भाजपा सांसद और फिल्म अभिनेत्री कंगना रणौत के खिलाफ छात्रों को ‘गटर जनरेशन’ कहने और उनके अभिभावकों का अपमान करने के मामले में गुरुवार को जिला जज संजय कुमार मलिक की अदालत में सुनवाई हुई। वादी पक्ष ने मामले से जुड़े दस्तावेज पेश किए। यह मामला कंगना रणौत की सोशल मीडिया पर की गई टिप्पणी से जुड़ा है। आरोप है कि उन्होंने आंदोलन कर रहे छात्रों को ‘गटर जनरेशन’ कहा था और उनके अभिभावकों का अपमान किया था। इस मामले में राजीव गांधी बार के अध्यक्ष और वरिष्ठ अधिवक्ता रमाशंकर शर्मा ने परिवाद दायर किया था। 3 सितंबर को खारिज हुआ था परिवाद एमपी-एमएलए अदालत में 3 सितंबर को विशेष न्यायिक मजिस्ट्रेट अनुज कुमार सिंह ने परिवाद खारिज कर दिया था। आदेश में कहा गया था कि परिवाद में जिस घटना का उल्लेख किया गया है, उससे वादी न तो पीड़ित है और न ही व्यथित। इसके बाद इस आदेश को चुनौती देते हुए जिला अदालत में रिवीजन दाखिल किया गया। नीट पेपर लीक का भी किया उल्लेख परिवाद में नीट और अन्य परीक्षाओं में बार-बार पेपर लीक होने से करोड़ों छात्रों के प्रभावित होने का उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया कि कई छात्र तनाव में आकर आत्महत्या कर चुके हैं। पेपर लीक के विरोध में अलग-अलग जगहों पर प्रदर्शन भी हुए थे। परिवाद में कंगना रणौत की 27 जुलाई को सोशल मीडिया और इंस्टाग्राम पर आंदोलनकारी छात्रों के खिलाफ की गई टिप्पणी का भी हवाला दिया गया है।
Source link
कंगना के ‘गटर जनरेशन’ बयान मामले रिवीजन पर सुनवाई: वादी पक्ष ने कोर्ट में पेश किए दस्तावेज, 3 सितंबर को खारिज हुआ था परिवाद – Agra News
फिर नया प्लान …: 74 बंगला से चार इमली तक बनेंगे 23 मंजिला टॉवर – Bhopal News
शहर के सबसे हरे-भरे आवासीय इलाकों शिवाजी नगर, तुलसी नगर, चार इमली और 74 बंगले की तस्वीर बदलने की तैयारी है। हाउसिंग बोर्ड ने इन इलाकों के 4,537 सरकारी मकानों के रीडेवलपमेंट का नया प्लान तैयार किया है। पुराने क्वार्टरों की जगह 75 मीटर यानी करीब 23 मंजिल तक ऊंची इमारतें बनाने का प्रस्ताव है। पूरे इलाके को कछुए के आकार में विकसित करने का कॉन्सेप्ट तैयार किया है। इसे ‘कूर्म मंडल’ या ‘टॉरटॉइज सिटी’ नाम दिया गया है। प्लान के मुताबिक करीब 500 एकड़ के पूरे इलाके में सिर्फ 30% जमीन पर निर्माण होगा। बाकी हिस्से में बड़े पार्क, हरियाली से घिरी सड़कें, पैदल रास्ते और खुली जगहें होंगी। मकसद बहुमंजिला इमारतों से जमीन का बेहतर उपयोग और हरियाली बढ़ाना है। अभी इस इलाके में करीब 40 हजार पेड़ हैं। इन पेड़ों को अधिकतम बचाते हुए विकास का प्रस्ताव है। 26 को साधिकार समिति में…
12 जून को अपर मुख्य सचिव संजय दुबे की अध्यक्षता में हुई बैठक के 16 सुझावों के आधार पर प्लान तैयार किया गया। आगे विस्तृत योजना बनेगी। 26 अक्टूबर को मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली साधिकार समिति में इस पर चर्चा होगी। यूरोप के शहरों जैसा विकास
हाउसिंग बोर्ड के चेयरमैन ओम जैन के मुताबिक सीएम की मंशानुरूप भोपाल को यूरोप के शहरों की तरह ऐसे डेवलप करना है, जहां हरियाली के बीच लोग रहें। इसी कॉन्सेप्ट पर यह प्लान बनाया है। जल्द सारी औपचारिकताएं पूरी कराएंगे। यह है कूर्म मंडल का कॉन्सेप्ट हिंदू मान्यता में भगवान विष्णु के दूसरे अवतार कूर्म यानी कछुए को स्थिरता, संतुलन और सुरक्षा का प्रतीक माना है। इसी कॉन्सेप्ट पर तैयार डिजाइन में कछुए का सिर शासन और नेतृत्व का प्रतीक होगा। कवच वाले हिस्से में आवासीय इमारतें और बीच में बड़ा पार्क होगा। अन्य हिस्सों में बाजार व जरूरी सुविधाएं होंगी। बड़ा आकर्षण… सेंट्रल पार्क, चारों ओर हाईराइज बिल्डिंग
मुख्य आकर्षण बीच में बनने वाला सेंट्रल पार्क होगा। इसके चारों ओर हाईराइज रेसीडेंशियल भवन होंगे। लिंक रोड नंबर 1, 2 और 3 के आसपास ग्रीन कॉरिडोर विकसित होगा। मेन रोड के किनारे बाजार और दुकानों के लिए जगह होगी। मौजूदा स्कूल, अस्पताल, निगम मुख्यालय और दूसरे प्रमुख भवनों को बनाए रखते हुए आसपास विकास होगा। टीओडी… यानी हर सुविधा वॉ़किंग डिस्टेंस पर मिलेगी
