Wednesday, June 3, 2026
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110 छात्राओं को मिल रहा हुनर और संस्कार का संगम: आत्मरक्षा से कंप्यूटर तक मिलेगा प्रशिक्षण, भारत विकास परिषद का विशेष शिविर शुरू – Dholpur News




धौलपुर में भारत विकास परिषद के महिला प्रकोष्ठ ने पीएम श्री स्कूल बाड़ा हेदरशाह, हरिदेव नगर में पांच दिवसीय संस्कार एवं अभिरुचि शिविर का शुभारंभ किया। यह आयोजन बुधवार को हुआ। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि जया मोदी थीं, जबकि पदमा झा और वीनस गर्ग विशिष्ट अतिथि के रूप में उपस्थित रहीं। अतिथियों ने छात्राओं के सर्वांगीण विकास में ऐसे शिविरों की उपयोगिता पर प्रकाश डाला। शिविर की अध्यक्षता करते हुए ममता शर्मा ने बताया कि इसमें कक्षा 6 से 12 तक की लगभग 110 छात्राएं भाग ले रही हैं। दक्ष प्रशिक्षकों द्वारा विभिन्न कौशलों का प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है।
रश्मि राव ने आत्मरक्षा, वीनस गर्ग और विजय सिंघल ने नृत्य, पदमा झा ने सिलाई, शिवांश मंगल ने हारमोनियम, शशिकांत और कौशल जैन ने कंप्यूटर प्रशिक्षण दिया। ग्रेसी मंगल, लवली मंगल और रोहिणी शर्मा ने ब्यूटिशियन कौशल का प्रशिक्षण प्रदान किया। शिविर के दौरान गरिमा गर्ग, डॉ. आकाश अग्रवाल और विकास शर्मा ने प्रतिभागियों के पंजीकरण और अभिलेख संधारण में सहयोग किया। परिषद के जिला समन्वयक जयंत मोदी, प्रांत प्रकल्प प्रभारी राजीव झा, अध्यक्ष मुकेश गर्ग, प्रिंसिपल नरेश जैन, सचिव जितेंद्र शर्मा और वित्त सचिव मनोज भट्ट ने व्यवस्थाओं की निगरानी की। मंच संचालन दिनेश गर्ग ने किया। परिषद अध्यक्ष मुकेश गर्ग ने बताया कि 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस पर स्कूल में निबंध, पोस्टर और आशु भाषण प्रतियोगिताओं का आयोजन किया जाएगा। इस अवसर पर पक्षियों के लिए परिंडे लगाए जाएंगे, वृक्षारोपण किया जाएगा और पर्यावरण संरक्षण की शपथ दिलाई जाएगी। सभी प्रतिभागियों को प्रमाण-पत्र प्रदान किए जाएंगे।



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दो चिट्ठियां और कॉमन सिग्नेचर, एक ही विधायक दोनों तरफ! असली TMC कौन?


असली TMC कौन? बंगाल में भी बीजेपी ने शिवसेना जैसी स्क्रिप्ट लिख दी है. टीएमसी नेता कुणाल घोष के कबूलनामे से सियासी भूचाल आ गया है. ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी में बड़ी टूट हो गई है. विधानसभा अध्यक्ष ने रीताव्रता बनर्जी को विपक्षी नेता का दर्जा दे दिया है. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के नतीजों के बाद शुरू हुआ तृणमूल कांग्रेस का अंदरूनी संकट अब एक बेहद पेचीदा और ऐतिहासिक कानूनी लड़ाई में तब्दील हो चुका है. कोलकाता के राजनीतिक गलियारों में इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी और भाजपा ने बंगाल में ठीक वैसा ही ‘खेला’ कर दिया है, जैसा कुछ साल पहले महाराष्ट्र में शिवसेना और एनसीपी के साथ हुआ था. इस बीच, टीएमसी के वरिष्ठ नेता और मुख्य प्रवक्ता कुणाल घोष ने एक ऐसा बयान दिया है जिसने साफ कर दिया है कि ममता बनर्जी की पार्टी अब पूरी तरह दो धड़ों में बंट चुकी है और इसकी अंतिम जंग विधानसभा से लेकर देश की सर्वोच्च अदालत तक लड़ी जाएगी.

कुणाल घोष ने मीडिया से बात करते हुए एक बेहद चौंकाने वाली संगठनात्मक जानकारी साझा की. उन्होंने बताया, ‘हमारे पास जो ताजा जानकारी है, उसके मुताबिक लोकसभा और राज्यसभा सांसदों वाली संसदीय पार्टी को छोड़कर तृणमूल कांग्रेस की अन्य सभी समितियों और कमेटियों को तत्काल प्रभाव से भंग कर दिया गया है.’ पार्टी के इस बड़े फैसले को बागियों पर नकेल कसने और संगठन पर ममता बनर्जी का नियंत्रण बनाए रखने की आखिरी कोशिश के रूप में देखा जा रहा है.

दो चिट्ठियां और कॉमन सिग्नेचर, एक ही विधायक दोनों तरफ!

बंगाल विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष (LoP) के पद और असली टीएमसी की दावेदारी को लेकर कानूनी संकट तब गहरा गया जब विधानसभा अध्यक्ष के दफ्तर में दो अलग-अलग दस्तावेज जमा किए गए. कुणाल घोष ने इस विडंबना को उजागर करते हुए कहा कि कानूनी पेंच बहुत फंसा हुआ है. आखिरकार विधानसभा अध्यक्ष ने नेता प्रतिपक्ष के तौर पर रीताव्रता बनर्जी को मान्यता दे दी.

बंगाल में दावेदारी का खेल

ममता बनर्जी के नेतृत्व वाली मूल टीएमसी ने अपने विधायकों की सूची सौंपी है, तो वहीं बागी धड़े ने खुद को ‘असली तृणमूल’ बताते हुए अपनी अलग सूची और नेता प्रतिपक्ष के नाम का प्रस्ताव दिया है. कुणाल घोष के मुताबिक, ऐसे कई विधायक हैं जिनके हस्ताक्षर ममता बनर्जी कैंप की चिट्ठी पर भी हैं और बागियों के दस्तावेज पर भी मौजूद हैं. यानी एक ही विधायक ने दोनों तरफ दस्तखत कर रखे हैं.

