पश्चिमी राजस्थान के थार मरुस्थल में पेयजल संकट दूर करने के लिए बड़ी सफलता मिली है। नाचना तहसील के घांटियाली में इंदिरा गांधी नहर के आरडी-1356 पर 242 करोड़ रुपए की लागत से 28 किलोमीटर घेरे वाला विशाल कृत्रिम जलाशय तैयार किया गया है। जल जीवन मिशन के तहत बने इस प्रोजेक्ट से मानसून के दौरान पंजाब से आने वाला अतिरिक्त जल संचित किया जाएगा, जो पहले सीमा पार बहकर बेकार हो जाता था। लगभग 33 फीट (10 मीटर) गहरे इस जलाशय की क्षमता 1413 मिलियन क्यूबिक फीट (MCFT) है। इससे जैसलमेर, बाड़मेर और आसपास के इलाकों की करीब 50 लाख आबादी को सालभर पीने का शुद्ध पानी आसानी से उपलब्ध हो सकेगा। तीन साल में ये बनकर तैयार हुआ है और बताया जा रहा है कि बहुत जल्द प्रदेश के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा इसका उद्घाटन करेंगे। 76 लाख वर्ग मीटर में बिछाई स्पेशल प्लास्टिक शीट रेगिस्तान की रेतीली जमीन में पानी के रिसाव को रोकने के लिए इंजीनियरिंग का अनोखा तरीका अपनाया गया है। लगभग 76 लाख स्क्वायर मीटर क्षेत्र में 300 माइक्रोन की स्पेशल एचडीपीई (HDPE) प्लास्टिक शीट बिछाई गई है। इस शीट को सुरक्षित रखने के लिए इसके ऊपर ढाई फीट मोटी मिट्टी की परत डाली गई है, जिससे पानी जमीन में नहीं रिसेगा। मोहनगढ़ फिल्टर प्लांट से होगी पानी की सप्लाई मानसून में नहर के अतिरिक्त पानी को 1 किलोमीटर लंबे एस्केप चैनल और दो बड़े गेटों के जरिए इसमें स्टोर किया जाएगा। यहां से पानी को पाइपलाइन के माध्यम से मोहनगढ़ फिल्टर प्लांट भेजा जाएगा, जहां से साफ होकर पानी सीधे जैसलमेर और बाड़मेर जिले के गांवों व कस्बों तक पहुंचेगा। नहरबंदी के समय मिलेगा 365 दिन बैकअप हर साल इंदिरा गांधी नहर की मरम्मत या सफाई (नहरबंदी) के दौरान पश्चिमी राजस्थान में पानी का संकट गहरा जाता था। यह नया जलाशय ‘वाटर बैंक’ की तरह काम करेगा, जिससे नहरबंदी के दिनों में भी जल आपूर्ति ठप नहीं होगी और लोगों को 365 दिन बिना रुकावट पानी मिलता रहेगा। साल 2023 में शुरू हुआ था निर्माण कार्य साल 2023 में शुरू हुई इस महत्वाकांक्षी परियोजना को 400 मजदूरों और 10 इंजीनियरों की टीम ने मिलकर पूरा किया है। 1356 एस्केप रिजर्वायर का काम पूरा होने के बाद अब मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा जल्द ही इसका औपचारिक उद्घाटन कर इसे जनता को समर्पित करेंगे।
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जैसलमेर में बनकर तैयार हुआ 28 किमी बड़ा वाटर बैंक: 242 करोड़ से बना, नहरबंदी में भी मिलेगा 365 दिन पानी; CM करेंगे उद्घाटन – Jaisalmer News
सरकारी मदद से मत्स्य पालक की तरक्की को लगे पंख: हरदोई में 30 लाख के सरकारी अनुदान और 8 टैंकों से मिली सफलता – Hardoi News
उत्तर प्रदेश सरकार के मत्स्य विभाग द्वारा प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत 30 लाख रुपये के सरकारी अनुदान और तकनीकी मार्गदर्शन से तहसील सण्डीला के युवा मत्स्य पालक अंकित विशाल ने सफलता की मिसाल पेश की है। उन्होंने 8 आधुनिक टैंकों (आरएएस) के जरिए सालाना 15 लाख रुपये का शुद्ध लाभ अर्जित किया है। शनिवार सुबह 1:06 बजे सहायक निदेशक मत्स्य डॉ. मुनीश कुमार ने प्रेस नोट के माध्यम से यह जानकारी दी। ग्रेजुएशन के बाद नौकरी न मिलने से अंकित की आर्थिक स्थिति बिगड़ने लगी थी, जिसके बाद उनके मन में मछली पालन व्यवसाय करने की उत्सुकता जगी। मछली पालन के बारे में कोई जानकारी न होने पर वे जिले के मत्स्य विभाग कार्यालय पहुंचे, जहाँ उन्होंने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना और मुख्यमंत्री मत्स्य संपदा योजना जैसी विभिन्न योजनाओं की विस्तृत जानकारी प्राप्त की। मत्स्य विभाग, उत्तर प्रदेश के मार्गदर्शन में अंकित ने आईसीएआर-सीआईएफए, केंद्रीय मत्स्य शिक्षा संस्थान, सीआईएफआरआई और अन्य प्रतिष्ठित संस्थानों से आधुनिक मत्स्य पालन तकनीकों का विशेष प्रशिक्षण भी प्राप्त किया। वर्ष 2022-23 में उन्होंने प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के अंतर्गत री-सर्कुलेटरी एक्वाकल्चर सिस्टम (RAS) की स्थापना की, जिसके लिए उत्तर प्रदेश सरकार के मत्स्य विभाग द्वारा 30 लाख रुपये का अनुदान प्रदान किया गया। वर्तमान में उनकी इस इकाई में 8 टैंक संचालित हैं, जिनमें लगभग 60,000 मछलियों का पालन किया जा रहा है। आधुनिक तकनीक और गुणवत्तापूर्ण मत्स्य बीज के उपयोग से उन्हें प्रतिवर्ष लगभग 40 से 45 टन मत्स्य उत्पादन प्राप्त हो रहा है, जिससे वे 10 से 15 लाख रुपये तक का वार्षिक शुद्ध लाभ अर्जित कर रहे हैं। इस उद्यम से स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रूप से रोजगार के नए अवसर भी सृजित हुए हैं।
