Monday, July 27, 2026
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गौ-सम्मान के लिए विधायक नंगे पैर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे: विजय मंत्र के जाप से शुरू हुई रैली, 3.47 लाख साइन सौंपे – Bhilwara News




गौ सम्मान अभियान के दूसरे चरण में भीलवाड़ा में गौभक्तों ने रैली निकाली। शहर विधायक अशोक कोठारी समेत प्रतिनिधिमंडल करीब 2 किमी नंगे पैर चलकर जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंचा और राष्ट्रपति व प्रधानमंत्री के नाम 3 लाख 47 हजार हस्ताक्षरयुक्त प्रार्थना पत्र कलेक्टर को सौंपा। अभियान के तहत देश के 780 केंद्रों पर जिला कलेक्टरों के माध्यम से ज्ञापन दिए जा रहे हैं। विजय मंत्र के जाप से शुरू हुई रैली रैली से पहले जिले के अलग-अलग क्षेत्रों से गौभक्त बसों और चौपहिया वाहनों के काफिले के साथ हरिसेवा वाटिका पहुंचे। यहां संगीतमय वातावरण में विजय मंत्र का सामूहिक जाप किया गया। इसके बाद संतों के आशीर्वचन हुए और संकीर्तन प्रार्थना रैली शुरू हुई। रैली में स्कूली स्टूडेंट्स, एनजीओ सदस्य और बड़ी संख्या में गौभक्त शामिल हुए। बच्चे-बच्चियां हाथों में तख्तियां लेकर गौ माता के जयकारे लगाते हुए चले। 2 किमी नंगे पैर कलेक्टर कार्यालय पहुंचे रैली हरिसेवा वाटिका से शुरू होकर सीताराम जी की बावड़ी, सूचना केंद्र चौराहा, बालाजी मार्केट, गोल प्याऊ चौराहा, अंबेडकर सर्किल और मशीनरी मार्केट होते हुए जिला कलेक्टर कार्यालय पहुंची। रैली में गौभक्त भजनों पर चलते और राधा-कृष्ण के भजन गाते नजर आए। सजी-धजी बैलगाड़ियां भी रैली में शामिल हुईं, जो लोगों के आकर्षण का केंद्र रहीं। दुर्गा शक्ति अखाड़ा की बच्चियां भी हाथों में तख्तियां लेकर रैली में शामिल हुईं। कलेक्टर कार्यालय पहुंचने के बाद प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के नाम प्रार्थना पत्र सौंपा। बड़ी संख्या में गौभक्त कलेक्टर कार्यालय के बाहर भी मौजूद रहे। गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग भीलवाड़ा विधायक अशोक कोठारी ने कहा कि अभियान का मुख्य उद्देश्य गौ माता को राष्ट्रमाता घोषित करवाना और देश में गोहत्या पर पूर्ण प्रतिबंध लगवाना है। उन्होंने कहा कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने भी स्वराज्य से अधिक गो रक्षा को महत्वपूर्ण माना था, लेकिन आजादी के इतने वर्षों बाद भी यह मांग पूरी नहीं हुई। अभियान के तहत कुल 40 करोड़ हस्ताक्षर जुटाकर केंद्र सरकार को सौंपने का लक्ष्य रखा गया है। इसके पहले चरण में 27 अप्रैल 2026 तक सवा 5 करोड़ हस्ताक्षर जमा किए गए थे। दूसरे चरण में भीलवाड़ा जिले से 3 लाख 47 हजार हस्ताक्षरयुक्त ज्ञापन जिला कलेक्टर को सौंपा गया। संतों और गौभक्तों की मौजूदगी कार्यक्रम में महामंडलेश्वर हंसाराम, जिला प्रचारक संत लालजी महाराज, काठिया बाबा करेड़ा से संत सरजू दास, जैन सुरेश मुनि, जिला समन्वयक सुनील जागेटिया, संभाग प्रभारी नंदकिशोर साहू और जिला प्रभारी जगदीश तेली मौजूद रहे। इनके अलावा दुर्गा शक्ति अखाड़ा की बच्चियां, एनजीओ सदस्य और बड़ी संख्या में गौभक्त व शहरवासी शामिल हुए।



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कन्नौज में पत्थर उतारते समय पलटा डंपर: डेढ़ घंटे जाम में फंसी एंबुलेंस और स्कूल बस, चालक सुरक्षित, प्रेशर पाइप की पिन टूटी – Kannauj News




कन्नौज के गुरसहायगंज कोतवाली क्षेत्र में फर्रुखाबाद सीमा से सटे रामाश्रम के पास सोमवार सुबह बड़ा हादसा हो गया। सड़क निर्माण के लिए पत्थर उतारते समय एक डंपर अचानक सड़क पर पलट गया। हादसे में डंपर में भरे पत्थर सड़क पर फैल गए, जिससे कन्नौज-फर्रुखाबाद मार्ग पर लंबा जाम लग गया। हालांकि चालक सुरक्षित बच गया। जानकारी के अनुसार, सोमवार सुबह करीब 8 बजे ग्वालियर से पत्थर लेकर पहुंचे डंपर चालक नरसिंह ने प्रेशर सिस्टम चालू कर पत्थर उतारने का प्रयास किया। इसी दौरान प्रेशर पाइप की पिन टूट गई और तेज धमाके के साथ डंपर अनियंत्रित होकर सड़क पर पलट गया। देखते ही देखते सड़क पर पत्थर बिखर गए और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं। नदी किनारे सड़क मजबूत करने का चल रहा था काम मौके पर मौजूद पोकलैंड चालक बृजेश कुमार ने बताया कि नदी किनारे सड़क के किनारों को मजबूत करने के लिए बड़े-बड़े पत्थर डाले जा रहे थे। इसी दौरान डंपर पलट गया। उन्होंने बताया कि हादसे में चालक को कोई चोट नहीं आई। डेढ़ घंटे तक लगा रहा जाम घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंच गई। जेसीबी की मदद से पलटे डंपर और सड़क पर फैले पत्थरों को हटाया गया। इसके बाद यातायात धीरे-धीरे बहाल कराया गया। बताया गया कि करीब डेढ़ घंटे तक जाम लगा रहा, जिसमें एंबुलेंस, स्कूल बस समेत कई छोटे-बड़े वाहन फंसे रहे। स्थानीय लोगों ने उठाई सुरक्षा मानकों की मांग हादसे के बाद स्थानीय लोगों ने निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा मानकों का सख्ती से पालन कराने की मांग की। उनका कहना है कि भारी निर्माण सामग्री उतारते समय पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था सुनिश्चित की जाए, ताकि भविष्य में इस तरह के हादसों की पुनरावृत्ति न हो।



