Friday, July 31, 2026
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ब्यावर जिला जेल में शौचालयों की सफाई सुधारने के निर्देश: एडीजे सोनल पारिख ने किया निरीक्षण, मुलाकात हेल्प डेस्क का लिया फीडबैक – Beawar News




ब्यावर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव एवं अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश सोनल पारिख ने जिला कारागृह का शुक्रवार को निरीक्षण किया। इस दौरान मुलाकात हेल्प डेस्क का भौतिक सत्यापन किया गया।
एडीजे पारिख ने हेल्प डेस्क पर अभिलेखों की जांच की और प्राप्त आवेदनों, उनके निस्तारण, बंदियों व उनके परिजनों को दी जा रही सहायता और रिकॉर्ड के बारे में जानकारी ली। एडीजे ने मुलाकात के लिए आए बंदियों के परिजनों से भी बातचीत की। उन्होंने हेल्प डेस्क के माध्यम से दी जा रही सुविधाओं का फीडबैक लिया। एडीजे पारिख ने निर्देश दिए कि बंदियों एवं उनके परिजनों से प्राप्त आवेदनों का समयबद्ध निस्तारण सुनिश्चित किया जाए और निर्धारित प्रपत्रों में सभी आवश्यक सूचनाओं का नियमित संधारण किया जाए। खाना, पानी, मेडिकल सुविधाओं का लिया जायजा
निरीक्षण के दौरान, बंदियों को उपलब्ध कराए जा रहे भोजन, पेयजल और चिकित्सा सुविधाओं का भी जायजा लिया गया। ये सुविधाएं संतोषजनक पाई गईं।
हालांकि, शौचालयों की साफ-सफाई व्यवस्था में कुछ कमियां मिलीं। इस पर कारागृह प्रशासन को नियमित सफाई सुनिश्चित करने और स्वच्छता व्यवस्था में सुधार के निर्देश दिए गए।



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मैनपुरी में महिला का आरोप-घर के बाहर की फायरिंग: CCTV में कैद; FIR न होने पर एसपी से लगाई न्याय की गुहार – Mainpuri News




मैनपुरी के शहर कोतवाली क्षेत्र के नगला कैथ गांव में एक महिला ने घर के बाहर फायरिंग और जान से मारने की धमकी देने का आरोप लगाते हुए पुलिस अधीक्षक से शिकायत की है। पीड़िता का दावा है कि पूरी घटना घर में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद है। आरोप है कि स्थानीय पुलिस को तहरीर देने के बावजूद मुकदमा दर्ज नहीं किया गया, जिसके बाद उसने एसपी से कार्रवाई और परिवार की सुरक्षा की मांग की है। रात 11 बजे घर पहुंचकर किया हंगामा नगला कैथ गांव निवासी सोनम पत्नी धीरज ने पुलिस अधीक्षक को दिए शिकायती पत्र में बताया कि 29 जुलाई की रात करीब 11 बजे वह अपने परिवार के साथ घर में सो रही थीं। इसी दौरान गांव के ही हरी सिंह और सूरज, जो कथित रूप से मुंह ढके हुए थे, उनके घर पहुंचे। पीड़िता का आरोप है कि दोनों ने पहले घर के दरवाजे पर लात मारकर परिवार को डराने का प्रयास किया। इसके बाद गाली-गलौज करते हुए तमंचे से फायरिंग की और जान से मारने की धमकी देकर फरार हो गए। CCTV में कैद होने का दावा महिला का कहना है कि पूरी घटना उसके मकान में लगे सीसीटीवी कैमरे में रिकॉर्ड हो गई है। फायरिंग के तुरंत बाद उसने डायल-112 पर सूचना दी। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और सीसीटीवी फुटेज भी देखी। इसके बाद पुलिसकर्मियों ने उसे थाना कोतवाली जाकर तहरीर देने की सलाह दी। जमीनी विवाद से जुड़ा बताया मामला पीड़िता के अनुसार यह पूरा विवाद पुरानी जमीनी रंजिश से जुड़ा है। उसने आरोप लगाया कि करीब दो महीने पहले भी इन्हीं लोगों ने उसके परिवार के साथ मारपीट की थी। उस समय भी पुलिस से शिकायत की गई थी, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। अब दोबारा हुई घटना के बाद भी थाना कोतवाली में शिकायत देने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं की गई। एसपी से लगाई न्याय की गुहार महिला ने पुलिस अधीक्षक से मामले की निष्पक्ष जांच कर आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करने, कड़ी कानूनी कार्रवाई करने और परिवार की सुरक्षा सुनिश्चित करने की मांग की है। फिलहाल पुलिस अधीक्षक कार्यालय में दिए गए प्रार्थना पत्र के आधार पर मामले की जांच की जा रही है।



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पन्ना अस्पताल में एक महीने में 22 बच्चों की मौत: CMHO ने किया निरीक्षण; बोले-कम वजन और सेप्सिस से मौतें – Panna News


पन्ना जिला चिकित्सालय की नवजात शिशु गहन चिकित्सा इकाई (SNCU) में पिछले एक महीने के दौरान जन्म से एक वर्ष तक की आयु के 22 बच्चों की मौत का मामला सामने आया है। लगातार हो रही मौतों के बाद स्वास्थ्य व्यवस्थाओं पर सवाल उठने लगे हैं।

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मामले की गंभीरता को देखते हुए शुक्रवार को सीएमएचओ डॉ. राजेश प्रसाद तिवारी ने जिला अस्पताल पहुंचकर एसएनसीयू और पीडियाट्रिक वार्ड का निरीक्षण किया।

परिजनों ने लगाए लापरवाही के आरोप

निरीक्षण के दौरान डॉक्टरों और स्टाफ की उपलब्धता, उपचार व्यवस्था तथा जीवनरक्षक सुविधाओं की समीक्षा की गई। बच्चों की मौतों से नाराज परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही के आरोप लगाते हुए जिम्मेदारों पर कार्रवाई और बेहतर इलाज की मांग की है।

CMHO बोले- कम वजन और सेप्सिस से मौतें

सीएमएचओ डॉ. राजेश प्रसाद तिवारी ने बताया कि भर्ती बच्चों की मौत कम वजन, सेप्सिस और अन्य गंभीर स्वास्थ्य जटिलताओं के कारण हुई है। सभी मामलों की विस्तृत समीक्षा की जा रही है और शिशु मृत्यु दर कम करने के लिए आवश्यक सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। फिलहाल मामले की जांच जारी है।

