Sunday, October 25, 2026
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आमेर किले के शाही आंगन में मॉडल्स की रैम्पवॉक: परिधानों और गहनों में दिखी भव्यता और राजस्थान की विरासत; 150 मॉडल्स ने की वॉक – Jaipur News




आमेर किले की ऐतिहासिक दीवारें, गणेश पोल की कलात्मक नक्काशी, शीशमहल की चमक और राजसी स्थापत्य की भव्यता। इसी विरासत के बीच जब रैंप पर पारंपरिक परिधान, हाथों की बारीक कारीगरी और शाही आभूषण के साथ राजस्थान की संस्कृति पेश करते हुए मॉडल्स ने फैशन के नए अंदाज में छाप छोड़ी। ऐतिहासिक आमेर किले में आयोजित ‘हैरिटेज डोर सीजन-3’ में राजस्थान की स्थापत्य कला, वस्त्र परंपरा, हस्तशिल्प और समकालीन फैशन का खूबसूरत मेल देखने को मिला। छह सीक्वेंस में फैशन शो में 150 से अधिक महिला और पुरुष मॉडल्स ने कैटवॉक किया। कार्यक्रम की मुख्य अतिथि उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी रहीं। राजस्थान सरकार के पर्यटन और पुरातत्व विभाग के सहयोग से आयोजित फैशन शो की खासियत यह रही कि आमेर महल के अलग-अलग हिस्सों की पहचान को परिधानों और आभूषणों की थीम से जोड़ा गया। गणेश पोल, सूरजपोल, चांदपोल, शीशमहल, जनाना महल, केसर क्यारी, सुख निवास और चार बाग जैसे ऐतिहासिक स्थलों के नाम पर सीक्वेंस तैयार किए गए। हर सीक्वेंस में डिजाइनर्स ने राजस्थान की पारंपरिक कारीगरी को अपने-अपने अंदाज में प्रस्तुत किया। आयोजक शिवाली गुप्ता, सोनाली खंडेलवाल और प्रिया दीवान ने बताया- शो डायरेक्टर अभिमन्यु सिंह तोमर के निर्देशन में इस आयोजन को राजस्थान की विरासत और आधुनिक फैशन के संगम के रूप में तैयार किया गया। फैशन शो के फोटोज यहां देखिए… गणेश पोल: साड़ी, इंडो-वेस्टर्न लहंगे और ब्राइडल ज्वैलरी का संगम आमेर महल का गणेश पोल के स्थापत्य सौंदर्य से प्रेरित सीक्वेंस में डिजाइनर्स कुल प्रकाश तनेजा और प्रेमप्रकाश तनेजा के परिधान प्रस्तुत किए गए। उनके कलेक्शन में पारंपरिक साड़ियों के साथ इंडो-वेस्टर्न लहंगों और स्मार्ट कैजुअल वियर को शामिल किया गया। इस सीक्वेंस में माधुरी धूत की ब्राइडल ज्वैलरी ने परिधानों के सौंदर्य को और निखारा। ब्राइडल लुक के अनुरूप आभूषणों और पारंपरिक परिधानों की जुगलबंदी ने विवाह समारोहों के लिए शाही स्टाइल की झलक पेश की। सूरजपोल और चांदपोल: कुंदन-मीनाकारी के साथ कांजीवरम की शाही छटा आमेर महल के सूरजपोल और चांदपोल से प्रेरित सीक्वेंस में गौरव जौहरी द्वारा डिजाइन की गई कुंदन, मीनाकारी और टेंपल ज्वैलरी प्रदर्शित की गई। इन आभूषणों में पारंपरिक भारतीय शिल्प की बारीकियों और राजसी आभा को प्रमुखता दी गई। कुंदन की चमक, मीनाकारी के रंग और टेंपल ज्वैलरी की पारंपरिक बनावट ने राजस्थान की आभूषण परंपरा को रैंप पर प्रभावी रूप से प्रस्तुत किया। इस कलेक्शन के साथ जोधपुर की दस्तकारी और प्रताप संस की कांजीवरम साड़ियों का संयोजन देखने को मिला। रेशमी साड़ियों की पारंपरिक बनावट और शिल्पकारी से तैयार आभूषणों ने दक्षिण भारतीय वस्त्र परंपरा तथा राजस्थान की राजसी ज्वैलरी के बीच खूबसूरत सामंजस्य बनाया। शीशमहल: पुरुष परिधानों के साथ जेमस्टोन ज्वैलरी का मेल आमेर किले के शीशमहल से प्रेरित सीक्वेंस में फैशन डिजाइनर दिग्विजय सिंह राठौड़ का मेंसवियर कलेक्शन प्रस्तुत किया गया। पुरुषों के परिधानों में शाही अंदाज और समकालीन फैशन के मेल को सामने रखा गया। इस कलेक्शन ने पारंपरिक राजसी पहनावे को आधुनिक पुरुषों की स्टाइलिंग के साथ जोड़ने का प्रयास किया। कलेक्शन के साथ डिजाइनर्स श्वेता और सपना टाटीवाला की जेमस्टोन ज्वैलरी प्रस्तुत की गई। रंगीन रत्नों और आभूषणों की बनावट ने परिधानों के साथ आकर्षक संयोजन बनाया। जनाना महल: सोने-चांदी के धागों और पारंपरिक कढ़ाई की बारीकियां आमेर महल का जनाना महल की विरासत को केंद्र में रखकर