Thursday, August 27, 2026
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उन्नाव में तहसीलदारों के कार्यक्षेत्र बदले: 6 अधिकारियों की नई तैनाती, न्यायिक तहसीलों की भी बदली जिम्मेदारी – Unnao News




उन्नाव जिले में प्रशासनिक व्यवस्था को बेहतर बनाने और राजस्व कार्यों के त्वरित निस्तारण के लिए तहसीलदारों के कार्यक्षेत्र में बड़ा फेरबदल किया गया है। जिलाधिकारी घनश्याम मीणा ने बुधवार रात तहसीलदारों के स्थानांतरण और नवीन तैनाती के आदेश जारी किए। आदेश के बाद संबंधित अधिकारियों को तत्काल नई तैनाती स्थल पर कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। राजस्व परिषद, उत्तर प्रदेश से नायब तहसीलदार पद से तहसीलदार पद पर प्रोन्नत अधिकारियों को जिले की अलग-अलग तहसीलों में तैनाती दी गई है। इसके अलावा जिले में पहले से तैनात कुछ तहसीलदारों के कार्यक्षेत्र बदले गए हैं। गैर जनपदों से स्थानांतरित होकर आए अधिकारियों को भी विभिन्न तहसीलों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बांगरमऊ में अखिलेश मौर्य, साक्षी राय को न्यायिक जिम्मेदारी जारी आदेश के मुताबिक अखिलेश कुमार मौर्य को तहसीलदार बांगरमऊ बनाया गया है। यहां पहले से तैनात तहसीलदार साक्षी राय का स्थानांतरण करते हुए उन्हें तहसीलदार (न्यायिक) बांगरमऊ की जिम्मेदारी दी गई है। हसनगंज में तहसीलदार के पद पर तैनात अविनाश चौधरी को अब तहसीलदार सफीपुर बनाया गया है। वहीं कीरत सेन को तहसीलदार हसनगंज की जिम्मेदारी सौंपी गई है। बीघापुर और पुरवा में भी नई तैनाती प्रियंका तिवारी को तहसीलदार बीघापुर और शिवम राठौर को तहसीलदार पुरवा के पद पर तैनाती दी गई है। इसके अलावा प्रतीक्षारत चल रहीं सुरभि गौतम को तहसीलदार (न्यायिक) पुरवा बनाया गया है। तहसीलदार (न्यायिक) सदर उन्नाव राकेश कुमार यादव को अपनी मौजूदा जिम्मेदारी के साथ सर्वे का कार्य भी सौंपा गया है। तत्काल प्रभाव से कार्यभार संभालने के निर्देश जिलाधिकारी के आदेश में सभी संबंधित अधिकारियों को नवीन तैनाती स्थल पर तत्काल कार्यभार ग्रहण करने के निर्देश दिए गए हैं। प्रशासन के अनुसार फेरबदल का उद्देश्य तहसील स्तर पर राजस्व कार्यों को बेहतर तरीके से संचालित करना, जनसमस्याओं का तेजी से निस्तारण करना और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाना है। नई तैनातियों के बाद जिले की तहसीलों में राजस्व मामलों के निस्तारण में तेजी आने और आम लोगों से जुड़े कामकाज को अधिक व्यवस्थित तरीके से संचालित किए जाने की उम्मीद है।



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ककोड़ा-चना दाल की सब्जी का स्वाद बढ़ाएगा ये देसी तरीका, जरूर आजमाएं

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Kakoda Chana Dal Sajzi Recipe: बरसात आते ही बाजार में मिलने वाला ककोड़ा कई घरों की रसोई का स्वाद बदल देता है. अगर इसकी सब्जी को चना दाल के साथ बनाया जाए तो साधारण सी सब्जी भी बेहद स्वादिष्ट बन जाती है. खास बात यह है कि इसके लिए किसी खास सामग्री की जरूरत नहीं पड़ती. प्याज, हरी मिर्च और रोजाना इस्तेमाल होने वाले मसालों से इसे आसानी से तैयार किया जा सकता है. ककोड़ा काटते समय इसके बीज निकालने की भी जरूरत नहीं है, क्योंकि ये सब्जी का स्वाद बढ़ाते हैं. चना दाल और ककोड़ा की यह देसी सब्जी रोटी, पराठे या चावल के साथ स्वादिष्ट लगती है.

बारिश के मौसम में अगर कुछ अलग और स्वादिष्ट खाने का मन हो तो ककोड़ा की सब्जी एक अच्छी सब्जी है. ककोड़ा इस मौसम में आसानी से मिलने वाली सब्जी है. इसे चना दाल के साथ बनाया जाए तो इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है. खास बात यह है कि इसे घर में मौजूद मसालों से आसानी से तैयार किया जा सकता है. कम समय में बनने वाली यह सब्जी रोटी, पराठे और चावल के साथ खूब पसंद की जाती है.

चना दाल और ककोड़ा की सब्जी बनाने के लिए सबसे पहले चना दाल को सब्जी बनाने से करीब एक घंटे पहले पानी में भिगोकर रख दें. इसके बाद ककोड़ा को साफ पानी से अच्छी तरह धो लें, ताकि उस पर लगी मिट्टी पूरी तरह निकल जाए. अब ककोड़ा को दो टुकड़ों में काट लें. इसके अंदर के बीज और बीच के हिस्से को फेंकने की जरूरत नहीं है. इसे भी सब्जी में इस्तेमाल किया जा सकता है. ककोड़ा के बीज सब्जी का स्वाद बढ़ाते हैं और खाने में भी अच्छे लगते हैं.

इसके बाद प्याज और हरी मिर्च को बारीक काट लें और लहसुन को छीलकर तैयार कर लें. अब गैस पर कढ़ाई रखें और उसमें सरसों का तेल डालें और तेल गर्म होने पर जीरा डालें. इसके बाद कटी हुई प्याज और हरी मिर्च डालकर अच्छी तरह सुनहरा होने तक भूनें. अब इसमें लाल मिर्च पाउडर, धनिया पाउडर, हल्दी, स्वादानुसार नमक, गरम मसाला और कसूरी मेथी डालें. मसालों को अच्छी तरह पकाएं.

