Sunday, November 1, 2026
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भारत में बन रहे गई ग्रेटर शहर, पर आप जानते हैं दुनिया की पहली ग्रेटर सिटी का नाम


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First Greater City : भारत में ग्रेटर नोएडा और ग्रेटर फरीदाबाद बन रहे हैं, लेकिन क्या आपको पता है कि दुनिया का पहला ग्रेटर शहर कौन सा है. आखिर किसी शहर को ग्रेटर बनाने के पीछे क्या मकसद होता है और इसके लिए किन-किन सेक्टर्स में ग्रोथ पर जोर देना पड़ता है. भारत अपने शहरों को ग्रेटर बनाने के लिए क्या कदम उठा सकता है और उसकी क्या चुनौतियां हैं.

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भारत में बन रहे गई ग्रेटर शहर, पर जानते हैं दुनिया की पहली ग्रेटर सिटी का नामZoom

दुनिया का पहला ग्रेटर शहर न्यूयॉर्क है.

नई दिल्ली. ग्रेटर नोएडा, ग्रेटर फरीदाबाद सहित देश में तमाम शहरों का विस्तार कर उसका नया ग्रेटर वर्जन बनाया जा रहा है. लेकिन, क्या आपको पता है कि दुनिया का पहला ग्रेटर शहर कौन सा था और उसे ग्रेटर बनाने के लिए किन-किन चीजों का विकास किया गया. ग्रेटर शहर की अवधारणा मुख्य रूप से तब शुरू की जाती है, जबकि मौजूदा शहर उसकी बढ़ती आबादी के लिए पर्याप्त नहीं रह जाता है. इस लिहाज से देखें तो दुनिया का वह कौन सा शहर है, जहां सबसे पहले आबादी के हिसाब से सुविधाएं बढ़ाने का प्रयास किया गया.

आपको बता दें कि ग्रेटर सिटी के तहत पहली बार अमेरिका के न्यूयॉर्क शहर का विस्तार किया गया था. साल 1898 में सिटी ऑफ ग्रेटर न्यूयॉर्क (City of Greater New York) बनाया गया था. तब न्यूयॉर्क शहर के आसपास की तमाम नगरपालिकाओं को मिलाकर शहर का विस्तार किया गया था. इसी तरह, दूसरा ग्रेटर शहर लंदन को बनाया गया. 1 अप्रैल, 1965 को ग्रेटर लंदन की नींव रखी गई और इस शहर का विस्तार कर आसपास के तमाम इलाकों को लंदन शहर में शामिल कर लिया गया.

5 शहरों को मिलाकर बना था ग्रेटर न्यूयॉर्क
अमेरिका ने सबसे पहले दुनिया का ग्रेटर शहर बनाया. 1 जनवरी, 1898 को 5 शहरों और क्षेत्रों को मिलाकर एक महानगर बनाया गया था. इसका मकसद सिर्फ शहर का क्षेत्रफल बढ़ाना नहीं, बल्कि ट्रांसपोर्ट, पानी, बंदरगाह, पुलिस और प्रशासन के स्तर तक बेहतर सुविधाएं विकसित करना था. तब न्यूयॉर्क में मैनहट्टन, ब्रुकलिन, ब्रॉन्क्स, क्वींस और स्टेटन आईलैंड को मिलाया गया था. इस एकीकरण से पहले तक न्यूयॉर्क का कुल क्षेत्रफल 60 वर्ग मील था, जो बाद में बढ़कर 360 वर्गमील हो गया है.

6 सेक्टर्स में ग्रोथ पर था फोकस

  • सड़क नेटवर्क : ग्रेटर न्यूयॉर्क बनने के बाद मैनहट्टन को ब्रुकलिन और दूसरे क्षेत्रों से जोड़ने के लिए नए पुलों का निर्माण किया गया. इसके बाद तीन बड़े ब्रिज विलियम्सबर्ग (1903), मैनहट्टन ब्रिज (1909) और क्वींसबोरो ब्रिज (1909) में खोला गया.
  • अंडग्राउंड मेट्रो : ग्रेटर न्यूयॉर्क बनने के बाद साल 1904 में पहली बार आधुनिक सब-वे लाइन शुरू की गई. भूमिगत मेट्रो चलाए जाने से मैनहट्टन और आसपास के इलाकों के बीच बड़े पैमाने पर आवाजाही संभव हो सकी.
  • वॉटर सप्लाई : शहर की आबादी बढ़ी तो पानी की जरूरतें भी बढ़ने लगीं. तब बड़े जलाशय बनाने के साथ एक्वाडक्ट लाइन शुरू की ई और साल 1915 में दूरदराज के जल स्रोतों से शहर तक पानी पहुंचाया गया.
  • पोर्ट और कारोबार : ग्रेटर न्यूयॉर्क के साथ न्यूयॉर्क हार्बर को भी विकसित किया गया और शहर में जहाजों की आवाजाही, माल ढुलाई और कारोबारी गतिविधियों को बेहतर बनाया गया.
  • पार्क और मनोरंजन का विकास : ग्रेटर न्यूयॉर्क में तमाम पार्क और खुले स्थान के साथ मनोरंजन की सुविधाओं का भी विकास किया गया. न्यूयॉर्क का सेंट्रल पार्क पहले से ही मौजूद था, लेकिन बाद में कई और पार्क बनाए गए.
  • प्रशासनिक विकास : ग्रेटर न्यूयॉर्क बनाने के लिए इसमें कई नगरपालिकाओं को मिलाया गया और एक महानगर बना. इस महानगर को बेहतर बनाने के लिए पुलिस, प्रशासन और टैक्स व्यवस्था को भी बेहतर बनाया गया.

