Thursday, May 28, 2026
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श्रीगंगानगर में नमाजियों ने एक साथ झुकाए सिर: पुरानी आबादी ईदगाह में ईद-उल-अजहा की नमाज अदा की गई, बकरों के दाम हुए महंगे – Sriganganagar News




श्रीगंगानगर में ईद-उल-अजहा के मौके पर गुरुवार सुबह पुरानी आबादी स्थित ईदगाह में रौनक छाई रही। सुबह 7:30 बजे मुस्लिम समाज के लोगों ने सामूहिक रूप से ईद की नमाज अदा की। नमाज के दौरान सैकड़ों सिर एक साथ सजदे में झुक गए। नमाज के बाद लोगों ने एक-दूसरे को गले लगाकर ईद की मुबारकबाद दी। ईद की खुशी पूरे शहर में छाई रही। समुदाय के लोगों ने अपने-अपने घरों में ईद की दावत भी दी। इस बार कुर्बानी के बकरों की खरीदारी में खासी तेजी रही। गोल बाजार और पुरानी आबादी के इलाकों में बकरों की चहल-पहल देखी गई। व्यापारियों ने बताया कि पिछले साल जो बकरा 10 से 15 हजार रुपए में आसानी से उपलब्ध हो जाता था, उसी की कीमत इस बार 20 से 30 हजार रुपए तक पहुंच गई है। इसके अलावा ईद के स्वाद को पूरा करने के लिए लोगों ने सेवई, फेनी, ताजे फल और सूखे मेवों की भरपूर खरीदारी की। बाजारों में सुबह से ही चहल-पहल रही। शहरवासियों ने इस मौके पर शांति, सद्भाव और भाईचारे का संदेश भी दिया।



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‘ईद-उल-अजहा की सभी को बधाई’, राष्‍ट्रपति मुर्मु और पीएम मोदी का पैगाम


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‘ईद-उल-अजहा की सभी को बधाई’, राष्‍ट्रपति मुर्मु और पीएम मोदी का पैगाम

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Eid ul-Adha Bakrid 2026: आज यानी 28 मई 2026 को देशभर में ईद-उल-अजहा का त्‍योहार हर्षोल्‍लास से मनाया जा रहा है. इस मौके पर राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को बधाई दी है.

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राष्‍ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को ईद-उल-अजहा यानी बकरीद की बधाई दी है. (फाइल फोटो)

नई दिल्ली. ईद-उल-अजहा (बकरीद) के अवसर पर राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देशवासियों को बधाई दी. बकरीद को समर्पण, त्याग और बलिदान का प्रतीक बताते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि यह पर्व हमें मानवता की सेवा करने की प्रेरणा देता है. राष्ट्रपति भवन के आधिकारिक एक्स हैंडल ने एक पोस्ट में लिखा, ‘ईद-उल-अजहा के अवसर पर मैं सभी देशवासियों, विशेषकर मुस्लिम भाइयों और बहनों को हार्दिक शुभकामनाएं देती हूं. यह त्योहार समर्पण, त्याग और बलिदान का प्रतीक है. यह पर्व हमें मानवता, विशेषकर वंचित वर्गों, की सेवा करने की प्रेरणा देता है. आइए, इस अवसर पर हम समाज में प्रेम और समरसता का संचार करने के लिए अधिक प्रतिबद्धता से आगे बढ़ें.’

वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक्स पोस्ट में लिखा, ‘ईद-उल-अजहा की शुभकामनाएं. कामना है कि यह अवसर हमारे समाज में भाईचारे और खुशियों की भावना को और गहरा करे. सभी की सफलता और अच्छे स्वास्थ्य के लिए प्रार्थना.’ इससे पहले, देश के कई अन्य नेताओं ने भी एक्स पोस्ट के जरिए देशवासियों को बकरीद की शुभकामनाएं दी.

केरल के मुख्‍यमंत्री ने दी बधाई

केरल के मुख्यमंत्री वीडी सतीशन ने लिखा, ‘बकरीद त्याग और निस्वार्थ भक्ति का शाश्वत संदेश लेकर आती है. इसके द्वारा पोषित मूल्य हमारे दैनिक जीवन में झलकने चाहिए और समाज को मानवता तथा करुणा की ओर अग्रसर करना चाहिए. हमारी इन उत्सवों की आध्यात्मिक रोशनी हमें हर चुनौती का सामना साहस और आशा के साथ करने की शक्ति प्रदान करे. आप सभी को ईद मुबारक.’



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‘तमाशा’ देख युवाओं ने छोड़ी नौकरी! 11 साल बाद बोले इम्तियाज अली- गिल्ट होता है


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2015 में रिलीज हुई रणबीर कपूर और दीपिका पादुकोण की फिल्म ‘तमाशा’ वक्त के साथ युवाओं के बीच कल्ट फिल्म बन गई. इस फिल्म ने कई लोगों को अपनी पहचान और अधूरी जिंदगी पर सोचने के लिए मजबूर किया. अब निर्देशक इम्तियाज अली ने खुलासा किया है कि फिल्म देखने के बाद कई युवाओं ने इंजीनियरिंग और कॉर्पोरेट जैसी अच्छी नौकरियां छोड़कर राइटिंग और आर्ट की दुनिया चुन ली. इसे लेकर इम्तियाज ने कहा कि उन्हें ‘गिल्ट’ महसूस होता है. उनका कहना है कि अगर ये लोग सफल नहीं हुए तो उनकी नाकामी और संघर्ष के लिए वो खुद को जिम्मेदार मानेंगे. यही डर उन्हें आज भी परेशान करता है.

नई दिल्ली. ‘जब वी मेट’, ‘लव आज कल’, ‘रॉकस्टार’, ‘हाईवे’, ‘तमाशा’, ‘जब हैरी मेट सेजल’ और ‘अमर सिंह चमकीला’ जैसी फिल्मों के साथ बॉलीवुड इंडस्ट्री में अपनी खास जगह बनाने वाले फिल्ममेकर इम्तियाज अली एक बार फिर सुर्खियों में हैं. जल्द उनकी नई फिल्म ‘मैं वापस आउंगा’ रिलीज होने वाली हैं. हाल ही में उन्होंने अपनी 11 साल पहले रिलीज हुई उस फिल्म पर बात की, जिसके लिए उन्हें आज भी गिल्ट होता है. ये फिल्म है साल 2015 में आई ‘तमाशा’. ये एक ऐसी रोमांटिक ड्रामा रिलीज हुई जो बेकार प्रमोशन के चलते फ्लॉप हो गई, लेकिन बाद में इसे कल्ट का दर्जा मिला.

