यूपी एटीएस ने पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI के एजेंट के सीधे निर्देश पर देश विरोधी और आतंकी गतिविधियों में शामिल एक युवक को गिरफ्तार किया है। एटीएस यूपी को सूचना मिली थी कि पाकिस्तानी गैंगस्टर शहजाद भट्टी और आबिद जट्ट के आतंकी नेटवर्क द्वारा भारतीय युवाओं को आर्थिक लाभ का लालच देकर सोशल मीडिया के जरिए स्लीपर सेल बनाने और आतंकी घटनाओं को अंजाम देने की साजिश रची जा रही है। इसी सिलसिले में बलरामपुर जिले के ग्राम जमधरा, थाना गैसड़ी निवासी 29 वर्षीय शहरोज अहमद को गिरफ्तार किया गया है। एटीएस के प्रवक्ता ने बताया कि अभियुक्त शहरोज अक्टूबर 2025 में फेसबुक पर पाकिस्तानी एजेंट जसवीर चौधरी जो ISI के लिए काम करता है, से जुड़ा है। जसवीर ने फेसबुक पर हिम्मत और जिगर वाले शूटरों की जरूरत बताई थी, जिस पर शहरोज ने कमेंट किया। इसके बाद बातचीत व्हाट्सएप, मेसेंजर और एन्क्रिप्टेड ऐप सिग्नल पर शुरू हो गई। जसवीर ने शहरोज को आतंकी गतिविधियों के लिए उकसाया और राजस्थान के श्रीगंगानगर जाकर हथियार एवं विस्फोटक सामग्री लेने का निर्देश दिया। शहरोज मुंबई में रहता था और दो दिन पहले ही गांव आया था। जसवीर ने शहरोज के खाते में इन गतिविधियों के लिए पांच हजार रुपये भी भेजे थे।
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भारत विरोधी गतिविधियों में शामिल युवक को एटीएस ने दबोचा: पाकिस्तानी एजेंट जसवीर चौधरी से जुड़ा था शहरोज अहमद – Uttar Pradesh News
राजस्व अधिकारी पर काम में लापरवाही का आरोप: लंबित मामलों में उदासीनता और अनियमतता, विभाग को भेजा गया लेटर – Gaya News
गयाजी के जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने नगर अंचल के राजस्व अधिकारी श्री राम कुमार रमन के खिलाफ कार्रवाई की है। राजस्व कार्यों में गंभीर लापरवाही, लंबित मामलों के निष्पादन में उदासीनता और विभिन्न प्रशासनिक अनियमितताओं के आरोप में उनके खिलाफ आरोप पत्र गठित कर राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग को भेजा गया है। जिलाधिकारी ने बताया कि राजस्व अधिकारी की ओर से राजस्व प्रशासन से संबंधित कार्यों के निष्पादन में लापरवाही बरती। समीक्षा के दौरान पाया गया कि बड़ी संख्या में दाखिल-खारिज (म्यूटेशन) के मामले उनके लॉगिन में अनावश्यक रूप से लंबित रखे गए। आम-खास सूचना से संबंधित 213 आवेदन और 120 दिनों से अधिक समय से लंबित कुल 388 आवेदनों का समय पर निष्पादन नहीं किया गया। इस कारण आम नागरिकों को अनावश्यक परेशानी का सामना करना पड़ा। जांच के दौरान यह भी सामने आया कि दाखिल-खारिज के कई मामलों में त्रुटिपूर्ण आदेश पारित किए गए। ऑनलाइन डिमांड में हेराफेरी जिलाधिकारी ने बताया कि अनुमंडल पदाधिकारी, सदर की ओर से कराई गई जांच में भी राजस्व अधिकारी के स्तर पर भूमि संबंधी अनेक मामलों को अनावश्यक रूप से लंबित रखने और तथ्यों के अनुरूप जांच नहीं किए जाने की पुष्टि हुई है। जांच प्रतिवेदन में कई गंभीर प्रशासनिक अनियमितताओं का उल्लेख किया गया है। जांच में राजस्व पदाधिकारी स्तर पर ऑनलाइन डिमांड में हेराफेरी का मामला भी प्रकाश में आया। यह भी पाया गया कि कुछ मामलों में जमाबंदी रद्द होने के बावजूद डिमांड को कायम रखा गया, जो राजस्व अभिलेखों के संधारण में गंभीर अनियमितता को दर्शाता है।
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मिर्जापुर का फेमस खस्ता, 40 साल पुराना स्वाद, एक बार खाओगे तो बार-बार आओगे
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Famous Khasta of Mirzapur: दुकानदार सोनू ने बताया की सुजी, मैदा और आटे की मदद से खस्ते को तैयार किया जाता है खस्ता को तैयार करने के बाद आलू को बनाया जता है. आलू बनाने में सीक्रेट मसाले को मिलाया जता है, इसके साथ ही चना और मुंग की दाल का भी प्रयोग किया जाता है. खास बात यह है कि इसका स्वाद ऐसा है कि खाने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं और आनंद उठाने के बाद ही जाते हैं. एक बार खाने के बाद बार-बार खाने को मन करता है.
