बालोतरा जिले की नई बनी धोरीमन्ना नगर पालिका में जेन जी कीर्ति गोसाईवाल पहली अध्यक्ष निर्विरोध बनी हैं। अध्यक्ष पद के लिए इसके अलावा किसी पार्षद ने नामांकन दाखिल नहीं किया। आज एसडीएम ने निर्विरोध निर्वाचित कर दिया। वहीं अध्यक्ष पद का प्रमाण-पत्र सौंप दिया। धोरीमन्ना नगर पालिका की पहली अध्यक्ष बनी हैं। इनकी उम्र 21 साल 47 दिन है। कीर्ति के पिता घेवर सिंह राजस्थान पुलिस ने सीआई पद से वीआरएस विधानसभा चुनाव से पहले लिया था। तब बिलाड़ा से खुद टिकट मांग रहे थे, लेकिन टिकट नहीं मिली। इसके बाद से राजनीतिक और सामाजिक स्तर पर एक्टिव हैं। कीर्ति गोसाईवाल ने बताया- मेरा सपना सिविल सर्विस में जाने का था। लेकिन पॉलिटिक्स में मुझे रूचि थी। मुझे धोरीमन्ना की जनता ने मुझे मौका दिया। पहले पार्षद बन गई। फिर हम उन्होंने मुझे नगर पालिका अध्यक्ष बना दिया। मैं मंत्री के.के. विश्नोई और पूरी भाजपा टीम को आभार व्यक्त करती हूं। मेरी प्राथमिकता रहेगी कि धोरीमन्ना की जनता के हर दुख सुख में भाग लूं। उनकी हर समस्या का जितना जल्दी हो सके समाधान करूं। धोरीमन्ना की कमान जेन जी के हाथ में दरअसल, बालोतरा जिले की धोरीमन्ना नगर पालिका में 20 वार्ड है। इसमें भाजपा ने 14 सीटें जीती। वहीं कांग्रेस 3 सीट पर ही सिमट गई। 3 निर्दलीय पार्षद बनें। 16 सितंबर को अध्यक्ष पद के लिए नामांकन दाखिल भाजपा से कीर्ति गोसाईवाल ने किया। वहीं कांग्रेस और निर्दलीय से किसी ने कोई नामांकन दाखिल नहीं किया। लेकिन रिटर्निंग ऑफिसर ने नामांकन पत्र की जांच और नाम वापसी के बाद कीर्ति को निर्विरोध निर्वाचित किया। शुक्रवार को एसडीएम बद्रीनारायण विश्नोई ने प्रमाण-पत्र सौंपा। अब धोरीमन्ना नगर पालिका की कमान 21 साल की बेटी के हाथ में है। वार्ड 7 से लड़ा चुनाव धोरीमन्ना नगर पालिका पहली जेन जी अध्यक्ष कीर्ति गोसाईवाल इसी साल बीए की थी। इस साल एमए की तैयारी कर रही है। इनके पिता जोधपुर में रहते हैं। इनके चाचा और पूरा परिवार धोरीमन्ना रहता है। धोरीमन्ना में यह आते-जाते रहते हैं। कीर्ति गोसाईवाल ने नगरपालिका चुनाव में वार्ड संख्या 7 से भाजपा प्रत्याशी के रूप में चुनाव लड़ा था। उन्होंने कांग्रेस प्रत्याशी को 9 वोट के अंतर से हराकर पार्षद का चुनाव जीता। इसके बाद भाजपा ने उन्हे अध्यक्ष पद का प्रत्याशी बनाया। अध्यक्ष पद के लिए नामांकन के दौरान कांग्रेस व निर्दलीय पक्ष की ओर से कोई नामांकन दाखिल नहीं किया गया। पहली अध्यक्ष बेटी बनी धोरीमन्ना नगर पालिका बनने के बाद पहली बार चुनाव हुए। इस चुनाव में पहली बार पार्षद चुने गए। अब पहली बार अध्यक्ष का निर्वाचन हुआ। ऐसे में 21 साल गोसाईवाल का निर्विरोध अध्यक्ष बनना धोरीमन्ना के नगर पालिका इतिहास में पहली राजनीतिक घटना बन गया है।
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धोरीमन्ना पालिका की कमान जेन जी के हाथ में: बोली- सिविल सर्विसेज में जाना चाहती थी; पुलिसकर्मी पिता ने भी मांगा था विधायकी का टिकट – Barmer News
मुरादाबाद में गौवंश को सुरक्षित गौशाला पहुंचाया: सनातन सेवा संगठन ने घायल नंदी को पहुंचाया गौशाला – Moradabad News
