Tuesday, June 16, 2026
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गेहूं की चक्की पर दिखा 5 फीट लंबा कोबरा: ग्रामीणों ने नहीं की छेड़छाड़, वन्यजीव टीम ने किया रेस्क्यू – Chittorgarh News




चित्तौड़गढ़ जिले के लालजी का खेड़ा गांव में स्थित एक गेहूं पीसने की चक्की पर करीब 5 फीट लंबा भारतीय नाग (कोबरा) दिखाई दिया। जिस जगह यह कोबरा मिला, वहां रोज बड़ी संख्या में ग्रामीण गेहूं और अन्य अनाज पिसवाने के लिए आते हैं। ऐसे में जहरीले सांप के दिखाई देने पर लोगों ने सावधानी बरतते हुए इसकी सूचना वन्यजीव रेस्क्यू टीम को दी। समय रहते जानकारी मिलने से किसी तरह की अप्रिय घटना नहीं हुई। मौके पर मौजूद लोगों ने सुरक्षित दूरी बनाकर रखी और रेस्क्यू टीम के पहुंचने का इंतजार किया। राहुल वानखेड़े ने किया रेस्क्यू, ग्रामीणों को भी किया जागरूक सूचना मिलने पर चित्तौड़गढ़ वन्यजीव एवं पर्यावरण संरक्षण समिति के सदस्य राहुल वानखेड़े मौके पर पहुंचे। उन्होंने पूरी सावधानी के साथ कोबरा का सुरक्षित रेस्क्यू किया। रेस्क्यू के दौरान आसपास काफी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे, जिन्हें सांप से दूर रहने और भीड़ नहीं लगाने की सलाह दी गई। रेस्क्यू के बाद राहुल वानखेड़े ने बताया कि अधिकांश सांप बिना वजह इंसानों पर हमला नहीं करते। जब उन्हें खतरा महसूस होता है, तभी वे अपनी सुरक्षा के लिए प्रतिक्रिया देते हैं। उन्होंने कहा कि किसी भी सांप को देखकर घबराने या उसे मारने की कोशिश करने के बजाय तुरंत प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम या वन विभाग को सूचना देनी चाहिए। कोबरा की अपनी खास पहचान, खेतों के लिए भी है उपयोगी राहुल वानखेड़े ने बताया कि भारतीय नाग देश के मुख्य विषैले सांपों में शामिल है। खतरा महसूस होने पर यह अपना फन यानी हुड फैला लेता है। इसके फन के पीछे चश्मे जैसा निशान दिखाई देता है, जो इसकी खास पहचान मानी जाती है। उन्होंने बताया कि कोबरा सहित कई अन्य सांप खेतों में चूहों की संख्या नियंत्रित करते हैं, जिससे किसानों की फसलों को फायदा होता है। इसी वजह से सांप पर्यावरण और प्राकृतिक संतुलन का जरूरी हिस्सा माने जाते हैं। काटने पर तुरंत इलाज जरूरी, प्राकृतिक आवास में छोड़ा गया राहुल वानखेड़े के अनुसार कोबरा का जहर काफी प्रभावशाली होता है। इसके काटने के बाद 15 मिनट से 2 घंटे के भीतर सांस लेने में परेशानी, शरीर के कुछ हिस्सों में लकवे जैसे लक्षण या गंभीर स्थिति पैदा हो सकती है। इसलिए सांप के काटने की स्थिति में बिना देरी किए हॉस्पिटल पहुंचना जरूरी है। रेस्क्यू अभियान पूरा होने के बाद भारतीय नाग को सुरक्षित रूप से उसके प्राकृतिक आवास में छोड़ दिया गया, ताकि वह अपने प्राकृतिक वातावरण में सुरक्षित रह सके।



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करोड़ों की मालकिन होकर भी ऑटो-मेट्रो में घूमती है दीपिका की बेटी! नाना ने किया खुलासा


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दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह की नन्हीं बेटी ‘दुआ’ की लाइफस्टाइल कैसी है और वह आम बच्चों से कितनी अलग है? इस बात का सबसे बड़ा खुलासा खुद दीपिका के पापा प्रकाश पादुकोण ने किया है. उन्होंने बताया कि सेलिब्रिटी किड होने के बावजूद दुआ को ऑटो-रिक्शा की सवारी करना, मेट्रो में घूमना और लोकल पार्क जाना बेहद पसंद है. इसके साथ ही जानिए कि दीपिका-रणवीर अपनी बेटी की परवरिश कैसे कर रहे हैं और इस स्टार कपल के घर जल्द ही कौन सी बड़ी खुशखबरी आने वाली है!