इन घटनाओं ने जिला अस्पताल की कार्यप्रणाली पर कई सवाल खड़े कर दिए हैं। यह जांच का विषय है कि क्या ये मौतें केवल स्वास्थ्य जटिलताओं का परिणाम थीं या इलाज में कोई बड़ी चूक हुई है। प्रशासन की विस्तृत जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो पाएगी।



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अररिया में महिला की करंट लगने से मौत: पशु को कर रही थी घर के अंदर, 220 वोल्ट की तार की चपेट में आई – Araria News




अररिया में गुरुवार रात करंट लगने से एक महिला की मौत हो गई। घटना सदर प्रखंड अंतर्गत जमुवा वार्ड संख्या-08 की है। मृतका की पहचान गम खातून (30) के रूप में हुई है। वे अपने घर के दरवाजे पर पशु को अंदर कर रही थीं, तभी यह हादसा हुआ। परिजनों ने उन्हें तुरंत सदर अस्पताल अररिया पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। खुले बिजली के तार की चपेट में आने से हादसा परिजनों के अनुसार, घटना गुरुवार रात करीब 8 बजे हुई। बेगम खातून पशु को घर के अंदर कर रही थीं, उसी दौरान वह 220 वोल्ट के खुले बिजली के तार की चपेट में आ गईं। करंट लगते ही वह जमीन पर गिर पड़ीं। आवाज सुनकर मौके पर पहुंचे परिजनों और स्थानीय लोगों ने उन्हें तत्काल अस्पताल पहुंचाया। सदर अस्पताल में ड्यूटी पर तैनात चिकित्सा पदाधिकारी डॉ. पंकज कुमार सिंह ने बताया कि अस्पताल पहुंचने पर महिला की न तो पल्स मिल रही थी और न ही हार्ट बीट। ईसीजी जांच में भी कोई गतिविधि नहीं पाई गई, जिसके बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया गया। इस घटना ने इलाके में बिजली सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों का मानना है कि खुले तारों की लापरवाही के कारण यह हादसा हुआ।



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गजब है मनरसा का स्वाद, भोजपुर के दुकानदार ने बताया कैसे होती है तैयार


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दुकानदार राकेश बताते हैं कि मनरसा बनाने में जल्दबाजी नहीं की जा सकती. सही अनुपात, धीमी आंच और वर्षों का अनुभव ही इसकी असली पहचान है. यही वजह है कि उनकी दुकान पर हर दिन बड़ी संख्या में ग्राहक पहुंचते हैं और कई लोग अपने रिश्तेदारों के लिए भी इसे पैक कराकर ले जाते हैं.

गौरव सिंह/भोजपुर: अगर आपने भोजपुर की मशहूर मनरसा मिठाई का स्वाद नहीं चखा है, तो समझिए आपने यहां की पारंपरिक मिठास का एक खास हिस्सा अभी तक आपने नहीं जाना. बाहर से हल्की कुरकुरी और अंदर से नरम और खोए की खुशबू से भरपूर मनरसा आज भी लोगों की पहली पसंद बनी हुई है. खास बात यह है कि यह मिठाई आधुनिक मशीनों से नहीं, बल्कि पारंपरिक तरीके से हाथों से तैयार की जाती है. आरा शहर में बड़ी मस्जिद के सामने हर शाम लगने वाली विनोद मनरसा की दुकान पूरे भोजपुर में अपनी खास पहचान रखती है.

विनोद की दुकान से रोजाना करीब 50 किलो मनरसा की बिक्री होती है. इसकी कीमत 320 रुपये प्रति किलो है. त्योहारों, शादी-विवाह और सावन जैसे धार्मिक अवसरों पर इसकी मांग और भी बढ़ जाती है. दूर-दूर से लोग सिर्फ इस मिठाई का स्वाद लेने यहां पहुंचते हैं.

बात करते हैं कि आखिर मनरसा बनता कैसे है. इसकी शुरुआत अच्छी गुणवत्ता वाले चावल से होती है. सबसे पहले चावल को अच्छी तरह साफ कर कई घंटों तक पानी में भिगोया जाता है. इसके बाद चावल को निकालकर सुखाया जाता है और फिर बारीक पीसकर उसका आटा तैयार किया जाता है. यही चावल का आटा मनरसा की मुख्य पहचान होता है.

दूसरी ओर ताजा खोआ (मावा) तैयार किया जाता है. इसमें स्वाद के अनुसार चीनी, खुशबू के लिए छोटी इलायची का पाउडर और जरूरत के अनुसार थोड़ा घी मिलाया जाता है. कई कारीगर स्वाद को और बेहतर बनाने के लिए इसमें हल्का-सा सूखा मेवा भी मिलाते हैं, हालांकि पारंपरिक मनरसा का असली स्वाद चावल और खोए के संतुलन से ही आता है. इसके बाद चावल के आटे और खोए के मिश्रण को अच्छी तरह गूंथकर छोटे-छोटे गोले या चपटी टिक्की का आकार दिया जाता है. फिर इन्हें धीमी आंच पर शुद्ध घी या रिफाइंड तेल में सुनहरा होने तक तला जाता है. तैयार होने के बाद इसकी खुशबू और स्वाद लोगों को अपनी ओर खींच लेता है.

दुकानदार राकेश बताते हैं कि मनरसा बनाने में जल्दबाजी नहीं की जा सकती. सही अनुपात, धीमी आंच और वर्षों का अनुभव ही इसकी असली पहचान है. यही वजह है कि उनकी दुकान पर हर दिन बड़ी संख्या में ग्राहक पहुंचते हैं और कई लोग अपने रिश्तेदारों के लिए भी इसे पैक कराकर ले जाते हैं. बाजार में नई-नई मिठाइयों की भरमार के बावजूद मनरसा आज भी भोजपुर की पारंपरिक पहचान को जीवित रखे हुए है.

चावल, खोया और देसी कारीगरी से तैयार होने वाली यह मिठाई सिर्फ स्वाद ही नहीं, बल्कि भोजपुर की संस्कृति और विरासत की भी मिठास अपने साथ समेटे हुए है. जो भी एक बार इसका स्वाद चखता है, वह दोबारा इसे खाने जरूर लौटता है.