मुरादाबाद में सनातन सेवा संगठन के कार्यकर्ताओं ने ट्रेन की चपेट में आकर घायल हुए नंदी महाराज को उपचार और देखभाल के लिए गौशाला भिजवाया। संगठन के सदस्यों को नंदी के घायल होने की जानकारी मिलने पर मौके पर पहुंचकर उसे सुरक्षित स्थान पर पहुंचाने की व्यवस्था की। इसके बाद नंदी महाराज को गौशाला भेजा गया, जहां उसकी देखभाल की जाएगी। इस दौरान सनातन सेवा संगठन के प्रदेश उपाध्यक्ष राहुल कुमार, बृजेश शर्मा, उज्ज्वल सक्सेना, मोहित और हर्ष ठाकुर मौजूद रहे। संगठन के सदस्यों ने बताया कि घायल पशुओं की मदद के लिए वे आगे भी प्रयास करते रहेंगे।
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बांका में 10 किसान ड्रोन बैंक स्थापित होंगे: खेती में मॉडर्न टेक्नोलॉजी को बढ़ावा मिलेगा, 10 लाख के प्रोजेक्ट पर सब्सिडी – Banka News
बांका जिले में खेती को आधुनिक बनाने के लिए पहली बार 10 किसान ड्रोन बैंक स्थापित किए जाएंगे। कृषि यांत्रीकरण योजना के तहत वित्तीय वर्ष 2026-27 के लिए इसकी मंजूरी मिल गई है।
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इन ड्रोन बैंकों से किसानों को कीटनाशक,तरल खाद और दूसरे कृषि कामों के लिए स्थानीय स्तर पर ही ड्रोन सेवा मिल सकेगी।
किसानों को ड्रोन खरीदने की जरूरत नहीं होगी,वे कस्टम हायरिंग सेंटर से जरूरत के हिसाब से ड्रोन ले सकेंगे।
राज्य सरकार की योजना के अनुसार,हर किसान ड्रोन कस्टम हायरिंग सेंटर की परियोजना लागत10लाख रुपए तय की गई है।
फसल प्रबंधन में मिलेगी काफी मदद
कृषि क्षेत्र में स्नातक (ग्रेजुएट)आवेदकों को परियोजना लागत का50 प्रतिशत या अधिकतम पांच लाख रुपए तक का अनुदान मिलेगा।
वहीं,गैर-कृषि स्नातक आवेदकों को40प्रतिशत या अधिकतम चार लाख रुपए तक का अनुदान दिया जाएगा।
इससे कृषि में तकनीक का इस्तेमाल बढ़ेगा और युवाओं को ड्रोन आधारित कृषि सेवा से रोजगार के अवसर भी मिलेंगे।
कृषि प्रधान बांका जिले में ड्रोन सेवा शुरू होने से किसानों को फसल प्रबंधन में काफी मदद मिलेगी।
ड्रोन की सुविधा मिलने से समय और लागत की बचत
पारंपरिक तरीके से कीटनाशक और तरल खाद के छिड़काव में ज्यादा मजदूर और समय लगता है।
ड्रोन से कम समय में बड़े इलाके में एक समान छिड़काव किया जा सकता है।
इससे मजदूरी और समय दोनों की बचत होगी। किसान अपनी फसल का समय पर इलाज भी करा सकेंगे। रजौन प्रखंड के उपरामा गांव में किसान पहले से ड्रोन का इस्तेमाल कर रहे हैं।
किसान रूपेश चौधरी ने बताया कि खेतों में कीटनाशक और तरल खाद के छिड़काव के लिए ड्रोन की सुविधा मिलने से समय और लागत दोनों बचती है।
समय पर छिड़काव करना होगा आसान
उन्होंने कहा कि बड़े इलाके में पारंपरिक तरीके से छिड़काव करने में कई मजदूर और कई घंटे लगते हैं, जबकि ड्रोन से कम समय में ज्यादा इलाके में छिड़काव हो जाता है।
इससे धान,गेहूं,मक्का और सब्जी समेत दूसरी फसलों में जरूरत के हिसाब से समय पर छिड़काव करना आसान होगा।
उप निदेशक, कृषि यांत्रिकरण रजनीश रंजन कुमार ने बताया कि इस वर्ष जिले को 10 किसान ड्रोन बैंक स्थापित करने का लक्ष्य मिला है।
इसके लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू हो गई है। इच्छुक आवेदक विभागीय पोर्टल के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं। अन्य कृषि यंत्रों के लिए भी आवेदन की प्रक्रिया शुरू की गई है।
OnePlus 16 में मिलेगा iPhone 18 Pro से बेहतर डिस्प्ले? 200MP कैमरे के साथ होगा लॉन्च