यह प्लान ट्रांजिट ओरिएंटेड डेवलपमेंट (टीओडी) के आधार पर बनाया है। लोगों को स्कूल, अस्पताल, बाजार व अन्य सुविधाओं के लिए लंबी दूरी तय न करनी पड़े। पैदल रास्तों और साइकिल ट्रैक के साथ मेट्रो-इलेक्ट्रिक बसों की सुविधा को भी जोड़ा जाएगा। प्राकृतिक ढलान के अनुसार छोटे तालाब और पोखर विकसित करने की योजना भी है। तीन चरणों में होगा विकास
हाउसिंग बोर्ड के अधिकारियों के अनुसार शहर के बीच इस पूरे इलाके का विकास 3 चरणों में प्रस्तावित है। फिलहाल यह शुरुआती प्लान है। आगे इसकी विस्तृत योजना बनाई जाएगी। 9 साल में 3 योजनाएं रुकीं, अब चौथी पर कोशिश… 2017 : स्मार्ट सिटी का विरोध। शिवाजी नगर और तुलसी नगर को एबीडी एरिया में शामिल कर नए सिरे से बसाने की योजना स्थानीय विरोध के कारण आगे नहीं बढ़ी। 2022 : चार इमली का प्लान रुका। 178 बंगले तोड़कर 20 इमारतों में 218 फ्लैट और 3 हेक्टेयर में प्लॉट-बंगले बेचने का प्रस्ताव था। तत्कालीन सीएस इकबाल सिंह बैस की मौजूदगी में समिति ने पर्यावरणीय नुकसान की आशंका पर इसे रोका। 2024 : शिवाजी-तुलसी नगर में 29 हजार पेड़ों पर खतरे का खुलासा। मंत्रियों के नए बंगलों की योजना का भास्कर ने खुलासा किया। विरोध के बाद योजना रुकी।
Source link
सभी वार्डों में चलेगा ‘स्वच्छता संकल्प’ अभियान: छठ महापर्व तक दिन में 3 बार उठेगा कूड़ा, खुले में फेंका तो सील होंगी दुकानें – Patna News
दीपावली और छठ महापर्व के दौरान शहर को चकाचक रखने के लिए पटना नगर निगम ने विशेष सफाई का शेड्यूल जारी किया है। 25 अक्टूबर से 10 नवंबर तक सभी वार्डों में ‘स्वच्छता संकल्प’ अभियान चलाया जाएगा। पर्व-त्योहारों में घरों और दुकानों से निकलने वाले अतिरिक्त कचरे को देखते हुए निगम ने दिन में तीन बार कचरा उठाव अनिवार्य कर दिया है। गली-मोहल्लों से लेकर मुख्य सड़कों, नालों और सार्वजनिक स्थलों की मुस्तैदी से सफाई के साथ ही खुले में कचरा फेंकने वालों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी। बार-बार उल्लंघन करने वाली दुकानों और प्रतिष्ठानों को सील भी किया जाएगा। खाली प्लॉट और ट्रांसफॉर्मर के पास बने कचरा प्वाइंट होंगे साफ, दोबारा फेंका तो जुर्माना : शहर के निजी खाली प्लॉटों, ट्रांसफॉर्मर के आसपास, सड़क किनारे और अन्य सार्वजनिक स्थलों पर बने अवैध कचरा प्वाइंट्स को चिह्नित कर विशेष तौर पर साफ कराया जाएगा। दोबारा कचरा न जमा हो, इसके लिए स्थानीय लोगों से समन्वय के साथ निगरानी रखी जाएगी। खुले में कचरा फेंकने वाले घरों और दुकानों पर भारी जुर्माना ठोका जाएगा। नियम तोड़ने पर प्रतिष्ठानों पर ताला लगाने तक की कार्रवाई होगी। कचरा गाड़ियों के 3 ट्रिप अनिवार्य, फेरे कम हुए तो कटेगा एजेंसी का भुगतान वार्डों से कचरे के त्वरित निष्पादन के लिए हर कचरा वाहन को प्रतिदिन अनिवार्य रूप से तीन ट्रिप लगाने होंगे। जीपीएस और मॉनिटरिंग सेल के जरिए वाहनों के फेरों पर नजर रखी जाएगी। निर्धारित तीन ट्रिप पूरे नहीं करने वाले वाहनों और संबंधित एजेंसियों के भुगतान में कटौती की जाएगी। येलो-रेड स्पॉट और ओवरब्रिज की होगी रोजाना धुलाई निगम प्रशासन ने शहर के सभी छह अंचलों में येलो स्पॉट (अक्सर गंदे रहने वाले स्थान) और रेड स्पॉट (कचरा डंपिंग प्वाइंट) चिह्नित कर उनकी नियमित धुलाई और विशेष सफाई के निर्देश दिए हैं। इसके अलावा शहर के सभी ओवरब्रिज के ऊपर और नीचे की सड़कों की भी रोजाना धुलाई कराई जाएगी, ताकि धूल और गंदगी न रहे। खुले एवं क्षतिग्रस्त मैनहोल और नालों की मरम्मत का काम भी अभियान के तहत तुरंत पूरा किया जाएगा। अपील : सड़क पर न गिराएं निर्माण सामग्री, प्लास्टिक पर पूरी तरह रोक नगर निगम ने शहरवासियों, दुकानदारों और व्यवसायियों से अपील की है कि वे कूड़ा केवल निर्धारित गाड़ी या डस्टबिन में ही डालें। सड़कों के किनारे गिट्टी-बालू या अन्य निर्माण सामग्री जमा करने और प्रतिबंधित सिंगल यूज प्लास्टिक के इस्तेमाल से पूरी तरह परहेज करें। जलस्तर घटा : गंगा घाटों पर दो पालियों में सफाई शुरू 15 दिनों में तय होंगे सुरक्षित और खतरनाक घाट छठ महापर्व को लेकर पटना नगर निगम ने 109 गंगा घाटों को चिह्नित किया है। गंगा का जलस्तर घटने के साथ ही इन घाटों पर विशेष सफाई अभियान तेज कर दिया गया है। अगले 15 दिनों में जलस्तर और सुरक्षा मानकों के आधार पर सुरक्षित और खतरनाक घाटों की अंतिम सूची जारी की जाएगी। जेपी सेतु, पाटीपुल, मीनार घाट, कलेक्ट्रेट, भद्र