Wednesday, September 9, 2026
Home Blog

फतेहपुर जिला अस्पताल के 2 डॉक्टरों को स्वाइन फ्लू: 5 सैंपल लखनऊ भेजे गए थे, 3 निगेटिव और 2 पॉजिटिव मिले; PGI लखनऊ में भर्ती – Fatehpur News




फतेहपुर जिला अस्पताल के दो डॉक्टरों में स्वाइन फ्लू की पुष्टि हुई है। दोनों डॉक्टरों को बेहतर इलाज और निगरानी के लिए लखनऊ के पीजीआई में भर्ती कराया गया है। डॉक्टरों की रिपोर्ट पॉजिटिव आने के बाद अस्पताल प्रशासन ने संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए सावधानी बढ़ा दी है। संक्रमित डॉक्टरों के संपर्क में आए लोगों की जानकारी भी जुटाई जा रही है। जिला अस्पताल के दो डॉक्टरों में स्वाइन फ्लू जैसे लक्षण दिखाई देने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने जांच के लिए पांच सैंपल लखनऊ भेजे थे। जांच रिपोर्ट आने पर तीन सैंपल निगेटिव मिले, जबकि दो डॉक्टरों की रिपोर्ट पॉजिटिव आई। रिपोर्ट की पुष्टि होते ही दोनों को इलाज के लिए लखनऊ पीजीआई भेज दिया गया। संपर्क में आए लोगों की जानकारी जुटा रहा विभाग दोनों डॉक्टरों में संक्रमण की पुष्टि होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने उनके संपर्क में आए कर्मचारियों और अन्य लोगों की जानकारी जुटानी शुरू कर दी है। अस्पताल में आने वाले मरीजों और स्वास्थ्यकर्मियों की निगरानी भी बढ़ा दी गई है, ताकि किसी अन्य व्यक्ति में संक्रमण के लक्षण मिलने पर समय रहते जांच कराई जा सके। मरीजों और कर्मचारियों को सावधानी बरतने के निर्देश अस्पताल प्रशासन ने कर्मचारियों और मरीजों को संक्रमण से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां बरतने के निर्देश दिए हैं। संदिग्ध मरीजों में स्वाइन फ्लू के लक्षण दिखाई देने पर तत्काल जांच कराने पर जोर दिया जा रहा है। अस्पताल में साफ-सफाई और निगरानी व्यवस्था को भी बढ़ाया गया है। सीएमएस बोले- जरूरी सावधानियां बरती जा रहीं जिला अस्पताल के सीएमएस राजेश कुमार शर्मा ने बुधवार को बताया कि दो डॉक्टरों की स्वाइन फ्लू रिपोर्ट पॉजिटिव आई है। दोनों को लखनऊ पीजीआई में भर्ती कराया गया है। उन्होंने कहा कि अस्पताल में संक्रमण से बचाव के लिए जरूरी सावधानियां बरती जा रही हैं। संदिग्ध मरीजों की निगरानी की जा रही है और लक्षण मिलने पर तुरंत जांच कराई जाएगी। लोगों से भी साफ-सफाई रखने, भीड़भाड़ वाली जगहों पर सावधानी बरतने और लक्षण दिखाई देने पर डॉक्टर से सलाह लेने की अपील की गई है।



Source link

जयपुर में मुख्यमंत्री के खास मुकेश के सामने पूर्व नेता-प्रतिपक्ष: वार्ड-49 में BJP-कांग्रेस की सीधी टक्कर, सीनियर नेताओं की प्रतिष्ठा दांव पर – Jaipur News




