Sunday, June 7, 2026
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कौन हैं अंजलि कुलथे? जिससे इंस्पायर होकर कंगना रनौत ने बनाई ‘भारत भाग्य विधाता’


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कंगना रनौत की आने वाली फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ 26/11 के एक अनसुने हीरो की कहानी को बड़े पर्दे पर ला रही है. यह फिल्म मुंबई के कामा और अल्बलेस अस्पताल की नर्स अंजली कुलथे से इंस्पायर है, जिनके साहसिक कदमों ने 2008 के आतंकी हमलों के दौरान कई लोगों की जान बचाई थी.

कंगना रनौत की मच अवेटेड फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ 12 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है. यह फिल्म 26 नवंबर 2008 की रात को आतंकवादी हमले पर बेस्ड है. इस दिन मुंबई में कई जगहों पर आतंकवादियों ने हमला किया था, जिसमें सीएसटी रेलवे स्टेशन और ताज महल पैलेस होटल भी शामिल थे. इसी दौरान हमलावर कामा अस्पताल के पास भी पहुंचे, जहां अंजली कुलथे ड्यूटी पर थीं. (फोटो साभारः यूट्यूब वीडियोग्रैब)

Kangana ranaut Anjali

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अंजलि कुलथे ने अस्पताल में करीब 20 प्रेग्नेंट महिलाओं की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाई. उन्होंने घबराने के बजाय मरीजों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाया और सुनिश्चित किया कि वे खतरे से दूर रहें. बहुत से लोग यह नहीं जानते कि 26/11 के दौरान अंजलि की भूमिका सिर्फ मरीजों की सुरक्षा तक सीमित नहीं थी. (फोटो साभारः यूट्यूब वीडियोग्रैब)

Kangana ranaut Anjali

रिपोर्ट्स के अनुसार, बाद में अंजलि कुलथे हमलों की जांच में एक महत्वपूर्ण गवाह भी बनीं. उनकी गवाही से अधिकारियों को कामा अस्पताल में उस रात क्या हुआ था, यह समझने में मदद मिली. कई रिपोर्ट्स में बताया गया है कि जब आतंकवादी अस्पताल पहुंचे, तो अंजलि ने तुरंत कार्रवाई की. (फोटो साभारः यूट्यूब वीडियोग्रैब)

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Kangana ranaut Anjali

अंजलि कुलथे ने करीब 20 गर्भवती महिलाओं और उनके रिश्तेदारों को एक छोटे कमरे में ले जाकर लाइट बंद कर दी और उन्हें कई घंटों तक छुपाए रखा, जब बाहर हमला चल रहा था. कामा अस्पताल आतंकवादियों के मुख्य निशाने पर नहीं था, जैसे ताज होटल, ओबेरॉय होटल या सीएसटी रेलवे स्टेशन. (फोटो साभारः यूट्यूब वीडियोग्रैब)

Kangana ranaut Anjali

अजमल कसाब और अबू इस्माइल ने सीएसटी पर गोलीबारी के बाद अस्पताल के इलाके में एंट्री की. रेलवे स्टेशन पर फायरिंग के बाद दोनों आतंकवादी दक्षिण मुंबई में घूमते हुए हमला जारी रखने और सुरक्षा बलों से बचने की कोशिश कर रहे थे. कामा अस्पताल सीएसटी के पास होने के कारण वे वहां पहुंचे. (फोटो साभारः यूट्यूब वीडियोग्रैब)

Kangana ranaut

करीब 18 साल बाद, अंजली कुलथे की कहानी ‘भारत भाग्य विधाता’ के जरिए सामने आ रही है, जिसमें कंगना रनौत एक नर्स की भूमिका निभा रही हैं. फिल्म में हमलों के दौरान कामा अस्पताल की घटनाओं को दिखाया गया है और उन नर्सों, वार्ड बॉय और अस्पताल स्टाफ को सम्मान दिया गया है, जिन्होंने मरीजों की सुरक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डाली. (फोटो साभारः यूट्यूब वीडियोग्रैब)

Kangana ranaut

‘भारत भाग्य विधाता’ के ट्रेलर में 26/11 के उन हीरो को श्रद्धांजलि के रूप में पेश किया गया है, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है. जहां उस रात की सार्वजनिक यादें ताज, सीएसटी और अन्य प्रमुख जगहों पर हुए हमलों पर केंद्रित रहती हैं, वहीं फिल्म अस्पताल के अंदर हुई घटनाओं और उन लोगों की कहानी दिखाती है, जिन्होंने संकट के समय आगे बढ़कर लोगों की जान बचाई. (फोटो साभारः यूट्यूब वीडियोग्रैब)

Kangana ranaut

इस फिल्म की कहानी आम लोगों के असाधारण कामों के बारे में है. अंजली कुलथे का नाम भले ही हर घर में न जाना जाता हो, लेकिन भारत की सबसे काली रातों में उनके साहसिक कदम आज भी याद किए जाते हैं. ‘भारत भाग्य विधाता’ के जरिए उनकी कहानी अब और ज्यादा लोगों तक पहुंचेगी. (फोटो साभारः यूट्यूब वीडियोग्रैब)

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ललितपुर में बुंदेलखंड विकास सेना का प्रदर्शन: पेयजल अमृत योजना की सड़कों की दुर्दशा पर जताया रोष – Lalitpur News




