Friday, June 5, 2026
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कभी घर-घर बांटा अखबार, आज खुद के ब्रांड से नाम, जमशेदपुर के मनप्रीत की कहानी


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Jamshedpur manpreet singh success story : जमशेदपुर के 21 वर्षीय मनप्रीत सिंह की कहानी संघर्ष और मेहनत की मिसाल है. महज 3 साल की उम्र में पिता को खोने के बाद उन्होंने बचपन से ही काम करना शुरू कर दिया. कभी घर के अमरूद बेचकर पैसे कमाए, तो कभी घर-घर अखबार पहुंचाया. बाद में कपड़ों के कारोबार से जुड़े और “Shades of Punjab” नाम से अपना ब्रांड शुरू किया. आज शहर में उनके दो आउटलेट चल रहे हैं, जहां पंजाबी परिधानों की अच्छी रेंज मिलती है. मनप्रीत कहते हैं कि उन्होंने हार नहीं मानी और लगातार मेहनत ही उनकी सबसे बड़ी ताकत बनी.

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जमशेदपुर : जब बच्चे अपनी छोटी-सी दुनिया में खिलौनों, बैट-बॉल और टेडी बेयर के साथ खेलते हैं, उस उम्र में जमशेदपुर के मनप्रीत सिंह जिंदगी की कठिन सच्चाइयों से रूबरू हो चुके थे. महज 3 साल की उम्र में उन्होंने अपने पिता को खो दिया. घर में मां और एकमात्र बेटे मनप्रीत ही थे. परिवार की जिम्मेदारी और आर्थिक चुनौतियों ने उन्हें बचपन से ही संघर्ष करना सिखा दिया.

आज 21 वर्षीय मनप्रीत सिंह शहर के युवाओं के लिए प्रेरणा बन चुके हैं. उनके द्वारा स्थापित “Shades of Punjab” आज जमशेदपुर में पंजाबी परिधानों का एक जाना-पहचाना नाम है. शहर के काशीडीह और जेमको में उनके दो सफल आउटलेट संचालित हो रहे हैं, जहां महिलाओं और पुरुषों के लिए ऑथेंटिक पंजाबी परिधानों का बड़ा संग्रह उपलब्ध है.

घर-घर अखबार पहुंचाने का काम किया
मनप्रीत बताते हैं कि उन्होंने महज 8 साल की उम्र से काम करना शुरू कर दिया था. उनके घर में अमरूद का पेड़ था और वे उन अमरूदों को तोड़कर सब्जी मंडी में बेचने जाया करते थे. इसके बाद उन्होंने घर-घर अखबार पहुंचाने का काम किया. समय के साथ उन्होंने राशन दुकान में काम किया और स्पेयर पार्ट्स की दुकान में भी मेहनत की. छोटी उम्र में ही उन्होंने समझ लिया था कि जीवन में आगे बढ़ने के लिए संघर्ष और मेहनत का कोई विकल्प नहीं होता.

ग्रेजुएशन की पढ़ाई के लिए वे पंजाब गए, लेकिन वहां की फीस और खर्च उनके लिए काफी अधिक साबित हुए. आर्थिक परिस्थितियों के कारण पढ़ाई जारी रखना मुश्किल हो गया. ऐसे समय में उन्होंने अपने भाई के साथ कपड़ों के व्यापार में हाथ बंटाना शुरू किया. इसी दौरान उन्हें महसूस हुआ कि यदि सही तरीके से काम किया जाए तो रेडीमेड और पारंपरिक कपड़ों का व्यवसाय काफी आगे बढ़ सकता है.

यही सोच लेकर वे वापस जमशेदपुर लौटे और “Shades of Punjab” की शुरुआत की. धीरे-धीरे लोगों का विश्वास बढ़ता गया और उनका कारोबार भी आगे बढ़ता गया. आज उनके स्टोर में पंजाबी कुर्ती, सलवार-सूट, चुन्नी, पगड़ी, जूती, मोजड़ी, जींस, शर्ट और अन्य पारंपरिक एवं आधुनिक परिधानों का बेहतरीन संग्रह उपलब्ध है.

सफलता का श्रेय अपनी मां की मेहनत, भगवान आशीर्वाद

मनप्रीत कहते हैं कि बचपन में उनके भी दोस्त थे, लेकिन वे कभी उनके साथ खेल नहीं पाए. घर की जिम्मेदारियां और मां का सहारा बनने की चिंता हमेशा उनके साथ रही. हालांकि, उन्होंने कभी हार नहीं मानी. आज वे अपनी सफलता का श्रेय अपनी मां की मेहनत, भगवान के आशीर्वाद और लगातार किए गए संघर्ष को देते हैं.

उनका मानना है कि यदि इरादे मजबूत हों तो कठिन से कठिन परिस्थितियां भी सफलता का रास्ता नहीं रोक सकतीं. आज वे जमशेदपुरवासियों को ऑथेंटिक पंजाबी पहनावे से जोड़ने का काम कर रहे हैं और युवाओं के लिए मिसाल बने हुए हैं.

