Friday, May 15, 2026
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चीन-US की जंग के बीच पीएम मोदी ने निकाला ‘तीसरा रास्ता’, भारत आएगी जादुई तकनीक


प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नीदरलैंड और नॉर्वे की डिप्लोमैटिक यात्राएं केवल हाथ मिलाने या फोटो खिंचवाने तक सीमित नहीं होंगी. यह भारत की उस गहरी चाल का हिस्सा है, जहां दिल्ली खुद को एक शांत लेकिन बेहद ताकतवर टेक्नोलॉजी और क्लाइमेट हब के रूप में देख रहा है. हिंडोल सेनगुप्ता के एनालिसिस के मुताबिक, ये दोनों देश भले ही दुनिया के नक्शे पर छोटे लगें, लेकिन इनके पास वो चाभी है जो भारत को भविष्य की महाशक्ति बना सकती है. मोदी का यह विजन भारत को न केवल आत्मनिर्भर बनाना है, बल्कि ग्लोबल सिस्टम में अपनी मर्जी चलाने की ताकत देना भी है. यह दौरा भारत की 21वीं सदी की महत्वाकांक्षाओं के स्तंभों को मजबूती देने वाला है.

नीदरलैंड और सेमीकंडक्टर का तिलिस्म क्या है?

जब भी चिप या सेमीकंडक्टर की बात होती है, तो अक्सर लोग अमेरिका या चीन का नाम लेते हैं. लेकिन असली खिलाड़ी नीदरलैंड की एएसएमएल (ASML) है. यह कंपनी ईयूवी (EUV) लिथोग्राफी मशीनें बनाती है, जिसके बिना दुनिया का कोई भी मॉडर्न चिप नहीं बन सकता.

  • यह मशीनें इतनी एडवांस हैं कि पूरी दुनिया में इनकी गिनती उंगलियों पर की जा सकती है. भारत को पता है कि अगर उसे चिप मेकिंग का हब बनना है, तो नीदरलैंड से दोस्ती बेहद जरूरी है. पीएम मोदी की यह कोशिश भारत को किसी एक सुपरपावर पर निर्भर रहने से बचाएगी.
  • भारत की सेमीकंडक्टर महत्वाकांक्षाएं घरेलू स्टार्टअप्स और इंटरनेशनल कोलैबोरेशन के बीच एक बैलेंस चाहती हैं. जब अमेरिका और चीन के बीच इस तकनीक को लेकर कोल्ड वॉर छिड़ा हो, तब भारत ने नीदरलैंड के साथ हाथ बढ़ाकर एक ‘तीसरा रास्ता’ चुन लिया है.

यह एक ऐसी पार्टनरशिप है जो न तो किसी देश पर दबाव डालती है और न ही तकनीक को लेकर किसी एक पर निर्भर करती है. भारत अपनी खुद की कैपेसिटी बिल्ड करने के लिए डच एक्सपर्ट्स की मदद ले रहा है, जो आने वाले समय में इलेक्ट्रॉनिक मार्केट में भारत को लीडर बना सकता है.

(Infographics made with AI)

खेती और निवेश का नया गेटवे कैसे बनेगा?

नीदरलैंड क्षेत्रफल में छोटा है, लेकिन खेती की तकनीक में दुनिया का उस्ताद है. भारत की बढ़ती जनसंख्या और बदलता मौसम खेती के लिए बड़ी चुनौती है. डच तकनीक के जरिए भारत वर्टिकल फार्मिंग और प्रिसिजन फार्मिंग को अपना सकता है. इससे न केवल पैदावार बढ़ेगी, बल्कि पानी की बचत भी होगी.

  • भारत में जिस तरह से क्लाइमेट चेंज का असर खेती पर दिख रहा है, उसे देखते हुए डच रिसर्च और बायोटेक्नोलॉजी एक वरदान साबित हो सकती है. मोदी चाहते हैं कि भारत के किसान केवल पेट भरने के लिए न उगाएं, बल्कि ग्लोबल मार्केट के लिए एक्सपोर्टर भी बनें.
  • इसके अलावा, नीदरलैंड यूरोप के फाइनेंशियल मार्केट का गेटवे है. एम्स्टर्डम का फाइनेंस स्ट्रक्चर भारतीय कंपनियों के लिए यूरोप के दरवाजे खोल देता है.
  • पीएम मोदी का यह दौरा भारतीय कंपनियों को इंटरनेशनल कैपिटल तक पहुंच दिलाने और यूरोप के बड़े निवेशकों को भारत की ओर खींचने की एक सोची-समझी रणनीति है.

नीदरलैंड के जरिए भारत अपने स्टार्टअप इकोसिस्टम को यूरोप के वेंचर कैपिटल से जोड़ना चाहता है, जो भारत के आर्थिक विकास की रफ्तार को दोगुना कर सकता है.

आर्कटिक में भारत की दिलचस्पी क्यों बढ़ रही है?

  1. अक्सर लोग सोचते हैं कि भारत का आर्कटिक से क्या लेना-देना? सच तो यह है कि आर्कटिक की बर्फ पिघलने से भारत के मानसून पर सीधा असर पड़ता है. वहां छिपे खनिज और नए समुद्री रास्ते आने वाले समय में ग्लोबल ट्रेड का चेहरा बदल देंगे.
  2. नॉर्वे इस क्षेत्र का सबसे बड़ा खिलाड़ी है. मोदी की नॉर्वे से दोस्ती का मतलब है कि भारत अब आर्कटिक के फैसलों में केवल दर्शक नहीं रहेगा.
  3. हम वहां की राजनीति और संसाधनों में अपनी हिस्सेदारी तय करने जा रहे हैं, जो सीधे तौर पर रूस और चीन के बढ़ते दबदबे को बैलेंस करेगा.
  4. आर्कटिक की बदलती जिओपॉलिटिक्स में नॉर्वे एक लोकतांत्रिक और स्थिर पार्टनर है. भारत के वैज्ञानिक और कूटनीतिज्ञ नॉर्वे के अनुभव का फायदा उठाकर आर्कटिक गवर्नेंस में अपनी जगह बना सकते हैं.
  5. यह भारत की समुद्री सुरक्षा और ट्रेड रूट के लिए भी अहम है. अगर नए रूट खुलते हैं, तो भारत के लिए ग्लोबल सप्लाई चेन में अपनी स्थिति मजबूत करने का यह सबसे बड़ा मौका होगा.

पीएम मोदी ने इसे भांप लिया है और नॉर्वे के साथ एक मजबूत ‘पोलर पार्टनरशिप’ की नींव रख दी है.

(Infographics made with AI)

एनर्जी ट्रांजिशन और क्लाइमेट का क्या है कनेक्शन?

नॉर्वे ने अपने तेल भंडार का इस्तेमाल तो किया, लेकिन साथ ही वह रिन्यूएबल एनर्जी और इलेक्ट्रिक गाड़ियों का ग्लोबल लीडर बन गया. भारत को अपनी एनर्जी जरूरतों के लिए कोयले और तेल पर निर्भरता कम करनी है.

नॉर्वे के पास वो मॉडल है जिससे हम सीख सकते हैं कि पर्यावरण को बचाते हुए विकास कैसे किया जाए.