ललितपुर में रविवार को बुंदेलखंड विकास सेना ने शहर की क्षतिग्रस्त सड़कों और पेयजल अमृत योजना के तहत खोदी गई सड़कों की घटिया मरम्मत को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। यह बैठक स्थानीय कंपनी बाग में संगठन प्रमुख हरीश कपूर टीटू की अध्यक्षता में संपन्न हुई। संगठन प्रमुख हरीश कपूर टीटू ने आरोप लगाया कि गोविंदसागर बांध से आजादपुरा होते हुए तालाबपुरा जाने वाली सड़क और करीमनगर से वर्णी चौराहा जाने वाली सड़क पर पाइपलाइन बिछाने के बाद मरम्मत के नाम पर निम्न गुणवत्ता वाली सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने विशेष रूप से तालाबपुरा की कंक्रीट सड़क का जिक्र किया, जिसे पाइपलाइन बिछाने के लिए कटर मशीन के बजाय जेसीबी से 2-3 फुट की जगह 6-7 फुट तक लापरवाही से खोदा गया। इसके कारण महीनों तक धूल उड़ती रही और बाद में मरम्मत के दौरान बेस परत में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया, जिससे सड़क कई जगह धंस गई है। वर्णी चौराहे से करीमनगर और तालाबपुरा से तुवन चौराहे की ओर जाने वाली सड़कों पर उड़ती धूल से लोग दमा, एलर्जी और चर्म रोगों का शिकार हो रहे हैं, जिससे सड़क किनारे रहने वाले नागरिकों और दुकानदारों का जीवन मुश्किल हो गया है। टीटू कपूर ने यह भी बताया कि गड्ढों के कारण कमर दर्द के मरीजों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है, और लोग लगातार दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। बुंदेलखंड विकास सेना ने मांग की है कि ललितपुर शहर की सभी क्षतिग्रस्त सड़कों को जल्द से जल्द दुरुस्त किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सड़कों की स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो संगठन आंदोलन छेड़ने के लिए बाध्य होगा। बैठक में राजकुमार कुशवाहा, फूलचंद रजक, खुशाल बरार,कमल विश्वकर्मा,कदीर खां, भैयन कुशवाहा,संजू राजा, रामप्रकाश झा,गफूर खां, जगदीश झा, सुरेन्द्र सेन, प्रदीप साहू, लालचंद रजक, जितेन्द्र, कामता प्रसाद भट्ट, ओमकार राजा, मथुरा प्रसाद मिश्रा प्रकाश रैकवार,मनोज सैनी , सुरेश झा आदि मौजूद रहे।



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दरभंगा के सुपौल पुल घाट पर जाम से लोग परेशान: बीच सड़क पर लगाई सब्जी की दुकान, कहा- शिकायत के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ – Darbhanga News




दरभंगा में बिरौल प्रखंड क्षेत्र के सुपौल बाजार स्थित पुल घाट पर रोजाना लगने वाले भीषण जाम से ग्रामीण परेशान है। शिकायत के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। परेशान होकर रविवार को आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़क पर ही आलू और परवल की दुकान सजा दी। करीब एक घंटे तक आवागमन पूरी तरह बाधित रहा। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। ग्रामीणों का आरोप है कि पुल घाट के दोनों किनारों पर वर्षों से मछली बाजार, सब्जी दुकान और फुटपाथी दुकानदारों का अतिक्रमण बना हुआ है। सड़क किनारे दुकानें सजने और सामान रखे जाने के कारण रोजाना घंटों जाम लगता है। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, मरीजों, महिलाओं और आम राहगीरों को उठानी पड़ती है। कई बार एंबुलेंस तक जाम में फंस जाती है, जिससे गंभीर मरीजों की जान पर भी बन आती है। कई बार शांति समिति की बैठकों में शिकायत की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ‘मजबूरन प्रदर्शन करना पड़ा’ स्थानीय विनोद सहनी उर्फ बलियाबी ने कहा कि प्रशासन की उदासीनता से लोग परेशान हो चुके हैं। बार-बार गुहार लगाने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है, इसलिए मजबूरी में सड़क पर सब्जी की दुकान लगाकर विरोध जताना पड़ा। हमारा उनका उद्देश्य किसी को परेशान करन नहीं है, बल्कि वर्षों पुरानी समस्या की ओर प्रशासन का ध्यान खींचना था। सड़क पर अतिक्रमण से बढ़ रही परेशानी मो. मुस्ताक शाह ने बताया कि पुल घाट पर दोनों ओर मछली विक्रेता और सब्जी विक्रेता सड़क किनारे ही दुकान लगा लेते हैं। इसके अलावा कई दुकानदार सड़क पर आलू, प्याज समेत अन्य सामान रख देते हैं। ठेला और फुटपाथी दुकानदार भी सड़क के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लेते हैं। परिणामस्वरूप संकरी सड़क पर वाहनों की आवाजाही बाधित हो जाती है। अक्सर लंबा जाम लग जाता है। जब तक अतिक्रमण नहीं हटेगा, तब तक जाम की समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। समस्या के समाधान का मिला आश्वासन सड़क जाम की सूचना मिलते ही एसडीपीओ प्रभाकर तिवारी के निर्देश पर पुलिस मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें शांत कराया। सड़क खाली करकार आवागमन बहाल कराया। प्रदर्शनकारियों को जल्द से जल्द समस्या के समाधान का आश्वासन मिला है। कार्रवाई के दिए निर्देश इधर, बिरौल अनुमंडल पदाधिकारी शशांक राज ने मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिएं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही नगर पंचायत, अंचल प्रशासन और पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।



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कमर के इलाज में बिगड़ा मरीज का पैर: जीवन ज्योति अस्पताल में लापरवाही का आरोप; परिजनों ने किया हंगामा – Sheopur News




