इलाहाबाद हाईकोर्ट ने आजमगढ़ जिले के विभिन्न थानों में दर्ज 20 आपराधिक मामलों में विचारण अदालत को दो जमानतदार और व्यक्तिगत बॉन्ड स्वीकार करने का निर्देश देने की मांग वाली याचिका खारिज कर दी है। यह आदेश न्यायमूर्ति सौरभ श्रीवास्तव की एकलपीठ ने मोहम्मद कलीम खान की याचिका पर पारित किया। याचिकाकर्ता मोहम्मद कलीम खान को आजमगढ़ जिले के जयनपुर, गंभीरपुर, जहानागंज, कप्तानगंज, अतरौलिया, अहरौला, महमूरगंज, सराय मीर, टेहबरपुर, खंधरापुर, देवगांव, फूलपुर और रानी की सराय थानों में दर्ज कुल 20 मामलों में पहले ही जमानत मिल चुकी थी। इन मामलों में भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) और भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए हैं। 20 मामलों के दो जमानत कैसे याचिकाकर्ता के अधिवक्ताओं ने हाईकोर्ट से अनुरोध किया कि निचली अदालत को निर्देश दिया जाए कि वह सभी 20 मामलों में दो ही जमानतदार और व्यक्तिगत बॉन्ड स्वीकार करे, ताकि अलग-अलग मामलों के लिए अलग-अलग जमानतदार पेश न करने पड़ें। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता के अधिवक्ता से स्पष्ट पूछा कि क्या याचिकाकर्ता ने कभी इन मामलों में जमानत बॉन्ड दाखिल करने का प्रयास किया था, और क्या अधीनस्थअदालत ने अलग-अलग मामलों के लिए अलग जमानतदार मांगने पर इन्कार किया था। इस पर अधिवक्ता ने स्वीकार किया कि याचिकाकर्ता ने वास्तव में किसी भी मामले में जमानत बॉन्ड दाखिल करने का प्रयास ही नहीं किया, और अधीनस्थ अदालत की ओर से भी कोई स्पष्ट इन्कार रिकॉर्ड पर नहीं है। इस पर कोर्ट ने पाया कि चूंकि याचिकाकर्ता ने कभी जमानत बॉन्ड दाखिल करने का प्रयास ही नहीं किया, इसलिए उसे कोई नुकसान नहीं पहुंचा है और मामले में कार्रवाई का कोई आधार नहीं बनता। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए कहा कि याचिकाकर्ता को छूट होगी कि वह सुप्रीम कोर्ट के हनी निशाद उर्फ मोहम्मद इमरान उर्फ विक्की बनाम उत्तर प्रदेश राज्य मामले (29 अक्टूबर 2018 को निर्णीत विशेष अनुमति याचिका में दिए गए फैसले के आलोक में सभी 20 मामलों में दो जमानतदार और व्यक्तिगत बॉन्ड स्वीकार करने के लिए नए सिरे से आवेदन दाखिल करे। जिस पर अदालत निर्णय लेगी।
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20 मामलों में दो जमानतदार स्वीकार करने की मांग खारिज: अदालत में अर्जी दिए बगैर हाईकोर्ट में आने पर हस्तक्षेप से इंकार – Prayagraj (Allahabad) News
भारत पर 100% टैरिफ बिल पर अमेरिकी संसद में वोटिंग: रूसी तेल खरीदने वाले देशों पर ट्रम्प लगा सकेंगे भारी शुल्क; सीनेट से पास हो चुका
अमेरिकी संसद के निचले सदन यानी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में आज उस बिल पर अंतिम वोटिंग होगी, जिसमें रूस से तेल और गैस खरीदने वाले देशों पर 100% तक एक्सट्रा टैरिफ लग सकता है। इसका असर भारत और चीन जैसे देशों पर पड़ सकता है। हालांकि, इस वोटिंग का मतलब भारत पर तुरंत 100% टैरिफ लगना नहीं है। बिल कानून बना तो राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प को ऐसा टैरिफ लगाने की कानूनी शक्ति मिल जाएगी। मंगलवार को हाउस ने 214-211 वोट से बिल को अंतिम वोटिंग के लिए आगे बढ़ाया था। इससे पहले अमेरिकी सीनेट अगस्त में इसे 86-11 वोट से पास कर चुकी है। यह बिल कानून बना तो भारत पर असर पहली स्थिति: भारत रूस से तेल खरीदता रहे अमेरिका के 100% टैरिफ का सीधा असर भारत के निर्यात बिल पर पड़ सकता है। इससे भारतीय सामान अमेरिका में दोगुना महंगा हो जाएगा। अमेरिकी खरीदार सस्ता विकल्प ढूंढेंगे जैसे बांग्लादेश, वियतनाम, मैक्सिको, चीन। नतीजतन भारत के टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी, इंजीनियरिंग गुड्स, लेदर, समुद्री उत्पाद, केमिकल्स आदि के ऑर्डर घट जाएंगे। दूसरी स्थिति: भारत रूस को छोड़कर दूसरे देशों से तेल खरीदे तो रूस से आने वाले तेल पर प्रतिबंध या टैरिफ का दबाव बढ़ता है, तो भारत को दूसरे देशों से तेल खरीदना पड़ेगा। यह महंगा पड़ सकता है, जिससे भारत में पेट्रोल-डीजल महंगा हो सकता है। रूस के रक्षा क्षेत्रों पर भी प्रतिबंध लगेगा बिल का नाम ‘लिंडसे ओ. ग्राहम सैंक्शनिंग रूस एंड ईरान एक्ट ऑफ 2026’ है। अगर अमेरिकी संसद का निचला सदन इसे मंजूरी दे देता है, तो बिल व्हाइट हाउस जाएगा। यहां राष्ट्रपति