वाराणसी में मकान की नींव के लिए खोदी गई नींव में भरे बारिश के पानी में डूबकर 10 वर्षीय छात्र की मौत हो गई। शिवपुर थाना क्षेत्र के बेलवरियां गांव में बच्चा घर से बारिश के बाद खेलने के लिए निकला था और फिर अचानक पैर फिसलने से गड्ढे में जा गिरा। जेसीबी से खोदे गए गड्ढे में गहराई अधिक होने के कारण छात्र आशु पटेल डूब गया। कई प्रयास के बावजूद वह निकल नहीं पाया, वहीं आसपास किसी के नहीं होने से उसे बचाया नहीं जा सका। घर से लापता हुए बेटे की जब परिजनों ने तलाश की तो कोई खबर नहीं मिली । इसके बाद पास में लगे सीसी फुटेज खंगाले गए, जिसमें मासूम घर से बाहर निकलकर कॉलोनी में नवनिर्मित मकान की ओर जाता दिखाई दिया। इसके बाद सभी उसी ओर गए। आशंका जताई कि मकान की नींव के लिए खोदे गए गड्ढे को खंगाला जाए। इसके बाद सभी ने तलाश शुरू की तो एक ओर मासूम आशु पटेल का शव बरामद हुआ। जेसीबी से खोदाई होने के कारण नींव काफी गहरी थी, जिससे तलाश में भी लगभग एक घंटे लग गया। शव को डॉक्टर के पास ले गए जहां जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया गया। परिजनों ने पुलिस का मामले की जानकारी दी और किसी के द्वारा धक्का दिए जाने की आशंका जताते हुए जांच की बात कही। शिवपुर थाना क्षेत्र के बेलवरियां गांव में निर्माणाधीन मकान के आसपास के सभी सीसीटीवी कैमरे खंगाले जाएंगे। सुबह लापता हुआ फिर 2 बचे बरामदगी स्थानीय लोगों ने बताया कि बेलवरियां गांव निवासी 10 साल के छात्र आशु पटेल पढ़ने में तेज था। सुबह 11 बजे से लापता हुआ था तब बच्चे की परिजनों ने खोजबीन शुरू की। दोपहर 2 बजे उसका शव निर्माणाधीन मकान की नींच से निकला। डायल 112 की मदद से परिजनों ने उसे दीनदयाल अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने आशु को मृत घोषित कर दिया। परिवार में एक साल में दूसरी मौत से कोहराम मच गया। मृतक कक्षा 2 का छात्र था। महज एक वर्ष पूर्व ही परिवार की 5 वर्षीय बेटी की बीमारी से मौत हुई थी।
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मकान की नींव के जलभराव में डूबकर मासूम की मौत: वाराणसी में खेलने निकला था बच्चा, 2 घंटे तलाश के बाद CCTV से मिला सुराग – Varanasi News
राखी के अगले दिन जनविश्वास अभियान होगा: बालाघाट में रहेंगे सीएम मोहन, आवासीय विद्यालय, आश्रम, छात्रावास का निरीक्षण और संवाद करेंगे अफसर – Bhopal News
सामान्य प्रशासन विभाग ने मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के निर्देश के उपरांत मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के संबंध में सभी अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, विभागाध्यक्ष, संभागायुक्त, कलेक्टर और जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। इसमें कहा गया है कि अभियान के दौरान जनसमस्याओं के समाधान, शासकीय संस्थानों के निरीक्षण और आमजन से संवाद को प्राथमिकता देना है। रक्षाबंधन के अगले दिन 29 अगस्त शनिवार को बालाघाट जिले में मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान मुख्यमंत्री की मौजूदगी में आयोजित किया जाएगा। अभियान के दौरान जिला स्तरीय समाधान ऑनलाइन में चिन्हित शिकायतों को मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत कर उनका समाधान किया जाएगा। बैठक के साथ मीडिया और उद्योग संवाद भी होगा। इसका उद्देश्य स्थानीय समस्याओं, विकास कार्यों और औद्योगिक गतिविधियों से जुड़े