गोरखपुर में मुहर्रम की 8वीं तारीख पर बुधवार को शहर में अकीदत और इबादत का माहौल रहा। मस्जिदों, घरों और इमाम चौकों पर हजरत इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को याद किया गया। जगह-जगह महफिलें हुईं, जहां उलमा ने कर्बला की घटना और इमाम हुसैन की कुर्बानी के बारे में बताया। इसे सुनकर वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं। गौसे आजम फाउंडेशन की ओर से शहर के अलग-अलग इलाकों में लोगों के बीच फल बांटे गए। फाउंडेशन के जिलाध्यक्ष समीर अली ने कहा कि इमाम हुसैन ने पूरी दुनिया को सच्चाई, इंसानियत और हक के रास्ते पर चलने का संदेश दिया है। उनकी कुर्बानी हमेशा लोगों को सही रास्ते पर चलने की सीख देती रहेगी। सच्चाई के लिए खड़े रहने की सीख देती है कर्बला शहर की अलग-अलग मस्जिदों में आयोजित कार्यक्रमों में उलमा ने कहा कि कर्बला सिर्फ एक घटना नहीं, बल्कि सच्चाई और इंसाफ के लिए दी गई सबसे बड़ी कुर्बानी की याद है। इमाम हुसैन ने जुल्म के आगे झुकने के बजाय हक का साथ दिया और आने वाली पीढ़ियों के लिए मिसाल कायम की। सुन्नी बहादुरिया जामा मस्जिद रहमतनगर में हुई महफिल में बताया गया कि कर्बला में इमाम हुसैन और उनके साथियों ने मुश्किल हालात में भी सच्चाई का रास्ता नहीं छोड़ा। उनकी कुर्बानी आज भी लोगों को नेकी और इंसानियत का संदेश देती है। आज सामूहिक रोजा इफ्तार का आयोजन गौसे आजम फाउंडेशन की ओर से गुरुवार को नौवीं मुहर्रम पर शाम 6:57 बजे रहमतनगर स्थित सुन्नी बहादुरिया जामा मस्जिद में सामूहिक रोजा इफ्तार कराया जाएगा। इसमें बड़ी संख्या में रोजेदार और अकीदतमंद शामिल होंगे। गुरुवार रात नौवीं मुहर्रम पर शहर में लाइन की ताजियों का जुलूस निकलेगा। अलग-अलग इमाम चौकों पर खूबसूरत ताजिया रखी जाएंगी। इस दौरान घरों और मस्जिदों में फातिहा होगी। लोगों में शरबत, खिचड़ा और मलीदा बांटकर इमाम हुसैन और कर्बला के शहीदों को याद किया जाएगा।
दिल्ली में 11 वर्षीय बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के मामले में अरेस्ट युवक को पुलिस ने हिरासत से भागने के प्रयास के दौरान गोली मार दी। युवक के पैर में गोली लगी है, जिसके बाद उसे इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। यह घटना दिल्ली में हुई। पुलिस अभिरक्षा से भागने की कोशिश घायल युवक की पहचान खगड़िया के चित्रगुप्तनगर थाना क्षेत्र निवासी जयनारायण सिंह के पुत्र बाशो सिंह उर्फ बुच्चर सिंह के रूप में हुई है। दिल्ली पुलिस का दावा है कि आरोपी को 11 वर्षीय बच्ची के अपहरण, दुष्कर्म और हत्या के मामले में गिरफ्तार किया गया था। पुलिस के अनुसार, पूछताछ और जांच के दौरान आरोपी ने पुलिस अभिरक्षा से भागने की कोशिश की, जिसके बाद उसे रोकने के लिए कार्रवाई की गई और उसके पैर में गोली लगी। दूसरी ओर, आरोपी के परिवार ने पुलिस के दावों को पूरी तरह खारिज कर दिया है। युवक की पत्नी खुशबू देवी ने कहा कि उनके पति पर लगाए गए आरोप निराधार हैं और उन्हें गलत तरीके से इस मामले में फंसाया गया है। पत्नि बोली-परिवार के एकमात्र कमाने वाले खुशबू देवी ने बताया कि घटना से कुछ दिन पहले रविवार को उनकी पति से फोन पर बात हुई थी और उन्होंने घर की आर्थिक जरूरतों के लिए 1500 रुपये भी भेजे थे। परिवार को अब भी विश्वास नहीं हो रहा है कि बाशो सिंह पर इतने गंभीर आरोप लगाए गए हैं। परिजनों के अनुसार, बाशो सिंह का विवाह 2019 में हुआ था और उनके दो छोटे बेटे हैं। वह दिल्ली में कैब चालक के रूप में काम करते थे और परिवार के एकमात्र कमाने वाले थे। घटना के बाद से पत्नी, बच्चों और अन्य परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है।