ट्रम्प के साइन करते ही यह कानून बन जाएगा। इस बिल में रूस के तेल और रक्षा से जुड़े कारोबार पर कड़े प्रतिबंध लगाने की बात कही गई है। साथ ही रूस के उन टैंकरों पर भी कार्रवाई हो सकती है जो मौजूदा प्रतिबंधों से बचते हुए दूसरे देशों तक रूसी तेल पहुंचाते हैं। इन टैंकरों के नेटवर्क को रूस का ‘शैडो फ्लीट’ कहा जाता है। अमेरिका पहले भी रूस पर ऐसे प्रतिबंध लगाने की कोशिश कर चुका है। लेकिन ईरान युद्ध के दौरान होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से तेल की सप्लाई पर असर पड़ा और दुनिया में तेल की कमी का डर बढ़ गया। इसके बाद अमेरिकी सरकार को रूस के तेल की बिक्री पर कुछ समय के लिए लगी पाबंदियों में छूट देनी पड़ी थी। ईरान के साथ ट्रेड करने वाली कंपनियों पर प्रतिबंध बढ़ेगा अगर यह कानून बन जाता है तो 1996 का ‘ईरान प्रतिबंध कानून’ 2031 तक बढ़ जाएगा। यह कानून उन गैर-अमेरिकी कंपनियों पर पाबंदी लगाता है जो ईरान के साथ व्यापार करती हैं। यह कानून इसी साल खत्म होने वाला था। इस बिल से अमेरिकी राष्ट्रपति को यह अधिकार भी मिल जाएगा कि वे अमेरिका में आने वाले रूसी सामान पर 500% तक टैरिफ लगा सकें। राष्ट्रपति का यह अधिकार 5 साल तक लागू रहेगा। यूरोपीय देशों को टैरिफ में राहत देगा अमेरिका रूस से प्राकृतिक गैस खरीदने वाले चीन, फ्रांस, जापान, हंगरी और बेल्जियम को भी इसके दायरे में रखा गया है। हालांकि, जो देश रूस की कुल गैस निर्यात का 15% से कम आयात करते हैं और अपनी निर्भरता घटाने की दिशा में कदम उठा रहे हैं, उन्हें छूट मिल सकती है। सीनेट में पेश बिल के तहत 15 यूरोपीय देशों को प्रस्तावित 100% टैरिफ से छूट दी गई है। इन देशों को राहत इसलिए दी गई है, क्योंकि ये रूस से 15% से कम प्राकृतिक गैस खरीदते हैं और धीरे-धीरे उस पर अपनी निर्भरता भी कम कर रहे हैं। डेमोक्रेट सीनेटर रिचर्ड ब्लूमेंथल ने कहा कि यह बिल यूरोपीय सहयोगियों के खिलाफ नहीं है। इसका निशाना सिर्फ वे देश हैं, जो अब भी रूस के तेल कारोबार को सबसे ज्यादा आर्थिक सहारा दे रहे हैं। बिल में रूस के ऊर्जा उद्योग, वित्तीय संस्थानों, रक्षा औद्योगिक ढांचे, कारोबारियों और राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन तक पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव है। —————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिका से पैसा निकालने लगे दुनिया के बड़े निवेशक: 40 ट्रिलियन डॉलर के कर्ज से बढ़ी चिंता, सोना खरीद रहे, चीन में निवेश बढ़ा रहे अमेरिका पर 40 ट्रिलियन डॉलर से ज्यादा का कर्ज है। इसके साथ ब्याज दरें, टैरिफ और दूसरे देशों पर लगाए जा रहे आर्थिक प्रतिबंध भी बढ़ रहे हैं। इससे दुनिया के कुछ निवेशक अब सोच रहे हैं कि अपना पैसा अमेरिका के अलावा कहां लगाया जाए। पूरी खबर पढ़ें…
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फर्जी IAS केस: जांच करते-करते खुद घिरे ASI: रुपए मांगने के आरोप में लाइन अटैच,धोखाधड़ी की जांच में फरियादियों-आरोपियों से पैसे मांगने की शिकायतें – Bhopal News
फर्जी IAS तृप्ति सिंह के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी के मामले की जांच कर रहे बाग सेवनिया थाने के ASI मनोज शर्मा और हवलदार सुनील राठौर खुद ही जांच के घेरे में आ गए हैं।
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दोनों पर धोखाधड़ी के मामलों में कार्रवाई और जांच के नाम पर फरियादियों व आरोपियों से रुपए मांगने के आरोप लगे हैं। तृप्ति सिंह केस में भी रुपए मांगने की शिकायत सामने आने के बाद DCP जोन-2 विकास शहवाल ने दोनों को लाइन अटैच कर दिया।
तृप्ति सिंह केस में भी रुपए मांगने का आरोप
पुलिस अधिकारियों के मुताबिक ASI मनोज शर्मा बाग सेवनिया थाने में दर्ज धोखाधड़ी के कई मामलों की जांच कर रहे थे। इसी दौरान उनके और हवलदार सुनील राठौर के खिलाफ शिकायतें वरिष्ठ अधिकारियों तक पहुंचीं।
आरोप था कि दोनों पुलिसकर्मी जांच में कार्रवाई का दबाव बनाकर फरियादियों और आरोपियों से रुपए मांगते थे।
शिकायतों की जांच के दौरान फर्जी IAS तृप्ति सिंह से जुड़े मामले में भी दोनों पर रुपए मांगने के आरोप सामने आए। DCP को लगातार मिल रही शिकायतों को गंभीरता से लेते हुए दोनों पुलिसकर्मियों को थाने से हटाकर पुलिस लाइन भेज दिया गया।
होटल-रिसॉर्ट की लीज दिलाने के नाम पर ठगी का मामला
