झालावाड़ में 11वें राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस पर राजकीय जिला आयुर्वेद अस्पताल में कई कार्यक्रम हुए। इनकी शुरुआत सुबह पंचकर्म शिविर से हुई। दोपहर में भगवान धन्वंतरि का पूजन और माल्यार्पण कर कार्यक्रम शुरू किया गया। आयुर्वेद के उपनिदेशक डॉ. ओमप्रकाश शर्मा ने दीप जलाकर कार्यक्रम का उद्घाटन किया। उन्होंने पंचकर्म शिविर का दौरा किया और इलाज के लिए आए मरीजों से चिकित्सा व्यवस्था और इलाज के बारे में जानकारी ली। सहायक निदेशक दुर्गालाल सस्ता ने स्वस्थ जीवनशैली के महत्व पर बात की। उन्होंने कहा कि नियमित दिनचर्या, संतुलित खाना, योग और व्यायाम को जीवन का हिस्सा बनाकर कई बीमारियों से बचा जा सकता है। आयुर्वेद दिवस के नोडल अधिकारी डॉ. रिंकेश कुमार यादवेंद्र ने बताया कि राष्ट्रीय आयुर्वेद दिवस पर जिले के सभी आयुर्वेद औषधालयों और अस्पतालों में मुफ्त स्वास्थ्य शिविर लगाए गए। उन्होंने कहा कि बीमारी का इंतजार करने के बजाय पहले से ही स्वास्थ्य का ध्यान रखना जरूरी है। तेजी से बदलती जीवनशैली, गलत खान-पान, मोटापा, शुगर, हाई ब्लड प्रेशर और मानसिक तनाव के समय में आयुर्वेद की स्वास्थ्य सुरक्षा की सोच और भी अहम हो जाती है। डॉ. यादवेंद्र ने यह भी कहा कि आयुर्वेद सिर्फ बीमारियों का इलाज नहीं करता, बल्कि स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा को भी उतना ही महत्व देता है। आयुर्वेद का मुख्य मकसद “स्वस्थस्य स्वास्थ्य रक्षणम्, आतुरस्य विकार प्रशमनम्” है, यानी स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य की रक्षा करना और बीमार व्यक्ति के रोगों को दूर करना। प्रमुख चिकित्सा अधिकारी डॉ. नवल टेलर ने बताया कि स्वस्थ व्यक्ति, स्वस्थ समाज और स्वस्थ पर्यावरण आपस में जुड़े हैं। स्वास्थ्य का मतलब सिर्फ बीमारी से मुक्त होना नहीं है, बल्कि व्यक्ति, परिवार और पर्यावरण के मिले-जुले स्वास्थ्य पर भी ध्यान देना जरूरी है। इस कार्यक्रम में डॉ. रामकेश मीणा, डॉ. संदीप निर्मल, डॉ. स्नेहा रावल, कंपाउंडर चंद्रेश, अनीता भील, रामबाबू मीणा, राजवीर मीणा, परिचारक प्रेम कंवर, संजू कंवर, उपभोक्ता संचालक नीरज व्यास, अमित सोनी और प्रदीप मेरोठा सहित अस्पताल के अधिकारी-कर्मचारी मौजूद रहे।
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Dahi Thikhari Recipe: पाली की पारंपरिक दही ठिखारी अपने तीखे, चटपटे और देसी स्वाद के लिए खास पहचान रखती है. लहसुन, सूखी लाल मिर्च और सरसों के तेल का तड़का इसके स्वाद को और भी खास बना देता है. हालांकि दही डालते समय अक्सर इसके फटने की समस्या आती है. इस रेसिपी में बताई गई आसान ‘फूंक मारो’ ट्रिक से दही को फटने से बचाया जा सकता है. मसाला भूनने के बाद गैस बंद कर उसे थोड़ा ठंडा करें और फिर फेंटा हुआ गाढ़ा दही मिलाएं. बाजरे की रोटी, पराठे या चावल के साथ परोसी गई यह चटपटी सब्जी खाने का स्वाद बढ़ा देती है.











