Saturday, June 27, 2026
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अवैध निर्माण पर LDA की सख्ती होगी और तेज: 50 जूनियर इंजीनियर भर्ती किए जाएंगे, आउटसोर्सिंग से होगी नियुक्ति – Lucknow News




लखनऊ में अवैध निर्माण के खिलाफ चल रहे अभियान को और धार देने के लिए लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) प्रवर्तन तंत्र को मजबूत करने जा रहा है। इसके तहत आउटसोर्सिंग के माध्यम से 50 जूनियर इंजीनियरों की भर्ती की जाएगी। इन अभियंताओं को आवश्यकता के अनुसार एलडीए के सातों प्रवर्तन जोनों में तैनात किया जाएगा, ताकि अवैध निर्माणों की निगरानी और कार्रवाई की रफ्तार बढ़ाई जा सके। शनिवार को एलडीए उपाध्यक्ष प्रथमेश कुमार ने अधिकारियों के साथ बैठक कर भर्ती का प्रस्ताव जल्द तैयार करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि राजधानी का लगातार विस्तार हो रहा है और नई कॉलोनियों व निर्माण गतिविधियों में तेजी आई है। ऐसे में प्रभावी निगरानी के लिए तकनीकी स्टाफ की संख्या बढ़ाना जरूरी हो गया है। उपाध्यक्ष ने अधिकारियों से कहा कि भर्ती से जुड़ी सभी औपचारिकताएं शीघ्र पूरी कर प्रस्ताव स्वीकृति के लिए प्रस्तुत किया जाए, ताकि नियुक्ति प्रक्रिया जल्द शुरू हो सके। उनका कहना है कि अतिरिक्त जूनियर इंजीनियरों की तैनाती से अवैध निर्माणों को शुरुआती स्तर पर ही चिन्हित कर रोका जा सकेगा। निरीक्षण और कार्रवाई होगी तेज एलडीए के मुताबिक नए जूनियर इंजीनियरों की तैनाती के बाद सातों प्रवर्तन जोनों की कार्यक्षमता बढ़ेगी। नियमित निरीक्षण, शिकायतों का त्वरित निस्तारण, अवैध निर्माणों की पहचान और सीलिंग व ध्वस्तीकरण जैसी प्रवर्तन कार्रवाइयों को अधिक प्रभावी ढंग से अंजाम दिया जा सकेगा। इससे शहर में अवैध निर्माण पर नियंत्रण की कवायद को और मजबूती मिलने की उम्मीद है।



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इंदौर के भावना नगर हत्याकांड में 6 दोषियों को उम्रकैद: लव मैरिज के बाद हुई थी हत्या; गवाह मुकरने के बावजूद दोषियों को मिली सजा – Indore News




8 साल पुराने चर्चित ऑनर किलिंग केस में इंदौर विशेष एससी/एसटी कोर्ट ने शनिवार को बड़ा फैसला सुनाते हुए 6 आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। कोर्ट सभी आरोपियों को हत्या और हत्या के प्रयास का दोषी पाते हुए कठोर दंड से दंडित किया। विशेष न्यायाधीश और अपर सत्र न्यायाधीश देवेंद्र प्रसाद मिश्र ने आरोपी अरुण भालसे, शिवराम भालसे, राहुल पंवार, सोनू दांगे, राजेश मोये और विशाल खेडेकर को धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और धारा 307 के तहत 7-7 वर्ष के सश्रम कारावास और अर्थदंड से दंडित किया है। बहन की लव मैरिज से नाराज था भाई प्रभारी उप संचालक अभियोजन राजेंद्र सिंह भदौरिया ने बताया कि भावना नगर निवासी रिंकी भालसे ने 2018 में तेजकरण भालसे से प्रेम विवाह किया था। इसी बात को लेकर रिंकी के परिजन नाराज थे। 26 जुलाई 2018 को आरोपियों ने तेजकरण को घर के नीचे बुलाया और बहन को भगाकर शादी करने की बात को लेकर विवाद किया। इसके बाद आरोपियों ने तेजकरण और उसके मित्र मोनू पर चाकुओं और लात-घूंसों से हमला कर दिया। हमले में गंभीर रूप से घायल तेजकरण को अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। वहीं मोनू गंभीर रूप से घायल हो गया था। फिर भी साबित हुआ अपराध मामले की सबसे महत्वपूर्ण बात यह रही कि मृतक की पत्नी रिंकी भालसे और घायल गवाह मोनूराव कोर्ट में अपने पूर्व बयानों से मुकर गए और अभियोजन का समर्थन नहीं किया। यहां तक कि घायल मोनू ने आरोपियों की पहचान करने से भी इनकार कर दिया। इसके बावजूद आरती भदौरिया (ADPO) ने अन्य प्रत्यक्षदर्शी गवाहों और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर प्रभावी पैरवी की। कोर्ट ने अन्य चश्मदीद गवाहों की गवाही को विश्वसनीय मानते हुए अभियोजन के तर्कों को स्वीकार किया और सभी आरोपियों को दोषी करार दिया। हत्या के साथ हत्या के प्रयास में भी सजा कोर्ट ने माना कि आरोपियों ने न केवल तेजकरण की हत्या की, बल्कि मोनू की भी हत्या करने का प्रयास किया था। इसी आधार पर आरोपियों को हत्या के साथ-साथ हत्या के प्रयास के अपराध में भी दोष सिद्ध हुआ।



