कन्नौज में सोलर स्थापना और सब्सिडी का लाभ उपभोक्ताओं को दिलाने में लापरवाही पर डीएम ने नाराजगी जताई। उन्होंने वेंडर को नोटिस देने और एफआईआर कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने कहाकि पीएम सूर्यघर योजना में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। डीएम आशुतोष मोहन अग्निहोत्री को शिकायत मिली कि खाटू इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमटेड वेंडर के लगभग 17-18 उपभोक्ताओं को अभी तक सब्सिडी का लाभ नहीं मिल पाया और न सोलर की स्थापना कराई गई। इस मामले को गम्भीरता से लेते हुए डीएम ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने वेंडर को नोटिस जारी करने के लिए सहायक पटल यूपीनेडा नैना कुशवाहा को निर्देश दिए। डीएम ने कहाकि उपभोक्ताओं को प्रत्येक दशा में नियमानुसार सब्सिडी का लाभ दिलाना सुनिश्चित करें। अगर वेंडर की ओर से लापरवाही बरती जा रही है तो एफआईआर दर्ज कराने की कार्रवाई की जाए। आवश्यकता पड़ने पर उपभोक्ताओं को अन्य अधिकृत वेंडर से समन्वय कर योजना के लाभ दिलाया जाए। लंबित सब्सिडी वाले वेंडरों के साथ बैठक कर प्रकरणवार समीक्षा करने के भी निर्देश दिए है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए 3,091 सोलर रूफटॉप संयंत्र स्थापना का लक्ष्य निर्धारित है। इसके सापेक्ष अब तक 1,696 संयंत्र स्थापित किए जा चुके हैं। शेष 1,395 संयंत्रों की स्थापना अगले छह महीने में पूरी किए जाने का लक्ष्य है। डीएम ने कहा कि योजना का उद्देश्य अधिक से अधिक पात्र परिवारों को स्वच्छ ऊर्जा, बिजली के खर्च में कमी तथा सौर ऊर्जा के माध्यम से आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ाना है। हालांकि कुछ मामलों में मानकों के विपरीत कोटेशन तैयार किए जाने के कारण बैंक स्तर पर फाइलें लंबित रहे जातीं है। निर्धारित मानकों और मार्जिन मनी के अनुरूप ही कोटेशन तैयार किए जाएं तो लाभार्थियों को अनावश्यक कठिनाई का सामना न करना पड़े और उन्हें समय से योजना का लाभ मिल सकता।
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कन्नौज में सोलर योजना में लापरवाही पर डीएम नाराज: वेंडर को नोटिस और FIR के निर्देश, 17-18 उपभोक्ताओं को नहीं मिला लाभ – Kannauj News
उदयपुर में तापमान गिरा, सुबह-शाम हल्की ठंड का अहसास: 3-4 दिन ऐसा ही मौसम रहने का अनुमान, दूसरे सप्ताह में बदलेगा वेदर – Udaipur News
उदयपुर में पिछले 2 दिनों से दिन और रात के तापमान में मामूली गिरावट दर्ज की गई है, जिससे हल्की ठंडक का अहसास होने लगा है, हालांकि तापमान में बड़ा बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन मौसम में नरमी साफ महसूस की जा रही है। मौसम विभाग के आंकड़ों के अनुसार, 4 अक्टूबर को उदयपुर का अधिकतम तापमान 35.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो 3 अक्टूबर को दर्ज 35.6 डिग्री के मुकाबले 0.2 डिग्री कम रहा। वहीं न्यूनतम तापमान में भी गिरावट देखी गई। 3 अक्टूबर को न्यूनतम तापमान 19.1 डिग्री था, जो 4 अक्टूबर को घटकर 19.0 डिग्री सेल्सियस पर आ गया। विशेषज्ञों के अनुसार यह गिरावट मानसून की विदाई और उत्तरी हवाओं के असर के कारण हो रही है। सुबह और शाम के समय हवा में हल्की ठंडक महसूस की जा रही है, जबकि दिन में धूप के कारण गर्मी बरकरार है। मौसम विभाग का अनुमान है कि आने वाले 3-4 दिनों तक मौसम इसी तरह बना रहेगा। अधिकतम तापमान 35 डिग्री के आसपास और न्यूनतम तापमान 18 से 19 डिग्री के बीच रहने की संभावना है। अक्टूबर के दूसरे सप्ताह से रात के तापमान में और गिरावट आने से हल्की सर्दी की शुरुआत हो सकती है।
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शाहीन हत्याकांड: 17 दिन बाद भी पुलिस के हाथ खाली: डंप टावर से भी नहीं मिला सुराग, तीन एंगल से मामले की जांच; घर के बाहर दरवाजे पर मारी थी गोली – Samastipur News
