भगवान श्री कृष्ण की जन्मस्थली असत्य पर सत्य की विजय के पर्व दशहरा के लिए तैयार है। मंगलवार को भव्य आतिशबाजी के बीच रामलीला मैदान में 75 फीट ऊंचे रावण के पुतले का दहन किया जाएगा। इसके अलावा 60 फीट ऊंचा अहिरावण का पुतला भी दहन होगा। इन विशालकाय पुतलों को जाहिद खान के परिवार ने तैयार किया है। जाहिद की पांच पीढ़ियां रावण का पुतला बनाती चली आ रही हैं। जाहिद के परिवार सहित 10 लोगों ने डेढ़ महीने की मेहनत के बाद इन पुतलों को तैयार किया है। जन्माष्टमी बाद से शुरू कर देते हैं तैयारी मथुरा में रावण बनाने की तैयारी जन्माष्टमी बाद से शुरू हो जाती है। इसमें लगने वाला कागज कुछ स्थानीय तो कुछ दिल्ली से मंगाया जाता है। इस कागज को भीगा कर रख देते हैं। इसके बाद सूखने पर इसे बांस से बने ढांचे पर सेट किया जाता है। इससे पहले कागज में अलग अलग रंगों का प्रयोग कर उसे आकर्षक बनाया जाता है। जाहिद का परिवार मथुरा और आसपास के इलाकों में रावण के पुतला बनाने का काम करता है। रावण के पुतले में करीब 300 किलो कागज का प्रयोग किया जाता है। 100 बांस से ज्यादा लगते हैं रावण के पुतले में रामलीला मैदान में रावण के पुतले को अंतिम रूप दे रहे जाहिद ने बताया कि रावण का पुतला बनाने में करीब 120 बांस लग जाते हैं। वहीं अहिरावण के पुतले में 100 के करीब बांस का प्रयोग होता है। शुरू के दिनों में 4 से 5 घंटे प्रतिदान मेहनत की जाती है,जबकि जैसे जैसे नजदीक समय आता है मेहनत का समय 12 घंटे से ज्यादा बढ़ जाता है। पुतला बनाने में जाहिद के 5 भाई के अलावा अन्य 5 कारीगर लगते हैं। इसके बाद विशालकाय पुतला तैयार होता है। 2 हजार रुपए प्रति फीट आती है लागत पुतला तैयार कर रहे जाहिद ने बताया कि उनका परिवार दशहरा पर दस से 12 पुतला बनाता है। सबसे बड़ा रावण का पुतला मथुरा के रामलीला मैदान में ही बनता है। जबकि सबसे छोटा पुतला 30 फीट का होता है जी ग्रामीण इलाकों में होने वाली रामलीला के पदाधिकारियों द्वारा बनवाया जाता है। एक पुतला बनाने में करीब 2000 रुपए प्रति फीट की लागत आती है। जाहिद ने बताया कि इसी काम से उनका परिवार चल रहा है। जाहिद ने बताया उनके पिता छोटे खान,दादा मुगल खान,परदादा भी इसी काम से जुड़े थे और यह कला पीढ़ी दर पीढ़ी सीखते चले आ रहे हैं। कमाई नहीं भगवान की सेवा है जाहिद बताते हैं कि यह कमाई का जरिया नहीं बल्कि प्रभु की सेवा है। पीढ़ी दर पीढ़ी इस परंपरा को संभाल रहे हैं। यह खानदानी जिम्मेदारी संभालने का भी प्रयास है। जिसे हम निभा रहे हैं। जाहिद ने बताया दशहरा उत्सव पर उनके द्वारा डेढ़ महीने की मेहनत के बाद तैयार पुतला को जब जलाया जाता है और पूरा वातावरण भक्ति मय होता है तो खुशी मिलती है। जाहिद ने बताया उनके द्वारा मथुरा ही नहीं बल्कि सदर बाजार,गोकुल,कृष्णा नगर,महावन सहित अन्य जगह पर भी पुतले बनाए गए हैं। पदाधिकारियों ने किया रामलीला मैदान का निरीक्षण श्री रामलीला सभा के तत्वावधान में दशहरा मेला व रावण वध की तैयारियों के संदर्भ मै सभा के पदाधिकारियों द्वारा रामलीला मैदान का निरीक्षण कर व्यवस्थायें सुनिश्चित की गई। महामंत्री मूलचन्द गर्ग ने बताया कि इस बार दशहरा मेला अत्यन्त आकर्षक होगा । रामलीला मैदान में राम-रावण युद्ध के मंचन के लिये 12 फुट ऊँची, 80 फुट लम्बा व 120 फुट चौड़ा मंच तैयार किया गया है। रावण का पुतला 75 फुट ऊँचा एवं अहिरावण का पुतला 60 फुट ऊँचा बनाया गया है। शिवकाशी,भरतपुर और दिल्ली की चलेगी आतिशबाजी दशहरा मेला मंत्री अजय कान्त गर्ग ने बताया शिवाकाशी, भरतपुर व दिल्ली के आतिशबाजों द्वारा आकर्षक आतिशवाजी का प्रदर्शन होगा । साथ ही इलैक्ट्रोनिक डिजिटल आतिशबाजी का प्रदर्शन विशेष आकर्षण का केन्द्र होगा । रामलीला मैदान में चारों ओर भव्य सजावट तथा दर्शकों के बैठने के लिये पर्याप्त व्यवस्था की जा रही है । साथ ही इस वर्ष ड्रोन के द्वारा पुष्प वर्षा की बहुत ही भव्य व्यवस्था की गई है। रामलीला मैदान में कार्यालय मंत्री संजय बिजली, अनूप टैण्ट वालों की देखरेख में मैदान की समस्त व्यवस्था की जा रही है।
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5 पीढ़ियों से रावण बना रहा जाहिद का परिवार: 75 फीट ऊंचे पुतले का होगा दहन, साथ में फूंकेंगे अहिरावण और मेघनाथ – Mathura News
