Sunday, August 9, 2026
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अहमदाबाद में पीजी हॉस्टल की छत पर स्टूडेंट से रेप: युवती भागी तो आरोपी गार्ड ने तार से गला बांधा, चार दिन पहले नौकरी लगी थी


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अहमदाबाद5 मिनट पहले

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अहमदाबाद में एक सुरक्षा गार्ड को पीजी में रह रही एक स्टूडेंट से दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। पुलिस के मुताबिक, PG में सिक्योरिटी गार्ड धर्मसिंह ने शनिवार की रात छत पर छात्रा को अकेला पाकर उसके साथ रेप किया।

पीड़िता इंटीरियर डिजाइनिंग की पढ़ाई कर रही है और एक साल से इसी सोसायटी के पीजी हॉस्टल में रह रही थी। वहीं, आरोपी को सोसाइटी में सुरक्षा गार्ड की नौकरी शुरू किए सिर्फ चार दिन ही हुए थे।

आरोपी के दो सीसीटीवी फुटेज, जिसमें वह लिफ्ट के अंदर और वारदात के बाद बाहर जाता दिखाई दिया

शनिवार रात 7.22 बजे लिफ्ट के अंदर आते नजर आया।

शनिवार रात 7.22 बजे लिफ्ट के अंदर आते नजर आया।

वारदात के बाद रात 8.52 पर बाहर निकलते हुए।

वारदात के बाद रात 8.52 पर बाहर निकलते हुए।

युवती ने बचने की कोशिश की तो वायर से गला दबा दिया

पुलिस के मुताबिक, वारदात शनिवार रात करीब 8 बजे हुई। छात्रा सोसायटी की छत पर टहलने गई थी। तभी धर्मसिंह छत पर पहुंचा और सीढ़ियों का गेट बंद कर लिया।

इसके बाद उसने स्टूडेंट के साथ जबरदस्ती की। जब छात्रा ने विरोध किया तो बिजली के वायर से उसका गला कस दिया फिर रेप किया और फरार हो गया था।

गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी ने अपना मोबाइल फोन बंद कर लिया था। पुलिस, लोकल क्राइम ब्रांच और क्राइम ब्रांच के कर्मचारियों की 10 टीमों ने इलाके की सीसीटीवी फुटेज खंगाली और तलाशी अभियान चलाया।

इस अभियान के दौरान उसे रविवार सुबह करीब 8 बजे हेबतपुर इलाके से गिरफ्तार कर लिया गया।

पुलिस ने आरोपी को रविवार सुबह हेबतपुर इलाके से गिरफ्तार किया।

पुलिस ने आरोपी को रविवार सुबह हेबतपुर इलाके से गिरफ्तार किया।

अहमदाबाद की कई कंपनियों में कर चुका था काम

पुलिस के मुताबिक, आरोपी इससे पहले अहमदाबाद की अलग-अलग कंपनियों में सुरक्षा गार्ड के तौर पर काम कर चुका था। इसके बाद उसने आनंदनगर इलाके की हाउसिंग सोसाइटी में जॉइन किया।

पुलिस ने कहा कि सिंह को नौकरी पर रखने वाली सुरक्षा एजेंसी ने उसका बैकग्राउंड वेरिफिकेशन नहीं किया। एजेंसी ने उसे जरूरी ट्रेनिंग भी नहीं दी और उसकी बुनियादी जानकारी भी जमा नहीं की।

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US 100% टैरिफ लगा दे तो भी भारत के पास 15 रास्‍ते, अरबों डॉलर छापने का मौका


अमेर‍िका ने 100% टैरिफ वाला बिल पास क‍िया तो भारत में चर्चा होने लगी. टैर‍िफ का डर सताने लगा. लेकिन अर्थशास्त्री एसपी शर्मा का मानना है क‍ि भारत के पास अगर अमेर‍िका 100% टैरिफ लगा भी दे तो भारत के पास 15 अन्‍य रास्‍ते हैं. ऐसे 15 दूसरे बाजार हैं, जहां वह अपने उन प्रोडक्‍ट को उतार सकता है, जो अमेर‍िका में एक्‍सपोर्ट करता था. भारत इन बाजारों से 200 अरब डॉलर छाप सकता है.

एएनआई से बातचीत में एसपी शर्मा ने कहा कि भारत के पास निर्यात के कई दूसरे विकल्प मौजूद हैं और वह अमेरिकी बाजार पर बहुत ज्यादा निर्भर नहीं है. हालांकि भारत और अमेरिका के बीच मजबूत व्यापारिक और आर्थिक संबंध हैं. उन्होंने कहा, हमारे पास 15 ऐसे बाजार हैं, जहां हम वही उत्पाद निर्यात कर सकते हैं, जो अभी अमेरिका को भेज रहे हैं. अगर अमेरिका को हमारा मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट करीब 87-88 अरब डॉलर है, तो इन्हीं उत्पादों के लिए 15 दूसरे देशों में करीब 200 अरब डॉलर का बड़ा बाजार मौजूद है.

कहां कहां बने नए बाजार

एसपी शर्मा ने नीदरलैंड, फ्रांस, ब्रिटेन, लैटिन अमेरिका के देशों, सऊदी अरब, यूएई और नेपाल जैसे बाजारों का जिक्र किया, जहां भारतीय निर्यातक अपने कारोबार का विस्तार कर सकते हैं. उनके मुताबिक, भारत के पास अमेरिका के अलावा ऐसे कई बाजार हैं, जहां भारतीय उत्पादों की मांग बढ़ रही है.

उन्होंने बताया कि 2025-26 में भारत का अमेरिका को निर्यात 87.3 अरब डॉलर रहा, जो 2024-25 के 86.5 अरब डॉलर से अधिक है. टैरिफ को लेकर अनिश्चितता और वैश्विक स्तर पर कई चुनौतियों के बावजूद भारतीय निर्यातकों ने अपना प्रदर्शन बेहतर किया है. शर्मा ने कहा कि अमेरिका में भारतीय उत्पादों की अच्छी मांग है और भारत प्रतिस्पर्धी कीमतों पर श्रम-प्रधान उत्पाद उपलब्ध करा रहा है.

दूसरे देशों में एक्‍सपोर्ट तेजी से बढ़ा

शर्मा ने कहा कि कुछ दूसरे बाजारों में भारत का निर्यात अमेरिका की तुलना में तेजी से बढ़ रहा है. उन्होंने कहा, अगर अमेरिका के साथ हमारा निर्यात 10-15 फीसदी की दर से बढ़ रहा है, तो दूसरे बाजारों के साथ निर्यात वृद्धि दर 20-25 फीसदी के बीच है.” उनका मानना है कि भारत के पास विकल्प मौजूद हैं और वह अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर बहुत ज्यादा निर्भर नहीं है.

