Bhusawal Train Incident | Passenger Booked Under Railway Act For Worship
2 घंटे पहले
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हजरत निजामुद्दीन-मैसूर एक्सप्रेस में अपनी बर्थ पर दीया जलाने वाले 55 साल के यात्री को चलती ट्रेन से उतार दिया गया। यात्री के खिलाफ पुलिस केस भी दर्ज किया गया है।
सेंट्रल रेलवे के अधिकारियों ने मंगलवार को बताया कि यात्री की पहचान मध्यप्रदेश के ग्वालियर निवासी गरिबा के रूप में हुई है। यह घटना 31 अगस्त को ट्रेन नंबर 12782 में हुई थी।
सेंट्रल रेलवे ने यात्रियों से अपील की है कि वे ट्रेन में ज्वलनशील सामान न लेकर चलें। रेलवे ने ट्रेन के अंदर दीया, मोमबत्ती या अगरबत्ती जलाने से भी बचने को कहा है, क्योंकि इससे आग लग सकती है और यात्रियों की जान खतरे में पड़ सकती है।
टीटीई ने चेकिंग के दौरान जलता दीया देखा
रेलवे ने जानकारी मिलने के बाद टिकट चेकिंग स्टाफ को कोच में भेजा। वहां यात्री ने बर्थ पर दीया जला रखा था। यात्री के पास से माचिस, पीतल का दीया और स्टील का कंटेनर मिला। इसके बाद उसे आगे की कार्रवाई के लिए भुसावल स्टेशन पर उतार दिया गया।
टीटीई ने यात्री से दीया बुझाने को कहा और उसे समझाया कि इससे आग लग सकती है। बाकी यात्रियों के साथ रेलवे की संपत्ति को भी खतरा हो सकता है।
हालांकि, यात्री ने दीया बुझाने से पहले अपनी प्रार्थना पूरी करने की बात कही। इस घटना को टीटीई ने अपने मोबाइल फोन में रिकॉर्ड भी किया।
रेलवे एक्ट की 2 धाराओं में केस दर्ज
रिलीज के अनुसार, मंगलवार को यात्री के खिलाफ रेलवे एक्ट, 1989 की धारा 153 और 145(बी) के तहत केस दर्ज किया गया। फिलहाल उसे भारतीय न्याय संहिता की धारा 35(सी) के तहत नोटिस देकर छोड़ दिया गया।
रेलवे एक्ट की धारा 153: यह यात्रियों की सुरक्षा खतरे में डालने वाले कामों से जुड़ी है। इसके तहत अधिकतम 5 साल तक की जेल हो सकती है।
रेलवे एक्ट की धारा 145(बी): यह ज्वलनशील सामान ले जाने या इस्तेमाल करने से जुड़ी है। इसमें रेलवे परिसर से हटाने, 5 हजार रुपए तक जुर्माने और कुछ मामलों में 5 साल तक जेल का प्रावधान है।
कौशांबी के पटाखा फैक्ट्री विस्फोट में घायलों को देखने कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष अजय राय मंगलवार शाम को प्रयागराज के स्वरूप रानी नेहरू अस्पताल पहुंचे। इस दौरान उन्होंने कहा कि जिन लोगों को यहां भर्ती किया गया है, उनमें एक महिला बहुत सीरियस हैं और उन्हें लाइफ सपोर्ट सिस्टम लगाया गया है, जबकि बाकी लोग जीवन-मौत से जूझ रहे हैं। यह दुखद और कठिन समय पीड़ित परिवारों के लिए है और कांग्रेस कार्यकर्ता मदद व इंसाफ दिलाने में जुटे हैं; उन्होंने डॉक्टरों से घायलों की जान बचाने के लिए पूरी मेहनत करने की अपील भी की। 2 साल पहले लाइसेंस निरस्त, फिर भी कैसे चल रहा था कारखाना अजय राय ने घटना की जांच को लेकर सवाल उठाया कि जिस व्यक्ति के कारखाने का लाइसेंस 2 साल पहले निरस्त कर दिया गया था। वह फिर से पटाखे की फैक्ट्री और गोदाम कैसे चला रहा था। इस फैक्ट्री को 2019 में विस्फोटक लाइसेंस मिला था, जो 2024 में रद्द यानी सस्पेंड कर दिया गया था। इसके बावजूद इकाई संचालित होती रही और 8 अक्टूबर 2024 को जांच में गोदाम से बड़ी मात्रा में बारूद व विस्फोटक सामग्री भी बरामद हुई थी। डिप्टी सीएम के गृह जनपद में जंगलराज उन्होंने कहा कि यह प्रदेश के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य का गृह जनपद है और उनके संरक्षण में अवैध कारखाना चल रहा था। उन्होंने सीधे तौर पर भाजपा सरकार और अधिकारियों पर सहयोग व बचाव का आरोप लगाया। उन्होंने मांग की कि संलिप्त अधिकारियों/कर्मचारियों के खिलाफ IPC 302 समेत सख्त मुकदमा दर्ज हो, गिरफ्तारी हो और जेल जाएं। उच्च न्यायालय के सिटिंग जज के द्वारा इसकी जांच कराई जाए और निष्पक्ष व न्यायिक जांच हो। उन्होंने कहा बुलडोजर उन अधिकारियों के घर पर कब चलेगा, जिनके संरक्षण में उन भाजपा के नेताओं पर बुलडोजर घर पर कब चलेगा? जो आज यहां बैठे हैं बड़े-बड़े लोग, जिनके संरक्षण में ये सारा अवैध काम फल-फूल रहा था, उनके अधिकारियों पर और उन नेताओं के घर पर बुलडोजर योगी जी कब चलाओगे?