  • नॉर्वे का सोवरेन वेल्थ फंड दुनिया के सबसे बड़े निवेश फंड्स में से एक है, और भारत की रिन्यूएबल एनर्जी प्रोजेक्ट्स में नॉर्वेजियन इन्वेस्टमेंट एक बड़ा बदलाव ला सकता है.

पीएम मोदी का नॉर्वे के साथ जुड़ना यह संदेश देता है कि भारत अपनी एनर्जी जरूरतों को लेकर गंभीर है. हम केवल जीवाश्म ईंधन (Fossil Fuels) को छोड़ने की बात नहीं कर रहे, बल्कि उसे रिप्लेस करने के लिए दुनिया की सबसे बेहतरीन तकनीक को अपना रहे हैं.

नॉर्वे के एक्सपर्ट्स की मदद से भारत अपने रिन्यूएबल एनर्जी के लक्ष्यों को समय से पहले पूरा कर सकता है. यह पार्टनरशिप क्लाइमेट चेंज के खिलाफ भारत की लड़ाई को ग्लोबल लेवल पर एक नई पहचान देगी.

भारत की नई डिप्लोमैटिक जियोमेट्री कितनी घातक है?

यह पूरा दौरा किसी सैनिक गठबंधन से कम नहीं है. मोदी ने एक तरफ नीदरलैंड को चुना जो टेक्नोलॉजी का पावरहाउस है और दूसरी तरफ नॉर्वे को जो भविष्य की जियोपॉलिटिक्स का केंद्र है. भारत अब अपनी शर्तों पर डील कर रहा है. हम किसी गुट में शामिल नहीं हो रहे, बल्कि अपना खुद का रास्ता बना रहे हैं.

  • यह ‘न्यू इंडिया’ की वो पहचान है जहां हम छोटे देशों की बड़ी ताकतों को अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करना जानते हैं. भारत अब केवल वस्तुओं के व्यापार पर फोकस नहीं कर रहा, बल्कि ‘टेक्नोलॉजिकल सोवरेनिटी’ पर काम कर रहा है.

इन दौरों का असली मकसद भारत को ग्लोबल सप्लाई चेन का एक अनिवार्य हिस्सा बनाना है. चाहे वो सेमीकंडक्टर हो, आर्कटिक के संसाधन हों या क्लीन एनर्जी की तकनीक – भारत हर उस मेज पर बैठना चाहता है जहां भविष्य के फैसले लिए जा रहे हैं.

(Infographics made with AI)

पीएम मोदी की यह ‘नॉर्डिक डिप्लोमेसी’ दिखाती है कि भारत अब केवल अपने पड़ोस तक सीमित नहीं है, बल्कि वह दुनिया के सबसे ऊंचे ध्रुवों और सबसे सूक्ष्म चिप्स तक अपनी पहुंच बना चुका है. यह डिप्लोमेसी आने वाले दशकों में भारत की ग्लोबल पोजिशन को तय करेगी.



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अगर आपको खूब पसंद आई ‘धुरंधर’, तो गारंटी है ये 6 फिल्में आपकी फेवरेट लिस्ट में होंगी


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2026 में बॉक्स ऑफिस पर ऐतिहासिक ₹3,000 करोड़ का आंकड़ा पार किया करने वाली रणवीर सिंह की फिल्म सीरीज ‘धुरंधर’ ने भारतीय सिनेमा में हाई-ऑक्टेन स्पाई-थ्रिलर और देशभक्ति जॉनर को एक नए लेवल पर पहुंचा दिया है. फिल्म के जबरदस्त एक्शन, सस्पेंस और देशभक्ति की भावना ने दर्शकों को थिएटर में खड़े होकर तालियां बजाने पर मजबूर कर दिया. अगर आपको भी ‘धुरंधर’ के रोमांचक सफर, सीक्रेट मिशन और रोंगटे खड़े कर देने वाले ट्विस्ट एंड टर्न्स से प्यार हो गया है, तो बॉलीवुड के पास 6 और बेहतरीन फिल्में हैं जो आपकी पसंदीदा लिस्ट का हिस्सा बनने की गारंटी हैं. इनमें से एक फिल्म 2012 में हर कल्ट सिनेमा लवर की पहली पसंद बन गई थी. तो आइए, इन 6 ब्लॉकबस्टर फिल्मों के बारे में जानें.

नई दिल्ली. सिनेमा की दुनिया में जब कोई फिल्म ‘धुरंधर’ जैसी बड़ी सफलता हासिल करती है, तो यह न केवल रेवेन्यू जेनरेट करती है, बल्कि दर्शकों की एक अनोखे तरह के सिनेमा के लिए भूख भी बढ़ाती है. ‘धुरंधर’ में एक जासूस और देश के रक्षक के तौर पर रणवीर सिंह की एनर्जी ने दर्शकों को हॉलीवुड की ‘जेम्स बॉन्ड’ और ‘मिशन: इम्पॉसिबल’ को भूलने पर मजबूर कर दिया. लेकिन, क्या आप जानते हैं कि बॉलीवुड में इंटेलिजेंस एजेंसियों (RAW) और अंडरकवर एजेंट्स की कहानियों का एक शानदार इतिहास रहा है? अगर आपको ‘धुरंधर’ का सस्पेंस, दुश्मन के ऑपरेशन्स में घुसपैठ और देशभक्ति वाला बैकग्राउंड म्यूजिक पसंद आया, तो नीचे दी गई 6 फिल्में आपके लिए एक खजाना हैं.

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1. एक था टाइगर (2012): यह लिस्ट उस फिल्म से शुरू होनी चाहिए जिसने बॉलीवुड में स्पाई-थ्रिलर जॉनर को पूरी तरह से बदल दिया. हम 2012 की सबसे पसंदीदा और कल्ट फिल्म ‘एक था टाइगर’ की बात कर रहे हैं. कबीर खान के डायरेक्शन और सलमान खान और कैटरीना कैफ स्टारिंग इस फिल्म ने इतिहास रच दिया. कहानी टाइगर के इर्द-गिर्द घूमती है, जो एक टॉप RAW एजेंट है, जिसे एक साइंटिस्ट की एक्टिविटीज पर नजर रखने के लिए डबलिन भेजा जाता है, लेकिन वहां उसे ISI एजेंट जोया से प्यार हो जाता है. ‘धुरंधर’ की तरह, इस फिल्म में भी इंटरनेशनल लेवल के एक्शन सीन थे. यह फिल्म 2012 में सबकी पसंदीदा बन गई क्योंकि यह पहली फिल्म थी जिसमें एक जासूस की जिंदगी के इंसानी और इमोशनल पहलुओं को खूबसूरती से दिखाया गया था. अगर आपको ‘धुरंधर’ का स्टाइल और स्वैग पसंद आया, तो टाइगर का पहला मिशन आपको आज भी रोमांचित कर देगा.