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नई दिल्ली: दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह के घर जब से बेटी ‘दुआ’ का जन्म हुआ है, तब से उनके फैंस इस स्टार कपल की हर एक अपडेट जानने के लिए बहुत बेताब रहते हैं. अब पहली बार दीपिका के पापा और मशहूर बैडमिंटन खिलाड़ी प्रकाश पादुकोण ने अपनी नातिन दुआ और दोनों सुपरस्टार्स के पैरेंटिंग स्टाइल को लेकर कई प्यारी बातें बताई हैं. उन्होंने बताया कि दीपिका और रणवीर अपनी बेटी की परवरिश खुद अपने हाथों से बहुत अच्छे से कर रहे हैं.

हाल ही में इंडियन एक्सप्रेस से एक बातचीत के दौरान प्रकाश पादुकोण ने बताया कि दीपिका और रणवीर अपनी नन्हीं बेटी दुआ के लिए पूरी तरह समर्पित हैं.

दीपिका-रणवीर पर क्या बोले पापा प्रकाश

उन्होंने कहा कि बिल्कुल, दीपिका मां होने के नाते थोड़ा ज्यादा काम करती हैं, लेकिन रणवीर भी जब अपने काम और शूटिंग से फ्री होते हैं, तो बेटी की देखभाल में बहुत ज्यादा मदद करते हैं. इसके अलावा दोनों के परिवार भी हर समय मदद के लिए तैयार रहते हैं. प्रकाश पादुकोण ने हंसते हुए यह भी माना कि पहले उन्हें समझ नहीं आता था कि नाना-नानी या दादा-दादी अपने बच्चों के बच्चों को लेकर इतने ज्यादा एक्साइटेड क्यों रहते हैं, लेकिन अब दुआ के आने के बाद उन्हें यह बात बहुत अच्छी तरह समझ आ गई है.

सेलिब्रिटी बच्ची होने के बाद भी आम बच्चों जैसी परवरिश

प्रकाश पादुकोण ने बताया कि वह दुआ को एक बिल्कुल नॉर्मल और आम बच्चे की तरह बड़ा करना चाहते हैं. इसके लिए वह दुआ को रोजमर्रा की जिंदगी के अनोखे अनुभव देते हैं, जो आमतौर पर स्टार्स के बच्चों को कम ही देखने को मिलते हैं. वह दुआ को मेट्रो की सैर कराते हैं, ऑटो-रिक्शा की सवारी करवाते हैं और शाम को लोकल पार्क में घुमाने भी ले जाते हैं. प्रकाश ने बताया कि दुआ को पैडल ग्राउंड जाना और उनके घर के पास से गुजरने वाली ट्रेन को देखना बहुत पसंद है.

बेहद मिलनसार हैं दुआ

अपनी नातिन की तारीफ करते हुए प्रकाश पादुकोण ने कहा कि दुआ बहुत ही मिलनसार बच्ची है. वह लोगों से बहुत जल्दी घुल-मिल जाती है और लगभग हर किसी को देखकर ‘हेलो’ बोलती है. बहुत छोटी उम्र से ही माता-पिता के साथ ट्रैवल करने की वजह से उसे लोगों के बीच रहना बहुत पसंद है. वह बहुत जल्दी बड़ी हो रही है और इस समय वह जिंदगी के बहुत ही प्यारे और दिलचस्प फेज में है.

