Saturday, May 23, 2026
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यूपी में बाल विवाह बढ़े इसकी दोषी यूपी पुलिस- हाईकोर्ट: दूल्हों और मदद करने वालों पर नहीं दर्ज हुए केस, डीजीपी गाइड लाइन दें – Prayagraj (Allahabad) News




इलाहाबाद हाईकोर्ट ने अपने एक आदेश में कहा कि उत्तर प्रदेश में बाल विवाह बढ़ रहे हैं, क्योंकि यूपी पुलिस ऐसे गैर-कानूनी विवाहों के दूल्हों और मदद करने वालों पर ‘बाल विवाह निषेध अधिनियम 2006’ के तहत केस दर्ज करने में नाकाम रही है। कोर्ट ने इस बात पर ज़ोर दिया कि आज तक उसके सामने एक भी ऐसा मामला नहीं आया, जिसमें पुलिस ने 2006 के अधिनियम की धारा 10 [बाल विवाह कराने पर सज़ा] और धारा 11 [बाल विवाह को बढ़ावा देने या उसकी इजाज़त देने पर सज़ा] के तहत, किसी नाबालिग लड़की से शादी करने वाले आरोपी या ऐसे गैर-कानूनी विवाह को संपन्न कराने के लिए ज़िम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की हो। कोर्ट ने डीजीपी से कहा गाइडलाइन जारी करें इसे देखते हुए बेंच ने राज्य के पुलिस महानिदेशक (डीजीपी ) को निर्देश दिया कि वे राज्य के सभी पुलिस कमिश्नरों/एस एस पी/एसपी को ज़रूरी निर्देश, गाइडलाइंस और सर्कुलर जारी करें, ताकि ऐसे मामलों में उचित कार्रवाई सुनिश्चित की जा सके। बेंच ने कहा, “…जब भी पुलिस को बाल विवाह के बारे में पता चले – चाहे किसी शिकायत के ज़रिए, जांच के दौरान, या खुद संज्ञान लेते हुए – तो बाल विवाह के संज्ञेय अपराध के मामले में, बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006 की धारा 10 और 11 के तहत, बाल विवाह कराने के लिए ज़िम्मेदार सभी लोगों के खिलाफ बिना किसी देरी के कानूनी कार्रवाई शुरू की जाए।” पुलिस सामाजिक बुराइयों को ताकत से खत्म करे इसके साथ ही बेंच ने डीजीपी को निर्देश दिया कि वे इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करें और इस सामाजिक बुराई को पूरी ताक़त और ज़ोर-शोर से खत्म करें। ये टिप्पणियां जस्टिस राजीव गुप्ता और जस्टिस अजय कुमार-II की बेंच ने आज़ाद अंसारी और उनके परिवार के सदस्यों द्वारा दायर आपराधिक रिट याचिका की सुनवाई के दौरान की। याचिका में 14 साल की एक लड़की के कथित अपहरण के मामले में दर्ज एफआईआर रद्द करने की मांग की गई, जिस पर आरोप था कि लड़की को शादी के लिए मजबूर किया गया। 14 साल की लड़की ने मुस्लिम रीति रिवाज से शादी की याचिकाकर्ताओं का पक्ष यह था कि नाबालिग लड़की (याचिकाकर्ता नंबर 1) ने अपनी मर्ज़ी से इस साल मार्च में मुस्लिम रीति-रिवाजों के अनुसार आज़ाद अंसारी (याचिकाकर्ता नंबर 2) से शादी की थी, और वह इस समय बिना किसी ज़ोर-ज़बरदस्ती या दबाव के उसके साथ रह रही है। दूसरी ओर, सरकारी वकील ने यह तर्क दिया कि याचिकाकर्ता नंबर1 एक नाबालिग लड़की है जिसकी उम्र बहुत कम है। याचिकाकर्ता नंबर 2 ने उसे बहला-फुसलाकर उसके माता-पिता की कानूनी देखरेख से अगवा कर लिया, ताकि उसे उससे शादी करने के लिए मजबूर किया जा सके। यह दलील दी गई कि याचिकाकर्ता नंबर 2 को पूरी तरह पता था कि लड़की नाबालिग है और उनकी शादी बाल विवाह के अलावा कुछ नहीं थी, जो ‘बाल विवाह निषेध अधिनियम, 2006’ के प्रावधानों के तहत दंडनीय अपराध है। आगे यह भी कहा गया कि याचिकाकर्ता नंबर 2 और 3 ने असल में इस अपराध को अंजाम देने के लिए साज़िश रची थी। इसलिए यह प्रार्थना की गई कि एफआईआर रद्द करने की याचिका खारिज कर दी जानी चाहिए। दोनों पक्षकारों की दलीलों और आरोपियों पर लगे आरोपों पर विचार करने के बाद बेंच ने पाया कि इस चरण पर याचिकाकर्ता नंबर 2 और 3 के खिलाफ प्रथम दृष्टया मामला बनता है। कोर्ट ने कहा आरोप बहुत ही गंभीर बेंच ने टिप्पणी की, “आरोप बहुत गंभीर प्रकृति के हैं, इसलिए हमारी सुविचारित राय है कि विवादित एफआईआर से याचिकाकर्ता नंबर 2 और 3 के खिलाफ एक संज्ञेय अपराध का होना पता चलता है।
याची नंबर 2 और 3 को फंसाने वाले पर्याप्त सबूत पहले ही जुटाए जा चुके हैं। इसलिए इस चरण पर विवादित एफआईआर को रद्द नहीं किया जा सकता।” हालांकि, आदेश जारी करने से पहले अदालत ने उस व्यापक प्रशासनिक विफलता पर ध्यान दिया, जो इस सामाजिक बुराई को बढ़ावा दे रही है। बेंच ने राय दी, “बाल विवाह का उन्मूलन केवल एक वैधानिक लक्ष्य नहीं है, बल्कि यह एक संवैधानिक अनिवार्यता है।” इस संबंध में बेंच ने कहा कि 2006 का अधिनियम यह अनिवार्य करता है कि जैसे ही पुलिस अधिकारियों को बाल विवाह संपन्न होने या पूरा होने की जानकारी मिलती है, वे तुरंत कड़ी कार्रवाई करें। ऐसा इसलिए किया जाना चाहिए ताकि अधिनियम की धारा 10 और 11 के तहत, ऐसे अवैध बाल विवाह को संपन्न कराने के लिए ज़िम्मेदार सभी लोगों पर मुकदमा चलाया जा सके। बाल विवाह दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहे हालांकि, कोर्ट ने यह भी पाया कि जांच अधिकारी दूल्हों और शादी कराने वालों के खिलाफ इन प्रावधानों का इस्तेमाल नहीं करते हैं, जिसके कारण बाल विवाह की ऐसी घटनाएं दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही हैं। आगे कहा गया, “चूंकि बाल विवाह निषेध अधिनियम के प्रावधानों के तहत ऐसे अवैध बाल विवाह कराने के लिए जिम्मेदार सभी लोगों पर मुकदमा चलाने के लिए कोई कार्रवाई नहीं की जा रही है, जिसके परिणामस्वरूप, उत्तर प्रदेश राज्य में बाल विवाह दिन-ब-दिन बढ़ते जा रहे हैं।” बेंच ने यह टिप्पणी करते हुए निराशा व्यक्त की कि जांच अधिकारी
अक्सर इन प्रावधानों की अनदेखी करते हैं। ऐसे विवाहों को सुगम बनाने वाली विभिन्न संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर कड़ी आपत्ति जताते हुए बेंच ने आगे कहा कि यहां तक ​​कि ऐसे अवैध बाल विवाह कराने वाले सामाजिक और धार्मिक संगठन भी या तो बच्ची के आधार कार्ड या उसके हलफनामे का सहारा लेते हैं, भले ही आधार कार्ड में दर्ज जन्मतिथि उम्र का वैध प्रमाण न हो। कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए संबंधित जांच अधिकारी को निर्देश दिया कि वह इस मामले को 2006 के अधिनियम के प्रावधानों के परिप्रेक्ष्य से देखें और जांच पूरी करते हुए कानून के अनुसार आगे की कार्रवाई करें।



