नई दिल्ली. बॉलीवुड सुपरस्टार अक्षय कुमार ने अपनी आने वाली फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ की फीस को लेकर चल रही तमाम खबरों पर विराम लगा दिया है. सोशल मीडिया पर चर्चा थी कि उन्होंने इस फिल्म के लिए 1.7 करोड़ रुपये चार्ज किए हैं. फिल्म के ट्रेलर लॉन्च इवेंट के दौरान जब यह सवाल उठा, तो अक्षय ने इन अफवाहों को सिरे से खारिज कर दिया. उन्होंने साफ शब्दों में कहा कि इंटरनेट पर जो आंकड़े चल रहे हैं, उनमें रत्ती भर भी सच्चाई नहीं है और यह पूरी तरह गलत हैं.
फिल्म के ट्रेलर लॉन्च इवेंट पर जब इंडिया टुडे के रिपोर्टर ने अक्षय कुमार से उनकी फीस को लेकर सवाल पूछा, तो उन्होंने बहुत ही बेबाकी से जवाब दिया. अक्षय ने कहा, ‘मैंने उतना भी नहीं लिया है, मुझे उतना भी नहीं मिला.’ फीस से हटकर उन्होंने फिल्म से अपने जुड़ाव पर बात की और कहा कि यह फिल्म उनके दिल के बेहद करीब है, क्योंकि इसकी कहानी दिवंगत राइटर-डायरेक्टर नीरज वोरा ने लिखी है.
क्या है फिल्म के ट्रेलर में?
ट्रेलर की शुरुआत काफी धमाकेदार और हाई-एनर्जी के साथ होती है, जिसमें फिल्म की तगड़ी स्टारकास्ट की एंट्री दिखाई गई है. इसे देखकर ही अंदाजा लग जाता है कि इस बार भी दर्शकों को भरपूर कन्फ्यूजन, पागलपन और ताबड़तोड़ कॉमेडी का तड़का मिलने वाला है. ‘वेलकम’ फ्रेंचाइजी के पुराने मिजाज को कायम रखते हुए इस ट्रेलर में भी ढेर सारे मजेदार किरदार, एक-दूसरे में उलझे हालात और कमाल का कॉमिक डिसऑर्डर देखने को मिल रहा है.
ट्रेलर में दिखी ‘मजनू भाई’ की झलक
ट्रेलर का सबसे बड़ा और मजेदार सरप्राइज वो पल है, जो पहली फिल्म के आइकॉनिक मजनू भाई की याद दिलाता है. अनिल कपूर का निभाया यह किरदार आज भी फैंस का ऑल-टाइम फेवरेट है, इसलिए नए ट्रेलर में मजनू भाई का यह थ्रोबैक मूमेंट सीधे दर्शकों के दिल को छूने वाला है.
इस दिन रिलीज होगी ‘वेलकम टू द जंगल’
अहमद खान के डायरेक्शन में बनी ‘वेलकम टू द जंगल’ 26 जून 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक देने के लिए पूरी तरह तैयार है. यह फिल्म ‘वेलकम’ फ्रेंचाइजी के उसी पुराने पागलपन, कन्फ्यूजन और कॉमेडी को एक बड़े और भव्य पैमाने पर पर्दे पर वापस लाने का वादा करती है. इस बार कहानी में नए किरदारों और मजेदार हालातों को जोड़ा गया है, जिसे देखकर लगता है कि यह फिल्म थिएटर्स में दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए एक परफेक्ट मसाला एंटरटेनर साबित होगी.
‘वेलकम टू द जंगल’ की तगड़ी स्टारकास्ट
फिल्म की स्टारकास्ट बेहद तगड़ी है. इसमें अक्षय कुमार लीड रोल में हैं और उनके साथ सुनील शेट्टी, अरशद वारसी, दिशा पाटनी, जैकलिन फर्नांडीस, रवीना टंडन, लारा दत्ता, जैकी श्रॉफ, उर्वशी रौतेला, परेश रावल, जॉनी लीवर, राजपाल यादव, श्रेयस तलपड़े, तुषार कपूर, कृष्णा अभिषेक, कीकू शारदा और दलेर मेहंदी जैसे कई बड़े नाम एक साथ स्क्रीन शेयर करते नजर आएंगे.