‘शादी के दवाब के कारण संजना को मार डाला’: गोपालगंज में नाबालिग की हत्या,बॉयफ्रेंड ने शव बोरी में छिपाकर घर में रखा;2 साल से था अफेयर – Gopalganj News
“संजना के साथ मेरा दो साल से लव अफेयर था। 2025 में संजना शादी का दबाव बनाने लगी, जिसको लेकर हम दोनों के बीच अक्सर विवाद होता था। इससे परेशान होकर मैंने उसकी हत्या की साजिश रची। 12 अक्टूबर की शाम संजना घर से बाहर निकली। उसी समय मैंने उसे अगवा कर कुल्हाड़ी से सिर पर वार कर दिया। इससे उसकी मौके पर ही मौत हो गई।” यह आरोपी सुजीत कुमार (20) का कबूलनामा है। उसने अपनी गर्लफ्रेंड संजना की हत्या कर शव को अपने पुराने घर के पीछे छिपा दिया था, ताकि पुलिस उस तक न पहुंच सके। दरअसल, 12 अक्टूबर की शाम नाबालिग संजना की हत्या कर दी गई थी। अगले दिन उसके पिता ने थाने में गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई। 14 अक्टूबर की रात पुलिस ने आरोपी के पुराने घर के पीछे से संजना का शव बरामद किया है। बेटी की हत्या से आक्रोशित परिजनों ने 15 अक्टूबर को आरोपी के घर के दरवाजे पर ही उसका अंतिम संस्कार कर दिया। इस दौरान गांव के लोग और पुलिसकर्मी भी मौजूद रहे। घटना से जुड़ी तस्वीरें देखिए…. अब सिलसिलेवार तरीके से पढ़िए पूरी खबर… स्पीडी ट्रायल के तहत होगी कार्रवाई गोपालगंज के थावे थाना क्षेत्र के खानपुर अजमत गांव में 12 साल की संजना की हत्या के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी सुजीत कुमार को 18 अक्टूबर को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी ने पूछताछ के दौरान संजना से प्रेम संबंध होने, मिलने के दौरान विवाद होने और कुल्हाड़ी से हमला कर उसकी हत्या करने की बात स्वीकार की है। पुलिस ने घटनास्थल से खून के सैंपल जुटाए हैं। आरोपी की निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल कुल्हाड़ी और शव को छिपाने के लिए इस्तेमाल किए गए सामान भी बरामद करने की बात कही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए FSL, DIU और डॉग स्क्वॉड की टीमों से जांच कराई गई। पुलिस अब तक जुटाए गए साक्ष्यों के आधार पर जल्द चार्जशीट दाखिल करने और मामले में स्पीडी ट्रायल कराने की तैयारी कर रही है। वहीं, आरोपी के घर के बाहर शव जलाने के मामले में भी थावे थाने में अलग प्राथमिकी दर्ज की गई है। इसमें एक आरोपी को गिरफ्तार किया गया है। ‘मुझे इतनी जल्दी शादी नहीं करनी थी’ आरोपी सुजीत कुमार ने पुलिस को दिए कबूलनामे में बताया, ‘मैं खानपुर अजमत गांव में रहता हूं। संजना मेरे घर के पास ही रहती थी। गांव में अगल-बगल में रहने वाले को भाई-बहन ही कहा जाता है। हम दोनों बचपन में साथ खेलते थे।’ ‘करीब दो साल पहले, जब मैं 18 साल का था, तब मैंने संजना को प्रपोज किया था। उसने मेरा प्रपोजल स्वीकार कर लिया। इसके बाद हम दोनों के बीच बातचीत और मिलना-जुलना शुरू हो गया। करीब एक साल तक सब ठीक रहा। हम खेलने के बहाने गांव के बाहर मिलते थे।’ ‘साल 2025 में संजना के घरवालों को हमारे रिश्ते के बारे में पता चल गया। उन्होंने संजना को मुझसे दूर रहने और बात नहीं करने के लिए समझाया, लेकिन वह मुझसे बात करती रही।’ ‘इसके बाद संजना मुझ पर शादी करने का दबाव बनाने लगी। मैं उसे समझाता था कि अभी वह नाबालिग है। हम दोनों के बड़े होने के बाद ही शादी के बारे में सोच सकते हैं।’ ‘इसके बावजूद वह जब भी मुझसे मिलती, शादी की बात करने लगती थी। इस बात को लेकर हमारे बीच अक्सर विवाद होने लगा। मैं इन झगड़ों से परेशान हो गया था। मैंने उससे रिश्ता खत्म करने के लिए भी कहा, लेकिन इस पर संजना ने मेरे घरवालों को हमारे रिश्ते के बारे में बता देने की धमकी दी।’ ‘मुझे डर था कि अगर उसने घरवालों को सब कुछ बता दिया, तो परेशानी बढ़ जाएगी। इसी डर और बार-बार होने वाले विवाद के कारण मैंने संजना की हत्या करने की साजिश रची।’ घटना वाले दिन पुराने घर में मिले थे दोनों सुजीत ने आगे बताया, ‘12 अक्टूबर को मैं और संजना मेरे पुराने घर में मिले थे। उस घर में कोई नहीं रहता था। इसी दौरान एक बार फिर हमारे बीच शादी की बात को लेकर विवाद शुरू हो गया। झगड़े के बाद गुस्से में संजना घर से बाहर चली गई।’ ‘मैं पहले से ही बार-बार होने वाले विवाद से परेशान था। इसके बाद मैंने उसे अगवा कर लिया और अपने पुराने घर के पीछे ले गया। वहां मैंने उसके सिर पर कुल्हाड़ी से वार किया, जिससे उसकी मौत हो गई।’ ‘संजना की हत्या करने के बाद मैंने उसके शव को पुराने घर में रखा। इसके बाद साक्ष्य छिपाने के इरादे से शव को घर के पीछे बोरे और प्लास्टिक में लपेट कर फेंक दिया। मैं चाहता था कि किसी को घटना के बारे में पता न चले।’ थाने में पिता ने किडनैपिंग का केस दर्ज करवाया SDPO चंदन कुमार ने घटना की जानकारी देते हुए बताया, 13 अक्टूबर की सुबह संजना के पिता थाने पहुंचे। उन्होंने अपनी बेटी की गुमशुदगी की शिकायत थाने में की। सूचना मिलने के बाद थावे थाना की पुलिस टीम मौके पर पहुंची। मामले की गंभीरता को देखते हुए थावे थाना कांड संख्या 246/26 दर्ज कर जांच शुरू की गई। संजना की बरामदगी के लिए पुलिस ने संभावित ठिकानों पर तलाश शुरू की। लड़की को खोजने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा था। इसी दौरान 14 अक्टूबर को गांव में मुन्ना सिंह (आरोपी का पिता) के पुराने घर के पीछे उसका शव बरामद हुआ। शव मिलने के बाद गांव में तनाव और आक्रोश का माहौल बन गया। परिजनों ने पुरानी दुश्मनी के कारण बेटी की हत्या किए जाने का आरोप लगाया। वहीं, हमने मामले को गंभीरता से लेते हुए घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने और हत्या की गुत्थी सुलझाने के लिए अलग-अलग टीमों को लगाया। शव बरामद होने के बाद पुलिस ने मामले की गंभीरता को देखते हुए मैनुअल और वैज्ञानिक तरीके से जांच शुरू की। घटनास्थल पर एफएसएल टीम, डीआईयू टीम और डॉग स्क्वॉड को बुलाया गया। टीमों ने उपलब्ध साक्ष्य जुटाए और संभावित सुरागों के आधार पर जांच आगे बढ़ाई। पुलिस के अनुसार, लगातार छापेमारी के दौरान 18 अक्टूबर 2026 को मामले में संलिप्तता के आरोप में सुजीत कुमार को गिरफ्तार किया गया। वह मुन्ना सिंह का बेटा है। गिरफ्तारी के बाद उससे पूछताछ की गई। पुलिस का दावा है कि पूछताछ में आरोपी ने घटना से जुड़े कई बिंदुओं पर जानकारी दी और वारदात में अपनी भूमिका स्वीकार की। पुलिस ने कहा कि मामले में अब तक जुटाए गए साक्ष्यों और पूछताछ के आधार पर हत्या की गुत्थी सुलझाने में सफलता मिली है। जांच टीम के बाकी सदस्यों की भूमिका और साक्ष्य जुटाने की प्रक्रिया भी आगे की कार्रवाई का हिस्सा है। परिजन बोले- पुरानी दुश्मनी में बेटी की हत्या की गई मृतका के परिजनों ने आरोप लगाया था कि करीब एक साल पहले दोनों परिवारों के बीच पीडिया पर्व के दौरान विवाद हुआ था। इसी पुरानी दुश्मनी के कारण उनकी बेटी का अपहरण कर हत्या कर दी गई है। हालांकि, पुलिस की शुरुआती जांच में प्रेम संबंध और मिलने के दौरान विवाद की बात सामने आई है। पुलिस का कहना है कि परिजनों की ओर से अन्य लोगों के नाम भी बताए जा रहे हैं। इसी वजह से इस बिंदु की जांच की जा रही है कि घटना में किसी अन्य व्यक्ति की भूमिका थी या नहीं। पुलिस ने स्पष्ट किया है कि जांच केवल आरोपी के बयान तक सीमित नहीं है। घटनास्थल से जुटाए गए वैज्ञानिक साक्ष्य, बरामद सामान, पूछताछ और अन्य उपलब्ध तथ्यों को मिलाकर आगे की कार्रवाई की जाएगी। यदि जांच में किसी अन्य व्यक्ति की संलिप्तता सामने आती है, तो उसके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी।
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ग्वालियर मंदिर हादसे में समिति को आतंकी हमले का शक: अब तक तीन तरह की थ्योरी सामने आईं, किसमें कितना दम; आखिर चूक हुई कहां? – Madhya Pradesh News
ग्वालियर के शीतला माता मंदिर में शनिवार रात करीब 1:30 बजे धान से भरा ट्रक दर्शन की कतार में खड़े श्रद्धालुओं पर चढ़ गया। 15 लोगों की मौत हुई और 40 से ज्यादा घायल हैं। अब मंदिर समिति हादसे में आतंकी साजिश की आशंका जता रही है। पुलिस ब्रेक, शराब और गूगल मैप की बात कर रही है। परिजन पूछ रहे हैं कि ट्रक वहां पहुंचा कैसे। कौन-सी थ्योरी कितनी पुख्ता है और जवाबदेही किसकी बनती है; समझते हैं आज के मध्य प्रदेश एक्सप्लेनर में… सवाल 1: हादसे को लेकर अब तक किस-किस तरह की थ्योरी सामने आई हैं? जवाब- अब तक दो वजहें सामने आई हैं- ब्रेक फेल होना और ड्राइवरों की गलती। तीसरी थ्योरी साजिश की है। थ्योरी 1: ब्रेक ने जवाब दे दिया थ्योरी 2: गूगल मैप, शॉर्टकट, शराब, टोल टैक्स तीसरी थ्योरी