लखनऊ के गोमती नगर थाना क्षेत्र में मनीष ईटिंग प्वाइंट के पास गोली चल गई। जिसमें एक युवक अखिलेश की कमर में गोली लगी है। जो गंभीर रूप से घायल हो गया। जिसे इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है। बताया जा रहा है पहले चाकू बाजी की घटना हुई। जिसके पीड़ित पक्ष थाने पहुंचा। इस दौरान बदमाश वापस लौटे और फायरिंग कर दी। मौके पर पुलिस बल मौजूद है। वहीं आक्रोशित लड़कों ने सड़क जाम कर दिया।
Source link
दो पक्षों में विवाद के बाद चली गोली: एक युवक हुआ हुआ घायल, आक्रोशित लोग धरने पर बैठे – Lucknow News
शादी वाले घर पर हमला, एक महिला की मौत: जमुई में नकाबपोश बदमाशों ने लूटे जेवरात, 6 घायल – Jamui News
जमुई जिले के झाझा थाना क्षेत्र के दादपुर गांव में रविवार रात शादी की तैयारियों के बीच एक घर पर नकाबपोश बदमाशों ने हमला कर दिया। इस घटना में एक महिला बेबी देवी (35) की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि छह अन्य लोग घायल हो गए। बदमाशों ने घर में घुसकर परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट की, फायरिंग की और शादी के लिए रखे जेवरात लूटकर फरार हो गए। घटना की सूचना मिलते ही डायल-112 पुलिस मौके पर पहुंची और सभी घायलों को झाझा अस्पताल पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर रूप से घायल बेबी देवी, सुहागा देवी, काजल कुमारी, कोमल कुमारी और सुबोध कुमार को सदर अस्पताल, जमुई रेफर किया गया। वहां से सभी घायलों को बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर किया गया, लेकिन बेबी देवी की नाजुक स्थिति के कारण रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। बदमाश तलवार, टांगी और अन्य हथियारों के साथ घर में घुस आए घायल उमेश कुमार यादव ने बताया कि परिवार के सदस्य छत पर सो रहे थे। इसी दौरान दिनेश यादव के बड़े भाई वासुदेव यादव ने घर का दरवाजा खोल दिया। इसके बाद लगभग एक दर्जन नकाबपोश बदमाश तलवार, टांगी और अन्य हथियारों के साथ घर में घुस आए और हमला कर दिया। सभी बदमाश काले कपड़े पहने हुए थे और उन्होंने अपनी बाइकें घर से करीब 200 मीटर दूर खड़ी कर रखी थीं। घायल काजल कुमारी ने आरोप लगाया कि मारपीट के दौरान बदमाशों ने दो से तीन राउंड फायरिंग भी की। एक गोली उसकी मां सुहागा देवी के पैर में लगी। बदमाशों ने घर से मोबाइल फोन छीन लिए और बक्से में रखे शादी के जेवरात भी लूट लिए। गोली चलने और चीख-पुकार सुनकर ग्रामीण और रिश्तेदार मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक सभी बदमाश बाइक से फरार हो चुके थे। जमीन बंटवारे के विवाद को लेकर करवाया हमला – बड़ा भाई पीड़ित परिवार के दिनेश यादव ने बताया कि उनकी बेटी काजल कुमारी की शादी 1 जुलाई को होनी थी, जिसके लिए वे खरीदारी करने झाझा बाजार गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि यह हमला उनके बड़े भाई वासुदेव यादव ने जमीन बंटवारे के विवाद को लेकर करवाया है। दिनेश यादव, वासुदेव यादव और उमेश यादव तीनों सगे भाई हैं। परिजनों ने बताया है कि वासुदेव यादव, सुभाष यादव और मनोज यादव समेत अन्य कई लोगों को पहचान लिया है। परिजनों के अनुसार वासुदेव यादव वर्तमान में योगियाटीला गांव में रहता है और इस घटना को अंजाम देने के लिए वह पांच दिनों से दादपुर में रहा रहा था। जमीनी विवाद को लेकर बासुदेव यादव अपने रिश्तेदारों और बदमाशों के साथ मिलकर इस घटना को अंजाम दिया। घटना की सूचना पर झाझा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। एसआई दीपक कुमार ने अस्पताल पहुंचकर घायलों और परिजनों से पूछताछ की। पुलिस ने बताया कि घटनास्थल का निरीक्षण कर लिया गया है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है तथा पूरे मामले की जांच जारी है।
Source link
केंद्रीय मंत्री सिंधिया के दौर से गायब रहे गुना विधायक: दिशा बैठक से भी रहे नदारद; ऊर्जा मंत्री को कहा था ‘नकारा’ – Guna News
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के 26 से 29 जून तक गुना दौरे के दौरान भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य किसी भी प्रमुख कार्यक्रम में नजर नहीं आए। उन्होंने केवल सर्किट हाउस पहुंचकर सिंधिया की आगवानी की, लेकिन इसके बाद आयोजित किसी भी कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। यहां तक कि कलेक्ट्रेट में सिंधिया की अध्यक्षता में हुई दिशा समिति की समीक्षा बैठक में भी उनकी अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही। विधायक की यह दूरी हाल ही में सिंधिया समर्थक मंत्रियों पर दिए गए उनके विवादित बयानों के बाद राजनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है। मंत्रियों पर दिए थे तीखे बयान कुछ दिन पहले विधायक पन्नालाल शाक्य ने सिंधिया समर्थक दो मंत्रियों पर सार्वजनिक रूप से तीखी टिप्पणी की थी। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को लेकर उन्होंने कहा था कि क्षेत्र को बदनामी से बचाने की जरूरत है। उन्होंने मंत्री के कामकाज और सार्वजनिक व्यवहार पर सवाल उठाते हुए कहा था कि प्रदेश को ऐसा जनसेवक चाहिए, जो गंभीरता और प्रामाणिकता से काम करे। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि कोई मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की छवि खराब करने की कोशिश करेगा तो वह मुख्यमंत्री से ऐसे मंत्री को हटाने का आग्रह करेंगे। प्रभारी मंत्री पर भी साधा था निशाना विधायक ने प्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री तथा गुना जिले के प्रभारी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत पर भी निशाना साधा था। उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रभारी मंत्री उन्हें केंद्रीय मंत्री सिंधिया के साथ चलने तक नहीं देते। उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा था कि हवाई पट्टी पर उन्हें किनारे कर दिया गया था। साथ ही उन्होंने कहा कि वे जनता के वोट से विधायक बने हैं और किसी व्यक्ति की वजह से राजनीति में नहीं हैं। सिंधिया के कार्यक्रमों से बनाए रखी दूरी केंद्रीय मंत्री सिंधिया के गुना प्रवास के दौरान शहर और आसपास कई सरकारी एवं संगठनात्मक कार्यक्रम आयोजित हुए, लेकिन विधायक पन्नालाल शाक्य इनमें कहीं भी दिखाई नहीं दिए। उनकी लगातार अनुपस्थिति को राजनीतिक हलकों में सिंधिया और उनके समर्थक नेताओं के प्रति नाराजगी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। दिशा समिति की बैठक से भी रहे गायब सबसे अधिक चर्चा कलेक्ट्रेट में आयोजित दिशा समिति की समीक्षा बैठक को लेकर हुई। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की अध्यक्षता में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में गुना के भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य शामिल नहीं हुए। वहीं बमोरी से कांग्रेस विधायक ऋषि अग्रवाल बैठक में मौजूद रहे। सत्ताधारी दल के विधायक की अनुपस्थिति और विपक्षी विधायक की मौजूदगी पूरे दिन राजनीतिक चर्चा का विषय बनी रही। अनुपस्थिति पर दिए अलग-अलग जवाब जब मीडिया ने विधायक पन्नालाल शाक्य से कार्यक्रमों में शामिल नहीं होने का कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि वे पार्टी के काम से भोपाल में हैं, इसलिए कार्यक्रमों में नहीं पहुंच सके। वहीं एक अन्य मीडियाकर्मी से उन्होंने अपने साले के निधन और बड़ी साली की तबीयत खराब होने का कारण बताया। सोशल मीडिया पोस्ट से उठे सवाल विधायक के इन बयानों के बीच उनके आधिकारिक फेसबुक पेज पर उसी दिन उनके गुना स्थित कार्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम को सुनते हुए तस्वीरें पोस्ट की गईं। इससे उनके भोपाल में होने के दावे पर सवाल उठने लगे। जब इस विरोधाभास को लेकर दोबारा सवाल किया गया तो उन्होंने सीधे जवाब देने के बजाय इतना ही कहा कि उनकी न किसी से दोस्ती है और न किसी से दुश्मनी, वे सबके चहेते हैं। पहले भी संगठन ने किया था तलब मंत्रियों के खिलाफ दिए गए उनके विवादित बयान सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद भाजपा संगठन ने मामले को गंभीरता से लिया था। पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर विधायक को भोपाल बुलाया गया था, जहां उन्होंने वरिष्ठ नेताओं और संगठन के पदाधिकारियों के सामने अपना पक्ष रखा था। सफाई के बाद भी खत्म नहीं हुई चर्चा भोपाल में संगठन से मुलाकात के बाद विधायक ने डैमेज कंट्रोल करते हुए कहा था कि भाजपा एक परिवार है और संगठन उनके लिए सर्वोपरि है। उन्होंने यह भी कहा था कि पार्टी में किसी तरह का मतभेद नहीं है। हालांकि, इसके बाद केंद्रीय मंत्री सिंधिया के पूरे दौरे से उनकी दूरी ने एक बार फिर गुना भाजपा में अंदरूनी खींचतान और असंतोष की चर्चाओं को हवा दे दी है।
Source link
‘मिर्जापुर’ साइन करने से पहले क्यों डरे हुए थे अली फजल? मेकर्स से मिली थी वॉर्निंग
नई दिल्ली. बॉलीवुड एक्टर अली फजल एक बार फिर गुड्डू पंडित के किरदार में धमाल मचाने के लिए तैयार हैं. उनकी ‘मिर्जापुर: द मूवी’ बड़े पर्दे पर दस्तक देगी, जिसका हाल ही में दमदार टीजर लॉन्च हुआ. वैसे यह एक पॉपुलर सीरीज है, जिस पर अब फिल्म बनकर तैयार हुई है. इस बीच अली फजल ने बताया कि वह ‘मिर्जापुर’ सीरीज को हां कहते वक्त काफी डरे हुए थे, क्योंकि उस वक्त भारत में वेब सीरीज का फॉर्मेट नया था और अपने पैर पसार ही रहा था.