About the Author

Amit Singh

7 वर्षों से पत्रकारिता में अग्रसर. इलाहबाद विश्वविद्यालय से मास्टर्स इन जर्नालिस्म की पढ़ाई. अमर उजाला, दैनिक जागरण और सहारा समय संस्थान में बतौर रिपोर्टर, उपसंपादक औऱ ब्यूरो चीफ दायित्व का अनुभव. खेल, कला-साह…और पढ़ें



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‘मुझे बुरा लगेगा अगर’, कामुक सीन पर जब जाह्नवी ने दी राय, मेकर्स की अजीब सोच की खोली पोल


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जाह्नवी कपूर की नई फिल्म ‘पेड्डी’ के रिलीज होते ही उनके किरदार को जरूरत से ज्यादा ग्लैमराइज करने पर विवाद खड़ा हो गया है. इस बीच उनका एक पुराना इंटरव्यू वायरल हो रहा है, जिसमें उन्होंने स्क्रीन पर एक्ट्रेसेस को बिना मर्जी के कामुक बनाने का विरोध किया था. जाह्नवी कपूर ने कहा था कि खुद की सहमति से बोल्ड दिखना अलग बात है, लेकिन असहज करने वाले कैमरा एंगल्स पर अब वे मेकर्स को ‘ना’ कहना सीख गई हैं. उन्होंने ‘पेड्डी’ के अतरंगी रोल पर मजाकिया अंदाज में कहा था कि दर्शकों को इसके लिए उनके बजाय डायरेक्टर को जिम्मेदार ठहराना चाहिए.

नई दिल्ली: बॉलीवुड एक्ट्रेस जाह्नवी कपूर की फिल्म ‘पेड्डी’ हाल में सिनेमाघरों में रिलीज हुई. मगर फिल्म के रिलीज होते ही एक नया विवाद खड़ा हो गया है. फिल्ममेकर्स पर आरोप लग रहे हैं कि उन्होंने फिल्म में जाह्नवी कपूर के किरदार ‘अचियम्मा’ को जरूरत से ज्यादा ग्लैमराइज और ऑब्जेक्टिफाई करने की कोशिश की है. (फोटो साभार: Instagram@janhvikapoor)

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जाह्नवी कपूर का विवाद के बीच एक पुराना इंटरव्यू खूब वायरल हो रहा है. उन्होंने इस इंटरव्यू में साफ-साफ बताया था कि जब फिल्ममेकर्स उन्हें पर्दे पर हद से ज्यादा बोल्ड या ग्लैमराइज दिखाने की कोशिश करते हैं, तो उन्हें कैसा महसूस होता है और वे इसे कैसे संभालती हैं. (फोटो साभार: Instagram@janhvikapoor)

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दरअसल, जाह्नवी से कुछ समय पहले एक पॉडकास्ट में पूछा गया था कि क्या मेकर्स द्वारा उन्हें जरूरत से ज्यादा ग्लैमराइज किया जाना परेशान करता है? इस पर जाह्नवी ने बहुत समझदारी से जवाब दिया था. उन्होंने कहा था कि सब कुछ इस बात पर निर्भर करता है कि उन्होंने खुद किस चीज के लिए हामी भरी थी. (फोटो साभार: Instagram@janhvikapoor)

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जाह्नवी ने ‘राज शमानी’ के पॉडकास्ट में अपना उदाहरण देते हुए कहा था, ‘मैंने फिल्म में एक गाना किया था जिसमें मैं गीली साड़ी में डांस कर रही थी. वह एक सेंसुअल गाना था, जो दर्शकों को आकर्षित करने के लिए था. अगर वैसे गानों में कोई मुझे आकर्षक न कहे, तो मुझे बुरा लगेगा क्योंकि मैंने उस सीन के लिए खुद सहमति दी थी.’ (फोटो साभार: Instagram@janhvikapoor)

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जाह्नवी कपूर ने आगे एक बड़ी बात कही कि अपनी मर्जी से सेंसुअल दिखना अलग बात है, लेकिन किसी एक्ट्रेस को उसकी मर्जी के बिना स्क्रीन पर कामुक दिखाना बिल्कुल गलत है. जाह्नवी ने साफ किया कि अगर कोई फिल्ममेकर या कैमरा पर्सन उन्हें बिना बताए इस तरह दिखाते हैं, तो यह बात उन्हें बिल्कुल मंजूर नहीं है. (फोटो साभार: Instagram@janhvikapoor)

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एक्ट्रेस ने यह भी माना कि अब वे ऐसे मेकर्स को ‘ना’ कहना सीख रही हैं. उन्होंने कहा, ‘अगर कोई कैमरामैन (DOP) कैमरा ऐसे एंगल पर रखता है जहां मैं असहज महसूस करूं, तो अब मैं तुरंत बोल देती हूं कि ‘नहीं, यह नहीं चलेगा.’ पहले मैं संकोच करती थी, लेकिन अब अपनी बात साफ रखना सीख गई हूं.’ (फोटो साभार: Instagram@janhvikapoor)

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जाह्नवी ने इंडस्ट्री की सोच पर भी बात की. उन्होंने बताया कि कई बार फिल्ममेकर्स अजीब सोच रखते हैं. वे चाहते हैं कि हीरोइन में थोड़ी शर्म हो, ताकि जब वह पहली बार स्क्रीन पर बिकिनी पहने, तो वो उन्हीं की फिल्म में हो. मेकर्स अक्सर इसी आधार पर रोल ऑफर करते हैं कि पब्लिक एक्ट्रेस को कितना पसंद करती है. (फोटो साभार: Instagram@janhvikapoor)

