Tuesday, June 2, 2026
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सीधी में जनसुनवाई में साइकिल से आए कलेक्टर: जमीन पर जानी लोगों की समस्याएं, मोबाइल चलाते रहे कर्मचारी – Sidhi News




सीधी जिला पंचायत सभागार में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था में एक विरोधाभासी दृश्य सामने आया। जहां जिले के कलेक्टर विकास मिश्रा आम लोगों के बीच जमीन पर बैठकर उनकी समस्याएं सुनते दिखे, वहीं अधिकांश अधिकारी और कर्मचारी कुर्सियों पर आराम फरमाते और मोबाइल फोन चलाते नजर आए। कलेक्टर विकास मिश्रा ने जनसुनवाई में पहुंचे ग्रामीणों और फरियादियों के बीच बैठकर सीधे संवाद स्थापित किया। उनका यह व्यवहार एक संवेदनशील प्रशासनिक अधिकारी की छवि को दर्शाता है, जो आमजन से सीधा जुड़ाव स्थापित करने का प्रयास कर रहे थे। इसके विपरीत, सभागार में मौजूद कई अधिकारी और कर्मचारी कुर्सियों पर बैठे रहे। कुछ तो जनसुनवाई के दौरान अपने मोबाइल फोन में व्यस्त दिखाई दिए, जिससे ऐसा प्रतीत हुआ कि उन्हें आमजन की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है। हैरानी की बात यह भी रही कि कलेक्टर विकास मिश्रा स्वयं साइकिल चलाकर कलेक्ट्रेट से जिला पंचायत सभागार पहुंचे। वहीं, अधिकांश अधिकारी और कर्मचारी महज कुछ सौ मीटर की दूरी तय करने के लिए भी चारपहिया वाहनों का उपयोग करते नजर आए। उल्लेखनीय है कि रीवा संभाग के कमिश्नर बी.एस. जामोद पहले ही अधिकारियों को अनावश्यक रूप से चारपहिया वाहनों का उपयोग कम करने की सलाह दे चुके हैं। जनसुनवाई के दौरान कई अधिकारियों और कर्मचारियों के गले में परिचय-पत्र (आईडी कार्ड) भी नहीं दिखाई दिए। जबकि कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि सभी अधिकारी और कर्मचारी अपने कार्यालय एवं संस्थान में प्रवेश के दौरान परिचय-पत्र अनिवार्य रूप से धारण करें। मंगलवार दोपहर करीब 12:30 बजे आयोजित इस जनसुनवाई में इन निर्देशों की खुली अनदेखी देखने को मिली, जिसने शासन-प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं।



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मधुबनी के चूड़ी बाजार में भीषण ट्रैफिक जाम: अतिक्रमण बना मुख्य कारण, गर्मी में घंटों फंसे रहे राहगीर – Madhubani News




मधुबनी शहर के थाना चौक से शंकर चौक तक जाने वाली मुख्य सड़क पर स्थित चूड़ी बाजार में मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे से भारी ट्रैफिक जाम लग गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़क पर हुए अतिक्रमण के कारण यातायात व्यवस्था पूरी तरह बाधित हो गई, जिससे राहगीरों, छात्रों और मरीजों के परिजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। भीषण गर्मी के बीच सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे जाम में फंसे लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ा। स्कूल से घर लौट रहे छात्र सौरभ कुमार और उमेश कुमार ने बताया कि अत्यधिक गर्मी में जाम में फंसे रहने के कारण उन्हें काफी दिक्कत हुई। उन्होंने प्रशासन से इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए कदम उठाने की अपील की। विवेक कुमार ने बताया कि वह अपने बीमार भाई के लिए दवा खरीदने जा रहे थे, लेकिन जाम में फंसने के कारण उन्हें समय पर दवा लाने में कठिनाई हुई। वहीं, कोचिंग के लिए जा रही छात्राएं अंकिता कुमारी और रचना कुमारी ने कहा कि जाम के कारण उन्हें अपनी कक्षाएं छूटने की चिंता सता रही थी। उन्होंने यह भी कहा कि शहर में लगातार बढ़ती जाम की समस्या विद्यार्थियों के लिए एक गंभीर परेशानी बनती जा रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क किनारे अतिक्रमण कर दुकानें चलाने के कारण सड़क की चौड़ाई काफी कम हो गई है। इसके बावजूद अतिक्रमणकारियों द्वारा स्थिति की गंभीरता को नजरअंदाज किया जा रहा है। जाम में फंसे लोगों की परेशानी से बेपरवाह होकर वे अपने कार्यों में व्यस्त दिखाई दिए। इस मामले पर मधुबनी ट्रैफिक इंस्पेक्टर नीलमणि रंजन ने कहा कि समस्या की जानकारी मिलते ही आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही जाम की समस्या का समाधान किया जाएगा और सड़क पर अतिक्रमण करने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी, ताकि आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा न हो।



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Realme ला रहा 8000mAh बैटरी वाला सस्ता फोन, भारत में लॉन्च से पहले कीमत हुई लीक


Realme भारत में जल्द 8000mAh बैटरी वाला एक और सस्ता फोन लॉन्च करने की तैयारी में है। चीनी कंपनी का यह फोन Realme P4R के नाम से पेश किया जाएगा। कंपनी ने फोन की लॉन्चिंग कंफर्म कर दी है। इस स्मार्टफोन का रिटेल बॉक्स सामने आया है, जिसमें फोन की कीमत के बारे में पता चला है। साथ ही, फोन के कुछ बेसिक फीचर्स भी रिवील हुए हैं। रिपोर्ट्स की मानें तो यह हाल में लॉन्च हुए Realme 16T का रीब्रांडेंड वर्जन हो सकता है।

कीमत हुई लीक

Realme P4R का रिटेल बॉक्स टिप्स्टर संजू ने शेयर की है, जिसमें फोन की MRP 44,999 रुपये बताई जा रही है। यह फोन 6GB RAM + 256GB स्टोरेज वेरिएंट के साथ आएगा। हालांकि, चीनी कंपनी के इस फोन की कीमत MRP से बहुत कम हो सकती है। इस फोन को 25,000 रुपये से 30,000 रुपये की रेंज में पेश किया जा सकता है।

मिलेंगे ये तगड़े फीचर्स

रियलमी के अपकमिंग फोन के लीक हुए बॉक्स के मुताबिक, इस फोन में 6.8 इंच का HD+ डिस्प्ले मिल सकता है। इस फोन का डिस्प्ले 144Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करेगा। साथ ही, इसमें 8,000mAh की बैटरी मिल सकती है। यह फोन डुअल कैमरा सेटअप के साथ आएगा। इसमें 50MP का मेन और 2MP का सेकेंडरी कैमरा मिलेगा। यही नहीं, यह फोन 5,300 वर्ग मिलीमीटर के वेपर चेंबर कूलिंग सिस्टम के साथ आ सकता है। फोन के बैक में Plus नोटिफिकेशन लाइट भी दिए जाने की संभावना है।