सीरीज को फिल्म में बदलना बड़ा एक्सपेरिमेंट
न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में अली फजल ने इस बड़े प्रोजेक्ट को लेकर अपनी एक्साइटमेंट शेयर की. उन्होंने कहा, ‘भारत में ऐसा पहली बार हो रहा है जब किसी सुपरहिट वेब सीरीज को फिल्म में बदला जा रहा है. यह नेशनल लेवल का एक बड़ा एक्सपेरिमेंट है जो हम करने जा रहे हैं. इसकी कहानी और किरदार सब कमाल के हैं. हम इस फिल्म की हर एक झलक दर्शकों के साथ शेयर करने के लिए बेहद एक्साइटेड हैं.’
अली फजल को कैसे मिली ‘मिर्जापुर’ सीरीज?
अली फजल ने एक दिलचस्प किस्सा शेयर करते हुए बताया कि उन्हें हाल ही में पता चला कि एक्सेल एंटरटेनमेंट के इस शो के लिए ‘फुकरे’ के डायरेक्टर मृगदीप सिंह लांबा ने मेकर्स को उनका नाम सुझाया था. उस वक्त अली हिंदी सिनेमा में पैर जमाने की कोशिश कर रहे थे और कुछ इंटरनेशनल प्रोजेक्ट्स भी कर चुके थे. लेकिन जब उन्हें ‘मिर्जापुर’ ऑफर हुई, तो कई लोगों ने उन्हें यह शो न करने की सलाह दी थी.
‘मिर्जापुर’ को हां करते वक्त डरे हुए थे अली फजल
उन्होंने याद करते हुए बताया, ‘उस वक्त मैं सच में काफी डरा हुआ था. मुझे समझ नहीं आ रहा था कि इस नए फॉर्मेट का भविष्य क्या होगा, क्योंकि भारत में तब वेब सीरीज का दौर बस शुरू ही हो रहा था. यहां तक कि कई मेकर्स ने मुझसे कहा था कि मैं यह क्या कर रहा हूं? फिल्मों पर ध्यान दो, शोज क्यों कर रहे हो?’ हालांकि, हॉलीवुड में काम करने के अनुभव की वजह से अली को यह अहसास हो गया था कि एंटरटेनमेंट की दुनिया में एक बड़ा बदलाव आने वाला है. इसी समझ और भरोसे के साथ उन्होंने यह रिस्क लिया.
अली फजल ने भांप लिया था ओटीटी का बदलता दौर
अली फजल ने कहा, ‘मैंने ओटीटी और शोज के बदलते इस नए दौर को भांप लिया था. मुझे लग रहा था कि एक बड़ी क्रांति आने वाली है. पुनीत कृष्णा ने जिस तरह से इसकी स्क्रिप्ट लिखी थी और मिर्जापुर की जो दुनिया खड़ी की थी, वो वाकई काबिले-तारीफ थी. हमने यूपी के उन इलाकों की कहानियां तो सुनी थीं, लेकिन उस जगह को इस नजरिए से कभी नहीं देखा था. आज जब अली पीछे मुड़कर देखते हैं, तो उन्हें लगता है कि इस शो ने उन्हें दर्शकों को सरप्राइज करने का एक बेहतरीन मौका दिया. उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, ‘शुरुआत में कोई भी मुझे गुड्डू पंडित के उस खूंखार किरदार में इमेजिन नहीं कर सकता था. सच में, यहां तक का सफर बेहद शानदार रहा है.
2018 में रिलीज हुआ था ‘मिर्जापुर’ का पहला सीजन
बताते चलें कि साल 2018 में शुरू हुई ‘मिर्जापुर’ देश के सबसे पॉपुलर शोज में से एक बन चुकी है. उत्तर प्रदेश के बैकड्रॉप पर बनी इस सीरीज में क्राइम, पॉलिटिक्स, बदले और पावर की जंग को जिस बेबाकी से दिखाया गया, उसने दर्शकों को दीवाना बना दिया. इसके बाद दोनों सीजन्स को भी फैंस का भरपूर प्यार मिला. इस सीरीज में अली फजल के साथ पंकज त्रिपाठी, दिव्येंदु, श्वेता त्रिपाठी, रसिका दुगल, विजय वर्मा, ईशा तलवार, हर्षिता गौर और श्रिया पिलगांवकर जैसे सितारों ने काम किया है.
अब सेशेल्स में भी UPI से पेमेंट होगा: भारत के साथ 19 बड़े समझौतों पर मुहर, 1250 करोड़ का लोन भी मिलेगा
विक्टोरिया1 घंटे पहले
- कॉपी लिंक
भारत और सेशेल्स ने रविवार को 19 बड़े समझौतों और विकास परियोजनाओं का ऐलान किया। प्रधानमंत्री मोदी और सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी की मौजूदगी में हुए इन फैसलों से रक्षा, डिजिटल भुगतान, स्वास्थ्य, शिक्षा, अंतरिक्ष और समुद्री सुरक्षा जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग मजबूत होगा।
सबसे बड़ी घोषणा यह रही कि अब सेशेल्स में भी भारत की UPI आधारित डिजिटल भुगतान व्यवस्था शुरू होगी। भारत ने अब तक 23 से अधिक देशों के साथ UPI को लेकर समझौते किए हैं। फिलहाल 9 देशों में UPI से भुगतान की सुविधा उपलब्ध है।
इसके अलावा भारत, सेशेल्स को 1,250 करोड़ रुपए की लाइन ऑफ क्रेडिट (लोन) देगा, जिससे वहां की विकास परियोजनाओं को पूरा किया जाएगा। दोनों देशों ने प्रत्यर्पण संधि, नए राष्ट्रीय अस्पताल की तैयारी और अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग जैसे अहम समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए।
भारत ने सेशेल्स को एक फास्ट पेट्रोल वेसल, 10 यूटिलिटी वाहन, 5 नौकाएं, 6 एम्बुलेंस, 500 मीट्रिक टन चावल और 8,500 मीट्रिक टन सीमेंट भी सौंपा। इसके साथ ही साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी। ये घोषणाएं ऐसे समय हुई हैं, जब दोनों देश राजनयिक संबंधों के 50 साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं।
PM मोदी के सेशेल्स दौरे से जुड़ी 3 तस्वीरें…

