अलवर के रामगढ़ थाना क्षेत्र के खेड़ी गांव में कब्रिस्तान की सरकारी जमीन पर लकड़ी रखने का विरोध करना एक परिवार को भारी पड़ गया। विरोध से गुस्साए कुछ लोगों ने लाठी-डंडों और धारदार हथियारों (तलवारों) से पूरे परिवार पर हमला कर दिया। इस खूनी झड़प में युवक समेत एक ही परिवार के चार लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। प्राथमिक उपचार के बाद एक घायल की हालत नाजुक है। जिसे अलवर जिला अस्पताल रेफर किया गया है। वारदात के बाद गांव में तनाव का माहौल बना हुआ है। जानिए क्या है पूरा मामला: जानकारी के मुताबिक, खेड़ी गांव निवासी शरीफ खान ने गांव के ही रतन सिंह और भगत सिंह के परिवार द्वारा कब्रिस्तान की सरकारी भूमि पर लकड़ियों का ढेर लगाने पर आपत्ति जताई थी। इसी बात को लेकर दोनों पक्षों के बीच कहासुनी शुरू हो गई। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि रतन सिंह, भगत सिंह और सुखविंदर समेत अन्य लोगों ने लाठी-डंडे व तलवारें निकालकर शरीफ खान के घर पर हमला बोल दिया। हमले में ये हुए घायल हमले में शरीफ खान, उसके पिता सलीम, भाई साहिल और बहन रवीना गंभीर रूप से चोटिल हो गए। शोर सुनकर पहुंचे ग्रामीणों ने बीच-बचाव कर घायलों को तुरंत रामगढ़ के स्थानीय अस्पताल पहुंचाया। डॉक्टरों ने प्राथमिक इलाज के बाद शरीफ खान की गंभीर स्थिति को देखते हुए उसे बेहतर इलाज के लिए अलवर रेफर कर दिया है।
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कब्रिस्तान की जमीन पर लकड़ी डालने से मना किया,तलवारें चलीं: लाठी-डंडों से पूरे परिवार पर हमला किया, चार लोग गंभीर रूप से घायल – Alwar News
AMU में आठ साल बाद छात्रों की सरकार: 19 दिन की भूख हड़ताल से यूनियन हुई बहाल; नोमान अशरफ अध्यक्ष, नसरा नईम पहली महिला उपाध्यक्ष, हमदान सचिव पद जीते – Aligarh News
अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (AMU) में आठ साल का इंतजार खत्म हुआ। 19 दिन के छात्र आंदोलन और भूख हड़ताल के बाद आखिरकार छात्रों की सरकार बन गई। गुरुवार को हुए छात्रसंघ चुनाव की मतगणना के बाद शुक्रवार सुबह करीब 6 बजे अध्यक्ष, उपाध्यक्ष, मानद सचिव और फैकल्टीवार कोर्ट मेंबर के परिणाम घोषित कर दिए गए। अध्यक्ष पद पर मोहम्मद नोमान अशरफ, उपाध्यक्ष पद पर नसरा नईम और मानद सचिव पद पर मोहम्मद हमदान ने जीत दर्ज की। इस चुनाव ने एएमयू के इतिहास में एक नया अध्याय भी जोड़ दिया। तीन प्रमुख पदों अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और मानद सचिव में पहली बार किसी महिला ने जीत दर्ज की है। लॉ फैकल्टी की छात्रा नसरा नईम पहली महिला उपाध्यक्ष निर्वाचित हुई हैं। मूल रूप से गोरखपुर की रहने वाली नसरा लखनऊ में रहती हैं। अध्यक्ष पद पर विजयी पीएचडी छात्र नोमान अशरफ बिहार के सहरसा जिले के रहने वाले हैं, जबकि मानद सचिव इंजीनियरिंग छात्र मोहम्मद हमदान आजमगढ़ के निवासी हैं। 