राजधानी लखनऊ में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती मनाई गई। गोमती नगर फेस-2 के विभव खंड स्थित शौर्य साप्ताहिक मिलन शाखा ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सहयोग से इस कार्यक्रम का आयोजन किया, जिसमें बड़ी संख्या में लोगों ने भाग लिया। इस अवसर पर महाराणा प्रताप के शौर्य, त्याग और राष्ट्रप्रेम को याद किया गया। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि किंग जॉर्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय (केजीएमयू) के रेडियोलॉजी विभागाध्यक्ष प्रो. डॉ. अनित परिहार थे। बाबासाहेब भीमराव अंबेडकर केंद्रीय विश्वविद्यालय के इतिहास विभाग के प्रो. डॉ. सुशील पाण्डेय ने मुख्य वक्ता के रूप में महाराणा प्रताप के जीवन और संघर्षों पर विस्तार से बताया। महाराणा प्रताप के गौरवशाली इतिहास की जानकारी दी प्रो. पाण्डेय ने अपने संबोधन में कहा कि महाराणा प्रताप केवल एक वीर योद्धा नहीं, बल्कि स्वाभिमान, त्याग और मातृभूमि के प्रति समर्पण के प्रतीक हैं। उन्होंने कहा कि हर सनातनी परिवार को महाराणा प्रताप के गौरवशाली इतिहास की जानकारी होनी चाहिए, ताकि नई पीढ़ी उनके आदर्शों से प्रेरणा ले सके। उन्होंने महाराणा प्रताप के संघर्षपूर्ण जीवन को वर्तमान समय में भी प्रासंगिक बताते हुए युवाओं से उनके आदर्शों को अपनाने का आह्वान किया। मुख्य संदेश महाराणा प्रताप के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाना कार्यक्रम की अध्यक्षता नगर संघ चालक जगवीर सिंह ने की। उन्होंने बताया कि ऐसे आयोजन समाज को अपनी सांस्कृतिक और ऐतिहासिक विरासत से जोड़ते हैं। ये युवाओं में राष्ट्रभाव और सामाजिक चेतना के विकास में भी सहायक होते हैं। इस अवसर पर अखिल विश्व गायत्री परिवार, गोमती नगर शक्तिपीठ के सहयोग से एक दीप यज्ञ का आयोजन किया गया। इसमें उपस्थित लोगों ने राष्ट्र की उन्नति, सामाजिक समरसता और जनकल्याण की कामना की। कार्यक्रम का संयोजन रामबदन दूबे ने किया और मंच संचालन अशोक सिन्हा ने किया। डॉ. राजेश कुमार सिंह ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इस कार्यक्रम में सामाजिक, शैक्षणिक और धार्मिक क्षेत्रों से जुड़े कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे। आयोजन का मुख्य संदेश महाराणा प्रताप के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाना और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत करना था।
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लखनऊ में महाराणा प्रताप की 486वीं जयंती मनाई: शौर्य, त्याग और राष्ट्रप्रेम के आदर्शों को किया गया याद – Lucknow News
केंद्रीय मंत्री ने सरकारी योजनाओं की दी जानकारी: धार में दो नए आंगनवाड़ी भवनों का भी किया लोकार्पण – Dhar News
धार जिले के राजगढ़ नगर में बुधवार को पुरानी कन्याशाला परिसर में जनकल्याण शिविर का आयोजन किया गया। शिविर में केंद्रीय महिला एवं बाल विकास राज्यमंत्री एवं क्षेत्रीय सांसद सावित्री ठाकुर मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुईं। उन्होंने विभिन्न सरकारी योजनाओं के पात्र हितग्राहियों को लाभ वितरित किया और केंद्र सरकार की योजनाओं की जानकारी दी। सावित्री ठाकुर ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र सरकार के 12 वर्ष पूरे होने के अवसर पर जनकल्याण शिविर आयोजित किए जा रहे हैं। इन शिविरों का उद्देश्य जरूरतमंद और पात्र लोगों तक योजनाओं का लाभ पहुंचाना है। शिविर में विभिन्न विभागों ने स्टॉल लगाकर लोगों को योजनाओं की जानकारी दी और संबंधित सेवाएं उपलब्ध कराईं। महाराणा प्रताप की प्रतिमा पर किया माल्यार्पण
कार्यक्रम में पूर्व विधायक वेलसिंह भूरिया, नगर परिषद अध्यक्ष सवेरा महेश जायसवाल, जिला पंचायत सदस्य गायत्री पुरोहित, सुनील गामड़, मंडल अध्यक्ष सोहन पटेल सहित कई जनप्रतिनिधि और अधिकारी मौजूद रहे। शिविर में शामिल होने से पहले सावित्री ठाकुर ने महाराणा प्रताप जयंती के अवसर पर महाराणा प्रताप शिव वाटिका पहुंचकर प्रतिमा पर माल्यार्पण किया और स्वच्छता अभियान में भी हिस्सा लिया। इसके बाद उन्होंने राजगढ़ के वार्ड क्रमांक 6 और 13 में नवनिर्मित आंगनवाड़ी भवनों का लोकार्पण किया। इस दौरान उन्होंने कहा कि बच्चों और महिलाओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए आंगनवाड़ी केंद्रों का सुदृढ़ होना जरूरी है।
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नालंदा में सड़क हादसा, 3 किशोर की मौत: अनियंत्रित बाइक खाई में पलटी, बाजार में मछली खरीदने जाते समय एक्सीडेंट – Nalanda News
नालन्दा में आज एक सड़क हादसे में तीन किशोरों की मौत हो गई। तेज रफ्तार बाइक अचानक अनियंत्रित होकर सड़क किनारे खाई में पलट गई और तार के पेड़ से जा टकराई। इस कारण तीनों की जान गई है। तीनों के सिर में चोट लगी थी। ये साथ में मछली खरीदने के लिए जा रहे थे। घटना तेल्हाड़ा थाना क्षेत्र के गंगा बिगहा पुल के पास की है। बता दें कि गंगा विगहा पुल के पास टर्निंग पर बाइक अनियंत्रित हो गई और खाई में जा गिरी, जहां तार के पेड़ से तीनों किशोर जा टकराए। हेड इंजरी के वजह से एक-एक कर तीनों की मौत हो गई। टक्कर इतनी जोरदार थी कि एक किशोर ने मौके पर ही दम तोड़ दिया, जबकि दो अन्य की अस्पताल ले जाने के दौरान रास्ते में ही मौत हो गई। इस घटना के बाद से दोनों गांव में मातम पसरा हुआ है। बाजार से मछली खरीदने जा रहे थे तीनों दोस्त परिजनों से मिली जानकारी के अनुसार, घर में नानी के श्राद्ध कर्म का कार्यक्रम था। कार्यक्रम संपन्न होने के बाद तीनों किशोर बाइक पर सवार होकर तेल्हाड़ा बाजार मछली खरीदने जा रहे थे। इसी दौरान गंगा बिगहा पुल के पास बाइक की रफ्तार तेज होने के कारण चालक संतुलन खो बैठा। बाइक सीधे खाई में जा गिरी और वहां मौजूद ताड़ के पेड़ से बेहद जोरदार ढंग से टकरा गई। हादसे का शिकार हुए तीनों मृतकों की पहचान जहानाबाद के घोषी के सैदपुर गांव के रहने वाले 14 साल के अंकुश कुमार, जो फ़िलहाल नानी के घर रहकर पढ़ाई कर रहा था। तेल्हाड़ा के कोठरी गांव के रहने वाले 14 साल के तन्नू कुमार और 16 साल के सन्नी कुमार के रुप में हुई है। अस्पताल ले जाने के दौरान तोड़ा दम घटना के तुरंत बाद स्थानीय लोग बचाव के लिए दौड़े। ग्रामीणों ने भारी मशक्कत के बाद तीनों को खाई से निकाला। अंकुश कुमार की मौत मौके पर ही हो चुकी थी। वहीं, गंभीर रूप से घायल तन्नू और सन्नी को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में शुरुआती इलाज के बाद बेहतर उपचार के लिए बिहारशरीफ सदर अस्पताल रेफर किया गया। परंतु, जख्म इतने गहरे थे कि दोनों ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया। तेल्हाड़ा थानाध्यक्ष अजित कुमार टिंकू और सहायक थानाध्यक्ष जितेंद्र सिन्हा ने संयुक्त रूप से बताया कि हादसा बाइक के अनियंत्रित होकर पेड़ से टकराने की वजह से हुआ है। पुलिस ने तीनों शवों को कब्जे में ले लिया है और आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।
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5 घंटे में बिक जाते हैं 12000 पीस! जानिए मधुबनी के इस आलू बम में क्या है खास?