समस्तीपुर के केशोरा गांव में ग्रामीण डॉक्टर गुलजार अहमद उर्फ शाहीन (50) की हत्या मामले में पुलिस किसी ठोस नतीजे पर नहीं पहुंच सकी है। 18 सितंबर को घर के दरवाजे पर सो रहे शाहीन की चार गोलियां मारकर हत्या की गई थी। पुलिस ने उनके मोबाइल की कॉल डिटेल खंगालने के साथ घटना वाली रात इलाके में सक्रिय मोबाइल नंबरों की डंप टावर जांच भी की, लेकिन अब तक कोई ठोस सुराग हाथ नहीं लगा है। अब पुलिस का शक शाहीन के किसी करीबी पर भी है। हसनपुर थाना पुलिस के साथ जिला डीआईयू की टीम वैज्ञानिक तरीके से जांच में जुटी है। रोसड़ा डीएसपी संजय सिन्हा ने बताया कि तीन एंगल(महिला, रुपए और जमीन) से मामले की जांच की जा रही है। महिला और जमीन के एंगल पर फिलहाल कोई ठोस जानकारी नहीं मिली है। रुपए और जमीन से जुड़े बिंदुओं पर जांच जारी है। 20 लाख से ज्यादा रुपए बाजार में बकाया जांच के दौरान पुलिस को शाहीन की एक डायरी मिली है। इसमें इलाज कराने के बाद पैसे नहीं देने वाले मरीजों के नाम और बकाया राशि दर्ज है। पुलिस सूत्रों के अनुसार, डायरी में 500 से अधिक लोगों के नाम हैं और कुल बकाया राशि 20 लाख रुपए से ज्यादा है। परिवार के लोगों के मुताबिक, शाहीन इलाज कराने आने वाले मरीजों से तुरंत पैसे की मांग नहीं करते थे। जिसने पैसे दे दिए, उससे ले लेते थे। जो नहीं दे पाता था, उसका नाम और बकाया राशि डायरी में दर्ज कर लेते थे। बाद में भुगतान होने पर नाम काट दिया जाता था। पुलिस अब इस डायरी में दर्ज नामों और बकाया रकम को भी जांच का हिस्सा बना रही है। यह पता लगाया जा रहा है कि हत्या का संबंध किसी आर्थिक विवाद से तो नहीं है। घटना वाली रात गांव में सिर्फ दर्जनभर मोबाइल एक्टिव पुलिस को शुरुआती जांच में जब कोई ठोस सुराग नहीं मिला तो पिछले सप्ताह डंप टावर विधि से भी जांच की गई। घटना वाली रात केशरौरा गांव में करीब दर्जनभर मोबाइल नंबर ही सक्रिय मिले। पुलिस ने इन नंबरों की जांच की, लेकिन फिलहाल किसी का हत्या से सीधा संबंध सामने नहीं आया है। शाहीन के मोबाइल की कॉल डिटेल भी खंगाली गई। इसमें ज्यादातर कॉल मरीजों से बातचीत के मिले। इनमें भी अधिकतर कॉल एक मिनट से कम समय के थे। कॉल डिटेल से भी पुलिस को ऐसा कोई सुराग नहीं मिला, जिससे हत्या की गुत्थी सुलझ सके। घर के दरवाजे पर सोते समय मारी थी गोली 18 सितंबर की रात शाहीन सिंघिया थाना क्षेत्र के विहट गांव से भोज खाकर घर लौटे थे। इसके बाद वह घर के दरवाजे पर सो गए। देर रात बदमाशों ने उन्हें गोली मार दी। सुबह लोगों ने उन्हें खून से लथपथ देखा। पोस्टमार्टम में शरीर पर चार गोलियां लगने की पुष्टि हुई थी। इनमें तीन गोलियां सिर में और एक गोली सीने में लगी थी। घटनास्थल से तीन खोखे भी बरामद हुए थे। 17 दिन बाद भी हत्या की वजह और हमलावरों का पता नहीं चल सका है। पुलिस अब आर्थिक लेनदेन, जमीन से जुड़े विवाद और शाहीन के करीबियों की भूमिका समेत सभी संभावित बिंदुओं पर जांच आगे बढ़ा रही है।
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चीन के लिए जासूसी के शक में अमेरिकी महिला गिरफ्तार: छिपकर ताइवान राष्ट्रपति के परिवार का वीडियो बनाया, चीनी अधिकारी ने काम दिया था
अमेरिका की फेडरल ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टिगेशन (FBI) ने लॉस एंजिल्स एयरपोर्ट से एक महिला को रविवार को गिरफ्तार किया। उस पर चीन सरकार के लिए काम करने का आरोप है। FBI के अनुसार महिला ने छिपकर ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते के परिवार का वाडियो बनाया। उसे ये काम एक चीनी अधिकारी ने दिया था। महिला की गिरफ्तारी उस समय हुई, जब वह लॉस एंजिल्स से शंघाई जाने वाली फ्लाइट में सवार होने वाली थी। कैलिफोर्निया में रियल एस्टेट एजेंट के तौर पर काम करती थी गिरफ्तार महिला की पहचान वैनयिंग हीदर झांग (34) के रूप में हुई है। वह कैलिफोर्निया के इरविन में रियल एस्टेट एजेंट है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, झांग ने सितंबर 2025 में एक साथी के साथ सिएटल जाकर ताइवान के राष्ट्रपति लाई चिंग-ते के बेटे टिंग-यू लाई के घर की निगरानी की और वहां की तस्वीरें और वीडियो बनाए। चीनी अधिकारी को वीचैट पर मैसेज भेजकर जानकारी दी FBI की ओर से 3 अक्टूबर को दाखिल की गई शिकायत के मुताबिक, झांग और एक अन्य व्यक्ति 1 सितंबर 2025 को लास वेगास से सिएटल पहुंचे थे। उन्होंने वहां एक काली निसान रोग गाड़ी किराए पर ली और राष्ट्रपति के बेटे के घर के पास पहुंचे। पड़ोसी के सुरक्षा कैमरे की तस्वीरों में दोनों को वीडियो बनाते देखा गया। FBI के मुताबिक, झांग ने चीन के एक कथित सरकारी अधिकारी को वीचैट पर मैसेज भेजकर बताया था कि उसने टिंग-यू को देख लिया है। झांग के आईक्लाउड अकाउंट की तलाशी के लिए मिले वारंट के जरिए FBI ने ये मैसेज हासिल किए। उसने यह भी लिखा कि वह वीडियो रिकॉर्ड कर रही है और दो गाड़ियों के नंबर भेजे। FBI एजेंट केविन होल्ट ने शिकायत में