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फिल्म ‘पेड्डी’ के प्रमोशन के दौरान जब जाह्नवी से उनके अतरंगी रोल के बारे में पूछा गया, तो उन्होंने मजाकिया अंदाज में कहा था कि उन्होंने पूरी तरह डायरेक्टर के विजन पर भरोसा किया. उन्होंने हंसते हुए कहा था कि अगर फिल्म में उनका अंदाज अजीब लगे, तो दर्शक उनके बजाय डायरेक्टर को जिम्मेदार ठहराएं. (फोटो साभार: Instagram@janhvikapoor)

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मथुरा में भीषण जाम से लोग परेशान: ट्रैफिक व्यवस्था पर सवाल, आधा किलोमीटर में लग रहा एक घंटा – Mathura News




मथुरा में इन दिनों भीषण यातायात जाम लोगों के लिए बड़ी परेशानी का कारण बन गया है। शहर के प्रमुख चौराहों और मार्गों पर दिनभर वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं। हालात ऐसे हैं कि आधा किलोमीटर की दूरी तय करने में भी लोगों को एक घंटे तक का समय लग रहा है, जिससे स्थानीय नागरिकों के साथ श्रद्धालुओं को भी भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। प्रमुख चौराहों पर सबसे ज्यादा समस्या शहर के गोवर्धन चौराहा, भूतेश्वर चौराहा और बस स्टैंड रोड पर जाम की स्थिति सबसे अधिक गंभीर बनी हुई है। इन मार्गों पर वाहनों का दबाव बढ़ने के साथ ही लंबी कतारें लग जाती हैं। चिलचिलाती धूप में घंटों फंसे रहने से यात्रियों और श्रद्धालुओं को परेशानी झेलनी पड़ रही है। ट्रैफिक व्यवस्था पर उठ रहे सवाल स्थानीय लोगों का आरोप है कि शहर की यातायात व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। उनका कहना है कि कई प्रमुख चौराहों पर तैनात पुलिस और ट्रैफिक कर्मी यातायात संचालन के बजाय मोबाइल फोन में व्यस्त दिखाई देते हैं, जिससे जाम की समस्या और बढ़ जाती है। खासकर गोवर्धन और भूतेश्वर चौराहे पर थोड़ी सी भी भीड़ बढ़ने पर यातायात ठप हो जाता है। व्यापार और दैनिक गतिविधियां प्रभावित लगातार लग रहे जाम का असर आम जनजीवन पर भी पड़ रहा है। नागरिकों का कहना है कि समय पर कार्यालय, स्कूल और अन्य जरूरी स्थानों तक पहुंचना मुश्किल हो गया है। वहीं, बाजारों और व्यापारिक गतिविधियों पर भी इसका नकारात्मक असर पड़ रहा है। स्थायी समाधान की मांग शहरवासियों ने ट्रैफिक विभाग से प्रमुख चौराहों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात करने, यातायात प्रबंधन को और प्रभावी बनाने तथा जाम की समस्या के स्थायी समाधान के लिए ठोस कदम उठाने की मांग की है। लोगों का कहना है कि यदि समय रहते व्यवस्था में सुधार नहीं हुआ तो आने वाले दिनों में हालात और गंभीर हो सकते हैं।



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पूर्णिया के NH-27 पर मक्का लदा ट्रैक्टर पलटा: स्थानीय बोले- परिवहन विभाग को देखकर भागते समय एक्सीडेंट; अवैध वसूली का आरोप – Purnia News