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फिल्म ‘तमाशा’ ने कई युवाओं की जिंदगी को भी प्रभावित किया. फिल्म के डायरेक्टर इम्तियाज अली ने खुलकर माना है कि फिल्म देखकर कई युवाओं ने अपनी अच्छी-खासी नौकरियां छोड़ दीं, जिसके लिए उन्हें बेहद गिल्ट महसूस होता है. न्यूज18 से एक्सक्लूसिव बातचीत में इम्तियाज अली ने कहा कि वे उन युवाओं की सफलता की दुआ करते हैं, लेकिन अगर वे संघर्ष में फंस गए तो पूरा परिवार प्रभावित होगा और इसके लिए उन्हें खुद को जिम्मेदार मानते हैं.

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2015 में रिलीज हुई रणबीर कपूर और दीपिका पादुकोण स्टारर फिल्म ‘तमाशा’ को उस वक्त मिली-जुली प्रतिक्रियाएं मिली थीं और बॉक्स ऑफिस पर भी औसत प्रदर्शन रहा था. लेकिन समय के साथ यह फिल्म कल्ट स्टेटस हासिल कर चुकी है. रणबीर कपूर के किरदार वेद के जरिए फिल्म ने पारंपरिक हीरो इमेज को तोड़ते हुए एक्सटेंशन क्राइसिस, पहचान और असंतोषजनक करियर की कहानी को रोमांटिक कहानी के रूप में पेश किया. इस कहानी का खासकर शहरी मिलेनियल्स पर इसका गहरा प्रभाव पड़ा. कई लोग मजाक में कहते हैं कि इस फिल्म ने पूरी पीढ़ी को अपनी प्रोफेशन छोड़ने के लिए प्रेरित किया.

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इम्तियाज अली ने हाल ही में बोमन इरानी के ‘स्पाइरल बाउंड’ राइटर्स कन्वेंशन में हिस्सा लिया. वहां कई नए लेखकों ने उनसे मुलाकात की और बताया कि उन्होंने ‘तमाशा’ देखने के बाद अपनी जॉब्स छोड़ दीं और अब लेखन के क्षेत्र में आ गए हैं. इम्तियाज ने कहा, ‘मुझे बेहद गिल्टी फील हुआ. मेरा तुरंत मन में ख्याल आया कि काश वे सफल हो जाएं.’

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उन्होंने आगे कहा, ‘अगर वे सफल नहीं हुए तो मैं उनके जीवन की विफलता के लिए जिम्मेदार बन जाऊंगा. न सिर्फ उस व्यक्ति के लिए, बल्कि उनके पूरे परिवार के लिए. उनकी पत्नियां, बच्चे और खासकर माता-पिता. उनके माता-पिता की आकांक्षा होती है कि मेरा बेटा इंजीनियर बनेगा और आगे अमेरिका में काम करेगा.’ इम्तियाज अली ने कहा कि मुंबई में हर कलाकार को शुरुआती संघर्ष से गुजरना पड़ता है. वे अपनी आकर्षक प्रोफेशन छोड़कर कलाकार बनने की राह पर निकले हैं. मैं मिक्स्ड फीलिंग्स रखता हूं. एक तरफ खुशी है कि वे अपना सपना पूरा कर रहे हैं, दूसरी तरफ जिम्मेदारी का बोझ भी है.’

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फिल्ममेकर ने आगे कहा कि मैं उन सबके लिए दुआ करता हूं. अगर मैं उनकी जगह होता तो खुद को खुश ही मानता. मैंने कभी चीजों को बहुत मेथोडिकल, मनी माइंडेड या न तरीके से नहीं सोचा. अंत में मुझे अच्छा लगता है, लेकिन जिम्मेदारी भी महसूस होती है. मैं इन लोगों से एक तरह से जुड़ा हुआ महसूस करता हूं.’

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इम्तियाज अली अब अपनी नई फिल्म ‘मैं वापस आऊंगा’ की रिलीज की तैयारी में हैं, जो 12 जून को रिलीज होने वाली है. फिल्म के बारे में बात करते हुए उन्होंने बताया, ‘इस फिल्म में अतीत की खोज वर्तमान के नजरिए से बहुत बड़ी भूमिका निभाती है. रेमिनिसेंस (यादें) फिल्म का बड़ा हिस्सा हैं. ‘समय के साथ मैंने क्या खो दिया’ यह कॉन्सेप्ट फिल्म का महत्वपूर्ण हिस्सा है. ‘जो मैं याद करता हूं, वही मेरी मौजूदा व्यक्तित्व को बनाता है’.

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उन्होंने कहा कि आज के समय में जब माइग्रेशन बहुत ज्यादा हो रहा है, यह फिल्म प्रासंगिक है. टीवी पर चैनल खोलते ही आपको अलग-अलग देशों में कानूनी और अवैध रूप से हो रहे माइग्रेशन के सीन्स दिखते हैं. खोने का एहसास केवल भौतिक नहीं होता, बल्कि भावनात्मक भी होता है. यह फिल्म उस प्यार के बारे में है जो आप अपने साथ लेकर चलते हैं जब आप एक सीमा पार करते हैं.

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निर्दोष लोग अंधेरे और बंद दरवाजे नहीं खोजते: आजादी के जश्न वाली रात छीनी मासूमियत; पढ़ें- आसाराम केस के फैसले में हाईकोर्ट की 10 टिप्पणी – Jodhpur News


जोधपुर42 मिनट पहलेलेखक: ​कमल वैष्णव

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फाइल फोटो

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पीड़िता का जन्म 4 जुलाई को हुआ था, जो अमेरिका का स्वतंत्रता दिवस है। वह उस तारीख की तरह ही स्वतंत्रता, गरिमा और स्वाभिमान की प्रतीक थी। लेकिन 15 अगस्त 2013 की रात जब पूरा हिंदुस्तान अपनी आजादी का जश्न मना रहा था, ठीक उसी वक्त जोधपुर की एक कुटिया में उस बच्ची की स्वतंत्रता, गरिमा और मासूमियत तीनों एक साथ छीन ली गईं।

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राजस्थान हाईकोर्ट की खंडपीठ ने नाबालिग रेप मामले में बुधवार को आसाराम की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखते हुए 92 पन्नों के फैसले की शुरुआत इन्हीं शब्दों से की। इन शब्दों ने पूरे मामले को बयां कर दिया।