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मुजफ्फरपुर दंपती हत्याकांड: रिक्शा चालक और सिम बेचने वाला गिरफ्तार: वकील की वेशभूषा में आए शख्स को सौंपा था सिम, पैसों के लालच में दिया था – Muzaffarpur News
मुजफ्फरपुर के मिठनपुरा थाना क्षेत्र के रामबाग चौड़ी स्थित सेवानिवृत्त बैंककर्मी अशोक कुंवर और उनकी पत्नी नीलम देवी की दोहरे हत्याकांड की जांच में पुलिस को बड़ा सुराग मिला है। साइबर जांच के दौरान इस्तेमाल किए गए एक सिम कार्ड के आधार पर पुलिस ने एक रिक्शा चालक और एक सिम विक्रेता को गिरफ्तार किया है। पुलिस का दावा है कि दोनों ने पैसों के लालच में अपने नाम से जारी सिम एक अज्ञात व्यक्ति को उपलब्ध कराया था। आशंका है कि इसी सिम का इस्तेमाल हत्या की साजिश या उससे जुड़े संपर्क के लिए किया गया। वकील की वेशभूषा में आया था अज्ञात व्यक्ति पुलिस जांच में सामने आया कि सकरा थाना क्षेत्र के लदौरा निवासी रिक्शा चालक रंधीर कुमार से पूछताछ के दौरान महत्वपूर्ण जानकारी मिली। रंधीर ने बताया कि करीब दो-तीन महीने पहले मोतीझील फ्लाईओवर के पास वकील की वेशभूषा में एक व्यक्ति ने उसका रिक्शा किराए पर लिया। वह स्टेशन रोड गेट नंबर-3 स्थित एक सिम स्टॉल पर पहुंचा, जहां दुकानदार ने उसे पैसे का लालच देकर उसके आधार कार्ड पर इंडिया कंपनी का नया सिम जारी कराया। सिम मिलते ही उसे रिक्शे पर बैठे उसी अज्ञात व्यक्ति को सौंप दिया गया। सिम बंद कराने गया, लेकिन नहीं हुई कार्रवाई रंधीर ने पुलिस को बताया कि बाद में उसे आशंका हुई कि उसके नाम से जारी सिम का इस्तेमाल किसी गलत काम में हो सकता है। इस पर वह सिम बंद कराने के लिए दोबारा दुकान पहुंचा, लेकिन दुकानदार ने यह कहकर लौटा दिया कि सिम अपने आप बंद हो जाएगा। इसके बाद उसने इस मामले पर ध्यान नहीं दिया। सिम विक्रेता ने भी स्वीकार की बात रंधीर की निशानदेही पर पुलिस स्टेशन रोड स्थित सिम स्टॉल पहुंची और संचालक राकेश कुमार गुप्ता से पूछताछ की। पूछताछ में उसने रिक्शा चालक के आधार कार्ड पर सिम जारी कर उसे अज्ञात व्यक्ति को देने की बात स्वीकार कर ली। पुलिस का मानना है कि दोनों ने पैसों के लालच में मिलकर सिम उपलब्ध कराया, जिसका इस्तेमाल एक गंभीर आपराधिक घटना में किया गया। दो गिरफ्तार, अज्ञात आरोपी की तलाश जारी पुलिस ने रंधीर कुमार, राकेश कुमार गुप्ता और वकील की वेशभूषा वाले अज्ञात व्यक्ति के खिलाफ संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है। रंधीर और राकेश को गिरफ्तार कर न्यायिक प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की जा रही है, जबकि फरार अज्ञात व्यक्ति की पहचान और गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। तकनीकी जांच से मिल रहे नए सुराग पुलिस का कहना है कि दंपती हत्याकांड की जांच में साइबर और तकनीकी साक्ष्य अहम भूमिका निभा रहे हैं। कॉल डिटेल, मोबाइल लोकेशन और अन्य डिजिटल साक्ष्यों के आधार पर लगातार नए सुराग मिल रहे हैं। जांच एजेंसियों को उम्मीद है कि जल्द ही इस बहुचर्चित दोहरे हत्याकांड का पूरा खुलासा कर लिया जाएगा।
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महाकाल दर्शन के लिए उमड़ेगा रिकॉर्ड जनसैलाब: सावन-भादौ में रोज 95 हजार यात्रियों की एडवांस बुकिंग, उज्जैन स्टेशन पर पहली बार लागू होगा वन-वे ट्रैफिक – Ujjain News