सहरसा में 15 लोगों से सवार नाव पलट गई। जिसमें एक महिला की डूबकर मौत हो गई है। जबकि एक किशोरी लापता है। घटना की सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंचकर घटना की जांच शुरू कर दी। मामला सिमरी बख्तियारपुर अनुमंडल क्षेत्र की है। मृतका की पहचान कुंदन यादव की पत्नी रूपम कुमारी (35) के रूप में हुई है। वहीं, लापता किशोरी विष्णु देव यादव की बेटी नेहा कुमारी (12) है। बख्तियारपुर थानाध्यक्ष जयशंकर कुमार ने बताया कि मृतका के शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा जा रहा है। वहीं, लापता किशोरी की तलाश को लेकर भी प्रयास जारी हैं। घटना से जुड़ी तस्वीरें देखें… सिलसिलेवार पढ़िए पूरी घटना नाव पर सवार मिथिलेश यादव ने बताया कि मंगलवार दोपहर तरियामा पंचायत के करीब 15 लोग नाव से तिलावे नदी पार कर तुर्की के नढेया घाट की तरफ गए थे। सभी लोग मवेशियों के लिए चारा काटने के लिए नदी के अंदर की तरफ गए थे। दिनभर घास काटने के बाद शाम करीब 6 बजे सभी लोग उसी नाव से वापस लौट रहे थे। मिथिलेश ने बताया कि सबकुछ ठीक चल रहा था। नाव घाट के पास पहुंच ही रही थी कि अचानक तेज हवा का झोंका आया। हवा इतनी तेज थी कि नाव एक तरफ झुकने लगी। नाव पर बैठे लोग कुछ समझ पाते, इससे पहले ही नाव डगमगाने लगी और देखते ही देखते पलट गई। नाव पलटते ही सभी लोग नदी में गिर पड़े। चारों तरफ चीख-पुकार मच गई। उस वक्त जिसे जो मिला, उसी को पकड़कर लोग बचने की कोशिश करने लगे। मिथिलेश के मुताबिक, कुछ लोगों ने घास के गट्ठरों से बंधी रस्सी पकड़ ली और किसी तरह तैरकर बाहर निकल आए। लेकिन इसी दौरान रूपम कुमारी नदी की तेज धारा में डूब गईं। लोगों ने उन्हें बचाने की काफी कोशिश की। बाद में रूपम का शव नदी से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। हादसे के बाद मौके पर कुछ देर तक अफरा-तफरी का माहौल बना रहा। बेटी बोलीं- आखों के सामने डूब गईं मां
रूपम कुमारी की 7 वर्षीय बेटी सरिता कुमारी ने बताया कि नाव उसकी आंखों के सामने पलट गई। उसने कहा कि यह घटना वह कभी नहीं भूल पाएगी। उसकी मां नदी में डूब गईं। रूपम तीन बच्चों की मां थीं।
मैहर जिले के अमरपाटन थाना क्षेत्र में मंगलवार दोपहर नेशनल हाईवे-30 पर एक सड़क हादसा हुआ। पर्सवाही नर्सरी के पास टमाटर से लदा एक तेज रफ्तार ट्रक बेकाबू होकर पलट गया। इस हादसे में ट्रक चालक केबिन में फंस गया और उसे मामूली चोटें आईं। यह ट्रक महाराष्ट्र के नासिक से टमाटर लेकर उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जा रहा था। पर्सवाही नर्सरी के पास अचानक एक आवारा पशु ट्रक के सामने आ गया। चालक ने पशु को बचाने की कोशिश की, लेकिन तेज रफ्तार के कारण ट्रक बेकाबू होकर पलट गया। केबिन में फंसा चालक हादसे के बाद ट्रक चालक अरबाज अहमद केबिन में फंस गया था। आसपास के लोगों ने उसे बाहर निकालने की कोशिश की। खबर मिलने पर डायल-112 की टीम मौके पर पहुंची और घायल चालक को निकालकर इलाज के लिए अस्पताल भेजा। ट्रक पलटने से सड़क पर बड़ी मात्रा में टमाटर बिखर गए। खबर मिलते ही आसपास के ग्रामीण बड़ी संख्या में वहां पहुंच गए और टमाटर उठाने लगे। डायल-112 की टीम के आने के बाद ग्रामीण वहां से हट गए। मामूली चोट आई ट्रक मालिक अदनान अहमद ने बताया कि चालक अरबाज अहमद को मामूली चोटें आई थीं। इलाज के बाद उसे घर भेज दिया गया है। हादसे के कारण कुछ देर के लिए हाईवे पर ट्रैफिक पर असर पड़ा। अमरपाटन पुलिस मामले की जांच कर रही है।
मुंगेर: भारत में कई ऐसे अनोखे और अजीबोगरीब रेलवे स्टेशन हैं, जिनकी दिलचस्प कहानियाँ और विशेषताएँ लोगों को हैरान कर देती हैं. कहानियों के इस श्रृंखला में हम आपको लेकर चलते हैं बिहार के मुंगेर और बेगूसराय के बॉर्डर जंक्शन यानी सबलपुर जंक्शन. इस सबलपुर जंक्शन की कहानी थोड़ी अलग है. नाम के आगे जंक्शन जुड़ा है, लेकिन यात्रियों का आरोप है कि यहां एक भी एक्सप्रेस ट्रेन नहीं रुकती. स्थानीय लोग समस्या जंक्शन के नाम से भी पुकारते हैं. यहां स्टेशन पर पानी, पंखा, बाथरूम, वेटिंग रूम और सुरक्षा जैसी बुनियादी सुविधाओं को लेकर भी सवाल हैं. Local 18 की ग्राउंड रिपोर्ट में यात्रियों ने अपनी परेशानियां बताईं और रेलवे से ट्रेनों का ठहराव बढ़ाने के साथ सुविधाएं दुरुस्त करने की मांग की.
