Friday, August 7, 2026
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ट्रैक्टर-टैंकर गहरे गड्ढे में बेकाबू होकर पलटा: टूटी सड़क के कारण हुआ हादसा, बाल-बाल बचा ड्राइवर – Deeg News




डीग शहर के वार्ड नंबर 1 में शनिवार दोपहर करीब 1 बजे एक बड़ा हादसा टल गया। सड़क की बदहाल स्थिति के कारण पानी से भरा एक ट्रैक्टर-टैंकर गहरे गड्ढे में पलट गया। गनीमत रही कि ट्रैक्टर ड्राइवर को कोई गंभीर चोट नहीं आई और वह सुरक्षित बच गया। जानकारी के अनुसार, एक व्यक्ति शुक्रवार दोपहर अपने ट्रैक्टर के पीछे पानी का टैंकर लेकर वार्ड नंबर 1 में पानी भरने जा रहा था। रास्ते में सड़क का एक हिस्सा लंबे समय से टूटा हुआ था। जैसे ही ट्रैक्टर का पहिया टूटे हुए हिस्से पर पहुंचा, वह सड़क किनारे बने गड्ढे की ओर चला गया। ड्राइवर भी गड्ढे में जा गिरा
टैंकर में पानी भरा होने के कारण उसका वजन अधिक था। इससे ट्रैक्टर-टैंकर का संतुलन बिगड़ गया और पानी से भरा टैंकर सड़क किनारे बने गड्ढे में पलट गया। हादसे के दौरान ट्रैक्टर ड्राइवर भी टैंकर के साथ गड्ढे में जा गिरा था। टैंकर के पलटते ही मौके पर अफरा-तफरी मच गई। हादसे की आवाज सुनकर आसपास के मोहल्लेवासी तुरंत घटनास्थल पर पहुंचे। लोगों ने तत्परता दिखाते हुए ट्रैक्टर ड्राइवर को गड्ढे से बाहर निकाला। ड्राइवर के सुरक्षित बाहर निकलने पर लोगों ने राहत की सांस ली।
ट्रैक्टर ड्राइवर ने बताया कि वह प्रतिदिन वार्ड नंबर 1 में पानी भरने आता है और यह सड़क लंबे समय से टूटी हुई है, साथ ही किनारे पर गड्ढा भी बना हुआ है। सड़क की बदहाल स्थिति को लेकर स्थानीय लोगों में नाराजगी है।



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नीरज चोपड़ा हमेशा स्वर्ण पदक नहीं जीतेंगे, ऐसा होना नामुमकिन है, AFI चयन समिति के अध्यक्ष ने दिया बयान


भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) की चयन समिति के अध्यक्ष आदिल सुमारीवाला ने कहा है कि नीरज चोपड़ा भारत के लिए हमेशा गोल्ड मेडल नहीं जीत सकेंगे। कभी-कभी सिल्वर मेडल से भी संतोष करना पड़ेगा। हमेशा गोल्ड लाना नामुमकिन है। उन्होंने और भी बातें कहीं।

भारतीय एथलेटिक्स महासंघ (एएफआई) की चयन समिति के अध्यक्ष आदिल सुमारीवाला ने नीरज चोपड़ा की फिटनेस और फॉर्म को लेकर चिंताओं को खारिज करते हुए कहा कि ‘देश का यह महानतम एथलीट’ भी इंसान है और कभी कभार रजत पदक हासिल करने पर उनकी आलोचना नहीं की जानी चाहिए।

नीरज चोपड़ा ने दिखाई है निरंतरता, हर बार गोल्ड जीतना असंभव

दो बार के ओलंपिक पदक विजेता भाला फेंक खिलाड़ी और पिछले लगभग एक साल से पीठ के निचले हिस्से में दर्द से परेशान रहे 28 वर्षीय चोपड़ा ने पिछले महीने ग्लास्गो में राष्ट्रमंडल खेलों में 86.48 मीटर का सर्वश्रेष्ठ प्रयास के साथ रजत पदक जीता था। उन्होंने 2018 में इसी प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक हासिल किया था। वह 2022 में राष्ट्रमंडल खेलों में हिस्सा नहीं ले पाए थे। सुमारीवाला ने कहा कि 2016 में 86.48 मीटर का जूनियर विश्व रिकॉर्ड बनाने के बाद से वैश्विक मंच पर चोपड़ा ने अपने प्रदर्शन में जिस तरह की निरंतरता दिखाई है उसके लिए उनकी प्रशंसा की जानी चाहिए। सुमारीवाला ने पीटीआई से कहा, ”चोट से उबरने के बाद वापसी करते हुए रजत पदक जीतना शानदार प्रदर्शन है। हमें पूरा भरोसा है कि आने वाले दिनों में उनका प्रदर्शन और बेहतर होगा।” उन्होंने कहा, ”ऐसा नहीं है कि वह हमेशा स्वर्ण पदक ही जीतेंगे। ऐसा होना नामुमकिन है। रजत पदक भी मिलते हैं। वह भी इंसान हैं। हमें इस चर्चा को यहीं खत्म कर देना चाहिए। हमें उनके रजत पदकों का भी जश्न मनाना चाहिए।”