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Madhubani Famous Aloo Bam: अगर आप मधुबनी आ जा रहे हैं तो एक बार फेमस आलू बम जरूर चखें. स्टेशन से आठ किलोमीटर दूर आपको बैजू बम खानें को मिल जाएगा. बता दें कि लगभग 70-75 साल पुरानी दुकान बैजू बम जो अरेर बीचला चौक पर स्थित है. इसका नाम न सिर्फ मधुबनी जिला बल्कि दरभंगा सीतामढ़ी और मधुबनी के अलग-अलग प्रखंडों से लोग यहां खाने के लिए आते हैं. महज पांच घंटे में 12 हजार पीस लोग चट कर जाते हैं. यह आपको 20 रुपये पीस खाने को मिलेगा.
मधुबनी: मधुबनी अपनी संस्कृति के साथ खान-पान के लिए काफी प्रसिद्ध है. आपने अबतक आलू चप खाया होगा? पर क्या आपने आलू बम खाया है. इसको बनाने का तरीका भी काफी खास है. इसमें बेसन का इस्तेमाल नाम मात्र का होता है. आलू के बीच में चना दाल और मसाले को भरकर बैजू बम यानी आलू बम बनता है. सिर्फ 5 घंटे के लिए यह दुकान खुलती है. भीड़ ऐसी की लाइन में लगने पर भी कई बार नहीं मिलता है. इसका स्वाद ऐसा है कि महज 5 घंटे में 12 हजार पीस की बिक्री हो जाती है.
जानिए क्या है आलू बम और इसका खास मसाला?
आज आपको मधुबनी की सबसे फेमस स्वादिष्ट आलू बम खिलाते हैं. जिसे आलू बम नहीं लोग बैजू बम के नाम से जानते है. इसकी पूरी रेसिपी की भी जानकारी देंगे. अगर आप भी किसी कारण बस मधुबनी आ रहे और कुछ नया डिश ट्राई करना चाहते है? तो स्टेशन से आठ किलोमीटर दूर आपको बैजू बम खानें को मिल जाएगा. बता दें कि लगभग 70-75 साल पुरानी दुकान बैजू बम जो अरेर बीचला चौक पर स्थित है. इसका नाम न सिर्फ मधुबनी जिला बल्कि दरभंगा सीतामढ़ी और मधुबनी के अलग-अलग प्रखंडों से लोग यहां खाने के लिए आते हैं.
जानिए किन मसाले का होता है इस्तेमाल
बैजू बम पसंद आने का सबसे बड़ा कारण आलू और उसके बीच में भरे जाने मसाला. पहले चना को भींगो कर प्याज, लहसुन, खड़ा मसाला, किचन के सभी मसाले हल्दी, नमक, मिर्च, धनिया और उसको डिप फ्राई करके खास स्टफिंग तैयार करते हैं. फिर आलू चोखा और मसाले की स्टफिंग करते हैं. इसके बाद आलू और बेसन की पतली घोल लगाकर फ्राई करते हैं. इससे इसका स्वाद काफी लाजबाव होता है.
पांच घंटे में बैजू बम खानें की मचती है लूट
लोकल 18 से बैजू बम बना रहे दुकानदार बताते हैं कि दुकान केवल 5 घंटे के लिए खुलती है. प्रतिदिन हमारा 10000 से 12000 पीस बैजू बम बिक जाता है. हालांकि मसाला बनाना, आलू चोखा ये सब का प्रक्रिया सुबह से शुरू होती है. सुबह में चना मसाले आलू के बीच में मसाले के स्टफिंग के लिए बनाकर रखते है. दुकान खोलने के बाद गार्म-गर्म कोयला पर पका हुआ बम खिलाते है. इसकी कीमत ₹20 होती है. यह एक दिन में 10 से 12000 पीस की बिक्री है. दुकान सुबह 1:00 से खुल जाती है. यह 6:00 तक खुली रहती है. लोग नाम पर भी खाने के लिए आते हैं. इसका अनोखा स्वाद और क्वालिटी भी बहुत अच्छी होती है. चूंकि कई पीढ़ी के लोग इन 70-75 वर्षों से अरेर का बैजू बम खा चुकें है.