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बक्सर के डुमरांव रेलवे स्टेशन पर बुजुर्ग की मौत: पुलिस बोली- गर्मी या हार्ट अटैक से डेथ की आशंका – Buxar News




बक्सर में डुमरांव रेलवे स्टेशन के निर्माणाधीन भवन के पास शनिवार दोपहर एक वृद्ध व्यक्ति की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। घटना की सूचना मिलने पर डुमरांव थाना पुलिस मौके पर पहुंची और जांच शुरू की। स्थानीय लोगों ने एक व्यक्ति को गड्ढे में अचेत अवस्था में देखा, जिसके बाद तत्काल पुलिस को सूचित किया गया। पुलिस ने शव को कब्जे में लिया। कचरा चुनने और प्लंबर का काम करते थे थानाध्यक्ष संजय कुमार सिन्हा के प्रयासों से कुछ ही घंटों में मृतक की पहचान हो गई। उनकी पहचान डुमरांव के गिरधारी गली निवासी हरेन्द्र चौधरी उर्फ हंटर (लगभग 60 वर्ष) के रूप में हुई, जो स्वर्गीय जनक चौधरी के पुत्र थे। वह कचरा चुनने और प्लंबर का काम करके अपना जीवन यापन करते थे। मृतक की पत्नी दुर्गावती देवी, बड़ी बेटी प्रीति कुमारी, और पुत्र प्रकाश कुमार (14 वर्ष) तथा अभिषेक कुमार (16 वर्ष) घटना की जानकारी मिलते ही मौके पर पहुंचे। प्राथमिक जांच में मृतक के शरीर पर किसी प्रकार के बाहरी चोट या जख्म के निशान नहीं पाए गए हैं। अत्यधिक गर्मी या हार्ट अटैक मौत का संभावित कारण पुलिस अत्यधिक गर्मी, अचानक तबीयत बिगड़ने या हार्ट अटैक को मौत का संभावित कारण मान रही है। हालांकि, मौत के वास्तविक कारणों का पता पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही चल पाएगा।



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दिल्ली के कोचिंग सेंटरों को एक महीने का अल्टीमेटम: सीएम रेखा गुप्ता बोलीं- सुरक्षा उपकरण न होने पर किए जाएंगे सील – New Delhi News




नई दिल्ली: राजधानी दिल्ली में पढ़ रहे लाखों छात्रों की सुरक्षा को लेकर दिल्ली सरकार ने बेहद सख्त रुख अपनाया है। दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने एक वीडियो संदेश जारी कर दिल्ली के सभी कोचिंग संस्थानों को सुरक्षा मानकों को दुरुस्त करने के लिए एक महीने का कड़ा समय दिया है। मुख्यमंत्री ने साफ चेतावनी दी है कि दिल्ली में चल रहे कोचिंग सेंटरों की संख्या चाहे 900 हो या 1000, सरकार को इस नंबर से मतलब नहीं है, बल्कि सबसे ज्यादा सरोकार बच्चों की जान और उनकी सुरक्षा से है। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन कोचिंग संस्थानों के पास फ़ायर ऑडिट नहीं है, आवश्यक सुरक्षा उपकरण नहीं हैं या जिनकी बिल्डिंग में सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम नहीं हैं, उन्हें नियमों का पालन न करने की स्थिति में तुरंत सील कर दिया जाएगा। हाईकोर्ट की सिफारिश पर लाया जाएगा सख्त कानून मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने यह भी घोषणा की कि दिल्ली हाईकोर्ट की समिति की सिफारिशों के आधार पर कोचिंग संस्थानों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए जल्द ही एक सख्त कानून लाया जाएगा। इसके साथ ही उन्होंने इस पूरी मुहिम में विद्यार्थियों से भी सहयोग की अपील की है। मुख्यमंत्री ने छात्रों से कहा है कि यदि उन्हें लगता है कि उनका कोचिंग संस्थान किसी भी स्थिति में सुरक्षित नहीं है, तो वे इसकी सूचना संदेश, ईमेल या फोन कॉल के माध्यम से सीधे सरकार तक पहुँचाएँ। उन्होंने भरोसा दिलाया कि छात्रों से मिली जानकारी पर प्रशासन द्वारा सख्त से सख्त एक्शन लिया जाएगा ताकि दिल्ली में पढ़ रहे लाखों बच्चों की जिंदगियों को पूरी तरह सुरक्षित किया जा सके।



