Thursday, May 7, 2026
Home Blog

अपने शेयर बाजार से ऊब गए हैं तो यहां लगाएं पैसा, रिटर्न देखकर ललचा जाएंगे आप


Last Updated:

क्या आप भी भारतीय शेयर बाजार में लगातार चल रही गिरावट से परेशान हैं? यदि हां तो आपको आज हम एक ऐसा विकल्प बताते हैं, जो आपके पोर्टफोलियो को बेहतर तरीके से बैलेंस कर सकता है. हम बात कर रहे हैं विदेशी फंड-ऑफ-फंड्स (Overseas FoF) की. पिछले एक साल में जहां घरेलू फंड्स ने सुस्त प्रदर्शन किया है, वहीं विदेशी फंड्स ने 46 फीसदी तक का रिटर्न दिया है. तो अब बिना देर किए इस बारे में सबकुछ जान ही लीजिए.

Zoom

ओवरसीज म्यूचुअल फंड्स में कैसे निवेश करें, यहां जानें तरीका. (Image – AI)

What is Fund of Funds: भारत के शेयर बाजार इन दिनों काफी सुस्त है. इंडेक्स तो फिर भी ठीक-ठाक चल रहे हैं, लेकिन शेयरों में भारी गिरावट है. जब भी बाजार में गिरावट आती है, तो बहुत से लोग परेशान हो जाते हैं कि उनका पैसा डूब न जाए. लगातार कमजोर होते पोर्टफोलियो को देखना किसी को अच्छा नहीं लगता. ऐसे में, समझदारी इसी में है कि आप अपना सारा पैसा एक ही जगह न रखें. तो कहां रखें? इस समस्या का हल है विदेशी फंड-ऑफ-फंड्स (Overseas Fund-of-Funds), जो आपको भारत में बैठे-बैठे दुनिया की बड़ी कंपनियों में पैसा लगाने का मौका देते हैं. ये फंड्स न केवल आपके रिस्क को कम करते हैं, बल्कि शानदार कमाई का जरिया भी बन सकते हैं.

पिछले एक साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो विदेशी फंड्स ने भारतीय म्यूचुअल फंड्स के मुकाबले कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है. जहां भारत के लार्ज-कैप फंड्स (Large-cap Funds) ने औसतन सिर्फ 3 फीसदी और फ्लेक्सी-कैप फंड्स (Flexi-cap Funds) ने 5 फीसदी का मुनाफा दिया है, वहीं विदेशी फंड-ऑफ-फंड्स ने 46 फीसदी का भारी-भरकम रिटर्न दिया है. अगर हम 3 साल की अवधि देखें, तब भी विदेशी फंड्स 25 फीसदी रिटर्न के साथ आगे रहे हैं, जबकि घरेलू फंड्स 14 से 16 फीसदी के बीच ही सिमट कर रह गए.

करेंसी में गिरावट से भी बचाव

विदेशी बाजार में निवेश का एक बड़ा फायदा करेंसी में होने वाली गिरावट से भी मिलता है. फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट में राइट रिसर्च पीएमएस (Wright Research PMS) की फाउंडर सोनम श्रीवास्तव (Sonam Srivastava) के हवाले से इस बारे में डिटेल से छापा गया है. सोनम श्रीवास्तव का कहना है कि एक आम नौकरीपेशा इंसान, जिसकी बचत और खर्चे सब रुपये में हैं, उसके लिए अपनी संपत्ति का कुछ हिस्सा ग्लोबल एसेट्स (Global Assets) में रखना पोर्टफोलियो को मजबूती देता है. यह कोई सट्टेबाजी नहीं, बल्कि समझदारी भरा निवेश है.

निवेश का तरीका और जरूरी बातें

विदेशी फंड-ऑफ-फंड्स में निवेश करना उतना ही आसान है, जितना किसी आम म्यूचुअल फंड में पैसा लगाना. इसके लिए आपको किसी विदेशी ब्रोकर के पास खाता खोलने या डॉलर खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती. आप सीधे किसी भी म्यूचुअल फंड वाली ऐप या डिस्ट्रीब्यूटर के जरिए निवेश कर सकते हैं. बस एक बात का ध्यान रखना जरूरी है कि आरबीआई (RBI) की सीमाओं के कारण कई बार फंड हाउस नए निवेश लेना बंद कर देते हैं.

फिस्डम (Fisdom) के रिसर्च हेड नीरव कारकेरा (Nirav Karkera) के अनुसार, निवेशकों को निवेश करने से पहले एएमसी की वेबसाइट पर यह चेक कर लेना चाहिए कि वे अभी नया पैसा ले रहे हैं या नहीं.

कितना निवेश करें? किस तरीके से लगेगा टैक्स

अगर आप विदेशी फंड्स में पैसा लगाने की सोच रहे हैं, तो कम से कम 5 से 7 साल का नजरिया रखें. छोटे समय के लिए यह रिस्की हो सकता है. कोड एडवाइजर्स (Qode Advisors) के पार्टनर गौरव डिडवानिया (Gaurav Didwania) का मानना है कि अपने पोर्टफोलियो का 10 से 15 फीसदी हिस्सा इन फंड्स में रखना चाहिए. हालांकि, इसमें टैक्स का गणित थोड़ा अलग है. इन फंड्स पर होने वाली कमाई को डेट फंड (Debt Fund) की तरह माना जाता है. आपकी जो भी कमाई होगी, उस पर आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा. यह भारतीय इक्विटी फंड्स के मुकाबले थोड़ा महंगा पड़ता है, लेकिन रिस्क कम करने के लिहाज से यह एक अच्छा विकल्प है.

About the Author

authorimg

Malkhan Singh

मलखान सिंह पिछले 17 वर्षों से ख़बरों और कॉन्टेंट की दुनिया में हैं. प्रिंट मीडिया से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई नामी संस्थानों का नाम प्रोफाइल में जुड़ा है. लगभग 4 साल से News18Hindi के साथ काम कर रहे …और पढ़ें



Source link

दिल्ली के पड़ोस में तहलका, 6 घंटे में बिक गए 1251 करोड़ के प्लॉट, अब बनेंगे महल जैसे घर


Faridabad Luxury Plots Sold in 6 Hours: द‍िल्‍ली के पड़ोसी शहर फरीदाबाद ने प्रॉपर्टी धमाका कर गुड़गांव और नोएडा को भी पछाड़ दिया है. यहां गोल्फ थीम वाली लग्जरी प्लॉटेड टाउनशिप में रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की गई है. जहां लांचिंग के महज 6 घंटे के भीतर ही 1251 करोड़ रुपये की कीमत के प्लॉट हाथों-हाथ बिक गए. यह कारनामा एनसीआर में गोल्फ थीम वाले लग्जरी प्लॉट काटने वाली कंपनी नियोलिव ने किया है.

