पाली जिले के रोहट क्षेत्र के मुरड़िया गांव में एक वृद्ध दंपती के साथ कथित रूप से उनके बेटे द्वारा मारपीट करने का मामला सामने आया है। घायल दंपती को रविवार रात उपचार के लिए पाली के बांगड़ हॉस्पिटल लाया गया, जहां उनका इलाज जारी है।
जानकारी के अनुसार मुरड़िया गांव निवासी 70 वर्षीय बुधाराम पुत्र नेनाराम तथा उनकी 65 वर्षीय पत्नी लुंगीदेवी घायल अवस्था में हॉस्पिटल पहुंचे। उपचार के दौरान दोनों ने पुलिस को बताया कि उनके बेटे ने नशे की हालत में उनके साथ मारपीट की, जिससे उन्हें चोटें आईं।
घटना की सूचना मिलने पर पुलिस ने हॉस्पिटल पहुंचकर वृद्ध दंपती के बयान दर्ज किए। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि दंपती द्वारा लगाए गए आरोपों की जांच की जा रही है। जांच के बाद तथ्य सामने आने पर नियमानुसार आगे की कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल दोनों घायलों का बांगड़ हॉस्पिटल में उपचार चल रहा है और उनकी स्थिति पर चिकित्सकों की निगरानी बनी हुई है। पुलिस मामले की विभिन्न पहलुओं से पड़ताल कर रही
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पाली में वृद्ध दंपति से मारपीट, दोनों घायल: बोले–नशे में बेटे ने ही की मारपीट, पुलिस जुटी जांच में – Pali (Marwar) News
न शोले, न जंजीर, न ही दंगल, 92 अवॉर्ड जीतने वाली इकलौती बॉलीवुड फिल्म
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बॉलीवुड के इतिहास में कई ऐसी फिल्में आईं, जिन्होंने बॉक्स ऑफिस पर रिकॉर्ड बनाए. कुछ ने कमाई के मामले में झंडे गाड़े तो कुछ ने अवॉर्ड्स की बारिश कर दी. लेकिन एक फिल्म ऐसी भी रही जिसने अपने नाम ऐसा रिकॉर्ड दर्ज कराया. ये अब तक की इकलौती ऐसी फिल्म है, जिसका 26 साल से अब तक कोई रिकॉर्ड नहीं तोड़ सका है. इस फिल्म ने कुल 92 अवॉर्ड जीतकर गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स में जगह बनाई थी.
नई दिल्ली. बॉलीवुड की सबसे ब्लॉकबस्टर या रिकॉर्ड तोड़ फिल्मों की बात आती है तो ख्याल ‘शोले’, ‘जंजीर’, ‘हम आपके हैं कौन’ या ‘दंगल’ जैसी फिल्मों का नाम याद आता है. लेकिन हिंदी सिनेमा के इतिहास में एक अनोखा रिकॉर्ड किसी और फिल्म के नाम है. इस फिल्म ने अकेले कुल 92 अवॉर्ड्स जीते थे. यह आज तक एक अटूट रिकॉर्ड है, जिसको कोई टस से मस नहीं कर सका.

बॉलीवुड में बाप-बेटे की जोड़ियों ने हमेशा ही सिनेमा की दुनिया पर राज किया है. राज कपूर, ऋषि कपूर और रणबीर कपूर से धर्मेंद्र, सनी देओल और बॉबी देओल तक कई नाम है. लेकिन बाप-बेटे इस जोड़ी ने ऐसी म्यूजिकल रोमांटिक-थ्रिलर बनाई, जो ऑल टाइम ब्लॉकबस्टर साबित हुई. ये फिल्म कोई और नहीं बल्कि साल 2000 में रिलीज हुई फिल्म ‘कहो न प्यार है’ है.

इस फिल्म के नाम एक ऐसा रिकॉर्ड दर्ज है, जिसे आज तक कोई दूसरी बॉलीवुड फिल्म नहीं तोड़ पाई है. इस फिल्म ने अकेले कुल 92 अवॉर्ड्स अपने नाम किए थे. इस बेमिसाल कामयाबी के कारण फिल्म का नाम बाकायदा ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में दर्ज किया गया. इस ऐतिहासिक फिल्म को बॉलीवुड के एक बेहद मशहूर डायरेक्टर राकेश रोशन ने बनाया था. इस फिल्म के जरिए उन्होंने अपने बेटे ऋतिक रौशन को सिनेमा की दुनिया में लॉन्च किया था. रिलीज के साथ ही इस बाप-बेटे की जोड़ी ने बॉक्स ऑफिस पर ऐसा तहलका मचाया कि रातों-रात इतिहास रच दिया. उनके साथ अमीषा पटेल भी पहली बार बड़े पर्दे पर नजर आई थीं.
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फिल्म की कहानी रोहित और सोनिया की प्रेम कहानी के इर्द-गिर्द घूमती है. रोहित एक साधारण लेकिन प्रतिभाशाली युवक होता है. दोनों एक-दूसरे से प्यार करने लगते हैं, लेकिन अचानक रोहित की मौत हो जाती है. इसके बाद कहानी में बड़ा मोड़ आता है, जब सोनिया की मुलाकात रोहित जैसे दिखने वाले राज से होती है. यहीं से सस्पेंस, रोमांस और एक्शन का नया सफर शुरू होता है.

10 करोड़ की लागत में बनी इस फिल्म ने चार गुना से ज्यादा कमाई की. फिल्म ने 44 करोड़ से ज्यादा की कमाई कर बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा दिया. फिल्म के गाने भी जबरदस्त हिट हुए. ‘एक पल का जीना’, ‘ना तुम जानो ना हम’ और टाइटल ट्रैक आज भी पसंद किए जाते हैं. इसके संगीत ने फिल्म की लोकप्रियता को कई गुना बढ़ा दिया था. इस शानदार प्रदर्शन के कारण इसे बॉक्स ऑफिस पर ‘ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर’ का दर्जा मिला.