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आयरन-कैल्शियम से भरपूर, जानें टेस्टी और हेल्दी रागी इडली की रेसिपी


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Ragi Idli Recipe: आमतौर पर इडली बनाने के लिए चावल का इस्तेमाल किया जाता है. लेकिन यदि टेस्ट के साथ हेल्दी इडली आप खाना चाहते हैं, तो राइस की जगह रागी यूज करें. यहां आप रागी इडली बनाने की विधि और फायदों के बारे में जान सकते हैं.

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आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में हेल्दी खाना खाना आसान नहीं रह गया है. ऐसे में रागी एक ऐसा सुपरफूड है, जो स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी पूरा ध्यान रखता है. रागी में कैल्शियम, आयरन और फाइबर भरपूर मात्रा में पाया जाता है. ऐसे में ये वजन कम करने में मदद करता है और डायबिटीज के मरीजों के लिए भी अच्छा विकल्प माना जाता है. अगर आप पौष्टिक और हल्का नाश्ता चाहते हैं, तो रागी इडली और गर्मागर्म सांभर बेहतरीन कॉम्बिनेशन हो सकता है.

रागी प्राकृतिक रूप से ग्लूटेन-फ्री होती है, इसलिए यह पाचन के लिए अच्छी मानी जाती है. इसमें दूध से भी अधिक कैल्शियम पाया जाता है, जो बच्चों और बुजुर्गों की हड्डियों को मजबूत बनाने में मदद करता है. इसके अलावा रागी में मौजूद फाइबर पेट को लंबे समय तक भरा रखता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती और ब्लड शुगर भी तेजी से नहीं बढ़ता. यही वजह है कि रागी इडली हेल्दी नाश्ते के लिए एक बेहतरीन विकल्प मानी जाती है.

रागी इडली बनाने की आसान विधि

सामाग्री
– 1 कप रागी का आटा
– 1 कप इडली चावल
– आधा कप उड़द दाल
– आधा चम्मच मेथी दाना
– स्वादानुसार नमक लें.

विधि

  • सबसे पहले उड़द दाल और मेथी दाने को एक बर्तन में तथा चावल को अलग बर्तन में 4 से 5 घंटे के लिए भिगो दें. इसके बाद दाल को मुलायम पीस लें और चावल को थोड़ा दरदरा पीसें. अब दोनों मिश्रण में रागी का आटा और नमक मिलाकर गाढ़ा घोल तैयार करें.
  • इस बैटर को ढककर 8 से 10 घंटे या पूरी रात गर्म जगह पर रखें ताकि यह अच्छी तरह फूल जाए. इसके बाद इडली स्टैंड में हल्का तेल लगाकर बैटर भरें और 10 से 12 मिनट तक भाप में पकाएं. नरम और स्वादिष्ट रागी इडली तैयार है.

सांभर की रेसिपी
सामाग्री
सांभर के लिए आधा कप अरहर दाल, सहजन, कद्दू, गाजर, बैंगन और प्याज जैसी सब्जियां लें. साथ ही इमली का गूदा, सांभर मसाला, राई, करी पत्ता, सूखी लाल मिर्च और हींग की जरूरत होगी.

विधि
सबसे पहले दाल को हल्दी और नमक के साथ प्रेशर कुकर में अच्छी तरह पका लें. दूसरी तरफ सब्जियों को थोड़ा पानी और नमक डालकर नरम होने तक पकाएं. अब इसमें पकी हुई दाल, इमली का गूदा और सांभर मसाला डालकर 5 से 7 मिनट तक उबालें. आखिर में राई, हींग, करी पत्ता और लाल मिर्च का तड़का लगाकर सांभर तैयार करें.

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शारदा सिंहSenior Sub Editor

शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…और पढ़ें

Disclaimer: इस खबर में दी गई दवा/औषधि और स्वास्थ्य से जुड़ी सलाह, एक्सपर्ट्स से की गई बातचीत के आधार पर है. यह सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए डॉक्टर्स से परामर्श के बाद ही कोई चीज उपयोग करें. Local-18 किसी भी उपयोग से होने वाले नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं होगा.



