संभल में मानव विकास जन सेवा समिति ने बिजली के स्मार्ट मीटर और प्रीपेड व्यवस्था में सरकार के बदलाव के फैसले पर खुशी जताई। बुधवार को सीएचसी कार्यालय के सामने समिति के पदाधिकारियों और स्थानीय लोगों ने मिठाई बांटकर इस निर्णय का स्वागत किया। सरकार ने प्रीपेड व्यवस्था को बदलकर पोस्टपेड करने का फैसला लिया है, जिसे जनता के हित में एक बड़ा कदम बताया गया। समिति के अध्यक्ष डॉ. मोहम्मद नाज़िम ने बताया कि स्मार्ट मीटर लगने के बाद आम जनता को कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। बिजली के बिल कई गुना बढ़कर आ रहे थे, जिससे गरीब और मध्यम वर्ग पर आर्थिक बोझ बढ़ गया था। उन्होंने यह भी कहा कि प्रीपेड व्यवस्था में रिचार्ज खत्म होते ही बिजली कट जाने से दैनिक जीवन प्रभावित हो रहा था। डॉ. नाज़िम के अनुसार, कई जगहों पर 1000 रुपए का रिचार्ज कराने के कुछ ही दिनों बाद बिजली कटने के मामले सामने आए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि कई मोहल्लों में बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं की बिजली आपूर्ति अचानक बंद हो जाती थी, जिससे जनता में असंतोष बढ़ रहा था। जनता की इन्हीं समस्याओं को देखते हुए सरकार ने प्रीपेड प्रणाली को हटाकर पोस्टपेड व्यवस्था लागू करने का निर्णय लिया है। समिति ने इसे जनहित में एक सराहनीय कदम बताया है। समिति का मानना है कि इस फैसले से आम जनता, खासकर गरीब वर्ग को बड़ी राहत मिलेगी। इस अवसर पर फारुख जमाल ने कहा कि सरकार के इस फैसले से लोगों में खुशी है, जिसके चलते मिठाई बांटकर जश्न मनाया गया। उन्होंने इस निर्णय को जनता की आवाज का सम्मान बताया। कार्यक्रम में मोहसिन अली, मास्टर सफदर, कमांडर अली, चौधरी वसीम अली, महावीर सिंह यादव, कैलाश सिंह और ग़ज़राम सिंह सहित कई स्थानीय लोग उपस्थित थे। इस आयोजन के दौरान लोगों में उत्साह और संतोष का माहौल देखा गया।
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स्मार्ट मीटर बिल व्यवस्था में बदलाव पर खुशी: संभल में मानव विकास जन सेवा समिति ने सरकार के फैसले का स्वागत किया – Sambhal News
जमुई में कचरा प्लांट 3 साल में जर्जर: घटिया निर्माण से दीवारें ढहीं, छत उड़ी; सफाई ठप, ग्रामीणों की जांच की मांग – Jamui News
जमुई जिले के बरहट प्रखंड की नुमर पंचायत में लाखों रुपये की लागत से निर्मित कचरा प्रबंधन इकाई तीन साल में ही जर्जर हो गई है। लोहिया स्वच्छ अभियान और स्वच्छ भारत मिशन फेज-2 के तहत बनी यह यूनिट अब पूरी तरह विफल साबित हो रही है, जिससे स्वच्छता व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। यूनिट की छत पर लगे टिन उड़ गए हैं, दीवारों में चौड़ी दरारें पड़ गई हैं और इसके कई हिस्से ढह चुके हैं। इतनी कम अवधि में संरचना का यह हाल निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगाता है। ग्रामीणों का आरोप है कि घटिया सामग्री के उपयोग और लापरवाही के कारण यह योजना शुरू होने से पहले ही दम तोड़ गई। यूनिट में डालने के बजाय बाहर ही फेंक दिया जाता इस बदहाल यूनिट का सीधा असर पंचायत की सफाई व्यवस्था पर पड़ा है। कचरा उठाव लगभग ठप हो गया है, जिसके परिणामस्वरूप गांव की गलियों में फिर से कचरे का अंबार लगने लगा है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, कभी-कभार कचरा उठाया भी जाता है तो उसे यूनिट में डालने के बजाय बाहर ही फेंक दिया जाता है। स्थिति तब और गंभीर हो जाती है जब यूनिट के बाहर ही कचरा जलाया जाता है। इससे पर्यावरण प्रदूषण बढ़ रहा है और लोगों के स्वास्थ्य पर भी खतरा मंडरा रहा है। प्लास्टिक और अन्य हल्का कचरा हवा के साथ उड़कर घरों तक पहुंच रहा है। जिम्मेदार अधिकारियों और संवेदकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग ग्रामीणों ने इस मामले में जिम्मेदार अधिकारियों और संवेदकों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की मांग की है। प्रखंड स्वच्छता समन्वयक सुमित कुमार रावत ने बताया कि वे हाल ही में पदस्थापित हुए हैं और मामले की जांच कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। इसी संबंध में प्रखंड मनरेगा कार्यक्रम पदाधिकारी योगेंद्र सिंह ने भी कहा है कि यूनिट की गुणवत्ता की जांच कराई जाएगी और दोषियों के खिलाफ सख्त कदम उठाए जाएंगे।
