उन्नाव के हसनगंज थाना क्षेत्र में एक 60 वर्षीय बुजुर्ग की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत हो गई। मंगलवार शाम को जमीन संबंधी मुकदमे की तारीख से लौटते समय उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। परिजनों ने उन्हें जिला अस्पताल में भर्ती कराया, जहां इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। युवक की पहचान साहपुर तोदा मजरा मुंशीखेड़ा गांव निवासी रमेश पुत्र स्व. उजागर के रूप में हुई है। परिजनों के अनुसार, रमेश मंगलवार को जमीन संबंधी मुकदमे की तारीख के लिए कोर्ट गए थे। शाम को घर लौटते समय रास्ते में अचानक उनकी तबीयत खराब हो गई। हालत बिगड़ने पर परिजन उन्हें तत्काल जिला अस्पताल ले गए। डॉक्टरों ने उपचार शुरू किया, लेकिन कुछ देर बाद रमेश ने दम तोड़ दिया। बुधवार सुबह करीब साढ़े 11 बजे परिजन पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और पुलिस को घटना की जानकारी दी। रमेश की मौत के बाद परिवार में शोक का माहौल है। परिजनों ने उनकी मौत को संदिग्ध बताया है। हालांकि, मौत की स्पष्ट वजह अभी सामने नहीं आई है। परिजनों ने शव का पोस्टमार्टम कराया है। परिजनों का कहना है कि पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के वास्तविक कारण का पता चल सकेगा। रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी। परिजन जमीन के मुकदमे से लौटने के दौरान हुई इस मौत को लेकर कई सवाल उठा रहे हैं, लेकिन फिलहाल किसी पर सीधा आरोप नहीं लगाया है। रमेश मजदूरी करके परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनके परिवार में पत्नी के साथ दो बेटियां और दो बेटे हैं। उनकी अचानक मौत से परिवार के सामने आर्थिक संकट भी खड़ा हो गया है।
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कोर्ट से लौट रहे बुजुर्ग की तबीयत बिगड़ी: उन्नाव में जिला अस्पताल में इलाज के दौरान मौत, घर वालों ने संदिग्ध बताया – Unnao News
किशनगंज में तिरंगा यात्रा निकली: अधिकारी, जनप्रतिनिधि, जवान और स्कूली बच्चे हुए शामिल, ‘वंदे मातरम्’ के नारों से गूंजा शहर – Kishanganj (Bihar) News
स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत बुधवार को किशनगंज शहर में जिला प्रशासन द्वारा तिरंगा यात्रा निकाली गई। यह यात्रा शहर के साथ-साथ जिले के सभी सातों प्रखंडों में भी आयोजित की गई। हाथों में तिरंगा लिए बड़ी संख्या में अधिकारी, जनप्रतिनिधि, पुलिस, एसएसबी के जवान, छात्र-छात्राएं और आम नागरिक देशभक्ति के उत्साह के साथ इसमें शामिल हुए। पूरे मार्ग पर देशभक्ति का माहौल रहा और ‘भारत माता की जय’ तथा ‘वंदे मातरम्’ के जयघोष सुनाई दिए। यात्रा समाहरणालय परिसर पहुंचकर संपन्न हुई
तिरंगा यात्रा पश्चिमपाली चौक से शुरू हुई और चुड़ीपट्टी, फल चौक, गांधी चौक, डी मार्केट सहित शहर के विभिन्न प्रमुख मार्गों से गुजरी। यह यात्रा समाहरणालय परिसर पहुंचकर संपन्न हुई। लगभग एक किलोमीटर से अधिक लंबी इस यात्रा में लोगों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया। यात्रा के दौरान शहरवासियों ने जगह-जगह इसका स्वागत किया। राष्ट्रीय ध्वज और देशभक्ति के नारों से पूरा शहर राष्ट्रभक्ति के रंग में रंगा दिखा। जिला प्रशासन ने लोगों से स्वतंत्रता दिवस पर अपने घरों पर तिरंगा फहराने और ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को जन-जन तक पहुंचाने की अपील की है। मिक्की साहा सहित कई जनप्रतिनिधि शामिल थे
