Wednesday, August 19, 2026
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सिविल अस्पताल से मरीज को निजी अस्पताल ले गए दलाल: इलाज के नाम पर 60 हजार वसूली, शिकायत के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई – Lucknow News




लखनऊ के सिविल अस्पताल की इमरजेंसी से रेफर हुई बुजुर्ग महिला के ट्रॉमा पहुंचने से पहले तीमारदार के नंबर पर फोन पहुंच गया। निजी अस्पताल के दलाल ने सरकारी में इलाज न मिलने की बात कहते हुए पति को डराया। मरीज को बेहतर इलाज का झांसा देकर ट्रॉमा के पास स्थित यूनाइटेड हॉस्पिटल ले गए। वहां पर इलाज के नाम पर उगाही हुई। आखिर में मरीज की जान चली गई। पति ने मरीज के पैरों से पायल और बिछिया भी गायब होने का आरोप लगाते हुए मुख्यमंत्री से शिकायत दर्ज कराई। मामले की जांच सीएमओ को सौंपी गई। पीड़ित की शिकायत को कचरे के डिब्बे में डालकर दबा दिया गया। बुजुर्ग न्याय के लिए भटक रहा है मगर उसकी सुनवाई नहीं हो रही। ये था पूरा मामला चारबाग निवासी विश्वनाथ पांडेय 21 जून को दोपहर ढाई बजे अपनी पत्नी पार्वती देवी को सिविल अस्पताल की इमरजेंसी ले गए थे। ईएमओ ने विशेषज्ञ न होने की बात कहकर ट्रॉमा रेफर किया। ट्रॉमा पहुंचने से पहले ही सिविल की इमरजेंसी से तीमारदार का नंबर दलाल के पास पहुंच गया। दलाल ने विश्वनाथ पांडेय को फोन करके सरकारी में इलाज न मिलने की बात कही। मरीज को सस्ता व बेहतर इलाज का झांसा देकर उसे यूनाइटेड हॉस्पिटल ले गए। वहां भर्ती, दवा और जांच के नाम पर करीब 60 हजार रुपये वसूले गए। पति विश्वनाथ का आरोप है भर्ती के समय पत्नी के पैरों में पहनी दो पायल और बिछिया गायब मिले। विश्वनाथ का आरोप है कि शिकायत करने की बात कहने पर दलाल ने जान से मारने की धमकी दी। इससे उनका परिवार डरा है। पीड़ित ने मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर पूरे प्रकरण की जांच की मांग की है। मामले की जांच सीएमओ को सौंपी गई थी। करीब दो माह बीतने के बाद भी अभी तक सीएमओ के स्तर से कोई भी कार्रवाई नहीं की गई। पीड़ित का आरोप है जांच के नाम पर सिर्फ नाटक चल रहा है। पीड़ित ने सीएमओ को कठघरे में खड़ा करते हुए सांठगांठ का आरोप लगाया है। मांगा जाएगा जवाब लखनऊ सीएमओ डॉ.एनबी सिंह ने बताया कि इस प्रकरण में अभी मामले की जानकारी नहीं है। पीड़ित संग ऐसी घटना हुई तो संबंधित अस्पताल से जवाब तलब करके कार्रवाई होगी। जांच के आधार पर होगी कार्रवाई सिविल अस्पताल के निदेशक डॉ. जीपी गुप्ता ने बताया कि अस्पताल की इमरजेंसी से मरीज के निकलते ही तीमारदार का नंबर दलाल के पास पहुंच गया। यह गंभीर मसला है। इस दलाली में जो भी डॉक्टर व कर्मचारी शामिल होंगे उनकी जांच करके कार्रवाई होगी।



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दिल्ली में 26 अगस्त से लक्ष्मी योजना का औपचारिक शुभारंभ: 1 सितंबर से खातों में आएगी 2,500 रुपये की सहायता – New Delhi News




दिल्ली सरकार लक्ष्मी योजना के तहत पात्र महिलाओं को आर्थिक सहायता देने की प्रक्रिया का औपचारिक शुभारंभ 26 अगस्त को करेगी। इसके लिए तालकटोरा स्टेडियम में कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा। कार्यक्रम में पात्र महिलाओं को योजना से संबंधित आधिकारिक पत्र सौंपे जाएंगे। वहीं, 1 सितंबर से सहायता राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में भेजी जाएगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार को सचिवालय में योजना की समीक्षा बैठक की। बैठक में मुख्य सचिव राजीव वर्मा और जिला स्तरीय समितियों के पदाधिकारी मौजूद रहे। मुख्यमंत्री ने बताया कि योजना शुरू होने के 18 दिनों में करीब 8 लाख महिलाओं ने पंजीकरण कराया है, जबकि 5 लाख से अधिक आवेदन अंतिम रूप से जमा हो चुके हैं। 1 अगस्त से प्रभावी योजना के तहत दिल्ली के कम आय वाले परिवारों की 21 से 60 वर्ष आयु वर्ग की पात्र महिलाओं को हर महीने 2,500 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाएगी। योजना के लिए आवेदन पूरे वर्ष दिल्ली लक्ष्मी योजना पोर्टल के माध्यम से किए जा सकते हैं।
अपात्र मिलने पर बंद होगी सहायता, राशि भी वसूली जाएगी
महिला एवं बाल विकास विभाग ने योजना में पात्रता को लेकर कड़े प्रावधान किए हैं। अधिकारियों के अनुसार लाभार्थियों की पात्रता की लगातार निगरानी की जाएगी। जांच में किसी भी स्तर पर महिला अपात्र पाई जाती है तो उसकी सहायता तत्काल बंद कर दी जाएगी। पहले जारी की गई राशि की वसूली भी की जाएगी। गलत जानकारी या धोखाधड़ी सामने आने पर कानूनी अथवा प्रशासनिक कार्रवाई हो सकती है।
मृत्यु पर तुरंत रुक जाएगा भुगतान
दिशा-निर्देशों के अनुसार लाभार्थी की मृत्यु होने पर उसके सीबीडीसी वॉलेट में राशि का भुगतान तत्काल रोक दिया जाएगा। आरडी या एफडी खाते में जमा राशि और अर्जित ब्याज कानूनी उत्तराधिकारी को दिया जाएगा। मृत्यु के दो साल के भीतर दावा नहीं करने पर राशि सरकारी खाते में वापस चली जाएगी। योजना से 1500 रुपए आरडी/एफडी में होंगे जमा योजना के तहत डिफॉल्ट रूप से 2,500 रुपये में से 1,500 रुपये आरडी या एफडी खाते में जमा होंगे, जबकि 1,000 रुपये लाभार्थी के बैंक खाते से जुड़े सीबीडीसी वॉलेट में भेजे जाएंगे। आरडी/एफडी राशि पर 31 जुलाई 2029 तक लॉक-इन अवधि लागू रहेगी। लाभार्थी चाहें तो पूरी 2,500 रुपये की राशि आरडी या एफडी में जमा करा सकती हैं।