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2. मद्रास कैफे (2013): ‘एक था टाइगर’ के कमर्शियल सिनेमा के बिल्कुल उलट, डायरेक्टर शूजित सरकार ने 2013 में एक ऐसी फिल्म दी जिसने दर्शकों को हैरान कर दिया. जॉन अब्राहम स्टारर ‘मद्रास कैफे’ एक बहुत ही दमदार, रॉ और रियलिस्टिक स्पाई थ्रिलर है. यह 1980 के दशक के आखिर और 1990 के दशक की शुरुआत में श्रीलंका के सिविल वॉर और एक पूर्व भारतीय प्रधानमंत्री की हत्या के बैकग्राउंड पर बनी है. जॉन अब्राहम एक इंडियन आर्मी इंटेलिजेंस ऑफिसर का रोल कर रहे हैं जो एक सीक्रेट ऑपरेशन को लीड कर रहे हैं. फिल्म में घिसे-पिटे गाने या कमर्शियल ड्रामा नहीं है. ‘धुरंधर’ में नेशनल सिक्योरिटी और इंटेलिजेंस एजेंसियों के अंदरूनी कामकाज को लेकर जो सीरियस चिंता है, वही ‘मद्रास कैफे’ में शुरू से आखिर तक साफ दिखती है. यह फिल्म इंडियन सिनेमा की सबसे बेहतरीन पॉलिटिकल थ्रिलर में से एक है.

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3. बेबी (2015): जब बिना किसी फालतू ड्रामा के टेररिज्म के खिलाफ सीधे एक्शन की बात आती है, तो डायरेक्टर नीरज पांडे की ‘बेबी’ का कोई मुकाबला नहीं है. 2015 में रिलीज हुई इस फिल्म में अक्षय कुमार, राणा दग्गुबाती, अनुपम खेर और तापसी पन्नू ने लीड रोल किए थे. कहानी इंडिया की सीक्रेट इंटेलिजेंस विंग ‘बेबी’ के इर्द-गिर्द घूमती है, जिसे देश के खिलाफ टेररिस्ट हमलों को होने से पहले ही नाकाम करने का काम सौंपा गया है. फिल्म का स्क्रीनप्ले इतना जबरदस्त है कि देखने वाले एक सेकंड के लिए भी स्क्रीन से अपनी नजरें नहीं हटा पाते. खासकर दूसरा हाफ, जहां टीम सऊदी अरब से एक खतरनाक टेररिस्ट को इंडिया लाने के लिए एक सीक्रेट मिशन पर निकलती है, ‘धुरंधर’ के क्लाइमैक्स की याद दिलाता है. देशभक्ति के जोश से भरी यह फिल्म आपके रोंगटे खड़े कर देगी.

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4. राजी (2018): जासूसी फिल्में सिर्फ बंदूकें चलाने और कारें उड़ाने के बारे में नहीं होतीं. इनमें बहुत ज्यादा मेंटल स्ट्रेस और पर्सनल सैक्रिफाइस भी शामिल होता है. मेघना गुलजार के डायरेक्शन में बनी ‘राजी’ इस साइकोलॉजिकल पहलू को खूबसूरती से दिखाती है. हरिंदर सिक्का के नॉवेल ‘कॉल्ड सहमत’ पर आधारित इस फिल्म में आलिया भट्ट और विक्की कौशल हैं. फिल्म की कहानी 1971 के भारत-पाकिस्तान युद्ध के समय की है, जहां एक जवान कश्मीरी लड़की ‘सहमत’ (आलिया भट्ट) को उसके पिता के कहने पर भारत के लिए जासूसी करने के लिए एक पाकिस्तानी मिलिट्री ऑफिसर के घर बहू के तौर पर भेजा जाता है. जहां ‘धुरंधर’ पूरी तरह से एक्शन के बारे में है, वहीं ‘राजी’ सस्पेंस और इमोशंस का ऐसा तूफान पेश करती है जो आपके दिल को छू जाएगा. आलिया भट्ट की परफॉर्मेंस और ‘ऐ वतन मेरे वतन’ के म्यूजिक ने इस फिल्म को बॉक्स ऑफिस पर ब्लॉकबस्टर बना दिया और दर्शकों के दिलों में अमर कर दिया.

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5. रोमियो अकबर वाल्टर – RAW (2019): जॉन अब्राहम की एक और बेहतरीन फिल्म जिसका ‘धुरंधर’ के फैंस को जरूर मजा आएगा, वह है ‘रोमियो अकबर वाल्टर’ (RAW), जो 2019 में रिलीज हुई थी. रॉबी ग्रेवाल के डायरेक्शन में बनी यह फिल्म भी 1971 के ऐतिहासिक समय के बैकग्राउंड पर बनी है. इस फिल्म में जॉन अब्राहम एक बैंक एम्प्लॉई से एक अंडरकवर RAW एजेंट में बदल जाते हैं, जिसे एक नई पहचान के साथ पाकिस्तान भेजा जाता है. फिल्म में गहराई से दिखाया गया है कि कैसे एक जासूस को अपने देश के लिए अपनी पहचान, अपने परिवार और अपनी भावनाओं को कुर्बान करना पड़ता है. फिल्म के ट्विस्ट इतने दिलचस्प हैं कि दर्शकों को आखिरी सीन तक समझ नहीं आता कि आगे क्या होने वाला है. ‘धुरंधर’ का रहस्यमयी और सीक्रेट पहलू इस फिल्म की जान है.

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6. पठान (2023): अगर आपको ‘धुरंधर’ का बड़ा स्केल, विदेश में फिल्माए गए खतरनाक स्टंट और शानदार VFX काम पसंद आया, तो 2023 की मेगा-ब्लॉकबस्टर ‘पठान’ आपके लिए एक विजुअल ट्रीट है. सिद्धार्थ आनंद के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म ने शाहरुख खान की चार साल बाद बड़े पर्दे पर वापसी को दिखाया और इतिहास रच दिया. ‘पठान’ पूरी तरह से कमर्शियल और बड़ी जासूसी फिल्म है, जिसमें एक देश निकाला हुआ रॉ एजेंट देश को एक खतरनाक बायोलॉजिकल हमले से बचाने के लिए एक प्राइवेट आतंकवादी संगठन का सामना करता है. दीपिका पादुकोण और जॉन अब्राहम की परफॉर्मेंस ने भी फिल्म में आग लगा दी.

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NEET परीक्षा में धांधली के खिलाफ प्रदर्शन: किसान संगठन ने विरोध जताया, सख्त कार्रवाई की मांग – Meerut News


शुभम | मेरठ4 मिनट पहले

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भारतीय किसान यूनियन (बी.आर. अम्बेडकर) ने नीट (NEET) परीक्षा में धांधली और परीक्षा रद्द होने के विरोध में डीएम ऑफिस पर प्रदर्शन किया। उन्होंने इस संबंध में प्रशासनिक अधिकारी को ज्ञापन भी दिया। उनका कहना है कि पेपर लीक करने वाले आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए।

संगठन ने ज्ञापन के माध्यम से लाखों परीक्षार्थियों के भविष्य पर पड़ने वाले प्रभाव और नीट परीक्षा में हुई अनियमितताओं पर चिंता व्यक्त की। उनका कहना है कि किसान और मजदूर वर्ग के छात्र कड़ी मेहनत कर डॉक्टर बनने का सपना देखते हैं, लेकिन हालिया परिणामों और पेपर लीक की खबरों ने उनके भरोसे को तोड़ा है।

सीबीआई से जांच करने की मांग यूनियन ने अपनी मुख्य मांगों में नीट परीक्षा में हुई धांधली की उच्च स्तरीय न्यायिक जांच की मांग की है। यह जांच सीबीआई या किसी सेवानिवृत्त न्यायाधीश की निगरानी में सुनिश्चित करने की बात कही गई है।

