4 अक्टूबर को सपा की पत्रकारवार्ता में हुए थप्पड़ कांड ने किसी को फर्श पर पहुंचा दिया तो किसी के लिए अर्श पर पहुंचने का मार्ग प्रशस्त कर दिया। इस कांड के पीड़ित नगीना प्रसाद साहनी अपने राजनीतिक भविष्य के लिए संघर्ष कर रहे थे लेकिन उनपर पड़े थप्पड़ ने अचानक उनका राजनीतिक रसूख बढ़ा दिया। गोरखपुर ग्रामीण सहित जिले की विभिन्न विधानसभा क्षेत्रों में प्रभावशाली मौजूदगी रखने वाले निषाद समाज में उनको लेकर सहानुभूति पैदा हो गई। ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से टिकट को लेकर उनकी दावेदारी पहले से थी लेकिन ऐसे कोई संकेत नहीं थे, जिससे उनकी दावेदारी को मजबूत माना जाता। लेकिन थप्पड़ कांड के बाद उनकी दावेदारी अब मजबूत हो गई है। राष्ट्रीय नेतृत्व की नजर में आ चुके हैं। प्रदेश अध्यक्ष ने घर पहुंचकर उनका कुशलक्षेम जाना और साथ ही उनके बढ़े कद और राजनीतिक महत्व की ओर इशारा भी कर दिया। इस बात की चर्चा तेज हो गई है कि या तो नगीना साहनी को टिकट मिलेगा या फिर संगठन में कोई महत्वपूर्ण पद। पहले जानिए क्या था थप्पड़ कांड 4 अक्टूबर को सपा के तत्कालीन जिलाध्यक्ष ब्रजेश कुमार गौतम ने लोकतंत्र बचाओ सप्ताह के अंतर्गत पत्रकारवार्ता की। इसमें सपा के प्रमुख नेताओं को बुलाया गया था। वहां पूर्व जिलाध्यक्ष एवं गोरखपुर ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र से टिकट के दावेदार नगीना प्रसाद साहनी भी पहुंचे थे। इसी विधानसभा क्षेत्र से तैयारी कर रहे अंशुमान सिंह को भी बुलाया गया था। अपराह्न 2 बजे के करीब वह भी अपने पुत्र कमलेश व समर्थकों के साथ प्रेसक्लब पहुंचे। नगीना प्रसाद साहनी, लोकसभा का चुनाव लड़ चुकीं काजल निषाद के बगल में बैठे थे। काजल व नगीना प्रसाद साहनी की कुर्सियों के बीच में थोड़ा गैप था। अंशुमान सिंह के लिए कुर्सी लगाने के लिए उनके पुत्र कमलेश सिंह ने नगीना प्रसाद साहनी को कुर्सी खिसकाने को कहा। जिसके बाद जगह न होने का हवाला दिया गया। इसी बात पर बहस शुरू हो गई। नगीना प्रसाद साहनी भी कुर्सी से खड़े हो गए। वीडियो में कमलेश भी उनके पास आते दिखे। वहां भी बहस हुई और फिर कमलेश ने नगीना को थप्पड़ मार दिया। इसी के बाद से इस मामले ने तूल पकड़ लिया। मामले में राजनीति शुरू हो गई। थोड़ी ही देर में सपा प्रमुख ने अंशुमान सिंह को पार्टी से निकाल दिया।
इधर अधिवक्ताओं के साथ नगीना प्रसाद साहनी कैंट थाने पहुंचे और अंशुमान, उनके पुत्र कमलेश सिंह एवं अन्य पर एफआईआर दर्ज कराई। अगले ही दिन अखिलेश यादव ने गोरखपुर की जिला एवं महानगर कार्यकारिणी एवं सभी फ्रंटल संगठनों को भंग कर दिया। मामला निषाद समाज से जुड़ा होने के कारण भाजपा भी इस मामले में कूद पड़ी है। भाजपा के कई नेताओं ने इसे सपा की अराजकता के रूप में प्रस्तुत करना शुरू किया है। इधर, निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. संजय निषाद ने भी सपा कार्यालय घेरने का ऐलान कर दिया। जिसके बाद सपा प्रमुख ने गोरखपुर की जिला व महानगर कार्यकारिणियों को भंग कर दिया। इसी बीच संजय निषाद का सुल्तानपुर में संबोधन का एक वीडिया आया, जिसमें वह हाथ उठाने वालों का हाथ काटने की बात कर रहे हैं। क्षत्रिय समाज ने इसे खुद से जोड़कर देखा है। अब नगीना साहनी के बारे में जानिए निषाद समाज से आने वाले नगीना साहनी नौसढ़ के रहने वाले हैं। उन्होंने गोरखपुर विश्वविद्यालय से एमए एवं एलएलबी किया है। वह छात्र राजनीति में भी सक्रिय रहे। 1998 में वह गोरखपुर विश्वविद्यालय छात्र संघ में कला संकाय प्रतिनिधि रहे। 1999 में उन्होंने छात्र संघ उपाध्यक्ष का चुनाव लड़ा लेकिन हार गए। 2008 में वह समाजवादी पार्टी में शामिल हुए। 2009 में उन्हें गोरखपुर ग्रामीण सीट का प्रभारी बनाया गया। 2010 से 2012 तक वह सपा के जिला महासचिव रहे। 2013 से 2016 तक जिला उपाध्यक्ष रहे। मार्च 2020 में पार्टी ने उन्हें जिलाध्यक्ष की जिम्मेदारी दी। लेकिन 2021 में जिला पंचायत अध्यक्ष पद के चुनाव में सपा प्रत्याशी के नामांकन न कर पाने के चलते उन्हें सितंबर 2021 में पद से हटा दिया गया। उसके बाद उनके पास संगठन में कोई जिम्मेदारी नहीं थी। 2027 चुनाव के लिए वह गोरखपुर ग्रामीण सीट से दावेदारी कर रहे हैं। डा. संजय निषाद के कदम से बढ़ा नगीना का कद इस घटना के तुरंत बाद निषाद पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष डा. संजय निषाद ने सपा को घेरना शुरू कर दिया। उन्होंने इसे निषाद समाज पर हमला बताते हुए कार्रवाई न होने पर सपा मुख्यालय घेरने की चेतावनी दे दी। जिसके बाद पार्टी ने इस कांड के आरोपी अंशुमान सिंह को पार्टी से निकाल दिया। अंशुमान भी गोरखपुर ग्रामीण से टिकट मांग रहे थे। उन्हें निकालने के साथ ही पार्टी ने निषाद समाज से आने वाले नगीना प्रसाद साहनी के साथ खुद को खड़ा दिखाया। संजय निषाद के बयानों का असर था कि डैमेज कंट्रोल के लिए सपा प्रमुख ने प्रदेश अध्यक्ष श्यामलाल पाल को नगीना साहनी के घर भेजा। हालांकि प्रदेश अध्यक्ष ने इस मुलाकात को संयोग से शिष्टाचार भेंट बताया था लेकिन अंदरखाने चर्चा है कि यह सोची-समझाी रणनीति थी। अब नगीना के लिए कुछ बेहतर करके अखिलेश निषाद समाज को संदेश दे सकते हैं। जानिए क्या कहते हैं विशेषज्ञ वरिष्ठ पत्रकार शफी आजमी का कहना है कि इस थप्पड़ कांड के बाद समाजवादी पार्टी के एक्शन ने PDA समाज को संदेश देने का प्रयास किया है कि पार्टी किसी भी परिस्थिति में उनके साथ है। राजनीति में एक सही कदम अर्श तक पहुंचा देता है और एक गलत कदम फर्श पर पहुंचा देता है। इस कांड ने गोरखपुर राजनीति का सूरते हाल बदल दिया है। पीडीए समाज से होने के नाते निश्चित रूप से इसका फायदा नगीना साहनी को मिलेगा।
