तीन किशोरियों को अगवा कर बेचने वाले सजायाफ्ता आरोपी को 40 साल बाद जूही पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। हैरान करने वाली बात यह है कि, आरोपी थाने से महज दो किलोमीटर दूर स्थित कच्ची बस्ती में पहचान छिपाकर रह रहा था। जबकि पुलिस आरोपी को लखनऊ समेत आसपास के जिलों में खोज रही थी। आरोपी हाईकोर्ट में अपील कर जेल से बाहर आया था, इसके बाद से फरार हो गया था। मामले में उसकी पत्नी भी आरोपी थी, जिसकी दो साल पहले मौत हो चुकी है। जूही थाना प्रभारी केके पटेल ने बताया कि वर्ष 1984 में जूही के साईपुरवा कच्ची मड़ैया निवासी प्रदीप कुमार ने इलाके की दो 13 वर्ष और एक 14 वर्ष की किशोरी को अगवा कर बेच दिया था। आरोपी प्रदीप कुमार को गिरफ्तार कर पुलिस ने किशोरियों को बरामद किया था। जिसके बाद कोर्ट ने आरोपी को सजा सुनाई थी। सजा के खिलाफ प्रदीप ने 1987 में हाईकोर्ट में अपील की थी, जिसके बाद वह जमानत पर बाहर आ गया। इसके बाद वह फरार हो गया। आरोपी के खिलाफ वारंट भी जारी हुए, लेकिन उसका कुछ पता नहीं चला। इधर हाईकोर्ट ने इस पुराने मामले में सख्त रुख अपनाते हुए पुलिस कमिश्नर से जवाब तलब किया था। सात अगस्त को इस मामले में पुलिस कमिश्नर को जवाब दाखिल करना था। इसके बाद जूही पुलिस हरकत में आई और थाने से महज दो किलोमीटर की दूरी पर उसे अरेस्ट किया। अगवा किशोरियों में एक की हो चुकी है मौत इंस्पेक्टर केके ने बताया कि मामले में कोर्ट ने प्रदीप उसकी पत्नी फगुनी उर्फ राजकुमारी और तब मकान मालकिन रही एक महिला को दोषी ठहराया था, पत्नी की 2024 में मृत्यु हो चुकी है। उसका मृत्यु प्रमाण पत्र भी मिला है। जिन तीन किशोरियों को अगवा किया गया था, उनमें एक की मौत हो चुकी है। वोटर आईडी से आरोपी तक पहुंची पुलिस पुलिस के मुताबिक, करीब दो माह से आरोपी के खिलाफ सर्च अभियान चल रहा था। तलाश में लगी एक टीम को आरोपी का वोटर आईडी हाथ लगा। इसपर चुनाव आयोग की वेबसाइट खंगाली गई, वहां से आरोपी का एपिक नंबर मिला। इसके बाद परिवार का ब्योरा खंगाला गया, बीएलओ से संपर्क किया तो एक रिश्तेदार प्रकाश में आया। उससे पूछताछ की गई, तब जाकर आरोपी पकड़ में आ सका
39 साल से फरार आरोपी को किदवई नगर पुलिस ने दबोचा किदवईनगर पुलिस ने भी 39 साल से फरार चल रहे कोयला घोटाले के आरोपी रहे एफ ब्लॉक निवासी 68 वर्षीय विशम्भर सिंह को गिरफ्तार कर लिया। किदवई नगर एसओ विजय सिंह ने बताया कि वर्ष 1986 में तत्कालीन एडीएम फाइनेंस ने विशम्भर के खिलाफ आवश्यक वस्तु सेवा अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया था। आरोप था कि विशम्भर ने कोयला खदान का लाइसेंस प्राप्त किया। हालांकि तय सीमा से अधिक भंडारण कर उसको बेचा। मामले का खुलासा होने पर रिपोर्ट दर्ज हुई थी। जिसके बाद आरोपी को जेल भेजा गया। वर्ष 1987 को जमानत पर बाहर आने के बाद विशम्भर गायब हो गया। मामला हाईकोर्ट में जाने के बाद वारंट जारी हुआ। इधर पुलिस को जानकारी हुई कि विशम्भर किदवई नगर एफ ब्लॉक में 128/17 मकान में रहने आया है। इसपर गुरुवार को आरोपी को गिरफ्तार करने के बाद जेल भेजा गया। फरारी के दौरान आरोपी दिल्ली, पंजाब, चंडीगढ़ में रहा।
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तीन किशोरियों को अगवा करने वाला 40 साल बाद अरेस्ट: जूही थाने से 2Km दूर रह रहा था, हाईकोर्ट ने पुलिस कमिश्नर को किया था तलब – Kanpur News
