Sunday, August 16, 2026
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जयपुर में उत्कृष्ट काम करने पर इंस्पेक्टर दिनेश सिंह सम्मानित: पहले भी नेशनल और स्टेट लेवल पर मिल चुका सम्मान, मंत्री और कलेक्टर ने दिया प्रशस्ति पत्र – Jaipur News




जयपुर में 80वें स्वतंत्रता दिवस के जिला स्तरीय समारोह का आयोजन 15 अगस्त को चौगान स्टेडियम में हुआ। समारोह में रोड सेफ्टी अवेयरनेस और सोशल एक्टिविटीज के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्य करने पर प्रादेशिक परिवहन कार्यालय जयपुर द्वितीय, विद्याधर नगर में कार्यरत इंस्पेक्टर दिनेश सिंह को सम्मानित किया गया। मुख्य अतिथि उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ और जिला कलेक्टर एवं जिला मजिस्ट्रेट संदेश नायक ने इंस्पेक्टर दिनेश सिंह को प्रशस्ति पत्र और मोमेंटो देकर सम्मानित किया। इस दौरान जयपुर शहर सांसद मंजू शर्मा और विधायक बालमुकुंद आचार्य भी मौजूद रहे। इंस्पेक्टर दिनेश सिंह ने स्कूल, कॉलेज, कोचिंग संस्थानों और सरकारी संस्थानों में रोड सेफ्टी अवेयरनेस को लेकर जागरूकता कार्यक्रम किए। इन कार्यक्रमों के जरिए सैकड़ों स्टूडेंट्स और नागरिकों को ट्रैफिक नियमों का पालन करने और सड़क सुरक्षा के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया गया। दिनेश सिंह को रोड सेफ्टी और सोशल एक्टिविटीज के क्षेत्र में किए गए उत्कृष्ट कार्यों के लिए पहले भी स्टेट और नेशनल लेवल पर सम्मानित किया जा चुका है।



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महाराजगंज के मोहम्मद सैफ का इसरो में वैज्ञानिक पद चयन: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन में मिली महत्वपूर्ण जिम्मेदारी – Maharajganj News


मोहम्मद सिद्दीक | महराजगंज4 मिनट पहले

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मोहम्मद सैफ का इसरो में वैज्ञानिक पद पर चयन।

महाराजगंज के वीर बहादुर नगर निवासी मोहम्मद सैफ का भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) में वैज्ञानिक के पद पर चयन हुआ है। उनकी इस उपलब्धि से क्षेत्र में हर्ष का माहौल है।

सैफ, मदरसा जामिया रिजविया नूरुल उलूम सिविल लाइन में कनिष्ठ सहायक के पद पर कार्यरत मोहम्मद असलम खान के पुत्र हैं। इसरो में चयन से पहले भी उन्होंने कई प्रतिष्ठित सरकारी और सार्वजनिक क्षेत्र के संस्थानों की प्रतियोगी परीक्षाओं में सफलता प्राप्त की है।

मोहम्मद सैफ ने अपनी इंटरमीडिएट तक की शिक्षा पंडित दीनदयाल इंटर कॉलेज, महाराजगंज से पूरी की। इसके बाद उन्होंने डॉ. अंबेडकर इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, कानपुर से बी.टेक की पढ़ाई की। गेट (GATE) परीक्षा के माध्यम से उनका चयन राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (NIT) कुरुक्षेत्र, हरियाणा में एम.टेक के लिए हुआ था।

उच्च शिक्षा प्राप्त करने के बाद, मोहम्मद सैफ ने घर पर रहकर नियमित रूप से प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी की। उनकी मेहनत, लगन और निरंतर प्रयास के कारण उन्हें एक के बाद एक प्रतिष्ठित संस्थानों की परीक्षाओं में सफलता मिलती गई। उनके बड़े भाई मोहम्मद फैज़, जो सहायक अध्यापक के पद पर कार्यरत हैं, का भी इसमें महत्वपूर्ण योगदान रहा।

यह सफलता केवल उनके परिवार के लिए ही नहीं, बल्कि पूरे महाराजगंज जनपद के लिए भी महत्वपूर्ण है। उनकी उपलब्धि यह दर्शाती है कि निरंतर मेहनत, सही दिशा और अनुशासन से कठिन लक्ष्य भी प्राप्त किए जा सकते हैं।



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अहमदाबाद में सांप के डसने से दिव्यांग की मौत: 2 दिन बाद सीतामढ़ी पहुंचा शव, चार बच्चों ने खोया पिता – Sitamarhi News




