Friday, October 2, 2026
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कानपुर के इंटर कॉलेज में गांधी-शास्त्री जयंती: विद्यार्थियों ने सफाई के साथ पौधरोपण कर दिया स्वच्छता का संदेश – Kanpur News




कानपुर के हर सहाय जगदंबा सहाय इंटर कॉलेज में राष्ट्रपिता महात्मा गांधी और पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती पर विद्यालय में कार्यक्रम आयोजित किया गया। शिक्षकों और विद्यार्थियों ने दोनों महापुरुषों के चित्रों पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि अर्पित की। इस दौरान विद्यार्थियों ने गांधीजी और शास्त्रीजी के जीवन, विचारों एवं योगदान पर अपने विचार साझा किए। विद्यार्थियों ने गांधीजी के स्वच्छता और अनुशासन के संदेश को ध्यान में रखते हुए विद्यालय परिसर में सफाई अभियान चलाया। इसके साथ ही पौधरोपण कर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। विद्यार्थियों ने उत्साह के साथ कार्यक्रम में भाग लिया और दोनों महापुरुषों के आदर्शों को जीवन में अपनाने की बात कही। शिक्षकों ने बताए महापुरुषों के विचार प्रधानाचार्य श्रीमती श्वेता गुप्ता, उप प्रधानाचार्य अनूप शुक्ला, डॉ. सुधांशु त्रिपाठी, सर्वेश तिवारी, ओपी अवस्थी और डॉ. मीरा यादव ने अपने विचार रखे। विद्यार्थियों ने भी अपने शब्दों में गांधीजी और शास्त्रीजी को याद किया। कार्यक्रम में विद्यालय के शिक्षक और विद्यार्थी मौजूद रहे।



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शिवपुरी में शराब पकड़ने वाले ग्रामीणों पर केस: बेचने वाले की शिकायत पर FIR, महिलाओं ने करैरा थाने का घेराव किया – Shivpuri News




शिवपुरी के करैरा थाना क्षेत्र के समोहा गांव में अवैध शराब को लेकर शुरू हुआ विवाद अब पुलिस कार्रवाई को लेकर विरोध में बदल गया है। 29 सितंबर को गांव की महिलाओं ने शराब लेकर पहुंचे सुरेंद्र राय को पकड़कर पुलिस के हवाले किया था। महिलाओं ने शराब की पेटियों में आग लगाने के साथ सुरेंद्र को रस्सी से बांध दिया था। पुलिस ने उसके कब्जे से 50 क्वार्टर शराब बरामद की। ग्रामीणों का आरोप है कि इसके बावजूद उसके खिलाफ हल्की धारा में कार्रवाई की गई। इसी दिन सुरेंद्र राय की शिकायत पर पुलिस ने चार ग्रामीणों के खिलाफ मारपीट की एफआईआर दर्ज की। शिकायत में पुराने विवाद को लेकर मारपीट करने का आरोप लगाया गया है। इसके बाद महिलाओं और ग्रामीणों ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाते हुए पूछा कि जिस व्यक्ति को शराब के साथ पकड़कर पुलिस को सौंपा गया, उसी की शिकायत पर ग्रामीणों के खिलाफ मारपीट का मामला कैसे दर्ज किया गया। ‘अवैध शराब बंद करो’ के नारे लगाए कार्रवाई के विरोध में शुक्रवार को समोहा के ग्रामीण और महिलाएं ‘अवैध शराब बंद करो’ के नारे लगाते हुए करैरा थाने पहुंचे। उन्होंने थाने का घेराव कर थाना प्रभारी को आवेदन सौंपा और पूरे मामले में कार्रवाई की मांग की। ग्रामीणों का आरोप है कि गांव में लंबे समय से अवैध शराब की बिक्री हो रही है। महिलाओं ने शराब पकड़कर पुलिस को सौंपा, लेकिन शराब बेचने वाले के खिलाफ अपेक्षाकृत हल्की धारा में मामला दर्ज किया गया। इसके बाद ग्रामीणों पर ही मारपीट की एफआईआर दर्ज कर दी गई। महिलाओं ने पुलिस पर शराब ठेकेदार का सहयोग करने का आरोप भी लगाया है। ग्रामीणों ने तीन मांगें रखीं ग्रामीणों ने आवेदन में सुरेंद्र राय के खिलाफ आबकारी एक्ट की धारा 34(2) में कार्रवाई करने की मांग की है। इसके अलावा महिलाओं से कथित अभद्रता और मारपीट की जांच तथा ग्रामीणों के खिलाफ दर्ज मारपीट की एफआईआर की निष्पक्ष जांच कर कार्रवाई करने की मांग की गई है।



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सुपौल में गांधी जयंती पर अधिकारियों ने लगाई झाड़ू: बाबा भीमशंकर धाम में चलाया स्वच्छता अभियान,पौध लगाए; स्वच्छता की शपथ – Supaul News