हादसे के अगले दिन PM मोदी ने अस्पताल में विश्वास से मुलाकात की थी।
‘12 जून 2025 के उस मनहूस दिन को पूरा साल हो गया। पर मेरे लिए वक्त वहीं ठहरा है। लोग मुझे ‘चमत्कारी’ कहते हैं, क्योंकि अहमदाबाद एयरपोर्ट से उड़ान भरते ही जब एअर इंडिया का बोइंग 787 ड्रीमलाइनर क्रैश हुआ, तो उसमें सवार 260 लोगों में से सिर्फ मैं अकेला जिंदा बचा था। पर सच कहूं, तो इस जिंदा रहने की कीमत मैं हर रोज अपनी आत्मा का एक हिस्सा देकर चुका रहा हूं।
इस दुर्घटना के एकमात्र सर्वाइवर विश्वास कुमार रमेश ने अपने भाई को भी इस क्रैश में खो दिया था। रमेश ने कहा कि हादसे की कैसी भी जांच हो, मेरा भाई तो नहीं लौटा सकती। लेकिन, हम सभी को यह जानने का पूरा हक है कि उस दिन हुआ क्या था। भावुक अपील में विश्वास ने जांचकर्ताओं द्वारा अंतिम रिपोर्ट जारी किए जाने से पहले ‘ईमानदारी, पारदर्शिता की मांग की है। पढ़िए उन्होंने और क्या कहा…
प्लेन हादसे के बाद रमेश विश्वास कुमार घटनास्थल से पैदल चलकर बाहर आए थे।
आज भी वह खौफनाक मंजर दिखाई देता है: रमेश
रमेश ने कहा- आज भी आंखें बंद करता हूं, तो मुझे वो चीखें, आग और वो खौफनाक मंजर दिखाई देता है। मैं बच तो गया, लेकिन गहरे मानसिक जख्मों के साथ। आज त्रासदी की पहली बरसी है। नागरिक उड्डयन मंत्री ने पिछले महीने कहा था कि जांच ‘अंतिम चरण’ में है और रिपोर्ट बरसी तक आ जाएगी।
हादसे के ठीक 30 दिन बाद शुरुआती रिपोर्ट में कहा गया था कि टेक-ऑफ के तुरंत बाद विमान के दोनों फ्यूल स्विच ‘कट-ऑफ’ पोजीशन पर आ गए थे, जिससे इंजनों को ईंधन मिलना बंद हो गया। पर ऐसा क्यों हुआ? यह तकनीकी खराबी थी या किसी की लापरवाही? इस सवाल का जवाब सालभर बाद भी नहीं मिला है।
उन्होंने आगे कहा- मुझे और मेरे जैसे सैकड़ों पीड़ित परिवारों को सिर्फ तीन चीजें चाहिए- ईमानदारी, पारदर्शिता और हमारे सवालों के जवाब। कोई भी रिपोर्ट मेरे भाई को लौटा नहीं सकती, न ही उन 260 लोगों को जिंदा कर सकती है। पर प्रभावित परिवारों को यह जानने का हक है कि उनके अपनों के साथ उस दिन क्या हुआ था।
अहमदाबाद में 12 जून 2025 को एअर इंडिया का AI17 प्लेन क्रैश हुआ था।
सदमे के चलते काम पर नहीं लौट पाया हूं: रमेश
हादसे के बाद से मेरी जिंदगी पटरी से उतर चुकी है। एअर इंडिया ने मदद के लिए 21,500 पाउंड (लगभग 23 लाख रुपए) दिए थे, पर वह रकम इस कड़वी हकीकत के सामने बहुत छोटी है। मानसिक आघात के कारण मैं काम पर सामान्य रूप से नहीं लौट पाया हूं। लंदन में मेरा परिवार हर महीने 1,000 पाउंड (एक लाख रु. से कम) में गुजारा करने को मजबूर है।
मेरे प्रतिनिधि संजीव पटेल ने कई बार एअर इंडिया के सीईओ से मिलने का समय मांगा, पर उन्होंने जरूरी नहीं समझा। हाल में एअर इंडिया अधिकारियों व टाटा समूह प्रतिनिधियों से मुलाकात हुई, पर मुआवजे और मदद से जुड़े अहम मुद्दे अब भी अधर में हैं। ब्रिटिश नागरिक होने के बावजूद मुझे या अन्य ब्रिटिश पीड़ित परिवारों को यूके सरकार से मदद नहीं मिली।
हमारे वकील कानूनी कार्रवाई की तैयारी कर रहे हैं। अंतिम जांच रिपोर्ट का इंतजार है ताकि असली जिम्मेदार तय हो सके। एअर इंडिया प्रवक्ता संपर्क में होने की बात करते हैं, पर अब वादों से ज्यादा ठोस नतीजों की जरूरत है। हर दिन न्याय की उम्मीद में जागता हूं, ताकि मेरे जैसे सैकड़ों परिवार इस दर्द से थोड़ा सा उबर सकें।’
एयर इंडिया ने 96% पीड़ित परिवारों को मुआवजा दिया
एयर इंडिया ने गुरुवार को कहा कि उसने अहमदाबाद में 12 जून 2025 को हुए विमान हादसे से प्रभावित 96% परिवारों को 25-25 लाख रुपए का अंतरिम मुआवजा दे दिया है। जिनके डॉक्यूमेंटेशन अधूरे हैं या जहाँ परिवार में झगड़े चल रहे हैं, उन परिवारों को ही मुआवजा नहीं मिला है।साथ ही जमीन पर घायल हुए 94% लोगों को या तो एक बार में पूरा मुआवजा मिला है। बाकी लोगों ने हेल्पडेस्क से फॉर्म ले लिए थे, लेकिन अभी तक उन्हें जमा नहीं किया है।
टाटा संस ने AI171 हादसे से प्रभावित लोगों की मदद करने के लिए AI171 मेमोरियल और वेलफ़ेयर ट्रस्ट बनाया है। टाटा संस के चेयरमैन एन चंद्रशेखरन ने सभी मरने वालों के परिवारों के लिए ₹1 करोड़ की मदद की घोषणा की थी। 91% परिवारों को पूरे ₹1 करोड़ दिए जा चुके हैं।
