उदयपुर शहर के अमराई घाट स्थित मांझी मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सामूहिक रुद्राभिषेक पाठ का आयोजन किया गया। चांदपोल बाहर राजकीय आत्मनिर्भर मंदिर सरदार स्वरूप श्याम में सामूहिक रुद्राभिषेक पाठ प्रदोष मंडल, माजी मंदिर सनातन भक्तों एवं क्षेत्रवासियों के सहयोग से श्रद्धा, भक्ति एवं आध्यात्मिक वातावरण के मध्य आयोजन हुआ। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने सहभागिता करते हुए भगवान महादेव का अभिषेक एवं पूजन-अर्चन किया। कार्यक्रम के दौरान 108 विद्वान आचार्यों एवं पंडितों द्वारा वैदिक मंत्रोच्चार के साथ भगवान शिव का रुद्राभिषेक संपन्न कराया गया। इस कार्यक्रम में लगभग 300 भक्तजन उपस्थित थे मंदिर परिसर हर-हर महादेव के जयघोष तथा वैदिक ऋचाओं से गुंजायमान रहा। श्रद्धालुओं ने धर्म, संस्कृति, राष्ट्र एवं समाज कल्याण की मंगलकामना के साथ अभिषेक एवं पूजन में भाग लिया। आयोजन से जुड़े आचार्य पंडित भगवान पालीवाल ने बताया कि मंदिर को जनजागृति, सनातन संस्कृति एवं आध्यात्मिक चेतना के केंद्र के रूप में विकसित करने के उद्देश्य से समय-समय पर ऐसे धार्मिक आयोजनों का आयोजन किया जा रहा है। भक्त रोहित चौबीसा ने बताया कि कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण एवं प्लास्टिक मुक्त आयोजन का विशेष संदेश दिया गया। भगवान महादेव को 51 किलोग्राम सेंगारी चिवड़ा, 51 किलोग्राम खोपरा पाक एवं 101 किलोग्राम आमरस का भोग अर्पित किया गया। प्रसाद वितरण में पर्यावरण संरक्षण को ध्यान में रखते हुए प्लास्टिक सामग्री का उपयोग न कर खाखरा पत्तोंसे बने दोने तथा स्टील के गिलासों का प्रयोग किया गया। इस अवसर पर विप्र फाउंडेशन से पश्चिम देहात अध्यक्ष सुरेश शर्मा, राष्ट्रीय सचिव एच आर दवे, सरक्षक लज्जा शंकर नागदा, पंडित रविंद्र नागदा, अनुज दीक्षित, विप्र युवा महा मंत्री विनोद नागदा महा मंत्री निलेश चौबीसा, भारत कुमावत, निर्मल चौबीसा आदि मौजूद रहे।
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महादेव को सेंगारी चिवड़ा, खोपरा पाक, आमरस का भोग लगाया: मांझी मंदिर में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ सामूहिक रुद्राभिषेक पाठ में जुटे भक्तगण – Udaipur News
पत्थरों में छिपे हैं पुराने रहस्य, हवाओं में गूंजती है वीरता की दास्तान!
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Taragarh Fort Bundi: राजस्थान के बूंदी शहर की पहाड़ियों पर स्थित 13वीं शताब्दी का तारागढ़ किला राज्य की गौरवशाली विरासत और ऐतिहासिक पहचान का प्रतीक माना जाता है. अपनी भव्य स्थापत्य कला, विशाल प्राचीरों और रणनीतिक निर्माण के लिए प्रसिद्ध यह किला सदियों से इतिहास प्रेमियों और पर्यटकों को आकर्षित करता आ रहा है. माना जाता है कि इस किले का निर्माण चौहान शासकों द्वारा कराया गया था और यह कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं का साक्षी रहा है. किले की दीवारें राजपूती शौर्य, युद्ध कौशल और समृद्ध संस्कृति की अनगिनत कहानियां अपने भीतर समेटे हुए हैं. ऊंची पहाड़ी पर स्थित होने के कारण यहां से बूंदी शहर का मनमोहक दृश्य दिखाई देता है.
राजस्थान की हाड़ौती धरती पर बसा बूंदी एक ऐसा शहर है, जहां इतिहास सिर्फ किताबों में नहीं मिलता, बल्कि हर गली, हर महल और हर पहाड़ी पर जीवंत दिखाई देता है. सदियों पुरानी विरासत को अपने आंचल में समेटे यह शहर आज भी अपनी वही शाही गरिमा और सांस्कृतिक समृद्धि बनाए हुए है, जिसने कभी दुनिया के महान साहित्यकार रुडयार्ड किपलिंग को भी मंत्रमुग्ध कर दिया था.

यह एक पर्यटन स्थल है साथ ही इसका इतिहास, कला और रोमांस का ऐसा जीवंत कैनवास है, जहां हर पत्थर एक कहानी कहता है और हर दीवार बीते गौरवशाली युग की याद दिलाती है. जो भी यहां आता है, वह अपने साथ सिर्फ तस्वीरें नहीं, बल्कि सदियों पुरानी विरासत की अमिट यादें भी लेकर लौटता है.

इस क्षेत्र की सबसे बड़ी सांस्कृतिक धरोहरों में से एक है विश्व प्रसिद्ध कोटा-बूंदी लघु चित्रकला शैली. अपनी जीवंत रंग योजना, बारीक चित्रांकन और प्रकृति के मनोहारी चित्रण के लिए यह कला शैली दुनियाभर में प्रसिद्ध है. इन चित्रों में राजदरबारों की भव्यता, शिकार के दृश्य, प्रेम कथाएं और प्रकृति की सुंदरता इतनी जीवंतता से उकेरी गई है कि देखने वाला मंत्रमुग्ध हो जाता है.
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बूंदी केवल किलों और महलों का शहर नहीं है, बल्कि यह कला और संस्कृति का भी अनमोल खजाना है. पूरा हाड़ौती क्षेत्र प्राचीन मंदिरों, बावड़ियों, छतरियों और ऐतिहासिक जल संरचनाओं से समृद्ध है. यहां की स्थापत्य कला राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को एक अलग पहचान देती है.