शहर के शिवपुरी रोड स्थित जीवन ज्योति अस्पताल में भर्ती मरीज के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। परिजनों का दावा है कि कमर में चोट के इलाज के लिए भर्ती मरीज सूबेदार बंजारा का पैर इलाज शुरू होने से पहले ही खराब हो गया। इस घटना को लेकर परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया। परिजनों के अनुसार, दोहरी वाबड़ी निवासी सूबेदार बंजारा को कमर की चोट के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल प्रबंधन ने इलाज के लिए 40 हजार रुपए मांगे थे। मरीज के बेटे ने आरोप लगाया कि आयुष्मान भारत योजना की सुविधा होने के बावजूद अस्पताल ने आयुष्मान कार्ड को वैध नहीं बताकर नकद भुगतान की मांग की। परिजनों का कहना है कि पैसे देने के बाद भी मरीज की स्थिति में सुधार नहीं हुआ, बल्कि उनका पैर और खराब हो गया। डॉक्टर बोले- मरीज पहले से गंभीर हालत में था परिजनों ने बताया कि कमर की चोट के लिए लाए गए मरीज के पैर की समस्या इलाज के दौरान गंभीर हो गई। जब उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से शिकायत की, तो अस्पताल संचालक डॉ. रवि तोमर ने मरीज को किसी अन्य अस्पताल में इलाज कराने की सलाह दी। इस सलाह से परिजन और अधिक आक्रोशित हो गए। वहीं, डॉ. रवि तोमर ने इस मामले पर अपनी सफाई दी। उन्होंने कहा कि जब मरीज को अस्पताल में भर्ती किया गया था, तब उसके शरीर में खून की कमी थी। साथ ही, मरीज का आयुष्मान कार्ड अपडेटेड नहीं था। डॉक्टर बोले- बेहतर इलाज के लिए दूसरे अस्पताल भेजा डॉ. तोमर ने यह भी बताया कि मरीज के पैर में पहले से चोट थी और उससे संबंधित कुछ आवश्यक जांच रिपोर्ट श्योपुर में उपलब्ध नहीं थीं, जिसके कारण बेहतर इलाज के लिए उन्हें अन्य स्थान पर जाने की सलाह दी गई थी। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही बरतने और अनावश्यक रूप से पैसे मांगने का आरोप दोहराया है। फिलहाल, दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आने के बाद यह मामला शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है।



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3 रुपए की चाय! 24 साल पुराना स्वाद, पीने के लिए लोगों की लगती है भीड़


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लोकल 18 की टीम को दुकान संचालक फरीद एहमद ने बताया कि मैं पहले दूसरों को यहां पर काम करता था लेकिन मुझे 24 साल पहले ऐसा लगा कि चाय की दुकान की शुरुआत करना चाहिए मैने ₹500 लगाकर चाय दुकान की शुरुआत की थी शुरुआती दिनों में मुझे काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा लेकिन आज लोग मुझ पर भरोसा करने लगे हैं 24 साल में लोगों को चाय पिला रहा हूं पहले ₹1 की चाय

बुरहानपुर. मध्य प्रदेश का बुरहानपुर जिला खानपान के लिए जाना जाता है. आजकल युवाओं से लेकर अधिकतर लोग सबसे अधिक चाय पीना पसंद करते हैं. आज हम आपको एक ऐसी चाय की दुकान का संचालन करने वाले दुकान संचालक की कहानी बता रहे हैं जो 24 साल पुरानी चाय की दुकान है. यहां शुरुआत में ₹1 की चाय मिलती थी जो स्वाद उस समय था आज वहीं स्वाद ₹3 की चाय का भी है. इस दुकान पर सुबह से लेकर देर रात तक लोगों की चाय पीने के लिए भीड़ लगती है. दुकान पर ताजी चाय बनाई जाती है. ग्राहकों के सामने ही चाय बनती है चाय बनते ही बिक जाती है.

लोकल 18 की टीम को दुकान संचालक फरीद अहमद ने बताया कि मैं पहले दूसरों के यहां पर काम करता था लेकिन मुझे 24 साल पहले ऐसा लगा कि चाय की दुकान की शुरुआत करना चाहिए. मैने ₹500 लगाकर चाय दुकान की शुरुआत की थी, शुरुआती दिनों में मुझे काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा लेकिन आज लोग मुझ पर भरोसा करने लगे हैं. 24 साल में लोगों को चाय पिला रहा हूं. पहले ₹1 की चाय पिलाता था अब महंगाई को देखते हुए. 2014 से यह चाय ₹2 की हुई 2019 से आज तक ₹3 की चाय मिल रही है. चाय पीने के लिए लोगों की सुबह से देर शाम तक भीड़ लगती है. दुकान संचालक का कहना है कि मैं 24 साल से यह चाय की दुकान चला रहा हूं. आज भी वहीं टेस्ट मेरी दुकान पर मिलता है इसलिए लोग सबसे अधिक मेरे यहां पर चाय पीने के लिए आते हैं. रोजाना में 500 से अधिक चाय बेचता हूं.

कक्षा दसवीं तक की है पढ़ाई
दुकान संचालक का कहना है कि मैं कक्षा दसवीं तक पढ़ाई की है उसके बाद पढ़ाई लिखाई में मन नहीं लगता था. मैं दूसरों के यहां पर काम करने जाता था लेकिन जब मुझे चाय के बिजनेस की जानकारी लगी तो मैंने चाय के ठेले की शुरुआत कर दी थी.

