Saturday, July 11, 2026
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जिस चीज पर माथापच्ची कर रहे दुनिया के बड़े-बड़े साइंटिस्ट, उसे बना रहे भारत के स्टूडेंट


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Semiconductor Manufacturing : केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विणी वैष्णव ने कहा है कि भारत के 315 से ज्यादा विश्वविद्यालयों में आज स्टूडेंट सेमीकंडक्टर डिजाइन पर काम कर रहे हैं. इनके डिजाइन किए गए चिप पर एससीएल मोहाली में काम भी चल रहा है. पिछले साल ही एससीएल मोहाली में ऐसे 56 डिजाइन पर काम शुरू किया गया था.

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एससीएल मोहाली में स्टूडेंट के डिजाइन किए गए चिप बनाए जाते हैं.

नई दिल्ली. आत्मनिर्भर भारत की मुहिम में सबसे बड़ा पड़ाव सेमीकंडक्टर के आयात को खत्म करना है. देश में जितनी तेजी से इलेक्ट्रॉनिक्स का विकास हो रहा है, उतना ही ज्यादा सेमीकंडक्टर यानी चिप का इस्तेमाल भी बढ़ रहा है. जाहिर है कि इस डिमांड को पूरी करने के लिए भारत को बड़ी मात्रा में चिप का आयात करना पड़ता है. लेकिन, मोदी सरकार ने इस दिशा में देश को आत्मनिर्भर बनाने के लिए बड़ी मुहिम शुरू की थी. अब यह मुहिम अपना रंग दिखाने लगी है और आज जिस चीज को बनाने के लिए दुनिया के बड़े-बड़े साइंटिस्ट माथापच्ची कर रहे हैं, उसे भारतीय यूनिवर्सिटीज के स्टूडेंड ने तैयार दिया. इन छात्रों के डिजाइन किए गए चिप का निर्माण मोहाली स्थित सेमीकंडक्टर लैबोरेटरी (SCL) में हो रहा है. यह जानकारी खुद केंद्रीय आईटी मंत्री अश्विणी वैष्णव ने दी है.

केंद्रीय मंत्री ने बताया कि भारत को साल 2047 तक टेक्नोलॉजी सुपरपावर बनाने का प्लान है, जिसके लिए एआई और सेमीकंडक्टर पर बड़े निवेश की जरूरत है. उन्होंने कहा कि कंपनियों को कॉलेजों और यूनिवर्सिटीज़ के साथ मिलकर पढ़ाई का सिलेबस इंडस्ट्री की जरूरतों के मुताबिक तैयार करना चाहिए. इस काम के लिए सरकार ने IIT हैदराबाद में सेक्टर-आधारित Data Trust का पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने का प्रस्ताव दिया है, जिससे स्टार्टअप, रिसर्चर और कंपनियां सुरक्षित तरीके से भारतीय डेटा का इस्तेमाल कर सकें.

315 विश्वविद्यालय में डिजाइन हो रही चिप
केंद्रीय मंत्री ने बताया कि सरकार की कोशिशों से आज देश की 315 यूनिवर्सिटीज़ में सेमीकंडक्टर चिप डिजाइन किए जा रहे हैं. इसके लिए आधुनिक EDA टूल्स उपलब्ध कराए गए हैं. छात्रों द्वारा डिजाइन की गई चिप्स का निर्माण SCL मोहाली में किया जा रहा है, ताकि उन्हें डिजाइन से लेकर टेस्टिंग तक का व्यावहारिक अनुभव मिले. केंद्रीय मंत्री का कहना है कि हजारों छात्र आज डिजाइन में हाथ आजमा रहे हैं और इसका फायदा देश को आत्मनिर्भर बनाने में मिल रहा है.

एससीएल में बनाए जा रहे 56 चिप
28 नवंबर 2025 को केंद्रीय मंत्री अश्विणी वैष्णव ने एससीएल मोहाली का दौरा किया था, तब इलेक्ट्रॉनिक डिजाइन ऑटोमेशन के तहत चिप टू स्टार्टअप प्रोग्राम के जरिये विश्वविद्यालय के छात्रों के डिजाइन पर सेमीकंडक्टर बनाना शुरू किया गया था. तब केंद्रीय मंत्री ने बताया था कि छात्रों की ओर से डिजाइन किए गए 56 चिप को एससीएल में बनाने पर काम शुरू किया जा चुका है. इसमें से 28 चिप को तो 17 संस्थानों के छात्रों ने डिजाइन किया है. सरकार ने एससीएल को आधुनिक बनाने के लिए 4,500 करोड़ रुपये का फंड भी दिया है.