Realme P4R का वजन 224 ग्राम होगा और यह महज 8.88mm चौड़ा हो सकता है। इस फोन को तीन स्टोरेज वेरिएंट्स- 4GB RAM + 128GB, 6GB RAM + 128GB और 6GB RAM + 256GB में लॉन्च किया जा सकता है। रियली का यह फोन सिल्वर ग्लेयर, टाइटेनियम ग्लेयर और लेवेंडर ग्लेयर कलर ऑप्शन में आ सकता है।

Realme 16T के फीचर्स

हाल में लॉन्च हुए Reame 16T को भारत में 29,999 रुपये की कीमत में पेश किया गया है। रियलमी का यह फोन भी 8,000mAh की बैटरी, 6.8 इंच के डिस्प्ले के साथ आता है, जो 144Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। इस फोन में Android 16 पर बेस्ड Realme UI मिलता है। फोन के बैक में 50MP का मेन और 2MP का सेकेंडरी कैमरा मिलता है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए फोन में 16MP का कैमरा दिया गया है। यह फोन MediaTek Dimensity 6300 चिपसेट पर काम करता है।

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क्या है खपली गेहूं आटा, कैसे गायब हुआ और क्यों हो रही वापसी, हड़प्पा कालीन अनाज


पता नहीं आपने भारत के प्राचीन खपली गेहूं का नाम सुना है या नहीं लेकिन अब फिर इसका नाम सुनाई पड़ने लगा है. इसकी वापसी हो रही है. इसे फ्यूचर का आटा बताया जा रहा है. भारतीय भोजन परंपरा में इसकी गहरी जड़ें हैं. जानते हैं कि ये कैसा गेहूं है. अब क्यों लंबे समय बाद इसकी वापसी हो रही है. ये कहां और कब उगाया जाता है. भारत के बेस्ट शेफ इसे क्यों चुनने लगे हैं.

खपली आटा दरअसल खपली गेहूं से बनता है. यह गेहूं की एक बहुत पुरानी किस्म है, जिसे भारत में हजारों वर्षों से उगाया जाता रहा है. आधुनिक गेहूं आने से पहले दक्कन और दक्षिण भारत के कई इलाकों में यही प्रमुख गेहूं था. महाराष्ट्र और कर्नाटक में इसके दाने का बाहरी आवरण अपेक्षाकृत सख्त और मोटा होता है. इसी कारण इसे खपली कहा जाने लगा.

‘खपली’ नाम महाराष्ट्र और कर्नाटक में सबसे अधिक प्रचलित है. दुनिया के अधिकांश हिस्सों में इसे एमर, इटली में फारो मेडियो और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में सांबा कहा जाता है.

पुरातात्विक साक्ष्य बताते हैं कि मौजूदा समय में पाकिस्तान में स्थित मेहरगढ़ में 6000-5000 ईसा पूर्व से ही एमर गेहूं की खेती होती रही है. इसकी खेती हड़प्पा सभ्यता की बस्तियों में की जाती थी.

हड़प्पा काल में खपली गेहूं की रोटी की खेती की जाती थी. उस समय इसी गेहूं के आटे का इस्तेमाल रोटी बनाने में होता था. (AI Image)

अचानक इसकी चर्चा क्यों होने लगी?

पिछले कुछ वर्षों में लोगों की रुचि “पारंपरिक अनाज” और “लो-प्रोसेस्ड फूड” की ओर बढ़ी है. मधुमेह, मोटापा और पाचन संबंधी समस्याओं के कारण लोग ऐसे अनाज तलाश रहे हैं जिन्हें अधिक प्राकृतिक माना जाता है. इसी वजह से खपली आटा फिर चर्चा में आ गया है.
– इसमें अपेक्षाकृत अधिक फाइबर होता है
– प्रोटीन अच्छा होता है
– ग्लाइसेमिक इंडेक्स अपेक्षाकृत कम माना जाता है
– पेट देर तक भरा महसूस होता है
– इसकी तीन चपातियां दैनिक फाइबर जरूरतों का करीब 34% प्रदान करती हैं. ये आयरन और बी विटामिन का अच्छा स्रोत है.

भारत के जाने माने शेफ क्यों करा रहे इसकी वापसी

भारत के कई नामी शेफ खपली आटे की वापसी सिर्फ “हेल्थ ट्रेंड” की वजह से नहीं करा रहे, बल्कि इसके पीछे स्वाद, बनावट, इतिहास और भारतीय खाद्य विरासत का भी बड़ा कारण है. शेफ कहते हैं कि आधुनिक गेहूं ने स्वाद खो दिया है. जो आधुनिक गेहूं उगाया जा रहा, वो अमूमन विदेशों से आया और उगाने और पैदावार में बेहतर था लेकिन इस प्रक्रिया में गेहूं का मूल स्वाद और सुगंध कम हो गई.

भारत के कई नामी शेफ खपली आटे की वापसी करा रहे हैं. उसके पीछे इसकी पौष्टिकता, स्वाद, बनावट, इतिहास और भारतीय खाद्य विरासत भी है. (AI Image)

खपली गेहूं में उन्हें एक अलग मेवों जैसी और गहरी स्वाद-परत मिलती है. इसी कारण देश के जाने माने शेफ इस आटे का इस्तेमाल करने लगे हैं. वो इसे रोटी, कुलचा और ब्रेड में इस्तेमाल कर रहे हैं.

इटली में जैसे पुरानी गेहूं किस्मों की वापसी हुई, वैसे ही भारत में भी कुछ शेफ और किसान पुराने अनाजों को वापस ला रहे हैं. खपली, रागी, कोदो, ज्वार और बाजरा इसी सोच का हिस्सा हैं. आजकल लोग खाने के साथ उसकी परंपरा और कहानी के बारे में सुनना चाहते हैं. खपली आटा एक “स्टोरीटेलिंग इंग्रीडिएंट” बन गया है जब किसी मेन्यू में लिखा होता है कि यह 2000 साल पुरानी गेहूं किस्म से बनी रोटी है, तो उसका सांस्कृतिक मूल्य बढ़ जाता है.

दिलचस्प बात यह है कि 1990 और 2000 के दशक में भारत के कई बड़े रेस्तरां पश्चिमी तकनीकों और विदेशी सामग्री पर केंद्रित थे. अब नई पीढ़ी के शेफ भारतीय खाद्य इतिहास की ओर लौट रहे हैं. वे ये देख, जान और परख रहे हैं कि
– हमारी असली रोटी कैसी थी?
– हमारे पूर्वज कौन-सा गेहूं खाते थे?
खपली इसी खोज का हिस्सा है. एक तरह से देखें तो भारत के बेस्ट शेफ खपली आटे को वापस इसलिए ला रहे हैं क्योंकि उन्हें इसमें सिर्फ गेहूं नहीं दिखता, बल्कि भारतीय कृषि इतिहास का एक खोया हुआ अध्याय दिखता है, जिसे वे फिर से थाली में लाना चाहते हैं.

