उत्तर प्रदेश में रोडवेज बसों का संचालन अब नई तकनीक से करने की तैयारी है। इसके लिए परिवहन निगम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम लागू करने जा रहा है। इस पर करीब 30 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके लिए टेंडर भी जारी कर दिया गया है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रदेश के सभी डिपो की बसों का संचालन एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया जा सकेगा। परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने बताया कि इस सिस्टम से यात्रियों की संख्या और उनकी जरूरत के हिसाब से बसों का संचालन होगा। AI तकनीक यह पता लगाने में मदद करेगी कि किस रूट पर कितने यात्रियों की आवाजाही है और वहां कितनी बसों की जरूरत है। इसी के आधार पर बसों का समय और उनके बीच का अंतर तय किया जाएगा। हर 15 मिनट में मिल सकेगी बस अभी परिवहन निगम के 120 डिपो से करीब 14,300 बसें चल रही हैं। इनसे रोजाना 17 लाख से ज्यादा यात्री सफर करते हैं। नई व्यवस्था में सभी डिपो की बसों का टाइम टेबल एक साथ जोड़ा जाएगा। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी रूट पर हर 15 मिनट में बस की जरूरत है तो अलग-अलग डिपो की बसों का समय इस तरह तय किया जाएगा कि यात्रियों को नियमित अंतराल पर बस मिलती रहे। इससे बसों का इंतजार कम होगा। जिस रूट पर ज्यादा यात्री, वहां बढ़ेंगी बसें नई तकनीक से यह भी पता चलेगा कि किस रूट पर ज्यादा यात्री सफर करते हैं और कहां बसों की जरूरत कम है। इसके हिसाब से बसों की संख्या तय की जाएगी। इससे एक तरफ यात्रियों को समय पर बस मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ खाली या कम यात्रियों वाली बसों के संचालन पर होने वाला खर्च भी कम किया जा सकेगा। चालकों की ड्यूटी और बसों की मरम्मत का भी हिसाब इस सिस्टम से सिर्फ बसों का समय ही तय नहीं होगा, बल्कि चालकों और परिचालकों की ड्यूटी, बसों की सर्विसिंग और मरम्मत का रिकॉर्ड भी डिजिटल तरीके से रखा जाएगा। परिवहन निगम के मुख्यालय और क्षेत्रीय अधिकारी एक ही प्लेटफॉर्म से बसों और डिपो के कामकाज पर नजर रख सकेंगे। यात्रियों की संख्या बढ़ने से बढ़ेगी कमाई परिवहन मंत्री के मुताबिक, बसों का सही इस्तेमाल होने और यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलने से रोडवेज में सफर करने वालों की संख्या बढ़ सकती है। इससे निगम की कमाई भी बढ़ेगी। साथ ही ईंधन, बसों और कर्मचारियों का बेहतर इस्तेमाल होने से खर्च कम करने में मदद मिलेगी। निगम की बचत और बढ़ी हुई कमाई का इस्तेमाल यात्रियों को और बेहतर सुविधाएं देने में किया जा सकेगा।
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यूपी में AI से चलेगी रोडवेज बसों की व्यवस्था: 30 करोड़ रुपये से बनेगा नया सिस्टम, 120 डिपो की 14,300 बसों का संचालन होगा एक प्लेटफॉर्म से – Lucknow News
भोपाल के एमवीएम ग्राउंड में 12 दिन चला स्वदेशी मेला: हस्तशिल्प, घरेलू सामान-देशी उत्पाद के 200 स्टॉल रहे; हजारों लोगों ने खरीदे – Bhopal News
भोपाल के एमवीएम ग्राउंड में 12 दिन चले स्वदेशी मेले का समापन हो गया है। बुधवार रात को राज्यपाल मंगुभाई पटेल भी मेले में पहुंचे। इस मेले में देशभर के स्वदेशी उत्पादों, हस्तशिल्प, दैनिक उपयोग की वस्तुओं, स्थानीय उद्योगों और स्टार्टअप्स के 200 से अधिक स्टॉल लगाए गए। मेले में खरीदारी के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम और विभिन्न प्रतियोगिताएं भी आकर्षण का केंद्र रहे। स्वदेशी जागरण मंच और स्वर्णिम भारतवर्ष फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में मेले का आयोजन किया गया। आयोजकों के मुताबिक, मेले में कारीगरों, बुनकरों, शिल्पकारों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री का अवसर मिला। इसके जरिए युवाओं, महिलाओं और नए उद्यमियों को भी स्वरोजगार व उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित किया गया। सांसद बोले- सभी 55 जिलों में हो ऐसे मेले मेले में पहुंचे सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि भोपाल का गौरवशाली इतिहास और समृद्ध संस्कृति रही है। शहर में स्वदेशी मेले के आयोजन की लंबे समय से प्रतीक्षा थी। स्वदेशी जागरण मंच