मेरठ के लालकुर्ती थाना क्षेत्र में आयुर्वेद की पढ़ाई कर रही छात्रा ने फांसी लगा ली। आनन फानन में परिजन उसे उठाकर अस्पताल पहुंचे जहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। बताया जाता है कि छात्रा की परीक्षा ख़राब हो गई थी जिसके बाद से वह डिप्रेशन में चल रही थी। परेशान होकर वह दादी के घर पहुंची और फांसी लगा ली। जाटव गेट में कासिम परिवार के साथ रहते हैं। उनकी तीन बेटियां हैं। एक बेटी अरीबा हापुड़ के एक आयुर्वेद कॉलेज से बीएएमएस की पढ़ाई कर रही थी। रविवार रात करीब 10 बजे अरीबा को फंदे के सहारे लटका देखा परिवार में कोहराम मच गया। इसके बाद वहां आस पड़ोस के लोगों की भीड़ जमा होती चली गई। अस्पताल में चिकित्सक ने किया मृत घोषित लोगों की मदद से परिवार के लोग अरीबा को उठाकर सीधे साकेत स्थित सुशीला जसवंत राय अस्पताल पहुंचे लेकिन यहां चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। इसके बाद परिजन अरीबा का शव लेकर घर आ गए। कुछ ही देर में लालकुर्ती पुलिस मौके पर पहुंच गई और परिजनों से बात की। परिजनों ने कार्रवाई से किया इनकार
लालकुर्ती थाने की पुलिस ने पंचनामे की कार्रवाई शुरू की तो परिजनों ने किसी भी तरह की कानूनी कार्रवाई से इनकार कर दिया। मामला 22 वर्षीय छात्रा की मौत से जुड़ा था, इसलिए पुलिसकर्मियों ने परिजनों को समझाया। काफी देर समझाने के बाद परिजन पोस्टमार्टम करने के लिए राजी हो गए। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर उसे मोर्चरी भिजवा दिया। परीक्षा खराब होने से थी परेशान
शुरुआती जांच में सामने आया है कि अरीबा हापुड़ के किसी आयुर्वेद कॉलेज में बीएएमएस की द्वितीय वर्ष की पढ़ाई कर रही थी। उसकी परीक्षा खराब हो गई थी जिसके बाद से वह परेशान चल रही थी। अक्सर वह अपनी दादी के घर बकरी मोहल्ला आया करती थी। रविवार को भी वह दादी के घर पर ही थी जहां उसका शव फंदे के सहारे झूलता मिला।
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फंदे पर झूलता मिला बीएएमएस की छात्रा का शव: परीक्षा खराब होने से थी परेशान, पुलिस के समझाने पर पोस्टमार्टम को राजी हुए परिजन – Meerut News
भास्कर अपडेट्स: भूटान में भूकंप से सिक्किम और बंगाल में झटके महसूस हुए; कुछ सेकंड तक कांपी धरती
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भूटान में रविवार देर रात 5.6 तीव्रता का भूकंप आया, जिसके झटके सिक्किम और पश्चिम बंगाल में भी महसूस किए गए। अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के अनुसार भूकंप का केंद्र भूटान के पुनाखा क्षेत्र के पास था।
इससे भारत में गंगटोक, सिलीगुड़ी, कूचबिहार, जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार समेत कई इलाकों में लोगों ने कुछ सेकंड तक धरती में कंपन महसूस की। लोग एहतियातन घरों से बाहर निकल आए। फिलहाल किसी तरह के जान-माल के नुकसान की खबर नहीं है।
आज की अन्य बड़ी खबरें…
सिक्किम से सिलीगुड़ी जाते समय लापता 4 लोगों के शव तीस्ता नदी से मिले, कार भी बरामद

सिक्किम के चार लोगों के शव रविवार को पश्चिम बंगाल में तीस्ता नदी से बरामद किए गए। ये सभी 5 जून को गंगटोक जिले से सिलीगुड़ी जा रहे थे और रास्ते में लापता हो गए थे। जांच के दौरान NH-10 के पास कार की बैटरी और हेडलाइट के कुछ हिस्से मिले।
इसके बाद सर्च ऑपरेशन चलाया गया। NDRF, पुलिस और स्थानीय लोगों की मदद से नदी में डूबी कार का पता लगाया गया, जिसके अंदर चारों के शव मिले। प्रारंभिक जांच में माना जा रहा है कि कार तीस्ता नदी में गिर गई था।
मृतकों की पहचान स्मारिका नेओपाने (28), शैब्या नेओपाने (27), टीका दहाल (27) और पांच साल की दित्या छेत्री के रुप में की गई। प्रारंभिक जांच में पता चला है कि सभी लोग सिलीगुड़ी में इलाज करा रहे अपने माता-पिता से मिलने जा रहे थे।