इसके अतिरिक्त, भविष्य की प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए एक सख्त कानून बनाने की मांग की गई है, ताकि पेपर लीक जैसी घटनाओं को रोका जा सके। संगठन ने पेपर लीक माफिया और इस भ्रष्टाचार में लिप्त बड़े अधिकारियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की भी मांग की है।

उनकी मांग है कि उन सभी योग्य छात्रों को न्याय मिले जिन्होंने अपनी मेहनत से अंक प्राप्त किए हैं, और पूरी प्रक्रिया को भ्रष्टाचार मुक्त बनाया जाए।

भारतीय किसान यूनियन (बी.आर. अम्बेडकर) संगठन के कार्यकर्ता आरिफ चौहान ने इस मुद्दे पर अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि पेपर लीक माफिया बार-बार ऐसी घटनाओं को अंजाम देते हैं, जिससे छात्रों का भविष्य खराब होता है। चौहान ने मांग की कि पेपर लीक करने वाले या करवाने वालों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। संगठन के सदस्यों ने अपनी मांगों को लेकर जिलाधिकारी से मुलाकात भी की।

प्रदर्शन में यह रहे मौजूद इस दौरान मोहित किनापुर जिला अध्यक्ष भारतीय किसान यूनियन अंबेडकर, आरिफ चौहान पचपेड़ा प्रदेश अध्यक्ष, नीरज कश्यप युवा मोर्चा जिला अध्यक्ष, वंश प्रधान हसनपुर, सुमित सैनी व अन्य पदाधिकारियों मौजूद रहे।



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जमुई का नरियाना-मांगोबंदर पुल जर्जर, आना-जाना बंद: सांसद अरुण भारती ने किया इंस्पेक्शन, जल्द बनेगा डायवर्सन – Jamui News




जमुई के खैरा प्रखंड में स्थित नरियाना-मांगोबंदर पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद शुक्रवार को जमुई सांसद अरुण भारती ने पुल स्थल का निरीक्षण किया। पुल की जर्जर स्थिति के कारण बड़े वाहनों का आवागमन पूरी तरह रोक दिया गया है। पैदल यात्रियों को भी आवाजाही में कठिनाई हो रही है। सांसद ने जिला प्रशासन से जल्द वैकल्पिक व्यवस्था करने को कहा है। पुल के दोनों छोर पर बैरिकेडिंग और लोहे की रेलिंग लगाई गई है, जिससे भारी, तीनपहिया और चारपहिया वाहनों का परिचालन पूरी तरह बंद है। इससे आसपास के गांवों के निवासियों की परेशानी बढ़ गई है। बाजार, अस्पताल, स्कूल-कॉलेज और दैनिक कार्यों के लिए लोगों को अब लंबी दूरी तय करनी पड़ रही है। ग्रामीण फिलहाल पैदल ही पुल पार कर रहे हैं। नरियाना पुल गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुका सांसद अरुण भारती ने निरीक्षण के दौरान बताया कि नरियाना पुल गंभीर रूप से क्षतिग्रस्त हो चुका है, और बड़ी गाड़ियों का परिचालन सुरक्षित नहीं है। यात्रियों की सुरक्षा को देखते हुए जिला प्रशासन ने पुल पर प्रतिबंध लगाया है। उन्होंने जानकारी दी कि एक अस्थायी डायवर्सन पुल के समानांतर बनाया जाएगा, जिससे छोटी गाड़ियों का परिचालन संभव हो सकेगा। डायवर्सन निर्माण का टेंडर चार या पांच जून तक जारी होने की संभावना है। डायवर्सन केवल एक अस्थायी समाधान होगा सांसद ने स्पष्ट किया कि यह डायवर्सन केवल एक अस्थायी समाधान होगा। स्थायी समाधान के लिए प्रयास किए जा रहे हैं कि इस पुल को एनएच-333ए से जोड़ा जाए। इससे राष्ट्रीय राजमार्ग मानकों के अनुरूप एक मजबूत और टिकाऊ पुल का निर्माण हो सकेगा। उन्होंने कहा कि इस दिशा में लगातार पहल की जा रही है और जल्द ही सकारात्मक परिणाम मिलने की उम्मीद है।



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अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत ने MRP पर उठाया सवाल: दवा-उपकरणों में 100 गुना मुनाफा, सरकार से सख्त कानून की मांग – Panna News




अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत (ABGP) ने केंद्र सरकार से अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) निर्धारण के लिए सख्त कानून बनाने की मांग की है। संगठन का आरोप है कि कंपनियाँ और व्यापारी MRP के नाम पर उपभोक्ताओं का बड़े पैमाने पर आर्थिक शोषण कर रहे हैं। इस संबंध में ABGP ने कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में मेडिकल सेक्टर में हो रही धांधली के चौंकाने वाले उदाहरण दिए गए हैं। ABGP का कहना है कि दवाओं पर उत्पादन लागत से 100 गुना अधिक MRP अंकित की जा रही है। इसका उद्देश्य 80% तक का भारी डिस्काउंट दिखाकर ग्राहकों को भ्रमित करना है। उदाहरण भी दिए भूपेंद्र सिंह परमार ने बताया कि ₹25,000 में आयात होने वाले पेसमेकर की MRP ₹2 लाख तक रखी जा रही है। इसी तरह, ₹4 लाख के हार्ट वाल्व को ₹26 लाख की MRP पर बेचा जा रहा है। ₹3 की लागत वाली सुई पर भी ₹30 का मूल्य टैग लगाया जा रहा है। जानबूझकर बढ़ाए दाम ABGP के अनुसार, कंपनियां जानबूझकर अत्यधिक MRP प्रिंट करती हैं। इसके पीछे मकसद ग्राहकों को ‘भारी छूट’ का लालच देकर यह एहसास कराना है कि उन्होंने खरीदारी में बचत की है। हालांकि, ‘सेल’ और ‘डिस्काउंट’ के बाद भी कंपनियां वास्तविक लागत से कई गुना अधिक मुनाफा कमा रही हैं। यह प्रवृत्ति ऑनलाइन शॉपिंग और मॉल्स में भी देखी जा रही है। फर्स्ट सेल प्राइस छापने की मांग अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत ने अपनी मांगों में उत्पाद पर ‘उत्पादन लागत’ और ‘फर्स्ट सेल प्राइस’ छापना अनिवार्य करने को कहा है। इसके साथ ही, MRP की निगरानी और नियम तय करने के लिए एक स्वतंत्र प्राधिकरण या बोर्ड के गठन की भी मांग की गई है। संगठन ने नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों और अस्पतालों पर भारी जुर्माने और सजा का प्रावधान करने की भी वकालत की है। मलखान सिंह ने बताया कि MRP अब उपभोक्ता संरक्षण के बजाय विपणन और मुनाफ़ाखोरी का एक उपकरण बन गया है। उन्होंने जोर दिया कि जब तक लागत मूल्य और बिक्री मूल्य में पारदर्शिता नहीं आएगी, तब तक आम आदमी का आर्थिक शोषण जारी रहेगा।



