वाराणसी में बड़ागांव विकासखंड की ग्राम सभा बसनी स्थित साईं इंस्टीट्यूट ऑफ रूरल डेवलपमेंट परिसर में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर का आयोजन किया गया। सामाजिक संस्था कमला ग्राम विकास संस्थान की ओर से भारत सरकार के नेशनल बैकवर्ड क्लासेज फाइनेंस एंड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (NBCFDC) के सहयोग से आयोजित शिविर का शुभारंभ ग्राम प्रधान अमलेश पटेल ने किया। शिविर में करीब 350 ग्रामीणों ने स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठाया। चिकित्सकों ने मरीजों की जांच कर निःशुल्क परामर्श दिया। इस दौरान शुगर, ब्लड प्रेशर, थायराइड, ईसीजी, महिला रोगों के साथ हड्डी और जोड़ों से संबंधित समस्याओं की जांच की गई। जरूरतमंद मरीजों को निःशुल्क दवाएं भी वितरित की गईं। ग्राम प्रधान अमलेश पटेल ने इस तरह के स्वास्थ्य शिविरों को ग्रामीणों के लिए उपयोगी बताया।
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वाराणसी में निःशुल्क स्वास्थ्य शिविर: शुगर, ब्लड प्रेशर, थायराइड, हड्डी और जोड़ों से संबंधित समस्याओं की जांच – Varanasi News
दक्षिण भारत का 130 साल पुराना मशहूर मदुगुला हलवा
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Diwali Special Halwa Recipe: दिवाली पर इस बार कुछ अलग और खास मिठाई बनाने की सोच रहे हैं तो 130 साल पुराना दक्षिण भारतीय हलवा बेहतरीन विकल्प हो सकता है. अपनी पारंपरिक पहचान और अनोखे बनाने के तरीके के लिए मशहूर इस हलवे के दीवाने पूरे दक्षिण भारत में हैं. इसकी खास तैयारी और लाजवाब स्वाद इसे दूसरी मिठाइयों से अलग बनाते हैं. त्योहार पर इस पुरानी रेसिपी से घर में पारंपरिक मिठास घोल सकते हैं.
हैदराबाद: दिवाली के त्योहार पर घरों में तरह-तरह के पकवान और मिठाइयां तैयार की जाती हैं लेकिन दक्षिण भारत में एक ऐसी खास मिठाई है जिसके बिना कई लोगों का त्योहार अधूरा माना जाता है. हम बात कर रहे हैं आंध्र प्रदेश के अनाकापल्ली जिले के मशहूर मदुगुला हलवा की. अपनी अनोखी बनावट, लाजवाब स्वाद और शुद्धता के कारण यह हलवा सिर्फ आंध्र प्रदेश में ही नहीं, बल्कि पूरे दक्षिण भारत में काफी लोकप्रिय है.
इस हलवे की सबसे बड़ी खासियत इसे बनाने का पारंपरिक और देसी तरीका है जो सौ साल से भी अधिक समय से चला आ रहा है. आज के आधुनिक दौर में जहां मिठाइयां मशीनों से बनाई जाती हैं वहीं मदुगुला कस्बे में आज भी स्थानीय महिलाएं इसे पूरी तरह हाथों से और मिट्टी के चूल्हों पर तैयार करती हैं.
दूध ही इस हलवे का मुख्य आधार होता
मदुगुला हलवा बनाने की रेसिपी काफी मेहनत और सब्र की मांग करती है. इसे बनाने के लिए सबसे पहले साबुत गेहूं को अच्छी तरह पानी में भिगोया जाता है. इसके बाद भीगे हुए गेहूं को पत्थर की पारंपरिक चक्की या सिलबट्टे पर बारीक पीसा जाता है. पीसने के बाद गेहूं का गाढ़ा सफेद सत्व यानी गेहूं का दूध छाना जाता है. यह दूध ही इस हलवे का मुख्य आधार होता है.
मिट्टी के चूल्हों पर लकड़ी की आग जलाई जाती
इसके बाद खुली जगह में बने मिट्टी के चूल्हों पर लकड़ी की आग जलाई जाती है. पीतल के बड़े बर्तनों में गुड़ या चीनी की चाशनी बनाई जाती है और फिर उसमें गेहूं का निकाला हुआ दूध धीरे-धीरे मिलाया जाता है. कड़ाही को चूल्हे पर चढ़ाने के बाद इसे लगातार लंबी करछी से चलाना पड़ता है ताकि मिश्रण नीचे न चिपके.
