हजरत मोहम्मद के नवासे हजरत इमाम हुसैन और करबला के शहीदों की याद में शुक्रवार को मुहर्रम पर मुस्लिम समाज ने ताजियों का जुलूस निकाला। दोपहर को करीब 2 बजे ताजियों का जुलूस शुरू हो गया था। पहले गली-मोहल्लों से छोटे तालियों का जुलूस निकाला गया। जो हरवेन जी का खुर्रा, हाथीपोल, मोती चोहट्टा, घंटाघर, गणेशघाटी, तीज का चौक, चोखला बाजार, भड़भूजा घाटी, बड़ा बाजार, जगदीश चौक होकर लालघाट पहुंचे। इसके बाद देर शाम बड़े ताजियों का जुलूस शुरू हो गया। इसमें प्रमुख आकर्षण का केन्द्र बड़ी पलटन, धोलीबावड़ी और अलीपुरा के ताजिये रहे। बड़ी संख्या में समुदाय के लोग परिवार सहित शामिल होने पहुंचे। इस अवसर पर ताजिये को रंग-बिरंगी रोशनी से सुंदर सजाया गया। रास्तेभर समुदाय के युवा या हुसैन के नारे लगाते रहे। जो लोग जुलूस में शामिल नहीं हो पाए। उन्होंने मस्जिदों में इबादत की। जुलूस के दौरान लोगों ने हजरत इमाम हुसैन की शहादत की याद में मातम किया और नोहे पढ़े।
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ताजिया जुलूस में दिखी अकीदत: मुहर्रम पर मुस्लिम समाज ने निकाला तालियों का जुलूस, पलटन, धोलीबावड़ी और अलीपुरा के ताजिये प्रमुख रहे – Udaipur News
‘विकिपीडिया पर तो मैं अभी भी भ्रूण हूं!’, उम्र के झोल पर महीप कपूर का मजेदार तंज
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महिलाएं अक्सर अपनी उम्र को लेकर दबाव महसूस करती हैं. वे अपनी असली आयु से कम उम्र की दिखने की कोशिश करती हैं, जिसे सुंदरता और फिटनेस से जोड़कर देखा जाता है. अब एक एक्ट्रेस ने अपनी उम्र से जुड़ी अफवाहों का खंडन किया है. महीप कपूर की उम्र विकीपीडिया में 43 साल दर्ज थी, मगर उन्होंने अपनी असली उम्र का खुलासा करके सबको चौंका दिया है. एक्ट्रेस ने अपनी उम्र पर बात करके महिलाओं को कम उम्र का दिखने के दबाव से बाहर निकालने की कोशिश की है. वे बढ़ती उम्र को छिपाने के बजाय उसे आत्मविश्वास, गर्व और बेहतर सेहत के साथ अपनाने के लिए प्रेरित करती दिखीं.
महीप कपूर पेशे से एक ज्वैलरी डिजाइनर हैं. (फोटो साभार: Instagram@maheepkapoor)
नई दिल्ली: हम जिस शख्सियत की बात कर रहे हैं, वे मशहूर हीरो की पत्नी हैं और मशहूर फिल्मी परिवार से ताल्लुक रखती हैं. उनकी बेटी भी बॉलीवुड में एंट्री कर चुकी हैं. वे शो ‘फैबुलस लाइव्स ऑफ बॉलीवुड वाइव्स’ के जरिये लोगों के बीच लोकप्रिय हुईं. उन्होंने अब अपनी उम्र को लेकर गलतफहमियों पर चुप्पी तोड़ी है और महिलाओं की सुंदरता, उम्र को लेकर पुरानी धारणाओं पर खुलकर बात की. महीप कपूर ने सोहा अली खान के पॉडकास्ट ‘ऑल अबाउट हर’ पर जिंदगी और उम्र पर बेबाकी से राय जाहिर की.
