Tuesday, June 2, 2026
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रामपुर में चाय कारोबारी के प्रतिष्ठान पर छापेमारी: 17 क्विंटल से ज्यादा चाय पत्ती जब्त, बिना लाइसेंस चल रही पैकिंग यूनिट सील – Rampur News




रामपुर में खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन विभाग ने चाय कारोबार से जुड़े एक प्रतिष्ठान पर बड़ी कार्रवाई करते हुए 17 क्विंटल से अधिक चाय पत्ती जब्त की है। जांच में बिना लाइसेंस चाय की रिपैकिंग और पैकिंग यूनिट संचालित होने का मामला सामने आया, जिसके बाद विभाग ने मशीन सील कर दी। मौके से लिए गए नमूनों को जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा गया है।
जिलाधिकारी अजय कुमार द्विवेदी के निर्देश पर सहायक आयुक्त (खाद्य) सुनील कुमार शर्मा के नेतृत्व में खाद्य विभाग की टीम ने जजेस कॉलोनी, हजारा बाग और बरेली गेट स्थित राजा टी ट्रेडर्स पर छापेमारी की। कार्रवाई के दौरान विभिन्न ब्रांडों की कुल 17 क्विंटल 24 किलोग्राम चाय पत्ती का स्टॉक बरामद हुआ, जिसकी अनुमानित कीमत 3.08 लाख रुपये से अधिक आंकी गई है। विभागीय अधिकारियों ने मौके से चाय पत्ती के पांच नमूने भी जांच के लिए संग्रहित किए।
जांच में पता चला कि प्रतिष्ठान पर वैध लाइसेंस के बिना चाय की रिपैकिंग की जा रही थी। टीम ने चाय पत्ती की पैकिंग और उस पर निर्माण संबंधी विवरण अंकित करने वाली मशीन को संचालित अवस्था में पाया। नियमों के उल्लंघन पर विभाग ने मशीन और पैकिंग यूनिट को तत्काल सील कर दिया। अधिकारियों के अनुसार, सभी नमूनों को परीक्षण के लिए प्रयोगशाला भेज दिया गया है। रिपोर्ट में मिलावट या अन्य अनियमितता मिलने पर संबंधित कारोबारी के खिलाफ खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम के तहत कार्रवाई की जाएगी। वहीं बिना लाइसेंस कारोबार संचालित करने के मामले में न्यायालय में वाद भी दायर किया जाएगा। इस छापेमारी में खाद्य सुरक्षा अधिकारी मनोज कुमार, राहुल शुक्ला, धर्मपाल सिंह, देवकांत और शहाबुद्दीन दोस्त सहित विभागीय टीम शामिल रही। 3 लाख से ज्यादा की चाय पत्ती जब्त
छापेमारी में 17 क्विंटल 24 किलोग्राम चाय पत्ती बरामद हुई, जिसकी अनुमानित कीमत 3,08,660 रुपये बताई गई है। विभाग ने पांच नमूने जांच के लिए भेजे हैं।
बिना लाइसेंस चल रही थी रिपैकिंग यूनिट
जांच में प्रतिष्ठान पर वैध लाइसेंस के बिना चाय की रिपैकिंग और पैकिंग कार्य संचालित मिलता पाया गया। विभाग ने पैकिंग मशीन को सील कर आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है।



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जमुई में झाझा थाने का ड्राइवर रिश्वत लेते गिरफ्तार: निगरानी टीम ने अवैध बालू कारोबार में 12 हजार रुपए के साथ पकड़ा – Jamui News




जमुई में निगरानी विभाग ने अवैध बालू उठाव और परिवहन से जुड़े भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई की है। झाझा थाना में पदस्थापित सरकारी चालक जितेंद्र कुमार को रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया गया। चालक जितेंद्र कुमार पर अवैध बालू कारोबार से जुड़े लोगों से सुविधा देने के नाम पर नियमित रूप से अवैध वसूली का आरोप था। वह अवैध बालू ढोने वाले ट्रैक्टर चालकों से प्रति ट्रैक्टर प्रतिदिन तीन हजार रुपये की मांग करता था। आरोपों की पुष्टि होने पर एक योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया इस मामले की शिकायत ट्रैक्टर चालक उमेश यादव ने निगरानी विभाग से की थी। विभाग ने आरोपों की पुष्टि होने पर एक योजनाबद्ध तरीके से जाल बिछाया। चालक जितेंद्र कुमार को 12 हजार रुपये रिश्वत लेते हुए रंगेहाथ गिरफ्तार किया गया और घूस की पूरी राशि भी बरामद कर ली गई। सूत्रों के अनुसार, इस मामले में झाझा थाना प्रभारी की संलिप्तता को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। हालांकि, इस संबंध में अभी तक किसी अधिकारी द्वारा आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई है। जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी निगरानी विभाग पूरे मामले की जांच कर रहा है और जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अधिकारियों ने बताया कि अवैध बालू कारोबार और उससे जुड़े भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। गिरफ्तारी के बाद निगरानी विभाग की टीम आरोपी चालक को अपने साथ ले गई, जहां उससे पूछताछ जारी है।



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दिल्ली में परिजनों ने सड़क पर शव रखकर किया प्रदर्शन: बोले- आरोपियों का एनकाउंटर करें; गोली मारकर की थी हत्या – New Delhi News




