Friday, October 2, 2026
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मथुरा में कांग्रेस जिलाध्यक्ष हाउस अरेस्ट: दिल्ली में प्रदर्शन में शामिल होने जाने वाले थे – Mathura News




दिल्ली में मुख्य चुनाव आयुक्त की गिरफ्तारी की मांग को लेकर युवा कांग्रेस के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले मथुरा में पुलिस ने कांग्रेस नेताओं के खिलाफ कार्रवाई की। युवा कांग्रेस के प्रदेश महासचिव अनाम धन्य तिवारी एडवोकेट को पुलिस उनके घर से हिरासत लेकर थाना कोतवाली ले गई। वहीं, युवा कांग्रेस के जिलाध्यक्ष दुर्गेश बघेल समेत अन्य कांग्रेस नेताओं को उनके घरों पर ही हाउस अरेस्ट कर नजरबंद कर दिया गया। पुलिस की इस कार्रवाई से राजनीतिक हलचल तेज हो गई। प्रदेश महासचिव अनाम धन्य तिवारी एडवोकेट ने कहा कि युवा कांग्रेस दिल्ली में लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात रखने जा रही थी, लेकिन प्रदर्शन से पहले ही उन्हें घर से हिरासत में लेकर कोतवाली ले जाया गया। उन्होंने कहा कि पुलिस की कार्रवाई से उनकी आवाज दबने वाली नहीं है। लोकतंत्र और निष्पक्ष चुनाव व्यवस्था से जुड़े सवालों पर उनका संघर्ष जारी रहेगा। वहीं, जिलाध्यक्ष दुर्गेश बघेल ने आरोप लगाया कि जब भी सरकारों से सवाल पूछे जाते हैं, तब पुलिस को आगे कर दिया जाता है। उन्होंने कहा कि दिल्ली में लोकतांत्रिक तरीके से प्रदर्शन में शामिल होने जा रहे थे, लेकिन पुलिस ने उनके घर पर पहुंचकर उन्हें हाउस अरेस्ट कर नजरबंद कर दिया। दुर्गेश बघेल ने कहा कि वे किसी अपराध के लिए नहीं, बल्कि लोकतंत्र से जुड़े सवालों को लेकर अपनी आवाज उठाने जा रहे थे। पुलिस का पहरा लगाकर विरोध की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। उन्होंने कहा कि सरकार चाहे जितनी पुलिस लगा ले, युवा कांग्रेस कार्यकर्ता अपने सवालों और मांगों से पीछे नहीं हटेंगे। युवा कांग्रेस नेताओं ने पुलिस की कार्रवाई पर नाराजगी जताते हुए कहा कि संगठन लोकतांत्रिक तरीके से अपनी मांगों को लेकर संघर्ष जारी रखेगा। वहीं, पुलिस की ओर से कार्रवाई के कारणों को लेकर कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।



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गुलाब बाग गांधी पार्क में हुई सर्वधर्म प्रार्थना सभा: कलेक्टर सहित अधिकारियों ने पूर्व प्रधानमंत्री और राष्ट्रपिता को दी श्रद्धांजलि – Sawai Madhopur News




राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर शुक्रवार को सवाई माधोपुर में विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए गए। गुलाब बाग स्थित गांधी पार्क में सर्वधर्म प्रार्थना सभा हुई। इसमें जिला कलेक्टर कानाराम, एडीएम संजय शर्मा, नगर परिषद सभापति मेवा चौधरी, उपसभापति माया गोयल सहित प्रशासनिक अधिकारी और जनप्रतिनिधि शामिल हुए। सभी ने महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के चित्र पर माल्यार्पण एवं पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। गांधी-शास्त्री का जीवन सत्य, त्याग और सेवा का प्रतीक इस दौरान जिला कलेक्टर कानाराम ने कहा कि गांधी जी और शास्त्री जी का जीवन सत्य, त्याग और सेवा का प्रतीक है। गांधी जी का ‘स्वच्छता–उत्कृष्ट सेवा’ और शास्त्री जी का ‘जय जवान, जय किसान’ आज भी हमारे मार्गदर्शक हैं। उन्होंने सभी अधिकारी-कर्मचारियों और नागरिकों से गांधीजी के सत्य और अहिंसा के सिद्धांतों को अपनाकर राष्ट्र निर्माण में योगदान देने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जीवन में लक्ष्य निर्धारित करते समय साध्य के साथ साधन की पवित्रता होना भी आवश्यक है। विभिन्न धर्मों की प्रार्थनाओं का सामूहिक गायन गुलाब बाग में आयोजित सर्वधर्म प्रार्थना सभा में सरकारी कर्मचारियों, विद्यार्थियों, स्काउट-गाइड और आमजन ने भाग लिया। इस दौरान सरस्वती वंदना, गुरु वंदना, रामधुन, बौद्ध प्रार्थना, गायत्री मंत्र, इस्लाम और जैन धर्म की प्रार्थनाएं, ‘वैष्णव जन तो तेने कहिए’, ‘दे दी हमें आजादी बिना खड्ग बिना ढाल’ और ‘रघुपति राघव राजा राम’ जैसे भजनों का सामूहिक गायन किया गया। कार्यक्रम के दौरान जिला कलेक्टर, एडीएम, सभापति और उपसभापति ने पौधरोपण कर ‘पेड़ लगाओ, पेड़ बचाओ’ का संदेश दिया। साथ ही स्वच्छता कार्यक्रमों के माध्यम से लोगों को स्वच्छता के प्रति जागरूक किया गया।



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भारतीय शेयर बाजार को किसकी लगी नजर? समझिए इसके पीछे का असली खेल


