Rajma Malai Kofta Recipe: जब भी मलाई कोफ्ता का नाम आता है, तो ज्यादातर लोगों के मन में आलू और पनीर से बने नरम कोफ्तों की तस्वीर उभरती है. लेकिन अगर आप इस पारंपरिक डिश को एक नया और अलग स्वाद देना चाहते हैं, तो राजमा मलाई कोफ्ता एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है. यह रेसिपी उन लोगों के लिए भी खास है जो कुछ नया ट्राई करना पसंद करते हैं, राजमा के रेगुलर सब्जी से अलग कुछ ट्राई करना चाहते हैं.
राजमा से बने कोफ्ते न सिर्फ स्वाद में शानदार लगते हैं, बल्कि इनका टेक्सचर भी काफी अच्छा होता है. वहीं, काजू, मखाने और क्रीम से तैयार की गई रिच ग्रेवी इस डिश को और भी खास बना देती है. फैमिली डिनर या किसी खास मौके पर ये रेसिपी मेहमानों को जरूर पसंद आएगी. आइए जानते हैं राजमा मलाई कोफ्ता बनाने का आसान तरीका.
राजमा मलाई कोफ्ता रेसिपी सामग्री उबला हुआ राजमा बारीक कटा प्याज हरा धनिया हरी मिर्च अदरक और लहसुन भुना जीरा गरम मसाला धनिया पाउडर नमक स्वादानुसार सत्तू (बाइंडिंग के लिए)
कोफ्ता बनाने की विधि उबले हुए राजमा को अच्छी तरह मैश कर लें. इसमें प्याज, हरा धनिया, हरी मिर्च, अदरक, लहसुन, भुना जीरा, गरम मसाला, धनिया पाउडर और नमक मिलाएं. मिश्रण को बांधने के लिए सत्तू डालें और छोटे-छोटे कोफ्ते तैयार कर लें. इन्हें हल्का सुनहरा होने तक तल लें या अपनी पसंद के अनुसार बेक भी कर सकते हैं.
मलाईदार ग्रेवी के लिए सामग्री प्याज मखाने काजू अदरक और लहसुन टमाटर प्यूरी साबुत मसाले भुना मसाला मिर्च हल्दी भुना जीरा धनिया पाउडर हींग फ्रेश क्रीम हरा धनिया
ग्रेवी बनाने की विधि सबसे पहले प्याज, मखाने, काजू, अदरक और लहसुन को पकाकर पीस लें. एक पैन में तेल या घी गर्म करें और साबुत मसालों का तड़का लगाएं. फिर टमाटर प्यूरी डालकर भूनें. इसके बाद मिर्च, हल्दी, भुना जीरा, धनिया पाउडर और हींग डालकर मसाले को अच्छी तरह पकाएं. तैयार पेस्ट मिलाएं और कुछ मिनट तक भूनें. जरूरत के अनुसार पानी डालकर ग्रेवी तैयार करें. अंत में फ्रेश क्रीम और हरा धनिया मिलाएं.
लगाएं खास तड़का डिश को और ज्यादा स्वादिष्ट बनाने के लिए लहसुन और सूखी लाल मिर्च का तड़का तैयार करें. इसे गर्म घी में भूनकर तैयार ग्रेवी और कोफ्तों के ऊपर डालें. यह छोटा सा कदम राजमा मलाई कोफ्ता के स्वाद को और भी शानदार बना देता है. गरमा-गरम राजमा मलाई कोफ्ता को नान, रोटी, पराठे या जीरा राइस के साथ परोसें और परिवार के साथ इसका आनंद लें.
