प्रयागराज के मोतीलाल नेहरू राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (MNNIT) में मंगल भूमि फाउंडेशन ने ‘भारतीय ज्ञान परंपरा में पर्यावरण संरक्षण’ विषय पर एक विचार गोष्ठी का आयोजन किया। इसमें विशेषज्ञों ने सर्वसम्मति से कहा कि पर्यावरण की रक्षा केवल सरकारी योजनाओं के भरोसे नहीं छोड़ी जा सकती, बल्कि पृथ्वी पर हरियाली वापस लाने के लिए इसे प्रत्येक नागरिक का नैतिक दायित्व बनाना होगा।
गोष्ठी के मुख्य वक्ता प्रो. राजेश गर्ग ने इस बात पर जोर दिया कि वेद, उपनिषद और पुराणों में जल, वायु, भूमि और वन संरक्षण को मानव का अनिवार्य धर्म माना गया है। उन्होंने कहा कि आज जब विश्व पर्यावरणीय असंतुलन से जूझ रहा है, तब प्रकृति के प्रति भारतीय ज्ञान परंपरा में निहित श्रद्धा का भाव ही समाधान का मार्ग दिखाता है।
कार्यक्रम के मुख्य अतिथि भारत भारती के राष्ट्रीय कार्याध्यक्ष विनय पत्राले ने अपने संबोधन में कहा कि भारत की सांस्कृतिक विरासत हमेशा प्रकृति के साथ संतुलन और सह-अस्तित्व का संदेश देती है। उन्होंने आह्वान किया कि यदि समाज भारतीय जीवन मूल्यों को अपनी दैनिक दिनचर्या में अपना ले, तो पर्यावरण संरक्षण मात्र सरकारी प्रयास न रहकर एक सशक्त जन-आंदोलन का रूप ले सकता है।
अतिथि वक्ता प्रमोद द्विवेदी ने उपस्थित युवाओं और शोधार्थियों को प्रेरित करते हुए कहा कि स्थानीय स्तर पर जैव विविधता और जल स्रोतों के संरक्षण में युवाओं की सक्रिय भूमिका निर्णायक होगी। उन्होंने यह भी कहा कि पर्यावरण की रक्षा के लिए अब समाज को स्वयं आगे आना होगा।
कार्यक्रम का संचालन डॉ. श्रवण मिश्रा ने किया, जबकि रामबाबू तिवारी ने धन्यवाद ज्ञापन प्रस्तुत किया। इस अवसर पर शिक्षाविदों, शोधार्थियों और विद्यार्थियों ने जल संरक्षण, वृक्षारोपण और प्राकृतिक संसाधनों के संवर्धन हेतु सामूहिक प्रयास करने का संकल्प लिया। आयोजन का मुख्य उद्देश्य भारतीय ज्ञान परंपरा के माध्यम से समाज में पर्यावरण के प्रति नई चेतना जागृत करना था।
बिहार शहरी आयोजना एवं विकास नियमावली, 2014 के तहत अगले 20 वर्षों से अधिक की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए दरभंगा नगर निगम और आसपास के क्षेत्रों के संतुलित एवं सुनियोजित विकास के लिए GIS आधारित मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है। साल 2019 में दरभंगा जिला आयोजना क्षेत्र की अधिसूचना जारी की गई थी और मास्टर प्लान तैयार करने की जिम्मेदारी Techmech International Pvt. Ltd. को दी गई है। दरअसल, शनिवार को आयुक्त कार्यालय सभागार में जियोग्राफिक इन्फॉर्मेशन सिस्टम यानी GIS बेस्ड मास्टर प्लान (स्टेज-V) के ड्राफ्ट पर समीक्षा एवं सुझाव बैठक आयोजित की गई। बैठक में जनप्रतिनिधियों और अधिकारियों ने सड़क, परिवहन, औद्योगिक विकास, सैटेलाइट टाउनशिप, जलनिकासी, हरित क्षेत्र और रोजगार सृजन समेत विभिन्न विषयों पर सुझाव दिए। दरभंगा जिला आयोजना क्षेत्र के लिए तैयार किए जा रहे GIS आधारित मास्टर प्लान (स्टेज-V) के ड्राफ्ट पर आयुक्त सह दरभंगा जिला आयोजना क्षेत्र प्राधिकार के अध्यक्ष हिमांशु कुमार राय की अध्यक्षता में समीक्षा बैठक हुई। लगभग 17,400 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जाएगी मिथिला ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप हिमांशु कुमार राय ने बताया कि जिला आयोजना क्षेत्र का कुल क्षेत्रफल 191.11 वर्ग किलोमीटर है, जिसमें पांच प्रखंड- दरभंगा सदर, केवटी, बहादुरपुर, हनुमाननगर और हायाघाट के 186 राजस्व ग्राम शामिल हैं। कुल आबादी 6.13 लाख है, जिसमें शहरी आबादी 2.66 लाख है। बैठक में जानकारी दी गई कि प्रस्तावित मिथिला ग्रीनफील्ड सैटेलाइट टाउनशिप लगभग 17,400 एकड़ क्षेत्र में विकसित की जाएगी, जिसमें 102 राजस्व गांव शामिल होंगे। इसका कोर