अगर सिरदर्द आपको अक्सर परेशान करता है तो आपको इससे निपटने के लिए कुछ आदतों को सुधारना चाहिए। यहां रोजाना की उन 5 आदतों के बारे में बता रहे हैं जो सिरदर्द को ट्रिगर करती हैं।
बहुत सी महिलाएं और पुरुष रोजाना सिरदर्द होने की शिकायत करते हैं। वैसे तो ये एक कॉमन समस्या है लेकिन रोजाना इसका होना आपको परेशान कर सकते हैं। जब किसी व्यक्ति को सिरदर्द होता है तो ये अलग-अलग तरह से महसूस हो सकता है। जैसे कुछ लोगों को सिरदर्द होने पर सिर में हल्का भारीपन होता है। कभी किसी को तेज धड़कती हुआ दर्द होता है तो लवहीं कई बार आंखों के पीछे चुभन होने लगती है। जिन लोगों को माइग्रेन का दर्द होता है उन्हें सिर के आधे हिस्से में तेज दर्द होता है जो रुक-रुक कर होता है। इसमें उल्टी जैसा महसूस हो सकता है और तेज रोशनी या शोर से परेशानी का हो सकती है। महीने में कभी सिरदर्द होना एक कॉमन समस्या हो सकता है लेकिन अगर रोजाना ऐसा हो तो आपको कुछ आदतों को बदलने की जरूरत है। यहां 5 ऐसी कॉमन आदतों के बारे में बता रहे हैं जो सिरदर्द का कारण बनती हैं।
सिरदर्द ट्रिगर करने वाली 5 आदतें
1) खाना स्किप करना
जब भी कोई व्यक्ति खाना स्किप करता है या फिर देरी से खाना खाता है तो ब्लड शुगर लेवल कम हो जाता है, जो सिरदर्द खासतौर से माइग्रेन का कारण बनते हैं। नियमित गैप में पौष्टिक खाने से ऐसा होने से बचा जा सकता है।
2) पानी ना पीना
ये सबसे कॉमन आदतों में से एक है। जब आप दिनभर पानी नहीं पीते हैं या फिर कम पानी पीते हैं तो पानी की कमी हो सकती है। डिहाइड्रेशन सिरदर्द का सबसे आम कारण है। भले ही आप सही महसूस कर रहे हों लेकिन फिर भी पूरे दिन पर्याप्त मात्रा में पानी पिएं।
3) नींद से जुड़ी समस्याएं
बहुत कम या बहुत ज्यादा सोने से सिरदर्द हो सकता है। रोजाना सात से आठ घंटे सोना सबसे अच्छा है। रात के समय स्क्रीन ज्यादा देखने की वजह से भी सिरदर्द होने के चांस बढ़ता है। इस आदत से बचने में भलाई है।
4) बहुत ज्यादा स्क्रीन टाइम
मोबाइल या टैबलेट का बहुत देर तक इस्तेमाल करने से आंखों पर जोर पड़ता है, गर्दन की मांसपेशियों में खिंचाव और टेंशन से सिरदर्द हो सकता है। इससे बचने के लिए 20-20-20 रूल को फॉलो करे। इस रूल को अपनाने से हर 20 मिनट में, कम से कम 20 सेकंड के लिए 20 फीट दूर किसी चीज को देखें। बीच-बीच में ब्रेक लेने से इन समस्याओं से बचा जा सकता है।
5) कैफीन ज्यादा लेना या अचानक कॉफी छोड़ना
कम मात्रा में कैफीन सिरदर्द कम करने में मदद कर सकती है। लेकिन ज्यादा मात्रा या अचानक इसे छोड़ देने से सिरदर्द बढ़ सकता है। बेहतर है कि कैफीन का सेवन सीमित मात्रा में किया जाए और सिरदर्द से राहत के लिए इस पर निर्भर न रहा जाए।
इंदिरा नगर सेक्टर-सी में सीवर एवं पेयजल से संबंधित लगातार आ रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए सोमवार को मेयर सुषमा खर्कवाल ने जोन-7 क्षेत्र का औचक निरीक्षण किया। इसमें मौके पर अधिकारियों को फटकार लगाकर समय से काम पूरा करने का निर्देश दिया। मेयर ने सुनी शिकायत निरीक्षण के दौरान महापौर ने स्थानीय नागरिकों से संवाद कर उनकी समस्याएं सुनीं तथा सीवर जाम, पेयजल आपूर्ति और अन्य जनसुविधाओं से जुड़ी शिकायतों का तत्काल संज्ञान लिया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देशित किया कि क्षेत्र में चिन्हित सभी समस्याओं का दो दिनों के भीतर गुणवत्तापूर्ण समाधान सुनिश्चित करते हुए अनुपालन रिपोर्ट प्रस्तुत की जाए। उन्होंने स्पष्ट किया कि नागरिकों की मूलभूत सुविधाओं में किसी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जाएगी। पार्कों की दुर्दशा पर अधिकारियों को लगाई फटकार महापौर ने सेक्टर-सी में साफ-सफाई व्यवस्था का भी निरीक्षण किया। क्षेत्र में सफाई व्यवस्था