बॉलीवुड के पहले सुपरस्टार राजेश खन्ना की प्रोफेशनल लाइफ जितनी सक्से थी, उनकी पर्सनल लाइफ में उतने ही उतार चढ़ाव थे. वह अक्सर सुर्खियों में छाए रहते थे. कभी एक्ट्रेस अंजू महेंद्रू संग अपने रिश्ते को लेकर. कभी खुद से आधी उम्र की एक्ट्रेस संग सादी को लेकर. हद तो तब हुई जब वह अपनी बारात का रास्ता ही अपनी एक्स गर्लफ्रेंड अंजू महेंद्रू के घर के सामने से लेकर गए थे.
नई दिल्ली. राजेश खन्ना की जिंदगी से जुड़े कई किस्से हैं, जो काफी दिलचस्प है. उनकी जिंदगी की कहानी भी किसी फिल्मी कहानी से कम नहीं. फिर चाहे वह अंजू महेंद्रू संग उनका अफेयर रहा हो, या डिंपल कपाड़िया संग उनकी शादी रही हो. उनका स्टारडम भी ऐसा था, जिसे लोग सिर्फ सपनों में ही पा सकते हैं.
राजेश खन्ना ने अपने करियर में कई हिट फिल्में दी हैं. उनका करियर हिट, सुपरहिट और ब्लॉकबस्टर फिल्मों से भरा पड़ा है. मेकर्स उनके घर के बाहर लाइन लगाकर खड़े रहते थे. कुछ मेकर्स तो उनको फिल्मों में कास्ट करने करने के लिए तरस जाया करते थे.
शर्मिला टैगोर, हेमा मालिनी, मुमताज, पद्मिनी कोल्हापुरे और आशा पारेख समेत उन्होंने तकरीबन हर एक्ट्रेस के साथ काम किया. लेकिन इनमें ज्यादा उन्होंने मुमताज के साथ हिट फिल्में दीं. फिल्मों के अलावा वह अपने अफेयर को लेकर भी चर्चा में रहा करते थे.
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खासकर उनकी लव लाइफ अक्सर खबरों में बनी रहती थी. एक समय था जब उनका नाम मॉडल और अभिनेत्री अंजू महेंद्रू के साथ जुड़ा था. दोनों का रिश्ता कई सालों तक चला, लेकिन बाद में दोनों के रास्ते अलग हो गए.
यूं तो राजेश खन्ना ने डिंपल कपाड़िया से शादी की थी. लेकिन वह पहले अंजू महेंद्रू संग शादी करना चाहते थे. उन्होंने एक्ट्रेस से कहा भी था कि वह एक्टिंग करियर छोड़ दें और उनके साथ घर बसा लें. लेकिन एक्ट्रेस ने ये शर्त नहीं मानी.
राजेश खन्ना की दुल्हन बनने के बजाय उन्होंने करियर पर फोकस किया. इसके बाद दोनों के बीच दूरियां बढ़ने लगीं और आखिरकार उनका रिश्ता टूट गया.इसके बाद राजेश खन्ना की जिंदगी में डिंपल कपाड़िया आईं और उन्होंने शादी का फैसला किया.
डिंपल राजेश खन्ना से 15 साल छोटी थीं. हर तरफ एक ही चर्चा थी कि राजेश खन्ना, डिंपल संग शादी रचा रहे हैं. लेकिन राजेश अंजू को इतना पसंद करते थे कि उन्होंने अपनी का रास्ता भी ऐसे तय किया कि वह दुल्हा बनकर अंजू महेंद्रू के घर के सामने से गुजरे.
उस दौर में खूब चर्चा हुई थी कि राजेश खन्ना अपनी पूर्व प्रेमिका को दिखाना चाहते थे कि वह जिंदगी में आगे बढ़ चुके हैं और एक नई शुरुआत कर रहे हैं. लेकिन बाद में डिंपल के साथ भी उनका रिश्ता कुछ खास नहीं चला और दोनों आखिर वक्त तक अलग-अलग रहते रहे. डिंपल ने अलग होकर फिर एक्टिंग शुरू की और ऋषि कपूर, अक्षय खन्ना समेत हर एक्टर संग काम किया.
