RBI MPC October 2026 Meeting LIVE: RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की तीन दिन से चल रही बैठक आज, बुधवार 7 अक्टूबर को खत्म हो गई. RBI गवर्नर संजय मल्होत्रा प्रेस कॉन्फ्रेंस के जरिए MPC के फैसलों और आगे की नीति को लेकर केंद्रीय बैंक का रुख बताएं. इस बार रेपो रेट में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी का ऐलान किया गया.
RBI MPC October 2026 Meeting LIVE: खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी
आरबीआई गवर्नर के अनुसार, खाने-पीने की चीजों की कीमतों में बढ़ोतरी अब ज्यादा सामानों तक फैल गई है. खास तौर पर चीनी और प्याज जैसी कुछ चीजों की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है. अगस्त में खाद्य महंगाई थोड़ी बढ़ी, जिसकी मुख्य वजह पिछले साल की तुलना में कमजोर बेस इफेक्ट रही.
RBI MPC Meeting 2026 LIVE: रियल GDP ग्रोथ का अनुमान
वैश्विक चुनौतियों के बावजूद घरेलू अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है. पहली तिमाही (Q1) में देश की वास्तविक GDP ग्रोथ 7.8% रही. दूसरी तिमाही (Q2) में मैन्युफैक्चरिंग और सर्विसेज PMI दोनों में बढ़त जारी रही, हालांकि ग्रोथ की रफ्तार पहली तिमाही के मुकाबले थोड़ी धीमी हुई. इस साल वास्तविक GDP ग्रोथ 7.1% रहने का अनुमान है. Q2 में यह 7.2%, Q3 में 6.9% और Q4 में 6.8% रह सकती है. अगले वित्त वर्ष की पहली तिमाही (Q1) में GDP ग्रोथ 7.1% रहने का अनुमान है.
RBI Repo Rate Today LIVE: महंगाई के दूसरे दौर के असर को कम करने के लिए आरबीआई का फैसला
RBI Repo Rate Today LIVE: MPC ने कहा कि मौद्रिक नीति का मुख्य काम महंगाई के दूसरे दौर के असर को कम करना है. यानी, महंगाई बढ़ने के बाद उसका वेतन, कीमतों और दूसरी चीजों पर दोबारा असर न पड़े, इसे रोकने में मौद्रिक नीति अहम भूमिका निभाती है.
SDF और MSF पर आरबीआई गवर्नर का फैसला
SDF (Standing Deposit Facility) की दर 5.25% कर दी गई है. वहीं, Marginal Standing Facility (MSF) और बैंक रेट को 5.75% कर दिया गया है.
रेपो रेट पर आरबीआई का ऐलान
आरबीआई ने रेपो रेट में 0.25 फीसदी की बढ़ोतरी की है. रेपो रेट 5.25 फीसदी से अब बढ़कर 5.50 फीसदी हो गया है.
Goldman Sachs का अनुमान
Goldman Sachs को RBI के रुख में बदलाव की संभावना दिख रही है. Goldman Sachs के विश्लेषकों का मानना है कि RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) रेपो रेट में 0.25% की बढ़ोतरी कर सकती है. इसके साथ ही MPC अपने मौजूदा न्यूट्रल रुख को बदलकर ब्याज दरों को लेकर थोड़ा सख्त रुख अपना सकती है. अब निवेशकों की नजर RBI के अगले कदम और ब्याज दरों को लेकर उसके संकेतों पर है, खासकर बढ़ती महंगाई और दुनियाभर में सख्त वित्तीय परिस्थितियों के बीच.
RBI Repo Rate Today LIVE: महंगाई को काबू में रखने के लिए फैसला
लक्ष्मी वेंकटरमन वेंकटेशन, BYST की संस्थापक और मैनेजमेंट ट्रस्टी हैं. उनका कहना है कि अगस्त में खुदरा महंगाई बढ़कर 4.82% हो गई, जबकि औद्योगिक उत्पादन की ग्रोथ बढ़कर 8% रही. ऐसे में RBI के सामने महंगाई को काबू में रखने और आर्थिक गतिविधियों की रफ्तार बनाए रखने के बीच संतुलन बनाने की चुनौती है. उनके मुताबिक, माइक्रो और छोटे कारोबारियों के लिए यह संतुलन और भी जरूरी है. कच्चे माल, ईंधन और कारोबार चलाने की लागत बढ़ रही है. रुपये में कमजोरी और विदेशी मुद्रा भंडार में गिरावट का भी दबाव है. हाल में अमेरिकी फेड की दर बढ़ोतरी के बाद अगर भारत में भी कर्ज महंगा होता है, तो छोटे कारोबारियों की वर्किंग कैपिटल, लोन की किस्त, कारोबार बढ़ाने और नई भर्ती की योजनाओं पर असर पड़ सकता है.