इस यात्रा में जिलाधिकारी नवीन कुमार, पुलिस अधीक्षक संतोष कुमार, किशनगंज सदर विधायक कमरुल होदा, कोचाधामन विधायक सरवर आलम, राज्य अल्पसंख्यक आयोग के उपाध्यक्ष लखविंदर सिंह उर्फ लक्खा, जदयू जिलाध्यक्ष फैसल अहमद, कांग्रेस जिलाध्यक्ष सहाबुल अख्तर, अनुमंडल पदाधिकारी अनिकेत कुमार और मिक्की साहा सहित कई जनप्रतिनिधि एवं अधिकारी शामिल थे। इसके अतिरिक्त, अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी, एसएसबी और बिहार पुलिस के जवान, विभिन्न विभागों के पदाधिकारी एवं कर्मचारी, विद्यालयों के छात्र-छात्राएं तथा स्वास्थ्य विभाग के एएनएम स्कूल की छात्राओं ने भी तिरंगा यात्रा में सहभागिता की।
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बाइक-स्कूटी की टक्कर के बाद कार ने मारी टक्कर: बैतूल में होटल कर्मचारी की मौत, एक युवक घायल, गंज इलाके में हुआ हादसा – Betul News
बैतूल के गंज इलाके में राम बोलो चौक ब्रिज के पास सड़क हादसे में 27 वर्षीय युवक की मौत हो गई। हादसे में एक अन्य युवक घायल हुआ है। मृतक की पहचान बिजासनी निवासी राजू पिता अन्ना विस्की के रूप में हुई है। राजू शहर के एक होटल में सहायक प्रबंधक के तौर पर कार्यरत था और नाइट ड्यूटी के लिए जा रहा था। बाइक-स्कूटी की टक्कर के बाद कार ने भी मारी टक्कर बताया जा रहा है कि राजू बाइक से जा रहा था, जबकि महाराष्ट्र निवासी सागर पिता धर्मराज घुड़देव स्कूटी से जा रहा था। दोनों वाहनों की टक्कर के दौरान एक सफेद कार ने भी उन्हें टक्कर मार दी। हादसे में राजू गंभीर रूप से घायल हो गया, जबकि सागर को भी चोटें आईं। सागर को ट्रॉमा सेंटर में भर्ती कराया गया है। अस्पताल में इलाज के दौरान मौत गंभीर रूप से घायल राजू को जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां उसकी मौत हो गई। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। राजू की शादी करीब दो साल पहले हुई थी और उसका एक छोटा बच्चा है। वह अपनी पत्नी माया विस्की के साथ बैतूल बाजार में रहता था। उसकी पत्नी हाथनोरा में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता बताई गई हैं। सफेद कार की भूमिका की जांच अस्पताल पुलिस चौकी के अनुसार, हादसे में शामिल सफेद कार का नंबर MP-48-C-8144 है। पुलिस सड़क दुर्घटना की परिस्थितियों और इसमें शामिल वाहनों की भूमिका की जांच कर रही है। परिजनों ने अस्पताल पर लगाया लापरवाही का आरोप इधर, मृतक के परिजनों ने जिला अस्पताल में उपचार के दौरान लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि राजू को ठीक से नहीं देखा गया और परिजनों के पहुंचने से पहले ही शव को मर्चुरी में शिफ्ट कर दिया गया। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन की ओर से इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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पोहा-जलेबी से अलग MP के इन 5 देसी पकवानों का स्वाद भी है खास, बाहर के लोग कम जानते हैं
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MP 5 Famous Food: मध्य प्रदेश घूमने जाएं तो इंदौर का पोहा, भोपाल का सुल्तानी स्वाद और दाल-बाफला तो आसानी से मिल जाएगा, लेकिन असली मजा कई बार उन पकवानों में छिपा होता है, जिनका नाम बड़े शहरों के मेन्यू तक नहीं पहुंच पाया. प्रदेश के गांवों और छोटे कस्बों में आज भी मौसम, स्थानीय अनाज और घर में मौजूद सामान से ऐसी डिश तैयार होती हैं, जो स्वाद के साथ पुरानी रसोई की कहानी भी सुनाती हैं. कुछ पकवान इतने साधारण हैं कि पहली नजर में खास नहीं लगते, लेकिन पहला निवाला लेते ही अंदाजा हो जाता है कि देसी खाना सिर्फ पेट भरने का जरिया नहीं, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही पाक कला भी है. आइए जानते हैं मध्य प्रदेश की ऐसी ही पांच कम चर्चित देसी डिश के बारे में.
