सीकर में 39 साल बाद एक ही मंच पर 7 लोगों ने दीक्षा लेकर सन्यास अपना लिया। सीकर में जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याण दिवस पर दीक्षा दी गई। यह महामहोत्सव आचार्य वर्धमान सागर महाराज के सान्निध्य में करवाया गया। इससे पहले मार्च 1987 में आचार्य धर्मसागर ने सीकर में क्षुल्लिका अनंतमति को दीक्षा दी थी। 1961 में आचार्य शिव सागर ने सीकर में 8 जनों को दीक्षा दी थी। सुभाष पहाड़िया ने बताया- इससे पहले मंगलवार शाम को सातों दीक्षार्थियों की शोभायात्रा निकाली गई थी। इसमें संगीत व जयकारों के बीच श्रद्धालु झूमते नजर आए। दीक्षा महोत्सव के पहले दिन दीक्षार्थियों ने आचार्य व संघ के साधुओं को खाना खिलाया। इसके बाद 6 दीक्षार्थियों ने बर्तनों की जगह हथेलियों में आहार कर त्याग का संदेश दिया। इस अवसर पर मंत्री झाबर सिंह खर्रा, विधायक राजेंद्र पारीक, भाजपा जिलाध्यक्ष मनोज बाटड़, पूर्व सांसद सुमेधानंद सरस्वती, पूर्व भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. कमल सिखवाल सहित अन्य समाजसेवी उपस्थित थे। इन्होंने दीक्षा ली पारसनाथ पर्वत का प्रतीकात्मक स्वरूप दिखा जैनेश्वरी दीक्षा महोत्सव स्थल पर इस बार झारखंड स्थित सम्मेद शिखरजी (स्वर्णभद्र टोंक) यानी पारसनाथ पर्वत का प्रतीकात्मक स्वरूप श्रद्धालुओं को देखने को मिला है। भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याणक से जुड़ा यह प्रतीकात्मक शिखर प्रमुख आकर्षण रहा। इसे थर्माकोल से तैयार किया गया है। पवन मोदी ने बताया- जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ का मोक्ष कल्याणक श्रावण मास के शुक्ल पक्ष की सप्तमी तिथि को मनाया जाता है। इसी दिन पार्श्वनाथ ने सम्मेद शिखरजी से कर्मों का क्षय कर मोक्ष प्राप्त किया था। अनुभव जैन ने बताया कि प्रतीकात्मक स्वरूप तैयार करने का उद्देश्य श्रद्धालुओं को इस पवित्र तीर्थ की अनुभूति कराना है। अंक गणित का अनूठा संयोग दीक्षा दिवस का अंक गणित भी विशेष आकर्षण का केंद्र है। 23वें तीर्थंकर पार्श्वनाथ के अंक 23 में 2 अरिहंत-सिद्ध बनने की भावना और 3 रत्नत्रय (सम्यक दर्शन, ज्ञान, चारित्र) का प्रतीक है। सप्तमी तिथि पर 7 दीक्षार्थियों ने संयम पथ अपनाया।
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सीकर में 7 लोगों ने एक साथ सन्यास लिया: जैन धर्म के 23वें तीर्थंकर भगवान पार्श्वनाथ के मोक्ष कल्याण दिवस पर दीक्षा दी गई – Sikar News
मराठी नहीं जानने वाले ऑटो-टैक्सी ड्राइवरों पर कल से एक्शन: महाराष्ट्र के परिवहन मंत्री बोले- पहले नोटिस, फिर 3 महीने के लिए लाइसेंस-बैज सस्पेंड होगा
मुंबई3 मिनट पहले
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महाराष्ट्र में मराठी का ‘वर्किंग नॉलेज’ नहीं रखने वाले ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवरों के खिलाफ 20 अगस्त से अभियान शुरू होगा। परिवहन मंत्री प्रताप सरनाईक ने कहा कि पहले ड्राइवरों को नोटिस दिया जाएगा और उन्हें मराठी सीखने का मौका मिलेगा। इसके बाद भी नियम पूरा नहीं करने पर कार्रवाई की जाएगी।