फिल्म की हीरोइन के लिए शुरुआत में करीना कपूर को चुना गया था. शूटिंग की तैयारियां पूरी हो चुकी थीं और सेट भी तैयार था. लेकिन शूटिंग शुरू होने से महज तीन दिन पहले राकेश रोशन और करीना कपूर की मां बबीता के बीच कुछ मतभेद हो गए. हालात ऐसे बने कि करीना ने फिल्म से अलग होने का फैसला कर लिया. इसके बाद राकेश रोशन के सामने नई एक्ट्रेस की तलाश की चुनौती आ गई. उन्होंने तेजी से फैसला लेते हुए अमीषा पटेल को फिल्म में कास्ट किया और उन्हें बतौर लीड एक्ट्रेस लॉन्च किया.

साल 2002 में इस फिल्म को एक बहुत बड़ा सम्मान मिला. एक सिंगल कैलेंडर ईयर में सबसे ज्यादा 92 अवॉर्ड्स जीतने के लिए इस फिल्म का नाम ‘गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड्स’ में शामिल किया गया. आज तक कोई भी बॉलीवुड फिल्म इस रिकॉर्ड के आस-पास भी नहीं पहुंच सकी है. इस फिल्म से डेब्यू करने वाले एक्टर रातों-रात देश के सबसे बड़े सुपरस्टार बन गए थे. फिल्म के रिलीज होने के बाद लड़कियों के बीच उनका क्रेज इस कदर बढ़ गया था कि उन्हें वैलेंटाइन डे पर हजारों की तादाद में शादी के प्रपोजल मिले थे.

फिल्म ने कई बड़े अवॉर्ड्स शो में दबदबा बनाया. ऋतिक रोशन को बेस्ट एक्टर का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला, जबकि राकेश रोशन को बेस्ट फिल्म का सम्मान दिया गया. राजेश रोशन ने बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर का अवॉर्ड जीता. वहीं, लकी अली को बेस्ट प्लेबैक सिंगर चुना गया. इसके अलावा रवि कपूर और हनी ईरानी को बेस्ट स्क्रीनप्ले का पुरस्कार मिला.

‘कहो ना… प्यार है’ को भव्य बनाने के लिए राकेश रोशन ने बड़ा जोखिम उठाया था. एक इंटरव्यू में उन्होंने बताया था कि फिल्म के लिए उनका विजन बहुत बड़ा था. वह क्राबी आइलैंड, न्यूजीलैंड और ऐसी अनदेखी लोकेशंस पर शूटिंग करना चाहते थे. बढ़ते बजट के कारण उन्होंने अपना घर तक गिरवी रख दिया.