का सराहनीय प्रयास हैं। उनकी इच्छा है कि इसी तरह के स्वदेशी मेले मध्य प्रदेश के सभी 55 जिलों में आयोजित किए जाएं। ऐसे आयोजन अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों और उनके प्रयासों को आपस में जोड़ने का काम करते हैं। उन्होंने भोपाल में अपने कार्यकाल के दौरान भोपाल मेले की शुरुआत का उल्लेख करते हुए कहा कि अब शहर में स्वदेशी जागरण मंच द्वारा स्वदेशी मेले का आयोजन होना प्रसन्नता की बात है। उन्होंने सुझाव दिया कि आने वाले समय में रानी कमलापति की स्मृति में भी मेले का आयोजन किया जाना चाहिए। देश को मजबूत बनाने के लिए समाज को भी आगे आना होगा-मिश्रा
भाजपा मध्य प्रदेश के मोर्चा प्रभारी मनोरंजन मिश्रा ने कहा कि वर्ष 1991 में जब पूरी दुनिया में वैश्वीकरण की चर्चा हो रही थी, उस समय स्वदेशी के विचार पर भी गंभीर विमर्श शुरू हुआ था। भोपाल में अध्ययन के दौरान उन्होंने पहली बार स्वदेशी के बारे में सुना था। उस समय उम्र कम होने के कारण इसकी व्यापकता को समझ नहीं पाए थे, लेकिन आज मेले में वक्ताओं के विचार सुनकर और यहां की गतिविधियों को देखकर स्वदेशी का महत्व समझ में आता है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी को केवल आर्थिक दृष्टिकोण से नहीं देखना चाहिए, बल्कि इसके सामाजिक और सांस्कृतिक पक्षों को भी समझना जरूरी है। जापान जैसे देशों ने अपने भीतर स्व का भाव जागृत करके प्रगति की है। भारत में भी पहले स्थानीय व्यवस्थाओं और परंपराओं के आधार पर समाज का संचालन होता था। अंग्रेजों के शासन के दौरान शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासन की जो व्यवस्थाएं आईं, स्वतंत्रता के बाद भी काफी हद तक उन्हीं पद्धतियों को अपनाया गया। कृषि और गांवों को स्वदेशी से जोड़ना जरूरी
भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष सर्वज्ञ दीवान ने कहा कि स्वदेशी का भाव कृषि और गांवों के जीवन से गहराई से जुड़ा हुआ है। वे स्वयं कृषि क्षेत्र से आते हैं। आज खेती में केवल उर्वरक ही नहीं, बल्कि बीज जैसी जरूरी चीजों के लिए भी विदेशी स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जबकि गांवों का जीवन और कृषि व्यवस्था पहले पूरी तरह स्वदेशी पर आधारित हुआ करती थी। उन्होंने कहा कि स्वदेशी को केवल खानपान या वस्तुओं के उपयोग तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे अपनी पूरी जीवनशैली और दिनचर्या का हिस्सा बनाना होगा। गांवों के लोगों और किसानों को मजबूत करने से ही देश मजबूत होगा। स्वावलंबन भारत फाउंडेशन के सीईओ संकेत सिंह राठौड़ ने कहा कि 1947 में देश की आजादी के साथ एक लड़ाई समाप्त हुई थी, लेकिन उसी वर्ष आर्थिक लड़ाई की शुरुआत भी हो गई थी। आज यह लड़ाई अपने अंतिम चरण में है। पूरी दुनिया वैश्वीकरण से स्थानीयकरण की ओर बढ़ रही है और स्वदेशी का विचार इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए
मेले के दौरान प्रतिदिन रात में सांस्कृतिक कार्यक्रमों में लोक नृत्य, गायन और वादन सहित विभिन्न रंगारंग प्रस्तुतियां हुईं। कार्यक्रम में मेला संयोजक सतीश विश्वकर्मा, स्वदेशी जागरण मंच के मध्य क्षेत्र संयोजक सुधीर दाते, स्वर्णिम भारतवर्ष फाउंडेशन के सीईओ राठौड़, सांसद शर्मा, मोर्चा प्रभारी मिश्रा, किसान संघ के अध्यक्षज्ञ दीवान, राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के संचालक संजीव शर्मा, श्रीकांत बुदौलिया, सीमा भारद्वाज, दीपक वर्मा, रमन तिवारी, शोभराज सुखवानी, अजय सोनी, अभिषेक तिवारी, हरिओम सेन, महेंद्र सिंह चौहान, वीरेंद्र पटेल, अश्विनी कुमार,सहित अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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कौन सा बैंक दे रहा है FD पर सबसे ज्यादा ब्याज? कहां मिल रहा 8.60% रिटर्न
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Highest FD Interest Rates : अगर आप भी बिना किसी जोखिम के घर बैठे अपनी गाढ़ी कमाई पर बंपर मुनाफा कमाने की सोच रहे हैं तो यह खबर सीधे आपकी जेब से जुड़ी है. भारतीय रिजर्व बैंक के रेपो रेट में इजाफा करने के बाद कई बैंकों ने फिकस्ड डिपॉजिट की ब्याज दरें बढ़ा दी हैं. देश में इस समय कौन सा बैंक एफडी पर सबसे ज्यादा ब्याज दे रहा है, आइये जानते हैं.
