नई दिल्ली. भारत की औसत आय भले ही अभी भी लोअर-मिडिल इनकम कैटेगरी में हो, लेकिन देश के भीतर तस्वीर काफी अलग है. वर्ल्ड बैंक समूह की 1 जुलाई 2026 को जारी Country Income Classifications रिपोर्ट बताती है कि भारत की प्रति व्यक्ति आय 2,760 डॉलर है, जो उसे अभी भी निम्न-मध्यम आय वाले देश की श्रेणी में रखती है. लेकिन इसी रिपोर्ट में यह भी सामने आया है कि भारत के 5 राज्य अब अपर-मिडिल इनकम लेवल को पार कर चुके हैं. यह साफ संकेत है कि भारत की आर्थिक कहानी अब एक जैसी नहीं रही. कुछ राज्य तेजी से आगे बढ़े हैं, जबकि कुछ अब भी बहुत पीछे हैं.
कौन से 5 राज्य उच्च-मध्यम आय स्तर में पहुंच गए?
वर्ल्ड बैंक की अपर मिडिल इनकम कैटेगरी की सीमा 4,636 डॉलर प्रति व्यक्ति आय से शुरू होती है. इस स्तर को पार करने वाले भारत के 5 राज्य इस प्रकार हैं:
- राज्य प्रति व्यक्ति आय (2025-26) वर्ल्ड बैंक की सीमा से तुलना
- दिल्ली 6,217 डॉलर बहुत आगे
- कर्नाटक 5,579 डॉलर बहुत आगे
- तेलंगाना 5,407 डॉलर बहुत आगे
- तमिलनाडु 5,329 डॉलर बहुत आगे
- गुजरात 4,734 डॉलर सीमा पार
इनमें दिल्ली सबसे आगे है, जिसकी प्रति व्यक्ति आय 6,217 डॉलर तक पहुंच गई है. इसके बाद कर्नाटक, तेलंगाना, तमिलनाडु और गुजरात हैं.
किन राज्यों की स्थिति सीमा के सबसे करीब है?
कुछ राज्य उच्च-मध्यम आय सीमा के बेहद करीब पहुंच चुके हैं, लेकिन अभी थोड़ा पीछे हैं.
- महाराष्ट्र: 4,628 डॉलर
- हरियाणा: 4,627 डॉलर
- केरल: 4,610 डॉलर
इन तीनों राज्यों और वर्ल्ड बैंक की सीमा के बीच का अंतर बहुत कम है. यानी आने वाले समय में ये राज्य भी उच्च-मध्यम आय श्रेणी में शामिल हो सकते हैं.
सबसे गरीब राज्य कौन से हैं?
रिपोर्ट में राज्यों के बीच आय का अंतर भी साफ दिखता है. सबसे पीछे रहने वाले राज्यों में:
- बिहार: 984 डॉलर
- उत्तर प्रदेश: 1,403 डॉलर
- झारखंड: 1,470 डॉलर
इन आंकड़ों से साफ है कि भारत के कुछ राज्यों की आय विकसित देशों के स्तर की ओर बढ़ रही है, जबकि कुछ राज्य अभी भी बहुत कम आधार से शुरुआत कर रहे हैं.
बिहार की आय कितनी कम है?
रिपोर्ट के मुताबिक बिहार की प्रति व्यक्ति आय सिर्फ 984 डॉलर है. यह न सिर्फ भारत के औसत से बहुत कम है, बल्कि नेपाल और कई उप-सहारा अफ्रीकी देशों से भी नीचे बताई गई है.
यह अंतर बताता है कि भारत के भीतर विकास की रफ्तार समान नहीं रही है. एक तरफ कुछ राज्य वैश्विक स्तर के उच्च-मध्यम आय वाले समूह में पहुंच रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ कुछ राज्य अभी भी बुनियादी आय स्तर पर संघर्ष कर रहे हैं.
30 साल में कितना बदला भारत?
रिपोर्ट का सबसे अहम हिस्सा पिछले 30 वर्षों का बदलाव है. 1994 में भारत का कोई भी बड़ा राज्य मध्यम आय स्तर पर नहीं था. लेकिन 2025-26 तक तस्वीर पूरी तरह बदल चुकी है.
आज कई भारतीय राज्य ऐसे स्तर पर पहुंच चुके हैं, जहां उनकी प्रति व्यक्ति आय कुछ देशों के बराबर या उनसे भी ज्यादा है.
- आज किन देशों के बराबर या आगे हैं भारतीय राज्य?
कर्नाटक और तेलंगाना की आय इंडोनेशिया (5,120 डॉलर) और वियतनाम (4,970 डॉलर) से ज्यादा हो गई है. - कई भारतीय राज्य दक्षिण अफ्रीका (6,270 डॉलर), फिजी (6,230 डॉलर) और मंगोलिया (6,210 डॉलर) के बराबर या उनसे आगे पहुंच चुके हैं.
यह दिखाता है कि भारत के कुछ हिस्सों ने पिछले तीन दशकों में तेज आर्थिक छलांग लगाई है.
राज्यों के बीच असमानता क्यों बढ़ी?
रिपोर्ट के मुताबिक राज्यों के बीच असमानता कम होने के बजाय बढ़ी है.
- गिनी गुणांक (Coefficient) 0.230 से बढ़कर 0.261 हो गया है.
- सबसे अमीर और सबसे गरीब राज्यों के बीच आय का अंतर 2.38 गुना से बढ़कर 3.73 गुना हो गया है.
- मध्यम आय वाले राज्यों ने सबसे तेज बढ़त दर्ज की है, जिनकी आय 36.7 गुना बढ़ी.
- जबकि सबसे गरीब राज्यों की आय सबसे धीमी रही और सिर्फ 26.6 गुना बढ़ी.
इसका मतलब है कि विकास हुआ जरूर है, लेकिन उसका फायदा सभी राज्यों तक बराबरी से नहीं पहुंचा.
कौन से राज्य आगे निकले और कौन पीछे रह गए?
रिपोर्ट में कुछ राज्यों की तुलना भी दिलचस्प है.
आगे रहने वाले राज्य
- ओडिशा ने उत्तर प्रदेश को पीछे छोड़ दिया है. अब ओडिशा की आय उत्तर प्रदेश से 75% ज्यादा है.
- असम ने झारखंड को पीछे छोड़ दिया है. असम की आय अब झारखंड से 48% ज्यादा है.
पीछे रह जाने वाले राज्य
- पंजाब, जो 1994-95 में सबसे आगे था, अब राजस्थान के बराबर पहुंच गया है.
- इतना ही नहीं, पंजाब अब 7 अन्य राज्यों से पीछे है.
यह बदलाव बताता है कि भारत में आर्थिक नेतृत्व अब पुराने औद्योगिक या कृषि-समृद्ध राज्यों तक सीमित नहीं रहा. नए राज्य तेजी से उभरे हैं.
इस रिपोर्ट का सबसे बड़ा संदेश क्या है?
इस रिपोर्ट का सबसे बड़ा संदेश यह है कि भारत की औसत आय भले ही निम्न-मध्यम आय श्रेणी में हो, लेकिन राज्य स्तर पर तस्वीर बेहद असमान है. कुछ राज्य अब वैश्विक स्तर पर उच्च-मध्यम आय वाली अर्थव्यवस्थाओं की कतार में खड़े हैं, जबकि कुछ राज्य अभी भी बहुत पीछे हैं. यानी भारत की विकास यात्रा एक समान नहीं रही, बल्कि कुछ राज्यों ने तेज रफ्तार पकड़ी और कुछ पीछे छूट गए.









