Sunday, November 8, 2026
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धनतेरस पर बिजली आपूर्ति में सुधार: बिजली व्यवस्था को लेकर उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष ने ऊर्जा अधिकारियों से की मुलाकात – Lucknow News




लखनऊ में धनतेरस के अवसर पर पूरे उत्तर प्रदेश में बिजली आपूर्ति सामान्य रही। प्रदेश के किसी भी हिस्से से बिजली आपूर्ति बाधित होने की शिकायत सामने नहीं आई। इस संबंध में उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष ने शक्ति भवन में प्रमुख सचिव ऊर्जा एवं पावर कॉरपोरेशन के अध्यक्ष रणवीर प्रसाद से मुलाकात कर विस्तृत चर्चा की। इस दौरान प्रदेश में बिजली आपूर्ति की स्थिति और उपभोक्ताओं को मिलने वाली सुविधाओं से जुड़े विषयों पर बातचीत हुई। धनतेरस जैसे प्रमुख त्योहार पर निर्बाध बिजली आपूर्ति को लेकर उपभोक्ताओं की ओर से कोई शिकायत नहीं मिलने को महत्वपूर्ण माना गया।



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10 लाख की वापसी को लेकर साइबर पुलिस पर सवाल: प्रेस रिलीज, पीड़ित के बयान में अंतर; आखिर रुपए लौटाने का मामला क्या है? – Gayaji News




गया में 10 लाख रुपए की वापसी को लेकर साइबर पुलिस की कार्रवाई पर ही सवाल खड़े हो रहे हैं। रकम वापस मिलने की कहानी में पुलिस की प्रेस रिलीज और पीड़ित के वीडियो बाइट के बीच कई अहम अंतर सामने आए हैं। पुलिस की ओर से जारी प्रेस रिलीज में कारोबारी के खाते से भूलवश दूसरे खाते में रकम ट्रांसफर होने की बात कही गई है। वहीं, पीड़ित के वीडियो बाइट में मोबाइल कंपनी का काम लेने के सिलसिले में 10 लाख रुपए ट्रांसफर करने और प्रभात पांडे नाम के व्यक्ति की ओर से धोखाधड़ी किए जाने का दावा है। दोनों ही बातें गया पुलिस की ओर से जारी की गई हैं। ऐसे में सवाल है कि आखिर 10 लाख रुपए की वापसी का वास्तविक मामला क्या है। प्रेस रिलीज में गलती, बाइट में धोखाधड़ी का दावा गया पुलिस की प्रेस रिलीज के अनुसार, विक्की इंटरप्राइजेज के मालिक साजिद इकबाल, पिता मोहम्मद फखरुद्दीन, निवासी वार्ड संख्या-18, उर्दू बाजार, शेरघाटी ने 30 मार्च 2026 को साइबर थाना में लिखित शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायत में बताया गया कि भूलवश उनके बैंक खाते से 10 लाख रुपये दूसरे खाते में ट्रांसफर हो गए। यह खाता विंटेज मैप वेंचर प्राइवेट लिमिटेड के नाम से दर्ज था। इसके उलट, पीड़ित के वीडियो बाइट में मोहम्मद साजिद इकबाल ने बताया कि 22 अक्टूबर 2026 को मोबाइल कंपनी का काम लेने के सिलसिले में उन्होंने जो वेंचर्स प्राइवेट लिमिटेड के अकाउंट में 10 लाख रुपए ट्रांसफर किए थे। इसी दौरान प्रभात पांडे नाम के व्यक्ति ने उनके साथ फ्रॉड किया। उन्होंने यह भी कहा कि 7 नवंबर 2026 को कंपनी की ओर से उनके 10 लाख रुपये वापस कर दिए गए और रकम उनके खाते में आ गई। कंपनी ने लौटाए पैसे या पुलिस ने कराए वापस यहीं से पुलिस की कहानी में सबसे बड़ा पेंच सामने आता है। प्रेस रिलीज में गया साइबर थाना की तकनीकी जांच और कार्रवाई के बाद कारोबारी के खाते में पूरी रकम वापस कराने का दावा किया गया है। वहीं, वीडियो बाइट में पीड़ित सीधे तौर पर कंपनी की ओर से रकम लौटाए जाने की बात कह रहे हैं। दोनों बयानों में रकम वापसी का श्रेय अलग-अलग तरीके से सामने आता है। शिकायत की तारीख, रकम ट्रांसफर होने की तारीख और संबंधित कंपनी के नाम में भी अंतर है। प्रेस रिलीज में 30 मार्च की शिकायत और Vantage Mep Ventures Private Limited का उल्लेख है, जबकि बाइट में 22 अक्टूबर की घटना और Zo Ventures Private Limited का नाम लिया गया है। पुलिस के अपने दो बयानों में सवाल गया पुलिस की ओर से जारी दोनों बयानों में सामने आए अंतर को स्पष्ट करना जरूरी है। क्या दोनों कंपनियां एक ही मामले से जुड़ी हैं। क्या शिकायत की तारीख में अंतर है या मामला अलग है। और रकम वापस कराने में कंपनी की भूमिका क्या रही? या फिर पीड़ित पक्ष पर साइबर पुलिस का कोई दवाब है। या फिर पूरी दाल ही काली है। इन सवालों का जवाब पुलिस की ओर से स्पष्ट किया जाना चाहिए।



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एमपी सरकार ₹100 कमा रही खर्च कर रही ₹124: लाड़ली बहना का खर्च ₹22000 करोड़, विकास कार्यों पर पहले चार महीने में केवल 23% खर्च – Madhya Pradesh News