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केन-बेतवा प्रोजेक्ट के आंदोलनों पर सरकार की सफाई: अधिकांश पात्र परिवारों को मुआवजे का भुगतान हुआ, आंदोलनों में बाहरी तत्व शामिल – Bhopal News




केन-बेतवा लिंक परियोजना को लेकर मध्य प्रदेश में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच केंद्र सरकार ने परियोजना और प्रभावित परिवारों के पुनर्वास को लेकर स्थिति स्पष्ट की है। जल शक्ति मंत्रालय से जारी पीआईबी के प्रेस नोट में कहा है कि प्रभावित परिवारों को मुआवजा और पुनर्वास लाभ नहीं मिलने के आरोप गलत और भ्रामक हैं। सरकार के मुताबिक अधिकांश पात्र परिवारों को मुआवजा और पुनर्वास का लाभ मिल चुका है, जबकि कुछ मामलों में केवल कागजी औपचारिकताएं बाकी हैं। आंदोलन को लेकर सरकार का जवाब प्रेसनोट में कहा है कि केन-बेतवा परियोजना के खिलाफ मध्यप्रदेश के कुछ इलाकों में जनजातीय परिवारों के बिना मुआवजे विस्थापन के आरोप लगाए जा रहे हैं। इसके विरोध में ‘चिता आंदोलन’, ‘फांसी प्रदर्शन’ और ‘जल सत्याग्रह’ जैसे प्रतीकात्मक प्रदर्शन किए जाने की खबरें सामने आई हैं। सरकार का कहना है कि इन प्रदर्शनों में उठाए जा रहे मुआवजा और पुनर्वास से जुड़े आरोप वास्तविक स्थिति से मेल नहीं खाते। 5039 प्रभावित परिवारों के लिए ₹590.74 करोड़ का भुगतान सरकार के अनुसार पुनर्वास के लिए कुल 5,039 प्रभावित परिवारों की पहचान की गई है। इनके लिए ₹629.87 करोड़ का मुआवजा तय किया गया है, जिसमें से ₹590.74 करोड़ यानी 93.78 प्रतिशत राशि का भुगतान किया जा चुका है। शेष भुगतान कानूनी औपचारिकताएं पूरी होने के बाद किया जाएगा। सरकार का कहना है कि पात्र परिवारों को लाभ से वंचित न रहना पड़े, इसके लिए भूमि रिकॉर्ड का लगातार सत्यापन किया जा रहा है। कृषि भूमि के मुआवजे में 88.85% राशि बांटी पीआईबी के मुताबिक जुलाई 2026 तक 10,913 प्रभावित लोगों के कृषि भूमि मुआवजे के लिए ₹360.66 करोड़ तय किए गए। इसमें से ₹320.45 करोड़ यानी 88.85 प्रतिशत राशि वितरित की जा चुकी है। वहीं मकान और अन्य आवासीय परिसंपत्तियों के लिए ₹149.63 करोड़ स्वीकृत किए गए हैं, जिसमें से 93.97 प्रतिशत राशि का भुगतान हो चुका है। जमीन के लिए ₹12.50 लाख प्रति हेक्टेयर तक मुआवजा सरकार ने कहा है कि भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास की प्रक्रिया 2013 के कानून तथा मध्यप्रदेश सरकार के 13 सितंबर 2023 को स्वीकृत विशेष पुनर्वास पैकेज के अनुसार की जा रही है। अधिगृहीत जमीन के लिए कानून के अनुसार निर्धारित मुआवजा अथवा ₹12.50 लाख प्रति हेक्टेयर, जो भी अधिक हो, दिया जा रहा है। मकान, पेड़, कुएं, ट्यूबवेल और दूसरी अचल परिसंपत्तियों का मुआवजा भी नियमानुसार निर्धारित किया जा रहा है। प्लॉट नहीं लेने पर ₹12.50 लाख की सहायता पुनर्वास पैकेज के तहत पात्र परिवारों को ग्रामीण क्षेत्र में प्लॉट के लिए ₹7 लाख और शहरी क्षेत्र में प्लॉट के लिए ₹6.50 लाख दिए जा रहे हैं। जो परिवार प्लॉट का विकल्प नहीं लेते, उन्हें एकमुश्त ₹12.50 लाख की सहायता देने का प्रावधान बताया गया है। अनुसूचित क्षेत्रों में पात्र एससी-एसटी परिवारों के लिए अतिरिक्त वित्तीय सहायता का भी प्रावधान है। करौंदिया में लगाया गया विशेष शिविर सरकार ने प्रभावित परिवारों की समस्याओं के समाधान के लिए करौंदिया में विशेष शिविर लगाए जाने की जानकारी भी दी है। इसमें पशुपालन, सामाजिक सुरक्षा, गरीबी रेखा, लाड़ली बहना और लाड़ली लक्ष्मी योजनाओं से जुड़े आवेदनों को मंजूरी दी गई। शिविर में 178 लोगों को स्वास्थ्य सेवाएं दी गईं, आयुष दवाओं का वितरण हुआ, हैंडपंपों की मरम्मत कराई गई और विद्यार्थियों की छात्रवृत्ति मैपिंग तथा पुस्तकों के वितरण का काम किया गया। सरकार के मुताबिक पिछले दस दिनों में ही 86 प्रभावित लोगों के लिए ₹10.42 करोड़ की राशि स्वीकृत की गई है। सरकार बोली- प्रदर्शनों में बाहरी तत्व शामिल पीआईबी के प्रेस नोट में सरकार ने विरोध प्रदर्शनों को लेकर एक और गंभीर दावा किया है। सरकार का कहना है कि हाल के प्रदर्शनों में शामिल लोगों के नाम परियोजना से प्रभावित परिवारों, भू-अभिलेखों या मुआवजा रजिस्टर में नहीं हैं। सरकार ने इन गतिविधियों को मुख्य रूप से बाहरी तत्वों द्वारा परियोजना को लेकर भ्रामक और तथ्यात्मक रूप से गलत सूचनाएं फैलाने की कोशिश बताया है। परियोजना से 10.62 लाख हेक्टेयर सिंचाई का दावा सरकार ने परियोजना के फायदे भी गिनाए हैं। केन-बेतवा लिंक परियोजना को नेशनल पर्सपेक्टिव प्लान के तहत देश की पहली प्रमुख नदी जोड़ो परियोजना बताया गया है। इसके जरिए मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र में केन नदी के अतिरिक्त पानी को बेतवा नदी में पहुंचाने की योजना है। सरकार के मुताबिक इससे 10.62 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में सिंचाई, करीब 62 लाख लोगों को पेयजल और 103 मेगावाट जलविद्युत उत्पादन का लाभ मिलेगा। परियोजना की अनुमानित लागत ₹44,604.99 करोड़ है और जुलाई 2026 तक ₹12,445.85 करोड़ खर्च किए जा चुके हैं।



