महाराष्ट्र में ठाणे के मीरा रोड में रहने वाले 81 साल के असगरअली वोहरा को जमीन विवाद में राहत मिली है। पीएम मोदी से मुलाकात के 8 दिन बाद भाजपा विधायक नरेंद्र मेहता ने उनसे जुड़ी विवादित जमीन का कब्जा छोड़ने और कंस्ट्रक्शन परमिट सरेंडर करने की बात कही है। वोहरा ने 8 सितंबर को पीएम मोदी से मुलाकात कर जमीन विवाद में दखल देने और CBI जांच की मांग की थी। दोनों की मुलाकात की तस्वीरें भी सामने आई थीं। वोहरा का दावा है कि उन्होंने गुजरात के वडनगर स्थित बीएन स्कूल में पीएम मोदी के साथ एक ही क्लास में पढ़ाई की थी। 15 साल से सरकारी दफ्तरों के चक्कर लगा रहे थे वोहरा वोहरा के मुताबिक, जमीन को लेकर वह करीब 15 साल से अलग-अलग सरकारी विभागों के सामने मामला उठा रहे थे। उनका आरोप है कि उनकी जानकारी के बिना फर्जी दस्तावेज तैयार किए गए और जमीन को दो कंपनियों के बीच बांट दिया गया। इन कंपनियों के नाम स्वयम बिल्डर्स और सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शंस हैं। वोहरा ने दोनों कंपनियों को नरेंद्र मेहता से जुड़ा बताया था। इस मामले में 2015 में एफआईआर भी दर्ज हुई थी। मुलाकात के बाद अधिकारियों ने कंपनियों को बुलाया वोहरा के मुताबिक, पीएम से मुलाकात के बाद मामले में गतिविधियां शुरू हुईं। मीरा-भायंदर नगर निगम ने दोनों कंपनियों के मैनेजमेंट को 16 सितंबर को अपना पक्ष रखने और मामले में स्पष्टीकरण देने के लिए बुलाया था। इससे पहले ही मंगलवार को मुख्यमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी श्रीकर परदेशी ने मंत्रालय में बैठक बुलाई। इसमें वोहरा, नरेंद्र मेहता, मीरा-भायंदर नगर निगम आयुक्त राधा बिनोद शर्मा और टाउन प्लानर पुरुषोत्तम शिंदे मौजूद रहे। कंपनी ने निगम से कंस्ट्रक्शन परमिट रद्द करने की मांग की बैठक के बाद सेवन इलेवन कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड ने ने मामले से पूरी तरह पीछे हटने की बात कही है। आधिकारिक दस्तावेजों के मुताबिक, कंपनी ने मीरा भायंदर नगर निगम के असिस्टेंट डायरेक्टर ऑफ टाउन प्लानिंग को लेटर देकर प्लॉट का कमेंसमेंट सर्टिफिकेट सरेंडर कर दिया। कंपनी ने बताया कि उसने 13 जून 2019 को रजिस्टर्ड डीड के जरिए प्लॉट खरीदा था और 17 अप्रैल 2026 को निर्माण की इजाजत हासिल की थी। लेकिन जमीन के मालिकाना हक के विवाद को देखते हुए कंपनी ने परमिट वापस करने का फैसला किया। उसने नगर निगम से कंस्ट्रक्शन परमिट रद्द करने और प्रोजेक्ट के लिए जमा की गई फीस वापस करने की मांग की। मेहता ने पुरानी पुलिस शिकायत वापस लेने की बात कही नरेंद्र मेहता ने पुलिस कमिश्नर को अलग लेटर भेजा। इसमें उन्होंने वोहरा और उनके सहयोगी अजय ढोका के खिलाफ पहले की गई शिकायत वापस लेने की बात कही। उन्होंने कहा कि दोनों पक्षों के बीच समझौता हो गया है। 2015 की इस शिकायत में वोहरा और ढोका पर अतिक्रमण और धमकी के आरोप लगाए गए थे। शिकायत वापस लेने से जुड़े लेटर संबंधित अधिकारियों को सौंपे गए हैं। ——————————– यह खबर पढ़ें… अमृता फडणवीस बोलीं-मुझे ट्रोल होने वाली पॉलिटिकल वाइफ बना रहे:गरबा में मुस्लिमों की एंट्री की बात दोहराई; कहा- त्योहारों में भेदभाव नहीं होना चाहिए महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस की पत्नी अमृता फडणवीस ने गरबा में मुस्लिमों की एंट्री के समर्थन में फिर से अपनी बात दोहराई। उन्होंने कहा- मुझे इस मुद्दे पर पॉलिटिकल वाइफ बनाकर ट्रोल किया जा रहा है। लेकिन मैं पॉलिटिकल नहीं हूं। मैं एक सोशल एक्टिविस्ट और नागरिक के तौर पर अपनी राय रखती हूं। पूरी खबर पढ़ें…