महीप कपूर ने पॉडकास्ट ‘ऑल अबाउट हर’ में सोहा अली खान और डॉक्टर रश्मि रॉय के साथ उम्र और सेहत पर खुलकर बात की. एक्ट्रेस की उम्र को लेकर अफवाहें थीं कि वे 43 साल की हैं, मगर अब उन्होंने अपनी असली उम्र का खुलासा किया है. सोहा अली खान शुरू में महीप से उनकी उम्र पूछने से झिझक रही थीं, पर उनके कूल अंदाज ने माहौल को सहज बना दिया. महीप ने बेबाक अंदाज में हंसते हुए कहा कि अच्छा हुआ जो तुमने पूछ लिया. विकिपीडिया पर तो ऐसा लगता है जैसे मैं अभी भी पैदा ही हो रही हूं!
अफवाहों पर महीप कपूर का तंज
महीप कपूर ने साफ कहा, ‘मैं 43 साल की नहीं, बल्कि 52 साल की हूं. मुझे अपनी इस उम्र पर बहुत गर्व है.’ सोहा ने भी मौके की नजाकत को भांपते हुए कहा कि जब इंटरनेट पर उम्र 43 दिख रही थी, तो मुझे लगा कि तुम अपनी उम्र के हिसाब से ठीक-ठाक दिखती हो, लेकिन 52 के हिसाब से तो तुम वाकई कमाल दिखती हो! महीप ने आगे बताया कि उनका जन्म 29 अप्रैल 1973 को लंदन में हुआ था, उनकी राशि वृषभ है और ब्लड ग्रुप ओ पॉजिटिव है. महीप का बिंदास रवैया बताता है कि उम्र को छिपाने के बजाय उसे पूरे आत्मविश्वास के साथ स्वीकार करना चाहिए.
महिलाओं में रहता है उम्र को लेकर दबाव
महीप कपूर की उम्र और सेहत पर बिंदास चर्चा का मकसद महिलाओं को कम उम्र का दिखने के दबाव से बाहर निकालना था. डॉक्टर रश्मि रॉय ने भी समझाया कि कैसे महिलाएं बढ़ती उम्र में अपने शरीर का ध्यान रख सकती हैं और सेहत को पहली प्राथमिकता दे सकती हैं. महीप कपूर ने साफ कहा कि असली खूबसूरती उम्र को नकारने में नहीं, बल्कि उसे शान से अपनाने में है. जाहिर है कि महीप कपूर इंटरनेट की गलत जानकारियों के चक्कर में खुद को कम उम्र का दिखाने के मूड में बिल्कुल नहीं हैं. वे अपनी शर्तों पर जिंदगी जीने में यकीन करती हैं.
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अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और पॉल…और पढ़ें
अलीगढ़ में अकीदत के साथ निकाला ताजिया जुलूस: सड़कों पर उमड़ा जनसैलाब, जंजीरी मातम हुआ – Aligarh News
अलीगढ़ में मुहर्रम के मौके पर अकीदत और गम का माहौल देखा गया। कर्बला के शहीदों की याद में शहर के विभिन्न इलाकों से पारंपरिक ताजिया जुलूस निकाले गए। इस दौरान इमाम हुसैन की शहादत को याद कर अकीदतमंदों की आंखें नम हो गईं। जुलूस में शामिल युवाओं ने हैरतअंगेज करतब दिखाए और जंजीरी मातम कर अपना दुख जाहिर किया, जिसे देखकर हर कोई सिहर उठा। इस दौरान पुलिस–प्रशासन मुस्तैद रहा और सुरक्षा के आरएएफ और पीएसी जवान रहे तैनात शहर की संवेदनशीलता को देखते हुए पुलिस और जिला प्रशासन अलर्ट मोड पर रहा। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिस बल तैनात किया गया। जुलूस के मुख्य मार्गों, चौराहों और संवेदनशील इलाकों में पुलिस, पीएसी और आरएएफ के जवानों को तैनात किया गया। कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आला प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी लगातार खुद पेट्रोलिंग करते नजर आए। डीएम और एसएसपी ने लिया व्यवस्थाओं का जायजा मुहर्रम पर सुरक्षा व्यवस्था में कोई चूक न हो, इसके