दिल्ली में साउथ ईस्ट जिले के अमर कॉलोनी थाना इलाके में गत 26 मई को साईं कुमार को गोली मार दी थी। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई थी। मंगलवार को पुलिस ने पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया। परिजनों ने शव को सड़क पर रखकर प्रदर्शन किया। वहीं मृतक के परिजन आरोपियों के एनकाउंटर की मांग कर रहे हैं। प्रदर्शन की जानकारी मिलते ही मौके पर पुलिस के आला अधिकारी पहुंच गए। पुलिस ने लोगों को समझाकर शांत कराया। क्राइम ब्रांच ने इस मामले में एक नाबालिग समेत 3 आरोपियों को पकड़ा है। वहीं एक नाबालिग अभी भी इस मामले में फरार है। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर मामले की छानबीन कर रही है। बता दें कि साउथ ईस्ट जिले के अमर कॉलोनी इलाके के एक रेस्तरां में एक 17 वर्षीय किशोर के सिर में गोली मारने का मामला सामने आया था। क्राइम ब्रांच ने नाबालिग समेत 3 आरोपियों को पकड़ा आरोपियों को पकड़ने के लिए क्राइम ब्रांच को भी जिम्मा सौंपा गया। टीम ने गुप्त सूचना के बाद नाबालिग समेत 3 आरोपियों को पकड़ा। इस संबंध में किशोरी ने पुलिस को बताया था कि वह अपने दोस्त के साथ रेस्तरां में बैठी थी। तभी वहां मौजूद लड़कों में से एक ने उसकी बगल वाली कुर्सी के साथ छेड़छाड़ शुरू कर दी। साईं ने इस पर आपत्ति जताई तो वह लड़का साईं को घूरने लगा। साईं ने किशोरी से कहा कि वह जल्दी से खाना खत्म कर वहां से निकल जाए। इस बीच आरोपी भी कुछ देर के लिए वहां से चले गए, लेकिन थोड़ी ही देर बाद वे वापस लौट आए। जिस लड़के ने साईं को गाली दी थी, उसने साई के सिर के पीछे गोली मारी थी। इसके बाद वे फरार हो गए।



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मुड़े हुए पैरों वाले 4 नवजात बच्चों को मिला सहारा: खरगोन में जन्मजात विकृति से जूझ रहे थे बच्चे, उपचार के बाद पहनाए गए विशेष ब्रेसेस – Khargone News




खरगोन जिला अस्पताल में विश्व क्लब फुट दिवस के अवसर पर क्लब फुट से पीड़ित चार नवजात बच्चों को विशेष ब्रेसेस (विशेष जूते) प्रदान किए गए। इन बच्चों का चरणबद्ध प्लास्टर उपचार सफलतापूर्वक पूरा होने के बाद उन्हें यह विशेष जूते पहनाए गए, ताकि भविष्य में उनके पैरों की विकृति दोबारा न हो और वे सामान्य बच्चों की तरह चल-फिर सकें। इस अवसर पर सिरवेल गांव की 22 दिन की जुड़वा बच्चियां गीता और मनीषा, पिता अनिल किराड़े, चिपीपुरा की 19 दिन की साक्षी, पिता ओमकार, तथा झिरन्या के 45 दिन के वासु, पिता जितेंद्र राठौड़ को विशेष जूते प्रदान किए गए। डॉक्टर बोले- जन्मजात विकृति थी जिला अस्पताल के हड्डी रोग विशेषज्ञ डॉ. अशोक वास्के की देखरेख में इन बच्चों का उपचार किया गया। उन्होंने बताया कि क्लब फुट एक जन्मजात विकृति है, जिसमें शिशु के एक या दोनों पैर अंदर और नीचे की ओर मुड़े हुए होते हैं। यदि समय रहते इसका उपचार नहीं कराया जाए, तो बच्चे को आगे चलकर चलने-फिरने में गंभीर परेशानी हो सकती है। डॉ. वास्के ने बताया कि इस बीमारी के उपचार में पैर को धीरे-धीरे सही स्थिति में लाने के लिए क्रमिक रूप से प्लास्टर लगाए जाते हैं। कई मामलों में आवश्यकता पड़ने पर छोटी शल्य क्रिया भी की जाती है। उपचार पूरा होने के बाद बच्चों को विशेष ब्रेसेस या जूते पहनाए जाते हैं, जिससे पैर सही स्थिति में बने रहते हैं और विकृति दोबारा विकसित नहीं होती। समय पर इलाज से सामान्य जीवन संभव विशेषज्ञों का कहना है कि यदि क्लब फुट की पहचान जन्म के तुरंत बाद हो जाए और समय पर उपचार शुरू कर दिया जाए, तो अधिकांश बच्चे पूरी तरह सामान्य जीवन जी सकते हैं। इसके लिए माता-पिता को जागरूक रहना और नियमित उपचार कराना जरूरी है। कार्यक्रम के दौरान डीईआईसी मैनेजर विनोद पवार, डॉ. शुभम महाजन और अनुष्का फाउंडेशन के मनोज यादव भी मौजूद रहे। इस मौके पर स्वास्थ्य विभाग ने अभिभावकों से अपील की कि नवजात शिशुओं में यदि पैरों की बनावट असामान्य दिखाई दे तो तुरंत चिकित्सकीय सलाह लें, ताकि समय पर उपचार शुरू किया जा सके और बच्चे को भविष्य में किसी प्रकार की शारीरिक परेशानी का सामना न करना पड़े।