हनुमान मंदिर हटाने के विरोध में प्रदर्शन: उज्जैन के कंठाल चौराहे पर बजरंग दल ने किया चकाजाम – Ujjain News
उज्जैन के कंठाल चौराहे पर सिंहस्थ 2028 के चौड़ीकरण कार्य के दौरान हनुमान मंदिर हटाने की आशंका को लेकर हिंदू समाज और बजरंग दल ने विरोध प्रदर्शन किया। कार्यकर्ताओं ने एक घंटे तक चकाजाम किया, जिसे निगम अधिकारियों के आश्वासन के बाद समाप्त किया गया। प्राचीन संकट मोचन हनुमान मंदिर को लेकर यह विवाद गहरा गया है। विकास कार्य के दौरान मंदिर हटाए जाने की आशंका के चलते देर रात हिंदू समाज, विश्व हिंदू परिषद और बजरंग दल के कार्यकर्ता मौके पर पहुंचे। उन्होंने सामूहिक हनुमान चालीसा का पाठ किया, महाआरती की और फिर विरोध प्रदर्शन करते हुए चकाजाम किया। बजरंग दल के पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि शहर के विकास के नाम पर अब तक 25 से 30 मंदिर हटाए जा चुके हैं। उनका कहना है कि प्राचीन मंदिरों को लगातार हटाकर सनातन संस्कृति और हिंदू समाज की भावनाओं को ठेस पहुंचाई जा रही है। संगठन ने मांग की कि यदि अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की जाती है, तो वह सभी धार्मिक स्थलों पर समान रूप से लागू होनी चाहिए। बजरंग दल ने चेतावनी दी है कि यदि भविष्य में किसी मंदिर के साथ छेड़छाड़ की गई या रात के समय कोई कार्रवाई की गई, तो अगले दिन शहर बंद कर उग्र आंदोलन किया जाएगा। इस पूरे मामले में नगर निगम के अपर आयुक्त संतोष टैगोर ने बताया कि कंठाल चौराहे पर नाली निर्माण कार्य के दौरान कुछ तकनीकी दिक्कतें सामने आई थीं। इसी संबंध में मंदिर समिति, विश्व हिंदू परिषद और स्थानीय लोगों के साथ चर्चा की गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सभी पक्षों के साथ बैठक कर आपसी सहमति से निर्णय लिया जाएगा और उसके बाद ही आगे की कार्रवाई होगी। वहीं, मंदिर के पुजारी राजेश बैरागी ने स्पष्ट किया कि उनका उद्देश्य किसी भी विकास कार्य में बाधा डालना नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि आवश्यकता हुई तो उपलब्ध स्थान पर मंदिर को व्यवस्थित करने पर विचार किया जा सकता है, लेकिन मंदिर को वहां से हटाया नहीं जाना चाहिए। बैरागी ने बताया कि इस विषय पर होने वाली बैठक के बाद ही अंतिम निर्णय लिया जाएगा।
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जोधपुर में पीयूष मिश्रा बोले- हार से क्यों डरते हो: स्वानंद किरकिरे ने कहा- दिल में आग लगने का सिस्टम खत्म नहीं होना चाहिए – Jodhpur News
दैनिक भास्कर मारवाड़ रो उत्सव के तहत तीसरे दिन गुरुवार को बॉलीवुड टॉक शो का आयोजन हुआ। यहां पीयूष मिश्रा ने यूथ को लेकर कहा- हार से क्यों डरते हो.. जो मन है, एक बार करके देखिए। हार ही तो मिलेगी। वहीं स्वानंद किरकिरे ने कहा- हमेशा मल्टी टास्कींग काम करो। एक काम से दिल नहीं भरता है तो दूसरा, तीसरा काम करो। मन नहीं भरने और दिल में आग लगने का सिस्टम खत्म नहीं होना चाहिए। दरअसल, मारवाड़ इंटरनेशनल सेंटर में बॉलीवुड टॉक शो के दौरान दोनों कलाकारों ने अपनी एक्सपीरिएंस, जंतर-मंतर और यूथ को लेकर बात की। इस मौके पर दैनिक भास्कर के नेशनल एडिटर एलपी पंत और एंकर शेलेंद्र व्यास के सवालों के जवाब देते हुए जोधपुर के युवाओं के लिए भी कई मैसेज दोनों कलाकारों ने दिए। साथ ही जोधपुरवासियों की डिमांड पर दोनों ने अपने-अपने सॉन्ग भी