सुपौल में गांधी जयंती एवं ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के तहत शुक्रवार को राघोपुर प्रखंड के प्रसिद्ध बाबा भीमशंकर महादेव स्थान, धरहारा में विशेष स्वच्छता एवं पौधारोपण कार्यक्रम आयोजित किया गया। जिलाधिकारी सावन कुमार, डीडीसी इन्द्रवीर कुमार समेत कई प्रशासनिक अधिकारियों ने खुद सफाई अभियान में हिस्सा लेकर स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। देखें, मौके से आई तस्वीरें… मास्क-ग्लव्स पहनकर अधिकारियों ने की सफाई डीएम, डीडीसी समेत अधिकारियों ने मास्क और ग्लव्स पहनकर मंदिर परिसर की सफाई की। परिसर में फैले कचरे को एकत्र कर अलग-अलग डस्टबिन में डाला गया। इस दौरान लोगों को कचरे के उचित प्रबंधन और सार्वजनिक स्थलों को साफ रखने के प्रति जागरूक किया गया। सफाई के बाद मंदिर परिसर में हुआ पौधारोपण स्वच्छता अभियान के बाद डीएम सावन कुमार ने मंदिर परिसर में पौधारोपण किया। इसके बाद डीडीसी इन्द्रवीर कुमार, एसडीएम विनय कुमार समेत अन्य अधिकारियों ने भी पौधे लगाए। अधिकारियों ने अधिक से अधिक पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का संकल्प लिया। अधिकारियों और लोगों ने ली स्वच्छता की शपथ कार्यक्रम में मौजूद अधिकारियों और स्थानीय लोगों ने स्वच्छता की शपथ ली। लोगों से अपने घर, गांव और सार्वजनिक स्थलों को स्वच्छ रखने के साथ पर्यावरण संरक्षण में सक्रिय भागीदारी निभाने की अपील की गई। डीएम बोले- स्वच्छता सामूहिक जिम्मेदारी मीडिया से बातचीत में डीएम सावन कुमार ने कहा कि स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण एक-दूसरे के पूरक हैं। समाज की सहभागिता से ही स्वच्छ भारत और हरित भारत का सपना साकार हो सकता है। उन्होंने स्वच्छता अभियान को जन आंदोलन बनाने और हर व्यक्ति से अपनी जिम्मेदारी निभाने का आह्वान किया। डीडीसी इन्द्रवीर कुमार, एसडीएम सह मंदिर समिति अध्यक्ष विनय कुमार, एसडीपीओ पवन कुमार, बीडीओ सत्येन्द्र कुमार, अंचलाधिकारी सह मंदिर समिति उपाध्यक्ष रश्मि प्रिया, प्रभारी चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. दीप नारायण राम, मंदिर समिति सचिव संजीव कुमार यादव, थानाध्यक्ष अमित कुमार राय समेत प्रशासनिक अधिकारी और स्थानीय लोग मौजूद रहे।



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Motorola Edge 70 Pro भी मिलेगा सस्ता, Flipkart सेल की अर्ली डील हुई रिवील


Flipkart पर 9 अक्टूबर को शुरू होने वाले बिग बिलियन डेज सेल से पहले ही अर्ली डील्स रिवील हो गई है। ई-कॉमर्स वेबसाइट पर मोटोरोला का यह स्मार्टफोन हजारों रुपये सस्ते में खरीदा जा सकता है। मोटोरोला का यह मिड बजट फोन अप्रैल में लॉन्च किया गया है। फोन में 6,500mAh की दमदार बैटरी समेत कई तगड़े फीचर्स दिए गए हैं।

Motorola Edge 70 Pro पर ऑफर

मोटोरोला का यह फोन दो स्टोरेज वेरिएंट्स- 8GB RAM + 256GB और 12GB RAM + 256GB में आता है। फ्लिपकार्ट पर यह फोन क्रमशः 39,999 रुपये और 42,999 रुपये में लिस्ट किया गया है। बिग बिलियन डेज सेल की अर्ली डील्स में यह फोन 3,000 रुपये सस्ता यानी 36,999 रुपये की शुरुआती कीमत में लिस्ट किया गया है। इसका टॉप वेरिएंट 39,999 रुपये में मिलेगा।

Motorola Edge 70 Pro के फीचर्स

इस मिड बजट फोन में 6.8 इंच का डिस्प्ले दिया गया है। इस फोन का डिस्प्ले 1.5K रेजलूशन को सपोर्ट करता है। फोन में एक्सट्रीम AMOLED पैनल यूज किया गया है। फोन का डिस्प्ले 144Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। वहीं, इसकी पीक ब्राइटनेस 5200 निट्स तक की है। इसके डिस्प्ले में कॉर्निंग गोरिल्ला ग्लास 7i का प्रोटेक्शन मिलता है। इस मिड बजट फोन में MediaTek Dimensity 8500 Extreme चिपसेट दिया गया है। यह 12GB रैम और 256GB तक स्टोरेज को सपोर्ट करता है।











Motorola Edge 70 Pro फीचर्स
डिस्प्ले 6.8 इंच, AMOLED, 144Hz
प्रोसेसर MediaTek Dimensity 8500 Extreme
स्टोरेज 12GB RAM + 256GB
बैटरी 6500mAh, 90W
कैमरा 50MP + 50MP, 50MP
OS Android 16
कीमत 41,999 रुपये से शुरू

Motorola का यह फोन मैटलिक फ्रेम के साथ आता है। इसमें IP68 और IP69 रेटिंग दी गई है। यह फोन पानी में भींगने और धूल-मिट्टी में खराब नहीं होगा। फोन में 6,500mAh की सिलिकन बैटरी इस्तेमाल की गई है। इसके साथ 90W वायर्ड फास्ट चार्जिंग फीचर दिया गया है। यह Android 16 ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करता है।

मोटोरोला के इस फोन में 50MP का मेन OIS कैमरा मिलेगा। इसके साथ 50MP का अल्ट्रा वाइड और 50MP का सेल्फी कैमरा भी दिया जाएगा। कनेक्टिविटी के लिए मोटोरोला के इस फोन में WiFi, Bluetooth, NFC जैसे फीचर्स दिए गए हैं।

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नाम ही नहीं, ‘ब्रेकअप सेजवान फ्राइड राइस’ का टेस्ट भी है खास, लेना है मजा तो आएं सेक्टर 2

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Bokaro Famous Breakup Schezwan Fried Rice: बोकारो के सेक्टर-2 में राइस रीमिक्स स्टॉल का ‘ब्रेकअप सेजवान फ्राइड राइस’ अपने नाम के साथ-साथ स्वाद के लिए भी दूर-दूर तक मशहूर है. स्टॉल संचालक विकास ने बताया कि उनके ठेले पर बहुत से आइटम मिलते हैं पर सबसे अधिक मांग इसी डिश की है. वे रोजाना 80 से 100 प्लेट तक की बिक्री कर लेते हैं.