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16 जून को लॉन्च होगा Redmi का 7560mAh बैटरी वाला Turbo फोन


Redmi भारत में 16 जून को दो स्मार्टफोन पेश कर सकता है। कंपनी ने आधिकारिक तौर पर Redmi Turbo 5 की लॉन्च डेट कंफर्म कर दी है। पहले खबरें सामने आ रही थी कि यह फोन 2 जून को लॉन्च किया जाएगा। हालांकि, कंपनी ने आज इसकी लॉन्च डेट ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म Amazon पर रिवील की है। इस टर्बो फोन के अलावा कंपनी Redmi 17 को भी भारतीय बाजार में उतार सकती है। इससे जुड़ी जानकारियां भी सामने आ रही हैं।

Redmi Turbo 5 के फीचर्स

रेडमी का यह फोन चीन में पहले ही लॉन्च हो चुका है। भारत में पेश किए जाने वाले मॉडल में भी चीनी वेरिएंट जैसे फीचर्स दिए जा सकते हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, रेडमी का यह फोन 6.59 इंच के बड़े OLED डिस्प्ले के साथ लॉन्च किया जाएगा। फोन का डिस्प्ले 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट कर सकता है। वहीं, डिस्प्ले की पीक ब्राइटनेस 3,500 निट्स और 480Hz टच सैम्पलिंग रेट मिलने की संभावना है।

चीन में लॉन्च हुए वेरिएंट में कंपनी ने MediaTek Dimensity 8500 Ultra चिपसेट यूज किया है। इस फोन में 16GB रैम और 512GB तक की इंटरनल स्टोरेज दिया जा सकता है। यह फोन डुअल कैमरा सेटअप के साथ आएगा। Turbo 5 में 50MP का मेन और 8MP का अल्ट्रा वाइड कैमरा मिलेगा। साथ ही, इसमें 20MP का सेल्फी कैमरा दिया जा सकता है।










Redmi Turbo 5 संभावित फीचर्स
डिस्प्ले 6.59 इंच, OLED, 120Hz
प्रोसेसर MediaTek Dimensity 8500 Ultra
बैटरी 7560mAh, 100W
स्टोरेज 16GB, 512GB
कैमरा 50MP + 8MP, 20MP
OS Android 16, HyperOS

Redmi का यह अपकमिंग फोन 7,560mAh की तगड़ी बैटरी के साथ लॉन्च किया जा सकता है। इसमें कंपनी 100W फास्ट चार्जिंग और 27W रिवर्स वायर्ड चार्जिंग दे सकती है। यह स्मार्टफोन Android 16 पर बेस्ड Hyper OS के साथ लॉन्च होने की उम्मीद है। इसकी भारत में कीमत 30,000 रुपये से 35,000 रुपये की रेंज में हो सकती है।

Redmi 17 भी होगा पेश?

Redmi Turbo 5 के साथ कंपनी Redmi 17 को भी भारत में लॉन्च कर सकती है। यह फोन 7000mAh की बैटरी के साथ आएगा। फोन में 50MP का रियर और 8MP का सेल्फी कैमरा दिया जा सकता है। रेडमी का यह फोन बजट यूजर्स के लिए पेश किया जाएगा। फोन में 6.9 इंच का बड़ा डिस्प्ले मिल सकता है, जो 144Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करेगा।

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घर पर बचे हैं सिर्फ आलू, कोई बात नहीं, इस तरह बनाएं स्वादिष्ट सब्जी, हर कोई पूछेगा रेसिपी


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Shahi Dum Aloo Recipe: अगर घर में कोई और सब्जी न हो और सिर्फ आलू बचे हों, तो परेशान होने की जरूरत नहीं है. बिना टमाटर-प्याज के सिर्फ दही और मसालों का उपयोग करके स्वादिष्ट शाही दम आलू बना सकते हैं. इसकी रेसिपी भी बेहद आसान है और इसका स्वाद बिल्कुल रेस्टोरेंट जैसा आएगा. एक बार बनाने के बाद आप इस डिश को बार-बार बनाएंगे.

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घर पर आलू और दही से टेस्टी शाही दम आलू बना सकते हैं.

Shahi Dum Aloo Recipe: कई बार बाजार जाने का टाइम नहीं मिल पाता है और घर पर हरी सब्जियां खत्म हो जाती हैं. अधिकतर घरों में आलू हमेशा रखा रहता है, क्योंकि यह लंबे समय तक खराब नहीं होता है. तमाम लोग आलू का बोरा खरीदकर रख लेते हैं और उसे इस्तेमाल करते रहते हैं. अगर आपके घर में घर में हरी सब्जियां खत्म हो गई हैं और सिर्फ आलू बचे हैं, तो चिंता करने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. अक्सर लोग सोचते हैं कि सिर्फ आलू से क्या खास बनेगा, लेकिन आज आपको आलू की एक ऐसी लाजवाब और शाही रेसिपी बताने जा रहे हैं, जिसे खाकर हर कोई आपकी तारीफ करते नहीं थकेगा. यह डिश शाही दम आलू है, जिसे आप आलू, दही और मसालों से तैयार कर सकते हैं. इसकी रेसिपी बहुत आसान है.

