कौशाम्बी के कनैली गोलीकांड मामले में सराय अकिल थाना प्रभारी निरीक्षक शेर सिंह वर्मा और कनैली चौकी प्रभारी उपनिरीक्षक जितेंद्र प्रताप सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। प्रयागराज परिक्षेत्र के पुलिस महानिरीक्षक ने यह कार्रवाई 19 जुलाई को कनैली चौराहे पर हुई गोलीबारी की घटना में लापरवाही बरतने के आरोप में की है। घटना में हिस्ट्रीशीटर गुलशन त्रिपाठी, रोहित त्रिपाठी और उनके भाई अंकित त्रिपाठी का नाम सामने आया था। पुलिस के अनुसार, तीनों आरोपियों ने 19 जुलाई की रात करीब 10 बजे कनैली चौराहे पर फायरिंग कर कई लोगों को घायल कर दिया था। जांच में सामने आया कि इससे पहले 6 जुलाई को भी इन्हीं आरोपियों ने कनैली निवासी सौरभ सिंह के साथ मारपीट की थी। उस मामले में मुकदमा दर्ज होने के बावजूद थाना स्तर पर आरोपियों के खिलाफ कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं की गई। पुलिस अधीक्षक सत्यनारायण प्रजापत की जांच रिपोर्ट के आधार पर पुलिस महानिरीक्षक ने माना कि अपराधियों के विरुद्ध कठोर एवं निरोधात्मक कार्रवाई में गंभीर शिथिलता बरती गई, जिसके चलते आरोपियों ने दो सप्ताह के भीतर दोबारा गोलीबारी की वारदात को अंजाम दिया। इसी आधार पर दोनों पुलिस अधिकारियों को निलंबित कर विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई।
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कनैली गोलीकांड: सराय अकिल इंस्पेक्टर, चौकी प्रभारी निलंबित: पुलिस महानिरीक्षक के आदेश पर हुई कार्रवाई, लापरवाही का आरोप – Kaushambi News
सीतामढ़ी में हाजत से फरार हुई चेन चोर महिला: शौच के बहाने पुलिस को दिया चकमा, 3 पुलिसकर्मी सस्पेंड, तलाश जारी – Sitamarhi News
सीतामढ़ी में जगन्नाथ रथयात्रा के दौरान चेन चोरी के आरोप में गिरफ्तार एक महिला नगर थाना की हाजत से फरार हो गई। इस मामले में लापरवाही बरतने के आरोप में पुलिस अधीक्षक ने नगर थाना के तीन पुलिसकर्मियों को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। फरार महिला की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है। सोमवार को आयोजित जगन्नाथ रथयात्रा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल हुए थे। इस दौरान आधा दर्जन से अधिक महिलाओं और पुरुषों के चेन, मोबाइल फोन और पर्स चोरी होने की शिकायतें मिलीं। पीड़ितों की शिकायत पर पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और स्थानीय लोगों की मदद से उत्तर प्रदेश के गोरखपुर जिले की सरिता देवी (पति राकेश गौतम) को गिरफ्तार किया था। पूछताछ के दौरान शौच जाने की बात कही
गिरफ्तारी के बाद सरिता देवी को नगर थाना लाया गया। पूछताछ के दौरान उसने शौच जाने की बात कही। पुलिसकर्मी उसे हाजत से बाहर लेकर निकले, लेकिन इसी दौरान वह पुलिस को चकमा देकर फरार हो गई। आरोपी के फरार होने की सूचना मिलते ही उसकी तलाश में कई स्थानों पर छापेमारी शुरू कर दी गई। घटना के बाद बड़ी संख्या में पीड़ित और स्थानीय लोग नगर थाना पहुंचे और पुलिस की कार्यशैली पर सवाल उठाए। पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित कर दिया गया
इस पूरे मामले पर डीएसपी राजीव कुमार सिंह ने बताया कि पुलिस हिरासत से आरोपी के फरार होने की घटना को गंभीरता से लिया गया है। उन्होंने कहा कि लापरवाही बरतने वाले नगर थाना के तीन पुलिसकर्मियों को तत्काल निलंबित कर दिया गया है और किसी भी सूरत में लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। डीएसपी ने यह भी बताया कि चेन चोरी के मामले में अब तक कुल तीन आवेदन प्राप्त हुए हैं, जिनके आधार पर एफआईआर दर्ज कर ली गई है। फरार महिला की गिरफ्तारी के लिए लगातार छापेमारी की जा रही है।
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राहुल गांधी की गिरफ्तारी पर शाजापुर में कांग्रेस का प्रदर्शन: बस स्टैंड के पास सड़क पर बैठे कार्यकर्ता; केंद्रीय शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग – shajapur (MP) News
