वाराणसी कोर्ट ने काशी हिन्दू विश्विद्यालय में स्थित बिरला ‘अ’ छात्रावास के गेट पर पुरानी रंजिश को लेकर साथी छात्र पर पिस्टल से जानलेवा हमला करने के मामले में रोहतास, बिहार निवासी आरोपित 25 हजार के इनामी बीएचयू छात्र नेता क्षितिज उपाध्याय को राहत दे दी है। अपर जिला जज (पंचम) यजुवेंद्र विक्रम सिंह की अदालत ने आरोपित छात्र नेता को 50-50 हजार रुपए की दो जमानतें एवं बंधपत्र देने पर रिहा करने का आदेश दिया। अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव व चंद्रबली पटेल ने पक्ष रखा। प्रकरण के अनुसार बीएचयू में पढ़ रहे बीए तृतीय वर्ष के छात्र रोशन मिश्रा ने लंका थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि 21 फरवरी 2026 को समय लगभग 9 से 9.30 बजे रात को अपने साथी विशाल के साथ बिरला ‘अ’ छात्रावास के गेट पर खड़ा था। उसी दौरान मोटर साइकिल से तीन व्यक्ति क्रमशः पीयूष कुमार तिवारी निवासी सासाराम, ऋषभ और तपस आये और हमारे ऊपर जान से मारने की नियत से पिस्टल से चार गोलियां चलायी। एक गोली मेरे सर के बगल से गुजरी तथा दूसरी छाती के बगल से निकली। जान बचाने के लिए वादी छात्र छात्रावास के अन्दर भागने लगा, तब भी उनलोगों द्वारा दो गोलियां मेरे ऊपर पीछे से फायर किया गया। यह सारी घटना पूर्व निष्काषित छात्र क्षीतिज उपाध्याय व अभिषेक उपाध्याय के इशारे पर किया गया है। इस घटना के बाद से वह काफी डरा और सहमा हुआ है। उसे अंदेशा है कि इन लोगो के द्वारा कभी भी उसकी हत्या कर दिया जायेगा। इस मामले में पुलिस ने सभी आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। इस मामले में आरोपित क्षितिज उपाध्याय काफी दिनों से फरार चल रहा था। जिसके बाद उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करते हुए 25 हजार का ईनाम घोषित किया गया था। जिसके बाद आरोपित छात्र नेता ने पिछले दिनों पुलिस को चकमा देते हुए अपने अधिवक्ता अनुज यादव व चंद्रबली पटेल के जरिए कोर्ट में आत्म समर्पण कर जेल चला गया था।
सम्राट सरकार ने सोमवार देर रात बड़े स्तर पर IAS अधिकारियों के तबादले किए हैं। सरकार ने कई विभागों के प्रधान सचिव, अपर मुख्य सचिव और सचिव स्तर के अधिकारियों की जिम्मेदारी बदली है। पंकज कुमार को गृह विभाग का प्रधान सचिव बनाया गया है, जबकि राजेश कुमार को पटना प्रमंडल का नया आयुक्त बनाया गया है। इसके अलावा वित्त, ग्रामीण विकास, शिक्षा, निगरानी, समाज कल्याण, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण और मद्य निषेध विभाग में भी अधिकारियों की जिम्मेदारी बदली गई है। पंकज कुमार को गृह विभाग की जिम्मेदारी 1997 बैच के IAS अधिकारी पंकज कुमार, जो अब तक ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव थे, उन्हें स्थानांतरित कर गृह विभाग का प्रधान सचिव बनाया गया है। वे जांच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग के अतिरिक्त प्रभार में पहले की तरह बने रहेंगे। पंकज कुमार के गृह विभाग में आने के बाद कुंदन कुमार गृह विभाग के सचिव के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त हो जाएंगे। कुंदन कुमार उद्योग विभाग के सचिव के साथ कई अन्य जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। राजेश कुमार बने पटना के नए कमिश्नर 2001 बैच के IAS अधिकारी राजेश कुमार को लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के प्रधान सचिव पद से स्थानांतरित कर पटना प्रमंडल का नया आयुक्त बनाया गया है। वहीं, पटना के मौजूदा आयुक्त मयंक वरवड़े को स्थानांतरित कर निगरानी विभाग का प्रधान सचिव बनाया गया है। एचआर श्रीनिवास बने ग्रामीण विकास विभाग के ACS 1996 बैच के IAS अधिकारी एचआर श्रीनिवास को समाज कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव पद से स्थानांतरित कर ग्रामीण विकास विभाग का अपर मुख्य सचिव बनाया गया है। श्रीनिवास जांच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग के अतिरिक्त प्रभार में भी बने रहेंगे। अरविंद कुमार चौधरी को बिपार्ड का अतिरिक्त प्रभार 1995 बैच के IAS अधिकारी अरविंद कुमार चौधरी मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव हैं। वे अगले आदेश तक बिपार्ड (BIPARD) के महानिदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी संभालेंगे। वे बिहार राज्य संयुक्त प्रवेश परीक्षा पर्षद के परीक्षा नियंत्रक के अतिरिक्त प्रभार में भी बने रहेंगे। विनय कुमार बने वित्त विभाग के प्रधान सचिव 1999 बैच के IAS अधिकारी विनय कुमार को नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव पद से स्थानांतरित कर वित्त विभाग का प्रधान सचिव बनाया गया है। हालांकि, वे अगले आदेश तक नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव का अतिरिक्त प्रभार भी संभालते रहेंगे। संजय कुमार सिंह को मद्य निषेध विभाग की जिम्मेदारी 2007 बैच के IAS अधिकारी संजय कुमार सिंह को वित्त विभाग के सचिव (सम्पूर्ण प्रभार) पद से स्थानांतरित कर मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग का सचिव बनाया गया है। वे वाणिज्य कर विभाग के सचिव, वाणिज्य कर आयुक्त/अपर आयुक्त GST और मुख्यमंत्री सचिवालय के सचिव का अतिरिक्त प्रभार पहले की तरह संभालते रहेंगे। इस बदलाव के बाद नवीन कुमार मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के प्रभारी सचिव के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त हो जाएंगे। शिक्षा विभाग में भी बड़ा बदलाव 2010 बैच के IAS अधिकारी राजीव रौशन को उच्च शिक्षा विभाग के सचिव पद से स्थानांतरित कर शिक्षा विभाग का सचिव बनाया गया है। वे उच्च शिक्षा विभाग के सचिव का अतिरिक्त प्रभार भी संभालते रहेंगे। इसके साथ ही वित्त विभाग के सचिव (संसाधन) का अतिरिक्त प्रभार भी उनके पास बना रहेगा। वहीं, विनोद सिंह गुंजियाल, जो निर्वाचन विभाग के सचिव-सह-मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी हैं, उन्हें समाज कल्याण विभाग के सचिव का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। वे शिक्षा विभाग के सचिव के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त हो जाएंगे। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग में भी बदलाव 2008 बैच के IAS अधिकारी बी. कार्तिकेय धनजी को लघु जल संसाधन विभाग के सचिव पद से स्थानांतरित कर लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग का सचिव बनाया गया है। वे जांच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग के अतिरिक्त प्रभार में पहले की तरह बने रहेंगे। चंद्रशेखर सिंह जल संसाधन विभाग के सचिव बने रहेंगे और उन्हें लघु जल संसाधन विभाग के सचिव का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। बिहार शिक्षा परियोजना परिषद की जिम्मेदारी नवदीप शुक्ला को 2013 बैच के IAS अधिकारी नवदीप शुक्ला, जो युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग के विशेष सचिव हैं, अगले आदेश तक बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के परियोजना निदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी संभालेंगे। वे बिहार कौशल विकास मिशन के अपर कार्यपालक पदाधिकारी का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे हैं।
ग्वालियर की बदहाल सड़कों को लेकर दायर जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई। इस दौरान हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया है। दरअसल, जिस सड़क से जांच कमीशन को सैंपलिंग करना था, नगर निगम ने जांच से ठीक पहले उसकी ऊपरी परत खुदवाकर नई सड़क बनाना शुरू कर दिया। मामले की भनक लगते ही हाईकोर्ट ने नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय को चैंबर में तलब किया। निगमायुक्त द्वारा कोर्ट में दिखाए गए वीडियो व साक्ष्यों को देखने के बाद जस्टिस जीएस अहलूवालिया व जस्टिस अनुराधा शुक्ला की बेंच ने सख्त निर्देश दिए हैं। कहा है कि कमिश्नर अपने मोबाइल से कोई भी वीडियो, फोटो या व्हाट्सएप चैट डिलीट नहीं करेंगे, ऐसा करने पर फोन जब्त कर लिया जाएगा। एक फीट गहराई के नीचे से लिए जाएंगे सैंपल याचिकाकर्ता के वकील अवधेश सिंह तोमर ने कोर्ट में फोटो-वीडियो पेश कर खुलासा किया कि 19 अगस्त को सड़क नंबर 7 (बेटी बचाओ चौराहा से गुड़ा गुड़ी का नाका) की सैंपलिंग तय थी, लेकिन निगम ने उसकी ऊपरी परत उखाड़कर निर्माण शुरू कर दिया। क्या सरकारी काम व्हाट्सऐप पर करने की अनुमति है? निगमायुक्त ने कोर्ट को बताया कि सोशल मीडिया पर वीडियो देखने के बाद उन्होंने कार्यपालन यंत्री को व्हाट्सएप पर गड्ढे भरने के निर्देश दिए थे। इस पर कोर्ट ने पूछा कि क्या सरकारी काम व्हाट्सएप के जरिए कराने की अनुमति है? और जब सालभर से सड़क खराब थी, तो सैंपलिंग तय होते ही बिना कोर्ट की अनुमति के मरम्मत क्यों शुरू कराई गई? सैंपलिंग का नया तरीका निगमायुक्त द्वारा यह स्वीकार करने पर कि 1 फीट गहराई तक सड़क खोद दी गई है, हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि सैंपलिंग करते समय ऊपर की 1 फीट परत को