सीतामढ़ी के बथनाहा प्रखंड के सहियारा गांव निवासी 37 वर्षीय अजय महतो की गुजरात के अहमदाबाद में सांप के डसने से मौत हो गई। 13 अगस्त की रात काम के बाद सोते समय उन्हें सांप ने डस लिया था। इलाज के दौरान उनकी जान चली गई। अजय महतो दिव्यांग थे और उनके चार बच्चे हैं। अजय महतो अपने बेटे के साथ अहमदाबाद में फूल-माली का काम कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनके भाई पप्पू महतो ने बताया कि अजय और उनकी पत्नी दोनों दिव्यांग थे और अहमदाबाद में रहकर मजदूरी करते थे। इलाज के दौरान तोड़ा दम सांप के डसने के बाद अजय की तबीयत बिगड़ने लगी। परिजनों और आसपास के लोगों ने उन्हें इलाज के लिए अस्पताल में भर्ती कराया। हालांकि, इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। इस घटना की सूचना मिलते ही सहियारा गांव में मातम छा गया। 15 अगस्त को सीतामढ़ी पहुंचा शव परिवार के सदस्यों ने बताया कि अजय ही मेहनत कर परिवार की जरूरतें पूरी करते थे। मृतक के शव को परिजन अहमदाबाद से लेकर 15 अगस्त को सीतामढ़ी पहुंचे, जहां सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम की प्रक्रिया कराई जा रही है। अजय की मौत के बाद उनकी पत्नी और चार बच्चों की जिम्मेदारी को लेकर परिवार के सामने बड़ा संकट खड़ा हो गया है।



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नईसराय हत्याकांड में 4 दोषियों को उम्रकैद: डेढ़ साल में आया फैसला; बस स्टैंड पर हुआ था मर्डर – Ashoknagar News




अशोकनगर जिले के नईसराय में डेढ़ साल पहले हुई रमेश रजक की हत्या के मामले में कोर्ट ने चार आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई है। प्रत्येक दोषी पर दो-दो हजार रुपए का अर्थदंड भी लगाया गया है। त्वरित विवेचना और मजबूत अभियोजन के कारण पीड़ित पक्ष को डेढ़ साल के भीतर न्याय मिल सका। यह घटना 19 फरवरी 2025 को हुई थी। अभिषेक रजक ने रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया कि नईसराय बस स्टैंड प्रतीक्षालय के पास विट्टू उर्फ चंचल कुशवाह, विनोद उर्फ कल्ला कुशवाह, कमल कुशवाह और मुकेश कुशवाह आपस में झगड़ा कर रहे थे। अभिषेक के चाचा रमेश रजक ने उन्हें शांत रहने की सलाह दी। कुल्हाड़ी और सरिए से मार दिया था
इस पर चारों आरोपियों ने रमेश रजक के साथ गाली-गलौज की और कुल्हाड़ी, लोहे की सरिया तथा डंडों से उन पर हमला कर दिया। इस मारपीट में रमेश रजक की मौत हो गई। पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर जांच शुरू की। तत्कालीन थाना प्रभारी उप निरीक्षक पुनीत दीक्षित ने गवाहों के बयान दर्ज किए और घटनास्थल से वैज्ञानिक साक्ष्य एकत्र किए। एफएसएल टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने घटना से संबंधित सभी साक्ष्य एकत्रित किए। आरोपियों को गिरफ्तार कर उनकी निशानदेही पर वारदात में इस्तेमाल हथियार भी बरामद किए गए। वैज्ञानिक साक्ष्यों और हथियारों की जांच के बाद निर्धारित समय सीमा में चालान न्यायालय में प्रस्तुत किया गया।
चारों दोषियों को आजीवन कारावास
अशोकनगर के अतिरिक्त सत्र न्यायाधीश ने 14 अगस्त 2026 को इस मामले में फैसला सुनाया। न्यायालय ने चारों दोषियों विट्टू उर्फ चंचल कुशवाह, विनोद उर्फ कल्ला कुशवाह, कमल कुशवाह और मुकेश कुशवाह को आजीवन कारावास और प्रत्येक पर दो-दो हजार रुपए का अर्थदंड लगाया। इस प्रकरण में लोक अभियोजक अविनाश लोधी, आशुतोष लोधी, थाना प्रभारी नईसराय उप निरीक्षक आशुतोष गुप्ता और विवेचक पुनीत दीक्षित सहित अन्य पुलिसकर्मियों की भूमिका सराहनीय रही। घटना के बाद रजक समाज के लोगों ने आरोपियों को सजा दिलाने की मांग को लेकर प्रदर्शन भी किए थे। उन्होंने कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपा था और गांधी पार्क में विरोध प्रदर्शन किया था। इसके बाद यह मामला चर्चित रहा था।



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पंजाबी स्टाइल मूली पराठा बनाने का झटपट तरीका, न स्टफिंग का झंझट न ज्यादा मेहनत

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Mooli Paratha Recipe: सुबह का नाश्ता ऐसा हो जो स्वादिष्ट भी लगे और बनाने में ज्यादा समय भी न ले, तो मूली पराठा एक बढ़िया विकल्प बन सकता है. खासकर सर्दियों में जब बाजार में ताजी और कुरकुरी मूली आसानी से मिल जाती है, तब इससे बना पराठा खाने का स्वाद ही बदल देता है. आमतौर पर मूली के पराठे के लिए अलग से भरावन तैयार करनी पड़ती है, मूली का पानी निचोड़ना पड़ता है और फिर आटा बेलने की मेहनत होती है, लेकिन इस झटपट तरीके में इन सब झंझटों को काफी हद तक कम किया जा सकता है. इसमें कद्दूकस की हुई मूली को सीधे आटे और मसालों के साथ मिलाकर आटा गूंथा जाता है.

