कोटा में डिलीवरी के बाद महिला की मौत हो गई। उसे बूंदी से कोटा रेफर किया गया था। बच्चेदानी में कट के कारण खून बहने लगा और दोनों किडनियों पर असर आ गया था। पति ने बूंदी के डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दी है। टांकों से खून निकलने पर बिगड़ी तबीयत टोंक जिले के पनवाड़ की रहने वाली महिला सोनिया सैनी (24) की मौत हुई है। उनके पति राजू सैनी ने बताया कि पत्नी को 17 अगस्त को डिलीवरी के लिए बूंदी के हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। अगले दिन 18 अगस्त को सुबह करीब 10 बजे डॉक्टर ने ऑपरेशन के जरिए डिलीवरी करवाई। पत्नी ने एक बच्ची को दिया लेकिन डिलीवरी के बाद नर्सों ने पत्नी को नहीं संभाला। उसके टांकों से खून निकलने लगा। तब डॉक्टरों ने कोटा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया, जहां 19 अगस्त की शाम मौत हो गई। डिलीवरी के दौरान बच्चेदानी में लगा कट पति का आरोप है कि कोटा मेडिकल कॉलेज में जांच के दौरान डॉक्टरों ने बताया कि डिलीवरी के दौरान बच्चेदानी में कट लगने के कारण लगातार खून निकलता रहा। ज्यादा खून निकलने से महिला की हालत गंभीर हो गई और दोनों किडनियों पर भी असर पड़ा। पुलिस में शिकायत दर्ज बूंदी कोतवाली थाने के एएसआई देशराज चौधरी ने बताया कि मामले में परिजनों की ओर से पुलिस को शिकायत दी गई है। शिकायत के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया गया है।
हॉकी वर्ल्ड कप के पहले राउंड में पाकिस्तान के खिलाफ 3-0 और 4-1 से बढ़त बनाने के बाद जिस तरह से भारत ने पकड़ ढीली की, वह नीदरलैंड जैसी टीमों के खिलाफ भारी पड़ सकती है।
आखिरी पूल मैच में चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान को हराकर दूसरे दौर पहुंची भारतीय पुरूष हॉकी टीम की राह अब आसान नहीं होगी और पहले ही मैच में शुक्रवार को उसका सामना पेरिस ओलंपिक स्वर्ण पदक विजेता नीदरलैंड से हो सकता है जिसमें गलती की कोई गुंजाइश नहीं होगी। पाकिस्तान के खिलाफ 3-0 और 4-1 से बढ़त बनाने के बाद जिस तरह से भारत ने पकड़ ढीली की, वह नीदरलैंड जैसी टीमों के खिलाफ भारी पड़ सकती है।
भारत ने पूल डी में वेल्स को 3 -1 से और पाकिस्तान को 5-3 से हराया जबकि इंग्लैंड से 2 -4 से हार गई। नए प्रारूप के तहत पूल डी की दोनों शीर्ष टीमें और पूल ए की दो शीर्ष टीमों से पूल ई बना है जिसमें से पहली दो टीमें सेमीफाइनल में जायेंगी। वहीं पूल बी और सी की शीर्ष दो टीमें पूल एफ में एक दूसरे से खेलेंगी और पहले दो स्थान की टीमें अंतिम चार में पहुंचेंगी।
पहले चरण में इंग्लैंड से हारने के कारण भारतीय टीम दूसरे दौर में उसके खिलाफ नहीं खेलेगी जबकि इंग्लैंड पहले दौर के तीन अंक लेकर इस दौर में पहुंची है। इसके मायने हैं कि भारत को बाकी दोनों टीमों से जीतना ही होगा।
पूल ए में दुनिया की दूसरे नंबर की टीम नीदरलैंड फिलहाल शीर्ष पर है जिसे गुरुवार को जापान से आखिरी ग्रुप मैच खेलना है। मौजूदा फॉर्म को देखते हुए नीदरलैंड का जीतना लगभग तय है क्योंकि जापान पहले दोनों मैच हारकर दौड़ से पहले ही बाहर हो चुका है।
वहीं दूसरे मैच में वर्ल्ड रैंकिंग में आठवें स्थान पर काबिज अर्जेंटीना का सामना 11 वीं रैंकिंग वाली न्यूजीलैंड से होगा जिसमें दूसरे दौर में जाने वाली एक और टीम का निर्धारण होगा। अर्जेंटीना और न्यूजीलैंड दोनों के नीदरलैंड से हारने के बाद तीन तीन अंक हैं लेकिन गोल औसत के आधार पर फिलहाल अर्जेंटीना दूसरे स्थान पर है।
तीन ओलंपिक और तीन विश्व कप जीत चुकी नीदरलैंड को उसके गढ में हराने की चुनौती भारत के लिये आसान नहीं होगी । इसी मैदान पर 1973 में पहली बार विश्व कप जीतने वाली नीदरलैंड ने 1990 और 1998 में फिर खिताब जीता जबकि पिछले चार विश्व कप में भी वह दो बार रजत और दो बार कांस्य पदक जीत चुकी है।
