Friday, October 9, 2026
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क्रेशर बस्ती महिला हत्याकांड का खुलासा: देवर ने गला दबाकर की हत्या, पानी से भरे प्लॉट में पत्थर से दबाया शव – Kota News




कोटा के अनंतपुरा थाना पुलिस ने क्रेशर बस्ती में मिले अज्ञात महिला के सड़े-गले शव के मामले का खुलासा करते हुए आरोपी देवा (29) को गिरफ्तार किया है। पुलिस के अनुसार आरोपी ने अपनी भाभी मति उर्फ निशा की गला दबाकर हत्या की थी। इसके बाद पहचान छिपाने के लिए शव को पानी से भरे एक प्लॉट में डालकर पत्थर से दबा दिया था। 29 सितंबर को क्रेशर बस्ती स्थित पानी से भरे प्लॉट में महिला का अर्धनग्न शव मिला था। पुलिस ने आसपास पूछताछ और मुखबिरों से जानकारी जुटाई। जांच में सामने आया कि घटनास्थल के पास एक मकान में देवा एक महिला के साथ रहता था। घटना के बाद मकान बंद मिला। पुलिस ने कनवास क्षेत्र में जानकारी जुटाई तो मृतका की पहचान मति उर्फ निशा के रूप में हुई। उसके दाहिने हाथ पर तीन स्टार का टैटू बना था, जिसके आधार पर परिजनों ने शव की पहचान की। परिजनों के अनुसार निशा का पति रवि कुमार करीब दो माह पहले मर चुका था। इसके बाद निशा अपने देवर देवा के साथ रहने लगी थी। पुलिस के मुताबिक 26 सितंबर की रात दोनों के बीच किसी बात को लेकर विवाद हुआ। इसी दौरान देवा ने निशा का गला दबाकर हत्या कर दी। बाद में शव को क्रेशर बस्ती के पानी से भरे प्लॉट में फेंककर पत्थर से दबा दिया और मौके से फरार हो गया। आरोपी की तलाश में तकनीकी साक्ष्य और मुखबिर तंत्र सक्रिय किया गया। 8 अक्टूबर को सूचना मिली कि देवा कनवास के जंगल में छिपा है। पुलिस टीम ने दबिश देकर उसे गिरफ्तार कर लिया। आरोपी से पूछताछ और मामले में आगे की जांच जारी है।



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एमजेपीआरयू में छात्रों को एआई और मैनेजमेंट की दी जानकारी: साथ ही कैंपस कॉर्पोरेट इंटरेक्शन का आयोजन हुआ – Bareilly News




बरेली के महात्मा ज्योतिबा फुले रुहेलखंड विश्वविद्यालय के व्यवसाय प्रशासन विभाग ने एक छात्र विकास कार्यक्रम आयोजित किया। यह कैंपस-कॉरपोरेट इंटरेक्शन एआई और मैनेजमेंट के भविष्य पर केंद्रित था। द कायी टेक्नोलॉजी प्राइवेट लिमिटेड के सह-संस्थापक प्रियांश गोयल ने विद्यार्थियों को आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, भविष्य के प्रबंधन, करियर की तैयारी और कॉर्पोरेट जगत की बदलती जरूरतों के बारे में बताया। इस कार्यक्रम का मकसद छात्रों को एआई आधारित कार्य संस्कृति, उद्योग की उम्मीदों और भविष्य के करियर अवसरों से परिचित कराना था। कार्यक्रम के संरक्षक हेड और डीन प्रो. त्रिलोचन शर्मा थे, और इसका संचालन डॉ. मंजुला सिंह ने किया।



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मंदसौर में शुक्रवार को 4 घंटे बिजली बंद: इंदिरा, जनता, किटियानी कॉलोनी समेत कई इलाकों में सप्लाई ठप रहेगी – Mandsaur News




मंदसौर में शुक्रवार को 4 घंटे बिजली सप्लाई बंद रहेगी। बिजली लाइनों के मानसून मेंटेनेंस के चलते मंदसौर के 2 नंबर फीडर पर सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक शटडाउन रहेगा। इससे चंबल कॉलोनी उपकेंद्र से जुड़े कई इलाकों में बिजली सप्लाई प्रभावित होगी। इन इलाकों में रहेगी बिजली बंद शटडाउन के दौरान आदिनाथ विहार, इंदिरा कॉलोनी, जनता कॉलोनी, किटियानी, नूर कॉलोनी, चौधरी कॉलोनी, पाटिल कॉलोनी और कंबल केंद्र रोड सहित आसपास के इलाकों में बिजली बंद रहेगी। बिजली कंपनी के अनुसार, इससे करीब 2933 उपभोक्ता प्रभावित होंगे। कंपनी ने लोगों से बिजली से जुड़े जरूरी काम शटडाउन से पहले करने की अपील की है। समय से पहले शुरू हो सकती है सप्लाई कंपनी ने बताया कि मेंटेनेंस का काम पूरा होने पर बिजली सप्लाई तय समय से पहले भी शुरू की जा सकती है। शटडाउन के कारण होने वाली असुविधा के लिए कंपनी ने नागरिकों से माफी मांगी है।



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सहरसा में दुकान का चदरा काटकर 1.10 लाख की चोरी: नगर परिषद गेट के पास हुई वारदात, चोरों ने CCTV कैमरे तोड़े; फुटेज में कैद – Saharsa News


