Thursday, July 30, 2026
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जब एक झटके में 36 करोड़ लोग अंधेरे में डूब गए, ठप पड़ गया था उत्तर भारत


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भारतीय इतिहास में एक तारीख ऐसी भी है जिसे देश के सबसे बड़े बिजली संकट के लिए याद किया जाता है. यह तारीख है 30 जुलाई, 2012. इस दिन उत्तरी बिजली ग्रिड फेल होने से दिल्ली समेत उत्तर भारत के 7 राज्यों में एक साथ बिजली चली गई थी. इस घटना से करीब 36 करोड़ लोग प्रभावित हुए थे. इस तारीख पर कई और अहम घटनाएं भी दर्ज हैं. 

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इस तकनीकी खराबी का असर सिर्फ बिजली तक सीमित नहीं रहा था. (सांकेतिक तस्वीर)

नई दिल्ली. इतिहास की कुछ तारीखें इसलिए याद रहती हैं क्योंकि उन्होंने करोड़ों लोगों की रोजमर्रा की जिंदगी पर गहरा असर डाला. 30 जुलाई ऐसी ही एक तारीख है. साल 2012 में इसी दिन भारत ने अपने इतिहास के सबसे बड़े बिजली संकटों में से एक का सामना किया, जब अचानक उत्तरी बिजली ग्रिड ठप पड़ गई और देखते ही देखते उत्तर भारत के बड़े हिस्से में अंधेरा छा गया.

इस तकनीकी खराबी का असर सिर्फ बिजली तक सीमित नहीं रहा. रेल सेवाएं प्रभावित हुईं, कई ट्रेनें बीच रास्ते में रुक गईं, मेट्रो संचालन पर असर पड़ा, दफ्तरों और उद्योगों का काम ठहर गया और करोड़ों लोगों की दिनचर्या पूरी तरह बदल गई. इस घटना ने यह भी दिखाया कि आधुनिक भारत की अर्थव्यवस्था और बुनियादी सेवाएं बिजली पर कितनी निर्भर हो चुकी हैं.

जब 7 राज्यों में एक साथ चली गई बिजली

30 जुलाई 2012 की सुबह उत्तरी बिजली ग्रिड में आई तकनीकी खराबी के कारण दिल्ली, उत्तर प्रदेश, पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, जम्मू कश्मीर और चंडीगढ़ में एक साथ बिजली आपूर्ति बंद हो गई. इस ब्लैकआउट से करीब 36 करोड़ लोग प्रभावित हुए. कई ट्रेनों को बीच रास्ते में रोकना पड़ा और बिजली बहाल करने में कई घंटे लग गए. इसे उस समय दुनिया के सबसे बड़े बिजली संकटों में गिना गया था.

30 जुलाई की दूसरी प्रमुख घटनाएं

  • 1836: अमेरिका के हवाई में अंग्रेजी भाषा का पहला समाचार पत्र प्रकाशित हुआ.
  • 1886: भारत की पहली महिला विधायक और समाज सुधारक एस. मुथुलक्ष्मी रेड्डी का जन्म हुआ.
  • 1930: एनबीसी रेडियो पर ‘डेथ वैली डेज’ का पहला प्रसारण हुआ.
  • 1942: द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान जर्मन सेना ने बेलारूस के मिंस्क में हजारों यहूदियों की हत्या की.
  • 1957: एक्सपोर्ट रिस्क इंश्योरेंस कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (प्राइवेट) लिमिटेड की स्थापना हुई.
  • 1966: इंग्लैंड ने पहली बार फुटबॉल विश्व कप का खिताब जीता.
  • 1980: वानुआतु को स्वतंत्र राष्ट्र का दर्जा मिला.
  • 2002: कनाडा ने अल कायदा समेत सात संगठनों को आतंकवादी संगठन घोषित किया.
  • 2007: चीनी वैज्ञानिकों ने झेंगझाऊ क्षेत्र में करीब 50 लाख वर्ष पुरानी चट्टानों की खोज की.
  • 2024: केरल के वायनाड में भीषण भूस्खलन में 200 से ज्यादा लोगों की मौत हुई.
  • 2025: इजराइली हमलों में 46 फलस्तीनी नागरिकों की मौत हुई.

क्यों याद रखा जाता है 30 जुलाई?

30 जुलाई सिर्फ ऐतिहासिक घटनाओं की एक और तारीख नहीं है. यह दिन याद दिलाता है कि एक तकनीकी गड़बड़ी भी पूरे देश की रफ्तार को थाम सकती है. वहीं इस दिन हुई दूसरी घटनाएं भी राजनीति, विज्ञान, खेल और वैश्विक इतिहास के कई महत्वपूर्ण पड़ावों की गवाह रही हैं. इसलिए 30 जुलाई का इतिहास कई मायनों में खास माना जाता है.

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जय ठाकुरSenior-Sub Editor

मैं जय ठाकुर, न्यूज18 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहा हूं. मेरा मुख्य काम बिजनेस की पेचीदा खबरों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. फिर चाहे वह शेयर बाजार की हलचल हो, देश की इकोनॉमी क…

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मारू को लेने आधी रात में निकला ढोला: गहरी साजिशों और सुलगती रेत के संघर्ष से गुजर कर बनी अमर जोड़ी; ढोला-मारू प्रेम कहानी एपिसोड-4 – Rajasthan News


कल आपने पढ़ा कि नरवर के सैनिकों को चकमा देकर किसी तरह से ढाढी (लोक गायक) ढोला के महल तक पहुंचा और उसने मल्हार गाना शुरू कर दिया।

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पढ़िए आगे की कहानी….