अपनी मजबूत हॉकी संस्कृति के लिये मशहूर नीदरलैंड टीम के हर मैच में दस हजार की क्षमता वाला स्टेडियम खचाखच भरा रहता है और मैदान में चारों तरफ आरेंज रंग नजर आता है हालांकि अब यह भारतीय जर्सी का भी रंग है।
पाकिस्तान पर जीत के बावजूद भारतीय कप्तान हरमनप्रीत ने स्वीकार किया था कि उन्हें डिफेंस में सुधार करने की जरूरत है।
उन्होंने कहा था ,”हमें आगे के कठिन मैचों में लिये डीप डिफेंस बेहतर करना होगा। अगर 25 मीटर के भीतर गेंद मिल रही है तो उसे अपने पास रखना होगा । हमने बेवकूफाना गलतियां की जिस पर पाकिस्तान को गोल करने का मौका मिल गया । हमें इनसे सबक लेकर आगे बेहतर प्रदर्शन करना होगा।”
अच्छी शुरूआत के बाद तीसरे या चौथे क्वार्टर में ढिलाई बरतने की कमजोरी इंग्लैंड और पाकिस्तान दोनों के खिलाफ नजर आई। इंग्लैंड के खिलाफ जहां हाफटाइम तक हरमनप्रीत सिंह और दिलप्रीत सिंह के गोल के दम पर 2 -1 से बढत बनाने के बाद तीसरे क्वार्टर में इंग्लैंड को दो गोल गंवाये तो पाकिस्तान को दूसरे क्वार्टर में चार मिनट के भीतर दो गोल करने के मौके दे दिए।
कोच क्रेग फुल्टोन ने पाकिस्तान के खिलाफ जीत के बावजूद कहा कि दूसरे क्वार्टर में टीम अच्छा नहीं खेल सकी लेकिन उन्होंने कहा कि इस तरह के मैच में कई बार जज्बात हावी हो जाते हैं।
उन्होंने कहा था ,” हमने अच्छी शुरूआत की लेकिन दूसरे क्वार्टर में खेल उतना अच्छा नहीं रहा। यह हालांकि बड़ा मैच था और कई बार जज्बात हावी हो जाते हैं लेकिन मैं प्रदर्शन से और टीम के संतुलन से खुश हूं।”
भारतीय टीम के लिये अच्छी बात यह है कि उसने जून में रोटरडम में एफआईएच प्रो लीग के 2025-26 सत्र के आखिरी मैच में नीदरलैंड को 3 -2 से हराया था । पहला मैच इसी अंतर से हारने के बाद भारत ने जु्गराज सिंह, अभिषेक और राजिंदर सिंह जैसे युवा खिलाड़ियों के गोल के दम पर जीत दर्ज की थी ।
ये तीनों खिलाड़ी टीम का हिस्सा हैं और खासकर अभिषेक शानदार फॉर्म में हैं जिन्होंने पाकिस्तान के खिलाफ दो बेहतरीन फील्ड गोल भी किये थे । वहीं कप्तान हरमनप्रीत अभी तक टूर्नामेंट में सर्वाधिक पांच गोल कर चुके हैं और एक बार फिर उन पर बड़ा दारोमदार होगा जबकि 420 अंतरराष्ट्रीय मैच खेल चुके अनुभवी मिडफील्डर मनप्रीत सिंह और 291 मैच खेल चुके फॉरवर्ड मनदीप सिंह से बेहतर प्रदर्शन की उम्मीद होगी ।
मैच का समय : शाम छह बजे से (भारतीय समयानुसार रात 9.30 से )
देवरिया जिले के रुद्रपुर विकासखंड स्थित एक कंपोजिट स्कूल के प्रिंसिपल का वीडियो सामने आया है। इस वीडियो में प्रधानाध्यापक एक महिला के साथ दिख रहे हैं। यह वीडियो 8 अगस्त का बताया जा रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि स्कूल की छुट्टी होने के बाद प्रिंसिपल अपने कक्ष में थे और उसी दौरान एक महिला भी कमरे में मौजूद थी। ग्रामीणों ने मौके पर पहुंचकर मोबाइल से यह वीडियो बनाया। वीडियो में छुट्टी के बाद प्रिंसिपल के कक्ष से महिला बाहर निकलते दिख रही है। बीएसए डॉ. रामजीवन मौर्य से संपर्क करने की कोशिश की गई। हालांकि, उनसे फोन पर बात नहीं हो सकी।
महिला प्रिंसिपल के कमरे से बाहर निकलती दिखी।
ग्रामीणों के पहुंचने पर बाहर निकले वीडियो में प्रधानाध्यापक कमरे से बाहर निकलते दिखाई दे रहे हैं। इसके कुछ समय बाद महिला भी विद्यालय परिसर से तेजी से बाहर जाती नजर आ रही है। ग्रामीणों का कहना है कि लोगों के पहुंचने के बाद दोनों वहां से चले गए।