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रीवा में बंद लिफ्ट में 1 घंटे फंसे 9 यात्री: बाहर निकालकर रेल विभाग ने टैक्सी से घर भेजा; सांकेतिक न लगा होने से परेशानी – Rewa News
रीवा रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म क्रमांक 2 पर में बुधवार को बड़ा हादसा टल गया। इतवारी ट्रेन से उतरे 9 यात्री मरम्मत के दौरान बंद पड़ी लिफ्ट के बीच में ही फंस गए। लिफ्ट अचानक बंद हो गई, जिससे सभी यात्री करीब एक घंटे तक अंदर ही कैद रहे। बंद पड़ी लिफ्ट में किसी तरह का संकेतक नहीं लगाया गया था। जहां बुधवार दोपहर रेलवे प्रबंधन की लापरवाही से यात्री धोखे में पड़कर उसमें सवार हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही रेलवे प्रशासन में हड़कंप मच गया। मौके पर पहुंचे कर्मचारियों ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाकर सभी यात्रियों को सुरक्षित बाहर निकाला। इसके बाद सभी का चिकित्सकों द्वारा स्वास्थ्य परीक्षण कराया गया, जिसमें सभी यात्री सामान्य पाए गए। रेलवे प्रशासन ने यात्रियों को उनके गंतव्य तक पहुंचाने की व्यवस्था भी की। इनमें से 8 यात्रियों को मऊगंज जिले के बरॉव तक आर्टिगा टैक्सी से भेजा गया, जबकि कोरवा (छत्तीसगढ़) से रामपुर नैकिन, जिला सीधी जा रही एक महिला यात्री को उसकी बच्ची सहित अलग से रवाना किया गया। घटना के बाद स्टेशन पर सुरक्षा व्यवस्था और लिफ्ट मरम्मत कार्य को लेकर सवाल खड़े हो रहे हैं। यात्रियों ने बिना सुरक्षा मानकों के लिफ्ट चालू रहने पर नाराजगी भी जताई है।
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भूल जाओगे मटन-मशरूम, इतनी टेस्टी केले की सब्जी, ट्राई करें पहाड़ों की ये रेसिपी
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Banana Vegetable Recipe : अगर आप सोचते हैं कि केला सिर्फ फल है, तो पहाड़ों का ये तरीका जरूर ट्राई करें. यहां कच्चे केले की टेस्टी सब्जी बनती है. पहाड़ी इलाकों में लोग सीजन के हिसाब से, जो भी मिलता है, उसका बेहतरीन इस्तेमाल करना जानते हैं. कच्चे केले की ये सब्जी भी उसी में शामिल है. लोकल 18 से पिथौरागढ़ की नरवदा देवी बताती हैं कि कुछ ही मिनटों में आपकी पहाड़ी स्टाइल केले की सब्जी तैयार हो जाती है. इसे आप गरमा-गरम रोटी या चावल के साथ खा सकते हैं.
पिथौरागढ़. अगर आप सोचते हैं कि केला सिर्फ फल के तौर पर ही खाया जाता है, तो पहाड़ों का ये खास तरीका जानकर आपको जरूर हैरानी होगी. यहां केला सब्जी के रूप में भी खूब पसंद किया जाता है. कच्चे केले की सब्जी, जो स्वाद में जितनी अलग होती है, उतनी ही सेहत के लिए दमदार मानी जाती है. पहाड़ी इलाकों में लोग सीजन के हिसाब से, जो भी मिलता है, उसका बेहतरीन इस्तेमाल करना जानते हैं. कच्चे केले की ये सब्जी भी उसी का एक अच्छा उदाहरण है. इसे बनाने का तरीका बहुत ही आसान है और घर की साधारण सामग्री से ही तैयार हो जाती है. लोकल 18 से पिथौरागढ़ की नरवदा देवी बताती हैं कि सबसे पहले कच्चे केलों को अच्छे से धोकर उबाल लिया जाता है. जब केले नरम हो जाते हैं, तो उन्हें ठंडा करके छील लिया जाता है. आप चाहें तो इन्हें हल्का सा मैश कर सकते हैं या छोटे-छोटे टुकड़ों में काट सकते हैं.