फ्लाईदुबई की दुबई से इजराइल के तेल अवीव जा रही फ्लाइट में कुल 4 पायलट सवार थे। उड़ान के दौरान को-पायलट ने भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर पर चाकू से हमला कर दिया, जिससे वे घायल हो गए।
हमले के बाद कैप्टन ने जैसे-तैसे कॉकपिट का दरवाजा खोला। इसके बाद विमान में बैठे 2 अन्य पायलट कॉकपिट में पहुंचे और विमान की कमान संभाली। उन्होंने बोइंग 737 मैक्स 8 को सुरक्षित सऊदी अरब में उतारा।
एविएशन सिक्योरिटी एक्सपर्ट के मुताबिक, अगर विमान को संभालने में करीब 5 सेकेंड और लग जाते तो वह ऐसी स्थिति में पहुंच सकता था, जहां उसे दोबारा ऊपर लाना और क्रैश होने से बचाना संभव नहीं होता।
17 हजार फीट नीचे आ गया था विमान, GFX देखें…
अब सबसे बड़ा सवाल है कि 3.5 घंटे की इस फ्लाइट में 2 अतिरिक्त पायलट आखिर क्यों मौजूद थे…
विमान में अतिरिक्त पायलट का होना आम नहीं
एयरलाइंस छोटी फ्लाइट में सिर्फ इस डर से अतिरिक्त पायलट नहीं बैठातीं कि अगर मुख्य पायलटों को कुछ हो गया तो दूसरा पायलट काम संभाल लेगा। यानी इस फ्लाइट में 4 पायलट होने का मतलब यह नहीं था कि एयरलाइन ने जानबूझकर 2 पायलटों को इमरजेंसी बैकअप के तौर पर भेजा था।
रिटायर्ड एयरलाइन कैप्टन और एविएशन सेफ्टी सलाहकार जॉन कॉक्स के मुताबिक, किसी छोटी फ्लाइट में सिर्फ संभावित देरी से निपटने के लिए अतिरिक्त पायलट रखना आम तरीका नहीं है।
पायलटों की ट्रेनिंग और सैलरी पर काफी खर्च होता है, 2 की जगह 4 पायलट रखने पर कंपनी का खर्च बढ़ता है। इसलिए एयरलाइंस जरूरत के मुताबिक ही क्रू रखती हैं।
फ्लाईदुबई विमान में 2 अतिरिक्त पायलट होने की 2 वजहें
पहली वजह
जॉन कॉक्स के मुताबिक दोनों पायलटों को शायद उनकी अगली फ्लाइट के लिए जरूरी जगह पर भेजा जा रहा था।
पायलटों को अक्सर ऐसी फ्लाइट में भेजा जाता है, जिसे वे खुद नहीं उड़ा रहे होते। उन्हें उनकी अगली ड्यूटी वाली जगह तक पहुंचाने के लिए ऐसा किया जाता है। एविएशन इंडस्ट्री में इसे ‘डेडहेडिंग’ कहते हैं।
फ्लाईदुबई ने बताया कि विमान में मौजूद अतिरिक्त पायलट कंपनी के ड्यूटी पर तैनात क्रू का हिस्सा थे। ऐसे पायलट कंपनी के काम से यात्रा करते हैं, इसलिए उन्हें ड्यूटी पर माना जाता है और उन्हें वेतन मिलता है। वे शराब नहीं पी सकते, जबकि यूनिफॉर्म पहनना जरूरी नहीं होता।
दूसरी वजह
एविएशन एक्सपर्ट्स के मुताबिक, एक वजह यह भी हो सकती है कि तेल अवीव से दुबई लौटने वाली फ्लाइट के लिए दूसरे क्रू की जरूरत हो।
पायलट की ड्यूटी सिर्फ उड़ान के समय से नहीं गिनी जाती। एयरपोर्ट पहुंचने के साथ उनका ड्यूटी टाइम शुरू हो जाता है। ऐसे में ज्यादा देरी या लंबे रूट के कारण वे तय ड्यूटी सीमा पूरी कर सकते हैं। इसे ‘टाइमिंग आउट’ कहते हैं, जिसके बाद पायलट विमान नहीं उड़ा सकते।
मौजूदा क्रू की कानूनी ड्यूटी सीमा पूरी होने पर उन्हें जरूरी आराम देना पड़ता है। ऐसे में वापसी की उड़ान के लिए दूसरे पायलटों को पहले ही वहां भेजा जा सकता है।
फ्लाईदुबई ने यह स्पष्ट नहीं किया कि इन दोनों पायलटों को इस फ्लाइट में क्यों भेजा गया था।
एक्सपर्ट बोले- इमरजेंसी में भी विमान का उड़ते रहना बड़ी बात
रिटायर्ड कैप्टन रिचर्ड लेवी ने क्रू और यात्रियों की भूमिका की तारीफ की। उन्होंने कहा कि हमले के दौरान कैप्टन स्मित मच्छर का कॉकपिट का दरवाजा खोल पाना और इमरजेंसी सिग्नल भेजना बेहद अहम था।
लेवी के मुताबिक, विमान का पिछला हिस्सा टूट जाने के बावजूद वह उड़ने की स्थिति में बना रहा। इतनी गंभीर स्थिति के बाद भी विमान का सुरक्षित रूप से उड़ते रहना असाधारण था।
अतिरिक्त पायलट से फायदा- क्रू और शेड्यूल संभालना आसान
एविएशन सिक्योरिटी एक्सपर्ट सैली लीव्सली के मुताबिक, इलाके में बैलिस्टिक मिसाइल हमलों के चलते उड़ानों में देरी हो सकती है। ऐसे माहौल में अतिरिक्त पायलट होने से क्रू की कमी और फ्लाइट शेड्यूल को संभालने में मदद मिल सकती है।
हालांकि, ऐसा कोई संकेत नहीं मिला कि फ्लाईदुबई की इस फ्लाइट में अतिरिक्त पायलट किसी खास सुरक्षा चेतावनी के चलते रखे गए थे।
