Tuesday, October 27, 2026
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दीपावली से पहले ग्वालियर पुलिस की बड़ी स्ट्राइक: सोमवार रात को ट्रांसपोर्ट नगर के 2 गोदामों से 645 किलो कैल्शियम कार्बाइड जब्त – Gwalior News




ग्वालियर में दीपावली और आगामी त्योहारों को ध्यान में रखकर आमजन की सुरक्षा को लेकर ग्वालियर पुलिस अलर्ट मोड पर है। सोमवार रात को थानांं बहोड़ापुर और क्राइम ब्रांच की संयुक्त टीम ने ट्रांसपोर्ट नगर स्थित दो गोदामों पर छापेमारी कर 645 किलो 310 ग्राम प्रतिबंधित कैल्शियम कार्बाइड जब्त किया है। जिला मजिस्ट्रेट के प्रतिबंधात्मक आदेश का उल्लंघन कर बिना लाइसेंस अवैध भंडारण करने पर पुलिस ने दोनों गोदाम संचालकों के खिलाफ बीएनएस की धाराओं में मामला दर्ज कर लिया है। राजा स्टील के गोदाम से 600 किलो कार्बाइड बरामद पुलिस को सूचना मिली थी कि ट्रांसपोर्ट नगर स्थित राजा स्टील के गोदाम में भारी मात्रा में खतरनाक रसायन रखा हुआ है। प्रभारी एसपी जयराज कुबेर के निर्देश पर सोमवार रात सीएसपी कृष्ण पाल सिंह और क्राइम ब्रांच की टीम ने दबिश दी। तलाशी के दौरान 6 सीलबंद लोहे के ड्रमों में 600 किलो कैल्शियम कार्बाइड मिला। मौके पर मौजूद रीकेश पसरीजा (35, निवासी शिंदे की छावनी) से भंडारण लाइसेंस मांगा गया, जो वह पेश नहीं कर सका। पुलिस ने मामला दर्ज कर सामग्री जब्त कर ली। छारिया हार्डवेयर के गोदाम से 45 किलो से ज्यादा कार्बाइड जब्त पहली कार्रवाई के 30 मिनट बाद सोमवार रात 9 बजे ट्रांसपोर्ट नगर पार्किंग नंबर-01 स्थित छारिया हार्डवेयर स्टोर के गोदाम पर छापा मारा। यहां संचालक अनिल कुमार छारिया (53) के कब्जे से लोहे के ड्रम में रखा 45 किलो 310 ग्राम कैल्शियम कार्बाइड मिला। अनिल भी कोई वैध लाइसेंस नहीं दिखा पाया, जिसके बाद उसके खिलाफ भी बहोड़ापुर थाने में केस दर्ज किया गया। कलेक्टर के आदेश की उड़ रही थी धज्जियां ग्वालियर कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट द्वारा 22 अक्टूबर को बीएनएसएस की धारा 163 के तहत आदेश जारी कर कैल्शियम कार्बाइड के निर्माण, संग्रहण और क्रय-विक्रय पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया गया था। इसके बावजूद दोनों व्यापारी अवैध रूप से इसका भंडारण कर रहे थे। क्यों खतरनाक है कैल्शियम कार्बाइड? कैल्शियम कार्बाइड नमी या पानी के संपर्क में आते ही एसिटिलीन गैस छोड़ता है, जो अत्यधिक ज्वलनशील और विस्फोटक होती है। त्योहारों के दौरान भीड़भाड़ वाले इलाके या गोदाम में इसके अवैध भंडारण से बड़ा हादसा होने का खतरा बना रहता है।



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बलिया में नया सवेरा ग्रुप का स्थापना दिवस मना: बापू भवन टाउन हॉल में रक्तदान शिविर लगा, पूर्व सैनिकों-खिलाड़ी सम्मानित – Ballia News




बलिया के बापू भवन टाउन हॉल में सोमवार को नया सवेरा ग्रुप का पहला स्थापना दिवस मनाया गया। कार्यक्रम सुबह करीब 11 बजे से शाम चार बजे तक चला। इसका उद्घाटन वरिष्ठ कोषाधिकारी आनंद दूबे और 104 वर्षीय पूर्व सैनिक घुरहू सिंह ने दीप जलाकर किया। इस मौके पर रक्तदान शिविर भी लगा, जिसमें पूर्व सैनिकों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। रक्तदान करने वालों, शहीदों की वीर नारियों और 1971 युद्ध के पूर्व सैनिक घुरहू सिंह को सम्मानित किया गया। बेल्थरारोड की 12 नेशनल-इंटरनेशनल फुटबॉल खिलाड़ियों, उनके कोच और NCC कैडेट्स को भी सम्मान मिला। मुख्य अतिथि आनंद दूबे ने कहा कि हम स्वतंत्र भारत में सेना की वजह से खुली हवा में सांस ले रहे हैं। उन्होंने सैनिकों के सम्मान को सर्वोपरि बताया। इस दौरान पूर्व सैनिक संगठन के दुबहड़ अध्यक्ष अंगद सिंह, रजनीश चौबे, नित्यानंद ठाकुर, महेश प्रसाद, हरेंद्र पाण्डेय, अजीत दूबे, लालजी ठाकुर समेत ग्रुप के संस्थापक अनिल पाण्डेय, अध्यक्ष अजय शंकर पाण्डेय, उपाध्यक्ष अनिल दूबे, मंत्री कमलेश वर्मा, वीर बहादुर यादव, योगेंद्र कुमार और गुलाब सिंह मौजूद रहे।



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Jio IPO Allotment: आज होगा शेयर अलॉटमेंट, ऐसे चेक करें अलॉटमेंट स्‍टेटस


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JIO IPO Allotment Status: जियो आईपीओ के शेयरों का आज अलॉटमेंट होने वाला है. इस इश्‍यू में निवेशकों ने जमकर पैसा लगाया और यह 22 गुना से ज्‍यादा सब्‍सक्राइब हुआ. अगर आपने भी इस ₹30,213 करोड़ के महा-आईपीओ में पैसा लगाया है तो आईपीओ के आधिकारिक रजिस्ट्रार KFin Technologies, बीएसई और एनएसई की वेबसाइट पर अलॉटमेंट चेक कर सकते हैं.

