Tuesday, June 2, 2026
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स्ट्रेट ऑफ होर्मुज का वो रास्ता जहां छिपा है भारत के लिए सबसे बड़ा खतरा!


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पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और कच्चे तेल की ऊंची कीमतों के बावजूद कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने भारतीय शेयर बाजार को लेकर सकारात्मक तस्वीर पेश की है. ब्रोकरेज का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 में निफ्टी 50 कंपनियों की कमाई 18 फीसदी और अगले वित्त वर्ष में 14 फीसदी बढ़ सकती है. रिपोर्ट में चेतावनी भी दी गई है कि अगर स्ट्रेट ऑफ होर्मुज से तेल और गैस की सप्लाई प्रभावित हुई तो भारत के चालू खाता घाटे, महंगाई और राजकोषीय स्थिति पर दबाव बढ़ सकता है. इसके बावजूद बैंकिंग, फाइनेंशियल, ग्लोबल सर्विसेज और यूटिलिटीज सेक्टर भारतीय बाजार को मजबूती देने की स्थिति में हैं.

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रिपोर्ट में भारतीय शेयर बाजार के वैल्यूएशन को लेकर भी अहम टिप्पणी की गई है. (AI)

नई दिल्ली. पश्चिम एशिया में जारी सैन्य संघर्ष, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों और वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारतीय अर्थव्यवस्था को लेकर एक अहम रिपोर्ट सामने आई है. दिग्गज ब्रोकरेज फर्म कोटक इंस्टीट्यूशनल इक्विटीज ने अपनी ताजा स्ट्रेटेजी रिपोर्ट में कहा है कि तेल की ऊंची कीमतों के कारण भारत का व्यापक आर्थिक परिदृश्य पहले की तुलना में कमजोर हुआ है. इसके बावजूद भारतीय कॉरपोरेट सेक्टर और शेयर बाजार की स्थिति अपेक्षाकृत मजबूत बनी हुई है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारतीय कंपनियों की कमाई आने वाले दो वित्त वर्षों में तेज रफ्तार से बढ़ सकती है, जो बाजार को सहारा देने का काम करेगी.

कोटक के संजीव प्रसाद और उनकी टीम द्वारा तैयार की गई रिपोर्ट में कहा गया है कि वित्त वर्ष 2025-26 में निफ्टी-50 पर लिस्टेड कंपनियों की आय में केवल 8 फीसदी की वृद्धि रहने का अनुमान है. लेकिन इसके बाद तस्वीर तेजी से बदल सकती है. ब्रोकरेज का अनुमान है कि वित्त वर्ष 2026-27 में निफ्टी 50 कंपनियों की कमाई 18 फीसदी और वित्त वर्ष 2027-28 में 14 फीसदी बढ़ सकती है. हालांकि, रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि अगर पश्चिम एशिया का संकट लंबा खिंचता है और तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं तो भारत के लिए महंगाई, चालू खाता घाटा और राजकोषीय घाटा जैसी चुनौतियां बढ़ सकती हैं.

बाजार वैल्यूएशन में दिख रहा बड़ा अंतर

रिपोर्ट में भारतीय शेयर बाजार के वैल्यूएशन को लेकर भी अहम टिप्पणी की गई है. कोटक का मानना है कि कंजम्पशन और इन्वेस्टमेंट आधारित कई सेक्टर इस समय महंगे वैल्यूएशन पर कारोबार कर रहे हैं. आईटी और फार्मा सेक्टर उचित से लेकर महंगे स्तर पर दिखाई दे रहे हैं, जबकि बैंकिंग और फाइनेंशियल शेयर अभी भी आकर्षक वैल्यूएशन पर उपलब्ध हैं. रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि स्मॉलकैप, मिडकैप और कुछ सरकारी कंपनियों के शेयरों में जरूरत से ज्यादा तेजी देखने को मिली है. ऐसे शेयरों में निवेशकों को सावधानी बरतने की जरूरत हो सकती है क्योंकि मौजूदा वैल्यूएशन उनके वास्तविक प्रदर्शन से काफी आगे निकल चुका है.

स्ट्रेट ऑफ होर्मुज बना भारत के लिए सबसे बड़ा जोखिम

कोटक की रिपोर्ट में सबसे बड़ी चिंता ऊर्जा सुरक्षा को लेकर जताई गई है. भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों के लिए पश्चिम एशिया पर काफी निर्भर है. वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान देश का लगभग 42 फीसदी कच्चा तेल आयात, 55 फीसदी एलएनजी आयात और करीब 88 फीसदी एलपीजी आयात सीधे स्ट्रेट ऑफ होर्मुज और उससे जुड़े क्षेत्रों के रास्ते हुआ है.

रिपोर्ट के अनुसार यदि पश्चिम एशिया का तनाव सीमित समय में कम हो जाता है और कच्चे तेल की औसत कीमत 95 डॉलर प्रति बैरल के आसपास रहती है, तो भारत का चालू खाता घाटा जीडीपी के 2.5 फीसदी के आसपास रह सकता है. लेकिन यदि संघर्ष लंबा खिंचता है और तेल की कीमतें और बढ़ती हैं, तो चालू खाता घाटा 3 फीसदी तक पहुंच सकता है, जिससे अर्थव्यवस्था पर अतिरिक्त दबाव बनेगा.

महंगाई और कमजोर मानसून बढ़ा सकते हैं मुश्किलें

कोटक ने वित्त वर्ष 2026-27 में महंगाई को लेकर भी चेतावनी दी है. रिपोर्ट के मुताबिक, पिछले वित्त वर्ष में जहां औसत खुदरा महंगाई दर करीब 2.5 फीसदी रही थी, वहीं नए वित्त वर्ष में यह बढ़कर 5 फीसदी तक पहुंच सकती है. इसके पीछे कच्चे तेल की ऊंची कीमतें, बढ़ती उत्पादन लागत और खाद्य महंगाई प्रमुख कारण होंगे.

स्थिति इसलिए और चुनौतीपूर्ण हो सकती है क्योंकि भारतीय मौसम विभाग (IMD) ने इस साल सामान्य से कमजोर मानसून का अनुमान जताया है. कमजोर बारिश से कृषि उत्पादन प्रभावित हो सकता है और खाद्यान्न व सब्जियों की कीमतों में तेजी आ सकती है. अगर सरकार को पेट्रोल और डीजल की कीमतें बढ़ानी पड़ीं, तो परिवहन लागत बढ़ने से महंगाई का असर पूरे बाजार में फैल सकता है.

