Tuesday, September 1, 2026
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GDP ने बढ़ाया भारत का दम, लेकिन शेयर बाजार पर फिर भी दबाव क्यों


भारत की अर्थव्यवस्था ने एक बार फिर अपनी मजबूती दिखाई है. अप्रैल से जून 2026 की तिमाही में देश की रियल GDP ग्रोथ 7.8 फीसदी रही है. यह बाजार के 7.3 फीसदी के अनुमान से बेहतर है. यानी उम्मीद से ज्यादा तेज रफ्तार से अर्थव्यवस्था आगे बढ़ी है. इस दौरान मैन्युफैक्चरिंग, फाइनेंस, रियल एस्टेट और दूसरे सर्विस सेक्टर ने अच्छा परफॉर्म किया है. GDP के मजबूत आंकड़ों से भारत की आर्थिक स्थिति को लेकर भरोसा बढ़ा है.

हालांकि, गिफ्ट निफ्टी करीब 64 अंक गिरकर 24,204 के लेवल पर कारोबार करता दिख रहा है. इससे बाजार के फ्लैट से हल्की कमजोरी के साथ खुलने के संकेत मिल रहे हैं. दूसरी तरफ, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमत 91 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है. इससे निवेशकों की चिंता बढ़ सकती है और बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.

GDP का आंकड़ा क्यों अहम है?

जून तिमाही में भारत की रियल GDP 7.8 फीसदी बढ़ी है. खास बात यह है कि यह बाजार के 7.3 फीसदी अनुमान से ऊपर रही. वहीं, नॉमिनल GDP में 10.3 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई. अर्थव्यवस्था की कुल गतिविधियों को दिखाने वाला GVA भी 8.2 फीसदी रहा. इससे पता चलता है कि देश में आर्थिक गतिविधियां अभी भी अच्छी रफ्तार से चल रही हैं.

GDP के इन आंकड़ों के बाद कई ब्रोकरेज हाउसों ने भारत की पूरे वित्त वर्ष की ग्रोथ को लेकर अपने अनुमान भी बढ़ाए हैं. कुछ संस्थानों का मानना है कि वित्त वर्ष 2026-27 में देश की आर्थिक विकास दर 7 फीसदी से ऊपर रह सकती है.

मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर ने संभाली कमान

जून तिमाही में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर सबसे मजबूत क्षेत्रों में रहा. इसमें 9.2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. बिजली, गैस और पानी जैसी जरूरी सेवाओं में 8.9 फीसदी की ग्रोथ दर्ज हुई, जबकि कंस्ट्रक्शन सेक्टर 7.7 फीसदी बढ़ा.

सर्विस सेक्टर की बात करें तो ट्रेड, होटल, ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन से जुड़ी गतिविधियां 8.5 फीसदी बढ़ीं. फाइनेंस, रियल एस्टेट और प्रोफेशनल सर्विसेज में 12.1 फीसदी की शानदार तेजी रही. कृषि क्षेत्र में 3.6 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई, लेकिन माइनिंग सेक्टर 2.4 फीसदी गिर गया.

कमजोर शुरुआत के संकेत क्यों?

GDP के अच्छे आंकड़ों के बावजूद शेयर बाजार पर ग्लोबल हालात का दबाव बना हुआ है. सोमवार को सेंसेक्स 307 अंक गिरकर 76,597 के लेवल पर बंद हुआ था, जबकि Nifty 95 अंक टूटकर 24,080 पर आ गया. मेटल और IT शेयरों में कमजोरी ने बाजार को नीचे खींचा.

अमेरिकी शेयर बाजार में सोमवार को गिरावट रही. S&P 500 इंडेक्स 25.62 अंक यानी 0.33% टूटकर 7,686.14 पर बंद हुआ, जबकि Nasdaq 31.53 अंक की गिरावट के साथ 26,370.89 पर पहुंच गया.

मंगलवार को गिफ्ट निफ्टी में भी गिरावट दिखी है. एशियाई बाजारों में जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख इंडेक्स भी दबाव में नजर आए. ऐसे में घरेलू अर्थव्यवस्था के अच्छे आंकड़े बाजार को कुछ सहारा दे सकते हैं, लेकिन शुरुआती कारोबार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है.

91 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है. ब्रेंट क्रूड का भाव 91 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है. निवेशकों को चिंता है कि अगर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के रास्ते तेल की सप्लाई पर असर पड़ा, तो कीमतें और बढ़ सकती हैं.

महंगा तेल भारत जैसी बड़ी आयातक अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का कारण बन सकता है. इससे महंगाई, सरकार के खर्च और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है. इसलिए आज बाजार GDP के मजबूत आंकड़ों के साथ-साथ तेल की कीमत और ग्लोबल तनाव पर भी नजर रखेगा.



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भाजपा ने 40वार्डों में ब्राह्मण समाज को सिर्फ एक टिकट: लोगों ने जताई नाराजगी, कांग्रेस में भी कई नेताओं को टिकट नहीं मिलने से बगावत – Jalore News