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उनियारा में शिकायतों के बाद ASI सस्पेंड: 15 दिन पहले किया था लाइन हाजिर; एसपी बोले- विभागीय जांच होने के कारण लिया फैसला – Tonk News




टोंक एसपी रोशन मीणा ने उनियारा थाने के तत्कालीन एएसआई रतनलाल मीणा को मंगलवार को निलंबित कर दिया। निलंबन आदेश में उनके विरुद्ध विभागीय जांच प्रस्तावित किए जाने का उल्लेख किया गया है। निलंबन अवधि में उनका मुख्यालय मालपुरा डीएसपी कार्यालय रहेगा। एसपी रोशन मीणा ने बताया कि एएसआई रतनलाल मीणा के विरुद्ध विभागीय जांच प्रस्तावित होने के चलते उन्हें कुछ दिन पहले लाइन हाजिर किया गया था। विभागीय स्तर पर कार्रवाई के बाद मंगलवार को उन्हें निलंबित कर दिया गया। शिकायतों के बाद कार्रवाई
एएसआई के निलंबन की कार्रवाई को लेकर चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। जानकारी के अनुसार, एएसआई रतनलाल मीणा के उनियारा थाने में कार्यकाल को लेकर पिछले कुछ समय से शिकायतें मिल रही थी। इनमें कथित तौर पर अपराधियों को संरक्षण देने, अवैध वसूली और साइबर ठगी से जुड़े संदिग्ध लोगों के संपर्क में रहने जैसे आरोप शामिल थे। हालांकि, इन आरोपों की अभी तक आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।



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मंडे मेगा क्विज में 216 छात्रों ने भाग लिया: बेगूसराय में जिला स्तरीय प्रतियोगिता का समापन – Begusarai News




बेगूसराय के सरस्वती विद्या निकेतन (मॉडल स्कूल), कॉलेजिएट प्लस टू स्कूल में आयोजित दो दिवसीय जिला स्तरीय मंडे मेगा क्विज का मंगलवार को समापन हो गया। इस प्रतियोगिता में जिले के सभी 18 प्रखंडों से कक्षा तीन से 12 तक के कुल 216 चयनित छात्र-छात्राओं ने भाग लिया। प्रतियोगिता की शुरुआत लिखित परीक्षा से हुई, जिसमें प्रत्येक कक्षा से बेहतर प्रदर्शन करने वाले छह छात्र-छात्राओं का चयन मौखिक परीक्षा के लिए किया गया। चयनित प्रतिभागियों के बीच पांच राउंड में मौखिक प्रश्न पूछे गए। यह प्रतियोगिता 17 अगस्त को कक्षा तीन से आठ तथा 18 अगस्त को कक्षा नौ से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए आयोजित की गई थी। कक्षा नौ से 12 तक के विजेताओं में कक्षा नौ में उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय बांक, डंडारी के प्रिंस कुमार प्रथम स्थान पर रहे। उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय फुलवरिया-2, तेघड़ा के मो. मारूफ ने द्वितीय स्थान प्राप्त किया, जबकि उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय अमरपुर, बरौनी के प्रियांशु कुमार तृतीय स्थान पर रहे। कक्षा 10 में राजकीयकृत उच्च विद्यालय गढ़पुरा के आलोक कुमार प्रथम, उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय नूरजमापुर के देवराज द्वितीय तथा राजकीयकृत हाई स्कूल बनवारीपुर, भगवानपुर के आदर्श कुमार तृतीय स्थान पर रहे।