मुद्दों पर संबंधित पक्षों से सीधे संवाद करना है। शासन ने निर्देश दिए हैं कि अन्य सभी जिलों में भी 29 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान आयोजित किया जाए। छात्रावास, आश्रम और आवासीय विद्यालयों का निरीक्षण अनिवार्य जन विश्वास अभियान के दौरान विभिन्न शासकीय आवासीय संस्थाओं का भ्रमण और निरीक्षण अनिवार्य किया गया है। इनमें आवासीय विद्यालय, आश्रम, छात्रावास सहित अन्य शासकीय आवासीय संस्थाएं शामिल हैं। इन संस्थाओं में रहने वाले छात्र-छात्राओं और युवाओं से संवाद एवं चर्चा करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए गए हैं, ताकि उनकी समस्याओं और आवश्यकताओं को सीधे समझा जा सके।
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जलमहल में युवक के छलांग लगाने से मचा हड़कंप: देर रात तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन, युवक बोला- हमारे सामने कूदा, 12 बजे तक नहीं मिला, सुबह फिर ढूंढेंगे – Jaipur News
जलमहल में बुधवार देर रात एक युवक के छलांग लगाने की सूचना से हड़कंप मच गया। रात करीब सवा दस बजे युवक के जलमहल में कूदने की सूचना प्रत्यक्षदर्शियों ने पुलिस कंट्रोल रूम को दी। सूचना मिलते ही ब्रह्मपुरी थाना पुलिस, एसडीआरएफ और सिविल डिफेंस की टीमें मौके पर पहुंचीं और झील में युवक की तलाश शुरू की। करीब दो घंटे तक चले सर्च ऑपरेशन के बावजूद देर रात तक युवक का कोई सुराग नहीं मिल सका। पाल पर मौजूद युवकों ने दी पुलिस को सूचना ब्रह्मपुरी थानाधिकारी बृज मोहन कविया ने बताया कि जलमहल के पास मौजूद दो युवकों ने पुलिस को सूचना दी थी कि एक युवक जलमहल में कूद गया है। इसके बाद पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने मौके पर पहुंचकर पानी में युवक की तलाश शुरू की। जलमहल की पाल पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया- पानी में दिखे युवक के हाथ प्रत्यक्षदर्शी राहुल ने बताया कि रात करीब सवा दस बजे एक युवक पजामा-टीशर्ट पहने जलमहल की पाल पर आया। कुछ देर बाद उसने अचानक झील में छलांग लगा दी। राहुल के अनुसार, वह चार दोस्तों के साथ चौपाटी पर मौजूद था। सूचना मिलने पर जब वे पाल के पास पहुंचे तो पानी में युवक के हाथ दिखाई दिए, लेकिन कुछ ही पल बाद वह पानी में डूब गया। मौके पर मौजूद देवेंद्र शर्मा ने भी बताया कि पजामा-टीशर्ट पहने युवक जलमहल की पाल पर आया और अचानक पानी में छलांग लगा दी। युवक के कूदते ही वहां मौजूद लोग उसकी ओर दौड़े, लेकिन तब तक वह पानी में डूब चुका था। शुरुआत में पानी के बीच उसके हाथ नजर आए, जो कुछ ही देर बाद दिखाई देना बंद हो गए। नाइट वॉक कर रहे लोगों ने देखा घटनाक्रम बताया जा रहा है कि उस समय चौपाटी पर नाइट वॉक कर रहे लोगों ने युवक को झील में डूबने से बचने के लिए हाथ-पैर चलाते हुए देखा। इसके बाद प्रत्यक्षदर्शियों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने नाव व अन्य संसाधनों की मदद से झील में युवक की तलाश शुरू की। देर रात तक नहीं मिला युवक का सुराग करीब दो घंटे तक पुलिस, एसडीआरएफ और सिविल डिफेंस की टीमों ने जलमहल की झील में सर्च ऑपरेशन चलाया। हालांकि देर रात तक युवक का पता नहीं चल सका।
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नेपाल में फ्लैश फ्लड,गंडक नदी में जलस्तर बढ़ने की आशंका: कटिहार प्रशासन ने संभावित बाढ़ से निपटने की तैयारी की समीक्षा की – Katihar News
