Monday, June 1, 2026
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चीन के 1500 स्टील्थ फाइटर्स को मटियामेट करेगा भारत का AMCA, आ गई पूरी टाइमलाइन


नई दिल्‍ली. भारतीय रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) ने रविवार सुबह चंडीगढ़ के पास पंचकूला (हरियाणा) के रामगढ़ में स्थित अपनी बेहद संवेदनशील विंग ‘टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी’ (TBRL) में एक बेहद शक्तिशाली और विनाशकारी ‘हाई-कैलिबर बम’ का सफल परीक्षण किया है. वायुसेना के आला अधिकारियों की सीधी मौजूदगी में किए गए इस महापरीक्षण की गूंज कई किलोमीटर दूर तक सुनी गई. यह बम इतना घातक था कि परीक्षण से पहले ही प्रशासन ने आस-पास के गांवों में हाई अलर्ट जारी कर लोगों को घरों के भीतर रहने की सख्त हिदायत दी थी. अधिकारियों के मुताबिक, कड़े सुरक्षा प्रोटोकॉल के तहत किया गया यह ट्रायल पूरी तरह सटीक और सफल रहा, जो भविष्य में भारतीय वायुसेना (IAF) के लड़ाकू विमानों और मिसाइलों को अचूक और तबाही मचाने वाली मारक क्षमता प्रदान करेगा.

यह धमाका DRDO की आर्मामेंट्स क्लस्टर के तहत आने वाली प्रतिष्ठित प्रयोगशाला TBRL में हुआ, जहां भारत के नए ‘हाई-कैलिबर’ बम की क्षमताओं को परखा गया. हालांकि TBRL में पहले भी कई विस्फोटक परीक्षण होते रहे हैं, लेकिन इस बार का धमाका बेहद खास और विशाल था, क्योंकि इसकी आवाज कई किलोमीटर दूर तक रिकॉर्ड की गई.

एयरफोर्स के अफसरों की मौजूदगी के मायने
इस परीक्षण की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी भारतीय वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारियों की उपस्थिति रही. इससे साफ संकेत मिलते हैं कि यह हाई-कैलिबर बम सीधे तौर पर वायुसेना के लड़ाकू विमानों से गिराए जाने वाले युद्धक हथियारों या फिर IAF की अत्याधुनिक मिसाइलों के वॉरहेड का हिस्सा बनने जा रहा है. यह परीक्षण चीन और पाकिस्तान की सीमाओं पर जारी तनाव के बीच भारत की हवाई संप्रभुता को और मजबूत करेगा.

1.5 किलोमीटर ऊंचाई तक उड़े टुकड़े
बम की संहारक क्षमता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि परीक्षण से पहले TBRL ने चेतावनी जारी की थी कि ब्लास्ट के बाद बम के मलबे और टुकड़े हवा में 1.5 किलोमीटर की ऊंचाई तक उड़ सकते हैं और धमाके की जगह से 2 किलोमीटर के दायरे में फैल सकते हैं. इसी वजह से पंचकूला प्रशासन ने भानू और बिल्ला जैसे नजदीकी गांवों में ‘कफ्र्यू’ जैसी स्थिति बनाते हुए लोगों को सुबह के समय घरों से बाहर न निकलने की सलाह दी थी. सुरक्षा के लिहाज से पूरे इलाके को विशेष सर्विलांस (निगरानी) पर रखा गया था.

क्या है TBRL और इसकी ताकत?
टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी (TBRL) भारत के मिसाइल और परमाणु हथियारों के विकास कार्यक्रमों की रीढ़ मानी जाती है. यह लैब मुख्य रूप से उच्च विस्फोटकों, डेटोनेटर, शॉक वेव्स और हथियारों के अंतिम विनाशकारी प्रभाव का आकलन करने के लिए डेटा तैयार करती है. सिर्फ सेना ही नहीं बल्कि अंतरिक्ष एजेंसी इसरो (ISRO) के महात्वाकांक्षी गगनयान मिशन के लिए विशेष पैराशूट और उपकरणों का मूल्यांकन भी इसी लैब में किया जा रहा है. इसके अलावा, यह लैब अर्धसैनिक बलों और पुलिस के लिए नॉन-लेथल बुलेट्स (गैर-घातक गोलियां), लिक्विड आर्मर और हैंड ग्रेनेड भी विकसित करती है.

परीक्षण के रणनीतिक प्रभाव

1. स्वदेशी मारक क्षमता में आत्मनिर्भरता: वायुसेना की मौजूदगी यह साबित करती है कि भारत अब विदेशी वेंडर पर निर्भर रहने के बजाय अपने लड़ाकू विमानों (जैसे राफेल, सुखोई और तेजस) के लिए भारी वजन वाले ‘हाई-कैलिबर’ बम खुद बना रहा है. यह ‘मेक इन इंडिया’ के तहत वायुसेना को आत्मनिर्भर बनाएगा.

2. वॉरहेड टेक्नोलॉजी में महारत: TBRL का परमाणु और मिसाइल कार्यक्रमों से पुराना नाता है. इस सफल टेस्ट से यह स्पष्ट है कि भारत ने उन्नत विस्फोटक और शॉक वेव तकनीक पर अपनी पकड़ मजबूत कर ली है, जिससे आने वाले समय में हमारी मिसाइलों की मारक क्षमता और अधिक विनाशकारी हो जाएगी.

3. दोहरे उपयोग वाली तकनीक: यह लैब केवल भारी बम ही नहीं बनाती, बल्कि पुलिस और पैरामिलिट्री के लिए बुलेटप्रूफ जैकेट (लिक्विड आर्मर) और नॉन-लेथल बुलेट्स भी तैयार करती है. यानी रक्षा क्षेत्र का यह अनुसंधान देश की बाहरी सुरक्षा के साथ-साथ आंतरिक कानून व्यवस्था को भी आधुनिक बना रहा है.

सवाल-जवाब
टर्मिनल बैलिस्टिक्स रिसर्च लेबोरेटरी (TBRL) का मुख्य काम क्या है?
TBRL का मुख्य काम मिसाइलों के वॉरहेड और प्रोजेक्टाइल्स का मूल्यांकन करना, उच्च विस्फोटकों की टेस्टिंग करना और हथियारों से होने वाले अंतिम नुकसान (Terminal Effects) का डेटा तैयार करना है.
इस बम परीक्षण के दौरान हवाई सुरक्षा के क्या मायने हैं?
वायुसेना के अफसरों की मौजूदगी दर्शाती है कि यह बम भविष्य में फाइटर जेट्स से गिराए जाने वाले पारंपरिक बमों या फिर लॉन्ग-रेंज मिसाइलों के भीतर फिट होने वाले विस्फोटक का हिस्सा बनेगा.
धमाके की जगह से कितनी दूरी को संवेदनशील घोषित किया गया था?
सुरक्षा के दृष्टिकोण से परीक्षण स्थल के चारों ओर 2 किलोमीटर के पूरे रेडियस (दायरे) को अत्यंत संवेदनशील ज़ोन घोषित किया गया था.
सैन्य हथियारों के अलावा TBRL नागरिक या अर्धसैनिक बलों के लिए क्या बनाती है?
TBRL ने अर्धसैनिक बलों और पुलिस के लिए एडवांस्ड हैंड ग्रेनेड, लिक्विड आर्मर (बुलेटप्रूफ तकनीक), बाधाओं को उड़ाने वाले डिवाइस और भीड़ नियंत्रण के लिए गैर-घातक गोलियां विकसित की हैं.