OnePlus 16 का ऑफिशियल टीजर सामने आ गया है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि इस फ्लैगशिप फोन को जल्द लॉन्च किया जाएगा। वनप्लस के इस फोन में Android 17 पर बेस्ड ColorOS 27 मिलेगा। अब इस फोन से जुड़ी एक और जानकारी सामने आई है। यह फोन iPhone 18 Pro सीरीज से भी बेहतर डिस्प्ले के साथ आएगा। इस फोन का डिस्प्ले 165Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करेगा। एप्पल के आईफोन 18 प्रो सीरीज में 120Hz रिफ्रेश रेट वाला डिस्प्ले दिया गया है।
मिलेगा 165Hz डिस्प्ले
सामने आई जानकारी के मुताबिक, OnePlus 16 में कंपनी BOE का OLED पैनल यूज करेगी, जो 165Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करेगा। वनप्लस पिछले कुछ साल से BOE का ही पैनल यूज कर रहा है। इसमें BOE X4 डिस्प्ले मिलेगा, जो 185Hz तक रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। हालांकि, कंपनी इसे 165Hz रिफ्रेश रेट के साथ प्रमोट करेगी।
चीनी माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म के मुताबिक, OnePlus 16 में Qualcomm Snapdragon 8 Elite Gen 6 Pro चिपसेट यूज किया जाएगा, जो 2nm प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी से लैस होगा। इस चिपसेट में 2+3+3 के तीन कलस्टर कंफिग्रेशन मिलेंगे। फोन के कैमरे फीचर्स की बात करें तो यह फोन 200MP के मेन कैमरा के साथ आएगा, जो OIS को सपोर्ट करेगा। इस फोन में 50MP का अल्ट्रा वाइड कैमरा और 50MP का पेरीस्कोप टेलीफोटो कैमरा दिया जाएगा। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए भी इस फोन में 50MP का कैमरा दिया जाएगा।
OnePlus 16 में दमदार चिपसेट और कैमरे के साथ-साथ तगड़ी बैटरी भी दी जाएगी। वनप्लस का यह फोन 9000mAh की बैटरी के साथ आ सकता है, जिसके साथ 100W फास्ट चार्जिंग मिल सकता है। यह फोन CNY 4,999 यानी लगभग 75,000 रुपये की कीमत में पेश किया जा सकता है।
भारत में नहीं होगा लॉन्च?
OnePlus 16 के भारत में लॉन्च नहीं होने की खबरें सामने आ रही हैं। हालांकि, OnePlus 16R भारत में लॉन्च किया जाएगा। कंपनी पहले ही यूरोप और अमेरिकी मार्केट से बाहर हो चुकी है। ऐसे में ये कयास लगाए जा रहे हैं कि चीनी ब्रांड भारत में भी अपना बिजनेस सीमित करने वाली है। हालांकि, कंपनी की तरफ से भारत से एग्जिट करने के बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है।
अमेरिका से जंग के बावजूद न्यूयॉर्क जाएंगे ईरानी राष्ट्रपति: US वीजा मिला, संयुक्त राष्ट्र को संबोधित करेंगे; उनकी गिरफ्तारी क्यों नहीं हो सकती
वॉशिंगटन डीसी/तेहरान28 मिनट पहले
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अमेरिका और ईरान के बीच 7 महीने से जंग चल रही है। इसके बावजूद ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान और विदेश मंत्री अब्बास अराघची अगले हफ्ते न्यूयॉर्क में होने वाली UNGA बैठक में शामिल होंगे।
अमेरिका के विदेश मंत्रालय ने गुरुवार को बताया कि दोनों नेताओं को वीजा दे दिया गया है। युद्ध शुरू होने के बाद यह पहली बार होगा, जब ईरान के शीर्ष नेता अमेरिका पहुंचेंगे।
बड़ा सवाल यह है कि क्या अमेरिका में ईरानी राष्ट्रपति पजशकियान की गिरफ्तारी हो सकती है?

