Wednesday, October 21, 2026
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जर्मनी में फंसी अहमदाबाद की 5 साल की बच्ची: 7 महीने की उम्र में माता-पिता से अलग हुई; क्या अरिहा को वापस ला पाएंगे अमित शाह


12 मिनट पहले

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माता-पिता के साथ खेलती अरिहा की फाइल फोटो।

गुजरात की रहने वाली अरिहा को 7 महीने की उम्र में जर्मनी की चाइल्ड सर्विसेज अपने साथ ले गई थी। अब अरिहा 5 साल की हो चुकी है और अपने माता-पिता के बिना रह रही है। वह अब तक भारत नहीं लौट पाई है।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने 17 अक्टूबर को अहमदाबाद के पालडी में जैनाचार्य गच्छाधिपति उदयप्रभ सूरीश्वरजी महाराज साहेब से मुलाकात कर उनका आशीर्वाद लिया। दोनों के बीच करीब 20 मिनट तक बातचीत हुई। इस दौरान जर्मनी में रह रही अहमदाबाद के जैन परिवार की बेटी अरिहा का मुद्दा भी उठा। अमित शाह ने अरिहा को वापस लाने का वादा किया।

आखिर अरिहा जर्मनी में क्यों है? पीएम नरेंद्र मोदी के प्रयासों के बावजूद जर्मनी उसे भारत को क्यों नहीं सौंप रहा है? उसे वापस लाने में आगे क्या चुनौतियां हैं? आइए, समझते हैं…

सवाल-1: पूरा मामला क्या है?

जवाब: अहमदाबाद के रहने वाले भावेश शाह आईटी प्रोफेशनल हैं। वे अगस्त 2018 में पत्नी धारा शाह के साथ जर्मनी गए थे। दोनों वहां बसने की कोशिश कर रहे थे। इसी दौरान धारा की डिलीवरी का समय आया, लेकिन कोरोना महामारी के कारण वे भारत नहीं लौट सकीं। फरवरी 2021 में जर्मनी में उनकी बेटी अरिहा का जन्म हुआ।

भावेश और धारा जर्मनी में स्थायी रूप से नहीं रहना चाहते थे। उनकी योजना कुछ साल बाद भारत लौटने की थी। इसलिए उन्होंने अरिहा का भारतीय पासपोर्ट बनवाया।

कुछ समय बाद अरिहा के दादा-दादी भी उससे मिलने जर्मनी पहुंचे। एक दिन दादी अरिहा के साथ खेल रही थीं, तभी उन्होंने उसके प्राइवेट पार्ट के पास खून देखा। वे घबरा गईं, लेकिन उन्होंने घर में किसी को इसकी जानकारी नहीं दी। करीब एक हफ्ते बाद दोबारा खून निकलने की घटना हुई।

बेटी अरिहा के साथ मां धारा शाह (जर्मनी की फाइल फोटो)

बेटी अरिहा के साथ मां धारा शाह (जर्मनी की फाइल फोटो)

धारा शाह 17 सितंबर 2021 को अरिहा का डायपर बदल रही थीं। इस दौरान उन्हें उसके प्राइवेट पार्ट के पास खून दिखा। वे पति के साथ तुरंत बच्ची को अस्पताल ले गईं। एक बाल रोग विशेषज्ञ समेत 4-5 डॉक्टरों ने उसकी जांच की। डॉक्टरों ने कहा कि चिंता की कोई बात नहीं है और यह हार्मोनल ब्लीडिंग है।

इसके बावजूद माता-पिता की चिंता बनी रही। इसलिए 21 सितंबर 2021 को वे फिर अस्पताल पहुंचे। धारा शाह सुबह 11 बजे अस्पताल पहुंचीं। शाम करीब 7 बजे डॉक्टर अरिहा को इलाज के लिए अंदर ले गए। डॉक्टर ने बताया कि बच्ची के प्राइवेट पार्ट के बाहरी हिस्से में चोट है और टांके लगाने पड़ सकते हैं।

इस पर धारा शाह उलझन में पड़ गईं। एक महिला सर्जन ने कहा कि टांके लगाने की जरूरत नहीं है, जबकि दूसरे डॉक्टर ने टांके लगाने की सलाह दी। दोनों की अलग-अलग राय सुनकर धारा ने पति भावेश शाह को फोन किया। उन्होंने कहा कि वे अस्पताल आकर डॉक्टर से बात करेंगे।

नर्स ने बताया कि डॉक्टर सुबह मिलेंगे, इसलिए धारा को रात में अस्पताल में रुकना होगा। 22 सितंबर को भावेश और धारा डॉक्टर से मिलने पहुंचे। उस समय एक नर्स अरिहा की देखभाल कर रही थी।

पिता भावेशभाई के साथ खेलती अरिहा (फाइल फोटो)

पिता भावेशभाई के साथ खेलती अरिहा (फाइल फोटो)

यहीं से मामला बदल गया। जब अरिहा के माता-पिता डॉक्टरों से मिलने पहुंचे, तो वहां दो टीमें मौजूद थीं। एक डॉक्टरों की और दूसरी चाइल्ड सर्विसेज की थी। यह संस्था बच्चों की देखभाल और सुरक्षा से जुड़े मामलों को देखती है।

चाइल्ड सर्विसेज के अधिकारियों को जर्मन भाषा आती थी। अरिहा के माता-पिता ने गुजराती या हिंदी अनुवादक मांगा, लेकिन अस्पताल ने उन्हें उर्दू-पंजाबी जानने वाला पाकिस्तानी ट्रांसलेटर दिया। आरोप है कि इससे बातचीत में गलतफहमी हुई। माता-पिता कुछ कहते थे, लेकिन ट्रांसलेटर उसका अलग मतलब बताता था। डॉक्टरों ने कहा कि मामले में पुलिस को भी शामिल करना पड़ेगा।

इसके बाद डॉक्टरों ने माता-पिता से पूछा कि बच्ची के प्राइवेट पार्ट में चोट कैसे लगी। उस समय अरिहा 7 महीने की थी और चीजों को पकड़कर खड़े होने की कोशिश करती थी। माता-पिता ने आशंका जताई कि डायपर के बिना खेलते समय वह किसी खिलौने या दूसरी चीज पर बैठ गई होगी।

धारा शाह ने डॉक्टरों से पूछा कि क्या बच्ची ठीक है। डॉक्टरों ने कहा कि वह ठीक है, लेकिन उन्हें अस्पताल में रुकना होगा। धारा दूसरी रात भी अरिहा के साथ अस्पताल में रहीं।

23 सितंबर को धारा और भावेश शाह फिर डॉक्टरों से मिलने पहुंचे। डॉक्टरों ने बताया कि अरिहा की हालत ठीक है और उसे अस्पताल से छुट्टी दी जा रही है, लेकिन वह माता-पिता के साथ घर नहीं जा सकती। उसे फोस्टर केयर में भेजा जाएगा। फोस्टर केयर ऐसी व्यवस्था है, जिसमें बच्चे की देखभाल माता-पिता से अलग की जाती है।

जब अरिहा नर्स के पास थी, तब चाइल्ड सर्विसेज के अधिकारी उसे लेकर जा चुके थे। इसके बाद से उसके माता-पिता की मुश्किलें शुरू हो गईं।

सवाल-2: जर्मनी में अरिहा के माता-पिता को किन समस्याओं का सामना करना पड़ा?