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IAS अग्रवाल-वही आगे बढ़ेंगे जो सीखना कभी नहीं छोड़ेंगे: दैनिक भास्कर प्रतिभा सम्मान समारोह में सपनों को मिला सम्मान, मेहनत को मिली पहचान – Udaipur News




शिक्षा, प्रतिभा और उज्ज्वल भविष्य के सपनों का उत्सव शनिवार को उस समय देखने को मिला, जब दैनिक भास्कर प्रतिभा सम्मान समारोह-2026 में शहर और आसपास के क्षेत्रों के मेधावी विद्यार्थियों का सम्मान किया गया। समारोह में दसवीं और बारहवीं बोर्ड परीक्षाओं में 80 प्रतिशत या उससे अधिक अंक प्राप्त करने वाले विद्यार्थियों को प्रशस्ति-पत्र और स्मृति-चिह्न देकर सम्मानित किया गया। विद्यार्थियों के सम्मान के साथ अशोका ग्रीन का सभागार तालियों की गूंज से भर उठा, जबकि अभिभावकों के चेहरों पर गर्व और खुशी साफ झलक रही थी। कार्यक्रम का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन और गणेश वंदना के साथ हुआ। समारोह में उदयपुर के जिला कलक्टर गौरव अग्रवाल, प्रशिक्षु आईएएस मणिमाला ने छात्र-छात्राओं को संबोधित कर मोटिवेट किया और उनको अपने जीवन के संस्मरण भी सुनाए और जीवन में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित किया। समारोह में पेसिफिक यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. हेमंत कोठारी, बडाला क्लासेस के निदेशक राहुल बडाला, टेक्नो इंडिया एनजेआर इंस्टीट्यूट के निदेशक आर.एस. व्यास, समाजसेवी भीम सिंह चुंडावत और डी.एल. पाटीदार सहित अनेक गणमान्य अतिथि मौजूद रहे। इससे पहले दैनिक भास्कर यूनिट हेड प्रशांत कुकरेती ने सभी का स्वागत किया। अग्रवाल-सकारात्मक सोच रखते हुए रुचि के अनुरूप आगे बढ़े
जिला कलक्टर गौरव अग्रवाल ने विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि प्रतिभा ईश्वर की देन हो सकती है, लेकिन उसे सफलता में बदलने के लिए अनुशासन, निरंतर मेहनत और सही दिशा में प्रयास जरूरी हैं। उन्होंने अपने अनुभव साझा करते हुए विद्यार्थियों से समय का सदुपयोग करने, सकारात्मक सोच रखने और अपनी रुचि के अनुरूप करियर चुनने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि बदलते समय में वही युवा आगे बढ़ेंगे जो सीखना कभी नहीं छोड़ेंगे। मणिमाला-स्टूडेंट बड़े सपने देखे.. प्रशिक्षु आईएएस मणिमाला ने कहा कि वे एक सामान्य परिवार से हैं और अपने परिवार की पहली आईएएस अधिकारी बनी हैं। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के विश्वास और मार्गदर्शन को देते हुए विद्यार्थियों से बड़े सपने देखने, छोटे लक्ष्य तय कर लगातार आगे बढ़ने और हर चुनौती का मुस्कुराकर सामना करने की सीख दी। उन्होंने विशेष रूप से बालिकाओं को आत्मनिर्भर बनने और राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाने का संदेश दिया। आत्मविश्वास के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़े
निःशुल्क करियर काउंसलिंग सत्र भी समारोह में विद्यार्थियों को केवल सम्मानित ही नहीं किया गया, बल्कि उन्हें भविष्य की दिशा भी दिखाई गई। आयोजित निःशुल्क करियर काउंसलिंग सत्र में विशेषज्ञों ने उच्च शिक्षा, प्रतियोगी परीक्षाओं, नई शिक्षा नीति, कौशल आधारित करियर, स्टार्टअप, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, डिजिटल तकनीक और देश-विदेश में उपलब्ध अवसरों की विस्तृत जानकारी दी। आयोजन का संचालन माय एफएम के आरजे काव्य ने किया। कार्यक्रम में पेसिफिक मेडिकल कॉलेज एंड हॉस्पिटल एवं पेसिफिक यूनिवर्सिटी प्रायोजक रहे, जबकि बडाला क्लासेस, टेक्नो इंडिया एनजेआर इंस्टीट्यूट, वीसीडी कॉलेज ऑफ डिजाइनिंग, ए टू जेड यूनिफॉर्म, वत्स एकेडमी और अन्य सहयोगी संस्थानों ने सहभागिता निभाई। समारोह से जुड़ी तस्वीरें देखे….



