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, कट्टरपंथी गुटों ने इस मौके का इस्तेमाल अमेरिका के खिलाफ फिर से युद्ध छेड़ने की मांग उठाने और ट्रम्प सरकार के साथ हुए किसी भी समझौते को पूरी तरह खारिज करने के लिए किया।
कट्टरपंथियों की यह इच्छा कुछ ही दिनों बाद पूरी होती नजर आई। इस सप्ताह ईरान और अमेरिका के बीच हुआ नाजुक युद्धविराम लगभग टूट गया। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों को निशाना बनाकर इस समुद्री मार्ग पर अपना कंट्रोल दिखाने की कोशिश की। इसके जवाब में अमेरिका ने जवाबी हमले किए।
राष्ट्रपति को खुलेआम दी गई थी जान से मारने की धमकी
युद्ध दोबारा शुरू होने से पहले भी कट्टरपंथी नेता अमेरिका से समझौता करने वाले अधिकारियों पर लगातार हमला बोल रहे थे। ईरानी शासन से जुड़े धार्मिक गायक मोहम्मद अली बख्शी ने एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति मसूद पजशकियान को खुलेआम धमकी दी थी। उन्होंने कहा-
राष्ट्रपति महोदय, अगर सुप्रीम लीडर की शर्तें पूरी नहीं हुईं तो हमारी तलवार होगी और आपका गला होगा। हम आपकी जिंदगी को जहन्नुम बना देंगे।
राष्ट्रपति को जान से मारने की इस धमकी की ईरान में काफी आलोचना हुई, लेकिन बख्शी के खिलाफ किसी कानूनी कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई।
गालिबाफ भी कट्टरपंथियों के निशाने पर
कट्टरपंथियों के निशाने पर सिर्फ राष्ट्रपति और विदेश मंत्री ही नहीं हैं। अमेरिका के साथ बातचीत करने वाले मुख्य वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ भी उनके निशाने पर हैं। गालिबाफ पहले रिवोल्यूशनरी गार्ड्स में कमांडर रह चुके हैं और लंबे समय से ईरान की राजनीति में सक्रिय हैं।
कट्टरपंथी सांसद कमरान गजनफारी ने जुलाई की शुरुआत में जारी एक वीडियो मैसेज में आरोप लगाया कि मौजूदा नेतृत्व सर्वोच्च नेता और संसद की भूमिका कमजोर कर रहा है।
संसद स्पीकर बाघेर गालिबाफ अमेरिका के साथ बातचीत में ईरान का नेतृत्व कर रहे थे।
कट्टरपंथियों को किनारे करने की कोशिश तेज
ईरान में करीब चार महीने बाद 14 जुलाई को संसद का विशेष सत्र बुलाया गया। इसमें सत्ता संघर्ष खुलकर सामने आया और अमेरिका के साथ हुए समझौते का विरोध करने वाले दो प्रमुख कट्टरपंथी सांसदों को अहम संसदीय पदों से हटा दिया गया।
सबसे पहले अमेरिका से समझौते का सबसे ज्यादा विरोध करने वाले कट्टरपंथी सांसद महमूद नबावियन को संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग (नेशनल सिक्योरिटी कमीशन) से हटा दिया गया। इसके अलावा इसके प्रवक्ता रहे इब्राहिम रेजाई को भी हटा दिया गया।
नबावियन पहले अमेरिका के साथ बातचीत करने वाले ईरानी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रह चुके हैं, लेकिन बाद में उन्होंने वार्ता का विरोध शुरू कर दिया। आरोप है कि उन्होंने पिछले महीने समझौते पर हस्ताक्षर होने से पहले उसका मसौदा मीडिया में लीक कर दिया था, ताकि समझौता रुक सके।
ईरान में 14 जुलाई को संसद का विशेष सत्र बुलाया गया था।
विशेषज्ञ बोले- सरकार कट्टरपंथियों का असर कम करना चाहती है
एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान की मौजूदा सरकार अब इन कट्टरपंथी गुटों का प्रभाव कम करने की कोशिश कर रही है। हामिदरेजा अजीजी ने CNN से कहा-
हम देख रहे हैं कि गालिबाफ इन कट्टरपंथी नेताओं को धीरे-धीरे किनारे कर रहे हैं। ये लोग अब व्यवस्था के लिए बोझ बन चुके हैं और देश में अस्थिरता बढ़ने के साथ अपनी आपसी लड़ाई भी खुलकर सामने ला रहे हैं।
हालांकि इन कट्टरपंथियों की संख्या ज्यादा नहीं है, लेकिन संसद और सरकारी न्यूज एजेंसीज आईआरआईबी (IRIB) जैसे कई प्रभावशाली संस्थानों में उनकी मजबूत पकड़ है। इनकी वास्तविक राजनीतिक ताकत कितनी है, यह साफ नहीं है।
इस धड़े के प्रमुख नेता और पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख सईद जलीली को 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में 1.3 करोड़ से ज्यादा वोट मिले थे। वे चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे थे। ईरान की कुल आबादी करीब 9.3 करोड़ है।
ट्रम्प ने कहा था- ईरान भीतर से बंटा हुआ है
युद्ध और कूटनीतिक बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कई बार कह चुके हैं कि ईरान का नेतृत्व गंभीर अंदरूनी मतभेदों से जूझ रहा है और यही किसी समझौते में सबसे बड़ी बाधा है।
हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार और कट्टरपंथियों के बीच मतभेद जरूर हैं, लेकिन पूरे शासन की प्राथमिकता अब भी एक जैसी है। उनका लक्ष्य ऐसा समझौता करना है जिससे युद्ध खत्म हो, ईरान को प्रतिबंधों से राहत मिले और होर्मुज स्ट्रेट पर उसका प्रभाव भी बना रहे।
अमेरिका से फिर जंग चाहते हैं कट्टरपंथी
CNN के अनुसार, मुजतबा खामेनेई का लगातार सार्वजनिक रूप से सामने न आना, युद्धविराम को लेकर उनका सीमित समर्थन, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का बढ़ता प्रभाव और अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में जुटी भारी भीड़ ने कट्टरपंथियों का मनोबल बढ़ा दिया है। अब वे अमेरिका और इजराइल के खिलाफ युद्ध जारी रखने की खुलकर मांग कर रहे हैं।
ईरान के पूर्व विदेश मंत्री और कट्टरपंथी नेता मनूचेहर मुत्ताकी ने बुधवार को एक टीवी इंटरव्यू में कहा,
मेरा सुझाव है कि हम क्षेत्र में मौजूद अमेरिका के किसी सैन्य अड्डे पर जाएं, जहां सैकड़ों या शायद हजारों अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं। अगर हम उनमें से 100 सैनिकों को पकड़कर ईरान ले आएं, तो इतना ही काफी होगा।
यह बयान दिखाता है कि अमेरिका के साथ हुए समझौते के बावजूद ईरान के भीतर सत्ता संघर्ष खत्म नहीं हुआ है। एक तरफ सरकार कूटनीतिक रास्ते से प्रतिबंधों में राहत और युद्ध खत्म करने की कोशिश कर रही है, वहीं कट्टरपंथी धड़े अब भी अमेरिका और इजराइल के खिलाफ टकराव की नीति पर अड़े हुए हैं। इससे आने वाले समय में ईरान की आंतरिक राजनीति और विदेश नीति दोनों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
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