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सेशेल्स की नेशनल असेंबली के विशेष सत्र को संबोधित किया। वह ऐसा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। इससे पहले भारत की तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने ऐसा किया था।

पीएम मोदी को राष्ट्रपति पैट्रिक ने सेशेल्स का सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया।

PM मोदी ने मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम से मुलाकात की। वे भी सेशेल्स के 50वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होने पहुंचे थे।
मोदी गोल्डन जुबली नेशनल डे में चीफ गेस्ट
प्रधानमंत्री मोदी को रविवार को सेशेल्स के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘गार्जियन ऑफ ब्लू होराइजन’ से सम्मानित किया गया। उन्हें अब तक 34 देशों का सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिल चुका है।
मोदी आज सेशल्स की आजादी के 50 साल पूरे होने पर मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। इस मौके पर भारतीय सशस्त्र बलों की एक टुकड़ी और भारतीय नौसेना का युद्धपोत INS तरकश और हाइड्रोग्राफिक सर्वे शिप INS इक्षक भी परेड और समारोह का हिस्सा बनेंगे। इस दौरान भारतीय नौसेना की मार्चिंग टुकड़ी और नेवल बैंड भी परेड में शामिल होंगे।
PM मोदी के सेशेल्स दौरे की 4 खास बातें
1. गोल्डन जुबली नेशनल डे में मुख्य अतिथि
PM मोदी 29 जून को सेशल्स की आजादी के 50 साल पूरे होने पर मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। इस मौके पर भारतीय सशस्त्र बलों की एक टुकड़ी और भारतीय नौसेना का युद्धपोत INS तरकश और हाइड्रोग्राफिक सर्वे शिप INS इक्षक भी परेड और समारोह का हिस्सा बनेंगे।
2. 175 मिलियन डॉलर का आर्थिक पैकेज
भारत ने सेशल्स के विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 175 मिलियन अमेरिकी डॉलर (1651 करोड़) के आर्थिक पैकेज की घोषणा की है। इसके अलावा भारत ने सेशेल्स को भारत में बना फास्ट पेट्रोल वेसल (FPV) ‘पीएस लेस्पवार’ गिफ्ट किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में निर्मित फास्ट पेट्रोल वेसल PS लेस्पवार सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी को गिफ्ट किया। यह सेशेल्स की समुद्री निगरानी क्षमता को मजबूत करेगा।
3. नए समझौतों पर हस्ताक्षर
भारत और सेशेल्स ने 19 अहम समझौतों और घोषणाओं का ऐलान किया। इसमें प्रत्यर्पण संधि, यूपीआई आधारित डिजिटल भुगतान शुरू करने, डिजिटल भुगतान आदि शामिल थे।
4. मोदी ने कोको डी मेर पौधा लगाया
कोको डी मेर का पौधा और इसका फल सिर्फ सेशल्स में ही प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। इसके फल के अंदर मिलने वाला बीज दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे भारी बीज माना जाता है। एक अकेले बीज का वजन 15 से 30 किलोग्राम तक हो सकता है।
कोको डी मेर के नर और मादा पेड़ अलग-अलग होते हैं। मादा फल महिला के कूल्हे जैसा दिखाई देता है। इसे ‘डबल कोकोनट’ भी कहा जाता है। वहीं, नर फूल पुरुष के जननांग जैसा दिखता है। इस अनूठी बनावट के कारण सदियों से इस पौधे को लेकर कई तरह की लोककथाएं और पौराणिक कहानियां प्रचलित हैं।
इस पेड़ को वयस्क होने और फल देने में 20 से 40 साल का समय लगता है। एक फल को पूरी तरह पककर तैयार होने में 6 से 7 साल लग जाते हैं। यह पेड़ बेहद लंबी उम्र जीता है; माना जाता है कि ये 200 से 350 साल तक जीवित रह सकते हैं।
प्राचीन काल में, जब यह फल समुद्र में तैरता हुआ मालदीव या भारत के तटों पर पहुंच जाता था, तो लोग सोचते थे कि यह समुद्र के तल में उगने वाले किसी जादुई पेड़ का फल है। इसी वजह से फ्रांसीसी भाषा में इसका नाम ‘कोको डी मेर’ पड़ा, जिसका अर्थ होता है समुद्र का नारियल।

मोदी सेशेल्स जाने वाले सिर्फ दूसरे प्रधानमंत्री
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी साल 1976 में सेशेल्स गई थीं। उसी साल सेशेल्स आजाद हुआ था। भारत ने सेशेल्स के स्वतंत्रता समारोह में नौसेना का युद्धपोत आईएनएस नीलगिरि भी भेजा था। इसके बाद इंदिरा गांधी ने 1981 में फिर सेशेल्स का दौरा किया था। उनकी यात्रा के बाद, लगभग 34 साल तक किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री ने सेशेल्स की यात्रा नहीं की थी।


———————————
यह खबर भी पढ़ें…
मोदी को सेशेल्स का सर्वोच्च सम्मान, संसद को संबोधित किया:बोले- सेशेल्स से हमारा 256 साल पुराना रिश्ता, 5 भारतीयों से हुई इसकी शुरुआत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रविवार को सेशेल्स के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘गार्जियन ऑफ ब्लू होराइजन’ से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही मोदी को अब तक 34 देशों का सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिल चुका है। सम्मान मिलने पर PM मोदी ने सेशेल्स की जनता, सरकार और राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी का आभार जताया। पूरी खबर यहां पढ़ें…