दीपावली पर प्रदेश के बाजार रोशनी से जगमगा रहे हैं, लेकिन मध्य प्रदेश सरकार का खजाना वित्तीय दबाव से जूझ रहा है। सरकार की कमाई और खर्च के बीच बड़ा अंतर है। सरकार 100 रुपए कमा रही है तो करीब 124 रुपए खर्च कर रही है। इस अंतर को पूरा करने के लिए उसे लगातार बाजार से कर्ज लेना पड़ रहा है। त्योहार से ठीक पहले 3 नवंबर को सरकार ने बाजार से 4 हजार करोड़ रुपए का नया कर्ज लिया। अप्रैल से अक्टूबर के बीच वह 45 हजार करोड़ रुपए का कर्ज ले चुकी थी। सरकार का कहना है कि बाजार से लिए गए कर्ज का इस्तेमाल विकास परियोजनाओं और स्थायी परिसंपत्तियों के निर्माण में किया जाता है। हालांकि, वित्त विभाग के आंकड़ों के मुताबिक वित्त वर्ष के शुरुआती चार महीनों में पूंजीगत व्यय के बजट का केवल 23% ही खर्च हो सका। ऐसे में सवाल है कि जब सरकार लगातार कर्ज ले रही है, तो विकास परियोजनाओं पर खर्च की रफ्तार धीमी क्यों है? दिवाली पर पढ़िए, मध्यप्रदेश सरकार के बजट में कर्ज, नियमित खर्च और विकास कार्यों की क्या स्थिति है। कमाई के हर ₹100 में से ₹45 वेतन, पेंशन और ब्याज पर सरकार के बजट पर वेतन, पेंशन और पुराने कर्ज के ब्याज का बड़ा बोझ है। वित्त वर्ष 2026-27 के बजट अनुमानों के मुताबिक यह राशि सरकार की अनुमानित राजस्व प्राप्तियों ₹3,08,703 करोड़ का करीब 44.7% है। इसका सीधा मतलब यह है कि सरकार राज्य के खजाने में आने वाले हर 100 रुपए में से करीब 45 रुपए सिर्फ अधिकारियों-कर्मचारियों की सैलरी, पेंशन और पुराने कर्जों का ब्याज भरने में ही खर्च कर देती है। हर महीने ₹4,100 करोड़ सिर्फ सब्सिडी और फ्री योजनाओं के लिए वेतन और ब्याज के अलावा, आम लोगों और किसानों से जुड़ी कल्याणकारी योजनाओं और सब्सिडी का मासिक बोझ भी बेहद भारी है। सरकार को हर महीने लाड़ली बहना, बिजली सब्सिडी और अन्य सहायता योजनाओं के लिए करीब ₹4,100 करोड़ यानी सालाना लगभग ₹49,200 करोड़ का बंदोबस्त करना पड़ रहा है। चुनाव से पहले लागू 4 बड़ी योजनाओं का ₹24,537 करोड़ का भार तत्कालीन शिवराज सरकार द्वारा चुनाव से ठीक पहले लागू की गई चार प्रमुख योजनाओं से खजाने पर इस साल ₹24,537 करोड़ का वित्तीय भार आ रहा है। विकास बजट का 77% अब भी खर्च होना बाकी सब्सिडी, वेतन, पेंशन और ब्याज के खर्च के बीच बुनियादी ढांचा परियोजनाओं पर बजट खर्च की रफ्तार धीमी है। सरकार ने सड़क, पुल, सिंचाई, बिजली और पेयजल जैसी परियोजनाओं के लिए ₹78,920 करोड़ का पूंजीगत व्यय बजट रखा था। लेकिन जुलाई तक इसमें से ₹17,836 करोड़ ही खर्च हुए। यानी शुरुआती चार महीनों में पूंजीगत व्यय बजट का करीब 23% खर्च हुआ, जबकि ₹61,084 करोड़ यानी 77% राशि खर्च होना बाकी थी। पिछले साल की समान अवधि की तुलना में पूंजीगत भुगतान की रफ्तार 21% कम बताई गई है। विभागवार आंकड़ों के मुताबिक, आर्थिक सेवाओं के लिए तय बजट का 31% और सामान्य सेवाओं का केवल 5.3% खर्च हुआ। एक्सपर्ट बोले- कमाई हो रही लेकिन खर्च कहीं और हो रहा अर्थशास्त्रियों के मुताबिक, सरकार के सामने तीन बड़ी चुनौतियां हैं। पहली, अपने संसाधनों से कर राजस्व बढ़ाना। दूसरी, लाड़ली बहना और बिजली सब्सिडी जैसी योजनाओं के लिए हर महीने करीब ₹4,100 करोड़ का इंतजाम करना। तीसरी, विकास परियोजनाओं पर पूंजीगत खर्च की रफ्तार बढ़ाना, ताकि रोजगार और कारोबार को गति मिले। आर्थिक मामलों के जानकार राजेश जैन कहते हैं कि हाल ही में देश का GST कलेक्शन ₹2.3 लाख करोड़ रहा। इसमें मध्यप्रदेश का भी योगदान है। यानी राजस्व संग्रह हो रहा है, लेकिन सवाल यह है कि सरकार इस राशि का इस्तेमाल किन मदों में कर रही है। जैन के मुताबिक, कुछ योजनाओं का लाभ सीधे व्यक्तियों को मिलता है। ऐसी योजनाओं को आमतौर पर फ्रीबीज कहा जाता है। चुनावी वादों को पूरा करने के लिए सरकार इन योजनाओं पर बड़ी राशि खर्च कर रही है। सरकार की आमदनी का अधिक हिस्सा सड़क, बिजली, सिंचाई और अन्य बुनियादी ढांचे पर खर्च होना चाहिए। इससे प्रदेश की विकास क्षमता बढ़ सकती है। FRBM एक्ट क्या है? FRBM (राजकोषीय उत्तरदायित्व और बजट प्रबंधन) अधिनियम, 2003 भारत में एक महत्वपूर्ण कानून है, जिसे सरकार के वित्तीय अनुशासन को मजबूत करने और राजकोषीय घाटे को नियंत्रित करने के लिए बनाया गया है। इसका मुख्य उद्देश्य सरकारी खर्चों में पारदर्शिता लाना, कर्ज के बोझ को कम करना और देश की दीर्घकालिक आर्थिक स्थिरता सुनिश्चित करना है। राज्यों के लिए कर्ज लेने की सीमा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 293(3) के तहत, केंद्र सरकार राज्यों के लिए कर्ज लेने की सीमा (नेट बॉरोइंग सीलिंग) निर्धारित करती है। सामान्य तौर पर, राज्यों को अपनी सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) के 3% तक कर्ज लेने की अनुमति होती है। हालांकि, विशेष परिस्थितियों या नीतिगत बदलावों के आधार पर केंद्र सरकार इसमें समय-समय पर बदलाव कर सकती है।



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घर पर ऐसे बनाएं पकरी बरांवा की प्रसिद्ध बरा मिठाई, बस 3 चीजों की पड़ेगी जरूरत

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नवादा के पकरी बरांवा की प्रसिद्ध बरा मिठाई अब घर पर आसानी से बना सकते हैं. इसे बनाने के लिए सिर्फ मैदा, चीनी और रिफाइंड तेल जैसी 3 चीजों की जरूरत पड़ती है. यह मिठाई दो घंटे में तैयार हो जाती है. इसका कुरकुरा और स्वादिष्ट स्वाद हर किसी को बहुत पसंद आता है.

