Friday, August 21, 2026
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राजस्थान में 473 घुमंतू परिवारों को मिला स्थायी आशियाना: CM ने सौंपे फ्लैट; प्रवासी भारतीयों के सहयोग से शिक्षा-रोजगार की पहल भी तेज – Jaipur News




राजस्थान में लंबे समय से स्थायी आश्रय के लिए संघर्ष कर रहे घुमंतू, अर्ध-घुमंतू और विमुक्त समुदायों के 473 परिवारों को अब अपना पक्का घर मिल गया है। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने 13 अगस्त को लाभार्थी परिवारों को आवास आवंटन सौंपे। स्थायी पता नहीं होने से इन परिवारों को सरकारी योजनाओं और बुनियादी सुविधाओं तक पहुंच में परेशानी होती थी। आवास मिलने के बाद अब इन समुदायों के बच्चों की शिक्षा और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। घर से शिक्षा तक, घुमंतू परिवारों को मुख्यधारा से जोड़ने की पहल राजस्थान सरकार की यह आवासीय पहल उन परिवारों के लिए अहम मानी जा रही है, जो लंबे समय से सामाजिक और आर्थिक रूप से हाशिये पर रहे हैं। स्थायी घर मिलने से उन्हें न केवल सुरक्षित आश्रय मिलेगा, बल्कि स्थायी पते से दस्तावेज, शिक्षा, स्वास्थ्य और सरकारी कल्याणकारी योजनाओं तक पहुंच आसान होने की उम्मीद है। न्यूयॉर्क स्थित राजस्थान एसोसिएशन ऑफ नॉर्थ अमेरिका (RANA) के अध्यक्ष और चंद्रा–के.के. मेहता फैमिली फाउंडेशन के एडवाइजरी बोर्ड के चेयरमैन प्रेम भंडारी ने सरकार के इस कदम का स्वागत किया है। उन्होंने जमीनी स्तर पर लंबे समय से काम कर रहे सामाजिक कार्यकर्ताओं के योगदान को भी रेखांकित किया। दुर्गादास जी के प्रयासों की सराहना प्रेम भंडारी ने घुमंतू जाति उत्थान न्यास के राष्ट्रीय प्रमुख दुर्गादास के कार्यों की विशेष रूप से सराहना की। उनके अनुसार दुर्गादास जी एक दशक से ज्यादा समय से घुमंतू, अर्ध-घुमंतू और विमुक्त समुदायों के कल्याण के लिए काम कर रहे हैं। इन समुदायों को सामाजिक और आर्थिक मुख्यधारा से जोड़ने के प्रयासों में उनकी लंबे समय से चली आ रही जमीनी सेवा को महत्वपूर्ण बताया गया है। ब्रिटिश दौर के कलंक का असर आज भी घुमंतू और विमुक्त समुदायों का इतिहास सामाजिक भेदभाव से भी जुड़ा रहा है। ब्रिटिश शासन के दौरान एक कानून के तहत इन्हें ऐतिहासिक रूप से ‘अपराधी जनजातियों’ की श्रेणी में रखा गया था। यह कानून 1952 में निरस्त कर दिया गया, लेकिन इससे जुड़ा सामाजिक कलंक और आर्थिक पिछड़ापन लंबे समय तक बना रहा। आज भी कई परिवारों के पास स्थायी घर, औपचारिक दस्तावेज और सरकारी योजनाओं तक पर्याप्त पहुंच नहीं है। ऐसे में आवास उपलब्ध कराना इनके पुनर्वास और मुख्यधारा से जुड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। पहले भी हुए रोजगार और जागरूकता से जुड़े प्रयास इन समुदायों के लिए पिछले कुछ वर्षों में राजस्थान में सामाजिक और कल्याणकारी स्तर पर कई गतिविधियां हुई हैं। जनवरी 2025 में जयसिंहपुरा खोर की चेतना बस्ती में दो दिवसीय कार्यक्रम आयोजित किया गया था। इसका उद्देश्य सामाजिक और आध्यात्मिक जागरूकता बढ़ाना था। इसके बाद 29 नवंबर 2025 को रोजगार मेले का आयोजन किया गया। इसमें उपमुख्यमंत्री दीया कुमारी ने सैकड़ों परिवारों को आजीविका से जुड़े साधन वितरित किए। आयोजकों के मुताबिक, इस कार्यक्रम को प्रेम भंडारी ने RANA और चंद्रा–के.के. मेहता फैमिली फाउंडेशन की ओर से व्यक्तिगत रूप से प्रायोजित किया था। RANA के सचिव रवि जारगढ़ भी कार्यक्रम में मौजूद रहे। स्वच्छता के बाद अब बच्चों की शिक्षा पर फोकस इन संगठनों की ओर से स्वच्छ भारत मिशन के उद्देश्यों के अनुरूप स्वच्छता प्रोत्साहन अभियान को भी समर्थन दिया गया। आयोजकों का कहना है कि इससे बस्तियों में स्वच्छता की स्थिति सुधारने में मदद मिली। अब प्रेम भंडारी का फोकस इन परिवारों के बच्चों की शिक्षा पर है। उन्होंने कहा कि वह इन समुदायों के बच्चों को डॉक्टर, इंजीनियर और सिविल सेवक बनते देखना चाहते हैं। RANA और चंद्रा–के.के. मेहता फैमिली फाउंडेशन योग्य और जरूरतमंद बच्चों की पहचान कर उनकी शिक्षा का खर्च उठाने की योजना पर काम करेंगे। सरकार की योजना के खर्च का विवरण अभी सार्वजनिक नहीं यह पहल सरकारी योजनाओं के साथ सामाजिक संगठनों और प्रवासी भारतीय समुदाय की भागीदारी का उदाहरण भी है। हालांकि, राजस्थान सरकार ने अभी तक 473 फ्लैटों की योजना की कुल लागत और लाभार्थियों के चयन के विस्तृत मानदंड सार्वजनिक नहीं किए हैं। ऐसे में योजना के आर्थिक पक्ष और चयन प्रक्रिया की विस्तृत जानकारी सामने आना अभी बाकी है।