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Rajneesh Singh

जी न्यूज, इंडिया डॉट कॉम, लोकमत, इंडिया अहेड, न्यूज बाइट्स के बाद अब न्यूज 18 के हाइपर लोकल सेगमेंट लोकल 18 के लिए काम कर रहा हूं. विभिन्न संस्थानों में सामान्य खबरों के अलावा टेक, ऑटो, हेल्थ और लाइफ स्टाइल बीट…

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‘मेरे पिता घर आए तो वर्दी खून से लाल थी’: जंतर-मंतर पर घायल पुलिसकर्मियों के परिजन बोले- प्रोटेस्ट में स्टूडेंट नहीं, गुंडे थे


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नई दिल्ली2 मिनट पहले

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जंतर-मंतर और संसद मार्च में घायल दिल्ली पुलिस के परिजन ने शुक्रवार को दिल्ली में प्रेस कॉन्फ्रेंस की।

कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में घायल दिल्ली पुलिस और सुरक्षा बलों के परिजन ने शुक्रवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस की। उन्होंने कहा, ’20 तारीख के बाद यही नेरेटिव चलाया जा रहा है कि छात्रों को पुलिस ने पीटा, लेकिन प्रोटेस्ट का दूसरा हिस्सा कुछ ओर ही है।’

एक पुलिस जवान की बेटी गुंजन ने कहा, ‘20 जुलाई को मेरे पिता के साथी उन्हें रात 10 बजे घर लेकर आए। उनकी वर्दी खून से लथपथ थी, फिर भी सोशल मीडिया पर उन्हें ही क्रिमिनल बताया गया।’

दूसरी तरफ, एक ASI की पत्नी सीमा ने कहा, ‘भीड़ में शरारती तत्वों ने पत्थर-हथियारों से पुलिस पर हमला किया। घायल ASI के बेटे लक्ष्य सिंह बिष्ट ने कहा, ‘मेरे पिता के सिर में गंभीर चोटें आईं।’

कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन और संसद मार्च के दौरान 148 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हो गए थे। इनमें कई को गंभीर चोटें आईं थीं।

संसद मार्च हिंसा में पुलिसकर्मियों पर हमले की तस्वीरें…

जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों के घायल होने की तस्वीरें आईं थीं।

जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान कुछ पुलिसकर्मियों के घायल होने की तस्वीरें आईं थीं।

इस तस्वीर में देखा जा सकता है कि कुछ प्रदर्शनकारी सुरक्षाकर्मियों पर हमला कर रहे थे।

इस तस्वीर में देखा जा सकता है कि कुछ प्रदर्शनकारी सुरक्षाकर्मियों पर हमला कर रहे थे।

20 जुलाई को संसद मार्च में छात्रों ने पुलिस पर पथराव किया था।

20 जुलाई को संसद मार्च में छात्रों ने पुलिस पर पथराव किया था।

सब इंस्पेक्टर की बेटी गुंजन बोलीं- मेरे पिता को हिंसक भीड़ ने पीटा

मेरे पिता जंतर-मंतर पर फ्रंटलाइन में तैनात थे। वे अक्सर कहते थे कि यह अब सिर्फ छात्रों का प्रदर्शन नहीं रहा, इसमें असामाजिक तत्व भी शामिल हो गए हैं। हिंसक भीड़ ने उन्हें घसीटा और जंतर-मंतर मंच के पास पीट-पीटकर मारने की कोशिश की।

वे करीब चार घंटे तक RML अस्पताल में बेहोश रहे। इसके बाद भी वे पुलिस को कटघरे में खड़ा करने के लिए सुप्रीम कोर्ट गए, इसलिए हमें भी अपना पक्ष रखने कोर्ट जाना पड़ा।

घायल ASI की पत्नी सीमा- पुलिसकर्मियों के अधिकारों पर भी बात हो

20 जुलाई की शाम पति को फोन किया, तो पता चला कि वे अस्पताल में इलाज करा रहे हैं। भीड़ में मौजूद शरारती तत्वों ने पत्थरों और हथियारों से पुलिसकर्मियों पर हमला किया था।

घायल ASI के बेटे लक्ष्य सिंह बिष्ट- पिता का सिर मुंडा देख डर गया था

मेरे पिता ASI हैं। उन्हें बहादुरी के लिए 4 सम्मान मिल चुके हैं। मेरे दादाजी भी BSF में थे। 1971 की जंग लड़ चुके हैं। जंतर-मंतर प्रदर्शन में पिता फ्रंटलाइन पर तैनात थे। उनके साथी से पता चला कि उनके सिर में गंभीर चोट लगी है।

जब उनकी तस्वीर देखी तो सिर मुंडा हुआ था और चार टांके लगे थे। मैं डर गया था। पिता ने बताया कि प्रदर्शन में सिर्फ छात्र नहीं थे, बल्कि हिंसक और उपद्रवी लोग भी शामिल थे। वरिष्ठ अधिकारियों को सुरक्षित निकालते समय उनके सिर पर पत्थर लगा, जिससे वे गंभीर रूप से घायल हो गए।



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मलेशिया में पंजाबी लड़की पाकिस्तानी युवक साथ पकड़ी, थप्पड़ जड़े-VIDEO: मोगा के युवकों ने घेरा तो रोने लगी, बोली-परिवार सब जानता – Moga News




