मऊ के रानीपुर थाना क्षेत्र के खिरियां गांव में चार दिन पहले एक युवक की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई थी। इस मामले में पुलिस ने गुरुवार को हत्या के प्रयास के आरोप में तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। यह गिरफ्तारी पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के इटौरा अंडरपास के पास से हुई। अपर पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार ने पुलिस लाइन में प्रेसवार्ता के दौरान मामले का खुलासा किया। उन्होंने बताया कि रानीपुर थाना क्षेत्र के खिरिया गांव निवासी 27 वर्षीय पंकज रविवार को अपने 57 वर्षीय चाचा अच्छे लाल के साथ बाइक पर शराब के ठेके से लौट रहा था। गांव के पास उनकी बाइक अनियंत्रित होकर पलट गई। जब पंकज अपने चाचा को उठा रहा था, तभी चौहान बस्ती निवासी आनंद चौहान से उसकी किसी बात को लेकर कहासुनी हो गई। यह कहासुनी हाथापाई में बदल गई। इसके बाद आनंद चौहान ने अपने पांच अन्य साथियों को मौके पर बुला लिया। लाठी-डंडों से लैस छह युवकों ने पंकज की बेरहमी से पिटाई की और मौके से फरार हो गए। गंभीर रूप से घायल पंकज को पहले जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। हालत गंभीर होने पर उसे वाराणसी रेफर कर दिया गया। सोमवार रात वाराणसी ले जाते समय रास्ते में पंकज की मौत हो गई। पंकज की मौत से आक्रोशित परिजनों और ग्रामीणों ने मंगलवार को पोस्टमार्टम के बाद शव को अंबेडकर मूर्ति के पास रखकर आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की थी। बुधवार को रानीपुर पुलिस ने छह लोगों के खिलाफ हत्या के प्रयास का मुकदमा दर्ज किया था। पुलिस ने अब तक तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है, जबकि तीन अन्य अभी फरार हैं। पुलिस फरार आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए लगातार दबिश दे रही है। अपर पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार ने बताया कि गुरुवार को पुलिस टीम आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए दबिश दे रही थी। इसी दौरान मुखबिर से सूचना मिली कि तीन आरोपित पूर्वांचल एक्सप्रेस-वे के इटौरा अंडरपास के पास आए हुए हैं। मुखबिर से सूचना मिलते ही थाना रानीपुर पुलिस टीम ने युवक की हत्या के प्रयास में शामिल तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। गिरफ्तार आरोपियों की शिनाख्त आनंद चौहान, योगेश चौहान, अंकित चौहान निवासी निवासी बस्ती थाना रानीपुर के रूप में किया गया। जबकि घटना में शामिल तीन आरोपित अभी भी पुलिस पकड़ से दूर हैं। अपर पुलिस अधीक्षक अनूप कुमार ने दावा किया कि जल्द ही फरार तीन अन्य आरोपियों को भी गिरफ्तार कर लिया जाएगा।
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मऊ में युवक की पीट-पीटकर हत्या मामला, 3 गिरफ्तार: चार दिन बाद पुलिस ने अंडरपास के पास से पकड़ा – Mau News
अनूपपुर से अगवा नाबालिग तेलंगाना में मिली, आरोपी गिरफ्तार: शादी का झांसा देकर भगाने वाला युवक पुलिस हिरासत में – Anuppur News
