खाद्य पदार्थों में मिलावट के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान के तहत जयपुर कमिश्नरेट की CST और झोटवाड़ा थाना पुलिस ने नकली घी की पैकिंग तैयार करने वाले गिरोह का खुलासा किया है। टीम ने मंगलवार को झोटवाड़ा के फैक्ट्री एरिया स्थित एक गोदाम पर दबिश देकर सरस, लोट्स, महान और कृष्णा घी के नाम पर इस्तेमाल होने वाली 61,600 खाली मोनो कार्टन, पाउच पैक और बारकोड स्कैनर बरामद किए हैं। मौके से पैकिंग और प्रिंटिंग में इस्तेमाल होने वाली मशीनें और सप्लाई में इस्तेमाल वाहन भी जब्त किए गए हैं। पुलिस ने मामले में मुख्य सरगना अनिल अग्रवाल समेत तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। आरोपियों की पहचान अनिल अग्रवाल (35) पुत्र टीकमचंद अग्रवाल, निवासी कोटड़ा मोहल्ला, वार्ड नंबर 6, चाकसू, मोहनलाल शर्मा (42) पुत्र राजेंद्र प्रसाद शर्मा, निवासी वार्ड नंबर 19, मालियों का मोहल्ला, चाकसू और याकूब (40) पुत्र इब्राहीम निवासी मकान नंबर डी-17, पुरानी बस्ती, नाहरगढ़ किले के नीचे, नीम घर की मस्जिद के पास, नाहरगढ़ थाना के रूप में हुई है। पुलिस ने पूछताछ के बाद तीन आरोपियों को गिरफ्तार किया है। एक महीने तक निगरानी के बाद दबिश डीसीपी वेस्ट प्रशांत किरण ने बताया कि झोटवाड़ा थाना पुलिस और सीएसटी टीम ने आरोपियों की गतिविधियों पर करीब एक महीने तक निगरानी रखी। तकनीकी सहायता से उनकी गतिविधियों की जानकारी जुटाई गई। इसके बाद फैक्ट्री एरिया स्थित गोदाम पर दबिश दी गई। सरस डेयरी अधिकारियों ने की सामग्री की जांच गोदाम से बड़ी मात्रा में नकली पैकिंग सामग्री मिलने के बाद पुलिस ने सरस डेयरी के अधिकारियों को मौके पर बुलाया। अधिकारियों ने बरामद रैपर, मोनो कार्टन और हॉलमार्क की जांच की। जांच में पैकिंग सामग्री और हॉलमार्क को नकली बताया गया। इसके बाद सरस डेयरी के राजाराम कार्यालय की ओर से रिपोर्ट पुलिस को दी गई। रिपोर्ट के आधार पर झोटवाड़ा थाने में मुकदमा दर्ज किया गया। मामले में कॉपीराइट एक्ट और ट्रेडमार्क अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई। मामले की जांच ACP झोटवाड़ा शिव कुमार भारद्वाज कर रहे हैं। ऐसे तैयार होती थी नकली घी की पैकिंग पुलिस जांच में सामने आया कि आरोपी अनिल अग्रवाल टोंक निवासी अमन जैन से रैपर और खाली मोनो कार्टन खरीदकर लाता था। इसके बाद झोटवाड़ा स्थित गोदाम में प्रिंटिंग मशीन की मदद से इन कार्टनों और रैपर पर सरस, नोट्स, महान और कृष्णा घी के ब्रांड, तारीख और हॉलमार्क फर्जी तरीके से अंकित किए जाते थे। तैयार पैकिंग को जयपुर और आसपास के इलाकों में छोटे व्यापारियों को सप्लाई किया जाता था। पुलिस के अनुसार इन फर्जी रैपर और कार्टनों का इस्तेमाल नकली घी की पैकिंग में किया जाता था। दूसरे नकली घी कारोबारियों को होती थी सप्लाई पुलिस के मुताबिक गोदाम से तैयार नकली पैकिंग को प्रमोद अग्रवाल, श्यामसुंदर राठौड़ और अन्य नकली घी कारोबारियों को सप्लाई किया जाता था। इस तरह आरोपी सीधे नकली घी बनाने के बजाय उसकी पैकिंग के लिए ब्रांडेड कंपनियों की फर्जी पैकिंग तैयार कर सप्लाई कर रहे थे। कोडवर्ड में लेते थे ऑर्डर, रास्ते और वाहन भी बदलते थे जांच में यह भी सामने आया कि आरोपी पुलिस की नजर से बचने के लिए काफी सतर्कता से काम