मारू का संदेश अब शब्दों में नहीं, सुरों में था। जैसे ही सारंगी की दर्दभरी तान नरवर के महल तक पहुंची, ढोला की नींद टूट गई….गानों के बोल सुनकर उसका मन बेचैन हो उठा।

जाग उठीं बचपन की धुंधली यादें

ढोला ने सैनिकों को आदेश दिया कि महल के बाहर जो गायक गा रहे हैं, उन्हें तुरंत सामने पेश किया जाए। सैनिकों ने कालूराम (ढाढी) को उसके साथियों समेत राजा के सामने पेश कर दिया।

कौन हो तुम? और ये किसकी कहानी गा रहे हो? ये गीत सुनकर मन व्याकुल क्यों हो उठा है, ढोला बेचैन था।

ये किसी और की नहीं आपकी ही कहानी है महाराज। मैं पूगल से आया हूं।आपकी पत्नी मारू ने मुझे भेजा है। बरसों से वो आपकी राह देख रही हैं। कई संदेश भेजे, लेकिन कोई भी आप तक नहीं पहुंच सका..वो आपके इंतजार में बेजान सी हो गई हैं.. महाराज आप अब उन्हें ले आएं। अवसर न गंवाते हुए कालूराम ने एक सांस में मारू की पूरी व्यथा ढोला को सुना दी।

कहानी सुनने के साथ ही बचपन की धुंधली यादें एक-एक कर जैसे ढोला के सामने से गुजरने लगीं। उसे अपनी नन्हीं दुल्हन मारू की वो मासूम सूरत याद आई जो वक्त की धूल में कहीं दब गई थी…. एक छोटा सा हाथ, नन्हीं सी दुल्हन, पूगल और बचपन, ढोला को सब याद आ गया।

ढोला के महल के बाहर ढाढी (लोक गायक) ने मल्हार गाया था।

मालवणी की जिद और ‘करहा’ का साथ

अब ढोला के मन में सिर्फ एक ही तड़प थी- पूगल पहुंचना और अपनी मारू को वापस लाना। उसने बिना समय गंवाए पूगल जाने का निर्णय लिया। यह इतना आसान नहीं था। ढोला की पत्नी मालवणी को जब पता चला कि ढोला पूगल जाने की तैयारी कर रहा है तो उसने उसे रोकने के लिए साम-दाम-दंड-भेद सब आजमा लिए।

आधी रात को जब मालवणी सो रही थी और पूरा नरवर सन्नाटे में डूबा था, ढोला चुपके से अस्तबल पहुंचा। उसने सबसे फुर्तीले और वफादार ऊंट करहा को चुना और उस पर सवार रेगिस्तान के सीने को चीरते हुए पूगल के लिए निकल पड़ा।

चांदनी रात थी। चारों तरफ रेत के सुनहरे धोरों के बीच ऊंट के गले में बंधी घंटियां ‘टन-टन’ बज रही थीं। न भूख न प्यास, सारी चिंता पीछे छोड़े ढोला अपनी धुन में मगन था। उसके भीतर बस ढाढी के गीत के वो बोल गूंज रहे थे —

“पूगल री पद्मिनी जोवे थारी बाट!

रेत के धोरों को चीरता ढोला का संकल्प

जहां प्रेम होता है, वहां परीक्षा भी होती है। ढोला का ऊंट बिजली की रफ्तार से पूगल की तरफ बढ़ रहा था, लेकिन राह अभी भी आसान नहीं थी। कभी तपती रेत के बवंडर उठते, तो कभी रास्ता भटकाने वाली आवाजें आतीं। लेकिन ढोला का संकल्प पहाड़ जैसा था। कहा जाता है कि उस रात ढोला ने इतना लंबा सफर तय किया, जितना लोग कई दिनों में नहीं कर पाते।

खत्म हुआ सालों का इंतजार

उधर पूगल में मारू रोज की तरह महल की अटारी पर खड़ी राह तक रही थी। तभी दूर क्षितिज पर रेत का गुबार उठा और ढोला के ऊंट के गले की घंटियां सुनाई दीं। धूल छंटने के साथ ढोला ने महल के आंगन में कदम रखा। सालों का इंतजार, आंसू और विरह की तपती रातें… सब एक पल में खत्म हो गए। मारू को अपना बचपन का साथी, अपना ‘ढोला’ मिल गया था।

ढोला के आगमन की खुशी में रेगिस्तान में जैसे सावन आ गया था, पूरे पूगल में जश्न मनाया गया। ढोला कुछ दिन पूगल रुके, फिर मारू को साथ लेकर नरवर के लिए रवाना हुए। लेकिन मिलन की इस राह में अभी भी परीक्षा बाकी थी।

साजिश का जाल और मारू की चतुराई

रास्ते में एक सामंत था- उमरा-सूमरा। वह खुद मारू से शादी करना चाहता था। उसे जब खबर मिली कि ढोला मारू को लेने पूगल जा रहा है, तो उसने रास्ते में एक जाल बिछाया। उसने ढोला को धोखे से रोक लिया और मेहमानवाजी का नाटक किया। उमरा-सूमरा की योजना थी कि ढोला को अफीम (कसूंबा) पिलाकर मदहोश कर उसे मार डालेगा।

चेहरे पर मुस्कान और मन में छल लिए उसने ढोला का स्वागत किया। ढोला उसके सम्मान में रुक गए। साथ आए ढाढी को उसकी साजिश का आभास हो गया। उसने इशारे से ढोल बजाकर मारू को सावधान किया। मारू इशारा समझ गई और बिना देर किए उसने ऊंट को एड़ लगाई। ऊंट जैसे ही दौड़ा ढोला उसे रोकने दौड़े, तभी मारू ने फुर्ती से ढोला को ऊपर खींच लिया।

उमरा-सूमरा ने दोनों का पीछा किया। रेगिस्तान के बीचों-बीच रोमांचक मुकाबला हुआ, लेकिन ढोला का साहस और मारू का साथ अटूट था। उन्होंने चतुराई और करहा ऊंट की फुर्ती से दुश्मनों को पछाड़ दिया। देखते ही देखते दोनों उमरा-सूमरा से बचकर दूर निकल गए।