दिल्ली फायर सर्विस में 850 से ज्यादा पद खाली, आखिरी बार 2011 में भर्ती हुई थी; होटल अग्निकांड के बाद खुलासा
दिल्ली के मालवीय नगर होटल अग्निकांड के बाद दिल्ली फायर सर्विस (DFS) की तैयारियों और संसाधनों पर सवाल उठने लगे हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार दिल्ली फायर सर्विस में फायरफाइटर के 3,312 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से 853 पद खाली पड़े हैं।
वहीं स्टेशन अधिकारी के 90 स्वीकृत पदों में केवल 18 पदों पर ही अधिकारी कार्यरत हैं। सूत्रों के मुताबिक स्टेशन अधिकारी पद के लिए आखिरी बार सीधी भर्ती साल 2011 में हुई थी। दिल्ली फायर सर्विस ने 1969 में वायरलेस संचार प्रणाली शुरू की थी।
सूत्रों के अनुसार तब से अब तक वायरलेस फ्रीक्वेंसी सिस्टम में कोई बड़ा बदलाव नहीं किया गया। विभाग अभी भी दो वीएचएफ (VHF) चैनलों पर निर्भर है। हालांकि रेडियो सेट आधुनिक डिजिटल डिवाइस में बदल दिए गए हैं, लेकिन संचार ढांचा लगभग पुराना ही बना हुआ है।ती
दिल्ली में ऊंची इमारतों और शहरी विस्तार के साथ फायर स्टेशनों की संख्या 17 से बढ़कर 71 हो गई है। इसके बावजूद पुरानी संचार व्यवस्था के कारण कई बार कंट्रोल रूम, फायर स्टेशन और मौके पर मौजूद कर्मचारियों के बीच संपर्क में दिक्कतें आती हैं।
आधी रात को थर्राई 5 देशों की धरती, भारत-चीन-भूटान तक दहशत, कितनी तीव्रता?
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Bhukamp Today Update: भूटान के पुनाखा में आए 5.6 तीव्रता के विनाशकारी भूकंप ने पूरे दक्षिण एशिया को हिलाकर रख दिया है. जमीन से केवल 10 किलोमीटर की उथली गहराई पर आए इस भूकंप के कारण थिम्पू और पारो समेत कई जिलों में इमारतें ताश के पत्तों की तरह हिलने लगीं. इसके तेज झटके भारत के असम, पश्चिम बंगाल और सिक्किम के साथ-साथ नेपाल, बांग्लादेश और चीन तक महसूस किए गए, जिससे आधी रात को लोग जान बचाने के लिए घरों से बाहर भागने लगे. फिलहाल प्रशासन बड़े नुकसान का आकलन कर रहा है और लोगों को आफ्टरशॉक्स से सावधान रहने की हिदायत दी गई है.
नेपाल से लेकर भारत-चीन में भूकंप के झटके महसूस हुए.
Butan-India Bhukamp Latest Update: भूटान के पुनाखा में रविवार यानी कि 6 जून की आधी रात को करीब 11:06 बजे आए एक बेहद शक्तिशाली और खतरनाक भूकंप से लोग डर गए. यूनाइटेड स्टेट्स जियोलॉजिकल सर्वे (USGS) के मुताबिक, रिक्टर स्केल पर इस भूकंप की तीव्रता 5.6 मापी गई है. इसका केंद्र पुनाखा से महज 5 किलोमीटर दूर था. जमीन से सिर्फ 10 किलोमीटर की उथली गहराई पर होने के कारण इसके झटके बेहद डरावने थे.
इस भूकंप के झटके की वजह से थिम्पू, पारो और कई अन्य जोंगखागों (जिलों) में मजबूत गगनचुंबी इमारतें हिलने लगी थीं. आधी रात को अचानक लगी इस भयानक थपकी से घबराए लोग अपनी जान बचाने के लिए चीखते-चिल्लाते हुए अपने घरों से बाहर खुले मैदानों और सड़कों की तरफ भागने लगे, जिससे चारों तरफ अफरा-तफरी का माहौल बन गया.
5 देशों के अलग-अलग शहरों में झटके महसूस हुए
इस भूकंप का असर सिर्फ भूटान तक ही सीमित नहीं रहा, बल्कि भारत, नेपाल, बांग्लादेश और चीन में भी इसके झटके महसूस हुए. भारत के असम, पश्चिम बंगाल और सिक्किम राज्यों में भी इसके बेहद तेज और डरावने झटके महसूस किए गए. भूकंप के झटकों से सीमावर्ती इलाकों में रहने वाले लाखों लोग पूरी रात दहशत के साये में रहे. हालांकि, इसकी वजह से फिलहाल किसी बड़े जान-माल के नुकसान या किसी के हताहत होने की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन आपदा प्रबंधन और सुरक्षा एजेंसियां पूरी तरह हाई अलर्ट पर हैं.