नेपाल के जलग्रहण क्षेत्र में फ्लैश फ्लड की स्थिति और गंडक नदी में अचानक जलप्रवाह बढ़ने की संभावना के मद्देनजर कटिहार जिला प्रशासन विशेष सतर्कता बरत रहा है। संभावित बाढ़ की स्थिति से निपटने के लिए जिलाधिकारी आशुतोष द्विवेदी की अध्यक्षता में आज संबंधित पदाधिकारियों के साथ वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से समीक्षा बैठक की गई। बैठक के दौरान जिलाधिकारी ने सभी संबंधित अधिकारियों को संभावित आपातकालीन स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार रहने और आपसी समन्वय के साथ त्वरित कार्रवाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। सभी अंचल अधिकारियों और थाना प्रभारियों को अपने-अपने क्षेत्र में आमजनों को संभावित जलस्तर वृद्धि के संबंध में सतर्क करने के निर्देश दिए गए हैं। उन्हें जलस्तर बढ़ने की स्थिति में बरती जाने वाली सावधानियों और प्रशासन द्वारा जारी दिशा-निर्देशों की जानकारी लोगों तक पहुंचाने को कहा गया। विशेष रूप से नदी और तटबंध के आसपास रहने वाले लोगों से निरंतर संपर्क बनाए रखने तथा किसी भी आकस्मिक स्थिति में त्वरित प्रतिक्रिया सुनिश्चित करने का निर्देश दिया गया। सभी चिन्हित बाढ़ शरण स्थलों की आवश्यक तैयारियां पूरी करने के निर्देश दिए गए हैं। इन शरण स्थलों पर पेयजल, शौचालय, प्रकाश, भोजन, चिकित्सा और अन्य मूलभूत सुविधाओं की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा गया है, ताकि आवश्यकता पड़ने पर प्रभावित लोगों को तत्काल सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा सके। संभावित आपातकालीन स्थिति में त्वरित राहत और बचाव कार्य सुनिश्चित करने के लिए SDRF की टीम को त्वरित प्रतिक्रिया के लिए तैयार रहने का निर्देश दिया गया है। साथ ही, बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-1 और बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल-2 के कार्यपालक अभियंताओं को तटबंधों की सतत निगरानी सुनिश्चित करने तथा तटबंध चौकीदारों से लगातार स्थिति की जानकारी प्राप्त कर जिला प्रशासन को अवगत कराने को कहा गया है। किसी भी प्रकार की असामान्य स्थिति या तटबंध से संबंधित सूचना मिलने पर तत्काल आवश्यक कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। जिला प्रशासन ने आम नागरिकों से अपील की है कि संभावित जलवृद्धि की स्थिति को देखते हुए अनावश्यक यात्रा से बचें तथा नदी, तटबंध और अन्य संवेदनशील क्षेत्रों की ओर जाने से परहेज करें। साथ ही, किसी भी प्रकार की अफवाह अथवा भ्रामक सूचना पर विश्वास न करें। संभावित बाढ़ की स्थिति से संबंधित प्रमाणिक एवं अद्यतन जानकारी के लिए केवल जिला प्रशासन एवं अन्य अधिकृत सरकारी माध्यमों से प्राप्त सूचनाओं पर ही भरोसा करें। आमजनों की सहायता एवं आपातकालीन परिस्थितियों में त्वरित समन्वय के लिए जिला, अनुमंडल एवं सभी अंचल स्तर पर नियंत्रण कक्ष (Control Room) की स्थापना कर दी गई है।
जिला नियंत्रण कक्ष दूरभाष संख्या: 06452-239025/239026, 06452-242400 जारी किया है। जिलाधिकारी द्वारा सभी संबंधित पदाधिकारियों को निर्देशित किया गया कि संभावित बाढ़ की स्थिति में आपसी समन्वय, सतत निगरानी एवं त्वरित प्रतिक्रिया के साथ कार्य करते हुए आम नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता दी जाए।
जिला प्रशासन द्वारा स्थिति पर लगातार नजर रखी जा रही है तथा आवश्यकतानुसार सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं।