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गुजरात के आणंद जिले में विदेश में पढ़ाई या नौकरी के इच्छुक उम्मीदवारों को अवैध तरीके से IELTS और TOEFL जैसी अंतरराष्ट्रीय अंग्रेजी दक्षता परीक्षाएं पास कराने वाले एक बड़े रैकेट का भंडाफोड़ हुआ है। पुलिस ने इस मामले में तरुणकांत शर्मा नाम के एक आरोपी को गिरफ्तार किया है, जबकि कथित मास्टरमाइंड हर्षद रावल और अर्थ बुंदेला फरार हैं। आणंद जिला साइबर क्राइम पुलिस ने गुप्त सूचना के आधार पर 20 जून को आणंद शहर स्थित एक आर्ट्स कॉलेज की दूसरी मंजिल पर किराए पर लिए गए दो कमरों में छापा मारा। यहां एक निजी कंपनी द्वारा TOEFL, IELTS और अन्य विदेशी भाषा दक्षता परीक्षाओं के लिए ऑनलाइन परीक्षा केंद्र संचालित किया जा रहा था। पुलिस जांच में सामने आया कि रैकेट के कथित सरगना हर्षद रावल और उसके सहयोगी अर्थ बुंदेला ने करीब छह महीने पहले कॉलेज के साथ समझौता कर यह परिसर किराए पर लिया था। कमरे के बीच की दीवार में छेद कर रखे थे जांच के दौरान पता चला कि परीक्षा देने आने वाले उम्मीदवारों को निर्धारित बूथ में बैठाया जाता था, जबकि पास के कमरे में बैठे डमी उम्मीदवार उनके स्थान पर प्रश्नों के उत्तर हल करते थे। आरोपियों ने परीक्षा केंद्र और दूसरे कमरे के बीच की दीवार में छेद कर रखे थे। HDMI स्प्लिटर एडॉप्टर और कंप्यूटर सिस्टम की मदद से परीक्षा स्क्रीन को दूसरे कमरे में मौजूद कंप्यूटरों पर दिखाया जाता था। इससे डमी परीक्षार्थी वास्तविक समय में सवालों के जवाब देकर उम्मीदवारों को परीक्षा पास कराने में मदद करते थे। पुलिस के अनुसार, असली उम्मीदवार परीक्षा कक्ष में मौजूद रहता था, लेकिन परीक्षा प्रभावी रूप से दूसरे कमरे में बैठा डमी व्यक्ति देता था। वह कथित मास्टरमाइंड हर्षद रावल का कर्मचारी था और परीक्षा केंद्र में काम कर रहा था। करीब डेढ़ महीने से सक्रिय था रैकेट मामले में तीनों आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश से संबंधित धाराओं के साथ-साथ सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम की धारा 66D के तहत मामला दर्ज किया गया है। छापेमारी के दौरान कंप्यूटर CPU, मोबाइल फोन और अन्य इलेक्ट्रॉनिक उपकरण जब्त किए गए, जिनकी कुल कीमत करीब 3.78 लाख रुपए बताई गई है। प्रारंभिक पूछताछ में पता चला है कि यह रैकेट करीब डेढ़ महीने से सक्रिय था। पुलिस अब जब्त किए गए कंप्यूटरों और मोबाइल फोन के डेटा की जांच कर रही है ताकि यह पता लगाया जा सके कि कितने उम्मीदवारों ने इस तरीके से परीक्षा दी और इसके बदले कितनी रकम वसूली गई।
बलिया के करीहरा गांव में सोमवार शाम प्रख्यात कथावाचक राजन जी महाराज की श्रीराम कथा का शुभारंभ हुआ। इस अवसर पर बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे। कथा से पूर्व श्रद्धालुओं ने भव्य कलश यात्रा निकाली, जिसमें बड़ी संख्या में महिला एवं पुरुष भक्तों ने भाग लिया। वैदिक मंत्रोच्चार, भजन-कीर्तन और जयघोष से पूरा क्षेत्र भक्तिमय हो उठा। कथा स्थल पर बांसडीह विधायक केतकी सिंह ने सपरिवार व्यासपीठ का पूजन-अर्चन और आरती की। राजन जी महाराज ने मंच पर चढ़ते ही भगवान श्रीराम व अन्य देवी-देवताओं का पूजन किया और सभी के समक्ष शीश झुकाया। विधायक सहित विभिन्न लोगों ने अंगवस्त्रम भेंट कर राजन जी महाराज का स्वागत किया। देखें, 2 तस्वीरें… इसके बाद राजन जी महाराज ने ‘श्रीराम जै राम जै जै राम’ के उच्चारण के साथ कथा की शुरुआत की। उन्होंने कहा कि एक तरफ गंगा की धारा और दूसरी तरफ सरयू की धारा के बीच श्रीराम कथा का प्रवाह हो रहा है। महाराज ने बलिया को अपनी पहली कथा भूमि बताते हुए कहा कि वे इस भूमि को कभी नहीं भूल सकते।
राजन जी महाराज ने श्रीराम कथा का महत्व बताते हुए कहा कि कथा वही है जो जीवन की व्यथा को समाप्त कर दे। उन्होंने जोर दिया कि भगवान की कथा ही भगवत स्वरूप है और भगवत शरणागति जीवन के सभी दुखों को दूर कर देती है। उनके अनुसार, भगवत शरणागति सौ बीमारियों की एक दवाई है, जिसे मन से करना चाहिए। कथा के प्रथम दिवस बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति देखी गई। आयोजन समिति ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए पांडाल में कूलर, पंखे, स्प्रिंकलर, पेयजल, प्रसाद और अन्य आवश्यक व्यवस्थाएं की थीं। कथा के शुभारंभ के साथ ही पूरे क्षेत्र में धार्मिक उत्साह और श्रद्धा का वातावरण व्याप्त हो गया है।
