बारां जिले के भंवरगढ़ में सरपंच प्रत्याशी के चुनाव कार्यालय पर देर रात हंगामा और अभद्रता का आरोप लगा है। शिकायतकर्ता ने थाना अधिकारी को लिखित शिकायत देकर कार्रवाई की मांग की है। शिकायत के मुताबिक, देर रात प्रत्याशी के चुनाव कार्यालय में कार्यकर्ता खाना खा रहे थे। इसी दौरान सरपंच प्रत्याशी के पति सोनू चौधरी, छोटू चौधरी, मोहित चौधरी और उनके कुछ समर्थक वहां पहुंचे। आरोप है कि उन्होंने कार्यालय में अभद्रता की। शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया कि वे नशे में थे और कार्यकर्ताओं से पैसे बांटने की बात कहकर जोर-जबरदस्ती करने लगे। शिकायत में कहा गया है कि वहां कोई अवैध गतिविधि नहीं हो रही थी। शिकायतकर्ता के मुताबिक, आरोपियों ने पुलिस की गाड़ी के सामने भी गाली-गलौज की और माहौल खराब करने की कोशिश की। उसने कहा कि उसे उनसे खतरा है। शिकायतकर्ता ने पुलिस से आरोपियों को हिरासत में लेकर कार्रवाई करने की मांग की है। उसने कहा कि इससे चुनाव के दौरान इलाके में शांति बनी रहेगी।
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सास ने किया विरोध, नर्सरी से रबी ने बदल दी किस्मत, सालाना है 500000 का मुनाफा
शिवहर: बिहार के शिवहर जिले से महिला सशक्तिकरण की एक बेहद प्रेरणादायक और दिल को छू लेने वाली कहानी सामने आई है. यहां मीनापुर बलहा गांव की रहने वाली रूबी कुमारी ने साबित कर दिया है कि अगर मन में कुछ कर गुजरने का पक्का इरादा हो, तो हर बड़ी से बड़ी मुश्किल को पार किया जा सकता है. पति की अचानक मौत के बाद जब जीवन में अंधेरा छा गया था, तब रूबी ने हिम्मत नहीं हारी. उन्होंने परिवार की माली हालत सुधारने के लिए नर्सरी व्यवसाय शुरू करने का फैसला किया, जिस काम के लिए उनकी अपनी सास ने उन्हें साफ तौर पर मना कर दिया था. आज वही फैसला इस पूरे परिवार के लिए वरदान साबित हुआ है और वे हर साल लाखों रुपये की शानदार कमाई कर रहे हैं.
दो वक्त की रोटी के लिए भी करना पड़ा था संघर्ष
रूबी कुमारी की जिंदगी साल 2013 में तब पूरी तरह बिखर गई. जब उनके पति कृष्णनंदन कुमार की एक सड़क दुर्घटना में दर्दनाक मौत हो गई. वर्ष 2010 में शादी के बंधन में बंधी रूबी के सिर से पति का साया उठ चुका था और उनके कंधों पर छोटे बच्चों की परवरिश की जिम्मेदारी आ गई थी. उस समय स्थिति इतनी बदतर थी कि घर में दो वक्त की रोटी और बच्चों की पढ़ाई के लिए भी पैसे नहीं बचते थे. कुछ समय तक उन्होंने जैसे-तैसे हरी सब्जी की खेती करके परिवार का पेट पालने की कोशिश की, लेकिन बढ़ती जरूरतों के आगे यह नाकाफी साबित हो रहा था. गरीबी के इस दौर में उन्हें लगने लगा था कि अगर उन्होंने कोई ठोस कदम नहीं उठाया, तो उनके बच्चों का भविष्य अंधेरे में डूब जाएगा.
जीविका समूह के सहारे उठाया बड़ा कदम
मुश्किल समय में रूबी की मुलाकात क्षेत्र की कुछ अन्य महिलाओं से हुई, जिन्होंने उन्हें ‘जीविका समूह’ के बारे में जानकारी दी. साल 2016 में जीविका से जुड़ने के बाद रूबी को नई दिशा मिली. साल 2023 में उन्होंने नर्सरी व्यवसाय शुरू करने के लिए लोन लिया और पौधशाला की नींव रखी. हालांकि, जब उन्होंने यह विचार अपनी सास के सामने रखा, तो उनकी सास ने इस काम को करने से सख्त मना कर दिया. उन्हें डर था कि यह नया व्यवसाय असफल हो गया तो कर्ज का बोझ और बढ़ जाएगा, लेकिन रूबी ने हार नहीं मानी और अपनी सास को प्रेम से समझा-बुझाकर इस काम को शुरू करने की अनुमति ले ली.
अब सालाना है 4-5 लाख की कमाई
आज रूबी कुमारी ने अपनी खुद की 12 कट्ठे जमीन पर शानदार नर्सरी विकसित कर ली है, जिसमें आम, लीची, अमरूद, पपीता, नींबू, आंवला, कटहल, सागवान, महोगनी और अर्जुन जैसे 13 अलग-अलग किस्मों के पौधे उपलब्ध हैं. उनके द्वारा तैयार किए गए ये पौधे जीविका समूह के माध्यम से अनुदानित मूल्य पर बेचे जाते हैं, साथ ही वन विभाग भी यहीं से पौधे खरीदता है. पिछले दो सालों से वे इस व्यवसाय को सफलतापूर्वक चला रही हैं और सभी खर्चों को निकालकर सालाना 4 से 5 लाख रुपये का शुद्ध मुनाफा कमा रही हैं. इसके अलावा वह पशुपालन और हरी सब्जियों की खेती भी करती हैं, जिससे उनकी आय और अधिक मजबूत हो गई है.