स्मॉल फाइनेंस बैंकों से लेकर देश के दिग्गज सरकारी और प्राइवेट बैंकों ने अपनी नई दरें लागू कर दी हैं. एफडी की ब्याज की रेस में स्मॉल फाइनेंस बैंक बड़े सरकारी और प्राइवेट बैंकों को पीछे छोड़ते नजर आ रहे हैं. अगर सही जगह और सही बैंक में पैसा लगाया जाए तो आपको एफडी पर 8.60% तक का धांसू रिटर्न मिल सकता है. (Photo : Canva)
सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक इस समय ग्राहकों पर सबसे ज्यादा मेहरबान है. बैंक ने 30 अक्टूबर 2026 से अपनी नई ब्याज दरें लागू की हैं. बैंक सामान्य ग्राहकों को 5 साल की एफडी पर8.25% का भारी-भरकम ब्याज दे रहा है. वहीं, अगर आप सीनियर सिटीजन हैं, तो आपके लिए यह दर पूरे 8.60% तक पहुंच जाती है. (Photo : Canva)
सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक में केवल 5 साल ही नहीं, बल्कि 18 महीने की अवधि वाली एफडी पर भी ग्राहकों खूब ब्याज मिल रहा है. बैंक 18 महीने की जमा राशि पर आम ग्राहकों को 8.01% और वरिष्ठ नागरिकों को 8.16% सालाना ब्याज दे रहा है. यानी अगर आप बहुत लंबे समय के लिए पैसा लॉक नहीं करना चाहते, तो डेढ़ साल की यह स्कीम आपके लिए बेहद मुफीद साबित हो सकती है. (Photo : Canva)
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उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक ने 1 नवंबर से अपनी एफडी ब्याज दरों में बदलाव किया है. बैंक ने अपनी 666 दिन की एक खास अवधि वाली एफडी पर पर सामान्य ग्राहकों को 8.10% और वरिष्ठ नागरिकों को 8.50% की दर से सालाना ब्याज देने का ऐलान किया है. इसके अलावा 2 साल से 3 साल से कम की अवधि पर आम ग्राहक को बैंक 7.50% और सीनियर सिटीजन्स को 7.90% का ब्याज दे रहा है. (Photo : canva)
कोटक महिंद्रा बैंक और एक्सिस बैंक भी अपने ग्राहकों को एफडी पर अच्छा ब्याज दे रहे हैं. कोटक महिंद्रा बैंक ने 4 नवंबर से अपनी चुनिंदा एफडी दरों में बदलाव करते हुए 2 से 3 साल से कम की एफडी पर आम लोगों को 6.80% और बुजुर्गों को 7.55% ब्याज देना शुरू किया है. वहीं एक्सिस बैंक 2 से 10 साल की एफडी पर सामान्य ग्राहकों को अधिकतम 6.60% और 5 से 10 साल की अवधि पर वरिष्ठ नागरिकों को 7.35% तक का आकर्षक रिटर्न दे रहा है. (Photo : Canva)
पंजाब नेशनल बैंक (PNB) और बैंक ऑफ इंडिया भी एफडी पर 7.35 फीसदी तक ब्याज दे रहे हैं. पीएनबी अपनी 444 दिन की स्पेशल एफडी पर आम ग्राहक को 6.60% और सीनियर सिटीजन को 7.10% ब्याज दे रहा है. बैंक ऑफ इंडिया ने 3 करोड़ रुपये से कम जमा के लिए अपनी नई ‘BOI अक्षय एफडी’ लॉन्च की है. इस स्कीम में सामान्य नागरिकों को 6.85%, 60 से 80 वर्ष के वरिष्ठ नागरिकों को 7.35% और 80 वर्ष से अधिक के सुपर सीनियर सिटीजन्स को 7.50% ब्याज मिल रहा है.
एफडी में पैसा लगाने से पहले सिर्फ सबसे ऊंची ब्याज दर देखकर ही फैसला न कर लें, बल्कि कुछ बुनियादी नियमों को भी समझें. निवेश करने से पहले यह जरूर जांच लें कि जमा की अवधि आपकी वित्तीय योजना के अनुकूल है या नहीं. इसके साथ ही समय से पहले पैसा निकालने पर लगने वाली पेनल्टी और शर्तों भी अच्छे से जांच लें.