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अहमदाबाद प्लेन क्रैश जिस हॉस्टल पर हुआ था, वह फिर बनेगा: सुपर स्पेशियलिटी हॉस्टल पर ₹105 करोड़ खर्च होंगे
अहमदाबाद में पिछले साल जून में जिस हॉस्टल पर गिरकर प्लेन क्रैश हुआ था, उसकी जगह अब नया आधुनिक सुपर स्पेशियलिटी हॉस्टल बनाया जाएगा। गुजरात सरकार ने सिविल अस्पताल के पास असरवा स्थित न्यू मेंटल कैंपस में ₹105 करोड़ की लागत से 9 मंजिला हॉस्टल और कैंटीन ब्लॉक बनाने का फैसला लिया है। पूरी खबर पढ़ें…
दिल्ली के मालवीय नगर स्थित ‘फ्लोरिस स्टे’ होटल अग्निकांड मामले में दिल्ली पुलिस की जांच पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। सिविल सोसायटी, सामाजिक कार्यकर्ताओं और आम लोगों का आरोप है कि रसूखदार होटल मालिकों, दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) और पुलिस अधिकारियों को बचाने के लिए होटल के 65 वर्षीय रसोइए केशव सिंह नेगी को ‘बलि का बकरा’ बनाया जा रहा है।
3 जून को हुए इस भयानक हादसे में अग्रवाल परिवार के 8 सदस्यों सहित नाइजीरिया, किर्गिस्तान, मोजाम्बिक, उज्बेकिस्तान, बांग्लादेश, कांगो, लाइबेरिया और इराक के 15 विदेशी नागरिकों समेत कुल 23 लोगों की मौत हो चुकी है। इसके अलावा 30 से अधिक लोग गंभीर रूप से घायल हैं।
होटल के 65 वर्षीय रसोइए केशव सिंह नेगी को दिल्ली पुलिस ने गिरफ्तार किया है।
पुलिस ने केशव पर 5 गंभीर आपराधिक धाराएं लगाई हैं
पुलिस का आरोप है कि आग लगने पर रसोइया केशव दरवाजा और बिजली का स्विच बंद कर भाग गया था। पुलिस ने उस पर 5 गंभीर आपराधिक धाराएं लगाकर उसे 14 दिन की न्यायिक हिरासत में भेज दिया है, जिसका अब चौतरफा विरोध हो रहा है।
लोगों का कहना है कि होटल में सुरक्षा मानकों की अनदेखी और खामियों की मुख्य जिम्मेदारी प्रबंधन और मालिकों की होती है, न कि वहां काम करने वाले किसी मामूली कर्मचारी की।
लाइसेंस खत्म होने के बाद भी 2 महीने तक चलता रहा होटल
एमसीडी के सिटी जोन की पूर्व चेयरमैन रेणुका गुप्ता ने होटल हादसे के लिए जिम्मेदार अफसरों पर गैर-इरादतन हत्या (धारा 105) के तहत कार्रवाई न करने और गिरफ्तारी न होने पर सवाल उठाए। उन्होंने अवैध रूप से बने 20 कमरों के लिए बिल्डिंग विभाग के इंजीनियरों को जिम्मेदार ठहराया और मार्च में लाइसेंस खत्म होने के बाद भी होटल चलने देने के लिए दिल्ली टूरिज्म डेवलपमेंट कॉर्पोरेशन (डीटीडीसी) की भूमिका पर सवाल उठाए।
फॉर्म सी नियम की अनदेखी, पुलिस की कार्यशैली पर सवाल
गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी के सरदार इंद्रजीत सिंह निरमान ने इस मामले में स्थानीय पुलिस पर गंभीर आरोप लगाते हुए उनकी कार्यशैली पर बड़े सवाल उठाए हैं। उन्होंने कहा कि विदेशी नागरिकों को ठहराने वाले हर होटल या गेस्टहाउस के लिए 24 घंटे के भीतर ‘फॉर्म सी’ जमा करना कानूनन जरूरी है। स्थानीय पुलिस की जिम्मेदारी विदेशी मेहमानों का रिकॉर्ड रखने और उन पर नजर रखने की है, ताकि कोई संदिग्ध न रह सके।
दिल्ली पुलिस ने 3 जून की रात होटल के सह-मालिक लवकेश बजाज को हिरासत में लिया था।
एसडीएम ने माना कि बिजली बंद होने से टला बड़ा हादसा
सिविल सोसायटी का कहना है कि केशव नेगी की गिरफ्तारी पूरी तरह गलत है। उस पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 105 (गैर इरादतन हत्या) समेत 5 धाराएं लगाई गई हैं। यह एक गैर-जमानती अपराध है, जिसमें 10 साल तक की जेल हो सकती है। धारा 105 तब लागू होती है जब किसी को पता हो कि उसके काम से मौत हो सकती है।
पुलिस का दावा है कि आग लगने पर बिजली बंद करने से अंधेरा हुआ, जिससे लोगों की जान गई। लेकिन, केशव नेगी ने फायर फाइटिंग के नियमों का पालन करते हुए सतर्कता दिखाई। ममगांई ने कहा कि वे सिविल डिफेंस के वालंटियर रहे हैं और फायर फाइटिंग, बचाव व आपातकालीन उपायों का प्रशिक्षण लिया है, जिसमें कहा जाता है कि आग से सुरक्षा के लिए विद्युत कनेक्शन बंद करना पहला कदम है।
खुद स्थानीय एसडीएम जितेंद्र कुमार ने माना है कि समय पर बिजली बंद होने से बड़ा हादसा टल गया। सिविल डिफेंस के जानकारों का भी यही मानना है।