सहरसा शहर के पश्चिम गंगजला मुख्य मार्ग पर स्थित ए.के. ट्रेडर्स में चोरों ने दुकान के पिछले हिस्से का चदरा काटकर करीब 1.10 लाख रुपये के सामान और नकदी पर हाथ साफ कर दिया।

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चोरों ने अपनी पहचान छिपाने के लिए दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरों को भी तोड़ दिया। गुरुवार को चोरी की वारदात का वीडियो सामने आने के बाद मामले ने और तूल पकड़ लिया है।

दुकानदार धीरज कुमार सिंह ने सदर थाने में शिकायत दर्ज कराई है।

रात में दुकान बंद कर घर लौटे, सुबह खुला चोरी का राज

दुकानदार धीरज कुमार सिंह ने बताया कि बुधवार रात करीब 10 बजे वह दुकान बंद कर घर चले गए थे। गुरुवार सुबह करीब 9:30 बजे दुकान खोलने पहुंचे तो अंदर सामान बिखरा पड़ा था।

जांच करने पर पता चला कि चोरों ने दुकान के पिछले हिस्से का चदरा काटकर अंदर प्रवेश किया और चोरी की वारदात को अंजाम दिया।

CCTV कैमरे तोड़े, चदरा काटकर दुकान में घुसे चोर

चोरों ने दुकान में लगे सीसीटीवी कैमरों को तोड़ दिया, ताकि उनकी पहचान सामने नहीं आ सके। चदरा काटे जाने के कारण बारिश का पानी भी दुकान के अंदर घुस गया, जिससे कई सामान खराब हो गए। पुलिस अब सामने आए वीडियो और घटनास्थल से मिले सुरागों के आधार पर चोरों की पहचान में जुटी है।

सरसों-धारा तेल और सुपारी-जर्दा समेत सामान चोरी

दुकानदार के अनुसार चोरों ने कैश काउंटर से खुले रुपये के अलावा करीब 1,10,248 रुपये का किराना सामान चोरी किया।

इसमें करीब 40 हजार रुपये का सरसों व धारा तेल, 35 हजार रुपये की रजनीगंधा, तुलसी, मयूर सुपारी और जर्दा शामिल है।

इसके अलावा करीब 25 हजार रुपये का पतंजलि घी, एवरेडी घी, काजू और टाटा गोल्ड चायपत्ती भी चोरी हुई है।

चोरी के बाद व्यापारियों में सुरक्षा को लेकर चिंता

मुख्य मार्ग स्थित दुकान में चोरी की घटना के बाद आसपास के व्यापारियों में सुरक्षा को लेकर चिंता बढ़ गई है। व्यापारियों का कहना है कि रात के समय बाजार क्षेत्र में पुलिस गश्त और सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत किए जाने की जरूरत है।

पुलिस ने कार्रवाई का दिया आश्वासन

दुकानदार की शिकायत पर सदर थाना पुलिस मामले की जांच में जुट गई है। सदर थानाध्यक्ष अजय कुमार पासवान ने कार्रवाई का आश्वासन दिया है। पुलिस चोरी के सामने आए वीडियो, सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर आरोपियों तक पहुंचने का प्रयास कर रही है।



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बिना दाखिल खारिज क्या बेकार है रजिस्ट्री, सुप्रीम कोर्ट ने उठा दिया इस कंफ्यूजन से पर्दा


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Mutation vs Registry : क्या आपको भी रजिस्ट्री और दाखिल खारिज को लेकर कोई कंफ्यूजन है तो सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में इन दोनों बातों को पूरी तरह क्लीयर कर दिया है. कोर्ट ने कहा है कि अगर किसी के पास म्यूटेशन दस्तावेज नहीं है तो इसका मतलब यह नहीं होगा कि वह अपनी संपत्ति को बेच नहीं सकता है. वैलिड सेल डीड ही मालिकाना हक को डिसाइड करने के लिए काफी है.

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बिना दाखिल खारिज क्या बेकार है रजिस्ट्री, सुप्रीम कोर्ट ने खत्म किया कंफ्यूजन Zoom

रजिस्ट्री और म्यूटेशन दोनों ही प्रॉपर्टी के लिए जरूरी होते हैं.

नई दिल्ली. प्रॉपर्टी खरीदने वालों को एक चीज को लेकर हमेशा कंफ्यूजन रहती है कि बिना दाखिल खारिज कराए जमीन या मकान की रजिस्ट्री पर्याप्त नहीं होती है. ज्यादातर लोगों को यही लगता है कि अगर प्रॉपर्टी का दाखिल खारिज यानी म्यूटेशन न कराया जाए तो सिर्फ उसकी रजिस्ट्री से पूरा मालिकाना हक नहीं मिलेगा. लेकिन, आपकी इस कंफ्यूजन को सुप्रीम कोर्ट ने पूरी तरह खत्म कर दिया है. शीर्ष अदालत ने अपने एक फैसले में कहा है कि अगर दाखिल खारिज नहीं है तो भी सेल डीड यानी रजिस्ट्री बेकार नहीं मानी जाएगी और मालिकाना हक को बनाए रखा जाएगा.

