मेरठ के ओडियन नाले में सफाई के दौरान कम सिल्ट और घरेलू कूड़ा ज्यादा निकलने पर वार्ड-83 के पार्षद रिजवान अंसारी ने डोर-टू-डोर कूड़ा संग्रहण करने वाली बीवीजी कंपनी पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि कंपनी क्षेत्र में नियमित रूप से कूड़ा नहीं उठा रही है, जिसके कारण लोगों द्वारा कूड़ा नालों में डाला जा रहा है और गंदगी की समस्या लगातार बढ़ रही है। पार्षद ने कमेले वाले पुल के पास स्थित कन्या इंटर कॉलेज के निकट जमा गंदगी का उदहारण देकर बताया कि कॉलेज में करीब 2600 छात्राएं पढ़ती हैं, लेकिन आसपास फैली गंदगी और दुर्गंध के कारण छात्राओं, शिक्षकों और कॉलेज प्रशासन को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। रिजवान अंसारी ने आरोप लगाया कि बीवीजी कंपनी पर नगर निगम का बड़ा बजट खर्च होने के बावजूद सफाई व्यवस्था बदहाल है। उन्होंने कहा कि इस संबंध में स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों और नगर निगम प्रशासन से कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन समस्या का समाधान नहीं हुआ। पार्षद ने चेतावनी दी कि यदि जल्द ही स्थिति में सुधार नहीं हुआ तो वह नगर निगम सदन में मामला उठाएंगे और आवश्यकता पड़ने पर धरना-प्रदर्शन भी करेंगे। उन्होंने क्षेत्र की सफाई व्यवस्था को तत्काल दुरुस्त करने की मांग की है।
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मेरठ में पार्षद का आरोप- लापरवाही से बढ़ी गंदगी: अधिकारियों की सांठ- गांठ से बीवीजी कंपनी कर रखी खानापुर्ति, जनता हो रही परेशान – Meerut News
जबलपुर में बदमाशों से परेशान मां-बेटी: कलेक्टर के पैरों में गिरकर मांगी मदद, बोली-परिवार परेशान है-पढ़ाई प्रभावित – Jabalpur News
जबलपुर में एक मां और उसकी बेटी क्षेत्र के बदमाशों से इस कदर परेशान हो गईं कि उन्हें कलेक्टर के सामने घुटनों के बल बैठकर मदद की गुहार लगानी पड़ी। मामला घमापुर थाना क्षेत्र के शीतलामाई इलाके का है, जहां रहने वाली पूजा दुबे और उनकी बेटी ने मंगलवार को कलेक्टर राघवेंद्र सिंह के सामने हाथ जोड़कर आरोपियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की। पीड़ित परिवार का आरोप है कि कई शिकायतों के बावजूद घमापुर पुलिस ने आरोपियों पर प्रभावी कार्रवाई नहीं की, जिससे उनके हौसले लगातार बढ़ते गए। पीड़िता पूजा दुबे का कहना है कि उनका परिवार पिछले चार साल से क्षेत्र के रहने वाले हनी बेन और उसके परिवार की प्रताड़ना झेल रहा है। पूजा के मुताबिक फरवरी 2022 में हनी बेन ने खुद को मिश्रा बताकर उनकी 14 वर्षीय नाबालिग बेटी से दोस्ती की और फिर उसे बहला-फुसलाकर अपने साथ ले गया। पुलिस के चक्कर लगाए नहीं मिली मदद बेटी के लापता होने के बाद परिवार ने पुलिस के कई चक्कर लगाए, लेकिन शुरुआत में कोई मदद नहीं मिली। बाद में जानकारी मिली कि बेटी को गढ़ाकोटा (सागर) ले जाया गया है। इसके बाद एसपी से शिकायत की गई, तब पुलिस सक्रिय हुई और दो दिन बाद नाबालिग को बरामद कर परिवार को सौंपा गया। उस समय आरोपी के खिलाफ कार्रवाई हुई और उसका जुलूस भी निकाला गया, लेकिन उसी दिन उसे कोर्ट से जमानत मिल गई। परिवार का आरोप है कि इसके बाद से आरोपी और उसका परिवार लगातार उन्हें परेशान कर रहा है। पूजा दुबे ने बताया कि मार्च 2026 में होली के दौरान उनकी बड़ी बेटी रिश्तेदारों के साथ घर के बाहर रंग खेल रही थी। उसी दौरान हनी बेन वहां पहुंचा और जबरन रंग लगाने लगा। विरोध करने पर विवाद बढ़ गया और आरोपी पक्ष ने मारपीट शुरू कर दी। मामले की शिकायत पुलिस तक पहुंची, लेकिन दोनों पक्षों को समझाइश देकर मामला शांत करा दिया गया। पीड़िता ने बताया कि 14 जून को उनका 10 वर्षीय बेटा मोहल्ले में क्रिकेट खेल रहा था। इसी दौरान खेलते समय गलती से बल्ला हनी बेन के रिश्तेदार अविनाश बेन की बड़ी मां को लग गया। इस बात पर आरोपी पक्ष भड़क गया और परिवार के लोगों ने मिलकर पूजा के पति रामचरण दुबे पर लोहे की रॉड और बैट से हमला कर दिया। इस दौरान उनकी दिव्यांग बेटी के साथ भी मारपीट की गई। घायल रामचरण दुबे को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उनका इलाज हुआ। आरोपियों के हौसले और बढ़ गए परिवार का आरोप है कि घटना के बाद आरोपियों के हौसले और बढ़ गए तथा उन्होंने रास्ते में रोककर छेड़छाड़ और अभद्रता करना शुरू कर दिया। पीड़िता ने बताया कि उनकी बेटी एसपी की पाठशाला में पढ़ती है और आगे चलकर