ऊंट पर सवार ढोला-मारू का रेगिस्तानी सफर।

ऊंट पर सवार ढोला-मारू का रेगिस्तानी सफर।

मिलन और खुशहाली का आगाज

हर बाधा को पार कर ढोला और मारू नरवर पहुंचे तो वहां की हवाएं भी जैसे झूम उठीं। शुरुआत में मालवणी को ईर्ष्या हुई, लेकिन मारू की सादगी और ढोला के सच्चे प्रेम ने सबका दिल जीत लिया। कहते हैं इसके बाद नरवर में कभी खुशहाली की कमी नहीं हुई।

….और अमर हो गई ढोला- मारू की प्रेम कहानी

मारू थारे देस में, निपजै तीन रतन।

एक ढोला, दूजी मरवण, तीजो कसूमल रंग।।

राजस्थान की रेत पर जन्मी यह अमर प्रेमकथा राजस्थान की लोक संस्कृति में गहरी बसी है। ढोला और मारू आज भी लोकगीतों, लोक कथाओं और चित्रकला में जीवित हैं। चित्रों में ढोला-मारू को ऊंट पर सवार दिखाया जाता है, जो उनके रेगिस्तानी सफर और अमर प्रेम का प्रतीक है। ग्यारहवीं शताब्दी में कवि कलोल ने ढोला और मारू के प्रेम और विरह को दोहों में लिखा। लोक-प्रसिद्ध राजस्थानी काव्य ‘ढोला मारू रा दूहा’ इस रोमांचक प्रेम कहानी का लोकप्रिय काव्य है।

(यह लोक कथा पुरानी परंपराओं, ऐतिहासिक संदर्भ और सांस्कृतिक मान्यताओं पर आधारित है। बाल विवाह सामाजिक बुराई और कानूनन अपराध है। दैनिक भास्कर बाल विवाह जैसी किसी भी कुप्रथा का समर्थन नहीं करता।

कहानी को रोचक बनाने के लिए क्रिएटिव लिबर्टी का इस्तेमाल किया गया है। सोर्स : राजस्थानी साहित्य, लोक कथाएं व स्थानीय लोगों से बातचीत। )

इनपुट सहयोग– अनुराग हर्ष, सुजान सिंह, कपिल मिश्रा (शिवपुरी), सुनील जैन, भरत मूलचंदानी, स्वाति पाठक

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ढोला-मारू की प्रेम-कहानी के 3 एपिसोड यहां पढ़िए…

1- डेढ़ साल की ‘दुल्हन’ और तीन साल का ‘दूल्हा’:भीषण अकाल में पड़ी थी ढोला और मारू के प्रेम की नींव; 4 एपिसोड में ढोला-मारू की कहानी

राजस्थान की तपती रेत पर जब कमायचा और रावणहत्था के तार छिड़ते हैं तो एक ऐसी प्रेम कहानी गूंजती है जो सदियों बाद भी अमर है। यह कहानी है ‘ढोला-मारू’ की। पूरा एपिसोड…

2- ढोला-मारू के साथ हुआ था 300 जोड़ों का विवाह: कम उम्र में जिम्मेदारी और दूसरी शादी में छुप गया बचपन का सच; एपिसोड-2

उन दिनों बाल-विवाह की परंपरा थी और रिश्ते सिर्फ परिवारों को नहीं, बल्कि राज्यों को जोड़ते थे। जिसके चलते दोनों राजाओं ने अपनी गहरी दोस्ती को रिश्तेदारी में बदलने का निर्णय लिया था। पूरा एपिसोड…

3- पहरों का ऐसा जाल कि परिंदा पर न मार सके:आधी रात को ढोला के महल तक कैसे पहुंची मारू की पुकार?, ढोला-मारू प्रेम कहानी एपिसोड-3

समय बीतने के साथ मारू की अधिकतर सहेलियां ससुराल चली गईं, लेकिन मारू को विदा कराने अब तक कोई नहीं आया था। हर बीतते दिन के साथ मारू की आंखों में ढोला का इंतजार और गहरा होता गया। पूरा एपिसोड…



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स्कूलों के 100 मीटर में तंबाकू बेचने पर चालानी कार्रवाई की, सामान जब्त – Balrampur News



भास्कर न्यूज | बलरामपुर राष्ट्रीय तंबाकू नियंत्रण कार्यक्रम के तहत बलरामपुर नगरीय क्षेत्र में विशेष अभियान चलाया गया। अभियान कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी के निर्देशन में हुआ। पुलिस अधीक्षक वैभव बैंकर के मार्गदर्शन में हुआ। अनुविभागीय अधिकारी और मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी विजय कुमार सिंह के नेतृत्व में संयुक्त टीम ने कार्रवाई की। टीम ने कोटपा अधिनियम-2003 के प्रावधानों के तहत निरीक्षण किया। स्कूलों और शिक्षण संस्थानों के 100 मीटर दायरे में तंबाकू उत्पाद बेचते मिले दुकानदारों पर चालानी कार्रवाई की गई। नाबालिगों से तंबाकू उत्पाद बिकवाने के मामलों में भी संबंधित फर्म और दुकान संचालकों पर चालान किया गया। कार्रवाई के दौरान दुकानों से सिगरेट, गुटखा, जर्दा, बीड़ी, मुनक्का समेत कई तंबाकू उत्पाद तुरंत जब्त किए गए। दुकानदारों को कोटपा अधिनियम के नियम बताए गए। आगे नियमों का सख्ती से पालन करने की समझाइश दी गई। टीम ने कहा कि स्वास्थ्य सुरक्षा के लिए ऐसी संयुक्त कार्रवाई आगे भी लगातार जारी रहेगी। स्वास्थ्य विभाग ने आम नागरिकों, अभिभावकों, व्यापारियों से अपील की। बच्चों और किशोरों को तंबाकू उत्पादों से दूर रखने में सहयोग करें। स्कूलों के आसपास तंबाकू उत्पादों की बिक्री न करें।