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केशव नेगी को न्याय दिलाने के लिए उत्तराखंड भाजपा-कांग्रेस एक:हरीश रावत बोले- शेफ को बली का बकरा बनाया
दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लोरिश स्टे होटल अग्निकांड में गिरफ्तार उत्तराखंड के शेफ केशव नेगी के मामले में भाजपा और कांग्रेस एक नजर आ रही है। प्रदेश की दोनों ही प्रमुख पार्टियां एक सुर में नेगी को न्याय दिलाने की बात कह रही हैं। पूरी खबर पढ़ें…
दिल्ली होटल आग- लाइसेंस मालिक नहीं, कर्मचारी के नाम:अकाउंटेंट बोला- सारे दस्तावेज जले; घटना वाले दिन मेट्रो से शहर में घूम रहा था
दिल्ली के मालवीय नगर स्थित फ्लरिश स्टे होटल में आग लगने के मामले में जांच के दौरान नए खुलासे हुए हैं। पुलिस को होटल के लाइसेंस, संचालन और फायर सेफ्टी नियमों में संभावित गड़बड़ियों के बारे में जानकारी मिली है। पूरी खबर पढ़ें…
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने बस्ती जिले की नगर पंचायत बभनान बाजार द्वारा 66 दुकानों की नीलामी के लिए 8 मई 2026 को जारी सार्वजनिक सूचना को निरस्त कर दिया है।
साथ ही नगर पंचायत को कानून के अनुरूप नई नीलामी प्रक्रिया शुरू करने के निर्देश दिए हैं। यह आदेश न्यायमूर्ति सौमित्र दयाल सिंह और न्यायमूर्ति सत्य वीर सिंह की खंडपीठ ने कृष्ण कुमार सिंह की याचिका पर सुनवाई करते हुए पारित किया। कोर्ट में पेश की गईं दलीलें याची की ओर से अधिवक्ता ने दलील दी कि नीलामी प्रक्रिया में सामाजिक रूप से पिछड़े और वंचित वर्गों के लिए आरक्षण की कोई व्यवस्था नहीं की गई थी। साथ ही नीलामी के लिए केवल स्थानीय स्थायी निवासियों को आवेदन की अनुमति देकर अन्य पात्र व्यक्तियों को बाहर कर दिया गया। याची वर्ष 2018 से नियमित रूप से किराया जमा कर संबंधित दुकान का संचालन कर रहा है, फिर भी उसे नीलामी प्रक्रिया से वंचित कर दिया गया। याचिका में यह भी कहा गया कि नीलामी के लिए प्रस्तावित दुकानों का आकार और सटीक स्थान सार्वजनिक सूचना में स्पष्ट नहीं किया गया था, जिससे पूरी प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही। सुनवाई के दौरान नगर पंचायत की ओर से अदालत को बताया गया कि वह मौजूदा अधिसूचना वापस लेकर कानून के अनुरूप नई प्रक्रिया शुरू करेगी। इस पर हाईकोर्ट ने 8 मई 2026 की नीलामी सूचना को रद्द करते हुए नगर पंचायत को न्यायालय की टिप्पणियों के अनुरूप नई अधिसूचना जारी करने का निर्देश दिया।
मध्य प्रदेश में एक और ग्रीनफील्ड हाईवे प्रोजेक्ट आकार लेने जा रहा है। भोपाल और ग्वालियर के बीच नया 4-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर बनाने की तैयारी शुरू हो गई है। परियोजना की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) तैयार करने के लिए इसी महीने टेंडर जारी किए जाएंगे। नए मार्ग के बनने से दोनों शहरों के बीच की दूरी मौजूदा लगभग 425 किलोमीटर से घटकर 340-350 किलोमीटर रह जाएगी। इस नए कॉरिडोर के जरिए भोपाल से ग्वालियर की यात्रा में लगने वाला समय भी कम होगा। वर्तमान में यह सफर 7 से 8 घंटे में पूरा होता है, जबकि नई सड़क बनने के बाद करीब साढ़े पांच घंटे में गंतव्य तक पहुंचा जा सकेगा। मध्यप्रदेश सड़क विकास निगम (एमपीआरडीसी) इस परियोजना को बीओटी (बिल्ड-ऑपरेट-ट्रांसफर) मॉडल पर अगले तीन वर्षों में पूरा करने की योजना बना रहा है। राज्य स्तर पर नए कॉरिडोर की सहमति
जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र में विकसित सड़क परियोजनाओं के अध्ययन के बाद राज्य स्तर पर इस नए ग्रीनफील्ड कॉरिडोर को लेकर सहमति बनी है। प्रदेश में इससे पहले भोपाल-इंदौर, भोपाल-मंदसौर, सागर-सतना, सागर-जबलपुर और जबलपुर-आशापुर ग्रीनफील्ड मार्गों पर भी काम आगे बढ़ चुका है और उनकी डीपीआर तैयार की जा रही है। एमपीआरडीसी के प्रबंध संचालक भरत यादव के अनुसार प्रदेश में यातायात दबाव वाले मार्गों को प्राथमिकता देते हुए ग्रीनफील्ड सड़क नेटवर्क विकसित किया जा रहा है, जिससे यात्रा समय और परिवहन लागत दोनों में कमी आएगी। प्रदेश के प्रमुख ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट भोपाल-मंदसौर कॉरिडोर सागर-सतना कॉरिडोर जबलपुर-आशापुर कॉरिडोर क्या है बीओटी मॉडल?