कोलकाता से लेकर सिलीगुड़ी-कोचीन बिहार तक कांपे
भूटान में आए भूकंप की वजह से कोलकाता और उसके आस-पास के जिलों में भी झटके महसूस किए गए. हालांकि, वहां झटकों की तीव्रता काफी ज़्यादा थी क्योंकि नॉर्थ बंगाल के जिले भूकंप के सोर्स के ज़्यादा करीब थे. पता चला है कि शहर की ऊंची इमारतों के साथ-साथ आम घरों में भी आधी रात को अचानक झटके महसूस किए गए. कई लोगों ने सीलिंग फैन और फर्नीचर हिलते हुए देखे.
सिलीगुड़ी, कोचीन बिहार, जलपाईगुड़ी और अलीपुरद्वार जैसे जिलों में झटके महसूस होते ही बहुत ज़्यादा दहशत फैल गई. कई लोगों ने रात में जागकर खुले आसमान के नीचे शरण ली. अभी तक, बीती रात आए भूकंप की वजह से राज्य में किसी बड़े नुकसान या किसी के हताहत होने की कोई खबर नहीं है. हालांकि, आधी रात को अचानक आई भूकंप ने लोगों के मन में बहुत डर पैदा कर दिया.
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भोपाल में जमीन विवाद को लेकर 12 राउंड फायरिंग: प्लॉट पर सफाई करने आए मजदूर और ठेकेदार पर गार्डों ने चलाई गोलियां – Bhopal News
भोपाल के मिसरोद थाना क्षेत्र के सुरेंद्र लैंडमार्क इलाके में शनिवार देर रात जमीन विवाद के चलते फायरिंग से दहशत फैल गई। शालीमार कॉलोनी के पास विवादित जमीन पर साफ-सफाई करने पहुंचे ठेकेदार और मजदूरों पर दो सिक्योरिटी गार्डों ने 12 बोर की लाइसेंसी बंदूकों से करीब 12 राउंड फायर कर दिए। गनीमत रही कि घटना में कोई घायल नहीं हुआ। फायरिंग की आवाज सुनकर पुलिस टीम मौके पर पहुंची। पुलिस के अनुसार दोनों गार्ड फायरिंग करते हुए आगे बढ़ रहे थे। पुलिसकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर दोनों को काबू में किया और उनकी बंदूकें जब्त कर लीं। मौके से पुलिस ने करीब 250 मीटर क्षेत्र में 12 बोर कारतूस के 12 खाली खोखे बरामद किए हैं। पुलिस के मुताबिक शालीमार एन्क्लेव के पास करीब पांच एकड़ जमीन को लेकर मीरचंदानी-परियानी परिवार और अजय नागर के बीच विवाद चल रहा है। मामला कोर्ट में लंबित है। शनिवार रात अजय नागर के ठेकेदार अंकित कुमार मजदूरों के साथ जमीन की सफाई कराने पहुंचे थे। इसी दौरान वहां तैनात गार्ड जागेश्वर शर्मा और विनोद गुर्जर ने विरोध किया और विवाद बढ़ने पर फायरिंग शुरू कर दी। ठेकेदार की शिकायत पर पुलिस ने दोनों आरोपियों के खिलाफ हत्या के प्रयास समेत अन्य धाराओं में मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
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‘मम्मी-पापा को अमीर बनाने की धुन सम्मान थी’, रानी मुखर्जी ने खोला बचपन का राज
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मशहूर होस्ट सिमी ग्रेवाल के शो में रानी मुखर्जी ने अपने बचपन की यादें बयां कीं. उन्होंने बताया कि वे कम उम्र से ही काफी समझदार थीं और अपने परिवार की आर्थिक स्थिति को बखूबी समझती थीं. जब भी वे किसी दुकान पर जाती थीं, तो अपनी मां को परेशानी से बचाने के लिए कभी किसी चीज की जिद नहीं करती थीं. छोटी उम्र से ही उनके मन में सिर्फ एक ही सपना था कि वे बड़ी होकर इतनी सफल बनें कि अपने माता-पिता की हर अधूरी इच्छा पूरी कर सकें.
रानी मुखर्जी फिल्मी परिवार से ताल्लुक रखती हैं.