क्यों डालते हैं छाछ
नरवदा देवी कहती हैं कि अब एक कढ़ाई में थोड़ा सा तेल या घी डालकर गरम करें. जैसे ही तेल गरम हो जाए, उसमें सरसों के दाने डालें. जब सरसों चटकने लगे, तो इसमें उबले हुए केले डाल दें. अब इसे अच्छे से चलाते हुए हल्का सा भून लें. इसके बाद इसमें डालें हल्दी, नमक और थोड़ा सा लाल मिर्च पाउडर. आप अपने स्वाद के अनुसार मसाले कम या ज्यादा कर सकते हैं. मसालों के साथ इसे अच्छे से मिलाकर कुछ मिनट तक पकाएं, ताकि केले में मसालों का स्वाद अच्छी तरह आ जाए. अब इस सब्जी का सबसे खास हिस्सा आता है छाछ. इसमें थोड़ा सा छाछ डाल दिया जाता है, जिससे सब्जी में हल्का खट्टापन और क्रीमी स्वाद आ जाता है. छाछ डालने के बाद इसे धीमी आंच पर कुछ देर पकने दें. धीरे-धीरे सब्जी गाढ़ी और खुशबूदार हो जाती है. बस, कुछ ही मिनटों में आपकी पहाड़ी स्टाइल केले की सब्जी तैयार हो जाती है. इसे आप गरमा-गरम रोटी या चावल के साथ खा सकते हैं.
जब कुछ अलग बनाना हो…
नरवदा देवी कहती हैं कि हमारे यहां ये सब्जी बचपन से बनती आ रही है. कच्चे केले की इस सब्जी में छाछ डालने से इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है. घर में जब कुछ अलग बनाना होता है, तो हम यही बनाते हैं, सबको बहुत पसंद आती है. अगर आप भी कुछ नया और पहाड़ी स्वाद ट्राई करना चाहते हैं, तो एक बार इस पहाड़ी स्टाइल केले की सब्जी जरूर बनाकर देखें. यकीन मानिए, इसका स्वाद आपको जरूर पसंद आएगा.
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प्रियांशु गुप्ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…और पढ़ें
ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ जयपुर में मनाएगी सेना: रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के साथ तीनों सेना प्रमुख रहेंगे मौजूद, ऑपरेशन से जुड़ी फिल्म करेंगे रिलीज – Jaipur News
ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ सेना जयपुर में मनाएगी। जयपुर स्थित साउथ वेस्टर्न कमांड में गुरुवार को कार्यक्रम आयोजित होगा। इसमें शामिल होने के लिए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह के साथ तीनों सेनाओं के प्रमुख जयपुर आएंगे। कार्यक्रम में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ
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भारतीय सेना ने 7 मई 2025 को पाकिस्तान के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर लॉन्च किया था। तब पाकिस्तान से लगती लंबी सीमा, सैन्य ठिकानों की मौजूदगी और सीमावर्ती जिलों की संवेदनशीलता के कारण ऑपरेशन सिंदूर का प्रमुख केंद्र राजस्थान रहा था। ऐसे में सेना ने फिर ऑपरेशन सिंदूर की पहली वर्षगांठ मनाने के लिए राजस्थान को चुना है।
ऑपरेशन से जुड़ी फिल्म करेंगे रिलीज
जयपुर में रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह गुरुवार दोपहर 12 बजे तीनों सेनाओं के प्रमुख के साथ खातीपुरा स्थित सप्त शक्ति कमांड में मीडिया को संबोधित करेंगे। वहीं शाम 5 बजे ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी फिल्म को रिलीज किया जाएगा। आधिकारिक सूत्रों की मानें तो इस फिल्म के कई शॉट्स रियल हैं, जिन्हें ऑपरेशन सिंदूर के समय शूट किया गया था।
जयपुर में जनवरी में हुई आर्मी डे परेड में टैंक सहित कई मिसाइलों को दिखाया गया था।
आर्मी डे परेड का हुआ था आयोजन
सेना ने इस साल जयपुर को आर्मी डे परेड के लिए भी चुना था। जगतपुरा में महल रोड पर 15 जनवरी को आर्मी डे परेड का आयोजन किया गया था। पहली बार यह परेड आर्मी एरिया से बाहर आमजन के बीच हुई थी।