बता दें कि फरीदाबाद में नियोलिव गोल्फ वन (NeoLiv Golf One) नाम की टाउनशिप के लांच होते ही पूरा प्रोजेक्ट बिक गया. सिर्फ 6 घंटों के अंदर 1,251 करोड़ रुपये की रिकॉर्ड बिक्री दर्ज की गई. इस प्रोजेक्ट को देश के बड़े निवेशकों, हाई नेटवर्थ खरीदारों (HNI) और एनआरआई ग्राहकों से जबरदस्त प्रतिक्रिया मिली, जिसके चलते इसकी सभी यूनिट्स बेहद कम समय में बिक गईं.

कैसा है यह प्रोजेक्ट, क्या है खास?
करीब 47 एकड़ में फैले इस प्रोजेक्ट में 181 से 388 वर्ग गज तक के प्रीमियम रेजिडेंशियल प्लॉट्स उपलब्ध हैं. इसकी खास थीम गोल्फ ग्रीन्स पर आधारित है, जो इसे एक लग्जरी और आधुनिक टाउनशिप का रूप देती है.

फरीदाबाद के सेक्टर 98 और 99A में स्थित यह प्रोजेक्ट एनसीआर की सबसे बड़ी और शानदार प्लॉटेड टाउनशिप्स बताया जा रहा है. इस प्रोजेक्ट में प्लॉट्स की कीमत लगभग 2,37,436 रुपये प्रति वर्ग मीटर यानी करीब 2 लाख रुपये प्रति वर्ग गज तक पहुंच गई है, जो इस क्षेत्र के रियल एस्टेट बाजार में एक नया रिकॉर्ड और बड़ा मानक माना जा रहा है.

कैसे अलग हैं इसके प्लॉट

नियोलिव की ओर से दी गई जानकारी में बताया गया कि इस रिकॉर्ड तोड़ सफलता के पीछे सबसे बड़ी वजह एक ऐसा प्रोजेक्ट है, जो एनसीआर के प्लॉटेड सेगमेंट में मौजूद अन्य प्रोजेक्ट्स से बिल्कुल अलग है. ‘नियोलिव गोल्फ वन’ को एक खास गोल्फ-लिविंग टाउनशिप के रूप में विकसित किया गया है. इसे सिर्फ गोल्फ कोर्स के पास नहीं, बल्कि पूरे गोल्फ लैंडस्केप को केंद्र में रखकर डिजाइन किया गया है, जिससे लोगों को प्रीमियम और अलग तरह का रहने का अनुभव मिल सके.

भारत में 100 से ज्यादा प्रोजेक्ट्स पर काम करने से मिले अनुभव का फायदा इस प्रोजेक्ट में साफ दिखाई देता है. नियोलिव ने बेहतर डिजाइन, मजबूत मास्टर प्लानिंग और लोगों को लंबे समय तक रहने का शानदार अनुभव देने पर विशेष ध्यान दिया है. यह प्रोजेक्ट केवल कीमत या लोकेशन के कारण नहीं, बल्कि अपनी बेहतरीन सोच और प्रीमियम विजन की वजह से लोगों को पसंद आया है. खरीदार इसे एक खास और लंबे समय तक मूल्य देने वाले अवसर के रूप में देख रहे हैं.

इसे लेकर नियोलिव (NeoLiv) के फाउंडर और सीईओ मोहित मल्होत्रा ने कहा, ‘नियोलिव गोल्फ वन को मिली इस जबरदस्त प्रतिक्रिया से हम बेहद सम्मानित और उत्साहित महसूस कर रहे हैं. भारत के अब तक के सबसे बड़े प्लॉटेड लॉन्च का मात्र छह घंटों में पूरी तरह बिक जाना सिर्फ एक सेल्स उपलब्धि नहीं, बल्कि नियोलिव की प्रोडक्ट सोच और विजन पर लोगों के मजबूत भरोसे का प्रमाण है. हमारा हमेशा से मानना रहा है कि अच्छी योजना और अलग पहचान वाले प्रोजेक्ट हर तरह के बाजार में बेहतर प्रदर्शन करते हैं, और इसी विश्वास ने पहले दिन से इस गोल्फ-ग्रीन्स टाउनशिप को आकार दिया.’

फरीदाबाद बनता जा रहा प्रॉपर्टी का केंद्र
दिल्ली-मुंबई इंडस्ट्रियल कॉरिडोर के शुरू होने के बाद फरीदाबाद एनसीआर के सबसे तेजी से विकसित हो रहे माइक्रो-मार्केट्स में शामिल हो गया है. शहर में प्रीमियम प्लॉटेड प्रोजेक्ट्स की मांग में तेजी से बढ़ोतरी देखी जा रही है. इस ग्रोथ को मजबूत सामाजिक बुनियादी ढांचे का भी पूरा सहयोग मिल रहा है, जिसमें अमृता अस्पताल जैसी विश्वस्तरीय स्वास्थ्य सुविधाएं और कई प्रतिष्ठित शैक्षणिक संस्थान शामिल हैं.



Source link

संजय कपूर संपत्ति मामला: सेटलमेंट के लिए तैयार हुआ परिवार, लेकिन प्रिया सचदेव ने रखी मांग


Last Updated:

पिछले साल जून में संजय कपूर के निधन के बाद से उनकी 30,000 करोड़ की वसीहत को लेकर घमासान मचा हुआ है. दिवंगत बिजनेसमैन की पत्नी प्रिया सचदेव, एक्स वाइफ करिश्मा कपूर, मां रानी कपूर कोर्ट के चक्कर काट रहे हैं. इस प्रॉपर्टी विवाद की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने सभी पक्षों को सेटलमेंट की सलाह दी है. कोर्ट का कहना है कि केस की सुनवाई में कई साल निकल जाएंगे और रानी कपूर की उम्र को देखते हुए सेटलमेंट ही सही रहेगा.

ख़बरें फटाफट

Zoom

संजय कपूर की वसीहत का मामला सुप्रीम कोर्ट में है. (AI enhanced photo)

नई दिल्ली.  करिश्मा कपूर के एक्स हस्बैंड और बिजनेसमैन संजय कपूर का पिछले साल जून में निधन हो गया था. उनकी मौत को करीबन एक साल हो चुका है लेकिन कपूर परिवार का संपत्ति विवाद अब भी कोर्ट में है. दिवंगत बिजनेसमैन की 30,000 करोड़ की अपार संपत्ति पर पिछले एक साल से घमासान मचा हुआ है. पिछली सुनवाई में सुप्रीम कोर्ट ने संजय कपूर की मां रानी कपूर को बहू प्रिया सचदेव के साथ सेटलमेंट करने का आदेश दिया था. इस सिलसिले में अब कोर्ट ने मामला सुलझाने के लिए पूर्व सीजेआई डी. वाई. चंद्रचूड़ को मध्यस्थ नियुक्त किया है.