क्या ये सुपर फूड है

नहीं, इसे “चमत्कारी सुपरफूड” मान लेना सही नहीं होगा. पोषण विशेषज्ञ भी कहते हैं कि यह सामान्य गेहूं का विकल्प हो सकता है, लेकिन कोई जादुई दवा नहीं है.

खपली गेहूं महाराष्ट्र, कर्नाटक में किसानों द्वारा सीमित तरीके से उगाया जा रहा है. हालांकि भारत में इसकी पैदावार कुल गेहूं की उपज की एक फीसदी ही है. (AI Image)

भारत में कहां उगता है?

ये गेहूं भारत में हर जगह नहीं उगता या उगाया जाता है. फिलहाल ये महाराष्ट्र, कर्नाटक में उगाया जा रहा है. गुजरात के कुछ हिस्सों में भी पैदा हो रहा है. सीमित मात्रा में मध्य प्रदेश में पैदा किया जा रहा है. विशेष रूप से महाराष्ट्र के पुणे, अहमदनगर, सोलापुर और विदर्भ क्षेत्र इसके लिए जाने जाते हैं.

ये कम क्यों होता है

दरअसल इसकी भी एक कहानी है. 1960-70 के दशक की हरित क्रांति के बाद किसानों को ऐसी नई गेहूं किस्में मिलीं जो ज्यादा पैदावार देती थीं, जल्दी तैयार हो जाती थीं, सरकारी खरीद में आसानी से बिक जाती थीं.

खपली गेहूं इनसे पीछे रह गया, क्योंकि इसकी उपज आधुनिक गेहूं की तुलना में कम होती है. किसान स्वाभाविक रूप से अधिक उत्पादन वाली किस्मों की ओर चले गए.

क्या ये विलुप्त हो गया था?

पूरी तरह नहीं, लेकिन बहुत सीमित क्षेत्र में सिमट गया. हरित क्रांति के बाद ये गेहूं मुख्यधारा से करीब गायब हो गया. केवल कुछ किसानों ने पारंपरिक रूप से इसकी खेती जारी रखी. आज फिर से अगर इसका दौर लौटता हुआ लग रहा है तो उसकी वजह उनकी बची हुई किस्मों की वजह से संभव हुआ है. हालांकि कुछ ब्रांडेड कंपनियां इसका आटा भी बाजार में ला रही हैं.

यह महंगा क्यों है?

आम भारतीय परिवार अब भी इसे नियमित रूप से नहीं खरीदते. सामान्य आटा जहां लगभग ₹40-60 प्रति किलो मिलता है, वहीं खपली आटा कई ब्रांडों में ₹150-250 प्रति किलो तक बिकता है. यानी 3 से 5 गुना महंगा. महंगा होने की वजह कम पैदावार, सीमित क्षेत्र में खेती सीमित क्षेत्र में खेती, जटिल प्रोसेसिंग, आपूर्ति कम है. इसे इसे अक्सर ऑर्गेनिक या प्रीमियम उत्पाद के रूप में बेचा जाता है.

क्या ये भविष्य का गेहूं बन सकता है?

संभावना कम है. भारत की 140 करोड़ आबादी को देखते हुए केवल खपली जैसे कम उपज वाले गेहूं पर निर्भर होना व्यावहारिक नहीं होगा लेकिन ये एक प्रीमियम, स्वास्थ्य-केंद्रित और पारंपरिक अनाज के रूप में अपनी जगह बना सकता है, ठीक वैसे ही जैसे मोटे अनाज यानि मिलेट्स ने बनाई.

हरित क्रांति के बाद देश के ज्यादातर किसान खपली गेहूं को”कम पैदावार वाला पुराना गेहूं” समझकर छोड़ चुके थे लेकिन अब वही “हेरिटेज ग्रेन” और “प्रीमियम हेल्थ फूड” के नाम पर बिक रहा है. (AI iMAGE)

हालांकि ये सच है कि जिस खपली गेहूं को 40-50 साल पहले किसान “कम पैदावार वाला पुराना गेहूं” समझकर छोड़ रहे थे, वही आज शहरों में “हेरिटेज ग्रेन” और “प्रीमियम हेल्थ फूड” के नाम पर कई गुना दाम में बिक रहा है.

इसमें एक गहरा अखरोट जैसा स्वाद, थोड़ा खुरदुरापन और आधुनिक गेहूं से बिल्कुल अलग संरचना दिखाई देती है. यह पानी को धीरे-धीरे सोखता है, ग्लूटेन को धीरे-धीरे विकसित करता है. धैर्य रखने पर बहुत अच्छा परिणाम देता है.

कैसे गूंथा जाता है

खपली के आटे को गूंधना सामान्य आटे से थोड़ा अलग अनुभव होता है. यह आटा कम लचीला होता है. इसमें ग्लूटेन की मात्रा कम होती है, इसलए यह आधुनिक गेहूं के आटे की तरह वापस अपनी जगह पर नहीं आता. इसमें थोड़ा अधिक पानी धीरे-धीरे डालना पड़ता है. हल्के हाथों से गूंधने के बाद दस से पंद्रह मिनट का आराम देने से इसका स्वाद और भी बेहतर हो जाता है. इसे बेलना आसान हो जाता है.

कैसी बनती हैं रोटियां

आप इसकी जो रोटियां बनाएंगे, वे दिखने में वैसी नहीं होंगी जैसी आप आमतौर पर खाती हैं. इनका रंग सामान्य आटे के हल्के क्रीम रंग के बजाय गहरा, लाल-सुनहरा होगा. ये देखने में अधिक देसी लगेंगी. अधिक पौष्टिक और घनी होंगी.