पुलिस फोर्स जॉइन करना चाहती है, लेकिन मोहल्ले का माहौल इतना खराब हो चुका है कि अब अकेले घर से निकलने में भी डर लगता है। लगातार तनाव और विवादों के कारण उसकी पढ़ाई भी प्रभावित हो रही है। पूजा दुबे का आरोप है कि आरोपियों के खिलाफ दर्ज शिकायतें वापस लेने के लिए उन पर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि मामले में राजनीतिक दबाव भी बनाया जा रहा है। परिवार का कहना है कि यदि घमापुर पुलिस शुरुआत में ही सख्त कार्रवाई करती तो आरोपियों के हौसले इतने बुलंद नहीं होते। कलेक्टर ने कार्रवाई का दिलाया भरोसा मंगलवार को जब कलेक्टर राघवेंद्र सिंह जिला पंचायत सीईओ अभिषेक गहलोत के साथ बैठक के लिए निकल रहे थे, तभी मां-बेटी उनके पास पहुंचीं और रोते हुए पूरी आपबीती सुनाई। इस दौरान बेटी कलेक्टर के सामने घुटनों के बल बैठ गई और सुरक्षा की गुहार लगाई। कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लेते हुए घमापुर थाना प्रभारी को आरोपियों पर सख्त कार्रवाई के निर्देश दिए और परिवार को उचित कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
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दिल्ली नगर निगम आयुक्त ने लिया विकास कार्यों का जायजा: मानसून से पहले जलभराव रोकने के लिए दिए निर्देश, बोले- लापरवाही अफसरों पर होगी कार्रवाई – New Delhi News
दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) के आयुक्त संजीव खिरवार ने मंगलवार को केशवपुरम जोन में विकास कार्यों और स्वच्छता व्यवस्था का औचक निरीक्षण किया। इस दौरान परशुराम चौक से लेकर अशोक विहार तक आयुक्त ने जमीनी हकीकत परखी और अधिकारियों को मानसून से पूर्व सभी जल निकासी कार्यों को युद्धस्तर पर पूरा करने के निर्देश दिए। आयुक्त संजीव खिरवार ने शालीमार गांव और परशुराम चौक जैसे कूड़ा संवेदनशील स्थलों पर विशेष जोर देते हुए कहा कि क्षेत्र में गंदगी का नामोनिशान नहीं होना चाहिए। पीतमपुरा में निर्माणाधीन कंपेक्टर स्टेशन और सड़कों के कार्यों का जायजा लेते हुए उन्होंने स्पष्ट किया कि निर्माण के दौरान नागरिकों को असुविधा नहीं होनी चाहिए और काम की गुणवत्ता में कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। निगम आयुक्त बोले- समय से पूरे हों सभी कार्य मानसून को देखते हुए पंप हाउस और नालों की सफाई को प्राथमिकता दी गई है। वहीं, अशोक विहार में एनसीएपी के तहत चल रहे सड़क निर्माण पर संतोष जताते हुए उन्होंने विभाग की कार्यप्रणाली की सराहना भी की। उन्होंने कहा, दिल्ली नगर निगम नागरिकों को बेहतर आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने, स्वच्छता अवसंरचना को मजबूत बनाने तथा विकास परियोजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन के माध्यम से शहर के समग्र शहरी वातावरण को बेहतर बनाने के लिए निरंतर प्रतिबद्ध है। सभी कार्य समयसीमा के भीतर पूरे होने चाहिए। आयुक्त ने अधिकारियों को जन शिकायतों के त्वरित निस्तारण के साथ-साथ विभागों के बीच बेहतर समन्वय बनाकर कार्य करने को कहा है, ताकि दिल्ली के निवासियों को स्वच्छ और सुव्यवस्थित वातावरण मिल सके।
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सिपाही भर्ती परीक्षा के लिए रेलवे की खास तैयारी: 12 स्पेशल ट्रेनें चलेंगी, कोसी-सीमांचल के अभ्यर्थियों को राहत, सुरक्षा के भी इंतजाम – Saharsa News
केंद्रीय चयन पर्षद (सिपाही भर्ती) द्वारा 17 जून को आयोजित होने वाली मद्य निषेध सिपाही, कक्षपाल और चलंत दस्ता सिपाही भर्ती परीक्षा में शामिल होने वाले कोसी और सीमांचल क्षेत्र के परीक्षार्थियों के लिए पूर्व मध्य रेल ने विशेष व्यवस्था की है। स्टेशनों पर संभावित भीड़ को देखते हुए, समस्तीपुर रेल मंडल ने 17 जून को वापसी के लिए 12 परीक्षा विशेष ट्रेनों के परिचालन का निर्णय लिया है। इन विशेष ट्रेनों से सहरसा, मधेपुरा, सुपौल और पूर्णिया के परीक्षार्थियों को समय पर अपने गंतव्य तक पहुंचने में सुविधा होगी। रेलवे प्रशासन ने अभ्यर्थियों की सुविधा सुनिश्चित करने के लिए यह कदम उठाया है। विशेष ट्रेन सहरसा से बुधवार को दोपहर 14:00 बजे रवाना होगी