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले को सुलझाने के लिए ‘मध्यस्थता प्रक्रिया’ (मीडिएशन) का रास्ता साफ कर दिया है, जिस पर परिवार के सभी सदस्यों ने अपनी रजामंदी दे दी है. करिश्मा कपूर के बच्चे भी इसके लिए राजी हैं. सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने एक महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा कि यदि यह कानूनी लड़ाई इसी तरह अदालतों में खिंचती रही, तो इसके अंतिम फैसले में कई दशक लग सकते हैं. न्याय के हित में कोर्ट की मंशा है कि परिवार के लोग आपस में बैठकर बातचीत करें और सौहार्दपूर्ण तरीके से इस विवाद का अंत करें.

सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों को दी हिदायत

अदालत ने सुनवाई के दौरान सभी पक्षों को कड़े अनुशासन में रहने की हिदायत दी है. कोर्ट ने स्पष्ट आदेश दिया है कि मामला संवेदनशील होने के कारण अब कोई भी पक्ष सार्वजनिक रूप से मीडिया में बयानबाजी नहीं करेगा. इसके साथ ही, सोशल मीडिया पर भी इस विवाद से जुड़ी किसी भी तरह की पोस्ट डालने पर पाबंदी लगा दी गई है. मामले की अगली सुनवाई अब अगस्त महीने में की जाएगी.

प्रिया कपूर ने सास के खिलाफ की थी अपील

दिवंगत संजय कपूर की पत्नी प्रिया सचदेव ने कोर्ट से अपील की थी कि उनकी सास रानी कपूर मीडिया के सामने पारिवारिक विवाद को न उछालें. उन्होंने अपनी सास के पब्लिक कमेंट को रोकने की अपील की थी जिसके बाद कोर्ट ने दोनों पक्षों की किसी भी तरह की बयान बाजी पर रोक लगा दी है.

दरअसल, यह पूरा मामला संजय कपूर की मौत के बाद उनकी संपत्ति, फैमिली ट्रस्ट और विरासत को लेकर शुरू हुआ था. संजय कपूर की मां रानी कपूर ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर फैमिली ट्रस्ट को रद्द करने की मांग की. उनका आरोप है कि यह ट्रस्ट उनकी जानकारी और अनुमति के बिना बनाया गया था. रानी कपूर का कहना है कि इस ट्रस्ट के जरिए परिवार की संपत्तियों और विरासत पर कब्जा करने की कोशिश की गई. उन्होंने अदालत से मांग की कि जब तक मामले का अंतिम फैसला नहीं हो जाता, तब तक संपत्तियों के ट्रांसफर और किसी भी तरह की बिक्री पर यथास्थिति बनाए रखी जाए. (आईएएनएस इनपुट के साथ)

About the Author

authorimg

Pranjul SinghSub-Editor

From the precision of chemistry labs to the vibrant chaos of a newsroom, my journey has been about finding the perfect formula for a great story. A graduate in Chemistry Honours from the historic Scottish Churc…और पढ़ें



Source link

गिफ्ट सिटी में 400 करोड़ से ज्यादा का घोटाला: मासिक 5% रिटर्न के लालच में 33 हजार निवेशकों को ठगा, कंपनी संचालक फरार – Gujarat News


कंपनी के खिलाफ 20-25 व्यापारियों ने शिकायत दर्ज करवाई।

गुजरात के आर्थिक हब गिफ्ट सिटी में निवेश के नाम पर करोड़ों रुपए का घोटाला सामने आया है। यहां कार्यरत शूट स्पेस डिजिटल प्र.लि. कंपनी पर टेराबाइट डेटा स्पेस में निवेश कर ऊंचे रिटर्न का लालच देकर करोड़ों रुपए ठगने के आरोप लगे हैं।

.

कंपनी के ऑफिस न्याय मांगने के लिए निवेशक पहुंचे, जिससे गिफ्ट सिटी में अफरा-तफरी मच गई। जानकारी मिलते ही डभोड़ा पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति संभाला। पुलिस ने पीड़ितों की शिकायत दर्ज कर कंपनी संचालकों की तलाश में जुटी है।

प्रारंभिक अनुमान है कि लगभग 33,000 से ज्यादा ग्राहक स्कीम में फंसे हैं और घोटाले की राशि ~400 करोड़ से ज्यादा है। कुछ निवेशकों ने ~5 लाख से ~3 करोड़ तक गंवाने की शिकायत की है।

बड़े कार्यक्रमों से कॉर्पोरेट ग्रुप की छवि बनाई निवेशकों का आरोप है कि कंपनी ने प्रोफेशनल कॉर्पोरेट ग्रुप की छवि बनाने के लिए बड़े पैमाने पर भूमिपूजन जैसे सार्वजनिक कार्यक्रम किए। गिफ्ट सिटी में आलीशान ऑफिस होने से लोगों को सुरक्षित निवेश लगा।

पिछले 2 महीने से रिटर्न आना बंद हुआ और कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों ने संपर्क तोड़ लिया, जिससे निवेशकों पर आसमान टूट पड़ा है। कंपनी के ऑफिस पर कोई जिम्मेदार नहीं होने से निवेशकों में भारी आक्रोश फैला है।

गिफ्ट सिटी में पुलिस बल तैनात

गिफ्ट सिटी में स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस बल तैनात किया गया है। इस बारे में डभोड़ा पुलिस थाना पीआई अनिल चौहान ने कहा कि निवेशकों को रिटर्न नहीं मिलने का आरोप है। उनकी अर्जी के आधार पर जांच शुरू की गई है।

निवेशकों ने 5 लाख से 3 करोड़ रुपए तक की रकम गंवाने की शिकायतें की हैं। जांच के अंत में कंपनी की आपराधिक गतिविधियां सामने आएंगी तो सभी दोषियों के खिलाफ मामला दर्ज किया जाएगा।

टेराबाइट डेटा स्पेस खरीदकर निवेश करने का लालच दिया जानकारी मिली है कि कंपनी ने निवेशकों को आकर्षक योजना दिखाई कि अगर वे टेराबाइट डेटा स्पेस खरीदने में निवेश करेंगे, तो इसके बदले उन्हें हर महीने लगभग 5 प्रतिशत का अच्छा रिटर्न दिया जाएगा। शुरुआती चरण में कंपनी ने समय पर रिटर्न देकर निवेशकों का विश्वास जीता था।

——————– गुजरात से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…

सूरत की SBI बैंक में डकैती करने वाले 2 अरेस्ट:13 मिनट में लूट लिए थे 52 लाख रुपए, पांच की तलाश जारी

सूरत के SBI बैंक में दिनदहाड़े हुई 52 लाख रुपए की नकद लूट के मामले में क्राइम ब्रांच ने यूपी के गोंडा से दो आरोपियों को अरेस्ट किया है। वहीं, अन्य 5 आरोपियों की तलाश जारी है। गिरफ्तार किए गए आरोपियों की पहचान शुभम कुमार और विकास सिंह के रूप में हुई है। पूरी खबर पढ़ें…