बीओटी मॉडल में परियोजना लागत का 20 प्रतिशत हिस्सा केंद्र सरकार और 20 प्रतिशत राज्य सरकार वहन करती है। शेष 60 प्रतिशत निवेश निर्माण एजेंसी या ठेकेदार द्वारा किया जाता है। इसके बदले तय अवधि तक टोल वसूली का अधिकार दिया जाता है। एमपीआरडीसी अब अधिक यातायात वाले अधिकांश नए सड़क प्रोजेक्ट इसी मॉडल पर विकसित करने की तैयारी में है।
भीषण गर्मी और लू के मौसम में शरीर को ठंडा और तरोताजा रखना सबसे बड़ी चुनौती बन जाता है. ऐसे समय में कृत्रिम पेय पदार्थों की बजाय पारंपरिक खस का शरबत एक बेहतरीन विकल्प माना जाता है. इसकी प्राकृतिक ठंडक, मनमोहक खुशबू और हल्का मीठा स्वाद शरीर के साथ-साथ मन को भी सुकून पहुंचाता है.
क्यों खास है खस का शरबत?
खस का शरबत लंबे समय से भारतीय घरों में गर्मियों का पसंदीदा पेय रहा है. उत्तर भारत समेत देश के कई हिस्सों में इसे गर्मी से राहत पाने के लिए पारंपरिक रूप से पिया जाता है. एक गिलास ठंडा खस शरबत न केवल प्यास बुझाता है बल्कि दिनभर की थकान और शरीर की गर्मी को भी कम करने में मदद करता है.
शरीर को देता है प्राकृतिक ठंडक
खस की जड़ों में प्राकृतिक रूप से शीतल गुण पाए जाते हैं. इन्हें पानी में भिगोने पर पानी में ठंडक का प्रभाव आ जाता है, जो शरीर के अंदरूनी तापमान को संतुलित रखने में सहायक माना जाता है. यह गर्मी के कारण होने वाली बेचैनी और अधिक पसीने से होने वाली कमजोरी को भी कम करने में मदद कर सकता है.
मन को रखे शांत और तरोताजा
खस की सुगंध का असर सिर्फ शरीर तक सीमित नहीं रहता, बल्कि यह मानसिक ताजगी और सुकून का एहसास भी कराती है. गर्मी में तनाव और थकावट महसूस होने पर इसका सेवन मन को शांत रखने और तरोताजा महसूस कराने में मददगार हो सकता है.
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पाचन और हाइड्रेशन में भी सहायक
आयुर्वेद में खस को पाचन के लिए लाभकारी माना गया है. इसका शरबत शरीर में पानी की कमी को पूरा करने में मदद करता है और गर्मियों में डिहाइड्रेशन के खतरे को कम करने में सहायक हो सकता है. यही वजह है कि इसे बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक के लिए उपयुक्त माना जाता है.
घर पर ऐसे बनाएं खस का शरबत
खस की साफ की हुई जड़ों को दो से तीन घंटे पानी में भिगोकर रखें. इसके बाद पानी को छान लें और उसमें स्वादानुसार चीनी या गुड़, थोड़ा नींबू का रस और इलायची पाउडर मिलाएं. चाहें तो पुदीना या सौंफ भी डाल सकते हैं. इसे ठंडा करके परोसने से स्वाद और ताजगी दोनों बढ़ जाते हैं.
बाजार के पेयों से बेहतर विकल्प
घर पर तैयार किया गया खस का शरबत कृत्रिम रंग, फ्लेवर और प्रिजर्वेटिव से मुक्त होता है. इसलिए यह कई पैकेज्ड ड्रिंक्स और कोल्ड ड्रिंक्स की तुलना में अधिक प्राकृतिक और स्वास्थ्यवर्धक विकल्प माना जाता है.