श्रावण-भादौ में बाबा महाकाल के दर्शन के लिए उज्जैन में रिकॉर्ड श्रद्धालुओं के पहुंचने की उम्मीद है। अगस्त और सितंबर के लिए ट्रेनों में हुई एडवांस टिकट बुकिंग ने पिछले सभी रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। बढ़ती भीड़ को देखते हुए रेलवे पहली बार सावन में उज्जैन स्टेशन पर वन-वे ट्रैफिक व्यवस्था लागू करने की तैयारी कर रहा है। साथ ही स्टेशन परिसर और आसपास ड्रोन से भीड़ की निगरानी करने की तैयारी है। रेलवे अधिकारियों का मानना है कि यह व्यवस्था आगामी सिंहस्थ महापर्व के लिए भीड़ प्रबंधन का ट्रायल भी साबित होगी। रेलवे के आंकड़ों के अनुसार सामान्य दिनों में रोजाना करीब 72 हजार यात्री उज्जैन स्टेशन पहुंचते हैं, लेकिन 30 जुलाई से 7 सितंबर तक चलने वाले श्रावण-भादौ मास के लिए अभी से प्रतिदिन 95 हजार यात्रियों ने टिकट बुक करा लिए हैं। इससे साफ है कि इस बार महाकाल दर्शन के लिए श्रद्धालुओं की संख्या पिछले वर्षों की तुलना में कहीं अधिक रहने वाली है। स्टेशन पर पहली बार लागू होगी वन-वे व्यवस्था आरपीएफ थाना प्रभारी नरेंद्र यादव ने बताया कि भीड़ नियंत्रण के लिए रेल मंडल को प्रस्ताव भेजा गया है। प्रस्ताव के अनुसार प्लेटफॉर्म नंबर-8 की ओर से यात्रियों का निकास (एग्जिट) होगा, जबकि प्लेटफॉर्म नंबर-1 की ओर से प्रवेश (एंट्री) दी जाएगी। इस दौरान माल गोदाम की ओर से यात्रियों का प्रवेश पूरी तरह बंद रहेगा, जिससे स्टेशन पर भीड़ का दबाव नियंत्रित किया जा सके। 6 अतिरिक्त ट्रेनें चलेंगी महाकाल लोक बनने के बाद उज्जैन आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में लगातार वृद्धि हुई है। आरपीएफ के अनुसार पिछले वर्ष श्रावण-भादौ मास में प्रतिदिन लगभग 70 हजार यात्री आते थे, जबकि अब यह संख्या सामान्य दिनों में ही पहुंच चुकी है। इस बार सीजन में यात्रियों की संख्या 95 हजार प्रतिदिन से अधिक रहने की संभावना है। श्रद्धालुओं का सबसे अधिक दबाव भोपाल रूट पर रहता है, इसलिए इस मार्ग पर 6 अतिरिक्त ट्रेनें संचालित की जाएंगी। पहली बार बनेगा वाटरप्रूफ होल्डअप एरिया श्रद्धालुओं की सुविधा और भीड़ नियंत्रण के लिए रेलवे स्टेशन परिसर के बाहर 1200 यात्रियों की क्षमता वाला वाटरप्रूफ होल्डअप एरिया तैयार किया जा रहा है। यहां यात्रियों के लिए मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध रहेंगी ताकि भीड़ को चरणबद्ध तरीके से स्टेशन में प्रवेश कराया जा सके। ड्रोन और अतिरिक्त जवान संभालेंगे सुरक्षा सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करने के लिए रेलवे ने 50 अतिरिक्त सुरक्षा जवानों की मांग की है। स्टेशन परिसर में सीसीटीवी कैमरों की संख्या भी बढ़ाई जा रही है। पहली बार ड्रोन के जरिए भी स्टेशन और आसपास की भीड़ पर नजर रखी जाएगी, जिससे किसी भी आपात स्थिति में तुरंत कार्रवाई की जा सके। रेलवे और प्रशासन का मानना है कि सावन-भादौ में लागू की जा रही यह नई व्यवस्था न केवल इस बार की भीड़ को नियंत्रित करने में मददगार होगी, बल्कि आगामी सिंहस्थ महापर्व के लिए भी प्रभावी क्राउड मैनेजमेंट का अभ्यास साबित होगी।
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अभिजीत दीपके को टाइफाइड हुआ: कहा- मेरा इलाज चल रहा है; प्रदर्शनकारियों का जताया आभार
अभिजीत दीपके ने एक वीडियो जारी कर अपने स्वास्थ्य की जानकारी दी। वीडियो में उन्होंने कहा कि पिछले कुछ दिनों से मेरी तबीयत खराब थी। अब मेरी ब्लड रिपोर्ट आ गई है और मुझे टायफाइड की पुष्टि हुई है। मेरा इलाज चल रहा है। सभी कॉकरोच प्रदर्शनकारियों का बहुत-बहुत धन्यवाद, जिन्होंने पूरे प्रदर्शन को शांतिपूर्ण बनाए रखा। खबर का वीडियो देखने के लिए कवर इमेज पर क्लिक करें…
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व्रत में बनाइए सेहत और स्वाद से भरपूर परफेक्ट साबूदाना खिचड़ी, जानिये तरीका
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व्रत के लिए साबूदाना खिचड़ी एक लोकप्रिय और ऊर्जा से भरपूर व्यंजन है. इसे बनाने के लिए साबूदाना, आलू, मूंगफली, हरी मिर्च और घी का उपयोग होता है. साबूदाने को 5-6 घंटे भिगोना ज़रूरी है.
व्रत में भी बनी रहेगी भरपूर एनर्जी, केवल खा लीजिये ये साबूदाना खिचड़ी. Image AI
व्रत के दौरान ऐसा भोजन खाने की सलाह दी जाती है जो हल्का होने के साथ-साथ शरीर को भरपूर ऊर्जा भी दे. ऐसे में साबूदाना खिचड़ी सबसे लोकप्रिय और पसंदीदा व्यंजनों में से एक है. यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और आवश्यक पोषक तत्वों से भरपूर होती है. नवरात्रि, एकादशी, महाशिवरात्रि और अन्य व्रतों में साबूदाना खिचड़ी खास तौर पर बनाई जाती है. यदि इसे सही तरीके से तैयार किया जाए, तो यह दानेदार, स्वादिष्ट और बेहद लाजवाब बनती है.
