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अपनी सधी हुई राय के लिए मशहूर जाने-माने निवेशक शंकर शर्मा ने कहा है कि बाजार में अब पहले जैसी रैली नहीं आएगी. उनका कहना है कि अगले 2 साल तक तो मार्केट बुल रन देखेगा ही नहीं. शंकर शर्मा ने पहली बार ऐसा नहीं कहा है. वह इससे पहले भी कह चुके हैं कि अब मार्केट में सुधार 2030 के बाद ही होगा. उन्होंने यह भी कहा मार्केट अब पुरानी वाली रैली नहीं दोहरा पाएगा.
शंकर शर्मा ने कहा है कि इस बार वाली रैली पिछली वाली से कमजोर होगी: शर्मा
नई दिल्ली. शंकर शर्मा का नाम शेयर बाजार में बड़े सम्मान के साथ लिया जाता है. उन्हें बाजार पर एक सधी हुई राय के लिए जाना जाता है. शर्मा अगर बाजार में किसी चीज को लेकर भविष्यवाणी करते हैं तो उस पर गौर किया जाता है. इसलिए जब वह ये कहते हैं कि 2 साल तक बाजार में रैली का कोई दौर नहीं आएगा तो इस पर नए निवेशकों को ध्यान देना चाहिए. क्योंकि मझे हुए इन्वेस्टर्स तो ऐसे दौर देख चुके हैं लेकिन बाजार में नई एंट्री करने वाले मौजूदा हालात देखकर काफी परेशान हो रहे हैं. जितनी तेजी से उन्होंने बाजार में प्रवेश किया था उसी स्पीड से बाहर भी निकल रहे हैं.
शंकर ने साफ तौर पर कह दिया है कि भारत के इक्विटी मार्केट में बुल रन अभी 2 साल तक नहीं आएगा. वह केवल इतना ही नहीं कह रहे हैं. उनका तो यहां तक कहना है कि अब जो रैली आएगी वो पिछली वाली से कमजोर होगी. आपको बता दें कि शंकर शर्मा ने पहली बार शेयर मार्केट को लेकर कोई पहली बार ऐसी भविष्यवाणी नहीं की है. वह इससे पहले भी कह चुके हैं कि बाजार में अब अच्छी तेजी 2030 तक ही आएगी. मनीकंट्रोल को दिए एक इंटरव्यू में शंकर शर्मा ने कहा है कि इकोनॉमी और मार्केट का साइज इतना बढ़ चुका है कि पहले जैसी ग्रोथ हासिल करना अब मुमकिन नहीं लगता.
8-10 फीसदी रिटर्न की उम्मीद
उन्होंने कहा कि बीते दो दशकों में भारतीय निवेशकों को औसतन 14 से 15 फीसदी सालाना रिटर्न मिलता रहा है, लेकिन अब अर्थव्यवस्था के बड़े आकार को देखते हुए यह दौर बदल चुका है. उनका मानना है कि भविष्य में 8 से 10 फीसदी सालाना रिटर्न को ही सामान्य मानकर चलना चाहिए. शर्मा ने इसे अपनी “1.6 बुल मार्केट्स” थ्योरी से समझाया. उनका कहना है कि 1991 के आर्थिक उदारीकरण के बाद भारत ने वास्तव में सिर्फ एक बड़ा और टिकाऊ बुल मार्केट देखा, जो 2003 से 2007 के बीच रहा. उनके मुताबिक, हर्षद मेहता के दौर की तेजी को सामान्य बुल मार्केट नहीं माना जा सकता. उन्होंने बताया कि 2003 से 2007 के बीच निफ्टी ने करीब 55 फीसदी सालाना रिटर्न दिया था, जबकि कोरोना महामारी के बाद आई तेजी में यह रिटर्न घटकर करीब 31 फीसदी रह गया. यानी पिछली बड़ी तेजी की तुलना में करीब 40 फीसदी कम. उनका अनुमान है कि अगला बुल मार्केट इससे भी कम रिटर्न वाला हो सकता है.
क्या है कम रिटर्न की वजह
शंकर शर्मा का कहना है कि इसकी वजह आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, ब्याज दरें या वैश्विक राजनीति नहीं, बल्कि भारत की तेजी से बढ़ी आर्थिक ताकत है. उनका तर्क है कि जब कोई अर्थव्यवस्था 4 से 5 ट्रिलियन डॉलर के आकार तक पहुंच जाती है, तो उसी रफ्तार से आगे बढ़ना पहले के मुकाबले काफी मुश्किल हो जाता है. उन्होंने एचडीएफसी बैंक और इन्फोसिस जैसी बड़ी कंपनियों का उदाहरण देते हुए कहा कि जब कंपनियां बहुत बड़ी हो जाती हैं, तो उनसे 35 से 40 फीसदी की ग्रोथ की उम्मीद नहीं की जाती. यही नियम देशों की अर्थव्यवस्था पर भी लागू होता है.
कौन से शेयर करेंगे अच्छा प्रदर्शन
इसी सोच के आधार पर शंकर शर्मा का मानना है कि अगली बड़ी तेजी में लार्ज कैप कंपनियों की तुलना में स्मॉल कैप शेयर ज्यादा बेहतर प्रदर्शन कर सकते हैं. उनका कहना है कि छोटी कंपनियों में कमाई बढ़ाने और निवेशकों को बेहतर रिटर्न देने की गुंजाइश अभी भी ज्यादा है. यही वजह है कि उन्होंने खुद भी 100 से 200 करोड़ रुपये स्मॉल कैप कंपनियों में लगाए हैं. खास तौर पर उन्होंने टेक्नोलॉजी इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा सेंटर से जुड़े कारोबारों पर दांव लगाया है, क्योंकि उनके मुताबिक ये सेक्टर अभी अपने ग्रोथ साइकल की शुरुआती अवस्था में हैं और आने वाले वर्षों में इनमें तेजी से विस्तार की संभावना है.
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मैं जय ठाकुर, न्यूज18 हिंदी में सीनियर सब-एडिटर के तौर पर अपनी सेवाएं दे रहा हूं. मेरा मुख्य काम बिजनेस की पेचीदा खबरों को आसान भाषा में लोगों तक पहुंचाना है. फिर चाहे वह शेयर बाजार की हलचल हो, देश की इकोनॉमी क…और पढ़ें