पकने के बाद जब इसे चौकोर ट्रे में पलटा जाता
पकने के दौरान इसमें भारी मात्रा में शुद्ध देसी घी डाला जाता है. इसके साथ ही इसमें ढेर सारे कटे हुए काजू और अन्य मेवे मिलाए जाते हैं. धीमी आंच पर कई घंटों तक लगातार पकने के बाद जब यह गाढ़ा होकर गहरे भूरे रंग की जेली जैसा चमकदार दिखने लगता है तब जाकर यह हलवा पूरी तरह तैयार होता है. पकने के बाद जब इसे चौकोर ट्रे में पलटा जाता है, तो इसके ऊपर से शुद्ध घी अपने आप छलकने लगता है.
उपहार के रूप में देने के लिए हफ्तों पहले से ऑर्डर करते
दिवाली के मौके पर इस पारंपरिक हलवे की मांग कई गुना बढ़ जाती है. लोग इसे त्योहारों पर परिवार के साथ खाने और रिश्तेदारों को उपहार के रूप में देने के लिए हफ्तों पहले से ऑर्डर करते हैं. शुद्ध सामग्री और देसी स्वाद ही इस हलवे को दक्षिण भारत की सबसे खास मिठाइयों में शामिल करता है.
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मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
बैतूल में मिठाई दुकान से 150 किलो मिठाई जब्त: 5 दुकानों की जांच में मिली संदिग्ध, जिलेभर से मिठाई-मावा के 39 नमूने लिए – Betul News
बैतूल में त्योहारी सीजन के दौरान खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांचने के लिए खाद्य सुरक्षा विभाग ने जिलेभर में अभियान चलाया। बुधवार को शाहपुर में पांच मिठाई दुकानों की जांच के दौरान एक प्रतिष्ठान से संदेह के आधार पर 150 किलो मिठाई जब्त की गई। इसकी अनुमानित कीमत 37 हजार 500 रुपए बताई गई है। जिलेभर से लिए 39 नमूने खाद्य सुरक्षा विभाग की टीम ने शाहपुर में मिठाई के 15 नमूने लिए। इसके अलावा आमला के ग्रामीण क्षेत्रों से मावा के 6, चिचोली की चार मिठाई दुकानों से मिठाई और नमकीन के 14 और गुदगांव चौपाटी से 4 नमूने संकलित किए गए। इस तरह जिलेभर से कुल 39 नमूने जांच के लिए लिए गए हैं। सभी नमूनों को राज्य खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला भोपाल भेजा गया है। रिपोर्ट आने के बाद खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के तहत संबंधित कारोबारियों पर कार्रवाई की जाएगी। दुकानदारों को दिए निर्देश जांच के दौरान दुकानदारों को एनालॉग डेयरी उत्पादों पर प्रतिबंध की जानकारी दी गई। साथ ही प्रतिष्ठानों में साफ-सफाई रखने और खाद्य कारोबार से जुड़े जरूरी दस्तावेज संधारित करने के निर्देश दिए गए। विभाग के अनुसार, जिले के शहरी और ग्रामीण क्षेत्रों में खाद्य पदार्थों की गुणवत्ता जांचने का अभियान जारी रहेगा।
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‘मैं खाने गया था, दुलारचंद ने शुरू की थी लड़ाई’: अनंत बोले-JDU से कहा था,पटना रहा तो नीरज का विरोध करूंगा; DG कुंदन कृष्णन का भी जिक्र – Patna News
विधानसभा चुनाव के दौरान दुलारचंद हत्याकांड में सुप्रीम कोर्ट ने अनंत सिंह को 1 दिसंबर को सरेंडर करने का आदेश दिया है। दुलारचंद हत्याकांड पर अनंत सिंह ने कई नई बातें कहीं हैं। इसके साथ ही अनंत सिंह ने जदयू एमएलसी नीरज कुमार, केंद्रीय मंत्री ललन सिंह और बिहार STF के डीजी कुंदन कृष्णन के बारे में कई बातें कही हैं। मेरी गाड़ी 5 KM दूर थी, मुझे फंसाया जा रहा है मोकामा विधानसभा क्षेत्र के तारतड़ गांव में दुलारचंद यादव का घर है। वहां से खाना खाने के बाद वह अपने समर्थकों और काफिले के साथ निकले थे। उस समय कई लोग और गाड़ियां साथ थीं। कुछ गाड़ियां आगे निकल गई थीं, जबकि कुछ पीछे रह गई थीं। अनंत सिंह ने बताया कि वह जिस गाड़ी में थे, वह घटनास्थल से करीब 5 किलोमीटर आगे निकल चुकी थी। इसी दौरान उन्हें जानाकरी मिली कि पीछे लड़ाई हो गई है। इसके बाद उन्होंने