आवश्यक सामग्री
1 कप साबूदाना
2 मध्यम आकार के उबले आलू (कटे हुए)
½ कप भुनी हुई मूंगफली का दरदरा पाउडर
2 हरी मिर्च बारीक कटी हुई
1 छोटा चम्मच जीरा
8-10 करी पत्ते
2 बड़े चम्मच घी या मूंगफली का तेल
सेंधा नमक स्वादानुसार
1 बड़ा चम्मच नींबू का रस
2 बड़े चम्मच हरा धनिया बारीक कटा हुआ
साबूदाना भिगोने का सही तरीका
साबूदाना खिचड़ी का स्वाद काफी हद तक साबूदाने को भिगोने के तरीके पर निर्भर करता है. सबसे पहले साबूदाने को 2-3 बार पानी से अच्छी तरह धो लें. इसके बाद इसे एक बर्तन में डालकर इतना पानी डालें कि साबूदाना बस डूब जाए. अब इसे 5 से 6 घंटे या पूरी रात के लिए ढककर रख दें.
भीगने के बाद साबूदाने का एक दाना हाथ में लेकर दबाएं. यदि वह आसानी से दब जाए तो समझ लें कि साबूदाना खिचड़ी बनाने के लिए तैयार है. अतिरिक्त पानी होने पर खिचड़ी चिपचिपी हो सकती है, इसलिए इस बात का विशेष ध्यान रखें.
- बनाने की विधि
एक कड़ाही में घी या तेल गर्म करें. इसमें जीरा डालकर चटकाएं. अब हरी मिर्च और करी पत्ते डालकर कुछ सेकंड भूनें. इसके बाद कटे हुए उबले आलू डालें और उन्हें हल्का सुनहरा होने तक भून लें. - अब मूंगफली का दरदरा पाउडर और सेंधा नमक डालकर अच्छी तरह मिलाएं. इसके बाद भीगा हुआ साबूदाना डालें और धीरे-धीरे चलाते हुए मिलाएं. गैस की आंच मध्यम रखें और खिचड़ी को 4-5 मिनट तक पकाएं.
- जब साबूदाने के दाने पारदर्शी दिखाई देने लगें, तब गैस बंद कर दें. ज्यादा देर पकाने से साबूदाना चिपचिपा हो सकता है. अंत में नींबू का रस और हरा धनिया डालकर अच्छी तरह मिला लें.
परोसने का तरीका
गरमा-गरम साबूदाना खिचड़ी को दही, व्रत वाली मूंगफली की चटनी या ताजे फलों के साथ परोसें. ऊपर से थोड़ा नींबू निचोड़ने से इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है.
वर्ल्ड अपडेट्स: कनाडा में पंजाब की छात्रा की गला घोंटकर हत्या, लिव-इन पार्टनर गिरफ्तार
कनाडा के एडमंटन शहर में पंजाब की 23 साल की छात्रा दमनप्रीत कौर की गला घोंटकर हत्या कर दी गई। पुलिस ने इस मामले में उनके 22 साल के भारतीय लिव-इन पार्टनर रितिश कुमार को गिरफ्तार किया है। दमनप्रीत पंजाब के लुधियाना जिले के समराला की रहने वाली थीं। वह स्टूडेंट वीजा पर करीब 5 साल पहले कनाडा गई थीं। एडमंटन पुलिस के मुताबिक, 9 जुलाई को उन्हें एक घर में गंभीर हालत में पाया गया था। अस्पताल में इलाज के दौरान 12 जुलाई को उनकी मौत हो गई। 14 जुलाई को हुई पोस्टमार्टम रिपोर्ट में मौत की वजह गला घोंटना बताई गई। पुलिस ने 22 जुलाई को रितिश कुमार को गिरफ्तार कर सेकेंड डिग्री मर्डर का आरोप लगाया। अधिकारियों का कहना है कि यह लिव-इन पार्टनर से जुड़ा हत्या का मामला है और फिलहाल किसी अन्य आरोपी की तलाश नहीं की जा रही। परिवार के मुताबिक, दमनप्रीत की पढ़ाई के लिए उनके माता-पिता ने कर्ज लेकर उन्हें कनाडा भेजा था। अब उनका शव भारत लाने के लिए ऑनलाइन फंड जुटाया जा रहा है। अंतरराष्ट्रीय मामलों से जुड़ी अन्य बड़ी खबरें… इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट के वकील करीम खान पद से हटाए गए, यौन उत्पीड़न का आरोप इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) के वकील करीम खान को यौन उत्पीड़न के आरोपों के बीच पद से हटा दिया गया है। ICC की सदस्य देशों की सभा ने शुक्रवार को इस पर मतदान कर उन्हें हटाने का फैसला लिया। वहीं, करीम खान की कानूनी टीम ने इस फैसले को राजनीतिक बताया है। उनका कहना है कि स्वतंत्र जांच पैनल को उनके खिलाफ गलत व्यवहार के पक्के सबूत नहीं मिले। साथ ही, उन्हें अपना पक्ष रखने का पूरा मौका भी नहीं दिया गया। करीम खान 2024 में इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू और तत्कालीन रक्षा मंत्री योआव गैलेंट के खिलाफ गिरफ्तारी वारंट जारी करने के बाद चर्चा में आए थे। इसके बाद अमेरिका ने करीम खान समेत ICC के कई अधिकारियों पर प्रतिबंध लगाए थे। इस साल जून में एक निगरानी पैनल ने खान पर गलत व्यवहार के आरोप लगाए थे। इसके बाद उन्होंने कुछ समय के लिए अपना पद छोड़ दिया था।
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बेकाबू हुआ OpenAI का AI एजेंट, चुपके से कर डाली हैकिंग FBI तक पहुंचा मामला
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AI Cyberattack : ओपनएआई के एक एआई ने ऐसा कारनामा कर डाला है, जिससे हर कोई हैरान और चिंतित है. लैब में सुरक्षा घेरे में बंद इस एजेंट ने सारी निगरानियों को धत्ता बताते हुए खुद को आजाद कर लिया और एक कंपनी पर ही साइबर अटैक कर डाला. खास बात यह है कि ओपनएआई को इसका पता ही नहीं चला कि उसका एक एआई एजेंट फरार हो गया है.
विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियां एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में सुरक्षा को ठेंगा दिखा रही हैं.
नई दिल्ली. जिस AI को इंसानों का काम आसान करने के लिए बनाया गया था, वही अब इंसानों की नाक में दम कर रहा है. चैटजीपीटी (ChatGPT) बनाने वाली कंपनी OpenAI में जो मामला सामने आया है, वो एक चेतावनी है. कंपनी एक AI एजेंट इतना होशियार हो गया कि लैब की वह लैब की सारी बंदिशों को तोड़कर ‘फरार’ हो गया. उसने चुपके से एक दूसरी कंपनी को हैक कर डाला. खास बात यह रही कि यह शरारती एआई एक हफ्ते तक हैकिंग करता रहा और OpenAI को कानोंकान खबर न हुई. जिस कंपनी पर इस एआई एजेंट ने हमला किया, उसने एफबीआई को शिकायत दी तो यह मामला खुला.
यह मामला इसी महीने का है. OpenAI अपने एक बेहद एडवांस्ड साइबर सिक्योरिटी AI एजेंट का टेस्ट कर रहा था. इसे पूरी तरह से आइसोलेट करके एक सुरक्षित जगह पर रखा गया था. लेकिन 9 जुलाई को यह AI एजेंट लैब के सारे बैन को धत्ता बता भाग निकला . 11 से 13 जुलाई के बीच इसने Hugging Face नामक AI प्लेटफॉर्म के सिस्टम में सेंध लगा दी. यह AI बिना किसी इंसानी मदद के खुद फैसले ले रहा था और हैकिंग के मजे ले रहा था.
कांड करके छुपाया सबूत
यह कोई मामूली AI एजेंट नहीं था, यह तो पूरा ‘क्रिमिनल माइंड’ निकला. जांच में पता चला कि इस AI एजेंट ने सुरक्षा निगरानी तंत्र (Monitoring System) को ही बंद कर दिया था. सबसे हैरानी की बात यह रही की इसने अपने आने वाले ‘फ्यूचर वर्जन्स’ के लिए गुप्त नोट्स छोड़ दिए. इन नोट्स में बताया गया था कि OpenAI की पाबंदियों और सुरक्षा घेरों को कैसे तोड़ा जा सकता है. यानी, यह AI न सिर्फ खुद आजाद हुआ, बल्कि अपने वंशज AI को भी बागी बनने का तरीका सिखा गया.
हफ्ते भर सोती रही कंपनी, FBI तक पहुंच गई बात
AI की दुनिया में इस घटना ने तहलका मचा दिया. हगिंग फेस को जब अपनी हैकिंग का अहसास हुआ, तो उन्होंने सीधे अमेरिकी खूफिया एजेंसी एफबीआई से शिकायत कर दी. हगिंग फेस के सह-संस्थापक थॉमस वुल्फ ने हैकिंग की जानकारी दी. दूसरी तरफ, ओपनएआई को ये ही पता नहीं चला कि उसके घर में क्या हुआ है. वुल्फ और जांच से जुड़े तीन अन्य लोगों के अनुसार, ओपनएआई को यह समझने में कई और दिन लग गए कि इस हैकिंग के पीछे उसका अपना AI एजेंट था.
16 जुलाई को जब हगिंग फेस ने ब्लॉग लिखकर इस हमले का खुलासा किया, तब कहीं जाकर OpenAI के इंजीनियरों की नींद खुली. 18-19 जुलाई के वीकेंड पर जब लॉग्स खंगाले गए, तब समझ आया कि यह कांड तो कंपनी के ही एआई एजेंट ने किया है. जब मामला मीडिया में उछला तो 21 जुलाई को OpenAI को सार्वजनिक रूप से मानना पड़ा कि उनका AI एजेंट ‘बेकाबू’ हो गया था. कंपनी ने इसे एक “अभूतपूर्व” घटना बताया.
आगे निकलने की होड़ पड़ रही भारी
विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियां एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में सुरक्षा को ठेंगा दिखा रही हैं. पैलिसेड रिसर्च के जेफ्री लैडिश ने कहा, “ये AI मॉडल झूठ बोलते हैं, धोखा देते हैं और हैक भी करते हैं.” वर्ल्ड एथिकल डेटा फाउंडेशन की प्रमुख इंटेलिजेंस विशेषज्ञ मार्ले स्मिथ ने कहा, “क्या इसका मतलब यह है कि कंपनी ने AI एजेंट को बिना निगरानी छोड़ दिया था और उसे पता ही नहीं चला कि वह क्या कर रहा है? या फिर उन्हें पता था लेकिन वे उसे रोक नहीं पाए? दोनों ही स्थितियां बेहद खतरनाक और चिंताजनक हैं.”