राष्ट्रीय भाला फेक दिवस है आज, नीरज ने जीता था सोना

भारतीय एथलेटिक्स महासंघ सात अगस्त को राष्ट्रीय भाला फेंक दिवस के रूप में मनाता है क्योंकि चोपड़ा ने 2021 में तोक्यो ओलंपिक खेलों में इसी दिन स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रचा था।चोपड़ा को पिछले साल सितंबर में विश्व चैंपियनशिप से दो सप्ताह पहले पीठ के निचले हिस्से में चोट लग गई थी। उन्होंने इस साल जून में दोहा डायमंड लीग में वापसी की, जहां वह चौथे स्थान पर रहे।वह अब 21 अगस्त को लुसाने डायमंड लीग में और चार और पांच सितंबर को ब्रुसेल्स में डायमंड लीग फाइनल में हिस्सा लेंगे। इसके बाद सितंबर अक्टूबर में एशियाई खेलों में भी सभी की निगाह उन पर टिकी रहेगी। पिछले एक साल से उनकी फिटनेस चर्चा का विषय बनी हुई है। माना जा रहा है कि चोट के कारण चोपड़ा अपनी सर्वश्रेष्ठ फॉर्म में वापसी करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। सुमारीवाला ने कहा कि चोपड़ा की प्रतिबद्धता पर संदेह नहीं किया जाना चाहिए।

जो भी पदक जीते हैं बोनस के रूप में लेना चाहिए

उन्होंने कहा, ”आपको दो ओलंपिक पदक, एक स्वर्ण और एक रजत, किसने दिए हैं। आपको विश्व चैंपियनशिप में स्वर्ण, जूनियर विश्व रिकॉर्ड और एक स्वर्ण पदक किसने दिया है। आपको एशियाई खेलों में स्वर्ण, राष्ट्रमंडल खेलों में स्वर्ण और रजत तथा एशियाई चैंपियनशिप में स्वर्ण पदक किसने दिया है। उन्होंने जो भी पदक जीता है, हमें उसे बोनस के रूप में लेना चाहिए।” सुमारीवाला ने कहा, ”इसलिए जब वह रजत पदक भी जीत लें तो हमें उस पर अगर मगर नहीं कर नहीं चाहिए। उन्हें जो भी करना होगा, वह करेंगे और वह यह जानते हैं। वह भारत के अब तक के महानतम एथलीट हैं।” इस बीच सुमारीवाला ने सेबेस्टियन को के उत्तराधिकारी के रूप में विश्व एथलेटिक्स के अध्यक्ष पद के लिए अपनी दावेदारी पेश कर दी है। चुनाव अगले साल सितंबर में होंगे। उन्होंने कहा, ”मैं विश्व एथलेटिक्स परिषद के सदस्य के रूप में दो कार्यकाल और उपाध्यक्ष के रूप में एक कार्यकाल पूरा कर चुका हूं। मेरे पास सभी योग्यताएं हैं, चाहे वह शैक्षणिक हों या अनुभव। मुझे लगता है कि मैं इस पद के लिए पूरी तरह से योग्य हूं। मैंने अपना नामांकन दाखिल कर दिया है।”

(फिलेम दीपक सिंह)



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एसपी मऊ ने पुलिस लाइन कार्यालयों का निरीक्षण किया: रजिस्टरों व अभिलेखों के नियमित अद्यतन के दिए निर्देश – Mau News


सुशील सिंह | मऊ3 मिनट पहले

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मऊ पुलिस अधीक्षक कमलेश बहादुर ने शुक्रवार सुबह पुलिस लाइन स्थित विभिन्न शाखा कार्यालयों और गार्दों का सघन निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने कार्यालयों में रखे जाने वाले रजिस्टरों, अभिलेखों और अन्य महत्वपूर्ण दस्तावेजों का बारीकी से अवलोकन किया।

एसपी ने संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों से अभिलेखों के रखरखाव तथा कार्यालयों की कार्यप्रणाली के संबंध में जानकारी ली। उन्होंने रजिस्टरों के नियमित अद्यतन, अभिलेखों के व्यवस्थित रखरखाव और आवश्यक दस्तावेजों के समयबद्ध संधारण पर विशेष जोर दिया।

पुलिस अधीक्षक ने निर्देश दिए कि सभी रजिस्टरों में प्रविष्टियां समय पर की जाएं और अभिलेखों के संधारण में किसी भी स्तर पर लापरवाही न बरती जाए। उन्होंने अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अपने-अपने दायित्वों का पूरी जिम्मेदारी और गंभीरता के साथ निर्वहन करने को कहा।