नई तकनीक विकसित करें उद्योग
केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने उद्योग जगत के दिग्गजों के साथ बैठक में कहा कि Artificial Intelligence (AI) दुनिया की IT इंडस्ट्री को तेजी से बदल रहा है और भारत को इस मौके का पूरा फायदा उठाना चाहिए. उन्होंने उद्योग जगत से अपील की कि नई तकनीक विकसित करें और भारत को ग्लोबल टेक्नोलॉजी लीडर बनाने में साझेदार बनें. मंत्री ने बताया कि भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर 13 लाख करोड़ रुपये का आंकड़ा पार कर चुका है और लगातार तेजी से बढ़ रहा है. मोबाइल फोन अब भारत का सबसे बड़ा सिंगल निर्यात (Single Export Product) बन चुका है, जबकि इलेक्ट्रॉनिक्स देश का तीसरा सबसे बड़ा निर्यात क्षेत्र है.

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Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें



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भाकियू (इंडिया) में नई नियुक्ति, राजेंद्र सिंह बने प्रदेश सचिव: पश्चिमी उत्तर प्रदेश में संगठन ने सौंपी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी – Baghpat News




बागपत में भारतीय किसान यूनियन (इंडिया) ने संगठन का विस्तार करते हुए नई नियुक्तियों की घोषणा की है। ग्राम कमाला निवासी किसान नेता राजेंद्र सिंह को पश्चिमी उत्तर प्रदेश का प्रदेश सचिव मनोनीत किया गया है। यह नियुक्ति किसानों के हितों को मजबूत करने के उद्देश्य से की गई है। इस नियुक्ति की औपचारिक घोषणा शनिवार दोपहर करीब साढ़े 12 बजे की गई। संगठन के प्रदेश अध्यक्ष (पश्चिमी उत्तर प्रदेश) विशेष गोपी ने राजेंद्र सिंह को यह जिम्मेदारी सौंपी। संगठन ने बताया कि राजेंद्र सिंह लंबे समय से किसानों के मुद्दों पर सक्रिय रहे हैं और क्षेत्र में उनकी मजबूत पहचान है। प्रदेश अध्यक्ष विशेष गोपी ने उम्मीद जताई कि राजेंद्र सिंह किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए पूरी निष्ठा और ईमानदारी से कार्य करेंगे। उन्होंने कहा कि राजेंद्र सिंह भारतीय किसान यूनियन (इंडिया) की नीतियों और विचारधारा को गांव-गांव तक पहुंचाएंगे, जिससे किसानों के अधिकारों की लड़ाई और मजबूत होगी। इस अवसर पर प्रदेश प्रभारी नवनीत बंसल ने भी राजेंद्र सिंह को बधाई दी। बंसल ने विश्वास व्यक्त किया कि उनके नेतृत्व और अनुभव से किसानों को लाभ मिलेगा और संगठन को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने कहा कि राजेंद्र सिंह राष्ट्रीय अध्यक्ष पहलवान मुनेन्द्र गुर्जर के सपनों को साकार करने और किसान हितों की रक्षा के लिए सक्रिय रूप से कार्य करेंगे। अपनी नई जिम्मेदारी मिलने पर राजेंद्र सिंह ने संगठन के शीर्ष नेतृत्व का आभार व्यक्त किया। उन्होंने प्रतिबद्धता जताई कि वे किसानों की आवाज बुलंद करने, उनकी समस्याओं को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने और संगठन को मजबूत बनाने के लिए पूरी मेहनत और ईमानदारी से कार्य करेंगे।



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चैती पीपर गोलीकांड पर भाकपा (माले) का प्रदर्शन: निष्पक्ष जांच-बालू माफिया पर कार्रवाई की मांग की, 4 जुलाई को हुई थी घटना – Jehanabad News