नगर निकाय चुनाव के लिए सोमवार को नामांकन की प्रक्रिया पूरी हो गई। जालोर नगर निकाय के 40 वार्डों में भाजपा के टिकट वितरण के बाद ब्राह्मण समाज में नाराजगी सामने आई है। भाजपा ने 40 वार्डों में ब्राह्मण समाज को सिर्फ एक टिकट दिया है। इसे लेकर समाज के लोगों ने सोशल मीडिया पर भी प्रतिक्रियाएं दी हैं। वहीं टिकट वितरण में भाजपा ने कई प्रमुख दावेदारों को भी मौका नहीं दिया। इनमें पिछले बोर्ड के उपसभापति अंबालाल व्यास, नगर मंडल अध्यक्ष रवि सोलंकी, भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष मंजु सोलंकी और सभापति गोविंद टांक सहित अन्य दावेदार शामिल हैं। टिकट कटने के बाद इनमें से कई दावेदार निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में उतर गए हैं। भाजपा के टिकट वितरण से ब्राह्मण समाज में नाराजगी जालोर नगर निकाय के 40 वार्डों में भाजपा ने ब्राह्मण समाज से सिर्फ एक प्रत्याशी को टिकट दिया है। टिकट वितरण के बाद समाज के लोगों में नाराजगी देखने को मिली। सोशल मीडिया पर लोगों ने टिकट वितरण को लेकर अपनी प्रतिक्रियाएं भी साझा की हैं। भाजपा की ओर से अलग-अलग वर्गों को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया गया है, लेकिन ब्राह्मण समाज को मिले एक टिकट को लेकर अब राजनीतिक चर्चा शुरू हो गई है। प्रमुख भाजपा नेताओं के भी टिकट कटे भाजपा ने कई ऐसे दावेदारों को टिकट नहीं दिया, जो पहले नगर निकाय में महत्वपूर्ण पदों पर रह चुके हैं। पिछले बोर्ड के उपसभापति अंबालाल व्यास, नगर मंडल अध्यक्ष रवि सोलंकी, भाजपा महिला मोर्चा की जिलाध्यक्ष मंजु सोलंकी और सभापति गोविंद टांक को टिकट नहीं मिला। इनमें से कई दावेदारों ने पार्टी के फैसले के बाद निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल कर दिया। इससे भाजपा के अधिकृत प्रत्याशियों के सामने अपने ही नेताओं और कार्यकर्ताओं की चुनौती खड़ी हो गई है। कांग्रेस में भी प्रमुख दावेदारों को टिकट नहीं कांग्रेस में भी टिकट वितरण को लेकर कई प्रमुख दावेदारों को निराशा मिली। वार्ड संख्या 31 से पूर्व एससी प्रकोष्ठ के जिला अध्यक्ष और वर्ष 2019 के निकाय चुनाव में सभापति पद के प्रत्याशी रहे राजेंद्र सोलंकी को टिकट नहीं दिया गया। वहीं वार्ड संख्या 36 से कांग्रेस महिला मोर्चा की प्रदेश सचिव कामिनी शर्मा को भी पार्टी ने प्रत्याशी नहीं बनाया। कांग्रेस में भी टिकट नहीं मिलने के बाद कई दावेदार निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरे हैं। ऐसे में भाजपा और कांग्रेस दोनों के सामने अधिकृत प्रत्याशियों के साथ बागियों को साधने की चुनौती है। 2:33 बजे कांग्रेस, 2:37 बजे भाजपा ने सौंपी सूची नामांकन के अंतिम दिन कांग्रेस ने दोपहर 2:33 बजे रिटर्निंग ऑफिसर कार्यालय में अपने अधिकृत प्रत्याशियों की सूची जमा कराई। इसके ठीक चार मिनट बाद दोपहर 2:37 बजे भाजपा ने भी अधिकृत प्रत्याशियों की सूची जमा करा दी। नामांकन प्रक्रिया पूरी होने के साथ ही अब चुनावी तस्वीर काफी हद तक साफ हो गई है। टिकट से वंचित दावेदारों के निर्दलीय चुनाव लड़ने के कारण कई वार्डों में त्रिकोणीय और बहुकोणीय मुकाबले की स्थिति बन गई है।



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जन्माष्टमी के लिए सजे सुल्तानपुर के बाजार: लड्डू गोपाल की पोशाक से झूले तक, कीमतों में मामूली बढ़ोतरी – Sultanpur News


सुल्तानपुर6 मिनट पहले

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सुल्तानपुर में जन्माष्टमी पर्व को लेकर बाजार सजकर तैयार हैं। शहर के प्रमुख बाजारों में लड्डू गोपाल की पोशाक, मुकुट, बांसुरी, मोरपंख और श्रृंगार के सामान की दुकानें सज गई हैं। दुकानों पर खरीदारी के लिए ग्राहक पहुंच रहे हैं, हालांकि रक्षाबंधन के तुरंत बाद जन्माष्टमी होने के कारण अभी बाजार में अपेक्षाकृत कम भीड़ है।

दुकानदारों को उम्मीद है कि जन्माष्टमी नजदीक आने के साथ अगले एक-दो दिनों में खरीदारी में तेजी आएगी। इस बार पिछले वर्ष की तुलना में जन्माष्टमी से जुड़े सामान की कीमतों में मामूली बढ़ोतरी हुई है। ग्राहक अपनी पसंद और बजट के अनुसार लड्डू गोपाल के कपड़े और पूजा-श्रृंगार का सामान खरीद रहे हैं।

लड्डू गोपाल की पोशाक 10 से 1000 रुपए तक

बाजार में लड्डू गोपाल की पोशाकें 10 से 1000 रुपए तक की रेंज में उपलब्ध हैं। श्रृंगार का सामान 5 से 500 रुपए, झूले 120 से 3000 रुपए और सिंहासन 50 से 1000 रुपए तक में मिल रहे हैं। इसके अलावा माला 5 से 1000 रुपए और पगड़ी 5 से 400 रुपए तक की कीमत में उपलब्ध है।

राधा-कृष्ण की पोशाकें 100 से 500 रुपए तक बिक रही हैं। दुकानों पर मोरपंख, मटकी, बांसुरी और अन्य सजावटी सामान भी उपलब्ध हैं। दुकानदारों ने अलग-अलग बजट के ग्राहकों को ध्यान में रखते हुए कई तरह के विकल्प सजाए हैं।

रक्षाबंधन के बाद अभी कम पहुंच रहे ग्राहक

मुरारी दास गली स्थित मुरारी दास एंड संस के मालिक ओजस अग्रवाल ने बताया कि जन्माष्टमी के सामान की खरीदारी के लिए अभी ग्राहकों की संख्या कम है। इसका प्रमुख कारण हाल ही में रक्षाबंधन का बाजार खत्म होना है। उन्होंने बताया कि पर्व नजदीक आने पर बिक्री बढ़ने की उम्मीद है।

ओजस अग्रवाल के मुताबिक, पिछले साल की तुलना में इस बार जन्माष्टमी के सामान की कीमतों में मामूली वृद्धि हुई है। इसके बावजूद ग्राहकों में लड्डू गोपाल की पोशाक और श्रृंगार सामग्री को लेकर उत्साह बना हुआ है।

शहर में सजेंगी आकर्षक झांकियां

जन्माष्टमी पर शहर के चौक, शाहगंज चौराहा, गोलाघाट, करौंदिया और राहुल चौराहा समेत कई स्थानों पर आकर्षक झांकियां सजाई जाएंगी। इन स्थानों पर पर्व को लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं।

पुलिस लाइन स्थित राधा-कृष्ण मंदिर की भव्य सजावट भी इस बार श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र रहेगी। जन्माष्टमी को लेकर बाजारों के साथ मंदिरों और झांकियों की तैयारियां भी अंतिम दौर में पहुंच रही हैं।



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नशीली दवाओं से जुड़ाव पर मेडिकल स्टोर का लाइसेंस निरस्त: सागर में ऋषभ इंटरप्राइजेज समेत 2 दुकानों पर कार्रवाई, एक लाइसेंस 7 दिन निलंबित – Sagar News