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भारत में रह रहे विदेशियों के लिए इमिग्रेशन नियम बदले: 180 दिन पूरे होने से पहले रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे; ऑनलाइन अपील का ऑप्शन मिला




केंद्र सरकार ने विदेशी नागरिकों के रजिस्ट्रेशन और अपील से जुड़े नियमों में बदलाव किया है। गृह मंत्रालय ने इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स (संशोधन) नियम, 2026 की अधिसूचना जारी की। नए नियमों के तहत विदेशी नागरिक अब 180 दिन पूरे होने से पहले कभी भी रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। साथ ही ऑनलाइन अपील का ऑप्शन भी दिया गया है। पहले भारत में 180 दिन पूरे होने के बाद विदेशी नागरिकों को 14 दिन के भीतर रजिस्ट्रेशन कराना होता था। अब वे 180 दिन पूरे होने से पहले किसी भी समय रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे। सरकार ने यह भी कहा है कि तय समय निकलने के बाद रजिस्ट्रेशन सिर्फ विशेष परिस्थितियों में ही किया जाएगा। ऑनलाइन अपील का प्रावधान जोड़ा गया पहली बार ऑनलाइन अपील की व्यवस्था जोड़ी गई है। किसी आदेश से प्रभावित व्यक्ति अब ब्यूरो ऑफ इमिग्रेशन के आयुक्त के पास ऑनलाइन अपील कर सकेगा। आदेश मिलने के 30 दिन के भीतर अपील करनी होगी। आयुक्त को संबंधित पक्ष की सुनवाई के बाद फैसला देना होगा। 60 दिन के भीतर मामले का निपटारा करने की कोशिश करना होगा। बच्चों की नागरिकता से जुड़े नियम भी बदले अगर माता-पिता में से कोई एक भारतीय नागरिक है और बच्चे की भारतीय नागरिकता बनाए रखना चाहता है, तो बच्चे पर विदेशी नागरिकों के रजिस्ट्रेशन वाले नियम लागू नहीं होंगे। वहीं, भारत में रह रहा कोई बच्चा किसी दूसरे देश की नागरिकता हासिल करता है, तो उसके माता-पिता को 30 दिन के भीतर इसकी जानकारी रजिस्ट्रेशन अधिकारी को देनी होगी। इसके अलावा कुछ मामलों में सूचना देने की समय-सीमा 24 घंटे तय की गई है। गृह मंत्रालय ने ये बदलाव इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 की धारा 30 के तहत किए हैं। इसके लिए इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स (संशोधन) नियम, 2026 जारी किए गए हैं। 2025 में पास हुआ था कानून संसद ने मार्च 2025 में इमिग्रेशन एंड फॉरेनर्स एक्ट, 2025 पास किया था। इस कानून ने पासपोर्ट एक्ट 1920, फॉरेनर्स रजिस्ट्रेशन एक्ट 1939, फॉरेनर्स एक्ट 1946 और इमिग्रेशन एक्ट 2000 समेत कई पुराने कानूनों के प्रावधानों को एक ढांचे में समेटा गया। कानून के तहत यदि कोई गैर कानूनी तरीके से किसी विदेशी को देश में लाता, ठहराता या बसाता है, तो उसे 3 साल जेल या 2 से 5 लाख रुपए का जुर्माना या फिर दोनों की सजा हो सकती है। भारत में आने के लिए किसी भी विदेशी के पास ‘वैध पासपोर्ट और वीजा’ होना अनिवार्य होगा। ——————— ये खबर भी पढ़ें… केंद्र ने नागरिकता नियमों में बदलाव किए:अब ऑनलाइन होगा आवेदन, सरकार बोली- यह अधिकार नहीं, विशेषाधिकार गृह मंत्रालय ने सिटिजनशिप (संशोधन) नियम, 2026 लागू कर दिए हैं। नए नियमों के तहत अब ओवरसीज सिटीजन ऑफ इंडिया (OCI) के लिए आवेदन पूरी तरह ऑनलाइन करना होगा। साथ ही फिजिकल कार्ड के साथ e-OCI दस्तावेज की भी सुविधा दी गई है, जिससे प्रक्रिया ज्यादा सरल और डिजिटल हो जाएगी। पूरी खबर पढ़ें…



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कोटा में सूने मकान में घुसे चोर, CCTV: 65 हजार नगदी,लेपटॉप, 35 ग्राम सोने के जेवर चुराए, सरिया मौके पर छोड़ गए – Kota News




कोटा शहर में चोरी की घटनाएं लगातार बढ़ती जा रही है। अब कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र में बदमाशों ने सूने मकान में सेंघ लगाई है। बदमाश ताला तोड़कर घर में घुसे। घर से 65 हजार नगदी, एक लैपटॉप, 35 ग्राम सोने की जेवर लेकर फरार हो गए। घटना सोमवार रात 8 बजे की है। घटना के वक्त पीड़ित परिवार अपने रिश्तेदार यहां बीमार की कुशलक्षेम पूछने गया था। साढ़े तीन घंटे बाद वापस लौटा तो चोरी का पता लगा। पीड़ित ने चोरी की शिकायत कुन्हाड़ी थाना पुलिस को दी है। सीसीटीवी में घर में घुसते दिखे दो बदमाश महेंद्र नगर बालिता रोड कुन्हाड़ी निवासी राजेश कुमार ने बताया कि वो निजी बैंक में काम करते है। सोमवार दोपहर साढ़े 4 बजे परिवार सहित साडू के घर गए थे। वहां से रात 8 बजे वापस घर लौटे। देखा तो मकान का ताला टूटा पड़ा था। पत्नी का पर्स गेट के पास पड़ा था। कमरे में सारा सामान इधर उधर बिखरा था। अलमारी खुली हुई थी। घर में रखी 65 हजार की नगदी, लेपटॉप, 35 ग्राम सोने के गहने गायब थे। घर के आसपास लगे सीसीटीवी फुटेज देखे। जिसमें दो बदमाश नजर आए। बदमाशों ने चोरी से पहले रैकी की। फिर मकान में घुसे। बदमाश 20 मिनट में चोरी करके फरार हो गए। बदमाशों ने सरिए से मकान का ताला तोड़ा था। जाते समय बदमाश सरिया मौके पर ही छोड़ गए। चोरी की शिकायत पर पुलिस मौके पर पहुंची। घटनास्थल का मौका मुआयना किया।



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वर्ल्ड अपडेट्स: अमेरिका में 30 भारतीय ट्रक ड्राइवर गिरफ्तार, गैरकानूनी रूप से रह रहे थे




