कानपुर के वार्ड 98 स्थित माहेश्वरी मोहाल इलाके में जर्जर सड़क से लोगों को जल्द निजात मिलेगी। सोमवार को महापौर प्रमिला पांडेय ने लगभग 20 लाख रुपये की लागत से बनने वाली नई सड़क का शिलान्यास किया। इस सड़क के निर्माण से कमला टावर से मंशा देवी मंदिर तक जाने वाले श्रद्धालुओं और स्थानीय निवासियों को गड्ढों से मुक्ति मिलेगी। लंबे समय से खराब पड़ी इस सड़क के निर्माण के लिए 15वें वित्त आयोग से बजट को मंजूरी मिली है। परियोजना की कुल लागत 19 लाख 60 हजार रुपये निर्धारित की गई है। महापौर ने पूरे विधि-विधान से भूमि पूजन कर नारियल फोड़ा और निर्माण कार्य का शुभारंभ कराया। उन्होंने मौके पर मौजूद इंजीनियरों को निर्देश दिए कि सड़क निर्माण में गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखा जाए और इसे निर्धारित समय सीमा के भीतर पूरा किया जाए। कमला टावर से मंशा देवी मंदिर तक का यह मार्ग काफी व्यस्त रहता है। मंदिर जाने वाले श्रद्धालुओं और राहगीरों को उखड़ी हुई सड़क के कारण आवागमन में काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था। भूमि पूजन के दौरान स्थानीय लोगों ने महापौर को इलाके की अन्य समस्याओं से भी अवगत कराया, जिस पर महापौर ने शहर के हर वार्ड में मूलभूत सुविधाओं को दुरुस्त करने को अपनी प्राथमिकता बताया। भूमि पूजन के बाद महापौर प्रमिला पांडेय ने कहा कि विकास कार्यों के लिए बजट की कोई कमी नहीं है, लेकिन जनता के पैसे का सही उपयोग होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि सड़क निर्माण में किसी भी तरह की लापरवाही या घटिया सामग्री का इस्तेमाल पाया गया, तो संबंधित ठेकेदार और अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। इस अवसर पर पार्षद और क्षेत्रीय लोग बड़ी संख्या में मौजूद रहे।
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महापौर ने माहेश्वरी मोहाल सड़क का भूमि पूजन किया: 20 लाख की लागत से कमला टावर से मंशा देवी मंदिर तक बनेगी नई सड़क – Kanpur News
शिवहर में कल 13 पंचायतों में स्पेशल कैंप: DM के निर्देश पर समस्याओं के समाधान के लिए होगा कार्यक्रम – Sheohar News
शिवहर जिले के पांचों प्रखंडों की 13 पंचायतों में 12 मई को विशेष सहयोग शिविर आयोजित किए जाएंगे। जिला पदाधिकारी प्रतिभा रानी के निर्देश पर इन शिविरों के सफल संचालन के लिए जिला स्तरीय एवं वरीय पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति की गई है। इन शिविरों का आयोजन डुमरी कटसरी प्रखंड की नयागांव पूर्वी एवं नयागांव पश्चिमी पंचायत, पूरनहिया प्रखंड की दोस्तियां एवं बराही जगदीश पंचायत, शिवहर प्रखंड की सुगीया, ताजपुर तथा माधोपुर अनंत पंचायत में होगा। इसके अतिरिक्त, तरियानी प्रखंड की खुरपट्टी, बेलहिया, विशंभरपुर एवं अटकोनी पंचायत तथा पिपराही प्रखंड की अम्बा दक्षिणी एवं बसहिया पंचायत में भी ये विशेष कैंप लगेंगे। योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुंचाना भी लक्ष्य प्रशासन द्वारा आयोजित इन सहयोग शिविरों का मुख्य उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत स्तर पर ही लोगों की समस्याओं को सुनना, उनका त्वरित एवं पारदर्शी समाधान करना है। साथ ही, सरकारी योजनाओं का लाभ पात्र व्यक्तियों तक पहुंचाना भी इसका लक्ष्य है। इस पहल से ग्रामीणों को प्रखंड या जिला मुख्यालय के चक्कर लगाने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी, जिससे उनकी शिकायतों के निष्पादन में तेजी आएगी। शिकायत का निपटारा 30 दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा – प्रशासन शिविर के दौरान राजस्व, शिक्षा, स्वास्थ्य, पुलिस, सामाजिक सुरक्षा, पेंशन, राशन कार्ड, आवास योजना सहित विभिन्न विभागों से संबंधित शिकायतों का ऑन-द-स्पॉट या निर्धारित समयसीमा में समाधान किया जाएगा। प्रशासन ने यह भी दावा किया है कि प्रत्येक शिकायत का निपटारा 30 दिनों के भीतर सुनिश्चित किया जाएगा। इन शिविरों में राज्य एवं केंद्र सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं से पात्र लाभुकों को जोड़ने पर भी विशेष जोर दिया जाएगा। पंचायत भवनों में आयोजित होने वाले इन विशेष शिविरों का उद्देश्य प्रशासन और आम नागरिकों के बीच की दूरी को कम करना तथा ग्रामीण स्तर पर सुशासन को मजबूत करना है।