दिल्ली सरकार ने राजधानी में उच्च शिक्षा के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए धीरपुर में डॉ. बी.आर. अंबेडकर विश्वविद्यालय (एयूडी) के नए अत्याधुनिक कैंपस के निर्माण को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता की अध्यक्षता में हुई व्यय वित्त समिति की बैठक में लगभग 1,668 करोड़ रुपए की इस महत्वाकांक्षी परियोजना को स्वीकृति प्रदान की गई। करीब 20 हेक्टेयर (50 एकड़) क्षेत्र में विकसित होने वाला यह कैंपस आधुनिक और भविष्य की जरूरतों के अनुरूप उच्च शिक्षा सुविधाएं उपलब्ध कराएगा। बैठक में लोक निर्माण विभाग मंत्री प्रवेश साहिब सिंह, शिक्षा मंत्री आशीष सूद और संबंधित विभागों के वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे। सीएम रेखा गुप्ता ने कहा शिक्षा किसी भी विकसित समाज की सबसे मजबूत नींव होती है और सरकार युवाओं को बेहतर शैक्षणिक अवसर उपलब्ध कराने के लिए लगातार प्रयासरत है। परियोजना के पहले चरण में 5,400 विद्यार्थियों के लिए शैक्षणिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी। साथ ही 840 विद्यार्थियों के लिए छात्रावास और शिक्षकों व कर्मचारियों के लिए आवासीय सुविधाओं का भी प्रावधान किया गया है। परिसर में आधुनिक अकादमिक ब्लॉक, केंद्रीय पुस्तकालय, प्रशासनिक भवन, छात्र सुविधा केंद्र, खेल अवसंरचना और पार्किंग सुविधाएं विकसित की जाएंगी। नए कैंपस की एक प्रमुख विशेषता 2,500 सीटों की क्षमता वाला भव्य सभागार होगा, जो विश्वविद्यालय की शैक्षणिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र बनेगा। सरकार का दावा है कि यह परियोजना राजधानी में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा के विस्तार के साथ हजारों विद्यार्थियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। कैंपस की खास विशेषताएं,…
ग्रीन कैंपस पर रहेगा फोकस – जीआरआईएचए 5-स्टार रेटिंग के अनुरूप विकास
– सौर और भू-तापीय ऊर्जा का उपयोग
– रेन वाटर हार्वेस्टिंग सिस्टम
– अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण की व्यवस्था
– जल संरक्षण और सतत विकास पर विशेष जोर
– डीयूएसी और अग्निशमन विभाग से आवश्यक मंजूरियां प्राप्त
डिंडौरी के गाड़ासरई पुलिस थाना परिसर में बुधवार शाम को उस समय हड़कंप मच गया, जब वहां कोबरा सांप देखा गया। सूचना मिलते ही वन विभाग की टीम और सर्प मित्र मौके पर पहुंचे। करीब 1 घंटे चले रेस्क्यू ऑपरेशन के बाद सांप को सुरक्षित पकड़ा जा सका, तब जाकर पुलिसकर्मियों ने राहत की सांस ली। पुलिस स्टाफ ने बताया कि यह घटना बुधवार शाम करीब 4:30 बजे की है। थाने की बिजली गुल थी, जिसे ठीक करने के लिए एक स्थानीय मैकेनिक को बुलाया गया था। मैकेनिक जैसे ही काम के लिए सीढ़ियों के पास पहुंचा, तो उसकी नजर वहां बैठे काले कोबरा पर पड़ी। सांप को देखते ही मैकेनिक के होश उड़ गए और वह तुरंत पीछे भागा। इसके बाद अन्य पुलिसकर्मियों ने भी सांप को देखा और तुरंत गाड़ासरई वन कार्यालय को इसकी सूचना दी। फिनाइल डालकर छेद से बाहर निकाला खबर मिलते ही सर्प मित्र कोमल सिंह ठाकरे अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे और बचाव अभियान शुरू किया। सर्प मित्र ने बताया कि कोबरा सीढ़ी के अंदर बने एक गहरे छेद में जाकर छिप गया था। उसे बाहर निकालने के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ी। जब तमाम कोशिशें नाकाम रहीं, तो अंत में छेद के अंदर फिनाइल डाली गई। फिनाइल के असर से कोबरा तुरंत बाहर निकल आया, जिसे टीम ने फुर्ती से पकड़कर पिंजरे में बंद कर दिया। बाद में सांप को सुरक्षित जंगल में छोड़ दिया गया।
मिथिला की इस खास रेसिपी ने बदला करेला भरवा का स्वाद, जानिए इसे बनाने की विधि
अगर आप भरवा करेला खाकर बोर हो गए हैं, तो इस बार मिथिलांचल की खास रेसिपी जरूर ट्राई करें. मिथिलांचल में करेला बनाने का तरीका थोड़ा अलग है. कच्चे आम की खटास और मसालों का स्वाद इस डिश को खास बना देता है. इसे बनाने के लिए सबसे पहले करेले को बीच से काटकर उबाल लिया जाता है. इसके बाद उसके बीज निकालकर प्याज, हरी मिर्च, लहसुन, पीली सरसों और कच्चे आम के साथ पीस लिया जाता है. फिर तेल में जीरा, तेजपत्ता, सूखी लाल मिर्च और अन्य मसालों के साथ इस मिश्रण को अच्छी तरह भूनकर मसाला तैयार किया जाता है. इसके बाद उबले हुए करेलों को नमक और हल्दी लगाकर डीप फ्राई किया जाता है. फिर तैयार मसाले को करेलों में भर दिया जाता है. इस तरह स्वादिष्ट और खट्टेपन से भरपूर भरवा करेला तैयार हो जाता है.
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करौली पॉक्सो कोर्ट ने अपनी नाबालिग बेटी से छेड़छाड़ और अश्लील हरकतें करने के दोषी पिता को 5 साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट ने दोषी पर 16 हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया है। इसके अतिरिक्त, पीड़ित बालिका को पीड़ित प्रतिकर स्कीम के तहत 1 लाख रुपए की आर्थिक सहायता राशि दिलवाने के आदेश दिए गए हैं। विशिष्ट लोक अभियोजक गजेंद्र शर्मा ने बताया कि पॉक्सो कोर्ट के विशिष्ट न्यायाधीश बृजेश शर्मा ने यह फैसला सुनाया। आरोपी को भारतीय दंड संहिता की संबंधित धाराओं और पॉक्सो अधिनियम के तहत दोषी पाया गया। मामले की जानकारी देते हुए गजेंद्र शर्मा ने बताया कि सूरौठ थाना क्षेत्र की एक महिला ने पुलिस उप अधीक्षक (हिण्डौन) के समक्ष रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार, आरोपी ने 30 जून 2017 को अपनी पत्नी की फावड़े से हत्या कर दी थी। इस अपराध में वह लगभग ढाई साल तक जेल में रहा। जेल से छूटने के बाद आरोपी फिर से नशे का आदी हो गया। वह अपने बच्चों को लगातार परेशान करता था और उन्हें धमकी देता था कि “जैसे तुम्हारी मां को मारा है, वैसे ही तुम्हारी भी हत्या कर दूंगा।” एक घटना के दौरान, आरोपी अपनी नाबालिग बेटी को, जो हॉस्टल में रहकर पढ़ाई करती थी, अपने घर ले आया। इसके बाद, उसने अपनी नाबालिग बेटी के साथ गलत नीयत से छेड़छाड़ की और अश्लील हरकतें कीं। जब नाबालिग बेटी रोने और चिल्लाने लगी, तब आरोपी ने उसे छोड़ा। पीड़िता किसी तरह अपनी जान बचाकर अपनी बुआ के गांव भाग गई और वहां जाकर अपनी बुआ को पूरी आपबीती बताई। घटना सपोटरा थाना क्षेत्र की होने के कारण, पुलिस उप अधीक्षक (हिण्डौन) के आदेश पर 13 मई 2025 को सपोटरा थाने में मामला दर्ज किया गया। पुलिस ने मामले की गहनता से जांच और अनुसंधान करने के बाद आरोपी के खिलाफ पॉक्सो कोर्ट (करौली) में चालान पेश किया। पॉक्सो कोर्ट के न्यायाधीश ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने और सबूतों के आधार पर आरोपी को अपनी ही नाबालिग पुत्री के साथ अश्लील हरकत व छेड़छाड़ करने का दोषी पाया और उसे 5 वर्ष के कठोर कारावास तथा 16 हजार रुपए के जुर्माने की सजा से दंडित किया।
