Saturday, August 1, 2026
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झालावाड़ की गागरोनी तोता साड़ी बनी पहचान: 50 महिलाओं के सपनों को मिली उड़ान, कलेक्टर ने की सराहना – jhalawar News




झालावाड़ जिले की पारंपरिक हथकरघा कला को नई पहचान दिलाने वाली असनावर स्थित सांवरिया सेठ हथकरघा फाउंडेशन सोसाइटी का शनिवार को जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने निरीक्षण किया। उन्होंने गागरोनी तोता साड़ी सहित विभिन्न हस्तनिर्मित उत्पादों का अवलोकन करते हुए संस्था की सराहना की, जो करीब 50 ग्रामीण महिलाओं को रोजगार देने के साथ पारंपरिक कला के संरक्षण और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी उल्लेखनीय कार्य कर रही है। पारंपरिक उत्पादों का किया अवलोकन निरीक्षण के दौरान जिला कलेक्टर ने गागरोनी तोता साड़ी, गागरोनी तोता बेडशीट, सिंगल व डबल खेस, बेडशीट और टॉवल सहित विभिन्न हथकरघा उत्पादों को देखा। उन्होंने बुनकरों और महिला कारीगरों से उत्पादन प्रक्रिया, डिजाइनों की विशेषताओं और उत्पादों के विपणन की जानकारी भी ली। 50 ग्रामीण महिलाओं को मिला आत्मनिर्भर बनने का अवसर जिला कलेक्टर ने कहा कि सोसाइटी जिले की पारंपरिक हथकरघा कला को संरक्षित करने के साथ उसे राष्ट्रीय स्तर पर नई पहचान दिलाने का सराहनीय कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि संस्था लगभग 50 ग्रामीण महिलाओं को स्थानीय स्तर पर रोजगार उपलब्ध कराकर उन्हें आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बना रही है। इसे उन्होंने महिला सशक्तिकरण की प्रेरणादायक पहल बताया। गागरोनी तोता साड़ी बनी जिले की पहचान कलेक्टर ने कहा कि सोसाइटी के उत्पादों में स्थानीय संस्कृति और गागरोन क्षेत्र की पारंपरिक कला की सुंदर झलक दिखाई देती है। विशेष रूप से गागरोनी तोता साड़ी झालावाड़ की विशिष्ट पहचान बन चुकी है, जिसे राज्य और जिला स्तर पर सम्मान भी प्राप्त हो चुका है। रद्दी अखबार से तैयार हो रहे उपयोगी उत्पाद निरीक्षण के दौरान जिला कलेक्टर ने महिलाओं द्वारा रद्दी अखबार से हैंडबैग, मोबाइल बैग और अन्य उपयोगी सामग्री तैयार करने की पहल की भी सराहना की। उन्होंने इसे रोजगार सृजन के साथ पर्यावरण संरक्षण और रीसाइक्लिंग को बढ़ावा देने वाला उत्कृष्ट नवाचार बताया। पुरस्कारों से बढ़ा हथकरघा कला का सम्मान जिला कलेक्टर ने बताया कि सोसाइटी के सदस्य सुजानमल को वर्ष 2025 में गागरोनी तोता साड़ी के लिए राज्य स्तरीय बुनकर पुरस्कार में द्वितीय स्थान मिला था। वहीं इस साल गीता बाई को इसी उत्पाद के लिए प्रथम जिला स्तरीय बुनकर पुरस्कार से सम्मानित किया गया। उन्होंने कहा कि ये उपलब्धियां झालावाड़ की पारंपरिक हथकरघा कला के बढ़ते सम्मान का प्रतीक हैं। विपणन और प्रशिक्षण को और मजबूत करने के निर्देश निरीक्षण के अंत में जिला कलेक्टर ने सोसाइटी के उत्पादों के विपणन, डिज़ाइन विकास और प्रशिक्षण गतिविधियों को और मजबूत करने के निर्देश दिए। उन्होंने विश्वास जताया कि यह संस्था भविष्य में झालावाड़ की हथकरघा कला को राष्ट्रीय ही नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी नई पहचान दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।



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बुलंदशहर में 90 घंटे बाद मिला चारू का शव: स्कूल से लौटते समय उफनाते नाले में गिरकर बह गई थी, 7 एक्सपर्ट भी बुलाए गए थे – Bulandshahar News




बुलंदशहर में 11 वर्षीय स्कूली छात्रा चारु कश्यप का शव 90 घंटे के लंबे रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद शनिवार सुबह बरामद कर लिया गया। चारु का शव चावली गांव के पास काली नदी से मिला। वह 28 जुलाई को कोतवाली नगर क्षेत्र स्थित भूतेश्वर मंदिर के पास एक उफनते नाले में गिरकर बह गई थी। चौथी कक्षा में पढ़ने वाली चारु 28 जुलाई की दोपहर करीब 12:30 बजे स्कूल से घर लौट रही थी। मूसलाधार बारिश के कारण सड़कें पानी से लबालब थीं, तभी वह नाले में गिर गई और तेज बहाव में बह गई। हादसे के तुरंत बाद पुलिस, नगर पालिका, SDRF और NDRF की टीमों ने बच्ची की तलाश शुरू कर दी थी। शुक्रवार को अभियान को तेज करने के लिए बागपत से 7 विशेषज्ञ गोताखोरों को भी बुलाया गया था। यह संयुक्त अभियान 90 घंटे तक चला। सीओ सिटी प्रखर पांडे ने बताया कि NDRF, SDRF और पुलिस की कड़ी मशक्कत के बाद शनिवार सुबह चारु कश्यप का शव काली नदी से बरामद किया गया। शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। एसएसपी दिनेश कुमार ने जानकारी दी कि छात्रा का शव मिलने के बाद NDRF की टीम वापस लौट गई है। NDRF के सब-इंस्पेक्टर मनोज शर्मा ने बताया कि जिस नाले में बच्ची गिरी थी, वह सीधे काली नदी में मिलता है। पूरे शहर का प्लास्टिक और कचरा इसी नदी में बहकर आता है, जिससे रेस्क्यू बोट के इंजन का फैन बार-बार जाम हो रहा था। नदी का पानी अत्यधिक प्रदूषित और काला होने के कारण पानी के अंदर देखना लगभग असंभव था। इन प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद, गोताखोर और बचाव कर्मी लगातार पानी में उतरकर हर संभावित जगह पर बच्ची की तलाश करते रहे और अंततः शव को ढूंढ निकालने में सफल रहे।