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‘तब्बू से मुझे बहुत जलन हुई’, नेशनल अवॉर्ड हारने पर जब हीरोइन को आया गुस्सा


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साल 1997 में जब तब्बू ने फिल्म ‘माचिस’ के लिए बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड जीता था, तब ज्यादातर लोग उनकी वाहवाही कर रहे थे, मगर एक हीरोइन को उनकी जीत से बहुत घुस्सा आया और जलन हुई. दरअसल, एक्ट्रेस भी फिल्म ‘दायरा’ के लिए नॉमिनेट हुई थीं. उन्हें लगता था कि तब्बू को यह अवॉर्ड सिर्फ शबाना आजमी की भतीजी होने की वजह से मिला है. हालांकि, जब एक्ट्रेस ने खुद ‘माचिस’ देखी, तो तब्बू की शानदार परफॉर्मेंस देखकर उनका गुस्सा शांत हो गया. वे उनकी मुरीद हो गईं.

नई दिल्ली: फिल्मी सितारों के बीच एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ हमेशा से रही है. 90 के दशक की मशहूर हीरोइन ने अब तब्बू से नेशनल अवॉर्ड हारने पर अपने जज्बात बयां किए. एक्ट्रेस सोनाली कुलकर्णी ने बताया कि जब 1997 में फिल्म ‘माचिस’ के लिए तब्बू को बेस्ट एक्ट्रेस का नेशनल अवॉर्ड मिला था, तो उन्हें काफी गुस्सा आया था. उन्हें लगता था कि यह अवॉर्ड उन्हें फिल्म ‘दायरा’ के लिए मिलना चाहिए, लेकिन अवॉर्ड तब्बू के खाते में चला गया. (फोटो साभार: IMDb)

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सोनाली कुलकर्णी ने पुरानी यादों को ताजा करते हुए बताया कि उस वक्त वो खुद को रोक नहीं पाई थीं और उनके मन में तब्बू के लिए बहुत गुस्सा और जलन पैदा हो गई थी. उन्होंने एक मशहूर टॉक शो में बात करते हुए माना कि करियर के उस दौर में उन्हें हर उस इंसान से जलन होने लगती थी, जो कोई न कोई अवॉर्ड अपने नाम कर रहा होता था.
(फोटो साभार: Instagram@sonalikul)

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सोनाली ने हंसते हुए एक और मजेदार बात बताई. उन्होंने कहा कि उस समय हारने के बाद वो खुद को तसल्ली देने के लिए अजीब-अजीब बहाने ढूंढती थीं. उन्हें लगता था कि तब्बू को यह अवॉर्ड सिर्फ इसलिए मिला क्योंकि वह बॉलीवुड की दिग्गज एक्ट्रेस शबाना आजमी की भतीजी हैं और उनका ताल्लुक फिल्म इंडस्ट्री के एक बड़े परिवार से है.
(फोटो साभार: IMDb)

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सोनाली ने आगे कहा कि उस दौर में उनकी फिल्में हर साल नेशनल अवॉर्ड के फाइनल राउंड तक तो पहुंचती थीं, पर आखिरी वक्त पर उनके हाथ खाली रह जाते थे. उस समय उन्हें दूसरे छोटे-मोटे अवॉर्ड्स तो मिल रहे थे, लेकिन नेशनल अवॉर्ड जीतने की सनक उन पर इस कदर सवार थी कि जो चीज नहीं मिल रही थी, बस वही चाहिए थी. (फोटो साभार: Instagram@sonalikul)

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तब्बू से मची जलन और गुस्से को शांत करने के लिए सोनाली ने आखिरकार एक तरकीब निकाली. उन्होंने तय किया कि वो तब्बू की फिल्म ‘माचिस’ खुद अपनी आंखों से देखेंगी, ताकि पता चले कि ऐसा क्या खास था. जब उन्होंने फिल्म देखी, तो उनका गुस्सा गायब हो गया और उन्हें अपनी इनसिक्योरिटी से बाहर निकलने का रास्ता मिल गया. (फोटो साभार: Instagram@sonalikul)

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फिल्म देखने के बाद सोनाली के विचार पूरी तरह बदल गए. उन्होंने माना कि ‘माचिस’ में तब्बू की एक्टिंग इतनी कमाल की और जबरदस्त थी कि वो खुद उनकी मुरीद हो गईं. उन्होंने तब्बू की ‘अस्तित्व’ और ‘चांदनी बार’ जैसी कई फिल्में देखीं और हर बार उन्हें तब्बू की परफॉर्मेंस से प्यार हो गया.
(फोटो साभार: IMDb)

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सोनाली ने अपनी मैच्योरिटी पर बात करते हुए कहा कि करियर की शुरुआत में हर कोई अपनी भावनाओं को बहुत आक्रामक तरीके से दिखाता है, क्योंकि तब सहजता की समझ नहीं होती, पर समय के साथ उन्हें थिएटर और फिल्म एक्टिंग का अंतर समझ आया और अब उन्हें इंडस्ट्री या किसी और से कोई शिकायत नहीं है.
(फोटो साभार: IMDb)