परेड में भारतीय सेनाओं की शौर्य और वीरता को पूरी दुनिया ने देखा था। जयपुर की सड़कों पर कदमताल करने सेना के जवान, टैंक, हेलीकॉप्टर और सेना की अत्याधुनिक हथियारों का प्रदर्शन किया गया था।
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आर्मी डे से जुड़ी ये खबरें भी पढ़िए…
आर्मी-डे पर पहली बार जयपुर में सेना ने दिखाया शौर्य:शहीद जवान की मां मेडल लेते बेहोश हुईं, राजनाथ सिंह बोले-ऑपरेशन सिंदूर अभी समाप्त नहीं हुआ

जयपुर के SMS स्टेडियम में आर्मी-डे पर 15 जनवरी की शाम शौर्य संध्या कार्यक्रम में सेना के पैराट्रूपर्स उतरे थे। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने बताया- ऑपरेशन सिंदूर अभी पूरी तरह से समाप्त नहीं हुआ है। पूरी खबर पढ़िए…
सेना के खतरनाक हथियारों के साथ दिखीं महिला आर्मी ऑफिसर:जयपुर में सड़क पर नजर आई नाग-आकाश मिसाइल; देखें VIDEO

पहली बार भारतीय सेना की आर्मी डे परेड सैन्य क्षेत्र (आर्मी एरिया) से बाहर 15 जनवरी को जयपुर में हुई थी। इस आयोजन में सेना के वो हथियार भी दिखाए गए, जिनका इस्तेमाल ऑपरेशन सिंदूर में किया गया था। सबसे खतरनाक हथियारों के साथ आर्मी की महिला ऑफिसर परेड में चल रही थीं। (पूरी खबर पढ़ें)
Vivo X300 Ultra का इंतजार खत्म, DSLR कैमरे वाला फोन भारत में लॉन्च, Apple और Samsung के उड़े होश
Vivo X300 Ultra का इंतजार खत्म हो गया है। चीनी कंपनी ने अपना सबसे दमदार कैमरे वाला फोन भारत में लॉन्च कर दिया है। इसके साथ Vivo X300 FE को भी भारतीय बाजार में पेश किया गया है। वीवो के ये फ्लैगशिप फोन DSLR क्वालिटी वाले कैमरा सेंसर के साथ आते हैं। ये फोन Apple, Samsung, Google के प्रीमियम फोन को कड़ी टक्कर देने वाले हैं। वीवो ने इन दोनों फोन की प्री-बुकिंग भारत में शुरू कर दी है।
DSLR वाला कैमरा
Vivo X300 Ultra में 200MP का मेन Sony LYT-901 कैमरा सेंसर दिया गया है। कंपनी का दावा है कि इसमें गिंबल जैसा ऑप्टिकल इमेज स्टेब्लाइजेशन मिलेगा। इसके अलावा फोन में 200MP का टेलीफोटो कैमरा भी दिया गया है। इस फोन में कंपनी ने Samsung HPO पेरीस्कोप चिप का यूज किया है, जो 3.7x ऑप्टिकल जूम को सपोर्ट करता है। इसके अलावा फोन के बैक में 50MP का Sony LYT-818 अल्ट्रा वाइड कैमरा मिलेगा। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए इस फोन में 50MP का कैमरा दिया गया है।
इस फोन के साथ वीवो ने Zeiss का टेलीफोटो एक्सटेंडर भी उतारा है। Gen 2 में 200mm का लेंस मिलेगा। वहीं, Gen 2 Ultra में 400mm का लेंस दिया गया है। यह फोन वाइल्ड फोटोग्राफी में DSLR की तरह काम करेगा।
वीवो एक्स 300 अल्ट्रा
Vivo X300 Ultra के फीचर्स
Vivo X300 Ultra में कंपनी ने 6.82 इंच का LTPO OLED डिस्प्ले यूज किया है। फोन का डिस्प्ले 144Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। इसका रेजलूशन 1440 x 3168 पिक्सल है। इस फोन में Qualcomm Snapdragon 8 Elite Gen 5 चिपसेट दिया गया है। साथ ही, यह 16GB LPDDR5X रैम और 512GB तक इंटरनल स्टोरेज को सपोर्ट करता है। इसको कूल रखने के लिए 5800 स्क्वायर मिलीमीटर का वेपर चेंबर दिया गया है।
| Vivo X300 Ultra | फीचर्स |
| डिस्प्ले | 6.82 इंच OLED, 144Hz |
| प्रोसेसर | Qualcomm Snapdragon 8 Elite Gen 5 |
| स्टोरेज | 16GB, 512GB |
| बैटरी | 6,600mAh, 100W, 40W |
| कैमरा | 200MP + 200MP + 50MP, 50MP |
| OS | Android 16, OriginOS |