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NEET एग्जाम से पहले टेलीग्राम पर सरकार की लगाम, 22 जून तक नहीं कर सकेंगे एक्सेस


आपको यह तो पता ही होगा कि 3 मई 2026 को NEET-UG की परीक्षा हुई थी जो लीक हो जाने के कारण रद्द कर दी गई। अब देश में फिर से NEET-UG 2026 की परीक्षा कराई जा रही है और इसके लिए तारीख 21 जून तय हुई है। यानी 21 जून को फिर से NEET की परीक्षा होगी और इस बार पेपर लीक न हो, इसके लिए सरकार कड़ी तैयारी कर रही है। इसी संबंध में एक बड़ा फैसला भी लिया है। आपको बता दें कि सरकार ने टेलीग्राम पर रोक लगा दी है। यह रोक अस्थाई है। अब लोग टेलीग्राम को 22 जून तक नहीं चला पाएंगे। इसका मतलब NEET की दोबारा परीक्षा होने तक NEET को लोग एक्सेस नहीं कर पाएंगे। इसके संबंध में NTA ने एक प्रेस रिलीज जारी किया है। आइए आपको बताते हैं कि उसमें क्या कुछ लिखा है

NTA के प्रेस रिलीज में क्या लिखा है?

सरकार ने टेलीग्राम पर कुछ दिनों की रोक लगा दी है और यह रोक NEET की परीक्षा के बाद खत्म होने वाली है। इसका मतलब यह है कि 22 जून तक लोग टेलीग्राम को एक्सेस नहीं कर पाएंगे। इसके संबंध में NTA ने एक प्रेस रिलीज जारी किया है। उस प्रेस रिलीज में लिखा है, ‘राष्ट्रीय परीक्षण एजेंसी (NTA) भारत में टेलीग्राम प्लेटफॉर्म के संबंध में आज जारी किए गए निर्देशों का स्वागत करती है। NTA की सिफारिशों पर जारी किए गए ये निर्देश तय समय के हिसाब से हैं। इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी एक्ट, 2000 के सेक्शन 69A के तहत एक निर्देश, जो 22 जून 2026 को खत्म होने वाले एक तय और सीमित समय के लिए भारत में टेलीग्राम प्लेटफॉर्म के एक्सेस पर रोक लगाता है, जिसमें NEET (UG) 2026 के दोबारा एग्जाम का दिन और उसके तुरंत बाद की घटनाएं शामिल हैं।’

उसी प्रेस रिलीज में आगे लिखा है, ‘इसके अलावा एक निर्देश जिसके तहत प्लेटफॉर्म को भारत में, पहले से पोस्ट किए गए मैसेज के लिए मैसेज-एडिटिंग फीचर को 30 जून 2026 को खत्म होने वाले एक तय समय के लिए बंद करना होगा, जिसमें उस खास स्ट्रक्चरल फीचर के बारे में बताया गया है जिसके ज़रिए प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल नेशनल एग्जाम के मामले में घटना के बाद “पेपर लीक” के सबूत बनाने के लिए किया गया है।’

प्रेस रिलीज में आगे क्या लिखा है?

NTA की तरफ से जारी प्रेस रिलीज में आगे लिखा है कि, ‘ये दोनों कदम पब्लिक ऑर्डर के हित में उठाए गए हैं क्योंकि 21 जून 2026 को होने वाले NEET (UG) 2026 के दोबारा एग्जाम में बैठने वाले कैंडिडेट्स को धोखा देने के लिए चीटिंग रैकेट्स प्लेटफॉर्म का ऑर्गनाइज़्ड इस्तेमाल कर रहे थे। NTA, स्टूडेंट्स के हित में समय पर की गई इस कार्रवाई के लिए इलेक्ट्रॉनिक्स और इन्फॉर्मेशन टेक्नोलॉजी मंत्रालय का शुक्रिया अदा करता है, जिससे NTA को 21 जून 2026 को सेफ और सिक्योर एग्जाम कराने में काफी मदद मिलेगी।’





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सरकारी जमीन कब्जे के मामले में हाईकोर्ट का स्वत: संज्ञान: कहा-पौधे नहीं बचा पाए ‘कागजी’ समाजसेवी, याचिकाकर्ता को जनहित याचिका से हटाया – Gwalior News




मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने सरकारी जमीन पर कथित अवैध कब्जे से जुड़े मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने जनहित याचिका लगाने वाले चंद्रेश त्यागी का नाम याचिका से हटा दिया है। कोर्ट ने माना कि खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताने वाले याचिकाकर्ता ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई। हालांकि, सरकारी जमीन पर कब्जे के आरोपों को गंभीर मानते हुए कोर्ट ने मामले को बंद नहीं किया और अब इसे स्वत: संज्ञान (सुओ मोटू) के रूप में सुनने का फैसला लिया है। 8 बीघा जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप याचिका में आरोप लगाया गया था कि ग्वालियर के पुरानी छावनी क्षेत्र में करीब 8 बीघा सरकारी जमीन पर अवैध बाउंड्रीवॉल बनाकर प्लॉट काटे जा रहे हैं और उन्हें बेचा जा रहा है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता को पर्यावरण संरक्षण के तहत पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का निर्देश दिया था। लगाए पौधे, लेकिन देखभाल नहीं की जांच में सामने आया कि याचिकाकर्ता ने औपचारिकता पूरी करते हुए पौधे तो लगाए, लेकिन उनकी देखभाल नहीं की। इसके चलते सभी पौधे नष्ट हो गए। कोर्ट ने इसे गंभीर लापरवाही माना। 1.53 लाख रुपए जमा करने से किया इनकार कोर्ट ने नगर निगम से नए पौधे लगाने और पांच साल तक उनकी देखभाल का खर्च मांगा था। निगम ने इसकी लागत 1 लाख 53 हजार 765 रुपये बताई। जब कोर्ट ने यह राशि जमा कराने को कहा, तो याचिकाकर्ता की ओर से इनकार कर दिया गया। कोर्ट की सख्त टिप्पणी हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता का खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताना सही साबित नहीं हुआ। अगर वह वास्तव में समाज और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार होते, तो पौधों की देखभाल और खर्च वहन करने से पीछे नहीं हटते। हाईकोर्ट का आदेश कब्जे के आरोपों की होगी जांच कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता की कमियों के कारण जमीन कब्जे के मामले को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हुआ है तो उसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। अब मामले की अगली सुनवाई में प्रशासन को सीमांकन रिपोर्ट पेश करनी होगी।



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दिल्ली के ये हैं 6 बेस्ट प्योर वेज रेस्टोरेंट, शौकीनों के लिए है जन्नत


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दिल्ली के ये हैं 6 बेस्ट प्योर वेज रेस्टोरेंट, शौकीनों के लिए है जन्नत

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Delhi Top 6 Pure-Veg North Indian Restaurants: दिल्ली के शुद्ध शाकाहारी नॉर्थ इंडियन रेस्टोरेंट में वेज गुलाटी, सात्विक, काके दा होटल, कारोबार, चंगेजी वेज और द येलो चिली खास आकर्षण हैं. यहां स्वाद के दीवानों की हमेशा भीड़ लगी रहती है. यहां आप अपने परिवार के साथ शानदार भोजन कर सकते हैं.

अगर आप दिल्ली में स्वादिष्ट और शुद्ध शाकाहारी खाने का मज़ा लेने का प्लान बना रहे हैं तो राजधानी में कई रेस्टोरेंट हैं. जो अपने बेहतरीन स्वाद, शानदार इंटीरियर और फ़ैमिली-फ़्रेंडली माहौल के लिए मशहूर हैं. यहां हम 6 ऐसे शुद्ध शाकाहारी भारतीय रेस्टोरेंट के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें आप आसानी से अपने ट्रिप प्लान में शामिल कर सकते हैं.

वेज गुलाटी (पंडारा रोड) यह दिल्ली के सबसे मशहूर प्योर वेजिटेरियन नॉर्थ इंडियन रेस्टोरेंट में से एक है. यहां की दाल मखनी, पनीर बटर मसाला और स्टफ्ड नान काफी फेमस हैं. अगर आपको रिच ग्रेवी वाला पंजाबी खाना पसंद है, तो यह जगह ज़रूर ट्राई करें. यहां स्वाद के दीवानों की भीड़ लगी रहती है. 

सात्विक रेस्टोरेंट, साकेत अगर आप शांत और थोड़े प्रीमियम माहौल में शुद्ध शाकाहारी खाना ढूंढ रहे हैं तो सात्विक रेस्टोरेंट एक बढ़िया ऑप्शन है. यह बिना प्याज और लहसुन के कई तरह के स्वादिष्ट नॉर्थ इंडियन डिश परोसता है. रेस्टोरेंट का इंटीरियर शाही एहसास देता है, जिससे यह फैमिली डिनर और छोटे सेलिब्रेशन के लिए एक पॉपुलर ऑप्शन बन गया है.

