Tuesday, May 26, 2026
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योगी के पीए, UP के मंत्रियों के नंबर पाकिस्तान भेजे: गाजियाबाद के जैद को तेलंगाना पुलिस ने अरेस्ट किया, पिस्टल देने के बाहने फंसाया – Ghaziabad News




पाकिस्तानी आतंकियों और खुफिया एजेंसी आईएसआई ने देश की सुरक्षा में फिर सेंध लगाने की कोशिश की। जिसमें यूपी समेत देश के कई मंत्रियों के नंबर गोपनीय ढंग से गाजियाबाद के रहने वाले जैद से जुटाए गए। जैद ने इन मोबाइल नंबरों को पाकिस्तनी आतंकियों और ISI एजेंटो को भेज दिया। तेलंगाना राज्य की मेडचल पुलिस ने आरोपी जैद को अरेस्ट कर लिया है। जिसे जेल भेज दिया गया है। 20 मई को इंटरनेट से सर्च किए नंबर तेलंगाना पुलिस की जांच में आया है कि 20 मई को आरोपी जैद ने इंटरनेट के माध्यम से यूपी के कैबिनेट मंत्रियों के फोन नंबर सर्च किए। इसके बाद इन मोबाइल नंबरों को ISI एजेंट और हेंडलर्स को भेजे। जिसके बद तेलंगाना की मेडचल पुलिस ने 25 मई को यूपी के गाजियाबाद के रहने वाले मौहम्मद जैद को अरेस्ट किया है। जिससे पूछताछ में कई खुलासे सामने आए। जैद कक्षा 4 तक पढ़ा हुआ जैद ने पुलिस को पूछताछ में बताया कि मैं कक्षा 4 तक पढ़ा हुआ हूं। 2021 में मैं यूपी के गाजियाबाद से कोलकाता चला गया। जहां उसने एक कपड़ा व्यापारी के साथ मिलकर काम किया। तीन साल तक कपड़ा का काम करने के बाद फिर गाजियाबाद लौटा। फरवरी 2026 में हैदराबाद के एक रेस्टोरेंट में काम करने चला गया। जैद की नौकरी की सिफारिश चचेरे भाई फैजान ने की थी। जहां रेस्टोरेंस्ट के सुपरवाइजर फैजान की सिफारिश पर जैद 15 हजार रुपये महीने पर वहीं पर वेटर की नौकरी कर रहा था। रील बनाने के चक्कर में फंसा पुलिस की जांच में आया कि जैद ISI के संपर्क में था। 22 साल के आरोपी ज़ैद खान उर्फ आदिला रील बनाता था। फेसबुक, इंस्टाग्राम पर वीडियो पोस्ट करता था। इस दौरान आबिद और राणा हुसैन नाम के दो लोगों ने जैद को फॉलो किया। पिछले महीने 4 अप्रैल को आबिद के कहने पर जैद ने प्रयागराज के छोटा योगी नाम व्यक्ति की लोकेशन उनके साथ शेयर की। इसके बाद 10 अप्रैल कोआबिद ने जैद से कहा कि पाकिस्तानी डॉन आबिद के नाम से एक हजार पोस्टर गाजियाबाद में लगाने हैं। इसके बदले में एक पिस्टल देने का वादा किया गया। इन सब का वीडियो पूरे सबूत के तौर पर जैद को भेजना था। इसके बाद सीएम योगी के पीए का नंबन निकालने का टास्क मिला। इसके बाद यूपी के कई कैबिनेट मंत्रियों के नंबर मांगे गए। जहां जैद ने यूपी के कई कैबिनेट मंत्रियों के नंबर भेज दिए। पुलिस की जांच में आया कि आबिद जाट मेमोस और जाट 333 जैसे व्हाट्सएप ग्रुप से जुड़ा था। वह लगातार इस्लाम के लिए लड़ने के लिए पिस्टल की मांग कर रहा था। जैद के मोबाइल की भी तेलंगाना पुलिस जांच कर रही है। जैद को चेरलापल्ली की जेल में भेजा गया है।



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अररिया सांसद बोले-मोदी सरकार के 12 साल में देश बदला: गांव-गांव तक पहुंची विकास की रोशनी, योजनाओं को बताया ऐतिहासिक – Araria News




प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के प्रधानमंत्री पद की शपथ ग्रहण के 12 वर्ष पूरे होने पर अररिया लोकसभा सांसद प्रदीप कुमार सिंह ने खुशी व्यक्त की है। उन्होंने इस अवसर पर जनता का आभार भी प्रकट किया। सांसद ने इस उपलब्धि को ‘नए भारत’ के निर्माण की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। सांसद प्रदीप कुमार सिंह ने कहा कि वर्ष 2014 में मिले जनादेश के साथ शुरू हुआ यह सफर आज देश के समग्र विकास का मजबूत आधार बन चुका है। उन्होंने ‘सेवा, संकल्प, सुशासन और विकास’ के मंत्र को केंद्र में रखकर प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत की अभूतपूर्व प्रगति का उल्लेख किया। सांसद के अनुसार, भारत आज विश्व पटल पर नई ताकत और आत्मविश्वास के साथ उभर रहा है। उन्होंने गरीब कल्याण, आधारभूत संरचना, डिजिटल क्रांति, महिला सशक्तिकरण, किसान उत्थान और युवा अवसरों में आए ऐतिहासिक परिवर्तनों की सराहना की। 12 वर्षों में विकास की नई इबारत लिखी गई
विशेष रूप से सीमांचल क्षेत्र के अररिया में पिछले 12 वर्षों में विकास की नई इबारत लिखी गई है। सड़क, रेल, बिजली, स्वास्थ्य सेवाएं, आवास, शौचालय, उज्ज्वला गैस कनेक्शन, बैंकिंग और डिजिटल सुविधाएं गांव-गांव तक पहुंच चुकी हैं। सांसद ने कहा, “बीते 12 वर्षों का गूगल मैप ही विकास की कहानी बताने के लिए पर्याप्त है।” उन्होंने बताया कि जहां पहले बुनियादी सुविधाओं का अभाव था, आज वहां सड़क, पुल, रेलवे कनेक्टिविटी और जनकल्याणकारी योजनाओं का विस्तार दिखाई देता है। इससे आम नागरिक का जीवन अब अधिक सरल, सुरक्षित और सम्मानजनक हुआ है। करोड़ों भारतीयों के जीवन में सकारात्मक बदलाव आया
प्रदीप कुमार सिंह ने प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व को दूरदर्शी और प्रेरणादायी बताया। उन्होंने कहा कि ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ के मंत्र ने करोड़ों भारतीयों के जीवन में सकारात्मक बदलाव लाया है। अंत में, सांसद ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इन सफल 12 वर्षों के लिए बधाई दी। उन्होंने विकसित भारत के संकल्प को पूरा करने में जनता के पूर्ण समर्थन का भरोसा भी जताया। इन 12 वर्षों को केवल सरकार चलाने के नहीं, बल्कि एक विकसित और आत्मनिर्भर भारत के निर्माण के वर्ष बताया गया।