दौरम मधेपुरा–हाजीपुर परीक्षा विशेष ट्रेन बुधवार को दोपहर 13:30 बजे दौरम मधेपुरा स्टेशन से प्रस्थान करेगी। यह सहरसा, सिमरी बख्तियारपुर, मानसी, खगड़िया, बेगूसराय, बरौनी और शाहपुर पटोरी होते हुए हाजीपुर पहुंचेगी। सहरसा–सिवान परीक्षा विशेष ट्रेन सहरसा से बुधवार को दोपहर 14:00 बजे रवाना होगी। इसका मार्ग खगड़िया, बेगूसराय, बरौनी, शाहपुर पटोरी, हाजीपुर, सोनपुर और छपरा होते हुए सिवान तक होगा। सीमांचल के अभ्यर्थियों के लिए पूर्णिया कोर्ट–पाटलिपुत्र परीक्षा विशेष ट्रेन शाम 18:00 बजे पूर्णिया कोर्ट से चलेगी। यह बनमनखी, मुरलीगंज, दौरम मधेपुरा, सहरसा, सिमरी बख्तियारपुर, खगड़िया, बेगूसराय, बरौनी, शाहपुर पटोरी और हाजीपुर के रास्ते पाटलिपुत्र पहुंचेगी। अन्य जिलों के लिए भी विशेष ट्रेनें चलाई जा रही
कोसी क्षेत्र के सुपौल जिला अंतर्गत सरायगढ़ से चलने वाली ट्रेन संख्या 05573 (सरायगढ़–देवघर) के समय में आंशिक बदलाव किया गया है। अब यह ट्रेन अपने निर्धारित समय के बजाय दोपहर 13:00 बजे देवघर के लिए प्रस्थान करेगी। रेलवे प्रशासन के अनुसार, इन विशेष ट्रेनों का परिचालन मुख्य रूप से दोपहर और शाम के समय निर्धारित किया गया है। इसका उद्देश्य परीक्षा की दोनों पालियों में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों को आने-जाने में कोई कठिनाई न हो। समस्तीपुर रेल मंडल के क्षेत्राधिकार में आने वाले मधुबनी, दरभंगा, समस्तीपुर, मुजफ्फरपुर, सीतामढ़ी और चंपारण जैसे अन्य जिलों के लिए भी विशेष ट्रेनें चलाई जा रही हैं। सुरक्षा और भीड़ प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम
समस्तीपुर रेल मंडल के जनसंपर्क विभाग ने परीक्षार्थियों से अपील की है कि वे समय से स्टेशन पहुंचें और केवल वैध टिकट लेकर ही यात्रा करें। स्टेशनों पर यात्रियों की सुरक्षा और सुगम आवागमन के लिए सुरक्षा बलों की अतिरिक्त तैनाती सहित भीड़ प्रबंधन की आवश्यक व्यवस्था की गई है। रेल प्रशासन ने सभी परीक्षार्थियों को परीक्षा के लिए शुभकामनाएं दी हैं।
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जापान में सार्वजनिक तौर पर शराब पीना कानूनी तौर पर वैध क्यों, बॉस के साथ पीना ‘वफादारी’
जापान में सड़कों पर रात के समय चलते हुए आपको हो सकता है कि लोग शराब पीते हुए नजर आएं. उनके हाथ में जाम का गिलास या बियर की कैन हो सकती है. या हो सकता है कि सड़क के किनारे कार खड़ी खड़ी करके कार – ओ- बार हो रहा हो. भारत और दूसरे किसी देश में अगर आप ऐसा करें तो हवालात की सैर करनी पड़ सकती है., चालान काटा जा सकता है लेकिन जापान में ये पूरी तरह वैध है. जापान में सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीने पर कोई प्रतिबंध नहीं है.
आप किसी भी सुविधा स्टोर से चौबीसों घंटे शराब खरीद सकते हैं. पार्क में, सड़क किनारे बेंच पर या चलते-फिरते भी इसका आनंद ले सकते हैं. वहां कुछ मौसम में तो ये आजादी चरम पर होती है, खासकर तब जबकि वहां चेरी ब्लॉसम खिलने का मौसम हो. तब हजारों लोग पेड़ों के नीचे बैठकर शराब पीने के लिए पार्कों में इकट्ठा होते हैं. तब लोग वोदका से लेकर स्कॉच पीते हुए तक दीख जाते हैं.
पर इसकी कुछ शर्तें भी
ये कानूनी है, फिर भी कुछ शिष्टाचार का पालन करना आवश्यक है. ज़ोर से बोलना, शोर मचाना या कूड़ा फैलाना बेहद असभ्य माना जाता है. ये उम्मीद की जाती है कि यदि आप सार्वजनिक स्थानों पर शराब पीते हैं, तो शांत और ज़िम्मेदारीपूर्वक पिएं. हालांकि स्थानीय ट्रेनों के अंदर शराब पीना आमतौर पर मना है लेकिन बुलेट ट्रेन में ऐसा किया जा सकता है.
जापान में सार्वजनिक जगहों पर शराब पीना कानूनी तौर पर वैध है. लिहाजा अक्सर वहां लोग पार्कों और पब्लिक प्लेसेज पर जाम टकराते दीख सकते हैं.
जापान में कैसे ऐसा होता है
जापान में कानूनों से ज्यादा सामाजिक नियम मजबूत हैं. लोग ज्यादातर जिम्मेदारी से पीते हैं. शराब को नैतिक बुराई नहीं माना जाता. इसे सामाजिक बांडिंग और रिलैक्सेशन का साधन माना जाता है. इसी वजह से सार्वजनिक नशा आम है. हां, अगर ज्यादा शोर-शराबा या परेशानी पैदा की तो फिर ये कानून का मामला हो जाता है. मतलब अगर आप शांति और हल्की बातचीत के साथ पब्लिक में ड्रिंक कर रहे हैं तो कोई दिक्कत नहीं. महिलाओं के लिए पहले पब्लिक ड्रिंकिंग टैबू था, लेकिन अब आम है. वो अब अकेले या दोस्तों के साथ एंजॉय करती हैं.
लोग खुद नियंत्रित रहते हैं
जापान की कम अपराध दर और उच्च सामाजिक अनुशासन के कारण पुलिस को सख्त नियमों की जरूरत नहीं पड़ती. लोग खुद को नियंत्रित रखते हैं. शर्मिंदगी खुद ही सजा का काम करती है. हालांकि विदेशी पर्यटकों को ये बात अजीब लग सकती है. जापान में युवाओं में शराब की उम्र 20 साल है.