जब कुणाल घोष से पूछा गया कि क्या पार्टी से निकाले गए या बागी नेता प्रतिपक्ष के रूप में काम कर सकते हैं, तो उन्होंने साफ कहा, ‘यह कानूनी रूप से बिल्कुल संभव नहीं है. इन संसदीय और कानूनी बारीकियों की जांच की जाएगी. लेकिन एक बात साफ है कि जो लोग आज विद्रोह कर रहे हैं, वे निर्दलीय उम्मीदवार नहीं थे. वे ममता बनर्जी के चेहरे और पार्टी के सिंबल पर चुनाव जीतकर आए हैं. पार्टी का फैसला ही सर्वोच्च होगा.”

सुवेंदु अधिकारी का ‘महाराष्ट्र मॉडल’ या कुणाल घोष के दावों में दम?

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि बंगाल में जो कुछ भी हो रहा है, वह सुवेंदु अधिकारी की सोची-समझी रणनीतिक बिसात का हिस्सा है. महाराष्ट्र में जिस तरह एकनाथ शिंदे ने मूल पार्टी के चुनाव चिह्न तीर-कमान और नाम पर दावा ठोक दिया था, ठीक उसी राह पर टीएमसी का बागी धड़ा भी बढ़ता दिख रहा है. बागी विधायकों का तर्क है कि उनके पास दो-तिहाई से अधिक बहुमत है, इसलिए दलबदल विरोधी कानून (Anti-Defection Law) उन पर लागू नहीं होता और वे ही असली तृणमूल हैं.

सुवेंदु अधिकारी ने टीएमसी की दुखती रग पर हाथ रखा है. वे जानते हैं कि अगर बागी विधायक सीधे भाजपा में शामिल होते हैं, तो उन्हें उपचुनाव का सामना करना पड़ सकता है. इसलिए, उन्हें तकनीकी रूप से टीएमसी के भीतर ही रखकर एक अलग धड़ा बनाने के लिए प्रेरित किया जा रहा है ताकि ममता बनर्जी कानूनी पचड़ों में उलझकर कमजोर हो जाएं.



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45 साल आई वो फिल्म, रिलीज होते ही निकली हिट, रीमेक हुई मैसिव हिट, बनी आइकॉनिक मूवी


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भारतीय संस्कृति में शादी के बंधन को सबसे पवित्र माना गया है. यह दो आत्माओं का मिलन है. शादी सात जन्मों का बंधन है. अगर कोई जोड़ा शादी के बंधन में बंध गया तो फिर यह मायने नहीं रखता कि उनका अतीत क्या था. ‘तलाक’ भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं है. इन्हीं बातों को आधार बनाकर बॉलीवुड में कई फिल्में बनाई गई हैं. 45 साल पहले ऐसी ही एक फिल्म रिलीज हुई थी. इसी मूवी से मिलती-जुलती एक और फिल्म 16 साल बाद बनाई गई. दूसरी फिल्म और ज्यादा पॉप्युलर हुई. गीत-संगीत, कहानी की प्रस्तुति सबकुछ बेजो‌ड़ था.

भारतीय समाज में आज भी अरेंज मैरिज का चलन है. शादी का बंधन अटूट होता है. ‘तलाक’ भारतीय संस्कृति का हिस्सा नहीं है. इसी मान्याता को आधार बनाकर 23 जून 1983 को एक फिल्म रिलीज हुई थी. यह एक रोमांटिक ड्रामा फिल्म थी. यह अनिल कपूर की पहली ऐसी फिल्म थी जिसमें वो लीड रोल में थे. इसी फिल्म की कहानी को नए अंदाज में 16 साल बाद दर्शकों के सामने पेश किया गया. दूसरी मूवी मैसिव हिट रही. दोनों फिल्मों की गिनती आइकॉनिक मूवी में होती है. ये फिल्में थीं : वो सात दिन और हम दिल दे चुके सनम. दोनों फिल्मों का फ्लॉट एक जैसा था.

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सबसे पहले बात करते हैं ‘वो सात दिन’ की जिसमें अनिल कपूर-पद्मिनी कोल्हापुरे लीड रोल में थे. फिल्म में नसीरुद्दीन सिद्दीकी ने भी अहम भूमिका निभाई थी. ‘वो सात दिन’ एक तमिल मूवी का रीमेक थी जिसका डायरेक्शन के. भाग्यराज ने किया था. जैनेंद्र जैन ने फिल्म के डायलॉग लिखे थे. डायरेक्टर बापू थे. प्रोड्यूसर बोनी कपूर-सुरेंद्र कपूर थे. सुरेंद्र कपूर अभिनेता अनिल कपूर के पिता थे. फिल्म में म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल का था. गीतकार आनंद बख्शी थे.

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फिल्म के दो गाने ‘मेरे दिल से दिल्लगी ना कर’ और ‘प्यार किया नहीं जाता हो जाता है’ खूब पॉप्युलर हुए थे. अनिल कपूर के पिता सुरेंद्र कपूर प्रोड्यूसर थे. हालांकि उन्हें फिल्मों में खूब घाटा ही हुआ. भाई बोनी कपूर हर हाल में अनिल कपूर को अभिनेता बनाना चाहते थे. बोनी और अनिल कपूर भाग्यराज की फिल्म के राइट्स खरीदने के लिए चेन्नई गए लेकिन पैसे कम पड़ गए. ऐसे में बोनी कपूर ने संजीव कुमार को फोन मिलाया. वो उन दिनों चेन्नई में एक शूटिंग के सिलसिले में थे. शबाना आजमी से भी पैसे उधार लिए. इस तरह से के. भाग्यराज की तमिल फिल्म के राइट्स खरीदकर उसे हिंदी में ‘वो सात दिन’ के नाम से बनाया गया. इस फिल्म ने अनिल कपूर की किस्मत चमका दी.