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लोडिंग वाहन से पकड़ाया 150 किलोग्राम अवैध डोडाचूरा: राजस्थान के नागौर के दो तस्कर लेकर जा रहे थे; फोरलेन पर घेराबंदी कर पकड़ा – Ratlam News




रतलाम पुलिस ने मंगलवार को अवैध मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 150 किलोग्राम डोडाचूरा जब्त किया है। जिले की रिंगनोद थाना पुलिस और माननखेड़ी चौकी पुलिस ने संयुक्त कार्रवाई में करीब 3 लाख रुपए कीमत का डोडाचूरा पकड़ा। पुलिस ने फोरलेन पर घेराबंदी कर एक 407 लोडिंग वाहन को रोका, जिसमें दो आरोपी अवैध मादक पदार्थ लेकर जावरा की ओर जा रहे थे। तलाशी लेने पर मिला 150 किलो माल संदिग्ध लोडिंग वाहन आने पर रोक कर तलाशी। तलाशी के दौरान वाहन में 150 किलोग्राम अवैध मादक पदार्थ डोडाचूरा बरामद हुआ। मौके पर वाहन में सवार जीवनराम (48) पिता परमाराम विश्नोई, निवासी पालडीमेस थाना गच्छीपुरा जिला नागौर (राजस्थान) व सुखाराम (30) पिता बल्लाराम विश्नोई निवासी रेण थाना मेडता जिला नागौर (राजस्थान) को एनडीपीएस एक्ट में केस दर्ज कर गिरफ्तार किया। पुलिस ने पिकअप वाहन को भी जप्त कर लिया है। जिसकी कीमत करीब 10 लाख रुपए है। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों से डोडाचूरा के स्रोत, सप्लाई नेटवर्क एवं अन्य संलिप्त व्यक्तियों के बारे में पूछताछ की जा रही है।



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दिल्ली में 3डी-प्रिंटेड इम्प्लांट से युवक को मिला नया कूल्हा: हादसे के बाद हड्डी जर्जर-गंभीर संक्रमण हुआ; 22 महीने में झेली 10 सर्जरी – New Delhi News




राजधानी दिल्ली के गंगा राम अस्पताल के डॉक्टरों ने चिकित्सा जगत में एक बड़ी उपलब्धि हासिल की है। अस्पताल में पहली बार एक 28 वर्षीय युवक के कूल्हे का विशेष 3डी-प्रिंटेड टाइटेनियम इम्प्लांट की मदद से अत्यंत जटिल रिवीजन टोटल हिप रिप्लेसमेंट सफलतापूर्वक किया गया। गंभीर सड़क हादसे का शिकार हुए इस मरीज की पिछले 22 महीनों में 10 सर्जरी हो चुकी थीं। वह लगातार पुरानी संक्रमण (क्रोनिक इन्फेक्शन) पस के रिसाव और भारी हड्डी क्षति से जूझ रहा था, जिससे उसका हिप जॉइंट पूरी तरह नष्ट हो चुका था। जॉइंट रिप्लेसमेंट कंसल्टेंट डॉ निपुण राणा के नेतृत्व में डॉक्टरों की बहु-विषयक टीम ने इस चुनौती को स्वीकार किया। सबसे पहले रैपिड डायग्नोस्टिक बायोफायर जॉइंट इन्फेक्शन पैनल, तकनीक से संक्रमण की सटीक पहचान कर उसे नियंत्रित किया गया। इसके बाद सीटी आधारित 3डी रिकंस्ट्रक्शन सॉफ्टवेयर की मदद से मरीज की अनूठी शारीरिक संरचना के अनुसार विशेष टाइटेनियम इम्प्लांट तैयार किया गया। मरीज का हिप पूरी तरह स्थिर है और वह चलने-फिरने लगा है: डॉक्टर डॉक्टरों के मुताबिक, जहां पारंपरिक इम्प्लांट फेल हो जाते हैं, वहां इस अत्याधुनिक तकनीक ने सटीक फिटिंग और हिप बायोमैकेनिक्स की बहाली को संभव बनाया। यह मरीज की 11वीं सर्जरी थी जो करीब 6 घंटे चली। अब मरीज का हिप पूरी तरह स्थिर है और वह चलने-फिरने लगा है। डॉक्टरों ने बताया, ऐसे जटिल मामलों में सफलता केवल जोड़ बदलने में नहीं, बल्कि संक्रमण को जड़ से समझने और सूक्ष्म योजना बनाने में है। 3डी-प्रिंटेड इम्प्लांट हमें वहां पुनर्निर्माण की ताकत देते हैं जहां पारंपरिक चिकित्सा पद्धतियां नाकाम हो जाती हैं। यह ऑर्थोपेडिक नवाचार के क्षेत्र में एक बड़ा कदम है।



