Friday, June 5, 2026
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‘मुझे PM मोदी पसंद हैं, वह मेरे अच्छे दोस्त’: ट्रंप ने की तारीफ, ट्रेड डील पर भी अपडेट


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मुझे मोदी पसंद, वह मेरे अच्छे दोस्त…ट्रंप ने की तारीफ, ट्रेड डील पर भी अपडेट

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Donald Trump Praises PM Modi: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने वाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में पीएम मोदी की तारीफ की. उन्होंने कहा, ‘मुझे PM मोदी पसंद हैं, वह मेरे अच्छे दोस्त हैं. इतना ही नहीं, अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर भी अपडेट दिया. उन्होंने कहा कि जल्द ही यह डील होगी.

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मुझे पीएम मोदी पसंद हैं, वह मेरे अच्छे दोस्त हैं’: ट्रंप ने कहा भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौता होगा

Donald Trump Praises PM Modi: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर पीएम मोदी की तारीफ की है. डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ विवाद के बीच तारीफ कर कहा कि पीएम मोदी उनके अच्छे दोस्त हैं. उन्होंने भारत-अमेरिका ट्रेड डील पर भी नया अपडेट दिया. जी हां, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को भरोसा जताया कि वॉशिंगटन और नई दिल्ली जल्द ही व्यापार समझौते पर पहुंच जाएंगे. उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपना अच्छा दोस्त बताया और कहा कि उनके साथ उनके संबंध मजबूत हैं.

दरअसल, डोनाल्ड ट्रंप ने गुरुवार को वाइट हाउस में पत्रकारों से बाकचीत के दौरान कहा, ‘हम व्यापार समझौते तक पहुंच जाएंगे क्योंकि मुझे आपके प्रधानमंत्री बहुत पसंद हैं, वह मेरे अच्छे दोस्त हैं और हमारे बीच अच्छी बनती है. हमारे संबंध अच्छे हैं.’ हालांकि, डोनाल्ड ट्रंप ने टैरिफ को लेकर भारत के खिलाफ भी बोला. ट्रंप ने एक बार फिर भारत की टैरिफ नीति की आलोचना की और कहा कि नई दिल्ली ने वर्षों तक अमेरिकी सामानों पर भारी शुल्क लगाया, जबकि उसे अमेरिकी बाजार में बेहतर पहुंच मिली.

ट्रंप ने टैरिफ पर भारत को कोसा

डोनाल्ड ट्रंप ने कहा, ‘सालों तक भारत ने अमेरिका का फायदा उठाया. उन्होंने हम पर भारी टैरिफ लगाए और कुछ नहीं चुकाया.’ हालांकि, ट्रंप ने दावा किया कि हाल के वर्षों में व्यापार का समीकरण बदल गया है और अब अमेरिका को भारत के साथ आर्थिक संबंधों से ज्यादा फायदा हो रहा है. उन्होंने कहा, ‘अब स्थिति पूरी तरह उलट गई है और हम भारत के साथ बहुत पैसा कमा रहे हैं.’

ट्रंप ने हार्ले-डेविडसन का किया जिक्र

डोनाल्ड ट्रंप ने अमेरिकी मोटरसाइकिल निर्माता हार्ले-डेविडसन का उदाहरण दिया, जिसे वह अक्सर अनुचित व्यापार बाधाओं का उदाहरण बताते हैं. उन्होंने कहा, टवे हार्ले-डेविडसन को भारत में नहीं आने देते थे. वे 200% टैरिफ लगाते थे. दुर्भाग्य से यह सब मेरे कार्यकाल से पहले हुआ. वे यहां मोटरसाइकिल बेचना चाहते थे और हमने उन पर कोई शुल्क नहीं लगाया.’

ट्रेड डील पर आखिरी दौर की बातचीत

ट्रंप की यह टिप्पणी ऐसे समय आई है, जब वॉशिंगटन और नई दिल्ली के बीच द्विपक्षीय व्यापार समझौते को अंतिम रूप देने के लिए बातचीत चल रही है, जिसे दोनों पक्षों ने आर्थिक सहयोग और बाजार पहुंच को बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण बताया है. इस सप्ताह की शुरुआत में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल भारत आया था और गुरुवार को चार दिन की बातचीत के बाद एक अंतरिम द्विपक्षीय समझौते पर चर्चा पूरी की.

पुतिन ने भी की मोदी की तारीफ

भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने कहा कि व्यापार वार्ता सहयोग और व्यावहारिकता की भावना के साथ हुई, जिसमें दोनों पक्षों ने आपसी लाभकारी समझौते को अंतिम रूप देने की प्रतिबद्धता दोहराई, जिससे द्विपक्षीय व्यापार और आर्थिक संबंध मजबूत होंगे. इतना ही नहीं, डोनाल्ड ट्रंप ने ऐसे वक्त में पीएम मोदी की तारीफ की है, जब रूसी राष्ट्रपति पुतिन ने पीएम मोदी की तारीफ की. पुतिन ने भी गुरुवार को कहा कि पीएम मोदी पर अमेरिका का प्रेशर बेअसर होगा.

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Shankar Pandit

Shankar Pandit has more than 10 years of experience in journalism. Before News18 (Network18 Group), he had worked with Hindustan times (Live Hindustan), NDTV, India News Aand Scoop Whoop. Currently he handle ho…और पढ़ें



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गोविंदा की हीरोइन, 7 भाषाओं में की 100 से ज्यादा फिल्में, कहलाई साउथ की दिव्या भारती


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90 के दशक की मशहूर एक्ट्रेस ने महज 16 साल की उम्र में डेब्यू किया था. एक्ट्रेस की बड़ी-बड़ी आंखें, मासूमियत और तेजी से सफल होते करियर के कारण उन्हें ‘साउथ की दिव्या भारती’ का टैग दिया गया था. उन्होंने साउथ में पॉपुलैरिटी हासिल करने के बाद बॉलीवुड का रुख किया. सलमान खान के साथ ‘जुड़वां’ जैसी कई हिट फिल्मों में काम करते हुए लगभग 7 भाषाओं में 100 से ज्यादा फिल्में कीं. साल 2010 में कनाडाई बिजनेसमैन से शादी के बाद उन्होंने फिल्मों से दूरी बना ली.