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मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें
Haier ने भारत में पेश की नई QLED Smart TV सीरीज, मिलेगी 75 इंच की बड़ी स्क्रीन
Haier ने भारत में अपनी QLED Smart TV की नई रेंज पेश की है। चीनी कंपनी ने भारतीय बाजार में नई P7 Pro सीरीज पेश की है, जिसमें 43 इंच से लेकर 75 इंच की स्क्रीन साइज वाले स्मार्ट टीवी पेश किए गए हैं। हायर की यह नई सीरीज यूनीबॉडी डिजाइन और स्लिम बॉडी के साथ आती है। इसमें अल्ट्रा-थिन बेजल्स दिए गए हैं, जो बेहतर व्यूइंग एक्सपीरियंस देता है।
Haier HQLED P7 Pro सीरीज की कीमत
इस नई स्मार्ट QLED Smart TV की कीमत भारत में 35,990 रुपये से शुरू होती है। इस सीरीज में कंपनी ने 43 इंच, 50 इंच, 55 इंच, 65 इंच और 75 इंच स्क्रीन साइज वाले स्मार्ट टीवी पेश किए हैं। इसके अन्य चारों मॉडल की कीमत क्रमशः 43,490 रुपये, 49,490 रुपये, 67,990 रुपये और 90,990 रुपये है।
- 43 इंच- 35,990 रुपये
- 50 इंच- 43,490 रुपये
- 55 इंच- 49,990 रुपये
- 65 इंच- 67,990 रुपये
- 75 इंच- 90,990 रुपये
Haier HQLED P7 Pro सीरीज के फीचर्स
हायर की यह स्मार्ट टीवी सीरीज 50W के साउंड सिस्टम से लैस है। कंपनी ने इस स्मार्ट टीवी में 2.1 चैनल स्पीकर दिया है, जिसके साथ इंटिग्रेटेड वूफर लगा है। हालांकि, यह फीचर 55 इंच और इससे ऊपर के मॉडल में मिलेगा। अन्य मॉडल में 2.1 चैनल साउंड सिस्टम नहीं मिलेगा। इस स्मार्ट टीवी सीरीज में डॉल्वी एटमस और टोटल सोनिक ऑडियो ट्यूनिंग फीचर दी गई है।
यह स्मार्ट टीवी सीरीज HQLED डिस्प्ले टेक्नोलॉजी पर काम करती है। इसमें क्वांटम डॉट टेक्नोलॉजी वाला डिस्प्ले मिलता है। यह स्मार्ट टीवी सीरीज AI फीचर्स से लैस है और इसमें Dolby Vision, HDR10+ जैसे फीचर्स दिए गए हैं। यह गूगल टीवी प्लेटफॉर्म पर काम करता है और इसमें बिल्ट-इन गूगल जेमिनी का सपोर्ट मिलेगा।
इस सीरीज के सभी मॉडल 120Hz रिफ्रेश रेट वाले DLG सिस्टम से लैस हैं। इनमें MEMC, VRR, ALLM जैसे लेटेस्ट फीचर्स दिए गए हैं। यही नहीं, इस सीरीज के सभी मॉडल 2GB रैम और 32GB इंटरनल स्टोरेज से लैस हैं। कंपनी ने इसमें HaiCast मिररिंग, ब्लूटूथ स्पीकर मोड, WiFi, Bluetooth 5.1 जैसे फीचर्स दिए हैं।
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तिलवाड़ा में पंच मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव 2 सितंबर 2027 को: श्री राणी रूपादे मंदिर में हुई पहली बैठक, समिति का गठन किया – Balotra News
तिलवाड़ा में संत शिरोमणि श्री रावल मल्लीनाथ जी मंदिर और श्री चक्रेश्वरी माता मंदिर (श्री नागणेच्या माताजी) सहित पंच मंदिरों के प्रस्तावित प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव की पहली बैठक हुई। यह बैठक श्री राणी रूपादे जी मंदिर, पालिया परिसर में संपन्न हुई। बैठक की अध्यक्षता श्री रावल मल्लीनाथ श्री राणी रूपादे संस्थान, तिलवाड़ा के अध्यक्ष और संत शिरोमणि श्री रावल मल्लीनाथ जी के 25वें गादीपति रावल किशन सिंह जसोल ने की। 2 सिंतबर 2027 को होगा प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव
बैठक में रावल किशन सिंह जसोल ने घोषणा की कि पंच मंदिरों का प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव 2 सितंबर 2027 को आयोजित किया जाएगा। उन्होंने अपने अध्यक्षीय उद्बोधन में कहा कि श्री चक्रेश्वरी माता मंदिर सहित पंच मंदिरों की प्राण-प्रतिष्ठा संपूर्ण मालाणी और राठौड़ वंश की आस्था, संस्कृति तथा गौरव से जुड़ा एक ऐतिहासिक अवसर है। उन्होंने सभी समाजबंधुओं से इस आयोजन में तन, मन और धन से सहयोग करने का आह्वान किया। रावल किशन सिंह जसोल ने राठौड़ वंश के गौरवशाली इतिहास पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि राठौड़ वंश के पूर्वजों, राष्ट्रकूटों ने एलोरा के विश्वविख्यात कैलाश मंदिर का निर्माण कराया था, जो भगवान कैलाशपति शंकर को समर्पित है। उन्होंने यह भी उल्लेख किया कि उस समय अनेक गुफाओं का निर्माण भी किया गया, जो विभिन्न आस्थाओं के संरक्षण और सम्मान की परंपरा को दर्शाते हैं। ‘ऐतिहासिक विरासतें गौरवशाली इतिहास की साक्षी’
उन्होंने कहा कि मेवानगर स्थित नाकोड़ा, खेड़ और मालाणी क्षेत्र की ऐतिहासिक विरासतें आज भी गौरवशाली अतीत की साक्षी हैं। उन्होंने विशेष रूप से खेड़ मंदिर का जिक्र किया, जो एक हजार वर्ष से भी अधिक प्राचीन है और क्षेत्र की प्राचीन सांस्कृतिक परंपराओं का महत्वपूर्ण केंद्र रहा है। उन्होंने पंच मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव को लेकर कहा कि पंच मंदिरों का निर्माण कार्य प्रगतिरत है और समय पर पूरा हो जाएगा, किंतु संपूर्ण राठौड़ वंश एवं आस्थावान समाज तक महोत्सव का निमंत्रण पहुंचाने के लिए पर्याप्त समय आवश्यक है। इसी दृष्टि से पंच मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव भादवा सुदी बीज, 02 सितम्बर 2027 को आयोजित करने का निर्णय लिया गया, ताकि देशभर में समाजबंधुओं तक आमंत्रण पहुंचाया जा सके। अपने संबोधन में रावल किशन सिंह जसोल ने संत शिरोमणि श्री रावल मल्लीनाथ जी, श्री जगमाल जी, श्री वीरमदे जी एवं श्री जेतमाल जी जैसे वीर पूर्वजों का स्मरण करते हुए कहा कि उन्होंने एकजुट होकर आक्रमणकारियों का सामना किया और अपनी वीरता से इस क्षेत्र की रक्षा की। इतिहास में वर्णित पांच महत्वपूर्ण युद्धों में इन वीरों ने मिलकर पराक्रम का