Tuesday, August 11, 2026
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404 – Page not found – Dainik Bhaskar




श्रावण महीने में पाली के प्राचीन लाखोटिया महादेव मंदिर और उससे जुड़ी कहानी चर्चा में है। मान्यता है कि करीब 976 साल पहले पाली में पेयजल संकट के दौरान पानी दरवाजा जूना मठ के संत चंदनपुरी ने लाखोटिया तालाब खुदवाया और उसकी टेकरी पर शिवलिंग स्थापित किया था। आज यही शिवलिंग लाखोटिया महादेव के नाम से प्रसिद्ध है। मंदिर और तालाब से जुड़ी कई दंतकथाएं आज भी लोगों के बीच प्रचलित हैं। पेयजल संकट के समय खुदवाया तालाब दंतकथाओं के अनुसार करीब 976 साल पहले पल्लीपुर यानी वर्तमान पाली में पेयजल संकट था। उस समय पानी दरवाजा स्थित जूना मठ के संत चंदनपुरी ने तालाब खुदवाने का निर्णय लिया। तालाब की खुदाई के बाद उसकी टेकरी पर शिवलिंग की स्थापना की गई। मान्यता है कि तालाब की खुदाई में एक लाख ऊंटों का इस्तेमाल किया गया था। इसी वजह से इसका नाम लाखोटिया तालाब और टेकरी पर स्थापित शिवलिंग का नाम लाखोटिया महादेव पड़ा। तालाब के किनारे स्थित जूना मठ में बाद में संत चंदनपुरी ने समाधि ली। समय के साथ लाखोटिया तालाब और मंदिर का विस्तार होता गया। खुदाई में सोने के सिक्के मिलने की मान्यता लाखोटिया तालाब से जुड़ी एक अन्य दंतकथा में कहा जाता है कि खुदाई के दौरान सोने के सिक्के निकलते थे। संत इन सिक्कों को खुदाई करने वाले मजदूरों को मेहनताना के रूप में दे देते थे। यह भी मान्यता है कि संत चंदनपुरी कमल के आकार के एक पत्थर पर बैठकर जूना मठ से लाखोटिया तालाब होते हुए टेकरी पर स्थित महादेव मंदिर तक जाते थे और शिवलिंग पर जल चढ़ाते थे। जूना मठ में आज भी कमल के आकार का यह पत्थर रखा हुआ है। इसके अलावा यहां संत से जुड़ी चिलम, छड़ी, बड़े शंख, धूणी, भाला और लकड़ी का डमरू भी मौजूद हैं। बहन का चेहरा देखने के बाद जीवित समाधि लेने की कथा संत चंदनपुरी से जुड़ी एक अन्य कथा उनकी बहन अन्नपूर्णा से जुड़ी है। मान्यता है कि संत महिलाओं का चेहरा नहीं देखते थे और जूना मठ में महिलाओं का प्रवेश भी नहीं था। एक बार उनकी बहन अन्नपूर्णा उनसे मिलने मठ पहुंचीं। संत ने उनका चेहरा देख लिया। इसके बाद उन्होंने जीवित समाधि लेने का निर्णय लिया। जब अन्नपूर्णा को इसकी जानकारी हुई तो वह भी जूना मठ पहुंचीं। दंतकथा के अनुसार दोनों भाई-बहन ने यहीं जीवित समाधि ली। जूना मठ में आज भी दोनों की समाधि मौजूद है। जूना मठ में आज भी मौजूद है प्राचीन गुफा जूना मठ के संत भोलापुरी के अनुसार मठ में आज भी एक प्राचीन गुफा मौजूद है। मान्यता है कि पाली के आसपास स्थित कुछ अन्य धार्मिक स्थलों में भी ऐसी गुफाएं हैं और प्राचीन समय में संत इन रास्तों से एक स्थान से दूसरे स्थान तक जाते थे। बताया जाता है कि करणी माता मंदिर, पूनागर भाकरी माता मंदिर और गाजण माता मंदिर में भी ऐसी गुफाओं के होने की मान्यता है। वर्तमान में इन गुफाओं को बंद कर दिया गया है। जूना मठ की गुफा में भी लोग पहले कई फीट अंदर तक जा चुके हैं। समय के साथ देखरेख नहीं होने के कारण अब इसका रास्ता बंद है। संत की निशानियां आज भी सुरक्षित पानी दरवाजा स्थित जूना मठ में संत चंदनपुरी से जुड़ी कई वस्तुएं आज भी रखी हैं। इनमें उनकी चिलम, छड़ी, शंख, धूणी, भाला और डमरू शामिल हैं। मठ परिसर में संत चंदनपुरी और उनकी बहन अन्नपूर्णा की समाधियां भी मौजूद हैं। वहीं कमल के आकार का वह पत्थर भी रखा है, जिसके बारे में मान्यता है कि संत इसी पर बैठकर लाखोटिया तालाब से होते हुए टेकरी पर स्थित शिवलिंग के जलाभिषेक के लिए जाते थे। लाखोटिया महादेव आज भी आस्था का केंद्र लाखोटिया तालाब और महादेव मंदिर पाली शहर की पहचान से जुड़े प्रमुख धार्मिक स्थलों में शामिल हैं। संत चंदनपुरी से जुड़ी इन कथाओं और जूना मठ में मौजूद पुरानी निशानियां इस पूरे क्षेत्र के धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व को दर्शाती हैं।



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शामली के गुलजारी वाले शिव मंदिर में उमड़ी भक्तों की: सावन में 108 साल पुराने मंदिर में जलाभिषेक को पहुंचे श्रद्धालु – Shamli News