निरीक्षण के दौरान, एसपी ने पुलिस लाइन परिसर में स्वच्छता, अनुशासन और अन्य व्यवस्थाओं का भी जायजा लिया। उन्होंने कर्मचारियों को कार्यालयों और आसपास के क्षेत्रों में साफ-सफाई बनाए रखने तथा पुलिस लाइन की व्यवस्थाओं को बेहतर रखने के निर्देश दिए।

उन्होंने स्पष्ट किया कि कार्यालयीन अभिलेख पुलिस व्यवस्था का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं, इसलिए इनका सही और समयबद्ध संधारण आवश्यक है। पुलिस अधीक्षक ने बताया कि नियमित निरीक्षण का उद्देश्य पुलिस व्यवस्था को अधिक प्रभावी, पारदर्शी और उत्तरदायी बनाना है।

इसके माध्यम से कार्यालयों की कार्यप्रणाली की समीक्षा के साथ-साथ कमियों को समय रहते दूर किया जा सकता है। उन्होंने सभी संबंधित अधिकारियों एवं कर्मचारियों को अनुशासन, स्वच्छता और कार्यप्रणाली के उच्च मानकों को बनाए रखने तथा जनहित एवं विभागीय कार्यों को प्राथमिकता के आधार पर समयबद्ध तरीके से पूरा करने के निर्देश दिए।



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सीवान में 81 सफाईकर्मियों की सेवा समाप्ति आदेश रद्द: 24 घंटे में ही पलटा फैसला, 30 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर है कर्मी – Siwan News




सीवान नगर परिषद में इन दिनों प्रशासनिक निर्णय और जनप्रतिनिधियों की भूमिका को लेकर बड़ा सवाल खड़ा हो गया है। सफाई कर्मियों की सात दिनों से जारी अनिश्चितकालीन हड़ताल के बीच नगर कार्यपालक पदाधिकारी नीलम गुप्ता द्वारा दैनिक पारिश्रमिक पर कार्यरत 81 सफाई कर्मियों और कुलियों की सेवा समाप्त करने का आदेश जारी किया गया। लेकिन इस आदेश के महज 24 घंटे के भीतर ही नगर परिषद की विशेष बैठक बुलानी पड़ी और वार्ड पार्षदों की सर्वसम्मति से उसी निरस्तीकरण आदेश को निरस्त कर दिया गया। इस घटनाक्रम ने नगर परिषद की कार्यप्रणाली और प्रशासनिक अधिकारियों के निर्णय लेने के तरीके पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। दरअसल, नगर परिषद की सफाई व्यवस्था को लेकर कर्मी 30 जुलाई से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं। हड़ताल के कारण शहर के विभिन्न हिस्सों में कचरे का अंबार लगा है। प्रमुख सड़कों, चौक-चौराहों और मोहल्लों में गंदगी तथा दुर्गंध से आम लोगों की परेशानी लगातार बढ़ रही है। इसी बीच नगर कार्यपालक पदाधिकारी की ओर से आदेश जारी कर 81 दैनिक पारिश्रमिक कर्मियों का नियोजन तत्काल प्रभाव से समाप्त कर दिया गया। सेवा समाप्त करने का लिया निर्णय जारी आदेश में कहा गया कि इन कर्मियों का नियोजन दैनिक पारिश्रमिक के आधार पर किया गया था, जबकि संबंधित पदों का विधिवत सृजन नहीं हुआ था। साथ ही नगर परिषद में आउटसोर्सिंग एजेंसी के चयन की प्रक्रिया पूरी होने के बाद इन कर्मियों की आवश्यकता नहीं रहने का हवाला दिया गया। विभागीय दिशा-निर्देशों का उल्लेख करते हुए उनके नियोजन को नियमसंगत नहीं बताते हुए सेवा समाप्त करने का निर्णय लिया गया। 24 घंटे में फैसला लिया गया वापस हालांकि, आदेश जारी होने के बाद निरस्त किए गए कर्मियों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन शुरू कर दिया। मामला बढ़ता देख नगर परिषद को महज 24 घंटे के भीतर विशेष बैठक बुलानी पड़ी। बैठक में वार्ड पार्षदों ने सर्वसम्मति से 81 कर्मियों के नियोजन को समाप्त करने संबंधी आदेश को ही निरस्त कर दिया। स्थानीय लोगों के बीच भी चर्चा है कि नगर परिषद का संचालन आखिर किसके निर्णय से हो रहा है—आम जनता द्वारा चुने गए सभापति, उपसभापति और वार्ड पार्षदों के माध्यम से या प्रशासनिक अधिकारियों के स्तर से? क्योंकि एक तरफ अधिकारी आदेश जारी करते हैं और दूसरी तरफ उसी आदेश को वापस लेने के लिए 24 घंटे के भीतर विशेष बैठक बुलानी पड़ती है। सबसे बड़ी बात यही है कि अगर अधिकारी का फैसला सही था तो 24 घंटे में क्यों पलटा और अगर फैसला गलत था तो इतना बड़ा आदेश जारी ही क्यों किया गया? नगर परिषद के इस पूरे घटनाक्रम ने प्रशासनिक निर्णय प्रक्रिया पर सवाल खड़े कर दिए हैं और अब लोगों की नजर इस बात पर है कि सफाई व्यवस्था और कर्मियों के मामले में आगे नगर परिषद क्या स्थायी फैसला लेती है।