मधुबनी के कोतवाली चौक स्थित एक निजी नर्सिंग होम में डिलीवरी के दौरान नवजात शिशु की मौत हो गई। इस घटना के बाद परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए जमकर हंगामा किया। पीड़ित महिला के परिजन शशि झा ने बताया कि प्रसव पीड़ा होने पर गर्भवती महिला को इलाज के लिए कोतवाली चौक स्थित निजी नर्सिंग होम में भर्ती कराया गया था। डिलीवरी की प्रक्रिया के दौरान नवजात शिशु की मौत हो गई। अस्पताल परिसर में विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया परिजनों ने आरोप लगाया कि अस्पताल में आवश्यक संसाधनों और विशेषज्ञ चिकित्सकीय व्यवस्था का अभाव था, जिसके कारण समय पर समुचित उपचार नहीं मिल सका। घटना की जानकारी मिलते ही परिजनों में आक्रोश फैल गया और उन्होंने अस्पताल परिसर में विरोध-प्रदर्शन शुरू कर दिया। निजी नर्सिंग होम के स्टाफ मनीष कुमार ने घटना के संबंध में बताया कि प्रसव के दौरान नवजात शिशु की मौत नहीं हुई थी, बल्कि गर्भवती महिला के पेट में ही शिशु की मृत्यु हो चुकी थी। उन्होंने कहा कि शिशु की मौत की सूचना परिजनों को देने के बाद ही हंगामा शुरू हो गया। बार-बार ऑपरेशन से प्रसव की जानकारी दी गई थी मनीष कुमार के अनुसार, गर्भवती महिला के परिजनों को बार-बार ऑपरेशन से प्रसव की जानकारी दी गई थी, लेकिन उन्होंने ऑपरेशन कराने से मना कर दिया। जब महिला को अधिक दर्द होने लगा और उसे ऑपरेशन रूम में ले जाया गया, तब देखा गया कि नवजात शिशु महिला के पेट में ही दम तोड़ चुका था। हंगामे की सूचना मिलने पर नगर थाना पुलिस मौके पर पहुंची और आक्रोशित परिजनों को शांत कराया। पुलिस अधिकारियों ने परिजनों और अस्पताल प्रबंधन से घटना के संबंध में जानकारी ली। पुलिस ने कागजी प्रक्रिया पूरी कर नवजात शिशु के शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल भेज दिया। नगर थाना अध्यक्ष मनोज कुमार ने बताया कि पीड़ित पक्ष की ओर से अभी तक कोई लिखित आवेदन नहीं मिला है। पुलिस मामले की जांच कर रही है और आवेदन मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
देवेन्द्रनगर थाना क्षेत्र के ग्राम बड़ी गुखौर में खेत की बाड़ से लकड़ी तोड़ने से मना करने पर एक किसान पर जानलेवा हमला किया गया। आरोपी ने किसान की पत्नी के सामने ही उसे लाठी से पीटा और जान से मारने की धमकी देकर फरार हो गया। पुलिस ने पीड़ित की शिकायत पर आरोपी के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। जानकारी के अनुसार, यह घटना उस समय हुई जब ग्राम बड़ी गुखौर निवासी किसान बृजकिशोर कुशवाहा (36 वर्ष) अपनी पत्नी सुशीला कुशवाहा के साथ गेवडा हार स्थित अपने खेत में धान की रोपाई कर रहे थे। इसी दौरान पड़ोस के खेत में मौजूद माधव यादव नामक युवक बृजकिशोर के खेत की बाड़ से लकड़ी तोड़ने लगा।
जब किसान बृजकिशोर ने माधव को लकड़ी तोड़ने से रोका, तो आरोपी आक्रोशित हो गया और अभद्र गालियां देने लगा। विरोध करने पर माधव यादव ने पास पड़े एक डंडे से बृजकिशोर के बाएं पैर पर हमला कर दिया। जब पीड़ित ने खुद को बचाने का प्रयास किया और डंडा पकड़ा, तो आरोपी ने उसका दाहिना हाथ बुरी तरह मरोड़ दिया। युवक ने किया बचाव किसान की चीख-पुकार सुनकर उसकी पत्नी सुशीला और पास के खेत में काम कर रहे दिनेश कुशवाहा मौके पर पहुंचे। दिनेश ने बीच-बचाव कर बृजकिशोर को आरोपी से छुड़ाया। घटना के बाद आरोपी माधव यादव ने पीड़ित को धमकी दी कि यदि थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई गई, तो उसे जान से मार दिया जाएगा। इस हमले में किसान बृजकिशोर के बाएं पैर की पिंडली और दाहिने हाथ के कंधे में गंभीर चोटें आई हैं। पीड़ित किसान ने देवेन्द्रनगर थाने पहुंचकर मामले की शिकायत दर्ज कराई।
दिल्ली में स्थित इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट।
दिल्ली के इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय (आईजीआई) एयरपोर्ट पर 2.3 किलोमीटर लंबे एयरोसिटी-टर्मिनल-1 मेट्रो कॉरिडोर का निर्माण किया जाएगा। गोल्डन लाइन के इस विस्तार के पूरा होने के बाद टर्मिनल-1 को मैजेंटा लाइन से जोड़ते हुए इंटरचेंज स्टेशन के रूप में विकस
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डीएमआरसी अधिकारियों के अनुसार, एयरोसिटी स्टेशन को एक प्रमुख मल्टी-मॉडल ट्रांजिट हब के रूप में विकसित किया जाएगा। नया कॉरिडोर एयरपोर्ट एक्सप्रेस (ऑरेंज लाइन), गोल्डन लाइन और प्रस्तावित दिल्ली-एसएनबी-अलवर आरआरटीएस कॉरिडोर को आपस में जोड़ेगा, जिससे एयरपोर्ट तक पहुंचने और विभिन्न टर्मिनलों के बीच यात्रा करने वाले यात्रियों को बड़ी सुविधा मिलेगी।