शाजापुर में मंगलवार शाम जिला कांग्रेस के कार्यकर्ताओं ने लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी की गिरफ्तारी के विरोध में बस स्टैंड स्थित पार्टी कार्यालय के सामने प्रदर्शन किया। रात 8:30 बजे से 10 बजे तक चले इस प्रदर्शन में कार्यकर्ताओं ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी की। ट्रैफिक प्वाइंट पर बैठकर जताया विरोध प्रदर्शनकारी बस स्टैंड से निकलकर शहरी हाईवे स्थित ट्रैफिक प्वाइंट पहुंचे, जहां उन्होंने सड़क पर बैठकर विरोध जताया और चक्काजाम करने की कोशिश की। कुछ कार्यकर्ताओं ने सड़क पर दंडवत होकर आंदोलनरत छात्रों पर लाठीचार्ज न करने और केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के तुरंत इस्तीफे की मांग की। भारी पुलिस बल रहा तैनात विरोध प्रदर्शन की सूचना मिलते ही एसडीएम, तहसीलदार और भारी संख्या में पुलिस बल मौके पर पहुंच गया। पुलिस की मौजूदगी में कार्यकर्ताओं ने बस स्टैंड कार्यालय पहुंचकर प्रदर्शन समाप्त किया। उग्र आंदोलन की चेतावनी जिला कांग्रेस अध्यक्ष नरेश्वर सिंह प्रताप ने कहा कि दिल्ली में छात्रों पर हुए लाठीचार्ज और शिक्षा मंत्री के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन कर रहे राहुल गांधी को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान अपना इस्तीफा नहीं देते हैं, तो कांग्रेस आने वाले दिनों में और उग्र आंदोलन करेगी। देखें तस्वीरें…
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ब्राउन अंडा ज्यादा हेल्दी होता है या सफेद? जानिए दोनों में क्या है असली फर्क
अंडा प्रोटीन का बेहतरीन स्रोत माना जाता है, लेकिन जब खरीदने की बारी आती है तो कई लोग ब्राउन और सफेद अंडे को देखकर उलझन में पड़ जाते हैं. कुछ लोगों का मानना है कि ब्राउन अंडे ज्यादा पौष्टिक होते हैं, जबकि कुछ सफेद अंडों को बेहतर मानते हैं. आखिर सच क्या है? आइए जानते हैं कि इन दोनों के बीच क्या अंतर है और सेहत के लिहाज से किसे चुनना ज्यादा सही माना जाता है.
अगर आपने कभी सुपरमार्केट या डेयरी स्टोर से अंडे खरीदे होंगे, तो आपने देखा होगा कि एक ही ट्रे में सफेद और भूरे रंग के अंडे अलग-अलग कीमत पर बिकते हैं. अक्सर लोग सोचते हैं कि महंगे होने की वजह से ब्राउन अंडे ज्यादा हेल्दी होंगे, लेकिन पोषण विज्ञान की नजर से मामला इतना सीधा नहीं है.
रंग अलग क्यों होता है?
अंडे का रंग उसके पोषण से नहीं, बल्कि उसे देने वाली मुर्गी की नस्ल से तय होता है. जिन मुर्गियों के कान के पास की त्वचा (ईयरलोब) सफेद होती है, वे आमतौर पर सफेद अंडे देती हैं. वहीं लाल या भूरे रंग के ईयरलोब वाली कई नस्लों की मुर्गियां ब्राउन अंडे देती हैं. यानी अंडे का रंग केवल आनुवंशिक विशेषता है, इसका पोषण से सीधा संबंध नहीं होता.
क्या पोषण में कोई बड़ा अंतर है?
ब्राउन और सफेद अंडे दोनों में लगभग समान मात्रा में प्रोटीन, विटामिन B12, विटामिन D, सेलेनियम, फॉस्फोरस और हेल्दी फैट पाए जाते हैं. दोनों ही शरीर को जरूरी अमीनो एसिड उपलब्ध कराते हैं. यदि मुर्गियों को एक जैसा भोजन दिया गया हो, तो दोनों तरह के अंडों के पोषण में अंतर बेहद मामूली होता है, जिसे सामान्य आहार में महसूस करना मुश्किल है.
फिर ब्राउन अंडे महंगे क्यों होते हैं?
ब्राउन अंडे देने वाली मुर्गियां कई बार आकार में बड़ी होती हैं. उन्हें अधिक भोजन की जरूरत पड़ती है और पालन-पोषण की लागत भी बढ़ जाती है. यही वजह है कि कई बाजारों में ब्राउन अंडों की कीमत सफेद अंडों से ज्यादा होती है. इसका मतलब यह नहीं कि वे पोषण के मामले में कई गुना बेहतर हैं.
किस अंडे का स्वाद बेहतर होता है?
स्वाद का संबंध अंडे के रंग से ज्यादा मुर्गी के भोजन और पालन-पोषण के तरीके से होता है. अगर मुर्गियों को संतुलित और पौष्टिक आहार दिया गया है, तो अंडे का स्वाद और गुणवत्ता बेहतर हो सकती है, चाहे उसका छिलका सफेद हो या भूरा.
खरीदते समय किन बातों पर दें ध्यान?
अंडे खरीदते समय सिर्फ रंग देखकर फैसला न करें. पैकिंग की तारीख, ताजगी, छिलके की मजबूती और साफ-सफाई जरूर देखें. अगर अंडे में दरार हो या उससे बदबू आ रही हो, तो उसे नहीं खरीदना चाहिए. साथ ही, अंडों को सही तापमान पर स्टोर करना भी जरूरी है, ताकि उनकी गुणवत्ता बनी रहे.