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PM के साथ पढ़े असगर अली को जमीन वापस मिली: महाराष्ट्र के BJP विधायक ने कब्जा छोड़ा; 8 दिन पहले मोदी से मिलकर शिकायत की थी
सीतापुर में प्रसव के बाद प्रसूता की मौत: परिजनों का रातभर अस्पताल में प्रदर्शन, लापरवाही का आरोप – Sitapur News
सीतापुर के कमलापुर थाना क्षेत्र में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र कमलापुर में मंगलवार शाम करीब 7 बजे प्रसव के बाद 29 वर्षीय प्रसूता की मौत के मामले में परिजनों का आक्रोश थम नहीं रहा है। स्वास्थ्यकर्मियों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए परिजनों ने अस्पताल परिसर में रातभर विरोध प्रदर्शन किया। परिजनों ने दोषियों के खिलाफ कार्रवाई और निष्पक्ष जांच की मांग की। विरोध के चलते बुधवार सुबह तक मृतका का अंतिम संस्कार नहीं किया गया। जानकारी के अनुसार, भानपुर मजरा मंगूपुर निवासी संजीत पुत्र काशीराम ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि उसकी पत्नी रामश्री को प्रसव पीड़ा होने पर 14 सितंबर को दोपहर करीब दो बजे सीएचसी कमलापुर में भर्ती कराया गया था। रात करीब नौ बजे प्रसव हुआ और बच्चे का जन्म हुआ। परिजनों के मुताबिक नवजात सुरक्षित है। पति संजीत का आरोप है कि प्रसव के बाद रामश्री की हालत बिगड़ने लगी और अत्यधिक रक्तस्राव होने लगा। आरोप है कि गंभीर स्थिति के बावजूद समय से आवश्यक उपचार नहीं मिल सका। नर्स बेबी समेत अन्य स्वास्थ्यकर्मियों पर भी परिजनों ने लापरवाही के आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि हालत गंभीर होने के बावजूद प्रसूता को समय रहते उच्च चिकित्सा केंद्र रेफर नहीं किया गया। एंबुलेंस उपलब्ध कराने को लेकर भी परिजनों ने सवाल उठाए। हालत बिगड़ने के बाद रामश्री की मंगलवार शाम मौत हो गई। मौत की सूचना के बाद परिजन अस्पताल परिसर में जुट गए और कार्रवाई की मांग को लेकर प्रदर्शन शुरू कर दिया। सूचना पर एसडीएम सिधौली अवनीश कुमार, सीओ वेद प्रकाश श्रीवास्तव और कमलापुर प्रभारी निरीक्षक इतुल चौधरी समेत कई थानों की पुलिस मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने परिजनों को समझाने का प्रयास किया, लेकिन वे कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। पुलिस ने शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। थाना प्रभारी ने बताया कि मामले की जानकारी उच्चाधिकारियों को दी गई है और जीडी में तस्करा दर्ज किया गया है। वहीं सीएमओ ने मौत के कारणों और लगाए गए आरोपों की जांच के लिए पैनल गठित कर दिया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और जांच टीम की रिपोर्ट के बाद कार्रवाई की जाएगी।
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नालंदा- महाबोधि कॉलेज की बिल्डिंग का उद्घाटन करेंगे नीतीश कुमार: आईटीईपी सत्र 2026-30 का भी होगा औपचारिक शुभारंभ; ग्रामीण विकास मंत्री, सांसद भी रहेंगे मौजूद – Nalanda News