जंक्शन है…लेकिन एक्सप्रेस ट्रेन का ठहराव नहीं रेलवे स्टेशन किसी भी इलाके के लिए सिर्फ ट्रेन पकड़ने की जगह नहीं होता, बल्कि आसपास के लोगों के लिए आने-जाने का बड़ा जरिया होता है .लेकिन सबलपुर जंक्शन पर पहुंचने वाले यात्रियों की शिकायतें सुनें तो यहां तस्वीर कुछ अलग नजर आती है.यात्रियों के मुताबिक जंक्शन होने के बावजूद यहां एक भी एक्सप्रेस ट्रेन नहीं रुकती . लंबी दूरी की यात्रा करने वाले लोगों को एक्सप्रेस ट्रेन पकड़ने के लिए दूसरे स्टेशन का रुख करना पड़ता है. ऐसे में समय के साथ अतिरिक्त किराया और आने-जाने की परेशानी भी बढ़ जाती है. यात्रियों की मांग है कि कम से कम प्रमुख एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव यहां दिया जाए, ताकि जंक्शन का फायदा स्थानीय लोगों को भी मिल सके.
पानी से लेकर बाथरूम तक की समस्या लोकल 18 पर देवघर जाने के लिए सबलपुर जंक्शन पहुंचे रेल यात्री मुकेश कुमार ने स्टेशन की व्यवस्था को लेकर अपनी नाराजगी जाहिर की . उन्होंने बताया कि यहां यात्रियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है.उनके मुताबिक पानी, लाइटिंग, बाथरूम और पंखे तक की पर्याप्त सुविधा नहीं है. सुरक्षा व्यवस्था को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए.मुकेश कुमार ने कहा कि यहां सिर्फ समस्या ही समस्या है .उनका कहना है कि यात्रियों के लिए कम से कम जरूरी बुनियादी सुविधाएं तो उपलब्ध होनी चाहिए.
‘ट्रेन में भीड़, हादसा हुआ तो जिम्मेदार कौन? वहीं , रेल यात्री धीरज साह ने स्टेशन की व्यवस्था को बेहद खराब बताया कि ट्रेनों में यात्रियों की संख्या काफी ज्यादा रहती है और ज्यादातर पैसेंजर ट्रेनें ही चलती हैं .उनकी चिंता सिर्फ ट्रेन की संख्या को लेकर नहीं है. वह कहते हैं कि भीड़ इतनी रहती है कि अगर कोई घटना या दुर्घटना हो गई तो जिम्मेदार कौन होगा? धीरज साह की मांग है कि यहां ट्रेनों की संख्या बढ़ाई जाए और यात्रियों के लिए वेटिंग रूम समेत जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं. उनका कहना है कि जब इसे जंक्शन का दर्जा दिया गया है तो यहां जंक्शन जैसी सुविधाएं भी मिलनी चाहिए.
सबलपुर में इन 5 ट्रेनों का है ठहराव स्टेशन पर उपलब्ध समय-सारणी जो लोकल 18 के ग्राउंड रिपोर्ट में दिखाई दिया वो आप अपने मोबाइल स्क्रीन पर देख सकते हैं.इस सूचना के आधार पर सबलपुर जंक्शन पर अप दिशा में पांच ट्रेनों का ठहराव है .इनमें मुख्य रूप से डेमू और पैसेंजर सेवाएं शामिल हैं.
1. जमालपुर–तिलरथ डेमू | 73452
ट्रेन नंबर 73452 जमालपुर से तिलरथ जाती है। सबलपुर जंक्शन पर इसका आगमन सुबह 5:32 बजे और प्रस्थान 5:33 बजे है .
2. जमालपुर–महेशखूंट डेमू | 73462
ट्रेन नंबर 73462 जमालपुर से महेशखूंट के लिए चलती है. यह सबलपुर में सुबह 9:57 बजे पहुंचती है और 9:58 बजे रवाना होती है.
3. जमालपुर–तिलरथ डेमू | 73454
73454 भी जमालपुर से तिलरथ जाने वाली डेमू ट्रेन है. इसका सबलपुर जंक्शन पर आगमन दोपहर 1:32 बजे और प्रस्थान 1:33 बजे है.
4. जमालपुर–खगड़िया | 73464
73464 जमालपुर से खगड़िया के लिए चलती है. सबलपुर पर इसका आगमन शाम 5:46 बजे और प्रस्थान 5:47 बजे है.
5. जमालपुर–सहरसा | 05510
05510 जमालपुर से सहरसा जाने वाली ट्रेन है.सबलपुर जंक्शन पर यह रात 10:26 बजे पहुंचती है और 10:28 बजे रवाना होती है.
डाउन दिशा में भी पांच ट्रेनों का ठहराव
सबलपुर जंक्शन पर डाउन दिशा में भी पांच ट्रेनों का ठहराव दर्ज है।
1. तिलरथ–जमालपुर डेमू | 73451
73451 तिलरथ से जमालपुर जाती है. सबलपुर पर इसका आगमन सुबह 8:06 बजे और प्रस्थान 8:07 बजे है.
2. महेशखूंट–जमालपुर डेमू | 73461
73461 महेशखूंट से जमालपुर जाती है. इसका सबलपुर में आगमन 11:39 बजे और प्रस्थान 11:40 बजे है.