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मनमोहन देसाई ने तो अनिल कपूर से खुलकर कहा था वो कभी हीरो नहीं बन पाएंगे. उस समय की कई एक्ट्रेस ने अनिल कपूर के साथ काम करने से इनकार कर दिया था. पद्मिनी कोल्हापुरे को बोनी कपूर ने प्रेमरोग से पहले साइन किया था. वो रातोंरात स्टार बन गईं. मुश्किल से उन्होंने ‘वो सात दिन’ के लिए डेट्स निकालीं. अनिल कपूर ने उन्हें खूब मनाया. रोज घर से उनके लिए सेट पर टिफिन लेकर आते थे. फिल्म में बेबी सुचिता ने नसीरुद्दीन सिद्दीकी की बेटी का रोल निभाया था.

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फिल्म में अनिल कपूर का नाम ‘प्रेम प्रताप सिंह पटियावाला वाले’ था. उनका यह नाम खूब पॉप्युलर हुआ. मजेदार बात यह है कि ‘वो सात दिन’ सावन कुमार की ‘लैला’ और यश चोपड़ा की ‘मशाल’ के बाद शुरू हुई थी लेकिन दोनों ही फिल्मों से पहले रिलीज हो गई थी. फिल्म में सतीश कौशिक ने भी एक रोल निभाया था. बोनी कपूर ने उन्हें 201 रुपये में साइन किया था. अनिल कपूर के कहने पर 300 रुपये सतीश कौशिक को और दिए गए थे. उनका मंदिर के पास एक सीन था. इस सीन को सतीश कौशिक अपने लिए लकी समझते थे. उनकी किस्मत भी इस मूवी से चमक उठी. फिल्म का टाइटल पलले ‘संजोग’ था जिसे बदलकर ‘वो सात दिन’ किया गया. 60 लाख के बजट में बनी इस फिल्म मे 1.8 करोड़ का बिजनेस किया था. यह उस साल की 24वीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी.

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‘वो सात दिन’ की रिलीज होने के 16 साल बाद 1999 में इसी फिल्म का रीमेक संजय लीला भंसाली ने बनाया. यह फिल्म ‘हम दिल दे चुके सनम’ थी. ‘हम दिल दे चुके सनम’ फिल्म का प्लॉट ‘वो सात दिन’ से इंस्पायर्ड था. यह भी एक संयोग ही है कि ‘वो सात दिन’ 23 जून 193 को रिलीज हुई थी तो सलमान खान-ऐश्वर्या राय और अजय देवगन स्टारर ‘हम दिल दे चुके सनम’ 18 जून 1999 को सिनेमाघरों में आई थी.

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डायरेक्टर-प्रोड्यूसर संजय लीला भंसाली थे. म्यूजिक इस्माइल दरबार का था. गीतकर महबूब थे. स्क्रीनप्ले संजय लीला भंसाली ने जबकि डायलॉग अमरीक गिल ने लिखे थे.इस आइकॉनिक फिल्म की चर्चा इसलिए भी खूब होती है क्योंकि इसी मूवी की शूटिंग के दौरान ऐश्वर्या राय-सलमान खान के बीच नजदीकियां बढ़ीं. दोनों का प्यार परिवान चढ़ा. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर जबरदस्त दर्शन किया.

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फिल्म का म्यूजिक बेहतरीन था. फिल्म के पॉप्युलर गाने थे : चांद छुपा बादल में, निम्बूड़ा-निम्बूड़ा, आंखों की गुस्ताखियां माफ हो, ढोली तारो. डायरेक्टर भंसाली और इस्माइल दरबार ने पूरे दो साल की मेहनत के बाद म्यूजिक तैयार किया था. यह फिल्म ऐश्वर्या राय को कैसे मिली, इसका किस्सा भी दिलचस्प है. राजा हिंदुस्तानी (1996) की स्क्रीनिंग में हिस्सा लेने संजय लीला भंसाली पहुंचे थे. ऐश्वर्या राय भी इस ईवेंट में पहुंची थीं. उन्होंने भंसाली से कहा कि आपकी ‘खामोशी : द म्यूजिकल’ फिल्म अच्छी थी. भंसाली ऐश्वर्या से प्रभावित हुए और उन्हें नंदिनी का रोल दे दिया.

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सलमान खान की इस फिल्म में उनकी सौतेली मां हेलेन भी नजर आई थीं. सिंगर केके ने फिल्म का सबसे दर्द भरा गाना ‘तड़प तड़प’ सुबह 4 बजे स्टूडियो में रिकॉर्ड किया था. ऐश्वर्या राय को इस फिल्म के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का फिल्मफेयर अवॉर्ड भी मिला था. फिल्म को चार नेशनल अवॉर्ड मिले थे. फिल्म ने बेस्ट मूवी, डायरेक्टर, एक्ट्रेस, प्लेबैक सिंगर मेल, आर्ट डायरेक्शन, सिनेमेटोग्राफर, कोरियोग्राफी, बैकग्राउंड स्कोर समेत 9 फिल्मफेयर अवॉर्ड जीते थे. 16 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 51 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. यह एक मैसिस हिट फिल्म साबित हुई थी. फिल्म की गिनती आज बॉलीवुड की आइकॉनिक मूवी में होती है.

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ऐश्वर्या राय और सलमान खान की लव स्टोरी स्क्रीन के अलावा रियल लाइफ में चल रही थी. ऐश्वर्या राय ने
सलमान खान को मोस्ट गॉर्जियस मैन भी बताया था. सार्वजनिक मंच से सलमान खान के सामने ‘मेरी सांसों में बसा है, एक तेरा ही नाम’ सॉन्ग भी गुनगुनाया था. फिर इस खूबसूरत जोड़ी को दुनिया की नजर लग गई. दोनों ने बीच ऐसे विवाद में जन्म लिया जो बॉलीवुड की सबसे बड़ी कंट्रोवर्सी बन गई. कहा जाता है कि ऐश्वर्या राय सलमान खान के पजेसिव नेचर से परेशान थीं. 2002 में एक इंटरव्यू में ऐश्वर्या ने पर मारपीट का आरोप भी लगाया था. सलमान खान से ब्रेकअप के बाद ऐश्वर्या राय का नम विवेक ओबेरॉय के साथ जोड़ा गया. बाद में ऐश्वर्या राय ने अभिषेक बच्चन से शादी रचा ली.