नालंदा के महाबोधि कॉलेज की नई बिल्डिंग का लोकार्पण और चार वर्षीय एकीकृत शिक्षक शिक्षा कार्यक्रम (आईटीईपी) के नए शैक्षणिक सत्र 2026-30 का औपचारिक उद्घाटन आज दोपहर 2 बजे आयोजित किया जाएगा। इस ऐतिहासिक पल के साक्षी बनने के लिए महाविद्यालय परिवार और स्थानीय प्रबुद्ध वर्ग की ओर से सभी प्रशासनिक एवं औपचारिक तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। कॉलेज के प्राचार्य डॉ. अरविन्द कुमार ने कार्यक्रम की विस्तृत जानकारी देते हुए बताया कि संस्थान के नवनिर्मित भवन का उद्घाटन जदयू के राष्ट्रीय अध्यक्ष सह पूर्व मुख्यमंत्री एवं राज्यसभा सांसद नीतीश कुमार करेंगे। नई बिल्डिंग के बनने से यहां पढ़ने वाले छात्र-छात्राओं को आधुनिक कक्षाओं, बेहतर बुनियादी ढांचे और उन्नत शैक्षणिक वातावरण का सीधा लाभ मिलेगा। इसके साथ ही नए सत्र के आगाज से शिक्षक बनने का सपना देख रहे युवाओं को भी गुणवत्तापूर्ण प्रशिक्षण प्राप्त होगा। समारोह में जुटेंगे शिक्षा व राजनीति के दिग्गज इस अवसर पर आयोजित भव्य समारोह में राज्य के ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार, नालंदा के सांसद कौशलेंद्र कुमार, विधान परिषद में सत्तारूढ़ दल के उप नेता ललन सर्राफ तथा मुख्य सचेतक संजय कुमार सिंह उर्फ गांधी जी विशेष रूप से शामिल होंगे। इनके अलावा सचेतक रीना देवी, पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. उपेन्द्र प्रसाद सिंह तथा महाविद्यालय शासी निकाय के सचिव राजेन्द्र प्रसाद की भी गरिमामयी उपस्थिति रहेगी। जनप्रतिनिधियों और शिक्षाविदों की मौजूदगी से कार्यक्रम को लेकर क्षेत्र में काफी उत्साह का माहौल है। गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा का प्रमुख केंद्र महाबोधि महाविद्यालय को पाटलिपुत्र विश्वविद्यालय, पटना तथा बिहार सरकार से स्थायी संबद्धता प्राप्त है। साथ ही यह संस्थान राष्ट्रीय मूल्यांकन एवं प्रत्यायन परिषद द्वारा ‘बी’ ग्रेड से मान्यता प्राप्त है। ग्रामीण क्षेत्र में स्थित होने के बावजूद यह कॉलेज वर्षों से उच्च शिक्षा के प्रसार और गुणवत्तापूर्ण पठन-पाठन में अपनी विशिष्ट पहचान बनाए हुए है। नए भवन और तकनीकी रूप से उन्नत पाठ्यक्रमों के शुरू होने से नालंदा के शैक्षणिक परिदृश्य को और अधिक मजबूती मिलेगी।
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मुरैना में चंबल से अवैध-रेत पर रात में बढ़ाई निगरानी: SP खुद सड़क पर उतरे, घाटों का निरीक्षण कर दिये आवश्यक निर्देश – Morena News
मुरैना में चंबल नदी से अवैध रेत उत्खनन, परिवहन और भंडारण रोकने के लिए पुलिस ने रात में निगरानी और चेकिंग बढ़ा दी है। मंगलवार रात पुलिस अधीक्षक धर्मराज मीना ने जिले में बनाए गए स्थायी और अस्थायी नाकों का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने ड्यूटी पर तैनात पुलिसकर्मियों की सतर्कता और संदिग्ध वाहनों की चेकिंग व्यवस्था देखी। देवरी से रेलवे स्टेशन तक व्यवस्था देखी SP ने रात के निरीक्षण के दौरान वन विभाग चेक पोस्ट देवरी, देवपुरी मंदिर और अल्लावेली चौकी पोस्ट समेत कई संवेदनशील इलाकों का दौरा किया। इसके अलावा शहर के रेलवे स्टेशन और आसपास के क्षेत्रों में भी पुलिस व्यवस्था का जायजा लिया। उन्होंने नाकों पर तैनात पुलिस अधिकारियों और कर्मचारियों से रात की ड्यूटी और निगरानी व्यवस्था की जानकारी ली। रेत से भरे वाहनों के दस्तावेज जांचने के निर्देश SP ने चंबल नदी के घाटों से निकलने वाले संभावित रास्तों पर विशेष नजर रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि रात में आने-जाने वाले संदिग्ध वाहनों की सघन जांच की जाए। रेत परिवहन करने वाले वाहनों के दस्तावेज और रेत ले जाने की अनुमति भी जांचने के निर्देश दिए गए हैं। किसी तरह की अनियमितता मिलने पर संबंधित विभाग से