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धोखाधड़ी के 8 मामलों का आरोपी जयपुर में गिरफ्तार: कपड़े रंगाई का काम कर रहा था, प्लॉट दिलाने के नाम पर की लाखों की ठगी – Hanumangarh News




हनुमानगढ़ टाउन पुलिस ने धोखाधड़ी के 8 मामलों में फरार चल रहे एक आरोपी को जयपुर से गिरफ्तार किया है। आरोपी पिछले करीब 3 साल से फरार था और गिरफ्तारी से बचने के लिए जयपुर में कपड़ों की रंगाई का काम कर रहा था। पुलिस ने मुखबिर की सूचना पर यह कार्रवाई की। एएसआई सरजीत सिंह के नेतृत्व में पुलिस टीम ने सोहेल खान (28) को पकड़ा। सोहेल हनुमानगढ़ टाउन की गली नंबर 4, नई आबादी का निवासी है।
आरोपी सोहेल खान वर्ष 2023 में दर्ज धोखाधड़ी के 8 मामलों में वांछित था। वह लंबे समय से पुलिस से बच रहा था। पुलिस जांच में सामने आया कि वर्ष 2014 में सोहेल खान और उसके पिता सलीम खान ने गांव कोहला में एक आवासीय कॉलोनी विकसित करने का दावा किया था। उन्होंने लोगों को किस्तों में प्लॉट देने और पूरा भुगतान होने पर रजिस्ट्री कराने का भरोसा दिलाया।
आरोपियों ने परिवादियों को कॉलोनी का नक्शा दिखाया और मौके पर प्लॉट भी बताए। इसके बाद उनसे लाखों रुपए अग्रिम राशि के रूप में ले लिए गए। बाद में जांच में पता चला कि दिखाए गए प्लॉट मौके पर मौजूद नहीं थे और न ही भूमि रूपांतरण से संबंधित कोई दस्तावेज थे। लाखों रुपए लेने के बाद आरोपी फरार हो गए थे। इस संबंध में टाउन थाने में अलग-अलग परिवादियों द्वारा 8 मामले दर्ज कराए गए थे।
सोहेल खान के पिता सलीम खान को पहले ही गिरफ्तार कर न्यायिक हिरासत में भेजा जा चुका है। मामले की आगे की जांच जारी है।



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बाजार से मीठे, रसीले और बिना कीड़े वाले चीकू कैसे चुनें? अपनाएं ये ट्रिक्स


Chikoo Buying Tips: फल खरीदना देखने में जितना आसान लगता है, असल में उतना होता नहीं है. खासकर चीकू जैसे फल के मामले में लोग अक्सर धोखा खा जाते हैं. ऊपर से साफ और सुंदर दिखने वाला चीकू घर पहुंचकर या तो कच्चा निकलता है, या फिर अंदर से खराब. कई बार लोग ज्यादा झुर्रियों वाले चीकू को मीठा समझकर खरीद लेते हैं, तो कभी हरे रंग का फल देखकर सोचते हैं कि घर पर पक जाएगा. लेकिन हर बार ऐसा नहीं होता. अगर आपको सच में मीठा, रसीला और खाने लायक चीकू चाहिए, तो खरीदते समय कुछ आसान बातों का ध्यान रखना जरूरी है.

सही पहचान होने पर न सिर्फ आपका पैसा बचेगा, बल्कि खाने का मजा भी दोगुना हो जाएगा. अच्छी बात यह है कि इसके लिए किसी एक्सपर्ट बनने की जरूरत नहीं है. बस थोड़ी समझदारी और ध्यान से आप हर बार बेहतर चीकू चुन सकते हैं.

सबसे पहले रंग देखकर करें पहचान
चीकू खरीदते समय सबसे पहले उसके रंग पर नजर डालें. अच्छा और पका हुआ चीकू आमतौर पर हल्के भूरे या हल्की लालिमा लिए भूरे रंग का दिखता है. अगर फल हरा नजर आ रहा है, तो समझ लीजिए कि उसे समय से पहले तोड़ा गया है. ऐसे चीकू कई बार घर पर रखने के बाद भी सही तरीके से नहीं पकते. अगर पक भी जाएं तो उनका स्वाद वैसा मीठा नहीं आता जैसा होना चाहिए. इसलिए सिर्फ चमक देखकर नहीं, रंग देखकर फैसला करें.

छोटे छेद को बिल्कुल नजरअंदाज न करें
कई बार चीकू बाहर से बिल्कुल ठीक दिखता है, लेकिन उसमें एक छोटा सा छेद होता है. यही छोटी सी चीज बड़ा नुकसान करा सकती है. ऐसे छेद अक्सर इस बात का संकेत होते हैं कि फल के अंदर कीड़ा लग चुका है. इसलिए चीकू खरीदते समय उसे हाथ में लेकर चारों तरफ से अच्छी तरह घुमाकर देखें. अगर कहीं भी छोटा छेद दिखे, तो उसे तुरंत वापस रख दें. वरना घर आकर फल काटने के बाद पछताना पड़ सकता है.