भारतीय अर्थव्यवस्था के लिए क्या है बड़ा संदेश

कोटक की रिपोर्ट का सबसे महत्वपूर्ण निष्कर्ष यह है कि पश्चिम एशिया संकट के कारण भारत के मैक्रोइकोनॉमिक संकेतकों पर दबाव बढ़ सकता है, लेकिन कॉरपोरेट सेक्टर की कमाई फिलहाल मजबूत बनी हुई है. यही वजह है कि बाजार को निकट भविष्य में कंपनियों के बेहतर नतीजों से सहारा मिलने की उम्मीद है. हालांकि तेल की कीमतों और स्ट्रेट ऑफ होर्मुज की स्थिति पर निवेशकों की नजर लगातार बनी रहेगी क्योंकि यही आने वाले महीनों में भारतीय अर्थव्यवस्था की दिशा तय करने वाला सबसे बड़ा फैक्टर साबित हो सकता है.

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जय ठाकुरSenior-Sub Editor

मैं जय ठाकुर, न्यूज18 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहा हूं. मेरा मुख्य काम बिजनेस की पेचीदा खबरों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. फिर चाहे वह शेयर बाजार की हलचल हो, देश की इकोनॉमी क…और पढ़ें



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अन्नामलाई ने छोड़ा BJP का साथ, नितिन नवीन को सौंपा इस्तीफा, शाम 4 बजे अमित शाह से मिलेंगे


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अन्नामलाई ने छोड़ा BJP का साथ, नितिन नवीन को सौंपा इस्तीफा, शाम 4 बजे अमित शाह से मिलेंगे

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तमिलनाडु में भाजपा के फायरब्रांड नेता अन्नामलाई ने फैसला ले लिया है. उन्होंने भाजपा से अलग होने का मन मना लिया. जी हां, पूर्व तमिलनाडु बीजेपी प्रमुख के. अन्नामलाई ने आज यानी मंगलवार को बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की और अपना इस्तीफा सौंप दिया. हालांकि, उम्मीद है कि वे शाम 4 बजे केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से भी मिलेंगे.

ऐसी अटकलें तेज थीं कि अन्नामलाई पार्टी छोड़ना चाहते हैं. रिपोर्ट्स में यह भी कहा गया कि अब वे बीजेपी में अपना भविष्य नहीं देख रहे हैं. अन्नामलाई को नैनार नागेन्द्रन के तमिलनाडु बीजेपी प्रमुख बनने के बाद से कम सक्रिय देखा जा रहा था.

यह ख़बर बिल्कुल अभी आई है और इसे सबसे पहले आप News18Hindi पर पढ़ रहे हैं. जैसे-जैसे जानकारी मिल रही है, हम इसे अपडेट कर रहे हैं. ज्यादा बेहतर एक्सपीरिएंस के लिए आप इस खबर को रीफ्रेश करते रहें, ताकि सभी अपडेट आपको तुरंत मिल सकें. आप हमारे साथ बने रहिए और पाइए हर सही ख़बर, सबसे पहले सिर्फ Hindi.News18.com पर…

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योगी आदित्यनाथ का जबरा फैन निकला कुली नं. 1 का ये एक्टर, बोला- जनता करे सम्मान


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Saharanpur News: कहते हैं कि हर इंसान किसी ना किसी एक्टर का फैन होता है, लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि एक्टर भी किसी ना किसी के फैन होते हैं. आज ऐसे ही एक एक्टर के बारे में आपको बताने वाले हैं, जो सीएम योगी के जबरा फैन हैं और उनका नाम लेते ही एक्टर भावुक हो जाते हैं.

सहारनपुर: बॉलीवुड का अपने समय पर जलवा रहा है. हर कोई किसी न किसी फिल्म एक्टर का जबरा फैन रहा है. लेकिन आज हम जिस फिल्म एक्टर की बात करने जा रहे हैं, वह 90 के दशक की फिल्मों के स्टार रहे हैं. हरिश कुमार जिनका जन्म 1 अगस्त 1975 को हुआ था, 90 के दशक के एक लोकप्रिय भारतीय फिल्म अभिनेता और निर्माता हैं, जिन्होंने हिंदी, तेलुगु और तमिल फिल्मों में काम किया है. वह मुख्य रूप से बॉलीवुड फिल्म ‘प्रेम कैदी’ (1991) और ‘कुली नंबर 1’ (1995) में अपनी भूमिकाओं के लिए जाने जाते हैं. इसके साथ ही तिरंगा मूवी में भी उन्होंने बेहतरीन भूमिका निभाई है.

उन्होंने 300 से ज्यादा फिल्मों में काम किया. ज्यादातर फिल्में उनकी गोविंदा के साथ कॉमेडी के रूप में देखने को मिलीं. एक फिल्म एक्टर जिसके लाखों करोड़ों फैन होते हैं, लेकिन वह भी किसी का फैन हो सकता है, क्या आपने कभी सोचा है. फिल्म अभिनेता हरिश कुमार यूपी के सहारनपुर पहुंचे और उन्होंने लोकल 18 से बात करते हुए अपने कुछ खूबसूरत पलों को हमसे साझा किया.

हरिश कुमार का सहारनपुर से गहरा लगाव
हरिश कुमार ने कहा कि सहारनपुर आकर बहुत ही अच्छा लगा और सहारनपुर को पूरी दुनिया जानती है. यहां पर लकड़ी पर खूबसूरत नक्काशी की जाती है. लेकिन उससे भी ज्यादा खूबसूरत यहां के लोगों की जुबान है. वही उनके दिल में भी है और जो दिल में है वही जुबां पर है. इस बात को कहकर उन्होंने सहारनपुर के लोगों का दिल जीत लिया.

इससे पहले भी वह तीन बार सहारनपुर आ चुके हैं और उनका सहारनपुर से एक गहरा प्रेम जुड़ा है. हरिश कुमार ने बताया कि वह 5 साल की उम्र से काम कर रहे हैं, जिसमें पहली फिल्म उनकी ‘अंधा कानून’ थी, जिसमें उन्होंने रजनीकांत के साथ छोटे रजनीकांत का रोल किया था. जब बड़ा हुआ, तो हिंदी में पहली फिल्म प्रेम कैदी थी, लेकिन उससे पहले वह लगभग 30 पिक्चर साउथ में कर चुके थे.