इस फोन में 6,600mAh की बैटरी दी गई है, जिसके साथ 100W वायर्ड और 40W वायरलेस चार्जिंग का सपोर्ट मिलता है। यह फोन Andorid 16 पर बेस्ड Origin OS 6 पर काम करता है। कंपनी फोन के साथ 5 साल तक OS और 7 साल तक सिक्योरिटी अपडेट का वादा करती है। इस फोन को दो कलर ऑप्शन- विक्ट्री ग्रीन और इक्लिप्स ब्लैक में खरीदा जा सकता है। फोन की मोटाई महज 8.2mm है और यह वाटर और डस्ट प्रूफ रेटिंग के साथ आता है। सिक्योरिटी के लिए फोन में अल्ट्रासोनिक इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर मिलता है।
Vivo X300 FE
वीवो का यह फ्लैगशिप फोन 6.31 इंच के LTPO AMOLED डिस्प्ले के साथ आता है। फोन का डिस्प्ले 120Hz रिफ्रेश रेट और 5000 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस को सपोर्ट करता है। इस फोन को तीन कलर ऑप्शन- अर्बल ओलिव, लिलाक पर्पल और नॉइर ब्लैक कलर में खरीदा जा सकता है। यह फोन भी IP68 और IP69 रेटेड है। इसमें Qualcomm Snapdragon 8 Gen 5 चिपसेट दिया गया है, जिसके साथ 12GB रैम और 256GB इंटरनल स्टोरेज का सपोर्ट दिया गया है।
वीवो एक्स300 एफई
यह फोन 6,500mAh की बैटरी के साथ 80W वायर्ड और 40W वायरलेस चार्जिंग को सपोर्ट करता है। इसमें भी Android 16 पर बेस्ड Origin OS दिया गया है। कंपनी इस फोन के साथ भी 5 साल तक OS और 7 साल तक सिक्योरिटी अपडेट ऑफर करती है।
Vivo X300 FE के बैक में भी ट्रिपल कैमरा सेटअप दिया गया है। इसमें 50MP का मेन Sony IMX-921 चिपसेट मिलता है। इसके अलावा फोन में 50MP का Sony IMX 882 टेलीफोटो कैमरा मिलेगा, जो 3x ऑप्टिकल जूम को सपोर्ट करता है। इस फोन में 8MP का अल्ट्रा वाइड कैमरा दिया गया है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए इसमें भी 50MP का कैमरा मिलता है। यह फोन भी टेलीफोटो एक्सटेंडर Gen 2 और Gen 2 Ultra के साथ आता है।
| Vivo X300 FE | फीचर्स |
| डिस्प्ले | 6.31 इंच AMOLED, 120Hz |
| प्रोसेसर | Qualcomm Snapdragon 8 Gen 5 |
| स्टोरेज | 12GB, 512GB |
| बैटरी | 6,500mAh, 80W, 40W |
| कैमरा | 50MP + 50MP + 8MP, 50MP |
| OS | Android 16, OriginOS |
कितनी है कीमत?
Vivo X300 Ultra एक ही स्टोरेज वेरिएंट 16GB + 512GB में आता है। इसकी कीमत 1,59,999 रुपये है। वहीं, Vivo X300 FE दो स्टोरेज वेरिएंट्स- 12GB + 256GB और 12GB + 512GB में आता है। इसकी शुरुआती कीमत 79,999 रुपये है। वहीं, इसका टॉप वेरिएंट 89,999 रुपये में आता है। इन दोनों फोन की खरीद पर 10% का बैंक डिस्काउंट ऑफर किया जा रहा है। इन दोनों फोन के साथ कंपनी ने Telephot Extender Gen 2 Ultra और Vivo Imaging Grip Kit भी पेश किए हैं। जिनकी कीमत क्रमशः 27,999 रुपये और 11,999 रुपये है।
Vivo X300 Ultra
- 16GB + 512GB – 1,59,999 रुपये
Vivo X300 FE
- 12GB + 256GB – 79,999 रुपये
- 12GB + 512GB – 89,999 रुपये
एक्सेसरीज
- Telephot Extender Gen 2 Ultra – 27,999 रुपये
- Vivo Imaging Grip Kit – 11,999 रुपये
वीवो के ये दोनों फ्लैगशिप फोन ई-कॉमर्स वेबसाइट Amazon और Flipkart से खरीदे जा सकेंगे। फोन की सेल 14 मई को आयोजित की जाएगी। फिलहाल ये दोनों फोन प्री-ऑर्डर के लिए उपलब्ध हैं।
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JAC 12th Result 2026 OUT: झारखंड बोर्ड 12वीं का रिजल्ट घोषित, रोल नंबर से ऐसे करें चेक
JAC 12th Result 2026 OUT: झारखंड अकादमिक परिषद (JAC) ने इंटरमीडिएट और कक्षा 12वीं की परीक्षा 2026 का परिणाम घोषित कर दिया है। जेएसी का 12वीं का परिणाम आधिकारिक वेबसाइटों jacresults.com और jac.jharkhand.gov.in पर उपलब्ध है। इंटरमीडिएट आर्ट्स में कुल 96.14 प्रतिशत छात्र उत्तीर्ण हुए, कॉमर्स में 93.37 प्रतिशत और विज्ञान में 82.92 प्रतिशत छात्र उत्तीर्ण हुए। छात्र jacresults.com और jac.jharkhand.gov.in वेबसाइटों पर JAC 12वीं का स्कोरकार्ड PDF देख और डाउनलोड कर सकते हैं।