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बहुत ज्यादा सख्त चीकू लेने से बचें
अगर चीकू छूने पर आलू की तरह बहुत सख्त महसूस हो रहा है, तो उसे खरीदने से बचें. बहुत कच्चे चीकू को घर पर पकाना आसान नहीं होता. कई बार वे बाहर से नरम दिखने लगते हैं, लेकिन अंदर से कच्चे ही रहते हैं. कुछ तो सूख भी जाते हैं और स्वाद खराब हो जाता है. हल्की नरमी वाला चीकू बेहतर माना जाता है, क्योंकि यह बताता है कि फल पकने की सही अवस्था में है.

ज्यादा झुर्रियों वाले चीकू हमेशा अच्छे नहीं होते
बहुत से लोग सोचते हैं कि झुर्रियां मतलब फल ज्यादा मीठा होगा. लेकिन हर बार यह सच नहीं होता. जरूरत से ज्यादा झुर्रियों वाला चीकू अक्सर ज्यादा पक चुका होता है. ऐसे फलों में स्वाद बदल सकता है और कभी-कभी हल्की खराब गंध भी आने लगती है. इसलिए हल्की प्राकृतिक बनावट ठीक है, लेकिन बहुत ज्यादा सिकुड़ा हुआ चीकू खरीदना सही फैसला नहीं है.

हल्का दबाकर करें अंतिम जांच
अगर आप पके हुए चीकू की सही पहचान चाहते हैं, तो उसे हल्के हाथ से दबाकर देखें. अगर फल थोड़ा नरम महसूस हो, तो यह अच्छी निशानी है. बहुत ज्यादा मुलायम हो तो वह ज्यादा पका हो सकता है, और बहुत सख्त हो तो अभी कच्चा है. सही चीकू वही है जो हल्का दबाने पर थोड़ा नरम लगे, लेकिन दबते ही पिचक न जाए.

गलती से कच्चे चीकू आ जाएं तो क्या करें
कई बार जल्दी में खरीदारी करते समय थोड़े कच्चे चीकू आ जाते हैं. ऐसे में घबराने की जरूरत नहीं है. उन्हें फ्रिज में रखने की गलती न करें. इससे उनका स्वाद खराब हो सकता है. बेहतर होगा कि उन्हें कागज के बैग या अखबार में लपेटकर कमरे के तापमान पर एक या दो दिन के लिए रख दें. इससे वे धीरे-धीरे नैचुरल तरीके से पक सकते हैं और मिठास भी बनी रहती है.

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गुजरात में 5 शावकों समेत 8 शेरों की मौत: बेबेसिया वायरस संक्रमण का अंदेशा, इसी से 2018 में 11 शेरों की मौत हुई थी


अमरेली3 घंटे पहले

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गुजरात के गिर जंगल क्षेत्र में दो शेर शावकों की संदिग्ध बाबेसिया वायरस संक्रमण से मौत हो गई है। वहीं, तीन अन्य शेरों की अलग-अलग घटनाओं में प्राकृतिक कारणों और आपसी संघर्ष में जान गई। राज्य के वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने मंगलवार को यह जानकारी दी।

वन मंत्री अर्जुन मोढवाडिया ने कहा कि गिर जंगल में किसी बड़े संक्रमण या महामारी जैसी स्थिति नहीं है। उन्होंने बताया कि बेबेसिया वायरस से केवल दो संदिग्ध मौतें जुड़ी हैं, जबकि बाकी तीन शेरों की मौत अन्य कारणों से हुई है।

मोढवाडिया ने बताया कि बाबेसिया वायरस टिक यानी किलनी के जरिए फैलता है। इससे संक्रमित जानवरों में कमजोरी, खांसी और नाक से स्राव जैसी दिक्कतें हो सकती हैं।

उन्होंने कहा कि वन विभाग और पशु चिकित्सकों की टीमें वायरस के फैलाव को रोकने में जुटी हैं। संदिग्ध शेरों की पहचान की जा रही है, उनके सैंपल लिए जा रहे हैं और इलाज भी किया जा रहा है। इससे पहले 2018 में बेबेसिया वायरस से ही एक महीने के भीतर 11 शेरों की मौत हुई थी।

अलग-अलग रेंज में हुई शावकों की मौत

प्रिंसिपल चीफ कंजर्वेटर ऑफ फॉरेस्ट्स (वाइल्डलाइफ) जयपाल सिंह ने कहा कि ये अलग-अलग घटनाएं हैं और इनमें कुछ भी असामान्य नहीं है। तीनों शावकों की मौत फॉरेस्ट के अलग-अलग रेंज में हुई है। इसलिए किसी महामारी जैसी स्थिति की बात नहीं है।

लिलिया रेंज में 1, सावरकुंडला रेंज और सरसिया रेंज में 1 शावक की मौत हुई है। इनमें से जिन दो शावकों की मौत हुई, वे बहुत छोटे थे। वहीं, दो अन्य शेरों की मौत प्राकृतिक कारणों से हुई, जबकि एक शेर की जान आपसी संघर्ष में गई है। इनकी मौत का वायरस से कोई लेना-देना नहीं है।

उन्होंने आगे कहा कि आमतौर पर शावकों की जीवित रहने की दर आमतौर पर 50 फीसदी ही होती है। लेकिन गिर फॉरेस्ट में लगातार निगरानी, ट्रैकर्स और बेहतर पशु चिकित्सा सुविधाओं की वजह से शेरों की मृत्यु दर काफी कम है।

2018 में बेबेसिया वायरस से ही एक महीने के भीतर 11 शेरों की मौत हुई थी।

2018 में बेबेसिया वायरस से ही एक महीने के भीतर 11 शेरों की मौत हुई थी।

बेबेसिया वायरस क्या है?