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28 अक्टूबर को जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयर एनएसई और बीएसई पर लिस्ट होंगे.

नई दिल्‍ली. भारतीय शेयर बाजार के सबसे बड़े आईपीओ, जियो प्लेटफॉर्म्स आईपीओ के शेयरों का इंतजार कर रहे निवेशकों के लिए आज का दिन बेहद अहम है. ₹30,213 करोड़ के इस इश्यू के शेयरों के अलॉटमेंट को आज, 26 अक्टूबर को दिया जाएगा. जिन निवेशकों को शेयर मिलेंगे, उनके डीमैट खातों में मंगलवार, 27 अक्टूबर को शेयर क्रेडिट कर दिए जाएंगे. इसके अगले दिन यानी बुधवार, 28 अक्टूबर को जियो प्लेटफॉर्म्स के शेयर एनएसई और बीएसई पर लिस्ट होंगे.

जियो आईपीओ को लेकर निवेशकों में गजब उत्‍साह दिखा था और यह कुल 22.19 गुना सब्सक्राइब हुआ है. क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स (QIBs) का हिस्सा 70.55 गुना सब्सक्राइब हुआ, जबकि नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स (NIIs) की कैटेगरी में 14 गुना आवेदन आए. खुदरा निवेशकों के लिए रिजर्व हिस्‍सा 2.72 गुना भरा. शेयरधारक कोटा 7.6 गुना और कर्मचारियों का आरक्षित हिस्सा 2.93 गुना सब्सक्राइब हुआ था.

ऐसे चेक करें जियो शेयर अलॉटमेंट स्टेटस

अगर आपने भी जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ के लिए बोली लगाई थी, तो आप इश्यू के आधिकारिक रजिस्ट्रार KFin Technologies की वेबसाइट पर जाकर चुटकियों में चेक कर सकते हैं-

  • सबसे पहले KFin Technologies के आईपीओ अलॉटमेंट पोर्टल
  • https://ipostatus.kfintech.com/ पर जाएं.
  • होमपेज पर ड्रॉपडाउन मेन्यू में जाकर Jio Platforms Limited का चयन करें.
  • स्टेटस सर्च करने के लिए PAN कार्ड नंबर या एप्लिकेशन नंबर का विकल्‍प चुनें.
  • चुनी गई श्रेणी के अनुसार बॉक्स में अपना पैन नंबर या एप्लिकेशन नंबर दर्ज करें और कैप्चा कोड भरें.
  • सबमिट बटन पर क्लिक करें, स्क्रीन पर आपका अलॉटमेंट स्टेटस दिखाई दे जाएगा.

इसके अतिरिक्त, निवेशक नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) की आधिकारिक वेबसाइटों पर लॉग इन करके भी अपना अलॉटमेंट स्टेटस जांच सकते हैं.

मिल सकता है मोटा मुनाफा

ग्रे मार्केट के आंकड़ों पर विश्‍वास करें तो यह इश्‍यू पैसा लगाने वालों को निराश नहीं करेगा और लिस्टिंग पर अच्‍छा-खासा मुनाफा देगा. ग्रे मार्केट पर नजर रखने वाली वेबसाइट, आईपीओवॉच. इन के अनुसार, इस समय जियो आईपीओ के शेयर 250 रुपये प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं. आईपीओ के ऊपर प्राइस बैंड 1119 रुपये के हिसाब से देखें तो निवेशकों को 22.34 फीसदी लिस्टिंग गेन हो सकता है.

(डिस्क्लेमर – नेटवर्क18 और टीवी18 कंपनियां चैनल/वेबसाइट का संचालन करती हैं, जिनका नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज एकमात्र लाभार्थी है.)

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रुली बिश्‍नोई

रुली बिश्‍नोई मीडिया इंडस्ट्री में 20 साल से अधिक के अनुभव वाले सीनियर पत्रकार हैं. वह अभी News18 Hindi (hindi.news18.com) से जुड़े हैं और बिजनेस वर्टिकल में काम करते हैं. यहां वे बिजनेस जगत के मुश्किल आंकड़ों …

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सिर्फ बेसन और मोतीचूर नहीं, इन 6 लड्डुओं का स्वाद भी है खास

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भारत में मिठाइयों की बात हो और लड्डुओं का जिक्र न हो, ऐसा कम ही होता है. त्योहार हो, शादी-ब्याह या घर में कोई खास मौका, लड्डू अक्सर मिठाई की थाली का हिस्सा होते हैं. बेसन और मोतीचूर के लड्डू तो आपने कई बार खाए होंगे, लेकिन देश के अलग-अलग हिस्सों में कई दूसरी किस्म के लड्डू भी बनाए जाते हैं. इनका स्वाद, बनाने का तरीका और इस्तेमाल होने वाली सामग्री इन्हें एक-दूसरे से अलग बनाती है. आइए जानते हैं ऐसे ही 7 लड्डुओं के बारे में, जिन्हें आप भी घर पर बनाकर चख सकते हैं.

तिल और गुड़ से बनने वाले लड्डू खासतौर पर सर्दियों और मकर संक्रांति के आसपास बनाए जाते हैं. इन्हें तैयार करने के लिए तिल को अच्छी तरह भूनकर गुड़ की चाशनी या पिघले हुए गुड़ में मिलाया जाता है. इसके बाद मिश्रण को हल्का ठंडा करके गोल आकार दिया जाता है. तिल का स्वाद और गुड़ की मिठास इन लड्डुओं को खास बनाते हैं. कुछ लोग इनमें मूंगफली या सूखे मेवे भी मिलाते हैं.

गोंद के लड्डू उत्तर भारत के कई घरों में पारंपरिक रूप से बनाए जाते हैं. इन्हें बनाने के लिए खाने वाला गोंद घी में तलकर फूलाया जाता है. इसके बाद इसमें आटा, गुड़ या चीनी और कटे हुए मेवे मिलाए जाते हैं. तैयार मिश्रण से गोल लड्डू बनाए जाते हैं. इनका स्वाद हल्का कुरकुरा होता है और घी व मेवों की खुशबू इन्हें खास बनाती है. कई परिवारों में इन्हें सर्दियों के दौरान बनाया जाता है.