स्कोरकार्ड PDF डाउनलोड करने के लिए फॉलो करें स्टेप्स
- सबसे पहले jacresults.com पर जाएं
- JAC 12th Result 2026 (Science / Commerce / Arts) लिंक पर क्लिक करें
- रोल कोड और Roll Number दर्ज करें
- “सब्मिट” बटन पर क्लिक करें
- आपका रिजल्ट स्क्रीन पर दिखाई देगा तब इसे डाउनलोड करें प्रिंट निकाल लें
गौरतलब है कि, JAC 12वीं की परीक्षाएं इस वर्ष 3 फरवरी से 23 फरवरी 2026 के बीच आयोजित की गई थीं। 8वीं, 9वीं और 11वीं कक्षा का रिजल्ट बोर्ड ने पहले ही घोषित कर दिया था तब से केवल 12वीं का रिजल्ट बचा था, अब ये भी जारी हो गया है।
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क्रू़ड ऑयल की कीमतों में भारी गिरावट, WTI करीब 8 परसेंट लुढ़का, ब्रेंट 7 फीसदी डाउन
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कच्चे तेल की कीमतों में भयानक गिरावट देखी जा रही है. ब्रेंट क्रूड करीब 7 फीसदी और WTI लगभग 8 फीसदी टूटकर ट्रेड कर रहा है.
WTI क्रूड 95 डॉलर से नीचे आ गया है.
नई दिल्ली. कच्चे तेल की कीमतों में बुधवार को जबरदस्त गिरावट देखने को मिली. खबर लिखे जाने तक ग्लोबल बेंचमार्क ब्रेंट क्रूड 7 परसेंट टूटकर 102.22 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड कर रहा है. वहीं, अमेरिकी क्रूड ऑयल डब्ल्यूटीआई में 7 फीसदी से भी ज्यादा की गिरावट है. वेस्ट टेक्सस इंटरमीडिएट यानी डब्ल्यूटीआई करीब 8 फीसदी टूटकर 94.36 डॉलर पर कारोबार कर रहा है.
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मैं जय ठाकुर, न्यूज18 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहा हूं. मेरा मुख्य काम बिजनेस की पेचीदा खबरों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. फिर चाहे वह शेयर बाजार की हलचल हो, देश की इकोनॉमी क…और पढ़ें
बंगाल में किस जाति के कितने विधायक जीते? ‘भूरा बाल’ ने डुबो दी ममता की नाव!
कोलकाता. सोशल मीडिया पर लोग सर्च कर रहे हैं कि बंगाल में किस जाति के कितने विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं? भूमिहार, ब्राह्मण, राजपूत, यादव और कायस्थों की संख्या इनमें से कितनी है? कितने मुस्लिम, एससी और ओबीसी कैंडिडेट जीते हैं? इस बार के बंगाल चुनाव में यूपी-बिहार के कई राजपूत और भूमिहार चेहरे बीजेपी के टिकट पर जीते हैं. अगर भूमिहार कैंडिडेट की बात करें तो बीजेपी के टिकट पर उमेश राय, दिलीप सिंह और रितेश तिवारी चुनाव जीते हैं. अगर बात करें 293 सीटों पर जीतने वाले सभी कैंडिडेट की, तो ज्यादातर उम्मीदवार ब्राह्मण, कायस्थ, ओबीसी और एससी वर्ग के हैं. महिलाओं की संख्या में इस बार इजाफा हुआ है. वहीं, मुस्लिम विधायकों की संख्या इस बार घट गई है. जानिए बंगाल चुनाव 2026 में किस जाति के कितने विधायक जीतकर आए हैं.
सबसे पहले बात करते हैं कि बंगाल में दलितों के लिए आरक्षित 68 सीटों में से 52 पर इस बार बीजेपी ने जीत दर्ज की है. मतुआ और राजबंशी समुदायों ने इस बार अपना पाला पूरी तरह बदल लिया है. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के रण के बाद अब नई विधानसभा के सामाजिक और जातीय समीकरणों के आंकड़े सामने आ गए हैं. 293 सीटों पर आए परिणामों ने राज्य की भावी राजनीति की एक नई पटकथा लिख दी है. इस बार की विधानसभा में न केवल सत्ता परिवर्तन हुआ है, बल्कि सदन के अंदर प्रतिनिधित्व का चेहरा भी बदल गया है. सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा मुस्लिम विधायकों की संख्या को लेकर है, जिसमें पिछले चुनाव के मुकाबले कमी दर्ज की गई है.