घाट, नौजर, दमराही, मंगल तालाब क्षेत्र और दीघा श्मशान घाट समेत कई इलाकों में पानी उतरने के बाद भारी मात्रा में गाद और कचरा जमा हो गया है। इसे हटाने के लिए निगम ने प्रत्येक घाट पर 2-3 सफाईकर्मियों को तैनात कर दो पालियों में काम शुरू कराया है। कुदाल एवं जरूरी उपकरणों से गाद हटाई जा रही है और कचरे का सुरक्षित निस्तारण किया जा रहा है। जलजमाव वाले हिस्सों में मच्छरों के पनपने से रोकने के लिए नियमित फॉगिंग और एंटी-लार्वा का छिड़काव भी शुरू हो गया है। इन दो मोर्चों पर भी निगम की तैयारी 1. घाटों पर नागरिक सुविधाएं : श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए एप्रोच रोड की मरम्मत, अस्थायी चेंजिंग रूम, हाई-मास्ट लाइट, वॉच टावर, सीसीटीवी कैमरे और पब्लिक एड्रेस सिस्टम लगाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। 2. पार्क और तालाबों में वैकल्पिक व्यवस्था : गंगा घाटों पर भीड़ का दबाव कम करने के लिए शहर के 45-50 पार्कों, मैदानों और तालाबों में कृत्रिम घाट बनाए जाएंगे। यहां निगम पानी के टैंकरों और रोशनी की मुकम्मल व्यवस्था करेगा।
Source link
एमपी में अक्टूबर के आखिरी सप्ताह रहेगा बारिश का दौर: हिमाचल के 10 शहरों में 10॰C से नीचे गिरा, केदारनाथ में लगातार तीसरे दिन बर्फबारी
- Hindi News
- National
- Himachal Pradesh Temperature Drop & Kedarnath Snowfall | Madhya Pradesh Rain
नई दिल्ली43 मिनट पहले
- कॉपी लिंक
मध्यप्रदेश में अक्टूबर के आखिरी सप्ताह में भी बारिश का दौर जारी रहेगा। गुरुवार को इंदौर के पास हातोद में तेज, जबकि धार के पीथमपुर में हल्की बारिश हुई। वहीं, अनूपपुर के अमरकंटक में पारा 15.8 डिग्री सेल्सियस रहा। मौसम विभाग के मुताबिक, अगले 2 दिन इंदौर संभाग और नर्मदापुरम में बारिश होगी।
हिमाचल प्रदेश के अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सुबह-शाम व रात में ठंड पड़ रही है। राज्य के 10 शहरों का तापमान 10 डिग्री से नीचे गिर चुका है। वेस्टर्न डिस्टर्बेंस एक्टिव होने से तीन दिन बाद इसमें और ज्यादा गिरावट आएगी।
उत्तराखंड के 4 जिलों में आज बारिश के आसार हैं। इनमें उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली और पिथौरागढ़ शामिल हैं। केदारनाथ में गुरुवार को लगातार तीसरे दिन बर्फबारी हुई। इसके चलते गुरुवार सुबह यहां का तापमान -8°C पहुंच गया।
उत्तर-पूर्वी मानसून की सक्रियता के कारण तमिलनाडु के कई हिस्सों में तेज बारिश हो रही है। चेन्नई के कुछ हिस्सों और दक्षिणी जिलों में जलजमाव की स्थिति पैदा हो गई है। कन्याकुमारी के निचले इलाके में कई घरों में पानी घुस गया है।
सैटेलाइट मैप में देखें मानसूनी बादलों की स्थिति

देशभर से मौसम की तस्वीरें

मध्यप्रदेश में गुरुवार दोपहर बाद इंदौर के पास हातोद में तेज बारिश हुई।

उत्तराखंड के केदारनाथ धाम में गुरुवार को लगातार तीसरे दिन बर्फबारी हुई।

उत्तर-पूर्वी मानसून की सक्रियता के कारण तमिलनाडु के कई हिस्सों में तेज बारिश हो रही है। तस्वीर तिरुपत्तूर की है।

बंगाल की खाड़ी से आ रही नमी के चलते झारखंड में ठंड ने दस्तक दे दी है। सुबह और रात में ठिठुरन बढ़ने लगी है।


नेतन्याहू हारे या जीतें, फिलिस्तीनियों की मुश्किलें बरकरार रहेंगी: पक्ष-विपक्ष कोई अलग देश बनाने को तैयार नहीं, वामपंथी पार्टियों ने भी एजेंडा बदला
तेल अवीव40 मिनट पहले
- कॉपी लिंक
इजराइल में 27 अक्टूबर को चुनाव होने हैं। प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की सत्ता बचेगी या जाएगी, इसका फैसला जनता करेगी, लेकिन इस चुनाव से फिलिस्तीनियों की जिंदगी में कोई बड़ा बदलाव आएगा, इसकी उम्मीद कम है।
वजह यह है कि नेतन्याहू के विरोध में खड़ी ज्यादातर पार्टियां भी फिलिस्तीन को अलग देश बनाने के पक्ष में नहीं हैं। गाजा में युद्ध शुरू होने के बाद इजराइल की संसद में फिलिस्तीनियों के खिलाफ कई प्रस्तावों को समर्थन मिला।
यहां तक कि जो वामपंथी पार्टियां पहले फिलिस्तीन के साथ समझौते और दो अलग देशों के रास्ते की बात करती थीं, उनके एजेंडे में भी बदलाव दिख रहा है। ऐसे में सत्ता बदलने के बावजूद फिलिस्तीनियों के लिए हालात बदलना मुश्किल नजर आता है।

इजराइल में वामपंथ और दक्षिणपंथ का क्या मतलब है?