अनूपपुर पुलिस ने एक महीने पहले लापता हुई 17 वर्षीय नाबालिग को तेलंगाना से बरामद कर गुरुवार को अनूपपुर लेकर आई है। इस मामले में किशोरी को भगाने वाले आरोपी श्यामनारायण केवट को भी गिरफ्तार किया गया है। आरोपी को न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया है, जबकि किशोरी को उसके परिजनों को सौंप दिया गया है। कोतवाली थाना पुलिस ने गुरुवार को तेलंगाना राज्य के रंगारेड्डी जिले के सादनगर थाना क्षेत्र अंतर्गत चटानपल्ली से किशोरी को दस्तयाब किया। आरोपी श्यामनारायण केवट (23 वर्ष) अनूपपुर के ग्राम बिजौडी का निवासी है। वह तेलंगाना में एक निजी कंपनी में मजदूरी का काम करता था। थाना प्रभारी अरविंद जैन ने बताया कि 15 अप्रैल को किशोरी के अचानक घर से लापता होने की रिपोर्ट परिजनों ने दर्ज कराई थी। जांच में सामने आया कि आरोपी श्यामनारायण केवट का किशोरी से पहले से परिचय था। उसने शादी का झांसा देकर नाबालिग को अपने साथ तेलंगाना ले गया था। परिजनों की शिकायत पर अज्ञात के खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। पुलिस ने परिजनों से पूछताछ और सायबर सेल की मदद से किशोरी की तलाश की। आरोपी पर कई धाराओं में मामला दर्ज कर उसे न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया है।
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खगड़िया में कार-ट्रक की भिड़ंत, 3 की मौत: ट्रक के पीछे आ रही बाइक भी टकराई, घायल का सदर हॉस्पिटल में इलाज जारी – Khagaria News
खगड़िया में गुरुवार दोपहर रोड एक्सीडेंट में 3 लोगों की मौत हुई है। घटना पसराहा थाना क्षेत्र में नेशनल हाईवे (NH) – 31 बंधु पेट्रोल पंप के पास हुई। ट्रक और कार की आमने-सामने टक्कर हुई, वहीं ट्रक के पीछे चल रही बाइक ट्रक के अचानक ब्रेक लगने से उसमें पीछे से टकरा गई। इस घटना में एक शिक्षिका सहित 3 लोगों की मौत हो गई, जबकि एक युवक गंभीर रूप से घायल है। मृतकों की पहचान परबत्ता प्रखंड के खीराडीह पंचायत वार्ड संख्या-3 निवासी शिक्षिका कुमारी रूबी (34), नवगछिया के साहू परबत्ता निवासी नीतीश कुमार (38) और झंझड़ा निवासी कार ड्राइवर विकास कुमार (35) के रूप में हुई है। हादसे में घायल सोनू कुमार का इलाज खगड़िया सदर अस्पताल में चल रहा है। घटना से जुड़ी तस्वीरें देखिए…. अब जानें पूरी घटना…. बाइक ड्राइवर की मौके पर ही मौत प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, NH-31 पर तेज रफ्तार ट्रक और कार के बीच आमने-सामने की टक्कर हुई। टक्कर इतनी भीषण थी कि चार बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। इसी दौरान पीछे से आ रही एक बाइक बेकाबू होकर ट्रक से जा टकराई। इस हादसे में बाइक ड्राइवर नीतीश कुमार की मौके पर ही मौत हो गई, जबकि पीछे बैठे सोनू कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए। बोलेरो में सवार शिक्षिका कुमारी रूबी और चालक विकास कुमार भी गंभीर रूप से जख्मी हुए। स्थानीय लोगों ने तुरंत राहत-बचाव कार्य शुरू किया और पुलिस की मदद से सभी घायलों को अनुमंडलीय अस्पताल गोगरी पहुंचाया। इलाज के लिए अस्पताल ले जाते समय मौत गोगरी अस्पताल में इलाज के दौरान शिक्षिका कुमारी रूबी ने दम तोड़ दिया। गंभीर रूप से घायल चालक विकास कुमार को सदर अस्पताल खगड़िया रेफर किया गया, लेकिन रास्ते में ही उनकी भी मौत हो गई। घटना की सूचना मिलते ही पसराहा थानाध्यक्ष नवीन कुमार और अपर थानाध्यक्ष रिशु कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने दुर्घटनास्थल को अपने कब्जे में लेकर यातायात बहाल कराया। पुलिस ने तीनों शवों को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल खगड़िया भेज दिया है और मामले की जांच शुरू कर दी है। 