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पूर्णिया में 28 नामजद, 250 अज्ञात पर FIR: हंगामा मामले में 4 गिरफ्तार; मजिस्ट्रेट के बयान पर दर्ज हुई प्राथमिकी, 6 आयोजकों के भी नाम – Purnia News




पूर्णिया में छात्र आंदोलन के दौरान जमकर हंगामा हुआ। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव कर दिया। जिसके बाद उग्र भीड़ पर पुलिस ने लाठीचार्ज कर दिया। पथराव में तीन पुलिसकर्मी घायल हुए थे। इस मामले में कुल 28 नामजद और लगभग 250 अज्ञात लोगों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने अब तक चार लोगों को गिरफ्तार किया है। प्राथमिकी एक मजिस्ट्रेट के बयान पर दर्ज की गई है। दर्ज प्राथमिकी में उन छह आयोजकों के नाम भी शामिल है, जो इस आंदोलन की अगुवाई कर रहे थे। आंदोलन के दौरान पथराव, हिंसा और लाठीचार्ज की घटनाएं सामने आई थी। छात्र आंदोलन के बीच हुई थी हिंसक झड़प दरसल 25 जुलाई 2026 को भीम आर्मी (भारत एकता मिशन) और आजाद समाज पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष चंद्रशेखर आजाद के आह्वान पर इंदिरा गांधी स्टेडियम में शांतिपूर्ण प्रोटेस्ट आयोजित किया गया। इस दौरान DM अंशुल कुमार और SSP शौर्य सुमन ने छात्रों के बीच पहुंच कर उनसे ज्ञापन लिया और प्रोटेस्ट समाप्त कराया गया। प्रोटेस्ट के बीच सैंकड़ों की संख्या में लोग सड़क पर उतर आए और समाहरणालय की ओर कूच करने लगे। इस बीच पथराव, तोड़फोड़ और लाठीचार्ज हुआ। जिला पशुपालन पदाधिकारी के आवेदन पर मामला दर्ज इस मामले में जिला पशुपालन पदाधिकारी (D.A.H.O.) सह दंडाधिकारी सी.एस. आजाद के बयान पर केहाट थाना (मामला सं० 332/26) में भारतीय न्याय संहिता (BNS) और ‘सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम’ (Prevention of Damage to Public Property Act) की कई गंभीर धाराओं के तहत प्राथमिकी दर्ज की गई है। पुलिस ने 25 जुलाई को ही 4 लोगों को गिरफ्तार कर लिया था। अब इस मामले में D.A.H.O. के आवेदन पर कुल 28 नामजदों के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है । सभी को भेजा गया जेल हिंसक झड़प के वक्त घटनास्थल से भागने के दौरान पुलिस ने 4 मुख्य अभियुक्तों को गिरफ्तार किया है। जिन्हें 25 जुलाई को हिरासत में लिया गया और 26 जुलाई की देर शाम मेडिकल कराकर न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। आरोपियों की पहचान नदीम सरवर(21), पिता गुलाम सरवर, निवासी- इस्लामनगर माधोपाड़ा, थाना- सहायक खजांची शेख सैफुद्दीन अली(22), पिता- शेख मुबारक अली, निवासी- राजाबाड़ी आलम मंजिल, थाना- सहायक खजांची यासीर अरफात, पिता- अब्दुल बासीत, निवासी- बकरीकोल, थाना- मरंगा शिवम कुमार गोस्वामी, पिता- इंदु शेखर गोस्वामी, निवासी- माफा पेट्रोल पंप, थाना- मरंगा 6 आयोजकों पर नामजद FIR छात्र आंदोलन के आयोजकों को भी पुलिस ने नामजद किया है। प्राथमिकी में आंदोलन का नेतृत्व करने और भीड़ को उकसाने के आरोप में सौर्य राय, साजिद, दिलीप राय, अजय भारती, अली खान (स्कूल संचालक), कुमार आदित्य का नाम शामिल किया गया है। नामजद और 200-250 अज्ञात पर FIR इस मामले में पुलिस ने डॉ. अलताफ, डॉ. शब्बीर, मो. अली, मो. आरजू हक, विक्रम पासवान (भीम आर्मी), मो. मोशरफ आलम उर्फ प्रिंस, यजदानी राज, फैजल राज, अजमेर करीम, सदाम हुसैन, मो. सहवाज आलम, शेख सद्दाम, मो. इरशाद पुरनवी, मो. अजमेर, मो. निक्की, मो. चाहत, मो. अकरम रजा, अल्ताफ हुसैन, मो. अली अहमद खान पर नामजद प्राथमिकी दर्जी की है, जबकि 200 से 250 अज्ञात पर भी FIR हुआ है ।
लगाए गए ये धारा के. हाट पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए BNS की धाराओं 109(1), 121(1), 121(2), 132, 329(4), 292, 61(2), 223, 191(2), 191(3), 190, 126(2), 115(2) और Prevention of Damage to Public Property Act की धारा 3/4 के तहत केस दर्ज कर लिया है। मामले की अग्रतर जांच पुलिस उप-निरीक्षक (S.I) संजीत कुमार को सौंपी गई है। पुलिस अन्य अज्ञात उपद्रवियों की पहचान के लिए सीसीटीवी (CCTV) और वीडियो फुटेज खंगाल रही है।

विरोध प्रदर्शन का पूरा घटनाक्रम दिए गए आवेदन के अनुसार 25 जुलाई 2026 को सुबह 11:00 बजे इंदिरा गांधी स्टेडियम में आंदोलन के बाद आर.एन. साह चौक तक मार्च निकाला गया। विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए दंडाधिकारियों (सज्जन कुमार, मनीष चंद्र यादव, विलट पासवान) और भारी पुलिसबल की तैनाती की गई थी। दोपहर 2:30 बजे उपद्रव पैदल मार्च जब आर.एन. साह चौक पहुंचा, तब प्रदर्शनकारियों में शामिल असामाजिक और उपद्रवी तत्वों ने अचानक उग्र होकर सड़क जाम कर दी और नारेबाजी शुरू कर दी। इस दरमियान असामाजिक तत्वों ने कलेक्ट्रेट (समाहरणालय) की तरफ बढ़ने का प्रयास करते हुए बैरिकेड्स और ट्रॉलियों को तोड़ डाला। सरकारी योजनाओं के प्रचार होर्डिंग्स पर चढ़कर उन्हें क्षतिग्रस्त कर दिया। दर्ज प्राथमिकी उपद्रवियों ने निजी वाहनों में तोड़फोड़ की और पथराव शुरू कर दिया। इस जाम में गंभीर मरीजों को ले जा रही एम्बुलेंस गाड़ियाँ भी फँस गईं, जिससे मरीजों की जान जोखिम में पड़ गई। पुलिसकर्मियों पर ईंट-पत्थर और लाठी-डंडों से जानलेवा हमला किया गया, जिसमें कई पुलिसकर्मी और पदाधिकारी घायल हो गए। कैदियों की गाड़ी और चौकीदार पर हमला उग्र भीड़ ने बायसी थाना के चौकीदार चमरू हरीजन और कैदी लेकर जा रहे अन्य पुलिसकर्मियों पर भी हमला किया। इस दौरान कोर्ट जा रहे कैदी (दिनेश राम) को सिर पर गंभीर चोट पहुँचाकर बुरी तरह जख्मी कर दिया गया।