एक सदी से अधिक समय पहले बूंदी की यात्रा के दौरान किपलिंग इसकी सुंदरता से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने यहां के महलों और किलों के बारे में लिखा था, “इन्हें केवल देवदूतों ने ही बनाया होगा, क्योंकि इतनी अद्भुत भव्यता इंसान के हाथों से संभव नहीं है.” आज भी बूंदी को देखकर उनकी यह बात पूरी तरह सच प्रतीत होती है.

इस क्षेत्र की सबसे बड़ी सांस्कृतिक धरोहरों में से एक है विश्व प्रसिद्ध कोटा-बूंदी लघु चित्रकला शैली. अपनी जीवंत रंग योजना, बारीक चित्रांकन और प्रकृति के मनोहारी चित्रण के लिए यह कला शैली दुनियाभर में प्रसिद्ध है. इन चित्रों में राजदरबारों की भव्यता, शिकार के दृश्य, प्रेम कथाएं और प्रकृति की सुंदरता इतनी जीवंतता से उकेरी गई है कि देखने वाला मंत्रमुग्ध हो जाता है.

आज जब आधुनिकता की दौड़ में कई शहर अपनी ऐतिहासिक पहचान खोते जा रहे हैं, तब बूंदी अपनी विरासत को संजोए हुए एक जीवंत संग्रहालय की तरह खड़ा है. यहां की संकरी गलियां, नीले रंग से सजे पुराने मकान, ऐतिहासिक स्मारक और शांत वातावरण हर आगंतुक को समय की यात्रा पर ले जाते हैं.

बूंदी की खूबसूरती का दूसरा नाम है सुख महल. जैत सागर झील के किनारे स्थित यह शांत और मनमोहक महल अपनी नाजुक मेहराबों, ठंडे कक्षों और सुंदर उद्यानों के लिए जाना जाता है. झील के शांत जल में प्रतिबिंबित होता यह महल किसी चित्रकार की कल्पना जैसा प्रतीत होता है. माना जाता है कि रुडयार्ड किपलिंग ने अपने प्रवास के दौरान यहीं समय बिताया था और अपने प्रसिद्ध उपन्यास ‘किम’ के कुछ हिस्सों के लिए प्रेरणा भी यहीं से प्राप्त की थी.

शहर के ऊपर लगभग 500 मीटर ऊंची पहाड़ी पर स्थित तारागढ़ किला बूंदी की पहचान है. 13वीं शताब्दी में निर्मित यह दुर्ग अपनी विशाल प्राचीरों, गुप्त मार्गों और अद्भुत जल संरचनाओं के लिए प्रसिद्ध है. दूर से देखने पर यह किला मानो पूरे शहर की निगरानी करता दिखाई देता है. इसकी मजबूत दीवारें वीरता, संघर्ष और राजपूती शौर्य की अनगिनत कहानियों की साक्षी हैं.

तारागढ़ किले की सबसे बड़ी विशेषता इसकी प्राचीन वर्षा जल संचयन प्रणाली है. उस दौर में निर्मित जलाशय और जल प्रबंधन की तकनीक आज भी इंजीनियरिंग का उत्कृष्ट उदाहरण मानी जाती है. यह साबित करती है कि उस समय के शिल्पकार केवल कलाकार ही नहीं, बल्कि दूरदर्शी वैज्ञानिक भी थे.
दुआ लिपा ने ब्रिटिश एक्टर कैलम टर्नर संग की शादी, वेडिंग में पहनी अनोखी ड्रेस
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सिंगिंग सेंसेशन और पॉपस्टार दुआ लीपा ने शादी कर ली है. वो ब्रिटिश एक्टर कैलम टर्नर संग परिणय सूत्र में बंध गई है. कपल की शादी की खूबसूरत फोटोज सोशल मीडिया पर छाई हुई हैं. इन फोटोज से नजरें हटा पाना काफी मुश्किल है. तो चलिए दुआ लीपा और कैलम टर्नर की शादी की फोटोज की झलकियां दिखाते हैं.
नई दिल्ली. पॉप सिंगर दुआ लीपा ने अपने जीवन की नई शुरुआत कर ली है. बीते रविवार यानी कि 31 मई को दुआ लीपा और ब्रिटिश अभिनेता कैलम टर्नर शादी के बंधन में बंधे. दोनों ने 31 मई को लंदन में एक निजी समारोह में शादी रचाई, जिसमें उनके परिवार के सदस्य और करीबी दोस्त ही शामिल हुए.

म्यूजिक और फिल्म इंडस्ट्री का ये चर्चित कपल लंदन के प्रतिष्ठित ओल्ड मैरिलेबोन टाउन हॉल में शादी के बंधन में बंधा. ये ऐतिहासिक टाउन हॉल कई सितारों की शादी का गवाह बन चुका है. शादी को पूरी तरह प्राइवेट रखा गया था.

कपल की शादी की भले ही किसी को भनक नहीं लगी थी, लेकिन उनकी वेडिंग फोटोज सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रही हैं. दुआ लीपा के पति कैलम टर्नर भी सोशल मीडिया पर ट्रेंड कर रहे हैं जो लोग एक्टर के बारे में नहीं जानते हैं वो ये जानने को उत्सुक हैं कि आखिर वो हैं कौन.
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सिंगिंग सेंसेशन दुआ लीपा ने अपनी शादी के लिए पारंपरिक व्हाइट गाउन नहीं पहना था. उन्होंने स्टाइलिश और बेहद अनोखे लुक से सोशल मीडिय पर तहलका मचा दिया है. उनके वेडिंग लुक ने लोगों का दिल जीत लिया है और फैंस उनकी फोटोज से नजरें नहीं हटा पा रहे हैं.