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IBPS में क्लर्क पद के लिए 11 हजार पदों पर भर्ती, देखें राज्यवार वैकेंसी की लिस्ट


इंस्टीट्यूट ऑफ बैंकिंग पर्सनल सिलेक्शन (IBPS) ने क्लेरिकल कैडर XVI के लिए आवेदन प्रक्रिया शुरू कर दी है। जो उम्मीदवार क्लेरिकल कैडर XVI के लिए आवेदन करना चाहते हैं, वे आधिकारिक वेबसाइट – ibps.in पर आवेदन कर सकते हैं। IBPS क्लेरिकल कैडर XVI के लिए आवेदन करने की आखिरी तारीख 21 अगस्त है। IBPS कस्टमर सर्विस एसोसिएट (CSA) भर्ती अभियान 11,403 रिक्तियों के लिए आयोजित की जा रही है।

IBPS क्लर्क पद के लिए कैसे अप्लाई करें

उम्मीदवार IBPS क्लर्क पद के लिए ऑफिशियल वेबसाइट – ibps.in पर अप्लाई कर सकते हैं। IBPS कस्टमर सर्विस एसोसिएट्स (CSA) पदों के लिए अप्लाई करने के लिए, उम्मीदवारों को ऑफिशियल वेबसाइट – ibps.in पर जाना होगा और CSA रजिस्ट्रेशन लिंक पर क्लिक करना होगा। एप्लीकेशन फ़ॉर्म में जानकारी भरें और जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें। IBPS क्लर्क एप्लीकेशन फीस का भुगतान करें और सबमिट पर क्लिक करें। IBPS क्लर्क एप्लीकेशन फ़ॉर्म PDF सेव करें और उसका प्रिंट आउट लें।

  • ऑफिशियल वेबसाइट – ibps.in पर जाएं
  • IBPS क्लर्क रजिस्ट्रेशन लिंक पर क्लिक करें
  • एप्लीकेशन फ़ॉर्म में जानकारी भरें और ज़रूरी डॉक्यूमेंट्स अपलोड करें
  • IBPS क्लर्क एप्लीकेशन फ़ीस का भुगतान करें और सबमिट पर क्लिक करें
  • IBPS क्लर्क एप्लीकेशन फ़ॉर्म PDF सेव करें और उसका प्रिंट आउट लें

राज्यवार भर्ती की लिस्ट









































राज्य भर्ती
अंडमान और निकोबार 18
आंध्र प्रदेश 186
अरुणाचल प्रदेश 45
असम 349
बिहार 491
चंडीगढ़ 20
छत्तीसगढ़ 265
दादर एवं नागर हवेली 18
दमन एवं दीव 7
दिल्ली 415
गोवा 61
गुजरात 698
हरियाणा 196
हिमाचल प्रदेश 97
जम्मू-कश्मीर 67
झारखंड 182
कर्नाटक 1414
केरल 108
लद्दाख 6
लक्ष्यद्वीप 11
मध्य प्रदेश 570
महाराष्ट्र 1051
मणिपुर 42
मेघालय 22
मिजोरम 17
नागालैंड 31
ओडिशा 337
पुडुचेरी 26
पंजाब 481
राजस्थान 392
सिक्क्मि 28
तमिलनाडु 675
तेलंगाना 191
त्रिपुरा 64
उत्तर प्रदेश 1731
उत्तराखंड 145
पश्चिम बंगाल 946

IBPS क्लर्क भर्ती 2026: योग्यता मानदंड

शैक्षिक योग्यता

किसी भी विषय में ग्रेजुएशन की डिग्री रखने वाले उम्मीदवार अप्लाई करने के लिए योग्य हैं। उम्मीदवारों को ध्यान देना चाहिए कि उनके पास ग्रेजुएशन के सबूत के तौर पर एक वैलिड मार्कशीट/डिग्री सर्टिफिकेट होना चाहिए।

आयु सीमा

उम्मीदवारों की अधिकतम आयु सीमा 28 वर्ष से अधिक नहीं होनी चाहिए, न्यूनतम आयु 20 वर्ष होनी चाहिए।

एप्लीकेशन फ़ीस

सामान्य श्रेणी के उम्मीदवारों को ₹850 का भुगतान करना होगा, जबकि SC/ST/PwD/EXSM जैसी आरक्षित श्रेणी के उम्मीदवारों को ₹175 का भुगतान करना होगा।