जस्टिस अरुण मोंगा और जस्टिस योगेंद्र कुमार पुरोहित की खंडपीठ ने न केवल अपराधी की सजा बरकरार रखी, बल्कि फैसले के हर पन्ने पर न्याय की ऐसी दार्शनिक व्याख्या की, जो भारतीय न्यायिक इतिहास में दर्ज हो गई है।

31 अगस्त 2013 को पुलिस ने आसाराम को गिरफ्तार किया था। (फाइल फोटो)।

31 अगस्त 2013 को पुलिस ने आसाराम को गिरफ्तार किया था। (फाइल फोटो)।

आइए, फैसले के उन 10 ऐतिहासिक पहलुओं को समझते हैं, जो कोर्ट ने अपने शब्दों में पिरोए हैं।

1. आजादी के जश्न वाली रात छीनी मासूमियत

हाईकोर्ट ने बेहद भावुक शब्दों में कहा कि पीड़िता का जन्म 4 जुलाई को हुआ था, जो स्वतंत्रता का प्रतीक दिन माना जाता है। लेकिन 15 अगस्त 2013 की रात जब पूरा देश आजादी मना रहा था, उसी रात उस बच्ची की आजादी, गरिमा और मासूमियत छीन ली गई। सबसे दर्दनाक बात यह थी कि जिस व्यक्ति को वह भगवान मानती थी, उसी ने उसके विश्वास को तोड़ा।

कोर्ट ने लिखा- “स्वतंत्रता, गरिमा और स्वाभिमान के प्रतीक उस दिन जन्मी बच्ची से- ठीक उसी रात जब भारत अपनी आजादी का जश्न मना रहा था – ये तीनों एक साथ छीन लिए गए। और जिसने यह किया, उसे वह ‘भगवान’ मानती थी।”

2. निर्दोषता कभी अंधेरे और बंद दरवाजे नहीं खोजती

बचाव पक्ष का तर्क था कि कुटिया के अंदर हुई घटना का कोई चश्मदीद गवाह नहीं है। इस पर कोर्ट ने सख्त टिप्पणी करते हुए कहा-

“रात के 10:30 बजे उस कुटिया में केवल दो लोग थे। दरवाजा अंदर से बंद था, कुंडी लगी थी और बत्तियां बुझा दी गई थीं। ऐसे हालात में पीड़िता से किसी तीसरे गवाह की मांग करना – उसे उसी एकांत के लिए दंडित करना (अन्याय) होगा, जो उसके उत्पीड़क (आरोपी) ने जानबूझकर रचा था। आखिर एक धर्मगुरु रात के अंधेरे में एक लड़की को अकेले अपने कमरे में क्यों बुलाएगा? निर्दोषता कभी अंधेरे और बंद दरवाजे नहीं खोजती।”

3. शरणस्थली कैसे बन गई ‘शिकारी का अड्डा’?

पीड़िता की चुप्पी पर समाज का आईना दिखाते हुए कोर्ट ने कहा-

“वह बच्ची उस शख्स के पास शरण मांगने आई थी जिसे वह भगवान मानती थी। वह हाथ जोड़कर आई थी। वह नहीं जानती थी कि जो जगह उसे ‘शरणस्थली’ लग रही थी, वह दरअसल एक ‘शिकारी का अड्डा’ (Hunter’s den) बन चुकी है। रेप केवल शारीरिक अपराध नहीं है, यह समाज की ओर से थोपी गई ‘शर्म’ का बोझ है जो पीड़िता को चुप रहने पर मजबूर करता है।”

4. एफआईआर की ‘व्याकरणिक गलती’ और उर्दू शायरी भी बनी डर की गवाही

पीड़िता ने पहली शिकायत में ‘जबरदस्ती कपड़े उतारे’ को काटकर ‘उतारने लगा’ किया था। हाईकोर्ट ने इसे डर की मनोवैज्ञानिक गवाही माना और न्याय के लिए अमीर मीनाई के शेर का उदाहरण दिया-

“क़रीब है यारो रोज़े महशर, छुपेगा कुश्तों का खून क्यों कर;

जो चुप रहेगी ज़बाने खँजर, लहू पुकारेगा आस्तीं का।”

(अर्थात: अगर कातिल का खंजर खामोश भी रहे, तो आस्तीन पर लगा खून खुद गवाही देगा)। कोर्ट ने इसे ‘न्याय और साहित्य का बेहतरीन संगम’ बताया।

5. याददाश्त कोई ‘तस्वीर’ नहीं है

क्रॉस-एग्जामिनेशन में बयानों के विरोधाभासों को बचाव पक्ष ने झूठ बताया, जिसे कोर्ट ने खारिज कर दिया। इस पर कहा-

“मानवीय धारणा कोई सटीक उपकरण नहीं है। याददाश्त अपने आप में कोई तस्वीर नहीं होती – यह एक जीवंत, लेकिन समय के साथ धुंधली होती छाप है। अगर सच बोलने वाले गवाह छोटी बातों पर लड़खड़ा जाएं, तो वे झूठे नहीं हैं, बल्कि यह उस साधारण इंसान की बची-खुची यादें हैं जिन्हें समय पहले ही मिटाना शुरू कर चुका है।”

6. अंधविश्वास कैसे विवेक पर भारी पड़ता है?

पढ़े-लिखे परिवार द्वारा ‘भूत-प्रेत’ की बात मान लेने पर कोर्ट ने कहा-

“आस्था एक बेहद शक्तिशाली ताकत है – इतनी कि यह सबसे तेज दिमाग वालों के तर्क और विवेक को भी मात दे सकती है। जब कोई व्यक्ति संकट में हो, ठीक ऐसे ही क्षणों में अंधविश्वास को सबसे तैयार श्रोता मिलते हैं।” संकट के समय इंसान सबसे ज्यादा भावनात्मक और कमजोर हो जाता है।

7. ‘50 करोड़ की साजिश’ वाली दलील खारिज

बचाव पक्ष का सबसे बड़ा दावा था कि यह 50 करोड़ रुपए ऐंठने की एक पहले से रची गई साजिश है। कोर्ट ने इस मनगढ़ंत कहानी को खारिज करते हुए लिखा-

“अगर यह पहले से रची गई कोई साजिश होती, तो शिकायतकर्ता आसानी से घटना के तुरंत बाद सीधे जोधपुर में ही रिपोर्ट दर्ज करवा सकते थे। इसके बजाय, वे जोधपुर से जयपुर गए, फिर शाहजहांपुर गए और अंत में वापस दिल्ली आकर जीरो एफआईआर करवाई। यह लंबा रास्ता और यात्रा ही यह साबित करती है कि यह कोई साजिश नहीं थी, बल्कि डर और आम मानवीय परिस्थितियों के तहत उठाया गया एक स्वाभाविक कदम था।’