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जब मसाला तेल छोड़ने लगे तो इसमें भिगोई हुई चना दाल डालें. कढ़ाई को ढककर करीब पांच मिनट तक दाल को पकाएं. जब दाल थोड़ी नरम हो जाए तो इसमें कटे हुए ककोड़ा डाल दें. अब इसे अच्छी तरह मिलाकर करीब 10 मिनट तक पकाएं. बीच-बीच में सब्जी को चलाते रहें, ताकि यह कढ़ाई में लगे नहीं.

जब ककोड़ा और चना दाल अच्छी तरह पक जाएं तो गैस बंद कर दें. आखिर में ऊपर से बारीक कटा हुआ हरा धनिया डालें. इस तरह चना दाल और ककोड़ा की स्वादिष्ट सब्जी बनकर तैयार हो जाएगा. इसे गरमा-गरम रोटी, पराठे या चावल के साथ परोसा जा सकता है. बारिश के मौसम में कम सामग्री और आसान तरीके से बनने वाली यह देसी सब्जी खाने का स्वाद बढ़ा सकती है.

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बांका में हाईवा ने 60 साल के शख्स को कुचला;मौत: 30 फीट तक घसीटा; सड़क पर क्षत-विक्षत हुआ शव, आक्रोशित ग्रामीणों ने किया सड़क जाम – Banka News




बांका में बुधवार शाम तेज रफ्तार हाईवा ने 60 साल के शख्स को कुचल दिया। टक्कर इतनी भीषण थी कि वाहन उन्हें लगभग 30 फीट तक घसीटता ले गया, जिससे उनकी मौत हो गई। घटना धोरैया थाना क्षेत्र के धोरैया-पंजवारा स्टेट हाईवे पर बेलडीहा के पास हुई। मृतक की पहचान मयंक कुमार सिंह उर्फ धर्मप्रकाश सिंह (60) के रूप में हो रही है। हादसे के बाद हाईवा चालक वाहन लेकर फरार हो गया। घटना से आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़क जाम कर दिया और फरार चालक की गिरफ्तारी की मांग की। बुधवार देर रात तक जाम की समस्या बनी रही। सड़क पर बुरी तरह क्षत-विक्षत हुआ शव दरअसल, मयंक कुमार सिंह बुधवार देर शाम अपने घर से पास के शिव मंदिर में आरती में शामिल होने जा रहे थे। पंजवारा की ओर से आ रहे एक तेज रफ्तार हाईवा ने उन्हें अपनी चपेट में ले लिया। टक्कर इतनी भीषण थी कि वाहन उन्हें लगभग 30 फीट तक घसीटता ले गया, जिससे मयंक सिंह की मौके पर ही मौत हो गई। उनका शव बुरी तरह क्षत-विक्षत हो गया था। हादसे की सूचना मिलते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण घटनास्थल पर जमा हो गए और सड़क जाम कर दिया। सूचना पाकर बीडीओ अरविंद कुमार और धोरैया थानाध्यक्ष अमित कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे।अधिकारियों ने ग्रामीणों को फरार हाईवा चालक को जल्द पकड़ने और सरकारी सहायता दिलाने का आश्वासन दिया।हालांकि,ग्रामीण तत्काल कार्रवाई की मांग पर अड़े रहे। स्टेट हाईवे पर लगा जाम जाम के कारण स्टेट हाईवे पर दोनों ओर वाहनों की लंबी कतारें लग गईं।देर रात तक पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी ग्रामीणों को समझाने का प्रयास करते रहे।काफी मशक्कत के बाद,फरार वाहन चालक को जल्द पकड़कर सख्त कार्रवाई करने के आश्वासन पर ग्रामीण शांत हुए और सड़क जाम समाप्त किया गया। मृतक मयंक सिंह की पत्नी उर्मिला देवी और परिवार के अन्य सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। उनके दो बेटे राहुल और ऋतिक तथा एक पुत्री ब्यूटी हैं। बड़ा बेटा राहुल आंख से दिव्यांग है,जबकि छोटा बेटा ऋतिक जमशेदपुर की एक निजी कंपनी में काम करता है। पिता की मौत की सूचना मिलते ही वह घर के लिए रवाना हो गया। धोरैया थानाध्यक्ष अमित कुमार ने बताया कि शव को कब्जे में लेकर पुलिस ने आगे की कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। फरार हाईवा और उसके चालक की तलाश की जा रही है।



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बालपुर के पास मारुति वैन से टकराई बाइक: दो गंभीर घायल, जबलपुर रेफर; घंसौर पुलिस ने शुरू की जांच – Seoni News




सिवनी जिले के घंसौर थाना क्षेत्र में बुधवार देर रात एक सड़क हादसे में बाइक सवार युवक और मारुति वैन में सवार एक व्यक्ति गंभीर रूप से घायल हो गए। यह दुर्घटना ग्राम बालपुर के पास हुई, जहाँ मोटरसाइकिल और मारुति वैन के बीच जोरदार टक्कर हो गई। हादसे में मोटरसाइकिल सवार आनंद उईक (40), पिता श्यामलाल उईक, और मारुति वैन में सवार प्रतीक अवधिया (38), निवासी घंसौर, गंभीर रूप से घायल हो गए। टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों वाहनों को काफी नुकसान पहुंचा। दुर्घटना की सूचना मिलते ही 108 एंबुलेंस मौके पर पहुंची। दोनों घायलों को तत्काल सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र घंसौर ले जाया गया। वहाँ प्राथमिक उपचार के बाद, उनकी गंभीर हालत को देखते हुए, उन्हें बेहतर इलाज के लिए मेडिकल कॉलेज जबलपुर रेफर कर दिया गया। घंसौर थाना पुलिस भी मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया। पुलिस ने दुर्घटनाग्रस्त वाहनों की जांच की और प्रत्यक्षदर्शियों से जानकारी जुटाई। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है, हालाँकि अभी तक दुर्घटना के कारणों का स्पष्ट पता नहीं चल पाया है। घंसौर पुलिस ने इस संबंध में आवश्यक कार्रवाई शुरू कर दी है और जांच पूरी होने के बाद ही दुर्घटना के वास्तविक कारणों का खुलासा हो पाएगा।