वेंकटेशन का कहना है कि RBI की मौद्रिक नीति में मैक्रो इकोनॉमिक स्थिरता के साथ छोटे और सक्षम कारोबारियों को समय पर और कम लागत पर कर्ज मिलने पर भी ध्यान देना चाहिए. सही तरीके से कर्ज पहुंचाना, पर्याप्त वर्किंग कैपिटल उपलब्ध कराना और कारोबारियों के लिए उचित repayment structure जरूरी है.
उन्होंने कहा कि पहली बार कारोबार शुरू करने वाले उद्यमियों, महिला उद्यमियों और Grampreneurs® के लिए सिर्फ कर्ज मिलना काफी नहीं है. उन्हें मेंटोरिंग और बिजनेस गाइडेंस भी मिलनी चाहिए. इससे छोटे कारोबारी अपना बिजनेस मजबूत कर सकते हैं, रोजगार पैदा कर सकते हैं और स्थानीय अर्थव्यवस्था को बढ़ावा दे सकते हैं.
RBI MPC Meeting 2026 LIVE: रिटेल महंगाई का हाल
आरबीआई एमपीसी मीटिंग 2026 लाइव: भारत की रिटेल महंगाई अगस्त में बढ़कर 4.82% हो गई, जबकि जुलाई में यह 4.45% थी. महंगाई में यह बढ़ोतरी RBI के लिए अहम है, क्योंकि मौद्रिक नीति समिति (MPC) ब्याज दरों पर फैसला लेते समय महंगाई को भी ध्यान में रखती है. अगस्त के आंकड़ों का असर RBI के repo rate और आगे की मॉनिटरी पॉलिसी को लेकर उसके संकेतों पर पड़ सकता है.
GIFT Nifty में गिरावट
भारतीय शेयर बाजार में 7 अक्टूबर को कमजोर शुरुआत के संकेत मिल रहे हैं. सुबह 8 बजे GIFT Nifty करीब 22,677 पर कारोबार कर रहा था, जो 97 अंक या 0.43% नीचे है. बाजार की नजर आज RBI की मौद्रिक नीति के फैसले पर भी है.
एशियाई बाजारों में भी कमजोरी रही, जबकि अमेरिकी बाजार रिकॉर्ड ऊंचाई पर बंद हुए. MSCI Asia Pacific Index 0.4% गिरा. जापान के Topix और हांगकांग के Hang Seng में भी गिरावट रही. कच्चे तेल की कीमतों में तेजी ने भी चिंता बढ़ाई है. Brent क्रूड $101 प्रति बैरल के ऊपर पहुंच गया है. घरेलू बाजार में विदेशी संस्थागत निवेशक लगातार 8वें सत्र में बिकवाल रहे. 6 अक्टूबर को FIIs ने ₹2,961 करोड़ की इक्विटी बेची, जबकि घरेलू संस्थागत निवेशकों ने ₹5,000 करोड़ से ज्यादा की खरीदारी की.
RBI Repo Rate Today LIVE: FD के ब्याज पर असर
आरबीआई रेपो रेट आज लाइव: सिद्धार्थ मौर्य, मैनेजिंग डायरेक्टर, विभावंगल अनुकूलकरा प्राइवेट लिमिटेड के मुताबिक, अगर RBI रेपो रेट 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 5.50% करता है, तो कर्ज लेने वालों और बचत करने वालों पर अलग-अलग असर हो सकता है. फ्लोटिंग रेट वाले होम और कार लोन की EMI बढ़ सकती है या लोन की अवधि लंबी हो सकती है. ऐसे में लोगों को अपने बजट में बढ़ी हुई EMI का असर पहले से देख लेना चाहिए. अतिरिक्त पैसा उपलब्ध हो तो कुछ लोग लोन का आंशिक प्रीपेमेंट कर सकते हैं.