दक्षिण भारत में उड़द दाल से बनने वाले लड्डू भी काफी पसंद किए जाते हैं. आंध्र प्रदेश में इन्हें सुन्नुंडालु के नाम से जाना जाता है. इन्हें बनाने के लिए उड़द दाल को भूनकर बारीक पीसा जाता है. फिर इसमें घी और चीनी या गुड़ मिलाकर लड्डू बनाए जाते हैं. इनका स्वाद दूसरे लड्डुओं से थोड़ा अलग होता है और इनमें भुनी हुई दाल की खास खुशबू आती है.

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बिहार और आसपास के इलाकों में सत्तू का इस्तेमाल कई तरह के व्यंजन बनाने में किया जाता है. इससे लड्डू भी तैयार किए जाते हैं. भुने चने के सत्तू में घी और गुड़ या चीनी मिलाकर मिश्रण तैयार किया जाता है. चाहें तो इसमें बादाम, काजू या इलायची भी डाल सकते हैं. इसके बाद मिश्रण को गोल आकार दे दिया जाता है. इन लड्डुओं का स्वाद सत्तू की सोंधी खुशबू और गुड़ की मिठास से बनता है.

राजस्थान के चूरमा के लड्डू अपने पारंपरिक स्वाद के लिए मशहूर हैं. इन्हें बनाने के लिए गेहूं के आटे से बाटी या मोटी रोटी तैयार की जाती है. पकने के बाद इसे बारीक चूरा करके इसमें घी और गुड़ या चीनी मिलाई जाती है. कई लोग स्वाद बढ़ाने के लिए इलायची और कटे हुए मेवे भी डालते हैं. फिर इस मिश्रण को गोल आकार दिया जाता है. राजस्थान में चूरमा के लड्डू दाल-बाटी के साथ भी खूब पसंद किए जाते हैं.

मूंगफली और गुड़ के लड्डू बनाने के लिए बहुत ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं होती. सबसे पहले मूंगफली को भूनकर उसका छिलका उतार लिया जाता है. इसके बाद इसे हल्का दरदरा कूटकर पिघले हुए गुड़ के साथ मिलाया जाता है. मिश्रण गर्म रहते ही इसके लड्डू बना लिए जाते हैं, क्योंकि ठंडा होने पर गुड़ सख्त हो सकता है. मूंगफली का कुरकुरापन और गुड़ की मिठास इन लड्डुओं को खास बनाती है. सर्दियों और मकर संक्रांति के मौके पर इन्हें कई घरों में बनाया जाता है.

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खड़गे के बयान पर भाजपा का प्रदर्शन: प्रदेश अध्यक्ष समेत 200 हिरासत में; PM मोदी के दिवंगत पिता पर कथित टिप्पणी का विरोध – New Delhi News




कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे की प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के दिवंगत पिता को लेकर कथित टिप्पणी के विरोध में सोमवार को दिल्ली भाजपा ने प्रदर्शन किया। प्रदेश अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा के नेतृत्व में करीब 2 हजार कार्यकर्ता राजाजी मार्ग स्थित खड़गे के आवास की ओर मार्च करने निकले। पुलिस ने उन्हें बैरिकेडिंग कर रोक दिया। इस दौरान प्रदेश अध्यक्ष समेत करीब 200 पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं को हिरासत में लेकर पांच बसों से मंदिर मार्ग थाने ले जाया गया। भाजपा के मुताबिक, पटना में एक सभा के दौरान खड़गे ने प्रधानमंत्री के दिवंगत पिता के खिलाफ कथित रूप से आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। इसके विरोध में भाजपा के पूर्वांचल, युवा और ओबीसी मोर्चा के कार्यकर्ता सेना भवन के पास एकत्र हुए। प्रदेश प्रभारी विनय सहस्त्रबुद्धे सहित अन्य नेताओं ने कार्यकर्ताओं को संबोधित किया। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने खड़गे के आवास की ओर मार्च शुरू किया। पुलिस ने कुशक रोड मोड़ पर बैरिकेडिंग कर उन्हें रोकने का प्रयास किया। कुछ कार्यकर्ता बैरिकेड पार कर आगे बढ़े, लेकिन पुलिस ने उन्हें रोककर हिरासत में ले लिया। हर्ष मल्होत्रा ने कहा कि कांग्रेस अध्यक्ष को अपनी कथित टिप्पणी के लिए माफी मांगनी चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि लगातार चुनावी हार से कांग्रेस नेतृत्व हताश है और मर्यादाहीन बयानबाजी कर रहा है। वहीं, विनय सहस्त्रबुद्धे ने कहा कि प्रधानमंत्री किसी एक पार्टी के नहीं, बल्कि पूरे देश के हैं। उनके परिवार के प्रति अपमानजनक टिप्पणी स्वीकार नहीं की जा सकती। उन्होंने कांग्रेस पर वंशवाद की राजनीति करने का भी आरोप लगाया।



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बिहार में फिल्मों को मिलेगी सब्सिडी, मुख्यमंत्री का ऐलान: भोजपुरी म्यूजिक अवार्ड में पहुंचे सितारे, पवन सिंह और शिल्पी राज को बेस्ट सिंगर का अवार्ड – Patna News


भोजपुरी संगीत और सिनेमा जगत के कलाकारों के लिए आज पटना में आईवीवाई भोजपुरी म्यूजिक अवॉर्ड्स 2026 का आयोजन किया गया। इस समारोह का उद्घाटन मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने किया।

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इसमें भोजपुरी फिल्म और संगीत जगत की कई चर्चित हस्तियां मनोज तिवारी, पवन सिंह और दिनेश लाल यादव निरहुआ शामिल हुईं।

आयोजन का उद्देश्य भोजपुरी संगीत से जुड़े गायकों, गीतकारों, संगीतकारों और अन्य रचनात्मक प्रतिभाओं को सम्मानित करना और नई प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करना है। अवार्ड समारोह में पवन सिंह को बेस्ट मेल सिंगर और शिल्पी राज को बेस्ट फीमेल सिंगर का पुरस्कार दिया गया।