सरकार के मुताबिक, जिन ड्राइवरों के पास मराठी का जरूरी सर्टिफिकेट नहीं है या जिन्हें मराठी का कामचलाऊ ज्ञान नहीं है, उनकी जांच की जाएगी। यह अभियान पूरे राज्य में एक महीने तक चलेगा।
पहले नोटिस, फिर 3 महीने के लिए लाइसेंस सस्पेंड
मंत्री ने कहा कि ड्राइवरों पर सीधे कार्रवाई नहीं होगी। पहले उन्हें नोटिस देकर मराठी सीखने का समय दिया जाएगा। अगर इसके बाद भी वे जरूरी मराठी नहीं सीखते हैं तो उनका ड्राइविंग लाइसेंस और बैज 3 महीने के लिए सस्पेंड किया जा सकता है।
तीन महीने बाद भी नियम पूरा नहीं करने पर लाइसेंस और बैज रद्द करने का आदेश दिया जा सकता है।
RTO की टीमें करेंगी जांच
इस अभियान की जिम्मेदारी अतिरिक्त परिवहन आयुक्त रवि गायकवाड़ को दी गई है। RTO की फ्लाइंग स्क्वॉड राज्यभर में ऑटो और टैक्सी ड्राइवरों की जांच करेंगी।
अधिकारियों को वीडियो कॉन्फ्रेंस के जरिए निर्देश दिए गए हैं। ड्राइवरों की मराठी की जांच और वेरिफिकेशन की वीडियो रिकॉर्डिंग भी की जाएगी।
करीब 6 लाख ड्राइवरों को मराठी सिखाने की योजना
सरकार के मुताबिक, महाराष्ट्र में करीब 6 लाख ऑटो-रिक्शा और टैक्सी ड्राइवर हैं, खासकर मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन में बड़ी संख्या में ड्राइवर काम करते हैं। सरकार इन सभी को मराठी सीखने की पहल से जोड़ना चाहती है।
कुछ महीने पहले शुरू किए गए इस अभियान में अब तक 1 लाख 65 हजार 601 ड्राइवर शामिल हो चुके हैं। सरकार के मुताबिक, मराठी भाषा विभाग अब परिवहन विभाग और दूसरे अधिकारियों के साथ मिलकर इस अभियान को आगे बढ़ाएगा।
दूसरे राज्यों से आए ड्राइवरों को लेकर चिंता
महाराष्ट्र में बड़ी संख्या में ऑटो और टैक्सी ड्राइवर दूसरे राज्यों से आते हैं। इनमें कई ड्राइवरों को मराठी नहीं आती या वे बहुत कम मराठी बोल पाते हैं। ऐसे ड्राइवरों को लाइसेंस और परमिट रद्द होने का डर है।
हालांकि, सरकार का कहना है कि पहले उन्हें मराठी सीखने का मौका दिया जाएगा, उसके बाद ही कार्रवाई होगी।
‘वर्किंग नॉलेज’ क्या है, यह साफ नहीं
ड्राइवर यूनियन ने नियम को लेकर सवाल उठाए हैं। सेवा सारथी ऑटो-रिक्शा टैक्सी एंड ट्रांसपोर्ट यूनियन के नेता डीएम गोसावी ने कहा कि सरकार ने मराठी का “वर्किंग नॉलेज” जरूरी कर दिया है, लेकिन यह साफ नहीं किया है कि कितनी मराठी जानना पर्याप्त माना जाएगा।
यूनियन का कहना है कि नियम स्पष्ट नहीं होने पर RTO अधिकारियों और ड्राइवरों के बीच विवाद हो सकता है और इससे भ्रष्टाचार या ड्राइवरों के आर्थिक शोषण का खतरा बढ़ सकता है।
सरकार का कहना है कि इस पहल का मकसद ड्राइवरों को मराठी सिखाना है, ताकि वे यात्रियों से आसानी से बातचीत कर सकें और राज्य के नियमों का पालन कर सकें।
थांदला-टीमरवानी फोरलेन योजना में 4 गुना मुआवजे की मांग: किसान बोले- अधिग्रहण से जमीन की सिंचाई प्रभावित; 3,839 करोड़ की परियोजना से 50 गांव प्रभावित – Jhabua News