इन देसी पकवानों में छिपा है एमपी का असली स्वाद 1. भुट्टे का कीस मालवा की रसोई से निकला भुट्टे का कीस अब धीरे-धीरे मशहूर जरूर हो रहा है, लेकिन प्रदेश के बाहर अभी भी बहुत से लोग इससे अनजान हैं. ताजे भुट्टे को कद्दूकस करके दूध, मसालों और हल्के तड़के के साथ पकाया जाता है. इसका स्वाद हल्का मीठा, मसालेदार और बेहद मुलायम होता है. बारिश के मौसम में गर्मागर्म भुट्टे का कीस खास तौर पर पसंद किया जाता है. (Image-AI generated)
2. मुठिया मध्य प्रदेश के कई ग्रामीण इलाकों में मुठिया घरेलू नाश्ते या हल्के भोजन के तौर पर बनाई जाती है. आटे या दूसरे स्थानीय अनाज के मिश्रण से तैयार इस व्यंजन को भाप में पकाकर फिर तड़का दिया जाता है. अलग-अलग इलाकों में इसकी सामग्री और बनाने का तरीका थोड़ा बदल जाता है. यही इसकी खासियत भी है एक नाम, लेकिन कई स्थानीय स्वाद. (Image-AI generated)
3. दाल पिट्ठी नाम सुनकर यह साधारण लग सकती है, लेकिन दाल पिट्ठी देसी खाने का ऐसा उदाहरण है जिसमें कम सामग्री में भरपूर स्वाद मिलता है. आटे की छोटी-छोटी लोइयों या टुकड़ों को मसालेदार दाल में पकाया जाता है. गांवों में यह व्यंजन खासकर तब याद आता है, जब घर में कुछ अलग लेकिन पेट भरने वाला बनाने का मन हो. (Image-AI generated)
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4. कढ़ी-फुलकी मध्य प्रदेश के कुछ हिस्सों में बनने वाली कढ़ी-फुलकी आम कढ़ी से थोड़ी अलग पहचान रखती है. खट्टी-मीठी या मसालेदार कढ़ी में आटे की छोटी फुलकियां डालकर इसे पकाया जाता है. गर्म चावल के साथ इसका स्वाद बेहद देसी और संतोष देने वाला लगता है. कई परिवारों में इसे आज भी पारंपरिक घरेलू भोजन की तरह बनाया जाता है. (Image-AI generated)
5. लस्सी नहीं, देसी मट्ठे वाली कढ़ी मालवा और निमाड़ की गर्मी में छाछ या मट्ठे का इस्तेमाल सिर्फ पेय के रूप में नहीं होता. इससे बनने वाली देसी मट्ठे की कढ़ी कई ग्रामीण घरों की पसंद है. इसमें बेसन, मसाले और मट्ठे का इस्तेमाल होता है और कई जगह इसमें स्थानीय सब्जियां या पकौड़ी भी डाली जाती हैं. चूल्हे पर धीमी आंच में पकने के बाद इसका स्वाद और भी निखर जाता है. (Image-AI generated)
शहरों के मेन्यू से दूर, घरों में आज भी जिंदा इन पकवानों की सबसे दिलचस्प बात यही है कि इनकी पहचान किसी बड़े रेस्तरां या फूड चेन से नहीं बनी. ये रेसिपी दादी-नानी की रसोई, गांव की चौपाल और मौसम के हिसाब से बदलती घरेलू थाली से आगे बढ़ी हैं. यही वजह है कि एक ही डिश का स्वाद अलग जिले में पहुंचते ही बदल सकता है. (Image-AI generated)
1601 से आने वाले कॉल्स को उठाएं या काटें? TRAI ने जारी किए नए नियम
TRAI ने प्रमोशनल सर्विस कॉल्स के लिए नई नंबर सीरीज की घोषणा की है। यह सीरीज 1601 से शुरू होगी। इससे पहले ट्राई ने बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विस के लिए 1600 नंबर सीरीज की घोषणा की थी। यह नई नंबर सीरीज लोगों को फ्रॉड या फर्जी कॉल्स से बचाने के लिए जारी की गई है। खास तौर पर यूटिलिटी सर्विस, कुरियर, फूड डिलीवरी सर्विस के लिए अब कंपनियों को इस नई नंबर सीरीज का इस्तेमाल करना पड़ेगा।
दूरसंचार नियामक प्राधिकरण ने अपने नए नियम में साफ किया है कि यह नई 1601 नंबर सीरीज पहले फेज में यूटिलिटीज, कुरियर और लॉजिस्टिक सेक्टर के लिए जारी की जाएगी। इस सीरीज को खास तौर डायरेक्ट डिजिटल इन्टिटीज को अलोकेट किया जाएगा। इसे किसी इंटरमीडियरीज और एग्रीगेटर को जारी नहीं किया जाएगा। इस नंबर को जारी करने से पहले टेलिकॉम सर्विस प्रोवाइडर्स को उन डिजिटल इन्टिटीज को वेरिफाई करना होगा।
क्यों लाया गया नियम?