योगी आदित्यनाथ का नाम लेते ही हुए भावुक
फिल्म अभिनेता हरिश कुमार योगी आदित्यनाथ का नाम आते ही भावुक हो उठे. उन्होंने कहा कि मैं हकीकत बोलूं तो आज तक मैं योगी आदित्यनाथ से मिला नहीं हूं, लेकिन अगर मैं फिल्म इंडस्ट्री में किसी को अपना गुरु मानता हूं, तो वह हैं गोविंदा जी और वैसे ही अगर राजनीति में कोई सच्चा ऑलराउंडर है तो वह हैं योगी आदित्यनाथ जी. यह बात योगी जी तक आप पहुंचा दीजिएगा, यह बात बोलने के लिए मैं तड़प रहा हूं. योगी जी का नाम आते ही मैं भावुक हो जाता हूं और मेरी आंखों में आंसू आ जाते हैं. अगर योगी जी को भी कुछ जनता को बोलना पड़े, यह गलत बात है. योगी जी को अगर जनता उनका पूरा समय दे, तो वह अपने स्टेट और इस देश को पता नहीं कहां से कहां ले जाएंगे.

तीन नेताओं को दिया भगवान का दर्जा
वहीं हरिश कुमार ने योगी आदित्यनाथ को भगवान का रूप, सच्चा भक्त और सच्चा सेवक बताया. साथ ही उन्होंने कहा कि क्या कभी आपने देखा है भगवान जनता के बीच में आकर कुछ मांगता है नहीं. योगी आदित्यनाथ के साथ भी जनता को मंदिर में बैठे भगवान की तरह ही करना चाहिए. योगी, मोदी और अमित शाह यह एक ऐसा कांबिनेशन है, जो बिल्कुल ब्रह्मा, विष्णु, महेश की तरह है. मोदी जी ब्रह्मा, अमित शाह महेश और योगी आदित्यनाथ विष्णु का अवतार हैं.

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आर्यन सेठ

आर्यन ने नई दिल्ली के जामिया मिलिया इस्लामिया से पत्रकारिता की पढ़ाई की और एबीपी में काम किया. उसके बाद नेटवर्क 18 के Local 18 से जुड़ गए.



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हापुड़ में नवजात की मौत पर अस्पताल में हंगामा, VIDEO: परिजनों ने डॉक्टरों पर लापरवाही का आरोप लगाया, पुलिस ने शांत कराया मामला – Hapur News




हापुड़ के गढ़ रोड स्थित देवनंदिनी अस्पताल में मंगलवार को नवजात शिशु की मौत के बाद परिजनों ने जमकर हंगामा किया। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन और चिकित्सकों पर गंभीर लापरवाही का आरोप लगाते हुए कार्रवाई की मांग की। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और स्थिति को नियंत्रित किया। जानकारी के अनुसार, गिरधारी नगर निवासी ऋषभ अग्रवाल अपनी पत्नी अपूर्वी (24) को प्रसव पीड़ा होने पर रविवार को देवनंदिनी अस्पताल लेकर पहुंचे थे। परिजनों के मुताबिक चिकित्सकों ने पहले सामान्य प्रसव कराने का प्रयास किया, लेकिन महिला की स्थिति को देखते हुए बाद में सिजेरियन ऑपरेशन की सलाह दी। परिजनों की सहमति के बाद सोमवार को ऑपरेशन किया गया, जिसमें अपूर्वी ने एक पुत्र को जन्म दिया। जन्म के बाद बिगड़ी नवजात की हालत परिजनों का आरोप है कि जन्म के कुछ समय बाद ही नवजात की तबीयत बिगड़ने लगी। इसके बाद अस्पताल प्रशासन ने बच्चे को विशेष निगरानी में रखते हुए मशीनों के सहारे उपचार शुरू किया। परिवार का कहना है कि उन्होंने बच्चे को किसी बड़े अस्पताल में रेफर करने की मांग की थी, लेकिन चिकित्सकों ने अपने स्तर पर इलाज करने का भरोसा दिलाया।
ऋषभ अग्रवाल के अनुसार, मंगलवार तड़के करीब 3:30 बजे अस्पताल से फोन कर बताया गया कि बच्चे की हालत गंभीर है और उसे एक विशेष इंजेक्शन लगाने की जरूरत है, जिस पर लगभग 30 हजार रुपये का खर्च आएगा। साथ ही बच्चे को वेंटिलेटर सपोर्ट पर रखने की बात भी कही गई। अस्पताल पहुंचने पर मिली मौत की सूचना परिजनों का कहना है कि जब वे अस्पताल पहुंचे तो उन्हें नवजात की मौत की जानकारी दी गई। इस सूचना के बाद परिवार में कोहराम मच गया। वहीं, मां अपूर्वी की तबीयत भी बिगड़ गई। नवजात की मौत से आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल परिसर में हंगामा करते हुए चिकित्सकीय लापरवाही का आरोप लगाया और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की। पुलिस ने कराया मामला शांत हंगामे की सूचना पर पुलिस मौके पर पहुंची और परिजनों को समझाकर स्थिति को शांत कराया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। हालांकि, अस्पताल प्रबंधन ने चिकित्सकीय लापरवाही के आरोपों को निराधार बताते हुए कहा है कि बच्चे को बचाने के लिए हर संभव प्रयास किए गए थे। कोतवाली प्रभारी नीरज कुमार ने बताया कि नवजात की मौत के बाद परिजन आक्रोशित हो गए थे, जिन्हें समझाकर शांत कराया गया। उन्होंने कहा कि यदि मामले में तहरीर प्राप्त होती है तो जांच के आधार पर आवश्यक कानूनी कार्रवाई की जाएगी।



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सीधी में जनसुनवाई में साइकिल से आए कलेक्टर: जमीन पर जानी लोगों की समस्याएं, मोबाइल चलाते रहे कर्मचारी – Sidhi News




सीधी जिला पंचायत सभागार में मंगलवार को आयोजित जनसुनवाई के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था में एक विरोधाभासी दृश्य सामने आया। जहां जिले के कलेक्टर विकास मिश्रा आम लोगों के बीच जमीन पर बैठकर उनकी समस्याएं सुनते दिखे, वहीं अधिकांश अधिकारी और कर्मचारी कुर्सियों पर आराम फरमाते और मोबाइल फोन चलाते नजर आए। कलेक्टर विकास मिश्रा ने जनसुनवाई में पहुंचे ग्रामीणों और फरियादियों के बीच बैठकर सीधे संवाद स्थापित किया। उनका यह व्यवहार एक संवेदनशील प्रशासनिक अधिकारी की छवि को दर्शाता है, जो आमजन से सीधा जुड़ाव स्थापित करने का प्रयास कर रहे थे। इसके विपरीत, सभागार में मौजूद कई अधिकारी और कर्मचारी कुर्सियों पर बैठे रहे। कुछ तो जनसुनवाई के दौरान अपने मोबाइल फोन में व्यस्त दिखाई दिए, जिससे ऐसा प्रतीत हुआ कि उन्हें आमजन की समस्याओं से कोई सरोकार नहीं है। हैरानी की बात यह भी रही कि कलेक्टर विकास मिश्रा स्वयं साइकिल चलाकर कलेक्ट्रेट से जिला पंचायत सभागार पहुंचे। वहीं, अधिकांश अधिकारी और कर्मचारी महज कुछ सौ मीटर की दूरी तय करने के लिए भी चारपहिया वाहनों का उपयोग करते नजर आए। उल्लेखनीय है कि रीवा संभाग के कमिश्नर बी.एस. जामोद पहले ही अधिकारियों को अनावश्यक रूप से चारपहिया वाहनों का उपयोग कम करने की सलाह दे चुके हैं। जनसुनवाई के दौरान कई अधिकारियों और कर्मचारियों के गले में परिचय-पत्र (आईडी कार्ड) भी नहीं दिखाई दिए। जबकि कलेक्टर ने स्पष्ट निर्देश जारी किए हैं कि सभी अधिकारी और कर्मचारी अपने कार्यालय एवं संस्थान में प्रवेश के दौरान परिचय-पत्र अनिवार्य रूप से धारण करें। मंगलवार दोपहर करीब 12:30 बजे आयोजित इस जनसुनवाई में इन निर्देशों की खुली अनदेखी देखने को मिली, जिसने शासन-प्रशासन की कार्यशैली पर सवाल खड़े किए हैं।



