Sunday, August 23, 2026
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पूर्व मंत्री के गांव में नदी रोकती बच्चों की पढ़ाई: बारिश में शिक्षक ट्यूब से नदी पार करते, बच्चों की पढ़ाई महीनों प्रभावित; सड़क-पुल मंजूर – Bhind News




भिंड से करीब 15-16 किलोमीटर दूर नदरौली गांव में स्कूल जाने के लिए शिक्षक और बच्चों को नदी पार करनी पड़ती है। बारिश में नदी का बहाव तेज होते ही इसे पैदल पार करना संभव नहीं रहता। ऐसे में ग्रामीणों को ट्यूब या मटके के सहारे नदी पार करनी पड़ती है। बारिश के दौरान स्थिति बिगड़ने पर गांव का संपर्क लगभग पूरी तरह टूट जाता है। शिक्षक कई-कई घंटे नदी किनारे बैठकर पानी का बहाव कम होने का इंतजार करते हैं। कई बार 5-6 दिन तक स्कूल पहुंचना संभव नहीं हो पाता। वहीं आठवीं के बाद पढ़ने के लिए दूसरे गांव जाने वाले बच्चों की पढ़ाई बारिश के दौरान तीन से चार महीने तक प्रभावित होने की बात ग्रामीण बता रहे हैं। नदरौली गांव बबेडी पंचायत के अंतर्गत आता है। गांव तक पहुंचने के लिए कोई प्रमुख पक्की सड़क नहीं है। पराये के पुरा से आगे करीब दो किलोमीटर तक खेतों की मेड़ और कच्चे रास्ते से होकर नदी तक पहुंचना पड़ता है। नदी के दूसरी तरफ नदरौली गांव है। खास बात यह है कि नदरौली पूर्व राज्य मंत्री डॉ. राजकुमार कुशवाह का पैतृक गांव है। ग्रामीणों के मुताबिक गांव में पक्की सड़क और नदी पर पुल नहीं होने से बारिश में बच्चों की पढ़ाई के साथ पूरे गांव का आवागमन प्रभावित होता है। भास्कर टीम गांव पहुंची, रास्ते में नदी बनी सबसे बड़ी बाधा दैनिक भास्कर की टीम ने नदरौली गांव पहुंचने के रास्ते और नदी के हालात का जायजा लिया। बबेडी पंचायत से होते हुए पराये के पड़ाव के आगे करीब दो किलोमीटर कच्चे रास्ते से नदी तक पहुंचना पड़ता है। नदी में पानी और तेज बहाव के कारण टीम ने भी ग्रामीणों की मदद से नदी पार करने की कोशिश की। हालांकि मौके पर मौजूद ग्रामीणों ने ट्यूब देने से इनकार कर दिया। उन्होंने बताया कि इस समय नदी पार करना जोखिम भरा है। नदी के इस पार कुछ शिक्षक भी पेड़ों की छांव में बैठे मिले। वे स्कूल जाने के लिए नदी का बहाव कम होने का इंतजार कर रहे थे। शिक्षक बोले- रोज ट्यूब से पार करनी पड़ती है नदी शिक्षकों ने बताया कि बारिश के दिनों में स्कूल पहुंचना उनके लिए रोज की चुनौती है। नदी का बहाव कम रहता है तो ग्रामीणों की मदद से ट्यूब पर बैठकर नदी पार करते हैं। पानी बढ़ने पर यह जोखिम और बढ़ जाता है। एक शिक्षक के मुताबिक, कई बार नदी का जलस्तर इतना बढ़ जाता है कि 5-6 दिन तक स्कूल पहुंचना संभव नहीं होता। यदि कोई ग्रामीण ट्यूब लेकर नदी के इस पार आ जाए और नदी पार करा दे, तभी वे स्कूल पहुंच पाते हैं। कई बार ग्रामीण नहीं मिलते तो शिक्षक दो से तीन घंटे तक नदी किनारे बैठे रहते हैं। ई-अटेंडेंस से बढ़ी परेशानी शिक्षकों के मुताबिक स्कूलों में ई-अटेंडेंस लागू होने के बाद परेशानी और बढ़ गई है। स्कूल परिसर में मौजूद रहकर ही हाजिरी दर्ज करनी होती है। लेकिन नदी का बहाव तेज होने पर शिक्षक जान जोखिम में डालकर नदी पार नहीं कर सकते। गांव में नेटवर्क की समस्या भी है। नदी पार करने में देरी और नेटवर्क नहीं मिलने के कारण कई बार समय पर ई-अटेंडेंस नहीं लग पाती। शिक्षकों का कहना है कि इस समस्या की जानकारी जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय को दी जा चुकी है, लेकिन अभी तक स्थायी समाधान नहीं हुआ है। 