लिए खुद डीएम और एसएसपी ने कमान संभाली। शुक्रवार को दोनों शीर्ष अधिकारियों ने भारी फोर्स के साथ थाना देहलीगेट क्षेत्र के ईदगाह और थाना हरदुआगंज के जलाली चौकी क्षेत्र का दौरा किया। वहीं, ताजिया जुलूस के संवेदनशील रास्तों और मोड़ों का बारीकी से मुआयना किया गया। यातायात में व्यवस्था में लगे रहे पुलिसकर्मी ताजिया जुलूस के चलते शहर की मुख्य सड़कों पर ट्रैफिक जाम न हो, इसके लिए यातायात पुलिस ने पहले ही एक व्यापक डायवर्जन प्लान लागू कर दिया था। जुलूस के रूट पर भारी वाहनों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित रहा। इसके साथ ही आम जनता की सहूलियत के लिए ट्रैफिक को लिंक रोड्स और वैकल्पिक मार्गों की तरफ मोड़ा गया, जिससे वाहन चालकों को ज्यादा परेशानियों का सामना न करना पड़े। ‘या हुसैन’ की सदाओं से गूंजा शहर मुख्य जुलूसों में अकीदतमंदों का हुजूम उमड़ पड़ा। काले लिबास पहने लोग ‘या हुसैन, हम न भूले’ और ‘लब्बैक या हुसैन’ के नारे लगा रहे थे। इस दौरान जुलूस में शामिल अकीदतमंदों ने धारदार जंजीरों और छुरियों से सीना-जनी कर मातम (जंजीरी मातम) किया। ताजियों को पूरे अदब-ओ-एहतराम के साथ कर्बला ले जाया गया। कर्बला में उन्हें सुपुर्दे-खाक किया जाएगा।
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बारिश में खतरा बन सकते हैं 106 जर्जर मकान: ग्वालियर नगर निगम की चेतावनी; नहीं तोड़े तो खुद ढहाकर वसूला जाएगा खर्च – Gwalior News
ग्वालियर में मानसून की दस्तक से पहले जर्जर भवन लोगों की चिंता का कारण बने हुए हैं। नगर निगम ने 151 खतरनाक भवनों की पहचान कर भवन स्वामियों को नोटिस जारी किए हैं, लेकिन अब भी 106 भवन विभिन्न क्षेत्रों में जर्जर हालत में खड़े हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर बारिश के साथ किसी भी समय दीवार या पूरा मकान गिरने का खतरा बना रहता है। नगर निगम के अनुसार इस वर्ष चिन्हित 151 जर्जर भवनों में से 45 भवन स्वामियों ने स्वयं अपने मकान हटा दिए हैं, जबकि 106 भवन अब भी कार्रवाई की प्रतीक्षा में हैं। इनमें कई पुराने कच्चे पाटौर और जर्जर मकान शामिल हैं, जिनकी दीवारों में गहरी दरारें पड़ चुकी हैं और कई स्थानों पर पेड़-पौधे तक उग आए हैं। आयुक्त ने लिखा कलेक्टर को पत्र हाल ही में संचालनालय नगरीय प्रशासन एवं विकास के आयुक्त संकेत भोंडवे ने कलेक्टर रुचिका चौहान को पत्र लिखकर बारिश से पहले सभी खतरनाक भवनों को हटाने के निर्देश दिए हैं। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर कार्रवाई की रफ्तार धीमी बनी हुई है। हर वर्ष मानसून से पहले नोटिस जारी किए जाते हैं, लेकिन समय पर प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से हादसों की आशंका बनी रहती है। दीवारों में उग आए पौधे शहर के कई इलाके सबसे अधिक संवेदनशील माने जा रहे हैं। छप्परवाला पुल स्थित डॉक्टर सराफ की गली में एक जर्जर भवन की दीवारों में बरगद का पेड़ उग आया है, जबकि नीचे दुकानें संचालित हो रही हैं। लक्ष्मणपुरा में कई पुराने पाटौर जर्जर अवस्था में हैं। लक्कड़खाना पुल के पास स्थित पुराने भवन को नाला चौड़ीकरण के तहत हटाने की प्रक्रिया चल रही है। वहीं भूतेश्वर मंदिर किला गेट और मैनावाली गली के मुख्य बाजार क्षेत्र में भी कई भयप्रद भवन लोगों के लिए खतरा बने हुए हैं। पिछले साल हुए थे हादसे बीते वर्ष बारिश के दौरान जर्जर भवन गिरने से कई दर्दनाक हादसे हुए थे। 