जवाब: चाइल्ड सर्विसेज के अधिकारी 7 महीने की अरिहा को अपने साथ ले गए। माता-पिता का आरोप है कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं दी गई और न ही उनसे पूछा गया। जब उन्होंने डॉक्टरों से पूछा कि बच्ची को उनके साथ क्यों नहीं भेजा गया, तो डॉक्टरों ने कहा कि मेडिकल रिपोर्ट आने तक वे कुछ नहीं बता सकते।

भावेश और धारा शाह के लिए यह बड़ा झटका था। अरिहा मां का दूध पीती थी। उन्हें चिंता थी कि बच्ची की देखभाल कौन करेगा। इसके बाद उन्होंने स्थानीय यूनियन से मदद मांगी। वहां उन्हें भारतीय दूतावास को जानकारी देने और जरूरत पड़ने पर एडवोकेट करने की सलाह मिली।

माता-पिता ने एडवोकेट किया। चार दिन बाद एडवोकेट ने उन्हें बताया कि डॉक्टरों को शक है कि उन्होंने बच्ची का यौन शोषण किया है। इसी वजह से अरिहा को उनके साथ नहीं भेजा जा सकता।

करीब तीन महीने बाद मेडिकल रिपोर्ट आई। माता-पिता के मुताबिक, अस्पताल के डॉक्टरों ने चाइल्ड सर्विसेज को अलग रिपोर्ट दी थी, जिसमें कहा गया था कि बच्ची के साथ यौन शोषण नहीं हुआ। इससे बच्ची को फोस्टर केयर में भेजने के आधार पर सवाल उठने लगे।

पुलिस ने भी जांच बंद कर दी और मामला अदालत तक नहीं पहुंचा। माता-पिता को उम्मीद थी कि अब उन्हें बेटी वापस मिल जाएगी, लेकिन ऐसा नहीं हुआ।

इसके बाद अरिहा के माता-पिता ने उन दूसरे परिवारों से संपर्क किया, जिनके बच्चों को चाइल्ड सर्विसेज ने अपने संरक्षण में लिया था। इन परिवारों ने उन्हें मेडिकल रिपोर्ट हासिल करने की सलाह दी। काफी कोशिशों के बाद नवंबर 2022 में करीब 13 महीने बाद उन्हें रिपोर्ट मिली।

माता-पिता ने यह रिपोर्ट भारत और अमेरिका के डॉक्टरों को दिखाई। उनके मुताबिक, डॉक्टरों ने बच्ची की जांच के तरीके पर सवाल उठाए। रिपोर्ट में वजाइनोस्कोपी, यूरेटेरोस्कोपी और सिस्टोस्कोपी जैसी जांचों का जिक्र था। माता-पिता का कहना है कि इतनी छोटी बच्ची की ये जांच क्यों की गईं और उनका क्या असर हुआ, इसकी जांच होनी चाहिए थी।

जर्मनी में चाइल्ड सर्विसेज को युगेंडआम्ट कहा जाता है। देश के अलग-अलग शहरों में ऐसे केंद्र हैं, जहां हजारों विदेशी बच्चों को जर्मन रीति-रिवाज और भाषा सिखाई जाती है।

जर्मनी में चाइल्ड सर्विसेज को युगेंडआम्ट कहा जाता है। देश के अलग-अलग शहरों में ऐसे केंद्र हैं, जहां हजारों विदेशी बच्चों को जर्मन रीति-रिवाज और भाषा सिखाई जाती है।

इस बीच, जर्मनी की चाइल्ड सर्विसेज, जिसे वहां यूगेंडआम्ट कहा जाता है, ने माता-पिता के अधिकार खत्म करने की कानूनी प्रक्रिया जारी रखी। मामला फैमिली कोर्ट पहुंचा। अदालत ने भावेश और धारा शाह की मनोवैज्ञानिक जांच कराने का फैसला किया, ताकि पता चल सके कि वे बच्ची की देखभाल कर सकते हैं या नहीं।

कोर्ट ने एक मनोवैज्ञानिक नियुक्त किया। उन्होंने माता-पिता से करीब 11 घंटे बातचीत की, लेकिन रिपोर्ट देने में एक साल लगा दिया। माता-पिता के मुताबिक, रिपोर्ट में उनकी मानसिक स्थिति सामान्य बताई गई थी।

इसके बावजूद चाइल्ड सर्विसेज ने दलील दी कि अरिहा ने भारतीय संस्कृति में सिर्फ 7 महीने बिताए हैं और अब वह जर्मन संस्कृति में पल रही है। इसलिए उसे वहां से हटाना ठीक नहीं होगा और उसकी देखभाल चाइल्ड सर्विसेज की निगरानी में ही होनी चाहिए।

अदालत की ओर से नियुक्त विशेषज्ञ ने माता-पिता के पक्ष में रिपोर्ट दी थी। उनके मुताबिक, अरिहा अपने माता-पिता से ज्यादा जुड़ी हुई थी। इसलिए उसके विकास के लिए निगरानी में उसे माता-पिता के साथ रहने देना चाहिए था।

फरवरी-मार्च 2023 में कोर्ट में दो दिन तक करीब 10-10 घंटे सुनवाई हुई। माता-पिता के मुताबिक, इस दौरान जज ने उन्हें अरिहा की चोट के बारे में दलील देने की अनुमति नहीं दी।

13 जून 2023 को कोर्ट ने फैसला सुनाया। माता-पिता का आरोप है कि कोर्ट ने अपने नियुक्त विशेषज्ञ की राय नहीं मानी और अरिहा की कस्टडी चाइल्ड सर्विसेज को सौंप दी।

सवाल-3: भारत सरकार ने अरिहा को वापस लाने के लिए क्या प्रयास किए?

जवाब: अरिहा को भारत वापस लाने के लिए जैन समाज, भारत सरकार और विपक्षी दलों के नेताओं ने प्रयास किए हैं।

दिसंबर 2022: विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने जर्मनी की विदेश मंत्री एनालेना बेयरबॉक के सामने अरिहा के मामले पर चिंता जताई।

अगस्त 2023: भारत सरकार ने जर्मनी के राजदूत फिलिप एकरमैन को तलब किया। उस समय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता अरिंदम बागची ने कहा था कि बच्ची को भारत की सांस्कृतिक, सामाजिक और धार्मिक पहचान से जुड़े माहौल में रहने का अवसर मिलना चाहिए।

जनवरी 2026: जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज के भारत दौरे के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भी अरिहा का मुद्दा उठाया।

जनवरी 2026: भारत के विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने बताया कि भारत सरकार अरिहा शाह के मामले में जर्मनी के अधिकारियों के संपर्क में है।

जनवरी 2026 में जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज भारत आए थे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके सामने बेबी अरिहा का मुद्दा उठाया था।

जनवरी 2026 में जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज भारत आए थे। इस दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उनके सामने बेबी अरिहा का मुद्दा उठाया था।

इसके अलावा, 19 राजनीतिक दलों के 59 सांसदों ने भी अरिहा के समर्थन में आवाज उठाई। सांसदों ने जर्मन राजदूत को पत्र लिखकर बच्ची को भारत वापस लाने का मुद्दा उठाया।

महाराष्ट्र के तत्कालीन सीएम एकनाथ शिंदे ने भी विदेश मंत्री एस. जयशंकर को लेटर लिखकर अरिहा के मामले में सख्त कदम उठाने की मांग की थी।

भारत सरकार लगातार प्रयास कर रही है, लेकिन अब तक अरिहा की वापसी नहीं हो सकी है। इस मामले में जर्मनी की चाइल्ड सर्विसेज की भूमिका और बच्ची को भारतीय संस्कृति से जुड़े माहौल में रखने का मुद्दा लगातार उठाया जाता रहा है।

सवाल-4: जर्मनी की चाइल्ड सर्विसेज पर किन नियमों के उल्लंघन के आरोप हैं?