समन्वय कर कार्रवाई करने को कहा गया है। संवेदनशील रास्तों पर लगातार पेट्रोलिंग SP ने रात्रि ड्यूटी में तैनात पुलिस बल को आपसी समन्वय के साथ काम करने के निर्देश दिए। संदिग्ध वाहन या अवैध रेत उत्खनन-परिवहन से जुड़ी जानकारी मिलने पर तत्काल वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना देने को कहा। संवेदनशील इलाकों और रेत परिवहन के संभावित रास्तों पर लगातार पेट्रोलिंग के साथ अचानक चेकिंग करने के निर्देश भी दिए गए हैं। अवैध रेत पर कार्रवाई जारी रहेगी SP धर्मराज मीना ने कहा कि चंबल नदी से अवैध रेत उत्खनन और परिवहन को रोकने के लिए पुलिस की निगरानी लगातार जारी रहेगी। स्थायी और अस्थायी नाकों पर खासकर रात के समय चेकिंग बढ़ाई गई है। उन्होंने कहा कि अवैध रेत उत्खनन, परिवहन या भंडारण में संलिप्त पाए जाने वाले लोगों और वाहनों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
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भारत-न्यूजीलैंड ट्रेड डील पर बड़ा अपडेट, संसद से मिली मंजूरी, जानें कब से लागू
न्यूजीलैंड की संसद ने भारत के साथ हुए फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) को लागू करने से जुड़ा कानून पास कर दिया है. इससे दोनों देशों के बीच यह समझौता लागू होने का रास्ता साफ हो गया है. भारत और न्यूजीलैंड के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट यानी FTA 19 अक्टूबर से लागू होने की उम्मीद है. इस डील का फोकस दोनों देशों के बीच कारोबार को आसान बनाना और सामान के साथ-साथ सर्विस सेक्टर में भी व्यापार के नए अवसर तैयार करना है.
भारत और न्यूजीलैंड के बीच इस ट्रेड डील पर 27 अप्रैल को सहमति बनी थी. इसके अलावा, यह समझौता दोनों देशों के बीच निवेश को बढ़ावा देने पर भी जोर देता है. डील के तहत न्यूजीलैंड ने भारत से आने वाले सभी तरह के निर्यात पर शुल्क हटाने का प्रावधान किया है. इसका सीधा मतलब है कि भारत से न्यूजीलैंड भेजे जाने वाले सामान पर वहां इम्पोर्ट ड्यूटी नहीं लगेगी, जिससे भारतीय कंपनियों के लिए वहां अपने उत्पाद बेचना आसान हो सकता है. लेकिन इससे आपको क्या-क्या फायदा मिलेगा, ये बताते हैं.
आम लोगों को इससे क्या फायदा मिलेगा?
इस ट्रेड डील का सबसे सीधा फायदा भारतीय कंपनियों और कारोबारियों को मिल सकता है. अभी भारत से न्यूजीलैंड भेजे जाने वाले कुछ प्रमुख सामान पर 10% तक इम्पोर्ट ड्यूटी लगती है. इनमें सिरेमिक, कालीन, ऑटोमोबाइल और ऑटो पार्ट्स जैसे प्रोडक्ट शामिल हैं. FTA लागू होने के बाद इन सामानों समेत भारत के सभी एक्सपोर्ट को न्यूजीलैंड में ड्यूटी-फ्री एंट्री मिलेगी. इससे भारतीय उत्पाद वहां के बाजार में पहले के मुकाबले कम लागत पर पहुंच सकते हैं और कंपनियों को कारोबार बढ़ाने का मौका मिल सकता है.
इसका फायदा सिर्फ सामान बेचने वाली कंपनियों तक सीमित नहीं रहेगा. सर्विस सेक्टर में भी भारतीय प्रोफेशनल्स के लिए न्यूजीलैंड में काम करने के अवसर बढ़ सकते हैं. IT, शिक्षा, फाइनेंशियल सर्विसेज, कंस्ट्रक्शन और टूरिज्म जैसे क्षेत्रों में भारतीय कंपनियों और प्रोफेशनल्स को बाजार तक बेहतर पहुंच मिलेगी. साथ ही योग प्रशिक्षकों, AYUSH से जुड़े प्रोफेशनल्स, भारतीय शेफ और म्यूजिक टीचर्स के लिए भी काम के रास्ते खुलेंगे. समझौते में हर साल 5,000 भारतीय स्किल्ड प्रोफेशनल्स के लिए अस्थायी रोजगार वीजा का प्रावधान है, जिसके तहत वे न्यूजीलैंड में अधिकतम तीन साल तक काम कर सकेंगे.