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सुप्रीम कोर्ट स्टाफ को 2 दिन का वर्क फ्रॉम होम: जज कार पूलिंग करके कोर्ट जाएंगे; मोदी की ईंधन बचाने की अपील पर फैसला




PM मोदी की ईंधन बचत की अपील पर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने वर्किंग को लेकर नई गाइडलाइन जारी की है। अब कोर्ट के हर विभाग का स्टाफ दो दिन वर्क फ्रॉम होम पर रहेगा। सभी जज कार पूल करेंगे। रजिस्ट्री से जुड़ा 50 फीसदी स्टाफ भी घर से काम करेगा। सोमवार, शुक्रवार और मिसलेनियस डे ( जो दिन पहले से तय नहीं होते) पर लिस्ट मामलों की सुनवाई केवल वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए होगी। इसके अलावा कोर्ट के अन्य वर्किंग डे में भी सुनवाई ऑनलाइन ही की जाएगी। कोर्ट ने रजिस्ट्री विभाग को निर्देश दिया है कि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग लिंक समय पर भेजें और टेक्निकल सपोर्ट हर समय उपलब्ध रहे, जिससे अदालत की कार्यवाही प्रभावित न हो। सुप्रीम कोर्ट सचिव जनरल भारत पराशर ने इस संबंध नें सर्कुलर जारी किया है। पीएम की अपील का राज्यों पर भी असर पीएम मोदी की पेट्रोल-डीजल बचाने की अपील का असर देश के राज्यों में भी दिखने लगा है। शुक्रवार को केरलम के सीएम बनने जा रहे वीडी सतीशन पद संभालने से पहले ही अपने काफिले में केवल तीन गाड़ियां रखने का फैसला किया है, जिसमें सिर्फ एक पायलट और एक एस्कॉर्ट वाहन चलेगा। एक दिन पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस गुरुवार को MLC शपथ ग्रहण समारोह के लिए बाइक से विधान भवन पहुंचे थे। दिल्ली सीएम रेखा गुप्ता ने पेट्रोल-डीजल की बचत के लिए नए आदेश जारी किए। अब दिल्ली में सरकारी कर्मचारी हफ्ते में 2 दिन ‘वर्क फ्रॉम होम’ करेंगे। 50% सरकारी बैठकें ऑनलाइन होंगी और कोई भी मंत्री 1 साल तक विदेशी दौरे पर नहीं जाएगा। त्रिपुरा में ग्रुप C और D के सिर्फ 50% सरकारी कर्मचारी ही रोज ऑफिस आएंगे, बाकी कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम करेंगे। पंजाब में गवर्नर ऑफिस में हर बुधवार को अधिकारी चार-पहिया वाहन से नहीं आएंगे। हरियाणा में सीएम नायब सिंह सैनी हफ्ते में एक दिन बिना गाड़ी के चलेंगे। पीएम मोदी भी बुधवार को काफिला छोड़ सिर्फ 2 गाड़ियों के साथ निकले। वहीं गृह मंत्री अमित शाह के काफिले में 4 गाड़ियां नजर आई थीं। PM की अपील के बाद 13 राज्यों में सरकार-नेताओं के फैसले 1. ओडिशा: सीएम ने काफिले में गाड़ियां घटाईं ओडिशा के सीएम मोहन माझी ने अपने काफिले की गाड़ियां घटा दी हैं। उनके काफिले में सिर्फ चार गाड़ियां हैं। जिसमें दो पुलिस की गाड़ी शामिल हैं। 2. अरुणाचल प्रदेश: मंत्रियों-सरकारी अधिकारियों की विदेश यात्रा पर रोक अरुणाचल प्रदेश सरकार ने खर्च कम करने के लिए अगले एक साल तक मंत्रियों और सरकारी अधिकारियों की विदेश यात्राओं पर पूरी तरह रोक लगा दी है। इसके अलावा मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और अन्य मंत्रियों के काफिले में वाहनों की संख्या 50% तक घटाने का आदेश दिया है। सरकार ने सरकारी बैठकों के लिए “वर्चुअल फर्स्ट” पॉलिसी भी लागू की है। अब जरूरी सरकारी यात्राओं के लिए कम से कम 15 दिन पहले टिकट बुक कराना जरूरी होगा, जबकि एलटीसी (भारत सरकार का अपने कर्मचारियों को दिया जाने वाला खर्च) यात्राओं की योजना 45 दिन पहले बनानी होगी। 3. त्रिपुरा: 50% कर्मचारी ही ऑफिस आएंगे, बाकी वर्क फ्रॉम होम त्रिपुरा सरकार ने खर्च और पेट्रोल-डीजल बचाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। अब सरकारी दफ्तरों में ग्रुप C और D के सिर्फ 50% कर्मचारी ही रोज ऑफिस आएंगे, बाकी कर्मचारी वर्क फ्रॉम होम करेंगे। सरकार ने सभी विभागों को कर्मचारियों की साप्ताहिक ड्यूटी रोस्टर बनाने के निर्देश दिए हैं। जरूरी और इमरजेंसी सेवाओं वाले कर्मचारियों पर यह नियम लागू नहीं होगा। 4. हरियाणा: सीएम ने काफिला घटाया, हफ्ते में एक दिन बिना गाड़ी के चलेंगे हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने पेट्रोल-डीजल बचाने के लिए अपने सरकारी काफिले में गाड़ियों की संख्या कम करने का फैसला लिया है। उन्होंने कहा कि अब उनके काफिले में सिर्फ सुरक्षा के लिए जरूरी वाहन ही शामिल होंगे। सीएम ने यह भी तय किया है कि वे हफ्ते में एक दिन कोई भी गाड़ी इस्तेमाल नहीं करेंगे। 5. आंध्र प्रदेश: सीएम के साथ अब पहले से आधा काफिला आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री एन चंद्रबाबू नायडू ने अपने काफिले में इस्तेमाल होने वाली गाड़ियों की संख्या 50% कम करने का फैसला लिया है। अब जिला दौरों के दौरान उनके साथ पहले से आधी गाड़ियां ही चलेंगी। मुख्यमंत्री ने मंत्रियों, वीआईपी लोगों से भी सरकारी गाड़ियों का कम इस्तेमाल करने और जरूरत होने पर ही यात्रा करने की अपील की है। 6. पंजाब: हर बुधवार अधिकारी चार पहिया से नहीं आएंगे पंजाब के राज्यपाल गुलाब चंद कटारिया ने कहा, हमने अपने अधिकारियों के साथ बैठक के बाद यह फैसला किया है कि हर बुधवार को हमारा कोई भी अधिकारी चार-पहिया वाहन से नहीं आएगा। 7. राजस्थान: सीएम भजनलाल के काफिले में अब 5 गाड़ियां राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने अपने काफिले में गाड़ियों की संख्या घटाने का आदेश दिया। पहले काफिले में 14-16 गाड़ियां रहती थीं, लेकिन बुधवार को दिल्ली दौरे के दौरान उनके साथ सिर्फ 5 गाड़ियां ही चलीं। पूरी खबर पढ़ें… 8. बिहार: CM सम्राट चौधरी इलेक्ट्रिक गाड़ी से सचिवालय पहुंचे बिहार के CM सम्राट चौधरी बुधवार को कैबिनेट बैठक के लिए इलेक्ट्रिक गाड़ी से सचिवालय पहुंचे। हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक सीएम की गाड़ी के पीछे पेट्रोल-डीजल वाली करीब 20 गाड़ियों का काफिला था। वहीं अब कई मंत्री सिर्फ एक या दो गाड़ियों में ही कार्यक्रमों और बैठकों में पहुंच रहे हैं। 9. मध्य प्रदेश: VIP काफिलों पर ब्रेक, CM ने गाड़ियां घटाईं मध्य प्रदेश में अब मंत्रियों और वीआईपी काफिलों में गाड़ियों की संख्या सीमित की जाएगी। साथ ही सरकारी दौरों और भ्रमण के दौरान रैलियों पर भी रोक रहेगी। मुख्यमंत्री मोहन यादव को Z+ कैटेगरी की सिक्योरिटी मिली है। इस वजह से उनके काफिले में अब तक कुल 13 वाहन शामिल रहते थे। नए आदेश के बाद भोपाल में स्थानीय दौरे के दौरान मुख्यमंत्री के काफिले में अब सिर्फ 8 वाहन शामिल होंगे। पूरी खबर पढ़ें… 10. यूपी: बैठकें वर्चुअल होंगी; 2 दिन वर्क फ्रॉम होम उत्तर प्रदेश में योगी सरकार ने मंगलवार को 7 बड़े फैसले लिए। मुख्यमंत्री, मंत्रियों, विधायकों और अफसरों का काफिला 50% घटेगा। हफ्ते में एक दिन इन्हें पब्लिक ट्रांसपोर्ट या बस-मेट्रो से चलना होगा। पूरी खबर पढ़ें… 11. दिल्ली: सरकारी कर्मचारी 2 दिन ‘वर्क फ्रॉम होम’ करेंगे, 50% सरकारी बैठकें ऑनलाइन होंगी दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता ने पेट्रोल-डीजल की बचत के लिए नए आदेश जारी किए हैं। अब सभी सरकारी कर्मचारी 2 दिन ‘वर्क फ्रॉम होम’ करेंगे। 50% सरकारी बैठकें ऑनलाइन होंगी, कोई मंत्री 1 साल तक विदेशी दौरे पर नहीं जाएगा, दफ्तरों की टाइमिंग सुबह 10:30 से शाम 7 बजे तक ही होगी और दिल्ली सरकार 6 महीने तक कोई नई गाड़ी नहीं खरीदेगी। वहीं, दिल्ली के शिक्षा मंत्री आशीष सूद ने मंगलवार को दिल्ली मेट्रो में INA से कड़कड़डूमा कोर्ट तक सफर किया। फिर मेट्रो स्टेशन से सूरजमल विहार में स्थित ‘CM श्री स्कूल’ तक जाने के लिए ई-रिक्शा लिया। वहां उन्होंने जोन 1 और 2 के स्कूलों के प्रमुखों के साथ एक सेशन में हिस्सा लिया। 12. महाराष्ट्र: मंत्री फ्रांस नहीं जाएंगे, विभाग के खर्च कम किए पीएम की अपील के बाद महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस बाइक से चल रहे हैं। वहीं मंत्री आशीष शेलार ने कहा कि वे इस साल फ्रांस में होने वाले कांस फिल्म फेस्टिवल में शामिल नहीं होंगे। उन्होंने कहा कि चुनौतीपूर्ण समय में राष्ट्रीय हित को प्राथमिकता देते हुए विभागीय खर्च में कटौती और संयम का फैसला लिया गया है। 13. गोवा: CM सावंत ने अपने काफिले का आकार घटाया गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत ने PM नरेंद्र मोदी की अपील के बाद अपने काफिले का आकार आधा कर दिया है। CM के काफिले में पहले छह गाड़ियां होती थीं, जिन्हें अब घटाकर तीन कर दिया गया है। इन तीन गाड़ियों में वह गाड़ी भी शामिल है जिसमें CM सफर करते हैं। 2 दिन- 2 जगह: PM की पेट्रोल खपत घटाने की अपील 11 मई: वडोदरा में मोदी बोले- पब्लिक ट्रांसपोर्ट का उपयोग करें 10 मई: हैदराबाद में पीएम बोले- विदेश यात्रा को टाल दें ———————————- ये खबर भी पढ़ें… पेट्रोलियम मंत्री बोले-भारत के पास 60 दिन का कच्चा तेल, 45 दिन का LPG स्टॉक है पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मंगलवार को कहा कि भारत के पास 60 दिन का कच्चा तेल, 60 दिन की LNG और 45 दिन की LPG का स्टॉक है। सप्लाई के मामले में कोई दिक्कत नहीं है। पुरी ने कहा कि पीएम ने दो दिन पहले जो बातें कही हैं। उसको लेकर अफरा-तफरी मचाना बेकार है। पूरी खबर पढ़ें…