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टीकमगढ़: पानी की टंकी में डूबने से मासूम की मौत: खेलते समय घर के बाहर हौदी में गिरा, पानी लेने के परिजन ने देखी लाश – Tikamgarh News




टीकमगढ़ जिले के बड़ागांव धसान नगर परिषद के वार्ड नंबर 15 में शनिवार को एक वर्षीय मासूम की पानी की टंकी में डूबने से मौत हो गई। बच्चा घर के बाहर खेलते समय हौदी में गिर गया था। जानकारी के अनुसार, सुरेंद्र लोधी का एक वर्ष एक माह का बेटा दक्ष घर के बाहर खेल रहा था। परिवार के सदस्य घर के कामों में व्यस्त थे और बच्चे पर ध्यान नहीं दे पाए। इसी दौरान दक्ष खेलते-खेलते घर के बाहर बनी पानी से भरी हौदी के पास पहुंच गया और उसमें गिर गया। तस्वीरें देखिए… परिजन ने देखी लाश जब परिवार का एक सदस्य पानी लेने के लिए हौदी के पास गया, तो दक्ष का शव पानी में देखा। परिजन तुरंत बच्चे को बड़ागांव सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले गए, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बच्चे के दादा गोविंद लोधी ने बताया कि घटना के दिन परिवार माता पूजन की तैयारी में था। बच्चे की मां प्रसाद बनाने में व्यस्त थी, जबकि घर के अन्य सदस्य अपने-अपने कामों में लगे थे। इस दौरान किसी का ध्यान दक्ष पर नहीं गया। घटना की सूचना मिलते ही थाना पुलिस मौके पर पहुंची। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है।