इंजीनियरिंग, हेल्थकेयर और एजुकेशन जैसे क्षेत्रों में काम करने वाले भारतीयों के लिए यह अवसर खास हो सकता है. वहीं, भारतीय कंपनियों को न्यूजीलैंड के बाजार में अपने उत्पाद और सेवाएं पहुंचाने के लिए नया ग्राहक आधार मिल सकता है. इसके अलावा भारतीय वाइन और स्पिरिट्स को भी न्यूजीलैंड में ड्यूटी-फ्री बाजार पहुंच मिलने से इस कारोबार से जुड़े एक्सपोर्टर्स को फायदा हो सकता है.
किन सामानों को रखा गया इस डील से बाहर?
भारत-न्यूजीलैंड ट्रेड डील में दोनों देशों ने कई सामानों पर व्यापार आसान करने का फैसला किया है, लेकिन भारत ने अपने कुछ संवेदनशील सेक्टर को इस दायरे से बाहर रखा है. खास तौर पर डेयरी उत्पादों को कोई टैरिफ रियायत नहीं दी गई है. यानी न्यूजीलैंड से आने वाले दूध, क्रीम, पनीर और दूसरे डेयरी प्रोडक्ट्स पर मौजूदा व्यापार सुरक्षा को बनाए रखा जाएगा.
इसी तरह प्याज, दालें और चीनी जैसे कुछ कृषि उत्पादों को भी रियायत वाली लिस्ट में शामिल नहीं किया गया है. इन उत्पादों की घरेलू कीमतों और किसानों से जुड़े हितों को देखते हुए भारत ने इनके लिए आयात नियमों में बड़ी ढील नहीं दी है. इसके अलावा आर्म्स और अम्युनिशन जैसे सामानों को भी इस ट्रेड समझौते के तहत विशेष बाजार पहुंच नहीं दी गई है. कुछ चुनिंदा मेटल्स को भी रियायतों से बाहर रखा गया है. हालांकि न्यूजीलैंड को भारत में कई उत्पादों के लिए बाजार पहुंच मिलेगी, लेकिन हर सामान पर एक जैसी छूट नहीं होगी. कुछ उत्पादों पर तुरंत ड्यूटी खत्म होगी, जबकि कुछ पर शुल्क धीरे-धीरे कम किया जाएगा.
Recipe: बारिश में पकौड़ों का मजा दोगुना कर देगी निमाड़ी लहसुन चटनी, 15 दिन तक नहीं होगी खर
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Garlic chutney recipe: बरसात में निमाड़ के बुरहानपुर की एक खास चटनी काफी फेमस है, जो 15 दिन तक खराब नहीं होती. यह लहसुन और लाल मिर्च से तैयार होती है और सफर के लिए भी बेहतरीन मानी जाती है. इसकी बनाने की विधि आसान है.
Garlic chutney recipe: मध्य प्रदेश के निमाड़ अंचल में बरसात का मौसम आते ही लोगों का मन कुछ चटपटा और स्वादिष्ट खाने का करने लगता है. बारिश के मौसम में गरमा-गरम पकौड़े भजिए और अन्य व्यंजनों के साथ चटनी का स्वाद खाने का मजा और बढ़ा देता है. बुरहानपुर में ऐसी ही एक खास चटनी बनाई जाती है. जो अपने तीखे और चटपटे स्वाद के लिए काफी पसंद की जाती है. हम बात कर रहे हैं लहसुन और लाल मिर्च से तैयार होने वाली निमाड़ी चटनी की. इस चटनी की खासियत इसका स्वाद ही नहीं बल्कि इसका लंबे समय तक सुरक्षित रहना भी है. सही तरीके से तैयार और साफ-सुथरे एयरटाइट डिब्बे में रखने पर यह चटनी करीब 15 दिन तक चल सकती है. यही वजह है कि इसे सफर के दौरान साथ ले जाने के लिए भी पसंद किया जाता है. सफर के लिए सबसे बेस्ट मानी जाती है लोग इसलिए ठंड के समय में सबसे अधिक बनाते हैं.