4121 वोट से जीते नोमान, नसरा ने 1273 वोट से दर्ज की जीत अध्यक्ष पद पर मोहम्मद नोमान अशरफ को 7797 वोट मिले। दूसरे स्थान पर रहे मोहम्मद इंतखाब को 3676 वोट मिले। इस तरह नोमान ने 4121 वोट के अंतर से जीत दर्ज की। उपाध्यक्ष पद पर नसरा नईम को 7091 और दूसरे स्थान पर रहे साकिब अली खान को 5818 वोट मिले। नसरा ने 1273 वोट से जीत हासिल की। मानद सचिव पद पर मोहम्मद हमदान को 8385 वोट मिले। दूसरे स्थान पर रहे अहमद फराज राजी को 6882 वोट मिले। हमदान ने 1503 वोट के अंतर से जीत दर्ज की। तीनों प्रमुख पदों में सबसे ज्यादा वोट भी मानद सचिव मोहम्मद हमदान को मिले। सुबह पांच बजे से जश्न, ढोल-नगाड़ों और आतिशबाजी से गूंजा कैंपस गुरुवार सुबह से मतदान को लेकर छात्रों में जबरदस्त उत्साह रहा। शाम को मतदान समाप्त होने के बाद रात करीब 7 से 8 बजे के बीच मतगणना शुरू हुई। एबीके गर्ल्स यूनियन स्कूल में मतगणना के दौरान जैसे-जैसे रुझान स्पष्ट होते गए, प्रत्याशियों और समर्थकों की धड़कनें बढ़ती गईं। शुक्रवार सुबह करीब पांच बजे तीनों प्रमुख पदों के परिणाम लगभग स्पष्ट हो गए। इसके बाद मतगणना स्थल के बराबर स्थित यूनियन हॉल और मैदान में जश्न शुरू हो गया। समर्थकों ने ढोल-नगाड़ों के साथ नारेबाजी और आतिशबाजी की। तीनों विजेता प्रत्याशियों के समर्थकों का जमावड़ा लग गया। परिणाम स्पष्ट होने के बाद पराजित प्रत्याशी और उनके समर्थक वहां से चले गए। इसके बाद तीनों विजेता यूनियन हॉल पहुंचे। यहां समर्थकों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। देर तक नारेबाजी, ढोल-नगाड़े और आतिशबाजी का दौर चलता रहा। आठ साल बाद छात्रसंघ की बहाली के बाद कैंपस में ऐसा उत्सव देखने को मिला, जिसमें छात्र, समर्थक और प्रत्याशी पूरी रात मतगणना और परिणामों से जुड़े रहे। 19 दिन की भूख हड़ताल के बाद लौटी छात्रसंघ की रौनक छात्रसंघ चुनाव की बहाली के पीछे लंबा आंदोलन रहा। छात्र यासिर फहद ने चुनाव कराने समेत विभिन्न मांगों को लेकर 21 सितंबर से भूख हड़ताल शुरू की थी। डक पॉइंट और अब्दुल्लाह गर्ल्स कॉलेज गेट पर चले इस आंदोलन में छात्राओं ने भी सक्रिय भूमिका निभाई। 19 दिन के आंदोलन के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन और आंदोलनकारी छात्रों के बीच सहमति बनी। इसके बाद चुनाव की प्रक्रिया शुरू हुई और 5 नवंबर को मतदान कराया गया। इस चुनाव के साथ आठ साल से बंद छात्रसंघ की गतिविधियां फिर शुरू हुईं। अब अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और मानद सचिव के साथ फैकल्टीवार कोर्ट मेंबर भी चुन लिए गए हैं। हालांकि, कैबिनेट सदस्यों का परिणाम अभी जारी होना बाकी है, जिसे कुछ देर में घोषित किया जाएगा। तीन प्रमुख पदों का पूरा परिणाम पद प्रत्याशी मिले वोट
अध्यक्ष मोहम्मद नोमान अशरफ 7797
अध्यक्ष मोहम्मद इंतखाब 3676
अध्यक्ष शरजील इकबाल 1807
अध्यक्ष मोहम्मद जुहैर अहमद 1274
अध्यक्ष अब्दुल वहीद 361
अध्यक्ष असमर फरीदी 345
अध्यक्ष अमीना इरशाद 136
अध्यक्ष शरजील मोहम्मद खान 33
अध्यक्ष साहिल खान 14
उपाध्यक्ष नसरा नईम 7091
उपाध्यक्ष साकिब अली खान 5818
उपाध्यक्ष मोहम्मद सदान 1525
उपाध्यक्ष अयमान हफीज खान 603
उपाध्यक्ष इरफा खान 196
उपाध्यक्ष सैयद अयान अहमद 75
उपाध्यक्ष अशफाक हुसैन 69
मानद सचिव मोहम्मद हमदान 8385
मानद सचिव अहमद फराज राजी 6882
मानद सचिव मोहम्मद ओवैस 144 जीत का गणित पद- विजेता को वोट- दूसरे प्रत्याशी को वोट- जीत का अंतर
अध्यक्ष- 7797 – 3676 -4121