3. तिलरथ–जमालपुर डेमू | 73453
73453 तिलरथ से जमालपुर जाने वाली ट्रेन है. उपलब्ध बोर्ड के अनुसार सबलपुर पर इसका आगमन 3:04 बजे और प्रस्थान 4:05 बजे दर्ज है.
4. सहरसा–जमालपुर | 05509
05509 सहरसा से जमालपुर जाती है. सबलपुर पर इसका आगमन सुबह 7:12 बजे और प्रस्थान 7:14 बजे है.
5. खगड़िया–जमालपुर | 03475
03475 खगड़िया से जमालपुर जाने वाली ट्रेन है.इसका सबलपुर जंक्शन पर आगमन शाम 6:45 बजे और प्रस्थान 6:46 बजे है.
Poco M8 Power को कुछ दिन पहले ही भारतीय बाजार में उतारा गया है। यह चीनी कंपनी का इस साल लॉन्च हुआ बजट फ्रेंडली फोन गेमिंग फोन है। फोन में 8000mAh बैटरी, 50MP कैमरा जैसे फीचर्स दिए गए हैं। फोन का डिस्प्ले भी 120Hz हाई रिफ्रेश रेट जैसे फीचर्स को सपोर्ट करता है। इस स्मार्टफोन को हमने कुछ दिन यूज किया है। आइए जानते हैं कैसा रहा हमारा एक्सपीरियंस?
यह फोन भारत में दो स्टोरेज वेरिएंट्स- 6GB RAM + 128GB और 8GB RAM + 128GB में आता है। इसे 3 कलर ऑप्शन- Black, Green और Blaze Orange में खरीदा जा सकता है। हमने इस फोन का Blaze Orange वाला वेरिएंट यूज किया है। इस फोन की शुरुआती कीमत 24,999 रुपये है। वहीं इसका टॉप वेरिएंट 27,999 रुपये में आता है।
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Poco M8 Power: डिजाइन और डिस्प्ले
पोको का यह मिड बजट फोन नए डिजाइन के साथ आता है। इसके बैक में स्क्वॉयर साइज वाला कैमरा मॉड्यूल मिलता है। फोन के बैक पैनल में पॉलीकॉर्बोनेट यानी प्लास्टिक बॉडी का इस्तेमाल किया गया है। इस फोन के फ्रंट में सेंटर अलाइंड पंच-होल डिजाइन वाला डिस्प्ले मिलता है। डिस्प्ले के तीन ओर पतले बेजल्स दिए गए हैं। वहीं, नीचे का चिन अन्य साइड के बेजल के मुकाबले मोटा है।
फोन के नीचे की तरफ USB Type C चार्जिंग पोर्ट, स्पीकर ग्रिल, सिम कार्ड स्लॉट और माइक मिलेंगे। वहीं, इस फोन की बाईं तरफ कोई बटन देखने को नहीं मिलेगा। वहीं, दाईं तरफ वॉल्यूम और पावर बटन दिए गए हैं। इस बजट फोन का वजन करीब 225 ग्राम है। वजन ज्यादा होने की वजह से सिंगल हैंड में यूज करते समय फोन आपको थोड़ा भारी लग सकता है।
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इसमें 6.99 इंच का FHD+ रेजलूशन वाला बड़ा AMOLED डिस्प्ले मिलता है, जो 120Hz तक हाई रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। हाई रिफ्रेश रेट की वजह से फोन में कॉन्टेंट स्क्रॉलिंग का अच्छा एक्सपीरियंस मिलेगा। इसके डिस्प्ले की पीक ब्राइटनेस 1800 निट्स तक की है। अच्छी ब्राइटनेस और AMOLED डिस्प्ले की वजह से धूप और तेज रोशनी में भी डिस्प्ले पर कॉन्टेंट साफ दिखाई देते हैं। वहीं, OTT पर वीडियो देखते समय आपको वाइब्रेंट एक्सपीरियंस मिलेगा।
हमने इस फोन पर स्टेंडर्ड रेजलूशन वाले बैटल रॉयल गेम खेलकर देखे। बजट फोन होने के बावजूद इस फोन के डिस्प्ले में गेम खेलते समय लैगिंग महसूस नहीं होती है। ओवरऑल फोन का डिजाइन आपको प्राइस रेंज के मुताबिक ठीक लगेगा।
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Poco M8 Power की परफॉर्मेंस
पोको का यह मिड बजट स्मार्टफोन Qualcomm Snapdragon Gen 4 प्रोसेसर पर काम करता है। इस फोन में 8GB तक रैम के साथ 128GB इंटरनल स्टोरेज का सपोर्ट मिलेगा। इस फोन पर आप बेसिक कॉलिंग के साथ-साथ HD क्वालिटी के वीडियो कॉन्टेंट एक्सपीरियंस कर सकते हैं। मल्टी-टास्किंग के दौरान भी फोन का परफॉर्मेंस ठीक रहता है। हालांकि, हमने इसके 6GB रैम वाला वेरिएंट यूज किया है।
यह Android 16 पर बेस्ड HyperOS 3 पर काम करता है। शाओमी का यह ऑपरेटिंग सिस्टम कई पर्सनलाइज्ड फीचर्स के साथ आता है। ये फीचर्स आपको इस फोन में यूज करने के लिए मिलेंगे। हालांकि, इसमें कई प्री-इंस्टॉल्ड ऐप्स मिलते हैं, जो आपको निराश कर सकते हैं। हालांकि, आप इन प्री-इंस्टॉल्ड ऐप्स को फोन से डिलीट कर सकते हैं। इस फोन के साथ कंपनी 2 साल OS और 3 साल सिक्योरिटी अपडेट देने का ऑफर दे रही है। कंपनी ने इसमें लेटेस्ट ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ AI फीचर्स भी दिए हैं जो Google Gemini पर बेस्ड हैं।
