Friday, May 22, 2026
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‘मैं बताऊंगा किसको कितना चढ़ावा गया’, गद्दार कहने पर चिढ़े भज्‍जी, क्‍या बोले?


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‘मैं बताऊंगा किसको कितना चढ़ावा गया’, गद्दार कहने पर चिढ़े भज्‍जी, क्‍या बोले?

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Harbhajan Singh Gaddar Controversy: पूर्व क्रिकेटर और पंजाब से राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह ने आम आदमी पार्टी (AAP) पर बड़ा हमला बोलते हुए दावा किया है कि पंजाब की राज्यसभा सीटें बेची गई थीं. सोशल मीडिया पर ट्रोल किए जाने के बाद हरभजन ने तीखी प्रतिक्रिया दी. उन्होंने चुनौती देते हुए कहा कि समय आने पर वह खुद खुलासा करेंगे कि किसको कितना चढ़ावा गया था और पंजाब को लूटने के लिए किसे कैसे मंत्री-संतरी बनाया गया.

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हरभजन सिंह ने अपनी बात कही.

क्रिकेट के मैदान में जब एक ‘टर्बिनेटर’ अपनी फिरकी छोड़ता है तो बड़े-बड़े सूरमाओं के पैर उखड़ जाते हैं. लेकिन इस बार पिच क्रिकेट की नहीं बल्कि राजनीति की है और हाथ में गेंद नहीं बल्कि सोशल मीडिया पर दागा गया एक ऐसा बारूद है जिसने पंजाब से लेकर दिल्ली तक के सियासी गलियारों को हिलाकर रख दिया है. बीजेपी नेता और राज्यसभा सांसद हरभजन सिंह पर अपनी ही पुरानी पार्टी के वफादार ‘गद्दार’ होने का ठप्पा लगाते हैं. अब जवाब में भज्जी ने एक ऐसा पलटवार किया जो सीधे पार्टी के सबसे बड़े ‘सच’ और शुचिता के दावों पर सवाल खड़े करता है. हरभजन सिंह ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर खुद को ‘गद्दार’ कहे जाने पर सीधे आप के शीर्ष नेतृत्व को कटघरे में खड़ा करते हुए दावा किया है कि पंजाब की राज्यसभा सीटें भारी-भरकम रकम लेकर बेची गई थीं.

हरभजन सिंह (भज्जी) ने विरोधी ट्रोलर्स और पार्टी कार्यकर्ताओं को खुली चुनौती दी है कि यदि उनके लोगों ने सच नहीं उगला तो वे खुद जनता के सामने इस बात का पर्दाफाश करेंगे कि राज्यसभा टिकट के बदले किसको कितना चढ़ावा और किसकी तरफ से गया था. इस सनसनीखेज खुलासे के बाद पंजाब से लेकर दिल्ली तक की सियासत में भूचाल आ गया है.

गद्दार के टैग पर भज्जी का पलटवार
दरअसल, इस पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई जब सोशल मीडिया पर देवेंदर यादव नाम के एक आप कार्यकर्ता ने हरभजन सिंह को ‘गद्दार’ बताते हुए सीधे निशाना साधा. पोस्ट में हरभजन सिंह से तीखा सवाल पूछा गया था कि, “जिस नेता को आप दिन-रात गाली देते हैं, उसकी दी हुई राज्यसभा सीट से आपने इस्तीफा क्यों नहीं दिया? भाजपा में जाने की आपकी क्या मजबूरी थी?” इसके साथ ही सोशल मीडिया पर हरभजन सिंह पर करोड़ों रुपये की बोली लगाए जाने के आरोप भी मढ़े गए.

इन आरोपों पर अपनी तीखी प्रतिक्रिया देते हुए हरभजन सिंह ने पलटवार किया और लिखा, “समय आने पर तुम्हारे एक-एक शब्द का जवाब दिया जाएगा. मैंने तुम्हारे किसी नेता को गाली नहीं दी है. मैं अपनी जुबान क्यों गंदी करूं?”



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धर्मेंद्र के जिस गाने को ‘हल्का’ बताकर किया था रिजेक्ट, उसे शंकर जयकिशन ने बनाया अमर


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Dharmendra Evergreen Hit Songs : कुछ नायाब गीतों के बनने की दास्तां बड़ी दिलचस्प है. इनमें से कुछ गानों को फिल्ममेकर्स के रिजेक्शन का सामना भी करना पड़ा था. धर्मेंद्र के ही एक सुपरहिट गाने को लीजिए. उसे पास कराने में शंकर जयकिशन को काफी पापड़ बेलने पड़े थे. वे इसे मोहम्मद रफी से गवाना चाहते थे. मगर फिल्म के डिस्ट्रिब्यूटर ताराचंद बड़जात्या ने यह कहकर रिजेक्ट कर दिया कि गाना ही इतना हल्का है, तो इसे गाकर मोहम्मद रफी क्या कर लेंगे. मगर यह नायाब गाना सुपर-डुपर हिट रहा, जिसे आज भी लोग गुनगुनाना पसंद करते हैं.