दुनिया के ज्यादातर देशों में वामपंथी पार्टियां गरीबों और कमजोर वर्गों की मदद करने, सरकारी खर्च बढ़ाने और प्रवासियों के अधिकारों की बात करती हैं। वहीं, दक्षिणपंथी पार्टियां देश की सीमाएं सख्त रखने, व्यापार में सरकारी हस्तक्षेप कम रखने और राष्ट्रीय पहचान पर जोर देती हैं।
इजराइल में वामपंथ और दक्षिणपंथ का फर्क मुख्य रूप से फिलिस्तीन को लेकर उनके रुख से तय होता रहा है। वामपंथी पार्टियां फिलिस्तीनियों के साथ बातचीत करके विवाद सुलझाने और जमीन को लेकर समझौता करने की बात करती रही हैं।
वहीं, दक्षिणपंथी पार्टियां फिलिस्तीन को अलग देश बनाने का विरोध करती हैं और कब्जे वाले इलाकों में यहूदी बस्तियां बसाने का समर्थन करती हैं।
हालांकि अब यह बीते दिनों की बात हो गई है। 7 अक्टूबर 2023 को हमास हमले के बाद इजराइल की राजनीति दक्षिणपंथ की तरफ मुड़ गई है। फिलहाल ये स्थिति है कि वामपंथी पार्टियां इस मुद्दे को छू ही नहीं रहे हैं।

इजराइल में पार्टियां और गठबंधन कैसे काम करते हैं?
इजराइल की संसद को नेसेट कहा जाता है। इसमें कुल 120 सीटें हैं। आज तक कोई भी पार्टी अपने दम पर इतनी सीटें नहीं जीत पाई कि वह अकेले सरकार बना सके।
सरकार बनाने के लिए प्रधानमंत्री को कम से कम 61 सांसदों का समर्थन चाहिए। इसके लिए सबसे बड़ी पार्टी को छोटी पार्टियों के साथ गठबंधन करना पड़ता है।
नेतन्याहू का मौजूदा गठबंधन
नवंबर 2022 के चुनाव के बाद नेतन्याहू की दक्षिणपंथी पार्टी लिकुड 32 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। इसके बाद उसने 64 सीटों का गठबंधन बनाया।
इस गठबंधन में दो कट्टर दक्षिणपंथी पार्टियां, शास और यूनाइटेड तोराह जूडिज्म शामिल थीं। इसके अलावा कट्टर दक्षिणपंथी धार्मिक जायनिज्म गठबंधन भी सरकार का हिस्सा था। इसमें धार्मिक जायनिज्म और ओत्जमा येहुदित पार्टियां शामिल थीं।
यह इजराइल के इतिहास की सबसे कट्टर दक्षिणपंथी सरकार मानी गई।
बेजालेल स्मोट्रिच धार्मिक जायनिज्म पार्टी के प्रमुख हैं। वे वित्त मंत्री हैं और कब्जे वाले वेस्ट बैंक में नागरिक मामलों पर भी उनका अधिकार है। इनमें यहूदी बस्तियों की योजना बनाने से जुड़े मामले शामिल हैं।
इतमर बेन ग्विर ओत्जमा येहुदित पार्टी के प्रमुख हैं। वे राष्ट्रीय सुरक्षा मंत्री रहे हैं और पुलिस उनके मंत्रालय के अधीन आती है।
स्मोट्रिच और बेन ग्विर दोनों ने कब्जे वाले इलाकों को इजराइल में मिलाने और वहां यहूदी बस्तियों का विस्तार करने की मांग की है। दोनों नेता कई बार सरकार से समर्थन वापस लेने की धमकी देकर अपनी नीतियां लागू कराने की कोशिश कर चुके हैं।

इजराइल का विपक्ष कौन है?
इजराइल में विपक्ष का मतलब यह नहीं है कि सभी पार्टियां वामपंथी हैं।
पिछली संसद में यायर लापिड के नेतृत्व वाली येश अतिद सबसे बड़ी विपक्षी पार्टी थी। उसके पास 24 सीटें थीं। बेनी गैंट्ज की ब्लू एंड व्हाइट पार्टी दूसरी प्रमुख विपक्षी पार्टी थी। दोनों पार्टियां मध्यमार्गी मानी जाती हैं।
एविगडोर लिबरमैन की यिसराइल बेइतेनु पार्टी धर्मनिरपेक्ष और दक्षिणपंथी है। लिबरमैन पहले नेतन्याहू के सहयोगी रह चुके हैं, लेकिन वे अति-रूढ़िवादी यहूदी पुरुषों को सैन्य सेवा से छूट देने का विरोध करते हैं।
लेबर पार्टी अब डेमोक्रेट्स का हिस्सा है। पिछली संसद में यह अकेली यहूदी पार्टी थी, जो खुले तौर पर इजराइल-फिलिस्तीन संघर्ष के समाधान के लिए दो अलग देशों के गठन का समर्थन करती थी।
अरब पार्टियों का क्या रुख है?