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राजकोट में रातों-रात हनुमानजी समेत 12 मंदिर गिराए: लोग सड़कों पर उतरे, कहा- भाजपा हिंदुओं के दम पर, सत्ता जाने में ज्यादा देर नहीं लगेगी – Gujarat News




राजकोट में 14 मई की देर रात, लगभग 12 मंदिरों को एक साथ बुलडोजर से ध्वस्त कर दिया गया। इस दौरान, मावाड़ी मेन रोड पर स्थानीय लोग सड़क पर उतर आए। स्थानीय लोगों ने भाजपा की नीति पर सवाल उठाए। लोगों ने कहा कि भाजपा धर्म के नाम पर वोट मांगकर आई है। हिंदुओं ने भाजपा को भारी संख्या में वोट दिया। पार्षदों को वोट मिल गए हैं, इसलिए वे आज चैन से सो रहे हैं। भाजपा हिंदुओं के दम पर ही सत्ता में आई है। हिंदुओ को नाराज करक उसे सत्ता खोने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। विवाद से बचने देर रात शुरू हुई थी कार्रवाई राजकोट नगर निगम ने स्थानीय लोगों से झड़प से बचने के लिए सड़कों पर स्थित छोटे मंदिरों को गिराने का काम रात 1:30 बजे शुरू किया था। अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई सुबह 5 बजे तक जारी रही। इसके लिए अधिकारियों ने फायर ब्रिगेड, पीजीवीसीएल, सतर्कता विभाग और स्थानीय पुलिस की भी मदद ली। मालवीय नगर पुलिस स्टेशन के पास एक हनुमान मंदिर को भी गिराने का नोटिस जारी किया गया था। हालांकि, इसकी जानकारी मिलते ही स्थानीय लोग और युवा बड़ी संख्या में मंदिर के बाहर जमा हो गए और सड़क पर रामधुन के नारे लगाने लगे। मंदिर के बाहर लगातार चार घंटे तक धरने पर बैठने के बाद विभाग के अधिकारियों ने स्थानीय लोगों को आश्वासन दिया कि वे 48 घंटों के भीतर मंदिर का आकार छोटा कर देंगे। पार्षद चैन से सो रहे हैं: हितेशभाई स्थानीय हितेशभाई डाभी ने कहा- आज सत्ता में बैठे पार्षद चैन से सो रहे हैं। उन्हें जनता की कोई परवाह नहीं है। मैंने खुद पार्षदों और भानुबेन बाबरिया को फोन किया था, लेकिन अब उन्हें वोट मिल गए हैं, इसलिए वे चैन से सो रही हैं। हम दिन-रात मेहनत करते हैं और अचानक रात 1 बजे हमें बताया जाता है कि मंदिर ढहाया जाना है। मंदिर गिराकर आप क्या साबित करना चाहते हैं? मंदिर जनता की आस्था का केंद्र है। भाजपा ने धर्म के नाम पर वोट मांगे थे। आज प्रधानमंत्री हो या मुख्यमंत्री, सभी हिंदुत्व और सनातन के नाम पर सत्ता में आए हैं। अगर काम करना है तो राजकोट में और भी कई अच्छे काम हैं, उन पर ध्यान दीजिए। मंदिरों पर समय बर्बाद मत कीजिए। अगर आज 5 लोग जाग रहे हैं तो कल 5 हजार भी जागेंगे। इसलिए याद रखिए, आज आपके पास सत्ता है, लेकिन अगर जनता सोच ले तो इसे उखाड़ फेंकने में देर नहीं लगेगी। 35-40 साल पुराना मंदिर और जनता का समर्थन हमारा मंदिर मौदी मेन रोड पर ज्योति लाइट बिल के पास स्थित है। यह मंदिर 35-40 साल पुराना है। मंदिर के खंभे पर तारीख भी लिखी है, जाकर पढ़ लीजिए कि यह कितना पुराना है। अगर किसी को इस मंदिर से परेशानी होती तो जनता खुद शिकायत करती। यहां बड़ी-बड़ी दुकानें चलाने वाले दुकानदार भी कहते हैं कि ये हमारा ‘दादा’ है। अगर उन्हें कोई आपत्ति नहीं है तो सरकार को क्यों है?