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लॉरेंस के भाई बोले- सलमान ने माफी को इश्यू बनाया: हाई सिक्योरिटी जेल से नेटवर्क कैसे चल सकता है, FBI का दावा हिंदुस्तान के खिलाफ साजिश – Abohar News


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काले हिरण के शिकार केस में फंसे बॉलीवुड एक्टर के लिए ये कहना है लॉरेंस के चचेरे भाई रमेश बिश्नोई का। लॉरेंस को गुजरात की साबरमती जेल में कैद हुए 28 अगस्त को 3 साल हो जाएंगे। अमेरिकी जांच एजेंसी FBI ने लॉरेंस, उसके गैंग और कई दूसरे गैंगस्टरों को ड्रग कार्टल, एक्सटॉर्शन और आर्म्स स्मगलिंग में शामिल बताते हुए ऑपरेशन हार्डबॉल शुरू किया है। FBI इन्वेस्टिगेशन के लिए लॉरेंस को अमेरिका ले जाने की बात कह चुकी है।

इसको लेकर लॉरेंस के पारिवारिक सदस्य ने दैनिक भास्कर से एक्सक्लूसिव बातचीत की। रमेश बिश्नोई ने कहा कि लॉरेंस हाई सिक्योरिटी जेल में बंद है तो वहां से नेटवर्क कैसे चला रहा, अमेरिकी जांच एजेंसी का दावा हिंदुस्तान के खिलाफ साजिश है।

रमेश बिश्नोई ने हमारे हर सवाल का विस्तार से जवाब दिया, पढ़ें एक्सक्लूसिव बातचीत…

सवाल: काला हिरण फिल्म पर इतनी आपत्ति क्यों? रमेश बिश्नोई: ये फिल्म बनाने वाला अमित जानी हमारे यानि बिश्नोई समाज से नहीं है। जब वो मूवी बना रहा था तब मैंने रोका था। परिवार ने भी ऑब्जेक्शन किया था कि लॉरेंस के नाम से कुछ नहीं बनाना। अभी तो लॉरेंस के केस कोर्ट में चल रहे, इससे उन पर बुरा असर पड़ता है।

बिश्नोई समाज ने भी ऑब्जेक्शन किया। तब अमित जानी ने कोर्ट में कहा कि हम लॉरेंस का नाम नहीं रखेंगे सिर्फ सलमान के केस पर बात करेंगे, लेकिन उसने फिर भी कुछ डाल दिया। मैंने उससे पूछा भी कि किससे पूछकर लॉरेंस को डाल रहे। हम इसे गलत मानते हैं। हमने तो साफ कहा कि फिल्म नहीं चलनी चाहिए।

सवाल: काले हिरण केस में कभी सलमान खान ने लॉरेंस, आपसे या परिवार से बात करने की कोशिश की? रमेश बिश्नोई: नहीं, यह हमारे परिवार का इश्यू नहीं था। यह हमारे समाज का इश्यू है। जब जोधपुर में केस हुआ, तब सलमान के भाई-बहन ने कोशिश की थी कि आप इसे निपटा लो। अगर कोई जुर्माना लगाना हो तो लगा दो। मगर हमने साफ कह दिया कि ऐसे नहीं होता।

हमारी धार्मिक भावनाओं से खिलवाड़ हुआ है, हम तो कोर्ट जाएंगे। फिर कोर्ट चाहे बरी कर दे। लॉरेंस भी बिश्नोई समाज से है। हमारा धार्मिक परिवार है। लॉरेंस के पड़दादा जी बहुत बड़े संत थे। उन्होंने समाज के लिए ग्रंथ लिखे। लॉरेंस भी धर्म से जुड़ा है। उसने हमेशा यही कहा कि सलमान बिश्नोई समाज के मुकाम धाम में आकर माफी मांग ले। बिश्नोई समाज तो घर आए दुश्मन को भी माफ कर देता है।

मगर पता नहीं, सलमान के दिमाग में किसने क्या भर दिया? माफी मांगना इतनी बड़ी बात नहीं। अगर कोई गलती हो जाती है तो माफी मांगने से कोई छोटा नहीं होता, लेकिन सलमान ने इसे इश्यू बना रखा है। उसके पिता सलीम खान कहते हैं कि जब सलमान ने शिकार किया ही नहीं, तो वह माफी क्यों मांगे। मैं पूछता हूं कि अगर ऐसा है तो उसी का नाम क्यों चल रहा? बाकी एक्टर-एक्ट्रेस ने गलती मान ली, उनका मुद्दा नहीं बना। जब से FIR हुई, उसके बाद हमारी सलमान से कोई बात नहीं हुई।

यह फोटो साल 1998 की है, जब काले हिरण के शिकार मामले में सलमान खान को पुलिस थाने में बैठा लिया गया था।- फाइल फोटो

यह फोटो साल 1998 की है, जब काले हिरण के शिकार मामले में सलमान खान को पुलिस थाने में बैठा लिया गया था।- फाइल फोटो

सवाल: अगर सलमान खान माफी मांगे तो क्या बिश्नोई समाज और लॉरेंस इससे संतुष्ट होंगे? रमेश बिश्नोई: हां, समाज ने खुले दिल से ये बात की। मैंने भी कहा और लॉरेंस ने भी। लॉरेंस ने कभी ये नहीं कहा कि मुझसे माफी मांगो। वह तो यही कहता है कि राजस्थान के बीकानेर में हमारा मुकाम धाम है, गुरु महाराज का मंदिर है। वहां आकर माफी मांग लो।

केस से क्या होता है कि कोई आगे से गलती न करे। मर्डर भी होता है तो सजा होती है ताकि आगे और गलती न करे। लॉरेंस ने माफी मांगने की बात कही तो इसका विरोध किसने किया? सलमान के दिमाग में क्या बैठा है? यह तो खुद सलमान या उसका परिवार ही जानता है। ये मामला कोर्ट में है और कानून अपना काम करेगा।

