Sunday, September 20, 2026
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अररिया में आकाशीय बिजली गिरने से 1 की मौत: खेत में चारा लेने गए थे, अचानक बिगड़ा मौसम; परिजनों ने मांगा मुआवजा – Araria News




अररिया के जोकीहाट प्रखंड में रविवार को आकाशीय बिजली गिरने से एक व्यक्ति की मौत हो गई। हादसा बलवा गांव में हुआ। मृतक की पहचान 40 वर्षीय वीरेंद्र यादव के रूप में हुई है। वह पशुओं के लिए चारा लाने खेत गए थे। इसी दौरान अचानक मौसम बिगड़ गया और तेज बारिश के बीच आकाशीय बिजली गिरने से उनकी मौके पर ही मौत हो गई। चारा लेने खेत गए थे वीरेंद्र यादव जानकारी के अनुसार, वीरेंद्र यादव अपने पशुओं के लिए चारा लेने खेत की ओर गए थे। इसी दौरान अचानक तेज बारिश शुरू हो गई। बारिश के बीच आकाशीय बिजली गिरी, जिसकी चपेट में आने से वह गंभीर रूप से झुलस गए। हादसे में उनकी मौके पर ही मौत हो गई। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंपा घटना की सूचना मिलने पर स्थानीय लोगों ने पुलिस को जानकारी दी। पुलिस मौके पर पहुंची और शव को कब्जे में लेकर आवश्यक प्रक्रिया पूरी की। इसके बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए सदर अस्पताल अररिया भेजा गया। पोस्टमार्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया गया। परिवार के अकेले कमाने वाले सदस्य थे मृतक के भाई अर्जुन कुमार यादव ने बताया कि वीरेंद्र यादव परिवार के अकेले कमाने वाले सदस्य थे। वह परिवार की पूरी जिम्मेदारी संभालते थे। उनकी अचानक मौत से परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है और परिवार सदमे में है। परिजनों ने मांगी आर्थिक सहायता हादसे के बाद परिजनों ने स्थानीय प्रशासन से आपदा के तहत मिलने वाली सहायता राशि और उचित मुआवजा देने की मांग की है। ग्रामीणों ने भी प्रशासन से पीड़ित परिवार को जल्द आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने की अपील की है।



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अशोकनगर में आमखो नदी में बहे दो किशोर: नदी में नहाने गए थे, SDRF की टीम रात तक तलाश में जुटी – Ashoknagar News


अशोकनगर के आमखो में रविवार दोपहर झरने में नहाते समय दो किशोर पानी के तेज बहाव में बह गए। दोनों की उम्र करीब 15 साल है। हादसे के बाद पुलिस और SDRF की टीम उनकी तलाश में जुटी है। रात में भी सर्चिंग जारी रही।

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अशोकनगर निवासी ध्रुव दुबे (15) और दक्ष यादव (15) दोपहर करीब 1 बजे तीन दोस्तों के साथ आमखो गए थे। करीब 3 बजे पांचों दोस्त झरने में नहा रहे थे। इसी दौरान ध्रुव और दक्ष तेज बहाव में बह गए। उनके तीन दोस्त सुरक्षित बाहर निकल आए।

मोबाइल नेटवर्क नहीं होने से सूचना देने में देरी

हादसे के बाद तीनों दोस्तों ने परिजनों को सूचना देने की कोशिश की। घटनास्थल पर मोबाइल नेटवर्क नहीं होने के कारण करीब एक घंटे तक उन्हें परेशानी हुई। इसके बाद कुछ दूर जाकर उन्होंने परिजनों को घटना की जानकारी दी। लोगों ने चंदेरी पुलिस को भी सूचना दी।

पुलिस और SDRF ने शुरू की तलाश

सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। SDRF की टीम भी वहां पहुंच गई और दोनों किशोरों की तलाश शुरू की। रात में भी सर्चिंग जारी रही।

घटनास्थल पर मुंगावली विधायक, दोनों किशोरों के परिजन और रिश्तेदार मौजूद हैं। बताया गया कि घटनास्थल उबड़-खाबड़ है और पानी का बहाव काफी तेज है। इससे तलाश में भी परेशानी आ रही है।



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क्या है इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग, जो रोकेगी ट्रेन हादसे? इन 7 स्टेशनों पर लगेगी


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Indian railway : भारतीय रेलवे ने महाराष्‍ट्र के सात रेलेव स्‍टेशनों पर आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्‍टम लगाने की मंजूरी दी है. अभी यहां सिग्‍नल बदलने के लिए मैकेनिकल लीवर या रिले-आधारित सिस्टम का इस्‍तेमाल हो रहा है. इलेक्‍ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग सिस्‍टम ट्रेन हादसे रोकने में बहुत कारगर है.

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इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग एक कंप्यूटर-आधारित आधुनिक सिग्नलिंग व्यवस्था है.