हादसे का शिकार होते बचा एयर इंडिया का विमान: पैसेंजर्स ने बताया- हवा में डगमगाने लगा था प्लेन, दिल्ली की जगह हरियाणा पहुंच गया था
भुवनेश्वर1 घंटे पहले
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एयर इंडिया की फ्लाइट नं. IX1058 ओडिशा के भुवनेश्वर से दिल्ली आ रही थी।
ओडिशा के भुवनेश्वर से दिल्ली आ रहा एयर इंडिया का एक विमान मंगलवार को हादसे का शिकार होते बच गया। पैंसेंजर्स ने बताया कि एयर इंडिया की भुवनेश्वर-दिल्ली फ्लाइट नं. IX1058 ने दोपहर 3.30 बजे उड़ान भरी थी। लेकिन करीब 30 मिनट बाद ही प्लेन हवा में डगमगाने लगा।
इस दौरान फ्लाइट में बैठे 150 से ज्यादा पैसेंजर डर गए। पैसेंजर्स ने यह भी आरोप लगाया कि पायलट ने मुश्किल से प्लेन को संभाला। उसने प्लेन की स्पीड बढ़ा दी। फ्लाइट दिल्ली की बजाय हरियाणा के चरखी दादरी की तरफ चली गई थी। बाद में उसे घुमाकर वापस दिल्ली एयरपोर्ट पर लाया गया। फ्लाइट आधे घंटे पहले ही दिल्ली पहुंच गई थी। हालांकि, एयर इंडिया की ओर से इस मामले में अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है।

एयरपोर्ट से बाहर निकलते समय एक महिला पैसेंजर्स ने सीने पर हाथ रखकर कहा- थैंक्स गॉड।

कुछ पैंसेजर्स दिल्ली एयरपोर्ट पर कर्मचारियों से शिकायत करते नजर आए।

फ्लाइट ट्रैकर मैप में देखा जा सकता है कि फ्लाइट दिल्ली से हरियाणा की ओर चली गई थी।
आधे घंटे पहले ही पहुंच गई थी दिल्ली
हरियाणा के कुरुक्षेत्र में रहने वाले स्पर्श सिंगल ने बताया कि वे प्राइवेट बैंक में सेल्समैन हैं। वे 14 जुलाई को भगवान श्री जगन्नाथ की यात्रा में शामिल होने के लिए पुरी गए थे। यहां भगवान के दर्शन और यात्रा में शामिल होने के बाद आज मंगलवार को वापस आ रहे थे।
दोपहर करीब साढ़े 3 बजे उनकी भुवनेश्वर से दिल्ली की फ्लाइट (IX1058) थी। शुरुआत में सबकुछ ठीकठाक रहा, लेकिन करीब आधे घंटे बाद फ्लाइट में हलचल होने लगी। प्लेन जोर से हिलने लगा। प्लेन में पैसेंजर्स की चीख-पुकार मच गई थी। वहीं, एक महिला तो बेहोश हो गई थी। इसी दौरान पायलट ने प्लेन संभालने के लिए उसकी स्पीड बढ़ा दी थी। इसी के चलते फ्लाइट आधे घंटे पहले ही दिल्ली एयरपोर्ट पर लैंड हो गई थी। हम लोगों ने दिल्ली एयरपोर्ट पर अधिकारियों से बात करने की कोशिश की, लेकिन हमें कोई जवाब नहीं मिला।

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30 हजार फीट पर प्लेन की खिड़की टूटी:पैसेंजर का सिर-कंधा बाहर निकले, पत्नी ने बचाया, दोनों पैर पकड़े रही

ग्रीस के आकाश में 30 हजार फीट की ऊंचाई पर एक फ्लाइट की खिड़की टूट जाने से बड़ा हादसा टल गया। उस खिड़की के नजदीक बैठे 61 साल के पैसेंजर का सिर और कंधे खिड़की से बाहर निकल गए। पास बैठी पत्नी ने बचाया। जैसे ही वह विंडो से बाहर निकलने लगे, उनकी पत्नी ने जोर से दोनों पैर पकड़ लिए। पूरी खबर पढ़ें…
ऑनलाइन गोल्ड ट्रेडिंग के नाम पर 12.09 करोड़ की ठगी: फाइनेंस कंपनी की महिला डायरेक्टर को मुंबई से दबोचा; अन्य राज्यों के पीड़ितों की भी तलाश – Jaipur News