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‘तुम बहुत खराब गा रहे हो’ जब अनु मलिक ने कुमार सानू को लगाई फटकार


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कुमार सानू ने पुराने दिनों का किस्सा सुनाया. उन्होंने बताया कि एक गाने की रिकॉर्डिंग के बाद अनु मलिक ने उन पर गुस्सा करते हुए कहा कि वे बहुत खराब और बेसुरा गा रहे हैं. कुमार सानू ने जब दोबारा मेहनत से गाना गाया, तो अनु मलिक बिना कुछ बोले स्टूडियो से बाहर चले गए. जिससे सानू उलझन में पड़ गए. हालांकि, उसी रात 11 बजे अनु मलिक ने सानू को फोन करके गाने की जमकर तारीफ की. इसी आपसी नोकझोंक से इस जोड़ी ने कई सदाबहार गाने दिए.

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दोनों सितारों ने साथ में कई गाने रिकॉर्ड किए हैं.

नई दिल्ली: संगीतकार अनु मलिक और प्लेबैक सिंगर कुमार सानू ने बॉलीवुड को एक से बढ़कर एक ब्लॉकबस्टर गाने दिए, जो आज भी लोगों की प्लेलिस्ट की शान बने हुए हैं. मगर अक्सर स्टूडियो के बंद कमरों में इन दोनों दिग्गजों के बीच गानों को लेकर जमकर बहस और नोकझोंक भी होती थी. सोशल मीडिया पर कुमार सानू का एक पुराना वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें वे कपिल शर्मा के शो में अनु मलिक के साथ रिकॉर्डिंग के दौरान मजेदार और दिलचस्प किस्सा सुनाया. कुमार सानू ने हंसते हुए बताया कि अनु मलिक के साथ हर गाने की रिकॉर्डिंग में किसी न किसी बात पर किचकिच होना एकदम आम बात थी, जो मानो उनके काम करने के स्टाइल का ही एक हिस्सा बन चुका था.

कुमार सानू ने किस्से को याद करते हुए बताया कि अमूमन वे पहली ही बार में पूरे कॉन्फिडेंस के साथ अपना बेस्ट शॉट देने के लिए रिकॉर्डिंग रूम में जाते थे, लेकिन एक दिन कुछ ऐसा हुआ जिसने उन्हें भी हैरान कर दिया. जैसे ही सानू दा ने गाना गाकर खत्म किया, माइक के दूसरी तरफ बैठे अनु मलिक भड़क गए और सीधे नाराजगी जताते हुए सख्त लहजे में बोले, ‘तुम बहुत खराब गा रहे हो, तुम्हारी आवाज बिल्कुल सही नहीं लग रही है और तुम सुर में भी नहीं हो!’ अनु मलिक के मुंह से इतनी कड़वी बातें सुनकर कुमार सानू के होश उड़ गए. उन्हें लगा कि शायद उनसे कोई वाकई बहुत बड़ी गड़बड़ हो गई है. जब उन्होंने अनु मलिक से पूछा कि भाई आखिर दिक्कत कहां है और कहां सुधार करना है, तो अनु मलिक ने बिना कुछ साफ बताए उन्हें दोबारा से पूरा गाना गाने का फरमान सुना दिया.

अनु मलिक का अतरंगी अंदाज
कुमार सानू ने बिना कोई बहस किए अपनी पूरी जी-जान लगाकर दूसरी बार में उस गाने को फिर से रिकॉर्ड किया. गाना खत्म होने के बाद वे रिकॉर्डिंग रूम के शीशे से अनु मलिक के रिएक्शन का इंतजार करने लगे. मगर इस बार अनु मलिक का अंदाज और भी अतरंगी था. वे अपनी सीट से उठे और बिना एक भी शब्द बोले चुपचाप सीधे स्टूडियो से बाहर निकल गए. कुमार सानू वहां खड़े-खड़े पूरी तरह उलझन में पड़ गए कि आखिर माजरा क्या है. गाना अच्छा बना है या बेहद बकवास? कुछ देर बाद जब वहां मौजूद रिकॉर्डिस्ट ने उनसे कहा कि सर रिकॉर्डिंग पूरी हो चुकी है और अब आप घर जा सकते हैं, तो कुमार सानू भी अपना सिर खुजलाते हुए स्टूडियो से बाहर निकलकर अपने घर के लिए रवाना हो गए.

साथ में दिए कालजयी गाने
असली सस्पेंस तो उसी रात को खुला जब, करीब 11 बजे अचानक कुमार सानू के फोन की घंटी बजी और दूसरी तरफ अनु मलिक लाइन पर थे. फोन उठाते ही अनु मलिक ने बड़े प्यार से उनका निकनेम पुकारा और चिल्लाते हुए बोले, ‘बॉस! आज तो तुमने वाकई कमाल का गाना गाया है, मजा आ गया!’ यह सुनकर सानू दा अपनी हंसी नहीं रोक पाए कि जिस गाने के लिए दिन में उन्हें इतनी डांट पड़ी और जो तारीफ रिकॉर्डिंग के वक्त मिलनी चाहिए थी, उसे करने में अनु मलिक को पूरे सात-आठ घंटे का वक्त लग गया. भले ही काम के दौरान इनके बीच कितनी भी खींचतान रही हो, लेकिन इसी अनोखी ट्यूनिंग का नतीजा था कि ‘बाजीगर’, ‘चुरा के दिल मेरा’ और ‘तेरे दर पर सनम’ जैसे सदाबहार गाने वजूद में आए, जो आज की नई पीढ़ी के दिलों पर भी राज कर रहे हैं.