सुप्रीम कोर्ट ने साल समीउल्लाह वर्सेज स्टेट ऑफ बिहार, 2025 ( Samiullah vs State of Bihar, 2025) के मामले में रजिस्ट्रेशन और म्यूटेशन यानी दाखिल खारिज पर बड़ा फैसला दिया है. कोर्ट ने कहा है कि अगर कोई व्यक्ति अपनी जमीन बेचना चाहता है तो उसे म्यूटेशन यानी दाखिल खारिज का प्रूफ देना जरूरी नहीं है. बिना इस दस्तावेज के भी वह व्यक्ति अपने मालिकाना हक वाली प्रॉपर्टी को बेचने का अधिकार रखता है. कोर्ट ने साफ किया है कि रजिस्ट्री और दाखिल खारिज दोनों अलग-अलग चीजें हैं और इन दोनों को एकसाथ नहीं मिलाया जा सकता है.

क्या है रजिस्ट्री का मतलब
कोर्ट के फैसले से जाहिर होता है कि किसी प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री यानी सेल डीड उसके टाइटल का ट्रांसफर होती है. इस प्रक्रिया में किसी प्रॉपर्टी पर मालिकाना हक रखने वाला व्यक्ति अपने टाइटल को दूसरे के नाम पर ट्रांसफर कर देता है. सेल डीड यानी रजिस्ट्री एक तरह से टाइटल डॉक्यूमेंट है और संपत्ति के मामले में यही सबसे जरूरी दस्तावेज माना जाता है. अगर किसी के पास वैलिड रजिस्ट्री है तो वही संबंधित संपत्ति का मालिक होगा, भले ही उसने अपनी प्रॉपर्टी का दाखिल खारिज नहीं कराया है.

क्या होता है म्यूटेशन
शीर्ष अदालत ने अपने फैसले में म्यूटेशन को भी पूरी तरह क्लीयर कर दिया है. कोर्ट ने कहा है कि म्यूटेशन यानी दाखिल खारिज किसी संपत्ति पर मालिकाना हक को डिफाइन नहीं करते हैं. यह सिर्फ रेवेन्यू अथवा म्यूनिसिपल रिकॉर्ड है, जो किसी तरह के मालिकाना हक का निर्णय नहीं करता है. लिहाजा अगर किसी व्यक्ति के पास म्यूटेशन का पेपर नहीं है तो इसका मतलब यह नहीं होगा कि संबंधित प्रॉपर्टी पर उसका मालिकाना हक नहीं रहेगी. उसकी वैलिड सेल डीड ही मालिकाना हक को डिसाइड करने के लिए काफी है.

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Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…

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CAPF अफसरों की भर्ती-सेवा का नया कानून लागू: 5 सुरक्षा बलों में IPS का डेपुटेशन-प्रमोशन हो सकेगा; कैडर अफसर बोले- आगे बढ़ने के मौके खत्म होंगे


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नई दिल्ली1 घंटे पहले

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देश में CAPF (जनरल एडमिनिस्ट्रेशन) एक्ट 2026 लागू हो गया। गृह मंत्रालय की अधिसूचना के मुताबिक, यह कानून 8 अक्टूबर से प्रभावी है। नया कानून, CAPF में ग्रुप-A जनरल ड्यूटी और दूसरे अधिकारियों की भर्ती, प्रमोशन, डेपुटेशन और सेवा शर्तों का एक जैसा ढांचा तय करता है।

कानून ऐसे समय लागू हुआ है, जब सुप्रीम कोर्ट में हजारों CAPF अफसर इसकी वैधता को चुनौती देने वाली याचिकाओं पर सुनवाई कर रहा है। यह कानून संसद ने अप्रैल में पास किया था।

यह कानून केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF), सीमा सुरक्षा बल (BSF), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF), भारत-तिब्बत सीमा पुलिस (ITBP) और सशस्त्र सीमा बल (SSB) में अफसरों की भर्ती और सेवा नियमों को नियंत्रित करेगा।

इसके तहत IPS से डेपुटेशन यानी प्रतिनियुक्ति के जरिए अफसरों की नियुक्ति भी की जाएगी।

कैडर अफसरों ने जताई आपत्ति

इन बलों के कैडर अफसरों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की हैं। उन्होंने एक अवमानना याचिका भी दाखिल की है। अफसरों का कहना है कि यह कानून IPS से डेपुटेशन पर आने वाले अफसरों की तुलना में उनके करियर में आगे बढ़ने के मौके खत्म करता है।

इन अफसरों ने सुप्रीम कोर्ट से केंद्र सरकार को मई 2025 के फैसले को लागू करने का निर्देश देने की मांग की है। मई 2025 के फैसले में कोर्ट ने कहा था कि CAPF में इंस्पेक्टर जनरल तक के पदों पर IPS अफसरों की डेपुटेशन को दो साल में धीरे-धीरे कम किया जाए।

कोर्ट ने कहा था कि इससे कैडर अफसरों को अधिक अवसर मिलेंगे। देरी से होने वाली उनकी प्रमोशन इन बलों के मनोबल पर प्रतिकूल असर डाल सकती है।

नए कानून में डेपुटेशन का प्रावधान

नए कानून के तहत इंस्पेक्टर जनरल रैंक के 50% पद IPS से डेपुटेशन के जरिए भरे जाएंगे। एडिशनल डायरेक्टर जनरल स्तर के कम से कम 67% पद डेपुटेशन से भरने का प्रावधान है। स्पेशल डायरेक्टर जनरल और डायरेक्टर जनरल रैंक के पद केवल डेपुटेशन से भरे जाएंगे।