4 बच्चों की मां थी टीचर मृतक शिक्षिका कुमारी रूबी मध्य विद्यालय मंडल टोला चकरामी, नारायणपुर में कार्यरत थीं। विक्रमशिला पुल क्षतिग्रस्त रहने के कारण वह ससुराल से ही विद्यालय जाया करती थीं। उनके पति भारतीय थल सेना में कार्यरत हैं। शिक्षिका अपने पीछे 2 बेटे और 2 बेटियों को छोड़ गई हैं। उनका मायका सलारपुर गांव में बताया जा रहा है। इधर, घटना की खबर मिलते ही मृतकों के घरों में कोहराम मच गया। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। वहीं पूरे इलाके में शोक की लहर दौड़ गई है। स्थानीय लोगों ने NH-31 पर लगातार हो रही सड़क दुर्घटनाओं पर चिंता जताते हुए प्रशासन से सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है।
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हरी मिर्च, लहसुन और सरसों तेल का कमाल! सिलबट्टे पर बनती है मिथिला की यह खास चटनी
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मिथिलांचल में तीखा और चटपटा खाना काफी पसंद किया जाता है. यहां सिलबट्टे पर बनी हरी मिर्च, काली मिर्च और लहसुन की देसी चटनी काफी लोकप्रिय है. मिथिला स्टाइल की यह चटनी सिर्फ 5 मिनट में तैयार हो जाती है. इसमें हरी मिर्च, काली मिर्च, लहसुन और नमक को पीसकर थोड़ा कच्चा सरसों तेल मिलाया जाता है.
मधुबनी: अगर आप तीखा और चटपटा खाने के शौकीन हैं, तो मिथिलांचल की देसी हरी मिर्च की चटनी का स्वाद आपको जरूर पसंद आएगा. मिथिला क्षेत्र में सिलबट्टे पर बनाई जाने वाली यह खास चटनी लोगों के बीच काफी लोकप्रिय है. यहां के लोग इसे खासकर चावल की रोटी, मक्का की रोटी और दूसरी मोटी रोटियों के साथ खाना पसंद करते हैं.
दरअसल, हर क्षेत्र का अपना अलग खान-पान और स्वाद होता है. कहीं लोग मीठा पसंद करते हैं तो कहीं खट्टा या चटपटा खाना ज्यादा पसंद किया जाता है. मिथिलांचल के लोग खास तौर पर तीखा और मसालेदार भोजन पसंद करते हैं. यहां पकौड़े, देसी सब्जियां और पारंपरिक व्यंजनों के साथ तीखी चटनियों का भी खूब चलन है.
मिथिला की यह पारंपरिक चटनी पूरी तरह देसी तरीके से सिलबट्टे पर तैयार की जाती है. इसे बनाने के लिए हरी मिर्च, काली मिर्च, लहसुन और ज्यादा मात्रा में नमक का इस्तेमाल किया जाता है. स्थानीय भाषा में काली मिर्च को ‘मरीच’ भी कहा जाता है. इन सभी चीजों को सिलबट्टे पर अच्छी तरह पीसकर चटनी तैयार की जाती है.
चटनी तैयार होने के बाद इसमें थोड़ा कच्चा सरसों तेल भी मिलाया जाता है. हालांकि कुछ लोग बिना तेल के भी इसे खाते हैं, लेकिन सरसों तेल डालने से इसका स्वाद और खुशबू दोनों बढ़ जाते हैं. साथ ही तेल तीखेपन को थोड़ा संतुलित भी करता है.
ग्रामीण इलाकों में लोग शाम के नाश्ते में चावल की रोटी और इस तीखी चटनी का स्वाद लेना काफी पसंद करते हैं. यह चटनी बहुत कम मात्रा में खाई जाती है, क्योंकि इसका स्वाद काफी तीखा होता है. खास बात यह है कि इसे बनाने में सिर्फ 5 मिनट का समय लगता है.