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने 24 सितंबर 2025 को न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में UNGA के 80वें सत्र को संबोधित किया था।
पजशकियान के पास खास कानूनी सुरक्षा
ईरानी राष्ट्रपति पजशकियान न्यूयॉर्क में गिरफ्तार नहीं हो पाएंगे। इसकी दो बड़ी वजहें हैं।
1. राष्ट्रपति को खास कानूनी सुरक्षा मिलती है
किसी देश के मौजूदा राष्ट्रपति को दूसरे देश में जाकर सीधे गिरफ्तार करना आसान नहीं होता। अंतरराष्ट्रीय नियमों के तहत मौजूदा राष्ट्राध्यक्षों को खास कानूनी सुरक्षा मिलती है।
इसका मकसद यह है कि कोई देश अपनी मर्जी से दूसरे देश के मौजूदा राष्ट्रपति को गिरफ्तार न कर सके।
हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि राष्ट्रपति पर कभी कोई कानूनी कार्रवाई नहीं हो सकती। यह इस बात पर निर्भर करता है कि मामला किस अदालत में है, आरोप क्या हैं और उस देश के कानून क्या कहते हैं।
निकोलस मादुरो का मामला इसका उदाहरण है। उन्हें अमेरिका ने गिरफ्तार किया था, लेकिन अमेरिका उन्हें उस समय वेनेजुएला का वैध राष्ट्रपति नहीं मानता था।
2. UNGA के लिए अमेरिका की अलग जिम्मेदारी है
यह मामला सिर्फ अमेरिका और ईरान के बीच का नहीं है। UN का मुख्यालय न्यूयॉर्क में है और अमेरिका इसकी मेजबानी करता है।
इसलिए UN की बैठकों में हिस्सा लेने वाले दूसरे देशों के प्रतिनिधियों को अमेरिका आने की अनुमति देना उसकी जिम्मेदारी का हिस्सा है।
UN के नियमों के मुताबिक अमेरिका ऐसा नहीं कर सकता कि किसी विदेशी प्रतिनिधि को UN के आधिकारिक काम में हिस्सा लेने से ही रोक दे। हालांकि, UN के बाहर उसकी आवाजाही पर पाबंदी लगाई जा सकती है।
इसी वजह से पजशकियान और अराघची को अमेरिका आने की अनुमति दी गई है। लेकिन ईरानी प्रतिनिधिमंडल छोटा रखा गया है और उसके सदस्यों की आवाजाही भी सीमित रहेगी।

यात्रा और खरीदारी पर पाबंदियां रहेंगी
अमेरिकी विदेश मंत्रालय के मुताबिक ईरानी अधिकारियों की न्यूयॉर्क में आवाजाही सीमित रहेगी। वे सिर्फ कुछ तय जगहों पर ही जा सकेंगे।
आमतौर पर ऐसे अधिकारियों को UN मुख्यालय, ईरान के UN मिशन और कुछ तय इलाकों के बीच ही आने-जाने की अनुमति होती है।
इसके अलावा लग्जरी सामान और कुछ दूसरी चीजें खरीदने पर भी रोक रहेगी। अमेरिका पहले भी ईरानी अधिकारियों पर इस तरह की पाबंदियां लगा चुका है।
क्या अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत होगी?