मिर्जापुर: कड़ाही से निकलता हुआ खस्ता और उसके साथ अगर आलू मिल जाए तो क्या ही कहना. दोनों एक साथ आने पर स्वाद को कई गुना तक बढ़ा देता है. उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले में खस्ता के साथ मिलने वाली आलू और चने की दीवानगी ऐसी है कि खाने के लिए लोगों की लाइन लगी रहती है. दूर-दूर से स्वाद का आनंद लेने के लिए लोग पहुंचते हैं और स्वाद का आनंद उठाते हैं. 15 रुपये में मिलने वाला खस्ता और आलू ऐसा है कि पेट भर जाएगा, लेकिन आपका मन बिल्कुल भी नहीं भरेगा.
मिर्जापुर के तेलियागंज के पास खस्ता और आलू की दुकान दुकान है. दुकानदार सोनू के द्वारा इसे तैयार करके बिक्री की जाती है. खास बात है की स्वाद के पीछे घर का बना हुआ सीक्रेट मसाला होता है, जो कई गुना तक बढ़ा देता है. दुकानदार सोनू ने बताया की सुजी, मैदा और आटे की मदद से खस्ते को तैयार किया जाता है खस्ता को तैयार करने के बाद आलू को बनाया जता है. आलू बनाने में सीक्रेट मसाले को मिलाया जता है, इसके साथ ही चना और मुंग की दाल का भी प्रयोग किया जाता है. खास बात यह है कि इसका स्वाद ऐसा है कि खाने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं और आनंद उठाने के बाद ही जाते हैं. एक बार खाने के बाद बार-बार खाने को मन करता है.
20 रुपये है दाम
सोनू ने बताया कि 40 सालों से खस्ता और आलू की बिक्री हो रही है. खस्ता के साथ ही पापड़ी को भी बेचा जाता है. डिमांड प्रतिदिन बढ़ता चला जा रहा है. उनका कहना है कि पिता के द्वारा स्वाद बढ़ाने के लिए जो टिप्स दिए गए थे. वह बेहद ही कारगर है. उन्हें की दिखाए रास्तों पर हम चल रहे हैं और आज भी पिता की तरह ही स्वाद हमारे खस्ता और कचौड़ी में मिलता है. खस्ता 15 रुपये का और कचौड़ी 40 रुपये प्लेट के दर से बेचते हैं.
स्वाद में छिपा हुआ है राज
खस्ता खाने के लिए पहुंचे उमेश केसरी ने बताया कि स्वाद बेहद ही लाजवाब होता है. एक बार हमने इसे खाया था, जिसके बाद बार हम लोग खा रहे हैं. कम पैसे में बेहतरीन स्वाद मिलता है. यही वजह है की इनकी दुकान पर हमेशा भीड़ लगी रहती है.
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काशी के बगल चंदौली से ताल्लुक रखते है. बिजेनस, सेहत, स्पोर्टस, राजनीति, लाइफस्टाइल और ट्रैवल से जुड़ी खबरें पढ़ना पसंद है. मीडिया में करियर की शुरुआत ईटीवी भारत हैदराबाद से हुई. अभी लोकल18 यूपी के कॉर्डिनेटर की…और पढ़ें
12 दिन बाद लौटा मानसून; जल संकट बरकरार: बारिश के बावजूद दो दिन छोड़कर होगी जलापूर्ति, 23 जुलाई को निकलेगी इन्द्रदेव प्रार्थना यात्रा – Mandsaur News
मंदसौर जिले में 12 दिन के लंबे अंतराल के बाद सोमवार को मानसून ने वापसी की। जिला मुख्यालय सहित कई ग्रामीण क्षेत्रों में रुक-रुककर बारिश दर्ज की गई। हालांकि, यह बारिश ज्यादा देर तक नहीं चली, लेकिन इससे उमस और गर्मी से आंशिक राहत मिली। जिले में आखिरी अच्छी बारिश 8 जुलाई को हुई थी। 9 जुलाई की रात को जिला मुख्यालय और कुछ अन्य क्षेत्रों में हल्की बूंदाबांदी हुई थी, जिसके बाद से बारिश लगभग थम गई थी। इस लंबे सूखे दौर ने किसानों की चिंता बढ़ा दी थी। सोमवार सुबह तेज धूप और उमस से लोग परेशान रहे। दोपहर में हल्की बूंदाबांदी हुई, लेकिन जल्द ही धूप फिर निकल आई। शाम को बादल छाए और लगभग 15 से 20 मिनट तक तेज बारिश हुई। इसके बाद बारिश रुक गई। देर रात तक जिला मुख्यालय में हल्की बूंदाबांदी जारी रही। जिला मुख्यालय के अतिरिक्त पिपलिया मंडी, नारायणगढ़, सोनगरी, मल्हारगढ़, सुठोद, बरखेड़ा शाहिद और आसपास के क्षेत्रों में बारिश दर्ज की गई। हालांकि, जिले के अधिकांश हिस्से अभी भी अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। खेतों की नमी कम हो चुकी