इंटरनेशनल फैशन डिजाइनर गजल मिश्रा का ‘पहरन’ कलेक्शन प्रस्तुत किया गया। इस कलेक्शन की खासियत परिधानों में सोने, चांदी और पीतल के धागों का इस्तेमाल रही। धातु के धागों से तैयार बनावट ने वस्त्रों को अलग दृश्यात्मक पहचान दी। ड्रेसेज पर जरदोजी, आरी-तारी और पारंपरिक एम्ब्रॉयडरी की कारीगरी देखने को मिली। इन शिल्प तकनीकों में बारीक हाथ के काम और सजावटी पैटर्न को प्रमुखता दी गई। पारंपरिक कढ़ाई को आधुनिक परिधानों में शामिल कर डिजाइनर ने विरासत को समकालीन रूप देने का प्रयास किया। इस सीक्वेंस में डिजाइनर्स मनीष और संदीप खूंटेटा की डायमंड, गोल्ड और पोलकी ज्वैलरी भी प्रस्तुत की गई। आभूषणों की राजसी बनावट और परिधानों पर की गई बारीक कारीगरी ने जनाना महल की भव्यता को फैशन के माध्यम से अभिव्यक्त किया। केसर क्यारी: आधुनिक महिला की स्टाइल में रॉयल परंपराओं की झलक आमेर किले की केसर क्यारी अपनी सममित बागवानी और ऐतिहासिक परिवेश के लिए जानी जाती है। इस सीक्वेंस में डिजाइनर्स आतिशा कपूर और दामिनी गुप्ता ने आधुनिक महिला की स्टाइल को राजसी परंपराओं के साथ प्रस्तुत किया। कलेक्शन में समकालीन फैशन की सहजता और पारंपरिक सौंदर्य के मेल को प्रमुखता दी गई। गौरी माहेश्वरी के कंटेम्पररी ज्वैलरी डिजाइन्स ने इस सीक्वेंस को नया अंदाज दिया। आधुनिक बनावट वाले आभूषणों को परिधानों के साथ इस तरह प्रस्तुत किया गया कि उनमें पारंपरिक प्रेरणा और आज के फैशन की पसंद दोनों दिखाई दें। इस प्रस्तुति को खास बनाने में जयपुर परफ्यूम्स की डायरेक्टर मुस्कान वाधवानी की भूमिका भी रही। उन्होंने केसर और अन्य फूलों से तैयार इत्र की खुशबू के जरिए आयोजन के अनुभव में सुगंध का आयाम जोड़ा। सुख निवास: फ्लप्पा और गोटा-पत्ती की विरासतकालीन कारीगरी आमेर महल का सुख निवास अपने विशिष्ट स्थापत्य और पारंपरिक शाही जीवनशैली से जुड़ा है। इस सीक्वेंस में कोजागिरी बाय धागा की फैशन डिजाइनर्स वैशाली गुप्ता और अर्चना डंगायच का कलेक्शन प्रस्तुत किया गया। इसमें विरासतकालीन फ्लप्पा और गोटा-पत्ती की कारीगरी को परिधानों के माध्यम से प्रदर्शित किया गया। गोटा-पत्ती राजस्थान की पारंपरिक सजावटी कला का महत्वपूर्ण हिस्सा है। कपड़ों पर की जाने वाली इस कारीगरी में धातु जैसी चमक वाले गोटे और पत्तियों के आकार की आकृतियों से डिजाइन तैयार किए जाते हैं। पारंपरिक तकनीक से सजे परिधानों ने राजस्थान की वस्त्र संस्कृति और हस्तकला की पहचान को रैंप पर सामने रखा। इस कलेक्शन के साथ ज्वैलरी डिजाइनर श्याम शत्रुघ्न सिन्हा के ब्राइडल क्रिएशंस प्रस्तुत किए गए। ब्राइडल ज्वैलरी की शाही बनावट और गोटा-पत्ती से सजे परिधानों के संयोजन ने पारंपरिक विवाह परिधान की भव्यता को उभारा। चार बाग: मुगल और राजपूती स्थापत्य से प्रेरित ग्रैंड फिनाले फैशन शो के ग्रैंड फिनाले में ‘चार बाग’ सीक्वेंस के जरिए मुगल और राजपूती स्थापत्य कला से प्रेरित शाही परिवेश प्रस्तुत किया गया। इस सीक्वेंस में फैशन डिजाइनर्स ऋषि और विभूति ने परिधानों पर रचनात्मक और भविष्यवादी डिजाइन दृष्टिकोण को सामने रखा। पारंपरिक स्थापत्य की प्रेरणा और आधुनिक डिजाइन सोच का मेल इस प्रस्तुति का प्रमुख पक्ष रहा। इस कलेक्शन के साथ डिजाइनर विपुल अग्रवाल और अग्रवाल एंड कंपनी ने डिजाइनर ज्वैलरी प्रस्तुत की गई। इसमें पोलकी, लैब-ग्रोन डायमंड्स और समकालीन आभूषण डिजाइन्स शामिल रहे। पारंपरिक राजसी आभूषणों की पहचान को आधुनिक डिजाइन के साथ जोड़कर पेश किया गया, जिससे ग्रैंड फिनाले में विरासत और नए दौर की ज्वैलरी का संगम नजर आया। राजपूती और मुगल स्थापत्य से प्रेरित सौंदर्य को परिधानों और आभूषणों के जरिए आधुनिक रूप में प्रस्तुत करना इस सीक्वेंस की खासियत रही। पूर्व विधायक मोहनलाल गुप्ता सहित फैशन, कला और संस्कृति से जुड़ी हस्तियां मौजूद रहीं।