8. जीवन का ‘पहले’ और ‘बाद’ में बंट जाना

मेंटल ट्रॉमा पर हाईकोर्ट ने लिखा-

“रेप पीड़िता केवल एक घाव नहीं उठाती, वह एक ‘मिटाना’ (Erasure) बर्दाश्त करती है – अपनी पहचान का खत्म करना, जो वह उस पल से पहले थी। इस घिनौने कार्य ने उसके जीवन को हमेशा के लिए ‘पहले’ और ‘बाद’ के दो हिस्सों में बांट दिया है। रेप सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि पीड़िता की पहचान और आत्मसम्मान को मिटा देने वाला अपराध है। इस घटना ने उसके जीवन को हमेशा के लिए “पहले” और “बाद” में बांट दिया।

9. 81 पन्नों की तीखी जिरह के बाद भी नहीं डिगी सच्चाई

आसाराम के बचाव में देश के नामचीन वकीलों ने पीड़िता को झूठा साबित करने के लिए उससे कोर्ट में बेहद तीखे सवाल किए। इसका जिक्र करते हुए कोर्ट ने लिखा-

“पीड़िता से बचाव पक्ष के वकीलों ने बहुत लंबी और विस्तृत जिरह (क्रॉस एग्जामिनेशन) की, जो रिकॉर्ड के 81 पन्नों में दर्ज है। लेकिन इसके बावजूद वह अपनी मुख्य गवाही पर पूरी तरह से अडिग रही। वकीलों के तमाम तीखे सवालों के तीर भी उस बच्ची के मुख्य बयान को हिला नहीं सके, जो इस बात का सबसे बड़ा सबूत है कि वह सच बोल रही है।”

10. अपराधी की कैद बनाम पीड़िता की सजा

जब 86 साल की उम्र का हवाला देकर रियायत की मांग की गई, तो कोर्ट ने कहा-

“आरोपी के लिए कैद सिर्फ शारीरिक है, जिसकी कुछ दीवारें हैं। लेकिन पीड़िता पर जो सजा थोपी गई, उसकी कोई दीवार नहीं है। न कोई वारंट जारी हुआ, न अदालत ने सजा सुनाई। उसकी आत्मा पर लिखी यह सजा उम्रभर की है, जिसमें कोई पैरोल नहीं है।”

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‘भूत का साया’ क्या था, शिल्पी-शरत को क्यों बरी किया:आसाराम की सजा बरकरार, 16 सवालों से जानिए हाईकोर्ट का फैसला

नाबालिग से रेप के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट (जोधपुर मुख्यपीठ) ने आसाराम की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी है। कोर्ट ने आसाराम की अंतरिम जमानत तुरंत रद्द करते हुए सरेंडर करने का आदेश दिया है। साथ ही तत्काल गिरफ्तारी का वारंट भी जारी कर दिया है। (पूरी खबर पढ़ें)

हाईकोर्ट का फैसला-आसाराम को करना होगा सरेंडर, सजा बरकरार:नाबालिग से यौन उत्पीड़न केस में 2 आरोपी बरी, करीब एक महीने बाद सुनाया डिसीजन

राजस्थान हाईकोर्ट (जोधपुर) ने बुधवार (27 मई) सुबह आसाराम की सजा पर फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने नाबालिग से यौन उत्पीड़न के केस में आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। (पूरी खबर पढ़ें)

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लखनऊ में बकरीद पर ₹450 करोड़ के बिके जानवर: 2 लाख लोगों ने बकरे और 1 लाख ने खरीदे बड़े जानवर, रातभर गुलजार रहे बाजार – Lucknow News




ईद-उल-अजहा (बकरीद) लखनऊ में अकीदत के साथ मनाई जा रही है। इस खास मौके पर लोगों ने जमकर जानवरों की खरीदारी की। बकरीद का चांद नजर आने से लेकर बुधवार देर रात तक बकरों की मंडी सजी रही। अरबी कैलेंडर के अनुसार, 1 जिल-हिज्जा को चांद दिखा जिसके बाद लोगों ने बकरों की खरीदारी शुरू कर दी थी, जो कि 9 जिल हिज्जा देर रात तक जारी है। इस बकरीद लगभग 450 करोड़ का व्यापार हुआ। शनिवार देर रात तक बकरा मंडी के साथ शहर के बाजार भी गुलजार रहे। लोगों ने देर रात तक जमकर खरीदारी की। कुर्बानी के लिए इस बार करीब 450 करोड़ से अधिक दुंबा, भेड़, बकरे बिके। बकरों के साथ कपड़े, ड्राई फ्रूट, क्रॉकरी और अन्य चीजें शामिल हैं। देर रात तक मंडियों में खरीदारी होने के साथ ही अमीनाबाद, मौलवीगंज, चौक, अकबरी गेट और नक्खास के बाजारों में भी बकरीद की रौनक छाई रही। बड़े जानवर में 7 लोग करते हैं कुर्बानी ईद-उल-अजहा पर मुसलमान बकरा, दुंबा और भेड़ की कुर्बानी करते हैं । इन छोटे जानवरों पर एक जानवर पर एक ही व्यक्ति के नाम से कुर्बानी होती है। इसके अलावा, इस्लाम में बड़े जानवरों की कुर्बानी की भी इजाजत है। इसमें सात लोगों के हिस्सा लेने की सहूलियत दी गई है। मुसलमान बड़े जानवरों में भैंसा पर सात लोग मिलकर कुर्बानी करते हैं। इन इलाकों के बाजारों में रातभर रही भीड़ आई आई एम रोड स्थित दुबग्गा सबसे बड़ी मंडी लगी थी। इसके अलावा नींबू पार्क, मेहंदी घाट, खदरा और के अलावा शहर के कुछ अलग- अलग हिस्सों में बकरे बिक रहे थे। कुरैश वेलफेयर फाउंडेशन के महासचिव शहाबुद्दीन ने बताया कि 9 दिनों करीब 400 करोड़ रुपए से ज्यादा के बकरे बिक गए। वहीं, बड़े जानवरों में लगभग 1 लाख लोगों ने कुर्बानी के हिस्से लिए हैं। बड़े जानवर की कीमत लगभग 35000 रुपए तक है, इस हिसाब से 50 करोड़ के पड़वों का कारोबार हुआ। बड़ी तादाद में बकरा व्यापारी अपने बकरे मंडी के बाहर सड़क पर घूम-घूमकर भी बेचते रहे हैं। बाजार में 20 हजार से 35 हजार तक औसत कीमत के बकरों की बिक्री ज्यादा हुई है। 3 लाख से ज्यादा लोग करते हैं कुर्बानी शहाबुद्दीन बताते हैं कि शहर में मुसलमानों कि आबादी करीब 8 से 9 लाख है। मुस्लिम आबादी में 40 फीसदी लगभग 3 लाख लोग कुर्बानी करते हैं। ऐसे में अगर एक बकरे की कीमत 20 हजार रुपए मान लें तो 2 लाख लोगों ने बकरों की कुर्बानी दिया कारोबार 400 करोड़ तक पहुंच जाता है। जिससे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलती है। बकरीद का सीधा लाभ किसानों को ग्रामीण इलाके के रहने वालों को मिलता है। लखनऊ में दूर-दराज से व्यापारी और किसान अपना जानवर बेचने आते हैं। शहर में पड़वों की डिमांड बढ़ी कुर्बानी करने वाले इरफान ने बताया कि बकरा थोड़ा महंगा पड़ता है इसलिए बड़े जानवर में हिस्सा ले लेते हैं। अपार्टमेंट में रहने वाले ज्यादातर लोग जगह न होने की वजह से बड़े जानवरों में कुर्बानी का हिस्सा लेते हैं। ऐसे में पड़वों का भी शहर में बड़ा कारोबार होता है। अनुमान के मुताबिक, शहर की मंडियों में करीब 50 करोड़ रुपए से ज्यादा के पड़वे बिक चुके हैं। रातभर बाजार रहे गुलजार अमीनाबाद, नक्खास, खदरा, डालीगंज, निशातगंज की बाजारों में देर रात तक लोग जमे रहे। चूड़ी, कंगन व कपड़ों की दुकानों पर महिलाओं की भीड़ उमड़ी। खानपान का स्वाद लेने वाले भी देर रात तक ईद-उल-अजहा की रौनक का लुत्फ लेते रहे। नक्खास और अकबरी गेट लगभग पूरी रात खुला रहा। यहां चूड़ी-कंगन व कपड़ों के साथ नमाज के लिए कुर्ता-टोपी और सेवईं की खरीदारी के लिए लोगों की भीड़ जुटी रही।



