Monday, October 5, 2026
Home Blog

ओमानी को-पायलट ने प्लेन क्रैश की साजिश अकेले रची थी: रिपोर्ट में दावा, विमान को बिल्डिंग से टकराने वाला था, इंजन बंद करने का भी शक


दुबई41 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

दुबई से इजराइल जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर पर हमला करने वाला ओमानी को-पायलट हमाम अल-हमामी ने अकेले ही विमान को क्रैश करने की साजिश रच रिपोर्ट्स के मुताबिक, अभी तक उसके किसी संगठन या सरकार से जुड़े होने की जानकारी नहीं मिली है।

इटली के अखबार कोरिएरे डेला सेरा की रिपोर्ट के मुताबिक, को-पायलट का प्लान कैप्टन स्मित को मारकर विमान को तेल अवीव में किसी ऊंची बिल्डिंग से टकराना था। उसने कॉकपिट में नमाज पढ़ने का बहाना बनाया और कैप्टन पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया।

रिपोर्ट में यह भी दावा किया गया है कि जब उसका पहला प्लान नाकाम होने लगा तो उसने विमान को रेगिस्तान में गिराने की कोशिश की। इस दौरान उसने ऑटोपायलट बंद कर दिया, जिससे विमान तेजी से नीचे आने लगा। जांचकर्ताओं को शक है कि को-पायलट ने विमान के दोनों इंजन बंद करने की कोशिश की थी।

फ्लाइटरडार24 के मुताबिक, विमान करीब एक मिनट में 33 हजार फीट से 17 हजार फीट तक नीचे आ गया था।

फ्लाइटरडार24 के मुताबिक, विमान करीब एक मिनट में 33 हजार फीट से 17 हजार फीट तक नीचे आ गया था।

हमले के बाद कॉकपिट में पहुंचे यात्री

रिपोर्ट के मुताबिक, हमामी ने नजाम के दौरान इमरजेंसी के लिए रखे क्रैश एक्स यानी कुल्हाड़ी निकाली और पीछे से कैप्टन स्मित पर वार करना शुरू कर दिया। शुरुआत में स्मित को लगा कि विमान का कोई हिस्सा उनके सिर से टकराया है, लेकिन लगातार वार होने पर उन्हें समझ आया कि उन पर हमला हो रहा है।

हमले में कैप्टन स्मित के सिर पर गंभीर चोट लगी और उनके हाथ पर भी गहरी चोट आई। काफी खून बहने के बावजूद उन्होंने कॉकपिट का दरवाजा खोलने की कोशिश की। लेकिन को-पायलट ने दरवाजा बंद किया। फिर स्मित ने उससे मुकाबला करते हुए दोबारा दरवाजा खोला।

कॉकपिट से आवाजें सुनकर ताली बर्कोविच नाम की एक महिला ने लोगों को इसकी जानकारी दी। इसके बाद कई यात्री और दो ऑफ-ड्यूटी पायलट कॉकपिट में पहुंचे। उन्होंने कैप्टन को गंभीर हालत में पाया और को-पायलट को काबू करने की कोशिश की।

इजराइली महिला ताली बर्कोविच-मानेस उस समय फ्लाइट के टॉयलेट के बाहर थीं, जबकि उनकी 6 साल की बेटी नीना अंदर थी। कॉकपिट से शोर सुनकर ताली को पायलट पर हमले का अंदेशा हुआ। उनके पति त्जविका कॉकपिट पहुंचे और को-पायलट को काबू करने में मदद की।

इजराइली महिला ताली बर्कोविच-मानेस उस समय फ्लाइट के टॉयलेट के बाहर थीं, जबकि उनकी 6 साल की बेटी नीना अंदर थी। कॉकपिट से शोर सुनकर ताली को पायलट पर हमले का अंदेशा हुआ। उनके पति त्जविका कॉकपिट पहुंचे और को-पायलट को काबू करने में मदद की।

विमान की रफ्तार 970 किमी प्रति घंटे से ज्यादा पहुंची

रिपोर्ट के मुताबिक, इस पूरे घटनाक्रम के दौरान विमान तेजी से जमीन की ओर गिर रहा था। उसकी रफ्तार 970 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा पहुंच गई थी। इस दौरान विमान का पिछला रडर क्षतिग्रस्त हो गया और को-पायलट ने कंट्रोल को भी नुकसान पहुंचाने की कोशिश की।

इसी दौरान पेशे से प्लंबर यात्री यानिव हयून ने कंट्रोल स्टिक अपनी ओर खींची, जिससे विमान का तेजी से नीचे जाना रुका। इसके बाद दो ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने कॉकपिट का नियंत्रण संभाला और विमान को सामान्य स्थिति में लाने की कोशिश की।

फ्लाइट FZ1073 में 174 लोग सवार थे। हमले के दौरान विमान ने इमरजेंसी सिग्नल भेजे और करीब 34 हजार फीट से 17 हजार फीट से ज्यादा नीचे आ गया था। बाद में यात्रियों और क्रू की मदद से विमान का कंट्रोल संभाला गया।

कॉकपिट में पायलटों के बीच हाथापाई के दौरान विमान हिलता हुआ नजर आया।

कॉकपिट में पायलटों के बीच हाथापाई के दौरान विमान हिलता हुआ नजर आया।

सऊदी अरब के ताबुक में इमरजेंसी लैंडिंग

सऊदी अरब के एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स ने विमान को वापस मोड़ने को कहा। इसके बाद फ्लाइट को ताबुक में इमरजेंसी लैंडिंग कराने के निर्देश दिए गए। पायलटों ने विमान को सुरक्षित उतारा।