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PET अभ्यर्थी बोले-ट्रेन में जगह नहीं, स्टेशन पर आराम नहीं: CPRO बोले- गोरखपुर स्टेशन पर बनाए गए हैं होल्डिंग एरिया; चलाई जा रही ट्रेनें – Gorakhpur News




प्रारंभिक अर्हता परीक्षा (पीईटी)-2026 देने के लिए गोरखपुर पहुंचे अभ्यर्थियों की भीड़ से रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर निगरानी बढ़ा दी गई है। शनिवार रात रेलवे स्टेशन पर बड़ी संख्या में अभ्यर्थी पहुंच गए। ट्रेनों में पहले से ही भीड़ होने के कारण कई अभ्यर्थियों को रास्तेभर धक्का-मुक्की झेलनी पड़ी। स्टेशन पहुंचने के बाद भी राहत नहीं मिली। बैठने की जगह नहीं मिलने पर कई अभ्यर्थी रात में स्टेशन के बाहर जमीन पर सोते नजर आए। किसी ने मच्छरों के बीच रात गुजारी तो कोई सुबह की परीक्षा की तैयारी में जुटा रहा। अभ्यर्थियों का कहना था कि जब ट्रेन में बैठने तक की जगह नहीं मिली तो स्टेशन पर भी उनके लिए पर्याप्त व्यवस्था नहीं दिखी। जिले में 25 और 30 अक्टूबर तथा एक नवंबर को होने वाली पीईटी के लिए सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। परीक्षा के लिए बनाए गए 52 केंद्रों पर पुलिस बल तैनात रहेगा। रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर भी सुरक्षा बढ़ाई गई है। जीआरपी और आरपीएफ की टीमें स्टेशन पर मुस्तैद हैं। शनिवार रात पुलिस बल ने गश्त कर सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया। पुलिस का जोर परीक्षा केंद्रों के साथ परिवहन स्थलों पर भी भीड़ को नियंत्रित करने और सतर्कता बनाए रखने पर है। प्लेटफॉर्म नंबर एक पर होल्डिंग एरिया, गेट पर सहायता केंद्र अभ्यर्थियों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए रेलवे स्टेशन के प्लेटफॉर्म नंबर एक पर होल्डिंग एरिया बनाया गया है। एंट्री गेट पर जीआरपी के जवान परीक्षा हेल्प सेंटर का डिस्प्ले लगाकर बैठे हैं, ताकि अभ्यर्थियों को जरूरत पड़ने पर सहायता मिल सके। वहीं, गेट नंबर चार से प्रवेश करते ही कैंट थाने की पुलिस भी सहायता के लिए तैनात है। स्टेशन पर सुरक्षा और निगरानी के इंतजाम किए गए हैं, लेकिन अभ्यर्थियों की शिकायत है कि रात गुजारने के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। दूर-दराज के जिलों से आए परीक्षार्थियों को सुबह की पाली में परीक्षा देने से पहले ही सफर की थकान और नींद पूरी नहीं होने की चिंता सता रही है। ‘मच्छर काट रहे, सुबह पेपर है, नींद नहीं पूरी होगी तो कैसे देंगे’ बलिया से परीक्षा देने पहुंचे राधेश्याम शर्मा ने बताया कि मैं पीईटी का पेपर देने गोरखपुर आए हैं ।यहां अभ्यर्थियों के लिए उचित व्यवस्था नहीं की गई है। रात किसी तरह गुजारनी पड़ रही है। स्टेशन पर मच्छरों की वजह से परेशानी हो रही है। सुबह की पाली मेरा परीक्षा है। ऐसे में अगर नींद पूरी नहीं होगी तो परीक्षा कैसे दे पाएंगे। उन्होंने बताया कि गोरखपुर आते समय ट्रेन में भी काफी भीड़ थी और रास्तेभर परेशानी झेलनी पड़ी। ‘ट्रेन के गेट पर खड़े होकर करना पड़ रहा सफर’ महराजगंज से परीक्षा देने जा रहे एक युवक ने बताया कि ट्रेन में इतनी भीड़ है कि अंदर खड़े होने तक की जगह नहीं मिल रही। युवक ने बताया कि ट्रेन में बच्चे, बुजुर्ग और महिलाएं तक भीड़ के बीच सफर करने को मजबूर हैं। युवक ने बताया यात्रियों की संख्या इतनी ज्यादा है कि हालात संभालना मुश्किल हो रहा है। बनारस से गोरखपुर पहुंचे जैकेस ने बताया कि ट्रेन में सफर के दौरान काफी परेशानी हुई। बैठने की व्यवस्था नहीं थी और साफ-सफाई भी ठीक नहीं थी। पूरे रास्ते दिक्कतों का सामना करना पड़ा। परीक्षा देने के लिए दूसरे शहर आने वाले अभ्यर्थियों को सफर के दौरान ही काफी मुश्किलें झेलनी पड़ रही हैं। ‘हजारों बच्चे स्टेशन पर, रात गुजारने के लिए जगह नहीं’ गाजीपुर के रहने वाले राम आशीष यादव ने बताया कि मैं प्रयागराज से ट्रेन पकड़कर गोरखपुर आया हूं। ट्रेन में इतनी धक्का-मुक्की थी कि सफर करना मुश्किल हो गया। स्टेशन पहुंचने के बाद भी बैठने के लिए उचित व्यवस्था नहीं मिली। उन्होंने कहा कि रातभर समय बिताना है और स्टेशन पर हजारों अभ्यर्थी पहुंच चुके हैं। ऐसे में रात गुजारना मुश्किल हो रहा है। रेलवे चला रहा पांच जोड़ी ट्रेनें, जरूरत पर बढ़ेगी संख्या पूर्वोत्तर रेलवे के सीपीआरओ सुमित कुमार ने दैनिक भास्कर को बताया कि पीईटी के अभ्यर्थियों की सुविधा के लिए पांच जोड़ी ट्रेनें चलाई जा रही हैं। स्टेशन पर होल्डिंग एरिया भी बनाया गया है। वार रूम से लगातार निगरानी की जा रही है। उन्होंने कहा कि जरूरत पड़ने पर ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जाएगी। 52 केंद्रों पर सुरक्षा, स्टेशन और बस अड्डों पर भी निगरानी पीईटी को देखते हुए जिले के 52 परीक्षा केंद्रों पर पुलिस बल की तैनाती की जाएगी। रेलवे स्टेशन और बस अड्डों पर भी सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाई गई है। जीआरपी और आरपीएफ के जवान लगातार निगरानी कर रहे हैं। शनिवार रात पुलिस बल ने गश्त कर व्यवस्था का जायजा लिया। परीक्षा के दिनों में भीड़ नियंत्रण, अभ्यर्थियों की सुरक्षा और परिवहन स्थलों पर सतर्कता बनाए रखने के निर्देश दिए गए हैं।



