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क्या आप भी भारतीय शेयर बाजार में लगातार चल रही गिरावट से परेशान हैं? यदि हां तो आपको आज हम एक ऐसा विकल्प बताते हैं, जो आपके पोर्टफोलियो को बेहतर तरीके से बैलेंस कर सकता है. हम बात कर रहे हैं विदेशी फंड-ऑफ-फंड्स (Overseas FoF) की. पिछले एक साल में जहां घरेलू फंड्स ने सुस्त प्रदर्शन किया है, वहीं विदेशी फंड्स ने 46 फीसदी तक का रिटर्न दिया है. तो अब बिना देर किए इस बारे में सबकुछ जान ही लीजिए.
ओवरसीज म्यूचुअल फंड्स में कैसे निवेश करें, यहां जानें तरीका. (Image – AI)
What is Fund of Funds: भारत के शेयर बाजार इन दिनों काफी सुस्त है. इंडेक्स तो फिर भी ठीक-ठाक चल रहे हैं, लेकिन शेयरों में भारी गिरावट है. जब भी बाजार में गिरावट आती है, तो बहुत से लोग परेशान हो जाते हैं कि उनका पैसा डूब न जाए. लगातार कमजोर होते पोर्टफोलियो को देखना किसी को अच्छा नहीं लगता. ऐसे में, समझदारी इसी में है कि आप अपना सारा पैसा एक ही जगह न रखें. तो कहां रखें? इस समस्या का हल है विदेशी फंड-ऑफ-फंड्स (Overseas Fund-of-Funds), जो आपको भारत में बैठे-बैठे दुनिया की बड़ी कंपनियों में पैसा लगाने का मौका देते हैं. ये फंड्स न केवल आपके रिस्क को कम करते हैं, बल्कि शानदार कमाई का जरिया भी बन सकते हैं.
पिछले एक साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो विदेशी फंड्स ने भारतीय म्यूचुअल फंड्स के मुकाबले कहीं बेहतर प्रदर्शन किया है. जहां भारत के लार्ज-कैप फंड्स (Large-cap Funds) ने औसतन सिर्फ 3 फीसदी और फ्लेक्सी-कैप फंड्स (Flexi-cap Funds) ने 5 फीसदी का मुनाफा दिया है, वहीं विदेशी फंड-ऑफ-फंड्स ने 46 फीसदी का भारी-भरकम रिटर्न दिया है. अगर हम 3 साल की अवधि देखें, तब भी विदेशी फंड्स 25 फीसदी रिटर्न के साथ आगे रहे हैं, जबकि घरेलू फंड्स 14 से 16 फीसदी के बीच ही सिमट कर रह गए.
करेंसी में गिरावट से भी बचाव
विदेशी बाजार में निवेश का एक बड़ा फायदा करेंसी में होने वाली गिरावट से भी मिलता है. फाइनेंशियल टाइम्स की एक रिपोर्ट में राइट रिसर्च पीएमएस (Wright Research PMS) की फाउंडर सोनम श्रीवास्तव (Sonam Srivastava) के हवाले से इस बारे में डिटेल से छापा गया है. सोनम श्रीवास्तव का कहना है कि एक आम नौकरीपेशा इंसान, जिसकी बचत और खर्चे सब रुपये में हैं, उसके लिए अपनी संपत्ति का कुछ हिस्सा ग्लोबल एसेट्स (Global Assets) में रखना पोर्टफोलियो को मजबूती देता है. यह कोई सट्टेबाजी नहीं, बल्कि समझदारी भरा निवेश है.
निवेश का तरीका और जरूरी बातें
विदेशी फंड-ऑफ-फंड्स में निवेश करना उतना ही आसान है, जितना किसी आम म्यूचुअल फंड में पैसा लगाना. इसके लिए आपको किसी विदेशी ब्रोकर के पास खाता खोलने या डॉलर खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती. आप सीधे किसी भी म्यूचुअल फंड वाली ऐप या डिस्ट्रीब्यूटर के जरिए निवेश कर सकते हैं. बस एक बात का ध्यान रखना जरूरी है कि आरबीआई (RBI) की सीमाओं के कारण कई बार फंड हाउस नए निवेश लेना बंद कर देते हैं.
फिस्डम (Fisdom) के रिसर्च हेड नीरव कारकेरा (Nirav Karkera) के अनुसार, निवेशकों को निवेश करने से पहले एएमसी की वेबसाइट पर यह चेक कर लेना चाहिए कि वे अभी नया पैसा ले रहे हैं या नहीं.
कितना निवेश करें? किस तरीके से लगेगा टैक्स
अगर आप विदेशी फंड्स में पैसा लगाने की सोच रहे हैं, तो कम से कम 5 से 7 साल का नजरिया रखें. छोटे समय के लिए यह रिस्की हो सकता है. कोड एडवाइजर्स (Qode Advisors) के पार्टनर गौरव डिडवानिया (Gaurav Didwania) का मानना है कि अपने पोर्टफोलियो का 10 से 15 फीसदी हिस्सा इन फंड्स में रखना चाहिए. हालांकि, इसमें टैक्स का गणित थोड़ा अलग है. इन फंड्स पर होने वाली कमाई को डेट फंड (Debt Fund) की तरह माना जाता है. आपकी जो भी कमाई होगी, उस पर आपके टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगेगा. यह भारतीय इक्विटी फंड्स के मुकाबले थोड़ा महंगा पड़ता है, लेकिन रिस्क कम करने के लिहाज से यह एक अच्छा विकल्प है.
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मलखान सिंह पिछले 17 वर्षों से ख़बरों और कॉन्टेंट की दुनिया में हैं. प्रिंट मीडिया से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई नामी संस्थानों का नाम प्रोफाइल में जुड़ा है. लगभग 4 साल से News18Hindi के साथ काम कर रहे …और पढ़ें
