एक और सबसे महत्वपूर्ण बात जो हर निवेशक को गांठ बांध लेनी चाहिए, वह है एफडी से होने वाली कमाई पर लगने वाला टैक्स. फिक्स्ड डिपॉजिट से मिलने वाला ब्याज पूरी तरह कर-मुक्त नहीं होता. यह आपकी सालाना आय में जुड़कर आपके तय इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स के दायरे में आता है.
केंद्रिय रेल मंत्री से मिले सीएम सम्राट चौधरी: दिवाली-छठ पर बिहार के लिए स्पेशल ट्रेनें चलाने की मांग – New Delhi News
बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बुधवार को नई दिल्ली में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव से मुलाकात कर दिवाली और छठ महापर्व के दौरान बिहार के लिए विशेष ट्रेनें चलाने का अनुरोध किया। बैठक में बिहार की लंबित रेल परियोजनाओं में तेजी लाने, रेलवे के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने और यात्री सुविधाओं के विस्तार पर चर्चा हुई। इसके अलावा सूचना प्रौद्योगिकी और औद्योगिक निवेश बढ़ाने से जुड़े प्रस्तावों पर भी विचार-विमर्श हुआ। बैठक में बिहार के मढ़ौरा और मधेपुरा स्थित रेल इंजन निर्माण कारखानों के आधुनिकीकरण और उत्पादन क्षमता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया। मौजूदा उत्पादन व्यवस्था वर्ष 2028 में समाप्त होने के करीब छह महीने बाद नए स्वरूप में उत्पादन दोबारा शुरू करने और दोनों कारखानों की क्षमता दोगुनी करने की दिशा में पहल करने पर चर्चा हुई। सम्राट चौधरी ने बिहार में रेल नेटवर्क के विस्तार और यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने की जरूरत बताई। बैठक में कई प्रस्तावों पर सकारात्मक सहमति बनने के साथ विकास परियोजनाओं को गति देने के लिए केंद्र और राज्य सरकार के बीच बेहतर समन्वय पर जोर दिया गया।
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AIIMS-जोधपुर में पहली बार IVF तकनीक से बच्चे का जन्म: सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल और आइवीएफ से अब दंपतियों में इलाज की उम्मीद जगी – Jodhpur News
अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (AIIMS) जोधपुर में पहली बार इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) एवं सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल तकनीक की सहायता से बच्चे का जन्म हुआ है।
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ऑब्सट्रक्टिव एज़ोस्पर्मिया के कारण कई दंपति पेरेंट्स नहीं बन पा रहे थे। प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की एचओडी डॉ. प्रतिभा सिंह के मार्गदर्शन में एसोसिएट प्रोफेसर एवं आईवीएफ विशेषज्ञ डॉ. मनु गोयल, यूरोलॉजी विभाग के डॉ. दीपक भिरुड, भ्रूणविज्ञानी डॉ. गिरीश की टीम ने इस तकनीक में शामिल थे।
कई पुरुषों में ऑब्सट्रक्टिव एज़ोस्पर्मिया की जन्मजात समस्या होती है
ऑब्सट्रक्टिव एज़ोस्पर्मिया एक ऐसी स्थिति है जिसमें पुरुष के अंडकोष में शुक्राणु बनते हैं, लेकिन प्रजनन मार्ग में अवरोध के कारण वे स्पर्म में नहीं पहुंच पाते। कुछ मामलों में यह स्थिति जन्मजात होती है। ऐसी स्थिति में सर्जरी के माध्यम से प्रजनन मार्ग से शुक्राणु प्राप्त किए जा सकते हैं।
सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल के बाद आईवीएफ-आईसीएसआई तकनीक ऑब्सट्रक्टिव एज़ोस्पर्मिया से पीड़ित कुछ पुरुषों के लिए इलाज का विकल्प है। जिससे दंपति अपने शुक्राणु एवं अंडाणु की सहायता से संतान प्राप्ति कर सकते हैं।
दंपत्ति का इलाज करने वाली एम्स डॉक्टर्स की टीम।
माां और बच्चा दोनों स्वस्थ डॉ. मनु गोयल ने बताया कि इस मामले में सर्जरी के माध्यम से प्राप्त शुक्राणुओं का उपयोग इन विट्रो फर्टिलाइजेशन (आईवीएफ) एवं इंट्रासाइटोप्लाज्मिक स्पर्म इंजेक्शन (आईसीएसआई) तकनीक में किया गया।