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हूतियों ने सऊदी के तेल ठिकानों-एयरपोर्ट्स पर हमला किया: मक्का-मदीना में मिसाइलों के टुकड़े गिरने की चेतावनी, इस महीने सऊदी पर 6 बड़े हमले हुए




यमन के हूती विद्रोहियों ने शनिवार को सऊदी अरब के तेल ठिकानों और एयरपोर्ट्स पर हमला किया है। हूती प्रवक्ता याह्या सरी के मुताबिक, निशाने पर सऊदी तेल कंपनी अरामको का यानबू ठिकाना, राबिग तेल रिफाइनरी और रियाद, दम्माम व नजरान के एयरपोर्ट थे। सऊदी सिविल डिफेंस ने मक्का और मदीना में मिसाइलों के टुकड़े गिरने की चेतावनी दी है। लोगों से सुरक्षित जगहों पर रहने को कहा गया है। इस महीने सऊदी अरब पर हूतियों ने 6 बड़े हमले किए हैं। अदन में भी सऊदी ठिकानों पर हमले का दावा हूती प्रवक्ता याह्या सरी के मुताबिक उनकी सेना ने अदन में सैन्य कैंप और नौसैनिक अड्डे को निशाना बनाया। उनके मुताबिक, इन ठिकानों पर सऊदी सेना की निगरानी थी। अदन यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार का अंतरिम केंद्र है। यहां हाल के दिनों में भी हमले हुए हैं। 15 अक्टूबर को अदन में राष्ट्रपति भवन परिसर पर मिसाइल हमला हुआ था। यमनी अधिकारियों के मुताबिक, इसमें पांच लोगों की मौत हुई और 16 घायल हुए। प्रधानमंत्री शाया अल-जिंदानी और सरकार के दूसरे अधिकारी सुरक्षित रहे। 16 अक्टूबर को अदन एयरपोर्ट परिसर में भी दो मिसाइलें गिरी थीं। यमनी अधिकारियों के मुताबिक, ये मिसाइलें काहिरा जाने के लिए तैयार एक यात्री विमान से करीब 500 मीटर दूर गिरीं। इस घटना में किसी की मौत या घायल होने की खबर नहीं थी। सऊदी अरब ने दो मिसाइलें रोकने की बात कही सऊदी अरब के नेतृत्व वाले सैन्य गठबंधन ने कहा कि उसने पश्चिमी सऊदी अरब के ताइफ और यानबू की ओर दागी गई दो मिसाइलों को बीच में ही रोक दिया। इसके बाद सऊदी सिविल डिफेंस ने ताइफ, यानबू, मक्का और जेद्दा में लोगों को खतरे की चेतावनी दी। लोगों से नजदीकी सुरक्षित जगह पर जाने को कहा गया। हूतियों का दावा- सऊदी ने हमले किए हूती मीडिया चैनल अल-मसीरा के मुताबिक, सना और उसके आसपास के इलाकों में सऊदी अरब ने कई हमले किए। चैनल ने मोखा शहर के आसपास करीब 20 हवाई हमले होने की भी जानकारी दी। सना के आसपास एक रिहायशी इमारत पर भी हमला हुआ। इस इमारत में सीमेंट फैक्ट्री में काम करने वाले लोग रहते थे। हूती मीडिया के मुताबिक, हमले में छह महिलाओं और एक बच्चे की मौत हुई, जबकि तीन लोग घायल हुए। सऊदी अरब और हूतियों की दुश्मनी क्यों है इस संघर्ष की शुरुआत यमन के गृहयुद्ध से हुई। यमन में हूतियों ने 2014 में राजधानी सना पर कब्जा कर लिया था। इसके बाद 2015 में सऊदी अरब ने कई देशों के साथ मिलकर उनके खिलाफ सैन्य अभियान शुरू किया। सऊदी अरब चाहता था कि यमन की अंतरराष्ट्रीय मान्यता प्राप्त सरकार दोबारा सत्ता में आए और हूतियों का कब्जा खत्म हो। इसके बाद कई साल तक यमन में हवाई हमले होते रहे। लेकिन हूतियों को पूरी तरह पीछे धकेलने में सऊदी गठबंधन कामयाब नहीं हो पाया। हूती अब भी यमन के बड़े हिस्से में अपनी पकड़ बनाए हुए हैं। उनकी लड़ाई का असर अब सऊदी अरब की सुरक्षा पर भी पड़ रहा है। अक्टूबर में सऊदी अरब पर हूतियों के बड़े हमले 3 अक्टूबर: हूतियों ने दावा किया कि उन्होंने रियाद में सऊदी कंपनी अरामको के तेल ठिकाने पर मिसाइल और ड्रोन से हमला किया। वहां आग लगने और धुआं उठने की खबर आई। 10 अक्टूबर: रियाद के किंग खालिद एयरपोर्ट पर हमला हुआ। रिपोर्ट के मुताबिक, 12 लोगों की मौत हुई और 309 लोग घायल हुए। हूतियों ने हमले की जिम्मेदारी ली। 11 अक्टूबर: रियाद एयरपोर्ट पर फिर हमले की खबर आई। एक व्यक्ति की मौत हुई और 11 लोग घायल हुए। दम्माम शहर के किंग फहद एयरपोर्ट पर भी हमले हुए। 13-14 अक्टूबर: धहरान में अरामको के मुख्यालय में आग लग गई। सऊदी ऊर्जा मंत्रालय ने इसकी पुष्टि की। हूतियों ने रियाद एयरपोर्ट और तेल ठिकानों पर हमले का भी दावा किया। 19 अक्टूबर: सऊदी गठबंधन ने बताया कि उसने यानबू की ओर आ रही एक मिसाइल को रोक दिया। उसने ड्रोन और क्रूज मिसाइलों को भी नष्ट करने की बात कही। 19 अक्टूबर को हूतियों ने यानबू, शायबा तेल क्षेत्र और रियाद-अभा एयरपोर्ट पर हमले का दावा किया। 24 अक्टूबर: हूतियों ने रियाद में रक्षा मंत्रालय, यानबू में अरामको के ठिकाने और दम्माम एयरपोर्ट पर हमले का दावा किया। 24 अक्टूबर को सऊदी गठबंधन ने कहा कि उसने ताइफ और यानबू की ओर आ रही दो मिसाइलों को रोक दिया।
—————————– ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प ने भारत पर 100% टैरिफ लगाने वाला कानून रोका, बोले- हमें फायदा, रूस से कर चुका डीजल खरीद डील अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने रूस पर सख्त प्रतिबंध लगाने वाले कानून को फिलहाल रोक दिया है। ट्रम्प ने शुक्रवार को इस फैसले से जुड़े आदेश पर हस्ताक्षर किए और कहा कि यह कदम अमेरिका के हित में है। पूरी खबर पढ़ें…