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स्कूल में शिक्षक की तबीयत बिगड़ी, जिला अस्पताल में मौत: मौत का कारण जानने पुलिस ने कराया पोस्टमार्टम, जांच जारी – Balaghat (Madhya Pradesh) News




बालाघाट जिले के मलाजखंड के सूजी प्राथमिक स्कूल के शिक्षक लालचंद राठौर (54) की शुक्रवार को स्कूल में तबीयत बिगड़ने के बाद जिला अस्पताल में मौत हो गई। पुलिस ने मौत का कारण जानने के लिए शव का पोस्टमार्टम कराया है। भटेरा खैरी निवासी लालचंद राठौर स्कूल में पढ़ाते समय अचानक बेहोश हो गए थे। उन्हें तत्काल बिरसा अस्पताल ले जाया गया। हालत में सुधार न होने पर उन्हें बालाघाट जिला अस्पताल रेफर किया गया, जहां ड्यूटी डॉक्टर ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। अस्पताल चौकी पुलिस ने शिक्षक का शव बरामद कर परिजनों की मौजूदगी में पंचनामा कार्रवाई की। इसके बाद शव का पोस्टमार्टम कराकर परिजनों को सौंप दिया गया। शिक्षक की मौत हार्ट अटैक से हुई है या कोई अन्य कारण है, यह पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पुलिस जांच के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा। अस्पताल चौकी पुलिस ने बताया कि मामले में शून्य पर मर्ग कायम कर डायरी संबंधित थाने भेजी जाएगी। संबंधित थाना मामले की अग्रिम जांच करेगा। परिजन बोले- बेहोश होने की जानकारी मिली थी परिजन रवि ने बताया कि उन्हें जीजाजी के बेहोश होने की जानकारी मिली थी। वे बिरसा अस्पताल पहुंचे और वहां से उन्हें जिला अस्पताल लाया गया। डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। परिजनों को हार्ट अटैक से मौत होने की आशंका है, लेकिन वास्तविक वजह जानने के लिए पोस्टमार्टम कराया गया है।



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थाईलैंड के स्कूल में छात्र ने फायरिंग की: 6 लोगों की मौत, कई घायल; हमलावर छात्र अस्पताल में भर्ती




थाईलैंड की राजधानी बैंकॉक के पास एक हाई स्कूल में शुक्रवार को एक छात्र ने अचानक गोलियां चला दीं। फायरिंग में 3 टीचर और 3 छात्रों की मौत हो गई, जबकि 15 लोग घायल हैं। इनमें दो की हालत गंभीर बताई जा रही है। पुलिस के मुताबिक, घटना नोंथाबुरी प्रांत के डेबसिरिन नोंथाबुरी स्कूल में हुई। फायरिंग करने वाले छात्र को भी गंभीर हालत में अस्पताल में भर्ती कराया गया है। शुरुआती जांच में पता चला है कि छात्र ने जिस बंदूक से फायरिंग की, वह उसके परिवार के किसी सदस्य की थी। उसने हमला क्यों किया, पुलिस अभी इसकी जांच कर रही है। गोलियां चलते ही क्लासरूम में छिप गए छात्र प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया कि जैसे ही गोलियों की आवाज आई, छात्र अपनी जान बचाने के लिए क्लासरूम में छिप गए। कुछ देर बाद पुलिस ने दरवाजा खटखटाकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाला। घटना के बाद स्कूल में अफरा-तफरी मच गई और बाहर मौजूद लोग एक-दूसरे को संभालते नजर आए। थाईलैंड में पहले भी हो चुकी हैं ऐसी घटनाएं थाईलैंड में स्कूलों और सार्वजनिक स्थानों पर फायरिंग की घटनाएं पहले भी सामने आई हैं। इसी साल फरवरी में दक्षिणी थाईलैंड के एक पब्लिक हाई स्कूल में 17 साल के एक छात्र ने पुलिस से बंदूक चुराकर फायरिंग की थी। उस दो घंटे के हमले में एक व्यक्ति की मौत हुई थी और दो लोग घायल हुए थे। वहीं, 2023 में बैंकॉक के एक बड़े शॉपिंग मॉल में 14 साल के लड़के पर फायरिंग करने का आरोप लगा था।



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बेकरी जैसी खारी खाने का मन है? बाजार से लाने की जरूरत नहीं, घर पर आटे से बनाएं


Khasta Khari Recipe: शाम की चाय के साथ कुरकुरी और हल्की ‘खारी’ का मज़ा दोगुना हो जाता है. वैसे तो लोग इसे अक्सर बेकरी से खरीदते हैं, लेकिन आप घर पर गेहूं के आटे से भी स्वादिष्ट और कुरकुरी ‘खारी’ बना सकते हैं यह तब एक बढ़िया विकल्प है जब आपके पास मैदा न हो या आप थोड़ी अतिरिक्त मेहनत करना चाहें. इस रेसिपी को बनाना आसान है और यह कम सामग्री के साथ जल्दी तैयार हो जाती है….