जयपुर में सांगानेर विधानसभा क्षेत्र का वार्ड नंबर 49 इस बार जयपुर नगर निगम चुनाव की हॉट सीट बन गया है। यहां मुकाबला सिर्फ दो पार्षद प्रत्याशियों के बीच नहीं, बल्कि भाजपा और कांग्रेस के दिग्गजों की प्रतिष्ठा से भी जुड़ गया है। भाजपा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के करीबी माने जाने वाले मौजूदा पार्षद मुकेश शर्मा ‘काका’ को दोबारा मैदान में उतारा है, जबकि कांग्रेस ने नगर निगम के पूर्व नेता प्रतिपक्ष और चेयरमैन रह चुके धर्मसिंह सिंघानिया पर दांव लगाया है। दोनों ही प्रत्याशी दूसरी बार चुनावी मैदान में हैं और अपने-अपने राजनीतिक रसूख, संगठन और व्यक्तिगत जनसंपर्क के दम पर सीट कब्जाने का दावा कर रहे हैं। भाजपा की घोषित सूची में वार्ड 49 से मुकेश शर्मा ‘काका’ और कांग्रेस की सूची में धर्मसिंह सिंघानिया आमने-सामने हैं। मुकेश बोले- विपक्ष की कोई फाइट नहीं भाजपा प्रत्याशी मुकेश शर्मा का कहना है कि पार्टी ने एक स्थानीय और पुराने कार्यकर्ता को मैदान में उतारा है। उन्होंने कहा कि सांगानेर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा का विधानसभा क्षेत्र है और यहां सरकार के कामकाज को लेकर जनता में सकारात्मक माहौल है। मुकेश का दावा है कि विपक्ष चुनावी माहौल बनाने के लिए बाहर से लोगों को बुला रहा है, लेकिन धरातल पर मुकाबला एकतरफा है। मुकेश शर्मा ने अपने पिछले कार्यकाल के काम गिनाते हुए कहा कि वार्ड में नई सड़कों का निर्माण हुआ है और सीवर लाइन डालने का काम भी किया गया है। परिसीमन के बाद वार्ड में कुछ नया क्षेत्र जुड़ा है, जहां पहले कांग्रेस का पार्षद था। मुकेश के मुताबिक, इस नए हिस्से का विकास उनकी प्राथमिकता रहेगा। उन्होंने कहा कि इलाके में चोरी की घटनाएं बढ़ना भी चिंता का विषय है। ऐसे में कॉलोनियों में सीसीटीवी कैमरे लगवाना और रात के समय पुलिस गश्त बढ़वाना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है। BJP में भीतरघात नहीं चुनाव में भाजपा कार्यकर्ताओं में नाराजगी और भीतरघात के सवाल पर मुकेश शर्मा ने इसे सिरे से खारिज किया। उनका कहना है कि वे भाजपा के पुराने कार्यकर्ता हैं और पार्टी के सभी समर्पित कार्यकर्ता पूरी ताकत से चुनाव में जुटे हुए हैं। उन्होंने संकेत दिया कि संगठन की एकजुटता ही वार्ड 49 में भाजपा की सबसे बड़ी ताकत है। सिंघानिया बोले- पहले सबसे ज्यादा वोटों से जीता था, अब जनता फिर मैदान में लाई दूसरी ओर कांग्रेस प्रत्याशी धर्मसिंह सिंघानिया ने वार्ड 49 के मुकाबले को सीधे तौर पर हॉट सीट करार दिया। सिंघानिया ने कहा कि जब वे पांच साल पहले चुनाव लड़े थे, तब सबसे ज्यादा वोटों से जीतने वाले पार्षदों में रहे और पूरे कार्यकाल में जनता के मुद्दों को लेकर सड़क पर संघर्ष किया। उनका दावा है कि जनता के आग्रह पर ही वे दोबारा चुनाव मैदान में उतरे हैं और उन्हें लगातार लोगों का समर्थन मिल रहा है। सिंघानिया ने कहा कि पिछले कार्यकाल में उन्होंने क्षेत्र में सबसे ज्यादा विकास कार्य करवाए और जनता के बीच रहकर काम किया। उनका कहना है कि लोग उन्हें इसलिए दोबारा मौका देना चाहते हैं क्योंकि उन्हें उनमें अपनी समस्याओं के समाधान की उम्मीद दिखाई देती है। मुकेश CM के खास हो सकते हैं, जनता के नहीं धर्मसिंह सिंघानिया ने भाजपा प्रत्याशी मुकेश शर्मा पर सीधा हमला बोलते हुए कहा कि वे मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के खास हो सकते हैं, लेकिन क्षेत्र की जनता के बीच उनकी छवि वैसी नहीं है। सिंघानिया का आरोप है कि वार्ड के लोग मूलभूत सुविधाओं को लेकर परेशान हैं और उनकी सुनवाई नहीं होती। उन्होंने दावा किया कि मुकेश शर्मा पांच साल में जनता के बीच सक्रिय नहीं रहे और आम लोगों के फोन तक नहीं उठाते। सिंघानिया ने कहा कि वार्ड को ऐसा पार्षद चाहिए जो जनता के बीच रहे, उसकी समस्याएं सुने और जरूरत पड़ने पर सड़क पर उतरकर संघर्ष करे। उन्होंने दावा किया कि कांग्रेस इस चुनाव में पूरी मजबूती से मैदान में है और भाजपा को हर मोर्चे पर कड़ी टक्कर दी जा रही है। सिर्फ वार्ड की सीट नहीं, दोनों दलों की प्रतिष्ठा का सवाल वार्ड 49 में लड़ाई इसलिए भी दिलचस्प है क्योंकि दोनों उम्मीदवारों की अपनी राजनीतिक पहचान है। मुकेश शर्मा दूसरी बार पार्षद पद के लिए चुनाव लड़ रहे हैं, जबकि धर्मसिंह सिंघानिया पहले नगर निगम में नेता प्रतिपक्ष और चेयरमैन की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। ऐसे में एक तरफ मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में भाजपा अपना दबदबा कायम रखने की कोशिश कर रही है, तो दूसरी तरफ कांग्रेस इस सीट को जीतकर सांगानेर में भाजपा के मजबूत किले में सेंध लगाने की कोशिश में है। वार्ड 49 सामान्य सीट है। यहां लगभग 15 हजार 300 मतदाता हैं। वार्ड के चुनावी समीकरण में ब्राह्मण और जाट मतदाताओं की भूमिका अहम मानी जा रही है। दोनों प्रमुख प्रत्याशी इन्हीं सामाजिक समूहों से आते हैं। ऐसे में मुकाबला केवल पार्टी के वोट बैंक तक सीमित नहीं रहने वाला, बल्कि व्यक्तिगत पकड़, पुराने संपर्क, स्थानीय मुद्दों और सामाजिक समीकरणों पर भी काफी कुछ निर्भर करेगा। वार्ड में सड़क, सीवर, सफाई, सुरक्षा, स्ट्रीट लाइट और नए जुड़े इलाकों का विकास प्रमुख चुनावी मुद्दे बनते दिखाई दे रहे हैं। सांगानेर के कई वार्डों में सड़क, जलभराव, सीवर और स्थानीय सुविधाएं इस चुनाव में प्रमुख मुद्दे बने हुए हैं। अब असली सवाल यह है कि मुख्यमंत्री के विधानसभा क्षेत्र में BJP अपने खास प्रत्याशी को दोबारा जिता पाती है या कांग्रेस के पुराने निगम नेता धर्मसिंह सिंघानिया भाजपा के गढ़ में सेंध लगा देते हैं। दोनों प्रत्याशियों के दावों के बीच वार्ड 49 में मुकाबला अब पूरी तरह आमने-सामने का बन चुका है और चुनाव परिणाम दोनों दलों के स्थानीय संगठन के लिए भी बड़ा संदेश देने वाला माना जा रहा है।



Source link

सतना में फर्जी सिम निकालकर साइबर गैंग को बेचते थे: 200 रुपए में होती थी एक सिम की डील; 20 से ज्यादा सिम बेचने का खुलासा, 2 आरोपी गिरफ्तार – Satna News




सतना कोलगवां पुलिस ने ग्राहकों के वैध दस्तावेजों का गलत इस्तेमाल कर अतिरिक्त सिम कार्ड निकालने और उन्हें साइबर फ्रॉड गैंग तक पहुंचाने वाले दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक आरोपी आधार कार्ड समेत अन्य दस्तावेजों पर चोरी-छिपे अतिरिक्त सिम जारी करवाकर उन्हें दूसरे राज्यों में सक्रिय साइबर अपराधियों को बेचते थे। मामले का खुलासा तब हुआ, जब सतना के एक युवक के नाम पर जारी सिम कार्ड का इस्तेमाल बेंगलुरु में लाखों रुपए के साइबर फ्रॉड में किया गया। इसके बाद स्टेट साइबर सेल ने सतना पुलिस को मामले की जांच के निर्देश दिए। पुलिस ने जांच में पिछले कुछ महीनों में जारी 38 से ज्यादा सिम कार्डों की पड़ताल की। सिम पोर्ट कराने के लिए दिए दस्तावेज, POS एजेंट ने रख लिए जांच के दौरान पुलिस ने सनत कुमार सिंह, महेंद्र साकेत और नीलू मिश्रा से पूछताछ की। उन्होंने बताया कि करीब 4-5 महीने पहले उन्होंने अपने सिम कार्ड पोर्ट कराने के लिए माधवगढ़ स्थित मोबाइल दुकान के POS एजेंट रजनीकांत साकेत को आधार कार्ड सहित जरूरी दस्तावेज दिए थे। आरोप है कि रजनीकांत ने उनका सिम पोर्ट नहीं कराया और दस्तावेज अपने पास रख लिए। पुलिस को इसी जानकारी से सिम कार्ड के फर्जीवाड़े की कड़ी मिली। 200 रुपए में अखिलेश को बेचता था अतिरिक्त सिम पुलिस ने रजनीकांत साकेत (29) निवासी इटौरा, थाना रामपुर बाघेलान को हिरासत में लेकर पूछताछ की। पुलिस के मुताबिक पूछताछ में उसने ग्राहकों के दस्तावेजों पर अतिरिक्त सिम कार्ड निकालने की बात कबूल की। आरोप है कि वह इन सिम कार्डों को 200-200 रुपए में अखिलेश सतनामी (21) निवासी सकरिया, थाना कोलगवां को बेच देता था। ग्रुप से साइबर अपराधियों से जुड़ा था आरोपी पुलिस ने रजनीकांत से मिली जानकारी के आधार पर अखिलेश को भी गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने पुलिस को बताया कि वह Telegram और WhatsApp ग्रुप के जरिए दूसरे राज्यों के लोगों के संपर्क में था। पुलिस के अनुसार, मोटे कमीशन के लालच में अखिलेश रजनीकांत से सिम कार्ड खरीदकर आगे सप्लाई करता था। अब तक की जांच में दोनों आरोपियों ने 20 से ज्यादा सिम कार्ड बेचने की बात कबूल की है। साइबर फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट में इस्तेमाल होने का पता चला पुलिस जांच में सामने आया है कि आरोपियों द्वारा उपलब्ध कराए गए सिम कार्डों का इस्तेमाल साइबर फ्रॉड और डिजिटल अरेस्ट जैसे अपराधों में किया गया। बेंगलुरु में हुए लाखों रुपए के साइबर फ्रॉड में सतना के युवक के नाम से जारी सिम का इस्तेमाल होने के बाद पुलिस ने पूरे नेटवर्क की जांच तेज की। पुलिस और साइबर टीम अब इन सिम कार्डों के जरिए जुड़े लोगों और दूसरे राज्यों में सक्रिय साइबर अपराधियों की जानकारी जुटा रही है। जांच आगे बढ़ने पर इस नेटवर्क से जुड़े और लोगों के गिरफ्तार होने की संभावना है। BNS, IT एक्ट और दूरसंचार अधिनियम में केस पुलिस ने जांच में मिले तथ्यों के आधार पर दोनों आरोपियों के खिलाफ BNS की धारा 318(4), 3(5), IT एक्ट की धारा 66(C) और दूरसंचार अधिनियम की धारा 42(3)(ई) एवं 42(6) के तहत मामला दर्ज किया है। दोनों आरोपियों को न्यायालय में पेश किया गया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि आरोपियों ने अब तक कितने सिम कार्ड जारी कराए और इनका इस्तेमाल किन-किन साइबर अपराधों में किया गया।