13 जून को शंकरपुर में दीवार गिरने से तीन लोगों की मौत हुई थी। 30 जुलाई को गेंडेवाली सड़क पर मकान का छज्जा गिरने से दो लोगों की जान चली गई। 5 अगस्त को हुजरात क्षेत्र में एक मकान ढह गया था, जबकि 25 अगस्त को रंगियाना मोहल्ले में मकान गिरने से एक मजदूर की मौत हो गई थी और पिता-पुत्री घायल हुए थे। भवन स्वामी नहीं हटाएंगे तो हम तोड़ेंगे नगर निगम आयुक्त संघप्रिय ने बताया कि सभी चिन्हित भवनों के स्वामियों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं। निगम की प्राथमिकता है कि भवन स्वामी स्वयं अपने जर्जर भवन हटाएं। यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो मानसून से पहले नगर निगम स्वयं कार्रवाई कर भवन ध्वस्त करेगा और उसकी लागत संबंधित भवन स्वामी से वसूली जाएगी। हालांकि शहरवासियों का कहना है कि अब केवल नोटिस और आश्वासनों से काम नहीं चलेगा। उनका मानना है कि बारिश शुरू होने से पहले सभी खतरनाक भवनों को हटाना जरूरी है, ताकि किसी भी बड़े हादसे से जनहानि को रोका जा सके।
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अंडे से भी ज्यादा ताकतवर हैं ये 6 भारतीय फूड्स, शाकाहारियों के लिए हैं प्रोटीन का पावरहाउस
Diet & Nutrition: प्रोटीन को स्वस्थ शरीर के लिए सबसे ज़रूरी पोषक तत्वों में से एक माना जाता है. यह मांसपेशियों को मज़बूत बनाने, शरीर की कोशिकाओं की मरम्मत करने और इम्यूनिटी बढ़ाने में अहम भूमिका निभाता है. हालांकि अंडे को अक्सर प्रोटीन का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है, लेकिन अगर आप शाकाहारी हैं तो चिंता करने की कोई बात नहीं है. भारत में कई तरह के प्रोटीन से भरपूर खाद्य पदार्थ उपलब्ध हैं जिन्हें आसानी से संतुलित आहार में शामिल किया जा सकता है. आइए, ऐसे ही 6 भारतीय खाद्य पदार्थों के बारे में जानते हैं जो शाकाहारियों के लिए प्रोटीन के बेहतरीन स्रोत हैं…
1. सोयाबीन
सोयाबीन को शाकाहारियों के लिए प्रोटीन का सबसे अच्छा स्रोत माना जाता है. इनमें भरपूर प्रोटीन होता है और साथ ही आयरन, कैल्शियम और स्टार्च भी पाए जाते हैं. आप अपनी डाइट में सोया चंक्स, सोया दाल या सोया ग्रेन्यूल्स शामिल कर सकते हैं.
2. पनीर (कॉटेज चीज़)
पनीर प्रोटीन और कैल्शियम का अच्छा स्रोत है. इसे सेहत के लिए अच्छा और शरीर को मज़बूत बनाने वाला माना जाता है. इसे कई तरह से खाया जा सकता है, जैसे सब्ज़ी में डालकर या नमकीन स्नैक के तौर पर.
3. मूंग दाल (हरी मूंग)
मूंग दाल में भरपूर प्रोटीन होता है. यह आसानी से पच जाती है और शरीर को ज़रूरी अमीनो एसिड देती है. इसे खाने से शरीर को ज़रूरी पोषक तत्व मिलते हैं.
4. छोले/चना
काले चने और काबुली चने (सफ़ेद छोले), दोनों ही प्रोटीन के बेहतरीन स्रोत हैं. इन्हें करी या दूसरी डिशेज़ में खाया जा सकता है. ये पेट को लंबे समय तक भरा हुआ महसूस कराने में भी मदद करते हैं.