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Recipe: बिहार के गया और नवादा क्षेत्र में पकरी बरांवा की प्रसिद्ध बरा मिठाई बहुत पसंद की जाती है. यह अपनी खास कुरकुराहट और मुंह में घुल जाने वाले स्वाद के लिए जानी जाती है. त्योहारों के मौसम में इस मिठाई की मांग काफी बढ़ जाती है. लोग इसे खरीदकर मेहमानों को भी परोसते हैं. अब इस पारंपरिक मिठाई को घर पर भी आसानी से बनाया जा सकता है.

मात्र 3 चीजों की जरूरत
पकरी बरांवा के रहने वाले सरयू चौधरी पिछले 25 वर्षों से इस मिठाई के कारोबार से जुड़े हैं. उनका कहना है कि इसे बनाने के लिए बहुत ज्यादा सामान की जरूरत नहीं पड़ती है. यह मिठाई सिर्फ 3 मुख्य चीजों से तैयार हो जाती है. इसमें मैदा, चीनी और रिफाइंड तेल की जरूरत होती है. इसे बनाने में कुल 2 घंटे का समय लगता है.

बनाने की आसान विधि
बरा मिठाई बनाने के लिए सबसे पहले मैदा लिया जाता है. मैदे में थोड़ा घी या रिफाइंड का मोयन मिलाया जाता है. इसके बाद मैदे को धीरे-धीरे गूंथा जाता है. फिर इसके छोटे-छोटे गोलाकार आकार बनाए जाते हैं, जिन्हें बरा कहा जाता है.

तैयार किए गए बरा को कम आंच पर रिफाइंड तेल या घी में तला जाता है. तलने के बाद इसे बाहर निकाल लिया जाता है. इसके बाद चीनी की चाशनी तैयार की जाती है. चाशनी बनाते समय इस बात का खास ध्यान रखना पड़ता है कि बरा को एक साथ चाशनी में नहीं डुबोया जाता है. चाशनी को बरा के ऊपर थोड़ा-थोड़ा करके डाला जाता है.

अगर आप भी त्योहारों के खास मौके पर कुछ अलग और पारंपरिक बनाना चाहते हैं, तो इस आसान तरीके से घर पर ही पकरी बरांवा का प्रसिद्ध बरा तैयार कर सकते हैं.

About the Author

Prashun Singh

प्रसून सिंह को मीडिया में 7 साल काम करने का अनुभव है. खबरों को डिजिटल प्लेटफॉर्म पर रोचक अंजाद में पेश करना खासियत है. दैनिक भास्कर अखबार में इंटर्नशिप के साथ करियर की शुरुआत हुई.

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लालकृष्ण आडवाणी का 99वां जन्मदिन आज: मोदी ने लिखा- प्रभु उन्हें दीर्घायु प्रदान करें; भाजपा पूजा-हवन से कार्यक्रमों की शुरुआत करेगी




लाल कृष्ण आडवाणी का आज 99वां जन्मदिन है। पीएम मोदी ने उनके लिए विशेष चिट्‌ठी लिखी है। जिसमें उन्होंने उनके व्यक्तित्व और जीवनयात्रा के बारे में लिखा है। साथ ही उन्होंने आडवाणी के बेहतर स्वास्थ्य और दीघार्यु की प्रार्थना भी की है। 8 नवंबर 1927 को देव दीपावली के दिन कराची में जन्मे आडवाणी का जीवन आधुनिक भारत के अनेक ऐतिहासिक अध्यायों का साक्षी रहा है। 1947 में विभाजन की त्रासदी ने उन्हें अपना घर और परिचित परिवेश छोड़ना पड़ा। मोदी ने लिखा- प्रभु श्रीराम और दीपोत्सव के साथ जुड़ा यह दिन इसलिए भी विशेष है कि इसी वर्ष हम जनसंघ की स्थापना के 75 वर्ष, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के 100 वर्ष और डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती मना रहे हैं। इधर, भारतीय जनता पार्टी आडवाणी के जन्मदिन पर विशेष कार्यक्रम आयोजित करेगी। यह कार्यक्रम भाजपा मुख्यालय में होगा। कार्यक्रम की शुरुआत पूजा और हवन से होगी। पीएम के लेटर की बड़ी बातें मोदी ने बताईं 2 बातें पहली- उनकी वैचारिक स्पष्टता और बौद्धिक प्रखरता। उनके भाषण, लेखन और संसदीय हस्तक्षेप विचारों की गहराई और अभिव्यक्ति की सटीकता के उदाहरण हैं। दूसरी- छद्म धर्मनिरपेक्षता के विरुद्ध निर्भीकता से अपनी बात रखी और राष्ट्र प्रथम के विचार को राजनीतिक विमर्श के केंद्र में स्थापित किया। जनसंघ से लेकर भाजपा तक उन्होंने कार्यकर्ताओं की कई पीढ़ियां तैयार कीं। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के रूप में संगठन को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाया। ‘उनका जीवन लोकतंत्र के लिए प्रतिबद्ध रहा’ आडवाणी जी और अटल बिहारी वाजपेयी जी की मित्रता और राजनीतिक साझेदारी भारतीय लोकतंत्र की अनूठी मिसाल है। पांच-छह दशकों तक दोनों ने परस्पर विश्वास, सम्मान और सहयोग के साथ काम किया। राजनीति के इतिहास में ऐसे उदाहरण बहुत कम मिलते हैं, जब दो बड़े कद के नेता इतने लंबे समय तक एक-दूसरे के साथ खड़े रहे हों। उनके जीवन का एक और महत्वपूर्ण आयाम लोकतंत्र के प्रति उनकी प्रतिबद्धता है। आपातकाल के दौरान उन्होंने संविधान और लोकतांत्रिक मूल्यों की रक्षा के लिए संघर्ष किया। 1977 में सूचना एवं प्रसारण मंत्री के रूप में और बाद में गृह मंत्री तथा उप प्रधानमंत्री के रूप में उन्होंने प्रशासनिक कुशलता का परिचय दिया। राष्ट्रीय सुरक्षा और आतंकवाद के विरुद्ध उनका दृढ़ रुख सदैव उल्लेखनीय रहेगा। सोमनाथ से अयोध्या तक की ऐतिहासिक रथयात्रा उनके जीवन का एक निर्णायक अध्याय है। मुझे इसकी परिकल्पना, तैयारी और संचालन से जुड़ने का अवसर मिला। वर्षों बाद अयोध्या में प्रभु श्रीराम के भव्य मंदिर का निर्माण उस संकल्प की ऐतिहासिक परिणति बना। ‘सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी, निजी जिंदगी में सादगी’ आडवाणी जी ने अपने आचरण से हमेशा सार्वजनिक जीवन में ईमानदारी और शुचिता का उदाहरण प्रस्तुत किया है। जबकि, सादगी और संवेदनशीलता उनका एक विशेष पक्ष है। वे अध्ययनशील हैं, इतिहास, साहित्य, सिनेमा और रंगमंच में गहरी रुचि रखते हैं। उनकी पुस्तक ‘माई कंट्री माई लाइफ’ उनके अनुभवों और ऐतिहासिक दृष्टि का महत्वपूर्ण दस्तावेज है। अपनी सिंधी संस्कृति से उनका जुड़ाव और सिंधु दर्शन को लोकप्रिय बनाने में उनका योगदान भी उल्लेखनीय है। उनकी इस लंबी यात्रा में कमला आडवाणी जी का योगदान भी अविस्मरणीय है। वे हर परिस्थिति में उनकी शक्ति और संबल बनी रहीं। राष्ट्र के प्रति उनके असाधारण योगदान के लिए वर्ष 2024 में उन्हें भारत रत्न से सम्मानित किया गया। यह सम्मान उनके जीवनभर के राष्ट्रसेवा के समर्पण के प्रति देश की कृतज्ञता का प्रतीक है।