एरिया करीब 1,600 एकड़ निर्धारित किया गया है। आयुक्त हिमांशु कुमार राय ने कहा कि दरभंगा ऐतिहासिक, सांस्कृतिक और शैक्षणिक दृष्टि से महत्वपूर्ण शहर है। एयरपोर्ट विस्तार के बाद यहां व्यापार, उद्योग और शहरी विकास की नई संभावनाएं बढ़ी हैं। ऐसे में सड़क, सार्वजनिक परिवहन, जलापूर्ति, सीवरेज, आवास, हरित क्षेत्र और औद्योगिक विकास जैसी आधारभूत सुविधाओं को मास्टर प्लान में प्राथमिकता दी जानी चाहिए। बैठक में उपमहापौर नाजिया हसन ने नगर निगम क्षेत्र के विस्तार का सुझाव दिया, जबकि महापौर अंजुम आरा ने नगर निगम क्षेत्र में होने वाली परियोजनाओं की जानकारी जनप्रतिनिधियों को देने की मांग की। विधायक डॉ. मुरारी मोहन झा ने आयोजना क्षेत्र के विस्तार, जबकि विधायक राजेश कुमार मंडल ने बेहतर सड़क और यातायात व्यवस्था पर जोर दिया। सांसद डॉ. गोपाल जी ठाकुर ने GIS आधारित मास्टर प्लान को दरभंगा के भविष्य की आधारशिला बताते हुए इसे राष्ट्रीय परियोजनाओं के अनुरूप तैयार करने की आवश्यकता जताई। उन्होंने दरभंगा को उत्तर बिहार का हेल्थ, एजुकेशन, एविएशन, निवेश, व्यापार और पर्यटन हब बनाने की वकालत की। साथ ही मेडिकल सिटी, आईटी एवं स्टार्टअप कॉरिडोर, मखाना प्रोसेसिंग एवं एक्सपोर्ट हब, मल्टी-मॉडल ट्रांसपोर्ट हब, हेरिटेज एवं टूरिज्म सर्किट, सैटेलाइट टाउनशिप, रिंग रोड, स्पोर्ट्स सिटी और वैज्ञानिक बाढ़ प्रबंधन जैसी परियोजनाओं को मास्टर प्लान में शामिल करने का सुझाव दिया। बैठक में विभिन्न विभागों और संबंधित पक्षों से प्राप्त सुझावों के आधार पर GIS आधारित ड्राफ्ट मास्टर प्लान को और अधिक व्यवहारिक, समावेशी तथा भविष्य उन्मुख बनाने पर सहमति बनी। बैठक का समापन नगर आयुक्त राकेश कुमार गुप्ता के धन्यवाद ज्ञापन के साथ हुआ।
Melon Seeds Burfi Recipe: सावन का महीना शुरू होते ही घरों में पूजा-पाठ, व्रत और स्वादिष्ट पकवानों की रौनक बढ़ जाती है. इसके कुछ समय बाद श्रीकृष्ण जन्माष्टमी का त्योहार भी आता है, जब घरों में भगवान कृष्ण के लिए खास भोग तैयार किए जाते हैं. ऐसे समय में ज्यादातर लोग बाजार से मिठाई खरीद लेते हैं, लेकिन मिलावट की खबरें सुनकर मन में एक डर बना रहता है, अगर आप भी इस बार अपने परिवार और मेहमानों के लिए घर पर ही शुद्ध, स्वादिष्ट और खास मिठाई बनाना चाहते हैं तो मावा और खरबूजे के बीज की बर्फी एक शानदार विकल्प है. इस बर्फी की सबसे बड़ी खासियत इसका लाजवाब स्वाद और मुलायम बनावट है. मावा की मलाईदार मिठास और खरबूजे के बीजों का हल्का कुरकुरापन मिलकर ऐसा स्वाद तैयार करता है, जिसे एक बार खाने के बाद हर कोई इसकी तारीफ करेगा.
इसे बनाना मुश्किल भी नहीं है और बहुत ज्यादा समय भी नहीं लगता. खास बात यह है कि यह मिठाई त्योहारों के साथ-साथ किसी भी खास मौके पर आसानी से बनाई जा सकती है, अगर आप चाहते हैं कि इस बार आपके घर आने वाले मेहमान मिठाई की तारीफ करते न थकें, तो इस आसान रेसिपी को एक बार जरूर आजमाएं.
मावा और खरबूजे के बीज की बर्फी बनाने के लिए जरूरी सामग्री 1. खरबूजे के बीज (मगज) – 1 कप 2. मावा या खोया – 1.5 कप (करीब 250 ग्राम) 3. चीनी – 1 कप 4. पानी – आधा कप 5. देसी घी – 2 चम्मच 6. हरी इलायची पाउडर – आधा छोटा चम्मच 7. पिस्ता कतरन – 1 चम्मच
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रेसिपी से जुड़ी जरूरी जानकारी 1. तैयारी का समय: 10 मिनट 2. पकाने का समय: 20 मिनट 3. कुल समय: लगभग 30 मिनट 4. कितने लोगों के लिए: 5 से 6
सबसे पहले खरबूजे के बीज भूनें एक भारी तले की कढ़ाई को हल्का गर्म करें. इसमें बिना घी डाले खरबूजे के बीज डालें और धीमी आंच पर 2 से 3 मिनट तक चलाते हुए भूनें. जैसे ही बीज हल्के फूलने लगें और खुशबू आने लगे, उन्हें तुरंत प्लेट में निकाल लें. ध्यान रखें कि ज्यादा भूनने पर उनका स्वाद कड़वा हो सकता है.