एक्सपर्ट महिला ने दी जानकारी
लोकल 18 की टीम को एक्सपर्ट महिला फूलाबाई ने जानकारी देते हुए बताया कि इस चटनी को बनाने के लिए मुख्य रूप से लहसुन, लाल मिर्च, तेल और जीरा इस्तेमाल किया जाता है. सबसे पहले लहसुन को साफ कर लिया जाता है. इसके बाद लाल मिर्च और लहसुन को पीसकर तैयार किया जाता है. दूसरी ओर कड़ाही में तेल गर्म कर उसमें जीरे का तड़का लगाया जाता है. इसके बाद तैयार लहसुन और लाल मिर्च के मिश्रण को तेल में डालकर अच्छी तरह पकाया जाता है. चटनी को कुछ देर धीमी आंच पर पकाने से इसका स्वाद और खुशबू और बेहतर हो जाती है. जब चटनी अच्छी तरह तैयार हो जाए तो उसे ठंडा करके साफ और सूखे एयरटाइट डिब्बे में रखा जाता है.
सफर के लिए भी है खास
लहसुन और लाल मिर्च की यह चटनी रोटी, पराठे, पूरी, पकौड़े और कई तरह के नाश्ते के साथ खाई जा सकती है. इसका चटपटा स्वाद बच्चों से लेकर बड़ों तक को पसंद आता है. खासकर बारिश के मौसम में गरमा-गरम भोजन के साथ इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है. निमाड़ के बुरहानपुर की यह चटनी स्थानीय स्वाद और पारंपरिक खान-पान की खास पहचान मानी जाती है. कम सामग्री में आसानी से तैयार होने वाली यह चटनी स्वाद के साथ-साथ सफर में भी काम आने वाला विकल्प बन जाती है.
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भारत में ऑनलाइन सट्टे का 10 लाख करोड़ का बाजार: बैन के बावजूद रोज डेढ़ करोड़ लोग दांव लगा रहे; 854 इन्फ्लुएंसर प्रचार कर रहे
ऑनलाइन सट्टेबाजी पर कानून सख्त होने के बावजूद इसका बाजार खत्म नहीं हुआ है। रिपोर्ट के मुताबिक, देश में इसका अवैध बाजार करीब 10 लाख करोड़ रुपए तक पहुंच गया है। कानून से बचने के लिए प्लेटफॉर्म विदेश शिफ्ट किए गए हैं। सट्टेबाजी चलाने के लिए म्यूल बैंक खाते, टेलीग्राम समूह, नए डोमेन और विदेशी सर्वर का इस्तेमाल किया जा रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में 15 अवैध ऑनलाइन सट्टा प्लेटफॉर्म पर 540 करोड़ से ज्यादा विजिट दर्ज हुईं। यानी औसतन हर दिन करीब 1.48 करोड़ बार इन मंचों तक पहुंच बनाई गई। वहीं, 854 इन्फ्लुएंसर भी सट्टेबाजी प्लेटफॉर्म के प्रचार में शामिल मिले। संसद ने 2025 में ऑनलाइन मनी गेम पर रोक लगाने वाला कानून पारित किया। यह 1 मई 2026 से प्रभावी है। कानून लक या कौशल, दोनों तरह की ऑनलाइन सट्टेबाजी, उनके प्रचार और भुगतान सुविधा पर रोक लगाता है। इसके बावजूद निजी मैसेजिंग समूह, सरोगेट विज्ञापन, इन्फ्लुएंसर और एजेंट विदेश से चलने वाले सट्टेबाजी मंचों तक यूजर्स को पहुंचा रहे हैं। दुनियाभर में 8 करोड़ वयस्क को सट्टे की लत; हर यूजर से जुड़े 6 लोग प्रभावित रिपोर्ट के मुताबिक, दुनियाभर में 8 करोड़ वयस्क सट्टे की लत से जूझ रहे हैं। इसका असर सिर्फ सट्टा खेलने वाले व्यक्ति तक सीमित नहीं रहता। हर यूजर से औसतन 6 लोग प्रभावित होते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, 60% यूजर पैसे हारते हैं। इससे इलाज और पढ़ाई प्रभावित हो सकती है और इसका असर पीढ़ियों तक रह सकता है। एल्गोरिदम यूजर को खेल की आदत लगाते हैं ऑनलाइन गेमिंग में पैसे वाले खेलों के दौरान भ्रामक डिजाइन, लत बढ़ाने वाले एल्गोरिदम, बॉट और एजेंट का इस्तेमाल