साजिश की है, जो मंदिर समिति ने उठाई है। सवाल 2: हादसा है या जानबूझकर किया गया हमला- फर्क कैसे पता चलेगा? जवाब- फर्क नीयत का है, और नीयत सबूतों की कड़ियों से तय होती है। एक्सपर्ट्स के मुताबिक जांच में ये कड़ियां देखी जाएंगी… ट्रक: ब्रेक, टायर और गियर की जांच से पता चलेगा कि वाहन में खराबी थी या नहीं। माल का असली वजन भी यहीं से निकलेगा। ड्राइवर: ब्लड रिपोर्ट से शराब का स्तर पता चलेगा। शराब का असर समय के साथ घटता है, इसलिए यह भी देखा जाएगा कि सैंपल हादसे के कितनी देर बाद लिया गया। फोन और रूट: गूगल मैप का रिकॉर्ड और फोन की लोकेशन बताएगी कि ड्राइवर किस रास्ते पर और क्यों गए। माल के कागजों से पता चलेगा कि धान कहां से लदा और कहां जाना था। रास्ते के रिकॉर्ड: चेकिंग पॉइंट के CCTV, तैनात पुलिसकर्मियों और ग्रामीणों के बयान। कानून में क्या फर्क है? लापरवाही से मौत: भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 106 के तहत लापरवाही से मौत के मामलों पर कार्रवाई हो सकती है। कौन-सी उपधारा लागू होगी, यह मामले के तथ्यों पर निर्भर करेगा। गैर-इरादतन हत्या: धारा 105 के तहत अपराध के लिए कानून में बताई गई मंशा या जानकारी जैसे तत्वों को साबित करना जरूरी है। केवल यह जानना कि किसी काम से दुर्घटना हो सकती है, अपने आप में धारा 105 लागू करने के लिए पर्याप्त नहीं है। आतंकी कृत्य: इसके लिए लागू कानून के तहत जरूरी कानूनी तत्वों और सबूतों को साबित करना होगा। किसी योजना, रेकी, बातचीत या संपर्क के रिकॉर्ड की जांच की जा सकती है, लेकिन इनमें से किसी एक बात का मिलना अपने आप आतंकवादी हमला साबित नहीं करता। सवाल 3: मंदिर समिति को आतंकी हमले का शक क्यों? जवाब- अब तक कोई ठोस आधार सामने नहीं आया है। समिति अध्यक्ष राजेंद्र सिंह गुर्जर ने धार्मिक आयोजन को जानबूझकर निशाना बनाए जाने की आशंका जताई है और SIT जांच की मांग की है। लेकिन उन्होंने इसे सिर्फ संभावना कहा है और कोई सबूत नहीं दिया है। पुलिस या प्रशासन ने साजिश की बात नहीं कही है। जो बातें शक बढ़ाती हैं… जो बातें दूसरी तरफ इशारा करती हैं… सवाल 4: ऐसे मेले में सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी होती है और चूक कहां हुई? जवाब- आम तौर पर जिम्मेदारी तीन हिस्सों में बंटी होती है। लेकिन इस मेले में किसे क्या लिखित जिम्मेदारी मिली थी, यह अब तक सामने नहीं आया है। भीड़ संभालने के लिए राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (NDMA) की गाइडलाइन ट्रैफिक और पार्किंग का प्लान बनाने की सलाह देती है। लेकिन यह सलाह है, बाध्यकारी कानून नहीं। इस मेले में क्या इंतजाम थे… चीनौर रोड के चेकिंग पॉइंट पर क्या हुआ, इस पर दो बातें हैं… सवाल 5: क्या जांच सिर्फ ट्रक ड्राइवर तक रहेगी, या पूरी व्यवस्था की जवाबदेही भी तय होगी? जवाब- अब तक कार्रवाई तीन रास्तों पर चल रही है। लेकिन व्यवस्था की जवाबदेही पर दो सवाल अभी बाकी हैं। कार्रवाई पर दो सवाल… इसी अंचल में रतनगढ़ की मिसाल… दतिया के रतनगढ़ मंदिर में 2006 की नवरात्रि में 56 श्रद्धालुओं की मौत हुई थी। इसके बाद वहां पुल बनाया गया। 2013 की नवरात्रि में उसी पुल पर भगदड़ मची और 115 लोगों की जान गई। तब 20 अधिकारी निलंबित हुए थे। सवाल यह है कि ग्वालियर में कार्रवाई कहां तक जाएगी। हादसे के बाद की व्यवस्था पर भी सवाल हैं… राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को 4-4 लाख, गंभीर घायलों को 2-2 लाख और अन्य घायलों को 50-50 हजार रुपए देने की घोषणा की है। प्रधानमंत्री राहत कोष से भी सहायता दी जा रही है। परिजन 25 लाख रुपए की मांग कर रहे हैं। मध्य प्रदेश एक्सप्लेनर का ये एपिसोड भी पढ़ें…
क्या ‘मोहन-मामा’ के बीच सब ठीक है?:कांग्रेस ने क्यों लगाया खींचतान का आरोप रविवार को सीहोर में आदिवासियों के 12 घर गिराए गए। केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने इसे जुल्म की पराकाष्ठा बताया और प्रभावित परिवारों के साथ धरना स्थल पर बैठ गए। उसी दिन रायसेन के भोजपुर में उन्होंने कहा कि लाड़ली बहना योजना अब कोई सरकार बंद नहीं कर पाएगी…पूरा एक्सप्लेनर पढ़िए।
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एमपी के 14 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट: तमिलनाडु में भारी बारिश जारी; केदारनाथ-बद्रीनाथ और गंगोत्री में पारा माइनस में