मलेशिया के एक हाईवे पर पंजाबी युवती को बीच सड़क थप्पड़ मारे गए। दावा है कि मोगा की रहने वाली युवती को कुछ पंजाबी युवकों ने पाकिस्तानी युवक के साथ पकड़ा। इसके बाद बीच सड़क पर युवती से बहस हुई, उसे थप्पड़ मारे गए और पाकिस्तानी युवक के साथ भी धक्का-मुक्की की गई। पूरी घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर अपलोड कर दिया गया, जो अब तेजी से वायरल हो रहा है। 30 जुलाई को शेयर किए वीडियो में युवकों ने खुद को मोगा का रहने वाला बताते हुए दावा किया कि युवती पाकिस्तान के युवक के साथ मलेशिया में रह रही है। उन्होंने इसे पंजाब की बदनामी बताते हुए युवती को डिपोर्ट कराने की मांग की। पंजाब की लड़कियां जब ऐसा करती हैं तो हमारी बेइज्जती होती है। वहीं, वीडियो में यह भी दावा किया गया कि कुछ निहंग जत्थेबंदियां भी युवती को भारत वापस भेजने की मांग कर रही हैं। हालांकि, इन दावों और वीडियो की दैनिक भास्कर पुष्टि नहीं करता। युवती से बहस के PHOTOS… पढ़िए वीडियो में क्या दिख रहा… युवती बोली-परिवार को जानकारी, फोन नहीं लग पाया वीडियो में पाकिस्तानी युवक दावा करता है कि युवती के परिवार को उनके साथ रहने की जानकारी है और वह रोजाना उनसे बात करता है। इस पर मौजूद पंजाबी युवक उसे मौके पर ही युवती के माता-पिता से फोन मिलाने के लिए कहते हैं, लेकिन कॉल नहीं लग पाती। इसके बाद दोनों पक्षों के बीच बहस तेज हो जाती है। डिपोर्ट कराने की मांग, निहंग जत्थेबंदियों का भी सपोर्ट बहस के दौरान कुछ युवक किसी ‘रूबी मैम’ को फोन कर युवती को डिपोर्ट कराने की मांग करते हैं। वीडियो में वे यह भी दावा करते हैं कि कई निहंग जत्थेबंदियां भी युवती को भारत वापस भेजने की मांग कर रही हैं। इसी दौरान कुछ युवक पाकिस्तानियों के साथ युवती के रहने पर आपत्ति जताते हुए अपनी नाराजगी भी व्यक्त करते हैं। बहस के बाद धक्का-मुक्की वीडियो में आगे बहस बढ़ने पर पंजाबी युवक युवती से पाकिस्तानी युवक का साथ छोड़ने के लिए कहते हैं। इसी दौरान पाकिस्तानी युवक के साथ धक्का-मुक्की होती है। युवती बीच में आकर उसे बचाने की कोशिश करती दिखाई देती है। पैसों के विवाद का भी हुआ जिक्र बातचीत के दौरान कुछ युवक पाकिस्तानी युवक से कहते हैं कि उसका ‘हैप्पी’ नाम के व्यक्ति के साथ पैसों का विवाद है और उसे पहले वही मामला सुलझाना चाहिए। इस दौरान ‘रूबीना’ नाम की एक युवती का भी जिक्र होता है, जिसे वीडियो कॉल कर पूरी घटना बताने का दावा किया जाता है। युवती परिवार से बात नहीं करवा सकी वीडियो के अंत में युवती से उसके घर का पता और परिवार से बात कराने के लिए कहा जाता है। युवती कहती है कि उसके परिजनों को सब पता है, लेकिन वह मौके पर अपने माता-पिता से फोन पर बात नहीं करवा पाती। ———————- यह भी पढ़ें- कनाडा में 500 पंजाबी स्टूडेंट्स पर डिपोर्टेशन का खतरा:आंधी-बारिश में सड़कों पर डटे; लड़कियां डिप्रेशन में, बोलीं- पढ़ाई में ₹20 लाख खर्च
कनाडा में पोस्ट-ग्रेजुएशन वर्क परमिट (PGWP) के आवेदन खारिज होने के बाद करीब 500 पंजाबी छात्रों पर डिपोर्टेशन का खतरा मंडरा रहा है। इसके विरोध में करीब 1,000 भारतीय छात्र पिछले तीन हफ्तों से प्रदर्शन कर रहे हैं। बारिश, तेज धूप और खराब मौसम के बावजूद छात्र अल्बर्टा के कैलगरी में सड़कों पर डटे हुए हैं। पूरी खबर पढ़ें…



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ITR Filing Live Updates: आज आईटीआर भरने का आखिरी दिन, जान लें सभी अपडेट्स


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आज ITR फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई है. अगर आपने अभी तक रिटर्न फाइल नहीं किया है, तो अब देरी करना भारी पड़ सकता है. हम आपको ITR फाइलिंग से जुड़े हर जरूरी अपडेट, नए नियम, टैक्स विभाग के अहम ऐलान, एक्सपर्ट ट…और पढ़ें

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आईटीआर भरने से पहले सभी जरूरी जानकारी के बारे में चेक कर लें.

आज टैक्सपेयर्स के लिए बेहद अहम दिन है, क्योंकि इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) फाइल करने की आखिरी तारीख आज यानी 31 जुलाई है. आईटीआर फाइल करते समय कई जरूरी बातों का ध्यान रखना होता है. तय डेडलाइन के अंदर रिटर्न दाखिल करने से न सिर्फ लेट फीस और अन्य परेशानियों से बचा जा सकता है, बल्कि टैक्स रिफंड, लोन आवेदन और फाइनेंशियल रिकॉर्ड से जुड़े कई काम भी आसानी से पूरे होते हैं. अगर आपने अभी तक अपना आईटीआर फाइल नहीं किया है, तो अब ज्यादा देर करने से परेशानी हो सकती है.



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बिजनेसमैन पति पर केस, खाप पंचायत ने ‘जात बाहर’ किया: 4 लाख का जुर्माना भी लगाया; दूसरी शादी के लिए तलाक का दबाव डाल रहा था – Rajasthan News