नई दिल्‍ली. भारतीय रेलवे ने रेल यात्रा को ‘जीरो एक्सीडेंट’ के स्तर पर ले जाने और सिग्नलिंग व्यवस्था को हाईटेक बनाने के लिए बड़ा कदम उठाया है. रेलवे ने महाराष्ट्र में सेंट्रल रेलवे के सोलापुर डिवीजन के 7 प्रमुख स्टेशनों पर अत्याधुनिक इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग (EI) सिस्टम लगाने का फैसला किया है. इस पर ₹209 करोड़ रुपये खर्च होंगे. ये सभी स्टेशन भारतीय रेलवे के ‘हाई डेंसिटी नेटवर्क (HDN-7)’ रूट पर स्थित हैं, जहां ट्रेनों की आवाजाही बहुत ज्यादा रहती है. इस रूट पर सेंट्रल ट्रैफिक कंट्रोल (CTC) और ऑटोमैटिक ब्लॉक सिग्नलिंग (ABS) के काम को पहले ही मंजूरी मिल चुकी है. यह तकनीक मानवीय भूलों की गुंजाइश को खत्म कर देती है, जिससे दो ट्रेनों की आमने-सामने की टक्कर, गलत ट्रैक पर गाड़ी जाना और सिग्नल जंपिंग (SPAD) जैसे गंभीर हादसों पर पूरी तरह लगाम लग सकेगी.

सरल शब्दों में कहें तो इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग एक कंप्यूटर-आधारित आधुनिक सिग्नलिंग व्यवस्था है. अभी रेलवे ट्रैक बदलने और सिग्नल देने के लिए मैकेनिकल लीवर या रिले-आधारित सिस्टम का इस्तेमाल ही ज्‍यादा करता है. जिसमें इंसानी चूक या तकनीकी खराबी का खतरा बना रहता है. इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग इन पुरानी प्रणालियों की जगह ले लेती है. यह माइक्रोप्रोसेसर और डिजिटल सॉफ्टवेयर के जरिए काम करती है. यह सिस्टम पटरियों के पॉइंट्स और सिग्नलों के बीच एक ऐसा डिजिटल तालमेल बैठाता है कि जब तक ट्रैक पूरी तरह सुरक्षित और खाली न हो, सिग्नल हरा (ग्रीन) हो ही नहीं सकता. अगर किसी सिग्नल या ट्रैक पर कोई खामी आती है, तो यह कंप्यूटर खुद-ब-खुद उसका पता लगा लेता है और तुरंत सिस्टम को अलर्ट कर देता है.



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मीठा खाने का मन हो तो भुने चने से बनाएं झटपट मिठाई, न मावा चाहिए न चाशनी

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Roasted Chana Mithai Recipe: घर पर कम मेहनत में मिठाई बनानी हो तो भुने चने से यह आसान रेसिपी तैयार की जा सकती है. इसमें भुने चने के साथ काजू, बादाम, नारियल, मिल्क पाउडर और मलाई का इस्तेमाल किया जाता है. भुने चने को बारीक पीसकर छानने से मिठाई का टेक्सचर ज्यादा मुलायम रखने में मदद मिलती है. मिश्रण को बांधने के लिए दूध एक साथ डालने के बजाय थोड़ा-थोड़ा करके मिलाना बेहतर रहता है. तैयार मिश्रण को ट्रे में अच्छी तरह दबाकर मनचाहे आकार में काटा जा सकता है. ऊपर से पिस्ता, बादाम या सूखी गुलाब की पंखुड़ियां डालकर मिठाई को खूबसूरत बनाया जा सकता है.

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चने की मिठाई कैसे बनाएं (इमेज AI)

Roasted Chana Mithai Recipe: घर में अचानक मीठा खाने का मन हो या मेहमान आने वाले हों, तब लंबी तैयारी वाली मिठाई बनाना थोड़ा मुश्किल लगता है. मावा, चाशनी और गैस पर लगातार पकाने की झंझट से बचना हो तो भुने चने से बनी यह मिठाई अच्छा विकल्प हो सकती है. खास बात यह है कि इसे बनाने के लिए भुने चने के साथ ड्राई फ्रूट्स, नारियल, मिल्क पाउडर और मलाई का इस्तेमाल किया जाता है. रेखा की रसोई से मिली इस रेसिपी में किसी तरह की लंबी कुकिंग नहीं करनी पड़ती. सारी सामग्री मिलाकर मिठाई का मिश्रण तैयार किया जाता है और फिर उसे मनचाहा आकार दिया जाता है. आइए जानते हैं इसे घर पर बनाने का आसान तरीका.

भुने चने की मिठाई के लिए तैयार करें सीक्रेट पाउडर
इस मिठाई का स्वाद बढ़ाने के लिए सबसे पहले ड्राई फ्रूट्स और चीनी का पाउडर तैयार करें. इसके लिए मिक्सी जार में काजू, बादाम, आधा कप चीनी और 2 हरी इलायची डालें. सभी चीजों को बारीक पीस लें. तैयार पाउडर को छलनी से छान लें ताकि चीनी या ड्राई फ्रूट्स के मोटे टुकड़े अलग हो जाएं. अब इसमें आधा कप डेसिकेटेड कोकोनट और आधा कप मिल्क पाउडर डालें. इसके बाद 3 चम्मच ताजी मलाई डालकर सभी चीजों को अच्छी तरह मिला लें. यह मिश्रण मिठाई को मलाईदार स्वाद और नरम टेक्सचर देने में मदद करेगा.