Source link

बुढ़ापे का सहारा है एसबीआई की एफडी स्कीम, जानें 1 लाख पर कितना पैसा बनेगा


अगर आप अपना पैसा सुरक्षित जगह पर रखना चाहते हैं और उस पर तय रिटर्न भी चाहते हैं, तो FD एक बेहतर ऑप्शन हो सकता है. खासकर ऐसे निवेशकों जो शेयर बाजार के उतार-चढ़ाव से दूर रहकर निश्चित ब्याज कमाना चाहते हैं. देश के सबसे बड़े सरकारी बैंकों में शामिल स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) भी अलग-अलग-अवधि की FD की सुविधा देता है.

बैंक में कुछ दिनों से लेकर कई साल तक के लिए पैसा जमा किया जा सकता है. 1 साल यानी 365 दिन की FD भी कई निवेशक करते हैं. इस अवधि में सामान्य ग्राहकों और वरिष्ठ नागरिकों के लिए ब्याज दर अलग-अलग है. ऐसे में अगर आप SBI में 1 लाख रुपये एक साल के लिए जमा करने की सोच रहे हैं, तो यह जानना जरूरी है कि मैच्योरिटी पर आपको कितनी रकम मिल सकती है.

365 दिन की FD पर कितना ब्याज मिलेगा?

SBI में 365 दिन यानी एक साल की FD पर सामान्य ग्राहकों को 6.25 फीसदी सालाना ब्याज दिया जा रहा है. यह दर 3 करोड़ रुपये से कम की FD पर लागू है. यानी अगर कोई सामान्य ग्राहक एक लाख रुपये एक साल के लिए जमा करता है, तो 6.25 फीसदी की दर से करीब 6,250 रुपये का ब्याज बनता है.

इस हिसाब से एक साल पूरा होने पर मूलधन और ब्याज मिलाकर रकम करीब 1,06,250 रुपये हो सकती है. हालांकि, पूरी मैच्योरिटी राशि बैंक के ब्याज कैलकुलेशन और पेमेंट के तरीके के आधार पर थोड़ी अलग हो सकती है.

सीनियर सिटीजन्स को कितना फायदा?

SBI सीनियर सिटीजन्स को सामान्य ग्राहकों की तुलना में ज्यादा ब्याज देता है. 60 साल या उससे अधिक उम्र के ग्राहक को 365 दिन की FD पर 6.75 फीसदी ब्याज मिल रहा है. वहीं, 80 साल या उससे अधिक उम्र के सुपर सीनियर सिटीजन के लिए ब्याज दर 6.85 फीसदी है. यानी समान अवधि और रकम पर सीनियर सिटीजन्स को सामान्य ग्राहक के मुकाबले ज्यादा ब्याज मिलता है.

1 लाख रुपये जमा करने पर कितना मिलेगा?

अगर 1 लाख रुपये की FD एक साल के लिए की जाती है, तो मोटे तौर पर रकम इस तरह समझ सकते हैं:

सामान्य ग्राहक: 6.25% ब्याज – करीब 6,250 रुपये ब्याज
60 से अधिक उम्र वाले सीनियर सिटीजन: 6.75% ब्याज – करीब 6,750 रुपये ब्याज
80 से अधिक उम्र वाले यानी सुपर सीनियर सिटीजन: 6.85% ब्याज – करीब 6,850 रुपये ब्याज

इस तरह मैच्योरिटी पर रकम करीब 1.06 लाख से 1.07 लाख रुपये के बीच हो सकती है.

SBI FD में कितने समय के लिए कर सकते हैं निवेश?

SBI में FD सिर्फ एक साल के लिए ही नहीं होती. ग्राहक अपनी जरूरत के हिसाब से अलग-अलग अवधि चुन सकते हैं. बैंक में 7 दिन से लेकर 10 साल तक की अवधि के लिए FD की सुविधा उपलब्ध है. ब्याज दर FD की अवधि और ग्राहक की कैटेगरी के हिसाब से बदलती है.

सीनियर सिटीजन के लिए FD का एक फायदा यह है कि उन्हें सामान्य ग्राहकों से आमतौर पर 0.50 फीसदी ज्यादा ब्याज मिलता है. 80 साल या उससे अधिक उम्र के सुपर सीनियर सिटीजन को इसके ऊपर अतिरिक्त फायदा मिलता है. हालांकि, FD में पैसा लगाने से पहले मौजूदा ब्याज दर, टैक्स नियम और मैच्योरिटी राशि की बैंक से बात करके पता करनी चाहिए.