थांदला से टीमरवानी के बीच 80.45 Km लंबा फोरलेन मार्ग बनाने के लिए भूमि अधिग्रहण किया जा रहा है। मामले में मुआवजे की राशि को लेकर किसान नाराज है। किसान आरोप लगा रहे हैं कि उनकी जमीन का दाम गलत तय किया गया है। वे चार गुना मुआवजे की मांग कर रहे हैं। 3,839 करोड़ रुपए की इस परियोजना में मुआवजा वितरण आखरी चरण में है। यह परियोजना 50 से ज्यादा गांवों से होकर गुजर रही है। इसके लिए कुल 155.579 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया है। 32 आरा जमीन का मुआवजा 7 लाख रुपए तय परियोजना से प्रभावित टेमरिया गांव के किसान लक्ष्मण भेरूलाल खराण की मुख्य मार्ग पर 32 आरा जमीन है। सरकार ने इसका मुआवजा 7 लाख रुपए तय किया है। लक्ष्मण के मुताबिक, उनके खेत से लगी उनके भाई की जमीन 300 रुपए प्रति वर्गफुट के हिसाब से करोड़ों रुपए में बिकी है। इसी वजह से वे जमीन के मूल्यांकन पर सवाल उठा रहे हैं। लक्ष्मण के बताया- 72 आरा जमीन में से बाकी 40 बीघा जमीन सड़क के दोनों ओर अलग-अलग हिस्सों में बंट गई है। इससे खेती प्रभावित हो रही है।
फोरलेन के चपेट में 20 बीघा जमीन की सिंचाई करने वाला कुआं किसान रणछोड़ गोबाजी आंजना की कुल 33.5 आरा जमीन का भी अधिग्रहण किया जा रहा है। फोरलेन उनकी जमीन के बीच से गुजर रहा है। इसके कारण उनका पुराना कुआं भी परियोजना की जद में आ गया है। रणछोड़ के मुताबिक- इस कुएं से करीब 20 बीघा जमीन की सिंचाई होती थी। कुएं के लिए 8 लाख रुपए का मुआवजा तय किया गया है। रणछोड़ का कहना है कि कुआं अधिग्रहण में जाने से उनकी बची जमीन की सिंचाई प्रभावित होगी। इससे खेती करना मुश्किल हो जाएगा। 155.579 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण फोरलेन परियोजना 50 से अधिक गांवों से होकर गुजर रही है। इसके लिए कुल 155.579 हेक्टेयर जमीन का अधिग्रहण किया गया है। प्रभावित किसान मुआवजे की राशि को लेकर विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि प्रशासन की ओर से तय मुआवजा काफी नहीं है। किसानों का आरोप है कि उनकी पुश्तैनी जमीन का उचित मूल्यांकन नहीं किया गया है। मुआवजे को लेकर असंतुष्ट किसानों ने विरोध तेज करने की बात कही है। किसानों की मांग है की जमीन के मूल्यांकन की समीक्षा की जाए और उन्हें चार गुना मुआवजा मिले।
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चाय में पहले दूध डालना चाहिए या पानी? जानिए इसे बनाने का एकदम परफेक्ट तरीका
भारत में चाय सिर्फ एक पेय नहीं, बल्कि लोगों की दिनचर्या का अहम हिस्सा है. सुबह की शुरुआत हो या दिनभर की थकान मिटानी हो, एक कप गर्म चाय मूड को तरोताजा कर देती है. हालांकि, चाय बनाते समय एक सवाल अक्सर लोगों के मन में आता है कि पहले दूध डालना चाहिए या पानी? अलग-अलग घरों में इसे बनाने का तरीका भी अलग होता है. लेकिन अगर आप स्वादिष्ट, खुशबूदार और संतुलित चाय बनाना चाहते हैं, तो सही क्रम जानना जरूरी है.
पहले पानी डालना क्यों माना जाता है बेहतर?
चाय विशेषज्ञों के अनुसार, चाय बनाते समय सबसे पहले पानी को उबालना चाहिए. उबलते पानी में चायपत्ती डालने से उसका स्वाद, रंग और खुशबू अच्छी तरह निकलकर आती है. यदि शुरुआत में ही दूध डाल दिया जाए, तो चायपत्ती का फ्लेवर पूरी तरह विकसित नहीं हो पाता.
