मथुरा के वृंदावन में संत प्रेमानंद महाराज के एक शिष्य से 2.90 करोड़ रुपए की चोरी का खुलासा हो गया है। पुलिस के मुताबिक, चार युवकों ने पहले दोस्ती कर पीड़ित का विश्वास जीता, फिर घर में रखे नकदी से भरा बैग चोरी कर लिया। चोरी के पैसों से आरोपियों ने लग्जरी कार, महंगे मोबाइल, सोने के आभूषण और ब्रांडेड सामान खरीदा। पुलिस ने चारों आरोपियों को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से करीब 2 करोड़ रुपए नकद और करीब 60 लाख रुपए का सामान बरामद किया है। पुलिस का कहना है कि शिकायत के बाद आरोपी दुबई भागने की तैयारी में थे। पासपोर्ट बनने से पहले ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया गया। पढ़िए पूरी खबर…
सतना शहर के मुख्तियारगंज स्थित प्राचीन व्यंकटेश लोक मंदिर परिसर का एक कथित आपत्तिजनक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद विवाद खड़ा हो गया है। वीडियो में एक युवक और युवती मंदिर परिसर के पीछे आपत्तिजनक स्थिति में दिखाई देने का दावा किया जा रहा है। वीडियो सामने आने के बाद स्थानीय लोगों, श्रद्धालुओं और धार्मिक संगठनों ने मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी पर सवाल उठाए हैं। हालांकि, वायरल वीडियो की स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है और इसकी सत्यता की आधिकारिक पुष्टि भी नहीं हुई है। मंदिर परिसर के पिछले हिस्से का बताया जा रहा वीडियो जानकारी के अनुसार वायरल वीडियो व्यंकटेश लोक मंदिर परिसर के पिछले हिस्से का बताया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वीडियो तेजी से साझा होने के बाद शहर में इसकी चर्चा शुरू हो गई। लोगों का कहना है कि धार्मिक और आस्था के केंद्रों पर इस तरह की घटनाएं न केवल मंदिर की गरिमा को प्रभावित करती हैं, बल्कि श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाओं को भी ठेस पहुंचाती हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि वीडियो कब रिकॉर्ड किया गया, किसने बनाया और इसमें दिखाई देने वाले युवक-युवती कौन हैं। प्रशासन की ओर से भी अब तक वीडियो की प्रामाणिकता को लेकर कोई आधिकारिक बयान जारी नहीं किया गया है। श्रद्धालुओं ने सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की वीडियो वायरल होने के बाद स्थानीय नागरिकों और श्रद्धालुओं ने मंदिर परिसर में सुरक्षा व्यवस्था बढ़ाने की मांग की है। उनका कहना है कि परिसर के संवेदनशील हिस्सों में नियमित निगरानी, पर्याप्त प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा कर्मियों की तैनाती की जानी चाहिए ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो। लोगों का कहना है कि धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनाए रखना प्रशासन और आम नागरिक, दोनों की जिम्मेदारी है। यदि नियमित निगरानी रहेगी तो असामाजिक गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण किया जा सकेगा। विश्व हिंदू परिषद ने लगाए गंभीर आरोप विश्व हिंदू परिषद (विहिप) के जिला विभाग मंत्री विपिन सिंह ने इस मामले को लेकर नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि मंदिर परिसर को व्यावसायिक गतिविधियों के लिए ठेके पर दिए जाने के बाद परिसर की मूल धार्मिक गरिमा प्रभावित हुई है। उन्होंने कहा कि पर्याप्त निगरानी और सुरक्षा व्यवस्था के अभाव में मंदिर परिसर में इस प्रकार की घटनाएं सामने आ रही हैं। उन्होंने प्रशासन से मांग की कि धार्मिक स्थलों की पवित्रता बनाए रखने के लिए सख्त निगरानी व्यवस्था लागू की जाए और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ उचित कार्रवाई की जाए। प्रशासनिक कार्रवाई का इंतजार फिलहाल इस मामले में प्रशासन या पुलिस की ओर से किसी प्रकार की कार्रवाई या जांच की आधिकारिक जानकारी सामने नहीं आई है। साथ ही वायरल वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि भी नहीं हो सकी है। ऐसे में वीडियो की सत्यता और उससे जुड़े तथ्यों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी। स्थानीय लोग प्रशासन से मामले की निष्पक्ष जांच और मंदिर परिसर की सुरक्षा व्यवस्था को और मजबूत करने की मांग कर रहे हैं क्या है व्यंकटेश मंदिर का इतिहास