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Abhishek NagarSenior Sub Editor

अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और पॉल…और पढ़ें





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चीन की कैंसर दवाओं से इलाज को मिली नई दिशा: KGMU में एक्सपर्ट्स ने कहा- स्मोकिंग कर रहा कैंसर – Lucknow News



KGMU में एक्सपर्ट्स बोले- चीन की नई कैंसर रोधी दवाओं से इलाज को मिलेगी नई दिशा।

कैंसर के इलाज के क्षेत्र में जल्द ही एक नई उम्मीद देखने को मिल सकती है। चीन में विकसित की गई नई कैंसर रोधी दवाएं विभिन्न प्रकार के कैंसर पर सीधे और प्रभावी तरीके से हमला करने में सक्षम बताई जा रही हैं। इन दवाओं के भारतीय बाजार में आने से कैंसर मरीजों

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KGMU के कलाम सेंटर में जार्जियन एल्युमनाय एसोसिएशन की तरफ से कार्यशाला हुई। आयोजक सचिव डॉ.सुधीर सिंह ने बताया कि नई दवाएं शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को सक्रिय कर कैंसर कोशिकाओं के खिलाफ लड़ने में मदद करती हैं। दवा की निर्धारित डोज लेने के बाद शरीर में ऐसी प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया विकसित होती है, जो कैंसर कोशिकाओं की पहचान कर उन्हें नष्ट करने का प्रयास करती है। इससे इलाज की प्रभावशीलता बढ़ने की संभावना है।

कैंसर को लेकर रहना होगा अलर्ट

डॉ.सुधीर ने बताया कि इन दवाओं की एक महत्वपूर्ण विशेषता यह भी है कि वे ट्यूमर तक पहुंचने वाली रक्त आपूर्ति को बाधित करती हैं। ट्यूमर को बढ़ने और फैलने के लिए लगातार रक्त और पोषक तत्वों की आवश्यकता होती है। नई दवाएं इस सप्लाई को रोककर कैंसर की वृद्धि को नियंत्रित करने में मदद कर सकती हैं।

डॉ.सुधीर सिंह के अनुसार फेफड़े, पेट और शरीर के अन्य अंगों में होने वाले कई प्रकार के कैंसर में इन दवाओं के अच्छे परिणाम सामने आए हैं। इसके अलावा रक्त कैंसर के कुछ प्रकारों में भी इनके प्रभावी होने की संभावना जताई जा रही है। प्रारंभिक अध्ययनों और परीक्षणों में मरीजों की स्थिति में सकारात्मक सुधार देखने को मिला है।

कुलपति प्रो.सोनिया नित्यानंद ने एलुमनी एसोसिएशन के कार्यक्रम को सार्थक बताते हुए कहा कि ऐसे कार्यक्रम छात्रों में उपचार के साथ साथ रोकथाम की समझ बढ़ाने में अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।

धूम्रपान से बनाना होगी दूरी

KGMU रेस्पीरेटरी मेडिसिन विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ.राजेंद्र प्रसाद ने कहाकि बीडी और सिगरेट फेफड़े के कैंसर के लिए जिम्मेदार है। लिहाजा धूम्रपान से तौबा करें। कैंसर संस्थान के निदेशक डॉ.एमएलबी भट्ट ने कहा कि कैंसर के मामलों में तेजी से इजाफा हो रहा है। जीवनशैली में सुधार कर कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है।

ये भी रहे मौजूद

कार्यक्रम में कैंसर संस्थान के डॉ. प्रमोद कुमार, KGMU प्लास्टिक सर्जरी विभाग के अध्यक्ष डॉ. विजय कुमार, डॉ. उमा सिंह, हड्डी रोग विभाग के पूर्व अध्यक्ष डॉ. जीके सिंह, डॉ. विनीत शर्मा समेत अन्य डॉक्टर मौजूद रहे।



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दष्टौन में देवर की गोली से भाभी की मौत: पति-देवर ने लाश को फ्रीजर में छुपाया, गुपचुप अंतिम संस्कार की थी तैयारी, पुलिस ने दबोचा – Gwalior News




शहर के थाटीपुर इलाके में रविवार को हत्या की एक सनसनीखेज वारदात हुई है। बेटे के दष्टौन (छठी/नामकरण) समारोह की खुशियों के बीच चाचा द्वारा अवैध कट्टे से की जा रही हर्ष फायरिंग की तैयारी में कट्‌टा लोड-अनलोड करते समय गोली चल गई। कट्टे से निकली गोली सीधे बच्चे की मां (भाभी) के सिर में जा धंसी, जिससे उसकी मौके पर ही दर्दनाक मौत हो गई।
इसके बाद जो हुआ, उसने क्रूरता की सारी हदें पार कर दीं। पुलिस और कानून के डर से पति और देवर ने मिलकर मृतका के शव को एक डीप फ्रीजर के अंदर छुपा दिया। रविवार रात के अंधेरे में जब सब शांत हुआ, तो शव को जलाकर सबूत मिटाने की तैयारी थी, लेकिन ऐन वक्त पर मुखबिर की सूचना ने इस भयानक साजिश का पर्दाफाश कर दिया। पुलिस ने मौके पर पहुंचकर शव को बरामद कर जांच शुरू कर दी है। भतीजे के जन्म की खुशी में कट्टा चमका रहा था चाचा
ग्वालियर के थाटीपुर में नदीपार टाल स्थित तृप्ती नगर इलाके में रहने वाले मनोज कुशवाह की 32 वर्षीय पत्नी जाहनवी उर्फ ज्योति कुशवाह के बेटे का रविवार सुबह दष्टौन समारोह चल रहा था। घर में मेहमान जुटे थे और मंगल गीत गाए जा रहे थे। इसी दौरान बच्चे का चाचा (मनोज का छोटा भाई) योगेश कुशवाह भतीजे के जन्म की खुशी में फायरिंग की तैयारी कर रहा था। वह बार-बार अवैध कट्‌टे को लोड अनलोड कर रहा था। पास ही ज्योति का पति मनोज भी खड़ा था। लोड-अनलोड करते समय चली गोली, सीधे सिर में धंसी
चश्मदीदों के मुताबिक, सुबह करीब 10:00 से 11:00 बजे के बीच जब योगेश अपने अवैध कट्टे को लोड और अनलोड (गोली भरना और निकालना) कर रहा था, तभी अचानक ट्रिगर दब गया। कट्टे से निकली हुई गोली कुछ ही दूरी पर बैठी मां ज्योति के सिर को चीरते हुए पार हो गई। गोली लगते ही ज्योति जमीन पर गिरी और उसकी मौके पर ही मौत हो गई। मातम के बीच साजिश लाश को फ्रीजर में डाला
गोली चलते ही घर में चीख-पुकार मच गई। लेकिन पुलिस कार्रवाई और जेल जाने के डर से पति मनोज और देवर योगेश ने मिलकर एक बेहद शातिर योजना बनाई। दोनों भाइयों ने तुरंत बाजार से एक बड़ा डीप फ्रीजर मंगवाया। ज्योति के शव को चादर में लपेटकर उस फ्रीजर के अंदर बंद कर दिया, ताकि लाश सड़े नहीं और किसी को भनक न लगे। आधी रात को श्मशान ले जाने की तैयारी
रविवार रात करीब 11:00 बजे जब मोहल्ले में सन्नाटा पसर गया, तो दोनों भाइयों ने फ्रीजर से बॉडी निकाली और चुपचाप अंतिम संस्कार (शव को जलाने) के लिए गाड़ी का इंतजाम करने लगे। आसपास बीमारी से मौत की कहानी सुना दी, जिससे मोहल्ल्ले में कोई शक न करे। पड़ोसी की सजगता से खुली पोल; पुलिस को देख भागे आरोपी
आरोपियों की बदकिस्मती रही कि मोहल्ले के ही एक शख्स ने फ्रीजर आने और रात में शव को गुपचुप ले जाने की संदिग्ध हलचल को ताड़ लिया। उसने तुरंत थाटीपुर थाना पुलिस को फोन घुमा दिया। सूचना मिलते ही थाटीपुर पुलिस बल के साथ मौके पर आ धमकी। पुलिस की गाड़ियां देखते ही आरोपी पति मनोज और कातिल देवर योगेश शव को वहीं छोड़कर अंधेरे का फायदा उठाकर मौके से फरार हो गए। पुलिस ने फ्रीजर से शव को अपने कब्जे में लिया और तुरंत फॉरेंसिक एक्सपर्ट डॉ. कोक सिंह को वैज्ञानिक जांच के लिए स्पॉट पर बुलाया। पुलिस का कहना
“हर्ष फायरिंग की तैयारी के लिए कट्‌टा लोड अनलोड करते समय महिला जाहनवी उर्फ ज्योति कुशवाह की सिर में गोली लगने से मौत हुई है। परिजनों ने पुलिस को सूचना दिए बिना शव को डीप फ्रीजर में छुपाकर साक्ष्य मिटाने और गुपचुप दाह-संस्कार करने का गंभीर अपराध किया है। शव को पोस्टमार्टम के लिए मर्चुरी भेजा जा रहा है। फरार आरोपी पति मनोज और देवर योगेश के खिलाफ मामला दर्ज कर तलाश की जा रही है।