ओमानी को-पायलट ने क्रैश ऐक्स से हमला किया था
इजराइली पीएम नेतन्याहू ने दावा किया था कि भारतीय पायलट स्मित मच्छर पर हमला करने वाले ओमानी को-पायलट ने कॉकपिट में रखी क्रैश ऐक्स (खास कुल्हाड़ी) से हमला किया था। अब UAE के सरकारी वकील ने रविवार को इसकी पुष्टी की है।
क्रैश ऐक्स एक खास तरह की कुल्हाड़ी होती है। बोईंग 737 जैसे विमानों में इसे इमरजेंसी उपकरण के तौर पर रखा जाता है। फ्लाईदुबई भी बोईंग 737 विमान चलाती है। इसलिए कॉकपिट में क्रैश ऐक्स रखी थी।
क्रैश ऐक्स का इस्तेमाल फ्लाइट में आपातकाल के समय किया जाता है।
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भारतीय पायलट पर हमले के आरोपी का नाम हमाम अल-हमामी: दावा- अलकायदा से प्रभावित था, कट्टरपंथी सोच के चलते ओमान एयर से निकाला गया
इजराइल जा रही फ्लाईदुबई की फ्लाइट में भारतीय पायलट कैप्टन स्मित मच्छर पर हमला करने वाले को-पायलट की पहचान हमाम अल-हमामी के रूप में हुई है। वह ओमान का रहने वाला है। पूरी खबर पढ़ें…
मेरठ के हस्तिनापुर की बुजुर्ग महिला की हत्या के मामले में फरार चल रहे दो आरोपियों को शनिवार तड़के पुलिस ने मुठभेड़ के दौरान गिरफ्तार कर लिया। मवाना-हस्तिनापुर बॉर्डर पर रजवाहे की पुलिया के पास पुलिस टीम ने दोनों संदिग्धों को रोकने का प्रयास किया। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों ने पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। फायरिंग में पुलिस का वाहन क्षतिग्रस्त हो गया, जबकि पुलिसकर्मी बाल-बाल बच गए। इसके बाद हस्तिनापुर पुलिस, मवाना पुलिस और स्वाट टीम देहात ने संयुक्त रूप से जवाबी कार्रवाई की। इस दौरान आरोपी शिवम उर्फ शुभम उर्फ भगत उर्फ बारवी के दोनों पैरों में गोली लगी और वह घायल होकर गिर गया। उसका साथी कोशेन्द्र उर्फ गुल्लू भागने लगा, लेकिन पुलिस टीम ने पीछा कर उसे भी गिरफ्तार कर लिया। घायल आरोपी को उपचार के लिए अस्पताल भेजा गया है। 13 सितंबर को हुई थी बुजुर्ग महिला की हत्या पुलिस के अनुसार, 13 सितंबर की सुबह करीब 5:15 बजे ग्राम गणेशपुर निवासी विमला देवी पत्नी सुरेश चंद घर से टहलने के लिए निकली थीं। इसी दौरान अज्ञात व्यक्ति ने उनके सिर पर ईंट से हमला कर उनकी हत्या कर दी थी। वारदात के बाद महिला के कानों की सोने की बालियां, गले में पहना सोने का ओम, पैरों की पायल और कीपैड मोबाइल फोन लेकर आरोपी फरार हो गया था। मामले में हस्तिनापुर थाने में मुकदमा दर्ज कर पुलिस टीमों को आरोपियों की गिरफ्तारी और घटना के खुलासे के लिए लगाया गया था। लगातार प्रयास के बाद पुलिस टीमों को आरोपियों के बारे में जानकारी मिली। तमंचा-कारतूस और जेवर बरामद पुलिस ने गिरफ्तार आरोपी शिवम के कब्जे से .315 बोर का अवैध तमंचा, एक खोखा कारतूस और दो जिंदा कारतूस बरामद किए हैं। इसके अलावा आरोपियों के कब्जे और निशानदेही से दो मोबाइल फोन, एक जोड़ी पाजेब और एक जोड़ी कान के कुंडल बरामद किए गए हैं। पुलिस के मुताबिक, दोनों आरोपियों से पूछताछ की जा रही है। पुलिस उनके आपराधिक इतिहास और हत्या की वारदात में उनकी भूमिका से जुड़े अन्य तथ्यों की भी जांच कर रही है।
औरंगाबाद में अंबा-नवीनगर मुख्य पथ पर बतरे नदी पर बने करीब 100 वर्ष पुराने ब्रिटिशकालीन पुल की हालत जर्जर है। शुक्रवार को पथ निर्माण विभाग के कनीय अभियंता मो. अशफाक ने पुल का निरीक्षण किया। पुल के क्षतिग्रस्त हिस्सों, टूट चुकी ढलाई और बाहर निकले लोहे के सरियों का जायजा लिया। उन्होंने पुल के विभिन्न हिस्सों का बारीकी से निरीक्षण कर वर्तमान स्थिति की जानकारी ली। अभियंता ने बताया कि पुल काफी पुराना है, जिसके कारण इसके कुछ हिस्सों में क्षति हुई है। क्षतिग्रस्त हिस्सों की मरम्मत के लिए विभाग को प्रस्ताव भेजा जाएगा। विभागीय स्तर पर आवश्यक प्रक्रिया पूरी कर जल्द ही मरम्मत का कार्य कराया जाएगा। पुल के निचले हिस्से में कई स्थानों पर ढलाई टूटकर अलग हो गई है। कई जगहों