राकेश रोशन ने बताया कि एक गाने की शूटिंग के लिए उन्होंने सिंगापुर में एक शिप बुक किया, लेकिन बाद में पता चला कि वह ग्रीस में है. इसके बाद वह ग्रीस पहुंचे, शिप का पूरा किराया दिया और 150 लोगों की टीम के साथ सिंगापुर-थाईलैंड जाकर शूटिंग पूरी की.
खरखौदा मस्जिद विवाद: नोटिस के बाद कोर्ट जाएगी मस्जिद समिति: वक्फ बोर्ड को दी गई जानकारी, 1989 से रिकॉर्ड में दर्ज – Meerut News
हर्षवर्धन पूनिया। मेरठ5 मिनट पहले
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मेरठ के खरखौदा कस्बे में जामा मस्जिद को थाना परिसर की भूमि पर निर्मित बताए जाने और पुलिस द्वारा नोटिस जारी किए जाने के बाद विवाद ने नया मोड़ ले लिया है। मस्जिद के मुतवल्ली अयूब खान ने कहा है कि मस्जिद कई दशक पुरानी है और वर्ष 1989 से वक्फ बोर्ड में द
200 करोड़ के ‘महाप्रोजेक्ट’ से बदलेगी गयाजी की सूरत: सीएम सम्राट चौधरी ‘टेक्नोलॉजी सेंटर’ का भूमि पूजन करेंगे, हर साल 10 हजार छात्रों को मिलेगी ट्रेनिंग – Gaya News
बिहार के सीएम सम्राट चौधरी आज गयाजी आ रहे हैं। अतरी विधानसभा क्षेत्र के देवगांव साधु नगर में 200 करोड़ की लागत से बनने वाले भव्य ‘टेक्नोलॉजी सेंटर’ का भूमि पूजन करेंगे और साथ ही जनता को संबोधित भी करेंगे। देश की आजादी के बाद यह पहला मौका है, जब कोई मुख्यमंत्री इस इलाके के देवगांव आ रहे हैं। मुख्यमंत्री का यह दौरा केवल एक शिलान्यास कार्यक्रम नहीं है, बल्कि इस पिछड़े इलाके के लिए औद्योगिक क्रांति की शुरुआत है। देवगांव में बनने वाला यह टेक्नोलॉजी सेंटर अत्याधुनिक मशीनों, लैब और ट्रेनिंग सुविधाओं से लैस होगा। हर साल यहां करीब 10 हजार छात्रों को ट्रेनिंग मिलेगी। जिससे उनके लिए रोजगार के अवसर खुलेंगे। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि इस सेंटर के शुरू होने से गयाजी, जहानाबाद, नवादा और आसपास के जिलों के युवाओं को विश्वस्तरीय तकनीकी शिक्षा के लिए बाहर नहीं जाना पड़ेगा। यहां से ट्रेनिंग पाकर युवा सीधे बड़ी कंपनियों में रोजगार पा सकेंगे या अपना स्टार्टअप शुरू कर सकेंगे। युवाओं को उच्च स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण मिलेगा इस बेहद खास और बड़े कार्यक्रम को लेकर प्रशासनिक गलियारों से लेकर आम जनता के बीच भारी उत्साह देखा जा रहा है। इस महापरियोजना को पूरे मगध क्षेत्र के विकास के लिए एक मील का पत्थर माना जा रहा है, जिससे न केवल स्थानीय युवाओं को उच्च स्तरीय तकनीकी प्रशिक्षण मिलेगा। खास बात यह भी केंद्रीय मंत्री जीतनराम मांझी खुद इस खास अवसर को लीड कर रहे हैं। सुरक्षा के कड़े इंतजाम मुख्यमंत्री के आगमन को लेकर खिजरसराय और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है। कार्यक्रम स्थल पर सुरक्षा और व्यवस्था की कमान खुद वरिष्ठ अधिकारियों ने संभाल रखी है। नीमचक बथानी के एसडीओ केशव आनंद और एसडीपीओ सुरेंद्र सिंह के साथ अनुमंडल क्षेत्र के तमाम प्रशासनिक और पुलिस पदाधिकारी खुद जमीन पर उतरकर निगरानी कर रहे हैं। वीआईपी मूवमेंट को ध्यान में रखते हुए सुरक्षा और सुचारू यातायात व्यवस्था के कड़े इंतजाम किए गए हैं। इसके तहत खिजरसराय के बाना मोड़ से लेकर मुख्य सभा स्थल तक दोनों तरफ मजबूत बैरिकेडिंग कर दी गई है। ताकि यातायात में कोई बाधा न आए। हेलीपैड से लेकर मुख्य मंच तक सघन जांच मुख्यमंत्री की सुरक्षा को लेकर सुरक्षा एजेंसियां बेहद सतर्क हैं। पटना से आई मुख्यमंत्री सुरक्षा सेल के वरिष्ठ अधिकारियों और अत्याधुनिक हथियारों से लैस सुरक्षाकर्मियों की टीम ने पूरे कार्यक्रम स्थल को अपने घेरे में ले लिया है। सुरक्षा अधिकारियों ने मुख्य मंच, सभा स्थल, प्रेस गैलरी और दर्शक दीर्घा के कोने-कोने की मेटल डिटेक्टर व अन्य आधुनिक उपकरणों से सघन जांच-पड़ताल लगातार की जा रही है। मुख्यमंत्री का हेलीकॉप्टर जहां लैंड करेगा, उस नवनिर्मित हेलीपैड परिसर की विशेष रूप से सुरक्षा जांच की गई है। सुरक्षा कर्मियों ने पूरे संवेदनशील क्षेत्र को अपने नियंत्रण में ले लिया है और बिना पास के किसी भी व्यक्ति के प्रवेश पर पूरी तरह रोक लगा दी गई है। युद्धस्तर पर हुआ काम मुख्यमंत्री के स्वागत के लिए सिर्फ प्रशासनिक अमला ही नहीं बल्कि नगर निकाय और निर्माण एजेंसियां भी दिन-रात काम कर रही हैं। सभास्थल और हेलीपैड तक आने वाले सभी प्रमुख मार्गों की सूरत बदल दी गई है। खास बात यह है कि मुख्यमंत्री के काफिले के दौरान धूल उड़कर बाधा न बने। इसके लिए सड़कों और आसपास के मैदानों में पानी का लगातार छिड़काव किया जा रहा है। कार्यक्रम स्थल पर जेसीबी और आधुनिक मशीनों को काम पर लगाया गया है। जमीन के समतलीकरण और निर्माण कार्यों को पूरी तरह अंतिम रूप दे दिया गया है।
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विदिशा के 6 इलाकों में 4 घंटे बिजली गुल: बेतवा सीवेज फीडर पर आज मेंटेनेंस; लगातार शटडाउन से रहवासी नाराज – Vidisha News
मध्य प्रदेश मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा मेंटेनेंस कार्य के चलते 15 जून को शहर के कई इलाकों में 4 घंटे तक बिजली आपूर्ति बाधित रहेगी। कंपनी ने जोन-1 के तहत 11 केवी बेतवा सीवेज फीडर पर लाइनों और उपकरणों के सुधार के लिए सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक का शटडाउन लिया है। इससे बेतवा सिटी कॉलोनी सहित 6 प्रमुख क्षेत्रों के लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। मेंटेनेंस कार्य के कारण बेतवा सिटी कॉलोनी, रामबाग, जानकी नगर, गणेशपुरा, बैस नगर और दुर्जनपुरा सहित इससे जुड़े आसपास के इलाकों में सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक बिजली पूरी तरह बंद रहेगी। बिजली कंपनी का कहना है कि यह शटडाउन फीडरों के रखरखाव के लिए लिया गया है, ताकि भविष्य में उपभोक्ताओं को बेहतर और सुचारु बिजली आपूर्ति सुनिश्चित की जा सके। हल्की बारिश और हवा में गुल हो जाती है बिजली
मेंटेनेंस के नाम पर लगातार की जा रही कटौती से शहरवासियों में भारी असंतोष है। लोगों का कहना है कि पिछले कई महीनों से सुधार के नाम पर शटडाउन लिया जा रहा है, लेकिन व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं दिख रहा है। हालात यह हैं कि हल्की बारिश या तेज हवा चलने पर भी कई इलाकों की बिजली चली जाती है और फिर घंटों तक बहाल नहीं हो पाती। औपचारिक मेंटेनेंस के बजाय स्थायी सुधार की मांग
स्थानीय नागरिकों ने सवाल उठाया है कि जब लाइनों और फीडरों का नियमित रखरखाव हो रहा है, तो इसका असर जमीन पर क्यों नहीं दिखता? बार-बार बिजली बंद होने से घरों के रोजमर्रा के कामकाज और व्यापार पर सीधा असर पड़ रहा है। उपभोक्ताओं ने बिजली कंपनी से औपचारिक मेंटेनेंस तक सीमित न रहकर व्यवस्था में स्थायी सुधार करने की मांग की है, ताकि मौसम बदलने पर बिजली व्यवस्था न चरमराए।
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ट्रम्प के जन्मदिन पर व्हाइट हाउस में UFC फाइट: अब तक का सबसे महंगा मुकाबला, जीत के बाद फाइटर राष्ट्रपति से मिलने पहुंचा
वॉशिंगटन डीसी16 मिनट पहले
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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प रविवार को व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में UFC मुकाबलों के साथ अपना 80वां जन्मदिन मनाया। UFC ने इस आयोजन पर करीब 6 करोड़ डॉलर खर्च किए। इसे अब तक के सबसे महंगे UFC आयोजनों में गिना जा रहा है।
इस फाइट में कुल 7 मुकाबले रखे गए हैं। मुख्य मुकाबला लाइटवेट इलिया टोपुरिया और चैंपियन जस्टिन गेथजे के बीच होना है। मुकाबले देखने के लिए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, उनकी सरकार के कई सीनियर अफसर, खास मेहमान और हजारों सैन्यकर्मी मौजूद हैं।
शुरुआती मुकाबले में बो निकल ने पहले ही राउंड में काइल डाउकस को नॉकआउट कर दिया। उन्होंने एक जोरदार लेफ्ट हुक और राइट पंच से प्रतिद्वंद्वी को गिराया, जिसके बाद रेफरी ने मुकाबला रोक दिया।
जीत के तुरंत बाद बो निकल रिंग से निकलकर सीधे राष्ट्रपति ट्रम्प के पास पहुंचे। दोनों ने हाथ मिलाया और कुछ देर बातचीत की। इस इवेंट में करीब 4300 लोग मौजूद हैं। दूसरी तरफ, 85 हजार लोगों के लिए अलग फैन जोन बनाया गया है।
UFC फाइट से जुड़ी 5 तस्वीरें…