यही वजह है कि व्यस्त सुबह में भी इसे जल्दी तैयार किया जा सकता है. गरम तवे पर सिकता मूली पराठा जब हल्का कुरकुरा और सुनहरा होने लगे, तो उसकी खुशबू रसोई में भूख बढ़ाने के लिए काफी होती है. इसे दही, अचार या मक्खन के साथ परोसें तो साधारण नाश्ता भी खास लगने लगता है.

मूली पराठे के लिए चाहिए ये सामग्री

इस रेसिपी की सबसे अच्छी बात इसकी आसान सामग्री है. इसके लिए आधा कप गेहूं का आटा, आधा कप कद्दूकस की हुई मूली और करीब एक चौथाई कप बारीक कटा हरा धनिया लें. स्वाद बढ़ाने के लिए एक चौथाई छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, एक चौथाई छोटा चम्मच जीरा पाउडर, एक चौथाई छोटा चम्मच गरम मसाला और स्वादानुसार नमक रखें. आटा गूंथने के लिए जरूरत के हिसाब से पानी और पराठे सेंकने के लिए थोड़ा तेल या घी लिया जा सकता है.

आटा गूंथने का आसान तरीका

एक बड़े बर्तन में आटा डालें. अब इसमें कद्दूकस की हुई मूली, हरा धनिया, लाल मिर्च पाउडर, जीरा पाउडर, गरम मसाला और नमक मिला दें. सारी चीजों को हाथ से अच्छी तरह मिलाने के बाद धीरे-धीरे पानी डालें. ध्यान रखें कि मूली में भी पानी होता है, इसलिए शुरुआत में बहुत ज्यादा पानी न डालें. थोड़ा-थोड़ा पानी डालकर नरम आटा गूंथें. आटा तैयार होने के बाद इसे कुछ मिनट के लिए ढककर रख दें.

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पराठे बेलने और सेंकने का तरीका

अब तैयार आटे की छोटी-छोटी लोइयां बना लें. एक लोई को हल्का सूखा आटा लगाकर बेलें. इसे बहुत ज्यादा पतला करने की जरूरत नहीं है. दूसरी ओर तवा गर्म होने के लिए रखें. तवा अच्छी तरह गर्म हो जाए तो उस पर बेला हुआ पराठा डाल दें. जब पराठे की ऊपरी सतह पर हल्के बुलबुले दिखाई देने लगें, तब उसे पलट दें. अब थोड़ा तेल या घी लगाकर दोनों तरफ से सुनहरा और हल्का कुरकुरा होने तक सेंकें. इसी तरह बाकी लोइयों के पराठे तैयार कर लें. तेज आंच पर सेंकने के बजाय मध्यम आंच रखना बेहतर रहेगा, इससे पराठा अंदर तक अच्छी तरह पकता है और बाहर से ज्यादा जलता भी नहीं.

स्वाद बढ़ाने के लिए ऐसे करें सर्व

मूली पराठे का असली मजा गरमागरम खाने में आता है. इसे ताजे दही, आम के अचार, हरी चटनी या थोड़े से मक्खन के साथ परोसा जा सकता है, अगर घर में पंजाबी अंदाज का नाश्ता पसंद किया जाता है, तो ऊपर से थोड़ा सफेद मक्खन रखकर पराठा सर्व करें. चाय के साथ भी इसका स्वाद काफी अच्छा लगता है.

सुबह की भागदौड़ में क्यों है काम का

कई घरों में नाश्ते के समय सबसे बड़ी परेशानी यही होती है कि स्वाद और समय के बीच संतुलन कैसे बनाया जाए. इस तरीके में मूली की अलग स्टफिंग तैयार करने की जरूरत नहीं पड़ती. सामग्री मिलाकर आटा गूंथना और सीधे पराठे बेलकर सेंकना ही काफी है. हालांकि मूली में पानी की मात्रा अलग-अलग हो सकती है, इसलिए आटा बनाते समय पानी की मात्रा उसी हिसाब से रखें.



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फोन चार्ज में लगाते ही खाली हो जाएगा बैंक अकाउंट, कहीं आप भी तो नहीं कर रहे ये गलती


क्या आपने रेलवे स्टेशन, मैट्रो, एयरपोर्ट आदि पर बने पब्लिक चार्जिंग स्टेशन का इस्तेमाल किया है? क्या आपने यहां अपना फोन चार्ज किया है? अगर, हां तो आपको सावधान रहने की जरूरत है। एक नए तरह के फ्रॉड की घटना सामने आ रही है, जिसमें हैकर्स इन चार्जिंग स्टेशन का इस्तेमाल करके आपके फोन में मेलवेयर यानी वायरस इंजेक्ट कर सकते हैं और फिर आपकी निजी जानकारियां चुराकर ऑनलाइन फ्रॉड कर सकते हैं।

क्या है ‘जूस जैकिंग स्कैम’?

