Monday, October 26, 2026
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सर्दियों में एक बार जरूर चखें मंगोड़ी की सब्जी, लहसुन और मसालों का स्वाद बना देगा दीवाना

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Mangodi Sabzi Recipe: राजस्थान के जालौर की पारंपरिक मंगोड़ी की सब्जी सर्दियों में स्वाद का जबरदस्त तड़का लगाती है. दाल की मंगोड़ी, लहसुन, हरे प्याज और देसी मसालों से बनने वाली इस चटपटी डिश को बाजरे की रोटी के साथ खाने का मजा ही अलग है, जानिए इसे बनाने की आसान रेसिपी.

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जालोर. सर्दियों का मौसम आते ही घरों में तरह-तरह की स्वादिष्ट और पौष्टिक सब्जियां बनने लगती हैं, इस मौसम में जहां हरी पत्तेदार सब्जियों की मांग बढ़ जाती है, वहीं राजस्थान की कुछ पारंपरिक देसी डिश भी लोगों की पसंद बनी रहती हैं. ऐसी ही एक खास राजस्थानी रेसिपी है मंगोड़ी की सब्जी, जिसे कई जगह बड़िया की सब्जी भी कहा जाता है. दाल से बनी मंगोड़ी, लहसुन, हरे प्याज और घर में मौजूद मसालों से तैयार होने वाली यह सब्जी स्वाद में लाजवाब होती है.

इसकी खासियत है कि इसे बनाने के लिए न तो ज्यादा सामग्री की जरूरत होती है और न ही घंटों रसोई में मेहनत करनी पड़ती है. मंगोड़ी की सब्जी बनाने के लिए सबसे पहले दाल से बनी मंगोड़ी लें, इन्हें हाथ या बेलन की मदद से छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ लें. इसके बाद हरे पत्ते वाले प्याज, हरी मिर्च और हरे धनिये को बारीक काटकर रख लें. साथ ही लहसुन की कुछ कलियां लेकर उन्हें अच्छी तरह कूट लें, लहसुन इस सब्जी के स्वाद को खास बनाने में अहम भूमिका निभाता है.

इस तरह बनाएं राजस्थानी मंगोड़ी की सब्जी

सब्जी बनाने के लिए सबसे पहले कड़ाही में तेल गर्म करें, तेल गर्म होने पर इसमें तोड़ी हुई मंगोड़ी डालें और मध्यम आंच पर हल्का सुनहरा होने तक भून लें. ध्यान रखें कि मंगोड़ी ज्यादा न जले, बल्कि अच्छी तरह भुनकर हल्की कुरकुरी हो जाए. अब कुटे हुए लहसुन को थोड़े पानी में मिलाकर कड़ाही में डालें. इसके बाद स्वादानुसार नमक और घर में इस्तेमाल होने वाले मसाले मिलाएं. फिर इसमें कटा हुआ हरा प्याज और हरी मिर्च डालकर सभी सामग्री को अच्छी तरह मिला लें, जरूरत के अनुसार पानी डालें, ताकि मंगोड़ी नरम होकर मसालों का स्वाद अच्छी तरह सोख सके. सब्जी को कुछ देर पकने दें और दो-तीन उबाल आने तक इंतजार करें, जब मंगोड़ी नरम हो जाए और मसालों का स्वाद उसमें अच्छी तरह समा जाए, तब ऊपर से बारीक कटा हरा धनिया डाल दें. इस तरह तैयार हो जाएगी स्वादिष्ट और चटपटी राजस्थानी मंगोड़ी की सब्जी.

बाजरे की रोटी के साथ बढ़ जाता है स्वाद

मंगोड़ी की सब्जी सर्दियों के मौसम में खाने के लिए एक बेहतरीन देसी विकल्प है, इसे गरमा-गरम गेहूं की रोटी या पारंपरिक बाजरे की रोटी के साथ परोस सकते हैं. लहसुन की खुशबू, हरे प्याज का स्वाद और देसी मसालों का जायका इसे खास बनाता है. कम सामग्री और आसान तरीके से तैयार होने वाली यह पारंपरिक राजस्थानी रेसिपी रोजमर्रा के खाने में देसी स्वाद का तड़का लगाने के लिए बेहतरीन है.

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मोनाली पाल

नमस्ते मेरा नाम मोनाली है, पेशे से पत्रकार हूं, ख़बरें लिखने का काम है. लेकिन कैमरे पर समाचार पढ़ना बेहद पसंद है. 2016 में पत्रकारिता में मास्टर्स करने के बाद पांच साल कैमरे पर न्यूज़ पढ़ने के साथ डेस्क पर खबरे…

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27 अक्टूबर को लॉन्च होगा Redmi K100, कलर वेरिएंट समेत कई फीचर्स हुए कंफर्म


Redmi K100 की लॉन्चिंग कंपनी ने पिछले दिनों कंफर्म की है। चीनी कंपनी का यह गेमिंग फोन कल यानी 27 अक्टूबर को घरेलू मार्केट में दस्तक देगा। Xiaomi के सब-ब्रांड ने अपने अपकमिंग फोन के फीचर्स कंफर्म करने शुरू कर दिए हैं। कंपनी ने आधिकारिक हैंडल से इसके कलर वेरिएंट्स, प्रोसेसर और OS समेत कई जानकारियां रिवील की हैं। कंपनी पहले ही इस सीरीज में Redmi K100 Pro Max लॉन्च कर चुकी है।

