Friday, July 10, 2026
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अनुज हत्याकांड: प्रभाकर चौधरी समेत ज्यादातर आरोपी जमानत पर छूटे: हाईप्रोफाइल मर्डर केस में आरोपियों के बाहर आने से फिर टकराव की आशंका,पुलिस अलर्ट – Moradabad News




मुरादाबाद के बहुचर्चित अनुज चौधरी हत्याकांड में असमोली की ब्लॉक प्रमुख के पति प्रभाकर चौधरी समेत कई मुख्य आरोपी जेल से जमानत पर बाहर आ गए हैं। वारदात को अंजाम देने वाले शूटर भी जेल से बाहर आ चुके हैं। इस हाईप्रोफाइल मर्डर केस के आरोपियों के जेल से बाहर आने की वजह से पुलिस की सिरदर्दी बढ़ गई है। दोनों गुटों में फिर से टकराव की आशंका में पुलिस ने जेल से रिहा हुए आरोपियों की निगरानी बढ़ा दी है। शुक्रवार को इसकी समीक्षा की गई है।
बता दें कि भाजपा नेता अनुज चौधरी की 10 अगस्त 2023 को मुरादाबाद के मझोला थाना क्षेत्र में नया मुरादाबाद स्थित पार्श्वनाथ प्रतिभा अपार्टमेंट में सरेआम गोलियां बरसाकर सनसनीखेज अंदाज में हत्या कर दी गई थी। बाइक सवार शूटर्स ने सरेआम अनुज को 25 सेकेंड में 4 गोलियां मारी थीं। हत्या के वक्त अनुज अपने एक दोस्त के साथ गेटेड सोसाइटी के अंदर कंपाउंड में इवनिंग वॉक कर रहे थे। तभी शाम को करीब 7:30 बजे हत्यारों ने उन पर गोलियां बरसाकर उनकी हत्या कर दी थी। इस हत्याकांड में असमोली की ब्लॉक प्रमु ख के पति प्रभाकर चौधरी, बेटा अनिकेत, पूर्व ब्लॉक प्रमुख और गैंगस्टर ललित कौशिक समेत अन्य 14 आरोपियों के खिलाफ पुलिस ने कोर्ट में आरोप पत्र दाखिल किया था। एक एनकाउंटर में पुलिस ने वारदात को अंजाम देने वाले दोनों शूटरों को भी गोली मारकर अरेस्ट कर लिया था।
लेकिन पिछले 15-20 दिन में इसके सभी मुख्य आरोपी एक-एक करके जेल से बाहर आ गए हैं। इसमें वे दोनों शूटर भी शामिल हैं जिन्होंने अनुज चौधरी को सरेआम गोलियों से भूना था।
रिहा होने वालों में मुख्य रूप से संभल के एंचौड़ा कम्बोह थाना क्षेत्र में हाजीबेड़ा निवासी असमोली की ब्लॉक प्रमुख संतोष देवी का पति प्रभाकर चौधरी, बरेली जेल में उम्रकैद की सजा काट रहे कुख्ययात शूटर मोहित चौधरी का भाई अमित चौधरी और दोनों शूटरों समेत करीब-करीब सभी आरोपी जेल से बाहर आ चुके हैं। ऐसे में पुलिस को फिर से इन गुटों के बीच टकराव की आशंका सता रही है।



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राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में निवाड़ी कांग्रेस का प्रदर्शन: महिला कांग्रेस ने उपवास रख निकाली संकीर्तन रैली; बाजार में पर्चे बांटकर जताया विरोध – Niwari News