नई दिल्ली: 90 का दशक भारतीय सिनेमा के लिए वाकई बड़ा जादुई था. इसी दौर में कई ऐसी खूबसूरत और टैलेंटेड अभिनेत्रियों ने बड़े पर्दे पर कदम रखा, जिनकी सादगी और मासूमियत ने दर्शकों को दीवाना बना दिया. इन्हीं में से एक नाम था एक्ट्रेस रंभा का, जिन्होंने जब फिल्मी दुनिया में एंट्री ली, तो उन्हें लेकर एक बेहद दिलचस्प चर्चा शुरू हो गई थी.
(फोटो साभार: Instagram@rambhaindran_)

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उस जमाने में हर कोई रंभा की तुलना बॉलीवुड की सुपरहिट एक्ट्रेस दिव्या भारती से करने लगा था. फिल्म क्रिटिक्स से लेकर आम दर्शकों तक, सब उन्हें ‘साउथ की दिव्या भारती’ कहकर बुलाते थे. ऐसा इसलिए था क्योंकि रंभा का चेहरा-मोहरा काफी हद तक दिव्या भारती से मिलता था और उनके करियर की रफ्तार भी वैसी ही तूफानी थी. (फोटो साभार: Instagram@rambhaindran_)

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रंभा का जन्म 5 जून 1976 को आंध्र प्रदेश के विजयवाड़ा में हुआ था और उनके माता-पिता ने उनका नाम विजयलक्ष्मी रखा था. बचपन से ही उन्हें एक्टिंग और डांस का बड़ा शौक था. किस्मत ने भी उनका साथ दिया और उन्होंने बहुत ही छोटी उम्र में ग्लैमर की दुनिया में कदम रख दिया, जहां उन्हें नया नाम ‘रंभा’ मिला.

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साल 1992 में आई मलयालम फिल्म ‘सरगम’ से रंभा ने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत की थी. उस समय उनकी उम्र सिर्फ 16 साल थी. उन्होंने अपनी पहली ही फिल्म से दर्शकों के दिलों में अपनी जगह बना ली. इसके बाद तो जैसे तेलुगु और तमिल फिल्मों की लाइन लग गई और वह साउथ की टॉप एक्ट्रेस बन गईं.
(फोटो साभार: Instagram@rambhaindran_)

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दिव्या भारती ने भी बहुत कम उम्र में फिल्म इंडस्ट्री में कदम रखा था और देखते ही देखते सुपरस्टार बन गई थीं. रंभा के साथ भी बिल्कुल ऐसा ही हुआ. उनकी बड़ी-बड़ी आंखें, प्यारी सी मुस्कान और कैमरे के सामने गजब का कॉन्फिडेंस देखकर हर कोई हैरान था. इसी पॉपुलैरिटी और तेज रफ्तार करियर की वजह से मीडिया ने उन्हें दिव्या भारती का अक्स बताना शुरू कर दिया. (फोटो साभार: Instagram@rambhaindran_)

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साउथ में तहलका मचाने के बाद रंभा ने बॉलीवुड का रुख किया और 1995 में फिल्म ‘जल्लाद’ से हिंदी सिनेमा में कदम रखा. इसके बाद तो उन्होंने सलमान खान के साथ ‘जुड़वां’ और ‘बंधन’ जैसी सुपरहिट फिल्मों में काम किया. गोविंदा, अक्षय कुमार और अजय देवगन जैसे बड़े स्टार्स के साथ उनकी कॉमिक टाइमिंग और ग्लैमरस अंदाज को लोगों ने खूब पसंद किया.
(फोटो साभार: Instagram@rambhaindran_)

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रंभा सिर्फ किसी एक भाषा या इंडस्ट्री तक सीमित नहीं रहीं. उन्होंने अपने करियर में तेलुगु, तमिल, मलयालम, कन्नड़, हिंदी, भोजपुरी और बंगाली सहित करीब 7 अलग-अलग भाषाओं में 100 से ज्यादा फिल्मों में काम किया. फिल्मों के साथ-साथ उन्होंने टीवी पर बतौर जज भी अपनी पहचान बनाई और खूब नाम कमाया.

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सफलता के शिखर पर पहुंचने के बाद रंभा ने साल 2010 में कनाडाई बिजनेसमैन इंद्र कुमार पद्मनाथन से शादी कर ली. उन्होंने शादी के बाद फिल्मों से दूरी बना ली और पूरी तरह अपने परिवार और बच्चों की परवरिश में बिजी हो गईं. हालांकि, आज भी वह सोशल मीडिया के जरिए अपने फैंस के साथ अक्सर जुड़ी रहती हैं. (फोटो साभार: Instagram@rambhaindran_)

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‘गहरा दुख पहुंचा’, संविधान विशेषज्ञ डॉ. सुभाष कश्यप के निधन पर PM मोदी भावुक


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‘गहरा दुख पहुंचा’, संविधान विशेषज्ञ डॉ. सुभाष कश्यप के निधन पर PM मोदी भावुक

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सुभाष कश्यप कश्यप 1984 से 1990 तक सातवीं, आठवीं और नौवीं लोकसभा के महासचिव रहे. वह एक प्रख्यात राजनीतिक वैज्ञानिक, भारतीय संविधान, संवैधानिक कानून, संसदीय मामलों के विशेषज्ञ थे. उनका जन्म 10 मई 1929 को हुआ था. पत्रकारिता से अपने पेशेवर जीवन की शुरुआत करने वाले कश्यप कुछ समय के लिए वकील और शिक्षक भी रहे. वह 1953 में लोकसभा सचिवालय के साथ जुड़े और 37 वर्षों तक सेवा दी.