सुप्रीम कोर्ट के 2025 के फैसले में क्या था

यह कानून CAPF में IPS अफसरों के डेपुटेशन पर सुप्रीम कोर्ट के मई 2025 के फैसले से जुड़ा है। पिछले साल अक्टूबर में सुप्रीम कोर्ट ने अपने 2025 के फैसले का रिव्यू करने की मांग करने वाली केंद्र की याचिका खारिज कर दी थी।

कोर्ट ने कहा था कि CAPF में SAG लेवल तक डेपुटेशन के लिए तय पदों की संख्या समय के साथ धीरे-धीरे कम की जानी चाहिए। इसके लिए अधिकतम दो साल की समय-सीमा तय की गई थी। कोर्ट ने कैडर रिव्यू का भी निर्देश दिया था।

अलग-अलग नियमों की जगह एक कानून

कानून के उद्देश्य और कारणों में कहा गया है कि CAPF की ऑपरेशनल जरूरतें बढ़ी हैं। इससे इन बलों का अलग ढांचा भी डेवलप हुआ है। इसमें कहा गया कि हाल के सालों में अम्ब्रेला कानून नहीं होने से नियम अलग-अलग तरीके से विकसित हुए।

इस वजह से सेवा से जुड़े कई मुकदमे हुए। इससे बलों के कामकाज और प्रशासन में कुछ दिक्कतें पैदा हुईं।

यह कानून पांचों CAPF में ग्रुप-A जनरल ड्यूटी और अन्य अधिकारियों के अलग-अलग नियमों की जगह साझा कानूनी ढांचा लागू करता है।

रिटायर्ड अफसरों ने भी दायर की थी अवमानना याचिका

रिटायर्ड CAPF अफसरों के एक समूह ने तत्कालीन गृह सचिव गोविंद मोहन के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अवमानना याचिका दायर की थी। समूह ने उन पर सुप्रीम कोर्ट के अक्टूबर 2025 के आदेश को लागू नहीं करने का आरोप लगाया था।

समूह ने कहा था कि CAPF की कमान व्यवस्था, सेवा शर्तों और नेतृत्व के अवसरों को प्रभावित करने वाला कोई भी कानूनी हस्तक्षेप मनोबल पर असर डाल सकता है।

उसने कहा था कि इससे देश की आंतरिक सुरक्षा और सीमा सुरक्षा के लिए जिम्मेदार बलों की संचालन क्षमता भी प्रभावित हो सकती है।

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सेंट्रल फोर्स में 93 हजार पद खाली: CRPF में सबसे ज्यादा 27 हजार; सरकार ने संसद में बताया- 5 साल में CAPF में इस्तीफे 86% बढ़े

केंद्र सरकार ने मार्च 2026 में संसद में बताया कि सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स (CAPF) और असम राइफल्स में कुल 93,139 पद खाली हैं। गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने लिखित जवाब में यह जानकारी दी थी। सरकार के मुताबिक CAPF में इस्तीफों की संख्या बढ़ी है। 2021 में 1,255 के मुकाबले 2025 में 2,333 कर्मियों ने इस्तीफा दिया, यानी करीब 86 फीसदी बढ़ोतरी हुई। पढ़ें पूरी खबर…



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हांडी कढ़ाई चंपारण नहीं, पूर्णिया में मिलता है मटन देहाती, 349 रुपये में 4 बड़े पीस

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Purnia Mutton Dehati: आपने आज तक कई तरह के मटन खाए होंगे. जैसे हांडी मटन, कढ़ाई मटन, चंपारण मटन, लीला मटन सबका स्वाद लिया होगा, लेकिन क्या आपने मटन देहाती खाया है, नहीं खाया है ना, तो चलिए आपको हम बताते हैं कि मटन देहाती का स्वाद कैसा होता है. दरअसल मटन देहाती नाम ही नहीं, बल्कि स्वाद भी लोगों को देता है. वहीं, यह मटन देहाती खाने के शौकीन लोगों के लिए पूर्णिया का एकमात्र दुबे दरबार रेस्टोरेंट कम ढाबा न्यू बायपास सड़क किनारे स्थित है. इस ढाबे पर सुबह और शाम मटन देहाती खाने के लिए ग्राहकों की भीड़ लगी रहती है. ग्राहकों की डिमांड को पूरा करने में ढाबा के कुकमैन और मालिक के पसीने छूट जाते हैं.

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अगर आप भी मटन खाने के शौकीन हैं तो आप मटन देहाती का एक बार स्वाद जरूर ले सकते हैं. मटन देहाती का स्वाद सामान्य बनने वाले मटन से बिल्कुल अलग होता है. इस मटन को बारीकी से बनाया जाता है. इस मटन देहाती को बनाने वाले सैफ कारीगर राहुल कुमार बताते है कि मटन की पूरी तरह साफ सफाई के साथ मटन बनाने की जो सामान्य प्रक्रिया है.

उसी प्रक्रिया से वह इस मटन को तैयार करते हैं. उसके बाद इसमें तड़का लगाते हैं और फिर इसमें कुछ सीक्रेट मसाले को मिलाते हैं, जिससे मटन का स्वाद लाजवाब हो जाता है और लोगों को खूब पसंद आता है.