परिचय दिया, जिसके कारण ये धरती अपनी सांस्कृतिक और धार्मिक पहचान बनाए रखने में सफल रही। उन्होंने आगे कहा कि वर्तमान में मालाजाल, तिलवाड़ा में निर्माणाधीन संत शिरोमणि श्री रावल मल्लीनाथ जी मंदिर इतिहास, शौर्य, संस्कृति और आध्यात्मिक चेतना का प्रेरणास्रोत बनेगा। संत शिरोमणि श्री रावल मल्लीनाथ जी का व्यक्तित्व संत, यशस्वी योद्धा, कुशल शासक और धर्मरक्षक के रूप में बहुआयामी रहा है। अपने जीवनकाल में उन्होंने पांच विजयी युद्धों के माध्यम से समाज और सनातन संस्कृति की रक्षा की तथा लोककल्याण, पराक्रम और जनसेवा के आदर्श स्थापित किए। उनका जीवन आज भी समाज को साहस, धर्मनिष्ठा और लोकमंगल की प्रेरणा प्रदान करता है। रावल किशन सिंह ने कहा कि भारत का इतिहास अत्यंत समृद्ध और गौरवशाली रहा है। विभिन्न क्षेत्रों के वीर शासकों, संतों और लोकनायकों ने अपने त्याग, बलिदान और संघर्ष से राष्ट्र एवं संस्कृति की रक्षा की। राजस्थान की धरती पर मेवाड़, मारवाड़ और मालाणी सहित अनेक क्षेत्रों ने इतिहास निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। इस गौरवशाली परंपरा को नई पीढ़ी तक पहुंचाना समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने युवाओं का आह्वान करते हुए कहा कि समाज तभी प्रगति कर सकता है, जब वो अपने इतिहास, संस्कृति और पूर्वजों के योगदान को जाने और उस पर गर्व करे। युवाओं को अपने गौरवशाली अतीत से प्रेरणा लेकर समाज और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए। पंच मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव समाज को अपनी जड़ों से जोड़ने तथा सांस्कृतिक चेतना को सुदृढ़ करने का महत्वपूर्ण अवसर सिद्ध होगा। संस्थान ट्रस्ट सदस्य हरिशचंद्र सिंह जसोल ने कहा कि संत शिरोमणि श्री रावल मल्लीनाथ जी की लोककल्याणकारी परंपराओं, आदर्शों एवं प्रेरणादायी जीवन-दर्शन को जन-जन तक पहुंचाना हम सभी का दायित्व है। उन्होंने कहा कि समाज की एकता, संगठन, सांस्कृतिक चेतना एवं ऐतिहासिक विरासत को सुदृढ़ बनाने में ऐसे आयोजन महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। ‘धार्मिक और सांस्कृतिक मूल्यों का सशक्त बनाने का महाअभियान’
हरिशचंद्र सिंह जसोल ने बताया कि पंच मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव समाज को एक सूत्र में जोड़ने, नई पीढ़ी को अपने गौरवशाली इतिहास से परिचित कराने तथा धार्मिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों को सशक्त बनाने का एक महाअभियान है। निर्माणाधीन पंच मंदिरों में विशेष रूप से संत शिरोमणि श्री रावल मल्लीनाथ जी मंदिर एवं श्री चक्रेश्वरी माता मंदिर भविष्य में राठौड़ वंश की आस्था, श्रद्धा और गौरव के प्रमुख तीर्थस्थलों के रूप में स्थापित होंगे। हरिशचंद्र सिंह जसोल ने कहा कि ये मंदिर राठौड़ वंश के गौरवशाली इतिहास, आध्यात्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत के जीवंत प्रतीक बनेंगे। इन तीर्थों के माध्यम से समाज की नई पीढ़ी अपने इतिहास, आदर्शों और पूर्वजों के योगदान से प्रेरणा प्राप्त करेगी। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि पंच मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव का ये ऐतिहासिक अवसर संपूर्ण समाज के लिए गौरव का विषय बनेगा। इससे राठौड़ वंश की गौरवगाथा को नई पहचान मिलेगी, धार्मिक चेतना को बल मिलेगा तथा सनातन धर्म के प्रति आस्था और अधिक प्रगाढ़ होगी। उन्होंने देशभर में निवासरत राठौड़ समाज, श्रद्धालुओं एवं धर्मप्रेमियों से इस ऐतिहासिक आयोजन में सक्रिय सहभागिता निभाने का आह्वान किया। प्रबंधन समिति सदस्य गिरधर सिंह कोटड़ा ने मालाणी की धार्मिक परंपराओं एवं लोक आस्था की गौरवशाली विरासत पर प्रकाश डालते हुए कहा कि ये क्षेत्र सदियों से संतों, वीरों और लोकदेवताओं की तपोभूमि रहा है। उनके अनुसार पंच मंदिरों की प्राण-प्रतिष्ठा आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा का केंद्र बनेगी और समाज को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़ने का कार्य करेगी। उन्होंने यह भी बताया कि यह परिसर भविष्य में धार्मिक, सांस्कृतिक एवं सामाजिक गतिविधियों का महत्वपूर्ण केंद्र बनेगा। जनसंपर्क अभियान चलाने का सुझाव
मदन सिंह राजमथाई ने कहा कि संत शिरोमणि श्री रावल मल्लीनाथ जी, श्री राणी रूपादे जी एवं श्री चक्रेश्वरी माता के प्रति समाज की अगाध श्रद्धा इस महोत्सव को अभूतपूर्व स्वरूप प्रदान करेगी। उन्होंने सुझाव दिया कि प्रत्येक परिवार, गांव एवं समाजबंधु तक महोत्सव का संदेश पहुंचाने के लिए व्यापक जनसंपर्क अभियान चलाया जाना चाहिए। उनके अनुसार यह आयोजन समाज की सामूहिक शक्ति, संगठन क्षमता एवं धार्मिक आस्था का भव्य उदाहरण बनेगा। मांगू सिंह विशाला ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि यह आयोजन मालाणी क्षेत्र के साथ-साथ देशभर में निवासरत राठौड़ वंश के लोगों को एक मंच पर जोड़ने का कार्य करेगा। उन्होंने बताया कि समाज की एकता, संगठन और पारस्परिक संवाद को सुदृढ़ बनाने के लिए ऐसे अवसर अत्यंत महत्वपूर्ण होते हैं। उन्होंने युवाओं से महोत्सव की तैयारियों में अग्रणी भूमिका निभाने तथा समाज के प्रत्येक परिवार तक इस ऐतिहासिक आयोजन का संदेश पहुंचाने का आह्वान किया। उन्होंने आगे कहा कि राठौड़ वंश की गौरवशाली परंपराओं एवं सांस्कृतिक पहचान को और अधिक सशक्त बनाने के लिए सामाजिक जीवन में अपने आराध्य एवं