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भाग्य नहीं, कर्म लिखेगा वृश्चिक राशि की किस्मत, संकेत कर रहे खास इशारे


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Aaj ka Vrishchik Rashifal 01 June 2026: 1 जून 2026 को वृश्चिक राशि के जातकों को भाग्य से अधिक अपने कर्म और पुरुषार्थ पर भरोसा करने की आवश्यकता है. कुछ महत्वपूर्ण कार्य अपेक्षा से धीमे हो सकते हैं, लेकिन सकारात्मक सोच और निरंतर मेहनत ही सफलता का मार्ग प्रशस्त करेगी. आज धैर्य, परिश्रम और आत्मविश्वास के साथ आगे बढ़ना आपके लिए लाभकारी रहेगा. जानें राशिफल और उपाय.

सीतामढ़ी: वृश्चिक राशि के जातकों के लिए जून मास का प्रथम दिवस यानी 1 जून 2026 एक अत्यंत महत्वपूर्ण और विशेष संदेश लेकर आया है. आज के दिन आपको भाग्य के भरोसे बैठने के बजाय अपने कर्म और पुरुषार्थ पर अधिक विश्वास करना होगा. सितारों की गणना बताती है कि आज आपके कुछ महत्वपूर्ण कार्य आपकी अपेक्षा से थोड़े धीमे चल सकते हैं. इस स्थिति में आपको निराश होने के बजाय सकारात्मक ऊर्जा के साथ आगे बढ़ना होगा. हमेशा स्मरण रखिए कि केवल मन में इच्छाएं संजोने से सफलता नहीं मिलती, बल्कि उसके लिए धरातल पर कड़ा परिश्रम करना पड़ता है.

कार्यक्षेत्र और करियर क्षेत्र में कड़ी परीक्षा
ज्योतिषाचार्य दीपेश शास्त्री के अनुसार, आज कार्यक्षेत्र और करियर के मामलों में आपके धैर्य की कड़ी परीक्षा हो सकती है. नौकरीपेशा और व्यापार से जुड़े लोगों को कुछ अप्रत्याशित चुनौतियों का सामना करना पड़ सकता है, जिससे काम की गति प्रभावित होगी. ज्योतिषाचार्य जी का कहना है कि जो व्यक्ति इस परीक्षा की घड़ी में बिना रुके निरंतर प्रयास करेगा. अंततः सफलता उसी के कदम चूमेगी. आज सहकर्मियों या वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत करते समय अपनी वाणी और क्रोध पर नियंत्रण रखना आपके लिए परम आवश्यक रहेगा.

कैसा रहेगा आर्थिक दृष्टिकोण
आर्थिक दृष्टिकोण से देखा जाए तो धन संबंधी मामलों में आज आपको विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है.  आज किसी भी तरह की अनावश्यक खरीदारी या फिजूलखर्च से पूरी तरह बचें, अन्यथा आने वाले समय में बजट बिगड़ सकता है. इस समय निवेश के नए प्रयोगों से दूर रहकर अपने संचित धन का संरक्षण करना अधिक महत्वपूर्ण रहेगा. वहीं दूसरी ओर, पारिवारिक जीवन में आज का दिन शांतिपूर्ण रहेगा. घर के बुजुर्गों का मार्गदर्शन और उनका स्नेहिल आशीर्वाद आपके लिए कठिन समय में संबल बनेगा और शुभ फलदायी सिद्ध होगा.

आज करें ये उपाय, मिलेगा लाभ
आज के दिन को और अधिक सकारात्मक व ऊर्जावान बनाने के लिए ज्योतिषीय उपायों का सहारा लें. वृश्चिक राशि वालों के लिए आज का शुभ भाग्यांक 6 रहेगा. जबकि शुभ वर्ण स्वर्णिम पीत है. आज का विशेष नवीन उपाय यह है कि प्रातःकाल उठकर स्नान आदि के पश्चात गाय को हरा चारा अथवा हरी घास अवश्य अर्पित करें. यह छोटा सा उपाय आपके जीवन में सौभाग्य के द्वार खोलेगा. आपको मानसिक शांति प्रदान करेगा. संक्षेप में कहें तो, आज जिसने परिश्रम के मार्ग को चुना, भाग्य भी उसी का पूरा साथ देगा.

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Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें



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मुजफ्फरपुर में कुख्यात गोविंद शर्मा की गोली मारकर हत्या: अपार्टमेंट में घुसकर चलाईं ताबड़तोड़ गोलियां; पूर्व मेयर समीर हत्याकांड का था शूटर – Muzaffarpur News




मुजफ्फरपुर में रविवार रात एक बड़ी आपराधिक वारदात सामने आई है। चर्चित पूर्व मेयर समीर कुमार हत्याकांड के आरोपी और कुख्यात शूटर गोविंदा शर्मा की गोली मारकर हत्या कर दी गई। घटना शहर के अमर सिनेमा रोड इलाके में हुई, जहां अपराधियों ने उसे निशाना बनाते हुए ताबड़तोड़ गोलियां बरसा दीं। घटना के बाद मौके पर कई थानों के पुलिस, एसडीपीओ टाउन-1 सुरेश कुमार, सिटी एसपी मोहिनबुल्ला अंसारी समेत एसएसपी कांतेश कुमार मिश्रा खुद मौके पर पहुंचे। पूर्व मेयर समीर हत्याकांड से जुड़ा था नाम गोविंदा शर्मा का नाम मुजफ्फरपुर के बहुचर्चित पूर्व मेयर समीर कुमार हत्याकांड में सामने आया था। आरोप है कि उसने अपने साथियों के साथ मिलकर AK-47 जैसे अत्याधुनिक हथियारों का इस्तेमाल करते हुए पूर्व मेयर समीर कुमार और उनके चालक की शहर में निर्मम हत्या की थी। इस हत्याकांड ने पूरे बिहार में सनसनी फैला दी थी। SSP ने की पुष्टि मुजफ्फरपुर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक कांतेश कुमार मिश्रा ने गोविंदा शर्मा की हत्या की पुष्टि की है। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है और हमलावरों की पहचान में जुटी हुई है। गैंगवार में हत्या की आशंका प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, पुलिस इस हत्याकांड को गैंगवार से जोड़कर देख रही है। गोविंदा शर्मा शहर के चर्चित शंभू-मंटू गिरोह का कुख्यात शूटर माना जाता था। अपराध जगत में उसकी सक्रिय भूमिका को देखते हुए पुलिस कई कोणों से मामले की जांच कर रही है।