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मावा को सही तरीके से भूनना है जरूरी उसी कढ़ाई में दो चम्मच देसी घी डालें. अब कद्दूकस किया हुआ मावा डालकर धीमी आंच पर 4 से 5 मिनट तक भूनें. जब मावा हल्का सुनहरा होने लगे और अच्छी खुशबू आने लगे, तब गैस बंद कर दें. मावा को थोड़ा ठंडा होने दें.
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एक तार की चाशनी बनाएं एक अलग बर्तन में चीनी और आधा कप पानी डालकर मध्यम आंच पर पकाएं. जब चाशनी हल्की गाढ़ी हो जाए, तब उंगली और अंगूठे के बीच चिपकाकर देखें, अगर एक पतला तार बनता है तो समझिए चाशनी तैयार है.
अब तैयार करें बर्फी का मिश्रण तैयार चाशनी में भुना हुआ मावा, भुने हुए खरबूजे के बीज और इलायची पाउडर डाल दें. अब लगातार चलाते हुए मिश्रण को पकाएं. जब यह कढ़ाई छोड़ने लगे और गाढ़ा हो जाए, तब गैस बंद कर दें.
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बर्फी को सेट करने का सही तरीका एक थाली या बर्फी ट्रे में हल्का घी लगाकर चिकना कर लें. तैयार मिश्रण उसमें डालें और चम्मच या स्पैटुला की मदद से बराबर फैला दें. ऊपर से पिस्ता कतरन डालकर हल्का दबा दें. अब इसे 1 से 2 घंटे तक सेट होने दें. पूरी तरह जमने के बाद मनचाहे आकार में काट लें.
स्वाद बढ़ाने के आसान टिप्स 1. हमेशा ताजा मावा इस्तेमाल करें. 2. चाशनी एक तार से ज्यादा गाढ़ी न होने दें. 3. बीजों को हल्का ही भूनें. 4. चाहें तो थोड़ा केसर डालकर स्वाद और खुशबू बढ़ा सकते हैं. 5. एयरटाइट डिब्बे में रखने पर यह बर्फी 4 से 5 दिन तक ताजा बनी रहती है.
त्योहारों के लिए क्यों है खास? सावन, जन्माष्टमी, रक्षाबंधन या किसी भी शुभ मौके पर यह मिठाई शानदार विकल्प बन सकती है. इसे भगवान श्रीकृष्ण को भोग में भी चढ़ाया जा सकता है. घर की बनी होने की वजह से इसमें शुद्धता और ताजगी बनी रहती है. यही कारण है कि यह बाजार की कई मिठाइयों से बेहतर साबित होती है.
कटनी जिले के बड़वारा ग्राम में हुई एक घंटे की बारिश ने ग्राम पंचायत और लोक निर्माण विभाग के विकास दावों की पोल खोलकर रख दी है। पहली ही तेज बारिश का पानी ग्रामीणों के घरों में घुस गया, जिससे पूरा जनजीवन अस्त-व्यस्त हो गया। इस बारिश से सबसे ज्यादा प्रभावित बड़वारा ग्राम का इमामबाड़ा क्षेत्र रहा। यहां जलजमाव के कारण हालात इस कदर बिगड़े कि इमामबाड़ा निवासी जान मोहम्मद के घर में घुटनों से ऊपर तक पानी भर गया, जिससे परिवार को संभलने तक का मौका नहीं मिला। पीड़ित ने बताया कि नाली निर्माण में गड़बड़ी और लंबे समय से सफाई न होने के कारण यह नौबत आई है। पानी भरने से उनके घर में रखा पूरा अनाज बर्बाद हो गया और बच्चों की स्कूल की कॉपी-किताबें पानी में तैरती मिलीं, जिससे परिवार को बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है। प्रशासन की लापरवाही पर फूटा ग्रामीणों का गुस्सा ग्रामीणों का आरोप है कि यह स्थिति प्रशासनिक उदासीनता का नतीजा है। मानसून की शुरुआत से पहले ही स्थानीय सरपंच और पंचायत प्रशासन से नाली निर्माण को ठीक करने और जल निकासी की व्यवस्था करने की गुहार लगाई गई थी, लेकिन समय रहते इस पर कोई ध्यान नहीं दिया गया। पंचायत और अधिकारियों का पक्ष बड़वारा की सरपंच सुनैना सिंह ने बताया कि संबंधित नाली का निर्माण लोक निर्माण विभाग ने कराया था, जिसमें पानी की निकासी की कोई ठोस व्यवस्था नहीं थी। उन्होंने कहा कि पंचायत ने मानसून से पहले ही पीडब्ल्यूडी विभाग को पत्र लिखकर व्यवस्था सुधारने का आग्रह किया था। पंचायत स्तर पर हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। क्षेत्रीय अधिकारी विवेक श्रीवास्तव ने कहा कि बड़वारा ग्राम में जलभराव की सूचना मिली है। मामले को गंभीरता से लेते हुए तकनीकी टीम मौके पर पहुंचेगी। स्थल निरीक्षण कर जलभराव की इस समस्या का स्थाई और त्वरित निराकरण किया जाएगा।