मैच शुरू होने से पहले व्हाइट हाउस बालकनी में राष्ट्रपति ट्रम्प और UFC CEO डाना व्हाइट।

ट्रम्प और उनकी पत्नी मेलानिया UFC मुकाबला देखते हुए।

92 फीट ऊंचे क्लॉ को ऑक्टागन और दर्शकों की कई सीटों के ऊपर बनाया गया है। इसका वजन करीब 600 टन है।

व्हाइट हाउस के साउथ लॉन में आयोजित UFC फ्रीडम 250 के दौरान ब्राजील के डिएगो लोपेस और अमेरिका के स्टीव गार्सिया फेदरवेट मुकाबले में आमने-सामने।

UFC फ्रीडम 250 में काइल डाउकस को हराने के बाद जीत का जश्न मनाते अमेरिकी फाइटर बो निकल। वह जीत के बाद तुरंत ट्रम्प से हाथ मिलाने पहुंचे।
ट्रम्प ने कहा- यह धरती का सबसे बड़ा शो
सरकार के कई अधिकारियों और खुद ट्रम्प ने आयोजन की तारीफ की है। ट्रम्प ने इसे ‘धरती का सबसे बड़ा शो’ बताया और ‘क्लॉ’ की तुलना पेरिस के एफिल टॉवर से की। वहीं विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने UFC को अमेरिका की सॉफ्ट डिप्लोमैटिक पावर बताया है।
इस इवेंट में कुल 14 फाइटर UFC के लगातार मुकाबलों में हिस्सा लेंगे। मुख्य मुकाबला जॉर्जियाई-स्पेनिश लाइटवेट फाइटर इलिया टोपुरिया और अमेरिकी फाइटर जस्टिन गैथजी के बीच होगा।
मुकाबलों की शुरुआत स्थानीय समयानुसार रात 8 बजे होगी। इसका प्रसारण केवल पैरामाउंट प्लस पर किया जाएगा। यह प्लेटफॉर्म डेविड एलिसन की कंपनी संचालित करती है, जिन्हें ट्रम्प का सहयोगी माना जाता है। पिछले साल UFC ने इस स्ट्रीमिंग सेवा के साथ 7.7 अरब डॉलर का समझौता किया था।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इस आयोजन का सबसे बड़ा फायदा UFC ब्रांड को मिल सकता है। एक समय ऐसा था जब इस खेल को प्रायोजकों और कई आयोजकों ने स्वीकार नहीं किया था। एक अमेरिकी सीनेटर ने इसे कभी ‘मानव मुर्गा लड़ाई’ तक कहा था। अब वही खेल व्हाइट हाउस तक पहुंच गया है।
33 साल पहले शुरू हुआ था UFC का सफर
अल्टीमेट फाइटिंग चैम्पियनशिप (UFC) आज दुनिया की सबसे बड़ी मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स (MMA) लीग है। इसकी शुरुआत 1993 में अमेरिका में हुई थी।
उस दौर में बॉक्सिंग, कराटे, कुश्ती और ब्राजीलियन जिउ-जित्सु जैसी अलग-अलग फाइटिंग शैलियों के समर्थक अपनी-अपनी तकनीक को सबसे प्रभावी बताते थे। यह बहस काफी लोकप्रिय थी कि असली मुकाबले में कौन-सी मार्शल आर्ट सबसे ज्यादा कारगर साबित होगी।
इसी सवाल का जवाब तलाशने के लिए UFC का पहला टूर्नामेंट आयोजित किया गया। इसमें ब्राजीलियन जिउ-जित्सु विशेषज्ञ रॉयस ग्रेसी चैंपियन बने।
ग्रेसी शारीरिक रूप से कई प्रतिद्वंद्वियों से छोटे और हल्के थे, लेकिन उन्होंने अपनी तकनीक के दम पर बड़े और ताकतवर फाइटर्स को हराकर सबको चौंका दिया। उन्होंने कई मुकाबले सबमिशन के जरिए जीते।
समय के साथ खेल का स्वरूप भी बदल गया। अब फाइटर्स सिर्फ एक शैली पर निर्भर नहीं रहते, बल्कि बॉक्सिंग, रेसलिंग, जूडो, कराटे, ताइक्वांडो, जिउ-जित्सु और किकबॉक्सिंग जैसी कई तकनीकों को मिलाकर मुकाबला करते हैं। यही वजह है कि इसे आज ‘मिक्स्ड मार्शल आर्ट्स’ कहा जाता है।