5. मूंगफली
मूंगफली में प्रोटीन के साथ-साथ हेल्दी फैट्स भी होते हैं. इन्हें भूनकर या दूसरे तरीकों से खाया जा सकता है. हालांकि, इनमें कैलोरी ज़्यादा होती है, इसलिए इन्हें सीमित मात्रा में ही खाना चाहिए.
6. दही (योगर्ट)
दही प्रोटीन, कैल्शियम और प्रोबायोटिक्स का अच्छा स्रोत है. यह ज़रूरी पोषक तत्व देता है और पाचन तंत्र को स्वस्थ रखने में मदद करता है. गर्मियों में दही का नियमित सेवन बहुत फ़ायदेमंद हो सकता है.
क्या अंडे सबसे अच्छा विकल्प हैं?
अंडों को हाई-क्वालिटी प्रोटीन का स्रोत माना जाता है. हालांकि, यह कहना सही नहीं होगा कि हर स्थिति में ये बाकी सभी खाद्य पदार्थों से बेहतर हैं. अलग-अलग खाद्य पदार्थों में प्रोटीन की मात्रा, गुणवत्ता और अन्य पोषक तत्व अलग-अलग होते हैं. फिर भी, शाकाहारी डाइट में इन चीज़ों को शामिल करके पर्याप्त प्रोटीन पाया जा सकता है.
( Disclaimer : इस खबर में दी गई जानकारी और सलाह विशेषज्ञों से हुई बातचीत पर आधारित है. ये सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए किसी भी सलाह को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें. किसी भी नुकसान के लिए न्यूज-18 जिम्मेदार नहीं रहेगा.
वर्ल्ड अपडेट्स: यूरोपीय संघ की बैठक में स्वीडन की मंत्री अपने 3 साल के बच्चे के साथ पहुंचीं
यूरोपीय संघ (EU) के जलवायु मंत्रियों की बैठक में गुरुवार को स्वीडन की जलवायु मंत्री रोमिना पूरमोख्तारी अपने 3 महीने के बेटे एडम को लेकर पहुंचीं। EU परिषद के अधिकारियों के मुताबिक, पहली बार किसी मंत्री स्तरीय बैठक में एक शिशु शामिल हुआ है। 30 साल की रोमिना ने कहा कि वह यह दिखाना चाहती थीं कि महिलाओं को मां बनने और करियर में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर नहीं होना चाहिए। उन्होंने कहा कि ऐसा तभी संभव है, जब परिवार और सरकारी नीतियों से पूरा सहयोग मिले। स्वीडन में दुनिया की सबसे उदार पेरेंटल लीव नीतियों में से एक है। वहां माता-पिता को कुल 16 महीने का सवेतन अवकाश मिलता है। इसमें से 90 दिन मां और 90 दिन पिता के लिए तय होते हैं।
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ABVP का खेलो बखरी प्रतियोगिता शुरू: सैकड़ों प्रतिभागी शामिल, वक्ताओं ने कहा- जीवन जीने की कला सिखाता है खेल – Begusarai News
अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) की ओर से शकरपुरा उच्च विद्यालय मैदान में खेलो बखरी प्रतियोगिता का शुभारंभ किया गया। जिसमें सैकड़ों धावकों ने दौड़ लगाया। उद्घाटन आरएसएस के जिला संचालक मनोरंजन वर्मा, थानाध्यक्ष अरविंद कुमार यादव, डॉ. मनीष कुमार, विनोद शर्मा, राजू कुशवाहा, नगर अध्यक्ष अशोक प्रियदर्शी और जिला संयोजक अनुभव आनंद ने झंडी दिखाकर किया छात्रों का उत्साहवर्धन करते हुए बखरी थानाध्यक्ष ने कहा कि युवा ही देश के भविष्य हैं। सफलता प्राप्ति के लिए युवाओं को संघर्ष से पीछे नहीं हटना चाहिए। अभाविप की ओर से प्रतियोगिता के माध्यम से युवाओं को शारीरिक रूप से स्वस्थ और संबल बनाने के प्रयास सराहनीय हैं। हम सभी को खेल से जुड़ना चाहिए। खेल न केवल शरीर को स्वस्थ रखते हैं। बल्कि यह मानसिक विकास और सामाजिक संबंधों को भी बढ़ावा देते हैं।