Source link

42 की उम्र में भी फौलादी बॉडी, गुरमीत चौधरी ने खाना छोड़ी रोटी-चावल और चीनी! ऐसा है फिटनेस रूटीन


एक्टर गुरमीत चौधरी अपनी दमदार एक्टिंग के साथ फिटनेस के लिए भी जाने जाते हैं। आज हम आपको उनके सख्त फिटनेस रूटीन के बारे में बताने जा रहे हैं, जिसे अपनाना हर किसी के बस की बात नहीं है।

एक्टर गुरमीत चौधरी (Gurmeet Choudhary) किसी पहचान के मोहताज नहीं हैं। उनकी दमदार एक्टिंग के साथ फिटनेस के बारे में भी हर कोई जानता है और वह फिट-टोन्ड बॉडी के लिए जाने जाते हैं। गुरमीत ने ऐसे ही फौलाद जैसा शरीर नहीं बनाया है बल्कि इसके लिए वह कड़ी मेहनत करते हैं और डाइट भी काफी बैलेंस लेते हैं। फिट रहने के लिए उन्होंने सालों से चावल, रोटी और चीनी नहीं खा रहे हैं। उनका मानना है कि जब आप किसी आदत को करीब 6 महीने तक अपना लेते हैं, तब शरीर को उसकी आदत पड़ जाती है और वह उस हिसाब से ही ढल जाता है। गुरमीत ने फिट रहने के लिए अपने रूटीन को काफी सख्त रखा हुआ है, जिसकी अब उन्हें आदत हो चुकी है। चलिए आपको बताते हैं फौलादी शरीर के लिए गुरमीत क्या खाते हैं और क्या उनका फिटनेस रूटीन है।

चावल-चीनी के अलावा नहीं खाते ये चीजें

गुरमीत चौधरी ने सालों से चावल, रोटी और चीनी को हाथ नहीं लगाया है और इसके अलावा वह मैदा, समोसा, मिठाई, जंक फूड्स से भी कोसों दूर रहते हैं। उनका मानना है कि अगर ये सब खाएंगे तो शरीर हेल्दी नहीं रहेगा और अगर आपको लंबे समय तक स्वस्थ रहना है तो शुरुआत अभी से करनी होगी।

क्या है उनके खाने की प्लेट में

गुरमीत चौधरी फिटनेस को लेकर काफी सख्त हैं और वह सिर्फ उबला या सादा खाना खाते हैं। इसमें सलाद, फल और उबला चिकन हो सकता है। रोटी वह क्विनोवा की खा लेते हैं, गेहूं के आटे से बनी रोटी नहीं खाते हैं। साथ ही वह चिकना खाना खाना भी पसंद नहीं करते हैं।

इंटरमिटेंट फास्टिंग करते हैं

गुरमीत चौधरी शाम को करीब 5:30 से 6:00 बजे के बीच अपना डिनर कर लेते हैं और इसके बाद 14 से 16 घंटे की इंटरमिटेंट फास्टिंग करते हैं। ऐसा करने से उनका पाचन मजबूत बना रहता है और वजन भी कंट्रोल में रहता है। उनका मानना है कि अगर आपको बिना रुके फिटनेस मेंटेन करनी है, तो उसका सही तरीका इंटरमिटेंट फास्टिंग है।

वर्कआउट भी नहीं है कम कठिन

गुरमीत चौधरी सुबह जल्दी उठकर मार्शल आर्ट्स, किक-बॉक्सिंग, जिम्नास्टिक, वेट ट्रेनिंग, डांस, साइकिलिंग और योग करते हैं। इससे उनका शरीर फिट और फ्लेक्सिबल बना रहता है। वह हर दिन करीब 2 घंटे वर्कआउट करते हैं और सुबह योगा करते हैं। फिटनेस के लिए वह हर जरूरी एक्टिविटी करते हैं, जो उनके शरीर को मजबूत बनाकर रख सकती है। यही कारण है कि गुरमीत चौधरी ने 42 साल की उम्र में भी सिक्स पैक एब्स और फिट बॉडी बनाकर रखी है। गुरमीत का मानना है कि फिट रहने के लिए आपको कुछ आदतों और चीजों को छोड़ना पड़ेगा। आप जंक फूड खाकर हेल्दी बॉडी नहीं बना सकते, उसके लिए आपको सही डाइट लेनी पड़ेगी और इसलिए उन्होंने अपना फिटनेस रूटीन सख्त बनाकर रखा है।



Source link

तीजा त्योहार की पहचान है छत्तीसगढ़ की पारंपरिक खुरमी, ट्राई करें ये रेसिपी

0


बिलासपुर. छत्तीसगढ़ के तीजा त्योहार में खानपान की परंपरा का खास महत्व है. त्योहार के मौके पर घरों में तरह-तरह के पारंपरिक पकवान बनाए जाते हैं, जिनमें खुरमी का स्वाद और पहचान अलग ही है. गेहूं के आटे, गुड़, सूजी, तिल और घी से तैयार होने वाली खुरमी बाहर से खस्ता और कुरकुरी, तो अंदर से स्वाद से भरपूर होती है. गांवों में आज भी तीजा सहित कई खास अवसरों पर इसे पारंपरिक तरीके से तैयार किया जाता है. खास बात यह है कि खुरमी बनाने में ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं पड़ती और इसे लंबे समय तक सुरक्षित भी रखा जा सकता है. अगर आप भी इस तीजा त्योहार पर घर में छत्तीसगढ़ी स्वाद और परंपरा की मिठास घोलना चाहते हैं, तो खुरमी की यह आसान रेसिपी जरूर आजमा सकते हैं.

छत्तीसगढ़ की संस्कृति में तीजा त्योहार महिलाओं के लिए विशेष महत्व रखता है. इस दौरान मायके और ससुराल में पारंपरिक पकवान बनाने की परंपरा रही है. खुरमी भी ऐसे ही पारंपरिक व्यंजनों में शामिल है, जिसे त्योहार और पारिवारिक आयोजनों में बड़े चाव से बनाया और परोसा जाता है.

गुड़ और गेहूं के आटे से तैयार होती है खुरमी
खुरमी बनाने के लिए मुख्य रूप से गेहूं का आटा, सूजी, गुड़ या चीनी, तिल और घी की जरूरत होती है. स्वाद और खुशबू बढ़ाने के लिए इसमें कद्दूकस किया हुआ नारियल, इलायची पाउडर और सौंफ भी डाली जा सकती है. साधारण सामग्री से बनने के बावजूद इसका स्वाद बेहद खास होता है.

पहले तैयार करें गुड़ का घोल
सबसे पहले एक पैन में गुड़ और थोड़ा पानी डालकर गर्म करें. गुड़ पूरी तरह घुल जाने के बाद इसे कुछ देर ठंडा होने के लिए रख दें. अगर चीनी का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो इसी तरह उसका घोल तैयार किया जा सकता है.

मोयन से आएगा खुरमी में खस्तापन
अब एक बड़े बर्तन में गेहूं का आटा, सूजी और तिल डालकर अच्छी तरह मिला लें. इसमें करीब ¼ कप घी डालकर दोनों हाथों से अच्छी तरह मिलाएं. यही घी खुरमी में मोयन का काम करेगा. सही मोयन की पहचान के लिए आटे को मुट्ठी में दबाकर देखें, अगर वह आसानी से बंध जाए तो मोयन सही माना जाता है.