जहानाबाद में चैती पीपर गोलीकांड के विरोध में शनिवार को भाकपा (माले) ने प्रतिवाद मार्च निकाला। पार्टी ने घटना की निष्पक्ष जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की। यह मार्च पार्टी कार्यालय से शुरू होकर स्टेशन और ऊंटा होते हुए अरवल मोड़ पहुंचा, जहां एक सभा आयोजित की गई। मार्च का नेतृत्व अरवल के पूर्व विधायक महानंद सिंह ने किया। इसमें बड़ी संख्या में कार्यकर्ता, ग्रामीण और पीड़ित परिवार शामिल हुए। सभा को संबोधित करते हुए महानंद सिंह ने आरोप लगाया कि 4 जुलाई को चैती पीपर में हुई घटना आपसी विवाद का परिणाम नहीं, बल्कि कथित बालू माफिया द्वारा किया गया सुनियोजित हमला था। उन्होंने कहा कि महादलित और दलित परिवारों को निशाना बनाया गया और निर्दोष लोगों को झूठे मामलों में फंसाया जा रहा है। उन्होंने सरकार से पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। सिंह ने बताया कि मगध क्षेत्र के आईजी विकास वैभव से भी निष्पक्ष जांच की मांग की गई है। उन्होंने आरोप लगाया कि अवैध बालू कारोबार से जुड़े गिरोह के कारण ग्रामीण भय के माहौल में जी रहे हैं। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि पीड़ितों को न्याय नहीं मिला तो पार्टी आंदोलन को और तेज करेगी। इससे पहले, भाकपा (माले) की एक जांच टीम ने भी चैती पीपर गांव का दौरा किया और ग्रामीणों, विशेषकर महिलाओं से बातचीत की। घायल सुधीर राम की बहन कंचन ने दावा किया कि शौचालय निर्माण के लिए बालू लेने का विरोध करने पर कथित हमलावरों ने फायरिंग की, जिसमें कई लोग घायल हुए। ग्रामीणों ने यह भी बताया कि महिलाओं ने साहस दिखाते हुए एक आरोपी को पकड़कर पुलिस के हवाले किया था।



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पहचानिए, तेज प्रताप यादव की थाली में क्या-क्या? एकादशी पर पहुंचे वृंदावन


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Tej Pratap Yadav: तेज प्रताप यादव एकादशी पर धार्मिक रंग में रंगे नजर आए. वह वृंदावन दौरे पर हैं और योगिनी एकादशी के दिन भोजन प्रसाद ग्रहण करने का पोस्ट एक्स हेंडल पर शेयर किया. जिसमें उनकी खाने की थाली में सात्विक भोजन नजर आया. साथ ही तेज प्रताप अपने माथे पर तिलक लगाए नजर आए. एकादशी के प्रसाद के रूप में क्या-क्या खाया? देख लीजिए.

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तेज प्रताप यादव ने वृंदावन में एकादशी पर क्या खाया? (तस्वीर साभारः एक्स @TejYadav14)

पटनाः जन शक्ति जनता दल के मुखिया तेज प्रताप यादव अक्सर सुर्खियों में रहते हैं. अब उनकी एक्स हेंडल पर नई पोस्ट सामने आई है. जिसमें उन्होंने एकादशी के मौके पर वृंदावन धाम से अपनी प्रसाद वाली थाली की तस्वीर शेयर की है. तस्वीर में पूरी तरह सात्विक और व्रत वाला भोजन नजर आ रहा है. खास बात यह है कि थाली में चावल नहीं है, बल्कि व्रत में खाई जाने वाली खिचड़ी है. साथ ही अन्य कई डिश परोसी गई हैं.

तेज प्रताप यादव की थाली में क्या-क्या?
तेज प्रताप यादव की थाली में सामा (सांवा/मोरधन) की खिचड़ी परोसी गई है. एकादशी के दिन अनाज खाने की मनाही होती है, इसलिए इसकी जगह व्रत वाले अनाज और फलाहार का सेवन किया जाता है. तस्वीर में थाली के बीच में सामा की खिचड़ी रखी हुई है. इसके साथ साबूदाना की खीर, दही का फराली रायता, पनीर या अरबी की मसालेदार सब्जी, आलू या कद्दू की सब्जी, साबूदाना पापड़, रोटी (संभवतः कुट्टू, सिंघाड़े या राजगिरा के आटे की) और सलाद में खीरा, टमाटर, नींबू और हरी मिर्च भी दिखाई दे रही है.

तेज प्रताप यादव ने थाली की तस्वीर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर शेयर की.

तेज प्रताप यादव ने किया पोस्ट
तेज प्रताप यादव ने तस्वीर शेयर करते हुए लिखा-“आज एकादशी का पावन दिन है. वृंदावन धाम में प्रभु की कृपा से एकादशी का प्रसाद ग्रहण करने का सौभाग्य मिला. इस पवित्र प्रसाद के साथ मन में भक्ति, शांति और आनंद का अनुभव हो रहा है. प्रभु श्री राधा-कृष्ण से यही प्रार्थना है कि सभी भक्तों पर अपनी कृपा बनाए रखें और सबके जीवन को सुख, समृद्धि एवं प्रेम से भर दें.
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> राधे-राधे! जय श्रीकृष्ण! 🙏🌸”