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चीनी के भाव ने छुड़ाए पसीने, बाहर से 10 लाख टन मंगाएगा भारत, सरकार ने खोला रास्‍ता


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सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की बढ़ती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए 10 लाख टन कच्ची चीनी के ड्यूटी-फ्री आयात की अनुमति दी है. DGFT ने 31 अक्टूबर तक के लिए यह फैसला लिया है.

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जब बाजार में किसी चीज के दाम बेकाबू होने लगें तो सरकार को बाहर का रास्ता भी खोलना पड़ता है. चीनी के मामले में कुछ ऐसा ही हुआ है. घरेलू बाजार में कीमतें करीब दो महीने में लगभग 40 फीसदी चढ़ चुकी हैं और त्योहारी सीजन सामने है. ऐसे में सरकार ने करीब एक दशक बाद कच्ची चीनी के आयात का रास्ता खोल दिया है. 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन कच्ची चीनी बिना कस्टम ड्यूटी के भारत लाई जा सकेगी.

डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड यानी DGFT ने गुरुवार को कच्ची चीनी की इंपोर्ट पॉलिसी में बदलाव किया है. इसके तहत 10 लाख मीट्रिक टन तक कच्ची चीनी को Tariff Rate Quota यानी TRQ के तहत ड्यूटी फ्री आयात की अनुमति दी गई है. आसान भाषा में कहें तो सरकार ने चीनी की एक तय मात्रा के लिए आयात शुल्क हटा दिया है, ताकि बाहर से चीनी आए और घरेलू बाजार में सप्लाई बढ़े.

अब सवाल है कि आखिर इसकी जरूरत क्यों पड़ी? दरअसल, देश में चीनी की सप्लाई पर दबाव बढ़ा है और इसी वजह से कीमतें तेजी से ऊपर गई हैं. पिछले दो महीनों में चीनी के भाव करीब 40 फीसदी तक बढ़ चुके हैं. भारत दुनिया में चीनी की सबसे बड़ी खपत करने वाली अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है. ऐसे में त्योहारों के मौसम से पहले कीमतों में इतनी तेजी सरकार के लिए चिंता का विषय बन गई.

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राम मंदिर चंदा-चढ़ावा चोरी को कांग्रेस बनाएगी मुद्दा: राजेंद्र पाल गौतम बोले-आस्था से धोखा, एक सप्ताह में घर-घर जाएंगे – Uttar Pradesh News