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मधुबनी के चूड़ी बाजार में भीषण ट्रैफिक जाम: अतिक्रमण बना मुख्य कारण, गर्मी में घंटों फंसे रहे राहगीर – Madhubani News




मधुबनी शहर के थाना चौक से शंकर चौक तक जाने वाली मुख्य सड़क पर स्थित चूड़ी बाजार में मंगलवार दोपहर करीब 12 बजे से भारी ट्रैफिक जाम लग गया। स्थानीय लोगों के अनुसार, सड़क पर हुए अतिक्रमण के कारण यातायात व्यवस्था पूरी तरह बाधित हो गई, जिससे राहगीरों, छात्रों और मरीजों के परिजनों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ा। भीषण गर्मी के बीच सड़क पर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं, जिससे जाम में फंसे लोगों को घंटों इंतजार करना पड़ा। स्कूल से घर लौट रहे छात्र सौरभ कुमार और उमेश कुमार ने बताया कि अत्यधिक गर्मी में जाम में फंसे रहने के कारण उन्हें काफी दिक्कत हुई। उन्होंने प्रशासन से इस समस्या के स्थायी समाधान के लिए कदम उठाने की अपील की। विवेक कुमार ने बताया कि वह अपने बीमार भाई के लिए दवा खरीदने जा रहे थे, लेकिन जाम में फंसने के कारण उन्हें समय पर दवा लाने में कठिनाई हुई। वहीं, कोचिंग के लिए जा रही छात्राएं अंकिता कुमारी और रचना कुमारी ने कहा कि जाम के कारण उन्हें अपनी कक्षाएं छूटने की चिंता सता रही थी। उन्होंने यह भी कहा कि शहर में लगातार बढ़ती जाम की समस्या विद्यार्थियों के लिए एक गंभीर परेशानी बनती जा रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि सड़क किनारे अतिक्रमण कर दुकानें चलाने के कारण सड़क की चौड़ाई काफी कम हो गई है। इसके बावजूद अतिक्रमणकारियों द्वारा स्थिति की गंभीरता को नजरअंदाज किया जा रहा है। जाम में फंसे लोगों की परेशानी से बेपरवाह होकर वे अपने कार्यों में व्यस्त दिखाई दिए। इस मामले पर मधुबनी ट्रैफिक इंस्पेक्टर नीलमणि रंजन ने कहा कि समस्या की जानकारी मिलते ही आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही जाम की समस्या का समाधान किया जाएगा और सड़क पर अतिक्रमण करने वाले लोगों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी, ताकि आम जनता को किसी प्रकार की असुविधा न हो।



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FIFA World Cup 2026 का पूरा शेड्यूल कर लीजिए नोट, जानिए कौन सी टीम है किस ग्रुप में?


FIFA World Cup 2026 Full Schedule: फीफा वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत होने में अब ज्यादा वक्त नहीं है। ऐसे में जान लीजिए कि इस मेगा इवेंट का शेड्यूल कैसा है? कौन सी टीम कब खेलने वाली है? 

FIFA World Cup 2026 Full Schedule: फीफा फुटबॉल वर्ल्ड कप 2026 की शुरुआत 11 जून से होने वाली है। तीन देश मिलकर इस मेगा इवेंट की मेजबानी करने वाले हैं। अमेरिका, कनाडा और मैक्सिको में फुटबॉल विश्व कप के मैच खेले जाएंगे। कुल 48 टीमें हिस्सा ले रही हैं, जिनको 12 ग्रुप में बांटा गया है। हर ग्रुप में चार-चार टीमों को रखा गया है। कुल 104 मैच इस दौरान खेले जाएंगे। फीफा विश्व कप का फाइनल 19 जुलाई को आयोजित होगा। टूर्नामेंट को शुरू होने में अब करीब एक सप्ताह का समय बाकी है। इससे पहले जान लीजिए कि इस टूर्नामेंट का शेड्यूल क्या है और कौन सी टीम किस ग्रुप में शामिल है।