UNGA के दौरान इस बात पर भी नजर रहेगी कि क्या अमेरिकी और ईरानी अधिकारियों के बीच कोई बातचीत होती है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प हाल के महीनों में कई बार कह चुके हैं कि उनके प्रशासन और ईरानी अधिकारियों के बीच बातचीत हुई है। हालांकि ईरान ने इस तरह की बातचीत से इनकार किया है।
फिलिस्तीनी राष्ट्रपति को दूसरे साल भी वीजा नहीं मिला
ईरानी नेताओं को वीजा देने का फैसला ऐसे समय हुआ है, जब अमेरिका ने फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास को UNGA में शामिल होने के लिए वीजा देने से इनकार कर दिया है।
अमेरिका ने फिलिस्तीनी प्राधिकरण (PA) और फिलिस्तीन लिबरेशन ऑर्गनाइजेशन (PLO) से जुड़े कई अधिकारियों पर भी पाबंदियां लगाई हैं। लगातार दूसरे साल अब्बास को अमेरिका आने की अनुमति नहीं मिली है।
पिछले साल की तरह इस बार भी उन्हें वीडियो के जरिए UNGA को संबोधित करने की अनुमति दी गई है।
अमेरिका का कहना है कि यह फैसला फिलिस्तीनी नेतृत्व की कुछ नीतियों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं में इजराइल के खिलाफ कानूनी कार्रवाई से जुड़े कदमों की वजह से लिया गया है।
वहीं, फिलिस्तीनी विदेश मंत्रालय ने इसका विरोध किया है। उसका कहना है कि ऐसे कदम शांति और राजनीतिक समाधान की कोशिशों को कमजोर करते हैं।

फिलिस्तीनी राष्ट्रपति महमूद अब्बास ने सितंबर 2025 में वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए UNGA को संबोधित किया था।
UNGA में युद्ध और तेल पर भी चर्चा होगी
इस बार UNGA ऐसे समय हो रही है, जब दुनिया में कई बड़े संघर्ष चल रहे हैं। अमेरिका-ईरान युद्ध के अलावा रूस-यूक्रेन युद्ध और पश्चिम एशिया में बढ़ता तनाव भी चर्चा में रहेगा।
वैश्विक अर्थव्यवस्था और तेल की कीमतों पर भी असर एक बड़ा मुद्दा होगा। अमेरिका और ईरान के बीच चल रही जंग का असर तेल बाजार और समुद्री व्यापार पर पड़ा है।
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जियांगमी टियाओ से अंडे-टमाटर तक, खाने में क्या पसंद करते हैं शी जिनपिंग?
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Xi Jinping Food Habits: शी जिनपिंग के खाने से जुड़े सार्वजनिक किस्सों में स्टीम्ड बन, नूडल्स, चिकन, मटन, सब्जियां और पारंपरिक चीनी स्नैक्स दिखाई देते हैं. बीजिंग के आम रेस्टोरेंट से लेकर शान्शी के घरेलू भोजन तक उनकी कई चर्चित फूड चॉइस साधारण स्थानीय स्वादों से जुड़ी रही हैं.
शी जिनपिंग को खाने में क्या पसंद है? जानें फूड हैबिट (Image-AI generated)
Xi Jinping Food Habits: किसी बड़े नेता की जिंदगी की तस्वीर अक्सर आलीशान बैठकों और बड़े आयोजनों से जुड़ी दिखाई देती है. लेकिन खाने की पसंद सामने आए तो तस्वीर कुछ अलग नजर आ सकती है. चीन के राष्ट्रपति Xi Jinping के बारे में सार्वजनिक रूप से सामने आई कुछ पुरानी रिपोर्ट्स भी उनकी खाने की पसंद की दिलचस्प झलक देती हैं. कभी वे बीजिंग के आम रेस्टोरेंट में स्टीम्ड बन खाते नजर आए तो कभी घर के बने स्थानीय व्यंजन उनकी थाली का हिस्सा रहे.
उनके भोजन से जुड़े ये किस्से किसी आधिकारिक डाइट चार्ट की तरह नहीं हैं. फिर भी अलग-अलग मौकों पर दर्ज की गई खाने की चीजों को देखें तो एक पैटर्न जरूर दिखाई देता है. उनकी पसंद में साधारण चीनी खाना और अपने क्षेत्र से जुड़े पारंपरिक स्वाद कई बार नजर आए हैं.
शी जिनपिंग की सबसे चर्चित फूड चॉइस क्या थी?
शी जिनपिंग के खाने से जुड़ा सबसे चर्चित किस्सा दिसंबर 2013 का है. उस समय वे बीजिंग के किंगफेंग स्टीम्ड बन रेस्टोरेंट पहुंचे थे. वहां उन्होंने छह पोर्क और हरे प्याज वाले बन, स्ट्यू किया हुआ पोर्क लिवर और सरसों के पत्तों की एक प्लेट ली थी. इस पूरे खाने की कीमत 21 युआन थी. उस समय इसे करीब 300 रुपये के आसपास बताया गया था. खास बात सिर्फ खाना नहीं था. रिपोर्ट्स के मुताबिक शी ने वहां लाइन में लगकर खाना लिया और आम ग्राहकों के साथ बैठकर भोजन किया.