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पानी पुरी नहीं बनती गोल, फूली, कुरकुरी, जानें आटा गूंथने, पूरियां बेलने-तलने का सही तरीका


Crispy golgappa puri recipe: पानी पुरी ठेले पर कहीं दिख जाए, तो कोई खाए या ना खाए, महिलाएं और लड़कियां बिना खाए नहीं मानती हैं. इनका फेवरेट होता है पानी पुरी. इसे देखते ही मुंह में पानी आ जाता है और बिना खाए रहा नहीं जाता है. पानी पुरी को कई नामों से भी जानते हैं जैसे पानी पताशी, बताशा, गोलगप्पा, पुचका, गुपचुप आदि. पानी पुरी छोटी गोल-गोल कुरकुरी होती है. पूरी तरह से फूली हुई पुरी इसकी पहचान होती है. काफी लोग घर पर भी गोलगप्पे बनाते हैं, लेकिन पुरी गोल, फूले और कुरकुरी नहीं बन पाती है. तो आखिर क्या ट्रिक है, जिससे पानी पुरी गोल बनती है?

पानी पुरी गोल, फूली और कुरकुरी बनाने के टिप्स

पानी पुरी की सबसे बड़ी पहचान उसकी कुरकुरी और पूरी तरह फूली हुई पुरी होती है. ऐसे में बेहद जरूरी है कि आप आटा सही से गूंथें और इसमें जरूरी चीजें डालें. आटा सही से नहीं गूंथा होगा, बेलेंगे गलत तरीके से पुरी तलते समय नहीं फूलेगी. ऐसे में आप नीचे बताए गए कुछ आसान बातों को ध्यान में रखें. घर पर भी बाजार जैसी फूली हुई गोलगप्पे की पुरी बना सकते हैं.

पानी पुरी के लिए कौन सा आटा लें?
इसके लिए आप सूजी, मैदा और गेहूं का आटा (ऑप्शनल) और गुनगुना पानी लें. फैमिली जितनी बड़ी है, उस हिसाब से आप ये सभी सामग्री लें. सूजी इसलिए जरूरी है, क्योंकि इससे कुरकुरापन आता है और देर तक पुरी खस्ता रहती है.

आटा गूंथने का सही तरीका
– जब भी पानी पुरी का आटा गूंथे तो सख्त हो, गीला नहीं. नर्म आटा होगा तो पुरी तेल में सही से नहीं फूलेगी.
– एक बार में ही बहुत अधिक पानी न डालें, बल्कि धीरे-धीरे पानी मिलाएं.
-आटे को अच्छी तरह से मसल कर गूंथें, कम से कम 10 मिनट तक. इससे आटा लचीला और सॉफ्ट होगा.
– गूंथते ही बेल कर तलने ना लगें, बल्कि इसे सेट होने के लिए छोड़ दें. कम से 30 मिनट के लिए गीले कपड़े से ढक कर रख दें.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

फायदा क्या होगा?
सूजी अच्छी तरह फूल जाती है.
पुरी बेलने में आसानी होती है.
तलने पर पुरी अच्छी तरह से फूल जाती है.

पानी पुरी बेलने का सही तरीका
लोई बराबर साइज में काटें. एक समान मोटाई रखें. ना तो बहुत पतली बेलें और ना ही बहुत मोटी. लगभग 1–1.5 मिमी मोटाई परफेक्ट मानी जाती है. जब बेल लें तो उसे काटने के लिए छोटे गोल कटर या ढक्कन की मदद लें. इससे सभी पूरियां एक समान आकार की होंगी. बेलने के बाद इन्हें हवा से सूखने न दें वरना ये फूलेंगी नहीं.पुरियों को गीले कपड़े से ढककर रखें, ताकि उनकी सतह सूखे नहीं.

तलते समय किन बातों का रखें ध्यान?
तेल अच्छी तरह गर्म होना चाहिए.
गुनगुने तेल में पुरी नहीं फूलेगी.
डालने के बाद पुरी पर कलछी से हल्का दबाव दें.
इससे पूरियां तुरंत फूलने लगेंगी.
एक बार में ज्यादा पुरी न डालें.

पुरी न फूलने के आम कारण
आटा बहुत नरम होना
आटे को आराम न देना
पुरी बहुत मोटी या बहुत पतली बेलना
तेल का पर्याप्त गर्म न होना
आटे में ज्यादा मैदा डालना



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नमक की गुफाओं में रखता है अमेरिका अपना क्रूड, जानिए कहां है भारत की अभेद्य तेल तिजोरी


नई दिल्ली. दुनिया में जब भी कोई बड़ा युद्ध, भू राजनीतिक संकट या तेल सप्लाई पर खतरा मंडराता है, तो सबसे ज्यादा चिंता उन देशों को होती है जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करते हैं. भारत भी उन्हीं देशों में शामिल है, क्योंकि देश अपनी कुल जरूरत का करीब 85 फीसदी कच्चा तेल विदेशों से मंगाता है. ऐसे में अगर किसी वजह से तेल की सप्लाई रुक जाए या समुद्री मार्ग प्रभावित हो जाएं, तो देश की अर्थव्यवस्था पर बड़ा असर पड़ सकता है. इसी खतरे को देखते हुए भारत ने जमीन के नीचे ऐसी विशाल तेल तिजोरियां तैयार की हैं, जो संकट के समय देश की ऊर्जा सुरक्षा की सबसे मजबूत ढाल बनती हैं. इन भूमिगत भंडारों को स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व (SPR) कहा जाता है. हाल के दिनों में पश्चिम एशिया संकट और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज को लेकर बढ़ती चिंताओं के बीच ये तेल भंडार एक बार फिर चर्चा में आ गए हैं.

स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व किसी देश द्वारा आपातकालीन परिस्थितियों के लिए जमा किया गया कच्चे तेल का विशेष भंडार होता है. इसका इस्तेमाल तब किया जाता है जब अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई बाधित हो जाए, युद्ध छिड़ जाए, समुद्री रास्ते बंद हो जाएं या तेल की कीमतों में अचानक भारी उछाल आ जाए. दुनिया के कई बड़े देशों के पास ऐसे रणनीतिक भंडार हैं. अमेरिका, चीन, जापान, दक्षिण कोरिया और भारत जैसे देश अपनी ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के लिए इस तरह के रिजर्व बनाकर रखते हैं.