सवाल: हर बड़े मर्डर में नाम आ रहा, मगर आप उसे गैंगस्टर नहीं मानते। आपकी नजर में लॉरेंस क्या है? रमेश बिश्नोई: बहुत साल पहले एक केस में लॉरेंस को अबोहर लेकर आए थे। तब मैं उससे मिला। मैंने उससे कहा कि ये रास्ता छोड़ दो। तब उसने कहा कि मैं इसे छोड़ दूं, लेकिन मेरी सुनता कौन है? मेरा बयान कौन सुनता है? वह मीडिया से बात नहीं कर सकता, वर्ना सब कुछ बता देता।

अगर वह वाकई मुजरिम है तो कोर्ट में साबित क्यों नहीं होता? गवाह ही नहीं होते। कई बार मीडिया कह देती है कि लॉरेंस के पिता पुलिस में थे। मैं साफ कर दूं कि हमारे परिवार का कोई आदमी कभी पुलिस में नहीं रहा। लॉरेंस के पिता तो जमींदारी करते हैं।

सवाल: क्या लॉरेंस अहमदाबाद की जेल में सेफ है? रमेश बिश्नोई: किस आदमी को कहां रखना है, ये सरकार की जिम्मेदारी है। सरकार ने सेफ समझा होगा, तभी लॉरेंस को वहां रखा है। हमें तो यही लगता है।

सवाल: लॉरेंस साबरमती जेल में बैठकर नेटवर्क चला रहा, अमेरिकी एजेंसी ने भी ये दावा किया? रमेश बिश्नोई: जब हमसे बात नहीं हो रही तो वह जेल से ये सब कुछ कैसे कर देता है। हरदीप निज्जर का मर्डर कनाडा में हुआ और FIR अमेरिका में हो रही। वह नशे की खेप पकड़ने का दावा कर रहे हैं। हिंदुस्तान में तो क्राइम करने वालों को राजनेता बचा लेते हैं, लेकिन अमेरिका में तो ऐसी बात नहीं।

अचानक ऐसी बात क्यों हो रही? ये हिंदुस्तान के खिलाफ बहुत बड़ी साजिश है। पाकिस्तान भी आतंकी मरने पर हिंदुस्तान का नाम ले लेता। अमेरिका ने हिंदुस्तान पर दबाव बनाने के लिए ये सब कहा। लॉरेंस हाई सिक्योरिटी जेल में है। जब परिवार तक उससे नहीं मिल सकता, तो फिर वह अंदर से नेटवर्क कैसे चला रहा?

अगर ऐसा है तो जेल प्रशासन को सस्पेंड किया जाए। लॉरेंस जहां बंद है, वहां जैमर लगे हैं। उसे बाकी लोगों से अलग रखा जाता है। टाइट सिक्योरिटी लगी है। ऐसे में ये कैसे संभव है? कहने की आजादी है, लेकिन इसके सबूत कहां है? जब वह किसी से मिल ही नहीं पाता तो किसको को कैसे कह देगा कि जाकर इसका–उसका मर्डर कर दे। जब कहीं कुछ नहीं होता तो पुलिस लॉरेंस का नाम लेकर पल्ला झाड़ लेती है।

लॉरेंस गुजरात की इसी साबरमती जेल में बंद है।- फाइल फोटो

लॉरेंस गुजरात की इसी साबरमती जेल में बंद है।- फाइल फोटो

सवाल: अमेरिकी जांच एजेंसी ने कहा कि लॉरेंस को अमेरिका लेकर जाएंगे? रमेश बिश्नोई: ये 2 देशों का मसला है। इसमें हमारे या परिवार के कहने से कुछ नहीं होगा। सरकार बैठी है, उनको देखना है। ये अगर इतना आसान होता तो पहले ही भेज देते। इसमें कोई सच्चाई नहीं होगी, तभी तो सरकार चुप है। विपक्ष वालों ने लोकसभा में कहा कि लॉरेंस को दामाद की तरह रखा है। इस पर गृह मंत्री ने लोकसभा में कहा कि पक्का सबूत लाइए, हम FIR करेंगे।

सवाल: लॉरेंस के परिवार में कौन-कौन हैं? अभी परिवार क्या करता है? रमेश बिश्नोई: लॉरेंस के माता–पिता हैं। उसके पिता 110 किला जमीन के मालिक हैं। इलाके में उनका पहले से रसूख है। लॉरेंस उनका बड़ा बेटा है। छोटे बेटे का नाम अनमोल है। अनमोल भी अभी तिहाड़ जेल में है। मैं एक बात क्लियर करना चाहता हूं कि लॉरेंस की वजह से अनमोल को सजा मिली। उसका नाम केसों में डाल दिया गया। अनमोल इस तरह का नहीं था।

लॉरेंस और उसका छोटा भाई अनमोल परिजन के साथ। - फाइल फोटो

लॉरेंस और उसका छोटा भाई अनमोल परिजन के साथ। – फाइल फोटो

सवाल: परिवार से मुलाकात होती है या परिवार ने लॉरेंस से दूरी बना ली है? रमेश बिश्नोई: अपनों से दूरी नहीं होती। लेकिन आज लॉरेंस जिस हालात में है, उसमें घरवाले उससे नहीं मिल सकते। न हमें परमिशन मिलती है। वकील जाता है और हमें पता चल जाता है कि लॉरेंस कैसा है? एक बात मैं क्लियर कर दूं कि अकसर कहा जाता है कि लॉरेंस ने इसे धमकी दे दी या उसे धमका दिया। जब उसकी परिवार से ही बात नहीं होती, तो धमकी कहां से आएगी? ये बात मुझे समझ नहीं आती।

सवाल: लॉरेंस की छवि से परिवार कितना परेशान है? रमेश बिश्नोई: जिस परिवार को लेकर ऐसी बात हो, तो मानसिक परेशानी होती है और है भी। जिस तरह लॉरेंस और अनमोल पर केस डाले जा रहे हैं। लॉरेंस तो चाय तक नहीं पीता। एक महीने में 20 दिन उसके व्रत होते हैं। गांव में जब तक था तो यही कहता था कि गांव या समाज का कोई व्यक्ति नशा न करे। एक बार सुनने में आया कि हमारा कोई रिश्तेदार जेल में था।