पर लोहे के सरिये बाहर निकल आए हैं। पुल के किनारे के हिस्सों में भी टूट-फूट दिखाई दे रही है। पुराने पुल से लगातार छोटे-बड़े वाहनों का परिचालन होने के कारण स्थानीय लोगों में इसकी सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। निरीक्षण के दौरान बीस सूत्री अध्यक्ष प्रवीण कुमार, अजीत कुमार समेत अन्य लोग मौजूद रहे। मेह पुल क्षतिग्रस्त होने से बढ़ा भारी वाहनों का दबाव स्थानीय लोगों के अनुसार बारुण प्रखंड के मेह के समीप पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद अंबा-नवीनगर मुख्य पथ पर भारी वाहनों का दबाव काफी बढ़ गया है। एनटीपीसी के दोनों पावर प्लांट से जुड़े भारी वाहनों के अलावा कोलकाता-वाराणसी एक्सप्रेसवे निर्माण में लगी कंपनियों के बड़े वाहन भी इसी मार्ग से गुजर रहे हैं। स्थानीय व्यवसायियों के अनुसार कुछ भारी वाहनों का भार करीब 90 से 120 टन तक बताया जा रहा है। ऐसे में पुराने पुल से लगातार भारी वाहनों के गुजरने से इसकी स्थिति को लेकर लोगों की चिंता बढ़ गयी है। लोगों का कहना है कि पुल की वर्तमान स्थिति को देखते हुए समय रहते मरम्मत और सुरक्षा उपाय जरूरी हैं। भारी वाहनों के बढ़ते परिचालन का असर अंबा बाजार की सड़क पर भी दिखाई देने लगा है। सड़क कई जगहों पर टूट गई है और जगह-जगह गड्ढे उभर आए हैं। स्थानीय लोगों ने पुल के साथ-साथ सड़क की भी आवश्यक मरम्मत कराने की मांग की है। दोनों ओर लगेगी रेलिंग, जल्द होगी मरम्मत पथ निर्माण विभाग के कार्यपालक अभियंता गोपाल सिंह ने बताया कि पुल के निर्माण काल और उसकी निर्धारित भार क्षमता से संबंधित दस्तावेज फिलहाल विभाग के पास उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा कि पुल के क्षतिग्रस्त हिस्से की जल्द मरम्मत करायी जाएगी। साथ ही पुल के दोनों ओर सुरक्षा के लिए रेलिंग भी लगायी जाएगी। स्थानीय लोगों ने विभागीय टीम के निरीक्षण को खबर का असर बताते हुए पुल की जल्द मरम्मत की उम्मीद जताई है। लोगों का कहना है कि यह पुल अंबा-नवीनगर मार्ग पर यातायात का महत्वपूर्ण हिस्सा है। मेह पुल क्षतिग्रस्त होने के बाद इस मार्ग पर बढ़े भारी वाहनों के दबाव को देखते हुए पुल की तकनीकी जांच, मरम्मत और सुरक्षा व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। रेलिंग लगने से पुल से गुजरने वाले वाहन चालकों और राहगीरों की सुरक्षा भी बेहतर होने की उम्मीद है।
रीवा के त्योंथर के पीएम श्री शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय गढ़ी में स्थानीय शिक्षक कैलाश नारायण द्विवेदी को लेकर विवाद सामने आया है। विद्यालय के प्रभारी प्राचार्य डॉ. मनीष प्रकाश उपाध्याय ने शिक्षक पर गाली-गलौज, डराने-धमकाने और गोली मारने की धमकी देने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं। स्कूल के कुछ विद्यार्थियों ने भी शिक्षक के व्यवहार को लेकर इसी तरह की बातें कही हैं। घटना से जुड़ा एक वीडियो भी सामने आया है। प्राचार्य ने शिकायत में लगाए गंभीर आरोप प्रभारी प्राचार्य डॉ. मनीष प्रकाश उपाध्याय ने अधिकारियों को दी शिकायत में आरोप लगाया कि संबंधित शिक्षक के व्यवहार के कारण स्कूल के अन्य शिक्षक दबाव और भय के माहौल में काम कर रहे हैं। शिकायत के मुताबिक, शिक्षक कथित तौर पर खुद को इलाके का जमींदार बताते हैं और कहते हैं कि उनका कोई कुछ नहीं बिगाड़ सकता। प्राचार्य ने यह भी आरोप लगाया कि शिक्षक विधायक से नजदीकी होने और अधिकारियों-कर्मचारियों को खरीद लेने जैसी बातें कहते हैं। हालांकि, इन दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। शिकायत में शिक्षक पर स्कूल में गाली-गलौज करने और गोली मारने की धमकी देने का आरोप लगाते हुए अधिकारियों से कार्रवाई की मांग की गई है। छात्रों ने भी शिक्षक के व्यवहार की शिकायत की मामले में स्कूल के विद्यार्थियों ने भी संबंधित शिक्षक के व्यवहार को लेकर आरोप लगाए हैं। छात्रों की शिकायतें सामने आने के बाद मामला केवल शिक्षकों के बीच विवाद तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि स्कूल के शैक्षणिक माहौल और विद्यार्थियों की सुरक्षा से भी जुड़ गया है। प्रभारी प्राचार्य ने अधिकारियों से मामले में हस्तक्षेप कर जांच और उचित कार्रवाई की मांग की है। शिक्षक का पक्ष सामने नहीं आया मामले में जिन शिक्षक कैलाश नारायण द्विवेदी पर आरोप लगाए गए हैं, उनका पक्ष अभी सामने नहीं आया है। आरोपों की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी।
