Thursday, June 4, 2026
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राहुल को भाई कहने वाले स्टालिन ने क्यों बनाई कांग्रेस से दूरी?


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राहुल को भाई कहने वाले स्टालिन ने क्यों बनाई कांग्रेस से दूरी?

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कभी राहुल गांधी को अपना ‘भाई’ बताने वाले एमके स्टालिन अब कांग्रेस से राजनीतिक दूरी बनाते नजर आ रहे हैं. 8 जून की इंडिया गठबंधन बैठक से डीएमके की गैरमौजूदगी ने विपक्षी एकता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं. कांग्रेस और डीएमके का तीन दशक पुराना रिश्ता आखिर किस वजह से कमजोर पड़ता दिख रहा है? क्या यह सिर्फ राजनीतिक रणनीति है या फिर विपक्षी गठबंधन के भीतर बढ़ते मतभेदों का संकेत? जानिए राहुल गांधी, स्टालिन, डीएमके और कांग्रेस के रिश्तों में आई दरार की पूरी कहानी और इसके 2029 की राजनीति पर संभावित असर.

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क्‍यों बढ़ी राहुल-स्‍टालिन की दूरियां.

भाई से ‘बेवफाई’ तक राहुल-स्‍टालिन के रिश्‍ते: भारतीय राजनीति में कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जो सिर्फ चुनावी फायदे के लिए नहीं बनते, बल्कि वर्षों के भरोसे और राजनीतिक साझेदारी पर टिके होते हैं. कांग्रेस और डीएमके का रिश्ता भी ऐसा ही माना जाता रहा है. तमिलनाडु की राजनीति में लंबे समय तक दोनों दल एक-दूसरे के मजबूत सहयोगी रहे. करुणानिधि के दौर से लेकर एमके स्टालिन तक, डीएमके को गांधी परिवार का सबसे भरोसेमंद साथी माना जाता था.

कई मौकों पर स्टालिन ने सार्वजनिक मंचों से राहुल गांधी को अपना ‘भाई’ बताया और उन्हें राष्ट्रीय राजनीति का अहम चेहरा कहा. लेकिन अब हालात बदलते दिखाई दे रहे हैं. INDIA गठबंधन की 8 जून को होने वाली बैठक से डीएमके का दूरी बनाना राजनीतिक गलियारों में बड़ी चर्चा का विषय बन गया है. इसे सिर्फ एक बैठक में शामिल न होने का फैसला नहीं माना जा रहा, बल्कि कांग्रेस और डीएमके के बीच बढ़ रही राजनीतिक असहजता का संकेत समझा जा रहा है.

  1. कांग्रेस और डीएमके का रिश्ता कितना पुराना है?
    कांग्रेस और डीएमके का साथ करीब तीन दशक से भी ज्यादा पुराना है. दोनों दलों ने कई लोकसभा और विधानसभा चुनाव मिलकर लड़े हैं. खासकर यूपीए सरकार के दौर में डीएमके कांग्रेस की सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी पार्टियों में शामिल रही. साल 2004 और 2009 के लोकसभा चुनावों में दोनों दलों की साझेदारी ने शानदार प्रदर्शन किया था. उस समय कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और डीएमके प्रमुख करुणानिधि के बीच मजबूत राजनीतिक विश्वास था.
  2. तमिलनाडु चुनाव तक बनी रही दोनों की एकता
    यही भरोसा आगे चलकर राहुल गांधी और एमके स्टालिन के रिश्तों में भी दिखाई दिया. 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी डीएमके ने राहुल गांधी और विपक्षी एकता का खुलकर समर्थन किया था. इतना ही नहीं, तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 ने दोनों एक साथ मिलकर चुनाव भी लड़ा. चुनावी जनसभा में स्‍लालिन ने खुलकर राहुल को अपना भाई बताते रहे. इसलिए आज दोनों दलों के बीच दिखाई दे रही दूरी कई लोगों को हैरान कर रही है.
  3. क्‍या सत्‍ता की महत्‍वाकांक्षा बनी दरार की वजह?
    राजनीतिक जानकारों के मुताबिक असली संकट तब शुरू हुआ जब तमिलनाडु की राजनीति में कांग्रेस ने डीएमके से अलग रास्ता चुन लिया. कांग्रेस का विजय थलापति की टीवीके के साथ जाना और राज्य सरकार में शामिल होना डीएमके को रास नहीं आया. डीएमके को लगा कि जिस कांग्रेस को उसने वर्षों तक राजनीतिक आधार दिया, वही पार्टी अब तमिलनाडु में उसके राजनीतिक क्षेत्र में प्रवेश करने की कोशिश कर रही है. दक्षिण भारतीय राजनीति में क्षेत्रीय दल अपने राजनीतिक क्षेत्र को लेकर बेहद संवेदनशील रहते हैं. ऐसे में कांग्रेस का यह कदम डीएमके नेतृत्व को असहज कर गया. यहीं से दोनों दलों के रिश्तों में तनाव खुलकर सामने आने लगा.
  4. इंडिया गठबंधन के लिए कितना बड़ा झटका?
    डीएमके सिर्फ एक क्षेत्रीय पार्टी नहीं है. लोकसभा में उसके सांसदों की संख्या विपक्षी राजनीति में उसे महत्वपूर्ण बनाती है. दक्षिण भारत में कांग्रेस के पास वैसे भी सीमित प्रभाव बचा है. ऐसे में डीएमके जैसी सहयोगी पार्टी का नाराज होना कांग्रेस के लिए चिंता की बात है. इंडिया गठबंधन की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता रही है. लेकिन यही उसकी सबसे बड़ी कमजोरी भी बनती दिख रही है.
  5. डीएमके का फैसला तो सिर्फ शुरूआत है
    पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी, पंजाब में आम आदमी पार्टी, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और तमिलनाडु में डीएमके इन सभी दलों की अपनी क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाएं हैं. जब तक लक्ष्य भाजपा को चुनौती देना था, तब तक यह एकता कायम रही. लेकिन जैसे-जैसे 2029 का चुनाव करीब आएगा, नेतृत्व और राजनीतिक हिस्सेदारी के सवाल सामने आने लगेंगे. डीएमके का यह फैसला उसी प्रक्रिया की शुरुआत माना जा सकता है.