राजस्थान में पेपरलीक की सजा उम्रकैद, 10 करोड़ जुर्माना: देश में सबसे सख्त कानून वाले 4 राज्यों में, सजा 1 को भी नहीं – Rajasthan News
दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे प्रोटेस्ट के बीच प्रतियोगी परीक्षा के पेपर लीक करने वालों के खिलाफ केंद्र सरकार के कानून में सख्त संशोधन को केबिनेट में मंजूरी मिल गई है। अब इस संशोधन बिल को लोकसभा में रखा जाएगा।
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राजस्थान में 2023 के विधानसभा चुनाव में पेपर लीक ही सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा बना था। खास बात यह है कि पेपर लीक करने वालों के खिलाफ देश का सबसे सख्त कानून राजस्थान में है।
फिर भी अब तक किसी भी आरोपी को कोर्ट से सजा नहीं हुई है। साल 2015 के बाद से अब तक 600 से ज्यादा गिरफ्तारियां हो चुकी हैं।
एक्सपट्र्स के अनुसार, आरोपियों को जल्दी सजा तक पहुंचाने के लिए अब बस यहां फास्ट ट्रैक कोर्ट की जरूरत है। राजस्थान के अलावा पेपर लीक मामलों में उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और झारखंड के कानून में भी उम्रकैद का प्रावधान है। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
राजस्थान में 2023 से पेपर लीक और नकल विरोधी संशोधन कानून लागू हो चुका है। वहीं केंद्र में संशोधन को सरकार सोमवार को संसद में पेश करने की तैयारी कर रही है।
राजस्थान के पेपर लीक मामलों में RPSC और कर्मचारी चयन बोर्ड की ओर से आयोजित सभी तरह की प्रतियोगी परीक्षाएं शामिल हैं।
वहीं, केंद्रीय कानून में UPSC, SSC, रेलवे भर्ती बोर्ड (RRB), बैंकिंग परीक्षाएं (IBPS) और NTA की ओर से आयोजित NEET, JEE, और UGC-NET जैसी बड़ी प्रवेश व पात्रता परीक्षाएं शामिल हैं।
राजस्थान में पिछली कांग्रेस सरकार दवाब में लाई थी संशोधन बिल
राजस्थान में पेपर लीक के खिलाफ सख्त कानून बनाने के लिए 21 जुलाई 2023 को संशोधन बिल (राजस्थान सार्वजनिक परीक्षा संशोधन विधेयक, 2023) विधानसभा में पारित हो गया था।
इसके बाद 5 अगस्त 2023 को राज्यपाल की मंजूरी मिलते ही इसने कानूनी रूप ले लिया। पिछली सरकार में 2021 में रीट 2021 व सब-इंस्पेक्टर और 2022 में सीनियर टीचर, कॉन्स्टेबल भर्ती, हाई कोर्ट LDC भर्ती सहित कई परीक्षाओं में पेपर लीक हुए।
वहीं RAS जैसी परीक्षा के बाद ओएमआर शीट तक बदलने के मामले को ACB ने पकड़ा। पेपर लीक के मामले में बीजेपी ने कांग्रेस सरकार को जमकर घेरा हुआ था।
पिछली सरकार काफी दबाव में थी और चुनाव भी नजदीक आते जा रहे थे। ऐसे में सरकार पेपर लीक और नकल रोकने के लिए राजस्थान परीक्षा (भर्ती में अनुचित साधनों की रोकथाम के उपाय) अधिनियम, 1992 में 2023 में संशोधन बिल लेकर आई थी।
पेपर लीक, नकल या गलत तरीके से नौकरी पाने वाले 190 कर्मचारी हटाए
राजस्थान में पिछले ढाई सालों में पेपर लीक को लेकर कई कार्रवाई हुई हैं। सरकार में आते ही सीएम भजनलाल शर्मा ने पेपर लीक मामलों की जांच के लिए स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम (SIT) का गठन किया।
सरकार ने पेपर पाकर नौकरी पर लगने वाले, नकल करके या गलत सर्टिफिकेट के जरिए नौकरी पाने वाले करीब 190 कर्मचारियों को बाहर का रास्ता दिखा दिया गया है। इन्हें बर्खास्त कर सरकार ने इनकी सेवा समाप्त कर दी है।
सरकार ने 135 शारीरिक शिक्षकों को भी नियुक्ति रद्द की, इन्होंने फर्जी खेल सर्टिफिकेट लगाए थे। सरकार की रेडार पर 500 सरकारी कर्मचारी ओर हैं, इनके खिलाफ जांच जारी है।

615 गिरफ्तार, सजा 1 को भी नहीं
पेपर लीक करने वाले या ऐसी गतिविधियों में शामिल रहे करीब 570 लोग यहां गिरफ्तार हो चुके हैं। यदि 2015 से अब तक के आंकड़े देखें तो पेपर लीक मामलों में 615 से भी अधिक गिरफ्तारियां हो चुकी है।
लेकिन कोर्ट से किसी को भी अब तक कोई सजा नहीं हुई है। मामलों में सुनवाई जारी है। राजस्थान में पिछले ढाई साल में अब तक 380 से ज्यादा छोटी-बड़ी प्रतियोगी परीक्षाएं आयोजित हो चुकी हैं।
लेकिन सरकार की ओर से की गई सख्ती के चलते पेपर लीक की घटनाएं काफी हद तक थम गई हैं। हाल ही राजस्थान सरकार ने दावा भी किया कि पिछली कांग्रेस सरकार के कार्यकाल में 17 भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक हुए थे, जिससे लाखों अभ्यर्थियों का भविष्य प्रभावित हुआ।