अयोध्या स्थित भगवान श्रीराम मंदिर के चढ़ावे में वित्तीय अनियमितताओं को लेकर निवाड़ी में महिला कांग्रेस ने विरोध प्रदर्शन किया। जिला मुख्यालय पर आयोजित इस प्रदर्शन के दौरान महिला कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने एक दिवसीय उपवास रखा और शहर में संकीर्तन रैली निकाली। कांग्रेस ने इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग की है। बड़ी माता मंदिर में किया सद्बुद्धि यज्ञ महिला कांग्रेस की कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन की शुरुआत जिला मुख्यालय के बड़ी माता मंदिर से की। यहाँ उन्होंने सबसे पहले सद्बुद्धि यज्ञ और भजन-संकीर्तन का आयोजन किया। इसके बाद बड़ी माता मंदिर से लेकर पुलिस थाना परिसर में स्थित हनुमान जी मंदिर तक महिलाओं ने हाथों में तख्तियां लेकर संकीर्तन रैली निकाली और विरोध दर्ज कराया। बाजार में पर्चे बांटकर जताया विरोध रैली के दौरान कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने स्थानीय बाजार और सार्वजनिक स्थानों पर पर्चे भी बांटे। इन पर्चों में राम जन्मभूमि पर सामने आई कथित चंदा चोरी की घटना को निंदनीय और शर्मनाक बताया गया है। कांग्रेस नेताओं ने इस मामले को लेकर सीधे तौर पर केंद्र सरकार और राम मंदिर ट्रस्ट के प्रबंधन पर गंभीर आरोप लगाए हैं। मंदिर ट्रस्ट और नियुक्तियों पर उठाए सवाल महिला कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि राम मंदिर ट्रस्ट द्वारा चंदे और चढ़ावे की राशि में बड़े स्तर पर अनियमितताएं की गई हैं। उन्होंने प्रधानमंत्री की अध्यक्षता में संचालित होने वाले इस ट्रस्ट में चंपत राय और अनिल मिश्रा जैसे पदाधिकारियों की नियुक्तियों पर सवाल उठाए। कांग्रेस का आरोप है कि मामले में छोटे आरोपियों को पकड़ा जा रहा है, जबकि मुख्य जिम्मेदार लोगों को बचाया जा रहा है। प्रदर्शन में कांग्रेस के जिला अध्यक्ष राजेश यादव, आनंदी पाल सहित कई कार्यकर्ता और महिलाएं शामिल रहीं।



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अररिया में 75 साल बाद भी नहीं बना पुल-सड़क: ग्रामीण बांस की चचरी से नदी पार करते हैं, बरसात में कट जाता है संपर्क – Araria News




अररिया के पलासी प्रखंड की पिपरा बिजवार पंचायत के बच्चा खाड़ी वार्ड संख्या-03 के ग्रामीण आज भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। गांव को मुख्य सड़क से जोड़ने के लिए न तो कोई पक्का पुल है और न ही संपर्क सड़क। ऐसे में ग्रामीण वर्षों से नदी पार करने के लिए बांस से बनी अस्थायी चचरी का उपयोग कर रहे हैं। बरसात के मौसम में यही चचरी ग्रामीणों के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन जाती है। तेज बहाव के बीच लोग जान जोखिम में डालकर रोजाना नदी पार करने को मजबूर होते हैं। ग्रामीणों के अनुसार, बारिश के दिनों में नदी का जलस्तर बढ़ने पर चचरी पर चलना बेहद खतरनाक हो जाता है। स्कूली बच्चे, मरीज और महिलाएं परेशान इसके बावजूद, गांव के स्कूली बच्चे, मरीज, महिलाएं, किसान और बुजुर्ग इसी खतरनाक रास्ते से आने-जाने को मजबूर हैं। कई बार भारी बारिश के कारण गांव का संपर्क प्रखंड और जिला मुख्यालय से कई दिनों तक पूरी तरह कट जाता है। इससे मरीजों को अस्पताल पहुंचाने, बच्चों को स्कूल भेजने और किसानों को अपनी उपज बाजार तक ले जाने में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। बारिश में अस्पताल पहुंचना चुनौती ग्रामीणों का कहना है कि थोड़ी सी बारिश भी पूरे गांव की मुश्किलें बढ़ा देती है। यदि किसी की तबीयत अचानक बिगड़ जाए, तो समय पर अस्पताल पहुंचाना एक बड़ी चुनौती बन जाती है। वहीं, स्कूली बच्चों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है, क्योंकि तेज बहाव के दौरान अभिभावक बच्चों को चचरी पार कर स्कूल भेजने से डरते हैं। ग्रामीण अशफाक आलम, मंगलू राम, बोकाई राम, सुरेश राम, बहुजन राम, सहदेव राम, महादेव राम, गुलई राम, शंभू राम, कस्तूर अली, वार्ड सदस्य खलीफुर रहमान, मैनुल हक और कलीमुद्दीन ने बताया कि देश को आजादी मिले 75 वर्ष से अधिक हो चुके हैं, लेकिन उनके गांव की यह मूलभूत समस्या आज भी जस की तस बनी हुई है। ग्रामीण बोले-प्रशासन मांग पर नहीं करता विचार उनका कहना है कि यदि समय रहते यह कार्य नहीं कराया गया तो बरसात के दौरान किसी बड़े हादसे से इनकार नहीं किया जा सकता। ग्रामीणों ने उम्मीद जताई कि प्रशासन उनकी वर्षों पुरानी मांग पर गंभीरता से विचार करेगा, ताकि उन्हें हर बरसात में जान जोखिम में डालकर नदी पार करने की मजबूरी से राहत मिल सके। उनका कहना है कि वर्षों से नदी पर पक्का पुल और संपर्क सड़क निर्माण की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक किसी स्तर पर ठोस पहल नहीं हुई। ग्रामीणों का आरोप है कि चुनाव के दौरान जनप्रतिनिधि पुल और सड़क निर्माण का आश्वासन देते हैं। पक्का पुल और संपर्क सड़क का निर्माण हो लेकिन चुनाव खत्म होने के बाद वादे भूल जाते हैं। इसका खामियाजा गांव के लोगों को हर साल बरसात में भुगतना पड़ता है। उनका कहना है कि सड़क और पुल नहीं होने का सबसे अधिक असर शिक्षा, स्वास्थ्य और खेती-किसानी पर पड़ रहा है। ग्रामीणों ने जिला प्रशासन, स्थानीय जनप्रतिनिधियों और संबंधित विभाग से मांग की है कि बच्चा खाड़ी वार्ड संख्या-03 में नदी पर जल्द से जल्द पक्का पुल और संपर्क सड़क का निर्माण कराया जाए।