क्या स्टालिन राहुल गांधी से नाराज हैं?
यह सवाल सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है. लेकिन इसका जवाब इतना सीधा नहीं है. स्टालिन और राहुल गांधी के व्यक्तिगत संबंधों में सार्वजनिक तौर पर कोई कटुता दिखाई नहीं देती. समस्या राजनीतिक हितों की है. राजनीति में व्यक्तिगत रिश्ते अक्सर संगठनात्मक हितों के सामने पीछे छूट जाते हैं. स्टालिन जानते हैं कि तमिलनाडु में उनकी सबसे बड़ी ताकत डीएमके की स्वतंत्र पहचान है. अगर कांग्रेस राज्य में अलग राजनीतिक विस्तार करने लगेगी, तो डीएमके के लिए यह भविष्य का खतरा बन सकता है. इसलिए यह लड़ाई राहुल गांधी बनाम स्टालिन नहीं, बल्कि कांग्रेस बनाम डीएमके के राजनीतिक हितों की लड़ाई ज्यादा दिखाई देती है.

ममता की मौजूदगी और डीएमके की गैरमौजूदगी क्या संदेश देती है?
दिलचस्प बात यह है कि जिस ममता बनर्जी को अक्सर इंडिया गठबंधन से दूरी बनाकर रखने वाला नेता माना जाता था, उनके बैठक में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है. वहीं डीएमके दूर रहती दिख रही है. यह स्थिति बताती है कि विपक्षी राजनीति में समीकरण तेजी से बदल रहे हैं. आज का सहयोगी कल आलोचक बन सकता है और आज का आलोचक कल रणनीतिक साझेदार. यानी विपक्ष के भीतर भी राजनीतिक पुनर्संरचना का दौर शुरू हो चुका है.

2029 की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?
अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि डीएमके पूरी तरह कांग्रेस से अलग रास्ता चुन रही है. लेकिन इतना जरूर है कि उसने कांग्रेस को एक राजनीतिक संदेश दिया है. स्टालिन यह दिखाना चाहते हैं कि डीएमके को हल्के में नहीं लिया जा सकता. तमिलनाडु में उसकी राजनीतिक ताकत को नजरअंदाज कर कोई राष्ट्रीय रणनीति नहीं बनाई जा सकती. दूसरी तरफ कांग्रेस के सामने चुनौती यह है कि वह क्षेत्रीय दलों को साथ भी रखे और अपनी राजनीतिक जमीन भी मजबूत करे. यही संतुलन भविष्य में इंडिया गठबंधन की सफलता या विफलता तय करेगा.

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Anoop Kumar MishraAssistant Editor

Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें



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‘अनपढ़ सेलिब्रिटी’, अनुष्का शर्मा ने होम्योपैथी का किया सपोर्ट, तो भड़क उठे मशहूर डॉक्टर


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एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा ने होम्योपैथी का सपोर्ट करने के लिए एक वीडियो शेयर किया, जिस पर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई. अनुष्का शर्मा ने होम्योपैथी को सेहत के लिहाज से अहम बताया, जबकि वीडियो में डॉ. राजन शंकरण ने इसे बीमारियों के बजाय व्यक्ति का इलाज करने वाली एक पद्धति कहा. इस पोस्ट पर तीखा रिएक्शन आया. हेपेटोलॉजिस्ट डॉ. सायरियाक एबी फिलिप्स ने इसकी कड़ी आलोचना की. उन्होंने अनुष्का शर्मा को ‘अनपढ़ सेलिब्रिटी’ कहा. डॉक्टर फिलिप्स का दावा है कि होम्योपैथी में कोई दवा नहीं होती, यह सिर्फ पानी और चीनी की महंगी गोलियां हैं.