अलवर में अक्टूबर की शुरुआत के साथ मौसम का मिजाज बदलने लगा है। दिन में तेज धूप के कारण गर्मी का असर महसूस हो रहा है, वहीं सुबह और रात के समय मौसम में ठंडक बढ़ने लगी है। दिन-रात के तापमान में अंतर के कारण लोगों को एक ही दिन में गर्मी और ठंडक दोनों का अहसास हो रहा है। मौसम विभाग के अनुसार 3 से 6 अक्टूबर तक अधिकतम तापमान 38 डिग्री के आसपास रहने का अनुमान है, जबकि न्यूनतम तापमान करीब 24 डिग्री रहेगा। 7 अक्टूबर को अधिकतम तापमान 37 और 8 अक्टूबर को 35 डिग्री तक रहने का अनुमान है। अगले सात दिनों में बारिश की संभावना नहीं है और कोई चेतावनी भी जारी नहीं की गई है। सामान्य से करीब 7 फीसदी कम रही बारिश इस बार मानसून में अलवर में 506.9 मिमी बारिश हुई, जबकि सामान्य बारिश 546.4 मिमी है। यानी बारिश सामान्य से करीब 7 फीसदी कम रही। मानसून की विदाई के बाद अब दिन में गर्मी और रात में ठंडक का असर महसूस होने लगा है।
नई दिल्ली. अमेरिका-ईरान जंग की वजह से होर्मुज जलडमरूमध्य से दुनिया को तेल की सप्लाई बहुत कम हो गई है. रूस पर यूक्रेन के ड्रोन हमलों की वजह से भारत को अब रूसी तेल भी मिल रहा है. लेकिन, भारत में फिर भी कच्चे तेल की कोई कमी नहीं है. खास बात यह है कि अब खाड़ी देशों से भारत को भरपूर तेल मिल रहा है. दरअसल, भारत ने इराक और सऊदी अरब जैसे देशों के साथ मिलकर तेल सप्लाई के खेल को ही बदल दिया है.
दरअसल, भारत को अब ‘शिप-टू-शिप’ (STS) ट्रांसफर के जरिए खाड़ी देशों से खूब कच्चा तेल मिल रहा है. पश्चिम एशिया में तनाव और युद्ध की आशंका के बीच खाड़ी देशों का सबसे संवेदनशील समुद्री रास्ता होर्मुज जलडमरूमध्य बेहद जोखिम भरा हो चुका है. इराक, कुवैत और कतर इसी संकरे रास्ते पर पूरी तरह निर्भर हैं. जंग के खतरे और महंगे बीमा के डर से सीधे बड़े टैंकर भेजना आत्मघाती साबित हो सकता है. इसका तोड़ निकाला गया शिप-टू-शिप (STS) कार्गो ट्रांसफर के जरिए. सामान्य तौर पर तेल सीधे टैंकर में भरकर मंजिल तक भेजा जाता है. लेकिन इस नए जुगाड़ में निर्यातक देश एक छोटे शटल टैंकर में तेल लोड करते हैं. यह शटल टैंकर होर्मुज जलडमरूमध्य के सबसे खतरनाक और तनावग्रस्त हिस्से को पार करता है. यानी खतरे का पूरा जोखिम आपूर्तिकर्ता देश खुद उठाते हैं.
समुद्र में ही अदला-बदली
शटल टैंकर जलडमरूमध्य पार कर बाहर अपेक्षाकृत शांत और सुरक्षित अंतरराष्ट्रीय समुद्री इलाके में पहुंचता है, वहां पहले से लंगर डाले खड़ा बड़ा टैंकर पाइपों के जरिए तेल अपने में ट्रांसफर करा लेता है और सीधे भारतीय बंदरगाहों के लिए रवाना हो जाता है. इस अनूठे तालमेल ने ढुलाई के भारी जोखिम को भारत के सिर से पूरी तरह उतार दिया.
खाड़ी देशों से खूब आ रहा तेल
यह शिप-टू-शिप ट्रांसफर का ही कमाल है कि खाड़ी देशों से अब भारत को तेल की आपूर्ति बढ़ रही है. सितंबर में इराक से भारत का तेल आयात मासिक आधार पर 238.2% की भारी छलांग लगाकर 5,10,000 बैरल प्रतिदिन (BPD) के पार पहुंच गया. सऊदी अरब से खरीद 56.2% बढ़कर लगभग 5,43,000 bpd हो गई, जबकि कुवैत से आयात 104.4% उछलकर 3,17,000 बीपीडी तक जा पहुंचा. अगस्त में कतर से खरीद शून्य थी, लेकिन सितंबर में वहां से भी रोजाना करीब 1,10,000 बैरल कच्चा तेल आया. खाड़ी आपूर्तिकर्ताओं में केवल संयुक्त अरब अमीरात (UAE) से आयात 15.8% घटकर 4,60,000 bpd रहा. कुल मिलाकर, भारत के कुल तेल आयात में इन पांच पश्चिम एशियाई देशों की हिस्सेदारी अगस्त के 26% से उछलकर सितंबर में 36.7% पर पहुंच गई.