स्थानीय लोगों का कहना है कि यह चटनी सिर्फ रोटी के साथ ही नहीं, बल्कि मुरही, भुजा और दूसरे हल्के नाश्ते के साथ भी काफी स्वादिष्ट लगती है. हरी मिर्च और काली मिर्च से बनी यह देसी चटनी आज भी मिथिलांचल की पारंपरिक रसोई की खास पहचान बनी हुई है.
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न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें
जस्टिस स्वर्णकांता बोलीं-मेरे और कोर्ट के खिलाफ अपमानजनक बातें कहीं: चुप नहीं रह सकती; शराब नीति घोटाला के आरोपियों पर अवमानना की कार्रवाई करूंगी
नई दिल्ली4 मिनट पहले
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13 अप्रैल को शराब नीति घोटाला मामले अरविंद केजरीवाल ने सुनवाई के दौरान कोर्ट में अपनी दलील खुद रखी थी।
दिल्ली हाईकोर्ट में गुरुवार को दिल्ली शराब नीति घोटाला मामले में सीबीआई की याचिका पर सुनवाई हुई। इस दौरान जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने कहा कि वह इस मामले से जुड़े आरोपियों और अन्य लोगों के खिलाफ अवमानना (कंटेम्प्ट) की कार्रवाई करेंगी।
उन्होंने कहा कि इस मामले पर आदेश सुनाया जाएगा। सुनवाई के दौरान जस्टिस शर्मा ने कहा-
मेरे और कोर्ट के खिलाफ कुछ आरोपियों और लोगों ने इंटरनेट पर अपमानजनक और मानहानिकारक पोस्ट की हैं। मैं इस पर चुप नहीं रह सकती। कुछ लोगों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई शुरू करूंगी।

जस्टिस स्वर्णकांता दिल्ली शराब नीति घोटाला मामले में सुनवाई कर रही हैं। मामले में ट्रायल कोर्ट से बरी होने वाले दिल्ली के पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने जज को केस से हटाने की मांग की है। केजरीवाल का आरोप है कि जस्टिस शर्मा RSS के कार्यक्रम में 4 बार शामिल हो चुकी हैं। उनसे न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है।

27 अप्रैल को अरविंद केजरीवाल ने वीडियो जारी कर जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा पर कई आरोप लगाए थे।
27 अप्रैल: केजरीवाल बोले- हाईकोर्ट में पेश नहीं होऊंगा
अरविंद केजरीवाल ने वीडियो जारी कर कहा था- ‘शराब नीति घोटाला मामले में मैं हाईकोर्ट में न खुद पेश होऊंगा और न ही कोई मेरी तरफ से दलीलें रखेगा। हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा से न्याय मिलने की उम्मीद नहीं है।
केजरीवाल ने आरोप लगाया था-
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता दोनों बच्चों को केस देते हैं। उनके बेटे को 2023 से 2025 के बीच करीब 5904 केस मिले। अगर जज के बच्चों का भविष्य सॉलिसिटर जनरल तय कर रहे हैं तो क्या जज साहिबा उनके खिलाफ फैसला सुना पाएंगी।

अरविंद केजरीवाल, मनीष सिसोदिया और आम आदमी पार्टी के नेता दुर्गेश पाठक ने जस्टिस शर्मा की कोर्ट में पेश होना बंद कर दिया है। उन्होंने न तो व्यक्तिगत रूप से और न ही वकील के जरिए अदालत में उपस्थित होने का फैसला किया।
20 अप्रैल: AAP नेताओं ने जज से हटने की मांग की थी
दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने शराब नीति केस से जुड़े पूर्व CM अरविंद केजरीवाल की उस याचिका को खारिज कर दिया था, जिसमें जज के केस से हटने की मांग की गई थी। जस्टिस स्वर्णकांता ने कहा था-
मैं इस मामले से खुद को अलग नहीं करूंगी। मैं सुनवाई करूंगी। मैं हट गई तो संदेश जाएगा कि दबाव डालकर किसी भी केस से जज हटा सकते हैं।

दरअसल, केजरीवाल ने जस्टिस स्वर्णकांता पर पक्षपात और हितों के टकराव का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा था कि जज RSS से जुड़े संगठन के कार्यक्रम में कई बार गई हैं। उनके बच्चे केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व करने वाले सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता के साथ काम करते हैं।
जस्टिस शर्मा ने केजरीवाल के आरोपों पर जवाब देते हुए कहा था- अगर कोई जज पद की शपथ लेता है तो इसका मतलब यह नहीं है कि उसका परिवार भी इस पेशे में न आने की शपथ ले। जज के बच्चे या परिवार अपनी जिंदगी कैसे जिएंगे, यह कोई भी तय नहीं कर सकता।

एमिकस क्यूरी नियुक्त करने की तैयारी
AAP नेताओं की ओर से कोई वकील पेश नहीं हो रहा था, इसलिए हाईकोर्ट ने सीनीयर एडवोकेट को ‘एमिकस क्यूरी’ यानी कोर्ट की सहायता के लिए नियुक्त करने का फैसला किया था। जस्टिस शर्मा ने कहा कि कुछ वरिष्ठ वकीलों ने इसके लिए सहमति भी दे दी है।
इस बीच कोर्ट ने कहा कि सुनवाई के दौरान उसे सोशल मीडिया और अन्य माध्यमों पर अदालत व जज के खिलाफ आपत्तिजनक सामग्री की जानकारी मिली, जिसके बाद अवमानना कार्रवाई का फैसला लिया गया।
CBI ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी
दरअसल हाईकोर्ट में सीबीआई की उस याचिका पर सुनवाई हो रही है जिसमें ट्रायल कोर्ट के फैसले को चुनौती दी गई है। ट्रायल कोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल, पूर्व डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया और 21 अन्य आरोपियों को शराब नीति मामले में डिस्चार्ज कर दिया था।
27 फरवरी को ट्रायल कोर्ट ने कहा था कि यह मामला न्यायिक जांच में टिक नहीं पाया और पूरी तरह कमजोर साबित हुआ। इसी आधार पर कोर्ट ने केजरीवाल, सिसोदिया समेत 21 लोगों को राहत दी थी।

केजरीवाल 156 दिन, सिसोदिया 530 दिन तक जेल में रहे
दिल्ली सरकार ने 2021 में राजस्व बढ़ाने और शराब व्यापार में सुधार के लिए आबकारी नीति बनाई थी, जिसे बाद में अनियमितताओं के आरोप लगने के बाद वापस ले लिया गया।
इसके बाद उपराज्यपाल विनय सक्सेना ने CBI जांच के आदेश दिए थे। CBI और प्रवर्तन निदेशालय (ED) का आरोप है कि इस नीति के जरिए निजी कंपनियों को लाभ पहुंचाया गया और इसमें भ्रष्टाचार हुआ।
इस मामले में केजरीवाल को 2024 लोकसभा चुनाव के दौरान गिरफ्तार कर हिरासत में भेजा गया था। उन्हें 156 दिन की हिरासत के बाद सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली। वहीं सिसोदिया इस मामले में 530 दिन तक जेल में रहे।