नई दिल्ली: बॉलीवुड एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा ने होम्योपैथी का सपोर्ट किया, तो सोशल मीडिया पर एक नया विवाद खड़ा हो गया. इस चिकित्सा पद्धति को लेकर इंटरनेट पर लोग दो गुटों में बंट गए. जहां एक तरफ कई लोग अनुष्का के इस कदम का सपोर्ट कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मॉडर्न चिकित्सा से जुड़े लोग इस पर तीखा रिएक्शन दे रहे हैं. (फोटो साभार: Instagram@anushkasharma)

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पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई, जब अनुष्का शर्मा ने अपने अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया. वीडियो में मशहूर होम्योपैथिक डॉक्टर राजन शंकरण और बिजनेसमैन नमिता थापर आपस में बातचीत करते हुए नजर आ रहे हैं. पोस्ट के जरिए अनुष्का ने अपनी सेहत से जुड़ी जर्नी में होम्योपैथी और डॉ. शंकरण की अहमियत को स्वीकार किया. (फोटो साभार: Instagram@anushkasharma)

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अनुष्का ने अपनी पर्सनल अनुभव को फैंस के साथ शेयर करते हुए लिखा, ‘होम्योपैथी ने मेरी जिंदगी में हमेशा एक अहम भूमिका निभाई है. डॉक्टर राजन शंकरण मेरी इस पूरी हेल्थ जर्नी का एक बहुत बड़ा हिस्सा रहे हैं. मैं उनकी लाइफ स्टाइल से जुड़े विचारों को बहुत ज्यादा महत्व देती हूं.’ (फोटो साभार: Instagram@anushkasharma)

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वायरल वीडियो में किसी भी तरह की होड़ के बजाय आपसी सहयोग पर जोर दिया गया है. ‘न्यूज18 इंग्लिश’ की रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. राजन शंकरण ने बातचीत के दौरान कहा कि होम्योपैथी वास्तव में बीमारियों का इलाज नहीं करती, बल्कि यह सीधे इंसान का इलाज करती है. जब व्यक्ति अंदर से ठीक होता है, तो उसकी बीमारी अपने आप दूर हो जाती है. (फोटो साभार: Instagram@anushkasharma)

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डॉ. शंकरण ने यह भी स्वीकार किया कि हर मेडिकल सिस्टम की अपनी कुछ सीमाएं होती हैं. उन्होंने आगे तर्क दिया कि एलर्जी, एक्जिमा और मल्टीपल स्क्लेरोसिस जैसी बीमारियों का मॉडर्न मेडिसिन में कोई लंबी अवधि का समाधान नहीं है. यही वजह है कि एलोपैथिक डॉक्टर भी अपने मरीजों को होम्योपैथी के पास रेफर करते हैं, क्योंकि आज का युग का है. (फोटो साभार: Instagram@anushkasharma)

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अनुष्का शर्मा का पोस्ट जैसे ही वायरल हुआ, वैसे ही सोशल मीडिया पर ‘द लिवर डॉक’ के नाम से मशहूर हेपेटोलॉजिस्ट डॉ. सायरियाक एबी फिलिप्स ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई. होम्योपैथी के बड़े आलोचक डॉ. फिलिप्स ने वीडियो की कड़ी आलोचना की और इसमें शामिल तीनों ही हस्तियों को अपने निशाने पर ले लिया. (फोटो साभार: Instagram@anushkasharma)

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डॉ. फिलिप्स ने सोशल मीडिया पर इस वीडियो से जुड़े लोगों पर बेहद आक्रामक कमेंट किया. उन्होंने राजन शंकरण, नमिता थापर और अनुष्का शर्मा की तिकड़ी तंज कसा. इतना ही नहीं, उन्होंने तीनों पर तंज कसते हुए उन्हें ‘सप्लीमेंट बेचने वाला, कानूनी रूप से मान्य झोलाछाप और अनपढ़ सेलिब्रिटी’ तक कह डाला.
(फोटो साभार: Instagram@anushkasharma)

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हेपेटोलॉजिस्ट ने होम्योपैथी को पूरी तरह नकारते हुए अपनी पुरानी राय को एक बार फिर दोहराया. उन्होंने दावा किया कि इन होम्योपैथिक दवाओं में कोई भी एक्टिव तत्व या दवा नहीं होती है. डॉ. फिलिप्स की मानें, तो यह पूरी पद्धति सिर्फ पानी, शराब और चीनी के मिश्रण पर टिकी है, जहां लोग महंगे दामों में सिर्फ रंगीन चीनी की गोलियां खरीद रहे हैं. (फोटो साभार: Instagram@anushkasharma)

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मुजफ्फरनगर में होटलों की फायर सेफ्टी जांच: दिल्ली अग्निकांड के बाद प्रशासन-दमकल विभाग ने की पड़ताल, लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी – Muzaffarnagar News