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UP TET 2026 का रिजल्ट हुआ जारी, 13 लाख से ज्यादा अभ्यर्थी हुए सफल
लखनऊ: उत्तर प्रदेश शिक्षा सेवा चयन आयोग (UPESSC) ने बुधवार (26 अगस्त) को उत्तर प्रदेश शिक्षक पात्रता परीक्षा (UPTET) 2026 के नतीजे घोषित किए, जिसमें प्राइमरी और अपर-प्राइमरी स्तर पर 13 लाख से ज़्यादा उम्मीदवार सफल हुए।
प्राइमरी लेवल पर, जिसमें क्लास 1 से 5 तक शामिल हैं, कुल 7,13,648 उम्मीदवार शामिल हुए, जिनमें से 5,71,435 यानी 80.07 प्रतिशत सफल घोषित किए गए। अपर-प्राइमरी लेवल पर, जिसमें क्लास 6 से 8 तक शामिल हैं, 10,57,021 उम्मीदवार शामिल हुए, जिनमें से 7,59,513 यानी 71.85 प्रतिशत उम्मीदवार क्वालिफाई हुए।
परीक्षा में शामिल होने वाले कार्यरत शिक्षकों में से, 1,22,405 उम्मीदवारों में से 93,387 (76.29 प्रतिशत) प्राइमरी लेवल पर क्वालिफ़ाई हुए। अपर-प्राइमरी लेवल पर, 1,46,394 कार्यरत शिक्षकों में से 1,13,384 (77.45 प्रतिशत) सफल घोषित किए गए।
UPTET स्कोरकार्ड PDF कैसे डाउनलोड करें
उम्मीदवार UPTET स्कोरकार्ड PDF डाउनलोड करने के लिए इन स्टेप्स को फ़ॉलो कर सकते हैं। UPTET स्कोरकार्ड PDF डाउनलोड करने के लिए, उम्मीदवारों को ऑफ़िशियल वेबसाइट – upessc.up.gov.in पर जाना होगा और UPTET स्कोरकार्ड PDF लिंक पर क्लिक करना होगा। लॉग-इन क्रेडेंशियल – एप्लीकेशन नंबर और जन्म तिथि – डालें। UPTET स्कोरकार्ड PDF डाउनलोड के लिए उपलब्ध हो जाएगा; UPTET स्कोरकार्ड PDF को सेव करें और उसका प्रिंटआउट ले लें।
- ऑफिशियल वेबसाइट – upessc.up.gov.in पर जाएं।
- UPTET स्कोरकार्ड PDF लिंक पर क्लिक करें।
- जरूरी लॉगिन क्रेडेंशियल के तौर पर एप्लीकेशन नंबर और जन्म तिथि का इस्तेमाल करें।
- UPTET स्कोरकार्ड PDF डाउनलोड के लिए स्क्रीन पर दिखाई देगा।
- UPTET स्कोरकार्ड PDF को सेव करें और उसकी हार्ड कॉपी लें।
UPTET मेरिट लिस्ट कैसे डाउनलोड करें
- ऑफिशियल वेबसाइट – upessc.up.gov.in पर जाएं।
- UPTET मेरिट लिस्ट PDF लिंक पर क्लिक करें।
- UPTET मेरिट लिस्ट PDF डाउनलोड के लिए स्क्रीन पर दिखाई देगी।
- UPTET टॉपर लिस्ट PDF को सेव करें और प्रिंटआउट निकाल लें।
चयन आयोग के अध्यक्ष डॉ. प्रशांत कुमार ने कहा कि आयोग ने 19 लाख से अधिक अभ्यर्थियों वाली इस विशाल परीक्षा को पूरी निष्पक्षता, पारदर्शिता और सुरक्षा के साथ सम्पन्न कराया है। विज्ञापन में पूर्व से निर्धारित तुलनात्मक मूल्यांकन प्रक्रिया का पालन करते हुए परिणाम तैयार किया गया है।
इससे पहले UPTGT का 2026 परीक्षा का रिजल्ट जारी हुआ था।
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बिहार-झारखण्ड-छत्तीसगढ़ वाले जल्दी पहुंचेंगे, रेलवे के ये 7 रूट्स होंगे फोर लेन
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देश के सबसे व्यस्त रेलवे रूटों पर ट्रेनों की रफ्तार और संख्या बढ़ाने के लिए रेलवे बड़ा विस्तार करने जा रहा है. करीब 11 हजार किलोमीटर लंबे हाई डेंसिटी रेल नेटवर्क को फोर लेन करने की योजना है. इन रूटों पर देश के कुल रेल ट्रैफिक का करीब 41 फीसदी हिस्सा चलता है, जबकि ये पूरे रेल नेटवर्क का सिर्फ 16 फीसदी हैं. इस विस्तार से यात्रियों के साथ मालगाड़ियों की आवाजाही के लिए भी ज्यादा क्षमता उपलब्ध होगी.
ये रूट पूरे भारतीय रेल नेटवर्क के सिर्फ 16 फीसदी हिस्से में फैले हैं.
