Wednesday, September 16, 2026
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सेंट्रल मार्केट ध्वस्तीकरण पर धरने पर बैठी महिलाओं का विरोध: बोलीं- सुबह 6:30 बजे से न पानी है न लाइट, मकान तोड़ दिए, बिजनेस खत्म कर दिया – Meerut News




बुधवार को मेरठ के सेंट्रल मार्केट में हुई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर पांच महीने से धरने पर बैठी महिलाओं ने भी आपत्ति जताई। कार्रवाई के दौरान महिलाएं काफी नाराज दिखाई दीं। महिलाओं का कहना था कि प्रशासन की कार्रवाई के बीच उन्हें मूलभूत सुविधाओं के लिए भी परेशान होना पड़ रहा है। महिलाओं ने बताया कि सुबह करीब 6 बजे से कार्रवाई शुरू हो गई थी। इसके बाद सुबह 6:30 बजे से इलाके में न लाइट है और न पानी की व्यवस्था है। महिलाओं ने कहा कि उनके मकान तोड़ दिए गए और उनका पूरा कारोबार खत्म हो गया। उन्होंने कहा, “मकान तोड़ दिय हमारे, हमारा बिजनेस सारा खत्म कर दिया। हम लोगों के पास पानी भी नहीं है, भूखे-प्यासे मर रहे हैं बच्चे हमारे।” महिलाओं ने कहा कि वे पिछले पांच महीने से धरने पर बैठी थीं। इतने लंबे समय से धरना देने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। उनका आरोप है कि आवास विकास की ओर से लगातार मीटिंग के लिए बुलाया जाता रहा। महिलाओं ने कहा कि रोज कहा जाता था कि मीटिंग है, इसमें यह होगा और वह होगा, लेकिन जमीन पर कोई समाधान नहीं निकला। महिलाओं ने कहा, “हम लोग पांच महीने से धरने पर बैठे थे। कुछ भी नहीं हुआ। आवास विकास रोज बुला रहा है कि मीटिंग है। इनकी मीटिंग ही नहीं हो रही। रोज मीटिंग है, ये हो रहा है, वो हो रहा है।” महिलाओं का कहना था कि एक तरफ लंबे समय से उनकी समस्याओं को लेकर बातचीत चलती रही और दूसरी तरफ बुधवार को अचानक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी गई। कार्रवाई के दौरान महिलाओं ने पानी और बिजली की व्यवस्था नहीं होने को लेकर भी नाराजगी जताई। महिलाओं ने कहा कि कार्रवाई से उनके परिवारों के सामने रहने और रोजमर्रा की जरूरतों का संकट खड़ा हो गया है। उनका कहना था कि बच्चों के लिए पानी तक उपलब्ध नहीं है।



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आनंद माइनिंग की याचिका हाईकोर्ट से खारिज: जबलपुर हाईकोर्ट ने कहा- अंतिम देयता अभी तय नहीं, कलेक्टर स्वतंत्र रूप से करें निर्णय – Jabalpur News




जबलपुर हाईकोर्ट ने मेसर्स आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन की याचिका खारिज कर दी। मामला जबलपुर जिले की सिहोरा तहसील के टिकरिया और प्रतापपुर स्थित लौह अयस्क खदानों में वर्ष 2004 से 2017 के बीच कथित अतिरिक्त खनन से जुड़ा है। राज्य द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर जबलपुर ने कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किए थे। टिकरिया खदान के लिए ₹1,13,81,94,280 और प्रतापपुर के लिए ₹1,20,69,41,910 की वसूली प्रस्तावित किए जाने का उल्लेख हाईकोर्ट के आदेश में है। न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि मामला अभी कारण बताओ नोटिस के स्तर पर है और कलेक्टर ने कंपनी की अंतिम देयता तय नहीं की है। इसलिए इस स्तर पर हाईकोर्ट के असाधारण रिट अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप का आधार नहीं है। जांच रिपोर्ट में ₹443 करोड़ से ज्यादा जमा कराने का उल्लेख
हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, जांच रिपोर्ट के अंतिम हिस्से में संबंधित कंपनियों से ₹4,43,04,86,890 (₹443 करोड़ 4 लाख 86 हजार 890) तथा उसके अनुसार GST की राशि जमा कराने को उचित बताया गया था। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच समिति की रिपोर्ट स्वयं अंतिम रिकवरी आदेश नहीं है। यह कलेक्टर पर बाध्यकारी भी नहीं है। कलेक्टर को कंपनी की आपत्तियों, जांच रिपोर्ट और संबंधित रिकॉर्ड पर विचार करते हुए कानून के अनुसार स्वतंत्र और कारणयुक्त आदेश पारित करना है। कलेक्टर को 4 महीने में कार्यवाही पूरी करने के निर्देश
हाईकोर्ट ने कलेक्टर जबलपुर को कंपनी की आपत्तियों और उपलब्ध रिकॉर्ड पर विचार करते हुए कानून के अनुसार स्वतंत्र एवं कारणयुक्त आदेश पारित करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कार्यवाही शीघ्र पूरी करने तथा प्रमाणित आदेश प्राप्त होने के बाद यथासंभव चार माह के भीतर अंतिम निर्णय करने की अपेक्षा व्यक्त की। कंपनी ने जांच समिति और नोटिस को चुनौती दी थी
याचिकाकर्ता ने कलेक्टर जबलपुर द्वारा खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21(5) के तहत जारी कारण बताओ नोटिस, जांच समिति के गठन और उसकी रिपोर्ट को चुनौती दी थी। उसका तर्क था कि जांच समिति का गठन बिना किसी वैधानिक अधिकार के किया गया, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ और मामले में कोई अंतिम क्षेत्राधिकार नहीं बनता। शिकायतकर्ता ने कहा- अब पारदर्शी जांच जरूरी
मामले के मुख्य शिकायतकर्ता आशुतोष मनु दीक्षित ने कहा कि न्यायालय के आदेश में ₹443 करोड़ से अधिक की राशि और उस पर GST का उल्लेख आया है। अब पूरे मामले में पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से तथ्यों की जांच करते हुए कानून के अनुसार अंतिम निर्णय होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने फिलहाल कंपनी की वास्तविक देयता पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया है। अब सभी संबंधित पक्षों को कलेक्टर के समक्ष अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा और कलेक्टर को बिना किसी पूर्वाग्रह के कानून के अनुसार निर्णय करना होगा। संजय पाठक से जुड़ी माइनिंग कंपनी को झटका
भाजपा विधायक संजय पाठक से जुड़ी माइनिंग कंपनी को झटका लगा है। हाई कोर्ट ने कहा कि जबलपुर कलेक्टर के सामने ही अपना पक्ष रखें, इसके साथ ही हाई कोर्ट ने जबलपुर कलेक्टर को यह भी निर्देश दिए हैं कि चार माह में प्रकरण का निराकरण करें। आनंद माइनिंग पर साल 2004 से 2017 तक अतिरिक्त खनन का आरोप लगाया था। जबलपुर में सिहोरा की दो आयरन और खदानों से अधिक खनन का यह पूरा मामला है। जबलपुर कलेक्टर ने कंपनी को ₹423 करोड रुपए की रिकवरी का नोटिस दिया था, जिस पर कंपनी ने कलेक्टर के क्षेत्राधिकार से बाहर बातकर नोटिस को चुनौती दी थी।