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नीतीश कुमार का वीडियो क्या फेक है: प्रशांत किशोर के दावों में कितनी सच्चाई, जानिए, PK के वोटिंग से पहले का माइंड गेम – Bihar News




पूर्व CM नीतीश कुमार के भाजपा प्रत्याशी के समर्थन में जारी वीडियो संदेश पर विवाद हो गया है। प्रशांत किशोर ने इसे AI जेनरेटेड बताया है। इस पर JDU नेता नीरज कुमार ने प्रशांत किशोर के खिलाफ झूठ फैलाने की शिकायत थाने में दर्ज कराई है। नीतीश कुमार का वीडियो सही है या AI जेनरेटेड, प्रशांत किशोर ने ऐसा क्यों कहा, नीतीश कुमार की सेहत ठीक तो है, समझेंगे; बूझे की नाही में…। सवाल-1ः नीतीश कुमार के वीडियो संदेश पर विवाद का पूरा मामला क्या है? जवाबः बिहार भाजपा ने अपने X हैंडल से 27 जुलाई की रात 10ः15 बजे पूर्व CM और JDU के राष्ट्रीय अध्यक्ष नीतीश कुमार का एक वीडियो संदेश जारी किया। इसमें नीतीश कुमार भाजपा प्रत्याशी नीरज सिन्हा के लिए बांकीपुर के लोगों से वोट देने की अपील कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि दो दशकों के विकास कार्य को देखते हुए जनता नीरज सिन्हा को वोट करे। नीतीश कुमार के इसी वीडियो संदेश को JDU ने 28 जुलाई की सुबह 6.53 बजे अपने ऑफिशियल X हैंडल से जारी किया। प्रशांत किशोर ने फेक वीडियो बताया प्रशांत किशोर की शिकायत लेकर थाने पहुंचे JDU MLC सवाल-2ः क्या यह वीडियो AI जेनरेटेड है? जवाबः नहीं। नीतीश कुमार का यह वीडियो संदेश हमारी (भास्कर) जांच में सही मिला है। इसके AI जेनरेटेड होने की संभावना मात्र 0.3% है। डीपफेक वीडियो की जांच करने वाले विश्वसनीय टूल में से एक Hive AI डिटैक्शन का इस्तेमाल किया। जिसकी रिपोर्ट पढ़िए… मतलब AI-डिटैक्शन रिपोर्ट के मुताबिक, यह वीडियो पूरी तरह से असली है और इसमें AI, डीपफेक या वॉइस क्लोनिंग जैसी तकनीकों का उपयोग नहीं हुआ है। सवाल-3ः प्रशांत किशोर ने तब ऐसा दावा क्यों किया? जवाबः दरअसल, यह दावा प्रशांत किशोर की चुनावी रणनीति का हिस्सा है। इसका सबसे बड़ा कारण EBC और महिला वोटर हैं। पॉलिटिकल एनालिस्ट संजय सिंह और केके लाल कहते हैं… नीतीश को धोखा देने वाले नैरेटिव को कमजोर करने के लिए BJP ने 3 काम किए… सवाल-4ः इस तरह के गलत दावों से क्या प्रशांत किशोर को नुकसान होगा? जवाबः ज्यादा संभव है। प्रशांत किशोर की छवि एक ‘तथ्य-आधारित’ और ‘डेटा-ड्रिवन’ रणनीतिकार की रही है। उनके दावे टेक्नोलॉजी टूल्स की जांच में गलत साबित हो रहे हैं तो तटस्थ यानी न्यूट्रल और शिक्षित मतदाताओं के बीच उनकी विश्वसनीयता पर सवाल उठेगा। सवाल-5: नीतीश कुमार ने वीडियो संदेश क्यों दिया, प्रचार क्यों नहीं किया? जवाबः सूत्रों के मुताबिक, नीतीश कुमार के प्रचार में नहीं शामिल होने का सबसे बड़ा कारण स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें हैं। वह ज्यादा देर तक भाषण नहीं दे सकते। टहल-घूम रहे हैं, लेकिन डायरेक्ट सार्वजनिक सभाओं से दूर हैं। हालांकि… इससे इतर नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव ने दावा किया है, ‘नीतीश कुमार बांकीपुर सीट पर BJP कैंडिडेट के समर्थन में प्रचार नहीं करना चाहते थे, उनसे कथित भूजा गैंग ने जबरन वीडियो बनवाया।’



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खाली प्लॉट से हटाया कचरा, रहवासियों को मिली राहत: वार्ड-38 की पार्षद गौरी नितिन पाठक बनीं ‘पब्लिक स्टार’; कचरा, बंद स्ट्रीट लाइट, जलभराव और गंदगी की शिकायतें पहुंची जिम्मेदारों तक – Bhopal News