कलर वेरिएंट हुआ कंफर्म

Xiaomi ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट के जरिए दावा किया है कि रेडमी का यह फोन Snow Rock White कलर ऑप्शन में पेश किया जाएगा। इसमें एक नया डेलिकेट पेपर जैसा टेक्स्चर मिलेगा। चीनी माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म Weibo पर शेयर की गई जानकारी के मुताबिक, इसमें ऑडियो स्पैटियल बोस फीचर मिलेगा। इसके अलावा फोन के बैक में डुअल-टोन फिनिशिंग दी जाएगी। वहीं, कैमरा पैनल में मैट फिनिशिंग दी जाएगी।

मिलेगा Qualcomm का फ्लैगशिप चिप

चीनी ब्रांड ने Redmi K100 के प्रोसेसर की जानकारी भी कंफर्म कर दी है। कंपनी ने कंफर्म किया है कि यह फोन Qualcomm Snapdragon 8 Elite फ्लैगशिप चिपसेट के साथ लॉन्च किया जाएगा। पिछले दिनों इस फोन को गीकबेंच पर लिस्ट किया गया था। लिस्टिंग के मुताबिक फोन में 16GB रैम दिया जाएगा। इसे सिंगल कोर में 2705 और मल्टी कोर में 9885 का स्कोर मिला है। यह Android 17 पर बेस्ड HyperOS 4 के साथ लॉन्च किया जाएगा।

Redmi K100 के संभावित फीचर्स

फोन के बारे में पहले सामने आई रिपोर्ट्स के मुताबिक, इसमें 6.83 इंच का OLED पैनल दिया जाएगा। फोन का डिस्प्ले 165Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करेगा। इस फोन में 165 fps पर गेमिंग एक्सपीरियंस किया जा सकता है। साथ ही, इसके डिस्प्ले में अल्ट्रासोनिक फिंगरप्रिंट सेंसर यूज किया जा सकता है। इस फोन में 10,000mAh की दमदार बैटरी दी जा सकती है। इसके बारे में पिछले दिनों आई लीक में खुलासा हुआ है।

Redmi K100 के बैक में डुअल कैमरा सेटअप मिलेगा। फोन में 50MP का मेन कैमरा दिया जाएगा, जो OIS यानी ऑप्टिकल इमेज स्टेब्लाइजेशन फीचर को सपोर्ट करेगा। वहीं, सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए भी इसमें 50MP का कैमरा मिल सकता है। यह IP68 रेटेड होगा, जिसकी वजह से पानी में डूबने पर भी फोन खराब नहीं होगा।

यह भी पढ़ें – चीनी कंपनी ने लॉन्च किया 8000mAh बैटरी वाला मिनी टैबलेट





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अल्बानिया में छात्रों ने PM ऑफिस की कुर्सियां जलाईं: प्रधानमंत्री ने खुद इन्हें रखा था, इन पर लिखा था- बातचीत करें


तिराना4 घंटे पहले

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अल्बानिया में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे छात्रों ने रविवार को प्रधानमंत्री कार्यालय के बाहर रखी कुर्सियों में आग लगा दी। प्रधानमंत्री एडी रामा ने छात्रों से बातचीत करने के लिए ये कुर्सियां और पत्थर की एक बड़ी मेज रखवाई थी। कुर्सियों पर ‘डायलॉग’ यानी बातचीत लिखा था, लेकिन छात्रों ने बातचीत के इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया। उन्होंने कुर्सियों पर ‘इस्तीफा’ लिखकर अपना विरोध जताया।

राजधानी तिराना में छात्र और युवा पिछले 13 दिनों से प्रदर्शन कर रहे हैं। रविवार को प्रदर्शनकारी पहले शिक्षा मंत्रालय के बाहर जुटे। यहां उन्होंने कुछ देर तक प्रदर्शन किया और इमारत पर पत्थर भी फेंके। इसके बाद वे प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर बढ़ गए और वहां रखी कुर्सियों में आग लगा दी।

प्रधानमंत्री एडी रामा कुर्सियों पर 20 अक्टूबर को ‘डायलॉग’ लिखी पर्चियां रखते हुए।

प्रधानमंत्री एडी रामा कुर्सियों पर 20 अक्टूबर को ‘डायलॉग’ लिखी पर्चियां रखते हुए।

प्रधानमंत्री कार्यालय के बाहर बातचीत के लिए रखी कुर्सियां जलाते हुए प्रदर्शनकारी। तस्वीर 25 अक्टूबर 2026 की है।

प्रधानमंत्री कार्यालय के बाहर बातचीत के लिए रखी कुर्सियां जलाते हुए प्रदर्शनकारी। तस्वीर 25 अक्टूबर 2026 की है।

तिराना में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पुलिस के सामने खड़ी प्रदर्शनकारी। तस्वीर 25 अक्टूबर की है।

तिराना में सरकार के खिलाफ प्रदर्शन के दौरान पुलिस के सामने खड़ी प्रदर्शनकारी। तस्वीर 25 अक्टूबर की है।

अल्बानिया में छात्रों की मांगें क्या है?

  • विश्वविद्यालयों में पढ़ाई और सुविधाओं की स्थिति सुधारी जाए।
  • पढ़ाई का खर्च कम किया जाए और छात्रों को आर्थिक मदद मिले।
  • पढ़ाई पूरी करने के बाद युवाओं के लिए रोजगार के अवसर बढ़ाए जाएं।
  • भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच हो और सरकार जवाबदेही तय करे।
  • प्रधानमंत्री एदी रामा इस्तीफा दें।
तिराना में छात्रों के सरकार विरोधी प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाघेरा बनाए हुए पुलिसकर्मी। तस्वीर 24 अक्टूबर 2026 की है।

तिराना में छात्रों के सरकार विरोधी प्रदर्शन के दौरान सुरक्षाघेरा बनाए हुए पुलिसकर्मी। तस्वीर 24 अक्टूबर 2026 की है।