अयोध्या के राम मंदिर में चंदे और चढ़ावे चोरी को लेकर कांग्रेस देशव्यापी मुद्दा बनाने की तैयारी में है। उत्तर प्रदेश कांग्रेस प्रभारी राजेंद्र पाल गौतम ने आरोप लगाया कि राम मंदिर के नाम पर करोड़ों-अरबों रुपए के चंदे और चढ़ावे में चोरी हुई है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अगले एक सप्ताह में घर-घर जाकर अभियान चलाएगी और जनता के बीच कथित चंदा-चढ़ावा चोरी के मामले को बड़े स्तर पर उजागर करेगी। ‘SIT की रिपोर्ट सीलबंद तो मीडिया तक जानकारी कैसे पहुंची?’ राजेंद्र पाल गौतम ने SIT की जांच को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि 17 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने SIT को अपनी प्रोग्रेस रिपोर्ट/स्टेटस रिपोर्ट बंद लिफाफे में दाखिल करने को कहा था। ऐसे में SIT की जांच से जुड़े गोपनीय तथ्य मीडिया में कैसे सामने आए? उन्होंने सवाल किया कि अगर मीडिया में आई खबरों के मुताबिक SIT की फाइनल रिपोर्ट में चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्र को क्लीन चिट दी गई है, तो सरकार पूरी SIT रिपोर्ट और क्लीन चिट का आधार जनता के सामने क्यों नहीं रख रही है? कांग्रेस नेता ने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि मामले की वर्तमान कानूनी स्थिति क्या है? SIT में फोरेंसिक ऑडिटर शामिल है और सुप्रीम कोर्ट ने भी फोरेंसिक पहलू सहित जांच की प्रोग्रेस मांगी है। ऐसे में अब तक फोरेंसिक जांच में क्या सामने आया, दान और उपहार का कितना समाधान हुआ और कौन-कौन सी अनियमितताएं मिलीं, इसकी जानकारी सार्वजनिक की जानी चाहिए। ‘सिर्फ 8 छोटे कर्मचारियों से इतनी बड़ी चोरी संभव नहीं’ राजेंद्र पाल गौतम ने कहा कि मामले में केवल 8 छोटे गणनाकर्मियों की गिरफ्तारी हुई है। सवाल यह है कि दान लेने, गणना कराने, बहुमूल्य धातुओं की जांच-माप, उनके रखरखाव और हिसाब-किताब की पूरी निगरानी की संस्थागत जिम्मेदारी किसकी थी? उन्होंने कहा कि इतनी बड़ी गड़बड़ी केवल कुछ छोटे कर्मचारियों के स्तर पर नहीं हो सकती। इसमें बड़े लोगों की सहभागिता की जांच होनी चाहिए। कांग्रेस का आरोप है कि जिम्मेदार बड़े लोगों को बचाने के लिए मामले में लीपापोती की जा रही है। अजय राय बोले–जिस SIT पर सवाल उठे, उसी से जांच कराई गई प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय राय ने कहा कि SIT गठन की घोषणा के समय ही उन्होंने इसकी निष्पक्षता पर सवाल उठाया था। उन्होंने कहा कि SIT के अध्यक्ष लखनऊ के तत्कालीन कमिश्नर विजय विश्वास पंत थे। अजय राय ने आरोप लगाया कि पंत खुद कुंभ मेले में हुई भगदड़ की जांच के घेरे में थे। ऐसे में जिस अधिकारी पर सवाल उठ रहे थे, वही SIT की निगरानी कर रहा था। अजय राय ने कहा कि बाद में सुप्रीम कोर्ट की दिशा में विजय विश्वास पंत को SIT से हटाया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस अब अपनी टीम तैयार कर रही है और गांव-गांव, घर-घर जाकर भाजपा और RSS पर चंदा-चढ़ावा चोरी के आरोपों को जनता के सामने रखेगी। SIT रिपोर्ट का हवाला देकर अनिल मिश्र पर उठाए सवाल अयोध्या के स्थानीय निवासी और युवा कांग्रेस के प्रदेश उपाध्यक्ष शरद शुक्ला ने दावा किया कि जिस SIT के प्रारंभिक रिपोर्ट के आधार पर आरोपियों की गिरफ्तारी हुई, उसी रिपोर्ट में डॉ. अनिल मिश्र की भूमिका को लेकर गंभीर टिप्पणियां की गई थीं। शुक्ला के मुताबिक SIT ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि अनिल मिश्र अपने दायित्वों के प्रति उदासीन रहे, जिससे चोरी और गबन की घटना की परिस्थितियां बनीं। रिपोर्ट में उनके उत्तरदायित्व को वरिष्ठ पर्यवेक्षणीय स्तर पर बताया गया और सुरक्षा उपायों के प्रभावी क्रियान्वयन को सुनिश्चित नहीं करने की बात कही गई। कांग्रेस ने सवाल उठाया कि यदि SIT की रिपोर्ट में इस तरह की टिप्पणियां हैं तो डॉ. अनिल मिश्र की गिरफ्तारी और उनके खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं की गई? मंदिर ट्रस्ट की जमीन खरीद पर भी जांच की मांग कांग्रेस ने राम मंदिर ट्रस्ट की ओर से खरीदी गई जमीनों की खरीद-फरोख्त की भी उच्चस्तरीय जांच की मांग की। शरद शुक्ला ने कहा कि वित्तीय अनियमितताओं के आरोपों के बावजूद प्रवर्तन निदेशालय (ED) की ओर से अब तक जांच क्यों नहीं की गई। उन्होंने आरोप लगाया कि लंबे समय तक इतनी बड़ी कथित चोरी बिना बड़े लोगों की संलिप्तता और संरक्षण के संभव नहीं है। कांग्रेस ने मीडिया के सामने दस्तावेज रखे प्रेस कॉन्फ्रेंस में कांग्रेस नेताओं ने जमीन की खरीद-फरोख्त से जुड़े दस्तावेज और SIT रिपोर्ट से संबंधित दस्तावेज मीडिया के सामने प्रस्तुत किए। पार्टी ने साफ किया कि आने वाले दिनों में इस मुद्दे को लेकर अभियान को और तेज किया जाएगा। कांग्रेस इसे राम मंदिर और देशभर के श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा मामला बताते हुए भाजपा और RSS को राजनीतिक रूप से घेरने की तैयारी में है।



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राशन कर्मी 20 से 26 अगस्त तक बांधेंगे काली पट्टी: बिहार आपूर्ति सेवा संघ की आंदोलन की घोषणा; कार्ड निर्माण, E-KYC ठप – Katihar News