लगातार शुष्क मौसम के कारण खेतों की नमी कम हो गई है। इससे सोयाबीन और मक्का सहित खरीफ फसलों पर प्रतिकूल असर पड़ने की आशंका बढ़ गई है। जिले में अब तक औसतन 10.10 इंच बारिश दर्ज की गई है, जो पिछले वर्ष की इसी अवधि के 12.69 इंच से लगभग ढाई इंच कम है। जुलाई के दूसरे सप्ताह में बारिश का लंबा अंतराल किसानों के लिए चिंता का मुख्य कारण बना हुआ है। कम बारिश के कारण शहर के प्रमुख जल स्रोतों का जलस्तर घटने लगा है। इसे देखते हुए नगर पालिका के जल कार्य विभाग ने पेयजल वितरण व्यवस्था में बदलाव किया है। अब शहर के अधिकांश क्षेत्रों में एक दिन छोड़कर होने वाली जलापूर्ति के स्थान पर दो दिन छोड़कर पानी की आपूर्ति की जाएगी। दो दिन छोड़कर होगी पानी की सप्लाई
विभाग के निर्णय के अनुसार, 19 जुलाई को जिन क्षेत्रों में पानी की सप्लाई हुई थी, वहां अगली सप्लाई 22 जुलाई को होगी। इसी प्रकार 20 जुलाई को जिन क्षेत्रों में पानी दिया जाएगा, वहां अगली सप्लाई 23 जुलाई को की जाएगी। हालांकि खानपुरा क्षेत्र और पुराने शहरी किला जैसे ऊंचाई वाले इलाकों में पहले की व्यवस्था जारी रहेगी। यहां एक दिन छोड़कर 40 मिनट तक पानी की सप्लाई होती रहेगी। नगर पालिका ने नागरिकों से पानी का अनावश्यक उपयोग नहीं करने, जल की बर्बादी रोकने तथा जल वितरण के दौरान विद्युत मोटर का उपयोग नहीं करने की अपील की है, ताकि सभी उपभोक्ताओं तक समान रूप से पानी पहुंच सके। अगले तीन दिन बारिश के आसार
मौसम विभाग के अनुसार 21 जुलाई को हल्की से मध्यम बारिश, 22 जुलाई को गरज-चमक के साथ बारिश तथा 23 जुलाई को जिले के कई क्षेत्रों में मध्यम से तेज बारिश होने की संभावना है। यदि ऐसा होता है तो किसानों की फसलों के साथ-साथ शहर के जल स्रोतों को भी बड़ी राहत मिलेगी। 23 को इन्द्रदेव प्रार्थना-कीर्तन यात्रा
इधर, जिले में अल्प वर्षा की स्थिति को देखते हुए सर्व समाज ने 23 जुलाई (गुरुवार) को सुबह 9 बजे तलाई वाले बालाजी मंदिर (बालागंज) से भगवान इन्द्रदेव प्रार्थना-कीर्तन यात्रा निकालने का निर्णय लिया है। यात्रा पशुपतिनाथ मंदिर तक पहुंचेगी। आयोजकों ने स्पष्ट किया है कि यदि 23 जुलाई को बारिश होती है, तब भी यात्रा पूर्व निर्धारित समय पर ही निकाली जाएगी। विभिन्न सामाजिक, धार्मिक एवं सांस्कृतिक संगठनों के प्रतिनिधियों ने इसे जनकल्याण, सर्वधर्म सौहार्द और पर्यावरण संरक्षण का प्रतीक बताते हुए नगरवासियों से अधिक से अधिक संख्या में शामिल होने की अपील की है।
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नियम तोड़कर चलने वाली बसों पर एक्शन: जोधपुर में जजों के निरीक्षण में हुई कार्रवाई, 6 प्राइवेट बसें सीज – Jodhpur News
सड़क दुर्घटनाओं पर अंकुश लगाने और यात्रियों के सुरक्षित सफर को सुनिश्चित करने के लिए सोमवार को भी जोधपुर में लग्जरी व स्लीपर बसों के खिलाफ अभियान चलाया गया। राजस्थान राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण (जयपुर) के निर्देश पर की गई इस औचक कार्रवाई में नियमों की धज्जियां उड़ा रही 6 लग्जरी व स्लीपर बसों के चालान काटकर उन्हें जब्त कर लिया गया। चेकिंग में सामने आईं यह गंभीर अनियमितताएं जांच के दौरान मोटर वाहन अधिनियम-1988 और स्लीपर कोच बसों के लिए तय सरकारी मानकों (AIS-119) का बड़े पैमाने पर उल्लंघन पाया गया। कई बसों में इमरजेंसी एग्जिट ही गायब थे। अवैध मॉडिफिकेशन: बसों में पीछे से चेसिस काटकर नियम विरुद्ध लगेज स्पेस बनाया गया था। बसों की छत पर अवैध रूप से लगेज कैरियर लगाए गए थे। इसके अलावा बैठने की क्षमता में फेरबदल और स्लीपर बर्थ की लंबाई-ऊंचाई तय मापदंडों के विपरीत पाई गई। अभियान जिला एवं सत्र न्यायाधीश दिनेश त्यागी (अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जोधपुर महानगर) और जिला एवं सत्र न्यायाधीश पूरण कुमार शर्मा (अध्यक्ष, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जोधपुर जिला) के नेतृत्व में चलाया गया। जिसमें जिला विधिक सेवा प्राधिकरण जोधपुर जिला ओर महानगर के सचिव जज डॉ मनीष हरजाई, राकेश रामावत शामिल रहे।
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यूक्रेन में शिप पर हमला, 4 भारतीयों की मौत: भारत ने कहा- कारोबारी जहाजों को निशाना बनाना गलत; यूक्रेन बोला- रूसी मिसाइलों से हमला हुआ
कीव27 मिनट पहले
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यूक्रेन से रवाना हुआ MV गोल्डन लियो रविवार को हमले का शिकार हो गया।