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दिल्ली का मशहूर काके दा होटल न सिर्फ़ अपने नॉन-वेजिटेरियन खाने के लिए, बल्कि अपने वेजिटेरियन खाने के लिए भी जाना जाता है. यहां का पनीर बटर मसाला, दाल फ्राई और बटर रोटी पॉपुलर चॉइस है. अगर आपको देसी ढाबा-स्टाइल नॉर्थ इंडियन खाना पसंद है, तो यह जगह एक बढ़िया चॉइस हो सकती है.

दिल्ली के करोल बाग में शंकर रोड पर मौजूद यह कारोबार रेस्टोरेंट अपनी बेहतरीन वेजिटेरियन थाली और नॉर्थ इंडियन फ्लेवर के लिए मशहूर है. यहां आप एक ही प्लेट में कई तरह की सब्ज़ी, रोटियां, मिठाइयां और खास डिशेज का मजा ले सकते हैं. इसे परिवार के साथ बैठकर खाने का मजा लेने के लिए एक शानदार जगह माना जाता है.

अगर आपको मुगलई स्टाइल का नॉर्थ इंडियन खाना पसंद है, तो चंगेजी वेज आपकी लिस्ट में जरूर होना चाहिए. पनीर चंगेज़ी, वेज कबाब और मलाई ग्रेवी डिश यहां काफी पॉपुलर हैं. इसका अनोखा और रिच फ्लेवर खाने के शौकीनों को बहुत पसंद आता है. इसके अलावा मशहूर शेफ संजीव कपूर का द येलो चिली नॉर्थ इंडियन खाने के लिए एक शानदार जगह है. यहां की दाल मखनी, पनीर टिक्का और वेज बिरयानी पॉपुलर है. रेस्टोरेंट का इंटीरियर भी काफी क्लासी है, जो इसे दोस्तों और परिवार के साथ डिनर के लिए एक बढ़िया ऑप्शन बनाता है.

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बड़े से बड़े लोगों की चड्डी उतर गई, कौन बचा: TMC सांसदों के दल-बदल पर पूर्व मंत्री बोले- तोड़ने के लिए दो चीज एक तो पैसा, दूसरा भय – Gonda News




गोंडा जिले के करनैलगंज से पूर्व सपा विधायक और पूर्व राज्य मंत्री योगेश प्रताप सिंह ने तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसदों के दल-बदल पर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि बड़े से बड़े लोगों की चड्डी उतर गई, बड़े-बड़े लोग दल बदल रहे हैं कौन बचा हुआ है टीएमसी के 28 सांसद व विधायक इसी तरह टूट गए हैं। योगेश प्रताप सिंह के अनुसार नेताओं को तोड़ने के लिए दो मुख्य चीजें होती हैं: पैसा और भय या लालच। उन्होंने कहा कि जब पैसा, भय और लालच का मिश्रण सामने रखा जाता है, तो दुनिया में कौन बचेगा? उनके मुताबिक, केवल वही लोग बचेंगे जो हिमालय की कंदराओं में बसे हैं और जो निस्पृह व निर्मोही हैं।
उन्होंने आगे कहा कि आज उत्तर प्रदेश सहित पूरे देश में भय या आतंक का माहौल नहीं है। सुप्रीम कोर्ट, हाई कोर्ट के जज, बड़े अफसर और नेता अब भयभीत नहीं हैं। सिंह ने सवाल उठाया कि बंगाल में हो रही यह दल-बदल की स्थिति क्या ममता बनर्जी की नाकामी है? उन्होंने कहा कि अब राजनीति का तरीका बदल गया है, जहां डराने के लिए पहले पांच उंगलियां और फिर मुट्ठी दिखाई जाती थी। पूर्व मंत्री ने सीबीआई और ईडी जैसी एजेंसियों द्वारा दंडित किए गए लोगों का भी जिक्र किया। उन्होंने कहा कि जो लोग 6 महीने से 2 साल तक जेल में रहे, वे लौटने पर बरी हो गए।
उन्होंने अरविंद केजरीवाल और मनीष सिसोदिया का उदाहरण देते हुए कहा कि वे भी बरी बैठे हैं। सिंह ने पूछा कि ऐसे मामलों में कितने लोगों को सजा हुई है। तमाम मामले न्यायालय में लंबित है किसी को कोई सजा नहीं हुई जो सच का सामना कर ले जा रहा है। वह बच जा रहा है जो सामना नहीं कर पा रहा है वह नहीं बच पा रहा है और फिर उसे मजबूरन पार्टी छोड़ना पड़ता है। यह बयान पूर्व राज्य मंत्री योगेश प्रताप सिंह ने कल करनैलगंज के डाक बंगले में दिया था, जो आज सामने आया है।