राजस्थान स्टेट साइबर क्राइम थाना पुलिस ने ऑनलाइन गोल्ड ट्रेडिंग के नाम पर 12 करोड़ 9 लाख 65 हजार 512 रुपए की साइबर ठगी का खुलासा किया है। मामले में पुलिस ने एक फर्जी फाइनेंस कंपनी गोल्डन लीजेंड लीजिंग एंड फाइनेंस लिमिटेड (GLLFL) की निदेशक दिव्या सिंह कुशवाहा को मुंबई से गिरफ्तार किया है। जांच में सामने आया है कि फर्जी गोल्ड ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म के लिए यूज किए जा रहे वर्चुअल मर्चेंट खातों के संचालन में कंपनी की अहम भूमिका थी। मामले में मुख्य आरोपी जयंता रॉय सहित अन्य आरोपियों की तलाश जारी है। वहीं पुलिस ठगी के शिकार हुए अन्य राज्यों के पीड़ित लोगों की भी तलाश कर रही है। भारी मुनाफे का झांसा देकर कराया निवेश एडीजी साइबर क्राइम संजय अग्रवाल ने बताया कि स्टेट साइबर क्राइम पुलिस थाना जयपुर में 9 दिसंबर 2025 को दर्ज मामले में परिवादी ने शिकायत दी थी कि उसे वाट्सएप के माध्यम से गोल्ड ट्रेडिंग में भारी मुनाफे का लालच देकर फर्जी वेबसाइट पर निवेश कराया गया। इसके बाद विभिन्न बैंक खातों और वर्चुअल मर्चेंट खातों में 12.09 करोड़ रुपए से ज्यादा जमा करवाकर उसके साथ धोखाधड़ी की गई। करोड़ों रुपए लेने के बाद भी नहीं लौटाई निवेश की राशि एडीजी ने बताया कि जब पीड़ित ने अपनी रकम निकालने का प्रयास किया तो आयकर, प्रोसेसिंग फीस, अकाउंट अनफ्रीज शुल्क और अन्य चार्ज के नाम पर पीड़ित को बार-बार अतिरिक्त रकम जमा करानी पड़ी। करोड़ों रुपए लेने के बावजूद न तो निवेश की राशि लौटाई गई और न ही निकासी की अनुमति दी गई। वित्तीय जांच में खुला बड़ा साइबर नेटवर्क स्टेट साइबर क्राइम पुलिस थाना जयपुर की टीम ने तकनीकी और वित्तीय साक्ष्यों की गहन जांच की। जांच में सामने आया कि साइबर ठगी में यूज किया गया वर्चुअल मर्चेंट खाता प्राइम इनफॉरमेशन टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड को उपलब्ध कराया गया था, जिसका संचालन गोल्डन लीजेंड लीजिंग एंड फाइनेंस लिमिटेड (GLLFL) के माध्यम से किया जा रहा था। पुलिस जांच में ऑनबोर्डिंग, केवाईसी, ड्यू डिलिजेंस, रिस्क मॉनिटरिंग और फ्रॉड डिटेक्शन प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं मिलीं। साथ ही इन खातों के खिलाफ राष्ट्रीय साइबर अपराध रिपोर्टिंग पोर्टल (1930) पर देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में शिकायतें दर्ज होने की पुष्टि भी हुई। मुंबई से महिला निदेशक गिरफ्तार मामले में पहले आरोपी इकबाल अहमद के खिलाफ जांच पूरी कर कोर्ट में आरोप पत्र पेश किया जा चुका है। आगे की जांच में GLLFL के निदेशकों की भूमिका सामने आने पर साइबर थाना जयपुर की टीम ने मुंबई पहुंचकर कंपनी की निदेशक दिव्या सिंह कुशवाहा को गिरफ्तार किया। पुलिस ने कोर्ट के जरिए आरोपी महिला को 5 दिन के रिमांड पर लिया है। इस दौरान मनी ट्रेल, फरार आरोपियों की भूमिका, डिजिटल सबूतों और साइबर नेटवर्क से जुड़े अन्य सदस्यों के बारे में पूछताछ की जा रही है। अन्य राज्यों के पीड़ितों की भी तलाश राजस्थान पुलिस अब इस साइबर नेटवर्क में यूज किए गए बैंक खातों, मोबाइल नंबरों और अन्य डिजिटल सबूतों का विश्लेषण कर गिरोह के अन्य सदस्यों की पहचान में जुटी है। साथ ही राजस्थान सहित अन्य राज्यों में इस गिरोह से ठगी के शिकार हुए पीड़ित लोगों की भी पहचान की जा रही है। इन अधिकारियों की रही अहम भूमिका थानाधिकारी गजेन्द्र शर्मा के नेतृत्व में गठित टीम में अनुसंधान अधिकारी पुलिस निरीक्षक अमृता सिंह, उप निरीक्षक मुकेश कुमार और कॉन्स्टेबल बोदूराम की विशेष भूमिका रही। डीजीपी राजीव कुमार शर्मा के निर्देश पर साइबर अपराधियों के खिलाफ चलाए जा रहे विशेष अभियान के तहत यह कार्रवाई की गई।
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10 किलोवाट के सोलर पैनल लगाने का कितना आएगा खर्च? क्या-क्या चलेगा लोड?