किया जाता है। जीत मिलने पर यूजर को इनाम का अहसास होता है। हारने के बाद रकम वापस पाने के चक्कर में अगला और बड़ा दांव लगाने की कोशिश होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के मुताबिक, लत के तीन संकेत हैं—नियंत्रण खोना, सट्टे को प्राथमिकता देना और नुकसान के बावजूद खेलते रहना। अंतरराष्ट्रीय निगरानी और प्लेटफॉर्म की जवाबदेही जरूरी रितेश भाटिया; साइबर व डेटा प्राइवेसी एक्सपर्ट ने कहा- ————————- यह खबर भी पढ़ें… ₹2000 से ज्यादा UPI पेमेंट पर 0.4% चार्ज:15 अक्टूबर से यह कारोबारियों से लिया जाएगा, अभी 4 साल में सरकार ने ₹8276 करोड़ खर्चा उठाया UPI से ₹2,000 से ज्यादा पेमेंट पर 0.4% चार्ज लगेगा। फीस की मैक्सिमम लिमिट 300 रुपए तक की गई है। यह अमाउंट अलग-अलग ट्रांजैक्शन पर निर्भर करेगा। यह शुल्क ग्राहकों से नहीं बिजनेसमैन से लिया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…
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इजराइल को ₹26 हजार करोड़ के हथियार देंगे ट्रम्प: 900 किलो के 40 हजार बम शामिल; बाइडेन ने ज्यादा मौत के डर से सप्लाई रोकी थी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का प्रशासन इजराइल को 2.8 अरब डॉलर यानी करीब ₹26 हजार करोड़ के हथियार देने की तैयारी कर रहा है। इस पैकेज में करीब 40 हजार भारी बम शामिल हैं। हर बम का वजन 2000 पाउंड यानी करीब 900 किलो है। इन बमों की सप्लाई पर पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 2024 में रोक लगाई थी। प्रस्तावित हथियार पैकेज में 20 हजार Mk84 और 20 हजार BLU-117 बम शामिल हैं। डील अभी फाइनल नहीं हुई है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, कांग्रेस को इसकी अनौपचारिक जानकारी दे दी गई है। गाजा में बड़ी संख्या में मौतों के डर से रोक लगी थी 2024 में बाइडेन प्रशासन ने 2,000 पाउंड के इन बमों की एक खेप इजराइल भेजने पर रोक लगा दी थी। उस समय चिंता थी कि गाजा जैसे घनी आबादी वाले इलाके में इनका इस्तेमाल होने पर बड़ी संख्या में लोगों की मौत हो सकती है। ट्रम्प के दोबारा राष्ट्रपति बनने के बाद यह रोक हटा दी गई। अब उनका प्रशासन इन्हीं बमों की बड़ी संख्या वाली नई डील की तैयारी कर रहा है। कुछ बम जमीन के अंदर ठिकानों को भेदने के लिए इन 900 किलो के बमों के अलग-अलग मॉडल हैं। कुछ को जमीन के अंदर मौजूद ठिकानों को निशाना बनाने के लिए डिजाइन किया गया है, जबकि कुछ जमीन के ऊपर फटकर बड़े इलाके में भारी नुकसान पहुंचा सकते हैं। एक्सपर्ट्स ने गाजा में हुए हमलों के वीडियो और घटनास्थलों से मिले बमों के टुकड़ों का विश्लेषण किया है। उनके मुताबिक, वहां अमेरिकी निर्मित बमों का इस्तेमाल हुआ है। इनमें कुछ हमास के सुरंग नेटवर्क को निशाना बनाने के लिए इस्तेमाल किए गए, लेकिन घनी आबादी वाले इलाकों में भी लोगों की मौत हुई। ट्रम्प पहले भी दे चुके हैं अरबों डॉलर के हथियार ट्रम्प प्रशासन पिछले साल इजराइल के लिए करीब 3 अरब डॉलर की हथियार बिक्री मंजूर कर चुका है। इसमें 35,500 से ज्यादा भारी बम शामिल थे। इसके बाद जनवरी में इजराइल के लिए 6.67 अरब डॉलर की एक और हथियार बिक्री को मंजूरी दी गई। 