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क्या एक से ज्यादा बार स्विच कर सकते हैं होम लोन, ईएमआई बचाने का स्मार्ट तरीका


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Home Loan Tips : आरबीआई ने रेपो रेट एक बार फिर बढ़ा दिया है, जिससे आपकी ईएमआई भी बढ़ने वाली है. ऐसे में बहुत से ग्राहक लोन ट्रांसफर कराने की भी सोच रहे हैं. अगर आप भी लोन ट्रांसफर कराने के बारे में सोच रहे हैं तो यह समझ लीजिए कि होम लोन सिर्फ एक बार नहीं, बल्कि कई बार ट्रांसफर कराया जा सकता है.

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होम लोन शुरुआती दौर में ट्रांसफर कराने से ज्यादा लाभ होता है.

नई दिल्ली. होम लोन की ईएमआई कम करने का सबसे स्मार्ट तरीका उसे एक बैंक से दूसरे बैंक में ट्रांसफर करना होता है. आरबीआई ने इस महीने की शुरुआत में रेपो रेट भी बढ़ा दिया है, जिससे ईएमआई बढ़ने वाली है. ऐसे में तमाम लोग अपना लोन ट्रांसफर कराने के बारे में सोच रहे हैं. लेकिन, क्या आपने सोचा है कि होम लोन को एक से ज्यादा बार स्विच कर सकते हैं. कब आपको होम लोन स्विच करना चाहिए और इससे क्या फायदा होगा.

अमूमन होम लोन बैलेंस ट्रांसफर कराने पर दूसरा बैंक कम ब्याज ऑफर करता है. इससे आपकी ईएमआई कम हो जाती है और लंबी अवधि में लोन पर लाखों रुपये की बचत होगी. नया बैंक आपके पुराने लोन को नए लोन की तरह ही समझेगा और उसका मूल्यांकन करने के बाद अगर अप्रूव होता है तो नया बैंक आपके पुराने बैंक को लोन का भुगतान करके उसे टेकओर कर लेता है. अगर आप लोन लेने के शुरुआती दौर में ही इसे ट्रांसफर करते हैं तो ब्याज के रूप में लंबी अवधि में आपको अच्छी खासी बचत हो सकती है.

क्या एक से ज्यादा बार ट्रांसफर कर सकते हैं लोन
यह जरूरी नहीं कि होम लोन का बैलेंस एक बार ही ट्रांसफर किया जा सकता है. अगर दूसरा बैंक आपको कम ब्याज पर लोन देता है तो एक से ज्यादा बार ट्रांसफर किया जा सकता है. अपनी सुविधा के अनुसार, आप जब चाहें अपने लोन को ट्रांसफर करा सकते हैं. हालांकि, लोन को ट्रांसफर कराना तभी फायदे का सौदा होता है जब आप इसे शुरुआती दौर में ट्रांसफर कराएं.

कब कराना चाहिए लोन ट्रांसफर
होम लोन को ट्रांसफर कराने के लिए यह देखना जरूरी होता है कि दूसरा बैंक आपको कितना ब्याज ऑफर करता है. मान लीजिए कि अगर आपने 25 लाख का लोन 7 फीसदी ब्याज पर 20 साल के लिए लिया है तो पूरे टेन्योर में आपको 21.5 लाख रुपये ब्याज के रूप में देने होंगे. लेकिन, अगर आप लोन ट्रांसफर कराते हैं और दूसरा बैंक 6 फीसदी ब्याज पर लोन ऑफर करता है तो पूरे टेन्योर में 18 लाख का ब्याज लगेगा और आपके 3.5 लाख रुपये की बचत होगी. लेकिन, इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि लोन शुरुआती दौर में ही ट्रांसफर कराने से फायदा होता है.