वहीं, मटन देहाती खाने आए ग्राहक सुमित कुमार और राजेश कुमार बताते है वह महीने में चार बार जरूर इस दुकान पर मटन देहाती का स्वाद लेने आते हैं. मटन देहाती का स्वाद बिल्कुल मजेदार लगता है, जिस कारण अपने दोस्तों के साथ मटन देहाती खाना इस ढाबे पर आते हैं. यहां स्वादा के दीवानों की भीड़ लगी रहती है.

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वहीं, दुबे दरबार ढाबा के मालिक रूपेंद्र मोहन दुबे उर्फ लड्डू दुबे बताते हैं कि पूर्णिया के एकमात्र उनके इस दुबे दरबार ढाबा में मटन देहाती का स्वाद लोगों को खिलाया जाता है. इस मटन देहाती को स्पेशल कारीगरों द्वारा तैयार किया जाता है. जो लोगों को खूब पसंद आता है.

उन्होंने कहा कि मटन देहाती 4 बड़े- बड़े साइज की पीस, जिसमें दो लोग आसानी से खा सके. जिसकी कीमत ₹349 है. एक बार खाने के बाद दोबारा लोग मटन देहाती खाने उनके इस ढाबा पर जरूर रुकते हैं. इस मटन देहाती का स्वाद लेकर खूब तारीफ करते हैं. ऐसे में अगर आप भी मटन देहाती का स्वाद लेना चाहते हैं तो आप एक बार उनकी इस दुकान पर मटन देहाती का स्वाद ले सकते हैं.

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राहुल गांधी की गिरफ्तारी पर कांग्रेस का प्रदर्शन: बूंदी में काला दिवस मनाकर ‘वोट बचाओ, लोकतंत्र बचाओ’ मार्च निकाला – Bundi News




राहुल गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और प्रियंका गांधी समेत इंडिया गठबंधन के नेताओं की दिल्ली में गिरफ्तारी के विरोध में बूंदी जिला कांग्रेस कमेटी ने काला दिवस मनाते हुए कलेक्ट्रेट पर प्रदर्शन किया। जिला अध्यक्ष महावीर मीणा के नेतृत्व में कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने आजाद पार्क से जुलूस निकाला और कलेक्ट्रेट पहुंचकर विरोध जताया। काले झंडों के साथ निकला जुलूस कार्यकर्ता आजाद पार्क से परशुराम सर्किल और अहिंसा सर्किल होते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। इस दौरान कार्यकर्ताओं के हाथों में काले झंडे थे। उन्होंने ‘लोकतंत्र की हत्या बंद करो’ और ‘चुनाव आयोग मुर्दाबाद’ के नारे लगाए। कलेक्ट्रेट पहुंचने के बाद मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार का पुतला जलाया गया। कार्यक्रम का समापन राष्ट्रगान के साथ हुआ। कांग्रेस नेताओं ने सरकार पर साधा निशाना जिला अध्यक्ष महावीर मीणा ने प्रदर्शन को संविधान की आत्मा पर हमला बताया। ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रामकरण मीणा ने कहा कि तानाशाही सरकार का अन्याय बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। पीसीसी सचिव गुड्डू कादरी ने राहुल गांधी को लोकतांत्रिक अधिकारों के लिए लड़ने वाला नेता बताया। संवैधानिक संस्थाओं के दुरुपयोग का आरोप कांग्रेस नेता चर्मेश शर्मा ने संवैधानिक संस्थाओं का दुरुपयोग तुरंत बंद करने की मांग की। उन्होंने कहा कि सत्ता के लिए संवैधानिक संस्थाओं का इस तरह इस्तेमाल किया जाना दुर्भाग्यपूर्ण है। कई पदाधिकारी और कार्यकर्ता रहे मौजूद प्रदर्शन में पीसीसी सचिव गुड्डू कादरी, बूंदी ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष रामकरण मीणा, पूर्व ब्लॉक अध्यक्ष बाबूलाल वर्मा, चेतराम मीणा, ओबीसी प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष बृजमोहन यादव, जिला प्रवक्ता किशनगोपाल मीणा, सोशल मीडिया प्रभारी गिरिराज मीणा, कांग्रेस नेता गोपाल माहेश्वरी, युवा कांग्रेस प्रदेश महासचिव अंकित बूलीवाल, खेल प्रकोष्ठ प्रदेश महासचिव रामराज मीणा, पूर्व उपप्रधान रामस्वरूप मीणा, चिकित्सा प्रकोष्ठ जिलाध्यक्ष यासीन कुरैशी सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। इसके अलावा पूर्व सरपंच गिरिराज मीणा, रामचंद्र मेघवाल, रतनलाल मेघवाल, गजानंद मेहर, नगर परिषद पार्षद देवराज गोचर, मोहसिन बैग, ईरफान इलु, शकील भाई, युवा कांग्रेस विधानसभा अध्यक्ष जोनेश मीणा, जिला उपाध्यक्ष बिलाल खान, जिला महासचिव समीर पठान, विष्णु कुमावत, ब्लॉक उपाध्यक्ष यजदानी, सुजल वर्मा, अरशान, सत्यम वैष्णव, फेजान, कांग्रेस नेता राधेश्याम मीणा, नीरज मीणा और शिवम खटीक सहित अन्य कार्यकर्ता भी शामिल हुए।



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योगी बोले- आपको लाइक चाहिए या रियल लाइफ: 470 खिलाड़ियों को जॉइनिंग लेटर बांटे; इनमें 43 दरोगा, 427 सिपाही – Uttar Pradesh News