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गोपालगंज से किडनैप छात्र 9 घंटे बाद देवरिया से मिला: नकाबपोशों ने किया था अपहरण, स्कूल के पास से गायब; CCTV-DVR से छेड़छाड़ – Gopalganj News


गोपालगंज के बंजारी में निजी स्कूल के पास से सातवीं कक्षा के 12 वर्षीय छात्र गोपाल द्विवेदी के लापता होने से हड़कंप मच गया। करीब नौ घंटे बाद छात्र को उत्तर प्रदेश के देवरिया से सुरक्षित बरामद कर लिया गया।

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छात्र की बरामदगी की सूचना मिलते ही परिजनों और पुलिस ने राहत की सांस ली। गोपालगंज पुलिस की टीम छात्र को लेने के लिए देवरिया रवाना हो गई है।

गोपाल द्विवेदी भोरे थाना क्षेत्र के जागीरदारी बगहवा गांव का रहने वाला है। उसके पिता सुमन्त द्विवेदी बंधन बैंक में ब्रांच सेल्स मैनेजर हैं। फिलहाल परिवार अधिवक्ता नगर में किराए के मकान में रहता है। गोपाल अपने नौवीं कक्षा में पढ़ने वाले भाई के साथ स्कूल गया था।

छुट्टी के बाद भाई को नहीं मिला

स्कूल की छुट्टी होने के बाद गोपाल का बड़ा भाई उसे तलाशता रहा, लेकिन वह नहीं मिला। भाई के घर लौटने के बाद भी गोपाल घर नहीं पहुंचा। इसके बाद परिवार के लोगों की चिंता बढ़ गई और उसकी तलाश शुरू की गई।

गोपाल द्विवेदी को पुलिस ने बरामद किया।

स्कूल पहुंचे पिता, CCTV देखकर बढ़ा शक

गोपाल के पिता स्कूल पहुंचे तो वहां लगे CCTV कैमरों की जांच की गई। कैमरे चालू थे, लेकिन DVR से छेड़छाड़ किए जाने की बात सामने आई।

इसके बाद परिवार ने पुलिस को सूचना दी। परिवार का आरोप है कि घटना से जुड़े साक्ष्य छिपाने के लिए स्कूल के DVR में बदलाव किया गया।

स्कूल प्रशासन के बयान से उलझा मामला

जांच के दौरान स्कूल प्रशासन और परिवार के बयानों में अंतर सामने आया। स्कूल प्रबंधन का कहना था कि गोपाल उस दिन स्कूल आया ही नहीं था। वहीं परिवार का कहना है कि वह अपने भाई के साथ स्कूल गया था।

परिवार के मुताबिक स्कूल के मुख्य रास्ते के पास एक निजी मकान में लगे CCTV कैमरे की फुटेज में गोपाल स्कूल कैंपस की ओर जाता दिखाई दे रहा है। इस फुटेज के सामने आने के बाद स्कूल प्रबंधन के दावे पर सवाल उठने लगे।

पुलिस ने क्लासरूम तक खंगाले

मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस टीम स्कूल परिसर में पहुंची और हर क्लासरूम की बारीकी से जांच की। पुलिस ने स्कूल में मौजूद संभावित साक्ष्यों को खंगाला। इस दौरान स्कूल प्रशासन ने मामले पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।

FSL टीम ने मौके से जुटाए साक्ष्य

पुलिस की सूचना पर एफएसएल टीम को भी मौके पर बुलाया गया। टीम ने स्कूल परिसर की जांच कर जरूरी साक्ष्य जुटाए। पुलिस CCTV फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर भी मामले की पड़ताल कर रही है।