सागर में मेडिकल स्टोर्स पर अनियमितताएं मिलने पर दो मेडिकल स्टोर के लाइसेंस निरस्त किए गए हैं। ड्रग इंस्पेक्टर सोनम ने शहर की विभिन्न मेडिकल स्टोर्स का निरीक्षण किया। जिसके तहत नशीली दवाओं में संलिप्तता पाए जाने समेत नियमों का उल्लंघन पर मेडिकल स्टोर्स के लाइसेंस निरस्त किए। सागर शहर के ऋषभ इंटरप्राइजेज मेडिकल में नशीली दवाओं में संलिप्तता पाए जाने पर मेडिकल का लाइसेंस निरस्त किया गया है। इसी प्रकार आईटीआई के सामने संचालित विष्णु मेडिकल का निरीक्षण के दौरान दुकान का संचालन नहीं पाए जाने पर लाइसेंस निरस्त किया गया। फार्मासिस्ट के बिना दुकान का संचालन पाए जाने पर संवृद्धि मेडिकल का लाइसेंस 7 दिन के लिए निलंबित किया गया है। 13 मेडिकल स्टोर के लाइसेंस निरस्त किए इससे पहले औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम 1945 के नियमों का उल्लंघन पाए जाने पर सागर जिले के 13 मेडिकल स्टोर के लाइसेंस निलंबित किए थे। पटेल मेडिकल, विजय टॉकीज रोड के निरीक्षण के दौरान Avil वायल 10 एमएल के क्रय-विक्रय के दस्तावेजों में गड़बड़ी पाए जाने पर दुकान का निरीक्षण किया गया। मेडिकल संचालक को 3 दिन में नारकोटिक्स दवाओं और Avil के दस्तावेज प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए हैं। जवाब संतोषजनक नहीं पाए जाने पर लाइसेंस निलंबन व निरस्तीकरण की कार्रवाई की जाएगी। दवाओं के नमूने जांच के लिए औषधि परीक्षण प्रयोगशाला भोपाल भेजे जाएंगे।



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राजगीर खेलो इंडिया सेंटर में अब अखाड़े की जगह तैराकी: SAI ने दी मंजूरी, 3 मुख्य कोच की होगी तैनाती; बजट का खाका तैयार – Nalanda News




भारतीय खेल प्राधिकरण ने राजगीर स्थित ‘खेलो इंडिया स्टेट सेंटर ऑफ एक्सीलेंस’ में खेल विधा के बदलाव को औपचारिक मंजूरी प्रदान कर दी है। अब इस केंद्र में कुश्ती के स्थान पर तैराकी को आधिकारिक तौर पर शामिल कर लिया गया है। विभागीय परियोजना अनुमोदन समिति की अनुशंसा के बाद युवा कार्यक्रम एवं खेल मंत्रालय के अधीन साई ने बिहार राज्य खेल प्राधिकरण के महानिदेशक को इस संबंध में लेटर जारी किया है। जिसमें वित्तीय सहायता और जरूरी मानव संसाधन के ढांचे को स्पष्ट किया है। 3 मुख्य कोच की तैनाती होगी ​नए विधा के तहत सेंटर में विशेषज्ञ मार्गदर्शन सुनिश्चित करने के लिए मानव संसाधन का व्यापक ढांचा तैयार किया गया है। इसके तहत एथलेटिक्स, भारोत्तोलन और तैराकी के लिए 3 मुख्य कोच और तैराकी के लिए 1 सहायक कोच की तैनाती को स्वीकृति मिली है। वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए अगस्त 2026 से प्रभावी तीन तिमाहियों के मद में कोचों के वेतन हेतु 40 लाख 80 हजार रुपए और तैराकी उपभोग्य खेल उपकरणों के लिए 18 प्रतिशत जीएसटी सहित 18 लाख 21 हजार 920 रुपए स्वीकृत किए गए हैं। इस प्रकार चालू वित्तीय वर्ष में कुल 59 लाख 1 हजार 920 रुपए का प्रावधान रहेगा, जबकि आगामी वित्तीय वर्षों में यह वार्षिक बजट 79 लाख 41 हजार 920 रुपए निर्धारित किया गया है। ​आवर्ती कोष की यह राशि भारतीय खेल प्राधिकरण और बिहार सरकार के बीच अनुबंध पर हस्ताक्षर होने के बाद जारी की जाएगी, जिसकी मूल प्रति साई के कोलकाता क्षेत्रीय केंद्र को भेजी जानी है। इसके साथ ही वन-टाइम ग्रांट को लेकर भी स्थिति स्पष्ट की गई है। कुश्ती के लिए 27 मार्च 2026 को जारी की गई 15 लाख 62 हजार 821 रुपए की एकमुश्त अनुदान राशि को अब नियमों के तहत तैराकी विधा के गैर-आवर्ती उपकरणों की खरीद में उपयोग किया जाएगा। विश्वस्तरीय तैराकी प्रशिक्षण शुरू होगा ​इसके अतिरिक्त पूर्व में वर्ष 2023 में जारी 5 लाख 20 हजार 940 रुपए की राशि को तैराकी अनुदान का हिस्सा नहीं माना जाएगा और बिहार सरकार को इसे वापस लौटाना होगा। डीपीएसी के निर्देशों के अनुसार कुश्ती के तहत राज्य सरकार द्वारा खर्च की गई पूर्व राशि का वहन स्वयं राज्य सरकार को करना होगा। बिहार सरकार से तैराकी उपकरणों की खरीद का विस्तृत मदवार प्रस्ताव भी मांगा गया है, जिससे राजगीर केंद्र में जल्द विश्वस्तरीय तैराकी प्रशिक्षण आरंभ हो सके।



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चीन ने युद्ध की तैयारी के लिए कानून बदला: 1 अक्टूबर से लागू होगा नया नियम; आम लोगों और कंपनियों के संसाधन भी ले सकेगी सरकार