कटिहार में राशन कार्ड निर्माण, ई-केवाईसी और सर्वर संबंधी समस्याओं से परेशान बिहार आपूर्ति सेवा संघ ने आंदोलन की घोषणा की है। संघ ने अपनी छह सूत्री मांगों के समर्थन में 20 से 26 अगस्त तक काला बिल्ला धारण कर सांकेतिक विरोध करने का निर्णय लिया है। इस संबंध में जिला पदाधिकारी आशुतोष द्विवेदी को 19 अगस्त को एक पत्र सौंपकर सूचित किया गया है। संघ के अनुसार, राज्य में 11 अप्रैल 2025 से नए राशन कार्ड बनाने का अभियान चल रहा है। इसके साथ ही E-KYC का कार्य भी तेजी से किया जा रहा है। लेटर में 6 मांगों का किया उल्लेख हालांकि, एक साल से अधिक समय बीत जाने के बाद भी आपूर्ति पदाधिकारियों और कर्मियों की मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं हो पाया है, जिसके विरोध में यह सांकेतिक आंदोलन किया जा रहा है। संघ ने जिला पदाधिकारी को सौंपे गए पत्र में अपनी छह प्रमुख मांगों का उल्लेख किया है। इन मांगों में कार्य की समय-सीमा, सर्वर संबंधी दिक्कतें, संसाधनों की कमी, पदोन्नति में देरी और कर्मचारियों के उत्पीड़न जैसे मुद्दे शामिल हैं। पहली मांग राशन कार्ड निर्माण की समय-सीमा से संबंधित है। विभाग ने इसके लिए T+1 की समय-सीमा तय की है, जिसे संघ अव्यावहारिक मानता है। संघ ने 30 दिनों की वैधानिक समय-सीमा निर्धारित करने की मांग की है। ‘प्रति लाभुक 2.50 से 3.00 रुपये दिए’ दूसरी समस्या सर्वर और डेटा से जुड़ी है, जहां 11 लाख 4 हजार 425 नए कार्डों का डेटा सर्वर से डाउनलोड नहीं हो पा रहा है और अपडेशन में भी दिक्कतें आ रही हैं। ई-केवाईसी के लिए लाभुक सूची निकालने की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है। तीसरी मांग संसाधनों और मानदेय को लेकर है। ई-केवाईसी के लिए प्रति लाभुक मात्र 2.50 से 3.00 रुपये दिए जा रहे हैं, जबकि विभाग ने न तो वाहन, न डेटा एंट्री ऑपरेटर, न कंप्यूटर-स्कैनर उपलब्ध कराए हैं। काम का बोझ बढ़ गया – कर्मी इससे कर्मियों को अपने खर्च पर काम करना पड़ रहा है। चौथी मांग पदोन्नति से संबंधित है; विभाग में 2010 के बाद से कोई पदोन्नति नहीं हुई है और 200 पद रिक्त हैं। निचले स्तर के कर्मियों को लेवल-9 के बजाय लेवल-8 पर काम कराया जा रहा है। पांचवीं मांग उत्पीड़न के आरोप से जुड़ी है। संघ का कहना है कि 17 जुलाई 2026 को कोरम पूरा न होने के कारण कई पदाधिकारियों ने एक दिन का उपार्जित अवकाश लिया था,लेकिन उन्हें अनुपस्थित कर दिया गया। छठी और अंतिम मांग स्टाफ की भारी कमी को लेकर है। काम का बोझ बढ़ गया है, लेकिन उसके अनुसार पद और संसाधन उपलब्ध नहीं कराए गए हैं। आंदोलन के दौरान क्या बंद रहेगा संघ ने स्पष्ट किया है कि विरोध के 7 दिनों तक आवाहन वितरण, राशन कार्ड निर्माण और ई-केवाईसी सहित कोई भी जनहित का कार्य बाधित रहेगा। हालांकि खाद्यान्न वितरण सामान्य रूप से जारी रहेगा ताकि गरीबों को परेशानी न हो। सरकार से अपील संघ ने राज्य सरकार से मांग की है कि इन समस्याओं पर सहानुभूतिपूर्वक विचार कर अविलंब समाधान किया जाए। ताकि आपूर्ति पदाधिकारी और कर्मी पूर्व मनोबल के साथ सरकार की योजनाओं को धरातल पर उतार सकें। जिला प्रशासन ने पत्र प्राप्त करने की पुष्टि की है। अब देखना होगा कि सरकार इस सांकेतिक विरोध से पहले कर्मियों की मांगों पर कोई निर्णय लेती है या नहीं।



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सिंगरौली: अंबेडकर चौराहे पर पुरुष-महिला ने की बीच सड़क मारपीट: स्थानीय लोगों बोले- दोनों नशे में थे; पुलिस चेकिंग पॉइंट पर उठे सवाल – Singrauli News




सिंगरौली जिले के बैढ़न थाना क्षेत्र के अंबेडकर चौराहे पर गुरुवार को एक पुरुष और महिला के बीच सड़क पर मारपीट का वीडियो सामने आया है। घटना के दौरान सड़क पर लोगों की आवाजाही जारी थी। एक राहगीर ने घटना का वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर शेयर कर दिया। वीडियो में दिख रहे पुरुष और महिला की पहचान अब तक नहीं हो पाई है। हालांकि, पूछताछ में पता चला कि दोनों संभवतः पति-पत्नी हैं और मजदूरी करते हैं। दोनों के बीच विवाद किस बात को लेकर हुआ, यह भी सामने नहीं आया है। पुलिस के मुताबिक, अब तक किसी भी पक्ष ने थाने में लिखित शिकायत नहीं दी है। इसलिए मामले में कोई आधिकारिक कार्रवाई शुरू नहीं हुई है। स्थानीय लोग बोले- दोनों नशे में किसी बात पर झगड़ने लगे नगर पुलिस अधीक्षक ललित बैरागी ने बताया कि किसी भी पक्ष ने थाने में शिकायत नहीं की है। उन्होंने कहा कि पुलिस स्टाफ मौके पर गया था। स्थानीय लोगों के मुताबिक, दोनों नशे में थे और किसी बात पर झगड़ने लगे थे। कुछ देर बाद दोनों खुद शांत हो गए और वहां से चले गए। नगर पुलिस अधीक्षक ने कहा कि अगर कोई पक्ष शिकायत करता है तो पुलिस कार्रवाई करेगी। पुलिस के चेकिंग पॉइंट के पास हुआ विवाद स्थानीय लोगों ने बताया की अंबेडकर चौराहे पर पहले भी विवाद और मारपीट की घटनाएं सामने आती रही हैं। यह स्थान पुलिस का चेकिंग पॉइंट है, फिर भी यहां ऐसी घटनाएं होती रहती हैं। स्थानीय लोगों ने चौराहे की सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल उठाए हैं। लोगों का कहना है कि यहां नियमित निगरानी के बावजूद ऐसी घटनाएं हो रही हैं।