यूक्रेन के ओडेसा पोर्ट से रवाना हुए कार्गो जहाज ‘MV गोल्डन लियो’ पर रविवार को हुए हमले में चार भारतीय नागरिकों की मौत हो गई। एक भारतीय गंभीर रूप से घायल है और अस्पताल में उसका इलाज चल रहा है।
भारत सरकार ने सोमवार को इसकी पुष्टि करते हुए हमले की कड़ी निंदा की और कहा कि कारोबारी जहाजों और निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाना पूरी तरह गलत है। विदेश मंत्रालय ने कहा कि भारतीय दूतावास लगातार यूक्रेनी अधिकारियों के संपर्क में है और प्रभावित लोगों की हरसंभव मदद की जा रही है।
उधर, यूक्रेनी अधिकारियों के मुताबिक गोल्डन लियो जहाज ओडेसा से मक्का लेकर रवाना हुआ था। पोर्ट से निकलने के कुछ देर बाद उस पर तीन रूसी क्रूज मिसाइलों से हमला किया गया। यूक्रेन की नौसेना ने कहा कि हमले के बाद जहाज में आग लग गई। रॉयटर्स के मुताबिक, समुद्र में जहाज से घना धुआं उठता देखा गया, जिसकी बाद में पहचान हुई।
हमले के बाद की 3 तस्वीरें…
घटना के बाद जहाज से धुएं का गुबार उठता नजर आया।
हमले में जहाज पर आग लग गई थी।
BBC के मुताबिक, कुल 10 लोगों की मौत हुई है।
जहाज पर कुल 17 क्रू मेंबर सवार थे, जिनमें 5 भारतीय
विदेश मंत्रालय (MEA) के मुताबिक, 19 जुलाई की शाम अफ्रीकी देश गिनी-बिसाऊ के झंडे वाले इस जहाज पर हमला हुआ। उस समय जहाज पर कुल 17 क्रू मेंबर थे, जिनमें पांच भारतीय शामिल थे।
विदेश मंत्रालय ने मारे गए भारतीयों के परिवारों के प्रति संवेदना जताई और घायल भारतीय के जल्द स्वस्थ होने की कामना की। मंत्रालय ने अपने बयान में कहा,
भारत ऐसे हमलों की निंदा करता है। कारोबारी जहाजों और निर्दोष नागरिक क्रू को निशाना बनाना या समुद्री व्यापार और नेविगेशन की आजादी में बाधा डालना निंदनीय है और इससे बचा जाना चाहिए।

वहीं, यूक्रेन के समुद्री बंदरगाह प्राधिकरण के मुताबिक घटना के बाद पूरी रात सर्च और रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया गया। हमले में नौ क्रू मेंबर और एक समुद्री पायलट की मौत हुई, जबकि 17 में से आठ क्रू मेंबर को सुरक्षित बचा लिया गया।

ब्लैक सी में बढ़ता तनाव, कारोबार पर असर
यह हमला ऐसे समय हुआ है, जब रूस और यूक्रेन के बीच ब्लैक सी और सी ऑफ एजोव में सैन्य गतिविधियां लगातार बढ़ रही हैं। इससे कारोबारी जहाजों और अनाज के निर्यात पर खतरा बढ़ गया है।
2022 में रूस के यूक्रेन पर हमले के बाद ब्लैक सी दुनिया के सबसे संवेदनशील समुद्री इलाकों में शामिल हो गया। कुछ अंतरराष्ट्रीय समझौतों से अनाज का निर्यात फिर शुरू हुआ था, लेकिन हाल के महीनों में बढ़े हमलों से यह व्यवस्था फिर प्रभावित हुई है।
यूक्रेन लगातार रूस के ऊर्जा ढांचे और तेल टैंकरों को निशाना बना रहा है। वहीं रूस ने यूक्रेन के बंदरगाहों, ईंधन भंडारण केंद्रों और कार्गो जहाजों पर मिसाइल और ड्रोन हमले तेज कर दिए हैं। रूस के रक्षा मंत्रालय ने भी दावा किया है कि उसकी सेना ने ओडेसा बंदरगाह पर ईंधन भंडारण केंद्रों पर हमला किया।

वैश्विक अनाज कारोबार पर भी असर
यूक्रेन दुनिया के कुल गेहूं निर्यात का करीब 6% और मक्का निर्यात का लगभग 11% हिस्सा देता है। लेकिन लगातार हो रहे मिसाइल और ड्रोन हमलों के कारण ब्लैक सी के जरिए होने वाला यूक्रेन का अनाज निर्यात करीब एक-तिहाई तक प्रभावित हुआ है।
दूसरी तरफ यूक्रेनी हमलों का असर रूस के अनाज कारोबार पर भी पड़ा है। रॉयटर्स के मुताबिक, यूक्रेन के हमलों के कारण रूस को सी ऑफ एजोव के रास्ते होने वाली जहाजों की आवाजाही सीमित करनी पड़ी है। इसी रास्ते से रूस के करीब एक-चौथाई अनाज का निर्यात होता है।
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यूक्रेन के हमले से रूस में भी होर्मुज जैसा संकट:एजोव सागर में जहाजों की आवाजाही रुकी, 9 दिन में 116 जहाजों पर हमले हुए

यूक्रेन के लगातार ड्रोन हमलों के बाद रूस को बड़ा झटका लगा है। इस सप्ताह हमलों की वजह से रूस को एजोव सागर के अहम समुद्री रास्तों पर जहाजों की आवाजाही रोकनी पड़ी। इससे दुनिया के दूसरे देशों के साथ रूस का व्यापार प्रभावित होने लगा है। पूरी खबर पढ़ें…