लैंडिंग के बाद घायल कैप्टन स्मित को अस्पताल ले जाया गया, जबकि हमाम अल-हमामी को सऊदी अधिकारियों को सौंप दिया गया।

इमरजेंसी लाइट जलने से इंजन की जांच

घटना के कुछ वीडियो में विमान की इमरजेंसी लाइट्स जलती दिखाई दीं। रिपोर्ट के मुताबिक, इससे विमान की मुख्य बिजली सप्लाई बंद होने की आशंका जताई गई। ऐसे में विमान बैटरी पावर पर आ सकता है।

जांचकर्ता यह पता लगा रहे हैं कि क्या को-पायलट ने इंजन तक फ्यूल पहुंचाने वाले स्विच को ‘रन’ से ‘कटऑफ’ पर किया था। बाद में दोनों ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने विमान को सामान्य स्थिति में लाने की कोशिश की। रिपोर्ट के मुताबिक, विमान में इंजन दोबारा शुरू करने की स्थिति बनी हुई थी।

कई देशों की एजेंसियां कर रहीं जांच

यूएई, इजराइल और सऊदी अरब की एजेंसियां मामले की जांच कर रही हैं। यूएई ने कहा है कि जांच में को-पायलट के आतंकी घटना को अंजाम देने की कोशिश करने की बात सामने आई है।

इजराइली अधिकारियों के मुताबिक, अभी तक किसी संगठन या सरकार से उसके संबंध का पता नहीं चला है।

कैप्टन स्मित खून से लथपथ दिखे। उनके शरीर पर कई जगह हमले के निशान थे।

कैप्टन स्मित खून से लथपथ दिखे। उनके शरीर पर कई जगह हमले के निशान थे।

ऑस्ट्रेलिया और ओमान से जुड़े रिकॉर्ड भी खंगाले जा रहे

वॉल स्ट्रीट जर्नल के मुताबिक, हमामी को उसके कट्टरपंथी विचारों को लेकर पहले ओमान में उड़ान भरने से रोक दिया गया था। ऑस्ट्रेलियाई फेडरल पुलिस भी उसके ऑस्ट्रेलिया से संबंधों की जांच कर रही है।

रिपोर्ट्स के मुताबिक, हमामी 2015 से 2017 के बीच ऑस्ट्रेलिया में छात्र रहा था। उसे 2014 में स्टूडेंट वीजा मिला था, जिसे 2019 में रद्द कर दिया गया। ABC के मुताबिक, वीजा चरित्र संबंधी वजहों से नहीं, बल्कि कोर्स में दाखिला खत्म होने के कारण रद्द हुआ था।

—————————–

यह खबर भी पढ़ें…

फ्लाईदुबई विमान को बचाने वाले दोनों सीक्रेट पायलट कौन:हमला होते ही कंट्रोल संभाला; यात्रियों को डर था- विमान हाईजैक कर ईरान न ले जाएं

दुबई से इजराइल जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में को-पायलट के हमले के बाद घायल कैप्टन स्मित ने कॉकपिट का दरवाजा खोला, जिससे विमान में मौजूद दो अन्य पायलट अंदर पहुंचे और कंट्रोल संभाला। ये दोनों पायलट तेल अवीव से दुबई लौटने वाली फ्लाइट के लिए पहले से विमान में सवार थे। कंट्रोल संभालने के बाद भी उन्होंने करीब 45 मिनट तक यात्रियों से बात नहीं की, जिससे कुछ यात्रियों को विमान के हाईजैक होकर ईरान ले जाए जाने का डर लगा। पूरी खबर पढ़ें…



Source link

13 ग्रेनेडियर्स-गंगा जैसलमेर रिसाला का स्थापना दिवस: कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने कहा-यह सैन्य विरासत केवल इतिहास नहीं, पीढ़ियों के लिए प्रेरणा – Jaipur News