IBPS क्लर्क परीक्षा तिथि 2026

IBPS क्लर्क प्रारंभिक परीक्षा अक्टूबर में होने की संभावना है, जबकि मुख्य परीक्षा दिसंबर में संभावित रूप से निर्धारित है।

वेतनमान

उम्मीदवारों के लिए न्यूनतम मूल वेतन ₹24,050 होगा। CSA समय-समय पर लागू होने वाले भाग लेने वाले बैंक के नियमों के अनुसार भत्ते और अन्य सुविधाओं के लिए पात्र होंगे।

IBPS क्लर्क प्रीलिम्स परीक्षा पैटर्न 2026








टेस्ट प्रश्नों की संख्या अधिकतम अंक समय सीमा
अंग्रेजी 30 30 20 मिनट
गणित 35 35 20 मिनट
रीजनिंग 35 35 20 मिनट
टोटल 100 100 60 मिनट

IBPS क्लर्क मेन्स परीक्षा पैटर्न 2026









टेस्ट प्रश्नों की संख्या अधिकतम अंक समय सीमा
सामान्य/वित्तीय जागरूकता 40 50 20 मिनट
समान्य अंग्रेजी 40 40 35 मिनट
रीजनिंग और कंप्यूटर ज्ञान 40 60 35 मिनट
संख्यात्मक अभिक्षमता 40 50 35 मिनट
टोटल 160 200 125 मिनट

IBPS क्लर्क परीक्षा 2026 के बारे में अधिक जानकारी के लिए, कृपया आधिकारिक वेबसाइट – ibps.in पर जाएं।

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बिरयानी की शुरुआत कहां से हुई? अफगानिस्तान या भारत… जानिए इस शाही डिश का दिलचस्प इतिहास


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बिरयानी की शुरुआत कहां से हुई? अफगानिस्तान या भारत… जानिए दिलचस्प इतिहास

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Biryani History: बिरयानी की शुरुआत को लेकर कई अलग-अलग ऐतिहासिक मान्यताएं मौजूद हैं. कई इतिहासकार इसकी जड़ें फारस से जोड़ते हैं, जबकि कुछ अफगानिस्तान और मुगल काल को इसका आधार मानते हैं. दक्षिण भारत में भी प्राचीन समय से चावल और मांस से बनने वाले व्यंजनों का उल्लेख मिलता है. लखनऊ और हैदराबाद ने बिरयानी को नया स्वाद और शाही पहचान दी. आज बिरयानी को कई संस्कृतियों और खानपान परंपराओं का अनोखा मेल माना जाता है.

Biryani History: बिरयानी का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के मुंह में पानी आ जाता है. भारत में हैदराबादी बिरयानी, लखनवी बिरयानी, कोलकाता बिरयानी और मालाबार बिरयानी जैसी कई किस्में बेहद लोकप्रिय हैं. यही वजह है कि अधिकतर लोग मानते हैं कि बिरयानी की शुरुआत भारत से ही हुई होगी. लेकिन इतिहास और फूड एक्सपर्ट्स की राय इस कहानी को थोड़ा अलग तरीके से पेश करती है. बिरयानी की जड़ें सिर्फ भारत तक सीमित नहीं मानी जातीं. (इमेज AI)

कई इतिहासकार इसके तार फारस यानी आज के ईरान से जोड़ते हैं, कुछ इसे मध्य एशिया और अफगानिस्तान से भारत पहुंची डिश बताते हैं, जबकि कुछ लोगों का मानना है कि भारत में पहले से मौजूद चावल और मांस से बनने वाले व्यंजन समय के साथ बिरयानी में बदल गए. दिलचस्प बात यह है कि इन सभी कहानियों में कुछ न कुछ ऐतिहासिक आधार मिलता है. इसलिए बिरयानी का एक ही जन्मस्थान तय करना आसान नहीं है. आइए जानते हैं कि आखिर इस शाही डिश की शुरुआत कहां से मानी जाती है और कैसे यह दुनिया के सबसे लोकप्रिय व्यंजनों में शामिल हो गई. (इमेज AI)

क्या फारस में हुई थी बिरयानी की शुरुआत? कई फूड इतिहासकार मानते हैं कि बिरयानी की शुरुआती कहानी फारस से शुरू होती है. कहा जाता है कि वहां के शाही रसोइयों ने चावल को घी या फैट में हल्का भूनकर उसमें मांस, सूखे मेवे, केसर और खुशबूदार मसाले मिलाकर धीमी आंच पर पकाना शुरू किया. इस तकनीक को आज “दम” पकाने की शैली के रूप में जाना जाता है. फारस के शाही दरबारों में यह तरीका काफी लोकप्रिय था. बाद में व्यापारी, सैनिक और यात्री इस तरह के व्यंजन को अपने साथ दूसरे इलाकों तक ले गए. (इमेज AI)

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व्यापार मार्गों से भारत तक पहुंची यह डिश: इतिहासकारों के अनुसार फारस से यह व्यंजन धीरे-धीरे मध्य एशिया के कई शहरों से गुजरते हुए अफगानिस्तान पहुंचा. इस दौरान इसमें स्थानीय स्वाद और मसाले भी जुड़ते गए. अलग-अलग क्षेत्रों में इसे अपनी पसंद के अनुसार बदला गया, जिससे इसका स्वाद और भी खास बनता गया. (इमेज AI)