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गुजरात MLA का स्टीकर लगाकर उत्तराखंड में तोड़ा ट्रैफिक नियम: रोकने पर बोला- पापा विधायक हैं, पुलिस ने काटा ₹500 का चालान – Chamoli News




चारधाम यात्रा पर जा रही एक स्कॉर्पियो पर ‘MLA GUJARAT’ का स्टीकर लगाकर चल रहे युवकों के खिलाफ चमोली पुलिस ने कार्रवाई की। वाहन को चेकिंग के दौरान रोका गया तो ड्राइवर सीट पर बैठे युवक ने खुद को गुजरात के एक विधायक का बेटा बताया। ट्रैफिक इंस्पेक्टर के अनुसार वाहन के शीशों पर गहरी काली (जेट ब्लैक) फिल्म लगी हुई थी, जो मोटर वाहन नियमों का उल्लंघन है। इसके बाद पुलिस ने वाहन का ₹500 का चालान किया। स्कॉर्पियो में सात लोग सवार थे, जिनमें महिलाएं भी शामिल थीं। सभी चारधाम यात्रा पर जा रहे थे। पुलिस ने मौके पर वाहन से स्टीकर हटवाया और शीशों पर लगी काली फिल्म भी उतरवाई। चालान जमा करने के बाद वाहन को आगे जाने की अनुमति दी गई। गाड़ी में विधायक नहीं, फिर भी लगा था MLA का स्टीकर पुलिस के मुताबिक चेकिंग के दौरान वाहन में कोई विधायक मौजूद नहीं था। पूछताछ में चालक ने खुद को विधायक का बेटा बताया। इसके बावजूद वाहन पर विधायक का स्टीकर लगा हुआ था। पुलिस ने कार्रवाई के दौरान स्टीकर हटवाकर वाहन को नियमों के अनुरूप किया। पुलिस ने कहा- कानून सभी के लिए समान चमोली पुलिस ने स्पष्ट किया कि चारधाम यात्रा मार्ग पर यातायात नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ बिना किसी भेदभाव के कार्रवाई की जाएगी। पुलिस के अनुसार कानून सभी पर समान रूप से लागू होता है, चाहे कोई भी व्यक्ति किसी भी राज्य या पद से जुड़ा हो।



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भारत-अमेरिका डील 99% डन, बाकी 1% कब तक होगा? सर्जियो गोर ने सुना दी गुड न्यूज


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India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से चल रही ट्रेड डील अब अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच गई है. भारत में अमेरिका के राजदूत सर्जियो गोर ने कहा है कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील 99 फीसदी तक पूरी हो चुकी है और अब सिर्फ 1 फीसदी काम बाकी है. गोर गुरुवार को केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात करेंगे.

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पीयूष गोयल से मुलाकात से पहले सर्जियो गोर का बड़ा बयान (फोटो- एएफपी)

India-US Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील को लेकर एक बहुत बड़ी खुशखबरी सामने आई है. भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर (Sergio Gor) ने एलान किया है कि दोनों देशों के बीच प्रस्तावित ट्रेड डील 99% पूरी हो चुकी है. अब दोनों पक्ष आखिरी 1% टेक्निकल और लीगल अड़चनों को दूर करने में जुटे हैं. इस डील को अंतिम रूप देने के लिए अमेरिकी राजदूत गुरुवार (4 जून) को भारत के वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात करने वाले हैं.

मुंबई में ‘सिटी इंडिया इन्वेस्टर कॉन्फ्रेंस’ में सर्जियो गोर ने साफ किया कि जो 1% मामला बचा है, वह कोई बड़ा विवाद या मतभेद नहीं है. अब चर्चा इस बात पर हो रही है कि समझौते की शर्तें कब से लागू होंगी, उनका कानूनी ढांचा क्या होगा और दस्तावेजों की भाषा कैसी होगी. दोनों देश अब डील के ‘फाइन प्रिंट’ को अंतिम रूप देने में जुटे हैं. उन्होंने बताया कि यह समझौता बेहद जटिल है क्योंकि इसमें हजारों प्रोडक्ट्स और कई सेक्टरों को शामिल किया गया है. ऐसे में अंतिम चरण में टेक्निकल पॉइंट्स पर सावधानीपूर्वक काम किया जा रहा है.

पीयूष गोयल से होगी अहम मुलाकात
गोर ने बताया कि वह गुरुवार को केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात करेंगे. उन्होंने उम्मीद जताई कि आने वाले कुछ हफ्तों में यह समझौता हो सकता है. गोर ने साफ कहा कि अब यह मामला सालों तक नहीं खिंचेगा.

भारत को मिला बेहतर टैरिफ फायदा
राजदूत ने यह भी संकेत दिया कि अंतरिम व्यवस्था के तहत भारत को अपने पड़ोसी देशों की तुलना में अधिक अनुकूल टैरिफ दरें मिली हैं. उन्होंने भारतीय वार्ताकारों की तारीफ करते हुए कहा कि भारत के पास बेहद मजबूत और कुशल बातचीत करने वाली टीम है, जिसने अपने हितों की मजबूती से रक्षा की है.

टेक्नोलॉजी और निवेश में भी बढ़ रहा सहयोग
गोर ने कहा कि ट्रेड डील के अलावा दोनों देशों के बीच तकनीक, सप्लाई चेन और क्रिटिकल मिनरल्स के क्षेत्र में भी सहयोग तेजी से बढ़ रहा है. उन्होंने हाल ही में घोषित अमेरिका-भारत क्रिटिकल मिनरल्स फ्रेमवर्क को बड़ी उपलब्धि बताया. साथ ही उन्होंने कहा कि भारत को अमेरिका समर्थित ‘पैक्स सिलिका’ पहल में शामिल किए जाने से एआई, सेमीकंडक्टर और क्वांटम कंप्यूटिंग जैसी उभरती तकनीकों में साझेदारी मजबूत होगी.