ट्रम्प के दामाद के लग्जरी रिसॉर्ट बनाने का भी विरोध

एदी रामा सरकार के खिलाफ शुरू हुआ विरोध अब भ्रष्टाचार, शिक्षा, रोजगार और पर्यावरण से जुड़े कई मुद्दों पर फैल गया है। इस विरोध की एक बड़ी वजह सरकारी अधिकारियों पर भ्रष्टाचार के आरोप हैं।

इसके अलावा, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दामाद जेरेड कुशनर से जुड़ी लग्जरी रिसॉर्ट परियोजना को लेकर भी कई महीनों से नाराजगी है।

योजना के तहत दो प्रमुख क्षेत्रों में पर्यटन विकास की बात है:

सान्जान द्वीप: एड्रियाटिक सागर में स्थित यह द्वीप बड़े पर्यटन परिसर के लिए प्रस्तावित है।

व्योसा-नार्ता का तटीय इलाका: यह दक्षिणी अल्बानिया का संवेदनशील प्राकृतिक क्षेत्र है, जहां फ्लेमिंगो समेत कई पक्षी और समुद्री जीव पाए जाते हैं।

परियोजना से जुड़े प्रस्ताव में लग्जरी होटल, विला, अपार्टमेंट और नौकाओं के लिए बंदरगाह जैसी सुविधाएं शामिल हैं।

पर्यावरण संगठनों को आशंका है कि बड़े निर्माण से समुद्र तट, आर्द्रभूमि और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को नुकसान पहुंच सकता है। इस इलाके में प्रवासी पक्षियों के अलावा समुद्री कछुए और सील जैसे जीव भी पाए जाते हैं।

पश्चिमी अल्बानिया के नार्ता लैगून क्षेत्र का इलाका। यहां जेरेड कुशनर से जुड़ी तटीय विकास की एक बड़ी परियोजना का विरोध हो रहा है।

पश्चिमी अल्बानिया के नार्ता लैगून क्षेत्र का इलाका। यहां जेरेड कुशनर से जुड़ी तटीय विकास की एक बड़ी परियोजना का विरोध हो रहा है।

हिंसक प्रदर्शन के बाद नया कानून लाएंगे रामा

प्रधानमंत्री एडी रामा ने हिंसा और शहर में तोड़फोड़ रोकने के लिए नए कानूनी उपायों का ऐलान किया है। इसके तहत हिंसा में नुकसान उठाने वाले कारोबारियों को मुआवजा दिया जाएगा। छोटे कारोबारियों को नुकसान का पूरा मुआवजा मिलेगा, जबकि बड़े कारोबारियों को 70% रकम दी जाएगी।

  • रामा ने कहा है कि सार्वजनिक या निजी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने वालों को इसकी भरपाई करनी होगी।
  • नुकसान की भरपाई जनता के टैक्स के पैसे से नहीं, बल्कि जिम्मेदार लोगों से कराई जाएगी।
  • अगर कोई व्यक्ति जानता है कि भीड़ में हिंसा हो रही है और संपत्ति को नुकसान पहुंचाया जा रहा है, फिर भी वहां बना रहता है, तो उस पर 5 लाख लेक (करीब ₹5.7 लाख) तक का जुर्माना लगाया जा सकता है।
  • नाबालिगों के जुर्माने और नुकसान की भरपाई की जिम्मेदारी उनके माता-पिता से होगी।

पत्रकारों, डॉक्टरों, निगरानी करने वालों, ड्यूटी पर तैनात सरकारी कर्मचारियों और वहां से गुजर रहे लोगों को इससे छूट मिलेगी। नए नियमों से लोगों के प्रदर्शन करने और अपनी बात रखने की आजादी पर रोक नहीं लगेगी।

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अल्बानिया में महंगी शिक्षा के खिलाफ छात्र सड़कों पर उतरे: सरकारी इमारतों और बैंकों में आग लगाई; अभी 11 देशों में छात्र आंदोलन चल रहा

अल्बानिया की राजधानी तिराना में महंगी शिक्षा और खराब सुविधाओं के खिलाफ अब छात्र सड़कों पर उतर आए हैं। छात्र प्रधानमंत्री एदी रामा के इस्तीफे की मांग कर रहे हैं। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने प्रधानमंत्री कार्यालय, सरकारी इमारतों और कई बैंकों की शाखाओं में आग लगा दी। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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कानपुर में शिव शक्ति अखाड़े का शस्त्रोत्सव मनाया: शस्त्र पूजन के साथ दिया सनातन संस्कृति और समाजिक एकता का संदेश – Kanpur News