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थप्पड़ कांड से बढ़ गया नगीना साहनी का राजनीतिक रसूख: शीर्ष नेतृत्व की नजर में आ गए; सहानुभूति मिली; टिकट की दावेदारी मजबूत हुई – Gorakhpur News
धनौरा की चौपाल में चाचा-भतीजी ने दिया संदेश: पुलिस अधिकारी चाचा और RAS भतीजी ने लोकतंत्र-कानून व्यवस्था पर की बात – Dholpur News
धौलपुर के धनौरा गांव में पंचायत चुनाव से पहले हुई रात्रि चौपाल खास रही। यहां एक ही मंच पर चाचा-भतीजी ने ग्रामीणों को लोकतंत्र और कानून व्यवस्था का संदेश दिया। कंचनपुर थाना प्रभारी हरेंद्र सिंह ने पुलिस की जिम्मेदारी संभालते हुए निष्पक्ष चुनाव का भरोसा दिलाया। उनकी भतीजी प्रशिक्षु RAS और सहायक जिला कलेक्टर प्रीती सिंह ने मतदाताओं से सीधा संवाद किया। निर्भीक होकर मतदान करने की अपील की
एसपी विकास सांगवान के निर्देश पर हुई इस चौपाल में प्रीती सिंह ने महिलाओं और युवा मतदाताओं से निर्भीक, निष्पक्ष और जागरूक होकर मतदान करने की अपील की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र की मजबूती में हर मतदाता की भूमिका अहम है। भयमुक्त चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार
थाना प्रभारी हरेंद्र सिंह ने ग्रामीणों और संभावित प्रत्याशियों को साफ संदेश दिया कि चुनाव के दौरान किसी भी तरह का दबाव, प्रलोभन या विवाद स्वीकार नहीं होगा। पुलिस-प्रशासन शांतिपूर्ण और भयमुक्त चुनाव कराने के लिए पूरी तरह तैयार है। चाचा-भतीजी का एक ही मंच पर होना चौपाल में चर्चा का विषय रहा। रिश्ते में चाचा और प्रशासनिक जिम्मेदारी में पुलिस अधिकारी-प्रशासक, दोनों ने अपने दायित्व से ग्रामीणों के बीच कानून व्यवस्था और लोकतांत्रिक मूल्यों का संदेश दिया।
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7 करोड़ के वेतन घोटाले में महिला सिपाही दोषी: अकाउंटेंट ने पत्नी और दो सिपाहियों के खातों में भेजी थी रकम; रोज एक ही ATM से निकलते थे लाखों – Muzaffarpur News
मुजफ्फरपुर एसपी कार्यालय के करीब 16 साल पुराने पुलिस वेतन घोटाले में दोषी करार दी गई महिला सिपाही बेबी कुमारी की सजा पर 26 अक्टूबर को सुनवाई होगी। विशेष निगरानी कोर्ट-2 के न्यायाधीश सुमन कुमार दिवाकर ने बेबी कुमारी को आय से अधिक संपत्ति और सरकारी राशि में हेरफेर से जुड़े मामले में दोषी करार देते हुए न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया है। अब अदालत सजा की अवधि तय करेगी। यह मामला उस समय सामने आया था, जब एसपी कार्यालय में तैनात तत्कालीन अकाउंटेंट सुशील कुमार चौधरी पर पुलिसकर्मियों के वेतन, टीए और एरियर की सरकारी राशि में हेरफेर कर करीब 7 करोड़ रुपए दूसरे खातों में भेजने का आरोप लगा था। साल 2006 से सितंबर 2010 के बीच करीब चार साल तक यह गड़बड़ी चलने की बात जांच में सामने आई थी। वेतन की सीडी में खाता नंबर बदलकर भेजता था रकम जांच में सामने आया था कि पुलिसकर्मियों के वेतन और दूसरे भुगतान की प्रक्रिया के दौरान अकाउंटेंट सुशील कुमार चौधरी बाहरी बैंक कर्मी की मदद से वेतन भुगतान की सीडी तैयार करवाता था। इसमें पुलिसकर्मियों के नाम तो सही रखे जाते थे, लेकिन उनके बैंक खाता नंबर बदल दिए जाते थे। इसके बाद वेतन, टीए, एरियर और दूसरे मद की सरकारी राशि पुलिसकर्मियों के खातों में जाने के बजाय सुशील चौधरी, उसकी पत्नी अनिता चौधरी और महिला सिपाहियों शकुंतला देवी व बेबी कुमारी के खातों में पहुंचने लगी। स्थानीय पुलिस की जांच में इस तरीके से करीब सात करोड़ रुपए की सरकारी राशि के गबन की बात सामने आई थी। एक ही ATM से रोज मोटी निकासी ने खोला राज इस घोटाले का खुलासा भी काफी दिलचस्प तरीके से हुआ। जांच से जुड़े पुराने घटनाक्रम के अनुसार, सुशील कुमार चौधरी के बैंक खाते से समस्तीपुर में एक ही एटीएम से लंबे समय तक लगभग एक ही समय पर मोटी रकम निकाली जा रही थी। बैंक अधिकारियों को इस पर संदेह हुआ। इसके बाद एसबीआई के अधिकारी ने तत्कालीन मुजफ्फरपुर एसपी को गोपनीय पत्र भेजकर इसकी जानकारी दी। एसपी कार्यालय में मामला पहुंचने के बाद जांच शुरू हुई। इसके बाद अकाउंटेंट और उससे जुड़े लोगों के ठिकानों पर एक साथ छापेमारी की गई। छापेमारी में घरों से मिली लाखों की नकदी छापेमारी के दौरान आरोपियों के घरों से बड़ी मात्रा में नकदी, जेवरात और जमीन व निवेश से जुड़े दस्तावेज बरामद हुए थे। जांच के अनुसार, शकुंतला देवी के घर से 53 लाख रुपए नकद, जबकि बेबी कुमारी के घर से 2.40 लाख रुपए नकद मिले थे। इसके अलावा जेवरात और जमीन में निवेश से संबंधित कागजात भी बरामद किए गए थे। वहीं, तत्कालीन अकाउंटेंट सुशील कुमार चौधरी के पास से 84 लाख रुपए नकद मिलने की बात जांच में सामने आई थी। नकदी इतनी अधिक थी कि नोट गिनने के लिए मशीन तक मंगवानी पड़ी थी। 2010 में दर्ज हुआ था केस गड़बड़ी सामने आने के बाद तत्कालीन डीएसपी हेडक्वार्टर के आवेदन पर 1 अक्टूबर 2010 को नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज की गई थी। स्थानीय पुलिस ने जांच के बाद आरोपपत्र दाखिल किया। बाद में बेबी कुमारी के खिलाफ आय से अधिक संपत्ति के मामले की अलग से निगरानी जांच शुरू हुई। निगरानी की जांच में बेबी कुमारी के पास आय के ज्ञात स्रोत से अधिक संपत्ति का मामला सामने आया। इसी आधार पर निगरानी थाना में अलग मामला दर्ज कर अनुसंधान किया गया और आरोप पत्र दाखिल किया गया। 