इस तकनीक में एक शुक्राणु को सीधे अंडाणु में प्रविष्ट कराया जाता है। इसके बाद विकसित भ्रूण को गर्भाशय में स्थानांतरित किया गया, जिससे सफल गर्भावस्था के बाद बच्चे का जन्म हुआ। माता और शिशु दोनों स्वस्थ हैं।
बांझपन की समस्या महिला-पुरुष दोनों में संभव प्रसूति एवं स्त्री रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. प्रतिभा सिंह ने बताया- बांझपन की समस्या पुरुष या महिला, किसी एक अथवा दोनों में हो सकती है। इसलिए उचित इलाज के लिए दोनों की समय पर और सभी जांच आवश्यक है। रिप्रोडेक्टिव मेडिसिन में हुई प्रगति से बांझपन से जूझ रहे कई दंपतियों को इलाज के नए विकल्प उपलब्ध हुए हैं।
एम्स जोधपुर के सहायक प्रजनन तकनीक (असिस्टेड रिप्रोडेक्टिव टेक्नोलॉजी- ART) केंद्र में पिछले दो साल से सर्जिकल स्पर्म रिट्रीवल एवं संबंधित प्रजनन इलाज की सुविधा उपलब्ध हैं।
चिकन और रंगीन सब्जियों से बनाएं चटपटे हक्का नूडल्स, आसान है तरीका
Chicken Hakka Noodles Recipe: गरमागरम नूडल्स की प्लेट सामने आते ही खाने का मन बन जाता है. साथ में हल्के सुनहरे चिकन के टुकडे, रंगीन सब्जियां और सॉस का चटपटा स्वाद हो तो मजा और भी बढ जाता है. चिकन हक्का नूडल्स की यही खासियत है कि इसमें कुछ आम सामग्रियों से ऐसा खाना तैयार हो जाता है, जिसे दोपहर के हल्के खाने, शाम की भूख या रात के डिनर में परोसा जा सकता है. इसे बनाने के लिए किसी खास मशीन या बहुत सारे मसालों की जरूरत भी नहीं होती. एक खुली कडाही, उबले हुए नूडल्स, पका हुआ चिकन और कटी हुई सब्जियां काफी हैं. हालांकि, स्वाद के साथ इसकी बनावट अच्छी रखने के लिए कुछ बातों पर ध्यान देना जरूरी है.
नूडल्स जरूरत से ज्यादा उबल जाएं या सब्जियां देर तक पकती रहें, तो पूरा मिश्रण नरम होकर चिपक सकता है. वहीं, तैयारी पहले से करके चीजों को सही क्रम में मिलाया जाए, तो घर पर भी अलग-अलग नूडल्स और हल्की कुरकुरी सब्जियों वाली स्वादिष्ट प्लेट तैयार की जा सकती है.
बनाने से पहले सारी सामग्री निकाल लें
करीब दो लोगों के लिए एक बाउल उबले हुए नूडल्स और पांच से छह उबले हुए, बिना हड्डी वाले चिकन के टुकडे लें. साथ में एक मध्यम प्याज, एक छोटी शिमला मिर्च और एक छोटी गाजर चाहिए. स्वाद के लिए दो बडे चम्मच तक सोया सॉस, एक छोटा चम्मच सिरका, आधा छोटा चम्मच काली मिर्च पाउडर और आधा छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर रखें. नमक स्वाद के अनुसार लें. चिकन और सब्जियां भूनने के लिए एक से दो बडे चम्मच तेल से शुरुआत कर सकते हैं. आखिर में ऊपर से डालने के लिए थोडा बारीक कटा हरा प्याज भी रख लें. बाउल और चिकन के टुकडों का आकार अलग हो सकता है, इसलिए सॉस और मसाले एक साथ पूरे डालने के बजाय थोडे-थोडे मिलाएं.
चिकन को पहले अच्छी तरह पका लें
बिना हड्डी वाले चिकन को छोटे और लगभग बराबर आकार के टुकडों में रखें, ताकि वे एक साथ पकें और नूडल्स में आसानी से मिल सकें. इन्हें पानी में उबालकर पूरी तरह पकाएं, फिर छानकर अलग रख दें. चिकन पकने का समय टुकडों के आकार पर निर्भर करेगा, इसलिए केवल तय मिनट देखकर उसे न निकालें. उबले चिकन पर पानी ज्यादा हो तो उसे निकल जाने दें. इससे तेल में डालते समय छींटे कम आएंगे और टुकडों को हल्का सुनहरा करना आसान होगा. कच्चे चिकन के लिए इस्तेमाल किए गए चाकू और बोर्ड को अच्छी तरह साफ करने के बाद ही सब्जियों के लिए लें.
नूडल्स उबालते समय रखें ध्यान
नूडल्स को पैकेट पर दिए निर्देश के अनुसार उबालें और पूरी तरह गलने से पहले उनकी बनावट जांच लें. उन्हें बाद में चिकन और सॉस के साथ भी पकाना है, इसलिए बहुत नरम करने की जरूरत नहीं है. पकने पर तुरंत छान लें और पानी अच्छी तरह निकलने दें. जरूरत लगे तो थोडा तेल डालकर हल्के हाथों से मिलाएं, जिससे वे आपस में कम चिपकें. गर्म नूडल्स को बार-बार चम्मच से चलाने से बचें, क्योंकि इससे वे टूट सकते हैं. उन्हें पहले से तैयार रखेंगे तो कडाही में बाकी चीजें भूनने के बाद काम जल्दी होगा.