बिजनेसमैन दूसरी शादी करना चाहता था। पत्नी पर तलाक के लिए दबाव डाला। मारपीट कर घर से निकाल दिया। पत्नी ने पति के खिलाफ केस कर दिया। समाज के पंचों को ये बात इतनी नागवार गुजरी कि महिला और उसके परिवार को समाज से बाहर कर दिया। पंचायात ने 4 लाख रुपए जुर्माना भी लगा दिया। शादी-समारोह और यहां तक कि किसी की मौत पर भी आने-जाने पर पाबंदी लगा दी। अब कोर्ट के आदेश पर पुलिस ने आरोपी पति सहित 22 के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। मामला पाली जिले के चंडावल थाना क्षेत्र का है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… मूल रूप से देवली कलां और वर्तमान में सोजत रोड निवासी विवाहिता ने साल 2022 में अपने पति राजेन्द्र एवं ससुराल पक्ष के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज कराया था। केस में आरोप था कि उसके पति राजेंद्र का चेन्नई में हार्डवेयर का बिजनेस है। वह दूसरी शादी करना चाहता है। उस पर तलाक के लिए दबाव बना रहा है। ऐसा नहीं करने पर पति व ससुराल पक्ष के लोगों ने मारपीट कर उसे घर से निकाल दिया। वह अपने बच्चों के साथ पीहर में रह रही है। केस में पुलिस ने आरोपी पति राजेंद्र के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का जुर्म प्रमाणित मान कोर्ट में आरोप पत्र प्रस्तुत किया। इसके बाद विवाहिता ने कोर्ट में घरेलू हिंसा और भरण-पोषण का मामला भी दायर किया। यह दोनों केस कोर्ट में विचाराधीन है। केस में आरोप लगाया गया है कि न्यायालय से नोटिस जारी होने के बाद पति पक्ष ने समाज के कुछ पंच-पटेलों के माध्यम से पत्नी और उसके परिवार पर कोर्ट केस वापस लेने का दबाव बनाने का प्रयास किया। समाज की पहली बैठक: पंचों ने कहा–मामला कोर्ट में है, हम कुछ नहीं कहेंगे एफआईआर में आरोप है कि 10 अप्रैल 2026 को समाज के हलकारे के माध्यम से विवाहिता के परिवार को सूचना दी गई कि 11 अप्रैल को देवली कलां स्थित समाज की हथाई पर पंचायत में उपस्थित होना होगा। साथ ही 50 हजार रुपए की सिक्योरिटी राशि साथ लानी होगी। यह भी कहा गया कि यदि परिवार पंचायत में उपस्थित नहीं हुआ तो समाज एकतरफा निर्णय कर देगा। उस बैठक में समाज के पंचों ने कहा- महिला ने पति एवं ससुराल पक्ष के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का मुकदमा दर्ज कराया गया है। घरेलू हिंसा एवं भरण-पोषण के मामले भी न्यायालय में विचाराधीन हैं। इसलिए हस्तक्षेप नहीं करना चाहिए। दूसरी बैठक : दो धड़ों मे बंटे पंच, आरोपी पक्ष ऊपरी पंचायत में ले गए एफआईआर में आरोप है कि 13 अप्रैल 2026 को देवली कलां में विवाहिता के ससुराल पक्ष के लोगों ने दूसरी बैठक बुलाई। आरोपी पंचों ने बैठक में आने के लिए पीड़ित परिवार को सिक्योरिटी राशि के 1 लाख रुपए लेकर आने को कहा। आरोप है कि देवली एवं छितरिया के कई पंचों ने फिर यह राय रखी कि न्यायालय में लंबित मामले पर पंचायत नहीं चलनी चाहिए, लेकिन चंडावल के कुछ पंचों ने स्वयं को समाज का सबसे बड़ा पंच बताते हुए कथित रूप से कहा कि समाज में उनका ही निर्णय चलेगा और मामला नौ खेड़ा पंचायत में ले जाया जाएगा। तीसरी बैठक : खाप पंचायत बुलाई, सिक्योरिटी राशि नहीं लाने पर समाज से बाहर निकाला एफआईआर में आरोप है कि 18 अप्रैल 2026 को चंडावल में हाईवे पर स्थित एक होटल के गार्डन में नौ खेड़ा की कथित पंचायत बुलाई गई। उस बैठक में पीड़ित पक्ष को 2.50 लाख रुपए की सिक्योरिटी राशि लेकर आने का कहा गया था। पीड़ित परिवार ने परिचितों से राशि एकत्र कर कथित रूप से पंचायत के कहे अनुसार जमा कराई। आरोप है कि जैसे ही विवाहिता के पिता जाजम पर पंचों को नमस्कार कर बैठने लगे। उसी समय समाज के कथित कुछ पंचों ने उन्हें जाजम से उठाकर जूतों के पास बैठाया। विवाहिता को अलग ले जाकर पूछताछ की। उसके चरित्र पर आरोप लगाए गए। मोबाइल और निजी जीवन के बारे में सवाल किए गए। न्यायालय में लंबित मुकदमे वापस लेने के लिए लगातार दबाव बनाया गया। आरोप है कि चंडावल में नौ खेड़ा की पंचायत में आरोपी पंचों ने पीड़ित पक्ष से कहा– हमारा फरमान ही कोर्ट है। हम समाज की कोर्ट है और हमारा फैसला ही मानना पड़ेगा। आरोपी पंचों ने विवाहिता को दहेज प्रताड़ना और घरेलू हिंसा का केस वापस लेने के आदेश दिया। पीड़ित पक्ष ने कहा- मामला कोर्ट ने विचाराधीन है। अब जो कोर्ट फैसला देगा, उसके वैसे ही करेंगे। खाप पंचायत के पंच और ज्यादा नाराज हो गए और कहा- हम कोर्ट–कचहरी को नहीं मानते। समाज से बाहर निकालने का आदेश आरोप है कि पंचों ने कहा–समाज में हमारा फैसला मानना पड़ेगा। पीड़ित ने केस वापस लेने से इंकार का तो कथित पंचों ने पीड़ित परिवार को समाज से बहिष्कृत कर 4 लाख रुपए का जुर्माना लगा दिा। आरोपी पंचों ने फरमान सुनाया कि जब तक वे लोग केस वापस नहीं लेंगे, तब तक परिवार के लोगों की रिश्तेदारों की शादी-ब्याह और मौत (शोक सभा के कार्यक्रम) में भी नो एंट्री होगी। आरोप है कि इस खाप पंचायत में झुझण्डा, दादिया, आलावास, सिसरवादा, पाचुण्डा, बागासनी, झाक, बासिया, देवली, छितरिया, चण्डावल सहित अन्य गांवों के पंच-पटेल मौजूद थे। पुलिस ने इनके खिलाफ दर्ज की एफआईआर पुलिस ने ​राजेन्द्र पुत्र घेवरराम, रतनाराम पुत्र जसाराम, ​चेतन पुत्र भबूतराम, ​बलदेवराम पुत्र रामाराम, ​चौनाराम, ​भंवरलाल पुत्र पोकरजी, ​पारस पुत्र हुकाराम, भंवर, जालाराम, ​नारायण, ​भैराराम, ​हापुराम, ​मोनाराम, ​नरपतराम पुत्र घेवरराम, ​मांगीलाल पुत्र हापुराम के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है। इसी तरह ​किशोर पुत्र उमाराम जांगु, ​गिरधारीलाल पुत्र लाबुजी, ​घेवरराम पुत्र पुखाराम, ​बलदेवराम पुत्र रामाराम, ​भंवरलाल पुत्र पोकरराम और ​हीरालाल पुत्र भंवरलाल के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज की गई। …. ये खबर भी पढ़िए… लिव-इन में रहने पर पंचों ने 21 लाख जुर्माना लगाया:दो परिवारों का हुक्का-पानी बंद किया, सामाजिक कार्यक्रम से निकाला; धार्मिक स्थल पर एंट्री बैन की जालोर में पंचायत का तुगलकी फरमान सामने आया है। लिव इन में रह रहे युवक और युवती पर 21 लाख का जुर्माना लगा दिया। दोनों के परिवार को समाज से बहिष्कृत कर हुक्का-पानी बंद कर दिया। पूरी खबर पढ़िए…