नियमित रूप से खेल में हिस्सा लेना चाहिए जिला संचालक मनोरंजन वर्मा और डॉ. मनीष कुमार ने कहा कि खेलकूद सिर्फ मनोरंजन के लिए नहीं है। यह हमारे शरीर को मजबूत, दिमाग को तेज और चरित्र को अनुशासित रखकर स्वस्थ और खुशहाल जीवन जीने का एक तरीका भी प्रदान करते हैं। इसीलिए सभी को नियमित रूप से खेल गतिविधियों में भाग लेना चाहिए। प्रतियोगिता के संयोजक दिलखुश कुमार ने बताया कि आज पहले दिन ग्रुप-सी से बालिका वर्ग में 1600 मीटर की दौड़ प्रतियोगिता में प्रथम स्थान पर मीठी, द्वितीय स्थान पर ममता एवं तृतीय स्थान पर सोनी रही। बालक वर्ग में प्रथम स्थान सिंटू एवं द्वितीय स्थान आशुतोष ने प्राप्त किया। ग्रुप ए और ग्रुप बी में शामिल खिलाड़ी 400 मीटर दौड़ में ग्रुप-ए से शारदा, मुस्कान, ऋचा, काजल, साक्षी, श्वेता, शिवम, रौशन, सौरभ, मो. हसन, दीपांशु, अनिकेत और ग्रुप-बी से अभिलाषा, शिवानी, पूजा, रौशन, शिवम, राजा ने अगले राउंड के लिए क्वालीफाई किया। मौके पर नगर मंत्री सौरभ कुमार, नगर सहमंत्री पुष्पम कुमार, सुशांत पोद्दार, मणिरत्नम, राजकमल, विशाल वशिष्ठ, नीतीश, मनीष, नीरज, अमन, प्रियांशु एवं दीनदयाल सहित अन्य कार्यकर्ता मौजूद रहे।
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ऑपरेशन सिंदूर के 6 शहीदों के नाम पहली बार सार्वजनिक: इनमें 5 सेना, 1 एयरफोर्स का जवान; पहलगाम अटैक के बाद PoK में हमला किया था
नई दिल्ली2 मिनट पहले
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भारतीय सेना ने 6-7 मई की रात ऑपरेशन सिंदूर को अंजाम दिया था। 100 आतंकी मार गिराए थे।
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान शहीद हुए भारतीय सशस्त्र बलों के 6 जवानों के नाम पहली बार आधिकारिक तौर पर सार्वजनिक किए गए हैं। इन नामों को नेशनल वॉर मेमोरियल की वेबसाइट के ‘रोल ऑफ ऑनर’ में शामिल किया गया है। नई दिल्ली स्थित राष्ट्रीय युद्ध स्मारक की 3D वॉल पर साल 2025 के खंड में भी उनके नाम अंकित किए गए हैं।

6 मई 2025: सेना ने PoK में 9 आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया
ऑपरेशन सिंदूर के तहत भारतीय सशस्त्र बलों ने पाकिस्तान और पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) में जैश-ए-मोहम्मद और लश्कर-ए-तैयबा से जुड़े 9 आतंकी ठिकानों पर सटीक हमले किए थे।
भारत सरकार ने कहा था कि इन हमलों में 100 से ज्यादा आतंकियों को मार गिराया था।
इसके बाद 10 मई को भारत और पाकिस्तान के सैन्य अभियान महानिदेशकों (DGMO) के बीच बातचीत के बाद दोनों देशों ने सैन्य कार्रवाई रोकने पर सहमति जताई थी।

भारत की एयरस्ट्राइक में कई पाकिस्तानी एयरबेस तबाह हुए थे
भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के कई एयरबेस तबाह किए थे। प्राइवेट कंपनी मक्सर (Maxar) के सैटेलाइट ने इन तबाह एयरबेस की फोटोज जारी की थीं।
मक्सर ने पाकिस्तान के जिनकी फोटोज जारी की, उनमें सरगोधा, नूर खान, भोलारी और सुक्कुर के एयरबेस थे। फोटोज में साफ देखा जा सकता है कि हमले के पहले और बाद में वहां क्या स्थिति थी।

सेना ने बताया था कहां-कहां की थी एयरस्ट्राइक
सेना ने 7 मई 2025 की सुबह बताया था कि पाकिस्तान और पीओके में 9 टारगेट पहचाने गए थे। इन्हें हमने तबाह कर दिया। लॉन्चपैड, ट्रेनिंग सेंटर्स टारगेट किए गए। इनके नाम हैं..