दिल्ली में हुए हालिया होटल अग्निकांड के बाद मुज़फ़्फ़रनगर प्रशासन सतर्क हो गया है। जनपद में संभावित हादसों को रोकने के लिए प्रशासन और अग्निशमन विभाग ने संयुक्त रूप से होटलों, गेस्ट हाउसों तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में विशेष जांच अभियान शुरू किया है। बुधवार को अग्निशमन अधिकारी अनुराग सिंह के नेतृत्व में दमकल विभाग की टीम ने शहर के कई प्रमुख होटलों का दौरा किया। इस दौरान सिटी मजिस्ट्रेट पंकज राठौर भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने फायर अलार्म सिस्टम, अग्निशमन यंत्र, इमरजेंसी एग्जिट, फायर फाइटिंग सिस्टम, बिजली व्यवस्था और आपातकालीन निकासी के इंतजामों का बारीकी से निरीक्षण किया। जांच दल ने यह भी सुनिश्चित किया कि आपात स्थिति में होटल प्रबंधन और कर्मचारी किस प्रकार प्रतिक्रिया देंगे। उनके पास पर्याप्त संसाधन और प्रशिक्षण उपलब्ध है या नहीं, इसकी भी पड़ताल की गई। कई स्थानों पर कर्मचारियों को सुरक्षा संबंधी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। सिटी मजिस्ट्रेट पंकज राठौर ने स्पष्ट किया कि जनपद में किसी भी होटल, गेस्ट हाउस या व्यावसायिक प्रतिष्ठान को फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि सुरक्षा मानकों में कमी पाए जाने पर संबंधित संस्थान के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। अग्निशमन अधिकारी अनुराग सिंह ने बताया कि यह अभियान केवल औपचारिक निरीक्षण नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में भी शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के विभिन्न प्रतिष्ठानों की जांच जारी रहेगी। सभी को सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना होगा। दिल्ली में हुए अग्निकांड के बाद प्रशासन कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। जनपद भर में सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की जा रही है, ताकि भविष्य में किसी भी बड़े हादसे की संभावना को समय रहते रोका जा सके।



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अररिया में पोखर में डूबी 3 किशोरियों की मौत: नहाने के लिए पानी में उतरीं; जलावन लेने घर से निकली थीं,ग्रामीण बोले-चेतावनी बोर्ड लगाएं – Araria News




अररिया के भरगामा प्रखंड अंतर्गत खजुरी पंचायत के बलुआही टोला वार्ड संख्या-4 में गुरुवार दोपहर 3 किशोरियों की पोखर में डूबने से मौत हो गई। घटना दोपहर करीब तीन बजे की बताई जा रही है। हादसे के बाद पूरे गांव में शोक और मातम का माहौल है। मृतक किशोरियों की पहचान उपेंद्र ऋषिदेव की 13 वर्षीय पुत्री रनिया कुमारी, फूलचंद ऋषिदेव की 14 वर्षीय पुत्री अंजली कुमारी तथा राजू ऋषिदेव की 14 वर्षीय पुत्री काजल कुमारी के रूप में हुई है। तीनों महादलित बस्ती की रहने वाली थीं। देखें,मौके से आई तस्वीरें… सिलसिलेवार पढ़ें, पूरा मामला… जलावन चुनने घर से निकली थीं स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, तीनों किशोरियां दोपहर में जलावन चुनने के लिए घर से निकली थीं। भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए वे पास स्थित एक पोखर में नहाने चली गईं। इसी दौरान वे अनजाने में पोखर के गहरे हिस्से में पहुंच गईं और डूबने लगीं। आसपास कोई मौजूद नहीं होने के कारण समय रहते उनकी मदद नहीं हो सकी। परिजनों-ग्रामीणों ने तलाश शुरू की काफी देर तक बच्चियों के घर नहीं लौटने पर परिजनों और ग्रामीणों ने उनकी तलाश शुरू की। खोजबीन के दौरान पोखर में डूबने की आशंका होने पर ग्रामीणों ने पानी में तलाश की और काफी मशक्कत के बाद तीनों के शव बाहर निकाले। यह दृश्य देखकर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। सूचना पर पहुंची पुलिस जांच में जुटी घटना की सूचना मिलते ही भरगामा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जानकारी जुटाई। पुलिस ने शवों को अपने कब्जे में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है तथा घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। पोखरों पर सुरक्षा के इंतजाम किए जाएं इस हृदयविदारक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांवों के पोखरों और तालाबों के गहरे हिस्सों की पहचान कर वहां चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं तथा सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए जाएं, ताकि भविष्य में इस तरह की दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।



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8 जून को लॉन्च होगा Infinix Smart 20, कीमत 10,000 रुपये से भी कम?


8 जून को Infinix अपना एक और बजट फ्रेंडली फोन लॉन्च करने जा रहा है। कंपनी ने इस फोन की लॉन्च डेट कंफर्म कर दी है। इसकी कीमत 10,000 रुपये से कम हो सकती है। इन्फिनिक्स का यह फोन ई-कॉमर्स वेबसाइट Flipkart पर लिस्ट किया गया है। साथ ही, फोन का एक माइक्रोसाइट भी तैयार किया गया है, जहां इसके कई फीचर्स भी रिवील हुए हैं। Infinix का यह स्मार्टफोन पिछले साल आए Infinix Smart 10 का अपग्रेड होगा।

Infinix Smart 20 की लॉन्च डेट कंफर्म

इनफिनिक्स का यह फोन 8 जून को दिन के 12 बजे ई-कॉमर्स वेबसाइट फ्लिपकार्ट पर लॉन्च होगा। फोन की कीमत भी लॉन्च से पहले लीक हो गई है। यह फोन चार कलर ऑप्शन – क्लाउडलाइन ब्लू, पोलारिस टाइटेनियम, शैडो ब्लैक और सनलाइक ऑरेंज में आएगा। लिस्टिंग के मुताबिक, इस फोन के बैक में डुअल कैमरा सेटअप और LED फ्लैश लाइट मिलेगी।

मिलेंगे ये फीचर्स?