नई दिल्ली: साल 1969 में एक फिल्म आई थी, नाम है- ‘प्यार ही प्यार.’ इसका एक गाना 57 साल बाद भी पॉपुलर है, जिसे धर्मेंद्र और वैजयंती माला पर फिल्माया गया था. गाने को मोहम्मद रफी ने गाया था. मगर जब गाने को शंकर जयकिशन बना रहे थे, तब फिल्म के डिस्ट्रिब्यूटर ताराचंद बड़जात्या ने इसे तुच्छ मानकर रिजेक्ट कर दिया था. वह गाना तब भी सुपरहिट था, आज भी है. गाने के बोल आज भी कानों में मिश्री घोलते हैं. (फोटो साभार: IMDb)

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शंकर जयकिशन को 1968 में पद्मश्री से जब सम्मानित किया गया था, तब वह फिल्म ‘प्यार ही प्यार’ के गानों पर काम कर रहे थे. उन्हें फिल्म की सिचुएशन का ख्याल था, जिन पर उन्हें गाने बनाने थे. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, शंकर जयकिशन पद्मश्री लेने दिल्ली गए. वे ओबेरॉय होटल में ठहरे हुए थे. जयकिशन को रोमांटिक सिचुएशन पर एक धुन याद आई. उन्होंने धुन पर एक मुखड़ा भी लिख दिया. उन्हें धुन के साथ-साथ मुखड़ा भी भा गया. (फोटो साभार: IMDb/AI से जेनरेटेड इमेज)

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जयकिशन ने जब यह धुन और मुखड़ा शंकर को सुनाया, तो उन्हें भी गीत बहुत पसंद आया. उन्होंने मुंबई जाकर इसे मोहम्मद रफी की आवाज में रिकॉर्ड कराने का मन बनाया. वे मुंबई पहुंचे, तो फिल्म के प्रोड्यूसर सतीश वागले को गीत सुनाया. उन्हें भी गाने की धुन-बोल भा गए. सबको लग रहा था कि यह गाना सुपरहिट होगा, मगर अभी भी एक रुकावट थी.
(फोटो साभार: YouTube/Videograb)

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फिल्म के डिस्ट्रिब्यूटर ताराचंद बड़जात्या थे. वे तब फिल्मों के गीत-संगीत में दखलअंदाजी करते थे. शंकर जयकिशन जानते थे कि उनकी अनुमति के बिना गाना पास नहीं हो पाएगा. प्रोड्यूसर सतीश वागले ने यह गाना ताराचंद बड़जात्या को सुनाने की नसीहत दी और बोले कि वह ही इसे फाइनल करेंगे. (फोटो साभार: IMDb)

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प्रोड्यूसर के कहने पर शंकर जयकिशन गाना सुनाने ताराचंद के पास पहुंचे. गाना सुनने के बाद ताराचंद बड़जात्या ने कहा कि यह बहुत हल्का गाना है. यह गीत नहीं चलेगा. इस सिचुएशन पर कोई दूसरा गाना बनाओ. शंकर जयकिशन को धक्का लगा. वह जिसे सुपरहिट समझ रहे थे, उसे ताराचंद ने एक झटके में रिजेक्ट कर दिया. (फोटो साभार: IMDb/AI से जेनरेटेड इमेज)

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शंकर जयकिशन ने गाने की पैरवी करते हुए कहा कि जब इसे मोहम्मद रफी गाएंगे, तो कमाल हो जाएगा. ताराचंद बड़जात्या बोले कि यह इतना हल्का गीत है, रफी साहब भी इसमें क्या कर लेंगे. प्रोड्यूसर सतीश वागले के कानों तक खबर पहुंची, तो वे बोले कि यह गीत मुझे बहुत पसंद है. किसी तरह ताराचंद बड़जात्या को मनाओ. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

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शंकर जयकिशन को एक तरकीब सूझी. उन्होंने 1952 में दिलीप कुमार की फिल्म ‘दाग’ में काम किया था, जिसके डिस्ट्रिब्यूटर भी ताराचंद बड़जात्या था. उन्होंने इस फिल्म का एक गाना ‘ऐ मेरे दिल कहीं ओर चल’ भी रिजेक्ट कर दिया था, जो बाद में सुपरहिट रहा था. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

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ताराचंद बड़जात्या के साथ अगली मुलाकात में शंकर जयकिशन ने उन्हें याद दिलाया कि आपका रिजेक्ट किया एक गाना सुपरहिट रहा था. इसलिए, हमारे कहने पर आप इसे फिल्म में रख लें. ताराचंद ने कुछ सोचकर उनकी बात मान ली. इस गाने को पूरा लिखा था हसरत जयपुरी ने. सुपर-डुपर हिट रहा यह गाना आज कहावतों में है. यह नायाब गाना है- ‘मैं कहीं कवि न बन जाऊं तेरे प्यार में ऐ कविता.’ (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

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डीएम ने निपुण भारत मिशन की समीक्षा की: अध्यापक उपस्थिति, छात्र नामांकन सुधार पर दिए निर्देश; निरीक्षण के आदेश – Jaunpur News