उपाध्यक्ष -7091 -5818 – 1273
मानद सचिव -8385 – 6882 – 1503 फैकल्टीवार विजयी कोर्ट मेंबर चिकित्सा संकाय से मोहम्मद कैफ 1147 वोट पाकर जीते। जीवन विज्ञान संकाय मोहम्मद राफे 383 वोट पाकर जीते। इंजीनियरिंग एवं प्रौद्योगिकी संकाय से मोहम्मद कुमैल अशरफ 1384 वोट पाकर जीते। विधि संकाय से मोहम्मद हमजा अंसारी 321 वोट पाकर जीते। प्रबंधन अध्ययन एवं अनुसंधान और अंतरराष्ट्रीय अध्ययन संकाय से मोहम्मद अहसुन उस्मानी 241 वोट पाकर जीते। कृषि विज्ञान, धर्मशास्त्र एवं कुरान अध्ययन केंद्र से मोहताशिम एजाज सानी 294 वोट पाकर जीते।विज्ञान संकाय से शाहंशाह खान 941 वोट पाकर जीते। कला संकाय से कफील उल हक 495 वोट पाकर जीते। यूनानी चिकित्सा संकाय से आमिना फैजान 216 वोट पाकर जीते। वाणिज्य संकाय से इल्मा मशरूफ 336 वोट पाकर जीते। समाज विज्ञान संकाय से अब्दुल बासिद सिद्दीकी 743 वोट पाकर जीते। अब तक के परिणाम का सार – तीन प्रमुख पदों पर अध्यक्ष, उपाध्यक्ष और मानद सचिव निर्वाचित।
– 11 फैकल्टी/समूहों के कोर्ट प्रतिनिधियों के परिणाम घोषित।
– नसरा नईम एएमयू छात्रसंघ के तीन प्रमुख पदों में पहली महिला निर्वाचित।
– तीन प्रमुख पदों में सर्वाधिक 8385 वोट मानद सचिव मोहम्मद हमदान को मिले।
– कैबिनेट सदस्यों का परिणाम अभी प्रतीक्षित।
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हस्त नक्षत्र और वैधृति योग के सुयोग में धनतेरस आज: दिनभर है खरीदारी का महा मुहूर्त; जानें राशि के अनुसार क्या खरीदें – Patna News
आज धनतेरस हस्त नक्षत्र और वैधृति योग के सुयोग में मनाया जाएगा। धन त्रयोदशी की तिथि सुबह 11:06 बजे से पूरे दिन होने का कारण पूजा-पाठ, निवेश और खरीदारी दिनभर चलेगी। ऐश्वर्य, धन, आरोग्य, सौभाग्य, सुख आदि में वृद्धि हेतु लक्ष्मी-गणेश के साथ धन्वंतरि भगवा
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ज्योतिषाचार्य राकेश झा ने बताया कि धनतेरस पर हस्त नक्षत्र, अमृत सिद्धि योग, प्रीति योग का उत्तम संयोग बन रहा है। आज लक्ष्मी पूजा के साथ खरीदारी करने के लिए यह योग मंगलकारी सिद्ध होगा। पूरे दिन खरीदारी का महामुहूर्त है। धनतेरस पर झाड़ू खरीदने से दरिद्रता का ह्रास व समृद्धि का वास होता है।
ज्योतिषाचार्य राकेश झा।
अकाल मृत्यु से बचाव हेतु यम को दीप दान
शुक्र प्रदोष में धनतेरस के दिन पंचदेव के निमित्त पांच दीपक जलाने से उनकी विशेष कृपा और अनिष्ट ग्रहों से शांति मिलेगी। प्रदोषकाल में यम को तिल तेल का दीपक घर के बाहर दक्षिण मुख दिखाने से काल- संकट, रोग,शोक, भय, दुर्घटना, अकाल या अप मृत्यु नहीं होती है। सनातन धर्मावलंबी इस दिन सुख-समृद्धि व उत्तम स्वास्थ्य की कामना से धन्वंतरि देव का पूजा कर संध्या काल में घर के मुख्य द्वार पर तेल का दीप जलाएंगे।
गुरु और शुक्र ग्रह से जुड़ा है धनतेरस
ज्योतिषी राकेश झा के मुताबिक धनतेरस धन-आरोग्य की चमक का दिन है। यह दिन गुरु जो कि आरोग्य व आयु का कारक है और शुक्र जो धन-वैभव का कारक है, से जुड़ा है। इस दिन पीतल, चांदी, सोना आदि धातु खरीदे।
हल्दी, पीली वस्तु का दान और दीपदान से गुरु का बल बढ़ता है। लक्ष्मी पूजन, धातु का क्रय शुक्र ग्रह को सक्रिय करने में सहायक सिद्ध होता है। इन दोनों ग्रहों को साधने से धन वृद्धि, आरोग्य सुरक्षा व समृद्धि का शुभारंभ होता है।