जवाब: जर्मनी में चाइल्ड सर्विसेज को युगेंडआम्ट कहा जाता है। आरोप है कि चाइल्ड सर्विसेज सभी नियमों का उल्लंघन कर रही है। अरिहा की कस्टडी किसे दी जाए, यह तय करने का अधिकार जर्मन चाइल्ड सर्विसेज के पास है। फिलहाल जर्मनी में अरिहा के मामले में कोई सक्रिय कानूनी प्रक्रिया नहीं चल रही है, लेकिन चाइल्ड सर्विसेज की मनमानी जारी है।

  • भारतीय नागरिक होने के बावजूद अरिहा से किसी भी भारतीय को मिलने की अनुमति नहीं है।
  • अरिहा को भारतीय त्योहार मनाने की भी अनुमति नहीं है।
  • बर्लिन स्थित भारतीय दूतावास को यह जानकारी नहीं दी जाती कि अरिहा को कहां रखा गया है, उसकी स्थिति कैसी है और वह किन लोगों के साथ रह रही है।
  • अरिहा पूरी तरह से जर्मन व्यवस्था में अलग-थलग है।
  • अरिहा 5 साल की है। अक्टूबर 2025 तक उसके फोस्टर केयर यानी पालन-पोषण करने वाले परिवार पांच बार बदल चुके थे।
  • चार-पांच साल की उम्र में बार-बार घर और देखभाल करने वाले लोगों के बदलने से बच्ची को मानसिक तनाव हो सकता है।
  • आरोप है कि जर्मनी अरिहा को न उसके अधिकार दे रहा है, न लंबे समय की सुरक्षा और न ही भावनात्मक स्थिरता।

वे संयुक्त राष्ट्र के बाल अधिकार समझौते (UNCRC) का भी हवाला देते हैं। भारत और जर्मनी दोनों इस समझौते के पक्षकार हैं। इसमें बच्चों के अधिकारों और उनकी सांस्कृतिक पहचान के संरक्षण पर जोर दिया गया है। अरिहा के माता-पिता का कहना है कि उनकी बेटी को भारतीय संस्कृति से दूर रखकर इन अधिकारों की भावना के खिलाफ काम किया जा रहा है।

जर्मनी में बच्चों को परिवार से अलग क्यों किया जाता है?

जर्मनी में बच्चों की सुरक्षा के लिए चाइल्ड सर्विसेज और फोस्टर केयर की व्यवस्था है। अगर अधिकारियों को लगता है कि किसी बच्चे की सुरक्षा खतरे में है, तो उसे परिवार से अलग कर फोस्टर केयर में रखा जा सकता है। हालांकि, ऐसे फैसलों की कानूनी समीक्षा और परिवार के अधिकार भी जरूरी होते हैं।

जर्मनी के इतिहास में नाजी शासन के दौरान बच्चों को उनके परिवारों से अलग किया गया था। द्वितीय विश्व युद्ध के बाद बने संविधान और कानूनों में बच्चों और परिवारों के अधिकारों की सुरक्षा पर जोर दिया गया।

जर्मनी के फोस्टर केयर (बच्चों की देखभाल करने वाले केंद्रों) में बच्चे अकेले पड़ जाते हैं। उनकी जिंदगी मशीन जैसी बनकर रह जाती है।

जर्मनी के फोस्टर केयर (बच्चों की देखभाल करने वाले केंद्रों) में बच्चे अकेले पड़ जाते हैं। उनकी जिंदगी मशीन जैसी बनकर रह जाती है।

अरिहा के माता-पिता का दावा है कि जर्मनी में हर साल हजारों बच्चों को उनके परिवारों से अलग किया जाता है। इनमें बड़ी संख्या प्रवासी परिवारों के बच्चों की होती है। उन्होंने तुर्किये, रोमानिया और कोलंबिया के उन परिवारों के उदाहरण भी दिए, जिनके बच्चों को लेकर जर्मनी में विवाद हुए थे।

उनका कहना है कि दूसरे देशों के लोगों और नेताओं के विरोध के बाद कुछ मामलों में बच्चों को उनके परिवारों को वापस सौंपा गया। वे चाहते हैं कि भारत सरकार भी अरिहा की वापसी के लिए ठोस कदम उठाए।

इस मामले की तुलना फिल्म मिसेज चटर्जी वर्सेज नॉर्वे से भी की जाती है। यह फिल्म एक भारतीय मां की कहानी है, जो नॉर्वे में अपने बच्चों की कस्टडी वापस पाने के लिए संघर्ष करती है। हालांकि, फिल्म में दिखाए गए मामले और अरिहा के मामले की कानूनी परिस्थितियां अलग हो सकती हैं।

अरिहा के माता-पिता का कहना है कि उन्हें अब भी अपनी बेटी के रहने की जगह और उसकी मौजूदा स्थिति के बारे में पर्याप्त जानकारी नहीं मिलती है।

जर्मनी में भी वहां के लोग चाइल्ड सर्विसेज की नीतियों का विरोध कर चुके हैं।

जर्मनी में भी वहां के लोग चाइल्ड सर्विसेज की नीतियों का विरोध कर चुके हैं।

सवाल-5: अरिहा अभी कहां है और उसे भारत वापस लाने का रास्ता क्या है?

जवाब: अरिहा के माता-पिता भावेश और धारा शाह का कहना है कि उन्हें नहीं बताया जाता कि उनकी बेटी कहां रह रही है। उनका आरोप है कि जर्मनी में भारतीय दूतावास को भी अरिहा की मौजूदा स्थिति की पूरी जानकारी नहीं दी जाती।

शुरुआत में अरिहा को एक बुजुर्ग जर्मन महिला के पास रखा गया था। बाद में उसे एक चिल्ड्रन सेंटर में भेज दिया गया। माता-पिता का दावा है कि यह सेंटर मानसिक दिव्यांग बच्चों की देखभाल के लिए था। उन्होंने सवाल उठाया कि सामान्य बच्ची अरिहा को वहां क्यों रखा गया। उनके मुताबिक, उन्हें बताया गया कि बच्ची भारतीय संस्कृति से आती है।

माता-पिता का आरोप है कि अलग-अलग कारण बताकर अरिहा को उनसे और भारतीय संस्कृति से दूर रखा जा रहा है। उनका कहना है कि बच्चे को सिर्फ खाना, कपड़े और रहने की जगह देना काफी नहीं है। उसके भावनात्मक विकास और परिवार से जुड़ाव का भी ध्यान रखना जरूरी है।

अरिहा को मांसाहारी खाना खिलाने का आरोप

अरिहा के माता-पिता जैन धर्म को मानते हैं। उनका कहना है कि वे मांस, मछली और अंडे नहीं खाते। उन्होंने फोस्टर केयर से भी अनुरोध किया था कि अरिहा को ये चीजें न दी जाएं। लेकिन उनके मुताबिक, उन्हें जवाब मिला कि बच्ची को ये चीजें दी जाएंगी, क्योंकि इनमें ज्यादा पोषण होता है।

माता-पिता का कहना है कि बचपन के शुरुआती साल बच्चे के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए बहुत महत्वपूर्ण होते हैं। उन्हें चिंता है कि इस दौरान अरिहा की भाषा, खानपान और रहन-सहन पूरी तरह जर्मन माहौल के अनुसार ढल रहा है।

भारतीय परिवार के पास रखने की कोशिश, लेकिन शर्तें सख्त

जर्मनी के अधिकारी कहते रहे हैं कि अरिहा को वहां रहने वाले किसी भारतीय परिवार के पास रखने की कोशिश की जा रही है। हालांकि, उसके माता-पिता का कहना है कि ऐसे परिवार के लिए कई सख्त शर्तें रखी गई हैं।

उनके मुताबिक, परिवार की लगातार निगरानी होगी और उसकी निजी जिंदगी पर भी नियंत्रण रहेगा। पूरा परिवार एक साथ भारत नहीं जा सकेगा और परिवार की महिला सदस्य को नौकरी छोड़नी पड़ सकती है।