FIFA वर्ल्ड कप 2026 ग्रुप स्टेज के मैच

गुरुवार, 11 जून 2026

मेक्सिको बनाम साउथ अफ्रीका – ग्रुप A – मेक्सिको सिटी स्टेडियम

कोरिया रिपब्लिक बनाम चेकिया – ग्रुप A – एस्टाडियो ग्वाडलहारा

शुक्रवार, 12 जून 2026

कनाडा बनाम बोस्निया और हर्जेगोविना – ग्रुप B – टोरंटो स्टेडियम

USA बनाम पैराग्वे – ग्रुप D – लॉस एंजिल्स स्टेडियम

शनिवार, 13 जून 2026

हैती बनाम स्कॉटलैंड – ग्रुप C – बोस्टन स्टेडियम

ऑस्ट्रेलिया बनाम तुर्किये – ग्रुप D – BC प्लेस वैंकूवर

ब्राज़ील बनाम मोरक्को – ग्रुप C – न्यूयॉर्क न्यू जर्सी स्टेडियम

कतर बनाम स्विट्जरलैंड – ग्रुप B – सैन फ्रांसिस्को बे एरिया स्टेडियम

रविवार, 14 जून 2026

कोटे डी आइवर बनाम इक्वाडोर – ग्रुप E – फिलाडेल्फिया स्टेडियम

जर्मनी बनाम कुराकाओ – ग्रुप E – ह्यूस्टन स्टेडियम

नीदरलैंड बनाम जापान – ग्रुप F – डलास स्टेडियम

स्वीडन बनाम ट्यूनीशिया – ग्रुप F – एस्टाडियो मॉन्टेरी

सोमवार, 15 जून 2026

सऊदी अरब बनाम उरुग्वे – ग्रुप H – मियामी स्टेडियम

स्पेन बनाम काबो वर्डे – ग्रुप H – अटलांटा स्टेडियम

IR ईरान बनाम न्यूज़ीलैंड – ग्रुप G – लॉस एंजिल्स स्टेडियम

बेल्जियम बनाम मिस्र – ग्रुप G – सिएटल स्टेडियम

मंगलवार, 16 जून 2026

फ्रांस बनाम सेनेगल – ग्रुप I – न्यूयॉर्क न्यू जर्सी स्टेडियम

इराक बनाम नॉर्वे – ग्रुप I – बोस्टन स्टेडियम

अर्जेंटीना बनाम अल्जीरिया – ग्रुप J – कैनसस सिटी स्टेडियम

ऑस्ट्रिया बनाम जॉर्डन – ग्रुप J – सैन फ्रांसिस्को बे एरिया स्टेडियम

बुधवार, 17 जून 2026

घाना बनाम पनामा – ग्रुप L – टोरंटो स्टेडियम

इंग्लैंड बनाम क्रोएशिया – ग्रुप L – डलास स्टेडियम

पुर्तगाल बनाम कांगो DR – ग्रुप K – ह्यूस्टन स्टेडियम

उज़्बेकिस्तान बनाम कोलंबिया – ग्रुप K – मेक्सिको सिटी स्टेडियम

गुरुवार, 18 जून 2026

चेकिया बनाम साउथ अफ्रीका – ग्रुप A – अटलांटा स्टेडियम

स्विट्जरलैंड बनाम बोस्निया और हर्जेगोविना – ग्रुप B – लॉस एंजिल्स स्टेडियम

कनाडा बनाम कतर – ग्रुप B – BC प्लेस वैंकूवर

मेक्सिको बनाम कोरिया रिपब्लिक – ग्रुप A – एस्टाडियो ग्वाडलहारा

शुक्रवार, 19 जून 2026

ब्राजील बनाम हैती – ग्रुप C – फिलाडेल्फिया स्टेडियम

स्कॉटलैंड बनाम मोरक्को – ग्रुप C – बोस्टन स्टेडियम

तुर्की बनाम पैराग्वे – ग्रुप D – सैन फ्रांसिस्को बे एरिया स्टेडियम

USA बनाम ऑस्ट्रेलिया – ग्रुप D – सिएटल स्टेडियम

शनिवार, 20 जून 2026

जर्मनी बनाम कोटे डी आइवर – ग्रुप E – टोरंटो स्टेडियम

इक्वाडोर बनाम कुराकाओ – ग्रुप E – कैनसस सिटी स्टेडियम

नीदरलैंड बनाम स्वीडन – ग्रुप F – ह्यूस्टन स्टेडियम

ट्यूनीशिया बनाम जापान – ग्रुप F – एस्टाडियो मॉन्टेरी

रविवार, 21 जून 2026

उरुग्वे बनाम काबो वर्डे – ग्रुप H – मियामी स्टेडियम

स्पेन बनाम सऊदी अरब – ग्रुप H – अटलांटा स्टेडियम

बेल्जियम बनाम IR ईरान – ग्रुप G – लॉस एंजिल्स स्टेडियम

न्यूज़ीलैंड बनाम मिस्र – ग्रुप G – BC प्लेस वैंकूवर

सोमवार, 22 जून 2026

नॉर्वे बनाम सेनेगल – ग्रुप I – न्यूयॉर्क न्यू जर्सी स्टेडियम

फ्रांस बनाम इराक – ग्रुप I – फिलाडेल्फिया स्टेडियम

अर्जेंटीना बनाम ऑस्ट्रिया – ग्रुप J – डलास स्टेडियम

जॉर्डन बनाम अल्जीरिया – ग्रुप J – सैन फ्रांसिस्को बे एरिया स्टेडियम

मंगलवार, 23 जून 2026

इंग्लैंड बनाम घाना – ग्रुप L – बोस्टन स्टेडियम

पनामा बनाम क्रोएशिया – ग्रुप L – टोरंटो स्टेडियम

पुर्तगाल बनाम उज़्बेकिस्तान – ग्रुप K – ह्यूस्टन स्टेडियम

कोलंबिया बनाम कांगो DR – ग्रुप K – एस्टाडियो ग्वाडलहारा

बुधवार, 24 जून 2026

स्कॉटलैंड बनाम ब्राज़ील – ग्रुप C – मियामी स्टेडियम

मोरक्को बनाम हैती – ग्रुप C – अटलांटा स्टेडियम

स्विट्जरलैंड बनाम कनाडा – ग्रुप B – BC प्लेस वैंकूवर

बोस्निया और हर्जेगोविना बनाम कतर – ग्रुप B – सिएटल स्टेडियम

चेकिया बनाम मेक्सिको – ग्रुप A – मेक्सिको सिटी स्टेडियम

साउथ अफ्रीका बनाम कोरिया रिपब्लिक – ग्रुप A – एस्टाडियो मॉन्टेरी

गुरुवार, 25 जून 2026

कुराकाओ बनाम कोटे डी आइवर – ग्रुप E – फिलाडेल्फिया स्टेडियम

इक्वाडोर बनाम जर्मनी – ग्रुप E – न्यूयॉर्क न्यू जर्सी स्टेडियम

जापान बनाम स्वीडन – ग्रुप F – डलास स्टेडियम

ट्यूनीशिया बनाम नीदरलैंड्स – ग्रुप F – कैनसस सिटी स्टेडियम

तुर्की बनाम USA – ग्रुप D – लॉस एंजिल्स स्टेडियम

पैराग्वे बनाम ऑस्ट्रेलिया – ग्रुप D – सैन फ्रांसिस्को बे एरिया स्टेडियम

शुक्रवार, 26 जून 2026

नॉर्वे बनाम फ्रांस – ग्रुप I – बोस्टन स्टेडियम

सेनेगल बनाम इराक – ग्रुप I – टोरंटो स्टेडियम

इजिप्ट बनाम IR ईरान – ग्रुप G – सिएटल स्टेडियम

न्यूज़ीलैंड बनाम बेल्जियम – ग्रुप G – BC प्लेस वैंकूवर

काबो वर्डे बनाम सऊदी अरब – ग्रुप H – ह्यूस्टन स्टेडियम

उरुग्वे बनाम स्पेन – ग्रुप H – एस्टाडियो ग्वाडलहारा