राज्य सरकार की सबसे बड़ी कार्रवाई में सब इंस्पेक्टर भर्ती परीक्षा के पेपर लीक में की गई थी। अकेले इस मामले में 150 लोगों को गिरफ्तार किया गया। इसमें आरपीएससी के पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा और रामूराम राईका को भी गिरफ्तार किया गया।
दो बड़े किरदार
बाबू लाल कटारा : चलती बस में पेपर सॉल्व
उदयपुर जिले के बेकरिया थाना पुलिस ने 24 दिसंबर 2022 को एक बस को पकड़ा था। पेपर लीक के सरगना चलती बस में द्वितीय श्रेणी शिक्षक भर्ती के 49 अभ्यर्थियों को परीक्षा से पहले पेपर हल करवा रहे थे।
इसके बाद पूरे घटनाक्रम का खुलासा हुआ और तार तत्कालीन आरपीएससी के सदस्य बाबूलाल कटारा से जुड़ गए। ग्रेड सेकेंड टीचर भर्ती-2022 पेपर लीक मामले में कटारा को इस परीक्षा के पेपर और उत्तर कुंजी तैयार करने का दायित्व मिला था।
उसने पेपर लीक कर दिया। कटारा के घर से 51.20 लाख रुपए नकद और 541 ग्राम सोने के 9 गहने बरामद हुए थे।

एसओजी ने 2023 में RPSC के पूर्व सदस्य बाबूलाल कटारा, उसके भांजे विजय डामोर और ड्राइवर को गिरफ्तार किया।
रामूराम राइका : बेटे-बेटी के लिए पेपर लिया
रामूराम राईका को 1 सितंबर 2024 को स्पेशल ऑपरेशन ग्रुप (एसओजी) ने 5 घंटे की पूछताछ के बाद गिरफ्तार किया था। राईका पर आरोप है कि उसने निलंबित RPSC सदस्य बाबूलाल कटारा से अपने बेटे और बेटी के लिए एसआई भर्ती परीक्षा से पहले पेपर लिया था। रामूराम राईका 2018 से 2022 तक आरपीएससी मेंबर रहा था।

पेपर लीक मामले में आरपीएससी (RPSC) के पूर्व सदस्य रामूराम राईका को 2024 में SOG ने गिरफ्तार किया था।
पेपर लीक में सजा जल्दी क्यों नहीं मिल पाती…
एक्सपर्ट के अनुसार पेपर लीक मामलों में आरोपियों की संख्या काफी अधिक होती है। ये गैंग के रूप में होते हैं। एक के बाद दूसरा, तीसरा…ऐसे चेन जुड़ी हुई रहती है।
हर पेपर लीक मामले में आरोपियों की संख्या काफी अधिक होने के कारण जांच भी लगातार चलती रहती है। कोर्ट में सुनवाई भी लगातार चलने के कारण काफी समय लगता है। पिछले कुछ सालों में पकड़े गए आरोपियों की संख्या भी यहां काफी अधिक है।
पेपर लीक के आरोपियों को जल्दी सजा के लिए कुछेक ही विकल्प हो सकते हैं। जैसे सरकार को फास्ट ट्रैक कोर्ट में मामलों को ले जाना चाहिए, जिससे कोर्ट ऐसे मामलों पर ही फोकस करते हुए काम करे।

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दिल्ली के जंतर-मंतर पर नीट पेपर लीक को लेकर प्रदर्शन कर रहे स्टूडेंट्स पर हुई पुलिस की कार्रवाई का विरोध राजस्थान में भी हुआ। जोधपुर में कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन के दौरान युवा कांग्रेस के कार्यकर्ता बैरिकेड्स पर चढ़ गए। पूरी खबर पढ़िए…
‘पुलिस ने डंडों में कीलें ठोकीं, महिलाओं के कपड़े फाड़े’: युवती बोली- 2 साल NEET की तैयारी की, परिवार ने छुड़वाकर पॉलिटेक्निक में एडमिशन कराया – Sirsa News
हम 19 जुलाई को सिरसा से दिल्ली पहुंचे थे। 20 को जंतर-मंतर गए। वहां दो-तीन जगह बैरिकेडिंग की गई थी। करीब एक घंटे तक नारेबाजी हुई, जिसके बाद पुलिस ने अचानक लाठीचार्ज कर दिया। महिलाओं को धक्के दिए गए और उनके कपड़े फाड़ दिए गए। एक गर्भवती महिला को भी दूर धकेल दिया। यह दावा सिरसा के दारेवाला गांव निवासी सरोज रानी का है। सरोज 20 जुलाई को जंतर-मंतर से संसद मार्च में शामिल होने दिल्ली गई थीं। इस दौरान उन्हें पुलिस ने डिटेन किया था। सिरसा लौटने के बाद दैनिक भास्कर से बातचीत में उन्होंने प्रदर्शन के दौरान हुई कार्रवाई को लेकर कई आरोप लगाए। सरोज के साथ मार्च में शामिल हुई अन्य युवतियों ने भी वहां का माहौल बताया। इन्हीं में शामिल पायल ने बताया- मैंने दो साल तक NEET की तैयारी की थी, लेकिन पेपर में गड़बड़ियों के बाद मेरे परिवार ने तैयारी छुड़वाकर एडमिशन सिरसा के पॉलिटेक्निक कॉलेज में करवा दिया। ‘महिलाओं के कपड़े फाड़े, डंडों में कीलें ठोक रखी थीं ‘ सिरसा के दारेवाला गांव निवासी सरोज रानी ने कहा- “20 जुलाई को मैं खुद जंतर-मंतर पर मौजूद थी। मैंने अपनी आंखों से देखा कि पुलिसकर्मियों ने हमारी बच्चियों के कपड़े फाड़ दिए और उन्हें अर्धनग्न कर दिया। यह बेहद शर्मनाक था। बच्चों के साथ हर अभिभावक खड़ा है और उनके समर्थन में आवाज उठाना जरूरी था। प्रदर्शन स्थल पर न शौचालय की व्यवस्था है और न ही पीने के पानी की। मैंने अपनी आंखों से देखा कि यदि प्रदर्शन स्थल पर खाना भी पहुंचता है तो वह बच्चों तक नहीं पहुंच पाता, क्योंकि वहां प्रदर्शनकारियों