सुनाए। जिन्हें शहरवासियों ने काफी पसंद किया। जंतर-मंतर पर बोले- वहां बच्चे नहीं, यंगस्टर थे जब जंतर-मंतर के प्रोटेस्ट और उनके बनाए वीडियो को लेकर सवाल किया तो वे बोले- मन में गुस्सा भी था और छटपटाहर भी थी। इसमें कोई बच्चा नहीं था। सभी यंगस्टर थे। कई ऐसी बात बोली कि मेरा मन आधा हो गया। पीयूष मिश्रा ने कहा- झारखंड के रांची में भी स्टूडेंट आंदोलन चल रहा है। इंस्डस्ट्री में किसी ने वीडियो बनाकर शेयर नहीं किया। मैंने वीडियो भी बनाया और परसों मैं वहां जा रहा हूं। ऐसा लग रहा है कि झारखंड को सौतेला बनाकर रखा है। वहीं स्वानंद किरकिरे ने जंतर-मंतर प्रोटेस्ट के दौरान यूज की भाषा को लेकर कहा- आज के दौर में बोलना सबसे कठिन है। यदि बोला है तो उसने हिम्मत का काम किया है। दोनों ने अपने ट्रेंडिंग साॅन्ग को लेकर भी की बात बॉलीवुड टॉक शो के दौरान जब उनसे पूछा गया कि बावरा मन को बयां करना है तो कैसे करेंगे। तब उनका कहना था- मैंने लिख दिया लोग बयां कर रहे है। जो गीत लिखा लोगों ने अपना दिया है। उन्होंने कहा- पीयूष मिश्रा मेरे बड़े भाई है। यदि ये गाना नहीं लिखते तो मैं भी नहीं लिख पाता था। मुझे लोग छोटा पीयूष मिश्रा कहने लगे थे। वहीं गुलाल मूवी के सवाल पर पीयूष मिश्रा ने कहा- वो बीत चुका है। काम करके भूल जाओ ये मेरी आदत है। मैं गुलाल को बहुत ज्यादा याद नहीं करता। यदि इसमें रह जाता तो आगे इससे बेहतर नहीं कर पाता। बोले- हमेशा हां बोलो…आपको आगे के रास्ते दिखेंगे स्वानंद किरकिरे से जब पंचायत मूवी को लेकर सवाल किया तो उन्होंने कहा- मैं सभी एक्टर के साथ बड़ा हुआ हूं। जब मुझे ऑफर मिला तो मैंने एक्टिंग को सीरियल लेना शुरू किया। उन्होंने कहा- एक काम से दिल नहीं भरता है। ये सभी यूथ को भी सोचना होगा कि दिल में आग लगने का सिस्टम खत्म नहीं होना चाहिए। जब भी मौका मिले और काम के लिए कहे तो हां बोले…। हां बोलेंगे तो आपको आगे का रास्ता मिलेगा। इसलिए जब मुझे कहा एक्टिंग करेगा तो मैंने कहा.. हां करूंगा। लोगों के साथ गुनगुनाया गाना, दोनों बोले-जोधपुर का खाना लाजवाब इस दौरान जोधपुरवासियों की रिक्वेस्ट पर दोनों ने अपने-अपने ट्रेडिंग सॉन्ग भी सुनाए। स्वानंद किरकिरे ने ‘रेल सी गुजरती है..’ सॉन्ग सुनाया। उन्होंने इस सॉन्ग का वो हिस्सा भी सुनाया जो रिकॉर्ड में नहीं था। इसके साथ ही पीयूष मिश्रा ने ‘एक बगल में चांद होगा…; और ’आरंभ है प्रचंड है…’ सॉन्ग जोधपुरवासियों का सुनाया। इस दौरान दोनों ने जोधपुर के खाने की तारीफ करते हुए कहा- हमने यहां के मिर्चीबड़े और गुलाब जामुन आज खाए हैं। पीयूष मिश्रा ने कहा- मुझे ये शहर पसंद है, क्योंकि ये शांत चलता है।
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ट्रम्प की सख्ती से भारतीय छात्रों का अमेरिका जाना कम: 65 साल में पहली बार अप्रवासियों की संख्या घटी; पाकिस्तान-बांग्लादेश के छात्रों को ज्यादा वीजा
वॉशिंगटन डीसी2 घंटे पहले
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अमेरिका में पढ़ाई का सपना देखने वाले भारतीय छात्रों के लिए अब राह पहले जैसी आसान नहीं रही। ट्रम्प सरकार की सख्त इमिग्रेशन पॉलिसी के बीच 2025 में भारतीय छात्रों को मिलने वाले F-1 स्टूडेंट वीजा में बड़ी गिरावट आई है। इसके उलट पाकिस्तान, बांग्लादेश और वियतनाम जैसे देशों के छात्रों को पहले के मुकाबले ज्यादा वीजा मिले हैं।