शामली में सावन के पवित्र महीने में भगवान शिव की भक्ति का माहौल है। शहर के 108 साल पुराने ऐतिहासिक गुलजारी वाले शिव मंदिर में मंगलवार सुबह से ही श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। दूर-दराज से आए भक्तों ने भगवान शिव का जलाभिषेक और दुग्धाभिषेक कर परिवार की सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर परिसर ‘हर-हर महादेव’ और ‘बम-बम भोले’ के जयकारों से गूंज उठा। गुलजारी वाले शिव मंदिर का इतिहास लगभग 108 साल पुराना बताया जाता है। सावन के महीने में इस प्राचीन मंदिर में भगवान शिव के दर्शन और जलाभिषेक के लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचते हैं। मंगलवार को भी मंदिर में सुबह से ही भक्तों की लंबी कतारें देखी गईं। श्रद्धालुओं ने अपने हाथों में गंगाजल, दूध, बेलपत्र, धतूरा और फूल लेकर भगवान भोलेनाथ का विधि-विधान से पूजन किया। मंदिर में लगातार गूंज रहे जयकारों से वातावरण भक्तिमय बना रहा। मान्यता है कि सावन के महीने में भगवान शिव का जलाभिषेक करने से भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं। इसी आस्था और विश्वास के साथ महिलाएं, पुरुष और बच्चे बड़ी संख्या में मंदिर पहुंच रहे हैं। भक्तों की भारी भीड़ को देखते हुए मंदिर परिसर में विशेष व्यवस्थाएं की गईं। श्रद्धालुओं को कतारबद्ध तरीके से दर्शन और जलाभिषेक कराया गया। मंदिर के आसपास सुरक्षा और यातायात व्यवस्था पर भी पुलिस प्रशासन ने नजर रखी। सुबह से लेकर दोपहर तक मंदिर में श्रद्धालुओं के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। भक्तों ने बताया कि गुलजारी वाले शिव मंदिर में भगवान भोलेनाथ का जलाभिषेक करने से उन्हें विशेष आध्यात्मिक अनुभूति होती है।



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पुलिस के सामने इंदौर के हिस्ट्रीशीटर बदमाश ने रील बनाई: सोशल मीडिया पर लिखा- जेल से ही पूरा सिस्टम चलाएंगे; आरोपी 2 दिन पुलिस रिमांड पर – Indore News




इंदौर के द्वारकापुरी इलाके के हिस्ट्रीशीटर और ड्रग माफिया चेतननाथ का एक वीडियो मंगलवार को सोशल मीडिया पर सामने आया है। सोमवार को राजेंद्र नगर पुलिस अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त के पुराने मामले में उसे प्रोडक्शन वारंट पर लेने जिला कोर्ट पहुंची थी। इसी दौरान उसके परिवारवालों ने पुलिसकर्मियों के सामने ही उसकी रील बनाई। बाद में रील को उसके भतीजे के अकाउंट से धमकी भरे कैप्शन के साथ पोस्ट किया गया। रील में कहा- जेल से ही पूरा सिस्टम चलाते हैं वायरल रील में एक ऑडियो लगाया गया है। जिसमें कहा जा रहा है कि पुलिस उन्हें गिरफ्तार करती है और छोड़ देती है। वह जेल के अंदर से ही पूरा सिस्टम चलाने की बात भी कहता है। यह वीडियो कोर्ट परिसर में पुलिसकर्मियों की मौजूदगी में बनाया गया था। अवैध हथियार मामले में 2 दिन का रिमांड राजेंद्र नगर पुलिस सोमवार को अवैध हथियारों की खरीद-फरोख्त के मामले में चेतननाथ का प्रोडक्शन वारंट लेने जिला कोर्ट पहुंची थी। पेशी के दौरान उसकी बहन सीमा नाथ भी उससे मिलने कोर्ट पहुंची थी। इसी दौरान परिवार वालों ने पुलिसकर्मियों के सामने चेतननाथ का वीडियो बना लिया। अवैध हथियार मामले में राजेंद्र नगर पुलिस को चेतननाथ का 2 दिन का रिमांड मिला है। 8 किलो गांजा और 19 लाख रुपए के साथ पकड़ा था चेतननाथ पर एक कारोबारी की हत्या समेत कई गंभीर मामले दर्ज हैं। हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद उस पर अवैध शराब, गांजा और ब्राउन शुगर का कारोबार करने के आरोप लगे। राजेंद्र नगर में मनीष नाम के युवक को पकड़ा गया था। उसके पास पिस्टल मिली थी और उसने पिस्टल चेतननाथ से लेने की बात कबूल की थी। इसके बाद धार के गोगवां में भी एक युवक पिस्टल के साथ पकड़ा गया था। इस दौरान चेतननाथ गाड़ी से कूदकर भाग गया था। बाद में द्वारकापुरी पुलिस ने उसे 8 किलो गांजा, 19 लाख रुपए नकद और ब्राउन शुगर के साथ पकड़ा था। इसके बाद उसे जेल भेज दिया गया था। बहन और जीजा पर भी गंभीर केस चेतननाथ की बहन सीमा नाथ को क्राइम ब्रांच पहले 55 लाख रुपए नकद और ब्राउन शुगर के साथ गिरफ्तार कर चुकी है। सीमा पर एनडीपीएस एक्ट के कई मामले दर्ज हैं। उसके पति महेश उर्फ टोपी पर भी हत्या के प्रयास और लूट जैसे गंभीर मामले दर्ज हैं। एक सप्ताह पहले महेश ने फूटी कोठी की वाइन शॉप के मैनेजर और स्टाफ को धमकाया था। इस घटना के दौरान उसका एक पुलिसकर्मी के साथ वीडियो वायरल हुआ था। हालांकि, जांच में पुलिसकर्मी की कोई भूमिका सामने नहीं आई थी।