ख़बरें फटाफट

बोकारो. अगर आप खाने-पीने के शौकीन हैं और कुछ अलग व स्वादिष्ट ट्राई करना चाहते हैं, तो बोकारो के सेक्टर-2 स्थित राइस रीमिक्स स्टॉल आ सकते हैं. यहां वैसे तो कई आइटम मिलते हैं पर यह स्टॉल ब्रेकअप सेजवान फ्राइड राइस के लिए फेमस है. यहां दूर-दूर से लोग फ्राइड राइस खाने के लिए आते हैं. स्टॉल के संचालक विकास ने बताया कि उनके यहां फ्राइड राइस की कई वैरायटी उपलब्ध हैं. इनमें बवंडर वेज फ्राइड राइस की कीमत 30 रुपए हाफ और 50 रुपए फुल प्लेट है. वहीं विस्फोटक पनीर फ्राइड राइस 50 रुपए हाफ और 70 रुपए फुल प्लेट में मिलता है, जबकि खास ब्रेकअप सेजवान राइस की कीमत 40 रुपए हाफ और 60 रुपए फुल प्लेट है.

ऐसे पड़ा नाम
विकास के मुताबिक, उनके स्टॉल पर सबसे ज्यादा डिमांड ब्रेकअप सेजवान राइस की है. इस डिश का नाम और आइडिया भी काफी अलग है. उनका कहना है कि ब्रेकअप के बाद लोग अक्सर उदास महसूस करते हैं. ऐसे में तीखे और चटपटे सेजवान राइस का स्वाद उनका मन बदल सकता है. टूटे दिल वालों का मूड फ्रेश करने के आइडिया से इस डिश का नाम ब्रेकअप सेजवान राइस रखा गया है.

यूं तैयार होता है ब्रेकअप सेजवान राइस
ब्रेकअप सेजवान राइस तैयार करने के लिए सबसे पहले कढ़ाई में बारीक कटे प्याज और लहसुन को अच्छी तरह फ्राई किया जाता है. इसके बाद इसमें शिमला मिर्च, गाजर, सोयाबीन समेत दूसरी सब्जियां डालकर पकाई जाती हैं. फिर इसमें चावल मिलाया जाता है. इसके बाद अगले चरण में स्वाद के अनुसार विनेगर और सोया सॉस डालकर सभी सामग्री को अच्छी तरह मिक्स किया जाता है. ऊपर से पनीर डालकर इसे कुछ देर तक पकाया जाता है. इसके बाद तैयार ब्रेकअप सेजवान राइस को प्लेट में परोसकर ग्राहक को दिया जाता है.

रोजाना बिकती हैं 80 से 100 प्लेट
विकास ने बताया कि उनके स्टॉल पर रोजाना करीब 80 से 100 प्लेट ब्रेकअप सेजवान राइस की खपत हो जाती है. यही वजह है कि यह डिश उनके स्टॉल की खास पहचान बन चुकी है. राइस रीमिक्स स्टॉल सुबह 8 बजे से शाम 4 बजे तक खुला रहता है और उनका अगला लक्ष्य आने वाले समय में स्टॉल पर और नई डिश जोड़ने की तैयारी है, ताकि ग्राहकों को अलग-अलग स्वाद का आनंद मिल सके.

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Raina Shukla

Raina Shukla is an experienced journalist and content professional with nearly two decades of experience in print and digital media. She holds a Master’s degree in Mass Communication and Journalism from Bundelk…

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एक्टर डीनो मोरिया के गिरफ्तार होने की खबर: मीठी नदी डीसिल्टिंग घोटाले से जुड़ा है मामला




एक्टर डीनो मोरिया शुक्रवार को मुंबई पुलिस ने गिरफ्तार होने की खबर सामने आई है। शुक्रवार सुबह वे कमिश्नर ऑफिस पहुंचे, जहां मुंबई पुलिस की इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EOW) के सामने उनकी पेशी हुई। मामला मीठी नदी डीसिल्टिंग स्कैम का है। दावा है कि राज्य में नदियों की सफाई के नाम पर हुए 65 करोड़ रुपए का गबन हुआ। इस जांच में मोरिया का नाम इसलिए आया क्योंकि उन पर उन कॉन्ट्रैक्टर्स और अधिकारियों से जुड़े होने का आरोप है। इन लोगों पर मुंबई में बाढ़ से बचाव और ड्रेनेज सिस्टम के रखरखाव के लिए दिए गए सरकारी फंड में हेराफेरी करने का शक है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में हुआ है जब डीनो, दिशा सालियन की मौत के मामले में भी जांच का सामना कर रहे हैं। पिछले साल ED ने डीनो के घर छापा मारा था 2025 में भी ED ने मुंबई और कोच्चि में 15 जगहों पर छापेमारी की, जिसमें मोरिया का घर भी शामिल था। इन छापों में उन लोगों और संगठनों को निशाना बनाया गया जो जांच के दायरे में आए कॉन्ट्रैक्टर्स और अधिकारियों से जुड़े थे। जांच में सामने आया कि आरोपी केतन कदम और जय जोशी ने मैटप्रॉप कंपनी के अधिकारियों और बीएमसी के स्टॉर्म वॉटर ड्रेन्स विभाग के अधिकारियों के साथ मिलीभगत करके घोटाला किया। जब घोटाले के मुख्य आरोपी केतन कदम के कॉल रिकॉर्ड्स की जांच हुई तो इसमें एक्टर डिनो मोरिया और उनके भाई का नाम सामने आया। दोनों ने कई मौकों पर केतन कदम से बात की थी। जांच अधिकारियों का मानना है कि डीनो मोरिया और केतन महज दोस्त नहीं हैं, बल्कि उनके बीच पैसों का लेन-देन भी हो सकता है। यही वजह है कि डिनो को जांच के दायरे में लेकर पूछताछ की जा रही है। क्या था मीठी नदी डीसिल्टिंग प्रोजेक्ट मीठी नदी डीसिल्टिंग प्रोजेक्ट की शुरुआत 2005 में मुंबई में आई बाढ़ के बाद बृहन्मुंबई म्युनिसिपल कॉरपोरेशन (BMC) और अन्य सिविक एजेंसियों ने की थी। इस प्रोजेक्ट का मकसद मलबे को हटाकर और नदी के तल का रखरखाव करके बाढ़ मैनेजमेंट को बेहतर बनाना था। बाद की जांच में डीसिल्टिंग के बताए गए काम और असल में किए गए काम के बीच अंतर मिला, जिससे प्रोजेक्ट के फंड के इस्तेमाल पर शक पैदा हुआ। खबर अपडेट की जा रही है….