Source link

दीपू के घर में डांस करते मदरसा छात्रा का वीडियो: कन्नौज में दलित युवक पर अपहरण और रेप के आरोप, बहन ने कहा- शादी हुई थी – Kannauj News




कन्नौज में मदरसे से बाहर निकली छात्रा के अपहरण और रेप के मामले ने नया मोड़ ले लिया है। आरोपी के घर में साड़ी और मंगलसूत्र पहनकर छात्रा के डांस करने का वीडियो वायरल हो रहा है। आरोपी की बहनों ने पुलिस के समक्ष साक्ष्य प्रस्तुत करते हुए कहा कि छात्रा ने शादी की थी और अपनी पहचान व उम्र छिपाई थी। शहर के हम्मालीपुरा मोहल्ले में रहने वाले दीपू के घर 5 अप्रैल को करीब 50 से 60 लोग अचानक पहुंच गए। उन्होंने उसकी छत पर मौजूद छात्रा को नीचे उतारा और परिजनों के साथ मारपीट की। इस दौरान मोहल्ले के अन्य घरों में भी तोड़फोड़ और हंगामा किया गया। छात्रा के परिजनों ने दीपू और उसके दो साथियों धीरज व संजीव पर अपहरण और रेप का आरोप लगाते हुए रिपोर्ट दर्ज कराई, जिसके बाद पुलिस ने तीनों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। हालांकि मामले में नया मोड़ तब आया, जब दीपू के घर से छात्रा के साड़ी और मंगलसूत्र पहनकर डांस करने के वीडियो वायरल होने लगे। इसके बाद दीपू की बहनें कंचन और नीतू सदर कोतवाली पहुंचीं और वीडियो सहित अन्य साक्ष्य पेश करते हुए आरोपों को झूठा बताया। उनका कहना है कि छात्रा ने अपनी उम्र और पहचान छिपाकर शादी की थी। छात्रा ने अपना नाम पूनम बताया दीपू की बहन कंचन और पड़ोस की रहने वाली रीमा ने बताया कि छात्रा अक्सर मोहल्ले में भीख मांगने आती थी। पूछने पर उसने बताया था कि उसके पिता का निधन हो चुका है और मां को चाचा अपने साथ ले गए हैं। घर बिक जाने के कारण वह बेसहारा है और मांगकर खाने को मजबूर है। पहले उसने अपना नाम शकीना बताया था, बाद में पूनम बताया। रीमा के अनुसार, जब महिलाओं ने उससे शादी के बारे में पूछा तो उसने सहमति दी। 1 अप्रैल को उससे आधार कार्ड लाने को कहा गया, जिसके बाद वह घर चली गई और 3 अप्रैल को वापस कपड़े लेकर लौटी। उसने बताया कि आधार कार्ड खो गया है और वह बालिग है। इसके बाद मोहल्ले के लोगों की मौजूदगी में कथित तौर पर शादी कराई गई, जिसके बाद छात्रा ने घर में डांस भी किया और उसे न्योछावर भी दिया गया। दीपू के घर के बाहर पुलिस तैनात घटना स्थल के पास शेखपुरा मोहल्ला मुस्लिम बहुल क्षेत्र है, जिसके चलते दो समुदायों के बीच तनाव की आशंका को देखते हुए दीपू के घर के बाहर पुलिस बल तैनात किया गया है। दीपू की दोनों बहनों को सुरक्षित स्थान पर भेज दिया गया है। दीपू के माता-पिता पहले ही निधन हो चुका है, जिसके चलते घर खाली पड़ा थ



Source link

BNMU में UDC पोस्ट पर अपॉइंटमेंट रोकने का आदेश रद्द: हाईकोर्ट ने विश्वविद्यालय और सरकार को बकाया वेतन 6% ब्याज सहित देने का दिया निर्देश – Madhepura News



पटना हाईकोर्ट ने BNMU के उच्च वर्गीय लिपिक पद पर नियुक्त कर्मचारियों को बड़ी राहत दी है। न्यायालय ने राज्य सरकार के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें इन नियुक्तियों को दी गई स्वीकृति रोक दी गई थी। कोर्ट ने विश्वविद्यालय और राज्य सरकार को कर्मचारियों

.

न्यायमूर्ति आलोक कुमार सिन्हा की एकलपीठ ने सिविल रिट अधिकारिता वाद संख्या 7250/2025 में यह महत्वपूर्ण फैसला सुनाया। न्यायालय ने स्पष्ट किया कि वर्ष 2017 में की गई नियुक्तियों को केवल इस आधार पर अवैध नहीं ठहराया जा सकता कि यूडीसी का पद पदोन्नति की श्रेणी में आता है। यह विशेष रूप से तब जब पूरी चयन प्रक्रिया न्यायालय के निर्देशों और राज्य सरकार की सहभागिता से पूरी हुई हो।

यूडीसी का पद पदोन्नति के माध्यम से भरा जाना चाहिए

याचिकाकर्ता चंद्र किशोर गुप्ता और राजेश कुमार ने 13 फरवरी 2025 को जारी उस आदेश को चुनौती दी थी, जिसमें उनकी नियुक्ति की स्वीकृति रोक दी गई थी। इस आदेश में कहा गया था कि यूडीसी का पद पदोन्नति के माध्यम से भरा जाना चाहिए, न कि सीधी भर्ती से। याचिकाकर्ताओं ने बताया कि वे वर्ष 1992 और 1995 से विश्वविद्यालय में दैनिक वेतनभोगी के रूप में कार्यरत थे।

बाद में, न्यायालय के निर्देशों के तहत वर्ष 2017 में एक विधिवत चयन प्रक्रिया के माध्यम से उनकी नियुक्ति की गई थी। उन्हें वर्ष 2019 में राज्य सरकार द्वारा स्वीकृति भी मिली थी और मई 2023 तक उन्हें नियमित वेतन मिलता रहा। हालांकि, इसके बाद अचानक उनका वेतन रोक दिया गया था, जिसके बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया।

नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह वैध थी

सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ताओं के अधिवक्ता ने दलील दी कि नियुक्ति प्रक्रिया पूरी तरह वैध थी और इसमें राज्य सरकार की सक्रिय भूमिका रही थी। वहीं, राज्य सरकार और विश्वविद्यालय की ओर से तर्क दिया गया कि यूडीसी का पद पदोन्नति का है, इसलिए सीधी नियुक्ति अवैध है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद न्यायालय ने पाया कि 2017 की नियुक्तियां न्यायालय के निर्देशों और राज्य सरकार द्वारा तय मानकों के तहत की गई थीं।

उस समय पद की प्रकृति को लेकर कोई आपत्ति नहीं उठाई गई थी, ऐसे में कई वर्षों बाद उसी आधार पर नियुक्ति को अस्वीकार करना कानून के विरुद्ध है।