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सदर अस्पताल के मैन गेट पर लगा 1 फुट पानी: अररिया में मरीजों और स्टाफ को परेशानी, कहा- निकासी की व्यवस्था नहीं – Araria News




अररिया में शनिवार को हुई तेज बारिश से पूरे जिले में जलभराव हो गया। इसका सबसे बुरा असर सदर अस्पताल पर पड़ा, जहाँ परिसर में भारी जलजमाव के कारण मरीजों, उनके परिजनों और अस्पताल स्टाफ को गंभीर परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। अस्पताल के पोस्टमार्टम हाउस वाले रास्ते, पीकू वार्ड (PICU) और डॉग बाइट इंजेक्शन वाले क्षेत्र में लगभग एक फुट तक पानी भर गया है। नवजात शिशुओं के लिए बने एसएनसीयू तक पहुँचने वाले अभिभावकों को भी इसी समस्या से जूझना पड़ रहा है। मरीजों को इलाज के लिए इस गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा है। अस्पताल के चिकित्सक, नर्सिंग स्टाफ और जीएनएम कर्मचारी भी इसी पानी में उतरकर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। स्टाफ सदस्यों ने बताया कि इस स्थिति में काम करना बेहद मुश्किल है और जलजमाव के कारण संक्रमण का खतरा भी बढ़ गया है। गांवों और टोलों में भी सड़कें पानी से लबालब जिले के विभिन्न गांवों और टोलों में भी सड़कें पानी से लबालब हो गई हैं, जिससे आम लोगों का आवागमन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। छोटे वाहन पूरी तरह से फंस गए, जबकि बड़े वाहनों को भी सुचारू रूप से चलने में दिक्कतें आ रही हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बारिश थमने के बावजूद पानी निकासी की कोई व्यवस्था नहीं है। जलजमाव का असर स्वास्थ्य सेवाओं पर सदर अस्पताल प्रबंधन ने अभी तक इस समस्या को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाया है। इस जलजमाव का सीधा असर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है, खासकर गंभीर मरीजों और आपातकालीन सेवाओं पर। स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन से तुरंत जल निकासी की व्यवस्था करने और अस्पताल परिसर को जलमुक्त कराने की मांग की है। मौसम विभाग के अनुसार, अगले कुछ दिनों में भी बारिश की संभावना बनी हुई है, जिससे स्थिति और बिगड़ सकती है।



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दिल्ली जिमखाना क्लब 5 जून तक खाली करने का ऑर्डर: केंद्र ने 27.3 एकड़ जमीन वापस मांगी; 112 साल पुराना क्लब हाई-सोसायटी स्टेटस का प्रतीक


नई दिल्ली12 मिनट पहले

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केंद्र सरकार ने लुटियंस दिल्ली स्थित ऐतिहासिक दिल्ली जिमखाना क्लब को 5 जून तक कैंपस खाली करने का ऑर्डर दिया है। केंद्र के लैंड एंड डेवलपमेंट ऑफिस (L&DO) ने 22 मई को क्लब सेक्रेटरी को लेटर भेजकर यह आदेश जारी किया।

इसमें कहा गया है कि सरकार को क्लब के कब्जे वाली 27.3 एकड़ जमीन डिफेंस इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने, संस्थागत जरूरतों और दूसरे प्रोजेक्ट्स के लिए चाहिए। आदेश के मुताबिक राष्ट्रपति की ओर से जमीन लीज खत्म कर दी गई है।

दिल्ली जिमखाना क्लब की स्थापना ब्रिटिश काल में हुई थी। 1913 में यह इम्पीरियल दिल्ली जिमखाना क्लब नाम से शुरू हुआ था। आजादी के बाद इसका नाम बदलकर दिल्ली जिमखाना क्लब कर दिया गया। मौजूदा भवन 1930 के दशक में बनाए गए थे।

यह क्लब की मेन बिल्डिंग है। यहीं से अंदर जाने का मेन गेट भी है।

यह क्लब की मेन बिल्डिंग है। यहीं से अंदर जाने का मेन गेट भी है।

PM आवास के पास है क्लब, मेंबर बोले- कोर्ट जाएंगे

दिल्ली जिमखाना क्लब को मशहूर ब्रिटिश आर्किटेक्ट रॉबर्ट टोर रसेल ने डिजाइन किया था। उन्होंने ही कनॉट प्लेस और तीन मूर्ति भवन भी डिजाइन किए थे। यह क्लब प्रधानमंत्री आवास लोक कल्याण मार्ग के पास है, जिसके कारण यह इलाका हाई-सिक्योरिटी जोन माना जाता है।