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पुतिन ने NATO देशों को परमाणु हमले की धमकी दी: कहा- कलिनिनग्राद पर हमला किया तो सारे हथियार तैयार; यहां 80 साल से रूसी कब्जा


मॉस्को2 घंटे पहले

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रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को NATO देशों को परमाणु हमले की धमकी दी। उन्होंने कहा कि रूस की किसी भी जमीन पर हमला हुआ, तो वह अपने सभी हथियारों से जवाब देगा।

पुतिन ने मॉस्को में वल्दाई फोरम के दौरान कहा कि NATO अगर कलिनिनग्राद को रूस से अलग करने की कोशिश करता है, तो रूस तुरंत जवाब देगा।

कलिनिनग्राद रूस का एक अलग इलाका है। यह रूस के बाकी हिस्से से जुड़ा नहीं है। यह रूस की सीमा से 300 किमी दूर यूरोप में पोलैंड और लिथुआनिया के बीच स्थित है। दूसरे विश्व युद्ध के बाद 1945 से इस इलाके पर रूस का कब्जा है।

कलिनिनग्राद रूस के लिए कैसे अहम

  • बाल्टिक सागर तक पहुंच: यहां रूस का बाल्टिक फ्लीट तैनात है, जिससे रूस को इस इलाके में समुद्री सैन्य मौजूदगी बनाए रखने में मदद मिलती है।
  • NATO के बीच रणनीतिक जगह: यह चारों तरफ से NATO देशों के करीब है। इसलिए रूस के लिए यूरोप में सैन्य दबाव बनाए रखने के लिहाज से यह जरूरी है।
  • मिसाइल तैनाती: यहां रूस ने परमाणु हथियार ले जाने में इस्कंदर मिसाइल सिस्टम तैनात किया है। इसके अलावा भी यहां कई आधुनिक हथियार हैं।
  • सैन्य निगरानी: यहां से पोलैंड, लिथुआनिया और बाल्टिक सागर के आसपास के इलाकों पर नजर रखना आसान है।
  • रूस के लिए सुरक्षा कवच: रूस मानता है कि कलिनिनग्राद उसकी पश्चिमी सीमा की रक्षा में जरूरी भूमिका निभाता है।

पुतिन बोले- पश्चिमी देश रूस के साथ युद्ध की तैयारी कर रहे

राष्ट्रपति पुतिन ने पश्चिमी देशों और यूरोप पर तनाव बढ़ाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पश्चिमी देश आने वाले वर्षों में रूस के साथ युद्ध की तैयारी की बात कर रहे हैं।

उन्होंने बाल्टिक सागर में सैन्य अभ्यास और रूसी जहाजों को जब्त करने का भी जिक्र किया।

उनका बयान मॉस्को की उस चेतावनी के बाद आया, जिसमें NATO से कहा गया था कि कलिनिनग्राद की रक्षा के लिए रूस परमाणु हथियार इस्तेमाल करने से पीछे नहीं हटेगा।

दावा- NATO कलिनिनग्राद की नाकाबंदी करने की तैयारी कर रहा है

यूरोप में रूस के कई दूतावासों ने इस हफ्ते बयान जारी किए। इनमें कहा गया कि मॉस्को के पास जानकारी है कि NATO कलिनिनग्राद और पूरे क्षेत्र की हवाई और नौसैनिक नाकाबंदी की तैयारी कर रहा है।

रूस ने यूरोपीय नेताओं पर खतरनाक खेल खेलने का आरोप लगाया। रूस का कहना है कि यूरोपीय नेता लगातार यह दावा कर रहे हैं कि मॉस्को किसी दूसरे देश पर हमला कर सकता है या ड्रोन और तोड़फोड़ के जरिए दूसरे देशों में अस्थिरता फैला सकता है। रूस ने इन आरोपों को बेबुनियाद बताया है।

NATO बोला- रूस पर हमले की कोई तैयारी नहीं है

NATO ने रूस की परमाणु हथियारों के इस्तेमाल की चेतावनी का विरोध किया है। NATO की प्रवक्ता एलिसन हार्ट ने बुधवार को कहा, ‘हम बल प्रयोग की धमकी और गैर-जिम्मेदाराना परमाणु बयानों की कड़ी निंदा करते हैं।’

उन्होंने कहा कि NATO कलिनिनग्राद को निशाना नहीं बना रहा है। NATO एक रक्षात्मक गठबंधन है और उसकी सैन्य गतिविधियों से रूस के किसी भी इलाके को खतरा नहीं है।

NATO के चीफ मार्क रुटे ने भी रूस से परमाणु हमले की धमकियां बंद करने को कहा। उन्होंने दावा किया कि रूस चाहता है कि सदस्य देशों का ध्यान बंटे और यूक्रेन की मदद पर जोर कम हो जाए। लेकिन NATO ऐसा नहीं होने देगा।