वहां लॉरेंस ने उससे कहा कि तू नशा छोड़ दे। उसने जेल सुपरिटेंडेंट से भी कह दिया कि या तो इसे जेल से दूसरी जगह भेज दो या फिर मुझे शिफ्ट कर दो। जो आदमी नशे से इतनी नफरत करता हो, भगत सिंह को आइडल मानता हो, वह देश से कभी गद्दारी नहीं कर सकता। क्या वह ऐसे काम करेगा? पता नहीं कैसे FIR में नाम डाले जा रहे हैं। यह तो नाम डालने वाले को पता या फिर भगवान को पता।

सवाल: लॉरेंस नाम क्यों रखा गया? रमेश बिश्नोई: लॉरेंस नाम उसके माता-पिता ने रखा था। इसके पीछे कोई खास लॉजिक या वजह जैसा कुछ नहीं है। बस परिवार को नाम जच गया तो रख लिया। कुछ मीडिया वाले कहते हैं कि लॉरेंस का नाम पहले कुछ और था और बाद में इसे बदला गया, ये बिल्कुल गलत है।

सवाल: लॉरेंस बचपन में कैसा था? पढ़ाई कहां हुई? रमेश बिश्नोई: यहां अबोहर के कॉन्वेंट स्कूल में शुरुआती पढ़ाई की। यहां के बाद चंडीगढ़ चला गया। लॉरेंस को खेलना, अच्छे कपड़े पहनना और घुड़सवारी का शौक शुरू से था।

सवाल: लॉरेंस की इमेज कॉलेज स्टूडेंट से गैंगस्टर वाली कैसे बन गई? रमेश बिश्नोई: लॉरेंस पहले दिन से ऐसा था कि अगर कोई किसी को घेरकर पीट रहा हो तो वह अन्याय बर्दाश्त नहीं करता था। वह कहता था कि चाहे मैं जानता ना होऊं, लेकिन अगर 4 आदमी मिलकर एक आदमी को पीट रहे हैं तो पूछता था कि क्यों पीट रहे हो? लॉरेंस में गैंगस्टर वाली कोई बात नहीं रही।

जब वह पढ़ने चंडीगढ़ गया तो वहां उसके ग्रुप ने मिलकर द स्टूडेंट्स ऑर्गेनाइजेशन ऑफ पंजाब यूनिवर्सिटी (SOPU) बनाई। चंडीगढ़ में रहते हुए वह स्टूडेंट पॉलिटिक्स में आ गया। उसके बाद वह बड़े नेताओं की नजर में चढ़ गया। सभी पार्टियों ने उसे यूज किया। लॉरेंस ने एक चुनाव लड़ा, लेकिन हार गया। उस समय जो जीते थे, उन्होंने लॉरेंस को एक-दो केसों में फंसवा दिया। इसके चलते उसके अंदर इस बात का गुस्सा भर गया कि मैंने तो ऐसा कुछ किया ही नहीं। वहीं से लॉरेंस रास्ता भटकना शुरू हो गया।

लॉरेंस की ये फोटो चंडीगढ़ के कॉलेज में पढ़ाई करते समय की है, जिसमें वह स्टूडेंट पॉलिटिक्स के दौरान एक्टिव था।- फाइल फोटो

लॉरेंस की ये फोटो चंडीगढ़ के कॉलेज में पढ़ाई करते समय की है, जिसमें वह स्टूडेंट पॉलिटिक्स के दौरान एक्टिव था।- फाइल फोटो

सवाल: अगर आप कहते हैं कि लॉरेंस को राजनीतिक रूप से फंसाया गया, तो किन नेताओं/पार्टियों ने उसे इस्तेमाल किया? क्या आप किसी का नाम लेना चाहेंगे? रमेश बिश्नोई: पंजाब में 2-3 बड़ी पार्टियां हैं। लॉरेंस लैंडलॉर्ड बैकग्राउंड वाला बच्चा था। हम लैंडलॉर्ड फैमिली से हैं। ऐसे यंग ब्लड को राजनीतिक दल कैच कर लेते हैं। हर पार्टी ने उसे कैच करने की कोशिश की और राजनीति में उलझा दिया। हमारे परिवार से कोई राजनीति में नहीं है। हम सिर्फ सिंपल जमींदार हैं। हम उसी में खुश थे। हर पार्टी ही उसे यूज करती रही और आज हालात ऐसे बन गए।

सवाल: क्या लॉरेंस को राजनीति में आना चाहिए? रमेश बिश्नोई: नहीं, लॉरेंस की कोई ऐसी भावना नहीं है। उसने कभी नहीं कहा कि मैं इलेक्शन लड़ूंगा। महाराष्ट्र की एक पार्टी उसे टिकट देने और इलेक्शन लड़वाने के लिए गई थी, मगर लॉरेंस ने कोरी ना कर दी। वह राजनीति में नहीं आना चाहता।

सवाल: जो यूथ लॉरेंस को हीरो या आइकन की तरह फॉलो करता है। उन्हें क्या कहना चाहेंगे? रमेश बिश्नोई: लॉरेंस कहता है कि नशे से दूर रहो। भगत सिंह उसका आइडल है। अगर किसी आदमी में गुण है तो यूथ को उससे सीख लेनी चाहिए। अगर लॉरेंस किसी राजनीति का शिकार होकर अंदर चला गया तो यह रास्ता सही नहीं है। FIR होने से कोई मुजरिम नहीं हो जाता। वह दोषी तब बनता है जब कोर्ट से सजा होगी।

अभी कोई सजा नहीं हुई। पुलिस केस डाल देती है, लेकिन सजा नहीं होती। यही लॉरेंस के साथ हो रहा है। अब तो ये हो रहा कि जिसका लॉरेंस से कोई कनेक्शन नहीं, वह भी कह देता है कि मैं लॉरेंस का आदमी हूं। कई दफा पुलिस बोल देती है कि लॉरेंस का गुर्गा है। ऐसे नहीं होता, पुलिस ऐसा काम करती है।