रूस से घटी सप्लाई
कमोडिटी ट्रैकर Kpler के आंकड़ों के मुताबिक, सितंबर में भारत का रूसी तेल आयात लगभग 9% घटकर 1.9 मिलियन बैरल प्रतिदिन (bpd) पर आ गया. अगस्त में यह 2.1 मिलियन बीपीडी था. जुलाई में रिकॉर्ड 2.8 मिलियन bpd छूने के बाद यह पांच महीने का निचला स्तर है.
यूक्रेन द्वारा रूस के तेल एवं गैस इंफ्रास्ट्रक्चर पर किए गए हमलों से रूसी क्रूड की उपलब्धता प्रभावित हुई. इसके अलावा चीनी रिफाइनरियों ने भी रूसी तेल की खरीद बढ़ा दी है. इससे भी भारत को कम तेल मिल रहा है. हालांकि, गिरावट के बावजूद सितंबर में भारत की कुल तेल खरीद में रूस की हिस्सेदारी 35% से ज्यादा बनी रही.
Sherni Fal Sabji Recipe: बरसात के मौसम में निमाड़ के बुरहानपुर में एक खास फल वाली सब्जी बनाई जाती है, जिसे बच्चे और बड़े सभी पसंद करते हैं. यह सब्जी शेरनी फल और चोली के दानों से बनती है, जिसका स्वाद खट्टा-मीठा होता है.
Sherni Fal Sabji Recipe: निमाड़ के बुरहानपुर में बरसात का मौसम आते ही खान-पान में भी बदलाव देखने को मिलता है. बारिश के दिनों में यहां बाजार में कई तरह की स्थानीय और मौसमी चीजें दिखाई देने लगती हैं. इन्हीं में से एक है शेरनी फल जिसका लोग फल के रूप में सेवन तो करते ही हैं लेकिन इसकी खास तरह की सब्जी भी बनाई जाती है. निमाड़ में बनने वाली यह सब्जी अपने खट्टे-मीठे स्वाद के लिए लोगों के बीच काफी पसंद की जाती है. निमाड़ की इस पारंपरिक सब्जी की एक खासियत यह भी बताई जाती है कि इसे बनाने के बाद करीब दो दिन तक रखा जा सकता है. बारिश के मौसम में शेरनी फल से बनने वाली यह सब्जी स्थानीय खान-पान और निमाड़ी स्वाद की अनोखी पहचान है.
एक्सपर्ट महिला ने दी जानकारी लोकल18 की टीम को फुला बाई ने बताया कि शेरनी फल की सब्जी खास तौर पर चोली के दानों के साथ बनाई जाती है. फल का हल्का खट्टा-मीठा स्वाद जब चोली के दानों के साथ मिल जाता है तो सब्जी का स्वाद और भी बढ़ जाता है. यही वजह है कि बारिश के मौसम में जब यह फल बाजार में आता है तो लोग इसे खरीदकर घर ले जाते हैं. खास बात यह है कि इस सब्जी को बच्चे और बड़े दोनों ही पसंद करते हैं.
ऐसे बनती है शेरनी फल की सब्जी इस पारंपरिक सब्जी को बनाने के लिए बहुत ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं होती. घर में आसानी से उपलब्ध होने वाली सामग्री से ही इसे तैयार किया जा सकता है. इसके लिए शेरनी फल चोली के दाने राई जीरा अदरक-लहसुन का पेस्ट प्याज नमक और तेल की जरूरत होती है. सबसे पहले शेरनी फल को अच्छी तरह साफ कर काट लिया जाता है. इसके बाद कड़ाही में तेल गर्म करके उसमें राई और जीरा डाला जाता है. तड़का लगने के बाद इसमें बारीक कटा प्याज और अदरक-लहसुन का पेस्ट डालकर भुना जाता है. इसके बाद चोली के दाने और कटे हुए शेरनी फल को इसमें डालकर आवश्यकतानुसार नमक मिलाया जाता है. सभी सामग्री को अच्छी तरह मिलाकर पकाया जाता है. जब तक फल और चोली के दाने अच्छी तरह पक न जाएं.