छोड़कर उसके नीचे से ही सैंपल लिया जाएगा। साथ ही, निगम के रवैये को देखते हुए सैंपलिंग 20 की जगह 19 अगस्त को ही कराने के आदेश दिए गए। ‘जनता त्रस्त अधिकारी मस्त’ नाम से निगमायुक्त के फोन में पहले से था वीडियो सुनवाई के दौरान यह चौंकाने वाली बात भी सामने आई कि निगमायुक्त सड़क की बदहाली से पहले से वाकिफ थे। उनके मोबाइल में एक वीडियो मिला, जिसका टाइटल था “जनता त्रस्त अधिकारी मस्त, बीते एक साल से बेटी बचाओ चौराहे के पास की सड़क की स्थिति बदहाल, आम जन परेशान, जिम्मेदारों ने आंखों पर बांध रखी पट्टी।” यह वीडियो खुद निगमायुक्त ने निगम के वकील को भेजा था। कोर्ट ने दर्ज किया कि जब कमिश्नर के पास यह वीडियो पहले से था और वे स्थिति से अवगत थे, तो सैंपलिंग तय होते ही अचानक सड़क को खोदकर नया बनाने का खेल क्यों रचा गया। डीपीआर छिपाई तो अफसरों पर होगी अवमानना की कार्रवाई गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए कोर्ट ने कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। हर स्थान से कुल 84 सैंपल लिए जाएंगे। प्रत्येक स्थान के चार सैंपल ग्वालियर एसएसपी कार्यालय की मोहर वाले मोम से सील होंगे। एक सैंपल पीडब्ल्यूडी टेस्टिंग लैब और दूसरा ग्रामीण यांत्रिकी सेवा लैब भेजा जाएगा। तीसरा सैंपल जिला न्यायालय के मालखाने में सुरक्षित रहेगा (ताकि क्रॉस चेक किया जा सके) और चौथा नगर निगम के पास रहेगा। नगर निगम, पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई को संबंधित सड़क की मूल डीपीआर और मेजरमेंट बुक देनी होगी। रिकॉर्ड छिपाने या बाढ़/आग का बहाना बनाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ व्यक्तिगत अवमानना की कार्रवाई होगी।
अजब स्वाद, गजब एक्शन! पुरानी दिल्ली का ‘धुरंधर ऑमलेट’, उछाल-उछाल कर बनता
Dhurandhar Omelette Recipe: स्ट्रीट फूड के दीवानों के लिए मशहूर पुरानी दिल्ली के चावड़ी बाजार से एक नया और अनूठा स्वाद सामने आया है. अपने अनोखे प्रयोगों के लिए चर्चित ‘सिकंदर ऑमलेट’ के मालिक सिकंदर भाई ने फिल्म ‘धुरंधर 2’ की सफलता और देशभक्ति के जोश से प्रेरित होकर एक नया ‘धुरंधर ऑमलेट’ पेश किया है. इस खास ऑमलेट को बनाने का अंदाज भी बिल्कुल फिल्मी और एक्शन से भरपूर है. सिकंदर भाई मटर के बेस पर 3 अंडों का ऑमलेट तैयार करते हैं, जिसके ऊपर 2 उबले अंडों (बॉयल्ड एग) को गार्निश किया जाता है. फिर अपने खास सीक्रेट मसालों और हरे धनिये से सजाकर, वे इसे उछाल-उछालकर तेज आंच पर सेकते हैं. प्लेट में परोसने के बाद वे इस पर बड़े ही चाव से ‘धुरंधर ऑमलेट’ लिखते हैं. लगभग 65 साल पुरानी इस दुकान को संभालने वाले सिकंदर भाई 200 से अधिक वैरायटी के ऑमलेट बनाने का दावा करते हैं. इस नए एक्शन वाले धुरंधर ऑमलेट की कीमत मात्र 80 रुपये रखी गई है. अगर आप भी इसका स्वाद चखना चाहते हैं, तो मंगलवार को छोड़कर किसी भी दिन शाम 4 बजे से रात 11 बजे के बीच चावड़ी बाजार स्थित इनकी दुकान पर पहुंच सकते हैं.
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 14 अगस्त को न्यूयॉर्क के गार्डन सिटी में भाषण देते हुए।
अमेरिका और ईरान के बीच जून में हुआ 60 दिन का समझौता सोमवार को खत्म हो गया। इसका मकसद दोनों देशों के बीच युद्ध रोकना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर विवाद का समाधान निकालना था। डेडलाइन खत्म होने के बावजूद न तो कोई फाइनल समझौता हुआ, न ही अमेरिका ने ईरान पर बड़ा हमला शुरू किया।
60 दिनों के दौरान ट्रम्प ने कई बार कहा कि अगर बातचीत नाकाम रही तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है। माना जा रहा था कि डेडलाइन खत्म होते ही अमेरिका फिर बड़ा हमला कर सकता है।
समयसीमा खत्म होने से ठीक पहले ट्रम्प का रुख बदलता दिखा। एक्सियोस को दिए इंटरव्यू में ट्रम्प ने कहा, “हम पहले के मुकाबले हल्का रुख अपना रहे हैं।” वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक अमेरिका, ईरान को तीन तरीके से घेर रहा है।
1. आर्थिक दबाव- ईरान की कमाई और अर्थव्यवस्था को कमजोर करना।
2. नौसैनिक नाकाबंदी- ईरान के लिए समुद्र के रास्ते व्यापार मुश्किल करना।
3. बातचीत- सीधे या दूसरे देशों के जरिए ईरान से समझौते की कोशिश करना।
ट्रम्प के इस बयान का मतलब अभी अमेरिका सीधे बड़ा हमला करने की बजाय ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बना रहा है, समुद्र के रास्ते उसका व्यापार रोक रहा है और बातचीत से समझौते की कोशिश भी कर रहा है।
ट्रम्प हमला रोककर क्या हासिल करना चाहते हैं?