पार्क में चादर बिछाई और सुबह से रात तक शराब
जापान में वसंत ऋतु में लाखों लोग पार्कों में चेरी के फूलों के नीचे ब्लू शीट्स बिछाकर दिन भर से रात तक शराब पीते हैं. लोग बढ़िया जगह लेने के लिए सुबह जल्दी आ जाते हैं, इसमें कॉलेज स्टूडेंट्स से लेकर सीईओ तक सब शामिल होते हैं. हालांकि अक्सर लोग ज्यादा शराब पीने के चलते अस्पताल भी पहुंच जाते हैं.
अक्सर रात में ज्यादा पीने के बाद लोग सड़क, स्टेशन या पार्क में सो जाते हैं. लोग उन्हें परेशान नहीं करते. कई बार लोग उनके पास पानी की बोतल रख देते हैं ताकि वे उठकर पी सकें. पुलिस या स्टेशन स्टाफ उन्हें धीरे से जगाकर घर भेज देते हैं. नशे में कोई हंगामा न करे तो अगले दिन सब भूल जाते हैं.
जापान में शराब का कल्चर बहुत अनोखा
जापान में शराब का कल्चर काफी अनोखा है. ये सामाजिक और कामकाजी जीवन से गहराई से जुड़ा हुआ है. यहां शराब केवल नशा नहीं, बल्कि रिश्ते बनाने, तनाव कम करने और संवाद का जरिया है. इसे “नोमुनिकेशन” कहते हैं.
बॉस के साथ ड्रिक करना वफादारी का प्रतीक
जापान की कॉर्पोरेट संस्कृति का ये सबसे बड़ा हिस्सा है. ऑफिस के बाद सहकर्मी और बॉस के साथ इज़ाकाया यानि जापानी पब में साथ ही जाते हैं. ऐसा करके वो हाइयारिकी को थोड़ा ढीला करते हैं, खुलकर बात करते हैं, टीम स्पिरिट बढ़ाते हैं. बॉस के साथ ड्रिंक करना वफादारी का प्रतीक माना जाता है. इनवाइट ठुकराना मुश्किल होता है, हालांकि अब युवा पीढ़ी इसे चैलेंज कर रही है. पार्टी लंबी चलती है. मुख्य पार्टी के बाद “दूसरी पार्टी” और कभी तीसरी भी.
हमारे यहां चखना तो वहां इज़ाकाया कल्चर
हमारे यहां शराब के साथ खाने के लिए इस्तेमाल होने वाली चीजों को चखना कहते हैं. जापान में इसको इज़ाकाया कहते हैं, जिसमें छोटे-छोटे व्यंजनों को शराब साथ शामिल किया जाता है. लोग खुद का ग्लास खुद नहीं भरते बल्कि दूसरे को भरते हैं. “कंपाई!” कहकर टोस्ट करते हैं. हमारे देश में आमतौर पर ऐसे मौकों पर चीयर्स कहकर टोस्ट किया जाता है.
अंधेरा पक्ष भी है
जापान में ज्यादा पीने से स्वास्थ्य समस्याएं भी बढ़ रही हैं. लीवर डैमेज और अल्कोहल डिपेंडेंस जैसी दिक्कतें सामने आती हैं. युवा पुरुषों में हानिकारक ड्रिंकिंग ग्लोबल औसत से ज्यादा है. हालांकि अब नई जेनरेशन इसे कम कर रही है.
जयपुर सीएमएचओ टीम ने 450 किलो पनीर नाली में फिकवाया: खो-नागोरिया इलाके में डेयरी संचालक के यहां मारा छापा; अलवर से 220 रुपए किलोग्राम की दर से करता था खरीद – Jaipur News
जयपुर सीएमएचओ (सैकंड) की टीम ने आज खो-नागोरियान क्षेत्र में 450 किलो पनीर नष्ट करवाया। टीम को आशंका थी कि ये पनीर स्टेण्डर्ड के मुताबिक नहीं है। वहीं पनीर में से बदबू भी आ रही थी, जिसके चलते पनीर का सैंपल लेने के बाद उसे नष्ट करवाया। सीएमएचओ डॉ. मनीष मित्तल ने बताया- पुलिस थाना खो नागोरियान की सूचना पर टीम को लक्ष्मी नगर स्थित एम.के. डेयरी पर भेजा। यहां टीम ने डीप फ्रिज और कैरटो रखा करीब 450 किलो पनीर चैक किया। डेयरी के मालिक मुस्तफा ने पूछताछ में बताया- कि वह ये पनीर अलवर से 220 रुपए किलो की दर से मंगवाता है और जयपुर के अलग-अलग बाजार में 260 रुपए किलो में बेचता है। उसने बताया कि यह पनीर दूध में से क्रीम निकाल कर तैयार किया जाता है। इस प्रकार क्रीम निकालकर लूज पनीर तैयार कर बेचना खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के अंतर्गत प्रतिबंधित है। पनीर की क्वालिटी घटिया होने और दूषित होने के साथ मिलावट का अंदेशा होने पर कारण पनीर का नमूना लेकर पूरे पनीर के स्टॉक (450 किलो पनीर) को टीम ने नष्ट करवाया।
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5G के जमाने में Tecno ने लॉन्च किया 4G फोन, मिलेगी 6000mAh की बैटरी
Tecno ने अपना नया 4G स्मार्टफोन पेश किया है। हांग-कांग की कंपनी का यह फोन खास तौर पर बजट फ्रेंडली यूजर्स के लिए उतारा गया है। इस फोन में 6000mAh तक की बैटरी और वाटरप्रूफ जैसे फीचर्स दिए गए हैं। कंपनी का दावा है कि यह स्मार्टफोन 4.5G नेटवर्क को सपोर्ट करेगा। साथ ही, इसमें डुअल सेल बैटरी टेक्नोलॉजी का यूज किया गया है। टेक्नो ने हालांकि, फोन की कीमत नहीं बताई है। उम्मीद है कि इसकी कीमत बजट प्राइस रेंज में रखी जाएगी।