    भारत के लिए क्या है सबक
    ग्रेटर न्यूयॉर्क शहर के मॉडल से भारत भी अपने शहरों के विकास के लिए बेहतर व्यवस्था बना सकता है. भारत की दो प्रमुख राजधानियों दिल्ली और मुंबई के आसपास ऐसा ही मॉडल विकसित किया जा रहा है. दिल्ली-एनसीआर में दिल्ली, नोएडा, ग्रेटर नोएडा, गाजियाबाद, गुरुग्राम और फरीदाबाद के बीच बेहतर कनेक्टिवटी बनाई जा रही है. इसी तरह, मुंबई महानगर क्षेत्र का भी विस्तार किया जा रहा है और इसमें मुंबई, ठाणे, नवी मुंबई, कल्याण-डोंबिवली और आसपास के क्षेत्रों को मिलाकर बड़ा शहर बनाया जा रहा है.

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Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…

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उद्धव ठाकरे बोले- BJP से 2019 के बाद संवाद नहीं: कुछ लोगों के फोन हमेशा के लिए बंद हो गए; संजय राउत की 17वीं किताब लॉन्च




शिवसेना (UBT) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि बीजेपी से बातचीत 2019 में बंद हुई और फिर दोबारा कभी नहीं हुई। कुछ लोगों के फोन आना बंद हुए और फिर हमेशा के लिए बंद हो गया। मुंबई में संजय राउत की नई किताब ‘बोध कीर्तन’ के विमोचन पर उद्धव ने यह बात कही। राउत शिवसेना (UBT) के सांसद और ‘सामना’ के कार्यकारी संपादक हैं। उद्धव ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस के दो दिन पुराने बयान का भी जवाब दिया। CM फडणवीस ने कहा था कि 2019 के बाद से उद्धव ने फोन नहीं किया। फडणवीस ने यह बात उस किताब के विमोचन कार्यक्रम में कही थी, जिसमें उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे भी शामिल हुए थे। उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा था, “2019 के बाद उन्होंने फोन नहीं किया। मैं इंतजार करता रहा।” 2019 के विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद को लेकर अविभाजित शिवसेना ने अपने लंबे समय के सहयोगी बीजेपी से नाता तोड़ लिया था। 2022 में शिवसेना में विभाजन के बाद दोनों दलों के रिश्ते और खराब हो गए। एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाला गुट बीजेपी के खेमे में शामिल हो गया था। किताब में नरेंद्र मोदी के भाषण पर लेख ‘बोध कीर्तन’ में संजय राउत के दार्शनिक विचार और उनके अनुभव शामिल हैं। किताब में अयोध्या में राम मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिए भाषण पर एक लेख भी है। कार्यक्रम में राज ठाकरे ने पत्रकार के तौर पर संजय राउत के सफर का जिक्र किया। उन्होंने राउत और अपने 40 साल से ज्यादा पुराने संबंध के बारे में भी बताया। बाल ठाकरे का इंटरव्यू याद किया राज ठाकरे ने कहा कि पहले जब संजय राउत किसी दूसरी पत्रिका में काम करते थे, तब वे शिवसेना पर आलोचनात्मक लेख लिखते थे। इससे शिवसेना के संस्थापक बाल ठाकरे नाराज होते थे। राज ने राउत के साथ बाल ठाकरे के पहले इंटरव्यू को भी याद किया। यह इंटरव्यू एक पत्रिका के लिए हुआ था। MNS प्रमुख ने कहा कि बाल ठाकरे ने राउत के लिए कुछ अपशब्दों का इस्तेमाल किया था। राउत ने इन शब्दों को हटाए बिना इंटरव्यू प्रकाशित कर दिया था। राज ठाकरे के मुताबिक, बाल ठाकरे को राउत की यही बात पसंद आई थी। बाद में इसी वजह से राउत ‘सामना’ के कार्यकारी संपादक बने। ‘सामना’ शिवसेना का मुखपत्र है।