अरब नेतृत्व वाली पार्टियां इजराइल के फिलिस्तीनी नागरिकों का प्रतिनिधित्व करती हैं। उनकी राजनीतिक विचारधारा अलग-अलग है, लेकिन वे फिलिस्तीनी इलाकों पर इजराइली कब्जे का विरोध करती हैं।
मंसूर अब्बास की पार्टी राम ने 2021 में इजराइल की सरकार में शामिल होकर इतिहास बनाया था। वह ऐसा करने वाली पहली अरब पार्टी थी।
हदाश और ताल पार्टी कभी इजराइल की सरकार में शामिल नहीं हुई। इस चुनाव में वह एक औऱ अरब पार्टी बालाद के साथ मिलकर चुनाव लड़ रही है।

—————————–
ये खबर भी पढ़ें….
चुनाव से पहले नेतन्याहू ने पीएम मोदी से बात की:इजराइल के स्वतंत्रता दिवस पर मशाल जलाने का न्योता दिया
इजराइल में चुनाव से 5 दिन पहले प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से फोन पर बात की है। नेतन्याहू ने मोदी को अगले साल 12 मई को इजराइल के स्वतंत्रता दिवस पर मशाल जलाने के लिए आमंत्रित किया। पूरी खबर यहां पढ़ें…
ऑडी संग CCTV में दिखा विक्रांत जैसा शख्स: अलीगढ़ हिट एंड रन केस में हादसे से आधा घंटे पहले का मिला सीसीटीवी, टहलते और सिगरेट पीते भाजपा नेता के भतीजे जैसा युवक – Aligarh News
हलवाई मनोज की मौत के हिट एंड रन मामले में देर रात सामने आए नए सीसीटीवी फुटेज ने जांच को अहम मोड़ दे दिया है। फुटेज में एक शख्स हादसे से करीब आधा घंटे पहले जीटी रोड पर ऑडी रोककर टहलता और सिगरेट पीता दिखाई दे रहा है। उसकी शक्ल भाजपा नेता देवराज सिंह के भतीजे विक्रांत से हूबहू मिलती-जुलती बताई जा रही है। इसी आधार पर पुलिस ने विक्रांत की तलाश तेज कर दी है। हादसे के समय मनोज के साथ बाइक पर सवार घायल भी विक्रांत की पहचान कर चुका है। जिस उत्तराखंड नंबर की ऑडी से हादसा हुआ, वह देवराज सिंह के नाम पंजीकृत है। मामले में हत्या की धारा में मुकदमा दर्ज है। हालांकि, सीसीटीवी में दिख रहा शख्स विक्रांत ही है और हादसे के वक्त कार कौन चला रहा था, इसकी पुष्टि आरोपी के पकड़े जाने और पूछताछ के बाद ही होगी।
दिनभर की जांच के बाद देर रात मिला फुटेज
पुलिस दिनभर हादसे से जुड़े साक्ष्य जुटाने में लगी रही। इसी पड़ताल के बाद देर रात जीटी रोड का सीसीटीवी फुटेज मिला। इसमें शख्स गाड़ी रोककर बाहर टहलता और सिगरेट पीता नजर आ रहा है। फुटेज हादसे से करीब आधा घंटे पहले का बताया जा रहा है। उसकी शक्ल विक्रांत से काफी मिलती-जुलती होने के कारण पुलिस इस सुराग को गंभीरता से ले रही है। बाइक पर मनोज के साथ मौजूद घायल की ओर से विक्रांत की पहचान किए जाने के बाद जांच में यह पहलू और अहम हो गया है।
विक्रांत की तलाश तेज, एसपी सिटी कर रहे मॉनिटरिंग
सीसीटीवी फुटेज और घायल के बयान के आधार पर पुलिस विक्रांत की तलाश में जुटी है। एसपी सिटी खुद मामले की मॉनिटरिंग कर रहे हैं। अब तक सामने आए साक्ष्यों के आधार पर जांच का फोकस विक्रांत पर है। पुलिस उसे पकड़कर पूछताछ करना चाहती है, ताकि फुटेज में दिख रहे शख्स की पहचान और हादसे के समय कार चला रहे व्यक्ति की भूमिका स्पष्ट हो सके।
उत्तराखंड नंबर की ऑडी देवराज के नाम
हादसे में इस्तेमाल ऑडी उत्तराखंड नंबर की है और भाजपा नेता देवराज सिंह के नाम पंजीकृत है। देवराज का कहना है कि दुर्घटना के समय कार उनका ड्राइवर चला रहा था। पुलिस इस पहलू की भी जांच कर रही है। फिलहाल नए फुटेज में दिख रहे शख्स की पहचान की पुष्टि और हादसे के समय चालक की भूमिका तय करना जांच के प्रमुख बिंदु हैं।
एसएसपी बोले- पकड़े जाने पर स्पष्ट होगी तस्वीर
एसएसपी नीरज जादौन ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज हादसे से करीब आधा घंटे पहले का है। इसमें संबंधित व्यक्ति जीटी रोड पर दिखाई दे रहा है। वह विक्रांत जैसा ही लग रहा है। उसे लोग पहचान भी रहे हैं। अब विक्रांत के पकड़े जाने और पूछताछ के बाद स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। फिलहाल पुलिस सभी पहलुओं पर जांच कर रही है।
Source link