22.42 लाख की असंतोषजनक संपत्ति का आधिकारिक आरोप निगरानी अन्वेषण ब्यूरो की आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, बेबी कुमारी के खिलाफ 22 लाख 42 हजार 552 रुपए की असंतोषजनक संपत्ति के आरोप में मामला दर्ज किया गया था। वहीं, मामले की विस्तृत जांच में आय से अधिक संपत्ति की राशि को लेकर अलग-अलग आकलन सामने आए हैं। निगरानी के अनुसार, बेबी कुमारी के खाते में सरकारी राशि ट्रांसफर किए जाने की भी जांच हुई थी। अदालत ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के साथ भारतीय दंड संहिता की जालसाजी, धोखाधड़ी, सरकारी राशि के गबन और आपराधिक षड्यंत्र से संबंधित धाराओं में उन्हें दोषी पाया है। अब 26 अक्टूबर को तय होगा कितनी सजा दोषी करार दिए जाने के बाद बेबी कुमारी को न्यायिक अभिरक्षा में भेज दिया गया है। अब 26 अक्टूबर को सजा के बिंदु पर सुनवाई होगी। इसी दिन अदालत यह तय करेगी कि दोष सिद्ध धाराओं में उन्हें कितनी सजा दी जाए। इस मामले में तत्कालीन अकाउंटेंट सुशील कुमार चौधरी और अन्य आरोपितों की भूमिका को लेकर भी अलग न्यायिक प्रक्रिया चल रही है। पुलिस वेतन और एरियर की राशि में हेरफेर कर सरकारी खाते से करोड़ों रुपए दूसरे खातों तक पहुंचाने का यह मामला मुजफ्फरपुर पुलिस के सबसे पुराने चर्चित वित्तीय मामलों में शामिल रहा है।
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सोना-चांदी हुआ सस्ता, 24K का कितना रेट, दिवाली तक कितना रेट जाएगा
सोने-चांदी की कीमतों में कल सोमवार को उतार-चढ़ाव देखा गया था. आज 6 अक्टूबर को दोनों के दाम MCX पर फिसल गए हैं. दिसंबर डिलीवरी वाला सोना MCX पर 83 रुपये की गिरावट के साथ 149233 रुपये प्रति 10 ग्राम पर कारोबार कर रहा है. दिसंबर डिलीवरी वाली चांदी 662 रुपये गिरकर 225425 रुपये प्रति किलोग्राम पर ट्रेड कर रही है.
इंटरनेशनल मार्केट में सोने का दाम 0.02 फीसदी बढ़त के साथ 4157 डॉलर प्रथि औंस पर ट्रेड कर रहा है. चांदी की कीमत में 0.39 फीसदी की गिरावट आई है. चांदी का भाव अब 61 डॉलर प्रति औंस पर आ गया है. अगर आप सोने-चांदी की खरीदारी करने की सोच रहे हैं तो उससे पहले ये समझ लें कि दिवाली में सोने की कीमत कहां तक पहुंच सकती है.
एनालिस्ट ने बताया कहां तक जाएगा सोने का भाव?
सोने की कीमतों को लेकर 2026 और 2027 का आउटलुक अभी भी मजबूत बना हुआ है. J.P. Morgan Global Research की रिपोर्ट का अनुमान है कि 2026 के अंत तक सोने की कीमत 6,000 डॉलर प्रति औंस तक पहुंच सकती है. वहीं, 2027 में यह 6,300 डॉलर प्रति औंस तक जाने की संभावना भी जताई गई है.
हालांकि, फिलहाल सोने की तेजी पर कुछ दबाव बना हुआ है. CNBC की रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड हाई लेवल पर बनी हुई है. डॉलर इंडेक्स करीब 102.37 पर है, जो करीब 18 महीने के उच्च स्तर के आसपास है. कमोडिटी टेक्निकल एनालिस्ट कावेरी मोरे के अनुसार, मजबूत डॉलर और ऊंची यील्ड के कारण सोने में तेजी की रफ्तार सीमित हो रही है.
KITCO की रिपोर्ट के अनुसार, सोने की कीमतों में थोड़ी कमजोरी के बावजूद यह 4,000 डॉलर प्रति औंस के ऊपर मजबूती से टिका हुआ है, जबकि बॉन्ड यील्ड 5% से ऊपर पहुंच चुकी है. आम तौर पर बढ़ती यील्ड सोने के लिए दबाव बढ़ाती है, लेकिन इस बार सोने का टिके रहना निवेशकों के बदलते रुख का संकेत माना जा रहा है.
विश्लेषकों के मुताबिक, ऊंची बॉन्ड यील्ड के बावजूद सोने की मजबूती से पता चलता है कि निवेशक सरकारों की बढ़ती वित्तीय चुनौतियों को लेकर चिंतित हो रहे हैं. ऐसे में सोना धीरे-धीरे बड़े निवेश पोर्टफोलियो में ज्यादा अहम भूमिका हासिल कर सकता है, जबकि पहले अमेरिकी पेंशन फंड्स जैसे बड़े संस्थागत निवेशकों की रणनीतिक एसेट एलोकेशन में इसकी हिस्सेदारी काफी कम रहती थी.
चांदी की कीमतों पर असर
अमेरिकी मल्टीनेशनल इन्वेस्टमेंट बैंक एंड फाइनेंशियल सर्विस कंपनी Citi की अगस्त की रिपोर्ट के अनुसार, चांदी में अभी और तेजी की गुंजाइश दिख रही है. बैंक ने शार्ट टर्म पीरियड के लिए 75 डॉलर प्रति औंस का टारगेट बरकरार रखा है, जबकि अगले 6 से 12 महीनों में चांदी के 90 डॉलर प्रति औंस तक पहुंचने का अनुमान लगाया है. बैंक का मानना है कि सोलर सेक्टर से औद्योगिक मांग कुछ कमजोर पड़ सकती है, लेकिन इसकी भरपाई निवेश मांग में बढ़ोतरी से हो सकती है, जो आगे चांदी की कीमतों को बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकती है.
इसके अलावा स्ट्रेट ऑफ हॉर्मुज की स्थिति अहम मानी जा रही है. Citi को उम्मीद है कि सितंबर से दिसंबर के बीच मिडिल ईस्ट में मौजूदा तनाव कम हो सकता है. ऐसा होने पर कच्चे तेल की ऊंची कीमतों, मजबूत रियल यील्ड और अमेरिकी डॉलर की मजबूती से मिलने वाला दबाव घट सकता है.
इसके अलावा, अगर यूएस फेड का रुख आने वाले समय में ब्याज दरों को लेकर कम सख्त होता है, तो सोने-चांदी जैसी कीमती मेटल्स में निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ सकती है. इससे प्रेशियस मेटल्स की कीमतों को आगे सपोर्ट मिलने की संभावना है.
अमेरिकी उपराष्ट्रपति बोले- हमलावर पायलट मुसीबत था: मालूम होने पर भी प्लेन क्यों उड़ाने दिया; ओमान बोला- किसी देश ने हमामी की जानकारी नहीं मांगी
वॉशिंगटन डीसी1 घंटे पहले
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अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने सोमवार को कहा कि फ्लाईदुबई का को-पायलट हमाम अल-हमामी पहले से मुसीबत था। ये अमेरिकी इंटेलिजेंस नहीं बोल रहा, उसका इतिहास खुद गवाह है। इसके बावजूद उसे पैसेंजर विमान उड़ाने की अनुमति कैसे मिली, यह सवाल उठता है।
हमामी पर 30 सितंबर को दुबई से तेल अवीव जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट के कॉकपिट में भारतीय कैप्टन स्मित मच्छर पर हमला करने और विमान को क्रैश कराने का आरोप है।
वहीं, ओमान ने कहा कि किसी दूसरे देश ने हमामी की बैकग्राउंड जांच के लिए जानकारी नहीं मांगी थी। ओमान के मुताबिक अगर किसी देश ने मांगी होती तो वह हमामी के कट्टरपंथी होने से जुड़ी उपलब्ध जानकारी जरूर साझा करता।