कक्षा 11 में उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय जिनेदपुर, बेगूसराय की आंचल कुमारी प्रथम, उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय भगतपुर, बलिया के राजीव कुमार द्वितीय तथा उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय बिक्रमपुर, चेरिया बरियारपुर के प्रिंस कुमार तृतीय रहे।

कक्षा 12 में उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय मल्हीपुर, साहेबपुर कमाल के अमन कुमार प्रथम, उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय प्लस टू सांख, बेगूसराय के मो. इश्तिखार द्वितीय तथा उत्क्रमित माध्यमिक विद्यालय रसीदपुर, बछवाड़ा के अनुराग कुमार तृतीय स्थान पर रहे।

कक्षा तीन से आठ तक के विजेता

कक्षा आठ में उत्क्रमित मध्य विद्यालय फजिलपुर, वीरपुर के युवराज प्रथम, मध्य विद्यालय तुलसीटोल, बलिया के आयुष कुमार द्वितीय तथा उत्क्रमित मध्य विद्यालय छड़ापट्टी, चेरिया बरियारपुर के आदित्य कुमार तृतीय रहे।

कक्षा सात में मध्य विद्यालय नैपुर, मंसूरचक की अनामिका कुमारी प्रथम, मध्य विद्यालय मकसपुर, चेरिया बरियारपुर के प्रणव कुमार द्वितीय तथा मध्य विद्यालय विष्णुपुर, भगवानपुर के आर्णव राज तृतीय रहे।

कक्षा छह में मध्य विद्यालय डंडारी के युवराज प्रथम, मध्य विद्यालय मालीपुर, गढ़पुरा के आदित्य कुमार द्वितीय तथा मध्य विद्यालय चमथा बरखूंट, बछवाड़ा के सार्थक चौहान तृतीय रहे।

कक्षा पांच में प्राथमिक विद्यालय यादव टोली, मंसूरचक की कृति राज प्रथम, प्राथमिक विद्यालय मालीपुर मुसहरी, गढ़पुरा के इशांत राज द्वितीय तथा प्राथमिक विद्यालय पतला झुग्गी, छौड़ाही के आयुष राज तृतीय रहे।

कक्षा चार में प्राथमिक विद्यालय रमौली, नावकोठी के मो. हसन प्रथम, मध्य विद्यालय सनहा नया टोला, साहेबपुर कमाल के हर्ष कुमार द्वितीय तथा प्राथमिक विद्यालय शाम्हो अकबरपुर, शाम्हो-अकहा-कुरहा के कुश कुमार तृतीय रहे।

कक्षा तीन में प्राथमिक विद्यालय आलमचक, मंसूरचक के मुहम्मद अदनान प्रथम, प्राथमिक विद्यालय देवस्थान, भगवानपुर के पुरुषोत्तम कुमार द्वितीय तथा मध्य विद्यालय दुलारपुर, तेघड़ा की भाव्या कुमारी तृतीय रहीं।

स्वस्थ विद्यालयी संस्कृति विकसित करने में सहायक

समापन समारोह के अवसर पर जिला कार्यक्रम पदाधिकारी, माध्यमिक शिक्षा एवं साक्षरता आकाश कुमार ने चयनित छात्र-छात्राओं तथा आयोजन समिति के शिक्षकों के बीच प्रमाणपत्र वितरित कर उनका उत्साहवर्धन किया। उन्होंने कहा कि इस तरह के क्विज आयोजन से छात्र-छात्राओं एवं शिक्षकों के बीच स्वस्थ विद्यालयी संस्कृति का निर्माण होता है। ऐसे आयोजन विद्यार्थियों में ज्ञान के साथ प्रतिस्पर्धा की भावना विकसित करते हैं और शिक्षा की गुणवत्ता को बेहतर बनाने में सहायक होते हैं। उन्होंने क्विज से जुड़े सभी पदाधिकारियों एवं शिक्षकों को सफल आयोजन के लिए प्रोत्साहित किया।



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रिपोर्ट- रूस सीक्रेट रूट से ईरान को हथियार भेज रहा: मिसाइल-ड्रोन पार्ट्स और गोला-बारूद शामिल; ट्रैकिंग सिस्टम बंद कर समुद्री रास्ते का इस्तेमाल


मॉस्को/ तेहरान3 घंटे पहले

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रूस सीक्रेट रास्ते के जरिये ईरान के सैन्य भंडार को मजबूत करने में मदद कर रहा है। NBC न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ईरान को TNT विस्फोटक, ड्रोन के पार्ट्स और गोला-बारूद भेज रहा है।

रिपोर्ट में यूरोपीय सरकार के एक दस्तावेज के हवाले से बताया गया कि सैटेलाइट तस्वीरों से संकेत मिले हैं कि इनमें बैलिस्टिक मिसाइल बनाने के लिए जरूरी कुछ पार्ट्स भी हो सकते हैं। ईरान के सैन्य भंडार हाल में अमेरिका और इजराइल के साथ हुए संघर्ष में काफी कम हुए थे।