इस नए तरीके के फ्रॉड को ‘जूस जैकिंग स्कैम’ कहा जाता है। इस तरह से साइबर अटैक में फोन के चार्जिंग में इस्तेमाल की जाने वाली USB पोर्ट के माध्यम से मेलवेयर इंसर्ट की जाती है। साइबर अपराधी इन पब्लिक प्लेस पर फर्जी चार्जिंग स्टेशन तक तैयार करते हैं ताकि कोई न कोई शिकार बन सके। ये फोन में चार्जिग केबल के माध्यम से मैलवेयर या वायरस इंसर्ट कर देते हैं।

फोन में इंसर्ट वायरस बैंकिंग डिटेल से लेकर OTP यानी वन टाइम पासवर्ड तक चुराकर हैकर को पहुंचा देते हैं। यही नहीं, आपकी निजी तस्वीरें आदि भी हैकर्स तक पहुंच जाती है। फिर हैकर्स आपको कॉल करके ब्लैकमेल करके डिजिटल अरेस्ट वाले फ्रॉड भी कर सकते हैं।

कैसे बचें?

  • आप कभी भी पब्लिक स्टेशन पर लगे चार्जिंग स्टेशन में अपना फोन न लगाएं। आपके पास अगर चार्जिंग अडेप्टर है तो उसी का इस्तेमाल करके फोन चार्ज करें।
  • इस तरह के इमरजेंसी चार्जिंग के लिए आप पावरबैंक या पोर्टेबल चार्जर का इस्तेमाल कर सकते हैं।
  • इन दिनों आने वाले ज्यादातर फोन बड़ी बैटरी के साथ आते हैं। ऐसे में आपके फोन की बैटरी सिंगल चार्ज में लंबा चल सकती है।
  • अगर, आपको पब्लिक चार्जिंग स्टेशन पर फोन चार्ज में लगाना ही पड़ रहा है तो आपको फोन की स्क्रीन पर दिखने वाले प्रॉम्प्ट का ध्यान रखना होगा। गलती से भी Trust this device या Allow Data Transfer पर टैप न करें।

फ्रॉड होने पर क्या करें?

अगर, आपके साथ किसी भी तरह का फ्रॉड होता है तो नेशनल साइबर फ्रॉड हेल्पलाइन नंबर 1930 पर कॉल करें। इसके अलावा आप संचार साथी ऐप या वेबसाइट की मदद लेकर भी साइबर फ्रॉड को रिपोर्ट कर सकते हैं। यही नहीं, आप नजदीकी साइबर पुलिस स्टेशन में जाकर भी फ्रॉड को रिपोर्ट कर सकते हैं।

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कैम्ब्रिज के सबसे कम उम्र के ब्लैक प्रोफेसर की मौत: घर में बेहोश मिले, रिसर्च में नकल के आरोपों के बाद यूनिवर्सिटी से इस्तीफा दिया था