याचिकाकर्ताओं ने लंबे समय तक कार्य किया

न्यायालय ने यह भी कहा कि सरकार और विश्वविद्यालय पहले इस प्रक्रिया में शामिल होकर बाद में उससे मुकर नहीं सकते, क्योंकि यह ‘प्रोमिसरी एसटॉपल’ और ‘वैध अपेक्षा’ जैसे सिद्धांतों के खिलाफ है। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ताओं ने लंबे समय तक कार्य किया है, इसलिए उन्हें उनके काम का वेतन मिलना उनका अधिकार है।

काम किया है तो वेतन मिलेगा के सिद्धांत को लागू करते हुए न्यायालय ने जून 2023 से लंबित वेतन और बकाया राशि के भुगतान का निर्देश दिया। साथ ही, बकाया वेतन पर 6 प्रतिशत वार्षिक साधारण ब्याज भी देने को कहा गया है, जिसकी गणना वेतन देय तिथि से भुगतान तक की जाएगी। न्यायालय ने उच्च शिक्षा विभाग द्वारा 13 फरवरी 2025 को पत्र को रद्द करते हुए राज्य सरकार और विश्वविद्यालय को आदेश दिया कि वे आठ सप्ताह के भीतर याचिकाकर्ताओं का बकाया वेतन और ब्याज सहित भुगतान सुनिश्चित करें।



Source link

महिला कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष को दस करोड़ की मानहानि का नोटिस: बीजेपी विधायक चिंतामणि मालवीय पर लगाए थे महिला उत्पीड़न के आरोप – Bhopal News


भोपाल10 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

रतलाम जिले की आलोट से बीजेपी विधायक डॉ चिंतामणि मालवीय ने मप्र महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रीना बोरासी सेतिया को मानहानि का नोटिस भेजा है।

विधायक ने अपने वकील के माध्यम से रीना बोरासी को 10 करोड़ रुपए का मानहानि नोटिस दिया है। रीना बोरासी द्वारा मीडिया में दिए गए उन बयानों को लेकर यह नोटिस भेजा गया है जिनमें बोरासी ने विधायक पर यौन शोषण और अवैध कब्जे जैसे गंभीर आरोप लगाए थे। विधायक ने एक स्थानीय चैनल को भी लीगल नोटिस भेजा है।

राज्यपाल से की थी शिकायत

रीना बोरासी ने कुछ दिन पहले राज्यपाल मंगुभाई पटेल से लोकभवन भोपाल में मुलाकात के बाद मीडिया को बयान दिया था। जिसमें उन्होंने विधायक पर गंभीर आरोप लगाए थे। उन्होंने एक महिला को लेकर कहा था कि उस महिला ने मुझे एफिडेविट के साथ सुबूत दिए हैं। वही राज्यपाल को देने आई हूं। मप्र का एक नेता, विधायक और पूर्व सांसद इस तरह से महिलाओं पर अत्याचार करेगा। उनका योन शोषण करेगा, उसके घर और पैतृक जमीन पर कब्जा करेगा। अपने 25-30 गुंडों काे भिजवाकर यशटर तोड़े, 70 साल की महिला पर अत्यावार किया। मेरी सरकार और राज्यपाल से मांग है कि संबंधित की विधायकीर रद्द की जाए।

विधायक से चुनावी रंजिश रखती हैं रीना

नोटिस में विधायक की ओर से कहा गया है कि वे एक उच्च शिक्षित जनप्रतिनिधि हैं और समाज में उनकी प्रतिष्ठा है। रीना बोरासी ने बिना किसी ठोस प्रमाण के केवल चुनावी रंजिश और राजनीतिक द्वेष के चलते उनकी छवि धूमिल करने के उद्देश्य से ये झूठे आरोप लगाए हैं। विधायक का तर्क है कि ‘पृथ्वीचक्र’ चैनल और सोशल मीडिया पर प्रसारित यह इंटरव्यू पूरी तरह से षड्यंत्र का हिस्सा है।

7 दिन की मोहलत और कानूनी चेतावनी

एडवोकेट शेखर श्रीवास्तव द्वारा भेजे गए इस नोटिस में रीना बोरासी को 7 दिन का समय दिया गया है। इन 7 दिनों के भीतर उन्हें उन सभी दस्तावेजों और साक्ष्यों की प्रमाणित प्रतियां उपलब्ध करानी होंगी, जिनके आधार पर उन्होंने ये आरोप लगाए हैं। यदि वे ऐसा करने में विफल रहती हैं, तो उनके विरुद्ध 10 करोड़ रुपए की क्षतिपूर्ति का दीवानी मामला और आपराधिक मानहानि का केस दर्ज किया जाएगा।

ये खबर भी पढ़िए…

आलोट विधायक पर महिलाओं को प्रताड़ित करने का आरोप

मध्यप्रदेश में महिलाओं के साथ हो रहे कथित शोषण और प्रताड़ना के मामलों को लेकर सियासत गर्मा गई है। महिला कांग्रेस की प्रदेश अध्यक्ष रीना बोरासी ने भाजपा के आलोट विधायक और पूर्व सांसद चिंतामणि मालवीय के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। उन्होंने गुरुवार को राज्यपाल से मुलाकात कर विधायक पर गंभीर आरोप लगाए और उन पर तुरंत कार्रवाई की मांग की है। रीना बोरासी का कहना है कि विधायक के रसूख के आगे पीड़ित महिलाओं की सुनवाई नहीं हो रही है और प्रशासन मौन बना हुआ है। पढ़ें पूरी खबर…



Source link

अनचाहे गर्भ पर दो कोर्ट दो फैसले; सुप्रीम कोर्ट से HC तक डॉक्टरों की शामत


होमताजा खबरदेश

अनचाहे गर्भ पर दो कोर्ट दो फैसले; सुप्रीम कोर्ट से HC तक डॉक्टरों की शामत

Last Updated:

Unwanted Pregnancy Case: अनचाहे गर्भ और मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी के दो मामलों में दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने डॉक्टरों और मेडिकल बोर्डों पर सख्त टिप्पणी की है. दिल्ली हाईकोर्ट ने 27 हफ्ते की गर्भवती महिला के मामले में आरएमएल अस्पताल के डॉक्टरों को फटकार लगाई. सुप्रीम कोर्ट ने 15 साल की रेप पीड़िता के मामले में AIIMS के रवैये पर नाराजगी जताई. अदालतों ने कहा कि महिलाओं की प्रजनन स्वतंत्रता संवैधानिक अधिकार है और मेडिकल संस्थानों को अपनी जिम्मेदारी स्पष्ट तरीके से निभानी होगी.