बिहार में इस साल से फिल्मों को सब्सिडी देने की शुरुआत होगी

मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने कहा, बिहार सरकार कला और संस्कृति को बढ़ावा देने के लिए संकल्पित है। उन्होंने घोषणा की कि इस साल से फिल्मों को सब्सिडी देने की शुरुआत की जाएगी, जिसकी शुरुआत भोजपुरी फिल्मों से होगी।

उन्होंने भोजपुरी कलाकारों के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हुए कहा कि कलाकार मिलकर फिल्म सिटी के लिए उपयुक्त स्थान तय करें, सरकार इसके निर्माण में सहयोग करेगी।

भोजपुरी फिल्म और संगीत की कई हस्तियां शामिल हुईं।

भोजपुरी फिल्म और संगीत की कई हस्तियां शामिल हुईं।

डिजिटल प्लेटफॉर्म पर भी पहुंचेगा समारोह

आईवीवाई एंटरटेनमेंट की पहल और याशी फिल्म्स के आयोजन में हो रहे इस कार्यक्रम का उद्देश्य भोजपुरी संगीत को व्यापक दर्शक वर्ग तक पहुंचाना है। ऑनलाइन माध्यम से देश के अलग-अलग हिस्सों और विदेशों में रहने वाले भोजपुरी संगीत प्रेमी भी कार्यक्रम से जुड़ सकेंगे।

भोजपुरी संगीत की लोकप्रियता को देखते हुए इस आयोजन को कलाकारों की उपलब्धियों का उत्सव और उभरती प्रतिभाओं को मंच देने की पहल के रूप में देखा जा रहा है।



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जयपुर की 5 पंचायत समितियों में वोटिंग 28 अक्टूबर को: जिला परिषद के 11 वार्डो के लिए भी डाले जाएंगे वोट; कल भवानी निकेतन से रवाना होगी पोलिंग पार्टियां – Jaipur News




पंचायत चुनाव के दूसरे चरण के लिए 28 अक्टूबर को वोटिंग होगी। राजधानी जयपुर में दूसरे चरण में 5 पंचायत समितियों में वोट डलेंगे, जिसमें कुल 81 वार्ड सदस्यों का चुनाव किया जाएगा। जबकि जयपुर जिला परिषद के भी 11 वार्ड मेम्बर्स के लिए वोटिंग करवाई जाएगी। वोटिंग के लिए कल यानी 27 अक्टूबर को सीकर रोड भवानी निकेतन परिसर से पोलिंग पार्टियां रवाना होगी। जयपुर जिला निर्वाचन शाखा की रिपोर्ट के मुताबिक 5 पंचायत समितियों में वोटिंग के लिए 413 पोलिंग बूथ बनाए है। इन पोलिंग बूथों पर ही पंचायत समिति सदस्यों और जिला परिषद सदस्यों के लिए वोटिंग होगी। इन चुनाव के लिए कल पोलिंग पार्टियां जयपुर से रवाना होगी। 28 अक्टूबर को वोटिंग पूरी होने के बाद ईवीएम मशीनों को जयपुर ​लाया जाएगा। वोटो की गणना और रिजल्ट 20 नवंबर को घोषित किए जाएंगे। इन पंचायत समितियों में डाले जाएंगे वोट दूसरे चरण में अमरसर, आमेर, जालसू, रामपुरा-डाबड़ी और शाहपुरा पंचायत समितियां है। इन सभी पंचायत समितियों में कुल 81 वार्ड है, जिनमें चुनाव लड़ने के लिए 247 उम्मीदवार मैदान में है। जबकि इन पंचायत समितियों में आ रहे जिला परिषद के 11 वार्ड (वार्ड संख्या 11 से 14 और 51 से 57) के लिए भी वोटिंग होगी। जिला परिषद के इन 11 वार्डो में 30 उम्मीदवार मैदान में है। 3.78 लाख वोटर्स दूसरे चरण की 5 पंचायत समितियों में 3 लाख 78 हजार 364 वोटर्स है। इसमें 1 लाख 97,323 पुरूष, 1 लाख 81040 महिला और 1 थर्ड जेंडर वोटर है। सरपंच और वार्ड पंच के लिए 30 अक्टूबर को वोटिंग जिला परिषद और पंचायत समिति सदस्यों की वोटिंग के बाद अगले दिन यानी 29 अक्टूबर से इन पंचायत समितियों में मौजूद 112 ग्राम पंचायतों के वार्ड पंच और सरपंच की निर्वाचन प्रक्रिया शुरू होगी। 29 अक्टूबर को वार्ड पंच और सरपंच पद के लिए नामांकन भरे जाएंगे और देर शाम तक जांच और नाम वापसी के बाद फाइनल उम्मीदवारों की सूची जारी की जाएगी। 30 अक्टूबर को वार्ड पंच और सरपंच के लिए सुबह 7 से शाम 6 बजे तक वोटिंग होगी और वोटिंग खत्म होने के बाद मतगणना शुरू करके देर रात तक रिजल्ट घोषित किए जाएंगे।



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Anthropic के AI मॉडल ने चुनावी डेटा चुराकर मचाया हड़कंप, कंपनी ने दी सफाई


Anthropic के एआई मॉडल ने चुनावी डेटा एक्सेस करके पूरी दुनिया में हड़कंप मचा दिया है। इसके बाद कंपनी को इसे लेकर सफाई देनी पड़ी है। एक तरफ भारत में जहां वोट चोरी वाला मुद्दा गर्माया हुआ है, वहीं दूसरी तरफ अमेरिका के जॉर्जिया स्टेट के वोटर का डेटा एंथ्रोपिक के Claude एआई मॉडल ने बिना किसी कमांड के एक्सेस कर लिया है। हालांकि, एआई मॉडल ने इसमें किसी भी वोटर की निजी जानकारियां हासिल नहीं की है, लेकिन एआई मॉडल के द्वारा इस तरह डेटा एक्सेस किए जाने की घटना ने एक बार फिर से आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस द्वारा डिजिटल डेटा में सेंध लगाए जाने वाली चर्चा को हवा दे दिया है।