नई दिल्ली: बॉलीवुड की टैलेंटेड एक्ट्रेस रानी मुखर्जी को आज कौन नहीं जानता, उन्होंने अपनी बेहतरीन अदाकारी के दम पर सिनेमा की दुनिया में एक बड़ा मुकाम हासिल किया है. सोशल मीडिया पर उनका एक पुराना इंटरव्यू खूब सुर्खियां बटोर रहा है, जो उन्होंने मशहूर होस्ट सिमी ग्रेवाल के चर्चित शो ‘रेंडेजवस विद सिमी ग्रेवाल’ में दिया था. रानी ने इस बातचीत में अपने बचपन के दिनों को याद करते हुए एक बेहद इमोशनल और दिल छू लेने वाला किस्सा सुनाया. रानी ने बताया कि जब वे बहुत छोटी थीं, तभी से उनके मन में सपना था कि वे लाइफ में कुछ बहुत बड़ा करें, ताकि मम्मी-पापा को सारी खुशियां और ऐशो-आराम दे सकें. वे बचपन में जब भी किसी दुकान पर जाती थीं और उनका मन किसी खिलौने या चीज को खरीदने का करता था, तो वे तुरंत अपनी मां के चेहरे को देखती थीं. अगर उन्हें जरा भी अंदाजा होता था कि उनकी मां के पास उस वक्त उतने पैसे नहीं हैं या वे उसे खरीद नहीं पाएंगी, तो रानी चुपचाप अपना मन मार लेती थीं और कभी भी रोने-धोने या जिद करने का नाटक नहीं करती थीं.
रानी ने बहुत ही सादगी से बताया कि वे बचपन से ही अपनी उम्र के बाकी बच्चों की तुलना में ज्यादा समझदार थीं. जहां आम तौर पर बच्चे सिर्फ अपनी फरमाइशों और खिलौनों के बारे में सोचते हैं, वहीं रानी बहुत छोटी उम्र में ही अपने घर के हालात, पैसों की तंगी और अपने माता-पिता की भावनाओं को गहराई से समझने लगी थीं. वे अपनी मां को किसी भी तरह के तनाव या मुश्किल में नहीं देखना चाहती थीं, इसलिए अपनी इच्छाओं को दबा लेती थीं. वे मन ही मन खुद से वादा करती थीं कि एक दिन वे इतनी कामयाब और अमीर बनेंगी कि उन्हें किसी भी चीज को खरीदने से पहले सोचना न पड़े. वे अपने माता-पिता की हर अधूरी ख्वाहिश को चुटकियों में पूरा कर सकें. उनके सपनों की उड़ान हमेशा उनके परिवार की खुशियों से ही शुरू होती थी. रानी के पिता राम मुखर्जी फिल्म डायरेक्टर और मां कृष्णा मुखर्जी एक प्लेबैक सिंगर थीं, इसलिए घर में सिनेमा का माहौल तो था ही, जिसने रानी को बहुत कम उम्र में ही एक्टिंग की तरफ बढ़ने के लिए प्रेरित किया.
रानी मुखर्जी ने दी दर्जनों हिट
रानी मुखर्जी ने आगे चलकर अपनी इसी समझदारी, कड़ी मेहनत और लगन के दम पर बॉलीवुड में कदम रखा और एक से बढ़कर एक ब्लॉकबस्टर फिल्में दीं. उन्होंने ‘कुछ कुछ होता है’, ‘साथिया’, ‘हम तुम’, ‘ब्लैक’ और ‘मर्दानी’ जैसी कल्ट फिल्मों में अपनी दमदार परफॉर्मेंस से न सिर्फ दर्शकों का दिल जीता, बल्कि बड़े-बड़े फिल्म क्रिटिक्स को भी अपना मुरीद बना लिया. बचपन में माता-पिता को हर खुशी देने का जो सपना रानी ने देखा था, उसे उन्होंने अपनी काबिलियत के दम पर पूरी ईमानदारी से सच कर दिखाया. आज वे फिल्म इंडस्ट्री की सबसे सफल और सम्मानित अभिनेत्रियों में से एक गिनी जाती हैं.
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अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और पॉल…और पढ़ें
आम पन्ना से कोकम शरबत तक, बनाएं ये 10 नेचुरल शरबत, शरीर को रखेंगे ठंडा, बेहद पौष्टिक
गर्मियों के मौसम में बढ़ती गर्मी और तेज धूप से राहत पाने के लिए लोग अक्सर ठंडे पेय पदार्थों का सहारा लेते हैं. हालांकि, बाजार में मिलने वाले कई ड्रिंक्स में अधिक चीनी और कृत्रिम तत्व होते हैं. इसके विपरीत, पारंपरिक भारतीय प्राकृतिक पेय न केवल शरीर को ठंडक पहुंचाते हैं, बल्कि जरूरी पोषक तत्व भी प्रदान करते हैं.
देसी पेय: स्वाद और सेहत का बेहतरीन मेल
भारत के अलग-अलग राज्यों में कई ऐसे पारंपरिक पेय प्रचलित हैं, जो स्थानीय सामग्री से तैयार किए जाते हैं. ये ड्रिंक्स वर्षों से भारतीय खानपान और संस्कृति का हिस्सा रहे हैं. इनमें स्वाद के साथ-साथ स्वास्थ्य लाभ भी छिपे होते हैं.