Realme के हाल में लॉन्च हुए 8000mAh बैटरी वाले फोन को सस्ते में खरीदने का मौका है। यह फोन लॉन्च प्राइस से सस्ते में खरीदा जा सकता है। रियलमी का यह फोन दमदार बैटरी के साथ-साथ 256GB स्टोरेज के साथ में आता है। इस फोन का लुक और डिजाइन Samsung के फोन की तरह है। फोन में वर्टिकली अलाइंड कैमरा मॉड्यूल दिया गया है।
सस्ता हुआ फोन
Realme P4R को भारत में तीन स्टोरेज वेरिएंट्स- 4GB RAM + 128GB, 6GB RAM + 128GB और 6GB RAM + 256GB में लॉन्च किया गया है। इसकी शुरुआती कीमत 18,999 रुपये है। वहीं, फोन के अन्य दोनों वेरिएंट्स की कीमत क्रमशः 20,999 रुपये और 22,999 रुपये है। ई-कॉमर्स वेबसाइट फ्लिपकार्ट पर फोन को सस्ते में खरीदा जा सकता है। फ्लिपकार्ट एक्सिस बैंक कार्ड से फोन खरीदने पर पूरे 950 रुपये की छूट दी जा रही है। साथ ही, इसकी खरीद पर 13,250 रुपये तक का एक्सचेंज ऑफर मिल रहा है।
Realme P4R 5G के फीचर्स
रियलमी के इस सस्ते फोन में 6.78 इंच का डिस्प्ले दिया गया है, जो 144Hz रिफ्रेश रेट और 1200 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस को सपोर्ट करता है। यह फोन टाइटेनियम ग्लेयर, सिल्वर ग्लेयर और लैवेंडर ग्लेयर तीन कलर ऑप्शन में पेश किया है। इसमें MediaTek Dimensity 6300 चिपसेट दिया गया है, जिसके साथ 8GB रैम और 128GB तक का स्टोरेज मिलता है। फोन की स्टोरेज को माइक्रोएसडी कार्ड के जरिए एक्सपेंड किया जा सकता है। यही नहीं, फोन MIL-STD-810H मिलिट्री ग्रेड ड्यूरेबिलिटी वाली बॉडी और IP65 रेटिंग से लैस है।
Realme P4R
फीचर्स
डिस्प्ले
6.78 इंच, 144Hz
प्रोसेसर
MediaTek Dimensity 6300
स्टोरेज
8GB, 128GB
कैमरा
50MP, 8MP
बैटरी
8000mAh, 45W
OS
Android 16, Realme UI
इस स्मार्टफोन में 8,000mAh की दमदार बैटरी मिलती है, जिसके साथ कंपनी ने इसमें 45W वायर्ड फास्ट चार्जिंग फीचर दिया है। यह Android 16 पर बेस्ड Realme UI पर काम करता है। फोन में बड़ा वेपर चेंबर कूलिंग सिस्टम दिया गया है, जो फोन को गेमिंग के दौरान गर्म होने से बचाता है। फोन के बैक में डुअल कैमरा सेटअप दिया गया है। इसमें 50MPका मेन कैमरा मिलेगा। इसके साथ एक और कैमरा मिलेगा। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए इसमें 8MP का कैमरा दिया गया है। फोन का कैमरा AI फीचर्स से लैस है।
(डिसक्लेमर – सेल में मिलने वाले ऑफर में उतार-चढ़ाव संभव है। ऐसे में फाइनल प्राइस ई-कॉमर्स वेबसाइट पर ही चेक करें। इंडिया टीवी किसी भी प्रकार के दावे की प्रामाणिकता की पुष्टि नहीं करता है।)
बॉलीवुड के मशहूर अभिनेता विनोद खन्ना ने 1968 में ‘मन का मीत’ फिल्म से अपना करियर शुरू किया था. सुनील दत्त उन्हें बॉलीवुड में लेकर आए थे. विनोद खन्ना ने शुरुआत की कई फिल्मों में विलेन की भूमिका निभाई. फिर वो बॉलीवुड सुपर स्टार बने. अमिताभ बच्चन को टक्कर दी. अपने करियर के पीक पर उन्होंने मसाला फिल्मों से इतर कई यादगार फिल्म में काम किया. एक फिल्म में तो उनकी एंट्री इंटरवल के बाद हुई, फिर भी मूवी सुपरहिट रही. फिल्म का टाइटल सॉन्ग इंस्टेंट हिट हुआ था.