आवश्यक सामग्री
2 कप गेहूं का आटा, ½ कप ठंडा मक्खन या घी, ½ छोटा चम्मच नमक, ½ छोटा चम्मच हरी पाउडर, 2-3 बड़े चम्मच ठंडा दूध, ज़रूरत के हिसाब से ठंडा पानी, टॉपिंग के लिए थोड़ा दूध या घी,

आटा तैयार करना
सबसे पहले, एक बड़े बर्तन में गेहूं का आटा, नमक और बेकिंग पाउडर अच्छी तरह मिला लें. इसमें ठंडा मक्खन या घी डालें और मिश्रण को हाथों से तब तक मलें जब तक कि यह ब्रेडक्रंब जैसा न दिखने लगे. फिर, थोड़ा-थोड़ा करके दूध और ठंडा पानी डालें और एक सख्त आटा गूंथ लें। आटे को ढककर 20 मिनट के लिए फ्रिज में रख दें.

खारी बनाना
आराम दिए हुए आटे को हल्के हाथ से बेल लें. उस पर थोड़ा घी लगाएं, उसे मोड़ें और फिर से बेल लें. इस प्रक्रिया को 3-4 बार दोहराएं; इससे खारी में परतें बनती हैं, जिससे यह बेकरी-स्टाइल पेस्ट्री की तरह कुरकुरी बनती है.

अब, आटे को लगभग आधे इंच की मोटाई में बेल लें और इसे चौकोर या डायमंड शेप में काट लें. इन्हें बेकिंग ट्रे पर रखें और ऊपर से हल्का सा दूध या घी लगाएं.

ओवन को 180°C पर प्रीहीट करें. खारी को 20-25 मिनट तक या सुनहरा भूरा होने तक बेक करें. अगर आपके पास ओवन नहीं है, तो आप भारी तले वाले पैन या प्रेशर कुकर का इस्तेमाल कर सकते हैं, तले में नमक की एक परत फैलाएं, पेस्ट्री को अंदर रखें और मध्यम आंच पर 25-30 मिनट तक बेक करें.

स्वाद बढ़ाना
अतिरिक्त स्वाद के लिए, बेक करने से पहले खारी के ऊपर अजवाइन, कुटी हुई काली मिर्च, सूखी मेथी के पत्ते (कसूरी मेथी) या तिल छिड़क सकते हैं.

सेहत, रिलेशनशिप, लाइफ या धर्म-ज्योतिष से जुड़ी है कोई निजी उलझन तो हमें करें WhatsApp, आपका नाम गोपनीय रखकर देंगे जानकारी.

( Disclaimer : इस खबर में दी गई जानकारी और सलाह विशेषज्ञों से हुई बातचीत पर आधारित है. ये सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए किसी भी सलाह को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें. किसी भी नुकसान के लिए न्यूज-18 जिम्मेदार नहीं रहेगा.



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CBI का दावा- नीट पेपर लीक साजिश महीनों पहले हुई: NTA एक्सपर्ट्स पेपर तैयार करते समय सवाल याद कर लेते थे, छात्रों तक वॉट्सएप-टेलीग्राम से पहुंचा