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गोपालगंज में न्यू पुलिस लाइन के पीछे मिला अज्ञात शव: गांवों के लोगों से पहचान कराने का प्रयास कर रही पुलिस – Gopalganj News


गोपालगंज में सोमवार को एक अज्ञात युवक का शव बरामद किया गया। पानी में तैरता हुआ शव देखकर स्थानीय ग्रामीणों ने पुलिस को सूचना दी, जिसके बाद मौके पर सैकड़ों लोगों की भीड़ जमा हो गई। घटना नगर थाना क्षेत्र में न्यू पुलिस लाइन के पीछे बसडिला चवर स्थित पोखर

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सूचना मिलते ही नगर थाना पुलिस दल-बल के साथ मौके पर पहुंची। ग्रामीणों की मदद से पुलिस ने शव को पोखरे से बाहर निकलवाया। पुलिस के अनुसार, शव कुछ दिन पुराना प्रतीत होता है और युवक की उम्र लगभग 25 से 30 वर्ष के बीच आंकी जा रही है।

गांवों के लोगों से पहचान कराने का प्रयास कर रही पुलिस

मृतक युवक ने काले रंग की पैंट और ‘बोल बम’ लिखा हुआ टी-शर्ट पहन रखा था। शव की तलाशी के दौरान कोई पहचान पत्र, दस्तावेज या मोबाइल फोन बरामद नहीं हुआ, जिससे उसकी तत्काल शिनाख्त हो सके। पुलिस ने आसपास के गांवों के लोगों से भी पहचान कराने का प्रयास किया, लेकिन सफलता नहीं मिली।

शव बरामद होने के बाद क्षेत्र में विभिन्न तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। नगर थाना पुलिस हत्या या आत्महत्या की गुत्थी सुलझाने में जुट गई है। पुलिस ने शव का पंचनामा तैयार कर उसे पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल, गोपालगंज भेज दिया है।

स्थानीय लोगों से पूछताछ कर रही पुलिस।

गुमशुदगी की रिपोर्टों से कराया जा रहा मिलान

नगर थाना पुलिस ने युवक के हुलिए और पहनावे की जानकारी आसपास के थानों और इलाकों में भेज दी है, ताकि गुमशुदगी की हालिया रिपोर्टों से इसका मिलान किया जा सके।

पुलिस का कहना है कि पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट आने के बाद ही मौत के सही कारणों, जैसे डूबने या किसी आपराधिक साजिश का खुलासा हो पाएगा। फिलहाल, पुलिस मामले की हर बिंदु पर गहनता से जांच कर रही है।



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बंगाल SIR पर सुप्रीम कोर्ट ने EC से जानकारी मांगी: वोटर लिस्ट से हटाए नामों पर ट्रिब्यूनल के फैसलों का पूरा ब्योरा मांगा


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नई दिल्लीकुछ ही क्षण पहले

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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को पश्चिम बंगाल में स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) में हटाए गए नामों से जुड़े मामलों की चुनाव आयोग से जानकारी मांगी है। कोर्ट ने अपीलीय ट्रिब्यूनलों के फैसलों की डिटेल्स देने को कहा है।

ये अपीलीय ट्रिब्यूनल उन लोगों की अर्जियों पर सुनवाई करते हैं, जिनके नाम बंगाल SIR में वोटर लिस्ट से हटा दिए गए हैं।

कोर्ट ने राज्य में SIR से जुड़े मामलों में कितनी अपीलें दाखिल हुईं, कितनों पर फैसला हुआ और कितने मामले अभी लंबित हैं, इसकी जानकारी मांगी है।

इससे यह साफ होगा कि वोटर लिस्ट से नाम हटाए जाने के खिलाफ लोगों की ओर से दाखिल अपीलों पर ट्रिब्यूनल ने अब तक कितनी कार्रवाई की है।

कोर्ट ने कांग्रेस नेता अधीर रंजन चौधरी की याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। चौधरी ने अपीलेट ट्रिब्यूनल के सामने SIR से जुड़े मामलों का जल्द निपटारा कराने की मांग की थी।

बंगाल में वोटर लिस्ट से 58 लाख से ज्यादा नाम कटे

पश्चिम बंगाल में SIR की ड्राफ्ट लिस्ट में 58.20 लाख नाम कट गए हैं। ड्राफ्ट लिस्ट से पहले राज्य में 7.66 करोड़ थे, ड्राफ्ट लिस्ट में 7.08 करोड़ वोटर्स का नाम शामिल किया गया।

काटे गए वोटर्स का प्रतिशत 7.6 है, यानी हर 100 से में लगभग 8 वोटर्स का नाम हटाया गया है। हालांकि, 58.20 लाख वोटर्स में से 24.17 लाख मृत पाए गए, 1.38 लाख डुप्लीकेट या फर्जी थे, 32.65 लाख वोटर्स शिफ्ट, लापता और अन्य थे।

SIR से जुड़ा अपडेट…

चुनाव आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR को तीन चरणों में लागू किया है।

पहला फेज: सबसे पहले SIR बिहार में लागू हुआ। फाइनल वोटर लिस्ट जारी हो चुकी है और यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक गया था।

दूसरा फेज: उत्तर प्रदेश, पश्चिम बंगाल, गुजरात, मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, तमिलनाडु, केरल, गोवा, पुडुचेरी, अंडमान निकोबार, लक्षद्वीप में दूसरे चरण का SIR हुआ।