अमेरिकी कंपनियां कर रही हैं बड़े निवेश
गोर के अनुसार, अमेजन 2030 तक भारत में 35 अरब डॉलर का निवेश करने की योजना बना रही है. माइक्रोसॉफ्ट 17.5 अरब डॉलर के निवेश का ऐलान कर चुकी है, जबकि गूगल ने हाल ही में भारत में 15 अरब डॉलर के एआई हब की योजना पेश की है. उन्होंने बताया कि पिछले दो दशकों में भारत और अमेरिका के बीच द्विपक्षीय व्यापार करीब 20 अरब डॉलर से बढ़कर 220 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जो दोनों देशों के मजबूत होते आर्थिक रिश्तों को दर्शाता है.

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विनय कुमार झासीनियर कॉपी एडिटर

वर्तमान में विनय कुमार झा नेटवर्क18 की वेबसाइट hindi.news18.com में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वह मई 2017 से इस वेबसाइट के साथ जुड़े हैं. वह बीते 5 सालों से वर्तमान में वेबसाइट के बिजनेस सेक्शन के …और पढ़ें



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‘पति पत्नी और वो दो’, ‘भूत बंगला’ सब भूल जाएंगे, अगर देखने बैठ गए वामिका गब्बी की ये फिल्म


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अपनी जबरदस्त कॉमिक टाइमिंग और सस्पेंस वाली फिल्मों से बॉलीवुड दर्शकों का दिल जीतने वाली एक्ट्रेस वामिका गब्बी आज किसी पहचान की मोहताज नहीं हैं. इन दिनों वह अपनी फिल्म ‘पति पत्नी और वो दो’ को लेकर सुर्खियों में हैं. इससे ‘भूत बंगला’ और ‘भूल चूक माफ’ जैसी बड़ी कॉमेडी फिल्मों में उनकी एक्टिंग की दर्शकों द्वारा काफी तारीफ की गई थी. लेकिन, अगर आप वामिका गब्बी की एक्टिंग की असली गहराई और उनका जबरदस्त अवतार देखना चाहते हैं, तो आपको उनकी बेहद खतरनाक और सस्पेंस वाली फिल्म ‘खुफिया’ जरूर देखनी चाहिए. यह फिल्म देखने के बाद आपको उनकी एक्टिंग से पक्का प्यार हो जाएगा.

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नई दिल्ली. बड़े पर्दे और ओटीटी की दुनिया में वामिका गब्बी को आज की सबसे वर्सेटाइल और होनहार एक्ट्रेस में से एक माना जाता है. नेटफ्लिक्स की सीरीज ‘माई’ और विशाल भारद्वाज की ‘जुबली’ में अपनी काबिलियत साबित करने के बाद, वामिका ने बड़े पर्दे पर राज किया. उन्होंने कॉमेडी ड्रामा ‘पति पत्नी और वो 2’, ‘भूत बंगला’ और ‘भूल चूक माफ’ से भी लोगों का दिल जीता. लेकिन, वामिका सिर्फ कॉमेडी या हल्के-फुल्के रोल तक ही सीमित हैं. उनका असली और सबसे खतरनाक साइड 2023 की नेटफ्लिक्स ओरिजिनल फिल्म ‘खुफिया’ में सामने आया था, जिसने दर्शकों के रोंगटे खड़े कर दिए थे.

नई दिल्ली. बड़े पर्दे और ओटीटी की दुनिया में वामिका गब्बी को आज की सबसे वर्सेटाइल और होनहार एक्ट्रेस में से एक माना जाता है. नेटफ्लिक्स की सीरीज ‘माई’ और विशाल भारद्वाज की ‘जुबली’ में अपनी काबिलियत साबित करने के बाद, वामिका ने बड़े पर्दे पर राज किया. उन्होंने कॉमेडी ड्रामा ‘पति पत्नी और वो 2’, ‘भूत बंगला’ और ‘भूल चूक माफ’ से भी लोगों का दिल जीता. लेकिन, वामिका सिर्फ कॉमेडी या हल्के-फुल्के रोल तक ही सीमित हैं. उनका असली और सबसे खतरनाक साइड 2023 की नेटफ्लिक्स ओरिजिनल फिल्म ‘खुफिया’ में सामने आया था, जिसने दर्शकों के रोंगटे खड़े कर दिए थे.
विशाल भारद्वाज के डायरेक्शन में बनी ‘खुफिया’ अमर भूषण के मशहूर जासूसी नॉवेल ‘एस्केप टू नोवेयर’ पर आधारित एक कल्ट स्पाई-थ्रिलर है. यह फिल्म भारतीय खुफिया एजेंसी ‘रॉ’ के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां देश के कुछ सबसे कॉन्फिडेंशियल डॉक्यूमेंट्स और जानकारी लीक हो रही हैं. तब्बू एक सीनियर रॉ ऑफिसर का लीड रोल निभा रही हैं, जो एक गद्दार को पकड़ने के मिशन पर निकलती है.
इस हाई-वोल्टेज और डार्क जासूसी कहानी के सेंटर में वामिका गब्बी का कैरेक्टर ‘चारू रवि’ है. चारू एक ऐसी औरत है जो अनजाने में एक बहुत खतरनाक जाल में फंस जाती है. उसके पति का रोल अली फजल ने किया है, जो एक रॉ एजेंट है. एक बेबस पत्नी, एक प्रोटेक्टिव मां और बाद में एक जासूस के तौर पर देश के लिए अपनी जान जोखिम में डालने वाली औरत के रूप में वामिका की परफॉर्मेंस रोंगटे खड़े कर देने वाली है.
किसी भी नए या उभरते हुए आर्टिस्ट के लिए तब्बू जैसी नेशनल अवॉर्ड विनिंग एक्ट्रेस और अली फजल जैसे अनुभवी इंटरनेशनल एक्टर के साथ स्क्रीन शेयर करना एक बहुत बड़ा चैलेंज होता है. लेकिन, इस फिल्म में वामिका गब्बी की परफॉर्मेंस साबित करती है कि वह एक लॉन्ग शॉट हैं. जहां कई सीन में तब्बू की सीरियस परफॉर्मेंस साफ दिखती है, वहीं वामिका गब्बी के चेहरे के एक्सप्रेशन, डर और गुस्सा दर्शकों को स्क्रीन से बांधे रखते हैं. खासकर फिल्म के दूसरे हाफ में, जब वामिका का कैरेक्टर अपनी जिंदगी के सबसे खतरनाक मिशन पर निकलता है, तो उनकी परफॉर्मेंस दर्शकों को हैरान कर देती है.
‘खुफिया’ सिर्फ एक सिंपल जासूसी फिल्म नहीं है. यह इंसानी रिश्तों के काले राज भी दिखाती है. विशाल भारद्वाज ने फिल्म में कमाल का सस्पेंस और थ्रिल बनाया है. वामिका गब्बी वाले कुछ इमोशनल और इंटेंस सीन इतने रियलिस्टिक हैं कि दर्शकों को उनके कैरेक्टर का दर्द और डर महसूस होता है. फिल्म का बैकग्राउंड म्यूजिक और डार्क सिनेमैटोग्राफी इसके खतरनाक माहौल को और बढ़ाते हैं. अगर आपने अभी तक यह फिल्म नहीं देखी है, तो यह आपकी नेटफ्लिक्स वॉचलिस्ट में एक बढ़िया एडिशन हो सकती है.
अक्सर दर्शक किसी स्टार को उनकी कमर्शियल फिल्मों जैसे ‘भूत बंगला’ या ‘पति पत्नी और वो 2’ से आंकते हैं, जहां मेन फोकस एंटरटेनमेंट और कॉमेडी पर होता है. लेकिन, एक सिनेमा लवर के तौर पर, वामिका गब्बी की असली एक्टिंग एबिलिटी और रेंज को समझने के लिए ‘खुफिया’ देखना जरूरी है. यह फिल्म दिखाती है कि वामिका कॉमेडी में भी उतनी ही आसानी से लोगों को हंसा सकती हैं और वह डार्क थ्रिलर में भी दर्शकों को डरा और शॉक कर सकती हैं.
अगर आप सस्पेंस, थ्रिल और दमदार एक्टिंग से भरी फिल्मों के फैन हैं, तो इस वीकेंड ‘खुफिया’ देखने के लिए बैठ जाइए. यकीन मानिए, यह फिल्म देखने के बाद आप वामिका गब्बी की एक्टिंग की तारीफ करते नहीं थकेंगे और उनके सबसे बड़े फैन बन जाएंगे.