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भोजपुर में कुएं में मिला लापता शख्स का शव: परिजनों ने हत्या की जताई आशंका; भतीजा बोला- किसी से दुश्मनी नहीं थी – Bhojpur News




भोजपुर में एक शख्स का शव कुएं से मिला है। छह दिन से लापता थे। परिजनों हत्या कर शव कुएं में फेंकने की आशंका जताई है। मृतक अमरेंद्र सिंह(55) विशंभरपुर गांव के रहने वाले थे। घटना चौरी थाना क्षेत्र की है। मृतक के भतीजे श्याम बाबू ने बताया कि 9 जून की सुबह चाचा घर से निकले थे। उसके बाद वापस नहीं लौटे। काफी खोजबीन के बाद भी कुछ पता नहीं चला। आवेदन देने के लिए थाना गए थे। वहां बोला गया कि उनकी पत्नी को बुलाइए, इसके बाद आवेदन दीजिएगा। जिसके बाद परिजन वापस घर लौट आए। अपने स्तर से परिवार के सदस्य खोजबीन कर रहे थे। इस दौरान सोमवार को बेरथ गांव के बधार स्थित कुएं में शव पड़ा मिला। कपडे और उंगली से उनकी पहचान की गई। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। शव को बाहर निकला। शव अधिक सड़-गल जाने के कारण पोस्टमार्टम के लिए पटना भेज दिया है। परिजनों का विवाद से इनकार श्याम बाबू ने हत्या कर शव को कुएं में फेंकने का आरोप लगाया है ।हालांकि उसने किसी भी व्यक्ति पर किसी प्रकार का कोई आशंका या आरोप नहीं लगाया है। साथ ही उसने अपने चाचा के गांव में किसी भी व्यक्ति से किसी भी प्रकार की दुश्मनी और विवाद की बातों से साफ इनकार किया है। घर में मचा कोहराम मृतक पांच भाइयों में तीसरे स्थान पर थे। परिवार में पत्नी गुड़िया देवी और एक पुत्र श्याम सुंदर है। मौत की खबर मिलते ही घर में कोहराम मच गया है। उनकी पत्नी गुड़िया देवी और परिवार के सभी सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है।



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वर्ल्ड अपडेट्स: ब्रिटेन में 16 साल की उम्र से पहले बच्चे नहीं चला सकेंगे सोशल मीडिया, प्रस्ताव से 10 में से 9 अभिभावक खुश


27 मिनट पहले

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ब्रिटेन में 16 साल से छोटे बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर बैन लगेगा। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सोमवार को इसकी घोषणा की। संबंधित नियम इस साल दिसंबर तक बन जाएंगे और 2027 मार्च- अप्रैल तक लागू होने की उम्मीद है।

सरकार का तर्क है कि एल्गोरिदम आधारित प्लेटफॉर्म बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई और सामाजिक विकास पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं। प्रस्ताव के तहत सोशल मीडिया के उपयोग से पहले उम्र सत्यापन सख्ती से लागू होगा और नियम पालन कराने की जिम्मेदारी कंपनियों पर होगी।

बैन एप में स्नैपचैट, टिकटॉक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म शामिल होंगे। वॉट्सएप और सिग्नल जैसी मैसेजिंग सेवाएं फिलहाल प्रतिबंध में शामिल नहीं होंगी। ब्रिटिश सरकार के एक सर्वे में 10 में से 9 अभिभावकों ने इस प्रतिबंध का स्वागत किया है।

ब्रिटेन की रॉयल सोसाइटी फॉर पब्लिक हेल्थ द्वारा 14-24 वर्ष के युवाओं के बीच किए सर्वे के मुताबिक स्नैपचैट, फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम से डिप्रेशन, चिंता, अपने शरीर को लेकर हीन भावना और अकेलेपन में बढ़ोतरी होती है।