बहू की सफलता से गर्व महसूस कर रहा परिवार
शुरुआत में जिस काम को लेकर सास ने मना किया था और आशंकाएं जताई थीं, आज उसी नर्सरी ने पूरे परिवार की तकदीर हमेशा के लिए बदल दी है. बहू रूबी की असीम मेहनत, लगन और संघर्ष रंग लाया है, जिसे देखकर आज उनकी सास का सीना गर्व से चौड़ा हो जाता है. जब परिवार के हालात सुधरे और समृद्धि आई, तो सास की आंखों से खुशी के आंसू छलक आए. रूबी कुमारी ने न सिर्फ अपने परिवार को गरीबी के दलदल से बाहर निकाला है, बल्कि वे आज अपने समाज और आसपास की अन्य महिलाओं के लिए भी आत्मनिर्भरता की एक बेहतरीन और अनुकरणीय मिसाल बन चुकी हैं.
तस्वीरों में देखिए जनप्रतिनिधियों के करवाचौथ की झलक: मेरठ में पारंपरिक रस्मों के साथ की पूजा-अर्चना – Meerut News
गुरुवार को करवाचौथ का त्योहार आम महिलाओं के साथ जनप्रतिनिधियों ने भी उत्साह और परंपरागत तरीके से मनाया। दिनभर व्रत रखने के बाद शाम को महिलाओं ने पूजा-अर्चना की और करवाचौथ की कथा सुनकर पति की लंबी उम्र और सुखी वैवाहिक जीवन की कामना की। महिला आयोग की सदस्य, जिला पंचायत अध्यक्ष गौरव चौधरी , पूर्व विधायक संगीत सोम, पूर्व मंत्री सुनील भराला और कांग्रेस नेत्री पूनम पंडित समेत अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी करवाचौथ मनाया। इस दौरान त्योहार की पारंपरिक रस्में निभाई गईं। करवाचौथ के मौके पर जनप्रतिनिधियों के घरों में भी उत्सव का माहौल देखने को मिला। जनप्रतिनिधियों ने भी परंपरा को निभाते हुए त्योहार मनाया। तस्वीरों में देखिए जनप्रतिनिधियों का करवाचौथ –
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‘सामने उजड़ गया सुहाग, मैं कुछ न कर सकी’: महिला बोली- लोगों ने मुझे पकड़ रखा था, नाव हादसे की आंखोदेखी; 35 में 2 की मौत – Begusarai News
‘छोटी सी नाव थी, जो ओवरलोड हो गई थी। मेरे पति और बेटी भी नाव पर थे। ओवरलोड होने के कारण नाव में पानी भर गया था। धीरे-धीरे नाव गंगा में समाने लगी। मेरे सामने पति और बेटी गंगा में डूब रहे थे। पति नाव के नीचे फंस गए थे। मैं उन्हें बचाने जा रही थी, पर अन्य लोगों ने मुझे पति के पास जाने नहीं दिया। मेरे सामने मेरा सुहाग उजड़ गया। पति सोगराथ महतो की लाश मिली। बेटी तैरकर किनारे तक पहुंच गई।’ बेगूसराय में ये बातें मन्नुता देवी (45) ने बताई है। जो नाव हादसे में खुद भी डूब गईं थी, पर नाव सवार ग्रामीणों ने इन्हें सहारा दिया था।’ दरअसल, बेगूसराय में बुधवार की देर शाम गंगा नदी में नाव डूब गई थी। नाव की क्षमता 15 लोगों की थी, पर उसपर 35 लोग सवार हो गए। हादसे में 2 लापता हो गए थे, दोनों की लाशें गुरुवार को मिली है। मृतकों में चमथा पंचायत-1 के चमथा रजौली गांव निवासी मेघू महतो के बेटे सोगारथ महतो (50) और हरदेव महतो की बेटी रीना कुमारी उर्फ रावो (12) है। बछवाड़ा थाना क्षेत्र स्थित चमथा रजौली दियारा में घटना हुई थी। पीड़ित परिवार ने बताई आंखोदेखी, कैसे हुआ नाव हादसा, ग्रामीणों में क्या है आक्रोश, क्या है मांगें, पढ़ें रिपोर्ट… कुछ तस्वीरें… एक के कूदने के बाद नाव झूकी, फिर पानी भर गया मन्नुती देवी कहतीं हैं कि हमलोग दियारा में परवल की खेती और मजदूरी करते हैं। उसी से हमारा घर चलता है। खेती-मजदूरी के बाद हम लौट रहे थे। नाव ओवरलोड हो गई तो हमलोगों ने आपत्ति भी की थी। मना किया था कि छोटी नाव पर इतने लोग न बैठें, पर किसी ने सुनी नहीं। नाव करीब 200 मीटर आगे बढ़ी थी। पानी की गहराई ज्यादा थी। इस दौरान नाव में हलचल होने लगी। एक लड़का डर के कारण नाव से कूद गया। जिसके बाद नाव एक तरफ से झूक गई थी। तब नाव में पानी भरने लगा और धीरे-धीरे नाव पानी में बैठती चली गई। ‘मेरे सामने बेटी नदी में डूबी, कुछ न कर सकी’ हरदेव महतो की पत्नी बबीता देवी (40) कहती हैं कि मैं और मेरी बेटी नाव पर थे। हमलोग बिचली दियारा से लौट रहे थे। मैं नाव के पिछले हिस्से में थी और मेरी बेटी नाव के आगे वाले हिस्से में बैठी हुई थी। नाव आगे वाले हिस्से से ही झूकने