अल-नीनो और अनिश्चित मानसून पर हाई अलर्ट: डीडीएमए की बैठक में जलभराव से निपटने की तैयारियों की समीक्षा – New Delhi News
दिल्ली में अल-नीनो के प्रभाव और मानसून के बदलते पैटर्न को देखते हुए दिल्ली आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (डीडीएमए) ने सोमवार को उच्च स्तरीय समीक्षा बैठक की। बैठक की सह-अध्यक्षता उपराज्यपाल टीएस संधू और मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने की। इसमें भारी बारिश, शहरी बाढ़ (अर्बन फ्लड) से निपटने की तैयारियों और राज्य आपदा प्रतिक्रिया बल (एसडीआरएफ) के गठन की प्रगति की समीक्षा की गई। बैठक में कैबिनेट मंत्री परवेश वर्मा और आशीष सूद, मुख्य सचिव, विशेष पुलिस आयुक्त (यातायात), एमसीडी आयुक्त, डीडीए उपाध्यक्ष समेत पीडब्ल्यूडी, गृह, परिवहन और दमकल विभाग के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। अधिकारियों ने बताया कि राजधानी में जलभराव की स्थिति में पिछले कुछ वर्षों में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। वर्ष 2024 में जलभराव वाले 194 संवेदनशील स्थान चिह्नित थे, जो 2025 में घटकर 169 रह गए। वहीं, 2026 में यह संख्या घटकर मात्र 34 रह गई है। इनमें पिछले वर्ष के केवल आठ स्थान ही दोबारा प्रभावित हुए हैं। बैठक में यह भी बताया गया कि एमसीडी, सिंचाई एवं बाढ़ नियंत्रण विभाग, एनडीएमसी और डीडीए ने नालों की सफाई और सिल्ट हटाने का 100 प्रतिशत लक्ष्य पूरा कर लिया है। वहीं, पीडब्ल्यूडी ने 95 प्रतिशत कार्य पूरा किया है। दिल्ली जल बोर्ड ने 85.5 प्रतिशत ट्रंक सीवर, 91.1 प्रतिशत परिधीय सीवर और 90.16 प्रतिशत ब्रांच सीवर लाइनों की सफाई पूरी कर ली है। उपराज्यपाल टीएस संधू ने अधिकारियों को सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि जलभराव के मामलों में किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। उन्होंने निर्देश दिए कि मौसम विभाग की भारी बारिश संबंधी चेतावनियों को गंभीरता से लेते हुए ऐसे कदम उठाए जाएं, जिससे लोगों को न्यूनतम या शून्य जलभराव का सामना करना पड़े।
बीते वर्षों से जल भराव के आंकड़े …
2024: 194 संवेदनशील स्थान
2025: 169 स्थान
2026: केवल 34 स्थान
पिछले वर्ष के सिर्फ 8 स्थान दोबारा प्रभावित
मॉनसून से पहले ही विभागों की तैयारी,… एमसीडी, एनडीएमसी, डीडीए और बाढ़ नियंत्रण विभाग ने नालों की सफाई का 100% लक्ष्य पूरा किया।
पीडब्ल्यूडी ने 95% कार्य पूरा किया।
दिल्ली जल बोर्ड ने:
-85.5% ट्रंक सीवर लाइन
-91.1% परिधीय सीवर लाइन
-90.16% ब्रांच सीवर लाइन की सफाई पूरी की।
एलजी ने विभागों के दिए सख्त निर्देश, लापरवाही या विफलता पर अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी ….
-भारी बारिश की चेतावनी पर तत्काल कार्रवाई।
-जलभराव वाले क्षेत्रों की लगातार निगरानी।
-एसडीआरएफ गठन की प्रक्रिया में तेजी।
-लापरवाही या विफलता पर अधिकारियों की जवाबदेही तय होगी।
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Apple ने दिया बड़ा झटका, iPhone 17 सीरीज, iPhone 16 और iPhone Air की बढ़ी कीमत
Apple ने आखिरकार iPhone की कीमत में इजाफा करने का फैसला किया है। अमेरिकी टेक कंपनी ने पिछले दिनों ही MacBook, iPad जैसे डिवाइसेज की कीमतें ग्लोबली बढ़ाई है। अब कंपनी ने iPhone 17 सीरीज, iPhone 16 और iPhone Air की कीमत बढ़ा दी है। हालांकि, एप्पल आईफोन का यह प्राइस हाइक केवल जापान में हुआ है। कंपनी ने भारत या अन्य देशों में आईफोन की कीमत में इजाफे की घोषणा फिलहाल नहीं की है।
11.3% तक बढ़ी कीमत
एप्पल ने जापान में आईफोन की कीमत में 8 से 11.3 प्रतिशत तक की बढ़ोतरी की है। ऐसे कयास लगाए जा रहे हैं कि चिप और मेमोरी की शॉर्टज और सप्लाई चेन की दिक्कत की वजह से अन्य मार्केट में भी एप्पल का आईफोन महंगा हो सकता है। एप्पल ने iPhone 16 सीरीज को 79,900 रुपये की शुरुआती कीमत में लॉन्च किया था। iPhone 17 सीरीज के आने के बाद यह 69,900 रुपये में मिल रहा था। वहीं, iPhone 17 सीरीज को भारत में 82,900 रुपये की शुरुआती कीमत में पेश किया है।
कितनी बढ़ी कीमत?