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मऊ में खा लिया ये छोला-भटूरा, तो प्लेट कर देंगे सफाचट, बना लीजिए आज ही घर पर, ये है रेसिपी


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Chole Bhature Recipe: आपने कई बार महंगे-महंगे रेस्टोरेंट में छोले भटूरे खाए होंगे और शायद उतना मजा आया भी न हो. मगर, 40 रुपये में आप इतने टेस्टी छोले भटूरे खा सकते हैं कि कभी स्वाद न भुल पाएं. अगर आपको इनका मजा लेना है तो आपको उसके लिए मऊ आना पड़ेगा… नहीं तो आप घर भी बना सकते हैं. आइए जानते हैं कहां है दुकान और कैसे बनाएं स्वाद से भरपुर छोले भटूरे.

मऊ: अक्सर देखा जाता है सुबह लोग घर से बाहर रहने वाले छोले भटूरे का स्वाद लेकर ऑफिस चले जाते हैं. ऐसा ही मऊ में एक छोले भटूरे की दुकान जहां 40 रुपये में मिलने वाला छोला भटूरा काफी धमाल मचा रहा है. यहां सुबह से ही खाने के लिए भीड़ लगने लगती है. आइए जानते हैं क्या छोले भटूरे बनाने की रेसिपी, जिसे खाने के बाद उंगली चाटने पर लोग मजबूर होते हैं.

मऊ का मशहूर है यह छोला भटूरा
मऊ जनपद के मुहम्मदाबाद गोहना रोडवेज पर स्थित छोले भटूरे और पुलाव की दुकान के ऑनर देवरिया जनपद के निवासी राहुल गुप्ता बताते हैं कि उनके यहां का छोला भटूरा काफी फेमस है. उनके यहां का छोला भटूरा खाने के लिए काफी दूर दराज से लोग आते हैं. बस अड्डा पास होने की वजह से बस से उतरते ही लोग उनके छोले भटूरे की दुकान पर चले आते हैं. उनके यहां छोला भटूरा अलग तरह से बनाया जाता है. इसकी वजह से लोगों को काफी पसंद आता है. वह इस छोले भटूरे को बनाने के लिए कानपुर से मसाला लाते हैं जो इसका स्वाद बढ़ा देता है.

पहले 5 बजे करें ये काम

राहुल गुप्ता बताते हैं कि इस छोला भटूरा को बनाने के लिए सबसे पहले शाम को 5 काबुली चना को भिगो दिया जाता है. उसके बाद अगली सुबह भटूरा बनाने के लिए मैदा को अच्छे से फेंटा जाता है. जब यह मैदा तैयार हो जाता है तो भटूरा बनाया जाता है. भटूरा बनाने में अधिक सामान नहीं लगता है, लेकिन छोला को टेस्टी बनाने के लिए इसमें कई प्रकार के समान डाले जाते हैं. छोला बनाने के लिए सबसे पहले भीगा हुआ काबुली चना लेते हैं.

खास है रेसिपी

रात भर भीगे हुए चनों को तेजपत्ता और नमक के साथ कुकर में 4-5 सीटी आने तक उबाल लें. कड़ाही में तेल गरम कर जीरा, प्याज-अदरक-लहसुन का पेस्ट भून लें. साथ ही कानपुर के खास मसाले डाल लें. फिर टमाटर प्यूरी और छोले मसाला डालकर तेल अलग होने तक पकाएं. उबले चने डालकर 10-15 मिनट पकाएं, ऊपर से हरा धनिया डालकर परोसें. बहुत ही स्वादिष्ठ इससे छोला बन जाता है.

40 रुपये में मिलेगा 2 भटूरा
इस छोले भटूरे को बनाने में सबसे अधिक प्याज और मसाला तथा अचार का महत्व होता है. अचार से इस छोले भटूरे का स्वाद काफी बढ़ जाता है, जिसकी वजह से लोग मन से खाते हैं. इस छोला भटूरा को खाने के लिए सिर्फ मऊ ही नहीं बल्कि दूर-दराज से भी लोग आते हैं. यहां जो एक बार इस छोला भटूरा को खा लेता है वह बार-बार खाने पर मजबूर हो जाता है. इसलिए लोग यहां आते ही बस से उतरते हैं और छोला भटूरा खाकर ही आगे बढ़ते हैं. अगर बात करें कीमत की तो यह छोला भटूरा ₹40 में 2 भटूरे के साथ आता है.

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काव्‍या मिश्रा

Kavya Mishra is working with News18 Hindi as a Senior Sub Editor in the regional section (Uttar Pradesh, Uttarakhand, Haryana and Himachal Pradesh). Active in Journalism for more than 7 years. She started her j…और पढ़ें



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सलूंबर में ‘ऑपरेशन सुदर्शन चक्र-2’ के तहत कारवाई: 2 साल से फरार वारंटी गिरफ्तार, पुलिस बनी ठेकेदार – Salumber News