रोजमर्रा की जिंदगी में भी यूगेंडआम्ट का दखल रहेगा। माता-पिता का मानना है कि इन शर्तों के कारण किसी भारतीय परिवार के लिए अरिहा की देखभाल करना मुश्किल हो जाएगा।

17 अक्टूबर को गृह मंत्री अमित शाह अहमदाबाद के पालडी में जैनाचार्य का आशीर्वाद लेने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने अरिहा को जल्द भारत वापस लाने का वादा किया था।

17 अक्टूबर को गृह मंत्री अमित शाह अहमदाबाद के पालडी में जैनाचार्य का आशीर्वाद लेने पहुंचे थे। इस दौरान उन्होंने अरिहा को जल्द भारत वापस लाने का वादा किया था।

फोस्टर केयर का खर्च भी माता-पिता से मांगा गया

अरिहा के माता-पिता का कहना है कि जर्मनी की फोस्टर केयर व्यवस्था ने उन्हें सितंबर 2021 से जून 2024 तक का करीब 22 लाख रुपये का बिल भेजा था। उनके मुताबिक, इसमें हर महीने करीब 55 हजार रुपये का खर्च शामिल था। उनका दावा है कि अरिहा के 18 साल की होने तक उन्हें हर महीने यह रकम देनी पड़ सकती है।

इसके अलावा, अदालत की ओर से नियुक्त विशेषज्ञ की रिपोर्ट, अनुवादक की फीस और प्रशासनिक खर्च के लिए करीब 16 लाख रुपये का अलग बिल भी भेजा गया है।

माता-पिता का सवाल है कि जब अरिहा को उनसे अलग रखा गया है और वे उसकी देखभाल नहीं कर पा रहे हैं, तो उसकी देखभाल का इतना खर्च उनसे क्यों मांगा जा रहा है?

अब आगे क्या होगा?

अरिहा के माता-पिता का दावा है कि उनकी बेटी बर्लिन से दूर जर्मनी के एक गांव में रह रही है। वहां उसे जर्मन भाषा और संस्कृति के अनुसार पाला जा रहा है। हालांकि, यहां उपलब्ध जानकारी से उसकी मौजूदा जगह और स्थिति की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकती।

अरिहा को भारत वापस लाना उसके माता-पिता और भारत सरकार, दोनों के लिए चुनौती बना हुआ है। इसके लिए भारत को जर्मनी के साथ कानूनी और कूटनीतिक स्तर पर प्रयास करने होंगे। जर्मनी में बच्चों की कस्टडी से जुड़े फैसले कानूनी प्रक्रिया के तहत लिए जाते हैं। ऐसे में भारत सरकार के प्रयासों के साथ जर्मनी के संबंधित अधिकारियों का सहयोग भी जरूरी है।

17 अक्टूबर को अहमदाबाद के पालडी में गृह मंत्री अमित शाह ने जैनाचार्य उदयप्रभ सूरीश्वरजी महाराज साहेब से मुलाकात की थी। इस दौरान अरिहा का मुद्दा भी उठा। रिपोर्ट के मुताबिक, दोनों के बीच करीब 8 मिनट तक इस मामले पर चर्चा हुई।

अमित शाह ने कहा कि वे इस मामले की फाइलों पर नजर रख रहे हैं और गुजरात की बेटी को जल्द भारत वापस लाने का प्रयास करेंगे। उन्होंने जैन समाज को भरोसा दिलाया कि वे अरिहा की वापसी के लिए काम करेंगे।

अब देखना होगा कि भारत सरकार के कानूनी और कूटनीतिक प्रयासों से अरिहा की भारत वापसी का रास्ता कब निकलता है।

(नोट: यह घटनाक्रम अरिहा की मां धारा शाह की जैन मीडिया यूट्यूब चैनल से बातचीत पर आधारित है। इसमें लगाए गए आरोपों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि जरूरी है।)

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महानगर की रामलीला में लड़कियां निभा रहीं राम-लक्ष्मण का किरदार: दशहरे पर रावण और मेघनाद के पुतलों को जलाया – Lucknow News




लखनऊ के महानगर की 61वीं रामलीला में मंगलवार को दशहरे पर रावण और मेघनाद के पुतलों का दहन किया गया। राम के रूप में यशी लोहुमी ने रावण के पुतले को अग्नि दी, जबकि लक्ष्मण के रूप में फल्गुनी लोहुमी ने मेघनाद का पुतला जलाया। पुतला दहन के साथ ही मैदान आतिशबाजी से गूंज उठा। दशहरा मेले में भी लोगों की भीड़ जुटी। रावण की भूमिका निभा रहे भास्कर जोशी पिछले 9 साल से इस किरदार को निभा रहे हैं। उन्होंने कहा कि रावण का दहन सिर्फ एक परंपरा नहीं, बल्कि असत्य पर सत्य और बुराई पर अच्छाई की जीत का संदेश है। यह जीत हमेशा होती रही है और आगे भी होती रहेगी। 4 साल से राम, पहले सीता बनीं लखनऊ विश्वविद्यालय की बीटेक तृतीय वर्ष की छात्रा यशी लोहुमी पिछले चार साल से राम की भूमिका निभा रही हैं। इससे पहले वह चार साल सीता का किरदार निभा चुकी हैं। इसके अलावा दो साल तक छोटे-छोटे किरदार भी निभाए। यशी ने बताया कि इस बार राम के रूप में रावण और लक्ष्मण के रूप में फल्गुनी मेघनाद का पुतला दहन करेंगी। 12वीं की छात्रा बन रहीं लक्ष्मण फल्गुनी लोहुमी कक्षा 12वीं की छात्रा हैं। वह पिछले तीन साल से लक्ष्मण की भूमिका निभा रही हैं। रामलीला के दौरान उनके अभिनय को दर्शकों ने सराहा। रामलीला समिति के निदेशक महेंद्र पंत ने बताया कि वह पिछले 25 वर्षों से हनुमान और केवट की भूमिका निभा रहे हैं। उन्होंने बताया कि प्रभु श्री के अग्निबाण से रावण और लक्ष्मण के अग्निबाण से मेघनाद का पुतला दहन किया गया। इसके बाद आतिशबाजी हुई। भारत मिलाप के साथ समापन महासमिति के महासचिव हेम पंत ने बताया कि इस बार रामलीला का 61वां वर्ष है। दशहरे के बाद बुधवार को भारत मिलाप और रामदरबार के साथ रामलीला का समापन होगा। उन्होंने कहा कि आयोजन को सफल बनाने में समिति के पदाधिकारियों और सभी सदस्यों का पूरा सहयोग रहा।



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आज सिंदूर खेला के साथ मां को विदाई: एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर रस्म निभाएंगी बंगाली समाज की महिलाएं, इंदौर में 106 साल से मना रहे उत्सव – Indore News