अमेरिका की नमक की गुफाएं और भारत का चट्टानी किला

अमेरिका का स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व मुख्य रूप से टेक्सास और लुइजियाना में मौजूद विशाल प्राकृतिक नमक की गुफाओं यानी सॉल्ट केवर्न्स में रखा जाता है. नमक की परतें तेल को सुरक्षित रखने के लिए बेहद उपयुक्त मानी जाती हैं क्योंकि इनमें रिसाव का खतरा बहुत कम होता है और स्टोरेज लागत भी अपेक्षाकृत कम रहती है. भारत के पास ऐसी प्राकृतिक नमक गुफाएं उपलब्ध नहीं हैं. इसलिए भारतीय इंजीनियरों ने अलग रास्ता अपनाया. देश के दक्षिणी हिस्से की मजबूत ग्रेनाइट चट्टानों को काटकर विशाल भूमिगत रॉक केवर्न्स तैयार किए गए. इन गुफाओं को अत्याधुनिक वाटर सीलिंग तकनीक से सुरक्षित बनाया गया है ताकि कच्चा तेल बाहर न निकल सके और लंबे समय तक सुरक्षित रहे.

कहां हैं भारत की तेल तिजोरियां?

भारत के पहले चरण के स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व तीन प्रमुख स्थानों पर बनाए गए हैं.

विशाखापत्तनम (Visakhapatnam), आंध्र प्रदेश – 1.33 MMT
मैंगलोर (Mangaluru), कर्नाटक – 1.5 MMT
पाडुर (Padur), कर्नाटक – 2.5 MMT

इन तीनों की कुल क्षमता लगभग 5.33 मिलियन मीट्रिक टन है. इन स्थानों का चयन भी रणनीतिक रूप से किया गया है क्योंकि ये समुद्री बंदरगाहों के काफी करीब हैं. इससे आयातित कच्चे तेल को सीधे पाइपलाइन के जरिए भंडारों तक पहुंचाना आसान हो जाता है.

परमाणु हमला भी नहीं कर सकता बड़ा नुकसान

भारत की ये भूमिगत तेल तिजोरियां सामान्य तेल टैंकों से पूरी तरह अलग हैं. जमीन के सैकड़ों फीट नीचे होने के कारण ये हवाई हमलों, आतंकी हमलों, आगजनी और कई प्राकृतिक आपदाओं से काफी हद तक सुरक्षित मानी जाती हैं. विशेषज्ञों के मुताबिक भूमिगत रॉक केवर्न्स में रखा गया तेल सतह पर मौजूद विशाल स्टोरेज टैंकों की तुलना में कहीं ज्यादा सुरक्षित रहता है. यही वजह है कि दुनिया के कई देश अब भूमिगत भंडारण को प्राथमिकता दे रहे हैं.

संकट में कितने दिन चलेगा भारत?

भारत के मौजूदा स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व में मौजूद तेल देश की लगभग 9.5 दिनों की जरूरत पूरी कर सकता है. हालांकि तस्वीर इससे कहीं बड़ी है. देश की सरकारी और निजी रिफाइनिंग कंपनियों के पास भी बड़ी मात्रा में कमर्शियल स्टॉक मौजूद रहता है. SPR और कमर्शियल स्टॉक को मिलाकर भारत के पास लगभग 74 दिनों तक की जरूरत पूरी करने लायक तेल भंडार उपलब्ध रहता है. यानी अगर किसी वजह से वैश्विक सप्लाई अचानक बाधित हो जाए, तब भी भारत के पास कुछ समय तक हालात संभालने का मजबूत बैकअप मौजूद है.

1991 के संकट से मिला था सबक

भारत में स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व की सोच अचानक नहीं आई. 1991 के खाड़ी युद्ध और उसके बाद पैदा हुए ऊर्जा संकट ने यह एहसास कराया कि आयातित तेल पर अत्यधिक निर्भरता देश के लिए बड़ा जोखिम बन सकती है. इसके बाद विभिन्न समितियों और ऊर्जा विशेषज्ञों ने सुझाव दिया कि भारत को भी अमेरिका और जापान की तरह रणनीतिक तेल भंडार तैयार करने चाहिए. इसी सोच ने आगे चलकर SPR परियोजना का रूप लिया.

अब शुरू हो रहा है दूसरा चरण

भारत अब स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व के दूसरे चरण पर भी तेजी से काम कर रहा है. इसके तहत दो नई परियोजनाएं प्रस्तावित हैं.

चंडीखोल (Chandikhol), ओडिशा – 4 MMT
पाडुर विस्तार (Padur Expansion), कर्नाटक – 2.5 MMT

इन दोनों परियोजनाओं के पूरा होने के बाद देश की कुल रणनीतिक भंडारण क्षमता में करीब 6.5 MMT की अतिरिक्त बढ़ोतरी होगी.

विदेशी कंपनियों को भी मिलेगी जगह

दूसरे चरण की एक बड़ी खासियत यह है कि इसे पब्लिक प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल के तहत विकसित किया जा रहा है. इसमें विदेशी तेल कंपनियों को भी भंडारण की सुविधा दी जाएगी. संयुक्त अरब अमीरात की तेल कंपनी एडीएनओसी (ADNOC) पहले ही भारत के रणनीतिक भंडारों में तेल स्टोर कर चुकी है. इससे भारत को दोहरा फायदा मिलता है. एक तरफ निवेश का बोझ कम होता है, वहीं दूसरी तरफ जरूरत पड़ने पर अतिरिक्त तेल तक पहुंच भी आसान हो जाती है.

क्यों अहम है स्ट्रेट ऑफ होर्मुज?

भारत के आयातित कच्चे तेल का बड़ा हिस्सा पश्चिम एशिया से आता है और उसकी सप्लाई का प्रमुख रास्ता स्ट्रेट ऑफ होर्मुज है. दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों में शामिल यह रास्ता वैश्विक तेल व्यापार की लाइफलाइन माना जाता है. जब भी इस क्षेत्र में तनाव बढ़ता है, भारत समेत कई देशों की ऊर्जा सुरक्षा को लेकर चिंताएं बढ़ जाती हैं. ऐसे समय में जमीन के नीचे बनी ये विशाल तेल तिजोरियां देश के लिए सुरक्षा कवच का काम करती हैं. यही वजह है कि भारत की स्ट्रेटेजिक पेट्रोलियम रिजर्व व्यवस्था को सिर्फ तेल भंडारण परियोजना नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा और आर्थिक स्थिरता से जुड़ा एक महत्वपूर्ण इंफ्रास्ट्रक्चर माना जाता है.