ओमान ने हमामी पर पहले ही जांच की थी
जेडी वेंस के मुताबिक ओमान के अधिकारियों ने पहले हमामी के व्यवहार को लेकर चिंता जताई थी। उसे उड़ान ड्यूटी से भी हटाया गया था, लेकिन बाद में फ्लाईदुबई ने उसे यात्री उड़ानों की जिम्मेदारी दे दी।
द वॉल स्ट्रीट जर्नल की रिपोर्ट के मुताबिक ओमान ने 29 साल के हमामी की ऑनलाइन गतिविधियों की जांच की थी। उसकी कट्टरपंथी विचारधारा में रुचि को लेकर चिंता जताई गई थी।
2024 में उसे इसी वजह से ओमान की सरकारी एयरलाइन की पायलट ट्रेनिंग से हटा दिया गया था। बाद में उसे दूसरी जिम्मेदारी दे दी गई। करीब 8 महीने पहले वह फ्लाईदुबई से जुड़ा था।
रिपोर्ट के मुताबिक ओमान ने अपनी जांच की जानकारी दूसरी एजेंसियों या एयरलाइंस को नहीं दी। फरवरी में जब फ्लाईदुबई ने हमामी को नौकरी दी, तब उसने उसकी पिछली नौकरी और रिकॉर्ड की पुष्टि के लिए ओमान से संपर्क नहीं किया।