लिखा कि झांग कम से कम दो ऐसे लोगों के संपर्क में थी, जो चीन सरकार के लिए काम करते हैं। जून में चीनी अधिकारी से मिलने चांगशा गई थी महिला FBI की शिकायत के अनुसार, झांग को जून 2025 में उसकी पुरानी यूनिवर्सिटी के एक क्लासमेट ने चीन के एक सरकारी अधिकारी से मिलवाया था। झांग ने जून में चीन के चांगशा शहर में एक निजी कमरा बुक किया था, जहां उसकी कथित तौर पर उस अधिकारी से मुलाकात हुई। शिकायत के मुताबिक, अधिकारी ने उसे निगरानी से जुड़ा काम दिया था। इसके बाद झांग ने मैसेज में कहा था कि वह यह काम संभाल लेगी। FBI ने बताया- राष्ट्रपति पर दबाव बनाने में इस्तेमाल हो सकती थीं तस्वीरें FBI एजेंट होल्ट ने शिकायत में कहा कि अगर चीन किसी संभावित संघर्ष के दौरान ताइवान के राष्ट्रपति पर दबाव बनाना चाहता है, तो उनके करीबी रिश्तेदारों की लोकेशन, घर और गाड़ियों की तस्वीरें उसके लिए उपयोगी हो सकती हैं। झांग के पति एड्रिक डिंग, जो उसी रियल एस्टेट कंपनी में काम करते हैं। उन्होंने मीडिया से कहा कि उन्हें अभी मामले के बारे में जानकारी नहीं है। ताइवान के राष्ट्रपति के बेटे डच कंपनी फिलिप्स में काम करते हैं टिंग-यू लाई इंजीनियर हैं और अमेरिका में पढ़ाई कर चुके हैं। उन्होंने 2012 में केस वेस्टर्न रिजर्व यूनिवर्सिटी से इलेक्ट्रिकल इंजीनियरिंग में ग्रेजुएशन किया। इसके बाद जॉन्स हॉपकिन्स यूनिवर्सिटी से बायोइंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री और यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन से पीएचडी की। टिंग-यू अब नीदरलैंड की बहुराष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी फिलिप्स में काम करते हैं। ताइवान की मीडिया रिपोर्टों के मुताबिक, उनकी पत्नी भी ताइवानी हैं। दोनों की शादी 2018 में हुई थी और उनका बच्चा 2020 में अमेरिका में पैदा हुआ। अमेरिका में पहले भी चीन से जुड़े जासूसी के मामले सामने आ चुके हैं 2024: शुजुन वांग नाम के 75 वर्षीय व्यक्ति को चीन के लिए जासूसी करने का दोषी पाया गया था। उस पर न्यूयॉर्क में चीन समर्थक जानकारी जुटाकर 17 साल तक बीजिंग भेजने का आरोप था। 2023: न्यूयॉर्क में चल रहे एक कथित चीनी “पुलिस स्टेशन” से जुड़े दो लोगों को गिरफ्तार किया गया था। अमेरिकी अधिकारियों का कहना था कि इसका इस्तेमाल चीन के आलोचकों पर नजर रखने के लिए किया जाता था। 2026: कैलिफोर्निया की पूर्व मेयर ईलीन वांग पर चीन के लिए एजेंट की तरह काम करने का आरोप लगा। अधिकारियों के मुताबिक, उन्होंने चीन समर्थक प्रचार के बदले पैसे लिए थे। ताइवान को लेकर अमेरिका-चीन में तनाव क्यों है? ताइवान खुद को अलग और लोकतांत्रिक सरकार वाला क्षेत्र मानता है, जबकि चीन उसे अपना हिस्सा बताता है और जरूरत पड़ने पर बल प्रयोग से भी उसे अपने नियंत्रण में लेने की बात कह चुका है। इसी वजह से ताइवान को लेकर अमेरिका और चीन के बीच लंबे समय से तनाव बना हुआ है। ताइवान सिर्फ राजनीतिक नहीं, बल्कि तकनीक के लिहाज से भी बेहद अहम है। दुनिया के सबसे उन्नत कंप्यूटर और AI चिप्स का बड़ा हिस्सा ताइवान में बनता है। दुनिया की सबसे बड़ी चिप निर्माता कंपनी TSMC भी यहीं की है। कई अमेरिकी टेक कंपनियां ताइवान में बने चिप्स पर निर्भर हैं। ————————- यह खबर भी पढ़ें… सर्वे- ट्रम्प के कामकाज से 70% अमेरिकी संतुष्ट नहीं: मिडटर्म में हार का खतरा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के खिलाफ उनकी अपनी रिपब्लिकन पार्टी में बगावत के संकेत दिखने लगे हैं। ट्रम्प की लोकप्रियता घट रही है। पूरी खबर पढ़ें…
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एक बार चख लिया तो भूल नहीं पाएंगे ये देसी स्वाद, छाछ-बाजरे से ऐसे बनती है राबड़ी
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Rajasthani traditional food Bajra Rabdi recipe: भरतपुर के ग्रामीण इलाकों में नया बाजरा आते ही पारंपरिक छाछ-बाजरे की राबड़ी की महक छा गई है. स्वाद और सेहत से भरपूर यह देसी व्यंजन ग्रामीणों का मुख्य नाश्ता है. इसे बनाने के लिए बाजरे का दलिया और ताजी छाछ को मिलाकर धीमी आंच पर पकाया जाता है. पकने के बाद इसमें नमक और काली मिर्च डालकर परोसा जाता है. यह सुपाच्य होने के साथ-साथ शरीर को ऊर्जा भी देता है. आज भी भरतपुर के गांवों में राबड़ी रोजमर्रा के खान-पान का एक अहम हिस्सा है, जिसका असली जायका नए बाजरे के साथ और भी ज्यादा बढ़ जाता है.