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जज से बहस वाले वीडियो पर केजरीवाल को नोटिस, हाईकोर्ट ने पूछा- सबसे पहले अपलोड किसने किया

दिल्ली हाईकोर्ट ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए पूर्व CM अरविंद केजरीवाल को नोटिस जारी किया। याचिका बिना इजाजत कोर्ट की कार्यवाही रिकॉर्ड करने और उसे सोशल मीडिया पर सर्कुलेट करने को लेकर है। कोर्ट ने सभी वीडियो डिलीट करने और लिंक हटाने के निर्देश दिए हैं। पूरी खबर पढ़ें…
P-टाइप या N-टाइप? कौन सा सोलर पैनल है बेहतर? छत पर लगाने से पहले समझें पूरा गणित
सोलर पैनल आजकल बिजली का नया और लोकप्रिय स्त्रोत बनकर उभरा है। सरकार के सोलर मिशन की वजह से पारंपरिक पावरग्रिड का लोड सोलर पैनल से पैदा होने बिजली की वजह से कम हो रहा है। यही कारण है कि लोग अपने घर की छतों पर सोलर पैनल लगा रहे हैं, ताकि बिजली का बिल न के बराबर आए। हालांकि, सोलर सिस्टम लगाने का खर्च ज्यादा आता है, जिसकी वजह से सरकार इस पर सब्सिडी भी दे रही है। अगर, आप भी अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगाना चाहते हैं तो इसके टाइप और क्षमता के बारे में आपको पता होना चाहिए।
P-टाइप और N-टाइप सोलर पैनल
इन दिनों मार्केट में दो तरह- P टाइप और N- टाइप के सोलर पैनल उपलब्ध हैं। ये दोनों ही पैनल अलग-अलग टेक्नोलॉजी पर काम करती हैं, जिसकी वजह से इनकी कीमत और क्षमता में अंतर है। इन दोनों पैनल में से आपको किसका चुनाव करना चाहिए, इसके बारे में जानते हैं….
P- टाइप सोलर पैनल में सिलिकन और बोरॉन के बीच केमिकल रिएक्शन होता है, जिसकी वजह से इलेक्ट्रिसिटी जेनरेट होती है। यह सोलर पैनल आपको बाजार में आसानी से मिल जाएगा। वहीं, N टाइप सोलर पैनल में सिलिकन के साथ फास्फोरस का केमिकल रिएक्शन होता है। ये सोलर पैनल आसानी से नहीं मिलते हैं। केवल कुछ चुनिंदा कंपनियां ही N- टाइप का सोलर पैनल बनाती हैं।
N टाइप सोलर पैनल
कौन सा सोलर पैनल है बेहतर?
P- टाइप सोलर पैनल में इस्तेमाल किया गया बोरॉन हवा में मौजूद ऑक्सीजन के साथ रिएक्ट होकर बोरॉन-ऑक्सीजन डिफेक्ट क्रिएट करता है। इस डिफेक्ट की वजह से सोलर पैनल में LID यानी लाइट इंड्यूस्ड डिग्रेडेशन क्रिएट होता है, जो पैनल की क्षमता को परमानेंट डिग्रेड यानी कम कर देती है। जैसे ही P टाइप सोलर पैनल पहली बार धूप के संपर्क में आता है, इसमें LID क्रिएट हो जाता है। इसी वजह से इसकी परफॉर्मेंस समय के साथ धीरे-धीरे कम होती जाती है।
N- टाइप सोलर पैनल में बोरॉन नहीं होता है, जिसकी वजह से LID केवल नाम मात्र का होता है, जिसकी वजह से पुराने होने पर भी इसकी क्षमता बरकरार रहती है। P- टाइप पैनल को एक बार इंस्टॉल करने के बाद 10 साल तक अच्छी बिजली पैदा की जा सकती है। वहीं, N टाइप पैनल से आप कम से कम 12 साल तक बिजली पैदा कर सकते हैं। क्योंकि इनमें डिग्रेडेशन न के बराबर होता है, इसलिए ये लंबे समय तक यूज किए जा सकते हैं।
P टाइप सोलर पैनल
कौन सा सोलर पैनल घर पर लगाएं?