भुने चने का मिश्रण ऐसे करें तैयार
अब मिक्सी जार में 2 कप बिना छिलके वाले भुने चने डालें. इन्हें अच्छी तरह पीसकर बारीक पाउडर बना लें. चने के आटे को छलनी से छानना बेहतर रहेगा, इससे मिठाई का टेक्सचर ज्यादा मुलायम बनेगा. छने हुए भुने चने के पाउडर में 2 चम्मच देसी घी डालकर अच्छी तरह मिलाएं. इसके बाद पहले तैयार किया हुआ ड्राई फ्रूट्स, चीनी, नारियल और मिल्क पाउडर का मिश्रण इसमें डाल दें.

(इमेज AI)

दूध डालते समय रखें ध्यान
अब मिश्रण को बांधने के लिए थोड़ा-थोड़ा करके उबला हुआ ठंडा दूध डालें. दूध एक साथ डालने की गलती न करें. करीब 4 से 5 चम्मच दूध पर्याप्त हो सकता है, लेकिन मात्रा मिश्रण की नमी के हिसाब से थोड़ी बदल सकती है. हाथों की मदद से सभी चीजों को अच्छी तरह मसलते हुए नरम डो जैसा मिश्रण तैयार करें. मिश्रण इतना सख्त न हो कि आसानी से फैल न सके और इतना गीला भी न हो कि आकार देना मुश्किल हो जाए.

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बूंदी की 8 निकायों में कल होगा बोर्ड का फैसला: 17 उम्मीदवारों के बीच मुकाबला, सुबह 10 बजे से मतदान और तुरंत बाद मतगणना – Bundi News



बूंदी सभापति समेत 7 नगरपालिकाओं के अध्यक्ष पद के लिए 21 सितंबर को सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक वोटिंग के बाद होगी मतगणना।

बूंदी जिले की 8 नगर निकायों में बोर्ड गठन को लेकर तस्वीर सोमवार, 21 सितंबर को साफ हो जाएगी। नगर निकाय आम चुनाव 2026 के तहत बूंदी नगर परिषद के सभापति और इंद्रगढ़, लाखेरी, नैनवां, देई, हिंडोली, केशोरायपाटन व कापरेन नगरपालिका के अध्यक्ष पद के लिए चुनाव

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जिला निर्वाचन विभाग के अनुसार, सभी 8 निकायों में अध्यक्ष/सभापति पद के लिए कुल 17 उम्मीदवार मैदान में हैं। सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक मतदान होगा और मतदान समाप्त होते ही मतगणना की जाएगी। चुनाव को देखते हुए दोनों प्रमुख दलों के पार्षद फिलहाल बाड़ाबंदी में हैं।

बूंदी में दो बड़े नेताओं के बीच सीधा मुकाबला

जिले की सबसे अहम बूंदी नगर परिषद में सभापति पद को लेकर कांग्रेस और भाजपा के बीच सीधा मुकाबला है। कांग्रेस ने पूर्व सभापति प्रत्याशी रहे अनुभवी नेता टीकम जैन को मैदान में उतारा है, जबकि भाजपा ने भरत कुमार शर्मा को उम्मीदवार बनाया है। नगर परिषद में कुल 60 वार्ड हैं। दोनों ही दलों की ओर से बहुमत हासिल करने का दावा किया जा रहा है। ऐसे में सोमवार को होने वाला चुनाव बोर्ड गठन की दिशा तय करेगा।

नैनवां में त्रिकोणीय मुकाबला

नैनवां नगरपालिका में अध्यक्ष पद के लिए मुकाबला तीन उम्मीदवारों के बीच है। भाजपा ने देवकी बाई, कांग्रेस ने कृष्णा मित्तल और निर्दलीय के रूप में युवा चेहरे दिलखुश पोटर को मैदान में उतारा है। निर्दलीय उम्मीदवार की मौजूदगी से यहां मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।

इंद्रगढ़ में भाजपा-कांग्रेस आमने-सामने

महिला आरक्षित इंद्रगढ़ नगरपालिका अध्यक्ष पद पर कांग्रेस की ऋतु जैन और भाजपा की बीना शर्मा के बीच सीधा मुकाबला है। दोनों दलों के सामने अपने-अपने पार्षदों को एकजुट रखने की चुनौती है।

केशोरायपाटन में दो प्रत्याशियों के बीच मुकाबला

केशोरायपाटन नगरपालिका में भाजपा ने अनुराधा को उम्मीदवार बनाया है, जबकि कांग्रेस की ओर से तुषार शर्मा चुनाव मैदान में हैं। अध्यक्ष पद के लिए दोनों दलों के बीच सीधा मुकाबला है।