पूर्वजों के प्रति श्रद्धा का भाव निरंतर प्रकट होना चाहिए। इस अवसर पर उन्होंने प्रस्ताव रखा कि राठौड़ वंश के पुरुष जब आपस में मिलें तो “जय श्री रावल मल्लीनाथ जी री” तथा महिलाएं आपस में मिलें तो “जय श्री राणी रूपादे जी री” कहकर एक-दूसरे का अभिवादन करें। उनके अनुसार यह परंपरा समाज में अपने गौरवशाली इतिहास, आस्था और सांस्कृतिक मूल्यों के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रभावी माध्यम बनेगी। उन्होंने इस पहल का शुभारंभ इसी बैठक से करने का आह्वान किया, जिसका उपस्थित समाजबंधुओं ने समर्थन किया। बाल सिंह मारूड़ी ने कहा कि समाज की एकता एवं सहभागिता ही इस महोत्सव की सबसे बड़ी शक्ति होगी। उन्होंने गांव-गांव, ढाणी-ढाणी तक महोत्सव का संदेश पहुंचाने तथा प्रत्येक परिवार को इस ऐतिहासिक आयोजन से जोड़ने का आह्वान किया। साथ ही विश्वास व्यक्त किया कि समाज के सामूहिक सहयोग से यह महोत्सव ऐतिहासिक एवं अविस्मरणीय बनेगा। प्रबंधन समिति सदस्य स्वरूप सिंह खारा ने अपने उद्बोधन में संत शिरोमणि श्री रावल मल्लीनाथ जी एवं श्री राणी रूपादे जी के आदर्शों का स्मरण करते हुए कहा कि उनके जीवन से समाज को त्याग, सेवा, धर्मनिष्ठा एवं लोककल्याण की प्रेरणा प्राप्त होती है। उन्होंने कहा कि पंच मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव धर्म, संस्कृति एवं सामाजिक समरसता का संदेश देने वाला ऐतिहासिक आयोजन सिद्ध होगा तथा समाज में आध्यात्मिक एवं सांस्कृतिक चेतना को और अधिक सुदृढ़ करेगा। प्रबंधन समिति सदस्य एवं पूर्व विधायक पोकरण शैतान सिंह ने कहा कि श्री चक्रेश्वरी माता मंदिर एवं संत शिरोमणि श्री रावल मल्लीनाथ जी मंदिर की प्राण-प्रतिष्ठा संपूर्ण राठौड़ वंश के लिए गौरव और आस्था का ऐतिहासिक क्षण है। उन्होंने सुझाव दिया कि इस महोत्सव को राष्ट्रीय स्तर की पहचान दिलाने के लिए व्यापक जनसंपर्क, प्रचार-प्रसार एवं समाज की सक्रिय सहभागिता आवश्यक है। उन्होंने समाज के प्रत्येक वर्ग, सामाजिक संगठनों एवं जनप्रतिनिधियों से इस महाअभियान से जुड़ने का आह्वान किया। प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव समिति का गठन
बैठक में संस्थान अध्यक्ष रावल किशन सिंह जसोल की अध्यक्षता में प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव समिति का गठन भी किया गया। सर्वसम्मति से यह निर्णय लिया गया कि मालाणी क्षेत्र सहित विभिन्न क्षेत्रों की छत्तीशी कौम, विभिन्न सामाजिक संगठनों एवं देशभर में निवासरत समाजबंधुओं तक महोत्सव का संदेश पहुंचाया जाएगा तथा समाज के प्रत्येक परिवार को इस ऐतिहासिक आयोजन से जोड़ा जाएगा। साथ ही हर साल की भांति भादवा बीज की पूर्व संध्या 12 सितम्बर 2026 को श्री राणी रूपादे जी मंदिर, पालिया में भव्य रात्रि जागरण तथा 13 सितम्बर 2026 को श्री रावल मल्लीनाथ जी मंदिर, मालाजाल तिलवाड़ा में ध्वजारोहण एवं महाप्रसादी का आयोजन किया जाएगा। सर्व समाज से इन कार्यक्रमों में अधिकाधिक संख्या में भाग लेकर धर्मलाभ प्राप्त करने का आह्वान किया गया। बैठक में मालाणी, मारवाड़ सहित विभिन्न क्षेत्रों से पधारे राठौड़ समाज के प्रबुद्धजन, समाज प्रतिनिधि, गणमान्य नागरिक एवं धर्मप्रेमी बड़ी संख्या में उपस्थित रहे। सभी ने पंच मंदिर प्राण-प्रतिष्ठा महोत्सव को ऐतिहासिक, भव्य एवं सर्वसमाज की सहभागिता वाला आयोजन बनाने के लिए अपने महत्वपूर्ण सुझाव एवं विचार प्रस्तुत किए।
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संगीत हिंदी फिल्मों की आत्मा है. किसी फिल्म का म्यूजिक जितना ज्यादा हिट होगा, दर्शकों में फिल्म के प्रति दीवानगी उतनी ज्यादा देखने को मिलती है. सुपरहिट संगीत दर्शकों को सिनेमाघर तक खींच लाने में मदद करता है. म्यूजिकल फिल्मों का अपना एक अलग मुकाम है. फिल्म को हिट कराने में सुपरहिट म्यूजिक अहम रोल अदा करता है. बॉलीवुड की इतिहास में कई बार एक ही गाने में दो-दो सुरीली धुनें जोड़ी गईं. 16 साल के अंतराल में बनीं चार फिल्मों में यही पैटर्न नजर आया. चार ही फिल्मों में एक गाने में दो धुनें समाई हुई थीं. चारों ही फिल्मों का बॉक्स ऑफिस पर डंका बजा. चारों फिल्मों ने 22 कुल फिल्मफेयर अवॉर्ड जीते थे.
भारतीय संगीत में एक गाने में एक ही धुन का चलन ज्यादा है. हिंदी सिनेमा की ज्यादातर फिल्मों में इसी स्टाइल में गाने बनाए जाते हैं. कई संगीतकारों ने एक ही गाने में दो धुनों को मिला दिया. फिर जो गाना तैयार हुआ, उसने इतिहास रच दिया. 16 साल के अंतराल में चार फिल्मों के एक-एक गाने में यह पैटर्न आजमाया गया. दिलचस्प बात यह है कि सभी फिल्में बॉक्स ऑफिस पर सफल रहीं. इस तरह के पैटर्न पर गाने भी खूब पॉप्युलर हुए. ये फिल्में थीं : नमक हलाल, हिना, दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे और कुछ कुछ होता है.

सबसे पहले बात करते हैं 30 अप्रैल 1982 को रिलीज हुई फिल्म ‘नमक हलाल’ की जिसका डायरेक्शन प्रकाश मेहरा ने किया था. फिल्म में अमिताभ बच्चन-स्मिता पाटिल, शशि कपूर-परवीन बॉबी लीड रोल में थे. वहीदा रहमान, ओम प्रकाश और रंजीत अहम भूमिकाओं में थे. मुहुर्त 1978 में हुआ था लेकिन शूटिंग 1980 के आसपास शुरू हुई. स्टोरी सुरेंद्र कौल ने स्क्रीनप्ले लक्ष्मीकांत शर्मा ने लिखा था. डायलॉग कादर खान ने लिखे थे. म्यूजिक बप्पी लहरी ने कंपोज किया था. ‘नमक हलाल’ शशि कपूर-अमिताभ बच्चन की साथ में आए आखिरी फिल्म थी. फिल्म का म्यूजिक ब्लॉकब्स्टर था.