900 से 1000 आबादी, बच्चों की पढ़ाई पर सीधा असर ग्रामीणों के मुताबिक नदरौली और आसपास के बबेडी-अकोड़ा क्षेत्र में करीब 200 मकान हैं और आबादी करीब 900 से 1000 के बीच है। गांव में प्राथमिक और माध्यमिक स्कूल हैं। प्राथमिक स्कूल में करीब 40, जबकि माध्यमिक स्कूल में करीब 93 विद्यार्थी पढ़ते हैं। आठवीं के बाद करीब 50 से 60 छात्र-छात्राएं नौवीं से 12वीं तक की पढ़ाई के लिए बबेडी पंचायत की ओर जाते हैं। बारिश में नदी का पानी बढ़ने पर इन बच्चों का स्कूल जाना बंद हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि अभिभावक बच्चों को नदी पार कराने का जोखिम नहीं लेते। इसी वजह से कई बार बच्चों की पढ़ाई तीन से चार महीने तक प्रभावित होती है। ग्रामीण बोले- महिलाओं और जरूरी कामों के लिए भी निकलना मुश्किल गांव के रहने वाले श्रीलाल कुशवाहा ने कहा, “इसी गांव के रहने वाले पूर्व मंत्री राजकुमार कुशवाहा हैं। वे सरकार में मंत्री रहे, तब भी गांव को पक्की सड़क नहीं दिलवा पाए। नदी में पानी बढ़ने पर पुल नहीं है। बच्चे स्कूल नहीं आ-जा सकते। महिलाएं निकल नहीं सकतीं। शिक्षक भी गांव में पढ़ाने नहीं जा पाते हैं। सभी परेशान होते हैं।” ग्रामीणों का कहना है कि समस्या केवल स्कूल आने-जाने की नहीं है। बारिश में नदी बढ़ने के बाद गांव के लोगों के लिए जरूरी कामों से बाहर निकलना भी मुश्किल हो जाता है। देवेंद्र सिंह कुशवाह बोले- हाईस्कूल के बच्चों की पढ़ाई बंद रहती है सरकारी माध्यमिक विद्यालय के शिक्षक देवेंद्र सिंह कुशवाह ने बताया, “प्राइमरी स्कूल और मिडिल स्कूल गांव में है। परंतु हाईस्कूल व हायर सेकंडरी के छात्रों की पढ़ाई चार महीने बंद रहती है। वहीं जब नदी का जलस्तर बढ़ता है तो हम लोगों को भी खासी परेशानी होती है। कई बार गांव के स्कूल में पढ़ने नहीं जा पाते हैं तो स्कूल बंद रहते हैं। इससे सबसे ज्यादा बुरा असर शिक्षा पर भी पड़ रहा है।” एक अन्य शिक्षक ने बताया कि बारिश में समय पर स्कूल पहुंचना चाहें तो भी कई बार संभव नहीं होता। गांव का कोई व्यक्ति ट्यूब लेकर आता है और नदी पार करवाता है, तभी स्कूल पहुंच पाते हैं। ऐसे में शिक्षकों का स्कूल आना-जाना भी ग्रामीणों की मदद पर निर्भर हो जाता है। सड़क-पुल के साथ बिजली की भी समस्या ग्रामीण सड़क और पुल के साथ बिजली की सुविधा को लेकर भी शिकायत करते हैं। उनका कहना है कि गांव में सरकारी स्तर पर बिजली की पर्याप्त सुविधा नहीं है। वे ट्यूबवेल पर रखे ट्रांसफॉर्मर के माध्यम से बिजली का उपयोग करते हैं। ग्रामीणों का कहना है कि पक्की सड़क, नदी पर पुल और पर्याप्त बिजली जैसी मूलभूत सुविधाएं मिलने से गांव की सबसे बड़ी समस्याएं दूर हो सकती हैं। मंत्री रहे राजकुमार कुशवाहा का यह पैतृक गांव नदरौली को पूर्व में राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त रहे डॉ. राजकुमार कुशवाहा का पैतृक गांव बताया जाता है। मध्यप्रदेश में शिवराज सिंह चौहान के शासनकाल में डॉ. राजकुमार कुशवाहा को पाठ्यपुस्तक निगम का उपाध्यक्ष बनाया गया था और उन्हें राज्य मंत्री का दर्जा प्राप्त था। ग्रामीणों को उम्मीद थी कि गांव के ही व्यक्ति को सरकार में मंत्री पद का दर्जा मिलने के बाद सड़क और पुल की समस्या दूर होगी। लेकिन ग्रामीणों के मुताबिक आज भी स्थिति में अपेक्षित बदलाव नहीं हुआ। गांव तक पहुंचने के लिए पगडंडी और खेतों की मेड़ का सहारा लेना पड़ता है। बारिश में नदी रास्ता रोक देती है और गांव का संपर्क लगभग कट जाता है। ग्रामीणों की मांग- नदी पर पुल बने, गांव को पक्की सड़क से जोड़ा जाए ग्रामीणों की मांग है कि नदरौली को पक्की सड़क से जोड़ा जाए और नदी पर स्थायी पुल बनाया जाए। उनका कहना है कि पुल बनने के बाद बच्चों का स्कूल जाना, शिक्षकों की उपस्थिति और ग्रामीणों का आवागमन आसान हो सकेगा। फिलहाल बारिश आते ही नदरौली के सामने वही सवाल खड़ा हो जाता है—स्कूल जाना हो या गांव से बाहर निकलना, नदी पार करने के लिए ट्यूब का सहारा आखिर कब तक लेना पड़ेगा? डॉ. कुशवाह बोले- गांव के लिए पुल और सड़क स्वीकृत
जब इस मामले में दैनिक भास्कर ने पूर्व राज्य मंत्री (बीज निगम के पूर्व उपाध्यक्ष) डॉ राजकुमार कुशवाहा से बातचीत की गई तो उन्होंने बताया कि पूर्व में नदरौली गांव से बबेड़ी वायपास के लिए सड़क निर्माण कराए जाने के लिए शासन ने स्वीकृत मार्ग किया है। करीब चार से पांच किलोमीटर लंबी सड़क बनेगी साथ बैसली नदी पर पुल भी बनेगा इसके लिए पर 12 करोड़ से अधिक खर्च होगा। कुछ तकनीकी परेशानियां आ रही है। इस संदर्भ विधायक से बातचीत भी हुई थी। उन्होंने समाधान निकाला लिया है। बारिश के बाद काम शुरू होने की उम्मीद है।