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गोरखपुर में सिपाही ने श्मशान घाट में हैवानियत की: फटा पेट, टूटी हडि्डयां, हाथ बांधकर नदी में फेंकने से बच्ची की मौत, भाई का जन्म हुआ – Gorakhpur News




गोरखपुर में बच्ची की हैवानियत के बाद सिपाही ने निर्ममता से हत्या की थी। मासूम बच्ची के पैर, गर्दन समेत शरीर के मुख्य अंगो की 5 हडि्डयां टूट गईं थी। उसके हाथ की उंगलियां भी कट गई थी। पेट भी फट गया था, अतड़ी बाहर आ गई थी। प्राइवेट पार्ट पर गहरे जख्म के निशान थे। हाथ पीठ के पीछे बांधकर नदी में फेंका गया था। जहां उसका सिर किसी पत्थर से टकराया था। 28 जुलाई की रात जिला अस्पताल से बच्ची गायब हुई थी। 36 घंटे बाद पुलिस ने जब चिऊटहां पुल के नीचे से शव बरामद किया तो कुछ इस तरह दृश्य देखने को मिला। देखने से लग रहा था कि बच्ची की दर्द से तड़पकर मौत हुई है। जिसे देखकर पुलिस टीम भी सन्न रह गई। पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टर भी इस हैवानियत से हैरान थे। वहीं पुलिस विभाग इस घटना से शर्मशार था। हर कोई यह कह रहा था कि इसके सीने में गोली मारकर सजा देनी चाहिए। वहीं रात करीब 9 बजे मृतिका की मां ने एक बेटे को जन्म दिया। 5 बेटियों के बाद इस घर में एक बेटे का जन्म हुआ था। लेकिन बेटी की मौत से पूरा परिवार टूट गया था। श्मशान घाट के कमरे में खून के निशान शहर से 15 किमी दूर चिऊटहां पुल के नीचे स्थित श्मशान घाट के कमरे में बच्ची के साथ हैवानियत की गई। वहां पर खून के निशान जगह-जगह मिले हैं। आरोपी पुलिस कर्मी की वर्दी पर भी खून के दाग लगे थे। जिसे वह बच्ची को मारने के बाद पुलिस लाइन आकर धूल लिया था। इसके बाद आराम से सोया था। बच्ची को वह 10 बजे के करीब जिला अस्पताल से बहला फुसलाकर घर छोड़ने के बहाने लेकर गया। श्मशान घाट पर ले जाकर 1 घंटे तक उसके साथ हैवानियत की। इसके बाद तड़पाकर मार डाला। जिला अस्पताल में चला 1 घंटे तक हंगामा गुरुवार को जिला अस्पताल में घटना से नाराज स्टाफ नर्सों ने करीब 1 घंटे तक हंगामा किया। दोपहर में मेडिकल कराने आए आरोपी सिपाही की जमकर पिटाई की। इसके बाद पुलिस से भी काफी देर तक नोकझोंक चली। किसी तरह पुलिस टीम ने समझाकर उन्हें शांत कराया। किसी तरफ भारी फोर्स बुलाकर सिपाही को पुलिस कस्टडी में बाहर निकाला गया। दो घंटे तक जिला अस्पताल का सारा काम ठप था। मरीज के साथ आए परिवार ने लोग भी इधर उधर दौड़ते नजर आए। इधर जली चिता, उधर जन्मा बेटा 10 साल की बच्ची की निर्ममता से हत्या की गई। इसे निर्भया कांड से भी बड़ी घटना बताई जा रही है। गुरुवार शाम 5 बजे पोस्टमार्टम के बाद बच्ची के शव को पुलिस घर न ले जाकर सीधे एंबुलेंस से राजघाट लेकर पहुंची। इस सूचना पर उसकी चार बहनें दौड़ती हुई, वहां पहुंची। एंबुलेंस का दरवाजा खोलकर बहन का शव देखकर छोटी बहन वहीं पर बेहोश हाे गई। पुलिस फोर्स की मौजूदगी में ई-रिक्शा चलाने वाले पिता ने बेटी का दाह संस्कार किया। अभी पिता परिवार और रिश्तेदारों के साथ घर पहुंचे ही थे। तभी उनकी पत्नी को लेबर पेन शुरू हो गया। आनन फानन में जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां पर रात 9 बजे मृतिका की मां ने बेटे को जन्म दिया। बहन बोली थी, इस बार रक्षा बंधन में मेरा भी भाई आएगा
7th में पढ़ने वाली बड़ी बहन ने बताया कि मेरी मम्मी 9 महीने की प्रेग्नेंट थी। इसीलिए उनकी तबियत ठीक नहीं रहती। हम पांच बहने हैं। मृतिका दूसरे नंबर पर थी। बड़ी बहन ने बताया कि सबका ख्याल मैं और मुझसे छोटी बहन ही रखते थे। 27 जुलाई की शाम करीब 7 बजे मेरी अचानक तबियत बिगड़ गई। सीने में दर्द होने लगा और बहुत तेज बुखार चढ़ गया। पापा तुरंत हॉस्पिटल लेकर पहुंचे। जहां डॉक्टरों ने मुझे एडमिट कर लिया। हॉस्पिटल में मेरे साथ दादी रुकी थी। 