सौ बात की एक बात: सौ बात की एक बात ये कि ये बॉन्ड क्या होते हैं? भारत का शेयर बाजार क्यों गिरे जा रहा है? एक्सपर्ट लोग कह रहे हैं कि अमेरिका के बॉन्ड पर ब्याज बढ़ गया इसलिए भारत का शेयर बाजार गिर रहा है. भारत ही नहीं दुनिया भर में जो शेयरों की कीमत गिरे जा रही है उसकी एक बड़ी वजह ये बताई जा रही है कि अमेरिका के बॉन्ड पर ब्याज ज्‍यादा हो गया है. अब बाकी दुनिया का तो बाकी दुनिया जाने, पब्लिक तो भारत के शेयर बाजार में शेयर के दाम गिरने की वजह जानना चाहती है. तो ईरान में युद्ध हो गया, होर्मुज गलियारा खुलने के आसार कभी दिखते हैं कभी नहीं दिखते, तो ये सब वजहें तो समझ में आती हैं कि अनिश्चितता का माहौल है और कंपनियों के मुनाफे पर असर पड़ेगा, और उनका मुनाफा आगे चल कर कम होने की आशंका है इसलिए उनके शेयर के दाम गिर जाएं ये तो समझ में आता है. लेकिन ये जो हाल के दिनों की लगातार गिरावट चल रही है उसमें ये भी कहने लग गए हैं कि अमेरिका में बॉन्ड पर यील्ड बढ़ रही है उसकी वजह से भारत का शेयर बाजार गिर रहा है, ये वाली बात ज़्यादातर पब्लिक को समझ में नहीं आ रही. लेकिन ये समझना बहुत ज़रूरी है. सिर्फ उनके लिये ही नहीं जिन्होंने शेयर बाजार में निवेश किया हुआ है. सबके लिए जानना ज़रूरी है.

शेयर बाजार क्यों गिर रहा है? क्योंकि शेयरों के दाम गिर रहे हैं. दाम क्यों गिर रहे हैं? उसी वजह से, जिस वजह से किसी भी चीज के दाम गिरते हैं. जब किसी चीज के खरीदार ज़्यादा होते हैं और बेचने वाले कम होते हैं तो उस चीज की बाजार में कमी हो जाती है और खरीदार ज़्यादा पैसे देने को तैयार होते हैं और उस चीज के दाम बढ़ जाते हैं. इसी तरह से अगर किसी चीज को बेचने वाले ज़्यादा हो जाते हैं और खरीदने वाले उतने नहीं होते तो उस चीज की मांग कम हो जाती है और बेचने वालों को सस्ते में बेचने पड़ती है और उस चीज के दाम गिरने शुरू हो जाते हैं. तो मतलब ये कि भारतीय शेयरों को बड़ी संख्या में बेचा जा रहा है, इसलिए उनके दाम गिरते जा रहे हैं. तो क्यों बेचा जा रहा है भारतीय शेयरों को? और कौन बेच रहा है? इसकी बहुत सारी वजहें बताई जाती हैं जैसे कि कच्चे तेल के दामों में बढ़ोतरी, डॉलर के मुकाबले रुपये की गिरती क़ीमत वगैरह. लेकिन साथ में बड़ी वजह ये बताई जा रही है कि विदेशी निवेशक भारत की कंपनियों के शेयरों में बड़ी तादाद में बेच कर अपना पैसा ले कर निकल रहे हैं. और क्यों बेच कर निकल रहे हैं भारत से वो लोग? भारत में तो सरकार कह रही है कि 7.8% ग्रोथ हुई है अर्थव्यवस्था में, तो भारत की कंपनियों को तो आगे और मुनाफ़े की उम्मीद होनी चाहिए. तो उनके शेयर की क़ीमत तो बढ़नी चाहिए. विदेशी निवेशक क्या वो मुनाफा नहीं कमाना चाहते? या उनको भरोसा नहीं कि भारतीय कंपनियों को मुनाफा होगा और भारतीय व्यवस्था आगे भी ऐसे ही बढ़ती रहेगी. या उनको अभी ये जो आंकड़े दिए हैं सरकार ने उनपर ही भरोसा नहीं इसलिए यहां से बेच-बेच कर निकल रहे हैं.

बॉन्‍ड होता क्‍या है?

इस सब पर भी बहुत सारे विश्लेषक अपनी-अपनी राय दे रहे हैं. और इन सब तर्कों का अपना वजन बिलकुल है. लेकिन एक बड़ा तर्क जो दिया जा रहा है वो ये भी है कि अमेरिका में बॉन्ड की यील्ड बढ़ रही है तो विदेशी निवेशकों को भारत से ज़्यादा वहां फायदा होने की उम्मीद दिख रही है इसलिए यहां से बेच-बेच कर निकले जा रहे हैं. ये बॉन्ड क्या होता है? बॉन्ड मतलब एक तरह से ऐसे समझ लो जैसे उधार की रसीद. मान लो आपने किसी को दस हजार रुपये उधार दिए. और वो एक कागज पर लिखकर दे कि इतने पैसे लिए, दो साल बाद लौटाऊंगा, और हर साल इतना ब्याज भी दूंगा. वही कागज जो है वो होता है बॉन्ड. मतलब बॉन्ड एक रसीद है, एक सबूत है कि उसने उधार लिया है और उधार पर इतना ब्याज देने का वादा किया है. फर्क बस इतना है कि ये रसीद आप किसी और को भी बेच सकते हो.

अमेरिकी बॉन्‍ड पर ज्‍यादा कमाई की वजह से निवेशक USA की तरफ रुख कर रहे हैं. (फोटो: AP)

अगर सरकार ही बॉन्‍ड दे तो फिर क्‍या होगा?