तथा पार्कों की खराब स्थिति पर उन्होंने कड़ी नाराजगी व्यक्त करते हुए संबंधित अधिकारियों को फटकार लगाई। उन्होंने निर्देश दिए कि नियमित सफाई, कूड़ा उठान, हरित क्षेत्रों का समुचित रखरखाव तथा पार्कों की साफ-सुथरी एवं व्यवस्थित स्थिति सुनिश्चित की जाए, जिससे स्थानीय नागरिकों को बेहतर नागरिक सुविधाएं उपलब्ध हो सकें। महापौर ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि क्षेत्र में सभी विकास एवं जनसुविधा संबंधी कार्यों की नियमित निगरानी की जाए। प्राप्त शिकायतों का समयबद्ध एवं प्रभावी निस्तारण सुनिश्चित किया जाए। नागरिकों को गुणवत्तापूर्ण मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना नगर निगम की प्राथमिकता है।
किशनगंज में सार्वजनिक वितरण प्रणाली (पीडीएस) के तहत भेजे जाने वाले सरकारी अनाज की कथित हेराफेरी का एक वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन ने कार्रवाई की है। जिला प्रशासन ने ट्रांसपोर्टरों पर निर्धारित राशि का पांच गुना जुर्माना लगाने और संबंधित वाहन के चालक व खलासी के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए हैं। अनाज लदे वाहनों से राशन निकालने के आरोप यह मामला ठाकुरगंज-किशनगंज मुख्य सड़क पर टेंगरमारी सहित विभिन्न स्थानों पर अनाज लदे वाहनों को रोककर बोरे से राशन निकालने के आरोपों के बाद सामने आया था। दैनिक भास्कर में खबर प्रकाशित होने और सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होने के बाद जिला प्रशासन ने इस पर संज्ञान लिया। राज्य खाद्य निगम (एसएफसी) के जिला प्रबंधक मिथिलेश झा ने बताया कि वायरल वीडियो की जांच के बाद यह निर्णय लिया गया है। उन्होंने ट्रांसपोर्टरों पर जुर्माना वसूलने और एफआईआर दर्ज कराने के निर्देश जारी किए हैं। स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया था कि सरकारी गोदाम से निकलने वाले अनाज से लदे ट्रक और ट्रैक्टरों को पिपलाचौक, गाछपाड़ा चौक, टावर चौक, सालकी चौक और बेलवा चौक जैसे स्थानों पर रोका जाता था। वहां बोरे से थोड़ी-थोड़ी मात्रा में अनाज निकाला जाता था। लाभुकों को मिलने वाले अनाज पर असर-ग्रामीण ग्रामीणों का कहना था कि प्रत्येक वाहन से थोड़ी मात्रा में भी अनाज निकाला जाए तो कुल मिलाकर बड़ी मात्रा में सरकारी राशन की हेराफेरी संभव है, जिससे लाभुकों को मिलने वाले अनाज पर असर पड़ सकता है। प्रशासन की इस कार्रवाई के बाद पीडीएस आपूर्ति व्यवस्था की निगरानी और पारदर्शिता को लेकर एक बार फिर चर्चा तेज हो गई है। अब सभी की नजर आगे की जांच और संभावित कार्रवाई पर टिकी हुई है।
शहडोल जिले के देवलौंद थाना क्षेत्र के चचाई गांव में सोमवार को एक 24 वर्षीय युवक की मौत हो गई। युवक का चेहरा कम पानी में औंधे मुंह डूबा मिला, जिससे दम घुटने की आशंका जताई जा रही है। सूचना पर पुलिस ने शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भिजवाकर जांच शुरू कर दी है। पुलिस के अनुसार, मृतक की पहचान शैलेंद्र बैस (24) पुत्र सरजू बैस, निवासी केरहा टोला, चचाई के रूप में हुई है। युवक गांव के पास पानी भरे स्थान पर औंधे मुंह पड़ा मिला था। स्थानीय लोगों ने उसे देखा और बाहर निकालने का प्रयास किया, लेकिन तब तक उसकी मौत हो चुकी थी। देवलौंद थाना पुलिस को सूचना मिलते ही टीम मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पंचनामा कार्रवाई के बाद शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया। प्रारंभिक जांच में युवक के शरीर पर चोट के निशान नहीं मिले हैं। पुलिस को फिलहाल किसी आपराधिक या संदिग्ध परिस्थिति के साक्ष्य भी नहीं मिले हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार, मृतक की मानसिक स्थिति पिछले कुछ समय से ठीक नहीं बताई जा रही थी। हालांकि, पुलिस का कहना है कि सभी पहलुओं की जांच की जा रही है और प्रारंभिक जानकारी के आधार पर निष्कर्ष पर नहीं पहुंचा जा सकता। पुलिस का कहना है कि मौत का वास्तविक कारण पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। पुलिस जांच कर रही है कि युवक दुर्घटनावश पानी में गिरा या घटना के पीछे अन्य वजह है। परिजनों और आसपास के लोगों के बयान भी दर्ज किए जा रहे हैं। देवलौंद पुलिस ने मर्ग कायम कर मामले की विवेचना शुरू कर दी है।
आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ई-20 पेट्रोल के विरोध में जनता के पत्रों के साथ मंगलवार को प्रधानमंत्री आवास तक मार्च करेंगे। उन्होंने कहा कि वह दोपहर 12 बजे 100 लोगों के साथ आप मुख्यालय से पीएम आवास के लिए निकलेंगे। हमें उम्मीद है कि प्रधानमंत्री मिलेंगे और हमारी बात सुनेंगे। उन्होंने बताया कि मात्र कुछ दिनों में ही ई-20 के खिलाफ 2,33,238 लोगों ने ऑनलाइन प्रधानमंत्री के नाम याचिका साइन की है। मैंने पीएम से मिलने के लिए एक माह पहले समय भी मांगा था, लेकिन अब तक उनका जवाब नहीं मिला है। उन्होंने पीएम से पूछा कि क्या ट्रम्प के दबाव में जबरदस्ती देश पर इथेनॉल थोपा रहा है और अगले 5 साल में 20 बिलियन डॉलर का इथेनॉल खरीदेंगे। सोमवार को आप मुख्यालय पर प्रेस वार्ता कर केजरीवाल ने कहा कि एथेनॉल को लेकर देश की जनता बहुत ज्यादा परेशान है और केंद्र की मोदी सरकार जबरदस्ती लोगों पर एथेनॉल थोपे जा रही है। लोगों की माइलेज कम हो रही है और लोगों की गाड़ियां खराब हो रही हैं। इसके बावजूद बिना प्रश्नों के जवाब दिए और बिना कोई तर्क दिए सरकार इसे जबरदस्ती थोप रही है। इससे यह लगता है कि सरकार का कोई न कोई हिडन एजेंडा है। केजरीवाल ने कहा कि एक आरोप यह लगाया जा रहा है कि ट्रंप के दबाव में मोदी जी झुके हुए हैं। ट्रंप अपने देश का एथेनॉल जबरदस्ती भारत में आयात करवाना चाहते हैं। एक अनुमान के हिसाब से अगले 5 साल में मोदी जी 20 बिलियन डॉलर का एथेनॉल ट्रंप से खरीदेंगे, जो हमारे देश के ऊपर थोपा जाएगा। मोदी जी हमारे देश के लोगों की गाड़ियां खराब करना चाहते हैं। उन्होंने आगे कहा कि शनिवार को हमने ई-20 के खिलाफ टाउन हॉल किया था, वह बेहद सफल रहा। हॉल के अंदर और बाहर बहुत सारे लोग थे और लगभग 7 लाख लोग कार्यक्रम को लाइव देख रहे थे। मुझे लगता है कि यह दुनिया का रिकॉर्ड है कि कोई भी लाइव कार्यक्रम 7 लाख लोग ऑनलाइन देख रहे हों, यह दिखाता है कि लोग ई-20 से कितने ज्यादा परेशान हैं और किस तरह से टॉउनहॉल के सपोर्ट में आए हैं। फिर भी लोगों को बुरी तरह से डराया-धमकाया जा रहा है। अगर कोई इन्फ्लुएंसर, कंटेंट क्रिएटर, पीड़ित व्यक्ति ई-20 के खिलाफ आवाज उठाए, तो उसे ट्रोल करके और उस पर एफआईआर दर्ज कर डराया-धमकाया जाता है। इस वजह से लोग बहुत डरे हुए हैं। केजरीवाल ने बताया कि मंगलवार को वह प्रधानमंत्री को यह पिटीशन सौंपने के लिए 100 लोगों के साथ दोपहर 12 बजे आम आदमी पार्टी के कार्यालय से उनके घर की तरफ रवाना होंगे। हम चाहते हैं कि व्यक्तिगत तौर पर उनको ये पिटीशन सौंप कर आएं और उनसे चर्चा करें कि कैसे एथेनॉल गलत है और लोग किस तरह से परेशान हैं।
देहरादून में कहां मिलेंगे बेस्ट नूडल्स? जानिए बजट से लेकर प्रीमियम फूड स्पॉट
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देहरादून. आज देहरादून में जेन जी डिम्पलिंग पसंद करते हैं. लेकिन, आज से लगभग 20 साल पहले जब मोमो देहरादून में इतने ज्यादा नहीं प्रचलित थे तो उस समय लोग नूडल्स और चाउमीन के शौकीन थे यानी मिलेनियन लोग नूडल्स पसंद करते थे. अगर आप भी उन लोगों में से हैं जिन्हें नूडल्स खाना पसंद है तो देहरादून में कई ऐसे स्पॉट है जहां आप टेस्टी नूडल्स, चाऊमीन खा सकते हैं. आइए देखते है लोकेशन..