बेबेसिया एक बहुत ही गंभीर और जानलेवा बीमारी है, जो मनुष्यों के साथ-साथ जानवरों और वन्यजीवों में भी पाई जाती है। यह बेबेसिया नामक परजीवी (प्रोटोजोआ) द्वारा फैलती है। मलेरिया की तरह, ये परजीवी शरीर में प्रवेश करते हैं और सीधे लाल रक्त कोशिकाओं (आरबीसी) पर हमला करके उन्हें नष्ट कर देते हैं।

वहीं, शेरों में यह परजीवी रोग किलनी द्वारा फैलता है। वायरस शेरों की लाल रक्त कोशिकाओं को नष्ट कर देती है। इससे शरीर में गंभीर एनीमिया हो जाता है, जिससे उनकी मौत हो जाती है।

एशियाई शेरों की संख्या 891 दर्ज की गई है

गुजरात में एशियाई शेरों की कुल संख्या 891 है। सितंबर, 2025 में विधानसभा में CM भूपेंद्र पटेल ने शेरों की गिनती के बाद नए आंकड़े जारी किए थे। साल 2020 में 674 शेर थे, जो अब बढ़कर 891 हो गए हैं। इनमें 196 शेर, 330 शेरनियां और 225 शावक शामिल हैं।

इस साल 10 से 13 मई 2025 के बीच अत्याधुनिक तकनीक से शेरों की गिनती की गई थी। इसके आधार पर यह आंकड़ा जारी किया गया था। गुजरात के 11 जिलों की 58 तहसीलों में शेरों की उपस्थिति दर्ज की गई है। राज्य के 7 जिलों… जूनागढ़, गिर सोमनाथ, अमरेली, भावनगर, द्वारका, पोरबंदर और राजकोट जिलों तक शेरों की बसाहट दर्ज कई गई है।

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गिर फॉरेस्ट में एक साथ दिखा 12 शेरों का परिवार:9 शावकों के साथ थी तीन शेरनियां

एशियाटिक लॉयंस के लिए फेमस गुजरात के गिर फॉरेस्ट से एक रोचक नजारा सामने आया है। सासण से विसावदर जाने वाले जंगल के रास्ते पर 12 शेरों का झुंड टहलता नजर आया। इस झुंड में 9 शावकों के साथ तीन शेरनियां थीं। पूरी खबर पढ़ें…

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बाल श्रम पर पुलिस की FIR? HC के फैसले पर लगा अल्‍पविराम! SC लेगा सुप्रीम फैसला


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बाल श्रम पर पुलिस की FIR? HC के फैसले पर लगा अल्‍पविराम! SC लेगा सुप्रीम फैसला

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बाल श्रम कानून के तहत पुलिस FIR दर्ज कर सकती है या नहीं, यह सवाल अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. सुप्रीम Court ने इलाहाबाद हाई कोर्ट के उस फैसले पर नोटिस जारी किया है, जिसमें कहा गया था कि पुलिस सीधे कार्रवाई नहीं कर सकती. मामला बाल एवं किशोर श्रम कानून की व्याख्या और बच्चों के शोषण के खिलाफ त्वरित कार्रवाई से जुड़ा है. कोर्ट का अंतिम फैसला देशभर में बाल मजदूरी के मामलों की जांच और कानूनी प्रक्रिया पर बड़ा असर डाल सकता है.

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बाल श्रम पर एफआईआर को लेकर सुप्रीम कोर्ट आखिरी फैसला लेगा.

Court News: बाल श्रम पर पुलिस सीधे एफआईआर कर सकेगी या नहीं, इस बाबत इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले पर अल्‍पविराम लग चुका है. अब इस मसले पर देश की सर्वोच्‍च अदालत ही सुप्रीम फैसला लेगी. जी हां, बाल एवं किशोर श्रम कानून के तहत एफआईआर दर्ज करने के अधिकार को लेकर मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है. इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देने वाली याचिका पर संज्ञान लेते हुए सुप्रीम कोर्ट ने संबंधित पक्षों को नोटिस भी जारी किया है.

हाई कोर्ट ने अपने फैसले में कहा था कि पुलिस सीधे तौर पर बाल श्रम कानून के तहत एफआईआर दर्ज नहीं कर सकती है. इस मामले में कार्रवाई केवल अधिकृत अधिकारी की शिकायत पर ही शुरू हो सकती है. मामले की सुनवाई जस्टिस जेके महेश्वरी और जस्टिस एएस चंदूरकर की पीठ ने की. याचिका में कहा गया है कि हाई कोर्ट का फैसला बाल श्रम के खिलाफ कार्रवाई को कमजोर कर सकता है और इससे बच्चों के शोषण के मामलों में तुरंत कानूनी कार्रवाई प्रभावित होगी.

दरअसल, यह विवाद चाइल्ड एंड अडोलसेंट लेबर (प्रोहिबिशन एंड रेगुलेशन) एक्ट को लेकर है. हाईकोर्ट ने माना था कि इस कानून के तहत मुकदमा शुरू करने का अधिकार केवल अधिकृत अधिकारी को है, इसलिए पुलिस अपने स्तर पर एफआईआर दर्ज नहीं कर सकती. इसी फैसले को अब सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है. याचिकाकर्ता का कहना है कि यदि पुलिस को एफआईआर दर्ज करने से रोका गया तो बाल मजदूरी से जुड़े मामलों में त्वरित कार्रवाई मुश्किल हो जाएगी. कई मामलों में बच्चों को खतरनाक परिस्थितियों में काम कराया जाता है और ऐसे मामलों में तुरंत हस्तक्षेप जरूरी होता है.

सुप्रीम कोर्ट द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद अब इस मामले पर केंद्र और संबंधित पक्षों से जवाब मांगा जाएगा. माना जा रहा है कि अदालत का अंतिम फैसला देशभर में बाल श्रम कानूनों के क्रियांवयन पर बड़ा असर डाल सकता है.