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छपरा की फेमस मिठाई है कलाकंद, दूसरी पीढ़ी संभाल रही दुकान, दुबई तक फैला है स्वाद


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छपरा की फेमस मिठाई है कलाकंद, दूसरी पीढ़ी संभाल रही दुकान, दुबई तक फैला स्वाद

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Chapra Famous Kalakand Shop: छपरा शहर में ही नहीं, ग्रामीण क्षेत्र के बाजार में भी एक काफी स्वादिष्ट और मशहूर मिठाई मिलती है, जिसे खरीदने के लिए दूर-दूर से लोग पहुंचते हैं. आज हम जिले के एक ऐसे मशहूर कलाकंद के बारे में बताने जा रहे हैं, जहां से कलाकंद खरीदकर दुबई में रहने वाले लोग भी ले जाते हैं. शुद्ध दूध से इसको तैयार किया जाता है. दूसरी पीढ़ी के लोग इस दुकान को संभाल रहे हैं. सबसे खास बात यह है कि जो स्वाद पहले मिलता था, वही स्वाद मिठाई में आज भी मिलता है. इसका कारण यह है कि ग्रामीण क्षेत्र से आसानी से दूध मिल जाता है.

कोयले की आग पर लोगों के सामने खोवा निकालकर कलाकंद तैयार किया जाता है. यह मशहूर कलाकंद जिले के गरखा प्रखंड अंतर्गत बसंत बाजार में तैयार होता है, जहां दूसरी पीढ़ी के रूप में बबलू प्रसाद और उनके पुत्र मिलकर कलाकंद तैयार करते हैं.

इस दुकान की शुरुआत उनके पिताजी ने की थी. लगभग 50 वर्ष से अधिक पुरानी यह दुकान बताई जा रही है. जो स्वाद 50 वर्ष पहले मिलता था, वही स्वाद आज भी मिलता है. जिसकी वजह से यहां मिठाई खाने वाले पुराने से पुराने ग्राहक भी आते हैं.

लोकल 18 से ग्राहक जयप्रकाश सिंह ने बताया कि ‘यह काफी पुरानी यह दुकान है. मैं जब छोटा था, तो अपने पिताजी के साथ यहीं पर कलाकंद खाने के लिए आता था और आज भी मैं यहीं का कलाकंद खाता हूं. जो पहले स्वाद मिलता था, वही स्वाद आज भी मिलता है. पहले बबलू प्रसाद के पिताजी शंभू प्रसाद जी यहां पर मिठाई बनाते थे.

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अब बबलू प्रसाद और उनके पुत्र के द्वारा कलाकंद तैयार किया जा रहा है. यह आज भी काफी स्वादिष्ट लगता है. शंभू मिष्ठान भंडार के नाम से यह दुकान पूरे जिले में मशहूर है. यहां के कलाकंद बहुत मशहूर हैं. दूर-दूर के लोग यहां के कलाकंद खाने आते हैं. यहां की मिठाई में आज भी शुद्धता बरकरार है.’

दुकानदार बबलू प्रसाद ने बताया कि ‘ग्रामीण क्षेत्र से शुद्ध दूध लाकर कोयले की आग पर खोवा निकाला जाता है, जिसमें इलायची, किशमिश, काजू सहित कई सामग्री स्वाद बढ़ाने के लिए डाली जाती है. शुद्धता में कोई कमी नहीं है. उन्होंने बताया कि लगभग 50 वर्ष से इस बाजार में दुकान संचालित हो रही है.

मेरे पिता शंभू प्रसाद ने इस दुकान की शुरुआत की थी. अब हम और मेरे पुत्र इसे संभाल रहे हैं. जिले के कोने-कोने से लोग मिठाई खाने के लिए आते हैं.यहां से दुबई में रहने वाले लोग भी मिठाई खरीदकर ले जाते हैं. कल ही यहां से 3 किलो कलाकंद खरीदकर लोग दुबई ले गए हैं.