पूर्णिया के कसबा में आज एनएच-27 के कॉलेज चौक ओवरब्रिज पर एक मक्का लदा ट्रैक्टर हादसे का शिकार हो गया। आरोप है कि परिवहन विभाग को देखकर भागने के चक्कर में ये हादसा हुआ। इस हादसे में परिवहन विभाग की गाड़ी भी बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई। परिवहन विभाग के अधिकारियों पर सड़को में अवैध वसूली का आरोप लगा है । घटना से आक्रोशित स्थानीय किसानों और चालकों ने मौके पर मौजूद ईएसआई (Enforcement Sub-Inspector) को घेरकर जमकर हंगामा किया। जानिए कैसे हुआ हादसा… चश्मदीदों और स्थानीय लोगों के अनुसार, शुक्रवार को एनएच 27 के कॉलेज चौक ओवरब्रिज पर परिवहन विभाग की एक गाड़ी बीच सड़क पर खड़ा था। इसी दौरान वहां से गुजर रहे एक मक्का लदे ट्रैक्टर के गाड़ी ने जब सामने परिवहन विभाग की गाड़ी देखी, तो वह कार्रवाई और अवैध वसूली के डर से गाड़ी को तेज रफ्तार में भगाने लगा। इसी आपाधापी में पीछे से आ रहे एक तेज रफ्तार ट्रक ने ट्रैक्टर को जोरदार टक्कर मार दी। टक्कर इतनी जबरदस्त थी कि ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर सड़क के बीचो-बीच खड़ी परिवहन विभाग की गाड़ी से जा टकराई और पलट गई। गनीमत यह रही कि इस दुर्घटना में ट्रैक्टर ड्राइवर, परिवहन विभाग का निजी ड्राइवर और मौके पर मौजूद ईएसआई बाल-बाल बच गए। घटना के बाद भागने का प्रयास, पेट्रोल पंप पर घेराव हादसे के तुरंत बाद माहौल बिगड़ता देख परिवहन विभाग के ईएसआई अपनी क्षतिग्रस्त गाड़ी को लेकर ही मौके से कसबा फ्यूल पेट्रोल पंप की ओर भाग निकले। हालांकि, अवैध वसूली से नाराज और आक्रोशित किसानों और वाहन चालकों ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। पेट्रोल पंप में घुसी भीड़, घेर लिया और मच गया हंगामा गुस्साई भीड़ ने पेट्रोल पंप पहुंच कर ईएसआई शिव नंदन कुमार सुमन को चारों तरफ से घेर लिया और उनके खिलाफ नारेबाजी करते हुए हंगामा शुरू कर दिया। लोगों का बढ़ता आक्रोश देख मामले की गंभीरता को समझते हुए स्थानीय पुलिस को सूचना दी गई। सूचना मिलते ही कसबा थाना पुलिस दल-बल के साथ मौके पर पहुंची और आक्रोशित लोगों को समझा-बुझाकर शांत कराया। इसके बाद पुलिस ईएसआई शिव नंदन कुमार सुमन को सुरक्षा घेरे में लेकर थाने ले आई। किसानों और चालकों का गंभीर आरोप एक गाड़ी के ड्राइवर ने कहा कि परिवहन विभाग के कर्मी चालान काटने के नाम पर सिर्फ अवैध उगाही कर रहे हैं। मंडियों में मक्का बेचने जाने वाले गरीब किसानों और ट्रैक्टर चालकों से जबरन ₹500 से लेकर ₹1500 तक की वसूली की जा रही है। इसी अवैध वसूली और उत्पीड़न से बचने के लिए रात के अंधेरे या अलसुबह भारी वाहनों के चालक गाड़ियों को भगाने पर मजबूर होते हैं, जिससे ऐसे गंभीर हादसे हो रहे हैं।” नंबर प्लेट और ‘पुलिस’ स्टिकर हटाने पर उठे सवाल इस पूरी घटना में परिवहन विभाग की भूमिका तब और संदिग्ध नजर आई जब क्षतिग्रस्त वाहन से नंबर प्लेट और उस पर लगा ‘पुलिस’ का स्टिकर आनन-फानन में हटा दिया गया। जब इस संबंध में ईएसआई शिव नंदन कुमार सुमन से सवाल किया गया, तो उन्होंने सफाई देते हुए कहा कि “चूंकि वाहन दुर्घटना में क्षतिग्रस्त हो गया था और उसकी मरम्मत कराई जानी बेहद जरूरी थी, इसीलिए नंबर प्लेट और स्टिकर को वहां से हटाया गया था।”
ईएसआई ने लगे आरोपों को नकारा ईएसआई ने चालकों और किसानों की ओर से लगाए गए अवैध वसूली के सभी आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए उन्हें पूरी तरह बेबुनियाद बताया। उन्होंने दावा किया कि वे शुक्रवार को हमेशा की तरह एनएच 27 पर सामान्य वाहन जांच (रूटीन चेकिंग) कर रहे थे, इसी दौरान पीछे से आ रहे ट्रक ने मक्का लदे ट्रैक्टर को टक्कर मार दी, जिससे ट्रैक्टर अनियंत्रित होकर उनके सरकारी वाहन से टकराकर पलट गया। कसबा थाना पुलिस ने स्थिति को नियंत्रण में ले लिया है। पुलिस प्रशासन का कहना है कि दुर्घटना के कारणों और दोनों पक्षों के दावों की जांच की जा रही है। हाईवे पर इस तरह बीच सड़क पर गाड़ी रोककर जांच करने और उससे पैदा होने वाले खतरों को लेकर स्थानीय लोगों में अब भी भारी आक्रोश व्याप्त है।



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आदेश और नक्शों को संभालकर नहीं रखने पर कलेक्टर नाराज: रिकॉर्ड रूम के दस्तोंवेजों को सात दिन में डिजिटाइजेशन के निर्देश, दो कर्मचारियों को नोटिस – Singrauli News