मुख्तियारगंज स्थित व्यंकटेश मंदिर सतना के प्रमुख धार्मिक और ऐतिहासिक स्थलों में से एक है। मंदिर का निर्माण वर्ष 1876 में देवराजनगर के शाही राजा ठाकुर रणदमन सिंह ने शुरू कराया था और इसे पूर्ण होने में करीब 49 वर्ष लगे। दक्षिण भारतीय वास्तुकला से प्रेरित इस मंदिर में भगवान विष्णु के विभिन्न स्वरूप विराजमान हैं और यह वर्षों से श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र रहा है। करीब 10 एकड़ क्षेत्र में फैले इस परिसर का हाल ही में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत ‘व्यंकटेश लोक’ के रूप में कायाकल्प और सौंदर्यीकरण किया गया है। परिसर की दीवारों पर भगवान विष्णु के दशावतार की आकर्षक कलाकृतियां उकेरी गई हैं। वर्तमान में व्यंकटेश लोक परिसर का संचालन नगर निगम द्वारा ठेके के माध्यम से कराया जा रहा है। ऐसे में कथित आपत्तिजनक वीडियो सामने आने के बाद परिसर की सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी को लेकर भी सवाल उठने लगे हैं।
सुपौल में मंगलवार की देर रात चोरों ने तीन घरों को निशाना बनाकर नगदी, चांदी के आभूषण, मोबाइल और महत्वपूर्ण दस्तावेजों की चोरी कर ली। सूचना मिलते ही डायल-112 की टीम और रतनपुर थानाध्यक्ष पिंटू कुमार मौके पर पहुंचे तथा घटनास्थल का निरीक्षण कर जांच शुरू कर दी। घटना रतनपुर थाना क्षेत्र के भगवानपुर पंचायत के वार्ड संख्या-11 की है। रात करीब दो बजे चोर सबसे पहले देव सुंदरी देवी के घर में घुसे। उस समय वह अपनी बहन के साथ घर में सो रही थीं। चोरों ने बक्से का ताला तोड़कर उसमें रखे करीब 15 हजार रुपए नगद, लगभग 17 भरी चांदी के आभूषण, जिनमें चेन और बाला शामिल हैं, के अलावा आधार कार्ड, बैंक पासबुक समेत अन्य जरूरी दस्तावेज चोरी कर लिए। सुबह नींद खुलने पर बक्सा खुला देख परिजनों को चोरी की जानकारी हुई। 2 घरों से मोबाइल फोन हुई चोरी इसके बाद चोरों ने जितेन्द्र राम और भोलबी देवी के घरों को भी निशाना बनाया। दोनों घरों से मोबाइल फोन चोरी होने की बात सामने आई है। पीड़ित परिवारों के अनुसार, तीनों घरों से हुई चोरी की कुल कीमत करीब एक लाख रुपए आंकी जा रही है। ग्रामीणों का दावा है कि आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज और स्थानीय जानकारी के आधार पर नेपाल के कंचनपुर क्षेत्र के बेलारदह निवासी एक संदिग्ध व्यक्ति का नाम सामने आया है। हालांकि पुलिस ने किसी भी संदिग्ध की संलिप्तता की आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। रतनपुर थानाध्यक्ष पिंटू कुमार ने बताया कि मामले की गंभीरता से जांच की जा रही है। सीसीटीवी फुटेज, तकनीकी साक्ष्यों और स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के आधार पर जांच आगे बढ़ाई जा रही है। जल्द ही मामले का खुलासा करने का प्रयास किया जा रहा है।
सुबह नाश्ते में क्या बनाएं? ट्राई करें 5 मिनट वाली हेल्दी वेज मैक्रोनी रेसिपी
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अगर सुबह समय की कमी हो और झटपट हेल्दी नाश्ता बनाना हो, तो 5 मिनट वाली वेज मैक्रोनी बेहतरीन विकल्प है. ताजी सब्जियों, हल्के मसालों और चीज या पनीर के साथ तैयार यह रेसिपी स्वादिष्ट होने के साथ बच्चों के टिफिन और ऑफिस ब्रेकफास्ट के लिए भी परफेक्ट है.
अगर सुबह ऑफिस, स्कूल या किसी जरूरी काम के लिए जल्दी निकलना हो और समझ न आए कि नाश्ते में क्या बनाया जाए, तो मैक्रोनी एक बेहतरीन विकल्प है यह स्वादिष्ट होने के साथ-साथ बहुत कम समय में तैयार हो जाती है। खास बात यह है कि इसमें अपनी पसंद की सब्जियां मिलाकर इसे और भी पौष्टिक बनाया जा सकता है. यही वजह है कि आजकल मैक्रोनी बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी की पसंदीदा डिश बन चुकी है.
स्वादिष्ट मैक्रोनी बनाने के लिए सबसे पहले उसे सही तरीके से उबालना बेहद जरूरी है इसके लिए एक गहरे बर्तन में 1 लीटर पानी डालकर तेज आंच पर उबाल लें जब पानी अच्छी तरह उबलने लगे, तब उसमें 1 छोटा चम्मच नमक और 1 छोटा चम्मच तेल डालें. तेल डालने से मैक्रोनी आपस में चिपकती नहीं है अब उबलते पानी में 1 कप मैक्रोनी डालें और बीच-बीच में चलाते रहें, ताकि वह बर्तन की तली में न चिपके मैक्रोनी को 7 से 10 मिनट तक उबालें.