अपने समर्थकों के पीछे चल रही गाड़ियों में फोन किया और यह पता लगाने की कोशिश की कि आखिर विवाद किसके साथ हुआ है। अब जदयू एमएलसी नीरज कुमार के विरोध को लेकर अनंत सिंह ने क्या कहा वो जानिए नीतीश और ललन सिंह से बात कर नीरज को टिकट दिलाई अनंत सिंह ने एक मीडिया हाउस को दिए इंटरव्यू में 2008 का किस्सा सुनाया। उन्होंने कहा कि उस समय नीरज कुमार उनसे लगातार टिकट दिलवाने की बात कहते थे। नीरज के कहने पर अनंत सिंह ललन सिंह के पास पहुंचे थे। अनंत सिंह के मुताबिक, वह ललन सिंह के पीछे-पीछे बेढ़ना तक गए और उनसे नीरज कुमार के लिए कुछ करने की गुजारिश की। जब वहां कोई खास बातचीत नहीं हुई तो वह बख्तियारपुर स्थित ममता होटल तक उनके पीछे पहुंचे। अनंत सिंह ने दावा किया कि वहां ललन सिंह ने उनसे कहा कि अगर वह अपने चेले आजाद गांधी को हरवा देंगे तो वह सीट आखिर किसे दिलवाएंगे? टिकट बंटने से पहले एक दिन ललन सिंह दिल्ली से पटना आए। इसके बाद उनकी नीतीश कुमार के साथ बैठक हुई। मीटिंग के बाद जदयू ने नीरज को टिकट दी। नीरज ने जितने के बाद कहना शुरू कर दिया का वो अनंत सिंह को नहीं जानते। अनंत सिंह ने कुंदन कृष्णन का भी किया जिक्र अनंत सिंह ने कहा कि 2005 से पहले मेरे ऊपर कोई केस नहीं था। विधायक बनने और पटना आवास में शिफ्ट होने के बाद मुझ पर सारे केस हुए हैं। उन्होंने इसके लिए नीरज कुमार और IPS कुंदन कृष्णन पर आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि उन्होंने कभी कुंदन कृष्णन का कोई नुकसान नहीं किया और भांजे की वजह से पैदा हुए विवाद को भी खुद बातचीत करके खत्म करने की कोशिश की। अब जानिए क्या है दुलारचंद हत्याकांड… 2025 के बिहार विधानसभा चुनाव में अनंत सिंह जदयू के टिकट पर मोकामा से चुनाव लड़ रहे थे। वहीं, जन सुराज पार्टी के प्रत्याशी पीयूष प्रियदर्शी के समर्थन में दुलारचंद यादव प्रचार कर रहे थे। 30 अक्टूबर 2025 को चुनाव प्रचार के दौरान दोनों पक्षों के काफिले आमने-सामने आ गए थे। इसी दौरान हुई हिंसा में दुलारचंद यादव की मौत हो गई थी। इस मामले में अनंत सिंह को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया था। हालांकि, जेल में रहते हुए भी उन्होंने चुनाव जीत लिया था। मार्च 2026 में पटना हाईकोर्ट से जमानत मिलने के बाद वह जेल से बाहर आ गए थे। 24 अक्टूबर को पार्टी से निकाले गए अनंत सिंह और उनकी पत्नी मोकामा से विधायक अनंत सिंह को 24 अक्टूबर को जदयू ने 6 साल के लिए पार्टी से निकाल दिया। अनंत सिंह लगातार पार्टी लाइन से हटकर बयान दे रहे थे। पार्टी के सीनियर नेताओं के लिए अमर्यादित और अपमानजनक भाषा का प्रयोग किया था। विधान परिषद चुनाव में पार्टी के उम्मीदवार के खिलाफ प्रचार कर रहे थे। पार्टी की प्राथमिक सदस्यता को तत्काल प्रभाव से रद्द करते हुए, उन्हें अगले 6 सालों के लिए पार्टी से निकाला गया है। साथ ही उनकी पत्नी और पूर्व विधायक नीलम देवी को भी पार्टी से निष्कासित किया गया है। जदयू के प्रदेश अध्यक्ष उमेश कुशवाना ने आदेश जारी किया है। उन्होंने विधानसभा स्पीकर से अनंत सिंह की सदस्यता रद्द करने की अनुशांसा की है।
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Oppo Find X10 Ultra में मिलेगी 8000mAh की बैटरी, जल्द हो सकता है लॉन्च
Oppo ने Find X और Find X10 Pro Max को भारत समेत ग्लोबल मार्केट में हाल ही में लॉन्च किया है। चीनी कंपनी अब इस सीरीज के सबसे प्रीमियम मॉडल Find X10 Ultra को लॉन्च करने की तैयारी में है। इस फोन को अगले साल की शुरुआत में लॉन्च किया जा सकता है। इसके चिपसेट में भी बदलाव देखने को मिलेगा। Find X 10 Ultra को MediaTek के हाल में लॉन्च हुए फ्लैगशिप चिपसेट Dimensity 9600 Pro के साथ पेश किया जा सकता है।