करते थे। नकली कार्टन और रैपर की सप्लाई के लिए अलग-अलग रास्तों और वाहनों का इस्तेमाल किया जाता था। व्यापारियों से कोडवर्ड में डिमांड ली जाती थी और मांग के अनुसार पैकिंग सामग्री पहुंचाई जाती थी। पुलिस टीम के अनुसार आरोपियों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी और तकनीकी इनपुट के आधार पर पूरे नेटवर्क तक पहुंचने की कोशिश की जा रही है। गोदाम से ये सामान बरामद पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से 61,600 खाली मोनो कार्टन, 61,600 पाउच पैक, 61,600 बारकोड स्कैनर, 1 इलेक्ट्रिक मशीन, 1 प्रिंटर/कन्वेयर, 1 इलेक्ट्रिक कांटा, 1 सिलाई मशीन, सरस, नोट्स, महान और कृष्णा के नाम के नकली रैपर, फर्जी हॉलमार्क और अन्य पैकिंग सामग्री, 1 अर्टिगा कार, 1 लोडिंग टेम्पो जब्त किया है। पुलिस आरोपियों से पूछताछ कर रही है। जांच में यह पता लगाने का प्रयास किया जा रहा है कि फर्जी पैकिंग किन-किन कारोबारियों को सप्लाई की जाती थी और नकली घी के कारोबार से जुड़े अन्य लोगों की इसमें क्या भूमिका थी।
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नकली घी की पैकिंग का भंडाफोड़, कोडवर्ड में लेते ऑर्डर: 61,600 कार्टन-पाउच बरामद, सरस, लोट्स, महान और कृष्णा-ब्रांड के नाम पर तैयार हो रही थी फर्जी पैकिंग; 3 गिरफ्तार – Jaipur News
आरोपी से साठगांठ के आरोप में दरोगा निलंबित: जांच में गलत तरीके से लाभ पहुंचाने पर एसपी का एक्शन, विभागीय जांच के आदेश – Shravasti News
श्रावस्ती में मंगलवार शाम 7 बजे के बाद एसपी राहुल भाटी ने उपनिरीक्षक राम भवन प्रजापति को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया। उन पर पदीय कर्तव्यों के निर्वहन में लापरवाही और अनियमितता के आरोप हैं। पुलिस के मुताबिक, जांच के दौरान उपनिरीक्षक पर एक आरोपी से साठगांठ कर उसे जांच में अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से काम करने का आरोप सामने आया। इसे गंभीर मानते हुए निलंबन की कार्रवाई की गई है। विवेचना में अनुचित लाभ पहुंचाने का आरोप पुलिस के अनुसार, प्रकरण की जांच के दौरान राम भवन प्रजापति पर एक अभियुक्त से सांठगांठ करने का आरोप सामने आया। आरोप है कि उन्होंने अभियुक्त को विवेचना में अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से काम किया। जांच में आरोप गंभीर पाए जाने के बाद एसपी ने उन्हें निलंबित कर दिया। पहले भंगहा चौकी पर थे तैनात राम भवन प्रजापति की पूर्व में भंगहा पुलिस चौकी पर तैनाती थी। कुछ समय पहले उन्हें चौकी से हटाकर पुलिस लाइन भेज दिया गया था। वर्तमान में वह पुलिस लाइन में तैनात थे। निलंबन के बाद अब विभागीय जांच में मामले से जुड़े सभी तथ्यों और परिस्थितियों की पड़ताल की जाएगी। विभागीय जांच के निर्देश एसपी राहुल भाटी ने निलंबन के साथ पूरे मामले की विभागीय जांच कराने के निर्देश दिए हैं। जांच में आरोपों से जुड़े सभी तथ्यों और परिस्थितियों की जांच की जाएगी। पुलिस विभाग ने कहा है कि जांच निष्पक्ष और पारदर्शी तरीके से कराई जाएगी। लापरवाही पर होगी नियमानुसार कार्रवाई पुलिस विभाग के अनुसार, पुलिसकर्मियों के पदीय दायित्वों में लापरवाही, अनियमितता और अनुशासनहीनता के मामलों में नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। विभाग ने स्पष्ट किया है कि जांच के आधार पर आगे की कार्रवाई तय होगी