फिल्म का एक गाना ‘पग घुंघरू बांध मीरा नाची थी..’ किशोर कुमार ने गाया था. गाना पूरे 9 मिनट का था. इस गाने में दो ट्यून सुनाई देती हैं. गाना एक दोहे ‘बुजुर्गों ने फरमाया कि पैरों पे अपने खड़े होकर दिखलाओ, फिर ये जमाना तुम्हारा है’ से शुरू होता है. गाना ‘पग घुंघरू बांध मीरा नाची थी..’ से शुरू होता है लेकिन बीच में ‘आप का तो लगता है बस यही सपना, राम नाम जपना पराया माल अपना’ गाने के धुन बिल्कुल अलग है. यानी एक ही गाने में दूसरी धुन सुनाई देती है. गाना प्रकाश मेहरा और अनजान ने गाना लिखा था. बप्पी लहरी की मां ने क्लासिकल अंदाज में गाने का मुखड़ा बनाया था. बप्पी लहरी ने इस गाने में डिस्को बीट जोड़ दी. ‘पग घुंघरू बांध मीरा नाची थी’ गाने को रिकॉर्ड करने में 3 दिन लगे थे. गाना तीन भाग में है. किशोर कुमार ने इस गाने में जो सरगम सुनाई देती है, उसे गाने से इनकार कर दिया था. सरगम सत्य नारायण मिश्रा की आवाज में है. गाना महबूब स्टूडियो में रिकॉर्ड हुआ था. ‘नमक हलाल’ ने 6 करोड़ का नेट कलेक्शन किया था. यह एक सुपरहिट फिल्म साबित हुई थी. किशोर दा को फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था.
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यही पैटर्न मूवी 1991 में रिलीज ‘हिना’ मूवी में भी नजर आया था. राज कपूर ने अपने पुराने सहयोगी ख्वाजा अहमद अब्बास, जैनेंद्र जैन, हसीना मोईन और वीपी साठे से फिल्म की कहानी लिखवाई थी. संगीतकार रविंद्र जैन के साथ मिलकर तीन गाने भी रिकॉर्ड करवाए थे. 1988 में उनकी मौत के बाद उनके बेटे रणधीर कपूर ने फिल्म का डायरेक्शन किया. हिना मूवी में ऋषि कपूर, अश्विनी भावे और पाकिस्तानी एक्ट्रेस जेबा बख्तियार लीड रोल में थे. इसके अलावा, रजा मुराद, कुलभूषण खरबंदा, रीमा लागू, फरीदा जलाज और सईद जाफरी जैसे दिग्गज कलाकार भी नजर आए थे. शूटिंग मनाली, स्विटजरलैंड और ऑस्ट्रिया में हुई थी. फिल्म में गीत-संगीत रविंद्र जैन का था. म्यूजिक सुपरहिट रहा था. फिल्म के सुपरहिट गानों में ‘मैं हूं खुशरं हिना’ ‘देर ना हो जाए, कहीं देर ना हो जाए’, और ‘बेदर्दी तेरे प्यार ने दीवाना कर दिया’ जैसे सॉन्ग शामिल थे.

फिल्म का एक गाना ‘देर ना हो जाए, कहीं देर ना हो जाए’ आज भी उतना ही हिट है. इस गाने में दो धुनें सुनाई देती हैं. गाना ‘कब आओगे, कब आओगे’ से शुरू होता है. फिर ‘देर ना हो जाए कहीं देर ना हो जाए’ बजता है. बीच में जब ‘आजा रे माही तेरा रस्ता उडीक दिया’ बजता है तो गाने की धुन बिल्कुल बदल जाती है. यानी गाने के अंदर एक नई धुन सुनने को मिलती है. यह अनोखा प्रयोग था जिसे रविंद्र जैन ने आजमाया. ‘हिना’ फिल्म के बजट की बात करें तो यह 4 करोड़ रुपये के करीब था. इस फिल्म ने 12 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. यह एक सुपरहिट फिल्म साबित हुई थी. ‘हिना’ मूवी को दो फिल्मफेयर अवॉर्ड मिले थे.

90 के दशक में म्यूजिकल-रोमांटिक फिल्मों का दौर शुरू हुआ. संगीतकार नदीम-श्रवण, आनंद-मिलिंद और जतिन-ललित की जोड़ी पूरे दशक में छाई रही. इनमें जतिन-ललित का म्यूजिक मेलोडियस होने के साथ-साथ सबसे अनूठा था. उन्होंने दो बार ऐसा कारनामा किया. दो बार एक ही सॉन्ग में दो सुरीली धुनें जोड़ दीं. पहली बार यह कारनामा 20 अक्टूबर 1995 को रिलीज हुई ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ फिल्म में किया. इसी फिल्म ने शाहरुख खान-काजोल को रातोंरात सुपरस्टार बनाया. फिल्म में भारतीय संस्कृति, परंपराओं और त्योहारों का गजब का संयोजन था. बतौर डायरेक्टर आदित्य चोपड़ा की यह पहली फिल्म थी. कहानी-स्क्रीनप्ले आदित्य चोपड़ा ने लिखा था. यश चोपड़ा प्रोड्यूसर थे. सदाबहार म्यूजिक जतिन-ललित ने ही कंपोज किया था. कुल 7 गाने फिल्म में रखे गए थे.

फिल्म का हर सीन आइकॉनिक, हर डायलॉग और हर गाना आइकॉनिक है फिल्म अपने समय से बहुत आगे की थी. इस फिल्म के एक गाने ‘हो गया है तुझको तो प्यार सजना’ में दो धुनें सुनाई देती हैं. गाना ‘ना जाने मेरे दिल को क्या हो गया, अभी तो यहीं था, अभी खो गया था’ से शुरू होता है. फिर अचानक गाने के अंदर ‘हो गया है तुझको तो प्यार सजना’ की धुन सुनाई देने लगती है और गाने का ट्रैक पूरी तरह से बदल जाता है. संगीतकार जतिन ने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि दो धुनों को एकसाथ पिरोया गया था. यह अनोखा प्रयोग डायरेक्टर आदित्य चोपड़ा के कहने पर किया गया था. 4 करोड़ के बजट में बनी ‘डीडीएलजे’ ने 103 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. यह एक ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई थी. डीडीएलजे को एक नेशनल अवॉर्ड और 10 फिल्मफेयर अवॉर्ड मिले थे.

संगीतकार जतिन-ललित ने इसी तरह का कारनामा अपनी एक और फिल्म ‘कुछ-कुछ होता है’ में भी दोहराया था. शाहरुख खान-काजोल और रानी मुखर्जी स्टारर यह फिल्म 16 अक्टूबर 1998 को रिलीज हुई थी. बतौर डायरेक्टर करण जौहर की यह पहली फिल्म थी. फिल्म की कहानी, स्टार कास्ट, गीत-संगीत, सिनेमेटोग्राफी सबकुछ परफेक्ट था. कहानी करण जौहर ने लिखी थी. प्रोड्यूसर उनके पिता यश जौहर थे. फिल्म का डिस्ट्रीब्यशन यशराज फिल्म्स के बैनर तले किया गया था. इस फिल्म का आधे से ज्यादा काम आदित्य चोपड़ा ने संभाला था. दरअसल यश चोपड़ा रिश्ते में करण जौहर रिश्ते के सगे मामा हैं. इस रिश्ते से आदित्य चोपड़ा और करण जौहर भाई-भाई हैं.