सिया के इशारे पर चेतन ने केतन को धक्का दिया: पुलिस का दावा- केतन गिरते वक्त सिया को पकड़ न पाए, इसलिए बहाने से बैठ गई
- Hindi News
- National
- Pune Murder Case | Ketan Agrawal Pushed By Chetan Chaudhari On Sia Goels Signal
पुणे11 मिनट पहले
- कॉपी लिंक
18 जून को लोहगढ़ किले से केतन अग्रवाल की धक्का दिया गया था।
पुणे के केतन अग्रवाल मर्डर केस में पुलिस ने कई खुलासे किए है। पुलिस के मुताबिक, 18 जून को लोहगढ़ किले पर सिया गोयल ने पानी पीने या जूते का फीता बांधने के बहाने बैठकर चेतन चौधरी को इशारा दिया। इसके बाद पीछे चल रहे चेतन ने केतन को खाई में धक्का दे दिया।
पुलिस का कहना है कि चेतन गिरते वक्त सिया को पकड़ न सके, इसलिए वह बैठ गई थी। सिया और चेतन ने घटना से एक दिन पहले पुणे के लुल्लानगर में एक कैफे में मर्डर प्लान किया था।
दोनों वारदात से पहले लोहगढ़ किले पर आए थे। यहां उन्होंने हत्या के लिए जगह चुनी और रिहर्सल भी की। पुलिस अब उस उस जगह का पता लगा रही है, जहां दोनों ने रिहर्सल किया था।
चेतन टोल से बचने के लिए स्कूटर से 90km पहुंचा
पुलिस के मुताबिक, चेतन पुणे से करीब 90 किलोमीटर दूर लोहगढ़ किले तक स्कूटर से पहुंचा था। उसने कार का इस्तेमाल नहीं किया ताकि टोल प्लाजा पर कार का रिकॉर्ड न बने। पुलिस ने वह स्कूटर जब्त कर लिया है।
चेतन हूडी पहनकर किले पर चढ़ा था। वहां पहुंचने के बाद उसने हूडी उतार दी और काली टी-शर्ट में रहा। मर्डर के बाद लौटते समय उसने फिर हूडी पहन ली। घटना के बाद वह उसी स्कूटर से पुणे लौट गया।

पुलिस रविवार को सिया और चेतन को लोहगढ़ किले लेकर पहुंची। केतन का डमी बनाकर पूरे घटनाक्रम को दोहराया गया।
सिया के वकील बोले- पुलिस हिरासत में दिया बयान सबूत नहीं
सिया गोयल के वकील आशुतोष श्रीवास्तव ने कहा कि पुलिस हिरासत में आरोपी का दिया बयान अदालत में सबूत नहीं माना जाता। उन्होंने कहा कि कोर्ट में यह सवाल उठाएंगे कि पहले इस मामले को हादसा क्यों माना गया और बाद में हत्या का केस कैसे बना।
उनका कहना है कि पुलिस सिया से पूछताछ के लिए काफी समय ले चुकी है। अब उसे और पुलिस रिमांड में रखने की जरूरत नहीं है।
पुणे मर्डर केस जुड़े अपडेट
- सिया गोयल और चेतन चौधरी ने गूगल पर लोहगढ़ किले के डेथ पॉइंट सर्च किए थे। वहां तक पहुंचने का रास्ता और खाइयों की भी जानकारी जुटाई थी। दोनों ने गूगल पर ‘डेथ पॉइंट और जहर देकर कैसे मारें, ताकि पुलिस को शक न हो’ जैसे सवाल सर्च किए।
- पुलिस ने शनिवार को सिया गोयल के माता-पिता से 12 घंटे पूछताछ की। इससे पहले गुरुवार को सिया के भाई से 10 घंटे तक पूछताछ की थी।
18 जून को कब-क्या हुआ…

हत्या से 6 दिन के अंदर आरोपी अरेस्ट
18 जून को केतन की हत्या से छह दिन के अंदर पुलिस ने आरोपी सिया और चेतन को अरेस्ट कर लिया। जांच के दौरान दोनों आरोपी एक-दूसरे को मास्टरमाइंड बता रहे हैं। पुलिस दोनों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ भी कर चुकी है।

सिया के प्रेमी संग 2 पुराने वीडियो; कैफे गई, मैच देखा
सिया के प्रेमी चेतन के साथ के दो पुराने वीडियो अब सामने आए हैं। एक वीडियो में दोनों महाराष्ट्र क्रिकेट लीग का मैच देखते नजर आ रहे हैं। हालांकि, यह वीडियो कब का है, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
वहीं दूसरा वीडियो पुणे के कैफे का है जो कि हत्या के एक दिन पहले यानी 17 जून का बताया जा रहा है। दावा है कि दोनों ने कैफै में बैठकर केतन के मर्डर की प्लानिंग की थी।

सिया और चेतन का वीडियो सामने आया है, जिसमें दोनों महाराष्ट्र क्रिकेट लीग का मैच देखते नजर आ रहे हैं।

केतन की मौत से एक दिन पहले 17 जून को सिया और चेतन पुणे के कोंढवा इलाके में स्थित एक कैफे गए थे।
31 मई को मारने का आइडिया आया, 18 जून को मर्डर

31 मई को आइडिया आया, 18 जून को मर्डर
31 मई: सिया को केतन की हत्या का प्लान सूझा
11 फरवरी को सगाई के बाद केतन, सिया को घर लेकर आता था, साथ घुमाने ले जाता था। उसे ट्रैकिंग यानी पहाड़ी चढ़ने का शौक था। उसने सिया से ट्रैकिंग के लिए लोहगढ़ किले चलने को कहा। यहीं सिया को केतन की हत्या की प्लान सूझा।
5 जून: किले पर जाने की जिद की, केतन नहीं गया
सिया ने 4 जून को केतन से दोबारा लोहगढ़ किला जाने की जिद की। केतन नहीं माना। 6 जून को केतन, उनकी बहन, एक दोस्त और सिया के इंडोनेशिया के बाली जाने के टिकट बुक थे। पुणे पुलिस के मुताबिक बाली न जाना पड़े, इसलिए सिया ने केतन का पासपोर्ट छिपा लिया।
14 जून: दूसरी कोशिश, धक्का दिया, लेकिन केतन बच गया
सिया ने केतन से दोबारा किले पर चलने को कहा। पुलिस के मुताबिक 14 जून को दोनों किले पहुंचे। सिया ने केतन को धक्का दिया। लेकिन पेड़ का सहारा मिलने से केतन बच गया। उसने पूछा- धक्का क्यों दिया? सिया ने कहा, ‘एक सांप था, तुम्हें उससे बचाने के लिए धक्का दिया।’ केतन ने घर आकर सबको बताया कि सिया की वजह से उसकी जान बच गई।
18 जून: तीसरी कोशिश में बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर धक्का दिया
19 जून को सिया का जन्मदिन मनाने के लिए केतन ने महाबलेश्वर में एक लग्जरी रिजॉर्ट बुक किया था। सिया ने उससे पहले केतन को प्री-वेडिंग फोटोशूट की बात कहकर लोहगढ़ किले पर जाने के लिए मना लिया। इस बार पीछे-पीछे चेतन भी था। एक जगह जब केतन पहाड़ियों की तरफ देख रहा था, तभी दोनों ने उसे पीछे से धक्का दे दिया।