250 साल की आजादी का जश्न मनाएगा अमेरिका
अमेरिका इस साल अपनी आजादी के 250 साल पूरे करने जा रहा है। 4 जुलाई 2026 को देश स्वतंत्रता की 250वीं वर्षगांठ मनाएगा।
इसकी तैयारियां अभी से शुरू हो चुकी हैं और पूरे देश में एक साल से ज्यादा समय तक चलने वाले कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार की गई है। UFC इवेंट भी इसी जश्न का हिस्सा है, जिसे ट्रम्प प्रशासन प्रमुख आकर्षण के तौर पर पेश कर रहा है।
अमेरिका की स्थापना का आधार माने जाने वाले ‘डिक्लेरेशन ऑफ इंडिपेंडेंस’ पर 4 जुलाई 1776 को हस्ताक्षर हुए थे। इसी की 250वीं सालगिरह के मौके पर देशभर में परेड, प्रदर्शनी, सांस्कृतिक कार्यक्रम, सामुदायिक अभियान और बड़े सार्वजनिक समारोह आयोजित किए जाएंगे।
व्हाइट हाउस ने ‘टास्क फोर्स 250’ बनाई है, जो संघीय सरकार, राज्यों, निजी संस्थाओं और सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर आयोजन कर रही है।
मखना भाजी-दाल की फटाफट वाली रेसिपी, स्वाद और सेहत का गजब कॉम्बिनेशन
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Chhattisgarh Sabji Recipe: मखना भाजी और दाल का यह मिश्रण स्वाद के साथ-साथ सेहत का भी खजाना है. इसमें विटामिन, फाइबर और प्रोटीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है.
बिलासपुर. छत्तीसगढ़ की पारंपरिक खानपान संस्कृति में हरी-भरी देशी भाजियों का विशेष महत्व है. इन्हीं में से एक है मखना भाजी और दाल की स्वादिष्ट रेसिपी, जो ग्रामीण अंचलों में आज भी बड़े शौक से बनाई जाती है. यह व्यंजन कम समय में तैयार होने के साथ-साथ पौष्टिकता से भरपूर भी होता है. मखना भाजी में मौजूद प्राकृतिक पोषक तत्व और दाल का प्रोटीन इसे एक संतुलित भोजन बनाते हैं. खास बात यह है कि इसे बनाने में ज्यादा मसालों की जरूरत नहीं पड़ती, फिर भी इसका देसी स्वाद लोगों को खूब पसंद आता है. जांजगीर-चांपा जिले के जर्वे गांव की महिलाओं द्वारा पीढ़ियों से बनाई जा रही यह पारंपरिक रेसिपी अब शहरों में भी लोकप्रिय हो रही है. बिलासपुर जिले के अन्नू सूर्यकांत ने इस आसान और स्वादिष्ट रेसिपी की विधि साझा की है.
मखना भाजी बनाने के लिए सबसे पहले ताजी भाजी को अच्छी तरह साफ करके कई बार पानी से धो लिया जाता है. इसके बाद भाजी को छोटे-छोटे टुकड़ों में काटकर अलग रख दिया जाता है ताकि पकाने में आसानी हो.
दाल को पहले से उबाल लें
इस रेसिपी में अरहर, मूंग या मसूर दाल का उपयोग किया जा सकता है. दाल को साफ पानी से धोकर हल्का नरम होने तक उबाला जाता है. दाल पूरी तरह गलने से पहले ही उसे अलग निकाल लिया जाता है ताकि भाजी के साथ पकने पर उसका स्वाद बेहतर बने.
देसी तड़का बढ़ाता है स्वाद
एक कड़ाही में तेल गर्म करें. तेल गर्म होने पर उसमें सूखी लाल मिर्च और कुटा हुआ लहसुन डालकर सुनहरा होने तक भूनें. यह पारंपरिक तड़का भाजी को खास सुगंध और देसी स्वाद प्रदान करता है.
भाजी और दाल को साथ में पकाएं
तैयार तड़के में मखना भाजी डालकर कुछ मिनट तक चलाएं. इसके बाद उबली हुई दाल और स्वादानुसार नमक मिलाकर करीब 10 मिनट तक पकाएं. जब भाजी और दाल अच्छी तरह मिल जाएं, तो गैस बंद कर दें.
पौष्टिकता से भरपूर पारंपरिक व्यंजन
मखना भाजी और दाल का यह मिश्रण स्वाद के साथ-साथ पोषण का भी खजाना माना जाता है. इसमें फाइबर, विटामिन और प्रोटीन भरपूर मात्रा में पाया जाता है.
गांव से शहर तक बढ़ रही लोकप्रियता
जांजगीर-चांपा जिले के जर्वे गांव में यह रेसिपी वर्षों से घर-घर में बनाई जाती रही है. बदलते समय के साथ अब यह पारंपरिक व्यंजन ग्रामीण क्षेत्रों से निकलकर शहरों के लोगों की थाली में भी अपनी खास जगह बना रहा है. कम समय में तैयार होने वाली मखना भाजी और दाल छत्तीसगढ़ की पारंपरिक रसोई का एक बेहतरीन उदाहरण है. देसी तड़के और पौष्टिक गुणों से भरपूर यह डिश स्वाद और सेहत दोनों का शानदार मेल है.
About the Author
राहुल सिंह पिछले 10 साल से खबरों की दुनिया में सक्रिय हैं. टीवी से लेकर डिजिटल मीडिया तक के सफर में कई संस्थानों के साथ काम किया है. पिछले चार साल से नेटवर्क 18 समूह में जुड़े हुए हैं.
मामा संग शूटिंग देखने गई थी एक्ट्रेस, डायरेक्टर ने देखते ही थमा दिया बड़ा ऑफर
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वो खूबसूरत एक्ट्रेस, जिन्होंने अपने करियर में हर तरह के रोल निभाए. एक्टिंक की दुनिया में आते ही जिसने दिलीप कुमार, देवानंद से लेकर अशोक कुमार जैसे सितारों को तगड़ी टक्कर दी. मामा के साथ सेट पर फिल्म देखने पहुंची इस एक्ट्रेस को देखते ही डायरेक्टर ने बड़ी फिल्म का ऑफर दे दिया था. 15 जून साल 1929 में आज ही के दिन इस हसीना का जन्म हुआ था.
नई दिल्ली. हिंदी सिनेमा के इतिहास में कुछ नाम ऐसे हैं, जिन्हें वक्त कभी भुला नहीं पाता. ऐसी ही एक अदाकारा थीं सुरैया. उन्होंने अपनी खूबसूरती, अभिनय और सुरीली आवाज के दम पर ऐसा मुकाम हासिल किया, जिसे आज भी याद किया जाता है. किस्मत उन्हें फिल्मों में ले आईं. लेकिन एक्ट्रेस प्यार की खातिर ताउम्र कुंवारी रही थीं.