कुरियर, फुड डिलीवरी समेत कई ऑनलाइन सर्विस के नाम पर किए जाने वाले फ्रॉड को रोकने के लिए दूरसंचार नियामक ने इस नई नंबर सीरीज की घोषणा की है ताकि लोगों इसकी पहचान हो सके। TRAI ने अपने आदेश में कहा कि पहले फेज में यूटिलिटीज और लॉजिस्टिक एवं कुरियर सर्विस को रखा गया है।
यूटिलिटीज में इलेक्ट्रिसिटी डिस्ट्रिब्यूशन कंपनी, वॉटर यूटिलिटीज, सिटी गैस डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी, एलपीजी डिस्ट्रीब्यूशन इन्टिटीज और अन्य सर्विस प्रोवाइडर्स को रखा गया है। वहीं, लॉजिस्टिक और कुरियर सर्विस के तहत कुरियर कंपनी, एक्सप्रेस लॉजिस्टिक कंपनी, पार्सल डिलीवरी सर्विस प्रोवाइडर्स, फ्रेट और लॉजिस्टिक सर्विस प्रोवाइडर्स को रखा गया है।
TRAI ने दूरसंचार कंपनियों को निर्देश दिया है कि पहले फेज में इन इन्टिटीज का वेरिफिकेशन 90 दिनों के अंदर कर लें। इसके बाद उन कंपनियों और सर्विस प्रोवाइडर्स को नई 1601 सीरीज वाले नंबर अलॉट किए जाएं। ट्राई ने यह भी निर्देश दिया है कि इस नंबर से आने वाले कॉल्स में किसी भी तरह का प्रमोशन नहीं किया जाएगा। इसे एक सर्विस नंबर के तौर पर यूज किया जाना चाहिए।
TCCCPR में बदलाव की तैयारी
पिछले दिनों दूरसंचार नियामक ने ट्रूकॉलर जैसे कॉल मैनेजमेंट ऐप्स के डेटा शेयरिंग को लेकर सख्ती दिखाई है। TRAI मौजूदा टेलीकॉम कमर्शियल कम्युनिकेशन कस्टमर प्रिफरेंस रेगुलेशन (TCCCPR) में बदलाव की तैयारी में है। यही नहीं, दूरसंचार नियामक ने ट्रूकॉलर समेत अन्य कॉल मैनेजमेंट ऐप्स को 1600 और 140 से शुरू होने वाले नंबरों से आने वॉले कॉल्स को स्पैम बताए जाने पर इन कंपनियों से स्पष्टीकरण भी मांगा था। साथ ही, साफ किया था कि 1600 से शुरू होने वाले कॉल्स केवल बैंकिंग और फाइनेंशियल सर्विस के लिए यूज किए जाएंगे। वहीं, 140 सीरीज वाले नंबर को प्रमोशनल एक्टिविटीज के लिए यूज किया जा सकता है।
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ट्रम्प ने माना- ईरान के डर से प्लेन बदलना पड़ा: हमला होता तो एयरफोर्स वन पर होता; ट्रक में छिपकर दूसरे विमान तक पहुंचे
वॉशिंगटन पोस्ट4 घंटे पहले
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने मान लिया है कि उन्होंने पिछले महीने तुर्किए में ईरान के डर से प्लेन बदला था। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि वे जिस प्लेन से NATO समिट में हिस्सा लेने गए थे उस पर हमले का सबसे ज्यादा खतरा था।
ट्रम्प ने यह भी बताया कि उन्हें सुरक्षा कारणों से एयरपोर्ट के केटरिंग ट्रक में बैठाकर दूसरे विमान तक ले जाया गया।
ट्रम्प ने कहा-
अगर कोई हमला होता तो उसी प्लेन को निशाना बनाया जाता। मैं वही करता हूं, जो सुरक्षा एजेंसियां कहती हैं। मुझे लगातार धमकियां मिलती रहती हैं।

कतर के गिफ्ट किए प्लेन में बैठकर गए, मिलिट्री प्लेन से लौटे
इससे पहले वॉशिंगटन पोस्ट ने दावा किया था कि 8 जुलाई को अंकारा से रवाना होते समय ट्रम्प कैमरों के सामने बोइंग 747-8 एयर फोर्स वन में सवार हुए थे। यह विमान उन्हें कतर ने गिफ्ट किया था।
इसके बाद एयरपोर्ट पर सामान और खाना पहुंचाने वाली केटरिंग गाड़ी की मदद से उन्हें चुपचाप अमेरिकी वायुसेना के वीआईपी सैन्य विमान C-32A तक ले जाया गया।

वॉशिंगटन पोस्ट को मिले वीडियो में केटरिंग गाड़ी को पुराने एयरफोर्स वन के पास से निकलकर छोटे विमान की तरफ जाते देखा जा सकता है।
मीडिया को भी नहीं पता था कि ट्रम्प दूसरे विमान में हैं
अमेरिकी राष्ट्रपति जब भी किसी दौरे पर जाते हैं, तो उनके साथ कुछ पत्रकार भी यात्रा करते हैं। सुरक्षा कारणों से हर जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती, लेकिन इन पत्रकारों को इतना जरूर पता होता है कि राष्ट्रपति किस विमान में हैं और कहां जा रहे हैं।
तुर्किये से उड़ान भरते समय पत्रकारों को लगा कि ट्रम्प भी उसी पुराने एयर फोर्स वन में हैं, लेकिन हकीकत अलग थी।
उड़ान के दौरान पत्रकारों को अपनी खिड़कियों के शेड नीचे रखने को कहा गया। यानी उन्हें बाहर देखने की इजाजत नहीं थी।
ऐसी सावधानी आमतौर पर तब बरती जाती है, जब विमान किसी खतरे वाले इलाके से गुजर रहा हो।