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होर्मुज स्ट्रेट में शुक्रवार को एक जहाज पर मिसाइल हमला हुआ। इस जहाज में 5 भारतीय सवार थे। ओमान में भारतीय दूतावास ने शनिवार को बताया कि पांचों भारतीय नाविकों को सुरक्षित बचा लिया गया है।
ये नाविक कुवैत के झंडे वाले टैंकर एमटी काजिमाह III पर सवार थे। यह कच्चे तेल से भरा था और अफ्रीका की ओर जा रहा था। हालांकि, यह हमला किसने किया, यह अभी जानकारी तक सामने नहीं आई।
फरवरी से अब तक होर्मुज में हमलो में 100 से ज्यादा भारतीय नाविक प्रभावित हो चुके हैं। वहीं, इन हमलों में 11 भारतीय नाविकों की जान गई।
खाड़ी क्षेत्र में जहाजों पर 4500 भारतीय नाविक
विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने इससे पहले मंगलवार को बताया था कि इस क्षेत्र में चल रहे व्यावसायिक जहाजों पर 4500 से ज्यादा भारतीय नाविक सवार हैं।
जायसवाल के मुताबिक, इस समय फारस की खाड़ी में भारत के झंडे वाले 6 कमर्शियल जहाज हैं। इसके अलावा 6 विदेशी झंडे वाले जहाज भी हैं, जो भारत के लिए सामान लेकर जा रहे हैं। इन 12 जहाजों पर करीब 163 भारतीय नाविक सवार हैं।
जायसवाल के मुताबिक, भारत का शिपिंग मंत्रालय इन जहाजों की आवाजाही पर नजर रख रहा है। भारतीय दूतावासों और स्थानीय एजेंसियों के साथ मिलकर नाविकों की सुरक्षा और उनकी स्थिति की जानकारी ली जा रही है।
उन्होंने बताया कि जरूरत पड़ने पर भारतीय दूतावास नाविकों की सुरक्षा और भलाई के लिए जरूरी कदम उठाते हैं। उन्होंने कहा कि विदेशों में काम कर रहे भारतीय नाविकों की सुरक्षा और उनकी भलाई भारत की प्राथमिकता है।
भारत ने संयुक्त राष्ट्र में नाविकों की सुरक्षा पर चिंता जताई थी
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने 26 सितंबर को संयुक्त राष्ट्र महासभा की 81वीं बैठक में व्यावसायिक जहाजों और नाविकों पर हमलों को लेकर चिंता जताई थी।
जयशंकर ने कहा था,
समुद्र में नए खतरे पहले से मौजूद जमीन से जुड़े संकटों को और बढ़ा रहे हैं। भारतीय नाविकों के साथ दूसरे देशों के नाविकों की भी जान गई है। यह पूरी तरह अस्वीकार्य है।
जयशंकर ने खाड़ी क्षेत्र में तुरंत तनाव कम करने और संयम बरतने की अपील भी की। उन्होंने कहा कि इससे आम लोगों के लिए काम कर रहे जहाजों के क्रू की सुरक्षा बनी रहेगी और ऊर्जा की सप्लाई के साथ-साथ दुनिया का व्यापार भी बिना रुकावट चलता रहेगा।
विदेश मंत्री एस जयशंकर संयुक्त राष्ट्र महासभा में बोलते हुए।
ट्रम्प ने ईरान का जंग खत्म करने का प्रस्ताव ठुकराया
अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने ईरान का युद्ध खत्म करने और होर्मुज खोलने का प्रस्ताव ठुकरा दिया। ट्रम्प ने व्हाइट हाउस के बाहर पत्रकारों से कहा कि ईरान समझौता करना चाहता है, क्योंकि वह बुरी तरह हार रहा है और उसके पास पैसा नहीं आ रहा।
उन्होंने कहा कि ईरान की कमाई होर्मुज से होने वाले कारोबार पर निर्भर है। अमेरिका ने इस समुद्री रास्ते पर सैन्य इतिहास की सबसे बड़ी नाकेबंदी की है, जो लोहे की दीवार जैसी है।
28 फरवरी से चल रही है अमेरिका-ईरान की लड़ाई
अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और उन खाड़ी देशों में हमले किए, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं।
अमेरिका का कहना है कि उसका मकसद ईरान की परमाणु क्षमता को कमजोर करना है। वहीं ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसे परमाणु तकनीक के इस्तेमाल का अधिकार है।
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रिपोर्ट- सऊदी अरब हूती विद्रोहियों पर हमला करेगा
सऊदी अरब यमन में हूती विद्रोहियों के खिलाफ जंग शुरू करने की तैयारी कर रहा है। रॉयटर्स की रिपोर्ट के मुताबिक, सऊदी 1 लाख से ज्यादा यमनी सैनिकों को उतार सकता है। पूरी खबर पढ़ें…