About the Author

Mohd Majid

with more than more than 5 years of experience in journalism. It has been two and half year to associated with Network 18 Since 2023. Currently Working as a Senior content Editor at Network 18. Here, I am cover…और पढ़ें



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अमेरिका में फर्जी पिज्जा-ऑर्डर के बहाने भारतीय युवक की हत्या: डिलीवरी देने पहुंचा था तेलंगाना का अंशुल; परिवार का आरोप- साजिश रचकर गोली मारी




अमेरिका के फिलाडेल्फिया में तेलंगाना के 28 वर्षीय अंशुल कुंचा की गोली मारकर हत्या कर दी गई। परिवार का आरोप है कि अंशुल को फर्जी पिज्जा ऑर्डर देकर सुनसान जगह बुलाया गया और वहां घात लगाकर हमला किया गया। अंशुल कुंचा एक मल्टीनेशनल कंपनी में नौकरी करते थे। एक्सट्रा इनकम के लिए वे वीकेंड में पिज्जा डिलीवरी का पार्ट-टाइम काम भी करते थे। शनिवार रात उन्हें एक ऑर्डर मिला, जिसके तहत उन्हें फिलाडेल्फिया के एक सुनसान इलाके में पिज्जा पहुंचाना था। परिवार के मुताबिक, वहां पहुंचते ही एक अज्ञात हमलावर ने अंशुल के सिर में कई गोलियां मार दीं और मौके से फरार हो गया। अंशुल की बहन बोलीं- डिलीवरी ऑर्डर एक जाल था अंशुल की बहन तन्वी कुंचा ने आरोप लगाया कि यह डिलीवरी ऑर्डर महज एक जाल था। उन्होंने कहा कि वहां कोई ग्राहक मौजूद नहीं था और अंशुल को सिर्फ निशाना बनाने के लिए बुलाया गया था। परिवार का कहना है कि हमलावर अंशुल का कोई सामान भी नहीं ले गए। ऐसे में हत्या के पीछे की वजह अब भी साफ नहीं है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, घटना के समय इलाके में बैग लिए दो नकाबपोश लोगों को देखा गया था। परिवार ने भारतीय और अमेरिकी अधिकारियों से अंशुल का शव जल्द भारत भेजने की अपील की है ताकि अंतिम संस्कार में देरी न हो। तन्वी ने कहा कि अधिकारियों ने शव सोमवार को सौंपे जाने की जानकारी दी है, लेकिन परिवार चाहता है कि प्रक्रिया जल्द पूरी हो। न्यूयॉर्क स्थित भारतीय वाणिज्य दूतावास ने घटना पर दुख जताते हुए कहा कि वह स्थानीय अधिकारियों और अंशुल के परिवार के संपर्क में है तथा हर संभव मदद उपलब्ध करा रहा है। मौके से तीन खाली कारतूस बरामद हुए फिलाडेल्फिया पुलिस के चीफ इंस्पेक्टर स्कॉट स्मॉल ने बताया कि घटनास्थल से तीन खाली कारतूस बरामद हुए हैं। उनके मुताबिक, कारतूसों की स्थिति से संकेत मिलता है कि हमलावर पीड़ित के बेहद करीब खड़े थे। अंशुल की कार भी घटनास्थल के पास मिली, जिसमें पिज्जा वार्मर रखा हुआ था। पुलिस के अनुसार, अभी तक किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है। हालांकि जांचकर्ताओं को उस फोन नंबर की जानकारी मिल गई है, जिससे पिज्जा का ऑर्डर दिया गया था। अधिकारियों का कहना है कि यही नंबर मामले की जांच में महत्वपूर्ण सुराग साबित हो सकता है। फिलाडेल्फिया हाउसिंग अथॉरिटी के निगरानी कैमरों में घटना से पहले का कुछ फुटेज रिकॉर्ड हुआ है। हालांकि गोली चलने की घटना कैमरे में कैद नहीं हुई। फुटेज में अंशुल के पीछे दो लोग चलते हुए दिखाई दिए हैं। दोनों ने गहरे रंग के कपड़े पहन रखे थे। इनमें से एक व्यक्ति के पास डार्क रंग का बैकपैक भी दिखाई दिया। पहले भी लूट का शिकार हो चुके थे परिवार ने बताया कि अंशुल पहले भी अमेरिका में लूटपाट की घटना का शिकार हो चुके थे। उस दौरान उनकी चेन, मोबाइल फोन और नकदी छीन ली गई थी, लेकिन तब उन पर जानलेवा हमला नहीं हुआ था। परिवार के अनुसार, उन्होंने हैदराबाद से बीटेक करने के बाद अमेरिका जाकर मास्टर्स की पढ़ाई की थी। पढ़ाई पूरी होने के बाद उन्हें KWC कंपनी में नौकरी मिल गई थी।



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दावा- NEET पेपर लीक के बाद NTA सिस्टम बदलेगा: एक्सपर्ट्स सवाल तैयार तो करेंगे, पर पता नहीं होगा किस एग्जाम के लिए किया


नई दिल्ली29 मिनट पहले

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NEET-UG 2026 पेपर लीक और CBSE की मार्किंग गड़बड़ियों के बाद सरकार परीक्षा व्यवस्था में बड़े बदलाव की तैयारी कर रही है। इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, NTA ऐसा नया सिस्टम बनाने पर काम कर रही है, जिसमें सवाल तैयार करने वाले एक्पर्ट्स को भी पता नहीं होगा कि वह किस एग्जाम के क्वेश्चन पेपर बना रहे हैं।