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शिवहर में अब टन के हिसाब से बिकेगी बालू-गिट्टी: ट्रक एसोसिएशन का फैसला, निर्माण कार्य कराने वालों पर पड़ेगा असर – Sheohar News
शिवहर ट्रक एसोसिएशन की बैठक में बालू और गिट्टी की बिक्री सीएफटी के बजाय टन के हिसाब से करने का निर्णय लिए जाने के बाद इसका सीधा असर निर्माण कार्य कराने वाले आम लोगों पर पड़ने की संभावना है। एसोसिएशन ने अलग-अलग दूरी और ट्रक के आकार के अनुसार बालू-गिट्टी की दरें भी निर्धारित की हैं। 2600 रुपये प्रति टन की दर से बिक्री करने की बात बैठक में 12 से 14 चक्का ट्रक पर बालू की बिक्री 1300 रुपये प्रति टन, जबकि 16 से 18 चक्का ट्रक पर 1200 रुपये प्रति टन करने की बात कही गई। बेलवा-दोस्तियां तक बालू की दर 1400 रुपये प्रति टन निर्धारित करने का निर्णय लिया गया। वहीं, नरवारा से शिवहर तक गिट्टी 2500 रुपये प्रति टन और बसंतपट्टी तक 2600 रुपये प्रति टन की दर से बिक्री करने की बात कही गई। निर्माण सामग्री की बढ़ सकती है कुल लागत एसोसिएशन का कहना है कि ट्रक मालिकों को बालू और गिट्टी टन के हिसाब से मिलती है, इसलिए बिक्री भी टन के आधार पर होनी चाहिए। अब सीएफटी से नापी नहीं करने का निर्णय लिया गया है। इस फैसले का असर मकान निर्माण कराने वाले लोगों पर पड़ सकता है। बालू और गिट्टी की खरीद की व्यवस्था बदलने के साथ-साथ यदि परिवहन और बाजार दरों में भी बढ़ोतरी होती है, तो निर्माण सामग्री की कुल लागत बढ़ सकती है। नियमों के उल्लंघन पर जुर्माने का भी निर्णय इससे मकान, दुकान अथवा अन्य निर्माण कार्य करा रहे लोगों का बजट प्रभावित होने की संभावना है। हालांकि, आम उपभोक्ताओं पर वास्तविक आर्थिक असर स्थानीय बाजार में लागू होने वाली अंतिम दर और सप्लाई व्यवस्था पर निर्भर करेगा। एसोसिएशन ने नियमों के उल्लंघन पर जुर्माने का भी निर्णय लिया है। ट्रक मालिक या सप्लायर द्वारा नियम तोड़ने पर 11 हजार रुपये, जबकि ड्राइवर की गलती पर 3 हजार रुपये जुर्माना लेने की बात कही गई। बैठक में विकास सिंह तरियानी छपरा, गुड्डू सिंह बेनीपुर, नवीन चौधरी नरवारा, रमेश रंजन सिंह बेरिया, रामबालक साह अंबा, सुजीत चौधरी अटकोनी, शिवम कुमार पासवान, शंभू साहनी नरवारा, नितेश कुमार भारती परसौनी, उमेश चौधरी परसौनी, मुकेश गुप्ता दोस्तियां, परमिंदर कुमार यादव अंबा और नितेश कुमार गुप्ता लक्ष्मीपुर सहित अन्य ट्रक मालिक मौजूद रहे।
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UPI पर MDR को लेकर व्यापारियों का बड़ा ऐलान, 17 राज्यों में विरोध की तैयारी
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NO UPI Day Against MDR : UPI पर MDR के विरोध में व्यापारियों ने 2 और 15 अक्टूबर को ‘नो UPI डे’ मनाने का फैसला किया है. भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के तहत 17 राज्यों के व्यापारी आंदोलन में शामिल होंगे. व्यापारियों का कहना है कि डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में लेनदेन पर किसी तरह का शुल्क लागू होने से व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है.
मोबाइल दुकानदारों ने एमडीआर का विरोध किया है.