P टाइप और N टाइप सोलर पैनल की परफॉर्मेंस की बात करें तो N टाइप में आपको बेहतर पावर जेनरेशन देखने को मिलता है। साथ ही, यह लंबे समय तक इस्तेमाल किया जा सकता है। हालांकि, इसकी कीमत P टाइप के मुकाबले बहुत ज्यादा होती है। N टाइप वाले सोलर पैनल खास तौर पर कमर्शियली और पावरग्रिड के लिए यूज होते हैं। वहीं, P टाइप वाले पैनल की कैपेसिटी N टाइप के मुकाबले 4% तक ही कम होती है। अफोर्डेबल और आसानी से उपलब्ध होने की वजह से इन्हें घरों की छतों पर लगाना फायदेमंद साबित हो सकता है।
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डॉलर के आगे कमजोर पड़ता रुपया, मई के आखिर तक क्या हो सकता है हाल?
भारतीय रुपया गुरुवार 14 मई के कारोबारी सेशन में अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरकर अपने नए रिकॉर्ड निचले स्तर 95.93 पर पहुंच गया है. भारतीय रुपया 1 महीने में 3 रुपये कमजोर हुआ है और 27 फरवरी के बाद से अब तक करीब 5 रुपये कमजोर हुआ है. विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली, डॉलर की मजबूती और सुरक्षित निवेश की बढ़ती मांग के कारण रुपये पर दबाव बढ़ता दिख रहा है.
हालांकि, सुबह के कारोबार में रिकॉर्ड निचले स्तर पर पहुंचने के बाद रुपये में कुछ सुधार देखने को मिला. ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के मुताबिक, भारत विदेशी बॉन्ड निवेशकों पर लगने वाले टैक्स में कटौती पर विचार कर रहा है, ताकि विदेशी निवेश बढ़ सके और रुपये को सहारा मिल सके.
मिडिल ईस्ट टेंशन का असर
अमेरिका और ईरान के बीच मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के बाद भारतीय रुपये पर लगातार दबाव देखने को मिल रहा है. इस युद्ध की शुरुआत के बाद से रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले करीब 5% कमजोर हो चुका है. 2 मार्च को रुपया जहां करीब 91.67 के स्तर पर था, वहीं गुरुवार को यह गिरकर रिकॉर्ड निचले स्तर तक पहुंच गया.
जियोपॉलिटिकल तनाव बढ़ने पर निवेशक आमतौर पर सुरक्षित निवेश ऑप्शन की तरफ रुख करते हैं. इसी वजह से डॉलर, अमेरिकी ट्रेजरी और अन्य सुरक्षित एसेट्स की मांग बढ़ रही है, जबकि उभरते बाजारों और उनकी मुद्राओं से निवेशक दूरी बना रहे हैं.
Investing.com के आंकड़ों के मुताबिक, पिछले तीन महीनों में रुपया करीब 6% कमजोर हुआ है. वहीं, सिर्फ पिछले एक हफ्ते में ही इसमें लगभग 2% की गिरावट दर्ज की गई है, जिसकी बड़ी वजह बढ़ते वैश्विक तनाव और बाजार में बढ़ी अनिश्चितता मानी जा रही है.
कच्चे तेल का असर
कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों का असर भी रुपये पर साफ दिखाई दे रहा है. भारत अपनी जरूरत का ज्यादातर कच्चा तेल विदेशों से खरीदता है। ऐसे में तेल महंगा होने पर आयात के लिए ज्यादा डॉलर खर्च करने पड़ते हैं, जिससे अमेरिकी डॉलर की मांग बढ़ जाती है और रुपया कमजोर होता है.
विदेशी निवेशक बना रहे बाजारों से दूरी
सोना, चांदी, खाद और धातुओं के इंपोर्ट भी महंगे हो गए हैं. ग्लोबल सप्लाई से जुड़ी दिक्कतों और बढ़ती कीमतों के कारण भारत का इंपोर्ट बिल लगातार बढ़ रहा है. वहीं, विदेशी निवेशक भी भारतीय बाजारों से पैसा निकाल रहे हैं. वे भारतीय शेयर और बॉन्ड बेचकर डॉलर में रकम वापस ले जा रहे हैं, जिससे रुपये पर और दबाव बढ़ता दिख रहा है.