मैक्रोनी कार्बोहाइड्रेट का अच्छा स्रोत है, जो शरीर को तुरंत ऊर्जा देने का काम करती है. इसमें शिमला मिर्च, गाजर, मटर, प्याज, टमाटर और स्वीट कॉर्न जैसी सब्जियां मिलाने से यह विटामिन, मिनरल और फाइबर से भरपूर हो जाती है. यदि इसमें थोड़ा पनीर या चीज भी मिलाया जाए, तो प्रोटीन की मात्रा बढ़ जाती है और यह संतुलित नाश्ता बन जाता है.
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अगर घर में पहले से उबली हुई मैक्रोनी उपलब्ध हो, तो मात्र 5 मिनट में स्वादिष्ट और हेल्दी नाश्ता तैयार किया जा सकता है यह रेसिपी उन लोगों के लिए भी बेहद उपयोगी है, जिनके पास सुबह समय की कमी रहती है. आप आसानी से 5 मिनट में मैक्रोनी तैयार कर सकते हैं. आज हम आपको बेहतरीन रेसिपी बताने जा रहे हैं.
सबसेपहले गैस पर एक पैन गर्म करें और उसमें तेल या मक्खन डालें. इसके बाद प्याज डालकर हल्का सुनहरा होने तक भून लें अब इसमें गाजर, शिमला मिर्च, मटर और स्वीट कॉर्न डालकर तेज आंच पर 2 मिनट तक चलाएं इसके बाद टमाटर डालें और हल्का नरम होने दें अब टमाटर सॉस, चिली सॉस, नमक, काली मिर्च, ओरिगैनो और मिर्च फ्लेक्स डालकर अच्छी तरह मिला लें. अब पहले से उबली हुई मैक्रोनी डालें और सभी मसालों के साथ अच्छी तरह टॉस करें करीब 2 मिनट तक चलाते हुए पकाएं आखिर में ऊपर से हरा धनिया और चीज डालकर गर्मागर्म परोसें
मैक्रोनी कार्बोहाइड्रेट का अच्छा स्रोत है, जो शरीर को तुरंत ऊर्जा देने का काम करती है इसमें शिमला मिर्च, गाजर, मटर, प्याज, टमाटर और स्वीट कॉर्न जैसी सब्जियां मिलाने से यह विटामिन, मिनरल और फाइबर से भरपूर हो जाती है। यदि इसमें थोड़ा पनीर या चीज भी मिलाया जाए तो प्रोटीन की मात्रा बढ़ जाती है और यह संतुलित नाश्ता बन जाता है
बच्चे अक्सर हरी सब्जियां खाने से बचते हैं, लेकिन जब वही सब्जियां मैक्रोनी में मिलाकर बनाई जाती हैं तो वे आसानी से खा लेते हैं। यही कारण है कि यह रेसिपी स्कूल जाने वाले बच्चों के टिफिन के लिए भी शानदार विकल्प मानी जाती है अगर आप रोजाना पराठा, पोहा या उपमा खाकर बोर हो चुके हैं और कुछ नया, स्वादिष्ट और झटपट बनने वाला नाश्ता चाहते हैं, तो 5 मिनट वाली वेज मैक्रोनी आपके लिए बेहतरीन विकल्प है.
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अमेरिकी सेना ने मंगलवार रात लगातार चौथे दिन ईरान के कई सैन्य ठिकानों पर एयरस्ट्राइक की। इसके साथ ही ईरानी बंदरगाहों की समुद्री नाकेबंदी भी शुरू कर दी है। अमेरिका का कहना है कि यह कार्रवाई ईरान पर दबाव बढ़ाने के लिए की जा रही है। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा, “हम मंगलवार रात (भारतीय समयानुसार बुधवार सुबह) भी हमला करेंगे, उसके अगले दिन भी करेंगे। अगले हफ्ते ईरान के बिजलीघर और पुल भी निशाने पर होंगे। अगर समझौता नहीं किया, तो वहां कुछ नहीं बचेगा।” ट्रम्प ने कहा कि अमेरिका के हमले तब तक जारी रहेंगे, जब तक ईरान बातचीत के लिए तैयार नहीं हो जाता। उन्होंने यह भी कहा कि जरूरत पड़ने पर जमीनी सैन्य अभियान भी चलाया जा सकता है, हालांकि इसके लिए सहयोगी देशों की मदद ली जा सकती है। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स IRGC का व्यापारिक जहाजों पर हमला: ईरानी सेना ने होर्मुज स्ट्रेट से गुजर रहे दो व्यापारिक जहाजों पर हमला किया। इसमें 1 भारतीय शख्स की मौत हो गई जबकि 10 लोग घायल हुए। जहाज पर कुल 20 भारतीय क्रू मेंबर सवार थे। भारत ने ईरानी राजदूत को तलब किया: भारत ने होर्मुज में जहाजों पर हुए हमलों पर कड़ी प्रतिक्रिया दी है। विदेश मंत्रालय ने नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास के उप प्रमुख (डिप्टी चीफ ऑफ मिशन) को तलब कर भारत का कड़ा विरोध दर्ज कराया। समंदर में भारत से जुड़े 11 जहाज फंसे: विदेश मंत्रालय ने बताया कि भारत से जुड़े 11 जहाज और 148 भारतीय नाविक फिलहाल फारस की खाड़ी में फंसे हुए हैं। ये सभी जहाज होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने का इंतजार कर रहे हैं। ट्रम्प ने होर्मुज में 20% टैक्स का फैसला वापस लिया: ट्रम्प ने होर्मुज से गुजरने वाले जहाजों पर 20% टैक्स लगाने का अपना फैसला वापस ले लिया। उन्होंने मिडिल ईस्ट के नेताओं के साथ बातचीत के बाद यह फैसला लिया। होर्मुज में जहाजों की आवाजाही सबसे कम: होर्मुज स्ट्रेट मंगलवार को सिर्फ 4 जहाज गुजरे। 17 जून को अमेरिका और ईरान के बीच हुए समझौता ज्ञापन (MoU) के बाद यह सबसे कम शिपिंग ट्रैफिक है। ईरान जंग से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
Ranchi Success Story: झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले रोशन शाही ‘वर्ल्ड ऑफ डांस’ कंपटीशन में पहले रनर अप रहे. उन्होंने जापान, वियतनाम सहित कई देशों में अपनी कला का प्रदर्शन किया है. उन्होंने इंडोनेशिया में आयोजित ‘वर्ल्ड ऑफ डांस’ कंपटीशन में आए करीब 100 कंट्री के करीबन 1500 डांसरों को हराकर खिताब जीता है.
ख़बरें फटाफट
रांची: झारखंड की राजधानी रांची के रहने वाले रोशन शाही इंडोनेशिया में आयोजित होने वाले ‘वर्ल्ड ऑफ डांस’ कंपटीशन में पहले रनर अप रहे. इन्होंने जापान, वियतनाम व कई सारे कंट्री में अपनी कला का लोहा मनवाया है. इस कंपटीशन में करीब 100 कंट्री के करीबन 1500 डांसर आए थे. इन सभी को हराते हुए उन्होंने यह खिताब अपने नाम किया. आइये जानते हैं उनके बारे में.
रोशन बताते हैं कि उनका बचपन काफी संघर्ष से गुजरा है. पिता नहीं थे, मां ने सिक्योरिटी गार्ड की भी नौकरी की, घर में कई बार एक वक्त का खाने का नहीं था. इतने संघर्षों के बाद आखिरकार उनको सफलता मिली. इसमें सबसे बड़ा श्रेय उनकी मां को जाता है. उन्होंने बहुत संघर्ष किया है. बचपन से संघर्ष देखा है. हमें किसी चीज की कमी नहीं होने दी और खुद हमेशा अभावों में जिया.
रोशन ने कई सारी उपलब्धि अपने नाम किए
रोशन ने जापान में विश्व प्रसिद्ध कोरियोग्राफर सीन लीव के कड़े ऑडिशन पास करके शॉर्ट डांस फिल्म में अपनी जगह बनाए. इसके अलावा वह बॉलीवुड में बैकस्टेज डांसर के तौर पर भी काम कर चुके हैं और अब इंडोनेशिया में भारत का प्रतिनिधित्व कर वर्ल्ड ऑफ डांस में अपनी अनूठी छाप छोड़े. वे झारखंड के एकलौते डांसर है, जिन्होंने ऐसा किया है.
खुद की बनाई एक अलग पहचान
रोशन बनाते हैं कि वह पीछे नहीं रहना चाहते व बैक स्टेज डांसर ही बनना चाहते हैं. मुझे अपना एक खुद का पहचान बनाना है. उनके इंस्टाग्राम पर लाखों फॉलोअर हैं. वहां पर वह अपनी वीडियो भी डालते हैं. उन्होंने 7 साल की उम्र से डांस करना शुरू कर दिया था. उनके गुरु हैं, उन्होंने उनसे पहले डांस सिखा. बचपन से ही डांस के प्रति उनकी गजब की दीवानगी थी. इसे देखते हुए मां ने भी पूरा सपोर्ट किया.
कंपटीशन में हिस्सा लेने के लिए उनके पास पैसे तक नहीं थे. वह किसी से मांग भी नहीं सकते थे. तब उनके डांस गुरु ने पैसे का इंतजाम कर उन्हें मुंबई और दिल्ली जैसे शहरों में भेजा. इस तरीके से आज वह यहां तक पहुंचे हैं. मेरी सफलता में उनके डांस गुरु और उनकी मां का बहुत बड़ा योगदान है.
बहाना नहीं मेहनत करो
युवाओं को संदेश देते हुए रोशन बताते हैं कि व्यक्ति को बहाना नहीं मेहनत करना चाहिए. आपके पास जो भी कुछ मौजूद है. उसी में अपना बेस्ट दीजिए, रेस्ट मत कीजिए. यह जिंदगी रेस्ट के लिए नहीं मिली है, मेहनत के लिए मिली है. कुछ करने के लिए मिली है.
बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें
Nitin Gadkari On E20 Ethanol: No Damage To Cars, Mileage Depends On Traffic
नई दिल्ली3 घंटे पहलेलेखक: धर्मेंद्र सिंह भदौरिया
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गडकरी ने कहा कि कौन-सा ईंधन प्रयोग होगा, इसका अंतिम फैसला पेट्रोलियम मंत्रालय करता है।
देश में ई-20 पेट्रोल, एथेनॉल, माइलेज और गाड़ियों पर इसके असर को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं। सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने दैनिक भास्कर से बातचीत में इन सभी सवालों के जवाब दिए।
उन्होंने कहा कि एथेनॉल से गाड़ियां खराब होने का कोई प्रमाण नहीं है। साथ ही उन्होंने बताया कि वैकल्पिक ईंधन से देश का तेल आयात कम होगा, प्रदूषण घटेगा और किसानों की आय बढ़ेगी। पढ़िए बातचीत के प्रमुख अंश-
सवाल: एथेनॉल और ई-20 पर सबसे ज्यादा चर्चा आपकी है, जबकि आप परिवहन मंत्री हैं, पेट्रोलियम नहीं?
गडकरी: मैं परिवहन मंत्री हूं और ऑटोमोबाइल इंजीनियरिंग के मानक तय करना मेरा अधिकार है। कौन-सा ईंधन इस्तेमाल होगा, इसका अंतिम फैसला पेट्रोलियम मंत्रालय करता है। मैं पिछले 25 साल से किसानों के हित में वैकल्पिक ईंधन पर काम कर रहा हूं। देश 22 लाख करोड़ रुपए का पेट्रोलियम आयात करता है। दिल्ली के प्रदूषण का 40% हिस्सा परिवहन से आता है। इसे कम करना भी हमारी जिम्मेदारी है।
सवाल: ई-20 के लिए जरूरी एथेनॉल हम बना पा रहे हैं?
गडकरी: देश को हर साल करीब 1450 करोड़ लीटर एथेनॉल की जरूरत है, जबकि हमारी उत्पादन क्षमता 1750-1800 करोड़ लीटर तक पहुंच चुकी है। एथेनॉल सिर्फ गन्ने से नहीं, बल्कि मोलासेस, मक्का, टूटे चावल, पराली और बांस से भी बनाया जा रहा है। इससे करीब 2 लाख करोड़ रुपए का तेल आयात बचा है, प्रदूषण कम हुआ है और किसानों की आय बढ़ी है।
सवाल: लोगों की शिकायत है कि ई-20 से माइलेज घट रहा है। ARAI ने भी 6% तक अंतर बताया है?
गडकरी: माइलेज सड़क और ट्रैफिक की स्थिति पर निर्भर करता है। एथेनॉल की कैलोरी वैल्यू पेट्रोल से थोड़ी कम होती है, इसलिए कुछ परिस्थितियों में मामूली अंतर आ सकता है। लेकिन एथेनॉल सस्ता है, प्रदूषण कम करता है और फ्लेक्स-फ्यूल इंजन आने के बाद यह अंतर और कम हो जाएगा।
सवाल: कई देशों में ई-20 के साथ 100% पेट्रोल का विकल्प भी मिलता है, भारत में क्यों नहीं?
गडकरी: हर देश की परिस्थितियां अलग होती हैं। भारत अपनी जरूरत और संसाधनों के हिसाब से नीति बना रहा है। हमारा लक्ष्य तेल आयात कम करना और प्रदूषण घटाना है। ब्राजील में 1970 से 100% एथेनॉल का इस्तेमाल हो रहा है। वहां एक ही पेट्रोल पंप पर कई तरह के ईंधन उपलब्ध हैं। भारत में अभी उस स्तर तक पहुंचना बाकी है।
सवाल: ई-20 से गाड़ियां खराब होने की शिकायतें आ रही हैं?
गडकरी: इसका कोई प्रमाण नहीं है। 2004 से पेट्रोल में एथेनॉल मिलाया जा रहा है। अब तक किसी की गाड़ी खराब होने का कोई प्रमाण सामने नहीं आया। सोशल मीडिया पर भ्रामक बातें फैलाई जा रही हैं।
सवाल: एथेनॉल सस्ता ईंधन है, फिर पेट्रोल सस्ता क्यों नहीं हुआ?
गडकरी: कच्चे तेल की कीमतें अंतरराष्ट्रीय बाजार पर निर्भर करती हैं। पेट्रोल के दाम तय करना पेट्रोलियम मंत्रालय का अधिकार है, मेरा नहीं। सरकार कीमतों में स्थिरता बनाए रखने की कोशिश करती है।
सवाल: अगर कच्चे तेल (क्रूड) की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से नीचे आ जाए, तब भी एथेनॉल फायदे का सौदा रहेगा?