NATO चीफ बेल्जियम के ब्रसेल्स में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान। तस्वीर 2 सितंबर 2026 की है।

NATO चीफ बेल्जियम के ब्रसेल्स में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान। तस्वीर 2 सितंबर 2026 की है।

बाल्टिक सागर में NATO के सैन्य अभ्यास से तनाव बढ़ा

NATO के सदस्य देशों ने हाल के महीनों में बाल्टिक सागर के आसपास सैन्य अभ्यास किए हैं। अक्टूबर में भी ऐसे अभ्यास की योजना है।

पिछले साल NATO ने इस इलाके में ‘ऑपरेशन बाल्टिक सेंट्री’ शुरू किया था। इसका मकसद समुद्र के नीचे मौजूद संचार केबल और पाइपलाइन की सुरक्षा करना है।

18 अगस्त को NATO ने उत्तरी पोलैंड और बाल्टिक इलाके में सैन्य अभ्यास किया था। इसमें कई विमान शामिल हुए थे। अमेरिकी वायुसेना के मुताबिक, इनमें ईए-37बी कंपास कॉल विमान भी शामिल था जो संचार और रडार सिस्टम को बाधित करने की क्षमता रखता है।

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पुतिन बोले-मोदी दोस्त, फिर भी जंग रोकने को कहते हैं: उनके पास अच्छे सुझाव; PM 5 मौकों पर यूक्रेन जंग का मुद्दा उठा चुके

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने गुरुवार को कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लगातार यूक्रेन युद्ध खत्म करने की बात उठाते हैं। वह हर मुलाकात में युद्ध रोकने और शांति का रास्ता निकालने पर बात करते हैं। पूरी खबर पढ़ें…



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मथुरा में कांग्रेस जिलाध्यक्ष हाउस अरेस्ट: दिल्ली में प्रदर्शन में शामिल होने जाने वाले थे – Mathura News




दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त की गिरफ्तारी की मांग को लेकर युवा कांग्रेस के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले मथुरा में पुलिस ने कांग्रेस नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की। युवा कांग्रेस के प्रदेश महासचिव अनाम धन्य तिवारी एडवोकेट को पुलिस उनके घर से हिरासत लेकर थाना कोतवाली ले गई। वहीं, युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष दुर्गेश बघेल समेत अन्य कांग्रेस नेताओं को उनके घरों पर ही हाउस अरेस्ट कर नजरबंद कर दिया गया। पुलिस की इस कार्रवाई से राजनीतिक हलचल तेज हो गई। प्रदेश महासचिव अनाम धन्य तिवारी एडवोकेट ने कहा कि युवा कांग्रेस दिल्ली में लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने जा रही थी, लेकिन प्रदर्शन से पहले ही उन्हें घर से हिरासत में लेकर कोतवाली ले जाया गया। उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्रवाई से उनकी आवाज दबने वाली नहीं है। लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था से जुड़े सवालों पर उनका संघर्ष जारी रहेगा। वहीं, जिलाध्यक्ष दुर्गेश बघेल ने आरोप लगाया कि जब भी सरकारों से सवाल पूछे जाते हैं, तब पुलिस को आगे कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने उनके घर पर पहुंचकर उन्हें हाउस अरेस्ट कर नजरबंद कर दिया। दुर्गेश बघेल ने कहा कि वे किसी अपराध के लिए नहीं, बल्कि लोकतंत्र से जुड़े सवालों को लेकर अपनी आवाज उठाने जा रहे थे। पुलिस का पहरा लगाकर विरोध की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि सरकार चाहे जितनी पुलिस लगा ले, युवा कांग्रेस कार्यकर्ता अपने सवालों और मांगों से पीछे नहीं हटेंगे। युवा कांग्रेस नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि संगठन लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष जारी रखेगा। वहीं, पुलिस की ओर से कार्रवाई के कारणों को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।



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गुलाब बाग गांधी पार्क में हुई सर्वधर्म प्रार्थना सभा: कलेक्टर सहित अधिकारियों ने पूर्व प्रधानमंत्री और राष्ट्रपिता को दी श्रद्धांजलि – Sawai Madhopur News




राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर शुक्रवार को सवाई माधोपुर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। गुलाब बाग स्थित गांधी पार्क में सर्वधर्म प्रार्थना सभा हुई। इसमें जिला कलेक्टर कानाराम, एडीएम संजय शर्मा, नगर परिषद सभापति मेवा चौधरी, उपसभापति माया गोयल सहित प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। सभी ने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। गांधी-शास्त्री का जीवन सत्य, त्याग और सेवा का प्रतीक इस दौरान जिला कलेक्टर कानाराम ने कहा कि गांधी जी और शास्त्री जी का जीवन सत्य, त्याग और सेवा का प्रतीक है। गांधी जी का ‘स्वच्छता–उत्कृष्ट सेवा’ और शास्त्री जी का ‘जय जवान, जय किसान’ आज भी हमारे मार्गदर्शक हैं। उन्होंने सभी अधिकारी-कर्मचारियों और नागरिकों से गांधीजी के सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों को अपनाकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जीवन में लक्ष्य निर्धारित करते समय साध्य के साथ साधन की पवित्रता होना भी आवश्यक है। विभिन्न धर्मों की प्रार्थनाओं का सामूहिक गायन गुलाब बाग में आयोजित सर्वधर्म प्रार्थना सभा में सरकारी कर्मचारियों, विद्यार्थियों, स्काउट-गाइड और आमजन ने भाग लिया। इस दौरान सरस्वती वंदना, गुरु वंदना, रामधुन, बौद्ध प्रार्थना, गायत्री मंत्र, इस्लाम और जैन धर्म की प्रार्थनाएं, ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’, ‘दे दी हमें आजादी बिना खड्ग बिना ढाल’ और ‘रघुपति राघव राजा राम’ जैसे भजनों का सामूहिक गायन किया गया। कार्यक्रम के दौरान जिला कलेक्टर, एडीएम, सभापति और उपसभापति ने पौधरोपण कर ‘पेड़ लगाओ, पेड़ बचाओ’ का संदेश दिया। साथ ही स्वच्छता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया।