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सोनाली वह मेन अवॉर्ड हार गईं, लेकिन उनकी काबिलियत की वजह से साल 2002 में आई मराठी शॉर्ट फिल्म ‘चैत्र’ के लिए उन्हें नेशनल फिल्म अवॉर्ड्स में स्पेशल जूरी अवॉर्ड से नवाजा गया. सोनाली ने आखिरी में मुस्कुराते हुए कहा कि अब उनकी इच्छाएं बदल चुकी हैं और वो भविष्य में तब्बू के साथ स्क्रीन शेयर करने की उम्मीद रखती हैं.
(फोटो साभार: IMDb)

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किसी को नहीं था भरोसा,तब राकेश झुनझुनवाला ने टाइटन पर लगाया दांव, रचा इतिहास


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शेयर बाजार में बड़ी कमाई सिर्फ सही कंपनी चुनने से नहीं, बल्कि सही समय पर भरोसा करने से होती है. दिग्गज निवेशक राकेश झुनझुनवाला ने यही करके दिखाया था, जब उन्होंने टाइटन में उस समय निवेश किया, जब ज्यादातर निवेशक उससे दूरी बना रहे थे. आज यही निवेश भारतीय शेयर बाजार की सबसे बड़ी सफलता की कहानियों में गिना जाता है.

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टाइटन में राकेश झुनझुनवाला ने क्यों किया था बड़ा निवेश? रामदेव अग्रवाल ने बताया सफलता का राज. (Representative Image: AI)

नई दिल्ली. भारत के मशहूर निवेशक राकेश झुनझुनवाला का टाइटन में किया गया निवेश आज भी निवेशकों के लिए प्रेरणा का उदाहरण माना जाता है. उस दौर में टाइटन को लेकर बाजार में ज्यादा उत्साह नहीं था. कंपनी कमजोर मांग, सोने की बढ़ती कीमतों, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और कुछ आंतरिक चुनौतियों से जूझ रही थी. इसके चलते शेयर की कीमत करीब 30 से 35 रुपये के आसपास थी और ज्यादातर निवेशक इसे आकर्षक विकल्प नहीं मान रहे थे. लेकिन झुनझुनवाला ने भीड़ से अलग सोच दिखाई और इसी दौर में कंपनी के शेयर खरीदने शुरू कर दिए. उनका यह फैसला आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी निवेश सफलता साबित हुआ.

क्या थी झुनझुनवाला की सबसे बड़ी ताकत
मोतीलाल ओसवाल ग्रुप के चेयरमैन रामदेव अग्रवाल ने एक पॉडकास्ट में बताया था कि राकेश झुनझुनवाला में सस्ते लेकिन मजबूत कारोबार पहचानने की अनोखी क्षमता थी. उनके अनुसार, यह सिर्फ पढ़ाई या अनुभव का परिणाम नहीं था, बल्कि बाजार को समझने की एक स्वाभाविक प्रतिभा थी. जब उन्हें किसी कंपनी में भविष्य दिखाई देता था, तो वह पूरे विश्वास के साथ निवेश करते थे. टाइटन के मामले में भी उन्होंने कंपनी की तत्काल मुश्किलों के बजाय उसके मजबूत ब्रांड, अनुभवी प्रबंधन और भविष्य की संभावनाओं को देखा. खासतौर पर ज्वेलरी ब्रांड तनिष्क के जरिए कंपनी के तेजी से आगे बढ़ने की संभावना ने उन्हें सबसे ज्यादा प्रभावित किया.

धैर्य ने बनाया निवेश को करोड़ों का खजाना
टाइटन में शुरुआती दौर में कई लोगों ने निवेश किया था, लेकिन लंबे समय तक टिके रहना हर किसी के बस की बात नहीं थी. राकेश झुनझुनवाला ने दो दशक से भी ज्यादा समय तक अपने निवेश पर भरोसा बनाए रखा. इसी धैर्य का नतीजा यह रहा कि 31 मार्च 2026 तक झुनझुनवाला परिवार के पास Titan में करीब 5 प्रतिशत हिस्सेदारी थी, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 20,250 करोड़ रुपये पहुंच गई. यह दिखाता है कि शेयर बाजार में केवल सही कंपनी चुनना ही काफी नहीं होता, बल्कि लंबे समय तक निवेश बनाए रखना भी उतना ही जरूरी होता है.