क्लब के सदस्य सिद्धार्थ ने कहा कि सरकार के आदेश को अदालत में चुनौती दी जाएगी। उन्होंने कहा कि क्लब से किसी सुरक्षा खतरे जैसी स्थिति नहीं है और आदेश में किए गए दावों पर पुनर्विचार होना चाहिए।

क्लब में बैडमिंटन-टेनिस कोर्ट सहित कई सुविधाएं

पिछले 112 सालों से यह क्लब हाई-सोसायटी स्टेटस का प्रतीक रहा है। क्लब में 26 ग्रास टेनिस कोर्ट हैं, जो देश के किसी भी क्लब में सबसे ज्यादा बताए जाते हैं। इसके अलावा स्क्वैश कोर्ट, बैडमिंटन कोर्ट, बिलियर्ड्स रूम, स्विमिंग पूल, तीन लाउंज बार और 43 कॉटेज भी हैं।

यह क्लब लंबे समय से नौकरशाहों, सेना प्रमुखों, जजों, राजनेताओं, उद्योगपतियों और पुराने कारोबारी परिवारों का पसंदीदा अड्डा रहा है। यहां की सदस्यता को किसी बड़े सरकारी पद जितना प्रतिष्ठित माना जाता है।

हर साल सिर्फ 100 लोगों को मिलती है मेंबरशिप

करीब 1200 सदस्यों वाले इस क्लब में एंट्री पाना बेहद मुश्किल माना जाता है। सदस्यता के लिए 20 से 30 साल तक इंतजार करना पड़ता था। हर साल सिर्फ करीब 100 नए लोग ही मेंबरशिप ले पाते हैं।

क्लब में दशकों तक 40-40-20 नियम लागू रहा। 40% सदस्यता सिविल सर्विस, 40% रक्षा सेवाओं और बाकी 20% अन्य लोगों को मिलती थी। पहले से क्लब के मेंबर्स के बच्चों को भी प्राथमिकता दी जाती थी। इससे बाहरी लोगों के लिए सदस्य बनना और मुश्किल हो जाता था।

सदस्यता से पहले ‘एट होम’ नाम की प्रक्रिया भी होती थी, जहां मौजूदा सदस्य यह तय करते थे कि नया व्यक्ति उनके स्टेटस का है या नहीं। इसी हाई-सोसायटी स्टेटस कल्चर को लेकर क्लब विवादों में भी रहा।

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हिमांशु पाटीदार कप्तान, अमित रोत को उपकप्तान बनाया: कॉल्विन शील्ड प्रतियोगिता के लिए डूंगरपुर क्रिकेट टीम में 18 खिलाड़ियों का चयन – Dungarpur News




राजस्थान क्रिकेट संघ की ओर से जयपुर में होने वाली राज्य स्तरीय कॉल्विन शील्ड प्रतियोगिता के लिए डूंगरपुर जिले की 18 सदस्यीय क्रिकेट टीम की घोषणा कर दी गई है। हिमांशु पाटीदार को टीम का कप्तान और अमित रोत को उपकप्तान बनाया गया है। जिला क्रिकेट संघ के सचिव सुशील जैन ने बताया कि टीम में दक्ष भावसार, केयूर त्रिवेदी, मयूक बिस्वा, दिलीप पाटीदार, अभयराज भोई, भाविक पाटीदार, आवेश खान, विश्वास पटेल, मयंक वरीयानी, पुलकित शर्मा कलाल, देव भावसार, निलेश पुरोहित, हनुमान बेनीवाल, रोहिताश गुर्जर और मनीष कुमावत शामिल हैं। कॉल्विन शील्ड प्रतियोगिता में 5 मैच खेलेगी डूंगरपुर टीम
टीम के कोच शाहिद सिंधी और मैनेजर जावेद खान होंगे। डूंगरपुर टीम प्रतियोगिता में कुल 5 मुकाबले खेलेगी। पहला मैच 27 मई को करौली के खिलाफ होगा। इसके बाद टीम 28 मई को बूंदी, 29 मई को सिरोही, 31 मई को प्रतापगढ़ और 1 जून को जालोर के विरुद्ध खेलेगी। जिला क्रिकेट संघ ने सभी खिलाड़ियों, कोच और मैनेजर को शुभकामनाएं दी हैं। संघ और क्रिकेट प्रेमियों को टीम से उत्कृष्ट प्रदर्शन और जिले का नाम रोशन करने की उम्मीद है।



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कश्मीर से कन्याकुमारी तक… कितने तरह की होती है चाय? हर एक का होता है अपना स्वाद


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Types of tea in india: भारत में चाय सिर्फ एक ड्रिंक नहीं बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा मानी जाती है. दिलचस्प बात यह है कि हर राज्य में चाय का स्वाद, बनाने का तरीका और उसमें इस्तेमाल होने वाले मसाले अलग होते हैं. कश्मीर की नमक वाली चाय से लेकर मुंबई की कटिंग चाय तक, हर कप अपने साथ एक अलग स्वाद और कहानी लेकर आता है.