रूस इसके लिए कैस्पियन सागर का रास्ता इस्तेमाल कर रहा है। कैस्पियन सागर से रूस, ईरान, कजाकिस्तान, तुर्कमेनिस्तान और अजरबैजान क सीमाएं लगती हैं।

यह समुद्री रास्ता पश्चिमी देशों की निगरानी से बचने में मदद करता है। यहां से गुजरने वाले जहाज अपना ट्रैकिंग सिस्टम (AIS) बंद कर सकते हैं। इससे उनकी आवाजाही को ट्रैक करना बहुत मुश्किल हो जाता है।

कैस्पियन सागर रूस-ईरान के लिए बैकडोर

कैस्पियन सागर रूस और ईरान के बीच एक सुरक्षित बैकडोर और रणनीतिक समुद्री रास्ते के रूप में काम करता है। यह बैकडोर दोनों देशों को अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों और पश्चिमी देशों की नजरों से बचकर सैन्य सामान भेजने की सहूलियत देता है।

कैस्पियन सागर की कानूनी स्थिति को लेकर लंबे समय तक विवाद रहा है, लेकिन 2018 में ‘कैस्पियन सागर की कानूनी स्थिति पर कन्वेंशन’ पर हस्ताक्षर किए गए। यह समझौता कैस्पियन सागर के पांच तटीय देशों को इसके संसाधनों और सुरक्षा पर अधिकार देता है।

हालांकि, यह समझौता मुख्य रूप से समुद्री सीमाओं और वहां के संसाधनों के इस्तेमाल से जुड़ा है। इसके तहत किसी बाहरी देश की सेना को यहां आने की इजाजत नहीं है। इससे यह इलाका इन पांच देशों के खास प्रभाव वाला क्षेत्र बन जाता है।

पहले ईरान रूस को ड्रोन देता था, अब रूस मदद कर रहा

यूक्रेन युद्ध के दौरान ईरान ने रूस को शाहेद जैसे ड्रोन दिए थे। अब, रूस ईरान को अपने घटे सैन्य भंडार को फिर से भरने में मदद कर रहा है।

रूस की ओर से ईरान को सामान भेजे जाने की रिपोर्ट ऐसे समय सामने आई है, जब इजराइल पहले ईरान के अहम बंदरगाह और सैन्य सप्लाई नेटवर्क को निशाना बना चुका है।

द टाइम्स ऑफ इजराइल के मुताबिक, इजराइली हमलों में बंदर अंजली पोर्ट की कुछ सुविधाओं और ईरानी नौसेना से जुड़े ठिकानों को नुकसान पहुंचा था। यह पोर्ट ईरान तक सैन्य सामान पहुंचाने वाले समुद्री नेटवर्क का हिस्सा है।

चीन से भी मिसाइल के पार्ट्स ले रहा ईरान

  • ईरान का रक्षा मंत्रालय और सशस्त्र बलों की लॉजिस्टिक्स संस्था अब अपने यहां बनने वाली बैलिस्टिक मिसाइलों में रूस और चीन में बने कुछ पार्ट्स का इस्तेमाल बढ़ा रही है।
  • इनका इस्तेमाल मुख्य रूप से ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स यानी IRGC की एयरोस्पेस फोर्स से जुड़े कार्यक्रमों में की जा रही है।
  • यह ईरान की ‘लुक ईस्ट’ रणनीति का हिस्सा है। इसके तहत ईरान पश्चिमी देशों पर अपनी निर्भरता कम करके रूस और चीन के साथ सैन्य और तकनीकी सहयोग बढ़ा रहा है।
  • रिपोर्ट के मुताबिक, रूस ईरान को सैटेलाइट तस्वीरें भी दे रहा है। इनकी मदद से ईरानी सेना सैन्य ठिकानों की निगरानी और हमलों के लिए लक्ष्य तय करने की क्षमता बढ़ा सकती है।
  • चीन भी ईरान को कई तरह की तकनीकी मदद दे रहा है। इसमें बेईदोऊ नेविगेशन सिस्टम, रडार और निगरानी तकनीक के साथ ठोस ईंधन वाली मिसाइलों के उत्पादन में इस्तेमाल होने वाली चीजे शामिल है।

रूस ने ईरान की मदद करने पर इनकार किया था

रूस और ईरान ने इन सामानों की आपूर्ति को लेकर सार्वजनिक रूप से कोई बयान नहीं दिया है। रूस पहले भी ईरान को सैन्य सामान देने की खबरों से इनकार करता रहा है। रूस ने घोषित सैन्य सहयोग के अलावा ईरान को किसी तरह की सैन्य सामग्री देने से लगातार इनकार किया है।

पश्चिमी खुफिया एजेंसियां सार्वजनिक रूप से यह बताने को तैयार नहीं हैं कि ईरान ने अपने सैन्य भंडार को कितनी तेजी से दोबारा तैयार किया है। हालांकि, रिपोर्ट्स के मुताबिक इजराइली खुफिया एजेंसियां इस बात से हैरान थीं कि ईरान अपने कुछ मिसाइल भंडार को इतनी तेजी से फिर तैयार करने में सफल रहा।

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ट्रम्प ने होर्मुज को अमेरिका का नया इलाका बताया:मैप पोस्ट किया; ईरान का जवाब- ट्रम्प की गलतफहमी जल्द दूर हो जाएगी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने होर्मुज स्ट्रेट को अमेरिका का हिस्सा बताते हुए सोशल मीडिया पर मैप पोस्ट किया है। ट्रम्प के पोस्ट के बाद ईरान ने कहा कि होर्मुज को अमेरिका का हिस्सा बताना सिर्फ एक गलतफहमी है। पूरी खबर पढ़ें…

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क्या आपने सुना है ‘पसाढ़ी’ चावल का नाम? महिलाओं को छठ पूजा में खाना अनिवार्य

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Sultanpur News: सफेद या काला चावल तो आपने देखा होगा, लेकिन क्या आपने कभी भूरे रंग का चावल देखा है? सुल्तानपुर समेत पूरे अवध क्षेत्र में भाद्रपद माह के छठवीं तिथि को यह चावल महिलाओं के लिए खाना अनिवार्य होता है. आइए इस चावल और इसके गुणों के बारे में आपको बताते हैं.