यही वजह रही कि उनका यह लंच काफी चर्चा में आया. इस घटना से कम से कम इतना जरूर पता चलता है कि सार्वजनिक रूप से दर्ज उनकी कुछ पसंद बेहद सामान्य और रोजमर्रा के चीनी भोजन से जुड़ी रही हैं. हालांकि इसे उनकी रोजाना की डाइट मानना सही नहीं होगा.
बन और नूडल्स से लेकर घर के खाने तक
शी जिनपिंग के खाने से जुड़े दूसरे किस्सों में भी स्थानीय और घरेलू भोजन दिखाई देता है. 2014 में सैनिकों के साथ भोजन के दौरान उनके खाने में टमाटर के साथ अंडे जैसे साधारण व्यंजन का जिक्र मिलता है. यह चीन के घरों में बनाए जाने वाले परिचित व्यंजनों में शामिल है. उनका रिश्ता चीन के शान्शी प्रांत के स्थानीय खाने से भी जुड़ा रहा है. युवा दिनों में उन्होंने लियांगजियाहे गांव में कई साल बिताए थे. 2015 में वहां लौटने के दौरान उन्होंने स्थानीय घर में भोजन किया. उस खाने में अचार वाली सब्जियां, तले हुए व्यंजन, चिकन, मटन और कद्दू जैसे घरेलू पकवान शामिल थे. यही वजह है कि उनके भोजन से जुड़े कई सार्वजनिक किस्सों में शान्शी और उत्तरी चीन के पारंपरिक स्वाद नजर आते हैं. नूडल्स, बन, मटन और घर के बने व्यंजन इस तस्वीर का हिस्सा रहे हैं. हालांकि उपलब्ध जानकारी इतनी ज्यादा नहीं है कि इससे उनकी पूरी व्यक्तिगत डाइट का चार्ट तैयार किया जा सके.
मीठे में भी है एक पुरानी पसंद
शी जिनपिंग ने एक मौके पर खुद बताया था कि उन्हें बचपन से जियांगमी टियाओ नाम की पारंपरिक मिठाई पसंद है. 2017 में पीपुल्स डेली की रिपोर्ट में उनके हवाले से बताया गया कि वे त्योहारों के दौरान जियांगमी टियाओ और तले हुए पाईचा जैसे स्नैक्स खरीदते हैं. उन्होंने यह भी कहा था कि इनमें तेल ज्यादा होता है इसलिए इन्हें आम दिनों में ज्यादा नहीं खाते और त्योहार पर थोड़ा खाते हैं. यह किस्सा उनकी खाने की पसंद का एक अलग पहलू दिखाता है. पसंदीदा चीज को पूरी तरह छोड़ने के बजाय उसे खास मौकों से जोड़कर खाना उनके अपने बयान में दिखाई देता है. इसे किसी मेडिकल या वैज्ञानिक डाइट रूल के तौर पर नहीं देखा जाना चाहिए.
मांसाहारी खाने की भी दिखती है जगह
शी के सार्वजनिक रूप से दर्ज भोजन में मांसाहारी व्यंजन भी कई बार सामने आए हैं. 2012 में हेबेई के फुपिंग काउंटी के दौरे से जुड़ी रिपोर्ट में उनके खाने में ब्राउन सॉस में पकाया गया चिकन, पोर्क बेली के साथ लहसुन की कलियां और लहसुन के साथ हरी सब्जी का जिक्र किया गया था. उसी रिपोर्ट में उनके लिए एल्कोहल नहीं परोसने की बात भी लिखी गई है.