कानपुर के किदवई नगर स्थित रतनलाल शर्मा स्टेडियम में शिव शक्ति अखाड़ा का द्वितीय स्थापना दिवस एवं विशाल शस्त्रोत्सव संपन्न हुआ। कार्यक्रम में शस्त्र पूजन, वैदिक मंत्रोच्चार और शस्त्र संचालन के प्रदर्शन के जरिए सनातन संस्कृति, सामाजिक समरसता और भारतीय परंपराओं के संरक्षण का संदेश दिया गया। आयोजन में संत-महात्माओं, धर्माचार्यों, श्रद्धालुओं और गणमान्य लोगों सहित हजारों की संख्या में लोग शामिल हुए। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता डॉ. गौतम खट्टर ने कहा कि मौजूद समय में शस्त्रोत्सव जैसे आयोजन महत्वपूर्ण हैं। इनके माध्यम से समाज में धर्म, संस्कृति और सांस्कृतिक परंपराओं के प्रति जागरूकता बढ़ती है। उन्होंने ऐसे आयोजनों को भारतीय परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से जुड़ाव मजबूत करने वाला बताया। शस्त्र पूजन कर दिया सनातन संस्कृति का संदेश शिव शक्ति अखाड़ा के संस्थापक महंत मधुराम शरण शिवा महाराज ने सनातन संस्कृति के संरक्षण, सामाजिक समरसता और हिंदू समाज की एकता पर जोर दिया। वहीं, प्रदेश महामंत्री आशीष त्रिपाठी ने शस्त्रों के महत्व और धर्म-संस्कृति की रक्षा में उनकी भूमिका पर विचार रखे। अखाड़े के संरक्षक डॉ. शिवदत्त ने कहा कि इस तरह के आयोजन नई पीढ़ी को भारतीय सांस्कृतिक विरासत और गौरवशाली इतिहास से जोड़ने का माध्यम हैं। वैदिक मंत्रोच्चार के बीच हुआ शस्त्र पूजन शस्त्रोत्सव में वैदिक परंपराओं के अनुसार शस्त्र पूजन किया गया। वेदपाठी बच्चों ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ पूजन संपन्न कराया। इसके बाद निहंग सरदारों, बटुकों और संन्यासियों ने शस्त्र संचालन का प्रदर्शन किया। कार्यक्रम में महाराणा प्रताप और वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई के स्वरूप में पहुंचे बच्चों ने भी लोगों का ध्यान आकर्षित किया। उनके माध्यम से वीरता, साहस और देश के गौरवशाली इतिहास को याद किया गया। आयोजन में विशिष्ट अतिथि साध्वी प्राची दीदी, डॉ. मदन गोपाल दास महाराज और वीर रस के कवि राम भदावर सहित अनेक संत-महात्मा मौजूद रहे। कार्यक्रम के अंत में अध्यक्ष राकेश अग्रवाल ने कहा कि शिव शक्ति अखाड़ा के माध्यम से आगे भी सनातन संस्कृति के संरक्षण, सामाजिक एकता और भारतीय परंपराओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए ऐसे आयोजन किए जाते रहेंगे।



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मजदूर का शव टीनशेड में फंदे पर लटका मिला: नर्मदापुरम में सुबह काम से छत पर पहुंची मां ने देखा; सुसाइड नोट नहीं मिला – narmadapuram (hoshangabad) News




नर्मदापुरम के ग्राम रायपुर में 22 साल के एक युवक ने फांसी के फंदे पर लटककर जान दे दी। घटना सोमवार सुबह 9 बजे उस समय उजागर हुई, जब उसकी मां किसी काम से छत पर बने टीनशेड में पहुंची। फंदे पर बेटे को लटका देख वह चीख पड़ी। आवाज सुनकर उसके बेटे ऊपर आए, जिसके बाद पड़ोसी भी मौके पर पहुंचे। सूचना पर देहात थाने से ASI दीपक पारासर, FSL अधिकारी ऋषिकेश यादव ने मौके पर पहुंचकर साक्ष्य जुटाए। पंचनामे के बाद शव को उतारकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा। देहात थाना पुलिस ने मर्ग कायम कर जांच शुरू की। मजदूरी करता था युवक
जानकारी के मुताबिक मृतक अखिलेश कहार पिता खुशीलाल कहार (22) निवासी रायपुर है, जो डेकोरेशन की मजदूरी करता था। रविवार रात को युवक नीचे परिवार के सदस्यों के साथ सोया था। घर की छत पर टीनशेड बना है। सोमवार सुबह 9 बजे किसी काम से उसकी मां लीलाबाई टीनशेड में पहुंची तो बेटे अखिलेश का शव फांसी के फंदे पर लटका था। थाना प्रभारी ऊषा मरावी ने बताया मौके पर सुसाइड नोट नहीं मिला है। फांसी लगाने की वजह स्पष्ट नहीं हो पाई है। परिजनों के बयान के बाद आत्महत्या के कारण का पता चल पाएगा।



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औरंगाबाद- तेज रफ्तार वाहन ने बाइक में मारी टक्कर: महिला टीचर और बेटा घायल, ट्रेनिंग में शामिल होने जा रही थी; आरोपी ड्राइवर मौके से फरार – Aurangabad (Bihar) News




औरंगाबाद में एनएच-19 पर सोमवार की सुबह तेज रफ्तार वाहन ने बाइक में टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जोरदार थी कि बाइक सवार मां-बेटे बीच सड़क पर गिरकर घायल हो गए। सूचना मिलते ही डायल-112 की टीम मौके पर पहुंची। दोनों को इलाज के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मदनपुर पहुंचाया। गंभीर हालत को देखते हुए डॉक्टरों ने बेहतर इलाज के लिए सदर अस्पताल रेफर कर दिया। घायलों की पहचान गयाजी जिले के सांव कला गांव निवासी मधुरेंद्र भूषण की पत्नी कुमारी सीमा और उनके पुत्र मणिकांत भूषण के रूप में हुई है। हादसे के बाद घटनास्थल पर अफरा-तफरी मच गई। बाइक का अगला हिस्सा पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो गया है। घटना मदनपुर थाना क्षेत्र के दर्जी बिगहा मोड़ के पास की है। ट्रेनिंग में शामिल होने जा रही थी शिक्षिका मिली जानकारी के अनुसार, कुमारी सीमा बसतपुर मध्य विद्यालय में शिक्षिका हैं। सोमवार की सुबह वह अपने पुत्र मणिकांत भूषण के साथ बाइक से औरंगाबाद में आयोजित ट्रेनिंग में शामिल होने जा रही थी। इसी दौरान दर्जी बिगहा मोड़ के पास उनकी बाइक अज्ञात वाहन की चपेट में आ गई। हादसे के बाद अज्ञात वाहन का चालक वाहन लेकर मौके से फरार हो गया। पुलिस मामले की जानकारी जुटाने में लगी है। दुर्घटना में शामिल वाहन और उसके चालक की पहचान के लिए आगे की कार्रवाई की जा रही है।