गडकरी: यह सही है कि कच्चे तेल की कीमत बहुत कम होने पर एथेनॉल की आर्थिक बढ़त कम हो सकती है। लेकिन हमारा मकसद सिर्फ लागत घटाना नहीं है। ऊर्जा सुरक्षा, प्रदूषण में कमी, किसानों की आय बढ़ाना और भारत को ऊर्जा के मामले में आत्मनिर्भर बनाना भी उतना ही जरूरी है। इसलिए वैकल्पिक ईंधन भविष्य की जरूरत हैं।
सवाल: नेशनल हाईवे पर गड्ढों की शिकायतें बढ़ रही हैं। दिल्ली-देहरादून राजमार्ग पर गड्ढे देखे गए?
गडकरी: मोटे तौर पर हमारे रोड की क्वालिटी अच्छी है। हम एक मशीन लाए हैं, एक्सरे मशीन जैसी। पूरे रोड का एक्सरे निकलकर हमारे पास आता है। मैंने पिछले महीने में राज्यों के 950 प्रोजेक्ट में से एक-एक का रिव्यू लिया। बहुत कंपनियों को ब्लैकलिस्ट किया। आजकल ठेकेदारों का रेटिंग होता है। अभी रेटिंग की लिस्ट भी हम प्रकाशित करने वाले हैं।
सवाल: आपकी स्पष्टवादिता की हमेशा चर्चा होती है। क्या इसकी कभी राजनीतिक कीमत चुकानी पड़ी?
गडकरी: मैं सुविधा की नहीं, सिद्धांतों की राजनीति करता हूं। राजनीति मेरे लिए सामाजिक और आर्थिक परिवर्तन का माध्यम है। मैं सत्ता के लिए नहीं, समाज और राष्ट्र निर्माण के लिए राजनीति में आया हूं।
एथेनॉल के बारे में जानें…
देश में 2 जनरेशन एथेनॉल मौजूद, थर्ड जनरेशन बायोफ्यूल पर सरकार का फोकस
फर्स्ट जनरेशन एथेनॉल : फर्स्ट जनरेशन एथेनॉल गन्ने के रस, मीठे चुकंदर, सड़े आलू, मीठे ज्वार और मक्का से बनाया जाता है।
सेकेंड जनरेशन एथेनॉल : सेकेंड जनरेशन एथेनॉल सेल्युलोज और लिग्नोसेल्यूलोसिक मटेरियल जैसे- चावल की भूसी, गेहूं की भूसी, कॉर्नकॉब (भुट्टा), बांस और वुडी बायोमास से बनाया जाता है।
थर्ड जनरेशन बायोफ्यूल, 5 जून को E85 फ्यूल लॉन्च
कई देशों में एथेनॉल मिला पेट्रोल पहले से इस्तेमाल हो रहा
सरकार के मुताबिक, अमेरिका, ब्राजील और जापान जैसे कई देशों में एथेनॉल मिला पेट्रोल पहले से इस्तेमाल हो रहा है। सरकार का कहना है कि इस योजना से भारत ने कच्चे तेल के आयात पर 1.4 लाख करोड़ रुपए से ज्यादा की विदेशी मुद्रा बचाई है। इससे ऊर्जा सुरक्षा बढ़ी है, प्रदूषण कम हुआ है और किसानों को भी फायदा मिला है।
भारत पिछले साल ही पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिलाने का लक्ष्य तय समय से पांच साल पहले हासिल कर चुका है। एक अप्रैल से पूरे देश में E20 पेट्रोल की सप्लाई शुरू हो चुकी है। अब सरकार 2030 तक इसे बढ़ाकर 30% करने का लक्ष्य लेकर चल रही है।
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खाने-पीने और रोजाना जरूरत के सामान महंगे:जून में थोक महंगाई 9.81%, 44 महीने में सबसे ज्यादा; रिटेल महंगाई भी 6 महीने से लगातार बढ़ रही
जून में थोक महंगाई (WPI) बढ़कर 9.87% पर पहुंच गई है। यह पिछले महीने 9.68% पर थी। जून में महंगाई 44 महीने में सबसे ज्यादा है। सितंबर 2022 में ये 10.70% पर पहुंच गई थी। कॉमर्स मिनिस्ट्री ने आज यानी 14 जुलाई को थोक महंगाई के आंकड़े जारी किए हैं। पूरी खबर पढ़ें…
लखनऊ मंडल में रेलवे सुरक्षा बल (आरपीएफ) ने वीआईपी इमरजेंसी कोटे का दुरुपयोग कर टिकटों की दलाली करने वाले गिरोह का पर्दाफाश किया है। वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त अरुण कुमार त्रिपाठी के निर्देशन में अपराध सूचना शाखा (सीआईबी) की टीम ने गोरखपुर-एलटीटी एक्सप्रेस (20104) में छापेमारी कर एक फर्जी यात्री को गिरफ्तार किया। फर्जी आधार कार्ड के सहारे कर रहा था सफर आरपीएफ को सूचना मिली थी कि ट्रेन के एस-2 कोच में एक यात्री फर्जी दस्तावेज के आधार पर यात्रा कर रहा है। जांच के दौरान सीट नंबर 27 पर बैठे सिद्धार्थनगर निवासी सुनील से पूछताछ की गई। उसके पास से जाली आधार कार्ड बरामद हुआ, जिसके आधार पर वह यात्रा कर रहा था। 