नई दिल्ली. देश में ट्रेन से सफर करने वाले करोड़ों यात्रियों के लिए रेलवे जल्द ही अपनी सबसे व्यस्त रेल लाइनों की क्षमता बढ़ाने जा रहा है. जिन रूटों पर अभी ट्रेनों की भीड़ सबसे ज्यादा रहती है, वहां अतिरिक्त रेलवे लाइन बिछाकर नेटवर्क को फोर लेन किया जाएगा. इसका मतलब यह है कि इन कॉरिडोर पर ट्रेनों के लिए ज्यादा रास्ता उपलब्ध होगा और एक ही लाइन पर ट्रेनों की आवाजाही के कारण होने वाली दिक्कतें कम की जा सकेंगी. रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने देश के हाई डेंसिटी रेल नेटवर्क को फोर लेन करने की योजना की जानकारी दी है.
करीब 11 हजार किलोमीटर लंबे इन प्रमुख रेल रूटों पर देश के कुल रेल ट्रैफिक का लगभग 41 फीसदी हिस्सा चलता है. खास बात यह है कि ये रूट पूरे भारतीय रेल नेटवर्क के सिर्फ 16 फीसदी हिस्से में फैले हैं. यानी रेलवे के एक छोटे से हिस्से पर ट्रेनों का बहुत बड़ा ट्रैफिक चल रहा है.
किन रूटों को किया जाएगा फोर लेन
रेलवे की योजना में 7 प्रमुख हाई डेंसिटी रूट शामिल हैं.
- दिल्ली से हावड़ा.
- हावड़ा से चेन्नई.
- चेन्नई से मुंबई.
- मुंबई से दिल्ली.
- दिल्ली से चेन्नई.
- मुंबई से हावड़ा.
- दिल्ली से गुवाहाटी.
इन रूटों को देश की सबसे व्यस्त रेल लाइनों में गिना जाता है. इन पर यात्री ट्रेन, एक्सप्रेस ट्रेन और बड़ी संख्या में मालगाड़ियां एक साथ चलती हैं. ट्रैफिक ज्यादा होने के कारण कई बार नई ट्रेन शुरू करने या मौजूदा ट्रेनों की संख्या बढ़ाने में रेलवे को क्षमता की समस्या का सामना करना पड़ता है.
बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ वालों को क्या फायदा
इस योजना का फायदा सिर्फ बड़े शहरों तक सीमित नहीं रहेगा. दिल्ली हावड़ा और मुंबई हावड़ा जैसे प्रमुख कॉरिडोर देश के पूर्वी हिस्से को उत्तर और पश्चिम भारत से जोड़ते हैं. इन रूटों से बिहार, झारखंड और छत्तीसगढ़ के कई प्रमुख रेल कनेक्शन जुड़े हुए हैं. अभी इन इलाकों से दिल्ली, मुंबई या देश के दूसरे हिस्सों की तरफ जाने वाली ट्रेनों में भारी भीड़ देखने को मिलती है. नई रेलवे लाइनें बनने से इस नेटवर्क की क्षमता बढ़ेगी. इसका फायदा आने वाले समय में नई ट्रेनों को चलाने, ट्रेनों के फेरे बढ़ाने और मालगाड़ियों के लिए अलग से ज्यादा क्षमता उपलब्ध कराने में मिल सकता है.