इंग्लैंड की कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी के सबसे कम उम्र के अश्वेत प्रोफेसर रहे जेसन अर्डे का 41 साल की उम्र में निधन हो गया। वे शिक्षा और समाज से जुड़े विषयों पर रिसर्च और अध्यापन करते थे। शुक्रवार दोपहर करीब 3 बजे उन्हें दक्षिण लंदन के बैटरसी स्थित उनके घर में बेहोश पाया गया। एंबुलेंस टीम ने उन्हें बचाने की कोशिश की, लेकिन उनकी मौत हो गई। पुलिस के मुताबिक, उनकी मौत अचानक हुई। अभी तक ऐसा कोई सबूत नहीं मिला है जिससे मौत को संदिग्ध माना जाए। पुलिस परिवार के संपर्क में है और मामले की जांच कर रही है। मौत से कुछ दिन पहले ही कैम्ब्रिज से दिया था इस्तीफा जेसन अर्डे ने 5 अगस्त को कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से इस्तीफा दिया था। यह फैसला उनकी कुछ रिसर्च को लेकर उठे सवालों के बीच आया था। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी ने उनकी नियुक्ति और यूनिवर्सिटी में उनके कामकाज की जांच भी शुरू की थी। यूनिवर्सिटी यह पता लगा रही थी कि अर्डे को 2022 में प्रोफेसर की नौकरी कैसे मिली और उनके काम के दौरान क्या हुआ। इस्तीफा देने के बाद अर्डे ने कहा था कि लगातार लग रहे आरोपों और उनके बारे में सार्वजनिक रूप से की जा रही टिप्पणियों का उन पर बहुत गहरा असर पड़ा। रिसर्च के कुछ हिस्सों पर नकल के आरोप लगे थे अर्डे ने 2015 में ब्रिटेन की लिवरपूल जॉन मूर्स यूनिवर्सिटी से पीएचडी की थी। इस दौरान उन्होंने एक रिसर्च रिपोर्ट लिखी थी। बाद में उनकी रिसर्च के कुछ हिस्सों पर आरोप लगे कि उन्होंने दूसरे लोगों के लिखे काम को बिना उचित श्रेय दिए अपनी रिसर्च में इस्तेमाल किया। आसान भाषा में कहें तो उन पर रिसर्च में नकल करने का आरोप लगा था। अर्डे ने इन आरोपों को गलत बताया था। इसके बाद उनकी कुछ दूसरी रिसर्च में भी गलतियां होने के आरोप लगाए गए। नियुक्ति पर भी उठे थे सवाल अर्डे की कैम्ब्रिज में नियुक्ति को लेकर भी विवाद हुआ था। कुछ लोगों ने आरोप लगाया था कि उन्हें उनकी योग्यता के बजाय यूनिवर्सिटी की विविधता बढ़ाने वाली नीति के तहत नौकरी दी गई। इस तरह की नीतियों को आम तौर पर DEI कहा जाता है। इसका मतलब है कि अलग-अलग समुदायों और कम प्रतिनिधित्व वाले लोगों को संस्थानों में बराबर मौके दिए जाएं और उनकी भागीदारी बढ़ाई जाए। हालांकि, ब्रिटेन की शिक्षक यूनियन के नेता डेनियल कबेडे ने अर्डे का बचाव किया था। उन्होंने कहा था कि अर्डे को सार्वजनिक रूप से बहुत बुरी तरह निशाना बनाया गया। उन्होंने ब्रिटिश मीडिया और दक्षिणपंथी टिप्पणीकारों के एक वर्ग पर अर्डे के खिलाफ नस्लवादी अभियान चलाने का आरोप लगाया था। DEI क्या है और इसे लेकर विवाद क्या है? DEI यानी डायवर्सिटी, इक्विटी एंड इंक्लूजन का मतलब अलग-अलग समुदायों, नस्लों और कम प्रतिनिधित्व वाले लोगों को संस्थानों में बराबर मौके देना और उनकी भागीदारी बढ़ाना है। यूनिवर्सिटीज में DEI नीतियों का मकसद ऐसे लोगों की संख्या बढ़ाना है, जिनकी शिक्षा और नौकरियों में लंबे समय से कम भागीदारी रही है। इसके आलोचकों का कहना है कि इससे कभी-कभी योग्यता के बजाय किसी व्यक्ति की पहचान को ज्यादा महत्व मिलने का खतरा रहता है। समर्थकों का तर्क है कि बराबरी के मौके देने के लिए ऐसे कदम जरूरी हैं। परिवार बोला- गलत जानकारी के अभियान ने उन्हें बहुत परेशान किया अर्डे के परिवार ने उनके निधन पर गहरा दुख जताया। परिवार ने कहा कि जेसन के बारे में फैलाई जा रही गलत जानकारियों का उन पर बहुत बुरा असर पड़ा था। परिवार के मुताबिक, अर्डे शांत स्वभाव के व्यक्ति थे और हमेशा दूसरों में अच्छाई देखने की कोशिश करते थे। परिवार ने मीडिया से अपील की कि अब उन्हें अकेला छोड़ दिया जाए। उन्होंने जेसन और उनके परिवार के खिलाफ लंबे समय से चल रहे उत्पीड़न को रोकने की भी अपील की। कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी की प्रमुख डेबोरा प्रेंटिस ने अर्डे की मौत पर दुख जताया। उन्होंने कहा कि इस मुश्किल समय में उनकी संवेदनाएं अर्डे के परिवार और दोस्तों के साथ हैं। ब्रिटेन की शिक्षा मंत्री लूसी पॉवेल ने भी उनके निधन पर शोक जताया। ——————————– ये खबर भी पढ़ें… ब्रिटेन में कट्टरपंथी नेता के सामने कूड़ेदान वाला उम्मीदवार:अजीबोगरीब वादों से सुर्खियां बटोर रहा, कहा- हर वोटर को सस्ता घर दूंगा ब्रिटेन में इन दिनों एक ऐसा उम्मीदवार चर्चा में है, जो चुनाव प्रचार के दौरान कूड़ेदान जैसी पोशाक पहनता है और खुद को एलियन बताता है। काउंट बिनफेस नाम के ये उम्मीदवार क्लैक्टन उपचुनाव में रिफॉर्म यूके के कट्टरपंथी नेता नाइजेल फराज के खिलाफ मैदान में हैं। पूरी खबर यहां पढ़ें…



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नारनौल को मिली त्योहारों पर स्पेशल ट्रेन की सौगात: 15 अगस्त से शुरू हुई 41 ट्रिप वाली स्पेशल ट्रेन, 9 कोच के साथ चलेगी – Narnaul News