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मुजफ्फरपुर में DEO रहते कैसे बनाई करोड़ों की संपत्ति?: MLC बंशीधर बृजवासी का दावा- ‘35% कमीशन का खेल था, कागज पर चलीं ₹119 करोड़ की योजनाएं’ – Muzaffarpur News




मुजफ्फरपुर में जिला शिक्षा पदाधिकारी (DEO) रहते हुए अजय कुमार सिंह के कार्यकाल में हुई कथित वित्तीय अनियमितताओं का मामला एक बार फिर चर्चा में है। बिहार ओपन स्कूलिंग एंड एग्जामिनेशन बोर्ड के डिप्टी डायरेक्टर अजय कुमार सिंह के कई ठिकानों पर आर्थिक अपराध इकाई (EOU) की छापेमारी के बाद उनकी संपत्ति और मुजफ्फरपुर में उनके कार्यकाल के दौरान हुए कामों को लेकर सवाल उठने लगे हैं। EOU ने अजय कुमार सिंह के खिलाफ 3 करोड़ 43 लाख 78 हजार 300 रुपए की आय से अधिक संपत्ति का मामला दर्ज किया है। इसी कार्रवाई के बाद विधान पार्षद वंशीधर बृजवासी ने उनके मुजफ्फरपुर कार्यकाल को लेकर गंभीर आरोप लगाए हैं। हालांकि, उनके द्वारा लगाए गए आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। बृजवासी का कहना है कि उन्होंने इन मामलों को पहले भी विधान परिषद में उठाया था। ‘कार्रवाई बहुत देर से हुई’ EOU की कार्रवाई पर बृजवासी ने कहा कि यह कार्रवाई काफी देर से हुई है। उनका दावा है कि देरी के कारण अजय कुमार सिंह की कथित वास्तविक संपत्ति और काली कमाई का बहुत छोटा हिस्सा ही जांच एजेंसी के सामने आया है। जो संपत्ति अब सामने आई है, वह उनके अनुसार अर्जित की गई कुल संपत्ति का 5% भी नहीं है। ₹119 करोड़ की योजनाओं का दावा बृजवासी के अनुसार, अजय कुमार सिंह के DEO कार्यकाल में मुजफ्फरपुर में करीब 119 करोड़ रुपए की योजनाएं संचालित हुईं। उनका आरोप है कि इनमें कई काम जमीन पर पूरी तरह नहीं हुए, जबकि भुगतान कागजों पर कर दिया गया। उन्होंने कहा कि बाद के कार्यकाल को जोड़ दें तो शिक्षा विभाग की योजनाओं में करीब 200 करोड़ रुपए तक का खर्च हुआ। उनका सवाल है कि जिले में करीब 3300 स्कूल होने के बावजूद अगर सभी स्कूलों में समान रूप से काम नहीं हुआ, तो जिन स्कूलों में योजनाएं चलीं, वहां बड़ी रकम कैसे खर्च हुई। पैतृक गांव में अजय कुमार सिंह के घर की तस्वीरें… ‘35% कमीशन का था खेल’ बृजवासी ने आरोप लगाया कि इन योजनाओं में 35% तक कमीशन लिए जाने की बात उस समय खुले तौर पर चर्चा में थी। उनका दावा है कि 119 करोड़ रुपए की योजनाओं में अगर 35% कमीशन की बात को आधार बनाया जाए तो रकम करीब 40 करोड़ रुपए से अधिक बैठती है।
‘कागज पर बना काम, जमीन पर कुछ नहीं’ बृजवासी ने आरोप लगाया कि कई स्कूलों में समर्सिबल और पानी की टंकी लगाने के नाम पर भुगतान हुआ, लेकिन मौके पर या तो काम अधूरा था या सामान खराब पड़ा था। उनका कहना है कि उन्होंने खुद कई स्कूलों में जाकर इन कामों की स्थिति देखी थी। उन्होंने कहा कि ‘समर्सिबल लगाने का उद्देश्य पानी निकालना नहीं, पैसा निकालना था।’ हालांकि यह उनका आरोप है, जिसकी जांच के बाद ही वास्तविक स्थिति स्पष्ट होगी। एक जैसा एस्टीमेट, अलग-अलग स्कूल बृजवासी ने जांच रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि कई स्कूलों में मरम्मत और निर्माण कार्यों के लिए एक जैसे एस्टीमेट बनाए गए। उनका सवाल है कि हर स्कूल की बिल्डिंग, कमरे और जरूरत अलग होने के बावजूद सभी जगह एक जैसा एस्टीमेट कैसे बनाया गया।
फर्जी हस्ताक्षर से भुगतान का आरोप बृजवासी ने दावा किया कि कुछ स्कूलों के प्रधानाध्यापकों के फर्जी हस्ताक्षर से बिल-वाउचर तैयार कर भुगतान कराया गया। उन्होंने बताया कि कम से कम सात प्रधानाध्यापकों ने लिखित रूप से शिकायत की थी कि उनके हस्ताक्षर का गलत इस्तेमाल हुआ है। उनका कहना है कि ऐसी शिकायतों की जांच केवल कागजों के आधार पर नहीं, बल्कि हर स्कूल में जाकर होनी चाहिए थी। किस स्कूल में कितनी राशि खर्च हुई, कौन-सा काम हुआ और उसका वास्तविक मूल्य क्या है—इसकी स्कूलवार जांच की मांग उन्होंने की। ‘चाय की दुकान पर तैयार होती थी संचिका’ बृजवासी ने एक और गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि शिक्षा भवन के बाहर चाय की दुकान के आसपास ही कई संचिकाएं तैयार की जाती थीं। उनका दावा है कि फर्जी बिल-वाउचर लगाकर फाइल तैयार की जाती थी और फिर भुगतान की प्रक्रिया आगे बढ़ती थी। एक संचिका तैयार करने के लिए कथित तौर पर 5-6 हजार रुपये तक लिए जाने की बात सामने आई थी। हालांकि इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। ‘119 करोड़ में 35% का हिसाब हो तो…’ बृजवासी ने कहा कि यदि 119 करोड़ रुपए की योजनाओं में उनके बताए 35% कमीशन के आरोप की जांच की जाए तो बड़ी रकम का हिसाब सामने आ सकता है। उन्होंने जांच एजेंसियों से स्कूलवार और योजनावार खर्च का पूरा रिकॉर्ड लेकर मौके पर भौतिक सत्यापन कराने की मांग की है।
जांच रिपोर्ट पर भी उठाए सवाल बृजवासी ने दावा किया कि मुजफ्फरपुर जिला प्रशासन की ओर से शिक्षा विभाग को भेजी गई जांच रिपोर्ट में भी कई अनियमितताओं का जिक्र है। उनके अनुसार, एक रिपोर्ट 2024 में और दूसरी रिपोर्ट 2026 में भेजी गई थी। ‘शिक्षकों पर बनाया जाता था दबाव’ बृजवासी का आरोप है कि जिन प्रधानाध्यापकों या शिक्षकों ने योजनाओं में गड़बड़ी का विरोध किया, उन पर विभागीय कार्रवाई का दबाव बनाया गया। उन्होंने अपने खिलाफ हुई कार्रवाई को भी इसी विरोध से जोड़ते हुए कहा कि लगातार इन मामलों को उठाया था। दावा है कि कई शिक्षक काम लेने या दस्तावेज पर हस्ताक्षर करने से इनकार करते थे तो उन पर कार्रवाई की जाती थी। अब स्कूलवार जांच की मांग EOU की मौजूदा कार्रवाई के बाद बृजवासी ने मांग की है कि अजय कुमार सिंह के DEO रहने के दौरान मुजफ्फरपुर में हुई सभी योजनाओं की स्कूलवार और योजनावार जांच कराई जाए। कागजों में दर्ज रकम और जमीन पर हुए काम का मिलान किया जाए। उन्होंने कहा कि सिर्फ अजय कुमार सिंह की संपत्ति की जांच से पूरी तस्वीर सामने नहीं आएगी। जिन योजनाओं में बड़ी रकम खर्च हुई, उनके भुगतान, बिल-वाउचर, एस्टीमेट, मापी पुस्तिका और वास्तविक काम की भी जांच होनी चाहिए। फिलहाल EOU की कार्रवाई और जांच जारी है। अजय कुमार सिंह पर लगाए गए वित्तीय अनियमितता और कमीशन से जुड़े आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि जांच पूरी होने के बाद ही हो सकेगी।



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गर्मी में खाने का स्वाद बढ़ा देगा खीरे का रायता, जानें 5 मिनट की आसान रेसिपी

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गर्मी में खाने का स्वाद बढ़ा देगा खीरे का रायता, जानें 5 मिनट की आसान रेसिपी

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गर्मियों और उमस भरे मौसम में ठंडा-ठंडा खीरे का रायता खाने का स्वाद बढ़ाने के साथ ताजगी भी देता है. दही, खीरा, भुना जीरा और कुछ मसालों से इसे महज 5 मिनट में तैयार किया जा सकता है. जानिए खीरे का रायता बनाने की आसान रेसिपी और स्वाद बढ़ाने के खास टिप्स.