नीट-यूपी 2026 पेपर लीक की साजिश परीक्षा से कई महीने पहले रची गई थी। CBI ने दिल्ली के राउज एवेन्यू कोर्ट में दाखिल 94 पेज की चार्जशीट में यह दावा किया है। जांच एजेंसी के मुताबिक, NTA के एक्सपर्ट्स ने पेपर तैयार करने के दौरान ही सवाल याद कर लिए थे। CBI चार्जशीट 28 जुलाई को दाखिल की गई थी, जिसकी जानकारी शुक्रवार को सामने आई। चार्जशीट के मुताबिक, एक्सपर्ट्स NTA ऑफिस से होटल लौटकर याद किए गए सवाल पर्चियों पर लिखते थे। इसके बाद इन्हें बिचौलियों और कोचिंग नेटवर्क के जरिए छात्रों तक पहुंचाया जाता था। CBI का दावा है कि लीक पेपर टेलीग्राम, वॉट्सएप, PDF और अन्य डिजिटल माध्यमों से भी फैलाए गए। CBI ने इस मामले में 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है। इनमें NTA के तीन एक्सपर्ट्स भी शामिल हैं। एजेंसी का आरोप है कि तीनों ने पेपर तैयार करने और मॉडरेशन के दौरान अपने पद का दुरुपयोग कर पेपर लीक किए। NTA एक्सपर्ट्स और बिचौलिए महीनों पहले संपर्क में आए CBI चार्जशीट के मुताबिक, नीट पेपर लीक किसी एक व्यक्ति की हरकत नहीं थी, बल्कि NTA एक्सपर्ट्स, प्राइवेट कोचिंग संचालकों, बिचौलियों और कुछ छात्रों की मिलीभगत से रची गई एक प्री-प्लान्ड साजिश थी। एजेंसी के अनुसार, कोचिंग संचालकों और बिचौलियों ने परीक्षा से कई महीने पहले ही NTA के तीनों एक्सपर्ट्स से संपर्क कर लिया था। इनके बीच लगातार बातचीत, मुलाकातों और पैसों के लेन-देन हुआ था। CBI ने बताया NTA एक्सपर्ट्स ने सवाल कैसे लीक किए वॉट्सएप और टेलीग्राम के जरिए छात्रों तक पहुंचा पेपर चार्जशीट में कोचिंग संचालक और डॉक्टर भी आरोपी CBI ने चार्जशीट में डॉ. अभंग प्रभु मेडिकल एकेडमी, पुणे के COO तेजस हर्षदकुमार शाह, रेणुकाई करियर सेंटर के मैनेजिंग पार्टनर शिवराज मोटेगांवकर और सिद्धिविनायक हॉस्पिटल के मालिक डॉ. मनोज भगवानराव शिरुरे को भी साजिश का हिस्सा बताया है। जांच के मुताबिक, इन लोगों ने NTA के बाहर पूरे नेटवर्क का संचालन किया और लीक पेपर छात्रों तक पहुंचाने में अहम भूमिका निभाई। CBI के मुताबिक, पेपर लीक का मकसद अवैध कमाई और कुछ कोचिंग संस्थानों के रिजल्ट बेहतर दिखाना था। CBI ने 13 आरोपियों के बैंक खाते-लॉकर फ्रीज किए चार्जशीट में कहा गया है कि एक आरोपी ने लीक पेपर मिलने के बाद अपने सर्टिफिकेट्स और साइन किया हुआ खाली चेक भी सिक्योरिटी के तौर पर दिया था। एजेंसी का दावा है कि इससे साफ होता है कि यह पूरी तरह पैसों का सौदा था। CBI ने आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की आपराधिक साजिश, धोखाधड़ी, आपराधिक विश्वासघात, सबूत मिटाने, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम और लोक परीक्षा (अनुचित साधनों की रोकथाम) अधिनियम, 2024 के तहत मामला दर्ज किया है। एजेंसी ने आरोपियों के बैंक खाते, बैंक लॉकर और एक डीमैट अकाउंट भी फ्रीज किए हैं। 13 आरोपी, 360 गवाह; CBI जांच में अब तक क्या-क्या हुआ पेपर लीक के बाद दोबारा परीक्षा हुई… जानें पूरा विवाद नीट-यूजी 2026 परीक्षा 3 मई 2026 को हुई थी। पेपर लीक के आरोपों के बाद सरकार और NTA ने परीक्षा रद्द कर दी। 21 जून को दोबारा परीक्षा कराई थी। इस दौरान देश भर में 20 से ज्यादा छात्रों ने सुसाइड किया था। ———- ये खबर भी पढ़ें… लोकसभा में आज पेपर लीक संशोधन बिल पर बोलेंगे राहुल:शाह जन्म-मृत्यु पंजीकरण बिल पेश करेंगे, सुप्रीम कोर्ट जजों की संख्या बढ़ाने वाला बिल भी आएगा लोकसभा में आज पेपर लीक से जुड़े ‘पब्लिक एग्जामिनेशन (अनुचित साधनों की रोकथाम) संशोधन विधेयक, 2026’ पर लगातार दूसरे दिन चर्चा होगी। पूरी खबर पढ़ें…



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57 सुरंगों और 108 खतरनाक मोड़ वाले इस जादुई रूट पर चलेगी वंदे भारत ट्रेन


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New Vande Bharat Express : बेंगलुरु-मंगलुरु रेलवे रूट पर पड़ने वाला सकलेशपुर-सुब्रह्मण्य रोड घाट सेक्शन को भारत के खतरनाक रेलवे टैक्‍स में माना जाता है. अब इस रूट पर भी वंदे भारत एक्‍सप्रेस चलाने की तैयारी है. 11 अगस्‍त से वंदे भारत के ट्रायल शुरू होंगे.

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इस रूट पर चलाने के लिए वंदे भारत में कुछ बदलाव किए गए हैं.