हरियाणा के नारनौल में त्योहारों के दौरान यात्रियों की अतिरिक्त भीड़ को देखते हुए उत्तर पश्चिम रेलवे ने मदार-नारनौल-मदार प्रतिदिन स्पेशल रेलसेवा संचालित की है। यह विशेष ट्रेन 15 अगस्त से शुरू हो गई, जो 24 सितंबर 2026 तक कुल 41 ट्रिप करेगी। उत्तर पश्चिम रेलवे के मुख्य जनसंपर्क अधिकारी अमित सुदर्शन ने बताया कि गाड़ी संख्या 09639 मदार-नारनौल प्रतिदिन स्पेशल 15 अगस्त से 24 सितंबर तक प्रतिदिन सुबह 4:30 बजे मदार से रवाना होकर सुबह 9:15 बजे नारनौल पहुंचेगी। यात्रियों को होगा फायदा इसी प्रकार गाड़ी संख्या 09640 नारनौल-मदार प्रतिदिन स्पेशल इसी अवधि में प्रतिदिन शाम 4:20 बजे नारनौल से रवाना होकर रात्रि 10:35 बजे मदार पहुंचेगी। इस ट्रेन के चलने से 48 दिनों के लिए बंद की गई अन्य ट्रेनों के यात्रियों को लाभ होगा। इन स्टेशनों पर होगा ठहराव यह स्पेशल रेलसेवा मार्ग में किशनगढ़, नरैना, फुलेरा, रेनवाल, बधाल, रींगस, श्रीमाधोपुर, कांवट, भागेगा, नीमकाथाना, मांवड़ा, डाबला और निजामपुर स्टेशनों पर दोनों दिशाओं में ठहरेगी। 9 डिब्बों के साथ चलेगी ट्रेन रेलवे के अनुसार इस स्पेशल ट्रेन में 7 साधारण श्रेणी के कोच तथा 2 गार्ड डिब्बे सहित कुल 9 डिब्बे लगाए जाएंगे, जिससे त्योहारों के दौरान यात्रियों को अतिरिक्त सीटों की सुविधा मिल सकेगी।



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11 महीने तक पाकिस्तान का बैंक रहा आरबीआई, उसके लिए नोट भी छापे


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RBI Untold Story : आजादी और बंटवारे से जुड़ी वैसे तो तमाम कहानियां आपको पता होंगी, लेकिन आज हम रिजर्व बैंक से जुड़ी एक ऐसी दास्तां बताते हैं, जिसने भारत की उदारता और सहयोग की अनूठी मिसाल पेश की है. साल 1947 में आजादी के बाद आरबीआई ने पाकिस्तान के बैंक के तौर पर काम किया. यही वजह रही कि भारत को अपना केंद्रीय बैंक 2 साल बाद मिला.

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आजादी के बाद भारतीय करेंसी ही पाकिस्तान में भी चलती थी.

नई दिल्ली. वैसे तो पाकिस्तान और भारत की आजादी के बीच सिर्फ एक रात का फर्क है. दोनों देश पहले एक हुआ करते थे और आजादी के बाद का बंटवारा तो आज तक दोनों देशों के लिए किसी बड़े जख्म की तरह बना हुआ है. दो मुल्क बनने के बाद दोनों ने अपनी-अपनी सरकारें बनाई और तमाम संस्थाओं को भी जन्म दिया, लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारतीय रिजर्व बैंक आजादी के 11 महीने बाद तक पाकिस्तान का भी केंद्रीय बैंक बना रहा था. इस दौरान आरबीआई ने पाकिस्तान की बैंकिंग और करेंसी से जुड़े सभी कामकाज भी संभाले थे.

दरअसल, आरबीआई की स्थापना तो आजादी के 12 साल पहले ही 1935 में हो गई थी. साल 1947 तक इसके पास पूरे उपमहाद्वीप में करेंसी का सर्कुलेशन बनाए रखने के लिए ऑफिस, कर्मचारी और बैंकिंग संबंधी सभी अधिकार मौजूद थे. इसके नेटवर्क में कराची और लाहौर के करेंसी ऑफिस भी आते थे, लेकिन बंटवारे के बाद यह पाकिस्तान का हिस्सा बन गए. यही वजह रही बंटवारे के तत्काल बाद पाकिस्तान के पास अपना बैंकिंग इन्फ्रा नहीं था. तब रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने पाकिस्तान के सेंट्रल बैंक के तौर पर काम किया. उसने पाकिस्तान की सरकार से जुड़े बैंकिंग और करेंसी से जुड़े इंतजाम संभाले, जबकि नया देश अपना खुद का संस्थान बना रहा था.

आरबीआई ने छापे थे पाकिस्तान के नोट
रिजर्व बैंक के अनोखे उत्तरदायित्व का सबूत उस समय के बैंक नोटों से भी मिलता है. आरबीआई ने ही तब पाकिस्तान के लिए पहली करेंसी छपवाई थी. भारत में छपे इन नोटों पर ‘गवर्नमेंट ऑफ पाकिस्तान’ लिखा है. पाकिस्तान ने जब तक अपना केंद्रीय बैंक बनाया और जरूरी कानून लागू करने के साथ कर्मचारियों की भर्ती की, तब तक सारा बैंकिंग कामकाज आरबीआई की देखरेख में ही चलता रहा. इसकी वजह यही थी कि पाकिस्तान के अलग मुल्क बनने के बाद भी उसके सरकारी कामकाज और करेंसी की सप्लाई को रोका नहीं जा सकता था. लिहाजा आरबीआई ने यह जिम्मेदारी 11 महीने तक निभाई.