अमेरिकी सर्जन जर्नल के मुताबिक रोज 3 घंटे से ज्यादा सोशल मीडिया पर बिताने वाले किशोरों में मानसिक समस्याओं का खतरा दोगुना होता है। अमेरिका में एक परीक्षण में पाया गया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बंद करने से युवाओं में खुशी, जीवन से संतुष्टि बढ़ी, डिप्रेशन-एंग्जाइटी में सुधार हुआ।

25 से ज्यादा देश किशोरों-बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने की पहल कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में साल भर पहले प्रतिबंध लागू किया गया था। मलेशिया, इंडोनेशिया और ब्राजील में भी इस साल की शुरुआत से प्रतिबंध लागू हो चुके हैं। नॉर्वे, फ्रांस, अमेरिका, चीन जैसे कई देशों में बच्चों के लिए सोशल मीडिया से जुड़े नियम सख्त किए जा रहे हैं।

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इंजीनियर का बेटा, जिसका अधूरा रह गया एक्टर बनने का सपना, बन बैठा डायरेक्टर


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बॉलीवुड को ‘जब वी मेट’, ‘रॉकस्टार’ और ‘तमाशा’ जैसी यादगार फिल्में देने वाले निर्देशक इम्तियाज अली आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं. दिलचस्प बात यह है कि वह डायरेक्टर नहीं एक्टर बनने का सपना लेकर मुंबई आए थे. हालांकि किस्मत ने उन्हें कैमरे के सामने नहीं, बल्कि कैमरे के पीछे खड़ा किया और यही फैसला उन्हें हिंदी सिनेमा के सबसे सफल निर्देशकों में शामिल कर गया.इम्तियाज अली का जन्म 16 जून 1971 को झारखंड के जमशेदपुर में हुआ था.

नई दिल्ली. बॉलीवुड के मशहूर निर्देशक इम्तियाज अली आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं. ‘जब वी मेट’, ‘रॉकस्टार’, ‘हाइवे’ और ‘तमाशा’ जैसी यादगार फिल्में बनाने वाले इम्तियाज ने अपनी कहानियों और किरदारों से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि वह निर्देशक नहीं, बल्कि अभिनेता बनने का सपना लेकर मुंबई आए थे. किस्मत ने हालांकि उनके लिए कुछ और ही सोच रखा था और यही फैसला उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट बन गया.

‘लव आज कल’, ‘रॉकस्टार’, ‘हाइवे’, ‘तमाशा’ और हाल ही में ‘अमर सिंह चमकीला’ जैसी फिल्मों ने उनकी पहचान को और मजबूत किया. अपने शानदार काम के लिए उन्हें आईफा, जी सिने अवॉर्ड, इंडियन टेली अवॉर्ड और कई प्रतिष्ठित सम्मान भी मिल चुके हैं. अभिनेता बनने का सपना लेकर मुंबई पहुंचे इम्तियाज अली ने निर्देशन की दुनिया में ऐसा मुकाम हासिल किया, जिसकी मिसाल आज भी दी जाती है.

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आधार कार्ड का इस्तेमाल सिर्फ पहचान के लिए हो: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज; याचिका में दावा- अभी पता और जन्मतिथि का सबूत माना जा रहा


नई दिल्ली2 घंटे पहले

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याचिकाकर्ता का दावा है कि आधार अधिनियम की धारा 9 बताती है कि आधार नागरिकता या डोमिसाइल का प्रमाण नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट आज आधार कार्ड के इस्तेमाल को लेकर दाखिल की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करेगा। याचिका में कहा गया है कि आधार कार्ड का इस्तेमाल पहचान पत्र से आगे बढ़कर नागरिकता, निवास और जन्म तारीख के प्रमाण के रूप में किया जा रहा है, जबकि कानून इसकी अनुमति नहीं देता।

अश्विनी कुमार उपाध्याय की तरफ से दायर याचिका नागरिकता और पहचान का भ्रम में मांग की गई है कि आधार कार्ड के इस्तेमाल को सिर्फ पहचान की पुष्टि तक सीमित करने के निर्देश दिए जाएं।