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गादी आइजनकोट इजराइल के अगले PM बन सकते हैं: राष्ट्रपति ने सरकार बनाने के लिए कहा, 6 हफ्ते में संसद में बहुमत साबित करना होगा


तेल अवीव33 मिनट पहले

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गादी आइजनकोट इजराइल के अगले प्रधानमंत्री हो सकते हैं। राष्ट्रपति इसाक हर्जोग ने उन्हें अगली सरकार बनाने के लिए चुना है।

आइजनकोट को सरकार बनाने के लिए 6 हफ्ते का समय मिलेगा। इस दौरान उन्हें दूसरी पार्टियों से बातचीत करके गठबंधन बनाना होगा और संसद में बहुमत साबित करना होगा।

सरकार बनाने के लिए 61 सासंदों का समर्थन चाहिए। गादी आइजनकोट के गठबंधन को 6 पार्टियों के 67 सांसदों ने समर्थन दिया है।

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के पास मात्र 46 सांसदों का समर्थन है। जो बहुमत के आंकड़े से बहुत दूर है। इस कारण राष्ट्रपति ने उन्हें सरकार बनाने का पहला मौका नहीं दिया।

आइजनकोट को अरब पार्टियों की जॉइंट लिस्ट ने भी समर्थन दिया है।

आइजनकोट को अरब पार्टियों की जॉइंट लिस्ट ने भी समर्थन दिया है।

छह पार्टियों ने आइजनकोट का नाम सुझाया

आइजनकोट को छह पार्टियों के 67 सांसदों का समर्थन मिला है। इनमें चार यहूदी पार्टियां और दो अरब पार्टियां शामिल हैं। चार यहूदी पार्टियों के पास कुल 48 सीटें हैं, जबकि दो अरब पार्टियों के पास 19 सीटें हैं।

सबसे बड़ी मुश्किल यह है कि इन छह पार्टियों में से तीन यहूदी पार्टियां अरब पार्टियों के साथ सरकार बनाने को तैयार नहीं हैं। आइजनकोट ने भी चुनाव से पहले अरब पार्टियों को सरकार में शामिल करने से इनकार किया था। दूसरी ओर, अरब पार्टियों का कहना है कि वे नेतन्याहू को सत्ता से हटाने के लिए आइजनकोट का समर्थन कर रही हैं।

जॉइंट लिस्ट गठबंधन को जानिए

यह इजराइल की अरब आबादी के अधिकारों की बात करने वाला राजनीतिक गठबंधन है। इसमें तीन अलग-अलग पार्टियां शामिल हैं। गठबंधन में अरब नेताओं के साथ यहूदी नेता भी हैं।

हदाश: वामपंथी पार्टी है। अरब और यहूदी नागरिकों की समानता, मजदूरों के अधिकारों और फिलिस्तीन के साथ शांति की वकालत करती है।

ताल: अहमद तिबी की पार्टी है। अरब नागरिकों के समान अधिकार, शिक्षा और रोजगार के बेहतर अवसरों और फिलिस्तीनी राज्य की स्थापना का समर्थन करती है।

बलद: अरब राष्ट्रवादी विचारधारा वाली धर्मनिरपेक्ष पार्टी है। इजराइल को ऐसा देश बनाने की वकालत करती है, जहां सभी नागरिकों को समान अधिकार मिलें।

राष्ट्रपति की बैठक में किसने किसका समर्थन किया?