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कांग्रेसजनों ने इंदिरा गांधी और सरदार पटेल को श्रद्धांजलि दी: ब्रह्मधाम में कार्यक्रम के बाद वृद्धाश्रम में बुजुर्गों को भोजन कराया – Beawar News




ब्यावर में इंदिरा गांधी की पुण्यतिथि और सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती पर कांग्रेसजनों ने ब्रह्मधाम में श्रद्धांजलि कार्यक्रम किया। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने ब्रह्मानंद धाम स्थित वृद्धाश्रम में बुजुर्गों को भोजन कराया। ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष एडवोकेट अजय शर्मा ने कहा कि इंदिरा गांधी ने अपने नेतृत्व और फैसलों से देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाई। उन्होंने कहा कि सरदार पटेल ने देशी रियासतों का एकीकरण कर अखंड भारत के निर्माण में भूमिका निभाई। पूर्व राज्य गृहमंत्री लक्ष्मण सिंह रावत ने कहा कि इंदिरा गांधी ने देश की एकता और अखंडता की रक्षा के लिए अपना जीवन समर्पित किया। सरदार पटेल ने स्वतंत्र भारत को एक सूत्र में पिरोने का काम किया। खनन प्रकोष्ठ के प्रदेशाध्यक्ष आशीषपाल पदावत, राजसमंद की पूर्व जिला प्रमुख बसंता देवी, पूर्व विधायक माणक डाणी और कांग्रेस प्रत्याशी पारस पंच ने भी विचार रखे। उन्होंने दोनों नेताओं के जीवन, संघर्ष, त्याग और राष्ट्रसेवा को प्रेरणादायक बताया। वक्ताओं ने कहा कि उनके आदर्शों पर चलकर समाजसेवा और जनकल्याण के काम करना ही सच्ची श्रद्धांजलि है। कार्यक्रम के बाद कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने वृद्धाश्रम में बुजुर्गों के साथ समय बिताया, उनका हालचाल पूछा और आशीर्वाद लिया। कार्यकर्ताओं ने कहा कि जरूरतमंदों की सेवा करना महापुरुषों के प्रति सम्मान जताने का तरीका है। कार्यक्रम में संगठन महामंत्री गोपाल डाणी, वरिष्ठ नेता नरेंद्र झंवर, बृजवल्लभ पाराशर, पुष्पांजलि पारीक, देवकरण शर्मा, अल्पसंख्यक जिलाध्यक्ष अजमत काठात, पार्षद इब्राहिम खां, घनश्याम फुलवारी, इमरान नागौरी, राहुल सामरिया, हनुमान सांखला, योगेश पंचोली, रोहित बजारी, अश्वनी प्रजापत, पप्पू पहलवान, अनिल शर्मा, भरत बंधीवाल, राहुल कड़ीवाल, मनीष सामरिया, जगदीश जांगिड़, भंवरलाल जांगिड़, कैलाश बैरवा, सुरेंद्र कुमार, सुनील चौहान और अजय स्वामी सहित कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।



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दादा नगर में निःशुल्क भोजन वितरण: 640वीं रसोई में 100 श्रमिकों ने प्रसाद ग्रहण किया – Kanpur News




कानपुर में श्री श्याम जी सेवा समिति की ओर से संचालित 640वीं श्री श्याम रसोई के तहत शनिवार, 31 अक्टूबर को दादानगर में भोजन वितरण किया गया। इस दौरान अरुण अरोड़ा ने श्रमिकों को पूड़ी-सब्जी वितरित की। रसोई में करीब 100 श्रमिकों ने प्रसाद ग्रहण किया। समिति के संस्थापक विशाल हरलालका ने बताया कि संस्था जरूरतमंदों को भोजन उपलब्ध कराकर ‘नर सेवा नारायण सेवा’ के भाव से कार्य कर रही है। समिति का उद्देश्य जरूरतमंदों तक भोजन पहुंचाना और सेवा के माध्यम से समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारी निभाना है।



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भोजपुर- सड़क हादसे में बाइक सवार पुजारी की मौत: शाहपुर से बिहिया जा रहे थे, तेज रफ्तार डंपर ने मारी टक्कर; पत्नी की हालत गंभीर – Bhojpur News