- पीओके में मुजफ्फराबाद स्थित लश्कर के सवाई नाला ट्रेनिंग सेंटर को सबसे पहले निशान बनाया गया। सोनमर्ग, गुलमर्ग और पहलगाम हमले के आतंकियों ने यहीं ट्रेनिंग ली थी।
- मुजफ्फराबाद का सैयदना बिलाल कैंप। यहां हथियार, विस्फोटक और जंगल सर्वाइवल की ट्रेनिंग दी जाती थी।
- कोटली का लश्कर का गुरपुर कैंप। पूंछ में 2023 में श्रद्धालुओं पर हमला करने वाले आतंकी यहीं ट्रेंड हुए थे।
- भिम्बर का बरनाला कैंप। यहां हथियार चलाना सिखाया जाता है।
- कोटली का अब्बास कैंप। यह एलओसी से 13 किमी दूर है। यहां फिदायीन तैयार होते हैं।
- सियालकोट का सरजल कैंप। मार्च 2025 में पुलिस जवानों की हत्या के आतंकवादियों को यहीं ट्रेन किया गया था।
- सियालकोट का हिजबुल महमूना जाया कैंप। पठानकोट हमला यहीं प्लान किया गया।
- मुरीदके का मरकज तैयबा कैंप। अजमल कसाब और डेविड कोलमैन हेडली यहीं ट्रेन हुए थे।।
- मस्जिद सुभान अल्लाह बहावलपुर जैश का हेडक्वार्टर था। यहां रिक्रूटमेंट, ट्रेनिंग दी जाती थी। बड़े अफसर यहां आते थे।
2019 में हुआ राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का उद्घाटन
राष्ट्रीय युद्ध स्मारक का उद्घाटन 2019 में इंडिया गेट के पास हुआ था। यहां स्वतंत्रता के बाद देश की रक्षा करते हुए शहीद हुए सैनिकों के नाम दर्ज किए जाते हैं। इन छह नामों के जुड़ने के साथ ही ऑपरेशन सिंदूर भी उन सैन्य अभियानों में शामिल हो गया है, जिन्हें राष्ट्रीय युद्ध स्मारक पर आधिकारिक रूप से सम्मान दिया गया है।

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ऑपरेशन सिंदूर से दुनिया में भारतीय हथियारों की डिमांड बढ़ी: ब्रह्मोस, आकाश और नेत्र खरीदने में कई देश रुचि दिखा रहे; ₹21,000 करोड़ की डील

ऑपरेशन सिंदूर में ब्रह्मोस, आकाश, लॉयटरिंग म्युनिशन और नेत्र जैसे भारतीय हथियारों के इस्तेमाल के बाद दुनिया में इनकी मांग तेजी से बढ़ी है। कई देशों ने इन्हें खरीदने में रुचि दिखाई है, जबकि कुछ के साथ हजारों करोड़ रुपए के सौदे भी हो चुके हैं। इनकी कीमत 21,000 करोड़ रुपए से अधिक है। रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, 2025-26 में भारत का रक्षा निर्यात रिकॉर्ड 38,424 करोड़ रुपए पहुंच गया, जो पिछले साल से 62% ज्यादा है। ब्रह्मोस के लिए फिलीपींस, वियतनाम और दो अन्य देशों से करीब 12,500 करोड़ रुपए के सौदे हो चुके हैं। पूरी खबर पढ़ें…