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Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…

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रेफरल अस्पताल में प्रसव के बाद महिला की मौत: परिजनों ने इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया, ऑपरेशन से बच्ची को दिया था जन्म – Jehanabad News




जहानाबाद के मखदुमपुर स्थित रेफरल अस्पताल में प्रसव के बाद एक महिला की मौत हो गई। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाया है। मृतका की पहचान कल्पा थाना क्षेत्र के शंकरगंज गांव की किरण कुमारी के रूप में हुई है। किरण प्रसव के लिए अपने मायके मखदुमपुर आई थी। परिजनों के मुताबिक, प्रसव पीड़ा होने पर उसे सरकारी अस्पताल ले जाया गया। वहां ऑपरेशन से उसने एक बच्ची को जन्म दिया। परिजनों का आरोप है कि प्रसव के दौरान किरण की हालत बिगड़ने लगी। प्राथमिक उपचार के बाद उसे जहानाबाद सदर अस्पताल रेफर किया गया। सदर अस्पताल में इलाज के दौरान उसकी मौत हो गई। परिवार के लोगों ने अस्पताल पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जांच की मांग की है। उनका कहना है कि सही इलाज मिलता तो महिला की जान बच सकती थी। महिला की मौत के कारणों की अभी आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है।



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वांगचुक बोले- विरोध-प्रदर्शन के बाद सरकारें बेहतर काम करती हैं: गुस्सा जाहिर करने जगह न मिले, तो हालात नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे बन सकते हैं




सोनम वांगचुक ने कहा कि विरोध-प्रदर्शन सरकारों के बेहतर काम करने का बड़ा जरिया हैं। शांतिपूर्ण तरीके से गुस्सा जाहिर करने की जगह न मिले तो नेपाल, श्रीलंका और बांग्लादेश जैसे हालात बन सकते हैं। मुंबई में शनिवार को आईपीएफ फेस्टिवल में पहुंचे वांगचुक ने भारत में संसद से दूर प्रदर्शन कराने पर सवाल उठाया। साथ ही कहा कि दुनिया के कई देशों में संसद के ठीक सामने प्रदर्शन की अनुमति होती है। वांगचुक ने कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन संविधान से मिला नागरिकों का अधिकार है। उन्होंने प्रदर्शनकारियों की गिरफ्तारी पर कहा, “संदेश लाने वाले को मत मारिए, संदेश को समझिए।” यह बयान ऐसे समय आया है, जब विपक्ष ने केंद्र सरकार पर शांतिपूर्ण प्रदर्शनों की अनुमति नहीं देने को लेकर सवाल उठाए हैं। प्रदर्शन फीडबैक और दबाव का जरिया वांगचुक ने कहा कि दुनियाभर के देश जैसे ब्रिटेन, नॉर्वे और स्वीडन संसद के सामने प्रदर्शन की अनुमति देते हैं। उन्होंने कहा, “सभी देशों में संसद के सामने का हिस्सा प्रदर्शन का चेहरा होता है। भारत में यह संसद से बहुत दूर था। नई दिल्ली का जंतर-मंतर भी संसद से बहुत दूर है।” उन्होंने कहा कि प्रदर्शन करने के लिए अनुमति नहीं मांगी जानी चाहिए। अनुमति का इस्तेमाल शहर में होने वाली गतिविधियों की निगरानी के लिए होना चाहिए, जैसे त्योहारों के दौरान किया जाता है। अर्धसैनिक बलों की तैनाती पर सवाल वांगचुक ने केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि अर्धसैनिक बल गृह मंत्रालय (MHA) के अधीन आते हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि इन बलों को उनके जैसे लोगों और युवाओं के खिलाफ लगाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि सरकार को देश की सुरक्षा को सबसे ज्यादा प्राथमिकता देनी चाहिए। देश की सीमाएं सुरक्षित रहनी चाहिए। अर्धसैनिक बलों को गृह मंत्रालय के बजाय रक्षा मंत्रालय के अधीन करने की मांग की। उन्होंने कहा कि लद्दाख में उन्होंने “सलामी स्लाइसिंग” देखी है। उनके मुताबिक, इसमें चीन धीरे-धीरे भारतीय क्षेत्र के अंदर बढ़ रहा है। वांगचुक ने दावा किया कि जब सर्दियों में अर्धसैनिक बलों को दूसरे कामों में लगाया जाता है, तो सीमा पर ध्यान कम हो जाता है। बलों के लौटने तक चीन आगे बढ़ चुका होता है। इसके बाद उसे पीछे धकेलना मुश्किल हो जाता है। लद्दाख के फैसलों में स्थानीय लोगों की भूमिका की मांग कार्यक्रम में वांगचुक ने कहा कि किसी क्षेत्र में रहने वाले लोगों को यह तय करने का अधिकार होना चाहिए कि वह क्षेत्र कैसे चलाया जाए। उन्होंने कहा कि उपेक्षा का असर भी वहीं रहने वाले लोगों को झेलना पड़ता है। उन्होंने कहा- इसी सिद्धांत के आधार पर मैं कहता हूं कि लद्दाख को यह तय करने में अपनी बात रखने का अधिकार होना चाहिए कि लद्दाख कैसे चलाया जाए। हम मूल रूप से यही कह रहे हैं। उन्होंने कहा कि फैसलों में आज के साथ बच्चों के लंबे समय के भविष्य को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए। उनके मुताबिक, वहां रहने वाले लोग ही ऐसा बेहतर तरीके से कर सकते हैं। सितंबर 2025 में लद्दाख में हुए हिंसक प्रदर्शनों के बाद वांगचुक को एहतियातन हिरासत में लिया गया था। उन्हें नेशनल सिक्योरिटी एक्ट के तहत रखा गया था। इस साल मार्च में उन्हें रिहा किया गया।



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भगवान को जड़ नहीं, चेतन भाव से देखें: कथा वाचक इन्द्रेश उपाध्याय बोले- प्रभु से धन-ऐश्वर्य नहीं, भक्ति और करुणा मांगें; भजनों-जयकारों से गूंजा कथा स्थल – Indore News