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20 मई को मैहर में सभी मेडिकल दुकानें बंद रहेंगी: दवा व्यापारी बोले- बड़ी कंपनियां भारी डिस्काउंट देकर बाजार बिगाड़ रही – Maihar News
मैहर में सोमवार को दवा दुकानदारों की मीटिंग हुई, जिसमें ऑनलाइन दवा बेचने वाली कंपनियों के खिलाफ जमकर गुस्सा फूटा। दुकानदारों ने फैसला लिया है कि वे अपनी मांगों को लेकर 20 मई को देशभर में होने वाली हड़ताल में शामिल होंगे और अपनी दुकानें बंद रखेंगे। मां शारदा यात्री निवास में हुई इस मीटिंग में जिलेभर के दवा व्यापारी जुटे। सतना जिला संघ के अध्यक्ष पंडित दीनदयाल तिवारी और अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि बड़े-बड़े डिजिटल प्लेटफॉर्म और ई-फार्मेसी बिना किसी जांच-परख के दवाएं बेच रहे हैं। इससे न सिर्फ लोगों की सेहत के साथ खिलवाड़ हो रहा है, बल्कि नियम-कायदों की भी धज्जियां उड़ाई जा रही हैं। 20 मई को रात भर बंद रहेंगे मेडिकल स्टोर दवा व्यापारियों का कहना है कि बड़ी कंपनियां भारी डिस्काउंट देकर बाजार बिगाड़ रही हैं, जिससे छोटे दुकानदारों का धंधा चौपट हो रहा है। इसके विरोध में फैसला लिया गया है कि 19 मई की रात 12 बजे से लेकर 20 मई की पूरी रात तक जिले के सभी मेडिकल स्टोर बंद रहेंगे। यानी पूरे 24 घंटे तक दवाओं की बिक्री नहीं होगी। सिविल अस्पताल के सामने प्रदर्शन की तैयारी सिर्फ दुकानें बंद करना ही नहीं, बल्कि 20 मई को सुबह 11 बजे सभी दवा व्यापारी सिविल अस्पताल के सामने जुटेंगे और अपनी आवाज बुलंद करेंगे। इस बैठक का संचालन नीरज गर्ग ने किया और सभी व्यापारियों से एकजुट होकर इस बंद को सफल बनाने की अपील की गई। मीटिंग के आखिर में राम भगत त्रिपाठी ने सभी का शुक्रिया अदा किया।
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LItti Chokha Recipe: घी में डूबी लिट्टी, धुएं वाला चोखा और मलाईदार खीर
घी में डूबी गर्मागर्म लिट्टी, धुएं की खुशबू वाला चोखा और मलाईदार खीर का स्वाद हर किसी का दिल जीत लेता है. यूपी-बिहार की यह पारंपरिक डिश अब पूरे देश में बेहद पसंद की जाती है. सत्तू के मसाले से भरी लिट्टी और भुने हुए बैंगन-आलू का चोखा खाने का मजा दोगुना कर देता है. इसके साथ मीठी और गाढ़ी खीर इस देसी दावत को और भी खास बना देती है. अगर आपने कभी घर पर यह स्वादिष्ट कॉम्बो ट्राई नहीं किया है, तो अब जरूर बनाएं.आसान रेसिपी की मदद से आप भी घर बैठे बिहारी जायके का भरपूर आनंद ले सकते हैं.
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मूल निवास प्रमाण पत्र जारी करने के नियमों में बदलाव: 10 साल किराए पर रहने वाले भी बनवा सकेंगे; सांसद-विधायक या अधिकारियों में से 2 का सर्टिफिकेट अनिवार्य – Jaipur News
राजस्थान में मूल निवास प्रमाण पत्र बनाने के लिए सरकार ने नए सिरे से प्रावधान लागू किए हैं। मूल निवास प्रमाण पत्र जारी करने के लिए कलेक्टर, उपखण्ड अधिकारी, सहायक कलेक्टर और तहसीलदार को अधिकृत किया गया है। गृह विभाग ने इसके आदेश जारी कर दिए हैं। अब 10 साल या इससे ज्यादा समय से किराए के मकान में रहने वालों के भी मूल निवास प्रमाण पत्र बन सकेंगे। इसके अलावा, जिनके माता-पिता राजस्थान सरकार में 3 साल से नौकरी में हैं, वे खुद और उनके बच्चे भी मूल निवास प्रमाण पत्र बनवाने के पात्र होंगे। अब 2 जिम्मेदार व्यक्तियों की सिफारिश होगी अनिवार्य मूल निवास प्रमाण पत्र बनाने से पहले अब आवेदक से शपथ पत्र (एफिडेविट) लेने के साथ-साथ 2 जिम्मेदार व्यक्तियों से भी अनुशंसा (सिफारिश) का प्रमाण पत्र लिया जाएगा। मूल निवास प्रमाण पत्र के लिए सांसद, विधायक, गजटेड ऑफिसर, जिला प्रमुख, प्रधान, जिला परिषद सदस्य, सरपंच, ग्राम सचिव, पटवारी, मेयर, नगरपालिका अध्यक्ष, सभापति, पार्षद, सरकारी कर्मचारी या पुलिस बीट प्रभारी में से किन्हीं 2 के प्रमाण पत्र आवेदन के साथ लगाने होंगे। गृह विभाग ने अफसरों को 2 जिम्मेदार व्यक्तियों के प्रमाण पत्र साथ लगाने के निर्देश दिए हैं। 10 साल से राजस्थान में रहने पर मिलेगा मूल निवास