सुरैया के करियर में एक समय ऐसा भी आया था जब उनकी लोकप्रियता किसी बड़े सुपरस्टार से कम नहीं थी. दिलचस्प बात यह है कि सुरैया ने कभी फिल्मों में आने का सपना नहीं देखा था, लेकिन किस्मत उन्हें सीधे फिल्मी दुनिया में ले आई.15 जून 1929 को लाहौर में जन्मी सुरैया का पूरा नाम सुरैया जमाल शेख था. जब वह सिर्फ एक साल की थीं, तब उनका परिवार मुंबई आ गया. उनके मामा एम. जहूर फिल्म इंडस्ट्री से जुड़े थे, इसलिए बचपन से ही उन्हें फिल्मी माहौल देखने का मौका मिला. छोटी उम्र में ही उन्होंने ऑल इंडिया रेडियो के बच्चों के कार्यक्रमों में गाना शुरू कर दिया था. उनकी मीठी आवाज लोगों को खूब पसंद आती थी.

सुरैया की जिंदगी का सबसे बड़ा मोड़ तब आया, जब वह अपने मामा के साथ फिल्म ‘ताजमहल’ की शूटिंग देखने मोहन स्टूडियो पहुंचीं. वह सिर्फ शूटिंग देखने गई थीं, लेकिन वहां मौजूद निर्देशक नानूभाई वकील की नजर उन पर पड़ गई. उनकी मासूमियत और सादगी से प्रभावित होकर निर्देशक ने उन्हें अपनी फिल्म में मुमताज महल का किरदार दे दिया. यहीं से सुरैया के फिल्मी सफर की शुरुआत हुई.
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अभिनय के साथ-साथ सुरैया ने गायिका के तौर पर भी खूब नाम कमाया. मशहूर संगीतकार नौशाद उनकी आवाज से इतने प्रभावित हुए कि उन्होंने फिल्म ‘शारदा’ में गाने का मौका दिया. इसके बाद सुरैया ने कई ऐसे गाने गाए, जो आज भी संगीत प्रेमियों की जुबान पर हैं. ‘दिल-ए-नादां तुझे हुआ क्या है’, ‘तू मेरा चांद मैं तेरी चांदनी’, ‘वो पास रहे या दूर’, ‘चुप-चुप खड़े हो जरूर कोई बात है’ और ‘धीरे-धीरे आ रे बादल’ जैसे गानों ने उन्हें बड़ी पहचान दिलाई.

फिल्मों की बात करें तो सुरैया ने ‘अनमोल घड़ी’, ‘प्यार की जीत’, ‘विद्या’, ‘दिल्लगी’, ‘बड़ी बहन’, ‘शायर’, ‘दास्तान’, ‘अफसर’, ‘सनम’, ‘दीवाना’ और ‘मिर्जा गालिब’ जैसी कई सफल फिल्मों में काम किया. उनकी जोड़ी अभिनेता देव आनंद के साथ सबसे ज्यादा पसंद की जाती थी. पर्दे पर दिखने वाली उनकी केमिस्ट्री असल जिंदगी में भी प्यार में बदल गई थी.