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लोकसभा के पूर्व महासचिव सुभाष कश्यप का 97 वर्ष की उम्र में निधन हो गया. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली. भारत के प्रख्यात संविधान विशेषज्ञ, पूर्व लोकसभा महासचिव और संसदीय मामलों के जानकार डॉ. सुभाष सी. कश्यप का गुरुवार को दिल्ली स्थित उनके आवास पर लंबी बीमारी के बाद निधन हो गया. वह 97 वर्ष के थे. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर शोक व्यक्त करते हुए कहा कि डॉ. सुभाष सी. कश्यप के निधन से उन्हें गहरा दुख पहुंचा है.

उन्होंने कहा कि डॉ. कश्यप भारत के अग्रणी संवैधानिक विद्वानों में से एक थे, जिनके संसदीय और संवैधानिक विमर्श में योगदान ने समाज को समृद्ध बनाया. प्रधानमंत्री ने उनकी लेखनी और लोकतांत्रिक संस्थाओं को मजबूत बनाने के प्रति उनकी प्रतिबद्धता का भी जिक्र किया. उन्होंने शोक संतप्त परिवार और मित्रों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए ‘ॐ शांति’ कहा.

सुभाष कश्यप ने संसद की प्रणाली को बेहतर बनाया
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने भी उनके निधन पर गहरा दुख जताया. राष्ट्रपति ने कहा कि लोकसभा के पूर्व महासचिव एवं सुप्रसिद्ध संविधान विशेषज्ञ डॉ. सुभाष सी. कश्यप के निधन का समाचार बहुत दुखद है. उन्होंने हमारे संविधान के अध्ययन को तथा हमारी संसदीय प्रणाली के विकास को अपनी विद्वत्ता और अंतर्दृष्टि से समृद्ध किया है. मैं उनके परिवारजनों और प्रशंसकों के प्रति गहरी संवेदना व्यक्त करती हूं.

वहीं, उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्ण ने भी शोक संदेश जारी करते हुए कहा कि डॉ. सुभाष सी. कश्यप एक प्रतिष्ठित संवैधानिक विशेषज्ञ और विद्वान थे. उन्होंने अपनी पुस्तकों, शोध और सार्वजनिक सेवा के माध्यम से भारतीय संविधान और संसदीय लोकतंत्र की समझ को मजबूत करने में अमूल्य योगदान दिया. उनकी स्पष्ट सोच, बौद्धिक क्षमता और लोकतांत्रिक संस्थाओं के प्रति समर्पण ने कई पीढ़ियों को प्रेरित किया.

बिरला ने सुभाष कश्यप को संविधान का ‘विश्वकोश’ कहा
लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने भी सुभाष कश्यप के निधन पर दुख जताया और कहा कि वह भारतीय संविधान और संसदीय व्यवस्था के जीवंत विश्वकोश थे. बिरला ने ‘एक्स’ पर पोस्ट किया, “प्रख्यात संविधान विशेषज्ञ, पद्म भूषण से सम्मानित डॉ. सुभाष सी. कश्यप जी का निधन अत्यंत दुःखद है. डॉ. कश्यप भारतीय संविधान और संसदीय व्यवस्था के जीवंत विश्वकोश थे. लोकसभा के महासचिव के रूप में उनकी दीर्घ और विशिष्ट सेवाएं, संवैधानिक विषयों पर उनका गहन अध्ययन तथा उनकी सौ से अधिक पुस्तकों ने देश की कई पीढ़ियों को मार्गदर्शन प्रदान किया.”

डॉ. सुभाष सी. कश्यप 1983 से 1990 तक लोकसभा के महासचिव रहे. उन्होंने जवाहरलाल नेहरू की पहली लोकसभा से लेकर नौवीं लोकसभा तक करीब 37 वर्षों तक संसद की सेवा की. वह 100 से अधिक पुस्तकों के लेखक थे और भारतीय संविधान तथा संसदीय प्रक्रियाओं के सबसे विश्वसनीय विशेषज्ञों में गिने जाते थे.

साल 1929 में उत्तर प्रदेश के बिजनौर जिले के चांदपुर में स्वतंत्रता सेनानी परिवार में जन्मे डॉ. कश्यप ने इलाहाबाद, नई दिल्ली, वॉशिंगटन डीसी, लंदन और जिनेवा में उच्च शिक्षा और पेशेवर प्रशिक्षण प्राप्त किया. अपने करियर की शुरुआत उन्होंने पत्रकार और इलाहाबाद विश्वविद्यालय में सहायक प्राध्यापक के रूप में की थी. बाद में इलाहाबाद हाईकोर्ट में वकालत का प्रशिक्षण लेने के बाद उन्होंने संसद की सेवा में प्रवेश किया.