‘कुछ कुछ होता है’में जतिन-ललित ने ऐसा म्यूजिक दिया, जिसे हमेशा याद रखा जाएगा. इस फिल्म का एक गाना ‘तेरे घर आया, मैं आया तुझको लेने’ असाधारण सॉन्ग था. इस गाने में भी दो धुनें सुनाई देती हैं. गाना सलमान खान और काजोल पर फिल्माया गया है. गाने की शुरुआत में सलमान खान ‘तेरे घर आया, मैं आया तुझको लेने’ लाइन गाते हैं. बीच में गाने की धुन तब अचानक बदल जाती है जब रीमा लागू ‘सवेरे चली जाएगी, तू बड़ा याद आएगी’ गाती हैं. करीब 10 करोड़ रुपये के बजट में बनी इस मूवी ने 106 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. यह एक ऑल टाइम फिल्म साबित हुई थी. यह उस साल की सबसे ज्यादा पैसा कमाने वाली फिल्म थी. ‘कुछ कुछ होता है’ फिल्म ने 8 फिल्मफेयर अवॉर्ड जीते थे.
फ्रांस में PM मोदी का काफिला रोकने की साजिश नाकाम: पुलिस ने खालिस्तानी अरेस्ट किए; G7 समिट के दौरान घेरने वाले थे – Ludhiana News
फ्रांस में G7 शिखर सम्मेलन के बीच पुलिस ने प्रतिबंधित संगठन सिख फार जस्टिस (SFJ) से जुड़े खालिस्तान समर्थकों को गिरफ्तार किया गया है। फ्रांस की खुफिया एजेंसी के अनुसार, ये सभी पीएम मोदी के दौरे के दौरान काफिले को रोकने की साजिश रच रहे थे। फ्रांस पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के बीच बैठक के बाद ये खालिस्तानी समर्थक विरोध-प्रदर्शन करने वाले थे। और पीएम मोदी के काफिले को भी घेरने वाले थे। इसके बाद फ्रांसीसी सुरक्षा एजेंसियों ने तुरंत एक्शन लेते हुए सभी को गिरफ्तार कर लिया। पढ़ें क्या है पूरा मामला… भारत-फ्रांस के बीच खुफिया सहयोग की भूमिका जानकारी के अनुसार, पुलिस के इस एक्शन में भारत-फ्रांस के बीच सुरक्षा एवं खुफिया सहयोग की महत्वपूर्ण भूमिका रही। दोनों देशों की एजेंसियों के बीच समन्वय के चलते किसी भी संभावित सुरक्षा खतरे को पहले ही आंक लिया गया। भारत-फ्रांस के मजबूत कूटनीतिक संबंध का उदाहरण हालांकि, फ्रांसीसी अधिकारियों की ओर से गिरफ्तार व्यक्तियों की संख्या और उनके खिलाफ लगाए गए आरोपों को लेकर आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। वहीं, इस कार्रवाई को भारत-फ्रांस के मजबूत सुरक्षा और कूटनीतिक सहयोग का उदाहरण माना जा रहा है। G7 सम्मेलन के दौरान कार्रवाई गौरतलब है कि खालिस्तान समर्थक गतिविधियों और SFJ से जुड़े मामलों को लेकर भारत लगातार विभिन्न देशों के साथ सुरक्षा सहयोग बढ़ाने पर जोर देता रहा है। G7 सम्मेलन के दौरान हुई यह कार्रवाई उसी दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है। पढ़िए क्या है SFJ… सिख फॉर जस्टिस यानी SFJ सिखों के लिए अलग खालिस्तान की मांग करने वाला एक संगठन है। 2007 में अमेरिका में इसकी स्थापना की गई थी। आतंकी गुरपतवंत सिंह पन्नू SFJ के संस्थापकों में से एक है। SFJ अपने अलगाववादी अभियान ‘रेफरेंडम 2020’ के तहत पंजाब को भारतीय से मुक्त कराने की बात करता है। SFJ ने अपने अगस्त 2018 में लंदन डिक्लेरेशन में भारत से अलग होने और पंजाब को एक स्वतंत्र देश के रूप में फिर से स्थापित करने के सवाल पर दुनिया भर में रहने वाले सिख समुदाय के बीच पहला जनमत संग्रह कराने की घोषणा की थी। SFJ ने नवंबर 2020 में जनमत संग्रह के लिए वोटिंग कराने की बात कही थी। पंजाब के साथ-साथ नॉर्थ अमेरिका, यूरोप, ऑस्ट्रेलिया, न्यूजीलैंड, मलेशिया, फिलीपींस, सिंगापुर, केन्या और मध्य-पूर्वी देशों के प्रमुख शहरों में इसे आयोजित करने की योजना बनाई थी। ‘रेफरेंडम 2020’ नाम से बाकायदा एक वेबसाइट बनाई गई थी। इसमें लिखा था- एक बार जब भारत से आजादी को लेकर पंजाबी लोगों के भीतर आम सहमति बन जाएगी तो हम पंजाब को एक देश के रूप में एस्टैब्लिश करने के लक्ष्य के साथ संयुक्त राष्ट्र और अन्य अंतरराष्ट्रीय निकायों से संपर्क करेंगे। G-7 समिट में मोदी 16 महीने बाद ट्रम्प से मिले 15 जून से दो दिवसीय G-7 समिट के लिए मंगलवार दोपहर एवियन पहुंचने पर मोदी का फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों ने स्वागत किया। G-7 के देशों के राष्ट्राध्याक्षों ने ग्रुप फोटो भी खिंचवाई। पीएम मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के बीच फ्रांस के एवियन शहर में G-7 समिट के दौरान मुलाकात हुई। दोनों के बीच करीब 5 मिनट तक बात हुई। मीटिंग में दोनों एक-साथ बैठे नजर आए। यह मुलाकात 16 महीनों के बाद हुई है। प्रधानमंत्री और अमेरिकी राष्ट्रपति G7 आउटरीच सेशन में भी साथ-साथ बैठे नजर आए। दोनों की पिछली मुलाकात फरवरी 2025 में व्हाइट हाउस में हुई थी। इसी बीच मोदी और इटालियन पीएम जॉर्जिया मेलोनी की बातचीत भी हुई। मेलोनी ने मोदी से कहा- दोबारा मिलकर अच्छा लगा, हम इंस्टाग्राम पर सबसे फेमस हैं। मोदी पिछले महीने 5 देशों के दौरे पर गए थे। जहां उन्होंने रोम में पीएम मेलोनी को मेलोडी टॉफी दी थी। जिसका वीडियो वायरल हो गया था। ——————– यह भी पढ़ें- दिलजीत दोसांझ के शो से खालिस्तानी धक्के मारकर निकाले:टोरंटो के कॉन्सर्ट में झंडे लेकर पहुंचे, पुलिस ने भीड़ से खींच-खींचकर पकड़े पंजाबी सिंगर और एक्टर दिलजीत दोसांझ के 31 मई की रात टोरंटो कॉन्सर्ट में खालिस्तानी झंडे लेकर पहुंच गए। कनाडा के टोरंटो स्थित फेमस रॉजर्स सेंटर स्टेडियम में शो के बीच कुछ दर्शकों ने खालिस्तानी झंडे लहराए और शो को खराब करने की कोशिश की। पूरी खबर पढ़ें…