सिंगरौली के कलेक्टर गौरव बैनल ने शुक्रवार को जिला रिकॉर्ड रूम (अभिलेखागार शाखा) का अचानक दौरा किया। वहां कागजातों को संभालने में मिली कमियों को देखकर उन्होंने नाराजगी जताई और तुरंत सब कुछ ठीक करने के लिए कहा। इस काम में लापरवाही बरतने पर दो कर्मचारियों को ‘कारण बताओ नोटिस’ भी थमा दिया गया है। निरीक्षण के दौरान जमीन से जुड़े जरूरी कागजात जैसे खसरा, खतौनी, जमीन की नाप-जोख (सीमांकन), नाम चढ़वाने (नामांतरण) के आदेश और नक्शों को सही तरीके से संभालकर नहीं रखा गया था। कलेक्टर ने इसे देखकर संबंधित अधिकारियों और कर्मचारियों को फटकार लगाई और व्यवस्था सुधारने को कहा। कागजातों को सुरक्षित और सही से न रखने की वजह से सहायक ग्रेड-3 जितेंद्र भदोरिया और भृत्य छत्रपाल कुशवाहा को नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया है। सात दिनों में सब कुछ ऑनलाइन करने का अल्टीमेटम कलेज्टर ने अधिकारियों को साफ निर्देश दिए हैं कि सात दिनों के भीतर एक खास मुहिम चलाकर जमीन से जुड़े इन सभी जरूरी कागजातों को पूरी तरह कंप्यूटर पर ऑनलाइन (डिजिटाइजेशन) किया जाए और उनकी एक लिस्ट बनाई जाए। उन्होंने इसके लिए एक्स्ट्रा कर्मचारी लगाने को भी कहा है ताकि सारे कागजात सही ढंग से दर्ज हो सकें। इसके साथ ही उन्होंने रिकॉर्ड रूम की रोज देखरेख करने, साफ-सफाई रखने और दीमक या कीड़े-मकोड़ों से कागजातों को बचाने के लिए समय-समय पर पेस्ट कंट्रोल (दवाई छिड़काव) कराने के निर्देश दिए। सरकारी गारंटी के तहत आने वाले कामों की समीक्षा करते हुए उन्होंने कहा कि जो भी मामले रुके हुए हैं, उन्हें तय समय के अंदर निपटाया जाए। दो-तीन दिन में लोगों को मिले रिकॉर्ड कलेक्टर गौरव बैनल ने कहा, “जमीन के रिकॉर्ड को संभालकर रखना और समय पर लोगों को देना प्रशासन की सबसे पहली जिम्मेदारी है। सभी जरूरी कागजातों को कंप्यूटर पर चढ़ाने का काम तय समय में पूरा हो जाना चाहिए। जनता को आवेदन करने के दो से तीन दिनों के भीतर उनके कागजात मिल जाने चाहिए, ताकि उन्हें दफ्तरों के चक्कर न काटने पड़ें।” इस पूरे दौरे के दौरान संयुक्त कलेक्टर अखिलेश सिंह, संजीव पांडे और तहसीलदार मान सिंह समेत कई अधिकारी मौजूद रहे।



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चिकन-मटन का स्वाद भूल जाएंगे जब खाएंगे महुआ के कोवा की यह पारंपरिक सब्जी


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Mahua Kova Ki Sabji: गर्मियों के मौसम में प्रकृति हमें कई ऐसे अनमोल तोहफे देती है, जो न सिर्फ हमारी जीभ का स्वाद बदलते हैं बल्कि सेहत को भी तंदुरुस्त रखते हैं. ऐसा ही एक देसी खजाना है ‘महुआ का कोवा’. पुराने जमाने में जहां यह लोगों के लिए एक अचूक औषधि का काम करता था, वहीं आज भी गांवों में इसके पारंपरिक स्वाद के दीवाने मौजूद हैं. अगर आप भी इस गर्मी कुछ अलग और बेहद फायदेमंद ट्राई करना चाहते हैं, तो महुआ के कोवा की सब्जी एक बेहतरीन विकल्प है. आइए जानते हैं इसे बनाने का बेहद आसान और पारंपरिक तरीका.

Mahua Kova Ki Sabji: क्या आपने कभी इसकी सब्जी खाई है? अगर नहीं, तो आज हम आपको बताने वाले हैं कि गर्मी के इस मौसम में महुआ के कोवा की सब्जी कैसे बनाएं, जिससे आपको कुछ अलग स्वाद मिल सके. इसके साथ ही यह सब्जी सेहत के लिए भी फायदेमंद होती है; क्योंकि महुआ पुराने समय में लोगों के लिए एक देसी औषधि के रूप में काम करता था. महुआ के बीज के ऊपर की जो परत होती है, उसकी सब्जी गांवों में आज भी लोग बनाकर खाते हैं. तो आइए जानते हैं कि कैसे बनती है महुआ के कोवा की सब्जी.

दो तरह से बनाई जाती है यह सब्जी
हम इसकी दो तरह की सब्जी बनाते हैं एक सूखी और दूसरी रसेदार वाली. इसकी सब्जी इतनी स्वादिष्ट होती है कि लोग इसे इतने शौक से खाते थे कि सिर्फ सब्जी से ही पेट भर जाता है. शहरी क्षेत्रों में तो यह सब्जी बमुश्किल ही बन पाती है, लेकिन ग्रामीण क्षेत्रों में यह आसानी से उपलब्ध हो जाती है.

इसी सीजन में मिलता है ‘कोवा’
कोवा, महुआ के पेड़ से निकलने वाला बीज होता है, जिसका आवरण काफी मुलायम होता है. इसी आवरण को बीज से अलग कर सब्जी बनाई जाती है, जो काफी स्वादिष्ट होती है. कोवा, महुआ के फल देने के बाद पेड़ों में लगता है और इसके लिए मई, जून और जुलाई का महीना सबसे उपयुक्त समय होता है. हालांकि, बारिश के मौसम में यह पकने लगता है.