गुड़ का घोल डालकर गूंथें सख्त आटा
अब तैयार गुड़ के घोल को थोड़ा-थोड़ा करके आटे में डालें और सख्त आटा गूंथ लें. ध्यान रखें कि आटा ज्यादा नरम न हो. आटा तैयार होने के बाद इसे करीब 10 मिनट के लिए ढककर रख दें ताकि यह अच्छी तरह सेट हो जाए.

मनचाहा आकार देकर करें तैयार
अब आटे की लोइयां बनाकर इन्हें थोड़ा मोटा बेल लें. इसके बाद चाकू की मदद से चौकोर, गोल या अपनी पसंद के आकार में काट लें. पारंपरिक तरीके से खुरमी को अलग-अलग आकार देकर भी तैयार किया जाता है.

धीमी आंच पर तलने से बनेगी खस्ता
कड़ाही में तेल या घी गर्म करें. यह बहुत ज्यादा गर्म नहीं होना चाहिए. खुरमी के टुकड़ों को धीमी से मध्यम आंच पर धीरे-धीरे तलें. दोनों तरफ से सुनहरा और कुरकुरा होने के बाद इन्हें बाहर निकाल लें. धीमी आंच पर तलने से खुरमी अच्छी तरह अंदर तक पकती है और उसका स्वाद भी बेहतर आता है.

ठंडी होने के बाद एयरटाइट डिब्बे में रखें
तली हुई खुरमी को पूरी तरह ठंडा होने दें. इसके बाद इसे एयरटाइट डिब्बे में भरकर रखा जा सकता है. सही तरीके से रखने पर खुरमी कई दिनों तक स्वादिष्ट और कुरकुरी बनी रह सकती है.

तीजा पर घर में घोलें छत्तीसगढ़ी स्वाद की मिठास
तीजा केवल पूजा और परंपराओं का त्योहार नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ की समृद्ध खानपान संस्कृति से भी जुड़ा अवसर है. खुरमी जैसे पारंपरिक पकवान इस त्योहार की मिठास को और बढ़ा देते हैं. आज के दौर में जहां कई पारंपरिक व्यंजन धीरे-धीरे कम होते जा रहे हैं, वहीं तीजा जैसे त्योहार इन स्वादों और पुरानी परंपराओं को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने का माध्यम भी बनते हैं.



Source link

नालंदा के अमृत राजकुमार बने सेना में लेफ्टिनेंट: चीन सीमा पर संभालेंगे मोर्चा, सातवें प्रयास में सीडीएस क्रैक; 4 सिख लाइट इन्फेंट्री रेजिमेंट में हुए शामिल – Nalanda News