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डीयू आईसीसी चुनाव में ABVP का दबदबा: यूजी से आर्यन और पीजी से श्लोक जीते, महिला सुरक्षा के मुद्दे को मिला समर्थन – New Delhi News
दिल्ली विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति के चुनाव में जीते पदाधिकारी।
दिल्ली विश्वविद्यालय की आंतरिक शिकायत समिति (आईसीसी) के चुनाव में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) ने शानदार प्रदर्शन करते हुए जीत का परचम लहराया है। स्नातक (यूजी) वर्ग से आर्यन चौधरी और स्नातकोत्तर (पीजी) वर्ग से श्लोक कुमार सिंह निर्वाचित हुए है
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आईसीसी विश्वविद्यालय में लैंगिक संवेदनशीलता और सुरक्षा सुनिश्चित करने वाली एक महत्वपूर्ण संस्था है। इस महत्वपूर्ण चुनाव में एबीवीपी समर्थित प्रत्याशियों की विजय यह स्पष्ट करती है कि छात्र पारदर्शी कार्यशैली और समर्पित नेतृत्व चाहते हैं।
जीत छात्र समुदाय के विश्वास और हमारी सकारात्मक कार्यशैली की जीत
एबीवीपी लंबे समय से छात्राओं की सुरक्षा और सम्मानजनक शैक्षणिक वातावरण के लिए आंदोलन करती रही है। परिषद का मानना है कि विश्वविद्यालय केवल डिग्री का केंद्र नहीं, बल्कि नेतृत्व और संवेदनशीलता निर्माण का भी मंच है।
एबीवीपी दिल्ली के प्रदेश मंत्री सार्थक शर्मा ने जीत पर खुशी जाहिर करते हुए कहा, यह जीत छात्र समुदाय के विश्वास और हमारी सकारात्मक कार्यशैली की जीत है। आर्यन और श्लोक छात्रों की अपेक्षाओं पर खरा उतरेंगे और महिला सुरक्षा व निष्पक्ष शिकायत निवारण की दिशा में पूरी निष्ठा से काम करेंगे। इस परिणाम के बाद नवनिर्वाचित प्रतिनिधियों ने कहा कि वे परिसर को और अधिक सुरक्षित और न्यायपूर्ण बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
एक फसल और बंपर मुनाफा! मशरूम ने बदल दी मधुबनी के स्वाति की किस्मत
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मधुबनी के बेनीपट्टी की महिला किसान स्वाति झा ने मशरूम उत्पादन को सफल व्यवसाय में बदल दिया है. वे ऑयस्टर, मिल्की और बटन मशरूम की खेती करने के साथ-साथ इससे पापड़, चिप्स, अचार, अदौरी और प्रोटीन पाउडर जैसे कई उत्पाद भी तैयार करती हैं. उनके ब्रांड “मिथिला स्वाति मशरूम” के उत्पाद स्थानीय बाजारों के साथ ऑनलाइन भी बिक रहे हैं. खास बात यह है कि उनका मशरूम प्रोटीन पाउडर जिम जाने वाले लोगों और बॉडी बिल्डर्स के बीच काफी लोकप्रिय है. स्वाति की मेहनत और मार्केटिंग रणनीति ने उन्हें अच्छी पहचान और बेहतर कमाई दिलाई है.
मधुबनी : मशरूम के हम आप सब्जी या पकौड़े के रूप से खाते है, लेकिन इससे कई सारी चीजें तैयार होती है. बता दें कि पापड़, चिप्स, अचार से लेकर अब जिम में भी इस्तेमाल होने लगा है. बॉडी बिल्डर डाइट में शामिल करते है प्रोटीन पावडर. जानिए मशरूम का और किन चीजों में उपयोग किया जाता है.
मशरूम का होता इन चीजों में इस्तेमाल
अगर आप भी जानना चाहते है कि मशरूम खाने के अलावा और किन चीजों में इस्तेमाल होता और इसके कितने फायदे है तो यह आर्टिकल आपको काफी मदद करेगा. आज आपको मधुबनी के बेनीपट्टी की एक महिला स्वाति झा से मिलाते है , जो पेशे से मशरूम उत्पादन करने वाली महिला किसान है. बता दें कि ये सिर्फ मशरूम उगाकर उसे बाजार में सप्लाई करने तक सीमित नहीं है, बल्कि उसको कॉमर्शियल रूप दिया है जिसे मोटी कमाई करती है और लोगों को भी काफी स्वास्थ्य के लिए फायदें पहुंचाने का काम करती है.
यह तीन प्रजाति के मशरूम उगाकर (ऑस्ट्रर, मिल्की, बटन) उसे मार्केट की कीमत पर बेचती है उसके आवला इसे पापड़ , चिप्स, अदौरी, तीसी चिप्स, अचार आदि के साथ जिम में बॉडी बिल्डर को पीने के लिए मशरूम प्रोटीन पावडर भी बनाकर सप्लाई करती हैं. अभी तक आप हम मशरूम से सिर्फ सब्जी -पकौड़े ही खाते है लेकिन यह मधुबनी के मार्केट में और ऑनलाइन दूर दराज “मिथिला स्वाति मशरूम” का घरेलू आइटम खाते है. इसमें इन्हें कमाई भी बढ़िया है क्योंकि कोई भी सामान हजार रुपए से कम का प्रतिकिलो नहीं बिक्री होता, लेकिन ठीक रहने के लिए खरीदते है.
एक्स्ट्रा फैट को कम करने में काफी फायदेमंद
बहरहाल इनकी खुद के दम पर मार्केट स्टैटजी कमाल की है, लोकल दुकान घुमाकर ग्राहकों को समझान, एग्जिबिसन लगाना और ऑनलाइन फायदें बताना सही साबित हुआ है. मशरूम पेट के लिए, लीवर के लिए और एक्स्ट्रा फैट को कम करने में काफी फायदेमंद साबित होता हैं. बॉडी बिल्डर के लिए प्रोटीन पावडर बनाए है जो मधुबनी के हर जिम में मेरा यह पावडर उपलब्ध है जो भी जिम करते वो खरीदते है और दूध में घोलकर या गर्म पानी में घोलकर पीते है. दरअसल एक शब्द में कहें तो मशरूम मेडिसिन है इसमें औषधीय गुण होते है.
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8 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. क्राइम, खेल, …और पढ़ें