Zoom

अनचाहे गर्भ और MTP मामलों में सुप्रीम कोर्ट और दिल्ली हाईकोर्ट ने डॉक्टरों और मेडिकल बोर्डों को फटकार लगाई. (सांकेतिक फोटो)

Unwanted Pregnancy Case: अनचाहे गर्भ और मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी (MTP) को लेकर अदालतों की सख्ती अब सिर्फ कानूनी बहस तक सीमित नहीं रह गई है. दिल्ली हाईकोर्ट से लेकर सुप्रीम कोर्ट तक जजों ने साफ संकेत दिया है कि किसी महिला की प्रजनन स्वतंत्रता को सरकारी मेडिकल बोर्डों की हिचकिचाहट या डॉक्टरों की ढुलमुल राय के हवाले नहीं छोड़ा जा सकता. एक तरफ दिल्ली हाईकोर्ट ने 27 हफ्ते की गर्भवती महिला के मामले में राम मनोहर लोहिया अस्पताल के डॉक्टरों को फटकार लगाई. क्योंकि मेडिकल बोर्ड कोर्ट के सीधे आदेश के बावजूद यह नहीं बता पाया कि अबॉर्शन संभव है या नहीं. दूसरी तरफ सुप्रीम कोर्ट ने 15 साल की रेप पीड़िता की 30 हफ्ते की गर्भावस्था खत्म कराने के मामले में AIIMS के खिलाफ अवमानना कार्यवाही तक शुरू कर दी थी. दोनों मामलों ने एक बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है कि आखिर कानून साफ होने के बावजूद मेडिकल संस्थान निर्णय लेने से क्यों बचते हैं. अदालतों की टिप्पणी यह भी बताती है कि अब महिला की ‘रिप्रोडक्टिव ऑटोनॉमी’ को केवल मेडिकल राय नहीं, बल्कि संवैधानिक अधिकार के रूप में देखा जा रहा है.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के अनुसार दिल्ली हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के इन दोनों फैसलों में एक समान बात दिखाई देती है. अदालतें डॉक्टरों से सिर्फ मेडिकल राय नहीं, बल्कि संवेदनशील और स्पष्ट जवाब चाहती हैं. हाईकोर्ट ने कहा कि मेडिकल बोर्ड ने अपनी वैधानिक जिम्मेदारी से मुंह मोड़ा. जबकि सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि किसी नाबालिग लड़की को उसकी इच्छा के खिलाफ गर्भ ढोने के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता. जस्टिस बी वी नागरत्ना ने यहां तक कहा कि अगर बड़े अस्पताल मदद नहीं करेंगे तो महिलाएं झोलाछाप डॉक्टरों के पास जाएंगी और उनकी जान खतरे में पड़ जाएगी. वहीं दिल्ली हाईकोर्ट ने मेडिकल बोर्ड की रिपोर्ट को कानूनी दायित्व की अनदेखी बताया. अदालतों का यह कड़ा रुख इसलिए भी अहम है क्योंकि हाल के सालों में ऐसे मामलों की संख्या तेजी से बढ़ी है जहां गर्भ में गंभीर असामान्यताएं या रेप पीड़िता की स्थिति अदालत तक पहुंच जाती है और हर दिन की देरी महिला के मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर भारी पड़ती है.
मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट के तहत 24 हफ्ते तक कुछ शर्तों के साथ अबॉर्शन की अनुमति दी जा सकती है.

मेडिकल बोर्ड की चुप्पी पर हाईकोर्ट नाराज

  • दिल्ली हाईकोर्ट में 29 वर्षीय महिला ने 27 हफ्ते की गर्भावस्था खत्म करने की अनुमति मांगी थी. महिला का कहना था कि भ्रूण में गंभीर असामान्यताएं हैं और गर्भ जारी रखने से गर्भ में ही बच्चे की मौत का खतरा है. कोर्ट ने RML अस्पताल और ABVIMS को मेडिकल जांच कर स्पष्ट राय देने का आदेश दिया था. लेकिन मेडिकल बोर्ड ने यह बताने के बजाय कि अबॉर्शन संभव है या नहीं, महिला को गर्भ जारी रखने की सलाह दे दी.
  • जस्टिस पुरुषेंद्र कुमार कौरव ने इसे अदालत के आदेश की अनदेखी माना. कोर्ट ने कहा कि डॉक्टरों ने MTP एक्ट की भावना और अपने वैधानिक दायित्वों को नजरअंदाज किया. अदालत ने यहां तक चेतावनी दी कि भविष्य में कोर्ट के आदेशों का अक्षरश: पालन होना चाहिए. इसके बाद महिला को जांच के लिए AIIMS भेजा गया.
  • दिल्ली हाईकोर्ट ने सुनवाई के दौरान यह भी कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही स्पष्ट कर चुका है कि महिलाओं की प्रजनन स्वतंत्रता को सर्वोच्च महत्व दिया जाना चाहिए. कोर्ट ने केंद्र सरकार के वकील से कहा कि मेडिकल बोर्ड को साफ-साफ बताना चाहिए था कि वे अबॉर्शन के पक्ष में हैं या निजी डॉक्टरों की राय से असहमत हैं.

सुप्रीम कोर्ट में AIIMS पर अवमानना की तलवार

  • दूसरा मामला 15 साल की रेप पीड़िता से जुड़ा था, जिसकी 30 हफ्ते की गर्भावस्था खत्म करने की अनुमति सुप्रीम कोर्ट ने दी थी. लेकिन AIIMS ने पहले इस आदेश पर हिचक दिखाई और बाद में पुनर्विचार तथा क्यूरेटिव याचिका तक दायर कर दी. अस्पताल का कहना था कि इतने समय बाद अबॉर्शन में बच्चा जीवित पैदा हो सकता है और उसमें गंभीर विकलांगताएं हो सकती हैं.
  • हालांकि सुप्रीम कोर्ट ने इसे महिला की व्यक्तिगत स्वतंत्रता से जुड़ा मामला माना. कोर्ट ने कहा कि किसी नाबालिग लड़की को अनचाहे गर्भ के साथ जीने के लिए मजबूर करना उसके मौलिक अधिकारों का उल्लंघन होगा. बाद में AIIMS ने कोर्ट के आदेश के अनुसार प्रक्रिया पूरी की. बच्चा जीवित पैदा हुआ और उसे NICU में रखा गया. इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने अवमानना की कार्यवाही बंद कर दी.

जजों की चिंता सिर्फ कानून नहीं, समाज भी

सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि नाबालिग लड़कियों में अनचाहे गर्भ के मामले बढ़ना चिंता का विषय है. उन्होंने कहा कि परिवार पहले सदमे में रहता है और फैसला लेने में देर हो जाती है, जिससे मामला सातवें महीने तक पहुंच जाता है. कोर्ट ने सरकार को MTP कानून में बदलाव पर भी विचार करने की सलाह दी.

कोर्ट की टिप्पणियां बताती हैं कि अब ऐसे मामलों को सिर्फ मेडिकल प्रक्रिया नहीं माना जा रहा. इसमें महिला की गरिमा, मानसिक स्वास्थ्य और संवैधानिक अधिकार को बराबर महत्व दिया जा रहा है. यही वजह है कि अदालतें अब मेडिकल बोर्डों की अस्पष्ट रिपोर्ट पर सख्त रुख अपना रही हैं.