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Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें



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LDA सीमा में शामिल 477 गांव: जिला पंचायत से पास नक्शे होंगे वैध, नहीं देना होगा जुर्माना – Lucknow News




लखनऊ. प्रदेश सरकार ने विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में रहने वाले हजारों परिवारों को बड़ी राहत दी है। सरकार ने फैसला किया है कि विकास प्राधिकरण की सीमा में शामिल हो चुके ग्रामीण क्षेत्रों में 31 मार्च तक जिला पंचायत से स्वीकृत सभी भवन नक्शों को पूरी तरह वैध माना जाएगा। इससे लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की सीमा में शामिल 477 गांवों के हजारों मकान मालिकों को सीधा लाभ मिलेगा। अब तक इन गांवों में जिला पंचायत से नक्शा पास कराकर मकान बनाने वाले लोगों को यह डर बना रहता था कि एलडीए उनके निर्माण को अवैध घोषित कर सकता है। कई मामलों में लोगों को शमन शुल्क जमा करने या कार्रवाई का सामना करने की आशंका रहती थी। नए फैसले के बाद ऐसे सभी निर्माणों को कानूनी मान्यता मिल जाएगी। नहीं देना होगा शमन शुल्क सरकार के निर्णय के अनुसार, जिला पंचायत के नियमों के तहत बनाए गए मकानों और व्यावसायिक भवनों के मालिकों को अब एलडीए को भारी-भरकम शमन शुल्क या जुर्माना नहीं देना पड़ेगा। इससे वर्षों से चली आ रही अनिश्चितता खत्म होगी। बैंक लोन और रजिस्ट्री होगी आसान नक्शों को वैधता मिलने के बाद इन क्षेत्रों की संपत्तियों पर बैंक से ऋण लेना आसान हो जाएगा। साथ ही मकानों और भूखंडों की खरीद-बिक्री तथा रजिस्ट्री में आने वाली कानूनी बाधाएं भी दूर होंगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति बाजार को भी गति मिलने की उम्मीद है। क्यों लिया गया फैसला? दरअसल, किसी ग्रामीण क्षेत्र को विकास प्राधिकरण की सीमा में शामिल किए जाने के बाद वहां जिला पंचायत से पहले स्वीकृत नक्शों की वैधता को लेकर विवाद खड़ा हो जाता था। प्राधिकरण कई बार ऐसे निर्माणों को नियम विरुद्ध मानकर नोटिस जारी करता था। सरकार के इस फैसले से प्राधिकरण और ग्रामीणों के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद समाप्त होने की उम्मीद है। नए निर्माणों के लिए एलडीए से लेनी होगी मंजूरी सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह राहत केवल उन निर्माणों पर लागू होगी, जिनके नक्शे संबंधित क्षेत्र के विकास प्राधिकरण में शामिल होने से पहले जिला पंचायत से स्वीकृत हो चुके हैं। भविष्य में इन गांवों में होने वाले किसी भी नए निर्माण या भवन विस्तार के लिए एलडीए से नक्शा पास कराना अनिवार्य होगा। इस फैसले से हजारों परिवारों को राहत मिलने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों और संपत्ति कारोबार को भी नई गति मिलने की संभावना है।



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बुजुर्ग महिला से गहने लूटने वाला बदमाश मुरैना से गिरफ्तार: लूट से पहले मंदिर में दो घंटे रुका, पूजा-पाठ किया; जुए के कर्ज ने बनाया लुटेरा – Jaipur News




जयपुर साउथ पुलिस ने सोडाला थाना क्षेत्र में हुई सनसनीखेज चेन स्नैचिंग और लूट की वारदात के हुए मुख्य आरोपी सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। मंदिर से लौट रही बुजुर्ग महिला को सड़क पर पटककर 17 सेकंड में 4.23 लाख रुपये के सोने के आभूषण लूटने वाले आरोपी को मध्यप्रदेश के मुरैना जिले से गिरफ्तार किया गया, जबकि लूट का माल खरीदने वाले दो ज्वेलर्स को भी पुलिस ने दबोच लिया है। पुलिस को उम्मीद है कि आरोपी से पूछताछ में अन्य वारदातों के भी खुलासे होंगे। डीसीपी साउथ राजर्षि राज ने बताया कि पुलिस ने करीब 500 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने के बाद आरोपी की पहचान अनिकेश रावत (21) पुत्र हरिज्ञान रावत के रूप में हुई। अनिकेश मूल रूप से मुरैना (मध्यप्रदेश) का निवासी है और वर्तमान में गंगाविहार कॉलोनी, सुशीलपुरा, सोडाला में किराए पर रह रहा था। मुरैना में छत से कूदकर भागने की कोशिश डीसीपी साउथ ने बताया कि आरोपी की लोकेशन मिलने पर पुलिस टीम मध्यप्रदेश के सबलगढ़ पहुंची। देर रात गुप्त सूचना के आधार पर आरोपी के घर दबिश दी गई। पुलिस को देखकर अनिकेश छत से कूदकर भागने लगा, लेकिन गिरने से उसके हाथ-पैर और शरीर पर चोटें आ गईं। इसके बावजूद पुलिस टीम ने पीछा कर उसे पकड़ लिया। जिसके बाद जयपुर लाकर की गई पूछताछ में आरोपी ने वारदात कबूल कर ली। जुए के कर्ज ने बनाया लुटेरा पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह जयपुर में किराए का कमरा लेकर रह रहा था और इधर-उधर घूमकर रेकी करता था। इसी दौरान वह जुए-सट्टे में भी शामिल हो गया, जिससे उस पर कर्ज चढ़ गया। कर्ज चुकाने के लिए उसने अपनी मोटरसाइकिल तक गिरवी रख दी थी। 2 जून को भी वह सुबह घर से निकलकर सोडाला और सुशीलपुरा क्षेत्र में घूमता रहा। रास्ते में हनुमान मंदिर में करीब दो घंटे तक रुका और पूजा-पाठ किया। इसके बाद शिकार की तलाश में निकल पड़ा। सुनसान रास्ते पर अकेली बुजुर्ग महिला को देखकर उसने वारदात को अंजाम दे दिया। गोपाल ज्वेलर्स को बेचा था लूटा गया माल पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया कि उसने लूटे गए सोने के आभूषण मानसरोवर स्थित गोपाल ज्वेलर्स में बेच दिए थे। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो खरीदारों को गिरफ्तार किया। दोनों आरोपियों की पहचान महेश चंद्र गुप्ता (61 वर्ष) निवासी वीटी रोड और राजेंद्र अग्रवाल (63 वर्ष) निवासी हीरापथ, मानसरोवर के रूप में हुई है। पुलिस लूटे गए आभूषणों की बरामदगी के प्रयास कर रही है। पहले भी कर चुका है चेन स्नैचिंग जांच में सामने आया है कि आरोपी अनिकेश रावत 24 अप्रैल को महेश नगर क्षेत्र के रामनगर विस्तार में भी एक महिला से मकान पूछने के बहाने सोने की चेन लूट चुका है। उस मामले में भी पुलिस जांच कर रही है। मंदिर से लौट रही महिला को बनाया था निशाना आरोपी ने बुजुर्ग महिला से घर के बाहर ही लूट की वारदात को अंजाम दिया था। संतोष अग्रवाल दोपहर करीब 12:40 बजे मंदिर से घर लौट रही थीं। श्याम सदन अपार्टमेंट, गुलाबी नगर, सोडाला के बाहर एक युवक काफी देर से उनका पीछा कर रहा था। मौका मिलते ही उसने पीछे से झपट्टा मारकर बुजुर्ग महिला को सड़क पर गिरा दिया और मारपीट करते हुए उनके कानों के टॉप्स तथा सोने की चेन लूटकर फरार हो गया। वारदात के दौरान एक ऑटो भी उसके पीछे चलता दिखाई दिया।