अमेरिका में 30 भारतीय ट्रक ड्राइवरों को गिरफ्तार किया गया है। न्यूज एजेंसी पीटीआई के मुताबिक, इन लोगों पर आरोप है कि वे अमेरिका में गैरकानूनी तरीके से रह रहे थे। अधिकारियों का कहना है कि इन्हें जल्द ही अमेरिका से बाहर भेजा जाएगा। अमेरिकी कस्टम्स एंड बॉर्डर प्रोटेक्शन ने बताया कि 11 से 15 मई के बीच ऑपरेशन चेकमेट के तहत एरिजोना में कुल 52 लोगों को पकड़ा गया। इनमें से 36 लोग ट्रक चला रहे थे। इनमें से 30 भारतीय है। बाकी 6 लोग मेक्सिको, एल साल्वाडोर और रूस के थे। इन ट्रक ड्राइवरों के पास कैलिफोर्निया, न्यूयॉर्क, वॉशिंगटन और वर्जीनिया जैसे राज्यों से जारी कमर्शियल ड्राइविंग लाइसेंस थे, जबकि कुछ लोगों के पास कोई लाइसेंस ही नहीं था। अधिकारियों के मुताबिक ज्यादातर लोगों के पास काम करने की अनुमति से जुड़े दस्तावेज थे, जो बाइडन प्रशासन के दौरान मिले थे। लेकिन अब वे दस्तावेज मान्य नहीं हैं। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… रूस का यूक्रेन पर फिर बड़ा हमला: 11 की मौत, 90 से ज्यादा घायल रूस ने मंगलवार रात यूक्रेन पर मिसाइलों और ड्रोन की बौछार कर दी। राजधानी कीव और द्नीप्रो समेत कई शहरों में हुए हमलों में कम से कम 11 लोगों की मौत हो गई, जबकि 90 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। कई रिहायशी इमारतें क्षतिग्रस्त हो गईं और दर्जनों लोग मलबे में फंस गए। यूक्रेन की आपातकालीन सेवा के अनुसार, कीव में 4 लोगों की मौत हुई है और 58 लोग घायल हुए हैं। घायलों में 3 बच्चे भी शामिल हैं। शहर के 8 जिलों में रिहायशी भवनों और अन्य नागरिक ढांचों को नुकसान पहुंचा है। दूसरी ओर, द्नीप्रोपेत्रोव्स्क क्षेत्र के द्नीप्रो शहर में रूसी हमलों में 6 लोगों की जान चली गई और 36 लोग घायल हुए। राहत कार्य के दौरान हुए दूसरे हमले में एक बचावकर्मी की भी मौत हो गई। द्नीप्रो में एक दो मंजिला मकान और चार मंजिला अपार्टमेंट का हिस्सा ढह गया। कई लोगों के मलबे में फंसे होने की आशंका है। कीव के पोदिल्स्की जिले में 9 मंजिला इमारत की ऊपरी मंजिलों को नुकसान पहुंचा, जबकि सोलोमियांस्की जिले में 20 और 24 मंजिला इमारतें प्रभावित हुईं। राहतकर्मी रातभर बचाव अभियान में जुटे रहे। हमलों के दौरान एयर रेड अलर्ट जारी रहा और कई इलाकों में लोग शेल्टर में शरण लेते रहे। यूक्रेनी राष्ट्रपति वोलोदिमिर जेलेंस्की ने पहले ही रूस के संभावित बड़े हमले की चेतावनी दी थी। उन्होंने नागरिकों से सतर्क रहने और एयर रेड अलर्ट का पालन करने की अपील की थी। यूक्रेन ने एक बार फिर अपने पश्चिमी सहयोगियों से अतिरिक्त एयर डिफेंस मिसाइलों की मांग की है। अधिकारियों का कहना है कि ड्रोन हमलों को रोकने में सफलता मिल रही है, लेकिन बैलिस्टिक मिसाइलें अब भी देश की सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। फरवरी 2022 से जारी रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच यह हमला हाल के सबसे घातक हमलों में से एक माना जा रहा है। अमेरिका में घरेलू विवाद के बाद परिवार के 6 लोगों की गोली मारकर हत्या, आरोपी ने भी की आत्महत्या
अमेरिका के आयोवा राज्य के मस्कटीन शहर में घरेलू विवाद के बाद एक व्यक्ति ने परिवार के 6 सदस्यों की गोली मारकर हत्या कर दी। इसके बाद उसने खुद भी आत्महत्या कर ली। घटना में कुल 7 लोगों की मौत हुई है। पुलिस को सोमवार दोपहर एक घर में गोलीबारी की सूचना मिली थी। मौके पर पहुंचने पर अधिकारियों ने घर के अंदर 4 लोगों के शव बरामद किए। सभी की मौत गोली लगने से हुई थी। जांच के दौरान पुलिस ने 52 वर्षीय रयान विलिस मैकफारलैंड को मुख्य संदिग्ध के रूप में चिन्हित किया। वारदात के बाद वह फरार हो गया था। पुलिस ने उसकी तलाश शुरू की और कुछ समय बाद उसे ढूंढ़ लिया। मस्कटीन पुलिस प्रमुख एंथनी कीस के मुताबिक, पुलिस उससे बातचीत कर रही थी तभी उसने खुद को गोली मार ली। इसके बाद जांच में सामने आया कि मामले में दो और लोग भी मारे गए हैं। पुलिस ने एक अन्य मकान और एक स्थानीय व्यवसायिक प्रतिष्ठान से दो पुरुषों के शव बरामद किए। दोनों की मौत भी गोली लगने से हुई थी। पुलिस का कहना है कि शुरुआती जांच के अनुसार पूरा घटनाक्रम घरेलू विवाद से जुड़ा हुआ है। अधिकारियों का मानना है कि सभी पीड़ित आरोपी के रिश्तेदार थे। मृतकों की पहचान अभी सार्वजनिक नहीं की गई है। करीब 23 हजार आबादी वाले मस्कटीन शहर में इस घटना के बाद शोक का माहौल है। रूस को आर्मेनिया की दो टूक: EU पर अभी जनमत संग्रह नहीं; पश्चिम की ओर बढ़ते कदमों से बढ़ा तनाव
आर्मेनिया के प्रधानमंत्री निकोल पशिनयान ने रूस की उस मांग को खारिज कर दिया है, जिसमें यूरोपीय संघ (EU) में शामिल होने को लेकर जल्द जनमत संग्रह कराने की बात कही गई थी। रूस और आर्मेनिया के बीच बढ़ते तनाव के बीच पशिनयान ने कहा कि फिलहाल ऐसा जनमत संग्रह न तो व्यावहारिक है और न ही उचित। कजाकिस्तान में 29 मई को हुए यूरेशियन इकोनॉमिक यूनियन (EAEU) शिखर सम्मेलन में रूस, बेलारूस, कजाकिस्तान और किर्गिस्तान ने आर्मेनिया से EU सदस्यता पर जल्द जनमत संग्रह कराने का आग्रह किया था। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन का कहना है कि कोई भी देश एक साथ EAEU और EU दोनों का सदस्य नहीं रह सकता। पुतिन ने आर्मेनिया को पश्चिमी देशों के करीब जाने के खतरों की ओर इशारा करते हुए कहा कि यूक्रेन संकट की शुरुआत भी EU के साथ बढ़ते रिश्तों से हुई थी। सोमवार को दोनों नेताओं के बीच फोन पर बातचीत भी हुई। पशिनयान ने सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में कहा कि आर्मेनिया तब तक EAEU में बना रहेगा, जब तक किसी एक गुट को चुनना अनिवार्य नहीं हो जाता। उन्होंने कहा कि EU उम्मीदवार देश का दर्जा पाने के लिए औपचारिक आवेदन से पहले जनमत संग्रह कराने का कोई औचित्य नहीं है। आर्मेनिया में 7 जून को होने वाले संसदीय चुनाव से पहले रूस ने आर्थिक और कूटनीतिक दबाव बढ़ा दिया है। मॉस्को ने अपने राजदूत को वापस बुला लिया है और आर्मेनिया से मछली व समुद्री खाद्य पदार्थों के आयात पर रोक लगा दी है। इससे पहले भी कई आर्मेनियाई उत्पादों पर प्रतिबंध लगाए जा चुके हैं। यूरोपीय संघ ने आरोप लगाया है कि रूस आर्थिक दबाव के जरिए आर्मेनिया के चुनावों को प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है। ऑस्ट्रेलिया की 368 अरब डॉलर की ऑकस सबमरीन डील पर स्वतंत्र जांच: पूर्व मंत्री पीटर गैरेट करेंगे अगुआई
ऑस्ट्रेलिया के पूर्व पर्यावरण मंत्री और प्रसिद्ध रॉक बैंड मिडनाइट ऑयल के फ्रंटमैन पीटर गैरेट ने ऑकस पनडुब्बी समझौते की स्वतंत्र जांच शुरू करने की घोषणा की है। उनका कहना है कि 368 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर की इस रक्षा परियोजना पर जनता और संसद को पर्याप्त रूप से अपनी राय रखने का अवसर नहीं मिला। गैरेट पांच सदस्यीय स्वतंत्र आयोग की अगुआई करेंगे। आयोग में ऑस्ट्रेलियाई रक्षा बल के पूर्व प्रमुख एडमिरल क्रिस बैरी, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया की पूर्व प्रीमियर कार्मेन लॉरेंस और सामाजिक कार्यकर्ता करेन लेस्टर समेत अन्य सदस्य शामिल हैं। आयोग सार्वजनिक सुनवाई करेगा और अक्टूबर में अपनी रिपोर्ट पेश करेगा। ऑकस समझौता ऑस्ट्रेलिया, अमेरिका और ब्रिटेन के बीच सुरक्षा साझेदारी का हिस्सा है। इसके तहत ऑस्ट्रेलिया अपने पुराने पनडुब्बी बेड़े को बदलने के लिए अमेरिका से परमाणु ऊर्जा चालित पनडुब्बियां खरीदेगा। इसकी अनुमानित लागत 368 अरब ऑस्ट्रेलियाई डॉलर है। गैरेट ने कहा कि यह ऑस्ट्रेलिया के इतिहास का सबसे महंगा रक्षा सौदा है, लेकिन इस पर पर्याप्त सार्वजनिक बहस नहीं हुई। उन्होंने कहा कि जनता और संसद से निर्णय प्रक्रिया का अधिकार छीन लिया गया है। जांच में यह परखा जाएगा कि क्या यह समझौता ऑस्ट्रेलिया की सुरक्षा को मजबूत करेगा, परमाणु कचरे का प्रबंधन कैसे होगा, क्या देश को वादा की गई पनडुब्बियां मिलेंगी और इस सौदे का चीन के साथ संबंधों पर क्या प्रभाव पड़ेगा। प्रधानमंत्री एंथनी अल्बानीज़ की सरकार ने कहा है कि वह पारदर्शिता और स्वतंत्र निगरानी का स्वागत करती है। सितंबर 2021 में घोषितऑकस समझौते को व्यापक रूप से इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव का मुकाबला करने की रणनीति के रूप में देखा जाता है। चीन ने शुरुआत से ही इस समझौते का विरोध किया है। हाल ही में ऑस्ट्रेलिया ने समझौते में संशोधन करते हुए अमेरिका से तीन पुरानी परमाणु पनडुब्बियां खरीदने का फैसला किया है। साथ ही 2027 से अमेरिका और ब्रिटेन को पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया के पर्थ में सीमित संख्या में परमाणु पनडुब्बियां तैनात करने की अनुमति मिलेगी। अमेरिका में OpenAI पर मुकदमा; ChatGPT पर बच्चों को नुकसान पहुंचाने और अपराधों में मदद के आरोप
अमेरिका का फ्लोरिडा राज्य ChatGPT की सुरक्षा और डिजाइन को लेकर OpenAI पर मुकदमा करने वाला पहला राज्य बन गया है। फ्लोरिडा के अटॉर्नी जनरल जेम्स उथमायर ने आरोप लगाया है कि ChatGPT बच्चों को लत लगा रहा है, हिंसक अपराधों में सहायता कर रहा है और कंपनी मुनाफे को सार्वजनिक सुरक्षा से ऊपर रख रही है। फ्लोरिडा द्वारा दायर सिविल मुकदमे में OpenAI और उसके CEO सैम ऑल्टमैन को प्रतिवादी बनाया गया है। शिकायत में कहा गया है कि कंपनी ने सुरक्षा जोखिमों की अनदेखी करते हुए AI तकनीक को तेजी से आगे बढ़ाया। मुकदमे में ऑल्टमैन को व्यक्तिगत रूप से भी जिम्मेदार ठहराने की मांग की गई है। मुकदमे में फ्लोरिडा स्टेट यूनिवर्सिटी गोलीकांड और यूनिवर्सिटी ऑफ साउथ फ्लोरिडा के दो शोधार्थियों की हत्या का उल्लेख किया गया है। अभियोजकों के अनुसार, एक आरोपी ने कथित तौर पर मानव शवों के निपटान से जुड़े सवाल ChatGPT से पूछे थे। हालांकि, अभी तक यह न्यायिक रूप से साबित नहीं हुआ है कि ChatGPT ने इन अपराधों में प्रत्यक्ष भूमिका निभाई। फ्लोरिडा सरकार का आरोप है कि ChatGPT बच्चों की सुरक्षा और मानसिक स्वास्थ्य के लिए खतरा बन सकता है। राज्य का कहना है कि कंपनी ने सार्वजनिक सुरक्षा की तुलना में व्यावसायिक हितों को प्राथमिकता दी। इन आरोपों पर प्रतिक्रिया देते हुए OpenAI ने कहा कि उसने नाबालिगों की सुरक्षा के लिए आयु-पहचान तकनीक समेत कई सुरक्षा उपाय लागू किए हैं। कंपनी का कहना है कि वह AI के सुरक्षित और जिम्मेदार उपयोग के लिए प्रतिबद्ध है। OpenAI पहले से ही कई मुकदमों का सामना कर रही है, जिनमें ChatGPT के संभावित मानसिक और सामाजिक प्रभावों को लेकर सवाल उठाए गए हैं। इसी तरह Google, Meta, TikTok और अन्य बड़ी टेक कंपनियां भी अपने उत्पादों के डिजाइन और उपयोगकर्ता सुरक्षा को लेकर कानूनी चुनौतियों का सामना कर रही हैं। विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला AI कंपनियों की जवाबदेही और नियमन को लेकर भविष्य की नीतियों पर महत्वपूर्ण असर डाल सकता है।