शर्मा ने यह भी कहा कि भारत और अमेरिका के आर्थिक रिश्ते काफी मजबूत हैं और दोनों देश द्विपक्षीय व्यापार समझौते को लेकर बातचीत कर रहे हैं. उनके मुताबिक, दोनों देशों के लिए कारोबार बढ़ाना ज्यादा फायदेमंद होगा. वहीं रूस से तेल खरीदने वाले देशों पर 100 फीसदी तक टैरिफ लगाने का कदम अमेरिका और भारत, दोनों के लिए नुकसानदेह हो सकता है.

अमेर‍िकी ग्राहकों पर भी सीधा असर

उनके मुताबिक- इतने ज्यादा टैरिफ का असर आखिरकार अमेरिकी ग्राहकों की जेब पर भी पड़ेगा, क्योंकि भारतीय कंपनियां कम लागत पर सामान उपलब्ध कराने वाली महत्वपूर्ण सप्लायर हैं. टैरिफ बढ़ने से अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद महंगे हो सकते हैं और वहां महंगाई का दबाव बढ़ सकता है. उन्होंने कहा, “व्यापार हमेशा लोगों के कल्याण के लिए होना चाहिए, व्यापार आपसी टकराव के लिए नहीं.” उनके मुताबिक, अतिरिक्त टैरिफ लगाने की बजाय भारत और अमेरिका के बीच लगातार व्यापारिक बातचीत दोनों अर्थव्यवस्थाओं के लिए ज्यादा फायदेमंद होगी.



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महिला से झुमका लूटने वाले दो लुटेरे गिरफ्तार: एटा में काली नदी पुल के पास हुई घटना का खुलासा, अवैध हथियार और नकदी बरामद – Etah News




एटा पुलिस ने करीब 14 दिन पहले कोतवाली देहात क्षेत्र में महिला से हुई छिनैती की घटना का खुलासा करते हुए दो शातिर अंतरजनपदीय लुटेरों को गिरफ्तार किया है। पुलिस, स्वाट और सर्विलांस टीम की संयुक्त कार्रवाई में आरोपियों के कब्जे से लूटा गया पीली धातु का झुमका, पीली धातु की चेन, दो तमंचे, तीन कारतूस, बाइक, मोबाइल फोन और 15,700 रुपये बरामद किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक 26 जुलाई की शाम काली नदी पुल के पास महिला और एक पुरुष बाइक से जा रहे थे। इसी दौरान दो बाइकों पर सवार चार बदमाशों ने उनकी बाइक में टक्कर मारकर उन्हें गिरा दिया। बदमाश महिला के कान से एक झुमका लूटकर अमांपुर की ओर फरार हो गए थे। मामले में कोतवाली देहात थाने में अज्ञात बदमाशों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई गई थी।
घटना को गंभीरता से लेते हुए वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक डॉ. इलामारन जि. ने पुलिस टीमों को जल्द खुलासा करने के निर्देश दिए। अपर पुलिस अधीक्षक श्वेताभ पाण्डेय और योगेंद्र सिंह के पर्यवेक्षण तथा क्षेत्राधिकारी नगर कीर्तिका सिंह के नेतृत्व में कोतवाली देहात पुलिस, स्वाट और सर्विलांस टीम ने जांच शुरू की। सीसीटीवी फुटेज और सर्विलांस की मदद से पुलिस आरोपियों तक पहुंची। पुलिस ने मोहित (23) पुत्र राजेंद्र प्रसाद और सचिन (19) पुत्र मुकेश कुमार, निवासी ग्राम नवाबगंज नगरिया, थाना सिकंदरपुर वैश्य, कासगंज को गिरफ्तार किया। उनके कब्जे से घटना में लूटा गया झुमका बरामद हुआ। इसके अलावा दो देशी तमंचे, तीन जिंदा कारतूस और बिना नंबर प्लेट की काली एक्सट्रीम बाइक बरामद की गई। पुलिस के मुताबिक इसी बाइक का इस्तेमाल वारदात में किया गया था।
कई जिलों में लूट और छिनैती की बात कबूली पूछताछ में आरोपियों ने एटा के अलावा कासगंज, फर्रुखाबाद, बरेली और शाहजहांपुर में भी लूट और छिनैती की कई घटनाओं को अंजाम देने की बात स्वीकार की है। पुलिस के अनुसार मिरहची क्षेत्र में दोनों ने दुकान बंद कर साइकिल से जा रहे युवक-युवती से थैला लूटने का प्रयास भी किया था, लेकिन इसमें सफल नहीं हो सके। पुलिस ने अन्य घटनाओं से संबंधित एक पीली धातु की चेन, रेडमी मोबाइल फोन और 15,700 रुपये भी बरामद किए हैं। संबंधित मुकदमे में धारा 317(2) बीएनएस और 3/25 आर्म्स एक्ट की बढ़ोतरी कर आरोपियों के खिलाफ आगे की वैधानिक कार्रवाई की जा रही है। कई जिलों में दर्ज हैं मुकदमे पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपियों का आपराधिक इतिहास कई जिलों से जुड़ा है। उनके खिलाफ अमांपुर कासगंज, मिरहची एटा, कम्पिल फर्रुखाबाद, फतेहगंज पूर्वी बरेली और जैतीपुर शाहजहांपुर में मुकदमे दर्ज हैं। गिरफ्तारी करने वाली टीम में थानाध्यक्ष कृष्णकांत लोधी, स्वाट प्रभारी एसके निगम, सर्विलांस प्रभारी सुशील लाम्बा और चौकी प्रभारी मरथरा अफसर खान समेत पुलिस टीमें शामिल रहीं।



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लहार में रात में 14 ट्रैक्टरों में रेत परिवहन: जवान के रोकने पर भी निकला अवैध रेत से भरे ट्रैक्टर-ट्रॉली, नेता का हवाला देकर धमकाया – Bhind News