गृह विभाग के अनुसार, मूल निवासी वह माना जाएगा जिसके माता-पिता राजस्थान के मूल निवासी हों या उसके माता-पिता राजस्थान में 10 साल या उससे ज्यादा समय से रह रहे हों। मूल निवास प्रमाण पत्र बनाने के लिए एसडीएम (SDM) या तहसीलदार के ऑफिस में आवेदन कर सकते है। आवेदन के साथ दस्तावेज लगाने होंगे। यदि माता-पिता राजस्थान के मूल निवासी हैं, तो आवेदन के साथ अपना बर्थ सर्टिफिकेट (जन्म प्रमाण पत्र) और माता-पिता का मूल निवास प्रमाण पत्र लगाना अनिवार्य होगा। 10 साल या ज्यादा समय से मकान तो भी मूल निवासी 10 साल या इससे ज्यादा समय से राजस्थान में खुद का मकान हो तो मूल निवास प्रमाण पत्र बनाने के पात्र होंगे। आवेदक का या उसके माता-पिता का राजस्थान में 10 साल या इससे ज्यादा अवधि में मकान हो तो आवेदक और उसके माता-पिता का वोटर आईडी,आधार कार्ड,पासपोर्ट, ड्राईविंग लाईसेंस या कोई अन्य फोटो पहचान पत्र साथ लगाना होगा। राजस्थान में शादी करने वाली बाहरी राज्यों की महिलाओं को पीहर का मूल निवास प्रमाण पत्र सरेंडर करना होगा दूसरे राज्यों की महिलाएं जो राजस्थान की मूल निवासी नहीं हैं लेकिन राजस्थान के मूल निवासी से शादी करने के बाद पति के साथ यहां रहती हैं, उन्हें राजस्थान की मूल निवासी माना जाएगा। बाहरी राज्यों की महिलाओं को शादी के बाद राजस्थान का मूल निवास प्रमाण पत्र बनाने के लिए मैरिज सर्टिफिकेट के साथ पति का मूल निवास प्रमाण-पत्र, वोटर आईडी, आधार कॉर्ड सहित कोई भी पहचान कार्ड साथ लगाना होगा। राजस्थान का मूल निवास प्रमाण पत्र बनाने के लिए बाहरी राज्यों की महिलाओं को पीहर का मूल निवास प्रमाण पत्र सरेंडर करना होगा, आवेदन के साथ सरेंडर का शपथ पत्र देना होगा। तीन साल से सरकारी नौकरी वालों के बच्चे मूल निवास प्रमाण पत्र बनाने के पात्र राजस्थान सरकार या सरकारी उपक्रमों में अगर कोई तीन साल से नौकरी कर रह रहा है तो खुद और उसके बच्चे मूल निवास प्रमाण पत्र बनाने के पात्र होंगे। आवेदन के साथ सरकारी नौकरी का प्रमाण लगाना होगा।
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TMC 31 सीटों के नतीजों के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट पहुंची: कहा- यहां जीत का अंतर SIR में कटे वोटों से कम, कोर्ट बोला- नई याचिकाएं लगाएं
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नई दिल्ली/कोलकाता33 मिनट पहले
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ममता बनर्जी ने 5 मई को प्रेस कॉन्फ्रेंस की थी। BJP-चुनाव आयोग पर साजिश के आरोप लगाए थे।
सुप्रीम कोर्ट में TMC ने दावा किया कि बंगाल में हुए विधानसभा चुनाव में 31 सीटों पर भाजपा और TMC में हार जीत का अंतर SIR में काटे गए वोटों से कम है। सोमवार को TMC सांसद और वकील कल्याण बनर्जी ने यह बात जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमल्या बागची की बेंच से कही।
बेंच बंगाल में SIR प्रैक्टिस को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। बेंच ने कहा- पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी और अन्य नेता बंगाल में हुए स्पेशल इंटेंसिव रिविजन के खिलाफ नई याचिका दाखिल कर सकते हैं।

हार 862 वोटों से हुई, SIR में 5000 वोट कम हुए
इससे पहले कल्याण बनर्जी ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था कि एक मामले में उनके कैंडिडेट की हार 862 वोटों से हुई, जबकि उस सीट पर 5000 से ज्यादा वोटर नाम लिस्ट से हटाए गए थे। TMC और भाजपा के बीच कुल वोटों का अंतर करीब 32 लाख था और वोट डिलीशन के खिलाफ 35 अपीलें अभी भी पेंडिंग हैं।
वहीं, चुनाव आयोग ने इन दलीलों का विरोध करते हुए कहा कि ऐसे मामलों में सही उपाय EC में याचिका दाखिल करना है।आयोग का कहना है कि SIR और उससे जुड़े विवादों में इसी प्रक्रिया के तहत जवाबदेही तय की जा सकती है।
अपीलों को निपटाने में 4 साल लगेंगे
TMC की ओर से ही पेश हुईं सीनियर एडवोकेट मेनका गुरुस्वामी ने कोर्ट को बताया कि मौजूदा रफ्तार से अपीलीय ट्रिब्यूनल्स को इन अपीलों को निपटाने में करीब 4 साल लग सकते हैं।
हाल में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में भाजपा ने 294 में से 207 सीटें जीतीं हैं, जबकि TMC को 80 सीटें मिली हैं। इन चुनावों में राज्य में 90% से ज्यादा वोटिंग दर्ज की गई।
भाजपा को कुल 2 करोड़ 92 लाख 24 हजार 804 वोट मिले हैं। तृणमूल कांग्रेस को 2 करोड़ 60 लाख 13 हजार 377 वोट मिले हैं।