बाद में पत्रकारों ने ट्रम्प से पूछा कि खिड़कियों के शेड बंद रखने को क्यों कहा गया था। ट्रम्प ने कहा, “शायद हम एक खतरनाक फ्लाइट पर थे। उनकी सूची में सबसे ऊपर मेरा नाम है। अगर मैं मरूंगा, तो आप भी मरेंगे।”
ट्रम्प वाला छोटा विमान पहले ब्रिटेन पहुंचा
ट्रम्प को लेकर छोटा C-32A विमान रात करीब 10:20 बजे ब्रिटेन के RAF मिल्डेनहॉल एयरबेस पहुंचा। इसके कुछ मिनट बाद पुराना एयरफोर्स वन भी वहां पहुंच गया। इस विमान में पत्रकार सवार थे।
इसके बाद उन्हें चुपचाप पुराने एयर फोर्स वन में लाया गया। कुछ देर बाद वे उसी विमान से उतरते दिखे, जिससे पत्रकारों को लगा कि वे पूरी यात्रा उसी में कर रहे थे।
हालांकि, यह साफ नहीं है कि C-32A से उतरने के बाद ट्रम्प पुराने एयरफोर्स वन तक कैसे पहुंचे। ट्रम्प ने पत्रकारों की तरफ हाथ हिलाया, लेकिन उनसे बात नहीं की।
इसके बाद फिर वे आधिकारिक प्लेन यानी कि एयरफोर्स वन में बैठ गए और उसी से अमेरिका पहुंचे।

ऐसा तरीका पहले भी अपनाया जा चुका है
राष्ट्रपति को खतरे से बचाने के लिए उनके असली सफर को छिपाने का तरीका नया नहीं है। साल 2000 में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन पाकिस्तान गए थे। तब उन्हें एक ऐसे सरकारी विमान से भेजा गया था, जिस पर राष्ट्रपति के विमान की कोई पहचान नहीं थी।
वहीं, उनका असली एयरफोर्स वन दूसरे रास्ते से भेजा गया था, ताकि लोगों को पता न चले कि राष्ट्रपति किस विमान में हैं।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान से मिले विश्वसनीय खतरे के इनपुट के बाद यह पूरा सुरक्षा ऑपरेशन कुछ ही घंटों में तैयार किया गया था। ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ समेत कुछ चुनिंदा अधिकारी इसमें शामिल थे।
कतर से मिले नए विमान की सुरक्षा पर भी सवाल उठे
ट्रम्प जिस बोइंग 747-8 विमान से तुर्किये पहुंचे थे, वह कतर के शाही परिवार ने पिछले साल अमेरिका को दिया था। अमेरिकी डिफेंस कंपनी L3 हैरिस टेक्नोलॉजीज ने इसे राष्ट्रपति के सफर के लिए तैयार किया है।
ट्रम्प ने पहली बार इस विमान का इस्तेमाल 1 जुलाई को नॉर्थ डकोटा जाने के लिए किया था। कुछ दिन बाद वे इसी विमान से अपनी पहली विदेश यात्रा पर तुर्किये पहुंचे।
इस विमान की सुरक्षा को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पुराने एयरफोर्स वन में राष्ट्रपति को हमले से बचाने के लिए कुछ खास सुरक्षा इंतजाम हैं, जो कतर से मिले विमान में नहीं हैं या उनकी क्षमता अलग है।

व्हाइट हाउस ने कहा- नए विमान की सुरक्षा में कोई कमी नहीं
कतर से मिले वाले विमान की सुरक्षा पर सवालों के जवाब में व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशन डायरेक्टर स्टीव चेउंग ने कहा कि इस विमान में ट्रम्प और उनके साथ मौजूद लोगों की सुरक्षा के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने कहा,
अमेरिका के कई दुश्मन ट्रम्प को निशाना बनाना चाहते हैं। इसलिए उनकी सुरक्षा के लिए हम हर जरूरी तरीका अपनाते हैं।

यानी व्हाइट हाउस ने यह नहीं माना कि नए विमान में सुरक्षा की कोई कमी थी। उसका कहना है कि ट्रम्प की सुरक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर अलग-अलग तरीके अपनाए जा सकते हैं। पेंटागन यानी अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस मामले पर तुरंत कोई जवाब नहीं दिया।
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अमेरिकी राष्ट्रपति के सलाहकार पीटर नवारो ने मंगलवार को कहा कि राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और पीएम मोदी के बीच बहुत अच्छे संबंध हैं। दोनों नेता रूसी तेल से जुड़े 100% टैरिफ के मुद्दे को आपस में सुलझा लेंगे। पूरी खबर पढ़ें…
दादी-नानी के स्वाद को सुप्रिया ने बनाया ब्रांड, आज है लाखों का टर्नओवर
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Ranchi Supriya Success Story: रांची की सुप्रिया ने घर की रसोई से होममेड ब्रांड ‘होम फ्लेशवर्स’ शुरू किया. जहां 10 साल में अपनी अलग ही पहचान बना ली. वह गुजिया, ठेकुआ, निमकी, लड्डू और कई तरह के अचार बनाती हैं. जहां बिहार से यूपी तक उनके प्रोडक्ट की मांग है और Swiggy-Zomato से ऑर्डर मिलते हैं. आइये जानते हैं उनकी सफलता के बारे में.