——————-
ये खबर भी पढ़ें…
सिया के सामने केतन मर्डर का सीन रीक्रिएट किया गया: पुलिस लोहगढ़ किला ले गई, दीवार से डमी गिराकर देखा

पुणे मर्डर केस में पुलिस ने रविवार को केतन को लोहगढ़ किले से गिराने का सीन रीक्रिएट किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके लिए पुलिस सुबह 6.30 बजे आरोपी सिया गोयल को लोहगढ़ किले लेकर पहुंची। टीम करीब 2.30 घंटे किले पर रही। पूरी खबर पढ़ें…
दुर्भाग्य ने बदला भाग्य! पैरों की चप्पल ने बदला मुकद्दर, सालाना 5 लाख टर्नओवर
Last Updated:
Success Story: कभी-कभी दुर्भाग्य में आपका भाग्य छिपा होता है. इस बात को साबित किया है जहानाबाद के देवकांत पांडे ने. मुंबई में निजी कंपनी में अच्छी सैलरी पर काम कर रहे थे. शादी में शामिल होने घर पहुंचे. फिर बाइक एक्सीडेंट से उनका पांव बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया. इसके बाद नौकरी छूट गई. फिर किस्मत ऐसी बदली कि आज उनके बिजनेस का सालाना टर्नओवर 5 लाख से ज्यादा है. जानें इनकी कहानी.
जहानाबाद: चुनौती कितनी भी हो, अगर दृढ़ निश्चय के साथ कार्य किया जाता है तो वो सफल हो जाता है. एक ऐसा ही उदाहरण जहानाबाद से आया है. जहां एक शख़्स हादसे का शिकार हो जाता है. इस दौरान उसकी नौकरी भी चली जाती है. थोड़े समय तक उसे कुछ समझ नहीं आता है. इसी बीच एक रिश्तेदार के यहां जाकर कुछ ऐसा देख लेता है, जो किसी चमत्कार से कम नहीं होता है. वहां से घर आकर चप्पल का बिजनेस तलाशना शुरू कर देता है. अब चुनौती पैसों की, कहां से लाएं? हालांकि, उद्योग विभाग की मदद से 10 लाख रुपए तक लोन मिलता है. यहां से शुरू होती है, देवकांत पांडे की कहानी. आज उनका 5 लाख रुपए का सलाना टर्नओवर जा रहा है.
दुर्भाग्य ने बदला भाग्य, फिर शुरू हुआ सफर
बिहार के जहानाबाद जिला स्थित बभना निवासी देवकांत पांडे की कहानी किसी प्रेरणा से कम नहीं है. देवकांत पांडे बताते हैं कि वो भी मुंबई में निजी कंपनी में अच्छी सैलरी पर काम कर रहे थे. साले की शादी में शामिल होने को मुंबई से घर पहुंचे. दुर्भाग्यवश, बाइक एक्सीडेंट से उनका पांव बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया. लगभग 6 महीने हादसे से उबरने में लग गया. हादसे के बाद जब कंपनी पहुंचा तो वहां बॉस रखने को मना कर गए. इसके बाद क्या ही करता, फिर कुछ समय तक बैठा रहा. एक रिश्तेदार के यहां गए थे और वहां हमने स्लीपर्स बनाने का कार्य देखा. इसके बाद हमारे मन में भी जागृति हुई. घर आया तो सोचा यह काम कैसे किया जाए?
ऐसे शुरू हुआ देवकांत का सफर
उन्होंने कहा कि बाद में कहीं कहीं से सरकारी लोन की जानकारी मिली. उद्योग विभाग के बारे में यह पता लगा कि यहां से उद्योग करने को लोन मिलता है. जहानाबाद उद्योग विभाग ऑफिस जाकर संपर्क किया. फिर संघर्ष के बाद 10 लाख रुपए का PMEGP योजना से लोन प्राप्त किया. इसमें हमें 2.5 लाख रुपए सब्सिडी भी प्राप्त हुआ है. इस प्रकार हमने अपना बिजनेस अपने गांव में ही शुरू कर दिया. 2022 में इस उद्योग की शुरुआत घर के ही एक छोटे से कमरे से कर दी. अब धीरे धीरे बाजार पकड़ लिया है. पटना जिले के साथ-साथ जिले में ही 50 जगह चप्पल की आपूर्ति की जा रही है.
5 लाख रुपए सलाना टर्नओवर
वो आगे यह बताते हैं कि हमने होलसेल रेट ₹70 से ₹90 प्रति जोड़ा चप्पल मार्केट में पहुंचा रहे हैं. इससे साल का टर्न ओवर 5 लाख रुपए तक है. इसी से हमारा घर परिवार चल रहा है. इसके साथ ही एक अन्य मशीन खाने वाला पत्तल, कटोरी और ग्लास वाली मशीन भी सेट अप कर रखे हैं. इससे भी कुछ कुछ कमाई हो जाती है. शादी ब्याह में कहीं कहीं सप्लाई करते हैं. इस व्यापार को भी बढ़ाने का कार्य कर रहे हैं. हमारे यहां चप्पल वाले यूनिट में लगभग 5 लोग काम कर रहे हैं. इससे उनका भी पेट भर रहा है.
About the Author
मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें
शाहिद कपूर की हीरोइन, डेब्यू फिल्म से रातोंरात बनीं स्टार, अब करती हैं ये काम
Last Updated:
साल 2003 की हिट फिल्म ‘इश्क विश्क’ से रातोंरात युवाओं की क्रश बनने वाली शहनाज ट्रेजरीवाला की कहानी बेहद दिलचस्प है. आज 29 जून को अपना जन्मदिन मना रहीं एक्ट्रेस मुंबई के एक पारसी परिवार में जन्मी शहनाज ने कॉलेज के दिनों में मॉडलिंग से शुरुआत की और एमटीवी की सबसे चहेती वीडियो जॉकी बनीं. बॉलीवुड में ‘हम तुम’ और ‘दिल्ली बेली’ जैसी फिल्मों में अपनी अदाकारी का जादू बिखेरने के बाद, उन्होंने सिनेमा की चकाचौंध छोड़ अपने घूमने के शौक को करियर बनाया और आज एक सफल ग्लोबल ट्रैवल इन्फ्लुएंसर हैं.
एक्ट्रेस का आज जन्मदिन है. (फोटो साभार इंस्टाग्राम shenaztreasury)
नई दिल्ली. बॉलीवुड में अक्सर कहा जाता है कि किस्मत बदलने के लिए सिर्फ एक सही शुक्रवार की जरूरत होती है. साल 2003 में एक ऐसा ही शुक्रवार आया, जिसने एक युवा वीडियो जॉकी को रातोंरात हिंदी सिनेमा की नई ‘क्रश’ बना दिया. हम बात कर रहे हैं एक्ट्रेस शहनाज ट्रेजरीवाला की, जिन्हें फिल्म ‘इश्क विश्क’ ने वो शोहरत और पहचान दी, जिसने उनके जीवन के सफर को हमेशा के लिए एक अनोखी दिशा में मोड़ दिया. आज 29 जून को एक्ट्रेस शहनाज ट्रेजरीवाला अपना जन्मदिन मना रही हैं.
शहनाज ट्रेजरीवाला का जन्म मुंबई के एक पारसी परिवार में हुआ था. उनके पिता मर्चेंट नेवी में एक इंजीनियर थे, जिसके चलते बचपन से ही उनके घर का माहौल थोड़ा अलग रहा. मुंबई में ही अपनी स्कूली और कॉलेज की पढ़ाई पूरी करने के दौरान उनकी खूबसूरत मुस्कान और हाजिरजवाबी ने ऐड फिल्म के डायरेक्टर्स का ध्यान खींचा. कॉलेज के दिनों से ही उन्होंने मॉडलिंग की दुनिया में कदम रख दिया था और जल्द ही वे कई बड़े ब्रांड्स के विज्ञापनों का चेहरा बन गईं.
टीवी से शुरू किया था करियर
एक्ट्रेस शहनाज को असली पहचान टीवी से मिली. उनको एमटीवी के बेहद मशहूर शो ‘एमटीवी मोस्ट वॉन्टेड’ में बतौर वीडियो जॉकी काम करने का मौका मिला. उस दौर में यह शो युवाओं के बीच एक कल्ट बन चुका था. शहनाज के चुलबुले अंदाज, बात करने के अनोखे ढंग और गजब की एनर्जी ने उन्हें देश भर के युवाओं का चहेता बना दिया.
‘इश्क विश्क’ से मिली बॉलीवुड में बड़ी पहचान
छोटे पर्दे पर धूम मचाने के बाद शहनाज ट्रेजरीवाला ने अभिनय की दुनिया का रुख किया. उन्होंने अपने एक्टिंग करियर की शुरुआत साल 2001 में एक तेलुगु फिल्म ‘एडुरुलेनी मनीषी’ से की थी. लेकिन उनकी किस्मत का असली सितारा साल 2003 में चमका, जब उन्हें केन घोष के निर्देशन में बनी रोमांटिक-कॉमेडी फिल्म ‘इश्क विश्क’ मिली. शाहिद कपूर और अमृता राव के साथ इस फिल्म में शहनाज ने ‘अलीशा’ का एक बेहद ग्लैमरस और आधुनिक किरदार निभाया. फिल्म ब्लॉकबस्टर रही और शहनाज का यह डेब्यू किरदार दर्शकों के दिलों में बस गया.
कई फिल्मों में किया काम
इस फिल्म की शानदार सफलता के बाद उनके पास कई बड़े प्रोजेक्ट्स आए. उन्होंने सैफ अली खान और रानी मुखर्जी की सुपरहिट फिल्म ‘हम तुम’ में एक छोटा लेकिन मजेदार किरदार निभाया. इसके बाद वे ‘लव का द एंड’ और आमिर खान के प्रोडक्शन की एडल्ट-कॉमेडी फिल्म ‘दिल्ली बेली’ में भी एक अहम और यादगार भूमिका में नजर आईं. भले ही उनका बॉलीवुड सफर बहुत लंबा नहीं रहा, लेकिन उन्होंने अपनी स्क्रीन प्रेजेंस से दर्शकों पर एक गहरी छाप छोड़ी.
एक्टिंग को अलविदा कह चुनी ट्रैवल की दुनिया
सिनेमा की चकाचौंध के बीच शहनाज के भीतर एक और शौक अंगड़ाइयां ले रहा था और वो था दुनिया ट्रैवलिंग का जुनून. उन्होंने जल्द ही समझ लिया कि उनका असली झुकाव अभिनय से ज्यादा घूमना और नए कल्चर को तलाशना है. उन्होंने अपने इस शौक को ही अपना प्रोफेशन बनाने का फैसला किया.शहनाज ने ‘कॉस्मोपॉलिटन’, ‘एले’ और ‘फेमिना’ जैसी दुनिया की मशहूर लाइफस्टाइल मैगजीन्स के लिए ट्रैवल आर्टिकल्स लिखना शुरू किया. उनके आर्टिकल्स और जर्नी के एक्सपीरियंस को काफी पसंद किया गया. इसके बाद उन्होंने एक इंटरनेशनल ट्रैवल चैनल पर ‘कल्चर शॉक’ नामक शो होस्ट किया, जिसने उन्हें वैश्विक स्तर पर पहचान दी.
About the Author