शटल बस बदलने की आवश्यकता नहीं होगी
वर्तमान में टर्मिनल-1 से अन्य टर्मिनलों तक जाने के लिए यात्रियों को 20 मिनट के अंतराल पर चलने वाली शटल बसों पर निर्भर रहना पड़ता है। लेकिन नए कॉरिडोर के चालू होने के बाद घरेलू और अंतरराष्ट्रीय टर्मिनलों के बीच शटल बस बदलने की आवश्यकता समाप्त हो जाएगी और यात्री सीधे मेट्रो के जरिए सफर कर सकेंगे।
अधिकारियों ने बताया कि एयरपोर्ट पर बढ़ते यात्री दबाव को देखते हुए एयरोसिटी स्टेशन पर गोल्डन लाइन का प्लेटफॉर्म 290 मीटर लंबा बनाया जाएगा, जो सामान्य इंटरचेंज स्टेशनों की तुलना में लगभग 30 मीटर अधिक होगा। पूरा कॉरिडोर भूमिगत (अंडरग्राउंड) होगा और इसका डिजाइन एयरपोर्ट सुरक्षा मानकों को ध्यान में रखकर तैयार किया गया है। परियोजना को दिसंबर 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है।
परियोजना की प्रमुख बातें
2.3 किमी लंबा एयरोसिटी-टर्मिनल-1 मेट्रो कॉरिडोर बनेगा गोल्डन लाइन का विस्तार कर टर्मिनल-1 को इंटरचेंज स्टेशन बनाया जाएगा एयरपोर्ट एक्सप्रेस, गोल्डन लाइन और प्रस्तावित आरआरटीएस को मिलेगा आपसी कनेक्शन टर्मिनलों के बीच चलने वाली शटल बसों की आवश्यकता समाप्त होगी एयरोसिटी स्टेशन पर 290 मीटर लंबा विशेष प्लेटफॉर्म बनाया जाएगा पूरा कॉरिडोर भूमिगत होगा और एयरपोर्ट सुरक्षा मानकों के अनुरूप तैयार किया जाएगा दिसंबर 2028 तक परियोजना पूरी होने की संभावना
Green Chilli Pickle Recipe: हरी मिर्च का चटपटा अचार बनाने के लिए अब कई दिनों तक इंतजार करने की जरूरत नहीं है. एक आसान रेसिपी से सिर्फ 10 मिनट में अचार तैयार किया जा सकता है और सही तरीके से रखने पर यह लंबे समय तक स्वादिष्ट बना रहता है. हरी मिर्च का अचार बनाने की यह रेसिपी सभी को जान लेनी चाहिए.
घर पर आसानी से 10 मिनट में हरी मिर्च का अचार बनाया जा सकता है.
Hari Mirch Ka Achar Recipe: मिर्च का अचार सबसे ज्यादा पंसद किया जाता है और यह हर खाने का स्वाद बढ़ा देता है. खाने में अचार का स्वाद अलग ही मायने रखता है. पराठे हों या दाल-चावल, थोड़ा सा अचार पूरे खाने का स्वाद बढ़ा देता है. खासकर हरी मिर्च का अचार उन लोगों को बेहद पसंद आता है, जिन्हें खाने में थोड़ा तीखापन और चटपटा स्वाद पसंद होता है. कई बार अचार बनाने में धूप में सुखाने और कई दिनों तक इंतजार करने की जरूरत पड़ती है. अगर आप भी जल्दी बनने वाला हरी मिर्च का अचार बनाना चाहते हैं, तो यह आसान तरीका आपके काम आ सकता है. इस तरीके से बिना धूप में सुखाए सिर्फ 10 मिनट में स्वादिष्ट हरी मिर्च का अचार तैयार किया जा सकता है.
मिर्च का अचार बनाने के लिए सामग्री
इस झटपट अचार के लिए आपको ज्यादा चीजों की जरूरत नहीं पड़ेगी. इसके लिए ताजी हरी मिर्च, सरसों का तेल, नमक, हल्दी, सौंफ, राई, मेथी दाना और थोड़ा सा नींबू का रस चाहिए. हरी मिर्च का चुनाव करते समय कोशिश करें कि मिर्च ताजी और बिना दाग वाली हो. अच्छी क्वालिटी की मिर्च से अचार का स्वाद भी बेहतर आता है.
10 मिनट में ऐसे बनाएं मिर्च का अचार
सबसे पहले हरी मिर्च को अच्छी तरह धोकर कपड़े से पूरी तरह सुखा लें, ताकि उनमें पानी न रह जाए. अब मिर्च को बीच से लंबा काट लें या छोटे टुकड़ों में काट लें. एक पैन में थोड़ा सरसों का तेल गर्म करें. तेल हल्का गर्म होने के बाद उसमें राई, सौंफ और मेथी दाना डालकर कुछ सेकंड भूनें. अब इसमें कटी हुई हरी मिर्च डालें और हल्की आंच पर 2 से 3 मिनट तक चलाते हुए पकाएं.
इसके बाद इसमें नमक, हल्दी और बाकी मसाले डालकर अच्छी तरह मिला दें. आखिर में नींबू का रस डालें और गैस बंद कर दें. आपका चटपटा हरी मिर्च का अचार तैयार है. अगर आप चाहते हैं कि अचार कई महीनों तक चले, तो कुछ बातों का ध्यान रखना जरूरी है. सबसे पहले अचार को हमेशा साफ और सूखे कांच के जार में भरें. जार में नमी बिल्कुल नहीं होनी चाहिए.
अचार निकालते समय हमेशा सूखा चम्मच इस्तेमाल करें. गीला चम्मच लगाने से अचार जल्दी खराब हो सकता है. साथ ही, अचार को हमेशा ढककर रखें और कोशिश करें कि इसमें पर्याप्त मात्रा में तेल रहे. हरी मिर्च के अचार में थोड़ा सा अजवाइन या कलौंजी डालने से इसका स्वाद और खुशबू बढ़ सकती है. अगर आपको ज्यादा तीखा पसंद नहीं है, तो कम तीखी हरी मिर्च का इस्तेमाल कर सकते हैं.