तृप्ति सिंह पर एमपी टूरिज्म के होटल और रिसॉर्ट लीज पर दिलाने के नाम पर ठगी करने के आरोप हैं। इसी मामले की जांच बाग सेवनिया पुलिस कर रही है। पुलिस की जांच में तृप्ति सिंह की कथित फर्जी पहचान और उसके जरिए लोगों से रकम लेने से जुड़े तथ्य भी सामने आए हैं।
अब इसी केस की जांच करने वाले पुलिसकर्मियों पर रुपए मांगने के आरोप सामने आने से पुलिस की जांच प्रक्रिया पर भी सवाल खड़े हुए हैं। हालांकि पुलिस अधिकारियों का कहना है कि दोनों के खिलाफ शिकायतों के आधार पर विभागीय स्तर पर कार्रवाई की गई है।
जुए की फड़ पर कार्रवाई के बाद कोतवाली TI समेत तीन सस्पेंड
इधर, कोतवाली इलाके में जुए की फड़ पर कार्रवाई के बाद थाना प्रभारी समेत तीन पुलिसकर्मियों को निलंबित किया गया है। शुक्रवार को ACP संतोष पटेल ने कायस्थपुरा में जुए की फड़ पर छापा मारकर 24 जुआरियों को गिरफ्तार किया था। मौके से 3.30 लाख रुपए जब्त किए गए थे। गिरफ्तार आरोपियों में देवरी, रायसेन का इनामी बदमाश फरहान भी शामिल था।
जुए की फड़ की जानकारी थाना स्तर पर होने के बावजूद कार्रवाई नहीं होने के आरोपों के बाद मंगलवार को DCP जोन-3 आयुष गुप्ता ने कोतवाली TI प्रभात गौड़, बीट प्रभारी ASI और माइक्रो बीट प्रभारी सिपाही को निलंबित कर दिया।
इससे पहले स्टेशन बजरिया क्षेत्र में क्राइम ब्रांच ने रूसी खान की जुए की फड़ पकड़ी थी। कार्रवाई के बाद स्टेशन बजरिया थाना प्रभारी शिल्पा कौरव को भी निलंबित किया गया था।
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फर्जी आईएएस ने वीडियो बनाने वाली युवतियों को भी ठगा

भोपाल में फर्जी आईएएस बनकर लोगों को नौकरी और सरकारी काम दिलाने का झांसा देने वाली तृप्ति सिंह का फर्जीवाड़ा अब उसके वायरल वीडियो से भी जुड़ गया है। जिस वीडियो में उसके साथ बैतूल की दो युवतियां खुद को आईएएस अधिकारी बता रही थीं, पुलिस जांच में वही युवतियां तृप्ति की ठगी का शिकार निकली हैं।पूरी खबर पढ़ें
नालंदा में 45 स्कूलों के बेंच-डेस्क की फिर होगी जांच: हरनौत में 779 और नूरसराय में 526 की आपूर्ति का दावा; 7 दिन में रिपोर्ट मांगी गई – Nalanda News
नालंदा जिले के सरकारी स्कूलों में बच्चों के बैठने के लिए खरीदे गए बेंच-डेस्क की आपूर्ति को लेकर मिल रही शिकायतों के बीच उप विकास आयुक्त (डीडीसी) सारा अशरफ ने जांच के आदेश दिए हैं। नूरसराय और हरनौत प्रखंड के स्कूलों में आपूर्ति किए गए बेंच-डेस्क की स्थिति की जांच के लिए वरीय अधिकारी की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय टीम गठित की गई है। टीम को सात दिनों के भीतर अपनी विस्तृत रिपोर्ट जिला शिक्षा कार्यालय को सौंपने का निर्देश दिया गया है। हरनौत के 22 और नूरसराय के 23 स्कूल जांच के दायरे में जारी आदेश के मुताबिक, आपूर्ति एजेंसी शाही ट्रेडर्स ने हरनौत प्रखंड के 22 स्कूलों में 779 और नूरसराय प्रखंड के 23 स्कूलों में 526 बेंच-डेस्क की आपूर्ति करने का दावा किया है। अब टीम दोनों प्रखंडों के कुल 45 स्कूलों में जाकर इन दावों का स्थल पर सत्यापन करेगी। जांच के दौरान स्कूलों में मौजूद बेंच-डेस्क की संख्या का मिलान आपूर्ति के रिकॉर्ड से किया जाएगा। इसके साथ ही बेंच-डेस्क में इस्तेमाल की गई सामग्री और उनकी गुणवत्ता की भी जांच होगी। ई-शिक्षाकोष के रिकॉर्ड से भी होगा मिलान मामले में ई-शिक्षाकोष पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों को लेकर भी सवाल उठे हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार, कुछ स्कूलों में पोर्टल पर बेंच-डेस्क की पूरी आपूर्ति दर्ज है, जबकि स्कूल में सामान उपलब्ध नहीं होने की शिकायत है। ऐसे में जांच टीम पोर्टल पर दर्ज आंकड़ों और स्कूल में मौजूद बेंच-डेस्क का मिलान करेगी। शिकायतों के अनुसार, कुछ जगह बच्चों को बेंच-डेस्क नहीं मिलने के कारण नीचे बैठकर पढ़ाई करनी पड़ रही है, जबकि ऑनलाइन रिकॉर्ड में आपूर्ति पूरी दिखाई गई है। टीम इस अंतर की भी जांच करेगी। विधानसभा में भी उठ चुका है मामला बेंच-डेस्क की खरीद और आपूर्ति का मामला पहले भी विधानसभा में उठ चुका है। अस्थावां विधायक डॉ. जितेंद्र कुमार ने इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया था। इसके बाद मुख्यमंत्री कार्यालय के निर्देश पर तत्कालीन जिलाधिकारी शशांक शुभंकर ने छह सदस्यीय उच्चस्तरीय जांच टीम गठित