7 अक्टूबर के हमले के बाद शुरू हुआ था गाजा युद्ध 7 अक्टूबर 2023 को हमास के नेतृत्व में दक्षिणी इजराइल पर हमला किया गया था। इसमें करीब 1,200 लोग मारे गए और 251 लोगों को बंधक बनाया गया। इसके बाद इजराइल ने गाजा में सैन्य अभियान शुरू किया। गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के मुताबिक, इजराइली अभियान में अब तक 73,264 से ज्यादा फिलिस्तीनी मारे गए हैं। इनमें संघर्षविराम के बाद मारे गए लोग भी शामिल हैं। अमेरिका की मध्यस्थता से संघर्षविराम हुआ है, लेकिन गाजा में हिंसा पूरी तरह बंद नहीं हुई है। इजराइल की ओर से हमले जारी रहने के साथ ही हमास से जुड़े लड़ाकों और इजराइली सैनिकों के बीच भी हिंसा की घटनाएं सामने आती रही हैं —————————- ये खबर भी पढ़ें…. मक्का में पहली बार मिसाइल अटैक का इमरजेंसी अलर्ट:हूती विद्रोहियों ने सऊदी पर हमला किया; 2017 में भी मक्का की ओर आई थी मिसाइल यमन के हूती विद्रोहियों ने मंगलवार को सऊदी अरब पर ड्रोन और मिसाइल हमले किए। इसके बाद सऊदी अरब ने मक्का में पहली बार इमरजेंसी अलर्ट जारी किया। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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आवासीय भूमि पर चल रहा अंजनी हॉस्पिटल सील: आवास विकास परिषद ने की कार्रवाई, भर्ती मरीजों को किया गया शिफ्ट – Agra News
आवासीय उपयोग के लिए आवंटित भूखंड पर बिना मानचित्र स्वीकृत कराए अस्पताल का निर्माण कर उसका संचालन किया जा रहा था। उ.प्र. आवास एवं विकास परिषद ने सिकंदरा योजना के सेक्टर-2बी स्थित अंजनी हॉस्पिटल को सील कर दिया। अधीक्षण अभियंता पंकज कुमार पाल के आदेश पर प्रवर्तन दल ने यह कार्रवाई की। सीलिंग के समय अस्पताल में 5-6 मरीज मौजूद थे। सीएमओ कार्यालय की टीम ने मरीजों को दूसरे अस्पताल में शिफ्ट करने के लिए एंबुलेंस की व्यवस्था की थी, लेकिन इसकी जरूरत नहीं पड़ी। मरीज डिस्चार्ज होकर चले गए, इसके बाद अस्पताल को सील किया गया। डॉ. नरेंद्र सिंह को आवासीय उपयोग के लिए मिला था भूखंड प्रवर्तन दल अधिकारी कर्नल जीएम खान ने बताया कि सिकंदरा योजना के सेक्टर-2बी में भूखंड संख्या-1149 डॉ. नरेंद्र सिंह को आवासीय प्रयोजन के लिए आवंटित किया गया था। इस भूखंड पर सक्षम स्तर से मानचित्र स्वीकृत कराए बिना अस्पताल का निर्माण किया गया और ‘अंजनी हॉस्पिटल’ के नाम से संचालन किया जा रहा था। मामले में नियमानुसार कार्रवाई करते हुए मौके पर नोटिस चस्पा किया गया। इसके बाद सीएमओ कार्यालय के अधिकारियों की मौजूदगी में भवन को सील कर दिया गया। अधिशासी अभियंता के नेतृत्व में हुई कार्रवाई पूरी कार्रवाई अधिशासी अभियंता सूरजपाल सिंह के नेतृत्व में हुई। सीलिंग के दौरान प्रवर्तन दल के साथ सहायक अभियंता मयंक कुमार कौशिक, अवर अभियंता सुनील कुमार यादव, सीएमओ कार्यालय के प्रतिनिधि और स्थानीय पुलिस बल मौजूद रहा। आवासीय भूखंडों के व्यावसायिक इस्तेमाल पर कार्रवाई जारी रहेगी परिषद के अधीक्षण अभियंता पंकज कुमार पाल ने कहा कि आवासीय भूखंडों का व्यावसायिक या अन्य गैर-अनुमोदित उपयोग करने और बिना स्वीकृत मानचित्र के निर्माण के मामलों में नियमानुसार कार्रवाई लगातार जारी रहेगी।
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