लगी थी। मैं बेटी को बचाने के लिए पानी में कूदने वाली थी, पर मुझे सबने पकड़ कर रखा था। मैंने बोला मुझे छोड़ दीजिए, मेरी बेटी पानी में डूब रही है। पर सब कहने लगे कि बीटिया पानी में डूब गई है, तुम बचाने जाओगी तो तुम भी डूब जाओगी। ये सब कहकर किसी ने मुझे आगे नहीं जाने दिया। मेरी आंखों के सामने बेटी नदी में समां गई। बाकी लोगों ने मुझे सहारा देकर नदी के किनारे तक लाया। हादसे के अगले दिन बेटी की लाश मिली है। ‘डर लग रहा था, पर जान बचान के लिए कूद गई’ नाव पर सवार मासूम बच्ची करीना ने भी हादसे के बारे में बताया। करीना ने कहा कि नाव जब डूबने लगी तो मैं काफी डर गई थी। सब लोगों को देखा कि अपनी-अपनी जान बचाने के लिए पानी में कूद रहे हैं। इसके बाद मैंने भी नदी में छलांग लगा दी। मेरे पास और कोई रास्ता नहीं था। तैरते हुए मैं नदी के उस हिस्से में पहुंच गई जहां पानी की गहराई कम थी। वहां एक खंभा था मैंने उसे पकड़ लिया। किसी तरह मैंने अपनी जान बचाई। ‘मैं लखनऊ से पहुंच गया, पर विधायक-सांसद नहीं आएं’ ग्रामीण रौशन कुमार ने कहा कि हादसे वाले दिन मैं लखनऊ में था। मुझे पता चला कि गांव में 2 की जान चली गई है तो मैं गुरुवार को गांव पहुंचा। विडंबना है कि मैं आम इंसान होकर लखनऊ से यहां पहुंच गया, पर स्थानीय विधायक और सांसद नहीं आए। उन्होंने जरूरत नहीं समझी कि दुखी लोगों से जाकर मिले। उनका दर्द समझें। गांव के बाहर के लोग मदद के लिए आ रहे हैं, पर जनप्रतिनिधि कोई फर्क नहीं पड़ रहा है। स्थानीय ग्रामीणों में आक्रोश और सवाल ग्रामीण रामजतन पासवान और राकेश कुमार ने कहा कि चमथा रजौली के लोगों को अपनी आजीविका, खेती-किसानी और मजदूरी के लिए हर दिन जान जोखिम में डालकर गंगा पार बिचली दियारा जाना पड़ता है। दियारा क्षेत्र में आवागमन के लिए किसी पक्के पुल या सुरक्षित यातायात के साधन की कोई व्यवस्था नहीं है। चुनाव के समय कई बार पुल निर्माण के शिलान्यास और वादे तो किए गए, लेकिन चुनाव बीत जाने के बाद जनप्रतिनिधि और विधायक दियारा के लोगों की सुध लेने नहीं आते। ग्रामीणों के अनुसार यदि समय रहते आवागमन की व्यवस्था की गई होती, तो आज दो लोगों को जान नहीं गंवानी पड़ती। ग्रामीणों ने मांग की है कि उचित मुआवजा दी जाए। दियारा क्षेत्र में पुल का निर्माण कराया जाए। जिससे भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं को रोका जा सके। NDRF-SDRF की टीम ने बरामद की लाशें दरअसल, बेगूसराय में बुधवार शाम नाव हादसे के बाद दो लोग लापता हो गए थे। बुधवार शाम में ही एसडीआरएफ की टीम पहुंच गई थी, पर अंधेरा होने के कारण बुधवार को दोनों की तलाश नहीं हो पाई थी। गुरुवार को सुबह हुई तो एनडीआरएफ की टीम भी पहुंच गई। इसके बाद सर्च अभियान चलाया गया। गुरुवार दोपहर लापता दो लोगों की लाशें मिली।
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तंज- सरकार में लात-घूंसे चल रहे, बस दिख नहीं रहे: पटवारी बोले- मैं साइकिल से आता, फिर भी हरा दिया; भाजपा की जीत पर हैरान अजय सिंह – Madhya Pradesh News
मध्य प्रदेश की राजनीति, नौकरशाही और अन्य घटनाओं पर चुटीली और खरी बात का वीडियो (VIDEO) देखने के लिए ऊपर क्लिक करें। इन खबरों को आप पढ़ भी सकते हैं। ‘बात खरी है’ मंगलवार से रविवार तक हर सुबह 6 बजे से दैनिक भास्कर एप पर मिलेगा। भाजपा की गुटबाजी पर जीतू पटवारी का तंज
मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी ने भाजपा सरकार में मंत्रियों के बीच चल रही कथित खटपट को लेकर तंज कसा है। इंदौर में किसी का नाम लिए बिना उन्होंने कहा कि यहां के प्रभारी मंत्री, जो मुख्यमंत्री हैं, और नगरीय प्रशासन मंत्री के बीच लात-घूंसे चल रहे हैं, बस दिखाई नहीं दे रहे। दोनों के बीच गाली-गलौज हो रही है, लेकिन सिर्फ सुनाई नहीं दे रही है। मंत्री कैलाश विजयवर्गीय को लेकर उन्होंने कहा कि इंदौर के भाजपा विधायक मानने को ही तैयार नहीं हैं कि ये मंत्री हैं। पटवारी ने आगे कहा कि अंतर्कलह में डूबी भाजपा प्रदेश का भला नहीं कर सकती, क्योंकि अहंकार में डूबे नेता एक-दूसरे की टांग खींचने में लगे हैं। जीतू पटवारी के इस बयान पर अब लोग चुटकी ले रहे हैं। कह रहे हैं कि जहां तक गुटबाजी का सवाल है, कांग्रेस का हाल भी भाजपा से कुछ जुदा नहीं है। जीतू पटवारी को याद आया चुनावी हार का दर्द