आरा-बक्सर फोरलेन पर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौटी गांव के पास शनिवार को डंपर ने बाइक सवार दंपति को टक्कर मार दी। हादसे में पति की घटनास्थल पर ही मौत हो गई। जबकि बाइक पर बैठी पत्नी गंभीर रूप से जख्मी हो गई। जिनका इलाज सदर अस्पताल में कराया जा रहा है। मृतक की पहचान शाहपुर थाना क्षेत्र के पांडेयपुर गांव के रहने वाले हृदयनंद पांडेय के 45 साल के बेटे सुजीत कुमार पांडेय के रूप में हुई है। वे पेशे से पुजारी थे और पूजा-पाठ करने का काम करते थे। वहीं, घायल पत्नी की पहचान 40 साल की मुन्नी देवी के रूप में हुई है। बिलौटी गांव के पास तेज रफ्तार डंपर ने मारी टक्कर इधर, मृतका के चचेरे भाई सुनील कुमार पांडेय ने बताया कि अपनी पत्नी मुन्नी देवी के साथ शाहपुर से बिहिया जा रहे थे। उसी दौरान बिलौटी गांव के समीप डंपर ने उनके बाइक में जोरदार टक्कर मार दी। जिससे उनकी घटनास्थल पर ही मौत हो गई। जबकि उनकी पत्नी मुन्नी देवी गंभीर रूप से जख्मी हो गई। जिनका इलाज अस्पताल में चल रहा है। सूचना पाकर परिजन एवं स्थानीय वहां पहुंचे। तीन भाई और एक बहन में तीसरे नंबर पर थे सुजीत पांडेय पुलिस ने शव को अपने कब्जे में लेकर उसका पोस्टमार्टम सदर अस्पताल में करवाया। बताया जाता है कि मृतक अपने तीन भाई व एक बहन में तीसरे स्थान पर थे। उनके परिवार में पत्नी मुन्नी देवी व एक पुत्र आयुष पांडेय एवं एक पुत्री सोनाक्षी पांडेय है। घटना के बाद मृतक के घर में कोहराम मच गया। उनकी पत्नी मुन्नी देवी एवं परिवार के सभी सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है।



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डिंडौरी कलेक्टर ने दो गांवों में सुनीं ग्रामीणों की समस्याएं: चौरा माल में पानी की कमी पर अधिकारियों को निर्देश; चौरा रैयत में घरों तक पहुंचीं – Dindori News




डिंडौरी कलेक्टर अंजू पवन भदौरिया ने शनिवार को जनपद के चौरा माल और चौरा रैयत गांवों का दौरा किया। चौरा माल में चौपाल लगाकर ग्रामीणों की समस्याएं सुनीं। यहां लोगों ने पेयजल की कमी बताई। वहीं, चौरा रैयत में कलेक्टर घरों तक पहुंचीं और ग्रामीणों से उनकी जरूरतों और शिकायतों पर बात की। पेयजल संकट दूर करने के निर्देश चौरा माल में ग्रामीणों ने बताया कि रोजमर्रा की जरूरतों के लिए पानी जुटाने में परेशानी हो रही है। इस पर कलेक्टर ने संबंधित अधिकारियों को पेयजल व्यवस्था का जायजा लेने और समस्या जल्द दूर करने के निर्देश दिए। उन्होंने नियमित पानी की आपूर्ति के लिए जरूरी इंतजाम करने को कहा। कलेक्टर ने अधिकारियों को गांवों में पेयजल, सड़क, बिजली सहित दूसरी बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराने के निर्देश भी दिए। उन्होंने कहा कि ग्रामीणों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें। विभागीय अधिकारी गांवों में पहुंचकर लोगों से बात करें और उनकी शिकायतों पर तय समय में कार्रवाई करें। राघोपुर परियोजना पर ग्रामीणों से ली राय चौरा रैयत में कलेक्टर ने घरों तक पहुंचकर ग्रामीणों की जरूरतें और शिकायतें सुनीं। उन्होंने अधिकारियों को शिकायतों पर तुरंत कार्रवाई करने और गांवों में जाकर हालात देखने के निर्देश दिए। इस दौरान राघोपुर परियोजना को लेकर भी ग्रामीणों से जानकारी ली और उनके सुझाव सुने। छिंदगांव रैयत में बांध का निरीक्षण कलेक्टर ने छिंदगांव रैयत में जल संसाधन विभाग की ओर से बनाए जा रहे बांध का निरीक्षण किया। उन्होंने निर्माण कार्य की प्रगति और गुणवत्ता देखी तथा अधिकारियों से परियोजना की जानकारी ली। कलेक्टर ने निर्देश दिए कि बांध का निर्माण तय मापदंडों के अनुसार और तय समय-सीमा में पूरा किया जाए। काम में किसी तरह की लापरवाही नहीं होनी चाहिए। चौपाल के दौरान जिला पंचायत सीईओ दिव्यांशु चौधरी, एसडीएम डिंडौरी रामाबाबू देवांगन सहित संबंधित विभागों के अधिकारी मौजूद रहे।



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न अंडा, न चिकन… इस चीज में मिलता है सबसे अधिक प्रोटीन, जानें नाम

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अगर आप अपनी डाइट में प्रोटीन की मात्रा बढ़ाना चाहते हैं, तो इसके लिए सिर्फ चिकन, अंडे या दाल पर निर्भर रहने की जरूरत नहीं है. कुछ ऐसे खाद्य पदार्थ भी हैं, जिनमें प्रोटीन अच्छी मात्रा में पाया जाता है. फूड गाइड TasteAtlas ने हाल ही में अपने इंस्टाग्राम पोस्ट में ऐसे ही कुछ प्रोटीन से भरपूर फूड्स की जानकारी दी है. इस लिस्ट में एक ऐसा चीज भी शामिल है, जो आमतौर पर हमारे फ्रिज में मिल जाता है. इसका नाम जानकर आपको हैरानी हो सकती है….