गर्मियों और उमस भरे मौसम में खाने के साथ अगर कुछ ठंडा, हल्का और स्वादिष्ट मिल जाए तो भोजन का मजा ही दोगुना हो जाता है. ऐसे में खीरे का रायता एक बेहतरीन विकल्प है. ठंडा-ठंडा रायता न सिर्फ खाने का स्वाद बढ़ाता है, बल्कि खीरे और दही का मेल इसे बेहद ताजगी भरा बना देता है. सबसे खास बात यह है कि इसे बनाने के लिए आपको ज्यादा मेहनत या लंबी तैयारी की जरूरत नहीं पड़ती. घर में मौजूद कुछ आसान सामग्री से महज 5 मिनट में स्वादिष्ट खीरे का रायता तैयार किया जा सकता है.

दरअसल रायबरेली जिले के एसबीवीपी इंटर कॉलेज के गृह विज्ञान के प्रवक्ता अरुण कुमार सिंह लोकल 18 से बात करते हुए बताते हैं कि खीरे का रायता बनाने के लिए सामग्री. 1 बड़ा ताजा खीरा. 1 से 2 कप ताजा दही. आधा चम्मच भुना हुआ जीरा पाउडर. स्वादानुसार काला नमक. थोड़ा सा सामान्य नमक आधा चम्मच लाल मिर्च पाउडर.1 से 2 हरी मिर्च बारीक कटी हुई. थोड़ा सा हरा धनिया बारीक कटा हुआ.जरूरत के अनुसार थोड़ा पानी डालें.

सबसे पहले खीरे को अच्छी तरह धोकर छील ले. इसके बाद इसे कद्दूकस कर ले. अगर खीरे में ज्यादा पानी है तो हल्के हाथों से अतिरिक्त पानी निकाल दे. हालांकि पूरा पानी निकालने की जरूरत नहीं है, क्योंकि यही रायते को ताजगी और स्वाद देता है.

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अब एक बड़े बर्तन में ताजा दही लें और उसे अच्छी तरह फेंट लें, ताकि उसमें कोई गांठ न रहे. दही ज्यादा गाढ़ा हो तो इसमें थोड़ा ठंडा पानी मिलाकर अपनी पसंद के अनुसार इसकी कंसिस्टेंसी तैयार कर सकते है.

इसके बाद फेंटे हुए दही में कद्दूकस किया हुआ खीरा डाले. इसमें स्वादानुसार काला नमक और सामान्य नमक मिलाए. अब भुना हुआ जीरा पाउडर, लाल मिर्च, बारीक कटी हरी मिर्च और चाट मसाला डालकर सभी चीजों को अच्छी तरह मिला ले.

आखिर में ऊपर से बारीक कटा हुआ हरा धनिया डाले. रायते को कुछ देर फ्रिज में रख दें तो इसका स्वाद और भी बढ़िया हो जाता है. अगर तुरंत परोसना है तो इसमें ठंडा दही इस्तेमाल करें और ऊपर से थोड़ा भुना जीरा डालकर सजाए.
खीरे के रायते का स्वाद बढ़ाने के लिए जीरे को हल्का भूनकर ताजा पीसकर इस्तेमाल करे. इससे रायते में शानदार खुशबू और स्वाद आएगा. आप चाहें तो इसमें बारीक कटा पुदीना भी डाल सकते है. पुदीना रायते को और ज्यादा फ्रेश स्वाद देता है.

अगर आपको थोड़ा चटपटा स्वाद पसंद है तो इसमें चुटकी भर चाट मसाला और थोड़ी सी काली मिर्च भी डाल सकते है. वहीं बच्चों के लिए रायता बना रहे है तो हरी मिर्च और लाल मिर्च की मात्रा कम रख सकते है.
खीरे का रायता खासतौर पर पुलाव, बिरयानी, तहरी, पराठे और मसालेदार सब्जियों के साथ खूब पसंद किया जाता है. दाल-चावल के साथ भी इसका स्वाद काफी अच्छा लगता है. गर्म मौसम में इसे हल्के भोजन के साथ ठंडा-ठंडा परोसना खाने को और भी स्वादिष्ट बना देता है.

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अब 30-31 अगस्त को होगी बीजेपी प्रदेश कार्यसमिति की बैठक: ओरछा के होटल राजमहल में जुटेंगे दिग्गज – Bhopal News




मध्य प्रदेश भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी) की प्रदेश कार्यसमिति की महत्वपूर्ण बैठक इस बार ऐतिहासिक नगरी ओरछा में आयोजित होने जा रही है। यह दो दिवसीय बैठक 30 और 31 अगस्त को ओरछा के प्रतिष्ठित राजमहल पैलेस होटल और राजविलास होटल में होगी। बैठक की तैयारियों को अंतिम रूप देने के लिए नेताओं का ओरछा पहुंचने का सिलसिला 29 अगस्त से ही शुरू हो जाएगा, जबकि मुख्य बैठक से पहले 25 अगस्त को एक अहम ‘टोली बैठक’ भी आयोजित की जाएगी। तैयारियों को लेकर ओरछा में हुई बैठक शनिवार को ओरछा में संगठन के बड़े पदाधिकारियों ने तैयारियों का जायजा लेने के लिए एक विशेष बैठक की। इस बैठक में प्रदेश उपाध्यक्ष शैलेन्द्र बरूआ, प्रदेश कार्यालय मंत्री श्याम महाजन, प्रदेश मंत्री अर्चना सिंह और उपाध्यक्ष सुरेन्द्र शर्मा प्रमुख रूप से मौजूद रहे। पूरी बैठक की व्यवस्थाओं की मुख्य जिम्मेदारी गौरव रणदिवे और शैलेन्द्र बरूआ को सौंपी गई है, जो सभी इंतजामों की खुद निगरानी कर रहे हैं। प्रदर्शनी और सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे मुख्य आकर्षण इस कार्यसमिति बैठक के दौरान केंद्र और राज्य सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं और सरकार के ऐतिहासिक कामों पर आधारित एक भव्य प्रदर्शनी भी लगाई जाएगी। इस प्रदर्शनी को तैयार करने और इसकी पूरी कमान संभालने की जिम्मेदारी पार्टी के वरिष्ठ नेता लोकेन्द्र पाराशर को दी गई है। इसके साथ ही, दो दिवसीय बैठक के दौरान रात्रिकालीन समय में अतिथियों के लिए सांस्कृतिक कार्यक्रमों का भी आयोजन किया जाएगा। ओरछा में 400 कमरों की बुकिंग बैठक में आने वाले अतिथियों के लिए दो विशेष प्रकार की व्यवस्थाएं की गई हैं। ओरछा रेलवे स्टेशन से लेकर होटल तक नेताओं को ससम्मान पहुंचाने के लिए विशेष परिवहन की व्यवस्था रहेगी। कार्यक्रम की शुरुआत ध्वजारोहण के साथ होगी, जिसके बाद सभी नेता प्रदर्शनी का अवलोकन करेंगे और फिर अपना पंजीकरण (रजिस्ट्रेशन) कराकर मुख्य सभागार में प्रवेश करेंगे। इस बैठक के लिए ओरछा क्लब एंड रिजॉर्ट, ओरछा पैलेस सहित विभिन्न होटलों में करीब 400 कमरे बुक कराए गए हैं। करीब 400 नेता होंगे शामिल इस कार्यसमिति की कुल सदस्य संख्या की बात करें, तो इस बार प्रदेश कार्यसमिति में कुल 106 नियमित सदस्यों को शामिल किया गया है। इसके अलावा, संगठनात्मक संतुलन और वरिष्ठ नेताओं के अनुभव का लाभ लेने के लिए पार्टी ने 41 विशेष आमंत्रित सदस्यों को भी इस कार्यसमिति का हिस्सा बनाया है। इस तरह मुख्य सूची और आमंत्रितों को मिलाकर यह संख्या करीब 150 के पास पहुंचती है, लेकिन पदेन सदस्यों (सांसद, विधायक और अन्य) को जोड़ने के बाद पूरी बैठक में करीब 350 से 400 नेताओं की मौजूदगी रहेगी। बैठक के मुख्य मंच पर प्रदेश अध्यक्ष के साथ मुख्यमंत्री, दोनों उपमुख्यमंत्री और राज्य मंत्रिमंडल के तमाम कद्दावर कैबिनेट व राज्य मंत्री इस बैठक का हिस्सा बनेंगे, जिनमें प्रमुख रूप से तुलसीराम सिलावट, गोविंद सिंह राजपूत, विश्वास सारंग, कुंवर विजय शाह, नारायण सिंह कुशवाहा, प्रद्युम्न सिंह तोमर और कृष्णा गौर जैसे दिग्गज अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे। इनके साथ ही मध्य प्रदेश से आने वाले सभी केंद्रीय मंत्री, राष्ट्रीय पदाधिकारी और राज्य के सभी भाजपा लोकसभा व राज्यसभा सांसद और विधायक भी ओरछा पहुंचेंगे।