लंदन के प्रतिष्ठित ओल्ड मैरिलेबोन टाउन हॉल में व्हाइट क्रिस्चियन वेडिंग के दौरान सिंगर ने पारंपरिक व्हाइट गाउन नहीं पहना था. वो ब्रिटिश स्टाइल में कोर्ट-स्कर्ट और हैट पहने दिख रही हैं. उन्होंने अपने हाथों में ग्लव्स पहना है और फूल पकड़े हैं.

दुआ ने अपने खास दिन के लिए बेहद खास लुक चुना था. उन्होंने प्रसिद्ध फैशन डिजाइनर डेनियल रोजबेरी द्वारा डिजाइन किया गया शिआपरेली कूचर आउटफिट पहना. इसके साथ उन्होंने व्हाइट ग्लव्स पहने. सिंगर के हैट ने सबका खूब ध्यान खींचा जिसे मशहूर मिलिनर स्टीफन जोन्स ने डिजाइन किया था.

वहीं कैलम टर्नर क्लासिक नेवी ब्लू सूट और टाई में बेहद हैंडसम रूप में नजर आए. दोनों का लुक सोशल मीडिया पर चर्चा का विषय बना हुआ है. फैंस और सेलेब्स दोनों पर जमकर प्यार लुटा रहे हैं. सोशल मीडिया पर उनकी फोटोज पर बधाई की बाढ़ आ गई है.