13 ग्रेनेडियर्स-गंगा जैसलमेर रिसाला बटालियन ने शनिवार को जयपुर मिलिट्री स्टेशन पर अपना स्थापना दिवस मनाया। इस मौके पर बटालियन द्वारा कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ को विशेष रूप से आमंत्रित किया गया। राठौड़ का इस बटालियन से पारिवारिक जुड़ाव भी रहा है। उनकी तीन पीढ़ियों ने इस गौरवशाली रीसाले में सेवाएं दी हैं। उनके पूर्वज इस बटालियन में प्रथम, द्वितीय विश्व युद्ध से लेकर 1965 और 1971 के भारत-पाक युद्धों तक में शामिल हुए हैं। इस मौके पर कर्नल राठौड़ ने बटालियन के शौर्य, परंपरा और बलिदान को नमन करते हुए कहा कि ऐसी सैन्य विरासत केवल इतिहास नहीं, आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा है। करीब 561 वर्ष पुरानी सैन्य इकाई
दरअसल, यह भारतीय सेना की एक गौरवशाली और ऐतिहासिक पैदल सेना बटालियन है, जिसे मूल रूप से बीकानेर के महाराजा गंगा सिंह द्वारा 1889 में ‘गंगा रिसाला’ (ऊंट सेना) के रूप में गठित किया गया था। स्वतंत्रता के बाद 1951 में इसे जैसलमेर के ऊंट सैनिकों के साथ मिला दिया गया, जिससे ‘गंगा जैसलमेर रिसाला’ बना और यह भारतीय सेना की द ग्रेनेडियर्स रेजिमेंट की 13वीं बटालियन (13 ग्रेनेडियर्स) के रूप में शामिल हुई। ऐतिहासिक रूप से 3 अक्टूबर 1465 को ही बीकानेर रियासत के संस्थापक राव बीका ने मारवाड़ से कूच किया था, जिसे बटालियन अपनी सैन्य परंपरा और विरासत की शुरुआत मानती है। हालांकि, आधुनिक ‘गंगा रिसाला’ (ऊंट सेना) का औपचारिक गठन महाराजा गंगा सिंह द्वारा 1889 में किया गया था। युद्ध में पाकिस्तानी चौकियों पर कब्जा किया
यह सैन्य इकाई भारतीय सेना की सबसे पुरानी और अनुभवी सैन्य टुकड़ियों में से एक है। इसके सैनिकों में बड़ी संख्या राजस्थान के सीकर, झुंझुनू और नागौर जिलों से आती है। इसने साल 1965 के भारत-पाक युद्ध में इस बटालियन ने तनोट माता मंदिर की रक्षा करते हुए सांचू और साधेवाला की महत्वपूर्ण चौकियां कब्जे में ली। वही 1971 के युद्ध में बटालियन ने पाकिस्तान के करीब 300 वर्ग किलोमीटर क्षेत्र पर कब्जा कर रणहाल और बिजनोट जैसे महत्वपूर्ण स्थान अपने नियंत्रण में लिए।



Source link

दुकान खुलने से पहले लगती है लाइन, 180 रुपये का पान भी बिकता है हाथों-हाथ

0


Last Updated:

गाजियाबाद के कविनगर में 46 साल पुरानी अरुण पान दुकान आज भी ग्राहकों के बीच खास पहचान रखती है. 1980 में सड़क किनारे 15 पैसे का पान बेचने से शुरू हुआ यह सफर अब ऐसा है कि दुकान खुलने से पहले ही ग्राहक यहां पहुंच जाते हैं. यहां देसी से लेकर बनारसी और स्पेशल मीठे पान तक कई विकल्प मिलते हैं.

गाजियाबाद: यूपी के गाजियाबाद शहर में पान खाने वालों की कमी नहीं है. कविनगर की एक पान की दुकान ऐसी है, जहां पान के शौकीनों का अंदाज ही अलग नजर आता है. दुकान खुलने से पहले ही यहां बड़ी-बड़ी गाड़ियां आकर खड़ी हो जाती हैं. कारों में बैठे लोग दुकान खुलने का इंतजार करते हैं और फिर अपनी पसंद का पान लेकर आगे बढ़ जाते हैं.

46 साल पुरानी इस दुकान पर शहर के कारोबारी, नौकरीपेशा लोग और कई प्रतिष्ठित लोग भी नियमित रूप से पहुंचते हैं. कई ग्राहकों के लिए यहां का पान रोजमर्रा की आदत का हिस्सा बन चुका है. अरुण पान दुकान की शुरुआत 1980 में हुई थी. दुकान के मालिक अरुण सिंघल लोकल 18 से बताते हैं कि उन्होंने सड़क किनारे बैठकर पान बेचने से शुरुआत की थी. उस समय एक पान की कीमत 15 पैसे थी. तब शायद ही किसी ने सोचा होगा कि छोटी सी यह शुरुआत आगे चलकर इतनी पहचान बना लेगी. धीरे-धीरे ग्राहकों की संख्या बढ़ती गई और आज स्थिति यह है कि दुकान खुलने से पहले ही कई ग्राहक यहां पहुंच जाते हैं.

अरुण सिंघल कहते हैं कि उनकी दुकान पर शहर के अलग-अलग इलाकों से लोग पान खाने आते हैं. इनमें कारोबारी, व्यापारी, नौकरीपेशा लोग और कई प्रतिष्ठित लोग शामिल हैं. ग्राहकों को यहां सिर्फ पान का स्वाद ही नहीं, बल्कि वर्षों से बना अपनापन भी खींचकर लाता है. कुछ ग्राहक सप्ताह के तय दिन यहां पहुंचते हैं, जबकि कई लोग रोजाना ऑफिस या कारोबार शुरू करने से पहले पान खाने के लिए रुकते हैं.

Add News18 as
Preferred Source on Google

पुरानी पीढ़ी के साथ अब युवाओं में भी इस दुकान के पान को लेकर दिलचस्पी दिखाई देती है. यही वजह है कि सुबह से लेकर दिन के अलग-अलग समय तक यहां ग्राहकों की आवाजाही बनी रहती है. अरुण पान की दुकान पर देसी सादा, देसी तंबाकू, देसी मीठा, बनारसी सादा, बनारसी मीठा और स्पेशल मीठा पान मिलता है. यहां पान की कीमत 25 रुपये से शुरू होकर 180 रुपये तक जाती है. स्पेशल मीठे पान का इस्तेमाल पूजा, सगाई और दूसरे शुभ अवसरों पर भी लोग करते हैं.