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Anoop Kumar MishraAssistant Editor

Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें



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ग्रीन कार्ड आवेदन से पहले मूल देश लौटना होगा‎: अमेरिकी सरकार की नई नीतियों से मुश्किल में हजारों इमिग्रेंट्स




अमेरिकी सरकार की नई नीति ने हजारों ‎इमिग्रेंट्स को मुश्किल में फंसा दिया है। हाल ही में ‎सिटीजनशिप और इमिग्रेशन सर्विसेस एजेंसी ने‎ कहा है कि ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने वाले‎ लोगों को पहले अपने मूल देश लौटना पड़ेगा। अब‎ आवेदक और इमिग्रेशन वकील समझने की कोशिश कर रहे हैं कि बदलाव से स्थायी निवास‎ की स्थिति पर क्या प्रभाव पड़ेगा। एजेंसी का कहना ‎है कि केवल असाधारण परिस्थितियों में ही‎ अमेरिका में पहले से रह रहे लोगों को परमानेंट‎ रेसीडेंस की मंजूरी दी जाएगी। अमेरिका में स्थायी‎ तौर पर बसने के इच्छुक किसी अन्य व्यक्ति को‎ अपने गृह देश में अमेरिकन कौन्सुलेट में आवेदन‎ करना पड़ेगा।‎ इमिग्रेशन वकील चार्ल्स कुक ने कहा कि ‎बदलाव उन लोगों के लिए खासतौर से चिंताजनक है, जिन्होंने अमेरिकी नागरिकों से शादी की है और‎ वे स्थायी निवास चाहते हैं। ऐसे इमिग्रेंट्स को ग्रीन‎कार्ड लेने से पहले अपने इमिग्रेशन दर्जे को तय करने की जरूरत रहती है और आमतौर पर वे‎ अमेरिका में रहते हुए ऐसे मामलों को निपटा लेते‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎ हैं। कुक कहते हैं, यह इमिग्रेशन की गति धीमी‎ करने और इमिग्रेशन को इतना जटिल और‎ असुविधाजनक बनाने का प्रयास है कि आप‎ अपने देश लौट जाएं।‎ नेशनल इमिग्रेशन लॉ सेंटर में कानूनी रणनीति‎ के वाइस प्रेसिडेंट एफरेन ओलिवरेस का कहना है,‎ नई नीति का उद्देश्य ग्रीन कार्ड प्रक्रिया को‎ अस्त-व्यस्त करना है। ग्रीन कार्ड प्रक्रिया पूरी होने‎ तक अधिकतर आवेदकों को अपने परिवारों के‎ साथ अमेरिका में रहने की अनुमति है, लेकिन अब‎ देश में बने रहना अपवाद होगा। ओलिवरेस कहते‎ हैं, पहले कई बार डिपोर्ट किए जा चुके या गंभीर ‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎‎आपराधिक इतिहास जैसी असाधारण परिस्थितियों‎ में किसी को अपने देश से आवेदन के लिए कहा‎ जाता था।‎ कार्रवाई के भय से नाम न छापने की शर्त पर‎ कुछ इमिग्रेंट्स ने कहा कि वे भ्रमित और चिंतित हैं ‎कि इस बदलाव का उनके या उनके पार्टनर के‎ आवेदनों के लिए क्या मतलब होगा। इमिग्रेंट्स की‎ मदद करने वाले एक गैर लाभकारी संगठन‎ इमिग्रेशन प्रैक्टिस के मैनेजिंग डायरेक्टर कार्ला‎ ओस्टोलेजा कहते हैं, इस परिवर्तन का असर तुरंत‎ तो नहीं लेकिन बहुत ज्यादा महसूस किया जाएगा।‎ 2024 में 14 लाख लोगों को ग्नीन ‎कार्ड मिला इमिग्रेशन वकीलों और उनके समर्थक संगठनों‎ का कहना है कि नए नियमों से ग्रीन कार्ड‎ आवेदन कम होंगे। 2024 में 14 लाख ग्रीन ‎कार्ड जारी किए गए थे। कार्ड पाने वाले आठ‎ लाख से अधिक लोग अमेरिका में पहले से हैं‎ और प्रक्रिया के तहत उनका इमिग्रेशन दर्जा ‎बदला गया है।‎



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90s की वो 8 फिल्में, स्क्रीन से नजर नहीं हटा पाए दर्शक, हर मूवी निकली ब्लॉकबस्टर


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8 must watch films 90s : बॉलीवुड के लिए 90 का दशक सबसे यादगार माना जाता है. इसी दशक में कालजयी रोमांटिक-एक्शन फिल्में बनाई गईं. आइकॉनिक गाने बनाए गए. 90 के दशक में बॉलीवुड में ऐसे कुछ फिल्में आईं जिन्होंने 100 करोड़ का कलेक्शन किया. कुमार सानू-उदित नारायण, अलका याज्ञनिक के मेलोडी से भरे गाने चौराहों, बस स्टॉप, शादी-फंक्शन पार्टी में बजते थे. कुछ ऐसी एक्शन फिल्में भी आईं जिनके डायलॉग आज भी उतने ही फेमस हैं. ऐसी ही 9 फिल्मों की हम चर्चा करने जा रहे हैं जो 90 के दशक की मस्ट वॉच मूवी में शामिल हैं. आज भी इन फिल्मों को देखकर मन पुरानी यादों में खो जाएगा.