भरतपुर: राजस्थान के भरतपुर जिले के ग्रामीण इलाकों में खेतों से नया बाजरा आते ही लोगों की रसोई में पारंपरिक व्यंजनों की खुशबू महकने लगी है. आधुनिकता के इस दौर में भी भरतपुर के ग्रामीण अंचलों में देसी और पारंपरिक खानपान का अपना एक अलग ही महत्व है. नया बाजरा आते ही यहां के लोग अपने पसंदीदा और स्वादिष्ट व्यंजनों को बनाने में जुट जाते हैं. बाजरे से बनने वाले कई देसी पकवानों में छाछ और बाजरे से तैयार होने वाली राबड़ी ग्रामीण क्षेत्र में विशेष रूप से पसंद की जाती है. यह न केवल स्वाद में लाजवाब होती है, बल्कि सेहत के लिहाज से भी इसके अनगिनत फायदे हैं. भरतपुर के गांवों में यह राबड़ी एक ऐसा व्यंजन है जो लगभग हर घर में बड़े चाव से खाया जाता है.
बाजरे की राबड़ी को ग्रामीण इलाकों में स्वाद के साथ-साथ अत्यंत पौष्टिक और पेट के लिए बहुत ही हल्का भोजन माना जाता है. यही सबसे बड़ी वजह है कि ग्रामीण इलाकों में लोग खास तौर पर अपनी सुबह की शुरुआत इसी देसी नाश्ते से करते हैं. किसान और मजदूर वर्ग के लिए यह एक ऊर्जा का बेहतरीन स्रोत है, जो उन्हें दिन भर खेतों में काम करने की ताकत देता है. बाजरे में भरपूर मात्रा में फाइबर, कैल्शियम और अन्य पोषक तत्व पाए जाते हैं, जबकि छाछ पाचन तंत्र को दुरुस्त रखने में मदद करती है. इन दोनों का मिश्रण राबड़ी को एक सुपरफूड बना देता है. इसका नियमित सेवन करने से पेट की बीमारियां दूर रहती हैं और शरीर में दिनभर स्फूर्ति बनी रहती है.
बाजरे की राबड़ी बनाने की आसान विधि
बाजरे की छाछ वाली राबड़ी बनाने की प्रक्रिया भी बेहद आसान और पारंपरिक है. इसमें किसी भी तरह के कृत्रिम मसालों का उपयोग नहीं किया जाता है. सबसे पहले साफ किए हुए नए बाजरे को पीसकर उसका मोटा दलिया तैयार किया जाता है. इसके बाद एक बड़े बर्तन या मिट्टी की हांड़ी में ताजी छाछ ली जाती है और उसमें बाजरे का वह दलिया डाल दिया जाता है. इस मिश्रण को अच्छी तरह से मिलाकर चूल्हे पर धीमी आंच पर पकाया जाता है. राबड़ी को स्वादिष्ट और एकदम सही बनावट का बनाने के लिए इसे लगातार या बीच-बीच में चम्मच से चलाया जाता है. ऐसा इसलिए किया जाता है ताकि दलिया बर्तन के नीचे चिपके नहीं और छाछ के साथ अच्छी तरह से पक जाए.
पकने के बाद का देसी जायका
चूल्हे की धीमी आंच पर धीरे-धीरे पकने के बाद बाजरे का दलिया पूरी छाछ को अपने अंदर सोख लेता है. इसके बाद यह मिश्रण गाढ़ा होकर एक बेहतरीन राबड़ी का रूप लेने लगता है. जब राबड़ी अच्छी तरह से पक कर तैयार हो जाती है, तो इसमें स्वाद के अनुसार नमक और हल्की सी काली मिर्च मिलाई जाती है. तैयार होने के बाद बाजरे की इस छाछ राबड़ी को हल्का गर्म या फिर अपनी पसंद के अनुसार पूरी तरह से ठंडा करके भी खाया जा सकता है. ग्रामीणों के मुताबिक, इसका असली देसी स्वाद खास तौर पर नए बाजरे के साथ और भी अधिक बढ़ जाता है. आज भी भरतपुर के गांवों में यह पारंपरिक रेसिपी लोगों की रोजमर्रा की खान-पान की संस्कृति का एक अहम और अटूट हिस्सा बनी हुई है.