- iPhone 17 Pro Max को जापान में 2,14,800 येन यानी लगभग 1,27,250 रुपये की शुरुआती कीमत में खरीद सकते हैं। इसे 1,94,800 येन यानी 1,15,400 रुपये की शुरुआती कीमत में लॉन्च किया गया था। फोन की कीमत में 10.3% का इजाफा किया गया है।
- iPhone 17 Pro को जापान में 1,94,800 येन यानी लगभग 1,15,400 रुपये की शुरुआती कीमत में खरीद सकते हैं। इसे 1,79,800 येन यानी 1,06,500 रुपये की शुरुआती कीमत में लॉन्च किया गया था। इसकी कीमत में 8.3% का इजाफा किया गया है।
- iPhone Air को जापान में अब 1,77,800 येन यानी लगभग 1,05,300 रुपये की शुरुआती कीमत में खरीद सकते हैं। इसे 1,59,800 येन यानी 94,672 रुपये की शुरुआती कीमत में लॉन्च किया गया था। इसकी कीमत में 11.3% का इजाफा किया गया है।
- iPhone 17 को जापान में अब 1,42,800 येन यानी लगभग 84,500 रुपये की शुरुआती कीमत में खरीद सकते हैं। इसे 1,29,800 येन यानी 84,500 रुपये की शुरुआती कीमत में लॉन्च किया गया था। इसकी कीमत में 10% का इजाफा किया गया है।
- iPhone 17e को जापान में अब 1,07,800 येन यानी लगभग 63,800 रुपये की शुरुआती कीमत में खरीद सकते हैं। इसे 99,800 येन यानी 59,100 रुपये की शुरुआती कीमत में लॉन्च किया गया था। इसकी कीमत में 8% का इजाफा किया गया है।
- iPhone 16 को जापान में अब 1,21,800 येन यानी लगभग 72,150 रुपये की शुरुआती कीमत में खरीद सकते हैं। इसे 1,14,800 येन यानी 68,000 रुपये की शुरुआती कीमत में लॉन्च किया गया था। इसकी कीमत में 8.7% का इजाफा किया गया है।
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2 साल तक भूल जाइए रैली, उसके बाद ये शेयर दिखाएंगे अपना जलवा, शंकर शर्मा ने की भविष्यवाणी
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अपनी सधी हुई राय के लिए मशहूर जाने-माने निवेशक शंकर शर्मा ने कहा है कि बाजार में अब पहले जैसी रैली नहीं आएगी. उनका कहना है कि अगले 2 साल तक तो मार्केट बुल रन देखेगा ही नहीं. शंकर शर्मा ने पहली बार ऐसा नहीं कहा है. वह इससे पहले भी कह चुके हैं कि अब मार्केट में सुधार 2030 के बाद ही होगा. उन्होंने यह भी कहा मार्केट अब पुरानी वाली रैली नहीं दोहरा पाएगा.
शंकर शर्मा ने कहा है कि इस बार वाली रैली पिछली वाली से कमजोर होगी: शर्मा
नई दिल्ली. शंकर शर्मा का नाम शेयर बाजार में बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है. उन्हें बाजार पर एक सधी हुई राय के लिए जाना जाता है. शर्मा अगर बाजार में किसी चीज को लेकर भविष्यवाणी करते हैं तो उस पर गौर किया जाता है. इसलिए जब वह ये कहते हैं कि 2 साल तक बाजार में रैली का कोई दौर नहीं आएगा तो इस पर नए निवेशकों को ध्यान देना चाहिए. क्योंकि मझे हुए इन्वेस्टर्स तो ऐसे दौर देख चुके हैं लेकिन बाजार में नई एंट्री करने वाले मौजूदा हालात देखकर काफी परेशान हो रहे हैं. जितनी तेजी से उन्होंने बाजार में प्रवेश किया था उसी स्पीड से बाहर भी निकल रहे हैं.
शंकर ने साफ तौर पर कह दिया है कि भारत के इक्विटी मार्केट में बुल रन अभी 2 साल तक नहीं आएगा. वह केवल इतना ही नहीं कह रहे हैं. उनका तो यहां तक कहना है कि अब जो रैली आएगी वो पिछली वाली से कमजोर होगी. आपको बता दें कि शंकर शर्मा ने पहली बार शेयर मार्केट को लेकर कोई पहली बार ऐसी भविष्यवाणी नहीं की है. वह इससे पहले भी कह चुके हैं कि बाजार में अब अच्छी तेजी 2030 तक ही आएगी. मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में शंकर शर्मा ने कहा है कि इकोनॉमी और मार्केट का साइज इतना बढ़ चुका है कि पहले जैसी ग्रोथ हासिल करना अब मुमकिन नहीं लगता.