यहां सफाई और शुद्धता पर विशेष ध्यान दिया जाता है. यही वजह है कि आज भी स्वाद बरकरार है. जिसकी वजह से ग्राहकों का मेरी दुकान की मिठाई पर विश्वास है. छोटी दुकान है, लेकिन बड़े-बड़े दुकानों में भी इस तरह की स्वादिष्ट और शुद्ध मिठाई नहीं मिलती है. यही वजह है कि लोग मेरी मिठाई पर विश्वास करते हैं.’

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सुप्रीम कोर्ट में वकील ने CJI को अपशब्द कहे: जज को आदेश देने लगा, फाइल फेंकी; सिक्योरिटी ने कोर्ट रूम से बाहर निकाला


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नई दिल्ली6 मिनट पहले

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सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान जिस वकील ने हंगामा किया, उसका नाम प्रबल प्रताप है।

सुप्रीम कोर्ट में शुक्रवार को एक याचिकाकर्ता वकील ने सुनवाई के दौरान अभद्र व्यवहार किया। इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई चल रही थी। याचिका वकील ने ही लगाई थी।

सुनवाई की शुरुआत से ही वकील ने बेहद आक्रामक रुख अपना रखा था। कुछ ही देर में उसने कोर्ट में गाली देना शुरू कर दिया। इतना ही नहीं, केस से जुड़े कागज हवा में उछालते हुए कहा… “दे देना उस @#$&% CJI को….।”

याचिकाकर्ता वकील के इस व्यवहार से कोर्ट रूम में कुछ देर के लिए सन्नाटा छा गया। लेकिन तुरंत ही सिक्योरिटी ने उसे कोर्ट रूम से बाहर निकाल दिया।

मामले की सुनवाई जस्टिस केवी विश्वनाथन और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच कर रही थी। हालांकि कोर्ट ने वकील के खिलाफ अवमानना की कार्रवाई न करने का फैसला किया, लेकिन उसकी याचिका खारिज कर दी।

कोर्ट रूम में हुए हंगामे की 2 तस्वीरें…

वकील को सिक्योरिटी ने माइक से हटाया और कोर्ट रूम से बाहर ले गई।

वकील को सिक्योरिटी ने माइक से हटाया और कोर्ट रूम से बाहर ले गई।

वकील के कागज फेंकने के तुरंत बाद पीछे बैठी वकील बुरी तरह डर गई।

वकील के कागज फेंकने के तुरंत बाद पीछे बैठी वकील बुरी तरह डर गई।

हंगामे के बाद जज बोले- हमें उससे सहानुभूति है

सुनवाई शुरू होते ही याचिकाकर्ता ने कहा, “न्यायिक अधिकारी महोदय, मैं आपको आदेश देता हूं कि आप लखनऊ के ACP के खिलाफ FIR दर्ज करने का आदेश दें। इस पर जस्टिस केवी विश्वनाथन ने हैरानी जताते हुए पूछा, आप मुझे आदेश दे रहे हैं?

इसके जवाब में याचिकाकर्ता ने कहा, “मेरी तरफ से बस इतना ही। सब कुछ रिकॉर्ड पर है। इसके बाद उसने केस की फाइल हवा में फेंक दी और गाली-गलौज करने लगा। इसके तुरंत बाद सुरक्षा कर्मी सक्रिय हुए और उसे कोर्टरूम से बाहर ले गए।

हंगामे के बाद जस्टिस केवी विश्वनाथन ने कहा- “वह बहुत परेशान है, यह सब हताशा है। हमें उसके लिए केवल सहानुभूति है।”

कोर्ट ने नहीं लिया एक्शन, लेकिन बार काउंसिल कर सकता है कार्रवाई

हंगामे के बावजूद, बेंच ने याचिकाकर्ता के खिलाफ अदालत की अवमानना ​​या कोई दूसरी कार्रवाई न करने का फैसला किया। जस्टिस विश्वनाथन ने कहा, “हम उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं करना चाहते। जहां तक मामले के गुण-दोष की बात है, हमने रिकॉर्ड देख लिए हैं और हमें विवादित आदेश में दखल देने का कोई ठोस आधार नहीं मिला। स्पेशल लीव पिटीशन खारिज की जाती है।”

हालांकि इस वकील के खिलाफ बार काउंसिल भी कार्रवाई कर सकता है। दरअसल, अगर कोई वकील अपने पेशे के नियमों का पालन नहीं करता या गलत आचरण करता है, तो उसके खिलाफ एडवोकेट्स एक्ट, 1961 के तहत कार्रवाई हो सकती है।

पहले शुरुआती जांच होती है, अगर जांच में आरोप सही पाए जाते हैं, तो उसे बार काउंसिल की अनुशासनात्मक समिति के पास भेजा जाएगा। समिति शिकायत करने वाले और वकील दोनों की बात सुनने के बाद फैसला करेगी।