लाखेरी में एक पार्षद का अंतर, निर्दलीय निर्णायक

लाखेरी नगरपालिका में कांग्रेस के पवन कुमार और भाजपा के राकेश कुमार (बाबा) के बीच कड़ी टक्कर है। यहां कांग्रेस के पास भाजपा से एक पार्षद ज्यादा है। नगरपालिका के 35 वार्डों में 17 कांग्रेस, 16 भाजपा और 2 निर्दलीय पार्षद हैं। ऐसे में दोनों निर्दलीय पार्षदों की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है।

कापरेन में 3 निर्दलीयों पर नजर

महिला आरक्षित कापरेन नगरपालिका में कांग्रेस की सुनीता और भाजपा की अनुपमा अध्यक्ष पद के लिए आमने-सामने हैं। यहां कुल 25 वार्ड हैं। भाजपा और कांग्रेस के पास 11-11 वार्ड हैं, जबकि 3 निर्दलीय पार्षद हैं। दोनों प्रमुख दलों के बराबर संख्या में होने के कारण निर्दलीय पार्षदों की भूमिका निर्णायक हो सकती है।

देई में भाजपा-कांग्रेस के बीच मुकाबला

देई नगरपालिका में अध्यक्ष पद के लिए भाजपा से महावीर और कांग्रेस से राजू लाल मैदान में हैं। यहां भाजपा का बोर्ड बनना लगभग तय माना जा रहा है।

हिंडोली में कांग्रेस का पलड़ा मजबूत होने का दावा

हिंडोली नगरपालिका में भाजपा के लोकेश और कांग्रेस के हनुमान के बीच मुकाबला है। यहां कांग्रेस का बोर्ड बनना लगभग तय माना जा रहा है।

कल दोपहर तक साफ हो जाएगी तस्वीर

जिला निर्वाचन विभाग ने सभी 8 निकायों में मतदान की तैयारियां पूरी कर ली हैं। सोमवार को सुबह 10 से दोपहर 2 बजे तक मतदान होगा। इसके तुरंत बाद मतगणना शुरू की जाएगी। परिणाम आने के साथ ही तय हो जाएगा कि बूंदी जिले की 8 निकायों में अध्यक्ष और सभापति की कुर्सी पर किस दल का बोर्ड बनता है।



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दिग्गज निवेशक वॉरेन बफे के बेटे हॉवर्ड के रोचक पहलू: पिता वॉरेन करोड़पति बन रहे थे, पर बचपन में हॉवर्ड उन्हें गार्ड समझते थे




दिग्गज कंपनी बर्कशायर हैथवे में वॉरेन बफे के रिटायर होने के बाद उनके बेटे हॉवर्ड बफे (71) को कंपनी का नया चेयरमैन बनाया है। हालांकि कंपनी का मुख्य कामकाज और सीईओ की कमान पहले से ही ग्रेगरी एबेल संभाल रहे हैं। अरबपति के बेटे होने के बावजूद हॉवर्ड का जीवन आम कॉर्पोरेट लीडर्स से अलग रहा है। पढ़िए रोचक किस्से… तीन भाई-बहन में हॉवर्ड दूसरे नंबर पर हैं। हॉवर्ड स्कूल के शुरुआती दिनों में बिल्कुल नहीं जानते थे कि उनके पिता एक मिलियनेयर हैं। एक दिन जब स्कूल में बच्चों से पूछा गया कि उनके पिता क्या काम करते हैं, तो हॉवर्ड और उनकी बहन सुसान ने जवाब दिया कि पिता ‘सिक्योरिटी गार्ड’ हैं। हालांकि कई साल बाद उन्हें ये बात समझ में आई। अरबपति का बेटा होने के बावजूद हॉवर्ड ने बचपन से खेती चुना। एकबार घर के पीछे की जमीन की मिट्टी को खोदकर खेत में बदल दिया। वहीं, कॉलेज के दिनों में बुलडोजर खरीद लिया और पेड़ हटाने और बेसमेंट खोदने का काम शुरू कर दिया। बाद में उन्होंने 1500 एकड़ जमीन पर खुद खेती की। सितंबर 1997 में कनाडा के हडसन बे इलाके में वन्यजीवों की तस्वीरें लेते वक्त भालू ने उन पर हमला कर दिया। तब वे मरते-मरते बचे। हेलिकॉप्टर ने ऐन वक्त पर उनका रेस्क्यू किया। वहीं, 2012 में कांगो के गोमा शहर पर जब विद्रोहियों ने कब्जा कर लिया, तब हॉवर्ड ने 48 घंटे के भीतर अस्पतालों के लिए जनरेटर और पानी की सप्लाई चालू करवाकर मरीजों की जान बची। 1999 से परोपकार में सक्रिय रहे हॉवर्ड की संस्था अब तक करीब 38 हजार करोड़ रु. खर्च कर चुकी है। हॉवर्ड ने 150 से अधिक देशों की यात्रा भी की है। कार के लिए पिता से की थी स्मार्ट डील 1973 में हाईस्कूल खत्म करते वक्त हॉवर्ड को नई कार खरीदनी थी, तो पिता से एक डील की। उन्होंने तय किया कि अगले तीन साल तक उन्हें जन्मदिन, क्रिसमस या ग्रेजुएशन पर कोई तोहफा न देकर इसके बदले अभी पैसे दिए जाएं। वॉरेन ने 5,000 डॉलर दिए, लेकिन कार महंगी थी। हॉवर्ड ने नौकरी करके 2,300 डॉलर जुटाए और कार खरीदी। हॉवर्ड फोटोग्राफर भी हैं। उन्होंने कई मौकों पर फोटोग्राफी भी की है।