चीन ने अपने समाज को युद्ध के लिए तैयार करने की दिशा में कानूनी ढांचा मजबूत किया है। देश की शीर्ष विधायिका ने 28 अगस्त 2026 को संशोधित राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी कानून को मंजूरी दी। यह कानून 1 अक्टूबर से लागू होगा। इसके तहत युद्ध या संघर्ष जैसी स्थिति में राष्ट्रपति शी जिनपिंग और चीनी कम्युनिस्ट पार्टी (CCP) किसी भी व्यक्ति या निजी कंपनी से मदद लेने और उनके संसाधन जब्त करने का अधिकार रखेंगे। पूरे देश को युद्ध के लिए तैयार करने की योजना चीन एक अधिनायकवादी देश है, जहां आम नागरिकों के पास कड़े और व्यापक कानूनों का विरोध करने या उनसे बचने की क्षमता नहीं है। नया कानून इसी व्यवस्था का हिस्सा है। यह कानून माओत्से तुंग की ‘जन युद्ध’ की सोच से जुड़ा हुआ है। इस सोच के तहत संकट के समय पूरी जनता को एकजुट होकर लड़ना और विरोध करना होता है। कानून का मकसद केवल पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (PLA) को युद्ध के लिए तैयार करना नहीं है। इसका उद्देश्य पूरे देश को संघर्ष के लिए तैयार करना है। इसी दिशा में चीन ने जनवरी 2014 में केंद्रीय राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग बनाया था। इसके बाद संसाधनों के तालमेल, राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत करने और युद्ध की तैयारी के लिए कई कानूनी नियम लागू किए गए। इन कदमों के जरिए CCP ने राष्ट्रीय सुरक्षा तंत्र के नाम पर अपनी सत्ता को और मजबूत किया है। राष्ट्रीय सुरक्षा के नाम पर व्यापक अधिकार इस आयोग की मदद से चीन ने 2015 में राष्ट्रीय सुरक्षा कानून, 2017 में राष्ट्रीय खुफिया कानून और 2021 में डेटा सुरक्षा कानून लागू किया। इन कानूनों के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा का मामला उठाकर चीनी सरकार को व्यापक अधिकार मिल जाते हैं। इन कानूनों के आदेशों से कोई नागरिक, कर्मचारी, कंपनी या संगठन बाहर नहीं है। संशोधित राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी कानून में 14 अध्याय और 82 अनुच्छेद हैं। 2010 में लागू होने के बाद यह इसका पहला अपडेट है। चीनी सरकारी मीडिया के मुताबिक, कानून नए सिस्टम के तहत राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी में सैन्य और नागरिक अधिकारियों के काम और जिम्मेदारियां साफ करता है। यह राष्ट्रीय रक्षा और सुरक्षा की जरूरतों को पूरा करने, आर्थिक और सामाजिक विकास के साथ तालमेल बैठाने और आपातकालीन प्रतिक्रिया व्यवस्था से जुड़ने के लिए राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी सिस्टम को बेहतर बनाता है। राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी का मतलब चीन राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी को ऐसी गतिविधियों के तौर पर परिभाषित करता है, जिनमें राष्ट्रीय संप्रभुता, एकता, क्षेत्रीय अखंडता, सुरक्षा और विकास हितों पर खतरे के जवाब में राज्य कानून के मुताबिक जरूरी कदम उठाता है। इसका उद्देश्य शांतिकाल और युद्धकाल के बीच तेजी से बदलाव सुनिश्चित करना और आर्थिक-सामाजिक ताकत को राष्ट्रीय रक्षा क्षमता में बदलना है। अमेरिका के थिंक टैंक जेम्सटाउन फाउंडेशन के लिए लिखने वाली सामंथा हॉफमैन ने कहा कि संशोधन छह क्षेत्रों पर केंद्रित हैं। इनमें सामान्य प्रावधानों में सुधार, जैसे पार्टी नेतृत्व को बनाए रखना; संगठनात्मक नेतृत्व ढांचे में बदलाव; लामबंदी की बुनियादी कार्यप्रणाली में सुधार; रिजर्व बल तैयार करने और भर्ती व्यवस्था की स्थापना; रणनीतिक सामग्री के भंडार की व्यवस्था में सुधार; और राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी से जुड़े प्रचार व शिक्षा तंत्र को मजबूत करना शामिल है। हॉफमैन ने लिखा, “नए संशोधन यह सुनिश्चित करते हैं कि पार्टी नेतृत्व किसी भी समय देश के सैन्य, नागरिक, आर्थिक और सामाजिक संसाधनों की पूरी ताकत को सक्रिय कर सके और उन्हें रणनीतिक लक्ष्यों की ओर लगा सके।” उनके मुताबिक, अगर कोई बड़ा संघर्ष होता है तो शी जिनपिंग राष्ट्रीय शक्ति को एकजुट ताकत के तौर पर इस्तेमाल कर सकते हैं। विकास हितों को भी कानून में शामिल किया चीन राष्ट्रीय विकास और राष्ट्रीय रक्षा के हितों को एक साथ जोड़ रहा है। 2010 के कानून में संप्रभुता, एकीकरण, क्षेत्रीय अखंडता और सुरक्षा की रक्षा का लक्ष्य था। 2026 के संस्करण में इसमें ‘विकास हित’ भी जोड़े गए हैं। CCP की भाषा में विकास हितों में आर्थिक सुरक्षा, संसाधनों तक पहुंच, विदेशों में मौजूद संपत्तियां और तकनीकी विकास शामिल हैं। इनमें क्षेत्रीय खतरे भी शामिल हैं। हॉफमैन ने आगे कहा, “यह बदलाव 2020 में संशोधित राष्ट्रीय रक्षा कानून के अनुरूप है। वह कानून पहले ही राज्य के विकास हितों को खतरा होने पर लामबंदी व्यवस्था शुरू करने की अनुमति देता है। इससे साफ होता है कि यह व्यवस्था विकास हितों पर भी लागू होती है।” संशोधित कानून में संगठनात्मक नेतृत्व निकायों और उनकी शक्तियों, राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी की योजना, सशस्त्र बलों के लिए कर्मियों के रिजर्व और लामबंदी, सैन्य शोध तथा नागरिक संसाधनों की मांग और जब्ती से जुड़े प्रावधान शामिल हैं। इसमें मुआवजे की व्यवस्था भी है। शी जिनपिंग की भूमिका पर विशेषज्ञों की राय ब्रसेल्स में सेंटर फॉर रूस यूरोप एशिया स्टडीज की निदेशक थेरेसा फॉलन ने X पर चिंता जताई। उन्होंने लिखा, “युद्ध के बढ़ते खतरे को नजरअंदाज करना अब कहीं ज्यादा मुश्किल है। चीन का राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी कानून 28 अगस्त 2026 को अपडेट किया गया और 1 अक्टूबर 2026 से लागू होगा। यह युद्धकाल का राष्ट्रीय रक्षा कानून है।” उन्होंने सवाल उठाया, “क्या अमेरिकी सैन्य भंडार में कमी, यूक्रेन में रूस का युद्ध और ईरान पर इजराइल-अमेरिका के युद्ध ने शी जिनपिंग को यह सोचने पर मजबूर कर दिया है कि समय अनुकूल होता जा रहा है?” हालांकि, 2026 के कानून की कुछ धाराएं चिंता पैदा करती हैं, लेकिन इसके ज्यादातर हिस्से पुराने कानून से बहुत अलग नहीं हैं। मिसाल के तौर पर, 18 से 60 साल के पुरुषों और 18 से 55 साल की महिलाओं के लिए राष्ट्रीय रक्षा सेवा करना जरूरी होने वाला प्रावधान 2010 के कानून में भी था। एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट के वरिष्ठ फेलो लाइल मॉरिस ने कहा, “असल में नागरिकों की लामबंदी से जुड़ी लगभग सभी जिम्मेदारियां 2010 के कानून जैसी ही हैं।” विशेष ज्ञान और कौशल वाले लोगों को बुलाने के लिए कोई उम्र सीमा तय नहीं है। हालांकि, मॉरिस ने कहा, “शी की लामबंदी में भूमिका और डेटा प्रबंधन से जुड़ी कई नई धाराओं को समझना जरूरी है। लेकिन लोगों को इसे युद्ध की नई तैयारी बताकर बहुत ज्यादा चिंता करना बंद करना चाहिए। यह तैयारी 2010 के कानून के बाद से एक दशक से ज्यादा