जयपुर. UPI पर MDR को लेकर व्यापारियों ने विरोध का ऐलान किया है. भारतीय उद्योग व्यापार मंडल की गवर्निंग बॉडी की बैठक में 2 अक्टूबर और 15 अक्टूबर को नो UPI डे मनाने का फैसला किया गया है. व्यापारियों का कहना है कि UPI लेनदेन पर लगाए जा रहे MDR का असर सीधे व्यापार पर पड़ रहा है. राजस्थान समेत देश के 17 राज्यों के व्यापारी इस मुद्दे को लेकर विरोध की तैयारी कर रहे हैं.
भारतीय उद्योग व्यापार मंडल के राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूलाल गुप्ता ने बताया कि संगठन की गवर्निंग बॉडी में UPI पर MDR के विरोध में आंदोलन का फैसला लिया गया है. व्यापारियों की ओर से 2 अक्टूबर से आंदोलन शुरू किया जाएगा. इसके बाद 10 अक्टूबर को सभी संबंधित संस्थाएं अपने-अपने शहर में विरोध प्रदर्शन करेंगी. 15 अक्टूबर को काला दिवस मनाते हुए ‘नो UPI डे’ का आयोजन किया जाएगा.
UPI पर MDR को लेकर व्यापारियों में नाराजगी
व्यापारियों के मुताबिक UPI लेनदेन पर सरकार की ओर से 40 पैसा सैकड़ा MDR लागू किया गया है. इसके अलावा रेलवे, टेलीकॉम, इन्श्योरेन्स, फ्यूल और खेती से जुड़े सामान पर 5 रुपये प्रति ट्रांजेक्शन का फिक्स्ड MDR लागू किए जाने की बात कही गई है. व्यापारियों का कहना है कि डिजिटल भुगतान का इस्तेमाल लगातार बढ़ रहा है. ऐसे में लेनदेन पर किसी तरह का शुल्क लागू होने से व्यापारियों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ पड़ सकता है. इसी मुद्दे को लेकर भारतीय उद्योग व्यापार मंडल से जुड़े व्यापारी विरोध की तैयारी कर रहे हैं.
संगठन के अनुसार राजस्थान समेत 17 राज्यों के व्यापारी UPI पर MDR के विरोध में हैं. आंदोलन को अलग-अलग शहरों और राज्यों में व्यापारिक संगठनों के स्तर पर आगे बढ़ाने की तैयारी की जा रही है. 2 अक्टूबर को आंदोलन की शुरुआत होगी. इसके बाद 10 अक्टूबर को देश के अलग-अलग शहरों में विरोध प्रदर्शन किया जाएगा. संगठन ने सभी संबंधित संस्थाओं से अपने शहर में विरोध प्रदर्शन करने की अपील की है. इसके बाद 15 अक्टूबर को नो UPI डे मनाया जाएगा. इस दिन व्यापारी UPI के जरिए भुगतान नहीं करने का संदेश देते हुए MDR के खिलाफ अपना विरोध दर्ज कराएंगे. संगठन ने इसे काला दिवस के तौर पर मनाने का फैसला किया है.
काली पट्टी बांधकर भी जताएंगे विरोध
भारतीय उद्योग व्यापार मंडल से जुड़े व्यापारी सिर्फ तय तारीखों पर ही प्रदर्शन नहीं करेंगे. संगठन से जुड़े व्यापारी लगातार काली पट्टी बांधकर भी अपना विरोध दर्ज कराएंगे. इसके जरिए UPI पर MDR लगाए जाने के खिलाफ व्यापारियों की नाराजगी सामने रखने की तैयारी है. राष्ट्रीय अध्यक्ष बाबूलाल गुप्ता ने बताया कि व्यापारियों की ओर से आंदोलन को लेकर अलग-अलग स्तर पर तैयारी की जा रही है. संगठन का कहना है कि UPI का इस्तेमाल करने वाले व्यापारियों के सामने MDR को लेकर स्थिति साफ होनी चाहिए और इस मुद्दे पर सरकार से बातचीत की जाएगी. फिलहाल 2 अक्टूबर से शुरू होने वाले आंदोलन के बाद 10 अक्टूबर को शहरों में विरोध प्रदर्शन और 15 अक्टूबर को नो UPI डे के जरिए व्यापारी अपना विरोध दर्ज कराने की तैयारी में हैं. राजस्थान समेत 17 राज्यों के व्यापारियों के इस आंदोलन में शामिल होने का दावा भारतीय उद्योग व्यापार मंडल की ओर से किया गया है.