किशनगंज में यू-डाइस प्लस (U-DISE+) पोर्टल पर छात्रों का डेटा अपलोड न करने पर 18 विद्यालयों के प्रधानाध्यापकों को शो-कॉज नोटिस जारी किया गया है। शिक्षा विभाग ने शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए निर्धारित समय सीमा के भीतर डेटा इम्पोर्ट न करने को लापरवाही माना है। जिला कार्यक्रम पदाधिकारी (प्राथमिक शिक्षा एवं सर्व शिक्षा अभियान) रूबी कुमारी ने इस संबंध में आदेश जारी किया है। उन्होंने सभी संबंधित प्रधानाध्यापकों को 24 घंटे के भीतर लंबित कार्य पूरा करने का निर्देश दिया है। साथ ही, उनसे यह भी पूछा गया है कि बार-बार विभागीय निर्देशों के बावजूद डेटा अपलोड का कार्य समय पर क्यों नहीं किया गया। 2 विद्यालयों में लंबित पाया गया कार्य विभागीय समीक्षा के दौरान यह सामने आया कि 18 विद्यालयों में छात्रों के डेटा इम्पोर्ट का कार्य अभी भी लंबित है। इसे विभागीय आदेशों की अवहेलना मानते हुए प्रधानाध्यापकों के खिलाफ कार्रवाई की गई है। जारी सूची के अनुसार, सर्वाधिक 16 विद्यालय ठाकुरगंज प्रखंड के हैं, जबकि किशनगंज प्रखंड के 2 विद्यालयों में यह कार्य लंबित पाया गया है। ठाकुरगंज प्रखंड के विद्यालयों में यूसीएचएच माध्यमिक विद्यालय दूधहौती, यूसीएचएच माध्यमिक विद्यालय रसिया, यूसीएचएच माध्यमिक विद्यालय कादोगांव, यूसीएचएच माध्यमिक विद्यालय लोधा, ठाकुरगंज हाई स्कूल, हाई स्कूल पौआखाली, यूसीएचएच माध्यमिक विद्यालय खारूदाह, यूसीएचएच माध्यमिक विद्यालय बरचौंदी शामिल है। इसके अलावा यूसीएचएच माध्यमिक विद्यालय बंदरझूला, यूसीएचएच माध्यमिक विद्यालय बेहबुलडांगी, यूसीएचएच माध्यमिक विद्यालय भोगडाबर, यूसीएचएच माध्यमिक विद्यालय जीरनगछ, प्रोजेक्ट गर्ल्स हाई स्कूल ठाकुरगंज, यूसीएचएच माध्यमिक विद्यालय भोलमारा और यूसीएचएच माध्यमिक विद्यालय सखुआडाली शामिल हैं। किशनगंज प्रखंड के 2 स्कूल में कार्य लंबित किशनगंज प्रखंड में एमएस लाइन उर्दू और यूएमएस अमलझाड़ी विद्यालयों में भी डेटा अपलोड का कार्य लंबित है। डीपीओ रूबी कुमारी ने बताया कि यू-डाइस प्लस पोर्टल पर छात्रों का डेटा अद्यतन करना अत्यंत महत्वपूर्ण है। इसके माध्यम से नामांकन, छात्र ट्रैकिंग और विभिन्न सरकारी कल्याणकारी योजनाओं का लाभ सुनिश्चित किया जाता है। उन्होंने स्पष्ट किया कि इस कार्य में किसी भी प्रकार की शिथिलता या लापरवाही स्वीकार्य नहीं होगी।
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने गुरुवार को उज्जैन में चल रहे विकास कार्यों का निरीक्षण किया। उन्होंने कंठाल चौराहे से सती गेट और छोटा सराफा तक चल रहे मार्ग चौड़ीकरण कार्य का जायजा लिया। कुछ दिन बाद शाही सवारी का मार्ग भी यहीं से रहेगा, इसलिए उन्होंने निर्माण एजेंसी के इंजीनियरों से काम की जानकारी ली। रहवासियों ने मुख्यमंत्री का स्वागत किया स्थानीय रहवासियों ने पुष्पमाला और दुपट्टा पहनाकर मुख्यमंत्री का स्वागत किया। मुख्यमंत्री ने दैनिक भास्कर से बातचीत में कहा कि उज्जैन के विकास में जनता का सहयोग महत्वपूर्ण है। उन्होंने बताया कि कई रहवासियों और दुकानदारों ने मार्ग चौड़ीकरण के लिए स्वेच्छा से अपने मकान और दुकानों के हिस्से हटाए हैं। मुख्यमंत्री ने इसे सरकार के संकल्प के साथ जनता का संकल्प जुड़ना बताया। विकास के बाद बदलेगा शहर का स्वरूप डॉ. यादव ने सभी समाज और धर्मों के लोगों का उज्जैन के भविष्य को बेहतर बनाने में सहयोग के लिए आभार व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि विकास कार्यों के कारण कुछ दिनों तक परेशानी होगी, लेकिन इसके बाद उज्जैन का स्वरूप बेहद आकर्षक होगा। मुख्यमंत्री ने कहा कि राजा विक्रमादित्य और बाबा महाकाल की नगरी का बदलता सौंदर्य आने वाले समय में सभी को आकर्षित करेगा। यह सिंहस्थ-2028 से पहले उज्जैन को स्वर्णिम शहर बनाने की दिशा में एक कदम है। 