रांची: झारखंड की राजधानी रांची की रहने वाली सुप्रिया जो कि अपना होममेड ब्रांड ‘होम फ्लेशवर्स’ चलाती हैं. इस ब्रांड के तहत वह गुजिया से लेकर ठेकुआ निम्की तरह-तरह के लड्डू और अचार बनाने का काम करती हैं. यह काम वह 10 सालों से कर रही हैं और स्विगी से लेकर जोमैटो तक में इनके प्रोडक्ट की काफी डिमांड है. उनकी कंपनी का सालाना टर्नओवर लाखों में पहुंच चुका है. आइये जानते हैं उनकी सफलता के बारे में.
सुप्रिया ने बताया कि जब उन्होंने यह काम शुरू किया था तो लोगों ने कहा कि अब ये ठेकुआ बचेगी. इसलिए फिर उन्होंने इस चीज को बहुत ही सीक्रेट रखा. तब तक जब तक मेरा टर्नओवर अच्छा खासा नहीं चला गया. आज वही लोग मेरी तारीफ करते हैं. और मेरे क्लाइंट भी बन चुके हैं अब सारे स्नेक्स उनको मेरे हाथ के ही बने चाहिए.
बिहार से लेकर यूपी तक है डिमांड
सुप्रिया बताती हैं कि बिहार से लेकर यूपी तक उनके कस्टमर हैं. क्योंकि, जोमैटो और यह सारे ऑनलाइन प्लेटफॉर्म में अवेलेबल हैं. इसीलिए आसानी से उनके घर तक पहुंच जाता है और क्वालिटी ऐसा है कि एक बार लोग खाते हैं तो हम देखते हैं कि हमारे रिपीटेड कस्टमर बहुत होते हैं. क्योंकि, हमारा 100% ओरिजिनल और ऑथेंटिक होता है. हमने क्वालिटी से कभी समझौता नहीं किया और यही हमारी सबसे बड़ी कुंजी है.
हमारे पास आपको हर वैरायटी के अचार जैसे महुआ का अचार, मिर्च, नींबू, हरी मिर्च, लाल मिर्च ओल का अचार. यह सारी चीज की वैरायटी देखने को मिलेगी और यह बिल्कुल अपने हाथ से जैसे आपकी मां और दादी बनाती होंगी, वह बिल्कुल वैसे ही बनाती हैं. अपनी दादी नानी को देखकर ही वह यह सारी चीजें सीखी हैं.
दोनों बेटियों ने किया खूब सपोर्ट
सुप्रिया बताती हैं कि दोनों बेटियों ने खूब सपोर्ट किया और पति का भी पूरा सहयोग मिला. इसलिए आज यहां तक पहुंच पाई हैं. घर को संभालते हुए उन्होंने यह सारी जिम्मेदारी निभाई है. उन्होंने देखा है कि बाहर में बच्चे बर्गर पिज़्ज़ा मैगी बहुत खाते हैं, लेकिन हम लोगों ने मेथी, आंवला यह सब जो हमारा ऑथेंटिक चीजें है. इन सब चीजों को हम भूलते जा रहे हैं.
इसीलिए मेरे पास आपको मेथी के लड्डू, मडुवा लड्डू यह सारी चीज देखने को मिलेगी, जो खाने में टेस्ट के साथ-साथ हेल्थ को भी प्रमोट करता है. अगर कोई आर्डर करना चाहता है तो हमारा प्रोडक्ट वह स्विगी और जोमैटो से आर्डर कर सकता है. वह जाकर सर्च कर ले होम फ्वलेर्स तो सारे के सारे विकल्प उनको दिखने लगेंगे और प्रोडक्ट सीधा उनके घर तक पहुंच जाएगी.