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गोंडा के मदरसे में छात्राओं से ‘बैड टच’ का आरोप: शिक्षक गिरफ्तार; 24 घंटे में भेजा जेल, कक्षा-5 की छात्राओं ने प्रधानाचार्य से की थी शिकायत – Gonda News




गोंडा के नगर कोतवाली क्षेत्र स्थित एक अनुदानित मदरसे में नाबालिग छात्राओं के साथ कथित अश्लील हरकत और दुर्व्यवहार का मामला सामने आया है। मामले में पुलिस ने सहायक शिक्षक खालिद हुसैन को गिरफ्तार कर शनिवार देर शाम करीब 6:30 बजे जेल भेज दिया। प्रधानाचार्य की तहरीर पर पुलिस ने आरोपी शिक्षक के खिलाफ पोक्सो एक्ट और छेड़छाड़ समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। मामला 15 जुलाई 2026 को सामने आया था। कक्षा 5 में पढ़ने वाली कई छात्राओं ने प्रधानाचार्य के कार्यालय पहुंचकर शिक्षक के खिलाफ शिकायत की थी। छात्राओं ने आरोप लगाया था कि सहायक शिक्षक खालिद हुसैन कक्षा में उनके साथ अनुचित तरीके से छूते थे। छात्राओं ने शिक्षक पर गाल और शरीर के अन्य अंगों को छूने तथा आपत्तिजनक बातें करने का आरोप लगाया था। शिक्षक को कक्षा से हटाया छात्राओं की शिकायत को प्रधानाचार्य ने गंभीरता से लिया। उनके बयान की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई गई। इसके बाद आरोपी शिक्षक को तत्काल कक्षा 4 और 5 के अध्यापन कार्य से हटा दिया गया। प्रधानाचार्य ने शिक्षक से पूरे मामले में लिखित स्पष्टीकरण भी मांगा। साथ ही संस्थान के प्रबंधक को छात्राओं की शिकायत और सामने आए आरोपों की जानकारी दी गई। आरोपी सहायक शिक्षक खालिद हुसैन ने अपने लिखित स्पष्टीकरण में छात्राओं के आरोपों को खारिज किया। उसने कहा कि वह बच्चों को केवल प्यार और मेहनत के साथ पढ़ाता है। हालांकि, छात्राओं की शिकायत और शिक्षक के लिखित जवाब में विरोधाभास सामने आने के बाद संस्थान प्रबंधन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी को पत्र भेजा। प्रबंधन ने पूरे मामले की उच्चस्तरीय जांच कराने की मांग की। चार अधिकारियों की टीम ने की मामले की जांच शिकायत के बाद मामले की जांच के लिए संयुक्त टीम गठित की गई। इसमें खंड शिक्षा अधिकारी मुख्यालय/नगर क्षेत्र, खंड शिक्षा अधिकारी नवाबगंज, जिला बाल संरक्षण अधिकारी और नायब तहसीलदार सदर शामिल रहे। जांच टीम ने मदरसे में पहुंचकर छात्राओं के साथ-साथ आरोपी शिक्षक, प्रधानाचार्य और प्रबंधक से भी पूछताछ की। टीम ने शिकायत से जुड़े तथ्यों और छात्राओं के आरोपों की विस्तार से पड़ताल की। जांच में आरोप सही पाए गए जांच टीम की पड़ताल के बाद छात्राओं द्वारा लगाए गए आरोप सही पाए गए। जांच रिपोर्ट के आधार पर जिला अल्पसंख्यक कल्याण कार्यालय ने मदरसे के प्रधानाचार्य को आरोपी शिक्षक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने के निर्देश दिए। इसके बाद प्रधानाचार्य ने नगर कोतवाली पहुंचकर पुलिस को तहरीर दी। पुलिस ने 21 अगस्त की देर शाम आरोपी शिक्षक के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया। मुकदमा दर्ज होने के 24 घंटे के भीतर गिरफ्तारी पुलिस ने मुकदमा दर्ज करने के बाद आरोपी शिक्षक की गिरफ्तारी के लिए कार्रवाई शुरू की। नगर कोतवाली पुलिस ने शनिवार देर शाम करीब 6:30 बजे खालिद हुसैन को गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपी को न्यायालय के समक्ष पेश किया, जहां से उसे जेल भेज दिया गया। इस तरह मुकदमा दर्ज होने के करीब 24 घंटे के भीतर पुलिस ने आरोपी शिक्षक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। छात्राओं के साथ ‘बैड टच’ और गलत टिप्पणी का आरोप नगर कोतवाल बिंदेश्वरी मणि त्रिपाठी ने बताया कि मदरसे के सहायक शिक्षक को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया है। उन्होंने बताया कि मदरसे के प्रधानाचार्य ने तहरीर देकर आरोप लगाया था कि नाबालिग बालिकाओं के साथ आरोपी शिक्षक बैड टच करता था और उनके साथ गलत तरीके से टिप्पणियां करता था। नगर कोतवाल के अनुसार, तहरीर के आधार पर मुकदमा दर्ज कर आरोपी को गिरफ्तार किया गया और न्यायालय में पेश करने के बाद जेल भेज दिया गया। गिरफ्तारी के बावजूद आरोपी की फोटो जारी न करने पर सवाल मामले में पुलिस की कार्रवाई तेजी से हुई, लेकिन आरोपी शिक्षक की गिरफ्तारी के बाद उसकी फोटो और विस्तृत जानकारी मीडिया को उपलब्ध नहीं कराई गई। इसे लेकर सवाल भी उठ रहे हैं। आमतौर पर पुलिस कई मामलों में गिरफ्तारी के बाद आरोपियों की तस्वीरें मीडिया को उपलब्ध कराती है। हालांकि, इस मामले में पुलिस की ओर से आरोपी की फोटो जारी नहीं की गई है। ऐसे में सवाल यह भी है कि गंभीर आरोपों वाले इस मामले में पुलिस ने मीडिया को आरोपी की तस्वीर उपलब्ध क्यों नहीं कराई। पुलिस अधिकारियों की ओर से इस संबंध में कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है। अब जांच और कानूनी प्रक्रिया पर नजर मामले में पुलिस ने पोक्सो और छेड़छाड़ समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज किया है। आरोपी को जेल भेजे जाने के बाद अब विवेचना और न्यायिक प्रक्रिया आगे बढ़ेगी। छात्राओं के बयान, जांच टीम की रिपोर्ट और अन्य उपलब्ध साक्ष्यों को मुकदमे की जांच का हिस्सा बनाया जाएगा।