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भारत-नेपाल सीमा पर तस्कर गिरफ्तार: 43.57 ग्राम ब्राउन शुगर, लाखों का कैश और 8 मोबाइल जब्त – Kishanganj (Bihar) News




भारत-नेपाल सीमा से सटे दिघलबैंक क्षेत्र में SSB और कोढ़ोबाड़ी थाना पुलिस ने नशीले पदार्थों की तस्करी के खिलाफ अभियन चलाया। इस दौरान छापेमारी कर भारी मात्रा में ब्राउन शुगर, नगदी और अन्य सामग्री बरामद किया है। साथ ही, एक आरोपी को गिरफ्तार किया है। एसएसबी जी कंपनी सिंघीमारी और कोढ़ोबाड़ी थाना पुलिस की संयुक्त टीम ने सामेद टोला निवासी जान मोहम्मद (पिता अब्दुल सामेद) के घर पर सघन छापेमारी की। तलाशी के दौरान टीम ने 43.57 ग्राम ब्राउन शुगर बरामद की, जिसकी अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमत लाखों रुपए बताई जा रही है। छापेमारी के दौरान पुलिस ने मौके से 62,900 भारतीय रुपए, 17,200 नेपाली मुद्रा, 11 कतरी रियाल और 8 मोबाइल फोन भी जब्त किए। इस कार्रवाई में आरोपी जान मोहम्मद को गिरफ्तार कर लिया गया। नेटवर्क से जुड़े लोगों की तलाश कर रही पलिस पुलिस सूत्रों के मुताबिक, गिरफ्तार आरोपी से पूछताछ जारी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने में जुटी हैं कि इस तस्करी नेटवर्क में और कौन-कौन लोग शामिल हैं तथा इसका तार सीमा पार से जुड़े किसी बड़े गिरोह से तो नहीं है। अधिकारियों ने बताया कि सीमावर्ती क्षेत्रों में मादक पदार्थों की तस्करी रोकने के लिए एसएसबी और स्थानीय पुलिस लगातार संयुक्त अभियान चला रही है। इसी क्रम में मिली गुप्त सूचना के आधार पर यह कार्रवाई की गई, जिसमें सुरक्षा बलों को महत्वपूर्ण सफलता मिली। इस अभियान में कोढ़ोबाड़ी थानाध्यक्ष संतोष कुमार और एसएसबी के असिस्टेंट कमांडेंट मनोज कुमार सहित एसएसबी एवं पुलिस बल के अन्य जवान शामिल रहे। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सीमा क्षेत्र में अवैध गतिविधियों के खिलाफ आगे भी सख्त कार्रवाई जारी रहेगी।



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रेल सुविधाओं को लेकर इंदौर की उपेक्षा क्यों?: मुंबई, सूरत सहित अन्य शहरों से चलने वाली स्पेशल ट्रेनों को नियमित किया, लेकिन हमारे यहां की पांचों ट्रेनों को छोड़ा – Indore News