शनिवार, 27 जून 2026

पनामा बनाम इंग्लैंड – ग्रुप L – न्यूयॉर्क न्यू जर्सी स्टेडियम

क्रोएशिया बनाम घाना – ग्रुप L – फिलाडेल्फिया स्टेडियम

अल्जीरिया बनाम ऑस्ट्रिया – ग्रुप J – कैनसस सिटी स्टेडियम

जॉर्डन बनाम अर्जेंटीना – ग्रुप J – डलास स्टेडियम

कोलंबिया बनाम पुर्तगाल – ग्रुप K – मियामी स्टेडियम

कांगो DR बनाम उज़्बेकिस्तान – ग्रुप K – अटलांटा स्टेडियम

FIFA World Cup 2026 के लिए ग्रुप इस प्रकार हैं

ग्रुप A: चेक गणराज्य, मैक्सिको, दक्षिण अफ्रीका और दक्षिण कोरिया

ग्रुप B: कनाडा, बोस्निया हर्ज़ेगोविना, कतर और स्विट्जरलैंड

ग्रुप C: ब्राजील, हैती, मोरक्को, स्कॉटलैंड

ग्रुप D: ऑस्ट्रेलिया, पराग्वे, तुर्किए और अमेरिका

ग्रुप E: कुराकाओ, इक्वाडोर, जर्मनी और आइवरी कोस्ट

ग्रुप F: नीदरलैंड, जापान, स्वीडन और ट्यूनीशिया

ग्रुप G: बेल्जियम, मिस्र, ईरान और न्यूजीलैंड

ग्रुप H: केप वर्डे, सऊदी अरब, स्पेन और उरुग्वे

ग्रुप I: फ्रांस, नॉर्वे, सेनेगल और इराक

ग्रुप J: अल्जीरिया, अर्जेंटीना, ऑस्ट्रिया और जॉर्डन

ग्रुप K: कोलंबिया, जमैका, पुर्तगाल और उज़्बेकिस्तान

ग्रुप L: क्रोएशिया, इंग्लैंड, घाना और पनामा



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Realme ला रहा 8000mAh बैटरी वाला सस्ता फोन, भारत में लॉन्च से पहले कीमत हुई लीक


Realme भारत में जल्द 8000mAh बैटरी वाला एक और सस्ता फोन लॉन्च करने की तैयारी में है। चीनी कंपनी का यह फोन Realme P4R के नाम से पेश किया जाएगा। कंपनी ने फोन की लॉन्चिंग कंफर्म कर दी है। इस स्मार्टफोन का रिटेल बॉक्स सामने आया है, जिसमें फोन की कीमत के बारे में पता चला है। साथ ही, फोन के कुछ बेसिक फीचर्स भी रिवील हुए हैं। रिपोर्ट्स की मानें तो यह हाल में लॉन्च हुए Realme 16T का रीब्रांडेंड वर्जन हो सकता है।

कीमत हुई लीक

Realme P4R का रिटेल बॉक्स टिप्स्टर संजू ने शेयर की है, जिसमें फोन की MRP 44,999 रुपये बताई जा रही है। यह फोन 6GB RAM + 256GB स्टोरेज वेरिएंट के साथ आएगा। हालांकि, चीनी कंपनी के इस फोन की कीमत MRP से बहुत कम हो सकती है। इस फोन को 25,000 रुपये से 30,000 रुपये की रेंज में पेश किया जा सकता है।

मिलेंगे ये तगड़े फीचर्स

रियलमी के अपकमिंग फोन के लीक हुए बॉक्स के मुताबिक, इस फोन में 6.8 इंच का HD+ डिस्प्ले मिल सकता है। इस फोन का डिस्प्ले 144Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करेगा। साथ ही, इसमें 8,000mAh की बैटरी मिल सकती है। यह फोन डुअल कैमरा सेटअप के साथ आएगा। इसमें 50MP का मेन और 2MP का सेकेंडरी कैमरा मिलेगा। यही नहीं, यह फोन 5,300 वर्ग मिलीमीटर के वेपर चेंबर कूलिंग सिस्टम के साथ आ सकता है। फोन के बैक में Plus नोटिफिकेशन लाइट भी दिए जाने की संभावना है।

Realme P4R का वजन 224 ग्राम होगा और यह महज 8.88mm चौड़ा हो सकता है। इस फोन को तीन स्टोरेज वेरिएंट्स- 4GB RAM + 128GB, 6GB RAM + 128GB और 6GB RAM + 256GB में लॉन्च किया जा सकता है। रियली का यह फोन सिल्वर ग्लेयर, टाइटेनियम ग्लेयर और लेवेंडर ग्लेयर कलर ऑप्शन में आ सकता है।

Realme 16T के फीचर्स

हाल में लॉन्च हुए Reame 16T को भारत में 29,999 रुपये की कीमत में पेश किया गया है। रियलमी का यह फोन भी 8,000mAh की बैटरी, 6.8 इंच के डिस्प्ले के साथ आता है, जो 144Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। इस फोन में Android 16 पर बेस्ड Realme UI मिलता है। फोन के बैक में 50MP का मेन और 2MP का सेकेंडरी कैमरा मिलता है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए फोन में 16MP का कैमरा दिया गया है। यह फोन MediaTek Dimensity 6300 चिपसेट पर काम करता है।

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सूरत में नवजात को कचरे में फेंकने वाली महिला अरेस्ट: बड़ी उम्र में मां बनी तो पॉलीथीन में भरकर फेंक आई थी, सीसीटीवी में आई नजर – Gujarat News


गुजरात में सूरत के कतारगाम इलाके में कचरे के ढेर से 26 मई को नवजात का शव मिला था। इस मामले में पुलिस ने आरोपी मां को अरेस्ट कर लिया है। महिला खुद पॉलीथीन में भरकर नवजात को कचरे के ढेर में फेंक गई थी। एक सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें महिला पॉ

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कुत्ते सड़क पर ले आया था पॉलीथीन

बीती 25 मई की रात करीब एक बजे कतारगाम के अवधूतनगर सोसायटी के पास एक प्लास्टिक की थैली में नवजात शिशु मृत अवस्था में मिला था। स्ट्रीट डॉग्स पॉलीथीन को कचरे के ढेर से उठाकर सड़क पर ले आए थे। कुछ लोगों की इस पर नजर पड़ी तो उन्होंने पुलिस को सूचना दी।

कतारगाम पुलिस ने सीसीटीवी फुटेज और ह्यूमन इंटेलिजेंस की मदद से जांच शुरू की। इस दौरान एक सीसीटीवी फुटेज में महिला नजर आई और पुलिस उस तक पहुंच गई।