रोजाना सेवन से मिल सकते हैं कई फायदे
विशेषज्ञों के अनुसार, सीमित मात्रा में खस का शरबत पीने से शरीर का तापमान संतुलित रखने, पानी की कमी से बचाने और दिनभर ऊर्जा बनाए रखने में मदद मिल सकती है. साथ ही इसकी ताजगी भरी खुशबू और स्वाद गर्मियों के मौसम को और भी सुखद बना देते हैं.
Salman Khan Sad Song : सलमान खान की फिल्म का एक दर्दभरा गाना असल में उनके लिए नहीं बना था. म्यूजिक कंपोजर इस्माइल दरबार ने बताया कि शुरुआत में इसे किसी दूसरे बड़े प्रोजेक्ट के लिए एक टेम्परेरी (स्क्रैच) ट्रैक के रूप में रिकॉर्ड किया जा रहा था. जब डायरेक्टर संजय लीला भंसाली ने यह गाना सुना, तो वे बहुत प्रभावित हुए. दिवंगत गायक केके ने पहले इसे गाने से मना कर दिया था, लेकिन समझाने पर जब उन्होंने इसे रिकॉर्ड किया, तो उनकी पत्नी सुनकर रो पड़ी थीं.
नई दिल्ली: हिंदी सिनेमा के इतिहास में जब भी सबसे दर्दभरे गानों की बात होती है, तो फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ का गाना ‘तड़प तड़प के’ हर किसी की जुबान पर सबसे पहले आता है. इस आइकॉनिक गाने को लेकर म्यूजिक कंपोजर इस्माइल दरबार ने अब एक बहुत बड़ा और चौंकाने वाला खुलासा किया है. (फोटो साभार: IMDb/IANS)
इस्माइल दरबार ने बताया कि यह सुपरहिट गाना असल में सलमान खान और ऐश्वर्या राय स्टारर संजय लीला भंसाली की इस ब्लॉकबस्टर फिल्म के लिए लिखा या बनाया ही नहीं गया था. शुरुआत में इस गाने की कहानी कुछ और ही थी और यह किसी दूसरे प्रोजेक्ट का हिस्सा बनने वाला था. (फोटो साभार: IMDb)
संगीतकार ने अपने पुराने दिनों के स्ट्रगल को याद करते हुए बताया कि यह गाना शुरू में किसी दूसरे बहुत बड़े प्रोजेक्ट के लिए सिर्फ एक टेम्परेरी यानी ‘स्क्रैच ट्रैक’ के रूप में रिकॉर्ड किया जा रहा था. उस वक्त उनके पास भंसाली की यह बड़ी फिल्म नहीं थी. (फोटो साभार: IMDb)
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गीत आखिरकार फिल्म मेकर संजय लीला भंसाली तक कैसे पहुंचा, इसकी कहानी भी बेहद दिलचस्प है. आईएएनएस की रिपोर्ट के अनुसार, इस्माइल दरबार ने बताया कि करीब 6 महीने तक भंसाली के साथ उनका काम चलता रहा और फिर एक दिन उन्होंने भंसाली को यह गाना सुनाया. (फोटो साभार: IMDb)
गाना सुनते ही संजय लीला भंसाली बेहद भावुक और इम्प्रेस हो गए. उन्होंने इस्माइल दरबार से कहा, ‘आज मुझे पता चल गया कि मेरी फिल्म का इंटरवल कहां होगा और फिल्म का अंत कहां होगा. आज मैंने अपनी फिल्म पूरी कर ली है.’ (फोटो साभार: IMDb)
इस्माइल दरबार इंडियन आइडल के आने वाले एपिसोड में एक कंटेस्टेंट की परफॉर्मेंस को देखकर इस गाने की पुरानी यादों में खो गए. उन्होंने दिवंगत और बेहद लोकप्रिय गायक केके (कृष्णकुमार कुन्नाथ) के साथ अपनी पहली मुलाकात का किस्सा भी शेयर किया. (फोटो साभार: IMDb)
इस्माइल दबार ने बताया कि बांद्रा के एक स्टूडियो में जब वे इस गाने का स्क्रैच रिकॉर्ड कर रहे थे, तब केके से उनकी पहली मुलाकात हुई. जब उन्होंने केके को यह गाना सुनाया, तो केके ने तुरंत कहा, ‘इस्माइल भाई, यह मेरी स्टाइल का गाना नहीं है, मैं इसे नहीं गा पाऊंगा.’ (फोटो साभार: IMDb)
हालांकि, इस्माइल दरबार को केके की वोकल रेंज और उनकी काबिलियत पर पूरा भरोसा था. उन्होंने केके को समझाया कि लो से लेकर हाई नोट्स तक उनकी आवाज बिल्कुल परफेक्ट है और उनसे गाना गवाना उनका काम है, जिसके बाद केके हंसते हुए गाने के लिए तैयार हो गए. जब गाना रिकॉर्ड हुआ, तो केके की पत्नी इसे सुनकर रो पड़ी थीं. (फोटो साभार: IMDb)
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दिल्ली में लगातार हो रहे हादसों और हौज रानी अग्निकांड में 23 लोगों की मौत के बाद मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की सरकार फायर सेफ्टी नियमों में ऐतिहासिक बदलाव की तैयारी कर रही है. इसके तहत अब हाईराइज इमारतों के साथ-साथ दिल्ली के हर स्वतंत्र मकान, बिल्डर फ्लोर और लो-राइज अपार्टमेंट में भी स्मोक डिटेक्टर लगाना अनिवार्य किया जा सकता है. गृह मंत्री आशीष सूद के अनुसार, सरकार बिल्डिंग बायलॉज में संशोधन पर विचार कर रही है ताकि 15 मीटर से कम ऊंचाई वाले उन 10 प्रतिशत भवनों को भी सुरक्षा के दायरे में लाया जा सकता है जो अब तक फायर एनओसी (NOC) के नियमों से बाहर थे.