410 मीटर मार्ग 15 मीटर चौड़ा होगा सिंहस्थ-2028 के लिए कंठाल चौराहे से छत्री चौक तक करीब 410 मीटर लंबा मार्ग 15 मीटर चौड़ा किया जा रहा है। इसमें करीब 310 मीटर हिस्से में पीसीसी सड़क का काम पूरा हो चुका है। कंठाल चौराहे पर 500 वर्ग मीटर क्षेत्र में पेवर ब्लॉक लगाकर सौंदर्यीकरण किया जाएगा। प्राचीन सती माता द्वार के विकास और सौंदर्यीकरण का काम भी प्रस्तावित है। डिजाइन देखी, गणेश मंदिर में दर्शन किए मुख्यमंत्री ने कंठाल चौराहा और सती माता द्वार के प्रस्तावित विकास की डिजाइन भी देखी। उन्होंने भगवान श्री चिंताहरण गणेश के दर्शन कर आशीर्वाद लिया। इससे पहले मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन कलेक्टर कार्यालय भवन का भी निरीक्षण किया।
ईरान के साथ युद्ध के बाद अमेरिका फारस की खाड़ी (गल्फ) में अपनी सैन्य मौजूदगी कम करने पर विचार कर रहा है। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, पेंटागन समीक्षा कर रहा है कि क्या अब गल्फ देशों में पहले जितने अमेरिकी सैनिक रखने की जरूरत है।
इसकी बड़ी वजह युद्ध में अमेरिकी सैन्य ठिकानों को हुआ भारी नुकसान है। रिपोर्ट के मुताबिक, इस दौरान 200 से ज्यादा अमेरिकी सैन्य सुविधाएं क्षतिग्रस्त या तबाह हुई हैं। फिलहाल अमेरिका जॉर्डन से लेकर ओमान तक फैले करीब 20 सैन्य ठिकानों पर लगभग 40 हजार सैनिक तैनात रखता है।
हालांकि, इस पर अभी कोई अंतिम फैसला नहीं हुआ है। पेंटागन, ज्वाइंट स्टाफ और अमेरिकी सेंट्रल कमांड मिलकर यह आकलन कर रहे हैं कि युद्ध के बाद मध्य पूर्व में अमेरिकी सैन्य तैनाती कैसी होनी चाहिए।
गल्फ में अमेरिका के सबसे बड़े सैन्य ठिकाने
बहरीन में अमेरिकी नौसेना के फिफ्थ फ्लीट का मुख्यालय है। वहीं कुवैत, कतर, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और दूसरे गल्फ देशों में अमेरिका के बड़े सैन्य ठिकाने हैं।
अमेरिका कई दशकों से इन सैन्य ठिकानों के जरिए मिडिल ईस्ट में अपने सैन्य अभियान चलाता रहा है और क्षेत्र के सहयोगी देशों की सुरक्षा में मदद करता रहा है।
बहरीन के मनामा में अमेरिकी नौसेना के फिफ्थ फ्लीट का हेडक्वार्टर। यह तस्वीर 21 फरवरी 2026 को सैटेलाइट से ली गई।
ईरानी हमलों के बाद बदली रणनीति
ईरान के साथ युद्ध के दौरान अमेरिका के कई सैन्य ठिकाने मिसाइल और ड्रोन हमलों की जद में आए। मार्च में कुवैत के एक सैन्य ठिकाने पर हुए हमले में 6 अमेरिकी सैनिकों की मौत हो गई थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, युद्ध में 200 से ज्यादा अमेरिकी मिलिट्री फैसिलिटी को नुकसान पहुंचा। इस दौरान कुल 18 अमेरिकी सैनिकों की मौत हुई है।
ईरान के हमलों से बचाव के लिए अमेरिकी सेना को 1000 से ज्यादा एयर डिफेंस इंटरसेप्टर मिसाइलें दागनी पड़ीं। इससे पैट्रियट और थाड जैसे एयर डिफेंस सिस्टम के मिसाइल भंडार पर दबाव बढ़ गया।
अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि भविष्य में ऐसे हमलों का खतरा कम करने के लिए सैनिकों और सैन्य उपकरणों की तैनाती पर दोबारा विचार करना जरूरी है।
लाइव-फायर ड्रिल के दौरान अमेरिकी सेना का ‘MIM-104 पैट्रियट (PAC-3)’ मिसाइल इंटरसेप्टर।
सैनिकों को दूसरी जगह भेजने पर विचार
पेंटागन में इस समय कई प्रस्तावों पर चर्चा चल रही है। इनमें गल्फ देशों से कुछ सैनिकों और सैन्य उपकरणों को जॉर्डन, इजराइल या सऊदी अरब के रेड सी (लाल सागर) तट के करीब तैनात करने का सुझाव दिया गया है।
अधिकारियों का मानना है कि ये इलाके ईरान की सीधी मिसाइल और ड्रोन पहुंच से अपेक्षाकृत ज्यादा सुरक्षित हो सकते हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक, सैनिकों की तैनाती को लेकर ट्रम्प सरकार के भीतर भी अलग-अलग राय है।
एक पक्ष चाहता है कि अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी कम करे और संसाधनों का ज्यादा इस्तेमाल घरेलू सुरक्षा तथा चीन से मुकाबले पर करे।