जौनपुर में जिलाधिकारी सैमुअल पॉल एन. की अध्यक्षता में शुक्रवार शाम 5 बजे कलेक्ट्रेट सभागार में एक समीक्षा बैठक हुई। इसमें निपुण भारत मिशन, कायाकल्प योजना, छात्र उपस्थिति और पीएम पोषण योजना (मध्याह्न भोजन) जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर चर्चा की गई। जिलाधिकारी ने अध्यापकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए कड़े निर्देश दिए। उन्होंने सभी अधिकारियों को महीने में तीन बार, एक ही दिन सभी विद्यालयों का व्यापक निरीक्षण करने का आदेश दिया। अनुपस्थित पाए गए अध्यापकों का ‘नो वर्क-नो पे’ सिद्धांत के आधार पर निरीक्षण तिथि का वेतन रोकने का निर्देश दिया गया। ग्रीष्मावकाश के बाद विद्यालयों में छात्रों की उपस्थिति सुधारने पर भी विशेष जोर दिया गया। आगामी माह में सपोर्टिव सुपरविजन की समीक्षा के लिए एकेडमिक रिसोर्स पर्सन (ए.आर.पी.) की अनिवार्य उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। जिला और ब्लॉक स्तरीय टास्क फोर्स सदस्यों को भी अपने निर्धारित लक्ष्यों के अनुसार निरीक्षण समय पर पूरा करने को कहा गया। निरीक्षण के दौरान शैक्षिक गुणवत्ता की जांच के साथ-साथ छात्र-छात्राओं से संवाद स्थापित करने और अपने अनुभव साझा करने के निर्देश दिए गए, ताकि उनमें शिक्षा के प्रति रुचि जागृत हो सके। जिलाधिकारी ने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी (बी.एस.ए.) को कई महत्वपूर्ण निर्देश दिए। उन्होंने आर.टी.ई. के तहत प्रवेश न देने वाले विद्यालयों की मान्यता रद्द करने की कार्यवाही प्रस्तावित करने को कहा। मुख्य चिकित्सा अधिकारी से समन्वय स्थापित कर दिव्यांग/विशेष आवश्यकता वाले बच्चों को दिव्यांग प्रमाण पत्र जारी करवाने का भी निर्देश दिया गया। प्रेरणा पोर्टल पर डी.बी.टी. के माध्यम से धनराशि हस्तांतरण हेतु प्रदर्शित 6601 ‘डिलीटेड स्टूडेंट्स’ के विकास खंडवार और छात्रवार विवरण प्रस्तुत करने का निर्देश दिया गया। इतनी बड़ी संख्या में छात्रों के ‘डिलीट’ होने पर जिलाधिकारी ने नाराजगी व्यक्त की। उन्होंने जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी और बरसठी, करंजाकला, रामपुर, शाहगंज जैसे विकास खंडों, जहां 400 से अधिक छात्र डिलीट किए गए हैं, को कारण बताओ नोटिस जारी करने का निर्देश दिया।



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बांका में युवक की करंट लगने से मौत: पंखे का वायर जोड़ रहा था, हॉस्पिटल में डेड घोषित – Banka News




बांका जिले के धोरैया थाना क्षेत्र में शुक्रवार को बिजली करंट लगने से 32 वर्षीय युवक की दर्दनाक मौत हो गई। मृतक की पहचान मड़पा गांव निवासी बालेश्वर राय के पुत्र धनी राय के रूप में हुई है। घटना के बाद परिजनों में कोहराम मच गया, जबकि पूरे गांव में शोक का माहौल व्याप्त है। गर्मी के कारण पंखा ठीक करने का दौरान हुई घटना। जानकारी के अनुसार भीषण गर्मी के कारण घर का पंखा खराब हो गया था। धनी राय खुद ही पंखे का तार जोड़कर उसे ठीक करने का प्रयास कर रहे थे। इसी दौरान पंखे के तार में करंट लीकेज था। जैसे ही उन्होंने तार जोड़ने की कोशिश की, वे अचानक बिजली करंट की चपेट में आ गए। तेज करंट लगते ही धनी राय मौके पर ही मूर्छित होकर नीचे गिर पड़े। पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कर आगे की कार्रवाई की जा रही घटना देखकर आसपास मौजूद परिजन और ग्रामीण तुरंत दौड़कर पहुंचे। आनन-फानन में उन्हें गंभीर अवस्था में धोरैया सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। जहां ड्यूटी पर मौजूद चिकित्सक ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। युवक की मौत की खबर मिलते ही अस्पताल परिसर में चीख-पुकार मच गई। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। घटना की सूचना मिलने पर धोरैया थाना पुलिस अस्पताल पहुंची और मामले की जांच शुरू की। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। थाना अध्यक्ष अमित कुमार ने बताया कि पोस्टमार्टम की प्रक्रिया पूरी कर आगे की कार्रवाई की जा रही है। घटना के बाद पूरे गांव में मातमी सन्नाटा पसरा हुआ है।



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तीसरी-चौथी रेलवे लाइन से प्रभावित होगा नेपानगर का वन क्षेत्र: सीसीएफ ने किया निरीक्षण, बारिश से पहले गुणवत्तापूर्ण पौधे तैयार करने के निर्देश – Burhanpur (MP) News


बुरहानपुर में भुसावल से खंडवा तक प्रस्तावित तीसरी और चौथी रेलवे लाइन के निर्माण से वन भूमि प्रभावित होगी। इसी संबंध में खंडवा सीसीएफ बासु कनौजिया ने शुक्रवार को नेपानगर का दौरा किया।

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सीसीएफ कनौजिया ने नेपानगर-सागफाटा रोड पर स्टेशन के पीछे वन क्षेत्र का निरीक्षण कर वास्तविक स्थिति का जायजा लिया। इस दौरान उनके साथ कुछ रेलवे अधिकारी भी मौजूद थे, जिनसे उन्होंने परियोजना को लेकर चर्चा की।