दुआ लीपा और कैलम टर्नर के रिश्ते की चर्चा पहली बार जनवरी 2024 में शुरू हुई थी. उस समय दोनों को लंदन में आयोजित एक आफ्टर पार्टी में साथ देखा गया था. इसके बाद कई मौकों पर दोनों साथ नजर आए और धीरे-धीरे उनके रिश्ते की खबरें सुर्खियां बनने लगीं. हालांकि शुरुआत में दोनों ने अपने रिश्ते को लेकर ज्यादा खुलकर बात नहीं की, लेकिन जुलाई 2024 में उन्होंने सोशल मीडिया के जरिए अपने रिश्ते को ऑफिशियल कर दिया था.
KGMU में दवा घोटाले की जांच तेज: यूरोलॉजी विभाग के दवा वितरण कर्मी हटाए गए, लखनऊ छोड़ने पर रोक – Lucknow News
KGMU के यूरोलॉजी विभाग में असाध्य योजना के तहत कैंसर मरीजों को मिलने वाली महंगी दवा व इंजेक्शन में घोटाले के आरोप में दवा वितरण में लगे सभी कर्मचारियों को हटा दिया गया। उन्हें विभागाध्यक्ष कार्यालय से संबंद्व किया गया है। सभी कर्मचारियों को लखनऊ न छोड़ने के निर्देश संस्थान ने दिए हैं। KGMU प्रशासन का कहना है कमेटी ने अपनी रिपोर्ट सोमवार तक दे देगी। जिसके बाद दोषी कर्मचारियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराकर उनसे रिकवरी कराई जाएगी।
यूरोलॉजी विभाग में प्रोस्टेट, किडनी, पेशाब की थैली समेत दूसरे अंगों के कैंसर से पीड़ितों का इलाज होता है। गरीब कैंसर मरीजों को मुफ्त इलाज मुहैया कराने के लिए असाध्य योजना का संचालन किया जा रहा है। इस तरह हुआ था खेल
यूरोलॉजी विभाग में असाध्य योजना में पंजीकृत कैंसर मरीजों के नाम पर महंगी दवाओं की फर्जी खपत दिखाकर सरकारी धन के दुरुपयोग की आशंका है। विभाग में अक्टूबर-नवंबर 2025 में विभाग में जहां 10 लाख रुपये माह की दवाओं की खपत थी। वहीं, फरवरी 2026 में करीब 40 लाख रुपये की दवाएं खप गईं। मार्च में यह बजट बढ़कर 45 लाख रुपये से ज्यादा के आंकड़े को पार कर गया। महंगी दवाओं के तेजी से बढ़ते बजट पर अफसरों को शक हुआ। उन्होंने बिल और डॉक्टरों के प्रिसक्रिप्सन ऑडिट शुरू किया। जिसमें ढ़ेरों गड़बड़ी सामने आई। हालात यह है कि कुछ मरीज को कागजों पर ताकत बढ़ाने व प्रोटीन के इंजेक्शन माह भर में चार से पांच लगा दिए गए। जबकि एक इंजेक्शन छह माह में एक बार लगाया जा सकता है। हर इंजेक्शन की कीमत आठ से 10 हजार रुपये है। खुलेआम हुआ नियम का उल्लंघन
कैंसर मरीजों को भर्ती कर दवा लगाने का नियम है। इस नियम का भी उल्लंघन किया गया। अधिकारियों ने दो करोड़ रुपये की दवाओं की घपलेबाजी की आशंका जाहिर की है। यूरोलॉजी विभाग में अफसरों ने चेहते संविदा कर्मचारी को असाध्य योजना की दवाओं की जिम्मेदारी सौंपी थी। इन सभी कर्मचारियों को हटाकर विभागाध्यक्ष कार्यालय से संबंद्व कर दिया गया है। जांच होने तक वह लखनऊ छोड़कर नहीं जाएंगे। दोषियों से होगी रिकवरी
KGMU प्रवक्ता डॉ. केके सिंह के मुताबिक, संविदाकर्मियों को दवा काउंटर से हटा दिया गया है। सोमवार तक कमेटी अपनी रिपोर्ट देगी। दोषी मिलने पर संबंधित कर्मचारियों से रिकवरी होने संग उनकी सेवा भी समाप्त होगी।
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नालंदा में 125 करोड़ खर्च के बावजूद ट्रैफिक सिस्टम फेल: ट्रैफिक सिग्नल फेल, चालान चालू; शहर में 500 CCTV से भी नहीं हो रहा कंट्रोल – Nalanda News
बिहार शरीफ शहर में ट्रैफिक जाम से लोग परेशान हैं। चौराहों पर लगे ट्रैफिक सिग्नलों की बत्ती महीनों से गुल है, लेकिन नियमों के नाम पर वाहन चालकों के चालान अब भी धड़ल्ले से काटे जा रहे हैं। यातायात व्यवस्था को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से करोड़ों रुपए की लागत से लगाए गए ट्रैफिक सिग्नल अब पूरी तरह से शोपीस बनकर रह गए हैं। सबसे बुरा हाल अस्पताल चौक का है, जहां पिछले एक महीने से मात्र एक ही लाइट के सहारे पूरा ट्रैफिक कंट्रोल किया जा रहा है। शहर के ट्रैफिक को हाईटेक तरीके से नियंत्रित करने के लिए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत इंटीग्रेटेड कंट्रोल एंड कमांड सेंटर (आई ट्रिपल सी) की स्थापना की गई थी। शुरुआत में इस महत्वाकांक्षी योजना की लागत 102.94 करोड़ रुपए थी, जो बाद में बढ़कर 125 करोड़ रुपए तक पहुंच गई। इस भारी-भरकम बजट से बिहार थाना परिसर में आई ट्रिपल सी भवन का निर्माण किया गया। शहर के चप्पे-चप्पे पर नजर रखने के लिए 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरे लगाए गए और इमरजेंसी कॉल बॉक्स भी बनाए गए। इसके बावजूद, धरातल पर स्थिति यह है कि न तो शहर का ट्रैफिक कंट्रोल हो पा रहा है और न ही प्रशासन का कोई ‘कमांड’ नजर आ रहा है। मेंटेनेंस के अभाव में 2 महीने में ही लाइटें खराब यातायात व्यवस्था सुधारने की यह कवायद चार दिसंबर 2021 को अस्पताल चौक से शुरू हुई थी। शुरुआत में लोगों के लिए यह व्यवस्था नई थी और उन्होंने नियमों का पालन भी किया। लेकिन रखरखाव के अभाव में महीने-दो महीने के भीतर ही लाइटें खराब होने लगीं और पूरी व्यवस्था अस्त-व्यस्त हो गई। आज हालत यह है कि लोग सरेआम लाल बत्ती जंप कर रहे हैं। आम जनता तो दूर, पुलिस और बड़े अधिकारियों तक की गाड़ियां लाल बत्ती होने के बावजूद बेरोकटोक पास करा दी जाती हैं। अस्पताल मोड़ के अलावा शहर के देवीसराय चौक, करगिल चौक, 17 नंबर मोड़, भरावपर चौराहा, सोहसराय मोड़, अम्बेर मोड़, खंदक मोड़, भैंसासुर मोड़ और मछली मार्केट जैसे प्रमुख स्थानों पर भी ट्रैफिक लाइटें लगाई गई थीं। इनमें से भरावपर, 17 नंबर मोड़ और करगिल चौक के सिग्नल तो ओवरब्रिज व सड़क निर्माण कार्य की भेंट चढ़ गए। सोहसराय, अंबेर और खंदक मोड़ सहित अन्य जगहों पर कुछ दिन लाइटें जली और फिर हमेशा के लिए बंद हो गईं। अब इन खराब पड़े सिग्नलों की सुध लेने वाला कोई नहीं है।आ आम जनता को कोई लाभ नहीं मिल रहा सुरक्षा और निगरानी के नाम पर लगाए गए 500 से अधिक कैमरों का हाल भी किसी से छिपा नहीं है। आधे से ज्यादा कैमरे कबाड़ में तब्दील हो चुके हैं। जो गिने-चुने कैमरे काम कर रहे हैं, उनकी गुणवत्ता इतनी खराब है कि उनके नीचे से गुजरने वाले किसी भी व्यक्ति का चेहरा स्पष्ट रूप से नहीं पहचाना जा सकता। ट्रैफिक लाइटों के ठीक नीचे ई-रिक्शा का बेतरतीब कब्जा रहता है और आम नागरिक रोज जाम से जूझने को मजबूर हैं। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यही उठता है कि 125 करोड़ रुपए फूंकने के बाद भी क्या जनता को कोई लाभ मिला, या फिर उनकी गाढ़ी कमाई पूरी तरह से पानी में बह गई।
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रिपोर्ट- ईरानी राष्ट्रपति पजशकियान ने सुप्रीम लीडर को इस्तीफा भेजा: इस्लामिक सेना के कंट्रोल से नाराज, कहा- बड़े फैसलों में शामिल नहीं किया जाता
तेल अवीव/तेहरान/वॉशिंगटन डीसी3 मिनट पहले
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ईरान में राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने इस्तीफा दे दिया है। ईरान इंटरनेशनल की रिपोर्ट के मुताबिक, उन्होंने देश के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह मोजतबा खामेनेई को अपना इस्तीफा भेज दिया है।
रिपोर्ट में दावा किया गया है कि पजशकियान ने अपनी चिट्ठी में लिखा है कि देश की सत्ता पर अब पूरी तरह इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) के कमांडरों का कंट्रोल हो गया है।
उन्होंने यह भी कहा कि फरवरी में अमेरिका और इजराइल के साथ युद्ध शुरू होने के बाद से उनकी सरकार को अहम फैसलों की प्रक्रिया से लगभग अलग कर दिया गया है।
पजशकियान के मुताबिक, उनकी सरकार को बड़े फैसलों में शामिल नहीं किया जा रहा है और वास्तविक नियंत्रण सैन्य नेतृत्व के हाथों में चला गया है। अभी यह साफ नहीं है कि सर्वोच्च नेता मोजतबा खामेनेई उनका इस्तीफा स्वीकार करेंगे या नहीं।
हालांकि, फर्स्टपोस्ट के मुताबिक ईरानी राष्ट्रपति कार्यालय में संचार और सूचना प्रसार विभाग के डिप्टी चीफ सैयद मेहदी तबातबाई ने इस रिपोर्ट को खारिज किया है।