Find X10 Ultra की नई लीक
चीनी टिप्स्टर डिजिटल चैट स्टेशन (DCS) ने दावा किया है कि Find X10 Ultra को Nebula कोडनेम के साथ देखा गया है। लीक के मुताबिक, इस फोन में MediaTek Dimensity 9600 Pro चिपसेट मिलेगा, जो 2nm प्रोसेसिंग टेक्नोलॉजी पर काम करता है। फोन में कंपनी 10X पेरीस्कोप टेलीफोटो कैमरा इस्तेमाल करने वाली है। साथ ही, इसमें 200MP के डायनैमिक रेंज वाला मल्टीकैमरा सेटअप मिल सकता है।
सामने आई रिपोर्ट के मुताबिक, इस फोन का डिस्पले 6.89 इंच का होगा, जो 2K रेजलूशन को सपोर्ट करेगा। साथ ही, इसमें 144Hz रिफ्रेश रेट का सपोर्ट दिया जाएगा। फोन का लुक और डिजाइन Oppo Find X10 सीरीज के अन्य दोनों फोन जैसा होगा। इस अपकमिंग फ्लैगशिप फोन के बारे में अन्य जानकारियां भी सामने आई है, जिसके मुताबिक यह फोन 8000mAh की दमदार बैटरी और OIS फीचर वाले कैमरे से लैस होगा।
Oppo Find X10 Ultra के बारे में पहले भी जानकारी सामने आई है। ओप्पो का यह फोन 200MP के LOFIC टेक्नोलॉजी वाले मेन यानी प्राइमरी कैमरा के साथ आएगा। इसके अलावा 200MP का पेरीस्कोप टेलीफोटो कैमरा मिलेगा, जो 10x ऑप्टिकल जूम को सपोर्ट किया जा सकता है। इसके अलावा 50MP का टेलीफोटो और 100MP का फ्रंट कैमरा दिया जाएगा। कंपनी ने दावा किया है कि इसमें Qualcomm Snapdragon 8 Elite Extreme Gen 6 चिपसेट दिया जाएगा।
Find X10 सीरीज के फीचर्स
Oppo Find X10 सीरीज के भारत में लॉन्च हुए फोन की बात करें तो इसमें AMOLED डिस्प्ले मिलता है, जो 144Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। इस सीरीज के फोन MediaTek Dimensity 9600 सीरीज के नए लॉन्च हुए चिपसेट के साथ आते हैं। Find X10 सीरीज के दोनों फोन मल्टीपल 200MP कैमरा के साथ आते हैं। वहीं, इनमें 8000mAh की बैटरी और 80W वायर्ड फास्ट चार्जिंग का सपोर्ट मिलता है। ये दोनों फोन Android 17 पर बेस्ड ColorOS 17 पर काम करते हैं।
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‘दो से ज्यादा बच्चे होने पर चुनाव से रोकना गलत’: सुप्रीम कोर्ट बोला- कानून पर विचार की जरूरत; 5 राज्यों में लागू है नियम
नई दिल्ली8 मिनट पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि दो से ज्यादा बच्चे होने पर चुनाव लड़ने से रोकने वाले कानून अब प्रासंगिक नहीं रह गए हैं। कोर्ट ने बताया कि भारत की कुल प्रजनन दर 2003 में 3 थी, जो अब घटकर 1.9 रह गई है। 2.1 की प्रजनन दर को रिप्लेसमेंट रेट माना जाता है।
इससे कम प्रजनन दर का मतलब है कि एक पीढ़ी अपनी जगह अगली पीढ़ी को पूरी तरह नहीं ले पाएगी। कोर्ट ने कहा कि प्रजनन दर में गिरावट से बुजुर्गों की आबादी बढ़ सकती है और कामकाजी लोगों की संख्या घट सकती है। इन बदलावों को नजरअंदाज करने के गंभीर परिणाम हो सकते हैं।
जस्टिस पीएस नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की बेंच ने महाराष्ट्र की पूर्व सरपंच मंगला भीमराव को राहत दी। उन्हें तीसरे बच्चे के जन्म के कारण अयोग्य ठहराया गया था। बेंच ने 2003 के उस फैसले पर दोबारा विचार के लिए मामला बड़ी बेंच के पास भेज दिया, जिसमें दो बच्चों की शर्त को सही ठहराया गया था।

कोर्ट बोला- मौजूदा कानून राजनीतिक अधिकारों से वंचित करते हैं
बेंच ने कहा कि दो से ज्यादा बच्चे होने पर चुनाव लड़ने से रोकने वाले कानून नागरिकों के एक पूरे वर्ग को राजनीतिक प्रतिनिधित्व से बाहर कर देते हैं। इसका किसी व्यक्ति की सार्वजनिक पद संभालने की क्षमता से कोई खास संबंध नहीं है।