वहीं दूसरा पक्ष मानता है कि गल्फ देशों और इजराइल में मजबूत अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बनाए रखना जरूरी है, ताकि क्षेत्र में अमेरिका का प्रभाव कायम रहे।
मई 2025 में कतर के अल-उदैद एयरबेस पर अमेरिकी सैनिकों से मुलाकात करते ट्रम्प। यह मिडिल ईस्ट में अमेरिकी सेना का सबसे बड़ा सैन्य ठिकाना है।
इजराइल में सैन्य मौजूदगी बढ़ाने का भी प्रस्ताव
एक प्रस्ताव में कुवैत समेत कुछ गल्फ देशों से सैनिकों और सैन्य उपकरणों को इजराइल के ओवदा एयरबेस भेजने की बात भी कही गई है।
हालांकि, इस प्रस्ताव का प्रशासन के भीतर विरोध भी हो रहा है। कुछ अधिकारियों का कहना है कि इजराइल में अमेरिकी सैन्य मौजूदगी बढ़ने से संवेदनशील खुफिया जानकारी की सुरक्षा पर खतरा बढ़ सकता है।
गल्फ देशों पर भी पड़ेगा असर
अगर अमेरिका गल्फ देशों से बड़ी संख्या में अपने सैनिक हटाता है, तो इसका सबसे ज्यादा असर वहां के सिक्योरिटी इन्फ्रास्ट्रक्चर पर पड़ेगा। साथ ही, पूरे मिडिल ईस्ट के सुरक्षा समीकरण भी बदल सकते हैं।
दशकों से सऊदी अरब, UAE, कतर, कुवैत, बहरीन और दूसरे खाड़ी देश अपनी सुरक्षा के लिए अमेरिकी सैन्य मौजूदगी पर निर्भर रहे हैं। सैनिकों की संख्या कम होने पर इन देशों को अपनी सैन्य क्षमता बढ़ानी पड़ सकती है या नए सुरक्षा साझेदार तलाशने पड़ सकते हैं।
हालांकि, अमेरिकी सैनिकों की संख्या कम होने का मतलब यह नहीं होगा कि दोनों पक्षों के सुरक्षा संबंध खत्म हो जाएंगे। हथियारों की खरीद, खुफिया जानकारी साझा करने और सैन्य सहयोग जैसी व्यवस्थाएं पहले की तरह जारी रह सकती हैं।
सितंबर तक ₹3.6 लाख रुपए खर्च होने का अनुमान
पेंटागन का अनुमान है कि सितंबर के अंत तक ईरान युद्ध पर अमेरिका का खर्च 37.5 अरब डॉलर (करीब 3.6 लाख करोड़ रुपए) तक पहुंच सकता है।
इस अनुमान में क्षतिग्रस्त सैन्य ठिकानों को दोबारा बनाने का खर्च शामिल नहीं है। इसलिए अमेरिका अब सिर्फ उनकी मरम्मत पर नहीं, बल्कि यह भी तय कर रहा है कि सभी ठिकानों को पहले की जगह फिर से बनाया जाए या कुछ को दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया जाए।
अमेरिका ने गल्फ देशों में सैन्य ठिकाने क्यों बनाए?
1. तेल और गैस की सप्लाई सुरक्षित रखने के लिए: दुनिया के बड़े हिस्से को तेल और गैस फारस की खाड़ी से मिलती है। अमेरिका चाहता है कि इन समुद्री रास्तों में कोई बाधा न आए।
2. ईरान की गतिविधियों पर नजर रखने के लिए: 1979 की ईरानी क्रांति के बाद से अमेरिका और ईरान के रिश्ते तनावपूर्ण रहे हैं। गल्फ में मौजूद सैन्य ठिकाने अमेरिका को ईरान की सैन्य गतिविधियों पर नजर रखने में मदद करते हैं।
3. सहयोगी देशों की सुरक्षा के लिए: सऊदी अरब, UAE, कुवैत, कतर और बहरीन लंबे समय से अमेरिका के रणनीतिक साझेदार रहे हैं। अमेरिकी सैन्य ठिकाने इन देशों की सुरक्षा व्यवस्था का अहम हिस्सा हैं।
4. मिडिल ईस्ट में सैन्य अभियानों के लिए: इराक, अफगानिस्तान और ISIS के खिलाफ अभियानों में अमेरिका ने इन्हीं सैन्य ठिकानों का इस्तेमाल किया है।
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Samsung ने Galaxy S25 की कीमत में 12,000 रुपये तक का इजाफा कर दिया है।
सैमसंग का यह फ्लैगशिप फोन पिछले साल जनवरी में लॉन्च किया गया था।
इस फोन में दमदार कैमरा के साथ-साथ AI फीचर भी दिया गया है।
Samsung Galaxy S25 की कीमत में बड़ा इजाफा हुआ है। सैमसंग का पिछले साल लॉन्च हुआ फ्लैगशिप फोन अब 12,000 रुपये तक महंगा मिल रहा है। इसकी कीमत Galaxy S26 के लगभग बराबर हो गई है। सैमसंग का यह फोन Qualcomm Snapdragon 8 Elite चिपसेट के साथ आता है। इसके अलावा फोन में Google Gemini पर बेस्ड Galaxy AI फीचर भी मिलेगा।
कितना महंगा हुआ फोन?