सख्ती का असर सिर्फ स्टूडेंट वीजा तक सीमित नहीं है। वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, जनवरी 2025 में अमेरिका में अप्रवासियों की संख्या रिकॉर्ड 5.33 करोड़ थी, जो जून तक घटकर 5.19 करोड़ रह गई। 1960 के दशक के बाद पहली बार वहां अप्रवासियों की आबादी में गिरावट दर्ज की गई है।

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने फरवरी में स्टेट ऑफ द यूनियन संबोधन 2026 के दौरान कहा था कि अमेरिकी सरकार का पहला कर्तव्य अपने नागरिकों की सुरक्षा करना है, न कि अवैध प्रवासियों की।
भारतीय छात्रों के लिए अमेरिका पहुंचना मुश्किल हुआ
सेंटर फॉर इमिग्रेशन स्टडीज (CIS) के मुताबिक, मई से अगस्त के बीच एडमिशन का पीक सीजन होता है। इसी दौरान 2025 में भारतीय छात्रों को मिलने वाले F-1 स्टूडेंट वीजा पिछले साल के मुकाबले 62% घट गए। चीनी छात्रों पर भी असर पड़ा और उन्हें 34% कम वीजा मिले।
हालांकि, तस्वीर सभी देशों के लिए एक जैसी नहीं रही। 2025 की पहली छमाही में वियतनाम के छात्रों को 5,324 F-1 वीजा मिले, जो पिछले साल के मुकाबले 19.6% ज्यादा हैं। बांग्लादेश के छात्रों को 2,098 वीजा मिले, यानी 20.1% की बढ़ोतरी हुई। वहीं पाकिस्तान के छात्रों को 1,928 F-1 वीजा मिले, जो पिछले साल की तुलना में 44.3% अधिक हैं।

4 फैसलों से अमेरिका जाने में गिरावट आई
1. सोशल मीडिया की जांच जरूरी: स्टूडेंट वीजा इंटरव्यू दोबारा शुरू होने के बाद आवेदकों को अपने सोशल मीडिया अकाउंट पब्लिक करने पड़े। इसके बाद अमेरिकी अधिकारियों ने उनकी ऑनलाइन गतिविधियों की जांच की।
2. वीजा जांच पहले से ज्यादा सख्त: वीजा आवेदकों के दस्तावेज, यात्रा इतिहास और दूसरी जानकारियों की पहले के मुकाबले ज्यादा गहराई से जांच की जाने लगी। इससे वीजा प्रक्रिया लंबी हुई और कई मामलों में मंजूरी मिलने में देरी हुई।
3. शरण के नियम कड़े: अमेरिका में शरण मांगने वालों के लिए भी नियम सख्त किए गए। अब पहले के मुकाबले शरण मिलना आसान नहीं है।
4. अवैध अप्रवासियों पर सख्ती: अवैध अप्रवासियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए ICE जैसी एजेंसी को ज्यादा अधिकार मिले। इसके बाद कई राज्यों में छापेमारी और गिरफ्तारी की कार्रवाई बढी।

अमेरिका के मिनियापोलिस शहर में ICE के एक एजेंट ने कार सवार महिला को गोली मार दी थी। इसके खिलाफ हजारों लोग सड़कों पर उतर आए और ICE के खिलाफ नारेबाजी की।
अमेरिका की जगह यूरोप को चुन रहे हैं भारतीय छात्र
अमेरिका में सख्त होती इमिग्रेशन नीतियों के बीच कई भारतीय छात्र अब यूरोप का रुख कर रहे हैं। जर्मनी, फ्रांस, आयरलैंड, इटली और नीदरलैंड जैसे देश उनकी नई पसंद बनकर उभरे हैं। इसकी बड़ी वजह कम फीस, अपेक्षाकृत आसान वीजा प्रक्रिया और पढ़ाई पूरी करने के बाद नौकरी के बेहतर अवसर हैं।
रॉयटर्स के मुताबिक, यूरोप की कई यूनिवर्सिटीज की फीस अमेरिकी यूनिवर्सिटीज के मुकाबले 50% से 80% तक कम है। यही वजह है कि 2015 से 2023 के बीच यूरोप जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या 45% बढ़ी। वहीं जर्मनी, फ्रांस, इटली और आयरलैंड में भारतीय छात्रों के दाखिले में 68% की बढ़ोतरी दर्ज की गई।
सिर्फ छात्र ही नहीं, अमेरिका में काम कर रहे कुछ भारतीय प्रोफेशनल भी सख्त वीजा नियमों और नौकरी को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के कारण भारत लौटने या दूसरे देशों का रुख करने लगे हैं।