देहरादून में नूडल्स और चाउमीन का सफर दशकों पुराना है. आज से लगभग 20 साल पहले जब शहर में मोमो का खुमार इतना नहीं था तब मिलेनियल्स का सबसे पसंदीदा स्नैक स्ट्रीट-स्टाइल स्ट्रीट चाउमीन हुआ करती थी. समय बदला और जेन जी के दौर में डिम्पलिंग और मोमो की लोकप्रियता बढ़ी. लेकिन, नूडल्स का क्रेज कभी कम नहीं हुआ. आज दून में तिब्बती, कोरियन, जापानी और चाइनीज फ्लेवर्स से लेकर पुराने देसी-स्ट्रीट स्टाइल नूडल्स तक का जबरदस्त जायका मिलता है. अगर आप भी नूडल लवर हैं और पुराने दिनों को याद करते हैं तो देहरादून की कुछ खास जगहों पर स्वाद की हर वैरायटी का लुत्फ उठा सकते हैं.
अगर आप ऑथेंटिक जापानी रामेन और सूपी नूडल्स के शौकीन हैं तो राजपुर रोड स्थित ‘सोसोरू’ एक बेस्ट जगह है. यहां का माहौल आपको सीधे जापान और कोरिया वाइब्स देता है. यहां मिलने वाले हॉट स्पाइसी रामेन बाउल, मिसो ब्रॉथ नूडल्स और पैन-एशियन फ्लेवर्स बहुत पसंद किए जाते हैं. खर्चे की बात करें तो दो लोगों के खाने का औसत खर्च यहां लगभग 1 हजार से डेढ़ हजार के आसपास आता है.
देहरादून में एशियन और तिब्बती नूडल्स की बात हो तो क्लॉक टावर के पास स्थित ‘कलसंग’ का नाम सबसे पहले आता है. यहां का तिब्बती ‘थुकपा’, कोरियन ‘ज़ापचे’ और स्पाइसी हक्का नूडल्स बहुत फेमस हैं. यहां का लाल रंग का पारंपरिक एशियन इंटीरियर खाने के अनुभव को और भी खास बना देता है. यहां दो लोगों के खाने का बजट 500 रुपए से 800 रुपए के बीच रहता है.
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पैन-एशियन स्ट्रीट फूड और क्रीमी नूडल्स के लिए ‘मामागोटो’ देहरादून का एक प्रीमियम रेस्टोरेंट है. यहां के सिग्नेचर नूडल बाउल्स जैसे चिआंग माई ट्रेन स्टेशन नूडल्स, स्टिर-फ्राइड उडोन नूडल्स और चिकेन के साथ ही वेज रामेन बाउल्स फूड लवर्स के बीच काफी मशहूर हैं. यहां नूडल बाउल की कीमतें 699 रुपए से 849 रुपए के आसपास हैं और दो लोगों का औसत बिल 1,200 रुपए से 1, 500 रुपए तक आता है.
केदारपुरम चौक में स्थित ‘सारास रेस्टोरेंट’ अपने किफ़ायती और स्वादिष्ट देसी-चाइनीज नूडल्स के लिए जाना जाता है. यहां नूडल समेत चाइनीस फूड युवाओं की पसंद बने रहते हैं. यहां आप स्ट्रीट स्टाइल चाऊमीन भी खा सकते हैं. यहां आपको एक नहीं बल्कि अलग-अलग फ्लेवर में नूडल मिल जाएंगे. स्मोकी फ्लेवर्ड चाउमीन तो लोगों को बहुत पसंद आती है. यहां वेज नूडल्स 110 रुपए, शेजवान नूडल्स 140 रुपए, चिली गार्लिक नूडल्स 130 रूपय, हक्का नूडल्स 180 रूपये और स्पेशल चीज़ नूडल्स 200 रुपए में कई वैरायटी मिलती हैं. कम बजट में भरपेट और चटपटा स्वाद चाहने वालों के लिए यह एक पसंदीदा अड्डा है.
स्ट्रीट-स्टाइल सूपी नूडल्स और देसी चाउमीन के लिए जाखन स्थित ‘केसी सूप बार’ सालों से देहरादून के युवाओं का पसंदीदा स्पॉट रहा है. यहां मिलने वाला गरमा-गर्म वेज व नॉन-वेज सूपी नूडल्स और चटपटी फ्राइड चाउमीन सर्दियों व शाम के वक्त खूब बिकती है. यहां एक प्लेट नूडल्स और सूप की कीमत 100 से 200 रुपए के बीच होती है.