जानिए कोवा की सब्जी बनाने का सही तरीका
खाना बनाने में और कई तरह की रेसिपी में माहिर एक्सपर्ट सविता श्रीवास्तव बताती हैं कि कोवा की सब्जी न सिर्फ खाने में स्वादिष्ट होती है, बल्कि सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद होती है. इसको बनाने के लिए सबसे पहले कोवा को सीधे पेड़ से तोड़कर लाते हैं. फिर घर लाकर उसके ऊपर का छिलका सूती कपड़े और छीलने वाली किसी चीज से हटा दिया जाता है. इसके बाद कोवा को एक-एक कर काटा जाता है और उसके अंदर का बीज अलग कर लिया जाता है. इसके बाद लोहे की कढ़ाई में पानी गर्म करके कोवा को थोड़ा उबालते हैं, ताकि वह नरम हो जाए. इसके बाद मसाला तैयार किया जाता है, जैसे धनिया, जीरा, हल्दी और गरम मसाला को पीसकर रखा जाता है. फिर लहसुन, मिर्च और प्याज को बारीक काटकर तड़का लगाया जाता है.

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Rahul Goel

राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें



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महिलाएं कलेक्टर से मिली- बोली घर के बाहर ठेका खोला: कलेक्टर ने कहा – साेमवार को हटवा देंगे, आबकारी पुलिस भी पहुंची – Alwar News




अलवर शहर में अंबेडकर नगर विस्तार कॉलोनी के मुख्य रोड पर4 दिन पहले शराब का ठेका खोलने का विरोध थमा नहीं है। शुक्रवार को महिलाएं अलवर कलेक्टर डॉ अर्तिका शुक्ला के पास पहुंच गई। कलेक्टर से महिलाओं बोली – हमारे घर के सामने ठेका खुलवा दिया। बच्चों को बाहर भेजने में परेशानी हो गई। इस पर कलेक्टर अर्तिका शुक्ला ने कहा कि सोमवार तक शराब के ठेके को दूसरी जगह शिफ्ट कराया जाएगा। इसके बाद मौके पर आबकारी पुलिस भी पहुंची। महिलाओं ने उनसे भी शराब का ठेका हटाने की मांग की। अंबेडकर नगर विस्तार निवासी हल्दीना स्कूल की व्याख्याता पूनम कुमारी ने बताया कि 1 जून को शराब का ठेका खोला। तभी कॉलोनी के लोग विरोध में आ गए थे। उसके बावजूद शराब का ठेका नमवहीं हटाया गया। इस कारण शुक्रवार को अलवर कलेक्टर से कॉलोनी के लोग शिकायत करने पहुंचे। कलेक्टर के सामने महिलाओं ने अपनी बात रखते हुए कहा कि घर के सामने ठेका खोल दिया। कैसे बेटियों को बाहर भेजें। वहां शराबी खड़े रहे थे। कभी भी कोई घटना होने का डर बना रहता है। हमारे सामने बड़ी परेशानी खड़ी हो गई। दूसरी महिला ने कहा कि घर के बाहर बेटी को भेजने से डरने लगे हैं। यह सुनने के बाद कलेक्टर ने तुरंत कहा कि सोमवार तक शराब के ठेके को वहां से शिफ्ट करा दिया जाएगा। पूनम कुमारी ने कहा कि ऐसे में बहन-बेटियों का देर शाम निकलना मुश्किल हो गया है। अभद्र व्यवहार होने की पूरी आशंका रहती। स्कूली बच्चों को आने-जाने में असहज महसूस होने लगता है।



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विश्व पर्यावरण दिवस पर दिल्ली सीएम ने किया पौधारोपण: 18 नमो ऑक्सीजन पार्कों का लोकार्पण, बोलीं- प्रदूषण को लेकर गंभीर नहीं रही पूर्व सरकार – New Delhi News