सवाल: क्या लॉरेंस की पूरी जिंदगी जेल में कटेगी? रमेश बिश्नोई: आज से नहीं बल्कि पिछली केंद्र सरकारें भी चंबल में डाकू रहे लोगों से कहती रहीं कि जो मुख्यधारा में आना चाहते हैं उनका सहयोग किया जाएगा। कई डाकुओं ने हथियार डाले। आज वह अपना जीवन जी रहे हैं। कुछ तो चुनाव भी लड़े। अगर सरकार टेररिस्ट और डाकुओं को मौका देती है तो सिर्फ लॉरेंस ही नहीं, बाकी लड़कों को भी मुख्यधारा में लाने की कोशिश करनी चाहिए। परिवार और समाज भी उनके साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा होगा। ऐसा हुआ तो यूथ भी नहीं भटकेगा।

(कल पढ़ें… लॉरेंस के बारे में, जिसे दुनिया एक गैंगस्टर के रूप में जानती है, उसके गांव के लोग क्या सोचते हैं? लॉरेंस की वजह से गांव की पहचान कैसे बदल गई? क्या लॉरेंस गांव के युवाओं के लिए हीरो है या विलेन? कल सुबह साढ़े 5 बजे से लॉरेंस के गांव से ग्राउंड रिपोर्ट पढ़ें।)



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MP के पांच जिलों में भारी बारिश के आसार: यूपी में दो दिनों में 13 लोगों की मौत, उत्तराखंड में 78 सड़कें बंद




मध्यप्रदेश के कई जिलों में बुधवार को भी तेज बारिश हुई। मौसम विभाग के मुताबिक, अगले दो दिनों में भोपाल, उज्जैन, सागर, ग्वालियर और चंबल संभाग के जिलों में भारी बारिश के आसार हैं। उत्तरप्रदेश के कई जिलों तेज बारिश जारी है। 2 दिनों में बारिश की वजह से हुए हादसों में 13 लोगों की मौत हो चुकी है। राज्य के 19 जिले बाढ़ की चपेट में हैं। नेपाल में आई बाढ़ से बिहार के भी 8 जिलों में हाईअलर्ट है। साथ ही बक्सर से लेकर पटना, बेगूसराय और भागलपुर तक गंगा उफान पर है। खगड़िया में 100 से ज्यादा घर और स्कूल पानी में डूबे हैं। उत्तराखंड के देहरादून, पिथौरागढ़ और बागेश्वर में बारिश का यलो अलर्ट है। भारी बारिश के चलते 9 जिलों की 78 सड़कें बंद हैं। सैटेलाइट मैप में देखें मानसूनी बादलों की स्थिति देशभर से मौसम की तस्वीरें देशभर के मौसम से जुड़े अपडेट्स जानने के लिए नीचे दिए लाइव ब्लॉग से गुजर जाइए…



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नेपाल में तबाही, पानी बिहार क्यों पहुंचेगा: 36 फाटक खोले, त्रिशूली-भोटेकोशी का पानी किन जिलों तक पहुंचेगा, समझिए पूरा कनेक्शन – Bihar News