90 के दशक में सिनेमाघरों में कुछ फिल्में ऐसी भी आईं जिन्होंने भारतीय सिनेमा को हमेशा के लिए बदलकर रख दिया. सबसे ज्यादा रोमांटिक-मेलोडियस गाने इसी दशक में सुनने को मिले. प्यार की परिभाषा बदलने वाली आइकॉनिक फिल्में इसी दौर में आईं. कुछ ऐसी एक्शन फिल्में भी देखने को मिलीं जिनके डायलॉग आज भी उतने ही पॉप्युलर हैं. सोशल मीडिया पर इन्हीं फिल्मों के सबसे ज्यादा मीम्स भी मिलते हैं. ऐसी ही 9 फिल्में पर हम एक नजर डालते हैं. ये फिल्में थीं : बॉर्डर, कुछ कुछ होता है, बाजीगर, दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे, हम आपके हैं कौन, दिल तो पागल है, अंदाज अपना अपना, दामिनी और राजा हिंदुस्तानी.

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सबसे पहले बात करते हैं फिल्म ‘बाजीगर’ की जिसका डायरेक्शन अब्बास-मस्तान ने किया था. शाहरुख खान-काजोल-शिल्पा शेट्टी स्टारर यह फिल्म 12 नवंबर 1993 को सिनेमाघरों में आई थी. स्टोरी-स्क्रीनप्ले रॉबिन भट्ट आकाश खुराना का था. डायलॉग जावेद सिद्दीकी ने लिखे थे. म्यूजिक अनु मलिक का था. फिल्म का म्यूजिक ब्लॉकबस्टर था. बाजीगर एक सस्पेंस क्राइम थ्रिलर फिल्म थी. ‘बाजीगर’ फिल्म का बजट 2-3 करोड़ रुपये के आसपास था. इस कम बजट की फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर ₹15 करोड़ का शानदार कलेक्शन किया था. यह एक सुपरहिट फिल्म साबित हुई थी. उस साल की चौथी सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी. यह फिल्म शाहरुख खान के करियर के लिए टर्निंग प्वॉइंट साबित हुई. बाजीगर फिल्म को 4 फिल्मफेयर अवॉर्ड मिले थे.

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साल 1993 में ही सनी देओल की एक ऐसी फिल्म आई जिसने हिंदी सिनेमा को कालजयी डायलॉग दिए. ‘तारीख पर तारीख’, ‘जब ये ढाई किलो का हाथ किसी पर पड़ता है, तो आदमी उठता नहीं, उठ जाता है.’ जैसे कालजयी डायलॉग 30 अप्रैल 1993 को रिलीज हुई ‘दामिनी’ फिल्म में सुनाई दिए थे. सनी देओल, अमरीश पुरी, मीनाक्षी शेषाद्रि और ऋषि कपूर स्टारर इस फिल्म का म्यूजिक नदीम श्रवण ने कंपोज किया था. कहानी-स्क्रीनप्ले राजकुमार संतोषी ने लिखा था जबकि डायलॉग दिलीप शुक्ला ने लिखे थे. दामिनी एक महिला केंद्रित फिल्म थी जो इंसाफ पाने के लिए पूरे समाज से लड़ती है. दामिनी मीनाक्षी शेषाद्रि के करियर की सर्वश्रेष्ठ फिल्म में से एक है. सनी देओल ने बेस्ट सपोर्टिंग एक्टर का नेशनल और फिल्म फेयर अवॉर्ड जीता था. 3.5 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने करीब 11 करोड़ का कारोबार किया था. 1993 में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्मों की लिस्ट में दामिनी छठवें नंबर पर थी. सनी देओल की एक्टिंग सब पर भारी पड़ी थी. 90 के दशक में सनी देओल ने ‘घायल’ और ‘घातक’ जैसी कालजयी एक्शन फिल्मों में काम किया.

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राजश्री प्रोडक्शन के बैनर तले 5 अगस्त 1994 को सलमान खान-माधुरी दीक्षित स्टारर फिल्म ‘हम आपके हैं कौन’ रिलीज हुई थी जिसने बॉक्स ऑफिस पर कमाए के रिकॉर्ड तोड़ दिए थे. रेणुका शहाणे, अनुपम खेर, मोहनीश बहल, आलोक नाथ, रीमा लागू, बिंदु, सतीश शाह, दिलीप जोशी और लक्ष्मीकांत बेर्डे सपोर्टिंग रोल में थे. फिल्म में कुल 14 गाने थे जिनकी धुनें राम-लक्ष्मण ने बनाई थीं. म्यूजिक बलॉकबस्टर था. यह फिल्म 1981 में आई ‘नदिया के पार’ फिल्म का रीमेक थी. मूवी को 4 फिल्म फेयर अवॉर्ड भी मिले थे. बेस्ट एक्ट्रेस का अवॉर्ड माधुरी दीक्षित को मिला था. करीब 6 करोड़ के बजट में बनी इस मूवी ने 128 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. यह एक ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई थी. यह बॉलीवुड की पहली ऐसी फिल्म थी जिसने 100 करोड़ से ज्यादा का कलेक्शन किया था.

नवंबर 1994 में सलमान खान और आमिर खान की फिल्म ‘अंदाज अपना अपना’ रिलीज हुई थी और रिलीज होते ही फ्लॉप हो गई थी. डायरेक्टर राजकुमार संतोषी थे. उस समय सलमान खान की छवि रोमांटिक हीरो की थी, इसलिए कॉमेडी रोल में दर्शकों ने उन्हें पसंद नहीं किया. जब फिल्म टीवी पर रिलीज हुई तो लोगों ने इस फिल्म को खूब पसंद किया. आज इस फिल्म की गिनती कल्ट मूवी में होती है. ‘अंदाज अपना अपना’ आज भी दर्शकों को खूब हंसाती है. फिल्म में रोमांस के साथ कॉमेडी भी काफी मजेदार है.