कोर्ट के मुताबिक, ऐसे कानून लोगों को बच्चे पैदा करने या लोकतांत्रिक प्रक्रिया में हिस्सा लेने में से किसी एक को चुनने के लिए मजबूर करते हैं। इससे संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत मिले प्रजनन से जुड़े फैसले लेने की आजादी के अधिकार का उल्लंघन होता है।

महाराष्ट्र में तीसरे बच्चे के कारण महिला को अयोग्य ठहराया गया था
मंमंगला भीमराव महाराष्ट्र की काकोड़ा ग्राम पंचायत की पूर्व सरपंच थीं। महाराष्ट्र ग्राम पंचायत अधिनियम, 1959 की धारा 14(1)(j-1) के तहत दो से ज्यादा बच्चे होने पर चुनाव लड़ने से रोकने का प्रावधान है। इसी नियम के तहत तीसरे बच्चे के जन्म के बाद उनके खिलाफ शिकायत की गई थी।
अतिरिक्त कलेक्टर ने उन्हें अयोग्य घोषित कर दिया था। इसके बाद उन्होंने अतिरिक्त आयुक्त के पास अपील की, लेकिन वहां से भी उन्हें राहत नहीं मिली। बॉम्बे हाईकोर्ट ने 5 अगस्त 2025 को उनकी अयोग्यता बरकरार रखी थी। इसके बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की।
सुप्रीम कोर्ट ने 4 नवंबर 2025 को हाईकोर्ट के फैसले पर रोक लगा दी थी। अब सुनवाई के दौरान कोर्ट ने इस मामले को बड़ी बेंच के पास भेज दिया है, ताकि यह तय किया जा सके कि दो बच्चों की शर्त को सही ठहराने वाले पुराने फैसले पर दोबारा विचार किया जाना चाहिए या नहीं।
7 राज्यों ने दो बच्चों की शर्त खत्म की
सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार की ओर से पेश वकील रुक्मिणी बोबडे को कोर्ट की मदद के लिए एमिकस क्यूरी नियुक्त किया था। कोर्ट ने उनसे और याचिकाकर्ता के वकील प्रतीक बोरंबडे से उन राज्यों की सूची मांगी थी, जहां दो से ज्यादा बच्चे होने पर चुनाव लड़ने पर रोक है।
रुक्मिणी बोबडे की ओर से दी गई सूची के मुताबिक, 7 राज्यों ने दो बच्चों की शर्त खत्म कर दी है, जबकि 15 राज्यों में ऐसी कोई नीति नहीं है। असम, गोवा, गुजरात, महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तराखंड में यह नियम अब भी लागू है।
2003 में सुप्रीम कोर्ट ने दो बच्चों की शर्त को सही ठहराया था
2003 में जावेद बनाम हरियाणा राज्य मामले में सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच ने हरियाणा पंचायती राज अधिनियम, 1994 में दो बच्चों की शर्त को संवैधानिक रूप से सही ठहराया था।
इस कानून के तहत दो से ज्यादा जीवित बच्चे होने पर कोई व्यक्ति स्थानीय निकाय का चुनाव नहीं लड़ सकता था। मौजूदा बेंच ने 4 अगस्त को इस मामले में फैसला सुरक्षित रखा था।
उस समय कोर्ट ने विचार किया था कि 2003 के फैसले पर दोबारा विचार किया जाए या मामला बड़ी बेंच को भेजा जाए।

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सुप्रीम कोर्ट बोला- बच्चों को इंटरनेट से दूर रखना बेतुका:बाल यौन शोषण कंटेंट हटाने के लिए डेटाबेस बने; 5 साल में केस 26.6 गुना बढ़े

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इंटरनेट का इस्तेमाल करना हर व्यक्ति, यहां तक कि बच्चों का भी मौलिक अधिकार है। बच्चों को इंटरनेट से पूरी तरह दूर रखना बेतुका होगा। कोर्ट ने कहा कि बच्चों की ऑनलाइन सुरक्षा और उनकी आजादी, दोनों का ध्यान रखना जरूरी है। पूरी खबर पढ़ें…
सिर्फ 500 रुपये से शुरू हुआ अचार का कारोबार, बिलासपुर की सरिता वैष्णव आज कमा रहीं हर महीने
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बिलासपुर की सरिता वैष्णव बिहान योजना से जुड़कर अचार बनाने का व्यवसाय कर रही हैं. उन्होंने घर से ही आम, कटहल, लहसुन और आंवले समेत कई तरह के अचार बनाने शुरू किए. अचार बेचकर लागत निकालने के बाद हर महीने 6 से 8 हजार रुपये कमा रही हैं. स्वयं सहायता समूह और बिहान योजना के सहयोग से सरिता आत्मनिर्भर बनकर परिवार को आर्थिक सहारा दे रही हैं.