Samsung Galaxy S25 को भारत में 79,999 रुपये की शुरुआती कीमत में लॉन्च किया गया था। अब इस फोन की कीमत में 4,000 रुपये का इजाफा किया गया है। प्राइस हाइक के बाद यह फोन अब 83,999 रुपये में मिलेगा। हालांकि, इसकी लिस्ट प्राइस पहले 80,999 रुपये थी, जो अब बढ़कर 84,999 रुपये हो गई है।
वहीं, इसका 12GB RAM + 512GB स्टोरेज वाला वेरिएंट अब लॉन्च प्राइस से 12,000 रुपये तक महंगा हो गया है। इसे 91,999 रुपये की शुरुआती कीमत में लॉन्च किया गया था। अब यह वेरिएंट 1,03,999 रुपये में मिलेगा। इसकी लिस्ट प्राइस 92,999 रुपये थी, जो अब बढ़कर 1,04,999 रुपये हो गई है। हाल ही में सैमसंग का यह फोन अमेजन पर 65,000 रुपये की शुरुआती कीमत में मिल रहा था।
Samsung Galaxy S25
पुरानी कीमत
नई कीमत
12GB + 256GB
79,999 रुपये
83,999 रुपये
12GB + 512GB
91,999 रुपये
1,03,999 रुपये
टिप्स्टर अभिषेक यादव ने अपने X हैंडल से सैमसंग के इस फोन की कीमत में हुए इजाफे का दावा किया है। हालांकि, यह पहली बार नहीं है जब इस साल सैमसंग के फोन की कीमत बढ़ी है। पिछले दिनों भी Galaxy M47 5G की कीमत लॉन्च के महज कुछ दिन बाद ही बढ़ गई थी। इसके अलावा इस साल लॉन्च हुए सभी मॉडल अब लॉन्च प्राइस से महंगे में मिल रहे हैं। इसकी मुख्य वजह मेमोरी चिपसेट की कीमत में इजाफा होना है। इसके अलावा अन्य कंपोनेंट्स भी दिनों-दिन महंगे होते जा रहे हैं, जिसका असर फोन की कीमत पर पड़ रहा है।
Samsung Galaxy S25 के फीचर्स
सैमसंग का यह फोन पिछले साल जनवरी 2025 में लॉन्च किया गया था। फोन में 6.2 इंच का Dynamic AMOLED 2X मिलता है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। यह फोन Qualcomm Snapdragon 8 Elite या Galaxy Exynos 2500 चिपसेट के साथ आता है। फोन में 12GB तक रैम और 512GB तक स्टोरेज का सपोर्ट मिलता है। यह Andorid 16 पर बेस्ड OneUI 8 पर काम करता है।
इस फोन के बैक में ट्रिपल कैमरा सेटअप दिया गया है। फोन में 50MP का मेन OIS कैमरा मिलेगा। इसके साथ 12MP का अल्ट्रा वाइड और 10MP का टेलीफोटो कैमरा मिलता है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए सैमसंग के इस फोन में 12MP का कैमरा दिया गया है। इस फोन में 4,000mAh की बैटरी और 25W वायर्ड के साथ वायरलेस चार्जिंग का सपोर्ट मिलता है। साथ ही, यह IP68 रेटेड है, जिसकी वजह से वाटर और डस्टप्रूफ है।
पटना. बनारस की गलियों में मिलने वाली गरमा-गरम टमाटर चाट का स्वाद लेने के लिए आपको वाराणसी जाने की जरूरत नहीं है. पटना में एक ऐसा चाट हब है, जहां मसालेदार टमाटर चाट का स्वाद आपको बनारस की गलियों की याद दिला देगा. खास बात यह है कि इस ठेले का नाम भी ‘काशी चाट हब’ है. यहां टमाटर, मसालों और चटपटे स्वाद का ऐसा मेल मिलता है कि पहली ही बाइट में बनारसी टमाटर चाट का स्वाद महसूस होगा. आपको बता दें कि यह चाट हब सिर्फ चाट प्रेमियों का ही अड्डा नहीं है, बल्कि कंटेंट क्रिएटरों का भी ठिकाना है. यहां मिलने वाले चाट के हजारों रील्स सोशल मीडिया पर मिल जाएंगे. इसीलिए भीड़ इतनी अधिक होती है कि पूछिए ही मत.
कुल्हड़ वाली बनारस स्पेशल चाट राजधानी पटना के बेली रोड स्थित पुनाइचक में टेक्नोलॉजी भवन के बगल में यह चाट की दुकान हर रोज लगती है. यूं तो यहां कई तरह की चाट मिलती है, लेकिन इन दिनों टमाटर चाट का क्रेज खूब देखने को मिल रहा है. इसकी खास वजह यह है कि बनारस की तर्ज पर पटना में इस चाट की शुरुआत की गई है. नई चीज का स्वाद चखने के लिए यहां लोगों की खूब भीड़ उमड़ रही है. आलम यह है कि अभी टमाटर चाट शुरू हुए महज दो-तीन दिन ही हुए हैं, लेकिन हर रोज 150 से 200 कुल्हड़ टमाटर चाट बिक रही है. बाकी आइटम काफी पहले से बिकते थे पर यह आइटम नया जुड़ा है.