BJP को TMC से 32 लाख 11 हजार 427 ज्यादा वोट मिले हैं। यानी 293 सीटों के हिसाब से भाजपा को हर सीट पर औसत 10,960 वोट ज्यादा मिले।
राज्य में स्पेशल इंटेंसिव रिविजन (SIR) से कुल 91 लाख वोट कटे। यानी हर सीट पर औसतन 30 हजार वोटरों के नाम काटे गए। कुल 293 सीटों में से 176 पर जीत का अंतर 30 हजार से कम और 117 सीटों पर 30 हजार से अधिक रहा।

भाजपा ने 128 सीटें 30 हजार से कम मार्जिन पर जीतीं
- बंगाल में 30 हजार से कम मार्जिन पर जीत वाली 176 सीटों में भाजपा की 128 सीटें हैं। वहीं, 30 हजार से ज्यादा मार्जिन पर जीत वाली 117 सीटों में भाजपा की 79 सीटें हैं। तृणमूल की 44 सीटों पर जीत का मार्जिन 30 हजार से कम और 36 सीटों पर 30 हजार से अधिक रहा है।
- 2021 में भाजपा की 77 में से 72 सीटों पर जीत का मार्जिन 30 हजार से कम था। प्रतिशत में देखें तो भाजपा ने इस बार 62% सीटें 30 हजार से कम मार्जिन पर जीतीं, जबकि 2021 में ऐसी 93.5% थीं।
- साल 2021 में 121 सीटों पर तृणमूल की जीत का अंतर 30 हजार से कम था और 94 पर 30 हजार से ज्यादा। यानी बहुमत वाले दल के लिए ये आंकड़े ट्रेंड दर्शाते हैं। इस बार भाजपा की 25 सीटें ऐसी हैं, जहां हटाए या अयोग्य घोषित मतदाताओं की संख्या जीत के अंतर से अधिक है।
13 अप्रैल: कोर्ट बोला- जीत के अंतर से ज्यादा वोटर वोट नहीं डाल पाए तो दखल देंगे
सुप्रीम कोर्ट ने 13 अप्रैल ने कहा था कि चुनाव परिणाम में तभी दखल दिया जाएगा, जब बड़ी संख्या में मतदाता बाहर किए गए हों और वह संख्या जीत के अंतर को प्रभावित करती हो।
जस्टिस बागची ने आयोग से कहा था कि मान लीजिए कि जीत का अंतर 2% है और 15% मतदाता वोट नहीं डाल सके, तो हमें इस पर सोचना होगा। यह चिंता का मामला हो सकता है। यह मत समझिए कि बाहर किए गए मतदाताओं का सवाल हमारे दिमाग में नहीं है।
इस उदाहरण से आसानी से समझिए…
मान लीजिए विजेता को 1 लाख वोट मिले और निकटतम प्रतिद्वंद्वी को 95 हजार वोट तो मार्जिन हुआ 5 हजार वोट। अगर हटाए गए वोट 5 हजार से कम हैं तो असर नहीं। लेकिन ज्यादा हैं तो नतीजों पर असर संभव।
भाजपा का वोट शेयर 7.50% बढ़ा, TMC का इतना ही घटा

बंगाल में 11.85% नाम हटे, ज्यादातर बांग्लादेश बॉर्डर के पास
पश्चिम बंगाल में अक्टूबर 2025 में कुल वोटर 7.66 करोड़ थे। इनमें से अब तक 90.83 लाख नाम हटाए गए। लगभग 11.85% वोटर कम हो गए। यानी अब राज्य में 6.76 करोड़ वोटर हैं।
चुनाव आयोग ने फाइनल आंकड़े जारी नहीं किए हैं। इसके अलावा जांच के तहत आए 60.06 लाख वोटरों में से 27.16 लाख के नाम हटाए गए। बांग्लादेश सीमा से लगे जिलों में भी बड़े स्तर पर नाम हटे। नॉर्थ 24 परगना में 5.91 लाख में से 3.25 लाख नाम हटे। वहीं, 8.28 लाख में से 2.39 लाख नाम हटे।

देश की 78% आबादी और 72% भूभाग पर अब भाजपा+ का राज
गंगासागर से कन्याकुमारी तक पांच राज्यों के चुनावी नतीजों ने भाजपा विरोधी राजनीति के बड़े ‘पॉवर सेंटर्स’ को बड़ा झटका दिया है। ममता बनर्जी और एमके स्टालिन भाजपा को चुनौती देने वाले प्रमुख चेहरे थे।
बंगाल (42) और तमिलनाडु (39) लोकसभा की 81 सीटें तय करते हैं। इनके ढहने से इंडिया गठबंधन पिछड़ गया। केरल में कांग्रेस की जीत उसे राहत देती है, लेकिन यह बढ़त विपक्ष में नई खींचतान शुरू करेगी। अब विपक्ष की लड़ाई सत्ता की नहीं, प्रासंगिकता बचाने की हो गई है।

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पश्चिम बंगाल चुनाव से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें…
ममता बोलीं- मैं आजाद पंछी, शेर की तरह लड़ूंगी: इस्तीफा नहीं दूंगी, हम जनादेश से नहीं, साजिश से हारे; कोलकाता में BJP कार्यकर्ता की हत्या

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने मंगलवार को कोलकाता में प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कहा- मैं CM पद से इस्तीफा नहीं दूंगी। हम जनादेश से नहीं, साजिश से हारे हैं। इसलिए इस्तीफा देने राजभवन नहीं जाऊंगी।ममता ने आगे कहा- चुनाव आयोग असली विलेन है। उसने भाजपा के साथ मिलकर 100 सीटें लूटीं। अब मेरे पास कोई कुर्सी नहीं है, मैं आजाद पंछी हूं। कहीं से भी चुनाव लड़ सकती हूं, सड़कों पर रहूंगी। पूरी खबर पढ़ें…
मार्केट में धड़ल्ले से बिक रहे फर्जी स्मार्टफोन और एक्सेसरीज, कैसे करें पहचान?