ईरान के राष्ट्रपति मसदू पजशकियान। वे जुलाई 2024 में राष्ट्रपति बने थे।
पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स…
- ब्यूफोर्ट किले पर इजराइल का कब्जा: इजराइली सेना ने दक्षिणी लेबनान में 900 साल पुराने ब्यूफोर्ट किले और आसपास की पहाड़ियों पर कब्जा कर लिया। यह पिछले 26 साल में इजराइल की लेबनान में सबसे बड़ी घुसपैठ है।
- इमरजेंसी मीटिंग बुलाने की मांग: फ्रांस ने लेबनान में इजराइल की बढ़ती सैन्य कार्रवाई को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की मांग की है।
- ट्रम्प बोले- ईरानी सेना के खिलाफ सख्त एक्शन नहीं: ट्रम्प ने कहा है कि अमेरिका ने ईरानी सेना पर उतनी सख्त कार्रवाई नहीं की, जितनी वह दूसरे देशों की सेनाओं के खिलाफ करता रहा है।
- ईरान को अमेरिका पर भरोसा नहीं: ईरान ने कहा है कि जब तक यह भरोसा नहीं हो जाता कि उसके अधिकार पूरी तरह सुरक्षित हैं, तब तक अमेरिका के साथ किसी भी समझौते को मंजूरी नहीं दी जाएगी।
- अमेरिका ने ईरान जा रहे जहाज को रोका: अमेरिका ने ईरान की ओर जा रहे एक और मालवाहक जहाज को रोक दिया। 17 अप्रैल से अब तक अमेरिका 6 जहाजों को ईरान जाने से रोक चुका है।
ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
लाइव अपडेट्स
3 मिनट पहले
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हिजबुल्लाह का दावा- दक्षिणी लेबनान में इजराइली ड्रोन गिराया
हिजबुल्लाह ने दावा किया है कि उसने दक्षिणी लेबनान के पश्चिमी इलाके में इजराइल के हर्मीस 450 ड्रोन को मार गिराया है।
हर्मीस 450 इजराइल का निगरानी और हमले में इस्तेमाल होने वाला प्रमुख ड्रोन माना जाता है। हालांकि, इजराइली सेना की तरफ से अभी इस दावे पर कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।
हिजबुल्लाह ने यह भी दावा किया है कि उसके लड़ाकों ने दक्षिणी लेबनान के योहमोर अल-शकीफ कस्बे के पूर्वी बाहरी इलाके में मौजूद इजराइली सैनिकों पर बड़ी संख्या में रॉकेट और तोप के गोले दागे।
संगठन के मुताबिक, यह हमला स्थानीय समयानुसार रात 1 बजे किया गया।
22 मिनट पहले
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ईरान-अमेरिका के बीच 4 मुद्दों पर बातचीत हो रही
ईरानी संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा समिति के सदस्य इस्माइल कौसरी ने कहा कि ईरान, अमेरिका के साथ फिलहाल चार प्रमुख मुद्दों पर बातचीत कर रहा है।
इनमें शामिल हैं-
1. भविष्य में फिर से युद्ध न होने की गारंटी
2. युद्ध से हुए नुकसान का मुआवजा
3. अमेरिकी फोर्स की होर्मुज से वापसी
4. ईरान पर लगाए गए नौसैनिक प्रतिबंधों को हटाना
कौसरी ने यह भी दावा किया कि दुनिया के कई देशों ने होर्मुज पर ईरान के कंट्रोल को स्वीकार कर लिया है। हालांकि युद्ध खत्म करने को लेकर अमेरिका से किसी ठोस नतीजे की उम्मीद नहीं है।
कौसरी ने यह भी दावा किया कि परमाणु कार्यक्रम का मुद्दा अब अमेरिका के साथ चल रही बातचीत के एजेंडे से हटा दिया गया है।