From the precision of chemistry labs to the vibrant chaos of a newsroom, my journey has been about finding the perfect formula for a great story. A graduate in Chemistry Honours from the historic Scottish Churc…और पढ़ें
भास्कर अपडेट्स: जम्मू-कश्मीर में वैष्णो देवी जा रही CISF जवानों की बस पलटी, 8 जवान और ड्राइवर घायल
1 घंटे पहले
- कॉपी लिंक
जम्मू-कश्मीर के रियासी जिले में रविवार को माता वैष्णो देवी मंदिर के ताराकोट मार्ग पर CISF जवानों को लेकर जा रही एक बस पलट गई। हादसे में 8 CISF जवान और बस चालक घायल हो गए। इनमें तीन जवानों की हालत गंभीर बताई गई है।
अधिकारियों के मुताबिक, हादसे के समय CISF के जवान ड्यूटी पूरी कर मंदिर क्षेत्र से अपने कैंप लौट रहे थे। इसी दौरान ताराकोट मार्ग पर बस अनियंत्रित होकर पलट गई। गंभीर रूप से घायल हेड कांस्टेबल सैमी कुमार, हेड कांस्टेबल एम.एम. दुबे और कांस्टेबल पी.के. त्राया को इलाज के लिए नारायणा अस्पताल में भर्ती कराया गया है।
वहीं, एक सब-इंस्पेक्टर समेत अन्य घायल जवानों और बस चालक वीरेंद्र सिंह का कटड़ा के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज चल रहा है। अधिकारियों के मुताबिक, उनकी हालत स्थिर है।
आज की अन्य बड़ी खबरें…
अनंत अंबानी ने तिरुपति बालाजी मंदिर में केश दान किए, सुप्रभात सेवा में हिस्सा लिया

रिलायंस इंडस्ट्रीज के एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर अनंत अंबानी ने रविवार सुबह तिरुमाला में भगवान वेंकटेश्वर की पूजा-अर्चना की। अनंत शनिवार रात 1 बजे तिरुमाला पहुंचे थे।
उन्होंने भगवान वेंकटेश्वर स्वामी के चरणों में अपने केश समर्पित कर सदियों पुरानी परंपरा निभाई। अनंत ने सुबह करीब 3:30 बजे पवित्र सुप्रभात सेवा में हिस्सा लिया, जो भगवान के जागने की रस्म है।
इसके बाद, मंदिर के पुजारियों ने उन्हें वैदिक आशीर्वाद दिया, जबकि तिरुमाला तिरुपति देवस्थानम (टीटीडी) के कार्यकारी अधिकारी ने उन्हें पवित्र स्मृति चिह्न और उपहार भेंट किया।
केरल में पानी से भरी खदान में डूबने से 2 छात्रों की मौत; 3 दोस्तों के साथ नहाने गए थे

केरल के कोट्टायम जिले में मुक्कूटुथारा के पास पानी से भरी बंद पड़ी खदान में डूबने से दो छात्रों की मौत हो गई। हादसा रविवार शाम करीब 6 बजे हुआ। दोनों तीन अन्य दोस्तों के साथ नहाने के लिए खदान में उतरे थे।
मृतकों की पहचान एशले सैंथोस (19) और आशेर सुधीश (15) के रूप में हुई है। दोनों कोडिथोट्टम के रहने वाले थे। एशले ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग का छात्र था, जबकि आशेर प्लस-वन में पढ़ता था।
सूचना मिलने पर पुलिस, फायर एंड रेस्क्यू की टीम मौके पर पहुंची और दोनों के शव बाहर निकाले। पुलिस ने अस्वाभाविक मौत का मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। पोस्टमॉर्टम के लिए शवों को कंजीरापल्ली तालुक अस्पताल की मॉर्च्युरी भेजा गया है।
विदेश मंत्रालय ने कहा- दस्तावेज पूरे हों, तभी मानसरोवर यात्रा पर जाएं; चीन का वीजा और एंट्री परमिट नहीं होने से नेपाल में फंस रहे यात्री

विदेश मंत्रालय ने निजी टूर ऑपरेटरों के जरिए कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जाने वाले भारतीयों के लिए एडवाइजरी जारी की है। मंत्रालय ने कहा कि कई यात्री चीन का वीजा और जरूरी एंट्री परमिट लिए बिना नेपाल पहुंच रहे हैं। इससे उन्हें नेपाल में ही रुकना पड़ रहा है और आर्थिक नुकसान भी उठाना पड़ रहा है।
मंत्रालय ने यात्रियों से कहा है कि सभी जरूरी दस्तावेज मिलने के बाद ही भारत से यात्रा शुरू करें। साथ ही, जिस टूर ऑपरेटर के जरिए यात्रा बुक कर रहे हैं, उसके रजिस्टर्ड और अधिकृत होने की भी पहले पुष्टि कर लें।