टाइटन ने कारोबार और मुनाफे दोनों में दिखाई शानदार रफ्तार
टाइटन ने सिर्फ शेयर बाजार में ही नहीं, बल्कि अपने कारोबार में भी लगातार मजबूत प्रदर्शन किया है. वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी की कुल आय में 33 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह बढ़कर 76,078 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. वहीं, कंपनी का शुद्ध लाभ 52 प्रतिशत बढ़कर 5,073 करोड़ रुपये हो गया. कंपनी ने ज्वेलरी कारोबार के साथ-साथ घड़ियों, आईवियर और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी मौजूदगी मजबूत की है. तनिष्क आज भी टाइटन की सबसे बड़ी ताकत बनी हुई है और आने वाले वर्षों में कंपनी अपने ज्वेलरी कारोबार को और तेजी से बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है.

निवेशकों के लिए क्या है सबसे बड़ा सबक?
टाइटन की कहानी सिर्फ एक सफल शेयर की कहानी नहीं है, बल्कि यह धैर्य, भरोसे और दूरदर्शी सोच की मिसाल भी है. जब बाजार किसी कंपनी को नजरअंदाज कर रहा था, तब राकेश झुनझुनवाला ने उसके भविष्य को पहचाना. उन्होंने जल्द मुनाफा कमाने की बजाय लंबे समय तक निवेश बनाए रखा और कंपनी के मजबूत होते कारोबार का पूरा लाभ उठाया. यही वजह है कि टाइटन आज उनकी सबसे यादगार निवेश सफलता मानी जाती है. यह कहानी नए और पुराने दोनों तरह के निवेशकों को सिखाती है कि मजबूत कारोबार वाली कंपनी में सही समय पर किया गया धैर्यपूर्ण निवेश लंबे समय में असाधारण संपत्ति बना सकता है.

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Rakesh Singh

Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें



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‘हर दिन हमारा मार्गदर्शन करती हो’, हर दिन मां के बारे में सोचती हैं माधुरी दीक्षित


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माधुरी दीक्षित की मां स्नेहलता दीक्षित की आज बर्थ एनिवर्सरी है. इस मौके पर उन्होंने मां के साथ वाली कई तस्वीरों का एक कोलाज शेयर किया और भावुक नोट लिखा है. इसमें उन्होंने बताया कि वह हर दिन अपनी मां को याद करती हैं. उनकी गाइडेंस ही वह एक अच्छी एक्ट्रेस और महिला बन सकी हैं.

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माधुरी दीक्षित मां की बर्थ एनिवर्सरी पर भावुक हुईं.

मुंबई. बॉलीवुड एक्ट्रेस माधुरी दीक्षित ने अपनी मां स्नेहलता दीक्षित को उनकी बर्थ एनिवर्सरी पर याद किया और कहा कि ऐसा कोई दिन नहीं बीतता जब वह उनके बारे में न सोचती हों और ज़िंदगी के छोटे-छोटे पलों में उनकी मौजूदगी महसूस न करती हों. माधुरी ने अपने स्टोरीज सेक्शन में अपनी और अपनी मां की तस्वीरों का एक कोलाज शेयर किया. इसके साथ ही उन्होंने लिखा, “हैप्पी बर्थडे, आई. ऐसा कोई दिन नहीं बीतता जब मैं आपके बारे में न सोचूं और जिंदगी के छोटे-छोटे पलों में आपकी मौजूदगी महसूस न करूं.”

माधुरी दक्षित ने आगे लिखा, “आपका प्यार, हिम्मत और अपनापन हर दिन हमारा मार्गदर्शन करते हैं. आपकी हमेशा याद आती है और आज प्यार के साथ आपको याद कर रही हूं.” दरअसल, माधुरी की मां, स्नेहलता दीक्षित का जन्म 27 जून को हुआ था. 12 मार्च, 2023 को मुंबई स्थित उनके घर पर 91 साल की उम्र में निधन हो गया था.

माधुरी दीक्षित का पोस्ट.

माधुरी दीक्षित अक्सर अपनी मां को याद करती रहती हैं. अपनी मां की बर्थ एनिवर्सरी पर भी एक्ट्रेस ने उनके साथ की कुछ खूबसूरत तस्वीरों के साथ एक प्यारा सा नोट भी लिखा. करियर की बात करें तो, माधुरी को हाल ही में रिलीज ‘मां बहन’ में देखा गया था. इस डार्क कॉमेडी फिल्म को सुरेश त्रिवेणी ने नेटफ्लिक्स के लिए डायरेक्ट किया है. माधुरी के अलावा, फिल्म में तृप्ति डिमरी, धारणा दुर्गा, रवि किशन, गीतांजलि कुलकर्णी, अरुणोदय सिंह और शार्दुल भारद्वाज जैसे कलाकार भी हैं.