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90 दिनों की कड़ी मेहनत से तैयार हुई सांवलिया सेठ मंदिर की भव्य पिछवाई


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Udaipur Sanwaliya Seth Mandir: राजस्थान के प्रसिद्ध सांवलिया सेठ मंदिर में स्थापित की गई भव्य पिछवाई इन दिनों श्रद्धालुओं और पर्यटकों के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है. इस अद्वितीय कलाकृति को तैयार करने में लगभग 20 किलो सोना और 120 किलो चांदी का उपयोग किया गया है, जबकि इसके निर्माण में करीब 90 दिनों का समय लगा. मंदिर प्रशासन और कुशल कारीगरों की मेहनत से तैयार हुई यह पिछवाई धार्मिक आस्था, कला और शिल्प का अद्भुत संगम प्रस्तुत करती है. इसकी बारीक नक्काशी, आकर्षक डिजाइन और भव्यता श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर रही है. दर्शन के लिए आने वाले भक्त न केवल भगवान सांवलिया सेठ के दर्शन कर रहे हैं, बल्कि इस अनूठी कलाकृति को भी निहारने के लिए विशेष रूप से रुक रहे हैं.

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Sanwaliya Seth Mandir: राजस्थान के प्रसिद्ध कृष्ण धाम श्रीसांवलिया सेठ मंदिर में भक्तों की आस्था अब भव्यता और कला के अद्भुत संगम के रूप में दिखाई दे रही है. मंदिर के गर्भगृह में भगवान श्रीसांवलिया सेठ की प्रतिमा के पीछे स्थापित की गई स्वर्ण-रजत जड़ित पिछवाई इन दिनों श्रद्धालुओं के आकर्षण का प्रमुख केंद्र बनी हुई है. इस भव्य कृति को तैयार करने में 20 किलो सोना और 120 किलो चांदी का उपयोग किया गया है, जिसकी उस समय अनुमानित लागत करीब 16 करोड़ रुपए रही थी.

मंदिर मंडल के अनुसार यह पिछवाई किसी बाहरी फंडिंग से नहीं, बल्कि भक्तों द्वारा वर्षों से चढ़ाए गए सोने और चांदी से तैयार की गई है. श्रद्धालुओं की भक्ति और समर्पण का यह अनूठा उदाहरण मंदिर की भव्यता में चार चांद लगा रहा है. मंदिर प्रदेश सरकार की महत्वाकांक्षी धार्मिक सर्किट योजना में भी शामिल है, जिसके चलते यहां देशभर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं.

सोने और चांदी को गलाकर स्लैब तैयार किए
ट्रस्ट अध्यक्ष हजारीलाल वैष्णव ने बताया कि पिछवाई निर्माण के लिए विशेष रूप से गुजरात के राजकोट से कुशल कारीगरों को बुलाया गया था. सबसे पहले सोने और चांदी को गलाकर स्लैब तैयार किए गए. इसके बाद आधुनिक मशीनों की मदद से इन्हें पतली शीट्स में बदला गया और उन पर बारीक नक्काशी की गई. बाद में इन शीट्स को सागवान की मजबूत लकड़ी के विशेष पैनलों पर जड़ा गया. पूरी प्रक्रिया को पूरा होने में करीब 90 दिन का समय लगा. इतनी बड़ी मात्रा में कीमती धातुओं के उपयोग को देखते हुए निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा के भी विशेष इंतजाम किए गए थे. मंदिर परिसर में 24 घंटे हथियारबंद सुरक्षा गार्ड तैनात रहे और पूरे काम की निगरानी सीसीटीवी कैमरों के जरिए की गई.

हवेली शैली और पारंपरिक राजस्थानी कला
पिछवाई की कलात्मकता भी श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर रही है. इसमें वैष्णव हवेली शैली और पारंपरिक राजस्थानी कला का सुंदर मिश्रण देखने को मिलता है. भगवान के विग्रह के ऊपर स्वर्ण निर्मित छतरी, चारों ओर फूल-पत्तियों और बेल-बूटों की महीन नक्काशी, चंवर डुलाती गोपियों और सेवकों की आकृतियां, कमल पर विराजमान देव प्रतिमाएं तथा नक्काशीदार स्वर्ण स्तंभ इसकी विशेषता हैं.

आस्था और श्रद्धा का केंद्र बन जाती
इसके अलावा भगवान श्रीकृष्ण की प्रसिद्ध कालिया दमन यानी नाग लीला को भी बेहद आकर्षक तरीके से उकेरा गया है. पूरी पिछवाई पर की गई रिपूजे कारीगरी इसे और अधिक भव्य बनाती है. श्रद्धालु जब गर्भगृह में दर्शन करने पहुंचते हैं तो भगवान के साथ यह स्वर्णिम कलाकृति भी उनकी आस्था और श्रद्धा का केंद्र बन जाती है.

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Jagriti Dubey

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देह व्यापार पर बनी बॉलीवुड की 10 क्लासिक कल्ट फिल्में, 3 एक्ट्रेस के लिए साबित हुईं वरदान


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देह व्यापार एक ऐसा विषय है जिसपर बॉलीवुड बरसों से फिल्में बना रहा है. कुछ फिल्में क्लासिक कल्ट की फेहरिस्त में शामिल हुईं तो कुछ अंडररेडेट रहीं. लेकिन हर बार जब किसी एक्ट्रेस ने सेक्स वर्कर का रोल अदा किया तो एक बात तो तय थी कि हर कोई उनके अभिनय का लोहा मानने लगा. क्रिटिक्स उनके शानदार अभिनय के मुरीद हो गए और कई एक्ट्रेसेस ने सेक्स वर्कर का किरदार अदा कर नेशनल अवॉर्ड भी झटक लिया.

नई दिल्ली. रेखा ने फिल्म ‘उमराव जान’ में सेक्स वर्कर का किरदार अदा किया था. रेखा ने उमराव जान में एक ऐसी लड़की का किरदार निभाया था, जिसे बचपन में कोठे पर बेच दिया जाता है. बड़ी होकर वह एक मशहूर तवायफ और शायरा बनती है. उसकी जिंदगी प्यार, बिछड़ने के दर्द और कई मुश्किलों से भरी होती है.वह अपने जज़्बातों को ग़ज़लों और शायरी के जरिए बयां करती है. रेखा ने इस किरदार को इतने खूबसूरत और भावुक अंदाज में निभाया कि दर्शक आज भी उनकी उमराव जान को नहीं भूल पाए हैं. रेखा को ‘उमराव जान’ में देखकर ऐसा लगता है कि मानो वो सिर्फ इस किरदार को निभा नहीं रही हैं, बल्कि इसे जी रही हैं. रेखा ने तवायफ का किरदार अदा कर नेशनल अवॉर्ड झटक लिया था.