Tecno Spark 50 Pro को भारत समेत ग्लोबल मार्केट में जल्द सेल के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। इस फोन को ब्लैक, टाइटेनियम ग्रे, मिडनाइट ब्लू, डायनैमिक ऑरेंज और क्लाउड व्हाइट कलर में पेश किया गया है। फोन का लुक और डिजाइन में iPhone 17 Pro वाली फील देने की कोशिश की गई है। हालांकि, फोन के बैक पैनल के कैमरा का डिजाइन Realme 16 से इंस्पायर्ड लग रहा है।
Tecno Spark 50 Pro के फीचर्स
इस बजट स्मार्टफोन में 6.78 इंच का डिस्प्ले दिया गया है, जो HD+ रेजलूशन को सपोर्ट करेगा। फोन का डिस्प्ले 120Hz रिफ्रेश रेट और हाई ब्राइटनेस को सपोर्ट करता है। यह MediaTek Helio G100 Ultimate चिपसेट पर काम करता है। कंपनी का दावा है कि यह 4G चिपसेट परफॉर्मेंस के मामले में जबरदस्त है और इसे AnTuTu पर 5,50,000 का स्कोर प्राप्त हुआ है। हालंकि, कंपनी ने फोन के रैम के बारे में कोई जानकारी शेयर नहीं की है।
| Tecno Spark Pro | फीचर्स |
| डिस्प्ले | 6.78 इंच, HD+ |
| प्रोसेसर | MediaTek Helio G100 Ultimate |
| स्टोरेज | पता नहीं |
| कैमरा | 50MP, 8MP |
| बैटरी | 6000mAh, 60W |
| OS | Android 16, HiOS |
Tecno का यह फोन Android 16 पर बेस्ड HiOS पर काम करता है। इसमें AI पावर्ड टूल्स और Ella एआई एजेंट दिया गया है। इसमें AI Writing, AI Noise cancellation, AI Eraser 2.0 और AI Extender जैसे फीचर्स मिलते हैं। इसमें लाइव फंक्शनैलिटी और यूनिवर्सल टोन इमेजिंग टेक्नोलॉजी जैसे फीचर्स भी दिए गए हैं।
यह फोन 5,600mAh या 6,000mAh बैटरी के साथ आता है। इसमें 60W फास्ट चार्जिंग सपोर्ट मिलेगा। कंपनी का दावा है कि यह बजट फोन महज 30 मिनट में 63 प्रतिशत तक चार्ज हो जाता है। इसके अलावा फोन में बाईपास चार्जिंग फीचर भी दिया गया है। फोन के बैक में 50MP का मेन कैमरा दिया गया है। इसके अलावा इसमें 8MP का सेल्फी कैमरा मिलेगा।
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एक रात में फाइनल हुईं 2 फिल्में, एक ब्लॉकबस्टर-दूसरी निकली कल्ट हिट, उतर गईं दिल में
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बॉलीवुड के लीजेंड सिंगर किशोर कुमार 60 के दशक में सिर्फ देवानंद के लिए प्लेबैक सिंगिंग किया करते थे. बहुत ही मूडी इंसान थे. संगीतकार एसडी बर्मन उन्हें बहुत चाहते थे. एक बार किशोर दा ने एसडी बर्मन के जटिल गाने की स्टाइल बदल दी. ऐसी सुरीली ट्यून बनाई कि गाना अमर हो गया. गाना इतना पॉप्युलर हुआ कि सरकारी विज्ञापनों में खूब दिखाया गया. गान प्रेम-प्यार का प्रतीक बन गया. फिल्म ने इतिहास रच दिया. मूवी हिंदी सिनेमा के लिए मील का पत्थर साबित हुई. खुद किशोर कुमार रातोंरात इस फिल्म की वजह से स्टार बने. इस फिल्म की कहानी एक रात में फाइनल हुई थी. उस रात एक और फिल्म फाइनल हुई थी.
Rajesh khanna Hit Movies : कुछ फिल्में दर्शकों के दिल में बस जाती हैं. कहानी इतनी मर्मस्पर्शी होती है कि बार-बार देखने पर भी दिल नहीं भरता. ऐसी फिल्में हर बार नई फीलिंग देती हैं. 57 साल ऐसी ही एक फिल्म सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी. इस फिल्म का एक ब्लॉकबस्टर गाना किशोर कुमार ने अपनी ही स्टाइल में गाया था. संगीतकार एसडी बर्मन ने जो धुन बनाई थी, उसे बदलकर अनोखे अंदाज में गाया. किशोर कुमार ने इतनी सुरीली धुन बनाई कि गाना अमर हो गया. वो गाना था ‘रूप तेरा मस्ताना, प्यार मेरा दीवाना’. गाना 7 नवंबर 1969 को रिलीज ‘आराधना’ फिल्म का था. इसी फिल्म ने किशोर कुमार को रातोंरात स्टार बनाया. इसी फिल्म से हिंदी सिनेमा को सही मायने में अपना पहला सुपरस्टार राजेश खन्ना के रूप मिला.

‘आराधना’ फिल्म का डायरेक्शन-प्रोडक्शन शक्ति सामंत ने किया था. फिल्म में राजेश खन्ना-शर्मिला टैगोर लीड रोल में थे. इसके अलावा, सुजीत कुमार, फरीदा जलाल और किशोर कुमार के बड़े भाई अशोक कुमार अहम भूमिकाओं में थे. फिल्म की कहानी सचिन भौमिक ने लिखी थी. यह कहानी 1946 में आई अमेरिकन फिल्म टू ईच हिज ओन (To Each His Own) से इंस्पायर्ड थी. सचिन ने यह कहानी सबसे पहले ऋषिकेश मुखर्जी को सुनाई थी. जब ऋषिकेश दा इस फिल्म को नहीं बना पाए तो सचिन ने यही कहानी शक्ति सामंत को सुनाई. पहले इस फिल्म का टाइटल ‘सुबह प्यार की’ था. एसडी बर्मन के कहने पर टाइटल बदला गया.