अफगानिस्तान की कहानी भी है दिलचस्प: एक दूसरी मान्यता के अनुसार 15वीं सदी में अफगानिस्तान के हेरात और काबुल में चावल और मांस से बनने वाले शाही व्यंजन काफी लोकप्रिय थे. यहां बनने वाला “काबुली पुलाव” राजघरानों में खास मौके पर परोसा जाता था. इसमें चावल, मटन, गाजर, किशमिश, बादाम और इलायची का इस्तेमाल किया जाता था. (इमेज AI)

जब बाबर 1504 में काबुल पहुंचा तो वह अपने साथ मध्य एशिया और फारस की खानपान परंपराएं भी लेकर आया. बाद में 1526 में भारत आने के बाद इन व्यंजनों में भारतीय मसाले और बासमती चावल जुड़ गए. माना जाता है कि यहीं से बिरयानी का भारतीय रूप धीरे-धीरे विकसित हुआ. (इमेज AI)

क्या मुगलों ने बनाई भारतीय बिरयानी? एक और मान्यता यह कहती है कि बिरयानी का विकास भारत में मुगल काल के दौरान हुआ. माना जाता है कि सैनिकों के लिए एक ऐसा भोजन तैयार किया जाता था जिसमें चावल और उपलब्ध मांस को एक साथ पकाकर पौष्टिक और पेट भरने वाला खाना बनाया जाता था. समय के साथ यही साधारण भोजन शाही रसोई तक पहुंच गया. मुगल रसोइयों ने इसमें केसर, मेवे, खुशबूदार मसाले और दम पकाने की तकनीक जोड़ दी. इसके बाद बिरयानी राजघरानों की पसंदीदा डिश बन गई. (इमेज AI)

क्या दक्षिण भारत में पहले से मौजूद था ऐसा व्यंजन? कुछ इतिहासकार इससे भी पुरानी कहानी बताते हैं. उनके अनुसार करीब दूसरी शताब्दी में वर्तमान तमिलनाडु क्षेत्र में सैनिकों के लिए चावल, घी, मांस, काली मिर्च और तेजपत्ते से बना एक व्यंजन तैयार किया जाता था. हालांकि इसे आधुनिक बिरयानी नहीं कहा जा सकता, लेकिन कई विशेषज्ञ इसे बिरयानी के शुरुआती रूपों में से एक मानते हैं. (इमेज AI)

लखनऊ और हैदराबाद ने दी नई पहचान: बिरयानी चाहे जहां से आई हो, लेकिन भारत में इसे सबसे ज्यादा पहचान अवध और हैदराबाद की रसोई से मिली. लखनऊ की बिरयानी अपने हल्के मसालों और नफासत के लिए मशहूर हुई, जबकि हैदराबादी बिरयानी ने तीखे मसालों, केसर और दम पकाने की शैली से अपनी अलग पहचान बनाई. इसके बाद भारत के अलग-अलग राज्यों में स्थानीय स्वाद के अनुसार बिरयानी के कई रूप तैयार हुए. आज कोलकाता, मालाबार, अंबूर, डिंडीगुल, सिंधी और कई दूसरी बिरयानियां अपनी अलग पहचान रखती हैं. (इमेज AI)

आखिर बिरयानी की असली जन्मभूमि कौन सी है? इतिहास में उपलब्ध जानकारियों को देखें तो किसी एक देश को बिरयानी का निश्चित जन्मस्थान कहना मुश्किल है. कई विशेषज्ञ मानते हैं कि इसकी शुरुआत फारस में हुई, अफगानिस्तान और मध्य एशिया से होते हुए यह भारत पहुंची और यहां आकर भारतीय मसालों, बासमती चावल और स्थानीय स्वाद के साथ इसका नया रूप तैयार हुआ. वहीं कुछ इतिहासकार मानते हैं कि भारत में पहले से मौजूद चावल और मांस के व्यंजनों ने भी इसके विकास में अहम भूमिका निभाई. यानी आज जिस बिरयानी को हम जानते हैं, वह कई संस्कृतियों, व्यापार मार्गों और शाही रसोइयों की साझा विरासत मानी जा सकती है. (इमेज AI)

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किशनगंज में सरकारी अनाज की चोरी का आरोप: मुख्य सड़क पर गाड़ियों को रोककर बोरे से निकाला जा रहा राशन – Kishanganj (Bihar) News




किशनगंज जिले में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत भेजे जा रहे सरकारी अनाज की कथित चोरी का मामला सामने आया है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि ठाकुरगंज-किशनगंज मुख्य सड़क पर टेंगरमारी स्थित इंडियन ऑयल पेट्रोल पंप के पास और अन्य कई स्थानों पर अनाज ले जा रहे ट्रकों और ट्रैक्टरों को रोककर बोरों से अनाज निकाला जा रहा है। आरोप है कि सरकारी गोदाम से अनाज निकलने के बाद पिपलाचौक, गाछपाड़ा चौक, टावर चौक, सालकी चौक और बेलवा चौक जैसे स्थानों पर वाहनों को बीच रास्ते में रोका जाता है। बोरों से कुछ मात्रा में अनाज निकाल लेते हैं चोर स्थानीय लोगों के अनुसार, इस काम में शामिल लोग मोटरसाइकिल पर सवार होकर विभिन्न चौक-चौराहों पर पहले से मौजूद रहते हैं और सरकारी अनाज से लदे वाहन आते ही उन्हें रोककर बोरों से कुछ मात्रा में अनाज निकाल लेते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि यदि प्रत्येक वाहन से थोड़ी-थोड़ी मात्रा में अनाज निकाला जाए, तो कुल मिलाकर बड़ी मात्रा में सरकारी राशन की हेराफेरी हो सकती है। इससे लाभुकों तक पहुंचने वाले अनाज की मात्रा प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। कड़ी कार्रवाई करने की मांग की हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। इस मामले को लेकर प्रशासन या आपूर्ति विभाग की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। स्थानीय लोगों ने जिला प्रशासन से पूरे मामले की जांच कराने, संबंधित मार्गों पर निगरानी बढ़ाने और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करने की मांग की है। यदि ये आरोप सही पाए जाते हैं, तो यह सार्वजनिक वितरण प्रणाली की पारदर्शिता और खाद्य सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़ा कर सकता है।