राजधानी दिल्ली में OnePlus, Oppo, Realme के फर्जी एक्सेसरीज बनाने वाले गिरोह का भंडाफोड़ हुआ है। दिल्ली पुलिस के क्राइम ब्रांच ने करोलबाग और मोतीनगर के दो गोदाम सील कर दिए हैं। इन गोदामों में 15,000 से ज्यादा नकली एक्सेसरीज बरामद किए गए हैं। दिल्ली ही नहीं देश के कई शहरों में फर्जी स्मार्टफोन से लेकर ईयरबड्स, नेकबैंड, चार्जर आदि बेचे जा रहे हैं। कहीं आप भी तो नकली स्मार्टफोन या एक्सेसरीज घर लेकर नहीं आ रहे हैं। इसे आप आसानी से चेक कर सकते हैं।
स्मार्टफोन असली है या नकली, कैसे करें चेक?
स्मार्टफोन की प्रमाणिकता चेक करने के लिए आपको बॉक्स पर दिए गए IMEI नंबर का इस्तेमाल करना होगा। IMEI नंबर एक इंटरनेशनल मोबाइल इक्विपमेंट आइडेंटिफिकेशन नंबर होता है, जो हर मोबाइल के लिए अलग-अलग होता है। फर्जी IMEI नंबर की पहचान करने के लिए दूरसंचार विभाग के संचार साथी पोर्टल या ऐप का इस्तेमाल करना होगा। जैसे ही आप फोन के डिब्बे पर दिए गए IMEI नंबर को पोर्टल पर एंटर करते हैं, आपको पता चल गया है कि यह वैलिड है या नहीं। फर्जी IMEI नंबर सरकारी पोर्टल या ऐप पर सर्च नहीं होगा।
संचार साथी पोर्टल
एक्सेसरीज की पहचान कैसे करें?
बाजार में बिकने वाले सभी इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम भारतीय मानक ब्यूरो यानी BIS द्वारा सर्टिफाइड होते हैं। अगर, कोई फर्जी एक्सेसरीज जैसे कि चार्जर, नेकबैंड, ईयरबड्स आदि मार्केट में बिक रहा है, तो वो BIS पर लिस्टेड नहीं होंगे। इसके लिए आपको BIS Care ऐप या फिर Umang ऐप का सहारा लेना होगा या फिर BIS की वेबसाइट के जरिए भी आप इसे चेक कर सकते हैं। इसके लिए एक्सेसरीज के बॉक्स पर दिए गए R-No. यानी रजिस्ट्रेशन नंबर को चेक करना होगा। इस नंबर का इस्तेमाल BIS Care पोर्टल या ऐप में करके एक्सेसरीज की जेनुइननेस की जांच कर सकते हैं।
एक्सेसरीज की पहचान
कभी न खरीदें ये प्रोडक्ट्स
अगर मार्केट में आपको कोई स्मार्टफोन या अन्य इलेक्ट्रॉनिक्स आइटम काफी सस्ते दाम पर मिल रहे हैं तो आपको सतर्क हो जाना चाहिए। ज्यादातर लोग महंगी चीज को सस्ते में खरीदने की लालच में फंस जाते हैं और गलत प्रोडक्ट खरीद लेते हैं।
इसके अलावा आपको प्रोडक्ट की पैकेजिंग पर भी गौर करना चाहिए। ज्यादातर नकली प्रोडक्ट्स की पैकेजिंग में आपको यह बदलाव आसानी से दिख जाएगा। नकली प्रोडक्ट्स की पैकेजिंग जेनुइन के मुकाबले दोयम दर्जे की होती है। साथ ही, पैकेट की क्वालिटी भी सही नहीं होती है।
ये भी पढ़ें – Oppo, OnePlus, Realme के नकली प्रोडक्ट्स का भंडाफोड़, दिल्ली पुलिस ने दो गोदाम किए सील
वेस्ट एशिया की जंग भारत की मेहनत पर फेरेगी पानी! 25 लाख लोग गरीबी के मुहाने पर
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भारत ने पिछले कुछ वर्षों में करोड़ों लोगों को गरीबी से बाहर निकालने का दावा किया है, लेकिन पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव इस पूरी आर्थिक कहानी को झटका दे सकता है. कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल, महंगाई और बढ़ते ट्रांसपोर्ट खर्च का असर सबसे ज्यादा उन परिवारों पर पड़ सकता है जो अभी हाल ही में गरीबी रेखा से ऊपर आए हैं. अगर हालात लंबे समय तक बिगड़े रहे तो लाखों लोग फिर आर्थिक संकट में फंस सकते हैं. विशेषज्ञ मानते हैं कि ईरान और इजरायल के बीच तनाव केवल भू राजनीति का मामला नहीं है, बल्कि इसका सीधा असर भारत की जेब, रोजगार और विकास योजनाओं पर पड़ सकता है.