समय से विकसित हो रही है।” CCP के केंद्रीय नेतृत्व के तहत लामबंदी व्यवस्था कानून में कुछ बदलाव किए गए हैं। जेम्सटाउन फाउंडेशन के लिए अपनी रिपोर्ट में हॉफमैन ने अनुच्छेद 3 और 16 को सबसे महत्वपूर्ण बदलाव बताया। इन अनुच्छेदों के तहत राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी व्यवस्था को CCP की केंद्रीय समिति के अधीन कर दिया गया है। पहले इसकी जिम्मेदारी राज्य परिषद और केंद्रीय सैन्य आयोग के पास थी। इस बदलाव से यह साफ होता है कि पार्टी का नेतृत्व और उसका अधिकार बाकी सभी संस्थाओं से ऊपर रहेगा। पहले नागरिक संसाधनों की केवल ‘मांग’ की जा सकती थी। अब उन्हें ‘जब्त’ भी किया जा सकता है और उनकी मांग भी की जा सकती है। इसमें सुविधाएं, उपकरण, वाहन, आयोजन स्थल या सरकार की जरूरत का कोई भी दूसरा संसाधन शामिल है। CCP की मांग पूरी करने से इनकार करने या देरी करने पर जबरन कार्रवाई और जुर्माना लगाया जा सकता है। चीनी अधिकारियों ने कहा है, “हमारा ध्यान सख्ती से पालन सुनिश्चित करने और सहायक नियामक व्यवस्थाएं बनाने पर रहेगा।” यह कानून आम नागरिकों, कारोबार, सामाजिक संगठनों, रणनीतिक सामग्री, सैन्य उत्पादन क्षमता, पेशेवर सहायता और चीन की ओर से राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी व्यवस्था में शामिल किए जाने वाले किसी भी अन्य तत्व पर लागू होगा। डेटा और साइबर सुरक्षा से जुड़ी नई जिम्मेदारियां हॉफमैन ने जवाबदेही बढ़ाने, डेटा और तकनीक से जुड़ी जिम्मेदारियां जोड़ने तथा राज्य के लामबंदी लक्ष्यों को लागू करने के लिए बाध्य संगठनों और लोगों का दायरा बढ़ाने की बात कही। कानून में पहली बार सूचना प्रबंधन का साफ तौर पर उल्लेख किया गया है। यह “झूठी राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी सूचना” तैयार करने या फैलाने पर रोक लगाता है। CCP की व्यवस्था में इस प्रावधान के तहत सरकार जिन सच्चाइयों को सामने नहीं आने देना चाहती, उन्हें भी ऐसी सूचना माना जा सकता है। पुराने कानून के कुछ हिस्से अप्रासंगिक हो चुके थे। उदाहरण के लिए, उसमें PLA के सैन्य क्षेत्रों का जिक्र था। इन सैन्य क्षेत्रों को 2016 में खत्म कर थिएटर कमांड बनाया गया था। नेशनल पीपुल्स कांग्रेस ने कानून में सुधार के दौरान 2010 के कानून के कुछ हिस्सों को चुपचाप अस्थायी तौर पर लागू करना रोक दिया था। कानून में सुधार के उपाय पूरी तरह विकसित होने के बाद इसे संशोधित करने की योजना पहले से थी। परिवहन से लेकर खाद्य आपूर्ति तक जिम्मेदारी हॉफमैन के मुताबिक, अनुच्छेद 58 में कई क्षेत्रों की इकाइयों के लिए राष्ट्रीय रक्षा सेवा से जुड़ी जिम्मेदारियां पूरी करना और पेशेवर सहायता दल बनाए रखना जरूरी किया गया है। इन दलों को संगठित और प्रशिक्षित करना होगा। आदेश मिलने पर उन्हें लामबंदी से जुड़े काम पूरे करने में सक्षम होना होगा। इस सूची में परिवहन, डाक सेवाएं, दूरसंचार, साइबर सुरक्षा, चिकित्सा और दवा आपूर्ति, खाद्य और अनाज आपूर्ति, इंजीनियरिंग समेत कई क्षेत्र शामिल हैं। इस सूची में साइबर सुरक्षा को शामिल करना महत्वपूर्ण बदलाव है। CCP का मानना है कि युद्ध के बदलते स्वरूप को देखते हुए कानून में बदलाव जरूरी था। कानून में कहा गया है, “राज्य राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी में उन्नत तकनीक के इस्तेमाल को बढ़ावा देता है और उभरते क्षेत्रों में राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी क्षमता विकसित करता है।” नागरिक संसाधनों की जब्ती का प्रावधान अनुच्छेद 64 के तहत सभी संगठनों और लोगों को नागरिक संसाधनों की जबरन जब्ती या अस्थायी इस्तेमाल के लिए सहमति देनी होगी। इन संसाधनों में इमारतें, उपकरण, वाहन और जमीन शामिल हैं। सैन्य इकाइयों के अनुरोध पर जिला स्तर के स्थानीय अधिकारी जब्ती की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं। राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी कार्यालयों ने 2022-23 के दौरान ज्यादातर समितियों के रोजमर्रा के काम अपने हाथ में ले लिए थे। शांतिकाल में लामबंदी की क्षमता से जुड़े नागरिक और सैन्य क्षेत्रों के आंकड़ों का सर्वे करना भी जरूरी है। इससे बीजिंग को विकास और संसाधनों की जानकारी रखने में मदद मिलती है। इससे उन लोगों पर भी नजर रखी जा सकती है, जो ऐसे आंकड़े देने से इनकार करते हैं, देरी करते हैं या गलत जानकारी देते हैं। चीन के बाहर रहने वालों पर भी लागू हो सकते हैं कानून राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी कानून चीन के बाहर रहने वाले लोगों पर भी लागू होता है। यह उस कोशिश का हिस्सा है, जिसमें चीन के कानूनों को व्यापक और दुनिया भर में लागू होने वाला बनाया जा रहा है। इसका एक और उदाहरण बीजिंग का 1 जुलाई 2026 को पारित जातीय एकता और प्रगति संवर्धन कानून है। यह कानून उइगर, तिब्बती और अन्य जातीय अल्पसंख्यकों के प्रति चीनी सरकार की नीतियों की आलोचना को अपराध बनाता है। धार्मिक मुद्दों पर आलोचना भी इसके दायरे में आती है। इस कानून के अनुच्छेद 63 में ‘देश से बाहर भी लागू होने’ का प्रावधान है। इसका मतलब है कि इसे चीन से बाहर रहने वाले नागरिकों या विदेशियों पर भी लागू किया जा सकता है। इसी वजह से चीन की यात्रा जोखिम भरी होती जा रही है। चीन किसी भी समय दावा कर सकता है कि किसी व्यक्ति ने दुनिया के किसी भी हिस्से में उसके कानून तोड़े हैं। यह शी सरकार की उस कोशिश का हिस्सा है, जिसके जरिए चीनी घरेलू कानूनों का इस्तेमाल कर दुनिया भर में विचारों और भाषण को नियंत्रित किया जा रहा है। हांगकांग की छात्रा की गिरफ्तारी का उदाहरण घरेलू कानूनों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर लागू करने का एक और उदाहरण युएन चिंग-टिंग की गिरफ्तारी है। 2023 में उन्हें दो महीने के लिए गिरफ्तार कर जेल भेजा गया था। हांगकांग की इस छात्रा को विदेश में रहते हुए फेसबुक और इंस्टाग्राम पर “देशद्रोही” ऑनलाइन पोस्ट करने का दोषी ठहराया गया था। जापान की यूनिवर्सिटी से हांगकांग लौटने के बाद उन्हें गिरफ्तार किया गया। अधिकारियों ने हांगकांग के 2020 के राष्ट्रीय सुरक्षा कानून के तहत कार्रवाई की। उनकी ऑनलाइन टिप्पणियों में 13 पोस्ट शामिल थीं। इनमें लिखा था, “मैं हांगकांग की नागरिक हूं; मैं हांगकांग की आजादी का समर्थन करती हूं” और “जब तक चीनी कम्युनिस्ट पार्टी मौजूद है, तब तक घर कैसे हो सकता है?” चीन में लोगों के विचारों और कामकाज को नियंत्रित करने के लिए कानूनों का इस्तेमाल जारी है। समाज को युद्ध और संघर्ष के लिए तैयार करने की उसकी एकीकृत कोशिशें रुकती नहीं दिख रही हैं। संशोधित राष्ट्रीय रक्षा लामबंदी कानून चीन के लोगों को भविष्य में संभावित युद्ध के लिए तैयार करने की एक और कोशिश है। इसमें ताइवान और अमेरिका को सबसे संभावित विरोधी माना गया है। खबर अपडेट हो रही है…