नई दिल्ली। विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर दिल्ली में केंद्रीय मंत्री भूपेंद्र यादव, सीएम रेखा गुप्ता, विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता और प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने वृक्षारोपण कर पर्यावरण बहाली के लिए अभियान चलाया। शुक्रवार को दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव और केंद्रीय मंत्री कीर्तिवर्धन सिंह के साथ मैदानगढ़ी स्थित ‘नमो ऑक्सीजन पार्क’ में आयोजित भव्य कार्यक्रम में शामिल हुईं। इस कार्यक्रम में पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास और जनभागीदारी पर आधारित दिल्ली सरकार की नई पर्यावरणीय पहलों का शुभारंभ किया। इस कार्यक्रम में दिल्ली के पर्यावरण और वन एवं वन्यजीव मंत्री सरदार मनजिंदर सिंह सिरसा, दक्षिण दिल्ली से सांसद रामवीर सिंह बिधूड़ी, छतरपुर से विधायक करतार सिंह तंवर सहित अन्य जन उपस्थित थे। ऑक्सीजन पार्कों का लोकार्पण इस अवसर पर केंद्रीय मंत्रियों और मुख्यमंत्री ने दिल्ली के अलग-अलग इलाकों में विकसित 18 ‘नमो ऑक्सीजन पार्कों’ का डिजिटल लोकार्पण भी किया। यह पहल राजधानी में हरित क्षेत्र बढ़ाने, वायु प्रदूषण कम करने और लोगों को प्रकृति से जोड़ने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। दिल्ली सरकार की योजना के अनुसार इन 18 पार्कों के तहत आने वाले कुल 185.42 एकड़ क्षेत्र को हरित जोन के रूप में विकसित किया जाएगा। इस अभियान के तहत बड़ी संख्या में पौधे लगाए जा रहे हैं। हरित राजधानी की शुरुआत एक पौधे से होती है इस दौरान विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा सच्चा सुशासन केवल वर्तमान के लिए कानून बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए मजबूत आधार तैयार करने का भी दायित्व निभाता है। एक हरित राजधानी की शुरुआत एक पौधे से होती है। विधानसभा अध्यक्ष ने पौधे रोपित कर राजधानी के पारिस्थितिक संतुलन की पुनर्स्थापना के प्रति विधानसभा की प्रतिबद्धता को रेखांकित किया। उन्होंने नागरिकों से केवल दर्शक बने रहने के बजाय प्रकृति के संरक्षक बनने का आह्वान करते हुए कहा कि दिल्ली के प्रत्येक परिवार को कम-से-कम एक वृक्ष अवश्य लगाना चाहिए। सभी 256 मंडलों में आयोजित किया गया एक पेड़ माँ के नाम कार्यक्रम-हर्ष मल्होत्रा विश्व पर्यावरण दिवस पर प्रदेश भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा के नेतृत्व में सभी 256 मंडलों में एक पेड़- माँ के नाम कार्यक्रम का आयोजन किया गया। प्रदेश भाजपा के अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने पूर्वी दिल्ली के सैनी एंक्लैव के डीडीए पार्क में आयोजित वृक्षारोपण कार्यक्रम में चाईना डोल नामक पौधा लगाया। वहीं पूर्व प्रदेश अध्यक्ष वीरेंद्र सचदेवा ने मयूर विहार में आम के पेड़ का वृक्षारोपण किया। वहीं मीडिया प्रभारी प्रवीण शंकर कपूर ने ग्रेटर कैलाश में आम का पेड़ लगाया। मल्होत्रा ने इस अवसर पर उन्होंने कार्यकर्ताओं एवं नागरिकों से अधिक से अधिक पौधे लगाने तथा उनके संरक्षण का संकल्प लेने का आह्वान किया।



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‘आत्मनिर्भर भारत’ का मजाक उड़ाने वालों ने देश को दूसरों पर निर्भर रखा: PM मोदी


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पीएम मोदी ने सूरत में सड़क, बिजली और औद्योगिक क्षेत्रों से जुड़ी 18,800 करोड़ रुपये से ज़्यादा की कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन किया. उन्हें राष्ट्र को समर्पित किया और उनकी आधारशिला रखी.

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पीएम मोदी ने विरोधियों पर निशाना साधा.

सूरत.  प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के सूरत में 18,800 करोड़ रुपये से अधिक की विकास परियोजनाओं का उद्घाटन, लोकार्पण और शिलान्यास करते हुए विपक्ष पर तीखा निशाना साधा. उन्होंने कहा कि कुछ लोग आज भी ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान का मजाक उड़ाते हैं, लेकिन वही लोग दशकों तक देश को दूसरे देशों पर निर्भर बनाए रखने के लिए जिम्मेदार रहे हैं.

प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “आज देश में कुछ निराशावादी लोग आत्मनिर्भर भारत अभियान का मजाक उड़ाते हैं. ये वे लोग हैं जिन्होंने हमेशा भारत को दूसरे देशों पर निर्भर रखा. वे भूल जाते हैं कि दूसरों पर निर्भर रहने वाला देश कभी भी विकास की उस ऊंचाई तक नहीं पहुंच सकता, जिसका वह हकदार है.” उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत केवल एक आर्थिक कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत को वैश्विक स्तर पर मजबूत और सक्षम बनाने का राष्ट्रीय संकल्प है. पीएम मोदी ने कहा कि भारत आज रक्षा, विनिर्माण, तकनीक और बुनियादी ढांचे के क्षेत्र में तेजी से आत्मनिर्भर बन रहा है.

सूरत के विकास मॉडल का जिक्र करते हुए प्रधानमंत्री ने शहर की “सर्कुलर वाटर इकोनॉमी” की सराहना की. उन्होंने कहा कि सूरत जल प्रबंधन के क्षेत्र में देश के लिए एक उदाहरण बनकर उभरा है. पीएम मोदी ने कहा, “आजकल सूरत की सर्कुलर वाटर इकोनॉमी की बहुत चर्चा हो रही है. अब प्रयास यह है कि आने वाले कई दशकों तक सूरत के लिए पीने के पानी की पूरी व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। इसी उद्देश्य से तापी बैराज परियोजना को मंजूरी दी गई है.”

प्रधानमंत्री ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार मिलकर सूरत को भविष्य की जरूरतों के अनुरूप विकसित करने में जुटी हैं. उन्होंने कहा कि सड़क, बिजली, जल आपूर्ति और औद्योगिक विकास से जुड़ी परियोजनाएं न केवल गुजरात बल्कि पूरे देश की आर्थिक प्रगति को नई गति देंगी. इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने 18,800 करोड़ रुपये से अधिक की कई विकास परियोजनाओं को राष्ट्र को समर्पित किया और नई परियोजनाओं की आधारशिला रखी.