सोलर एनर्जी के जरिए आप हर महीने आने वाले बिजली के बिल का खर्चा बचा सकते हैं। हालांकि, सोलर पैनल लगाने में अच्छा-खासा खर्चा आता है, जिसकी वजह से सरकार ने पीएम सूर्य घर योजना के तहत लोगों सो सब्सिडी भी दी है। अगर, आप अपने घर पर 10 किलोवाट का सोलर पैनल लगवाना चाहते हैं तो इसके लिए आपको कितना खर्च करना होगा? इस सोलर सिस्टम को लगाकर घर का कितना लोड चला सकते हैं? साथ ही, कितने बिजली की आप बचत कर सकते हैं? आइए जानते हैं…
10kW के सोलर पैनल का खर्च
भारत में कई ब्रांड के सोलर पैनल मिलते हैं, जिन्हें आप अपने घर की छतों पर लगा सकते हैं। हाल ही में सरकार ने सोलर पैनल को लेकर पॉलिसी में बदलाव किया है, जिसके तहत पीएम सूर्य घर योजना के अंतर्गत सब्सिडी लेने के लिए आपको नई ALMM यानी अप्रूव्ड लिस्ट ऑफ मॉडल एंड मैन्युफैक्चरर्स से ही पैनल लगवाना होगा। इस लिस्ट में उन कंपनियों को ही शामिल किया गया है, जो भारत में ही सोलर सेल बनाकर बाजार में बेचते हैं।
सब्सिडी के साथ 10 किलोवाट का सोलर सिस्टम लगवाने में आपको 4 लाख रुपये से लेकर 5 लाख रुपये के बीच का खर्च आएगा। इसमें सोलर पैनल के अलावा इसमें लगने वाले कंपोनेंट्स जैसे कि सोलर इनवर्टर, DCDB (डीसी डिस्ट्रीब्यूशन बॉक्स), ACDB (एसी डिस्ट्रीब्यूशन बॉक्स), वायर, अर्थिंग आदि की कीमत शामिल हैं। अगर, आप बैटरी बैकअप लगाना चाहते हैं तो इसके लिए आपको अलग से भी खर्च करना पड़ सकता है।
वहीं, बिना सब्सिडी वाला सोलर सिस्टम लगाने के लिए आपको करीब 6 लाख से 7 लाख रुपये के बीच का खर्च करना होगा। इसमें सोलर पैनल के अलावा इसमें इस्तेमाल होने वाले कंपोनेंट्स शामिल हैं। बैटरी का खर्च अलग से आ सकता है। अगर, आप हर महीने 700 से 1000 यूनिट्स बिजली की खपत करते हैं तो 10 किलोवाट का सोलर सिस्टम आपके महीने के बिल को जीरो कर देगा।
क्या-क्या चलेंगे लोड?
10 किलोवाट के सोलर सिस्टम पर आप 2 से 3 एयरकंडीशनर (1.5 टन इन्वर्टर टेक्नोलॉजी वाले), 2 हार्स पावर के वाटर पंप या समर्सिबल, फ्रिज, वॉशिंग मशीन, मिक्सर, गीजर समेत पूरे घर का लोड डाल सकते हैं। इस सिस्टम को आम तौर पर बड़े घरों और दुकानों के साथ-साथ कमर्शियल यूज के लिए लगाया जाता है। बेसिक यूज के लिए आप 3 से 5 किलोवाट का सिस्टम लगवा सकते हैं।
कितनी मिलेगी सब्सिडी?
पीएम सूर्य घर- मुफ्त बिजली योजना के तहत घर की छत पर सोलर पैनल लगाने के लिए सरकार की तरफ से भारी सब्सिडी ऑफर की जाती है। इस योजना के तहत 1 किलोवॉट (1KW) का सोलर सिस्टम लगाने पर लगभग 30,000 रुपये की सब्सिडी मिलती है। वहीं, 2 किलोवॉट पर 60,000 रुपये और 3 किलोवॉट या इससे ज्यादा पर 78,000 रुपये की सब्सिडी मिलती है। इसके अलावा कई राज्य सरकारें भी अपनी तरफ से सब्सिडी ऑफर कर रही हैं। ऐसे में ग्राहकों को सोलर सिस्टम लगाने पर अच्छी-खासी बचत हो जाती है। इसके अलावा हर महीने 300 यूनिट्स तक की बिजली मुफ्त में दी जाती है।
PM सूर्य घर योजना के लिए कैसे करें अप्लाई?
- पीएम सूर्य घर योजना के तहत सब्सिडी लेने के लिए आप आधिकारिक वेबसाइट से ऑनलाइन अप्लाई कर सकते हैं।
- इसके लिए PM Sury Ghar की वेबसाइट (https://solarrooftop.pmsuryaghar.gov.in/) पर जाएं।
- यहां Register वाले ऑप्शन पर क्लिक करें और आगे बढ़ें।
- अगले पेज पर आपको अपना राज्य, बिजली वितरण कंपनी (DISCOM) और अपना कंज्यूमर नंबर दर्ज करना होगा।
- इसके बाद मोबाइल नंबर और ई-मेल आईडी दर्ज करके रजिस्ट्रेशन प्रक्रिया पूरी करें।
- Rooftop सोलर पैनल के लिए अब आपको रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर और OTP के जरिए लॉग-इन करना होगा।
- यहां आपको डैशबोर्ड पर दिए गए Apply For Rooftop Solar वाले ऑप्शन पर टैप करना होगा।
- फिर आगे की प्रक्रिया में आवेदन फॉर्म को भरना होगा और अप्रूवल का इंतजार करना होगा।
- अप्रूवल मिलते ही आपको अपने घर की छत पर सोलर पैनल लगवाने के लिए रजिस्टर्ड वेंडर को चुनना होगा।
