बिजनौर की अपर जिला एवं सत्र न्यायालय तथा फास्ट ट्रैक कोर्ट प्रथम ने अपहरण और दुष्कर्म के मामले में फैसला सुनाया है। न्यायाधीश कमलदीप ने मुख्य आरोपी अरुण कुमार को दुष्कर्म के मामले में 10 साल की कैद और 61 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं, अपहरण में सहयोग करने के दोषी जगमोहन और उसकी मां रोशन देवी को सात-सात साल की कैद और 10-10 हजार रुपए जुर्माने से दंडित किया। एडीजीसी मुकुल कुमार और आनंद जंघाला के अनुसार, कोर्ट के आदेश पर महिला ने अरुण कुमार, जगमोहन और रोशन देवी के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। जगमोहन और रोशन देवी महिला के पिता के पड़ोसी हैं, जबकि अरुण कुमार जगमोहन का मौसेरा भाई है। महिला की शादी 14 जुलाई 2016 को हुई थी। आरोप के अनुसार, अरुण कुमार ने महिला के मोबाइल से उसकी फोटो खींच ली थीं और जगमोहन के फोन से उससे बातचीत करता था। आरोप है कि उसने महिला का रिश्ता तुड़वा दिया। इसके बाद 4 सितंबर 2016 को अरुण ने धमकी दी कि बैंक नहीं आने पर फोटो और रिकॉर्डिंग उसके पति को भेजकर तलाक करवा देगा। महिला के अनुसार, डर के कारण वह 5 सितंबर को बताए गए बैंक पहुंची। वहां अरुण कुमार, जगमोहन और रोशन देवी कार में मिले। आरोप है कि तीनों उसे कार में बैठाकर मुरादाबाद में अरुण की बहन गुड्डी के घर ले गए। वहां अरुण ने महिला पर पति को तलाक देकर उससे शादी करने का दबाव बनाया। मना करने पर जान से मारने की धमकी देने और जबरन कई बार दुष्कर्म करने का आरोप लगाया गया। 7 सितंबर को अरुण के जीजा की तबीयत अचानक खराब होने पर आरोपी अस्पताल गए। इसी दौरान महिला मौका पाकर वहां से निकल गई और अपने पति को घटना की जानकारी दी। पुलिस ने विवेचना के बाद तीनों आरोपियों के खिलाफ आरोप पत्र कोर्ट में दाखिल किया। मामले की सुनवाई के बाद अदालत ने अरुण कुमार को दुष्कर्म में 10 वर्ष की कैद और 61 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई। वहीं, अपहरण में दोषी पाए गए अरुण कुमार, जगमोहन और रोशन देवी को सात-सात वर्ष की कैद की सजा दी गई।
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बरसात के मौसम खत्म होने को है और विंध्य-बघेलखंड के गांवों में खेतों की मेड़, खाली जमीन, नमी वाली जगहों और रास्तों के किनारे अपने आप उगने वाली रानभाजियां अब लोगों की रसोई में पहुंचने लगी हैं. इन्हीं पारंपरिक भाजियों में कनकौआ भी शामिल है. गांवों में इसे आज भी बड़े चाव से खाया जाता है. खास बात यह है कि इसे उगाने के लिए न तो खेत तैयार करना पड़ता है और न ही अलग से बीज बोने की जरूरत होती है. बारिश के दिनों में यह प्राकृतिक रूप से बहुतायत में दिखाई देती है.