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SEBI की चेतावनी के घेरे में ICICI, FPI फंड ट्रांसफर मामले में वार्निंग लेटर


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SEBI की चेतावनी मिलने के बाद ICICI Bank एक बार फिर चर्चा में आ गया है, लेकिन दिलचस्प बात यह है कि बैंक के वित्तीय नतीजे अब भी मजबूत बने हुए हैं. विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) से जुड़े एक लेनदेन में नियमों के उल्लंघन पर बाजार नियामक ने बैंक को वार्निंग लेटर जारी किया है. मामला वॉलंटरी रिटेंशन रूट (VRR) के तहत तय अवधि पूरी होने से पहले फंड वापस भेजने की अनुमति से जुड़ा है. हालांकि इस घटनाक्रम के बीच बैंक ने मुनाफे, कर्ज वितरण और एसेट क्वालिटी के मोर्चे पर मजबूत प्रदर्शन दर्ज किया है, जिस पर निवेशकों की नजर बनी हुई है.

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ICICI Bank को SEBI की फटकार, विदेशी निवेशक लेनदेन नियमों में मिली चूक. (Image:News18)

नई दिल्ली. देश के दूसरे सबसे बड़े निजी बैंक ICICI Bank को भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से एक चेतावनी पत्र मिला है. बैंक ने 4 जून को शेयर बाजारों को दी गई जानकारी में बताया कि उसे 1 जून 2026 तारीख वाला यह पत्र 2 जून को प्राप्त हुआ. मामला बैंक की कस्टोडियन के रूप में निभाई गई भूमिका से जुड़ा है. SEBI ने बैंक को एक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (FPI) को निर्धारित अवधि पूरी होने से पहले धन वापस भेजने की अनुमति देने के कारण चेतावनी जारी की है.

FPI लेनदेन से जुड़ा है पूरा मामला
SEBI के अनुसार यह मामला वॉलंटरी रिटेंशन रूट (VRR) के तहत किए गए निवेश से जुड़ा है. नियामक ने पाया कि एक विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक को उसकी प्रतिबद्ध रिटेंशन अवधि पूरी होने से पहले ही फंड वापस भेजने की अनुमति दी गई. इसी वजह से बैंक को चेतावनी पत्र जारी किया गया. यह कार्रवाई बैंक की कस्टोडियन सेवाओं से संबंधित है, जहां निवेशकों के लेनदेन और निवेश रिकॉर्ड की निगरानी की जिम्मेदारी निभाई जाती है.

मुनाफे में दर्ज हुई मजबूत बढ़ोतरी
एक तरफ SEBI की चेतावनी चर्चा में है, वहीं बैंक के वित्तीय नतीजे मजबूत रहे हैं. ICICI Bank का शुद्ध लाभ सालाना आधार पर 8.5 प्रतिशत बढ़कर 13,701.7 करोड़ रुपये रहा. पिछले वर्ष इसी अवधि में बैंक का शुद्ध लाभ 12,630 करोड़ रुपये था. यह आंकड़ा बाजार के अनुमान 12,949 करोड़ रुपये से भी अधिक रहा. बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) भी बढ़कर 22,979.2 करोड़ रुपये पहुंच गई, जो एक साल पहले 21,193 करोड़ रुपये थी.

एसेट क्वालिटी में भी हुआ सुधार
बैंक की परिसंपत्ति गुणवत्ता में भी सुधार देखने को मिला. नेट एनपीए घटकर 0.33 प्रतिशत रह गया, जो पिछली तिमाही में 0.37 प्रतिशत था. इसी तरह सकल एनपीए भी 1.53 प्रतिशत से घटकर 1.40 प्रतिशत पर आ गया. खराब ऋणों में कमी आने से बैंक की बैलेंस शीट और मजबूत हुई है. इसके अलावा एनपीए से संबंधित कुल राशि में भी गिरावट दर्ज की गई, जो बैंक के लिए सकारात्मक संकेत माना जा रहा है.