H-1B वर्क वीजा में भारतीय अब भी आगे
पढ़ाई के लिए अमेरिका जाने वाले भारतीय छात्रों की संख्या घट रही है, लेकिन अमेरिकी कंपनियों में भारतीय प्रोफेशनल्स की मांग अब भी सबसे ज्यादा बनी हुई है।
2024 में जारी सभी H-1B वीजा में 71% भारतीयों को मिले। चीन दूसरे स्थान पर रहा, जबकि फिलीपींस, कनाडा और साउथ कोरिया की हिस्सेदारी करीब 1-1% रही।

अमेरिका अब भी सबसे बड़ा प्रवासी देश
सख्त नियमों और वीजा में गिरावट के बावजूद अमेरिका दुनिया का सबसे बड़ा प्रवासी देश बना हुआ है। बेहतर शिक्षा, नौकरी और कमाई के मौके आज भी लाखों लोगों को अमेरिका की ओर आकर्षित करते हैं।
2023 के उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका में सबसे ज्यादा 1.1 करोड़ प्रवासी मेक्सिको से हैं। इसके बाद भारत (32 लाख), चीन (30 लाख), फिलीपींस (21 लाख) और क्यूबा (17 लाख) का स्थान है।
प्यू रिसर्च सेंटर के मुताबिक, अमेरिका में रहने वाले कुल प्रवासियों में 52% लैटिन अमेरिका और 27% एशिया से हैं। यानी, अमेरिका की प्रवासी आबादी में एशियाई देशों की बड़ी हिस्सेदारी है। ऐसे में वीजा नियमों में होने वाले बदलाव का असर भारत, चीन और दूसरे एशियाई देशों पर सबसे ज्यादा पड़ता है।

अमेरिका में अप्रवासियों के समर्थन में प्रदर्शन के दौरान ‘अप्रवासी अमेरिका को महान बनाते हैं’ लिखा पोस्टर लिए प्रदर्शनकारी।
अमेरिका में विदेशी टूरिस्टों की भी संख्या घटी
ट्रम्प सरकार की सख्त नीतियों का असर अमेरिकी पर्यटन पर भी पड़ा है। 2025 में अमेरिका आने वाले विदेशी टूरिस्टों की संख्या घटकर करीब 6.83 करोड़ रह गई, जबकि 2024 में यह आंकड़ा 7.23 करोड़ था। इसके चलते विदेशी पर्यटकों के खर्च में भी 8 अरब डॉलर से ज्यादा की कमी दर्ज की गई।
सबसे बड़ी गिरावट कनाडा से आने वाले टूरिस्टों की संख्या में रही। इसके अलावा भारत, जर्मनी, फ्रांस, ऑस्ट्रेलिया और चीन से आने वाले पर्यटकों की संख्या भी घटी। हालांकि, इस दौरान मेक्सिको से अमेरिका आने वाले टूरिस्टों की संख्या बढ़ी।
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अमेरिका में इमिग्रेशन को लेकर नया बिल पेश: 7 साल रहने वाले प्रवासियों को ग्रीन कार्ड मिलेगा, लाखों भारतीयों को हो सकता है फायदा

अमेरिका में रह रहे भारतीय H-1B वीजा धारकों समेत लाखों लोगों के लिए ग्रीन कार्ड पाने का नया मौका मिल सकता है।
अमेरिकी सीनेट में एक ऐसा विधेयक पेश किया गया है, जिसमें पिछले 7 साल से लगातार अमेरिका में रह रहे लोगों को ग्रीन कार्ड के लिए आवेदन करने की अनुमति देने का प्रस्ताव है।
ग्रीन कार्ड अमेरिका में स्थायी रूप से रहने और काम करने की अनुमति देने वाला आधिकारिक दस्तावेज है। इसे आधिकारिक तौर पर परमानेंट रेजिडेंट कार्ड कहा जाता है। पूरी खबर पढ़ें…
नीति आयोग की रैंकिंग में पंजाब ने केरल को पछाड़ा: शिक्षा मंत्री ने विधानसभा में चार सालों का रिपोर्ट कार्ड पेश किया – New Delhi News