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सब्जियों को पतला और एक जैसा काटें
प्याज को पतले लंबे टुकडों में काट लें. गाजर और शिमला मिर्च की भी पतली लंबी पट्टियां बनाएं. मोटी गाजर देर से पकती है, जबकि बहुत पतली शिमला मिर्च जल्दी नरम हो सकती है. इसलिए कटाई लगभग एक जैसी रखने से सब्जियां ठीक तरह से पकेंगी. धोने के बाद सब्जियों का अतिरिक्त पानी भी हटा दें. नूडल्स बनाते समय सब्जियां, चिकन और सॉस पास में रखें, क्योंकि गर्म कडाही में इन्हें मिलाने के दौरान बार-बार तैयारी के लिए रुकना ठीक नहीं रहता.
चिकन को दें हल्का सुनहरा रंग
एक खुली कडाही या बडे पैन में तेल गर्म करें. इसमें उबले हुए चिकन के टुकडे डालें और पलटते हुए हल्का सुनहरा होने दें. चिकन पहले से पका हुआ है, इसलिए इसे बहुत देर तक तलने की जरूरत नहीं है. ज्यादा भूनने पर टुकडे सूखे लग सकते हैं. अब गाजर डालकर थोडा चलाएं और उसके बाद प्याज व शिमला मिर्च मिलाएं. मध्यम से तेज आंच पर सब्जियां भूनें, लेकिन उन्हें लगातार ध्यान से चलाते रहें. सब्जियों में हल्का कुरकुरापन बचा रहे तो नूडल्स खाने में अच्छे लगते हैं.
सॉस और मसाले मिलाने का सही समय
सब्जियां हल्की पक जाएं तो आंच थोडी कम करके सोया सॉस, सिरका, काली मिर्च और लाल मिर्च पाउडर डालें. पहले सोया सॉस की कुछ मात्रा मिलाएं और बाकी जरूरत के अनुसार डालें. अलग-अलग ब्रांड के सॉस में नमक और स्वाद की तीव्रता अलग हो सकती है. इसी वजह से साधारण नमक बहुत कम डालें और बाद में स्वाद देखकर बढाएं. मसालों को चिकन और सब्जियों के साथ मिलाएं, लेकिन सूखे मसाले डालने के बाद उन्हें खाली गर्म पैन में देर तक न रहने दें.
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नूडल्स को हल्के हाथों से मिलाएं
अब उबले हुए नूडल्स कडाही में डालें. दो चम्मच या चिमटे की मदद से उन्हें नीचे से उठाते हुए चिकन और सब्जियों के साथ मिलाएं. जोर से दबाकर चलाने पर नूडल्स टूट सकते हैं. सॉस पूरे मिश्रण में बराबर फैल जाए तो एक छोटा हिस्सा चखकर नमक और तीखापन जांच लें. नूडल्स पहले से पके हैं, इसलिए उन्हें केवल अच्छी तरह गर्म होने और स्वाद मिलने तक पकाना है. छोटी कडाही में ज्यादा मात्रा भरने के बजाय दो बार में बनाना बेहतर रहेगा.
गर्मागर्म परोसने पर मिलेगा अच्छा स्वाद
तैयार चिकन हक्का नूडल्स पर बारीक कटा हरा प्याज डालें और तुरंत परोसें. चाहें तो साथ में अलग से चिली सॉस रख सकते हैं, ताकि हर कोई अपनी पसंद के अनुसार तीखापन बढा सके. बच्चों के लिए बना रहे हैं तो हरी मिर्च या अतिरिक्त चिली फ्लेक्स डालना जरूरी नहीं है. सामग्री काटने और चिकन उबालने सहित इसे बनाने में करीब 35 मिनट या उससे ज्यादा लग सकते हैं. तैयारी पहले से हो तो कडाही में पकाने का काम जल्दी पूरा हो जाएगा.