बिलासपुर: अगर हौसले बुलंद हों और कुछ कर गुजरने का जज्बा हो, तो छोटी सी शुरुआत भी बड़ी सफलता की कहानी बन सकती है. इसकी मिसाल बिलासपुर जिले के ग्राम पंचायत अमने की रहने वाली सरिता वैष्णव हैं, जिन्होंने बिहान योजना से जुड़कर न सिर्फ खुद का रोजगार शुरू किया, बल्कि अपनी मेहनत से परिवार की आर्थिक स्थिति को भी मजबूत बनाया है. कभी घर की जिम्मेदारियों के बीच सीमित रहने वाली सरिता आज घर पर ही अलग-अलग तरह के स्वादिष्ट अचार तैयार कर रही हैं और उन्हें बाजार में बेचकर अच्छी खासी कमाई कर रही हैं. सरिता ने स्वयं सहायता समूह के माध्यम से पहले आरएफ की राशि प्राप्त की और फिर डेढ़ लाख रुपये का लोन लेकर करीब 500 रुपये की छोटी पूंजी से अचार बनाने का कारोबार शुरू किया. कारोबार में अच्छा मुनाफा मिलने के बाद उन्होंने 3 लाख रुपये का अतिरिक्त लोन लिया और अपने काम को आगे बढ़ाया. आज सरिता आम, कटहल, लहसुन, गाजर-गोभी, आंवला और नींबू समेत कई तरह के अचार तैयार करती हैं. इन अचारों की बिक्री समूह, ग्राम संगठन, क्लस्टर, बैंक और सरस मेले के साथ-साथ ग्राहकों के ऑर्डर पर भी करती हैं. सरिता बताती हैं कि सभी खर्च और लागत निकालने के बाद उन्हें हर महीने करीब 6 से 8 हजार रुपये की बचत हो जाती है. बिहान योजना से मिले सहयोग ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है.
₹500 से शुरू किया अचार बनाने का कारोबार
बिलासपुर जिले के ग्राम पंचायत अमने की रहने वाली सरिता वैष्णव ने महज 500 रुपये की छोटी पूंजी से घर पर अचार बनाने का व्यवसाय शुरू किया. बिहान योजना से जुड़ने के बाद उन्हें स्वयं सहायता समूह के माध्यम से आर्थिक सहयोग मिला, जिससे उन्होंने अपने छोटे से कारोबार को आगे बढ़ाया.
लोन लेकर बढ़ाया अपना कारोबार
सरिता ने शुरुआत में डेढ़ लाख रुपये का लोन लेकर अचार का व्यवसाय शुरू किया. कारोबार में अच्छी आमदनी होने लगी तो उन्होंने 3 लाख रुपये का अतिरिक्त लोन लिया. इससे उन्हें अपना काम बढ़ाने और अधिक मात्रा में अचार तैयार करने का मौका मिला.
कई तरह के स्वादिष्ट अचार बनाती हैं सरिता
सरिता घर पर आम, कटहल, लहसुन, गाजर-गोभी मिक्स, आंवला और नींबू समेत कई तरह के अचार तैयार करती हैं. इसके अलावा सीजन के अनुसार जमीकंद का अचार बनाने की भी तैयारी कर रही हैं. उनके बनाए अचार की कीमत और गुणवत्ता के आधार पर ग्राहक खरीदारी करते हैं.
हर महीने हो रही 6 से 8 हजार रुपये की कमाई
सरिता के मुताबिक अचार बनाने में लागत और अन्य खर्च निकालने के बाद उन्हें हर महीने करीब 6 से 7 हजार रुपये की बचत होती है. कई बार यह कमाई बढ़कर 8 हजार रुपये तक पहुंच जाती है. इस आमदनी से वह अपने परिवार के खर्च में आर्थिक सहयोग कर रही हैं.
समूह और सरस मेले में बेचती हैं अपने उत्पाद
सरिता अपने बनाए अचार को स्वयं सहायता समूह, ग्राम संगठन, क्लस्टर और बैंक के माध्यम से बेचती हैं. इसके अलावा सरस मेले और छोटे-बड़े आयोजनों में भी अपने उत्पाद लेकर पहुंचती हैं. ग्राहकों से मिलने वाले ऑर्डर पर अचार की सप्लाई भी करती हैं. बिहान योजना से मिले सहयोग ने उन्हें आत्मनिर्भर बनने का अवसर दिया है.