प्रदेश में शिक्षा में ऐतिहासिक बदलाव का दावा करते हुए पंजाब के शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने बताया कि पंजाब ने केरल को पछाड़कर ‘नीति आयोग स्कूल एजुकेशन क्वालिटी इंडेक्स 2026’ में शीर्ष स्थान हासिल किया है। जहां वर्ष 2022 में 8,000 स्कूलों में चारदीवारी नहीं थी और लगभग 4 लाख विद्यार्थी ताटों (चटाइयों) पर बैठकर पढ़ने को मजबूर थे। वहीं आज पंजाब के सरकारी स्कूलों के 882 विद्यार्थियों ने नीट परीक्षा पास की है। पंजाब पहली से 12वीं कक्षा तक ‘आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस’ को मुख्य विषय के रूप में शुरू करने वाला देश का पहला राज्य बन गया है। यह वह बदलाव है जिसका वादा आप की अगुवाई वाली पंजाब सरकार ने किया था। विधायक प्रो. जसवंत सिंह गज्जनमाजरा द्वारा लाए गए शिक्षा संबंधी प्रस्ताव पर बहस में भाग लेते हुए, स्कूल शिक्षा मंत्री हरजोत सिंह बैंस ने जुलाई 2022 में पदभार संभालने के समय स्कूलों की खराब स्थिति को याद करवाया। बुनियादी ढांचे के प्रारंभिक सर्वेक्षण के नतीजों के बारे में बताते हुए बैंस ने कहा कि 8,000 से अधिक स्कूलों में चारदीवारी नहीं थी। वहीं 3,200 में उपयोग योग्य बाथरूम नहीं थे और लगभग 4 लाख बच्चे जमीन पर बैठने को मजबूर थे। पाठ्यपुस्तकें अक्टूबर-नवंबर में स्कूलों तक पहुंचती थीं, जिससे शैक्षणिक सत्र के कई महीने बर्बाद हो जाते थे। किसी भी सरकारी शिक्षक से इसकी पुष्टि करने की चुनौती देते हुए उन्होंने आगे कहा, अब वही पाठ्यपुस्तकें 15 फरवरी तक जिला मुख्यालयों तक पहुंच जाती हैं और 31 मार्च तक वितरित कर दी जाती हैं। अपने शासन मॉडल के बारे में बताते हुए बैंस ने कहा कि उन्होंने पंजाब के हर जिले के 2,000 से अधिक सरकारी स्कूलों का निजी तौर पर दौरा किया है। जिनमें सीमावर्ती स्कूल, जीरो-लाइन से सटे गांव और दूर-दराज के क्षेत्र शामिल हैं। उन्होंने सदन को बताया कि सरकार का प्रमुख ‘मिशन समरथ’ भारत के सबसे बड़े बुनियादी शिक्षा कार्यक्रमों में से एक के रूप में उभरा है। इसके लेवल बेस्ड टीचिंग मॉडल के तहत, हर बच्चे को अच्छी तरह पढ़ना, लिखना और गणित सिखाना सुनिश्चित करने के लिए विद्यार्थियों को ग्रेड के बजाय उनकी सीखने की क्षमता के अनुसार समूहों में बांटा जाता है। शिक्षा मंत्री ने कहा, जब मैंने सितंबर-अक्टूबर 2022 में स्कूलों का दौरा किया, तो मैंने 8वीं कक्षा के ऐसे विद्यार्थी भी देखे जो सामान्य वाक्य भी नहीं लिख सकते थे। कुछ विद्यार्थी सामान्य जोड़ और घटाव नहीं कर सकते थे। हमने इन विद्यार्थियों की पहचान की और इन्हें तीसरी कक्षा के सिलेबस के स्तर से पढ़ाया। आज वे बहुत सुधार कर रहे हैं। उन्होंने आगे बताया कि इस कार्यक्रम के तहत अब सालाना लगभग 12 लाख विद्यार्थियों और 70,000 से अधिक शिक्षकों को कवर किया जाता है। सरकारी स्कूलों के विद्यार्थियों के प्रदर्शन में हुए सुधार के बारे में बैंस ने सदन को बताया कि पंजाब के सरकारी स्कूलों से नीट-यू.जी. परीक्षा पास करने वालों की संख्या वर्ष 2021 में मात्र 80 से बढ़कर वर्ष 2026 में 882 हो गई है। उन्होंने कहा कि ये नतीजे ‘पंजाब अकादमिक कोचिंग फॉर एक्सीलेंस’ (पेस) पहल का स्पष्ट परिणाम हैं।
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एलआईसी ने तीन महीने में कमाए 2.38 लाख करोड़ रुपये, मुनाफा भी 23 फीसदी बढ़ गया
नई दिल्ली. देश की सबसे बड़ी जीवन बीमा कंपनी भारतीय जीवन बीमा निगम (एलआईसी) ने चालू वित्तवर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में बंपर कमाई की है.कंपनी ने गुरुवार को शेयर बाजार को दी जानकारी में बताया कि अप्रैल-जून तिमाही में उसका कुल शुद्ध लाभ 23 फीसदी बढ़कर 13,492 करोड़ रुपये हो गया. इससे पहले वित्तवर्ष 2025-26 की समान तिमाही में एलआईसी का शुद्ध लाभ 10,987 करोड़ रुपये रहा था.