मध्य प्रदेश में अगले तीन दिन मौसम का मिजाज बदला रहेगा। मंगलवार को इंदौर, उज्जैन, भोपाल और नर्मदापुरम समेत 14 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट है। इस दौरान 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से हवा चल सकती है। राजस्थान में वेस्टर्न डिस्टर्बेंस के असर से सवाई माधोपुर में सोमवार अलसुबह 3 बजे से सुबह 8 बजे तक कभी रिमझिम तो कभी तेज बारिश हुई। मलारना डूंगर क्षेत्र के टापरी गुर्जर गांव में बिजली गिरने से रेलवे कर्मचारी की मौत हो गई। उत्तराखंड में बर्फबारी से कड़ाके की ठंड पड़ने लगी है। केदारनाथ, बद्रीनाथ और गंगोत्री में रात का तापमान माइनस में पहुंच रहा है। वहीं, मसूरी और नैनीताल में न्यूनतम तापमान करीब 11°C बना हुआ है। हिमाचल प्रदेश के ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सुबह, शाम और रात के समय ठंड में इजाफा हुआ है। राज्य के 10 शहरों का तापमान 10 डिग्री सेल्सियस से नीचे गिर गया है। सैटेलाइट मैप में देखें मानसूनी बादलों की स्थिति
देशभर से मौसम की तस्वीरें…
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ट्रम्प मिडटर्म चुनाव हार सकते हैं: महंगाई और ईरान जंग से लोकप्रियता घटी, अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार दूरी बना रहे
अमेरिका में 3 नवंबर को होने वाले मिडटर्म चुनाव राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की पार्टी के लिए मुश्किल खड़ी कर सकते हैं। महंगाई, ईरान के साथ जंग और ट्रम्प की घटती लोकप्रियता के बीच रिपब्लिकन पार्टी के लिए कांग्रेस में अपना बहुमत बचाना चुनौती बन गया है। 10 प्रमुख जनमत सर्वेक्षणों में से सिर्फ 1 में रिपब्लिकन पार्टी आगे है। मिडटर्म चुनाव में राष्ट्रपति नहीं चुना जाता। इसमें अमेरिकी संसद यानी कांग्रेस के दोनों सदनों- हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स और सीनेट की सीटों के लिए वोटिंग होती है। फिलहाल दोनों सदनों में रिपब्लिकन पार्टी को मामूली बहुमत है। अगर डेमोक्रेट्स जरूरी सीटें जीत लेते हैं, तो वे एक या दोनों सदनों में बहुमत हासिल कर सकते हैं। इससे ट्रम्प के लिए अपने एजेंडे को लागू करना मुश्किल हो सकता है। 1. ट्रम्प की लोकप्रियता में गिरावट, 30% तक रेटिंग पहुंची अमेरिका में ट्रम्प के कामकाज से खुश लोगों की संख्या घट रही है। अलग-अलग सर्वे में सिर्फ 30 से 36% लोग ही उनके काम से खुश हैं। NBC न्यूज के सर्वे में 34% लोगों ने ट्रम्प के कामकाज को सही बताया। वॉशिंगटन पोस्ट-ABC न्यूज के सर्वे में 33% और फॉक्स न्यूज के सर्वे में 36% लोगों ने उनका समर्थन किया। प्यू रिसर्च सेंटर के सर्वे में ट्रम्प को सबसे कम, यानी 30% लोगों का समर्थन मिला। ये ट्रम्प के पहले कार्यकाल से भी कम हैं। पहले कार्यकाल में ट्रम्प की अप्रूवल रेटिंग सबसे कम जनवरी 2021 में संसद में दंगाईयों के घुसने वाली घटना के बाद हुई थी। तब उनकी रेटिंग 34% पहुंच गई थी। 2. अमेरिकी जनता महंगाई से परेशान 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में ट्रम्प ने वादा किया था कि वे महंगाई कम करेंगे और लोगों का खर्च घटाएंगे। लेकिन अब बढ़ती कीमतें उनकी पार्टी के लिए परेशानी बन रही हैं। अमेरिका में अंडे, दूध, ब्रेड, मांस और सब्जियां जैसी बुनियादी चीजों के दाम 20% से 30% तक महंगे हो चुके हैं। घर का किराया औसतन 1.60 लाख रुपए पहुंच गया है जो अब तक सबसे ऊंचा स्तर है। तेल-गैस की कीमतों में करीब 20% का इजाफा हुआ है। हालांकि लोगों की तनख्वाह में थोड़ी बढ़ोतरी हुई है, लेकिन महंगाई की वजह से उन्हें इसका फायदा नहीं मिला। रॉयटर्स-इप्सोस के सर्वे में 78% लोगों ने कहा कि चीजों के दाम उनकी कमाई से ज्यादा तेजी से बढ़ रहे हैं। AP की रिपोर्ट के मुताबिक, 65% अमेरिकी मानते हैं कि महंगाई के लिए ट्रम्प की नीतियां जिम्मेदार हैं। राष्ट्रीय सर्वेक्षणों के मुताबिक लगभग 37% से अधिक अमेरिकी महंगाई और बढ़ती कीमतों को देश की सबसे बड़ी और गंभीर समस्या मानते हैं। ऐसे में महंगाई कम करना राष्ट्रपति ट्रम्प के लिए सबसे बड़ी चुनौती बन गया है। 