माधुरी दीक्षित ने ‘मिसेज देशपांडे’ में निभाया लीड रोल

माधुरी दीक्षित हाल में नागेश कुकुनूर द्वारा डायरेक्ट की गई ओटीटी सीरीज ‘मिसेज देशपांडे’ भी शामिल है. इसमें वह एक सीरियल किलर का किरदार निभाती नजर आई थीं. यह कहानी एक पुलिस वाले के बारे में है जो एक कॉपीकैट किलर के मामले की जांच करता है. अपराधों के रहस्य को सुलझाने के लिए, वे जेल में बंद उस सीरियल किलर से संपर्क करते हैं जिसके तरीकों की नकल की जा रही होती है.

माधुरी दीक्षित ने की 70 से ज्यादा फिल्में

बता दें, माधुरी दीक्षित 70 से ज्यादा हिंदी फिल्मों में नजर आ चुकी हैं और उन्हें पूरे देश में ऐसी स्टारडम मिली जिसने भारतीय पॉपुलर कल्चर को प्रभावित किया. उन्हें पुरुषों के दबदबे वाले इस इंडस्ट्री में अपने पुरुष साथियों के बराबर स्टारडम हासिल करने और लीड रोल निभाने का श्रेय दिया जाता है.

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रमेश कुमारSenior Sub Editor

रमेश कुमार, सितंबर 2021 से बतौर सीनियर सब एडिटर न्यूज18 हिंदी डिजिटल से जुड़े हैं. एंटरटेनमेंट डेस्क पर काम कर रहे हैं. समय-समय पर विधानसभा-लोकसभा चुनाव पर भी काम करते हैं. इससे पहले हिंदीरश (पिंकविला) में एंटर…और पढ़ें





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सुरियावां में 101 टीबी रोगियों को पोषण पोटली मिली: भदोही को प्रदेश में प्रथम स्थान, जनसहयोग से मिली सफलता – Bhadohi (Sant Ravidas Nagar) News




राष्ट्रीय क्षय उन्मूलन कार्यक्रम के तहत शनिवार को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र सुरियावां में एक कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें 101 क्षय (टीबी) रोगियों को पोषण पोटली वितरित की गई। इस अवसर पर जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी, पूर्व विधायक रवीन्द्र नाथ त्रिपाठी, जिलाधिकारी शैलेष कुमार और पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी ने संयुक्त रूप से टीबी रोगियों को पोषण पोटली प्रदान की और उनके शीघ्र स्वस्थ होने की कामना की। जिलाधिकारी शैलेष कुमार ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए बताया कि जनपदवासियों, जनप्रतिनिधियों, स्वयंसेवी संस्थाओं, निक्षय मित्रों और समाज के विभिन्न वर्गों के सक्रिय सहयोग से अब तक 2,200 से अधिक पोषण पोटलियों का वितरण किया जा चुका है। उन्होंने कहा कि इसी जनसहयोग, सहभागिता और स्वास्थ्य विभाग के समर्पित प्रयासों के परिणामस्वरूप जनपद ने इस अभियान में प्रदेश स्तर पर प्रथम स्थान प्राप्त किया है। जिलाधिकारी ने जानकारी दी कि वर्तमान में जनपद में 1,440 टीबी रोगियों का उपचार चल रहा है। टीबी मुक्त भारत अभियान के अंतर्गत बलगम की नियमित जांच के माध्यम से रोगियों की शीघ्र पहचान कर उन्हें निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है। साथ ही, प्रत्येक पात्र रोगी को भारत सरकार द्वारा प्रतिमाह ₹1,000 की पोषण सहायता भी प्रदान की जा रही है।
उन्होंने जोर देकर कहा कि टीबी एक पूर्णतः उपचार योग्य बीमारी है। यदि रोगी समय पर जांच कराकर चिकित्सकों के परामर्श के अनुसार नियमित रूप से दवाओं का सेवन करे, तो वह पूरी तरह स्वस्थ हो सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि वर्ष में तीन बार संचालित होने वाले संचारी रोग नियंत्रण अभियान एवं दस्तक अभियान के दौरान संभावित टीबी रोगियों का चिन्हीकरण कर उनकी जांच एवं उपचार भी सुनिश्चित कराया जाता है। जिला पंचायत अध्यक्ष अनिरुद्ध त्रिपाठी ने टीबी रोगियों के पोषण एवं उपचार में समाज की सक्रिय भागीदारी को अत्यंत आवश्यक बताया। उन्होंने अधिक से अधिक लोगों से निक्षय मित्र बनकर इस मानवीय अभियान में सहयोग करने का आह्वान किया। पुलिस अधीक्षक अभिनव त्यागी ने कहा कि टीबी रोगियों का मनोबल बढ़ाना, उनके प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण अपनाना तथा उन्हें समाज का सहयोग उपलब्ध कराना प्रत्येक नागरिक की जिम्मेदारी है। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि जनसहयोग से ही टीबी मुक्त समाज का सपना साकार होगा।



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