उदयपुर में 6 साल में बदला वोटिंग पैटर्न: झाड़ोल-फलासिया में बंपर वोटिंग, भींडर-वल्लभनगर और मावली समेत 4 समितियों में गिरा ग्राफ; 3 नई समितियों में दिखा उत्साह – Udaipur News
उदयपुर में 6 साल बाद हुए चुनाव का वोटिंग पैटर्न भी पूरा तरह बदला हुआ नजर आया। आदिवासी बाहुल्य झाड़ोल-फलासिया में बंपर वोटिंग हुई। तो मैदानी इलाकों की भींडर, वल्लभनगर और मावली समेत 4 समितियों में वोटिंग ग्राफ गिरा। हालांकि इस बार नई बनाई गई 3 पंचायत समितियों में अच्छा उत्साह देखने को मिला। गांवों की सरकार चुनने के लिए गुरुवार को पहले चरण का मतदान हुआ। इस चरण में जिले की 10 पंचायत समितियों के सदस्यों और इन क्षेत्रों में आने वाले जिला परिषद सदस्यों के लिए वोट डाले गए। इन सभी 10 पंचायत समितियों में कुल 66.88 फीसदी मतदान हुआ। चुनाव में नई बनी नाई पंचायत समिति 81.05 फीसदी वोटिंग के साथ पूरे जिले में टॉप पर रही। वहीं, कुराबड़ पंचायत समिति में सबसे कम 58.97 फीसदी वोट पड़े। पहले चरण के 160 निर्वाचन क्षेत्रों में कुल 7,33,784 मतदाता पंजीकृत थे। इनमें से 4,90,757 मतदाताओं ने बूथ पर पहुंचकर वोट डाले। अभी जिले में दो और चरणों में पंचायत समिति और जिला परिषद सदस्यों के लिए वोटिंग होनी बाकी है। नई पंचायत समितियों में पहली बार वोटिंग, मतदाताओं में दिखा उत्साह इस बार नाई, ओगणा और घासा को नई पंचायत समिति बनाया गया है। इन तीनों जगहों पर पहली बार पंचायत समिति सदस्यों के लिए चुनाव हुए हैं। पहली बार वोटिंग होने से यहां के ग्रामीणों में काफी उत्साह देखा गया। नाई में सबसे अधिक 81.05 फीसदी मतदान दर्ज किया गया। इसी तरह ओगणा में 74.77 फीसदी और घासा में 65.51 फीसदी मतदाताओं ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया। आदिवासी इलाकों में बढ़ा मतदान, 4 समितियों में गिरा ग्राफ इस बार आदिवासी बहुल इलाकों में वोटिंग का प्रतिशत बढ़ा है, जबकि मैदानी क्षेत्रों की चार पंचायत समितियों में मतदान कम हुआ है। झाड़ोल में पिछली बार 74.04 फीसदी वोट पड़े थे, जो इस बार 1.32 फीसदी बढ़कर 75.36 फीसदी हो गए। फलासिया में भी वोटिंग 69.51 फीसदी से बढ़कर 73.57 फीसदी पर पहुंच गई। यहां 4.06 फीसदी का उछाल आया है। गिर्वा में भी मतदान 68.8 फीसदी से मामूली बढ़कर 69.41 फीसदी रहा। दूसरी तरफ, भींडर में सबसे ज्यादा 6.47 फीसदी की गिरावट आई है। यहां पिछली बार 66.65 फीसदी वोटिंग हुई थी, जो इस बार घटकर 60.18 फीसदी ही रह गई। कुराबड़ में भी मतदान 63.8 फीसदी से गिरकर 58.97 फीसदी पर आ गया। इसी तरह मावली में वोटिंग 66.79 से घटकर 62.15 फीसदी और वल्लभनगर में 63.13 से घटकर 61.29 फीसदी रही। पिछली बार 63.97% वोटिंग हुई थी, इस बार 4 वार्ड बढ़े छह साल पहले वर्ष 2020 में हुए चुनावों में उदयपुर जिला परिषद के सभी वार्डों को मिलाकर औसत 63.97 फीसदी मतदान हुआ था। उस समय जिला परिषद में कुल 43 वार्ड थे। इस बार 4 नए वार्ड बढ़ने से जिला परिषद में कुल 47 वार्ड हो गए हैं। वर्ष 2020 के चुनाव में 43 में से 27 सीटों पर भाजपा ने जीत दर्ज की थी। वहीं कांग्रेस को 15 सीटें मिली थीं और 1 सीट पर निर्दलीय प्रत्याशी जीता था। तब जिला परिषद में बोर्ड बनाने के लिए बहुमत का आंकड़ा 22 सीट का था। बहुमत से 5 सीट ज्यादा जीतने पर भाजपा का बोर्ड बना था और ममता कुंवर पंवार को जिला प्रमुख बनाया गया था। 10 पंचायत समितियों में 2020 और 2026 के मतदान की तुलना चुनाव की तस्वीर देखें…
Source link
दिग्विजय सिंह की पदयात्रा पर NHRC का नोटिस: बच्चों से नारे लगवाने की शिकायत पर राष्ट्रीय मानव अधिकार आयोग ने मांगा जवाब – Bhopal News
पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह की यात्रा में बच्चों को शामिल करने और उनसे राजनीतिक नारे लगवाने के आरोपों पर राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (NHRC) ने संज्ञान लिया है।
.