कुछ जख्म ऐसे होते हैं, जो कभी भरते नहीं। रह-रहकर दर्द देते हैं। मध्य प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष जीतू पटवारी के साथ भी कुछ ऐसा ही नजर आया। पटवारी इंदौर में संगीत के एक कार्यक्रम में पहुंचे थे। यहां बातों-बातों में उन्हें अपनी चुनावी हार का दर्द याद आ गया। उन्होंने कहा- साइकिल वाला भी कैसे हारता है, देखा है मैंने। जैसे ही कोई मुझे कहता है कि साइकिल से आता था, भाभी-भाभी कहता था, फिर भी हार गया। ये मुझे याद आता है। चुनावी हार का दर्द बयां करने के बाद पटवारी ने फिल्मी गाने की एक लाइन बोलकर खुद को समझाया कि कोई बात नहीं… जिंदगी की यही रीत है… हार के बाद ही जीत है…। कांग्रेस को लेकर अजय सिंह ने जताई चिंता
भाजपा की लगातार जीत कांग्रेस नेताओं के लिए किसी पहेली से कम नहीं है। पूर्व नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह भी इस पर हैरान नजर आए कि तमाम समस्याओं के बावजूद वोट भाजपा के पक्ष में क्यों जाते हैं। उन्होंने कहा कि सड़क, बिजली से लेकर भ्रष्टाचार तक कई समस्याएं हैं। इसके बावजूद जब वोट देने की बारी आती है, तो भाजपा के अलावा किसी और को वोट नहीं मिलते। उन्होंने कहा कि यह समझ से परे है। दरअसल, सिंगरौली में एक पत्रकार ने उनसे सड़क, बेरोजगारी और दूसरी समस्याओं को लेकर सवाल किया था। जिसे लेकर उनका अलग की दर्द फूट पड़ा। इससे पहले, एक पत्रकार वार्ता में उन्होंने इस बात को लेकर चिंता जताई कि 2028 में कांग्रेस को मध्य प्रदेश की सत्ता से बाहर रहते हुए 25 साल हो जाएंगे। अगर इस बार भी पार्टी नहीं जीती, तो फिर अपने को कोई पूछेगा नहीं। और अब अंदर की बात.. दूर हो गईं IAS अफसर की गलतफहमियां
मध्य प्रदेश में एक IAS अफसर बड़ी-बड़ी डींगें हांक रहे थे। दावा कर रहे थे कि उन्हें प्रदेश के चार महानगरों में से किसी एक में कलेक्टरी मिलेगी। वे खुद को ‘सरकार’ के करीबी बता रहे थे। लेकिन हाल ही में जब ट्रांसफर लिस्ट जारी हुई, तो उनकी तमाम गलतफहमियां दूर हो गईं। कलेक्टर तो बने, लेकिन किसी बड़े महानगरीय जिले के नहीं, बल्कि एक छोटे जिले के। अब अधिकारी अपनी इस पोस्टिंग को सही ठहराने में जुटे हैं। कह रहे हैं कि सरकार ने उन्हें इस जिले की व्यवस्थाएं सुधारने की खास जिम्मेदारी सौंपकर भेजा है। बता दें कि ये वही अधिकारी हैं, जो एक बड़े नगर निगम में कमिश्नर रह चुके हैं। वहां एक बड़ी घटना के बाद उन्हें हटाकर लूप लाइन में भेज दिया गया था। इनपुट सहयोग – अमित सालगट (इंदौर), राज द्विवेदी (सिंगरौली) ये भी पढ़ें –
मंत्री को भाया अफसर का भाषण, कहा-इन्हें नेता बनना चाहिए; कांग्रेस विधायक बोले-भाजपाइयों को खटमल जैसे मसल देंगे हाल ही में अपर मुख्य सचिव, नगरीय विकास एवं आवास विभाग संजय दुबे ने प्रदेश के नगरीय निकायों में भ्रष्टाचार उजागर किया था। अब विभाग के मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने जब मंच से इसी अधिकारी की तारीफ की, तो उनका बयान चर्चा में आ गया। विजयवर्गीय ने अधिकारी से कहा कि वे रिटायरमेंट के बाद अच्छे नेता बन सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें
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शुद्ध देसी दूध और पारंपरिक तरीके से बनता है यह कलाकंद, छपरा से विदेश तक सप्लाई
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छपरा के बसंत बाजार में शुद्ध देसी दूध से पारंपरिक तरीके से कलाकंद बनाया जाता है. यहां साफ-सफाई और गुणवत्ता का पूरा ध्यान रखा जाता है. इस स्वादिष्ट मिठाई की मांग स्थानीय बाजार के साथ-साथ कोलकाता और विदेशों तक है. एक बार खाने वाले लोग यहाँ बार-बार आते हैं.