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Pratik ShekharEntertainment Head

पिछले 15 सालों से डिजिटल मीडिया की दुनिया में एक्टिव, प्रतीक शेखर अभी News18 में एंटरटेनमेंट हेड के तौर पर काम कर रहे हैं. एंटरटेनमेंट इंडस्ट्री की गहरी समझ के साथ, प्रतीक ने खुद को एक और पढ़ें





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स्टार व्हाइट फूल की खेती से 30 लाख की कमाई, युवा किसान चंदा यादव बने मिसाल!


जयपुर. जयपुर जिले के ग्रामीण क्षेत्र बस्सी झाझड़ा गांव में एक युवा किसान फूलों की अनोखी खेती कर रहे हैं. यह किसान कोलकाता में उगाए जाने वाले स्टार व्हाइट फूल की खेती कर रहे हैं. खास बात यह है कि जयपुर जिले में इस फूल की खेती करने वाले वे पहले किसानों में गिने जाते हैं. किसान का नाम चंदा यादव है, जिन्होंने कम उम्र में ही आधुनिक खेती के जरिए अपनी अलग पहचान बना ली है. उन्होंने बताया कि स्टार व्हाइट फूल का पौधा एक बार लगाने के बाद करीब एक वर्ष तक लगातार फूल देता है.

चंदा यादव बताते हैं कि यह फूल देखने में बेहद आकर्षक होता है और इसकी खुशबू भी काफी मनमोहक होती है. इसी वजह से बाजार में इसकी अच्छी मांग रहती है और किसानों को बेहतर कीमत मिलती है. उन्होंने बताया कि फूलों के दाम मौसम और मांग के अनुसार बदलते रहते हैं. शादी-विवाह और अन्य आयोजनों के दौरान इन फूलों की मांग सबसे ज्यादा रहती है. चंदा यादव का कहना है कि इस खेती से वे सालाना 8 से 10 लाख रुपये तक की आय अर्जित कर रहे हैं. खेती का खर्च निकालने के बाद भी उन्हें करीब 7 से 8 लाख रुपये का शुद्ध लाभ हो जाता है.

खेती में संभावनाएं असीमित

चंदा यादव की उम्र करीब 25 से 26 वर्ष है. जब उनसे पूछा गया कि आज के समय में युवा पढ़ाई और सरकारी नौकरी को प्राथमिकता देते हैं, तो उन्होंने कहा कि नौकरी में व्यक्ति का दायरा सीमित रहता है, जबकि खेती में संभावनाएं असीमित हैं. उनका मानना है कि यदि आधुनिक तकनीकों को अपनाया जाए तो खेती से नौकरी से भी अधिक कमाई की जा सकती है. साथ ही इसमें किसी बाहरी दबाव या हस्तक्षेप का सामना भी नहीं करना पड़ता. किसान अपनी योजना और मेहनत के अनुसार खेती कर बेहतर परिणाम हासिल कर सकता है.

बचपन से खेती में रही रुचि

चंदा यादव बताते हैं कि उनके पिता भी किसान हैं और वे बचपन से खेती-किसानी के माहौल में ही बड़े हुए हैं. स्कूल से लौटने के बाद खेतों में समय बिताना उन्हें अच्छा लगता था. धीरे-धीरे खेती के प्रति उनका लगाव बढ़ता गया. कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पूरी तरह खेती को ही अपना पेशा बना लिया. उनका कहना है कि वे अपनी शिक्षा और तकनीकी जानकारी का उपयोग खेती में कर रहे हैं और लगातार नई तकनीकों को अपनाकर उत्पादन बढ़ाने का प्रयास कर रहे हैं. भविष्य में वे इस क्षेत्र को और विस्तार देने की योजना बना रहे हैं.