की थी। पिछली जांच में अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल पूर्व में तत्कालीन डीडीसी श्रीकांत कुंडलिक खांडेकर की जांच का भी इस मामले में उल्लेख किया गया था। उस जांच में तत्कालीन जिला शिक्षा पदाधिकारी और डीपीओ की भूमिका को लेकर सवाल उठे थे। एक लिपिक के खिलाफ प्रशासनिक कार्रवाई भी की गई थी। वहीं, उस समय आपूर्ति एजेंसी से राशि की वसूली कर मामले को समाप्त करने की कोशिश किए जाने के आरोप भी सामने आए थे। अब नूरसराय और हरनौत के 45 स्कूलों में नए सिरे से जांच के आदेश के बाद आपूर्ति की वास्तविक स्थिति, गुणवत्ता और रिकॉर्ड में दर्ज आंकड़ों का मिलान किया जाएगा।
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खैरथल-तिजारा जिले में अध्यक्ष पद के लिए 22 नामांकन दाखिल: भाजपा-कांग्रेस के साथ 6 निर्दलीय भी मैदान में, खैरथल में 5 दावेदार – Khairthal-Tijara News
खैरथल-तिजारा जिले की 3 नगर परिषद और 4 नगर पालिकाओं में अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए कुल 22 उम्मीदवारों ने नामांकन दाखिल किए हैं। इनमें भाजपा के 9, कांग्रेस के 7 और 6 निर्दलीय उम्मीदवार शामिल हैं। नामांकन पत्रों की सूची जारी होने के बाद अब चुनावी तस्वीर
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अध्यक्ष पद के लिए सबसे ज्यादा नामांकन खैरथल नगर परिषद में 5 और टपूकड़ा नगर पालिका में 4 हुए हैं। इसके बाद तिजारा, भिवाड़ी और किशनगढ़बास में 3-3, जबकि मुंडावर में 2 और कोटकासिम में एक उम्मीदवार ने पर्चा दाखिल किया है।
अध्यक्ष पद के नामांकन का निकायवार गणित
| निकाय | नामांकन |
| खैरथल नगर परिषद | 5 |
| टपूकड़ा नगर पालिका | 4 |
| तिजारा नगर पालिका | 3 |
| भिवाड़ी नगर परिषद | 3 |
| किशनगढ़बास नगर पालिका | 3 |
| मुंडावर नगर पालिका | 2 |
| कोटकासिम नगर पालिका | 1 |
| कुल | 22 |
खैरथल में 5 उम्मीदवारों ने भरे पर्चे
खैरथल नगर परिषद में अध्यक्ष पद के लिए 5 नामांकन दाखिल हुए हैं। भाजपा से विक्रम सिंह और कांग्रेस से ओमप्रकाश रोघा उम्मीदवार हैं। वहीं सर्वेश कुमार, सुमित रोघा और नवल सिंह ने निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर नामांकन दाखिल किया है।
खैरथल में कांग्रेस सबसे बड़ी पार्टी बनी हैं। उसे 20 वार्डों में जीत मिली हैं। वहीं भाजपा 8 पर सिमट गई है। 17 में निर्दलीयों ने जीत हासिल की है।


तिजारा में भाजपा के दो, कांग्रेस का एक नामांकन
तिजारा में अध्यक्ष पद के लिए 3 उम्मीदवार मैदान में हैं। कांग्रेस की ओर से रामावतार सैनी ने नामांकन दाखिल किया है। भाजपा से रेखा देवी और सुभाष चंद सैनी ने पर्चा भरा है।
भिवाड़ी नगर परिषद में भाजपा से गुंजन खटाना, कांग्रेस से गजराज तंवर और निर्दलीय के तौर पर शीशराम तंवर ने नामांकन दाखिल किया है। जारी सूची में शीशराम तंवर का नाम भाजपा की श्रेणी में भी दर्ज है।

किशगनढ़बास में भाजपा को कम से कम एक निर्दलीय की जरूरत पड़ेगी। टपूकड़ा में भी किसी पार्टी को बोर्ड बनाने का आंकड़ा नहीं मिला है।
किशनगढ़बास में भाजपा-कांग्रेस के साथ निर्दलीय उम्मीदवार
किशनगढ़बास में अध्यक्ष पद के लिए 3 नामांकन हुए हैं। भाजपा से विश्वास यादव, कांग्रेस से भारती और निर्दलीय के तौर पर मूलचंद सिंह ने पर्चा दाखिल किया है।

टपूकड़ा में 4 नामांकन
टपूकड़ा नगर पालिका में अध्यक्ष पद के लिए 4 नामांकन दाखिल किए गए हैं। रघुवीर सिंह तंवर ने कांग्रेस और निर्दलीय दोनों श्रेणियों में नामांकन किया है। इनके अलावा कांग्रेस से धीरज कुमार और भाजपा से बलवंत सिंह ने पर्चा भरा है।
कोटकासिम में भाजपा की रेखा सैनी ने भरा नामांकन
कोटकासिम नगर पालिका में अध्यक्ष पद के लिए भाजपा से रेखा सैनी ने नामांकन दाखिल किया है। यहां कुल एक नामांकन हुआ है।

मुंडावर में भाजपा ने बोर्ड बनाने के आंकड़ें जुटा लिए है।
मुंडावर में भाजपा और कांग्रेस के उम्मीदवार
मुंडावर नगर पालिका में अध्यक्ष पद के लिए दो नामांकन दाखिल हुए हैं। कांग्रेस से मनीषा बाई गुर्जर और भाजपा से महेंद्र सिंह ने पर्चा भरा है।
अब नामांकन पत्रों की होगी जांच
नामांकन दाखिल होने के बाद अब नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की प्रक्रिया होगी। इसके बाद मैदान में बचे उम्मीदवारों की स्थिति स्पष्ट होगी। इसी के साथ संबंधित निकायों में अध्यक्ष पद के चुनाव को लेकर पार्षदों के समर्थन और सियासी समीकरण भी साफ होंगे।