दुबई-तेल अवीव फ्लाइट में हमले के आरोपी को-पायलट हमाम अल-हमामी की यह तस्वीर वायरल है।
वेंस बोले- ईरान कनेक्शन का सबूत नहीं
फ्लाईदुबई की घटना में ईरान की भूमिका के सवाल पर वेंस ने कहा कि अभी तक ऐसा कोई पक्का सबूत नहीं मिला, जिससे ईरान का कनेक्शन साबित हो। उन्होंने कहा-
ईरान की भूमिका को लेकर मैं अमेरिकी खुफिया अधिकारियों की बात पर भरोसा करूंगा। किसी आधिकारिक ऐलान से पहले मैं इस पर कुछ नहीं कहना चाहता। इसकी जांच चल रही है, लेकिन अभी तक मुझे ऐसा कोई पक्का सबूत नहीं मिला है।

तेल अवीव की फ्लाइट में ड्यूटी कैसे मिली, इसकी जांच जारी
ओमान और इजराइल के बीच राजनयिक संबंध नहीं हैं। ऐसे में जांच का एक अहम सवाल यह है कि हमामी को तेल अवीव जाने वाली फ्लाईदुबई की फ्लाइट में को-पायलट की ड्यूटी कैसे मिली।
सीएनएन के मुताबिक, इजराइल की शिन बेट (जांच एजेंसी), मोसाद (खुफिया एजेंसी), सेना और ट्रांसपोर्टेशन मिनिस्ट्री समेत कई एजेंसियां इस पहलू की जांच कर रही हैं। वे यह पता लगा रही हैं कि पहले उठी चिंताओं के बावजूद हमामी फ्लाइट क्रू का हिस्सा कैसे बना।
घटना के बाद हमामी को सऊदी अरब से UAE भेज दिया गया, जहां उसके खिलाफ आतंकवाद से जुड़े मामले की जांच चल रही है।