माइक्रोसाइट के मुताबिक, इस फोन में पंच-होल डिजाइन वाला डिस्प्ले मिलेगा। फोन के बैक में 3D टेक्स्चर डिजाइन दिया जाएगा। वहीं, फ्रेम में पावर बटन के साथ वॉल्यूम कंट्रोलर्स देखे जा सकते हैं। फोन की मोटाई 7.7mm होगी। इस फोन के फीचर्स की बात करें तो इसमें MediaTek Helio G81 चिपसेट दिया जा सकता है। इसमें 4GB रैम के साथ माइक्रोएसडी के जरिए 2TB तक स्टोरेज का सपोर्ट मिलेगा।

Infinix Smart 20 में 6.78 इंच का डिस्प्ले मिल सकता है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करेगा। फोन में 5,200mAh की बैटरी के साथ 15W वायर्ड और 5W रिवर्स वायर्ड चार्जिंग का सपोर्ट दिया जा सकता है। इसमें IP64 रेटिंग मिल सकती है, जो फोन को पानी में भींगने और धूल-मिट्टी से बचाएगा।

Infinix Smart 10 के फीचर्स

पिछले साल लॉन्च हुए Infinix Smart 10 की बात करें तो इसे भारत में 6,799 रुपये की शुरुआती कीमत में पेश किया गया था। फोन में 4GB रैम के साथ 64GB स्टोरेज मिलता है। यह फोन 6.67 इंच के HD+ डिस्प्ले के साथ आता है। फोन में Unisoc T7250 चिपसेट दिया गया है। इस फोन के बैक और फ्रंट में 8MP के कैमरे लगे हैं। यह फोन 5,000mAh की दमदार बैटरी के साथ आता है और Android 15 ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करता है।

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अशोकनगर धर्मांतरण और जबरन निकाह केस का साजिशकर्ता गिरफ्तार: भोपाल से दबोचा गया आरोपी, बेटे समेत आरोपियों को संरक्षण देने का आरोप – Ashoknagar News




अशोकनगर जिले के पिपरई थाना क्षेत्र में नाबालिग बालिकाओं के धर्मांतरण, बहला-फुसलाकर शोषण, दुष्कर्म और जबरन निकाह के चर्चित मामले में पुलिस को सफलता मिली है। विशेष जांच दल (एसआईटी) ने गुरुवार को एक प्रमुख साजिशकर्ता को भोपाल से गिरफ्तार किया है। आरोपी पर अपने बेटे सहित अन्य आरोपियों को संरक्षण देने और पूरी साजिश में सहयोग करने का आरोप है। पुलिस के अनुसार, यह मामला 16 अप्रैल को पिपरई थाने में दर्ज रिपोर्ट के आधार पर धर्मांतरण एवं दुष्प्रेरण से जुड़ी धाराओं में कायम किया गया था। प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक राजीव कुमार मिश्रा के निर्देश पर एसडीओपी विवेक शर्मा के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल का गठन किया गया था। फरार आरोपियों की गिरफ्तारी पर 10 हजार रुपए का इनाम भी घोषित किया गया था। किन्नर समेत अन्य आरोपी पहले गिरफ्तार हो चुके
जांच के दौरान मिले साक्ष्यों और तकनीकी जानकारी के आधार पर बस्सू उर्फ बशीर (55) को गिरफ्तार किया गया। वह भोपाल के लक्ष्मीगंज, बरखेड़ी जहांगीराबाद का निवासी है। पुलिस ने बताया कि आरोपी ने अपने बेटे को संरक्षण देते हुए नाबालिग बालिकाओं के धर्म परिवर्तन, बहला-फुसलाने, दुष्कर्म और जबरन निकाह जैसी आपराधिक गतिविधियों में सक्रिय रूप से सहयोग किया था। इस मामले में इससे पहले एक विधि-विवादित बालक सहित अल्तमश कुरैशी, आहद उर्फ आहत शेख और जस्सी किन्नर को गिरफ्तार किया जा चुका है। पुलिस अब इस पूरे नेटवर्क और इससे जुड़े अन्य लोगों की भूमिका की भी गहनता से जांच कर रही है। आदतन अपराधी है आरोपी बस्सू
पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार, गिरफ्तार आरोपी आदतन अपराधी है। उसके खिलाफ भोपाल के जहांगीराबाद थाने में मारपीट, अवैध हथियार, हत्या, नकबजनी, चोरी, अवैध वसूली, अवैध शराब बिक्री और जुआ समेत दो दर्जन से अधिक आपराधिक प्रकरण दर्ज हैं। आरोपी के विरुद्ध दो बार राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) के तहत भी कार्रवाई की जा चुकी है। पुलिस अधीक्षक राजीव कुमार मिश्रा ने कहा कि महिलाओं और बालिकाओं के खिलाफ अपराध, धर्मांतरण, मानव तस्करी तथा अन्य गंभीर मामलों में जिले में सख्त और त्वरित कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि कानून व्यवस्था से खिलवाड़ करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा।