अदालतें डॉक्टरों और मेडिकल बोर्डों से नाराज क्यों दिखीं?

जवाब: दोनों मामलों में कोर्ट को लगा कि मेडिकल बोर्ड और अस्पताल स्पष्ट जिम्मेदारी लेने से बच रहे थे. दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा कि डॉक्टरों ने कोर्ट के सीधे आदेश के बावजूद यह नहीं बताया कि अबॉर्शन संभव है या नहीं. वहीं सुप्रीम कोर्ट को लगा कि AIIMS बार-बार कानूनी प्रक्रिया में देरी कर रहा है. अदालतों का मानना है कि ऐसे मामलों में अस्पष्ट राय महिला के अधिकारों और स्वास्थ्य दोनों को प्रभावित करती है.

MTP एक्ट महिलाओं को क्या अधिकार देता है?

मेडिकल टर्मिनेशन ऑफ प्रेग्नेंसी एक्ट के तहत 24 हफ्ते तक कुछ शर्तों के साथ अबॉर्शन की अनुमति दी जा सकती है. लेकिन यदि भ्रूण में गंभीर असामान्यता हो या महिला के जीवन और मानसिक स्वास्थ्य पर खतरा हो, तो अदालतें 24 हफ्ते के बाद भी अनुमति दे सकती हैं. सुप्रीम कोर्ट ने कई फैसलों में कहा है कि महिला की प्रजनन स्वतंत्रता संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मौलिक अधिकार का हिस्सा है.

कोर्ट की सख्ती का आगे क्या असर पड़ सकता है?

इन फैसलों के बाद मेडिकल बोर्डों और सरकारी अस्पतालों पर दबाव बढ़ेगा कि वे ऐसे मामलों में स्पष्ट और समयबद्ध राय दें. अदालतों ने संकेत दिया है कि महिला की इच्छा और मानसिक स्वास्थ्य को प्राथमिकता दी जानी चाहिए. साथ ही सरकार पर भी दबाव बनेगा कि MTP कानून में बदलाव कर नाबालिग रेप पीड़िताओं और गंभीर भ्रूण असामान्यता वाले मामलों के लिए प्रक्रिया आसान बनाई जाए.

About the Author

authorimg

Sumit KumarSenior Sub Editor

सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 4 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…और पढ़ें



Source link

फिल्म के सेट पर मां नीतू के लिए परेशान थे रणबीर, चाहते थे छोड़ दें मूवी


Last Updated:

नीतू कपूर इन दिनों अपनी फिल्म दादी की शादी के प्रमोशन में व्यस्त है. ये फिल्म कपूर परिवार के लिए बेहद खास है क्योंकि इसमें उनके खानदान की 3 जेनरेशन एक साथ नजर आएगी. 45 की उम्र में नीतू कपूर की बेटी रिद्धिमा साहनी पहली बार फिल्म दादी की शादी में सिल्वर स्क्रीन पर नजर आएंगी. इसी फिल्म में नीतू कपूर की नातिन और रिद्धिमा की बेटी समायरा भी हैं.

नई दिल्ली. दादी की शादी 8 मई को सिनेमाघरों में रिलीज के लिए तैयार है. इन दिनों कपिल शर्मा और नीतू कपूर अपनी फिल्म को दर्शकों तक पहुंचाने में जी-जान से जुटे हुए हैं. प्रमोशन के दौरान दोनों कलाकारों ने फिल्म से जुड़े मजेदार किस्से और यादें भी शेयर की. नीतू कपूर और कपिल शर्मा बताते हैं कि पिछले साल भारत-पाकिस्तान टेंशन के बीच उन्होंने कैसे फिल्म की शूटिंग पूरी की.

नीतू कपूर ने बताया कि वो लोग शिमला के एक गांव में दादी की शादी की शूटिंग कर रहे थे. उस दौरान भारत-पाकिस्तान के बीच टेंशन चल रही थी और ऑपरेशन सिंदूर के बाद युद्ध जैसी स्थिति बन रही थी. ऐसे में रणबीर कपूर अपनी मां की सुरक्षा को लेकर काफी चिंतित हो गए. (फोटो साभारः इंस्टाग्राम @Neetu54)

रणबीर कपूर नहीं चाहते थे कि नीतू शिमला में रहकर फिल्म की शूटिंग करें. वो बार-बार उन्हें वापस घर आने के लिए कहते रहते थे, लेकिन एक्ट्रेस ने अपने बेटे को आश्वासन दिलाया कि वो सुरक्षित जगह पर हैं और पूरी टीम और क्रू उनके साथ है. (फोटो साभारः इंस्टाग्राम @Neetu54)

Add News18 as
Preferred Source on Google

स्क्रीन के साथ बात करते हुए नीतू कपूर ने ये किस्सा साझा किया. वो कहती हैं कि उन्होंने रणबीर को यकीन दिलाया कि वहां कई बम नहीं फेकेगा. वो लोग वहां बिलकुल सुरक्षित हैं. इस फिल्म के बारे में सीनियर एक्ट्रेस ने शेयर किया कि कैसे छोटे से गांव ने उन्हें उम्र भर की यादें दीं. (फोटो साभारः इंस्टाग्राम @Neetu54)

फिल्म की स्टारकास्ट ने बताया कि दादी की शादी की शूटिंग शिमला के छोटे से गांव में हो रही थी. वहां वैनिटी वैंस की कोई जगह नहीं थी. यहां तक कि बड़े-बड़े होटल्स भी नहीं थे जिस वजह से पूरी टीम एक साथ एक ही जगह पर रहती थी. एक साथ ठहरने की वजह से टीम को बॉन्ड करने का मौका मिला. (फोटो साभारः इंस्टाग्राम @Neetu54)

नीतू कपूर कहती हैं कि दादी की शादी बाकी फिल्मों की तरह नहीं थी. आज कल की फिल्मों में आउटडोर शूट काफी अकेला फील कराते हैं. ज्यादातर एक्टर्स अपनी वैनिटी में रहना पसंद करते हैं और सेट पर वो किसी के साथ बॉन्ड नहीं करते हैं. ऐसे में लोग अकेला महसूस करते हैं. (फोटो साभारः इंस्टाग्राम @Neetu54)

नीतू ने आगे बताया कि इस फिल्म की शूटिंग ने उन्हें पुराने दिनों की याद दिलाई जहां सब एक साथ इकट्ठे रहते थे. एक साथ मिलजुलकर बातें करते थे. वो कहती हैं कि एक साथ रहने की वजह से सेट पर लोगों की बॉन्डिंग भी काफी अच्छी रही और उन्हें इसमें बहुत मजा आया. (फोटो साभारः इंस्टाग्राम @Neetu54)