तीसरा फेज: आयोग ने 16 राज्यों और 3 केंद्रशासित प्रदेशों में SIR शुरू किया है। इनमें आंध्र प्रदेश, अरुणाचल प्रदेश, हरियाणा, झारखंड, कर्नाटक, महाराष्ट्र, मणिपुर, मेघालय, मिजोरम, नगालैंड, ओडिशा, पंजाब, सिक्किम, तेलंगाना, त्रिपुरा, उत्तराखंड, दिल्ली, जम्मू-कश्मीर और चंडीगढ़ शामिल हैं।



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दिल्ली के सरकारी स्कूलों में प्रिंसिपल और वाइस-प्रिंसिपल के 828 पदों पर बंपर भर्ती


दिल्ली सरकार के स्कूलों में प्रिंसिपल (प्रधानाचार्य) और वाइस-प्रिंसिपल (उप-प्रधानाचार्य) के 828 पद खाली पड़े हैं। संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) द्वारा हाल ही में जारी एक भर्ती विज्ञापन से यह जानकारी सामने आई है। शिक्षा निदेशालय (DOE) लगभग 1,090 सरकारी स्कूलों का संचालन करता है। शिक्षा निदेशालय द्वारा जारी एक सर्कुलर के अनुसार, सीधी भर्ती के माध्यम से भरे जाने वाले कुल 828 पदों में से 124 पद प्रिंसिपल के और 704 पद वाइस-प्रिंसिपल के खाली हैं।

सर्कुलर में बताया गया है कि इन 124 प्रिंसिपल और 704 वाइस-प्रिंसिपल के पदों पर सीधी भर्ती के लिए 25 जुलाई से 14 अगस्त तक आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। ‘प्रिंसिपल एंड वाइस-प्रिंसिपल गवर्नमेंट स्कूल एसोसिएशन’ के अनुसार, दिल्ली के सरकारी स्कूलों में प्रिंसिपल के 950 और वाइस-प्रिंसिपल के 1,670 स्वीकृत पद हैं। 

कैसे करें आवेदन?

प्रिंसिपल और वाइस-प्रिंसिपल पोस्ट पर नियुक्त होने के इच्छुक उम्मीदवार UPSC की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर तय अंतिम तिथि के शाम 6 बजे तक या उससे पहले अपना रजिस्ट्रेशन फॉर्म सफलतापूर्वक जमा कर सकते हैं। फॉर्म भरते समय उम्मीदवारों को अपने वर्ग अनुसार निर्धारित आवेदन शुल्क का भुगतान ऑनलाइन माध्यम से करना होगा, जो जनरल/OBC/EWS के लिए 25 रुपये तय किया गया है। वहीं, SC/ST/PWBD और महिला उम्मीदवारों को रजिस्ट्रेशन फीस में छूट दी गई है।

योग्यता-

  • आवेदन करने वाले अभ्यर्थियों के पास किसी मान्यता प्राप्त संस्थान या विश्वविद्यालय से बैचलर ऑफ एजुकेशन (बी.एड) और मास्टर डिग्री होनी चाहिए।
  • प्रिंसिपल पोस्ट के लिए कैंडिडेट्स के पास किसी मान्यता प्राप्त हाई स्कूल/हायर सेकेंडरी स्कूल/सीनियर सेकेंडरी स्कूल/इंटरमीडिएट कॉलेज में पढ़ाने का 10 साल का अनुभव (वाइस प्रिंसिपल/पोस्ट ग्रेजुएट टीचर/ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर के तौर पर) होना चाहिए।
  • वाइस प्रिंसिपल पोस्ट के लिए अभ्यर्थियों के पास पोस्ट ग्रेजुएट टीचर के तौर पर दो वर्ष का अनुभव या ट्रेंड ग्रेजुएट टीचर के तौर पर तीन वर्ष का अनुभव होना चाहिए।
  • प्रिंसिपल पोस्ट के लिए कैंडिडेट की अधिकतम उम्र 50 वर्ष और वाइस-प्रिंसिपल पद के लिए 35 वर्ष तय की गई है, जिसकी गणना आवेदन की अंतिम तिथि के आधार पर की जाएगी।
  • आरक्षित श्रेणी से आने वाले कैंडिडेट्स को नियमानुसार अधिकतम उम्र सीमा में छूट दी जाएगी। हालांकि, किसी भी कैंडिडेट की उम्र 56 वर्ष से ज्यादा नहीं होनी चाहिए।

चयन की प्रक्रिया

योग्य अभ्यर्थियों का चयन सीधी भर्ती अभियान के तहत पेन और पेपर पर आधारित संयुक्त भर्ती परीक्षा (सीआटी), शॉर्टलिस्टिंग और इंटरव्यू के आधार पर किया जाएगा, जिसके बाद प्रिंसिपल पद पर चयनित कैंडिडेट्स की सैलरी 7वें सीपीसी के अनुसार पे मैट्रिक्स 12 और वाइस-प्रिंसिपल पद पर चुने गए उम्मीदवारों की सैलरी 7वें सीपीसी के अनुसार पे मैट्रिक्स 10 के तहत प्रति माह होगी।

(इनपुट- PTI)

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सीजन के बचे आमों से बनाएं शाही स्वाद वाला हलवा, रेसिपी इतनी आसान कि हर कोई बना ले

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Mango Halwa Recipe: सीजन के आखिरी और ज्यादा पके आमों से स्वादिष्ट आम का हलवा बनाया जा सकता है. सूजी, देसी घी, इलायची और काजू के साथ तैयार यह हलवा कम मेहनत में सुनहरा, मुलायम और खुशबूदार बनता है.