पुलिस स्कूल परिसर में जांच कर ही रही थी, तभी गोपाल के पिता के मोबाइल पर एक कॉल आई। फोन करने वाले ने बताया कि गोपाल उत्तर प्रदेश के देवरिया में है।

साथ ही यह भी बताया गया कि नकाबपोश बदमाशों ने उसका अपहरण किया था। सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू की।

SDPO के नेतृत्व में टीम देवरिया रवाना

बच्चे की लोकेशन देवरिया में मिलने के बाद SDPO के नेतृत्व में विशेष पुलिस टीम तत्काल उत्तर प्रदेश के लिए रवाना की गई। पुलिस का मुख्य फोकस बच्चे को सकुशल बरामद करना था। स्थानीय लोगों से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने छात्र को तलाश लिया।

सुरक्षित बरामदगी के बाद कई सवाल बाकी

गोपाल के सुरक्षित मिलने के बाद पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि वह देवरिया तक कैसे पहुंचा। शुरुआती जांच में अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि छात्र खुद किसी कारण से वहां पहुंचा था या उसके साथ किसी ने कुछ किया। नकाबपोश बदमाशों द्वारा अपहरण किए जाने की सूचना की भी पुलिस जांच कर रही है।

CCTV-DVR और कॉल की जांच अहम

पूरे मामले में स्कूल के CCTV-DVR से छेड़छाड़, निजी मकान के कैमरे में छात्र के स्कूल परिसर में जाने की फुटेज और पिता के मोबाइल पर आई कॉल जांच के अहम बिंदु हैं।

पुलिस इन सभी पहलुओं को जोड़कर घटनाक्रम की कड़ियां तलाश रही है। छात्र के बयान और आगे की जांच के बाद ही उसके स्कूल से देवरिया पहुंचने की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।



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गाढ़ी दही, मलाई, काजू-पिस्ता और केसर… ₹50 की लस्सी के लिए लगती है लंबी कतार

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गाढ़ी दही, मलाई, काजू-पिस्ता और केसर… ₹50 की लस्सी के लिए लगती है लंबी कतार

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Darbhanga Tower Famous Lassi: दरभंगा टावर की शाम बाजार की रौनक और भीड़ के साथ एक खास स्वाद के लिए भी जानी जाती है. टावर चौराहे पर दशकों से बिक रही मशहूर लस्सी का स्वाद लेने के लिए स्थानीय लोगों के साथ बाहर से आने वाले लोग भी पहुंचते हैं. महज 50 रुपये में मिलने वाली इस लस्सी में गाढ़ी दही, मलाई, क्रीम, काजू, पिस्ता, बादाम और केसर का इस्तेमाल किया जाता है और इसे मिट्टी के कुल्हड़ में परोसा जाता है. इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शाम होते ही यहां ग्राहकों की भीड़ जुटने लगती है और लोगों को लस्सी के लिए टोकन लेकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है.

दरभंगा टावर की शाम अपने आप में खास होती है. चौराहे की रौनक, लोगों की भीड़ और बाजार की हलचल यहां के माहौल को अलग पहचान देती है. लेकिन इस रौनक के बीच एक ऐसी चीज है, जो स्थानीय लोगों के साथ बाहर से आने वाले लोगों को भी अपनी ओर खींचती है दरभंगा टावर की मशहूर लस्सी. कहा जाता है कि अगर दरभंगा आए और टावर की इस लस्सी का स्वाद नहीं लिया, तो शहर का सफर कुछ अधूरा-सा रह जाता है.

टावर चौराहे पर एक छोटे से टेबल से दशकों से लस्सी बेचने का सिलसिला जारी है. दुकान भले ही बड़ी नहीं है, लेकिन इसके स्वाद की चर्चा दूर-दूर तक है. यही वजह है कि शाम होते ही यहां लस्सी पीने वालों की भीड़ जुटने लगती है. अपनी बारी के लिए लोगों को टोकन लेना पड़ता है. नंबर आने का इंतजार करना पड़ता है.

गर्मी के मौसम में इसकी मांग और बढ़ जाती है. महज 50 रुपये में मिलने वाली ठंडी-ठंडी लस्सी गर्मी से राहत देने के साथ स्वाद का भी अलग अनुभव कराती है. टोकन सिस्टम के कारण ग्राहकों को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है, लेकिन लस्सी का स्वाद इंतजार को आसान बना देता है.

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इस लस्सी की खासियत इसका देसी अंदाज है. गाढ़ी दही के साथ मलाई और क्रीम मिलाई जाती है. इसके बाद काजू, पिस्ता, बादाम और केसर से इसे सजाया जाता है. मिट्टी के कुल्हड़ में परोसी जाने वाली लस्सी में देसी स्वाद और खुशबू का एहसास और बढ़ जाता है.

दरभंगा टावर की यह लस्सी सिर्फ गर्मी में राहत देने वाला पेय नहीं, बल्कि शहर की खान-पान संस्कृति का हिस्सा बन चुकी है. ऑफिस से लौटने वाले लोग हों, कॉलेज के छात्र हों या परिवार के साथ बाजार घूमने निकले लोग कई लोग यहां रुककर लस्सी का स्वाद लेना पसंद करते हैं. छोटी सी जगह से शुरू हुई यह दुकान आज दरभंगा टावर की पहचान से जुड़ चुकी है. यही वजह है कि स्थानीय लोगों के लिए यह लस्सी सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि दरभंगा की शाम और शहर की स्वादिष्ट याद का हिस्सा है.