खैरथल नगर परिषद के विजेता
| वार्ड संख्या | विजेता प्रत्याशी का नाम | पार्टी |
| वार्ड 1 | हुकम सिंह | निर्दलीय |
| वार्ड 2 | अनिल सिंह | निर्दलीय |
| वार्ड 3 | रामधन | कांग्रेस |
| वार्ड 4 | महेंद्र कुमार | कांग्रेस |
| वार्ड 5 | राहुल यादव | भाजपा |
| वार्ड 6 | Sanjay कुमार | कांग्रेस |
| वार्ड 7 | ममता | कांग्रेस |
| वार्ड 8 | हरिदेवी छंगाणी | कांग्रेस |
| वार्ड 9 | कंचन | कांग्रेस |
| वार्ड 10 | राहुल जाटव | कांग्रेस |
| वार्ड 11 | सुशीला देवी | कांग्रेस |
| वार्ड 12 | दिलीप कुमार | निर्दलीय |
| वार्ड 13 | कर्ण चौधरी | कांग्रेस |
| वार्ड 14 | फिरदौस | निर्दलीय |
| वार्ड 15 | कैलाश चन्द शर्मा | कांग्रेस |
| वार्ड 16 | चारु अग्रवाल | भाजपा |
| वार्ड 17 | प्रीति | भाजपा |
| वार्ड 18 | सर्वेश गुप्ता | कांग्रेस |
| वार्ड 19 | हंसराज | कांग्रेस |
| वार्ड 20 | भगवान दास | कांग्रेस |
| वार्ड 21 | फरमीना | निर्दलीय |
| वार्ड 22 | राकेश | निर्दलीय |
| वार्ड 23 | काजल | कांग्रेस |
| वार्ड 24 | शंकर दयाल | कांग्रेस |
| वार्ड 25 | सानिया | निर्दलीय |
| वार्ड 26 | जरीना | निर्दलीय |
| वार्ड 27 | नेमीचंद | निर्दलीय |
| वार्ड 28 | संदीप कुमार | कांग्रेस |
| वार्ड 29 | सुखविंदर सिंह | कांग्रेस |
| वार्ड 30 | महेन्द्र पाल सिंह | भाजपा |
| वार्ड 31 | विक्रम सिंह | कांग्रेस |
| वार्ड 32 | सुभाष चंद | निर्दलीय |
| वार्ड 33 | राशि रोघा | निर्दलीय |
| वार्ड 34 | चन्द्र प्रकाश | निर्दलीय |
| वार्ड 35 | हेमराज | भाजपा |
| वार्ड 36 | सुमित रोघा | निर्दलीय |
| वार्ड 37 | अर्जुन दास | भाजपा |
| वार्ड 38 | सचिन कुमार | निर्दलीय |
| वार्ड 39 | नवीन कुमार | कांग्रेस |
| वार्ड 40 | माया देवी | निर्दलीय |
| वार्ड 41 | रचना | कांग्रेस |
| वार्ड 42 | तानिया | निर्दलीय |
| वार्ड 43 | सरला देवी | भाजपा |
| वार्ड 44 | पंकज रोघा | निर्दलीय |
| वार्ड 45 | परमानन्द | भाजपा |
चाय की पत्ती से बनती है ये अनोखी चटनी! जानें कहां और कैसे होती है तैयार
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बांग्लादेश के कुछ चाय बागान इलाकों में ताजी चाय की पत्तियों से एक अनोखी चटनी बनाई जाती है. पत्तियों को साफ कर पकाया जाता है और फिर मिर्च, नमक, प्याज व नींबू के साथ पीसकर तैयार किया जाता है. इसका स्वाद आम चटनी से काफी अलग होता है.
चाय की पत्ती का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के दिमाग में गर्मागर्म चाय का कप आता है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि चाय की पत्ती से चटनी भी बनाई जा सकती है? सुनने में यह बात थोड़ी अजीब जरूर लगती है, लेकिन कुछ जगहों पर चाय की पत्तियों का इस्तेमाल खाने में भी किया जाता है. बांग्लादेश के चाय बागानों में रहने वाले कुछ समुदायों के भोजन में चाय की पत्ती से बनी चटनी का जिक्र मिलता है.
चाय की पत्ती वाली चटनी भारत के हर हिस्से में बनने वाली आम चटनी नहीं है. इसका संबंध बांग्लादेश के कुछ चाय बागान क्षेत्रों में रहने वाले लोगों के पारंपरिक खान-पान से बताया जाता है. वहां चाय की पत्तियों का इस्तेमाल सिर्फ चाय बनाने के लिए ही नहीं, बल्कि कुछ स्थानीय व्यंजनों में भी किया जाता है. हालांकि, इस चटनी को किसी एक तय रेसिपी के रूप में नहीं देखा जा सकता. अलग-अलग जगहों और परिवारों में इसे बनाने का तरीका और इसमें इस्तेमाल होने वाली सामग्री अलग हो सकती है.
कैसे तैयार की जाती है यह अनोखी चटनी?
चाय की पत्ती की चटनी बनाने के लिए खाने योग्य ताजी चाय की पत्तियों का इस्तेमाल किया जाता है. सबसे पहले पत्तियों को अच्छी तरह साफ किया जाता है. इसके बाद उन्हें हल्का नरम करने के लिए पकाया या भाप में तैयार किया जा सकता है. इसके बाद पत्तियों को बारीक काटा या पीसा जाता है. अब इसमें स्वाद के अनुसार हरी मिर्च, नमक, प्याज और दूसरी स्थानीय सामग्री मिलाई जा सकती है. चटनी में खट्टापन लाने के लिए नींबू या किसी दूसरी खट्टी चीज का इस्तेमाल किया जाता है. सभी सामग्री को मिलाकर पीसने के बाद चटनी तैयार हो जाती है. इस चटनी का स्वाद सामान्य धनिया या पुदीने की चटनी से काफी अलग हो सकता है. चाय की पत्तियों में हल्का कसैलापन होता है, इसलिए बाकी सामग्री की मात्रा संतुलित रखना जरूरी होता है.