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कीर्ति राजपूत हिंदी डिजिटल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की एक अनुभवी पत्रकार हैं. उन्हें मीडिया इंडस्ट्री में करीब 13 साल का अनुभव है. वर्तमान में वह साल 2021 से News18 हिंदी की धर्म टीम के साथ जुड़ी हैं, जहां…
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ब्रिटिश नागरिकता और जमीन-खरीद मामले में मौलाना की रिट खारिज: इलाहाबाद हाईकोर्ट में पैरवी के लिए नहीं पहुंचे वकील; 2024 में FIR पर मिली अंतरिम राहत भी खत्म – Sant Kabir Nagar News
संतकबीरनगर के खलीलाबाद थाने में दर्ज ब्रिटिश नागरिकता और जमीन खरीद से जुड़े मामले में मौलाना शमशुल हुदा खान को इलाहाबाद हाईकोर्ट से राहत नहीं मिली। हाईकोर्ट ने उनकी आपराधिक विविध रिट याचिका को पैरवी के अभाव में खारिज कर दिया। कोर्ट ने यह भी स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता के पक्ष में पहले कोई अंतरिम आदेश पारित हुआ था तो वह अब समाप्त माना जाएगा। 12 अगस्त 2026 को कोर्ट संख्या-49 में न्यायमूर्ति अजय भनोट और न्यायमूर्ति देवेंद्र सिंह-प्रथम की पीठ ने मामले की सुनवाई की। सुनवाई के समय याचिकाकर्ता की ओर से वकील मौजूद नहीं अदालत के आदेश के मुताबिक, सुनवाई के समय याचिकाकर्ता की ओर से कोई अधिवक्ता उपस्थित नहीं था, जबकि सरकारी पक्ष के वकील मौजूद थे। पैरवी नहीं किए जाने के कारण कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी। यह मामला खलीलाबाद थाने में 7 अप्रैल 2024 को दर्ज केस क्राइम नंबर 288/2024 से जुड़ा है। एफआईआर में IPC की धारा 419, 420, 467, 468, 471 और 120-बी के तहत मुकदमा दर्ज किया गया था। 2024 में FIR पर दंडात्मक कार्रवाई से मिली थी अंतरिम राहत 24 अक्टूबर 2024 की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अगली तारीख तक मौलाना शमशुल हुदा खान के खिलाफ उक्त एफआईआर के आधार पर कोई दंडात्मक कार्रवाई नहीं करने का निर्देश दिया था। अब रिट याचिका खारिज होने के साथ यह अंतरिम राहत भी समाप्त हो गई है। ब्रिटिश नागरिकता और जमीन खरीद को लेकर लगाए गए थे आरोप मामले में शिकायतकर्ता पक्ष की ओर से आरोप लगाया गया था कि मौलाना शमशुल हुदा खान ने ब्रिटिश नागरिकता हासिल करने के बाद भारत में जमीन खरीदी और इसके लिए सरकार की पूर्व अनुमति नहीं ली। याचिका की पूर्व सुनवाई में इस बात पर भी बहस हुई थी कि नागरिकता की स्थिति और जमीन खरीद से जुड़े विवाद का निर्धारण संबंधित कानूनों के तहत होना चाहिए। याचिकाकर्ता की ओर से उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 के प्रावधानों का भी हवाला दिया गया था। संबंधित पक्षों ने संपत्ति खरीद और नागरिकता की स्थिति को लेकर अलग-अलग दलीलें कोर्ट के सामने रखी थीं। संपत्ति और मदरसा जमीन से जुड़े मामले अलग-अलग मामले की पूर्व सुनवाई में यह भी बताया गया था कि संबंधित संपत्ति सोसायटी के नाम पर खरीदी गई थी और जमीन को लेकर मंडलायुक्त, बस्ती के समक्ष पुनरीक्षण की कार्यवाही भी हुई थी। इसके अलावा मदरसा की जमीन और भवन से जुड़े प्रशासनिक आदेशों को लेकर अलग न्यायिक कार्यवाही चल रही है। अगस्त 2026 में एसडीएम खलीलाबाद की अदालत ने संबंधित संस्था के नाम कृषि भूमि के बैनामे को निरस्त करते हुए जमीन को राज्य सरकार में निहित करने का आदेश दिया था। इस आदेश को लेकर भी आगे की न्यायिक प्रक्रिया अलग से चल रही है। अगली कार्रवाई: मौजूदा हाईकोर्ट आदेश के बाद 2024 की एफआईआर पर मिली अंतरिम राहत समाप्त हो चुकी है। मामले में आगे की कार्रवाई संबंधित न्यायिक और जांच प्रक्रिया के अनुसार होगी।
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बच्चों की वैलिडिटी से फीस तक पासपोर्ट नियम बदले, अब कितना लगेगा पैसा
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Passport New Rules: पासपोर्ट बनवाने वालों के लिए विदेश मंत्रालय ने नियमों और फीस में बड़ा बदलाव किया है. सबसे ज्यादा चर्चा बच्चों के पासपोर्ट की वैलिडिटी को लेकर है. 15 साल से कम उम्र के बच्चे को जारी 36 पेज का सामान्य पासपोर्ट अब 5 साल या बच्चे के 18 साल का होने तक ही वैलिड रहेगा, जो भी पहले हो. दूसरी तरफ पासपोर्ट की फीस भी बढ़ गई है. वयस्कों के 36 पेज के सामान्य पासपोर्ट की कीमत अब 2500 रुपए होगी. तत्काल सेवा के लिए भी ज्यादा पैसे देने होंगे. बच्चों के पासपोर्ट की फीस बढ़ी है, हालांकि छोटे बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों के नए आवेदन पर 10 प्रतिशत छूट जारी रहेगी.