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आगरा में यहां 70 रुपए में मिल रहा चीज पनीर बर्गर, लोगों को खूब आ रहा पसंद

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Agra Best Burger Shop: आगरा के शास्त्रीपुरम स्थित आंगन रेस्टोरेंट का चीज पनीर बर्गर युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय है, जो महज 70 रुपये में मिलता है. भारतीय स्वाद और ताजी सामग्री से तैयार यह बर्गर शाम के समय युवाओं की भीड़ खींचता है.

आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा स्थित शास्त्रीपुरम के आंगन रेस्टोरेंट का बर्गर इन दिनों युवाओं के बीच खासा पसंद किया जा रहा है. यहां मिलने वाले स्पेशल बर्गर का स्वाद लेने के लिए युवा बड़ी संख्या में पहुंच रहे हैं. रेस्टोरेंट के संचालक संतोष ने बताया कि उनके यहां दो तरह के स्पेशल बर्गर सबसे ज्यादा पसंद किए जाते हैं. इनमें पहला वेज बर्गर और दूसरा चीज बर्गर है. दोनों ही बर्गर की डिमांड लगातार बनी हुई है.

दुकानदार संतोष ने बताया कि उनके बर्गर की खासियत यह है कि इन्हें भारतीय स्वाद और स्टाइल को ध्यान में रखकर तैयार किया जाता है. बर्गर में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और मसालों का संयोजन इसे अलग स्वाद देता है. चीज बर्गर में चीज की अच्छी मात्रा युवाओं को खासतौर पर आकर्षित करती है. वहीं, वेज बर्गर भी अपने स्वाद और भरपूर फिलिंग के कारण लोगों की पसंद बना हुआ है. शाम के समय यहां युवाओं की भीड़ अधिक देखने को मिलती है.

भारतीय स्टाइल वेज बर्गर युवाओं को है पसंद
आगरा के शास्त्रीपुरम स्थित आंगन रेस्टोरेंट के संचालक संतोष कुमार बघेल ने बताया कि उनके यहां इंदौर बर्गर सबसे ज्यादा पसंद किया जाता है. इस बर्गर को खास भारतीय स्टाइल में तैयार किया जाता है, जिसकी वजह से इसका स्वाद युवाओं को काफी आकर्षित करता है. संतोष कुमार बघेल ने यह भी कहा कि उनके यहां के बर्गर में भरपूर मात्रा में ताजी सब्जियों का इस्तेमाल किया जाता है. इसमें खीरा, टमाटर, प्याज, पत्ता गोभी और पनीर समेत कई सामग्री शामिल की जाती हैं.

उन्होंने बताया कि सब्जियों और मसालों का सही मिश्रण बर्गर को स्वादिष्ट और अलग बनाता है. भारतीय स्वाद को ध्यान में रखकर तैयार किया गया यह बर्गर युवाओं के साथ-साथ परिवार के लोगों को भी काफी पसंद आ रहा है. शाम के समय इसे खाने के लिए रेस्टोरेंट में अच्छी भीड़ रहती है.

60 रुपए वेज और 70 रुपए चीज बर्गर की है कीमत
आगरा के शास्त्रीपुरम स्थित आंगन रेस्टोरेंट के संचालक संतोष कुमार बघेल ने बताया कि उनके यहां स्वाद के साथ किफायती कीमत पर बर्गर उपलब्ध कराया जाता है. उन्होंने बताया कि वेज बर्गर की कीमत महज 60 रुपये है, जबकि चीज बर्गर मात्र 70 रुपये में मिलता है. कम कीमत होने के बावजूद बर्गर की क्वालिटी और स्वाद से कोई समझौता नहीं किया जाता. बर्गर तैयार करने में ताजी सामग्री और अच्छी गुणवत्ता वाले उत्पादों का इस्तेमाल किया जाता है.

संतोष कुमार ने कहा कि यही वजह है कि युवाओं के बीच दोनों बर्गर काफी लोकप्रिय हैं. खासकर शाम के समय बड़ी संख्या में युवा यहां बर्गर का स्वाद लेने पहुंचते हैं. कम बजट में स्वादिष्ट और अच्छी क्वालिटी का खाना मिलने के कारण आंगन रेस्टोरेंट की ओर लोगों का रुझान लगातार बढ़ रहा है.