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राज्यसभा चुनाव- भाजपा ने 11 उम्मीदवारों की लिस्ट जारी की: एमपी से तरुण चुग, राजस्थान से सतीश पूनिया प्रत्याशी; 26 सीटों पर 18 जून को चुनाव


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भोपाल/जयपुर/अहमदाबाद/दिल्ली1 मिनट पहले

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भाजपा ने राज्यसभा चुनाव के लिए उम्मीदवारों की पहली लिस्ट जारी कर दी है। 12 राज्यों की 26 राज्यसभा सीटों पर 18 जून को चुनाव होगा। नामांकन भरने की लास्ट डेट 8 जून है।

BJP ने मध्यप्रदेश की दो सीटों के लिए राष्ट्रीय महासचिव तरुण चुग और उद्योगपति रजनीश अग्रवाल को उम्मीदवार बनाया है। राजस्थान से पूर्व प्रदेशाध्यक्ष डॉ. सतीश पूनिया और डॉ. अलका गुर्जर को टिकट दिया गया है।

गुजरात की चार सीटों पर राजूभाई शुक्ला, मुकेशभाई राठवा, मानसिंह परमार और जितेंद्र मेघजीभाई कंजारिया को उम्मीदवार बनाया गया है। अरुणाचल प्रदेश से ताई तागक और मणिपुर से ए. शारदा देवी को टिकट मिला है।

ओडिशा में राज्यसभा की खाली सीट पर होने वाले उपचुनाव के लिए पार्टी ने देवाशीष सामंतराय को उम्मीदवार घोषित किया है। यह सीट उपचुनाव के जरिए भरी जाएगी।

मेघालय और मिजोरम में भी प्रत्याशी घोषित

  • मेघालय: मेघालय डेमोक्रेटिक अलायंस-II (MDA-II) ने नेशनल पीपुल्स पार्टी (NPP) के जेम्स पीके संगमा को सर्वसम्मति से अपना उम्मीदवार बनाया है।
  • मिजोरम: राज्य की इकलौती सीट के लिए सत्ताधारी दल जोराम पीपुल्स मूवमेंट (ZPM) ने पार्टी प्रवक्ता के. लालतलुआंगकिमा के नाम की आधिकारिक घोषणा की है।

NDA के पास 26 में से 18 सीट

राज्यसभा की जिन 26 सीटों पर चुनाव होने हैं, उनमें से NDA के पास अभी 18 (आंध्र प्रदेश से 1, गुजरात से 4, कर्नाटक से 3, राजस्थान-मध्य प्रदेश से 2-2, झारखंड, मणिपुर, मेघालय, अरुणाचल, महाराष्ट्र और तमिलनाडु से एक-एक सीटे हैं)। वहीं कांग्रेस गठबंधन के पास 5 सीटे हैं। वहीं तीन अन्य सीटें YSRCP के खाते में हैं।

इन चुनावों में NDA को 17 सीटें मिलने की संभावना है, जबकि कांग्रेस को पांच, JMM को दो और TVK को एक सीट मिलने की उम्मीद है। एक सीट मिजोरम में जोरम पीपल्स मूवमेंट जीत सकती है। YSRCP अपनी तीनों सीटें गंवा सकती है।

244 सदस्यों वाले उच्च सदन में NDA के पास अभी 149 सांसद हैं, जबकि विपक्ष के पास 78 और गैर-गठबंधन वाले क्षेत्रीय दलों के पास 17 सांसद हैं।

ऐसे होता है राज्यसभा चुनाव

राज्यसभा सांसदों के लिए चुनाव की प्रक्रिया दूसरे चुनावों से काफी अलग है। राज्यसभा के सदस्य अप्रत्यक्ष रूप से चुने जाते हैं यानी जनता नहीं बल्कि विधायक इन्हें चुनते हैं। चुनाव हर दो साल में होते हैं, क्योंकि राज्यसभा एक स्थायी सदन है और इसके एक-तिहाई सदस्य हर दो साल में रिटायर होते हैं।

राज्यसभा सीटों की कुल संख्या 245 हैं। इनमें से 233 सीटों पर अप्रत्यक्ष रूप से चुनाव होते हैं और 12 सदस्यों को राष्ट्रपति मनोनीत करते हैं।

राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए कितने वोटों की जरूरत होती है, ये पहले से ही तय होता है। वोटों की संख्या का कैलकुलेशन कुल विधायकों की संख्या और राज्यसभा सीटों की संख्या के आधार पर होता है। इसमें एक विधायक की वोट की वैल्यू 100 होती है।

महाराष्ट्र की 7 सीटों के उदाहरण से फॉर्मूला समझते हैं

राज्यसभा चुनाव में किसी भी उम्मीदवार को जीतने के लिए एक निश्चित संख्या में मतों की आवश्यकता होती है, जिसे जीतने का कोटा (Quota) कहा जाता है। महाराष्ट्र विधानसभा में कुल 288 विधायक हैं। खाली हो रही सीटें 7 हैं।