शिक्षा एवं पंचायती राज मंत्री मदन दिलावर के भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त रुख का एक और मामला सामने आया है। कोटा में तबादलों के नाम पर पैसे वसूलने वाले एक आरोपी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया है। मामला सांगोद पंचायत समिति से जुड़ा है, जहां पदस्थापित ग्राम विकास अधिकारी(VDO) मंजुला बैरागी ने मंत्री मदन दिलावर के आवास पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई। उन्होंने आरोप लगाया कि बारां निवासी नरोत्तम बड़ारिया ने उनका तबादला करवाने के नाम पर उनसे पैसों की मांग की और राशि भी ली। शिक्षा मंत्री दिलावर ने जीरो एफआईआर दर्ज करने के दिए निर्देश शिकायत को गंभीरता से लेते हुए मंत्री मदन दिलावर ने तत्काल महावीर नगर थाना प्रभारी को बुलाकर आरोपी के खिलाफ नामजद जीरो एफआईआर दर्ज करने के निर्देश दिए। इसके बाद महावीर नगर थाने में जीरो एफआईआर दर्ज की गई, जिसे सांगोद पुलिस को भेजा गया। सांगोद थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपी नरोत्तम बड़ारिया को बारां से गिरफ्तार कर लिया है। फिलहाल पुलिस उससे पूछताछ कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि उसने कितने लोगों से तबादलों के नाम पर ठगी की है। इस मामले में केवल मंजुला बैरागी ही नहीं, बल्कि दो अन्य ग्राम विकास अधिकारियों भूपेंद्र सिंह और संदीप सिंह चौहान ने भी आरोपी के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई है। पुलिस को आशंका है कि आरोपी ने कई अन्य लोगों को भी अपना शिकार बनाया हो सकता है। फिलहाल पुलिस मामले की हर पहलू से जांच कर रही है और आरोपी के नेटवर्क तथा उसके संपर्कों की भी पड़ताल की जा रही है।
अमेरिका के साथ युद्धविराम समझौते के बाद ईरान के भीतर राजनीतिक टकराव खुलकर सामने आ गया है। राष्ट्रपति मसूद पजशकियान, विदेश मंत्री अब्बास अराघची और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ पर अब ईरान के कट्टरपंथी धड़े ‘सॉफ्ट कूप’ यानी बिना हथियारों के सत्तापलट करने का आरोप लगा रहे हैं।
कट्टरपंथियों का कहना है कि इन नेताओं ने अमेरिका से समझौता करके ईरान के सिद्धांतों से समझौता किया है। CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले सप्ताह तेहरान में सुप्रीम लीडर अली खामेनेई के अंतिम संस्कार के दौरान यह नाराजगी खुलकर दिखाई दी।
राष्ट्रपति मसूद पजशकियान जब खामेनेई के ताबूत के साथ चल रहे थे, तब काले कपड़े पहने कुछ लोगों ने राष्ट्रपति के खिलाफ नारे लगाए। वहीं, अंतिम संस्कार स्थल से कुछ दूरी पर विदेश मंत्री अब्बास अराघची पर पत्थर फेंके गए और उन्हें देश बेचने वाला गद्दार कहा गया। हालात इतने बिगड़ गए कि उन्हें वहां से भागना पड़ा।
तेहरान में 3 जुलाई को एक कार्यक्रम में पहुंचे, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के सीनियर कमांडर जनरल मोहसिन रेजाई, विदेश मंत्री अब्बास अराघची, मुख्य न्यायाधीश गुलाम-हुसैन मोहसेनी एजेई, ईरानी संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ, राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ये सभी मिलकर ही अभी देश चला रहे हैं।
कट्टरपंथियों का आरोप- अमेरिका के सामने सरकार झुक गई
CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, कट्टरपंथी गुटों का मानना है कि अली खामेनेई की हत्या का बदला लेने के बजाय सरकार ने अमेरिका के सामने झुककर समझौता कर लिया। उनका कहना है कि यह समझौता नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई के आदेशों के खिलाफ किया गया।
मुजतबा खामेनेई अब तक सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आए हैं। उन्होंने न तो देश को संबोधित किया है और न ही खुलकर अपनी सत्ता का प्रदर्शन किया है, जबकि उनके नाम पर सरकार बातचीत भी कर रही है और देश भी चला रही है।
कट्टरपंथियों का आरोप है कि मुजतबा की गैरमौजूदगी का फायदा उठाकर मौजूदा सरकार अपनी ताकत बढ़ाने में लगी है। उनका दावा है कि वे संसद को कमजोर करना चाहती है।
मुजतबा खामेनेई के लगातार सार्वजनिक रूप से सामने नहीं आने के कारण राष्ट्रपति मसूद पजशकियान, संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ और विदेश मंत्री अब्बास अराघची युद्ध के बाद ईरान के सबसे प्रमुख चेहरे बन गए हैं। कट्टरपंथियों की नाराजगी की एक बड़ी वजह यही है।