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स्कूल बसों पैनिक बटन बंद और महिला अटेंडर नदारद: भिंड में दुल्हन के साथ जा रहे दूल्हे का भी चालान, मजिस्ट्रेट चेकिंग में 40 वाहनों पर जुर्माना – Bhind News




भिंड शहर में सोमवार सुबह मजिस्ट्रेट चेकिंग के दौरान स्कूल बसों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था में गंभीर खामियां सामने आईं। सिटी कोतवाली के सामने इंदिरा गांधी चौराहे पर चलाए गए विशेष जांच अभियान में 10 स्कूल बसों की जांच की गई। जांच में अधिकांश बसों के पैनिक बटन बंद मिले। कई बसों में स्पीड गवर्नर नहीं था और महिला अटेंडर भी मौजूद नहीं मिली। इसके अलावा फर्स्ट एड बॉक्स, अग्निशमन यंत्र और अन्य जरूरी सुरक्षा उपकरणों की भी कमी पाई गई। नियमों का उल्लंघन मिलने पर सभी संबंधित बस संचालकों के खिलाफ चालानी कार्रवाई की गई। दो घंटे चला जांच अभियान
मजिस्ट्रेट की मौजूदगी में यह अभियान सुबह करीब 8 बजे शुरू हुआ और करीब दो घंटे तक चला। पहले चार पहिया वाहनों की जांच की गई। इस दौरान रजिस्ट्रेशन, बीमा, सीट बेल्ट, प्रदूषण प्रमाणपत्र और अन्य जरूरी दस्तावेज जांचे गए। नियमों का उल्लंघन करने वाले 17 चार पहिया वाहनों के चालान काटे गए। इसके बाद दोपहिया वाहनों की जांच हुई। बिना हेलमेट, बिना बीमा और बिना वैध दस्तावेज के वाहन चला रहे लोगों पर भी कार्रवाई की गई। कुल मिलाकर 40 से अधिक वाहनों के चालान बनाए गए। इसके बाद जांच अभियान बायपास स्थित देहात थाना क्षेत्र में भी जारी रहा। अफसरों, जनप्रतिनिधियों के भी वाहन रोके गए
जांच के दौरान बिजली कंपनी, राजस्व विभाग, जनप्रतिनिधियों और सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों के वाहन भी रोके गए। कुछ लोगों ने वरिष्ठ अधिकारियों से फोन पर बात कराने की कोशिश की, लेकिन मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारियों ने साफ कहा कि नियम सभी के लिए समान हैं। दस्तावेज अधूरे मिलने पर किसी को भी राहत नहीं दी गई और नियमानुसार चालान किए गए। अधिकारियों ने वाहन चालकों को भविष्य में सभी जरूरी दस्तावेज साथ रखने और यातायात नियमों का पालन करने की हिदायत दी। जांच के दौरान एक रोचक मामला भी सामने आया। नई नवेली दुल्हन को लेकर कालका देवी मंदिर दर्शन के लिए जा रहे एक दूल्हे की कार भी जांच के लिए रोकी गई। वाहन के दस्तावेज पूरे नहीं मिलने पर पुलिस ने उसका भी चालान किया। कार्रवाई पूरी होने तक दुल्हन को करीब एक घंटे तक कार में इंतजार करना पड़ा। अधिकारियों ने कहा कि सड़क सुरक्षा और बच्चों की सुरक्षा से जुड़े नियमों में किसी भी तरह की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ऐसे अभियान आगे भी जारी रहेंगे।



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सिएटल फूड फेस्टिवल में फायरिंग: 2 की मौत, बच्चे समेत 5 घायल; स्पेस नीडल के पास हुई घटना, पुलिस ने इलाका खाली कराया


सिएटल6 मिनट पहले

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अमेरिका के सिएटल में रविवार शाम एक फूड फेस्टिवल के दौरान फायरिंग में 2 लोगों की मौत हो गई। बच्चे समेत 5 लोग घायल हुए हैं। घटना स्पेस नीडल के पास आयोजित ‘बाइट ऑफ सिएटल’ फेस्टिवल के आखिरी घंटों में हुई। सिएटल फायर डिपार्टमेंट की प्रवक्ता ग्रेस नुनेज ने इसकी जानकारी दी।

फायरिंग शाम करीब 6 बजे हुई। पुलिस ने इलाके की जांच शुरू कर दी और लोगों से शहर के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में स्थित घटनास्थल के पास नहीं जाने की अपील की। अभी यह साफ नहीं है कि इस मामले में किसी को हिरासत में लिया गया है या नहीं।

सिएटल में रविवार को ‘बाइट ऑफ सिएटल’ फूड फेस्टिवल के दौरान हुई फायरिंग के बाद घटनास्थल पर तैनात फोर्स।

सिएटल में रविवार को ‘बाइट ऑफ सिएटल’ फूड फेस्टिवल के दौरान हुई फायरिंग के बाद घटनास्थल पर तैनात फोर्स।

5 घायलों को अस्पताल ले जाया गया

सिएटल फायर डिपार्टमेंट की प्रवक्ता ग्रेस नुनेज के मुताबिक, फायरिंग में मारे गए दोनों लोगों की मौत मौके पर ही हो गई। 5 घायलों को हार्बरव्यू मेडिकल सेंटर ले जाया गया।

घायलों में 56 साल की महिला की हालत गंभीर है। 2 साल का बच्चा, 23 साल का युवक और 39 साल की महिला की हालत स्थिर बताई गई है। वहीं 40 साल की एक महिला को मामूली चोटें आई हैं।