स्ट्रीट डॉग्स पॉलिथीन मुंह में दबाकर लाते हुए।

कतारगाम पुलिस कि हिरासत में आरोपी महिला।

कतारगाम पुलिस कि हिरासत में आरोपी महिला।

बड़ी उम्र में मां बनने से बदनामी का डर था: महिला

इस मामले में पुलिस ने शांतिनगर सोसायटी निवासी हेमलताबेन वीरेंद्रसिंह बारिया (43) को हिरासत में लिया। पूछताछ में महिला ने स्वीकार किया कि उसके पहले से दो बड़े बच्चे हैं। इस उम्र में दोबारा गर्भवती होने पर उसे समाज में बदनामी का डर सताने लगा था।

महिला ने बताया कि घर में कोई मौजूद नहीं था, उसी दौरान उसने समय से पहले मृत बच्चे को जन्म दिया था। इसके बाद उसने नवजात को प्लास्टिक की थैली में रखकर कचरे के ढेर में फेंक दिया था, जिससे किसी को इसकी जानकारी न हो।

पुलिस के अनुसार महिला का बयानों और सबूते के आधार पर उसके खिलाफ मामला दर्ज कर लिया गया है। चौकबाजार पुलिस ने आरोपी महिला के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) 2023 की धारा 94 और 91 के तहत मामला दर्ज कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। मामले की जांच जारी है।

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नानी ने जलते कचरे में फेंका था नवजात, गर्भपात कराने लड़की महाराष्ट्र से सूरत आई थी

गुजरात में सूरत के उधना इलाके में बुधवार को कचरे के जलते ढेर से जला हुआ नवजात मिला था। इस मामले में महाराष्ट्र में रहने वाली एक युवती को हिरासत में लिया गया है। युवती गर्भपात कराने सूरत आई थी। जांच में पता चला है कि उसकी नानी ने ही भ्रूण को जलते कचरे के ढेर में फेंक दिया था। पूरी खबर पढ़ें…



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क्या है खपली गेहूं आटा, कैसे गायब हुआ और क्यों हो रही वापसी, हड़प्पा कालीन अनाज


पता नहीं आपने भारत के प्राचीन खपली गेहूं का नाम सुना है या नहीं लेकिन अब फिर इसका नाम सुनाई पड़ने लगा है. इसकी वापसी हो रही है. इसे फ्यूचर का आटा बताया जा रहा है. भारतीय भोजन परंपरा में इसकी गहरी जड़ें हैं. जानते हैं कि ये कैसा गेहूं है. अब क्यों लंबे समय बाद इसकी वापसी हो रही है. ये कहां और कब उगाया जाता है. भारत के बेस्ट शेफ इसे क्यों चुनने लगे हैं.

खपली आटा दरअसल खपली गेहूं से बनता है. यह गेहूं की एक बहुत पुरानी किस्म है, जिसे भारत में हजारों वर्षों से उगाया जाता रहा है. आधुनिक गेहूं आने से पहले दक्कन और दक्षिण भारत के कई इलाकों में यही प्रमुख गेहूं था. महाराष्ट्र और कर्नाटक में इसके दाने का बाहरी आवरण अपेक्षाकृत सख्त और मोटा होता है. इसी कारण इसे खपली कहा जाने लगा.

‘खपली’ नाम महाराष्ट्र और कर्नाटक में सबसे अधिक प्रचलित है. दुनिया के अधिकांश हिस्सों में इसे एमर, इटली में फारो मेडियो और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में सांबा कहा जाता है.

पुरातात्विक साक्ष्य बताते हैं कि मौजूदा समय में पाकिस्तान में स्थित मेहरगढ़ में 6000-5000 ईसा पूर्व से ही एमर गेहूं की खेती होती रही है. इसकी खेती हड़प्पा सभ्यता की बस्तियों में की जाती थी.

हड़प्पा काल में खपली गेहूं की रोटी की खेती की जाती थी. उस समय इसी गेहूं के आटे का इस्तेमाल रोटी बनाने में होता था. (AI Image)

अचानक इसकी चर्चा क्यों होने लगी?

पिछले कुछ वर्षों में लोगों की रुचि “पारंपरिक अनाज” और “लो-प्रोसेस्ड फूड” की ओर बढ़ी है. मधुमेह, मोटापा और पाचन संबंधी समस्याओं के कारण लोग ऐसे अनाज तलाश रहे हैं जिन्हें अधिक प्राकृतिक माना जाता है. इसी वजह से खपली आटा फिर चर्चा में आ गया है.
– इसमें अपेक्षाकृत अधिक फाइबर होता है
– प्रोटीन अच्छा होता है
– ग्लाइसेमिक इंडेक्स अपेक्षाकृत कम माना जाता है
– पेट देर तक भरा महसूस होता है
– इसकी तीन चपातियां दैनिक फाइबर जरूरतों का करीब 34% प्रदान करती हैं. ये आयरन और बी विटामिन का अच्छा स्रोत है.

भारत के जाने माने शेफ क्यों करा रहे इसकी वापसी

भारत के कई नामी शेफ खपली आटे की वापसी सिर्फ “हेल्थ ट्रेंड” की वजह से नहीं करा रहे, बल्कि इसके पीछे स्वाद, बनावट, इतिहास और भारतीय खाद्य विरासत का भी बड़ा कारण है. शेफ कहते हैं कि आधुनिक गेहूं ने स्वाद खो दिया है. जो आधुनिक गेहूं उगाया जा रहा, वो अमूमन विदेशों से आया और उगाने और पैदावार में बेहतर था लेकिन इस प्रक्रिया में गेहूं का मूल स्वाद और सुगंध कम हो गई.

भारत के कई नामी शेफ खपली आटे की वापसी करा रहे हैं. उसके पीछे इसकी पौष्टिकता, स्वाद, बनावट, इतिहास और भारतीय खाद्य विरासत भी है. (AI Image)

खपली गेहूं में उन्हें एक अलग मेवों जैसी और गहरी स्वाद-परत मिलती है. इसी कारण देश के जाने माने शेफ इस आटे का इस्तेमाल करने लगे हैं. वो इसे रोटी, कुलचा और ब्रेड में इस्तेमाल कर रहे हैं.

इटली में जैसे पुरानी गेहूं किस्मों की वापसी हुई, वैसे ही भारत में भी कुछ शेफ और किसान पुराने अनाजों को वापस ला रहे हैं. खपली, रागी, कोदो, ज्वार और बाजरा इसी सोच का हिस्सा हैं. आजकल लोग खाने के साथ उसकी परंपरा और कहानी के बारे में सुनना चाहते हैं. खपली आटा एक “स्टोरीटेलिंग इंग्रीडिएंट” बन गया है जब किसी मेन्यू में लिखा होता है कि यह 2000 साल पुरानी गेहूं किस्म से बनी रोटी है, तो उसका सांस्कृतिक मूल्य बढ़ जाता है.