14 जुलाई को तेहरान के इमाम खुमैनी मुसल्ला ग्रैंड मस्जिद में आयोजित दिवंगत सुप्रीम लीडर अली खामेनेई की श्रद्धांजलि सभा में शामिल शोकाकुल लोग मुट्ठियां उठाकर नारे लगाते हुए।
अंतिम संस्कार में जंग का संदेश, कुछ दिन बाद ही टूट गया युद्धविराम
ईरान में युद्ध के दौरान राष्ट्रीय एकता बनाए रखने की लगातार अपील की जा रही थी, लेकिन अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में कट्टरपंथी गुटों का दबदबा साफ दिखाई दिया। रिपोर्ट के मुताबिक, कट्टरपंथी गुटों ने इस मौके का इस्तेमाल अमेरिका के खिलाफ फिर से युद्ध छेड़ने की मांग उठाने और ट्रम्प सरकार के साथ हुए किसी भी समझौते को पूरी तरह खारिज करने के लिए किया।
कट्टरपंथियों की यह इच्छा कुछ ही दिनों बाद पूरी होती नजर आई। इस सप्ताह ईरान और अमेरिका के बीच हुआ नाजुक युद्धविराम लगभग टूट गया। ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड्स ने होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों को निशाना बनाकर इस समुद्री मार्ग पर अपना कंट्रोल दिखाने की कोशिश की। इसके जवाब में अमेरिका ने जवाबी हमले किए।
राष्ट्रपति को खुलेआम दी गई थी जान से मारने की धमकी
युद्ध दोबारा शुरू होने से पहले भी कट्टरपंथी नेता अमेरिका से समझौता करने वाले अधिकारियों पर लगातार हमला बोल रहे थे। ईरानी शासन से जुड़े धार्मिक गायक मोहम्मद अली बख्शी ने एक कार्यक्रम के दौरान राष्ट्रपति मसूद पजशकियान को खुलेआम धमकी दी थी। उन्होंने कहा-
राष्ट्रपति महोदय, अगर सुप्रीम लीडर की शर्तें पूरी नहीं हुईं तो हमारी तलवार होगी और आपका गला होगा। हम आपकी जिंदगी को जहन्नुम बना देंगे।
राष्ट्रपति को जान से मारने की इस धमकी की ईरान में काफी आलोचना हुई, लेकिन बख्शी के खिलाफ किसी कानूनी कार्रवाई की जानकारी सामने नहीं आई।
गालिबाफ भी कट्टरपंथियों के निशाने पर
कट्टरपंथियों के निशाने पर सिर्फ राष्ट्रपति और विदेश मंत्री ही नहीं हैं। अमेरिका के साथ बातचीत करने वाले मुख्य वार्ताकार और संसद अध्यक्ष मोहम्मद बाघेर गालिबाफ भी उनके निशाने पर हैं। गालिबाफ पहले रिवोल्यूशनरी गार्ड्स में कमांडर रह चुके हैं और लंबे समय से ईरान की राजनीति में सक्रिय हैं।
कट्टरपंथी सांसद कमरान गजनफारी ने जुलाई की शुरुआत में जारी एक वीडियो मैसेज में आरोप लगाया कि मौजूदा नेतृत्व सर्वोच्च नेता और संसद की भूमिका कमजोर कर रहा है।
संसद स्पीकर बाघेर गालिबाफ अमेरिका के साथ बातचीत में ईरान का नेतृत्व कर रहे थे।
कट्टरपंथियों को किनारे करने की कोशिश तेज
ईरान में करीब चार महीने बाद 14 जुलाई को संसद का विशेष सत्र बुलाया गया। इसमें सत्ता संघर्ष खुलकर सामने आया और अमेरिका के साथ हुए समझौते का विरोध करने वाले दो प्रमुख कट्टरपंथी सांसदों को अहम संसदीय पदों से हटा दिया गया।
सबसे पहले अमेरिका से समझौते का सबसे ज्यादा विरोध करने वाले कट्टरपंथी सांसद महमूद नबावियन को संसद की राष्ट्रीय सुरक्षा आयोग (नेशनल सिक्योरिटी कमीशन) से हटा दिया गया। इसके अलावा इसके प्रवक्ता रहे इब्राहिम रेजाई को भी हटा दिया गया।
नबावियन पहले अमेरिका के साथ बातचीत करने वाले ईरानी प्रतिनिधिमंडल का हिस्सा रह चुके हैं, लेकिन बाद में उन्होंने वार्ता का विरोध शुरू कर दिया। आरोप है कि उन्होंने पिछले महीने समझौते पर हस्ताक्षर होने से पहले उसका मसौदा मीडिया में लीक कर दिया था, ताकि समझौता रुक सके।
ईरान में 14 जुलाई को संसद का विशेष सत्र बुलाया गया था।
विशेषज्ञ बोले- सरकार कट्टरपंथियों का असर कम करना चाहती है
एक्सपर्ट्स का मानना है कि ईरान की मौजूदा सरकार अब इन कट्टरपंथी गुटों का प्रभाव कम करने की कोशिश कर रही है। हामिदरेजा अजीजी ने CNN से कहा-
हम देख रहे हैं कि गालिबाफ इन कट्टरपंथी नेताओं को धीरे-धीरे किनारे कर रहे हैं। ये लोग अब व्यवस्था के लिए बोझ बन चुके हैं और देश में अस्थिरता बढ़ने के साथ अपनी आपसी लड़ाई भी खुलकर सामने ला रहे हैं।