आम पन्ना: गर्मी से बचाव का लोकप्रिय पेय
कच्चे आम से तैयार होने वाला आम पन्ना गर्मियों में काफी पसंद किया जाता है. इसमें विटामिन सी, आयरन और इलेक्ट्रोलाइट्स पाए जाते हैं, जो शरीर को ठंडक देने और थकान कम करने में मदद कर सकते हैं.
लस्सी: ऊर्जा और पोषण से भरपूर
दही से बनने वाली लस्सी उत्तर भारत, खासकर पंजाब और हरियाणा में बेहद लोकप्रिय है. इसमें प्रोटीन, कैल्शियम और प्रोबायोटिक्स मौजूद होते हैं, जो पाचन तंत्र और शरीर की ऊर्जा बनाए रखने में सहायक माने जाते हैं.
छाछ: पाचन के लिए फायदेमंद
छाछ एक हल्का और ताजगी देने वाला पेय है, जिसे कई राज्यों में भोजन के साथ पिया जाता है. इसमें कैल्शियम, विटामिन बी12 और प्रोबायोटिक्स होते हैं, जो आंतों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद कर सकते हैं.
सत्तू का शरबत: देसी सुपरड्रिंक
बिहार, झारखंड और पूर्वी उत्तर प्रदेश में लोकप्रिय सत्तू का शरबत प्रोटीन, फाइबर और खनिजों से भरपूर होता है. यह शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा देने और गर्मी से राहत पहुंचाने में मदद करता है.
कोकम शरबत: कोंकण क्षेत्र की खास सौगात
कोकम फल से तैयार यह पेय पश्चिमी तटीय क्षेत्रों में काफी लोकप्रिय है. इसमें विटामिन सी और एंटीऑक्सीडेंट्स पाए जाते हैं, जो पाचन और शरीर की ताजगी बनाए रखने में मदद कर सकते हैं.
सोल कढ़ी: स्वाद और पोषण का अनोखा मिश्रण
कोकम और नारियल के दूध से तैयार सोल कढ़ी महाराष्ट्र और गोवा के कई हिस्सों में पसंद की जाती है. यह पाचन को बेहतर बनाने और शरीर को ठंडक देने के लिए जानी जाती है.
पानकम: दक्षिण भारत का पारंपरिक पेय
गुड़, सोंठ, काली मिर्च और इलायची से बनने वाला पानकम ऊर्जा देने वाला पारंपरिक पेय माना जाता है. यह गर्मी के मौसम में ताजगी और स्फूर्ति बनाए रखने में मदद कर सकता है.
नीर मोर: ठंडक देने वाली मसालेदार छाछ
तमिलनाडु में लोकप्रिय नीर मोर दही, पानी और हल्के मसालों से तैयार की जाती है. यह शरीर को हाइड्रेट रखने और पाचन में सहायता करने के लिए जानी जाती है.
सम्बारम: इलेक्ट्रोलाइट्स से भरपूर प्राकृतिक ड्रिंक
दक्षिण भारत का यह पारंपरिक पेय दही, अदरक, करी पत्ता और मसालों से तैयार किया जाता है. यह डिहाइड्रेशन से बचाने और शरीर को ठंडक पहुंचाने में मदद कर सकता है.
बेल पना: गर्मी में राहत देने वाला पेय
बेल फल से बनने वाला यह पारंपरिक शरबत खासकर ओडिशा में लोकप्रिय है. इसे गर्मी के दौरान शरीर को ठंडा रखने और पाचन संबंधी परेशानियों से राहत दिलाने वाला पेय माना जाता है.
क्यों चुनें प्राकृतिक पेय?
इन पारंपरिक ड्रिंक्स की सबसे बड़ी खासियत यह है कि ये आमतौर पर घर में तैयार किए जाते हैं और इनमें कृत्रिम रंग, फ्लेवर या प्रिजर्वेटिव नहीं होते. गर्मियों में कोल्ड ड्रिंक्स की जगह इन प्राकृतिक पेयों को अपनाकर शरीर को ठंडक, पोषण और ऊर्जा तीनों मिल सकते हैं.