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भारतीय शेयर बाजार को किसकी लगी नजर? समझिए इसके पीछे का असली खेल


सौ बात की एक बात: सौ बात की एक बात ये कि ये बॉन्ड क्या होते हैं? भारत का शेयर बाजार क्यों गिरे जा रहा है? एक्सपर्ट लोग कह रहे हैं कि अमेरिका के बॉन्ड पर ब्याज बढ़ गया इसलिए भारत का शेयर बाजार गिर रहा है. भारत ही नहीं दुनिया भर में जो शेयरों की कीमत गिरे जा रही है उसकी एक बड़ी वजह ये बताई जा रही है कि अमेरिका के बॉन्ड पर ब्याज ज्‍यादा हो गया है. अब बाकी दुनिया का तो बाकी दुनिया जाने, पब्लिक तो भारत के शेयर बाजार में शेयर के दाम गिरने की वजह जानना चाहती है. तो ईरान में युद्ध हो गया, होर्मुज गलियारा खुलने के आसार कभी दिखते हैं कभी नहीं दिखते, तो ये सब वजहें तो समझ में आती हैं कि अनिश्चितता का माहौल है और कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ेगा, और उनका मुनाफा आगे चल कर कम होने की आशंका है इसलिए उनके शेयर के दाम गिर जाएं ये तो समझ में आता है. लेकिन ये जो हाल के दिनों की लगातार गिरावट चल रही है उसमें ये भी कहने लग गए हैं कि अमेरिका में बॉन्ड पर यील्ड बढ़ रही है उसकी वजह से भारत का शेयर बाजार गिर रहा है, ये वाली बात ज़्यादातर पब्लिक को समझ में नहीं आ रही. लेकिन ये समझना बहुत ज़रूरी है. सिर्फ उनके लिये ही नहीं जिन्होंने शेयर बाजार में निवेश किया हुआ है. सबके लिए जानना ज़रूरी है.

शेयर बाजार क्यों गिर रहा है? क्योंकि शेयरों के दाम गिर रहे हैं. दाम क्यों गिर रहे हैं? उसी वजह से, जिस वजह से किसी भी चीज के दाम गिरते हैं. जब किसी चीज के खरीदार ज़्यादा होते हैं और बेचने वाले कम होते हैं तो उस चीज की बाजार में कमी हो जाती है और खरीदार ज़्यादा पैसे देने को तैयार होते हैं और उस चीज के दाम बढ़ जाते हैं. इसी तरह से अगर किसी चीज को बेचने वाले ज़्यादा हो जाते हैं और खरीदने वाले उतने नहीं होते तो उस चीज की मांग कम हो जाती है और बेचने वालों को सस्ते में बेचने पड़ती है और उस चीज के दाम गिरने शुरू हो जाते हैं. तो मतलब ये कि भारतीय शेयरों को बड़ी संख्या में बेचा जा रहा है, इसलिए उनके दाम गिरते जा रहे हैं. तो क्यों बेचा जा रहा है भारतीय शेयरों को? और कौन बेच रहा है? इसकी बहुत सारी वजहें बताई जाती हैं जैसे कि कच्चे तेल के दामों में बढ़ोतरी, डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरती क़ीमत वगैरह. लेकिन साथ में बड़ी वजह ये बताई जा रही है कि विदेशी निवेशक भारत की कंपनियों के शेयरों में बड़ी तादाद में बेच कर अपना पैसा ले कर निकल रहे हैं. और क्यों बेच कर निकल रहे हैं भारत से वो लोग? भारत में तो सरकार कह रही है कि 7.8% ग्रोथ हुई है अर्थव्यवस्था में, तो भारत की कंपनियों को तो आगे और मुनाफ़े की उम्मीद होनी चाहिए. तो उनके शेयर की क़ीमत तो बढ़नी चाहिए. विदेशी निवेशक क्या वो मुनाफा नहीं कमाना चाहते? या उनको भरोसा नहीं कि भारतीय कंपनियों को मुनाफा होगा और भारतीय व्यवस्था आगे भी ऐसे ही बढ़ती रहेगी. या उनको अभी ये जो आंकड़े दिए हैं सरकार ने उनपर ही भरोसा नहीं इसलिए यहां से बेच-बेच कर निकल रहे हैं.

बॉन्‍ड होता क्‍या है?

इस सब पर भी बहुत सारे विश्लेषक अपनी-अपनी राय दे रहे हैं. और इन सब तर्कों का अपना वजन बिलकुल है. लेकिन एक बड़ा तर्क जो दिया जा रहा है वो ये भी है कि अमेरिका में बॉन्ड की यील्ड बढ़ रही है तो विदेशी निवेशकों को भारत से ज़्यादा वहां फायदा होने की उम्मीद दिख रही है इसलिए यहां से बेच-बेच कर निकले जा रहे हैं. ये बॉन्ड क्या होता है? बॉन्ड मतलब एक तरह से ऐसे समझ लो जैसे उधार की रसीद. मान लो आपने किसी को दस हजार रुपये उधार दिए. और वो एक कागज पर लिखकर दे कि इतने पैसे लिए, दो साल बाद लौटाऊंगा, और हर साल इतना ब्याज भी दूंगा. वही कागज जो है वो होता है बॉन्ड. मतलब बॉन्ड एक रसीद है, एक सबूत है कि उसने उधार लिया है और उधार पर इतना ब्याज देने का वादा किया है. फर्क बस इतना है कि ये रसीद आप किसी और को भी बेच सकते हो.