देहरादून के परेड ग्राउंड और कनक चौक के पास स्थित ‘काउंटडाउन’ देहरादून के सबसे पुराने और मशहूर चाइनीज फास्ट फूड सेंटर्स में से एक है. यहां की तीखी देसी स्टाइल वेज चाउमीन, चिकन चाउमीन और शेजवान नूडल्स का स्वाद दशकों से एक जैसा बना हुआ है. यहां वेजिटेबल से भरपूर तीखे स्पाइसी नूडल्स यहां हर उम्र के लोगों को पसंद आते हैं. यहां अगर आप आते हैं तो बजट में भी यह काफी अच्छा है. यहां दो लोगों के खाने का खर्च सिर्फ 300 से 500 रूपए के आसपास आता है.
देहरादून के एज्युकेशन हब करणपुर जैसे छात्र-बहुल इलाकों में छोटे तिब्बती और नेपाली स्टॉल्स और रेस्टोरेंट मौजूद है इन्हीं में से एक है. केटीएम फास्ट फूड जो डीएवी पीजी कॉलेज के पास ही है. यहां आपको असली हिमालयन नूडल्स जैसे मटन, वेज थेनथुक, सूपी थुकपा और स्ट्रीट-स्टाइल फ्राइड चाउमीन मिलती है. यह स्टूडेंट्स वाले एरिया में होने के कारण बजट फ्रेंडली सर्विस देता है. यहां आपको चाऊमीन नूडल्स के साथ ही झोल मोमो भी मिल जाएंगे. यहां नूडल्स की कीमत 80 से 160 रूपए प्रति प्लेट है.
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कम्युनिटी सोलर पैनल को खास तौर पर बड़े अपार्टमेंट्स और कमर्शियल कॉम्प्लेक्स के लिए डिजाइन किया गया है।
इसमें लोग अपने घर की छत पर बिना सोलर पैनल लगाए ही बिजली का इस्तेमाल कर सकते हैं।
इसके लिए लाइफटाइम या मंथली सब्सक्रिप्शन लेना पड़ता है।
सोलर पैनल से मिलने वाली बिजली को क्लिन एनर्जी के तौर पर जाना जाता है। लोग अपने घरों की छत पर सोलर पैनल लगाकर बिजली के भारी-भरकम बिल से निजात पाते हैं। हालांकि, एक ऐसा सोलर सिस्टम भी है, जिसमें लोगों को अपने घर की छत पर पैनल लगाए बिना सोलर वाली बिजली मिलती है। सरकार भी इसे बढ़ावा दे रही है ताकि डिस्कॉम यानी ट्रेडिशन बिजली की बचत की जा सके।
क्या है कम्युनिटी सोलर सिस्टम?
कम्युनिटी सोलर सिस्टम को अपार्टमेंट, कमर्शियल बिल्डिंग आदि में यूज किया जाता है। इसमें किसी एक व्यक्ति के घर की छत पर सोलर सिस्टम नहीं लगाया जाता है। इसमें बड़ी संख्यां में सोलर पैनल लगाए जाते हैं, जिससे मिलने वाली बिजली को कई घरों में इस्तेमाल किया जाता है। इसे एक साझा सौर उर्जा भी कहा जाता है। इसे एक सोलर डिस्ट्रीब्यूशन मॉडल के तौर पर यूज किया जाता है। इसमें ऑन ग्रिड सिस्मट की तरह फिजिकल नेट मीटरिंग का यूज नहीं होता है। इसमें वर्चुअल नेट मीटरिंग का इस्तेमाल किया जाता है।
कैसे करता है काम?
इसमें किसी बड़े अपार्टमेंट या कमर्शियल कॉम्पलेक्स में यूज किया जाता है। इसके लिए बड़ा सोलर पावर प्लांट लगाया जाता है, जिससे मिलने वाली बिजली उस अपार्टमेंट या कमर्शियल कम्पलेक्स के कई यूजर्स को सप्लाई किया जाता है। उदाहरण के तौर पर किसी अपार्टमेंट की छत पर 500 किलोवाट का प्लांट लगाया गया है। उस बिल्डिंग में अगर 100 से 150 घर हैं तो इनमें ये बिजली सप्लाई की जा सकती है।
इसमें लोग कम्युनिटी सोलर सिस्टम का सब्सक्रिप्शन लेते हैं। यूजर्स जितनी कैपेसिटी का सब्सक्रिप्शन लेते हैं उतने पैनल द्वारा जेनरेट सोलर एनर्जी को पावरग्रिड में सप्लाई की जाती है। लोगों के घर में इस्तेमाल किए गए कुल बिजली को सोलर पैनल द्वारा पावरग्रिड में भेजे गए बिजली से घटाकर बिल बनाया जाता है। इसमें वर्चुअल नेट मीटरिंग का यूज होता है, जो इस्तेमाल किए गए बिजली और जेनरेट किए गए बिजली को बैलेंस करता है।
Image Source : UNSPLASHसोलर प्लांट
उदाहरण के तौर पर अगर डिस्कॉम आपको 8 रुपये प्रति यूनिट बिजली का चार्ज करती है और सोलर ग्रिड 6 रुपये प्रति यूनिट में बिजली देता है तो आपको 2 रुपये प्रति यूनिट की बचत होगी, वो भी बिना किसी डिवाइस को खरीदे या छत पर सिस्टम लगाए।
कितना आता है खर्च?