सिएटल सेंटर में रविवार को ‘बाइट ऑफ सिएटल’ फूड फेस्टिवल के दौरान हुई फायरिंग के बाद मौके पर पहुंची सिएटल पुलिस।

सिएटल सेंटर में रविवार को ‘बाइट ऑफ सिएटल’ फूड फेस्टिवल के दौरान हुई फायरिंग के बाद मौके पर पहुंची सिएटल पुलिस।

फायरिंग के बाद बड़ी संख्या में पुलिस और इमरजेंसी टीमें मौके पर पहुंचीं। उन्होंने सिएटल सेंटर इवेंट्स कैंपस के आसपास का इलाका खाली कराना शुरू किया। अधिकारियों ने अभी यह नहीं बताया है कि फेस्टिवल के किस हिस्से में फायरिंग हुई। इस आयोजन में खुले और इनडोर, दोनों तरह के क्षेत्र शामिल थे।

गवर्नर बोले- स्टेट पेट्रोल SWAT टीम मदद के लिए तैनात

वॉशिंगटन के गवर्नर बॉब फर्ग्यूसन ने कहा कि उन्हें घटना को लेकर लगातार जानकारी दी जा रही है। स्थानीय पुलिस की मदद के लिए स्टेट पेट्रोल SWAT अधिकारियों को भी तैनात किया गया है।

फर्ग्यूसन ने एक बयान में कहा, “मेरी संवेदनाएं पीड़ितों के परिवारों और उन सभी लोगों के साथ हैं, जो लोगों को सुरक्षित रखने के लिए काम कर रहे हैं।”

खाने का सामान लेकर लौटे थे लोग, तभी गोलियां चलीं

फेस्टिवल में मौजूद फेथ एडिया हंटर ने बताया कि वह और उनके दोस्त क्रेप बेचने वाले एक स्टॉल से खाना लेकर लौटे ही थे तभी फायरिंग शुरू हो गई। उन्हें एहसास हुआ कि शूटर उनके पास ही था।

हंटर ने कहा, “जब यह शुरू हुआ, तब हम उसके ठीक पास थे। इसलिए हम भागे और भीड़ के साथ इमारत के अंदर चले गए।” उन्होंने बताया कि वह और कुछ अन्य लोग पास के सिएटल चिल्ड्रन्स म्यूजियम में जाकर छिप गए।

फायरिंग के बाद मची अफरा-तफरी में कई फूड वेंडर अपने स्टॉल छोड़कर बाहर की ओर भाग गए। कई घंटे बाद भी कुछ वेंडर पुलिस की घेराबंदी के बाहर खड़े रहे और इंतजार करते रहे कि उन्हें अपने टेंट, खाना और खाना बनाने का सामान लेने के लिए वापस जाने की अनुमति कब मिलेगी।

वेंडर ने कहा- पहले पटाखे जैसी आवाज सुनाई दी

फेस्टिवल में वेंडर रॉबर्टो रामिरेज ने बताया कि उन्हें पहले पटाखे जैसी आवाज सुनाई दी। इसके बाद लोगों ने चिल्लाना शुरू कर दिया कि गोली चलाने वाला मौजूद है और लोग घबराकर भागने लगे।

रामिरेज ने कहा, “अचानक सब कुछ खाली हो गया। लोग बहुत डरे हुए थे।”

उन्होंने बताया कि शुरुआती अफरा-तफरी के बाद भी कुछ नए लोग फेस्टिवल में पहुंचते रहे। उन्हें घटना की जानकारी नहीं थी। पुलिस ने इन लोगों को भी वहां से जाने के लिए कहा।

फेस्टिवल में मौजूद एस्टन वाकोनाबो अपनी गर्लफ्रेंड के साथ फोटो बूथ की लाइन में खड़े थे। तभी किसी ने उन्हें पीछे से धक्का दिया। उन्होंने मुड़कर देखा तो लोगों की भीड़ तेजी से भाग रही थी।

वाकोनाबो ने बताया, “लोग छिप रहे थे, एक-दूसरे को धक्का दे रहे थे और जमीन पर गिर रहे थे। बच्चों की स्ट्रोलर भी गिर रही थीं। तभी मैंने गोलियों की आवाज सुनी।”

उन्होंने कहा, “जब मैंने पॉप-पॉप-पॉप की आवाज सुनी, तभी मुझे समझ आया कि गोली चलाने वाला कोई व्यक्ति है।”

वाकोनाबो ने अपनी गर्लफ्रेंड को सुरक्षित जगह पहुंचाने के बाद दोबारा घटनास्थल की ओर जाने की बात कही। उनके मुताबिक, वहां उन्होंने कई घायलों को जमीन पर पड़े देखा और उनकी तस्वीरें भी लीं।

सीएटल की कांग्रेसवुमन प्रमिला जयपाल ने ‘बेवजह की हिंसा’ की निंदा की

प्रमिला जयपाल

प्रमिला जयपाल

सीएटल का प्रतिनिधित्व करने वाली कांग्रेसवुमन प्रमिला जयपाल ने सीएटल सेंटर में हुई फायरिंग के बाद इसे ‘बेवजह की हिंसा’ बताते हुए निंदा की।

उन्होंने सोशल मीडिया पर लिखा, “हमारी संवेदनाएं इस बेवजह की हिंसा से प्रभावित सभी लोगों के साथ हैं।”

जयपाल ने बताया कि वह सीएटल की मेयर केटी विल्सन और गवर्नर बॉब फर्ग्यूसन के संपर्क में हैं। स्थिति की जानकारी जुटाने के लिए सरकार के अलग-अलग स्तरों के बीच समन्वय किया जा रहा है।

उन्होंने लोगों से अपील की कि सक्रिय जांच जारी रहने तक वे इलाके से दूर रहें।

1982 से हो रहा है फूड फेस्टिवल

‘बाइट ऑफ सिएटल’ फूड फेस्टिवल की शुरुआत 1982 में हुई थी। फेस्टिवल की वेबसाइट के मुताबिक, 3 दिन चलने वाले इस आयोजन में खाने-पीने की चीजों के साथ अलग-अलग तरह के कार्यक्रम होते हैं और करीब 3.5 लाख लोग इसमें शामिल होते हैं।



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नाश्ते में कुछ नया ट्राई करें, दुकान जैसा स्वाद अब घर पर… सिर्फ इन चीजों से तैयार करें श


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Homemade Kanda Kachori: बरसात के मौसम में स्वादिष्ट नाश्ते के लिए घर पर आसानी से कांदा कचोरी बनाई जा सकती है. प्याज, मूंग दाल और मसालों से तैयार यह कुरकुरी कचोरी चाय के साथ एक बेहतरीन स्नैक है. इसे मैदे की लोई में मसाला भरकर धीमी आंच पर तलकर तैयार किया जाता है. दुकान संचालक अजय ने इसे बनाने की आसान सी रेसिपी बताई है.