शाही दम आलू के लिए जरूरी सामग्री

इस स्वादिष्ट सब्जी को बनाने के लिए आपको चाहिए 5-6 उबले और छिले हुए मीडियम साइज के आलू. ग्रेवी तैयार करने के लिए 1 कप ताजा दही लें. तड़के के लिए 2 चम्मच तेल या घी, 1 छोटा चम्मच जीरा, 1 तेजपत्ता, 1 दालचीनी का टुकड़ा और 2 लौंग की आवश्यकता होगी. मसालों में आपको 1 छोटा चम्मच हल्दी पाउडर, 1.5 छोटा चम्मच कश्मीरी लाल मिर्च पाउडर, 1 चम्मच धनिया पाउडर, आधा छोटा चम्मच गरम मसाला और स्वादानुसार नमक लेना है. आखिर में सब्जी का स्वाद दोगुना करने वाले खास ट्विस्ट के लिए 1 चम्मच कसूरी मेथी और बारीक कटा हुआ हरा धनिया पास रख लें.

शाही दम आलू बनाने की विधि

सबसे पहले उबले हुए आलुओं को छील लें. अब एक कांटे या टूथपिक की मदद से आलुओं में चारों तरफ छोटे-छोटे छेद कर लें. इससे मसालों का रस आलू के अंदर तक चला जाएगा. एक कढ़ाई में 2 चम्मच तेल या घी गर्म करें. इसमें आलुओं को डालकर तब तक फ्राई करें जब तक कि उन पर एक हल्की सुनहरी परत न आ जाए. फ्राई करने के बाद आलुओं को एक प्लेट में निकाल लें.

अब एक कटोरी में 1 कप दही लें. इसमें हल्दी, कश्मीरी लाल मिर्च पाउडर और धनिया पाउडर डालकर अच्छी तरह फेंट लें. इसके बाद कढ़ाई के तेल में जीरा, तेजपत्ता, लौंग और दालचीनी डालें. जब मसाले चटकने लगें, तो गैस की आंच को बिल्कुल धीमा कर दें. अब इसमें दही और मसालों का मिश्रण डालें और लगातार चलाते रहें. इसे तब तक चलाना है जब तक कि ग्रेवी में उबाल न आ जाए और तेल ऊपर न तैरने लगे.

जब ग्रेवी तेल छोड़ दे, तो इसमें फ्राई किए हुए आलू और स्वाद अनुसार नमक डाल दें. ग्रेवी को गाढ़ा रखने के लिए आधा कप गुनगुना पानी मिलाएं. अब कढ़ाई को ढक्कन से ढक दें और धीमी आंच पर 5 से 7 मिनट के लिए पकने दें ताकि आलू सारे मसालों को सोख लें. आखिर में ऊपर से गरम मसाला और हाथों से क्रश की हुई कसूरी मेथी डालें. 1 मिनट और पकाने के बाद गैस बंद कर दें और ऊपर से हरा धनिया डालकर सजाएं.

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अमित उपाध्याय

अमित उपाध्याय News18 हिंदी की लाइफस्टाइल टीम के अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास प्रिंट और डिजिटल मीडिया में 9 वर्षों से अधिक का अनुभव है। वे हेल्थ, वेलनेस और लाइफस्टाइल से जुड़ी रिसर्च-बेस्ड और डॉक्टर्स के इंटरव्…और पढ़ें



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सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने पर चर्चा: सहकारी समितियों के बैंक खाते, माइक्रो एटीएम, रूपे किसान क्रेडिट कार्ड वितरण पर जोर – jhalawar News