भारत में चाय सिर्फ एक पेय नहीं बल्कि लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी का हिस्सा मानी जाती है. सुबह की शुरुआत हो, सफर की थकान मिटानी हो या दोस्तों के साथ गपशप करनी हो, एक कप चाय हर मौके को खास बना देता है. लेकिन दिलचस्प बात यह है कि कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक हर राज्य में चाय का स्वाद और बनाने का तरीका अलग दिखाई देता है. कहीं नमक वाली चाय पी जाती है, तो कहीं मसालों और गुड़ का स्वाद चाय को खास बना देता है. यही विविधता भारतीय चाय संस्कृति को बेहद अनोखा बनाती है.

Noon Chai को कश्मीर की पारंपरिक चाय माना जाता है. इसे गुलाबी चाय भी कहा जाता है. इस चाय में नमक, दूध और खास कश्मीरी चायपत्ती का इस्तेमाल किया जाता है. कई लोग इसमें सूखे मेवे भी डालते हैं. ठंडे मौसम में यह चाय शरीर को गर्म रखने में मदद करती है और इसका स्वाद सामान्य चाय से काफी अलग होता है.

Noon Chai को कश्मीर की पारंपरिक चाय माना जाता है. इसे गुलाबी चाय भी कहा जाता है. इस चाय में नमक, दूध और खास कश्मीरी चायपत्ती का इस्तेमाल किया जाता है. कई लोग इसमें सूखे मेवे भी डालते हैं. ठंडे मौसम में यह चाय शरीर को गर्म रखने में मदद करती है और इसका स्वाद सामान्य चाय से काफी अलग होता है.

पहाड़ी इलाकों में लोग अक्सर जड़ी-बूटियों वाली चाय पीना पसंद करते हैं. अदरक, तुलसी, दालचीनी और पहाड़ी जड़ी-बूटियों से बनी चाय यहां काफी लोकप्रिय मानी जाती है. ठंड के मौसम में यह चाय शरीर को गर्माहट देने के साथ ताजगी भी महसूस कराती है.

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Kolkata की कुल्हड़ चाय का स्वाद अलग ही माना जाता है. यहां मिट्टी के छोटे कप यानी कुल्हड़ में चाय परोसी जाती है, जिससे चाय में मिट्टी की हल्की खुशबू आ जाती है. सड़क किनारे मिलने वाली यह चाय स्थानीय लोगों और पर्यटकों दोनों के बीच काफी लोकप्रिय है.

Kolkata की कुल्हड़ चाय का स्वाद अलग ही माना जाता है. यहां मिट्टी के छोटे कप यानी कुल्हड़ में चाय परोसी जाती है, जिससे चाय में मिट्टी की हल्की खुशबू आ जाती है. सड़क किनारे मिलने वाली यह चाय स्थानीय लोगों और पर्यटकों दोनों के बीच काफी लोकप्रिय है.

Gujarat में मसाला चाय काफी पसंद की जाती है. इसमें अदरक, इलायची, लौंग और कई मसालों का इस्तेमाल किया जाता है. कई जगहों पर चाय को काफी देर तक उबाला जाता है, जिससे उसका स्वाद और गाढ़ापन बढ़ जाता है. गुजराती स्नैक्स के साथ यह चाय लोगों की फेवरेट मानी जाती है.

Gujarat में मसाला चाय काफी पसंद की जाती है. इसमें अदरक, इलायची, लौंग और कई मसालों का इस्तेमाल किया जाता है. कई जगहों पर चाय को काफी देर तक उबाला जाता है, जिससे उसका स्वाद और गाढ़ापन बढ़ जाता है. गुजराती स्नैक्स के साथ यह चाय लोगों की फेवरेट मानी जाती है.

Mumbai की कटिंग चाय पूरे देश में मशहूर है. “कटिंग” का मतलब आधा गिलास चाय होता है. ऑफिस जाने वाले लोग, कॉलेज स्टूडेंट्स और सड़क किनारे खड़े दोस्त अक्सर छोटी-सी कटिंग चाय के साथ बातचीत का मजा लेते दिखाई देते हैं. इसका स्वाद तेज और काफी स्ट्रॉन्ग माना जाता है.

Mumbai की कटिंग चाय पूरे देश में मशहूर है. “कटिंग” का मतलब आधा गिलास चाय होता है. ऑफिस जाने वाले लोग, कॉलेज स्टूडेंट्स और सड़क किनारे खड़े दोस्त अक्सर छोटी-सी कटिंग चाय के साथ बातचीत का मजा लेते दिखाई देते हैं. इसका स्वाद तेज और काफी स्ट्रॉन्ग माना जाता है.

दक्षिण भारत में कॉफी ज्यादा लोकप्रिय मानी जाती है, लेकिन कई जगहों पर खास तरह की चाय भी पी जाती है. Tamil Nadu और Kerala में दूध और मजबूत चायपत्ती से बनी गाढ़ी चाय लोगों को काफी पसंद आती है. कई जगहों पर इसे ऊंचाई से डालकर झागदार बनाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और मजेदार लगने लगता है.