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बस का एक्सल टूटा, बोलेरो से टकराई; तीन घायल: ब्यौहारी-रीवा मार्ग पर हादसा, गाड़ी का अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त; क्रेन की मदद से हटाए वाहन – Shahdol News




शहडोल जिले के खमडांड गांव स्थित मऊ पावर स्टेशन के पास एक बस और बोलेरो की आमने-सामने टक्कर हो गई। हादसे में तीन लोग घायल हुए हैं, जिन्हें इलाज के लिए तुरंत अस्पताल पहुंचाया गया है। रीवा से ब्यौहारी आ रही बस का अचानक टूटा एक्सल पुलिस के अनुसार, दीपक बस रीवा से ब्यौहारी की ओर आ रही थी, जबकि बोलेरो ब्यौहारी से रीवा की तरफ जा रही थी। खमडांड के पास अचानक बस का एक्सल टूट गया, जिससे बस अनियंत्रित होकर सामने से आ रही बोलेरो से जा टकराई। बोलेरो का अगला हिस्सा क्षतिग्रस्त टक्कर इतनी भीषण थी कि बोलेरो का अगला हिस्सा बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया। ब्यौहारी थाना प्रभारी जिया उल हक ने बताया कि अस्पताल में भर्ती तीनों घायलों की हालत सामान्य है और वे खतरे से बाहर हैं। क्रेन की मदद से हटाए गए वाहन, ब्यौहारी-रीवा मार्ग पर यातायात शुरू हादसे के बाद ब्यौहारी-रीवा मार्ग पर कुछ समय के लिए आवाजाही ठप हो गई थी। ब्यौहारी थाना पुलिस ने मौके पर पहुंचकर दोनों क्षतिग्रस्त वाहनों को रास्ते से हटवाया और बंद पड़े यातायात को सुचारू रूप से बहाल कराया। बसों की नियमित फिटनेस जांच की मांग स्थानीय निवासियों ने हादसों को रोकने के लिए यात्री बसों की नियमित फिटनेस जांच कराने की मांग की है। ब्यौहारी पुलिस मामले की विस्तृत जांच कर रही है और जांच के आधार पर आगे की वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।



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वर्ल्ड अपडेट्स: अमेरिका में F-35B फाइटर जेट क्रैश; पायलट सुरक्षित बाहर निकलने में कामयाब




अमेरिका के सैन डिएगो में शुक्रवार सुबह मरीन कॉर्प्स का F-35B फाइटर जेट मिरामार एयर बेस के पास क्रैश हो गया। हादसे के बाद विमान में आग लग गई, जिसे दमकलकर्मियों ने बुझा दिया। मरीन कॉर्प्स के मुताबिक, पायलट समय रहते इजेक्ट कर सुरक्षित बाहर निकल आया। उसे मामूली चोटें आई हैं और इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अधिकारियों ने इस हादसे को ‘क्लास A मिसहैप’ घोषित किया है। यह सैन्य विमान हादसों की सबसे गंभीर श्रेणी होती है। इसमें विमान पूरी तरह नष्ट हो जाए, 20 लाख डॉलर (करीब 17 करोड़ रुपये) से ज्यादा का नुकसान हो या किसी सैनिक की मौत हो जाए। एक F-35B फाइटर जेट की कीमत करीब 109 मिलियन डॉलर (करीब 950 करोड़ रुपये) बताई जाती है। क्यों खास है F-35B? F-35B अमेरिका का एडवांस्ड स्टील्थ फाइटर जेट है। इसकी सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह कम दूरी से उड़ान भर सकता है और हेलीकॉप्टर की तरह सीधा उतर (वर्टिकल लैंडिंग) भी सकता है। इसका इस्तेमाल अमेरिकी मरीन कॉर्प्स, नेवी और एयर फोर्स करती हैं। यह पिछले एक महीने में अमेरिकी मरीन कॉर्प्स के F-35B से जुड़ा दूसरा बड़ा हादसा है। इससे पहले वॉशिंगटन में भी एक F-35B जेट दुर्घटनाग्रस्त हुआ था। अब इस नए हादसे की जांच शुरू कर दी गई है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी ये खबरें भी पढ़ें… रूस ने यूक्रेन पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया; 4 की मौत, 15 घायल रूस ने शनिवार सुबह यूक्रेन की राजधानी कीव पर बैलिस्टिक मिसाइलों से हमला किया। स्थानीय अधिकारियों के मुताबिक, हमले में कम से कम 4 लोगों की मौत हुई है, जबकि 15 लोग घायल हुए हैं। घायलों में 13 और 17 साल के दो किशोर भी शामिल हैं। कीव के मेयर विताली क्लिट्स्को ने टेलीग्राम पर लोगों से तुरंत बंकरों में जाने की अपील की। प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, शहर में कुछ ही मिनटों के भीतर 10 से ज्यादा धमाके हुए, जिससे कई इलाकों में कारों के अलार्म बजने लगे। संयुक्त राष्ट्र ने हाल ही में कहा था कि जून 2026 यूक्रेन में नागरिकों के लिए अप्रैल 2022 के बाद सबसे घातक महीना रहा। इसकी वजह रूस की ओर से मिसाइल और ड्रोन हमलों में आई तेजी बताई गई। वहीं, यूक्रेन भी हाल के महीनों में रूस के अंदर जवाबी हमले तेज कर चुका है। दोनों देशों के बीच चार साल से ज्यादा समय से युद्ध जारी है।