जिस तरह से घर की छत पर लगाए जाने वाले प्लांट का खर्च कैल्कुलेट होता है, वैसे ही कम्युनिटी सोलर पैनल का भी खर्च आता है। अगर, आपने 3 किलोवाट का सिस्टम सब्सक्राइब करते हैं तो इसके लिए 2 से 2.5 लाख रुपये का खर्च आएगा। वहीं, इसके लिए मंथली प्लान का भी ऑप्शन मिलता है। पीएम सूर्य घर योजना के तहत लोगों को इसमें सब्सिडी भी मिलती है। सोलर पैनल को लेकर हाल ही में सरकार ने नई पॉलिसी भी बनाई है।
कितने की होगी बचत?
बेसिक यूज के लिए अगर आप 2 किलोवाट का कम्युनिटी सोलर का सब्सक्रिप्शन लेते हैं तो आप एक महीने में 1,200 रुपये से लेकर 1,800 रुपये की बचत कर सकते हैं। वहीं, ईयरली आप 14,400 रुपये से लेकर 21,600 रुपये की बचत कर सकते हैं। 5 किलोवाट का सब्सक्रिप्शन लेने पर आपको हर महीने 3,500 रुपये से लेकर 4,500 रुपये की बचत होगी। इस तरह साल के आप 42,000 रुपये से लेकर 54,000 रुपये की बचत कर सकते हैं।
जापान की प्रधानमंत्री शाने ताकाइची और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बताया कि अमेरिका ने एक दशक में पहली बार जापानी येन खरीदा है। येन को डॉलर के मुकाबले उसके 40 साल के सबसे निचले स्तर से उबारने के लिए ऐसा किया गया है। ट्रम्प ने कहा, “उनकी करेंसी कमजोर हो रही थी और वे थोड़ी मदद चाहते थे।”
10 सवाल-जवाब में जानें पूरी डिटेल्स…
सवाल 1: जापान और अमेरिका ने हाल ही में बाजार में क्या और क्यों कदम उठाया है?
जवाब: पिछले हफ्ते जापानी मुद्रा ‘येन’ डॉलर के मुकाबले 164 के स्तर पर पहुंच गई थी, जो पिछले 40 सालों का सबसे निचला स्तर है। इस तेज गिरावट को नियंत्रित करने के लिए जापान और अमेरिका ने मिलकर फॉरेन एक्सचेंज मार्केट में हस्तक्षेप किया। इस हस्तक्षेप का मुख्य उद्देश्य येन की अत्यधिक अस्थिरता को रोकना और करेंसी स्पेक्युलेटर्स को नियंत्रित करना था।
यह पिछले 15 सालों में यानी साल 2011 के बाद पहला मौका है जब जापान और अमेरिका ने करेंसी मार्केट में एक साथ मिलकर कदम उठाया है। इससे पहले 2011 में पूर्वी जापान में आए भूकंप और सुनामी के बाद दोनों देशों ने येन को कमजोर करने के लिए समन्वित कार्रवाई की थी। इस बार उद्देश्य येन को और अधिक गिरने से बचाना है।
सवाल 2: इस हस्तक्षेप में दोनों देशों ने कितनी रकम का इस्तेमाल किया है?
उत्तर: बैंक ऑफ जापान के आंकड़ों के अनुसार, टोक्यो ने शुक्रवार के आधिकारिक संयुक्त हस्तक्षेप से ठीक पहले, गुरुवार को न्यूयॉर्क बाजार में येन खरीदने के लिए लगभग 59 अरब डॉलर बेचे थे।
अमेरिका ने आधिकारिक तौर पर अपनी खरीदी की राशि का खुलासा नहीं किया है, लेकिन कैबिनेट बैठक के दौरान अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट की नोटबुक की तस्वीर से संकेत मिला है, जिस पर लिखा था: “To Do: Buy Japanese Yen $5-10 bil” यानी 5 से 10 अरब डॉलर का येन खरीदना।
मैरीलैंड के कैंप डेविड में 31 जुलाई, 2026 को एक कैबिनेट बैठक में भाग लेते हुए अमेरिकी वित्त मंत्री (ट्रेजरी सेक्रेटरी) स्कॉट बेसेंट के सामने रखी एक नोटपैड पर लिखा है: “To Do: Buy Japanese Yen $5-10 bil” (यानी 5 से 10 अरब डॉलर का जापानी येन खरीदना)।
सवाल 3: इस संयुक्त कार्रवाई पर अमेरिका और जापान के अधिकारियों का क्या कहना है?