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आर्यन सेठ

आर्यन सेठ, News18 Hindi में डिजिटल डेस्क पर जुड़े हैं और जनवरी 2026 से उत्तर प्रदेश की राजनीति, अपराध, प्रशासन, वायरल और अन्य महत्वपूर्ण विषयों पर खबरें लिखते हैं. जामिया मिलिया इस्लामिया दिल्ली से साल 2024 में…

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तीन भाषा नीति पर सुप्रीम कोर्ट का बड़ा सवाल, अंग्रेजी को लेकर भी CBSE से कही अहम बात


Highlights

  • सुप्रीम कोर्ट ने CBSE से तीन भाषा नीति पर दोबारा विचार करने को कहा।
  • कोर्ट ने कक्षा 6 के छात्रों को राहत देने की संभावना तलाशने का सुझाव दिया।
  • अंग्रेजी को गैर-देशज भाषा मानने पर भी सुप्रीम कोर्ट ने सवाल उठाए।

नई दिल्ली: केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड यानी कि CBSE की तीन भाषा नीति को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। कोर्ट ने CBSE से इस नीति पर दोबारा विचार करने को कहा और कक्षा 6 के छात्रों को कुछ राहत देने की संभावना तलाशने का सुझाव दिया। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने अंग्रेजी को गैर-मूल या ‘नॉन नेटिव’ भाषा मानने पर भी सवाल उठाए। जस्टिस जॉयमाल्य बागची ने कहा कि ‘नेटिव’ यानी ‘मूल निवासी’ शब्द के इस्तेमाल को लेकर भी उन्हें गंभीर आपत्ति है, क्योंकि इसमें औपनिवेशिक सोच की झलक मिलती है। उनके मुताबिक इसके बजाय ‘इंडिजिनस’ यानी ‘देशज’ या ‘स्वदेशी’ शब्द का इस्तेमाल किया जाना चाहिए।

जस्टिस बागची ने ‘नेटिव’ शब्द पर जताई आपत्ति

जस्टिस बागची ने अपनी टिप्पणी में कहा कि भारत में अंग्रेजी की ऐतिहासिक मौजूदगी और समाज में उसकी गहरी जड़ों को भी ध्यान में रखना होगा। उन्होंने कहा,

‘हमें यह देखना होगा कि अंग्रेजी को किस हद तक गैर-देशज भाषा माना जा सकता है। मुझे व्यक्तिगत रूप से ‘नेटिव’ शब्द को लेकर गंभीर आपत्ति है। इसमें औपनिवेशिक भाव है। इसके बजाय ‘इंडिजिनस’ शब्द होना चाहिए। अंग्रेजी के भारत में ऐतिहासिक विकास और भारतीय समाज में उसकी जड़ों को देखते हुए हमें इस पर अंतिम फैसला लेना होगा। हालांकि नीति बनाना आपका अधिकार है, लेकिन संवैधानिक दृष्टि से यह देखना होगा कि अंग्रेजी गैर-देशज भाषा है या देशज। ऐसा करने से मौजूदा व्यवस्था की कई खामियां दूर हो सकती हैं।’

तीसरी भाषा लागू करने में स्कूलों के सामने बड़ी चुनौतियां

तीन भाषा व्यवस्था के तहत कक्षा 6 से तीसरी भाषा पढ़ाने की व्यवस्था को लेकर पहले से ही सवाल उठते रहे हैं। संसद की एक समिति ने भी इस व्यवस्था में कई कमियां बताते हुए कहा है कि स्कूलों को तीसरी भाषा लागू करने के लिए पर्याप्त समय नहीं दिया गया। सबसे बड़ी दिक्कत भाषा शिक्षकों की भर्ती, पढ़ाई की सामग्री उपलब्ध कराने और शिक्षकों को प्रशिक्षण देने को लेकर सामने आई है। लोकसभा में 2026-27 के लिए अनुमानों पर पेश की गई समिति की दसवीं रिपोर्ट में CBSE और देश में सस्ती व गुणवत्तापूर्ण शिक्षा से जुड़े बजट और नीतिगत पहलुओं की समीक्षा की गई है।

सरकार ने तीन भाषा फॉर्मूले में किए ढांचागत बदलाव

रिपोर्ट के मुताबिक, शिक्षा मंत्रालय ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ मिलकर तीन भाषा फॉर्मूले में ढांचागत बदलाव किए हैं। इसके तहत नया R1, R2, R3 भाषा ढांचा भी तैयार किया गया है। समिति ने माना कि मंत्रालय ने इस दिशा में महत्वपूर्ण प्रगति की है। गणित, विज्ञान और सामाजिक विज्ञान जैसे विषयों की किताबों का 22 अनुसूचित भाषाओं में अनुवाद किया गया है। इसके अलावा अलग-अलग भाषाओं में पढ़ाई के बीच बदलाव को आसान बनाने के लिए ब्रिज कोर्स और ई-कंटेंट भी तैयार किए गए हैं।

सरकार ने मुश्किलें आसान करने के लिए उठाए कदम

मंत्रालय ने बच्चों की शुरुआती पढ़ाई को आसान और रोचक बनाने के लिए ‘जादुई पिटारा’ जैसे खेल आधारित लर्निंग किट भी तैयार किए हैं। ये किट 22 भाषाओं में उपलब्ध कराए गए हैं। इसके साथ ही देशभर में भाषाओं से परिचय कराने के लिए ‘भाषा संगम’ कार्यक्रम चलाया गया है। केंद्रीय भारतीय भाषा संस्थान (CIIL) के साथ मिलकर 121 मातृभाषा प्राइमर भी तैयार किए गए हैं। केंद्रीय विद्यालयों जैसे संस्थानों में स्थानीय भाषाओं की पढ़ाई के लिए संविदा पर स्थानीय भाषा शिक्षकों की नियुक्ति कर शैक्षणिक मदद देने की व्यवस्था भी की गई है।