झालावाड़ में मंगलवार को केंद्रीय सहकारी बैंक मुख्यालय स्थित सहकार भवन में ‘सहकारिता में सरकार’ विषय पर एक जिला स्तरीय कार्यशाला एवं समीक्षा बैठक आयोजित की गई। इसकी अध्यक्षता केंद्रीय सहकारी बैंक के प्रबंध निदेशक ओमप्रकाश जैन ने की। कार्यशाला में सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने, किसानों को बैंकिंग सेवाओं से जोड़ने और केंद्र व राज्य सरकार की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करने पर विस्तृत चर्चा हुई। अभियान के तहत सहकारी समितियों और उनके सदस्यों के खाते केंद्रीय सहकारी बैंक में खोलने पर जोर दिया गया। इसके अतिरिक्त डेयरी और अन्य प्राथमिक सहकारी समितियों को बैंक मित्र नियुक्त कर माइक्रो एटीएम उपलब्ध कराने और दुग्ध उत्पादक किसानों को रूपे किसान क्रेडिट कार्ड वितरित करने जैसे महत्वपूर्ण कार्य किए जा रहे हैं। जिले की 19 प्राथमिक डेयरी समितियों और 48 पैक्स समितियों को रियायती दरों पर माइक्रो एटीएम वितरित किए गए हैं, जिससे ग्रामीण क्षेत्रों में बैंकिंग सेवाओं की पहुंच आसान होगी। प्रबंध निदेशक ओमप्रकाश जैन ने बताया कि बैंक कार्यक्षेत्र में संचालित सभी 294 सक्रिय दुग्ध उत्पादक सहकारी समितियों के खाते केंद्रीय सहकारी बैंक में हैं, जिनमें 128.63 लाख रुपए से अधिक की राशि जमा है। मत्स्य पालन विभाग की समितियों के खातों को भी नियमित रूप से बैंकिंग व्यवस्था से जोड़ने के निर्देश दिए गए हैं। रूपे किसान क्रेडिट कार्ड वितरण अभियान के तहत बैंक ने बड़े पैमाने पर कार्रवाई शुरू कर दी है। बैंक कार्यक्षेत्र के लिए लगभग 5000 रूपे किसान क्रेडिट कार्ड के आवेदन प्राप्त हुए हैं। कार्ड मिलने पर डेयरी समितियों से जुड़े पात्र खाताधारकों को इनका वितरण किया जाएगा। इस दौरान 10 एटीएम कार्ड भी वितरित किए गए। कार्यशाला में नाबार्ड के जिला विकास प्रबंधक ने भारत सरकार के सहकारिता मंत्रालय के राष्ट्रव्यापी अभियान ‘सहकारिता में सरकार’ की जानकारी दी। उन्होंने सभी सहकारी संस्थाओं और हितधारकों को अपने-अपने क्षेत्र में ब्लॉक स्तर पर ऐसे कार्यक्रम आयोजित करने के निर्देश दिए। कार्यशाला के अंत में सहकारिता क्षेत्र को और अधिक सशक्त एवं जनहितैषी बनाने के लिए विभिन्न विभागों के बीच समन्वय बढ़ाने तथा अभियान को जमीनी स्तर तक पहुंचाने का संकल्प लिया गया। दो दिवसीय “टाइगर प्रदर्शनी” का आयोजन 5 से जिला प्रशासन झालावाड़ की ओर से संचालित “वंदे गंगा जल संरक्षण जन अभियान ” के तहत विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर 5 एवं 6 जून को विजया राजे सिंधिया राजकीय खेल संकुल, झालावाड़ में दो दिवसीय “टाइगर प्रदर्शनी” का आयोजन किया जाएगा। प्रदर्शनी का शुभारंभ 5 जून को सवेरे 9 बजे होगा। जिला कलेक्टर अजय सिंह राठौड़ ने बताया कि प्रदर्शनी का उद्देश्य आमजन, विशेषकर युवाओं एवं स्टूडेंट्स में वन्यजीव संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन तथा प्राकृतिक संसाधनों के संरक्षण के प्रति जागरूकता विकसित करना है। बाघों के जीवन चक्र, व्यवहार, संरक्षण प्रयासों, वन पारिस्थितिकी तंत्र में उनकी भूमिका तथा वन्यजीवों के संरक्षण से जुड़े प्रेरक संदेशों को आकर्षक चित्रों, फोटोग्राफ्स एवं जानकारीपूर्ण सामग्री के माध्यम से प्रदर्शित किया जाएगा। आयोजन भविष्य में टाइगर सफारी एवं ईको-टूरिज्म जैसी अवधारणाओं के प्रति जनजागरूकता बढ़ाने में भी सहायक सिद्ध होंगे। प्रदर्शनी के माध्यम से आमजन को वन्यजीव संरक्षण और पर्यटन विकास के बीच के संबंध से अवगत कराया जाएगा, जिससे प्राकृतिक धरों के संरक्षण के साथ-साथ क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को प्रोत्साहन मिल सके। यह आयोजन प्रकृति, वन्यजीव एवं पर्यावरण के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करते हुए आने वाली पीढ़ियों में संरक्षण की भावना को सुदृढ़ करेगा। जिला प्रशासन द्वारा आमजन से प्रदर्शनी में अधिकाधिक संख्या में पहुंचकर पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण के प्रति अपनी सहभागिता सुनिश्चित करने की अपील की गई है। अभियान के तहत आयोजित यह प्रदर्शनी पर्यावरण संरक्षण के प्रति जनभागीदारी को बढ़ावा देने के साथ-साथ प्रकृति और वन्यजीवों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करने, पर्यटन संभावनाओं को रेखांकित करने और वन्यजीव संरक्षण के प्रति व्यापक जनजागरूकता उत्पन्न करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।



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1968 की वो ब्लॉकबस्टर फिल्म, जिसमें था लता मंगेशकर का सुपरहिट गाना, मूवी ने रचा इतिहास


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रामायण जैसा कालजयी टीवी सीरियल बनाने वाले रामानंद सागर ने फिल्म इंडस्ट्री में अपना सफर स्क्रीनप्ले राइटर के रूप में शुरुआत की. राज कपूर की 1949 में आई क्लासिक फिल्म बरसात के राइटर थे. ‘रामायण’ से पहले रामानंद सागर ने 60-70 के दशक में कई सफल फिल्में भी बनाईं. अमिताभ बच्चन-रेखा से हमेशा उन्होंने दूरी ही बरती. बॉलीवुड के एक किलर लुक हीरो को बहुत पसंद करते थे. 8 साल में इस हीरो के साथ दो फिल्में बनाईं, दोनों ही मैसिव रहीं.

‘रामायण’ जैसा सीरियल बनाने वाले मशहूर निर्माता-निर्देशक रामानंद सागर ने करीब तीन दशक फिल्में बनाईं. फिल्म इंडस्ट्री में वैसे तो उन्होंने अपनी शुरुआत पटकथा लेखक के तौर पर की थी. उन्होंने घूंघट, जिंदगी और आरजू (1965) जैसी हिट फिल्में बनाई. रामानंद सागर धर्मेंद्र के फैन थे. उन्होंने धर्मेंद्र के साथ 8 साल के अंतराल में दो फिल्में बनाईं. दोनों ही फिल्में मैसिव हिट रहीं. ये फिल्में थीं : आंखें और चरस. आइये जानते हैं इन फिल्मों से जुड़े दिलचस्प फैक्ट्स…….