एलआईसी ने बताया कि जून तिमाही में उसकी कुल कमाई बढ़कर 2,37,848 करोड़ रुपये हो गई, जो 2025-26 की समान अवधि में 2,22,864 करोड़ रुपये थी. पहले साल के प्रीमियम से हुई कमाई जून तिमाही में बढ़कर 9,217 करोड़ रुपये रही, जो पिछले वित्त वर्ष की समान तिमाही में 7,525 करोड़ रुपये थी. इसके अलावा रिन्यू कराने वाली पॉलिसी के प्रीमियम की कमाई बढ़कर 61,833 करोड़ रुपये हो गई, जबकि एक साल पहले यह 59,885 करोड़ रुपये थी.
सिंगल प्रीमियम से भी मोटी कमाई
एलआईसी ने बताया कि जून तिमाही के दौरान सिंगल प्रीमियम से कमाई भी बढ़कर 56,369 करोड़ रुपये रही, जो वित्तवर्ष 2025-26 की पहली तिमाही में 51,923 करोड़ रुपये थी. इससे कंपनी की शुद्ध प्रीमियम से कमाई बढ़कर 1,27,250 करोड़ रुपये हो गई, जो एक साल पहले की समान अवधि में 1,19,200 करोड़ रुपये थी. हालांकि, इस दौरान कंपनी का कुल खर्च भी बढ़कर 2,25,573 करोड़ रुपये हो गया, जो पिछले वित्त वर्ष की जून तिमाही में 2,11,928 करोड़ रुपये था.
बीमा क्लेम निपटाने में भी सुधार
एलआईसी ने बताया कि चालू वित्तवर्ष की पहली तिमाही में एलआईसी के क्लेम निपटाने में भी सुधार आया है. क्लेम निपटाने का अनुपात सुधारकर 2.42 गुना हो गया है, जो एक साल पहले की समान तिमाही में 2.17 गुना था. इसका मतलब है कि कंपनी ने अपने ग्राहकों के बीमा दावों का सेटलमेंट करने में भी तेजी हासिल की है. इस अनुपात का मतलब है कि क्लेम रिजेक्ट करने की तुलना में उसका निपटारा करने की दर दोगुने से भी ज्यादा है.
शेयरों में दिखी गिरावट
एलआईसी के दमदार प्रदर्शन के बावजूद निवेशकों का सेंटिमेंट गुरुवार को कमजोर दिखा और कंपनी के शेयरों में गिरावट दिखी. एनएसई पर एलआईसी के स्टॉक्स 1.4 फीसदी की गिरावट के साथ 387.50 रुपये के भाव पर बंद हुए. इससे पहले सरकार ने एलआईसी में ऑफर फॉर सेल के जिरये अपनी करीब 7 फीसदी हिस्सेदारी बेच दी और 32 हजार करोड़ रुपये का फंड जुटाया. इस डील की वजह से ही निवेशकों का सेंटिमेंट कमजोर दिख रहा है.
Samsung का सस्ता स्मार्टफोन गीकबेंच पर हुआ लिस्ट, Android 17 के साथ होगा लॉन्च?
Samsung Galaxy A सीरीज में एक और सस्ते फोन को लॉन्च करने वाला है। दक्षिण कोरियाई कंपनी का यह फोन 4G कम्पैटिबल होगा और Android 17 ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ आ सकता है। इस फोन को गीकबेंच सर्टिफिकेशन वेबसाइट पर लिस्ट किया गया है, जहां इसके कुछ फीचर्स भी रिवील हुए हैं।
गीकबेंच लिस्टिंग में सामने आए फीचर्स
Samsung Galaxy A18 4G को Galaxy A17 के अपग्रेड के तौर पर पेश किया जाएगा। सैमसंग के Galaxy A16 और Galaxy A17 ग्लोबली सबसे ज्यादा बिकने वाले डिवाइस हैं। गीकबेंच लिस्टिंग में सैमसंग के इस अपकमिंग फोन को सिंगल कोर में 738 और मल्टी-कोर में 2025 का स्कोर मिला है। इसमें MT6789 यानी MediaTek Helio G99 चिपसेट दिए जाएगा। इसके अलावा लिस्टिंग के मुताबिक, फोन में Android 17 ऑपरेटिंग सिस्टम मिलेगा।
बजट प्राइस में हो सकता है लॉन्च
सैमसंग का यह फोन सर्टिफिकेशन वेबसाइट पर मॉडल नंबर SM-A185F के नाम से लिस्ट किया गया है। 4G स्मार्टफोन होने की वजह से दक्षिण कोरियाई कंपनी इस फोन को बजट प्राइस में लॉन्च कर सकती है। इसकी कीमत भारत में 15,000 रुपये की प्राइस रेंज में होने की उम्मीद है। Samsung Galaxy A18 4G के बारे में और ज्यादा डिटेल्स फिलहाल सामने नहीं आई है।