पानी में चायपत्ती को एक से दो मिनट तक उबालने के बाद उसमें अदरक, इलायची या अन्य मसाले भी मिलाए जा सकते हैं. इससे चाय का स्वाद और भी बेहतर हो जाता है.
कब डालना चाहिए दूध?
जब पानी में चायपत्ती अच्छी तरह उबल जाए और उसका रंग गहरा हो जाए, तब उसमें दूध मिलाना सबसे अच्छा माना जाता है. इसके बाद चाय को दो से तीन मिनट तक और उबालें. इससे दूध और चाय का स्वाद आपस में अच्छी तरह मिल जाता है और चाय का रंग भी आकर्षक बनता है.
परफेक्ट चाय बनाने की आसान विधि
सामग्री
1 कप पानी
½ कप दूध
1 से 1½ चम्मच चायपत्ती
1 से 2 चम्मच चीनी (स्वादानुसार)
थोड़ा-सा अदरक या इलायची
बनाने का तरीका
सबसे पहले एक पैन में पानी डालकर उबाल लें. पानी उबलने लगे तो उसमें चायपत्ती और अदरक या इलायची डालें. इसे लगभग 1 से 2 मिनट तक उबलने दें. इसके बाद दूध और चीनी मिलाएं. अब चाय को मध्यम आंच पर 2 से 3 मिनट तक पकाएं. जब चाय अच्छी तरह उबल जाए और उसका रंग गाढ़ा दिखने लगे, तब गैस बंद कर दें और छानकर कप में परोसें.
इन बातों का भी रखें ध्यान
चाय को बहुत ज्यादा देर तक न उबालें, इससे स्वाद कड़वा हो सकता है.
दूध और पानी का अनुपात अपनी पसंद के अनुसार रखें.
ताजी चायपत्ती का उपयोग करने से स्वाद बेहतर आता है.
मसाला चाय बनाते समय मसालों को पहले पानी में उबालना बेहतर रहता है.
पाकिस्तान बोला- ऑपरेशन सिंदूर पर बनी डॉक्यूमेंट्री प्रोपेगेंडा: इसमें सिर्फ भारत का पक्ष, हकीकत नहीं; 15 अगस्त को रिलीज हुई थी
ऑपरेशन सिंदूर पर बनी डॉक्यूमेंट्री को लेकर पाकिस्तान ने नाराजगी जताई है। पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता लेफ्टिनेंट जनरल अहमद शरीफ चौधरी ने डॉक्यूमेंट्री को प्रोपेगेंडा बताया। उन्होंने कहा कि फिल्म में घटनाओं को भारत के पक्ष में दिखाया गया है और इससे असली घटनाएं नहीं बदल सकतीं। अहमद शरीफ ने मंगलवार रात करीब 2 बजे सोशल मीडिया X पर यह बयान दिया। उन्होंने डॉक्यूमेंट्री को ‘ट्रैजेडी और कॉमेडी’ तक बताया। उनका आरोप है कि फिल्म में कुछ चुनिंदा इंटरव्यू, भावुक कहानी और फिल्मी अंदाज का इस्तेमाल किया गया है। डिस्कवरी की डॉक्यूमेंट्री ‘डिक्लासिफाइड: ऑपरेशन सिंदूर’ 15 अगस्त को रिलीज हुई थी। इसमें ऑपरेशन सिंदूर में शामिल भारतीय सैन्य अधिकारियों के इंटरव्यू हैं। राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (NSA) अजीत डोभाल भी इसमें नजर आए हैं। पाकिस्तान बोला- सैन्य नाकामी को जीत बताया पाकिस्तानी सेना के प्रवक्ता ने आरोप लगाया कि भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के नतीजे को अपनी जीत के तौर पर दिखाया है। उन्होंने कहा कि फिल्म में कहानी और वीडियो के जरिए सैन्य नाकामी को सफल ऑपरेशन बताया गया है। उनका कहना था कि फिल्म बनाने से उस समय हुई असली घटनाएं नहीं बदल सकतीं। अहमद शरीफ दावा किया कि भारत-पाकिस्तान के बीच हुए चार दिन के संघर्ष में उनकी सेना ने 8 भारतीय सैन्य विमान गिराए थे। हालांकि, भारत इन दावों को पहले ही नकार चुका है। सीजफायर पर भी पाकिस्तान ने सवाल उठाए पाकिस्तानी सेना ने कहा कि लड़ाई दोनों देशों के DGMO यानी सैन्य ऑपरेशन के प्रमुख अधिकारियों के बीच बातचीत के बाद रुकी थी। इसलिए इसे भारत की एकतरफा जीत बताना सही नहीं है। पाकिस्तान ने कहा कि डॉक्यूमेंट्री में एक तरफ भारत की बड़ी और सटीक सैन्य कार्रवाई की बात कही गई है, तो दूसरी तरफ यह भी कहा गया है कि भारत ने लड़ाई को सीमित रखा और पाकिस्तान को पीछे हटने का मौका दिया। पाकिस्तान ने इसे विरोधाभासी दावा बताया। पहलगाम हमले से ऑपरेशन सिंदूर तक 19 दिनों में क्या-क्या हुआ? 22 अप्रैल 2025 के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत-पाकिस्तान के बीच तनाव तेजी से बढ़ा। 