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है. (AI)
नई दिल्ली. भारत पिछले कुछ वर्षों से दुनिया के सामने खुद को तेजी से उभरती अर्थव्यवस्था के तौर पर पेश कर रहा है. नीति आयोग (NITI Aayog) के मुताबिक बीते करीब 9 साल में 25 करोड़ से ज्यादा लोग बहुआयामी गरीबी से बाहर निकले हैं. गांवों में बिजली, मुफ्त राशन, बेहतर सड़कें और डिजिटल योजनाओं ने करोड़ों परिवारों की जिंदगी बदली है. लेकिन अब पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव इस पूरी कहानी को बड़ा झटका दे सकता है. ईरान और इजरायल के बीच बढ़ते संघर्ष ने दुनिया भर के बाजारों को चिंता में डाल दिया है. सबसे बड़ा डर कच्चे तेल की कीमतों को लेकर है. अगर ब्रेंट क्रूड 100 से 110 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचता है तो भारत जैसे तेल आयात पर निर्भर देश के लिए मुश्किलें तेजी से बढ़ सकती हैं. इसका असर सिर्फ पेट्रोल पंप तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि खाने पीने की चीजों से लेकर रोजगार तक हर क्षेत्र प्रभावित हो सकता है.
भारत में बड़ी संख्या ऐसे परिवारों की है जो हाल के वर्षों में गरीबी रेखा से थोड़ा ऊपर पहुंचे हैं. उनकी आमदनी अभी भी बहुत मजबूत नहीं मानी जाती. संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम यानी यूएनडीपी (UNDP) पहले ने चेतावनी दी है कि गरीबी दर में मामूली बढ़ोतरी भी लाखों लोगों को फिर संकट में धकेल सकती है. UNDP के मुताबिक, अगर हालात नहीं सुधरे तो भारत में गरीबी दर 23.9% से बढ़कर 24.2% हो सकती है. इसका मतलब है कि करीब 25 लाख और लोग गरीबी रेखा के नीचे आ सकते हैं. इससे देश में कुल गरीबों की संख्या 35.4 करोड़ तक पहुंच सकती है. अगर महंगाई तेजी से बढ़ती है तो सबसे पहले असर इन्हीं परिवारों पर पड़ता है. रसोई गैस, दूध, सब्जी, ट्रांसपोर्ट और किराए का खर्च बढ़ते ही उनका पूरा बजट बिगड़ जाता है. यानी जिन परिवारों ने अभी हाल में आर्थिक राहत महसूस की थी, वे दोबारा मुश्किल हालात में पहुंच सकते हैं.
तेल महंगा हुआ तो हर चीज होगी महंगी
भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करता है. ऐसे में पश्चिम एशिया में कोई भी बड़ा संकट सीधे भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर डालता है. अगर तेल महंगा होता है तो ट्रक, ट्रेन और शिपिंग का खर्च बढ़ता है. इसका असर नमक, आटा, दाल, सब्जी, सीमेंट और कपड़ों तक हर चीज पर दिखाई देता है. विशेषज्ञों का मानना है कि तेल की कीमतों में लगातार उछाल सरकार के लिए भी बड़ा सिरदर्द बन सकता है. सरकार को गरीबों के लिए राशन और सब्सिडी पर ज्यादा पैसा खर्च करना पड़ सकता है. इससे इंफ्रास्ट्रक्चर और विकास परियोजनाओं के लिए उपलब्ध बजट पर दबाव बढ़ेगा.
इंडस्ट्रियल हब में बढ़ सकता है तनाव
नोएडा, मानेसर, तिरुपुर और सूरत जैसे इंडस्ट्रियल इलाकों में पहले से लागत बढ़ने का दबाव महसूस किया जा रहा है. कंपनियां महंगे कच्चे माल और कमजोर डिमांड के बीच खर्च घटाने की कोशिश कर रही हैं. कई जगह ओवरटाइम कम किए जा रहे हैं और बोनस रोकने की चर्चा है. ऐसे हालात लंबे समय तक बने रहे तो श्रमिक असंतोष बढ़ सकता है. इससे उत्पादन और सप्लाई चेन पर असर पड़ेगा. भारत की मैन्युफैक्चरिंग ग्रोथ के लिए यह बड़ा खतरा माना जा रहा है.