हालांकि इन कट्टरपंथियों की संख्या ज्यादा नहीं है, लेकिन संसद और सरकारी न्यूज एजेंसीज आईआरआईबी (IRIB) जैसे कई प्रभावशाली संस्थानों में उनकी मजबूत पकड़ है। इनकी वास्तविक राजनीतिक ताकत कितनी है, यह साफ नहीं है।
इस धड़े के प्रमुख नेता और पूर्व राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख सईद जलीली को 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में 1.3 करोड़ से ज्यादा वोट मिले थे। वे चुनाव में दूसरे स्थान पर रहे थे। ईरान की कुल आबादी करीब 9.3 करोड़ है।
ट्रम्प ने कहा था- ईरान भीतर से बंटा हुआ है
युद्ध और कूटनीतिक बातचीत के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प कई बार कह चुके हैं कि ईरान का नेतृत्व गंभीर अंदरूनी मतभेदों से जूझ रहा है और यही किसी समझौते में सबसे बड़ी बाधा है।
हालांकि एक्सपर्ट्स का कहना है कि सरकार और कट्टरपंथियों के बीच मतभेद जरूर हैं, लेकिन पूरे शासन की प्राथमिकता अब भी एक जैसी है। उनका लक्ष्य ऐसा समझौता करना है जिससे युद्ध खत्म हो, ईरान को प्रतिबंधों से राहत मिले और होर्मुज स्ट्रेट पर उसका प्रभाव भी बना रहे।
अमेरिका से फिर जंग चाहते हैं कट्टरपंथी
CNN के अनुसार, मुजतबा खामेनेई का लगातार सार्वजनिक रूप से सामने न आना, युद्धविराम को लेकर उनका सीमित समर्थन, रिवोल्यूशनरी गार्ड्स का बढ़ता प्रभाव और अली खामेनेई के अंतिम संस्कार में जुटी भारी भीड़ ने कट्टरपंथियों का मनोबल बढ़ा दिया है। अब वे अमेरिका और इजराइल के खिलाफ युद्ध जारी रखने की खुलकर मांग कर रहे हैं।
ईरान के पूर्व विदेश मंत्री और कट्टरपंथी नेता मनूचेहर मुत्ताकी ने बुधवार को एक टीवी इंटरव्यू में कहा,
मेरा सुझाव है कि हम क्षेत्र में मौजूद अमेरिका के किसी सैन्य अड्डे पर जाएं, जहां सैकड़ों या शायद हजारों अमेरिकी सैनिक मौजूद हैं। अगर हम उनमें से 100 सैनिकों को पकड़कर ईरान ले आएं, तो इतना ही काफी होगा।
यह बयान दिखाता है कि अमेरिका के साथ हुए समझौते के बावजूद ईरान के भीतर सत्ता संघर्ष खत्म नहीं हुआ है। एक तरफ सरकार कूटनीतिक रास्ते से प्रतिबंधों में राहत और युद्ध खत्म करने की कोशिश कर रही है, वहीं कट्टरपंथी धड़े अब भी अमेरिका और इजराइल के खिलाफ टकराव की नीति पर अड़े हुए हैं। इससे आने वाले समय में ईरान की आंतरिक राजनीति और विदेश नीति दोनों पर बड़ा असर पड़ सकता है।
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अमेरिका का लगातार सातवीं रात ईरान पर हमला:भारत के निवेश वाले चाबहार पोर्ट पर अटैक; ईरान ने कतर-कुवैत पर दागीं मिसाइलें
अमेरिका ने शनिवार को लगातार सातवीं रात ईरान पर एयरस्ट्राइक की। इन हमलों में पुल, एनर्जी इंफ्रास्ट्रक्चर और भारत के निवेश वाले चाबहार पोर्ट का एक कंट्रोल (निगरानी) टावर निशाना बना। जवाब में ईरान ने कतर, कुवैत, बहरीन और जॉर्डन की ओर मिसाइलें दागीं। पूरी खबर यहां पढ़ें…
Q1 Results : पहली तिमाही के नतीजों का सीजन शुरू हो रहा है. कई दिग्गज कंपनियों ने अपने पहली तिमाही के परिणाम जारी कर दिए हैं. आज एक्सिस बैंक और पंजाब नेशनल बैंक ने भी अपना फाइनेंशियल लेखा-जोखा सामने रखा है. इन दिग्गज बैंकों की कैसी है वित्तीय सेहत, आइये जानते हैं.
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पीएनबी और एक्सिस बैंक के मुनाफे में उछाल आया है.
नई दिल्ली. बैंकिंग सेक्टर के दो बड़े दिग्गजों ने अपनी पहली तिमाही (Q1) के नतीजे जारी कर दिए हैं. प्राइवेट सेक्टर के एक्सिस बैंक (Axis Bank) ने बताया है कि उसके मुनाफे में 23% का जोरदार उछाल आया है. वहीं सरकारी पंजाब नेशनल बैंक (PNB) का प्रॉफिट भी सीधे तीन गुना बढ़ गया है. दोनों ही बैंकों के बढिया नतीजों का सकारात्मक असर दोनों के ही शेयरों पर होगा. लेकिन, डिविडेंड के मोर्चे पर दोनों ही बैंकों ने निवेशकों को निराश किया है. दोनों ने ही डिविडेंड देने की घोषणा नहीं की है.
प्राइवेट सेक्टर के एक्सिस बैंक के लिए चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही खुशियां लेकर आई है. बैंक का नेट प्रॉफिट 23% बढ़कर ₹7,114 करोड़ पर पहुंचा है. पिछले साल की समान तिमाही में यह ₹5,806 करोड़ था.