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अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें
खैरथल। जिला मुख्यालय खैरथल के रेलवे स्टेशन पर यात्री सुविधाओं के विस्तार और लंबे समय से लंबित मांगों को लेकर भाजपा नेताओं का प्रतिनिधिमंडल सोमवार को मंडल रेल प्रबंधक (डीआरएम) से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने स्टेशन पर आधारभूत सुविधाओं के विकास के लिए विस्तृत ज्ञापन सौंपते हुए कई महत्वपूर्ण मांगें उठाईं। खैरथल भाजपा मंडल अध्यक्ष मनीष शर्मा ने पूर्व विधायक रामहेत सिंह यादव के नेतृत्व में डीआरएम को ज्ञापन सौंपते हुए बताया कि खैरथल स्टेशन पर यात्रियों की संख्या लगातार बढ़ रही है, लेकिन सुविधाएं अभी भी अपेक्षित स्तर तक नहीं पहुंच पाई हैं। उन्होंने मुख्य बाजार स्थित 93 एलसी से प्लेटफॉर्म नंबर-2 तक सीधा रास्ता विकसित करने, प्लेटफॉर्म पर टिनशेड का विस्तार करने तथा पटवार घर वाली गली से मंदिर तक रास्ता खुलवाने की मांग रखी। प्रतिनिधिमंडल ने पड़ीसल क्षेत्र में रेलवे स्टेशन के निकट आवागमन की बेहतर व्यवस्था करने तथा प्लेटफॉर्म का विस्तार कराने की भी मांग की। इसके अलावा यात्रियों को धूप और बारिश से राहत देने के लिए स्टेशन पर दोनों प्लेटफॉर्मों पर 100 मीटर अतिरिक्त टिनशेड निर्माण कराने का आग्रह किया गया। भाजपा नेताओं ने कहा कि खैरथल अब जिला मुख्यालय है, ऐसे में रेलवे स्टेशन पर सुविधाओं का विस्तार समय की जरूरत बन चुका है। यात्रियों की बढ़ती संख्या को देखते हुए स्टेशन के विकास कार्यों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। मंडल रेल प्रबंधक ने प्रतिनिधिमंडल की मांगों को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को शीघ्र मौके पर भेजकर निरीक्षण कराने तथा आवश्यक कार्रवाई करने का आश्वासन दिया। इस दौरान प्रदेश कार्यसमिति सदस्य एवं पूर्व विधायक रामहेत सिंह यादव, सरस डेयरी चेयरमैन नितिन सांगवान, भाजपा मंडल अध्यक्ष मनीष शर्मा, पूर्व जिला अध्यक्ष संजय नरुका, व्यापार प्रकोष्ठ जिला अध्यक्ष दीनदयाल गुप्ता, योगेश गोयल तथा युवा नेता इंदर यादव सहित कई भाजपा पदाधिकारी मौजूद रहे।
Andy Burnham Profile: From Journalist To ‘King Of The North’ And Labour Leadership Contender
लंदन59 मिनट पहले
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ब्रिटेन के पीएम कीर स्टार्मर ने इस्तीफा दे दिया है। उनकी जगह एंडी बर्नहैम नए प्रधानमंत्री बन सकते हैं। बर्नहैम ने पीएम पद के लिए दावेदारी भी पेश कर दी है।
बर्नहैम 19 जून को मेकरफील्ड से उपचुनाव जीतकर सांसद बने थे। पार्टी में उनकी लोकप्रियता के चलते तभी से ही स्टार्मर की मुश्किलें बढ़ गईं थी।
इस स्टोरी में जानिए पत्रकारिता से करियर की शुरुआत करने वाले बर्नहैम कैसे इंग्लैंड के ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ बने…
टीवी सीरियल देखने के बाद राजनीति में आए बर्नहैम
बर्नहैम का जन्म 1970 में लिवरपूल में हुआ था, लेकिन उनका बचपन चेशायर के कुलचेथ गांव में बीता। उनके पिता टेलीकॉम कंपनी BT में इंजीनियर थे, जबकि मां एक क्लिनिक में रिसेप्शनिस्ट थीं। दोनों लेबर पार्टी के समर्थक थे।
एंडी बर्नहैम का राजनीति में आने का फैसला किसी नेता के भाषण से नहीं, बल्कि एक टीवी ड्रामा देखकर हुआ था।
उन्होंने बताया है कि 14 साल की उम्र में BBC का फेमस सीरियल बॉयज फ्रॉम द ब्लैकस्टफ देखने के बाद उन्होंने लेबर पार्टी से जुड़ने का मन बनाया। यह ड्रामा लिवरपूल में बेरोजगारी और आर्थिक संकट की कहानी पर आधारित था।
आयरिश मूल के बर्नहैम की पहचान सिर्फ राजनीति तक सीमित नहीं है। वह लिवरपूल के एवर्टन फुटबॉल क्लब के बड़े फैन हैं।
स्कूल के दिनों की तस्वीर11 साल के एंडी बर्नहैम (दाएं), अपने भाइयों निक (बाएं) और जॉन (सामने) और मां एलीन के साथ।
कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय में पढ़ाई के दौरान फुटबॉल खेलते एंडी बर्नहैम (सबसे बाएं), यूनिवर्सिटी एफसी टीम के साथ।
कैम्ब्रिज में पढ़ाई के दौरान नीदरलैंड की मैरी से प्यार हुआ