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Rakesh Ranjan Kumar

राकेश रंजन कुमार को डिजिटल पत्रकारिता में 10 साल से अधिक का अनुभव है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने लाइव हिन्दुस्तान, दैनिक जागरण, ज़ी न्यूज़, जनसत्ता और दैनिक भास्कर में काम किया है. वर्तमान में वह h…और पढ़ें



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संगीत जगत का ‘मॉडर्न रफी’, 32 भाषाओं में गाए 6000 गाने, 1 एल्बम ने रातोंरात बनाया स्टार


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मशहूर सिंगर ने 90 के दशक में करियर की शुरुआत की थी. उन्होंने ‘अच्छा सिला दिया’ और ‘संदेशे आते हैं’ जैसे गानों से बड़ी पहचान मिली. उन्होंने 30 साल से ज्यादा लंबे सफर में 32 भाषाओं में 6000 से ज्यादा गाने गाए. एक्टिंग में हाथ आजमा चुके सिंगर को ‘मॉडर्न रफी’ कहा जाता है. संगीत जगत में योगदान के लिए उन्हें 2022 में पद्म श्री से सम्मानित किया गया था. दिग्गज सिंगर ने साल 1993 की फिल्म ‘बेवफा सनम’ के गाने की रिकॉर्डिंग की पुरानी तस्वीरें शेयर करके अपने शुरुआती दिनों को याद किया.

नई दिल्ली: हम जिस सिंगर की बात कर रहे हैं, वे बॉलीवुड के सबसे चहेते गायकों में से एक हैं. उन्होंने सोशल मीडिया पर अपनी कुछ पुरानी और खास तस्वीरें शेयर की हैं. उन्होंने इन तस्वीरों को शेयर करते हुए अपने करियर के उन शुरुआती दिनों को याद किया, जब वे इंडस्ट्री में अपनी पहचान बनाने के लिए संघर्ष कर रहे थे.

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सोनू निगम ने साल 1993 की सुपरहिट फिल्म ‘बेवफा सनम’ के एक बेहद पॉपुलर गाने ‘मोहब्बत की कीमत अदा हम करेंगे’ को याद किया. उन्होंने बताया कि सितंबर 1993 में मुंबई के गोरेगांव में मौजूद मशहूर फिल्मिस्तान स्टूडियो में इस गाने की रिकॉर्डिंग हुई थी, जो उनके दिल के बहुत करीब है.(फोटो साभार: Instagram@sonunigamofficial)

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सिंगिंग की दुनिया में सोनू का सफर 90 के दशक की शुरुआत में ही शुरू हो चुका था. बहुत कम लोग जानते हैं कि फिल्मों में उनका पहला गाना साल 1993 की फिल्म ‘आजा मेरी जान’ का ‘ओ आसमानवाले’ था. इसके बाद उन्होंने एक टीवी सीरियल के लिए ‘हम तो छैला बन गए’ गाना भी गाया. (फोटो साभार: Instagram@sonunigamofficial)

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सोनू निगम को असली पहचान और घर-घर में पॉपुलैरिटी ‘अच्छा सिला दिया’, ‘संदेशे आते हैं’ और ‘ये दिल दीवाना’ जैसे गानों से मिली. साल 1999 में आए उनके पर्सनल एल्बम ‘दीवाना’ ने तो म्यूजिक इंडस्ट्री में धूम मचा दी और उन्हें रातों-रात सुपरस्टार बना दिया. (फोटो साभार: Instagram@sonunigamofficial)

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सोनू निगम ने 30 साल से भी लंबे इस शानदार करियर में कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा. उन्होंने अपनी जादुई आवाज में देश-विदेश की 32 से ज्यादा भाषाओं में 6 हजार से भी ज्यादा गाने रिकॉर्ड किए हैं, जो अपने आप में एक बहुत बड़ा रिकॉर्ड है.(फोटो साभार: Instagram@sonunigamofficial)

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संगीत की दुनिया में सोनू निगम के इसी बेमिसाल योगदान के लिए साल 2022 में भारत सरकार ने उन्हें ‘पद्म श्री’ सम्मान से नवाजा था. सोनू निगम को आज के दौर का ‘मॉडर्न रफी’ भी कहा जाता है, क्योंकि वे महान गायक मोहम्मद रफी साहब को अपना सबसे बड़ा आदर्श मानते हैं. (फोटो साभार: Instagram@sonunigamofficial)

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सोनू सिर्फ गाने तक ही सीमित नहीं रहे, बल्कि उन्होंने फिल्मों में एक्टिंग भी की. उन्होंने साल 2002 में आई मल्टी-स्टारर फिल्म ‘जानी दुश्मन: एक अनोखी कहानी’ से बतौर लीड एक्टर अपना डेब्यू किया था, जिसमें अक्षय कुमार, सनी देओल और मनीषा कोइराला जैसे बड़े कलाकार शामिल थे. (फोटो साभार: Instagram@sonunigamofficial)

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अगर फिल्म ‘बेवफा सनम’ की बात करें, तो यह गुलशन कुमार के डायरेक्शन में बनी एक सुपरहिट म्यूजिकल थ्रिलर फिल्म थी. इस फिल्म की कहानी एक मशहूर क्रिकेटर के बारे में थी, जिसे झूठे आरोप में जेल भेज दिया जाता है और उसकी मंगेतर उसे धोखा देकर किसी और से शादी कर लेती है. (फोटो साभार: Instagram@sonunigamofficial)

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