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Deepti Sharma, currently working with News18MPCG (Digital), has been creating, curating and publishing impactful stories in Digital Journalism for more than 6 years. Before Joining News18 she has worked with Re…
युवक को पीटने के आरोपी 24 घंटे बाद भी-गिरफ्तार नहीं: पीड़ित के पिता ने भाजपा पार्षद के बेटे और तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज कराई – Shahjahanpur News
शाहजहांपुर में युवक से मारपीट के मामले में पुलिस 24 घंटे बाद भी आरोपियों को गिरफ्तार नहीं कर पाई है। सोमवार को दिनदहाड़े राजघाट पुलिस चौकी के पास युवक को पीटा गया था। पीड़ित सिख समाज से है। तिलहर थाना क्षेत्र के हाजी नगला गांव के हरपिंदर सिंह ने मंगलवार को कोतवाली में FIR दर्ज कराई है। उन्होंने बताया कि उनका बेटा योगराज सिंह सोमवार शाम करीब 5 बजे कोचिंग से घर लौट रहा था। हरपिंदर सिंह के मुताबिक, चित्रा टॉकीज के पास रहने वाले प्रदीप सक्सेना का बेटा अनिरुद्ध सक्सेना अपने तीन साथियों के साथ वहां आया और योगराज को पीटा। इसके बाद आरोपी FIR दर्ज कराने पर जान से मारने की धमकी देकर चले गए। मारपीट में योगराज को चोटें आई हैं।
पुलिस ने अनिरुद्ध सक्सेना को नामजद करते हुए तीन अज्ञात लोगों के खिलाफ FIR दर्ज की है। घटना का वीडियो भी वायरल हुआ। वीडियो में कुछ लोग योगराज के लंबे बाल पकड़कर खींचते और उसे घूंसे-थप्पड़ मारते दिख रहे हैं। मारपीट के दौरान सड़क पर यातायात रुक गया था। मौके पर मौजूद लोग घटना देखते रहे, लेकिन किसी ने योगराज को बचाने की कोशिश नहीं की। कोतवाली प्रभारी निरीक्षक प्रदीप राय ने कहा कि आरोपी कम उम्र के हैं। पुलिस जांच कर रही है कि वे बालिग हैं या नाबालिग। अभी किसी की गिरफ्तारी नहीं हुई है।
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बेड के नीचे पत्नी ने रखी पति की लाश: ऊपर बॉयफ्रेंड संग रात बिताई, फ्रिज के कार्टन ने खोला मर्डर का राज – Madhya Pradesh News
क्राइम फाइल्स के पार्ट-1 में आपने पढ़ा कि 18 जून 2018 को शिवपुरी के दिनारा इलाके में सड़क किनारे पीली बोरी में बंद एक युवक की सड़ी-गली लाश मिली थी।
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शव के पास फ्रिज के कार्टन पर लिखा एक मोबाइल नंबर पुलिस को झांसी तक ले गया, लेकिन कई महीनों की जांच के बाद भी मृतक की पहचान नहीं हो सकी।
करीब 10 महीने बाद झांसी में दर्ज गुमशुदगी की रिपोर्ट से पता चला कि शव रेलवे से रिटायर राधारमण भारद्वाज के बड़े बेटे रिंकू का है।
पुलिस की जांच आगे बढ़ी तो पता चला कि रिंकू की हत्या उसके अपने घर में हुई थी। जिस बेड के नीचे बॉक्स में उसकी लाश छिपाई गई, उसी पर उसकी पत्नी हेमलता ने प्रेमी के साथ रात बिताई।
सुबह शव को कार्टन में पैक कर दूसरे जिले में फेंक दिया गया। करीब एक साल तक पुलिस को उलझाने वाले इस केस में आखिरकार कार्टन पर लिखा मोबाइल नंबर ही अहम सुराग बना। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
रिंकू की पहचान होने के बाद पुलिस ने परिवार के लोगों से पूछताछ शुरू की। सामने आया कि उसके पिता राधारमण रेलवे में नौकरी करते थे। पहली पत्नी की मौत के बाद उन्होंने दूसरी शादी की थी। रिंकू पहली पत्नी का बेटा था, जबकि दूसरी पत्नी से एक बेटा और एक बेटी थे। राधारमण ने स्वैच्छिक सेवानिवृत्ति (VRS) लेकर अपनी सरकारी नौकरी छोटे बेटे रोहित को दिलवा दी थी। रिंकू की पत्नी हेमलता उर्फ आरती इस फैसले से नाराज थी।
देरी से रिपोर्ट पर पुलिस को संदेह
तनाव बढ़ने पर राधारमण ने रिंकू और हेमलता को अपना मकान दे दिया था। वे दूसरी पत्नी और बच्चों के साथ अलग किराए के मकान में रहने लगे।
परिवार के बीच बातचीत कम हो गई थी। रिंकू ड्राइविंग के काम से अक्सर बाहर रहता था। ऐसे में उसके कई महीनों तक घर नहीं लौटने पर भी शुरुआत में किसी ने गंभीरता से तलाश नहीं की।
लेकिन पुलिस के सामने एक सवाल था- रिंकू की हत्या जून 2018 में हो चुकी थी, फिर हेमलता ने जनवरी 2019 में गुमशुदगी की रिपोर्ट क्यों दर्ज कराई?