सारणः छपरा के ग्रामीण बाजारों की मिठाइयां अपने बेहतरीन स्वाद और शुद्धता के लिए दूर-दूर तक प्रसिद्ध हैं. यहां के छोटे बाजारों में मिलने वाली मिठाइयों की बात ही कुछ और है. इसका सबसे बड़ा कारण यह है कि गांवों में दुधारू मवेशी बहुत पाले जाते हैं. इससे कारीगरों को आसानी से ताजा और शुद्ध दूध मिल जाता है. इसी कड़ी में गरखा प्रखंड का बसंत बाजार अपने स्वादिष्ट कलाकंद के लिए बहुत मशहूर है.
बबलू प्रसाद का मशहूर कलाकंद
इस बाजार में बबलू प्रसाद अपनी दुकान चलाते हैं. वे अपने परिवार की दूसरी पीढ़ी हैं जो यह काम संभाल रहे हैं. वे शुद्ध कलाकंद बनाकर लोगों का मुंह मीठा कराते हैं. साफ-सफाई और शुद्धता पर उनका खास ध्यान रहता है. गांव से दूध लाने के बाद उसे अच्छी तरह ढककर रखा जाता है. इसके बाद कोयले की धीमी आंच पर दूध से खोवा तैयार किया जाता है.
स्वाद और शुद्धता का राज
इस कलाकंद में चीनी का इस्तेमाल बहुत कम किया जाता है. खोवा तैयार करने के बाद इसमें काजू, किशमिश और इलायची मिलाई जाती है. इससे इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है. बबलू प्रसाद बताते हैं कि वे पूरी तरह शुद्ध दूध का इस्तेमाल करते हैं. उनकी मिठाई में किसी भी तरह की मिलावट नहीं होती है.
विदेशों तक जाती है इस कलाकंद की ख्याति
जो भी व्यक्ति यहां का कलाकंद एक बार खा लेता है, वह बार-बार खरीदने आता है। इस दुकान का कलाकंद कोलकाता और यहाँ तक कि विदेशों में रहने वाले लोग भी अपने साथ ले जाते हैं। उनके पिता ने इस दुकान की शुरुआत की थी। अब बबलू प्रसाद इसे संभाल रहे हैं। ग्राहकों का भरोसा आज भी वैसा ही बना हुआ है जैसा पहले था.
ग्राहकों का क्या कहना है?
स्थानीय निवासी जयप्रकाश सिंह बताते हैं कि वे बचपन से अपने पिता के साथ यहाँ कलाकंद खाने आ रहे हैं। पहले बबलू प्रसाद के पिता मिठाई बनाते थे। आज भी इस कलाकंद का स्वाद बिल्कुल पहले जैसा ही लाजवाब है। यही वजह है कि सिर्फ इस क्षेत्र के ही नहीं, बल्कि पूरे जिले से लोग दूर-दूर से यहाँ कलाकंद खरीदने आते हैं।
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प्रसून सिंह को मीडिया में 7 साल काम करने का अनुभव है. खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रोचक अंजाद में पेश करना खासियत है. दैनिक भास्कर अखबार में इंटर्नशिप के साथ करियर की शुरुआत हुई.
इसके बाद ETV Bharat (बिहार)…
भास्कर अपडेट्स: महाराष्ट्र के शिवसेना विधायक बोले- किसान सुसाइड करे तो अंतिम संस्कार में न जाएं
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नई दिल्ली59 मिनट पहले
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महाराष्ट्र के शिवसेना विधायक संजय गायकवाड़ ने कहा है कि आत्महत्या करने वाले किसानों के अंतिम संस्कार में कोई शामिल न हो। उन्होंने दावा किया कि ऐसा होने पर दूसरे किसान आत्महत्या करने से पहले इसके परिणामों के बारे में सोचेंगे। उनके इस बयान पर विवाद हो रहा है। गायकवाड़ ने किसानों से कहा कि परेशानी होने पर सरकार, सांसद या विधायक को अपनी समस्या बताएं।
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पश्चिम बंगाल में नए सरकारी शिक्षकों के चुनाव लड़ने पर लगी रोक

प. बंगाल सरकार ने भविष्य में नियुक्त होने वाले सरकारी सहायता प्राप्त स्कूलों के शिक्षकों के सीधे राजनीति में शामिल होने पर रोक लगा दी है। मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में इस प्रस्ताव को मंजूरी दी गई।
नए शिक्षक पंचायत, नगर निकाय, विधानसभा और लोकसभा चुनाव नहीं लड़ सकेंगे। यह नियम पहले से नियुक्त शिक्षकों पर लागू नहीं होगा।
गृह मंत्रालय के पास ‘दिमागी नक्सल’ पर जानकारी नहीं, आरटीआई का दिया जवाब

पीएम नरेंद्र मोदी के ‘दिमागी नक्सल’ बयान पर विवाद के बीच गृह मंत्रालय का आरटीआई जवाब आया है। मंत्रालय ने कहा कि इसकी जानकारी उपलब्ध नहीं है।
आवेदन में पूछा गया था कि क्या यह सरकार की आधिकारिक श्रेणी है और इसके तहत लोगों की पहचान कैसे होती है। आवेदक ने ऐसे लोगों की संख्या, राज्यवार आंकड़े और पहचान के नियमों से जुड़े दस्तावेज मांगे थे।