नई योजना के तहत अलग-अलग विषयों के एक्सपर्ट्स केवल सवाल तैयार करेंगे। इन सवालों को एक बड़े डिजिटल बैंक में रखा जाएगा। अधिकारियों के मुताबिक इसमें करीब 10 हजार सवाल हो सकते हैं। बाद में टेक्नीक की मदद से इन सवालों से फाइनल एग्जाम पेपर तैयार होगा।

वहीं, शनिवार को इंडियन एक्सप्रेस के आइडिया एक्सचेंज कार्यक्रम में पहुंचे केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कहा- पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने नैतिक जिम्मेदारी ली है। मंत्री जिम्मेदारी से नहीं भाग रहे, बल्कि व्यवस्था सुधारने के लिए लगातार कदम उठा रहे हैं।

जानिए NTA की नई प्लानिंग के बारे में

  • NTA से जुड़े अधिकारी ने कहा कि हम चाहते हैं कि पूरे प्रश्नपत्र की जानकारी बहुत कम लोगों तक पहुंचे। सिस्टम को लोगों पर नहीं, प्रोसेस पर भरोसा करना चाहिए। पेपर लीक मामले में ट्रांसलेशन करने वालों की गिरफ्तारी के बाद NTA ट्रांसलेशन प्रोसेस में भी बदलाव करना चाहती है।
  • एजेंसी पहले ही सुप्रीम कोर्ट को बता चुकी है कि वह करीब 85% ट्रांसलेशन का काम AI से कराने की योजना बना रही है। इसके बाद एक्सपर्ट्स सिर्फ यह जांचेंगे कि ट्रांसलेशन सही हुआ या नहीं। अधिकारियों का कहना है कि कोशिश यह भी रहेगी कि ट्रांसलेशन करने वालों को यह जानकारी न हो कि वे किस परीक्षा के सवाल देख रहे हैं।
  • वहीं, NTA इस समय 21 जून को होने वाले NEET-UG री-टेस्ट की तैयारी भी कर रही है। अधिकारियों के मुताबिक कुछ बदलाव अभी से लागू किए जा चुके हैं। इसके तहत नए सब्जेट एक्सपर्ट्स को जोड़ा गया है। साथ ही पेपर छपने के बाद उसके ट्रांसपोर्ट और स्टोरेज सिस्टम को और सुरक्षित बनाने पर भी काम चल रहा है।

रिजिजू बोले- शिक्षा मंत्री पर सीधा आरोप हो तो इस्तीफा मांगिए

रिजिजू ने कहा कि लाखों छात्रों को NEET दोबारा देने की नौबत आई और CBSE की मार्किंग गड़बड़ियों से भी परेशानी हुई। ऐसे मामलों में सरकार की जिम्मेदारी समस्या को ठीक करना है, न कि उससे बचना। उन्होंने भरोसा जताया कि उठाए गए कदम भविष्य में ऐसी घटनाओं को रोकने में मदद करेंगे।

उन्होंने कहा कि किसी मंत्री या उसके स्टाफ पर सीधे भ्रष्टाचार, रिश्वत या गलत काम का आरोप हो तो इस्तीफे की मांग जायज होती है, लेकिन NEET पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री पर ऐसा कोई सीधा आरोप नहीं है।

NTA बोला- NEET री-एग्जाम का पेपर लीक नहीं हुआ

NEET (UG) 2026 री-एग्जाम से पहले सोशल मीडिया और मैसेजिंग ऐप्स पर पेपर लीक होने और सवाल पहले से मिलने के कई दावे किए जा रहे हैं। NTA ने इन सभी दावों को गलत और भ्रामक बताया है।

एजेंसी का कहना है कि कुछ ठग गिरोह छात्रों और उनके परिवारों को गुमराह कर पैसे कमाने की कोशिश कर रहे हैं। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कथित पेपर और लीक से जुड़े मैसेज पूरी तरह फर्जी हैं।

NTA ने कहा कि परीक्षा की सुरक्षा के लिए सभी जरूरी इंतजाम किए गए हैं और परीक्षा निष्पक्ष तरीके से कराई जाएगी। एजेंसी ने छात्रों से अफवाहों पर भरोसा न करने और अपनी पढ़ाई पर ध्यान देने की अपील की है।

साथ ही, ऐसे फर्जी मैसेज और पोस्ट फैलाने वाले अकाउंट्स व चैनलों की पहचान की जा रही है। NTA उनकी जानकारी सोशल मीडिया कंपनियों और साइबर क्राइम एजेंसियों को दे रही है, ताकि उन्हें हटाया जा सके। एजेंसी ने ऐसे मामलों में कानूनी कार्रवाई के लिए शिकायत भी दर्ज कराई है।

NEET पेपर लीक मामले में अब तक 13 गिरफ्तार

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दिल्ली में कॉकरोच जनता पार्टी का 5 घंटे प्रदर्शन: अभिजीत दीपके ने शिक्षा मंत्री का इस्तीफा मांगा; अगले शनिवार फिर जंतर-मंतर पर जुटने का ऐलान

NEET पेपर लीक मामले में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की मांग को लेकर 6 जून को कॉकरोच जनता पार्टी, यानी CJP ने दिल्ली के जंतर-मंतर पर 5 घंटे प्रदर्शन किया। पार्टी के फाउंडर अभिजीत दीपके ने कहा था कि मंत्री आज शाम 5 बजे तक इस्तीफा दें, नहीं तो पूरे देश में प्रदर्शन किया जाएगा। अगले शनिवार, यानी 13 जून को जंतर-मंतर पर फिर प्रदर्शन करेंगे। पूरी खबर पढ़ें…