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ट्रम्प बोले- नॉर्वे से किसी को अमेरिका नहीं आने दूंगा: गाली भी दी; नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने से नाराज हैं




अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने पर एक बार फिर नाराजगी जताई है। उन्होंने नॉर्वे को गाली देते हुए कहा कि अब वे वहां के लोगों को अमेरिका नहीं आने देना चाहते। रविवार को मिशिगन के पोर्ट ह्यूरॉन में एक चुनावी रैली के दौरान ट्रम्प ने यह बात कही है। इसके पहले ट्रम्प हैती और सोमालिया जैसे देशों के लिए अपमानजनक शब्दों का इस्तेमाल कर चुके हैं। हाल ही में उन्होंने लीबिया को भी ऐसे ही शब्द कहे, जिस पर वहां की सरकार ने विरोध जताया। ट्रम्प ने 8 जंंग खत्म कराने का दावा किया ट्रम्प लंबे समय से दावा करते रहे हैं कि उन्होंने दुनिया में शांति के लिए कई बड़े काम किए हैं और इसलिए उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार मिलना चाहिए था। ट्रम्प ने रैली में कहा कि उन्होंने 8 जंंग खत्म कराए हैं और ईरान के साथ-साथ रूस-यूक्रेन युद्ध को लेकर भी आगे काम करने की बात कही। इस महीने की शुरुआत में भी ट्रम्प ने नोबेल शांति पुरस्कार न मिलने को नॉर्वे पर एक ऐसा दाग बताया था, जो कभी नहीं मिटेगा। शांति पुरस्कार नॉर्वे की सरकार नहीं देती नोबेल शांति पुरस्कार को लेकर ट्रम्प की नाराजगी के बीच एक अहम बात यह है कि इस पुरस्कार का फैसला नॉर्वे की सरकार नहीं करती। विजेता का चुनाव स्वतंत्र नॉर्वेजियन नोबेल समिति करती है। इस समिति में पांच सदस्य होते हैं, जिन्हें नॉर्वे की संसद नियुक्त करती है। नॉर्वे के प्रधानमंत्री जोनास गार स्टोर पहले भी ट्रम्प को यह बात समझा चुके हैं कि पुरस्कार का फैसला सरकार नहीं करती। ट्रम्प 2018 से नोबेल शांति पुरस्कार मांग रहे ट्रम्प के लिए नोबेल शांति पुरस्कार की मांग कोई नई बात नहीं है। अक्टूबर 2018 में एक कार्यक्रम में ट्रम्प ने नोबेल शांति पुरस्कार का जिक्र करते हुए कहा था कि उन्हें शायद यह पुरस्कार कभी नहीं मिलेगा, भले ही ने कोरिया और सीरिया में शांति कायम करने की कोशिश कर रहे हों। इसके बाद फरवरी 2019 में उन्होंने खुलकर अपनी दावेदारी रखी। उन्होंने कहा कि जापान के प्रधानमंत्री शिंजो आबे ने उन्हें नोबेल के लिए नामित किया है, लेकिन मुझे नहीं लगता कि इसे कभी नहीं जीत पाऊंगा। 2019 में एक पाकिस्तानी पत्रकार के सवाल के जवाब में ट्रम्प ने कहा कि उन्हें लगता है कि उन्हें कई चीजों के लिए नोबेल मिलेगा, अगर पुरस्कार निष्पक्ष तरीके से दिया जाए। 2020 के राष्ट्रपति चुनाव के दौरान भी ट्रम्प ने नोबेल का मुद्दा उठाया। उन्होंने पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा से अपनी तुलना करते हुए कहा था कि अगर ओबामा को यह पुरस्कार मिल सकता है तो उन्हें भी मिलना चाहिए। जुलाई 2025 में नॉर्वे के वित्त मंत्री जेन्स स्टोल्टेनबर्ग से फोन पर बातचीत में ट्रम्प ने नोबेल पुरस्कार पाने की इच्छा जताई थी। यह जानकारी नॉर्वे के अखबार की रिपोर्ट के हवाले से आई थी। —————————– ये खबर भी पढ़ें… ब्राजील में लूला चौथी बार राष्ट्रपति बने: बोल्सोनारो से पहले राउंड में पिछड़ने के बाद जीते; 2022 में इनके पिता को हराया था ब्राजील में 80 साल के लुइज इनासियो लूला दा सिल्वा ने चौथी बार राष्ट्रपति चुनाव जीत लिया है। वे पहले दौर की वोटिंग में फ्लावियो बोल्सोनारो से पिछड़ गए थे, लेकिन दूसरे दौर में बाजी पलट दी। पूरी खबर यहां पढ़ें…



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प्रिंटिंग इंडस्ट्री ने की सरकार से जीएसटी घटाने की मांग: सरकारी टेंडर में नई कंपनियों को अवसर नहीं मिलने का आरोप – Jaipur News