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26 बीघा जमीन 6.95 करोड़ में बिक्री, सिर्फ 72 लाख पेमेंट, द‍िल्‍ली HC का फैसला


दिल्ली के नजफगढ़ की 26 बीघा जमीन. चार महिलाएं इसकी बराबर की हिस्सेदार थीं. जमीन बिकी तो कीमत लगी 6.95 करोड़ रुपये. लेकिन चार हिस्सों में से एक हिस्सेदार को उसके हिस्से की पूरी रकम नहीं मिली. उसके खाते में करीब 72 लाख रुपये पहुंचे. बाकी करीब 1.01 करोड़ रुपये कहां गए, यही सवाल कई साल तक चलता रहा और आखिरकार दिल्ली हाई कोर्ट तक पहुंच गया. अब कोर्ट ने जीजा को 1,01,78,074 रुपये और उस पर 8 फीसदी सालाना ब्याज देने का आदेश दिया है.

मामला करीब चार दशक पुराना है. टाइम्‍स ऑफ इंड‍िया की र‍िपोर्ट के मुताबिक, 29 मार्च 1985 को एक महिला ने अपनी तीन जेठानियों या देवरानियों के साथ मिलकर नजफगढ़ में 26 बीघा जमीन खरीदी थी. रजिस्टर्ड सेल डीड में चारों महिलाओं का नाम था और सभी की जमीन में एक-चौथाई हिस्सेदारी थी. यानी जमीन पर किसी एक का पूरा मालिकाना हक नहीं था. चारों का हिस्सा बराबर था. बाद में जमीन का म्यूटेशन भी हुआ और संबंधित महिला के नाम एक-चौथाई अविभाजित हिस्सा दर्ज किया गया.

इसी दिन एक और दस्तावेज तैयार हुआ, जिसने आगे चलकर इस पूरे विवाद में सबसे अहम भूमिका निभाई. संबंधित महिला उस समय पश्चिम बंगाल में रहती थीं, जबकि उनके भाई-इन-लॉ यानी जीजा दिल्ली में रहते थे. इसलिए उन्होंने अपने जीजा के नाम एक जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी यानी GPA कर दी. इसका मतलब था कि जीजा उनकी ओर से जमीन की देखरेख और उससे जुड़े काम कर सकते थे. GPA में जमीन को बेचने, ट्रांसफर करने और गिफ्ट करने जैसी शक्तियां भी दी गई थीं.

GPA का इस्‍तेमाल हुआ

कई साल बाद 2011 में इसी GPA का इस्तेमाल हुआ. चारों हिस्सेदारों की जमीन एक पब्लिक लिमिटेड कंपनी को बेच दी गई. 11 अप्रैल 2011 को रजिस्टर्ड सेल डीड हुई और पूरी 26 बीघा जमीन की कीमत 6.95 करोड़ रुपये तय हुई. तीन महिला मालिकों ने अपने स्तर पर दस्तावेजों पर कार्रवाई की, जबकि चौथी महिला की तरफ से उनके जीजा ने GPA धारक के रूप में सौदा किया. यहीं से विवाद की शुरुआत हुई.

गणित बिल्कुल सीधा था. जमीन में महिला की हिस्सेदारी 25 फीसदी थी. 6.95 करोड़ रुपये का एक-चौथाई हिस्सा करीब 1.73 करोड़ रुपये बैठता था. लेकिन महिला के खाते में सिर्फ 71.99 लाख रुपये पहुंचे. यानी करीब 1.01 करोड़ रुपये की रकम बाकी रह गई. खास बात यह थी कि महिला को जमीन की बिक्री की पूरी जानकारी पहले से नहीं थी. उन्हें तब पता चला जब उनके खाते में करीब 72 लाख रुपये ट्रांसफर किए गए.

मह‍िला पहुंच गई कोर्ट

महिला ने अपने हिस्से की बाकी रकम के लिए कानूनी लड़ाई शुरू की. लेकिन इस बीच उनकी मौत हो गई. उन्होंने कोई वसीयत नहीं छोड़ी थी. इसके बाद उनकी तीन बेटियों ने उनकी जगह यह कानूनी लड़ाई जारी रखी. मामला दिल्ली हाई कोर्ट पहुंचा, जहां कोर्ट के सामने सबसे बड़ा सवाल यह था कि क्या GPA के आधार पर जीजा खुद जमीन का मालिक बन गया था या वह सिर्फ महिला की तरफ से काम करने वाला एजेंट था?

जीजा की तरफ से दावा किया गया कि असल में जमीन उन्होंने और उनकी पत्नी ने अपने पैसों से खरीदी थी. महिलाओं के नाम सिर्फ सुविधा के लिए रखे गए थे. उन्होंने GPA में मौजूद जमीन को गिफ्ट करने की शक्ति का भी हवाला दिया और यह तर्क देने की कोशिश की कि इससे उनका जमीन पर अधिकार साबित होता है. लेकिन हाई कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया.

कोर्ट ने क‍िन दस्‍तावेजों को महत्‍वपूर्ण माना

कोर्ट ने पुराने रजिस्टर्ड दस्तावेजों को सबसे महत्वपूर्ण माना. सेल डीड में चारों महिलाओं को जमीन का मालिक और भूमिधर बताया गया था. वहीं जीजा को साफ तौर पर GPA धारक के रूप में दर्ज किया गया था. कोर्ट ने कहा कि रजिस्टर्ड दस्तावेजों में जो दर्ज है, उसे सिर्फ सामान्य दावों के आधार पर पलटा नहीं जा सकता. जीजा यह साबित करने के लिए भी पर्याप्त सबूत नहीं दे सके कि जमीन खरीदने का पूरा पैसा उन्होंने और उनकी पत्नी ने लगाया था.