- पैनल लगाए जाने के बाद DISCOM द्वारा इसे वेरिफाई किया जाएगा।
- इसके बाद आपके बैंक अकाउंट में सरकार द्वारा मिलने वाली सब्सिडी ट्रांसफर की जाएगी।
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जापान में राजा अब दूर के रिश्तेदारों को गोद लेंगे: सिर्फ 3 उत्तराधिकारी बचे तो नियम बदला, महिला को सम्राट बनने का अधिकार नहीं मिला
जापान की संसद ने 17 जुलाई को शाही परिवार के उत्तराधिकार से जुड़े कानून में बड़ा बदलाव किया। नए कानून के तहत अब शाही परिवार 15 साल या उससे अधिक उम्र के दूर के पुरुष रिश्तेदारों को गोद लेकर दोबारा शाही परिवार में शामिल कर सकेगा। इसके अलावा, अब शाही परिवार की महिलाएं किसी आम नागरिक से शादी करने के बाद भी अपना शाही दर्जा और आधिकारिक जिम्मेदारियां नहीं खोएंगी। हालांकि, सबसे अहम नियम नहीं बदला गया। जापान में अब भी सिर्फ पुरुष ही सम्राट बन सकते हैं। यानी सम्राट नारुहितो की इकलौती बेटी राजकुमारी आइको भविष्य में भी सिंहासन की उत्तराधिकारी नहीं बन सकेंगी। शाही परिवार में नियम बदलने की जरूरत क्यों पड़ी जापान का शाही परिवार दुनिया का सबसे पुराना लगातार चला आ रहा राजवंश माना जाता है, लेकिन आज वह उत्तराधिकार के गंभीर संकट से जूझ रहा है। मौजूदा सम्राट की सिर्फ एक बेटी है। वह उत्तराधिकारी नहीं बन सकती, क्योंकि कानून सिर्फ पुरुषों को ही सिंहासन का अधिकार देता है।
शाही परिवार में सिंहासन के सिर्फ 3 उत्तराधिकारी हैं। उत्तराधिकार की कतार में पहले नंबर पर सम्राट के छोटे भाई प्रिंस फुमिहितो, दूसरे नंबर पर उनके 19 वर्षीय बेटे प्रिंस हिसाहितो और तीसरे नंबर पर 90 वर्षीय प्रिंस हिताची हैं। अगर भविष्य में पुरुष उत्तराधिकारी नहीं बढ़े, तो शाही परिवार के सामने उत्तराधिकार का संकट और गहरा सकता है। सरकार के सामने दो ही रास्ते थे- सरकार ने दूसरा रास्ता क्यों चुना जापान में महिला को सम्राट बनाने का मुद्दा कई वर्षों से चर्चा में है। जनमत सर्वेक्षणों में अधिकांश जापानी नागरिक महिला सम्राट के पक्ष में रहे हैं। 2024 में क्योडो न्यूज के सर्वे में 90% जापानी नागरिकों ने महिला सम्राट का समर्थन किया था। लेकिन सत्तारूढ़ लिबरल डेमोक्रेटिक पार्टी (LDP) के परंपरावादी नेता इसका विरोध करते रहे हैं। इन नेताओं का तर्क है कि जापान का शाही परिवार करीब 2,000 वर्षों से पुरुष वंश के आधार पर चला आ रहा है। उनके अनुसार, अगर किसी महिला को सम्राट बनाया गया और उसके बच्चे भविष्य में सिंहासन पर बैठे, तो शाही परिवार की पितृवंश परंपरा टूट जाएगी। उनका मानना है कि यही परंपरा जापान की राजशाही की पहचान है और इसे नहीं बदला जाना चाहिए। इसी वजह से सरकार ने महिला सम्राट या महिलाओं की संतान को उत्तराधिकारी बनाने का कानून बदलने के बजाय दूसरा रास्ता चुना।
11 पूर्व शाही शाखाएं क्या हैं, जिनके बच्चे गोद लिए जाएंगे
सम्राट को उत्तराधिकारी चुनने के लिए गोद लेने का अधिकार मिला है। लेकिन वे किसी भी बच्चे को गोद नहीं ले सकते। वे केवल 11 पूर्व शाही शाखाओं के वंशज के पुरुषों को ही गोद ले सकेंगे। दरअसल, दूसरे विश्व युद्ध से पहले जापान के शाही परिवार में सिर्फ मुख्य राजपरिवार ही नहीं था, बल्कि उससे जुड़ी 11 अलग-अलग शाही शाखाएं भी थीं। इन शाखाओं के सदस्य भी सम्राट के पुरुष वंशज थे और जरूरत पड़ने पर सिंहासन के उत्तराधिकारी बन सकते थे। साल 1947 में, दूसरे विश्व युद्ध के बाद अमेरिकी कब्जे वाली प्रशासनिक व्यवस्था और जापानी सरकार ने शाही परिवार का आकार छोटा करने का फैसला किया। इसके तहत इन 11 शाखाओं के 51 सदस्यों से शाही दर्जा वापस ले लिया गया। वे आम नागरिक बन गए और उनके परिवारों का शाही परिवार से कानूनी रिश्ता खत्म हो गया। नियम बदलने के बाद शाही परिवार में पुरुष सदस्यों की संख्या लगातार घटती गई। दूसरी ओर, शाही परिवार की महिलाएं जब आम नागरिकों से शादी