About the Author
विविधा सिंह हिंदी डिजिटल पत्रकारिता का उभरता हुआ नाम हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया में साढ़े चार साल का अनुभव है. वर्तमान में वह News18 हिंदी में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. वह लाइफस्टाइल वर्टि…
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सेंट्रल मार्केट ध्वस्तीकरण पर धरने पर बैठी महिलाओं का विरोध: बोलीं- सुबह 6:30 बजे से न पानी है न लाइट, मकान तोड़ दिए, बिजनेस खत्म कर दिया – Meerut News
बुधवार को मेरठ के सेंट्रल मार्केट में हुई ध्वस्तीकरण की कार्रवाई पर पांच महीने से धरने पर बैठी महिलाओं ने भी आपत्ति जताई। कार्रवाई के दौरान महिलाएं काफी नाराज दिखाई दीं। महिलाओं का कहना था कि प्रशासन की कार्रवाई के बीच उन्हें मूलभूत सुविधाओं के लिए भी परेशान होना पड़ रहा है। महिलाओं ने बताया कि सुबह करीब 6 बजे से कार्रवाई शुरू हो गई थी। इसके बाद सुबह 6:30 बजे से इलाके में न लाइट है और न पानी की व्यवस्था है। महिलाओं ने कहा कि उनके मकान तोड़ दिए गए और उनका पूरा कारोबार खत्म हो गया। उन्होंने कहा, “मकान तोड़ दिय हमारे, हमारा बिजनेस सारा खत्म कर दिया। हम लोगों के पास पानी भी नहीं है, भूखे-प्यासे मर रहे हैं बच्चे हमारे।” महिलाओं ने कहा कि वे पिछले पांच महीने से धरने पर बैठी थीं। इतने लंबे समय से धरना देने के बावजूद उनकी समस्या का समाधान नहीं हुआ। उनका आरोप है कि आवास विकास की ओर से लगातार मीटिंग के लिए बुलाया जाता रहा। महिलाओं ने कहा कि रोज कहा जाता था कि मीटिंग है, इसमें यह होगा और वह होगा, लेकिन जमीन पर कोई समाधान नहीं निकला। महिलाओं ने कहा, “हम लोग पांच महीने से धरने पर बैठे थे। कुछ भी नहीं हुआ। आवास विकास रोज बुला रहा है कि मीटिंग है। इनकी मीटिंग ही नहीं हो रही। रोज मीटिंग है, ये हो रहा है, वो हो रहा है।” महिलाओं का कहना था कि एक तरफ लंबे समय से उनकी समस्याओं को लेकर बातचीत चलती रही और दूसरी तरफ बुधवार को अचानक ध्वस्तीकरण की कार्रवाई शुरू कर दी गई। कार्रवाई के दौरान महिलाओं ने पानी और बिजली की व्यवस्था नहीं होने को लेकर भी नाराजगी जताई। महिलाओं ने कहा कि कार्रवाई से उनके परिवारों के सामने रहने और रोजमर्रा की जरूरतों का संकट खड़ा हो गया है। उनका कहना था कि बच्चों के लिए पानी तक उपलब्ध नहीं है।
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आनंद माइनिंग की याचिका हाईकोर्ट से खारिज: जबलपुर हाईकोर्ट ने कहा- अंतिम देयता अभी तय नहीं, कलेक्टर स्वतंत्र रूप से करें निर्णय – Jabalpur News
जबलपुर हाईकोर्ट ने मेसर्स आनंद माइनिंग कॉर्पोरेशन की याचिका खारिज कर दी। मामला जबलपुर जिले की सिहोरा तहसील के टिकरिया और प्रतापपुर स्थित लौह अयस्क खदानों में वर्ष 2004 से 2017 के बीच कथित अतिरिक्त खनन से जुड़ा है। राज्य द्वारा गठित जांच समिति की रिपोर्ट के आधार पर कलेक्टर जबलपुर ने कंपनी को कारण बताओ नोटिस जारी किए थे। टिकरिया खदान के लिए ₹1,13,81,94,280 और प्रतापपुर के लिए ₹1,20,69,41,910 की वसूली प्रस्तावित किए जाने का उल्लेख हाईकोर्ट के आदेश में है। न्यायमूर्ति आनंद पाठक और न्यायमूर्ति बीपी शर्मा की खंडपीठ ने कहा कि मामला अभी कारण बताओ नोटिस के स्तर पर है और कलेक्टर ने कंपनी की अंतिम देयता तय नहीं की है। इसलिए इस स्तर पर हाईकोर्ट के असाधारण रिट अधिकार क्षेत्र में हस्तक्षेप का आधार नहीं है। जांच रिपोर्ट में ₹443 करोड़ से ज्यादा जमा कराने का उल्लेख
हाईकोर्ट के आदेश के अनुसार, जांच रिपोर्ट के अंतिम हिस्से में संबंधित कंपनियों से ₹4,43,04,86,890 (₹443 करोड़ 4 लाख 86 हजार 890) तथा उसके अनुसार GST की राशि जमा कराने को उचित बताया गया था। हालांकि कोर्ट ने स्पष्ट किया कि जांच समिति की रिपोर्ट स्वयं अंतिम रिकवरी आदेश नहीं है। यह कलेक्टर पर बाध्यकारी भी नहीं है। कलेक्टर को कंपनी की आपत्तियों, जांच रिपोर्ट और संबंधित रिकॉर्ड पर विचार करते हुए कानून के अनुसार स्वतंत्र और कारणयुक्त आदेश पारित करना है। कलेक्टर को 4 महीने में कार्यवाही पूरी करने के निर्देश
हाईकोर्ट ने कलेक्टर जबलपुर को कंपनी की आपत्तियों और उपलब्ध रिकॉर्ड पर विचार करते हुए कानून के अनुसार स्वतंत्र एवं कारणयुक्त आदेश पारित करने के निर्देश दिए। कोर्ट ने कार्यवाही शीघ्र पूरी करने तथा प्रमाणित आदेश प्राप्त होने के बाद यथासंभव चार माह के भीतर अंतिम निर्णय करने की अपेक्षा व्यक्त की। कंपनी ने जांच समिति और नोटिस को चुनौती दी थी