दक्षिण भारत में कॉफी ज्यादा लोकप्रिय मानी जाती है, लेकिन कई जगहों पर खास तरह की चाय भी पी जाती है. Tamil Nadu और Kerala में दूध और मजबूत चायपत्ती से बनी गाढ़ी चाय लोगों को काफी पसंद आती है. कई जगहों पर इसे ऊंचाई से डालकर झागदार बनाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और मजेदार लगने लगता है.

दक्षिण भारत में कॉफी ज्यादा लोकप्रिय मानी जाती है, लेकिन कई जगहों पर खास तरह की चाय भी पी जाती है. Tamil Nadu और Kerala में दूध और मजबूत चायपत्ती से बनी गाढ़ी चाय लोगों को काफी पसंद आती है. कई जगहों पर इसे ऊंचाई से डालकर झागदार बनाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और मजेदार लगने लगता है.

दक्षिण भारत में कॉफी ज्यादा लोकप्रिय मानी जाती है, लेकिन कई जगहों पर खास तरह की चाय भी पी जाती है. Tamil Nadu और Kerala में दूध और मजबूत चायपत्ती से बनी गाढ़ी चाय लोगों को काफी पसंद आती है. कई जगहों पर इसे ऊंचाई से डालकर झागदार बनाया जाता है, जिससे इसका स्वाद और मजेदार लगने लगता है.

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BJP जॉइन करते ही राघव चड्ढा का बढ़ा कद, राज्यसभा की बड़ी समिति की कमान मिली


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BJP जॉइन करते ही राघव चड्ढा का बढ़ा कद, राज्यसभा की बड़ी समिति की कमान मिली

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राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा को राज्यसभा की याचिका समिति का नया चेयरमैन नियुक्त किया गया है. हाल ही में आम आदमी पार्टी छोड़कर भारतीय जनता पार्टी में शामिल हुए राघव चड्ढा को यह अहम जिम्मेदारी मिलने के बाद सियासी हलकों में चर्चा तेज हो गई है. राज्यसभा सचिवालय की ओर से जारी अधिसूचना के अनुसार, राज्यसभा के सभापति सीपी राधाकृष्‍णन ने 20 मई 2026 से प्रभावी नई समिति का पुनर्गठन किया है. इसी के तहत राघव चड्ढा को समिति का अध्यक्ष बनाया गया है.

राज्यसभा की याचिका समिति संसद की एक महत्वपूर्ण समिति मानी जाती है. यह समिति आम लोगों की याचिकाओं और शिकायतों पर विचार करती है. साथ ही, आमजनों की शिकायतों को लेकर सरकार को सुझाव भी देती है. ऐसे में इस समिति की कमान राघव चड्ढा को मिलना राजनीतिक रूप से भी अहम माना जा रहा है. समिति में राघव चड्ढा के अलावा कई अन्य सांसदों को भी शामिल किया गया है. इनमें हर्ष महाजन, गुलाम अली, शंभू शरण पटेल, मयंककुमार नायक, मस्तान राव यादव बीधा, जेबी मैथर हिशाम, सुभाषिश खुंटिया, र्वंगवरा नार्जरी और संतोष कुमार पी शामिल हैं.

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि बीजेपी में शामिल होने के बाद राघव चड्ढा को इतनी जल्दी बड़ी संसदीय जिम्मेदारी मिलना पार्टी नेतृत्व के भरोसे को दर्शाता है. इससे संसद में उनकी भूमिका और ज्यादा मजबूत हो सकती है. इसी बीच राज्यसभा सचिवालय ने एक अन्य अधिसूचना भी जारी की है. इसके मुताबिक मेनका गुरुस्‍वामी को कॉरपोरेट लॉज (संशोधन) विधेयक 2026 से जुड़ी संयुक्त समिति का सदस्य नामित किया गया है.

राज्यसभा में हुए इन नए नियुक्तियों को संसद के आगामी सत्र से पहले महत्वपूर्ण माना जा रहा है. माना जा रहा है कि संसदीय समितियों के जरिए सरकार कई अहम विधेयकों और नीतिगत मामलों पर तेजी से काम आगे बढ़ा सकती है.