और अगर ये बॉन्ड किसी सरकार ने ही दिया हो तो समझिए उसकी वैल्यू कितनी हो जाती होगी. मतलब सरकार ही उधार ले रही है आप से. और सरकार ही वादा कर रही है. तो सरकार के बॉन्ड से पक्की रसीद क्या होगी? और वो अमेरिका की सरकार हो तो सोचिए. तो ये जो कहते हैं कि अमेरिका के बॉन्ड की कीमत बढ़ गई है उसका मतलब है कि अमेरिका की सरकार को उधार दो तो इतना ब्याज मिल रहा है. बाज़ार में इस तरह के बॉन्ड की क़ीमत रोज बदलती रहती है, जबकि असली उधार की रकम और ब्याज का वादा तो कागज पर जस का तस रहता है. मतलब जिसने सरकार को ब्याज दिया उसके पास जो रसीद है उस रसीद को वो बेच रहा है और उस रसीद की कीमत ही मांग के हिसाब से ऊपर नीचे होती रहती है. तो जब लोग कहते हैं की अमेरिकी बॉन्ड महंगा या सस्ता हो गया, तो वो उस रसीद की बाजार वाली कीमत की बात कर रहे होते हैं. मतलब बॉन्ड असल में एक उधार का कागज होता है. जब किसी को पैसे की जरूरत होती है और वो बैंक से नहीं, सीधे लोगों से उधार लेना चाहता है, तो वो एक वादा लिखकर देता है. उसी वादे को बॉन्ड कहते हैं. कागज पर लिखा होता है कि इतने रुपये मैंने लिए, इतने समय बाद लौटाऊंगा, और बीच-बीच में या आखिर में इतना ब्याज भी दूंगा. जो यह कागज खरीदता है, वो उधार देने वाला बन जाता है. जो कागज जारी करता है, वो उधार लेने वाला बन जाता है.

बॉन्ड मतलब एक तरह से ऐसे समझ लो जैसे उधार की रसीद. मान लो आपने किसी को दस हजार रुपये उधार दिए. और वो एक कागज पर लिखकर दे कि इतने पैसे लिए, दो साल बाद लौटाऊंगा, और हर साल इतना ब्याज भी दूंगा. वही कागज जो है वो होता है बॉन्ड. मतलब बॉन्ड एक रसीद है, एक सबूत है कि उसने उधार लिया है और उधार पर इतना ब्याज देने का वादा किया है. फर्क बस इतना है कि ये रसीद आप किसी और को भी बेच सकते हो.

सब साख की बात

और सबसे आम तरह के जो बॉन्ड होते हैं वो सरकार के बॉन्ड होते हैं. तो जैसे अमेरिका की सरकार को जब अपना खर्चा चलाने या पुराना कर्ज चुकाने के लिए पैसे चाहिए होते हैं तो वो ये बॉन्ड जारी करती है. सभी सरकारें ऐसा करती हैं. भारत की सरकार भी बॉन्ड जारी करती है. कंपनियां भी बॉन्ड जारी करती है. जैसे अगर किसी कंपनी को फैक्टरी लगानी है या कोई पुराना कर्ज चुकाना है तो वो भी बाजार से पैसा उधार लेने के लिए बॉन्ड जारी करती है. फर्क बस इतना है कि सरकार का वादा ज्यादा पक्का माना जाता है, किसी कंपनी का वादा उसकी अपनी साख और वित्तीय हालत पर निर्भर करता है. सरकारों का भी ऐसा ही है. जिस सरकार की वित्तीय हालत जितनी ज्‍यादा अच्छी होती है उसको उतने कम ब्याज पर उधार मिल जाता है. जिसने बॉन्ड खरीदा, उसे तय ब्याज मिलता रहता है और समय पूरा होने पर मूल रकम भी वापस मिल जाती है.

बॉन्‍ड शेयर से कैसे अलग?

शेयरों में ऐसा कोई वादा नहीं होता. जिस कंपनी का शेयर होता है वो कंपनी जैसा मुनाफा कमाए वैसी शेयर की कीमत ऊपर-नीचे होती है. बॉन्ड में तो फ़िक्स्ड होता है कि टाइम खत्म होने पर इतना पैसा देने का वादा है. वादा छपा होता है, रकम लिखी होती है, तारीख तय होती है. गारंटी का तो ऐसा है कि अगर बॉन्ड जारी करने वाला ही डूब जाए तो पैसा भी डूब जाता है. इसलिए अमेरिका जैसी सरकार के बॉन्ड की मांग किसी ऐसी सरकार के बॉन्ड से जाहिर सी बात है ज्यादा रहती है जिसकी अर्थव्य्वस्था के भविष्य का कुछ ठिकाना ही ना हो.

कोई क्यों आएगा भारत में निवेश करने जब अमेरिका की सरकार को ही उधार दे कर वहां 5% से ज़्यादा की कमाई हो रही होगी? वो भी डॉलर में? वो तो तभी यहां पैसा लगाएगा ना जब यहां कंपनियों की कमाई इतनी ज़्यादा होने की उम्मीद हो कि बाकी देशों से ज़्यादा मुनाफ़ा भी हो जाए और रुपये की क़ीमत गिरने से जो नुकसान हो उसकी भी भरपाई हो जाए. मगर जब तक अमेरिका की सरकार की गारंटी वाले कागज पर इतना मोटा और सुरक्षित रिटर्न मिल रहा है, भारत के शेयर बाजार को चढ़ने के लिए अर्थव्यवस्था को और ज्‍यादा मजबूत होना होगा.

यील्ड का मतलब क्या?