बिहार से करीब 300 किलोमीटर दूर नेपाल में तिब्बत से आई अचानक बाढ़ ने तबाही मचा दी है। भोटेकोशी और त्रिशूली नदी के पानी ने रसुवा, टिमुरे और स्याब्रुबेसी इलाके को तहस-नहस कर दिया है। गांव के गांव बह गए, बाजार तबाह हो गए, पुल टूट गए और सड़कें कट गईं। नेपाल में आई तबाही पर बिहार सरकार अलर्ट है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से गृह मंत्री अमित शाह ने बात की है और NDRF की टीम को सीमावर्ती जिलों में तैनात कर दिया है। नेपाल में आई तबाही से बिहार को खतरा क्यों, क्या यहां भी तबाही मचेगी, समझेंगे; बूझे की नाही में…। सवाल-1: नेपाल के रसुवा में बाढ़ और तबाही कैसे आई है? जवाबः 26 अगस्त की सुबह करीब 9 बजे नेपाल के रसुवा और नुवाकोट जिले में भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में अचानक बहुत तेज पानी आया। पानी तिब्बत की तरफ से आया और कुछ ही समय में घर, सड़क, पुल और हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट बहा ले गया। उस समय रसुवा में ऐसी भारी स्थानीय बारिश की सूचना नहीं थी, इसलिए सामान्य बारिश से आई बाढ़ की संभावना कम मानी जा रही है। कैसे हुआ? कितना नुकसान? नेपाल पुलिस के मुताबिक, अब तक 95 लोगों के मौत की खबर है। नेपाल के पर्यटन विभाग के मुताबिक 500 से ज्यादा लोगों का पता नहीं चल रहा है। इनमें 133 भारतीय समेत 300 से ज्यादा विदेशी पर्यटक हैं। सवाल-2: भोटेकोशी और त्रिशूली नदी में आई तबाही से बिहार को खतरा क्यों? जवाबः नेपाल में आई तबाही से बिहार के खतरों को समझने के लिए भोट कोशी और त्रिशूली नदियों के तंत्रों को समझना होगा… त्रिशूली नदी के पानी से 5 जिलों को खतरा रसुवा नेपाल का उत्तरी, हिमालयी जिला है और चीन के तिब्बत से लगा है। टिमुरे/रसुवागढ़ी और स्याब्रुबेसी इसी क्षेत्र में हैं। यहां की नदियां ऊंचे हिमालय से निकलकर बहुत तेज ढाल वाले एरिया में नीचे उतरती हैं। इसी क्षेत्र में त्रिशूली नदी का डिस्चार्ज अचानक बढ़ता है तो पानी तेजी से नीचे आता है। भोटेकोशी से कोसी इलाके में खतरा भोटेकोशी नेपाल के उत्तरी हिस्से में चीन-तिब्बत सीमा से निकलने वाली हिमालयी नदी है। यह सिंधुपालचोक क्षेत्र से होकर बहती है। हालांकि, अबकी बार 2008 वाले हालात नहीं सवाल-3: कितना नुकसान हो सकता है, बिहार सरकार क्या कर रही है? जवाबः अभी नुकसान का आकलन करना जल्दीबाजी होगी। गंडक और कोसी बेसिन की नदियों में पानी बढ़ना चालू है। लेकिन गति सामान्य है। CM सम्राट चौधरी ने मुख्य सचिव, आपदा प्रबंधन और जल संसाधन विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक कर स्थिति की समीक्षा की। डिप्टी CM और जल संसाधन मंत्री विजय चौधरी ने कहा कि लोग सतर्क रहें, घबराएं नहीं। अगले 24 घंटे अलर्ट रहने की जरूरत है। समस्या पहले से बड़ी है, लेकिन फिलहाल स्थिति नियंत्रण में है। गंडक नदी पर दबाव बढ़ने की आशंका है। उन्होंने बताया कि सरकार की ओर से बाढ़ राहत के लिए अतिरिक्त टीमों की तैनाती की गई है। राहत एवं बचाव के लिए जरूरी सामग्री भी उपलब्ध कराई गई है। सरकार अलर्ट, बोली-डरे नहीं सवाल-4ः नेपाल की नदियों से बिहार में क्यों आती है बाढ़? जवाबः नेपाल बिहार से करीब 400 फीट ऊंचाई (समुंद्र तल से) पर स्थित है। नेपाल में भारी बारिश होती है तो पानी ऊपर से नीचे की तरफ नेचुरल ग्रेविटी के कारण आता है। नेपाल में कोई बड़ा डैम नहीं है। जिससे पानी को कंट्रोल किया जा सके। नेपाल हिमालय पर बसा है। इसका करीब 75% हिस्सा पहाड़ी क्षेत्र है। कोसी, गंडक, बूढ़ी गंडक, बागमती, कमला बलान, महानंदा और अधवारा नदियों का समूह यहां से निकलता है। नेपाल में बारिश होने पर पानी इन्हीं नदियों के रास्ते गंगा नदी तक पहुंचता है। 129 साल से चल रही हाई डैम बनाने की बात उत्तर बिहार को बाढ़ से मुक्ति दिलाने के लिए 1897 से ही भारत और नेपाल की सरकारों के बीच सप्तकोशी नदी पर बांध की बात चल रही है। इसे लेकर आजादी से पहले और बाद में दोनों देशों की सरकारों के बीच कई बार वार्ताएं हुईं। आखिरकार 1991 में दोनों देशों के बीच इसे लेकर एक समझौता भी हुआ। 2004 में इस प्रस्तावित बांध की संभावनाओं को तलाशने के लिए नेपाल के धरान में एक संयुक्त परियोजना कार्यालय भी बना है। मगर 129 साल से अधिक समय बीतने के बावजूद आज तक नेपाल के बराह क्षेत्र से 1.6 किमी उत्तर की दिशा में प्रस्तावित इस बांध के निर्माण को लेकर सहमति नहीं बन पाई है। 21 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण और विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ बैठक की। इसके बाद वित्त मंत्री ने कोसी-मेची परियोजना के पहले चरण की राशि जारी करने और दूसरे चरण की तकनीकी मंजूरी देने का निर्देश जल शक्ति मंत्रालय को दिया है। CM सम्राट चौधरी ने कहा कि बाढ़ के स्थायी समाधान के लिए कोसी नदी पर उच्च बांध की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट जल्द बनेगी। JDU नेता संजय झा ने बताया, ‘नेपाल में हाई डैम का निर्माण एकमात्र समाधान है, जिसकी विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) 2028 तक बन जाएगी।’



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मकान की नींव के जलभराव में डूबकर मासूम की मौत: वाराणसी में खेलने निकला था बच्चा, 2 घंटे तलाश के बाद CCTV से मिला सुराग – Varanasi News




वाराणसी में मकान की नींव के लिए खोदी गई नींव में भरे बारिश के पानी में डूबकर 10 वर्षीय छात्र की मौत हो गई। शिवपुर थाना क्षेत्र के बेलवरियां गांव में बच्चा घर से बारिश के बाद खेलने के लिए निकला था और फिर अचानक पैर फिसलने से गड्‌ढे में जा गिरा। जेसीबी से खोदे गए गड्ढे में गहराई अधिक होने के कारण छात्र आशु पटेल डूब गया। कई प्रयास के बावजूद वह निकल नहीं पाया, वहीं आसपास किसी के नहीं होने से उसे बचाया नहीं जा सका। घर से लापता हुए बेटे की जब परिजनों ने तलाश की तो कोई खबर नहीं मिली । इसके बाद पास में लगे सीसी फुटेज खंगाले गए, जिसमें मासूम घर से बाहर निकलकर कॉलोनी में नवनिर्मित मकान की ओर जाता दिखाई दिया। इसके बाद सभी उसी ओर गए। आशंका जताई कि मकान की नींव के लिए खोदे गए गड्‌ढे को खंगाला जाए। इसके बाद सभी ने तलाश शुरू की तो एक ओर मासूम आशु पटेल का शव बरामद हुआ। जेसीबी से खोदाई होने के कारण नींव काफी गहरी थी, जिससे तलाश में भी लगभग एक घंटे लग गया। शव को डॉक्टर के पास ले गए जहां जांच के बाद उसे मृत घोषित कर दिया गया। परिजनों ने पुलिस का मामले की जानकारी दी और किसी के द्वारा धक्का दिए जाने की आशंका जताते हुए जांच की बात कही। शिवपुर थाना क्षेत्र के बेलवरियां गांव में निर्माणाधीन मकान के आसपास के सभी सीसीटीवी कैमरे खंगाले जाएंगे। सुबह लापता हुआ फिर 2 बचे बरामदगी स्थानीय लोगों ने बताया कि बेलवरियां गांव निवासी 10 साल के छात्र आशु पटेल पढ़ने में तेज था। सुबह 11 बजे से लापता हुआ था तब बच्चे की परिजनों ने खोजबीन शुरू की। ​दोपहर 2 बजे उसका शव निर्माणाधीन मकान की नींच से निकला। डायल 112 की मदद से परिजनों ने उसे दीनदयाल अस्पताल ले जाने पर डॉक्टरों ने आशु को मृत घोषित कर दिया। परिवार में ​एक साल में दूसरी मौत से कोहराम मच गया। मृतक कक्षा 2 का छात्र था। महज एक वर्ष पूर्व ही परिवार की 5 वर्षीय बेटी की बीमारी से मौत हुई थी।