आयकर रिटर्न भी इस मामले में महत्वपूर्ण साबित हुआ. कोर्ट ने पाया कि जमीन की बिक्री से मिले 6.95 करोड़ रुपये पर बनने वाला पूरा कैपिटल गेन जीजा के ITR में नहीं दिखाया गया था. कोर्ट ने यह भी सवाल उठाया कि अगर वास्तव में पूरा पैसा जीजा ने लगाया था, तो किसी दूसरे के नाम जमीन खरीदने की बात को साबित करने के लिए ठोस दस्तावेज होने चाहिए थे. सिर्फ यह कहना कि पैसा उन्होंने दिया था, पर्याप्त नहीं माना गया.

अब आता है 71.99 लाख रुपये का दूसरा पेच. जीजा ने दावा किया कि यह रकम महिला को जमीन बेचने के बदले नहीं दी गई थी, बल्कि उन्होंने उसे ब्याज मुक्त दोस्ताना कर्ज के रूप में पैसा दिया था. लेकिन इस दलील को भी कोर्ट ने नहीं माना. एक पुलिस शिकायत के जवाब में जीजा ने खुद लिखा था कि उन्होंने करीब 72 लाख रुपये की रकम तीनों बहनों के खातों में लगभग उसी समय जमा की थी. वहां उन्होंने इसे कर्ज के तौर पर पेश नहीं किया था.

आईटीआर में कहां से आया ज‍िक्र

दूसरी तरफ महिला ने अपने ITR में 71.99 लाख रुपये को जमीन की बिक्री से मिले लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन के रूप में दिखाया था और उस पर टैक्स भी चुकाया था. अगर यह वास्तव में कर्ज होता, तो उसके समर्थन में कोई प्रॉमिसरी नोट या दूसरा दस्तावेज भी नहीं मिला. पैसे के ट्रांसफर को लेकर भी अलग-अलग बातें सामने आईं. इन सब कारणों से कोर्ट ने कर्ज वाली दलील को टिकाऊ नहीं माना.

दिल्ली हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के 2012 के सूरज लैंप एंड इंडस्‍ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड बनाम स्‍टेट ऑफ हरियाणा फैसले का भी सहारा लिया. इसमें साफ किया गया था कि GPA अपने आप जमीन का मालिकाना हक ट्रांसफर नहीं करता. GPA किसी व्यक्ति को मालिक की तरफ से काम करने का अधिकार देता है. यानी यहां जीजा जमीन के मालिक नहीं, बल्कि अपनी भाभी की तरफ से काम करने वाले एजेंट थे.

इसके बाद भारतीय कॉन्ट्रैक्ट एक्ट की धारा 218 भी महत्वपूर्ण हो गई. इस प्रावधान के मुताबिक एजेंट को अपने प्रिंसिपल यानी मालिक की ओर से मिली रकम का हिसाब देना होता है और मालिक को उसका हिस्सा देना होता है. चूंकि जीजा ने महिला की ओर से जमीन की बिक्री में भूमिका निभाई थी, इसलिए कोर्ट ने माना कि उन्हें महिला के हिस्से की पूरी रकम देनी होगी.

अदालत ने क्‍या फैसला सुनाया

अदालत ने हिसाब भी साफ कर दिया. 6.95 करोड़ रुपये की बिक्री में महिला का एक-चौथाई हिस्सा करीब 1.73 करोड़ रुपये था. इसमें से 71.99 लाख रुपये पहले ही मिल चुके थे. इसलिए 1,01,78,074 रुपये की रकम अभी बाकी थी. दिल्ली हाई कोर्ट ने अब यही रकम उनकी बेटियों को देने का आदेश दिया है. इसके साथ 11 अप्रैल 2011 यानी जमीन की बिक्री की तारीख से भुगतान होने तक 8 फीसदी सालाना ब्याज भी देना होगा.

इस मामले की सबसे अहम बात यह है कि सिर्फ GPA हाथ में होने से कोई व्यक्ति जमीन का मालिक नहीं बन जाता. GPA किसी को मालिक की ओर से काम करने का अधिकार दे सकती है, लेकिन बिक्री से मिली रकम का हिसाब देना उसकी जिम्मेदारी बनी रहती है. इस मामले में रजिस्टर्ड सेल डीड, GPA, बैंक ट्रांजैक्शन, ITR और पहले दिए गए जवाब जैसे दस्तावेजों ने कोर्ट को यह तय करने में मदद की कि 26 बीघा जमीन की बिक्री की रकम में किसका कितना हिस्सा था.



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जल मंथन में दिल्ली की जल सुरक्षा का रोडमैप तैयार: एआई, डिजिटल ट्विन और स्मार्ट मीटरिंग से लीकेज रोकने पर जोर – New Delhi News