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गोवा में भाजपा सरकार बिल्डरों के लिए काम कर रही: केजरीवाल बोले- गोवा बिकने के लिए नहीं है, आप सभी अनुमतियों को रद्द करेगी – New Delhi News




आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने गोवा के कारापुर-श्रवण गांव में अपनी जमीन, गांव और पर्यावरण बचाने के लिए धरने पर बैठे ग्रामीणों को समर्थन दिया है। रविवार को वह पार्टी की गोवा प्रभारी आतिशी के साथ धरने में भी शामिल हुए। इस दौरान उन्होंने कहा कि गोवा में भाजपा सरकार बिल्डरों के लिए काम कर रही है और जनता अपनी जमीन बचाने के लिए संघर्ष कर रही है। आम आदमी पार्टी की सरकार धारा 39(ए) और इसके तहत दी गई सभी अनुमतियों को रद्द करेगी। उन्होंने कहा कि गोवा बिकने के लिए नहीं है। ‘‘आप’’ की सरकार बनते ही सारे हाउसिंग प्रोजेक्ट खत्म किए जाएंगे और गोवा के लोगों और ग्राम सभाओं से पूछ कर विकास कार्य किए जाएंगे। बोले-लोगों के धरने का समर्थन करने पहुंचा हूं कारापुर-श्रवण गांव में चल रहे धरने में शामिल होने के दौरान अरविंद केजरीवाल ने कहा कि मैं दिल्ली से विशेष रूप से इन लोगों के धरने का समर्थन करने के लिए पहुंचा हूं। गोवा धरती की सबसे खूबसूरत जगहों में से एक है। टीसीपी एक्ट के सेक्शन 39ए के तहत लैंड यूज बदलने की जो परमिशन दी गई है, उसमें हितों का गंभीर टकराव है। इसलिए जमीन के इस कन्वर्जन की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए। एक महीने के अंदर हाउसिंग प्रोजेक्ट खत्म किया जाएगा अरविंद केजरीवाल ने कहा कि आम आदमी पार्टी की सरकार बनने के महज एक महीने के अंदर इस हाउसिंग प्रोजेक्ट को खत्म कर दिया जाएगा। हमारी सरकार पूर्वव्यापी प्रभाव से कानून लाएगी और इसके तहत पास किए गए सभी प्रोजेक्ट को रद्द किया जाएगा। गोवा में जो भी विकास कार्य होगा, वह यहां के लोगों और गांव की ग्राम सभाओं से पूछकर ही होना चाहिए। ईमानदार सरकार के लिए प्रचार करना चाहिए अरविंद केजरीवाल ने कहा कि जनता को खुद मिलकर एक ईमानदार सरकार के लिए प्रचार करना चाहिए। आम आदमी पार्टी दिल्ली में शानदार सरकार चला चुकी है और अब पंजाब में भी चला रही है और वहां के अच्छे कामों से यह साबित होता है कि यह एक ईमानदार पार्टी है। जब यहां आम आदमी पार्टी की सरकार आएगी, तो वह सारे प्रोजेक्ट कैंसिल करेगी और गांव वालों को उनकी जमीन वापस दिलाएगी। बोले- गोवा बिकाऊ नहीं है अरविंद केजरीवाल ने एक्स पर कहा कि गोवा की भाजपा सरकार बिल्डर्स और कॉलोनाइजर्स के लिए काम करती है, जबकि गोवा के लोगों को अपनी जमीन, गांवों और पर्यावरण की लड़ाई लड़ने के लिए उनके हाल पर छोड़ दिया गया है। आज कारापुर-श्रवण में, मैंने गांव वालों को भरोसा दिलाया कि “आप” सरकार सेक्शन 39ए को रद्द करेगी और इसके तहत दी गई सभी परमिशन वापस लेगी। गोवा बिकाऊ नहीं है। गांव के लोगों के लिए खेती बहुत महत्वपूर्ण वहीं, मीडिया से बातचीत के दौरान अरविंद केजरीवाल ने कहा कि कारापुर गांव के लोग उस प्रोजेक्ट के खिलाफ धरने पर बैठे हैं, जो इस इलाके में चल रहा है। गांव के लोग चाहते हैं कि यह प्रोजेक्ट नहीं होना चाहिए क्योंकि यहां का जो पठार है, वह गांव के लोगों की खेती और उनके जीवन के लिए बहुत महत्वपूर्ण है। उसी पठार से सारा ग्राउंड वाटर रिचार्ज होता है, जिसकी वजह से यहां खेती होती है। इसके अलावा यह पूरा इलाका इकोलॉजिकली सेंसिटिव है और पर्यावरण के लिहाज से बहुत महत्वपूर्ण है। इस प्रोजेक्ट से गोवा का पर्यावरण खराब होगा अरविंद केजरीवाल ने बताया कि यहां 5.5 लाख वर्ग मीटर जमीन पर एक बिल्डर दो हजार से ज्यादा ड्वेलिंग यूनिट बनाएगा, जिन्हें देश-विदेश से आकर लोग खरीदेंगे। यहां एक तरह से नई टाउनशिप बनाई जाएगी। गोवा अपनी प्राकृतिक सुंदरता के लिए पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है, लेकिन इस प्रोजेक्ट से यहां की पूरी प्राकृतिक सुंदरता और पर्यावरण खराब हो जाएगा। यहां के लोगों की खेती खत्म हो जाएगी। लोगों के इस जमीन पर टिनेंसी राइट हैं, उसका भी ख्याल नहीं रखा गया। लोग यहां काजू उगाते हैं और तरह-तरह की खेती करते हैं, वह सब भी खत्म हो जाएगी। जमीन बेचकर मंत्री को करोड़ों का फायदा होगा अरविंद केजरीवाल ने आगे कहा कि यहां लोग यह आरोप लगा रहे हैं कि यह जमीन किसी मंत्री की है। मैं मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत से पूछना चाहता हूं कि यह किस मंत्री की जमीन है? इस जमीन को बेचने से उस मंत्री को करोड़ों-अरबों का फायदा होगा। टीसीपी एक्ट के सेक्शन 39ए के तहत इस एग्रीकल्चरल लैंड का लैंड यूज बदलने की परमिशन दी गई है। ऐसा आरोप लग रहा है कि जिस बिल्डर को यह जमीन दी गई है, वह भी भाजपा से जुड़ा हुआ है। उस बिल्डर को भी करोड़ों-अरबों का फायदा होगा। लेकिन गोवा और इस गांव के लोगों को क्या मिलेगा? इस गांव के लोगों को तो सिर्फ बर्बादी मिलेगी। उनका जीवन और खाना-पीना सब बर्बाद हो जाएगा। सिर्फ बिल्डर और जमीन का मालिक ही कमाएगा। भाजपा दो साल पहले सेक्शन 39ए लाई अरविंद केजरीवाल ने कहा कि भाजपा सरकार दो साल पहले यह सेक्शन 39ए लाई थी और इसके तहत पूरे गोवा में इस तरह की कई परमिशन दी गई हैं। यह केवल बिल्डर्स और कॉलोनाइजर्स की सरकार है, जो पूरे गोवा को बर्बाद करने पर तुली हुई है। सेक्शन 39ए के तहत खूब भ्रष्टाचार हो रहा है। मैंने इन लोगों को यह आश्वासन और भरोसा दिया है कि भाजपा की सरकार कुछ नहीं करने वाली है। चुनाव में कुछ ही महीने रह गए हैं, इसलिए आम आदमी पार्टी को वोट देकर हमारी सरकार लाइए। हमारी सरकार आने पर सेक्शन 39ए को स्क्रैप किया जाएगा और इसके तहत पास किए गए सारे प्रोजेक्ट भी स्क्रैप किए जाएंगे। इससे पहले सेक्शन 17(2) था और उसमें भी ऐसे ही प्रावधान थे, उसके तहत दिए गए प्रोजेक्ट को भी स्क्रैप किया जाएगा। साथ ही, सेक्शन 16बी के तहत पास किए गए प्रोजेक्ट भी स्क्रैप किए जाएंगे। हम धरने पर बैठे कारापुर और गोवा के सभी लोगों के साथ हैं और हम मांग करते हैं कि यह प्रोजेक्ट स्क्रैप किया जाए। महिलाओं ने सरकार को पीछे हटने पर मजबूर किया इस दौरान ‘‘आप’’ गोवा प्रभारी आतिशी ने कहा कि चिंबल में जब आंदोलन हुए थे तो उसमें सबसे आगे चिंबल की महिलाएं थीं। महिलाओं की हिम्मत ने सरकार को भी पीछे हटने पर मजबूर कर दिया और वह प्रोजेक्ट खत्म करना पड़ा। आज भी कारापुर के लोग इस लड़ाई में अकेले नहीं हैं, बल्कि पूरा गोवा कारापुर के लोगों के साथ है। हम लोग भी कारापुर के लोगों का साथ देने के लिए दिल्ली से आए हैं। आतिशी बोलीं- गोवा देश की धरोहर आतिशी ने कहा कि गोवा की जो प्राकृतिक सुंदरता और पर्यावरण है, वह पूरे देश की धरोहर है। पूरे विश्व में गोवा से सुंदर जगह नहीं है, चाहे यहां के जंगल हों, समुद्र हो या नदियां हों। लेकिन उसी सौंदर्य को गोवा के नेता खत्म करना चाहते हैं क्योंकि वह अपनी जेब भरना चाहते हैं। वह पहले खेती की जमीन खरीदते हैं, धारा 39 ए के माध्यम से उसका लैंड यूज़ बदलते हैं, बड़े-बड़े बिल्डर को बुलाते हैं और सब लोग करोड़ो रुपए अपनी जेब में डालते हैं। आतिशी ने कहा कि इस आंदोलन को खत्म करने के लिए धमकी भी दी गई होगी और पैसा का लालच भी दिया गया होगा। लेकिन अपने गांव, खेत और पूरे गोवा को बचाने के लिए आप लोग डटे हुए हैं, उसके लिए आप सबको सलाम है। आम आदमी पार्टी आप लोगों के संघर्ष में आपके साथ है। भाजपा सरकार से कोई उम्मीद नहीं कर सकते। धारा 39 ए का गलत इस्तेमाल सिर्फ कारापुर में नहीं, बल्कि गोवा के हर हिस्से में हो रहा है। आतिशी ने कहा कि गोवा में सबसे पहले सस्ते दामों में खेती की जमीन खरीदी जाती है और धारा 39 ए के तहत उसको मेगा प्रोजेक्ट में बदल दिया जाता है। हर जगह भाजपा का कोई बड़ा नेता उस मामले से जुड़ा होता है। गोवा में आम आदमी पार्टी की सरकार बनने ही धारा 39 ए को खत्म किया जाएगा। इसके तहत आज तक जितनी भी परियोजनाओं को मंजूरी मिली है, उन सबको निरस्त किया जाएगा और गोवा की जमीन गोवा के लोगों को दी जाएगी। इसके साथ ही धारा 17 (2) के तहत जो आदेश दिए गए हैं, उनको भी निरस्त किया जाएगा। आगे से किसी भी परियोजना का आदेश इन नेताओं और बिल्डरों से पूछकर नहीं, बल्कि गांव के लोगों से पूछकर दिया जाएगा।