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चित्तौड़गढ़ की मिट्टी में घुली हापुस और दशहरी की मिठास: कृषि विज्ञान केंद्र ने 2008 में शुरू किया प्रयोग, आज किसानों के लिए बन गया कमाई का नया मॉडल – Chittorgarh News




चित्तौड़गढ़ जिले में गेहूं, मक्का और सोयाबीन जैसी पारंपरिक फसलें लंबे समय से उगाई जाती रही हैं। लेकिन अब जिले के किसान खेती में नए एक्सपेरिमेंट भी कर रहे हैं। राजस्थान के गर्म मौसम वाले इस क्षेत्र में अब देश की प्रसिद्ध आम की किस्मों की भी सफल खेती हो रही है। महाराष्ट्र का हापुस, उत्तर प्रदेश का दशहरी और लंगड़ा, गुजरात का केसर समेत कई लोकप्रिय आम अब चित्तौड़गढ़ की धरती पर लहलहा रहे हैं। इसकी शुरुआत करीब 18 साल पहले बोजुंदा स्थित कृषि विज्ञान केंद्र (KVK) में किए गए एक प्रयोग से हुई थी। आज यह एक्सपेरिमेंट सफल होकर किसानों के लिए अच्छी आय और नई संभावनाओं का जरिया बन गया है। एक हेक्टेयर में तैयार हुआ आम का मॉडल गार्डन कृषि विज्ञान केंद्र बोजुंदा में साल 2008 में आम की विभिन्न किस्मों का एक मॉडल गार्डन विकसित किया गया था। करीब एक हेक्टेयर क्षेत्र में लगाए गए इन पौधों ने समय के साथ साबित कर दिया कि यदि सही तकनीक अपनाई जाए तो चित्तौड़गढ़ का मौसम भी आम की अच्छी खेती के लिए उपयुक्त हो सकता है। इस बगीचे में आम्रपाली, दशहरी, लंगड़ा, मल्लिका, हापुस, हयात और केसर सहित सात प्रमुख किस्मों के पौधे लगाए गए थे। इनमें से कई पौधे आज भी अच्छी स्थिति में हैं और भरपूर उत्पादन दे रहे हैं। पिछले साल इस बगीचे से करीब 20 क्विंटल आम का उत्पादन प्राप्त हुआ था, जिससे कृषि विज्ञान केंद्र को अच्छा राजस्व भी मिला। इस साल भी आम के फलों का टेंडर करीब 37 हजार रुपए में हुआ है। मदर प्लांट बने किसानों के लिए नई उम्मीद कृषि विज्ञान केंद्र में लगे ये पौधे केवल फल उत्पादन के लिए नहीं हैं, बल्कि इन्हें मदर प्लांट के रूप में विकसित किया गया है। इन पौधों से कलम लेकर नए ग्राफ्टेड पौधे तैयार किए जाते हैं और किसानों को उपलब्ध कराए जाते हैं। यही वजह है कि यह बगीचा केवल एक प्रदर्शन प्लॉट नहीं बल्कि किसानों के लिए प्रशिक्षण और पौधा उत्पादन का जरूरी केंद्र बन गया है। यहां तैयार होने वाले पौधे मूल किस्म की सभी विशेषताओं को बनाए रखते हैं और जल्दी फल देना शुरू कर देते हैं। यही कारण है कि जिले के कई किसान अब यहां से पौधे लेकर अपने खेतों में बागवानी विकसित कर रहे हैं। जुलाई-अगस्त में होती है ग्राफ्टिंग की सबसे बड़ी तैयारी कृषि विज्ञान केंद्र के तकनीकी सहायक संजय धाकड़ ने बताया कि आम के ग्राफ्टेड पौधे तैयार करने के लिए जुलाई और अगस्त का समय सबसे उपयुक्त माना जाता है। बारिश के मौसम में पौधों में नई बढ़वार आने लगती है। इसी दौरान चयनित शाखाओं की पत्तियां हटाई जाती हैं और कुछ दिनों बाद तैयार हुई कलम को रूट स्टॉक पर ग्राफ्ट किया जाता है। रूट स्टॉक सामान्यतः बीज से तैयार किया गया एक साल पुराना पौधा होता है जिसकी मोटाई पेंसिल के बराबर होती है। ग्राफ्टिंग के बाद पौधों को पॉलीहाउस में रखा जाता है या फिर विशेष कवर लगाए जाते हैं ताकि उनमें नमी और तापमान बना रहे। करीब दो महीने बाद पौधा रोपण के लिए तैयार हो जाता है और किसान उसे अपने खेत में लगा सकते हैं। तीन साल में शुरू हो जाता है फल आना, पांच साल बाद मिलता है पूरा उत्पादन उन्होंने बताया कि ग्राफ्टेड पौधों की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इनमें जल्दी फल लगना शुरू हो जाता है। आमतौर पर तीसरे साल से कैरियां आने लगती हैं, हालांकि उस समय