24 मिनट पहले
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फ्रांस ने संयुक्त राष्ट्र में इमरजेंसी मीटिंग बुलाने की मांग की
फ्रांस ने लेबनान में इजराइल की बढ़ती सैन्य कार्रवाई को लेकर संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की आपात बैठक बुलाने की मांग की है। यह मांग तब की गई जब इजराइली सेना ने दक्षिणी लेबनान के रणनीतिक ब्यूफोर्ट किले पर कब्जा कर लिया।
फ्रांस के विदेश मंत्री जां-नोएल बारो ने कहा कि फ्रांस इजराइल के आत्मरक्षा के अधिकार को मानता है, लेकिन लेबनान के भीतर लगातार सैन्य अभियान चलाना और वहां और गहराई तक कब्जा बढ़ाना उचित नहीं है। उनके मुताबिक, मौजूदा हालात क्षेत्र में तनाव को और बढ़ा सकते हैं।
फ्रांस का कहना है कि इजराइल और हिजबुल्लाह के बीच संघर्ष को और फैलने से रोकना जरूरी है। इसी वजह से उसने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद से इस मुद्दे पर तत्काल चर्चा करने की मांग की है।
ब्यूफोर्ट किले पर कब्जे के बाद इजराइल ने दक्षिणी लेबनान के बड़े इलाके में लोगों को घर खाली करने का आदेश भी दिया है। फ्रांस को आशंका है कि इससे मानवीय संकट और गहरा सकता है, साथ ही दोनों देशों के बीच संघर्ष और बढ़ सकता है।
जबलपुर में महिला जेल प्रहरी नौकरी छोड़ने को मजबूर: पीड़िता बोली- पीछा कर मानसिक प्रताड़ना दी जा रही, 2 साल पहले विवाद का मामला एनएचआरसी तक पहुंचा – Jabalpur News
जबलपुर के पाटन सब जेल में पदस्थ एक महिला जेल प्रहरी कथित प्रताड़ना से इस कदर परेशान हो चुकी है कि उसने नौकरी छोड़ने तक का मन बना लिया है। महिला जेल प्रहरी ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों को पत्र लिखकर मानसिक रूप से प्रताड़ित किए जाने की शिकायत की है। उसका आरोप है कि ड्यूटी के बाद बाजार जाने पर भी उसका पीछा किया जाता है। साल 2024 से शुरू हुआ यह विवाद अब तक सुलझ नहीं पाया है। हालांकि जेल प्रशासन का कहना है कि विभाग पूरी तरह महिला कर्मचारी के साथ खड़ा है और मामले की जानकारी उच्च अधिकारियों सहित एडीजे को भी दी गई है। 2024 की घटना से शुरू हुआ पूरा विवाद जानकारी के अनुसार जबलपुर से करीब 30 किलोमीटर दूर स्थित पाटन सब जेल में पदस्थ महिला जेल प्रहरी रचना ने शिकायत में बताया है कि साल 2024 में सौरभ व्यास नाम का व्यक्ति जेल पहुंचा था और बिना अनुमति सीधे मुलाकात कक्ष की ओर जाने लगा। रचना ने जब उससे मिलने की अनुमति और पहचान संबंधी दस्तावेज पूछे, तो इसी बात को लेकर विवाद शुरू हो गया। महिला प्रहरी का आरोप है कि इसके बाद से उसे लगातार परेशान किया जाने लगा। महिला जेल प्रहरी को धमकी- तुम्हारी वर्दी उतरवा दूंगा पाटन जेल में सहायक जेल अधीक्षक हेमेंद्र बागरी के मुताबिक रचना की नियुक्ति साल 2018 में महिला जेल प्रहरी के पद पर हुई थी और सब कुछ सामान्य चल रहा था। लेकिन 2024 से सौरभ व्यास द्वारा उसे परेशान किया जाने लगा। मामले की लिखित शिकायत पाटन थाने में की गई थी, लेकिन कार्रवाई नहीं होने पर मानव अधिकार आयोग को पत्र लिखा गया। इसके बाद 17 जनवरी 2026 को एफआईआर दर्ज हुई, हालांकि पुलिस ने थाने से ही आरोपी को जमानत दे दी। महिला जेल प्रहरी ने शिकायत में कहा है कि उसका लगातार पीछा किया जा रहा है और धमकियां दी जा रही हैं। उसे कहा जाता है कि “तुम्हारी हिम्मत कैसे हुई मुझे जेल में रोकने की, तुम्हारी वर्दी उतरवा दूंगा।” महिला कर्मचारी का आरोप है कि सौरभ अपने साथियों के साथ उसका पीछा करता है और अधिकारियों से लगातार शिकायतें कर मानसिक दबाव बनाने की कोशिश कर रहा है। समझौते का दबाव बनाने का आरोप महिला प्रहरी ने आरोप लगाया है कि मामला कोर्ट में पहुंचने के बावजूद उस पर राजीनामा करने का दबाव बनाया जा रहा है। उसका कहना है कि लगातार तनाव और दबाव के कारण उसकी मानसिक स्थिति प्रभावित हो रही है। इतना ही नहीं, वह अपनी प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी भी ठीक से नहीं कर पा रही है। पुलिस के साथ विभागीय जांच जारी सब जेलर हेमेंद्र बागरी का कहना है कि मामला जांच में है और पुलिस के साथ विभागीय स्तर पर भी जांच की जा रही है। उन्होंने बताया कि सौरभ व्यास पेशे से अधिवक्ता हैं और दो साल पहले बिना आवश्यक दस्तावेज के जेल परिसर में घूम रहे थे, जिस पर महिला प्रहरी ने आपत्ति जताई थी। इसी बात से नाराज होकर वह लगातार उसे परेशान कर रहे हैं। बागरी के मुताबिक महिला जेल प्रहरी सरकारी आवास में अकेले रहती है और लगातार धमकियों व पीछा किए जाने से मानसिक रूप से परेशान हो चुकी है। कई बार उसने नौकरी छोड़ने की बात भी कही है। उन्होंने बताया कि हाल ही में जेलर पद की परीक्षा भी प्रस्तावित है, लेकिन मानसिक तनाव के कारण वह पढ़ाई तक नहीं कर पा रही है। सभी आरोप निराधार, सबूत देना चाहिए वहीं मामले में सौरभ व्यास का कहना है कि उन्होंने जेल में कथित अनियमितताओं की शिकायत की थी और इसी कारण उनके खिलाफ झूठी एफआईआर दर्ज करवाई गई। उनका कहना है कि उन पर लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं। सौरभ व्यास ने यह भी कहा कि महिला जेल प्रहरी का पीछा करने के आरोप भी गलत हैं और यदि इस संबंध में कोई सबूत हैं तो उन्हें पुलिस या संबंधित अधिकारियों के सामने पेश किया जाना चाहिए। बंदी की मां से शिकायत करवाने का आरोप जेल प्रशासन ने एक अन्य मामले का भी उल्लेख किया है। 21 मई को जेल में बंद सौरभ पिता राजू नामक बंदी ने बैरक में लोहे की रॉड से सिर टकराकर खुद को घायल कर लिया था। अगले दिन उसकी मां ने पाटन पहुंचकर आरोप लगाया कि जेल में उसके बेटे के साथ मारपीट की गई है। जांच में सामने आया कि बंदी ने खुद अपनी मां को ऐसा कहने के लिए कहा था। सब जेलर के मुताबिक बंदी को बाहर से मनचाही वस्तुएं नहीं मिल पाने के कारण उसने दबाव बनाने के लिए यह कदम उठाया था। मामले की जांच एडीजे स्तर पर भी हुई, जिसमें स्पष्ट हुआ कि बंदी ने खुद को चोट पहुंचाई थी। बाद में कुछ लोगों ने इस मामले को अलग रूप देकर जेल विभाग पर झूठे आरोप लगाए।
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भास्कर अपडेट्स: बंगाल में आज मंत्रिमंडल विस्तार, 35 नए मंत्री शपथ लेंगे
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1 घंटे पहले
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पश्चिम बंगाल में भाजपा की पहली सरकार बनने के तीन हफ्ते बाद, सोमवार सुबह 11 बजे राज्य 35 नए मंत्री बनेंगे। मुख्यमंत्री ने सोशल मीडिया पर लिखा कि इस समारोह में कम से कम 35 विधायक मंत्री पद की शपथ लेंगे, जिन्हें राज्यपाल आरएन रवि लोक भवन में पद और गोपनीयता की शपथ दिलाएंगे।
सूत्रों के मुताबिक, इस नए कैबिनेट में भाजपा के कई बड़े और प्रमुख चेहरों को शामिल किए जाने की उम्मीद है। मंत्रियों की इस सूची में पूर्व टीएमसी नेता अर्जुन सिंह, क्रिकेटर से नेता बने अशोक डिंडा, पूर्व राज्यसभा सांसद स्वपन दासगुप्ता और जानी-मानी अभिनेत्री व भाजपा नेता रूपा गांगुली जैसे बड़े नाम शामिल हो सकते हैं
सिद्धारमैया के बेटे बोले- अगली कैबिनेट में जगह मिलने की उम्मीद है