रेल सुविधाओं के मामले में इंदौर की एक बार फिर उपेक्षा की गई। रेलवे ने दूसरे सेक्शन, मंडलों से चलने वाली स्पेशल ट्रेनों में से ज्यादातर को नियमित कर दिया। यानी वह ट्रेनें अब सालभर चलेंगी, लेकिन इंदौर से चलने वाली छह रूट की पांचों स्पेशल ट्रेन को रेलवे ने छोड़ दिया। हमारी किसी भी ट्रेन को नियमित नहीं किया गया। हां, सिर्फ इंदौर-मुंबई के बीच चलने वाली एसी स्पेशल ट्रेन के फेरे एक महीने के लिए जरूर बढ़ा दिए। अब इसको लेकर नाराजगी सामने आईं। रेलवे एक्सपर्ट और सलाहकार समिति से जुड़े सदस्यों ने कहा यह इंदौर के साथ अन्याय है, आखिर यह कब तक चलेगा। सवाल उठाया कि क्या इंदौर को और ट्रेनें, सुविधाएं नहीं मिलना चाहिए? दरअसल, रेलवे ने मुंबई सेंट्रल, सूरत, काठगोदाम, मेंगलुरु, भावनगर, जबलपुर, बांद्रा टर्मिनस, अजमेर, काचीगुड़ा, श्रीगंगानगर आदि से चलने वाली स्पेशल ट्रेनों को नियमित कर दिया है। ऐसी 12 से ज्यादा ट्रेनों को रेलवे ने नियमित करने का निर्णय लिया। इंदौर से ये स्पेशल ट्रेनें चल रही हैं: स्पेशल ट्रेन नियमित होंगी तो 30 फीसदी तक किराया होगा कम स्पेशल ट्रेनों का संचालन रेलवे अधिकांश मौके पर स्पेशल किराए के साथ करता है। इसलिए किराया ज्यादा लगता है। अब जिन सेक्शन में ट्रेन को नियमित कर दिया गया है, वहां किराया 30 फीसदी तक कम हो जाएगा। इससे यात्रियों को फायदा होगा। इंदौर के सभी प्रोजेक्ट लेट, फेरे नहीं बढ़ रहे, नई ट्रेन की सुविधा नहीं रेलवे एक्सपर्ट और पैसेंजर एमीनिटीज कमेटी के पूर्व सदस्य नागेश नामजोशी ने कहा- इंदौर आखिर इंदौर के साथ कब तक ऐसा होगा। इंदौर से जुड़े सभी प्रोजेक्ट 15 साल से भी ज्यादा देरी से चल रहे हैं। सालों बाद भी ट्रेनों के फेरे नहीं बढ़ रहे। वहीं नई ट्रेन की सुविधा भी नहीं मिल रही है। रेल सुविधाओं में इंदौर के यात्री वंचित क्याँ रहे? क्या कारण है कि इंदौर की ट्रेनों को रेलवे ने छोड़ दिया और उन्हें नियमित नहीं किया, जबकि इंदौर से मुंबई के लिए पिछले कई सालों से एक और ट्रेन की मांग की जा रही थी। इंदौर-पटना में सालभर वेटिंग रहती है। इंदौर-पुणे एक्सप्रेस पर इतना दबाव है कि एक और ट्रेन इस रूट पर जरूरी है। मुंबई रूट पर 140 फीसदी और पटना पर इससे भी ज्यादा दबाव रहता है। उन्होंने कहा अब क्या रेल सुविधाओं को लेकर भी लोगों सड़क पर उतरना होगा? रेलवे इस मामले में पुनर्विचार करें। सांसद बोले- जल्द रेलमंत्री से मिलेंगे इधर, इस मामले में सांसद शंकर लालवानी ने कहा कि वे जल्द रेलमंत्री से मिलेंगे। साथ ही उनसे मांग करेंगे कि इंदौर की स्पेशल ट्रेनों को भी नियमित किया जाए। रेल मंत्री की घोषणा के बाद भी नियमित नहीं हुई ट्रेन



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स्वाद-सेहत का परफेक्ट कॉम्बिनेशन, छत्तीसगढ़ की मुनगा भाजी-दाल है देसी सुपरफूड


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Bilaspur News: इस पारंपरिक सब्जी को बनाने के लिए सबसे पहले मुनगा के पेड़ से ताजी पत्तियां तोड़कर अच्छी तरह साफ कर लें. इसके बाद पत्तियों को हल्का उबालकर अतिरिक्त पानी निकाल दें. अब कुकर में तेल गर्म करें और उसमें जीरा, सरसों, करी पत्ता और लहसुन का तड़का लगाएं.

बिलासपुर. गर्मी के मौसम में लोग ऐसे खानपान की तलाश करते हैं, जो शरीर को ठंडक दे, पाचन को बेहतर बनाए और सेहत को भी मजबूत रखे. छत्तीसगढ़ की पारंपरिक रसोई में ऐसी कई देसी डिश मौजूद हैं, जिनमें स्वाद के साथ भरपूर पोषण भी मिलता है. इन्हीं में से एक है मुनगा भाजी-दाल, जो गांवों से लेकर शहरों तक लोगों की पसंद बनी हुई है. मुनगा की कोमल पत्तियों और दाल से तैयार यह व्यंजन गर्मी में शरीर को हल्का और ऊर्जावान बनाए रखने में मदद करता है. कम मसालों में बनने वाली यह डिश स्वाद, पोषण और देसी जायके का शानदार मेल मानी जाती है. स्थानीय खानपान और पारंपरिक व्यंजनों के जानकार आकाश सोनवानी ने इसकी आसान रेसिपी और सेहत से जुड़े फायदे साझा किए हैं.

छत्तीसगढ़ की रसोई में खास पहचान
छत्तीसगढ़ का खानपान अपनी सादगी, देसी स्वाद और पौष्टिकता के लिए जाना जाता है. यहां मौसमी सब्जियों और देसी साग-भाजियों का उपयोग पारंपरिक भोजन में बड़े पैमाने पर किया जाता है. मुनगा भाजी-दाल भी ऐसी ही लोकप्रिय डिश है, जिसे ग्रामीण परिवार रोजमर्रा के खाने से लेकर खास मौकों तक में बनाते हैं. गर्मी के दिनों में यह भोजन हल्का होने के साथ शरीर को जरूरी पोषण भी देता है.

गर्मी में फायदेमंद मुनगा भाजी-दाल
आकाश सोनवानी के अनुसार, मुनगा की पत्तियां आयरन, कैल्शियम, फाइबर और कई जरूरी विटामिन से भरपूर होती हैं. वहीं दाल शरीर को प्रोटीन और ऊर्जा देती है. गर्मी में जब शरीर जल्दी थक जाता है और पाचन कमजोर होने लगता है, तब यह डिश शरीर को संतुलित पोषण देने का काम करती है. यह बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए भी बेहद लाभकारी मानी जाती है.

ऐसे तैयार करें स्वादिष्ट मुनगा भाजी-दाल
इस पारंपरिक डिश को बनाने के लिए सबसे पहले मुनगा के पेड़ से ताजी पत्तियां तोड़कर अच्छी तरह साफ कर लें. इसके बाद पत्तियों को हल्का उबालकर अतिरिक्त पानी निकाल दें. अब कुकर में तेल गर्म करें और उसमें सरसों, जीरा, करी पत्ता और लहसुन का तड़का लगाएं. फिर टमाटर और स्वादानुसार नमक डालकर पकाएं. इसके बाद हल्दी, लाल मिर्च और धनिया पाउडर मिलाकर मुनगा की पत्तियां डालें और कुछ देर भूनें. अब इसमें दाल डालकर अच्छी तरह मिक्स करें और जरूरत के अनुसार पानी मिलाएं. कुकर में तीन सीटी आने तक पकाएं. तैयार है गर्मी के मौसम के लिए स्वाद और पोषण से भरपूर देसी मुनगा भाजी-दाल.