नेतन्याहू पिछले 8 चुनावों में इस बार सबसे कमजोर: उनकी पार्टी को 27 सीटें मिलीं, बहुमत से दूर, फिर भी सरकार बना लेने के आसार
इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी लिकुड को 2026 के चुनाव में 27 सीटें मिली हैं। पिछले 8 चुनावों में यह उनकी पार्टी का सबसे कमजोर प्रदर्शन है। इससे पहले लिकुड को 2009 में 27 सीटें मिली थीं। इजराइल की संसद नेसेट में कुल 120 सीटें हैं। नेतन्याहू के गठबंधन को 53 सीटें मिली हैं। सरकार बनाने के लिए 61 सांसदों का समर्थन चाहिए। उनकी पार्टी बहुमत से 34 सीटें पीछे है, लेकिन सत्ता में उनकी वापसी के आसार हैं। इसकी वजह विपक्षी दलों के बीच मतभेद और सरकार बनाने के लिए जरूरी समर्थन जुटाने की संभावनाएं हैं। नेतन्याहू के पास सरकार बनाने के तीन रास्ते पहला रास्ता: विपक्षी दलों के सांसदों का समर्थन नेतन्याहू विपक्षी खेमे में शामिल कुछ दलों या सांसदों को अपने साथ लाने की कोशिश कर सकते हैं। विपक्ष के पास कुल 48 सीटें हैं। अगर उसके कुछ सहयोगी नेतन्याहू का समर्थन करने को तैयार हो जाते हैं, तो उनके लिए 61 सीटों का आंकड़ा हासिल करना संभव हो सकता है। चुनौती- इस रास्ते में सबसे बड़ी चुनौती विपक्षी नेताओं का विरोध है। उन्होंने चुनाव में नेतन्याहू को सत्ता से हटाने का वादा किया था। ऐसे में उनके लिए नेतन्याहू के साथ जाना राजनीतिक रूप से मुश्किल होगा। दूसरा रास्ता: राष्ट्रीय एकता सरकार नेतन्याहू विपक्षी नेता गादी आइजनकोट और उनके सहयोगियों के साथ मिलकर राष्ट्रीय एकता सरकार बनाने की कोशिश कर सकते हैं। ऐसी सरकार में अलग-अलग विचारधारा वाली पार्टियां शामिल हो सकती हैं। चुनौती- नेतन्याहू के कुछ सहयोगियों ने भी इस विकल्प पर चर्चा की है। इससे उन्हें प्रधानमंत्री पद पर बने रहने का मौका मिल सकता है। हालांकि, आइजनकोट नेतन्याहू के नेतृत्व का विरोध कर चुके हैं। इसलिए इस प्रस्ताव पर सहमति बनना आसान नहीं होगा। तीसरा रास्ता: अल्पमत सरकार नेतन्याहू अल्पमत सरकार बनाने की कोशिश भी कर सकते हैं। ऐसी सरकार के पास अपने गठबंधन में 61 सांसद नहीं होते, लेकिन उसे संसद में दूसरे दलों का समर्थन या कुछ मामलों में उनका विरोध नहीं मिलने की जरूरत होती है। चुनौती- अल्पमत सरकार को बजट, विश्वास मत और दूसरे अहम फैसलों पर समर्थन जुटाना पड़ता है। इसलिए ऐसी सरकार बन भी जाए, तो उसे लंबे समय तक चलाना चुनौतीपूर्ण हो सकता है। विपक्ष के पास 48 सीटें, बहुमत के लिए 13 और चाहिए पूर्व सैना प्रमुख गादी आइजनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी खेमे को 48 सीटें मिली हैं। सरकार बनाने के लिए उसे 13 और सांसदों के समर्थन की जरूरत है। विपक्ष का मुख्य लक्ष्य नेतन्याहू को सत्ता से हटाना रहा है, लेकिन उसके सामने भी गठबंधन को एकजुट रखने की चुनौती है। उसके सहयोगियों के बीच अरब पार्टियों के साथ सरकार बनाने को लेकर मतभेद हैं। आइजनकोट ने ऐसी सरकार बनाने की बात कही है जो यहूदी हो और सभी नागरिकों के लिए सैन्य सेवा अनिवार्य करने का समर्थन करे। इस रुख से अरब पार्टियों और अति-रूढ़िवादी यहूदी दलों के साथ समझौता करना मुश्किल हो सकता है। यही स्थिति नेतन्याहू के लिए अवसर पैदा करती है। अगर विपक्ष अपने सहयोगियों के बीच सहमति नहीं बना पाता, तो नेतन्याहू को सरकार बनाने के लिए जरूरी समर्थन जुटाने का मौका मिल सकता है। अरब पार्टियों की 19 सीटें क्यों अहम इजराइल की अरब पार्टियों को चुनाव में कुल 19 सीटें मिलने का अनुमान है। इनमें जॉइंट लिस्ट को 11 और यूनाइटेड अरब लिस्ट यानी राअम को 8 सीटें मिली हैं। इन पार्टियों का समर्थन विपक्ष को बहुमत तक पहुंचने में मदद कर सकता है। विपक्ष की 48 सीटों में अगर राअम की सभी 7 सीटें जुड़ जाएं, तो संख्या 55 होगी। बहुमत के लिए तब भी 6 और सीटों की जरूरत पड़ेगी। अगर जॉइंट लिस्ट और राअम दोनों का समर्थन मिल जाए, तो विपक्षी खेमे की संख्या 67 तक पहुंच सकती है। लेकिन यह तभी संभव होगा, जब दोनों अरब पार्टियां समर्थन देने को तैयार हों और विपक्ष के दूसरे सहयोगी भी इस व्यवस्था पर सहमत हों। अरब पार्टियों ने नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के लिए दूसरी पार्टियों के साथ काम करने की इच्छा