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साल 1995 में आई एक फिल्म का नाम बॉलीवुड के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में दर्ज है. प्रोड्यूसर-डायरेक्टर यश चोपड़ा के बेटे ने अपनी पहली फिल्म ‘दिलवाले दुल्हनिया ले जाएंगे’ बनाई. ज्यादातर सिनेप्रेमी इस फिल्म को ‘डीडीएलजे’ के नाम से जानते हैं. 20 अक्टूबर 1995 को दीपावाली के दिन रिलीज इस फिल्म में भारतीय संस्कृति, परंपराओं और त्योहारों का जबर्दस्त संयोजन था. ‘शाहरुख खान-काजोल’ स्टारर यह फिल्म मस्ट वॉच मूवी में शामिल है. फिल्म में सिर्फ एक फाइट सीन था जिसे शाहरुख खान ने अपनी जिद पर रखवाया था. फिल्म की स्टोरी-स्क्रीनप्ले आदित्य चोपड़ा ने लिखा था. सदाबहार म्यूजिक जतिन-ललित ने कंपोज किया था. कुल 7 गाने फिल्म में रखे गए थे. करीब 4 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 103 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. यह एक ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई थी. यह बॉलीवुड की सबसे बेस्ट फिल्मों में से एक है. डीडीएलजे को एक नेशनल अवॉर्ड और 10 फिल्मफेयर अवॉर्ड समेत कुल 15 अवॉर्ड मिले थे.

साल 1996 आमिर खान-करिश्मा कपूर की रोमांटिक फिल्म ‘राजा हिंदुस्तानी’ ने तहलका मचा दिया था. धर्मेश दर्शन के डायरेक्शन में बनी इस फिल्म का स्क्रीनप्ले रॉबिन भट्ट और डायलॉग जावेद सिद्दीकी ने लिखे थे. म्यूजिक नदीम-श्रवण ने कंपोज किया था. फिल्म में 51 मिनट की लंबाई के 8 गाने रखे गए थे. सबसे सुपरहिट गाना ‘परदेसी परदेसी जाना नहीं’ था. सबसे मजेदार तथ्य यह है कि इस पॉप्युलर सॉन्ग को मेकर्स मूवी में नहीं रखना चाहते थे. फिल्म में आमिर खान-करिश्मा कपूर का करीब एक मिनट का किसिंग सीन भी था. इस सीन की बड़ी चर्चा हुई थी. यह सीन ऊंटी में तीन दिन तक फिल्माया गया था. करीब 6 करोड़ के बजट में बनी इस फिल्म ने 76 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. यह एक ऑल टाइब ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई थी. 1996 में सबसे ज्यादा पैसे कमाने की लिस्ट में पहले नंबर पर थी. राजा हिंदुस्तानी फिल्म फिल्म करिश्मा कपूर के करियर का टर्निंग प्वाइंट साबित हुई.

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‘प्रेम, दिल, धड़कन-जज्बात सिर्फ फील करने की चीजें हैं. इन्हीं अहसास को एक कहानी पिरोकर यश चोपड़ा ने 1997 में एक फिल्म बनाई थी. नाम था ‘दिल तो पागल है’ जिसमें शाहरुख खान, अक्षय कुमार, करिश्मा कपूर और माधुरी दीक्षित लीड रोल में थे. कहानी पामेला चोपड़ा ने जबकि डायलॉग आदित्य चोपड़ा ने लिखे थे. स्क्रीनप्ले यश चोपड़ा, तनूजा चंद्रा और पामेला चोपड़ा ने लिखा था. फिल्म का मेलोडियस म्यूजिक उत्तम सिंह ने दिया था. यह फिल्म अपनी शानदार स्टोरी और ब्लॉकबस्टर म्यूजिक के लिए जानी जाती है. ‘दिल तो पागल है’ का बजट करीब 9 करोड़ रुपये का था. फिल्म ने 71 करोड़ रुपये का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. यह एक ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई थी.

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जून 1997 में जेपी दत्ता के निर्देशन में सनी देओल की एक फिल्म ‘बॉर्डर’ सिनेमाघरों में रिलीज हुई थी. इस फिल्म ने इतिहास रच दिया. फिल्म की शूटिंग राजस्थान के बीकानेर में हुई थी. स्टोरी-स्क्रीनप्ले, डायरेक्शन और प्रोडक्शन सबकुछ जेपी दत्ता का था. कहानी 1971 में राजस्थान के जैसलमेर बॉर्डर पर हुए लोंगेवाला युद्ध पर बेस्ड थी. फिल्म का सबसे पॉप्युलर गाना ‘संदेशे आते हैं’ था. म्यूजिक अनु मलिक ने कंपोज किया था. 10 करोड़ के बजट में बनकर तैयार हुई इस मूवी ने करीब 39 करोड़ की कमाई की थी. यह फिल्म 1997 में सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी.

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इस लिस्ट में सबसे आखिरी नाम 16 अक्टूबर 1998 को रिलीज हुई फिल्म ‘कुछ-कुछ होता है’ का है जिसे करण जौहर ने डायरेक्ट किया था. बतौर डायरेक्टर करण जौहर की यह पहली फिल्म थी. करण जौहर जाने-माने प्रोड्यूसर यश जौहर के बेटे हैं. यश चोपड़ा उनके सगे मामा थे. काजोल-शाहरुख खान और रानी मुखर्जी स्टारर फिल्म ‘कुछ कुछ होता है’ ने रिलीज होते ही इतिहास रच दिया. फिल्म की कहानी कॉलेज गोइंग यूथ को ध्यान में रखकर लिखी गई थी. राहुल-अंजलि और टीना के बीच ट्रायंगल लव स्टोरी हमेशा के लिए अमर हो गई. 10 करोड़ के बजट में बनी इस मूवी ने 106 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन किया था. यह एक ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई थी.

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