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पोको के इस फोन में 8000mAh की तगड़ी बैटरी दी गई है। इसे चार्ज करने के लिए 45W फास्ट चार्जिंग फीचर दिया गया है। इसमें 10W रिवर्स चार्जिंग फीचर का सपोर्ट मिलता है। इससे आप अपने TWS, स्मार्टवॉच आदि को भी चार्ज कर सकते हैं। पोको के इस फोन को आप एक बार फुल चार्ज करके दो दिन आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं। फोन को 0 से 100 प्रतिशत तक चार्ज होने में करीब 80 से 85 मिनट का समय लगता है। यह पोको का भारत में अब तक लॉन्च हुआ सबसे बड़ी बैटरी वाला फोन है।
Poco M8 Power का कैमरा
इस फोन के बैक में डुअल कैमरा सेटअप मिलता है। इसमें 50MP का मेन कैमरा दिया गया है। इसके अलावा फोन में एक और सेकेंडरी कैमरा दिया गया है। कैमरा सेटअप के साथ एक LED फ्लैश लाइट भी दी गई है। फोन का कैमरा AI फीचर से लैस है। वहीं, सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए इसमें 8MP का कैमरा मिलता है। फोन के कैमरे से आप दिन की रोशनी में ठीक-ठाक तस्वीर क्लिक कर सकते हैं। वहीं, कम रोशनी में भी फोन के कैमरे से ली गई तस्वीर आपको अच्छी नहीं लगेगी।
हाई रेजलूशन वाली तस्वीर क्लिक करने के लिए आपको आपको कैमरा ऐप में जाकर 50MP वाला मोड सेट करना होगा। स्टैंडर्ड मोड में यह 12.5MP वाले सेंसर से फोटो क्लिक करेगा। फोन से कम रोशनी में तस्वीर लेने के लिए नाइट मोड का भी सपोर्ट मिलता है। हालांकि, कम रोशनी में ली गई तस्वीर ज्यादा जूम करने पर पिक्सलेट होती है।
Image Source : INDIA TVपोको एम8 पावर रिव्यू
मेन कैमरा से ली गई तस्वीर की क्वालिटी आपको ठीक लगेगी। इसे आप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने के लिए यूज कर सकते हैं। आप इस फोन से बेसिक के साथ-साथ हाई क्वालिटी तस्वीरें भी क्लिक कर सकते हैं। QR कोड स्कैन करके आप ऑनलाइन डिजिटल पेमेंट भी कर सकते हैं। सेल्फी कैमरे से ली गई तस्वीर भी ठीक लगेगी। हालांकि, ली गई तस्वीर को अगर आप ज्यादा जूम करते हैं तो यह पिक्सलेट होती है।
हमारा फैसला
पोको का यह फोन डेली यूज के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इस स्मार्टफोन की सबसे अच्छी बात ये है कि फोन को अगर आप एक बार फुल चार्ज कर लेते हैं तो आपको दो दिन तक चार्जर की जरूरत नहीं पड़ेगी। फोन का डिजाइन भी हमें ठीक लगा है। कीमत के हिसाब से फोन में हमें कुछ कमियां भी लगी हैं। 6GB रैम वाले फोन के लिए 25,000 रुपये खर्च करना यूजर की जेब पर बोझ लगेगा। फोन की कीमत अगर 20,000 रुपये से कम होती तो इसे एक वैल्यू फोन कहा जा सकता था।
लखनऊः उत्तर प्रदेश अधीनस्थ सेवा चयन आयोग (UPSSSC) ने यूपी PET-2026 आवेदन की अंतिम तारीख बढ़ा दी है। अभ्यर्थी अब 7 सितंबर तक PET-2026 के लिए ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगे। इससे पहले आवेदन की अंतिम तिथि 1 सितंबर थी। अब अभ्यर्थी 7 सितंबर तक शुल्क जमा और ऑनलाइन आवेदन सबमिट कर सकेंगे। आवेदन में संशोधन की अंतिम तिथि 8 सितंबर ही रहेगी।
UPSSSC ने अभ्यर्थियों से अपील की है कि अंतिम तारीख का इंतजार न करें, समय रहते आवेदन पूरा करें। आवेदन प्रक्रिया, शुल्क और अन्य नियमों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। इससे पहले तीन अगस्त से ऑनलाइन आवेदन प्रक्रिया शुरू हुई थी।
आवेदन प्रक्रिया में आ रही थी दिक्कतें
इससे पहले कई आवेदकों ने सोशल मीडिया पर UPSSSC की वेबसाइट upsssc.gov.in में आ रही दिक्कतों के बारे में बताया था। आवेदकों का कहना था कि वेबसाइट कई दिनों से ठीक से काम नहीं कर रही है और वे PET एप्लीकेशन फॉर्म भरने के लिए ज़रूरी वन-टाइम रजिस्ट्रेशन (OTR) प्रक्रिया पूरी नहीं कर पा रहे हैं। सोशल मीडिया पर कई पोस्ट में यह भी कहा गया था कि OTP वेरिफिकेशन काम नहीं कर रहा है। उम्मीदवारों का कहना है कि बार-बार कोशिश करने के बावजूद OTP नहीं मिल रहे हैं। इस समस्या के कारण उम्मीदवार आयोग और उत्तर प्रदेश के अधिकारियों से एप्लीकेशन की समय-सीमा बढ़ाने की मांग कर रहे थे।