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सीजन के बचे आमों से बनाएं शाही आम हलवा, रेसिपी इतनी सरल कि हर कोई बना लेZoom

सीजन के आखिरी पके आमों से बनाएं स्वादिष्ट Mango Halwa. (Image-AI generated)

Mango Halwa Recipe: गर्मियों में आम की मिठास का इंतजार हर साल रहता है, लेकिन सीजन खत्म होते-होते अक्सर कुछ आम इतने पक जाते हैं कि उन्हें सीधे काटकर खाना मुश्किल लगता है. ऐसे नरम और ज्यादा पके आमों को फेंकने के बजाय उनसे स्वादिष्ट हलवा बनाया जा सकता है. आम की प्राकृतिक मिठास, देसी घी में भुनी सूजी और इलायची की खुशबू मिलकर इस मिठाई को खास बना देती है.

खास बात यह है कि इसके लिए न तो बहुत ज्यादा सामग्री चाहिए और न ही घंटों रसोई में खड़े रहने की जरूरत. धीमी आंच पर पकाया गया यह आम का हलवा देखने में सुनहरा और खाने में बेहद मुलायम बनता है. ऊपर से भुने काजू डाल दें तो इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है.

सीजन के आखिरी आम से बनाएं स्वादिष्ट हलवा

आम का सीजन खत्म होने के दिनों में मिलने वाले फल अक्सर ज्यादा पके, मुलायम और मीठे होते हैं. यही आम इस रेसिपी के लिए सबसे अच्छे रहते हैं. सबसे पहले पके आमों का गूदा निकालकर उसका स्मूद प्यूरी बना लें. अगर आम बहुत मीठे हैं तो चीनी की मात्रा थोड़ी कम भी रखी जा सकती है.

हलवे के लिए चाहिए ये सामग्री

एक कप पके आम की प्यूरी, आधा कप सूजी, एक चौथाई कप देसी घी, आधा कप चीनी, एक कप गुनगुना पानी, एक चौथाई चम्मच इलायची पाउडर और दो बड़े चम्मच मोटे कटे काजू चाहिए. सामग्री साधारण है, लेकिन इसका स्वाद काफी खास निकलता है.

ऐसे तैयार करें आम का हलवा

सबसे पहले चौड़ी कड़ाही में घी गर्म करें. इसमें कटे हुए काजू डालकर हल्का सुनहरा होने तक भूनें. काजू को निकालकर अलग रख दें. अब उसी घी में सूजी डालें और मध्यम आंच पर लगातार चलाते हुए करीब पांच से छह मिनट तक भूनें. सूजी का रंग हल्का सुनहरा होने लगे और खुशबू आने लगे तो समझें कि यह सही तरह से भुन गई है. अब इसमें धीरे-धीरे गुनगुना पानी डालें और साथ-साथ चलाते रहें. यह कदम थोड़ा ध्यान मांगता है, क्योंकि पानी एक साथ डालने पर गांठें बन सकती हैं. सूजी पानी सोखकर फूलने लगेगी और मिश्रण धीरे-धीरे गाढ़ा होने लगेगा.

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आम की प्यूरी डालते समय रखें ध्यान

अब इसमें आम की प्यूरी और चीनी डाल दें. आंच धीमी रखें और करीब सात मिनट तक लगातार चलाते हुए पकाएं. आम की प्राकृतिक मिठास और चीनी के साथ मिश्रण पकने पर इसका रंग और भी गहरा सुनहरा हो जाएगा. जब हलवा कड़ाही के किनारे छोड़ने लगे और घी हल्का अलग दिखाई देने लगे, तब गैस बंद कर दें. आखिर में इलायची पाउडर और भुने हुए काजू डालकर अच्छी तरह मिला दें. गर्मागर्म आम का हलवा परोसें. चाहें तो ऊपर से कुछ काजू और आम के छोटे टुकड़े भी सजाए जा सकते हैं.

ज्यादा पके आमों को फेंकने की जरूरत नहीं

इस रेसिपी की सबसे अच्छी बात यही है कि इसमें ऐसे आम भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं जो देखने में बहुत आकर्षक न हों, लेकिन अंदर से अच्छे और मीठे हों. हालांकि सड़े हुए या खराब हिस्से वाले आम इस्तेमाल न करें. इस तरह सीजन के आखिरी आमों का इस्तेमाल करके घर पर ही एक आसान और खुशबूदार मिठाई तैयार की जा सकती है.

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Keerti Rajpoot

कीर्ति राजपूत हिंदी डिजिटल मीडिया और इलेक्ट्रॉनिक मीडिया की एक अनुभवी पत्रकार हैं. उन्हें मीडिया इंडस्ट्री में करीब 13 साल का अनुभव है. वर्तमान में वह साल 2021 से News18 हिंदी की धर्म टीम के साथ जुड़ी हैं, जहां…

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ईरान के डर से ट्रम्प ने सीक्रेट फ्लाइट ली थी: तुर्किये में एयरफोर्स वन में बैठने का दिखावा किया, फिर सामान वाली गाड़ी से दूसरे प्लेन में पहुंचे




अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने पिछले महीने तुर्किये से ब्रिटेन जाने के लिए सीक्रेट रूप से एक छोटे मिलिट्री विमान का इस्तेमाल किया था। वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट के मुताबिक, ईरान से ट्रम्प की हत्या की धमकी मिलने के बाद उनकी यात्रा का पूरा प्लान बदला गया था। तुर्किये की राजधानी अंकारा से निकलते समय ट्रम्प कैमरों के सामने पुराने एयरफोर्स वन में सवार हुए। इसके बाद उन्हें एयरपोर्ट पर सामान और खाना पहुंचाने वाली केटरिंग गाड़ी से चुपचाप छोटे मिलिट्री विमान C-32A तक पहुंचाया गया। पहले बड़े विमान में बैठे, फिर चुपचाप बाहर निकले ट्रम्प 8 जुलाई को नाटो समिट में शामिल होने के लिए तुर्किये की राजधानी अंकारा पहुंचे थे। वे कतर से मिले नए बोइंग 747-8 विमान से वहां गए थे। वापसी के समय ट्रम्प ने कहा कि वे पुराने, हल्के नीले रंग के एयरफोर्स वन से ब्रिटेन जाएंगे। वे कैमरों के सामने इसी विमान में सवार भी हुए। ट्रम्प ने इसकी वजह बताते हुए कहा था कि वे पुराने समय की याद में इस विमान से सफर करेंगे। नया कतर वाला विमान भी ब्रिटेन के RAF मिल्डेनहॉल एयरबेस गया था। सामान वाली गाड़ी से दूसरे विमान तक पहुंचे वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, ट्रम्प के पुराने एयरफोर्स वन में चढ़ने के कुछ देर बाद एक कैटरिंग गाड़ी वहां पहुंची। ऐसी गाड़ियां आमतौर पर विमान में खाना और जरूरी सामान पहुंचाने के लिए इस्तेमाल होती हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, इसी गाड़ी से ट्रम्प को चुपचाप एयरपोर्ट पर खड़े एक छोटे मिलिट्री विमान C-32A तक ले जाया गया। यह बोइंग 757 का मिलिट्री विमान है। वॉशिंगटन पोस्ट को मिले वीडियो में भी कैटरिंग गाड़ी को पुराने एयरफोर्स वन के पास से निकलकर छोटे विमान की तरफ जाते देखा जा सकता है। इसके बाद C-32A ट्रम्प को लेकर ब्रिटेन के लिए रवाना हो गया। मीडिया को भी नहीं पता था कि ट्रम्प दूसरे विमान में हैं पुराने एयरफोर्स वन में बैठे पत्रकारों को लगा कि ट्रम्प भी इसी विमान में सफर कर रहे हैं। रिपोर्ट के मुताबिक, व्हाइट हाउस के कुछ कर्मचारियों को भी असली प्लान की जानकारी नहीं थी। उड़ान के दौरान पत्रकारों को अपनी खिड़कियों के शेड नीचे रखने को कहा गया। यानी उन्हें बाहर देखने की इजाजत नहीं थी। ऐसी सावधानी आमतौर पर तब बरती जाती है, जब विमान किसी खतरे वाले इलाके से गुजर रहा हो। बाद में पत्रकारों ने ट्रम्प से पूछा कि खिड़कियों के शेड बंद रखने को क्यों कहा गया था। ट्रम्प ने कहा, “शायद हम एक खतरनाक फ्लाइट पर थे।” ट्रम्प वाला छोटा विमान पहले ब्रिटेन पहुंचा ट्रम्प को लेकर छोटा C-32A विमान रात करीब 10:20 बजे ब्रिटेन के RAF मिल्डेनहॉल एयरबेस पहुंचा। इसके कुछ मिनट बाद पुराना एयरफोर्स वन भी वहां पहुंच गया। इस विमान में पत्रकार सवार थे। हालांकि, यह साफ नहीं है कि C-32A से उतरने के बाद ट्रम्प पुराने एयरफोर्स वन तक कैसे पहुंचे। ट्रम्प के साथ यात्रा कर रहे पत्रकारों के मुताबिक, वे रात 10:56 बजे पुराने एयरफोर्स वन की सीढ़ियों से नीचे उतरते दिखाई दिए। ट्रम्प ने पत्रकारों की तरफ हाथ हिलाया, लेकिन उनसे बात नहीं की। इसके बाद वे अमेरिकी सैनिकों से मिले और फिर कतर से मिले नए विमान की तरफ चले गए। ऐसा तरीका पहले भी अपनाया जा चुका है राष्ट्रपति को खतरे से बचाने के लिए उनके असली सफर को छिपाने का तरीका नया नहीं है। साल 2000 में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन पाकिस्तान गए थे। तब उन्हें एक ऐसे सरकारी विमान से भेजा गया था, जिस पर राष्ट्रपति के विमान की कोई पहचान नहीं थी। वहीं, उनका असली एयरफोर्स वन दूसरे रास्ते से भेजा गया था, ताकि लोगों को पता न चले कि राष्ट्रपति किस विमान में हैं। कतर से मिले नए विमान की सुरक्षा पर भी सवाल उठे ट्रम्प जिस बोइंग 747-8 विमान से तुर्किये पहुंचे थे, वह कतर के शाही परिवार ने पिछले साल अमेरिका को दिया था। अमेरिकी डिफेंस कंपनी L3 हैरिस टेक्नोलॉजीज ने इसे राष्ट्रपति के सफर के लिए तैयार किया है। ट्रम्प ने पहली बार इस विमान का इस्तेमाल 1 जुलाई को नॉर्थ डकोटा जाने के लिए किया था। कुछ दिन बाद वे इसी विमान से अपनी पहली विदेश यात्रा पर तुर्किये पहुंचे। इस विमान की सुरक्षा को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पुराने एयरफोर्स वन में राष्ट्रपति को हमले से बचाने के लिए कुछ खास सुरक्षा इंतजाम हैं, जो कतर से मिले विमान में नहीं हैं या उनकी क्षमता अलग है। व्हाइट हाउस ने कहा- नए विमान की सुरक्षा में कोई कमी नहीं कतर से मिले वाले विमान की सुरक्षा पर सवालों के जवाब में व्हाइट हाउस के कम्युनिकेशन डायरेक्टर स्टीव चेउंग ने कहा कि इस विमान में ट्रम्प और उनके साथ मौजूद लोगों की सुरक्षा के लिए खास इंतजाम किए गए हैं। उन्होंने कहा, अमेरिका के कई दुश्मन ट्रम्प को निशाना बनाना चाहते हैं। इसलिए उनकी सुरक्षा के लिए हम हर जरूरी तरीका अपनाते हैं। यानी व्हाइट हाउस ने यह नहीं माना कि नए विमान में सुरक्षा की कोई कमी थी। उसका कहना है कि ट्रम्प की सुरक्षा के लिए जरूरत पड़ने पर अलग-अलग तरीके अपनाए जा सकते हैं। पेंटागन यानी अमेरिकी रक्षा विभाग ने इस मामले पर तुरंत कोई जवाब नहीं दिया। ————— ट्रम्प से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें… अमेरिकी मिडटर्म चुनाव में ट्रम्प की हार के 65% चांस:हारे तो मनमानी पर रोक लगेगी, नवंबर में होनी है वोटिंग अमेरिका में मिडटर्म चुनाव से पहले राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की मुश्किलें बढ़ती दिख रही हैं। इप्सॉस-एएपीआई सर्वे के मुताबिक, चुनाव में ट्रम्प की रिपब्लिकन पार्टी के हारने की संभावना 65% तक है। मिडटर्म के लिए वोटिंग नवंबर में होनी है। पूरी खबर यहां पढ़ें…