भोपाल के अलग-अलग वार्डों से सामने आ रही जनसमस्याओं के समाधान में दैनिक भास्कर एप का ‘भास्कर समाधान’ सेगमेंट लगातार प्रभावी साबित हो रहा है। इस मंच के जरिए नागरिक अपनी समस्याएं सीधे जिम्मेदार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों तक पहुंचा रहे हैं। शिकायत पोस्ट होते ही संबंधित विभाग और जनप्रतिनिधि संज्ञान लेकर कार्रवाई कर रहे हैं, जिससे लोगों को समय पर राहत मिल रही है। ( आमजन से जुड़ी जनसमस्याएं और शहर की जमीनी हकीकत पोस्ट करने के लिए यहां क्लिक करें… ) वार्ड-38 की पार्षद गौरी नितिन पाठक बनीं आज की ‘पब्लिक स्टार’ रूपेश दीक्षित ने ‘भास्कर समाधान’ पर शिकायत दर्ज कराई थी कि ग्रीन वैली स्कूल की बाउंड्री से लगे खाली प्लॉट में भारी मात्रा में कूड़ा-कचरा जमा हो रहा है। लंबे समय से सफाई नहीं होने के कारण वहां कीड़े-मकोड़े पनप रहे थे, जिससे गंभीर बीमारियों का खतरा बढ़ गया था। शिकायत भास्कर समाधान पर सामने आने के बाद वार्ड-38 की पार्षद गौरी नितिन पाठक ने मामले का संज्ञान लिया। उनके प्रयासों से खाली प्लॉट की सफाई कराई गई और क्षेत्र को कचरा मुक्त कराया गया। इससे स्थानीय रहवासियों को गंदगी और संक्रमण के खतरे से राहत मिली। खाली प्लॉट से हटाया गया कचरा, रहवासियों को मिली राहत अजय राठौर ने ‘भास्कर समाधान’ पर शिकायत दर्ज कराई थी कि कावेरी सोसाइटी, कोलार स्थित सूर्यशिन प्रोटीन के सामने खाली प्लॉट में कचरा जमा होने से सांप, कीड़े और मच्छरों का प्रकोप बढ़ गया है। शिकायतकर्ता ने बताया था कि हाल ही में करीब आठ फीट लंबा सांप उनके घर में घुस गया था। प्लॉट मालिक सफाई नहीं करा रहा था, जिससे लोगों में भय का माहौल था। शिकायत भास्कर समाधान पर पोस्ट होने के बाद वार्ड-82 की पार्षद ज्योति मिश्रा ने मामले पर संज्ञान लिया और उनके निर्देश पर खाली प्लॉट की सफाई कराकर समस्या का समाधान कराया गया। भोपाल के कई क्षेत्रों में सफाई, स्ट्रीट लाइट और सड़क की समस्याएं बरकरार कल्याण नगर में सड़क किनारे कचरे का ढेर, रहवासी परेशान प्रकाश शर्मा ने शिकायत दर्ज कराई है कि कल्याण नगर, भानपुरा स्थित जीनियस स्कूल के पास नगर निगम का कचरा सड़क किनारे पड़ा हुआ है। शिकायतकर्ता का कहना है कि खुले में फैले कचरे से गंदगी और दुर्गंध फैल रही है तथा राहगीरों और स्थानीय लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। द्वारका नगर में 25 दिनों से बंद स्ट्रीट लाइट, अंधेरे से लोग परेशान विश्वकर्मा जी ने शिकायत दर्ज कराई है कि द्वारका नगर गली नंबर-1, बावड़ी के पीछे पिछले करीब 25 दिनों से स्ट्रीट लाइट बंद है। रात के समय पूरी गली अंधेरे में डूबी रहती है, जिससे लोगों को आवागमन में परेशानी होती है और दुर्घटना व असामाजिक गतिविधियों का खतरा बना रहता है। स्कूल और मंदिर के मुख्य मार्ग पर जलभराव, वर्षों से बनी हुई है समस्या एक समाजसेवी ने शिकायत दर्ज कराई है कि शासकीय स्कूल एवं हनुमान मंदिर के मुख्य मार्ग पर वर्षों से कीचड़ और जलभराव की समस्या बनी हुई है। गंदगी के कारण बच्चों, महिलाओं और ग्रामीणों को रोजाना परेशानी का सामना करना पड़ता है। मोती मस्जिद के पास तीन दिन से पड़ी गंदगी, सफाई नहीं होने से नाराजगी सुमित खंडेलवाल ने शिकायत दर्ज कराई है कि सुल्तानिया रोड स्थित न्यू राजीव प्रकाशन के सामने, मल्टीलेवल पार्किंग के पास पिछले तीन दिनों से सड़क पर गंदगी और मलबा पड़ा हुआ है। उनका कहना है कि इससे क्षेत्र में बदबू फैल रही है और बीमारियां फैलने का खतरा बना हुआ है। पब्लिक को आवाज देने का सबसे बड़ा डिजिटल प्लेटफॉर्म दैनिक भास्कर एप पर भास्कर समाधान सेगमेंट देश का पहला ऐसा डिजिटल प्लेटफॉर्म है, जहां शहरवासी खुद अपने इलाके से जुड़े सिविक इश्यू पोस्ट कर सकते हैं। यह पब्लिक को आवाज देने का सबसे बड़ा माध्यम बना है। एप को यूजर्स के लिए भी काफी आसान बनाया गया है और नए फीचर्स जोड़े गए हैं। किसी समस्या का समाधान होने पर यूजर्स बता सकते हैं कि उनकी शिकायत दूर कर दी गई है। अधिकारी बता सकेंगे, क्या एक्शन लिया दैनिक भास्कर के इस सेगमेंट में अधिकारी भी अपना एक्शन बता सकेंगे। शिकायत जिस विभाग से संबंधित है, वह अब सीधे उसके अधिकारियों तक पहुंचेगी। इसके बाद अधिकारी उस लोकेशन को मैप पर देख सकेंगे। यदि उन्होंने समाधान कर दिया है, तो शिकायतकर्ता को इसकी जानकारी एप के जरिए ही दे सकेंगे या बता सकेंगे कि अभी काम जारी है। अधिकारी चाहें तो जिस यूजर ने शिकायत की है, उसे भी कॉल कर सकेंगे। यूजर बता सकते हैं, समाधान हो गया एप को यूजर्स के लिए भी काफी आसान बनाया गया है और नए फीचर्स जोड़े गए हैं। किसी समस्या का समाधान होने पर यूजर्स बता सकते हैं कि उनकी शिकायत दूर कर दी गई है। भास्कर समाधान सेगमेंट बदलाव लाने की दिशा में एक सकारात्मक पहल है। इसके पीछे भास्कर एप की सोच यही है कि शहर के हर कोने से लोगों की समस्याएं प्रशासन तक रियल टाइम पहुंचें, ताकि आमजन और प्रशासन के बीच एक सेतु बन सके। लोग सीधे अपनी बात कह सकें। ऐसे में सरकार और अधिकारियों को चाहिए कि वे इन पोस्ट को सकारात्मक रूप से लें और समाधान का रास्ता चुनें।