ब्याज से खूब कमाया पैसा
पहली तिमाही में बैंक ने ब्याज से खूब पैसा कूटा है. बैंक की नेट इंटरेस्ट इनकम (NII) 8% उछलकर ₹14,646 करोड़ हो गई. बैंक में लोग खूब पैसा जमा करा रहे हैं. इसी का नतीजा है कि बैंक का कुल डिपॉजिट 18% की रफ्तार से भागा है. बैंक लोन भी दिल खोलकर बांट रहा है. र लोन बुक 19% की दर से चढ़ी है. कॉरपोरेट लोन में तो 38% की तूफानी तेजी आई है.
PNB Q1 Results : तीन गुना बढ़ा मुनाफा, डूबा पैसा भी हुआ कम
पंजाब नेशनल बैंक (PNB) ने पहली तिमाही के नतीजे भी निवेशकों को गदगद करने वाले हैं. पीएनबी की कुल आय 37,231 करोड़ रुपये रही. चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में इस सरकारी बैंक ने अच्छा मुनाफा कूटा है. पीएनबी का नेट प्रॉफिट साल-दर-साल आधार पर तीन गुना उछलकर ₹5,253 करोड़ हो गया है.
बिहार के सहरसा में दुकानदार के तीन बच्चों ने साबित कर दिया है कि दृढ़ संकल्प, अनुशासन और कड़ी मेहनत से आर्थिक तंगी को दूर किया जा सकता है। एक साधारण परिवार के तीन भाई-बहनों ने, जो कोटा या दिल्ली में महंगी कोचिंग का खर्च नहीं उठा सकते थे, एक साथ नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेंस टेस्ट (NEET) पास किया है। उन्होंने साबित किया है कि प्रतिभा किसी की मोहताज नहीं होती।
तीनों बच्चों को मिले अच्छे नंबर
सहरसा के गांव तुलसियाही के रहने वाले किराना दुकानदार के बड़े बेटे रजनीश कुमार ने नीट परीक्षा में 633 अंक प्राप्त किया। बहन साक्षी कुमारी को 601 अंक मिले जबकि छोटे बेटे प्रह्लाद कुमार ने 565 अंक प्राप्त किए हैं। रजनीश कुमार, प्रह्लाद कुमार और उनकी बहन साक्षी ने अपने गृहनगर सहरसा में ही तैयारी करके यह उपलब्धि हासिल की। उनकी शानदार सफलता पूरे जिले में चर्चा का विषय बन गई है और देश भर के हजारों NEET उम्मीदवारों के लिए प्रेरणा का स्रोत हैं।
पिता चलाते हैं छोटी सी किराना की दुकान
रजनीश और प्रह्लाद ने सेंट्रल बोर्ड ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन (CBSE) से अपनी स्कूली शिक्षा पूरी की, वहीं साक्षी ने बिहार स्कूल एग्जामिनेशन बोर्ड से पढ़ाई की। अलग-अलग शैक्षणिक पृष्ठभूमि के बावजूद, तीनों का डॉक्टर बनने का सपना एक ही था। उनके पिता रोहित आनंद किराने की एक छोटी सी दुकान चलाते हैं। इससे परिवार का गुजारा चलता है। सीमित आर्थिक संसाधनों के कारण, बच्चों को कोटा या दिल्ली जैसे कोचिंग हब में भेजना परिवार की क्षमता से बाहर था।
Image Source : REPORTERदुकानदार के 3 बच्चों ने एक साथ क्रैक किया नीट
रोहित आनंद और उनकी पत्नी पूनम देवी ने कहा कि उन्होंने अपने बच्चों को ईमानदारी से बता दिया था कि वे उन्हें कोचिंग के लिए जिले से बाहर भेजने का खर्च नहीं उठा सकते। हालांकि, उन्होंने उन्हें भरोसा दिलाया कि वे उनकी शिक्षा में मदद के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। इसके बाद भाई-बहनों ने सहरसा के एक स्थानीय कोचिंग संस्थान में दाखिला लिया।
कोटा जाने के बजाय सहरसा में तैयारी की
तीनों भाई-बहनों ने कोटा या दिल्ली जाने की बजाय अपने गृहनगर में ही तैयारी करने का फैसला किया। उन्होंने अपनी सफलता का श्रेय अनुशासित पढ़ाई, समय के सही प्रबंधन और लगातार कड़ी मेहनत को दिया। भाई-बहनों ने बताया कि वे नियमित रूप से एक-दूसरे के साथ कठिन विषयों पर चर्चा करते थे और एक-दूसरे के संदेह दूर करते थे, जिससे उनकी समझ मजबूत हुई और तैयारी के दौरान वे प्रेरित रहे।
जनसमस्याओं के त्वरित निस्तारण के उद्देश्य से शनिवार दोपहर 12 बजे तहसील तुलसीपुर में सम्पूर्ण समाधान दिवस का आयोजन किया गया। जिलाधिकारी डॉ. विपिन कुमार जैन और पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने फरियादियों की शिकायतें सुनीं। इस दौरान अधिकारियों को स्पष्ट चेतावनी दी गई कि शिकायतों के निस्तारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनावश्यक विलंब बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। अधिकारियों को समयबद्ध, गुणवत्तापूर्ण और संतोषजनक निस्तारण सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। दोपहर 2 बजे तक चले समाधान दिवस के दौरान जिलाधिकारी ने पात्र लाभार्थियों को आवासीय भूमि के पट्टे भी वितरित किए। ग्राम शीतलापुर देहात की साधना, सुमन देवी, रीनू देवी और विद्या देवी को ये