नेपानगर एसडीओ विक्रम सुलिया ने बताया कि सीसीएफ ने सबसे पहले डेहरिया बीट का निरीक्षण किया। इसके बाद उन्होंने सीवल और नेपानगर स्थित वन रोपणी का भी दौरा किया। बाद में, वे रतागढ़ में तेंदूपत्ता संग्रहण कार्य का निरीक्षण करने पहुंचीं।

इस निरीक्षण के दौरान बुरहानपुर डीएफओ विद्याभूषण सिंह, नेपानगर रेंजर और नावरा रेंजर पुष्पेंद्र जादौन सहित अन्य वन अधिकारी भी उपस्थित थे।

सीसीएफ ने वन अधिकारियों को निर्देश दिए कि जिले की सभी वन रोपणियों में बारिश से पहले अच्छी गुणवत्ता के पौधे तैयार किए जाएं। उन्होंने समय पर पौधों के परिवहन की भी ताकीद की, क्योंकि आगामी बारिश के मौसम में बड़े पैमाने पर पौधारोपण किया जाना है।

उन्होंने पौधों की उपलब्धता की जानकारी ली और किसी भी कमी को जल्द से जल्द पूरा करने को कहा। निरीक्षण के बाद सीसीएफ खंडवा के लिए रवाना हो गईं।



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IVF से बच्चा करने के नाम पर 1.80 लाख ठगे: सेंटर की डॉक्टर और काउंसलर के खिलाफ मामला दर्ज,महिला ने जनसुनवाई में दी थी शिकायत – Sikar News



IVF सेंटर सीकर के जनाना हॉस्पिटल में संचालित होता था।

सीकर के राजकीय जनाना अस्पताल में संचालित हुए प्रताप आईवीएफ सेंटर की डॉ सुमन तंवर और काउंसलर मीरा देवी के खिलाफ 1.80 लाख रुपए की ठगी का मामला दर्ज हुआ है। IVF तकनीक से बच्चा पैदा करने के नाम पर महिला से यह रुपए लिए गए। अब कोतवाली पुलिस मामले की जांच क

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लक्ष्मणगढ़ निवासी महिला ने कोतवाली पुलिस थाने में शिकायत देकर बताया कि उनके संतान नहीं हो रही थी। ऐसे में वह सीकर के नेहरू पार्क के सामने जनाना अस्पताल में संचालित प्रताप आईवीएफ सेंटर में इलाज लेने के लिए गई। वहां उन्हें डॉ सुमन तंवर और काउंसलर मीरा देवी मिली। जिन्होंने इलाज का भरोसा दिलाया और 1.80 लाख रुपए जमा करवाने को कहा।

महिला ने वह रुपए जमा करवा दिए। इसके बाद महिला को दवाइयां लिखकर दी गई जो उन्होंने बाहर से ले ली। इसके बाद डॉ सुमन तंवर और काउंसलर मीरा महिला को मैसेज पर दवाइयां लिखकर भेजती रही जिन्हें महिला लेती रही। कुछ दिनों बाद जब महिला चेकअप के लिए हॉस्पिटल गई तो उन्हें पता लगा कि डॉ सुमन तंवर और काउंसलर आईवीएफ सेंटर के ताला लगाकर भाग गए हैं।

जब महिला ने अस्पताल स्टाफ के मोबाइल से उन्हें कॉल किया तो दोनों ने कहा कि जनवरी या फरवरी 2026 में सेंटर वापस चालू हो जाएगा। इसके बाद महिला कई बार हॉस्पिटल गई लेकिन उन्हें हमेशा आईवीएफ सेंटर बंद मिला।

एक दिन जनाना अस्पताल में उन्हें काउंसलर मीरा देवी मिली। जब उन्हें पैसों के बारे में कहा गया तो उसने कहा कि तुम्हारे पैसों का कोई हिसाब नहीं है। न ही तुम्हारे रुपए मेरे पास है। ना ही मेरे पास तुम्हारा कोई इलाज है। तुम्हें जो कार्रवाई करनी है वह कर लो हमारा कोई कुछ नहीं बिगाड़ पाएगा।

दरअसल महिला ने 21 मई को सीकर जिला कलेक्टर आशीष मोदी द्वारा आयोजित जनसुनवाई में यह शिकायत दी थी। जिसके बाद मुकदमा दर्ज हुआ। फिलहाल मामले की जांच ASI तूफान सिंह कर रहे हैं।

दरअसल इस आईवीएफ सेंटर में 7 महीने पहले करोड़ों रुपए का सामान गायब होने का भी मामला सामने आया था। तब डॉ सुमन तंवर और डॉ विक्रम सिंह ने तत्कालीन पीएमओ कमल अग्रवाल सहित छह लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज करवाया था।



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हॉर्मूज संकट के बीच देसी जुगाड़, बीकानेर में फेमस हुई भट्टी वाली कचौरी-समोसे


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LPG gas Shortage: बीकानेर में ईरान-अमेरिका तनाव और एलपीजी गैस की बढ़ती कीमतों के बीच एक दुकानदार ने देसी तरीका अपनाकर लकड़ी और कोयले की भट्टी पर कचौरी और समोसे बनाना शुरू किया है. कोटगेट रेलवे क्रॉसिंग स्थित 40 साल पुरानी तंवर परिवार की दुकान पर आज भी पारंपरिक अंदाज में नाश्ता तैयार किया जाता है. दुकानदार जगन्नाथ तंवर के अनुसार, धीमी आंच पर बनी कचौरी ज्यादा कुरकुरी और स्वादिष्ट होती है. यही वजह है कि यहां रोजाना करीब तीन हजार कचौरी और समोसे तैयार होते हैं और दूर-दूर से ग्राहक स्वाद लेने पहुंचते हैं.