बॉलीवुड सुपर स्टार की स्क्रीन प्रजेंस जबर्दस्त थी. जब वो पर्दे पर आते थे तो अपने लुक-अपनी संवाद अदायगी से छा जाते थे. हैंडसम तो वो थे ही. 1978 में जब अमिताभ बच्चन करियर के टॉप पर थे, तब विनोद खन्ना ही उन्हें टक्कर दे पाए. विनोद खन्ना ने इसी दौर में अमिताभ से भी ज्यादा फीस वसूली. विनोद खन्ना के स्टारडम का अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि उन्होंने अपने करियर के पीक पर मसाला फिल्मों से इतर कुछ फिल्मों में काम किया. ये फिल्में भी सुपरहिट रहीं. एक फिल्म में तो उनकी एंट्री इंटरवल के बाद हुई थी. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर बंपर कमाई की. यह फिल्म ‘मैं तुलसी तेरे आंगन की’ थी.
‘मैं तुलसी तेरे आंगन की’ फिल्म 4 अगस्त 1978 को रिलीज हुई थी. फिल्म का डायरेक्शन राज खोसला ने किया था. फिल्म चंद्रकांत काकोडकर के मराठी उपन्यास ‘अशी तुझी प्रीत’ पर बेस्ड थी. राज भारती, जीआर कामत और सूरज सनीम ने मिलकर लिखा था. डायलॉग राही मसूम रजा ने लिखे थे. गीतकार आनंद बख्शी थे.
‘मैं तुलसी तेरे आंगन की’ में नूतन, आशा पारेख, विनोद खन्ना, देब मुखर्जी, विजय आनंद ने अपनी एक्टिंग का जलवा बिखेरा था. फिल्म का म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने कंपोज किया था. फिल्म का टाइटल सॉन्ग ‘मैं तुलसी तेरे आंगन की’ इंस्टेंट हिट हुआ था. गाना आज भी उतना ही हिट है. गाना फिल्म में कई बार चलता है.
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इसके अलावा फिल्म के कई गाने ‘छाप तिलक सब छीनी’ (आशा भोसले-लता मंगेशकर) और ‘ये खिड़की जो बंद रहती है’ (मोहम्मद रफी) भी बहुत हिट हुए. फिल्म में दो मुजरा सॉन्ग थे. ‘सैंया रूठ गए’ और ‘नथुनिया जो डाली’ गानों ने समा बांध दिया. फिल्म का फर्स्ट हॉफ बहुत शानदार था. फिल्म में जब भी ‘मैं तुलसी तेरे आंगन की’ गाना बजता है, कहानी दर्शकों पर पकड़ बना लेती है.
आशा पारेख और नूतन ने इस फिल्म से जबर्दस्त वापसी की थी. दोनों के बीच फिल्म में जो संवाद हुआ, वही आइकॉनिक सीन बन गया. फिल्म में आशा पारेख ने तुलसी नाम की तवायफ का किरदार निभाया था. नूतन ने संजुक्ता चौहान का किरदार निभाया जो कि ठाकुर राजनाथ सिंह चौहान (विजय आनंद) की पत्नी है. संजुक्ता अपनी सास के कहने पर तुलसी से मिलने जाती है. यही सीन पूरी फिल्म की जान है. दोनों दिग्गज एक्ट्रेस ने इस सीन में शानदार अभिनय किया है. संजुक्ता तुलसी से कहती है, ‘तू बिन ब्याही सुहागन है, मैं एक कुंआरी ब्याहता.’ नूतन को बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था.
विजय आनंद और राज खोसला पिछले 20 साल से दोस्ते थे. राज खोसला हमेशा दोपहर बाद ही सेट पर आते थे. वो सेट पर लेट आने के लिए कुख्यात थे. उनकी अनुपस्थिति में विजय आनंद फिल्म को डायरेक्ट करते थे. विजय आनंद ने जब यह फिल्म की थी, तब वो रजनीश के पुणे आश्रम में रहते थे. जब फिल्म रिलीज के लिए तैयार हुई तो विजय आनंद पोस्टर से गायब हो गए. उनका रोल काट दिया गया. फिल्म का ट्रायल बीच में छोड़कर विजय आनंद घर लौट गए थे. फिर उन्होंने कभी राज खोसला के साथ काम नहीं किया. दोनों की 20 साल पुरानी दोस्ती टूट गई.