28 जुलाई को दूसरे नंबर की बहन ने अपने हाथ से खाना बनाई। वह 5th क्लास में पढ़ती थी। घर पर पापा के न होने और मम्मी के बीमार होने की वजह से तीसरे नंबर की बहन के साथ वह खुद खाना लेकर पहुंची। फिर तीसरी बहन को हॉस्पिटल में ही रुकने को बोल कर खुद खाना खिलाने के बाद जाने लगी। तभी यह घटना हुआ। मेरी छोटी बहन प्रेग्नेंट मां से कहती थी इस बार रक्षा बंधन में मेरा भी भाई आएगा। उसको राखी बांधकर अपना सपना पूरा करूंगी। लेकिन यह सब देखने से पहले ही वह इस दुनिया से चली गई। आज वह हाेती तो, सबसे अधिक खुश होती। वो हमेशा मां से भाई की डिमांड करती थी। वह हमेशा बोलती थी कि एक दिन पढ़कर अच्छी डॉक्टर बनकर दिखाऊंगी। फिर अपनी मां का इलाज खुद करूंगी। गोरखनाथ रूट पर लगी थी सिपाही डयूटी आरोपी सिपाही अभिषेक यादव वर्ष 2016 बैच का भर्ती जवान है, जिसकी पुलिस सेवा में ज्वाइनिंग वर्ष 2018 में हुई थी। वर्तमान में उसकी तैनाती डॉयल-112 में थी। वारदात वाले दिन उसकी ड्यूटी सुबह आठ बजे से रात आठ बजे तक गोरखनाथ से चिउटहां रूट पर लगी थी। ड्यूटी पूरी करने के बाद वह पुलिस लाइन स्थित अपने आवास नहीं गया, बल्कि सीधे जिला अस्पताल पहुंचा। आरोप है कि यहीं से उसने मासूम बच्ची को अगवा किया और बाद में जघन्य वारदात को अंजाम दिया। जांच में सामने आया है कि आरोपी सिपाही का विभागीय रिकॉर्ड पहले से ही सवालों के घेरे में रहा है। उस पर पहले भी कई आरोप लग चुके हैं और उसका सेवा रिकॉर्ड अच्छा नहीं माना जाता। इसके बावजूद वह पुलिस सेवा में बना रहा। आरोपी का अतीत भी विवादों से भरा रहा है। वह एक मामले में करीब नौ माह तक जेल में रहा। इसके बाद फरवरी में उसकी बहाली की प्रक्रिया शुरू हुई और सितंबर 2025 में उसे दोबारा सेवा में बहाल कर दिया गया। जिला अस्पताल से मंगलवार रात 10 बजे बच्ची के लापता होने के बाद परिजनों ने करीब दो घंटे तक अपने स्तर पर तलाश की। देर रात पुलिस को सूचना भी दे दी गई, लेकिन शुरुआती घंटों में जिस तेजी से कार्रवाई होनी चाहिए थी, वह नहीं दिखी। एफआईआर बुधवार दोपहर 2:02 बजे दर्ज हुई और इसके बाद पुलिस मशीनरी पूरी तरह सक्रिय हुई। मामले की गंभीरता को देखते हुए एफआईआर दर्ज होने के बाद बुधवार दोपहर से 10 थानों की पुलिस और टीमें सर्च अभियान में जुटीं। इसी दौरान आसपास के इलाकों के सीसीटीवी कैमरे खंगाले गए। कैमरों में जिला अस्पताल से बाइक सवार संदिग्ध सिपाही मासूम को ले जाता दिखाई दिया, जिसका रजिस्ट्रेशन नंबर मिलते ही पुलिस आरोपी तक पहुंच गई।
सीसीटीवी से बाइक का रजिस्ट्रेशन नंबर मिलने के बाद बुधवार दोपहर बाद आरोपी की पहचान हो गई। पुलिस ने उसी दौरान उसे हिरासत में भी ले लिया गया। हालांकि पहचान होने के बावजूद आरोपी करीब चार घंटे तक पुलिस को गुमराह करता रहा और जांच को भटकाने की कोशिश करता रहा। वारदात के बाद भी करता रहा ड्यूटी, किसी को नहीं हुई भनक सबसे चौंकाने वाला पहलू यह रहा कि घटना को अंजाम देने के बाद आरोपी सामान्य तरीके से अपनी ड्यूटी करने गोरखनाथ थानाक्षेत्र में पहुंच गया। उसके हावभाव से किसी को जरा भी संदेह नहीं हुआ। बाद में तकनीकी साक्ष्यों और बाइक नंबर के आधार पर पुलिस उसके करीब पहुंच सकी। पुलिस अगर पहले सक्रिय होती तो बच जाती जान
पूरे घटनाक्रम ने पुलिस के रिस्पॉन्स टाइम पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। मासूम के मामा का कहना है कि सूचना देने के बाद यदि पुलिस मंगलवार रात में ही सक्रिय होकर सर्च अभियान शुरू करती, इलाके की घेराबंदी करती और सीसीटीवी तुरंत खंगालती, तो आरोपी तक जल्दी पहुंचा जा सकता था। कोतवाली पुलिस की शुरुआती घंटों की सुस्ती ने उनकी मासूम भांजी की जिंदगी छीन ली। मायके में रहती है सिपाही की पत्नी सिपाही अभिषेक यादव की एक बेटी और बेटा है। जो मां के साथ ससुराल में रहते हैं। गाजिपुर में सिपाही का घर है, वहीं पर उसका ससुराल भी है। पत्नी को जब इस घटना की जानकारी मिली तो उसने सिर पकड़ लिया। पत्नी बोली उनकी आदतों की वजह से ससुराल छोड़कर बच्चों के साथ मायके में रहती हूं। भगवान से यही मनाती हूं कभी उनके साथ न रहना पड़े। बच्ची के साथ जो घटना हुई है, वह कभी माफ करने लायक नहीं है। उनकी भी बेटी है। कैसे चेहरा दिखाएंगे। अब जानिए पूरा घटनाक्रम डॉक्टर और नर्सों ने दोड़ाकर पीटा गोरखपुर में 35 साल के सिपाही अभिषेक यादव ने 10 साल की बच्ची से रेप करने के बाद हत्या की थी। गुरुवार शाम को आई बच्ची की पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में इस बात की पुष्टि हुई है। सिपाही ने जिला अस्पताल से ही बच्ची को किडनैप किया। फिर उसे बाइक से श्मशान घाट ले गया। वहां रेप करने के बाद बच्ची की गर्दन को पैर से दबाकर तोड़ दिया। इसके बाद शव नदी में फेंक दिया था। इससे पहले आरोपी सिपाही को जिला अस्पताल में डॉक्टरों और नर्सों ने दौड़ा-दौड़ाकर पीटा। दोपहर करीब ढाई बजे पुलिस सिपाही को मेडिकल कराने के लिए जिला