याचिका में यह निर्देश देने की भी मांग की गई है कि नए वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए एप्लीकेशन फॉर्म में जन्म तिथि और निवास के सबूत के तौर पर आधार का इस्तेमाल, आधार एक्ट 2016 की धारा 9, RPA 1950 की धारा 23(4) और संविधान के अनुच्छेद 14 के खिलाफ माना जाए।

चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस वी मोहना की बेंच सुनवाई कर सकती है।

याचिकाकर्ता के 2 तर्क

  • आधार अधिनियम की धारा 9 स्पष्ट रूप से बताती है कि आधार नागरिकता या डोमिसाइल का प्रमाण नहीं है।
  • UIDAI की 22 अगस्त 2023 की अधिसूचना में भी स्पष्ट किया गया है कि आधार केवल पहचान का प्रमाण है, नागरिकता, पते या जन्मतिथि का नहीं।

घुसपैठियों और अवैध प्रवासियों को आसानी से मिल रहे दूसरे दस्तावेज

आधार का इस्तेमाल स्कूलों में एडमिशन, संपत्ति खरीदने, जन्म प्रमाण पत्र, राशन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने जैसी प्रक्रियाओं में उम्र, नागरिकता और निवास के प्रमाण के रूप में किया जा रहा है। याचिका में दावा किया गया है कि इसी वजह से घुसपैठिए और अवैध प्रवासी भी आधार के आधार पर अन्य दस्तावेज हासिल कर रहे हैं।

वोटर रजिस्ट्रेशन वेरिफिकेशन पर भी सवाल उठाए

याचिकाकर्ता ने वोटर रजिस्ट्रेशन वेरिफिकेश प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। याचिका के अनुसार फॉर्म-6 के तहत दस्तावेजों की जांच पर्याप्त नहीं है और इससे ऐसे लोगों के नाम भी मतदाता सूची में शामिल हो सकते हैं जिनके पास जरूरी वैध दस्तावेज नहीं हैं।

याचिका में चुनावी प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले सत्यापन ढांचे में व्यापक सुधार की मांग की गई है। इसके साथ ही एक उच्चस्तरीय निगरानी समिति बनाए जाने का सुझाव दिया गया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और फॉरेंसिक विशेषज्ञ शामिल हों।

2018 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- आधार वैध, लेकिन सीमाओं के साथ

सुप्रीम कोर्ट ने 26 सितंबर 2018 को ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने 4:1 के बहुमत से आधार अधिनियम को संवैधानिक माना, लेकिन कुछ प्रावधान रद्द कर दिए।

कोर्ट ने कहा बैंक खाते से, मोबाइल सिम से आधार लिंक करना अनिवार्य नहीं। स्कूल एडमिशन के लिए आधार अनिवार्य नहीं। लेकिन सरकारी सब्सिडी और कल्याणकारी योजनाओं में आधार का उपयोग वैध है।

जानिए आधार अधिनियम क्या है

आधार (वित्तीय और अन्य सब्सिडी, लाभ एवं सेवाओं की लक्षित डिलीवरी) अधिनियम, 2016 वह कानून है जिसके तहत आधार संख्या जारी करने, उसके उपयोग, डेटा की सुरक्षा और UIDAI के कामकाज का कानूनी ढांचा तय किया गया। यह कानून 26 मार्च 2016 को लागू हुआ था। अधिनयिम में यह बात स्पष्ट की गई है कि आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है। आधार केवल यह दर्शाता है कि व्यक्ति भारत का निवासी है।

देश में आधार कार्ड सरकारी और अन्य सर्विस में जरूरी

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आधार कार्ड पर सिर्फ फोटो और QR कोड होगा: फोटोकॉपी से होने वाले मिसयूज रोकने UIDAI बना रही नियम, दिसंबर से हो सकते हैं लागू

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) आधार कार्ड नए सिरे से डिजाइन करने पर विचार कर रहा है। भविष्य में आधार कार्ड केवल धारक की फोटो और QR कोड वाला हो सकता है। यानी कार्ड पर आधार नंबर, नाम-पता, जन्‍मतिथि अन्‍य बायोमीट्रिक जानकारी नहीं होंगी। पूरी खबर पढ़ें…

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