कार-ऑटो में टक्कर, 2 मजदूरों की मौत: काम के बाद घर लौट रहे थे, हादसे में 9 लोग घायल; एक की स्थिति गंभीर – Aurangabad (Bihar) News
औरंगाबाद में कार ने ऑटो में टक्कर मार दी। हादसे में मजदूरी कर लौट रहे ऑटो सवार दो मजदूरों की मौत हो गई। वहीं, 9 मजदूर गंभीर रूप से घायल हो गए हैं। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, मजदूरों से भरा ऑटो मझितावां मोड़ की ओर मुड़ने के लिए तेजपुरा-लख के पास पहुंचा था। इसी दौरान दाउदनगर की ओर से आ रही अर्टिगा कार ने ऑटो में सामने से जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी भीषण थी कि ऑटो और कार दोनों सड़क किनारे जा गिरे। ऑटो में सवार सभी लोग गंभीर रूप से घायल हो गए। घटना के तुरंत बाद स्थानीय ग्रामीण मौके पर पहुंचे और राहत-बचाव कार्य शुरू किया। ग्रामीणों की मदद से सभी घायलों को अनुमंडलीय अस्पताल, दाउदनगर पहुंचाया गया। अस्पताल में चिकित्सकों ने जांच के बाद ओबरा थाना क्षेत्र के भटौलिया गांव निवासी राजेश पासवान (55) और उमेश पासवान (45) को मृत घोषित कर दिया। घटना दाउदनगर-बारुण मुख्य मार्ग पर तेजपुरा-लख के पास की है। 4 का इलाज निजी अस्पताल में हो रहा है घायलों में भटौलिया निवासी राजाराम (55) की स्थिति गंभीर है। उसे हायर सेंटर रेफर किया गया है। वहीं, धनु कुमार (18), रणधीर कुमार (16), रविंद्र पासवान (45) और रामाशीष राजवंशी (60) का इलाज अनुमंडलीय अस्पताल में चल रहा है। अन्य चार घायलों का उपचार निजी अस्पताल में कराया जा रहा है। घटना की सूचना पर पहुंची पुलिस हादसे की सूचना मिलते ही ओबरा थाना अध्यक्ष नीतीश कुमार, अपर थाना अध्यक्ष कुणाल कुमार और दाउदनगर थाना के एसआई सच्चिदानंद मिश्र पुलिस बल के साथ अस्पताल पहुंचे। पुलिस ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया और दुर्घटना की जांच शुरू कर दी। थाना अध्यक्ष ने बताया कि पोस्टमॉर्टम के बाद शव अंतिम संस्कार के लिए परिजनों को सौंपा जाएगा। घटना की जानकारी मिलने पर जिला परिषद अध्यक्ष प्रतिनिधि शैलेश कुमार यादव, युवा राजद के प्रदेश सचिव अजीत कुमार, लोजपा (रामविलास) के प्रखंड अध्यक्ष रमेश पासवान और भाजपा नगर अध्यक्ष श्याम कुमार पाठक अस्पताल पहुंचे। जनप्रतिनिधियों ने घायलों का हालचाल जाना और मृतकों के परिजनों को सांत्वना देते हुए हरसंभव सहायता का भरोसा दिलाया।
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रोमांटिक सीन नहीं दे पा रहे थे बॉबी देओल, मनीषा कोइराला से लिया बदला, सालों बाद खुला राज
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बॉबी देओल ने फिल्म ‘गुप्त’ से जुड़ी पुरानी यादें शेयर की हैं. उन्होंने मनीषा कोइराला के साथ अपने रोमांटिक सीन का दिलचस्प किस्सा सुनाया. स्टार ने खुलासा किया क्यों उन्हें वह सीन शूट करने में दिक्कत हो रही थी. वे एक्सप्रेशन नहीं दे पा रहे थे, इसलिए उन्होंने पीछे हटने का फैसला किया था. उन्होंने ट्विंकल खन्ना के साथ बचपन की नोक-झोंक को भी याद किया.
नई दिल्ली: बॉलीवुड के ‘लॉर्ड बॉबी’ यानी बॉबी देओल इन दिनों अपनी फिल्मों को लेकर खूब सुर्खियां बटोर रहे हैं. उन्होंने हाल में अपने करियर और पर्सनल लाइफ से जुड़े कई दिलचस्प खुलासे किए. इस दौरान उन्होंने उन पुरानी अफवाहों पर भी खुलकर बात की, जिनमें कहा जाता था कि वे सेट पर अपनी हीरोइनों को काफी परेशान करते थे. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

बॉबी देओल पर लंबे समय से यह आरोप लगता रहा है कि वे ट्विंकल खन्ना, रानी मुखर्जी, प्रीति जिंटा और मनीषा कोइराला जैसी अपनी को-स्टार्स के साथ सेट पर अक्सर उलझ जाते थे. शो में जब उनसे इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने हंसते हुए इन बातों के पीछे का सच बताया. उन्होंने यह भी साफ किया कि आखिर क्यों उन्होंने एक बार मनीषा कोइराला के साथ एक इंटीमेट सीन करने से मना कर दिया था.