एंडी बर्नहैम ने कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से इंग्लिश लिटरेचर की पढ़ाई की, लेकिन वहां का माहौल उनके लिए आसान नहीं था। अपनी किताब ‘हेड नॉर्थ’ में उन्होंने लिखा है कि कई बार उन्हें लगता था कि वे वहां के नहीं हैं और खुद को एक ‘बाहरी’ की तरह महसूस करते थे।
पढ़ाई के दौरान उनकी रुचि म्यूजिक में बढ़ी। मैनचेस्टर के इंडी बैंड्स- द स्मिथ्स और द स्टोन रोजेज के गानों ने उनकी सोच और व्यक्तित्व को काफी प्रभावित किया। बर्नहैम के मुताबिक, इसी म्यूजिक कल्चर ने उन्हें अपनी अलग पहचान दी।
एंडी बर्नहैम की लव स्टोरी की शुरुआत कैम्ब्रिज यूनिवर्सिटी से हुई थी। यहीं उनकी मुलाकात नीदरलैंड में जन्मीं मैरी-फ्रांस वैन हील से हुई। दोनों इंग्लिश लिटरेचर की पढ़ाई के दौरान करीब आए और कई साल बाद 2000 में शादी कर ली। आज उनके तीन बच्चे हैं।
बर्नहैम ने 2009 में द गार्जियन को दिए इंटरव्यू में बताया था कि शुरुआती दौर में वे परिवार बढ़ाने की योजना नहीं बना रहे थे। उनका मानना था कि जिंदगी में पहले स्थिरता हासिल करना जरूरी है।
एंडी बर्नहैम अपनी पत्नी मैरी फ्रांस वैन हील और पहले बच्चे जिमी के साथ।
31 साल की उम्र में पहली बार सांसद बने
एंडी बर्नहैम ने करियर की शुरुआत राजनीति से नहीं, बल्कि पत्रकारिता से की थी। ग्रेजुएशन के बाद उन्होंने टैंक वर्ल्ड और पैसेंजर वर्ल्ड मैनेजमेंट जैसी पत्रिकाओं में काम किया। 20 साल की उम्र में उन्हें राजनीति में पहला मौका मिला, जब वह लेबर सांसद टेसा जोवेल के रिसर्चर बने।
इसके बाद बर्नहैम ने तेजी से राजनीति में पहचान बनाई। वह संस्कृति मंत्री क्रिस स्मिथ के सलाहकार रहे और 2001 में ग्रेटर मैनचेस्टर के लीघ सीट से पहली बार सांसद चुने गए। संसद पहुंचने के बाद बर्नहैम ने टोनी ब्लेयर सरकार में जूनियर मंत्री के तौर पर काम किया।
गॉर्डन ब्राउन के कार्यकाल में उनका कद और बढ़ा और उन्हें कैबिनेट में जगह मिली। इस दौरान उन्होंने वित्त, संस्कृति और स्वास्थ्य जैसे अहम मंत्रालयों की जिम्मेदारी संभाली।
2010 में स्वास्थ्य सचिव के रूप में एंडी बर्नहैम, तत्कालीन प्रधानमंत्री गॉर्डन ब्राउन के साथ।
दो बार लेबर पार्टी का चुनाव हारे, फिर भी नहीं छोड़ी दावेदारी
2010 में लेबर पार्टी की चुनावी हार के बाद एंडी बर्नहैम ने पहली बार पार्टी नेता बनने की कोशिश की, लेकिन पांच उम्मीदवारों में चौथे स्थान पर रहे। पार्टी की कमान एड मिलिबैंड के हाथ में चली गई।
पांच साल बाद 2015 में बर्नहैम ने दूसरी बार किस्मत आजमाई। इस बार उन्हें जेरेमी कॉर्बिन ने हरा दिया। लगातार दो हार के बावजूद उन्होंने पार्टी के जमीनी कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच अपनी पकड़ मजबूत करने पर काम जारी रखा।
आलोचक अक्सर बर्नहैम पर राजनीतिक रुख बदलने के आरोप लगाते रहे हैं। हालांकि, ब्रेक्जिट के मुद्दे पर वह लगातार यूरोपीय यूनियन के पक्ष में रहे। 2016 के जनमत संग्रह में उन्होंने ब्रिटेन के EU में बने रहने का समर्थन किया था। बाद में उन्होंने कहा कि वह अपने जीवनकाल में ब्रिटेन को दोबारा यूरोपीय संघ का हिस्सा बनते देखना चाहते हैं।
गॉर्डन ब्राउन ने एंडी बर्नहैम को अपनी कैबिनेट में शामिल किया था।
सरकार से भिड़े तो ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ का नाम मिला
दो बार लेबर पार्टी का नेता बनने से चूकने के बाद एंडी बर्नहैम ने 2017 में नई पारी शुरू की। उन्होंने राष्ट्रीय राजनीति छोड़ ग्रेटर मैनचेस्टर के पहले सीधे चुने गए मेयर का चुनाव लड़ा और 60% से ज्यादा वोटों के साथ जीत दर्ज की। 2021 में उन्होंने और बड़े अंतर से दोबारा जीत हासिल की।
कोविड महामारी के दौरान बर्नहैम ने नॉर्थ इंग्लैंड के साथ भेदभाव का आरोप लगाते हुए केंद्र सरकार के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोला। उस समय लंदन की सत्ता से उनकी टक्कर ने उन्हें राष्ट्रीय पहचान दिलाई और मीडिया ने उन्हें ‘किंग ऑफ द नॉर्थ’ कहना शुरू कर दिया।
अपनी ही पार्टी की सरकार पर सवाल उठाए