दिल्ली जल बोर्ड के दो दिवसीय जल मंथन 2026 का बुधवार को समापन हो गया। 15 और 16 सितंबर को आयोजित सम्मेलन में दिल्ली को जल सुरक्षा देने, 24×7 साफ पानी की आपूर्ति सुनिश्चित करने और यमुना के कायाकल्प के लिए व्यापक रोडमैप तैयार किया गया। सम्मेलन में भारत के अलावा इजराइल, ब्रिटेन, नीदरलैंड और फ्रांस के विशेषज्ञों के साथ विश्व बैंक और एशियाई विकास बैंक के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। जल मंथन में पानी की लीकेज रोकने और जल नेटवर्क की क्षमता बढ़ाने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, मशीन लर्निंग, डिजिटल ट्विन और स्मार्ट मीटरिंग जैसी तकनीकों के इस्तेमाल पर जोर दिया गया। इसके अलावा उपचारित अपशिष्ट जल और कीचड़ के पुन: उपयोग व पुनर्चक्रण की रणनीति पर भी सहमति बनी। इसका इस्तेमाल गैर-पेय जरूरतों में किया जाएगा, जिससे ताजे पानी की मांग और यमुना पर दबाव कम किया जा सके। सम्मेलन में 24×7 जल आपूर्ति, सर्कुलर वॉटर इकोनॉमी, डिजिटल जल बोर्ड, कुशल कार्यबल, वित्तीय स्थिरता और यमुना पुनरुद्धार जैसे विषयों पर चर्चा हुई। विभिन्न कार्य समूहों की सिफारिशों को ‘जल संकल्प’ के रूप में संकलित किया गया है। इन सुझावों को दिल्ली की जल व्यवस्था में लागू करने के लिए आगे की कार्ययोजना तैयार की जाएगी। जल मंत्री प्रवेश साहिब सिंह ने कहा कि ‘जल मंथन’ का उद्देश्य केवल चर्चा तक सीमित रहना नहीं, बल्कि दुनिया की बेहतर तकनीकों और विचारों को दिल्ली की जरूरतों के मुताबिक जमीन पर उतारना है। लक्ष्य हर घर तक गुणवत्तापूर्ण पानी पहुंचाना और यमुना में स्पष्ट सुधार लाना है।



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अमेरिका को छोड़कर कनाडा अब यूरोप के साथ आएगा: यूरोपीय संघ का पहला एसोसिएट मेंबर बनेगा, ब्रिटेन-यूक्रेन के साथ मिलकर सुरक्षा मजबूत करेगा


स्ट्रासबर्ग1 घंटे पहले

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स्ट्रासबर्ग में यूरोपीय संसद में यूरोपीय आयोग की अध्यक्ष उर्सुला फॉन डेर लेयेन और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी।

अमेरिका के साथ बढ़ते तनाव के बीच कनाडा अब यूरोप के और करीब जाने की तैयारी कर रहा है। कनाडा यूरोपीय संघ (EU) का पहला ‘एसोसिएट मेंबर’ बनने जा रहा है।

EU में यूरोप के 27 देश शामिल हैं। कनाडा इन देशों की तरह EU के फैसलों पर वोट नहीं कर सकेगा। हालांकि, वह कई अहम मुद्दों पर EU के साथ मिलकर काम करेगा। इनमें रक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), टेक्नोलॉजी, ऊर्जा, जरूरी खनिज और व्यापार जैसे क्षेत्र शामिल हैं।

इसके अलावा कनाडा यूरोप की सुरक्षा मजबूत करने के लिए बनाई जाने वाली एक नई सिक्योरिटी काउंसिल में भी शामिल हो सकता है। इसमें ब्रिटेन और यूक्रेन जैसे वे देश भी शामिल होंगे, जो EU के सदस्य नहीं हैं।

यूरोपीय संसद में ‘स्टेट ऑफ द यूनियन’ कार्यक्रम के दौरान कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का स्वागत किया गया।

यूरोपीय संसद में ‘स्टेट ऑफ द यूनियन’ कार्यक्रम के दौरान कनाडाई प्रधानमंत्री मार्क कार्नी का स्वागत किया गया।

कनाडा के प्रधानमंत्री ने यूरोपीय संघ के साथ जुड़ने की इच्छा जताई थी यूरोपीय संघ की अध्यक्ष उर्सुला वॉन डेर लेयेन ने बुधवार को कहा कि यूरोपीय संघ कनाडा के लिए अपने दरवाजे खोलना चाहता है। उन्होंने कहा कि कनाडा और यूरोप के बीच सहयोग को और मजबूत किया जा सकता है।

इस दौरान कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी भी मौजूद थे। कार्नी ने पिछले हफ्ते यूरोपीय संघ के साथ एक ‘गठबंधन’ बनाने की इच्छा जताई थी। उनका कहना था कि बदलती वैश्विक परिस्थितियों में कनाडा और यूरोप के बीच रिश्तों को और मजबूत करना जरूरी है।

वॉन डेर लेयेन ने कहा कि कनाडा और यूरोप दुनिया को एक जैसी नजर से देखते हैं और लोकतंत्र में विश्वास रखते हैं।

वॉन डेर लेयेन ने कहा कि कनाडा और यूरोप दुनिया को एक जैसी नजर से देखते हैं और लोकतंत्र में विश्वास रखते हैं।

कनाडा के लिए यूरोपीय संघ को नई व्यवस्था बनानी पड़ेगी

यूरोपीय संघ के नियमों में अभी ‘एसोसिएट मेंबर’ जैसी कोई सदस्यता नहीं है। इसलिए अगर कनाडा को यह दर्जा देना है, तो EU को इसके लिए नए नियम बनाने होंगे। इसके लिए सभी सदस्य देशों की सहमति भी जरूरी होगी।

इस तरह की सदस्यता का विचार पहली बार इस साल जर्मनी के चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने यूक्रेन के लिए रखा था। हालांकि, यूक्रेन ने इसमें ज्यादा दिलचस्पी नहीं दिखाई। वह यूरोपीय संघ का पूरा सदस्य बनना चाहता है।