नई दिल्‍ली. जंगल, घाटियों, बहते झरनों और गहरी खाइयों के बीच से गुजरने वाला बेंगलुरु-मंगलुरु रेल सेक्शन सिर्फ एक रास्ता नहीं, बल्कि रोमांच से भरा एक अनूठा अनुभव है. पश्चिमी घाट की सुहानी वादियों के बीच स्थित सकलेशपुर-सुब्रह्मण्य रोड घाट सेक्शन को देश के सबसे कठिन रेल ट्रैक्स में गिना जाता है. अब इसी जादुई रूट पर वंदे भारत एक्सप्रेस दौड़ने वाली है. दक्षिण पश्चिम रेलवे 11 अगस्त से यहां सेमी-हाई-स्पीड वंदे भारत का ट्रायल रन शुरू करने जा रहा है.

यह रेल मार्ग जितना खूबसूरत है, उतना ही खतरनाक और तकनीकी रूप से चुनौतीपूर्ण भी है. सकलेशपुर से सुब्रह्मण्य रोड के बीच का यह 55 किलोमीटर लंबा पैच रेलवे इंजीनियरों की हमेशा परीक्षा लेता आया है. इस रूट पर पहाड़ों को काटकर बनाई गई 57 सुरंगें हैं, जिनमें से गुजरना एक रोमांचक अनुभव होता है.

108 तीखे मोड़ और 250 से ज्‍यादा पुल

सकलेशपुर-सुब्रह्मण्य रोड घाट सेक्शन 108 खतरनाक मोड़ हैं. पहाड़ी ढलाओं पर बने ये मोड़ ट्रेन की राइड को किसी रोलर-कोस्टर जैसा रोमांच देते हैं. इस रूट पर 250 से अधिक ऊंचे पुल गहरी खाइयों और बरसाती नदियों के ऊपर बनें हैं. 1:50 की सीधी खड़ी ढलान (Gradient) पर ट्रेन को संतुलित रखना सबसे बड़ी तकनीकी चुनौती है.

वंदे भारत मे लगाए गए हैं ऑटो इमरजेंसी ब्रेक

पहाड़ी ढलानों और तीखे मोड़ों पर एक स्व-चालित (Self-Propelled) ट्रेनसेट को संभालना आसान नहीं होता. इसी को ध्यान में रखते हुए रेलवे ने इस रूट पर चलाने के लिए 8-कोच वाली विशेष वंदे भारत ट्रेन तैयार की है. इसमें ऑटो इमरजेंसी ब्रेक (AEB) सिस्टम लगाया है.

कैसे काम करेगा यह सिस्टम?

जब ट्रेन नीचे की ओर ढलान पर उतरेगी और अगर उसकी स्पीड तय सीमा से थोड़ी भी ज्यादा होगी, तो इमरजेंसी ब्रेक सिस्‍टम अपने आप ब्रेक लगा देगा. 11 अगस्त को होने वाले ट्रायल के दौरान रेलवे अधिकारी इसी सिस्टम, ट्रेन की ब्रेकिंग क्षमता और क्रू हैंडलिंग का गहराई से परीक्षण करेंगे.

इस कठिन मार्ग पर वंदे भारत जैसी हाई-स्पीड इलेक्ट्रिक ट्रेन चलाना आसान नहीं था. लगभग दो साल की कड़ी मेहनत और 93.5 करोड़ रुपये की लागत से इस पूरे घाट सेक्शन का इलेक्ट्रि‍फिकेशन किया गया है. घने जंगलों और भूस्खलन संभावित इलाकों में ओवरहेड वायर लगाना रेलवे के बड़ी चुनौती थी.



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23 जिलों में सूखे जैसे हालात, 246 बांध खाली: बीसलपुर का लेवल एक इंच भी नहीं बढ़ा; मंत्री बोले- पानी नहीं आ रहा तो कहां से देंगे? – Rajasthan News