प्रोविजनिंग घटी, कर्ज वितरण बढ़ा
बैंक की प्रोविजनिंग भी काफी कम हुई है. चौथी तिमाही में यह 96.2 करोड़ रुपये रही, जबकि पिछली तिमाही में यह 2,556 करोड़ रुपये थी. वहीं पिछले वर्ष इसी अवधि में प्रोविजनिंग 890.7 करोड़ रुपये रही थी. दूसरी ओर बैंक का कुल ऋण वितरण सालाना आधार पर 15.8 प्रतिशत बढ़कर 15.53 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया. तिमाही आधार पर इसमें 6 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो कर्ज कारोबार में मजबूती को दर्शाती है.

शेयर में तेजी के साथ कारोबार समाप्त
बैंक का नेट इंटरेस्ट मार्जिन (NIM) चौथी तिमाही में 4.32 प्रतिशत रहा, जो पिछली तिमाही के 4.3 प्रतिशत के मुकाबले लगभग स्थिर रहा. पूरे वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भी NIM 4.32 प्रतिशत पर बना रहा. इस बीच, 4 जून को BSE पर ICICI Bank का शेयर 9.95 रुपये या 0.80 प्रतिशत की बढ़त के साथ 1,252.30 रुपये पर बंद हुआ. SEBI की चेतावनी के बावजूद निवेशकों की नजर बैंक के मजबूत वित्तीय प्रदर्शन पर बनी रही.

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Rakesh Singh

Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें



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वो 8 साइकोलॉजिकल हॉरर, जिनमें डराता है इंसानी दिमाग का पागलपन, रोंगटे खड़े कर देंगी कहानी


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अगर आपको साइकोलॉजिकल हॉरर थ्रिलर्स पसंद हैं, तो आपको इन 8 फिल्मों और सीरीज की लिस्ट देखनी चाहिए. लिस्ट में ‘टॉक टू मी’, ‘द बाबाडूक’ और ‘सेंट मॉड’ जैसी फिल्में शामिल हैं, जो मानसिक बीमारी, दुख और धार्मिक उन्माद को डरावने रूप में दिखाती हैं. इसके अलावा, वेब सीरीज ‘बिहाइंड हर आइज’ अपने अनोखे ट्विस्ट और क्लासिक फिल्म ‘मिजरी’ एक जुनूनी फैन के खौफनाक पागलपन को बखूबी बयां करती है.

शैतान (2024): इस लिस्ट में बॉलीवुड की फिल्म ‘शैतान’ भी अपनी जगह बनाती है, जो माता-पिता के सबसे बड़े डर को पर्दे पर लाती है. एक हंसता-खेलता परिवार वीकेंड मनाने बाहर जाता है, लेकिन उनकी जिंदगी तब नरक बन जाती है, जब एक अजनबी उनकी जवान बेटी को अपने वश में कर लेता है. वह लड़की उस आदमी के सम्मोहन में आकर अपने ही माता-पिता पर क्रूर अत्याचार करने लगती है, जिसे देख किसी की भी रूह कांप जाए.

भूतकालम (2022): मलयालम सिनेमा की बेहतरीन साइकोलॉजिकल फिल्म आपको सोचने पर मजबूर कर देगी. घर में एक मौत के बाद एक मां और उसका बेटा डिप्रेशन से जूझते हुए अपने किराए के मकान में कुछ बेहद डरावनी और अजीब घटनाओं का सामना करते हैं. फिल्म की सबसे बड़ी खूबसूरती यही है कि यह अंत तक दर्शकों को उलझाए रखती है कि जो कुछ हो रहा है, वह वाकई कोई भूत है या फिर उनके दिमाग का वहम.

तुम्बाड (2018): भारतीय सिनेमा की सबसे बेहतरीन हॉरर फिल्मों में गिनी जाने वाली ‘तुम्बाड’ इंसानी लालच की एक अनोखी और डरावनी लोककथा है. कहानी एक ऐसे आदमी की है, जिसकी सोने के खजाने को पाने की भूख उसे एक श्रापित देवता की अंधेरी कोख तक ले जाती है. यह फिल्म सिर्फ डराती नहीं है, बल्कि यह दिखाती है कि कैसे इंसान का अपना ही लालच उसके लिए सबसे बड़ा और सबसे भयानक राक्षस बन जाता है.

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बिहाइंड हर आइज (2021): अगर आपको मिनीसीरीज देखना पसंद है, तो ‘बिहाइंड हर आइज’ एक परफेक्ट साइकोलॉजिकल थ्रिलर है. कहानी एक सिंगल मदर के इर्द-गिर्द घूमती है, जो अपने बॉस के साथ अफेयर में पड़ जाती है और साथ ही उसकी रहस्यमयी पत्नी से भी दोस्ती कर लेती है. तीन लोगों का यह अजीब लव ट्रायंगल धीरे-धीरे ऐसे डार्क सीक्रेट्स खोलता है, जिसका अंत देखकर आपके पैरों तले जमीन खिसक जाएगी.

मिजरी (1990): मशहूर लेखक स्टीफन किंग के नॉवेल पर बनी क्लासिक फिल्म एक जुनूनी फैन के डरावने रूप को दिखाती है. एक जाने-माने लेखक की कार का एक्सीडेंट हो जाता है, जिसके बाद उसकी जान उसकी ‘नंबर वन फैन’ बचाती है. लेकिन यह सेवा जल्द ही एक भयानक कैद में बदल जाती है, जब उस फैन का पागलपन सामने आता है. यह फिल्म आपको शुरू से अंत तक सीट से बांधकर रखेगी.