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बैतूल में किसान ने फांसी लगाकर आत्महत्या की: पारिवारिक विवाद और पत्नी के मायके में रहने से था तनाव में; अस्पताल पहुंचने के पहले मौत – Betul News




बैतूल के झल्लार थाना क्षेत्र के ग्राम केरपानी में 35 वर्षीय किसान ने घर में फांसी लगाकर आत्महत्या कर ली। परिजन उन्हें गंभीर हालत में जिला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की जांच शुरू कर दी है। मृतक की पहचान केरपानी निवासी मनोज पिता नाथूराम बारस्कर (35) के रूप में हुई है। बताया गया कि शनिवार सुबह उन्होंने अपने घर में फांसी लगा ली। परिजनों ने उन्हें फंदे से उतारकर तत्काल जिला अस्पताल पहुंचाया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। परिजनों के अनुसार, मनोज का विवाह वर्ष 2015-16 में राधिका बारस्कर से हुआ था। पिछले कुछ समय से पति-पत्नी के बीच पारिवारिक विवाद चल रहा था। उनकी पत्नी मायके में रह रही थी, जिससे मनोज मानसिक तनाव में थे। परिजनों का कहना है कि इसी तनाव के चलते उन्होंने आत्मघाती कदम उठाया। बहन का दावा- दहेज केस के बाद तलाक का दबाव था मृतक की बहन ने बताया कि उनकी भाभी ने पहले मनोज के खिलाफ दहेज प्रताड़ना का मामला दर्ज कराया था। बाद में विवाद सुलझ गया था, लेकिन उनकी भाभी तलाक के लिए दबाव बना रही थीं। बहन का दावा है कि इसी वजह से मनोज मानसिक तनाव में थे। हालांकि, पुलिस ने इन दावों की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है और मामले के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। मनोज खेती-किसानी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनके परिवार में एक बेटा और एक बेटी हैं। घटना के बाद गांव में शोक का माहौल है। पुलिस ने जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम कराने के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही आत्महत्या के वास्तविक कारणों का स्पष्ट खुलासा हो सकेगा।



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वियतनाम में बोट पलटी, भारतीयों समेत 15 की मौत: 32 भारतीय सवार होने की खबर, इनमें ज्यादातर तेलंगाना के टूरिस्ट थे




वियतनाम के फु क्वोक द्वीप के पास शनिवार को भारतीय पर्यटकों को लेकर जा रही एक बोट समुद्र में पलट गई। स्थानीय मीडिया के मुताबिक हादसे में भारतीयों समेत 15 लोगों की मौत हो गई है। खोज-बचाव अभियान जारी है। सोशल मीडिया पर दावा किया किया जा रहा है नाव पर 32 भारतीय टूरिस्ट सवार थे। इनमें ज्यादातर तेलंगाना के हैं। हादसे की तस्वीरें…
हेल्पलाइन नंबर जारी, कंट्रोल रूम बनाया इंडियन एंबेसी ने बताया कि घटना के सही जानकारी जुटाई जा रही है। यहां यात्रियों की मदद के लिए कंट्रोल रूम बनाया गया है। इससे संपर्क करने के लिए हेल्पलाइन नंबर +84 36 281 7930, +84 91 552 37 14 और +84 33 452 0414 जारी किए गए हैं। भारतीय दूतावास ने कहा कि हम स्थानीय प्रशासन के संपर्क में हैं और भारतीय नागरिकों को हर संभव मदद दी जा रही है। सुबह 10:30 बजे हुआ हादसा रिपोर्ट्स के मुताबिक, हादसा सुबह करीब 10:30 बजे हुआ। नाव भारतीय पर्यटकों को फु क्वोक के पास स्थित होन मे रुट न्गोआई द्वीप घुमाने ले जा रही थी। यह द्वीप अपने साफ समुद्र, छोटे बीच और कोरल रीफ डाइविंग के लिए मशहूर है। यहां पहुंचने के लिए पर्यटक आमतौर पर एन थोई बंदरगाह से नाव या स्पीडबोट किराये पर लेते हैं।
खबर लगातर अपडेट हो रही है…



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सरिस्का होटल में 15 कर्मचारियों ने छोड़ी नौकरी: वन-विभाग के कर्मचारियों पर धमकी देने और जातिसूचक टिप्पणी के आरोप,DFO बोले-बिना परमिशन काम कर रहे – Alwar News