आमतौर पर जब भी प्रोटीन वाले खाने की बात होती है, तो सबसे पहले चिकन, मछली, अंडे और दाल का ख्याल आता है. लेकिन इस लिस्ट में शामिल एक चीज प्रोटीन के मामले में इन सभी को पीछे छोड़ती नजर आती है. यह चीज है परमेसन चीज, जिसे गाय के दूध से बनाया जाता है. इसका स्वाद थोड़ा नमकीन और खास तरह का होता है. इसे अक्सर पास्ता के ऊपर कद्दूकस करके डाला जाता है या फिर सलाद में इस्तेमाल किया जाता है. कुछ लोग इसे छोटे टुकड़ों में भी खाते हैं.

TasteAtlas के इंस्टाग्राम पोस्ट के मुताबिक, 100 ग्राम परमेसन चीज में करीब 36 ग्राम प्रोटीन होता है. इस तुलना में यह चिकन ब्रेस्ट, टूना मछली, बीफ, बादाम, टोफू, अंडे और दाल से आगे है.

परमेसन एक तरह का सख्त और लंबे समय तक पकाकर तैयार किया जाने वाला चीज है. इसका स्वाद हल्का तीखा, नमकीन और अखरोट जैसा होता है. इसकी खासियत यह है कि थोड़ी-सी मात्रा भी खाने का स्वाद बढ़ा देती है.

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परमेसन चीज आमतौर पर कम मात्रा में खाया जाता है, जबकि चिकन, मछली और दाल को ज्यादा मात्रा में भोजन का हिस्सा बनाया जा सकता है. इसके अलावा, परमेसन में फैट और सोडियम भी अधिक होता है.

प्रोटीन के लिए चिकन ब्रेस्ट भी काफी पसंद किया जाता है. इसमें फैट की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है, खासकर जब इसे ज्यादा तेल के बिना पकाया जाए. इसे सलाद, सैंडविच, रैप और रोज के खाने में आसानी से शामिल किया जा सकता है. TasteAtlas की तुलना के अनुसार, 100 ग्राम चिकन ब्रेस्ट में करीब 32 ग्राम प्रोटीन होता है. यानी यह परमेसन चीज से सिर्फ 4 ग्राम पीछे है.

मछली भी प्रोटीन का अच्छा स्रोत है. खासतौर पर पकी हुई ब्लूफिन टूना में 100 ग्राम के हिसाब से करीब 30 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है. इसे ग्रिल या हल्का सेककर खाया जा सकता है. सलाद और दूसरी डिशेज में भी इसका इस्तेमाल होता है.

जो लोग मांस खाते हैं, उनके लिए बीफ स्कर्ट स्टेक भी प्रोटीन का एक विकल्प है. इसे तेज आंच पर पकाकर पतले टुकड़ों में काटा जाता है. TasteAtlas के आंकड़ों के मुताबिक, 100 ग्राम ग्रिल्ड बीफ में करीब 29 ग्राम प्रोटीन होता है.

वहीं, शाकाहारी लोगों के लिए बादाम प्रोटीन का एक अच्छा विकल्प हो सकते हैं. 100 ग्राम कच्चे बादाम में लगभग 21 ग्राम प्रोटीन पाया जाता है. इनमें फाइबर और हेल्दी फैट भी होते हैं. हालांकि, बादाम में कैलोरी भी काफी होती है, इसलिए इन्हें सीमित मात्रा में खाना बेहतर है.

टोफू भी प्रोटीन पाने का एक अच्छा प्लांट-बेस्ड विकल्प है. इसे सोयाबीन से तैयार किया जाता है और यह उन लोगों के लिए उपयोगी है जो मांस या मछली नहीं खाते. 100 ग्राम सादे और बिना पकाए फर्म टोफू में करीब 17 ग्राम प्रोटीन होता है. टोफू की खासियत है कि यह मसालों और सॉस का स्वाद आसानी से सोख लेता है. इसलिए इसे सब्जी, करी या ग्रिल्ड डिश में शामिल किया जा सकता है.

अंडे भी रोजमर्रा की डाइट में प्रोटीन शामिल करने का आसान तरीका हैं. उबले हुए अंडों के 100 ग्राम हिस्से में लगभग 13 ग्राम प्रोटीन मिलता है. इन्हें नाश्ते में खाया जा सकता है या सलाद और सैंडविच में मिलाया जा सकता है. प्रोटीन के साथ अंडे शरीर को कई जरूरी पोषक तत्व भी देते हैं.