छात्रों को राहत मिलने की संभावना पर टिकीं नजरें

समिति ने यह भी माना कि तीसरी भाषा लागू करने से पहले स्कूलों की वास्तविक जरूरतों का पर्याप्त अनुमान नहीं लगाया गया। खासतौर पर पढ़ाई की सामग्री, शिक्षक प्रशिक्षण और भाषा शिक्षकों की उपलब्धता जैसी जरूरतों पर पहले से पर्याप्त तैयारी नहीं हो सकी। यही वजह है कि कक्षा 6 से तीसरी भाषा लागू करने को लेकर स्कूलों और छात्रों के सामने व्यावहारिक परेशानियां पैदा हो रही हैं। अब सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी के बाद CBSE की तीन भाषा नीति में बदलाव या कक्षा 6 के छात्रों को राहत मिलने की संभावना पर नजरें टिकी हैं।

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8,499 रुपये में लॉन्च हुआ Smart प्रोजेक्टर, घर की दीवार बन जाएगी 200 इंच की स्क्रीन


देसी ब्रांड XElectron ने एक और सस्ता स्मार्ट प्रोजेक्टर लॉन्च किया है। यह स्मार्ट प्रोजेक्टर Android ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करता है। इसकी खास बात ये है कि इसमें 200 इंच तक की स्क्रीन का प्रोजेक्शन मिलता है। आप अपने घर की दीवार को थिएटर की तरह बड़ी स्क्रीन में बदल सकते हैं। इस प्रोजेक्टर में इन-बिल्ट स्पीकर, चार्जेबल बैटरी आदि भी दी गई है। इसे आप आराम से कहीं भी पोर्ट कर सकते हैं।

कितनी है कीमत?

XElectron ने इससे पहले इस सीरीज में Techno Android 14 Smart HD लॉन्च किया था, जिसकी कीमत 6,990 रुपये है। इसमें 40 से 200 इंच तक का प्रोजेक्शन मिलता है। कंपनी का नया स्मार्ट प्रोजेक्टर Techno Plus Android 14 Smart Home के नाम से लॉन्च हुआ है। इसकी कीमत 8,499 रुपये है। इसमें भी 200 इंच तक का प्रोजेक्शन फीचर मिलता है। इसका लुक और डिजाइन भी Techno Android 14 Smart HD की तरह ही है। साथ ही, इसके कई फीचर्स भी सीरीज के स्टैंडर्ड मॉडल की तरह ही हैं।

क्या हैं फीचर्स?

इस स्मार्ट प्रोजेक्टर में 1080 पिक्सल वाला लेंस दिया गया है, जो 4K रेजलूशन को सपोर्ट करता है। इसके स्क्रीन का रेजलूशन 1920 x 1080 पिक्सल है। यह प्रोजेक्टर स्मार्ट स्ट्रीमिंग और इलेक्ट्रिक फोक्स जैसे फीचर्स के साथ आता है। इसमें ऑटोफोकस फीचर दिया गया है, जिसकी वजह से दीवार पर प्रोजेक्ट करते समय यह अपने आप इसके प्रोजेक्शन को एडजस्ट कर देता है। इसमें 9000 ल्यूमन्स की ब्राइटनेस वाला का लेंस यूज किया गया है। साथ ही, यह 180 डिग्री तक रोटेट हो सकता है।

यह Android 14 ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करता है। इसमें पहले से ही कई OTT ऐप्स जैसे कि Netflix, YouTube, Prime Video, JioCinema, Zee5 और SonyLIV इंस्टॉल्ड हैं। यह प्रोजेक्टर 40 से 200 इंच की स्क्रीन में बदल सकता है। इसे आप 4 से लेकर 16 फीट की दूरी से प्रोजेक्ट कर सकते हैं। यही नहीं, यह 180 डिग्री तक रोटेट हो सकता है।

कनेक्टिविटी की बात करें तो इस प्रोजेक्टर में डुअल बैंड WiFi6, Bluetooth 5.0, HDMI और USB जैसे पोर्ट्स मिलते हैं। इसके साथ आप स्पीकर्स को अटैच कर सकते हैं। इसके अलावा इस प्रोजेक्टर में आप अपने स्मार्टफोन को भी स्क्रीन मिररिंग के जरिए कनेक्ट कर पाएंगे। यह प्रोजेक्टर पोर्टेबल डिजाइन के साथ आता है, जिसे आप अपने साथ कहीं भी कैरी कर सकते हैं। साथ ही, इसमें 25 ग्लोबल लैंग्वेज का सपोर्ट मिलता है, जिनमें हिन्दी, अंग्रेजी, बांग्ला आदि शामिल है। इस स्मार्ट प्रोजेक्टर के साथ आप अपने लैपटॉप, टीवी, टैबलेट आदि को भी कनेक्ट कर सकते हैं।

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जंतर-मंतर पर पुलिस एक्शन- सुप्रीम कोर्ट ने जांच कमेटी बनाई: इसमें रिटायर्ड जज, CBI-पुलिस के पूर्व अफसर; पैलेटगन चलाने और महिलाओं से बदसलूकी के आरोप


नई दिल्ली45 मिनट पहले

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जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान 20 जुलाई कोे पुलिस ने बल प्रयोग किया था।

सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को संसद मार्च के दौरान पुलिस की कार्रवाई के आरोपों की जांच के लिए 5 सदस्यों की हाई पावर्ड कमेटी के नामों का ऐलान किया। कमेटी का अध्यक्ष सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जस्टिस आर सुभाष रेड्डी को बनाया गया है।