फिल्म का म्यूजिक एसडी बर्मन ने दिया था और गीतकार आनंद बख्शी थे. आरडी बर्मन ने म्यूजिक बनाने में बहुत मदद की थी. फिल्म में कुल 7 गाने थे. हर गाना सुपरहिट था. फिल्म का म्यूजिक उस दशक का सबसे ज्यादा बिकने वाला संगीत था. फिल्म के पॉप्युलर गाने थे : रूप तेरा मस्ताना, मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू, कोरा कागज था ये मन मेरा, चंदा है तू मेरा सूरज है तू, सफल होगी तेरी आराधना, गुन गुना रहे हैं भंवरे और बागों में बहार है. ‘रूप तेरा मस्ताना’ गाने की सुरीली धुन बनाने में किशोर कुमार ने अहम भूमिका निभाई थी.
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किशोर कुमार के बेटे अमित कुमार ने एक स्टेज शो ‘रूप तेरा मस्ताना’ गाने का किस्सा सुनाया था. उन्होंने बताया था पहले इस गाने की धुन बहुत ही अजीब सी थी. गाना बहुत ही कठिन था. जब संगीतकार एसडी बर्मन इस गाने की धुन सिखा रहे थे तो किशोर दा को ट्यून पसंद नहीं आई. गाना बहुत ही धीमा था. किशोर कुमार को उसी समय एसडी बर्मन का पुराना गाना याद आया जो इसी धुन से मिलता-जुलता था. किशोर कुमार ने एसडी बर्मन को उनका बंगाली गाना याद दिलाया. यह गाना था ‘एतो कछे दूजने, प्रेम भरा जो बूने, होथट भूले भूल ना होय जाए.’ गाना सुनते ही बर्मन दा खुश हो गए.

‘आराधना’ फिल्म का निर्माण कैसे हुआ, इसकी कहानी भी बहुत दिलचस्प है. आखिरी समय में इस फिल्म की कहानी बदलनी पड़ी थी. दरअसल, डायरेक्टर-प्रोड्यूसर शक्ति सामंत, लेखक गुलशन नंदा और मधुसूदन कालेलकर के साथ फेमस स्टूडियो में बैठे थे. इसी दौरान अनिल कपूर के पिता प्रोड्यूसर सुरेंद्र कपूर वहां पहुंचे और अपनी फिल्म ‘एक श्रीमान, एक श्रीमती’ की आखिरी रील देखने का अनुरोध किया. इस फिल्म का आखिरी हिस्सा देखकर शक्ति सामंत के होश उड़ गए. दरअसल ‘एक श्रीमान, एक श्रीमती’ का आखिरी हिस्सा ‘आराधना’ की कहानी से हूबहू मेल खाता था. दोनों फिल्मों के राइटर सचिन भौमिक ही थे. शक्ति सामंत सचिन भौमिक से बहुत नाराज हुए और परेशान भी हुए.

उन्होंने गुलशन नंदा से मदद मांगी. ‘आराधना’ की कहानी सुनने के बाद हीरो का डबल रोल करने का सुझाव दिया. शक्ति सामंत को सुझाव पसंद आया. फिल्म का क्लाइमैक्स फिर से कई बदलाव के साथ लिखा गया. गुलशन नंदा ने ‘कटी पतंग’ की कहानी भी शक्ति सामंत को सुनाई थी. इस तरह से एक ही रात में दोनों फिल्मों की स्क्रिप्ट फाइनल हुई. दोनों फिल्में दो साल के अंतराल में बॉक्स ऑफिस पर रिलीज हुईं. आराधना 7 नवंबर 1969 को रिलीज हुई थी जबकि 29 जनवरी 1971 को सिनेमाघरों में आई थी. आराधना ने रिलीज होते ही इतिहास रच दिया. कटी पतंग को भी दर्शकों ने खूब पसंद किया. यह हिट फिल्म साबित हुई.

‘मेरे सपनों की रानी कब आएगी तू’ गाने का किस्सा भी दिलचस्प है. दरअसल, इस गाने के रिद्म एक गिटारिस्ट नहीं बजा पाया. उधर, शक्ति सामंत पूरी टीम के साथ दार्जलिंग में थे. गाने का इंतजार था. ऐसे में आरडी बर्मन ने गिटार की जगह माउथ ऑर्गन बजाया था. गाना तो सुपरहिट बना ही, इसका हर म्यूजिक पीस पॉप्युलर हुआ. ‘आराधना’ शक्ति सामंत के साथ राजेश खन्ना की पहली फिल्म थी. इस फिल्म से ही राजेश खन्ना रातोंरात सुपरहिट बने. राजेश खन्ना-शर्मिला टैगोर की साथ में यह पहली फिल्म थी. फिल्म का नेट कलेक्शन 3.5 करोड़ रुपये के आसपास था. फिल्म ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी. यह 1969 की सबसे ज्यादा पैसे कमाने वाली फिल्म थी. फिल्म को तीन फिल्मफेयर अवॉर्ड मिले थे. बेस्ट फिल्म शक्ति सामंत, बेस्ट एक्ट्रेस शर्मिला टैगोर और बेस्ट प्लेबैक मेल सिंगर किशोर कुमार ‘रूप तेरा मस्ताना’ के फिल्मफेयर अवॉर्ड मिले थे.