इंदौर में बंगाली समाज की महिलाएं बुधवार को सिंदूर खेला की रस्म के साथ मां दुर्गा को विदाई देंगी। बंगाली परंपरा में मां दुर्गा को बेटी माना जाता है, जो हर साल अपने मायके आती हैं और पांच दिन तक उत्सव के बाद विदा होती हैं। दुर्गा उत्सव के अंतिम दिन महिलाएं मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित करेंगी। इसके बाद एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर सिंदूर खेला की परंपरा निभाएंगी। पूजा-अर्चना और सांस्कृतिक आयोजनों के बाद मां की विदाई की यह बेला समाज के लिए भावुक पल होगी। सार्वजनिक रूप से 98वीं बार आयोजन इंदौर में बंगाली समाज 106 वर्षों से दुर्गा उत्सव मना रहा है। सार्वजनिक रूप से यह उत्सव 98वीं बार आयोजित किए जाने की जानकारी है। पांच दिन तक चलने वाले इस आयोजन में पूजा-पाठ के साथ सांस्कृतिक और पारंपरिक कार्यक्रम होते हैं। सिंदूर खेला उत्सव का प्रमुख आकर्षण है, जिसमें महिलाएं मां दुर्गा को सिंदूर अर्पित करने के बाद एक-दूसरे को सिंदूर लगाती हैं। यह रस्म मां को बेटी के रूप में विदाई देने की परंपरा से जुड़ी है। सिंदूर खेला से जुड़ी है विदाई की परंपरा बंगाली समाज में मां दुर्गा को विवाहित बेटी के रूप में देखा जाता है, जो अपने मायके आती हैं। पांच दिन तक पूजा और उत्सव के बाद उनकी विदाई होती है। अंतिम दिन महिलाएं मां दुर्गा के चरणों में सिंदूर अर्पित करती हैं और फिर एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर शुभकामनाएं देती हैं। इसके बाद प्रतिमा विसर्जन के साथ उत्सव का समापन होता है। 1830 के दशक में इंदौर आए थे बंगाली परिवार इंदौर में बंगाली समाज की मौजूदगी का इतिहास करीब दो शताब्दी पुराना है। 1830 के दशक की शुरुआत में पश्चिम बंगाल के चंदन नगर से गणेश चंद्र दास और भगवान चंद्र दत्त इंदौर आए और यहीं बस गए। उस समय इंदौर में सूती कपड़ा उद्योग तेजी से विकसित हो रहा था। कपड़ा मिलों और उनसे जुड़े व्यवसायों में काम करने के लिए देश के अलग-अलग हिस्सों से लोग यहां आए। होलकर रियासत के दौर में बाहरी लोगों के बसने के अनुकूल माहौल ने भी बंगाली परिवारों को यहां बसने का अवसर दिया। 1918 में शुरू हुआ था दुर्गा उत्सव बंगाली परिवारों की संख्या बढ़ने के साथ इंदौर में दुर्गा पूजा की परंपरा भी शुरू हुई। वर्ष 1918 में बंगाली परिवारों ने अपने स्तर पर नवदुर्गा उत्सव मनाना शुरू किया। इसके बाद 1928 में बंगाली क्लब के बैनर तले सार्वजनिक रूप से शारदीय दुर्गा उत्सव आयोजित करने की परंपरा शुरू हुई। उस समय शहर में 125 से अधिक बंगाली परिवार रहते थे। पहले सार्वजनिक आयोजन के लिए वर्तमान सरवटे बस स्टैंड के सामने स्थित सेठ टीकमचंद मूलचंद की धर्मशाला वाले स्थान को चुना गया था। उस समय यहां खुला मैदान था। दूसरे समाजों के प्रतिष्ठित लोगों ने भी आयोजन में सहयोग दिया। तब से बंगाली समाज दुर्गा उत्सव के जरिए अपनी सांस्कृतिक परंपराओं को आगे बढ़ा रहा है।



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भारत से जल्द होगी ट्रेड डील, लेकिन स्‍ट्रक्‍चर होगा अलग, ट्रंप ने द‍िए संकेत


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भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर बातचीत तेजी से आगे बढ़ रही है. अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि दोनों देश समझौते के काफी करीब हैं, हालांकि इस बार डील का स्वरूप अलग हो सकता है. अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो के मुताबिक, समझौते को अंतिम रूप देने के लिए कुछ तकनीकी पहलुओं पर सहमति बनाना बाकी है और डील अगले कुछ हफ्तों में पूरी हो सकती है. वहीं, वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल और अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमिसन ग्रीर के बीच भी बातचीत हो चुकी है.

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जल्द ट्रेड डील कर सकते हैं.

भारत के साथ ट्रेड डील को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने भी एक बड़ी अपडेट दे दी है. डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि दोनों देशों के बीच समझौता होगा और बातचीत काफी आगे बढ़ चुकी है. जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत के साथ ट्रेड डील जल्द होने वाली है, तो उन्होंने कहा, ‘हम समझौता करेंगे, यह काफी करीब है. लेकिन इस बार डील का स्वरूप काफी अलग होगा.’ ट्रंप के इस बयान से संकेत मिलता है कि भारत-अमेरिका के बीच व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है. हालांकि, उन्होंने यह साफ नहीं किया कि नई डील में क्या बदलाव होंगे और समझौते पर कब तक मुहर लग सकती है.

हाल ही में, नेटवर्क18 के एडिटर-इन-चीफ राहुल जोशी को दिए इंटरव्यू में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने भारत और अमेरिका के बीच ट्रेड डील को लेकर अहम जानकारी दी. उन्होंने कहा कि दोनों देशों के बीच व्यापार समझौता अब काफी करीब है. इसे अंतिम रूप देने के लिए कुछ तकनीकी फैक्टर्स पर सहमति बनाना बाकी है. मार्को रूबियो के मुताबिक, किसी भी बड़े समझौते की घोषणा से पहले जरूरी है कि दोनों पक्ष हर छोटी-बड़ी बात पर सहमत हों. ऐसा नहीं होना चाहिए कि डील की घोषणा पहले कर दी जाए और बाद में पता चले कि समझौता अभी पूरा नहीं हुआ है.

जल्द हो सकती है डील

मार्को रूबियो ने कहा कि बातचीत अब ऐसे चरण में पहुंच गई है, जहां समझौते की भाषा और उसके मतलब को लेकर दोनों पक्षों की सहमति जरूरी है. उन्होंने स्पष्ट किया कि वह खुद इस बातचीत में शामिल नहीं हैं, क्योंकि इसकी जिम्मेदारी अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव की है. हालांकि, वह पूरी प्रक्रिया पर नजर बनाए हुए हैं. उन्होंने उम्मीद जताई कि भारत-अमेरिका ट्रेड डील को पूरा होने में अब महीनों नहीं, बल्कि कुछ हफ्ते लगेंगे. इस समझौते से भारत को बेहतर टैरिफ दरें मिलने की उम्मीद है. इसके साथ ही उन्होंने विदेश मंत्री एस जयशंकर के साथ बैठक के बाद भारत को तेल रिफाइनरी के क्षेत्र में महाशक्ति बताया.

ट्रेड डील पर हुई कई बैठक

इस महीने की शुरुआत में वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल ने अमेरिका के ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमिसन ग्रीर से मिलवॉकी और वॉशिंगटन में मुलाकात की थी. इस दौरान भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील की बारीकियों पर चर्चा हुई. दोनों देशों ने फरवरी में अपने द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) के पहले चरण का स्ट्रक्चर तैयार करने का ऐलान किया था. हालांकि, बाद में अमेरिका के टैरिफ में बदलाव होने के कारण बातचीत फिर से शुरू करनी पड़ी.

भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने हाल ही में नई दिल्ली में ब्लूमबर्ग न्यू इकोनॉमी फोरम में कहा था कि समझौते से जुड़े बड़े मुद्दों पर सहमति बन चुकी है और दोनों देश डील के काफी करीब हैं. विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने भी बातचीत को लेकर उम्मीद जताई थी.