पान तैयार करने की प्रक्रिया भी ग्राहक की पसंद के अनुसार होती है. ताजा पान के पत्ते पर कत्था और चूना लगाया जाता है. इसके बाद ग्राहक की पसंद के हिसाब से इलायची, सुपारी और दूसरे मसाले डाले जाते हैं. अरुण सिंघल कहते हैं कि हर ग्राहक की पसंद अलग होती है और वर्षों से आने वाले ग्राहकों की पसंद उन्हें याद भी रहती है.

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।



Source link

लखनऊ में पितृपक्ष पर भागवत कथा शुरू: पुंडरीक गोस्वामी महाराज के कथावाचन से मंत्रमुग्ध हुए भक्त, पहले दिन पहुंचे डिप्टी सीएम – Lucknow News




लखनऊ में श्रीमद्भागवत महापुराण का श्रवण भगवान श्रीकृष्ण की भक्ति, प्रेम और समर्पण का मार्ग दिखाता है। पितृपक्ष के पावन अवसर पर दिवंगत पितरों की शांति, तृप्ति और मोक्ष की कामना से ऐशबाग स्थित डीएवी कॉलेज में 4 से 10 अक्टूबर तक श्रीमद्भागवत राधारमण कथा का आयोजन किया जा रहा है। रविवार को कथा के पहले दिन पुंडरीक गोस्वामी महाराज ने भागवत महापुराण के माहात्म्य का विस्तार से वर्णन किया। कथा से पहले सुंदरकांड का पाठ किया गया। इसके बाद वृंदावन धाम से पहुंचे पुंडरीक गोस्वामी महाराज का श्रद्धालुओं ने स्वागत किया। उनके पहुंचते ही पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने कथा का श्रवण किया। हरिनाम संकीर्तन से भक्तिमय हुआ माहौल कथा का शुभारंभ श्री राधारमण लाल के जयकारों, शंखनाद और ‘हरे कृष्ण, हरे कृष्ण, हरे राम, हरे राम’ के संकीर्तन से हुआ। अयोध्या धाम के रामजानकी मंदिर से पहुंचे कौशल दास महाराज ने श्रद्धालुओं के साथ ‘ले लो, ले लो हरि का नाम, अमृत बरसेगा’ का संकीर्तन कराया। डिप्टी सीएम ब्रजेश पाठक ने लिया आशीर्वाद मुख्य आयोजक एवं यजमान ब्रजेश पाठक, उप मुख्यमंत्री, उत्तर प्रदेश सरकार भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। उनका स्वागत किया गया। उन्होंने श्रद्धापूर्वक श्रीमद्भागवत कथा का श्रवण किया। उन्होंने कहा कि व्यास गद्दी पर विराजमान पूज्य गुरुदेव के मुख से कथा का श्रवण करने का अवसर हम सभी को मिला है। सभी कथा का श्रवण करें और इस सुनहरे पल का लाभ उठाएं। आयोजक अमरनाथ मिश्र ने बताया कि आश्विन मास के पितृपक्ष में कथा का आयोजन यजमानों के दिवंगत पितरों और पूर्वजों की आत्मिक शांति, तृप्ति और मोक्ष की कामना से किया जा रहा है। श्रद्धालु पितरों के निमित्त धार्मिक अनुष्ठान और कथा श्रवण कर रहे हैं। भक्ति का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास अमरनाथ मिश्र ने कहा कि कथा के माध्यम से राधा-कृष्ण की भक्ति, प्रेम, करुणा और सनातन संस्कृति के आध्यात्मिक संदेश को जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया जा रहा है। उन्होंने श्रद्धालुओं से सपरिवार कथा में शामिल होने की अपील की।



Source link

लहार में शराब के नशे में विवाद के बाद फायरिंग: युवक की जांघ में लगी गोली, पुरानी चुंगी पास हुई कहासुनी, घायल ग्वालियर रेफर – Bhind News




भिंड के लहार कस्बे में रविवार शाम शराब के नशे में हुए विवाद के बाद फायरिंग हो गई। गोली लगने से भीकमपुरा निवासी बिक्कू उर्फ विवेक सिंह राजावत घायल हो गया। उसके बाएं पैर की जांघ में गोली लगी। गंभीर हालत में उसे सिविल अस्पताल लहार में प्राथमिक उपचार के बाद ग्वालियर रेफर किया गया। घटना रविवार शाम करीब 7:30 बजे पुरानी चुंगी क्षेत्र की है। शराब के नशे में बिक्कू उर्फ विवेक सिंह राजावत का छुन्नू सिंह नाम के युवक से किसी बात को लेकर विवाद हो गया। दोनों के बीच कहासुनी हुई। गाली-गलौज के बाद मामला बढ़ गया। युवक ने देसी कट्टे से किया फायर आरोप है कि इसी दौरान राहुल उर्फ छुन्नू सिंह ने देसी कट्टे से फायर कर दिया। गोली बिक्कू के बाएं पैर की जांघ में जा लगी। फायरिंग की आवाज सुनकर मौके पर अफरा-तफरी मच गई। आसपास मौजूद लोगों की मदद से घायल को तुरंत सिविल अस्पताल लहार पहुंचाया गया। जहां से डॉक्टरों ने उसे ग्वालियर रेफर कर दिया। घटना की सूचना पुलिस को दी गई। मामले में शिकायत किए जाने की बात सामने आई है। खबर लिखे जाने तक लहार थाना पुलिस की ओर से प्रकरण दर्ज किए जाने की पुष्टि नहीं हुई थी। पुलिस घटना की जांच कर रही है।