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हेल्थ भी और कमाई भी! आरा में प्रकाश का चिया सीड नाश्ता हिट, मचा रहा धमाल

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Ara Chia Seed Startup Success Story: आरा में प्रकाश ने रमना मैदान के पास चिया सीड का पौष्टिक नाश्ता स्टार्टअप शुरू किया है. यह सुबह की सैर के बाद हल्का और सेहतमंद विकल्प प्रदान करता है, जिसमें सूखे मेवे व ताजे फल भी होते हैं. यह पहल मॉर्निंग वॉकर्स और सोशल मीडिया पर खूब सराही जा रही है.

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भोजपुर: दिन की शुरुआत अगर वॉक और पौष्टिक नाश्ते से हो, तो पूरा दिन ताजगी और ऊर्जा से भरा रहता है. इसी सोच को धरातल पर उतारते हुए आरा के रमना मैदान के पास प्रकाश नामक युवा ने एक अनोखा और स्वास्थ्यवर्धक स्टार्टअप शुरू किया है. सुबह की सैर के बाद जंक फूड या भारी नाश्ते के बजाय वे लोगों को ‘चिया सीड’ से तैयार सेहतमंद नाश्ता परोस रहे हैं.

रमना मैदान के पास सुबह 2 घंटे की ‘हेल्थ क्लास’
रमना मैदान में रोजाना सुबह सैकड़ों लोग टहलने और व्यायाम करने आते हैं. प्रकाश रोज सुबह केवल दो घंटे के लिए अपना स्टॉल लगाते हैं. सुबह की सैर के बाद शरीर को ऊर्जा देने के लिए उनके पास पौष्टिक नाश्ते की खास वेरायटी मौजूद रहती है. इस नई पहल को मॉर्निंग वॉकर्स और फिटनेस पसंद लोगों द्वारा खूब सराहा जा रहा है.

ड्राई फ्रूट्स और ताजे फलों का तड़का
चिया सीड पोषक तत्वों का खजाना माना जाता है. इसमें फाइबर, प्रोटीन और ओमेगा-3 फैटी एसिड की भरपूर मात्रा होती है. इसे और अधिक स्वादिष्ट व सेहतमंद बनाने के लिए प्रकाश इसमें ताजे फल जैसे सेब और केला,
ड्राई फ्रूट्स में बादाम, पिस्ता और काली किशमिश मिलाकर एक बाउल (फ्रूट सलाद जैसा) तैयार करते हैं. जो खाने में स्वादिष्ट होने के साथ-साथ सेहत के लिए बेहद फायदेमंद है.

सोशल मीडिया पर भी मिल रही खूब वाहवाही
प्रकाश का यह छोटा सा प्रयास अब सिर्फ रमना मैदान तक सीमित नहीं रहा. वे अपने इस हेल्दी डाइट और रेसिपी के वीडियो सोशल मीडिया पर भी शेयर करते हैं. उनके वीडियो को 1 लाख से अधिक बार देखा और शेयर किया जा चुका है. डिजिटल प्लेटफॉर्म्स के जरिए उनके इस छोटे से आइडिया को खूब लोकप्रियता मिल रही है.

सेहतमंद जीवनशैली की ओर एक कदम
स्थानीय लोगों के लिए यह स्टार्टअप एक बेहतर जीवनशैली का विकल्प बन रहा है. हालांकि, स्वास्थ्य विशेषज्ञों का मानना है कि केवल चिया सीड का सेवन करने से ही फिटनेस नहीं मिलती, बल्कि इसके साथ दिनभर में पर्याप्त पानी पीना, नियमित व्यायाम करना और संतुलित आहार लेना भी उतना ही जरूरी है. प्रकाश का यह प्रयास साबित करता है कि अगर सोच सही हो, तो एक छोटा सा आइडिया भी समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकता है.

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Amit Ranjan

अमित रंजन वर्तमान में News18 में बिहार, झारखंड और दिल्ली से जुड़ी खबरों के समन्वय और संपादन का कार्य देख रहे हैं. खोजी पत्रकारिता उनकी विशेष रुचि का क्षेत्र है. राजनीति, शिक्षा, खेल, क्राईम और मौसम जैसे विषयों …

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कनाडा का अमेरिकी सामान पर 8 सितंबर से जवाबी टैरिफ: ट्रम्प ने 50% टैरिफ का ऐलान किया था, दोनों देशों के बीच तीन दिन की बातचीत फेल


2 घंटे पहले

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कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने शनिवार को कहा कि कनाडा 8 सितंबर से अमेरिकी सामान पर जवाबी टैरिफ लगाएगा।

यह फैसला अमेरिका की ओर से कनाडा के करीब 20 अरब डॉलर के उत्पादों पर 50% टैरिफ लगाए जाने के बाद लिया गया है।

दोनों देशों के बीच आखिरी दौर की बातचीत भी शुक्रवार को बिना किसी समझौते के खत्म हो गई।