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सपा युवजन सभा के नए जिलाध्यक्ष जोरदार स्वागत: अलीगढ़ पहुंचे नए जिलाध्यक्ष रवि सैनी, पनैठी चौराहे से खुली जीप में निकला स्वागत जुलूस – Aligarh News




समाजवादी युवजन सभा के नवनियुक्त जिलाध्यक्ष एडवोकेट रवि सैनी का रविवार को अलीगढ़ पहुंचने पर सैनी-कुशवाहा समाज के संगठनों और पार्टी कार्यकर्ताओं ने जोरदार स्वागत किया। धनीपुर हवाई पट्टी के पास पनैठी चौराहे से शुरू हुआ स्वागत जुलूस खुली जीप में निकला। ढोल-नगाड़ों के बीच रास्ते में जगह-जगह कार्यकर्ताओं और समाज के लोगों ने रवि सैनी का स्वागत किया।
रवि सैनी खुली जीप में पार्टी के प्रमुख पदाधिकारियों के साथ मौजूद रहे। उनके आगे-पीछे वाहनों का काफिला चलता रहा। पनैठी चौराहे से जीटी रोड, नरंगाबाद, छर्रा पुल, दुबे पड़ाव, मीनाक्षी पुल, रामघाट रोड और क्वार्सी चौराहा होते हुए जुलूस पार्टी कार्यालय पहुंचा। यहां भी कार्यकर्ताओं ने उनका स्वागत किया।
सैनी युवा जन क्रांति मोर्चा, अखिल भारतीय कुशवाहा महासभा और अन्य सामाजिक संगठनों से जुड़े लोगों ने भी रवि सैनी को जिलाध्यक्ष बनाए जाने पर शुभकामनाएं दीं। स्वागत कार्यक्रम में सैनी-कुशवाहा समाज के साथ युवजन सभा के कार्यकर्ताओं और पदाधिकारियों की मौजूदगी रही।
पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर करेंगे काम
नवनियुक्त जिलाध्यक्ष रवि सैनी ने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने जो जिम्मेदारी दी है, उसका निर्वहन पार्टी की गाइडलाइन और नेतृत्व के निर्देशों के अनुसार किया जाएगा। संगठन को मजबूत करने और युवाओं को पार्टी से जोड़ने के लिए काम किया जाएगा। उनकी नियुक्ति के बाद युवाओं और सैनी-कुशवाहा समाज में उत्साह देखा जा रहा है। इस मौके पर युवजन सभा के पूर्व जिलाध्यक्ष रंजित चौधरी, संजय शर्मा, जैकी ठाकुर, जीतू सैनी, राजकुमार सैनी, बब्लू होल्कर, राजा गुप्ता आदि थे।



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गुजरात के बनासकांठा के वाडिया गांव में बदलाव: बेटियों को देह व्यापार से बचाने के लिए 7 साल की उम्र में सगाई, 18 में शादी