अब आ जाइए यील्ड पर. यील्ड का मतलब क्या? मान लीजिए आपने ऐसा बॉन्ड खरीदा जो साल में 5 रुपये ब्याज देता है. और बाजार में ब्याज दरें और बढ़ जाएं. और बाद में नए बॉन्ड जारी हों जिनपर 7 रुपये ब्याज मिलने लगे. तो आपका पुराना बॉन्ड तो कम कमाई करके देने लगता है. आप चाहोगे कि वो पैसा निकाल कर नए बॉन्ड में डाल दूं और ज्‍यादा ब्याज क्यों ना कमाऊं? तो आप उसको बेचने निकलते हो और अब लोग उसे सस्ते में ही खरीदेंगे. क्योंकि बेचने वाले ज्‍यादा आ जाते हैं बाजार में. कीमत गिरेगी. कीमत गिरेगी, भाव घटेगा, बॉन्ड सस्ता होगा. मतलब आपने अगर 100 रुपये का बॉन्ड लिया था, और 5 रुपये ब्याज मिलना था तो अभी बेचने पर उसके 98 ही मिलेंगे क्योंकि अब 5 रुपये ब्याज 98 पर ही मिलने लगेगा. ब्याज तो फ़िक्स है. लेकिन अब वो कम रकम पर ही मिलेगा. इसको कहते हैं कि यील्ड बढ़ गई. पहले 100 रुपये पर 5 रुपये मिल रहे थे अब 98 पर ही 5 रुपये मिल रहे हैं. यानी रिटर्न ज़्यादा हो गई. इसको कहते हैं यील्ड ज़्यादा हो गई.

असल कहानी तो डॉलर और रुपये की

इसलिए जब खबर आती है कि अमेरिकी बॉन्ड यील्ड 5.3% पर पहुंच गई, तो उसका सीधा मतलब ये होता है कि अमेरिका की सरकार के वादे की वैल्यू कम हो रही है. नया बॉन्ड खरीदने वाले को पहले से मोटा ब्याज मिल रहा है. यानी अब अमेरिका की सरकार को बाजार से उधार चाहिए तो ज़्यादा पैसा देना पड़ रहा है. और जो अमेरिका की सरकार को पैसा उधार दे रहा है उसको 5.3% की कमाई हो रही है. तो ये वजह बताई जा रही है कि विदेशी निवेशक भारतीय शेयर बाजार से पैसा निकाल कर अमेरिका की सरकार के बॉन्ड में लगाए जा रहे हैं. तो क्या भारत से उनको 5% कमाई की उम्मीद भी नहीं दिख रही? ये है असली कहानी. ये है असली समझने वाली बात. कि अमेरिका में 5% पर पैसा उधार देने निकल पड़े हैं, यहां पर क्या 5% भी नहीं कमाएंगे? तो वो क्या है कि यहां कमा भी लेंगे तो वो कमाई तो होगी रुपयों में. वहां 5% भी कमाई होगी तो वो कमाई होगी डॉलरों में. पहले अमेरिका के बॉन्ड पर कमाई चल रही थी 1-2% की. तो भारत में शेयर बाज़ार में ज़्यादा कमाई दिख रही थी तो वो यहां आ रहे थे. अब वहां कमाई दिख रही है 5% से भी ज़्यादा की. 5.3% भी हो गया आंकड़ा. और वो भी डॉलरों में. तो वो ज़्यादा फ़ायदेमंद दिख रहा है.

धंधे वालों को तो बस मुनाफा चाहिए

धंधे वाला तो मुनाफ़ा देखता है. वहां ज्‍यादा दिख रहा है तो वहां भाग रहे हैं. एक तो वो सरकार का बॉन्ड है. अमेरिका की सरकार का बॉन्ड है. यहां शेयर बाजार में कभी ऊपर कभी नीचे का हिसाब चलता है. वहां सरकार का पक्का वादा है. और यहां रुपये की क़ीमत ही गिरती जाती है. सोचिए कई एक डॉलर लेकर आया. उसने यहां शेयर खरीदे. तो एक डॉलर के उसे मिले 90 रुपये. उसने 90 रुपये के शेयर खरीदे. और शेयर की कीमत चढ़ कर हो गई 95 रुपये. तो उसको 5 रुपये का फ़ायदा होना चाहिए. लेकिन वो जब बेचने जाए तो एक डॉलर की क़ीमत हो गई 95 रुपये. तो उसको 95 रुपये पर शेयर बेचने के बाद भी वापस मिलेगा एक ही डॉलर. एक ही डॉलर लेकर आया था, मुनाफा होने के बाद भी एक ही डॉलर ले कर जाएगा. तो काहे का मुनाफ़ा हुआ? खाया पिया कुछ नहीं गिलास तोड़ा बारा आना? कोई क्यों आएगा भारत में निवेश करने जब अमेरिका की सरकार को ही उधार दे कर वहां 5% से ज़्यादा की कमाई हो रही होगी? वो भी डॉलर में? वो तो तभी यहां पैसा लगाएगा ना जब यहां कंपनियों की कमाई इतनी ज़्यादा होने की उम्मीद हो कि बाकी देशों से ज़्यादा मुनाफ़ा भी हो जाए और रुपये की क़ीमत गिरने से जो नुकसान हो उसकी भी भरपाई हो जाए. मगर जब तक अमेरिका की सरकार की गारंटी वाले कागज पर इतना मोटा और सुरक्षित रिटर्न मिल रहा है, भारत के शेयर बाजार को चढ़ने के लिए अर्थव्यवस्था को और ज्‍यादा मजबूत होना होगा. नहीं तो वहां का बॉन्ड ही असली बॉन्ड बना रहेगा. सौ बात की एक बात.