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भारत में नेपाल जैसी तबाही को उफन रहीं 88 झीलें: खतरे में 6 प्रदेश, ‘ग्लेशियल लेक’ अचानक कैसे फट जाती हैं
26 अगस्त की सुबह 9 बजे। तिब्बत से सटे नेपाल के रसुवा जिले की भोटेकोशी नदी में अचानक तेज बाढ़ आ गई। कुछ ही मिनटों में सड़कें, इमारतें, गांव बह गए। सैकड़ों लोग लापता हैं, जिनमें भारत-अमेरिका समेत 26 देशों के नागरिक शामिल हैं। रात 9 बजे तक 95 मौतों की पुष्टि हो चुकी है। शुरुआती आकलन के मुताबिक, तबाही की वजह ‘ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड’ यानी GLOF है। करीब एक साल पहले, जुलाई 2025 में भी इसी इलाके में तिब्बत की एक ग्लेशियर झील तापमान बढ़ने से फट गई थी, जिसमें 9 लोगों की जान गई थी। ये एक पैटर्न-सा बनता जा रहा है। GLOF की जद में भारत के भी कई इलाके हैं। 5 गुना बढ़ गईं ग्लेशियर झीलें, खतरे में भारत के 6 प्रदेश IIT रोपड़ और सिडनी की यूनिवर्सिटी ऑफ टेक्नोलॉजी ने एक साझा स्टडी की। इसी महीने जारी रिपोर्ट के मुताबिक, हिमाचल प्रदेश में 1990 में सिर्फ 107 ग्लेशियर झीलें थीं। 2024 तक यह संख्या बढ़कर 669 हो गई, यानी 525% की बढ़ोत्तरी। 669 में से 88 झीलों पर नेपाल जैसी ‘ग्लेशियर लेक आउटबर्स्ट फ्लड’ का खतरा मंडरा रहा है। 9 झीलों को ‘बेहद ज्यादा खतरनाक’, 18 को ‘ज्यादा खतरनाक’ और 26 को ‘मध्यम खतरनाक’ श्रेणी में रखा गया है। रिसर्चर्स ने दो झीलों पर खास मॉडलिंग की- ब्यास बेसिन की हिमसू झील और सतलुज बेसिन की एक बेनाम झील। अगर ब्यास झील का नेचुरल डैम टूट जाए, तो 1,385 क्यूबिक मीटर प्रति सेकेंड की बाढ़ आएगी। यानी हर सेकेंड करीब 14 लाख लीटर पानी बहेगा। इससे हर सेकेंड ओलंपिक साइज के 6 स्विमिंग पूल भरे जा सकते हैं। इसी तरह सतलुज झील से 3,507 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड पानी का सैलाब आएगा। यानी हर सेकेंड करीब 35 लाख लीटर पानी बहेगा। इससे डैम और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट समेत 588 इमारतों को खतरा है। हिमालय का बढ़ता तामपान इस खतरे को और बढ़ा रहा है। जुलाई 2026 में आई IIT खड़गपुर की एक स्टडी बताती है कि ऊंचाई वाले इलाकों का तापमान पिछले 20 सालों में करीब 1 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है। वैज्ञानिकों की चेतावनी है कि इससे ग्लेशियर पिघलने और नदियों के बहाव में बड़ा बदलाव आ सकता है। ग्लेशियर झीलें अचानक कैसे फट जाती हैं? पहाड़ों पर ऊंचाई पर मौजूद ग्लेशियर जब पिघलते हैं, तो उनका पानी आसपास के निचले इलाके या किसी चट्टानी दीवार के सहारे इकट्ठा होने लगता है। ये धीरे-धीरे एक झील का रूप ले लेता है, जिसे ‘ग्लेशियल लेक’ कहते हैं। ये झील ग्लेशियर के सामने या उसकी निचली सतह पर भी बन सकती है। इन झीलों को बर्फ, पहाड़ का मलबा या चट्टान की एक नैचुरल दीवार यानी ‘डैम’ रोककर रखती है। जब ये दीवार किसी वजह से अचानक टूट जाती है, तो झील में जमा लाखों-करोड़ों क्यूबिक मीटर पानी बहुत तेज रफ्तार से बेकाबू होकर नीचे की तरफ बहता है। इसी को ‘ग्लेशियल लेक आउटबर्स्ट फ्लड, GLOF या ग्लेशियर की झील फटना कहते हैं। GLOF में पानी के बहाव की रफ्तार आम बारिश से आई बाढ़ के मुकाबले कई गुना ज्यादा होती है, जिससे यह रास्ते में आने वाली हर चीज को बहुत तेजी से काटती-छांटती और बहाती चली जाती है। ग्लेशियर झील 3 वजहों से फट सकती हैं… 1. ग्लोबल वार्मिंग से ग्लेशियर का तेजी से पिघलना 2. बर्फ या चट्टान का झील में गिरना 3. भारी बारिश से झील का ओवरफ्लो होना GLOF की तबाही कैसे रोकी जा सकती है? नेशनल डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी, NDMA और नेशनल GLOF रिस्क मिटिगेशन प्रोग्राम के मुताबिक, क्या नेपाल की बाढ़ से भारत में फौरन कोई खतरा? इसलिए भोटेकोशी में अधिक पानी आने पर उसका पानी सुनकोशी और फिर कोसी नदी तंत्र में शामिल हो सकता है। इससे सुपौल, सहरसा, मधेपुरा और खगड़िया जिले काफी प्रभावित हो सकते हैं। 