ऐसे तैयार होती है टमाटर चाट टमाटर चाट बनाने वाले शेखर के मुताबिक, इस चाट को तैयार करने में ब्रांडेड और शुद्ध घी का इस्तेमाल किया जाता है. सबसे पहले टमाटर और आलू को पकाकर इसका बेस तैयार किया जाता है. इसके बाद इसे कुल्हड़ में परोसा जाता है और ऊपर से कई तरह के मसाले, नमकीन, पनीर, चाशनी, हरा धनिया और हरी चटनी समेत अलग-अलग सामग्री डाली जाती है. इन सभी चीजों के मेल से तैयार होती है खास कुल्हड़ वाली टमाटर चाट.
शेखर बताते हैं कि इसका आइडिया भले ही बनारस से लिया गया है, लेकिन स्वाद में बिहारी अंदाज जोड़ने की कोशिश की गई है. अपने तरीके से तैयार की गई इस चाट को ग्राहकों का अब तक अच्छा रिस्पॉन्स मिल रहा है. शुरुआती फीडबैक से साफ है कि लोगों को इसका स्वाद खूब पसंद आ रहा है.
यहां मिलती है कई और चाट भी यहां टमाटर चाट के अलावा, घी में बनी टिक्की से चाट बनाई जाती है. साथ ही घर का बना गाढ़ा दही और गुड़-धनिया की चटनी चाट का स्वाद ही नहीं, बल्कि रंग-रूप भी निखार देती है. आखिरी में अनार दाना से गार्निश तो सबका दिल जीत लेती है.
यहां मिक्स चाट, समोसा चाट, टिक्की चाट, पापड़ी चाट, दही टिक्की चाट, दही पापड़ी चाट और दही समोसा चाट की कीमत मात्र 50 रुपये प्रति प्लेट है, जबकि स्पेशल जायका मिक्स 60 रुपये प्रति प्लेट है. इसके अलावा, शुद्ध घी की चाट 80 रुपये प्रति प्लेट है. इसी तरह टमाटर चाट की कीमत फिलहाल 60 रुपये है.
पूरे बिहार के लोग खा चुके हैं चाट काशी चाट हब की लोकेशन ऐसा है कि सरकारी बाबू से लेकर आम लोग रोजाना स्वाद चखते हैं. इस एरिया के आसपास न्यू सचिवालय, सूचना भवन, टेक्नोलॉजी भवन, विश्वेश्वरैया भवन सहित कई विभाग के ऑफिस हैं. यहां काम करवाने के लिए पूरे बिहार से लोग पहुंचते हैं. काम खत्म होने के बाद लोग चाट का स्वाद चखना नहीं भूलते.
शेखर का कहना है कि 2022 में यह दुकान खुली और अब तक सभी जिलों के लोग चाट खा चुके हैं. डिजिटल क्रिएटरों की इतनी भीड़ रहती है कि एक आदमी तो सिर्फ रील्स के लिए रहता है. लोग ठेले को चारों तरफ से घेरकर अपनी प्लेट का इंतजार करते हैं. कह सकते हैं कि यह पटना की सबसे वायरल चाट दुकान है.
नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) ने हर रजिस्टर्ड डॉक्टर को केंद्रीय स्तर पर यूनिक आइडेंटिफिकेशन नंबर (UID) देने का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत एक बार राज्य मेडिकल रजिस्टर में रजिस्ट्रेशन होने के बाद डॉक्टर को देश के किसी दूसरे राज्य में प्रैक्टिस करने के लिए दोबारा रजिस्ट्रेशन या लाइसेंस लेने की जरूरत नहीं होगी। यह प्रस्ताव डॉक्टरों के रजिस्ट्रेशन और प्रैक्टिस लाइसेंस से जुड़े 2026 के ड्राफ्ट नियमों में रखा गया है। इसके मुताबिक, राज्य मेडिकल काउंसिल से रजिस्ट्रेशन मिलने के बाद NMC का एथिक्स एंड मेडिकल रजिस्ट्रेशन बोर्ड (EMRB) डॉक्टर को UID जारी करेगा। यह नंबर डॉक्टर को नेशनल मेडिकल रजिस्टर (NMR) में रजिस्टर्ड करेगा और उन्हें देशभर में प्रैक्टिस करने की अनुमति देगा। डॉक्टर पर कार्रवाई भी पूरे देश में दिखेगी NMC ने प्रस्तावित NMR में डॉक्टर के रजिस्ट्रेशन की जानकारी, लाइसेंस की स्थिति और अनुशासनात्मक कार्रवाई का रिकॉर्ड रखने की बात कही है। अगर किसी डॉक्टर पर पेशेवर लापरवाही, गलत आचरण या मेडिकल नेग्लिजेंस का मामला सामने आता है, तो संबंधित राज्य मेडिकल काउंसिल इसकी जांच करेगी। अगर किसी दूसरे राज्य की काउंसिल डॉक्टर के खिलाफ कार्रवाई करती है, तो उसका रिकॉर्ड NMR में अपडेट किया जाएगा। साथ ही, यह जानकारी डॉक्टर के मूल राज्य के मेडिकल रजिस्टर में भी अपने आप दर्ज हो जाएगी। लाइसेंस 5 साल के