पौधा छोटा होने के कारण उत्पादन सीमित रहता है। पांच साल की आयु के बाद पौधे पूरी क्षमता से फल देने लगते हैं। एक अच्छे प्रबंधन वाले पौधे से 40 से 50 किलो तक फल आसानी से प्राप्त हो सकते हैं, जबकि बेहतर देखभाल और पर्याप्त सिंचाई होने पर उत्पादन एक से डेढ़ क्विंटल तक पहुंच सकता है। यही वजह है कि आम की बागवानी किसानों के लिए लाभकारी विकल्प बनती जा रही है। सही दूरी और देखभाल से बढ़ती है सफलता कृषि विज्ञान केंद्र के तकनीकी सहायक संजय धाकड़ ने बताया कि आम के पौधे लगाते समय खेत की तैयारी बहुत जरूरी होती है। इसके लिए लगभग एक मीटर लंबा, एक मीटर चौड़ा और एक मीटर गहरा गड्ढा तैयार किया जाना चाहिए। पौधे से पौधे की दूरी छह से आठ मीटर यानी करीब 18 से 20 फीट रखनी चाहिए ताकि भविष्य में पेड़ों को ज्यादा जगह मिल सके। ग्राफ्टेड पौधे लगाने के बाद खास ध्यान इस बात का रखना होता है कि ग्राफ्टिंग वाले हिस्से के नीचे से कोई नई फुटान विकसित न हो। अगर ऐसा होता है तो पौधे की मूल कलम कमजोर पड़ सकती है और उत्पादन प्रभावित हो सकता है। किसानों की आमदनी बढ़ाने में निभा रहा अहम भूमिका कृषि विज्ञान केंद्र का यह प्रयोग अब जिले के किसानों के लिए प्रेरणा बन चुका है। कई प्रगतिशील किसान यहां से पौधे लेकर दो से तीन बीघा तक के आम के बगीचे विकसित कर चुके हैं। वहीं कई किसान अपने खेतों और घरों के आसपास सीमित संख्या में भी पौधे लगा रहे हैं। धाकड़ का कहना है कि यदि कोई किसान 100 पौधों का बगीचा विकसित करता है और प्रति पौधा औसतन 40 किलो उत्पादन भी प्राप्त करता है तो उसे पारंपरिक खेती की तुलना में कहीं ज्यादा आय मिल सकती है। यही कारण है कि जिले में धीरे-धीरे बागवानी के प्रति रुचि बढ़ रही है। 25 साल तक देता है अच्छा उत्पादन आम का पेड़ एक लंबी अवधि की फसल माना जाता है। तकनीकी सहायक संजय धाकड़ ने बताया कि अच्छी देखभाल मिलने पर एक पेड़ करीब 25 साल तक लगातार अच्छा उत्पादन देता है। कई किस्मों में एक फल का वजन 400 से 600 ग्राम तक पहुंच जाता है। विशेष रूप से लंगड़ा और अन्य उन्नत किस्मों में बड़े आकार और बेहतर गुणवत्ता के फल मिलते हैं, जिससे बाजार में अच्छी कीमत मिलती है। किसानों को प्रशिक्षण के साथ मिल रही नई दिशा कृषि विज्ञान केंद्र सिर्फ पौधे उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। यहां किसानों को बागवानी, पौधारोपण, सिंचाई, पौध संरक्षण और प्रबंधन की पूरी जानकारी भी दी जाती है। समय-समय पर ट्रेनिंग प्रोग्राम आयोजित किए जाते हैं ताकि किसान वैज्ञानिक तरीके से बगीचे विकसित कर सकें। इससे उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ पौधों की गुणवत्ता बनाए रखने में भी मदद मिलती है। मरुधरा में फलों के राजा की नई कहानी एक समय था जब लोगों का मानना था कि हापुस, दशहरी और केसर जैसे आम सिर्फ अपने पारंपरिक इलाकों में ही अच्छी तरह उग सकते हैं। लेकिन बोजुंदा के कृषि विज्ञान केंद्र ने इस धारणा को गलत साबित कर दिया है। यहां अपनाई गई ग्राफ्टिंग तकनीक और वैज्ञानिक तरीके से देखभाल के जरिए यह दिखाया गया कि चित्तौड़गढ़ जैसी गर्म जलवायु में भी आम की अच्छी और गुणवत्तापूर्ण पैदावार ली जा सकती है। इसी कारण से यह आम का बगीचा आज सिर्फ एक प्रयोग नहीं रहा, बल्कि जिले के किसानों के लिए प्रेरणा का केंद्र बन गया है। यह बगीचा किसानों को बता रहा है कि सही तकनीक, विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और थोड़े धैर्य के साथ आम की खेती से अच्छी आय हासिल की जा सकती है। इससे जिले में बागवानी के नए अवसर भी खुल रहे हैं।