दिलचस्प बात यह है कि 1990 और 2000 के दशक में भारत के कई बड़े रेस्तरां पश्चिमी तकनीकों और विदेशी सामग्री पर केंद्रित थे. अब नई पीढ़ी के शेफ भारतीय खाद्य इतिहास की ओर लौट रहे हैं. वे ये देख, जान और परख रहे हैं कि
– हमारी असली रोटी कैसी थी?
– हमारे पूर्वज कौन-सा गेहूं खाते थे?
खपली इसी खोज का हिस्सा है. एक तरह से देखें तो भारत के बेस्ट शेफ खपली आटे को वापस इसलिए ला रहे हैं क्योंकि उन्हें इसमें सिर्फ गेहूं नहीं दिखता, बल्कि भारतीय कृषि इतिहास का एक खोया हुआ अध्याय दिखता है, जिसे वे फिर से थाली में लाना चाहते हैं.

क्या ये सुपर फूड है

नहीं, इसे “चमत्कारी सुपरफूड” मान लेना सही नहीं होगा. पोषण विशेषज्ञ भी कहते हैं कि यह सामान्य गेहूं का विकल्प हो सकता है, लेकिन कोई जादुई दवा नहीं है.

खपली गेहूं महाराष्ट्र, कर्नाटक में किसानों द्वारा सीमित तरीके से उगाया जा रहा है. हालांकि भारत में इसकी पैदावार कुल गेहूं की उपज की एक फीसदी ही है. (AI Image)

भारत में कहां उगता है?

ये गेहूं भारत में हर जगह नहीं उगता या उगाया जाता है. फिलहाल ये महाराष्ट्र, कर्नाटक में उगाया जा रहा है. गुजरात के कुछ हिस्सों में भी पैदा हो रहा है. सीमित मात्रा में मध्य प्रदेश में पैदा किया जा रहा है. विशेष रूप से महाराष्ट्र के पुणे, अहमदनगर, सोलापुर और विदर्भ क्षेत्र इसके लिए जाने जाते हैं.

ये कम क्यों होता है

दरअसल इसकी भी एक कहानी है. 1960-70 के दशक की हरित क्रांति के बाद किसानों को ऐसी नई गेहूं किस्में मिलीं जो ज्यादा पैदावार देती थीं, जल्दी तैयार हो जाती थीं, सरकारी खरीद में आसानी से बिक जाती थीं.

खपली गेहूं इनसे पीछे रह गया, क्योंकि इसकी उपज आधुनिक गेहूं की तुलना में कम होती है. किसान स्वाभाविक रूप से अधिक उत्पादन वाली किस्मों की ओर चले गए.

क्या ये विलुप्त हो गया था?

पूरी तरह नहीं, लेकिन बहुत सीमित क्षेत्र में सिमट गया. हरित क्रांति के बाद ये गेहूं मुख्यधारा से करीब गायब हो गया. केवल कुछ किसानों ने पारंपरिक रूप से इसकी खेती जारी रखी. आज फिर से अगर इसका दौर लौटता हुआ लग रहा है तो उसकी वजह उनकी बची हुई किस्मों की वजह से संभव हुआ है. हालांकि कुछ ब्रांडेड कंपनियां इसका आटा भी बाजार में ला रही हैं.

यह महंगा क्यों है?

आम भारतीय परिवार अब भी इसे नियमित रूप से नहीं खरीदते. सामान्य आटा जहां लगभग ₹40-60 प्रति किलो मिलता है, वहीं खपली आटा कई ब्रांडों में ₹150-250 प्रति किलो तक बिकता है. यानी 3 से 5 गुना महंगा. महंगा होने की वजह कम पैदावार, सीमित क्षेत्र में खेती सीमित क्षेत्र में खेती, जटिल प्रोसेसिंग, आपूर्ति कम है. इसे इसे अक्सर ऑर्गेनिक या प्रीमियम उत्पाद के रूप में बेचा जाता है.

क्या ये भविष्य का गेहूं बन सकता है?

संभावना कम है. भारत की 140 करोड़ आबादी को देखते हुए केवल खपली जैसे कम उपज वाले गेहूं पर निर्भर होना व्यावहारिक नहीं होगा लेकिन ये एक प्रीमियम, स्वास्थ्य-केंद्रित और पारंपरिक अनाज के रूप में अपनी जगह बना सकता है, ठीक वैसे ही जैसे मोटे अनाज यानि मिलेट्स ने बनाई.

हरित क्रांति के बाद देश के ज्यादातर किसान खपली गेहूं को”कम पैदावार वाला पुराना गेहूं” समझकर छोड़ चुके थे लेकिन अब वही “हेरिटेज ग्रेन” और “प्रीमियम हेल्थ फूड” के नाम पर बिक रहा है. (AI iMAGE)

हालांकि ये सच है कि जिस खपली गेहूं को 40-50 साल पहले किसान “कम पैदावार वाला पुराना गेहूं” समझकर छोड़ रहे थे, वही आज शहरों में “हेरिटेज ग्रेन” और “प्रीमियम हेल्थ फूड” के नाम पर कई गुना दाम में बिक रहा है.

इसमें एक गहरा अखरोट जैसा स्वाद, थोड़ा खुरदुरापन और आधुनिक गेहूं से बिल्कुल अलग संरचना दिखाई देती है. यह पानी को धीरे-धीरे सोखता है, ग्लूटेन को धीरे-धीरे विकसित करता है. धैर्य रखने पर बहुत अच्छा परिणाम देता है.

कैसे गूंथा जाता है

खपली के आटे को गूंधना सामान्य आटे से थोड़ा अलग अनुभव होता है. यह आटा कम लचीला होता है. इसमें ग्लूटेन की मात्रा कम होती है, इसलए यह आधुनिक गेहूं के आटे की तरह वापस अपनी जगह पर नहीं आता. इसमें थोड़ा अधिक पानी धीरे-धीरे डालना पड़ता है. हल्के हाथों से गूंधने के बाद दस से पंद्रह मिनट का आराम देने से इसका स्वाद और भी बेहतर हो जाता है. इसे बेलना आसान हो जाता है.

कैसी बनती हैं रोटियां

आप इसकी जो रोटियां बनाएंगे, वे दिखने में वैसी नहीं होंगी जैसी आप आमतौर पर खाती हैं. इनका रंग सामान्य आटे के हल्के क्रीम रंग के बजाय गहरा, लाल-सुनहरा होगा. ये देखने में अधिक देसी लगेंगी. अधिक पौष्टिक और घनी होंगी.



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