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‘नौकरी-नेतागिरी’ का फर्क समझाने लगे ‘चीफ साहब’: बकरियों के झुंड में ‘विरोधी खेमे’ का बकरा; ‘हनुमानजी’ के लिए पदयात्रा – Rajasthan News




नमस्कार, उद्घाटन की बात पर गुस्साए पीसीसी चीफ गोविंद सिंह डोटासरा ने SDM साहब को नौकरी और नेतागिरी का फर्क बता दिया। जिन बकरियों को पूर्व मंत्रीजी हांक रहे थे उनमें ‘विरोधी खेमे’ का बकरा भी था और शिवजी के लिए पदयात्राओं के दौर में सद्दाम ‘हनुमानजी’ के लिए चल पड़ा। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. डोटासरा को SDM पर गुस्सा क्यों आया? नौकरी और नेतागिरी में क्या फर्क है? आप कहेंगे कि नौकरी परमानेंट होती है और नेतागिरी 5 साल का खेल है। लेकिन असल में यह मामूली फर्क है। असली अंतर यह है कि नौकरी बचाई जाती है और नेतागिरी चमकाई जाती है। प्रदेश कांग्रेस के चीफ साहब सीकर के लक्ष्मणगढ़ में खूब गरजे। गरजना अधिकार भी है, क्योंकि वे इस क्षेत्र से विधायक भी हैं। तो, जो वाकया चीफ साहब के साथ हुआ, वह उन्हीं की जुबानी कुछ इस प्रकार है- इलाके के SDM साहब ने अपनी मजाल और औकात को बढ़ाते हुए चीफ साहब के दफ्तर में फोन करके यह कह दिया कि डोटासरा जी फलां विकास का कार्य का उद्घाटन न करें। ईमानदारी से SDM साहब ने कारण भी साफ किया कि अगर उन्होंने उद्घाटन किया तो सरकार मेरे से नाराज हो जाएगी। चूंकि नौकरी बचाई जाती है। तो इसी नियम के हिसाब से SDM साहब ने अपनी नौकरी बचाने के लिए ऐसा सुझाव दिया। जिसे माननीय ने मंच से सार्वजनिक कर दिया। सार्वजनिक किया सो किया, उद्घाटन करने की रीति-नीति का बखान कर दिया। कौन कर सकता है, कौन नहीं कर सकता। इसके बाद SDM साहब को खरी सलाह देते हुए बोले- तू तेरी नौकरी संभाल। मैं मेरी नेतागिरी संभाल लूंगा। 2. चुनावी सीजन और ‘बकरी’ सिंगल लेन सड़क थी। दोनों ओर हरियाली थी। सड़क पर चरवाहे थे। चरवाहों के पास बकरियों का झुंड था। झुंड के पीछे नेताजी थे। नेताजी के एक हाथ में छतरी थी। दूसरे हाथ में लाठी थी। यह सामान्य दृश्य नहीं था। यह पूर्ण रूप से राजनीतिक दृश्य था। जो प्रतीक के रूप में पेश किया जा रहा था। पथ पर निरंतर आगे बढ़ती बकरियां ‘सबका साथ-सबका विकास’ का प्रतीक थीं। जिसने इसे सामान्य आंखों से देखा, उसने कहा कि पूर्व कृषि मंत्री प्रभुलाल सैनी किसी कार्यक्रम से लौटते हुए चरवाहों को देख रुके। इसके बाद बकरियों को हांकने लगे और यह उनके जन-जुड़ाव का नमूना है। लेकिन सूक्ष्मदृष्टा यानी छिद्रान्वेषी अर्थात पैनी नजर वाले समझ जाएंगे कि जो हरियाली नजर आ रही है वह चुनावी सीजन के कारण पैदा हुई है। हाथ में छतरी अपना बचाव करते हुए आगे बढ़ने की है। दूसरे हाथ में लाठी जनता पर पकड़ की ताकत है। बकरियों का झुंड क्षेत्र की जनता है। चरवाहे कार्यकर्ता हैं। अब यह समझने में शायद कठिनाई न हो कि बकरियां बूथ की तरफ बढ़ रही हैं। पंचायत और निकाय चुनाव सिर पर हैं। अच्छा नेता वही जो लोकतंत्र की भेड़-बकरियों को हांक कर सही मुकाम की तरफ ले जाए। नेताजी ने बकरियों के बीच चल रहे एक बकरे को प्यार से सहलाया। लेकिन उसे यह रास नहीं आया। उसने पलटकर सींग मारने की कोशिश की। शर्तिया यह बकरा या तो बागी है या फिर विरोधी खेमे का कार्यकर्ता। कुल मिलाकर इस तरह के मोहक और प्रतीकात्मक दृश्य अब चुनाव तक दिखते रहेंगे। देखिए, समझिए और आनंद लीजिए। 3. चलते-चलते.. सावन का महीना चल रहा है। शिवजी के प्रसन्न करने के लिए पदयात्राएं-कांवड़यात्राएं चल रही हैं। इन्हीं पदयात्राओं के बीच एक पदयात्रा सद्दाम अली की भी है। सद्दाम जोधपुर से चला है अजमेर शरीफ के लिए। शिवजी की पदयात्रा के दौर में सद्दाम अली ‘हनुमानजी’ के लिए पैदल चल रहा है। उसके हनुमान RLP प्रमुख वाले हनुमान बेनीवाल हैं। नागौर सांसद। सद्दाम चाहता है कि हनुमान बेनीवाल राजस्थान के मुख्यमंत्री बनें। इस मन्नत के साथ वह पदयात्रा निकाल रहा है। रास्ते में आरएलपी के कार्यकर्ता उसे रोक-रोककर मालाएं पहना रहे हैं और नारेबाजी कर रहे हैं। इस पदयात्रा से संभव है कि हनुमानजी प्रसन्न हों और सद्दाम से वर मांगने को कहें। यही मौका है पार्षदी-पंचायती का आशीर्वाद पाने का। चुनावी सीजन जो है। इनपुट सहयोग- सुरेंद्र खदाव (रणसी, जोधपुर), स्वप्निल सक्सेना (सीकर), मुकेश नागर (बूंदी)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।