Neetu post

एक्ट्रेस औऱ कपिल के मुताबिक फिल्म की पूरी टीम को शूटिंग में इतना मजा आ रहा था कि भारत-पाकिस्तान के बीच बढ़ते टेंशन के बावजूद कोई वापस नहीं जाना चाहता था. वो लोग अपने-अपने कॉटेज में महफूज थे. (फोटो साभारः इंस्टाग्राम @Neetu54)

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।



Source link

ऑपरेशन सिंदूर का एक साल: PM मोदी ने सोशल मीडिया डीपी बदली, ऑपरेशन का लोगो लगाया, लिखा- देश सेनाओं के शौर्य को सलाम करता है


  • Hindi News
  • National
  • Operation Sindoor First Anniversary PM Modi Changes X Profile Photo With Operation Sindoor Logo

नई दिल्ली1 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

पीएम मोदी समेत केंद्र के कई मंत्रियों और वरिष्ठ अधिकारियों ने डिस्प्ले पिक्चर में ऑपरेशन सिंदूर का लोगो लगाया है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुरुवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर अपनी डिस्प्ले पिक्चर बदलकर ऑपरेशन सिंदूर का लोगो लगाया है। यह पहल पहलगाम आतंकी हमले के जवाब में शुरू किए गए सैन्य ऑपरेशन की पहली वर्षगांठ पर भारतीय सेना के साहस को ट्रिब्यूट देने के लिए की गई।

अप्रैल 2025 में हुए पहलगाम आतंकी हमले के बाद शुरू किया गया था, जिसमें 26 लोगों की जान चली गई थी। ऑपरेशन सिंदूर के दौरान भारतीय सेना ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoJK) में मौजूद आतंकी ठिकानों पर हमला किया था।

7 मई 2025 को लॉन्च किए गए ऑपरेशन सिंदूर में, भारत ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत जम्मू-कश्मीर (PoK) में नौ बड़े आतंकी लॉन्चपैड को नष्ट कर दिया था।

इस दौरान लश्कर-ए-तैयबा, जैश-ए-मोहम्मद और हिजबुल मुजाहिदीन की सुविधाओं को निशाना बनाया गया। भारतीय सशस्त्र बलों ने इस कार्रवाई में 100 से अधिक आतंकवादियों को मार गिराया था।

पीएम मोदी का X अकाउंट, जिस पर डीपी बदली है…

पीएम ने संस्कृत के श्लोक से किया सेनाओं के पराक्रम को सलाम

पीएम मोदी ने संस्कृत श्लोक के लिए जरिए सेनाओं के पराक्रम को सलाम किया है। उन्होंने लिखा- उदीर्णमनसो योधा वाहनानि च भारत। यस्यां भवन्ति सेनायां ध्रुवं तस्यां जयं वदेत्…। यानी हे भारत, जिस सेना के योद्धा ऊंचे उत्साह और मजबूत मनोबल वाले हों, और जिसके पास अच्छे वाहन/साधन हों, उस सेना की विजय निश्चित मानी जाती है।

एक और पोस्ट में पीएम लिखते हैं…

QuoteImage

एक साल पहले, हमारी सेनाओं ने ऑपरेशन सिंदूर के दौरान बेजोड़ साहस, सटीकता और संकल्प का प्रदर्शन किया था। उन्होंने उन लोगों को करारा जवाब दिया, जिन्होंने पहलगाम में बेकसूर भारतीयों पर हमला करने की हिम्मत की थी। पूरा देश हमारी सेनाओं के शौर्य को सलाम करता है।ऑपरेशन सिंदूर ने आतंकवाद के खिलाफ भारत की मजबूत प्रतिक्रिया और राष्ट्र की सुरक्षा के लिए उसके अटूट संकल्प को दर्शाया। इसने हमारी सेनाओं के पेशेवरपन, तैयारी और समन्वित शक्ति को भी उजागर किया। साथ ही, इसने हमारी सेनाओं के बीच बढ़ते तालमेल को भी दिखाया और इस बात पर जोर दिया कि रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भरता हासिल करने की भारत की कोशिश ने हमारी राष्ट्रीय सुरक्षा को कितनी ताकत दी है।आज, एक साल बाद भी, हम आतंकवाद को हराने और उसे बढ़ावा देने वाले पूरे तंत्र को तबाह करने के अपने संकल्प पर पहले की तरह ही अडिग हैं।

QuoteImage

ऐसे सिलेक्ट हुआ था नाम और लोगो

8 मई 2025 को ऑपरेशन सिंदूर के बाद जब सेना के अधिकारियों जानकारी देने प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाई थी, तब बताया था कि ऑपरेशन के लिए 5 नाम तय हुए थे। सबसे आखिर में 2 नाम ऑपरेशन मंगलसूत्र और सिंदूर चुना गया। पहलगाम आतंकी हमले में कई महिलाओं के सुहाग उजाड़े गए थे, इसलिए पीएम मोदी ने ऑपरेशन सिंदूर को मंजूरी दी।

पढ़िए 7 से 10 मई 2025 के बीच अजेय हिंदुस्तान के वो 88 घंटे, जब हमारे प्रहार से घुटनों पर आ गया था पाकिस्तान…

6-7 मई: रात 1.05 से 1.27 बजे

क्या हुआ: भारतीय वायुसेना ने 23 मिनट में पीओके और पाक के भीतर 9 आतंकी ठिकाने उड़ाए। 100 आतंकी मारे गए। शाम को पाक ने मिसाइलें दागीं। 15 शहर निशाने पर थे, पर हमारे एयर डिफेंस सिस्टम ने करारा जवाब दिया।

8 मई: देर रात 2 से सुबह 4 बजे

क्या हुआ: पाक ने लेह से गुजरात तक 1000 ड्रोन से 36 जगह हमला बोला। हमने 98% को मार गिराया। पाक के 4 एयर डिफेंस सिस्टम, एक रडार तबाह।

9 मई: रात 10:30 से 1:55 बजे

क्या हुआ: पाक ने 26 जगहों पर लंबी दूरी के हथियार दागे। भारत ने ड्रोन और सुखोई विमानों से ‘ब्रह्मोस’ दागी। इसने पाक के 11 एयरबेस और कई विमान तबाह किए।

——————————-

ये खबर भी पढ़ें…

भारत में पहली बार 50 हजार जवानों की अलग ड्रोन फोर्स बनेगी, किसी भी सैन्य हमले में सबसे पहले यही प्रहार करेगी

ऑपरेशन सिंदूर और वैश्विक युद्धों (रूस-यूक्रेन व पश्चिम एशिया) से सबक लेते हुए भारतीय रक्षा प्रतिष्ठान ने एक ‘ड्रोन फोर्स’ बनाने का निर्णय लिया है। यह फोर्स किसी भी सैन्य कार्रवाई में ‘फर्स्ट रेस्पोंडर’ (पहली जवाबी कार्रवाई) के तौर पर तैनात की जाएगी। इसे डेटा और कॉग्निटिव वारफेयर फोर्स का तकनीकी समर्थन होगा। पढ़ें पूरी खबर…

खबरें और भी हैं…



Source link