कैप्टन स्मित मच्छर पर आरोपी पायलट ने कुल्हाड़ी से वार किया था। इसके बाद उन्हें सऊदी अरब में ही भर्ती कराया गया था।
रिपोर्ट- हमामी को मौत की सजा दी जा सकती है
आरोपी ओमानी को-पायलट हमाम अल-हमामी को UAE में मौत की सजा का सामना करना पड़ सकता है। एक सीनियर अमीराती अधिकारी के मुताबिक, हमामी को कट्टरपंथी विचारधारा की ट्रेनिंग मिली थी।
जांच में उसके पास कथित तौर पर चरमपंथी सामग्री और सोशल मीडिया पर लंबे समय से कट्टर विचारों से जुड़ी गतिविधियां भी मिली हैं।
UAE की एजेंसियां इस घटना को सिर्फ कॉकपिट में हुई झड़प नहीं, बल्कि आतंकवादी घटना के तौर पर देख रही हैं। इसी आधार पर आरोपी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जा सकती है।
हमामी ने प्लेन क्रैश की साजिश अकेले रची थी
हमामी ने अकेले ही विमान को क्रैश करने की साजिश रची थी। रिपोर्ट्स के मुताबिक अभी तक उसके किसी संगठन या सरकार से जुड़े होने की जानकारी नहीं मिली है।
इटली के अखबार कोरिएरे डेला सेरा की रिपोर्ट के मुताबिक हमामी का प्लान कैप्टन स्मित को मारकर विमान को तेल अवीव में किसी ऊंची बिल्डिंग से टकराना था। उसने कॉकपिट में नमाज पढ़ने का बहाना बनाया और कैप्टन पर कुल्हाड़ी से हमला कर दिया।
जब उसका पहला प्लान नाकाम होने लगा तो उसने विमान को रेगिस्तान में गिराने की कोशिश की। इस दौरान उसने ऑटोपायलट बंद कर दिया, जिससे विमान तेजी से नीचे आने लगा। जांचकर्ताओं को शक है कि हमामी ने विमान के दोनों इंजन बंद करने की कोशिश की थी।
विमान एक मिनट में 17 हजार फीट तक नीचे आ गया था, देखें GFX…

विमान की रफ्तार 970 किमी प्रति घंटे से ज्यादा पहुंची
इस पूरे घटनाक्रम के दौरान विमान तेजी से जमीन की ओर गिर रहा था। उसकी रफ्तार 970 किलोमीटर प्रति घंटे से ज्यादा पहुंच गई थी। इस दौरान विमान का पिछला हिस्सा भी टूट गया। को-पायलट हमामी ने कंट्रोल को भी नुकसान पहुंचाने की कोशिश की।
फ्लाइट FZ1073 में 174 लोग सवार थे। हमले के दौरान कैप्टन ने विमान से इमरजेंसी सिग्नल भेजे। इसी दौरान पेशे से प्लंबर यानिव हयून ने कंट्रोल स्टिक अपनी ओर खींची, जिससे विमान का तेजी से नीचे जाना रुका।
इसके बाद दो ऑफ-ड्यूटी पायलटों ने कॉकपिट का नियंत्रण संभाला और विमान को सामान्य स्थिति में लाने की कोशिश की। वहीं, यात्रियों और क्रू की मदद से आरोपी को-पायलट को कंट्रोल किया गया।
सऊदी अरब के ताबुक में इमरजेंसी लैंडिंग
सऊदी अरब के एयर ट्रैफिक कंट्रोलर्स ने विमान को वापस मोड़ने को कहा। इसके बाद फ्लाइट को ताबुक में इमरजेंसी लैंडिंग कराने के निर्देश दिए गए। पायलटों ने विमान को सुरक्षित उतारा।