वकील दोषी मिला तो उसे चेतावनी दी जा सकती है, कुछ समय के लिए वकालत करने से रोका जा सकता है। गंभीर मामलों में उसका नाम बार काउंसिल की सूची से हटाया जा सकता है।

सुप्रीम कोर्ट में अभद्रता के मामले

सुप्रीम कोर्ट में कभी-कभार किसी वकील द्वारा बहस के दौरान ऊंची आवाज, तीखी बहस या अनुचित टिप्पणी के मामले सामने आए हैं, लेकिन CJI पर शारीरिक हमला या कोर्ट रूम के अंदर गंभीर अभद्रता जैसी घटनाएं सार्वजनिक रिकॉर्ड में मिलती ही नहीं हैं। CJI से अभद्रता की अबतक केवल 2 घटनाओं का जिक्र मिलता है…

1999 – CJI एएस आनंद पर एडवोकेट नंदलाल बलवानी ने जूता फेंका

तत्कालीन CJI एएस आनंद की बेंच के सामने एक वकील ने नारेबाजी की और कोर्ट रूम में जूता फेंका। सुप्रीम कोर्ट ने इसे गंभीर आपराधिक अवमानना माना और उन्हें 4 महीने की जेल और जुर्माने की सजा सुनाई।

6 अक्टूबर 2025 – CJI बीआर गवई के कोर्ट रूम में जूता फेंकने की घटना

एक वकील ने सुनवाई के दौरान CJI बीआर गवई की ओर जूता फेंका और नारे लगाए। जूता CJI को नहीं लगा। सुरक्षा कर्मियों ने तुरंत आरोपी को हिरासत में ले लिया। इसके बाद बार काउंसिल ने भी अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की। बाहर जाते वक्त वकील ने नारा लगाया- सनातन का अपमान नहीं सहेगा हिंदुस्तान।

घटना के बाद CJI ने अदालत में मौजूद वकीलों से अपनी दलीलें जारी रखने को कहा। उन्होंने कहा कि इस सबसे परेशान न हों। मैं भी परेशान नहीं हूं, इन चीजों से मुझे फर्क नहीं पड़ता। पढ़ें पूरी खबर…

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सुप्रीम कोर्ट बोला- फैसलों में AI के फर्जी उदाहरण खतरनाक:ये मिथाइल आइसोसाइनेट जैसे, इससे न्याय व्यवस्था को नुकसान; NCLT का फैसला रद्द

नई दिल्ली

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से बनाए गए नकली कानूनी उदाहरणों का इस्तेमाल खतरनाक है। कोर्ट ने इसकी गंभीरता समझाने के लिए कहा कि यह खतरा उतना ही बड़ा है, जितना भोपाल गैस त्रासदी में जहरीली (AI) गैस का रिसाव था। पढ़ें पूरी खबर…

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शेख हसीना बोलीं- दिसंबर में बांग्लादेश लौटूंगी: कोर्ट में सरेंडर करूंगी, हत्या हो जाए तो भी मंजूर, देश की मिट्टी पर मरना चाहती हूं




बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने कहा है कि वह दिसंबर में भारत से बांग्लादेश देश लौटेंगी और कोर्ट में सरेंडर करेंगी। उन्होंने कहा कि उनके साथ अवामी लीग के कई सीनियर नेता भी बांग्लादेश लौटकर आत्मसमर्पण करेंगे। हसीना ने कहा कि अवामी लीग के नेताओं और कार्यकर्ताओं पर लगातार कार्रवाई हो रही है। उनके मुताबिक, लगभग सभी बड़े नेताओं और कार्यकर्ताओं पर मुकदमे दर्ज किए गए हैं और कई लोग छिपकर रहने को मजबूर हैं। हालांकि, उन्होंने वापसी की सटीक तारीख नहीं बताई। रॉयटर्स को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, हसीना 2024 में सरकार विरोधी आंदोलन के बाद बांग्लादेश छोड़कर भारत आ गई थीं। इसके बाद उन्हें छात्र आंदोलन पर कार्रवाई से जुड़े मामले में मौत की सजा सुनाई गई। वह इन आरोपों से इनकार करती रही हैं। हसीना बोलीं- सरकार से वापसी पर कोई बातचीत नहीं शेख हसीना ने कहा कि उन्होंने बांग्लादेश लौटने को लेकर सरकार से कोई बातचीत नहीं की है। उनका कहना है कि लोकतंत्र, चुनाव, अवामी लीग के राजनीतिक अधिकार और न्याय जैसे मुद्दों पर पर्दे के पीछे बातचीत नहीं हो सकती। हसीना ने दावा किया कि बांग्लादेश सरकार उन्हें वापस भेजने के लिए भारत को लगातार पत्र लिख रही है। उन्होंने कहा, “मुझे वापस लाने की जरूरत नहीं पड़ेगी, मैं खुद ही लौटूंगी।” हालांकि, हसीना के इस दावे पर बांग्लादेश सरकार की ओर से कोई प्रतिक्रिया नहीं आई है। वहीं भारत ने भी फिलहाल कोई टिप्पणी नहीं की। इससे पहले अप्रैल में भारत ने कहा था कि वह बांग्लादेश के प्रत्यर्पण अनुरोध पर विचार कर रहा है और नई सरकार के साथ संबंध मजबूत करने की दिशा में काम कर रहा है। हसीना बोलीं- अगर गलती की है तो फैसला जनता करे शेख हसीना ने कहा कि उन्हें जेल जाने का डर नहीं है, क्योंकि वह पहले भी कई बार गिरफ्तार हो चुकी हैं। उन्होंने कहा कि सत्ता में लंबे समय तक रहने वाली किसी भी सरकार से गलतियां हो सकती हैं, लेकिन उसका फैसला अदालत नहीं, जनता को करना चाहिए। उन्होंने कहा, “अगर हमारी सरकार से गलतियां हुई हैं, तो जनता फैसला करेगी।” रॉयटर्स के मुताबिक, संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट में 2024 के छात्र आंदोलन पर कार्रवाई में करीब 1,400 लोगों की मौत होने की बात कही गई है। इसी मामले में शेख हसीना को अनुपस्थिति में मौत की सजा सुनाई गई थी। हसीना ने कहा कि उन्हें भरोसा है कि अदालत की सुनवाई शुरू होने पर सच्चाई सामने आ जाएगी। चार दिन पहले हसीना विरोधी रैली में धमाका राजधानी ढाका के पास सावर में चार दिन पहले सोमवार को शेख हसीना विरोधी रैली के दौरान बम धमाका हुआ था। इस हमले में 3 लोग घायल हुए, जबकि मंच पर छात्र आंदोलन के प्रमुख चेहरों में शामिल नाहिद इस्लाम समेत नेशनल सिटिजन पार्टी (NCP) के कई वरिष्ठ नेता मौजूद थे। धमाका सोमवार रात करीब 9:45 बजे उस समय हुआ, जब पार्टी की एक नेता सभा को संबोधित कर रही थीं। घायलों को इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया। यह रैली जुलाई 2024 के छात्र आंदोलन की दूसरी बरसी के मौके पर निकाली गई थी। इसी आंदोलन के बाद शेख हसीना की सरकार सत्ता से बाहर हो गई थी। फिलहाल धमाके की वजह साफ नहीं हो सकी है और मामले की जांच जारी है।
सरकार बोली- शेख हसीना को वापस लाने की कोशिश जारी बांग्लादेश सरकार के मुताबिक हसीना को वापस लाने की कोशिश जारी है। विदेश राज्य मंत्री शमा ओबैद इस्लाम ने मंगलवार को बताया था कि हसीना को अदालत के सामने पेश करने के लिए सरकार राजनयिक स्तर पर लगातार प्रयास कर रही है और इस प्रक्रिया में कोई कमी नहीं है। उन्होंने कहा कि हसीना को वापस लाने की प्रक्रिया अंतरिम सरकार के समय शुरू हुई थी और मौजूदा सरकार भी इसे आगे बढ़ा रही है। उनके मुताबिक, प्रत्यर्पण अंतरराष्ट्रीय नियमों और कानूनी प्रक्रिया के तहत ही होता है, इसलिए इसमें समय लगना स्वाभाविक है। जब उनसे पूछा गया कि क्या भारत इस मामले में सहयोग कर रहा है, तो उन्होंने सीधे जवाब नहीं दिया।



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भारत में बच्चों के लिए बैन हो सकता है सोशल मीडिया?


पीएम मोदी ने ऑस्ट्रेलिया के सोशल मीडिया को लेकर बनाए गए नए कानून की सराहना की है और कहा कि भारत को भी इससे कुछ सीखना चाहिए। पीएम मोदी की ये बात भारत में भी सोशल मीडिया को लेकर कानून में बदलाव की तरफ ईशारा है। भारत के कुछ राज्य सरकारों ने भी पिछले दिनों 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया को बैन करने को लेकर घोषणाएं की हैं। सोशल मीडिया की वजह से बच्चों पर मानसिक प्रभाव पड़ता है। इसे लेकर कई एक्सपर्ट्स ने चिंता भी जाहिर की है।

पीएम मोदी ने क्या कहा?