मिठाइयों पर चांदी नहीं, एल्युमिनियम का जहरीला वर्क परोस रहे: ₹180 में 150 शीट बेच रहे दुकानदार; भोपाल-इंदौर में भास्कर का स्टिंग; जानिए असली-नकली की पहचान – Madhya Pradesh News
दिवाली पर मिठाइयों में इस्तेमाल होने वाले चांदी के वर्क के नाम पर एल्युमिनियम का वर्क बेचे जाने का मामला सामने आया है। दैनिक भास्कर ने मिठाई कारोबारी बनकर भोपाल और इंदौर में स्टिंग किया। इस दौरान दुकानदारों ने ₹180 से ₹350 तक में एल्युमिनियम का वर्क देने की बात कही। कुछ दुकानदारों ने दावा किया कि कई मिठाई कारोबारी इसे खरीदते हैं और इससे कोई नुकसान नहीं होता। हालांकि, एक्सपर्ट का कहना है कि ऐसे वर्क सेहत के लिए खतरा पैदा कर सकते हैं। पढ़िए, बाजार में कैसे बेचा जा रहा है चांदी के नाम पर एल्युमिनियम का वर्क। स्टिंग 1: ओल्ड सिटी मार्केट, भोपाल दैनिक भास्कर की टीम मिठाई कारोबारी बनकर प्रधान स्टोर पहुंची। रिपोर्टर ने चांदी का वर्क मांगा तो दुकानदार ने पहले चांदी का और फिर एल्युमिनियम का वर्क दिखाया। दुकानदार: यह 150 शीट का असली चांदी का वर्क ₹1,350 का है। रिपोर्टर: कुछ सस्ता मिलेगा? दुकानदार: (बिना प्रिंट वाला पैकेट दिखाते हुए) यह भी 150 शीट का है। ₹180 में मिल जाएगा। रिपोर्टर: यह लोकल है? नुकसान तो नहीं करेगा? किस चीज का बना है? दुकानदार: यह एल्युमिनियम का बना होता है। इससे कोई नुकसान नहीं है। मिठाई वाले इसे ले जाते हैं। इसका रंग भी नहीं उड़ता। स्टिंग 2: चौक बाजार, भोपाल चौक बाजार में सोनू नाम के बिचौलिए की मदद से रिपोर्टर एक दुकान तक पहुंचा। सोनू: (10 मिनट बाद 200 शीट का पैकेट लेकर लौटा) यह 200 शीट का वर्क ₹350 का है। एल्युमिनियम का बना है। कई मिठाई वाले हमसे ही खरीदते हैं। 15-20 दिन रखने पर भी इसका रंग नहीं बदलता और ग्राहकों को पता नहीं चलता। स्टिंग 3: राजवाड़ा मार्केट, इंदौर इंदौर के राजवाड़ा मार्केट में रिपोर्टर ने पुरुषोत्तम कृष्णदास सुगंधी की दुकान पर वर्क मांगा। दुकानदार ने दो तरह के पैकेट दिखाए। दुकानदार: ₹100 में चांदी के 10 वर्क मिलेंगे। रिपोर्टर: कुछ और सस्ता मिलेगा? दुकानदार: यह हल्का वाला चांदी का वर्क है। ₹20 में 10 मिल जाएंगे। स्टिंग में दुकानदार ने सस्ते वर्क को भी चांदी का बताया। 10 ग्राम चांदी से 250 वर्क बनते हैं तो 150 शीट का पैकेट ₹1,500 में कैसे? बाजार में 150 शीट के वर्क का पैकेट ₹1,300 से ₹1,500 में बिक रहा है। सर्राफा कारोबारियों के मुताबिक, 10 ग्राम चांदी से अधिकतम 250 शीट वर्क तैयार हो सकते हैं। 10 ग्राम चांदी का भाव ₹1,910 से ₹2,100 के बीच है। ऐसे में 150 शीट के पैकेट की कीमत 1500 रुपए होना संभव नहीं है। इसकी वास्तविक कीमत का आकलन उसमें इस्तेमाल हुई चांदी की वास्तविक मात्रा, वर्क बनाने की मजदूरी और व्यापारियों का मार्जिन से होता है। कारोबारियों के मुताबिक, मध्यप्रदेश में चांदी का वर्क गुजरात और राजस्थान से आता है। एल्युमिनियम का वर्क भी दूसरे राज्यों से मंगाया जाता है। एल्युमिनियम के सेवन से सेहत पर क्या असर हो सकता है? पूर्व सीएमएचओ वीणा सिन्हा के