कार्टन का सुराग पहुंचा उसी घर के पास
पुलिस ने झांसी में रिंकू के घर के आसपास रहने वालों से पूछताछ शुरू की। इसी दौरान फ्रिज के कार्टन का सुराग फिर अहम साबित हुआ।
पता चला कि जिस कमरे तक कार्टन पर लिखे मोबाइल नंबर की जांच पहुंची थी, वहां अरमान नाम का युवक बेकरी चलाता था। यह बेकरी रिंकू और हेमलता के घर से लगी हुई थी।
अरमान बेकरी के लिए रिंकू के घर से पानी लाता था। बिजली का तार भी उसी घर से खींच रखा था। इस वजह से उसका घर में आना-जाना सामान्य हो गया था।

घर के अंदर हुई हत्या, बेड के बॉक्स में छिपाया शव
रिंकू को जब पत्नी और अरमान के संबंधों के बारे में पता चला तो घर में विवाद होने लगा। पुलिस के मुताबिक, इसी तनाव के बीच हेमलता और अरमान ने मिलकर रिंकू की हत्या की साजिश रची।
पुलिस की जांच के मुताबिक, 14 जून 2018 की रात अरमान रिंकू के घर पहुंचा। वहां उसने चाकू से रिंकू पर कई वार किए। गर्दन पर हुए हमलों और अत्यधिक खून बहने से उसकी मौत हो गई।
हत्या के बाद दोनों ने शव को चादर में लपेटकर बोरी में भर दिया और डबल बेड के बॉक्स में छिपा दिया। पुलिस के अनुसार, इसके बाद अरमान और हेमलता ने उसी बेड पर रात बिताई।
मोपेड पर कार्टन में शव लेकर निकला
सुबह शव को ठिकाने लगाने की तैयारी शुरू हुई। अरमान अपनी बेकरी से फ्रिज और बिस्कुट के कार्टन लेकर आया। शव को बोरी समेत कार्टन में पैक किया और मोपेड पर रखकर वहां से निकल गया।
बेकरी के काम के चलते उसका कार्टन लेकर आना-जाना आम बात थी। किसी को शक नहीं हुआ। वह शव को शिवपुरी जिले के बरकुआं गांव के हनुमान मंदिर के पास सड़क किनारे फेंक आया।

पेंट, चाकू और बेड की प्लाई से मिले अहम सबूत
हत्या के करीब एक साल बाद पुलिस ने 1 जून 2019 को हेमलता और अरमान को गिरफ्तार कर लिया। जांच के दौरान पुलिस ने अरमान की बेकरी की दीवार से पेंट का नमूना लिया।
जांच में कार्टन पर लगे हरे पेंट और बेकरी की दीवार पर इस्तेमाल किए गए पेंट में समानता सामने आई। पुलिस को रिंकू के घर में रखे डबल बेड की प्लाई पर भी खून के निशान मिले।
चाकू, मोपेड और बेड से जुड़े साक्ष्यों को भी अहम माना गया। जिस बेड के बॉक्स में शव छिपाया गया था, उसकी प्लाई पर मिले खून के निशान जुर्म को साबित करने के लिए अहम सबूत बन गए।
अदालत में 24 गवाहों ने क्या बताया?
मुकदमे के दौरान अभियोजन पक्ष ने कुल 24 गवाह पेश किए। रिंकू के पिता राधारमण ने परिवार में नौकरी और संपत्ति को लेकर चल रहे विवाद की जानकारी दी। छोटे भाई रोहित ने भी रिंकू और हेमलता के बीच होने वाले झगड़ों तथा अरमान के घर आने-जाने की बात अदालत में बताई।
रिंकू के रिश्तेदार श्याम भारद्वाज ने बताया कि जनवरी 2019 में वह झांसी में एक शादी में शामिल होने आया था। इस दौरान वह हेमलता के घर गया, जहां उसने एक युवक को बैठे देखा। पूछने पर हेमलता ने बताया कि वह अरमान है और बेकरी चलाता है।

बचाव पक्ष के सवाल, अदालत का फैसला
बचाव पक्ष ने अभियोजन की कहानी पर सवाल उठाए। उसका तर्क था कि हत्या का कोई प्रत्यक्षदर्शी नहीं है। डीएनए जांच से मृतक की पहचान का निर्णायक वैज्ञानिक मिलान भी नहीं हुआ था। कुछ गवाहों के बयान परिस्थितिजन्य थे।
अदालत ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद पूरे घटनाक्रम और सबूतों का परीक्षण किया। शव की पहचान, घर के भीतर मिले खून के निशान, चाकू पर खून, कार्टन और बेकरी की दीवार के पेंट की समानता तथा गवाहों के बयानों को एक साथ देखा गया।
13 मई 2024 को अदालत ने अरमान उर्फ रिंकू खान और हेमलता उर्फ आरती उर्फ वेटू शर्मा को दोषी ठहराया। दोनों को आईपीसी की धारा 302 के तहत आजीवन कारावास और एक-एक हजार रुपए जुर्माने की सजा सुनाई गई।
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