भारतीय रसोई में दाल का इस्तेमाल रोज होता है. यह न सिर्फ प्रोटीन, बल्कि डाइटरी फाइबर का भी अच्छा स्रोत है. TasteAtlas के मुताबिक, 100 ग्राम पकी हुई और पानी निकाली गई दाल में करीब 9 ग्राम प्रोटीन होता है. इसे दाल, सूप, सलाद और खिचड़ी के रूप में खाया जा सकता है.

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बांग्लादेश में भारत के ट्रांजिट कॉरिडोर का विरोध: विपक्षी नेता बोले- देश की जमीन भारत को नहीं देंगे; गंगा जल समझौते का भी विरोध




बांग्लादेश में भारत के ट्रांजिट कॉरिडोर का विरोध हो रहा है। विपक्षी नेता नाहिद इस्लाम ने शुक्रवार को ढाका में एक रैली के दौरान आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान की सरकार बांग्लादेश में भारत को ट्रांजिट कॉरिडोर देने की तैयारी कर रही है। उन्होंने कहा कि बांग्लादेश की जमीन भारत को नहीं दी जाएगी। ट्रांजिट कॉरिडोर का मतलब एक देश की जमीन और सड़क का इस्तेमाल करके दूसरे देश के किसी हिस्से तक सामान पहुंचाना है। इससे दूरी और सामान पहुंचाने में लगने वाला समय कम हो सकता है। नाहिद ने गंगा जल समझौते को लेकर भी सरकार से सख्त रुख अपनाने को कहा। उन्होंने कहा कि अगर समझौते को नए सिरे से करते समय बांग्लादेश के हितों का ध्यान नहीं रखा गया, तो लोग इसके विरोध में सड़कों पर उतरेंगे। नाहिद इस्लाम की रैली में भारत विरोधी नारे भी लगे नेशनल सिटिजन पार्टी के नेता नाहिद इस्लाम की अगुआई में तारिक रहमान सरकार के खिलाफ ढाका में बड़े पैमाने पर प्रदर्शन भी हुआ प्रदर्शनकारी बढ़ती महंगाई, बिजली संकट और पेट्रोल-डीजल व गैस की कमी से नाराज थे। उन्होंने गृह मंत्री और ऊर्जा मंत्री के इस्तीफे की मांग की। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने भारत विरोधी नारे भी लगाए। रैली में ‘दिल्ली नहीं, ढाका ढाका’ के नारे लगाए गए। जापान दौरे के बाद क्यों उठा कॉरिडोर का मुद्दा? दरअसल, बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान 26 से 29 अक्टूबर तक जापान के दौरे पर थे। इस दौरान जापान और बांग्लादेश के बीच बंगाल की खाड़ी के आसपास व्यापार और आवाजाही बढ़ाने पर सहमति बनी। जापान बांग्लादेश में मातरबाड़ी नाम का एक बड़ा बंदरगाह भी बना रहा है। इसके जरिए समुद्र के रास्ते सामान लाने-ले जाने की सुविधा बढ़ेगी। जापान की एक योजना के मुताबिक, इस बंदरगाह को भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से जोड़ा जा सकता है। इसके लिए बांग्लादेश के रास्ते सड़क और दूसरे संपर्क मार्गों का इस्तेमाल होगा। इससे भारत के पूर्वोत्तर राज्यों तक सामान पहुंचाना आसान हो सकता है। साथ ही भारत का व्यापार दक्षिण-पूर्व एशिया के देशों तक बढ़ सकता है। इसी योजना को लेकर नाहिद इस्लाम ने विरोध जताया है। जापान दौरे में भारत को लेकर कोई बात नहीं हुई बांग्लादेश के विदेश मामलों के राज्य मंत्री हुमायूं कबीर ने शुक्रवार को कहा है कि प्रधानमंत्री तारिक रहमान के जापान दौरे में भारत या किसी दूसरे देश को लेकर कोई चर्चा नहीं हुई थी। ढाका ट्रिब्यून के मुताबिक कबीर ने पत्रकारों से कहा कि जापान के साथ बातचीत सिर्फ बांग्लादेश और जापान के आर्थिक रिश्तों को लेकर हुई थी। कबीर ने कहा कि अगर किसी दूसरे देश से जुड़े मुद्दे पर बात करनी होती, तो उस देश के प्रतिनिधियों को भी बातचीत में शामिल किया जाता। भारत बोला- जापान के साथ पूर्वोत्तर से जुड़े काम बढ़ाएंगे 28 अक्टूबर को भारत ने जापान के साथ अपने रिश्ते और मजबूत करने की बात कही थी। इसमें भारत के पूर्वोत्तर राज्यों से जुड़ी योजनाएं भी शामिल हैं। यह बयान बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान और जापान की प्रधानमंत्री साने ताकाइची की मुलाकात के कुछ घंटे बाद आया था। भारत के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा था कि, जापान के साथ हमारी बहुत मजबूत साझेदारी है। भारत के पूर्वोत्तर राज्यों और जापान से जुड़ी कई योजनाएं हैं। हम इन रिश्तों को और मजबूत करना चाहते हैं। 12 दिसंबर को खत्म हो रहा है गंगा जल समझौता भारत और बांग्लादेश के बीच 12 दिसंबर 1996 को 30 साल के लिए यह समझौता हुआ था। इसके तहत जनवरी से मई के बीच गंगा के पानी का बंटवारा होता है। यह वह समय होता है, जब नदी में पानी कम रहता है। पश्चिम बंगाल के फरक्का बैराज पर पानी का बंटवारा किया जाता है। बांग्लादेश चाहता है कि नया समझौता ज्यादा सालों के लिए हो। साथ ही उसमें ऐसी शर्त हो, जिससे सूखे के मौसम में भी उसे पानी का तय हिस्सा मिलता रहे। भारत का कहना है कि पानी के बंटवारे और दोनों देशों के बीच बहने वाली 54 नदियों से जुड़े मुद्दों पर बातचीत संयुक्त नदी आयोग (JRC) के जरिए होती है। इस आयोग की शुरुआत 1972 में हुई थी। इसका काम दोनों देशों के बीच नदियों से जुड़े मुद्दों पर मिलकर काम करना है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने सितंबर में बताया था कि गंगा जल समझौते को लेकर दोनों देशों के अधिकारियों के बीच तकनीकी स्तर पर बातचीत जारी है। ——————————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिकी नाकेबंदी को चकमा देकर ईरान ने सैन्य सामान खरीदा: रिपोर्ट- 5000 फर्जी एजेंसियों का नेटवर्क बनाया, चीन-रूस से मंगवाए मिसाइलों के पुर्जे अमेरिका ने ईरान पर कई तरह के प्रतिबंध लगा रखे हैं। समुद्र में अमेरिकी नाकेबंदी के चलते उसके लिए दूसरे देशों से सैन्य सामान मंगाना भी मुश्किल है। इसके बावजूद ईरान ने हथियारों की सप्लाई जारी रखी। पूरी खबर पढ़ें…