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हरिद्वार में कांवड़िया बहा, रुद्रप्रयाग में कार पर गिरा बोल्डर: एमपी में नदी-नाले उफान पर, राजस्थान समेत 16 राज्यों में ऑरेंज अलर्ट




देशभर में तेज बारिश का दौर जारी है। मौमस विभाग ने गुरुवार को राजस्थान समेत 16 राज्यों में बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। उत्तराखंड के 7 जिलों में बुधवार को बारिश हुई। हरिद्वार में गंगा के तेज बहाव में गंगाजल भरते समय युवक बहने लगा। घाट पर ड्यूटी कर रही SDRF टीम नेउसे बचा लिया। वहीं, रुद्रप्रयाग के अगस्त्यमुनि में मूसलाधार बारिश से कई इलाकों में जलभराव हो गया। सिल्ली के पास मलबा आने से हाईवे कुछ देर बाधित रहा, जबकि पेट्रोल पंप के पास पहाड़ी से बोल्डर गिरने से एक कार दब गई। मध्य प्रदेश के बालाघाट में दो दिनों से लगातार बारिश के कारण बीते 24 घंटे में करीब 3 इंच पानी गिरा। इससे दैतबर्रा-मंगलेगांव पुल, टोंडिया नाला और थानेगांव का नाला उफान पर आ गए। छत्तीसगढ़ के गरियाबंद में उफनते सरगी नाले को पार करते समय एक शख्स बह गया। करीब 5 किमी दूर उसका शव मिला। छत्तीसगढ़ के सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले में बहे दंपती का शव और उनकी कार 4 दिन बाद मिली। वहीं सक्ती जिले में लापता युवक का शव बुधवार को बरामद कर लिया गया। देशभर से बारिश-बाढ़ की तस्वीरें अगले 2 दिन के मौसम का हाल 31 जुलाई: 1 अगस्त:



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Sawan 2026: सावन का पहला दिन आज, कैसे करें भगवान शिव की पूजा? जानें विधि, मुहूर्त, मंत्र


Sawan 2026: साल 2026 में सावन का पवित्र महीना 30 जुलाई, गुरुवार यानी आज से शुरू होकर 28 अगस्त, शुक्रवार को समाप्त होगा. इस दौरान पहला सावन सोमवार 3 अगस्त को है. सावन का महीना भगवान शिव की आराधना के लिए सबसे पवित्र और शुभ माना जाता है. मान्यता है कि इस महीने में सच्चे मन से की गई शिव पूजा, जलाभिषेक और व्रत जीवन की कई परेशानियों को दूर करने में सहायक माने जाते हैं. आज सावन का पहला दिन है और देशभर के शिव मंदिरों में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखने को मिल रही हैं.

कई लोग घर पर ही शिवलिंग का अभिषेक कर पूजा कर रहे हैं, तो कई श्रद्धालु मंदिर पहुंचकर भोलेनाथ का आशीर्वाद ले रहे हैं. यदि आप भी आज पहली बार सावन की पूजा करने जा रहे हैं या सही विधि जानना चाहते हैं, तो यहां जानिए पूजा का क्रम, शुभ मुहूर्त, मंत्र, भोग और इस दिन का धार्मिक महत्व.

सावन का पहला दिन क्यों माना जाता है खास?

हिंदू धर्म में सावन का महीना भगवान शिव को समर्पित माना जाता है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, समुद्र मंथन के दौरान निकले हलाहल विष को भगवान शिव ने इसी काल में ग्रहण किया था, जिससे सृष्टि की रक्षा हुई. तभी से सावन में शिव आराधना का विशेष महत्व माना जाता है. इस महीने में सोमवार का व्रत, रुद्राभिषेक, शिव मंत्रों का जाप और बिल्वपत्र अर्पित करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है. यही वजह है कि सावन शुरू होते ही मंदिरों में भक्तों की संख्या कई गुना बढ़ जाती है.

सावन के पहले दिन पूजा के शुभ मुहूर्त

सावन के पहले दिन ब्रह्म मुहूर्त से लेकर प्रातःकाल तक शिव पूजा करना सबसे शुभ माना जाता है. यदि सुबह पूजा संभव न हो तो प्रदोष काल में भी भगवान शिव की आराधना की जा सकती है. धार्मिक विद्वानों के अनुसार पूजा के दौरान मन की पवित्रता और श्रद्धा सबसे महत्वपूर्ण होती है. केवल शुभ समय ही नहीं, बल्कि सच्ची भक्ति भी पूजा को सफल बनाती है.