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देवास में 150 फीट ऊंचे BSNL टावर पर चढ़ा युवक: पारिवारिक समस्या बताई वजह, बोला- मर्जी से ही उतरूंगा; 12 दिन में दूसरी ऐसी घटना – Dewas News




देवास के बागली में शुक्रवार सुबह एक युवक करीब 150 फीट ऊंचे बीएसएनएल टावर पर चढ़ गया। युवक का नाम प्रकाश उर्फ सुदामा (35) है। उसने टावर पर चढ़ने की वजह पारिवारिक समस्या बताई है। प्रकाश सुबह करीब 6 बजे से टावर पर मौजूद है। वह लगातार अपने परिजनों और दोस्तों से फोन पर बात कर रहा है। उसने कहा कि वह अपनी मर्जी से चढ़ा है और अपनी मर्जी से ही तय समय में नीचे उतरेगा।
थाना प्रभारी भी मौके पर पहुंचे
सूचना मिलते ही थाना प्रभारी जीवन भिंडोरे पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। पुलिस और परिजन युवक को सुरक्षित नीचे उतारने की कोशिश कर रहे हैं। मौके पर लोगों की भीड़ भी जमा हो गई है। यह बागली में 12 दिन के अंदर दूसरी ऐसी घटना है। इससे पहले भी एक युवती बीएसएनएल टावर पर चढ़ गई थी।



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प्रभारी मंत्री श्रवण कुमार मोतिहारी पहुंचे, गांधी-शास्त्री को किया नमन: बोले- ‘जय जवान, जय किसान’ ने देश को नई दिशा दी, स्थानीय लोगों से भी मुलाकात – Motihari (East Champaran) News




बिहार सरकार के मंत्री और पूर्वी चंपारण जिले के प्रभारी मंत्री श्रवण कुमार शुक्रवार को मोतिहारी पहुंचे। उन्होंने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की जयंती पर बाल उद्यान में उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण कर श्रद्धांजलि दी। इसके बाद उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री के चित्र पर भी फूल चढ़ाकर उन्हें नमन किया। इस मौके पर मंत्री श्रवण कुमार ने कहा कि महात्मा गांधी का चंपारण से गहरा जुड़ाव रहा है। गांधीजी ने यहीं से किसानों की समस्याओं को लेकर सत्याग्रह किया और देश के स्वतंत्रता आंदोलन को नई दिशा दी। उन्होंने मोतिहारी की धरती को ऐतिहासिक और प्रेरणादायी बताया। देशवासियों को किया एकजुट मंत्री ने कहा कि गांधीजी ने सत्य, अहिंसा और स्वच्छता का संदेश देकर देशवासियों को एकजुट किया। उनके विचार आज भी समाज और देश के लिए जरूरी हैं। चंपारण में उनकी जयंती मनाना खास महत्व रखता है। उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री को याद करते हुए कहा कि शास्त्रीजी ने ‘जय जवान, जय किसान’ का नारा दिया था। उन्होंने जवानों और किसानों के योगदान को देश की तरक्की का आधार बताया। इस दौरान मंत्री ने स्थानीय लोगों से भी मुलाकात की।



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घर पर बनाएं रोड साइड चाऊमीन का हेल्दी वर्जन, मिलेगा स्ट्रीट वाला स्वाद भरपूर पोषण के साथ

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Healthy Chowmein Recipe: लगभग सभी बच्चों को चाऊमीन बेहद पसंद आती है. पर बाजार की अनहेल्दी चाऊमीन खिलाने से बेहतर है कि आप घर पर खूब सारी रंग-बिरंगी सब्जियां और पनीर/सोयाबीन डालकर इसे तैयार करें. छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखने से बिलकुल स्ट्रीट स्टाइल स्वाद मिलेगा पोषण के साथ.

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जमशेदपुर. शाम के समय या बच्चों के टिफिन में अगर कुछ इंट्रेस्टिंग और टेस्टी रखना चाहते हैं क्योंकि आपका बच्चा रोज-रोज एक जैसा खाना खाकर बोर हो गया है तो चाऊमीन का यह हेल्दी वर्जन ट्राय कर सकते हैं. बच्चों की कुछ चटपटा और स्वादिष्ट खाने की जिद पूरी हो जाएगी और आपका भी मन भरा रहेगा कि टेस्टी के नाम पर बच्चे को जंक नहीं खिला रहे. यह बनाने में आसान है और इसमें कई तरह की सब्जियां डालकर इसे स्वादिष्ट बनाया जा सकता है. खास बात यह है कि बच्चों को चाऊमीन पसंद भी आती है और सब्जियों को इसमें आसानी से शामिल किया जा सकता है.

सबसे पहले उबालें चाऊमीन, 80 परसेंट ही कुक करें
इसे बनाने के लिए सबसे पहले चाऊमीन को उबालकर तैयार कर लें. इसके लिए एक बर्तन में पानी गर्म करें और उसमें चाऊमीन डाल दें. चाऊमीन को ज्यादा गलाने के बजाय हल्का नरम होने तक उबालें. इसके बाद पानी निकालकर इसे ठंडे पानी से धो लें और थोड़ा सा तेल मिलाकर अलग रख दें, ताकि चाऊमीन आपस में चिपके नहीं.

अधिक से अधिक सब्जियां डालें
अब सब्जियों की तैयारी करें. इसके लिए एक प्याज, एक शिमला मिर्च, एक गाजर और थोड़ी सी बींस को अच्छी तरह धोकर बारीक काट लें. बच्चों के लिए बना रहे हैं तो सब्जियों को बहुत छोटे टुकड़ों में काटना बेहतर रहेगा, ताकि वे आसानी से खा सकें. अगर घर में बेबी कॉर्न, मशरूम या पनीर उपलब्ध है तो उसे भी छोटे टुकड़ों में काटकर इसमें शामिल किया जा सकता है. कुल मिलाकर जितनी ज्यादा सब्जियां हों डालें.