(फोटो साभार: YouTube/Videograb)

ट्विंकल खन्ना के साथ फिल्म ‘बरसात’ की शूटिंग के दिनों को याद करते हुए बॉबी ने ‘आप की अदालत’ में बताया कि उस वक्त वे दोनों बहुत छोटे और नासमझ थे. बॉबी ने मजाकिया अंदाज में कहा, ‘मुझे बचपन से पेट की थोड़ी दिक्कत रही है, इसलिए मैं अक्सर सेट पर अपने पेट और वॉशरूम जाने की बातें करता रहता था. ट्विंकल मेरी इस आदत से बहुत ज्यादा चिढ़ जाती थी.’ (फोटो साभार: YouTube/Videograb)
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बॉबी ने आगे बताया कि जब ट्विंकल ने अपना पहला इंटरव्यू दिया, तो उन्होंने मजे-मजे में बॉबी की इस पेट वाली समस्या का जिक्र सरेआम कर दिया. बॉबी ने उन्हें फोन करके शिकायत भी की थी कि उन्होंने इंटरव्यू में ऐसा क्यों कहा. बॉबी के मुताबिक, यह सिर्फ बचपन की नोक-झोंक थी और उनके बीच कोई गंभीर लड़ाई नहीं थी.
(फोटो साभार: YouTube/Videograb)

साल 1997 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘गुप्त’ में बॉबी के साथ काजोल और मनीषा कोइराला लीड रोल में थीं. इस फिल्म की शूटिंग के दौरान का एक बेहद मजेदार किस्सा सुनाते हुए बॉबी ने बताया कि आखिर उन्होंने मनीषा के साथ एक रोमांटिक सीन करने से क्यों अपने पैर पीछे खींच लिए थे. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

बॉबी ने बताया, ‘शूटिंग के वक्त काफी ठंड थी और सेट के बाहर कोई चना बेच रहा था. मनीषा बड़े मजे से प्याज डालकर वो चने खा रही थीं. इसके तुरंत बाद, हमारा एक सीन होना था, जिसमें गाने के दौरान मनीषा को प्यार से मेरी ठुड्डी (चिन) पर काटना था. लेकिन उनके मुंह से प्याज की इतनी तेज आ रही थी कि मैं कोई रोमांटिक एक्सप्रेशन ही नहीं दे पा रहा था.’ (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

बॉबी ने इसका बदला लेने के लिए सेट पर एक तगड़ा प्लान भी बनाया था. फिल्म के एक कॉलेज वाले सीन में मनीषा के ऑन-स्क्रीन भाई को बॉबी की पिटाई करनी थी. वह एक नया एक्टर था, तो बॉबी ने मौके का फायदा उठाया और उसकी एक्टिंग सुधारने के बहाने उसे ढेर सारे कच्चे प्याज खिला दिए, ताकि मनीषा को सबक मिल सके. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

बॉबी ने हंसते हुए बताया, ‘मैंने उस लड़के को खूब प्याज खिलाए कि जब वह मनीषा के क्लोज जाकर शॉट देगा तो उन्हें पता चलेगा. लेकिन मजेदार बात यह रही कि मनीषा पर इसका कोई असर ही नहीं हुआ और मेरा बदला अधूरा रह गया. उस उम्र में हम लोग ऐसी ही नादानियां और प्रैंक किया करते थे.’ (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

अगर बॉबी देओल हाल में रिलीज हुई फिल्म ‘बंदर’ में नजर आए हैं, जो 5 जून 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है. उन्होंने फिल्म में ‘समीर मेहरा’ नाम के एक रॉकस्टार का किरदार निभाया है. बॉबी ने इस प्रोजेक्ट के जरिए पहली बार मशहूर डायरेक्टर अनुराग कश्यप के साथ काम किया है. बॉबी देओल जल्द ही यशराज फिल्म्स की फिल्म ‘अल्फा’ में एक दमदार रोल में दिखाई देंगे. फिल्म में आलिया भट्ट और शारवरी अहम भूमिकाओं में हैं, जो इसी साल 10 जुलाई को थिएटर्स में रिलीज होने वाली है. विलेन के रोल में बॉबी को दोबारा देखने के लिए फैंस बेहद एक्साइटेड हैं. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)
बनना है सिविल इंजीनियर? JEE मेंस में 10 लाख रैंक पर भी मिलेगा सिविल ब्रांच
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Bihar Engineering Admission Cutoff: जेईई-मेंस की परीक्षा में कम स्कोर या 10 लाख तक रैंक लाने वाले छात्रों के लिए भी बिहार के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में सिविल इंजीनियर बनने का रास्ता साफ है. राज्य के विभिन्न जिलों में खुले नए इंजीनियरिंग कॉलेजों और सीटों की संख्या अधिक होने के कारण, सही काउंसलिंग रणनीति अपनाकर छात्र कम रैंक पर भी सरकारी कॉलेज में अपनी सीट पक्की कर सकते हैं. जानिए एडमिशन और काउंसलिंग की पूरी प्रक्रिया.