सेंट मॉड (2020): अगर आप धीरे-धीरे बढ़ने वाले सस्पेंस के दीवाने हैं, तो आपको ‘सेंट मॉड’ बिल्कुल मिस नहीं करनी चाहिए. इसमें एक अकेली और बेहद धार्मिक हॉस्पिस नर्स की कहानी है, जो अपनी एक नास्तिक मरीज की आत्मा को बचाने के जुनून में इस कदर अंधी हो जाती है कि सही और गलत का फर्क भूल बैठती है. यह फिल्म मानसिक बीमारी, तन्हाई और धार्मिक उन्माद के खतरनाक तालमेल को बहुत ही खौफनाक अंदाज में दिखाती है.

द बाबाडूक (2014): यह फिल्म सिर्फ एक मॉन्स्टर की कहानी नहीं है, बल्कि इंसानी दिमाग के गहरे खालीपन को दिखाती है. कहानी एक अकेली मां और उसके बेटे की है, जो बच्चों की एक किताब से निकले अजीब और डरावने राक्षस ‘बाबाडूक’ के साए से परेशान हैं. यह कमाल की ऑस्ट्रेलियाई फिल्म असल में किसी भूत-प्रेत से ज्यादा, एक मां के पुराने दुख, तन्हाई और डिप्रेशन के खौफनाक रूप को पर्दे पर बेहद संजीदगी और डर के साथ पेश करती है.

टॉक टू मी : अगर आपको रोंगटे खड़े कर देने वाला सस्पेंस पसंद है, तो ऑस्ट्रेलियाई हॉरर फिल्म ‘टॉक टू मी’ आपकी वॉचलिस्ट में जरूर होनी चाहिए. कहानी कुछ ऐसे टीनेजर्स की है, जिन्हें एक नकली सिरेमिक हाथ मिलता है, जिसकी मदद से वे आत्माओं को बुलाने का खेल शुरू करते हैं. देखते ही देखते उनका यह रोमांच एक खौफनाक और जानलेवा पागलपन में बदल जाता है, जहां दोस्तों का दबाव और पुरानी यादों का दर्द उन्हें एक डरावने जाल में फंसा देता है.

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राइजिंग लाइन से पानी चोरी कर रहे थे माइंस संचालक: जलदाय विभाग ने 9 फर्मों पर लगाया 1-1 लाख रुपए का जुर्माना – Tonk News




टोंक जिले के देवली क्षेत्र में जलदाय विभाग ने बड़ी कार्रवाई करते हुए ग्रेनाइट माइंस संचालकों के खिलाफ सख्त कदम उठाया है। बघेरा फिल्टर प्लांट से गोपालपुरा पंप हाउस तक जा रही मुख्य राइजिंग लाइन में अवैध रूप से छेद कर पानी चोरी किए जाने का मामला सामने आया, जिसके बाद विभाग ने 9 माइंस फर्मों को नोटिस थमा दिए हैं। 9 फर्मों पर 1-1 लाख से अधिक का जुर्माना विभागीय जांच में पाया गया कि संबंधित माइंस संचालक ग्रामीण पेयजल पाइपलाइन से अवैध कनेक्शन लेकर पानी का उपयोग कर रहे थे। इसके बाद पीएचईडी (जलदाय विभाग) की ओर से इन सभी 9 फर्मों पर करीब 1-1 लाख रुपए से अधिक यानी कुल 1,04,986 रुपए प्रति फर्म का जुर्माना लगाया गया है। सभी को सात दिन के भीतर राशि जमा कराने और अवैध कनेक्शन हटाने के निर्देश दिए गए हैं। गर्मी में पेयजल आपूर्ति पर पड़ा असर जानकारी के अनुसार भीषण गर्मी के दौरान मुख्य राइजिंग लाइन में जगह-जगह छेद कर 24 घंटे पानी की चोरी की जा रही थी। इससे गोपालपुरा पंप हाउस तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पा रहा था, जिसके कारण उप तहसील क्षेत्र के कई गांवों और ढाणियों में पेयजल संकट गहरा गया और ग्रामीणों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। शिकायतों के बाद विभाग ने की कड़ी कार्रवाई लगातार शिकायतों और विभागीय निगरानी के बाद पीएचईडी ने मामले को गंभीरता से लिया और यह बड़ी कार्रवाई की। विभाग ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि निर्धारित समय में जुर्माना जमा नहीं कराने और अवैध कनेक्शन नहीं हटाने पर संबंधित फर्मों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी। इस कार्रवाई के दौरान जेईएन वीरेंद्र सिंह, विभाग के रामेश्वर मीणा सहित अन्य कर्मचारी मौके पर मौजूद रहे।



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कटिहार में जाम से निपटने की तैयारी: ऑटो-टोटो के लिए तीन अस्थायी पार्किंग स्थल चिन्हित – Katihar News