आइजनकोट के समर्थन में

यिस्राइल बेतेनु: अविग्दोर लिबरमैन की पार्टी ने आइजनकोट को समर्थन दिया है। इसके पास 7 सीटें हैं।

राअम: मंसूर अब्बास की अरब पार्टी के 8 सांसदों ने आइजनकोट को सरकार बनाने का मौका देने की सिफारिश की।

जॉइंट लिस्ट: 11 सांसदों वाले इस अरब गठबंधन ने भी आइजनकोट का समर्थन किया।

याशर और डेमोक्रेट्स: आइजनकोट के नेतृत्व वाले विपक्षी खेमे की इन पार्टियों ने भी उनका नाम सुझाया। इसके अलावा नफ्ताली बेनेट के नेतृत्व वाली बियाचाद पार्टी ने भी उनका समर्थन किया।

नेतन्याहू के समर्थन में

लिकुड: बेंजामिन नेतन्याहू की अपनी पार्टी के सांसदों ने उन्हें दोबारा सरकार बनाने का मौका देने की सिफारिश की।

शास: आर्ये डेरी के नेतृत्व वाली इस पार्टी ने भी नेतन्याहू का समर्थन किया।

रिलिजियस जायनिज्म: बेजालेल स्मोट्रिच की पार्टी के सांसदों ने नेतन्याहू के पक्ष में सिफारिश की।

ओत्जमा येहुदित: इतमार बेन ग्विर की पार्टी ने भी नेतन्याहू को समर्थन दिया।

यूनाइटेड तोराह जूडिज्म: इस पार्टी के सांसदों ने भी नेतन्याहू के नेतृत्व में सरकार बनाने का समर्थन किया।

किसी का समर्थन नहीं किया

यूनाइटेड तोरा जूडिज्म (UTJ): किसी भी नेता के नाम की सिफारिश नहीं की। इसके पास 7 सीटें हैं। यह पार्टी लंबे समय से नेतन्याहू की सहयोगी रही है, लेकिन इस बार उसने उनसे दूरी बना ली।

इजराइल की संसद नेसेट।

इजराइल की संसद नेसेट।

चुनाव में नेतन्याहू के गठबंधन को ज्याद सीट मिली थी

27 अक्टूबर को हुए चुनाव में नेतन्याहू की लिकुड पार्टी 27 सीटें जीतकर सबसे बड़ी पार्टी बनी थी। हालांकि, उसके साथ गठबंधन में शामिल धार्मिक और राष्ट्रवादी पार्टियों को मिलाकर कुल 53 सीटें ही मिलीं।

वहीं, आइजनकोट के गठबंधन में शामिल चार पार्टियों ने 48 सीटें जीतीं। यह गठबंधन केंद्र से लेकर वामपंथ और दक्षिणपंथ तक की पार्टियों को मिलाकर बना है। चुनाव में अरब पार्टियों को रिकॉर्ड 19 सीटें मिलीं।

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प्रयागराज में पुलिस चौकी के पास लूट: 3 लुटेरों ने पीछे से जकड़कर पिस्टल सटाई, 18 हजार कैश-मोबाइल छीना – Prayagraj (Allahabad) News




प्रयागराज में दीपावली के मद्देनजर अलर्ट के बावजूद बदमाशों ने सनसनीखेज वारदात अंजाम दी। लीडर रोड पुलिस चौकी के सामने ही एक युवक को पिस्टल सटाकर लूट लिया। तीन बदमाशों ने युवक को घेरकर उससे 18 हजार रुपये नकद और मोबाइल फोन छीन लिया। वारदात शनिवार रात करीब 9:30 बजे की है। घटना के बाद पीड़ित शिकायत दर्ज कराने के लिए दो थानों के चक्कर काटता रहा। बाद में उसने पुलिस चौकी के पास पहुंचकर डायल 112 पर सूचना दी। करेली का रहने वाला है मोनू
करेली के निहालपुर निवासी मो. महताब उर्फ मोनू (25) बावर्ची का काम करता है। उसने पुलिस को बताया कि एक दिन पहले उसने कहीं खाना बनाने का काम किया था। शनिवार को उसे उसी काम का भुगतान मिला था। 18 हजार रुपये लेकर वह घर लौट रहा था। रात करीब 9:30 बजे वह ऑटो से प्रयागराज जंक्शन के पास उतरा और वहां से पैदल ही आगे बढ़ने लगा। दो ने पीछे से जकड़ा, तीसरे ने नकदी छीनी
आरोप है कि इसी दौरान लीडर रोड पुलिस चौकी के सामने तीन बदमाशों ने उसे घेर लिया। दो बदमाशों ने पीछे से उसे जकड़ लिया, जबकि तीसरे ने उस पर पिस्टल तान दी। बदमाशों ने जान से मारने की धमकी देते हुए उसकी जेब में रखे 18 हजार रुपये और मोबाइल फोन लूट लिया। इसके बाद तीनों मौके से भाग निकले। एक थाने से दूसरे थाने भेजते रहे पुलिसकर्मी
लूट के बाद मोनू शिकायत लेकर शाहगंज थाने पहुंचा। वहां से उसे खुल्दाबाद थाने भेज दिया गया। खुल्दाबाद पहुंचने पर उसे फिर शाहगंज जाने को कहा गया। इस तरह वह दोनों थानों के बीच चक्कर काटता रहा। बाद में वह लीडर रोड चौकी के पास पहुंचा और डायल 112 पर कॉल कर घटना की सूचना दी। इसके बाद डायल 112 की टीम और खुल्दाबाद थाने की पुलिस मौके पर पहुंची। पीड़ित ने पुलिस को बताया कि बदमाशों में से एक खुल्दाबाद इलाके का रहने वाला है। सीसीटीवी फुटेज खंगाल रही पुलिस
खुल्दाबाद थाना प्रभारी केशव वर्मा ने बताया कि पीड़ित के मुताबिक बदमाश पैदल आए थे और वारदात को अंजाम देकर भाग निकले। घटनास्थल और आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज देखे जा रहे हैं। मामले की जांच-पड़ताल की जा रही है। पुलिस की चौकसी पर भी उठे सवाल
दीपावली को देखते हुए शहर में पुलिस की चौकसी बढ़ाई गई है। बाजारों में भीड़ को देखते हुए पुलिसकर्मियों की तैनाती की गई है और सुरक्षा के मद्देनजर लगातार गश्त की जा रही है। ऐसे समय में पुलिस चौकी के ठीक सामने पिस्टल के बल पर लूट की घटना सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। सवाल यह भी है कि जब पुलिस त्योहार के मद्देनजर अलर्ट है, तब बदमाशों ने चौकी के सामने ही वारदात को अंजाम देने की हिम्मत कैसे जुटा ली।



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दड़ा मार्केट में भीषण आग, चार दुकानें चपेट में आईं: कानोता कॉम्प्लेक्स में सलवार-सूट की दुकानों में लगी आग, 6 दमकलों ने तीन घंटे में पाया काबू; दिवाली से पहले मची अफरा-तफरी – Jaipur News