फिल्म में छोटा सा रोल होने के बाद विनोद खन्ना ने हामी भर दी थी. उन्हें राज खोसला के साथ काम पसंद था. विनोद खन्ना की फिल्म में एंट्री इंटरवल के बाद होती है. विनोद खन्ना मुंबई रीजन के डिस्ट्रीब्यूटर थे. वही फिल्म के मेन फेस थे. फिल्म के पोस्टर में सिर्फ विनोद खन्ना छाए हुए थे. फिल्म का बजट 1.25 करोड़ के आसपास था. कलेक्शन 2.75 करोड़ रुपये था. फिल्म सुपरहिट थी. 1978 में ही विनोद खन्ना की एक और फिल्म ‘मुकद्दर का सिकंदर’ आई थी. यह इस साल की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी.
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ईरान में 4 जुलाई से पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार समारोह शुरू होंगे।
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के राजकीय अंतिम संस्कार में शामिल होने का न्योता भेजा है।
अयातुल्ला खामेनेई की 28 फरवरी को इजराइल-अमेरिका के हमले में मौत हो गई थी। इसके बाद 4 मार्च को उनका अंतिम संस्कार होना था लेकिन जंग की वजह से इसे टाल दिया गया था।
अब इसकी शुरुआत 4 जुलाई से होगी। उनके शव को तेहरान के ग्रैंड मोसल्ला परिसर में अंतिम दर्शन के लिए रखा जाएगा। इसके बाद 9 जुलाई को मशहद स्थित इमाम रजा दरगाह में दफन किया जाएगा।
अधिकारियों को उम्मीद है कि तेहरान, कुम और मशहद में होने वाले अंतिम संस्कार कार्यक्रमों में करीब 2 करोड़ लोग शामिल हो सकते हैं।
ईरान के तेहरान में पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के कार्यालय के पास उनकी कुर्सी और एक तस्वीर प्रदर्शित की गई थी।
मोदी का ईरान जाने पर सस्पेंस
ईरान ने अंतिम संस्कार समारोह के लिए दुनिया के कई देशों को निमंत्रण भेजा है। खास तौर पर पड़ोसी और मित्र देशों को इसमें शामिल होने के लिए आमंत्रित किया गया है।
फिलहाल यह साफ नहीं है कि प्रधानमंत्री मोदी खामेनेई के अंतिम संस्कार में शामिल होंगे या नहीं। भारत सरकार ने अभी तक इस बारे में कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की है। ऐसे में भारत की ओर से कौन इस समारोह में शामिल होगा, यह अभी स्पष्ट नहीं है।
ईरान के तत्कालीन राष्ट्रपति इब्राहिम रायसी की मई 2024 में हेलिकॉप्टर दुर्घटना में मौत के बाद भी भारत ने उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल तेहरान भेजा था।
उस समय भारत सरकार ने एक दिन का राष्ट्रीय शोक घोषित किया था। तत्कालीन उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ भारतीय प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करते हुए तेहरान पहुंचे थे और अंतिम संस्कार समारोह में शामिल हुए थे।
खामेनेई मशहद में क्यों दफनाए जाएंगे
खामेनेई का मुख्य अंतिम संस्कार समारोह तेहरान में होगा, जो कम से कम 24 घंटे तक चलने की उम्मीद है। इसके बाद पार्थिव शरीर को धार्मिक शहर कुम ले जाया जाएगा और फिर मशहद पहुंचाया जाएगा, जहां इमाम रजा के दरगाह परिसर में दफनाया जाएगा।
मशहद ईरान का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। यह देश के उत्तर-पूर्वी हिस्से में स्थित है और शिया मुसलमानों का सबसे प्रमुख धार्मिक केंद्र माना जाता है।
शहर की सबसे बड़ी पहचान इमाम रजा की दरगाह है। इमाम रजा शिया मुस्लिम परंपरा के आठवें इमाम थे। उनका दरगाह दुनिया के सबसे बड़े धार्मिक स्थलों में शामिल है, जहां हर साल करोड़ों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
खामेनेई को मशहद में दफनाने से उनका नाम शिया इस्लाम के सबसे सम्मानित धार्मिक नेताओं की श्रेणी में और मजबूती से जुड़ जाएगा।