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Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with News18 Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
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सुप्रीम कोर्ट में CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ सुनवाई आज: SIR से जुड़ा एकतरफा फैसला लेने का आरोप; मांग- फैसला आने तक कामकाज से अलग रखा जाए
सुप्रीम कोर्ट आज CEC ज्ञानेश कुमार के खिलाफ दायर दो याचिकाओं पर सुनवाई करेगा। ये याचिकाएं स्पेशल इंटेन्सिव रिवीजन (SIR) से जुड़े फैसलों को लेकर दाखिल की गई हैं। आरोप है कि SIR से जुड़े करीब 14 फैसले दो अन्य चुनाव आयुक्तों की सहमति के बिना लिए गए। याचिकाकर्ताओं ने इन फैसलों को पलटने, ज्ञानेश कुमार पर मुकदमा चलाने और SIR में मतदाताओं के नाम हटाने की SIT जांच की मांग की है। साथ ही CEC को अंतिम फैसला आने तक पद के कामकाज से अलग रखने की भी मांग की गई है। CJI जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच मामले की सुनवाई करेगी। याचिकाओं में कहा गया है कि SIR के दौरान 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 13 करोड़ नाम हटाए गए। पहली याचिका की मांगें दूसरी याचिका की मांगें ज्ञानेश कुमार के अलावा बाकी अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग याचिका में सक्षम प्राधिकरण को जनप्रतिनिधित्व अधिनियम 1950 की धारा 32 के तहत शिकायत दर्ज करने और मुकदमा शुरू करने का निर्देश देने की मांग की गई है। यह कार्रवाई ज्ञानेश कुमार, सीनियर डिप्टी इलेक्शन कमिश्नर मनीष गर्ग, डायरेक्टर जनरल (IT) सीमा खन्ना और जिम्मेदार पाए जाने वाले अन्य अधिकारियों के खिलाफ मांगी गई है। याचिका में धारा 32 का हवाला दिया गया है। इस प्रावधान में मतदाता सूची तैयार करने, उसमें संशोधन या सुधार से जुड़े सरकारी कर्तव्य के उल्लंघन पर सजा का प्रावधान है। फॉर्म 6 और वोटर डेटा को लेकर भी आरोप याचिकाकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि Form 6 में बिना अनुमति बदलाव किया गया। इसके अलावा, वोटर लिस्ट के डेटाबेस को सेंट्रलाइज करने का भी आरोप लगाया गया है। याचिका में कहा गया है कि ECINet सिस्टम के जरिए पात्र मतदाताओं के नाम दोबारा बहाल नहीं किए गए। इसमें ECI के नाम पर बताए गए मतदाताओं को शामिल करने को चुनौती देते हुए पश्चिम बंगाल में 16.10 लाख अपीलें दाखिल किए जाने का भी जिक्र है। एक मीडिया रिपोर्ट के बाद शुरू हुआ ज्ञानेश कुमार पर विवाद इस पूरे मामले की शुरुआत इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट से हुई थी, जिसमें SIR को लेकर चुनाव आयोग के अधिकारियों के बीच मतभेदों का जिक्र था। रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने चुनाव पैनल के भीतर SIR प्रक्रिया को लेकर बार-बार चिंता जताई थी। रिपोर्ट के मुताबिक, SIR प्रक्रिया की देखरेख तीनों अधिकारियों ने की है, लेकिन संधू और जोशी ने पिछले 10 महीनों में कम से कम 14 बार औपचारिक रूप से आपत्तियां दर्ज कराईं। इनमें से 4 आपत्तियां एक ही दिन में दर्ज की गईं। रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि ये आपत्तियां उन फैसलों और आदेशों को लेकर थीं, जिन्हें संधू और जोशी की जानकारी के बिना जारी किया गया था। विपक्ष अगले सत्र में महाभियोग लाने की तैयारी में विपक्ष एक बार फिर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग प्रस्ताव लाने की योजना बना रहा है। अप्रैल 2026 में भी विपक्ष ने ज्ञानेश कुमार के खिलाफ महाभियोग नोटिस दिया था लेकिन लोकसभा में वह प्रस्ताव खारिज हो गया था, जबकि राज्यसभा में अभी भी लंबित है। सूत्रों के मुताबिक, इस बार भी महाभियोग प्रस्ताव को कांग्रेस ही लीड कर रही है। कांग्रेस ने इस मुद्दे पर विपक्षी दलों से बात की है। संभावना है कि इसे अगले 2 हफ्तों के भीतर पेश किया जाएगा। एक और मामला सुप्रीम कोर्ट भी पहुंचा है, जहां एक वकील ने भारत के अटॉर्नी जनरल को पत्र लिखकर ज्ञानेश कुमार के खिलाफ अवमानना कार्रवाई चलाने की मांग की है। ज्ञानेश कुमार पर एक्शन होगा या नहीं, 3 संभावनाएं 1. कार्यकाल के फैसलों पर पुलिस एक्शन नहीं हो सकता: ज्ञानेश कुमार को मुख्य चुनाव आयुक्त और अन्य चुनाव आयुक्त (नियुक्ति, सेवा शर्तें और कार्यकाल) अधिनियम, 2023′ की धारा 16 के तहत सुरक्षा मिली है। यानी, धारा 16 उन्हें सुरक्षा देती है कि “अपने आधिकारिक कर्तव्यों के निर्वहन में किए गए किसी भी कार्य या निर्णय” के लिए उनके खिलाफ कोई दीवानी या आपराधिक मुकदमा नहीं चलाया जा सकता। कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, जब तक यह प्रावधान मौजूद है, उन्हें केवल पुलिस कार्रवाई या गिरफ्तारी के जरिए हटाना, उन पर केस चलाना कानूनी रूप से बहुत चुनौतीपूर्ण है। 