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हम जिस शख्सियत की बात कर रहे हैं, वे बॉलीवुड के दिग्गज निर्देशक हैं. उन्होंने फिल्मों के प्रति अपने जुनून के चलते एक शानदार कॉर्पोरेट करियर और मीडिया कंपनी के हेड का पद छोड़ दिया था. इंजीनियरिंग और एमबीए की डिग्री रखने वाले स्टार ने 1999 में जोखिम उठाया और 2003 में ‘झंकार बीट्स’ से डेब्यू किया. हालांकि शुरुआती सफर में कुछ फिल्में फ्लॉप रहीं, लेकिन 2012 में आई ‘कहानी’ ने उन्हें सस्पेंस-थ्रिलर का मास्टर बना दिया.
सुजॉय घोष का फिल्मी सफर.
नई दिल्ली: शानदार नौकरी छोड़कर फिल्मी दुनिया में अपनी अलग जगह बनाने वाले सुजॉय घोष की कहानी किसी फिल्मी पटकथा से कम नहीं है. उन्होंने बॉलीवुड को सस्पेंस और थ्रिलर का एक नया नजरिया दिया. सुजॉय का जन्म कोलकाता में हुआ था, लेकिन महज 13 साल की उम्र में वो लंदन चले गए. उन्होंने अपनी पढ़ाई-लिखाई वहीं से पूरी की और मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी से इंजीनियरिंग और एमबीए की डिग्री ली. इसके बाद, उन्होंने एक बड़ी मीडिया कंपनी में ऊंचे पद पर काम करना शुरू किया, जहां वो साउथ एशिया के हेड बन गए थे.
सुजॉय एक शानदार करियर का आनंद ले रहे थे, लेकिन उनका दिल हमेशा कहानियों में ही बसता था. उन्हें बचपन से ही फिल्मों का जबरदस्त शौक था. उन्होंने इसी जुनून की वजह से साल 1999 में एक बड़ा जोखिम उठाया और अपनी जमी-जमाई नौकरी को अलविदा कह दिया, ताकि वो फिल्मों में अपनी किस्मत आजमा सकें. सुजॉय ने साल 2003 में फिल्म ‘झंकार बीट्स’ से निर्देशन की शुरुआत की. यह फिल्म आरडी बर्मन साहब को एक ट्रिब्यूट थी. हालांकि, फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर कोई धमाका नहीं किया, लेकिन इसकी फ्रेश कहानी और शानदार संगीत ने सुजॉय को इंडस्ट्री में एक अलग पहचान दिला दी. लोगों को समझ आ गया कि यह डायरेक्टर कुछ हटकर सोचता है.
‘कहानी’ ने बदल दी तकदीर
शुरुआती सफलता के बाद सुजॉय को थोड़े मुश्किल दौर से भी गुजरना पड़ा. उनकी फिल्में ‘होम डिलीवरी’ और ‘अलादीन’ दर्शकों को खास पसंद नहीं आईं और फ्लॉप रहीं. लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी और अपनी राइटिंग पर काम करते रहे. वह एक ऐसी कहानी की तलाश में थे जो दर्शकों के रोंगटे खड़े कर दे. फिर साल 2012 में आई फिल्म ‘कहानी’, जिसने सुजॉय की तकदीर ही बदल दी. विद्या बालन की इस फिल्म ने सस्पेंस-थ्रिलर के सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए. कोलकाता के बैकड्रॉप पर बनी इस फिल्म ने न सिर्फ नेशनल अवॉर्ड जीता, बल्कि सुजॉय को रातों-रात सस्पेंस फिल्मों का बेताज बादशाह बना दिया.
फिल्ममेकिंग में मनवाया लोहा
सुजॉय घोष ने ‘बदला’, ‘टाइपराइटर’ और ‘जाने जां’ जैसी बेहतरीन फिल्में और सीरीज दीं. अमिताभ बच्चन के साथ उनकी फिल्म ‘बदला’ को भी लोगों ने खूब सराहा. दिलचस्प बात यह है कि सुजॉय सिर्फ डायरेक्टर ही नहीं हैं, बल्कि आईपीएल टीम कोलकाता नाइट राइडर्स का मशहूर एंथम ‘कोरबो लोरबो जीतबो रे’ भी उन्हीं की कलम से निकला है. आज सुजॉय घोष बॉलीवुड के उन चुनिंदा निर्देशकों में से हैं, जिनकी फिल्मों का दर्शक बेसब्री से इंतजार करते हैं. वह लगातार नए प्रयोग कर रहे हैं और एक्टिंग के साथ-साथ लेखन में भी अपना लोहा मनवा रहे हैं. उनकी कहानी सिखाती है कि अगर आप अपने सपनों के पीछे भागने की हिम्मत रखते हैं, तो मंजिल मिल ही जाती है.
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अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और पॉल…और पढ़ें