यह ख़बर बिल्कुल अभी आई है और इसे सबसे पहले आप News18Hindi पर पढ़ रहे हैं. जैसे-जैसे जानकारी मिल रही है, हम इसे अपडेट कर रहे हैं. ज्यादा बेहतर एक्सपीरिएंस के लिए आप इस खबर को रीफ्रेश करते रहें, ताकि सभी अपडेट आपको तुरंत मिल सकें. आप हमारे साथ बने रहिए और पाइए हर सही ख़बर, सबसे पहले सिर्फ Hindi.News18.com पर…



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घर की रसोई बनेगी नोट छापने की मशीन! मात्र ₹10,000 में शुरू करें ये बिजनेस


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Cloud Kitchen Business: महंगाई और नौकरी की अनिश्चितता के दौर में अब लोग कम लागत वाले छोटे बिजनेस की तरफ तेजी से बढ़ रहे हैं. ऐसे में ‘क्लाउड किचन’ बिजनेस युवाओं, महिलाओं और घर से काम करने वालों के लिए शानदार अवसर बनकर उभरा है. इस कारोबार को आप महज 10 हजार रुपये से शुरू तक सकते हैं. 

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घर की रसोई से शुरू करें अपना क्लाउड किचन (फोटो- एआई)

Cloud Kitchen Business: आज के डिजिटल दौर में अगर आपके हाथों में स्वाद का जादू है, तो आपको मोटी कमाई करने के लिए किसी बड़े रेस्तरां या महंगी दुकान की जरूरत नहीं है. आप अपने घर की मौजूदा रसोई को ही एक मुनाफे वाले बिजनेस में बदल सकते हैं. इस बिजनेस मॉडल को ‘क्लाउड किचन’ (Cloud Kitchen) कहा जाता है. सबसे अच्छी बात यह है कि इसे शुरू करने के लिए आपको लाखों रुपये की नहीं, बल्कि मात्र 10,000 रुपये की शुरुआती लागत की आवश्यकता है. आइए जानते हैं कि आप घर बैठे जोमैटो (Zomato) और स्विगी (Swiggy) के जरिए इस बिजनेस को कैसे सुपरहिट बना सकते हैं.

क्लाउड किचन एक ऐसा रेस्टोरेंट होता है, जहां कोई ‘डाइन-इन’ यानी बैठकर खाने की व्यवस्था नहीं होती. यहां सिर्फ खाना पकाया जाता है और ऑनलाइन डिलीवरी ऐप्स के जरिए ग्राहकों तक पहुंचाया जाता है. चूंकि इसमें न तो किसी प्राइम लोकेशन पर दुकान किराए पर लेनी होती है और न ही महंगे फर्नीचर या वेटर्स पर खर्च करना पड़ता है, इसलिए इसमें रिस्क न के बराबर होता है.

मात्र ₹10,000 में कैसे होगी शुरुआत?
शुरुआती बजट कम होने पर आपको अपनी रणनीति थोड़ी स्मार्ट रखनी होगी. अगर आपके घर में गैस, बर्तन और बेसिक किचन सेटअप पहले से मौजूद है, तो शुरुआती खर्च काफी कम हो सकता है. करीब 8 से 10 हजार रुपये में यह काम शुरू किया जा सकता है. शुरुआती खर्च कुछ ऐसा हो सकता है:

  • फूड पैकेजिंग बॉक्स और कंटेनर – 2,000 रुपये
  • बेसिक लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन – 1,000 से 2,000 रुपये
  • कच्चा सामान – 3,000 रुपये
  • मोबाइल इंटरनेट और ऑनलाइन प्रमोशन – 1,000 रुपये
  • फोटोशूट और मेन्यू डिजाइन – 1,000 रुपये

Zomato और Swiggy पर कैसे बेचें?
अपने घर के खाने को पूरे शहर तक पहुंचाने का सबसे आसान जरिया हैं- जोमैटो और स्विगी. इनके पार्टनर नेटवर्क से जुड़ने के लिए आपको कुछ प्रक्रियाओं से गुजरना होगा. आपके पास FSSAI (फूड सेफ्टी) लाइसेंस, पैन कार्ड, बैंक अकाउंट डिटेल्स और जीएसटी नंबर (यदि लागू हो) होना चाहिए. FSSAI का बेसिक रजिस्ट्रेशन बेहद कम फीस में ऑनलाइन हो जाता है. Zomato Fast Track या Swiggy Partner ऐप/वेबसाइट पर जाकर अपने किचन का रजिस्ट्रेशन करें. अपनी डिशेज के नाम, उनके दाम तय करें और खाने की साफ व आकर्षक तस्वीरें अपलोड करें. शुरुआत में प्रॉफिट मार्जिन थोड़ा कम रखें और खाने की क्वालिटी व क्वांटिटी को दमदार बनाएं, ताकि आपको अच्छे रिव्यूज और रेटिंग्स मिल सकें.

कमाई कितनी हो सकती है?
शुरुआत में रोज 15-20 ऑर्डर भी मिलते हैं तो अच्छी कमाई हो सकती है. अगर एक ऑर्डर पर 80 से 150 रुपये तक बचत होती है, तो महीने में 25 हजार से 60 हजार रुपये तक की कमाई संभव है. त्योहारों और वीकेंड पर ऑर्डर ज्यादा मिलने से मुनाफा और बढ़ सकता है.