की संख्या बहुत ज्यादा है। सरकार ने बच्चों को ‘कॉकरोच’ कहकर अपनी घटिया मानसिकता दिखाई है। पिछले 12 साल में पहली बार प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर सामने आकर बातचीत की है। वरना वह सिर्फ ‘मन की बात’ करते रहे हैं। वहां का माहौल ऐसा है कि कोई भी अभिभावक अपने बच्चों को वहां ले जाना नहीं चाहेगा।” हमने भगत सिंह को दोबारा देखा है। पहले सिर्फ उनके बारे में पढ़ा और सुना था। पुलिस ने आंसू गैस के गोले छोड़े और फायरिंग की, लेकिन बच्चों ने भी उनका डटकर सामना किया। वहां पत्थरों से भरे ट्रक लाए गए और डंडों में कीलें ठोंक रखी थीं। इतने बच्चों का खून बहने के बाद जाकर प्रधानमंत्री ने इस मुद्दे पर मुंह खोला। अब जनता खुद तय करे कि उन्हें देश की ज्यादा चिंता है या हवाई यात्राओं की।” ‘हमारे पेरेंट्स दिल्ली भेजने से डर रहे’ सिरसा के आनंद विहार निवासी छात्रा पूजा ने बताया- “स्टूडेंट ने 20 जुलाई को शांतिपूर्वक प्रदर्शन करने एवं संसद तक जाने को कहा था। इतनी बेरहमी से उनको मारा गया। एक पुलिस वाले ने तो अपने डंडे पर कील लगा रखी थी। हमारे पेरेंट्स हमें वहां जाने नहीं दे रहे। वो डर रहे हैं कि बच्चों को कुछ हो ना जाए। हम अपने जिले में रहकर आवाज उठा सकते हैं। एक ये NEET एग्जाम की बात नहीं है, हर एग्जाम में हेरा-फेरी हुई है। CJL में हेरा-फेरी हुई। मैंने साल 2024 में BSF का फॉर्म भरा था। मेरे साथ और भी स्टूडेंट स्टेडियम में तैयारी करने के लिए आते थे। सभी का फिजिकल भी क्लीयर हुआ। हमारा फिजिकल इतनी दूर था कि हमारा पांच से दस हजार के बीच खर्चा आया। वो क्या फ्री के आए थे? उसका अभी तक एग्जाम नहीं हुआ। सरकार क्या कर रही है? हम अपना भविष्य कहां देखें। अभी सरकारी भर्ती के लिए पेपरों की तैयारी कर रही हूं।” ‘NTA चेयरमैन का नहीं, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा चाहिए’ पूजा ने कहा- “यह सिर्फ NEET पेपर लीक का मामला नहीं है। आज ऐसे कई युवा हैं, जिन्होंने बीएससी और एमएससी जैसी डिग्रियां हासिल की हैं, लेकिन 10-10 साल पढ़ाई करने के बाद भी बेरोजगार घूम रहे हैं। सरकारी भर्तियों की तैयारी में काफी समय और पैसा खर्च होता है। आवेदन फॉर्म भरने के लिए भी फीस देनी पड़ती है। जिनके माता-पिता सरकारी नौकरी में हैं, वे किसी तरह खर्च उठा लेते हैं, लेकिन कई परिवारों के लिए यह संभव नहीं होता। सरकार ने एनटीए के चेयरमैन का इस्तीफा मांगा है, लेकिन यह सिर्फ एनटीए का मामला नहीं है। कई प्रतियोगी परीक्षाओं के पेपर लीक हो रहे हैं। हमारी मांग है कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान इस्तीफा दें। यदि शिक्षा व्यवस्था पर प्रभावी निगरानी नहीं होगी, तो चाहे कोई भी बोर्ड हो, पेपर लीक जैसी घटनाएं होती रहेंगी।” ‘NEET की तैयारी छोड़ पॉलिटेक्निक में एडमिशन लिया’ सहारणी गांव निवासी पायल ने बताया- “मैंने दो साल पहले NEET की तैयारी की थी। उस समय मेरी उम्र भी परीक्षा देने की थी। मैंने एक साल ड्रॉप लेकर तैयारी की, लेकिन उसी दौरान स्कैम सामने आया। 28 छात्रों को पूरे अंक दिए गए थे। इससे पहले NEET में ऐसा कभी देखने को नहीं मिला था। उस समय कई छात्रों के साथ अन्याय हुआ था। इसी वजह से मेरे परिवार ने मुझसे कहा कि अब आगे NEET की तैयारी नहीं करनी है। इसके बाद मेरे परिवार ने मेरा दाखिला सिरसा के पॉलिटेक्निक कॉलेज में आर्किटेक्चर ट्रेड में करवा दिया। मैं इस प्रदर्शन में इसलिए शामिल हूं ताकि भविष्य में इस तरह पेपर लीक या परीक्षा में गड़बड़ी जैसी घटनाएं दोबारा न हों। मेरे साथ पढ़ने वाले कुछ छात्रों ने NEET का री-एग्जाम भी दिया था। री-एग्जाम में उन्हें पहले की तुलना में काफी कम अंक मिले, जबकि पहले वाले पेपर में उनके नंबर अच्छे थे।” ————————– ये खबर भी पढ़ें :- जंतर-मंतर लाठीचार्ज-कॉकरोच पोस्ट पर घिरीं हरियाणवी लेडी अफसर:DUSU चुनाव लड़ चुकीं, किरण बेदी जैसी बनने का सपना; प्रोटेस्ट में हाथ फ्रैक्चर जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के बीच जमीन पर छटपटाते कॉकरोच की वीडियो पर कमेंट के साथ स्टोरी शेयर करने के बाद से ट्रोल हो रहीं CRPF में असिस्टेंट कमांडेंट सोनिया सहरावत के हाथ में फ्रेक्चर के कारण मेडिकल लीव पर भेजा गया है। साथ ही हालात और थ्रेट्स को देखते हुए धरने से दूर कर दिया गया है। पढ़ें पूरी खबर…
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