गुजरात के बनासकांठा जिले के वाडिया गांव में बेटियों को देह व्यापार से बचाने के लिए कम उम्र में सगाई कराई जा रही है। गांव में लड़कियों की सगाई 7 से 12 साल की उम्र में कर दी जाती है। वाडिया गांव अहमदाबाद से करीब 200 किलोमीटर दूर है। यहां करीब 750 लोग रहते हैं। न्यूज एजेंसी PTI की रिपोर्ट के मुताबिक पीढ़ियों से इस पारंपरिक घुमंतू समुदाय की महिलाओं को देह व्यापार में धकेला जाता रहा है। गांव के पुरुष दलालों की तरह ग्राहकों की तलाश करते हैं। वे हर सुबह पालनपुर-थराद हाईवे पर जाकर ट्रक ड्राइवरों, राहगीरों और आसपास के गांवों-शहरों के पुरुषों से संपर्क करते हैं। गांव वालों का कहना है कि सगाई या शादी हो जाने के बाद लड़कियों को देह व्यापार में नहीं धकेला जाता। कम उम्र की सगाई को वे बेटियों को गांव से बाहर सम्मानजनक जिंदगी देने का रास्ता मानते हैं। देह व्यापार से बचने के लिए सगाई भारत में बाल विवाह पर रोक है। इसके बावजूद वाडिया में कम उम्र की सगाई को लड़कियों को देह व्यापार से बचाने का उपाय माना जाता है। गांव की कई लड़कियों की शादी परिवार पहले ही तय कर देते हैं। ऐसा इसलिए किया जाता है, ताकि वे अपनी मां और दादी की तरह देह व्यापार में न जाएं। वाडिया में बदलाव की कोशिश पितृसत्तात्मक व्यवस्था के बीच हो रही है। कई परिवारों के लिए बाल सगाई ही बेटियों को इस धंधे से दूर रखने का एकमात्र रास्ता है। गांव की 19 साल की एक लड़की इस संघर्ष की मिसाल है। उसकी मां और दादी दोनों देह व्यापार में थीं। वह दूर के कॉलेज में नर्स बनने की पढ़ाई कर रही है। उसकी शादी हो चुकी है। उसके लिए दूल्हा 11 साल की उम्र में तय कर दिया गया था। उसने PTI को पहचान जाहिर नहीं करने की शर्त पर बताया, “मैंने देखा कि मेरे पिता और चाचा मेरी मां और दादी के लिए ग्राहकों को लाते थे।” उसने कहा, “जब वे ग्राहकों की जरूरत पूरी करने की स्थिति में नहीं रहीं, तब यह सिलसिला बंद हुआ। मेरी मां ने बताया कि उन्हें जबरन इसमें नहीं धकेला गया था।” उसके मुताबिक, गरीबी के कारण गांव में सब इसे सामान्य मानते थे। उसकी मां को यह भी पक्का पता नहीं था कि उसके जैविक पिता कौन हैं। लड़की ने कहा, “मेरी मां ने तय किया कि वह मुझे इस धंधे में नहीं जाने देंगी। 11 साल की उम्र में सामूहिक समारोह में मेरी सगाई हुई और 18 साल में शादी।” वह ऐसी अकेली लड़की नहीं है। गांव में निगरानी और नियम समाजसेवियों और कुछ परिवारों की मदद से आसपास के गांवों या रिश्तेदारों के परिवारों में लड़कियों की औपचारिक सगाई कराई जाती है। इन लड़कियों की उम्र 7 से 12 साल तक होती है। गांव वालों ने आपसी सहमति से एक अनलिखा नियम बनाया है। सगाई या शादी हो चुकी लड़कियों को देह व्यापार में नहीं धकेला जाता। गांव में आने वाले लोगों पर भी नजर रखी जाती है। हाल ही में गर्म दोपहर में खाट पर बैठे कुछ पुरुष हर नए व्यक्ति से उसके आने की वजह पूछ रहे थे। रंग-बिरंगे घाघरा-चोली पहने कुछ महिलाएं गांव के बाहर थीं। इनमें सगाईशुदा, शादीशुदा और देह व्यापार छोड़ चुकीं बुजुर्ग महिलाएं शामिल थीं। एक ग्रामीण के मुताबिक, देह व्यापार में शामिल महिलाएं ज्यादातर घरों के अंदर रहती हैं। परिवार के पुरुष या दलाल उनके लिए ग्राहक तलाशते हैं। गांव की करीब 750 लोगों की आबादी में लगभग 350 महिलाएं हैं। पितृत्व की पहचान को लेकर लगे कलंक के कारण वाडिया की महिलाएं पीढ़ियों तक अविवाहित रहीं। कम उम्र में सगाई से बेटियों को बचाने की कोशिश चंद्रा सरानिया ने बताया कि जब वह अपनी बेटी की शादी करना चाहती थीं, तो लोगों ने उन्हें इसे लड़कियों की किस्मत मानने को कहा। उन्होंने कहा, “मुझसे कहा गया कि विद्रोह मत करो और यहां की लड़कियों की किस्मत स्वीकार कर लो। मैंने अपनी बेटी की 12 साल में सगाई और 18 साल में शादी कराई।” उन्होंने बताया कि सगाई पक्की करने के लिए लड़के के परिवार ने 1 रुपए और बेटी को कुछ कपड़े दिए थे। चंद्रा को 15 साल की उम्र में देह व्यापार में धकेला गया था। अब वह छोटी डेयरी चलाती हैं। सरकार ने 1963 में उनके परिवार को खेती की जमीन दी थी। लेकिन गांव में सिंचाई की सुविधा नहीं थी। इसी वजह से उन्हें देह व्यापार में जाना पड़ा। चंद्रा ने देह व्यापार से हुई कमाई से तीन बच्चों का पालन-पोषण किया। इनमें दो बेटे और एक बेटी है। वह नहीं चाहती थीं कि उनके अतीत का असर उनके बच्चों के भविष्य पर पड़े। खासकर, वह अपनी बेटी को इस धंधे से दूर रखना चाहती थीं। 2012 से सामूहिक शादी और सगाई 2012 में बदलाव की एक शुरुआत हुई। गैर-सरकारी संगठनों ने कुछ परिवारों को बेटियों को देह व्यापार में न धकेलने के लिए मनाया। इसके बाद गांव में पहली सामूहिक शादी कराई गई। तब से वाडिया में हर साल सामूहिक शादी या सगाई का आयोजन हो रहा है। सामूहिक शादी की पहल करने वाले गैर-सरकारी संगठन विचरता समुदाय समर्थन मंच (VSSM) की संस्थापक मित्तल पटेल ने कहा कि इससे कई लड़कियों को जबरन देह व्यापार से बचाया गया। पटेल ने कहा, “परिवारों को बेटियों को इस धंधे में भेजने से रोकना आसान नहीं था। हमें छिपकर साहूकार बने घूमने वाले दलालों का सामना करना पड़ा।” उन्होंने कहा, “समाज को इस गलत प्रथा के बारे में जागरूक किया गया। माता-पिता से बच्चों को पढ़ाने की अपील की गई।” पटेल ने बताया कि गांव में पहली सामूहिक शादी कराई गई। 160 में से 90 परिवारों को यह धंधा छोड़ने के लिए तैयार किया गया। उन्होंने कहा, “बदलाव आसान नहीं था। लेकिन लड़कियों को इस धंधे से बचाने के लिए लगातार काम करना पड़ा।” पटेल के मुताबिक, सगाई होने के बाद लड़के का परिवार भी लड़की की सुरक्षा को लेकर जिम्मेदारी लेने लगता है। उन्होंने बताया कि बोरवेल और तालाबों को फिर से उपयोगी बनाने, खेती की जमीन को सुधारने और परिवारों को बिना ब्याज कर्ज देने जैसे काम किए गए। इन कर्जों से परिवारों को अपना कारोबार शुरू करने में मदद मिली। इन प्रयासों का मकसद 12-13 साल की लड़कियों को देह व्यापार में धकेले जाने से रोकना है। पटेल ने कहा कि कुछ सामाजिक कार्यकर्ताओं ने बाल विवाह को बढ़ावा देने को लेकर चिंता जताई है। उनका कहना है कि बाल सगाई देह व्यापार से बेहतर है। यह शादी न होने और सम्मानजनक जिंदगी न मिलने से भी बेहतर विकल्प है। पढ़ाई और बेहतर जिंदगी की उम्मीद कुछ माता-पिता अपनी बेटियों को पढ़ाई और बेहतर जिंदगी का मौका देने के लिए भी सगाई करा रहे हैं। रमेशभाई सरानिया की दो बेटियां हैं। उन्होंने एक की सगाई 8 साल और दूसरी की 11 साल की उम्र में कराई। उन्होंने बताया कि दोनों बेटियों की अब शादी हो चुकी है। दोनों ने अपनी स्कूली पढ़ाई भी पूरी की है। रमेशभाई ने कहा, “मैंने अपने भाई से भी झगड़ा किया, ताकि उसकी बेटियां इस धंधे में न जाएं।” उन्होंने बताया कि गांव के नाम से जुड़े कलंक के कारण आज भी उनकी बेटियों के लिए दूल्हे तलाशना मुश्किल होता है। उन्होंने कहा, “फिर भी यह उन्हें देह व्यापार में जाने देने से बेहतर है।” वाडिया के नाम से जुड़ा पुराना कलंक लोककथाओं के मुताबिक, सरानिया समुदाय एक घुमंतू जनजाति है। यह समुदाय कभी मेवाड़ के महाराणा प्रताप की सेना के साथ घूमता था। पुरुष ढाल और तलवार जैसे हथियारों को धार देते थे। महिलाएं सैनिकों का मनोरंजन करती थीं। कहा जाता है कि 1947 में भारत की आजादी के बाद सरानिया समुदाय के पास काम नहीं रहा। आजीविका के विकल्प न होने के कारण वे फिर देह व्यापार की ओर लौट गए। वाडिया के लोग आज भी इस अतीत से जूझ रहे हैं। वे गांव से जुड़े ‘वेश्याओं के गांव’ के टैग को हटाने की कोशिश कर रहे हैं।