साल 2016 के बाद से EU और कनाडा के बीच व्यापार 80% से ज्यादा बढ़ गया है।

साल 2016 के बाद से EU और कनाडा के बीच व्यापार 80% से ज्यादा बढ़ गया है।

यूरोपीय संघ और कनाडा के बीच व्यापार बढ़ा

अमेरिका के लगाए टैरिफ और चीन से बढ़ती कारोबारी चुनौती के बीच यूरोपीय संघ और कनाडा पहले से ही एक-दूसरे के साथ मिलकर काम कर रहे हैं।

दोनों के बीच CETA नाम का एक व्यापार समझौता है। इसके तहत ज्यादातर सामान पर लगने वाला आयात शुल्क खत्म हो चुका है।

इस साल कनाडा यूरोप के एक बड़े रक्षा फंड से जुड़ने वाला पहला गैर-यूरोपीय देश भी बना है। इससे कनाडा और यूरोपीय देशों के बीच रक्षा के क्षेत्र में सहयोग और बढ़ने की उम्मीद है।

वॉन डेर लेयेन ने कहा कि दुनिया में ताकत सिर्फ बड़े या अमीर देशों के पास नहीं होनी चाहिए। लोकतांत्रिक देशों को यह तय करने का अधिकार होना चाहिए कि वे किन देशों के साथ मिलकर काम करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि इसी सोच के तहत यूरोप और कनाडा अपने रिश्ते और मजबूत कर रहे हैं।

अमेरिका और कनाडा के बीच ट्रेड वॉर जारी

अमेरिका और कनाडा के बीच व्यापार को लेकर विवाद करीब 18 महीने से चल रहा है। जुलाई में ट्रम्प ने कनाडा पर अमेरिकी उद्योगों के साथ भेदभाव करने का आरोप लगाया था।

इसके बाद ट्रम्प ने एक पुराने कानून का इस्तेमाल करते हुए कनाडा से आने वाले कुछ सामान पर 50% तक टैरिफ लगाने का फैसला किया। जवाब में कनाडा ने भी अमेरिका से आने वाले कई सामान पर 50% तक टैरिफ लगा दिया।

इससे पहले दोनों देशों के बीच कई महीनों तक बातचीत चली थी। लेकिन 21 अगस्त को बातचीत टूट गई। इसके बाद दोनों देशों के बीच टैरिफ वॉर और तेज हो गई।

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iQOO 16 की डेट हुई कंफर्म, सबसे तेज प्रोसेसर और यूनीक कैमरे के साथ होगा लॉन्च


iQOO 16 की लॉन्च डेट कंपनी ने आधिकारिक तौर पर कंफर्म कर दी है। Vivo के सब ब्रांड का यह दमदार गेमिंग सबसे तेज प्रोसेसर और यूनीक कैमरा डिजाइन के साथ पेश किया जाएगा। यह फोन पिछले साल लॉन्च हुए iQOO 15 का अपग्रेड होगा। कंपनी ने हाल ही में इस फोन के कैमरा डिजाइन को टीज किया था

आईकू का यह फ्लैगशिप फोन Samsung के M16 OLED डिस्प्ले के साथ लॉन्च होने वाला पहला Android फोन होगा। ये वही डिस्प्ले है, जिसे एप्पल ने अपने हाल में लॉन्च हुई iPhone 18 Pro सीरीज में इस्तेमाल की है। वहीं, Samsung Galaxy S27 सीरीज के प्रो और अल्ट्रा मॉडल में भी यही डिस्प्ले इस्तेमाल किया जाएगा।

29 सितंबर को होगा लॉन्च

iQOO ने चीनी माइक्रोब्लॉगिंग प्लेटफॉर्म Weibo पर कंफर्म किया है कि iQOO 16 को 29 सितंबर को लॉन्च किया जाएगा। यह फोन फिलहाल चीन में लॉन्च किया जाएगा। भारतीय समय के अनुसार फोन को शाम के 4:30 बजे लॉन्च किया जाएगा। साथ ही, कंपनी ने फोन के कलर ऑप्शन भी कंफर्म किए हैं। यह फोन तीन कलर ऑप्शन- “Chasing Light”, “Legendary”, और “Racing Track” में आएगा।

मिलेंगे तगड़े फीचर्स

Samsung के फ्लैगशिप डिस्प्ले के आलावा इस फोन में Qualcomm का 2nm चिपसेट मिलेगा। इसे Snapdragon 8 Elite Extreme Gen 6 चिपसेट के साथ लॉन्च किया जा सकता है। फोन में 16GB/24GB रैम के साथ 1TB तक स्टोरेज का सपोर्ट मिल सकता है। इसके बैक में ट्रिपल कैमरा मिलेगा। तीनों ही कैमरे 50MP के होंगे। सेल्फी के लिए भी इसमें 50MP का ही कैमरा दिया जा सकता है। यह Android 17 ऑपरेटिंग सिस्टम और 7500mAh की दमदार बैटरी के साथ लॉन्च किया जा सकता है। इसके साथ 100W वायर्ड और 50W वायरलेस चार्जिंग को सपोर्ट मिल सकता है।

iQOO 16 के कई फीचर्स भी पिछले दिनों सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर शेयर किए गए हैं। आईकू के इस गेमिंग फोन में 6.85 इंच का 2K OLED डिस्प्ले मिल सकता है, जो 165Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करेगा। आईकू के इस फोन में सैमसंग का M16 OLED पैनल यूज किया जा सकता है। यह फोन IP68 और IP69 रेटेड होगा, जिसकी वजह से पानी और धूल-मिट्टी में यह खराब नहीं होगा। इस फोन में 3D सोनिक इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर भी दिया जा सकता है।