भिंड के लहार क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन और परिवहन का मामला एक बार फिर चर्चा में है। शनिवार-रविवार की दरमियानी रात मटियावली गांव से रेत भरकर करीब 14 ट्रैक्टर मिहोना क्षेत्र की ओर ले जाए जाने की सूचना है। ड्यूटी पर तैनात पुलिस जवानों ने रेत से भरे ट्रैक्टरों को रोकने का प्रयास किया, लेकिन आरोप है कि रेत माफिया ने स्थानीय नेता का हवाला देते हुए जवान को धमकाया और ट्रैक्टरों को वहां से निकलवा लिया। मामला सामने आने के बाद भी पुलिस और खनिज विभाग की ओर से स्पष्ट कार्रवाई सामने नहीं आई है। पुलिस ने रोका तो नेता का हवाला देकर बनाया दबाव
जानकारी के अनुसार शनिवार-रविवार की दरमियानी रात मटियावली क्षेत्र से रेत से भरे ट्रैक्टर मिहोना की ओर जा रहे थे। इसी दौरान एक एफआरवी वाहन में तैनात पुलिस जवानों ने ट्रैक्टरों को रोकने का प्रयास किया। आरोप है कि रेत माफिया ने स्थानीय नेता का हवाला देते हुए पुलिस जवान पर दबाव बनाया। इसके बाद रेत से भरे ट्रैक्टरों को वहां से निकाल लिया गया। जिस पुलिस जवान ने ट्रैक्टरों को रोकने का प्रयास किया, वह इस मामले में कुछ भी कहने से बच रहा है। टेंडर के बाद मामला न्यायालय में विचाराधीन
दरअसल, लहार क्षेत्र में रेत का टेंडर होने के बाद संबंधित मामला न्यायालय में विचाराधीन है। इसके बावजूद क्षेत्र में समय-समय पर अवैध रेत उत्खनन और परिवहन की शिकायतें सामने आती रही हैं। कुछ दिन पहले मटियावली में अवैध रूप से रेत का भंडारण किए जाने की सूचना पर खनिज विभाग की टीम मौके पर पहुंची थी। टीम ने रेत को जब्त करने के बजाय उसे मौके पर ही जमीन पर फैलवा दिया था। इसके बाद रेत माफिया द्वारा उसी रेत को दोबारा एकत्रित कर ढेर लगाए जाने और सप्लाई शुरू किए जाने की बात सामने आई। पुलिस की सख्ती के बाद बंद हुआ था अवैध परिवहन
क्षेत्र में अवैध रेत परिवहन की खबरें सामने आने के बाद लहार पुलिस ने सख्ती बढ़ाई थी। इसके चलते कुछ समय तक रेत से भरे ट्रैक्टरों का परिवहन बंद रहा। अब रेत के दाम बढ़ने और मिहोना क्षेत्र में मांग बढ़ने के बाद अवैध परिवहन दोबारा शुरू होने की बात सामने आ रही है। इसी क्रम में मटियावली से 14 ट्रैक्टरों को रेत भरकर मिहोना की ओर ले जाने का मामला सामने आया है। पुलिस-खनिज विभाग की चुप्पी पर सवाल
मामले में पुलिस जवान से जानकारी लेने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने इस संबंध में कुछ भी बोलने से इनकार कर दिया। वहीं खनिज विभाग के अधिकारियों से संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन फोन रिसीव नहीं हुआ। खनिज निरीक्षक गौरव साहू का कहना है कि लहार क्षेत्र में अवैध रेत उत्खनन की शिकायतें सामने आ रही हैं। जल्द ही क्षेत्र में सख्त कार्रवाई की जाएगी।



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आम-बड़हर का मिक्स अचार, 2 साल नहीं होगा खराब, खुशबू बढ़ा देगी भूख, बघेलखंड की खास पहचान


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आम-बड़हर का मिक्स अचार, 2 साल नहीं होगा खराब, बघेलखंड की खास पहचान

 

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बघेलखंड में कभी खास पहचान रखने वाला आम-बड़हर का मिक्स अचार अपने खट्टे-चटपटे स्वाद और सरसों के तेल की खुशबू के लिए मशहूर रहा है. खट्टे आम और बड़हर का अनोखा मेल, सरसों के तेल की तेज खुशबू और देसी मसालों का चटपटा स्वाद इसे बाकी अचारों से बिल्कुल अलग बनाता है. खास बात यह है कि इसे सही तरीके से तैयार किया जाए तो लंबे समय तक संभालकर रखा जा सकता है. आम-बड़हर की खटास मिलकर ऐसा स्वाद तैयार होता जो साधारण दाल-चावल और पराठे का जायका भी बदल देगा. सही तरीके से तैयार करने के बाद इस अचार को एयरटाइट डिब्बे में रखकर करीब 2 साल तक स्टोर किया जा सकता है.

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नेतन्याहू ने गाजा से सेना हटाने की योजना ठुकराई: कहा- हमास के निहत्था होने तक वापसी नहीं होगी; ट्रम्प का 15-पॉइंट गाजा प्लान खारिज किया




इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रविवार को गाजा से सेना हटाने के प्लान को ठुकरा दिया है। उन्होंने कहा कि हमास के पूरी तरह निहत्था होने तक इजराइली सेना गाजा से वापस नहीं हटेगी। नेतन्याहू ने साप्ताहिक कैबिनेट बैठक की शुरुआत में उन दावों को खारिज किया, जिनमें कहा गया था कि इजराइल ने अमेरिकी प्रस्ताव स्वीकार कर लिया है। उन्होंने कहा कि इजराइल हमास को दिखावटी तौर पर नहीं, बल्कि वास्तव में खत्म करना चाहता है। अमेरिका से बातचीत जारी, कुछ सुझाव मंजूर नेतन्याहू ने कहा कि इस मुद्दे पर अमेरिका से बातचीत चल रही है। उनके मुताबिक, अमेरिका की ओर से कुछ सुझाव दिए गए हैं, जिनमें से कुछ इजराइल को मंजूर हैं और कुछ नहीं। अमेरिका के समर्थन वाला बोर्ड ऑफ पीस युद्ध के बाद गाजा के लिए अपनी योजना आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहा है। हमास इस योजना को स्वीकार कर चुका है, लेकिन इजराइली अधिकारियों का आरोप है कि आतंकी संगठन इस प्रक्रिया का इस्तेमाल इजराइल की दोबारा सैन्य कार्रवाई रोकने के लिए कर रहा है। पिछले महीने ट्रम्प के बोर्ड ऑफ पीस ने हमास और गाजा के दूसरे सशस्त्र संगठनों को पूरी तरह निहत्था करने और इसके साथ इजराइली सेना की वापसी का समझौता घोषित किया था। ट्रम्प ने इसे युद्ध खत्म करने की दिशा में बड़ी सफलता और स्थायी शांति-सुरक्षा की ओर बड़ा कदम बताया था। गाजा प्लान में स्टेप्स में सेना हटाने का प्रस्ताव अमेरिकी प्रस्ताव के तहत हमास अलग-अलग फेज में अपने हथियार गाजा की नई फिलिस्तीनी प्रशासनिक व्यवस्था को सौंपता। इसके बदले इजराइल गाजा के उस आधे से ज्यादा हिस्से से धीरे-धीरे सेना हटाता, जिस पर अभी उसका नियंत्रण है। प्लान के मुताबिक, इजराइल और हमास को पहले मौजूदा संघर्षविराम से जुड़ी अपनी प्रतिबद्धताएं पूरी करनी होंगी। इसके बाद हमास और दूसरे फिलिस्तीनी गुट गाजा का नागरिक प्रशासन और आंतरिक सुरक्षा राष्ट्रीय समिति को सौंपेंगे। इस समिति का नाम नेशनल कमेटी फॉर द एडमिनिस्ट्रेशन ऑफ गाजा है। इसे संक्रमण के दौरान गाजा का प्रशासन संभालने वाली फिलिस्तीनी तकनीकी समिति के तौर पर बनाया जाना है। योजना में भारी हथियारों, हथियार भंडार, सैन्य ठिकानों और सुरंगों की पहचान कर उन्हें समिति के नियंत्रण में देने की बात कही गई है। इजराइली सैनिकों और फिलिस्तीनी प्रशासन वाले इलाकों के बीच अंतर रखने तथा समझौते की निगरानी के लिए अंतरराष्ट्रीय स्थिरीकरण बल तैनात किया जाना है। इजराइली सेना तय समयसीमा के तहत चरणों में गाजा से हटेगी। इसके साथ अंतरराष्ट्रीय निगरानी में पुनर्निर्माण और सार्वजनिक सेवाएं बहाल करने का काम शुरू होगा। योजना में फिलिस्तीनी आत्मनिर्णय और फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना के लिए लंबे समय की राजनीतिक प्रक्रिया का भी जिक्र है। नेतन्याहू बोले- मेरे रहते फिलिस्तीनी राज्य नहीं बनेगा नेतन्याहू ने यह भी कहा कि जब तक वह प्रधानमंत्री हैं, गाजा या वेस्ट बैंक में कोई फिलिस्तीनी राज्य नहीं बनेगा। उन्होंने यह बात ट्रम्प के योजना को बड़ी उपलब्धि बताए जाने के एक हफ्ते से ज्यादा समय बाद कही। नेतन्याहू के कार्यालय ने पहले इस योजना पर आपत्ति जताई थी। कार्यालय ने कहा था कि यह ढांचा इजराइल के रुख को नहीं दिखाता, लेकिन तब योजना को सीधे तौर पर खारिज नहीं किया गया था। रविवार को नेतन्याहू ने पहली बार खुले तौर पर योजना को नामंजूर किया। उनके कार्यालय की ओर से जारी जानकारी के मुताबिक, इजराइल ने ट्रम्प प्रशासन को अपनी चिंताओं से अवगत करा दिया है। यह ट्रम्प और नेतन्याहू के बीच सार्वजनिक तौर पर सामने आया एक दुर्लभ मतभेद है। दोनों के बीच साझेदारी को अक्सर तेज बदलावों वाली और अनुमान लगाना मुश्किल साझेदारी के रूप में बताया जाता रहा है। ट्रम्प ने नेतन्याहू से वॉशिंगटन में मुलाकात के बाद कहा था कि इजराइल इस समझौते से बहुत खुश है। उन्होंने कहा था, “इजराइल ने हमारी मदद की है और वह हमारे साथ बहुत अच्छा रहा है।” हालांकि, ट्रम्प ने यह भी माना था कि योजना को लागू करना मुश्किल हो सकता है। उन्होंने कहा था, “क्या इसमें उतार-चढ़ाव आएंगे? वहां की स्थिति बहुत जटिल है।” एक इजराइली राजनीतिक सूत्र ने यह भी कहा था कि नेतन्याहू की ट्रम्प से मुलाकात में गाजा का मुद्दा नहीं उठा था। हमास ने भी रखी शर्तें हमास ने कहा है कि हथियार सौंपने से पहले इजराइल को अपने हमले रोकने होंगे और पहले हुए संघर्षविराम समझौते की शर्तें पूरी करनी होंगी। संगठन ने कहा कि समझौते की दिशा में पहला कदम इजराइल की ओर से हत्या और हमले रोकने की प्रतिबद्धता होना चाहिए। बातचीत में शामिल हमास के वरिष्ठ अधिकारी गाजी हमद ने कहा कि संगठन मुश्किल और तकलीफदेह समझौते को स्वीकार करने के लिए तैयार है। हालांकि, उन्होंने तुरंत निहत्था होने की बात स्वीकार नहीं की। हमद ने कहा कि इजराइल को पहले शर्म अल-शेख में हुए शुरुआती संघर्षविराम समझौते का पहला चरण लागू करना होगा। इसमें