ट्रम्प की मौजूदा रणनीति को समझने के लिए सबसे अहम बात यह है कि अमेरिका युद्ध को खत्म नहीं मान रहा है।
ट्रम्प को लगता है कि फिलहाल ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना सैन्य हमले से ज्यादा असरदार हो सकता है।
अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी ने ईरान की आर्थिक मुश्किलों को और बढ़ा दिया है। ट्रम्प का मानना है कि अगर ईरान युद्ध में नहीं उलझा रहेगा तो उसे अपनी असली आर्थिक स्थिति का सामना करना पड़ेगा। जैसे कि बर्बाद बुनियादी ढांचा, कमजोर अर्थव्यवस्था, महंगाई और पैसों की कमी।
यानी अमेरिका का दांव यह है कि युद्ध रोककर ईरान को कमजोर होने दिया जाए। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने शनिवार को कहा कि अमेरिका कूटनीतिक, आर्थिक और सैन्य तीनों तरीकों का इस्तेमाल कर रहा है।
अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि युद्ध जारी रहने पर ईरानी सरकार अपनी आर्थिक परेशानियों के लिए जंग को जिम्मेदार ठहरा सकती है। जब युद्ध नहीं होगा, तब जनता और सरकार को आर्थिक संकट का सामना सीधे करना पड़ेगा।
ईरान में गरीबी दर इस साल 40% से ज्यादा होने का अनुमान है।
ट्रम्प को ईरान के खिलाफ रणनीति क्यों बदलनी पड़ी?
ट्रम्प ने फरवरी में इजराइल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किया था। शुरुआत में उम्मीद थी कि संघर्ष ज्यादा लंबा नहीं चलेगा, लेकिन यह कई महीनों तक खिंच गया।
अब अमेरिका के सामने दो तरह का दबाव है। एक तरफ वह ईरान के खिलाफ अपने सैन्य लक्ष्य हासिल करना चाहता है, दूसरी तरफ लंबे युद्ध की बढ़ती लागत भी उसके लिए चिंता बन रही है।
ट्रम्प लगातार कहते रहे हैं कि ईरान की कमजोर अर्थव्यवस्था अमेरिका की सबसे बड़ी ताकत है। एक इंटरव्यू में ट्रम्प ने कहा था कि अमेरिका के सामने दो रास्ते हैं- या तो ईरान को आर्थिक रूप से टूटने दिया जाए या फिर उस पर बहुत बड़ा सैन्य हमला किया जाए। फिलहाल ट्रम्प पहला रास्ता आजमाते दिख रहे हैं।
हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि अमेरिका ने टकराव खत्म कर दिया है। रॉयटर्स के मुताबिक, ट्रम्प सरकार चीन की उन रिफाइनरियों पर नए प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है जो ईरानी तेल खरीदती हैं।
इसके अलावा ईरान के साथ लेन-देन करने वाले चीनी बैंकों और उन संस्थाओं पर भी कार्रवाई की तैयारी है, जिन पर प्रतिबंधों से बचने में ईरान की मदद करने का आरोप है। यानी हमला भले ही रुका हुआ है, लेकिन दबाव कम नहीं हुआ है।
होर्मुज स्ट्रेट बना सबसे बड़ा सौदेबाजी का मुद्दा
अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा टकराव में होर्मुज स्ट्रेट सबसे बड़ा दांव बन गया है।
दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है। इसलिए होर्मुज स्ट्रेट को लेकर किसी भी तरह की रुकावट का असर सिर्फ अमेरिका और ईरान पर नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के तेल बाजार और समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है।
ईरान इस मुद्दे पर ओमान के साथ बातचीत कर रहा है। 9 अगस्त को ईरानी अधिकारियों ने कहा था कि ओमान के साथ समझौता अंतिम चरण में पहुंच गया है।
लेकिन तेहरान ने यह भी साफ कर दिया कि ओमान के साथ समझौता होने का मतलब यह नहीं है कि होर्मुज स्ट्रेट तुरंत अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खोल दिया जाएगा।
ईरान चाहता है कि अमेरिका पहले नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करे, प्रतिबंध हटाए और युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा दे।
यानी अमेरिका चाहता है कि समुद्री रास्ते और जहाजों की आवाजाही सामान्य हो, जबकि ईरान इसे अमेरिकी रियायतों से जोड़कर देख रहा है।
इसी वजह से होर्मुज स्ट्रेट अब सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं रह गया है। यह दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा सौदेबाजी का हथियार बन चुका है।
युद्ध की बड़ी कीमत चुका रहा अमेरिका
सूत्रों के मुताबिक, ईरान के साथ पांच महीने चले युद्ध में अमेरिका ने लंबी दूरी तक मार करने वाली बड़ी संख्या में मिसाइलें इस्तेमाल की हैं। इनमें ATACMS और प्रिसीजन स्ट्राइक मिसाइल शामिल हैं।