कांग्रेस एमएलसी और कर्नाटक के पूर्व सीएम सिद्धारमैया के बेटे यतींद्र सिद्धारमैया ने रविवार को कहा कि उन्हें कर्नाटक की अगली कैबिनेट में जगह मिलने की उम्मीद है और पार्टी आलाकमान ने उन्हें मंत्री पद का आश्वासन दिया है।
डिप्टी सीएम पद की रेस में शामिल होने के सवाल पर यतींद्र ने कहा कि न तो उन्होंने और न ही उनके समर्थकों ने ऐसी कोई मांग या प्रस्ताव आलाकमान के सामने रखा है।
ओडिशा में दो महिलाओं ने सीएम आवास के बाहर जहर खाने की कोशिश की, खतरे से बाहर

ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी के आवास के पास रविवार को तीन महिलाओं ने प्रदर्शन किया, जिनमें से दो महिलाओं ने खोरधा जिले में एक भूमि विवाद को सुलझाने में हो रही देरी से परेशान होकर जहर खाकर जान देने की कोशिश की।
भुवनेश्वर के डीसीपी जगमोहन मीणा ने बताया कि यह घटना लोअर पीएमजी में धरना प्रदर्शन के लिए तय की गई जगह के पास हुई। ये महिलाएं खोरधा के बानपुर में चल रहे जमीन विवाद के निपटारे की मांग कर रही थीं। उन्हें तुरंत कैपिटल अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक इलाज के बाद डॉक्टरों ने बताया कि फिलहाल दोनों महिलाएं खतरे से बाहर हैं।
सुप्रीम कोर्ट बोला- नाबालिगों की तस्करी पर अब पॉक्सो की धाराओं के तहत भी मुकदमा दर्ज होगा