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पन्ना में एक महीने से ट्रांसफार्मर खराब: बिजली गुल से बोरवेल बंद, पीने के पानी की संकट; ग्रामीण बोले-बिल भरने के बाद भी सुनवाई नहीं – Panna News




बृजपुर विकासखंड की ग्राम पंचायत गहरा मुख्यालय में पिछले एक महीने से ज्यादा समय से बिजली व्यवस्था खराब है। गांव में माध्यमिक शाला की बाउंड्री के अंदर लगा बिजली ट्रांसफार्मर लंबे समय से खराब पड़ा है। बिजली विभाग ने इसे बदलने या सुधारने के लिए अब तक कोई कदम नहीं उठाया है, जिस कारण पूरा गांव अंधेरे में है। बोरवेल बंद, पीने के पानी की परेशानी बिजली सप्लाई ठप होने से बरसात के मौसम में ग्रामीणों की परेशानियां बढ़ गई हैं। अंधेरे के कारण घरों में सांप-बिच्छू और जहरीले कीड़ों का खतरा बना हुआ है। बिजली न होने से बोरवेल बंद पड़े हैं, जिससे पीने के पानी का गंभीर संकट खड़ा हो गया है। इसके अलावा मच्छरों के प्रकोप से गांव में लगातार लोग बीमार पड़ रहे हैं और छमाही परीक्षाएं पास आने के बावजूद बच्चे पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं। बिल भरने के बाद भी सुनवाई नहीं ग्रामीणों का कहना है कि वे बिजली बिल और मीटर का पूरा भुगतान करते हैं। इसके बावजूद बिजली वितरण कंपनी के अधिकारी और कर्मचारी उनकी समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दे रहे हैं। ग्रामीणों ने रविवार को फिर विभाग के अधिकारियों को अपनी समस्या बताई और चेतावनी दी है कि यदि जल्द से जल्द खराब ट्रांसफार्मर को बदलकर बिजली सप्लाई बहाल नहीं की गई, तो वे आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। जल्द समाधान नहीं हुआ तो आंदोलन की चेतावनी स्थानीय निवासी पहाड़ सिंह यादव ने बताया कि गांव में एक महीने से ट्रांसफार्मर खराब है। मच्छरों की वजह से लोग बीमार पड़ रहे हैं और रोज 10-20 लोग इलाज के लिए जा रहे हैं। बिजली कंपनी का कोई कर्मचारी या लाइनमैन देखने तक नहीं आ रहा है। उन्होंने कहा कि हम पूरा बिल भरते हैं, फिर भी हमारी कोई सुनवाई नहीं हो रही है। रोहित यादव ने बताया कि एक महीने से बिजली न होने से पानी का भारी संकट खड़ा हो गया है। बच्चों की छमाही परीक्षाएं आ गई हैं, लेकिन वे पढ़ाई नहीं कर पा रहे हैं।