करती थीं, तो कानून के मुताबिक उन्हें भी शाही परिवार छोड़ना पड़ता था। इससे शाही परिवार छोटा होता चला गया और उत्तराधिकार का संकट गहराने लगा। इसी वजह से जापानी सरकार ने करीब 79 साल बाद नियमों में बदलाव किया है। अब इन 11 पूर्व शाही शाखाओं के 15 वर्ष या उससे अधिक उम्र के पुरुष वंशजों को कानूनी प्रक्रिया के जरिए गोद लेकर फिर से शाही परिवार में शामिल किया जा सकेगा। महिलाओं का आम नागरिक से शादी करने पर शाही दर्जा नहीं छिनेगा नए कानून के तहत अब शाही परिवार की महिला सदस्य अगर किसी आम नागरिक से शादी करती हैं, तब भी वे अपना शाही दर्जा और आधिकारिक जिम्मेदारियां नहीं खोएंगी। यह पहले के नियम से बिल्कुल अलग है। पुराने कानून के तहत आम नागरिक से शादी करने वाली महिला को शाही परिवार छोड़ना पड़ता था। नए कानून के पीछे सबसे बड़ा कारण राजकुमारी माको का मामला माना जा रहा है। सम्राट नारुहितो की भतीजी माको ने 2021 में अपने कॉलेज के साथी केई कोमुरो से शादी की थी। दोनों की मुलाकात 2013 में टोक्यो की इंटरनेशनल क्रिश्चियन यूनिवर्सिटी में हुई थी। दोनों ने गुपचुप सगाई कर ली थी, जिसके बाद पूरे जापान में इस रिश्ते को लेकर काफी विवाद हुआ। अक्टूबर 2021 में दोनों की शादी बेहद सादगी से हुई। परंपरा के मुताबिक होने वाला जुलूस और भव्य समारोह भी नहीं हुआ। शादी के बाद कानून के तहत माको को अपना शाही दर्जा छोड़ना पड़ा और वे अपने पति के साथ न्यूयॉर्क चली गईं, जहां उनके पति वकील हैं। माको ने शाही परिवार छोड़ने पर मिलने वाली करीब 10 लाख पाउंड (करीब 11 करोड़ रुपए) की सरकारी राशि भी लेने से इनकार कर दिया था। दूसरे विश्व युद्ध के बाद ऐसा करने वाली वे शाही परिवार की पहली सदस्य थीं। जापान की सम्राट बन चुकी हैं 8 महिलाएं जापान के इतिहास में अब तक 8 महिलाएं सम्राट (महारानी) बन चुकी हैं। हालांकि, इनमें से कोई भी अपने बच्चों को उत्तराधिकारी नहीं बना सकी। वे केवल तब सिंहासन पर बैठीं, जब कोई उपयुक्त पुरुष उत्तराधिकारी उपलब्ध नहीं था या वह बहुत छोटा था। इसलिए उन्हें अक्सर अस्थायी शासक माना गया और बाद में सत्ता फिर किसी पुरुष उत्तराधिकारी को सौंप दी गई। जापान की आखिरी महिला शासक महारानी गोसाकुरामाची थीं। उन्होंने 1762 से 1770 तक शासन किया। उनके बाद से पिछले 250 से अधिक साल में जापान में कोई महिला सम्राट नहीं बनी। फिर महिलाओं के लिए रास्ता क्यों बंद हो गया? पहले जापान में कानून में यह साफ नहीं लिखा था कि केवल पुरुष ही सम्राट बन सकते हैं। 19वीं सदी के आखिर में जापान ने खुद को एक आधुनिक राष्ट्र बनाने की शुरुआत की। जापान पश्चिमी देशों की तरह आधुनिक सेना, प्रशासन और कानूनी व्यवस्था विकसित करना चाहता था। इसी प्रक्रिया में 1889 में मेइजी संविधान लागू किया गया, जिसने जापान में संवैधानिक राजतंत्र की नींव रखी और सम्राट की शक्तियों तथा शाही परिवार से जुड़े नियम तय किए। इसमें यह व्यवस्था की गई कि सिंहासन पर केवल पुरुष वंशज ही बैठेंगे। दूसरे विश्व युद्ध के बाद 1947 में नया शाही परिवार कानून बनाया गया। इसमें भी पुरुष उत्तराधिकार की व्यवस्था को बरकरार रखा गया। यही कानून आज भी लागू है। इसलिए आज भी जापान में महिला सम्राट बनने या महिला की संतान के उत्तराधिकारी बनने की अनुमति नहीं है। ——————————
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पैसा कमाना है तो आज ही सीखें यह स्किल, नॉर्मल इंजीनियर्स से 7 गुना सैलरी
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FDEs Salary Package : आईटी सेक्टर के युवाओं के लिए रोजगार और मोटी सैलरी का नया अवसर सामने आ गया है. कंपनियां अब एआई और कस्टमर सपोर्ट को मिलाकर एक नया पेशेवर तैयार कर ही हैं, जिन्हें सामान्य इंजीनियर की तुलना में 7 गुना ज्यादा सैलरी मिलती है.
आईटी सेक्टर में FDEs की डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है.