सुल्तानपुर: आपने सफेद रंग का चावल देखा होगा, काले रंग का चावल देखा होगा. लेकिन आज हम आपको बताने वाले हैं एक भूरे रंग के चावल के बारे में, जिसे पसई या पसाढ़ी का चावल कहा जाता है. इस चावल के पौधे की सबसे खास बात यह है कि इसकी ना तो बुवाई होती है और ना ही रोपाई होती है, बल्कि यह अपने आप खाली जगह पर उगता है. सुल्तानपुर समेत पूरे अवध क्षेत्र में भाद्रपद माह के छठवीं तिथि को यह चावल महिलाओं के लिए खाना अनिवार्य होता है. खासकर उनको जो छठी माता की पूजा करती हैं. आज हम जानेंगे क्या है पसाढ़ी चावल का महत्व और महिलाएं इसको क्यों अनिवार्य रूप से खाती हैं.

यह‌ है मान्यता
उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले की रहने वाली महिला पुष्पा देवी लोकल 18 से बताती हैं कि पसाढ़ी का चावल भाद्र पद की छठवीं तिथि को महिलाओं द्वारा किए जाने वाले छठ माता के पूजन में किया जाता है. इसमें पसाढ़ी चावल के अलावा अन्य कोई भी चावल महिलाएं नहीं खाती हैं. इस अनोखी मान्यता के पीछे की वजह है कि जिन महिलाओं को पुत्र की प्राप्ति हुई होती है, वह महिलाएं पसाढ़ी के चावल पकाकर को खाती हैं.

इस चावल के खाने के पीछे एक मान्यता यह भी है कि इस चावल को गाय के घी के साथ नहीं खाया जाता, बल्कि इसको भैंस के घी के साथ उबालकर खाया जाता है. इसके साथ ही महुआ और करमवा का साग भी इसके साथ खाया जा सकता है. लेकिन इस दिन गाय के घी का इस्तेमाल इस चावल के साथ नहीं किया जाता.

स्वास्थ्य में है लाभदायक
वहीं मेडिकल कॉलेज सुल्तानपुर में कार्यरत आयुर्वेद चिकित्सक डॉक्टर संतोष कुमार श्रीवास्तव लोकल 18 से बताते हैं कि अगर आप वजन कम करने की कोशिश में हैं, तो पसई का चावल आपके लिए नेचुरल हेल्पर साबित हो सकता है. यह न सिर्फ हल्का होता है, बल्कि लंबे समय तक पेट भरा रखता है, यानी बार-बार भूख लगने की समस्या से छुटकारा और मोटापे पर कंट्रोल करता है.

पसई के चावल में मैग्नीशियम भरपूर मात्रा में मिलता है. यही वजह है कि यह हमारी हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है और ऑस्टियोपोरोसिस जैसी समस्याओं से बचाता है. यदि इसका सेवश रोजाना डाइट में किया जाए तो हमारी हड्डियां मजबूत बनी रहती हैं.

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आर्यन सेठ

आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ली से साल 2024 में…

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0 से शुरुआत, बाप-दादा का न कोई बिजनेस न दौलत, अपने दम पर बने अरबपति


नई दिल्ली. भारत के सबसे सफल कारोबारियों की बात होती है तो अक्सर बड़े कारोबारी परिवारों के नाम सामने आते हैं. लेकिन देश में कुछ ऐसे उद्यमी भी हैं जिन्होंने बिना किसी बड़े कारोबारी बैकग्राउंड के अपनी कंपनियां खड़ी कीं. इनमें किसी ने आर्थिक तंगी देखी तो किसी ने नौकरी छोड़कर बिजनेस शुरू करने का जोखिम उठाया. इन कारोबारियों ने अलग अलग क्षेत्रों में काम किया और लाखों करोड़ रुपये की कंपनियां खड़ी कीं. किसी ने डिजिटल पेमेंट की दुनिया बदल दी, तो किसी ने फूड डिलीवरी, होटल, ब्यूटी और रिटेल के कारोबार को नया रूप दिया. इनकी कहानी संघर्ष के साथ सही समय पर सही फैसला लेने की भी कहानी है.

ऐसे उद्यमियों में विजय शेखर शर्मा से लेकर फाल्गुनी नायर तक शामिल हैं. हालांकि, सभी का नाम यहां ले पाना संभव नहीं है. इसलिए अभी हम यहां सिर्फ 5 उद्यमियों के बारे में बात करेंगे.

विजय शेखर शर्मा

अलीगढ़ के अतरौली के एक साधारण परिवार से आने वाले विजय शेखर शर्मा के पिता स्कूल टीचर थे. हिंदी मीडियम से पढ़ाई करने के कारण दिल्ली इंजीनियरिंग कॉलेज में पहुंचने के बाद उन्हें अंग्रेजी समझने में काफी परेशानी हुई. उन्होंने हिंदी और अंग्रेजी में किताबें और मैगजीन साथ पढ़कर अपनी भाषा सुधारी.