ऑस्ट्रेलिया के मेनलबर्न में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि भारत और बाकी देशों ने ऑस्ट्रेलिया के सोशल मीडिया नियमों से काफी कुछ सीखा है। इस कार्यक्रम में ऑस्ट्रेलिया के प्रधानमंत्री एंथनी अल्बनीज भी मौजूद थे। उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के IT और सोशल मीडिया से जुड़े कानूनों में हुए बदलाव की सराहना की है। पीएम मोदी ने कहा कि जिस तरह से ऑस्ट्रेलिया आईटी और सोशल मीडिया से जुड़े कानूनों में बदलाव कर रहा है, वह समाज की सुरक्षा के लिए प्रेरणादायक है।

क्या भारत में भी बच्चों के लिए बैन होगा सोशल मीडिया?

पीएम मोदी ने अपने संबोधन में कहा कि बच्चों को ऑनलाइन खतरों से बचाने के लिए की गई ऑस्ट्रेलिया की कोशिशों से भारत भी बहुत कुछ सीख रहा है। बता दें कि ऑस्ट्रेलिया दुनिया का पहला ऐसा देश बना है, जिसने 16 साल से कम उम्रे के बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर पूरी तरह से बैन लगा दिया है।

ऑस्ट्रेलिया ने यह कानून पिछले साल दिसंबर 2025 में लागू किया था, जिसके बाद सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स फेसबुक, इंस्टाग्राम, टिक-टॉक, स्नैपचैट आदि पर बड़ी संख्यां में 16 साल से कम उम्र के बच्चों के अकाउंट पर रोक लगा दी गई थी। ऑस्ट्रेलिया की सरकार की तरफ से सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को सख्त निर्देश जारी किए गए हैं कि वे कम उम्र के यूजर्स की सख्ती से जांच करें।

ऑस्ट्रेलिया के इस फैसले के बाद भारत के भी कई राज्य सरकारों ने भी 16 साल से कम उम्र के बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने को लेकर घोषणाएं की हैं। आंध्र प्रदेश, बिहार, कर्नाटक समेत कई राज्य सरकारों ने इसे लेकर जल्द कानून की घोषणा की है। यही नहीं, पिछले दिनों ब्रिटेन ने भी बच्चों के लिए सोशल मीडिया पर बैन लगाने और गेमिंग लाइव-स्ट्रीमिंग पर रोक लगाने की घोषणा की है।

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ओमप्रकाश चौधरी बने पाली के नए ASP: निशांत भारद्वाज का ATS जोधपुर में ट्रांसफर; राज्य सरकार ने जारी की 49 ASP की सूची – Pali (Marwar) News




राज्य सरकार की ओर से जारी ट्रांसफर सूची में पाली के ASP निशांत भारद्वाज का तबादला ATS जोधपुर कर दिया गया है। उनकी जगह एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) में तैनात ओमप्रकाश चौधरी को पाली का नया ASP लगाया गया है। राज्य सरकार ने गुरुवार को ASP स्तर के अधिकारियों की ट्रांसफर सूची जारी की, जिसमें कुल 49 अधिकारियों के तबादले किए गए हैं। इसी सूची में पाली ASP निशांत भारद्वाज का नाम भी शामिल है। निशांत भारद्वाज को ASP ATS जोधपुर के पद पर लगाया गया है। वे कुछ महीने पहले ही पाली में ASP के रूप में तैनात हुए थे, लेकिन अब उनका फिर से ट्रांसफर कर दिया गया है। वहीं ओमप्रकाश चौधरी ACB से ट्रांसफर होकर पाली आ रहे हैं। उनके पाली पहुंचने के बाद वे जिले के नए ASP के रूप में कार्यभार संभालेंगे। राज्य सरकार की ओर से जारी इस सूची के बाद पुलिस विभाग में प्रशासनिक स्तर पर नई जिम्मेदारियों के अनुसार अधिकारियों की पदस्थापन प्रक्रिया शुरू हो गई है।



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बाबा आनंदेश्वर का फूलों और फलों से हुआ दिव्य श्रृंगार: मोगरा-बेलपत्र से सजा दरबार, पेड़ा-बर्फी का लगा भोग – Kanpur News