मशहद ईरान का दूसरा सबसे बड़ा शहर है। यहां इमाम रजा की दरगाह है।
IRGC के पास खामेनेई के अंतिम संस्कार की जिम्मेदारी
अयातुल्ला अली खामेनेई की अंतिम संस्कार में हुई देरी इस्लामी परंपरा के लिहाज से असामान्य मानी जा रही है। आमतौर पर इस्लाम में किसी व्यक्ति को मौत के एक-दो दिन के भीतर दफना दिया जाता है। हालांकि ईरानी अधिकारियों के मुताबिक, भारी भीड़ की उम्मीद और युद्ध के हालात के कारण अंतिम संस्कार में देरी हुई।
तेहरान नगर निगम में सामाजिक और सांस्कृतिक मामलों के उपप्रमुख मोहम्मद अली तवक्कोलीजादेह ने अंतिम संस्कार की तैयारियों की जानकारी दी। उन्होंने सरकारी टेलीविजन से कहा कि खामेनेई के लिए तीन दिन का सार्वजनिक जनाजा आयोजित किया जाएगा।
अधिकारी ने यह नहीं बताया कि जनाजा कब होगा, लेकिन कहा कि यह इस्लामी कैलेंडर के पहले महीने मुहर्रम की शुरुआत में हो सकता है, जो 21 जून के आसपास में पड़ता है। पूरे कार्यक्रम के आयोजन की जिम्मेदारी IRGC के पास है।
खोमैनी के जनाजे में 1 करोड़ लोग जुटे थे
ईरान में इस्लामिक गणराज्य के संस्थापक अयातुल्ला रुहोल्लाह खोमैनी के 1989 के जनाजे में करीब 1 करोड़ लोग शामिल हुए थे। यह उस समय ईरान की कुल आबादी का लगभग छठा हिस्सा था।
इस कार्यक्रम को आज भी दुनिया के सबसे बड़े जनाजों में गिना जाता है। इतनी भारी भीड़ उमड़ी थी कि भगदड़ मच गई थी। इसमें कम से कम 8 लोगों की मौत हो गई थी और हजारों लोग घायल हुए थे।
इस बार अधिकारी इससे भी बड़ी भीड़ को संभालने और किसी हादसे से बचने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन युद्ध के प्रभाव से उबर रहे देश में इतना बड़ा आयोजन कराना बड़ी चुनौती माना जा रहा है।
ईरान के नेता अयातुल्ला रूहल्ला खोमैनी का 6 जून, 1989 को तेहरान में जनाजा। शोक में लोगों की भीड़ उनके शरीर को छूने की कोशिश कर रही है।
अमेरिका-इजराइल हमलों में खामेनेई की मौत हुई थी
अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ बड़ा सैन्य ऑपरेशन शुरू किया था। इस दौरान तेहरान समेत कई रणनीतिक ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की गईं। हमलों में ईरान के सुप्रीम लीडर अयातुल्ला अली खामेनेई के घर और उनके कार्यालय को भी निशाना बनाया गया था।
खामेनेई बंकर में मौजूद थे, लेकिन लगातार मिसाइल और ड्रोन हमलों में वह गंभीर रूप से घायल हो गए। बाद में ईरानी सुरक्षा सूत्रों ने उनकी मौत की पुष्टि की। हमलों में खामेनेई के साथ ईरान के कई वरिष्ठ सैन्य और सुरक्षा अधिकारी भी मारे गए थे।
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दावा किया कि कई दशकों में पहली बार ईरान अमेरिका और उसके राष्ट्रपति को इतनी इज्जत दे रहा है।
उन्होंने कहा कि ईरान इस समय कमजोर स्थिति में है और समझौते के लिए लगभग हर शर्त मानने को तैयार है। पूरी खबर पढ़ें
Index funds Vs Active Funds: इंडेक्स फंड और एक्टिव फंड की 10 साल की तुलना बताती है कि सही एक्टिव फंड चुनने पर निवेशक को इंडेक्स फंड से कहीं बेहतर रिटर्न मिल सकता है, लेकिन गलत फंड चुनने पर नुकसान भी हो सकता है. 10 साल पहले निफ्टी 50 इंडेक्स फंड में लगाया गया 1 लाख रुपये करीब 3.15 लाख रुपये बना, जबकि सबसे बेहतर फ्लेक्सी-कैप फंड में यही रकम 5.99 लाख रुपये तक पहुंच गई. वहीं, कमजोर प्रदर्शन वाले फ्लेक्सी-कैप फंड में निवेश सिर्फ 2.53 लाख रुपये तक ही बढ़ पाया.
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क्या वाकई इंडेक्स फंड्स से बेहतर हैं एक्टिव फंड्स?