पासपोर्ट नियम 2026 में बड़ा बदलाव हुआ है. (फाइल फोटो)
आगर आप नया पासपोर्ट बनवाने जा रहे हैं तो जेब और डॉक्यूमेंट दोनों पर थोड़ा ज्यादा ध्यान देना होगा. विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है. इसका असर बच्चों से लेकर बड़ों तक, अलग-अलग तरह के पासपोर्ट आवेदन पर पड़ेगा. सबसे अहम बदलाव बच्चों के पासपोर्ट की वैलिडिटी को लेकर है. अब 15 साल से कम उम्र के बच्चे को जारी 36 पेज का सामान्य पासपोर्ट हमेशा की तरह 10 साल के लिए नहीं चलेगा. इसकी वैलिडिटी 5 साल या बच्चे के 18 साल की उम्र पूरी करने तक रहेगी. जो भी पहले होगा, वहीं पासपोर्ट की वैलिडिटी खत्म हो जाएगी. यानी पासपोर्ट बनवाते समय बच्चे की उम्र अब काफी मायने रखेगी.
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सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 4 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…
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असम में सड़क-निर्माण का टेंडर दिलवाने के नाम पर ठगी: ठगों ने सीकर के फर्म पार्टनरों को साइट विजिट भी करवाया; 40 लाख ठगे – Sikar News
असम में सड़क निर्माण टेंडर दिलवाने के नाम पर 40 लाख की ठगी का मामला सामने आया है। फर्म के पार्टनर की मुलाकात आरोपियों से दिल्ली में हुई थी। उन्होंने विश्वास में लेने के लिए पीड़ित को साइट का विजिट भी करवाया। अब पैसे लौटाने से मना कर दिया है। सदर थाना पुलिस ने मामला दर्ज करके जांच शुरू कर दी है। सीकर के पालवास रोड निवासी विक्रम सिंह ने सदर पुलिस थाने में शिकायत देकर बताया कि उनकी और उनके पार्टनर्स की फर्म है। फर्म असम में रोड कंस्ट्रक्शन का काम करना चाहती थी। असम में NHIDCL के तहत चल रहे कामों की जानकारी लेने के लिए उनकी मुलाकात दिल्ली में 28 मार्च को नेहरू पैलेस में सुरेंद्र कुमार ठाकुर से हुई। जिसके साथ एक आदमी नबाज्योति कालेता भी था। उन्होंने बताया कि BHARTIA INFRAPROJECTS LIMITED नाम की कंपनी को असम में सड़क निर्माण का टेंडर है। अब वह कंपनी थर्ड पार्टी को काम देना चाहती है। सुरेंद्र और उसके साथी ने गारंटी के रूप में 40 लाख रुपए मांगे। जो सुरेंद्र कुमार के अकाउंट में ट्रांसफर कर दिए गए। उसके बाद एक एग्रीमेंट भी तैयार करवाया। जिस पर सुरेंद्र और उसके साथी ने सिग्नेचर भी किया। सुरेंद्र और उसके साथी ने असम में साइट का विजिट भी करवाया लेकिन जब विक्रम ने Bhartia infraprojects के साथ एग्रीमेंट करवाने की बात कही तो पहले तो सुरेंद्र टाइम देता रहा और फिर फोन ही स्विच ऑफ कर लिया। बाद में सुरेंद्र को पता चला कि Bhartia infraprojects से सुरेंद्र कुमार ठाकुर और नबाज्योति का कोई लेना देना नहीं है। अब दोनों ने रुपए लौटाने से मना कर दिया।
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