यौन शोषण के लिए नाबालिगों की तस्करी पर अब पॉक्सो की धाराओं के तहत भी मुकदमा दर्ज होगा। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ‘कमर्शियल सेक्सुअल एक्सप्लॉइटेशन’ के लिए बच्चों की तस्करी के मामलों में सख्त पॉक्सो एक्ट के तहत भी केस बन सकता है।
जस्टिस जेबी पारदीवाला और जस्टिस आर महादेवन की बेंच ने यौन कार्यकर्ताओं से जुड़ी चिंताओं को कम करने के लिए कई निर्देश भी दिए। कोर्ट ने साफ किया कि तस्करी के मामलों में फोकस पीड़ित की सहमति पर नहीं, बल्कि आरोपी के तरीके और इरादे पर होना चाहिए।
चीन के 1500 स्टील्थ फाइटर्स को मटियामेट करेगा भारत का AMCA, आ गई पूरी टाइमलाइन
नई दिल्ली. भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने रविवार सुबह चंडीगढ़ के पास पंचकूला (हरियाणा) के रामगढ़ में स्थित अपनी बेहद संवेदनशील विंग ‘टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी’ (TBRL) में एक बेहद शक्तिशाली और विनाशकारी ‘हाई-कैलिबर बम’ का सफल परीक्षण किया है. वायुसेना के आला अधिकारियों की सीधी मौजूदगी में किए गए इस महापरीक्षण की गूंज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई. यह बम इतना घातक था कि परीक्षण से पहले ही प्रशासन ने आस-पास के गांवों में हाई अलर्ट जारी कर लोगों को घरों के भीतर रहने की सख्त हिदायत दी थी. अधिकारियों के मुताबिक, कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत किया गया यह ट्रायल पूरी तरह सटीक और सफल रहा, जो भविष्य में भारतीय वायुसेना (IAF) के लड़ाकू विमानों और मिसाइलों को अचूक और तबाही मचाने वाली मारक क्षमता प्रदान करेगा.
यह धमाका DRDO की आर्मामेंट्स क्लस्टर के तहत आने वाली प्रतिष्ठित प्रयोगशाला TBRL में हुआ, जहां भारत के नए ‘हाई-कैलिबर’ बम की क्षमताओं को परखा गया. हालांकि TBRL में पहले भी कई विस्फोटक परीक्षण होते रहे हैं, लेकिन इस बार का धमाका बेहद खास और विशाल था, क्योंकि इसकी आवाज कई किलोमीटर दूर तक रिकॉर्ड की गई.
एयरफोर्स के अफसरों की मौजूदगी के मायने
इस परीक्षण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति रही. इससे साफ संकेत मिलते हैं कि यह हाई-कैलिबर बम सीधे तौर पर वायुसेना के लड़ाकू विमानों से गिराए जाने वाले युद्धक हथियारों या फिर IAF की अत्याधुनिक मिसाइलों के वॉरहेड का हिस्सा बनने जा रहा है. यह परीक्षण चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर जारी तनाव के बीच भारत की हवाई संप्रभुता को और मजबूत करेगा.
1.5 किलोमीटर ऊंचाई तक उड़े टुकड़े
बम की संहारक क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि परीक्षण से पहले TBRL ने चेतावनी जारी की थी कि ब्लास्ट के बाद बम के मलबे और टुकड़े हवा में 1.5 किलोमीटर की ऊंचाई तक उड़ सकते हैं और धमाके की जगह से 2 किलोमीटर के दायरे में फैल सकते हैं. इसी वजह से पंचकूला प्रशासन ने भानू और बिल्ला जैसे नजदीकी गांवों में ‘कफ्र्यू’ जैसी स्थिति बनाते हुए लोगों को सुबह के समय घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी थी. सुरक्षा के लिहाज से पूरे इलाके को विशेष सर्विलांस (निगरानी) पर रखा गया था.
क्या है TBRL और इसकी ताकत?
टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी (TBRL) भारत के मिसाइल और परमाणु हथियारों के विकास कार्यक्रमों की रीढ़ मानी जाती है. यह लैब मुख्य रूप से उच्च विस्फोटकों, डेटोनेटर, शॉक वेव्स और हथियारों के अंतिम विनाशकारी प्रभाव का आकलन करने के लिए डेटा तैयार करती है. सिर्फ सेना ही नहीं बल्कि अंतरिक्ष एजेंसी इसरो (ISRO) के महात्वाकांक्षी गगनयान मिशन के लिए विशेष पैराशूट और उपकरणों का मूल्यांकन भी इसी लैब में किया जा रहा है. इसके अलावा, यह लैब अर्धसैनिक बलों और पुलिस के लिए नॉन-लेथल बुलेट्स (गैर-घातक गोलियां), लिक्विड आर्मर और हैंड ग्रेनेड भी विकसित करती है.
परीक्षण के रणनीतिक प्रभाव
1. स्वदेशी मारक क्षमता में आत्मनिर्भरता: वायुसेना की मौजूदगी यह साबित करती है कि भारत अब विदेशी वेंडर पर निर्भर रहने के बजाय अपने लड़ाकू विमानों (जैसे राफेल, सुखोई और तेजस) के लिए भारी वजन वाले ‘हाई-कैलिबर’ बम खुद बना रहा है. यह ‘मेक इन इंडिया’ के तहत वायुसेना को आत्मनिर्भर बनाएगा.
2. वॉरहेड टेक्नोलॉजी में महारत: TBRL का परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों से पुराना नाता है. इस सफल टेस्ट से यह स्पष्ट है कि भारत ने उन्नत विस्फोटक और शॉक वेव तकनीक पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है, जिससे आने वाले समय में हमारी मिसाइलों की मारक क्षमता और अधिक विनाशकारी हो जाएगी.
3. दोहरे उपयोग वाली तकनीक: यह लैब केवल भारी बम ही नहीं बनाती, बल्कि पुलिस और पैरामिलिट्री के लिए बुलेटप्रूफ जैकेट (लिक्विड आर्मर) और नॉन-लेथल बुलेट्स भी तैयार करती है. यानी रक्षा क्षेत्र का यह अनुसंधान देश की बाहरी सुरक्षा के साथ-साथ आंतरिक कानून व्यवस्था को भी आधुनिक बना रहा है.
सवाल-जवाब
टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी (TBRL) का मुख्य काम क्या है?
TBRL का मुख्य काम मिसाइलों के वॉरहेड और प्रोजेक्टाइल्स का मूल्यांकन करना, उच्च विस्फोटकों की टेस्टिंग करना और हथियारों से होने वाले अंतिम नुकसान (Terminal Effects) का डेटा तैयार करना है.
इस बम परीक्षण के दौरान हवाई सुरक्षा के क्या मायने हैं?
वायुसेना के अफसरों की मौजूदगी दर्शाती है कि यह बम भविष्य में फाइटर जेट्स से गिराए जाने वाले पारंपरिक बमों या फिर लॉन्ग-रेंज मिसाइलों के भीतर फिट होने वाले विस्फोटक का हिस्सा बनेगा.
धमाके की जगह से कितनी दूरी को संवेदनशील घोषित किया गया था?
सुरक्षा के दृष्टिकोण से परीक्षण स्थल के चारों ओर 2 किलोमीटर के पूरे रेडियस (दायरे) को अत्यंत संवेदनशील ज़ोन घोषित किया गया था.
सैन्य हथियारों के अलावा TBRL नागरिक या अर्धसैनिक बलों के लिए क्या बनाती है?
TBRL ने अर्धसैनिक बलों और पुलिस के लिए एडवांस्ड हैंड ग्रेनेड, लिक्विड आर्मर (बुलेटप्रूफ तकनीक), बाधाओं को उड़ाने वाले डिवाइस और भीड़ नियंत्रण के लिए गैर-घातक गोलियां विकसित की हैं.