अलवर के सरिस्का पैलेस होटल और वन विभाग के बीच विवाद सामने आया है। होटल के मैनेजर प्रेमचंद्र शर्मा ने वन विभाग के कुछ कर्मचारियों के खिलाफ थानागाजी थाने में ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में गाली-गलौज, जातिसूचक टिप्पणी, धमकी देने और ड्रोन के जरिए होटल की गोपनीयता भंग करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। वहीं, वन विभाग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए पूरे मामले को वन भूमि पर बिना अनुमति पौधारोपण करने से जुड़ा विवाद बताया है। गाली-गलौज और जातिसूचक टिप्पणी के लगाए आरोप होटल मैनेजर प्रेमचंद्र शर्मा के अनुसार, होटल के कर्मचारी जब भी होटल से बाहर निकलते हैं, तब वन विभाग के कर्मचारी उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं और गाली-गलौज करते हैं। कर्मचारियों ने इसकी जानकारी होटल के सुपरवाइजर धर्मेंद्र जाटव को दी। आरोप है कि गुरुवार शाम होटल के सामने पौधारोपण को लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी हो गई। शिकायत में कहा गया है कि वन विभाग के कर्मचारी धर्मसिंह और कप्तान सिंह करीब 15 कर्मचारियों के साथ होटल पहुंचे। इस दौरान होटल स्टाफ के साथ गाली-गलौज की गई और सुपरवाइजर धर्मेंद्र जाटव के खिलाफ जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया गया। साथ ही कथित रूप से धमकी दी गई कि “बाहर निकलोगे तब बताएंगे।” मैनेजर का दावा है कि घटना के बाद डर के माहौल के चलते होटल के करीब 15 कर्मचारियों ने नौकरी छोड़ दी। मैनेजर ने यह भी आरोप लगाया कि वन विभाग के कर्मचारी अक्सर रात के समय ड्रोन कैमरे होटल परिसर के ऊपर उड़ाते हैं, जिससे होटल की गोपनीयता भंग होती है। उनका कहना है कि होटल में महिला कर्मचारी भी कार्यरत हैं और इस तरह की गतिविधियों से उनकी निजता प्रभावित होती है। DFO ने आरोपों को बताया निराधार वहीं, सरिस्का के डीएफओ अभिमन्यु सहारण ने होटल प्रबंधन के आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि होटल के कर्मचारी होटल परिसर से बाहर वन विभाग की भूमि पर गड्ढे खोदकर पौधारोपण करना चाहते हैं, जबकि उन्हें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि होटल परिसर के बाहर कोई कार्य करना है तो पहले विभाग से अनुमति लेनी होगी। अनुमति मिलने के बाद ही ऐसे कार्य किए जा सकते हैं। डीएफओ का कहना है कि कई बार होटल प्रबंधन हरियाणा से बाउंसर बुलाकर वन भूमि पर गड्ढे खुदवाने का प्रयास करता है। जब वन विभाग के कर्मचारी उन्हें रोकते हैं तो होटल पक्ष ही कहासुनी पर उतर आता है। ड्रोन कैमरे के आरोपों पर डीएफओ ने कहा कि वन विभाग सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघों की मॉनिटरिंग और वन क्षेत्र की निगरानी के लिए नियमित रूप से ड्रोन का उपयोग करता है। उनका कहना है कि ड्रोन उड़ाने का उद्देश्य किसी होटल की निगरानी करना नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण और गश्त करना है। मामले में थानागाजी SHO रामस्वरूप का कहना है कि गुरुवार को शिकायत मिली थी। हम मामले की जांच कर रहे हैं।



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वार्ड की 19 गलियों में पूरे साल रहता जलभराव: वार्ड-52 के लोग बोले- निगम में शामिल होने के बाद बढ़ीं समस्याएं, हाईवे ने किया नरक – Varanasi News