दो सूत्रों ने दावा किया कि अमेरिका ने इन हथियारों का लगभग पूरा भंडार इस्तेमाल कर लिया है, हालांकि उन्होंने सटीक संख्या नहीं बताई।
अमेरिका युद्ध के दौरान कम से कम 45 एमक्यू-9 रीपर ड्रोन भी गंवा चुका है। यह उसके कुल बेड़े का करीब 25% है।
अमेरिकी वायुसेना के मुताबिक, एक रीपर ड्रोन की कीमत उसके उपकरणों के आधार पर 3 से 5 करोड़ डॉलर तक हो सकती है। वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, इन नुकसानों की कुल कीमत 1.3 अरब डॉलर से ज्यादा हो सकती है।
इन ड्रोन का इस्तेमाल खास तौर पर होर्मुज स्ट्रेट के आसपास निगरानी और हमलों के लिए किया गया था। कम ऊंचाई और धीमी गति के कारण ये ईरानी बलों और ईरान समर्थित समूहों के निशाने पर रहे।
युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिका के पास करीब 185 रीपर ड्रोन थे। इनमें 165 वायुसेना और 20 मरीन कॉर्प्स के पास थे। मई में अमेरिकी वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल डेविड टैबर ने सीनेट को बताया था कि वायुसेना के पास करीब 135 रीपर ड्रोन बचे हैं।
पेंटागन पहले से ही रीपर ड्रोन को धीरे-धीरे हटाकर उनकी जगह कम कीमत वाले नए हथियारबंद ड्रोन लाने की योजना पर काम कर रहा है।
लंबी दूरी की मिसाइलों की कीमत भी 10 लाख डॉलर से ज्यादा होती है। इनका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में भी किया गया है।
अगर अमेरिका के पास इन हथियारों का भंडार कम होता है तो भविष्य में ईरान पर बड़े हमले या रूस और चीन जैसे दूसरे प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ उसकी सैन्य क्षमता प्रभावित हो सकती है।
हालांकि एक अन्य अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि अमेरिका दुनिया भर में मौजूद अपने सैन्य भंडार से इन हथियारों की फिर से आपूर्ति कर सकता है।
ईरान की मांगें क्या हैं?
अमेरिका आर्थिक दबाव बढ़ाकर ईरान को समझौते के लिए तैयार करना चाहता है। लेकिन ईरान भी अपने पास मौजूद विकल्पों का इस्तेमाल कर रहा है। होर्मुज स्ट्रेट इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। ईरान ने अमेरिका के सामने होर्मुज खोलने के लिए 6 मांगें रखी हैं।
यानी अमेरिका आर्थिक प्रतिबंधों को दबाव के हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है, जबकि ईरान दुनिया के सबसे अहम समुद्री तेल मार्ग पर अपनी पकड़ को दबाव के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है।
यही वजह है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत की गुंजाइश होते हुए भी समझौते की राह आसान नहीं है। ——————————–ईरान से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें…
ट्रम्प ने ओमान पर बमबारी की धमकी दी:कहा- ईरान मुद्दे पर बीच में न आए; IRGC का अमेरिका से बातचीत का दावा खारिज
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को लेकर ओमान को बमबारी की धमकी दी है। फॉक्स न्यूज के मुताबिक, ट्रम्प ने कहा कि अगर ओमान अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में बाधा बना, तो अमेरिका उस पर ‘बमबारी करेगा’। पूरी खबर यहां पढ़ें…
दिल्ली विश्वविद्यालय छात्रसंघ (DUSU) चुनाव में इस बार शक्ति प्रदर्शन, हुड़दंग और गाड़ियों के काफिलों पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने कड़ा शिकंजा कस दिया है। प्रचार के नाम पर ट्रैफिक जाम करने, सार्वजनिक जगहों पर गाड़ियां खड़ी करने और शराब या नशे का इस्तेमाल करने वाले प्रत्याशियों पर सीधी कार्रवाई की जाएगी। नियम तोड़ने पर बिना किसी चेतावनी के प्रत्याशी का नामांकन तुरंत रद्द कर दिया जाएगा। सोमवार को डीयू प्रॉक्टर कार्यालय में चीफ रिटर्निंग ऑफिसर, छात्र संगठनों के प्रतिनिधियों और दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों (ACP नॉर्थ, मॉरिस नगर थाना और ट्रैफिक पुलिस) की संयुक्त बैठक में लिंगदोह कमेटी व दिल्ली हाईकोर्ट के निर्देशों के तहत सख्त दिशानिर्देश तय किए गए। जानिए DUSU चुनाव प्रचार के सख्त नियम बिना स्टीकर एंट्री नहीं: चुनाव प्रचार में शामिल वाहनों पर प्रॉक्टर ऑफिस का अधिकृत स्टीकर लगाना अनिवार्य होगा। बिना स्टीकर वाले वाहनों को कैंपस या कॉलेजों में प्रवेश नहीं दिया जाएगा। शराब मिलने पर नामांकन रद्द: प्रत्याशी या समर्थक द्वारा गाड़ी, रोडसाइड या पार्किंग में शराब अथवा किसी भी तरह के नशे का सेवन करने पर संबंधित प्रत्याशी का चुनाव रद्द कर उसे अयोग्य घोषित कर दिया जाएगा। नो-पार्किंग जोन: यूनिवर्सिटी रोड और छात्र मार्ग पर फुटपाथ या सड़क पर वाहन खड़ा करने पर पूरी तरह रोक रहेगी। केवल निर्धारित पार्किंग स्थलों का ही इस्तेमाल किया जा सकेगा। गंदगी फैलाने पर पेनल्टी: प्रचार के दौरान सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने या सड़क पर पैंपलेट-पोस्टर फैलाकर गंदगी करने पर भी कड़ी कानूनी कार्रवाई होगी। डीयू प्रॉक्टर ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि चुनाव लड़ना अधिकार है, लेकिन कैंपस की शांति भंग करने की छूट किसी को नहीं दी जाएगी। स्थिति गंभीर होने पर पूरे चुनाव को भी रद्द करने का विकल्प खुला रखा गया है।
उत्तर पश्चिम रेलवे के जोधपुर मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) अनुराग त्रिपाठी ने सोमवार को जैसलमेर रेलवे स्टेशन का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने स्टेशन पर यात्रियों के लिए उपलब्ध सुविधाओं, सुरक्षा व्यवस्था और साफ-सफाई का जायजा लिया। उन्होंने अधिकारियों को यात्री सुविधाओं को बेहतर बनाने के साथ स्टेशन परिसर में स्वच्छता और व्यवस्थाएं लगातार बनाए रखने के निर्देश दिए। 140 करोड़ की लागत से बन रहा नया स्टेशन डीआरएम ने करीब 140 करोड़ रुपए की लागत से विकसित किए जा रहे नए जैसलमेर रेलवे स्टेशन के निर्माण कार्यों की प्रगति की जानकारी ली। उन्होंने स्टेशन परिसर का निरीक्षण कर यात्री सुविधाओं, परिचालन व्यवस्था और सुरक्षा से जुड़े इंतजामों को देखा। उन्होंने अधिकारियों से कहा कि निर्माण कार्य पूरा होने के बाद सुविधाओं का उचित रखरखाव भी सुनिश्चित किया जाए, ताकि यात्रियों को लंबे समय तक बेहतर सुविधाएं मिल सकें। साबरमती एक्सप्रेस के डिब्बों की जांच निरीक्षण के बाद डीआरएम ने जैसलमेर-साबरमती सुपरफास्ट एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 20491) के कोचों का निरीक्षण किया। उन्होंने ट्रेन में साफ-सफाई और हाउसकीपिंग व्यवस्था को देखा तथा यात्रियों से बातचीत कर उन्हें मिल रही सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। सफाई कर्मचारियों से बातचीत की डीआरएम ने ट्रेन में कार्यरत सफाई कर्मचारियों से भी बातचीत की। उन्होंने कर्मचारियों को जिम्मेदारी के साथ कार्य करने और यात्रियों के साथ विनम्र एवं सहयोगपूर्ण व्यवहार रखने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि ट्रेन में बेहतर साफ-सफाई और यात्रियों के प्रति अच्छा व्यवहार रेलवे की कार्यप्रणाली का महत्वपूर्ण हिस्सा है। निरीक्षण के दौरान जैसलमेर स्टेशन मास्टर पंकज कुमार झा सहित रेलवे के विभिन्न विभागों के अधिकारी और कर्मचारी मौजूद रहे।
नई दिल्ली. एक आम आदमी के लिए 65-70 हजार रुपये का फोन काफी बड़ी बात होती है. फिर भी हिम्मत करके कई बार वो इतना महंगा फोन खरीदते हैं. इस उम्मीद में कि बाकी मोबाइल फोन वाली प्रॉब्लम्स उसमें नहीं होंगी. लेकिन क्या हो कि वो सारी परेशानियां जिससे वह भाग रहा था इस नए महंगे वाले फोन में भी आ जाए. ऐसा ही कुछ हुआ रोहतक के राजबीर फोगाट के साथ. राजबीर पेशे से एक वकील हैं और उन्होंने इसके लिए आईफोन बनाने वाली कंपनी ऐपल को ही कोर्ट में खींच लिया.
राजबीर द्वारा दर्ज शिकायत के अनुसार, उन्होंने जनवरी 2024 में आईफोन 15 खरीदा था. उन्हें इसके लिए 64,999 रुपये चुकाने पड़े. फोगाट की माने तो फोन में शुरू से ही गड़बड़ियां दिख रही थीं. उन्होंने इसकी शिकायत सर्विस सेंटर पर की. वहां फोन में कुछ सेटिंग्स चेंज की गई और कहा गया कि अब फोन ठीक चलेगा. ऐसा हुआ नहीं. फोगाट फिर फोन को लेकर सर्विस सेंटर पहुंचे. इस बार उन्हें कस्टमर केयर को कॉल लगाने के लिए कह दिया गया. यहां से भाग-दौड़ का मानो एक नया अध्याय शुरू हो गया.