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यशस्वी यादवSub Editor

यशस्वी यादव बिजनेस और फाइनेंस जर्नलिज्म से जुड़ी युवा पत्रकार हैं. उन्हें मीडिया इंडस्ट्री में करीब तीन साल का अनुभव है. फिलहाल, वह News18 हिंदी के साथ मनी सेक्शन में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. उनका फोक…

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कार-वैन में भरकर ले जा रहे थे 66किलो डोडा चूरा: पुलिस से बचने के चक्कर में पिकअप को टक्कर मारी; 2 गिरफ्तार – rajsamand (kankroli) News




राजसमंद में मादक पदार्थों की तस्करी और सप्लाई पर रोक लगाने के लिए अभियान जारी है। कार्रवाई भीम पुलिस और जिला स्पेशल टीम (डीएसटी) ने की है। पुलिस ने NH -58 पर टॉडगढ़ रोड के निकट फुतियाखेड़ा के पास नाकाबंदी के दौरान दो कारों से 66 किलोग्राम डोडा पोस्त चूरा जब्त कर दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। तस्करी में यूज ईको और ऑल्टो के-10 कार के साथ मोबाइल फोन, फर्जी नंबर प्लेट, वाहन संबंधी दस्तावेज और अन्य सामग्री भी जब्त की गई है। अब पढ़िए कैसे पकड़ में आई खेप



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बांका में नाबालिग से छेड़खानी की कोशिश: घर से बाजार जाने के लिए निकली थी लड़की, 3 आरोपी गिरफ्तार – Banka News




बांका सदर थाना की पुलिस ने नाबालिग लड़की से छेड़खानी के प्रयास मामले में त्वरित कार्रवाई करते हुए 3 आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया है। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान धनियाडीह गांव निवासी पवन कुमार और राजा कुमार तथा हाहा गांव निवासी अभिषेक कुमार के रूप में हुई है। पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद तीनों आरोपियों को न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। बाजार जाने के दौरान आरोपियों ने की थी टिप्पणी पीड़िता बाजार जाने के लिए घर से निकली थी। इसी दौरान रास्ते में तीन युवकों ने उसे रोककर कथित तौर पर आपत्तिजनक टिप्पणियां कीं और छेड़खानी का प्रयास किया। युवकों की इस हरकत से परेशान होकर लड़की ने शोर मचाना शुरू कर दिया। इसके बाद आसपास के लोगों के जुटने की आशंका को देखते हुए तीनों आरोपी मौके से फरार हो गए। घटना के बाद मामले की जानकारी पुलिस को दी गई। मामले की सूचना मिलते ही सदर थाना की पुलिस सक्रिय हो गई और आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी शुरू कर दी। पुलिस टीम ने कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने 3 आरोपियों को किया गिरफ्तार इस संबंध में सदर थानाध्यक्ष सुधीर कुमार ने बताया कि नाबालिग लड़की से छेड़खानी के प्रयास की जानकारी मिलने के बाद पुलिस ने तत्परता से कार्रवाई की। छापेमारी कर मामले में नामजद तीनों आरोपियों को गिरफ्तार किया गया। उन्होंने बताया कि आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करने के बाद सभी आरोपियों को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। पुलिस मामले में नियमानुसार आगे की कार्रवाई कर रही है।



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स्वादिष्ट और मुलायम मेथी पराठों में आता है कड़वा स्वाद, जानिये इसे कम करने के तरीके

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सर्दियों में मेथी के पराठे सेहत के लिए फायदेमंद होते हैं. इसकी कड़वाहट दूर करने के लिए मेथी पर नमक छिड़कें, हल्का उबालें या आटे में दही, बेसन और मसाले मिलाएं. ताजी मेथी का चुनाव करने से भी पराठे स्वादिष्ट बनते हैं.

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स्वादिष्ट और मुलायम मेथी पराठों में आता है कड़वा स्वाद, जानें कम करने के तरीकेZoom

मेथी के पराठों का कड़वापन ऐसे करें कम. Image AI

सर्दियों का मौसम आते ही बाजार में ताजी मेथी की भरमार दिखाई देने लगती है. मेथी के पराठे स्वाद और सेहत दोनों के लिहाज से बेहद फायदेमंद माने जाते हैं. इनमें फाइबर, आयरन और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं. हालांकि कई लोग मेथी के पराठे इसलिए पसंद नहीं करते क्योंकि उनमें हल्का कड़वापन आ जाता है. खासकर बच्चों को यह स्वाद कम पसंद आता है। अगर आप भी मेथी के पराठे बनाते समय कड़वाहट की समस्या का सामना करते हैं, तो कुछ आसान उपाय अपनाकर इन्हें और भी स्वादिष्ट बना सकते हैं.

मेथी की पत्तियों पर नमक लगाएं

मेथी का कड़वापन कम करने का सबसे आसान तरीका है कि पत्तियों को बारीक काटकर उन पर थोड़ा नमक छिड़क दें. लगभग 15-20 मिनट तक इसे ऐसे ही छोड़ दें. इसके बाद पत्तियों को हल्के हाथ से निचोड़ लें. इससे मेथी का अतिरिक्त कड़वापन काफी हद तक निकल जाता है.

मेथी को हल्का उबाल लें

यदि मेथी ज्यादा कड़वी लग रही हो तो उसे 1-2 मिनट के लिए गर्म पानी में डालकर ब्लांच कर सकते हैं. इसके बाद तुरंत ठंडे पानी में डाल दें. यह तरीका मेथी का रंग भी बनाए रखता है और स्वाद भी बेहतर करता है.

आटे में दही मिलाएं

मेथी के पराठे का स्वाद संतुलित करने के लिए आटा गूंधते समय उसमें थोड़ा दही मिलाएं. दही की हल्की खटास मेथी के कड़वेपन को कम कर देती है और पराठों को मुलायम भी बनाती है.

मसालों का करें सही इस्तेमाल

अजवाइन, सौंफ, धनिया पाउडर और हल्का सा गरम मसाला मिलाने से मेथी का स्वाद और निखर जाता है. ये मसाले कड़वाहट को संतुलित करने में मदद करते हैं और पराठों में शानदार खुशबू लाते हैं.

प्याज और हरी मिर्च डालें

बारीक कटा प्याज, हरी मिर्च और थोड़ा सा अदरक मिलाने से पराठों का स्वाद कई गुना बढ़ जाता है. प्याज की प्राकृतिक मिठास मेथी के कड़वेपन को कम करने में मदद करती है.

थोड़ा बेसन मिलाएं

गेहूं के आटे में 2-3 चम्मच बेसन मिलाने से पराठों का स्वाद और बनावट दोनों बेहतर हो जाते हैं. साथ ही मेथी का कड़वापन भी कम महसूस होता है.

ताजी मेथी का ही करें चुनाव

पुरानी और ज्यादा बड़ी पत्तियों वाली मेथी में कड़वाहट अधिक होती है. इसलिए हमेशा कोमल और ताजी हरी पत्तियों वाली मेथी चुनें. इससे पराठे स्वाभाविक रूप से कम कड़वे बनेंगे.



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दुनिया में पहली बार ड्रोन से घायल सैनिक का रेस्क्यू: यूक्रेनी सैनिक डेढ़ साल से बॉर्डर पर फंसा था, चारों तरफ बारूदी सुरंगें बिछी थीं