बिहार शरीफ के बड़ी पहाड़ी के रहने वाले राजीव रंजन कुमार के बेटे अमृत राजकुमार भारतीय सेना में बतौर अधिकारी (लेफ्टिनेंट) चयनित हुए हैं। 5 सितंबर 2026 को ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी, चेन्नई की प्रतिष्ठित पासिंग आउट परेड के साथ ही अमृत सेना का हिस्सा बने। सेना की सबसे जांबाज शाखा—पैदल सेना (इन्फेंट्री) की ‘4 सिख लाइट इन्फेंट्री’ रेजिमेंट में उन्हें कमीशन प्राप्त हुआ है। अमृत की सफलता की नींव वर्षों पहले अमृत के दादाजी शांति लाल ने रखी थी। परिवार में पांच पीढ़ियों से किसी ने भी इस तरह की कामयाबी का स्वाद नहीं चखा था। दादाजी का एक ही सपना था कि उनका पोता पढ़-लिखकर देश के सबसे प्रतिष्ठित संस्थान में पहुंचे और एक दिन बहुत बड़ा आदमी बनकर फौज में अफसर बने। अमृत जब बहुत छोटे थे, तभी नानी ने जन्म के बाद उनका पालन-पोषण किया और दादाजी ने उंगली पकड़कर आगे का रास्ता दिखाया। परिवार की माली हालत ऐसी नहीं थी कि आसानी से महंगी पढ़ाई का खर्च उठाया जा सके। इसके बावजूद दादाजी ने अपने इलाज या निजी जरूरतों के लिए बैंक बैलेंस की परवाह किए बिना पोते की पढ़ाई को प्राथमिकता दी। उन्होंने पाई-पाई जोड़कर सैनिक स्कूल की भारी-भरकम फीस का इंतजाम किया और अमृत का दाखिला सैनिक स्कूल में कराकर ही दुनिया को अलविदा कहा। अमृत की माता मंजू देवी भारी मन और गर्व भरी आवाज में कहती हैं कि आज दादाजी स्वर्ग में बैठकर अपने पोते के कंधों पर सितारे देखकर सबसे ज्यादा सुकून महसूस कर रहे होंगे। उनका देखा ख्वाब आज पोते ने अपनी मेहनत से हकीकत में तब्दील कर दिखाया है। पिता का हौसला और समाज की बदौलत मुश्किल राहें हुईं आसान अमृत के पिता राजीव रंजन कुमार नालंदा डिस्ट्रिक्ट कोर्ट में वकालत करते हैं। एक स्थानीय अदालत में प्रैक्टिस करते हुए इतने बड़े परिवार का भरण-पोषण करना और बच्चों को उच्च शिक्षा दिलाना कभी भी आसान नहीं रहा। राजीव रंजन बताते हैं कि जीवन के इस लंबे सफर में कई आर्थिक और सामाजिक चुनौतियां सामने आईं, कदम-कदम पर कमियां महसूस हुईं, लेकिन उन्होंने कभी धैर्य और साहस का दामन नहीं छोड़ा। पिता के अनुसार, समाज से मिले इसी सकारात्मक सहयोग और भरोसे की बदौलत वे बच्चों को बिना किसी रुकावट के पढ़ा सके। पिता का मानना है कि असली गर्व उस दिन महसूस होगा जब उनका बेटा सीमा पर पूरी निष्ठा, ईमानदारी और बहादुरी के साथ देश की रक्षा करेगा और देश सेवा के लिए सम्मानित होकर घर लौटेगा। शुरुआती पढ़ाई से लेकर सैनिक स्कूल और दिल्ली विश्वविद्यालय का सफर अमृत की शुरुआती स्कूली शिक्षा बिहार शरीफ के स्थानीय ‘बिहार पब्लिक स्कूल’ से हुई। प्राथमिक शिक्षा पूरी करने के बाद उन्होंने कक्षा छह में सैनिक स्कूल की प्रवेश परीक्षा पास की और वहां दाखिला लिया। सैनिक स्कूल के अनुशासित माहौल में उन्होंने लगातार सात वर्षों तक कड़ा परिश्रम किया और वर्ष 2021 में वहां से पास आउट हुए। सैनिक स्कूल ने उनके व्यक्तित्व में अनुशासन, शारीरिक दृढ़ता और देशप्रेम का ऐसा बीज बोया जिसने उनके लक्ष्य को पूरी तरह स्पष्ट कर दिया था। इसके बाद उच्च शिक्षा के लिए वे देश की राजधानी दिल्ली पहुंचे, जहां उन्होंने प्रतिष्ठित दिल्ली विश्वविद्यालय में दाखिला लिया। वहां से अमृत ने बीएससी मैथमेटिक्स ऑनर्स की डिग्री हासिल की। गणित जैसे कठिन और तार्किक विषय में स्नातक की पढ़ाई करते हुए भी उनका ध्यान अपने एकमात्र लक्ष्य सेना की वर्दी से कभी नहीं भटका। एनडीए की नाकामी से टूटे नहीं, सातवें प्रयास में सीडीएस क्रैक कर रचा इतिहास अमृत की यह यात्रा केवल सफलताओं से भरी नहीं रही, बल्कि इसमें असफलताओं के गहरे घाव भी शामिल रहे। सैनिक स्कूल में पढ़ाई के दौरान ही उन्होंने एनडीए की कठिन चयन प्रक्रिया में हिस्सा लिया। लिखित परीक्षा और एसएसबी इंटरव्यू पास करने के बाद जब अंतिम मेरिट लिस्ट जारी हुई, तो कम रैंक होने के कारण वे अंतिम चयन से बाहर हो गए। इस झटके ने किसी भी सामान्य युवा का मनोबल तोड़ दिया होता, लेकिन अमृत ने हार मानने के बजाय अपनी गलतियों से सीखा। दिल्ली विश्वविद्यालय में स्नातक के अंतिम वर्ष में पहुंचते ही उन्होंने सम्मिलित रक्षा सेवा परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी। असफलताएं लगातार उनका इम्तिहान लेती रहीं, लेकिन उन्होंने मैदान नहीं छोड़ा। लगातार छह प्रयासों में मनमुताबिक परिणाम न मिलने के बावजूद अमृत डटे रहे और आखिरकार अपने सातवें प्रयास में उन्होंने सीडीएस परीक्षा में शानदार सफलता हासिल की। इसके साथ ही उनका चयन ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी, चेन्नई के लिए सुनिश्चित हो गया। ओटीए चेन्नई की 11 महीने की कड़ी ट्रेनिंग और कंधों पर चमके सितारे सीडीएस पास करने के बाद अमृत राजकुमार चेन्नई स्थित ऑफिसर्स ट्रेनिंग एकेडमी पहुंचे। वहां 11 महीनों तक चलने वाली भारतीय सेना की सबसे कठिन और थका देने वाली सैन्य ट्रेनिंग की शुरुआत हुई। शारीरिक सहनशक्ति, सामरिक युद्ध कौशल, मानसिक मजबूती और नेतृत्व क्षमता को तराशने वाले इस कठिन प्रशिक्षण को अमृत ने पूरे जज्बे के साथ पूरा किया। 5 सितंबर 2026 को जब पासिंग आउट परेड के दौरान उनके कंधों पर लेफ्टिनेंट के सितारे सजाए गए, तो परिवार की आंखों से खुशी के आंसू छलक पड़े। अमृत को पैदल सेना (इन्फेंट्री) की विख्यात ‘4 सिख लाइट इन्फेंट्री’ में अधिकारी पद पर कमीशन मिला, जो अपने शौर्य और पराक्रम के लिए भारतीय सेना में एक विशिष्ट पहचान रखती है। संयुक्त परिवार की ताकत: सात भाई-बहनों का अटूट संबल अमृत की सफलता के पीछे केवल उनके माता-पिता ही नहीं, बल्कि उनके पूरे संयुक्त परिवार की सामूहिक ताकत रही है। परिवार में चाचा रवि कुमार और चाची सुनीता देवी ने हमेशा अमृत को अपने बेटे की तरह प्यार और संबल दिया। अमृत का अपना छोटा भाई नालंदा मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल (एनएमसीएच) से एमबीबीएस प्रथम वर्ष की पढ़ाई कर रहा है। इसके अलावा चाचा के बेटे राजा और प्रजा, फुफेरी बहनें स्वीटी व डॉली और छोटा भाई निशांत कुमार—इन सभी सात भाई-बहनों का आपस में गहरा लगाव रहा है। एक बड़े संयुक्त परिवार में माता-पिता, चाचा-चाची, बुआ और दादी के एक साथ रहने से घर में हमेशा सकारात्मक और सहयोगी माहौल बना रहा, जिससे अमृत बिना किसी मानसिक तनाव के अपनी पढ़ाई और लक्ष्य पर ध्यान केंद्रित रख सके। पहली पोस्टिंग हिमाचल के स्पीति में, चीन सीमा पर रक्षा का मिला दायित्व सैन्य अफसर बनने के बाद लेफ्टिनेंट अमृत राजकुमार को उनकी पहली तैनाती देश के बेहद संवेदनशील और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण क्षेत्र में मिली है। उन्हें हिमाचल प्रदेश के स्पीति वैली में वास्तविक नियंत्रण रेखा यानी भारत-चीन सीमा के निकट मोर्चा संभालने की जिम्मेदारी सौंपी गई है। दुर्गम पहाड़ों, अत्यधिक ऊंचाई और हाड़ कंपा देने वाली ठंड के बीच देश की सीमा की निगहबानी करना किसी भी युवा अधिकारी के लिए बड़ी चुनौती और उतना ही बड़ा सम्मान है। अमृत 20 दिनों की पारिवारिक छुट्टी पूरी करने के तुरंत बाद स्पीति वैली के लिए रवाना होंगे। उनका कहना है कि वे इस दुर्गम और खूबसूरत मोर्चे पर देश की हिफाजत के लिए पूरी तरह तैयार और उत्साहित हैं। नालंदा जिले के एक साधारण परिवार से निकलकर देश की रक्षा पंक्ति के शीर्ष पर खड़े होने तक का अमृत का यह सफर हर उस युवा के लिए एक मिसाल है, जो विपरीत परिस्थितियों के आगे झुकने से इनकार कर देता है।



Source link

BJP सांसद के बेटे बोले- Gen-Z आंदोलन में गया था: कहा- टोपी-मास्क पहनकर जंतर-मंतर पहुंचा, फोटो बाहर आती तो ठीक नहीं होता – Hisar News


हांसी में पत्रकारों से बातचीत करते भिवानी-महेंद्रगढ़ के सांसद चौधरी धर्मबीर के बेटे मोहित चौधरी।

भिवानी-महेंद्रगढ़ से भाजपा सांसद चौधरी धर्मबीर के बेटे मोहित चौधरी ने बड़ा खुलासा किया है। उन्होंने कहा कि वह हाल ही में दिल्ली के जंतर-मंतर पर हुए Gen-Z आंदोलन में शामिल हुए थे। वह विरोध प्रदर्शन में टोपी और मास्क पहनकर गए थे, क्योंकि वह जानते हैं क

.