2. भाजपा ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया: ज्ञानेश कुमार का कार्यकाल जनवरी 2029 तक है, यानी अभी 2 साल कम से कम ज्ञानेश अपने पद पर रहेंगे। सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी ने सभी आरोपों को सिरे से खारिज किया है। पार्टी का मानना है कि ये आरोप आधारहीन हैं। संधू और जोशी की आपत्तियां किसी गड़बड़ी का प्रमाण नहीं है, बल्कि कार्यशील लोकतंत्र का संकेत है। यानी वह उनके खिलाफ कोई एक्शन नहीं लेने के मूड में है। 3. आखिरी रास्ता महाभियोग, लेकिन विपक्ष के पास बहुमत संभव नहीं: अनुच्छेद 324 (5) के मुताबिक मुख्य चुनाव आयुक्त को महाभियोग के तहत ही हटाया जा सकता है। महाभियोग प्रस्ताव को पेश करने के लिए लोकसभा में 100 तो राज्यसभा में 50 सांसदों के समर्थन की जरूरत होती है। लोकसभा में स्पीकर और राज्यसभा में सभापति को यह तय करना होता है कि इसे स्वीकार किया जाए या नहीं। मौजूदा हालात में विपक्ष को महाभियोग प्रस्ताव को पास कराने के लिए संसद के दोनों सदनों में 2/3 की जरूरत होगी। यानी लोकसभा में 362 सांसदों और राज्यसभा में 164 सांसदों का समर्थन हो। विपक्ष के पास संसद में इस वक्त इतना बड़ा समर्थन नहीं है। ———————- मुख्य चुनाव आयुक्त विवाद से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें…
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ओमानी को-पायलट ने प्लेन क्रैश की साजिश अकेले रची थी: रिपोर्ट में दावा, विमान को बिल्डिंग से टकराने वाला था, इंजन बंद करने का भी शक
दुबई41 मिनट पहले
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दुबई से इजराइल जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर पर हमला करने वाला ओमानी को-पायलट हमाम अल-हमामी ने अकेले ही विमान को क्रैश करने की साजिश रच रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभी तक उसके किसी संगठन या सरकार से जुड़े होने की जानकारी नहीं मिली है।
इटली के अखबार कोरिएरे डेला सेरा की रिपोर्ट के मुताबिक, को-पायलट का प्लान कैप्टन स्मित को मारकर विमान को तेल अवीव में किसी ऊंची बिल्डिंग से टकराना था। उसने कॉकपिट में नमाज पढ़ने का बहाना बनाया और कैप्टन पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया।
रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि जब उसका पहला प्लान नाकाम होने लगा तो उसने विमान को रेगिस्तान में गिराने की कोशिश की। इस दौरान उसने ऑटोपायलट बंद कर दिया, जिससे विमान तेजी से नीचे आने लगा। जांचकर्ताओं को शक है कि को-पायलट ने विमान के दोनों इंजन बंद करने की कोशिश की थी।

फ्लाइटरडार24 के मुताबिक, विमान करीब एक मिनट में 33 हजार फीट से 17 हजार फीट तक नीचे आ गया था।
हमले के बाद कॉकपिट में पहुंचे यात्री
रिपोर्ट के मुताबिक, हमामी ने नजाम के दौरान इमरजेंसी के लिए रखे क्रैश एक्स यानी कुल्हाड़ी निकाली और पीछे से कैप्टन स्मित पर वार करना शुरू कर दिया। शुरुआत में स्मित को लगा कि विमान का कोई हिस्सा उनके सिर से टकराया है, लेकिन लगातार वार होने पर उन्हें समझ आया कि उन पर हमला हो रहा है।
हमले में कैप्टन स्मित के सिर पर गंभीर चोट लगी और उनके हाथ पर भी गहरी चोट आई। काफी खून बहने के बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश की। लेकिन को-पायलट ने दरवाजा बंद किया। फिर स्मित ने उससे मुकाबला करते हुए दोबारा दरवाजा खोला।
कॉकपिट से आवाजें सुनकर ताली बर्कोविच नाम की एक महिला ने लोगों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद कई यात्री और दो ऑफ-ड्यूटी पायलट कॉकपिट में पहुंचे। उन्होंने कैप्टन को गंभीर हालत में पाया और को-पायलट को काबू करने की कोशिश की।

इजराइली महिला ताली बर्कोविच-मानेस उस समय फ्लाइट के टॉयलेट के बाहर थीं, जबकि उनकी 6 साल की बेटी नीना अंदर थी। कॉकपिट से शोर सुनकर ताली को पायलट पर हमले का अंदेशा हुआ। उनके पति त्जविका कॉकपिट पहुंचे और को-पायलट को काबू करने में मदद की।