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इस पूरी मुहिम को कामयाब बनाने के लिए दिल्ली फायर सर्विसेज के बुनियादी ढांचे को भी पूरी तरह से हाईटेक किया जा रहा है. (AI)
नई दिल्ली. दिल्ली में लगातार सामने आ रही आग की भीषण घटनाओं और हाल ही में हौज रानी अग्निकांड में 23 मासूम लोगों की जान जाने के बाद राजधानी का प्रशासनिक अमला पूरी तरह सख्त हो गया है. मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व वाली दिल्ली सरकार अब दिल्ली के रियल एस्टेट और रिहायशी ढांचे में अब तक का सबसे बड़ा फेरबदल करने जा रही है. इस नए फैसले के तहत अब दिल्ली के हर छोटे-बड़े घर, स्वतंत्र कोठी और बिल्डर फ्लोर में स्मोक डिटेक्टर लगाना कानूनी रूप से अनिवार्य किया जा सकता है. सरकार बिल्डिंग बायलॉज में बड़ा संशोधन करने जा रही है ताकि दिल्ली की प्रॉपर्टीज को सुरक्षित बनाया जा सके. इस बड़े नीतिगत फैसले को लेकर गृह मंत्री आशीष सूद ने साफ किया है कि सरकार मौजूदा नियमों की गहन समीक्षा कर रही है और जनता की सुरक्षा के लिए जरूरी कानूनी व नीतिगत बदलाव तुरंत किए जाएंगे.
फिलहाल दिल्ली के नियम इतने ढीले हैं कि सिर्फ 15 मीटर से ऊंची रिहायशी इमारतों में ही स्मोक डिटेक्टर या फायर हाइड्रेंट लगाना जरूरी होता है, जिससे लाखों स्वतंत्र मकान और छोटे अपार्टमेंट नियमों से बच निकलते हैं. गृह मंत्री ने बताया कि वैसे तो 90 प्रतिशत इमारतें किसी न किसी रूप में नियमों के दायरे में हैं, लेकिन बचे हुए हिस्से को सुरक्षित करने के लिए अब स्मोक डिटेक्टर, फायर हाइड्रेंट और इमरजेंसी एग्जिट सिस्टम जैसी सुविधाओं को हर प्रॉपर्टी की बुनियादी जरूरत बनाया जाएगा.
प्रॉपर्टी मालिकों पर क्या होगा असर
अगर इस प्रस्ताव पर अंतिम मुहर लगती है तो दिल्ली के लाखों प्रॉपर्टी मालिकों को अपने घरों में फायर सेफ्टी उपकरण लगाने होंगे, जिससे मकानों की कंस्ट्रक्शन कॉस्ट पर भी थोड़ा असर पड़ सकता है. राहत की बात यह है कि सरकार केवल नई बनने वाली इमारतों पर ही इसे लागू नहीं करेगी, बल्कि पुरानी और पहले से बनी प्रॉपर्टीज को भी इन उपकरणों को लगाने के लिए अगले तीन वर्षों का समय देने पर विचार कर रही है. इसके साथ ही भविष्य में बनने वाले मकानों और सोसाइटियों में कम ज्वलनशील निर्माण सामग्री (कम आग पकड़ने वाले मैटेरियल) के इस्तेमाल को भी अनिवार्य किया जा सकता है ताकि किसी हादसे की स्थिति में आग को फैलने से रोका जा सके.
गरीब बस्तियों की चिंता
इस नीति के सामने आने के बाद सबसे बड़ा सवाल जेजे (JJ) क्लस्टर्स और झुग्गी-झोपड़ी वाले संवेदनशील इलाकों में रहने वाले निम्न आय वर्ग के परिवारों पर पड़ने वाले अतिरिक्त आर्थिक बोझ को लेकर उठ रहा था. इस पर सरकार ने योजना बनाई है कि ऐसी संपत्तियों पर उपकरणों के बजाय फायर ब्रिगेड की गाड़ियों की पहुंच और उनके रिस्पॉन्स टाइम को बेहतर करने पर पूरा फोकस रखा जाएगा ताकि तंग गलियों में भी समय रहते राहत पहुंचाई जा सके.