याचिकाकर्ता ने कलेक्टर जबलपुर द्वारा खान एवं खनिज (विकास और विनियमन) अधिनियम, 1957 की धारा 21(5) के तहत जारी कारण बताओ नोटिस, जांच समिति के गठन और उसकी रिपोर्ट को चुनौती दी थी। उसका तर्क था कि जांच समिति का गठन बिना किसी वैधानिक अधिकार के किया गया, प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों का उल्लंघन हुआ और मामले में कोई अंतिम क्षेत्राधिकार नहीं बनता। शिकायतकर्ता ने कहा- अब पारदर्शी जांच जरूरी
मामले के मुख्य शिकायतकर्ता आशुतोष मनु दीक्षित ने कहा कि न्यायालय के आदेश में ₹443 करोड़ से अधिक की राशि और उस पर GST का उल्लेख आया है। अब पूरे मामले में पारदर्शी और निष्पक्ष तरीके से तथ्यों की जांच करते हुए कानून के अनुसार अंतिम निर्णय होना चाहिए। उन्होंने कहा कि हाईकोर्ट ने फिलहाल कंपनी की वास्तविक देयता पर कोई निष्कर्ष नहीं दिया है। अब सभी संबंधित पक्षों को कलेक्टर के समक्ष अपना पक्ष रखने का अवसर मिलेगा और कलेक्टर को बिना किसी पूर्वाग्रह के कानून के अनुसार निर्णय करना होगा। संजय पाठक से जुड़ी माइनिंग कंपनी को झटका
भाजपा विधायक संजय पाठक से जुड़ी माइनिंग कंपनी को झटका लगा है। हाई कोर्ट ने कहा कि जबलपुर कलेक्टर के सामने ही अपना पक्ष रखें, इसके साथ ही हाई कोर्ट ने जबलपुर कलेक्टर को यह भी निर्देश दिए हैं कि चार माह में प्रकरण का निराकरण करें। आनंद माइनिंग पर साल 2004 से 2017 तक अतिरिक्त खनन का आरोप लगाया था। जबलपुर में सिहोरा की दो आयरन और खदानों से अधिक खनन का यह पूरा मामला है। जबलपुर कलेक्टर ने कंपनी को ₹423 करोड रुपए की रिकवरी का नोटिस दिया था, जिस पर कंपनी ने कलेक्टर के क्षेत्राधिकार से बाहर बातकर नोटिस को चुनौती दी थी।
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गोपालगंज से किडनैप छात्र 9 घंटे बाद देवरिया से मिला: नकाबपोशों ने किया था अपहरण, स्कूल के पास से गायब; CCTV-DVR से छेड़छाड़ – Gopalganj News
गोपालगंज के बंजारी में निजी स्कूल के पास से सातवीं कक्षा के 12 वर्षीय छात्र गोपाल द्विवेदी के लापता होने से हड़कंप मच गया। करीब नौ घंटे बाद छात्र को उत्तर प्रदेश के देवरिया से सुरक्षित बरामद कर लिया गया।
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छात्र की बरामदगी की सूचना मिलते ही परिजनों और पुलिस ने राहत की सांस ली। गोपालगंज पुलिस की टीम छात्र को लेने के लिए देवरिया रवाना हो गई है।
गोपाल द्विवेदी भोरे थाना क्षेत्र के जागीरदारी बगहवा गांव का रहने वाला है। उसके पिता सुमन्त द्विवेदी बंधन बैंक में ब्रांच सेल्स मैनेजर हैं। फिलहाल परिवार अधिवक्ता नगर में किराए के मकान में रहता है। गोपाल अपने नौवीं कक्षा में पढ़ने वाले भाई के साथ स्कूल गया था।
छुट्टी के बाद भाई को नहीं मिला
स्कूल की छुट्टी होने के बाद गोपाल का बड़ा भाई उसे तलाशता रहा, लेकिन वह नहीं मिला। भाई के घर लौटने के बाद भी गोपाल घर नहीं पहुंचा। इसके बाद परिवार के लोगों की चिंता बढ़ गई और उसकी तलाश शुरू की गई।
गोपाल द्विवेदी को पुलिस ने बरामद किया।
स्कूल पहुंचे पिता, CCTV देखकर बढ़ा शक
गोपाल के पिता स्कूल पहुंचे तो वहां लगे CCTV कैमरों की जांच की गई। कैमरे चालू थे, लेकिन DVR से छेड़छाड़ किए जाने की बात सामने आई।
इसके बाद परिवार ने पुलिस को सूचना दी। परिवार का आरोप है कि घटना से जुड़े साक्ष्य छिपाने के लिए स्कूल के DVR में बदलाव किया गया।
स्कूल प्रशासन के बयान से उलझा मामला
जांच के दौरान स्कूल प्रशासन और परिवार के बयानों में अंतर सामने आया। स्कूल प्रबंधन का कहना था कि गोपाल उस दिन स्कूल आया ही नहीं था। वहीं परिवार का कहना है कि वह अपने भाई के साथ स्कूल गया था।
परिवार के मुताबिक स्कूल के मुख्य रास्ते के पास एक निजी मकान में लगे CCTV कैमरे की फुटेज में गोपाल स्कूल कैंपस की ओर जाता दिखाई दे रहा है। इस फुटेज के सामने आने के बाद स्कूल प्रबंधन के दावे पर सवाल उठने लगे।
पुलिस ने क्लासरूम तक खंगाले
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस टीम स्कूल परिसर में पहुंची और हर क्लासरूम की बारीकी से जांच की। पुलिस ने स्कूल में मौजूद संभावित साक्ष्यों को खंगाला। इस दौरान स्कूल प्रशासन ने मामले पर कुछ भी कहने से इनकार कर दिया।
FSL टीम ने मौके से जुटाए साक्ष्य
पुलिस की सूचना पर एफएसएल टीम को भी मौके पर बुलाया गया। टीम ने स्कूल परिसर की जांच कर जरूरी साक्ष्य जुटाए। पुलिस CCTV फुटेज और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर भी मामले की पड़ताल कर रही है।