विमान की रफ्तार 970 किमी प्रति घंटे से ज्यादा पहुंची
रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम के दौरान विमान तेजी से जमीन की ओर गिर रहा था। उसकी रफ्तार 970 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा पहुंच गई थी। इस दौरान विमान का पिछला रडर क्षतिग्रस्त हो गया और को-पायलट ने कंट्रोल को भी नुकसान पहुंचाने की कोशिश की।
इसी दौरान पेशे से प्लंबर यात्री यानिव हयून ने कंट्रोल स्टिक अपनी ओर खींची, जिससे विमान का तेजी से नीचे जाना रुका। इसके बाद दो ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने कॉकपिट का नियंत्रण संभाला और विमान को सामान्य स्थिति में लाने की कोशिश की।
फ्लाइट FZ1073 में 174 लोग सवार थे। हमले के दौरान विमान ने इमरजेंसी सिग्नल भेजे और करीब 34 हजार फीट से 17 हजार फीट से ज्यादा नीचे आ गया था। बाद में यात्रियों और क्रू की मदद से विमान का कंट्रोल संभाला गया।

कॉकपिट में पायलटों के बीच हाथापाई के दौरान विमान हिलता हुआ नजर आया।
सऊदी अरब के ताबुक में इमरजेंसी लैंडिंग
सऊदी अरब के एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स ने विमान को वापस मोड़ने को कहा। इसके बाद फ्लाइट को ताबुक में इमरजेंसी लैंडिंग कराने के निर्देश दिए गए। पायलटों ने विमान को सुरक्षित उतारा।
लैंडिंग के बाद घायल कैप्टन स्मित को अस्पताल ले जाया गया, जबकि हमाम अल-हमामी को सऊदी अधिकारियों को सौंप दिया गया।

इमरजेंसी लाइट जलने से इंजन की जांच
घटना के कुछ वीडियो में विमान की इमरजेंसी लाइट्स जलती दिखाई दीं। रिपोर्ट के मुताबिक, इससे विमान की मुख्य बिजली सप्लाई बंद होने की आशंका जताई गई। ऐसे में विमान बैटरी पावर पर आ सकता है।
जांचकर्ता यह पता लगा रहे हैं कि क्या को-पायलट ने इंजन तक फ्यूल पहुंचाने वाले स्विच को ‘रन’ से ‘कटऑफ’ पर किया था। बाद में दोनों ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने विमान को सामान्य स्थिति में लाने की कोशिश की। रिपोर्ट के मुताबिक, विमान में इंजन दोबारा शुरू करने की स्थिति बनी हुई थी।
कई देशों की एजेंसियां कर रहीं जांच
यूएई, इजराइल और सऊदी अरब की एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं। यूएई ने कहा है कि जांच में को-पायलट के आतंकी घटना को अंजाम देने की कोशिश करने की बात सामने आई है।
इजराइली अधिकारियों के मुताबिक, अभी तक किसी संगठन या सरकार से उसके संबंध का पता नहीं चला है।

कैप्टन स्मित खून से लथपथ दिखे। उनके शरीर पर कई जगह हमले के निशान थे।
ऑस्ट्रेलिया और ओमान से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे
वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, हमामी को उसके कट्टरपंथी विचारों को लेकर पहले ओमान में उड़ान भरने से रोक दिया गया था। ऑस्ट्रेलियाई फेडरल पुलिस भी उसके ऑस्ट्रेलिया से संबंधों की जांच कर रही है।
रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमामी 2015 से 2017 के बीच ऑस्ट्रेलिया में छात्र रहा था। उसे 2014 में स्टूडेंट वीजा मिला था, जिसे 2019 में रद्द कर दिया गया। ABC के मुताबिक, वीजा चरित्र संबंधी वजहों से नहीं, बल्कि कोर्स में दाखिला खत्म होने के कारण रद्द हुआ था।
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दुबई से इजराइल जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में को-पायलट के हमले के बाद घायल कैप्टन स्मित ने कॉकपिट का दरवाजा खोला, जिससे विमान में मौजूद दो अन्य पायलट अंदर पहुंचे और कंट्रोल संभाला। ये दोनों पायलट तेल अवीव से दुबई लौटने वाली फ्लाइट के लिए पहले से विमान में सवार थे। कंट्रोल संभालने के बाद भी उन्होंने करीब 45 मिनट तक यात्रियों से बात नहीं की, जिससे कुछ यात्रियों को विमान के हाईजैक होकर ईरान ले जाए जाने का डर लगा। पूरी खबर पढ़ें…
प्रयागराज में SRN से लौट रही महिला से गैंगरेप: ऑटो चालक ने सुनसान जगह ले जाकर 2 लोगों के साथ मिलकर की दरिंदगी – Prayagraj (Allahabad) News
प्रयागराज में एसआरएन अस्पताल से दवा लेकर लौट रही 32 साल की महिला के साथ गैंगरेप किया गया। एसआरएन अस्पताल से लौटते समय वह नए पुल से घूरपुर जाने के लिए टैम्पो में बैठी थी। चालक ने उसे घूरपुर पहुंचाने का भरोसा दिया, लेकिन धोखे से उसे करछना में सुनसान स्थान पर ले गया। वहां दो अन्य लोगों के साथ मिलकर उससे दरिंदगी की।