3. ईरान जंग से बढ़ी मुश्किल, विदेश नीति से भी नाराज लोग ईरान के साथ जंग ट्रम्प के लिए एक और परेशानी बन गई है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, जंग के कारण पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर दबाव बढ़ा है। इससे अमेरिकी लोगों का रोजमर्रा का खर्च बढ़ सकता है। NBC न्यूज के सर्वे में सिर्फ 29% लोगों ने ईरान जंग को संभालने के ट्रम्प के तरीके को सही माना। वहीं, फॉक्स न्यूज के सर्वे में 64% लोगों ने उनकी विदेश नीति को गलत बताया। हालांकि, ट्रम्प की अपनी पार्टी रिपब्लिकन के समर्थकों में उन्हें अब भी समर्थन मिल रहा है। AP के सर्वे में 69% रिपब्लिकन मतदाताओं ने उनकी विदेश नीति को सही माना। ईरान जंग का चुनाव पर कितना असर पड़ेगा, यह अभी साफ नहीं है। लेकिन अगर जंग के कारण पेट्रोल-डीजल महंगा होता है और लोग ट्रम्प की नीतियों से नाराज रहते हैं, तो इसका नुकसान उनकी रिपब्लिकन पार्टी को हो सकता है। 4. अपनी ही पार्टी के उम्मीदवार ट्रम्प से दूरी बनाने लगे ट्रम्प की लोकप्रियता घटने का असर उनकी अपनी पार्टी पर भी दिख रहा है। रॉयटर्स की अक्टूबर में आई रिपोर्ट के मुताबिक, मुकाबले वाली 62 सीटों में से 41 सीटों पर रिपब्लिकन उम्मीदवार ट्रम्प की कुछ नीतियों से असहमति जता रहे हैं या उनसे दूरी बनाकर चल रहे हैं। ये उम्मीदवार ट्रम्प की सभी नीतियों का विरोध नहीं कर रहे। वे कुछ मुद्दों पर उनसे अलग राय रखकर उन लोगों का समर्थन हासिल करना चाहते हैं, जो किसी पार्टी के पक्के समर्थक नहीं हैं। इन उम्मीदवारों के सामने मुश्किल यह है कि ट्रम्प के करीब रहने पर उनकी गिरती लोकप्रियता का नुकसान उठाना पड़ सकता है। वहीं, उनसे ज्यादा दूरी बनाने पर ट्रम्प के वफादार समर्थक नाराज हो सकते हैं। संसद में बहुमत खोने पर ट्रम्प को क्या नुकसान होगा अगर डेमोक्रेटिक पार्टी कांग्रेस के एक या दोनों सदनों में बहुमत हासिल कर लेती है, तो ट्रम्प के लिए अपने फैसलों को लागू करना मुश्किल हो सकता है। कांग्रेस में बजट, सरकारी खर्च और नए कानूनों से जुड़े अहम फैसले लिए जाते हैं। ऐसे में डेमोक्रेट्स के पास बहुमत होने पर वे ट्रम्प के प्रस्तावों को रोक सकते हैं और उनके प्रशासन के कामकाज की जांच भी बढ़ा सकते हैं। हालांकि, रिपब्लिकन पार्टी के पास कुछ फायदे भी हैं। रॉयटर्स के मुताबिक, पार्टी के पास चुनाव प्रचार पर खर्च करने के लिए मजबूत संसाधन हैं। इसके अलावा, डेमोक्रेटिक पार्टी के कुछ उम्मीदवारों को लेकर मध्यमार्गी मतदाताओं की चिंता भी रिपब्लिकन के पक्ष में जा सकती है। ——————– ये खबर भी पढ़ें… ट्रम्प ने इजराइलियों से कहा- नेतन्याहू को दोबारा प्रधानमंत्री बनाएं:किसी और को चुना तो ईरान के खिलाफ अमेरिका को अकेले लड़ना पड़ेगा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने इजराइल के लोगों से प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू को दोबारा प्रधानमंत्री चुनने की अपील की है। उन्होंने कहा कि बीबी नेतन्याहू आपको कभी निराश नहीं करेंगे। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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शाजापुर में चलती 4 कारों पर पथराव: गाड़ियों के शीशे टूटे, दुपाड़ा रोड पर ऐसी घटनाएं पहले भी हो चुकी – shajapur (MP) News
शाजापुर के लालघाटी थाना क्षेत्र अंतर्गत दुपाड़ा रोड पर सोमवार शाम उपद्रवियों ने चलती गाड़ियों पर पथराव कर दिया। पत्थरबाजी की इस घटना में 3 से 4 चारपहिया वाहनों के कांच टूट गए, हालांकि राहत की बात यह रही कि वाहन सवार यात्री बाल-बाल बच गए। लगातार हो रही इन घटनाओं से इस मार्ग पर सफर करने वाले चालकों में दहशत का माहौल है। सूचना मिलते ही पुलिस ने मौके पर पहुंचकर जांच-पड़ताल शुरू कर दी है। एक के बाद एक गाड़ियों पर फेंके गए पत्थर जानकारी के अनुसार, सोमवार शाम करीब साढ़े सात बजे करेड़ी नाका के आगे दुपाड़ा रोड पर इंदौर निवासी धरम इंगले अपनी ग्लैंझा कार से मां बगलामुखी के दर्शन कर लौट रहे थे, तभी अचानक किसी ने उनकी गाड़ी पर पत्थर मारा। इससे कार के कंडक्टर साइड का पिछला कांच चकनाचूर हो गया। इसी दौरान आगर मालवा से शाजापुर आ रहे हीरपुर टेका भरड़ निवासी जितेंद्र कुम्हार की ग्रैंड आई-10 कार पर भी हरणगांव टर्न के पास पथराव किया गया, जिससे उनकी कार का कांच भी टूट गया। इसके