देसी स्वाद के साथ सेहत का खजाना
गर्मी में भारी और तला-भुना भोजन शरीर पर असर डालता है. ऐसे में मुनगा भाजी-दाल जैसे पारंपरिक व्यंजन बेहतर विकल्प माने जाते हैं. यह डिश स्वादिष्ट होने के साथ शरीर को अंदर से मजबूत बनाने में भी मदद करती है. यही वजह है कि आज भी छत्तीसगढ़ के घरों में यह पारंपरिक रेसिपी लोगों की पहली पसंद बनी हुई है.

About the Author

Rahul Singh

राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.



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भास्कर अपडेट्स: बंगाल सरकार ने BSF को 142.79 एकड़ जमीन सौंपी, शुभेंदु बोले- सीमा सुरक्षा के लिए तेजी से काम कर रहे


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47 मिनट पहले

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पश्चिम बंगाल सरकार ने भारत-बांग्लादेश सीमा पर सीमा सुरक्षा बल (BSF) को फेंसिंग के लिए 142.79 एकड़ जमीन सौंप दी है। सीएम शुभेंदु अधिकारी ने बुधवार को सोशल मीडिया पोस्ट में कहा कि राज्य सरकार सीमा सुरक्षा मजबूत करने के लिए तेजी से काम कर रही है। इसके तहत BSF चौकियों और वायर फेंसिंग के निर्माण को बढ़ावा दिया जा रहा है।

बंगाल सरकार ने 11 मई को हुई पहली कैबिनेट बैठक में 45 दिनों के भीतर 600 एकड़ जमीन सीमा सुरक्षा और बुनियादी ढांचे के लिए BSF को देने का निर्णय लिया था। पहले चरण में 20 मई को पांच जिलों में 43 एकड़ जमीन और 31.9 एकड़ वेस्टेड लैंड के स्वीकृति आदेश BSF को सौंपे गए थे।

पश्चिम बंगाल की बांग्लादेश के साथ 2,217 किलोमीटर लंबी सीमा लगती है, जो किसी भी भारतीय राज्य में सबसे लंबी है। मुख्यमंत्री के मुताबिक राज्य में अब तक करीब 1,600 किलोमीटर सीमा पर फेंसिंग हो चुकी है, जबकि लगभग 600 किलोमीटर हिस्सा अभी भी बिना बाड़ के है।

आज की अन्य बड़ी खबरें…

सैन फ्रांसिस्को जा रही एयर इंडिया फ्लाइट बीच रास्ते से लौटी

दिल्ली से सैन फ्रांसिस्को जा रही एयर इंडिया की एक फ्लाइट बुधवार को तकनीकी खराबी आने के बाद बीच रास्ते से वापस लौट आई। विमान करीब आठ घंटे तक हवा में रहने के बाद सुरक्षित नई दिल्ली एयरपोर्ट वापस आ गया।

एयर इंडिया के मुताबिक फ्लाइट AI173, जिसे बोइंग 777-300ER विमान ऑपरेट कर रहा था, में करीब 230 यात्री सवार थे। उड़ान ने दिल्ली से सैन फ्रांसिस्को के लिए टेकऑफ किया था, लेकिन उड़ान के दौरान तकनीकी समस्या सामने आने पर सुरक्षा मानकों के तहत विमान को वापस दिल्ली लाने का फैसला लिया गया।

कंपनी ने यात्रियों को हुई असुविधा पर खेद जताते हुए कहा कि ग्राउंड स्टाफ की ओर से यात्रियों को रिफ्रेशमेंट, होटल में ठहरने और जरूरत के अनुसार री-शेड्यूलिंग जैसी सुविधाएं दी जा रही हैं।

मैसूरु में तस्करी नेटवर्क का भंडाफोड़, हाथी के 4.058 किलोग्राम दांत बरामद किए गए

राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने कर्नाटक के मैसूरु में तस्करी के एक नेटवर्क का भंडाफोड़ किया है। कार्रवाई के दौरान भारतीय हाथी के 4.058 किलोग्राम दांत (आइवरी) बरामद किए गए हैं। मामले में तीन लोगों को पकड़ा गया है।

डीआरआई की ओर से जारी बयान के मुताबिक भारतीय हाथी को वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 की अनुसूची-1 में रखा गया है। इस कानून के तहत हाथियों और उनसे जुड़े उत्पादों के व्यापार पर पूरी तरह प्रतिबंध है। इसी प्रावधान के तहत जब्त किए गए हाथीदांत को सीज किया गया।

डीआरआई ने बताया कि एजेंसी ने हाल के वर्षों में वन्यजीव तस्करी से जुड़े कई अवैध नेटवर्क ध्वस्त किए हैं और इस तरह के रैकेट्स पर लगातार कार्रवाई जारी है।

दिल्ली में 25 साल के युवक की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या की

दिल्ली के कंझावला में मंगलवार सुबह एक 25 साल के युवक की भीड़ ने पीट-पीटकर हत्या कर दी गई। पुलिस के मुताबिक, युवक को एक घर में चोरी करने की कोशिश करते हुए पकड़ा गया था, जिसके बाद भीड़ ने उस पर हमला कर दिया।

घायल युवक को तुरंत नजदीकी अस्पताल ले जाया गया, जहां डॉक्टरों ने प्राथमिक उपचार के बाद उसे मृत घोषित कर दिया। घटना के बाद क्राइम टीम और फॉरेंसिक टीम ने मौके पर पहुंचकर जांच की और सबूत जुटाए।

मामले की जांच जारी है और अन्य आरोपियों की पहचान वीडियो फुटेज के आधार पर की जा रही है। आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां हो सकती हैं।

80 करोड़ नागरिकों तक पहुंच वाला सरकारी राशन सिस्टम 5 साल बढ़ाने की मंजूरी

देश के 80 करोड़ नागरिकों तक पहुंच वाला सरकारी राशन सिस्टम (पीडीएस) पूरी तरह ‘हाईटेक’ होगा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में बुधवार को कैबिनेट की बैठक में पीडीएस योजना 5 साल बढ़ाने की मंजूरी दी गई। खास बात है कि अनाज बांटने, धांधली रोकने और लाभार्थियों की पहचान करने के लिए अब एआई का इस्तेमाल होगा।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि इससे अनाज परिवहन की दूरी 15% से 50% तक कम हो जाएगी। स्थानीय स्तर पर अनाज खरीद को बढ़ावा मिलेगा और सालाना 280 करोड़ रु. की बचत होगी। कार्बन उत्सर्जन में 35% कमी का अनुमान है।