8-10 फीसदी रिटर्न की उम्मीद
उन्होंने कहा कि बीते दो दशकों में भारतीय निवेशकों को औसतन 14 से 15 फीसदी सालाना रिटर्न मिलता रहा है, लेकिन अब अर्थव्यवस्था के बड़े आकार को देखते हुए यह दौर बदल चुका है. उनका मानना है कि भविष्य में 8 से 10 फीसदी सालाना रिटर्न को ही सामान्य मानकर चलना चाहिए. शर्मा ने इसे अपनी “1.6 बुल मार्केट्स” थ्योरी से समझाया. उनका कहना है कि 1991 के आर्थिक उदारीकरण के बाद भारत ने वास्तव में सिर्फ एक बड़ा और टिकाऊ बुल मार्केट देखा, जो 2003 से 2007 के बीच रहा. उनके मुताबिक, हर्षद मेहता के दौर की तेजी को सामान्य बुल मार्केट नहीं माना जा सकता. उन्होंने बताया कि 2003 से 2007 के बीच निफ्टी ने करीब 55 फीसदी सालाना रिटर्न दिया था, जबकि कोरोना महामारी के बाद आई तेजी में यह रिटर्न घटकर करीब 31 फीसदी रह गया. यानी पिछली बड़ी तेजी की तुलना में करीब 40 फीसदी कम. उनका अनुमान है कि अगला बुल मार्केट इससे भी कम रिटर्न वाला हो सकता है.
क्या है कम रिटर्न की वजह
शंकर शर्मा का कहना है कि इसकी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्याज दरें या वैश्विक राजनीति नहीं, बल्कि भारत की तेजी से बढ़ी आर्थिक ताकत है. उनका तर्क है कि जब कोई अर्थव्यवस्था 4 से 5 ट्रिलियन डॉलर के आकार तक पहुंच जाती है, तो उसी रफ्तार से आगे बढ़ना पहले के मुकाबले काफी मुश्किल हो जाता है. उन्होंने एचडीएफसी बैंक और इन्फोसिस जैसी बड़ी कंपनियों का उदाहरण देते हुए कहा कि जब कंपनियां बहुत बड़ी हो जाती हैं, तो उनसे 35 से 40 फीसदी की ग्रोथ की उम्मीद नहीं की जाती. यही नियम देशों की अर्थव्यवस्था पर भी लागू होता है.
कौन से शेयर करेंगे अच्छा प्रदर्शन
इसी सोच के आधार पर शंकर शर्मा का मानना है कि अगली बड़ी तेजी में लार्ज कैप कंपनियों की तुलना में स्मॉल कैप शेयर ज्यादा बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं. उनका कहना है कि छोटी कंपनियों में कमाई बढ़ाने और निवेशकों को बेहतर रिटर्न देने की गुंजाइश अभी भी ज्यादा है. यही वजह है कि उन्होंने खुद भी 100 से 200 करोड़ रुपये स्मॉल कैप कंपनियों में लगाए हैं. खास तौर पर उन्होंने टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर से जुड़े कारोबारों पर दांव लगाया है, क्योंकि उनके मुताबिक ये सेक्टर अभी अपने ग्रोथ साइकल की शुरुआती अवस्था में हैं और आने वाले वर्षों में इनमें तेजी से विस्तार की संभावना है.
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मैं जय ठाकुर, न्यूज18 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहा हूं. मेरा मुख्य काम बिजनेस की पेचीदा खबरों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. फिर चाहे वह शेयर बाजार की हलचल हो, देश की इकोनॉमी क…और पढ़ें
भारतीय ज्ञान परंपरा से ग्लोबल करियर तक; डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय की नई उड़ान
बिलासपुर: छत्तीसगढ़ का पहला निजी विश्वविद्यालय और NAAC से ‘A’ ग्रेड प्राप्त करने वाला डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय (CVRU) शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर चुका है। विश्वविद्यालय विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण, कौशल-आधारित और इंडस्ट्री-ओरिएंटेड शिक्षा प्रदान करने के साथ उन्हें रोजगार और स्वरोजगार दोनों के लिए तैयार कर रहा है। आधुनिक तकनीक, शोध, नवाचार और भारतीय ज्ञान परंपरा के समन्वय के साथ यह विश्वविद्यालय प्रदेश ही नहीं, बल्कि देशभर के विद्यार्थियों के लिए शिक्षा का प्रमुख केंद्र बनकर उभरा है।
आदिवासी अंचल में शिक्षा की नई क्रांति
कोटा-बिलासपुर के अनुसूचित जाति, जनजाति एवं आदिवासी बहुल क्षेत्र में स्थापित विश्वविद्यालय शिक्षा को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुंचाने के उद्देश्य से कार्य कर रहा है। यहां भारतीय ज्ञान परंपरा को शिक्षा का अभिन्न हिस्सा बनाया गया है। साथ ही जनजातीय समुदायों के पारंपरिक ज्ञान के संरक्षण और संवर्धन के लिए भी विशेष प्रयास किए जा रहे हैं।
डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय
इंजीनियरिंग से लेकर रिसर्च तक, हर क्षेत्र में अवसर
