जालोर में एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स (एएनटीएफ) और स्थानीय पुलिस ने भारतमाला हाईवे पर हरियाली गांव की सरहद में एक स्विफ्ट कार से 425 ग्राम एमडी (मेफेड्रोन) बरामद किया। कार में सवार 3 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। कार को पुलिस ने जब्त कर लिया। पुलिस के अनुसार- एएनटीएफ टीम को सूचना मिली थी कि दो-तीन व्यक्ति स्विफ्ट कार में डावल गांव की ओर से हरियाली क्षेत्र में किसी व्यक्ति को अवैध मादक पदार्थ की सप्लाई देने आने वाले हैं। सूचना की पुष्टि के बाद टीम ने दो अलग-अलग दल बनाकर जोधपुर और सांचौर की ओर से निगरानी शुरू की। कार्रवाई के दौरान भारतमाला हाईवे के पास हरियाली की सरहद में संदिग्ध स्विफ्ट कार दिखाई दी। कार में सवार तीनों युवक नीचे उतरकर किसी का इंतजार कर रहे थे। पुलिस टीम के पहुंचते ही तीनों भागने लगे, लेकिन घेराबंदी कर उन्हें पकड़ लिया गया। इसके बाद स्थानीय पुलिस को मौके पर बुलाकर कार की तलाशी ली गई, जिसमें 425 ग्राम एमडी बरामद हुई। पुलिस ने मादक पदार्थ के साथ स्विफ्ट कार को जब्त कर तीनों आरोपियों के खिलाफ एनडीपीएस एक्ट के तहत मामला दर्ज किया। गिरफ्तार आरोपियों में डावल निवासी सुरेश कुमार उर्फ लाखाराम, हिन्डवाड़ा निवासी श्रवण (21) और डावल निवासी अशोक (24) शामिल हैं। पुलिस आरोपियों से मादक पदार्थ के स्रोत और सप्लाई नेटवर्क के संबंध में पूछताछ कर रही है।
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Palamu Sonu Farming Story: डिग्री हाथ में आते ही जहां युवा बड़े शहरों की ओर नौकरी के लिए भागते हैं. वहीं पलामू के खामडीह निवासी सोनू कुमार गुप्ता ने खेती को ही अपना फुल-टाइम करियर बना लिया. साल 2018 में ग्रेजुएशन पूरी करने के बाद सोनू ने नौकरी की अंधी दौड़ में शामिल होने के बजाय सब्जी उत्पादन का रुख किया, जिसने आज उनके परिवार की किस्मत बदल दी है. पहले उनका परिवार पारंपरिक रूप से सिर्फ धान-गेहूं उगाता था. जिसमें अपेक्षित लाभ नहीं मिल रहा था. सोनू ने इस ढर्रे को बदला और करीब डेढ़ एकड़ भूमि पर करैला, नेनुआ, झिंगी, कद्दू और खीरा जैसी मौसमी सब्जियों की खेती शुरू की. आज वे तमाम लागत निकालकर सालाना 3 से 4 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रहे हैं. अब सोनू का अगला लक्ष्य ‘ट्रिपल लेयर’ (मल्टीलेयर) फार्मिंग जैसे आधुनिक वैज्ञानिक मॉडल को अपनाना है, ताकि एक ही जमीन से तीन गुना उत्पादन लिया जा सके. हालांकि, पलामू में बिजली संकट के कारण सिंचाई एक बड़ी बाधा है. सोनू का कहना है कि अगर सरकार से उन्हें सोलर पंप का सहयोग मिल जाए, तो वे लागत घटाकर इस मॉडल को नई ऊंचाइयों पर ले जा सकते हैं.