राजस्थान में इस बार कमजोर मानसून ने प्रदेशवासियों की चिंता बढ़ा दी है। औसत से भी कम बारिश के चलते 693 में से 246 बांध पूरी तरह सूखे पड़े हैं। केवल 15 बांध ही पूरी तरह भर पाए हैं। शेष 432 बांधों के हालात भी ज्यादा अच्छे नहीं हैं। पिछली बारिश में पूरी तरह भरे इन बांधों में अब तक औसत 35 फीसदी पानी खर्च हो चुका है। जयपुर-अजमेर जैसे 4 जिलों की लगभग 1.16 करोड़ आबादी की प्यास बुझाने वाले बीसलपुर बांध में इस बार एक इंच भी पानी नहीं आया है। मौसम विभाग की अगस्त और सितंबर में बारिश को लेकर की गई भविष्यवाणी भी राहत देने वाली नहीं है। कम बरसात के कारण 23 जिलों में सूखे जैसे हालात हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत में जल संसाधन मंत्री मंत्री सुरेश रावत ने खुद माना कि अधिकतर बांधों में पानी की कमी से वाटर मैनेजमेंट की जरूरत पड़ेगी। किसानों की समस्या पर उन्होंने कहा- पानी नहीं आ रहा है। पढ़िए- प्रदेश के बांधों में क्या है स्थिति जयपुर, जोधपुर सहित सभी जगह के बांधों में घट गया पानी जल संसाधन विभाग ने राजस्थान के बांधों को 6 जोन में बांटा हुआ है। पानी की आवक के आंकड़े देखें, तो जोधपुर जोन के बांधों के हालात सबसे ज्यादा खराब है। बीसलपुर के कारण बढ़ी चिंता राजस्थान में मानसून 2 जुलाई के बाद सक्रिय हुआ। तब से अब तक की स्थिति देखें, तो जयपुर और अजमेर के लिए सबसे जरूरी बीसलपुर बांध है। इसमें पानी का स्तर एक इंच भी नहीं बढ़ा है। जबकि पिछले मानसून में अगस्त के शुरुआती दौर में ही बांध लबालब भर गया था। हालात ये हैं कि अभी बांध करीब 35 फीसदी पानी कम हो चुका है। केवल 15 बांध भरे हैं जल संसाधन विभाग ने बांधों को जल भराव की क्षमता के अनुसार दो हिस्सों में बांटा हुआ है। एक 4.25 मिलियन क्यूबिक मीटर से ज्यादा क्षमता वाले बांध और दूसरा, 4.25 मिलियन क्यूबिक मीटर से कम क्षमता वाले बांध। प्रदेश में कुल 693 बांध हैं, उनमें से 246 पूरी तरह खाली पड़े हैं। वहीं, 432 बांध आंशिक भरे हुए हैं। केवल 15 बांध ही ऐसे हैं, जिन्हें पूरा भरा माना जा सकता है। इसमें भी 75 फीसदी छोटे बांध हैं। पिछले साल के मुकाबले ज्यादा हाल खराब राजस्थान में पिछले साल मानसून काफी मेहरबान था। इस कारण बांध छलक उठे थे। पिछले साल के मानसून में 4 अगस्त तक के हालातों की तुलना इस मानसून से करें, तो सभी बांधों का हाल खराब है। बारिश का पानी नहीं आने के कारण जल स्तर घट रहा है।यदि मानसून पहले महीने की तरह बचे दिनों में भी कुछ रूठा रहा, तो जयपुर, जोधपुर, भरतपुर सहित लगभग सभी जगह पानी का संकट खड़ा हो सकता है। इन हालातों में ज्यादा प्रभावित किसान होंगे, सिंचाई के लिए पर्याप्त पानी मिलना मुश्किल हो जाएगा। जल संसाधन मंत्री सुरेश रावत से बातचीत सवाल : अभी तक मानसून का दौर कमजोर है, बांधों की क्या स्थिति है? जवाब : अभी तक जो मानसून आया है, वह काफी कमजोर रहा है, निश्चित रूप से अभी अधिकतर बांध खाली हैं। सवाल : क्या इससे अगली गर्मियों में पीने के पानी का संकट नहीं गहराएगा? जवाब : ऐसा नहीं है कि पीने के पानी का संकट खड़ा हो जाएगा। अगली गर्मियों तक के लिए पीने के लिए पर्याप्त पानी की व्यवस्था है। कोई परेशानी नहीं आने वाली है। सवाल : सिंचाई के पानी को लेकर सभी किसान चिंता कर रहे हैं। जवाब : बरसात तो अभी तक बहुत कम आई है, पानी कहां से आएगा। जब भी बरसात नहीं आती किसान परेशान होता ही है। जब बांध ही खाली हैं, बरसात का पानी आ नहीं रहा, तो पानी देंगे कहां से, उनकी परेशानी भी लाजिमी है। सवाल : किसानों की इस आशंका को दूर करने के लिए सरकार के पास क्या उपाय हैं? जवाब : सरकार हर परिस्थिति में किसानों के साथ है। हम वाटर मैनेजमेंट करके जितना अधिक किसानों को पानी दे सकते हैं, देंगे। हालांकि मानसून का दौर अभी चल रहा है। विभाग की पूरी तैयारी है। सामान्य से भी कम बारिश, 23 जिलों में सूखे जैसे हालात राज्य में मानसून का सीजन 1 जून से 30 सितंबर तक माना जाता है। जून में प्री-मानसून के दौरान बारिश सामान्य रही। लेकिन 31 जुलाई तक सामान्य से 11 फीसदी कम बरसात हुई है। 23 जिलों में सूखे जैसे हालात बन रहे हैं। मौसम विज्ञान केन्द्र जयपुर के सीनियर साइंटिस्ट हिमांशु शर्मा ने बताया- इस बार प्रशांत महासागर में अलनीनो कंडीशन और हिंद महासागर में बना इंडियन ओशन डाइपोल (IOD) भी न्यूट्रल कंडीशन ने मानसून को कमजोर किया है। मौसम विज्ञान केन्द्र, नई दिल्ली के अनुसार राजस्थान में आगे अगस्त-सितंबर अच्छी बारिश के कोई संकेत नहीं है। मान्य से कम बारिश का अनुमान है।



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