मुताबिक, शरीर के लिए रोजाना 5 मिलीग्राम से कम चांदी का सेवन ही सुरक्षित माना जाता है। लेकिन चांदी की जगह एल्युमिनियम का सेवन शरीर के लिए घातक है। हमें सोच समझकर इन वस्तुओं का इस्तेमाल करना चाहिए। उपभोक्ता इनकी स्थानीय स्तर पर भी जांच करवा सकते हैं। घर बैठे ऐसे करें असली और नकली वर्क की पहचान अफसर बोले- शिकायत मिलने पर कार्रवाई करते हैं खाद्य एवं औषधि प्रशासन के नियंत्रक मनोज पुष्प के मुताबिक, त्योहारों के दौरान मिठाई और मेवे की दुकानों का निरीक्षण किया जा रहा है। खाद्य पदार्थों के नमूने लेकर लैब में जांच कराई जा रही है। मिठाइयों में इस्तेमाल होने वाले सिल्वर वर्क की गुणवत्ता भी जांच के दायरे में है। मिलावट की शिकायत या आशंका मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इनपुट- जलज नागदा, इंदौर
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तमिलनाडु के कई जिलों में बारिश: यूपी के 10 शहरों में कोहरा, चारधामों में तापमान -8°C से नीचे
चक्रवात मुरासु का असर कमजोर होने के बावजूद तमिलनाडु के कई जिलों में बारिश हो रही है। मौसम विभाग के मुताबिक, 8 नवंबर तक तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में कुछ स्थानों पर भारी बारिश की संभावना है। 7 और 8 नवंबर को बारिश का दायरा अन्य जिलों बढ़ने की संभावना है। चक्रवाती तूफान मुरासु का प्रभाव आंध्र प्रदेश में कमजोर पड़ गया है। राज्य के ज्यादातर हिस्सों में बारिश थम गई है। हालांकि, गुरुवार को काकीनाडा, एलुरु और पोलावरम जिले शामिल हैं। यूपी में ठंड बढ़ गई है। सुबह और शाम हल्की ठिठुरन महसूस होने लगी है। कई जिलों में कोहरे पड़ने लगा है। गुरुवार सुबह लखनऊ, संभल, श्रावस्ती, देवरिया समेत 10 शहरों में कोहरा छाया रहा। उत्तराखंड के चारों धामों में गुरुवार सुबह तापमान माइनस में दर्ज किया गया। केदारनाथ में न्यूनतम तापमान -8°C, बद्रीनाथ में -9°C, गंगोत्री में -13°C और यमुनोत्री में -6°C रिकॉर्ड किया गया। मध्यप्रदेश में इस बार दीपावली और धनतेरस के दिन मौसम साफ रहेगा। 5 से 8 नवंबर तक मध्य प्रदेश के किसी भी जिले में आंधी-बारिश का अलर्ट नहीं है। सैटेलाइट मैप में देखें मानसूनी बादलों की स्थिति
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रिपब्लिकन पार्टी की 50 साल में सबसे बड़ी हार: सरकार अपनी थी, चुनाव लड़ने के लिए रिकॉर्ड पैसा, ट्रम्प को रोक नहीं पाए इसलिए हारे
तारीख- 28 अक्टूबर जगह- न्यूयॉर्क रिपब्लिकन पार्टी के करीब 25 चुनावी रणनीतिकार एक वीडियो कॉल पर जुड़े थे। बातचीत की शुरुआत ही साइनाइड (जहर) की गोली से हुई। पार्टी के लिए चुनावी सर्वे करने वाले टोनी फैब्रिजियो ने पूछा, ”आप पहले सफेद गोली (अच्छी खबर) लेना चाहेंगे या काली (बुरी खबर)?” इसके बाद रिपब्लिकन पार्टी के बड़े डेटा सलाहकारों में से एक टिम सेलर ने चुनाव के दो संभावित नतीजे बताए। पहला ये कि पार्टी के प्रचार के लिए जुटाए गए 40 करोड़ डॉलर का फंड सही वोटर्स तक पहुंच रहा है और लोग वोट देने भी आ रहे हैं। दूसरा नतीजा पार्टी की करारी हार को लेकर था। पार्टी की चुनावी कमान संभाल रहे जेम्स ब्लेयर ने हंसते हुए कहा, ”मैंने अपने अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू कर दी है। मेरा सुझाव है कि आप सब भी ऐसा ही करें।” उनकी बात सुनकर बाकी लोग हंसने लगे। करीब 30 मिनट तक कॉल पर ऐसे ही निराशा भरे मजाक चलते रहे। इसमें जेल का खाना खाने, राष्ट्रपति से माफी मिलने और देश छोड़कर भागने की बातें भी हुईं। नेतन्याहू का जिक्र करते हुए ब्लेयर ने तंज में कहा, “कम से कम बीबी जीत गए। वह हमारी रक्षा करेंगे।” इस पर फैब्रिजियो ने कहा, ”हां शायद हमें इजराइल में शरण मिल सकती है। डेमोक्रेट्स ने रिपब्लिकन की 7 सीटें छीनीं एक साल पहले किसी को अंदाजा नहीं होगा कि रिपब्लिकन पार्टी की इतनी बड़ी हार होगी। पार्टी के पास चुनाव लड़ने के लिए रिकॉर्ड पैसा था। दुनिया के सबसे अमीर व्यक्ति इलॉन मस्क का साथ था। उन्होंने इस चुनाव में राष्ट्रपति चुनाव से भी ज्यादा पैसा लुटाया। सीनेट चुनाव में भी रिपब्लिकन पार्टी की स्थिति मजबूत थी। चुनावी समीकरण ऐसे थे कि डेमोक्रेट्स को उन राज्यों में मुकाबला करना पड़ रहा था, जहां वे दशकों से नहीं जीते थे। हाउस चुनाव में ट्रम्प ने अपना बहुमत बढ़ाने के लिए एक और दांव चला। अमेरिका में आमतौर पर हर 10 साल में चुनावी क्षेत्रों की सीमाएं बदली जाती हैं। लेकिन ट्रम्प की टीम ने इस परंपरा को तोड़ते हुए बीच दशक में ही सीमाएं बदलने की कोशिश की। मकसद था ऐसे नए चुनावी क्षेत्र बनाना, जहां रिपब्लिकन उम्मीदवारों की जीत आसान हो जाए। इन तमाम कोशिशों के बावजूद रिपब्लिकन पार्टी को हार का सामना करना पड़ा। इसे पिछले 50 साल में पार्टी की सबसे बड़ी चुनावी हार में से एक माना जा रहा है। इसकी तुलना 1974 के चुनाव से की जा रही है। उस समय वाटरगेट कांड के बाद रिपब्लिकन पार्टी ने प्रतिनिधि सभा की 48 और सीनेट की 4 सीटें गंवाई थीं। इस बार रिपब्लिकन पार्टी ने सीनेट की 7 सीटें गंवाई हैं। चुनाव से पहले सीनेट में उसके 53 सदस्य थे, जो घटकर 44 रह गए हैं। (2 सीटों पर गिनती जारी है)। वहीं, हाउस में भी पार्टी को बड़ा नुकसान हुआ है। शुरुआती नतीजों में वह करीब 25 सीटें गंवाती दिख रही थी। हालांकि, खबर लिखे जाने तक 45 सीटों पर मतगणना जारी थी। ईरान के खिलाफ जंग शुरू कर ट्रम्प ने अपना ही वादा तोड़ा चुनाव के नतीजे आने से पहले ही ट्रम्प सोचने लगे थे कि अगर कुछ फैसले नहीं लिए गए होते तो क्या होता। उनसे बातचीत करने वाले एक व्यक्ति के मुताबिक, ट्रम्प ने पूछा भी था, ”अगर हम ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू ही नहीं करते, तो मिडटर्म चुनाव में क्या होता?” ईरान युद्ध ने लोगों को बहुत नाराज किया क्योंकि ट्रम्प ने राष्ट्रपति चुनाव प्रचार में वादा किया था कि अमेरिका कोई नया युद्ध शुरू नहीं करेगा। लेकिन सत्ता में आने के बाद उन्होंने खुद नया युद्ध शुरू कर दिया। उन्होंने महंगाई कम करने का वादा किया था। लेकिन पेट्रोल की कीमतें तेजी से बढ़ गईं और महंगाई भी बढ़ गई। पेट्रोल की कीमतें बढ़ने पर ट्रम्प ने कहा, ”यह एक छोटी सी कीमत है, जिसे चुकाया जा सकता है।” ट्रम्प का जंग खत्म करने का अनुमान गलत साबित हुआ ट्रम्प ने जब ईरान के खिलाफ जंग शुरू की तो उन्हें भरोसा था कि यह जल्दी खत्म हो जाएगा और अमेरिका को बड़ी जीत मिलेगी। लेकिन ट्रम्प का