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Petrol-Diesel Price: LPG गैस के दाम में भारी गिरावट, क्या अब पेट्रोल-डीजल की है बारी?


LPG Price Today: ईरान संकट के बीच देशवासियों को सुबह-सुबह खुशखबरी मिली है. महीने के पहले दिन ही महंगाई से बड़ी राहत मिली है. जी हां, दिल्ली से लेकर पटना-कोलकाता तक एलपीजी गैस के दाम में बड़ी गिरावट हुई है. 1 अगस्त को 19 किलो वाले करमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में 200 रुपए से अधिक की कटौती हुई है. यह नई कीमतें आज से लागू हो गई हैं. हालांकि, घरेलू रसोई में इस्तेमाल होने वाले 14.2 किलो के घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है.

समाचार एजेंसी एएनआई के मुताबिक, कोलकाता में 19 किलो वाले कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर की कीमत 209 रुपये घटाई गई है. वहीं, दिल्ली में इसकी कीमत 202 रुपये कम हुई है. इस कटौती के बाद कोलकाता में 19 किलो का कमर्शियल सिलेंडर अब 2,872.50 रुपये में मिलेगा. नए रेट के हिसाब से, दिल्ली में अब 19 किलो वाला कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर अब ₹2,728 रुपये में मिलेगा. यहां ध्यान देने वाली बात है कि पहले इसका रेट ₹2,930 था.

कमर्शियल एलपीजी सिलेंडल के दाम कमने से क्या फायदा?

कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर के दाम घटने का सीथा असर कारोबारियों पर पड़ता है. कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर का इस्तेमाल मुख्य रूप से होटल, रेस्तरां, ढाबों, कैटरिंग कारोबार और अन्य व्यावसायिक संस्थानों में किया जाता है. ऐसे में कीमत कम होने से इन कारोबारों की लागत घट सकती है. इससे छोटे व्यापारियों और होटल उद्योग को राहत मिलने की उम्मीद है. हालांकि, आम लोगों के लिए फिलहाल डायरेक्ट कोई राहत नहीं है. कारण कि आप और हम जिस घरेलू एलपीजी सिलेंडर का यूज करते हैं, उसकी कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है. यानी घरों में इस्तेमाल होने वाले गैस सिलेंडर पहले की कीमत पर ही मिलेंगे.

क्या पेट्रोल-डीजल के दाम घटेंगे?

लेकिन कमर्शियल सिलेंडर की कीमतों में कमी से एक संकेत की आहट सुनाई दे रही है. वह यह कि क्या घरेलू एलपीजी सिलेंडर के भी दाम घटेंगे? क्या कमर्शियल एलपीजी गैस के दाम में कमी के बाद अब पेट्रोल-डीजल की बारी है? जिस तरह से कमर्शियल गैस की कीमतों में कमी हुई है, उससे यह उम्मीद की जा सकती है कि आने वाले दिनो में पेट्रोल-डीजल के दाम कम हो सकते हैं. इसकी एक वजह यह भी है कि ग्लोबल मार्केट में क्रूड ऑयल के दाम कम हुए हैं. बहरहाल, यहां स्पष्ट करना जरूरी है कि तेल कंपनियों या सरकार की ओर से पेट्रोल-डीजल के दाम घटाने को लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है.

कैसे तय होती हैं पेट्रोल-डीजल की कीमतें

दरअसल, पेट्रोल और डीजल की कीमतें कई कारकों पर निर्भर करती हैं. इनमें ग्लोबल बाजार में कच्चे तेल की कीमत, डॉलर के मुकाबले रुपए की स्थिति और टैक्स समेत अन्य खर्च शामिल हैं. इसलिए कमर्शियल एलपीजी की कीमत घटने का मतलब यह नहीं है कि पेट्रोल और डीजल के दाम भी तुरंत कम हो जाएंगे. सरका ग्लोबल मार्केट के पैटर्न को पहले समझेगी. कच्चे तेल की कीमतों का हिसाब लगाएगी, तब जाकर ही सस्ता-महंगा का हिसाब हो पाएगा. फिलहाल, यह तो सबके मन में है ही कि क्या आने वाले दिनों में आम लोगों को भी पेट्रोल, डीजल या घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमतों में राहत मिलेगी?