हमले रोकना, सेना को पहले के ठिकानों पर वापस ले जाना और गाजा में सामान तथा मानवीय सहायता की सप्लाई बढ़ाना शामिल है। हमास के मुताबिक, इसके बाद ही वह अपने हथियार गाजा के प्रशासन के लिए बनी राष्ट्रीय समिति के नियंत्रण में देने पर सहमत होगा। हमास के अनुसार, भारी हथियार सौंपने की शर्त इजराइल की ओर से सभी तरह के हमले रोकना और अपनी सेना हटाना है। हमास के पास अब भी इजराइल पर हमला करने की क्षमता: नेतन्याहू नेतन्याहू ने कहा कि हमास के पास अब भी इजराइल पर हमला करने की क्षमता है। उन्होंने कहा, “वह हमला कर सकता है, लेकिन कई हफ्ते बीत जाने के बाद भी उसने हम पर हमला क्यों नहीं किया? क्योंकि उसे पता है कि ऐसा करने पर हम उसे कितना ताकतवर जवाब देंगे।” उन्होंने ईरान के खिलाफ सहयोग के लिए ट्रम्प की तारीफ की। नेतन्याहू ने कहा, “राष्ट्रपति ट्रम्प से मेरा बहुत सम्मान है। वह व्हाइट हाउस में हमारे बहुत अच्छे दोस्त हैं।” उन्होंने कहा, “मैं ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने से रोकने के लिए अमेरिका के साथ ऐतिहासिक साझेदारी की बहुत सराहना करता हूं। मैं फिर साफ करना चाहता हूं कि समझौता हो या न हो, जब तक मैं प्रधानमंत्री हूं, ईरान के पास परमाणु हथियार नहीं होंगे।” नेतन्याहू ने कहा, “जो लोग हमें केवल उपदेश देते हैं, उनके उलट हम इजराइल की सुरक्षा के लिए जरूरी काम कर रहे हैं। जरूरत पड़ने पर हम अपने सबसे अच्छे दोस्तों के सामने भी अपनी बात पर कायम रहना जानते हैं।” अक्टूबर 2023 के हमले के बाद से जारी है युद्ध हमास ने 7 अक्टूबर 2023 को इजराइल पर हमला किया था। इस हमले के बाद गाजा में युद्ध शुरू हुआ। हमास करीब दो दशक तक गाजा पर शासन करता रहा है और अब भी इलाके के कुछ हिस्सों पर उसका नियंत्रण है। इजराइल और हमास ने पिछले साल अक्टूबर में अमेरिका की मदद से गाजा में शुरुआती संघर्षविराम पर सहमति जताई थी। मध्यस्थों को उम्मीद थी कि इससे युद्ध खत्म हो जाएगा, लेकिन संघर्षविराम में हमास के गाजा पर नियंत्रण जैसे कई मुश्किल सवाल बाद के लिए टाल दिए गए। संघर्षविराम पर सहमति के बाद भी इजराइल ने गाजा में हमले जारी रखे हैं। योजना में हमास से हथियार छोड़ने की मांग इजराइल की मुख्य शर्त है, जबकि इजराइल के खिलाफ सशस्त्र प्रतिरोध हमास की विचारधारा का केंद्रीय हिस्सा है। रॉयटर्स के मुताबिक, यह बयान यरुशलम में 9 अगस्त को दिया गया। इजराइल में इस साल पतझड़ में चुनाव होने हैं और नेतन्याहू के सामने कड़ा चुनावी मुकाबला है। इसी वजह से उनके रुख में रियायत देने की संभावना कम बताई जा रही है। नेतन्याहू ने हमास के खिलाफ “पूर्ण जीत” का वादा भी किया था। यह वादा उन्होंने 7 अक्टूबर 2023 के हमले के बाद किया था, जिसने गाजा युद्ध शुरू किया था। आठ देशों ने शांति योजना पटरी से उतरने की चेतावनी दी अमेरिकी योजना और इजराइल के रुख के बीच बढ़ते मतभेद पर मुस्लिम बहुल आठ देशों ने संयुक्त प्रतिक्रिया दी है। गुरुवार को संयुक्त अरब अमीरात, कतर, जॉर्डन, इंडोनेशिया, पाकिस्तान, तुर्किये, सऊदी अरब और मिस्र ने गाजा में इजराइल के लगातार सैन्य अभियानों की निंदा की। इन देशों ने चेतावनी दी कि इजराइल की कार्रवाई अमेरिकी समर्थन वाली शांति योजना के अगले चरण को लागू करने की कोशिशों को पटरी से उतार सकती है। उन्होंने कहा कि इजराइल की कार्रवाई अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को कमजोर कर रही है। संयुक्त बयान में कहा गया कि इजराइल के अभियान राजनीतिक प्रक्रिया को पटरी से उतार सकते हैं, दोबारा तनाव बढ़ा सकते हैं और गाजा में मानवीय संकट को और गहरा कर सकते हैं। बयान में कहा गया कि फिलिस्तीनी गुटों के ट्रम्प की घोषित रूपरेखा स्वीकार करने के बाद समझौते को आगे बढ़ाने की कोशिशों पर इजराइल की कार्रवाई का असर पड़ रहा है। इन आठ देशों की एकजुटता को खास माना गया, क्योंकि इजराइल को लेकर इन देशों के रुख अलग-अलग रहे हैं। संयुक्त अरब अमीरात अमेरिका का करीबी साझेदार है और इजराइल के साथ उसके राजनयिक संबंध हैं, जबकि तुर्किये इजराइल के सबसे कड़े क्षेत्रीय आलोचकों में शामिल है। योजना पर मुख्य अड़चन क्या है अमेरिकी योजना का मकसद गाजा युद्ध खत्म करना, सशस्त्र गुटों को निहत्था करना, इजराइली सेना हटाना और गाजा का प्रशासन फिलिस्तीनी तकनीकी समिति को सौंपना है। इस योजना पर आगे बढ़ने में मुख्य अड़चन यही है कि इजराइल सेना हटाने से पहले हमास का निहत्था होना चाहता है। हमास पहले इजराइल से हमले रोकने और सेना हटाने की मांग कर रहा है। नेतन्याहू के इस रुख ने ट्रम्प के उस दावे को झटका दिया है, जिसमें उन्होंने योजना को युद्ध खत्म करने की दिशा में बड़ी उपलब्धि बताया था। इजराइल और हमास दोनों ने पिछले साल योजना से जुड़े संघर्षविराम पर सहमति जताई थी, लेकिन इसे लागू करने की शर्तों पर अब भी मतभेद बने हुए हैं। इस खबर के लेखक आरोन बॉक्सरमैन हैं, जो इजराइल और गाजा से जुड़ी खबरें कवर करते हैं। वह यरुशलम में रहते हैं।