आयोग ने मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक (DGP) को नोटिस जारी कर मामले की जांच कराने और दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट (ATR) प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं।
आयोग के 22 अक्टूबर 2026 के पत्र के अनुसार, शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया है कि दिग्विजय सिंह की यात्रा में बच्चों से राजनीतिक नारे लगवाए गए। इस कथित घटना के वीडियो और तस्वीरें 22 अक्टूबर को फेसबुक पर साझा किए जाने का भी उल्लेख शिकायत में किया गया है।
शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि बच्चों को यात्रा में लाने के लिए पैसे दिए गए होंगे। उसने मामले की जांच कर आयोजकों और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की मांग की है।
बाल अधिकारों के उल्लंघन के आरोपों की जांच होगी
राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के सदस्य प्रियंक कानूनगो की अध्यक्षता वाली पीठ ने संरक्षण मानवाधिकार अधिनियम, 1993 की धारा 12 के तहत मामले का संज्ञान लिया है। आयोग ने शिकायत में लगाए गए आरोपों को प्रथम दृष्टया बच्चों के अधिकारों का उल्लंघन प्रतीत होने वाला बताया है।
आयोग ने मध्यप्रदेश के मुख्य सचिव और डीजीपी को निर्देश दिए हैं कि शिकायत में लगाए गए आरोपों की जांच कराई जाए। जांच में यह भी पता लगाया जाएगा कि क्या बच्चों को पैसे देकर यात्रा में शामिल किया गया था या किसी तरह से उनका इस्तेमाल किया गया। इसके साथ ही लागू बाल संरक्षण कानूनों के संभावित उल्लंघन की भी जांच करने को कहा गया है।
बच्चों के नारे लगाते हुए पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने गुरुवार सुबह वीडियो अपने फेसबुक पेज पर शेयर किया था।
इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय को भी नोटिस
आयोग ने केंद्रीय इलेक्ट्रॉनिकी एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय के सचिव को भी निर्देश दिए हैं कि कथित घटना से जुड़े बच्चों के वीडियो और तस्वीरों के इस्तेमाल के मामले को देखें और अपनी कार्रवाई रिपोर्ट प्रस्तुत करें।
आयोग ने सभी संबंधित अधिकारियों से पत्र प्राप्त होने के दो सप्ताह के भीतर कार्रवाई रिपोर्ट मांगी है। फिलहाल आयोग के पत्र में आरोपों की जांच के निर्देश दिए गए हैं। शिकायत में लगाए गए आरोपों की पुष्टि या किसी की जिम्मेदारी तय होने का उल्लेख नहीं है।
20 अक्टूबर को उज्जैन से शुरू हुई यात्रा
दिग्विजय सिंह की करीब 950 किलोमीटर की ‘सत्य सनातन स्वाभिमान यात्रा’ 20 अक्टूबर को विजयादशमी के दिन उज्जैन से शुरू हुई थी। यात्रा का लक्ष्य ओरछा स्थित रामराजा सरकार मंदिर होते हुए अयोध्या के श्रीराम मंदिर तक पहुंचना है। यात्रा के घोषित उद्देश्यों में धार्मिक स्थलों पर चंदे और चढ़ावे में पारदर्शिता, कथित अनियमितताओं की जांच तथा वोट चोरी के आरोपों पर जवाबदेही की मांग शामिल है।
यात्रा की शुरुआत से पहले उज्जैन में चिंतामण गणेश और महाकालेश्वर मंदिर में दर्शन-पूजन किया गया था। इसके बाद पार्थिव शिवलिंग पूजन, कन्या भोज और भंडारे के आयोजन के साथ पदयात्रा शुरू हुई।
गुरुवार को तराना पहुंची पदयात्रा
यात्रा के निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार, 21 अक्टूबर को पदयात्रा उज्जैन से देवास जिले के सिंदुरिया गांव पहुंची। तीसरे दिन, 22 अक्टूबर को सिंदुरिया से तराना तक 15 किलोमीटर की पदयात्रा के बाद तराना में रात्रि विश्राम कर रही है।
मोतिहारी में 2 बाइक की भिड़ंत, एक युवक की मौत: राजमिस्त्री का काम कर बाइक से घर लौट रहा था – Motihari (East Champaran) News
मोतिहारी के दरपा थाना क्षेत्र में देर शाम एक दर्दनाक सड़क हादसा हो गया। श्यामपुर-नरकटिया रोड पर दो बाइकों की आमने-सामने की जोरदार टक्कर में एक युवक की मौत हो गई, जबकि दूसरा युवक गंभीर रूप से घायल हो गया। सूचना मिलने के बाद मौके पर पहुंची पुलिस ने घायल को इलाज के लिए अस्पताल भेजा और शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। घटना दरपा थाना क्षेत्र के श्यामपुर-नरकटिया रोड पर गम्हरिया कला गांव से आगे छतवन के पास की है। बताया जा रहा है कि दोनों बाइक स्पलेंडर प्लस थीं, जिनकी आमने-सामने की टक्कर इतनी भीषण थी कि दोनों बाइक के परखच्चे उड़ गए और दोनों सवार सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से जख्मी हो गए। स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई प्राप्त जानकारी के अनुसार मृतक की पहचान बैकुंठवा निवासी 18 वर्षीय मुकेश कुमार के रूप में हुई है। वह अपनी बाइक से नरकटिया की तरफ जा रहा था। वहीं घायल युवक की पहचान गम्हरिया कला निवासी 24 वर्षीय रमेश कुमार बैठा के रूप में हुई है। रमेश प्रतिदिन की तरह राजमिस्त्री का काम कर बाइक से घर लौट रहा था। इसी दौरान गम्हरिया और नरकटिया के बीच छतवन के पास दोनों की बाइक आपस में टकरा गई। हादसे के बाद मौके पर अफरा-तफरी मच गई और स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई। लोगों ने तुरंत इसकी सूचना दरपा थाना पुलिस को दी। बाइकों को जब्त कर मामले की छानबीन जारी सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची और स्थानीय लोगों के सहयोग से दोनों घायलों को अस्पताल पहुंचाया। पुलिस ने घायल मुकेश कुमार को आदापुर सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। वहीं दूसरे घायल रमेश कुमार को उसके परिजन नरकटिया स्थित एक निजी अस्पताल लेकर गए, जहां उसका इलाज चल रहा है। उसकी स्थिति गंभीर बताई जा रही है। दरपा थानाध्यक्ष अनीश कुमार ने बताया कि बाइक की आमने-सामने की टक्कर में बैकुंठवा निवासी मुकेश कुमार की मौत हो गई है। शव को पोस्टमार्टम के लिए मोतिहारी सदर अस्पताल भेजा गया है। दूसरे घायल का इलाज चल रहा है। पुलिस दोनों बाइकों को जब्त कर मामले की छानबीन कर रही है।
Source link
1 जनवरी से बदल जाएगा वॉट्सऐप इस्तेमाल करने का तरीका, फोन में सिम रखना होगा जरूरी!