Source link

गयाजी में कांग्रेस का ‘सत्याग्रह’ जनजागरण अभियान: राहुल गांधी के डिजिटल प्लेटफॉर्म से जुड़ने की अपील, कांग्रेस बोले- जनआंदोलनों को मिलेगा एक मंच – Gayaji News




गयाजी में कांग्रेस ने राहुल गांधी के ‘सत्याग्रह’ डिजिटल प्लेटफॉर्म का जनजागरण अभियान चलाया। यह देशभर के जनआंदोलनों को एक मंच देगा। रविवार को गयाजी के हृदय स्थल चौक पर महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास कांग्रेस नेताओं ने लोगों को इसकी जानकारी दी और जुड़ने की अपील की। इस अभियान में बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रतिनिधि विजय कुमार मिट्ठू, पूर्व विधायक मोहम्मद खान अली और जिला उपाध्यक्ष राम प्रमोद सिंह सहित कई नेता शामिल थे। कांग्रेस नेताओं ने बताया कि छात्र, युवा, किसान, मजदूर और महिलाएं अपने हक के लिए संघर्ष कर रहे हैं। ये आंदोलन अक्सर स्थानीय ही रह जाते हैं। राहुल गांधी ने उन्हें एक मंच देने के लिए यह प्लेटफॉर्म शुरू किया है, ताकि उनकी आवाज दूर तक पहुंचे। नेताओं ने ‘सत्याग्रह’ अभियान को महात्मा गांधी की परंपरा से जोड़ा। आजादी की लड़ाई में गांधीजी तक लोगों की समस्याएं पहुंचती थीं। राहुल गांधी मानते हैं कि आज भी लोग अपने अधिकारों के लिए अकेले लड़ रहे हैं। लोग आंदोलन से जुड़ेंगे तो समस्याएं व्यापक स्तर तक जा सकती यदि अलग-अलग जगहों के लोग और आंदोलन एक साथ जुड़कर अपनी आवाज उठाएं तो उनकी समस्याओं को व्यापक स्तर पर सामने लाया जा सकता है। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि राहुल गांधी सड़क से संसद तक जनता की समस्याओं को उठाने के साथ विभिन्न आंदोलनों को एक साझा मंच से जोड़ने की पहल कर रहे हैं। ‘सत्याग्रह’ डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से लोगों को अपनी समस्याओं और संघर्षों से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इस दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने महात्मा गांधी की प्रतिमा के समीप ‘संघर्ष जोड़ो-भारत जोड़ो’ जैसे नारों को बुलंद किया।
आवाज को मजबूती देने के लिए लोगों की भागीदारी जरूरी नेताओं ने देशभर के छात्र, युवा, किसान, मजदूर और विभिन्न सामाजिक समूहों से जुड़े लोगों से ‘सत्याग्रह’ अभियान से जुड़ने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि जनसमस्याओं की आवाज को मजबूती देने के लिए लोगों की भागीदारी जरूरी है। गयाजी में चलाए गए इस अभियान के जरिए कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने ‘सत्याग्रह’ डिजिटल प्लेटफॉर्म का संदेश जन-जन तक पहुंचाने का प्रयास किया।



Source link

गिलकी से बनाएं टेस्टी पकौड़े, चाव से खाते है बुरहानपुर के लोग, दो दिन तक नहीं होगा खराब

0


होमफोटोलाइफ़फूड

गिलकी से बनाएं टेस्टी पकौड़े, चाव से खाते है बुरहानपुर के लोग, दो दिन तक खाएं

Last Updated:

Gilki ke Pakode Recipe: मध्य प्रदेश के निमाड़ अंचल में बारिश का मौसम शुरू होते ही खान-पान को लेकर लोगों का उत्साह बढ़ जाता है. बारिश की फुहारों के बीच गर्मागर्म चाय के साथ पकौड़े खाने का अपना ही आनंद है. बुरहानपुर में इस मौसम में गिलकी से तैयार होने वाले पकौड़े भी लोगों के बीच खास पसंद किए जाते हैं. ऐसे में गिलकी के पकौड़े स्वाद के साथ-साथ स्थानीय खान-पान की एक खास पहचान भी बन जाते हैं. आप भी इस बारिश में घर पर आसानी से गिलकी के पकौड़े बनाकर इसका स्वाद ले सकते हैं.

लोकल 18 की टीम को एक्सपर्ट महिला फूलाबाई ने जानकारी देते हुए बताया कि गिलकी एक सामान्य सब्जी है लेकिन इससे बनने वाले पकौड़े स्वाद में काफी खास होते हैं. बारिश के दिनों में घरों में लोग इसे नाश्ते के रूप में तैयार करते हैं.

इसे बनाने की विधि भी काफी आसान है और इसके लिए ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं पड़ती. गिलकी के पकौड़े बनाने के लिए सबसे पहले गिलकी को अच्छी तरह धोकर साफ किया जाता है और उसके छोटे-छोटे टुकड़े या पतले टुकड़े काट लिए जाते हैं.

इसके बाद बेसन में जीरा, लाल मिर्च और स्वादानुसार नमक मिलाया जाता है. इसमें जरूरत के अनुसार पानी डालकर गाढ़ा घोल तैयार किया जाता है. इसके बाद गिलकी के टुकड़ों को बेसन के घोल में अच्छी तरह लपेटकर गर्म तेल में डाला जाता है.