लिए वैध प्रस्ताव के मुताबिक, डॉक्टर का मेडिसिन प्रैक्टिस लाइसेंस 5 साल तक वैध रहेगा। अवधि खत्म होने के 3 महीने के भीतर रिन्यू नहीं कराने पर डॉक्टर का रजिस्ट्रेशन इनएक्टिव कर दिया जाएगा और वह प्रैक्टिस नहीं कर सकेगा। यह स्थिति नेशनल मेडिकल रजिस्टर में भी अपने आप अपडेट हो जाएगी। आईएमए के डायरेक्टर अनिल नायक ने बताया कि नए प्रस्ताव के तहत ‘यूनिफाइड पैन इंडिया रजिस्ट्रेशन पोर्टल’ तैयार किया जाएगा। जिन राज्यों के पास पहले से डिजिटल रजिस्ट्रेशन व्यवस्था है, उन्हें इस राष्ट्रीय पोर्टल से जोड़ा जाएगा। पुराने डॉक्टरों को भी मिलेगा UID जो डॉक्टर पहले से इंडियन मेडिकल रजिस्टर या राज्य मेडिकल रजिस्टर में रजिस्टर्ड हैं, लेकिन उनके पास UID नहीं है, उनके लिए एक बार का अपडेट अभियान चलाया जाएगा। वे EMRB पोर्टल पर अपनी जानकारी अपडेट कर UID ले सकेंगे। इसके लिए EMRB की ओर से कोई फीस नहीं ली जाएगी।
राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (एनसीईआरटी) ने कक्षा 11वीं और 12वीं की पालिटिकल साइंस की नई किताबें तैयार करने के लिए 20 सदस्यों की नई टीम बनाई है। यह नई टीम 14 अगस्त को बनाई गई। इससे पहले जून 2025 में बनाई गई टीम को हटा दिया गया है। आठवीं की किताब को लेकर विवाद के बाद यह फैसला लिया गया था। रिपोर्ट के अनुसार, नई टीम में कम से कम 4 ऐसे सदस्य हैं, जिनका राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ या उससे जुड़े संगठनों से संबंध रहा है।
कौन हैं यदुनाथ देशपांडे?
यदुनाथ देशपांडे एबीवीपी में संगठनात्मक पदों पर रह चुके हैं। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद को राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़ा छात्र संगठन माना जाता है। उनके प्रोफाइल में उन्हें बीजेपी के पूर्व राजनीतिक सलाहकार के रूप में भी बताया गया है। डॉ. प्रशांत दिवेकर पुणे के ज्ञान प्रबोधिनी में शिक्षक शिक्षा और रिसर्च कार्यक्रम का नेतृत्व करते हैं। यह संस्था राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक रहे विनायक विश्वनाथ से जुड़ी रही है।
जेएनयू की प्रोफेसर को भी मिली जगह
वंदना मिश्रा, जो जवाहर नेहरू विश्वविद्यालय की प्रोफेसर हैं। वह अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद की पूर्व राष्ट्रीय सचिव रह चुकी हैं। डॉ. रवि रामचंद्र शुक्ला, जो जवाहर नेहरू विश्वविद्यालय में हैं। वह राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े संगठन रामभाऊ म्हालगी प्रबोधिनी की पत्रिका के संपादकीय बोर्ड में हैं।
नई किताबों में इंडियन नॉलेज सिस्टम पर जोर
किताबों में इंडियन नॉलेज सिस्टम पर जोर देने की बात कही गई है। नई टीम को किताबों में इंडियन नॉलेज सिस्टम और भारतीय संस्कृति से जुड़ी बातों को महत्वपूर्ण जगह देने को कहा गया है। इसके लिए टीम को एनसीईआरटी के उन विभागों से भी सलाह लेनी होगी जो इंडियन नॉलेज सिस्टम, सामाजिक विज्ञान, भाषाओं, पर्यावरण शिक्षा और नई शिक्षण पद्धतियों पर काम करते हैं। किताब के अध्याय तैयार होने के बाद एक टेक्सबुक कोर ग्रुप उनकी समीक्षा करेगा और यह देखेगा कि भारतीय ज्ञान और सांस्कृतिक जुड़ाव को किताब में किस तरह शामिल किया गया है।
किताबें कब तक तैयार होंगी?
नई टीम के प्रमुख निट्टे यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर संदीप शास्त्री हैं। डॉ. वंथांगपुई खोबुंग सदस्य और डॉ. सुभाष सिंह समन्वयक हैं। कक्षा 11 की पॉलिटिकल साइंस की किताब 30 नवंबर 2026 तक तैयार करने का लक्ष्य रखा गया है। वहीं, कक्षा 12 की पॉलिटिकल साइंस की किताब 30 जुलाई 2027 तक तैयार करने का लक्ष्य है।