प्रिंटिंग इंडस्ट्री में इंक, पेपर, फिल्म, प्लेट और केमिकल की बढ़ती कीमतों से उद्यमी परेशान हैं। इन पर 18 प्रतिशत जीएसटी लगने से कारोबार पर असर पड़ रहा है। द राजस्थान प्रिंटर्स एसोसिएशन (RPA) की ओर से आयोजित संवाद कार्यक्रम में उद्यमियों ने सरकार से जीएसटी की दर 18 से घटाकर 5 प्रतिशत करने और इंडस्ट्री के लिए स्पेशल पैकेज देने की मांग की है। इंडियन प्रिंटिंग पैकेजिंग एंड एलाइड मशीनरी मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन (आईपीएएमए) के प्रेसिडेंट कुलजीत सिंह और आरपीए अध्यक्ष विनोद कुमार शर्मा सहित प्रिंटिंग इंडस्ट्री से जुड़े उद्यमियों ने कारोबार की चुनौतियों पर चर्चा की। इस दौरान सरकारी प्रिंटिंग टेंडर में कुछ कंपनियों के दबदबे और नई कंपनियों को अवसर नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया गया। सरकारी टेंडर में नई कंपनियों को अवसर नहीं मिलने का आरोप आरपीए अध्यक्ष विनोद कुमार शर्मा ने कहा कि सरकारी प्रिंटिंग टेंडर पर कुछ चुनिंदा कंपनियों का कब्जा है। टेंडर प्रक्रिया में खामियों के कारण नए उद्यमियों को काम करने का अवसर नहीं मिल पाता। आरपीए इस मुद्दे को उठाएगा और नई कंपनियों को भी अवसर दिलाने के लिए संघर्ष करेगा। तकनीक के साथ आगे बढ़ने की जरूरत आईपीएएमए के प्रेसिडेंट कुलजीत सिंह ने कहा कि दुनिया में प्रिंटिंग इंडस्ट्री की तकनीक तेजी से बदल रही है। कारोबार को आगे बढ़ाने के लिए उद्यमियों को नई तकनीक अपनानी होगी और समय के साथ खुद को अपडेट रखना होगा। आईपीएएमए और आरपीए का उद्देश्य देश और प्रदेश की प्रिंटिंग इंडस्ट्री को आगे बढ़ाना है। सप्लायर और प्रिंटर के बीच भी हुआ संवाद कार्यक्रम में रॉ मैटेरियल की सप्लाई चेन को बेहतर बनाने के लिए सप्लायर और प्रिंटर के बीच विशेष संवाद सत्र रखा गया। इसमें कच्चे माल की उपलब्धता और उससे जुड़ी समस्याओं पर चर्चा की गई। इस दौरान राजस्थान की प्रिंटिंग इंडस्ट्री के वरिष्ठ उद्यमियों हरिकिशन रावत, रूपनारायण, राजेंद्र कुमठ, मनमोहन सिंह, आलोक जैन, दुर्गा प्रसाद शर्मा, उमेश शर्मा और सुनील मित्तल को सम्मानित किया गया।



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Gold-Silver Price : त्‍योहारी सीजन में आज महंगा हो गया सोने-चांदी


नई दिल्‍ली. घरेलू वायदा बाजार में आज, 26 अक्‍टूबर को सोने और चांदी की कीमतों में तेजी दिख रही है. मल्‍टी कमोडिटी एक्‍सचेंज (MCX) 24 कैरेट सोने की कीमत 0.21% बढ़कर ₹1,42,810 प्रति 10 ग्राम हो गई, जबकि चांदी की कीमत 0.36% बढ़कर ₹1,97,300 प्रति किलोग्राम पहुंच गई है.

अंतरराष्ट्रीय कमोडिटी बाजार यानी कॉमेक्स (Comex) पर भी सोना-चांदी आज तेज है. इंट्राडे में कॉमेक्स पर सोने की कीमत में 0.51 फीसदी चढ़कर 4,028.40 डॉलर प्रति औंस के स्तर पर पहुंच गई. कॉमेक्स पर चांदी की कीमतों में 0.90 फीसदी का उछाल आया और यह 54.435 डॉलर प्रति औंस पर ट्रेड करने लगी.

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प्रमुख शहरों में सोने के भाव

मनीकंट्रोल के अनुसार, आज दिल्‍ली में 24 कैरेट सोने का भाव ₹14,272 प्रति ग्राम, 22 कैरेट का ₹13,084 प्रति ग्राम और 18 कैरेट का रेट ₹10,708 प्रति ग्राम है. मुंबई, कोलकाता, बेंगलुरु, हैदराबाद, पुणे और केरल में 24 कैरेट सोना आज ₹14,257 प्रति ग्राम, 22 कैरेट ₹13,069 प्रति ग्राम और 18 कैरेट सोना ₹10,693 प्रति ग्राम मिल रहा है. चेन्नई में 24 कैरेट सोने का प्रति ग्राम भाव ₹14,257 रुपये है.

क्‍या होगा आगे?

एलकेपी सिक्योरिटीज के रिसर्च एनालिस्ट जतिन त्रिवेदी का कहना है कि ब्याज दरें ऊंची बने रहने की उम्मीद और बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी की वजह से सोने और चांदी पर दबाव दिख रहा है. आने वाले समय में अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) का ब्‍याज दरों पर होने वाला नीतिगत फैसला सोने और चांदी की चाल तय करने में अहम भूमिका निभाएगा.

मोतीलाल ओसवाल के एनालिस्‍ट मानव मोदी का कहना है कि पिछले सप्ताह 4 फीसदी से अधिक की गिरावट के बाद सोने की कीमतें 4,000 डॉलर प्रति औंस के आसपास स्थिर रहीं. इस दौरान सोने का भाव कुछ समय के लिए इस मनोवैज्ञानिक स्तर से नीचे भी फिसल गया था. जुलाई के बाद पहली बार ऐसा हुआ.

मोदी का कहना है कि  पिछले सप्ताह ब्रेंट क्रूड की कीमतों में 6 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी हुई. इससे यह चिंता और मजबूत हुई कि ऊर्जा की बढ़ती लागत अमेरिकी महंगाई को ऊंचे स्तर पर बनाए रख सकती है और अमेरिकी फेडरल रिजर्व (Fed) के लिए ब्याज दरों में बदलाव करने की गुंजाइश सीमित कर सकती है. फेडरल रिजर्व का रुख सोने के लिए अहम होगा.