Galaxy A18 के अलावा कंपनी तीन और सस्ते फोन को भी जल्द लॉन्च करने वाली है। सैमसंग के ये फोन Samsung Galaxy A08 4G, Galaxy M08 और Galaxy F08 के नाम से लॉन्च किए जा सकते हैं। इन तीनों फोन को अमेरिकी सर्टिफिकेशन वेबसाइट FCC पर पिछले दिनों देखा गया है। ये फोन GSM, WCDMA, LTE, Bluetooth, FM रेडियो और डुअल बैंड WiFi सपोर्ट के साथ पेश किए जाएंगे। WiFi Alliance सर्टिफिकेशन वेबसाइट पर Galaxy A08 को मॉडल नंबर SM-A805F/DS के साथ देखा गया है। यह फोन पिछले साल आए Galaxy A07 4G का अपग्रेड होगा।
Galaxy A07 के फीचर्स
भारत में पिछले साल लॉन्च हुए Galaxy A07 4G के फीचर्स की बात करें तो यह फोन 6.74 इंच के HD+ डिस्प्ले के साथ आता है, जो 90Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। यह फोन भी MediaTek Helio G99 चिपसेट पर काम करता है। फोन में 5000mAh की बैटरी मिलती है। कैमरे की बात करें तो यह 50MP के डुअल रियर और 8MP के सेल्फी कैमरा के साथ आता है। इस फोन की कीमत 8,999 रुपये है।
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बारिश में घर पर ऐसे बनाएं आलू-प्याज और आटे के पकौड़े, पड़ोसी भी पूछेंगे रेसिपी
No Besan Pakoda Recipe : बारिश का मौसम आते ही चाय के साथ गरमा-गरम पकौड़े खाने का मन करता है. लेकिन, कई बार घर पर बेसन खत्म हो जाता है और पकौड़े बनाने का प्लान अधूरा रह जाता है. अगर आपके साथ भी ऐसा हुआ है, तो चिंता करने की कोई बात नहीं है। आप सिर्फ़ गेहूं के आटे, आलू और प्याज़ का इस्तेमाल करके स्वादिष्ट और कुरकुरे पकौड़े बना सकते हैं. ये पकौड़े बाहर से कुरकुरे और अंदर से नरम बनते हैं। आइए इसकी आसान रेसिपी जानते हैं…
आवश्यक सामग्री
2 मध्यम आकार के आलू, 2 प्याज, 1 कप गेहूं का आटा, 2 बड़े चम्मच चावल का आटा, 1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर, ½ छोटा चम्मच हल्दी पाउडर, 1 छोटा चम्मच अजवाइन, 1 छोटा चम्मच धनिया पाउडर, स्वादानुसार नमक, बारीक कटा हुआ ताज़ा हरा धनिया, ज़रूरत के अनुसार पानी और तलने के लिए तेल.
कैसे तैयार करें बैटर
एक बड़े कटोरे में गेहूं का आटा और चावल का आटा डालें. अब इसमें लाल मिर्च, हल्दी, अजवाइन, धनिया पाउडर, नमक और हरा धनिया मिलाएं। थोड़ा-थोड़ा करके पानी डालकर गाढ़ा घोल तैयार कर लें. ध्यान रखें कि घोल न तो बहुत पतला हो और न ही बहुत गाढ़ा.
बनाने की विधि
अब कटे हुए आलू और प्याज को तैयार घोल में अच्छी तरह मिला लें, ताकि मसाले हर टुकड़े पर अच्छी तरह लग जाएं. एक पैन में तेल गरम करें. जब तेल पर्याप्त गर्म हो जाए तो मिश्रण को थोड़ा-थोड़ा करके तेल में डालें. पकौड़ों को मध्यम आंच पर दोनों तरफ से सुनहरा और कुरकुरा होने तक तलें.
कैसे परोसें
पकौड़ों को टिश्यू पेपर पर निकाल लें ताकि अतिरिक्त तेल निकल जाए. इन्हें हरे धनिये की चटनी, इमली की चटनी या टोमैटो सॉस के साथ गरमागरम परोसें. अदरक वाली चाय के साथ इनका स्वाद और भी अच्छा लगता है.
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( Disclaimer : इस खबर में दी गई जानकारी और सलाह विशेषज्ञों से हुई बातचीत पर आधारित है. ये सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए किसी भी सलाह को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें. किसी भी नुकसान के लिए न्यूज-18 जिम्मेदार नहीं रहेगा.


