कौन हैं देबाशीष, सौमित्र और आनंद पॉल, जिनके परिजनों से PM ने अलग से की मुलाकात
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बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद पीएम मोदी ने राजनीतिक हिंसा के शिकार हुए तीन भाजपा कार्यकर्ताओं के परिवारों से मुलाकात की. देबाशीष मंडल, सौमित्र घोषाल और आनंद पॉल के परिजनों के बगल में बैठकर पीएम ने न केवल उनका दुख बांटा, बल्कि यह संदेश भी दिया कि पार्टी अपने बलिदानियों को कभी नहीं भूलती.
पीएम मोदी ने बीजेपी के शहीद कार्यकर्ताओं के परिवारों से मुलाकात की?
कोलकाता. कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शपथ ग्रहण समारोह के समापन के बाद एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने वहां मौजूद हजारों लोगों की आंखों को नम कर दिया. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के शपथ लेने के तुरंत बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच के पास ही बने एक विशेष कक्ष में तीन साधारण परिवारों से मुलाकात की. ये वे लोग थे जिनके परिजनों ने बंगाल में भाजपा के विस्तार के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी.
शनिवार को जब कोलकाता में ‘सोनार बांग्ला’ सरकार का आगाज हो रहा था, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उनके लिए संगठन का कार्यकर्ता सर्वोपरि है. शपथ ग्रहण के तुरंत बाद पीएम मोदी उन तीन परिवारों के बीच जाकर बैठ गए, जिन्होंने पिछले वर्षों में राजनीतिक प्रतिशोध की आग में अपने घर के चिराग खो दिए थे. ये परिवार देबाशीष मंडल, सौमित्र घोषाल और आनंद पॉल के थे. पीएम ने उनकी बातें सुनीं, बच्चों के सिर पर हाथ रखा और उन्हें ढांढस बंधाया कि अब राज्य में ‘न्याय का शासन’ शुरू हो गया है.
1. देबाशीष मंडल: दक्षिण 24 परगना की निडर आवाज
देबाशीष मंडल दक्षिण 24 परगना जिले के एक सक्रिय भाजपा कार्यकर्ता थे. चुनावी गहमागहमी के दौरान उन पर जानलेवा हमला हुआ था. देबाशीष का परिवार बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आता है. उनकी पत्नी और छोटे बच्चे आज पीएम के बगल में बैठे नजर आए. देबाशीष ने उस क्षेत्र में भाजपा का झंडा बुलंद किया था जहां पार्टी के लिए काम करना जान जोखिम में डालने जैसा था. पीएम ने उनकी पत्नी को आश्वासन दिया कि बच्चों की पढ़ाई और भविष्य की जिम्मेदारी अब पूरी तरह से नई सरकार और संगठन की होगी.
2. सौमित्र घोषाल: ग्रामीण बंगाल में संगठन के सिपाही
हुगली जिले के सौमित्र घोषाल की हत्या ने पूरे बंगाल को झकझोर दिया था. सौमित्र एक ऐसे कार्यकर्ता थे जो बूथ स्तर पर पार्टी को मजबूत करने के लिए दिन-रात काम करते थे. उनकी वृद्ध मां और भाई जब पीएम मोदी से मिले, तो माहौल काफी भावुक हो गया. सौमित्र की पृष्ठभूमि एक किसान परिवार की थी. उनकी शहादत के बाद उनके परिवार ने भारी मानसिक और आर्थिक दबाव झेला, लेकिन उन्होंने भाजपा का साथ नहीं छोड़ा. पीएम ने उनके भाई से कहा कि सौमित्र का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा और उनकी स्मृति में क्षेत्र में विकास कार्य किए जाएंगे.
3. आनंद पॉल: उत्तर बंगाल की हिंसा का शिकार
आनंद पॉल उत्तर बंगाल के उन युवा चेहरों में से थे जिन्होंने सीतलकुची और आसपास के क्षेत्रों में भाजपा की पकड़ मजबूत की थी. राजनीतिक हिंसा के दौरान आनंद की जान चली गई थी. आनंद के पिता जब पीएम के बगल में बैठे, तो उन्होंने केवल इतना कहा कि ‘हमें न्याय चाहिए.’ आनंद पॉल की पृष्ठभूमि एक श्रमिक परिवार की रही है. उनकी शहादत के बाद उत्तर बंगाल में भाजपा के प्रति लोगों का समर्थन और अधिक बढ़ गया था, जिसका परिणाम आज की जीत के रूप में सामने है.
राजनीतिक संदेश और न्याय का वादा
प्रधानमंत्री का इन परिवारों के बगल में बैठना केवल एक शिष्टाचार भेंट नहीं थी, बल्कि यह बंगाल की नई सरकार के लिए एक स्पष्ट दिशा-निर्देश भी था. पीएम मोदी ने शुभेंदु अधिकारी की उपस्थिति में इन परिवारों से मुलाकात कर यह संदेश दिया कि नई सरकार की पहली प्राथमिकता राजनीतिक हिंसा को जड़ से खत्म करना और पीड़ितों को न्याय दिलाना है. इन तीनों चेहरों की पृष्ठभूमि यह बताती है कि भाजपा की यह जीत बड़े नेताओं की नहीं, बल्कि उन गुमनाम कार्यकर्ताओं के खून-पसीने की है जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी. बंगाल के राजनीतिक इतिहास में यह पहली बार था जब किसी शपथ ग्रहण मंच पर ‘शहीद’ परिवारों को इतना सम्मान दिया गया.
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I am an alumnus of Bharatiya Vidya Bhavan, Delhi with a career in journalism that spans across several prestigious newsrooms. Over the years, I have honed my craft at Sahara Samay, Tehelka, P7 and Live India, a…और पढ़ें