पट्टे प्रदान किए गए। डीएम ने बताया कि शासन की मंशा प्रत्येक पात्र परिवार को भूमि और आवास जैसी मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना है, और यह अभियान लगातार जारी रहेगा। डीएम ने राजस्व, पुलिस, विकास, समाज कल्याण, विद्युत, पेयजल, पंचायत और कृषि विभाग के अधिकारियों को शिकायतों की नियमित समीक्षा करते हुए प्राथमिकता के आधार पर उनका निस्तारण करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जिन मामलों में राजस्व और पुलिस विभाग की संयुक्त कार्रवाई आवश्यक हो, वहां दोनों विभाग समन्वय स्थापित कर तत्काल कार्रवाई करें। उन्होंने विशेष रूप से भूमि विवाद, अवैध कब्जा, पेंशन, आवास, बिजली और पेयजल से जुड़ी शिकायतों के पारदर्शी समाधान पर जोर दिया। जिलाधिकारी ने कहा कि जहां स्थलीय निरीक्षण जरूरी हो, वहां अधिकारी मौके पर जाकर जांच करें और तथ्यात्मक रिपोर्ट प्रस्तुत करें। समाधान दिवस में कुल 36 प्रार्थना पत्र प्राप्त हुए। इनमें से 8 शिकायतों का मौके पर ही निस्तारण कर दिया गया, जबकि शेष मामलों को समयबद्ध कार्रवाई के लिए संबंधित विभागों को सौंपा गया। पुलिस अधीक्षक विकास कुमार ने पुलिस से संबंधित शिकायतों के निष्पक्ष और त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि कानून-व्यवस्था से जुड़े मामलों में किसी भी प्रकार की ढिलाई स्वीकार नहीं की जाएगी। प्रत्येक शिकायत पर संवेदनशीलता और पारदर्शिता के साथ कार्रवाई सुनिश्चित की जाए ताकि लोगों को समय पर न्याय मिल सके।
लखीसराय में 19 जुलाई को सात मॉडल विद्यालयों के उद्घाटन की तैयारियों की समीक्षा के लिए शनिवार को समाहरणालय में जिला पदाधिकारी शैलेंद्र कुमार की अध्यक्षता में एक बैठक आयोजित की गई। इसमें संबंधित अधिकारियों को आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। अधिकारियों ने बताया कि बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी 19 जुलाई को बेगूसराय से लाइव प्रसारण के माध्यम से राज्य के मॉडल विद्यालयों का शुभारंभ करेंगे। जिले के चयनित विद्यालयों में इस कार्यक्रम का सीधा प्रसारण किया जाएगा। मननपुर में कार्यक्रम का सीधा प्रसारण होगा
लखीसराय जिले के उच्च विद्यालय हलसी, उच्च विद्यालय रामगढ़ चौक, केंद्रीय उच्च माध्यमिक विद्यालय लखीसराय, मालती रामाश्रय उच्च विद्यालय बड़हिया, उच्च माध्यमिक विद्यालय पिपरिया, उच्च विद्यालय नरोत्तमपुर (कजरा) सूर्यगढ़ा और उत्क्रमित उच्च विद्यालय मननपुर (चानन) में कार्यक्रम का सीधा प्रसारण होगा। इन विद्यालयों में जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, शिक्षकों, छात्र-छात्राओं और अभिभावकों की उपस्थिति सुनिश्चित की जाएगी। जिलाधिकारी ने कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए मिनट-टू-मिनट कार्ययोजना तैयार कर उसका शत-प्रतिशत अनुपालन सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने स्वागत गान, अतिथियों का स्वागत, पदाधिकारियों एवं जनप्रतिनिधियों का संबोधन तथा धन्यवाद ज्ञापन निर्धारित समय पर संपन्न कराने को कहा। पावर बैकअप सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए
सभी विद्यालयों में साफ-सफाई, पेयजल, बैठने की समुचित व्यवस्था, ध्वनि विस्तारक यंत्र, इंटरनेट कनेक्टिविटी और निर्बाध लाइव प्रसारण के लिए पावर बैकअप सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए। डीएम ने सभी शिक्षकों को निर्धारित ड्रेस कोड और पहचान पत्र के साथ उपस्थित रहने तथा प्रत्येक विद्यालय में ड्यूटी रोस्टर बनाकर जिम्मेदारियां तय करने को कहा। साथ ही, कंट्रोल रूम स्थापित कर प्रशासनिक अधिकारियों के साथ समन्वय बनाए रखने का निर्देश दिया गया। संबंधित विद्यालयों के प्राचार्यों को स्थानीय जनप्रतिनिधियों को आमंत्रित कर उनकी गरिमामयी उपस्थिति सुनिश्चित करने की जिम्मेदारी सौंपी गई। बैठक में डीएम ने सातों मॉडल विद्यालयों के लिए सात वरीय पदाधिकारियों की प्रतिनियुक्ति करते हुए कार्यक्रम की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी। उन्होंने बताया कि कार्यक्रम से पूर्व सभी विद्यालयों की तैयारियों का निरीक्षण अपर समाहर्ता, उप विकास आयुक्त, अनुमंडल पदाधिकारी एवं अन्य वरीय अधिकारियों के साथ किया जाएगा, ताकि उद्घाटन समारोह का सफल एवं व्यवस्थित आयोजन सुनिश्चित हो सके।