Last Updated:
WhatsApp New Rule : अगले साल की शुरुआत से वॉट्सऐप चलाने वालों को नया नियम फॉलो करना पड़ सकता है. साइबर ठगी और फ्रॉड पर लगाम कसने के लिए दूरसंचार विभाग बिना सिम के वॉट्सऐप चलाने पर रोक लगा सकता है. इससे उन उपभोक्ताओं पर असर पड़ सकता है, जो बिना सिम के सिर्फ वाईफाई के सहारे अपना वॉट्सऐप चलाते हैं.
दूरसंचार विभाग बिना सिम के वॉट्सऐप चलाने पर रोक लगा सकता है.
नई दिल्ली. WiFi पर बिना SIM वाले फोन में WhatsApp चलाते हैं? तो आने वाले दिनों में आपकी परेशानी बढ़ सकती है. दूरसंचार विभाग (DoT) के SIM Binding निर्देशों के तहत WhatsApp, Telegram और Signal जैसे मैसेजिंग ऐप्स के इस्तेमाल के नियम बदल सकते हैं. नए नियम के तहत जिस मोबाइल नंबर से मैसेजिंग ऐप का अकाउंट जुड़ा है, उसका SIM उसी डिवाइस में होना जरूरी हो सकता है, जिस पर ऐप इस्तेमाल किया जा रहा है. ऐसे में फोन से SIM निकालने या SIM के निष्क्रिय होने पर ऐप की सेवाएं प्रभावित होने की आशंका है.
सरकार का मकसद ऑनलाइन ठगी, फर्जी अकाउंट और मोबाइल नंबर के गलत इस्तेमाल पर लगाम लगाना है. आरोप है कि साइबर ठग भारतीय नंबर से अकाउंट का वेरिफिकेशन कराने के बाद भी SIM के बिना मैसेजिंग ऐप्स का इस्तेमाल जारी रखते हैं. SIM Binding से ऐसे मामलों को रोकने में मदद मिलने की उम्मीद है. इसी पर लगाम कसने के लिए 1 जनवरी, 2027 से वॉट्सऐप नियमों में बदलाव किया जा रहा है.
किन यूजर्स पर पड़ेगा असर?
इस बदलाव का असर उन लोगों पर पड़ सकता है, जो दो फोन इस्तेमाल करते हैं या पुराने स्मार्टफोन में केवल WiFi के जरिए WhatsApp चलाते हैं. eSIM इस्तेमाल करने वाले और iPhone यूजर्स के लिए भी तकनीकी व्यवस्था अहम होगी. हालांकि, इस नियम का अलग-अलग डिवाइस और यूजर्स पर कितना असर पड़ेगा, यह इसके तकनीकी क्रियान्वयन पर निर्भर करेगा. खासकर डुअल फोन, WiFi पर चलने वाले WhatsApp और eSIM यूजर्स को लेकर स्थिति स्पष्ट होना अभी बाकी है.
अभी क्या है वॉट्सऐप चलाने का तरीका
वर्तमान में आप किसी भी मोबाइल में सिम लगाकर वॉट्सऐप को इंस्टॉल कर सकते हैं. ऐप चलाने के लिए आपके मोबाइल नंबर पर ओटीपी आएगा और एक बार वेरिफिकेशन पूरा होने के बाद आप सिम निकालने के बावजूद ऐप चला सकते हैं. दूरसंचार विभाग ने इसी नियम को बदलने की तैयारी कर ली है. विभाग का मानना है कि यूजर्स की पहचान बनाए रखने और फर्जीवाड़े या ऑनलाइन फ्रॉड पर लगाम कसने के लिए बिना सिम के वॉट्सऐप लगाने पर रोक लगानी होगी. हालांकि, इसका असर काफी हद तक यूजर्स पर भी पड़ेगा, लेकिन सुरक्षा के लिए यह कदम उठाना जरूरी माना जा रहा है.
About the Author
प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…