कनाडा का जवाबी टैरिफ स्टील, डेयरी उत्पाद, घरेलू उपकरण, कृषि उपकरण, पल्प एंड पेपर और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे अमेरिकी सामान पर लगेगा। किन-किन उत्पादों पर कितना टैरिफ लगेगा, इसकी पूरी जानकारी आने वाले दिनों में जारी की जाएगी।

दोनों देशों के बीच 3 दिन चली बातचीत बेनतीजा रही

अमेरिका और कनाडा के बीच 3 दिन तक चली ट्रेड डील की बातचीत नाकाम रही। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार आधी रात से कनाडा के 20 अरब डॉलर (करीब 1.9 लाख करोड़ रुपए) के सामान पर 50% टैरिफ लागू कर दिया।

यह टैरिफ कनाडा के अमेरिका भेजे जाने वाले कुल सामान का करीब 5% है। अमेरिका और कनाडा के अधिकारियों ने वॉशिंगटन डीसी में तीन दिन की बातचीत की थी, लेकिन व्यापार समझौता फाइनल नहीं हो सका।

कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने कहा कि अमेरिका जितना टैरिफ लगाएगा, कनाडा भी उतना ही जवाब देगा।

अमेरिका बोला- अच्छा ऑफर दिया था, उन्होंने मौका गंवाया

दोनो देशों के बीच ट्रेड डील नहीं हो पाने के बाद अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) ने सोशल मीडिया पर पोस्ट कर कहा कि कनाडा ने अमेरिका के साथ पार्टनशिप का बहुत अच्छा मौका गंवा दिया है।

USTR के मुताबिक, उन्होंने कनाडा को किसी भी बड़े एक्सपोर्टर के मुकाबले सबसे अच्छा ऑफर दिया था। लेकिन कनाडा की नई मांगों और पहले किए गए वादों से पीछे हटने की वजह से यह डील नहीं हो पाई।

USTR ने आगे कहा कि अगर यह डील होती तो इससे एयरोस्पेस में सप्लाई चेन कोऑर्डिनेशन, गलत ट्रेड प्रैक्टिस से निपटने के लिए जरूरी कदम, खनिजों पर सहयोग, और US-मेक्सिको-कनाडा एग्रीमेंट (USMCA) बातचीत की घोषणा जैसे नतीजे सामने आते।

अमेरिका ने कनाडा पर इतना ज्यादा टैरिफ क्यों लगाया?

अमेरिका का कहना है कि कनाडा की कुछ व्यापार नीतियां अमेरिकी कंपनियों के लिए नुकसानदेह हैं। दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर लंबे समय से विवाद चल रहा है। इनमें ऑटोमोबाइल, डेयरी प्रोडक्ट्स, शराब और लकड़ी का कारोबार प्रमुख हैं।

अमेरिका ने पहले नए टैरिफ 20 अगस्त से लगाने का ऐलान किया था। हालांकि, डेडलाइन से ठीक पहले दोनों देशों ने बातचीत शुरू करने का फैसला किया। इसके बाद ट्रम्प ने टैरिफ लागू करने की समयसीमा 3 दिन बढ़ा दी, ताकि समझौते की कोशिश की जा सके।

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, कई मुद्दों पर सहमति बन गई थी, लेकिन कुछ अहम मामलों में दोनों देश एक-दूसरे की शर्तों पर सहमत नहीं हो सके।

1. अमेरिकी कारों के साथ भेदभाव का आरोप

अमेरिका लंबे समय से शिकायत करता रहा है कि कनाडा की ट्रेड पॉलिसी अमेरिकी कार कंपनियों को कनाडा के बाजार में बराबर मौका नहीं देती।

अमेरिका चाहता है कि उसकी कारों और दूसरे सामान के लिए कनाडा का बाजार ज्यादा खुले।

कनाडा ने बदले में अमेरिका से स्टील, एल्युमिनियम, कारों और लकड़ी पर लगाए गए टैरिफ में राहत मांगी थी। लेकिन अमेरिका इन टैरिफ को हटाने पर तैयार नहीं हुआ।

2. कनाडा का अपने डेयरी मार्केट को प्रोटेक्शन

कनाडा अपने डेयरी बाजार को विदेशी कंपनियों और सस्ते डेयरी प्रोडक्ट्स से बचाने के लिए लंबे समय से कई नियम लागू करता रहा है।

अमेरिका चाहता है कि उसके दूध, पनीर और दूसरे डेयरी प्रोडक्ट्स को कनाडा के बाजार में ज्यादा आसानी से बेचने का मौका मिले।

लेकिन कनाडा अपने डेयरी सेक्टर को लेकर ज्यादा रियायत देने के लिए तैयार नहीं हुआ। इस मुद्दे पर भी दोनों देशों के बीच मतभेद बने रहे।

3. अमेरिकी शराब की बिक्री पर प्रतिबंध

कनाडा के कुछ हिस्सों में अमेरिकी शराब की बिक्री को लेकर भी पाबंदियां लगाई गई हैं। अमेरिका इसे अपने सामान के साथ भेदभाव के तौर पर देखता है।

अमेरिका चाहता है कि उसकी शराब को कनाडा के बाजार में ज्यादा आसानी से बेचने की इजाजत मिले।

इसके अलावा दोनों देशों के बीच कनाडा की सॉफ्टवुड लंबर यानी लकड़ी को लेकर भी लंबे समय से विवाद है। अमेरिका कनाडा से आने वाली लकड़ी पर कई तरह के व्यापारिक प्रतिबंध और शुल्क लगाता रहा है।

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भारत पर 100% टैरिफ वाला बिल अमेरिकी सीनेट में पास:रूसी तेल खरीदने वाले 5 देशों पर कार्रवाई; 86 सांसदों ने पक्ष में वोट किया, 11 विरोध में

अमेरिकी सीनेट ने 86-11 के बहुमत से भारत समेत 5 देशों पर 100% तक का टैरिफ लगाने वाला बिल पास कर दिया है। इसका मकसद रूस की तेल से होने वाली कमाई को कम करना है, ताकि उसकी युद्ध लड़ने की क्षमता कमजोर हो सके। पूरी खबर पढ़ें…



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जोधपुर में बाइक चोरी तीन आरोपियों को दबोचा: तीन मोटरसाइकिलें बरामद, रात में करते थे वारदात – Jodhpur News