फूलों के साथ सब्जियों से भी कमाई

चंदा यादव बताते हैं कि पहले किसान मुख्य रूप से बाजरा, गेहूं और मूंगफली जैसी पारंपरिक फसलों पर निर्भर रहते थे, लेकिन इनमें मेहनत के मुकाबले आय सीमित होती है. इसी कारण उन्होंने आधुनिक खेती का रास्ता चुना. वे पॉलीहाउस में खेती करते हैं और स्टार व्हाइट फूलों की खेती शुरू करने से पहले खीरा और शिमला मिर्च की खेती से भी अच्छी आय अर्जित कर चुके हैं. उनका कहना है कि इन फसलों में भी अच्छा मुनाफा है, लेकिन वे कुछ अलग करना चाहते थे. इसी सोच के साथ उन्होंने स्टार व्हाइट फूल की खेती शुरू की. हाल ही में उन्होंने डच रोज और लिली जैसे फूलों की खेती भी शुरू की है.

बड़े शहरों तक पहुंच रही मांग

चंदा यादव के पॉलीहाउस में तैयार होने वाले फूलों की मांग केवल स्थानीय बाजार तक सीमित नहीं है. उन्होंने बताया कि उनके फूल जयपुर, दिल्ली, अहमदाबाद समेत कई बड़े शहरों में भेजे जाते हैं. सभी फूलों और अन्य फसलों को मिलाकर वे सालाना करीब 30 लाख रुपये तक की आय प्राप्त कर रहे हैं. उनका मानना है कि यदि वे किसी नौकरी में होते तो इतनी कमाई करना आसान नहीं होता. खेती के जरिए वे अपने घर पर रहकर बेहतर आय अर्जित कर रहे हैं.

किसानों के लिए प्रेरणा

चंदा यादव का कहना है कि आज कई किसान परिवारों के युवा जमीन होने के बावजूद नौकरी की तलाश में भटकते हैं. उनका मानना है कि किसानों की जमीन किसी सोने की खान से कम नहीं है. यदि आधुनिक तकनीक, शिक्षा और सही योजना के साथ खेती की जाए तो किसान घर बैठे बेहतर आय अर्जित कर सकते हैं. उनके अनुसार खेती में आज भी अपार संभावनाएं हैं और युवा पीढ़ी को इसे नए नजरिए से देखने की जरूरत है.



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फिरोजाबाद में सीएम ग्रिड कार्य में लापरवाही: खुले गड्ढों और मैनहोल से बढ़ रहा हादसे का खतरा – Firozabad News




फिरोजाबाद में सीएम ग्रिड योजना के तहत चल रहे कार्यों में लापरवाही सामने आई है। कोटला चुंगी से तिलक चौराहा होते हुए जलेसर रोड तक कई स्थानों पर सड़कें खोदकर छोड़ दी गई हैं। इसके अलावा, कई जगह मैनहोल भी खुले पड़े हैं, जिससे राहगीरों और वाहन चालकों के लिए दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। स्थानीय निवासी रवि कुमार ने बताया कि क्षेत्र में सीएम ग्रिड का कार्य लगभग एक माह से चल रहा है। कार्यदायी संस्था ने सड़क खोदने के बाद गड्ढों को ठीक से नहीं भरा है। गहरे गड्ढे और खुले मैनहोल विशेष रूप से रात के समय हादसों की आशंका बढ़ा रहे हैं। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि निर्माण स्थलों पर पर्याप्त बैरिकेडिंग या चेतावनी बोर्ड नहीं लगाए गए हैं। इसके कारण आए दिन दोपहिया वाहन चालक और पैदल राहगीर दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। स्थानीय लोगों ने इस स्थिति में किसी बड़े हादसे की जिम्मेदारी तय करने की मांग की है। स्थानीय लोगों ने नगर निगम और संबंधित विभाग से खुले गड्ढों और मैनहोल को तत्काल बंद कराने तथा कार्यस्थलों पर सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम सुनिश्चित करने की मांग की है। उन्होंने चेतावनी दी है कि यदि समस्या का शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो वे आंदोलन करने के लिए बाध्य होंगे।



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सहरसा में 100 करोड़ की लागत से बनेगा ड्रेनेज सिस्टम: जलजमाव से लोगों को मिलेगी राहत, 10 जून तक टेंडर प्रक्रिया पूरी होने का दावा – Saharsa News




सहरसा शहर में हर साल होने वाली जलजमाव की समस्या के समाधान के लिए विधायक इंद्रजीत प्रसाद गुप्ता ने नगर निगम और संबंधित विभागों के अधिकारियों के साथ समीक्षा बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए हैं। विधायक गुप्ता ने बताया कि आगामी 10 जून तक टेंडर प्रक्रिया पूरी कर कार्या निर्देश जारी कर दिया जाएगा। इसके बाद शहर के विभिन्न इलाकों में जलनिकासी के कार्य शुरू होंगे,जिससे अगले दो महीनों में लोगों को जलजमाव से काफी हद तक राहत मिलने की उम्मीद है। विधायक ने इस बात पर जोर दिया कि पिछले 25 वर्षों में शहर में एक प्रभावी ड्रेनेज सिस्टम विकसित नहीं हो सका है, जिसके कारण सहरसा के कई हिस्से आज भी जलजमाव की समस्या का सामना कर रहे हैं। उन्होंने नगर निगम के नगर आयुक्त और विभागीय अधिकारियों को इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए आवश्यक निर्देश दिए हैं। 100 करोड़ रुपए से बनाई जाएगी ड्रेनेज सिस्टम विधायक गुप्ता ने एक बड़ी ड्रेनेज सिस्टम परियोजना की जानकारी दी। यह योजना रिफ्यूजी कॉलोनी से कहरा प्रखंड जाने वाली सड़क पर महावीर चौक से सुभाष चौक तक 100 करोड़ रुपए से अधिक की लागत से बनाई जाएगी। इस परियोजना का उद्देश्य रिफ्यूजी कॉलोनी क्षेत्र में वर्षों से चली आ रही जलभराव की समस्या का स्थायी समाधान करना है। नगर निगम ने इसकी प्रशासनिक स्वीकृति के लिए नगर विकास एवं आवास विभाग, पटना को प्रस्ताव भेज दिया है। इसके अतिरिक्त, लक्ष्मीनिया चौक से पॉलिटेक्निक ढाला तक सड़क के दोनों किनारों पर ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने की भी योजना है।आरसीडी विभाग के कार्यपालक अभियंता ने विधायक को सूचित किया है कि इस कार्य को 9 जून तक शुरू कर दिया जाएगा। पॉलिटेक्निक ढाला के पास मौजूदा ड्रेनेज सिस्टम में एक सुरक्षा दीवार (प्रोटेक्शन वॉल) का निर्माण भी किया जाएगा। इसका उद्देश्य राहगीरों के दुर्घटनाग्रस्त होने की आशंका को कम करना है। बटराहा में अतिक्रमण हटाकर पूरा होगा ड्रेनेज कार्य बटराहा मोहल्ले में जलजमाव की समस्या पर विधायक ने कहा कि बुडको द्वारा सड़क किनारे नाला निर्माण कराया गया है, लेकिन नाले की ऊंचाई सड़क से अधिक होने के कारण पानी सड़क पर जमा हो जाता है। नगर निगम द्वारा ड्रेनेज सिस्टम का लगभग 500 फीट निर्माण कराया जा चुका है, जबकि शेष कार्य अतिक्रमण के कारण रुका हुआ है।