एमआर-10 स्थित स्टार चौराहे पर शुक्रवार से शुरू हुई कथावाचक इन्द्रेश उपाध्याय की श्रीमद्भागवत कथा में दो दिनों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंच रहे हैं। ‘मुकुंद माधव हरि, हरि बोल’, ‘जगन्नाथ चका नयन’ और ‘नंद के आनंद भयो, जय कन्हैया लाल की’ जैसे भजनों पर श्रद्धालु झूम उठे। कथावाचक ने भगवान के प्रति समर्पण, भक्ति और करुणा का महत्व समझाया। उन्होंने कहा कि भगवान को जड़ नहीं, चेतन भाव से देखना चाहिए। भक्त का प्रेम और श्रद्धा ही उसे भगवान को अपने बीच जीवंत अनुभव करने की शक्ति देते हैं। मनुष्य को भगवान से धन, ऐश्वर्य और सुख-सुविधाओं के बजाय भक्ति, सहजता और करुणा मांगनी चाहिए। इन्द्रेश उपाध्याय ने रावण के प्रसंग के माध्यम से मनुष्य को अपने भीतर झांकने की सीख दी। उन्होंने कहा कि कुछ दिन पहले ही हमने रावण दहन किया, लेकिन रावण में जिन अवगुणों का वर्णन मिलता है, कहीं न कहीं हम भी उन्हीं चीजों की चाह रखते हैं। रावण के पास इतना धन था कि कुबेर उसके घर में माली के समान थे। इसके बावजूद अहंकार, घमंड और असीम ऐश्वर्य की लालसा उसके पतन का कारण बनी। उन्होंने श्रद्धालुओं से सवाल किया कि यदि भगवान स्वयं सामने आकर एक इच्छा मांगने को कहें, तो क्या वे धन और ऐश्वर्य मांगेंगे या स्वयं प्रभु को? उन्होंने कहा कि मनुष्य को प्रभु से प्रभु को ही मांग लेना चाहिए। भक्त के प्रेम से ठाकुरजी के बाल हुए सफेद, संतों का सम्मान करने की दी सीख कथावाचक ने उदयपुर के राजघराने से जुड़ा एक प्रसंग सुनाया। उन्होंने बताया कि एक बार मंदिर के पुजारी ने ठाकुरजी को पहनाई जाने वाली माला स्वयं पहन ली और बाद में वही माला राजा को पहना दी। माला में सफेद बाल देखकर राजा ने पूछा कि क्या ठाकुरजी के बाल भी सफेद हो गए हैं। पुजारी ने घबराकर हां कह दिया। अगले दिन राजा ने ठाकुरजी का मुकुट उतरवाकर देखा तो उनके बाल वास्तव में सफेद दिखाई दिए। इस प्रसंग के माध्यम से उन्होंने संतों और भक्तों का सम्मान करने की सीख दी। उन्होंने कहा कि भगवान अपने भक्तों की चिंता दूर करने के लिए भी लीला करते हैं। भजनों पर झूमे श्रद्धालु, 12 एलईडी स्क्रीन पर हो रहा कथा का प्रसारण ‘गिरधारी कहो बनवारी’, ‘श्याम संग राधा नाचे रे’, ‘रास रचाई’ और ‘मुकुंद माधव हरि’ सहित कई भजनों की प्रस्तुति हुई। श्रद्धालु तालियां बजाते और हाथ उठाकर झूमते नजर आए। करीब 10 एकड़ क्षेत्र में आयोजित कथा प्रतिदिन शाम 4 से 7 बजे तक हो रही है। आयोजन स्थल पर 12 बड़ी एलईडी स्क्रीन के माध्यम से कथा का प्रसारण किया जा रहा है। श्रद्धालुओं के लिए पेयजल, मेडिकल सहायता, बैठने और सुरक्षा की व्यवस्था की गई है। आयोजक आशीष गोयल ने बताया कि परिवार में गुरु परंपरा और भागवत कथा करवाने की प्रथा वर्षों से चली आ रही है। आयोजन सभी श्रद्धालुओं के लिए निशुल्क है। कथा की सीख जीवन में उतारना जरूरी, सत्य और सदाचार अपनाने का संदेश कथावाचक ने भागवत कथा का महत्व समझाते हुए कहा कि धार्मिक ग्रंथों में वर्णित प्रसंग केवल सुनने के लिए नहीं, बल्कि जीवन में उतारने के लिए भी हैं। मनुष्य को अपने व्यवहार में विनम्रता बनाए रखनी चाहिए और दूसरों के प्रति प्रेम तथा सम्मान का भाव रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि जीवन में कठिन परिस्थितियां आने पर धैर्य बनाए रखना, अच्छे कर्म करना और जरूरतमंदों की सहायता करना जरूरी है। परिवार में बड़ों का सम्मान और समाज के प्रति अपनी जिम्मेदारियों को समझना भी धार्मिक जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। केवल धार्मिक आयोजनों में शामिल होना पर्याप्त नहीं है, बल्कि वहां से मिली शिक्षाओं को अपने व्यवहार में उतारना भी आवश्यक है।



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मिट्टी के बर्तन में खाना पकाने के हैं गजब के फायदे! जानें क्या कहती है साइंस

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मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने का चलन एक बार फिर बढ़ रहा है. माना जाता है कि इनमें धीमी आंच पर खाना पकाने से स्वाद और बनावट बेहतर हो सकती है. लेकिन क्या मिट्टी के बर्तन में बना खाना ज्यादा पौष्टिक होता है? जानें इसके पीछे की वैज्ञानिक सच्चाई.


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 मिट्टी के बर्तन में खाना पकाने के हैं गजब के फायदे! जानें इसकी साइंस Zoom

मिट्टी के बर्तन में खाना पकाना.

आजकल ज्यादातर घरों में स्टील, एल्युमिनियम और नॉन-स्टिक बर्तनों का इस्तेमाल होता है. लेकिन मिट्टी के बर्तनों में खाना पकाने का चलन भी धीरे-धीरे वापस आ रहा है. मिट्टी की हांडी में बनी दाल, सब्जी और खिचड़ी का स्वाद कई लोगों को पसंद आता है. इसके पीछे सिर्फ पारंपरिक तरीका ही नहीं, बल्कि गर्मी के फैलने और भोजन में नमी बने रहने जैसे वैज्ञानिक कारण भी हैं. हालांकि, मिट्टी के बर्तन में खाना पकाने का असर बर्तन की बनावट और इस्तेमाल के तरीके पर निर्भर करता है.