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आज 20 जिलों में तेज बरसात की चेतावनी: जालोर और सिरोही में भारी बारिश का अलर्ट; जैसलमेर-कोटा में एक इंच से ज्यादा पानी बरसा – Jaipur News


राजस्थान में बारिश का दौर थोड़ा धीमा पड़ गया है। हालांकि, मौसम विभाग ने शनिवार को जालोर और सिरोही में भारी बारिश का ऑरेंज अलर्ट जारी किया है। वहीं, 18 जिलों में यलो अलर्ट है।

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शुक्रवार को राज्य के अधिकांश हिस्सों में मौसम साफ रहा। जैसलमेर दिनभर सबसे गर्म रहा, लेकिन यहां एक इंच से ज्यादा पानी भी बरसा। पिछले 24 घंटे में सबसे ज्यादा बरसात कोटा के मंडाना में 44 मिमी दर्ज की गई।

इसके अलावा जयपुर सहित 8 जिलों में भी हल्की बारिश हुई। मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में बारिश का दौर धीमा हो गया। 3 अगस्त से मानसून के कमजोर होने की भी आशंका है।

राजस्थान में बारिश की स्थिति

मानसून के बड़े अपडेट्स

कहां-कहां हुई बारिश: शुक्रवार को कोटा, प्रतापगढ़ और सिरोही में हल्की से मध्यम बारिश हुई, जबकि जालोर, जयपुर, दौसा, बाड़मेर, अलवर और भरतपुर के क्षेत्रों में कहीं-कहीं हल्की बौछारें पड़ीं। वहीं प्रतापगढ़ के दलोत और सिरोही के रेवदर में 20-20 मिमी, बाड़मेर के धोरीमन्ना में 16, जालोर के जसवंतपुरा में 15 और बाड़मेर के रामसर में 13 मिमी बारिश हुई। प्रदेश में अब तक मानसून की बारिश सामान्य से 11 फीसदी कम हुई है।

भारी बारिश की भी आशंका: मौसम विज्ञान केन्द्र, जयपुर के निदेशक राधेश्याम शर्मा ने बताया कि 2 अगस्त तक दक्षिणी राजस्थान के उदयपुर और जोधपुर संभाग के कुछ हिस्सों में मध्यम से भारी बारिश हो सकती है। वहीं जयपुर, कोटा, अजमेर और बीकानेर संभाग के कुछ इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश दर्ज होने की संभावना है।

जैसलमेर में पारा 41 डिग्री के पार: राजस्थान के पश्चिमी जिलों में बारिश की गतिविधियां धीमी पड़ने से गर्मी और उमस बढ़ गई है। शनिवार को जैसलमेर में दिन का अधिकतम तापमान 41.8 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। इसके अलावा बाड़मेर में 40.4 डिग्री सेल्सियस तापमान दर्ज हुआ।

कमजोर पड़ सकता है मानसून: मौसम विशेषज्ञों के अनुसार, 3 अगस्त से मानसून ट्रफ लाइन के सामान्य से उत्तर की ओर खिसकने की संभावना है, जिससे बारिश की गतिविधियां मुख्य रूप से उत्तरी भागों में केंद्रित हो जाएंगी। इसके कारण राज्य में मानसून के कमजोर पड़ने के आसार हैं।

राजस्थान के मौसम से जुड़ी PHOTOS…

बाड़मेर में शुक्रवार को बारिश के बाद सड़कों पर पानी बहने लगा।

बाड़मेर में शुक्रवार को बारिश के बाद सड़कों पर पानी बहने लगा।

जैसलमेर में दोपहर बाद तेज बरसात हुई। जिले में इस साल मानसून काफी कमजोर रहा।

जैसलमेर में दोपहर बाद तेज बरसात हुई। जिले में इस साल मानसून काफी कमजोर रहा।

ये शहर सबसे ज्यादा गर्म

आगे कैसा रहेगा मौसम

बड़े शहरों के मौसम का हाल

जयपुर: राजधानी में शुक्रवार को ग्रामीण इलाकों में बादल छाने के साथ कहीं-कहीं हल्की बारिश और बूंदाबांदी हुई। वहीं जयपुर शहर के कुछ हिस्सों में हल्की बूंदाबांदी हुई। बादलों की मौजूदगी के कारण जयपुर में अधिकतम तापमान गिरकर 32.4 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड हुआ।

जयपुर में शुक्रवार को तेज हवा के साथ बारिश हुई, लेकिन इसके बाद भी जिले में उमस और गर्मी बनी रही।

जयपुर में शुक्रवार को तेज हवा के साथ बारिश हुई, लेकिन इसके बाद भी जिले में उमस और गर्मी बनी रही।

अलवर: जिले में शुक्रवार सुबह से ही बादलों का डेरा रहा। दोपहर बाद शहर समेत जिले के कई इलाकों में रुक-रुककर बारिश का दौर चला, जिससे आमजन को भीषण गर्मी और उमस से काफी राहत मिली। अधिकतम तापमान 33 डिग्री सेल्सियस रह। मौसम विभाग ने अगले तीन दिनों तक जिले में तेज बारिश का यलो अलर्ट जारी किया है।

अलवर में बारिश के बाद मौसम सुहावना रहा। जिले में आगे भी अच्छी बारिश की संभावना है।

अलवर में बारिश के बाद मौसम सुहावना रहा। जिले में आगे भी अच्छी बारिश की संभावना है।

कोटा: जिले में लगातार दूसरे दिन हल्की बारिश हुई। हालांकि, गर्मी-उमस का असर बढ़ गया। शुक्रवार को कोटा के तापमान में हल्की बढ़ोतरी दर्ज हुई। अधिकतम तापमान 33.4 डिग्री और न्यूनतम तापमान 27.4 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग के अनुसार बीते 24 घंटों में 4.5 मिमी बारिश रिकॉर्ड की गई।