ये 3 AI बदलेंगे राशन व्यवस्था की सूरत…

निर्मल: लाभार्थियों का रियल-टाइम एआई डेटाबेस तैयार करेगा। इससे फर्जी लाभार्थियों को हटाने और डेटा जोड़ने में मदद मिलेगी।

आशा: बहुभाषी प्लेटफॉर्म से फोन कॉल, वॉट्सएप, आईवीआरएस या चैटबॉट से शिकायतें दर्ज करा सकेंगे। यह प्लेटफॉर्म रोजाना 3 लाख शिकायतों/सवालों को हैंडल करने में सक्षम बताया गया है।

सक्षम: राशन ले जाने वाली गाड़ियों की ट्रैकिंग, अनाज की बोरियों पर क्यूआर-कोड और मांग का सटीक अनुमान लगा सकेंगे।

खबरें और भी हैं…



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मीन राशि वालों पर मेहरबान होंगे देव गुरु बृहस्पति, करियर में आएगा जबरदस्त उछाल


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Aaj Ka Meen Rashifal 28 May 2026: मीन राशि के जातकों के लिए आज का दिन खुशियों से भरा रहेगा. परिवार में प्यार और तालमेल बना रहेगा, जिससे मन प्रसन्न रहेगा. स्वास्थ्य अच्छा रहेगा और आप ऊर्जा से भरपूर महसूस करेंगे. संतुलित और पौष्टिक आहार आपके दिन को और बेहतर बनाएगा.

आज मीन राशि वालों के लिए दिन नई उम्मीदों और उपलब्धियों की सौगात लेकर आ सकता है. करियर में आगे बढ़ने के मौके मिलेंगे और आपकी लगन का सकारात्मक परिणाम दिखाई देगा. नौकरी करने वालों को नई जिम्मेदारियां मिल सकती हैं, जो भविष्य में सफलता के दरवाजे खोलेंगी. धन संबंधी मामलों में स्थिति मजबूत रहने के संकेत हैं. आत्मविश्वास और उत्साह के दम पर आप मुश्किल परिस्थितियों को भी आसानी से अपने पक्ष में कर सकते हैं.

उज्जैन के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य आनंद भारद्वाज के अनुसार, आज का दिन मीन राशि वालों के लिए बेहद शुभ संकेत लेकर आया है. प्रेम जीवन में नजदीकियां बढ़ेंगी और रिश्तों में विश्वास मजबूत होगा. पार्टनर के साथ बेहतर बातचीत से संबंध और गहरे होंगे. ज्येष्ठ माह का गुरुवार यानि आज का दिन आपके लिए खुशियां और सौभाग्य लेकर आया है.

मीन राशि वालों का करियर राशिफल
आज मीन राशि वालों के लिए करियर में तरक्की के नए रास्ते खुल सकते हैं. कार्यक्षेत्र में आपकी सूझबूझ और टीम के साथ बेहतर सामंजस्य सफलता की कुंजी बनेगा. सहकर्मियों का भरपूर साथ मिलेगा, जिससे काम आसानी और समय पर पूरे होंगे. आपका शांत और सकारात्मक स्वभाव लोगों को प्रभावित करेगा, जिससे मान-सम्मान बढ़ने के साथ कार्यस्थल पर आपकी अलग पहचान बनेगी.

मीन राशि वालों का व्यापार राशिफल
आज मीन राशि के व्यापार से जुड़े लोगों के लिए दिन शानदार संभावनाएं लेकर आया है. बिजनेस में नई योजनाएं आकार ले सकती हैं और कामकाज में तेजी देखने को मिलेगी. किसी करीबी व्यक्ति या भरोसेमंद साझेदार का सहयोग बड़ी सफलता का कारण बन सकता है. लाभ के मजबूत योग बन रहे हैं और कोई खास अवसर या सौदा आपके कारोबार को नई पहचान और तरक्की की राह पर आगे बढ़ा सकता है.

मीन राशि वालों का स्वास्थ राशिफल
मीन राशि वालों के लिए आज का दिन सेहत के लिहाज से राहत और ऊर्जा लेकर आएगा. शरीर में स्फूर्ति बनी रहेगी और लंबे समय से चल रही परेशानियों में सुधार महसूस हो सकता है. संतुलित और पौष्टिक आहार लेने से ताकत और बढ़ेगी. दिन भर सकारात्मक ऊर्जा बनी रहेगी. बच्चों की सेहत भी सामान्य रहेगी. कुल मिलाकर आज स्वास्थ्य को लेकर मन प्रसन्न रहेगा और आप खुद को ज्यादा सक्रिय व संतुलित महसूस करेंगे.

मीन राशि वालों का आर्थिक राशिफल
मीन राशि वालों के लिए आज आर्थिक मोर्चे पर खुशखबरी भरा दिन रहने के संकेत हैं. पैसों से जुड़ी परेशानियां कम हो सकती हैं और करीबी लोगों का भरपूर सहयोग मिलेगा. पहले किए गए निवेश से अच्छा लाभ मिलने की संभावना है, जिससे आत्मविश्वास बढ़ेगा. नए निवेश के मौके भी सामने आ सकते हैं, लेकिन जल्दबाजी से बचें. समझदारी से लिया गया फैसला आने वाले समय में आर्थिक स्थिति को और मजबूत बना सकता है.

मीन राशि वालों का लव लाइफ राशिफल
मीन राशि वालों के लिए आज का दिन रिश्तों में खुशियों की बहार लेकर आएगा. दांपत्य जीवन में प्रेम और समझ बढ़ेगी, जिससे आपसी तालमेल और मजबूत होगा. लव लाइफ वालों के लिए समय रोमांटिक रहेगा और साथी संग बिताए पल यादगार बनेंगे. सिंगल लोगों के लिए भी दिन खास संकेत दे रहा है, किसी खास से मुलाकात या नया रिश्ता शुरू होने की संभावना बन सकती है, जो दिल को खुश कर देगा.

मीन राशिफल वाले जरूर करें ये उपाय
आज आपके लिए लकी नंबर 3 रहेगा. यह अंक आपको सफलता और सकारात्मक ऊर्जा प्रदान करेगा. जो जातक धर्म-कर्म में रुचि रखते हैं. वे आज गुरु देव के मंत्रों का जाप करें. उसके बाद गरीबों को पिली वस्तु का दान करें. यह उपाय मानसिक शांति देगा और आत्मविश्वास बढ़ाएगा.



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