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बीकानेर. ईरान-अमेरिका तनाव और हॉर्मूज क्षेत्र में बढ़ते वैश्विक संकट का असर अब भारत के बाजारों में भी दिखाई देने लगा है. एलपीजी गैस की आपूर्ति और कीमतों को लेकर बढ़ती चिंता के बीच बीकानेर के एक दुकानदार ने देसी तरीका अपनाकर लकड़ी और कोयले की भट्टी पर कचौरी और समोसे बनाना शुरू कर दिया है. खास बात यह है कि इस पारंपरिक तरीके से बने समोसे और कचौरी का स्वाद लोगों को इतना पसंद आ रहा है कि दूर-दूर से ग्राहक यहां पहुंच रहे हैं. देसी चूल्हे की खुशबू और पारंपरिक मसालों का मेल ही बीकानेर की इस दुकान को खास पहचान दिला रहा है.

बीकानेर के कोटगेट रेलवे क्रॉसिंग स्थित फड़ बाजार में करीब 40 साल पुरानी तंवर परिवार की दुकान आज भी पुराने अंदाज में चल रही है. यहां रोजाना लकड़ी और कोयले की धीमी आंच पर हजारों कचौरी और समोसे तैयार किए जाते हैं.  दुकानदार जगन्नाथ तंवर ने बताया कि एलपीजी गैस लगातार महंगी पड़ रही है और वर्तमान अंतरराष्ट्रीय परिस्थितियों के चलते गैस आसानी से उपलब्ध भी नहीं हो पा रही. ऐसे में उन्होंने फिर से पारंपरिक भट्टी का सहारा लिया.

लकड़ी और कोयला भी अब नहीं रहे सस्ते

उन्होंने बताया कि लकड़ी और कोयला भी अब सस्ते नहीं हैं, लेकिन यह आसानी से मिल जाते हैं. वहीं चूल्हे पर बनने वाली कचौरी और समोसे का स्वाद भी गैस पर बने नाश्ते से बेहतर होता है. यही कारण है कि ग्राहकों की पसंद आज भी देसी भट्टी वाली कचौरी बनी हुई है.  तंवर ने बताया कि पहले दुकान पर मिट्टी के तेल वाले स्टोव का इस्तेमाल होता था, लेकिन समय के साथ वह व्यवस्था बंद हो गई. इसके बाद लकड़ी और कोयले की भट्टी लगाई गई. उनका कहना है कि धीमी आंच पर तली गई कचौरी ज्यादा कुरकुरी और स्वादिष्ट बनती है.

रोजाना 3 हजार कचौरी और समोसे होते हैं तैयार

दुकान पर सुबह 6 बजे से काम शुरू हो जाता है. एक बार में बड़ी कढ़ाई में करीब 200 कचौरी और समोसे तले जाते हैं. रोजाना यहां करीब तीन हजार कचौरी और समोसे तैयार किए जाते हैं. मात्र 10 रुपये में मिलने वाली कचौरी का स्वाद लेने के लिए शहर ही नहीं, बाहर से आने वाले लोग भी यहां पहुंचते हैं. समोसे में आलू, मिर्च, अदरक, पुदीना, धनिया और गर्म मसालों का इस्तेमाल किया जाता है, जबकि कचौरी में दाल, काली मिर्च, लौंग और खास मसाले डाले जाते हैं.

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दीप रंजन सिंह 2016 से मीडिया में जुड़े हुए हैं. हिंदुस्तान, दैनिक भास्कर, ईटीवी भारत और डेलीहंट में अपनी सेवाएं दे चुके हैं. 2022 से News18 हिंदी में अपनी सेवाएं दे रहे हैं. एजुकेशन, कृषि, राजनीति, खेल, लाइफस्ट…और पढ़ें



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निवेशकों के लिए जरूरी खबर! शेयर बाजार में कब है बकरीद की छुट्टी?


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Share Market Holiday Bakrid: केंद्र सरकार ने बकरीद की छुट्टी को लेकर जारी कन्फ्यूजन खत्म करते हुए 28 मई 2026 को गजेटेड हॉलिडे घोषित कर दिया है. इस दिन National Stock Exchange और Bombay Stock Exchange में भी ट्रेडिंग होगी या नहीं, ये सवाल कई निवेशकों के मन में है. पहले ये छुट्टी 27 मई को तय थी, लेकिन चांद दिखने के आधार पर तारीख बदली गई है. मई महीने में वीकेंड और छुट्टियों को मिलाकर कुल 11 दिन शेयर बाजार बंद रहा है.

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शेयर बाजार में बकरीद के मौके पर छुट्टी रहने वाली है.

केंद्र सरकार ने बकरीद (ईद-उल-जुहा) की छुट्टी को लेकर लोगों का कन्फ्यूजन दूर कर दिया है. कार्मिक मंत्रालय (DoPT) ने आधिकारिक नोटिफिकेशन जारी करके 28 मई 2026 को गजेटेड छुट्टी घोषित कर दी है. पहले यह छुट्टी 27 मई को तय थी, लेकिन चांद दिखने के आधार पर तारीख बदल दी गई है. यह फैसला दिल्ली और आसपास के क्षेत्रों के लिए लिया गया है. इससे केंद्र सरकार के कर्मचारियों को साफ जानकारी मिल गई है.