जताई है। लेकिन विपक्ष के कुछ सहयोगी अरब पार्टियों के साथ गठबंधन का विरोध करते रहे हैं। इसलिए उनका समर्थन हासिल करना सिर्फ सीटों का गणित नहीं, बल्कि राजनीतिक सहमति का मामला भी है। नेतन्याहू को पद छोड़ना होगा या वे कार्यवाहक प्रधानमंत्री रहेंगे चुनाव में किसी भी खेमे को बहुमत नहीं मिलने का मतलब यह नहीं है कि नेतन्याहू को तुरंत प्रधानमंत्री पद छोड़ना होगा। नई सरकार बनने तक वह कार्यवाहक प्रधानमंत्री के रूप में काम कर सकते हैं। इजराइल के राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग चुनाव के बाद राजनीतिक दलों से बातचीत करेंगे। इसके बाद वह उस नेता को सरकार बनाने का पहला मौका देंगे हैं, जिसके पास बहुमत जुटाने की सबसे बेहतर संभावना होगी। सरकार बनाने के लिए नेता को शुरुआत में 28 दिन मिलते हैं। जरूरत पड़ने पर राष्ट्रपति 14 दिन का अतिरिक्त समय दे सकते हैं। यानी सरकार बनाने की कोशिश के लिए कुल 42 दिन तक मिल सकते हैं। इस दौरान पार्टियों के बीच गठबंधन, मंत्रिपदों और नीतियों को लेकर बातचीत होती है। अगर कोई भी नेता बहुमत जुटाने में नाकाम रहता है, तो दोबारा चुनाव कराने की नौबत भी आ सकती है। नेतन्याहू के लिए चुनाव क्यों अहम था नेतन्याहू ने लंबे समय से अपनी राजनीति को मजबूत नेतृत्व और राष्ट्रीय सुरक्षा के वादे पर आगे बढ़ाया है। लेकिन 7 अक्टूबर 2023 को हमास के हमले के बाद इजराइल की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल उठे। इसके बाद गाजा में लंबा युद्ध चला और ईरान के साथ जंग ने भी क्षेत्रीय तनाव बढ़ाया। विपक्ष ने चुनाव में नेतन्याहू के नेतृत्व और सुरक्षा नीति को निशाना बनाया। वहीं, सेना में भर्ती को लेकर विवाद और न्यायपालिका की शक्तियों में बदलाव की कोशिश भी इजराइल की राजनीति में बड़े मुद्दे रहे हैं। इन मुद्दों का चुनावी नतीजों पर कितना असर पड़ा, यह केवल सीटों के आंकड़ों से तय नहीं किया जा सकता। लेकिन लिकुड को 2022 के मुकाबले 5 सीटों का नुकसान हुआ है और नेतन्याहू का गठबंधन बहुमत से दूर है। क्या नेतन्याहू फिर प्रधानमंत्री बन पाएंगे नेतन्याहू की पार्टी को बहुमत नहीं मिला है, लेकिन उनका पूरा गठबंधन सरकार बनाने की दौड़ में है। विपक्ष को भी बहुमत के लिए दूसरे दलों का समर्थन चाहिए। अरब पार्टियों की 19 सीटें सरकार गठन के गणित में अहम हैं, लेकिन विपक्षी खेमे में उनके साथ गठबंधन को लेकर मतभेद हैं। यही नेतन्याहू के लिए सबसे बड़ा अवसर हो सकता है। आखिरकार, सरकार कौन बनाएगा, यह इस बात पर निर्भर करेगा कि कौन-सा नेता 61 सांसदों का समर्थन जुटा पाता है। नेतन्याहू के लिए चुनाव आसान नहीं रहा, लेकिन उनकी सत्ता में वापसी की संभावना अभी खत्म नहीं हुई है। ——————–
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एक मंच पर नजर आए फडणवीस, उद्धव और राज ठाकरे: सीएम बोले- इसमें हैरानी की बात नहीं, यह महाराष्ट्र की राजनीतिक परंपरा
मुंबई2 घंटे पहले
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कार्यक्रम 75 कार्टूनिस्टों के काम और उनके परिचय पर आधारित पुस्तक के विमोचन का था।
मुंबई में गुरुवार को एक कार्यक्रम में महाराष्ट्र के सीएम देवेंद्र फडणवीस, शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे और महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (एमएनएस) प्रमुख राज ठाकरे एक मंच पर नजर आए।
यह कार्यक्रम 75 कार्टूनिस्टों के काम और उनके परिचय पर आधारित पुस्तक के विमोचन के लिए आयोजित किया गया था। फडणवीस ने कहा कि महाराष्ट्र में हमेशा से अलग-अलग राजनीतिक दलों के नेताओं के बीच बातचीत और आपसी मेलजोल की परंपरा रही है।

कार्यक्रम में शामिल होने से पहले भी तीनों नेता एक कमरे में बातचीत करते नजर आए।
इस दौरान फडणवीस ने कहा- मुझे नहीं पता कि कुछ लोग हमें एक मंच पर देखकर हैरान क्यों हुए। हम हैरान नहीं हैं। यह महाराष्ट्र की राजनीतिक परंपरा का हिस्सा है। अलग-अलग पार्टियों के नेता एक ही कार्यक्रम में शामिल हो सकते हैं, साथ में हंस सकते हैं और चाय भी पी सकते हैं।”
फडणवीस ने उद्धव ठाकरे का जिक्र करते हुए कहा- 2019 तक जब भी उद्धवजी मुझे बुलाते थे, मैं जाता था। 2019 के बाद उन्होंने फोन नहीं किया। मैं इंतजार कर रहा था।