ममता बनर्जी की हार के बाद देश में दिल्ली की रेखा गुप्ता इकलौती CM बची हैं.
मुस्लमों की संख्या 38 पर सिमटी
चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 की नई विधानसभा में कुल 38 मुस्लिम विधायक चुनकर आए हैं. यह संख्या 2021 के चुनाव 42 मुस्लिम विधायक के मुकाबले 4 कम है. इनमें सबसे ज्यादा 32 मुस्लिम विधायक तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर जीते हैं. हुमायूं कबीर अपनी पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) से 2 सीटों से जीतकर आए हैं. पहली बार ‘ऑल इंडिया सेकुलर फ्रंट’ (AISF) ने भी 01 मुस्लिम विधायक के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है.
ब्राह्मण-राजपूत-भूमिहार वर्गों का हाल
अगर यूपी-बिहार के भूमिहार जाति की बात करें तो इस बार उमेश राय हावड़ा उत्तर विधानसभा जीते हैं. वह गांव पलियां लोहारपुर जिला गाजीपुर यूपी के रहने वाले हैं. दिलीप सिंह चांपदानी विधानसभा से जीते हैं. वह भी यूपी बनारस पिंडरा के भूमिहार हैं. तीसरे भूमिहार रितेश तिवारी काशीपुर बेलगछिया विधानसभा से जीते हैं. वह बिहार सिवान के भूमिहार हैं. बीजेपी की 206 सीटों की बड़ी जीत के साथ विधानसभा में सवर्ण और पिछड़ा वर्ग (OBC) के प्रतिनिधित्व में इजाफा हुआ है. नई विधानसभा में लगभग 42 से 45 ब्राह्मण विधायक चुनकर पहुंचे हैं, जिनमें से बहुमत बीजेपी के खेमे से है. कल्याण चक्रवर्ती और शांतनु देय जैसे चेहरों ने अपनी सीटों पर जीत दर्ज की है.
बंगाल विधानसभा में संख्या के लिहाज से इस बार अनुसूचित जाति (SC) और पिछड़ा वर्ग (OBC) से सबसे ज्यादा विधायक सदन में दिखेंगे.
एससी, ओबीसी और महिलाओं का जलवा
बंगाल विधानसभा में संख्या के लिहाज से इस बार अनुसूचित जाति (SC) और पिछड़ा वर्ग (OBC) से सबसे ज्यादा विधायक सदन में दिखेंगे. उत्तर बंगाल और जंगलमहल में बीजेपी की क्लीन स्वीप ने राजबंशी और मतुआ समुदाय के प्रतिनिधियों की संख्या बढ़ा दी है. भले ही ममता बनर्जी की सत्ता चली गई हो, लेकिन उनके द्वारा शुरू की गई ‘महिला केंद्रित राजनीति’ का असर नतीजों में दिख रहा है. इस बार विधानसभा में 44 महिला विधायक चुनकर आई हैं. टीएमसी ने सबसे अधिक महिला उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से कई ने जीत हासिल की. यह आंकड़ा बताता है कि बंगाल की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी अब केवल वोट बैंक तक सीमित नहीं है, बल्कि वे नीति-निर्धारण में भी बड़ी भूमिका निभाएंगी.
1941 के बाद यह पहली बार है जब बंगाल की विधानसभा में हिंदुत्ववादी विचारधारा के समर्थकों की संख्या बहुमत के पार है. 38 मुस्लिम विधायकों की मौजूदगी के बावजूद, सदन का शक्ति केंद्र अब ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ की ओर झुक गया है. विश्लेषकों का मानना है कि मुस्लिम सीटों पर बीजेपी की सेंधमारी और ध्रुवीकरण के चलते टीएमसी के कई मुस्लिम बहुल किलों में भी ‘कमल’ खिला है, जिसका सीधा असर मुस्लिम विधायकों की कुल संख्या पर पड़ा है.
वो रोमांटिक कॉमेडी, जिसमें 1 लॉटरी बदलती है पूरी कहानी, चमकती है पूरे गांव की किस्मत
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अक्षय कुमार और प्रियदर्शन ने साथ में कई फिल्मों में काम किया है. यह कॉमेडी फिल्में सुपरहिट हुई हैं. हाल में आई भूत बंगला भी बॉक्स ऑफिस 100 करोड़ रुपए से ज्यादा का कलेक्शन कर चुकी है. लेकिन साल 2006 में प्रियदर्शन की एक ऐसी फिल्म आई, जिसमें अक्षय कुमार नहीं थे. फिल्म फिर सुपरहिट हुई. फिल्म की कहानी के सेंटर में लॉटरी का टिकट था.