अस्पताल ले गई। उसे देखते ही अस्पताल के कर्मचारी भड़क गए और हमला कर दिया। पुलिसवालों ने बड़ी मुश्किल से सिपाही को छुड़ाया। दरअसल, 28 जुलाई को बच्ची अपनी बीमार बहन को खाना देने अस्पताल आई थी। घर लौटते समय सिपाही ने बाइक से उसका पीछा किया। फिर उसे बाइक पर बैठाकर 15 किलोमीटर दूर श्मशान घाट ले गया। अपने साथ ले गया। इधर, बच्ची नहीं लौटी, तो घरवालों ने गुमशुदगी दर्ज कराई। जांच के लिए पुलिस ने 10 टीमें लगाईं, 200 CCTV फुटेज खंगाले। इसमें बाइक की नंबर प्लेट से आरोपी सिपाही की पहचान हुई। पुलिस ने सिपाही को पकड़कर सख्ती से पूछताछ की, तो उसने जुर्म कबूल कर लिया। गुरुवार सुबह साढ़े 8 बजे आरोपी सिपाही की निशानदेही पर पुलिस ने बच्ची का शव बरामद किया। एसएसपी डॉ. कौस्तुभ ने बताया- सिपाही अभिषेक यादव गोरखपुर में डायल-112 में तैनात था। जनवरी, 2025 में उसने बंगाल की एक महिला से छेड़छाड़ की थी। तब भी उसे सस्पेंड किया गया था। जेल भी भेजा गया था। सितंबर, 2025 में उसकी बहाली हुई थी। अभिषेक 2018 बैच का सिपाही था। उसकी 7 साल की एक बेटी है। सिपाही को बर्खास्त कर दिया गया है। उस पर पॉक्सो एक्ट में FIR दर्ज की गई है। रासुका (एनएसए) भी लगाया जाएगा। 3 तस्वीरें देखिए- पोस्टमॉर्टम के बाद पुलिस शव सीधे अंतिम संस्कार के लिए ले गई पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट में बच्ची के प्राइवेट पार्ट में चोट मिली। गर्दन की हड्‌डी भी टूटी थी। हत्या के 36 घंटे बाद पुलिस को बच्ची की लाश मिली। पोस्टमॉर्टम के बाद पुलिस शाम 5 बजे बच्ची का शव एंबुलेंस से सीधे राजघाट लेकर पहुंची। पिता ने बच्ची का अंतिम संस्कार किया। परिवार ने 50 लाख रुपए, नौकरी और आरोपी को फांसी देने की मांग की है। अस्पताल में भर्ती बहन को खाना देने गई थी आजमगढ़ जिले के कप्तानगंज थाना इलाके के रहने वाले एक युवक ने बुधवार को पुलिस से शिकायत की थी। बताया था कि पिछले 4 साल से पत्नी और 5 बेटियों के साथ गोरखपुर में किराए पर रहते हैं। ई-रिक्शा चलाकर घर चलाते हैं। पत्नी प्रेग्नेंट है। 27 जुलाई को 13 साल की बेटी की अचानक तबीयत बिगड़ गई। सीने में दर्द और बहुत तेज बुखार हो गया। मैं तुरंत उसे हॉस्पिटल लेकर पहुंचा। डॉक्टरों ने उसे एडमिट कर लिया। 28 जुलाई को मैं काम पर गया था। पत्नी की भी तबीयत ठीक नहीं थी। इसलिए रात 8:30 बजे मेरी 10 साल बेटी अपनी बीमार बड़ी बहन के लिए खाना लेकर अस्पताल गई थी। रात 10 बजे घर वह लौटने के लिए निकली। जब वह काफी देर तक घर नहीं आई, तो मैं हॉस्पिटल पहुंचा। इधर-उधर पूछताछ की। हर जगह ढूंढा, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। पिता बोले- बेटी ने बताया, सिपाही बच्ची के पीछे पड़ा था पिता ने बताया- अस्पताल में भर्ती बड़ी बेटी से पूछा तो उसने बताया कि जब हम दोनों बहनें बाहर बैठकर खाना खा रहे थे, तभी पुलिस वर्दी पहने एक व्यक्ति आया। उसने पूछा कि कहां रहती हो? हमने पता बताया, तो उसने कहा कि रात काफी हो गई है। अगर किसी को घर जाना हो, तो मैं छोड़ दूंगा। बड़ी बेटी ने उससे कहा कि छोटी बहन को घर जाना है। इसके बाद वह मेरी छोटी बेटी के पीछे पड़ गया। लेकिन, बेटी ने उसके साथ जाने से इनकार कर दिया। रात करीब 10 बजे जब छोटी बेटी अस्पताल से निकली, तो सिपाही भी उसके पीछे-पीछे निकल गया। CCTV में बच्ची को गाड़ी पर बैठाते दिखा था सिपाही पिता की शिकायत के बाद पुलिस एक्शन में आ गई। अस्पताल के CCTV खंगाले, तो लड़की की बात सच निकली। 39 सेकेंड की फुटेज में लड़की हॉस्पिटल से बाहर पैदल जाती दिखी। उसके पीछे वर्दी पहनकर सिपाही बाइक से आता दिखा। पास पहुंचकर रुक गया। कुछ देर बात की। फिर लड़की उसकी बाइक पर बैठ गई। सिपाही ने पुलिस को पूछताछ में बताया- 28 जुलाई को मैं अस्पताल में दवा लेने आया था। इसी दौरान बच्ची मिल गई। घर छोड़ने के बहाने उसे किडनैप कर लिया था। सिपाही की पत्नी और बेटी गाजीपुर में रहती है आरोपी सिपाही अभिषेक यादव मूल रूप से गाजीपुर के शादियाबाद थाना क्षेत्र के हंसराजपुर चौरा गांव का रहने वाला है। उसकी शादी दुल्लहपुर थाना क्षेत्र के मोलनापुर गांव में हुई थी। मेरिट के आधार पर 2016 में उसकी नियुक्ति हुई थी। 2018 से उसकी तैनाती गोरखपुर में थी। उसकी पत्नी बेटी के साथ गाजीपुर में ही रहती है। ————————-



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