दिवाली से ठीक पहले जयपुर के परकोटे में रविवार रात भीषण आग लग गई। हल्दियों का रास्ता स्थित दड़ा मार्केट के कानोता कॉम्प्लेक्स में सलवार-सूट की दुकानों में आग लगने से अफरा-तफरी मच गई। देखते ही देखते आग ने विकराल रूप ले लिया और ग्राउंड फ्लोर की दो दुकानों के बाद फर्स्ट फ्लोर की दो दुकानें भी इसकी चपेट में आ गईं। सूचना पर दमकल की गाड़ियां और माणक चौक थाना पुलिस मौके पर पहुंची। करीब तीन घंटे की मशक्कत और 6 दमकल गाड़ियों की मदद से रात 12 बजे बाद आग पर काबू पाया जा सका। घटना रात करीब 9 बजे की है। आग लगने के बाद पुलिस ने एहतियात के तौर पर दड़ा मार्केट का बाजार बंद करवा दिया। साथ ही इलाके की बिजली सप्लाई भी बंद करवा दी गई। आग लगने के कारणों का फिलहाल पता नहीं चल पाया है। प्रारंभिक तौर पर शॉर्ट सर्किट या पटाखे से आग लगने की आशंका जताई जा रही है। दुकान बंद कर घर जा चुके थे व्यापारी जानकारी के अनुसार, आग लगने वाली दुकानें व्यापारी सुरेश इसरानी की हैं। दिवाली की तैयारियों के बीच व्यापारी रात करीब 8 बजे दुकानें बंद करके घर चले गए थे। इसके करीब एक घंटे बाद दुकानों में आग लग गई। कपड़ों की दुकान होने के कारण आग तेजी से फैलती चली गई। ग्राउंड फ्लोर पर दो दुकानों में लगी आग ने देखते ही देखते फर्स्ट फ्लोर की दो दुकानों को भी चपेट में ले लिया। कॉम्प्लेक्स की छत पट्टियों की बनी हुई है। कमजोर पट्टियों के कारण आग ऊपर की दुकानों तक पहुंच गई। सिलेंडर और खड़े दोपहिया वाहनों से बड़ा हादसा होने का खतरा जिस कॉम्प्लेक्स में आग लगी, वहां दोपहिया वाहन भी खड़े हुए थे। परिसर में एक सिलेंडर भी मौजूद था। ऐसे में आग के दौरान सिलेंडर में विस्फोट होने पर बड़ा हादसा हो सकता था। दमकलकर्मियों ने मौके पर पहुंचकर आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। संकरी गलियों के कारण बड़ी दमकल गाड़ियों को पहुंचने में परेशानी हुई, जिसके बाद छोटी दमकल गाड़ियां भी मौके पर बुलाई गईं। मेयर बोले- आग लगने के कारणों की समीक्षा करेंगे आग की सूचना पर जयपुर मेयर सुनील कोठारी भी मौके पर पहुंचे। उन्होंने ग्राउंड फ्लोर के साथ फर्स्ट फ्लोर पर पहुंचकर आग से प्रभावित दुकानों का जायजा लिया। मेयर सुनील कोठारी ने भास्कर को बताया कि दिवाली की पूर्व संध्या पर व्यापारी दुकानें बंद करके जा रहे थे। इसी दौरान संभवत: शॉर्ट सर्किट से आग लग गई। कपड़ों की दुकान होने के कारण आग तेजी से फैल गई। सूचना मिलते ही दमकल की गाड़ियां मौके पर पहुंच गईं और आग बुझाने का प्रयास शुरू कर दिया। उन्होंने कहा कि कॉम्प्लेक्स की छत पट्टियों की बनी हुई है। पट्टियां कमजोर होने के कारण आग फर्स्ट फ्लोर तक पहुंच गई। फिलहाल दमकलकर्मियों ने आग पर काबू पा लिया है। पूरे मामले की समीक्षा की जाएगी। मेयर ने कहा कि व्यापारियों के साथ पहले भी बैठक की गई थी। उस दौरान उन्होंने खुद व्यापारियों से अपने स्तर पर भी आग से बचाव के पर्याप्त इंतजाम करने की अपील की थी। यदि जांच में कोई दोषी पाया जाता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। संकरी गलियों के कारण छोटी दमकल गाड़ियां बुलानी पड़ीं एडिशनल डीसीपी नॉर्थ फर्स्ट आलोक कुमार सिंघल ने बताया कि हल्दियों का रास्ता स्थित कानोता मार्केट में आग लगने की सूचना मिली थी। सुरेश इसरानी की लेडीज सूट्स की दुकान में आग लगी थी। सूचना मिलते ही बड़ी चौपड़ पर खड़ी दमकल की गाड़ी को मौके पर भेजा गया। रास्ता संकरा होने के कारण बाद में छोटी दमकल गाड़ियां भी बुलाई गईं। पुलिस और दमकलकर्मियों ने तत्काल आग बुझाने का प्रयास शुरू किया। करीब तीन घंटे बाद आग पर पूरी तरह काबू पाया जा सका। आग की चपेट में आई चारों दुकानें सुरेश इसरानी की ही हैं। फिलहाल आग लगने के कारणों और दुकानों में हुए नुकसान का आकलन किया जा रहा है। बता दें कि कानौता कॉम्पलेक्स तीन मंजिला भवन है। इसमे फर्स्ट फ्लोर पर करीब 10 से 12 दुकान है। इसी तरीके से हर मंजिल पर इतनी ही दुकानें है। चौकाने वाली बात है कि कॉम्पलेक्स में कहीं भी फायर सेफ्टी की कोई व्यवस्था नहीं थी। बल्कि कॉम्पलेक्स में जहां आग लगी वहां गैस सिलेंडर और टू व्हिलर तक खड़े थे, जो बड़े हादसे को न्यौता दे सकते थे। देखिए, आग से जुड़ी PHOTO’S



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रिपोर्ट-चुनाव से पहले ईरान पर हमला करना चाहते थे नेतन्याहू: मोसाद चीफ के साथ प्लान बनाया था; ट्रम्प को भनक लगी तो हमला रुका


तेल अवीव1 घंटे पहले

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इजराइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू अक्टूबर में हुए चुनाव से ठीक पहले ईरान पर हमला करना चाहते थे। इजराइली न्यूज चैनल-12 ने शुक्रवार को अपनी रिपोर्ट में यह दावा किया।