इस पूरी मुहिम को कामयाब बनाने के लिए दिल्ली फायर सर्विसेज के बुनियादी ढांचे को भी पूरी तरह से हाईटेक किया जा रहा है. गृह मंत्री आशीष सूद ने बताया कि विभाग का मौजूदा वायरलेस कम्युनिकेशन सिस्टम लगभग पांच दशक पुराना हो चुका है, जिसे पूरी तरह बदलकर नया आधुनिक कम्युनिकेशन नेटवर्क स्थापित करने के लिए टेंडर जारी कर दिए गए हैं. सरकार का इरादा आग लगने के बाद राहत कार्य करने के पुराने ढर्रे को बदलकर, तकनीक के दम पर रिहायशी संपत्तियों को पूरी तरह सुरक्षित करने का है.
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बिहार के उपमुख्यमंत्री विजेन्द्र प्रसाद यादव को एक अज्ञात व्यक्ति ने फोन कर अपशब्द कहे। धमकी भी दी है। कॉल करने वाले ने पार्सल बुकिंग का झांसा देकर संपर्क किया और बाद में लगातार अपशब्दों का इस्तेमाल करते हुए परेशान किया। मामला 5 जून का है। आप्त सचिव ने दर्ज कराई शिकायत इस घटना को गंभीरता से लेते हुए उपमुख्यमंत्री के आप्त सचिव वीरेंद्र कुमार ने 5 जून को पटना साइबर थाने में शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने तत्काल प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। साइबर फ्रॉड गिरोह की आशंका प्रारंभिक जांच में पुलिस को यह मामला साइबर फ्रॉड और ठगी गिरोह से जुड़ा लग रहा है। आशंका जताई जा रही है कि यह गिरोह पार्सल बुकिंग के नाम पर लोगों को डराने-धमकाने और फंसाने की कोशिश करता है। पुलिस जांच तेज, नंबर ट्रेस करने में जुटी टीम साइबर थाना पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए तकनीकी जांच शुरू कर दी है। कॉल डिटेल और नंबर की ट्रेसिंग की जा रही है ताकि आरोपी की पहचान की जा सके। पुलिस जल्द ही पूरे नेटवर्क का खुलासा करने का दावा कर रही है।
कमिश्ररेट के जिला वेस्ट में मोटरसाइकिल चोरी की वारदातों पर अंकुश लगाने और चोरी की घटनाओं में शामिल अपराधियों की धरपकड़ के लिए विशेष अभियान चलाया गया। अभियान के दौरान पुलिस टीमों द्वारा संदिग्ध व्यक्तियों एवं सक्रिय वाहन चोर गिरोहों की पहचान के लिए व्यापक स्तर पर सूचना संकलन के साथ ही घटनास्थलों एवं आस-पास के क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज का सूक्ष्मता से विश्लेषण किया गया। मुखबिर तंत्र की सक्रियता और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर पुलिस टीमों द्वारा शातिर मोटरसाइकिल चोरों की सघन तलाश एवं दबिश की कार्रवाई की गई। इनमें कुल 33 मोटरसाइकिल अब तक बरामद की जा चुकी है। आरोपियों से और बरामदगी के प्रयास जारी है। पुलिस थाना बासनी द्वारा 2 आरोपियो को गिरफ्तार कर 14 मोटरसाइकिल बरामद, पुलिस थाना सरदारपुरा द्वारा 3 मुलजिम गिरफ्तार कर 18 मोटरसाइकिल बरामद और पुलिस थाना बोरानाडा द्वारा 1 मुलजिम गिरफ्तार कर 1 मोटरसाइकिल बरामद की गई। पांच आरोपियों को गिरफ्तार कर जेवरात व नगदी की बरामद सूरसागर थाना पुलिस ने चोरी की वारदार का 24 घंटे में ही खुलासा करते हुए पांच आरोपियों को गिरफ्तार किया है। वारदात में शामिल आरोपियों के कब्जे से जेवरात और नकदी भी बरामद की है। सूरसागर थानाधिकारी
हरीश चन्द्र सोलंकी ने बताया कि बुधवार को ऊंटो की घाटी सूरसागर निवासी शाहबाज बेलिम पुत्र इकबाल ने थाने में चोरी की रिपोर्ट दी थी। रिपोर्ट के अनुसार 10 जून सुबह लगभग 3.00 बजे से 3.30 बजे के बीच उनके मकान में चोर घुस गये व घर में रखे सोने चांदी के आभूषण व रुपये चोरी कर ले गये। केस दर्ज होने के बाद थानाधिकारी हरीशचन्द्र सोलंकी के नेतृत्व मे एक विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने सूचना और सीसीटीवी कैमरे चेक कर आरोपियों साजिद, मुकेश उर्फ दुबा, सैफअली उर्फ सेफ, पृथ्वीराज उर्फ पियुष व संजय को पकड़ा। पुछताछ के बाद आरोपियों के कब्जे से चोरी किए गहने और रुपये बरामद किये गये। अ जिला पश्चिम डीएसटी भंग डीसीपी कमल शेखावत ने आदेश जारी कर जिला जोधपुर पश्चिम की जिला विशेष टीम (डीएसटी)को भंग कर दिया। डीएसटी में तैनात अधिकारी और कर्मचारियों अपनी उपस्थिति, तैनाती संबंधित थाना और पुलिसलाइन में देने के निर्देश दिए गए।