अधिवक्ताओं ने टीन शेड की जगह बेचने का आरोप लगाया: मेरठ कलेक्ट्रेट में 12 लाख रुपए में जगह बेचने और हटाने की शिकायत डीएम से की – Meerut News
मेरठ कलेक्ट्रेट परिसर में टीन शेड की जगह को लेकर दो अधिवक्ताओं ने जिलाधिकारी से शिकायत की है। उन्होंने राजकीय संपत्ति पर अवैध कब्जे का आरोप लगाया और अपनी सीट वापस दिलाने की मांग की है। अधिवक्ता निखिल कुमार सिंह और उनकी पत्नी अनुष्का भारद्वाज पिछले 4 साल से महात्मा गांधी बिल्डिंग के पीछे टीन शेड के नीचे विधि व्यवसाय कर रहे थे। आरोप है कि 23 अक्टूबर 2026 को रविंद्र कुमार और प्रशांत गुप्ता ने यह जगह 12 लाख रुपए में मोहम्मद शहादत अब्बासी, रफीक आलम, मोहम्मद सुहैब और फरहा अब्बासी को बेच दी। इसके बाद निखिल कुमार सिंह और अनुष्का भारद्वाज को वहां से हटा दिया गया। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि यह जमीन नजारत की है। उन्होंने डीएम से अपनी सीट वापस दिलाने और आरोपियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग की है। उन्होंने प्रदर्शन किया और धरने पर बैठ गए। इसके बाद प्रशासनिक अधिकारी को ज्ञापन देते हुए मामले की शिकायत उच्च अधिकारियों से भी करने की की है। उनका कहना है कि गलत तरीके से आवंटन किया गया है।
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होर्मुज से भारतीय जहाजों को गुजरने देगा ईरान: 8 महीने से बंद था रास्ता, इसी रूट से 40% कच्चा तेल मंगाता है भारत
तेहरान5 घंटे पहले
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ईरान ने करीब 8 महीने बाद भारतीय जहाजों को होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने की छूट दे दी है। अब भारतीय जहाज इस रास्ते से बिना किसी रोक-टोक के गुजर सकेंगे।
ईरान ने चीन, इराक और कतर के जहाजों को भी यह छूट दी है। 28 फरवरी से इस रास्ते पर जहाजों की आवाजाही पर पाबंदियां लगी हुई थीं। भारत अपने कुल कच्चे तेल आयात का करीब 40% इसी रास्ते से मंगाता है।
ईरान की न्यूज वेबसाइट ईरानवायर और अनादोलू एजेंसी की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा और विदेश नीति समिति के उपाध्यक्ष अहमद हयात-मोगद्दम ने मंगलवार को इसकी जानकारी दी।

भारत को दवाओं की सप्लाई के लिए मिली छूट
रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान ने भारत को यह छूट इसलिए दी है, ताकि उसे भारत से दवाएं मिलती रहें। वहीं, चीन को छूट देने के पीछे ईरान की उम्मीद है कि मुश्किल वक्त में बीजिंग उसका राजनीतिक रूप से साथ देगा।
हालांकि, भारतीय और चीनी जहाजों को होर्मुज से गुजरने के लिए पैसे देने होंगे। वहीं, कतर के जहाज बिना कोई शुल्क दिए इस रास्ते से गुजर सकेंगे। इराक को किस वजह से छूट दी गई है, यह साफ नहीं किया गया है।
भारत के लिए क्यों अहम है होर्मुज स्ट्रेट
भारत अपनी जरूरत का 85% से ज्यादा कच्चा तेल दूसरे देशों से खरीदता है। इसमें से करीब 40% तेल होर्मुज स्ट्रेट से होकर आता है। सऊदी अरब, इराक, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) जैसे देशों से भारत आने वाले तेल के लिए यह अहम रास्ता है।
अगर भारत रोजाना 50 लाख बैरल कच्चा तेल विदेशों से मंगाता है, तो इसमें करीब 20 लाख बैरल तेल होर्मुज के रास्ते आता है। ऐसे में इस रास्ते पर पाबंदी लगने से भारत की तेल सप्लाई पर बड़ा असर पड़ सकता है।
होर्मुज सिर्फ कच्चे तेल के लिए ही जरूरी नहीं है। भारत खाड़ी देशों से बड़ी मात्रा में LNG यानी प्राकृतिक गैस और LPG यानी रसोई गैस भी मंगाता है। इनकी सप्लाई के लिए भी यह रास्ता अहम है।

होर्मुज से जहाज गुजरने पर भारत को क्या फायदा होगा
भारतीय जहाजों को छूट मिलने से तेल और गैस की सप्लाई में रुकावट का खतरा कम हो सकता है। इससे भारत को तीन बड़े फायदे हो सकते हैं।
1. तेल की सप्लाई आसान होगी: खाड़ी देशों से कच्चा तेल लाने वाले भारतीय जहाज होर्मुज से गुजर सकेंगे। इससे तेल की सप्लाई जारी रखने में मदद मिलेगी।
2. पेट्रोल-डीजल की कीमतें कम हो सकती हैं: होर्मुज स्ट्रेट से तेल की सप्लाई आसान होने पर अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतें घट सकती हैं। इसका फायदा भारत को भी मिल सकता है और पेट्रोल-डीजल सस्ता होने की उम्मीद बढ़ सकती है।
3. दवाओं और दूसरे सामान का कारोबार आसान होगा: भारत से ईरान जाने वाले जहाजों को छूट मिलने से दवाओं की सप्लाई जारी रखने में मदद मिलेगी। इससे दोनों देशों के बीच कारोबार भी आसान हो सकता है।