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अभ्यर्थी बोले -प्राध्यापक भर्ती परीक्षा का पेपर रहा आसान: 60 प्रतिशत से ज्यादा रही उपस्थिति, जोधपुर सहित विभिन्न जिलों से पहुंचे परीक्षार्थी – Jodhpur News




जिला परीक्षा समन्वयक अंजुम ताहिर सम्मा ने बताया कि परीक्षा के प्रथम सत्र में सामान्य अध्ययन एवं सामान्य जागरूकता विषय की परीक्षा प्रातः 10 बजे से 11:30 बजे तक आयोजित की गई। इसके लिए जिले में कुल 84 परीक्षा केंद्र स्थापित किए गए थे, जिनमें 50 राजकीय एवं 34 निजी विद्यालय शामिल थे। वहीं पेपर देकर बाहर निकले स्टूडेंट्स ने दोनों पेपर को पिछले मुकाबले में आसान बताया। पहली पारी में 60.79 प्रतिशत रही उपस्थिति पहली पारी में कुल 26 हजार 266 अभ्यर्थी पंजीकृत थे, जिनमें से 15 हजार 966 अभ्यर्थी परीक्षा में सम्मिलित हुए, जबकि 10 हजार 300 अनुपस्थित रहे। इस सत्र में उपस्थिति प्रतिशत 60.79 दर्ज किया गया। दूसरी पारी में हिन्दी विषय की परीक्षा आयोजित दूसरी पारी में हिन्दी विषय की परीक्षा दोपहर 2 बजे से सायं 5:30 बजे तक आयोजित की गई। इस सत्र में कुल 11 हजार 785 अभ्यर्थी पंजीकृत थे, जिनमें से 7 हजार 406 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी, जबकि 4 हजार 379 अभ्यर्थी अनुपस्थित रहे। इसमें उपस्थिति प्रतिशत 62.84 रहा। विभिन्न जिलों एवं राज्यों से पहुंचे अभ्यर्थी परीक्षा में जोधपुर जिले के अतिरिक्त बाड़मेर, जैसलमेर, बालोतरा, पाली एवं फलौदी सहित प्रदेश के विभिन्न जिलों से बड़ी संख्या में अभ्यर्थी शामिल हुए। इसके साथ ही राज्य के बाहर से भी परीक्षार्थी परीक्षा में सम्मिलित होने के लिए जोधपुर पहुंचे। सुरक्षा एवं निगरानी के रहे पुख्ता इंतजाम परीक्षा के सुचारु एवं निष्पक्ष संचालन के लिए सभी परीक्षा केंद्रों पर सुरक्षा एवं निगरानी की समुचित व्यवस्था की गई थी। जिला प्रशासन, शिक्षा विभाग एवं पुलिस प्रशासन के समन्वय से परीक्षा केंद्रों पर निर्धारित दिशा-निर्देशों की प्रभावी पालना सुनिश्चित की गई।



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