स्टार्मर की सरकार बनने के बाद भी बर्नहैम ने चुप्पी नहीं साधी। उन्होंने सरकार की खर्च और कर्ज से जुड़ी आर्थिक नीतियों पर सवाल उठाए, जिसके चलते पार्टी के भीतर ही उनके खिलाफ आवाजें उठने लगीं।
हालांकि, 2025 तक उन्हें लेबर पार्टी के अगले बड़े चेहरे और संभावित नेता के तौर पर देखा जाने लगा था। जनवरी 2026 में जब ग्रेटर मैनचेस्टर के सांसद एंड्रयू ग्विन ने सीट छोड़ने का ऐलान किया, तो बर्नहैम की वेस्टमिंस्टर वापसी की चर्चा तेज हो गई। लेकिन उपचुनाव में पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार नहीं बनाया। माना गया कि यह फैसला प्रधानमंत्री और लेबर नेता कीर स्टार्मर की सहमति से लिया गया था।
पार्टी की हार से स्टार्मर पर सवाल उठे
मई 2026 में इंग्लैंड, स्कॉटलैंड और वेल्स के चुनावों में लेबर पार्टी का प्रदर्शन उम्मीद से खराब रहा। वहीं नाइजल फराज की रिफॉर्म UK तेजी से मजबूत हुई। उसने उन इलाकों में भी बढ़त बनाई, जिन्हें एंडी बर्नहैम का गढ़ माना जाता था।
खराब नतीजों के बाद कीर स्टार्मर के नेतृत्व पर सवाल उठने लगे। कुछ सांसदों ने नेतृत्व बदलने की मांग की, जबकि सरकार और पार्टी में इस्तीफों का दौर भी शुरू हो गया।
इसी बीच लेबर सांसद जोश साइमंस ने मेकरफील्ड सीट छोड़ने का ऐलान किया, ताकि बर्नहैम संसद में वापसी कर सकें। पार्टी ने उन्हें उम्मीदवार बनाया और अगले महीने हुए उपचुनाव में उन्होंने जीत हासिल कर वेस्टमिंस्टर में वापसी कर ली।
इस जीत को सिर्फ उनकी संसदीय वापसी नहीं, बल्कि लेबर पार्टी के अगले नेता की दौड़ में उनकी एंट्री के तौर पर देखा गया। दरअसल, पार्टी का नेता बनने के लिए सांसद होना जरूरी है और बर्नहैम ने यह शर्त पूरी कर ली थी।
आम लोगों की भाषा बोलना बर्नहैम की सबसे बड़ी ताकत
मैनचेस्टर यूनिवर्सिटी में राजनीति के प्रोफेसर रॉबर्ट फोर्ड के मुताबिक, एंडी बर्नहैम की सबसे बड़ी ताकत यह है कि वह मुश्किल और तकनीकी मुद्दों को भी आम लोगों की भाषा में समझा देते हैं।
फोर्ड का कहना है कि बर्नहैम सिर्फ अच्छे वक्ता ही नहीं, बल्कि बेहतरीन कहानीकार भी हैं। वह लोगों को आसानी से समझा देते हैं कि वह किसके लिए राजनीति कर रहे हैं और क्या हासिल करना चाहते हैं।
प्रोफेसर के मुताबिक, यही बात उन्हें कई दूसरे लेबर नेताओं और मौजूदा प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर से अलग बनाती है। जहां स्टार्मर की राजनीति को अक्सर तकनीकी और प्रशासनिक माना जाता है, वहीं बर्नहैम आम मतदाताओं से भावनात्मक जुड़ाव बनाने में ज्यादा सफल दिखते हैं।
इसी वजह से लेबर पार्टी के भीतर कई लोग उन्हें ऐसा नेता मानते हैं, जो पार्टी की घटती लोकप्रियता को रोककर समर्थकों में नया उत्साह पैदा कर सकता है।
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Redmi ने Note 15 सीरीज में एक बजट फ्रेंडली फोन पिछले दिनों भारत में लॉन्च किया है। रेडमी का यह फोन कर्व्ड डिस्प्ले डिजाइन के साथ आता है। Redmi Note 15 सीरीज का यह स्पेशल एडिशन स्टैंडर्ड मॉडल जैसे फीचर के साथ आता है। इस फोन को हमने कुछ समय तक इस्तेमाल किया है। हमें यह फोन कैसा लगा है, आइए जानते हैं।
Redmi Note 15 SE का डिजाइन और डिस्प्ले
रेडमी के इस बजट फोन का लुक और डिजाइन हमें काफी इंप्रेसिव लगा। जैसे ही हमने इस फोन को बॉक्स से निकाला यह देखने में हमें अच्छा लगा। इसमें सबसे अच्छी बात ये लगी कि बैक में वीगन लेदर फिनिशिंग दी गई है। इसका Crimson Reserve कलर वाला मॉडल हमने रिव्यू किया है, जो देखने में बेहद आकर्षक है। इसके चारों ओर गोल्डेन फिनिश दी गई है। फ्रंट के बेजल बेहद ही पतले हैं और सेंटर अलाइंड कैमरा डिजाइन मिलेगा।
Image Source : INDIA TVरेडमी नोट 15 एसई रिव्यू
कंपनी ने इस स्पेशल एडिशन में Redmi Note 15 सीरीज के डिजाइन एलिमेंट का ही इस्तेमाल किया है। फोन की मोटाई 7.35mm है और इसका वजन महज 178 ग्राम है। कम वजन होने की वजह से इसे सिंगल हैंड ऑपरेट किया जा सकता है। कंपनी ने फोन के साथ प्रीमियम कवर दिया है, जो इसे प्रोटेक्ट करता है।