7 मई को भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत आतंकी ठिकानों पर हमला किया। इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य संघर्ष बढ़ा और 10 मई को DGMO स्तर की बातचीत के बाद सीजफायर पर सहमति बनी। ————————
ये खबर भी पढ़ें…. इमरान खान से बहन और पत्नी ने मुलाकात की:सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद अडियाला जेल पहुंचीं; पूर्व PM अस्पताल शिफ्ट किए जाएंगे पाकिस्तान के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान से उनकी बहन नोरीन नियाजी और पत्नी बुशरा बीबी ने अडियाला जेल में मुलाकात की। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद यह मुलाकात हुई। नोरीन 9 महीने बाद इमरान से मिलीं। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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बच्चों को संपत्ति से बेदखल कर सकते हैं माता-पिता: सुप्रीम कोर्ट का आदेश; कहा- उन्हें सम्मान और सुरक्षा देना सभ्य समाज की पहचान
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नई दिल्ली41 मिनट पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को कहा कि सीनियर सिटीजन्स अपने बच्चों को संपत्ति से बेदखल कर सकते हैं। कोर्ट ने कहा कि बढ़ती उम्र का मतलब असुरक्षा या अपमान नहीं होना चाहिए। हर व्यक्ति को जीवनभर गरिमा के साथ जीने का अधिकार है।
सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस आदेश को भी पलट दिया, जिसमें बेटे और बहू को मकान से बेदखल करने के ट्रिब्यूनल कोर्ट के आदेश को रद्द किया गया था। कोर्ट ने कहा कि बुजुर्गों की गरिमा के लिए ट्रिब्यूनल के पास बच्चों को संपत्ति से निकालने का आदेश देने का अधिकार है।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने कहा कि कानून का मकसद बुजुर्गों की गरिमा और सुरक्षा तय करना है। सभ्य समाज का स्तर अक्सर इस बात से तय होता है कि वह अपने बुजुर्गों को कितनी गरिमा, सम्मान और सुरक्षा देता है।

लखनऊ के मकान से जुड़ा मामला
यह मामला लखनऊ के विकास नगर निवासी रवि कांत गुप्ता की अपील से जुड़ा था। गुप्ता ने 5 जून 2022 को अपने बेटे को मकान से निकालने के लिए जिला मजिस्ट्रेट के पास आवेदन दिया था।
यह मकान उनकी खुद की खरीदी हुई संपत्ति थी। मामला तब सामने आया, जब गुप्ता की 81 साल की मां को घर छोड़कर वृद्धाश्रम में रहने के लिए मजबूर होना पड़ा।
SDM ने 15 नवंबर 2022 को बेटे की बेदखली का आदेश दिया। जिला मजिस्ट्रेट ने 9 अगस्त 2023 को इसे बरकरार रखते हुए बेटे और बहू को मकान खाली करने का निर्देश दिया।
हाईकोर्ट ने बेदखली का आदेश रद्द किया था
बेटे और बहू ने SDM और जिला मजिस्ट्रेट के आदेश को इलाहाबाद हाईकोर्ट में चुनौती दी। हाईकोर्ट ने कहा था कि 2007 का कानून बुजुर्गों को अपनी संपत्ति से बच्चों को बेदखल करने का अधिकार नहीं देता। इसके बाद दोनों आदेश रद्द कर दिए गए।

सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट का फैसला पलटा
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हाईकोर्ट ने ट्रिब्यूनल के आदेश में दखल देकर गलती की। कोर्ट ने स्पष्ट किया कि भरण-पोषण और सुरक्षा के लिए जरूरी होने पर ट्रिब्यूनल बेदखली का आदेश दे सकता है।