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गौतम अडानी को बड़ी राहत, अमेरिका में रिश्वत-धोखाधड़ी के केस खत्म, बिजनेसमैन हो गए खुश


Gautam Adani News: अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी को अमेरिका में बड़ी कानूनी राहत मिली है. अमेरिका की संघीय अदालत ने बिजनेसमैन गौतम अडानी के खिलाफ दर्ज धोखाधड़ी और रिश्वतखोरी के सभी आपराधिक मामलों को खारिज कर दिया है. इस फैसले पर गौतम अडानी ने खुशी जाहिर की है. गौतम अडानी ने मंगलवार को अमेरिकी अदालत के उस फैसले का स्वागत किया. उन्होंने कहा कि उन्हें न्यायिक प्रक्रिया पर गहरा भरोसा और सम्मान है.

अमेरिकी कोर्ट से केस खत्म होने के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में गौतम अडानी ने कहा कि कानूनी कार्यवाही के दौरान सच्चाई, निष्पक्षता और कानून के शासन में उनका भरोसा अटूट रहा. उन्होंने एक्स पर एक पोस्ट में कहा, ‘मैं अमेरिकी कोर्ट के फैसले का विनम्रता और न्यायिक प्रक्रिया के प्रति गहरे सम्मान के साथ स्वागत करता हूं. इस मुश्किल दौर में सच्चाई, निष्पक्षता और कानून के शासन में हमारा भरोसा अटूट रहा.’

गौतम अडानी ने क्या कहा

गौतम अडानी ने उन लोगों का शुक्रिया अदा किया, जिन्होंने इस पूरे मामले के दौरान उन पर, न्याय व्यवस्था और भारत की न्याय देने की क्षमता पर भरोसा बनाए रखा. अडानी ने आगे कहा, ‘हम वही काम करते रहेंगे जो मायने रखता है- देश के लिए निर्माण करना, ऐसी वैल्यू बनाना जो हमारे बाद भी कायम रहे और खुद से बड़े उद्देश्य के लिए काम करना. यही हमारी प्रतिबद्धता है.’

अमेरिकी जज ने केस खत्म किया

दरअसल, अमेरिका के एक जज ने सोमवार को गौतम अडानी के खिलाफ चल रहे आपराधिक मामले को खारिज कर दिया. यह फैसला ट्रंप प्रशासन की ओर से 2024 में लगाए गए धोखाधड़ी और रिश्वतखोरी के आरोपों को हटाने की मांग के बाद आया.

कोर्ट ने क्या कहा

ब्रुकलिन की संघीय अदालत के जज निकोलस गराफिस ने ऑपचारिक रूप से प्रॉसिक्यूटर की उस मांग को औपचारिक मंजूरी दी, जिसमें अडानी पर भारतीय अधिकारियों को 26.5 करोड़ डॉलर की कथित रिश्वत देने की योजना में शामिल होने का आरोप हटाने की बात कही गई थी. आरोप था कि इस योजना का मकसद भारत में बड़े सौर ऊर्जा आपूर्ति ठेके हासिल करना था.

अडानी के वकील रॉबर्ट जिउफ्रा ने कथित तौर पर अमेरिकी न्याय विभाग के अधिकारियों से कहा था कि अगर आरोप हटा दिए जाते हैं तो अडानी अमेरिका में 10 बिलियन डॉलर का निवेश करने को तैयार होंगे. रॉबर्ट जिउफ्रा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के निजी वकील भी हैं.

जज ने क्या सवाल उठाया?

जज गराफिस ने सवाल उठाया था कि क्या निवेश के वादे ने फ़ैसले को प्रभावित किया, लेकिन अंत में यह निष्कर्ष निकाला कि प्रॉसिक्यूटर के फैसले में इसकी कोई भूमिका नहीं थी. हालांकि, जज ने न्याय विभाग द्वारा केस को संभालने के तरीके की आलोचना की. उन्होंने कहा कि किसी सीनियर अधिकारी का जांचकर्ताओं और प्रॉसिक्यूटर की सलाह के बिना आरोप हटाने का फैसला लेना ‘बहुत असामान्य’ था, जबकि उन लोगों ने ही केस पर काम किया था.



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