Homemade Kanda Kachori: जैसे ही बरसात का समय शुरू होता है तो लोग चटपटा नाश्ते का प्लान बनाते हैं. अगर अभी आपके घर कुछ चटपटा और नाश्ते में बनाने की सोच रहे हैं तो आप घर पर झपट कांदा कचोरी तैयार कर सकते हैं. कांदा कचोरी बनाने के लिए आपको प्याज, मूंग की दाल, बेसन, गरम मसाला, हरी मिर्च, राई, जीरा, तेल और मैदे का इस्तेमाल किया जाता है, जिससे यह कांदा कचोरी बनकर तैयार हो जाती है. कांदा कचोरी की खासियत होती है कि यह नॉर्मल कचोरी से बहुत ही टेस्टी लगती है और लोग इसको सबसे अधिक खाना पसंद करते हैं.

दुकान संचालक ने दी जानकारी 
लोकल 18 की टीम ने जब दुकान संचालक अजय से बात की तो उन्होंने बताया कि आप भी बरसात में कुछ चटपटा खाने का प्लान बना रहे हैं जो झटपट बनकर तैयार हो जाएगा. आप कांदा कचोरी तैयार कर सकते हैं. इसको बनाना बहुत ही आसान होता है. इसको बनाने के लिए प्याज, राई, जीरा, गरम मसाला हरी मिर्च, तेल, मैदा, मूंग की दाल की जरूरत होती है, जिससे यह कांदा कचोरी बनकर तैयार हो जाएगी. आप साइज में छोटी बड़ी बना सकते हैं.

ऐसे बनकर होती है तैयार 
अगर आप भी आपके घर पर कांदा कचोरी बनाने जा रहे हैं तो सबसे पहले बाजार से आप 500 ग्राम मैदा लेकर आइए. उसे हल्का सा नमक डालकर पानी से भीगा लीजिए और उसे एक बर्तन में रख दीजिए. एक कढाई लीजिए उसमें आप 100 ग्राम तेल डालिए, 5 ग्राम राय, 5 ग्राम जीरा, 10 ग्राम गरम मसाला, 100 ग्राम भीगी हुई मूंग की दाल और 200 ग्राम प्याज बारीक कटी हुई. उसको अच्छे से भून लीजिए, जिससे आपका मसाला तैयार हो जाएगा. आप मैदे से छोटे-छोटे लोई बनाकर उसमें यह मसाला भरते जाइए, जिससे आपकी कचोरी तैयार होगी. आप इसको एक कढ़ाई में तेल लेकर कम आंच पर तलने दीजिए और आपकी कचोरी बन जाएगी.

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Deepti Sharma

Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…

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भारत बना मेडिकल टूरिज्म का हब: 16 साल में विदेशी मरीज 4.5 गुना बढ़े; 1.5 लाख करोड़ का होगा बाजार




भारत अब सिर्फ सस्ते इलाज का ठिकाना नहीं, बल्कि मेडिकल टूरिज्म का बड़ा वैश्विक केंद्र बनने की ओर बढ़ रहा है। 2009 में जहां 1.12 लाख विदेशी मरीज इलाज के लिए भारत आए थे, वहीं 2025 में यह संख्या बढ़कर 5.07 लाख हो गई। यानी 16 साल में विदेशी मरीजों की संख्या करीब 4.5 गुना बढ़ी। इनमें बांग्लादेश इराक, उज्बेकिस्तान, सोमालिया, ओमान और केन्या से बड़ी संख्या में मरीज भारत पहुंचे। भारत का मेडिकल टूरिज्म बाजार 2025 में 84 हजार करोड़ रुपए का था। अनुमान है कि 2030 तक यह बढ़कर 1.56 लाख करोड़ रुपए हो जाएगा। भारत में विशेषज्ञ डॉक्टर्स का जल्दी मिल जाना इस बढ़त की वजह सिर्फ कम खर्च नहीं है। इसकी बड़ी वजह भारत में विशेषज्ञ डॉक्टर्स का जल्दी मिल जाना है। इसके अलावा जांच रिपोट्रर्स का तुरंत आना और इलाज का खर्च पहले से तय हो जाना भी विदेशी मरीजों को लुभा रहा है। अमेरिका में जिस इलाज पर 15 हजार रुपए खर्च होते हैं, वही भारत में 1,000 से 2,000 रुपए में संभव है। नीदरलैंड्स में दांतों के सामान्य इलाज पर 16 हजार रुपए ज्यादा लगते हैं, जबकि लखनऊ में यही इलाज 3,000 रुपए में हो जाता है। भारत में 69 हजार अस्पताल भारत के पास मेडिकल टूरिज्म संभालने के लिए बड़ा हेल्थ इंफ्रा भी मौजूद है। देश में कुल 69,364 अस्पताल हैं। इनमें 43,486 निजी (करीब 66%) और 25,778 सरकारी अस्पताल हैं। 12 लाख रजिस्टर्ड डॉक्टर हैं। 1,299 अस्पतालों को एनएबीएच की मान्यता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह निजी नेटवर्क भारत आने वाले विदेशी मरीजों को संभालने की क्षमता देता है।