बिहार में गंडक नदी में उफान और तटबंध टूटने से सारण समेत 6 जिलों के करीब 255 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। इससे करीब 4 लाख की आबादी प्रभावित हुई है। 44 हजार लोग घर छोड़ चुके हैं। राज्य की प्रमुख नदियां भी उफान पर हैं। यूपी में आज सुबह से ज्यादातर जिलों में धूप निकली है। मौसम विभाग ने आज किसी भी जिले में बारिश का अलर्ट जारी नहीं किया है। राज्य में नदियां अब भी उफान पर हैं। गंगा, शारदा समेत 15 नदियां खतरे के निशान के करीब बह रही हैं। उन्नाव में सई नदी का पानी 12 से ज्यादा गांवों में घुस गया है। राजस्थान में अक्टूबर में भी दिन के समय तेज गर्मी है। तापमान 40°C के ऊपर पहुंच गया है। सबसे ज्यादा असर पश्चिमी जिलों में है। शुक्रवार को सबसे अधिक तापमान पिलानी (झुंझुनूं) में दर्ज हुआ। वहीं, पूर्वी जिलों में रात के तापमान में तेजी से गिरावट हो रही है। सीकर, भीलवाड़ा, उदयपुर और नागौर में रात में ठंडक बढ़ गई है। इन शहरों में शुक्रवार को न्यूनतम तापमान 20°C से नीचे रहा। सैटेलाइट मैप में देखें मानसूनी बादलों की स्थिति देशभर से मौसम की तस्वीरें राज्यों से मौसम की खबरें… राजस्थान: अक्टूबर में भी पारा 40 डिग्री के ऊपर, रात में ठंडक राजस्थान में अक्टूबर में भी दिन के समय तेज गर्मी है। पारा 40 डिग्री के ऊपर पहुंच गया है। सबसे ज्यादा असर पश्चिमी जिलों में है। शुक्रवार को सबसे अधिक तापमान पिलानी (झुंझुनूं) में दर्ज हुआ। पूरी खबर पढ़ें… यूपी: गोंडा में 25 हजार लोग बाढ़ में फंसे, उन्नाव के 12 गांवों में पानी यूपी में आज यानी शनिवार सुबह से ज्यादातर जिलों में धूप निकली है। मौसम विभाग ने आज किसी भी जिले में बारिश का अलर्ट जारी नहीं किया है। हालांकि बारिश तो थम गई है, लेकिन नदियां अब भी उफान पर हैं। पूरी खबर पढ़ें… बिहार: 6 जिलों के 255 गांव पानी में डूबे, 4 लाख आबादी बाढ़ से प्रभावित बिहार में बाढ़ की स्थिति गंभीर होती जा रही है। गंडक नदी में उफान और तटबंध टूटने से सारण समेत 6 जिलों के करीब 255 गांव बाढ़ की चपेट में हैं। इससे करीब 4 लाख की आबादी प्रभावित हुई है। 44 हजार लोग घर छोड़ चुके हैं। पूरी खबर पढ़ें… मध्य प्रदेश: राज्य के आधे हिस्से में सूखे जैसे हालात, 25 जिलों में ही सामान्य बारिश मध्य प्रदेश के आधे हिस्से में सूखे जैसे हालात हैं। 55 में से 30 जिलों में सामान्य बारिश का कोटा पूरा नहीं हुआ है। इनमें भी 11 जिले ऐसे हैं, जहां 80% से कम पानी गिरा। आलीराजपुर में तो आधी बारिश भी नहीं हुई। पूरी खबर पढ़ें… हरियाणा: अक्टूबर महीने में भी गर्मी बरकरार, महेंद्रगढ़ सबसे गर्म हरियाणा में अक्टूबर शुरू होने के बावजूद गर्मी से राहत नहीं मिली है। बारिश नहीं होने और मौसम शुष्क रहने से प्रदेश में दिन का तापमान बढ़ रहा है। शुक्रवार को प्रदेश के औसत अधिकतम तापमान में गुरुवार के मुकाबले 0.6 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हुई। पूरी खबर पढ़ें… पंजाब-चंडीगढ़: ड्राई रहेगा मौसम, बारिश के आसार नहीं पंजाब और चंडीगढ़ में मौसम अब लगातार ड्राई बना हुआ है। उत्तर-पश्चिमी हवाओं के असर से वातावरण में नमी कम हो रही है और बारिश के आसार भी कम बने हुए हैं। राज्य के औसत अधिकतम तापमान में 0.4 डिग्री की बढ़ोतरी हुई है। पूरी खबर पढ़ें… हिमाचल: आज से मानसून की विदाई के आसार, छह से आठ तक तेज बारिश हिमाचल प्रदेश से लगभग सवा तीन महीने बाद आज से मानसून की विदाई के आसार है। अगले 48 घंटे के भीतर पूरे प्रदेश से मानसून विदा हो सकता है। मौसम विज्ञान केंद्र शिमला के अनुसार अभी मानसून की वापसी के लिए परिस्थितियां अनुकूल बनी हुई हैं। पूरी खबर पढ़ें… उत्तराखंड: आज विदा होगा मानसून, 3-4 अक्टूबर को सभी जिलों में मौसम साफ उत्तराखंड से आज विदा मानसून हो जाएगा। अगले 24 घंटे में मानसून के प्रदेश के अधिकांश हिस्सों से लौटने की संभावना है। मौसम विभाग के अनुसार, 3 और 4 अक्टूबर को सभी 13 जिलों में मौसम शुष्क रहेगा। मैदानी इलाकों में सुबह हल्के से मध्यम कोहरे की स्थिति बन सकती है। पूरी खबर पढ़ें…