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तेज बारिश से रॉकेट्री ट्रायल टला, कल होगा शुभारंभ: कुशीनगर के पिपराघाट में होना था कार्यक्रम, 76 टीमों के बच्चों ने किया रिव्यू – Kushinagar News




कुशीनगर में किताबों में अंतरिक्ष विज्ञान पढ़ने वाले बच्चों को अपनी बनाई तकनीक को आसमान में उड़ते देखने का इंतजार करना पड़ा। बीती रात हुई तेज बारिश के कारण पिपराघाट में आयोजन स्थल पर कार्यक्रम नहीं हो सका। इससे देशभर से आईं 76 टीमों के बच्चे मायूस हो गए। हालांकि आयोजकों ने कार्यक्रम को पूरी तरह रोका नहीं। सभी टीमों को गौरीश्रीराम स्थित जगदीश पब्लिक स्कूल में रखा गया है, जहां वैज्ञानिक बच्चों को प्रशिक्षण दे रहे हैं और उनके तैयार मॉडलों की समीक्षा कर रहे हैं। देवरिया लोकसभा क्षेत्र के सांसद शशांक मणि की पहल पर श्री नारायणी साइंस डेवलपमेंट फाउंडेशन (एसएसडीएफ), इन-स्पेस और इसरो की ओर से इन-स्पेस नारायणी रॉकेट्री कप आयोजित किया जा रहा है। प्रतियोगिता 31 अक्टूबर से 3 नवंबर तक होनी है। इसमें मॉडल रॉकेट और कैनसैट लॉन्च किए जाने हैं। आयोजकों के मुताबिक, मौसम ने साथ दिया तो 1 नवंबर को निर्धारित स्थान पर कार्यक्रम शुरू होगा। 76 टीमों के बच्चे ले रहे हिस्सा प्रतियोगिता में देशभर की 76 टीमें शामिल हैं। विद्यार्थी अपने बनाए मॉडल रॉकेट और छोटे उपग्रह लेकर पहुंचे हैं। इसका मकसद बच्चों को अंतरिक्ष तकनीक की केवल सैद्धांतिक जानकारी देना नहीं, बल्कि उन्हें खुद तकनीक विकसित करने और उसका परीक्षण करने का मौका देना है। एक किलोमीटर तक पेलोड ले जाएगा रॉकेट मॉडल रॉकेट्री में विद्यार्थियों को ऐसा रॉकेट तैयार करना है, जो करीब एक किलोमीटर की ऊंचाई तक एक किलोग्राम वजन ले जा सके। इसमें रॉकेट की उड़ान स्थिर रखने, पेलोड को सुरक्षित अलग करने और उसकी रिकवरी जैसी तकनीकी क्षमताओं को परखा जाएगा। ड्रोन से लॉन्च होंगे छोटे उपग्रह प्रतियोगिता में कैनसैट भी शामिल हैं। इनके जरिए विद्यार्थी छोटे उपग्रह में इस्तेमाल होने वाली प्रणालियों का मॉडल तैयार करते हैं। इस बार कैनसैट को ड्रोन की मदद से लॉन्च किया जाएगा। इससे बच्चों को उपग्रह की तकनीक और उसके काम करने के तरीके को समझने का मौका मिलेगा। बारिश से बदला कार्यक्रम, स्कूल में प्रशिक्षण बीती रात हुई तेज बारिश के कारण पिपराघाट स्थित आयोजन स्थल पर कार्यक्रम नहीं हो सका। इसके बाद आयोजकों ने सभी टीमों को जगदीश पब्लिक स्कूल में प्रशिक्षण और मॉडल की समीक्षा के लिए रखा है। प्रतियोगिता के जरिए बच्चों को भौतिकी, गणित, इलेक्ट्रॉनिक्स और संचार का व्यावहारिक ज्ञान देने के साथ टीम में काम करने और तकनीकी समस्याओं का हल खोजने का अनुभव भी दिया जा रहा है।