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5 मिनट में ऐसे बनाएं राजस्थानी धुगरी तड़का चटनी, दिल खुश कर देगा देसी स्वाद

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Desi Dhugari Tadka Chutney Recipe: भीलवाड़ा की राजस्थानी देसी धुगरी तड़का चटनी अपने तीखे, खट्टे और चटपटे स्वाद के लिए खास पसंद की जाती है. इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसे बेहद कम समय और घर में मौजूद सामान्य सामग्री से तैयार किया जा सकता है. धुगरी, हरी मिर्च, लहसुन और देसी मसालों से बनने वाली इस चटनी में जीरा, राई और हींग का तड़का स्वाद और खुशबू को और बढ़ा देता है. इसे रोटी, बाजरे की रोटी, पराठे, दाल-बाटी और चावल के साथ परोसा जा सकता है. रोज के खाने में अगर कुछ चटपटा और देसी स्वाद जोड़ना हो तो यह आसान रेसिपी बेहतर विकल्प है.

ख़बरें फटाफट

भीलवाड़ा. राजस्थान के देसी खान-पान की अपनी अलग पहचान है. यहां के व्यंजनों में मसालों और देसी स्वाद का खास मेल देखने को मिलता है. इसी तरह राजस्थानी देसी धुगरी तड़का चटनी भी अपने तीखे, खट्टे और चटपटे स्वाद के लिए काफी पसंद की जाती है. यह चटनी खाने के स्वाद को बढ़ाने के साथ भोजन में देसी जायका भी जोड़ देती है. खास बात यह है कि इसे बनाने में ज्यादा टाइम नहीं लगता और यह चटनी महज 5 मिनट में तैयार की जा सकती है.

अगर आप रोज रोज आम सब्जियां खाकर ऊब गए हों तो ये देसी चटनी घर पर बना सकते हैं. राजस्थानी देसी धुगरी तड़का चटनी की सबसे बड़ी खासियत इसकी जल्दी बनने वाली रेसिपी और देसी स्वाद है. कम समय में तैयार होने के कारण यह चटनी रोजमर्रा के भोजन के लिए भी बेस्ट ऑप्शन है. अगर आप खाने में तीखा , खट्टा और मसालेदार स्वाद पसंद करते हैं, तो यह चटनी जरूर बनाकर देख सकते हैं.

देसी धुगरी तड़का चटनी के लिए इन सामाग्रियों की पड़ेगी जरूरत

पूजा कुमारी सांखला ने बताया कि अगर घर में अचानक मेहमान आ जाए या रोज के खाने के साथ कुछ चटपटा खाने का मन हो तो यह चटनी आसानी से बनाई जा सकती है. इसके लिए बहुत ज्यादा सामग्री की भी जरूरत नहीं होती. घर में मौजूद सामान्य मसालों से ही इसे तैयार किया जा सकता है. तड़के में डाले गए मसाले चटनी के स्वाद और खुशबू को और भी बढ़ा देते हैं. देसी धुगरी तड़का चटनी बनाने के लिए धुगरी, हरी मिर्च, लहसुन, नमक, लाल मिर्च, धनिया पाउडर और खटास के लिए नींबू या अमचूर का इस्तेमाल किया जा सकता है. इसके अलावा तड़का लगाने के लिए तेल, जीरा, राई और जरूरत के अनुसार हींग ली जा सकती है. सामग्री को अपने स्वाद के अनुसार कम या ज्यादा किया जा सकता है.

घर पर ऐसे बनाएं देसी धुगरी तड़का चटनी

सबसे पहले धुगरी को साफ कर लें. इसके बाद हरी मिर्च और लहसुन को बारीक पीस लें. अब इसमें नमक, लाल मिर्च और धनिया पाउडर मिलाएं. चटनी को मनचाहा स्वाद देने के लिए इसमें नींबू का रस या अमचूर डालें. सभी सामग्री को अच्छी तरह मिला लें. अब एक छोटी कड़ाही में तेल गर्म करें. इसमें जीरा और राई डालें. जब जीरा चटकने लगे तो इसमें थोड़ी हींग डालें. तैयार तड़के को चटनी के ऊपर डाल दें. तड़का पड़ते ही चटनी से देसी मसालों की खुशबू आने लगेगी. इसे अच्छी तरह मिलाने के बाद चटनी परोसने के लिए तैयार है.  यह चटनी रोटी, बाजरे की रोटी, पराठे, दाल-बाटी और चावल के साथ खाई जा सकती है. सादे भोजन के साथ भी इसका चटपटा स्वाद खाने का जायका बढ़ा देता है. तीखा पसंद करने वाले लोग इसमें हरी मिर्च की मात्रा बढ़ा सकते हैं.