इसमें पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट के पूर्व चीफ जस्टिस रवि शंकर झा, दिल्ली हाईकोर्ट की पूर्व जज जस्टिस शलिंदर कौर, CBI के पूर्व डायरेक्टर ऋषि कुमार शुक्ला और मेघालय के रिटायर्ड DGP डॉ. एलआर बिश्नोई शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट ने 18 अगस्त को सुनवाई के दौरान इस कमेटी को बनाने का फैसला लिया था। इस दौरान प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पैलेटगन इस्तेमाल करने और महिलाओं से बदसलूकी के आरोप लगाए थे।

नीट पेपर लीक और परीक्षाओं में गड़बड़ी को लेकर कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन जंतर-मंतर पर 36 दिन चला था। 25 जुलाई को शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के बाद खत्म हुआ था।

जंतर-मंतर पुलिस एक्शन की तस्वीरें

20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई थी। इसमें पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी घायल हो गए थे।

20 जुलाई को संसद मार्च के दौरान प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच झड़प भी हुई थी। इसमें पुलिसकर्मी और प्रदर्शनकारी घायल हो गए थे।

प्रदर्शन के दौरान 120 पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे।

प्रदर्शन के दौरान 120 पुलिसकर्मी भी घायल हुए थे।

दिल्ली पुलिस ने सुप्रीम कोर्ट में कहा था- संसद मार्च गैरकानूनी था

सुप्रीम कोर्ट में 18 अगस्त को सुनवाई के दौरान दिल्ली पुलिस ने कहा था कि 20 जुलाई का संसद मार्च गैरकानूनी था। इसकी परमिशन नहीं थी। जंतर-मंतर पर प्रदर्शन में कई हिस्ट्रीशीटर भी आ गए थे।

पुलिस ने बताया कि संसद मार्च में प्रदर्शनकारियों ने बैरिकेड तोड़े और पुलिस से मारपीट की, जिससे प्रदर्शन शांतिपूर्ण नहीं रहा। हालात संभालने के लिए बल प्रयोग किया गया था,लेकिन प्रदर्शनकारियों पर जरूरत से ज्यादा बल प्रयोग नहीं किया गया।

डिप्टी कमिश्नर ऑफ पुलिस सचिन शर्मा ने हलफनामा दाखिल कर ये जानकारी दी। इसे पुलिस ज्यादती की कोर्ट की निगरानी में जांच की मांग वाली याचिकाओं के जवाब के तौर पर पेश किया गया है। सुप्रीम कोर्ट इस मामले में हाई लेवल कमेटी बनाएगा।

कॉकरोच जनता पार्टी का प्रोटेस्ट 36 दिन चला था

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जंतर-मंतर प्रदर्शन पर रिजिजू बोले- गोली कहां चली:जेन-जी हमारे बच्चे, उनसे बातचीत जरूरी; अभिजीत दीपके AAP कार्यकर्ता, छात्र नेता कैसे बन गए

केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने ANI को दिए इंटरव्यू में कहा कि जेन-जी हमारे अपने बच्चे हैं और उनसे लगातार बातचीत जरूरी है। रिजिजू ने जंतर-मंतर प्रदर्शन के दौरान दिल्ली पुलिस की कार्रवाई का बचाव किया। पूरी खबर पढ़ें…

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डिलीवरी में बच्चेदानी में कट लगा, महिला की मौत: पति बोला- दोनों किडनियों पर असर आया था, डॉक्टरों पर लगाया आरोप – Kota News




कोटा में डिलीवरी के बाद महिला की मौत हो गई। उसे बूंदी से कोटा रेफर किया गया था। बच्चेदानी में कट के कारण खून बहने लगा और दोनों किडनियों पर असर आ गया था। पति ने बूंदी के डॉक्टरों पर इलाज में लापरवाही का आरोप लगाते हुए पुलिस में शिकायत दी है। टांकों से खून निकलने पर बिगड़ी तबीयत टोंक जिले के पनवाड़ की रहने वाली महिला सोनिया सैनी (24) की मौत हुई है। उनके पति राजू सैनी ने बताया कि पत्नी को 17 अगस्त को डिलीवरी के लिए बूंदी के हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया था। अगले दिन 18 अगस्त को सुबह करीब 10 बजे डॉक्टर ने ऑपरेशन के जरिए डिलीवरी करवाई। पत्नी ने एक बच्ची को दिया लेकिन डिलीवरी के बाद नर्सों ने पत्नी को नहीं संभाला। उसके टांकों से खून निकलने लगा। तब डॉक्टरों ने कोटा मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया, जहां 19 अगस्त की शाम मौत हो गई। डिलीवरी के दौरान बच्चेदानी में लगा कट पति का आरोप है कि कोटा मेडिकल कॉलेज में जांच के दौरान डॉक्टरों ने बताया कि डिलीवरी के दौरान बच्चेदानी में कट लगने के कारण लगातार खून निकलता रहा। ज्यादा खून निकलने से महिला की हालत गंभीर हो गई और दोनों किडनियों पर भी असर पड़ा। पुलिस में शिकायत दर्ज बूंदी कोतवाली थाने के एएसआई देशराज चौधरी ने बताया कि मामले में परिजनों की ओर से पुलिस को शिकायत दी गई है। शिकायत के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। शव का पोस्टमार्टम करवाकर परिजनों को सौंप दिया गया है।



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