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सबसे पहले बात करते हैं 1968 में रिलीज हुई फिल्म ‘आंखें’ की. धर्मेंद्र-माला सिन्हा स्टारर इस फिल्म की शुरुआत में एक शेर ‘उस मुल्क की सरहद को कोई छू नहीं सकता, जिस सरहद पर निगाहबान हैं आंखें’ सुनाई देता है. फिल्म के कुछ हिस्से की शूटिंग जापान में भी हुई थी. आंखें एक स्पाइ थ्रिलर फिल्म थी. महमूद, ललिता पवार, जीवन और मदन पुरी भी सहायक भूमिकाओं में थे. फिल्म का सदाबहार म्यूजिक रवि ने कंपोज किया था. गीतकार साहिर लुधियानवी थे.

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फिल्म का सबसे पॉप्युलर गाना ‘मिलती है जिंदगी में मुहब्बत कभी-कभी’ था. इसके अलावा ‘गैरों पे करम, अपनों पे सितम, ऐ जाने वफा ये जुल्म ना कर’ गाना भी खूब पॉप्युलर हुआ. ‘मिलती है जिंदगी में मुहब्बत कभी-कभी’ गाना जापान में शूट हुआ था. यह गाना साहिर लुधियानवी ने नाजिर काजमी के शेर ‘ऐ दिल कैसे नसीब ये तौफीक-ए-इजतराब, मिलती है जिंदगी में ये राहत कभी-कभी’ से इंस्पायर्ड होकर लिखा था. रामानंद सागर की पहली फिल्म थी जिसकी शूटिंग विदेश में हुई थी. यह पहली हिंदी फिल्म है जिसकी शूटिंग इजराइल के बेरुत में हुई थी.

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‘आंखें’ फिल्म से जुड़ा सबसे दिलचस्प किस्सा राज कुमार से जुड़ा है. रामानंद सागर ने उन्हें लीड रोल ऑफर किया था. स्क्रिप्ट सुनने के बाद उन्होंने अपने कुत्ते को बुलाया और पूछा कि क्या वो इस फिल्म में काम करना चाहेगा. कुत्ते ने कुछ रिस्पांस नहीं दिया. राज कुमार ने कहा कि मेरा कुत्ता भी यह रोल नहीं करना चाहता तो मैं कैसे कर लूं?

फिल्म का एक गाना ‘मेरी सुन ले अर्ज बनवारी, तेरे द्वार खड़ी दुखियारी’ में भगवान कृष्ण की मूर्ति आर्ट डायरेक्टर ने मंगवाई थी. गाना फिल्माने के बाद रामानंद सागर इस मार्बल की मूर्ति घर ले गए थे. वो कृष्ण के बहुत बड़े उपासक थे. उन्होंने फिल्म के क्लाइमैक्स में भगवान कृष्ण की शक्ति भी बहुत ही रोमांचक अंदाज में दिखाई थी. 1.2 करोड़ के बजट में बनी ‘आंखें’ ने 3.25 करोड़ का कलेक्शन किया था. यह एक ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई थी.

रामानंद सागर ने 70 के दशक में एक बार फिर से धर्मेंद्र के साथ फिल्म बनाई. 1972 में युगांडा से एशियाई देश के रहवासियों को निकाला जा रहा था. इस बात को ‘चरस’ की कहानी का आधार फिल्म बनाई गई. धर्मेंद्र-हेमा मालिनी लीड रोल में थे. टॉम अल्टर की यह पहली फिल्म थी. डायलॉग वेद राही ने लिखे थे. स्क्रीनप्ले मोती सागर ने लिखे थे. फिल्म के लेखक-निर्माता-निर्देशक रामानंद सागर थे. फिल्म के प्रमोशन में ‘हॉटेस्ट रोमांस ऑफ द ईयर’ शब्द यूज किया गया था क्योंकि उन दिनों धर्मेंद्र-हेमा मालिनी का रोमांस पीक पर था. फिल्म की शूटिंग यूरोप के कई देशों जैसे इटली, स्विस, फ्रांस और माल्टा में की गई थी.

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फिल्म का म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने कंपोज किया था. फिल्म के दो गाने असाधारण थे. ये गाने थे : कल की हसीन मुलाकात के लिए, हम तुम जुदा हो जाते हैं, अच्छा चलो सो जाते हैं और ‘आ जा तेरी याद आई.’ यह गाना फिल्म की बैकबोन था. गानों का प्लेसमेंट लाजवाब था. ‘चरस’ से पहले अमजद खान की फिल्म ‘शोले’ 1975 में ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी. अमजद खान को लोग ‘गब्बर सिंह’ के नाम से जानते थे. इसका फायदा रामानंद सागर को मिला. डिस्ट्रीब्यूटर्स से उन्हें मुंहमागा पैसा मिला. फिल्म का बजट 1.45 करोड़ था और मूवी ने 1.8 करोड़ रुपये की कमाई की थी. फिल्म हिट रही थी. हकीकत यह थी कि फिल्म से इससे कहीं ज्यादा कमाई हुई थी. यह मामला 2017 में सामने आया था. सागर परिवार पर इनकम टैक्स की चोरी का आरोप लगा. परिवार को 6 लाख का जुर्माना भरना पड़ा था.