कभी कस्टमर केयर तो कभी सर्विस सेंटर फोगाट ने जब कस्टमर केयर से बात की तो उन्हें कहा गया कि फोन अपडेट कर दें, इसके बाद कॉल ड्रॉप और नेटवर्क इश्यू जैसी परेशानियों खत्म हो जाएंगी. आपको बता दें कि फोगाट ने फोन के ओवरहीट होने की भी शिकायत की थी. बहरहाल, उन्होंने फोन अपेडट किया लेकिन कुछ नहीं सुधरा. वह फिर एक बार सर्विस सेंटर गए. इस बार कहा गया कि आप आईक्लाउड स्टोरेज खरीदिए. उन्होंने 75 रुपये महीना पर उसे भी खरीदा. उन्हें फिर कहा गया कि अपना नेटवर्क ही बदलिए उसकी वजह से गड़बड़ हो रही है. उन्होंने ऐसा ही किया. वह जियो से एयरटेल पर शिफ्ट कर गए. फिर भी कुछ नहीं बदला. अंत में सर्विस सेंटर ने उनकी बात सुनने से ही मना कर दिया और कहा कि वे अब राजबीर फोगाट की कोई मदद नहीं कर सकते.
कमीशन के पास पहुंचे फोगाट इसके बाद वह कंज्यूमर कमीशन के पास पहुंच गए. उन्होंने रिफंड या फोन रिप्लेस करने की मांग रखी. इसके अलावा उन्होंने मानसिक तनाव और रोजमर्रा के काम में पैदा हुई बाधाओं के लिए भी मुआवजा मांगा.
ऐपल बोला- हमारी गलती नहीं ऐपल ने अपनी गलती मानने से ही इनकार कर दिया. कंपनी ने कहा कि फोन में कोई मैन्युफैक्चरिंग डिफेक्ट नहीं था. आईफोन निर्माता के अनुसार, फोन में ‘अन-ऑथोराइज्ड मोडिफिकेशन’ किए गए जिसकी वजह से ऐसा हुआ. कंपनी का कहना था कि फोन के बटन में डस्ट, अन-अथॉराइज्य रीयर कैमरा लैंस, बैक ग्लास और रीयर माइक्रोफोन के साथ गड़बड़ी मिली थी. कंपनी ने यह भी दावा किया कि कस्टमर को जब ये सारी बातें बताई गईं तो उन्होंने फोन को आगे रिपेयर के लिए सर्विस सेंटर ही नहीं भेजा.
जीत कस्टमर की कैसे हुई रोहतक कंज्यूमर कमीशन ने माना कि ऐपल ने ग्राहक को सही सर्विस नहीं दी. फोगाट ने फोन की खरीद का बिल, कॉल फेल होने के स्क्रीनशॉट और जून 2024 की सर्विस जॉब शीट पेश की थी, जिसमें नेटवर्क, ओवरहीटिंग और ब्लूटूथ जैसी दिक्कतें दर्ज थीं. ऐपल और उसके सर्विस सेंटर ने फोन में कैमरा लेंस और बैक ग्लास से कथित छेड़छाड़ का हवाला दिया, लेकिन इसके सबूत के तौर पर न तो इंजीनियर की रिपोर्ट पेश की गई और न ही कोई स्वतंत्र तकनीकी जांच सामने रखी गई. कमीशन ने कहा कि सिर्फ जॉब शीट में अंदरूनी टिप्पणी दर्ज कर देना यह साबित करने के लिए काफी नहीं है कि ग्राहक ने फोन से छेड़छाड़ की थी.
कितना मिलेगा वापस कमीशन ने यह भी माना कि फोन वारंटी के दौरान खराब हुआ था और ऐपल ने बिना समस्या ठीक किए उसे ग्राहक को वापस कर दिया. इसे सेवा में कमी मानते हुए कमीशन ने ऐपल इंडिया को फोन की कीमत का 30% डेप्रिसिएशन काटकर ₹45,500 वापस करने का आदेश दिया. इस रकम पर 10 जून 2024 से भुगतान होने तक 9% सालाना ब्याज भी देना होगा. इसके अलावा मानसिक परेशानी और उत्पीड़न के लिए ₹5,000 और मुकदमे के खर्च के लिए ₹5,000 देने होंगे. ग्राहक को भुगतान के समय आईफोन ऐपल को वापस करना होगा और आदेश की कॉपी मिलने के 1 महीने के भीतर इसका पालन करना होगा.
