एटा के सकीट क्षेत्र में बैंक कर्मियों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर एक दिवसीय हड़ताल की। हड़ताल के चलते नगर के कई बैंकों में ताले लटके रहे, जबकि बैंक शाखाएं खुली होने के बावजूद कर्मचारी काम करते नजर नहीं आए। इससे बैंकिंग सेवाएं प्रभावित होने के कारण उपभोक्ताओं को परेशानी का सामना करना पड़ा। भारतीय स्टेट बैंक, केनरा बैंक, ग्रामीण बैंक सहित अन्य बैंकों के कर्मचारियों ने हड़ताल में हिस्सा लिया। पांच दिन बैंकिंग लागू करने की मांग बैंक कर्मचारियों ने सरकार पर वादा खिलाफी का आरोप लगाया। उनका कहना है कि 8 मार्च 2024 को हुए समझौते में छह महीने के भीतर पांच दिन बैंकिंग व्यवस्था लागू करने का आश्वासन दिया गया था, लेकिन कई साल बीतने के बाद भी मांग पूरी नहीं हुई। कर्मचारियों ने अन्य लंबित मांगों के समाधान की भी मांग की। बैठक विफल होने पर हड़ताल कर्मचारियों के अनुसार 8 सितंबर को सीएलसी, डीएफसी, आईबीए और बैंक यूनियन के बीच हुई बैठक भी बेनतीजा रही। इसके बाद बैंक कर्मियों ने एक दिवसीय हड़ताल का निर्णय लिया। स्टेट बैंक के प्रबंधक सचिन कुमार वर्मा ने बताया कि हड़ताल के कारण बैंक पूरी तरह बंद रहे। कर्मचारियों ने चेतावनी दी कि मांगें नहीं मानी गईं तो आंदोलन को आगे बढ़ाते हुए अनिश्चितकालीन हड़ताल की जा सकती है।
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नौकरी सरकारी हो या प्राइवेट, काम का लगातार दबाव और घंटों सिटिंग हर युवा को परेशान कर रहा। लेकिन ज्यादातर लोग इस नौकरी के जाल से बाहर नहीं निकल पाते क्योंकि उनकी परिस्थितियां साथ नहीं देती। लेकिन इन दिनों एक महिला का विश्वास और मेहनत दोनों चर्चा का विषय बना हुआ है। दरअसल, स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में असिस्टेंट मैनेजर की पोस्ट पर काम कर रही स्निग्धा बोस ने अपनी शानदार सरकारी नौकरी को छोड़ दिया और ऐसा करियर चुना जो उन्हें कमाई देने के साथ ही मानसिक शांति और सुकून भी देता है। उत्तर प्रदेश के मेरठ में तुला वेलनेस स्टूडियो चलाने वाली महिला ने इंस्टाग्राम पर अपनी स्टोरी को शेयर किया है। जो किसी के लिए भी इंस्पायरिंग हो सकती है।



