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सर्दियों में घर पर बनाएं हलवाई जैसा दानेदार मूंग दाल का हलवा, देसी घी से आएगा स्वाद

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Moong Dal Halwa Recipe: सर्दियों का मौसम शुरू होते ही घरों में गरमागरम खाने की चीजें बनने लगती हैं. इस मौसम में गाजर का हलवा, गोंद के लड्डू और तिल की मिठाइयों के साथ मूंग दाल का हलवा भी खूब पसंद किया जाता है. शादी-ब्याह हो या कोई खास मौका, मिठाई के काउंटर पर मूंग दाल का हलवा देखते ही इसे खाने का मन करने लगता है. इसका दानेदार स्वाद, देसी घी की खुशबू और ऊपर से डाले गए मेवे इसे और भी खास बना देते हैं. हालांकि, बहुत से लोग सोचते हैं कि मूंग दाल का हलवा घर पर बनाना काफी मुश्किल है. खासकर दाल को सही तरीके से भूनना और हलवे को हलवाई जैसा दानेदार बनाना आसान नहीं लगता. लेकिन अगर कुछ छोटी बातों का ध्यान रखा जाए, तो इसे घर पर भी स्वादिष्ट बनाया जा सकता है. इसके लिए आपको पीली मूंग दाल, देसी घी, दूध, चीनी और कुछ सूखे मेवों की जरूरत होगी.

इस रेसिपी में सबसे जरूरी काम दाल को धीमी आंच पर अच्छी तरह भूनना है. अगर दाल सही तरीके से भुन जाए, तो हलवे में अच्छी खुशबू और स्वाद आता है. ऐसे में अगर आप भी सर्दियों में परिवार के लिए कुछ मीठा बनाने की सोच रहे हैं, तो इस बार मूंग दाल का हलवा ट्राई कर सकते हैं. आइए जानते हैं इसे बनाने का आसान तरीका.

मूंग दाल का हलवा बनाने के लिए क्या-क्या चाहिए?
मूंग दाल का हलवा बनाने के लिए एक कप धुली हुई पीली मूंग दाल लें. इसके अलावा आधा से तीन चौथाई कप देसी घी, करीब तीन चौथाई कप चीनी और दो कप दूध की जरूरत होगी. हलवे की मिठास अपनी पसंद के अनुसार कम या ज्यादा रख सकते हैं. स्वाद और खुशबू बढ़ाने के लिए आधा छोटा चम्मच इलायची पाउडर लें. इसके अलावा आठ से दस काजू, आठ से दस बादाम और थोड़े पिस्ते भी रख लें. अगर आप हलवे को ज्यादा रिच बनाना चाहते हैं, तो इसमें थोड़ा केसर भी डाल सकते हैं. हालांकि, बिना केसर के भी मूंग दाल का हलवा स्वादिष्ट बनता है.

सबसे पहले मूंग दाल को अच्छी तरह धोकर भिगोएं
मूंग दाल का हलवा बनाने की शुरुआत दाल तैयार करने से करें. इसके लिए सबसे पहले एक कप पीली मूंग दाल को दो से तीन बार साफ पानी से धो लें. इसके बाद दाल को एक बड़े बर्तन में डालकर पर्याप्त पानी भर दें. अब इसे करीब तीन से चार घंटे के लिए भिगोकर रख दें. ऐसा करने से दाल नरम हो जाएगी और इसे पीसना आसान रहेगा. जब दाल अच्छी तरह फूल जाए, तो इसका पानी पूरी तरह निकाल दें. ध्यान रखें कि दाल में ज्यादा पानी न बचा हो, क्योंकि इससे हलवा भूनने में अधिक समय लग सकता है.

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दाल को पीसते समय रखें इस बात का ध्यान
भीगी हुई मूंग दाल का पानी निकालने के बाद इसे मिक्सर में डालें. अब दाल को दरदरा पीस लें. ध्यान रखें कि इसे बिल्कुल बारीक पेस्ट नहीं बनाना है. अगर आप हलवाई जैसा दानेदार हलवा चाहते हैं, तो दाल को थोड़ा मोटा पीसना बेहतर रहेगा. जरूरत पड़ने पर पीसते समय एक-दो चम्मच पानी डाल सकते हैं, लेकिन ज्यादा पानी डालने से बचें. दाल जितनी ज्यादा गीली होगी, उसे भूनने में उतना ही ज्यादा समय लग सकता है. जब दाल का दरदरा मिश्रण तैयार हो जाए, तो इसे एक बर्तन में निकालकर अलग रख लें.

भारी तले की कड़ाही में गर्म करें देसी घी
अब गैस पर एक भारी तले की कड़ाही रखें. मूंग दाल का हलवा बनाने के लिए मोटे तले वाली कड़ाही बेहतर रहती है, क्योंकि इसमें दाल के जलने का खतरा कुछ कम रहता है. कड़ाही में देसी घी डालकर मध्यम आंच पर गर्म करें. जब घी गर्म हो जाए, तो इसमें पिसी हुई मूंग दाल डाल दें. शुरुआत में दाल घी के साथ मिलकर चिपचिपी दिखाई दे सकती है. इससे परेशान होने की जरूरत नहीं है. अब इसे लगातार चलाते हुए भूनना शुरू करें. ध्यान रखें कि दाल कड़ाही के तले में चिपकने न पाए.

