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कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर के एस यादव ने कहा कि सबसे पहले तो जहां पर आम के पौधे लगाने की तैयारी की जा रही है. वहां यह सुनिश्चित कर लें कि कम से कम 2 मीटर की गहराई तकरीली और पथरीली जमीन ना हो, नहीं तो पौधे सूख जाते हैं अगर दोमट मिट्टी है तो यह बहुत अच्छा होता है काली मिट्टी है तो उसमें कुछ रेत मिलाकर पौधे का ट्रांसप्लांट करना चाहिए.
भारत आम उत्पादन के मामले में दुनिया का सबसे बड़ा देश है. यहां की अलग-अलग जलवायु अलग-अलग क्षेत्र में सैकड़ो वैरायटी के आम का उत्पादन देती हैं. यह आम की उद्यान किसानों के लिए मोटी कमाई भी करवा रहे हैं सरकारों के द्वारा भी फलों की खेती करने के लिए बढ़ावा दिया जा रहा है. इसके अलावा मानसून का सीजन ठीक वह सीजन होता है जब हम उद्यान लगाने की पहली सीढ़ी चढ़ते हैं. मानसून से ही फलदार वृक्ष का लगना शुरू होता है.
ऐसे में जो किसान भाई मानसून के सीजन में आम के वृक्षों का उद्यान लगाने की तैयारी कर रहे हैं तो उन्हें ऐसी कौन सी वेराइटी लगानी चाहिए जो कम समय में कम मेहनत में और काम देखरेख में अच्छी ग्रोथ के साथ जल्दी फलों का उत्पादन देने लगे खासकर बुंदेलखंड और मध्य प्रदेश के क्षेत्र में वह कौन सी वेराइटी हैं.जो बिना किसी एक्स्ट्रा मेहनत के आसानी से उगाई जा सकती हैं. उनकी बाजार में भी अच्छी डिमांड रहती है. इसके लिए हम सागर कृषि विज्ञान केंद्र के कृषि वैज्ञानिक डॉक्टर के एस यादव से जानेंगे, इन्होंने आम पर पीएचडी भी की है.
दोमट मिट्टी में लगाएं आम के पौधे
डॉक्टर यादव बताते हैं कि सबसे पहले तो जहां पर आम के पौधे लगाने की तैयारी की जा रही है. वहां यह सुनिश्चित कर लें कि कम से कम 2 मीटर की गहराई तकरीली और पथरीली जमीन ना हो, नहीं तो पौधे सूख जाते हैं अगर दोमट मिट्टी है तो यह बहुत अच्छा होता है काली मिट्टी है तो उसमें कुछ रेत मिलाकर पौधे का ट्रांसप्लांट करना चाहिए. आम की वैरायटी की बात करें तो यह दो तरह के होते हैं. एक शंकर किस्मे होती हैं जो हर साल फलते हैं दूसरा व्यावसायिक फसले होती हैं. अगर कमर्शियल फसलों की बात करें. सामान्य तौर पर लंगड़ा चौसा फजली दशहरा है. उनकी समस्या है कि इनके पेड़ काफी बड़े होते हैं. इसके साथ-साथ में एकांतर फलन की समस्या भी आती है. एक साल फल काफी ज्यादा लगते हैं. 1 साल बहुत कम आते हैं.
आम लगाने के लिए यह है बेस्ट पांच वैरायटी
यह इन वैरायटी की कमी है. दूसरी तरफ शंकर किस्म की बात करें तो यह बहुत सारी बाजार में आ गई हैं जैसे आम्रपाली है मल्लिका है जो हमारे यहां काफी अच्छी किस्म मानी जाती हैं.इनको लगाने से फलन भी बहुत जल्दी आता है इसमें तुड़ाई में सुविधा रहती है देखभाल में सुविधा रहती है इसमें कुछ ऐसी किस्म भी है जो बहुत जल्दी आ जाती है उसमें बादाम है. हाइब्रिड किस्म में थोड़ी देर से आती हैं. अलग-अलग वैरायटी के आम अलग-अलग समय पर आते रहते हैं. मध्य प्रदेश की जलवायु में यह सभी बहुत स्वीटवल है.आम के पेड़ लगाने के लिए 2 मीटर गहरा 2 मीटर चौड़ा 2 मीटर लंबा गड्ढा खोदना चाहिए और कुछ दिन के लिए धूप लगने के लिए छोड़ देना चाहिए इसकी वजह से मिट्टी और गड्ढे में जो शत्रु किट होते हैं. वह खत्म हो जाते हैं. फिर जब पौधा ट्रांसप्लांट करते हैं तो इसमें आधा गोबर आदि मिट्टी और कुछ रासायनिक उर्वरक मिक्स करके रोप देते हैं.

