कोटा में शुक्रवार को मौसम साफ रहा। हालांकि, शाम को हवा चलने से मौसम सुहावना हो गया।

कोटा में शुक्रवार को मौसम साफ रहा। हालांकि, शाम को हवा चलने से मौसम सुहावना हो गया।

उदयपुर: लेकसिटी में तापमान में बढ़ोतरी के साथ ही उमस बढ़ गई है। शुक्रवार दोपहर करीब 12:30 बजे शहर के कुछ इलाकों में हल्की बारिश हुई। मौसम विभाग ने क्षेत्र में तेज बारिश का अलर्ट तो जारी किया है। जिले में अधिकतम तापमान 33.2 डिग्री और न्यूनतम तापमान 26.3 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया।

उदयपुर में शुक्रवार को बार-बार मौसम बदलता रहा। तेज उमस के बीच हल्की बारिश भी हुई।

उदयपुर में शुक्रवार को बार-बार मौसम बदलता रहा। तेज उमस के बीच हल्की बारिश भी हुई।

अजमेर: जिले में देर रात हुई हल्की बारिश के बावजूद शुक्रवार सुबह तेज धूप निकल आई, जिससे दिनभर लोग उमस और गर्मी से बेहाल रहे। जिले में अधिकतम तापमान 33.7 डिग्री और न्यूनतम तापमान 25.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। हवा में नमी का स्तर (सापेक्षिक आर्द्रता) सुबह 85 प्रतिशत और शाम को 59 प्रतिशत रिकॉर्ड किया गया।

अजमेर में बारिश के बाद उमस रही, लेकिन बारिश के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई है।

अजमेर में बारिश के बाद उमस रही, लेकिन बारिश के कारण तापमान में गिरावट दर्ज की गई है।

सीकर: जिले में शुक्रवार सुबह से ही तीखी धूप खिली रही, जिससे लोग गर्मी से परेशान दिखे। जिले में पिछले दो दिनों से मौसम साफ है। अधिकतम तापमान 36.0 डिग्री और न्यूनतम तापमान 26.9 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विशेषज्ञों के अनुसार 2 अगस्त से मानसूनी गतिविधियां फिर से बढ़ सकती हैं।

सीकर में गुरुवार को बादल छाए रहे, इससे जिले में गर्मी ओर उमस असर भी कम रहा।

सीकर में गुरुवार को बादल छाए रहे, इससे जिले में गर्मी ओर उमस असर भी कम रहा।

जोधपुर: जिले में शुक्रवार को मौसम मिला-जुला रहा। जिले के कुछ हिस्सों में बारिश हुई और आसमान में बादल छाए रहे। जोधपुर में अधिकतम तापमान 37.2 डिग्री और न्यूनतम तापमान 29.0 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। मौसम विभाग के अनुसार आने वाले दिनों में जिले में अच्छी बारिश देखने को मिल सकती है।

जोधपुर शहर में सुबह से बादल छाए रहे। शुक्रवार को शहर के अलग-अलग इलाकों में हल्की बरसात हुई थी।

जोधपुर शहर में सुबह से बादल छाए रहे। शुक्रवार को शहर के अलग-अलग इलाकों में हल्की बरसात हुई थी।



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पासपोर्ट आवेदकों के लिए आज विशेष सेवा अभियान: लखनऊ क्षेत्र के 4 पीएसके और 33 पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र करेंगे काम – Lucknow News




पासपोर्ट बनवाने या उससे जुड़ी सेवाएं लेने वाले आवेदकों के लिए शनिवार को विशेष सुविधा उपलब्ध रहेगी। क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय ने एक अगस्त को विशेष पासपोर्ट सेवा अभियान चलाने का फैसला किया है। इसके तहत अवकाश के दिन भी लखनऊ क्षेत्र के सभी पासपोर्ट सेवा केंद्र और पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र खुले रहेंगे। 5500 अतिरिक्त ऑनलाइन अपॉइंटमेंट स्लॉट जारी क्षेत्रीय पासपोर्ट अधिकारी ज्ञानवीर सिंह ने बताया कि अभियान के दौरान आवेदकों की सुविधा के लिए करीब 5500 अतिरिक्त ऑनलाइन अपॉइंटमेंट स्लॉट जारी किए गए हैं। लखनऊ क्षेत्र के चार पासपोर्ट सेवा केंद्र (पीएसके) और 33 पोस्ट ऑफिस पासपोर्ट सेवा केंद्र (पीओपीएसके) में पासपोर्ट संबंधी सेवाएं दी जाएंगी। इच्छुक आवेदक पासपोर्ट सेवा पोर्टल पर ऑनलाइन अपॉइंटमेंट बुक कर इस सुविधा का लाभ उठा सकते हैं। 17 अगस्त से शिकायत व्यवस्था में बदलाव क्षेत्रीय पासपोर्ट कार्यालय ने जन शिकायत निवारण प्रणाली में भी बदलाव किया है। अब 17 अगस्त से केवल वही आवेदक अपनी शिकायत दर्ज करा सकेंगे, जिन्होंने पहले से ऑनलाइन अपॉइंटमेंट लिया होगा। बिना ऑनलाइन समय लिए आने वाले लोगों की शिकायतें नहीं सुनी जाएंगी। कार्यालय का कहना है कि नई व्यवस्था से शिकायतों के निस्तारण की प्रक्रिया अधिक व्यवस्थित और सुगम होगी।



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