इसके बाद किसी से शिकायत पर जान से मारने की धमकी देते हुए भाग निकले। पीड़िता शिकायत लेकर घूरपुर, करछना और कीडगंज थाने पहुंची, लेकिन FIR दर्ज नहीं की गई। चार दिन बाद 28 सितंबर को अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद कीडगंज पुलिस ने मामले में मुकदमा दर्ज किया। पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है, हालांकि दो अन्य आरोपी अब भी हाथ नहीं आए हैं। अस्पताल से लौटते समय टैम्पो में बैठी थी
पीड़िता ने पुलिस को बताया, वह लालापुर की रहने वाली है और उसका पति नौकरी के सिलसिले में बाहर रहता है। वह 24 सितंबर को दवा लेने के लिए एसआरएन अस्पताल आई थी। वहां से लौटते समय नए पुल से घूरपुर जाने के लिए टैम्पो में बैठी। रास्ते में उसने चालक से साफ कहा कि उसे घूरपुर जाना है। चालक ने भरोसा दिलाया कि वह उसे घूरपुर छोड़ देगा।
महिला का आरोप है कि इसी भरोसे पर वह टैम्पो में बैठी रही। इसके बाद चालक उसे घूरपुर ले जाने के बजाय करछना क्षेत्र में एक सुनसान जगह पर ले गया। वहां पहले से मौजूद दो अन्य लोगों के साथ मिलकर उसके साथ दुराचार किया गया।
शिकायत लेकर तीन थानों में पहुंची
घटना के बाद पीड़िता ने पुलिस से संपर्क किया। उसके मुताबिक, वह कीडगंज के साथ ही घूरपुर और करछना थाने गई, लेकिन उसका मुकदमा दर्ज नहीं किया गया। इसके बाद उसने 28 सितंबर को आला अधिकारियों को प्रार्थना पत्र देकर FIR दर्ज कराने और मेडिकल कराने की मांग की।
प्रार्थना पत्र में उसने पूरे घटनाक्रम की जानकारी देते हुए कहा कि घटना के बाद वह लगातार दहशत में है। शिकायत के बाद भी FIR दर्ज नहीं हुई। इसके बाद अधिकारियों के स्तर से हस्तक्षेप किया गया और कीडगंज पुलिस ने मुकदमा दर्ज किया। एक आरोपी गिरफ्तार, दो की तलाश
सूत्रों का कहना है कि मामले में पुलिस ने एक आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है। उसे न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। वहीं, घटना में शामिल बताए जा रहे दो अन्य आरोपियों का अभी पता नहीं चल सका है। पुलिस उनकी तलाश कर रही है।
हालांकि, एक आरोपी की गिरफ्तारी के बावजूद पुलिस ने उसकी पहचान और भूमिका से जुड़ी विस्तृत जानकारी सार्वजनिक नहीं की है। पुलिस का कहना है कि मामले में जांच जारी है।
गिरफ्तारी के बाद भी कई सवाल
एक आरोपी की गिरफ्तारी के बाद भी मामले में कई सवाल बने हुए हैं। पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपी महिला के संपर्क में कैसे आया और घटना में शामिल अन्य दोनों आरोपियों से उसका क्या संबंध है। घटना के लिए पहले से कोई योजना बनाई गई थी या नहीं, इसकी भी जांच की जा रही है।
थाना प्रभारी दिनेश सिंह से मामले में आरोपी की गिरफ्तारी और घटना से जुड़े सवालों पर जानकारी मांगी गई तो उन्होंने कहा कि अभी जांच की जा रही है। जांच पूरी होने से पहले इस संबंध में कुछ नहीं बताया जा सकता।
चार दिन तक FIR क्यों नहीं
इस मामले में सबसे बड़ा सवाल FIR दर्ज करने में हुई देरी को लेकर है। पीड़िता के अनुसार, घटना 24 सितंबर की है और वह घटना के बाद शिकायत लेकर अलग-अलग थानों में पहुंची थी। इसके बावजूद 28 सितंबर तक FIR दर्ज नहीं हुई।
सवाल यह है कि गंभीर यौन अपराध की शिकायत मिलने के बाद तत्काल मुकदमा क्यों दर्ज नहीं किया गया? पीड़िता को तीन थानों के चक्कर क्यों लगाने पड़े और अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद ही FIR क्यों दर्ज हुई?
मामले में पुलिस की शुरुआती कार्रवाई को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। खासकर तब, जब पुलिस ने बाद में एक आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है।
थाना प्रभारी पहले भी कार्रवाई को लेकर रहे हैं चर्चा में
कीडगंज थाना प्रभारी दिनेश सिंह इससे पहले भी पुलिस कार्रवाई को लेकर चर्चा में रहे हैं। करीब चार महीने पहले घूरपुर थाना क्षेत्र के सेंधुवार गांव में दो पक्षों के विवाद में पुलिस की कार्रवाई को लेकर शिकायत हुई थी।
बताया गया था कि विवाद के बाद एक पक्ष के लोगों को थाने लाकर हिरासत में रखा गया था। मामले की शिकायत वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचने के बाद एसीपी स्तर से जांच कराई गई। जांच में प्रथम दृष्टया पुलिसकर्मियों की भूमिका पर सवाल उठने के बाद इंस्पेक्टर को निलंबित किया गया था।
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