खुद को IAS अफसर बताकर 3 नाबालिग स्टूडेंट्स बहनों से दरिंदगी के आरोपी उम्मेदाराम ने कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। नाबालिग बच्चियों को झांसे में लेने और अफसर जैसा रौब दिखाने के लिए उसने पेट्रोल पंप और जमीन बेचकर नई कार खरीदी।
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मासूमों को टारगेट करने के लिए जोधपुर के कोचिंग ऐरिया में कार से चक्कर काटता। किसी तरीके से नंबर हासिल कर उन्हें सरकारी नौकरी लगवाने का झांसा देता।
एक पीड़ित को उसने कहा- तुम बहुत खूबसूरत हो, तुम्हें एयरहोस्टेस बनवा दूंगा। वहीं, दूसरी को RPSC में बिना एग्जाम-इंटरव्यू के नौकरी लगवाने का झांसा देकर ज्यादती की।
47 साल का अरोपी उम्मदेराम की नशे और अय्याशी की लत के चलते पत्नी भी घर छोड़कर चली गई थी। वहीं, परिवार के लोगों (भाई) ने भी उससे रिश्ता तोड़ रखा है। संडे बिग स्टोरी में पढ़िए- फर्जी आईएएस के काले कारनामों का सच…।
आरोप है कि आरोपी ने नाबालिग की दो बहनों के साथ भी ज्यादती की।
सबसे पहले पढ़िए- कैसे सामने आया मामला
जोधपुर ईस्ट डीसीपी मनीष चौधरी ने बताया कि 26 जुलाई को एक पीड़ित ने मुकदमा दर्ज करवाया था। उसमें बताया कि साल 2024 में उसे एक अनजान नंबर से फोन आया।
कॉल करने वाले ने खुद को IAS अधिकारी बताया और बोर्ड परीक्षा में नंबर बढ़वाने का लालच दिया। इस बहाने मिलने के लिए मजबूर किया और होटल ले जाकर उसके साथ रेप किया।
इसके बाद आरोपी ने उसकी दो रिश्तेदार बहनों से भी इसी तरह झांसा देकर ज्यादती की।
कार में बैठते ही आरोपी को पकड़ा
पीड़ित के पास आरोपी की फोटो, घर का एड्रेस और उसकी ब्रेजा कार के नंबर थे। पुलिस ने इन सभी फैक्ट्स के साथ आरोपी की तलाश में दबिश दी। मगर न तो वो खुद मिला और न ही उसकी कार।
इसी बीच 28 जुलाई को इंफॉर्मेशन मिली कि जिस गाड़ी की पुलिस को तलाश है, उन नंबरों की एक लाल पट्टी लगी कार किसी दूसरी लोकेशन पर खड़ी है।
पुलिस वहां पहुंची तो कार वहीं खड़ी मिली, मगर आरोपी वहां नहीं था। पुलिस ने इंतजार किया। करीब दो घंटे बाद जैसे ही एक शख्स आकर कार में बैठा तो उसे दबोच लिया। ये वही राज उदावत था, जिसकी फोटो पीड़ित ने पुलिस को दी थी।
IAS बताने वाला निकला नशेड़ी
पुलिस पूछताछ में खुलासा हुआ कि न तो उसका नाम राज उदावत है और न ही वो कोई IAS अफसर है। लोहावट के सदरी गांव का उम्मेदाराम बिश्नोई है।
नशा करने का आदी है। उसके दो बेटियां हैं और वह नाना भी बन चुका है। महज बीए पास उम्मेदाराम गांव में अच्छी जमीन-जायदाद होने के बाद भी जोधपुर शहर में किराए का मकान लेकर रह रहा था।
लोगों पर रौब झाड़ने और टोल फ्री करवाने के लिए कई RAS व IAS अधिकारियों के फर्जी आइडेंटिटी कार्ड तक बनवा रखे थे। इन कार्डों की बदौलत वह कई बार टोल फ्री करवा चुका था।
कोचिंग ऐरिया में कार से चक्कर काटता, स्टूडेंट्स को बनाता शिकार
पुलिस पड़ताल में सामने आया कि उम्मेदाराम ने जोधपुर में अय्याशी करने के लिए प्रॉपर्टी और एक पेट्रोल पंप बेच दिया। उन पैसों से साल 2024 में एक नई ब्रेजा कार खरीदी।
अपनी कार लेकर लाइब्रेरी, कोचिंग ऐरिया और गर्ल्स कॉलेज के बाहर चक्कर काटता था। चाय की थड़ियों, ईमित्र और फोटो स्टेट की दुकानों पर घंटों बैठकर लड़कियों को घूरता।
उनसे बात कर कॉन्टैक्ट नंबर मांगता। इसी दौरान उसे एक प्रतियोगी परीक्षा का फॉर्म भरने आई एक नाबालिग बच्ची का मोबाइल नंबर उसे मिला था।
आरोपी के कब्जे से मिले फर्जी कार्ड। एक कार्ड में उसने खुद को राज्य प्रशासनिक सेवा का अफसर दिखा रखा है।
रौब दिखाने के लिए कमिश्नरेट-कलेक्ट्रेट में कटवाए चक्कर
उम्मेदाराम ने पहली बार उस नाबालिग पीड़िता के नंबर पर कॉल किया। खुद को IAS अधिकारी राज उदावत बताते हुए कहा कि वो प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले बच्चों की मदद करता है।
उसने बताया कि उसकी पहुंच ऊपर तक है और सरकारी नौकरी लगवा देगा। झांसा देकर दोस्ती और जान-पहचान कर ली। इसके बाद वो उसे अक्सर अपनी कार में बैठा कर बड़े-बड़े सरकारी दफ्तरों में ले कर जाता।