कुल विधायकों की संख्या x 100/ (राज्यसभा की सीटें+1) = +1 288X100/(7+1)= +1 28800/8= +1 3600= +1 3601 चूंकि एक विधायक के वोट की वैल्यू 100 होती है। इसलिए महाराष्ट्र में अभी एक राज्यसभा सीट पर जीत के लिए कम से कम 36 विधायकों की जरूरत होगी।

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जानिए ऑयल फ्री सब्जी बनाने के आसान तरीके, हेल्थ भी रहेगी फिट


Oil Free Sabji: आज के समय में लोग अपने खान-पान को लेकर पहले से कहीं ज्यादा जागरूक हो गए हैं. बढ़ता वजन, हाई कोलेस्ट्रॉल, ब्लड प्रेशर और दिल से जुड़ी परेशानियों ने लोगों को अपनी रोजमर्रा की डाइट पर ध्यान देने के लिए मजबूर किया है. ऐसे में सबसे पहले जिस चीज पर लोगों की नजर जाती है, वह है खाने में इस्तेमाल होने वाला तेल. कई लोग तेल कम करने की कोशिश करते हैं, जबकि कुछ लोग पूरी तरह ऑयल फ्री खाना अपनाने लगे हैं. हालांकि अब भी बहुत से लोगों को लगता है कि बिना तेल के बनी सब्जी फीकी और बेस्वाद होती है. यही वजह है कि वे इस तरीके को अपनाने से बचते हैं. असल में यह सिर्फ एक गलतफहमी है.

सही तकनीक और कुछ आसान किचन टिप्स की मदद से बिना एक बूंद तेल के भी स्वादिष्ट, खुशबूदार और लाजवाब सब्जियां बनाई जा सकती हैं. कई बार तो सब्जियों का असली स्वाद तभी सामने आता है जब उनमें तेल का ज्यादा इस्तेमाल न किया जाए, अगर आप भी हेल्दी लाइफस्टाइल की तरफ कदम बढ़ाना चाहते हैं और स्वाद से कोई समझौता नहीं करना चाहते, तो ऑयल फ्री सब्जी बनाने के ये आसान तरीके आपके बेहद काम आने वाले हैं.

1. सही बर्तन चुनना है सबसे पहला कदम
ऑयल फ्री कुकिंग में बर्तनों की भूमिका बहुत अहम होती है, अगर आप नॉन-स्टिक पैन या भारी तले वाली कढ़ाई का इस्तेमाल करते हैं तो सब्जी आसानी से पकती है और चिपकती भी नहीं. इससे तेल की जरूरत काफी हद तक खत्म हो जाती है. मोटे तले वाले बर्तन गर्मी को बराबर फैलाते हैं जिससे सब्जियां अच्छी तरह पकती हैं.

2. पानी से भी हो सकती है बेहतरीन भुनाई
अक्सर लोग सोचते हैं कि प्याज, अदरक, लहसुन और टमाटर को भूनने के लिए तेल जरूरी है, लेकिन ऐसा नहीं है. आप इन चीजों को थोड़ा-थोड़ा पानी डालकर भी अच्छी तरह भून सकते हैं. जब पानी सूखने लगे तो थोड़ा और पानी डाल दें और लगातार चलाते रहें. इससे मसाले धीरे-धीरे पकेंगे और उनका स्वाद भी बरकरार रहेगा. टमाटर की प्यूरी या वेजिटेबल स्टॉक का इस्तेमाल भी इस काम के लिए किया जा सकता है. इससे सब्जी का फ्लेवर और बेहतर हो जाता है.

3. सूखे मसाले बढ़ाते हैं स्वाद
अगर आप बिना तेल के खाना बना रहे हैं तो मसालों का सही इस्तेमाल बेहद जरूरी है. जीरा, धनिया, सौंफ और काली मिर्च जैसे मसालों को हल्का सूखा भून लें. इसके बाद इन्हें पीसकर सब्जी में डालें. ऐसा करने से मसालों की खुशबू कई गुना बढ़ जाती है और सब्जी में गहराई वाला स्वाद आता है.

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4. हींग देगी तड़के जैसा स्वाद
हींग एक ऐसा मसाला है जो कम मात्रा में भी खाने का स्वाद बदल देता है. ऑयल फ्री सब्जी में हींग का इस्तेमाल तड़के जैसी खुशबू और स्वाद देता है. आप इसे सीधे सब्जी में डाल सकते हैं या पानी में घोलकर मिला सकते हैं. खासकर दाल और आलू की सब्जी में हींग का स्वाद शानदार लगता है.

कौन सी सब्जियां बनती हैं सबसे अच्छी
कुछ सब्जियां ऐसी होती हैं जो बिना तेल के भी बहुत अच्छी बन जाती हैं. इनमें लौकी, तोरी, कद्दू, पालक, मशरूम, टमाटर, पत्ता गोभी और फूलगोभी शामिल हैं. इन सब्जियों में प्राकृतिक नमी होती है जिससे इन्हें पकाने में ज्यादा परेशानी नहीं होती. फूलगोभी और पत्ता गोभी जैसी सब्जियों को पहले हल्का उबाल लिया जाए तो वे जल्दी पकती हैं और स्वाद भी अच्छा आता है.