पुलिस स्कूल परिसर में जांच कर ही रही थी, तभी गोपाल के पिता के मोबाइल पर एक कॉल आई। फोन करने वाले ने बताया कि गोपाल उत्तर प्रदेश के देवरिया में है।
साथ ही यह भी बताया गया कि नकाबपोश बदमाशों ने उसका अपहरण किया था। सूचना मिलते ही पुलिस ने तत्काल कार्रवाई शुरू की।
SDPO के नेतृत्व में टीम देवरिया रवाना
बच्चे की लोकेशन देवरिया में मिलने के बाद SDPO के नेतृत्व में विशेष पुलिस टीम तत्काल उत्तर प्रदेश के लिए रवाना की गई। पुलिस का मुख्य फोकस बच्चे को सकुशल बरामद करना था। स्थानीय लोगों से मिली सूचना के आधार पर पुलिस ने छात्र को तलाश लिया।
सुरक्षित बरामदगी के बाद कई सवाल बाकी
गोपाल के सुरक्षित मिलने के बाद पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि वह देवरिया तक कैसे पहुंचा। शुरुआती जांच में अभी यह स्पष्ट नहीं हुआ है कि छात्र खुद किसी कारण से वहां पहुंचा था या उसके साथ किसी ने कुछ किया। नकाबपोश बदमाशों द्वारा अपहरण किए जाने की सूचना की भी पुलिस जांच कर रही है।
CCTV-DVR और कॉल की जांच अहम
पूरे मामले में स्कूल के CCTV-DVR से छेड़छाड़, निजी मकान के कैमरे में छात्र के स्कूल परिसर में जाने की फुटेज और पिता के मोबाइल पर आई कॉल जांच के अहम बिंदु हैं।
पुलिस इन सभी पहलुओं को जोड़कर घटनाक्रम की कड़ियां तलाश रही है। छात्र के बयान और आगे की जांच के बाद ही उसके स्कूल से देवरिया पहुंचने की पूरी तस्वीर साफ हो सकेगी।
गाढ़ी दही, मलाई, काजू-पिस्ता और केसर… ₹50 की लस्सी के लिए लगती है लंबी कतार
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Darbhanga Tower Famous Lassi: दरभंगा टावर की शाम बाजार की रौनक और भीड़ के साथ एक खास स्वाद के लिए भी जानी जाती है. टावर चौराहे पर दशकों से बिक रही मशहूर लस्सी का स्वाद लेने के लिए स्थानीय लोगों के साथ बाहर से आने वाले लोग भी पहुंचते हैं. महज 50 रुपये में मिलने वाली इस लस्सी में गाढ़ी दही, मलाई, क्रीम, काजू, पिस्ता, बादाम और केसर का इस्तेमाल किया जाता है और इसे मिट्टी के कुल्हड़ में परोसा जाता है. इसकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि शाम होते ही यहां ग्राहकों की भीड़ जुटने लगती है और लोगों को लस्सी के लिए टोकन लेकर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है.
दरभंगा टावर की शाम अपने आप में खास होती है. चौराहे की रौनक, लोगों की भीड़ और बाजार की हलचल यहां के माहौल को अलग पहचान देती है. लेकिन इस रौनक के बीच एक ऐसी चीज है, जो स्थानीय लोगों के साथ बाहर से आने वाले लोगों को भी अपनी ओर खींचती है दरभंगा टावर की मशहूर लस्सी. कहा जाता है कि अगर दरभंगा आए और टावर की इस लस्सी का स्वाद नहीं लिया, तो शहर का सफर कुछ अधूरा-सा रह जाता है.
टावर चौराहे पर एक छोटे से टेबल से दशकों से लस्सी बेचने का सिलसिला जारी है. दुकान भले ही बड़ी नहीं है, लेकिन इसके स्वाद की चर्चा दूर-दूर तक है. यही वजह है कि शाम होते ही यहां लस्सी पीने वालों की भीड़ जुटने लगती है. अपनी बारी के लिए लोगों को टोकन लेना पड़ता है. नंबर आने का इंतजार करना पड़ता है.
गर्मी के मौसम में इसकी मांग और बढ़ जाती है. महज 50 रुपये में मिलने वाली ठंडी-ठंडी लस्सी गर्मी से राहत देने के साथ स्वाद का भी अलग अनुभव कराती है. टोकन सिस्टम के कारण ग्राहकों को अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता है, लेकिन लस्सी का स्वाद इंतजार को आसान बना देता है.
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इस लस्सी की खासियत इसका देसी अंदाज है. गाढ़ी दही के साथ मलाई और क्रीम मिलाई जाती है. इसके बाद काजू, पिस्ता, बादाम और केसर से इसे सजाया जाता है. मिट्टी के कुल्हड़ में परोसी जाने वाली लस्सी में देसी स्वाद और खुशबू का एहसास और बढ़ जाता है.
दरभंगा टावर की यह लस्सी सिर्फ गर्मी में राहत देने वाला पेय नहीं, बल्कि शहर की खान-पान संस्कृति का हिस्सा बन चुकी है. ऑफिस से लौटने वाले लोग हों, कॉलेज के छात्र हों या परिवार के साथ बाजार घूमने निकले लोग कई लोग यहां रुककर लस्सी का स्वाद लेना पसंद करते हैं. छोटी सी जगह से शुरू हुई यह दुकान आज दरभंगा टावर की पहचान से जुड़ चुकी है. यही वजह है कि स्थानीय लोगों के लिए यह लस्सी सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि दरभंगा की शाम और शहर की स्वादिष्ट याद का हिस्सा है.