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महाराजगंज के सोहगीबरवा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के बीच सदियों से खड़ा है यह लकड़ी का पुल


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जहां आज के आधुनिक दौर में आधुनिक टेक्नोलॉजी का प्रयोग हो रहा है तो वहीं यह लकड़ी का पूल आज भी इन दूर दराज के क्षेत्र में अपनी उपयोगिता साबित कर रहा है. सोहगीबरवा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के बीच मौजूद इस पूल को देखने पर हमें पुराने ऐतिहासिक दृश्य जैसा लगता है. इसमें प्रयोग हुए लकड़ी काफी जर्जर हो चुके हैं इसके बावजूद भी यहां से लोगों को गुजरते हुए देखा जाता है.

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महराजगंज: महराजगंज जिले के चौक क्षेत्र के घने जंगलों के बीच में एक बहुत ही अनोखा लकड़ी से बना पुल देखने को मिलता है. जो देखने में काफी आकर्षक लगता है. इसकी बनावट देखकर ऐसा लगता है कि यह आज से नहीं बल्कि सदियों से यहां खड़ा है, जो अपनी मजबूत और टिकाऊ होने की वजह से आज भी इस स्थिति में है. लकड़ी से बने इस पूल की बात करें तो यह एक नाले के ऊपर बना है जहां से जंगल के बीच रहने वाले लोग और आसपास के लोग इधर से आवागमन करते हैं.

जहां आज के आधुनिक दौर में आधुनिक टेक्नोलॉजी का प्रयोग हो रहा है तो वहीं यह लकड़ी का पूल आज भी इन दूर दराज के क्षेत्र में अपनी उपयोगिता साबित कर रहा है. सोहगीबरवा वाइल्ड लाइफ सेंचुरी के बीच मौजूद इस पूल को देखने पर हमें पुराने ऐतिहासिक दृश्य जैसा लगता है. इसमें प्रयोग हुए लकड़ी काफी जर्जर हो चुके हैं इसके बावजूद भी यहां से लोगों को गुजरते हुए देखा जाता है.

पुल की ज्यादातर पटरियां टूटी

सदियों बीत जाने के बावजूद भी यह पूल यूंही खड़ा है. खास बात है कि इसके नीचे पिलर से बना लकड़ी का बेस पूरी तरह पानी में रहता है लेकिन आज भी बहुत कमजोर नहीं दिखता बल्कि इस पूल का पूरा भार अपने ऊपर लिए खड़ा है. मौजूदा समय में यह काफी सकरा हो गया है लेकिन पहले ऐसा नहीं था यह पूल पहले काफी चौड़ा होता था. जब आप इसके स्ट्रक्चर को देखेंगे तो इस बात का अंदाजा लगा सकते हैं कि यह पहले कितना चौड़ा हुआ करता था. पूल इतना पुराना है कि इसकी ज्यादातर पटरियां उखड़ चुकी हैं लेकिन स्थानीय लोगों ने आवागमन की सुविधा के लिए टूटे हुए पटरियों की जगह पर पेड़ की शाखों का इस्तेमाल किया है. वर्तमान समय में भी यहां के स्थानीय लोग इसका इस्तेमाल कर रहे हैं और रोजाना इसी पूल से होकर आते जाते भी है. बीच जंगल में खड़ा यह पूल वर्षों से यहां के लोगों को मुख्य धारा से जोड़ने का काम कर रहा है. जंगल में कई ऐसे गांव हैं जिनके लिए यह पूल बहुत ही महत्वपूर्ण हो जाता है.

इस क्षेत्र का इतिहास बन चुका है यह पुल

बहुत से लोग ऐसा बताते हैं कि यह पूल आज से नहीं बल्कि बहुत समय से यहां पर है. हालांकि इसकी उम्र का अंदाजा लगाना आज के समय में संभव नहीं है. आज के समय में यह पूल सिर्फ आवागमन का साधन ही नहीं है बल्कि इस क्षेत्र के इतिहास का एक हिस्सा बन चुका है. घने जंगलों के बीच मौजूद होने की वजह से इसके आसपास का प्राकृतिक सौंदर्य भी लोगों को खूब आकर्षित करता है. चारों तरफ फैली हरियाली, ऊंचे पेड़ और नीचे बहता पानी इसको और भी खूबसूरत बनाता है. समय समय पर सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर इसके फोटोज और वीडियो देखने को मिलता है. स्थानीय लोगों की ऐसी मांग है कि इस पूल को सही करने की जरूरत है जिससे लोगों को आने-जाने में आसानी हो सके क्योंकि यह जर्जर हो चुका है जिस पर आना-जाना बहुत खतरे भरा हो गया है.

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Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें



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अमेरिका फर्स्ट की नीति आप्रवासियों का रहना कठिन बना रही: बच्चों की डे-केयर जैसी सेवाएं घटीं; स्वास्थ्य और वित्तीय सुविधाएं तक रोकी जा रहीं‎