कोर्ट ने कहा कि एक्ट की धारा 7 के तहत ट्रिब्यूनल बनाए गए हैं और धारा 8 उन्हें सिविल कोर्ट जैसी शक्तियां देती है। वहीं, धारा 27 सिविल कोर्ट के अधिकार क्षेत्र पर रोक लगाती है। इसलिए ट्रिब्यूनल को कानून के उद्देश्य को लागू करने के लिए जरूरी कदम उठाने की शक्ति भी है।
कोर्ट ने 2021 के फैसले का भी हवाला दिया
- कोर्ट ने एस. वनिता बनाम डिप्टी कमिश्नर (2021) मामले का हवाला देते हुए कहा कि माता-पिता या वरिष्ठ नागरिकों के भरण-पोषण और सुरक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर ट्रिब्यूनल बेदखली का आदेश दे सकता है। यानी संपत्ति से बच्चों को हटाना भी बुजुर्गों के अधिकारों की रक्षा का एक तरीका हो सकता है।
- कोर्ट ने बताया कि यही कानूनी स्थिति बाद में समटोला देवी बनाम उत्तर प्रदेश सरकार (2025) और कमलकांत मिश्रा बनाम एडिशनल कलेक्टर (2025) मामलों में भी दोहराई गई।

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सुप्रीम कोर्ट में फांसी सिस्टम खत्म करने की याचिका खारिज:मौत के लिए जहरीले इंजेक्शन या गोली मारने जैसे तरीकों की मांग की गई थी

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को मौत की सजा देने के लिए फांसी की मौजूदा व्यवस्था खत्म करने की याचिका खारिज कर दी। जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच ने कहा कि फिलहाल ऐसा कोई आधार नहीं है, जिसके कारण फांसी को असंवैधानिक घोषित किया जाए। पूरी खबर पढ़ें…
बाढ़ और लगातार बारिश के चलते स्कूल बंद, आज छुट्टी का जारी हुआ आदेश
ओडिशा में लगातार बारिश और कई इलाकों में बाढ़ की स्थिति को देखते हुए छात्रों की सुरक्षा के लिए स्कूलों को बंद रखने का फैसला लिया गया है। जाजपुर और सुंदरगढ़ जिले में जिला प्रशासन की ओर से अलग-अलग आदेश जारी किए गए हैं। जाजपुर जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से 18 अगस्त 2026 को जारी कार्यालय आदेश में बताया गया है कि जिले के कई हिस्सों में बाढ़ और जलभराव की स्थिति बनी हुई है। साथ ही बारिश की संभावना को देखते हुए छात्रों की सुरक्षा के लिए 19 अगस्त 2026, बुधवार को जिले के चार ब्लॉक में स्कूलों में कक्षाएं स्थगित रहेंगी। इन चार ब्लॉकों में बरी, बिंझारपुर, धर्मशाला और जाजपुर शामिल हैं।
आदेश के अनुसार, इन चारों ब्लॉक में सभी सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी स्कूलों की कक्षाएं 19 अगस्त को निलंबित रहेंगी। इसमें प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर के स्कूलों के साथ-साथ OAV और OMAV भी शामिल हैं।
बाढ़ से प्रभावित स्कूलों की कक्षाएं स्थगित
जाजपुर जिले के अन्य ब्लॉकों के लिए आदेश में कहा गया है कि वहां केवल बाढ़ से प्रभावित स्कूलों की कक्षाएं स्थगित रहेंगी। बाकी स्कूल सामान्य रूप से संचालित होंगे।इसके लिए जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय ने प्रभावित स्कूलों की सूची भी जारी की है।
बाढ़ और लगातार जलभराव से स्कूल प्रभावित
जारी सूची में धर्मशाला ब्लॉक के कई स्कूलों को बाढ़ और लगातार जलभराव से प्रभावित बताया गया है। इनमें अलोक प्रोजेक्ट यूपी स्कूल, सनराईपाड़ा, जगुलाई जीपीटी हाई स्कूल, कोटापुर, दिहानारसिंहपुर पीएस, सांखा पीपीएस, पिपिलढिहा पीपीएस, भागाबनपुर यूजीएमई, बुधिजगुलाई हाई स्कूल, कदमपाल, परिखितास्वाईं यूपीएस, पंचायत हाई स्कूल अरेइकाना, हमजापुर पीपीएस, बंकासाही पीएस, जयमंगलनोडल यूपीएस, बसुदेवपुर पीएस, नालाकुल पीपीएस, अलारपुर पीएस और सरदा संस्कृत विद्यालय शामिल हैं।