हालांकि सुरैया और देव आनंद की प्रेम कहानी शादी तक नहीं पहुंच सकी. परिवार और धर्म से जुड़ी वजहों के चलते दोनों एक नहीं हो पाए. उनकी यह अधूरी प्रेम कहानी आज भी हिंदी सिनेमा की सबसे चर्चित प्रेम कहानियों में गिनी जाती है.

सुरैया का स्टारडम इतना बड़ा था कि उनके घर के बाहर फैंस की भीड़ लगी रहती थी. लोग उनकी एक झलक पाने के लिए घंटों इंतजार करते थे. वह अपने दौर की सबसे ज्यादा फीस लेने वाली अभिनेत्रियों में भी शामिल थीं. उनकी लोकप्रियता सिर्फ भारत ही नहीं, बल्कि विदेशों तक फैली हुई थी.

लंबे समय तक फिल्म इंडस्ट्री में सक्रिय रहने के बाद सुरैया ने धीरे-धीरे फिल्मों से दूरी बना ली. उन्होंने जिंदगीभर शादी नहीं की और बेहद सादगी से जीवन बिताया. बढ़ती उम्र के साथ उनकी सेहत कमजोर होने लगी. आखिरकार 31 जनवरी 2004 को 74 साल की उम्र में उन्होंने इस दुनिया को अलविदा कह दिया. लेकिन अपने गानों, फिल्मों और यादगार अभिनय के जरिए वह आज भी लोगों के दिलों में जिंदा हैं.
मेरठ में पति ने पत्नी के पेट में मारी गोली: गृहकलेश के चलते घटना को दिया अंजाम, अरेस्ट – Meerut News
मेरठ के मोदीपुरम थानाक्षेत्र के पल्लवपुरम फेज वन में रविवार रात को पति अजय कुमार नैन ने अपनी पत्नी सरिता नैन को गोली मार दी है। अजय मधुर एंक्लेव फेज वन का रहने वाला है। उम्र 50 साल है। अजय ने लाईसेंसी पिस्टल से पत्नी सरिता के गोली मारी है। गोली सरिता के पेट में लगी है। उसे प्राइवेट अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां उसका इलाज चल रहा है। वहीं आरोपी पति अजय को पुलिस ने हिरासत में ले लिया। पुलिस ने मौके से लाईसेंसी पिस्टल, खोखा, कारतूस भी बरामद किया है। बाकी पूरी घटना की पुलिस जांच कर रही है।
बताया जा रहा है कि अजय ने गृह क्लेश के चलते गोली मारना बताया है। सरिता का मायका बागपत का है उसके दो बच्चे हैं। आरोपी अजय रिटायर फौजी बताया जा रहा है। पुलिस इसकी जांच कर रही है। लाइसेंसी पिस्टल से मारी गोली पुलिस के अनुसार रॉयल पार्क एक्सटेंशन निवासी अजय नैन का अपनी पत्नी सरिता नैन से किसी बात को लेकर विवाद हो गया। विवाद इतना बढ़ गया कि अजय ने अपनी लाइसेंसी पिस्टल से पत्नी पर गोली चला दी। गोली सरिता के पेट में लगी, जिससे वह गंभीर रूप से घायल हो गई। घटना की सूचना पर थाना पल्लवपुरम पुलिस मौके पर पहुंची और घायल महिला को तत्काल कैलाशी अस्पताल में भर्ती कराया। चिकित्सकों ने महिला का उपचार शुरू कर दिया है। डॉक्टरों के अनुसार महिला की हालत फिलहाल स्थिर बनी हुई है। आरोपी अजय नैन को हिरासत में ले लिया गया है। प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि गोली उसकी लाइसेंसी पिस्टल से चली है। पुलिस मामले की जांच कर रही है तथा आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जा रही है।
पुलिस का कहना है सीओ दौराला प्रकाश चंद अग्रवाल ने बताया कि डायल 112 पर थाना पल्लवपुरम पर फेज वन में एक व्यक्ति द्वारा अपनी पत्नी को गोली मारने की सूचना मिली। सूचना पर मैं थानापुलिस मौके पर पहुंचा। घायल हालत में अजय की पत्नी सरिता को नजदीकी अस्पताल में भर्ती कराया गया है जहां उसका इलाज चल रहा है। वहीं मौके से आरोपी पति अजय कुमार नैन को अरेस्ट किया गया है। पति ने बताया कि गृहकलेश के चलते उसने अपनी पत्नी को गोली मारी है। मौके से खोखा कारतूस, जिंदा कारतूस और लाईसेंसी पिस्टल बरामद की गई है।
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इंदौर के गुलमार्ग परिसर हाउसिंग सोसाइटी में मारपीट का मामला: पुलिस कमिश्नर से की शिकायत, कहा- सोसाइटी सचिव और आरक्षक के नाम FIR से हटाए – Indore News
इंदौर के कनाड़िया इलाके की बिचौली हप्सी स्थित गुलमार्ग परिसर हाउसिंग सोसाइटी में मेंटेनेंस विवाद के दौरान हुए जानलेवा हमले के मामले में पीड़ित पक्ष ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। पीड़ित महिला ने आरोप लगाया है कि सोसाइटी सचिव और पुलिस आरक्षक नारायण जाट सहित मुख्य आरोपियों के नाम प्रभाव के चलते एफआईआर से हटा दिए गए, जबकि शिकायतों के बावजूद अब तक कोई सख्त कार्रवाई नहीं हुई। इसके विरोध में महिला ने शुक्रवार को पुलिस कमिश्नर को आवेदन सौंपकर निष्पक्ष जांच और आरोपियों की गिरफ्तारी की मांग की है। महिला ने निगम आयुक्त को आरोपियों द्वारा सोसाइटी के समीप खाली सरकारी जमीन पर अवैध कब्जा कर मंदिर निर्माण और निजी उपयोग के आरोप लगाएं हैं। वहीं, पीड़ितों ने रविवार को निगम आयुक्त को भी आवेदन दिया है। जिसमें सरकारी भूमि पर कब्जे का आरोप लगाया है। पहले जान लीजिए क्या है पूरा मामला