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बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत, दैनिक भास्कर के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से Hindi.News18.com<…
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डांगाजी का 15 अगस्त यानी ‘गणतंत्र दिवस’: किरोड़ी बाबा की ‘गहलोतजी’ वाली टीस; जड़ से खोद कर निकाला ‘आंदोलन’ – Rajasthan News
नमस्कार, नेता हो तो खींवसर विधायक रेवंतराम डांगा जी जैसा, जो गणतंत्र को भी स्वतंत्र ही समझे, कोई फर्क नहीं। किरोड़ी बाबा का हाल वैसा ही है जैसा अशोक गहलोत जी का। दोनों नारेबाजी में यकीन नहीं करते और पुलिस ने छात्रनेता का आंदोलन जमीन से खोदकर निकाल लिया। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. डांगाजी बोले- 15 अगस्त जो ‘गणतंत्र दिवस’ है डांगा जी खासे चर्चा में रहते हैं। वे नागौर के खींवसर से विधायक हैं। हनुमान बेनीवाल के मुताबिक पहले वे उनके आगे-पीछे घूमते थे। फिर डांगा जी ने पार्टी बदल ली। पार्टी बदलते ही किस्मत ने भी करवट बदली और वे खींवसर से विधायक बन गए। इसके बाद उनका स्टिंग हो गया। जिससे उनकी पहचान ‘कमीशन’ से होने लगी। यह कमीशन भी साइमन कमीशन से कम नहीं। बहुत चर्चा में रहा। नागौर सांसद हनुमान बेनीवाल तो अब तक पब्लिक से कहते हैं- डांगाजी की रील देखी क्या? डांगा जी रील बहुत अच्छी बनाते हैं और डांस करने में माहिर हैं। एक अच्छे नेता को नाचना और नचाना, दोनों आना चाहिए। उनकी ताजा रील नागौर में तिरंगा रैली की है। वे हाथ में तिरंगा उठाए लंबे-लंबे डग भरते हुए शासन-प्रशासन के अधिकारियों, नेताओं, पदाधिकारियों, कार्यकर्ताओं और आमजन के साथ रैली निकाल रहे हैं। रील के बैकग्राउंड में गाना है- सौगंध मुझे इस मिट्टी की। मैं देश नहीं मिटने दूंगा। ये देश नहीं झुकने दूंगा। रैली के बीच ही एक पत्रकार ने डांगा जी को पकड़ लिया। कहा- तिरंगा रैली को लेकर कुछ कहिए। डांगा जी ने निबंध जैसा सुनाया। बोले- ‘तिरंगा हमारी पहचान है। हमारा पर्व है। हमें खुशी है। ये खुशी राजस्थान नहीं, पूरे हिंदुस्तान में है। क्योंकि हमारा गणतंत्र दिवस है। जो 15 अगस्त है।’ वैसे बड़े नेता की निशानी यह है कि वे भेदभाव नहीं करते। डांगा जी बड़े नेता हैं, वे तो गणतंत्र और स्वतंत्र तक में भेदभाव नहीं करते। 2. किरोड़ी बाबा की ‘टीस’ किरोड़ी बाबा काफी दिनों से आदिवासी दिवस की तैयारियां कर रहे थे। बड़े-बड़े कलाकारों को फोन लगाकर इन्वाइट किया था। हालांकि बड़े सिंगर समय नहीं निकाल सके, लेकिन जो आए उन्होंने भी जबरदस्त परफॉर्मेंस दी। आदिवासी दिवस पर किरोड़ी बाबा ट्रक पर सवार होकर हजारों की भीड़ के बीच हाथ हिलाते हुए मीणा हाईकोर्ट की तरफ बढ़े। किसी ने फूलों की बरसात की। कोई माला पहनाना चाहता है। कोई झलक देखना चाहता है। युवाओं में उन्माद। इसी जोश में युवाओं ने नारा लगा दिया- ‘हमारा सीएम कैसा हो?’ यह ऐसा नारा है जो कुछ दिन पहले पूर्व मुखिया जी के लिए भी लगाया गया था। पूर्व मुखिया जी ने जिस प्रकार समर्थकों को रोका था, उसी भांति किरोड़ी बाबा ने भी समर्थकों को रोका। ‘हमारा सीएम कैसा हो?’ अगर इस नारे को डिकोड करें तो यह ऐसा नारा है जो बड़े नेता चाहते हैं कि लगे। लेकिन समर्थकों से यह कहना उनकी मजबूरी है कि इस तरह के नारे मत लगाओ। मना करने में भी उदारता झलकती है। वे चाहते हैं कि आलाकमान यह देखे कि जनता क्या चाहती है। जनता के चाहने के बावजूद हमारा नेता कितना महान है कि जनता को रोक रहा है। किरोड़ी बाबा का अंदाज ऐसा कि जूता मारकर पुचकार लेते हैं। बोले- लोग कहते हैं कि बाबा तू तो ठीक है, लेकिन तेरी पार्टी गड़बड़ है। फिर उदारता दिखाते हुए बोले- पार्टी ही सब कुछ है। पार्टी ने विचारधारा दी है। मुख्यमंत्री-प्रधानमंत्री बनना तो किस्मत की बात है। फिर उन्होंने वैसी ही बात कह दी जो सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज से कही थी। बोले- तुम मुझे पसीना दोगे तो मैं तुम्हें खून दूंगा। आखिर में बाबा ने ‘हमारा सीएम कैसा हो’ नारे पर ‘समर्थकों के प्यार’ की मोहर लगाकर मार्केट में उतार दिया। 