अलावा दो अन्य गाड़ियों को भी निशाना बनाए जाने की बात सामने आई है। पहले भी हो चुकी हैं वारदातें, यात्रियों में डर दुपाड़ा रोड पर पथराव की यह कोई पहली घटना नहीं है। इससे पहले भी एक बोलेरो गाड़ी सहित अन्य वाहनों पर पत्थरबाजी हो चुकी है। पिछली घटना में तो वाहन की पिछली सीट पर बैठी एक महिला गंभीर रूप से घायल भी हो गई थी। इस तरह बार-बार हो रही घटनाओं से इस मार्ग से गुजरने वाले यात्रियों की सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। इलाके में पुलिस चेकिंग शुरू पुलिस मौके पर पहुंचा और आसपास के इलाके व झाड़ियों में टॉर्च जलाकर सर्चिंग की, लेकिन अंधेरे का फायदा उठाकर आरोपी भाग निकले। मामले की गंभीरता को देखते हुए एसपी प्रियंका शुक्ला ने बताया कि एक ही इलाके में बार-बार हो रही इन घटनाओं को देखते हुए प्रभावित मार्ग पर पुलिस चेकिंग पॉइंट लगाए गए हैं। पुलिस दर्ज शिकायतों के आधार पर जांच कर रही है और आरोपियों को चिन्हित कर जल्द से जल्द गिरफ्तार करने का प्रयास किया जा रहा है।
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पूर्व सीएम गहलोत बोले- प्रदेश में पानी-चारे का संकट: कहा- सरकार अभी से करे तैयारी, दूसरे राज्यों से करें व्यवस्था – Jodhpur News
पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत सोमवार को जोधपुर दौरे पर रहे। जोधपुर से जयपुर जाते समय उन्होंने एयरपोर्ट पर मीडिया बात करते हुए सरकार को कई मुद्दों पर घेरने की कोशिश की। गहलोत ने प्रदेश में संभावित जल संकट, चारे की कमी और रोजगार के संकट को लेकर राज्य सरकार को अभी से सचेत होने की सलाह दी है। उन्होंने कहा- इस बार हालात चुनौतीपूर्ण हो सकते हैं। बांधों में पानी की आवक नहीं हुई है। फसलें प्रभावित हुई हैं और चारे का भी पर्याप्त उत्पादन नहीं हुआ है। ऐसे में पशुधन को बचाना और ग्रामीण क्षेत्रों में लोगों के लिए रोजगार की व्यवस्था करना सरकार के सामने बड़ी चुनौती होगी। गहलोत ने कहा- जोधपुर में अभी से पानी की समस्या सामने आने लगी है। आने वाले समय में प्रदेश के दूसरे हिस्सों में भी स्थिति बिगड़ सकती है, क्योंकि कई क्षेत्रों में सूखे जैसे हालात हैं। उन्होंने कहा- सरकार को पेयजल संकट से निपटने के लिए अभी से पूरी योजना तैयार करनी चाहिए। साथ ही दूसरे राज्यों से पानी और चारे की व्यवस्था करने सहित सभी जरूरी विकल्पों पर काम शुरू करना चाहिए। चारा डिपो खोलने और पशु शिविर लगाने की मांग गहलोत ने कहा- सूखे के हालात से निपटने के लिए पहले प्रभावित तहसीलों और गांवों की पहचान कर उन्हें अकालग्रस्त घोषित करने की प्रक्रिया शुरू करनी चाहिए। इसके बाद चारा डिपो खोलने, चारे की व्यवस्था करने और पशुओं के लिए शिविर लगाने की योजना बनाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा- चारे की कीमतें बढ़ने से पशुपालकों की परेशानी और बढ़ सकती है। ऐसे में सरकार को अनुदान और अन्य राहत उपायों पर भी ध्यान देना चाहिए। उन्होंने कहा- जब तक सरकार पूरी तैयारी नहीं करेगी, तब तक प्रभावित लोगों और पशुपालकों को समय पर राहत देना मुश्किल होगा। इसलिए पेयजल, चारा और पशुधन संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। फसल खराब होने से ग्रामीण रोजगार पर असर पूर्व मुख्यमंत्री ने ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के मुद्दे पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा- इस बार फसलें प्रभावित हुई हैं। जिन गरीब परिवारों के पास अपनी जमीन नहीं है और जो मजदूरी करके जीवनयापन करते हैं। उनके सामने आजीविका का संकट खड़ा हो सकता है। गहलोत ने मनरेगा का जिक्र करते हुए कहा- इसके बंद होने से ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार की समस्या और गंभीर हो सकती है। उन्होंने राज्य सरकार से सवाल किया कि फसल खराब होने और मजदूरी के अवसर कम होने की स्थिति में ग्रामीण गरीबों को रोजगार कैसे मिलेगा। पंचायत चुनाव के बीच सरकार को किया सचेत पंचायत चुनाव का जिक्र करते हुए गहलोत ने नगर निगम चुनाव में कथित अनियमितताओं और पुलिस की भूमिका पर भी गहलोत ने सवाल उठाए। उन्होंने दावा किया कि जोधपुर और जयपुर सहित कुछ जगहों पर कांग्रेस को अधिक वोट मिलने के बावजूद बोर्ड गठन की स्थिति अलग रही। उन्होंने ग्रामीणों से पंचायत और जिला परिषद चुनावों में मजबूती से भाग लेने तथा अपने प्रतिनिधियों को चुनने की अपील भी की। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को खुद धरने पर बैठना पड़ा, यह सरकार की कार्यशैली पर सवाल गहलोत ने प्रदेश में मामले में एफआईआर दर्ज करने में देरी को लेकर सरकार और पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि यदि शिकायत मिलने के बाद समय पर एफआईआर दर्ज कर ली जाती तो ऐसी स्थिति पैदा नहीं होती और कांग्रेस को धरना देने के लिए मजबूर नहीं होना पड़ता। गहलोत ने कहा- इस मामले में ऐसी स्थिति बन गई कि कांग्रेस नेताओं को धरना देना पड़ा और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष को खुद धरने पर बैठना पड़ा। उन्होंने इसे सरकार की कार्यशैली पर सवाल उठाने वाला घटनाक्रम बताया।
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इटली में हिंसक प्रदर्शनों के बीच भारतीयों के लिए एडवाइजरी: भीड़भाड़ वाली जगहों से दूर रहने की सलाह; PM मेलोनी ने इमरजेंसी बैठक बुलाई
इटली में बढ़ती महंगाई के खिलाफ हो रहे प्रदर्शनों के हिंसक होने के बाद भारतीय दूतावास ने वहां रह रहे भारतीय नागरिकों के लिए एडवाइजरी जारी की है। दूतावास ने सोमवार को भारतीयों से भीड़भाड़ वाली जगहों और प्रदर्शन वाले इलाकों से दूर रहने और स्थानीय खबरों पर नजर रखने को कहा है। इस बीच, इटली की प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने हिंसा की घटनाओं के बाद सोमवार को इमरजेंसी सिक्योरिटी बैठक बुलाई है। भारतीय दूतावास ने आपात स्थिति में मदद के लिए रोम और मिलान स्थित अपने कार्यालयों के नंबर जारी किए हैं। मिलान में पुलिस से भिड़े प्रदर्शनकारी, दुकानों में लूटपाट इटली के कई शहरों में रविवार को बढ़ती महंगाई के खिलाफ प्रदर्शन हुए। शुरुआत में शांतिपूर्ण रहे इन प्रदर्शनों के दौरान मिलान में हिंसा भड़क गई। प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पत्थर, कूड़ेदान और कुर्सियां फेंकीं। इसके बाद पुलिस ने आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। वीकेंड पर मिलान में 5,000 से ज्यादा लोग जुटे थे। हिंसा के दौरान दुकानों में लूटपाट की गई और संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया। इटली की न्यूज एजेंसी अंसा के मुताबिक, पुलिस ने 200 से ज्यादा लोगों को हिरासत में लिया। इनमें करीब 80% नाबालिग हैं। झड़पों में पुलिसकर्मियों और अन्य लोगों के घायल होने की भी खबर है। ट्यूरिन में पत्थर और हथौड़े लेकर घूम रहे लोग पकड़े गए हिंसा का असर इटली के दूसरे शहरों में भी देखने को मिला। मेलोनी के मुताबिक, ट्यूरिन में कुछ लोगों को पत्थर और शीशे तोड़ने वाले हथौड़े लेकर जाते समय हिरासत में लिया गया। वहीं, बोलोन्या में गड़बड़ी की आशंका के चलते एक रेलवे स्टेशन को एहतियातन बंद कर दिया गया। मिलान के मेयर ग्यूसेपे साला ने कहा कि दुकानों के टूटे शीशे, लूटपाट और डरे हुए नागरिकों को देखकर चिंता होती है। उनके मुताबिक, ऐसी घटनाएं दुनिया के कई शहरों में देखने को मिल रही हैं। मेलोनी बोलीं- प्रदर्शन करना अधिकार, शहरों में आग लगाना नहीं प्रधानमंत्री जॉर्जिया मेलोनी ने हिंसा की निंदा करते हुए कहा, ‘प्रदर्शन करना अधिकार है, लेकिन हमारे शहरों को बर्बाद करना नहीं।’ उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ उपद्रवियों ने प्रदर्शनों का फायदा उठाकर अराजकता फैलाने की कोशिश की। मेलोनी ने विपक्षी दलों से भी हिंसा की स्पष्ट रूप से निंदा करने की अपील की। उन्होंने कहा कि इस मामले में किसी तरह की अस्पष्टता नहीं होनी चाहिए, क्योंकि हिंसा की निंदा करने में हिचकिचाहट को उसका समर्थन समझा जा सकता है। ———————– ये खबर भी पढ़ें… यूरोप के 6 देशों में शिक्षा-महंगाई पर प्रदर्शन:फ्रांस में आगजनी-लूटपाट, इटली में स्कूलों पर कब्जा किया, ग्रीस में संसद के सामने बैठे आंदोलनकारी यूरोप के 6 देशों में पढ़ाई का बढ़ता खर्च, बेरोजगारी और महंगे घरों के खिलाफ प्रदर्शन तेज हो गए हैं। फ्रांस में प्रदर्शनकारियों ने दुकानों में लूटपाट की और कई सरकारी इमारतों में आग लगा दी। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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