कटिहार नगर निगम में शहर की बढ़ती यातायात समस्या और जाम से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। नगर आयुक्त की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में ऑटो और टोटो के लिए अस्थायी पार्किंग व्यवस्था पर चर्चा की गई। इसमें जिला परिवहन पदाधिकारी, यातायात पुलिस के प्रतिनिधि और अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। नगर आयुक्त ने बताया कि नगर निगम क्षेत्र में वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण जाम की समस्या गंभीर हो गई है। इस समस्या के समाधान हेतु अरगड़ा चौक, चौधरी मोहल्ला और मिर्चाईबाड़ी (सहायक थाना के पास) को ऑटो-टोटो के लिए अस्थायी पार्किंग स्थल के रूप में चिन्हित किया गया है। इन स्थलों पर सुचारु संचालन के लिए ट्रैफिक पुलिस की तैनाती आवश्यक है। यातायात थाना प्रभारी ने अतिरिक्त पुलिस बल की कमी का उल्लेख करते हुए बताया कि अतिरिक्त बल की मांग भेजी गई है। इस पर नगर आयुक्त ने निर्देश दिया कि उपलब्ध पुलिस बल को ही रोटेशन मोड में तत्काल इन पार्किंग स्थलों पर तैनात किया जाए। जिला परिवहन पदाधिकारी ने बैठक में गैर-पंजीकृत ऑटो और टोटो के संचालन पर रोक लगाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि पंजीकृत वाहनों की पहचान के लिए विशेष कलरिंग की जाएगी और उन्हें निर्धारित रूटों पर ही चलने की अनुमति दी जाएगी। इससे वाहनों की संख्या नियंत्रित होगी और जाम कम करने में मदद मिलेगी। नगर आयुक्त ने यह भी जानकारी दी कि जल्द ही ऑटो और टोटो संघ के अध्यक्ष व सचिव के साथ बैठक की जाएगी। इस बैठक में शहर में अन्य छोटे पार्किंग स्थलों का चयन किया जाएगा और वाहनों के सुव्यवस्थित परिचालन के लिए एक कार्ययोजना तैयार की जाएगी। बैठक के अंत में, नगर आयुक्त ने यातायात थाना प्रभारी को शहर के महत्वपूर्ण रूटों की सूची तैयार कर जिला परिवहन पदाधिकारी को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया, ताकि आगे की आवश्यक कार्रवाई की जा सके। यह बैठक कटिहार में जाम मुक्त और व्यवस्थित यातायात व्यवस्था स्थापित करने के लिए नगर निगम, परिवहन विभाग और यातायात पुलिस के संयुक्त प्रयासों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।



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56 से ज्यादा फ्लेवर, लेकिन कहानी शुरू हुई थी एक साधारण सफेद पेठे से, जानिए


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56 से ज्यादा फ्लेवर, लेकिन कहानी शुरू हुई थी एक साधारण सफेद पेठे से, जानिए

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आगरा का पेठा सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि शहर की पहचान बन चुका है. ताजमहल की तरह दुनिया भर में मशहूर इस मिठाई को लेकर एक दिलचस्प मान्यता प्रचलित है, जिसका संबंध मुगलकाल और शाहजहां के दौर से जोड़ा जाता है.

आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा को पेठा नगरी भी कहा जाता है. आगरा का पेठा ताजमहल कि तरह पुरी दुनिया में मशहूर है. आगरा में कई तरह के पेठे बनाये जाते है जिसमे सादा पेठा, अंगूरी पेठा, पान पेठा, चॉकलेट पेठा, केसर पेठा.

इस तरह आगरा में 56 प्रकार से अधिक पेठे के फ्लेवर तैयार किये जाते है. यह पेठा मुग़लकाल के समय जन्मा था बताया जाता है कि ज़ब ताजमहल का निर्माण हो रहा था तब बादशाह शाहजहाँ ने अपने शाही रसोई खाने में ऐसी मिठाई बनाने का आदेश दिया जो ताजमहल कि तरह ही सफ़ेद हो और अपनी मिठास के साथ साथ वह लंबे समय तक खराब ना हो जिससे मजदूरों को इसे बाँटा जा सके.

तब उस समय सफ़ेद सादा पेठे को बनाया गया था. उस दौर के शाही रसोई के कारीगरों ने सफेद कद्दू (पेठे) को उबाला और चीनी की चाशनी में पकाकर पेठे का निर्माण किया था. तब से लेकर आज तक आगरा का पेठा दुनिया में मशहूर हो गया. वर्तमान में तो कई प्रकार के पेठे बाजार में मिल रहे हैं.

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आगरा में पिछले 20 सालों से पेठे का व्यापार कर रहे गगन चौहान ने बताया कि इससे पहले उनके पिताजी और दादाजी भी पेठे का कार्य करते आ रहे है.

कहा कि आगरा में हमारी दुकान काफ़ी प्राचीन है और हम कई प्रकार के पेठे को बनाते है. आगरा में पेठे का जन्म मुग़ल शासन काल में ही हुआ था.

उन्होंने कहा कि दादा और पिताजी बताते है कि ज़ब ताजमहल बन रहा था तब गर्मियों में बादशाह ने ऐसी मिठाई बनाने का आदेश दिया जो लंबे समय तक चले और खराब ना हो. तब उस दौर के लोगों ने कद्दू से इस पेठे को बनाना शुरू किया जो लोगों को काफी पसंद आया. उन्होंने कहा कि सादा पेठा एक ऐसी मिठाई है जो काफी लंबे समय तक आसानी से रखकर खाई जा सकती है यह हाल ही खराब नहीं होती है.

आगरा के पेठा व्यापारी गगन चौहान ने बताया कि पेठा विदेशी लोगों को भी काफी पसंद आ रहा है. आगरा घूमने आने वाले विदेशी पर्यटक अपने साथ आगरा का पेठा भी लेकर जाते है. उनकी एक दुकान ताजमहल के पास ही है, जहाँ से सबसे ज्यादा अंग्रेज ही पेठा खाना और अपने साथ पैक करा कर लेजाना पसंद करते है.

आगरा के वरिष्ठ इतिहासकार ने कहा की पेठे का इतिहासकार मुग़लकाल के समय का है ज़ब बादशाह शाहजहाँ ने अपने शाही रसोई में ऐसी मिठाई बनाने का आदेश दिया जो लंबे समय तक खराब ना हो तब इस पेठे का जन्म हुआ जो आज वर्तमान में पुरी दुनिया में मशहूर हो चूका है.

बेशक इसका इतिहास बेहद प्राचीन है मुग़लकाल से अबतक यह अपनी छाप छोड़ रहा है. यह ऐसी मिठाई है जिसे लोग उपहार के तौर पर भी देना पसंद करते है.

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