कॉलेज में ही उन्होंने कोडिंग सीखी और एक वेबसाइट बनाई, जिसे बाद में करीब 10 लाख रुपये में बेच दिया. साल 2000 में उन्होंने वन97 कम्युनिकेशंस शुरू की. शुरुआती दौर में आर्थिक संकट इतना बढ़ा कि उन पर करीब 32 लाख रुपये का कर्ज हो गया. साल 2010 में इसी कंपनी के तहत पेटीएम शुरू हुआ. साल 2016 की नोटबंदी के बाद डिजिटल पेमेंट तेजी से बढ़ा और पेटीएम देश के सबसे चर्चित डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म में शामिल हो गया.

दीपिंदर गोयल

पंजाब के संगरूर से आने वाले दीपिंदर गोयल ने आईआईटी दिल्ली से पढ़ाई की. पढ़ाई के शुरुआती दौर में वह बहुत अच्छे छात्र नहीं थे और आठवीं कक्षा में फेल भी हुए थे. बाद में मेहनत के दम पर उन्होंने आईआईटी में जगह बनाई.

आईआईटी के बाद उन्होंने बैन एंड कंपनी में नौकरी की. ऑफिस में उन्होंने देखा कि लंच के समय कर्मचारी मेन्यू देखने के लिए परेशान होते थे. इसी समस्या से उन्हें बिजनेस आइडिया मिला. साल 2008 में उन्होंने पंकज चड्ढा के साथ फूडीबे डॉट कॉम शुरू किया. साल 2010 में इसका नाम बदलकर जोमैटो कर दिया गया. शुरुआत मेन्यू की जानकारी देने से हुई और कंपनी बाद में फूड डिलीवरी में उतरी. साल 2021 में जोमैटो का आईपीओ आया. इसके बाद ब्लिंकिट के अधिग्रहण ने कंपनी को क्विक कॉमर्स के बड़े खिलाड़ियों में शामिल कर दिया.

रितेश अग्रवाल

ओडिशा के रायगढ़ जिले के एक छोटे से इलाके से आने वाले रितेश अग्रवाल ने कम उम्र में ही कारोबार शुरू कर दिया था. 13 साल की उम्र में वह सिम कार्ड बेचते थे. आगे चलकर उन्हें थिएल फेलोशिप मिली, जिसके तहत उन्हें बिजनेस शुरू करने के लिए 1 लाख डॉलर की फंडिंग मिली.

भारत में घूमने के दौरान उन्होंने बजट होटलों की खराब स्थिति देखी. इसी समस्या को अवसर बनाकर उन्होंने साल 2012 में ओरावल स्टेस शुरू किया. साल 2013 में इसे ओयो रूम्स के रूप में रीब्रांड किया गया. शुरुआत में रितेश खुद होटल के कमरों की सफाई से लेकर ग्राहकों की शिकायतों तक संभालते थे. धीरे धीरे ओयो ने बजट होटल कारोबार को एक स्टैंडर्ड मॉडल में बदल दिया और भारत के बाहर भी अपना कारोबार फैलाया.

फाल्गुनी नायर

फाल्गुनी नायर ने आईआईएम अहमदाबाद से पढ़ाई की और करीब 19 साल तक कोटक महिंद्रा कैपिटल में काम किया. वह कंपनी में मैनेजिंग डायरेक्टर के पद तक पहुंचीं. लेकिन करीब 50 साल की उम्र में उन्होंने अपनी सुरक्षित कॉरपोरेट नौकरी छोड़कर बिजनेस शुरू करने का फैसला किया.

साल 2012 में उन्होंने करीब 2 करोड़ रुपये की अपनी पूंजी से नायका शुरू किया. उनका लक्ष्य भारत में ब्यूटी और कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स के लिए भरोसेमंद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बनाना था. शुरुआत में ब्रांड्स को ऑनलाइन बेचने के लिए मनाना और ग्राहकों का भरोसा जीतना बड़ी चुनौती थी. साल 2021 में नायका का आईपीओ आया और फाल्गुनी नायर भारत की प्रमुख सेल्फ मेड महिला अरबपतियों में शामिल हो गईं. आज नायका का ऑनलाइन कारोबार होने के साथ देशभर में सैकड़ों स्टोर का नेटवर्क भी है.

राधाकिशन दमानी

मुंबई की एक चॉल में पले बढ़े राधाकिशन दमानी ने बीकॉम की पढ़ाई पूरी नहीं की. पिता के निधन के बाद उन्होंने पारिवारिक बॉल बेयरिंग कारोबार बंद किया और 1980 के दशक में शेयर बाजार में कदम रखा.

वैल्यू इन्वेस्टिंग के जरिए उन्होंने बड़ी पूंजी बनाई. इसके बाद उन्होंने रिटेल कारोबार में उतरने का फैसला किया. साल 2002 में मुंबई के पवई में डीमार्ट का पहला स्टोर खोला गया. दमानी ने किराए की दुकानों के बजाय जमीन खरीदकर स्टोर बनाने पर जोर दिया. कम खर्च, कम विज्ञापन और कम कीमत पर सामान बेचने के मॉडल ने डीमार्ट को तेजी से आगे बढ़ाया. साल 2017 में एवेन्यू सुपरमार्ट्स का आईपीओ आया और इसके बाद दमानी देश के सबसे अमीर कारोबारियों में शामिल हो गए.