इन स्कूलों में की गई छुट्टी
बरचना ब्लॉक की सूची में पात्राजपुर सिंहसाही पीएस, सरकारी यूजीएचएस बारपाड़ा, बनामालिपुर यूजीएमई, कुला चांदिया यूजीयूपी, सीताराम गर्ल्स हाई स्कूल, ओसिलापाल पीएस, गजेंद्रपुर नोडल यूपीएस, कल्पनादेवी विद्यानिकेतन, साउथ गोपालपुर पीआरवाई, कलाश्री यूजीएमई स्कूल, बहादुरनगर यूजीयूपी स्कूल, झारकुल यूजीयूपी स्कूल, मदरसा इस्लामिया चाटाबार, मदरसा इल्मो मोल्हा और मदरसा तख्ते सुलेमानिया के नाम शामिल हैं।
कोरेई ब्लॉक के प्रभावित स्कूलों में सनाबिरुआन सरकारी यूपीएस, तेलिया सरकारी यूपीएस, बारेई सरकारी यूपीएस, कनकेश्वर सरकारी यूपीएस, मां चताकुमा हाई स्कूल और सरकारी यूपीएस कराड़ा शामिल हैं।
वहीं, रसूलपुर ब्लॉक में परिदाबाद सरकारी यूपीएस, चंदिमाता सरकारी यूपीएस, जीपीडी हाई स्कूल, कमरपाल पीएस, भागबती परिय यूपीएस, बंटारा पीएस और खरास्रोता सरकारी यूपीएस को प्रभावित स्कूलों की सूची में रखा गया है।
जिला शिक्षा अधिकारी के आदेश में यह भी कहा गया है कि जिन स्कूलों में कक्षाएं स्थगित की गई हैं, वे स्कूल बंद नहीं रहेंगे। जरूरत पड़ने पर इन स्कूलों को बचाव और पुनर्वास के लिए उपलब्ध रखा जाएगा।
खराब मौसम के चलते लिया गया फैसला
इधर, सुंदरगढ़ जिले में भी लगातार बारिश और खराब मौसम को देखते हुए सभी प्रकार के शैक्षणिक संस्थानों को 19 अगस्त 2026 को बंद रखने का आदेश जारी किया गया है।
सुंदरगढ़ जिला शिक्षा अधिकारी की ओर से 18 अगस्त को जारी कार्यालय आदेश में कहा गया है कि जिले में लगातार बारिश हो रही है और प्रतिकूल मौसम की स्थिति बनी हुई है। छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए यह निर्णय लिया गया है।
KVS, JNV, OAV और EMRS जैसे संस्थान भी बंद
आदेश के अनुसार, सरकारी, सरकारी सहायता प्राप्त और निजी सभी शैक्षणिक संस्थान 19 अगस्त को बंद रहेंगे। इसमें प्राथमिक, माध्यमिक और उच्च माध्यमिक स्तर के संस्थानों के साथ-साथ KVS, JNV, OAV और EMRS जैसे संस्थान भी शामिल हैं। सुंदरगढ़ जिला प्रशासन की ओर से जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह फैसला विशेष रूप से लगातार बारिश, खराब मौसम और छात्रों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए लिया गया है।
छात्रों की सुरक्षा को प्रशासन ने दी प्राथमिकता
जाजपुर और सुंदरगढ़ में जारी इन आदेशों से साफ है कि लगातार बारिश, बाढ़ और जलभराव के बीच प्रशासन छात्रों की सुरक्षा को प्राथमिकता दे रहा है। जाजपुर में चार ब्लॉक में सभी स्कूलों की कक्षाएं स्थगित की गई हैं, जबकि अन्य क्षेत्रों में केवल सूचीबद्ध बाढ़ प्रभावित स्कूलों में कक्षाएं बंद रहेंगी। वहीं सुंदरगढ़ जिले में 19 अगस्त को सभी प्रकार के शैक्षणिक संस्थानों को बंद रखने का आदेश दिया गया है।
ओडिशा से शुभम कुमार की रिपोर्ट
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हाईवे की होगी ‘परीक्षा’,उद्घाटन से पहले 3 महीने फ्री चलेंगी गाड़ियां
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Highway New Rule : ट्रायल रन के दौरान बारिश या भारी वाहनों के दबाव से सड़क का कोई हिस्सा बैठता है, दरारें आती हैं या पानी निकासी सही से नहीं हो रही है तो इसका पता उद्घाटन से पहले ही चल जाएगा.