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दीप रंजन सिंह Content Producer

दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…

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जंतर-मंतर प्रोटेस्ट से जुड़ी 13 FIR रद्द करने की मांग: सुप्रीम कोर्ट में आज सुनवाई; दिल्ली पुलिस ने 2873 लोगों पर नई FIR की परमिशन मांगी


नई दिल्ली2 घंटे पहले

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नई दिल्ली में NEET पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों पर दर्ज 13 FIR रद्द करने की दिल्ली पुलिस की याचिका पर सुप्रीम कोर्ट आज 1 सितंबर को सुनवाई करेगा। यह मांग भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने की थी।

पुलिस ने प्रदर्शन के दौरान मौजूद रहे 2873 लोगों की भूमिका की जांच के लिए नई FIR दर्ज करने की परमिशन भी मांगी है।

CJI जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी. मोहना की बेंच ने मंगलवार को मामले की तत्काल सुनवाई को मंजूरी दी थी। बेंच ने कहा कि अगर पक्षकार आपस में सहमति बना रहे हैं, तो उसे कोई परेशानी नहीं है।

SG मेहता ने कहा- हम एक IA (इंटरलोक्यूटरी एप्लिकेशन) दाखिल करना चाहते हैं। यह प्रदर्शन से जुड़ा है और FIR रद्द करने के लिए है। हम संविधान के अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल कर रहे हैं।

आवेदन में कहा गया है कि केंद्र सरकार के 25 जुलाई के फैसले के अनुसार, दिल्ली पुलिस कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शनों से जुड़ी 13 FIR आगे नहीं चलाना चाहती।

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके 5 सितंबर को दिल्ली मार्च का ऐलान किया है।

कॉकरोच जनता पार्टी के संस्थापक अभिजीत दीपके 5 सितंबर को दिल्ली मार्च का ऐलान किया है।

दिल्ली पुलिस का दावा- 2800 से ज्यादा क्रिमिनल पहचाने गए

दिल्ली पुलिस ने आवेदन में कहा कि NCRB के रिकॉर्ड के मुताबिक प्रदर्शन स्थल पर कुछ आपराधिक पृष्ठभूमि वाले लोग मौजूद थे। पुलिस जांच करना चाहती है कि इनमें से किसी की हिंसा या संपत्ति को नुकसान पहुंचाने में भूमिका थी या नहीं।

पुलिस ने कहा कि वह केवल इन 2,873 लोगों के खिलाफ नई FIR दर्ज करने की अनुमति चाहती है। इस FIR की जांच ‘क्रिमिनल बैकग्राउंड’ की तय परिभाषा के आधार पर की जाएगी।

पुलिस ने कहा कि आम तौर पर नई FIR दर्ज नहीं की जाएगी। लेकिन जनहित और मामले की खास परिस्थितियों को देखते हुए संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत कोर्ट से विशेष अनुमति मांगी गई है। साथ ही पुरानी FIR रद्द करने की मांग की गई है।

पुलिस ने कोर्ट से यह भी कहा कि उसका फैसला सिर्फ इस मामले की परिस्थितियों तक सीमित रहे और भविष्य के मामलों में इसे मिसाल न माना जाए।

CJP ने टीचर्स-डे पर दिल्ली में दोबारा मार्च बुलाया

कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) ने सितंबर में दिल्ली में फिर प्रदर्शन मार्च निकालने का ऐलान किया है। संगठन का आरोप है कि केंद्र सरकार ने 25 जुलाई को आंदोलन खत्म कराने के लिए किए वादे पूरे नहीं किए।

CJP के मुताबिक, मार्च 5 सितंबर यानी शिक्षक दिवस के दिन निकलेगा। इसका नेतृत्व उन छात्रों के परिवार करेंगे, जिन्होंने NEET परीक्षा रद्द होने और दोबारा परीक्षा कराने के बाद आत्महत्या की थी।

मार्च में जुलाई के आंदोलन के दौरान पुलिस ज्यादती का आरोप लगाने वाले छात्रों के परिवार भी शामिल होंगे।

NEET प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट की पिछली कार्रवाई

सुप्रीम कोर्ट ने पहले पूर्व जज जस्टिस आर. सुभाष रेड्डी की अध्यक्षता में एक हाईपावर्ड कमेटी बनाई थी। कमेटी को NEET-UG पेपर लीक के विरोध में देशभर में हुए प्रदर्शनों और छात्रों पर पुलिस ज्यादती के आरोपों की जांच करनी थी।

3 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने छात्रों की रिहाई के आदेश में ‘आपराधिक पृष्ठभूमि’ का मतलब साफ किया। कोर्ट ने कहा कि इसमें केवल गंभीर और जघन्य अपराधों में शामिल लोग आएंगे। बाकी छात्रों के खिलाफ दर्ज FIR राज्य सरकारें कानून के तहत बंद या वापस ले सकती हैं।

यह सफाई केंद्र के उस बयान के बाद आई थी, जिसमें उसने कहा था कि वह NEET पेपर लीक के विरोध में प्रदर्शन करने वाले छात्रों के खिलाफ FIR जारी नहीं रखना चाहता। इसमें 20 जुलाई को दिल्ली में संसद मार्च करने वाले छात्र भी शामिल थे, अगर उनका कोई आपराधिक रिकॉर्ड नहीं था।

20 जुलाई को प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों में झड़प

20 जुलाई को CJP के नेतृत्व में दिल्ली में हुए मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और सुरक्षाकर्मियों के बीच झड़प हुई थी। संसद की ओर बढ़ रही भीड़ को रोकने के लिए सुरक्षाकर्मियों ने लाठीचार्ज और आंसू गैस का इस्तेमाल किया था।

इसके बाद छात्रों का आंदोलन कई शहरों तक फैल गया। उनकी मुख्य मांग तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा था।

आंदोलन 20 जून को जंतर-मंतर से शुरू हुआ था। प्रधान के इस्तीफे और सरकार की ओर से CJP की दूसरी मांगें मानने के बाद 25 जुलाई को आंदोलन खत्म कर दिया गया था।



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आज फिर सरकार लेगी ₹3,600 करोड़ का कर्ज: RBI के जरिए होगी सरकारी सिक्योरिटी, 5 लाख 40 हजार करोड़ के पार पहुंचेगा राज्य शासन पर कर्ज – Bhopal News