मोहित चौधरी बुधवार को हांसी पहुंचे थे। वह धर्मसेना युवा मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। यहां पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने जंतर-मंतर के विरोध प्रदर्शन में शामिल होने की बात कही।

दैनिक भास्कर रिपोर्टर ने जब मोहित चौधरी से प्रोटेस्ट में शामिल होने की फोटो मांगी तो उन्होंने कहा कि साथ कोई कैमरे वाला नहीं था। अगर वह 10 कैमरे वाले अपने साथ रखते और मीडिया में यह दिखता कि सांसद का बेटा भी वहां बैठा है, तो मीडिया में सिर्फ यही चीजें आतीं।

हांसी में धर्मसेना के कार्यक्रम को संबोधित करते मोहित चौधरी।

‘देशहित में गलत हो तो युवाओं से मिलना चाहिए’

मोहित चौधरी ने कहा कि अगर कोई चीज देश के हित में नहीं है, खराब है या गलत है तो उसके लिए देश के युवाओं से मिलना चाहिए। उन्होंने नीट परीक्षा का उदाहरण देते हुए कहा कि परीक्षा में पेपर लीक हुआ था और ऐसा नहीं होना चाहिए था। भाजपा सरकार ने तुरंत इस पर संज्ञान लिया, पेपर कैंसिल करवाया और जो भी इसमें दोषी था, उसके खिलाफ कार्रवाई हुई।

‘जंतर-मंतर पर जेनुअन बच्चे भी बैठे थे’

मोहित चौधरी से जब पूछा गया कि अर्चना गुप्ता कहती हैं कि जंतर-मंतर के प्रदर्शन में दूसरी पार्टी के लोग भी बैठे थे, तो उन्होंने कहा कि वहां जेनुअन बच्चे भी बैठे थे। हालांकि, उनके मुताबिक कुछ बच्चे ऐसे भी थे, जिनका मकसद सरकार को बदनाम करना था, ताकि वे जिस भी पार्टी से जुड़े हैं, उन्हें वाहवाही मिल सके।

अर्चना गुप्ता ने कहा था- आंदोलन में आतंकवादी थे

करीब एक महीने पहले हांसी में ही हरियाणा भाजपा प्रदेश अध्यक्ष डॉ. अर्चना गुप्ता ने जंतर-मंतर पर हुए छात्रों के आंदोलन को लेकर दो बड़े दावे किए थे। उन्होंने कहा था कि आंदोलन के दौरान अराजकता और आतंकवादी भी दिखाई दिए थे।

अर्चना गुप्ता ने दूसरा दावा किया था कि आंदोलन के दौरान एक महिला पुलिस कॉन्स्टेबल की मौत हो गई और एक पुलिस अधिकारी की आंख चली गई। हालांकि, महिला कॉन्स्टेबल की मौत के दावे को दिल्ली पुलिस 24 जुलाई को ही गलत बता चुकी थी। वहीं, आंदोलन में विदेशी फंडिंग के सवाल पर विदेश मंत्रालय भी कह चुका है कि उसके पास ऐसी कोई जानकारी नहीं है।

भागवत ने भी कहा था- प्रदर्शन करने वाले एंटी-नेशनल नहीं

6 अगस्त को संघ प्रमुख मोहन भागवत ने मुंबई में Gen-Z और Gen-Alpha के युवाओं से करीब एक घंटे तक बातचीत की थी। इस दौरान एक युवा ने उनसे सवाल किया कि अगर हम प्रदर्शन करने आएंगे तो हमें एंटी-नेशनल बता दिया जाएगा और कुछ लोग कहेंगे कि हम किसी दूसरे देश के एजेंट हैं।

इस पर भागवत ने कहा था कि अगर Gen-Z प्रदर्शन कर रहे हैं तो वे अपने लोग हैं, एंटी-नेशनल नहीं हैं। Gen-Z और Gen-Alpha पुरानी पीढ़ी से भी ज्यादा देशभक्त और ईमानदार हैं।



Source link

अमेरिका का 5 ईरानी टैंकरों पर हमला: जवाब में ईरान ने जॉर्डन में US बेस पर 20 मिसाइलें दागीं, दावा- 18 मार गिराईं