172 देशों को भारत अब दे रहा ई-मेडिकल वीसा ब्रिटिश नागरिक एंडरसन को अपने देश में न्यूरो परामर्श का वेटिंग पीरियड एक साल से ज्यादा था। भारत आने पर उन्हें अपॉइंटमेंट अगले दिन मिल गया। एमआरआई व ब्लड टेस्ट तुरंत हुए और रिपोर्ट भी घंटे भर में मिल गई। इलाज की रफ्तार भी लोगों को भारत आने पर आकर्षित कर रही है। भारत अब उन मरीजों को भी लुभा रहा है, जो पहले इलाज को तुर्किए व थाईलैंड जाते थे। इसकी वजह विशेषज्ञ डॉक्टर, अस्पतालों की मान्यता और खर्च का बड़ा अंतर है। डिजिटल माध्यमों से अब मरीज पहले ही डॉक्टर, अस्पताल, इलाज की प्रक्रिया की जानकारी ले लेते हैं। इससे भरोसा बढ़ा है। विदेशी मरीजों की पहुंच आसान बनाने को भारत 172 देशों को ई-मेडिकल वीसा दे रहा है। सहायक के लिए ई-मेडिकल अटेंडेंट वीसा की सुविधा भी है। आयुर्वेद, योग, यूनानी और होम्योपैथी जैसी भारतीय चिकित्सा पद्धतियों से इलाज कराने वालों के लिए ई-आयुष वीसा की अलग श्रेणी शुरू की गई हैं। ‘हील इन इंडिया’ पोर्टल को एक साझा मंच में बदला जा रहा है। —————– ये खबर भी पढ़ें…. भारत में पहली डेंगू वैक्सीन QDENGA को मंजूरी:बिना किसी जांच के 4 से 60 साल तक के लोग ले सकेंगे डोज, देश में ही बनेगी भारत में पहली बार डेंगू की वैक्सीन को मंजूरी मिल गई है। ड्रग कंट्रोलर जनरल ऑफ इंडिया (DCGI) ने ताकेदा बायोफार्मास्यूटिकल्स इंडिया की वैक्सीन QDENGA को बाजार में इस्तेमाल की अनुमति दे दी है। पूरी खबर पढ़ें….



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डेढ़ साल की ‘दुल्हन’ और तीन साल का ‘दूल्हा’: भीषण अकाल में पड़ी थी ढोला और मारू के प्रेम की नींव; 4 एपिसोड में ढोला-मारू की कहानी – Rajasthan News


राजस्थान की तपती रेत पर जब कमायचा और रावणहत्था के तार छिड़ते हैं तो एक ऐसी प्रेम कहानी गूंजती है जो सदियों बाद भी अमर है। यह कहानी है ‘ढोला-मारू’ की।

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इस प्रेम कहानी को टटोलने दैनिक भास्कर अजमेर से 95 किलोमीटर दूर केकड़ी के ‘बघेरा’ और मध्य प्रदेश के ‘नरवर‘ पहुंचा तो यहां ढोला-मारू के ऐतिहासिक विवाह के साक्ष्य इस अनूठी प्रेम कहानी की गवाही देते नजर आए।

जानिए 11वीं शताब्दी की वो प्रेम कहानी जिसकी शुरुआत एक भीषण अकाल और दो राजाओं की गहरी दोस्ती से हुई-

बात सदियों पुरानी है। ग्यारहवीं सदी का बीकानेर तब ‘जांगलदेश’ कहलाता था। उस साल यहां ऐसा खौफनाक अकाल पड़ा कि बूंद-बूंद पानी के लिए हाहाकार मच गया और मारवाड़ की धरती का कण-कण पानी के लिए तरस उठा था। चारों तरफ एक ही मंजर था— अकाल का सन्नाटा। उस समय जांगल प्रदेश के पूगल ठिकाने पर राज करते थे राजा पिंगल…

11वीं शताब्दी के जांगल प्रदेश (बीकानेर) के पूगल ठिकाने पर राजा पिंगल का शासन था।

अकाल के वक्त पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश में ली शरण

अकाल के दर्दनाक मंजर को देख राजा पिंगल की आंखों में बेबसी के आंसू थे। अपनी प्रजा और परिवार को वे तड़पता नहीं देख पा रहे थे। ऐसे में उन्होंने भारी मन से अपनी मातृभूमि छोड़ पड़ोसी राज्य नरवर (मध्य प्रदेश) में शरण लेने का फैसला लिया। नरवर के राजा नल राजा पिंगल के अच्छे मित्र थे।

तैयारी करो! हम आज ही मरुधरा छोड़ रहे हैं। जब तक यहां के हालात नहीं सुधरते, हम पड़ोसी राज्य नरवर में शरण लेंगे, राजा पिंगल ने मंत्रियों को आदेश दिए।

उधर, नरवर में चारों तरफ हरियाली, बहता हुआ पानी और खुशहाली थी। राजा नल दरबार में थे, जब अचानक सैनिक ने उन्हें राजा पिंगल पर आए संकट की सूचना दी।

पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के राजा नल का नरवर उस समय हरा-भरा था।

पड़ोसी राज्य मध्य प्रदेश के राजा नल का नरवर उस समय हरा-भरा था।

संकट की घड़ी में स्वागत किया मित्र राजा नल ने

महाराज की जय हो! पूगल के राजा पिंगल परिवार और अपनी प्रजा के साथ हमारे राज्य की सीमा पर पहुंचे हैं। वे भारी संकट में हैं महाराज, सैनिक ने राजा नल को जानकारी दी।

मित्र के दुख में जो खड़ा न हो, वो राजा कैसा ! तुरंत उनके स्वागत की तैयारी करो! उनके रहने, खाने और घोड़ों के चारे का पूरा इंतजाम किया जाए, सूचना मिलते ही राजा नल ने मंत्रियों को आदेश दिया।

राजा पिंगल के नरवर महल पहुंचने पर राजा नल ने अपने दोस्त का दिल खोलकर स्वागत किया।

पिंगल, तुम नरवर में खुद को पराया मत समझना। जब तक पूगल के हालात ठीक नहीं होते, यह तुम्हारा ही घर है। राजा पिंगल अपने मित्र के इस प्रेम को देख भावुक थे।

मरुधरा से आई ‘अच्छी खबर’

कुछ ही समय बीता था कि एक दिन राजा पिंगल को उनके सैनिक ने अच्छी खबर सुनाई।

हुकुम! पूगल से संदेश आया है। मरुधरा पर काले बादलों ने डेरा डाल दिया है। झमाझम बारिश हो रही है! सूखी नदियां फिर से बह निकली हैं। अकाल खत्म हो गया है दाता!, सैनिक उत्साहित था।

राजा पिंगल ने आसमान की तरफ हाथ जोड़े और नल से बोले- मित्र, मातृभूमि हमें पुकार रही है। अब विदा लेने का समय आ गया है।

विदा की उदासी के बीच खिलखिला दी मासूमियत

विदा लेने का वक्त आया और अपने मित्र के जाने की बात सुन कर राजा नल भावुक हो उठे। तभी ढोला दौड़ते हुए आया और मारू के पालने को हिलाने लगा। इस पर मारू खिलखिलाकर हंस पड़ी। मासूमों की हंसी देखकर दोनों राजाओं के चेहरे खिल उठे।

देखो पिंगल, इन बच्चों को। जैसे बरसों पुरानी पहचान हो। क्यों न हम इस पुरानी दोस्ती को एक नए और अटूट रिश्ते में बदल दें, राजा नल ने मित्र पिंगल के सामने प्रस्ताव रख दिया।