तब तक नहीं हुआ आरबीआई का राष्ट्रीयकरण
रिवर्ज बैंक के इतिहास की यह सबसे अनोखी बात है कि आजादी के 2 साल तक आरबीआई का राष्ट्रीयकरण नहीं किया गया. दरअसल, पाकिस्तान के केंद्रगीय बैंक के तौर पर काम करने के लिए साल 1947 में पाकिस्तान (मौद्रिक प्रणाली और रिजर्व बैंक) आदेश, 1947 के तहत एक अंतरिम व्यवस्था लागू की गई. इस दौरान आरबीआई ने पाकिस्तान सरकार के बैंकर के तौर पर काम करना जारी रखा और उसकी मुद्रा प्रणाली को सहयोग दिया. आरबीआई ने जून 1948 तक पाकिस्तान के केंद्रीय बैंक के तौर पर काम किया. इस समय तक आरबीआई शेयरहोल्डर्स के मालिकाना हक वाली संस्था थी, क्योंकि उसे पाकिस्तान के लिए भी काम करना था तो इसका राष्ट्रीयकरण साल 1949 में किया गया. जब पाकिस्तान में इसकी भूमिका खत्म हो गई.

पाकिस्तान में चलती थी भारतीय करेंसी
आजादी के समय पाकिस्तान ने नए डिजाइन वाले नोट नहीं छापे थे. वहां शुरुआत में भारतीय करेंसी ही चलन में रही. बाद में पाकिस्तान में इस्तेमाल के लिए मौजूदा नोटों में बदलाव किए गए. स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान के अनुसार, उसने पहली बार 1 रुपये, 2 रुपये, 5 रुपये, 10 रुपये और 100 रुपये के नोट छापे थे. इन नोटों पर ऊपर की तरफ अंग्रेजी में ‘Government of Pakistan’ छपा था, जबकि वॉटरमार्क वाले हिस्से पर उर्दू में ‘Hakumat-e-Pakistan’ लिखा था. नोट का मूल डिजाइन भारतीय ही रहा. इन अतिरिक्त शब्दों की वजह से पाकिस्तान को नोटों पर अपनी सरकार का नाम छापने के लिए करेंसी की पूरी तरह से नई सीरीज के डिजाइन, प्रिंटिंग और वितरण का इंतजार नहीं करना पड़ा.

कब खुला पाकिस्तान का केंद्रीय बैंक
आजादी के बाद पाकिस्तान का केंद्रीय बैंक स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान 1 जुलाई, 1948 को कराची में खुला और जाहिद हुसैन इसके पहले गवर्नर बने. इसके उद्घाटन के समय मुहम्मद अली जिन्ना ने इस संस्थान को आर्थिक आजादी का प्रतीक बताया था. ‘बैंक फॉर इंटरनेशनल सेटलमेंट्स’ के अनुसार उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान के स्टेट बैंक का खुलना वित्तीय क्षेत्र में हमारे देश की संप्रभुता का प्रतीक है. इसके बाद आरबीआई ने पाकिस्तान में अपना कामकाज बंद किया और फिर उसका राष्ट्रीयकरण किया गया. लिहाजा देखा जाए तो आजादी के बाद भारत को अपना केंद्रीय बैंक पाकिस्तान के भी करीब एक साल बाद मिला, जबकि आरबीआई पहले से ही भारतीय बैंकिंग सिस्टम के लिए काम कर रहा था.

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Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…

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जालौन की कल की 5 बड़ी खबरें: IAS रिंकू सिंह राही बोले- अंग्रेजों ने नहीं हमने किसानों का शोषण किया; डीएम ने फहराया तिरंगा – Jalaun News


अनुज कौशिक | जालौन5 मिनट पहले

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आज नो न्यूजपेपर डे है, इसलिए शनिवार को अखबार आपके घर नहीं पहुंचेगा। जालौन जिले की कल दिनभर की 5 बड़ी और जरूरी खबरें एक नजर में पढ़िए।

1:- जालौन में IAS रिंकू सिंह राही बोले- अंग्रेजों ने नहीं हमने किसानों का शोषण किया

जालौन में स्वतंत्रता दिवस के मौके पर एसडीएम (न्यायिक) रिंकू सिंह राही ने कहा- भगत सिंह आज के हिसाब से बेवकूफ और बेकार बच्चे थे। वो घर के हिसाब से बागी थे। उन्होंने कहा- जब मैं इतिहास पढ़ता हूं, तो मुझे लगता है कि जब किसानों का शोषण हुआ, क्या अंग्रेजों ने किया या फिर हमारा जो पटवारी था, इस देश का ही आदमी था, उसने किया था। उसने अपने अफसर के सामने अच्छा कर्मचारी बनने के लिए किया था।

इस दौरान रिंकू सिंह ने स्वतंत्रता आंदोलन और उसमें हिस्सा लेने वालों के बारे भी टिप्पणी की। उन्होंने कहा शुरू में स्वतंत्रता के आंदोलन में सिर्फ 1 प्रतिशत लोगों ने हिस्सा लिया था। बाकी तो अपने धर्म के अनुसार कर्मकांड और परिवार में लगे थे। पढ़ें पूरी खबर…