Add News18 as
Preferred Source on Google

तेल में पकने के बाद जब पकौड़े सुनहरे और कुरकुरे हो जाते हैं तो उन्हें बाहर निकाल लिया जाता है.गर्मागर्म पकौड़ों को चाय, हरी चटनी या अन्य पसंदीदा चटनी के साथ परोसा जाता है. बारिश के मौसम में इनका स्वाद लोगों को खास तौर पर पसंद आता है.

स्थानीय लोगों के अनुसार, गिलकी के पकौड़ों की एक खासियत यह भी मानी जाती है कि इन्हें सही तरीके से तैयार और सुरक्षित रखने पर करीब दो दिन तक इस्तेमाल किया जा सकता है. हालांकि, गर्मागर्म पकौड़ों का स्वाद सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है.

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।



Source link

यमन ने हूतियों को खदेड़ने के लिए फौज भेजी: इनके कब्जे में देश का एक-तिहाई हिस्सा, यहां 80% आबादी रहती है




यमन की सऊदी समर्थित सरकार ने हूती विद्रोहियों को खदेड़ने और कब्जे वाले इलाकों को वापस लेने के लिए फौज भेजना शुरू कर दिया है। राष्ट्रपति राशद अल-अलीमी ने रविवार को इसका ऐलान करते हुए कहा कि सरकारी सेना पूरे यमन में राज्य का नियंत्रण बहाल करेगी। यमन में हूतियों का करीब एक-तिहाई इलाके पर नियंत्रण है। यहां देश की करीब 80% आबादी रहती है। यही वजह है कि हूतियों का क्षेत्रफल कम होने के बावजूद उनका देश की आबादी और अहम शहरों पर बड़ा प्रभाव है। हूतियों ने यमन के पश्चिमी तट पर कब्जा बढ़ाया हूतियों ने पिछले 48 घंटों में यमन के पश्चिमी तट पर कई रणनीतिक पहाड़ियों पर कब्जा किया है। अगर हूती इस इलाके को सरकारी इलाके से काट देते हैं, तो सरकार पूरी तरह इस पर नियंत्रण खो देगी। हूतियो ने इस इलाके में यमन के तीसरे सबसे बड़े शहर ताइज पर भी कब्जा बढ़ाया है। यहां सैकड़ों लोग रहते हैं और हजारों सरकारी समर्थक लड़ाके भी तैनात हैं। शहर पर दबाव बढ़ने से आम लोगों के लिए भी मुश्किलें बढ़ सकती हैं। यमनी पत्रकार और राजनीतिक विश्लेषक मोहम्मद अल-कादी के मुताबिक, आसपास की पहाड़ियों पर कब्जा हूतियों को मजबूत रक्षा स्थिति देता है। इससे तट की ओर होने वाली किसी भी सैन्य कार्रवाई का सामना करना उनके लिए आसान होगा और इन इलाकों को वापस लेना सरकार के लिए मुश्किल हो सकता है। बाब अल-मंदेब पर भी हूतियों की नजर हूतियों की हालिया बढ़त सिर्फ जमीन तक सीमित नहीं है। उन्होंने बाब अल-मंदेब स्ट्रेट के आसपास भी अपनी स्थिति मजबूत की है। यह लाल सागर और अदन की खाड़ी को जोड़ने वाला अहम समुद्री व्यापार मार्गों में से एक है। दुनिया का 12% तेल इसी रास्ते से होकर गुजरता है। हाल ही में हूतियों ने दक्षिणी लाल सागर में दो और अहम द्वीपों ग्रेटर हनीश और लेसर हनीश पर कब्जा कर लिया है। ये द्वीप बाब-अल मंदेब स्ट्रेट से करीब 160 किमी उत्तर में हैं। इन पर कब्जे से लाल सागर के समुद्री रास्ते पर उनका दबदबा और मजबूत हो गया है। यूरोप और एशिया के बीच आने-जाने वाले जहाजों के लिए यह रास्ता बेहद अहम है। ऐसे में इस इलाके पर हूतियों का नियंत्रण बढ़ने से अंतरराष्ट्रीय शिपिंग पर भी असर पड़ सकता है। होर्मुज स्ट्रेट में तनाव के बीच बाब अल-मंदेब की अहमियत और बढ़ गई है। 12 साल से चल रही हैं यमन में लड़ाई यमन में सरकार और हूतियों के बीच करीब 12 साल से लड़ाई चल रही है। सऊदी अरब यमन की सरकार का समर्थन करता है, जबकि हूतियों को ईरान का समर्थन मिलता है। 2022 में दोनों पक्षों के बीच सीजफायर हुआ था। इसके बाद बड़े पैमाने पर लड़ाई काफी कम हो गई थी। अब हूतियों की बढ़त के बाद यमन में फिर बड़े गृहयुद्ध का खतरा पैदा हो गया है। युद्ध से यमन पहले ही गंभीर मानवीय संकट में है। देश का बुनियादी ढांचा क्षतिग्रस्त हो चुका है। वर्ल्ड फूड प्रोग्राम के मुताबिक, कुछ इलाकों में हर 4 में से 3 परिवारों को पर्याप्त खाना नहीं मिल रहा। नई लड़ाई में हजारों लोग विस्थापित हो चुके हैं। ऐसे में अगर सैन्य अभियान लंबा चला, तो यमन में भूख और विस्थापन का संकट और बढ़ सकता है। सऊदी अरब भी हूतियों पर हमला कर सकता है सऊदी अरब भी यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ जंग शुरू करने की तैयारी कर रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी 1 लाख से ज्यादा सैनिकों को उतार सकता है। इसका मकसद बाब अल-मंदेब स्ट्रेट को हूतियों के कब्जे से छुड़ाना और समुद्री व्यापार का रास्ता सुरक्षित करना है। रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी अरब के सामने सैन्य कार्रवाई के दो विकल्प हैं – इस ऑपरेशन का नेतृत्व यमन की सेनाएं करेंगी, जिन्हें सऊदी अरब का समर्थन मिलेगा। जरूरत पड़ने पर सऊदी अरब हवाई हमले भी कर सकता है। ———————– यह खबर भी पढ़ें… अल-कायदा ने फ्लाईदुबई हमले के आरोपी की तारीफ की: कहा- जंग अभी खत्म नहीं हुई, अमेरिकी-इजराइली विमानों पर 9/11 जैसे हमले करो आतंकी संगठन अल-कायदा ने फ्लाईदुबई की फ्लाइट में भारतीय पायलट स्मित मच्छर पर हमला करने वाले ओमानी को-पायलट हमाम अल-हमामी की तारीफ की। पूरी खबर पढ़ें…