जोधपुर के चौपासनी हाउसिंग बोर्ड थाना पुलिस ने वाहन चोरी की वारदात का खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर चोरी की तीन मोटरसाइकिलें जब्त की हैं। इनमें दो बुलेट मोटरसाइकिल भी शामिल है। पुलिस के अनुसार, 13 अगस्त को विशाल लालवानी ने रिपोर्ट दर्ज करवाई थी कि उनकी बुलेट मोटरसाइकिल को उन्होंने 7 अगस्त की रात अपने घर के आगे खड़ा किया था। 8 अगस्त को करीब 12:30 बजे दो अज्ञात युवक मोटरसाइकिल चोरी कर ले गए। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की। आरोपियों से अन्य मामलों को लेकर पूछताछ थानाधिकारी गोविन्द व्यास ने बताया कि वाहन चोरी की वारदात का खुलासा करने के लिए विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने कार्रवाई करते हुए रफीक (25) पुत्र मोहम्मद गनीफ, निवासी मस्जिद की ढाणी पीपवा, जिला फलोदी और जितेन्द्र उर्फ जितू (20)पुत्र पप्पूराम निवासी मेघवालों की ढाणियां पीपवा, जिला फलोदी को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों से वारदात में चोरी की गई दो बुलेट और एक स्पलेंडर मोटरसाइकिल बरामद की गई। जांच के दौरान सामने आया कि आरोपियों ने अन्य क्षेत्रों में भी वाहन चोरी की वारदातें की हैं। इन मामलों में पुलिस की जांच जारी है। रात में शहर में घूमकर करते थे वाहन चोरी पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि आरोपी अपनी पहचान छिपाकर रात के समय जोधपुर शहर में आते थे और अलग-अलग इलाकों में घूमकर गली-मोहल्लों में खड़े दुपहिया वाहनों को निशाना बनाते थे। वाहन चोरी करने के बाद वे ग्रामीण क्षेत्रों की ओर निकल जाते थे और मौका मिलने पर दूर-दराज के क्षेत्रों में चोरी के वाहनों को बेच देते थे। कार्रवाई करने वाली टीम में थानाधिकारी गोविन्द व्यास सहित पुलिस टीम के राणाराम, महेन्द्रसिंह, देवेन्द्र पटेल, पूनमचन्द, बद्रीराम, माधाराम और मनीष शामिल रहे।



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ओडिशा के पास चीनी क्रू वाला जहाज डूबा: 24 लोग सवार थे; इंडियन कोस्ट गार्ड-नेवी ने रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया


8 घंटे पहले

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प्रतीकात्मक तस्वीर।

ओडिशा के पारादीप तट से करीब 240 समुद्री मील दूर बंगाल की खाड़ी में शनिवार को MV Ocean Winner नाम का एक मालवाहक जहाज डूब गया।

पनामा के झंडे वाले इस जहाज पर 24 क्रू सदस्य सवार थे। दो को बचा लिया गया है, बाकी की तलाश जारी है। पीटीआई के मुताबिक, क्रू में 20 चीन के, 3 म्यांमार और एक बांग्लादेश से है।

जहाज ओडिशा से लौह अयस्क लेकर सिंगापुर जा रहा था। यह शुक्रवार को ओडिशा तट से रवाना हुआ था। जहाज के डूबने की वजह अभी पता नहीं चल पाई है।

इंडियन कोस्ट गार्ड और नेवी का रेस्क्यू ऑपरेशन

हादसे की जानकारी मिलते ही इंडियन कोस्ट गार्ड और इंडियन नेवी ने क्रू सदस्यों की तलाश और बचाव अभियान शुरू कर दिया। आसपास मौजूद दूसरे जहाजों को भी अलर्ट किया गया है और रेस्क्यू में मदद करने को कहा गया है।

हादसे के समय बंगाल की खाड़ी में मौसम भी पूरी तरह सामान्य नहीं था। मौसम विभाग ने उत्तर बंगाल की खाड़ी में कम दबाव का क्षेत्र बनने की संभावना जताई थी।

इससे समुद्र में मौसम खराब हो सकता है। हालांकि, जहाज इसी वजह से डूबा, इसकी अभी पुष्टि नहीं हुई है।

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21 भारतीयों वाले जहाज पर ईरानी हमले का VIDEO: होर्मुज में IRGC बोट्स ने फायरिंग की

होर्मुज स्ट्रेट में 21 भारतीय नाविकों वाले एक कंटेनर जहाज पर ईरानी नौकाओं ने फायरिंग की थी। यह घटना 22 अप्रैल को हुई थी। भारतीय नाविकों के संगठन (FSUI) ने अब इस घटना का वीडियो जारी किया है। पूरी खबर पढ़ें…



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कटिहार बार काउंसिल के वरीय अधिवक्ता का निधन: पटना में इलाज के दौरान हुआ देहांत, राजनीतिक-सामाजिक क्षेत्र में शोक – Katihar News




कटिहार बार काउंसिल के पूर्व सचिव और 70 वर्षीय वरीय अधिवक्ता अविनाश यादव का पटना स्थित मेदांता अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया। उनके निधन की खबर से अधिवक्ता समाज सहित जिले के राजनीतिक एवं सामाजिक क्षेत्र में शोक की लहर है। अविनाश यादव अपने मिलनसार स्वभाव और सामाजिक सरोकारों के लिए जाने जाते थे। उनके निधन पर सांसद तारिक अनवर ने गहरी संवेदना व्यक्त की है। सांसद तारिक अनवर ने अपने शोक संदेश में कहा कि अविनाश यादव का व्यक्तित्व बेहद मिलनसार था और उनके निधन से उन्हें व्यक्तिगत रूप से भी गहरा दुख पहुंचा है। उन्होंने ईश्वर से दिवंगत आत्मा की शांति और शोकाकुल परिजनों को यह क्षति सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की। सांसद प्रतिनिधि सुनील कुमार यादव ने भी उनके निधन पर गहरा शोक व्यक्त किया। उन्होंने अविनाश यादव के आवास पर पहुंचकर उनके अंतिम दर्शन किए और पार्थिव शरीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर श्रद्धांजलि दी। सुनील कुमार यादव ने कहा कि अविनाश यादव ने लंबे समय तक अधिवक्ता के रूप में अपनी सेवाएं दीं और अपने व्यवहार के कारण लोगों के बीच विशेष स्थान रखते थे। सुनील कुमार यादव ने आगे कहा कि उनका निधन न्यायिक एवं सामाजिक क्षेत्र के लिए एक अपूरणीय क्षति है। अविनाश यादव जैसे अनुभवी एवं सहज व्यक्तित्व के व्यक्ति का चले जाना पीड़ादायक है। उनके सामाजिक और पेशेवर योगदान को लंबे समय तक याद किया जाएगा। अविनाश यादव के निधन पर कांग्रेस नेता दिलीप विश्वास, प्रो० विनोद यादव, पूर्व विधायक सुनीता देवी, अवधेश कुमार मंडल, प्रहलाद गुप्ता, अंजुमन कौशल उर्फ आम्रपाली यादव, डॉ० विपिन कुमार विमल सिंह बेगानी और संतोष यादव सहित अन्य लोगों ने भी गहरी संवेदना व्यक्त की। सभी ने कहा कि समाज ने एक अनुभवी, मिलनसार और संवेदनशील व्यक्तित्व को खो दिया है।



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