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विनय कुमार झासीनियर कॉपी एडिटर

वर्तमान में विनय कुमार झा नेटवर्क18 की वेबसाइट hindi.news18.com में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वह मई 2017 से इस वेबसाइट के साथ जुड़े हैं. वह बीते 5 सालों से वर्तमान में वेबसाइट के बिजनेस सेक्शन के …और पढ़ें



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‘रिटर्न ऑफ द जंगल’ का ट्रेलर आउट, दोस्ती और जज्बे से भरी है बच्चों की ये फिल्म, थिएटर्स में करे एन्जॉ


 

मुंबई. भारत के इकलौते एमी-नॉमिनेटेड एनीमेशन स्टूडियो- वैभव स्टूडियोज की मच अवेटेड एनिमेटेड फीचर फिल्म ‘रिटर्न ऑफ द जंगल’ का ट्रेलर रिलीज हो गया है. यह फिल्म 29 मई को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी. यह फिल्म पंचतंत्र से इंस्पायर्ड एक मॉडर्न कहानी है. ट्रेलर में जूनियर स्कूल के कुछ बच्चों और उनके दोस्तों की कहानी दिखाई गई है, जो रोज़मर्रा की चुनौतियों का सामना करते हैं. हास्य, भावनाओं, जोशीले संगीत और एक रोमांचक क्रिकेट मुकाबले से भरपूर यह फिल्म हर उम्र के लिए है. पेरेंट्स इस समर वेकेशन में बच्चों के साथ इस फिल्म को सिनेमाघरों में एन्जॉय कर सकते हैं.

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टीवी, एसी, पंखे आदि के लिए घर में लगाना चाहिए कितने एम्पियर का सॉकेट?


घर में इलेक्ट्रिकल वायरिंग कराते समय अगर इलेक्ट्रिशियन अप्लायंसेज के लिए गलत सॉकेट लगा देता है, तो आपको भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। इससे शॉर्ट-सर्किट हो सकता है और पूरे घर की वायरिंग जल भी सकती है। आजकल लगभग हर घर में एसी, टीवी, फ्रिज, सेट-टॉप बॉक्स जैसे अप्लायंसेज होते हैं। इन सब को बिजली से कनेक्ट करने के लिए घर में लगे सॉकेट का इस्तेमाल किया जाता है। घर मे लगने वाले हर अप्लायंसेज के लिए अलग-अलग एम्पियर के सॉकेट लगते हैं। किस अप्लायंस के लिए कितने एम्पियर का सॉकेट लगवाना चाहिए, आइए जानते हैं…

6 AMP  (एम्पियर) वाला सॉकेट

आम तौर पर ज्यादातर होम अप्लायंसेज इस 6 amp वाले सॉकेट पर काम करते हैं। लाइटिंग, पंखे, टीवी, सेट-टॉप बॉक्स आदि के लिए इस सॉकेट का यूज होता है। यह सॉकेट कम लोड वाले अप्लायंसेज के लिए इस्तेमाल किया जाता है।

16 AMP वाला सॉकेट

यह सॉकेट हैवी लोड वाले अप्लायंसेज के लिए यूज किया जाता है। इस सॉकेट को आप घर में रखे अप्लायंसेज जैसे कि फ्रिज, मिक्सर, ग्राइंडर, वॉशिंग मशीन, गीजर, एसी, आयरन, माइक्रोवेव, मोटर आदि के लिए यूज किया जाता है। आपके घर में अगर इलेक्ट्रिक वायरिंग होती है, तो आप उन जगहों पर 16 एम्पियर का ही सॉकेट लगवाएं, जहां ये हैवी लोड वाले अप्लायंसेज इस्तेमाल करना हो।

20/25 AMP वाला सॉकेट

यह सॉकेट आम तौर पर बहुत ज्यादा लोड जैसे कि इंडक्शन कुकटॉप, इन्वर्टर और हैवी अप्लायंसेज के लिए यूज होता है। हालांकि, ये सब अप्लायंसेज 16 amp वाले सॉकेट पर भी काम करते हैं, लेकिन अगर अप्लायंसेज का पावर कंजम्पशन ज्यादा है, तो इसके पिघलने का खतरा रहता है। ऐसे में शॉर्ट-सर्किट हो सकता है।

भूलकर भी न करें ये काम

इलेक्ट्रिसिटी की सप्लाई के लिए सॉकेट एक कनेक्टर का काम करता है, जहां से इलेक्ट्रिसिटी को अप्लायंसेज में सप्लाई किया जाता है। 6 amp वाले सॉकेट में अगर आप हैवी लोड वाले अप्लायंसेज कनेक्ट करेंगे तो यह गर्म होकर पिछल सकता है। ऐसे में शॉर्ट-सर्किट लगने का खतरा रहेगा। इसलिए घर में इस्तेमाल किए जाने वाले हैवी लोड वाले अप्लायंसेज को आप पावर सॉकेट में ही यूज करें।

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