5 हजार रुपये में खरीदा था वीआईपी कोटे का टिकट पूछताछ में सुनील ने बताया कि उसने मुंबई निवासी टिकट दलाल प्रमोद रूदल तिवारी से 5,000 रुपये देकर टिकट खरीदा था। आरोपी दलाल ने पहले सामान्य वेटिंग टिकट बुक कराया और बाद में रेलवे के वीआईपी इमरजेंसी कोटे का इस्तेमाल कर टिकट कन्फर्म करा दिया। इसके बाद टिकट पर दर्ज नाम के अनुसार फर्जी आधार कार्ड तैयार कर यात्री को सौंप दिया गया। जाली दस्तावेज और मोबाइल चैट जब्त कार्रवाई के दौरान आरपीएफ ने फर्जी आधार कार्ड, कन्फर्म टिकट और मोबाइल चैट समेत कई अहम साक्ष्य बरामद किए हैं। इन दस्तावेजों के आधार पर पूरे नेटवर्क की जांच की जा रही है। मुख्य आरोपी की तलाश जारी मामले में आरपीएफ पोस्ट ऐशबाग में रेल अधिनियम की धारा 142 और 143 के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। टिकट दलाल प्रमोद रूदल तिवारी को वांछित घोषित कर उसकी तलाश शुरू कर दी गई है। इस कार्रवाई में इंस्पेक्टर रणजीत यादव, प्रशांत सिंह यादव और आरपीएफ की रेड टीम की अहम भूमिका रही।
India Passport Citizenship Proof Statement | Randhir Jaiswal Clarification
नई दिल्ली2 घंटे पहले
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केंद्र सरकार ने एक बार फिर से कहा है कि पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने मंगलवार को कहा कि पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के मुताबिक भारत सरकार देश से बाहर यात्रा के लिए भारतीय नागरिकों को पासपोर्ट जारी करता है।
मंत्रालय ने कहा कि यह एक डॉक्यूमेंट है जो पूरी जांच और वेरिफिकेशन के बाद जारी किया जाता है। इसका संचालन पासपोर्ट अधिनियम, 1967 तथा पासपोर्ट नियम, 1980 के तहत होता है। जायसवाल ने बताया कि देश के 8% से भी कम नागरिकों के पास पासपोर्ट है।
24 जून: सरकार ने पहली बार कहा- पासपोर्ट नागरिकता का दस्तावेज नहीं
24 जून को पासपोर्ट सेवा दिवस पर विदेश मंत्रालय ने कहा था कि पासपोर्ट ट्रैवल डॉक्यूमेंट है, नागरिकता का प्रमाण नहीं। यह बयान चुनाव आयोग की SIR प्रक्रिया में पासपोर्ट को नागरिकता के प्रमाण के तौर पर इस्तेमाल किए जाने के सवाल पर दिया गया था। मंत्रालय ने 2013 के बॉम्बे हाईकोर्ट के फैसले का भी हवाला दिया था, जिसमें पासपोर्ट को नागरिकता का प्रमाण नहीं माना गया था।
अधिकारियों ने यह भी बताया था कि पासपोर्ट अधिनियम, 1967 के तहत जनहित में जरूरत पड़ने पर केंद्र सरकार किसी गैर-भारतीय नागरिक को भी पासपोर्ट जारी कर सकती है। इसलिए पासपोर्ट को नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाता।
कांग्रेस ने पूछा- कौन सा दस्तावेज नागरिकता का सबूत
विदेश मंत्रालय के इस बयान के बाद विपक्षी कांग्रेस ने सरकार की आलोचना की थी। पार्टी ने सवाल उठाया कि अगर पासपोर्ट नागरिकता का प्रमाण नहीं है, तो इसे किस आधार पर जारी किया जाता है।
कांग्रेस नेता सुप्रिया श्रीनेत और राज्यसभा सांसद कपिल सिब्बल ने कहा कि पासपोर्ट नागरिकता का दस्तावेज नहीं है तो फिर कौन सा दस्तावेज नागरिकता का सबूत है। कांग्रेस ने आरोप लगाया कि सरकार उन लोगों की नागरिकता पर सवाल उठाने की जमीन तैयार कर रही है, जिनसे उसकी राजनीतिक असहमति है।
नागरिकता का असली सबूत क्या है, 8 सवाल-जवाब से पूरे मामले को समझिए…
1. पासपोर्ट क्यो होता है? इसका क्या इस्तेमाल है?