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Recipe: कुरकुरा बाहर से, नींबू के तड़के के साथ अंदर से नरम, निमाड़ का ये पकौड़ा है बारिश क
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Aloo Lemon Pakoda Recipe: बरसात के मौसम में निमाड़ और बुरहानपुर का फेमस आलू लेमन पकौड़ा अपनी खट्टे-मीठे स्वाद के लिए खास पसंद किया जाता है. जानिए इसे बनाने की आसान विधि.
Aloo Lemon Pakoda Recipe: मध्य प्रदेश का बुरहानपुर अपने ऐतिहासिक स्थलों के साथ-साथ खानपान की अलग-अलग स्वादिष्ट चीजों के लिए भी जाना जाता है. खासकर बरसात और ठंड के मौसम में यहां के लोग गरमा-गरम पकौड़ों का स्वाद लेना पसंद करते हैं. इन्हीं में एक खास और स्थानीय स्वाद वाली डिश है. आलू लेमन पकौड़ा जो अपने खट्टे-मीठे स्वाद के कारण लोगों के बीच काफी पसंद की जाती है.
एक्सपर्ट महिला ने ली जानकारी
लोकल 18 की टीम को एक्सपर्ट महिला वंदना ने जानकारी देते हुए बताया कि आलू लेमन पकौड़ा बनाने के लिए बहुत ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं पड़ती. इसे घर में आसानी से उपलब्ध सामान से ही तैयार किया जा सकता है. इसके लिए सबसे पहले आलू नींबू नमक चाट मसाला बेसन और तेल की जरूरत होती है. आलू को उबालकर या छोटे टुकड़ों में काटकर तैयार किया जाता है. इसके बाद बेसन में नमक और जरूरत के अनुसार मसाले मिलाकर घोल तैयार किया जाता है. आलू के टुकड़ों को बेसन के घोल में अच्छी तरह लपेटकर गर्म तेल में डाला जाता है. पकौड़ों को सुनहरा और कुरकुरा होने तक तला जाता है. इसके बाद गरमा-गरम पकौड़ों पर नींबू का रस और चाट मसाला डाला जाता है. नींबू की खटास और चाट मसाले का स्वाद इसे सामान्य आलू पकौड़े से अलग बना देता है.
बारिश में लोग करते हैं पसंद
बुरहानपुर और निमाड़ क्षेत्र में बारिश के दिनों में चाय के साथ गरमा-गरम पकौड़े खाने का अपना ही मजा है. ऐसे में आलू लेमन पकौड़ा लोगों की पसंदीदा डिश बन जाता है. इसकी खासियत यह है कि इसे कम समय में तैयार किया जा सकता है और बच्चे भी इसे बड़े चाव से खाते हैं. बाहर से कुरकुरा और अंदर से नरम आलू ऊपर से नींबू और चाट मसाले का स्वाद इसे खास बनाता है. अगर आप भी बारिश के मौसम में कुछ झटपट और स्वादिष्ट बनाना चाहते हैं तो घर पर आलू लेमन पकौड़ा जरूर बना सकते हैं. कम सामग्री आसान विधि और शानदार स्वाद के कारण यह निमाड़ के खानपान की एक खास पहचान बन चुका है.
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लखनऊ/पटना/भोपाल/जयपुर4 मिनट पहले
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देश के ज्यादातर राज्यों से मानसून लौट चुका है। हालांकि, मध्य प्रदेश के 9 जिलों में चक्रवात के असर के चलते अगले 4 दिन बारिश होने का अनुमान है। वहीं, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, बिहार, यूपी, हिमाचल, छत्तीसगढ़ और झारखंड में बारिश की संभावना है।
यूपी के बाराबंकी, प्रतापगढ़ और सुल्तानपुर में सोमवार रात आंधी-बारिश के साथ ओले गिरे। आंधी से पेड़-बिजली के पोल गिर गए। फसलों को भी नुकसान हुआ। पहाड़ों पर बारिश के बाद 10 नदियां उफान पर हैं और लखनऊ-सीतापुर समेत 11 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर लगातार 8वें दिन बढ़ रहा है।
फैजुल्लागंज में करीब 40 हजार घरों में 4-5 फीट पानी भर गया है। बाढ़ का पानी मां चंद्रिका देवी मंदिर और हनुमंत धाम परिसर में भी पहुंच गया। लेटे हनुमान मंदिर के गर्भगृह में करीब 20 साल बाद पानी पहुंचा है। इससे पहले 2006 में ऐसी स्थिति बनी थी।
बिहार में 6 जिलों के करीब 466 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। बाढ़ से करीब 8 लाख लोग प्रभावित हुए हैं। करीब 92,730 बाढ़ पीड़ितों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। सारण में बाढ़ का सबसे ज्यादा असर है। यहां करीब 3.55 लाख लोग प्रभावित हैं।
राजस्थान में सोमवार को तापमान गिरने से रात में ठंडक बढ़ गई। हिल स्टेशन माउंट आबू में तापमान 14.6°C के करीब रहा। 12 अक्टूबर से वेस्टर्न डिर्स्टबेंस के एक्टिव होने से राज्य में बारिश हो सकती है।
सैटेलाइट मैप में देखें मानसूनी बादलों की स्थिति

देशभर से मौसम की तस्वीरें

यूपी के प्रतापगढ़ में शाम करीब 5 बजे अचानक तेज हवाओं के साथ बारिश शुरू हो गई। कई जगह ओले भी गिरे।

बिहार के छपरा में राशन बांटने के दौरान विवाद होने पर मकेर थाना अध्यक्ष ने बाढ़ पीड़ितों पर पिस्टल तान दी। वीडियो आने के बाद उन्हें सस्पेंड कर दिया गया है।

बिहार के खगड़िया में गंगा के जलस्तर में फिर से हो रही बढ़ोतरी के चलते बाढ़ का पानी इलाकों में आ गया है।

एमपी के इंदौर में तापमान 35 डिग्री पर पहुंच गया है। मौसम विभाग के अनुसार अगले दो दिनों में तापमान 37 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच सकता है।

उत्तराखंड के पहाड़ी जिलों में मौमस बदलने लगा है। नैनीताल में सुबह से ही धुंध छायी रही।


राज्यों से मौसम की खबरें…
राजस्थान: बारिश का अलर्ट, ठंड बढ़ी, पारा 15 डिग्री सेल्सियस से नीचे

राजस्थान में सोमवार को तापमान गिरने से रात में ठंडक बढ़ गई। हिल स्टेशन माउंट आबू में तापमान 14.6 डिग्री सेल्सियस के करीब रहा। वहीं, बाड़मेर, जैसलमेर, जोधपुर, फलोदी, श्रीगंगानगर, चूरू, बीकानेर में दिन के तापमान में 2 डिग्री तक गिरावट हुई। पूरी खबर पढ़ें…
उत्तर प्रदेश: लखनऊ में हनुमंत धाम के गर्भगृह में भरा पानी, 20 साल बाद ऐसे हालात

यूपी में पहाड़ों पर हुई बारिश से 10 नदियां उफान पर हैं। लखनऊ और सीतापुर समेत 11 जिले बाढ़ की चपेट में हैं। लखनऊ में गोमती नदी का जलस्तर लगातार 8वें दिन बढ़ रहा है। फैजुल्लागंज इलाके के 40 हजार घरों में 4 से 5 फीट तक पानी भर गया है। पूरी खबर पढ़ें…
बिहार: 6 जिलों के 466 गांव बाढ़ से घिरे, आज 8 जिलों में बारिश की संभावना