कई निवेशकों को इस बात की अभी भी कंफ्यूजन है कि नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) में बकरीद की छुट्टी किस दिन पर दी जाएगी.

मई में कितने दिनों की छुट्टी?

मई महीने में शेयर बाजार निवेशकों को कई लंबे ब्रेक मिले हैं. इस महीने कुल 11 दिन ऐसे रहेंगे जब बाजार में कोई कारोबार नहीं हुआ. इसकी शुरुआत 1 मई से हुई, जब बाजार छुट्टी के कारण बंद रहा. शुक्रवार को अवकाश पड़ने से निवेशकों को लगातार तीन दिन का लंबा वीकेंड मिल गया. इसके बाद भी पूरे महीने में शनिवार और रविवार की वजह से कई दिन बाजार बंद रहा. मई में 2, 9, 16, 23 और 30 तारीख को शनिवार पड़े हैं, जबकि 3, 10, 17, 24 और 31 तारीख को रविवार रहा है. यानी वीकेंड और छुट्टियों को मिलाकर पूरे महीने में कुल 11 दिन शेयर बाजार में कारोबार नहीं हुआ. लगातार छुट्टियों का असर बाजार की गतिविधियों और ट्रेडिंग वॉल्यूम पर भी देखने को मिला है.

शेयर बाजार में किस दिन बकरीद की छुट्टी?

बता दें कि 28 मई 2026 को नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) और बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज (BSE) दोनों बंद रहेंगे. यानी बकरीद के मौके पर ट्रेडिंग नहीं होगी. इसी हफ्ते में शनिवार यानी 30 मई और रविवार 31 मई को भी बाजार बंद रहेगा. हालांकि, भारतीय शेयर बाजार बकरीद पर बंद है, लेकिन दुनिया के दूसरे बड़े बाजारों में कारोबार जारी रहेगा. अमेरिका और एशियाई बाजारों में होने वाली हलचल का असर सीधे शुक्रवार को भारतीय बाजार पर देखने को मिल सकता है.

29 मई को बाजार खुलने पर निवेशकों की नजर पिछले दिन के ग्लोबल डेटा, अंतरराष्ट्रीय घटनाओं और विदेशी बाजारों के रुख पर रहेगी. निवेशकों को सलाह दी जाती है कि वे इस छुट्टी के दौरान भी ग्लोबल मार्केट से जुड़ी बड़ी खबरों और आर्थिक संकेतों पर नजर बनाए रखें, ताकि बाजार खुलने पर सही निवेश फैसला ले सकें.

ईद-उल-जुहा पर सरकार ने दी जानकारी

केंद्र सरकार के कार्मिक मंत्रालय ने कहा कि दिल्ली में ईद-उल-जुहा 28 मई 2026 को मनाई जाएगी. सभी केंद्र सरकार के दफ्तरों में 28 मई गुरुवार को पूर्ण छुट्टी रहेगी. दिल्ली और नई दिल्ली के बाहर केंद्र सरकार के कार्यालयों के लिए छुट्टी का फैसला स्थानीय चांद दिखने या राज्य सरकार के अनुसार लिया जा सकता है. बकरीद इस्लाम धर्म का अहम त्योहार है. इस दिन लोग कुर्बानी देते हैं और खुशी मनाते हैं.

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यशस्वी यादवSub Editor

यशस्वी यादव एक अनुभवी बिजनेस राइटर हैं, जिन्हें मीडिया इंडस्ट्री में दो साल का अनुभव है। ये नेटवर्क18 के साथ मनी सेक्शन में सब-एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं। यशस्वी का फोकस बिजनेस और फाइनेंस से जुड़ी खबरों को रिस…और पढ़ें



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‘छुपकर शादी नहीं करूंगी, वादा है’, कंगना ने मंगलसूत्र लुक और शादी की अफवाहों पर दी सफाई


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कंगना रनौत ने अपनी शादी की अफवाहों पर प्रतिक्रिया दी. उन्होंने इंस्टाग्राम पर अपनी बात साफ की और यह भी सवाल उठाया कि उनकी पसंद इतनी बड़ी चर्चा का विषय क्यों बन गई है. कंगना हाल ही में पारंपरिक हरे चूड़ियों और मंगलसूत्र में नजर आईं, जिससे सोशल मीडिया पर यह चर्चा शुरू हो गई कि क्या उन्होंने गुपचुप शादी कर ली है.

कंगना रनौत की शादी की चर्चा पिछले कुछ दिनों से चल रही है. मंगलसूत्र पहने हुए उनकी तस्वीर वायरल होने के बाद से फैंस यह जानने को उत्सुक हो गए कि उनकी जिंदगी में ‘मिस्ट्री मैन’ कौन है. शुक्रवार को कंगना रनौत ने इंस्टाग्राम पर अफवाहों का जवाब दिया और पूछा कि उनके पारंपरिक गहनों की पसंद इतनी बड़ी चर्चा का विषय क्यों बन गई है. (फोटो साभारः इंस्टाग्राम)