अमेरिका और ईरान के बीच तनाव एक बार फिर बढ़ गया है। अमेरिकी सेना ने मंगलवार (8 सितंबर) को ईरान से जुड़े 5 तेल टैंकरों पर हमला किया। इसके कुछ घंटे बाद ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने की ओर 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जॉर्डन की सेना ने दावा किया कि उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने 18 मिसाइलों को मार गिराया, जबकि दो मिसाइलें आबादी से दूर इलाकों में गिरीं। अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा कि ईरान ने पिछले दो दिनों में अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत को दो बार बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाने की कोशिश की थी। इसके जवाब में अमेरिकी सेना ने ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े तेल टैंकरों पर हमला किया। अमेरिका ने ओमान की खाड़ी में 4 टैंकरों को निशाना बनाया CENTCOM के मुताबिक, अमेरिका ने ओमान की खाड़ी में 4 और खार्ग द्वीप के पास 1 तेल टैंकर को निशाना बनाया। अमेरिका ने दावा किया कि जिन पांच टैंकरों पर हमला किया गया, वे अरबों डॉलर के एक शैडो नेटवर्क का हिस्सा थे। यह नेटवर्क ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड्स और उसके सहयोगियों के लिए फंड जुटाता है। अमेरिकी सेना ने बताया कि हमले से पहले टैंकरों के चालक दल को जहाज खाली करने का निर्देश दिया था। अमेरिका ने कहा- युद्धपोत पर हमला नाकाम हुआ CENTCOM के मुताबिक, ईरान ने अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत को बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाने की कोशिश की थी। हालांकि अमेरिकी युद्धपोत ने मिसाइल हमले को नाकाम कर दिया। CENTCOM के अनुसार इस घटना में किसी अमेरिकी सैनिक को नुकसान नहीं हुआ और अमेरिकी युद्धपोत क्षेत्र में गश्त जारी रखे हुए है। अमेरिकी सेना का कहना है कि ईरान के इन हमलों के जवाब में ही पांच तेल टैंकरों पर कार्रवाई की गई। रूबियो की चेतावनी- अमेरिकी जहाज पर हमला किया तो टैंकर खोएगा ईरान कोलंबिया में पत्रकारों से बातचीत के दौरान अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने ईरान को खुले तौर पर चेतावनी दी है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी नौसैनिक जहाजों पर हमले की कोशिश का जवाब दिया जाएगा। अमेरिका की ओर से इस तरह की कार्रवाई आगे भी देखने को मिल सकती है। ईरान ने कुवैत और बहरीन में अमेरिकी जहाजों को भी धमकाया अमेरिकी हमले के बाद ईरान ने कुवैत और बहरीन के बंदरगाहों के पास मौजूद कुछ तेल टैंकरों को चेतावनी दी है। ईरान के IRGC ने कहा है कि इन जहाजों के चालक दल तुरंत जहाज खाली कर दें। ईरान ने साफ कहा है कि अगर ये जहाज अमेरिकी पक्ष से जुड़े हैं, तो उन्हें निशाना बनाया जा सकता है। जहाज बंदरगाह पर खड़े हों या समुद्र में लंगर डालकर रुके हों, दोनों ही स्थिति में उन पर हमला हो सकता है। खार्ग द्वीप ईरान के तेल कारोबार के लिए बेहद अहम अमेरिकी कार्रवाई में जिस इलाके को निशाना बनाया गया, उसमें खार्ग द्वीप खास तौर पर महत्वपूर्ण है। यह ईरान का प्रमुख कच्चा तेल निर्यात टर्मिनल है। ईरान के करीब 90% कच्चे तेल का निर्यात इसी द्वीप के जरिए होता है। मुख्य भूमि से पाइपलाइनों के जरिए कच्चा तेल खार्ग द्वीप तक पहुंचाया जाता है और फिर यहां से इसे अंतरराष्ट्रीय बाजारों के लिए भेजा जाता है। इस वजह से खार्ग द्वीप के आसपास किसी भी सैन्य कार्रवाई से ईरान के तेल निर्यात और वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर चिंता बढ़ सकती है। पहले भी ईरान के तेल टैंकरों को निशाना बना चुका है अमेरिका अमेरिका ने इससे पहले 5 सितंबर को 3 ईरानी तेल टैंकरों पर हमला किया था। अमेरिकी सेना के मुताबिक, यह कार्रवाई ईरान की ओर से एक अमेरिकी विमानवाहक पोत और गाइडेड मिसाइल विध्वंसक पर हमला करने की कोशिश के बाद की गई थी। अब पांच और टैंकरों पर अमेरिकी हमले और उसके जवाब में जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने पर ईरानी मिसाइल हमले के बाद दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ गया है। ईरान ने अमेरिकी अंडरवॉटर ड्रोन पकड़ा IRGC ने मंगलवार को दावा किया है कि उसने होर्मुज में एक अमेरिकी अंडरवॉटर ड्रोन पकड़ा है। IRGC ने इसकी तस्वीर भी जारी की है। तस्वीर में दिख रहा ड्रोन अमेरिकी कंपनी एंड्यूरिल के डाइव-LD मॉडल जैसा है। ड्रोन का आकार और डिजाइन की कई चीजें Dive-LD से मेल खाती हैं। अंडरवॉटर ड्रोन बिना चालक के पानी के अंदर कई दिनों तक मिशन करने के लिए बनाया गया है।इसका इस्तेमाल समुद्र की निगरानी, खुफिया जानकारी जुटाने और समुद्री बारूदी सुरंगों की तलाश जैसे कामों में किया जा सकता है। यह अमेरिकी नौसेना के इस्तेमाल में भी है। ————————— यह खबर भी पढ़ें… मिडिल ईस्ट में एक और संघर्ष शुरू:सऊदी के 4 शहरों पर हूती विद्रोहियों का हमला, 73 घायल यमन में हूतियों और सऊदी अरब के बीच तनाव फिर बढ़ गया है। हूतियों विद्रोहियों ने सोमवार को सऊदी के 4 शहरों पर हमला किया। पूरी खबर यहां पढ़ें…



Source link

NEET-UG पेपर लीक- आरोप तय करने के मुद्दे पर सुनवाई: आरोपी के वकील बोले- वे पब्लिक सर्वेंट नहीं; न भरोसा तोड़ा, न कोई अपराध हुआ


  • Hindi News
  • National
  • NEET UG Paper Leak Case | Delhi Court Hearing Prahlad Kulkarni Statement

नई दिल्ली14 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

फाइल फोटो

नई दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट में मंगलवार को NEET-UG पेपर लीक केस में आरोप तय करने के मुद्दे पर सुनवाई हुई। प्रह्लाद विठ्ठलराव कुलकर्णी के वकील ने कहा कि कुलकर्णी पब्लिक सर्वेंट नहीं हैं, जैसा कि CBI ने आरोप लगाया है।

वकील हेमंत शाह ने कहा कि किसी व्यक्ति को पब्लिक सर्वेंट घोषित करने के लिए कानून के मुताबिक उसके पद की अधिसूचना जारी होना जरूरी है।

नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) पब्लिक अथॉरिटी है और पब्लिक परीक्षाएं कराती है। लेकिन कुलकर्णी के पद को लेकर ऐसी कोई अधिसूचना नहीं है।

वकील ने CBI के आरोप पर भी सवाल उठाया कि कुलकर्णी समेत एक्सपर्ट्स को NEET प्रश्नपत्र तैयार करने का काम सौंपा गया था।

उन्होंने कहा कि ऐसा कोई काम सौंपे जाने का सवाल ही नहीं है। न भरोसा तोड़ने का मामला बनता है और न ही कोई अपराध हुआ है।

स्पेशल फास्ट ट्रैक कोर्ट स्पेशल जज (CBI) अजय गुप्ता की बेंच 13 आरोपियों के खिलाफ आरोप तय करने के मुद्दे पर सुनवाई कर रही है।

इस मामले में आज भी सुनवाई होगी, मंगीलाल बिवाल, दिनेश बिवाल और विकास बिवाल के वकील दलीलें रखेंगे।

वकील ने पेपर लीक और पैसों के आरोपों पर सवाल उठाए

कुलकर्णी के वकील ने कहा कि किसी भी छात्र को लीक हुआ पेपर नहीं दिया गया था। किसी ने यह भी नहीं कहा है कि सवालों के बदले पैसे दिए गए। पैसे से जुड़ी बात विवादित है। उन्होंने कहा कि कुलकर्णी का परीक्षा प्रश्नपत्र की छपाई से कोई लेना-देना नहीं था।

वकील ने कहा कि आरोपों के मुताबिक NEET-UG परीक्षा से पहले छात्रों ने कुलकर्णी के घर पर स्पेशल क्लास की थी। लेकिन रिकॉर्ड में छात्रों के उनके घर जाने का कोई सबूत नहीं है। रिकॉर्ड में MyGate की एंट्री भी नहीं है।

NTA के साथ हुए समझौते को लेकर भी दलील

कुलकर्णी के वकील ने कहा कि उनके और NTA के बीच हुआ गोपनीयता प्रमाणपत्र सिर्फ एक अंडरटेकिंग है। यह केवल एक कॉन्ट्रैक्ट है। इस अंडरटेकिंग से यह पता चलता है कि काम किया गया था।

धनंजय लोखंडे की ओर से एडवोकेट विक्रम सिंह ने दलीलें रखीं। मंगलवार को स्पेशल जज (CBI) अजय गुप्ता ने आरोपियों की ओर से बहस सुनी। CBI आरोप तय करने के मुद्दे पर सोमवार को अपनी दलीलें पूरी कर चुकी है।

मंगलवार की सुनवाई में प्रह्लाद कुलकर्णी, मनीषा मंधारे, तेजस हर्षद कुमार शाह, यश यादव, धनंजय लोखंडे और शुभम खैरनार के वकीलों ने बहस की।



Source link