उन्होंने नगर निगम को अतिक्रमण हटाकर शेष ड्रेनेज निर्माण शीघ्र पूरा करने का निर्देश दिया है। विधायक का कहना है कि एक-दो दिनों में यहां कार्य प्रारंभ हो जाएगा, जिससे जलजमाव की समस्या काफी हद तक समाप्त हो जाएगी। साथ ही मारूफगंज से बटराहा जाने वाली लगभग 700 फीट सड़क को ऊंचा करने का भी प्रस्ताव है, जिससे बरसात के दौरान लोगों को आवागमन में परेशानी नहीं होगी। रोशनी और जलनिकासी की व्यवस्था होगी बेहतर शहर के बाइपास स्थित सर्वा ढाला क्षेत्र में जलभराव और अपर्याप्त रोशनी को लेकर भी विधायक ने चिंता जताई। उन्होंने नगर निगम को पर्याप्त स्ट्रीट लाइट लगाने तथा जलनिकासी की व्यवस्था सुदृढ़ करने का निर्देश दिया है। उन्होंने बताया कि रेलवे के वाशिंग पिट और सड़क क्रॉसिंग के कारण यहां जलनिकासी प्रभावित हुई थी, लेकिन नगर निगम ने पानी निकालने की कार्रवाई शुरू कर दी है। गोदाम के समीप कच्ची खुदाई कर जलनिकासी को और सुगम बनाने का निर्देश भी दिया गया है। 10 जून तक वर्क ऑर्डर होगा जारी विधायक ने कहा कि 5 जून तक टेंडर प्रक्रिया में ठेकेदार शामिल हो जाएंगे और 10 जून तक अधिकांश योजनाओं का वर्क ऑर्डर जारी कर दिया जाएगा। इसके बाद विभिन्न परियोजनाओं पर तेजी से काम शुरू होगा। उन्होंने पूर्व के जनप्रतिनिधियों पर निशाना साधते हुए कहा कि शहर के विकास और ड्रेनेज व्यवस्था को लेकर गंभीर पहल नहीं किए जाने के कारण आज ऐसी स्थिति उत्पन्न हुई है। अब नगर निगम और विभागीय अधिकारियों के सहयोग से जलजमाव की समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाए जा रहे हैं।



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नेता प्रतिपक्ष कार्यालय ने सीएस को लिखी चिट्‌ठी: तिलहन संघ के कर्मचारियों को दें पांचवें वेतनमान का लाभ, कोर्ट में चल रहे 300 से अधिक केस – Bhopal News




प्रदेश में अलग-अलग विभागों में प्रतिनियुक्ति पर पदस्थ तिलहन संघ के अधिकारियों और कर्मचारियों को राज्य सरकार ने अब तक पांचवां वेतनमान नहीं दिया है। इसको लेकर हाईकोर्ट में 300 से अधिक मामले जबलपुर और इंदौर हाईकोर्ट में चल रहे हैं। नाम मात्र की संख्या में बचे ऐसे कर्मचारियों को पांचवें वेतनमान का लाभ देने के लिए विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष के कार्यालय ने मुख्य सचिव को चिट्‌ठी लिखी है। नेता प्रतिपक्ष कार्यालय द्वारा मुख्य सचिव को लिखे गए पत्र में कहा गया है कि मध्यप्रदेश राज्य तिलहन संघ से प्रतिनियुक्ति, संविलियन पर शासन में पदस्थ कर्मचारियों को पंचम वेतनमान का लाभ देने तथा वर्षों से लंबित न्यायालयीन प्रकरणों के शीघ्र निराकरण की जरूरत है। 95 प्रतिशत कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके वर्ष 1998 से राज्य शासन में प्रतिनियुक्ति अथवा संविलियन पर कार्यरत तिलहन संघ के लगभग 800 कर्मचारियों को अब तक पांचवें वेतनमान और एरियर राशि का लाभ नहीं मिल सका है। इनमें से करीब 95 प्रतिशत कर्मचारी सेवानिवृत्त हो चुके हैं। पत्र में कहा गया है कि इस मामले से जुड़ी लगभग 300 याचिका एवं अवमानना प्रकरण वर्ष 2008 से जबलपुर और इंदौर खंडपीठ में लंबित हैं। वहीं, विभिन्न विभागों में कार्यरत लगभग 200 कर्मचारियों को पांचवें वेतनमान का लाभ पहले ही मिल चुका है, जबकि अन्य विभागों और संस्थाओं में कार्यरत कर्मचारियों को इससे वंचित रखा गया है। 50 प्रकरण हाईकोर्ट में लंबित यह भी कहा गया है कि इन प्रकरणों में शासन द्वारा अधिवक्ताओं की फीस, अधिकारियों की यात्रा और अन्य प्रशासनिक मदों पर लाखों रुपये खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं निकल पाया है। पत्र में उच्च न्यायालय, जबलपुर के उन आदेशों का भी उल्लेख किया गया है, जिनसे संबंधित करीब 50 प्रकरण लंबित बताए गए हैं। पत्र में संविधान के समानता के अधिकार और “समान कार्य के लिए समान वेतन” के सिद्धांत का हवाला देते हुए कर्मचारियों को वैधानिक लाभ से वंचित रखना अनुचित बताया गया है।



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