मीना कुमारी की ‘पाकीजा’ उनके करियर और जीवन की आखिरी फिल्म थी. फिल्म की रिलीज के कुछ दिन बाद ही एक्ट्रेस ने इस दुनिया को हमेशा के लिए अलविदा कह दिया. एक ऐसी तवायफ का किरदार निभाया था, जो बाहरी दुनिया की चमक-दमक के बीच भी एक सम्मानजनक जिंदगी और सच्चे प्यार की तलाश में रहती है. उसकी जिंदगी दर्द, अकेलेपन और अधूरे सपनों से भरी होती है, लेकिन फिर भी वह बेहतर भविष्य की उम्मीद नहीं छोड़ती. फिल्म में मीना कुमारी के साथ राजकुमार लीड रोल में थे.

‘चमेली’ में करीना कपूर ने मुंबई की एक सेक्स वर्कर का किरदार निभाया था. एक बरसाती रात में उसकी मुलाकात एक अजनबी से होती है और दोनों के बीच जिंदगी को लेकर कई भावुक बातचीत होती हैं. करीना ने इस किरदार को बेहद सहज और संवेदनशील तरीके से निभाया, जिसके लिए उन्हें खूब सराहना मिली.

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तब्बू के करियर की बात हो और उनकी फिल्म ‘चांदनी बार’ का जिक्र न हो ऐसा तो मुमकिन नहीं. फिल्म चांदनी बार में तब्बू ने एक ऐसी महिला का किरदार निभाया है, जो मजबूरी में बार डांसर बनती है. जिंदगी में एक के बाद एक मुश्किलों का सामना करते हुए वह अपने बच्चों को बेहतर भविष्य देने के लिए संघर्ष करती है. इस दमदार भूमिका के लिए तब्बू को सर्वश्रेष्ठ अभिनेत्री का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला था.

‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ में आलिया भट्ट ने कमाठीपुरा की एक ऐसी महिला का किरदार निभाया जिसे उसका कोई अपना ही काली गलियों में ढकेल जाता है. हालात का शिकार बनने के बजाय अपनी पहचान खुद बनाती है. वह कोठे की मालकिन बनने के बाद सेक्स वर्कर्स के हकों के लिए आवाज उठाती है और अपने समुदाय की मजबूत नेता बनकर उभरती है. इस दमदार रोल के लिए आलिया भट्ट ने नेशनल अवॉर्ड जीता था.

‘देव डी’ में कल्कि कोचलिन ने एक मॉर्डन और प्रोग्रेसिव सोच रखने वाली यंग लड़की का रोल अदा किया था. वो अपनी मजबूरी और हालातों का शिकार होकर कॉल गर्ल बन जाती तमाम मुश्किलों के बावजूद वह अपनी जिंदगी को अपने तरीके से जीने की कोशिश करती है. कल्कि के इस किरदार को उनकी सबसे बेहतरीन परफॉर्मेंस में गिना जाता है.

‘बेगम जान’- ‘बेगम जान’ में विद्या बालन एक कोठे की मालकिन की भूमिका में नजर आई थीं. भारत-पाकिस्तान बंटवारे के दौर में जब उनके कोठे को खाली कराने की कोशिश होती है, तो वह अपने साथ रहने वाली महिलाओं के अधिकारों और सम्मान के लिए मजबूती से खड़ी हो जाती हैं. इस रोल में विद्या बालन के अभिनय को खूब सराहा गया था.

‘चोरी चोरी चुपके चुपके’- इस फिल्म में प्रीति जिंटा ने एक सेक्स वर्कर का किरदार निभाया था, जिसे एक दंपति अपने बच्चे की सरोगेट मां बनने के लिए चुनता है. धीरे-धीरे वह भावनात्मक रूप से इस परिवार से जुड़ने लगती है. प्रीति ने इस भूमिका में भावनाओं और मासूमियत का खूबसूरत मेल दिखाया.

‘लागा चुनरी में दाग’- अभिषेक बच्चन, रानी मुखर्जी और जया बच्चन की फिल्म ‘लागा चुनरी में दाग’ में रानी ने एक ऐसी महिला का किरदार अदा किया था जो अपने परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए ऐसा रास्ता चुनती है. उन्होंने हाई सोसाइटी एस्कॉर्ट का रोल प्ले किया था. फिल्म में रानी ने दमदार अभिनय किया था.

‘देवदास’- फिल्म ‘देवदास’ में माधुरी दीक्षित ने चंद्रमुखी का किरदार निभाया था. वह एक तवायफ होती है, लेकिन दिल से बेहद दयालु और संवेदनशील है. देवदास के दर्द को समझते हुए वह हर कदम पर उसका साथ देती है और आखिरकार वो उससे सच्चा प्यार कर बैठती है. ऐसा प्यार जो कभी पूरा नहीं हो सकता है.

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नाबालिग छात्रा के अपहरण और छेड़छाड़ मामले में आरोपी दोषी: नौ साल पुराने पॉक्सो मामले में अदालत ने भेजा जेल, सजा पर 8 जून को सुनवाई – Farrukhabad News




फर्रुखाबाद में विशेष न्यायाधीश पॉक्सो एक्ट/अपर सत्र न्यायाधीश रितिका त्यागी ने नौ वर्ष पुराने नाबालिग छात्रा के अपहरण और छेड़छाड़ मामले में आरोपी अमन को दोषी करार दिया। अदालत ने उसे न्यायिक अभिरक्षा में जेल भेजने का आदेश दिया। सजा के बिंदु पर सुनवाई के लिए आठ जून की तारीख तय की गई है। यह मामला आठ फरवरी 2017 को शहर कोतवाली क्षेत्र के एक मोहल्ला निवासी व्यक्ति द्वारा दर्ज कराई गई प्राथमिकी से जुड़ा है। शिकायतकर्ता ने बताया था कि उनकी 14 वर्षीय पुत्री शहर के कॉलेज में कक्षा नौ की छात्रा थी। वह सुबह करीब नौ बजे अपनी पुत्री को कॉलेज छोड़ने गए थे। पुत्री को रास्ते में छोड़कर वह अपने काम से चले गए। दोपहर में पुत्री डरी-सहमी हालत में घर लौटी। पूछताछ करने पर पुत्री ने बताया कि थाना मऊदरवाजा क्षेत्र के मोहल्ला कटरा बू अली खां निवासी अमन उसे बहलाकर एक कमरे में ले गया था। अमन ने छात्रा के साथ अश्लील हरकतें कीं। उसने छात्रा की तस्वीरें खींचने का भी प्रयास किया। आरोपी ने परिजन को मामले की जानकारी देने पर तस्वीरें इंटरनेट पर वायरल करने की धमकी दी थी। अदालत ने सभी साक्ष्यों और गवाहों के बयानों पर विचार किया। विशेष न्यायाधीश रितिका त्यागी ने मामले की सुनवाई की। अदालत ने प्रस्तुत किए गए साक्ष्यों को परखा। गवाहों के बयानों को भी ध्यान से सुना गया। इन सभी के आधार पर आरोपी अमन को दोषी पाया गया। उसे तत्काल न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है।



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