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राखी के अगले दिन जनविश्वास अभियान होगा: बालाघाट में रहेंगे सीएम मोहन, आवासीय विद्यालय, आश्रम, छात्रावास का निरीक्षण और संवाद करेंगे अफसर – Bhopal News




सामान्य प्रशासन विभाग ने मंगलवार को हुई कैबिनेट बैठक में मुख्यमंत्री डॉ मोहन यादव के निर्देश के उपरांत मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान के संबंध में सभी अपर मुख्य सचिव, प्रमुख सचिव, सचिव, विभागाध्यक्ष, संभागायुक्त, कलेक्टर और जिला पंचायतों के मुख्य कार्यपालन अधिकारियों को निर्देश जारी किए हैं। इसमें कहा गया है कि अभियान के दौरान जनसमस्याओं के समाधान, शासकीय संस्थानों के निरीक्षण और आमजन से संवाद को प्राथमिकता देना है। रक्षाबंधन के अगले दिन 29 अगस्त शनिवार को बालाघाट जिले में मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान मुख्यमंत्री की मौजूदगी में आयोजित किया जाएगा। अभियान के दौरान जिला स्तरीय समाधान ऑनलाइन में चिन्हित शिकायतों को मुख्यमंत्री के समक्ष प्रस्तुत कर उनका समाधान किया जाएगा। बैठक के साथ मीडिया और उद्योग संवाद भी होगा। इसका उद्देश्य स्थानीय समस्याओं, विकास कार्यों और औद्योगिक गतिविधियों से जुड़े मुद्दों पर संबंधित पक्षों से सीधे संवाद करना है। शासन ने निर्देश दिए हैं कि अन्य सभी जिलों में भी 29 अगस्त 2026 को मुख्यमंत्री जन विश्वास अभियान आयोजित किया जाए। छात्रावास, आश्रम और आवासीय विद्यालयों का निरीक्षण अनिवार्य जन विश्वास अभियान के दौरान विभिन्न शासकीय आवासीय संस्थाओं का भ्रमण और निरीक्षण अनिवार्य किया गया है। इनमें आवासीय विद्यालय, आश्रम, छात्रावास सहित अन्य शासकीय आवासीय संस्थाएं शामिल हैं। इन संस्थाओं में रहने वाले छात्र-छात्राओं और युवाओं से संवाद एवं चर्चा करने के निर्देश भी अधिकारियों को दिए गए हैं, ताकि उनकी समस्याओं और आवश्यकताओं को सीधे समझा जा सके।



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जलमहल में युवक के छलांग लगाने से मचा हड़कंप: देर रात तक चला रेस्क्यू ऑपरेशन, युवक बोला- हमारे सामने कूदा, 12 बजे तक नहीं मिला, सुबह फिर ढूंढेंगे – Jaipur News




जलमहल में बुधवार देर रात एक युवक के छलांग लगाने की सूचना से हड़कंप मच गया। रात करीब सवा दस बजे युवक के जलमहल में कूदने की सूचना प्रत्यक्षदर्शियों ने पुलिस कंट्रोल रूम को दी। सूचना मिलते ही ब्रह्मपुरी थाना पुलिस, एसडीआरएफ और सिविल डिफेंस की टीमें मौके पर पहुंचीं और झील में युवक की तलाश शुरू की। करीब दो घंटे तक चले सर्च ऑपरेशन के बावजूद देर रात तक युवक का कोई सुराग नहीं मिल सका। पाल पर मौजूद युवकों ने दी पुलिस को सूचना ब्रह्मपुरी थानाधिकारी बृज मोहन कविया ने बताया कि जलमहल के पास मौजूद दो युवकों ने पुलिस को सूचना दी थी कि एक युवक जलमहल में कूद गया है। इसके बाद पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने मौके पर पहुंचकर पानी में युवक की तलाश शुरू की। जलमहल की पाल पर बड़ी संख्या में लोगों की भीड़ जमा हो गई। प्रत्यक्षदर्शियों ने बताया- पानी में दिखे युवक के हाथ प्रत्यक्षदर्शी राहुल ने बताया कि रात करीब सवा दस बजे एक युवक पजामा-टीशर्ट पहने जलमहल की पाल पर आया। कुछ देर बाद उसने अचानक झील में छलांग लगा दी। राहुल के अनुसार, वह चार दोस्तों के साथ चौपाटी पर मौजूद था। सूचना मिलने पर जब वे पाल के पास पहुंचे तो पानी में युवक के हाथ दिखाई दिए, लेकिन कुछ ही पल बाद वह पानी में डूब गया। मौके पर मौजूद देवेंद्र शर्मा ने भी बताया कि पजामा-टीशर्ट पहने युवक जलमहल की पाल पर आया और अचानक पानी में छलांग लगा दी। युवक के कूदते ही वहां मौजूद लोग उसकी ओर दौड़े, लेकिन तब तक वह पानी में डूब चुका था। शुरुआत में पानी के बीच उसके हाथ नजर आए, जो कुछ ही देर बाद दिखाई देना बंद हो गए। नाइट वॉक कर रहे लोगों ने देखा घटनाक्रम बताया जा रहा है कि उस समय चौपाटी पर नाइट वॉक कर रहे लोगों ने युवक को झील में डूबने से बचने के लिए हाथ-पैर चलाते हुए देखा। इसके बाद प्रत्यक्षदर्शियों ने तुरंत पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची पुलिस और रेस्क्यू टीमों ने नाव व अन्य संसाधनों की मदद से झील में युवक की तलाश शुरू की। देर रात तक नहीं मिला युवक का सुराग करीब दो घंटे तक पुलिस, एसडीआरएफ और सिविल डिफेंस की टीमों ने जलमहल की झील में सर्च ऑपरेशन चलाया। हालांकि देर रात तक युवक का पता नहीं चल सका।



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