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कंगना रनौत ने अपनी इंस्टाग्राम स्टोरी पर एक वीडियो शेयर किया जिसमें वह पारंपरिक कपड़ों के साथ मंगलसूत्र और हरे चूड़ियां पहने नजर आ रही हैं. इस पर सफाई देते हुए कंगना ने कहा कि उन्हें कई फोन आ रहे हैं और लोग पूछ रहे हैं कि यह इतना बड़ा मुद्दा क्यों है? (फोटो साभारः इंस्टाग्राम)

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कंगना रनौत ने यह भी बताया कि वह छुपकर शादी नहीं करेंगी. उन्होंने अपनी पोस्ट मे लिखा, “मैं हर दिन शहर में शूटिंग कर रही हूं, किसी ने किरदार के मेकअप में मेरी एक तस्वीर क्लिक कर ली और अब मुझे इतने फोन आ रहे हैं, लेकिन शादीशुदा महिला के लुक में क्या बड़ी बात है?” (फोटो साभारः इंस्टाग्राम)

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kangana Ranaut

कंगना रनौत ने आगे लिखा, “एक्टर हर तरह के किरदार निभाते हैं, मैं छुपकर शादी नहीं करूंगी, वादा है.” एक अन्य पोस्ट में कंगना ने बताया कि वह गर्मी में बाहर शूटिंग कर रही हैं. (फोटो साभारः इंस्टाग्राम)

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कंगना रनौत ने लिखा, “न्यूज एंकर अपने एसी स्टूडियो से बाहर की गर्मी और तापमान की शिकायत कर रहे हैं, लेकिन हमारे जैसे लोग जो बाहर शूटिंग कर रहे हैं, ढेर सारी लाइट्स और बंद जगहों में, हाहा, शिकायत करना बंद करो दोस्तों, जिंदगी तब तक शानदार है जब तक वह आपको चुनौती देती है, अगर सब आसान और अनुमानित हो तो वह मौत जैसा है, हैप्पी समर.” (फोटो साभारः इंस्टाग्राम)

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वहीं, कंगना अपनी आने वाली फिल्म ‘क्वीन 2’ की शूटिंग में बिजी हैं और उनका वायरल लुक इसी फिल्म के लिए है. एक सूत्र ने हाल ही में एचटी को बताया, “कंगना ने मुंबई में ‘क्वीन 2’ की शूटिंग शुरू कर दी है और वह गेयटी में थीं जब उन्हें जल्दी जाना पड़ा.” (फोटो साभारः इंस्टाग्राम)

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सूत्र ने बताया, “उन्हें डेंटिस्ट के पास जाना था और उनके पास कपड़े बदलने का समय नहीं था. वह शादीशुदा नहीं हैं, यह सिर्फ उनके किरदार का हिस्सा था. उन्हें पता नहीं था कि बाहर पैपराजी खड़े हैं और उनके पास कुछ समझाने का समय नहीं था.”(फोटो साभारः इंस्टाग्राम)

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वर्क फ्रंट की बात करें तो कंगना की फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ भी जल्द रिलीज होने वाली है. यह 12 जून को सिनेमाघरों में आएगी. हाल में उन्होंने फिल्म का पोस्ट शेयर किया था. इसमें वह नर्स के किरदार में हैं. (फोटो साभारः इंस्टाग्राम)

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सामने दुश्‍मन है या अपना ही राफेल, फ्रेंडली फायर का खतरा कैसे टलता है S-400?


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सामने दुश्‍मन है या अपना ही राफेल, फ्रेंडली फायर का खतरा कैसे टलता है S-400?

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S-400 मिसाइल डिफेंस सिस्टम का आईएफएफ (IFF) तकनीक आधुनिक युद्धक्षेत्र में फ्रेंडली फायर यानी अपने ही विमानों पर गलती से होने वाले हमलों को रोकने वाला सुरक्षा कवच है. यह सिस्टम आसमान में अज्ञात लड़ाकू विमानों को एन्क्रिप्टेड रेडियो कोड भेजकर सेकंड्स में मित्र या दुश्मन की सटीक पहचान करता है. भारतीय वायुसेना के एकीकृत नेटवर्क (IACCS) के साथ मिलकर यह तकनीक भारत की हवाई सुरक्षा को अभेद्य और अचूक बनाती है.

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एस-400 एयर डिफेंस सिस्‍टम भारतीय सेना का प्रमुख हिस्‍सा है.

इस्‍लामाबाद से लेकर बीजिंग तक के वॉर-रूम में इस वक्त सबसे बड़ी खलबली भारत को मिलने जा रही S-400 ट्रायम्फ मिसाइल सिस्टम की अगली खेप को लेकर है. कल्पना कीजिए कि आधी रात का वक्त है, सरहद पार पर अचानक एक लड़ाकू विमान भारतीय हवाई सीमा में नजर आता है. कंप्यूटर स्क्रीन पर एक लाल डॉट चमकता है. S-400 का फायर कंट्रोल रडार एक्टिव होता है, उंगलियां उसे मार गिराने के लिए मिसाइल लॉन्च बटन पर टिक जाती हैं, लेकिन तभी एक खामोश इलेक्ट्रॉनिक अंगूठे का निशान आसमान में ही उस विमान की शिनाख्त करता है. क्या वो सच में दुश्मन है या भटके हुए राडार के बीच हमारा ही कोई जांबाज पायलट मौत के मुंह में जाने वाला है? आधुनिक युद्ध के इसी सबसे खौफनाक सस्पेंस, यानी फ्रेंडली फायर को रोकने के लिए S-400 के भीतर एक ऐसा अदृश्य पहरेदार बैठा है, जिसे सैन्य विज्ञान की भाषा में IFF यानी ‘आइडेंटिफिकेशन फ्रेंड और फो’ सिस्टम कहते हैं.