गयाजी: इंजीनियर बनने का सपना देख रहे हैं लेकिन जेईई एडवांस में सफलता नहीं मिली हो बावजूद बिहार के कॉलेज में जेईई मेंस के रैंक के आधार पर नामांकन लेकर इंजीनियर बनने का सपना पूरा कर सकते हैं. बिहार के लगभग हर जिले में इंजीनियरिंग कॉलेज है जहां जेईई मेंस और बीसीईसीई के रैंक पर नामांकन होता है. बिहार के टॉप फाइव इंजीनियरिंग कॉलेज में शामिल गया कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में नामांकन के लिए जेईई मेंस में 90 हजार से 10 लाख रैंक के बीच छात्रों का नामांकन होता है.
बिहार में स्कोप ज्यादा, नामांकन की होड़
गया कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग का सिविल ब्रांच में नामांकन के लिए छात्रों में होड़ लगी रहती है. पिछले 2 साल की रैंक की बात करें तो जेईई मेंस में 1 लाख से 10 लाख के बीच के रैंक वाले छात्रों को सिविल ब्रांच मिला है. बिहार में सिविल इंजीनियरिंग एक प्रमुख और अत्यधिक मांग वाली शाखा है. यह बुनियादी ढांचे जैसे सड़क, पुल, इमारत के निर्माण और योजना से जुड़ी ब्रांच है. इस कोर्स को करने के बाद ज्यादातर छात्र सरकारी नौकरी लेता चाहते हैं और बिहार में इसका स्कोप भी अधिक है.
यहां पर है खूब मांग, मिलेगा अवसर भी
देश और राज्य में बन रहे नए एक्सप्रेसवे, बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट्स, एयरपोर्ट्स और स्मार्ट सिटीज, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट जैसे सड़कें, पुल, भवन, और रियल एस्टेट के कारण सिविल इंजीनियरिंग के छात्रों के लिए भी प्लेसमेंट के शानदार मौके बन रहे हैं. इसके अलावे जूनियर इंजीनियर से लेकर सरकारी ठेकेदार और निजी कंस्ट्रक्शन फर्मों में काम करके आप शानदार करियर बना सकते हैं. वहीं प्राइवेट सेक्टर में भी सिविल इंजीनियर की मांग हाल के वर्षो में खूब बढी है.
सिविल ब्रांच की डिमांड ज्यादा, इस बार ये रहेगा रैंक
गया कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के डिप्टी रजिस्ट्रार डाॅ.कृष्णा प्रसाद ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि बिहार के ज्यादातर बच्चे सरकारी नौकरी में जाना चाहते हैं इसलिए सिविल ब्रांच की डिमांड ज्यादा रहती है. सरकारी नौकरियों में सबसे ज्यादा वैकेंसी सिविल इंजीनियर के लिए होती है. इन्होंने बताया इस कालेज में 120 सीट पर सिविल ब्रांच में नामांकन होता है. इस बार भी उम्मीद है 1 लाख से 10 लाख के बीच रैंक वाले छात्रों को यहां एडमिशन मिलेगा.
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बदायूं में पुलिस भर्ती परीक्षा के लिए डायवर्जन: 8 से 10 जून तक भारी वाहनों की नो-एंट्री रहेगी, पुलिस की रहेगी निगरानी – Badaun News
बदायूं में उत्तर प्रदेश पुलिस आरक्षी भर्ती परीक्षा को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन ने विशेष यातायात व्यवस्था लागू की है। परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों की संभावित भारी भीड़ को देखते हुए, 8 जून से 10 जून तक शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा। इस अवधि में ट्रक, ट्रॉला, डीसीएम और ट्रैक्टर-ट्रॉली जैसे भारी वाहनों को शहर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह यातायात व्यवस्था 8 जून की सुबह सात बजे से शुरू होकर 10 जून की शाम आठ बजे तक प्रभावी रहेगी। प्रशासन का अनुमान है कि भर्ती परीक्षा के लिए बड़ी संख्या में अभ्यर्थी जनपद पहुंचेंगे। मुख्य मार्गों पर भारी वाहनों के संचालन से जाम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिससे परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। भारी वाहनों को वैकल्पिक मार्गों पर भेजा जाएगा डायवर्जन व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए बिल्सी मोड़, पटेल चौक, मझिया मोड़, केशव मंडी चौकी, बदायूं-बरेली बाईपास स्थित बीआरवी तिराहा और कुँवरगांव चौराहे को प्रमुख नियंत्रण बिंदु बनाया गया है। इन स्थानों से भारी वाहनों को वैकल्पिक मार्गों पर भेजा जाएगा। यातायात पुलिस और स्थानीय पुलिस को व्यवस्था की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। एसएसपी अंकिता शर्मा ने वाहन चालकों से निर्धारित डायवर्जन व्यवस्था का पालन करने और सहयोग बनाए रखने की अपील की है, ताकि शहर को जाममुक्त रखा जा सके और अभ्यर्थियों को समय पर परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया जा सके।
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