2:- जालौन में युवक की पिटाई और अभद्रता, पैर छुलवाने का आरोप, भीम आर्मी ने पुलिस से की कार्रवाई की मांग

जालौन के गोहन थाना क्षेत्र के नावर गांव से एक वीडियो सोशल मीडिया पर है। इस वीडियो में कुछ युवक एक अन्य युवक के साथ मारपीट करते और कथित तौर पर अभद्र व्यवहार करते दिखाई दे रहे हैं। आरोप है कि पीड़ित युवक से पैर छुलवाए गए और बाबा साहब डॉ. भीमराव अंबेडकर के संबंध में आपत्तिजनक शब्दों का प्रयोग किया गया।

पुलिस ने मामले का संज्ञान लिया है और जांच शुरू कर दी है। बताया जा रहा है कि यह वायरल वीडियो 14 अगस्त का है। वीडियो में एक युवक दूसरे युवक को पीटता नजर आ रहा है, जबकि वह अपने साथियों से वीडियो बनाने को कहता है। इस दौरान पीड़ित युवक के साथ कथित रूप से अभद्रता की गई और उसे पैर छूने के लिए मजबूर किया गया। वीडियो में डॉ. भीमराव अंबेडकर के प्रति भी कथित तौर पर आपत्तिजनक भाषा का इस्तेमाल किए जाने की बात सामने आई है। वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद भीम आर्मी के संज्ञान में आया। पढ़ें पूरी खबर…

3:- जालौन में 111 मीटर लंबे तिरंगे के साथ यात्रा निकाली, जिलाधिकारी-पुलिस अधीक्षक तिरंगा लेकर सड़क पर निकले

स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर शनिवार को जालौन में देशभक्ति का माहौल देखने को मिला। जिलाधिकारी राजेश कुमार पाण्डेय और पुलिस अधीक्षक विनय कुमार सिंह के नेतृत्व में 111 मीटर लंबे राष्ट्रीय ध्वज के साथ भव्य तिरंगा यात्रा निकाली गई। यात्रा में बड़ी संख्या में जनप्रतिनिधि, अधिकारी, छात्र-छात्राएं और आम लोग शामिल हुए।

तिरंगा यात्रा टाउन हॉल स्थित रानी लक्ष्मीबाई की प्रतिमा से शुरू हुई। 111 मीटर लंबे तिरंगे को थामे लोग शहर के प्रमुख मार्गों से होते हुए कोंच रोड स्थित पीली कोठी पहुंचे। यहां सरदार वल्लभभाई पटेल की प्रतिमा पर यात्रा का समापन हुआ। पढ़ें पूरी खबर…

4:- जालौन में बाइक चोर गिरोह का खुलासा: 10 आरोपी गिरफ्तार, 6 चोरी की बाइक और मोबाइल बरामद

जालौन की रामपुरा थाना पुलिस ने मोटरसाइकिल चोरी की घटनाओं का सफल अनावरण करते हुए एक बड़े गिरोह के 10 सदस्यों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से छह चोरी की मोटरसाइकिलें, जिनमें एक अधूरी बाइक भी शामिल है, एक मोटरसाइकिल की चेचिस, पांच मोबाइल फोन तथा बाइक चोरी में प्रयुक्त होने वाले पेचकस, हथौड़ा समेत अन्य सामान बरामद किया है।

पुलिस ने सभी आरोपियों को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है। जालौन के एएसपी IPS अधिकारी डॉक्टर ईशान सोनी ने पुलिस लाइन में खुलासा करते हुए बताया कि थाना रामपुरा क्षेत्र में मोटरसाइकिल चोरी की घटनाओं को लेकर मुकदमे दर्ज किए गए थे। पढ़ें पूरी खबर…

5:- छात्र की तबीयत बिगड़ी तो रातों-रात पहुंचे 25 पलंग: संस्कृत विद्यालय में अब जमीन पर नहीं सोएंगे बच्चे

जालौन के गुरु का इटौरा स्थित श्रीकृष्ण संस्कृत उच्च माध्यमिक विद्यालय में बरसाती कीड़े के काटने से एक छात्र की तबीयत बिगड़ने के बाद प्रशासन ने विद्यार्थियों की सुरक्षा को लेकर तत्काल कदम उठाया। डीएम राजेश कुमार पांडेय के निर्देश पर शुक्रवार रात उरई से विद्यालय में 25 पलंग भेजे गए। डीएम ने स्पष्ट निर्देश दिए कि किसी भी छात्र को जमीन पर न सुलाया जाए।

बताया गया कि रात में एक छात्र को किसी बरसाती कीड़े ने काट लिया था। इसके बाद उसके गले में तेज दर्द होने लगा और हालत बिगड़ गई। सूचना मिलते ही डीएम राजेश कुमार पांडेय और एसपी विनय कुमार सिंह मौके पर पहुंचे। छात्र को उपचार के लिए राजकीय मेडिकल कॉलेज उरई में भर्ती कराया गया, जहां डॉक्टरों की निगरानी में उसका इलाज चल रहा है। चिकित्सकों ने विषैले कीड़े के काटने की आशंका जताई है। पढ़ें पूरी खबर…



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