रिपोर्ट के अनुसार नेतन्याहू ने इजराइल की खुफिया एजेंसी मोसाद के चीफ रोमन गोफमैन के साथ मिलकर योजना बनाई थी। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प को इसकी भनक लग गई। इसके बाद उन्होंने दखल देकर हमले की योजना रुकवा दी।

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू मोसाद मुख्यालय में रोमन गोफमैन के साथ बैठक करते हुए। तस्वीर 17 जून 2026 की है।

प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू मोसाद मुख्यालय में रोमन गोफमैन के साथ बैठक करते हुए। तस्वीर 17 जून 2026 की है।

सेना और सुरक्षा अधिकारी नेतन्याहू के खिलाफ थे

रिपोर्ट के मुताबिक, इजराइल की सेना और सुरक्षा से जुड़े कई बड़े अधिकारी नेतन्याहू की योजना के खिलाफ थे। उन्हें डर था कि हमला किया तो ईरान जवाबी हमला कर सकता है। इससे दोनों देशों के बीच तनाव और बढ़ जाता। आशंका थी कि 27 अक्टूबर को होने वाला चुनाव भी टल जाता।

अधिकारियों की असहमति के बावजूद नेतन्याहू ने योजना पर काम जारी रहा। चैनल-12 के मुताबिक इजराइल के एक सुरक्षा अधिकारी ने जल्दबाजी में ऐसा कदम उठाया, जिससे अमेरिका को इस योजना के बारे में पता चल गया। अधिकारी ने क्या कदम उठाया था यह स्पष्ट नहीं किया गया है।

पीएम नेतन्याहू के दफ्तर ने इस खबर को गलत बताया है। उसका कहना है कि प्रधानमंत्री ने उसी समय साफ कर दिया था कि इजराइली चुनाव से पहले ईरान पर हमला करने की कोई योजना नहीं थी।

इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के चुनाव प्रचार वाले पोस्टर में ट्रम्प ओर फाइटर जेट को दिखाया गया था।

इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के चुनाव प्रचार वाले पोस्टर में ट्रम्प ओर फाइटर जेट को दिखाया गया था।

चुनाव से दो दिन पहले सेना प्रमुख से भी विवाद हुआ था

ईरान पर कार्रवाई को लेकर नेतन्याहू और इजराइली सेना के प्रमुख एयाल जमीर के बीच तनाव की खबरें पहले भी सामने आई थीं।

25 अक्टूबर को चैनल-12 ने बताया था कि नेतन्याहू ने सेना को एक ऐसा आदेश दिया था, जिससे ईरान के साथ लड़ाई फिर शुरू हो सकती थी। सेना प्रमुख जमीर ने इस आदेश को मानने के इंकार कर दिया था।

उन्होंने इस पर दोबारा चर्चा करने और प्रधानमंत्री से लिखित आदेश मांगा था। वह यह भी चाहते थे कि कार्रवाई को कानूनी मंजूरी मिलने के दस्तावेज दिए जाएं।

रिपोर्ट के मुताबिक सेना के बड़े अधिकारियों को शक था कि नेतन्याहू ईरान के मुद्दे का इस्तेमाल चुनाव में फायदा उठाने के लिए करना चाहते हैं। उन्हें डर था कि चुनाव से पहले कोई कार्रवाई हुई तो हालात बिगड़ सकते हैं।

नेतन्याहू ने उस समय इन खबरों को भी बकवास बताया था। उन्होंने कहा था कि सेना प्रमुख के साथ उनका कोई विवाद नहीं है। हालांकि, उन्होंने यह भी कहा था कि उन्होंने सेना और मोसाद को ईरान की मौजूदा सरकार गिराने का निर्देश दिया है।

अमेरिका और ईरान के बीच जंग रोकने पर बातचीत चल रही है

अमेरिका और ईरान के बीच कतर की मदद से बातचीत जारी है। दोनों देश जंग खत्म करने का रास्ता तलाश रहे हैं। हालांकि, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के दोबारा हमले शुरू करने पर विचार करने की खबरें भी आई हैं।

चैनल-12 के मुताबिक, अमेरिकी मिडटर्म चुनाव से पहले नेतन्याहू ने ट्रम्प से कहा था कि मतदान खत्म होते ही ईरान पर फिर हमला किया जाए। लेकिन ट्रम्प फिलहाल ईरान से बातचीत को कुछ और समय देना चाहते हैं।

नेतन्याहू को डर है कि बातचीत आगे बढ़ी तो ईरान पर लगे प्रतिबंध और दूसरे दबाव कम हो सकते हैं। शुक्रवार को ट्रम्प ने भी कहा कि अमेरिका ईरान से बात कर रहा है और उसके साथ बातचीत अच्छी चल रही है।

ट्रम्प ने यह दावा भी किया कि अगर उन्होंने ईरान को परमाणु हथियार बनाने से नहीं रोका होता, तो आज इजराइल और पूरा मिडिल ईस्ट सुरक्षित नहीं होता।

ईरान और इजराइल के बीच विवाद की 4 बड़ी वजह

1979 में दुश्मनी शुरू हुई: ईरान में इस्लामी क्रांति के बाद नई सरकार ने इजराइल का विरोध शुरू कर दिया था। उसका कहना था कि इजराइल ने फिलिस्तीनियों की जमीन पर कब्जा कर रखा है। इसके बाद दोनों देशों के रिश्ते टूट गए।

इजराइल विरोधी संगठन का समर्थन: ईरान फिलिस्तीनियों और हमास-हिजबुल्लाह जैसे इजराइल विरोधी संगठनों का समर्थन करता है। इजराइल इसे अपनी सुरक्षा के लिए खतरा मानता है।

परमाणु हथियारों का डर: ईरान कहता है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण कामों के लिए है। लेकिन इजराइल को शक है कि वह परमाणु बम बना रहा है। इससे सुरक्षा का खतरा है।

दोनों देश एकदूसरे पर हमला करते रहे हैं: कई साल तक दोनों देश छिपकर एक-दूसरे पर हमले करते रहे। 2024 और जून 2025 में दोनों के बीच सीधे मिसाइल और हवाई हमले भी हुए।

तेहरान में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और स्टीव विटकॉफ की तस्वीरें बैनर में लगाई गई।