बजरंग नगर का पूरा इलाका हाइवे बनने के बाद नरक बन गया है। सीवर की समस्या ऐसी है कि लोग घर बेचकर जा रहे हैं। पार्षद जी ने तीन साल में इस इलाके में झांका नहीं…। ये दर्द वार्ड-52 लोहता के निवासियों का है। उनका यह भी आरोप है कि पार्षद विकास कार्य में भी पक्षपात करती हैं। वाराणसी का यह वार्ड तीन साल पहले शहर का हिस्सा बना था। लोगों को उम्मीद थी कि इलाके की तस्वीर बदल जाएगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। उल्टे हाईवे निकलने के बाद उनकी मुसीबत बढ़ गई। करीब पांच फीट ऊंची बनी सड़क और बंद हो चुकी जल निकासी के कारण 19 गलियां सालभर जलभराव और सीवर ओवरफ्लो की समस्या झेल रही हैं। कई घरों के शौचालय तक मलजल से भर चुके हैं। दैनिक भास्कर की वार्ड परिक्रमा में लोगों ने बताया कि रहीमपुर में धन्नीपुर गांव का सीवर भी इसी लाइन में जोड़ दिया गया है। बेटी ताल को पाटे जाने से पानी निकलने का आखिरी रास्ता भी खत्म हो गया। लोगों का कहना है कि नगर निगम बनने के बाद समस्याएं बढ़ी हैं, जबकि ग्राम प्रधान के समय छोटी-छोटी समस्याओं का समाधान जल्दी हो जाता था। दैनिक भास्कर वार्ड परिक्रमा अभियान चला रहा है। इसी कड़ी में वार्ड-52 का जायजा लिया गया… हाइवे से जुड़ी 19 गलियां सालभर सीवर और बारिश के पानी में डूबी मिलीं। बजरंग नगर में कई घरों के शौचालयों तक सीवर का पानी भरने से लोगों ने उनका इस्तेमाल बंद कर दिया है। रहीमपुर में धन्नीपुर गांव का मलजल जोड़ने के कारण सड़कें और गलियां जलमग्न नजर आईं। धमरिया में जाम नाला बारिश के दौरान लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन जाता है। वहीं खाली प्लॉटों और गलियों में कूड़े के ढेर पड़े मिले, जिससे नियमित सफाई व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं। पहले ये नजारा देखिए… हाइवे बना, लेकिन बंद हो गई जल निकासी स्थानीय लोगों का कहना है कि हाइवे बनने के दौरान सड़क करीब पांच फीट ऊंची बना दी गई, जबकि पुरानी बस्ती पहले से नीचे थी। इससे सीवर और नालियां बेअसर हो गईं। बारिश के दिनों में पानी घरों और गलियों में भर जाता है। कई जगह शौचालयों तक मलजल पहुंच जाता है और लोगों का घरों में रहना मुश्किल हो जाता है। वार्ड की बड़ी समस्याएं सीवर और जलभराव: 19 गलियां सालभर जलभराव और सीवर ओवरफ्लो की समस्या झेल रही हैं। बेटी ताल पर कब्जा: जल निकासी का प्रमुख स्रोत खत्म होने से हालात और बिगड़े। धन्नीपुर का सीवर: दूसरे गांव का मलजल रहीमपुर की लाइन में जोड़ने से संकट बढ़ा। पेयजल संकट: दो टंकियों से पूरे वार्ड में पर्याप्त पानी नहीं पहुंच रहा। सफाई व्यवस्था: गलियों में नियमित सफाई नहीं, खाली प्लॉटों में कूड़े के ढेर। लोग बोले- सड़क ऊंची होने से डूबने इलाका निजाम खान ने बताया कि धन्नीपुर का पानी जोड़ने और सड़क ऊंची होने से पूरा इलाका डूबने लगा है। सिकंदर खान ने कहा कि दूसरे गांव का पानी हमारे मोहल्ले में छोड़ा जा रहा है। बच्चे स्कूल तक नहीं जा पा रहे। सुनील यादव के मुताबिक सीवर के पानी और कीचड़ से ग्राहक नहीं आते। कारोबार प्रभावित हो गया है। नहीं हो रही नाले की सफाई, घरों तक भर रहा पानी रशीद अहमद ने कहा कि धमरिया में नाले की सफाई नहीं होती। बारिश में घरों तक पानी भर जाता है। रियाज ने बताया कि गलियों में न सफाई होती है, न इंटरलॉकिंग। नगर निगम सिर्फ मुख्य सड़क तक सीमित है। एखलाक अहमद के अनुसार नगर पंचायत बनती तो बेहतर होता। नगर निगम बनने के बाद समस्याएं बढ़ गईं। पार्षद कभी झांकने नहीं आते शकील ने बताया कि पार्षद कभी गलियों में नहीं आते। सिर्फ सड़क तक दौरा करके लौट जाते हैं। जमाल अहमद का कहना है कि धमरिया का नाला मकानों के लिए खतरा बन गया है। बारिश में नाला फैल जाता है। इस्लामुद्दीन ने बताया कि नाले के किनारे सड़क है, लेकिन स्ट्रीट लाइट नहीं। रात में हादसे का डर बना रहता है। मोहम्मद रियाज ने कहा कि नाले की सिर्फ ऊपर-ऊपर सफाई होती है, सिल्ट नहीं निकाली जाती। रहीमपुर में दूसरे गांव का सीवर बना आफत रहीमपुर के लोगों का आरोप है कि धन्नीपुर गांव का सीवर भी उनकी लाइन में जोड़ दिया गया। पहले यह पानी बेटी ताल में जाता था, लेकिन तालाब पाट दिए जाने के बाद पूरा दबाव रहीमपुर पर आ गया। नतीजा, सड़कें और घर लगातार सीवर के पानी में डूबे रहते हैं। बेटी ताल पटा, खत्म हुआ पानी निकलने का रास्ता स्थानीय लोगों का आरोप है कि बेटी ताल पर भू-माफियाओं ने कब्जा कर लिया। पहले पूरे इलाके का अतिरिक्त पानी इसी ताल में जाता था, लेकिन अब वहां मलबा डाल दिया गया है। इससे जल निकासी पूरी तरह प्रभावित हो गई है। पेयजल और सफाई व्यवस्था भी बदहाल धमरिया की दो पानी टंकियों से पूरे क्षेत्र में पानी की आपूर्ति होती है, लेकिन दूर के इलाकों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाता। लोग समर्सिबल लगाने को मजबूर हैं। सफाईकर्मी मुख्य सड़क तक ही सीमित रहते हैं, जबकि गलियों में नियमित सफाई नहीं होती। ————— ये खबर भी पढ़िए… जिस वार्ड से गुजरते करोड़ों श्रद्धालु उसके रास्ते दलदल जैसे:वार्ड-9 में कच्ची सड़कें, उफना रहे सीवर; इसी वार्ड से है संगम का रास्ता प्रयागराज का वो वार्ड भी बदहाल है जहां से होकर महाकुंभ का रास्ता गुजरता है। करोड़ों श्रद्धाल इसी वार्ड से होकर संगम तक पहुंचते हैं। वार्ड-9 सोनौटी को तीन साल पहले निगम में शामिल किया गया था, लेकिन हालात आज भी गांव जैसे हैं। वार्ड में पक्की सड़कें नाम मात्र ही हैं। नालियां सालों से चोक हैं। कई इलाकों में बिजली के खंभे तक नहीं लगे। बारिश होते ही गलियां दलदल बन जाती हैं। घरों के सामने सीवर व नालियों का गंदा पानी भर जाता है। लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद न प्रशासन सुन रहा है और न ही पार्षद। पूरी खबर पढ़ें… ————— ये खबर भी पढ़िए… वार्ड-88 में लोग बोले-द्वेष भावना से काम करा रहे पार्षद:10 महीने से 150 परिवार साफ पानी को तरस रहे; धर्म के आधार पर सुविधाएं देने का आरोप वाराणसी का सबसे घनी आबादी वाला वार्ड-88 सुविधाओं में बहुत पिछड़ा नजर आ रहा है। कुछ हिस्सों की हालत ज्यादा खराब है। यहां के लोगों का कहना है कि पार्षद द्वेष भावना से काम कर रहे हैं। धर्म के आधार पर लोगों को लाभ दिया जा रहा है। काल भैरव मंदिर से कुछ ही दूरी पर बसे वार्ड बलुआबीर में न तो पीने का साफ पानी है न ही सीवर व्यवस्था। चिकवन टोला में 10 महीने से मिनी ट्यूबवेल खराब है। 150 से अधिक परिवारों को इससे परेशानी हो रही है। नलों से सीवर मिला बदबूदार पानी आ रहा है। पूरी खबर पढ़ें…