आम आदमी की जेब पर डबल मार
महंगाई का सबसे बड़ा असर आम आदमी की खरीद क्षमता पर पड़ता है. जो पैसा पहले लोग मोबाइल, कपड़े, बाइक या बाहर खाने पर खर्च करते थे, वह अब पेट्रोल और जरूरी सामान में चला जाता है. इससे बाजार में मांग घटती है. जब मांग कम होती है तो फैक्ट्रियां उत्पादन घटाती हैं. उत्पादन घटने पर रोजगार पर असर पड़ता है. यही स्थिति धीरे-धीरे आर्थिक दुष्चक्र का रूप ले सकती है, जहां कमाई और खर्च दोनों कमजोर होने लगते हैं.
भारत के लिए सिर्फ विदेश नीति का मामला नहीं
पश्चिम एशिया का संकट अब सिर्फ भू राजनीति या कूटनीति का मुद्दा नहीं रह गया है. भारत के लिए यह सीधा आर्थिक और सामाजिक चुनौती बनता जा रहा है. सरकार ने पिछले कई सालों में गरीबी कम करने, मिडिल क्लास बढ़ाने और खपत मजबूत करने पर बड़ा जोर दिया है. लेकिन अगर तेल की कीमतें लंबे समय तक ऊंची रहती हैं और वैश्विक तनाव बढ़ता है, तो इसका असर भारत की विकास दर, रोजगार और गरीब परिवारों की आर्थिक स्थिति पर साफ दिखाई दे सकता है.
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मैं जय ठाकुर, न्यूज18 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहा हूं. मेरा मुख्य काम बिजनेस की पेचीदा खबरों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. फिर चाहे वह शेयर बाजार की हलचल हो, देश की इकोनॉमी क…और पढ़ें
CTET सितंबर 2026 का नोटिफेकशन हुआ जारी, जानें इस बार क्या हुआ है बदलाव
आज यानी 11 मई 2026 को CTET (केंद्रीय शिक्षक पात्रता परीक्षा) ने सितंबर 2026 का नोटिफिकेशन जारी कर दिया है। आपको बता दें कि जो भी अभ्यार्थी आवेदन भरना चाहते हैं वो आज से अप्लाई कर सकते हैं और इसके लिए यानी आवेदन भरने की अंतिम तिथि 10 जून 2026 है। वहीं परीक्षा की बात करें तो परीक्षा 6 सितंबर को होने वाली है। मगर इस बार जो नोटिफिकेशन जारी हुआ है, उसमें एक बड़ा बदलाव हुआ है। आइए फिर आपको बताते हैं कि वो बदलाव क्या है और फिर अन्य जरूरी जानकारी भी देते हैं।
इस बार क्या बदलाव हुआ है?
परीक्षा के लिए नोटिफिकेशन जारी हो गया है मगर अभ्यार्थी इस बार अपने पसंद का शहर नहीं चुन पाएंगे। इस बार परीक्षा के लिए शहर रेंडम बेसिस पर दिया जाएगा। आवदेन पोर्टल पर अभ्यार्थियों को अपने लिए परीक्षा का शहर चुनने का कोई विकल्प नहीं मिलेगा। आपको बता दें कि जो भी उम्मीदवार होंगे, उन्हें CBSE की तरफ से रेंडम बेसिस पर दिया जाएगा। यह भी बता दें कि शहर बदलने का भी कोई अनुरोध नहीं स्वीकार होगा।
नोटीफिकेशन से जरूरी जानकारियां
आइए अब आपको उस जारी नोटिफिकेशन से कुछ जरूर जानकारियां बताते हैं। आवेदन भरने की प्रक्रिया 11 मई 2026 से शुरू हुई है और इसकी अंतिम तिथि 10 जून 2026 होगी। इसके अलावा परीक्षा 6 सितंबर को होगी और अगर अभ्यार्थियों की संख्या बढ़ती है तो फिर एक दिन पहले यानी 5 सितंबर को भी आयोजित हो सकती है। आपको यह भी बता दें कि आवेदन भरने के बाद उसमें सुधार करने के लिए 15 जून 2026 से लेकर 18 जून 2026 तक का समय दिया गया है। वहीं अगर परीक्षा के रिजल्ट की बात करें तो वो अक्टूबर के अंत तक आ सकते हैं मगर यह सिर्फ संभावित है।
आप अगर आवेदन भरना चाहते हैं तो बता दें कि यह सिर्फ CTET की वेबसाइट https://ctet.nic.in और CBSE की वेबसाइट https://www.cbse.gov.in के जरिए अप्लाई कर सकते हैं।
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केरल में वेणुगोपाल का तिलक या बने रहेंगे राहुल गांधी के ‘टाइपराइटर’?
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केरल में जीत के बाद कांग्रेस में सीएम पद की जंग तेज हो गई है. यदि केसी वेणुगोपाल को गुटबाजी रोकने के लिए तिरुवनंतपुरम भेजा जाता है, तो दिल्ली में राहुल गांधी के लिए अपने सबसे भरोसेमंद रणनीतिकार को खोना एक बड़ी चुनौती होगी. क्या दिल्ली की राजनीति छोड़ केरल जाएंगे वेणुगोपाल?