गौरतलब है कि 2019 के महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के बाद मुख्यमंत्री पद साझा करने के मुद्दे पर भाजपा और अविभाजित शिवसेना के बीच गठबंधन टूट गया था। इसके बाद दोनों दल एक-दूसरे के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी बन गए।

राज ठाकरे बोले- कुछ मंच राजनीति से अलग होते हैं
वहीं, राज ठाकरे ने कहा कि लोग सोच रहे होंगे कि तीनों नेता आज एक मंच पर कैसे आ गए। कुछ मंच ऐसे होते हैं, जहां सभी लोग राजनीति को अलग रखकर एक साथ आते हैं. ऐसे कार्यक्रमों में राजनीति के बजाय कला और संस्कृति पर चर्चा होती है।
राज ठाकरे ने आगे कहा कि लोग सोच रहे होंगे कि तीनों नेता आज एक मंच पर कैसे आ गए। कुछ मंच ऐसे होते हैं, जहां सभी लोग राजनीति को अलग रखकर एक साथ आते हैं।
ऐसे कार्यक्रमों में राजनीति के बजाय कला और संस्कृति पर चर्चा होती है। इस तरह के मंचों पर अलग-अलग राजनीतिक विचारधारा वाले लोगों का साथ आना स्वाभाविक है।

फडणवीस ने राज ठाकरे से कहा था- मेरा कार्टून बनाओ तो नाक थोड़ी बड़ी बनाना
फडणवीस ने पुस्तक ‘महाराष्ट्र ची हास्यरेषा’ तैयार करने के लिए संपादक प्रशांत कुलकर्णी और ग्रंथाली संस्था को बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह संग्रह पुराने कार्टूनों को उनके ऐतिहासिक संदर्भों के साथ सुरक्षित रखने का महत्वपूर्ण काम करता है।
इस दौरान फडणवीस ने मजाकिया अंदाज में याद किया कि उन्होंने राज ठाकरे से कहा था कि अगर वह कभी उनका कार्टून बनाएं, तो उनकी नाक थोड़ी बड़ी बनाएं।
वहीं, उद्धव ठाकरे ने कहा कि किसी भी कार्टूनिस्ट का ब्रश उसका सबसे बड़ा हथियार होता है। उन्होंने बताया कि बाल ठाकरे के निर्माणाधीन स्मारक में उनके बनाए कार्टून भी रखे जाएंगे।
पूर्व मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे ने कार्यक्रम में विमोचित पुस्तक को एक अनमोल खजाना बताया, जिसमें करीब 100 वर्षों का इतिहास समेटा गया है।
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महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने रविवार को सोशल मीडिया से एक डॉक्यूमेंट्री हटा दी। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उद्योगपति गौतम अडाणी पर बनाई गई थी। राज ठाकरे ने कहा कि उन्होंने मुंबई पुलिस कमिश्नर के अनुरोध पर यह कदम उठाया। पूरी खबर पढ़ें…
सहारनपुर में कार से 200 किलो रसगुल्ले मिले: खाद्य विभाग ने नमूना लिया, दस्तावेज नहीं मिलने पर वरना कार सीज – Saharanpur News
सहारनपुर के नानौता में गुरुवार शाम 6 बजे चेकिंग के दौरान हुंडई वरना कार से करीब 200 किलो सफेद रसगुल्ले मिले। खाद्य सुरक्षा विभाग ने मौके पर नमूना लिया और बाकी मिठाई गड्ढा खुदवाकर नष्ट करा दी। कार के जरूरी दस्तावेज नहीं मिलने पर पुलिस ने उसे सीज कर दिया। रसगुल्लों की गुणवत्ता जांच रिपोर्ट आने के बाद ही साफ होगी। एसपी देहात मयंक पाठक ने बताया कि नानौता थाना क्षेत्र में चेकिंग के दौरान कार को रोका गया था। उसमें करीब 200 किलो सफेद रसगुल्ले मिले। इसके बाद खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम को मौके पर बुलाया गया। खाद्य सुरक्षा अधिकारी विपिन कुमार और खाद्य अधिकारी उमेश कुमार ने मिठाई का निरीक्षण किया और जांच के लिए नमूना लिया। नमूना लेने के बाद टीम ने बाकी रसगुल्ले गड्ढा खुदवाकर नष्ट करा दिए। नमूने की जांच रिपोर्ट आने के बाद ही पता चलेगा कि मिठाई में मिलावट थी या नहीं। कार में सवार दो लोगों की पहचान सौरव शर्मा निवासी नस्तरपुर सडोली, थाना कोतवाली, सहारनपुर और जान मोहम्मद निवासी भैसानी, थाना भवन, शामली के रूप में हुई। पुलिस के मुताबिक, वाहन नंबर यूपी-11 सीजे-9976 के जरूरी दस्तावेज मौके पर नहीं दिखाए गए। इसके बाद सीसी टीम प्रभारी उपनिरीक्षक सतीश कुमार ने मोटर वाहन अधिनियम की धारा 207 के तहत कार सीज कर दी। यह कार्रवाई थानाध्यक्ष विकास चारण के नेतृत्व में नानौता पुलिस, सीसी टीम और खाद्य सुरक्षा विभाग की संयुक्त टीम ने की।
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