आधुनिक युद्धक्षेत्र में सबसे बड़ी चुनौती दुश्मन को मार गिराना नहीं बल्कि भ्रम की स्थिति में अपने ही विमानों को बचाना होता है. इसे सैन्य भाषा में फ्रेंडली फायर या ब्लू ऑन ब्लू क्रैश कहा जाता है. S-400 का IFF (Identification Friend or Foe – मित्र या शत्रु पहचान) सिस्टम इसी घातक गलती को रोकने वाला सबसे बड़ा सुरक्षा कवच है.

S-400 का आईएएफ नेटवर्क से जुड़ाव
S-400 का IFF एक एडवांस इलेक्ट्रॉनिक कोडेड सिस्टम है. जब भी इसके रडार की नजर आसमान में किसी अज्ञात उड़ती हुई वस्तु (UFO या एयरक्राफ्ट) पर पड़ती है तो मिसाइल दागने से पहले इसका कंप्यूटर एक अत्यधिक सुरक्षित, एन्क्रिप्टेड (गुप्त कोड वाला) रेडियो सिग्नल भेजता है. इसे चैलेंज कहते हैं. सामने आ रहे विमान में लगा ट्रांसपोंडर अगर सही रिस्पॉन्स वापस भेज देता है, तो S-400 उसे फ्रेंड (मित्र) मान लेता है.

विश्लेषण के स्तर पर देखें तो भारत के लिए सबसे बड़ी चुनौती रूस के इस सिस्टम को भारतीय वायुसेना के स्वदेशी IACCS (Integrated Air Command and Control System – एकीकृत वायु कमान और नियंत्रण प्रणाली) के साथ जोड़ना था. यदि रूसी मूल का S-400 भारतीय वायुसेना के फ्रांस निर्मित राफेल, स्वदेशी तेजस और इजरायली रडार प्रणालियों से सीधे बात नहीं कर पाता तो फ्रेंडली फायर का खतरा बढ़ जाता. भारतीय इंजीनियरों ने इसमें स्वदेशी सुरक्षित डेटा-लिंक और आईएएफ-विशिष्ट (IAF-specific) गुप्त कोड्स को सफलतापूर्वक इंटीग्रेट किया है जिससे यह खतरा पूरी तरह टल जाता है.

S-400 IFF की 5 बड़ी ताकतें
• सेकेंड्स का खेल: यह पूरी पहचान प्रक्रिया पलक झपकते ही (मिलिसेकंड्स में) पूरी हो जाती है, जिससे ऑपरेटर को फैसला लेने में देरी नहीं होती.
• एंटी-जैमिंग तकनीक: दुश्मन देश इस कोड को हैक या जैम (Jam) न कर सके इसके लिए S-400 की फ्रीक्वेंसी लगातार बदलती रहती है.
• ऑटोमैटिक लॉक सिस्टम: अगर आसमान में मौजूद टारगेट की पहचान मित्र के रूप में हो जाती है तो S-400 का फायर कंट्रोल रडार मिसाइल लॉन्च बटन को ऑटोमैटिकली ब्लॉक कर देता है.
• मल्टी-टारगेट ट्रैकिंग: यह सिस्टम एक साथ 300 से ज्यादा विमानों से चैलेंज और रिस्पॉन्स की प्रक्रिया चला सकता है.
• क्रॉस-प्लेटफॉर्म सिंक: यह भारतीय नौसेना के युद्धपोतों और थल सेना के एयर डिफेंस रडार के साथ भी रियल-टाइम डेटा शेयर करता है.

सवाल-जवाब
क्या दुश्मन देश भारत के IFF कोड्स को कॉपी करके S-400 को धोखा दे सकता है?

नहीं, यह मुमकिन नहीं है. आईएएफ के नेटवर्क में इस्तेमाल होने वाले एन्क्रिप्शन कोड्स क्रिप्टोग्राफिकली सिक्योर होते हैं, जो हर मिशन या कुछ घंटों में पूरी तरह बदल जाते हैं. अगर दुश्मन हमारे विमान की नकल भी कर ले तो भी बिना सही डिजिटल चाबी के S-400 उसे तुरंत शत्रु घोषित कर देगा.

यदि किसी भारतीय विमान का ट्रांसपोंडर युद्ध के दौरान खराब हो जाए तो क्या S-400 उसे मार गिराएगा?

ट्रांसपोंडर खराब होने पर भी सीधे मिसाइल नहीं दागी जाती. S-400 का रडार विमान की गति, उड़ान के रूट और बेस स्टेशन से मिले इनपुट का विश्लेषण करता है. साथ ही, ग्राउंड कंट्रोलर्स (IACCS) मैन्युअल रूप से इसकी पुष्टि करते हैं कि उस क्षेत्र में हमारा कोई विमान है या नहीं.

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Sandeep GuptaChief Sub Editor

डिजिटल पत्रकारिता में खबरों की गहरी समझ रखने वाले संदीप गुप्ता वर्तमान में News18 इंडिया में बतौर चीफ सब-एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. 16 वर्षों से सुदीर्घ पत्रकारीय सफर में इन्होंने अपनी कलम से जटिल विषयों को …और पढ़ें



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