इसको हेल्दी ट्विस्ट देने के लिए पनीर और सोयाबीन डालना एक बेहतरीन ऑप्शन है. बच्चे अगर आम तौर पर सोयाबीन या पनीर खाने में मुंह बनाते हैं तो इस तरह से आसानी से खा लेंगे. सोयाबीन को आप पहले से उबालकर, हल्का सा फ्राई करके स्टोर कर सकते हैं और चाऊमीन बनाते समय डायरेक्ट सब्जियों में डालकर फ्राई कर लें.

तेज आंच पर पकाएं सब्जियां
अब एक फ्राई पैन या कड़ाही को गैस पर रखें और उसमें थोड़ा सा तेल डालकर गर्म करें. तेल गर्म होने के बाद सबसे पहले अदरक लहसुन का पेस्ट या एकदम बारीक कटी अदरक-लहसुन डालें फिर प्याज डालें और हल्का भूनें. इसके बाद इसमें गाजर, बींस और शिमला मिर्च डालकर तेज आंच पर कुछ मिनट तक चलाते हुए पकाएं. सब्जियों को पूरी तरह गलाने की जरूरत नहीं है. हल्का क्रंची रहने पर चाऊमीन का स्वाद और भी अच्छा लगता है. इसका एक नियम यह भी है कि सब्जियों को तेज आंच पर सॉटे करें.

अब मसालों और सॉस की बारी
अब इसमें स्वाद के अनुसार थोड़ा नमक, काली मिर्च और घर में इस्तेमाल होने वाले हल्के मसाले डालें. बच्चों के लिए बना रहे हैं तो लाल मिर्च की मात्रा कम रखें. इसके बाद उबली हुई चाऊमीन को पैन में डालकर सब्जियों के साथ अच्छी तरह मिलाएं. आप चाहें तो थोड़ा सा सोया सॉस या चाऊमीन मसाला भी डाल सकते हैं. सॉस अपने बच्चे की पसंद के हिसाब से चुनें.

अब इसे तेज आंच पर करीब 2 से 3 मिनट तक लगातार चलाते हुए पकाएं. आखिर में गैस बंद कर दें और ऊपर से थोड़ा सा हरा धनिया डालकर चाऊमीन को सर्व करें. अगर बच्चा पसंद करता है तो इसमें भुनी और कुटी मूंगफली भी डाल सकते हैं.

घर पर पूरी शुद्धता से करें तैयार
इस तरह घर में मौजूद साधारण सब्जियों से स्वादिष्ट और रंग-बिरंगी देसी चाऊमीन तैयार हो जाएगी. इसे शाम के नाश्ते के साथ-साथ बच्चों के टिफिन में भी दिया जा सकता है. बाहर मिलने वाली चाऊमीन के बजाय घर पर बनाकर आप इसमें अपनी पसंद की सब्जियां और मसाले सीमित मात्रा में रख सकते हैं. साथ ही घर के सामान की शुद्धता भी मिलेगी.

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Raina Shukla

Raina Shukla is an experienced journalist and content professional with nearly two decades of experience in print and digital media. She holds a Master’s degree in Mass Communication and Journalism from Bundelk…

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अमेरिका ने 9000 सैनिकों वाला वॉरशिप मिडिल ईस्ट भेजा: ट्रम्प ने मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर हमले की बात कही थी




अमेरिका मिडिल ईस्ट में अपनी सैन्य मौजूदगी और बढ़ा रहा है। करीब 9 हजार सैनिकों के साथ अमेरिका अपना वॉरशिप थियोडोर रूजवेल्ट भी क्षेत्र में भेज रहा है। अक्टूबर के आखिर तक मिडिल ईस्ट में तीन अमेरिकी एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात हो सकते हैं। फिलहाल USS जॉर्ज डब्ल्यू बुश और USS जॉर्ज वॉशिंगटन पहले से वहां मौजूद हैं। यह कदम ऐसे समय उठाया गया है, जब राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ईरान पर नए हमलों की चेतावनी दे चुके हैं। उन्होंने 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव के बाद ईरान पर हमले की बात की थी। इसके पहले उन्होंने ईरान के सीजफायर प्लान को भी ठुकरा दिया था। अमेरिका ने 2,000 मरीन सैनिकों को मिडिल ईस्ट भेजा अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, अक्टूबर के अंत तक मिडिल ईस्ट में अमेरिका के 3 एयरक्राफ्ट कैरियर तैनात हो सकते हैं। अगस्त में USS अब्राहम लिंकन की वापसी के बाद क्षेत्र में USS जॉर्ज डब्ल्यू बुश और USS जॉर्ज वॉशिंगटन तैनात थे। इसके अलावा USS बॉक्सर समेत कई अन्य युद्धपोत भी क्षेत्र में तैनात हैं। नई तैनाती के बाद मिडिल ईस्ट में अमेरिकी नौसेना और मरीन कर्मियों की संख्या 20 हजार से ज्यादा हो सकती है। ट्रम्प ने ईरान का सीजफायर प्रस्ताव ठुकरा दिया था टाइम मैगजीन को दिए इंटरव्यू में ट्रम्प ने बताया कि उन्होंने ईरान के हालिया सीजफायर प्रस्ताव को ठुकरा दिया। ईरान ने होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने की पेशकश भी की थी, लेकिन ट्रम्प के मुताबिक यह प्रस्ताव अमेरिका के लिए काफी नहीं था। उन्होंने यह भी कहा कि 3 नवंबर के चुनाव के बाद ईरान पर बमबारी बढ़ाने की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता। अमेरिका और ईरान के बीच जारी युद्ध को लेकर ट्रम्प ने पिछले हफ्ते संयुक्त राष्ट्र महासभा में कहा था कि अगर वह चाहें तो ईरान को पूरी तरह तबाह कर सकते हैं। अमेरिका का कहना है कि ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकना युद्ध के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल है। ईरान ने जंग खत्म करने को 7 दिन का प्रस्ताव रखा था ईरान ने जंग खत्म करने के लिए अमेरिका के सामने सात दिन का प्रस्ताव रखा था। इसमें होर्मुज स्ट्रेट को दोबारा खोलने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत शुरू करने की बात शामिल थी। अमेरिका ने इस प्रस्ताव को खारिज कर दिया था। ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के मुताबिक, ईरान समझौते के तहत होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए तैयार है। इसके बदले वह विदेशों में जमा अपनी संपत्तियों और पैसों पर लगी रोक हटाने और अपना तेल बेचने की अनुमति चाहता है। उन्होंने कहा कि ये मांगें जून में अस्थायी सीजफायर के लिए हुए समझौता ज्ञापन (MoU) जैसी हैं। हालांकि, दोनों पक्षों की ओर से जवाबी हमलों के बाद वह समझौता टूट गया था। ——————— ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प बोले- फ्लाईदुबई को-पायलट का ईरान कनेक्शन हो सकता है: ऐसा हुआ तो कड़ी कार्रवाई होगी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि इजराइल जा रहे फ्लाईदुबई विमान के को-पायलट का ईरान से संबंध हो सकता है। पूरी खबर यहां पढ़ें…