पुलिस पड़ताल में सामने आया आरोपी पीड़ित को कई बार जोधपुर कलेक्ट्रेट और कमिश्नरेट परिसर लेकर गया था। इससे पीड़ित को ये विश्वास हो गया था कि वह IAS ही है और उसकी सरकारी नौकरी लगवा देगा।
अप्रैल 2024 में उम्मेदाराम पीड़ित को एक होटल में ले गया और वहां ज्यूस में नशा मिलाकर बेहोशी की हालत में उसके साथ ज्यादती की। कई बार ऐसा ही किया।
आरोपी कार की नंबर प्लेट पर लाल पट्टी लगवाकर रखता था, जो सरकारी अफसरों की गाड़ियों पर ही इस्तेमाल होती है।
पीड़ित की दो बहनों को भी बनाया शिकार
साल 2026 में उम्मेदाराम की मुलाकात पीड़ित की बुआ की 2 नाबालिग बेटियों से हुई। उन्हें भी उम्मेदाराम ने खुद को IAS राज उदावत उर्फ अक्की नाम ही बताया।
मौका पाकर एक से कहा- आप तो बहुत सुंदर हो, मैं आपको एयर होस्टेस बनवा दूंगा…डायरेक्टरेट जनरल ऑफ़ सिविल एविएशन (DGCA) में मेरे कई बैचमेट हैं।
दोनों मासूम बच्चियां भी उसके झांसे में आ गईं। दोनों को अलग-अलग दिन बहला फुसलाकर वो अपने किराए के घर में ले गया और ज्यादती की।
इसी तरह उम्मेदाराम ने दूसरी बहन को भी झांसे में लिया। उससे कहा कि RPSC में उसकी अच्छी जान पहचान है। बिना एग्जाम और इंटरव्यू के नौकरी लगवा देगा।
एक दिन उम्मेदाराम ने उसे फोन कर कहा कि वह अजमेर RPSC में आया हुआ है और उसकी नौकरी की बात फाइनल हो गई है।
आरोपी ने उसे डॉक्यूमेंट वेरिफिकेशन के बहाने अजमेर बुला लिया। इसके बाद एक होटल में ले जाकर ज्यादती की और अपनी कार से जोधपुर छोड़ दिया।
अजमेर के होटल में आरोपी ने टिफिन से लड्डू निकाला और ‘प्रसाद’ बताकर छात्रा को खिला दिया।
तीनों बहनों ने बातचीत में खोला राज
काफी समय बीतने के बाद भी नौकरी नहीं लगी तो तीनों बहनों ने आपस में बातचीत शुरू की। इसी दौरान उन्हें खुद के साथ हुए इस धोखे का पता चला।
आखिरकार पहली पीड़ित ने एक रिश्तेदार को खुद के साथ हुई ज्यादती के बारे में बताया। इसके बाद बात घर तक पहुंची। पीड़ितओं के परिजनों ने हिम्मत जुटा कर जोधपुर के एक थाने में आरोपी फर्जी IAS के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया।
आरोपी के परिवार ने उससे रिश्ता तोड़ा
उम्मेदाराम के पिता गणपतराम विश्नोई की 6 साल पहले कोरोना के दौरान तबीयत बिगड़ने से मौत हो गई थी। सदरी गांव में अच्छी साख थी। पंचायत समिति सदस्य रह चुके थे।
देचू के पास कलाऊ गांव में एक पेट्रोल पंप, 2-3 ट्यूबवेल और अच्छी-खासी जमीन थी। बड़े बेटे उम्मेदाराम (बीए पास) की शादी रिटायर्ड पीडब्ल्यूडी एईएन की बेटी से कराई थी। दोनों की दो बेटियां हैं। एक की शादी हो चुकी है।
परिजनों और ग्रामीणों के अनुसार, उम्मेदाराम को शुरू से नशे और अय्याशी की लत थी। शादी के बाद भी कई महिलाओं से उसके संबंध रहे। वह ज्यादातर जोधपुर में रहता था।
इसी दौरान एक महिला ने मंडोर थाने में शादी का झांसा देकर दुष्कर्म का मामला दर्ज कराया था। छोटे भाई अशोक का दावा है कि उस केस में समझौते के लिए पिता को बड़ी रकम चुकानी पड़ी थी।
इसके बाद भी उम्मेदाराम की आदतें नहीं बदलीं। बाद में दोनों भाइयों के संबंध भी टूट गए।
पत्नी के छोड़कर जान के बाद भी उम्मेदाराम की आदतें नहीं बदलीं। इसे परेशान परिवार उससे अब कोई संबंध नहीं रखता।
हरकतों से परेशान पत्नी भी चली गई थी पीहर
ग्रामीणों के मुताबिक, उम्मेदाराम पत्नी के जाने के बाद दूसरी महिला के साथ लिव-इन में रहने लगा था। लेकिन वह भी कुछ समय बाद उसे छोड़कर चली गई। उसके खिलाफ मुंडवा, मंडोर, देचू और लोहावट थानों में दुष्कर्म, मारपीट समेत कई मामले पहले से दर्ज हैं।
रातानाड़ा सीआई मोहम्मद शफीक ख़ान ने बताया कि उम्मेदाराम को पहले मामले में गिरफ्तारी और पूछताछ के बाद 30 जुलाई को न्यायिक हिरासत में भेजा गया है। अब अन्य दो मामलों में पुलिस उसे फिर से गिरफ्तार कर पूछताछ की तैयारी में है।
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