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सेवढ़ा के वकीलों ने तीन तहसीलदारों पर की कार्रवाई मांगी: मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन दिया; कार्यालय से गैरहाजिर रहने और लापरवाही के आरोप – datia News




दतिया की सेवढ़ा तहसील कार्यालय में अधिकारियों की कथित लापरवाही और मनमानी कार्यप्रणाली को लेकर अभिभाषक संघ ने मोर्चा खोल दिया है। शुक्रवार को अभिभाषक संघ के पदाधिकारी और वकील एसडीएम कार्यालय पहुंचे और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। इसमें सेवढ़ा में पदस्थ तीनों तहसीलदारों पर कार्यालय से नदारद रहने और कामकाज में लापरवाही बरतने के आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की गई। एसडीएम की अनुपस्थिति में तहसीलदार राजेंद्र जाटव ज्ञापन लेने पहुंचे, लेकिन वकीलों ने उन्हें ज्ञापन देने से इनकार कर दिया। अभिभाषक संघ के अध्यक्ष मुकेश यादव ने कहा, “ज्ञापन तहसीलदारों के खिलाफ है, इसलिए उन्हें नहीं देंगे।” इसके बाद एसडीएम के स्टेनो को ज्ञापन सौंपा गया। दो तहसीलदार नहीं मिले, नायब तहसीलदार पर ताश खेलने का आरोप अभिभाषक संघ के अध्यक्ष मुकेश यादव ने बताया कि बुधवार को वे पक्षकारों के साथ दावा पेश करने तहसील कार्यालय पहुंचे थे। इस दौरान सेवढ़ा में पदस्थ दो तहसीलदार अपनी टेबल पर नहीं मिले। वहीं, नायब तहसीलदार रामनरेश आर्य थरेट तहसीलदार की टेबल पर बैठकर कंप्यूटर पर ताश का गेम खेलते मिले। वकीलों का आरोप है कि तहसील कार्यालय में पदस्थ तीनों तहसीलदारों की कार्यप्रणाली संतोषजनक नहीं है। उनका कहना है कि तहसीलदार अक्सर अपनी टेबल से नदारद रहते हैं और बिना अवकाश लिए कार्यालय से चले जाते हैं। अभिभाषक संघ ने सोशल मीडिया पर वायरल नायब तहसीलदार के ताश खेलने के वीडियो को भी कथित लापरवाही का प्रमाण बताया है। संघ ने पूरे मामले की जांच कर कार्रवाई करने की मांग की है। तहसीलदार बोले- तबीयत खराब थी, एसडीएम को दी थी सूचना वहीं, तहसीलदार राजेंद्र जाटव ने बुधवार को कार्यालय में अनुपस्थित रहने के मामले में अपना पक्ष रखा। उन्होंने बताया कि अचानक उनकी तबीयत ज्यादा खराब हो गई थी। इस पर उन्होंने एसडीएम से मौखिक रूप से निवेदन किया था कि वे उस दिन कार्यालय नहीं आ पाएंगे। राजेंद्र जाटव के अनुसार, राजस्व निरीक्षक गंधर्व सिंह और पटवारी सोनू साहू उन्हें डॉ. तिवारी के यहां लेकर गए थे। वहां से दवा लेने के बाद वे अपने शासकीय आवास पर आराम कर रहे थे। उन्होंने कहा कि एसडीएम को सूचना देने और डॉक्टर की सलाह के अनुसार वे शासकीय आवास पर ही स्वास्थ्य लाभ ले रहे थे।



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