प्रियदर्शन ने ‘हेरा फेरा’, ‘भूल भुलैया’ जैसी कॉमेडी फिल्मों को डायरेक्ट किया और स्टार डायरेक्टर बन गए. ‘हंगामा’, ‘हलचल’ और ‘हेरा फेरी’ के अलावा उनकी एक और चर्चित फिल्म रही, जिसे बहुत कम लोग जानते हैं. साल 2006 में आई यह फिल्म ग्रामीण परिवेश में बनाई गई थी. यह फिल्म बॉक्स ऑफिस ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी. महज 7 करोड़ रुपए में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 42 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया था. (फिल्म पोस्टर/यूट्यूब थंबनैल)

इस फिल्म का नाम ‘मालामाल वीकली’ है. कॉमेडी फिल्मों की बात हो और ‘मालामाल वीकली’ का नाम न आए, ऐसा मुश्किल है. प्रियदर्शन के डायरेक्शन में बनी यह फिल्म ग्रामीण भारत की पृष्ठभूमि पर आधारित एक ऐसी कहानी है, जिसमें लालच, किस्मत और हास्य का जबरदस्त मिश्रण देखने को मिलता है. (फिल्म पोस्टर/यूट्यूब थंबनैल)

कहानी एक छोटे से गांव लाहौली के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां के लोग बेहद गरीब हैं और किसी चमत्कार का इंतजार करते रहते हैं. गांव में गरीबी इतनी ज्यादा है कि लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतें भी मुश्किल से पूरी कर पाते हैं. ऐसे में एक दिन गांव के एक आदमी लॉटरी टिकट खरीदता है और यहीं से कहानी में बड़ा ट्विस्ट आता है. (फिल्म पोस्टर/यूट्यूब थंबनैल)
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‘मालामाल वीकली’ में लीडर रोल लोटन का है, जो रितेश देशमुख ने जताया है. लोटन गांव में एक छोटे-मोटे काम करने वाला सीधा-सादा युवक है. उसे पता चलता है कि गांव के जिस आदमी ने लॉटरी टिकट खरीदा था, वह मर चुका है—लेकिन उसकी टिकट पर करोड़ों की लॉटरी लग चुकी है. अब समस्या यह है कि अगर यह बात सबको पता चल गई, तो पैसे पर झगड़ा और बवाल होना तय है. (फिल्म पोस्टर/यूट्यूब थंबनैल)

लोटन अपने दोस्त और गांव के कुछ लोगों के साथ मिलकर एक योजना बनाता है कि इस लॉटरी के पैसे को कैसे अपने कब्जे में लिया जाए. लेकिन जैसे-जैसे वे इस प्लान को अंजाम देने की कोशिश करते हैं, कहानी में नए-नए मोड़ आते जाते हैं और हालात और ज्यादा उलझते जाते हैं. (फिल्म पोस्टर/यूट्यूब थंबनैल)

फिल्म में परेश रावल का किरदार लीलाराम का है, जो बेहद मजेदार है, जो हर स्थिति में अपने फायदे की सोचता है. वहीं ओमपुरी बलवंत के रोल में हैं, जिनका मासूम लेकिन चालाक अंदाज दर्शकों को खूब हंसाता है. इनके अलावा असरानी और राजपाल जैसे कलाकार भी फिल्म में जबरदस्त कॉमिक टाइमिंग लेकर आते हैं. (फिल्म पोस्टर/यूट्यूब थंबनैल)

जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, गांव के हर व्यक्ति को इस लॉटरी के बारे में शक होने लगता है. हर कोई किसी न किसी तरह उस पैसे को हासिल करना चाहता है. नतीजा यह होता है कि एक के बाद एक झूठ, धोखा और चालबाजी का सिलसिला शुरू हो जाता है. लोग एक-दूसरे को बेवकूफ बनाने में लगे रहते हैं, और यही स्थिति फिल्म को बेहद हास्यास्पद बना देती है. फिल्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें हास्य सिर्फ डायलॉग्स से नहीं, बल्कि सिचुएशनसे पैदा होता है. (फिल्म पोस्टर/यूट्यूब थंबनैल)

एक छोटी सी बात कैसे बड़ी समस्या बन जाती है, और फिर उसे छिपाने के लिए लोग और बड़ी गलतियां करते जाते हैं—यही फिल्म की कॉमिक ताकत है. क्लाइमैक्स में हालात इतने बिगड़ जाते हैं कि सच्चाई छिपाना मुश्किल हो जाता है. अंत में यह दिखाया जाता है कि लालच इंसान को कैसे उलझनों में फंसा देता है और कभी-कभी जो चीज हमें आसानी से मिल सकती है, वही हमारी गलतियों की वजह से हाथ से निकल जाती है. (फिल्म पोस्टर/यूट्यूब थंबनैल)