Source link

जीएसटी कानून में फिर बड़ा बदलाव, अब अधिकारी नहीं कर सकेंगे गिरफ्तार


Last Updated:

GST Reform 3.0 : जीएसटी परिषद ने पिछले साल सितंबर में 2.0 सुधार के बाद अब कानूनी प्रक्रिया में बदलाव की तैयारी कर रही है. परिषद की इसी सप्ताह होने वाली बैठक में कानूनी प्रक्रिया में बदलाव किया जाएगा. माना जा रहा है कि परिषद सीधे गिरफ्तारी के मामलों पर रोक लगा सकती है और अधिकारियों से यह अधिकार छीना जा सकता है. अब गिरफ्तारी सिर्फ कोर्ट के आदेश पर ही की जा सकेगी.

Zoom

जीएसटी परिषद की बैठक में टैक्स अधिकारियों की शक्तियां घटाने पर चर्चा हो सकती है.

नई दिल्ली. माल एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने एक बार फिर कानून में बड़े बदलाव की तैयारी कर ली है. परिषद की इस महीने होने वाली बैठक में कर अधिकारियों से गिरफ्तारी का अधिकार वापस लेने और किसी भी गिरफ्तारी के लिए अदालत की मंजूरी अनिवार्य करने के प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है. मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि जीएसटी पर निर्णय लेने वाली शीर्ष संस्था जीएसटी परिषद 7 अक्टूबर की बैठक में गिरफ्तारी जुड़े सुधारों के पैकेज पर भी विचार कर सकती है. इसमें अपराधों के लिए आपराधिक कार्रवाई शुरू करने की सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये किया जा सकता है.

सूत्रों का कहना है कि अभियोजन के प्रावधानों का दायरा भी सीमित किया जा सकता है, ताकि वस्तुओं या सेवाओं के वर्गीकरण, मूल्यांकन या इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) से जुड़े सामान्य विवादों पर आपराधिक कार्रवाई न हो. ऐसे मामलों में कारोबारी और कर अधिकारी एक ही लेनदेन की अलग-अलग व्याख्या कर सकते हैं. ये प्रस्ताव सरकार के अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों का हिस्सा हैं. सितंबर 2025 में जीएसटी दरों को तर्कसंगत बनाने के बाद सुधारों का अगला चरण प्रशासन को सरल बनाने, अनुपालन लागत घटाने और प्रवर्तन को अधिक आनुपातिक बनाने पर केंद्रित रहने की उम्मीद है.

और क्या बदलने की तैयारी
मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि विचाराधीन पैकेज में जीएसटी पंजीकरण आसान करना बनाया जा सकता है. इसके अलावा तेजी से रिफंड देना, इनपुट टैक्स क्रेडिट की प्रक्रिया सरल करना और कारण बताओ नोटिस और जुर्माने से जुड़े नियमों में बदलाव शामिल हैं. प्रवर्तन से जुड़े प्रस्ताव के केंद्र में केंद्रीय जीएसटी अधिनियम की धारा 69 है. इसके तहत निर्धारित कानूनी शर्तें पूरी होने और किसी व्यक्ति के कुछ विशेष अपराध किए जाने के पर्याप्त कारण होने पर आयुक्त किसी अधिकारी को उसे गिरफ्तार करने के लिए अधिकृत कर सकता है. प्रस्तावित बदलाव में कर अधिकारियों से यह शक्ति वापस लेने और किसी भी गिरफ्तारी के लिए न्यायिक मंजूरी जरूरी करने की बात है.

खत्म नहीं होगा टैक्स वसूलने का अधिकार
इन बदलावों से सरकार का टैक्स वसूली या वित्तीय दंड लगाने का अधिकार खत्म नहीं होगा. कंपाउंडिंग के तहत निर्धारित टैकस, ब्याज और जुर्माना जुकाने के बाद अपराध का निपटारा किया जा सकता है. कम टैक्स चुकाने या गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करने वालों के खिलाफ टैक्स वसूली और अन्य कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी. गंभीर और जानबूझकर की गई कर चोरी या धोखाधड़ी के मामलों में अदालत के जरिये गिरफ्तारी की जा सकती है. यह कदम आर्थिक और नियामकीय अपराधों को गैर-आपराधिक बनाने के सरकार के व्यापक प्रयास के अनुरूप भी होगा.