8 जून 2026 की रात 9:30 बजे पीड़ित कार्तिक शर्मा सोसाइटी परिसर में टहल रहे थे। तब समिति के लोकेश जाट ने उन्हें सुनाते हुए ब्लॉक बी-12 के रहवासियों को गालियां दीं। विरोध करने पर लोकेश जाट और चंदू जाट अपनी कार से डंडे निकाल लाए और कार्तिक के सिर व शरीर पर जानलेवा हमला कर लहूलुहान कर दिया। सचिन और उसके दो साथियों ने भी मारपीट की और कार्तिक की सोने की चेन लूट ली। जाते-जाते आरोपियों ने पूरे परिवार को जान से खत्म करने की धमकी दी। वारदात के बाद 9 जून 2026 (रात 02:26 बजे) घायल कार्तिक अपनी मां सुलोचना शर्मा और बहन तनिषा शर्मा के साथ कनाडिया थाने पहुंचा। पुलिस ने (BNS) की धारा 115(2), 296(a), 3(5), और 351(2) में मामला दर्ज किया। लेकिन आरोप है कि प्रभाववश मुख्य आरोपी कनाड़िया थाने में पदस्थ आरक्षक नारायण जाट का नाम FIR से गायब कर दिया गया। पीड़ित परिवार ने 9 जून 2026 को ही थाना प्रभारी कनाड़िया को लिखित आवेदन देकर FIR में आरक्षक नारायण जाट और उसके भाई चंद्रेश जाट का नाम सह आरोपी के रूप में जोड़ने की गुहार लगाई। 12 जून को पुलिस कमिश्नर और निगम आयुक्त को शिकायत कनाडिया पुलिस द्वारा कोई ठोस कार्रवाई न किए जाने पर कार्तिक की मां सुलोचना शर्मा ने 12 जून 2026 को इंदौर पुलिस कमिश्नर और नगर पालिक निगम आयुक्त शिकायत पत्र देकर कार्रवाई की मांग की है। पुलिस कमिश्नर और निगम कमिश्नर को की गई शिकायत में पीड़ित परिवार ने सोसाइटी के वर्तमान पदाधिकारियों दिलीप पंवार (अध्यक्ष), सुंदन सिंह (कोषाध्यक्ष) और नारायण जाट (सचिव) पर कई आरोप लगाए हैं। महिला और उसके परिवार का आरोप है कि सोसाइटी का सचिव नारायण जाट असल में कनाडिया थाने में ही आरक्षक (कांस्टेबल) के पद पर पदस्थ है। वह पिछले एक साल से अपनी शासकीय वर्दी और पद की धौंस दिखाकर सोसाइटी के 216 फ्लैट्स के रहवासियों को डरा-धमका रहा है। शिकायत पत्र के मुताबिक, आरक्षक नारायण जाट खुद अवैध रूप से शराब की पेटियां लेकर आता है और वह और उसका भाई चन्द्रेश जाट दोनों मिलकर सोसाइटी परिसर के भीतर से ही अवैध शराब बेचने का काला कारोबार संचालित करते हैं। निगम की जमीन पर अवैध कब्जा
पीड़िता का आरोप है कि इन पदाधिकारियों ने अपनी सत्ता का दुरुपयोग करते हुए गुलमर्ग परिसर सोसाइटी से लगी नगर निगम की शासकीय (सरकारी) भूमि पर अवैध रूप से कब्जा कर लिया है और नियमों को ताक पर रखकर अवैध निर्माण कार्य करवा रहे हैं। विरोध करने पर पानी और कचरा गाड़ी बंद की
जो भी रहवासी इनके वित्तीय गबन, अवैध शराब बिक्री या शासकीय भूमि पर अवैध कब्जे का विरोध करता है, ये लोग तानाशाही दिखाते हुए उनका पानी 3-4 दिनों के लिए बंद कर देते हैं, कचरा गाड़ी रोक देते हैं। आरक्षक ने दुर्भावनापूर्वक पीड़िता की छत पर रखे गमलों को भी नीचे फेंककर तोड़फोड़ की। आरक्षक कहता है कानून मेरी जेब में
शिकायत पत्र में महिला ने बताया कि वारदात के वक्त आरोपियों ने सार्वजनिक रूप से पूरी सोसाइटी के सामने ललकारते हुए कहा था कि “कानून मेरी जेब में रहता है, हमारा कोई कुछ नहीं उखाड़ सकता।” पुलिस द्वारा अपने ही विभाग के आरक्षक को बचाने के प्रयास से पीड़ित परिवार अत्यंत भय के साये में जीने को मजबूर है और उन्हें अपनी जान का प्रत्यक्ष खतरा है। शिकायती पत्र में ये मांगे
पहले से दर्ज एफआईआर में मुख्य साजिशकर्ता आरक्षक नारायण जाट और उसके भाई चन्द्रेश जाट का नाम तुरंत सह-आरोपी के रूप में जोड़ा जाए। साथ ही पुलिस विभाग की छवि धूमिल करने वाले आरक्षक नारायण जाट को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर निष्पक्ष विभागीय जांच की जाए। पीड़िता ने परिवार की सुरक्षा की भी मांग की है।
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