आवेदन कैसे करें
सबसे पहले UPSSSC की आधिकारिक https://upsssc.gov.in/ पर वेबसाइट पर जाएं
UPSSSC PET 2026 रजिस्ट्रेशन लिंक पर क्लिक करें।
अपनी बेसिक जानकारी, सही मोबाइल नंबर और ईमेल ID का इस्तेमाल करके रजिस्ट्रेशन पूरा करें।
अपनी पर्सनल, एजुकेशनल और कम्युनिकेशन जानकारी के साथ ऑनलाइन आवेदन फ़ॉर्म ध्यान से भरें।
ज़रूरी फ़ोटो और हस्ताक्षर (सिग्नेचर) तय फ़ॉर्मैट में अपलोड करें।
ऑनलाइन पेमेंट गेटवे के ज़रिए आवेदन शुल्क का भुगतान करें।
फ़ाइनल सबमिशन से पहले भरी गई सभी जानकारी को ध्यान से जांच लें।
आवेदन फ़ॉर्म सबमिट करें।
भविष्य के लिए कन्फर्मेशन पेज डाउनलोड करें और उसका प्रिंट आउट लें।
UPSSSC PET पास करने वाले दे सकेंगे ये परीक्षा
UPSSSC PET एक क्वालिफाइंग परीक्षा है जो उत्तर प्रदेश में अलग-अलग ग्रुप B और ग्रुप C भर्तियों के लिए उम्मीदवारों को शॉर्टलिस्ट करने के लिए आयोजित की जाती है, जिसमें ये पद शामिल हैं।
लेखपाल
जूनियर असिस्टेंट
ग्राम विकास अधिकारी (BDO)
क्लर्क
फॉरेस्ट गार्ड
राजस्व (रेवेन्यू) से जुड़े पद
समय-समय पर घोषित अन्य UPSSSC भर्तियां
इन भर्ती परीक्षाओं के लिए योग्य होने के लिए उम्मीदवारों को PET पास करना ज़रूरी है।
नई दिल्ली, 1 सितंबर। कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने मंगलवार को चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि आयोग निष्पक्ष चुनावों के संरक्षक की जगह ‘सेव बीजेपी चेयर कमीशन’ की तरह काम कर रहा है। खरगे ने आरोप लगाया कि बीजेपी ‘वोट चोरी’ के जरिए भारत के लोकतंत्र को खोखला करने की साजिश कर रही है। उन्होंने कहा कि यह साजिश अब सामने आ गई है और लोग वोटों की चोरी के खिलाफ एकजुट हो रहे हैं। महाराष्ट्र में 2.07 करोड़ नाम ड्राफ्ट सूची से बाहर: खरगे खरगे ने हिंदी में किए X पोस्ट में आरोप लगाया कि बीजेपी जहां अपने फायदे के लिए वोट बढ़ाती है, वहीं जहां फायदा नहीं होता, वहां वोटों को बांट देती है। उन्होंने कहा- बीजेपी की ‘वोट चोरी’ के जरिए भारतीय लोकतंत्र को खोखला करने की साजिश सामने आ रही है। जहां बीजेपी को फायदा होता है, वहां मतदाता जोड़े जाते हैं और जहां फायदा नहीं होता, वहां वोट बांट दिए जाते हैं।” खरगे ने कहा कि महाराष्ट्र में लोकसभा और विधानसभा चुनावों के बीच अचानक 39 लाख मतदाता बढ़ गए थे। अब SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन की ड्राफ्ट सूची से 2.07 करोड़ मतदाता बाहर हैं। उन्होंने सवाल किया- क्या बीजेपी को जिताने के लिए चुनावों के दौरान इन मतदाताओं के नाम हटाए गए? बंगाल में अपील के बाद 91% नाम फिर जुड़े खरगे ने कहा कि बंगाल में SIR के दौरान हटाए गए नामों में से 91% नाम अपील के बाद फिर से जोड़ने पड़े। उन्होंने आरोप लगाया कि यही खेल दिल्ली में भी दोहराया जा रहा है। उनके मुताबिक, विधानसभा चुनाव से पहले मतदाताओं की संख्या बढ़ाई गई थी। खरगे ने कहा कि इसके बाद ड्राफ्ट सूची से 47.56 लाख मतदाताओं के नाम गायब हो गए और 33 लाख अन्य मतदाताओं को नोटिस देने की तैयारी चल रही है। ———————- ये खबर भी पढ़ें… राहुल ने कहा- बीजेपी देश में चुनाव सुधार नहीं चाहती:चुनाव आयोग को कंट्रोल कर रही; SIR पर सदन के सामने 3 मांगें रखीं राहुल गांधी ने मंगलवार को लोकसभा में चुनाव सुधार (SIR) पर 28 मिनट की स्पीच दी। कहा कि RSS और BJP देश की संस्थाओं पर कब्जा कर रही हैं। इनमें चुनाव आयोग, ईडी, सीबीआई, आईबी, इनकम टैक्स डिपार्टमेंट शामिल हैं। पूरी खबर पढ़े…
बिरयानी बनाना सिर्फ मसालों और सही पकाने के तरीके का खेल नहीं है, बल्कि इसके लिए सही चावल का चुनाव भी बहुत जरूरी है. बिरयानी की खूबसूरती उसके लंबे, खिले-खिले और खुशबूदार चावल से ही नजर आती है. अगर चावल सही नहीं होंगे तो चाहे ग्रेवी और मसालों का स्वाद कितना भी अच्छा क्यों न हो, बिरयानी का पूरा मजा किरकिरा हो सकता है. कई बार घर पर बिरयानी बनाते समय चावल ज्यादा गल जाते हैं, आपस में चिपक जाते हैं या पकने के बाद टूट जाते हैं. इसकी एक वजह गलत किस्म के चावल का इस्तेमाल भी हो सकती है.