रूस के साथ जंग में यूक्रेन ने घायल सैनिक को बचाने के लिए ड्रोन का इस्तेमाल किया। यूक्रेनी सैनिक करीब डेढ़ साल से बारूदी सुरंग वाले इलाके में फंसा था। वहां बचाव दल भेजना खतरनाक था। इसी के चलते आयुडेग-6 नाम के ड्रोन से सैनिक को एयरलिफ्ट किया गया। ड्रोन बनाने वाली युक्रेनी कंपनी गुर्जुफ डिफेंस ने दावा किया है कि किसी घायल सैनिक को इस तरह बचाने का यह दुनिया का पहला मामला है। रेस्क्यू से जुड़ी 2 तस्वीरें ड्रोन के नीचे बांधकर सैनिक को बचाया यूक्रेन की सरकारी सैन्य न्यूज एजेंसी आर्मीइन्फॉर्म के मुताबिक, यह सैनिक 30वीं मैकेनाइज्ड ब्रिगेड का था। रूसी ड्रोन की मौजूदगी और जमीन पर बिछी बारूदी सुरंगों के कारण उसे पैदल या गाड़ी से निकालना खतरनाक था। ऐसे में यूक्रेन की ड्रोन बनाने वाली कंपनी गुरजुफ डिफेंस ने मुफ्त में ड्रोन दिया। सैनिक को एक खास बेल्ट से ड्रोन के नीचे बांधा गया और फिर हवा में उठाकर वहां से निकाला गया। इस दौरान सैनिक की ड्रोन उड़ाने वाले ऑपरेटर से लगातार बातचीत होती रही। हर साल 10 लाख सस्ते ड्रोन बना सकता है यूक्रेन रूस-यूक्रेन जंग में ड्रोन का इस्तेमाल लगातार बढ़ा है। 2023 में पहली बार यूक्रेन ने ड्रोन से मॉस्को पर हमला किया था। शुरुआत में इन हमलों में कम ड्रोन इस्तेमाल होते थे, लेकिन अब यूक्रेन लंबी दूरी तक हमला करने में सक्षम हो गया है। यूक्रेन ने सस्ते ड्रोन बनाने की क्षमता भी बढ़ाई है। ये अब हर साल करीब 10 लाख सस्ते ड्रोन बना सकता है। यूक्रेन पर रूस के हमले जारी, बिजली ठिकानों को नुकसान 19 अक्टूबर को रूस ने यूक्रेन पर बड़े स्तर पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे। रॉयटर्स के मुताबिक, रूस ने कीव और आसपास के इलाकों की ओर 16 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। इसके अलावा, देश के अलग-अलग हिस्सों में 200 से ज्यादा ड्रोन से हमले किए गए। इन हमलों में बिजली से जुड़े 10 से ज्यादा ठिकानों को नुकसान पहुंचा। यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की के मुताबिक, हमलों के कारण 5 लाख से ज्यादा घरों की बिजली चली गई। यूक्रेन के कई इलाकों में आम लोगों की जिंदगी प्रभावित हुई है। ट्रम्प समझौते के लिए यूक्रेन पर दबाव बना रहे रूस और यूक्रेन के बीच जंग करीब 4 साल से जारी है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प चाहते हैं कि यूक्रेन रूस के साथ युद्ध खत्म करने के लिए समझौता करे। इसी बीच, अमेरिकी विशेष दूत स्टीव विटकॉफ ने 20 अक्टूबर को नॉर्वे के ओस्लो में जेलेंस्की और यूरोपीय नेताओं से बातचीत की। इसके बाद विटकॉफ के 21 अक्टूबर को रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से मिलने का कार्यक्रम है। अमेरिका से मदद मिलने में देरी से यूक्रेन परेशान यूक्रेन को रूस के मिसाइल और ड्रोन हमलों से बचने के लिए अमेरिका से मिलने वाली सैन्य मदद की जरूरत है। जेलेंस्की ने हथियारों की सप्लाई में देरी और रूसी मिसाइल हमलों की पहले से जानकारी न मिलने को लेकर चिंता जताई थी। हालांकि मंगलवार को जेलेंस्की ने कहा कि अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो से बातचीत के बाद यूक्रेन को रूसी मिसाइल हमलों की पहले से जानकारी मिलने की व्यवस्था फिर शुरू हो गई है। —————— यह खबर भी पढ़ें… यूरोप के 6 देशों में शिक्षा-महंगाई पर प्रदर्शन: फ्रांस में आगजनी-लूटपाट, इटली में स्कूलों पर कब्जा किया, ग्रीस में संसद के सामने बैठे आंदोलनकारी यूरोप के 6 देशों में पढ़ाई का बढ़ता खर्च, बेरोजगारी और महंगे घरों के खिलाफ प्रदर्शन तेज हो गए हैं। फ्रांस में प्रदर्शनकारियों ने दुकानों में लूटपाट की और कई सरकारी इमारतों में आग लगा दी। पूरी खबर पढ़ें…



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डेढ़ साल की बच्ची को छठी मंजिल से फेंका: 10 साल की पड़ोसी बच्ची के खिलाफ 7 दिन बाद FIR; मुंबई की घटना CCTV में कैद


मुंबई2 घंटे पहले

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CCTV फुटेज में बच्ची के नीचे फेंकने के बाद 10 साल की बच्ची भागने हुए दिखी।

मुंबई के गोरेगांव में डेढ़ साल की बच्ची की छठी मंजिल से गिरकर मौत मामले में पुलिस ने 7 दिन बाद हत्या की FIR दर्ज की है। बच्ची की मां ने 10 साल की पड़ोसी बच्ची पर उसे नीचे फेंकने का आरोप लगाया है। पुलिस ने पहले आकस्मिक मौत का मामला दर्ज किया था।

घटना 14 अक्टूबर की रात हुई थी। पुलिस के मुताबिक, CCTV फुटेज में नाबालिग लड़की छोटी बच्ची को उठाकर रेलिंग से खुले डक्ट में धकेलती दिखाई दी। इसके बाद वह वहां से भाग गई। सोसायटी के लोग घायल बच्ची को अस्पताल ले गए।

हालांकि, डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने आरोपी नाबालिग को जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड के सामने पेश किया था। बोर्ड ने उसकी काउंसलिंग कराने के निर्देश दिए और उसे माता-पिता की देखरेख में छोड़ दिया।

घटना के बाद आरोपी बच्ची CCTV में कॉरिडोर में साइकिल चलाते और मृत बच्ची के घर में जाते हुए भी दिखाई दी। उस वक्त परिवार बच्ची को तलाश रहा था।

घटना के बाद आरोपी बच्ची CCTV में कॉरिडोर में साइकिल चलाते और मृत बच्ची के घर में जाते हुए भी दिखाई दी। उस वक्त परिवार बच्ची को तलाश रहा था।

बिल्ली के साथ खेल रही थी डेढ़ साल की बच्ची

FIR के मुताबिक, घटना गोरेगांव ईस्ट की शिवशाही बिल्डिंग में रात करीब 9 से 9:30 बजे के बीच हुई थी। मां के मुताबिक, उनकी 18 महीने की बेटी छठी मंजिल पर घर के बाहर कॉमन कॉरिडोर में एक बिल्ली के साथ खेल रही थी।

कुछ देर बाद बच्ची दिखाई नहीं दी, तो मां ने उसके 12 साल के भाई को तलाशने भेजा। भाई को वह नहीं मिली। उसने सीढ़ियों के खुले डक्ट में नीचे देखा, जहां उसे अपनी बहन जैसे कपड़े पहने बच्ची पड़ी दिखाई दी। उसने तुरंत मां को बताया।

CCTV फुटेज में बच्ची का भाई अपनी मां को बुलाकर लाता दिखा। इसके बाद परिवार को बच्ची के नीचे गिरने का पता चला।

CCTV फुटेज में बच्ची का भाई अपनी मां को बुलाकर लाता दिखा। इसके बाद परिवार को बच्ची के नीचे गिरने का पता चला।

मां का आरोप- साढ़े तीन फीट ऊंची रेलिंग, बच्ची खुद नहीं गिरी

मां ने पुलिस को बताया कि छठी मंजिल की रेलिंग करीब साढ़े तीन फीट ऊंची है, इसलिए बच्ची का अपने आप गिरना संभव नहीं था।

उनका आरोप है कि CCTV फुटेज में पड़ोस की बच्ची छोटी बच्ची को इशारा करके लिफ्ट के पास बुलाती है और फिर उसे उठाकर खुले डक्ट में धकेल देती है।

दो हफ्ते पहले ही सोसायटी में आया था आरोपी बच्ची का परिवार

रिपोर्ट के मुताबिक, 10 साल की बच्ची और उसका परिवार घटना से करीब दो हफ्ते पहले ही सोसायटी में रहने आया था। घटना के बाद परिवार वहां से चला गया और रिश्तेदारों के साथ रहने लगा।