ईरान का दावा- बारूदी सुरंगों से 4 तेल टैंकर तबाह
ईरान की रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने दावा किया है कि होर्मुज स्ट्रेट के दक्षिण में प्रतिबंधित रास्ते से गुजरने की कोशिश कर रहे चार तेल टैंकर समुद्री बारूदी सुरंगों से टकराकर तबाह हो गए।
रिवोल्यूशनरी गार्ड्स के बयान के मुताबिक, चारों टैंकरों में आग लगी हुई थी। इसके अलावा दो अन्य जहाजों को भी कब्जे में लेने का दावा किया गया है।
ईरान ने अमेरिका दोबारा जंग की चेतावनी दी
ईरान ने अमेरिका को साफ चेतावनी दी है कि अगर युद्ध दोबारा शुरू हुआ तो वह मुकाबले के लिए पूरी तरह तैयार है। अमेरिका के साथ बातचीत में ईरान के मुख्य वार्ताकार मोहम्मद बागेर गालिबफ ने कहा कि उनका देश ‘ट्रिगर पर उंगली रखकर युद्ध के लिए तैयार है।
ईरान ने कहा है कि वह होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने के लिए तैयार है, लेकिन इसके लिए अमेरिका को उसकी पुरानी मांगें माननी होंगी।
वहीं, ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने कहा कि उनकी सरकार बातचीत के जरिए संकट का समाधान निकालने की कोशिश कर रही है। उन्होंने मंगलवार को कहा, ‘अगर दोबारा युद्ध शुरू होता है तो इससे किसी को फायदा नहीं होगा।’
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होर्मुज में भारतीय जहाज पर हमला, एक की मौत:14 भारतीय सवार थे, 13 को बचाया गया; पिछले महीने 30 जहाजों पर हमले हुए

होर्मुज स्ट्रेट में 2 नवंबर को एक भारतीय जहाज पर हमला हुआ। इसमें गुजरात के एक नाविक की मौत हो गई। जहाज पर सवार बाकी 13 भारतीयों को ओमान के कोस्ट गार्ड ने सुरक्षित बचा लिया। मृतक की पहचान गांधार नाहीम अजीज के रूप में हुई है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
सहरसा नगर निगम में दूसरे दिन भी तालाबंदी: 40 से ज्यादा पार्षदों ने नगर आयुक्त के निलंबन का विरोध किया, कोसी आयुक्त को ज्ञापन सौंपा – Saharsa News
सहरसा नगर निगम में नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा के निलंबन और तबादले के विरोध में लगातार दूसरे दिन भी कामकाज ठप रहा। वार्ड पार्षदों और उनके प्रतिनिधियों ने निगम कार्यालय में तालाबंदी कर विरोध जताया। इस दौरान पार्षदों ने नगर आयुक्त का निलंबन वापस लेने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। कोसी प्रमंडल के आयुक्त को सौंपा ज्ञापन 40 से अधिक वार्ड पार्षदों के हस्ताक्षर वाला संयुक्त ज्ञापन कोसी प्रमंडल के आयुक्त को सौंपा गया। ज्ञापन की प्रतियां मुख्यमंत्री, नगर विकास एवं आवास मंत्री, जिलाधिकारी और सदर एसडीओ को भी भेजी गईं। इसमें पार्षदों ने नगर आयुक्त के निलंबन और तबादले पर आपत्ति जताते हुए इसे वापस लेने की मांग की। दीपावली और छठ से पहले सफाई व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका ज्ञापन में पार्षदों ने कहा कि दीपावली और छठ जैसे प्रमुख त्योहारों से पहले नगर आयुक्त के निलंबन और सफाई कर्मचारियों की हड़ताल से शहर की सफाई व्यवस्था प्रभावित हुई है। उनके अनुसार, प्रभात कुमार झा के कार्यकाल में जलजमाव से राहत दिलाने, सड़क और नाला निर्माण, तालाबों के सुधार, ठोस कचरा प्रबंधन और सफाई से जुड़े कई काम किए गए थे। पार्षदों ने आशंका जताई कि उनके हटने से शहर में चल रहे विकास कार्यों की रफ्तार धीमी पड़ सकती है। 68 विभागीय योजनाओं का भी किया जिक्र पार्षदों ने ज्ञापन में निगम की 68 विभागीय योजनाओं का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि ये योजनाएं तत्कालीन मुख्यमंत्री के दौरे और राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) के आदेशों के अनुपालन में जनहित को ध्यान में रखकर शुरू की गई थीं। पार्षदों ने आरोप लगाया कि फेसबुक पर चलाए गए भ्रामक अभियानों के आधार पर नगर आयुक्त का पक्ष सुने बिना उन्हें निलंबित कर दिया गया। उन्होंने इस कार्रवाई को प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के खिलाफ बताया। निलंबन वापस लेने और निष्पक्ष जांच की मांग धरना और तालाबंदी में शामिल पार्षदों ने प्रभात कुमार झा का निलंबन तत्काल वापस लेने के साथ पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि जल्द कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो आंदोलन को और तेज किया जाएगा।
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