वहीं सही चावल चुनने पर दाने पकने के बाद लंबे और अलग-अलग रह सकते हैं, जिससे बिरयानी देखने में भी शानदार लगती है. इसलिए चावल खरीदते समय सिर्फ कीमत या पैकेट देखकर फैसला न करें, बल्कि उसकी किस्म, दाने की लंबाई और गुणवत्ता पर भी ध्यान दें. आइए जानते हैं बिरयानी के लिए कौन से चावल सबसे अच्छे रहते हैं.
लंबे दाने वाला बासमती चावल
बिरयानी के लिए लंबे दाने वाला बासमती चावल सबसे लोकप्रिय विकल्पों में से एक है. बासमती चावल की खासियत यह है कि पकने के बाद इसके दाने लंबे होते हैं और सही तरीके से पकाने पर एक-दूसरे से चिपकते नहीं हैं. इसके अलावा बासमती की प्राकृतिक खुशबू बिरयानी के स्वाद और खुशबू को भी बढ़ाती है. चिकन बिरयानी हो, मटन बिरयानी, वेज बिरयानी या एग बिरयानी, लंबे दाने वाला बासमती चावल लगभग हर तरह की बिरयानी के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है.
पुराना यानी Aged Basmati क्यों है अच्छा?
बिरयानी के लिए aged basmati rice यानी कुछ समय तक रखा गया पुराना बासमती चावल भी अच्छा विकल्प माना जाता है. इसकी नमी कम होने के कारण चावल पकाते समय दाने ज्यादा आसानी से अलग रह सकते हैं. ऐसे चावल बिरयानी के लिए खास तौर पर पसंद किए जाते हैं, क्योंकि इनसे चावल के दाने लंबे और खिले हुए नजर आ सकते हैं.
हालांकि aged rice खरीदते समय भी गुणवत्ता का ध्यान रखना जरूरी है. सिर्फ पुराना होने से चावल अच्छा नहीं हो जाता. पैकेट पर चावल की किस्म, ग्रेन की लंबाई और अन्य जानकारी देखकर ही खरीदना बेहतर है.
1121 बासमती चावल
अगर आपको बिरयानी में बहुत लंबे और आकर्षक चावल पसंद हैं तो 1121 Basmati Rice पर विचार कर सकती हैं. इसके दाने लंबे होते हैं और पकने के बाद इनकी लंबाई और बढ़ सकती है. इसी वजह से यह बिरयानी, पुलाव और कई तरह के चावल वाले व्यंजनों में इस्तेमाल किया जाता है. दम बिरयानी में इसकी लंबाई और खिले हुए दाने डिश को काफी आकर्षक बना सकते हैं.
1509 बासमती चावल
1509 Basmati Rice भी बिरयानी बनाने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक विकल्प है. यह अच्छी क्वालिटी में मिलने पर पकने के बाद लंबे और अलग-अलग दाने दे सकता है. कुछ किस्में 1121 की तुलना में जल्दी पक सकती हैं, इसलिए इसे इस्तेमाल करते समय चावल पकाने का समय और पानी की मात्रा ध्यान से रखें. बजट और उपलब्धता के हिसाब से कई लोग इसे भी पसंद करते हैं.
छोटे या ज्यादा चिपचिपे चावल से बचें
हर तरह के चावल से अच्छी बिरयानी नहीं बनती. ऐसे चावल जिनमें स्टार्च ज्यादा हो और जो पकने के बाद जल्दी चिपक जाएं, बिरयानी के लिए परेशानी पैदा कर सकते हैं. चावल अगर आपस में चिपक जाएंगे तो बिरयानी की परतें और दानों की खूबसूरती खत्म हो सकती है. इसलिए खासकर बिरयानी के लिए छोटे दाने या ज्यादा चिपचिपी किस्म की जगह लंबे दाने वाले चावल चुनना बेहतर रहता है.
चावल खरीदते समय इन बातों का रखें ध्यान
चावल खरीदते समय सबसे पहले दाने की लंबाई और एकरूपता देखें. कोशिश करें कि पैकेट में टूटे हुए चावल बहुत ज्यादा न हों. अगर संभव हो तो अच्छी गुणवत्ता वाले पैकेज्ड बासमती चावल चुनें और पैकेट पर दी गई जानकारी जरूर पढ़ें. बिरयानी के लिए ऐसा चावल लें जिसके बारे में यह स्पष्ट हो कि वह लंबे दाने वाला है और पकने के बाद खिला हुआ परिणाम देता है.
बिरयानी के चावल पकाने का सही तरीका भी जरूरी
सही चावल खरीदने के बाद उसे पकाने का तरीका भी उतना ही महत्वपूर्ण है. चावल को पकाने से पहले अच्छी तरह धोकर कुछ समय के लिए भिगोया जा सकता है. इससे दानों को समान रूप से पकने में मदद मिलती है. बिरयानी के लिए चावल को पूरी तरह गलाने के बजाय लगभग 70-80 प्रतिशत तक पकाना बेहतर रहता है, क्योंकि बाद में यह मसालेदार परतों के साथ दम पर भी पकता है. चावल को ज्यादा पकाने से दाने टूट सकते हैं और बिरयानी चिपचिपी हो सकती है. वहीं कम पके चावल दम के दौरान भी पूरी तरह नरम नहीं हो पाएंगे. इसलिए चावल की बनावट पर ध्यान देना जरूरी है.
रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन को डर है कि अगर उन्होंने पूरा डोनबास अपने कब्जे में लिए बिना यूक्रेन युद्ध खत्म कर दिया, तो रूस के ताकतवर लोगों में उनके खिलाफ नाराजगी बढ़ सकती है। इससे उनकी सत्ता पर भी खतरा आ सकता है। द इकोनॉमिस्ट की एक रिपोर्ट के मुताबिक, पुतिन को लगता है कि अपनी बड़ी मांगें पूरी किए बिना यूक्रेन युद्ध खत्म करना रूस में उनकी कमजोरी मानी जाएगी। क्रेमलिन के एक करीबी सूत्र ने बताया कि युद्ध खत्म करने के नतीजों पर बात करते हुए पुतिन ने एक बार कहा था, “वे मुझे फांसी पर लटका देंगे।” पुतिन का मानना है कि अगर रूस का नेता कमजोर दिखता है तो उसके लिए सत्ता में बने रहना मुश्किल हो सकता है। यही वजह है कि वह युद्ध खत्म करने के लिए बड़े समझौते करने से बच रहे हैं। यूक्रेन के डोनेत्स्क और लुहांस्क क्षेत्रों को मिलाकर डोनबास कहा जाता है। रूस का डोनबास के करीब 90% हिस्से पर कंट्रोल है। पुतिन के सामने अब क्या रास्ता है? रिपोर्ट के मुताबिक, पांच साल से ज्यादा समय से चल रहे युद्ध ने पुतिन के लिए स्थिति मुश्किल कर दी है। युद्ध जारी रखने पर यूक्रेन रूस के तेल और ऊर्जा ठिकानों पर लगातार हमले कर रहा है। इससे रूस का खर्च लगातार बढ़ रहा है। युद्ध रोकना भी पुतिन के लिए आसान नहीं है। रिपोर्ट के मुताबिक, उन्हें आम लोगों की नाराजगी से ज्यादा चिंता रूस के उन ताकतवर लोगों की है, जिनके पास पैसा, हथियार और सत्ता तक पहुंच है। एस्टोनियाई खुफिया प्रमुख रोसिन के मुताबिक, इन लोगों के बीच अब पहले की तरह रूस की पूरी जीत की बात नहीं हो रही है। इसके बजाय वे यह सोच रहे हैं कि इस युद्ध को सही तरीके से कैसे खत्म किया जाए। पांच साल की जंग के बाद लोगों की नाराजगी बढ़ी द इकोनॉमिस्ट के मुताबिक, रूस के ताकतवर लोगों में अब यह सवाल उठने लगा है कि करीब पांच साल तक युद्ध लड़ने के बाद आखिर देश ने हासिल क्या किया। चिंता सिर्फ अर्थव्यवस्था या युद्ध के नतीजे की नहीं है, बल्कि लंबे समय से चल रहे इस युद्ध की कीमत को लेकर भी है। रिपोर्ट में रूस के एक ताकतवर व्यक्ति के हवाले से कहा गया कि वहां अब यह भावना बढ़ रही है कि “राजा के पास कपड़े नहीं हैं।” यानी सत्ता की कमजोरियां अब पहले की तरह छिपी नहीं हैं और लोगों को दिखाई देने लगी हैं। फिर भी पुतिन की सत्ता पर पकड़ मजबूत है। रूस के पास युद्ध जारी रखने के लिए पैसा और विरोध को दबाने का मजबूत सिस्टम मौजूद है। लेकिन द इकोनॉमिस्ट के मुताबिक, राजनीति में हिंसा को लोग सह सकते हैं, लेकिन नाकामी को नहीं। डोनबास को लेकर रूस और यूक्रेन के बीच फंसा है मामला रूस पूरे डोनबास पर कब्जा चाहता है, लेकिन यूक्रेन अपनी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं है। यही वजह है कि दोनों देशों के बीच शांति समझौते में यह सबसे बड़ी अड़चनों में से एक बना हुआ है। रूस डोनबास को बेहद अहम मानता है और इन्हें छोड़ना नहीं चाहता। पुतिन पहले ही कह चुके हैं कि शांति समझौते के लिए यूक्रेन को रूस के कब्जे वाले इलाकों पर अपना दावा छोड़ना होगा। साथ ही उसे इन इलाकों को रूस का हिस्सा मानना होगा। 2022 से जारी रूस-यूक्रेन जंग रूस और यूक्रेन के बीच जंग फरवरी 2022 में शुरू हुई। रूस ने यूक्रेन के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया और तभी से दोनों देशों के बीच लड़ाई जारी है। रूस के पास यूक्रेन के करीब 20% इलाके पर कब्जा है। इस युद्ध में हजारों नागरिकों और सैनिकों की मौत हुई है, जबकि लाखों यूक्रेनियन अपना घर छोड़ने को मजबूर हुए हैं। जून 2023 तक करीब 80 लाख लोग यूक्रेन छोड़कर दूसरे देशों में चले गए थे। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प युद्ध खत्म कराने के लिए रूस और यूक्रेन के नेताओं के साथ बातचीत कर चुके हैं। हाल ही में उन्होंने रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन से अलास्का में मुलाकात की थी। यह करीब 80 साल में किसी रूसी नेता की पहली अलास्का यात्रा थी। ————————————- ये खबर भी पढ़ें… यूक्रेन- घरों के बीच छिपे हथियार डिपो पर रूसी हमला:गोला-बारूद, बारूदी सुरंगें और ड्रोन फटे, 37 की मौत, 130 घरों को नुकसान
रूस ने यूक्रेन की राजधानी कीव के पास शनिवार को एक हथियार डिपो पर ड्रोन हमला किया। हमले के बाद डिपो में रखे गोले, बारूदी सुरंगें और ड्रोन फटने लगे। इस घटना में कम से कम 37 लोगों की मौत हुई है। पूरी खबर यहां पढ़ें…