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हरदा में अलग-अलग घटनाओं में बुजुर्ग और युवक की मौत: बीमारी से परेशान बुजुर्ग ने फांसी लगाई, 18 वर्षीय युवक की सल्फॉस खाने से जान गई – Harda News




हरदा में शनिवार को दो अलग-अलग घटनाओं में एक बुजुर्ग और एक 18 वर्षीय युवक की मौत हो गई। एक बुजुर्ग ने बीमारी से परेशान होकर फांसी लगा ली, जबकि युवक ने सल्फॉस का सेवन कर अपनी जान दे दी। पुलिस ने दोनों मामलों में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, सिविल लाइन थाना क्षेत्र के ग्राम छिड़गांव निवासी 68 वर्षीय गजानंद पिता चंपालाल ने शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात अपने घर में फांसी लगा ली। सुबह करीब चार बजे परिजनों ने उन्हें फंदे पर लटका देखा, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने बताया कि मृतक कई दिनों से बीमारी से परेशान थे, ऐसी आशंका है कि बीमारी से परेशान होकर ही उन्होंने यह कदम उठाया होगा। दूसरी घटना में, खंडवा जिले के छनेरा निवासी 18 वर्षीय पवन पिता गोकुल कोरकू ने शुक्रवार शाम मजदूरी से लौटते समय चारुवा और हेमागांव के बीच सल्फॉस का सेवन कर लिया। तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे तत्काल खिरकिया अस्पताल ले गए, जहां से उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। दोनों शवों का जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंप दिया गया है। बताया जा रहा है कि पवन अपने दो भाइयों में छोटा था।