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अमीर बिजनेसमैन से रचाई शादी, 30 की उम्र में करियर के पीक पर एक्टिंग को कहा अलविदा


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सिनेमा जगत में जहां स्टार्स दशकों तक टिके रहने के लिए संघर्ष करते हैं, वहीं एक ऐसी भी एक्ट्रेस भी रही है, जिसने महज 30 साल की उम्र में कामयाबी के शिखर पर होते हुए भी चकाचौंध को अलविदा कह दिया. बॉलीवुड को पहली 100 करोड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्म देने वाली इस हसीना ने बेहद कम समय में खुद को इंडस्ट्री की सबसे भरोसेमंद स्टार के रूप में स्थापित किया था. लेकिन साउथ से लेकर हिंदी सिनेमा तक अपनी धाक जमाने के बाद एक्ट्रेस शादी के बाद अचानक स्क्रीन से गायब हो गई.

नई दिल्ली. 15 साल की उम्र में सिनेमा की दुनिया में कदम रखने वाली एक्ट्रेस कई भाषाओं की फिल्म इंडस्ट्री का बड़ा चेहरा बन गई. बॉलीवुड की सबसे पहली 100 करोड़ी ब्लॉकबस्टर फिल्म में लीड हीरोइन का रोल निभाने के बाद इंडस्ट्री के बड़े-बड़े हीरो के साथ काम किया. 30 साल की उम्र से पहले ही उनका करियर सफलता के सातवें आसमान पर था.

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मगर फैंस को हैरानी तब हुई, जब बैक-टू-बैक सुपरहिट फिल्में देने के बावजूद एक्ट्रेस ने बेहद खामोशी से खुद को चकाचौंध से दूर कर लिया. हम बात कर रहे हैं असिन थोट्टुमकल की. साल 2008 में जब ‘गजिनी’ सिनेमाघरों में रिलीज हुई, तो हर तरफ सिर्फ आमिर खान के जबरदस्त बॉडी ट्रांसफॉर्मेशन और फिल्म की खतरनाक रिवेंज स्टोरी की ही चर्चा थी. दूसरी तरफ, कल्पना के किरदार में असिन की मासूमियत ने दर्शकों का दिल जीत लिया.

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उनकी इसी बेहतरीन परफॉर्मेंस ने फिल्म को एक इमोशनल टच दिया, जिसने ‘गजिनी’ को एक कल्ट फिल्म बना दिया. इस ब्लॉकबस्टर ने बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रचते हुए भारत में 100 करोड़ का आंकड़ा पार किया. यह ऐसा कारनामा करने वाली बॉलीवुड इतिहास की सबसे पहली हिंदी फिल्म बनी, जिसने आने वाले समय के लिए कामयाबी के नए मायने तय कर दिए.

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असिन के लिए यह फिल्म बॉलीवुड में एक ग्रैंड और धमाकेदार एंट्री जैसी थी. वैसे तो वह साउथ फिल्म इंडस्ट्री में पहले से ही नंबर वन एक्ट्रेस थीं और वहां राज कर रही थीं, लेकिन कल्पना के इस यादगार रोल ने उन्हें रातों-रात पूरे देश में घर-घर की पसंद बना दिया. ‘गजिनी’ की ऐतिहासिक कामयाबी के बाद असिन रातों-रात बॉलीवुड के बड़े-बड़े डायरेक्टर्स और सुपरस्टार्स की पहली पसंद बन गईं.

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इसके बाद उन्होंने सलमान खान के साथ सुपरहिट फिल्म ‘रेडी’ में काम किया, अक्षय कुमार के साथ ‘हाउसफुल 2’ और ‘खिलाड़ी 786’ जैसी फिल्मों में अपनी कमाल की कॉमिक टाइमिंग दिखाई, तो वहीं अजय देवगन के साथ फिल्म ‘बोल बच्चन’ में नजर आईं. एक के बाद एक मिली इन धमाकेदार कामयाबियों ने बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया और साल 2010 के शुरुआती दशक में असिन को इंडस्ट्री की सबसे भरोसेमंद और टॉप हीरोइनों की कतार में ला खड़ा किया.

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बेहद कम समय में असिन ने एक ऐसा शानदार मुकाम हासिल कर लिया, जिसे पाने में एक्टर्स को सालों-साल लग जाते हैं. मलयालम, तमिल और तेलुगू से लेकर हिंदी सिनेमा तक, उन्होंने जिस सहजता से हर फिल्म इंडस्ट्री में अपनी धाक जमाई, उसने यह साबित कर दिया कि वह एक ऐसी बेमिसाल टैलेंट हैं जो बिना किसी सरहद के पूरे देश के दर्शकों के दिलों से सीधे जुड़ सकती हैं.

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जब ‘गजिनी’ में आमिर खान के अपोजिट असिन को देखा गया, तो कई लोगों को लगा कि वह कोई नई एक्ट्रेस हैं. जबकि असल में वह 15 साल की उम्र से ही तमिल, तेलुगू और मलयालम फिल्मों की सुपरस्टार थीं. उन्होंने थलपति विजय (पोक्किरी), अजीत (वरलारू), चियान विक्रम और सूर्या (ओरिजिनल गजिनी) जैसे सुपरस्टार्स संग काम किया था. वहीं तेलुगू में वह महेश बाबू और पवन कल्याण जैसी बड़ी हस्तियों की पसंदीदा लीडिंग लेडी रह चुकी थीं.

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साल 2016 के जनवरी महीने में असिन ने माइक्रोमैक्स के को-फाउंडर और बिजनेसमैन राहुल शर्मा के साथ सात फेरे लिए. हिंदू और क्रिश्चियन दोनों रीति-रिवाजों से हुई इस खूबसूरत शादी की सबसे दिलचस्प बात यह थी कि इन दोनों की मुलाकात असिन के को-स्टार अक्षय कुमार ने कराई थी. शादी के बाद उन्होंने ग्लैमर की दुनिया को पूरी तरह अलविदा कह दिया और अपना पूरा वक्त परिवार और पर्सनल लाइफ को दे दिया.

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आज के समय में असिन लाइमलाइट से कोसों दूर एक बेहद निजी और सुकून भरी जिंदगी जी रही हैं. साल 2017 में पति राहुल शर्मा के साथ अपनी बेटी आरिन रयान का स्वागत करने के बाद उन्होंने खुद को पब्लिक और सोशल मीडिया से लगभग पूरी तरह काट लिया. वह अब कभी-कभार ही सोशल मीडिया पर अपनी बेटी या परिवार से जुड़ी खास तस्वीरों की छोटी सी झलक फैंस के साथ शेयर करती हैं.

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