वोटर डेटा किए एक्सेस

एंथ्रोपिक ने कंफर्म किया है कि Claude AI ने पेवॉल को बाईपास करके अमेरिका के जॉर्जिया स्टेट के वोटर डेटा को एक्सेस किया था। कंपनी ने एआई मॉडल को ऐसा करने का कमांड जारी नहीं किया था। कंपनी ने बताया कि एक इंटरनल स्टेटिस्टिक प्रोजेक्ट में ट्रेनिंग के दौरान Claude ने ऐसा किया है। एआई ने वोटर डेटा को एक्सेस करके वोट काउंट दिखा दिया था, जबकि उसे ऐसा करने का कमांड नहीं दिया गया था। कंपनी ने यह भी नहीं बताया है कि Claude के कौन एआई मॉडल ने ऐसा किया है।

Anthropic के प्रवक्ता ने सफाई देते हुए कहा है कि बिना कहे ही, मॉडल ने एक डैशबोर्ड को क्वेरी करने के लिए टोकन मांगा, जिसमें ऐसी जानकारी मौजूद थी जो आमतौर पर शुल्क देकर यानी Paywall के जरिए ही मिलती है। कंपनी ने साथ ही यह भी कंफर्म किया है कि Claude ने किसी भी इंडिविजुअल वोटर डिटेल को एक्सेस नहीं किया है। एआई द्वारा एक्सेस की जानकारी पहले से ही पब्लिकली उपलब्ध है, जिसे लोग फीस चुकाकर हासिल करते हैं। क्लाउडे एआई मॉडल ने किसी भी स्टेट वोटर रजिस्ट्रेशन सिस्टम में सेंध नहीं लगाई है।

कंपनी ने इस घटना के बाद जॉर्जिया के स्टेट ऑफिस के सेक्रेटरी को इसकी जानकारी दी है। साथ ही, व्हाइट हाउस में भी कंपनी ने यह जानकारी उपलब्ध कराई है। इससे पहले भी एंथ्रोपिक के एआई मॉडल को लेकर कई बार सवाल उठाए जा चुके हैं। कंपनी के एआई रिसर्चर जैकब कॉक्सन ने पिछले महीने ही इस्तीफा दिया है। उन्होंने एआई के बढ़ रहे खतरों को देखते हुए अपने पद से इस्तीफा दिया है।

सुपरइंटेलिजेंट एआई बन रहा खतरा

कॉक्सन के मुताबिक AI सिस्टम बहुत जल्द ऐसी क्षमताएं हासिल कर सकते हैं जो इंसानों से कहीं ज्यादा होंगी। उनका कहना है कि इस तकनीक की ताकत को कम करके नहीं आंकना चाहिए। उन्होंने लिखा कि आने वाले समय में ऐसे सिस्टम हो सकते हैं जो किसी भी सिस्टम को हैक करने, किसी भी क्षेत्र में रातोंरात बड़ा बदलाव लाने और वास्तविक ताकत तथा संसाधन हासिल करने में सक्षम हों। उनका तर्क है कि इन सभी क्षेत्रों में AI की प्रगति पहले ही दिखाई दे रही है और इसकी रफ्तार कम नहीं हो रही।

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आज का एक्सप्लेनर: नेतन्याहू सर्वे में पिछड़ रहे, क्या फिर भी प्रधानमंत्री बन जाएंगे; इजराइल में वोटिंग आज, भारत से कितने अलग होते हैं चुनाव


इजराइल में 27 अक्टूबर को वोट पड़ेंगे। सर्वे में मौजूदा पीएम बेंजामिन नेतन्याहू की पार्टी विपक्षी आइजनकोट से पिछड़ रही है। इसके बावजूद नेतन्याहू के 7वीं बार प्रधानमंत्री बनने का रास्ता पूरी तरह बंद नहीं होगा। इसकी वजह है इजराइल का अनोखा चुनावी सिस्टम।

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साल- 1907, ब्रिटेन का एक यहूदी केमिस्ट चाइम वाइजमैन पहली बार फिलिस्तीन पहुंचा और जाफा इलाके में एक कंपनी खोली। धीरे-धीरे दुनियाभर से सताए हुए यहूदी फिलिस्तीन पहुंचने लगे। वो यहां जमीनें खरीदते, खेती और व्यापार करते। आबादी बढ़ती गई।

1948 में इजराइल नया देश बना। तब तक यहां 70 से ज्यादा देशों से यहूदी आकर बस चुके थे। जमीनी सीमाएं तय नहीं थीं। हर समूह की भाषा, संस्कृति और राजनीति अलग थी। सभी को प्रतिनिधित्व देना जरूरी था।

ऐसे में पूरा देश एक निर्वाचन क्षेत्र मानकर प्रोपोर्शनल रिप्रेजेंटेशन सिस्टम अपनाया गया, यानी जिसकी जितनी आबादी, उसकी उतनी हिस्सेदारी।

इजराइल के इसी अनोखे इलेक्शन सिस्टम को आसानी से समझने के लिए 7 पॉइंट्स से गुजर जाइए…

1. पूरा देश एक ही निर्वाचन क्षेत्र

  • भारत में लोकसभा की 543 अलग-अलग सीटें हैं। इसमें वाराणसी का वोटर सिर्फ वाराणसी का सांसद चुनता है। इजराइल में ऐसा कोई इलाका नहीं है। पूरा देश एक ही निर्वाचन क्षेत्र है और 120 सीटों की नेसेट (संसद) के लिए सब एक साथ वोट डालते हैं।

2. वोट पार्टी को मिलते हैं, किसी एक उम्मीदवार को नहीं

  • सभी पार्टियां चुनाव से पहले 120 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी करती हैं। वोटर किसी एक उम्मीदवार को नहीं, बल्कि पार्टी की पूरी लिस्ट को वोट देते हैं। भारत की तरह 18 साल से ज्यादा उम्र के इजराइली नागरिक वोट डाल सकते हैं। वहां बैलेट पेपर के जरिए चुनाव होते हैं, ईवीएम जैसी मशीन से नहीं।