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पटना में रातभर हुई बारिश, कई इलाकों में जलजमाव: आज भी भारी वर्षा और तेज हवा का अलर्ट, 19 क्विक रिस्पॉन्स टीम फील्ड पर उतरी – Patna News




बिहार में मानसून एक्टिव हो गया है। कल रात से ही लगातार पटना में बारिश हो रही है और कई इलाकों में जल जमाव की स्थिति देखने को मिली है। आज पटना में दिनभर गरज चमक के साथ 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की संभावना है। अगले 2 घंटों तक पटना शहर के कुछ हिस्सों में मध्यम वर्षा जारी रहने की संभावना है। इस दौरान 30 से 40 मिमी अतिरिक्त वर्षा होने का अनुमान है। पटना शहर में बारिश की तस्वीर…

पटना में अनुमानित कुल वर्षा के आंकड़े मौसम विभाग के मुताबिक, 10 जुलाई 2026 को शाम 5:30 बजे से 11 जुलाई 2026 को सुबह 8:30 बजे तक पटना के अनीसाबाद क्षेत्र में 46.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। अब तक दर्ज वर्षा और अगले कुछ घंटों के पूर्वानुमान को देखते हुए, 10 जुलाई 2026 की शाम 5:30 बजे से 11 जुलाई 2026 की शाम 5:30 बजे तक पटना में कुल 75 से 85 मिमी वर्षा होने की संभावना है।
संभावित प्रभाव निचले इलाकों, अंडरपास तथा खराब जल निकासी वाले क्षेत्रों में जलजमाव हो सकता है। प्रमुख सड़कों और व्यस्त चौराहों पर ट्रैफिक जाम तथा वाहनों की धीमी आवाजाही की संभावना है। नागरिकों से अपील है कि मध्यम से भारी बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें।
वाहन चलाते समय सावधानी बरतें और जलजमाव वाले क्षेत्रों से दूर रहें।
संबंधित नगर निकाय एवं अन्य एजेंसियां जल निकासी व्यवस्था को सुचारु रखें और स्थानीय जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहें।

19 क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) फील्ड पर उतरी पटना नगर निगम की टीम भी लगातार फील्ड पर जल निकासी के लिए काम कर रही है। मॉनसून को लेकर सभी वरीय पदाधिकारी, 3 अपर नगर आयुक्त, 2 DMC, सारे इग्जेक्युटिव इंजीनियर, 19 क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) फील्ड पर उतरी हुई है। हर टीम में 3 लोग हैं। इन्हें एक-एक गाड़ी दी गई है, ताकि बारिश के दौरान टीमें लगातार क्षेत्र का दौरा कर सकें और जल निकासी कार्यों की निगरानी करते हुए आवश्यक कार्रवाई कर सकें। इसी क्रम में हज भवन के समीप पेड़ गिरने की सूचना प्राप्त होने पर पटना नगर निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर पेड़ को हटाया और यातायात व्यवस्था को सामान्य किया।
हर अंचल में जल निकासी के लिए जोन वाइज की गई व्यवस्था बुडको द्वारा डिजिटल मॉनिटरिंग की जा रही दूसरी ओर बुडको द्वारा भी लगातार शहर के प्रमुख नालों, पंप हाउसों और जलभराव वाले क्षेत्रों की 24 घंटे डिजिटल मॉनिटरिंग की जा रही है। नाले में पानी का स्तर बढ़ते ही ऑटोमैटिक पंप चालू किया गया है। इससे शहर में जलजमाव की स्थिति से निपटने में मदद मिलेगी। डीपीएस और पंप होंगे तैनात पटना शहर में कुल 56 स्थाई और 35 अस्थाई डीपीएस हैं। वहीं, शहर की जलनिकासी के लिए कुल 364 पंपों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिनमें 265 इलेक्ट्रिक चालित और 99 डीजल पंप शामिल हैं। स्थाई डीपीएस पर 256 पंप और अस्थाई डीपीएस पर 83 पंप लगाए गए हैं। इसके अतिरिक्त 8 नए डीपीएस भी तैयार किए गए है।



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