सीएम योगी गुरुवार को लोकभवन में पुलिस और पीएसी में नौकरी पाने वाले कुल 470 खेल प्रतिभाओं को नियुक्ति पत्र बांटे। इनमें नागरिक पुलिस के 43 दरोगा, 295 सिपाही और पीएसी के 132 सिपाही शामिल हैं। कार्यक्रम में डिप्टी सीएम केशव मौर्य, खेल एवं युवा मामलों के मंत्री गिरीश यादव, अपर मुख्य सचिव गृह संजय प्रसाद और डीपीजी राजीव कृष्णा भी मौजूद हैं। कार्यक्रम से पहले सीएम योगी का डीजीपी ने रामरथ स्मृति चिह्न देकर स्वागत किया। इस मौके पर सीएम योगी ने कहा- 2017 से पहले यूपी में क्या स्थिति थी? याद कीजिए- एक समय था, जब यूपी में सूर्योदय से सूर्यास्त तक लाइफ थी। उसके पहले और उसके बाद बाहर नहीं निकल सकते थे। खेल इंफ्रा के बारे में तो बात ही नहीं कर सकते थे। योगी बोले- आपकी यह यात्रा जर्सी से वर्दी की शुरू हुई सीएम योगी ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा- मैं आप सभी युवा खिलाड़ियों को यूपी पुलिस का हिस्सा बनने के लिए शुभकामनाएं देता हूं। आपकी यह यात्रा जर्सी से वर्दी की यात्रा शुरू हुई है। इसका अभिनंदन करने के लिए एक डिप्टी सीएम और मंत्री के साथ मैं खुद आया हूं। योगी ने कहा- जर्सी में जो काम करते थे, जो परिणाम लाए हैं, सरकार वर्दी में भी उसी तरह की अपेक्षा करती है। जर्सी में आपने अनुशासन, टीम वर्क के महत्व को समझा। शक्ति और सामर्थ्य की सही दिशा दी। समय की कीमत को पहचाना। आपकी दिनचर्या सुबह 4 बजे से शुरू होती है। सम विषम परिस्थिति में भीषण सर्दी, बरसात या संसाधन का अभाव होता है, तो भी आप प्रैक्टिस करते हैं। सीएम ने कहा- चुनौती को आपने चुनौती नहीं माना। पारिवारिक समस्या को समस्या नहीं माना। अपने परिश्रम को समाधान की ओर लेकर गए। यह काम यूपी पूलिस का हिस्सा बनने का बाद आपको करना है। मैं देख रहा था कि 470 में 303 पुरुष और 167 महिलाएं हैं। उपनिरीक्षक में 43 पुरुष और 30 महिलाएं है। मैं पूछना चाहता हूं कि जो नियुक्ति पत्र मिला है, उस प्रक्रिया में किसी ने कोई पैसा मांगा। गर्दन हिलाकर नहीं आवाज दो। कहीं से कोई सिफारिश कराने की जरूरत हुई। याद रखना ये न सरकार की कृपा है ना मेरी अनुकंपा है। यह आपके मेहनत के पसीने का परिणाम है। योगी ने कहा- 2017 में हमारे यहां सीधी भर्ती से खिलाड़ी भर्ती करने का कोई नियम नहीं था। हम मजबूर थे। लेकिन, फिर हमने सीधी भर्ती से खिलाड़ियों को नौकरी देना शुरू किया। अब तक 1000 खिलाड़ियों को सीधी भर्ती से नौकरी दे चुके हैं। 470 को आज दे रहे हैं, 500 और खिलाड़ी को नियुक्ति पत्र देने की तैयारी है। जापान में एशियन गेम्स चल रहे थे तो हम देखते हैं कि हमारा खिलाड़ी उस मोर्चे पर खड़ा है तो हम मैच देखते हैं, जीत का जितना महत्व है उतना ही महत्व उस खिलाड़ी है जो हार कर फिर खड़ा होता है फिर मेडल लाने के लिए तैयार है। यूपी की एक बेटी ने गोल्ड मेडल जीता उसने कहा कि मेरा निशाना यूपी सरकार के डिप्टी एसपी पद पर था। हमने अब तक यूपी पुलिस में ऐसे 7 खिलाड़ी को जिन्होंने ऑलंपिक, कॉमनवैल्थ या एशियाई खेलों में मैडल प्राप्त किया है उन्हे डिप्टी एसपी का पद दिया है। यूपी के हॉकी खिलाड़ी ललित उपाध्याय, राज कुमार पाल को नीती बदलकर डिप्टी एसपी का पद दिया। राज कुमार पाल का परिवार बहुत गरीब पाल था, ओलंपिक में पद जीता तो राजकुमार को डिप्टी एसपी का पद दिया। केशव बोले- जब खिलाड़ी पदक जीतकर तिरंगा लहराते हैं, तो सीना चौड़ा हो जाता है डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कार्यक्रम को संबोधित करते हुए कहा- आज देश-प्रदेश का मान बढ़ाने वाले खिलाड़ियों को नियुक्ति पत्र देने का सुअवसर है। इनमें से कई खिलाड़ी देश-प्रदेश के लिए पदक जीतते हैं। जब पदक जीतकर तिरंगा लहराते हैं, तो हमारा सीना चौड़ा हो जाता है। खेल प्रतिभा दिखाने के कारण ऐसे लोगों को पुलिस सेवा में आने का अवसर मिला