2008 में नेपाल के कुसहा में कोसी नदी का तटबंध टूट गया था। इसके बाद कोसी नदी अपने नए/प्राकृतिक रास्ते को छोड़कर सैकड़ों साल पुराने पूर्व की ओर वाले रास्ते पर बहने लगी। इससे अचानक नदी का रुख घनी आबादी और नए इलाकों की तरफ मुड़ गया, जिससे बिहार के 34 लाख से अधिक लोग बिना किसी पूर्व चेतावनी के भीषण बाढ़ की चपेट में आ गए। हालांकि, इस बार रसुवा में लैंडस्लाइड, भूस्खलन या हिम झील टूटने से अचानक नदी में भारी मात्रा में पानी आ गया है। लेकिन नदी ने अपना रास्ता नहीं बदला है। वह अपने तय रास्ते पर बह रही है। इस कारण एक्सपर्ट तटबंध टूटने की संभावना व्यक्त नहीं कर रहे हैं। पानी के भारी दबाव और संभावित बढ़ोतरी को देखते हुए पश्चिमी चंपारण के वाल्मीकिनगर गंडक बैराज के सभी 36 फाटक खोल दिए गए हैं। बिहार के 8 जिलों में हाईअलर्ट जारी किया गया है। ये जिले पश्चिमी चंपारण (बगहा), पूर्वी चंपारण (मोतिहारी), गोपालगंज, सारण, मुजफ्फरपुर, वैशाली, सीतामढ़ी और शिवहर हैं। ———— ये खबरें भी पढ़ें- नेपाल में बाढ़ से तबाही, सैकड़ों लापता, 95 मौतें:पावर प्लांट-पुल बहे; 133 भारतीय लापता, कैलाश मानसरोवर यात्रा पर जा रहे थे नेपाल की बाढ़ से गंडक नदी में अचानक पानी बढ़ा:बैराज के 36 गेट खोले गए, मोतिहारी-गोपालगंज समेत बिहार के 8 जिलों में हाई अलर्ट
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योगी जी लाएं चंदा चोरी पर नया कानून: वाराणसी पहुंचे धर्माचार्य परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष, बोले – राम-मंदिर के चंदा-चोरों के घरों पर चले बुलडोजर – Varanasi News
वाराणसी पहुंचे धर्माचार्य परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष स्वामी डॉ अनिकेत शास्त्री ने राम मंदिर चंदा चोरी पर बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा की जिसने चोरी की है और जो दोषी पाए गए हैं। उनके घरों पर सरकार बुलडोजर की कार्रवाई करे। साथ ही उन्होंने नया कानून बनाने की मांग भी उत्तर प्रदेश के सीएम से की। संस्कृत विश्वविद्यालय के योग संस्थान में स्वामी डॉ अनिकेत शास्त्री का स्वागत किया गया। काशी विद्वत धर्म परिषद की तरफ से आयोजित इस स्वागत समारोह में उन्होंने काशी को मुक्ति की नगरी बताया। दोषियों पर हो सख्त कार्रवाई स्वामी डॉ अनिकेत शास्त्री ने कहा – राम मंदिर में चंदा चोरी हो या कोई भी चोरी हो यह शास्त्र में सदा सर्वथा निषिद्ध था। अपने संविधान में भी इसके लिए दंडविधान है। तो मै सरकार से यही कहूंगा की जो दोषी है। उनके ऊपर सख्त से सख्त कार्रवाई हो। और ऐसी चोरी आगे किसी भी मंदिरों में न हो इसके लिए प्रावधान हो और कानून बनाया जाए। योगी महराज जी से हम आग्रह करते हैं कि जो लोग भी राम मंदिर में चोरी के दोषी पाए गए हैं। उनके घरों के ऊपर भी बुलडोजर चलाया जाए। वेद और वेदांग से जुड़ी हुई काशी स्वामी डॉ अनिकेत शास्त्री ने कहा – मै महाराष्ट्र के नासिक से मुक्ति की धरती काशी में आया हूं। काशी विद्वत धर्म परिषद की जो परंपरा रही है। उसके माध्यम से यह काशी नगरी सिर्फ नगरी न रहकर यह ज्ञान और वेद वेदांग से जुड़ी हुई है। ऐसा दिव्य कार्य काशी विद्वत धर्म परिषद लगतार काशी में कर रहा है। आज हमें यहां आने का मौका मिला है। कुछ दिन प्रवास कर काशी में सभी मंदिरों में पूजन अर्चन करूंगा और फिर प्रस्थान करूंगा।
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