उधर, ‘कटी पतंग’ की बात करें तो इस फिल्म ने राजेश खन्ना के स्टारडम को एक अलग मुकाम दिया. ‘कटी पतंग’ नायिका प्रधान फिल्म थी. राजेश खन्ना, आशा पारेख, प्रेम चोपड़ा, बिंदु और नाजिर हुसैन जैसे सितारों ने अपनी एक्टिंग का जलवा बिखेरा था. कहानी गुलशन नंदा की थी. वृजेंद्र गौड़ ने डायलॉग लिखे थे. फिल्म की कहानी 1948 में आए कॉर्निल वूलरिच के उपन्यास ‘आई मैरिड ए डेड मैन’ से इंस्पायर्ड थी. म्यूजिक आरडी बर्मन का था. इस फिल्म का म्यूजिक भी ब्लॉकबस्टर रहा था. इस फिल्म के सुपरहिट गाने ‘प्यार दीवाना होता है, मस्ताना होता है’, ‘ये शाम मस्तानी, मदहोश किए जा’, ‘ये जो मुहब्बत है, उनका है काम’ ‘ना कोई उमंग है, ना कोई तरंग है’ थे. गीतकार आनंद बख्शी थे. फिल्म मैसिव हिट साबित हुई थी.
अमेरिका में मिलने वाले प्रति घंटा वेतन में गिरावट जारी: मध्यम वर्ग की आय धीमी गति से बढ़ रही, एआई से भी बढ़ी समस्या
अमेरिकी अर्थव्यवस्था इस समय एक विरोधाभास से गुजर रही है, जहां एक ओर अरबपतियों की संपत्ति नई ऊंचाइयों पर पहुंच रही है, वहीं आम वर्कर्स बढ़ती महंगाई और भविष्य की अनिश्चितताओं से जूझ रहे हैं। पिछले सप्ताह इसकी झलक दो घटनाओं में दिखाई दी। बुधवार को लेबर ब्यूरो ने बताया कि ऊर्जा कीमतों(बिजली, पेट्रोल, गैस, डीजल) में बढ़ोतरी ने औसत अमेरिकी कर्मचारी की पिछले डेढ़ साल की वास्तविक वेतन वृद्धि लगभग खत्म कर दी। वहीं शुक्रवार को स्पेसएक्स के आईपीओ के बाद इलॉन मस्क दुनिया के पहले खरबपति बन गए। अर्थशास्त्रियों गैब्रियल जकमैन और इमैनुएलसाएज के अनुसार, 19वीं सदी के उत्तरार्ध के तथाकथित “गिल्डेड एज’ में सबसे अमीर अमेरिकियों की संपत्ति देश के वार्षिक आर्थिक उत्पादन के लगभग 3% के बराबर थी। आज अमेरिका के शीर्ष 0.00001% यानी लगभग 20 लोगों की संपत्ति राष्ट्रीय उत्पादन (अमेरिकी कंपनियों द्वारा अमेरिका और अन्य देशों में सालाना किया जाने वाला उत्पादन ) के 12% तक पहुंच चुकी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अमेरिकी इतिहास में शीर्ष स्तर पर संपत्ति का इतना बड़ा केंद्रीकरण पहले कभी नहीं देखा गया। हार्वर्ड विश्वविद्यालय की प्रोफेसर स्टीफेनी स्टेंटचेवा केअनुसार, शेयर बाजार में लगातार उछाल ने लोगों में यह भावना पैदा की है कि आर्थिक व्यवस्था कुछ चुनिंदा लोगों के लिए अधिक काम कर रही है। हालांकि आधे से अधिक अमेरिकी परिवार प्रत्यक्ष रूप से या रिटायरमेंट फंड के माध्यम से शेयर बाजार में निवेश रखते हैं और उन्हें भी लाभ मिला है, लेकिन फेडरल रिजर्व के आंकड़े बताते हैं कि पिछले दशक में मध्यम वर्ग की संपत्ति अमीरों की तुलना में कहीं धीमी गति से बढ़ी है। ईरान से जुड़े तनाव और ऊर्जा कीमतों में उछाल के कारण मई में अमेरिका की मुद्रास्फीति तीन वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंच गई थी। महंगाई को समायोजित करने के बाद प्रति घंटे मिलने वाला वास्तविक वेतन लगातार तीन महीनों से घट रहा है। नतीजतन, ट्रम्प के मौजूदा कार्यकाल के शुरुआती दौर में हुई वेतनवृद्धि का बड़ा हिस्सा खत्म हो गया है। अमेरिकी परिवार पहले ही कोविड-19 महामारी,चार दशक की सबसे ऊंची महंगाई, ऊंची ब्याज दरों, टैरिफ और मंदी की आशंकाओं का सामना कर चुके हैं। अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस(एआई) एक नई चिंता बनकर उभरा है। कई तकनीकी कंपनियों के प्रमुख चेतावनी दे चुके हैं कि एआई आने वाले वर्षों में अनेक श्रेणियों की नौकरियों को प्रभावित कर सकता है। कोलंबिया बिजनेस स्कूल के अर्थशास्त्री ग्लेन हबार्ड का कहना है कि जब तकनीकी कंपनियां स्वयं यह संदेश देती हैं कि उनकी तकनीक लोगों की नौकरियां खत्म कर सकती है, तो उसके खिलाफ प्रतिक्रिया स्वाभाविक है। इसी वजह से अमेरिका में आर्थिक असमानता, सुपररिच वर्ग के बढ़ते प्रभाव और आम लोगों की आर्थिक सुरक्षा को लेकर बहस पहले से अधिक तेज हो गई है। महंगाई बढ़ने के साथ कमाई घटी – अमेरिका में महामारी के बाद महंगाई चार दशक में सबसे अधिक हो गई । – राष्ट्रीय आय में वर्कर्स के हिस्से में लगातार गिरावट। – अमीरों की तुलना में मध्यमवर्ग की संपत्ति में बढ़ोतरी की गति धीमी। – लंबे समय तक महंगाई रहने से कंज्यूमर खर्च से बचते हैं। – प्रति घंटा वेतनों में तीन माह से गिरावट जारी। एआई कंपनियों के कई बड़े आईपीओ आएंगे टेक कंपनियों को अभी हाल में शेयर