सीतापुर के सकरन थाना क्षेत्र में सोमवार शाम प्रेम संबंध को लेकर विवाद के बाद एक युवती को जबरन जहरीला पदार्थ पिलाने का मामला सामने आया है। युवती ने गांव के ही युवक पर मारपीट करने और जहर पिलाने का आरोप लगाया है। घटना के बाद युवती की हालत बिगड़ गई। उसे सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बिसवां ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टरों ने जिला अस्पताल सीतापुर रेफर कर दिया। वहीं, घटना के कुछ देर बाद युवक ने भी कथित तौर पर जहरीला पदार्थ खाकर आत्महत्या का प्रयास किया। उसे भी अस्पताल में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों के अनुसार दोनों की हालत फिलहाल खतरे से बाहर है। लखनऊ से गांव लौट रही थी युवती
पुलिस के अनुसार, घटना सोमवार 17 अगस्त की शाम की है। सकरन थाना क्षेत्र के सीतलपुरवा गांव निवासी करीब 19 वर्षीय ज्योति लखनऊ में काम करती है। सोमवार को वह बस से अपने गांव लौट रही थी। उसी बस में गांव का ही करीब 21 वर्षीय अनूप पुत्र रमाकांत भी लखनऊ से सवार होकर आया था। पुलिस के मुताबिक, दोनों एक-दूसरे को पहले से जानते हैं और उनके बीच बातचीत होती थी।
नहर किनारे विवाद के बाद युवती ने लगाया आरोप
बताया गया कि दोनों महाराजनगर स्थित नहर पुल के पास बस से उतर गए। इसके बाद नहर किनारे करीब एक किलोमीटर दूर जाने के बाद दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हो गया। पुलिस के अनुसार, युवती ने आरोप लगाया कि कहासुनी के दौरान अनूप ने उसके साथ मारपीट की और उसे जबरन जहरीला पदार्थ पिला दिया। इसके बाद उसकी हालत बिगड़ गई।
युवती के बाद युवक ने भी खाया जहरीला पदार्थ
स्थानीय लोगों की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और युवती को अस्पताल पहुंचाया। वहीं, युवती को छोड़कर कुछ दूर जाने के बाद अनूप ने भी कथित तौर पर जहरीला पदार्थ खा लिया। पुलिस ने उसे भी गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया। पुलिस जांच में जुटी
पुलिस का कहना है कि दोनों एक-दूसरे को पहले से जानते थे। फिलहाल मामले की जांच की जा रही है। युवती के आरोपों के आधार पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है। पुलिस यह भी जांच कर रही है कि विवाद की वास्तविक वजह क्या थी और युवती को जहरीला पदार्थ किस तरह दिया गया।
भारतीय सुरक्षा एजेंसियों ने स्वतंत्रता दिवस से पहले पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी ISI से जुड़े आतंकी संगठन शहजाद भट्टी नेटवर्क को ध्वस्त कर दिया है। एजेंसियों ने 14 राज्यों में कार्रवाई की। नेटवर्क के 200 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार कर उसके हमले की साजिश नाकाम करने का दावा किया है। गृह मंत्रालय के मुताबिक, 12 अगस्त को राज्य पुलिस बलों के साथ रियल टाइम इंटेलिजेंस शेयरिंग सिस्टम के जरिए यह जॉइंट ऑपरेशन चलाया गया। शाह बोले- आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस नीति केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने X पर पोस्ट कर कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह नेटवर्क कई आतंकी गतिविधियों में शामिल था। शाह ने लिखा, “मोदी सरकार ने स्वतंत्रता दिवस से पहले ISI के आतंकी संगठन शहजाद भट्टी नेटवर्क को नष्ट कर दिया। 200 से ज्यादा सदस्यों को गिरफ्तार कर उसके हमले की साजिश नाकाम की। भारतीय सुरक्षा बलों ने 14 राज्यों में अलग-अलग जगहों पर कार्रवाई करके इस नेटवर्क को तोड़ दिया। यह आतंकवाद के खिलाफ भारत की जीरो टॉलरेंस नीति का शानदार उदाहरण है।” IED, ग्रेनेड और पिस्तौल बरामद अमित शाह ने बताया कि ISI से फंडिंग पाने वाले इस समूह से IED, पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्ट्री की मार्किंग वाले ग्रेनेड, पिस्तौल, जिंदा कारतूस और जासूसी के लिए इस्तेमाल किए जाने वाले CCTV कैमरे बरामद हुए हैं। गृह मंत्रालय के अनुसार ISI सिंडिकेट का कनेक्शन भारत में ग्रेनेड, IED और पेट्रोल बम हमलों से है। यह नेटवर्क टारगेट किलिंग में भी शामिल रहा है। मंत्रालय ने कहा कि नेटवर्क लोकल मददगारों को पुलिस, रक्षा और धार्मिक स्थलों की रेकी करने के लिए पैसे देता था। इसके अलावा, जासूसी के लिए इन जगहों पर CCTV कैमरे लगाने का काम भी कराया जाता था। 80 से ज्यादा एफआईआर दर्ज गृह मंत्रालय के मुताबिक, शहजाद भट्टी नेटवर्क के खिलाफ अब तक 80 से ज्यादा FIR दर्ज की जा चुकी हैं। ये मामले UAPA, भारतीय न्याय संहिता, आर्म्स एक्ट, नारकोटिक ड्रग्स एंड साइकोट्रॉपिक सब्सटेंस एक्ट और विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत दर्ज किए गए हैं। मंत्रालय ने कहा कि बरामद आईईडी, पाकिस्तान ऑर्डनेंस फैक्ट्री की मार्किंग वाले ग्रेनेड, पिस्तौल, जिंदा कारतूस और जासूसी के लिए इस्तेमाल सीसीटीवी कैमरे इस नेटवर्क के सीधे सीमा पार संबंधों की पुष्टि करते हैं।