ब्रह्म मुहूर्त: सुबह 04:19 बजे से 05:01 बजे तक
प्रातः पूजन उत्तम समय: सुबह 05:28 बजे से 06:21 बजे तक
अभिजीत मुहूर्त: दोपहर 12:00 बजे से 12:54 बजे तक
विजय मुहूर्त: शाम 04:28 बजे से शाम 05:29 बजे तक
गोधूलि मुहूर्त: रात 09:32 बजे से रात 09:50 बजे तक

भगवान शिव की पूजा विधि

सुबह स्नान कर स्वच्छ वस्त्र पहनें

  • दिन की शुरुआत स्नान के बाद साफ और हल्के रंग के वस्त्र पहनकर करें. पूजा स्थल को साफ करें और शिवलिंग के सामने दीपक जलाएं.
  • सबसे पहले तांबे के पात्र से शिवलिंग पर जल चढ़ाएं. इसके बाद दूध, दही, शहद, घी और शक्कर से पंचामृत अभिषेक करें. अंत में फिर से स्वच्छ जल अर्पित करें.
  • भगवान शिव को बेलपत्र, धतूरा, आक का फूल, सफेद चंदन, भांग, अक्षत, सफेद पुष्प और मौसमी फल अर्पित किए जाते हैं. ध्यान रखें कि बेलपत्र तीन पत्तियों वाला और साफ होना चाहिए.

सावन में कौन-सा मंत्र करें?

पूजा के दौरान “ॐ नमः शिवाय” मंत्र का जाप सबसे सरल और प्रभावशाली माना जाता है. इसके अलावा महामृत्युंजय मंत्र का श्रद्धापूर्वक जाप भी किया जा सकता है.

महामृत्युंजय मंत्र

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्.
उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक्षीय मामृतात्॥

मान्यता है कि नियमित मंत्र जाप से मन को शांति मिलती है और सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है.

भगवान शिव को क्या भोग लगाएं?

सावन के पहले दिन भगवान शिव को सात्विक भोग अर्पित करना शुभ माना जाता है. आप दूध से बनी खीर, मिश्री, मौसमी फल, मखाना, पंचामृत या गुड़ का भोग लगा सकते हैं. कई परिवारों में घर का बना सादा प्रसाद चढ़ाने की भी परंपरा है. भोग लगाने के बाद परिवार के सभी सदस्यों में प्रसाद बांटना शुभ माना जाता है.

पूजा के दौरान इन बातों का रखें ध्यान

शिव पूजा में तुलसी के पत्ते अर्पित नहीं किए जाते. पूजा के समय क्रोध, विवाद और नकारात्मक विचारों से दूर रहने की सलाह दी जाती है. यदि व्रत रख रहे हैं तो सात्विक भोजन करें और पूरे दिन भगवान शिव के नाम का स्मरण करते रहें. आजकल कई लोग ऑफिस जाने से पहले कुछ मिनट निकालकर घर में ही शिवलिंग पर जल चढ़ाते हैं. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, कम समय होने पर भी श्रद्धा के साथ की गई पूजा का अपना महत्व होता है.

सावन की पूजा का धार्मिक महत्व

सावन का महीना केवल व्रत और पूजा तक सीमित नहीं है, बल्कि यह आत्मसंयम, सकारात्मक सोच और आध्यात्मिक साधना का भी समय माना जाता है. इस दौरान भक्त नियमित रूप से शिव मंदिर जाते हैं, जरूरतमंदों की सहायता करते हैं और सात्विक जीवनशैली अपनाने का प्रयास करते हैं. धार्मिक मान्यता है कि सावन में भगवान शिव की आराधना करने से वैवाहिक जीवन में सुख, परिवार में शांति, कार्यों में सफलता और मानसिक संतुलन प्राप्त होता है. हालांकि इन मान्यताओं का आधार धार्मिक विश्वास है और इन्हें श्रद्धा के संदर्भ में ही देखा जाता है.



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निस्वार्थ प्रेम से ही रिश्ते निभते हैं: जया किशोरी: कथा के अंतिम दिन कर्म और मोक्ष का भी महत्व श्रद्धालुओं को समझाया – Agra News




रिश्तों में स्वार्थ नहीं, बल्कि निस्वार्थ प्रेम ही सबसे बड़ा आधार है। श्रीमद्भागवत कथा के विश्राम दिवस पर कथावाचक जया किशोरी ने प्रेम, कर्म और मोक्ष का संदेश देते हुए कहा कि भगवान भी सच्चे प्रेम के आगे स्वयं को समर्पित कर देते हैं। कथा समाप्ति पर हजारों श्रद्धालु भावुक हो गए और पूरे पंडाल में ‘राधे-राधे’ व ‘हरि बोल’ के जयकारे गूंजते रहे। आगरा के फतेहाबाद रोड स्थित राजदेवम में श्रीश्याम परिवार सेवा ट्रस्ट की ओर से आयोजित श्रीमद्भागवत कथा के विश्राम दिवस पर कथावाचक जया किशोरी ने जरासंध वध, श्रीकृष्ण के 16,108 विवाह, सुदामा चरित्र और राजा परीक्षित के मोक्ष प्रसंग का वर्णन किया। कथा के दौरान उन्होंने कहा कि किसी भी रिश्ते की सबसे बड़ी ताकत निस्वार्थ प्रेम है। भगवान श्रीकृष्ण ने भी प्रेम के कारण अपनी ठकुराई छोड़ अर्जुन का सारथी बनना स्वीकार किया और दुर्योधन का राजसी भोजन छोड़ विदुर के घर सादा भोजन किया। उन्होंने कहा कि सच्चे प्रेम में स्वार्थ का कोई स्थान नहीं होता। जया किशोरी ने कर्म के महत्व पर भी जोर देते हुए कहा कि हर व्यक्ति को अपने कर्मों का फल अवश्य मिलता है। सुख मिले तो भगवान का धन्यवाद करें और दुख मिले तो उनका नाम स्मरण करें। उन्होंने कहा कि पहले समाज में वर्ण व्यवस्था कर्म के आधार पर थी और हर वर्ग समाज की सेवा के लिए कार्य करता था, लेकिन आज अधिकांश लोग केवल अपने हित तक सीमित हो गए हैं। कथा विश्राम के दिन बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। पंडाल पूरा भर जाने के कारण कई लोगों ने खड़े होकर कथा सुनी। कथा समाप्त होने के बाद जया किशोरी की विदाई के समय कई श्रद्धालुओं की आंखें नम हो गईं। इसके बाद भजनों पर श्रद्धालु देर तक भक्ति में झूमते रहे।