ट्रायल रन तभी शुरू होगा, जब निर्माण कार्य और सुरक्षा ऑडिट पूरी तरह मुकम्मल हो चुके हों.
नई दिल्ली. देश में किसी भी नए एक्सप्रेसवे या हाईवे पर सफर करने के लिए आपकी जेब से टोल तभी कटेगा, जब सड़क हर कसौटी पर खरी उतरेगी. सरकार किसी भी नवनिर्मित हाईवे के उद्घाटन से पहले उस पर 2 से 3 महीने तक उसका ट्रायल रन करने की योजना बना रही है. ट्रायल रन के दौरान टोल नहीं वसूला जाएगा. हाल के दिनों में लखनऊ-कानपुर सहित कुछ नए बनी सड़कों के उद्धाटन के कुछ ही दिन उनके धंसने और गड्ढे पड़ने से सरकार की किरकिरी हुई है. इसी से सबक लेते हुए अब पहले हाईवे की असली ‘परीक्षा’ लेकर कमियां ठीक होंगी और उसके बाद ही जनता से टोल वसूला जाएगा.
सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी की अध्यक्षता में दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे परियोजना की समीक्षा बैठक में इस नए मॉडल पर मंथन किया गया. गडकरी ने एनएचएआई के अधिकारियों, ठेकेदारों और सलाहकारों को निर्देश दिए हैं कि निर्माण की गुणवत्ता से कोई समझौता बर्दाश्त नहीं किया जाएगा.
ट्रायल रन के क्या होंगे फायदे?
टाइम्स ऑफ इंडिया की एक रिपोर्ट के अनुसार, 2-3 महीने तक सामान्य ट्रैफिक चलने से सड़क की वास्तविक मजबूती का पता चल सकेगा. बारिश या भारी वाहनों के दबाव से सड़क का कोई हिस्सा बैठता है, दरारें आती हैं या पानी निकासी सही से नहीं हो रही है तो इसका पता उद्घाटन से पहले ही चल जाएगा. कॉन्ट्रैक्ट के नियमों के तहत ठेकेदार डिफेक्ट लायबिलिटी पीरियड के दौरान इन सभी खामियों को अपने खर्च पर ठीक करने के लिए बाध्य होंगे.
पहले भी हो चुका है यह प्रयोग
अधिकारियों का कहना है कि लंबा ट्रायल रन तभी शुरू होगा, जब निर्माण कार्य और सुरक्षा ऑडिट पूरी तरह मुकम्मल हो चुके हों. ऐसा प्रयोग पहले भी दिल्ली-अमृतसर-कटरा एक्सप्रेसवे के कुछ हिस्सों और द्वारका एक्सप्रेसवे की सुरंग पर सफलतापूर्वक किया जा चुका है.
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रुली बिश्नोई मीडिया इंडस्ट्री में 20 साल से अधिक के अनुभव वाले सीनियर पत्रकार हैं. वह अभी News18 Hindi (hindi.news18.com) से जुड़े हैं और बिजनेस वर्टिकल में काम करते हैं. यहां वे बिजनेस जगत के मुश्किल आंकड़ों …
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