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सुबह 5-7 बजे तक गाड़ियों की आवाजाही पर रोक: गोपालगंज के मंगलपुर पुल पर मरम्मत का काम – Gopalganj News




गोपालगंज में गंडक नदी पर स्थित मंगलपुर-विशुनपुर उच्च स्तरीय आरसीसी पुल पर आवश्यक मरम्मत और सुरक्षात्मक कार्यों के कारण 10 अगस्त 2026 को यातायात 2 घंटे के लिए पूरी तरह प्रतिबंधित रहेगा। यह प्रतिबंध सुबह 5 बजे से 7 बजे तक सभी प्रकार के छोटे और बड़े वाहनों पर लागू होगा। जिला प्रशासन ने पुल पर आवश्यक मरम्मत और सुरक्षात्मक कार्यों के लिए यह महत्वपूर्ण निर्णय लिया है। संबंधित विभागों और अधिकारियों को सख्त निर्देश मरम्मत कार्य के दौरान पुल के ‘सुपर स्ट्रक्चर’ को हाइड्रोलिक जैक तकनीक का उपयोग करके अस्थायी रूप से ऊपर उठाया जाएगा। यह कार्य सुबह के समय निर्धारित किया गया है ताकि आम जनता और दैनिक यात्रियों को कम से कम असुविधा हो। जिला पदाधिकारी ने इस तकनीकी और संवेदनशील कार्य को सुरक्षित रूप से संपन्न कराने के लिए संबंधित विभागों और अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। पुल के दोनों ओर पुलिस फोर्स की तैनाती वाहन चालकों की सुविधा के लिए प्रमुख चौराहों और संपर्क मार्गों पर पूर्व-सूचना और दिशा-निर्देश बोर्ड लगाए जा रहे हैं, ताकि लोग समय रहते वैकल्पिक मार्गों का चयन कर सकें और सड़कों पर जाम की स्थिति न बने। मरम्मत कार्य के दौरान पुल के दोनों ओर पुलिस बल और यातायात पुलिस कर्मियों को तैनात किया जाएगा, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी वाहन गलती से प्रतिबंधित क्षेत्र में प्रवेश न करे। जिला प्रशासन ने आम जनता, वाहन चालकों और दैनिक यात्रियों से अपील की है कि वे 10 अगस्त को सुबह 5 से 7 बजे के बीच मंगलपुर-विशुनपुर पुल वाले मार्ग का उपयोग करने से बचें और अपनी यात्रा की योजना उसी अनुसार बनाएं।



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CJI को यूनिवर्सिटी इवेंट में चीफ गेस्ट बनाने का विरोध: हैदराबाल लॉ यूनिवर्सिटी के छात्र बेरोजगारों को कॉकरोच कहने से नाराज; बोले- फैसले पर विचार करें


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हैदराबाद3 मिनट पहले

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-फाइल फोटो

हैदराबाद की नेशनल एकेडमी ऑफ लीगल स्टडीज एंड रिसर्च (NALSAR) यूनिवर्सिटी के करीब 450 स्टूडेंट्स ने 2026 दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत को मुख्य अतिथि बनाने का विरोध किया है। छात्रों ने NEET विवाद और हालिया कॉकरोच जनता पार्टी के जंतर-मंतर प्रोटेस्ट के दौरान हुए घटनाक्रमों को लेकर यह आपत्ति जताई है।

2026 बैच के छात्रों के एक ग्रुप ने यूनिवर्सिटी के वाइस चांसलर, रजिस्ट्रार, फैकल्टी सदस्यों और प्रशासन के अन्य सदस्यों को लेटर लिखा है। इसमें उन्होंने भारत के मुख्य न्यायाधीश को मुख्य अतिथि के तौर पर बुलाने के फैसले पर फिर से विचार करने की अपील की है।

छात्रों ने संवैधानिक जवाबदेही का हवाला दिया

छात्रों के लिखे लेटर के मुताबिक उनका विरोध सुप्रीम कोर्ट में प्रोटेस्ट के खिलाफ दायर याचिकाओं की सुनवाई के घटनाक्रमों से जुड़ी चिंताओं के कारण है। विरोध कर रहे छात्रों ने संवैधानिक जवाबदेही और अकादमिक स्वतंत्रता को भी अहम बताया है।

छात्रों ने कहा है कि मौजूदा हालात में CJI सूर्यकांत को समारोह में बुलाना इन मूल्यों के अनुरूप नहीं होगा। छात्रों ने इसे ही आधार बनाते हुए उन्हें चीफ गेस्ट के रूप में बुलाने के फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा है।

3 मौके, जब CJI सूर्यकांत के कमेंट पर भड़के लोग

15 मई: CJI ने कहा था- कुछ युवा कॉकरोच की तरह भटक रहे

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने एक याचिका पर सुनवाई के दौरान युवाओं पर टिप्पणी की थी। CJI सूर्यकांत ने कहा था- कॉकरोच की तरह ऐसे युवा हैं, जिन्हें इस पेशे में रोजगार नहीं मिल रहा है। इनमें से कुछ मीडिया, कुछ सोशल मीडिया और कुछ RTI और दूसरे तरह के एक्टिविस्ट बन रहे हैं। ये हर किसी पर हमला करना शुरू कर देते हैं।’

इस बयान के बाद ही 16 जुलाई को अभिजीत दीपके नाम के शख्स ने कॉकरोच जनता पार्टी नाम से सोशल मीडिया पेज बनाया। इसने ही दिल्ली जंतर-मंतर पर 35 दिन तक प्रदर्शन किया था।

22 जुलाई: CJI ने कहा था- हमें वीडियो देखने में दिलचस्पी नहीं है

दरअसल, 22 जुलाई को एक वकील ने CJI की अगुआई वाली 3 जजों की बेंच के सामने जनहित याचिका लगाई थी। सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता वकील ने कहा- छात्र महत्वपूर्ण मुद्दे उठा रहे हैं। लेकिन उन पर पुलिस की बर्बरता के वीडियो भी हैं। यदि संभव हो तो मामले की सुनवाई जल्द की जाए।

इस पर CJI सूर्यकांत ने कहा था, ‘हमें वीडियो में दिलचस्पी नहीं है, हमारे पास देखने का समय नहीं है।’ जब वकील ने छात्रों के साथ मारपीट के वीडियो देखने का दूसरी बार अनुरोध किया तो CJI ने कहा, ‘हमारा और अपना समय बर्बाद मत कीजिए।’ पढ़ें पूरी खबर…

24 जुलाई: CJI ने कहा था- किसी भी याचिका की सुनवाई से इनकार नहीं किया

प्रदर्शनकारियों के खिलाफ पुलिस की हिंसा से जुड़ी 2 याचिकाएं दायर की गई हैं। इनमें कई राज्य पक्षकार के तौर पर शामिल हैं। इनका जिक्र पहले इसलिए नहीं किया गया क्योंकि वे डायरी नंबर का इंतजार कर रहे थे। इन दलीलों के बाद CJI ने कहा, “इसे लिस्टिंग में आने दें, हम इस पर सुनवाई करेंगे।”

इससे पहले एक दूसरे मामले की सुनवाई के दौरान CJI ने कहा था- मैंने CJP के प्रदर्शन के दौरान हुए लाठीचार्ज से जुड़ी किसी भी याचिका की सुनवाई से इनकार नहीं किया। सच ये है कि कोई रिट याचिका दाखिल ही नहीं की गई थी। मीडिया ने भी गलत खबरें चलाईं। पढ़ें पूरी खबर…



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हॉकी विश्व कप में पाकिस्तान का दबदबा, जानिए 1971 से 2023 कैसा है भारत का सफर, सिर्फ इतनी बार जीता खिताब