इस स्मार्टफोन में 6.7 इंच का कर्व्ड AMOLED डिस्प्ले दिया गया है। फोन का डिस्प्ले 120Hz रिफ्रेश रेट और 3200 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस को सपोर्ट करता है। डिस्प्ले की ब्राइटनेस अच्छी होने की वजह से आप डायरेक्ट सनलाइट में भी इसे यूज कर सकते हैं। वहीं, इंडोर में अडेप्टिव ब्राइटनेस फीचर मिलता है, जिसकी वजह से फोन पर कंटेंट स्ट्रीम करना और गेमिंग आपको अच्छा लगेगा। ओवरऑल इस फोन का डिजाइन और डिस्प्ले हमें काफी इंप्रेसिव लगा है।
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Redmi Note 15 SE की परफॉर्मेंस
शाओमी ने अपने इस बजट फोन में Qualcomm Snapdragon 6 Gen 3 चिपसेट का इस्तेमाल किया है। हमने इसके 8GB RAM + 256GB वाला टॉप वेरिएंट यूज किया है। मल्टी टास्किंग और डेली यूज में हमें इस फोन की परफॉर्मेंस अच्छी लगी है। एक साथ कई ऐप्स ओपन करने के बाद भी फोन स्मूदली काम करता है। वहीं, गेमिंग के दौरान भी हमें फोन की परफॉर्मेंस में गिरावट देखने को नहीं मिली है। हालांकि, वीडियो स्ट्रीमिंग करते समय फोन का बैक हल्का गर्म होता है। वहीं, वीडियोग्राफी के दौरान भी इसमें हीटिंग की थोड़ी-बहुत दिक्कत आती है।
इस फोन में कंपनी ने Android 16 पर बेस्ड HyperOS 3 ऑपरेटिंग सिस्टम यूज किया है। शाओमी का नया HyperOS काफी इंप्रूव्ड है। इसमें आपको कई उपयोगी टूल्स मिल जाते हैं। हालांकि, फोन में कंपनी ने कई प्री-इंस्टॉल्ड ऐप्स भी दिए हैं, जिन्हें आप डिलीट कर सकते हैं। यही नहीं, इसमें PhonePe का Indus App Store भी मिलेगा, जहां से आप बिना गूगल में लॉग-इन किए ऐप डाउनलोड कर सकते हैं।
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Redmi Note 15 SE का बैटरी बैकअप
रेडमी के इस फोन में इन दिनों लॉन्च होने वाले फोन की तरह ज्यादा बड़ी बैटरी नहीं मिलेगी। कंपनी ने इसमें 5,800mAh की बैटरी दी है, जो दिन भर इस्तेमाल करने के लिए पर्याप्त है। एक बार फोन को फुल चार्ज करने के बाद पूरे दिन भर आप इसे यूज कर सकते हैं। फोन का बैटरी बैकअप भी अच्छा है। हालांकि, कंपनी ने इसके साथ 45W का चार्जिंग सपोर्ट दिया है, जिसकी वजह से बैटरी को चार्ज होने में थोड़ा ज्यादा समय लगता है। इसे फुल चार्ज होने में तकरीबन 80 से 85 मिनट का समय लगता है। बैटरी के मामले में भी फोन ने हमें इंप्रेस किया है।
Redmi Note 15 SE का कैमरा
रेडमी के इस बजट फोन के कैमरे की बात करें तो बैक में सेंटर अलाइंड कैमरा मॉड्यूल मिलेगा। इसमें दो कैमरे दिए गए हैं। इसके साथ एक LED फ्लैश दिया गया है। इसमें 50MP का मेन यानी प्राइमरी कैमरा दिया गया है। वहीं, फोन में 2MP का एक डेप्थ सेंसर मिलता है।
फोन के प्राइमरी कैमरा से दिन के समय ली गई तस्वीर में आपको डिटेलिंग देखने को मिलती है। हालांकि, ज्यादा जूम करने पर तस्वीर पिक्सलेट होती है। कैमरा ऐप में AI फीचर का इस्तेमाल किया गया है, जो खींची गई तस्वीर के डायनैमिक रेंज को इन्हांस करता है। इस फोन का कैमरा 4K वीडियो रिकॉर्डिंग 30fps पर सपोर्ट करता है। वहीं, लो लाइट में फोन से ली गई तस्वीर इतनी इंप्रेसिव नहीं है।
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सेल्फी की बात करें तो कंपनी ने इसमें 20MP का फ्रंट कैमरा यूज किया है। यह कैमरा भी अच्छी लाइट और रोशनी में ठीक-ठाक तस्वीर क्लिक कर सकता है। खास तौर पर सोशल मीडिया अपलोड्स और रील्स आदि बनाने के लिए फोन का फ्रंट कैमरा बेहतर काम करता है। लो-लाइट में सेल्फी कैमरा भी एवरेज ही काम करेगा।
Image Source : INDIA TVरेडमी नोट 15 एसई रिव्यू
Redmi Note 15 SE हमें कैसा लगा?
रेडमी का यह फोन 22,999 रुपये की शुरुआती कीमत में आता है। इस प्राइस रेंज में आपको अन्य ब्रांड के भी फोन मिल जाएंगे, जो इससे थोड़े बेहतर फीचर्स के साथ आते हैं। हालांकि, फोन का डिजाइन और लुक हमें काफी प्रीमियम लगा है। परफॉर्मेंस के मामले में भी फोन ने हमें निराश नहीं किया है। फोन का कैमरा फीचर थोड़ा और बेहतर हो सकता था। वहीं, बैटरी को भी बढ़ाई जा सकती थी। अगर, आप 25,000 रुपये की प्राइस रेंज में Android फोन खोज रहे हैं तो इसे भी अपनी लिस्ट में शामिल कर सकते हैं।