है। इस अवसर को और अच्छे अवसर में बदलने का मौका है। जनता की सुरक्षा और सेवा का अवसर है। आपका खेल खत्म नहीं हुआ है, खेल अभी जारी है। केशव ने कहा- 2017 से पहले खिलाड़ियों पर ध्यान नहीं दिया जाता था केशव ने कहा- 2017 से पहले विपक्षी दलों की सरकारों के समय कानून व्यवस्था ध्वस्त रहती थी। लेकिन, आज देश में यूपी की चुस्त-दुरुस्त कानून-व्यवस्था की चर्चा है। यह गौरव की बात है। जहां कानून व्यवस्था चुस्त-दुरुस्त होती है, तो प्रदेश का विकास होता है। पहले भी सरकारों ने खेल और खिलाड़ियों पर उतना ध्यान नहीं दिया, इसलिए हमें पदक नहीं मिलते थे। गांवों में प्रतिभाशाली खिलाड़ी हैं। अगर उन्हें मौका मिल जाए, तो वे दुनिया के किसी भी खिलाड़ी को पछाड़ सकते हैं। आज कोच के साथ पुष्टाहार की व्यवस्था की जा रही है। खिलाड़ी के लिए सरकारी भर्ती में दो प्रतिशत कोटा दिया है। डीजीपी बोले- खेल और पुलिस में गहरा संबंध सबसे पहले डीजीपी राजीव कृष्ण ने कार्यक्रम को संबोधित किया। उन्होंने कहा- सीएम के नेतृत्व ने खेल प्रतिभाओं को प्रोत्साहित करने और सम्मानजक अवसर देने का महत्वपूर्ण काम किया है। आज का आयोजन उसी का उदाहरण है। आज 470 प्रतिभाशाली खिलाड़ी यूपी पुलिस का हिस्सा बनने जा रहे हैं। यह केवल भर्ती का आंकड़ा नहीं है, बल्कि खेल प्रतिभाओं के सम्मान और उन्हें जनसेवा से जोड़ने का उदाहण है। खेल और पुलिस में गहरा संबंध है। पुलिस और खेल से अनुशासन, व्यायाम, आचरण, अभ्यास और धैर्य सीखने को मिलता है। आज आपकी मेहनत को नई पहचान मिल रही है। आपकी पहचान खिलाड़ी के साथ यूपी पुलिस के रूप में होगी। डीजीपी ने कहा- यह पहल बताती है कि यूपी में प्रतिभा और मेहनत को उचित मंच मिलता है। खिलाड़ियों को आउट ऑफ टर्न प्रमोशन भी दिए गए हैं। यूपी पुलिस के खिलाड़ियों ने एक दशक में कुल 1105 पदक अर्जित किए हैं। हॉकी खिलाड़ी ललित उपाध्याय, दीप्ती शर्मा ने पद हासिल किए हैं। खेल मंत्री बोले- सरकार ने 17 खिलाड़ियों को सीधी नौकरी दी खेल मंत्री गिरीश यादव ने कहा- पीएम मोदी के मार्गदर्शन और सीएम योगी के नेतृत्व में खिलाड़ियों का चेहरा खिलखिला उठता है। सीएम ने खिलाड़ियों के लिए ऐतिहासिक फैसले किए हैं। उनकी मांगों को भी पूरा किया है। खिलाड़ियों के लिए विशेष रूप गारंटी दी है कि हमारा जो भी खिलाड़ी पदक जीतकर आएगा, उसे नौकरी देंगे। 9 साल में जो भी पदक जीतकर आया, उसे सरकारी नौकरी और नकद पुरस्कार भी मिला है। पुरस्कार राशि भी दो से तीन गुना बढ़ाई गई है। खिलाड़ियों को सीधी भर्ती दी जा रही है। आज 17 खिलाड़ियों को सीधी नौकरी दी जा चुकी है। 7 खिलाड़ियों को डिप्टी एसपी बनाया गया है। जिला पंचायतराज अधिकारी समेत अन्य पदों पर नौकरी दी है। मंत्री ने कहा- पहले खिलाड़ी पैसे की कमी में अपनी प्रतिभा निखार नहीं पाते थे। उनके लिए एकलव्य क्रीड़ा कोष बनाया गया है। अब तक 500 से ज्यादा खिलाड़ियों को इस कोष से मदद दी गई है। गिरीश यादव ने कहा कि विकासखंड स्तर पर भी मिनी स्टेडियम बनाया जा रहा है। पहली बार यूपी में खेल यूनिवर्सिटी बनाई गई है। उसका पीएम नरेंद्र मोदी जल्द लोकार्पण करेंगे। हर कमिश्नरी स्तर पर खेल महाविद्यालय भी खोले जाएंगे। योगी ने लिखा- नई खेल संस्कृति बदलाव की तस्वीर है सीएम योगी ने एक्स पर पोस्ट कर कहा- मैदान में मेधा, उपलब्धि पर सम्मान और प्रतिभा को राष्ट्र सेवा का अवसर देना ही नए उत्तर प्रदेश की नई खेल संस्कृति है। इसी संस्कृति को आगे बढ़ाते हुए पुलिस विभाग में कुशल खिलाड़ी कोटे के तहत चयनित 470 खिलाड़ियों को नियुक्ति पत्र दिए गए। सीएम ने कहा कि खिलाड़ियों के लिए खुल रहे सरकारी सेवा के ये द्वार उस बदलाव की तस्वीर हैं, जो प्रदेश ने साल-2017 के बाद देखा है। इससे पहले खेल कोटा उपेक्षित था। भर्तियों में प्रतिभा से अधिक सिफारिश और पहुंच की चर्चा होती थी।