कौन होगा केरल में कांग्रेस का सीएम कैंडिडेट?
कौन होगा केरल का अगला सीएम? देश के पांच राज्यों के चुनावी नतीजों के बाद अब सरकार गठन की सरगर्मी तेज हो गई है. जहां बंगाल में भाजपा ने किला फतह किया और तमिलनाडु में ‘थलापति’ विजय के रूप में नया सूर्य उदय हुआ, वहीं केरल में कांग्रेस की प्रचंड जीत 102 सीटें के बाद भी ‘कौन बनेगा मुख्यमंत्री’ का सस्पेंस बरकरार है. पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी और असम में हिमंता बिस्वा सरमा के नाम तय होने के बाद अब सबकी नजरें केरल पर हैं. कांग्रेस नीत यूडीएफ (UDF) ने 140 में से 102 सीटें जीतकर वामपंथियों के 10 साल के शासन को उखाड़ फेंका है. लेकिन जीत के साथ ही पुराने जख्म भी हरे हो गए हैं. मुख्यमंत्री पद के लिए वीडी सतीशन, रमेश चेन्निथला और प्रदेश अध्यक्ष के सुधाकरन के बीच ‘साइलेंट वॉर’ छिड़ा हुआ है. इस गुटबाजी को खत्म करने के लिए आलाकमान के पास एकमात्र विकल्प के रूप में केसी वेणुगोपाल का नाम सामने आ रहा है.
केसी वेणुगोपाल वर्तमान में कांग्रेस के संगठन महासचिव हैं और राहुल गांधी के सबसे करीबी सलाहकारों में गिने जाते हैं. कांग्रेस के हर फैसले और नियुक्तियों में केसी का ही साइन चलता है. जिस तरह बीजेपी में अरुण सिंह का रोल है, पार्टी का अध्यक्ष जेपी नड्डा रहें या नितिन नबीन, सिग्नेचर वाला लेटर अरुण सिंह का ही निकलेगा. ठीक उसी तरह कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे रहें या कोई और नियुक्तियों वाला लेटर पर केसी वेणुगोपाल का ही साइन होता है. 2024 के लोकसभा चुनावों और उसके बाद पार्टी को मजबूत करने के लिए वेणुगोपाल ने ही राहुल गांधी के ‘वार रूम’ को संभाला है. संगठन के हर छोटे-बड़े फैसले और इंडिया गठबंधन के साथ समन्वय में उनकी भूमिका ‘चाणक्य’ जैसी रही है.
केरल में गुटबाजी तो दिल्ली में राहुल गांधी की जरुरत?
केरल में गुटबाजी इतनी गहरी है कि सतीशन और चेन्निथला के समर्थक किसी एक नाम पर सहमत नहीं हैं. ऐसे में वेणुगोपाल एक ‘न्यूट्रल’ और सर्वमान्य चेहरे के रूप में उभर सकते हैं. अगर केसी वेणुगोपाल दिल्ली छोड़कर तिरुवनंतपुरम में मुख्यमंत्री की कुर्सी संभालते हैं, तो राहुल गांधी के लिए यह एक बड़ा व्यक्तिगत और राजनीतिक झटका होगा. राहुल गांधी को एक ऐसा नया चेहरा खोजना होगा जो संगठन की बारीकियों को वेणुगोपाल की तरह समझता हो.
केसी के केरल जाने से कांग्रेस को होगा नुकसान?
वेणुगोपाल गांधी परिवार और पार्टी के क्षेत्रीय क्षत्रपों के बीच एक सेतु का काम करते हैं. उनके जाने से यह कड़ी टूट सकती है. आगामी चुनावों के लिए जो खाका वेणुगोपाल ने तैयार किया है, उसे बीच में छोड़कर जाना कांग्रेस के राष्ट्रीय अभियान को धीमा कर सकता है.
अंतिम फैसला किसके हाथ?
अजय माकन और मुकुल वासनिक जैसे पर्यवेक्षक केरल से रिपोर्ट लेकर दिल्ली लौट चुके हैं. अब गेंद राहुल गांधी और मल्लिकार्जुन खड़गे के पाले में है. क्या वे केरल को बचाने के लिए दिल्ली के अपने सबसे भरोसेमंद सिपाही की ‘कुर्बानी’ देंगे? या फिर केरल में किसी स्थानीय नेता को कमान सौंपकर वेणुगोपाल को अपने पास ही रखेंगे?
कुलमिलाकर जहां कांग्रेस केरल में उलझी है, वहीं भाजपा ने अपनी राहें स्पष्ट कर ली हैं. बंगा में सुवेंदु अधिकारी सीएम बन गए हैं और हिमंता बिस्वा सरमा को दोबारा असम विधायक दल का नेता चुन लिया गया है. 12 मई को सरमा शपथ लेंगे. पुडुचेरी में भी एन. रंगासामी के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार दोबारा सत्ता संभालने को तैयार है. वहीं, केरल की 102 सीटों की जीत कांग्रेस के लिए संजीवनी तो है, लेकिन अगर केसी वेणुगोपाल मुख्यमंत्री बनते हैं, तो तिरुवनंतपुरम की जीत दिल्ली के लिए एक नई सिरदर्दी साबित हो सकती है.
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