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महाराष्ट्र के अमरावती में ट्रक-पिकअप वैन की टक्कर, 7 मौतें: 18 घायल; समृद्धि हाईवे पर हादसा, देवी दुर्गा की प्रतिमा लेकर जा रहे थे लोग




महाराष्ट्र के अमरावती जिले में समृद्धि हाईवे पर शुक्रवार को भीषण सड़क हादसा हुआ। यहां तेज रफ्तार ट्रक ने पीछे से पिकअप वैन को टक्कर मार दी। हादसे में 7 लोगों की मौत हो गई, जबकि 18 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। जानकारी के मुताबिक, पिकअप में श्रद्धालु देवी दुर्गा की प्रतिमा लेकर जा रहे थे। पिकअप की रफ्तार कम थी और उसके पीछे ट्रॉली लगी हुई थी। इसी दौरान पीछे से आए तेज रफ्तार ट्रक ने ट्रॉली को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि ट्रॉली पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। हादसे की जानकारी मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और राहत-बचाव का काम शुरू किया। पुलिस ने ट्रक ड्राइवर को हिरासत में ले लिया है। सभी घायलों को इलाज के लिए वर्धा के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। प्राथमिक जानकारी के मुताबिक, पिकअप की कम रफ्तार और पीछे लगी ट्रॉली के कारण ट्रक ड्राइवर का अंदाजा चूक गया, जिससे यह हादसा हुआ। यह खबर लगातार अपडेट की जा रही है…



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महात्मा गांधी की 157वीं जयंती: पीएम मोदी ने राजघाट पर श्रद्धांजलि दी; राहुल गांधी भी पहुंचे, पिछले साल नहीं गए थे




महात्मा गांधी की 157वीं जयंती है। नई दिल्ली में उनकी समाधि राजघाट पर पीएम मोदी ने महात्मा गांधी को श्रद्धांजलि दी। उनके अलावा दिल्ली की सीएम रेखा गुप्ता, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला और केंद्रीय मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने भी श्रद्धांजलि दी। पिछले साल राहुल गांधी देश से बाहर थे, इसके कारण वे राजघाट नहीं पहुंचे थे। हालांकि इस बार उन्होंने श्रद्धांजलि दी। महात्मा गांधी के अलावा आज लालबहादुर शास्त्री की भी 122वीं जयंती है। शास्त्री का जन्म 2 अक्टूबर 1904 में यूपी के मुगलसराय में हुआ था। राजघाट पर श्रद्धांजलि की 6 तस्वीरें… आज से 30 दिन तक चलेगा स्वच्छता अभियान केंद्रीय कोयला और खान मंत्री जी किशन रेड्डी ने 2 अक्टूबर गांधी जयंती से लेकर 31 अक्टूबर को सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती तक, 30 दिनों के राष्ट्रव्यापी स्वच्छता अभियान का आह्वान किया। उन्होंने नागरिकों, सरकारी और निजी संस्थानों, शैक्षणिक संस्थानों, NGOs और अन्य संगठनों से इसमें भाग लेने की अपील की। गांधी जयंती से पहले तैयारियों से जुड़ी तस्वीरें…



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बॉम्बे हाईकोर्ट बोला- SIR ने पूरी व्यवस्था दरकिनार कर दी: चुनाव आयोग को फटकार, कहा- कानून भूलकर सॉफ्टवेयर के हिसाब से काम नहीं हो सकता