जवाब:जापान का वित्त मंत्रालय: इस संयुक्त कार्रवाई से हाल के महीनों में येन में आई अत्यधिक अस्थिरता और अनियंत्रित चाल को रोकने में सफल रहा है।
अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी: स्कॉट बेसेंट ने सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा कि इस समन्वित कार्रवाई ने येन की अनियंत्रित चाल को नियंत्रित किया है। अमेरिका, येन के भारी अवमूल्यन को ठीक करने के लिए जापान के मौद्रिक और बाजार कदमों का पुरजोर समर्थन करता है।
अमेरिकी राष्ट्रपति: रविवार को संवाददाताओं से बात करते हुए ट्रम्प ने कहा, “जापानी मुद्रा कमजोर हो रही थी और वे थोड़ी मदद चाहते थे। हम जापान की मदद के लिए हमेशा तैयार हैं।”
सवाल 4: अमेरिका को जापान की मदद करने से क्या फायदा है?
जवाब: ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स में जापान इकोनॉमिक्स के प्रमुख शिगेतो नागाई ने बताया कि अमेरिका इस समन्वित हस्तक्षेप में शामिल होने के लिए इसलिए सहमत हुआ क्योंकि यह उसके अपने राष्ट्रीय हित में है। यदि येन और जापानी सरकारी बॉन्ड्स में बिकवाली जारी रहती, तो इसका असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ता और वॉशिंगटन के लिए भी कर्ज लेने की लागत बढ़ सकती थी।
सवाल 5: इस हस्तक्षेप का करेंसी मार्केट पर तुरंत क्या असर देखने को मिला?
उत्तर: अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की टिप्पणियों के बाद डॉलर 0.2% गिरकर 157.07 येन पर आ गया, जो पिछले महीने के 164 के रिकॉर्ड निचले स्तर से काफी बेहतर स्थिति है।
सवाल 6: आगे क्या उम्मीद है? क्या दोनों देश भविष्य में भी ऐसा हस्तक्षेप करेंगे?
जवाब: विशेषज्ञ शिगेतो नागाई के अनुसार, दोनों देश आगे भी समय-समय पर रुक-रुक कर और समन्वित तरीके से हस्तक्षेप जारी रख सकते हैं। जापान के वित्त मंत्रालय और अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी दोनों ने स्पष्ट किया है कि जरूरत पड़ने पर वे दोबारा कदम उठाने से नहीं हिचकेंगे।
सवाल 7: जापानी येन 40 साल के निचले स्तर पर क्यों पहुंचा? इसके पीछे क्या कारण हैं?
जवाब: 1990 के दशक की मंदी के बाद से जापान ने अपनी अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए लंबे समय तक अपनी ब्याज दरों को शून्य या नकारात्मक बनाए रखा था। 2024 में जापान ने ब्याज दरें बढ़ाईं जरूर, लेकिन फिर भी ये दुनिया के मुकाबले काफी कम रहीं।
कम ब्याज दरों के कारण अंतरराष्ट्रीय निवेशकों ने येन में कर्ज लेकर उसे ज्यादा रिटर्न देने वाली करेंसी में लगाया। इसके अलावा जापानी कंपनियों का भारी विदेशी निवेश और उनकी विदेशी कमाई का विदेशों में ही बने रहना भी येन पर भारी पड़ा। इसने येन को 40 साल के निचले स्तर पर पहुंचा दिया था।
सवाल 8: क्या अमेरिका-ईरान जंग का असर भी येन की गिरावट पर पड़ा?
जवाब: हां। ईरान जंग ने येन की गिरावट को और तेज कर दिया। केइओ यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर सायुरी शिराई के अनुसार, पूरी तरह ऊर्जा आयात पर निर्भर रहने के कारण तेल-गैस की बढ़ती कीमतों ने जापान के व्यापार संतुलन को बिगाड़ा। इससे महंगाई बढ़ी और येन की रिकवरी रुक गई।
सवाल 9: मजबूत डॉलर और कमजोर येन से दोनों देशों को क्या फायदा-नुकसान हो रहा था?