मिट्टी के बर्तन आमतौर पर धातु के बर्तनों की तुलना में धीरे गर्म होते हैं. इस वजह से इनमें खाना धीरे-धीरे पकाया जा सकता है. दाल, सब्जी और करी जैसे व्यंजनों में इससे मसालों और दूसरी सामग्री का स्वाद अच्छी तरह मिल सकता है. हालांकि, खाना कितनी तेजी से गर्म होगा, यह बर्तन की मोटाई, आकार और चूल्हे पर भी निर्भर करता है.

खाने में नमी बनाए रखने में मदद
मिट्टी के कुछ बर्तनों में बहुत छोटे-छोटे छेद होते हैं. इनकी वजह से बर्तन में नमी और बर्तनों के मुकाबले अलग हो सकते हैं. कुछ पारंपरिक मिट्टी के बर्तनों को इस्तेमाल से पहले पानी में भिगोया जाता है. गर्म होने पर इनमें मौजूद नमी भाप बन सकती है, जिससे खाना नरम और नम बना रह सकता है. हालांकि, यह फायदा हर तरह के मिट्टी के बर्तन में एक जैसा नहीं होता.

क्या मिट्टी के बर्तन में बना खाना ज्यादा पौष्टिक होता है?
अक्सर माना जाता है कि मिट्टी के बर्तन में बना खाना ज्यादा पौष्टिक होता है, लेकिन इसका कोई पक्का वैज्ञानिक आधार नहीं है. भोजन में मौजूद पोषक तत्वों पर खाना पकाने का समय, तापमान और पानी की मात्रा असर डालते हैं. लंबे समय तक पकाने से कुछ विटामिन कम हो सकते हैं, जबकि अच्छी तरह पकाने से कुछ खाद्य पदार्थों को पचाना आसान हो जाता है. इसलिए सिर्फ मिट्टी के बर्तन में खाना बनाने से उसके पोषण में बढ़ोतरी होना जरूरी नहीं है.

स्वाद और बनावट में आ सकता है अंतर
मिट्टी के बर्तन में खाना धीरे पकाने से उसकी बनावट और स्वाद में बदलाव आ सकता है. खासकर दाल, खिचड़ी और ग्रेवी वाली सब्जियों में सामग्री को अच्छी तरह पकने का समय मिलता है. इससे खाना गाढ़ा और स्वादिष्ट बन सकता है. हालांकि, इसका कारण सिर्फ मिट्टी नहीं, बल्कि धीमी आंच पर पकाने का तरीका भी है. इसके अलावा मिट्टी के बर्तन को खरीदते समय कुछ सावधानी रखें. कुछ बर्तनों पर लगी चमकदार परत या रंग में सीसा और कैडमियम जैसे हानिकारक तत्व हो सकते हैं, जो भोजन में मिल सकते हैं.

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Vividha SinghSub Editor

विविधा सिंह हिंदी डिजिटल पत्रकारिता का उभरता हुआ नाम हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया में साढ़े चार साल का अनुभव है. वर्तमान में वह News18 हिंदी में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. वह लाइफस्टाइल वर्टि…

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पंजाब में भाजपा-अकाली गठबंधन पर केजरीवाल का हमला: कहा- मजीठिया के साथ मिलकर पंजाब से नशा मिटाना दुनिया का आठवां अजूबा होगा – New Delhi News




पंजाब में शिरोमणि अकाली दल और भारतीय जनता पार्टी के बीच संभावित राजनीतिक गठबंधन को लेकर आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने ट्वीट करके हमला बोला है। केजरीवाल ने आरोप लगाया है कि दोनों दल सिर्फ राजनीतिक स्वार्थ के लिए एक बार फिर साथ आ रहे हैं, लेकिन पंजाब की जनता उनके 10 साल के पुराने कुशासन को भूली नहीं है। मजीठिया और अमित शाह भाई जैसे करीबी- केजरीवाल अरविंद केजरीवाल ने सोशल मीडिया पर तीखा कटाक्ष करते हुए लिखा कि बिक्रम सिंह मजीठिया और अमित शाह बेहद करीबी और भाई जैसे हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि अब मजीठिया के साथ गठबंधन करके अमित शाह पंजाब से नशा दूर करेंगे, यह दुनिया का आठवां अजूबा होगा। वहीं अरविंद केजरीवाल ने आरोप लगाते हुए कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की राजनीतिक रणनीति है। इस पर केजरीवाल ने निशाना साधते हुए व्यंग्यात्मक लहजे में लिखा, वाह मोदी जी वाह। क्या प्लानिंग की है। उन्होंने आरोप लगाया कि एक तरफ पंजाब में नशामुक्ति और कानून-व्यवस्था के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं, वहीं दूसरी तरफ ऐसे नेताओं के साथ राजनीतिक समीकरण साधे जा रहे हैं जिन पर गंभीर सवाल उठते रहे हैं।



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फलोदी में सरपंच चुनाव के सबसे पहले नतीजे: दैनिक भास्कर ऐप पर जानें कौन जीता, किसे कितने वोट मिले, पूरी जानकारी एक क्लिक में – Phalodi News




राजस्थान पंचायत चुनाव के पहले चरण के लिए सरपंच पद का मतदान पूरा हो गया है। अब मतगणना जारी है। शनिवार को हुए इस चरण में 16 जिलों की 104 पंचायत समितियों में चुनाव हुए थे। फलोदी जिले की 9 पंचायत समितियों की 274 ग्राम पंचायतों में मतदान हुआ। यहां 31 सरपंच निर्विरोध चुने गए हैं। आप अपनी ग्राम पंचायत का सबसे पहले और सटीक रिजल्ट जानने के लिए इस लिंक पर क्लिक करें।



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