सलूंबर जिले में चलाए जा रहे विशेष अभियान ‘ऑपरेशन सुदर्शन चक्र-2’ के तहत कूण थाना पुलिस ने बड़ी सफलता हासिल की है। पुलिस ने दो साल से फरार चल रहे एक स्थाई वारंटी को गिरफ्तार किया है। आरोपी गिरफ्तारी से बचने के लिए लगातार भेष बदलकर और नाम छुपाकर रह रहा था। पुलिस ने मजदूर बनकर पकड़ा आरोपी अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सलूंबर रतन चावला और वृताधिकारी सलूंबर हेरम्ब जोशी के निर्देशन में कूण थानाधिकारी निलेश कुमार डाबी ने एक विशेष टीम का गठन किया। पुलिस को मुखबिर से सूचना मिली थी कि माणातलाब निवासी कालू पुत्र गोंदा मीणा, जो कूण थाने के तीन मामलों में वांछित था, किर की चौकी क्षेत्र में पहचान बदलकर रह रहा है। सूचना मिलने के बाद पुलिस टीम ने क्षेत्र में दबिश दी, लेकिन आरोपी लगातार अपनी लोकेशन बदलकर पुलिस को गुमराह करता रहा। देर रात तक तलाश के बाद पुलिस को जानकारी मिली कि आरोपी प्रतिदिन सुबह मजदूरी के लिए किर की चौकी चौराहे पर आता है। इस पर पुलिस ने एक अनोखी रणनीति अपनाई। कांस्टेबल गजेंद्र सिंह और अरविंद सिंह ठेकेदार और मजदूर बनकर किर की चौकी चौराहे पर पहुंचे। उन्होंने काम दिलाने के बहाने संदिग्ध व्यक्तियों से बातचीत शुरू की। इसी दौरान, मुखबिर ने दूर से आरोपी की पहचान कराई। पुलिसकर्मियों ने उससे नाम-पता पूछा तो उसने खुद को माणातलाब निवासी कालू पुत्र गोंदा मीणा बताया। पहचान पुख्ता होने के बाद पुलिस टीम ने अपनी पहचान उजागर की और उसे हिरासत में लेकर कूण थाने ले आई। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी बेहद शातिर प्रवृत्ति का है। वह मोबाइल फोन का उपयोग नहीं करता था और लगातार अपना हुलिया तथा पहचान बदलकर रह रहा था। इस कारण उसकी गिरफ्तारी पुलिस के लिए एक चुनौती बनी हुई थी।



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पेट्रोल ₹3 महंगा, लेकिन टेंशन मत लीजिए, इस कार्ड से मिलेगा 7.25% सस्ता तेल


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BPCL SBI Card OCTANE: तेल कंपनियों ने शुक्रवार (15 मई) को पेट्रोल और डीजल के दाम में प्रति लीटर 3 रुपये की बढ़ोतरी कर दी. करीब 4 साल बाद फ्यूल की कीमतों में हुई इस बढ़ोतरी से रोजाना वाहन इस्तेमाल करने वाले लोगों के बजट पर असर हो सकता है. हालांकि, बढ़ी हुई कीमतों के बीच कुछ ऐसे क्रेडिट कार्ड भी हैं जिनकी मदद से फ्यूल खर्च पर अच्छी बचत की जा सकती है. ऐसा ही एक कार्ड है BPCL SBI Card OCTANE, जो पेट्रोल-डीजल खरीदने पर ग्राहकों को 7.25 फासदी बचत कराता है.

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देशभर में पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाए गए हैं.

BPCL SBI Card OCTANE: आज यानी 15 मई से पेट्रोल और डीजल की कीमतों में ₹3 प्रति लीटर का बड़ा उछाल आया है. तेल कंपनियों ने पूरे 4 साल के लंबे अंतराल के बाद दाम बढ़ाकर आम आदमी की जेब पर बोझ बढ़ा दिया है. लेकिन, महंगाई के इस दौर में भी आप स्मार्ट तरीके से पैसे बचा सकते हैं. अगर आप बीपीसीएल एसबीआई कार्ड ऑक्टेन (BPCL SBI Card OCTANE) क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल करते हैं, तो पेट्रोल-डीजल भरवाने पर आपको 7.25% तक की बचत हो सकती है. यह कार्ड खास तौर पर उन लोगों के लिए है जो अक्सर गाड़ी का इस्तेमाल करते हैं और फ्यूल पर होने वाले खर्च को कम करना चाहते हैं.

फ्यूल पर मिल सकता है 7.25% तक फायदा
इस कार्ड के जरिए भारत पेट्रोलियम (BPCL) के पेट्रोल पंपों पर फ्यूल खरीदने पर ग्राहकों को कुल 7.25 फीसदी तक का फायदा मिलता है. इसमें 6.25 फीसदी वैल्यूबैक और 1 फीसदी फ्यूल सरचार्ज वेवर शामिल है. इस कैटेगरी में हर बिलिंग साइकिल में मैक्सिमम 2500 रिवॉर्ड प्वाइंट्स हासिल कर सकते हैं. एक बिलिंग साइकिल में मैक्सिमम 100 रुपये तक का फ्यूल सरचार्ज वेवर लिया जा सकता है.

वेलकम बोनस में मिलेंगे 6,000 रिवॉर्ड प्वाइंट्स
1499 रुपये का एनुअल फीस देने पर वेलकम गिफ्ट के तौर पर 6,000 बोनस रिवॉर्ड प्वाइंट्स (1500 रुपये के बराबर) मिलेंगे. रिवार्ड प्वाइंट्स को कार्ड होल्डर्स के खाते में एनुअल फीस का भुगतान करने के 30 दिनों के भीतर क्रेडिट कर दिया जाएगा.

भारत गैस पेमेंट पर भी फायदा
अगर ग्राहक भारत गैस की वेबसाइट या ऐप के जरिए भुगतान करते हैं तो हर 100 रुपये खर्च करने पर 25 रिवॉर्ड प्वाइंट्स मिलते हैं यानी यहां भी 6.25 फीसदी तक का रिवॉर्ड फायदा मिलता है. इस कैटेगरी में हर बिलिंग साइकिल में मैक्सिमम 500 रिवॉर्ड प्वाइंट्स हासिल कर सकते हैं.

खाने-पीने और मूवी पर भी रिवॉर्ड
यह कार्ड सिर्फ फ्यूल तक सीमित नहीं है. डाइनिंग, ग्रोसरी, डिपार्टमेंटल स्टोर और मूवी टिकट पर खर्च करने पर हर 100 रुपये पर 10 रिवॉर्ड प्वाइंट्स (रिवॉर्ड रेट- 2.50 फीसदी) दिए जाते हैं.

एयरपोर्ट लाउंज और टैप एंड पे की सुविधा
कार्ड में कॉन्टैक्टलेस ‘टैप एंड पे’ फीचर भी मिलता है, जिससे बिना स्वाइप किए सीधे मशीन पर टैप कर पेमेंट किया जा सकता है. इसके अलावा कार्डधारकों को साल में 4 बार डोमेस्टिक एयरपोर्ट लाउंज एक्सेस की सुविधा भी दी जाती है.

BPCL SBI Card OCTANE के चार्जेज-
इस कार्ड की जॉइनिंग फीस (वन टाइम) 1,499 रुपये है. इस कार्ड की रिन्यूअल फीस (हर साल) 1,499 रुपये है. हालांकि सालभर में 2 लाख रुपये खर्च करने पर रिन्यूअल फीस माफ कर दी जाती है.

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विनय कुमार झासीनियर कॉपी एडिटर

वर्तमान में विनय कुमार झा नेटवर्क18 की वेबसाइट hindi.news18.com में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वह मई 2017 से इस वेबसाइट के साथ जुड़े हैं. वह बीते 5 सालों से वर्तमान में वेबसाइट के बिजनेस सेक्शन के …और पढ़ें



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