विश्वविद्यालय में इंजीनियरिंग, सूचना प्रौद्योगिकी, प्रबंधन, विज्ञान, वाणिज्य, कला, शिक्षा, विधि, फार्मेसी, शारीरिक शिक्षा, संगीत, लाइब्रेरी साइंस और ग्रामीण विकास सहित अनेक विषयों में स्नातक, स्नातकोत्तर, डिप्लोमा और पीएचडी कार्यक्रम संचालित किए जा रहे हैं।
इंजीनियरिंग में मैकेनिकल, सिविल, इलेक्ट्रिकल, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन तथा कंप्यूटर साइंस जैसे प्रमुख पाठ्यक्रम उपलब्ध हैं। वहीं एम.टेक., बीसीए, एमएससी (आईटी), एमबीए, बीकॉम, एमकॉम, बीए, एमए, बीएड, एमएड, एलएलबी, एलएलएम, बीएससी, एमएससी, बीफार्मा, एमफार्मा और पीएचडी जैसे कोर्स भी विद्यार्थियों के लिए उपलब्ध हैं।
नई शिक्षा नीति के अनुरूप तैयार है पाठ्यक्रम
विश्वविद्यालय के सभी पाठ्यक्रम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) के अनुरूप तैयार किए गए हैं। विद्यार्थियों को तकनीकी दक्षता के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया जाता है। क्षेत्रीय भाषाओं के अलावा विदेशी भाषाओं के सर्टिफिकेट कोर्स भी उपलब्ध हैं, जिससे छात्र वैश्विक रोजगार के अवसरों के लिए तैयार हो सकें।
वाइस चांसलर प्रदीप कुमार घोष
स्टार्टअप और इनोवेशन को मिल रहा मजबूत मंच
विश्वविद्यालय में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग (DST) के सहयोग से AIC-CVRU स्थापित किया गया है, जहां विद्यार्थियों को स्टार्टअप शुरू करने और उसे विकसित करने के लिए हर स्तर पर सहयोग मिलता है। यहां अनुभवी मेंटर्स का मार्गदर्शन, शुरुआती फंडिंग सहायता, अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं, वर्कशॉप, बूट कैंप, इनोवेशन कार्यक्रम, निवेशकों से संपर्क, बिजनेस नेटवर्किंग और कानूनी व तकनीकी सहायता जैसी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाती हैं, जिससे उनके आइडिया सफल उद्यम में बदल सकें।
आधुनिक इंफ्रास्ट्रक्चर और इंडस्ट्री एक्सपोजर
विश्वविद्यालय में अत्याधुनिक प्रयोगशालाएं, रिसर्च सेंटर और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस स्थापित किए गए हैं। अनुभवी फैकल्टी और उद्योग विशेषज्ञ विद्यार्थियों को प्रैक्टिकल नॉलेज, रिसर्च स्किल्स और प्रोफेशनल ट्रेनिंग प्रदान करते हैं, जिससे वे उद्योग की वर्तमान आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार हो सकें।
विश्वविद्यालय की छात्राएं।
प्लेसमेंट में शानदार रिकॉर्ड
डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय रोजगार और करियर विकास को अपनी प्रमुख प्राथमिकताओं में शामिल करता है। विश्वविद्यालय के कैंपस में नियमित रूप से राष्ट्रीय और बहुराष्ट्रीय कंपनियां प्लेसमेंट के लिए पहुंचती हैं। यहां विद्यार्थियों को 50 लाख रुपये प्रति वर्ष तक का उच्चतम पैकेज प्राप्त हो चुका है। TCS, McCain Foods, Exide Industries, Xebia, HDFC Bank, ICICI Bank सहित कई प्रतिष्ठित कंपनियां यहां से प्रतिभाओं का चयन कर चुकी हैं। करियर डेवलपमेंट सेल विद्यार्थियों के लिए नियमित रूप से इंडस्ट्री इंटरैक्शन, सेमिनार, वर्कशॉप और करियर गाइडेंस कार्यक्रम आयोजित करता है।
मेधावी और जरूरतमंद स्टूडेंट्स के लिए स्कॉलरशिप
विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. प्रदीप कुमार घोष और कुल सचिव डॉ. अरविंद कुमार तिवारी के अनुसार, मेधावी, जरूरतमंद और सामान्य वर्ग के विद्यार्थियों के लिए विभिन्न छात्रवृत्ति योजनाएं संचालित की जा रही हैं, ताकि कोई भी छात्र आर्थिक कारणों से शिक्षा से वंचित न रहे।
14 उत्कृष्टता केंद्र बना रहे हैं भविष्य के लीडर्स
विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास के लिए डॉ. सी. वी. रमन विश्वविद्यालय में 14 उत्कृष्टता केंद्र (Centres of Excellence) स्थापित किए गए हैं। इन केंद्रों के माध्यम से कौशल विकास, अनुसंधान, नवाचार, नेतृत्व क्षमता और व्यक्तित्व निर्माण पर विशेष ध्यान दिया जाता है। यहां विद्यार्थियों को आधुनिक तकनीकी दक्षता, व्यावहारिक अनुभव और रचनात्मक सोच विकसित करने का अवसर मिलता है, जिससे वे राष्ट्र निर्माण में प्रभावी भूमिका निभाने के लिए तैयार हो सकें।