बॉम्बे हाईकोर्ट की गोवा बेंच ने SIR के दौरान वोटर लिस्ट से नाम हटाने और फॉर्म 8 को रिजेक्ट करने की प्रक्रिया पर चुनाव आयोग को फटकार लगाई। बेंच ने कहा- आयोग का मुख्य मकसद यह सुनिश्चित करना है कि नागरिक वोट डालें और इस मकसद को दरकिनार नहीं किया जा सकता। जस्टिस वाल्मीकि मेनेजेस और जस्टिस अमित एस. जामसांडेकर की बेंच ने टिप्पणी की कि SIR प्रक्रिया परेशान करने वाली है। कोर्ट ने कहा कि इसमें कानून की जगह सॉफ्टवेयर के हिसाब से काम करने की स्थिति नहीं बननी चाहिए। वोटर का नाम हटाने से पहले उसे सुनवाई का मौका मिलना चाहिए। मामला सांता क्रूज विधानसभा क्षेत्र के एक परिवार के छह सदस्यों से जुड़ा है। परिवार के लोग उसी विधानसभा क्षेत्र में दूसरे घर में शिफ्ट हुए थे। उन्होंने पता बदलने के लिए फॉर्म 8 भरा था, लेकिन SIR के दौरान उनके नाम वोटर लिस्ट से हटा दिए गए। पुराने पते का सर्वे फॉर्म भरने पर सवाल SIR के तहत बूथ लेवल अधिकारी घर-घर जाकर पहले से भरे हुए सर्वे फॉर्म के जरिए वोटरों का सत्यापन करते हैं। ये फॉर्म पुराने वोटर डेटा के आधार पर तैयार किए जाते हैं। कोर्ट के सामने सवाल उठा कि जो व्यक्ति पुराने पते से दूसरे स्थान पर जा चुका है, उससे उसी पुराने पते का सर्वे फॉर्म भरने की उम्मीद कैसे की जा सकती है। बेंच ने कहा कि ऐसे लोगों की संख्या सैकड़ों-हजारों हो सकती है, जो पुराने पते पर नहीं रहने के कारण वह फॉर्म साइन नहीं करना चाहेंगे। फॉर्म 8 अपने आप रिजेक्ट कर रहा सॉफ्टवेयर कोर्ट को बताया गया कि चुनाव आयोग के ऑटोमेटेड सॉफ्टवेयर में फॉर्म 8 का आवेदन तब रिजेक्ट हो जाता है, जब आवेदक पुराने पते पर दिया गया पहले से भरा सर्वे फॉर्म जमा नहीं करता। कुछ रिजेक्शन आदेशों में ‘सिस्टम ग्लिच’ का भी जिक्र था। इस पर कोर्ट ने सवाल उठाया कि क्या पोर्टल अधिकारियों को आवेदन स्वीकार या लंबित रखने का विकल्प ही नहीं देता और उन्हें रिजेक्ट करने के लिए मजबूर करता है। चुनाव आयोग ने बताया- फॉर्म 6 क्यों जरूरी चुनाव आयोग के वकील गौरीश अग्नि ने कहा कि SIR के दौरान अगर किसी व्यक्ति का नाम ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में नहीं है तो उसे फॉर्म 6 के जरिए नाम शामिल कराने का रास्ता उपलब्ध है। चुनाव आयोग के मुताबिक, फॉर्म 8 का इस्तेमाल पहले से मौजूद वोटर एंट्री में पता बदलने के लिए होता है। अगर सर्वे फॉर्म जमा नहीं हुआ और पुराना नाम ड्राफ्ट लिस्ट में नहीं आया, तो फॉर्म 8 के बजाय फॉर्म 6 की प्रक्रिया अपनानी होगी। आयोग बोला- फॉर्म स्वीकार करने का अधिकार है तो खारिज करने का भी चुनाव आयोग की ओर से दलील दी गई कि अगर सर्वे फॉर्म मौजूद नहीं है तो फॉर्म 8 को स्वीकार नहीं किया जा सकता। वकील ने कहा कि आयोग के पास आवेदन स्वीकार करने की शक्ति है तो उसे खारिज करने की शक्ति भी है। कोर्ट ने इसी प्रक्रिया पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आवेदन को तुरंत खारिज करने के बजाय लंबित क्यों नहीं रखा जा सकता। बेंच ने सुझाव दिया कि वोटर लिस्ट को पूरा और अंतिम रूप देने के बाद ऐसे आवेदनों पर कार्रवाई की जा सकती है, ताकि वोटर छूट न जाएं। वोटर की जिम्मेदारी पर भी चुनाव आयोग की दलील चुनाव आयोग ने कहा कि वोटर की भी जिम्मेदारी है कि घर बदलने के बाद वह आयोग को अपने नए पते की जानकारी दे। आयोग की ओर से यह भी कहा गया कि संबंधित लोगों ने कई साल तक पता अपडेट नहीं कराया और अब SIR के दौरान फॉर्म 8 के जरिए बदलाव की मांग की। चुनाव आयोग के मुताबिक, ऐसे लोगों के लिए फॉर्म 6 का विकल्प उपलब्ध है। वकील ने पुराने पते की जानकारी समय पर नहीं देने वाले वोटरों की जिम्मेदारी का भी मुद्दा उठाया। कोर्ट ने लगातार अपडेट करने की जरूरत बताई बेंच ने कहा कि वोटर लिस्ट में बदलाव की प्रक्रिया नियमित रूप से होती रहनी चाहिए। कोर्ट ने जन्म और मृत्यु के रिकॉर्ड के आधार पर वोटर लिस्ट को अपडेट करने का सुझाव दिया, ताकि लंबे अंतराल के बाद बड़े स्तर पर संशोधन की जरूरत कम हो। कोर्ट ने कहा कि अंतिम कोशिश ऐसी वोटर लिस्ट तैयार करने की होनी चाहिए, जिसमें वास्तव में वही लोग शामिल हों जो वोटर हैं। सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला चुनाव आयोग के वकील ने बिहार में पहले हुई SIR प्रक्रियाओं को बरकरार रखने वाले सुप्रीम कोर्ट के पुराने फैसलों का हवाला दिया। उन्होंने संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत चुनाव आयोग के व्यापक पर्यवेक्षण अधिकारों की भी दलील दी। कोर्ट ने चुनाव आयोग से पूरी प्रक्रिया को इन दलीलों के साथ जोड़कर स्पष्ट करने को कहा। इस मामले में 5 अक्टूबर को आगे की सुनवाई होगी। उस दिन फॉर्म 8 की प्रक्रिया और SIR के दौरान पता बदलने वाले वोटरों के नाम से जुड़े सवालों पर आगे दलीलें सुनी जाएंगी।



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