दूसरी ओर, रेपो रेट बढ़ने पर बैंक FD पर ब्याज दरें बढ़ा सकते हैं. ऐसे में छोटी से मध्यम अवधि की FD पर ध्यान दिया जा सकता है. हालांकि, कच्चे तेल की कीमत $100 प्रति बैरल से ऊपर और रुपये में कमजोरी के कारण महंगाई बढ़ने पर FD से मिलने वाला वास्तविक रिटर्न कम हो सकता है. इसलिए सिर्फ ज्यादा ब्याज के लालच में FD चुनने से बचना चाहिए. नए निवेश से पहले कर्ज, लिक्विड फंड, इमरजेंसी फंड और इंश्योरेंस की समीक्षा करना भी जरूरी है.
RBI MPC October 2026 Meeting LIVE: प्रॉपर्टी सेगमेंट पर असर
आरबीआई एमपीसी अक्टूबर 2026 मीटिंग लाइव: हार्दिक शाह, डायरेक्टर, श्याम ग्रुप-धोलेरा SIR के मुताबिक, रेपो रेट बढ़कर 5.50% होने से रियल एस्टेट निवेशकों के लिए प्रॉपर्टी और FD जैसे फिक्स्ड इनकम निवेश के बीच का समीकरण बदल सकता है. ब्याज दर बढ़ने से कर्ज महंगा होगा, जिसका असर उन प्रॉपर्टी सेगमेंट पर पड़ सकता है जो ब्याज दरों के प्रति ज्यादा संवेदनशील हैं.
कमर्शियल रियल एस्टेट और REITs के लिए भी फाइनेंसिंग लागत बढ़ सकती है. हालांकि, लंबे समय के लीज कॉन्ट्रैक्ट से मिलने वाली नियमित आय इन पर कुछ दबाव कम कर सकती है. ऑफिस और रिटेल प्रॉपर्टी में निवेशक ज्यादा रिटर्न की मांग कर सकते हैं. कमजोर रुपया और ग्लोबल अनिश्चितता भी निवेश को प्रभावित कर सकती है. वहीं, अगर घरों की मांग बनी रहती है तो अफोर्डेबल और किराये के मकानों में असर सीमित रह सकता है. आगे बाजार पर सबसे ज्यादा निर्भर करेगा कि यह सिर्फ एक छोटी बढ़ोतरी है या लगातार ब्याज दरें बढ़ने की शुरुआत.
ग्लोबल स्तर पर अनिश्चितता
शिव गर्ग, डायरेक्टर, फोर्टएशिया रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड के मुताबिक, रेपो रेट में 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी से रेजिडेंशियल रियल एस्टेट बाजार पर दबाव पड़ सकता है. नवरात्रि से दिवाली तक का समय घरों की बिक्री के लिए अहम होता है. ऐसे में होम लोन की ब्याज दर थोड़ी भी बढ़ने पर कुछ खरीदार अपना फैसला टाल सकते हैं. खासकर तब, जब प्रॉपर्टी की कीमतें पहले ही ऊंची हैं और ग्लोबल स्तर पर अनिश्चितता बनी हुई है. उनके अनुसार, रेपो रेट बढ़ने पर डेवलपर्स बिक्री बढ़ाने के लिए तैयार घरों पर ज्यादा छूट, इंसेंटिव और सबवेंशन ऑफर दे सकते हैं. वहीं, खरीदार ऐसी होम लोन EMI को प्राथमिकता दे सकते हैं, जिसका मंथली खर्च पहले से तय हो. इससे इस फेस्टिव सीजन में डेवलपर्स की बिक्री रणनीति पर असर पड़ सकता है.
RBI Monetary Policy: 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी की उम्मीद
विजय रौंदल, मैनेजिंग डायरेक्टर, तीर्थ रियल्टीज के मुताबिक, रेपो रेट बढ़कर 5.5% होने से बिल्डरों के लिए निर्माण और कारोबार चलाने का खर्च बढ़ सकता है. अगर ब्याज दर में सिर्फ 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी भी होती है, तो फ्लोटिंग रेट वाले कर्ज पर डेवलपर्स का ब्याज खर्च बढ़ जाएगा. पहले से बढ़ी हुई निर्माण लागत के कारण बिल्डरों के मुनाफे पर दबाव है. छोटे शहरों में काम करने वाले छोटे डेवलपर्स के लिए यह बढ़ी लागत ग्राहकों पर डालना मुश्किल हो सकता है. ऐसे में वे नए प्रोजेक्ट लॉन्च करने में देरी कर सकते हैं। बड़े डेवलपर्स कुछ समय तक इस दबाव को संभाल सकते हैं, लेकिन लगातार ब्याज दरें बढ़ने पर कंपनियों को अपनी विस्तार योजनाओं और लागत पर दोबारा विचार करना पड़ सकता है.