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आदित्य ठाकरे बोले- मैं दिशा सालियान को नहीं जानता: एक्टर सुशांत सिंह की मैनेजर थीं, 6 साल पहले 12वीं मंजिल से गिरने से मौत हुई थी


2 घंटे पहले

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शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने बुधवार को मुंबई में मीडिया से बात की।

शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने बुधवार को दावा किया कि वह दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की पूर्व मैनेजर दिवंगत दिशा सालियन को कभी नहीं जानते थे और न ही उनसे कभी मिले थे।

उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि कुछ लोग राजनीतिक फायदे के लिए उन्हें बदनाम करने के लिए जानबूझकर उनका नाम इस मामले से जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं।

आदित्य का यह बयान CBI की तरफ से 2020 के दिशा मौत मामले में FIR दर्ज करने के 2 दिन बाद आया है। FIR में किसी को आरोपी नहीं बनाया गया है।

28 साल की सालियन की मौत 8 जून, 2020 को मुंबई के मलाड इलाके में एक रिहायशी इमारत की 12वीं मंजिल से गिरने के बाद हुई थी।

पुलिस ने एक्सीडेंटल डेथ रिपोर्ट (ADR) दर्ज की थी और बाद में जांच के बाद दावा किया कि यह आत्महत्या का मामला था।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2 सितंबर को दिशा के पिता की याचिका पर CBI जांच के निर्देश दिए थे।

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2 सितंबर को दिशा के पिता की याचिका पर CBI जांच के निर्देश दिए थे।

दिशा के पिता का आरोप- केस को दबाने की कोशिश की गई

बॉम्बे हाईकोर्ट के निर्देश के बाद दिशा के पिता सतीश सालियान ने कहा था कि दिशा का गैंगरेप और हत्या हुई। मामले को दबाने की कोशिश की गई। उन्होंने आदित्य ठाकरे समेत अन्य लोगों के खिलाफ FIR की मांग की थी।

उन्होंने यह भी कहा था- मैं 6 साल से इसका इंतजार कर रहा था। खुश होने की कोई वजह नहीं है। मैंने अपनी बेटी को खोया है। आज मुझे राहत महसूस हो रही है। मैंने हाथ जोड़कर जज के प्रति आभार जताया।

वकील ने कहा था- आदित्य ठाकरे, सूरज पंचोली पर FIR होगी

सतीश सालियान के वकील निलेश ओझा ने कहा था कि जिन लोगों के खिलाफ जांच में सबूत मिलेगा, उनके खिलाफ कार्रवाई होगी। अगर किसी व्यक्ति के खिलाफ सबूत नहीं मिलता है तो उसे आरोपी नहीं बनाया जाएगा। अगर CBI की रिपोर्ट नकारात्मक आती है, तो परिवार को उस पर आपत्ति जताने और प्रोटेस्ट पिटीशन दाखिल करने का अधिकार रहेगा।

ओझा के मुताबिक, FIR में आदित्य ठाकरे, सूरज पंचोली, डीनो मोरिया, आदित्य ठाकरे के बॉडीगार्ड, रिया चक्रवर्ती, परमबीर सिंह, उद्धव ठाकरे, सचिन वाजे और पिछली SIT के उन सदस्यों के नाम भी आरोपी के तौर पर दिए गए हैं, जिन पर मामले को दबाने का आरोप है।

शुरुआती जांच 3 महीने में ही बंद कर दी थी

बॉम्बे हाईकोर्ट ने 2 सितंबर की सुनवाई के दौरान छह साल तक FIR दर्ज न करने के लिए मुंबई पुलिस को फटकार लगाई और कहा था कि पुलिस की जांच से जवाबों से ज़्यादा सवाल खड़े होते हैं।

दिशा केस की शुरुआती जांच करीब तीन महीने में बंद कर दी गई थी। अक्टूबर 2020 में पुलिस ने मौत को सुसाइड बताया था। वहीं दिसंबर 2023 में केस दोबारा खोला गया और SIT बनाई गई। इसमें भी आत्महत्या की बात कही गई थी।

पहले भी बोल चुके आदित्य- दिशा की मौत से मेरा कोई लेना-देना नहीं

इससे पहले नई दिल्ली में भी आदित्य ठाकरे ने दिशा केस से जुड़े सवालों और आरोपों पर जवाब देने से इनकार कर दिया था। उन्होंने कहा था- “इस मामले से मेरा कोई लेना-देना नहीं है, तो मैं इन आरोपों पर जवाब क्यों दूं। पिछले 6 साल से मुझे बदनाम करने की कोशिश की जा रही है। जो भी बीजेपी को चुभता है, उसे लेकर उसे परेशानी होती है। जैसा मैंने कहा, जब आपका किसी चीज से कोई लेना-देना नहीं है, तो उसके बारे में बोलना या उसे कोई महत्व देना क्यों चाहिए? मेरा यही रुख है।” पढ़ें पूरी खबर…



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आदित्य ठाकरे बोले- मैं दिशा से कभी नहीं मिला: उन्हें जानता भी नहीं था, मेरी इमेज बिगाड़ने की कोशिश की गई




शिवसेना (UBT) नेता आदित्य ठाकरे ने कहा कि वह दिशा सालियान से कभी नहीं मिले।उन्होंने कहा कि वह दिशा सालियान को जानते भी नहीं थे। मुझे दिशा सालियान मामले से जोड़ना राजनीतिक और निजी मकसद से मेरी छवि खराब करने की जान-बूझकर की गई कोशिश है। खबर अपडेट की जा रही है…



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