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प्रमोद तिवारी बोले- सभी चंदा चोर बीजेपी से: प्रतापगढ़ में राम मंदिर चंदा चोरी और नई कमेटी पर उठाए सवाल – Pratapgarh News




प्रतापगढ़ में राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने मंगलवार को प्रेस वार्ता कर भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने राम मंदिर से जुड़े चंदे, जमीन के लेनदेन और भाजपा की नई कमेटी को लेकर सवाल उठाए। तिवारी ने भाजपा पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए आगामी चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन को लेकर भी दावा किया। राम मंदिर विवाद पर बोले- सहमति नहीं तो कोर्ट का फैसला मानें उत्तराखंड के कांग्रेस नेता हरीश रावत के राम मंदिर से जुड़े बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रमोद तिवारी ने कहा कि कांग्रेस शुरू से ही राम मंदिर विवाद का समाधान आपसी बातचीत और सहमति से करने की पक्षधर रही है। उन्होंने कहा कि यदि सहमति नहीं बनती है तो न्यायालय का फैसला सभी को स्वीकार करना चाहिए।
जमीन के लेनदेन को लेकर भाजपा पर सवाल उठाए प्रमोद तिवारी ने राम मंदिर से जुड़ी जमीन के लेनदेन को लेकर भाजपा पर कटाक्ष किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस जमीन को करीब दो करोड़ रुपये में खरीदा गया था, उसे बाद में 17 करोड़ रुपये में बेच दिया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को पहले यह जानकारी नहीं थी कि यहां “चंदा चोर और चढ़ावा चोर” भी हैं। बोले- सभी भाजपा नेता चोर नहीं, लेकिन… चंदा चोरी के आरोपों को लेकर भाजपा पर हमला बोलते हुए तिवारी ने कहा कि भाजपा में सभी लोग चोर नहीं हैं। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि जितने भी “चंदा चोर” हैं, वे भाजपा से जुड़े हुए हैं। नई कमेटी पर भी साधा निशाना भाजपा की ओर से घोषित नई कमेटी को लेकर प्रमोद तिवारी ने नवनियुक्त पदाधिकारियों को शुभकामनाएं दीं। इसके साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा चाहे जिसे राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए, अध्यक्ष बनने के बाद वह अपनी विधानसभा सीट भी नहीं जीत पाएगा। तिवारी ने दावा किया कि भाजपा कितनी भी कमेटियां बना ले, आने वाले चुनावों में उसका प्रदर्शन पूरी तरह विफल रहेगा।



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उद्धव गुट बोला-पहले बागी विधायकों की अयोग्यता पर फैसला हो: सुप्रीम कोर्ट में अपील- असली शिवसेना और पार्टी सिंबल किसका, यह बाद में देखें


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नई दिल्ली2 घंटे पहले

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सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को उद्धव ठाकरे गुट की याचिका पर लगातार छठे दिन सुनवाई हुई। उद्धव ठाकरे गुट ने कोर्ट से कहा कि असली शिवसेना किसकी, इसका फैसला विधायकों की अयोग्यता से जुड़े फैसले के बाद होना चाहिए।

मामला CJI जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच के सामने दी। बेंच 2024 में दायर उद्धव गुट की 2 याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।

कोर्ट में उद्धव ठाकरे का पक्ष एडवोकेट कपिल सिब्बल ने रखा। उद्धव गुट का कहना है कि पहले यह तय हो कि बागी विधायक अयोग्य हैं या नहीं, इसके बाद चुनाव आयोग तय करे कि असली शिवसेना कौन सी है।

दरअसल, चुनाव आयोग ने एकनाथ शिंदे गुट को असली शिवसेना मानने और पार्टी का नाम और धनुष-बाण निशान दे दिया था। इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।

मंगलवार को दोनों पक्षों की बहस किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। इस मामले पर बुधवार को फिर सुनवाई होगी।

39 विधायकों की अयोग्यता से जुड़ा है मामला

यह पूरा मामला शिवसेना के 39 बागी विधायकों से जुड़ा है। जिन्हें 10 जनवरी 2024 को महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर राहुल नार्वेकर ने अयोग्य नहीं माना था और विधानसभा में बहुमत के आधार पर शिंदे गुट को असली शिव सेना घोषित किया था।

सिब्बल ने इसी फैसले का हवाला देते हुए कहा- चुनाव आयोग और महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर ने कानून का गलत मतलब निकाला है। उन्होंने विधायकों की संख्या में बहुमत और राजनीतिक पार्टी को एक ही मान लिया, जबकि दोनों अलग चीजें हैं।

उन्होंने दलील दी- चुनाव आयोग को यह तय करना चाहिए कि असली पार्टी कौन-सी है। अगर इन विधायकों को आखिर में अयोग्य ठहराया जाता है, तो विधानसभा में उनकी संख्या को नहीं गिना जाना चाहिए।

सिब्बल ने सुभाष देसाई मामले के फैसले का हवाला दिया

सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट के सुभाष देसाई मामले के फैसले का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि विधायी दल में बंटवारे का मतलब अपने आप राजनीतिक दल में बंटवारा नहीं होता।

इससे पहले 13 अगस्त की सुनवाई के दौरान भी उद्धव गुट ने कहा था कि संविधान के प्रावधानों की ऐसी व्याख्या नहीं की जा सकती, जिससे उस गलती को बढ़ावा मिले जिसे रोकने के लिए दलबदल विरोधी कानून बनाया गया है।

शिवसेना की मौजूदा स्थिति क्या है

महाराष्ट्र के सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में दर्ज शिवसेना पर फिलहाल चुनाव आयोग का 17 फरवरी 2023 वाला फैसला लागू है। यानी आधिकारिक तौर पर ‘शिवसेना’ नाम और ‘धनुष-बाण’ चिह्न एकनाथ शिंदे गुट के पास है। उद्धव गुट शिवसेना (UBT) के नाम से और ‘मशाल’ चिह्न के साथ चुनाव लड़ती आ रही है।



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