तेहरान में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प, इजराइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू, अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस और स्टीव विटकॉफ की तस्वीरें बैनर में लगाई गई।

इजराइल और अमेरिका ने मिलकर ईरान पर हमला किया था

28 फरवरी 2026 को अमेरिका और इजराइल ने मिलकर ईरान पर बड़ा हमला किया था। इसमें ईरान के सुप्रीम लीडर अली खामेनेई समेत कई बड़े सैन्य और सुरक्षा अधिकारी मारे गए थे।

हमलों में ईरान के सैकड़ों मिसाइल ठिकानों, एयर डिफेंस सिस्टम, सैन्य अड्डों और सेना के कमांड सेंटरों को निशाना बनाया गया। तेहरान समेत कई शहरों में इमारतों को नुकसान पहुंचा। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और खाड़ी देशों में मौजूद अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।

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जिनपिंग चीन में ट्रम्प-पुतिन मुलाकात कराने से डर रहे: अपनी जमीन पर यूक्रेन बंटवारे का फैसला नहीं चाहते; 18-19 नवंबर की मीटिंग पर अभी सस्पेंस

अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प और रूसी राष्ट्रपति पुतिन चीन में एक साथ बैठक करना चाहते हैं। पुतिन ने 19 अक्टूबर को इसका प्रस्ताव रखा। उसी दिन ट्रम्प ने बैठक में शामिल होने की रजामंदी भी दे दी। दोनों ने इस बातचीत में जिनपिंग को शामिल करने का प्रस्ताव रखा है। पूरी खबर पढ़ें…

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इंदौर में युवक बोला- बैच-बिल्ला उतरवाने में 5 मिनट लगेंगे: गोदाम के विवाद में पुलिसकर्मी को धमकाया; आरोपी भाजपा नेता का समर्थक – Indore News




इंदौर में एक युवक का पुलिसकर्मी को धमकाने का वीडियो सामने आया है। इसमें युवक वर्दी पहने कॉन्स्टेबल श्रवण से बहस करते हुए कहता सुनाई दे रहा है- ‘मेरी बात सुनना, यह बैच और बिल्ला उतारने में पांच मिनट लगेंगे, सारी गर्मी उतर जाएगी।’ युवक की पहचान सूरज शर्मा के रूप में हुई है। उसे द्वारकापुरी क्षेत्र के भाजपा पार्षद राकेश जैन का समर्थक बताया जा रहा है। चौकीदार से विवाद के बाद पुलिस को बुलाया कॉन्स्टेबल श्रवण के मुताबिक, एक चौकीदार शिकायत लेकर थाने आया था। उसने बताया कि वह साइकिल लेकर गली-गली घूमता है और सीटी बजाकर लोगों को बुलाता है। इ सी दौरान सूरज वहां आया और उससे पूछने लगा कि किसके यहां चौकीदारी करते हो। इसके बाद दोनों के बीच कहासुनी हुई। उसकी शिकायत पर पुलिस मौके पर पहुंची तो सूरज वहां भी विवाद करने लगा। तीन तस्वीरें देखिए कॉन्स्टेबल से बोला- आराम से बात करो, थाने चलो वायरल वीडियो में युवक कॉन्स्टेबल श्रवण से ऊंची आवाज में बात करता नजर आ रहा है। वह बार-बार अपनी बात सुनने के लिए कहता है। इस पर पुलिसकर्मी उसे सम्मान से बात करने की समझाइश देता है। वह कहता है- ‘तू-तू मत कर, कोई भी हो। आराम से बात करो, थाने चलो, वहीं बात करेंगे।’ इसके बाद युवक बैच-बिल्ला उतरवाने की धमकी देते हुए कहता है कि इसमें पांच मिनट लगेंगे और सारी गर्मी उतर जाएगी। वीडियो में वह अपने पास कैमरे लगे होने की बात भी कहता सुनाई देता है। मौके पर मौजूद एक चौकीदार भी अपनी समस्या बताने की कोशिश करता है, लेकिन युवक उसे बीच में ही रोक देता है। पिस्टल दिखाकर धमकाने का भी था आरोप जानकारी अनुसार सूरज शर्मा को लेकर एक पुराना मामला भी सामने आया है। करीब एक साल पहले एडिशनल डीसीपी दिशेष अग्रवाल ने पड़ोसी को पिस्टल दिखाकर धमकाने के आरोप में उसके खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाई थी। हालांकि, बाद में जिस हथियार को पिस्टल बताया गया था, वह लाइटर निकला था। थाना प्रभारी बोले- जांच के बाद होगी कार्रवाई वीडियो में दिखाई दे रहे युवक की पहचान सूरज शर्मा के रूप में किए जाने का दावा किया जा रहा है। मामले में द्वारकापुरी थाना प्रभारी अजय नायर का कहना है कि वायरल वीडियो की जांच की जा रही है। जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी। वीडियो वायरल होने के बाद अब पुलिस की जांच पर नजर है कि आखिर पुलिसकर्मी को इस तरह धमकाने के मामले में क्या कार्रवाई होती है। पहले भी विवादों में रहा है सूरज शर्मा सूरज शर्मा पहले भी विवादों में रह चुका है। वर्ष 2022 में वह कलेक्टर कार्यालय में एक फर्जी मामला लेकर पहुंचा था। उस दौरान एसडीएम पवन जैन ने उसे फटकार लगाई थी। उसका नाम अक्सर पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों से टकराव के मामलों में सामने आता रहा है। 10 सितंबर 2025 को भी सूरज ने एक महिला को पिस्टल दिखाकर धमकाया था। इसका वीडियो भी सामने आया था। पुलिस उसे थाने लेकर आई थी, लेकिन पूछताछ में उसने बताया कि पिस्टल असली नहीं, बल्कि लाइटर था। इसके बाद उसके खिलाफ कोई कानूनी कार्रवाई नहीं की गई। इस दौरान एमआईसी सदस्य और पार्षद राकेश जैन के साथ सतनाम सिंह खनूजा और 50 से ज्यादा समर्थक थाने के बाहर पहुंच गए थे। आरोप है कि उन्होंने तत्कालीन टीआई सूरज पटेल पर सूरज को छोड़ने का दबाव बनाया। इसके बाद उसे बिना कार्रवाई के छोड़ दिया गया था।



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