3. चलते-चलते… कॉकरोचों की सफलता के बाद ‘प्रदर्शन’ फैशन बन गया है। अलग-अलग राज्यों में छात्र शक्ति प्रदर्शन कर रही है। राजधानी में एक छात्रनेता दो सप्ताह तक अनशन पर रहा। राजस्थान यूनिवर्सिटी में मराठी पढ़ाई जाए या न पढ़ाई जाए। राजस्थानी भाषा का अलग डिपार्टमेंट खुले या न खुले। छात्रसंघ चुनाव हों या न हों। छात्रनेता ने प्रदर्शन करके बहुत कुछ कमा लिया। छात्रनेता अगर लक्ष्मण होता है तो प्रदर्शन उसकी संजीवनी होती है। संजीवनी के लिए तपना पड़ता है। युवा तपने को तैयार हैं। कॉकरोचों का जिक्र इसलिए क्योंकि महीने भर से ज्यादा दिन तक आंदोलन करके उन्होंने अपनी सफलता का ऐलान 1992 में आई फिल्म अधर्म के गीत की पंक्तियों से किया था- आसमां को धरती पे लाने वाला चाहिए। झुकती है दुनिया झुकाने वाला चाहिए। तुन्ना तुन्ना। तुन्ना-तुन्ना का झुनझुना पकड़कर सरकारी स्कूल के छात्र, ग्रेड थर्ड टीचर, नर्स, सफाईकर्मी, आंगनबाड़ी कार्यकर्ता, छात्रनेता और न जाने कौन-कौन प्रदर्शन की राह पर चलने लगे। जयपुर में कुछ छात्रनेता टंकी पर चढ़ गए थे। उन्हें लगा कि सारी लाइमलाइट अनशन वाला छात्रनेता ले गया, कुछ हम पर भी गिरे। इसी तरह एक छात्रनेता ने यूनिवर्सिटी के लॉन में जमीन समाधि ले ली। वह उन साथियों के झांसे में आ गया जो कह रहे थे- फलाने तुम संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं। साथियों के आश्वासन में नियम और शर्तें बारीक अक्षरों में लिखी थी। साथियों ने समाधि ले चुके छात्र नेता को यह नहीं बताया कि पुलिस आने के बाद हमारी कोई गारंटी नहीं है। जैसा कि उम्मीद थी, पुलिस आई और लाठी फटकारी। मात्र 6 सेकेंड में आंदोलन तितर-बितर हो गया। छात्र नेता जमीन में गड़ा रह गया, साथी भाग निकले। पुलिस ने आंदोलन के पौधे को जड़ समेत उखाड़ा और घसीटकर ले गई। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।
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सहरसा में 12 अगस्त को 4 घंटे बिजली रहेगी बंद: आरओबी निर्माण के चलते टाउन-1 और टाउन-2 फीडर प्रभावित, कई प्रमुख इलाकों में बिजली आपूर्ति रहेगी बाधित – Saharsa News
सहरसा में रेलवे ओवरब्रिज (आरओबी) निर्माण के कारण बुधवार, 12 अगस्त को शहर के कई इलाकों में चार घंटे बिजली आपूर्ति बाधित रहेगी। टाउन-1 और टाउन-2 फीडर से जुड़े क्षेत्रों में सुबह 11 बजे से दोपहर 3 बजे तक बिजली बंद रहेगी। विद्युत विभाग के अनुसार, बंगाली बाजार से पूरब बाजार के बीच समपार संख्या-31 (SPL Class) पर आरओबी का निर्माण कार्य चल रहा है। निर्माण कार्य के दौरान सुरक्षा और आवश्यक विद्युत कार्यों को पूरा करने के लिए यह कटौती की जा रही है। आवश्यक तैयारी करने की सलाह टाउन-1 फीडर से प्रभावित होने वाले इलाकों में शंकर चौक, दहलान चौक, महावीर चौक, कपड़ा पट्टी और डीबी रोड शामिल हैं। इन क्षेत्रों के उपभोक्ताओं को पहले से आवश्यक तैयारी करने की सलाह दी गई है। इसी तरह, टाउन-2 फीडर से जुड़े पूरब बाजार, प्रशांत सिनेमा, मीरा सिनेमा, राइस मिल कैंपस और कायस्थ टोला सहित आसपास के क्षेत्रों में भी विद्युत आपूर्ति बाधित रहेगी। सहरसा के विद्युत कार्यपालक अभियंता अमित कुमार ने उपभोक्ताओं से अपील की है कि वे निर्धारित अवधि में बिजली कटौती को देखते हुए अपनी तैयारियां पूरी कर लें। उन्होंने कहा कि आरओबी निर्माण शहर की यातायात व्यवस्था के लिए महत्वपूर्ण है। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद निर्धारित समय पर विद्युत आपूर्ति बहाल कर दी जाएगी। विभाग ने उपभोक्ताओं से इस असुविधा के लिए सहयोग की अपेक्षा की है।
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