पोलिंग बूथ में हर पार्टी की पर्चियां रखी होती हैं। वोटर पसंदीदा पार्टी की एक पर्ची उठाकर लिफाफे में बंद करके बैलेट बॉक्स में डाल देते हैं।

3. वोट शेयर के हिसाब से सीटों का बंटवारा

  • भारत में सबसे ज्यादा वोट वाला उम्मीदवार जीतता है, चाहे उसका वोट शेयर 30% ही क्यों न हो। इसे फर्स्ट-पास्ट-द-पोस्ट कहते हैं।
  • इजराइल में वोट शेयर के अनुपात में सीटें मिलती हैं। मसलन- अगर किसी पार्टी को कुल 10% वोट मिले, तो उसे 120 सीटों वाली नेसेट की करीब 12 सीटें मिलेंगी।

4. सीट पाने के लिए कम से कम 3.25% वोट जरूरी

  • छोटी-छोटी सैकड़ों पार्टियां इलेक्शन को बहुत जटिल न बना दें, इसलिए इजराइल में 3.25% का इलेक्टोरल थ्रेशोल्ड तय किया गया है। यानी पार्टियों को नेसेट पहुंचने के लिए कम से कम 3.25% चाहिए। जो पार्टी इससे नीचे रह जाती है, उसे कोई सीट नहीं मिलती और उसके वोट गिनती से बाहर हो जाते हैं।
  • मान लीजिए कुल 40 लाख वोट पड़े। इसका 3.25% हुआ 1.3 लाख वोट। अब अगर किसी पार्टी को 1.3 वोट मिले हैं, तो उसे नेसेट में सीट मिलेगी। वहीं किसी को 1.29 लाख वोट मिले, तो वह बाहर और उसके सारे वोट बेकार।

5. नेसेट की सीटों का बंटवारा

6. प्रधानमंत्री कौन बनेगा?

  • भारत में जैसे राष्ट्रपति बहुमत वाले नेता को सरकार बनाने के लिए बुलाते हैं, वैसा ही इजराइल में भी है, लेकिन एक फर्क है।
  • इजराइल के राष्ट्रपति सरकार बनाने का मौका उस सांसद को देते हैं, जिसके बहुमत जुटाने और सरकार बनाने की संभावना सबसे ज्यादा हो। इसके लिए जरूरी नहीं है कि वह सांसद सबसे बड़ी पार्टी का नेता हो।
  • दरअसल, इजराइल के 78 साल के चुनावी इतिहास में किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत नहीं मिला है, यानी नेसेट की 120 में से 61 सीटें नहीं जीतीं हैं। ऐसे में हर बार गठबंधन की सरकार बनती है और राष्ट्रपति द्वारा तय किए नेता को बहुमत जुटाना होता है।
  • नेता को सरकार बनाने के लिए 28 दिन मिलते हैं। राष्ट्रपति चाहें तो 14 दिन का मौका और दे सकते हैं। उसे नेसेट में अपनी सरकार, मंत्री और नीतियां पेश करनी पड़ती हैं। फिर वोटिंग में मौजूद सांसदों का बहुमत मिल जाता है, तो उसकी सरकार बन जाती है।
  • 2021 में नफ्ताली बेनेट की पार्टी ‘यामिना’ के पास सिर्फ 7 सांसद थे। फिर भी वे प्रधानमंत्री बने, क्योंकि विपक्षी दलों ने उन्हें समर्थन दिया।
जून 2021 में पीएम पद संभालने के बाद नेफ्ताली बेनेट (सबसे बाएं), राष्ट्रपति रूवेन रिवलिन (बीच में) और विदेश मंत्री यायर लापिड (सबसे दाएं)।

जून 2021 में पीएम पद संभालने के बाद नेफ्ताली बेनेट (सबसे बाएं), राष्ट्रपति रूवेन रिवलिन (बीच में) और विदेश मंत्री यायर लापिड (सबसे दाएं)।

7. अगर कोई गठबंधन न बने तो?

  • अगर पहला नेता सरकार नहीं बना पाता है, तो राष्ट्रपति दूसरे सांसद को मौका दे सकते हैं। अगर वो भी सरकार नहीं बना पाता है, तो नेसेट को मौका दिया जाता है।
  • अगर इन 3 कोशिशों के बाद भी सरकार न बने, तो नेसेट भंग मान ली जाती है और 90 दिन के भीतर दोबारा चुनाव होते हैं। तब तक पुरानी सरकार काम करती रहती है।
  • नेसेट का कार्यकाल 4 साल का है, लेकिन 78 साल में 25 बार चुनाव हो चुके हैं। अप्रैल 2019 से नवंबर 2022 के बीच 3.5 साल में तो 5 बार चुनाव हुए।

1949 से लेकर आज तक इजराइल में किसी भी पार्टी को अकेले बहुमत नहीं मिला है। इसकी 3 वजहें हैं…

1. वोट शेयर के हिसाब से सीटों का बंटवारा: नेसेट में सीटें पार्टी को मिले वोट शेयर के अनुपात में बंटती हैं। ऐसे में बहुमत की 61 सीटें पाने के लिए किसी भी पार्टी को कम से कम 51% की जरूरत है, जो बहुत मुश्किल है। जबकि भारत में अमूमन 35-40% वोट पर लोकसभा में आधी सीटें मिल सकती हैं। 1969 में गोल्डा मायर के अलाइनमेंट (लेबर अलायंस) बहुमत के सबसे नजदीक पहुंचा। उसे 46.2% वोट और 56 सीटें मिली थीं।

1969 के चुनाव में वोट डालती हुईं गोल्डा मायर। वे इजराइल की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं।

1969 के चुनाव में वोट डालती हुईं गोल्डा मायर। वे इजराइल की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं।