मृत बच्ची के परिवार ने यह आरोप भी लगाया था कि नाबालिग बच्ची के परिजनों ने घटना छिपाने के लिए CCTV कैमरे बंद कर दिए थे। पुलिस इस आरोप और मामले से जुड़े अन्य पहलुओं की जांच कर रही है।

नाबालिग की काउंसलिंग पर जोर

मामले के जानकारों का कहना है कि नाबालिग बच्ची की काउंसलिंग और सुधार पर ध्यान देना जरूरी है। उनके मुताबिक, आगे की प्रक्रिया में केवल सजा नहीं, बल्कि बच्चे की देखभाल और सुधार को भी महत्व दिया जाना चाहिए।

कानून के मुताबिक, 7 साल से कम उम्र के बच्चों पर आपराधिक जिम्मेदारी नहीं डाली जा सकती। 7 से 12 साल की उम्र के बच्चों के मामले में यह देखा जाता है कि वे अपने काम की गंभीरता और उसके नतीजों को समझने लायक थे या नहीं।

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टाइगर श्रॉफ फायरिंग-आरोपियों ने अमिताभ-सलमान, आमिर-अक्षय की रेकी की थी:सिक्योरिटी ज्यादा थी तो प्लान बदला; दिल्ली से 4 और गिरफ्तार

एक्टर टाइगर श्रॉफ पर फायरिंग करने वाले आरोपियों ने बताया है कि उन्होंने पहले अमिताभ बच्चन, सलमान खान, आमिर खान और अक्षय कुमार की रेकी की थी, लेकिन सिक्योरिटी ज्यादा होने के कारण प्लान बदल दिया था। आरोपियों के साथ एक चौथा युवक भी था, लेकिन वह हमले से एक रात पहले सिगरेट पीने के बहाने होटल से भाग गया। पूरी खबर पढ़ें…

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शाह बोले- कश्मीर, नॉर्थ-ईस्ट और नक्सल प्रभावित इलाकों में शांति: 2029 तक देश नशामुक्त बनाएंगे, नक्सलवाद के खिलाफ लड़ाई में 3,600 जवानों ने बलिदान दिया


नई दिल्ली1 घंटे पहले

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शाह ने राष्ट्रीय पुलिस स्मृति दिवस के मौके पर जवानों को संबोधित किया।

गृह मंत्री अमित शाह ने बुधवार को कहा कि देश की आंतरिक सुरक्षा के सामने लंबे समय से चली आ रही तीन बड़ी चुनौतियों- कश्मीर, नॉर्थ-ईस्ट और नक्सलवाद से प्रभावित इलाकों में अब शांति है। उन्होंने इन क्षेत्रों में सुरक्षा बलों की कार्रवाई और प्रयासों की सराहना की।

शाह ने नशे के खिलाफ देशव्यापी अभियान चलाने की अपील करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 31 दिसंबर 2029 तक भारत को नशामुक्त बनाने का लक्ष्य रखा है। इसके लिए पुलिस बलों को मिलकर काम करना होगा।

राष्ट्रीय पुलिस स्मृति दिवस पर दिल्ली स्थित राष्ट्रीय पुलिस स्मारक में शाह ने शहीद पुलिसकर्मियों को श्रद्धांजलि दी। उन्होंने कहा कि देश की सुरक्षा में पुलिसकर्मियों का योगदान महत्वपूर्ण है और उनके बलिदान को हमेशा याद रखा जाएगा।

शाह के भाषण की प्रमुख बातें

  1. नशे से देश की अर्थव्यवस्था को नुकसान: शाह ने कहा कि नशे का कारोबार आने वाली पीढ़ियों को खोखला कर रहा है। इससे अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त बोझ पड़ता है और देशविरोधी संगठनों को आर्थिक मदद मिलती है।
  2. CRPF, CoBRA और छत्तीसगढ़ पुलिस की तारीफ: गृह मंत्री ने नक्सलवाद के खिलाफ अभियान में CRPF और CoBRA बटालियनों के योगदान की विशेष रूप से सराहना की। उन्होंने छत्तीसगढ़ पुलिस के साहस, धैर्य और लगातार किए गए प्रयासों की भी तारीफ की।
  3. आजादी के बाद 36,852 पुलिसकर्मी शहीद: शाह ने बताया कि आजादी के बाद से अब तक ड्यूटी के दौरान 36,852 पुलिसकर्मी जान गंवा चुके हैं। इनमें इस साल शहीद हुए 154 पुलिसकर्मी भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि शहीदों के परिवारों के नुकसान की भरपाई नहीं की जा सकती, लेकिन पूरा देश उनके बलिदान के प्रति आभारी है।
  4. पुलिसकर्मियों के बलिदान से देश मजबूत हुआ: शाह ने कहा कि आजादी के बाद भारत ने दुनिया में सम्मानजनक स्थान हासिल किया है। इसमें आंतरिक सुरक्षा बनाए रखने और देश की सीमाओं की रक्षा करने वाले पुलिस और सुरक्षा कर्मियों के बलिदान का बड़ा योगदान है।
शाह ने राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले पुलिस और सुरक्षा कर्मियों को श्रद्धांजलि दी।

शाह ने राष्ट्रीय पुलिस स्मारक पर पुष्पांजलि अर्पित कर ड्यूटी के दौरान जान गंवाने वाले पुलिस और सुरक्षा कर्मियों को श्रद्धांजलि दी।

नशे के खिलाफ बाइक रैली रवाना

कार्यक्रम से पहले शाह ने करीब 90 पुलिस राइडर्स की देशव्यापी बाइक रैली को हरी झंडी दिखाई। रैली में CRPF, CISF, BSF, SSB, ITBP और NSG के जवानों के साथ रेलवे सुरक्षा बल (RPF), राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (NDRF) और राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) के कर्मी भी हिस्सा ले रहे हैं।

रैली कई राज्यों से गुजरते हुए गुजरात के एकता नगर पहुंचेगी। यहां 31 अक्टूबर 2026 को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर आयोजित एकता परेड में राइडर्स शामिल होंगे। इस दिन को राष्ट्रीय एकता दिवस के रूप में मनाया जाता है।

‘नशे के खिलाफ लड़ाई’ थीम वाली इस रैली में जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली के राइडर्स शामिल हैं।

‘नशे के खिलाफ लड़ाई’ थीम वाली इस रैली में जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, चंडीगढ़ और दिल्ली के राइडर्स शामिल हैं।

21 अक्टूबर को क्यों मनाया जाता है पुलिस स्मृति दिवस

राष्ट्रीय पुलिस स्मृति दिवस हर साल 21 अक्टूबर को मनाया जाता है। 21 अक्टूबर 1959 को लद्दाख के हॉट स्प्रिंग्स में चीनी सैनिकों के घात लगाकर किए गए हमले का मुकाबला करते हुए 10 CRPF जवान शहीद हुए थे। उन्हीं की याद में यह दिन मनाया जाता है।

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शाह बोले- SIR 2024 में आया,कांग्रेस पहले से हार रही:राहुल के नेतृत्व में 2029 का चुनाव भी हारेगी; विपक्ष के प्रदर्शन के बीच पहला बयान

देश भर में SIR और चुनाव आयोग के खिलाफ आंदोलन के बीच गृह मंत्री अमित शाह ने पहली बार बयान दिया। उन्होंने कहा- राहुल गांधी SIR की आड़ में घुसपैठियों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं। SIR प्रक्रिया 2024 के बाद शुरू हुई, जबकि राहुल गांधी के राजनीति में आने के बाद से ही कांग्रेस लगातार चुनाव हार रही है। राहुल 2029 में एक बार फिर करारी हार के लिए तैयार रहें। पूरी खबर पढ़ें…

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