जवाब: अमेरिका के लिए: मजबूत डॉलर अमेरिकी एक्सपोर्ट को विदेशी उपभोक्ताओं के लिए महंगा बना देता है। इसका नुकसान अमेरिकी कंपनियों को होता है।
जापान के लिए: कमजोर येन से जापानी एक्सपोर्टर्स और पर्यटकों को फायदा जरूर होता है, लेकिन जरूरी सामान का आयात महंगा हो जाता है, जिससे देश में महंगाई बढ़ती है।
सवाल 10: क्या इस खरीदारी से येन की स्थिति में स्थायी सुधार आ सकता है?
जवाब: बैंक ऑफ अमेरिका सिक्योरिटीज के शुसुके यामादा का मानना है कि करेंसी मार्केट में ऐसी खरीदारी से केवल कुछ समय के लिए ही राहत मिलती है।
वहीं बार्कलेज बैंक की रिपोर्ट के मुताबिक, इस साझा कदम का असर शुरुआती दिनों में तो दिखेगा, लेकिन लंबी अवधि में येन पर नीचे जाने का दबाव बना रह सकता है।
डीग शहर के जलमहल स्थित गेट नंबर दो पर एक मंदबुद्धि महिला मिली। सूचना मिलने पर एंटी रोमियो टीम तुरंत मौके पर पहुंची और महिला को सुरक्षित अपने संरक्षण में लिया। टीम को मोबाइल के माध्यम से सूचना मिली थी कि एक महिला कुछ लोगों से घिरी हुई है। हालांकि, टीम के पहुंचने से पहले ही वहां मौजूद लोग फरार हो गए। एंटी रोमियो टीम में हेड कांस्टेबल जगन्नाथ, वेदपाल, कमलेश, देवेंद्री और सुमन शामिल थे। पूछताछ में महिला की पहचान शिवानी ठाकुर पुत्री नानक चंद के रूप में हुई। उसके भाइयों के नाम पुष्कर और जयप्रकाश बताए गए। पुलिस के अनुसार, महिला मानसिक रूप से मंदबुद्धि है। महिला की सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए एंटी रोमियो टीम ने उसे ‘अपना घर’ संस्था को सौंप दिया। यह कदम उसकी उचित देखभाल और संरक्षण सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया। एंटी रोमियो टीम की त्वरित कार्रवाई से महिला को सुरक्षित आश्रय मिल सका और किसी भी संभावित अप्रिय घटना को टाल दिया गया।
रोहित यादव ने स्वीकार किया कि कॉमनवेल्थ गेम्स के फाइनल में श्रीलंका के स्वर्ण पदक विजेता रमेश पथिरागे के बड़े थ्रो का पीछा करना और नीरज चोपड़ा से भी बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करना गलती थी।
भारतीय भाला फेंक खिलाड़ी रोहित यादव ने स्वीकार किया कि कॉमनवेल्थ गेम्स के फाइनल में श्रीलंका के स्वर्ण पदक विजेता रमेश पथिरागे के बड़े थ्रो का पीछा करना और नीरज चोपड़ा से भी बेहतर प्रदर्शन करने की कोशिश करना गलती थी। इस 27 वर्षीय खिलाड़ी ने 31 जुलाई को पुरुषों के भाला फेंक फाइनल में 81.56 मीटर के थ्रो के साथ सातवां स्थान हासिल किया। पथिरागे ने 89.75 मीटर के साथ स्वर्ण पदक जीता, जबकि भारत के नीरज चोपड़ा (85.83 मीटर) और यशवीर सिंह (85.41 मीटर) ने क्रमशः रजत और कांस्य पदक हासिल किए।
यादव ने कहा कि दूसरे प्रयास में 81.56 मीटर का थ्रो करने के बाद उन्हें लगा कि वह पदक जीतने की अच्छी स्थिति में हैं, जिसके बाद उन्होंने अपने शेष चार प्रयासों में सब कुछ झोंक देने का फैसला किया।
सोमवार को ग्लास्गो से लौटने के बाद रोहित ने पीटीआई से कहा, ”मेरा दूसरा थ्रो लगभग 81 मीटर (81.56 मीटर) था और मुझे लगा कि मैं कम से कम शीर्ष आठ में तो जगह बना ही लूंगा। उसके बाद मैंने इसके बाद अपनी पूरी ताकत लगाने का फैसला किया।”
उन्होंने कहा, ”मुझे लगा कि मैं रमेश के थ्रो की बराबरी कर सकता हूं। मैं सोच रहा था कि मैं उस मुकाम को हासिल कर सकता हूं जहां तक उस दिन नीरज भी नहीं पहुंच पाया था। इसी सोच के कारण मैं थोड़ा अति आत्मविश्वासी हो गया था।”
यादव अपने शेष प्रयासों में बेहतर प्रदर्शन नहीं कर सके। उनके तीसरे और पांचवें प्रयास फाउल रहे, जबकि उन्होंने अपने चौथे और छठे प्रयास में क्रमशः 73.70 मीटर और 79.55 मीटर का थ्रो किया।