आईटीसी नियमों में भी बदलाव
व्यापारियों और कारोबारियों के लिए इन बदलावों से टैकस विवाद के अंतिम निपटारे से पहले गिरफ्तारी की संभावना कम होगी, जबकि सरकार की राजस्व वसूली की शक्तियां बरकरार रहेंगी. अगर प्रस्ताव मंजूर होते हैं तो रिटर्न दाखिल करने में देरी, वर्गीकरण से जुड़े विवाद और नकदी की कमी के कारण टैक्स भुगतान में देरी जैसे मामलों में करदाता टैक्स, ब्याज और आनुपातिक जुर्माना भरकर गिरफ्तारी से बच सकेंगे. फिलहाल जीएसटी अधिकारियों को आयुक्त स्तर के अधिकारी की पूर्व मंजूरी के बाद ऐसे गंभीर मामलों में गिरफ्तारी का अधिकार है, जिनमें कर चोरी, फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट या गलत तरीके से रिफंड लेने की राशि एक करोड़ रुपये से अधिक हो. अभियोजन की सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है, ताकि आपराधिक प्रक्रिया उन मामलों तक सीमित रहे जिनका आकार इसके लायक है.

पूरी तरह खत्म होंगे 9 अपराध
इस प्रस्तावों में अभियोजन संबंधी प्रावधान के तहत आने वाले 24 अपराधों में सजा के प्रावधानों को नरम किया जाएगा, जबकि 9 अपराधों को पूरी तरह हटाना और 11 को मौजूदा रूप में बनाए रखना शामिल है. न्यूनतम सजा का प्रावधान हटाने का भी प्रस्ताव है, जिससे अदालत के लिए कारावास की सजा देना अनिवार्य नहीं रहेगा. हर मामले में जुर्माना लगाने का विकल्प उपलब्ध होगा, जबकि मध्यम श्रेणी के अपराधों में अधिकतम सजा तीन साल से घटाकर दो साल करने का प्रस्ताव है. परिषद छोटे करदाताओं के लिए विलंब शुल्क माफ करने और जुर्माने को तर्कसंगत बनाने के प्रस्ताव पर भी विचार कर सकती है.

About the Author

authorimg

Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…

और पढ़ें



Source link

मताधिकार से वंचित करने वाली प्रक्रिया मनमानी: सुप्रीम कोर्ट के जज बोले- कोई बहाना इसे सही नहीं ठहरा सकता, मताधिकार के बिना नागरिक अर्थहीन


  • Hindi News
  • National
  • Justice Ujjwal Bhuiyan Statement | Voting Rights Arbitrary Process | Hyderabad

नई दिल्ली8 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

फाइल फोटो

सुप्रीम कोर्ट के जज जस्टिस उज्जल भुइयां ने कहा कि लाखों भारतीयों को मताधिकार से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया मनमानी है। ऐसी प्रक्रिया संवैधानिक व्यवस्था को नकारती है। कोई भी बहाना इसे सही नहीं ठहरा सकता।

जस्टिस भुइयां हैदराबाद में NALSAR यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ के कार्यक्रम में शामिल हुए थे। हालांकि, अपने भाषण में उन्होंने किसी खास प्रक्रिया या अथॉरिटी का नाम नहीं लिया।

जस्टिस भुइयां की स्पीच, 5 बड़ी बातें…

  • एक वर्ग वोट देने का अधिकार रखता हो और दूसरे वर्ग को इससे वंचित रखा जाए, भारत का संविधान नागरिकों के दो वर्ग नहीं बनाता।
  • भारतीय नागरिकों को बड़े पैमाने पर मताधिकार से वंचित करने वाली कोई भी प्रक्रिया संविधान के अनुच्छेद 326 और 14 का उल्लंघन होगी।
  • अगर कोई प्रक्रिया लाखों भारतीय नागरिकों को उनके ही देश में दूसरे दर्जे का नागरिक बना देती है, तो ऐसी मनमानी है।
  • ऐसी प्रक्रिया संविधान की बुनियाद पर चोट करती है। यह भारतीय संविधान के संवैधानिक व्यवस्था को नकारने के बराबर है।
  • कोई भी संस्था इससे मुक्त नहीं है। कोई भी प्राधिकरण ऐसा नहीं कर सकता, कोई भी अदालत इसे माफ नहीं कर सकती। कोई भी संविधान से ऊपर नहीं है।

अरबपति हो रिक्शा चालक, दोनों के वोट बराबर

जस्टिस भुइयां ने कहा, “भारतीय नागरिकों का मतदान का अधिकार, विदेशी शासन के खिलाफ भारत के लंबे संघर्ष से जुड़ा हुआ है। यह हमारी आजादी की अभिव्यक्ति है। अनुच्छेद 326 में किसी भी प्रकार का बदलाव नहीं किया जा सकता।”

उन्होंने कहा- “एक व्यक्ति अरबपति हो सकता है और दूसरा रिक्शा चालक; फिर भी दोनों के पास अपने वोट होंगे और उनके वोटों का मूल्य बराबर होगा।”

अमेरिकी जज जस्टिस फेलिक्स फ्रैंकफर्टर की टिप्पणी का हवाला देते हुए कि लोकतंत्र में सर्वोच्च पद नागरिक का होता है, जस्टिस भुइयां ने पूछा- “मतदान के अधिकार के बिना एक नागरिक का क्या मूल्य है?”



Source link