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सीवान-‘जर्जर भवन, पेड़ के नीचे पढ़ाई’, छात्रों का प्रोटेस्ट: आइसा-आरवाईए का ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान; बीईओ को घेरा – Siwan News




सीवान सदर प्रखंड कार्यालय परिसर में गुरुवार को अखिल भारतीय छात्र संगठन (आइसा) और इंकलाबी नौजवान सभा (आरवाईए) के संयुक्त नेतृत्व में ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत छात्र प्रदर्शन किया गया। प्रदर्शन से पहले कार्यकर्ताओं ने प्रखंड क्षेत्र के विभिन्न सरकारी विद्यालयों का निरीक्षण कर शैक्षणिक और बुनियादी सुविधाओं की स्थिति का जायजा लिया। इसके बाद समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर प्रखंड शिक्षा पदाधिकारी के समक्ष प्रदर्शन किया गया। टड़वा स्कूल में दो कमरों में पढ़ाई, किचन शेड खराब होने का दावा निरीक्षण के दौरान राजकीय प्राथमिक विद्यालय टड़वा में भवन की जर्जर स्थिति और महज दो कमरों की उपलब्धता का मुद्दा उठाया गया। संगठन ने खराब शौचालय, बिजली और पेयजल की समस्या होने का दावा किया। स्कूल में खेल मैदान और प्रयोगशाला की सुविधा नहीं होने की बात भी कही गई। किचन शेड की स्थिति खराब होने के कारण कमरे में ही मध्याह्न भोजन बनाए जाने का आरोप लगाया गया। विद्रूती हाता में जर्जर कमरे, पेड़ के नीचे पढ़ने को मजबूर बच्चे राजकीय प्राथमिक विद्यालय विद्रूती हाता में तीन कमरे जर्जर बताए गए। संगठन के अनुसार भवन की कमी के कारण बच्चों को पेड़ के नीचे पढ़ना पड़ता है। स्कूल में शौचालय, बिजली और पेयजल की समस्या के साथ खेल मैदान और प्रयोगशाला के अभाव का भी मुद्दा उठाया गया। उच्च माध्यमिक विद्यालय टड़वा में सात कमरों के लिए पांच और की जरूरत उच्च माध्यमिक विद्यालय टड़वा में सात कमरों के मुकाबले पांच अतिरिक्त कमरों की आवश्यकता बताई गई। संगठन का कहना है कि जगह की कमी के कारण 1 कमरे में दो कक्षाएं संचालित होती हैं। कक्षा एक से 12वीं तक की पढ़ाई वाले इस विद्यालय में 13 शिक्षक हैं। बिजली, शुद्ध पेयजल, शौचालय, खेल मैदान और प्रयोगशाला की कमी का भी आरोप लगाया गया। रेलवे कॉलोनी स्कूल में जर्जर कमरे और जमीन विवाद का मुद्दा प्राथमिक विद्यालय रेलवे कॉलोनी में चार कमरों की स्थिति खराब बताई गई। संगठन ने शौचालय, बिजली और पेयजल की समुचित व्यवस्था नहीं होने का मुद्दा उठाया। खेल मैदान और प्रयोगशाला के अभाव के साथ विद्यालय के सामने की जमीन पर रेलवे विभाग के दावे से जुड़े विवाद के समाधान की मांग भी की गई। प्राथमिक बालिका विद्यालय पचलखी में भी सुविधाओं की कमी का मुद्दा उठाते हुए छात्राओं के लिए सुरक्षित और सुविधायुक्त शैक्षणिक माहौल की मांग की गई। ‘शिक्षा बच्चों का मौलिक अधिकार, सरकार सुविधाएं सुनिश्चित करे’ आइसा के राज्य अध्यक्ष धनंजय ने कहा कि शिक्षा बच्चों का मौलिक अधिकार है और इसे सुनिश्चित करना सरकार की जिम्मेदारी है। उन्होंने सरकारी विद्यालयों में बुनियादी सुविधाओं की कमी को गंभीर बताते हुए तत्काल समाधान की मांग की। आइसा महासचिव प्रसनजीत ने कहा कि भवन, शौचालय, बिजली और पेयजल जैसी सुविधाओं के अभाव में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होना उचित नहीं है। प्रदर्शन के दौरान जर्जर भवनों की मरम्मत या नए भवन निर्माण, पर्याप्त कक्षाओं की व्यवस्था, शौचालयों की मरम्मत, बिजली और स्वच्छ पेयजल, खेल मैदान एवं प्रयोगशाला उपलब्ध कराने की मांग की गई। मध्याह्न भोजन और किचन शेड को दुरुस्त करने की मांग भी उठाई गई। प्रदर्शन में विभिन्न विद्यालयों के सैकड़ों छात्र-छात्राओं ने हिस्सा लिया। संगठन ने कहा कि ‘स्कूल ठीक करो’ अभियान के तहत सरकारी विद्यालयों की समस्याओं और बच्चों के शिक्षा के अधिकार को लेकर आंदोलन आगे भी जारी रहेगा।



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