मार्केट की तेजी से फायदा हुआ है। स्पेसएक्स के बाद एआई कंपनियों के बड़े-बड़े आईपीओ की श्रृंखला आ सकती है। महंगाई और आय में गिरावट की चिंता के बीच एआई में उछाल से लोगों का अमीरों की संपत्ति में बढ़ोतरी से असहज होना असामान्य नहीं है। कम आय वालों को करना पड़ रहा संघर्ष अर्थशास्त्रियों के अनुसार महंगाई के दौर से कंज्यूमर का आर्थिक व्यवहार लंबे समय तक प्रभावित रहता है। यह उनके बजट पर बोझ के साथ अनुचित भी है, क्योंकि अमीर लोग तो महंगाई का सामना अपेक्षाकृत आसानी से कर लेते हैं जबकि कम आय वाले परिवारों को संघर्ष करना पड़ता है। कई अमेरिकी राज्यों में डेटा सेंटरों का विरोध सर्वेक्षणों के अनुसार कई वर्कर्स करिअर पर एआई टेक्नोलॉजी के पड़ने वाले प्रभाव के बारे में चिंतित हैं। अमेरिका के कई राज्यों में वोटर अपने इलाके में डेटा सेंटरों के निर्माण पर विरोध जता चुके हैं। वे अपने बिजली के बिल, पानी सप्लाई और हवा की क्वालिटी पर इसके असर की बात कह रहे हैं।
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यूपी सहित 13 राज्यों का भरा है खजाना, 15 स्टेट में खर्चे पूरे करने के भी पैसे नहीं
नई दिल्ली. देश के 28 राज्यों में से 10 के पास तो अपने खर्चे पूरे करने के बाद भी ठीकठाक राजस्व बचता है, लेकिन बाकी 18 राज्यों के पास इतने भी पैसे नहीं हैं कि अपना खर्चा भी पूरा किया जा सके. भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक (कैग) के संजय मूर्ति ने अपनी हालिया रिपोर्ट में बताया है कि उत्तर प्रदेश, गुजरात, झारखंड, मणिपुर सहित 13 राज्यों ने 2024-25 में राजस्व सरप्लस दर्ज किया, जबकि बाकी 15 राज्यों में घाटा रहा.
कैग की ‘राज्य वित्त 2024-25’ रिपोर्ट के अनुसार, 18 राज्यों ने रेवेन्यू सरप्लस का लक्ष्य रखा था, 3 राज्यों ने राजस्व घाटे का लक्ष्य रखा और 7 राज्यों ने शून्य राजस्व घाटे का लक्ष्य रखा था. अब रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि वित्त वर्ष 2024-25 में 15 राज्य राजस्व घाटे में रहे, जबकि बाकी 13 राज्यों में रेवेन्यू सरप्लस रहा. 18 राज्यों में से जिन्होंने रेवेन्यू सरप्लस का लक्ष्य रखा था, 9 राज्य ही इसे हासिल कर पाए. इसके अलावा असम, बिहार, छत्तीसगढ़, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मिजोरम और तेलंगाना 2024-25 के दौरान राजस्व घाटे में रहे.
7 राज्यों ने रखा था शून्य घाटे का लक्ष्य
रिपोर्ट में उन 7 राज्यों का भी जिक्र किया गया, जिन्होंने शून्य राजस्व घाटे का लक्ष्य रखा था. इन राज्यों में गोवा, झारखंड, पंजाब, राजस्थान, तमिलनाडु, त्रिपुरा और उत्तर प्रदेश शामिल हैं. इनमें से चार राज्यों गोवा, झारखंड, त्रिपुरा और उत्तर प्रदेश ने रेवेन्यू सरप्लस हासिल कर लिया, जबकि पंजाब, राजस्थान और तमिलनाडु को राजस्व घाटा हुआ. 2024-25 में जिन 15 राज्यों में राजस्व घाटा रहा, उनमें हिमाचल प्रदेश, मिजोरम, पंजाब और पश्चिम बंगाल को वित्त आयोग से राजस्व घाटा अनुदान मिला.
कितना रहा राजस्व घाटा
रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि यदि 2024-25 के लिए पंद्रहवें वित्त आयोग द्वारा राज्यों के लिए निर्धारित सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के 3 फीसदी के संकेतक राजकोषीय घाटा लक्ष्य को देखा जाए, तो 18 राज्य इस लक्ष्य से ऊपर रहे. 15 राजस्व घाटे वाले राज्यों का कुल राजस्व घाटा 13 राज्यों के रेवेन्यू सरप्लस को मिलाए बिना ही 3,46,385 करोड़ रुपये रहा, जो उनके संयुक्त GSDP का 1.5 फीसदी है. 13 राज्यों के रेवेन्यू सरप्लस को समायोजित करने के बाद शुद्ध राजस्व घाटा 2,19,041 करोड़ रुपये रहा, जो सभी 28 राज्यों के संयुक्त GSDP का 0.68 फीसदी है.
राज्यों ने कितना पैसा जुटाया
कैग ने अपनी रिपोर्ट में राज्यों के रेवेन्यू की बढ़ती अहमियत को दिखाया, जो 2024-25 में 28 राज्यों की कुल राजस्व प्राप्तियों 40.52 लाख करोड़ रुपये का 50 फीसदी रहा. इस दौरान राज्य जीएसटी राज्यों के अपने कर राजस्व का 43 फीसदी से अधिक रहा है. सभी राज्यों का संयुक्त बजटीय खर्च 2024-25 में 51.20 लाख करोड़ रुपये रहा, जो उनके संयुक्त GSDP का 15.78 फीसदी है. आंकड़े बताते हैं कि वेतन, पेंशन और ब्याज भुगतान अब भी राजस्व खर्च का बड़ा हिस्सा बने हुए हैं. 31 मार्च 2025 तक राज्यों की कुल देनदारियां 90.51 लाख करोड़ रुपये थीं.