अनुमान गलत साबित हुआ। ट्रम्प लगातार दावा कर रहे थे कि अमेरिका ने जीत हासिल की है। लेकिन निजी बैठकों में उनके सलाहकार उन्हें होर्मुज स्ट्रेट बंद होने, पेट्रोल और खाद की कीमतें बढ़ने और अमेरिकी हथियारों के भंडार में तेजी से कमी आने की जानकारी दे रहे थे। युद्ध शुरू होने के करीब दो हफ्ते बाद मार्च में मतदाताओं के बीच सर्वे किया गया। इसमें पता चला कि लोगों को समझ नहीं आ रहा था कि राष्ट्रपति ने युद्ध शुरू ही क्यों किया। लोगों को लग रहा था कि ट्रम्प ने अपना वादा तोड़ा है और अब इस युद्ध के कारण उनकी रोजमर्रा की जिंदगी महंगी हो रही है। युद्ध का विरोध करने वाले ट्रम्प के कुछ पुराने सहयोगी भी अब खुलकर उनके खिलाफ हो गए थे। इनमें टकर कार्लसन और जॉर्जिया की पूर्व सांसद मार्जोरी टेलर ग्रीन शामिल थीं। सलाहकारों के मुताबिक, ट्रम्प जानते थे कि युद्ध के कारण उनका समर्थन घट रहा है। लेकिन कुछ समय के लिए उन्हें लगा कि अब इस मुसीबत से बाहर निकलने का रास्ता मिल गया है। ट्रम्प अपने शौक में उलझे रहे, जनता की समस्याओं पर ध्यान नहीं दिया ट्रम्प की टीम के कुछ सदस्य इस बात से परेशान थे कि ट्रम्प सीमा सुरक्षा की तुलना में अपने नए बॉलरूम की ज्यादा बात करते थे। उन्हें किराने के सामान की बढ़ती कीमतों से ज्यादा गोल्फ कोर्स की चिंता थी। महंगाई के बजाय वे इमारतों की सजावट पर ध्यान दे रहे थे। मिडटर्म चुनाव से ठीक पहले अपने आखिरी चुनावी भाषण में भी उन्होंने नेशनल मॉल के रिफ्लेक्टिंग पूल के नवीनीकरण की बात की। मजाक में कहा कि वे इसका नाम अब्राहम लिंकन के बजाय अपने नाम पर रखने के बारे में सोच रहे हैं। यही वह दूरी थी, जिसे लेकर उनकी टीम के लोग चिंतित थे। एक तरफ आम अमेरिकी महंगाई, महंगे पेट्रोल और ईरान युद्ध से परेशान थे, दूसरी तरफ राष्ट्रपति का ध्यान उन मुद्दों पर नहीं दिख रहा था। 28 अक्टूबर की वीडियो कॉल में जिस हार का अंदाजा लगाकर उनकी टीम अंतिम संस्कार और देश छोड़ने के मजाक कर रही थी, एक हफ्ते बाद चुनाव नतीजों ने उस डर को हकीकत में बदल दिया। ————————————-
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‘सूर्य-सारथी-सम्मान से सम्मानित हुए सौर-ऊर्जा को बढ़ावा देने वाले पार्षद: प्रयागराज में 1000 से अधिक घरों में लगा सोलर, इकोज़ेन ने किया सम्मानित – Prayagraj (Allahabad) News
प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना को जन-जन तक पहुंचाने और सौर ऊर्जा के प्रति लोगों को जागरूक करने में अहम भूमिका निभाने वाले नगर निगम पार्षदों को सम्मानित किया गया। डिसेंट्रलाइज्ड रिन्यूएबल एनर्जी के क्षेत्र में काम करने वाली कंपनी इकोज़ेन की ओर से प्रयागराज में ‘सूर्य सारथी सम्मान 2026’ समारोह आयोजित किया गया। इसमें सरकारी अधिकारियों, नगर निगम पार्षदों और अन्य प्रमुख लोगों की मौजूदगी में योजना को बढ़ावा देने वाले जनप्रतिनिधियों के योगदान की सराहना की गई। कार्यक्रम में इकोज़ेन के रूफटॉप सेल्स एवं कंज्यूमर फाइनेंस हेड अक्षत गुप्ता ने बताया कि कंपनी अब तक देशभर में 6 लाख से अधिक किसानों को सोलर समाधान उपलब्ध करा चुकी है। प्रधानमंत्री सूर्य घर मुफ्त बिजली योजना के तहत कंपनी रूफटॉप सोलर लगाने का काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सोलर पैनल लगवाने, उसकी उपयोगिता और विश्वसनीयता को लेकर लोगों के मन में कई तरह के सवाल और संशय रहते हैं। ऐसे में स्थानीय पार्षदों ने जनता और सोलर तकनीक के बीच सेतु का काम किया है। उनके सहयोग और समन्वय से प्रयागराज में 1000 से अधिक उपभोक्ताओं के घरों में रूफटॉप सोलर सिस्टम स्थापित किए जा चुके हैं। सोलर कैंप लगाकर लोगों को किया जागरूक कार्यक्रम में बताया गया कि इकोज़ेन की ओर से शहर में सोलर कैंप और जागरूकता अभियान चलाए जा रहे हैं। इनके माध्यम से लोगों को रूफटॉप सोलर के फायदे, सरकारी सब्सिडी और सोलर सिस्टम लगवाने की प्रक्रिया की जानकारी दी जा रही है। सोलर ऊर्जा अपनाकर परिवार अपनी बिजली की जरूरतों का एक हिस्सा खुद पूरा कर सकते हैं। इससे बिजली बिल में बचत के साथ लंबे समय में आर्थिक लाभ भी मिल सकता है। समारोह में भविष्य में प्रधानमंत्री के हरित ऊर्जा विजन को आगे बढ़ाने और अधिक से अधिक घरों तक सौर ऊर्जा पहुंचाने की रणनीति पर भी चर्चा हुई।
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नायब तहसीलदार बनने विभागीय परीक्षा 10 जनवरी को: 73 पदों के लिए पटवारी, RI और लिपिक संवर्ग के कर्मचारियों को मिलेगा मौका; 100 अंकों का पेपर – Bhopal News
राजस्व विभाग में कार्यरत पटवारी, राजस्व निरीक्षक (RI) और लिपिक वर्गीय सेवा संवर्ग के कर्मचारियों के लिए नायब तहसीलदार बनने का मौका है। मध्यप्रदेश कर्मचारी चयन मंडल (MPESB) सीमित विभागीय प्रतियोगिता परीक्षा-2026 आयोजित करेगा।
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पहले परीक्षा 14 नवंबर को प्रस्तावित थी, लेकिन अब राजस्व विभाग की सहमति के बाद परीक्षा 10 जनवरी 2027 को होगी। इस परीक्षा के जरिए नायब तहसीलदार के कुल 73 पद भरे जाएंगे।


कौन कर सकता है आवेदन?
- राजस्व विभाग में पटवारी, राजस्व निरीक्षक या लिपिक वर्गीय पद पर कार्यरत कर्मचारी।
- संबंधित पद पर कम से कम 5 साल का अनुभव होना जरूरी। अनुभव स्थायी या स्थानापन्न रूप से काम करने का हो सकता है।
- मान्यता प्राप्त विश्वविद्यालय से कला, विज्ञान, वाणिज्य या कृषि में स्नातक डिग्री अनिवार्य।
- अधिकतम आयु: 1 जनवरी 2026 को 55 वर्ष।
- एक अभ्यर्थी इस परीक्षा में अधिकतम तीन बार शामिल हो सकता है।

परीक्षा के दिन क्या जरूरी?
- परीक्षा केंद्र पर मूल फोटो पहचान पत्र अनिवार्य।
- आधार कार्ड, वोटर आईडी, पैन कार्ड, ड्राइविंग लाइसेंस या पासपोर्ट में से कोई एक मान्य।
- आधार आधारित बहुस्तरीय बायोमेट्रिक सत्यापन होगा।
- आवेदन में कर्मचारी कोड दर्ज करना जरूरी था।
- विभागीय परीक्षा होने के कारण मूल निवासी प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं होगी।

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मध्य प्रदेश के डेढ़ लाख से ज्यादा शिक्षकों की शिक्षक पात्रता परीक्षा (TET) कराने को लेकर नया पेंच सामने आया है। मुख्यमंत्री और स्कूल शिक्षा मंत्री की घोषणा के बाद परीक्षा ऑनलाइन के साथ ऑफलाइन कराने के स्कूल शिक्षा विभाग के प्रस्ताव पर कर्मचारी चयन मंडल (ESB) ने परीक्षा कराने से इनकार कर दिया है।पूरी खबर पढ़ें