राज्य सरकार विकास और उत्पादक योजनाओं एवं परियोजनाओं के नाम पर आज एक बार फिर कुल ₹3,600 करोड़ का कर्ज लेने जा रही है। इसके लिए सरकार 1 सितंबर को भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), मुंबई कार्यालय के माध्यम से दो अलग-अलग सरकारी सिक्योरिटी की नीलामी करेगी। अब कर्ज का कुल आंकड़ा चालू वित्त वर्ष में 51400 करोड़ रुपए हो जाएगा। वहीं नए कर्ज के बाद राज्य सरकार पर कुल कर्ज बढ़कर 5 लाख 40 हजार 114 करोड़ रुपए हो जाएगा। राज्य सरकार की ओर से अधिसूचना जारी कर दोनों कर्ज की अवधि, राशि, नीलामी और भुगतान की प्रक्रिया स्पष्ट की गई है। पहला कर्ज ₹1,600 करोड़ 18 साल के लिए होगा। नीलामी प्लेटफॉर्म RBI का Core Banking Solution (E-Kuber) होगा। इस राशि की ब्याज के साथ अदायगी सरकार जुलाई 2044 तक 7.61 प्रतिशत सालाना ब्याज पर करेगी। ब्याज का हर साल भुगतान 8 जनवरी और 8 जुलाई को किया जाएगा। दूसरा कर्ज ₹ 2,000 करोड़ रुपए का 30 साल के लिए लिया जा रहा है। इसकी मूलधन वापसी सितंबर 2056 तक नीलामी में तय होने वाली कट-ऑफ यील्ड ब्याज के जरिये की जाएगी। हर साल 2 मार्च और 2 सितंबर को ब्याज राशि का भुगतान होगा। किससे लिया जाएगा कर्ज यह कर्ज किसी एक बैंक से सीधे नहीं लिया जा रहा है। प्रदेश सरकार सरकारी सिक्योरिटीज बेचकर निवेशकों से पैसा जुटाएगी। इनकी नीलामी RBI के मुंबई कार्यालय से होगी। इसमें बैंक, वित्तीय संस्थान और पात्र निवेशक बोली लगा सकेंगे। इसके अलावा नॉन-कॉम्पिटिटिव बिडर्स के लिए भी सरकारी प्रतिभूतियों में हिस्सा लेने की व्यवस्था रखी गई है। नॉन-कॉम्पिटिटिव श्रेणी में पात्र व्यक्तियों और संस्थाओं को कुल नोटिफाइड राशि के 10% तक सिक्योरिटीज आवंटित की जा सकती हैं, जबकि एकल बोलीदाता के लिए अधिकतम सीमा नोटिफाइड राशि की 1% रखी गई है। सरकार को कर्ज की राशि का भुगतान 2 सितंबर 2026 को भुगतान करना होगा। 18 अगस्त को लिया था 2400 करोड़ का कर्ज इसके पहले मोहन सरकार ने 18 अगस्त को सिक्योरिटी की नीलामी के बाद 7.58% और 7.39% ब्याज दर पर 1,400 करोड़ और 1,000 करोड़ रुपए के दो कर्ज उठाए हैं। इन दोनों कर्ज की राशि पर सरकार जनवरी और जुलाई में छमाही आधार पर ब्याज का भुगतान करेगी। दोनों कर्ज की अवधि क्रमशः 12 साल और 8 साल है। अगस्त महीने में ही 4 अगस्त को 1,600 करोड़ और 2,000 करोड़ रुपए के कुल 3,600 करोड़ रुपए कर्ज लिए गए थे। 31 मार्च 2026 की स्थिति में राज्य सरकार पर 4 लाख 88 हजार 714 करोड़ रुपए का कर्ज था। एक सितम्बर को होने वाली नीलामी के बाद लिए गए कर्ज का कुल आंकड़ा चालू वित्त वर्ष में 51400 करोड़ रुपए हो जाएगा। नए कर्ज के बाद राज्य सरकार पर कुल कर्ज बढ़कर 5 लाख 40 हजार 114 करोड़ रुपए हो जाएगा।



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डायग्नोस्टिक सेंटर के कर्मचारी ने खुद को मारी गोली: गोरखपुर में मची अफरा-तफरी, पुलिस ने घायल को भर्ती कराया – Gorakhpur News




गोरखपुर के खोराबार के रानीडीह स्थित वर्ड विजन डायग्नोसिस सेंटर में सोमवार को सेंटर के एक कर्मचारी के सिर में गोली लग गई। घटना की सूचना मिलते ही खोराबार पुलिस मौके पर पहुंच गई। घायल कर्मचारी को तत्काल कैंट क्षेत्र स्थित राजवंशी हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां उसका इलाज चल रहा है। पुलिस के अनुसार, उसकी हालत सामान्य बताई जा रही है। कर्मचारी ने ही खुद को गोली मारी है, पुलिस की जांच में यह बात सामने आई है। गोली किस असलहे से चली है, पुलिस इसके बारे में जानकारी जुटा रही है। बताया जा रहा है कि शाम 6 बजे की घटना है। पुलिस को इसकी जानकारी रात करीब 9 बजे मिली। खुद को क्यों मारी गोली, जांच चल रही है घायल की पहचान सिकरीगंज थाना क्षेत्र के भीटी गांव निवासी विशाल चंद पुत्र बजरंगी चंद के रूप में हुई है। उम्र करीब 25 साल का विशाल रानीडीह स्थित वर्ड विजन डायग्नोसिस सेंटर में कर्मचारी है। सोमवार को सेंटर पर मौजूदगी के दौरान उसके सिर में गोली लगने की घटना हुई। गोली चलने की आवाज और युवक के घायल होने की जानकारी मिलते ही सेंटर के अन्य कर्मचारियों में अफरा-तफरी मच गई।
सेंटर के कर्मचारियों ने पुलिस को प्रारंभिक जानकारी दी कि विशाल ने खुद को गोली मार ली है। हालांकि, गोली किन परिस्थितियों में चली और उसने ऐसा कदम क्यों उठाया, यह अभी स्पष्ट नहीं हो सका है। पुलिस घटना के सभी पहलुओं की जांच कर रही है। नहीं दिया थाने पर प्रार्थना पत्र
सूचना मिलने के बाद खोराबार पुलिस ने मौके पर पहुंचकर कर्मचारियों से घटना के संबंध में जानकारी ली। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि घटना के समय सेंटर में कौन-कौन लोग मौजूद थे और गोली किस असलहे से चली। असलहे के बारे में भी जानकारी जुटाई जा रही है। घटनास्थल की परिस्थितियों और कर्मचारियों के बयानों के आधार पर पुलिस मामले की पड़ताल कर रही है। इधर, घायल विशाल का राजवंशी हॉस्पिटल में उपचार जारी है। पुलिस के मुताबिक उसकी हालत सामान्य है। घटना के संबंध में अभी तक विशाल के परिजनों की ओर से कोई प्रार्थना पत्र नहीं दिया गया है। इस संबंध में एसपी सिटी निमिष पाटील ने बताया कि जांच की जा रही है, इसके बाद ही घटना की पूरी स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।



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