यह सुनकर राजा पिंगल की आंखों में चमक आ गई।

रिश्तेदारी? तुम्हारे कहने का मतलब… दोनों का विवाह? राजा पिंगल उत्साह के साथ बोले।

हां मित्र! मेरा बेटा ढोला और तुम्हारी बेटी मारू। दोनों का गठबंधन करा देते हैं। हमारी दोस्ती हमेशा-हमेशा के लिए अमर हो जाएगी, राजा नल ने साफ शब्दों में कह दिया।

वराह देव का आशीर्वाद, दोस्ती को रिश्ते में बदलने का वादा

इस प्रस्ताव पर राजा पिंगल उत्साहित हो उठे। दोनों मित्रों ने तय किया कि बघेरा की पावन भूमि पर वराह देव के आशीर्वाद से वे इस शुभ कार्य को संपन्न करेंगे।

इसके साथ ही नगाड़े बजाते हुए पूरे महल में इस विवाह की घोषणा कर दी गई। और इस तरह राजा पिंगल की बेटी मारवणी (मारू) और राजा नल का बेटा साल्हकुमार (ढोला) का बाल विवाह तय हुआ। इस समय मारू डेढ़ साल की थी और ढोला की उम्र थी तीन वर्ष।

अकाल खत्म हो चुका था और राजा पिंगल का पूगल लौटना तय था। क्या दोनों दोस्तों ने एक दूसरे को दिया वादा पूरा किया? क्या वाकई ढोला और मारू का विवाह हुआ?

जानिए अगले एपिसोड में….

(यह लोक कथा पुरानी परंपराओं, ऐतिहासिक संदर्भ और सांस्कृतिक मान्यताओं पर आधारित है। बाल विवाह एक सामाजिक बुराई और कानूनन अपराध है। दैनिक भास्कर बाल विवाह जैसी किसी भी कुप्रथा का समर्थन नहीं करता। कहानी को रोचक बनाने के लिए क्रिएटिव लिबर्टी का इस्तेमाल किया गया है। सोर्स : राजस्थानी साहित्य, लोक कथाएं व स्थानीय लोगों से बातचीत। )

इनपुट सहयोग– अनुराग हर्ष, सुनील जैन, सुजान सिंह, कपिल मिश्रा (शिवपुरी), स्वाति पाठक

रिसर्च सहयोग– ममता कुमारी

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पढ़िए महेंद्र-मूमल की प्रेम कहानी ….

1. रेगिस्तान में काक नदी के किनारे था मूमल का महल:अमरकोट के राजा और जैसलमेर की राजकुमारी का प्रेम; 4 एपिसोड में मूमल-महेंद्र की कहानी

जैसलमेर के लौद्रवा की राजकुमारी मूमल और अमरकोट (वर्तमान पाकिस्तान) के राणा महेंद्र की प्रेम कहानी सदियों पुरानी है। इस कहानी को जानने के लिए दैनिक भास्कर जैसलमेर से 14 किलोमीटर दूर लौद्रवा गांव पहुंचा। पूरा एपिसोड…

2. कांच का पानी और शीशों का खेल:हजारों राजकुमार नाकाम, फिर अमरकोट के राणा ने कैसे पार की मूमल की खतरनाक पहेलियां? मूमल-महेंद्र प्रेम-कहानी एपिसोड-2

मूमल इंतजार में थी उस राजकुमार के जो उसकी खूबसूरती से ज्यादा उसकी पहेलियों की गहराई को समझ सके। लौद्रवा का महल उसी का स्वागत करेगा जो बिना डरे काक महल की पहेलियों को सुलझा पाएगा। पूरा एपिसोड…

3. मीलों का सफर और वो एक रात:आधी रात मूमल के कमरे में राणा महेंद्र ने ऐसा क्या देखा कि बिना मिले लौट गए? एपिसोड-3

वो रात बातों और वादों में बीत गई। मूमल और महेंद्र अब एकदूसरे के प्रेम में बंध चुके थे। दोनों की मुलाकातों का सिलसिला शुरू हो गया, लेकिन एक बड़ी समस्या थी? पूरा एपिसोड…

4. एक गलतफहमी से हारा राणा महेंद्र का विश्वास:महेंद्र-मूमल की प्रेम कहानी का वो अंत, जिसे सुनकर आज भी रोता है जैसलमेर का रेगिस्तान, एपिसोड 4

राणा महेंद्र को हुई गलतफहमी की पीड़ा मूमल के लिए असहनीय थी। उसने राणा को कई संदेश भिजवाए, लेकिन मूमल का एक भी संदेश राणा तक नहीं पहुंचा। पूरा एपिसोड…



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टला पेट्रोल-डीजल महंगा होने का खतरा, 7% सस्ता हुआ क्रूड ऑयल


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Crude Oil Price Today : अमेरिका और ईरान के बीच पिछले दो दिन से शांति बनी हुई है. इसका असर तेल बाजार पर दिख रहा है. पिछले एक महीने में 20 फीसदी चढ़ चुके क्रूड ऑयल के भाव में आज जोरदार गिरावट आई है.

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कच्‍चे तेल की कीमत में आज जोरदार गिरावट आई है.

नई दिल्‍ली. अमेरिका और ईरान द्वारा पिछले दो दिन से एक-दूसरे पर रोक देने से कच्‍चे तेल के तेवर नरम हुए हैं. एक महीने में 20 फीसदी उछलकर क्रूड ऑयल एक बार डॉलर प्रति बैरल को पार कर गया था. इससे भारत सहित दुनियाभर में पेट्रोल-डीजल फिर महंगा होने का खतरा बढ़ गया था. लेकिन पश्चिम एशिया में तनाव घटने से आज कच्‍चे तेल की कीमत करीब फीसदी टूट गई है.

तनाव कम होते ही तेल के बाजार में अचानक ठंडक आ गई. आज इंट्राडे में ब्रेंट एक बार तो फिसलकर 90 डॉलर प्रति बैरल के नीचे आ गया. समाचार लिखे जाने तक ब्रेंट क्रूड 6.34 फीसदी टूटकर डॉलर प्रति बैरल पर कारोबार कर रहा था. अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी करीब 6.31% गिरकर 84.73 डॉलर प्रति बैरल हो गया है.