अमेरिकी बॉन्‍ड पर ज्‍यादा कमाई की वजह से निवेशक USA की तरफ रुख कर रहे हैं. (फोटो: AP)

अगर सरकार ही बॉन्‍ड दे तो फिर क्‍या होगा?

और अगर ये बॉन्ड किसी सरकार ने ही दिया हो तो समझिए उसकी वैल्यू कितनी हो जाती होगी. मतलब सरकार ही उधार ले रही है आप से. और सरकार ही वादा कर रही है. तो सरकार के बॉन्ड से पक्की रसीद क्या होगी? और वो अमेरिका की सरकार हो तो सोचिए. तो ये जो कहते हैं कि अमेरिका के बॉन्ड की कीमत बढ़ गई है उसका मतलब है कि अमेरिका की सरकार को उधार दो तो इतना ब्याज मिल रहा है. बाज़ार में इस तरह के बॉन्ड की क़ीमत रोज बदलती रहती है, जबकि असली उधार की रकम और ब्याज का वादा तो कागज पर जस का तस रहता है. मतलब जिसने सरकार को ब्याज दिया उसके पास जो रसीद है उस रसीद को वो बेच रहा है और उस रसीद की कीमत ही मांग के हिसाब से ऊपर नीचे होती रहती है. तो जब लोग कहते हैं की अमेरिकी बॉन्ड महंगा या सस्ता हो गया, तो वो उस रसीद की बाजार वाली कीमत की बात कर रहे होते हैं. मतलब बॉन्ड असल में एक उधार का कागज होता है. जब किसी को पैसे की जरूरत होती है और वो बैंक से नहीं, सीधे लोगों से उधार लेना चाहता है, तो वो एक वादा लिखकर देता है. उसी वादे को बॉन्ड कहते हैं. कागज पर लिखा होता है कि इतने रुपये मैंने लिए, इतने समय बाद लौटाऊंगा, और बीच-बीच में या आखिर में इतना ब्याज भी दूंगा. जो यह कागज खरीदता है, वो उधार देने वाला बन जाता है. जो कागज जारी करता है, वो उधार लेने वाला बन जाता है.

बॉन्ड मतलब एक तरह से ऐसे समझ लो जैसे उधार की रसीद. मान लो आपने किसी को दस हजार रुपये उधार दिए. और वो एक कागज पर लिखकर दे कि इतने पैसे लिए, दो साल बाद लौटाऊंगा, और हर साल इतना ब्याज भी दूंगा. वही कागज जो है वो होता है बॉन्ड. मतलब बॉन्ड एक रसीद है, एक सबूत है कि उसने उधार लिया है और उधार पर इतना ब्याज देने का वादा किया है. फर्क बस इतना है कि ये रसीद आप किसी और को भी बेच सकते हो.

सब साख की बात

और सबसे आम तरह के जो बॉन्ड होते हैं वो सरकार के बॉन्ड होते हैं. तो जैसे अमेरिका की सरकार को जब अपना खर्चा चलाने या पुराना कर्ज चुकाने के लिए पैसे चाहिए होते हैं तो वो ये बॉन्ड जारी करती है. सभी सरकारें ऐसा करती हैं. भारत की सरकार भी बॉन्ड जारी करती है. कंपनियां भी बॉन्ड जारी करती है. जैसे अगर किसी कंपनी को फैक्टरी लगानी है या कोई पुराना कर्ज चुकाना है तो वो भी बाजार से पैसा उधार लेने के लिए बॉन्ड जारी करती है. फर्क बस इतना है कि सरकार का वादा ज्यादा पक्का माना जाता है, किसी कंपनी का वादा उसकी अपनी साख और वित्तीय हालत पर निर्भर करता है. सरकारों का भी ऐसा ही है. जिस सरकार की वित्तीय हालत जितनी ज्‍यादा अच्छी होती है उसको उतने कम ब्याज पर उधार मिल जाता है. जिसने बॉन्ड खरीदा, उसे तय ब्याज मिलता रहता है और समय पूरा होने पर मूल रकम भी वापस मिल जाती है.

बॉन्‍ड शेयर से कैसे अलग?

शेयरों में ऐसा कोई वादा नहीं होता. जिस कंपनी का शेयर होता है वो कंपनी जैसा मुनाफा कमाए वैसी शेयर की कीमत ऊपर-नीचे होती है. बॉन्ड में तो फ़िक्स्ड होता है कि टाइम खत्म होने पर इतना पैसा देने का वादा है. वादा छपा होता है, रकम लिखी होती है, तारीख तय होती है. गारंटी का तो ऐसा है कि अगर बॉन्ड जारी करने वाला ही डूब जाए तो पैसा भी डूब जाता है. इसलिए अमेरिका जैसी सरकार के बॉन्ड की मांग किसी ऐसी सरकार के बॉन्ड से जाहिर सी बात है ज्यादा रहती है जिसकी अर्थव्य्वस्था के भविष्य का कुछ ठिकाना ही ना हो.

कोई क्यों आएगा भारत में निवेश करने जब अमेरिका की सरकार को ही उधार दे कर वहां 5% से ज़्यादा की कमाई हो रही होगी? वो भी डॉलर में? वो तो तभी यहां पैसा लगाएगा ना जब यहां कंपनियों की कमाई इतनी ज़्यादा होने की उम्मीद हो कि बाकी देशों से ज़्यादा मुनाफ़ा भी हो जाए और रुपये की क़ीमत गिरने से जो नुकसान हो उसकी भी भरपाई हो जाए. मगर जब तक अमेरिका की सरकार की गारंटी वाले कागज पर इतना मोटा और सुरक्षित रिटर्न मिल रहा है, भारत के शेयर बाजार को चढ़ने के लिए अर्थव्यवस्था को और ज्‍यादा मजबूत होना होगा.