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बामनिया स्टेशन पर ट्रेन से कटकर युवक की मौत: पंथ बोराली का रहने वाला था, तीन बच्चे छोड़ गया – Jhabua News




झाबुआ जिले के बामनिया रेलवे स्टेशन पर बुधवार रात करीब 9 बजे एक युवक की एक्सप्रेस ट्रेन की चपेट में आने से मौत हो गई। हादसे में युवक का एक पैर कटकर अलग हो गया और सिर में गंभीर चोटें आईं। मृतक की पहचान पंथ बोराली (टेमरिया) निवासी मुकेश, पिता जोगा माल के रूप में हुई है। मृतक के पीछे तीन छोटे बच्चे हैं, जिनमें दो लड़के और एक लड़की शामिल हैं। घटना की सूचना मिलने पर रेलवे सुरक्षा बल (RPF) के मयाराम गुर्जर मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि समाचार लिखे जाने तक मृतक के परिजन घटनास्थल पर नहीं पहुंचे थे। रेलवे पुलिस इस पूरे हादसे के वास्तविक कारणों का पता लगा रही है और आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।



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सावन में खाएं बिना लहसुन-प्याज वाला जैन समोसा, ट्राई करें ये रेसिपी


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सावन के महीने में यदि आप लहसुन और प्याज नहीं खाते हैं, तो जैन समोसा की रेसिपी आपके बेहतरीन विकल्प साबित हो सकती है. यदि आप भी बरसात के दौरान घर में बने गरमागरम चाय और समोसे का आनंद लेना चाहते हैं तो यहां जानिए पूरी रेसिपी.

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अगर आपको घर पर नई-नई रेसिपी ट्राई करना पसंद है, तो जैन समोसे की यह स्वादिष्ट रेसिपी जरूर आजमाएं. आमतौर पर समोसे की स्टफिंग आलू से तैयार की जाती है, लेकिन इस खास रेसिपी में कच्चे केले का इस्तेमाल किया जाता है, जो इसे एक अलग स्वाद और टेक्सचर देता है. यह रेसिपी पूरी तरह जैन है, इसलिए इसमें प्याज और लहसुन का उपयोग नहीं किया जाता, जिससे ये सावन में खाने के लिए एक बेहतरीन स्नैक साबित होते हैं.

कच्चे केले, मटर और सुगंधित मसालों का मिश्रण इसे बेहद लाजवाब बनाता है. यह समोसा चाय के साथ शाम के नाश्ते के लिए एक बेहतरीन विकल्प है. आप इसे घर की पार्टी, त्योहार, मेहमानों की खातिरदारी या पिकनिक के लिए भी बना सकते हैं. अगर आप इसे थोड़ा हेल्दी बनाना चाहते हैं, तो डीप फ्राई करने की बजाय एयर फ्रायर में भी तैयार कर सकते हैं. सौंठ की चटनी या हरी पुदीना चटनी के साथ इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है.

सामग्री
आधा कप मैदा, आधा कप गेहूं का आटा, आधा चम्मच अजवाइन, 2 बड़े चम्मच घी, 2 कच्चे केले, 1/4 कप मटर, 2 हरी मिर्च, 1 चम्मच जीरा, 1 चम्मच सौंफ, 1/4 चम्मच हींग, 1/4 चम्मच सोंठ पाउडर, 1/4 चम्मच हल्दी, 1/2 चम्मच धनिया पाउडर, 1/2 चम्मच अमचूर पाउडर, 1/4 चम्मच गरम मसाला, 1/2 चम्मच चीनी, स्वादानुसार नमक, 2 बड़े चम्मच हरा धनिया और तलने के लिए तेल.

समोसा बनाने की विधि

  • सबसे पहले एक बर्तन में मैदा, गेहूं का आटा, अजवाइन और नमक डालकर मिलाएं. इसमें घी और थोड़ा-थोड़ा गुनगुना पानी डालते हुए नरम आटा गूंथ लें. आटे पर हल्का तेल लगाकर कुछ देर ढककर रख दें.
  • अब कच्चे केलों को छीलकर हल्का नरम होने तक उबाल लें. पानी निकालकर इन्हें अच्छी तरह मैश कर लें. एक पैन में थोड़ा तेल गर्म करें और उसमें हींग, जीरा और बारीक कटी हरी मिर्च डालकर भूनें. इसके बाद मैश किया हुआ केला और मटर डालकर मिला लें.
  • अब इसमें सोंठ पाउडर, हल्दी, धनिया पाउडर, अमचूर, गरम मसाला, चीनी और नमक डालें. हल्की कुटी हुई सौंफ भी मिलाएं. मिश्रण को 5-6 मिनट तक पकाएं और आखिर में हरा धनिया डाल दें.
  • गूंथे हुए आटे की लोई बनाकर पतली रोटी बेलें और उसे दो हिस्सों में काट लें. एक हिस्से को कोन का आकार दें और उसमें तैयार स्टफिंग भरकर किनारों को अच्छी तरह बंद कर दें. इसी तरह सभी समोसे तैयार कर लें.
  • कड़ाही में तेल गर्म करें और समोसों को धीमी से मध्यम आंच पर सुनहरा और कुरकुरा होने तक तलें. तैयार जैन समोसे को हरी चटनी या सौंठ की चटनी के साथ गर्मागर्म परोसें.

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शारदा सिंहSenior Sub Editor

शारदा सिंह एक अनुभवी लाइफस्टाइल पत्रकार हैं, जिनके पास डिजिटल मीडिया और कंटेंट लेखन के क्षेत्र में 6 वर्षों से अधिक का अनुभव है. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से…

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