पासपोर्ट केंद्र सरकार द्वारा जारी किया गया एक अंतरराष्ट्रीय पहचान पत्र है, जिसका मुख्य इस्तेमाल भारत से बाहर किसी भी देश में यात्रा करने के लिए होता है। विदेश जाने के लिए जरूरी ‘वीजा’ इसी पर लगता है।
दूसरे देश में रहने के दौरान यही आपकी पहचान, नाम और पते का सबसे बड़ा सरकारी सबूत बनता है। आसान शब्दों में कहें तो विदेश में कानूनी एंट्री करने और वहां किसी भी मुसीबत में फंसने पर भारत सरकार से मदद पाने के लिए पासपोर्ट ही सबसे जरूरी दस्तावेज है।
2. क्या पासपोर्ट राष्ट्रीयता की पहचान देता है?
हां, पासपोर्ट राष्ट्रीय की पहचान देता है। राष्ट्रीयता बताती है कि आप किस देश से संबंध रखते हैं। जबकि नागरिकता बताती है कि उस देश में आपको कौन-कौन से कानूनी अधिकार मिले हैं। राष्ट्रीयता आपकी पहचान होती है। नागरिकता आपके अधिकार और जिम्मेदारियां तय करती है।
3. सरकार ने पासपोर्ट की संख्या को लेकर क्या कहा है?
मंत्रालय ने बताया कि पिछले एक दशक में पासपोर्ट सेवा केंद्र और संबंधित सुविधाओं की संख्या 77 से बढ़कर 545 हो गई है। 2025 में शुरू हुए चिप आधारित ई-पासपोर्ट की अब तक 1.47 करोड़ प्रतियां जारी की जा चुकी हैं। आवेदन निपटाने का औसत समय घटकर 5-6 दिन रह गया है। 2019 के 16 देशों के मुकाबले अब 27 देश भारतीयों को वीजा-फ्री प्रवेश देते हैं।
4. क्या भारतीय नागरिकता साबित करने वाला कोई एक दस्तावेज है?
नहीं। भारत कोई ऐसा एक दस्तावेज जारी नहीं करता है जो सभी नागरिकों के लिए नागरिकता का अंतिम प्रमाण माना जाए। नागरिकता इस बात पर तय होती है कि इसे कैसे हासिल किया गया और नागरिकता कानून के तहत कौन से रिकॉर्ड मौजूद हैं।
5. पहचान पत्र अपने आप नागरिकता साबित क्यों नहीं करते?
आधार, वोटर आईडी और ड्राइविंग लाइसेंस जैसे दस्तावेज खास कामों के लिए जारी किए जाते हैं, जैसे पहचान की जांच, चुनाव में रजिस्ट्रेशन या गाड़ी चलाने की अनुमति। इन्हें नागरिकता तय करने के लिए नहीं बनाया गया है, इसलिए इन्हें अपने आप में नागरिकता का पक्का सबूत नहीं माना जाता है।
6. विदेश मंत्रालय ने क्यों कहा कि पासपोर्ट नागरिकता का सबूत नहीं है?
विदेश मंत्रालय ने साफ किया कि पासपोर्ट मुख्य रूप से एक यात्रा दस्तावेज है, जो विदेश में धारक की राष्ट्रीयता को दर्शाता है। कानूनी रूप से नागरिकता ‘नागरिकता कानून’ के तहत तय होती है, जबकि पासपोर्ट ‘पासपोर्ट कानून’ के तहत जारी होता है और यह हर परिस्थिति में अपने आप में नागरिकता का अंतिम सबूत नहीं होता है।
7. क्या पासपोर्ट रद्द होने पर नागरिकता खत्म हो जाती है?
नहीं। पासपोर्ट रद्द होने का मतलब यह नहीं है कि व्यक्ति की भारतीय नागरिकता खत्म हो गई। पासपोर्ट कई कारणों से रद्द या निलंबित हो सकता है:
गलत जानकारी देकर बनवाना
कानूनी मामलों में कार्रवाई
सुरक्षा कारण
पासपोर्ट अधिनियम के तहत उल्लंघन
लेकिन भारतीय नागरिकता खत्म करने की प्रक्रिया अलग है और यह Citizenship Act, 1955 के तहत होती है।
8. भारत में नागिरकों मिलने वाले प्रमुख दस्तवेज कौन से हैं?
भारत में नागरिकता के मामले में 10 कागजात एक साथ देखे जा सकते हैं। इनमें आधार कार्ड, वोटर आईडी और पैन कार्ड शामिल हैं…
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- आधार पहचान का दस्तावेज, नागरिकता का नहीं
बिहार में मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) से जुड़ी सुनवाई के दौरान 8 सितंबर 2025 को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि आधार कार्ड नागरिकता का प्रमाण नहीं है, बल्कि यह पहचान का दस्तावेज है।
हालांकि, अदालत ने चुनाव आयोग से कहा था कि SIR प्रक्रिया में आधार को पहचान के लिए एक वैध दस्तावेज के रूप में स्वीकार किया जाए। साथ ही स्पष्ट किया था कि जरूरत पड़ने पर चुनाव आयोग नागरिकता और पात्रता की पुष्टि के लिए अन्य दस्तावेज भी मांग सकता है।
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