कानपुर के परमट स्थित बाबा आनंदेश्वर मंदिर में शुक्रवार सुबह बाबा आनंदेश्वर महादेव का विशेष श्रृंगार किया गया। सुबह करीब 7 बजे गर्भगृह के कपाट खुलते ही श्रद्धालुओं ने बाबा के दिव्य स्वरूप के दर्शन किए। प्राकृतिक फूलों, ताजे फलों और बेलपत्रों से किए गए श्रृंगार को देखने के लिए सुबह से ही मंदिर में भक्तों की भीड़ उमड़ पड़ी। श्रृंगार के बाद बाबा की भव्य आरती की गई। मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से गूंज उठा। आरती के बाद श्रद्धालुओं को महाप्रसाद भी वितरित किया गया। मोगरा और बेला के फूलों से सजा शिवलिंग बाबा आनंदेश्वर के शिवलिंग के चारों ओर सफेद मोगरा और बेला के फूलों की सजावट की गई। इसके ऊपर नारंगी और लाल रंग के जरबेरा व गेंदे के फूलों से गोलाकार आकृतियां बनाई गईं। रंग-बिरंगे फूलों की सजावट ने पूरे दरबार को आकर्षक बना दिया। चंदन से बनाया गया त्रिपुंड श्रृंगार के दौरान शिवलिंग पर पीले चंदन का लेप लगाया गया। इसके ऊपर काले रंग से त्रिपुंड और अर्धचंद्र बनाया गया। त्रिपुंड के बीच लाल कुमकुम से तीसरी आंख का स्वरूप उकेरा गया, जिसने बाबा के स्वरूप को और भव्य बना दिया। बेलपत्र पर लिखा गया ‘राम’ नाम श्रृंगार में चारों ओर गुलाबी कमल और लाल गुलाब के फूल सजाए गए। शिवलिंग के पास रखे बेलपत्रों पर चंदन और कुमकुम से ‘राम’ नाम अंकित किया गया। बाहरी घेरे में रुद्राक्ष की मालाएं और ताजे फलों से भी सजावट की गई। श्रृंगार के बाद बाबा को पेड़ा और बर्फी का विशेष भोग लगाया गया। आरती के बाद यही महाप्रसाद श्रद्धालुओं में वितरित किया गया। सुबह बाबा के दिव्य स्वरूप के दर्शन करने के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु मंदिर पहुंचे।



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DM विक्रम विरकर ने पर्यटन स्थलों का किया निरीक्षण: मां कात्यायनी धाम और कसरैया धार में विकास कार्यों का लिया जायजा – Khagaria News




खगड़िया में पर्यटन विकास को गति देने के उद्देश्य से जिलाधिकारी विक्रम विरकर ने गुरुवार को विभिन्न प्रस्तावित पर्यटन स्थलों का स्थलीय निरीक्षण किया। उन्होंने चौथम प्रखंड स्थित प्रसिद्ध मां कात्यायनी धाम और कसरैया धार पहुंचकर विकास योजनाओं की प्रगति का जायजा लिया और अधिकारियों को समयबद्ध तरीके से कार्यों को आगे बढ़ाने के निर्देश दिए। निरीक्षण की शुरुआत जिलाधिकारी ने मां कात्यायनी मंदिर परिसर से की। यहां उन्होंने पर्यटन की दृष्टि से प्रस्तावित विकास कार्यों की समीक्षा करते हुए मंदिर परिसर में श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए बेहतर मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया। आधारभूत सुविधाओं की प्रगति की जानकारी ली उन्होंने परिसर के सौंदर्यीकरण, स्वच्छता व्यवस्था, सुगम आवागमन, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और पार्किंग सहित अन्य आधारभूत सुविधाओं की प्रगति की जानकारी ली। मौके पर मौजूद प्रभारी पदाधिकारी प्रवीण कुमार ने प्रस्तावित योजनाओं की वर्तमान स्थिति से जिलाधिकारी को अवगत कराया। इसके बाद जिलाधिकारी कसरैया धार पहुंचे, जहां उन्होंने प्राकृतिक पर्यटन की संभावनाओं का आकलन किया। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को स्थल की प्राकृतिक सुंदरता और भौगोलिक विशेषताओं को संरक्षित रखते हुए इसे एक आकर्षक पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करने की कार्ययोजना तैयार करने का निर्देश दिया। साथ ही आवश्यक अधोसंरचना विकसित करने पर भी बल दिया गया। आर्थिक गतिविधियों को मिलेगी मजबूती निरीक्षण के दौरान जिलाधिकारी ने कहा कि खगड़िया के धार्मिक और प्राकृतिक स्थलों का सुनियोजित विकास जिले की पहचान को नई ऊंचाई देगा। इससे न केवल पर्यटकों की संख्या में वृद्धि होगी, बल्कि स्थानीय लोगों के लिए रोजगार के नए अवसर भी सृजित होंगे और क्षेत्र की आर्थिक गतिविधियों को भी मजबूती मिलेगी। उन्होंने सभी संबंधित विभागों को आपसी समन्वय के साथ पर्यटन विकास योजनाओं में तेजी लाने और निर्धारित समय-सीमा के भीतर प्रस्तावित कार्यों को आगे बढ़ाने का निर्देश दिया। प्रशासन का लक्ष्य है कि खगड़िया के प्रमुख धार्मिक एवं प्राकृतिक स्थलों को बेहतर पर्यटन सुविधाओं से जोड़कर उन्हें राज्य के महत्वपूर्ण पर्यटन केंद्रों के रूप में विकसित किया जाए।



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