बिहार से मानसून की विदाई समय से पहले शुरू हो गई है। दक्षिण-पश्चिम इलाके में पटना समेत कई जिलों से मानसून लौट चुका है। आमतौर पर बिहार से मानसून की विदाई 10 से 11 अक्टूबर के आसपास होती है, लेकिन इस बार करीब एक सप्ताह पहले ही मानसून लौट रहा है। पूरी खबर पढ़ें…
उत्तराखंड: 8 जिलों में आज यलो अलर्ट, ऊंची चोटियों पर बर्फबारी की संभावना

उत्तराखंड के आज 8 जिलों में यलो अलर्ट जारी किया गया है। देहरादून मौसम विज्ञान केंद्र के अनुसार अल्मोड़ा, नैनीताल, चंपावत, देहरादून, टिहरी, पौड़ी, हरिद्वार और ऊधम सिंह नगर में कुछ स्थानों पर गरज-चमक के साथ हल्की बारिश हो सकती है। पूरी खबर पढ़ें…
दिल्ली ACP विवेक भगत को एडिशनल-DCP चार्ज देने पर रोक: महिला पत्रकार से बदसलूकी का आरोप, जांच होने तक पद नहीं संभालेंगे; सरकार बोली- यह प्रमोशन नहीं
दिल्ली सरकार ने ACP विवेक भगत को एडिशनल DCP का चार्ज देने पर रोक लगा दी है। भगत पर 3 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन के दौरान एक महिला पत्रकार से यौन उत्पीड़न का आरोप है। उनके खिलाफ FIR की मांग को लेकर पिछले 3 दिन से पार्लियामेंट स्ट्रीट थाने के बाहर प्रदर्शन जारी है। सरकार के मुताबिक, केंद्र शासित प्रदेशों के 12 अधिकारियों को एडिशनल DCP का करेंट ड्यूटी चार्ज यानी CDC देने की प्रक्रिया 25 अगस्त को शुरू हुई थी, यानी मौजूदा विवाद से पहले। 5 अक्टूबर को मंजूरी के बाद आदेश जारी हुआ था। दिल्ली सरकार के मुताबिक, विवेक भगत ने खुद कहा कि वे महिला पत्रकारों के कथित उत्पीड़न की पूरी जांच होने तक वह अतिरिक्त DCP का चार्ज नहीं लेना चाहते। इसके बाद पहले जारी आदेश में बदलाव किया गया। बाकी 11 अधिकारियों के लिए CDC का आदेश दोबारा जारी होगा। सरकार बोली- CDC अस्थायी व्यवस्था, प्रमोशन नहीं दिल्ली सरकार ने स्पष्ट किया कि करेंट ड्यूटी चार्ज एक अस्थायी व्यवस्था है। इसे नियमित पदोन्नति नहीं माना जाता। CDC मिलने से अधिकारी को कोई अतिरिक्त आर्थिक लाभ नहीं मिलता। सरकार ने कहा कि जिस अधिकारी को CDC दिया जाता है, वह उस पद पर नियमित रूप से तैनात अधिकारी के वैधानिक अधिकारों का इस्तेमाल नहीं कर सकता। इससे वेतन, सीनियरिटी या अन्य नियमित सेवा लाभों में भी कोई बदलाव नहीं होता। 3 महिला पत्रकारों ने लगाए पुलिस अधिकारियों पर आरोप 3 अक्टूबर को मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन किया गया था। यह प्रदर्शन चुनाव आयोग के कामकाज और वोटर लिस्ट के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) में कथित अनियमितताओं के विरोध में था। प्रदर्शन के दौरान तीन महिला पत्रकारों ने दिल्ली पुलिस के अधिकारियों पर यौन उत्पीड़न के आरोप लगाए। इनमें एक पत्रकार ने दावा किया कि ACP विवेक भगत ने उनसे सीने पर हाथ मारा। FIR दर्ज करने और CCTV जांच की मांग को लेकर थाने के बाहर प्रदर्शन ACP विवेक भगत के खिलाफ आरोपों को लेकर 5 अक्टूबर को प्रदर्शनकारियों ने पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन के बाहर प्रदर्शन किया। उनकी मांग थी कि मामले में FIR दर्ज की जाए और घटना के CCTV फुटेज की जांच कराई जाए। प्रदर्शन के दौरान कई लोगों को हिरासत में लिया गया। प्रदर्शनकारियों का आरोप था कि उन्होंने घटना वाले दिन ही पुलिस से CCTV फुटेज की मांग की थी, लेकिन उन्हें 24 घंटे बाद आने के लिए कहा गया। दोबारा थाने पहुंचने पर भी फुटेज नहीं दी गई और FIR दर्ज करने या जांच की स्थिति की जानकारी नहीं मिली। प्रदर्शनकारी बोली- ACP के खिलाफ जुलाई में भी आई थी शिकायत हिरासत में ली गई एक महिला प्रदर्शनकारी ने आरोप लगाया कि ACP विवेक भगत के खिलाफ जुलाई में भी इसी तरह की शिकायत सामने आई थी। लेकिन जांच नहीं हुई। नई दिल्ली जिला पुलिस ने तीनों महिला पत्रकारों की शिकायतों को क्राइम ब्रांच को भेजा है। पुलिस के मुताबिक, शिकायतें निष्पक्ष और स्वतंत्र जांच के लिए ट्रांसफर की गई हैं। SIR को लेकर ज्ञानेश और चुनाव आयोग पर सवाल CEC ज्ञानेश कुमार और चुनाव आयोग पर SIR को लेकर सवालों खड़े हुए हैं। इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने SIR से जुड़े फैसलों और आदेशों पर रिकॉर्ड में कम से कम 14 बार आपत्ति जताई थी। दावा है कि कई फैसले और आदेश संधू और जोशी की जानकारी या सिफारिश के बिना जारी किए गए। इसके बाद से विपक्ष ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग करते हुए देशभर में प्रदर्शन कर रहा है। 10 अक्टूबर को कॉकरोच पार्टी दिल्ली में प्रदर्शन करेगी CJP फाउंडर अभिजीत दीपके ने 2 अक्टूबर को कहा कि ज्ञानेश कुमार ने इस्तीफा नहीं दिया तो 10 अक्टूबर को पूरे देश से कॉकरोच दिल्ली पहुंचेंगे। दीपके ने लिखा- अगर दिल्ली पुलिस हमें रोकने की कोशिश करती है, तो जहां वे हमें रोकेंगे, वही हमारा जंतर-मंतर होगा। हमारा आंदोलन शांतिपूर्ण होगा। हम महात्मा गांधी के दिखाए रास्ते पर चलेंगे। ——————————– ये खबर भी पढ़ें: मुंबई में ज्ञानेश कुमार के खिलाफ CJP का प्रदर्शन:मुख्य चुनाव आयुक्त पद से इस्तीफे की मांग; दीपके बोले- 10 अक्टूबर को कॉकरोच दिल्ली आएंगे मुंबई के शिवाजी पार्क में शुक्रवार को कॉकरोच जनता पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन किया। पार्टी ने वोटर लिस्ट के SIR को लेकर भी सवाल उठाए। इस दौरान स्टेज पर मौजूद सभी लोग महात्मा गांधी की फोटो वाली टी-शर्ट पहनकर पहुंचे। पढ़ें पूरी खबर…
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प्रधानाचार्य चयन के खिलाफ 115 याचिकाएं खारिज: हाईकोर्ट का प्रधानाचार्य पदों पर घोषित सूची की याचिका में हस्तक्षेप से इंकार – Prayagraj (Allahabad) News
इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा सेवा चयन बोर्ड द्वारा विज्ञापन संख्या 3/2013 के तहत प्रधानाचार्य/प्रधानाध्यापक पदों पर घोषित चयन सूची को चुनौती देने वाली 115 याचिकाओं के पूरे समूह को खारिज कर दिया है।
न्यायमूर्ति सिद्धार्थ नंदन ने डा संजय कुमार मिश्र व तमाम अन्य याचिकाओं की सुनवाई करते हुए यह फैसला सुनाया। क्या है मामला जानिये याचिकाकर्ता इंटरमीडिएट कॉलेजों के वरिष्ठतम प्रवक्ता हैं, जो कार्यवाहक प्रधानाचार्य के रूप में कार्यरत थे। उन्होंने साक्षात्कार में भाग लिया, लेकिन 11 और 13 नवंबर 2022 को क्षेत्रवार घोषित चयन सूची में उनका नाम नहीं आया। याचिकाएँ तीन श्रेणियों में बँटी थीं: (क) जो 25.फरवरी .2014 की अंतिम तिथि को पात्र नहीं थे, (ख) जो मुकदमे के दौरान सेवानिवृत्त हो गए, और (ग) जो साक्षात्कार में कम अंकों के कारण चयनित नहीं हुए। विबंधन” लागू होने की आपत्ति स्वीकार्य चयन प्रक्रिया में भाग लेने के कारण याचिकाकर्ताओं पर “विबंधन” लागू होने की आपत्ति को कोर्ट ने अस्वीकार किया। परिणाम घोषित होते समय बोर्ड के सभी सदस्य सेवानिवृत्त हो चुके थे और केवल अध्यक्ष ही बचे थे। याचिकाकर्ताओं का तर्क था कि “बैठक” के लिए कोरम जरूरी है और एक व्यक्ति की बैठक नहीं हो सकती। कोर्ट ने “आवश्यकता के सिद्धांत” का सहारा लेते हुए कहा कि यह सिद्धांत केवल पक्षपात के मामलों तक सीमित नहीं है।
साक्षात्कार के समय सदस्य मौजूद थे और उन्होंने संस्तुतियाँ की थीं। अन्यथा 2013 से चल रही पूरी प्रक्रिया निरर्थक हो जाती। कोर्ट ने इसे अध्यक्ष का वैध कार्य माना। याचिकाकर्ताओं की दलीलें अलग याचिकाकर्ताओं की मुख्य दलील थी कि पुराने दिशानिर्देशों के अनुसार प्रत्येक संस्था के लिए दो वरिष्ठतम शिक्षकों के साथ ग्रेडेड सूची के शीर्ष पाँच अभ्यर्थियों को ही साक्षात्कार में बुलाया जाना चाहिए था। कोर्ट ने यह नहीं माना। वे दिशानिर्देश नियमावली 1983 के दौर के थे, जब गुणांक देने की कोई विधि निर्धारित नहीं थी। मौजूदा चयन नियमावली 1998 से संचालित है, जिसमें विस्तृत प्रक्रिया दी गई है, और नियम 12(8) के अनुसार पैनल संस्था-वार, अभ्यर्थियों की वरीयता और प्राप्तांकों के क्रम में बनता है।
शीर्ष पाँच तक सीमित करना इस नियम के विपरीत होता। कोर्ट ने कहा कि नियम 11(2)(b) के तहत प्रबंधन द्वारा दो वरिष्ठतम शिक्षकों के नाम भेजना अनिवार्य है, पर इससे उन्हें सीधे भर्ती अभ्यर्थियों पर कोई वरीयता नहीं मिल जाती। वे अन्य संस्थाओं के लिए भी सामान्य अभ्यर्थी के रूप में आवेदन कर सकते हैं। उन्हें वरीयता देना वैधानिक प्रावधान के विपरीत होगा। पूरे याचिका समूह को खारिज कर दिया गया जनवरी.2022 की अधिसूचना के तहत सभी ने ऑनलाइन आवेदन भरे, विवरण सत्यापित किए और तीन संस्थाओं की वरीयता दी। इसलिए यह नहीं कहा जा सकता कि उन्हें प्रक्रिया की जानकारी नहीं थी। कोर्ट ने कहा पात्रता आवेदन की अंतिम तिथि (25.फरवरी.2014) को देखी जाती है। अपात्र होने के कारण याचिकाकर्ताओं को चयन सूची को चुनौती देने का वाद-हेतु नहीं है। इस बिंदु का किसी पक्ष ने खंडन भी नहीं किया। अधिवर्षता आयु पूरी कर चुके या विस्तार पर कार्यरत व्यक्तियों का पद पर बने रहने का निहित अधिकार नहीं होता और उन्हें नियुक्ति नहीं दी जा सकती। इस पर याचिकाकर्ताओं ने कोई विपरीत तर्क भी नहीं रखा। कोर्ट ने कहा कि 2013 में शुरू हुआ चयन अब अपने तार्किक अंत तक पहुंचाया जाएगा। पूरे याचिका समूह को खारिज कर दिया गया।
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