(इमेज AI)

दाल को अच्छी तरह भूनने से आएगा असली स्वाद
मूंग दाल का हलवा बनाने का सबसे जरूरी हिस्सा दाल को भूनना है. इसके लिए गैस की आंच धीमी से मध्यम रखें और दाल को लगातार चलाते रहें. शुरुआत में दाल का मिश्रण थोड़ा भारी और चिपचिपा दिखाई देगा, लेकिन जैसे-जैसे यह भुनेगा, इसकी बनावट बदलने लगेगी. कुछ देर बाद दाल से अच्छी खुशबू आने लगेगी और इसका रंग हल्का सुनहरा होने लगेगा. भूनते समय जल्दबाजी न करें. अगर आंच बहुत तेज होगी, तो दाल बाहर से भूरी हो सकती है, जबकि अंदर से कच्ची रह जाएगी. दाल को तब तक भूनें, जब तक उसका कच्चापन दूर न हो जाए और मिश्रण हल्का दानेदार दिखाई देने लगे. इसमें लगभग 25 से 40 मिनट या दाल की मात्रा के अनुसार इससे ज्यादा समय भी लग सकता है.

दूध डालकर हलवे को अच्छी तरह पकाएं
जब मूंग दाल अच्छी तरह भुन जाए, तो अब इसमें दूध मिलाने की बारी है. इसके लिए दूध को एक अलग बर्तन में हल्का गर्म कर लें. इसके बाद गर्म दूध को सावधानी से थोड़ा-थोड़ा करके भुनी हुई दाल में डालें. ध्यान रखें कि गर्म कड़ाही में दूध डालते समय भाप और छींटे निकल सकते हैं, इसलिए इसे धीरे-धीरे मिलाएं. अब दाल और दूध को अच्छी तरह चलाएं, ताकि कोई बड़ी गांठ न बने. इसके बाद मिश्रण को धीमी आंच पर पकने दें. कुछ देर में दाल दूध को सोखने लगेगी और हलवा गाढ़ा होने लगेगा.

चीनी मिलाने का सही समय क्या है?
जब दाल दूध को अच्छी तरह सोख ले और हलवा गाढ़ा दिखाई देने लगे, तो इसमें चीनी डालें. चीनी डालने के बाद मिश्रण थोड़ा पतला हो सकता है, क्योंकि गर्म होने पर चीनी घुलकर नमी छोड़ती है. ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं है. हलवे को धीमी से मध्यम आंच पर चलाते हुए पकाते रहें. कुछ देर बाद अतिरिक्त नमी कम होने लगेगी और हलवा दोबारा गाढ़ा हो जाएगा. अगर आपको कम मीठा हलवा पसंद है, तो चीनी की मात्रा थोड़ी कम रख सकते हैं. वहीं, ज्यादा मिठास पसंद करने वाले लोग अपने स्वाद के अनुसार चीनी बढ़ा सकते हैं.

इलायची और सूखे मेवों से बढ़ाएं स्वाद
अब हलवे में आधा छोटा चम्मच इलायची पाउडर डाल दें. इलायची की खुशबू मूंग दाल के हलवे का स्वाद और बढ़ा देती है. इसके बाद काजू, बादाम और पिस्ते को छोटे टुकड़ों में काटकर मिलाएं. अगर आप चाहें, तो थोड़े काजू और बादाम को अलग से घी में हल्का भूनकर भी डाल सकते हैं. इससे मेवों का स्वाद और अच्छा लगेगा. हलवे को कुछ मिनट तक और पकाएं, ताकि सभी चीजें अच्छी तरह मिल जाएं. अगर केसर इस्तेमाल कर रहे हैं, तो उसे पहले थोड़े गर्म दूध में भिगोकर हलवे में मिला सकते हैं.

हलवा तैयार होने की पहचान कैसे करें?
मूंग दाल का हलवा पूरी तरह तैयार हुआ है या नहीं, यह उसकी बनावट देखकर समझ सकते हैं. जब हलवा कड़ाही के किनारे छोड़ने लगे, उसमें से अच्छी भुनी हुई खुशबू आए और घी हल्का अलग दिखाई देने लगे, तो समझिए कि हलवा तैयार होने के करीब है. इस समय गैस की आंच धीमी रखें और हलवे को कुछ देर और चलाएं. ध्यान रखें कि हलवा बहुत ज्यादा सूखा भी न हो जाए. सही तरीके से बना मूंग दाल का हलवा मुलायम होने के साथ हल्का दानेदार रहता है.

गरमागरम हलवे को ऐसे करें सर्व
मूंग दाल का हलवा तैयार होने के बाद इसे एक कटोरी या प्लेट में निकाल लें. ऊपर से बारीक कटे बादाम, काजू और पिस्ते डालकर सजाएं. अगर आपको देसी घी का स्वाद ज्यादा पसंद है, तो परोसते समय ऊपर से थोड़ा घी भी डाल सकते हैं. यह हलवा गरम खाने पर ज्यादा अच्छा लगता है. सर्दियों में इसे लंच या डिनर के बाद मीठे के रूप में परोस सकते हैं. घर में मेहमान आने वाले हों या कोई छोटा पारिवारिक कार्यक्रम हो, तब भी इसे बनाया जा सकता है.

हलवाई जैसा हलवा बनाने के लिए इन गलतियों से बचें
मूंग दाल का हलवा बनाते समय कुछ गलतियों से बचना जरूरी है. सबसे पहली गलती दाल को बहुत बारीक पीसना है. इससे हलवे में मनचाहा दानेदार स्वाद नहीं आ पाता. दूसरी गलती दाल को कम भूनना है. अगर दाल अच्छी तरह नहीं भुनेगी, तो हलवे में कच्चापन महसूस हो सकता है. इसके अलावा तेज आंच पर भूनने से दाल जल सकती है. चीनी को भी दाल अच्छी तरह पकने के बाद ही डालें. अगर हलवा बहुत ज्यादा गाढ़ा हो जाए, तो जरूरत के अनुसार थोड़ा गर्म दूध मिलाया जा सकता है. इन आसान बातों का ध्यान रखकर आप घर पर स्वादिष्ट मूंग दाल का हलवा बना सकते हैं.



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