Index funds Vs Active Funds: म्यूचुअल फंड की दुनिया में अक्सर एक बहस छिड़ी रहती है कि इंडेक्स फंड बेहतर है या एक्टिव फंड? अगर 10 साल पहले आपने 1 लाख रुपये का निवेश किया होता, तो आज किस फंड ने आपको सबसे ज्यादा अमीर बनाया होता? क्या बाजार की चाल पर चलने वाले इंडेक्स फंड ने बाजी मारी या किसी एक्सपर्ट फंड मैनेजर के दिमाग ने पैसों को दोगुना-तिगुना कर दिया? आइए जानते हैं कि बीते एक दशक में निवेश की इस जंग का असली विजेता कौन रहा?
मान लीजिए दो दोस्तों ने 10 साल पहले 1-1 लाख रुपये का निवेश किया. पहले निवेशक ने निफ्टी 50 इंडेक्स फंड चुना, जबकि दूसरे ने एक्टिव इक्विटी फंड में पैसा लगाया. निफ्टी 50 इंडेक्स फंड में लगाया गया 1 लाख रुपये बढ़कर करीब 3.15 लाख रुपये हो गया होता. वहीं, अगर दूसरे निवेशक ने एक अच्छा लार्ज-कैप एक्टिव फंड चुना होता तो उसका निवेश लगभग 3.83 लाख रुपये तक पहुंच सकता था. लेकिन कमजोर प्रदर्शन वाले फंड में निवेश करने पर यही रकम सिर्फ 2.60 लाख रुपये रह जाती.
फ्लैक्सी-कैप फंड में दिखा सबसे बड़ा अंतर फ्लेक्सी-कैप फंड्स में रिटर्न का अंतर और भी ज्यादा देखने को मिला. आंकड़ों के अनुसार, सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले एक्टिव फ्लेक्सी-कैप फंड ने 1 लाख रुपये को 10 साल में लगभग 5.99 लाख रुपये में बदल दिया. इस दौरान निवेशकों को करीब 19.62% का सालाना रिटर्न मिला. दूसरी ओर, सबसे कमजोर फ्लेक्सी-कैप फंड में यही निवेश सिर्फ 2.53 लाख रुपये तक पहुंच पाया और सालाना रिटर्न 9.74% रहा.
एक्टिव फंड क्यों दे सकते हैं ज्यादा रिटर्न? एक्सपर्ट के मुताबिक, एक्टिव फंड के फंड मैनेजर बाजार की परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग सेक्टर और कंपनियों में निवेश का फैसला कर सकते हैं. वे बड़े, मिड और स्मॉल-कैप शेयरों के बीच भी बदलाव कर सकते हैं. यही फ्लेक्सिबिलिटी कई बार इंडेक्स से बेहतर रिटर्न दिलाता है.
फिर भी इंडेक्स फंड क्यों पसंद किए जाते हैं? इंडेक्स फंड उन निवेशकों के लिए बेहतर माने जाते हैं जो आसान निवेश चाहते हैं. इनमें फंड मैनेजर के फैसलों का रिस्क कम होता है और खर्च भी अपेक्षाकृत कम रहता है. हालांकि ये बाजार को मात देने की कोशिश नहीं करते, लेकिन बाजार जैसा रिटर्न देने का लक्ष्य रखते हैं.
निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सबक यह आंकड़े बताते हैं कि एक्टिव फंड में ज्यादा कमाई की संभावना जरूर होती है, लेकिन रिस्क भी उतना ही बड़ा होता है. इसलिए केवल पिछले रिटर्न देखकर निवेश करने के बजाय फंड की स्ट्रैटेजी, रिस्क मैनेजमेंट और लंबे समय के प्रदर्शन को भी जरूर जांचना चाहिए.
इंडेक्स फंड क्या होता है? इंडेक्स फंड किसी बाजार इंडेक्स जैसे निफ्टी 50 को ट्रैक करता है और उसी के अनुसार निवेश करता है.
एक्टिव फंड क्या होता है? एक्टिव फंड में फंड मैनेजर बाजार का विश्लेषण करके शेयरों का चयन करता है ताकि इंडेक्स से बेहतर रिटर्न मिल सके.
वर्तमान में विनय कुमार झा नेटवर्क18 की वेबसाइट hindi.news18.com में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वह मई 2017 से इस वेबसाइट के साथ जुड़े हैं. वह बीते 5 सालों से वर्तमान में वेबसाइट के बिजनेस सेक्शन के …और पढ़ें