अमेरिका में इमिग्रेशन को लेकर ट्रम्प प्रशासन‎ लगातार सख्त रुख अपनाए हुए है। पिछले एक‎ साल में ऐसे कई कदम उठाए गए हैं, जिनसे‎ इमिग्रेंट्स यानी अप्रवासियों का अमेरिका में रहना‎ और काम करना कठिन हो जाए। नौकरियों, ‎स्वास्थ्य सेवाओं, वित्तीय सुविधाओं, टैक्स लाभ‎ और बच्चों की डे-केयर सेवाओं तक पहुंच ‎सीमित करने जैसी नीतियों पर जोर दिया जा रहा ‎है। प्रशासन का लक्ष्य उन सुविधाओं को कम‎ करना है, जो लंबे समय से लोगों को अमेरिका‎ की ओर आकर्षित करती रही हैं।‎ ट्रम्प संसद को दरकिनार रखकर एक्जीक्यूटिव ‎आदेशों के जरिये इमिग्रेशन नीति को नया रूप दे‎ रहे हैं। इस साल की शुरुआत में प्रमुख शहरों में‎ मिलिट्री के छापों और डिपोर्टेशन के खिलाफ ‎तीखी राजनीतिक प्रतिक्रिया के बाद ट्रम्प प्रशासन‎ अधिक क्रिएटिव और कम विवादित तरीकों पर‎ अमल कर रहा है। इसके तहत इमिग्रेशन व्यवस्था‎ में बदलाव के साथ हजारों लोगों को नौकरियों से ‎निकालने और सरकारी सुविधाएं छीनने जैसे ‎कदम उठाए गए हैं। ट्रम्प के इमिग्रेशन एजेंडे के‎ प्रमुख रणनीतिकार स्टीफन मिलर का तर्क है कि ‎बड़ी संख्या में आने वाले नए प्रवासी अमेरिका‎ की पहचान, सुरक्षा और आर्थिक समृद्धि के लिए‎ चुनौती बन सकते हैं।‎
एल सल्वाडोर की इमिग्रेंट रेक्वेल मोलिना के ‎मामले से ट्रम्प के अभियान को समझा जा‎ सकता है। मोलिना करीब 30 वर्षों से वैध सोशल ‎सिक्योरिटी नंबर और काम की अनुमति के साथ‎ बोस्टन के लोगान इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर‎ विमानों की सफाई का काम कर रही थीं। हाल ही‎ में उन्हें और कई अन्य इमिग्रेंट कर्मचारियों को‎ नौकरी से हटा दिया गया। प्रशासन ने फैसला ‎किया है कि एयरपोर्ट के सुरक्षित क्षेत्रों में अब‎ केवल अमेरिकी नागरिकों, ग्रीन कार्ड धारकों और‎ स्थायी निवासियों को ही प्रवेश मिलेगा। इसी तरह ‎के नियमों के कारण हजारों लोगों की नौकरियां‎ प्रभावित हुई हैं। अमेरिका में शरण लेने की‎ प्रक्रिया भी कठिन बनाई जा रही है। अपने देशों ‎से भागकर अमेरिका पहुंचने वाले कई‎ शरणार्थियों को वर्क परमिट जारी करने पर रोक‎ लगाई जा रही है। इससे उनके लिए आर्थिक रूप‎से आत्मनिर्भर बनना मुश्किल हो सकता है।‎ जापान में भी कई देशों के लोग प्रभावित‎ जापान की सरकार भी ऐसे 47 हजार विदेशियों की जांच कर रही है‎ जो देश में बिजनेस मैनेजर वीसा के तहत रहते हैं। सरकार ने ‎बिजनेस वीसा आवेदकों के लिए पूंजी की सीमा 31 हजार डॉलर से‎ बढ़ाकर एक लाख 88 हजार कर दी है। नए नियम से भारत, नेपाल,‎ श्रीलंका, वियतनाम, थाइलैंड सहित अन्य देशों के लोग अधर में‎ लटक गए हैं। ये जापान के शहरों और गांवों में करी, फ्राइड चावल,‎नूडल्स और अन्य व्यंजन परोसने वाले रेस्तरां चलाते हैं।‎ सजा की धमकियों के बीच एक लाख‎ से अधिक लोगों ने अमेरिका छोड़ा‎ गिरफ्तारियों और सजा की धमकियों के साथ प्रशासन की रणनीति ने‎ कई आप्रवासियों को भूमिगत होने पर मजबूर कर दिया है। उन्हें टैक्स‎ जमा करने, डॉक्टरों के यहां जाने और यात्रा करने से रोका जाता है।‎ अब तक स्थायी कानूनी दर्जे के बिना रहने वाले एक लाख 16 हजार‎ से अधिक लोग स्वेच्छा से अमेरिका छोड़ चुके हैं। इनमें सरकार के‎ सेल्फ डिपोर्टेशन प्रोग्राम के तहत गए कुछ लोग भी शामिल हैं। कई‎ लोग सरकार को बताए बगैर जा चुके हैं।‎ पैरेंट के नागरिक न होने पर अमेरिका में‎ जन्मे बच्चों को भी सुविधाएं नहीं मिलेंगी‎ ट्रम्प की रणनीति से स्थायी निवासियों, शरणार्थियों और उनके‎ परिवारों सहित कई वैध इमिग्रेंट्स भी प्रभावित हुए हैं। किसी पैैरेंट के ‎नागरिक न होने की स्थिति में अमेरिका में जन्मे बच्चों को डे-केयर‎ सुविधाएं लेने से रोकने के लिए नियमों में बदलाव किए जा रहे हैं।‎ ग्रीन कार्ड होल्डरों सहित सभी गैर नागरिकों के सरकारी लोन लेने पर‎ प्रतिबंध है। कई इमिग्रेंट्स को ट्रक ड्राइविंग के लिए कॉमर्शियल‎ ड्राइविंग लाइसेंस नहीं दिए गए हैं।



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