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असम में गोपालगंज के सिविल इंजीनियर की गला रेतकर हत्या: तालाब से मिला शव, 6 महीने पहले शादी; पत्नि बोली-‘दोषियों को सजा मिले’ – Gopalganj News




गोपालगंज के उचकागांव थाना क्षेत्र के दहींभत्ता गांव निवासी 32 वर्षीय सिविल इंजीनियर दीपक ठाकुर की असम के नवगांव में गला रेतकर हत्या कर दी गई। घटना 16 सितंबर की देर रात की बताई जा रही है। पुलिस ने 17 सितंबर की सुबह तालाब से उनका शव बरामद किया। तीन दिन बाद शव पैतृक गांव पहुंचा तो परिवार में कोहराम मच गया। अंतिम संस्कार के दौरान पिता रामप्रीत ठाकुर ने बेटे को मुखाग्नि दी। दीपक ठाकुर पिछले करीब तीन साल से असम के नवगांव जिले में नवहट्टा कंपनी में सिविल इंजीनियर के पद पर काम कर रहे थे। वह कंपनी परिसर में ही रहते थे। उनके पिता, भाई और चचेरे भाई भी असम में रहकर सैलून चलाते थे। देखें, मौके से आई तस्वीरें… रात में कमरे पर नहीं पहुंचे, साथी ने दी सूचना परिजनों के अनुसार, 16 सितंबर की रात दीपक अपने कमरे पर नहीं पहुंचे। इसके बाद उनके साथी ने उनके पिता को इसकी जानकारी दी। परिवार के लोगों ने उनकी तलाश शुरू की, लेकिन रात में उनका कोई पता नहीं चल सका। तालाब के पास मिली चप्पल, फिर तलाश शुरू 17 सितंबर की सुबह दीपक की चप्पल उनके कमरे से करीब 100 मीटर दूर तालाब के पास मिली। इसके बाद परिजनों ने पुलिस को सूचना दी। पुलिस ने तालाब में तलाशी अभियान चलाया, जहां से दीपक का शव बरामद किया गया। गले पर धारदार हथियार के निशान शव के गले पर धारदार हथियार से चोट के निशान मिले हैं। शुरुआती तौर पर आशंका जताई जा रही है कि दीपक की गला रेतकर हत्या की गई और शव को पानी भरे गड्ढे में फेंक दिया गया। हत्या की वजह और वारदात में शामिल अपराधियों की पहचान अभी स्पष्ट नहीं हुई है। छह महीने पहले ही हुई थी शादी दीपक की शादी इसी साल फरवरी में हुई थी। शादी के करीब एक महीने बाद मार्च में वह काम के सिलसिले में असम चले गए थे। शादी के महज छह महीने बाद ही उनकी हत्या की खबर ने पत्नी और परिवार को तोड़ दिया। पत्नी ने की हत्यारों को फांसी देने की मांग दीपक की पत्नी ने बिहार के मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी और असम सरकार से हत्याकांड की जांच कर अपराधियों की जल्द गिरफ्तारी की मांग की है। उन्होंने दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा, यहां तक कि फांसी देने की मांग की है। विधायक सुबास सिंह ने परिवार से की मुलाकात घटना की जानकारी मिलने के बाद भाजपा विधायक सुबास सिंह भी दहींभत्ता गांव पहुंचे और पीड़ित परिवार से मुलाकात की। उन्होंने परिजनों को हरसंभव सहयोग और न्याय दिलाने का आश्वासन दिया। हत्यारों की गिरफ्तारी की मांग दीपक का शव गांव पहुंचते ही बड़ी संख्या में ग्रामीण अंतिम दर्शन के लिए जुट गए। परिजनों के रोने-बिलखने से माहौल गमगीन हो गया। परिवार ने पुलिस और सरकार से जल्द से जल्द हत्यारों की पहचान कर गिरफ्तारी करने की मांग की है।



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