स्टीम और प्रेशर कुकिंग का लें सहारा
अगर आप सब्जियों को पहले स्टीम कर लेते हैं तो उनकी बनावट और स्वाद दोनों बेहतर रहते हैं. स्टीम की हुई सब्जियां जल्दी पकती हैं और उनमें पोषक तत्व भी ज्यादा बचते हैं. इसी तरह दाल, राजमा या कुछ सख्त सब्जियों को प्रेशर कुकर में आसानी से पकाया जा सकता है. इससे समय की बचत भी होती है और तेल की जरूरत भी नहीं पड़ती.

स्वाद बढ़ाने के लिए अपनाएं ये तरीके
ऑयल फ्री खाना स्वादिष्ट बनाने के लिए हरा धनिया, पुदीना और करी पत्ता काफी मददगार होते हैं. ये खाने में ताजगी और शानदार खुशबू जोड़ते हैं. इसके अलावा नींबू का रस, अमचूर पाउडर और इमली का पल्प भी सब्जी के स्वाद को कई गुना बढ़ा देते हैं. हल्की खटास खाने को ज्यादा मजेदार बना देती है.

बिना तेल के कैसे बनाएं गाढ़ी ग्रेवी
कई लोगों को लगता है कि बिना तेल के ग्रेवी वाली सब्जी नहीं बन सकती, लेकिन यह पूरी तरह गलत है. टमाटर की प्यूरी, पानी में पकी प्याज की पेस्ट, कम वसा वाला दही, भीगे हुए काजू या खरबूजे के बीज की थोड़ी मात्रा ग्रेवी को गाढ़ापन और क्रीमी टेक्सचर दे सकती है. इस तरीके से बनी ग्रेवी स्वाद में भी अच्छी लगती है और शरीर पर अतिरिक्त फैट का बोझ भी नहीं डालती.



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अवैध हथियार-चोरी की संपत्ति मामले में दो दोषी करार: एडीजे कोर्ट ने 3-3 साल कारावास, 10-10 हजार जुर्माने की सजा सुनाई – Churu News




चूरू जिले के तारानगर अपर जिला एवं सेशन न्यायालय (एडीजे) ने अवैध हथियार और चोरी की संपत्ति रखने के एक पुराने मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। न्यायालय ने दो आरोपियों को दोषी ठहराते हुए उन्हें तीन-तीन वर्ष के कठोर कारावास और 10-10 हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई है। यह मामला वर्ष 2018 में साहवा थाने में दर्ज किया गया था। अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश संतोष कुमार मीणा ने हनुमानगढ़ जिले के जगतसिंह उर्फ कालू और बलराम को अवैध हथियार रखने तथा चोरी की संपत्ति अपने कब्जे में रखने का दोषी पाया। इस पर दोनों दोषियों को तीन-तीन वर्ष का कठोर कारावास भुगतना होगा। इसके अतिरिक्त, प्रत्येक पर 10 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया गया है। यदि आरोपी जुर्माने की राशि जमा नहीं करते हैं, तो उन्हें छह माह का अतिरिक्त कारावास भुगतना पड़ेगा। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अपर लोक अभियोजक पंकज कुमार स्वामी ने पैरवी की। उन्होंने साक्ष्य और तथ्यों को कोर्ट के समक्ष प्रस्तुत किया, जिसके आधार पर न्यायालय ने उपलब्ध गवाहों और साक्ष्यों को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय सुनाया।



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कॉकरोच जनता पार्टी के पीछे क्‍या तेजस्‍वी यादव का हाथ, तेज‍िंदर बग्‍गा ने पेश कर द‍िए सबूत


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कॉकरोच जनता पार्टी के पीछे क्‍या तेजस्‍वी यादव का हाथ, तेज‍िंदर बग्‍गा ने पेश कर द‍िए सबूत

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कॉकरोच जनता पार्टी के पीछे कौन है, यह सवाल तमाम लोगों के मन में है. लेकिन अब जो सबूत सामने आए हैं उसने पूरी कहानी बयां कर दी है. बीजेपी नेता तेज‍िंदर बग्‍गा ने इसके सबूत पेश कर द‍िए हैं. आरोप लगाया है क‍ि कॉकरोज जनता पार्टी को कांस्‍टीट्यूशन क्‍लब में जगह द‍िलाने में तेजस्‍वी यादव के नेता मनोज झा ने मदद की थी. उन्‍होंने बकायदा इसके ल‍िए लेटर भी जारी क‍िया है.

तेज‍िंदर बग्‍गा ने आरजेडी नेता मनोज झा का लेटरपैड शेयर करते हुए ल‍िखा, कॉकरोज जनता पार्टी का अभियान शुरू होने से पहले ही बेनकाब हो गया. CJP की कल की प्रेस कॉन्फ्रेंस भारत की सबसे ईमानदार पार्टी RJD के लालू प्रसाद यादव द्वारा प्रायोजित थी.





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