यील्ड का मतलब क्या?

अब आ जाइए यील्ड पर. यील्ड का मतलब क्या? मान लीजिए आपने ऐसा बॉन्ड खरीदा जो साल में 5 रुपये ब्याज देता है. और बाजार में ब्याज दरें और बढ़ जाएं. और बाद में नए बॉन्ड जारी हों जिनपर 7 रुपये ब्याज मिलने लगे. तो आपका पुराना बॉन्ड तो कम कमाई करके देने लगता है. आप चाहोगे कि वो पैसा निकाल कर नए बॉन्ड में डाल दूं और ज्‍यादा ब्याज क्यों ना कमाऊं? तो आप उसको बेचने निकलते हो और अब लोग उसे सस्ते में ही खरीदेंगे. क्योंकि बेचने वाले ज्‍यादा आ जाते हैं बाजार में. कीमत गिरेगी. कीमत गिरेगी, भाव घटेगा, बॉन्ड सस्ता होगा. मतलब आपने अगर 100 रुपये का बॉन्ड लिया था, और 5 रुपये ब्याज मिलना था तो अभी बेचने पर उसके 98 ही मिलेंगे क्योंकि अब 5 रुपये ब्याज 98 पर ही मिलने लगेगा. ब्याज तो फ़िक्स है. लेकिन अब वो कम रकम पर ही मिलेगा. इसको कहते हैं कि यील्ड बढ़ गई. पहले 100 रुपये पर 5 रुपये मिल रहे थे अब 98 पर ही 5 रुपये मिल रहे हैं. यानी रिटर्न ज़्यादा हो गई. इसको कहते हैं यील्ड ज़्यादा हो गई.

असल कहानी तो डॉलर और रुपये की

इसलिए जब खबर आती है कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 5.3% पर पहुंच गई, तो उसका सीधा मतलब ये होता है कि अमेरिका की सरकार के वादे की वैल्यू कम हो रही है. नया बॉन्ड खरीदने वाले को पहले से मोटा ब्याज मिल रहा है. यानी अब अमेरिका की सरकार को बाजार से उधार चाहिए तो ज़्यादा पैसा देना पड़ रहा है. और जो अमेरिका की सरकार को पैसा उधार दे रहा है उसको 5.3% की कमाई हो रही है. तो ये वजह बताई जा रही है कि विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकाल कर अमेरिका की सरकार के बॉन्ड में लगाए जा रहे हैं. तो क्या भारत से उनको 5% कमाई की उम्मीद भी नहीं दिख रही? ये है असली कहानी. ये है असली समझने वाली बात. कि अमेरिका में 5% पर पैसा उधार देने निकल पड़े हैं, यहां पर क्या 5% भी नहीं कमाएंगे? तो वो क्या है कि यहां कमा भी लेंगे तो वो कमाई तो होगी रुपयों में. वहां 5% भी कमाई होगी तो वो कमाई होगी डॉलरों में. पहले अमेरिका के बॉन्ड पर कमाई चल रही थी 1-2% की. तो भारत में शेयर बाज़ार में ज़्यादा कमाई दिख रही थी तो वो यहां आ रहे थे. अब वहां कमाई दिख रही है 5% से भी ज़्यादा की. 5.3% भी हो गया आंकड़ा. और वो भी डॉलरों में. तो वो ज़्यादा फ़ायदेमंद दिख रहा है.

धंधे वालों को तो बस मुनाफा चाहिए

धंधे वाला तो मुनाफ़ा देखता है. वहां ज्‍यादा दिख रहा है तो वहां भाग रहे हैं. एक तो वो सरकार का बॉन्ड है. अमेरिका की सरकार का बॉन्ड है. यहां शेयर बाजार में कभी ऊपर कभी नीचे का हिसाब चलता है. वहां सरकार का पक्का वादा है. और यहां रुपये की क़ीमत ही गिरती जाती है. सोचिए कई एक डॉलर लेकर आया. उसने यहां शेयर खरीदे. तो एक डॉलर के उसे मिले 90 रुपये. उसने 90 रुपये के शेयर खरीदे. और शेयर की कीमत चढ़ कर हो गई 95 रुपये. तो उसको 5 रुपये का फ़ायदा होना चाहिए. लेकिन वो जब बेचने जाए तो एक डॉलर की क़ीमत हो गई 95 रुपये. तो उसको 95 रुपये पर शेयर बेचने के बाद भी वापस मिलेगा एक ही डॉलर. एक ही डॉलर लेकर आया था, मुनाफा होने के बाद भी एक ही डॉलर ले कर जाएगा. तो काहे का मुनाफ़ा हुआ? खाया पिया कुछ नहीं गिलास तोड़ा बारा आना? कोई क्यों आएगा भारत में निवेश करने जब अमेरिका की सरकार को ही उधार दे कर वहां 5% से ज़्यादा की कमाई हो रही होगी? वो भी डॉलर में? वो तो तभी यहां पैसा लगाएगा ना जब यहां कंपनियों की कमाई इतनी ज़्यादा होने की उम्मीद हो कि बाकी देशों से ज़्यादा मुनाफ़ा भी हो जाए और रुपये की क़ीमत गिरने से जो नुकसान हो उसकी भी भरपाई हो जाए. मगर जब तक अमेरिका की सरकार की गारंटी वाले कागज पर इतना मोटा और सुरक्षित रिटर्न मिल रहा है, भारत के शेयर बाजार को चढ़ने के लिए अर्थव्यवस्था को और ज्‍यादा मजबूत होना होगा. नहीं तो वहां का बॉन्ड ही असली बॉन्ड बना रहेगा. सौ बात की एक बात.



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