2. कई खेमों में बंटा समाज: इजराइली थिंकटैंक ‘इजराइल डेमोक्रेसी इंस्टीट्यूट’ के सीनियर फेलो प्रो. गिदोन राहत के मुताबिक, इजराइल का समाज कई हिस्सों में बंटा हुआ है। जैसे- सेकुलर यहूदी बनाम अल्ट्रा-ऑर्थोडॉक्स, अशकेनाजी बनाम मिजराही, यहूदी बनाम अरब। हर समूह की अपनी अलग पार्टी है, इसलिए वोट बिखर जाते हैं। जैसे- सेकुलर यहूदी येश अतीत, अल्ट्रा ऑर्थोडॉक्स शास, राष्ट्रीय-दक्षिणंपथी लिकुड और अरब-इजराइली रा’आम को अमूमन वोट देते हैं।

3. कम इलेक्टोरल थ्रेशोल्ड: शुरुआत में 1% वोट पाने वाली पार्टियों को भी नेसेट में जगह मिल जाती थी। फिर इसे बढ़ाकर 1.5%, 2% और अब 3.25% किया गया, ताकि छोटी पार्टियां कम हों। इसके बावजूद औसतन 11-12 पार्टियां इलेक्टोरल थ्रेशोल्ड पार कर लेती हैं। औसतन 3 पार्टियां ही 10 से ज्यादा सीटें हासिल कर पाती हैं। वहीं औसतन 5-6 छोटी पार्टियों को 4-6 सीटें मिल जाती हैं।

क्या चुनाव के बाद नेतन्याहू फिर से सरकार बना पाएंगे?

ऐसा 38 साल बाद हो रहा है कि नेसेट के पूरे 4 साल के कार्यकाल के बाद चुनाव हो रहा है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि इस बार के चुनाव में ये छोटे गुट ‘किंगमेकर’ बन सकते हैं, खासतौर पर अरब पार्टियां।

दरअसल, इजराइल के 3 बड़े मीडिया प्लेटफॉर्म्स- चैनल 12, चैनल 13 और कान 11 के फाइनल पोल में किसी भी अलायंस को बहुमत नहीं मिला।

ज्यादातर पोल में पूर्व आर्मी चीफ गादी आइजनकोट की पार्टी ‘याशर’ को बढ़त है। याशर को 22 से 23 सीटें मिल सकती हैं, जबकि 19 साल पीएम रहे नेतन्याहू की लिकुड को 19 से 21 सीटें।

माना जा रहा है कि अगर अरब पार्टियों ने 10 सीटें भी हासिल कर लीं, तो वही तय करेंगी कि सत्ता कौन संभालेगा?

इजराइली मीडिया में इस चुनाव को अक्टूबर 2023 में शुरू हुई जंग के बाद का पहला चुनाव और नेतन्याहू की लीडरशिप पर जनमत जैसा बता रही हैं। नेतन्याहू पर जंग की आड़ में अपनी सरकार बचाने के आरोप लगे हैं। उन पर भ्रष्टाचार का मुकदमा भी चल रहा है।

‘फ्लाई एंड वोट’ नाम की एक मुहिम भी चल रही है, जिसके तहत विदेशों में रह रहे इजराइली वोटर्स देश आकर वोट डाल रहे हैं। यहूदी मीडिया वेबसाइट ‘फॉरवर्ड’ के मुताबिक, करीब 5 लाख इजराइली वोटर्स विदेशों में रहते हैं, जिनमें से करीब 53 हजार वोटर वोट डालने के लिए इजराइल जा रहे हैं और ये 67 हजार तक हो सकते हैं।

गाजा जंग की जांच को लेकर इजराइल में प्रदर्शन हो रहे हैं और बदलाव की मांग की जा रही है। इसी के चलते विदेशों में रहने वाले इजराइली वोटर भी देश लौट रहे हैं।

गाजा जंग की जांच को लेकर इजराइल में प्रदर्शन हो रहे हैं और बदलाव की मांग की जा रही है। इसी के चलते विदेशों में रहने वाले इजराइली वोटर भी देश लौट रहे हैं।

अमेरिका के लॉस एंजिल्स में रहने वाले एडम पाइंस वोट डालने के लिए इजराइल के तेल अवीव पहुंच गए हैं। वे मानते हैं कि इजराइल ने अपनी नैतिक दिशा खो दी है। नेतन्याहू इजराइल की हिफाजत करने में नाकाम रहे हैं। उनकी कार्रवाइयों से दुनियाभर के यहूदियों और इजराइलियों पर असर पड़ा है।

विदेशों से लौट रहे ज्यादातर वोटर नेतन्याहू के खिलाफ हैं। इसी के चलते लिकुड पार्टी ने केंद्रीय चुनाव समिति से ‘फ्लाई एंड वोट’ मुहिम रोकने की मांग की है।

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पूर्व जस्टिस बोले-चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति दबाव में न हो: चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं की सुरक्षा जरूरी; जस्टिस ओका SIR पर भी बयान दे चुके


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नई दिल्ली2 घंटे पहले

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जस्टिस अभय 31 अगस्त 2021 से सुप्रीम कोर्ट में बतौर जज रहे, और 24 मई 2025 को रिटायर हुए।

सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस अभय ओका ने कहा कि चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राजनीतिक दबदबे से मुक्त रहनी चाहिए। इसके लिए मजबूत कानूनी व्यवस्था और स्वतंत्र संस्थाओं की सुरक्षा का ढांचा जरूरी है।

जस्टिस अभय रविवार को ठाणे में ‘फ्रीडम ऑफ स्पीच एंड अस’ विषय पर व्याख्यान दे रहे थे। उन्होंने संवैधानिक पदों पर नियुक्ति में जवाबदेही को लेकर सवाल उठाए।

उन्होंने कहा कि स्वतंत्र और निष्पक्ष चुनाव लोकतंत्र की बुनियाद हैं। साथ ही, बोलने की आजादी मौलिक अधिकार है। किसी तर्क का जवाब शारीरिक ताकत से नहीं, तर्क से दिया जाना चाहिए।

रिटायर जस्टिस ओका ने 15 अक्टूबर को SIR को लेकर भी बयान दिया था। उन्होंने कहा था कि सुप्रीम कोर्ट को मई 2026 में दिए SIR को सही ठहराने वाले अपने फैसले पर दोबारा विचार करना चाहिए।

चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति पर सवाल

जस्टिस ओका ने कहा कि ऐसी व्यवस्था और कानूनी प्रावधान होना जरूरी है, जिससे चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति राजनीतिक दबदबे से तय न हो।

उन्होंने कहा कि पूर्व उपप्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने करीब 14 साल पहले कॉलेजियम व्यवस्था का प्रस्ताव दिया था। इसमें प्रधानमंत्री, लॉ मिनिस्टर, लोकसभा और राज्यसभा में विपक्ष के नेता तथा चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया शामिल होते।

उनके मुताबिक, इस व्यवस्था का मकसद चुनाव आयुक्तों के चयन की प्रक्रिया को वास्तव में स्वतंत्र बनाना था।

बोलने की आजादी लोकतंत्र के लिए जरूरी

अभय ओका ने कहा कि लोकतंत्र को बचाने के लिए बोलने की आजादी की रक्षा करनी होगी। इसके बिना जीवन अपना सार्थक अर्थ खो देता है।

उन्होंने कहा कि हर नागरिक को अपने विचार और नजरिए रखने का मौलिक अधिकार है। किसी बहस का जवाब बहस से दिया जाना चाहिए, शारीरिक बल से नहीं।

चुनाव आयुक्त पर सुप्रीम कोर्ट के 4 जज/पूर्व जज बयान दे चुके

  1. सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस उज्जल भुइयां: मतदाता अधिकारों को लेकर चिंता जताई थी। उन्होंने कहा कि लाखों लोगों को मतदान के अधिकार से वंचित करने वाली प्रक्रिया मनमानी और संवैधानिक व्यवस्था के विरुद्ध होगी।
  2. पूर्व CJI जस्टिस बीआर गवई: जस्टिस गवई ने भुइयां की टिप्पणी के औचित्य पर सवाल उठाए और कहा कि अदालत में लंबित मामले पर वर्तमान जज को सार्वजनिक टिप्पणी करने से बचना चाहिए।
  3. पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस रोहिंटन फली नरीमन: आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए, मतदाता सूची से बड़ी संख्या में नाम हटने और चुनाव आयोग के कामकाज पर चिंता जताई।
  4. पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस वी. गोपाल गौड़ा: आयोग और SIR की आलोचना की। SIR पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को वापस लेने की मांग की। आरोप लगाया कि आयोग ने कोर्ट में महत्वपूर्ण तथ्य नहीं रखे।

इनके अलावा पूर्व सुप्रीम कोर्ट जज जस्टिस हेमंत गुप्ता और जस्टिस पंकज मित्तल का नाम भी शामिल है, जो उन 42 रिटायर जजों में शामिल, जिन्होंने खुले पत्र में चुनाव आयोग का समर्थन किया और उसके खिलाफ आरोपों को राजनीतिक हितों से प्रेरित बताया।

जस्टिस ओका के 5 चर्चित फैसले

1. बीफ बैन वाला फैसला- महाराष्ट्र (2016): सरकार ने कहा था – बैल/गाय काटना ही नहीं, बाहर से बीफ लाकर घर में रखना भी अपराध है। जस्टिस ओका ने कहा- काटने पर बैन ठीक है, पर किसी के फ्रिज में क्या है, ये देखना निजता का उल्लंघन है। बाहर का बीफ रखने वाले हिस्से को असंवैधानिक करार दिया।

2. लाउडस्पीकर धर्म का हिस्सा नहीं (2016-17): बॉम्बे हाईकोर्ट में उन्होंने कहा – “लाउडस्पीकर पर अजान, भजन बजाना धर्म का जरूरी हिस्सा नहीं है, ये आर्टिकल 25 में नहीं है।” रात 10 बजे से सुबह 6 बजे तक लाउडस्पीकर बैन, साइलेंस जोन में पूरी तरह बैन। सरकार ने उन पर पक्षपात का आरोप लगाकर केस दूसरी बेंच में ट्रांसफर कराने की कोशिश की, तो पूरा बार एसोसिएशन उनके समर्थन में आ गया, सरकार को माफी मांगनी पड़ी।

3. फ्री स्पीच केस (2024): सुप्रीम कोर्ट एक प्रोफेसर ने वॉट्सएप पर धारा 370 हटाने की आलोचना वाला मैसेज फॉरवर्ड किया, उस पर 153A (नफरत फैलाना) लग गया। जस्टिस ओका ने केस रद्द करते हुए लिखा – हर आलोचना को अपराध समझोगे तो लोकतंत्र नहीं बचेगा।

4. आंगनवाड़ी वर्कर्स को ग्रेच्युटी (2022): सुप्रीम कोर्ट में कहा- आंगनवाड़ी वर्कर / हेल्पर सिर्फ मानदेय पर नहीं हैं, वो असली काम करती हैं, इसलिए पेमेंट ऑफ ग्रेच्युटी एक्ट 1972 के तहत ग्रेच्युटी की हकदार हैं। लाखों महिलाओं के लिए बड़ा फैसला।

5. आखिरी दिन वाला POCSO फैसला (23 मई 2025): रिटायरमेंट से एक दिन पहले, अपनी मां के अंतिम संस्कार से लौटकर उन्होंने 11 फैसले सुनाए। एक में POCSO में सजा पाए लड़के को छोड़ा- लड़की नाबालिग थी तब रिलेशन बना, बाद में बालिग होकर उसी से शादी कर ली, बच्चा भी है, लड़की खुद नहीं मानती कि ये अपराध है। जस्टिस ओक ने अनुच्छेद 142 का इस्तेमाल कर सजा माफ की और लिखा – “समाज ने उसे जज किया, सिस्टम ने फेल किया, परिवार ने छोड़ दिया, ट्रॉमा तो इन सबने दिया, उस घटना ने नहीं।”

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जस्टिस कौल ने अपनी आने वाली किताब ‘विदाउट फियर ऑर फेवर’ में कहा कि कॉलेजियम को सरकार के दबाव का विरोध करना चाहिए। आज नियुक्तियों से पहले सरकार से नामों पर चर्चा करने की परंपरा बन गई है। पढ़ें पूरी खबर…



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