1971 से 2023 तक के सफर में भारत को एकमात्र सफलता 1975 में कुआलालम्पुर में मिली जब अजित पाल सिंह की कप्तानी वाली टीम ने पाकिस्तान को हराकर खिताब जीता था। पाकिस्तान टूर्नामेंट की सबसे कामयाब टीम रही है।

पुरूष हॉकी विश्व कप की शुरुआत इसी महीने से हो रही है। ऐसे में आइए आपको विस्तार से बताते हैं कि हॉकी विश्व कप में पिछले पांच दशक में भारत का प्रदर्शन कैसा रहा है।

1971 से 2023 तक के सफर में भारत को एकमात्र सफलता 1975 में कुआलालम्पुर में मिली जब अजित पाल सिंह की कप्तानी वाली टीम ने पाकिस्तान को हराकर खिताब जीता था, लेकिन उसके बाद से आठ बार की ओलंपिक चैम्पियन भारत पोडियम पर जगह बनाने में नाकाम रही है । टूर्नामेंट की सबसे कामयाब टीम पाकिस्तान रही है जिसने चार बार खिताब जीते जबकि नीदरलैंड, आस्ट्रेलिया और जर्मनी तीन तीन बार चैम्पियन रहे । बेल्जियम ने एक बार ट्रॉफी अपने नाम की।

भारत का हॉकी विश्व कप में 1971 से लेकर 2023 तक कैसा रहा प्रदर्शन

1971 बार्सीलोना :

भारत और पाकिस्तान ने मिलकर मार्च 1969 में एफआईएच परिषद की बैठक में फुटबॉल की तर्ज पर हॉकी विश्व कप कराने का प्रस्ताव रखा जिसे अगले साल ब्रसेल्स में हुई बैठक में मंजूरी मिली। पाकिस्तान को मेजबानी दी गई लेकिन 1971 में दोनों देशों के बीच राजनीतिक तनाव के चलते पहला विश्व कप स्पेन के बार्सीलोना में हुआ।

पांच उपमहाद्वीपों की दस टीमों ने एफआईएच के आमंत्रण पर इसमें भाग लिया। ओलंपिक की सबसे कामयाब टीम भारत पूल ए में फ्रांस, अर्जेंटीना, कीनिया और पश्चिम जर्मनी को हराकर शीर्ष पर रहा। सेमीफाइनल में पाकिस्तान ने भारत को 2- 1 से हराया और फिर स्पेन को हराकर पहला विश्व कप जीता। भारत ने कीनिया को 2-1 से हराकर कांस्य पदक जीता।

1973 एम्सटर्डम :

एम्सटेलवीन के वेगनेर स्टेडियम पर खेले गए इस विश्व कप में मेजबान नीदरलैंड ने पेनल्टी शूटआउट में भारत को 4-2 से हराकर खिताब जीता। भारत पूल ए में पांच जीत और तीन ड्रॉ के साथ पश्चिम जर्मनी के बाद दूसरे स्थान पर रहा। सेमीफाइनल में बी पी गोविंदा के गोल के दम पर भारत ने पाकिस्तान को हराया। फाइनल में अतिरिक्त समय तक मैच 2 . 2 से बराबर था लेकिन पेनल्टी शूटआउट में नीदरलैंड ने भारत को हराया।

1975 कुआलालम्पुर : (भारत ने पहली बार जीता विश्व कप)

भारतीय हॉकी के विश्व कप इतिहास का सबसे सुनहरा अध्याय लिखा गया 15 मार्च 1975 को कुआलालम्पुर में जब फाइनल में अजित पाल सिंह की कप्तानी में भारत ने पाकिस्तान को 2 -1 से हराया। फाइनल में पाकिस्तान ने बढ़त बना ली थी लेकिन सुरजीत सिंह ने 44वें और अशोक कुमार ने 51वें मिनट में गोल करके भारत को खिताब दिलाया। पूल चरण में शीर्ष पर रहे भारत ने सेमीफाइनल में मलेशिया को मात दी थी। तब तक सात ओलंपिक स्वर्ण जीत चुकी भारतीय टीम का यह पहला विश्व कप खिताब था।

1978 ब्यूनस आयर्स :

गत चैम्पियन भारत बेहद निराशाजनक प्रदर्शन के बाद सेमीफाइनल तक नहीं पहुंच सका और छठे स्थान पर रहा। पूल चरण में भारत ने छह में से तीन मैच जीते और दो गंवाये जिसमें पश्चिम जर्मनी से 7- 0 से मिली हार शामिल थी। पाकिस्तान ने नीदरलैंड को 3- 2 से हराकर खिताब जीता और आस्ट्रेलिया को कांस्य पदक मिला।

1982 मुंबई :

अपने देश में पहली बार विश्व कप खेलते हुए भारत फिर अंतिम चार में नहीं पहुंच सका और पांचवें स्थान से ही संतोष करना पड़ा। पाकिस्तान ने अपराजेय रहकर वानखेड़े स्टेडियम में फाइनल में पश्चिम जर्मनी को 3-1 से हराकर तीसरी बार खिताब जीता। भारत के राजिंदर सिंह सीनियर ने टूर्नामेंट में सर्वाधिक 12 गोल दागे थे।

1986 लंदन :

इस विश्व कप में भारतीय टीम अब तक के सबसे खराब प्रदर्शन के बाद 12वें और आखिरी स्थान पर रही लेकिन इसी टीम के एक सितारे मोहम्मद शाहिद ने अपने जबर्दस्त खेल से दुनिया को चौंका दिया। ड्रिबलिंग के जादूगर शाहिद को टूर्नामेंट का सर्वश्रेष्ठ खिलाड़ी चुना गया। आस्ट्रेलिया ने इंग्लैंड को 2-1 से हराकर खिताब जीता जबकि पश्चिम जर्मनी तीसरे स्थान पर रहा। तीन बार का चैम्पियन पाकिस्तान 11वें स्थान पर रहा।

1990 लाहौर :

राजनीतिक तनाव, मेजबान दर्शकों की आक्रामकता और सुरक्षा चिंताओं के बीच भारतीय टीम ने परगट सिंह की कप्तानी में लाहौर में विश्व कप खेला। भारत दसवें स्थान पर रहा लेकिन इतनी प्रतिकूल परिस्थितियों में भी आपा नहीं खोने के कारण एफआईएच ‘फेयरप्ले’ पुरस्कार भारतीय टीम को मिला।

नीदरलैंड ने पाकिस्तान को हराकर खिताब जीता जबकि आस्ट्रेलिया तीसरे स्थान पर रहा।

1994 सिडनी:

जूड फेलिक्स की कप्तानी में भारतीय टीम ने कृत्रिम टर्फ पर अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करते हुए पांचवां स्थान हासिल किया था। पाकिस्तान ने नीदरलैंड को पेनल्टी शूटआउट में 4 -3 से हराकर खिताब जीता जबकि आस्ट्रेलिया तीसरे स्थान पर रहा।

1998 यूट्रेक्ट :

इस विश्व कप में पूरी तरह से यूरोपीय टीमों का दबदबा रहा। मेजबान नीदरलैंड ने स्पेन को हराकर तीसरा खिताब जीता जबकि जर्मनी तीसरे स्थान पर रहा। धनराज पिल्लै की कप्तानी वाली भारतीय टीम नीदरलैंड में परिस्थितियों से सामंजस्य बिठाने में नाकाम रही और निराशाजनक नौवें स्थान पर रही ।

2002 कुआलालम्पुर :

पहली बार 16 टीमों की भागीदारी में हुए विश्व कप में जर्मनी ने आस्ट्रेलिया को हराकर पहली बार खिताब जीता जबकि नीदरलैंड तीसरे स्थान पर रहा। भारत नौ मैचों में तीन जीत, एक ड्रॉ और पांच हार के साथ दसवें स्थान पर रहा।

2006 मोंशेंग्लाबाख , जर्मनी :

दिलीप टिर्की की कप्तानी में भारतीय टीम पूल चरण में एक भी मैच नहीं जीत सकी और एकमात्र ड्रॉ दक्षिण अफ्रीका से खेलने के बाद आखिरी स्थान पर रही। क्लासीफिकेशन मैच में राजपाल सिंह के एक गोल से दक्षिण अफ्रीका को हराने के बाद 12 टीमों में 11वें स्थान पर रही। जर्मनी ने आस्ट्रेलिया को हराकर लगातार दूसरा खिताब जीता जबकि स्पेन तीसरे स्थान पर रहा।

2010 दिल्ली :

दिल्ली में हुए इस विश्व कप में खचाखच भरे मेजर ध्यानचंद नेशनल स्टेडियम पर पूल चरण में पाकिस्तान को 4 -1 से हराना ही मेजबान भारत की सबसे बड़ी उपलब्धि रही। पूल चरण में चौथे स्थान पर रही भारतीय टीम सेमीफाइनल में जगह नहीं बना सकी और आठवां स्थान हासिल किया। आस्ट्रेलिया ने जर्मनी को 2 -1 से हराकर खिताब जीता जबकि नीदरलैंड तीसरे स्थान पर रहा।

2014 द हेग :

पूल चरण में बेल्जियम, इंग्लैंड , आस्ट्रेलिया से करारी हार झेलने वाली भारतीय टीम नौवे स्थान पर रही। आकाशदीप सिंह ने टूर्नामेंट में पांच गोल किये। आस्ट्रेलिया ने नीदरलैंड को 6 . 1 से हराकर खिताब जीता और अर्जेंटीना तीसरे स्थान पर रहा।

2018 भुवनेश्वर :

हॉकी के गढ ओडिशा में पहली बार हुए विश्व कप में भारत ने पूल चरण में बेल्जियम जैसे दिग्गज को ड्रॉ पर रोका और दक्षिण अफ्रीका तथा कनाडा को हराकर शीर्ष पर रहा। मनप्रीत सिंह की कप्तानी वाली मेजबान टीम क्वार्टर फाइनल में नीदरलैंड से कड़े मुकाबले में 1-2 से हारकर छठे स्थान पर रही जो कई साल में उसका सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन था। बेल्जियम ने पेनल्टी शूटआउट में नीदरलैंड को हराकर खिताब जीता जबकि आस्ट्रेलिया तीसरे स्थान पर रहा ।

2023 भुवनेश्वर और राउरकेला :

लगातार दूसरी बार अपनी मेजबानी में हुए विश्व कप में भारत पूल चरण में दूसरे स्थान पर रहा। क्रासओवर मैच में न्यूजीलैंड ने उसे पेनल्टी शूट आउट में हराया। हरमनप्रीत सिंह की कप्तानी में भारतीय टीम नौवे स्थान पर रही। जर्मनी ने बेल्जियम को शूटआउट में हराकर खिताब जीता जबकि नीदरलैंड तीसरे स्थान पर रहा।



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राजस्थानी वेशभूषा में महिलाओं ने खेला चिरमी: सावन के गीतों पर किया डांस, महिलाओं ने लोक संस्कृति एवं परंपराओं की सुंदर झलक पेश की – Nagaur News




नागौर में सावन के अवसर पर कुंदन नगर महिला मंडल की ओर से ‘आओ रे सखिया, चिरमी खेलें’ कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में महिलाओं ने उत्साह के साथ भाग लिया। राजस्थानी पारंपरिक वेशभूषा में सजी महिलाओं ने चिरमी खेल का आनंद लिया और लोक संस्कृति एवं परंपराओं की सुंदर झलक पेश की। कार्यक्रम के दौरान संगीत की मधुर धुनों पर महिलाओं ने नृत्य किया। सावन के पारंपरिक गीतों से माहौल खुशनुमा हो गया। राजस्थानी परिधान और लोकगीतों के बीच महिलाओं ने सावन के उत्सव को यादगार बनाया। चिरमी खेल के बाद विजेताओं को पुरस्कार वितरित कार्यक्रम में चिरमी खेल के साथ प्रतियोगिता भी आयोजित की गई। प्रतियोगिता में बेहतर प्रदर्शन करने वाली विजेता महिलाओं को पुरस्कार देकर सम्मानित किया गया। पुरस्कार मिलने पर विजेता महिलाओं में खासा उत्साह नजर आया। कार्यक्रम में पूजा पटेल, संतोष, निर्मला विश्नोई, विमला वैष्णव, पुष्पा, सुमन चौधरी, मंजू सामरिया, प्रियंका और गीता सहित अनेक महिलाओं ने भाग लिया। लोक परंपराओं को आगे बढ़ाने का संदेश महिला मंडल की ओर से कहा गया कि इस तरह के आयोजन महिलाओं को आपस में जोड़ने के साथ-साथ राजस्थान की लोक परंपराओं और सांस्कृतिक विरासत को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। कार्यक्रम के दौरान महिलाओं ने सावन के गीतों, नृत्य और पारंपरिक खेलों का आनंद लिया। हंसी-खुशी और उमंग के माहौल में कार्यक्रम का समापन हुआ।



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