अमेरिका-ईरान तनाव में नरमी

लगातार 13 रातों तक चले हवाई हमलों के बाद पिछले दो दिन से खाड़ी देशों में शांति है. ईरान ने भी कुवैत और बहरीन जैसे अमेरिकी ठिकानों वाले क्षेत्रों में कोई जवाबी कार्रवाई नहीं की है. ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने दावा किया था कि उन्होंने सऊदी अरब की अरामको रिफाइनरी को निशाना बनाया है. लेकिन सऊदी अधिकारियों द्वारा इसकी पुष्टि न होने के बाद बाजार ने इस खबर को नजरअंदाज कर दिया.

महीने भर की तेजी पर लगा ब्रेक

इस महीने ब्रेंट क्रूड के दाम 20% से ज्यादा चढ़ चुके थे. होर्मुज के साथ ही लाल सागर में भी जहाजों पर हमलों के कारण यह रूट भी बाधित हो गया. इस वजह से कच्‍चा तेल 100 डॉलर प्रति बैरल के पार जा पहुंचा था. अब तकनीकी रूप से बाजार ‘ओवरबॉट’ जोन से बाहर आकर फिर से सामान्य होता दिख रहा है. अमेरिका और ईरान युद्ध की वजह से एक बार क्रूड एक बार 120 डॉलर बैरल तक चला गया था. इसके बाद दोनों देशों के बीच युद्वविराम होने के बाद यह गिरकर 70 डॉलर बैरल के करीब पहुंच गया.



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मूंग खरीदी पर केंद्र-एमपी सरकार आमने-सामने: देश का 87% कोटा एमपी से… फिर भी प्रदेश में सिर्फ 2 फीसदी खरीद हुई, लेटर वॉर छिड़ा – Bhopal News




मध्य प्रदेश में मूंग खरीदी को लेकर किसानों का आंदोलन तेज होता जा रहा है। नर्मदापुरम, सीहोर, रायसेन, हरदा और आसपास के जिलों में किसान समर्थन मूल्य पर खरीदी नहीं होने से नाराज हैं। इसी बीच केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को पत्र लिखकर स्पष्ट किया है कि प्रदेश को देश में सबसे अधिक मूंग खरीदी का कोटा पहले ही दिया जा चुका है। इसके बावजूद राज्य सरकार अब तक स्वीकृत मात्रा का महज 2 प्रतिशत ही खरीद सकी है। ऐसे में पहले स्वीकृत लक्ष्य पूरा करने के बाद ही अतिरिक्त कोटे पर विचार किया जाएगा। तीन दिन पहले मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव को भेजे गए पत्र में शिवराज सिंह चौहान ने लिखा है कि मुख्यमंत्री ने 21 मई 2026 के अपने लेटर के माध्यम से मूंग खरीदी की मात्रा बढ़ाने का अनुरोध किया था। इसके जवाब में केंद्र ने खरीद के नियमों और प्रदेश की वास्तविक स्थिति स्पष्ट की है। 16 जुलाई तक सिर्फ 7,947 टन खरीदी
केंद्र सरकार ने पत्र में कहा है कि 16 जुलाई 2026 तक राज्य में केवल 7,947.92 मीट्रिक टन मूंग की खरीद हो सकी है। इससे लगभग 12 हजार किसानों से ही उपज खरीदी गई, जबकि यह स्वीकृत मात्रा का मात्र 2 प्रतिशत है। केंद्र ने राज्य सरकार से पहले मंजूर मात्रा की खरीदी तेजी से पूरी कराने को कहा है। एमपी में मूंग खरीदी का कोटा 4,54,580 मीट्रिक टन है। 16 जुलाई तक मात्र दो फीसदी ही मूंग खरीद हुई है। कोटा पूरा होने के बाद ही बढ़ेगी सीमा
शिवराज सिंह चौहान ने पत्र में स्पष्ट किया है कि पीएसएस (मूल्य समर्थन योजना) के दिशा-निर्देशों के तहत तूर, उड़द और मसूर की 100 प्रतिशत खरीद के अलावा अन्य अधिसूचित फसलों की खरीद अनुमानित उत्पादन के अधिकतम 25 प्रतिशत तक ही की जा सकती है। इसलिए पहले स्वीकृत मात्रा की खरीद पूरी होने के बाद ही अतिरिक्त मात्रा की मंजूरी के प्रस्ताव पर नियमों के अनुसार विचार किया जाएगा। पिछले साल 1.22 लाख किसानों को मिला था लाभ पत्र के अनुसार, ग्रीष्मकालीन 2024-25 में मध्य प्रदेश के लिए 4,19,692 मीट्रिक टन मूंग खरीद स्वीकृत हुई थी। इसके विरुद्ध 3,93,123.79 मीट्रिक टन मूंग की खरीदी की गई। इस पर 3,413.10 करोड़ रुपए का एमएसपी भुगतान हुआ और 1,22,776 किसानों को लाभ मिला। सोयाबीन का भी दिया उदाहरण केंद्र ने पत्र में यह भी उल्लेख किया है कि वर्ष 2025-26 में भावांतर भुगतान योजना (PDPS) के तहत मध्य प्रदेश के लिए 22.21 लाख मीट्रिक टन सोयाबीन स्वीकृत की गई। इसके लिए 1,093.13 करोड़ रुपए जारी किए गए, जिससे 7,10,257 किसानों को लाभ मिला। इधर किसान आंदोलन तेज, भोपाल तक पदयात्रा मूंग खरीदी समेत कई मांगों को लेकर संयुक्त किसान मोर्चा मध्य प्रदेश ने 27 जुलाई से नर्मदापुरम के सेठानी घाट से किसान क्रांति पदयात्रा शुरू करने की घोषणा की है। पदयात्रा बुधनी, बरखेड़ा, ओबेदुल्लागंज और मंडीदीप होते हुए 29-30 जुलाई को भोपाल पहुंचेगी। किसानों की योजना मिसरोद, बाग सेवनिया, रानी कमलापति, बोर्ड ऑफिस, रोशनपुरा और पॉलीटेक्निक चौराहे से होते हुए मुख्यमंत्री निवास तक मार्च निकालने की है। किसान अपने साथ ट्रैक्टर, पिकअप और अन्य वाहनों में भोजन व दैनिक उपयोग की सामग्री भी लेकर चलेंगे। किसान नेताओं ने चेतावनी दी है कि यदि मुख्यमंत्री से वार्ता नहीं हुई या मांगों पर संतोषजनक निर्णय नहीं निकला तो भोपाल में चक्काजाम किया जाएगा। साथ ही ओबेदुल्लागंज से मिसरोद के बीच रेल मार्ग बाधित करने की भी संभावना जताई गई है।



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