भारत की अर्थव्यवस्था ने एक बार फिर अपनी मजबूती दिखाई है. अप्रैल से जून 2026 की तिमाही में देश की रियल GDP ग्रोथ 7.8 फीसदी रही है. यह बाजार के 7.3 फीसदी के अनुमान से बेहतर है. यानी उम्मीद से ज्यादा तेज रफ्तार से अर्थव्यवस्था आगे बढ़ी है. इस दौरान मैन्युफैक्चरिंग, फाइनेंस, रियल एस्टेट और दूसरे सर्विस सेक्टर ने अच्छा परफॉर्म किया है. GDP के मजबूत आंकड़ों से भारत की आर्थिक स्थिति को लेकर भरोसा बढ़ा है.
हालांकि, गिफ्ट निफ्टी करीब 64 अंक गिरकर 24,204 के लेवल पर कारोबार करता दिख रहा है. इससे बाजार के फ्लैट से हल्की कमजोरी के साथ खुलने के संकेत मिल रहे हैं. दूसरी तरफ, मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमत 91 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गई है. इससे निवेशकों की चिंता बढ़ सकती है और बाजार में उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.
GDP का आंकड़ा क्यों अहम है?
जून तिमाही में भारत की रियल GDP 7.8 फीसदी बढ़ी है. खास बात यह है कि यह बाजार के 7.3 फीसदी अनुमान से ऊपर रही. वहीं, नॉमिनल GDP में 10.3 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई. अर्थव्यवस्था की कुल गतिविधियों को दिखाने वाला GVA भी 8.2 फीसदी रहा. इससे पता चलता है कि देश में आर्थिक गतिविधियां अभी भी अच्छी रफ्तार से चल रही हैं.
GDP के इन आंकड़ों के बाद कई ब्रोकरेज हाउसों ने भारत की पूरे वित्त वर्ष की ग्रोथ को लेकर अपने अनुमान भी बढ़ाए हैं. कुछ संस्थानों का मानना है कि वित्त वर्ष 2026-27 में देश की आर्थिक विकास दर 7 फीसदी से ऊपर रह सकती है.
मैन्युफैक्चरिंग और सर्विस सेक्टर ने संभाली कमान
जून तिमाही में मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर सबसे मजबूत क्षेत्रों में रहा. इसमें 9.2 फीसदी की बढ़ोतरी हुई. बिजली, गैस और पानी जैसी जरूरी सेवाओं में 8.9 फीसदी की ग्रोथ दर्ज हुई, जबकि कंस्ट्रक्शन सेक्टर 7.7 फीसदी बढ़ा.
सर्विस सेक्टर की बात करें तो ट्रेड, होटल, ट्रांसपोर्ट और कम्युनिकेशन से जुड़ी गतिविधियां 8.5 फीसदी बढ़ीं. फाइनेंस, रियल एस्टेट और प्रोफेशनल सर्विसेज में 12.1 फीसदी की शानदार तेजी रही. कृषि क्षेत्र में 3.6 फीसदी की बढ़त दर्ज हुई, लेकिन माइनिंग सेक्टर 2.4 फीसदी गिर गया.
कमजोर शुरुआत के संकेत क्यों?
GDP के अच्छे आंकड़ों के बावजूद शेयर बाजार पर ग्लोबल हालात का दबाव बना हुआ है. सोमवार को सेंसेक्स 307 अंक गिरकर 76,597 के लेवल पर बंद हुआ था, जबकि Nifty 95 अंक टूटकर 24,080 पर आ गया. मेटल और IT शेयरों में कमजोरी ने बाजार को नीचे खींचा.
अमेरिकी शेयर बाजार में सोमवार को गिरावट रही. S&P 500 इंडेक्स 25.62 अंक यानी 0.33% टूटकर 7,686.14 पर बंद हुआ, जबकि Nasdaq 31.53 अंक की गिरावट के साथ 26,370.89 पर पहुंच गया.
मंगलवार को गिफ्ट निफ्टी में भी गिरावट दिखी है. एशियाई बाजारों में जापान, दक्षिण कोरिया और ऑस्ट्रेलिया के प्रमुख इंडेक्स भी दबाव में नजर आए. ऐसे में घरेलू अर्थव्यवस्था के अच्छे आंकड़े बाजार को कुछ सहारा दे सकते हैं, लेकिन शुरुआती कारोबार में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है.
91 डॉलर के पार पहुंचा कच्चा तेल
मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव का सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ा है. ब्रेंट क्रूड का भाव 91 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया है. निवेशकों को चिंता है कि अगर स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज के रास्ते तेल की सप्लाई पर असर पड़ा, तो कीमतें और बढ़ सकती हैं.
महंगा तेल भारत जैसी बड़ी आयातक अर्थव्यवस्था के लिए चिंता का कारण बन सकता है. इससे महंगाई, सरकार के खर्च और कंपनियों की लागत पर दबाव बढ़ सकता है. इसलिए आज बाजार GDP के मजबूत आंकड़ों के साथ-साथ तेल की कीमत और ग्लोबल तनाव पर भी नजर रखेगा.