नई दिल्ली. आज का युवा जल्दी अमीर होना चाहता है, अच्छी सैलरी और फाइनेंशियल आजादी की ख्वाहिश रखता है. लेकिन, समस्या ये आती है कि वह कौन सा रास्ता जिससे यह सभी ख्वाहिशें पूरी हो जाएं. अगर आप भी ऐसी ही समस्या से घिरे हैं तो जरा इस तरफ नजर डालें और अपने करियर को आज की डिमांड के आधार पर चुनें. आईटी सेक्टर में एक नई जॉब आई है जिसे फॉरवर्ड डेप्लॉयड इंजीनियर (FDEs) कहते हैं. यह एआई डेवलपमेंट की स्पेशलिस्ट की नई कैटेगरी है और इस सेक्टर में शुरुआती सैलरी नॉर्मल इंजीनियर्स के मुकाबले 7 गुना ज्यादा रहती है. इस सेक्टर में एंट्री लेवल पर ही करीब 18 लाख रुपये के पैकेज से शुरुआत होती है.
तेजी से बढ़ रही स्किल की डिमांड
टीमलीज डिजिटल की सीईओ नीति शर्मा का कहना है कि इस सेक्टर में टैलेंट की डिमांड तेजी से बढ़ रही है. वित्तवर्ष 2026 की पहली तिमाही से लेकर 2027 की पहली तिमाही तक ऐसे टैलेंट की डिमांड 800 फीसदी बढ़ चुकी है. अब कंपनियां एआई पायलट के छोटे स्तर से बढ़कर लार्ज स्केल पर इसे लागू कर रही हैं. मनीकंट्रोल के अनुसार, बीते मई महीने में देश में OpenAI, Anthropic जैसी कंपनियों में 230 FDEs की डिमांड थी. अब अन्य कंपनियां भी तेजी से इस सेक्टर में टैलेंट की खोज कर रही हैं. फिलहाल भारत में 2,800 से ज्यादा FDEs प्रोफेशनल्स हैं.
कैसे अलग होते हैं FDEs
पारंपरिक सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स के मुकाबले FDEs प्रोडक्शन के लिए सीधे तौर पर कस्टमर्स कंपनियों और एआई सिस्टम से जुड़े होते हैं. इन पेशेवरों के पास Python, agentic AI, retrieval-augmented generation (RAG), MLOps, cloud platforms और APIs जैसे सेक्टर्स में एक्सपरटीज होती है. उनका काम बिजनेस वर्कफ्लो को बेहतर बरना और कस्टमर की जरूरतों के हिसाब से प्रोडक्ट तैयार करने में एआई के इस्तेमाल को लागू करना होता है. Xpheno के मुताबिक, इस काम के लिए तकनीकी दक्षता ज्यादा जरूरी है, बजाय कि ज्यादा भाषाओं पर कमांड अथवा अन्य पारंपरिक योग्यताओं के.
भारतीय कंपनियां भी दे रहीं जोर
- आईटी फर्म टीसीएस ने अपने कुल ग्लोबल फोर्स का 1 से 1.5 फीसदी टैलेंट FDEs में बदलने पर जोर दे रही है. इसका मतलब है कि कंपनी के करीब 8,900 कर्मचारियों को इसका प्रशिक्षण दिया जाएगा.
- इसके अलावा एचसीएल टेक ने भी अपने फ्रेशर्स और मौजूदा कर्मचारियों को FDEs में बदलने की तैयारी शुरू कर दी है.
- एलटीएम ने AI1000 इनीशिएटिव लॉन्च किया है, जो कंपनी में 1,000 FDEs की फौज खड़ी करेगी.
- Coforge ने तो इस साल के आखिर तक कंपनी के लिए 100 स्पेशल FDEs तैयार करने का लक्ष्य रखा है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें
अमरोहा में कलेक्ट्रेट पहुंचे हजारों किसान: भारत-अमेरिका ट्रेड डील रोकने, भूमि अधिग्रहण में 4 गुना मुआवजा समेत कई मांगें – Amroha News
अमरोहा में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट) सहित अन्य किसान संगठनों ने एक साथ एकत्र होकर मंगलवार को कलेक्ट्रेट पर धरना-प्रदर्शन किया। हजारों की संख्या में पहुंचे किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आवाज बुलंद की और जल्द समाधान न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी। किसान ट्रैक्टरों और अन्य वाहनों से कलेक्ट्रेट पहुंचे, जिससे आसपास के क्षेत्र में भारी भीड़ जमा हो गई। उन्होंने प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शन को देखते हुए कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। किसानों ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील समझौते को किसानों के लिए हानिकारक बताते हुए उसे रोकने की मांग की। उन्होंने यह भी मांग की कि गंगा एक्सप्रेसवे मार्ग के द्वितीय चरण में मंगरौला से हरिद्वार तक भूमि अधिग्रहण के लिए सर्किल रेट बढ़ाकर बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा दिया जाए। इसके अतिरिक्त, किसानों ने मुरादाबाद कॉरिडोर नेशनल हाईवे 9 के दोनों ओर एक-एक किलोमीटर भूमि को एमडीए के अधीन लाने के प्रस्ताव को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग की। उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्रों के प्रदर्शन का भी समर्थन किया और उन पर हुए लाठीचार्ज की निंदा करते हुए छात्रों की मांगें मानने की अपील की। धरने के दौरान संबंधित अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और किसानों की समस्याओं को सुना। अधिकारियों ने जल्द समस्याओं का समाधान कराने का आश्वासन दिया। हालांकि, किसानों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे।
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