भारतीय रुपया में मई अंत तक दिख सकता है ये लेवल
CNBC की रिपोर्ट के अनुसार, केडिया कमोडिटी कॉमट्रेड प्राइवेट लिमिटेड के संस्थापक और निदेशक के अजय केडिया के मुताबिक, पिछले एक साल में रुपये में करीब 14% की गिरावट देखने को मिली है. उनका मानना है कि मई के अंत तक डॉलर के मुकाबले रुपया 96.40 के रेजिस्टेंस लेवल तक पहुंच सकता है. यानी अभी आने वाले हफ्ते में और गिरावट हावी हो सकती है.
मैं चुप नहीं रह सकती…केजरीवाल पर फैसला देने से पहले जस्टिस शर्मा बोलीं?
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Arvind Kejriwal News: दिल्ली शराब नीति से जुड़े अरविंद केजरीवाल समेत 22 आरोपियों को अरोपमुक्त करने के मामले में गुरुवार को जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा की अदालत फैसला देगी. यह फैसला कोर्ट में न्यायमित्र की नियुक्ति को लेकर होगा. इस मामले की सुनवाई के दौरान जब कोर्ट के सामने कुछ तथ्य आए तो जस्टिस शर्मा ने कहा कि मैं चुप नहीं रह सकती हूं… ये कहने के पीछे की क्या वजह है जानने के लिए पढ़ें पूरी रिपोर्ट
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा न्यायमित्र नियुक्त करने पर गुरुवार को देंगी फैसला
नई दिल्ली. दिल्ली की नई शराब नीति से जुड़े सीबीआई के मामले में गुरुवार को दिल्ली हाईकोर्ट में अहम सुनवाई हुई. यह मामला उस ट्रायल कोर्ट के आदेश से जुड़ा है, जिसमें मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत 23 लोगों को आरोपमुक्त कर दिया गया था. सीबीआई ने इसी आदेश को चुनौती देते हुए दिल्ली हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया है.
सीबीआई की अपील पर दिल्ली हाईकोर्ट में जस्टिस स्वर्ण कांता शर्मा की बेंच में सुनवाई शुरू हुई. सुनवाई के दौरान अदालत ने साफ किया कि यह मामला सिर्फ कानूनी बहस तक सीमित नहीं रह गया है बल्कि अदालत और न्यायिक प्रक्रिया की गरिमा से भी जुड़ गया है.
जस्टिस स्वर्णकांता शर्मा ने क्या कहा?
सुनवाई के बीच जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा ने एक अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि मैं चुप नहीं रह सकती… उन्होंने कोर्ट में बताया कि आज उन्हें एमिकस क्यूरी (न्याय मित्र) के नामों की घोषणा करनी थी. उन्होंने कहा कि उन्होंने इस संबंध में प्रयास किए और कुछ वरिष्ठ वकील एमिकस बनने के लिए सहमत भी हो गए हैं.
यह मामला साधारण आपराधिक अपील का नहीं रहा: जस्टिस स्वर्णकांता
लेकिन इसी बीच उन्हें जानकारी मिली कि कुछ प्रतिवादियों द्वारा उनके खिलाफ अत्यंत मानहानिकारक कंटेंट सोशल मीडिया या अन्य प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किया गया है. जस्टिस शर्मा ने कहा कि यह मामला अब सिर्फ एक साधारण आपराधिक अपील का नहीं रहा, बल्कि न्यायालय की अवमानना से जुड़ा गंभीर मुद्दा बन गया है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि वह इस तरह की मानहानिकारक सामग्री पर चुप नहीं रह सकतीं.
जस्टिस स्वर्णा कांता शर्मा ने कहा कि उन्होंने कुछ प्रतिवादियों और अवमानना करने वालों के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई करने का निर्णय लिया है. अदालत ने संकेत दिया कि न्यायपालिका के खिलाफ की गई ऐसी टिप्पणियां और पोस्ट न केवल अदालत की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंचाती हैं, बल्कि न्यायिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश भी हो सकती हैं.