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आनंद पाण्डेय वर्तमान में News18 हिंदी (राजस्थान डिजिटल) में बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले 5 वर्षों से सक्रिय पत्रकारिता के क्षेत्र में अ…
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पत्तियों से बनता है सिक्किम का ये अनोखा फूड, नाम है गुन्द्रुक, जानें कैसे होता है तैयार
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सिक्किम का गुन्द्रुक अपनी अनोखी बनाने की प्रक्रिया और खट्टे स्वाद के लिए जाना जाता है. हरी पत्तेदार सब्जियों को खास तरीके से फरमेंट करके तैयार किया जाने वाला यह पारंपरिक फूड पहाड़ी खान-पान का खास हिस्सा है.
सिक्किम की पहाड़ी रसोई में कई ऐसी पारंपरिक चीजें मिलती हैं, जिनके पीछे स्वाद के साथ-साथ खाना बचाकर रखने की पुरानी समझ भी छिपी है. इन्हीं में से एक है गुन्द्रुक. यह कोई साधारण सूखी सब्जी नहीं, बल्कि हरी पत्तियों को प्राकृतिक तरीके से खमीर उठाकर यानी फरमेंट करके तैयार किया जाने वाला पारंपरिक भोजन है. सिक्किम के अलावा हिमालयी इलाकों और नेपाल में भी इसे खाया जाता है.
गुन्द्रुक मुख्य रूप से सरसों, मूली, राई जैसी पत्तेदार सब्जियों और कुछ जगहों पर फूलगोभी या पत्तागोभी की पत्तियों से बनाया जाता है. ताजी पत्तियों को पहले साफ किया जाता है और कुछ समय के लिए मुरझाने दिया जाता है. इसके बाद इन्हें हल्का कुचला जाता है और एक बर्तन में दबाकर रखा जाता है. यहीं से इसकी खास प्रक्रिया शुरू होती है.
इस दौरान पत्तियों में मौजूद प्राकृतिक सूक्ष्मजीवों की मदद से फरमेंटेशन होता है. इससे पत्तियों में हल्का खट्टापन और अलग तरह की खुशबू व स्वाद विकसित होता है. वैज्ञानिक अध्ययनों में गुन्द्रुक के फरमेंटेशन में लैक्टिक एसिड बैक्टीरिया की भूमिका भी सामने आई है.
कैसे बनाया जाता है गुन्द्रुक?
सबसे पहले ताजी हरी पत्तियों को अच्छी तरह साफ किया जाता है. इसके बाद उन्हें कुछ समय के लिए धूप में या हवा में रखकर थोड़ा मुरझाया जाता है, ताकि उनमें मौजूद अतिरिक्त पानी कम हो जाए. फिर पत्तियों को छोटे टुकड़ों में काटकर हल्का कुचला जाता है.
अब इन पत्तियों को साफ बर्तन में भरकर अच्छी तरह दबाया जाता है. पारंपरिक तरीकों में मिट्टी के बर्तन या दूसरे बंद बर्तनों का इस्तेमाल किया जाता रहा है. पत्तियों को दबाकर रखने का उद्देश्य उनके बीच की हवा कम करना होता है. इसके बाद बर्तन को बंद करके कुछ दिनों के लिए सामान्य तापमान पर फरमेंट होने दिया जाता है. पारंपरिक तरीकों में यह समय समुदाय और मौसम के हिसाब से बदल सकता है, कई विधियों में करीब 7 से 10 दिन और कुछ अध्ययनों में इससे लंबी अवधि भी दर्ज की गई है.
जब पत्तियों में अच्छा खट्टापन आ जाता है, तो उन्हें बर्तन से निकालकर धूप में अच्छी तरह सुखाया जाता है. सूखने के बाद गुन्द्रुक को लंबे समय तक रखा जा सकता है और जरूरत के अनुसार इस्तेमाल किया जाता है.
गुन्द्रुक खाया कैसे जाता है?
सूखे गुन्द्रुक को सीधे खाने के बजाय आमतौर पर पानी में भिगोकर नरम किया जाता है. इसके बाद इससे खट्टी सब्जी, सूप या दूसरी पारंपरिक डिश तैयार की जाती है. कई जगह इसे चावल के साथ भी परोसा जाता है. इसका स्वाद हल्का खट्टा और काफी अलग होता है, इसलिए पहली बार खाने वालों को भी यह सामान्य सब्जियों से बिल्कुल अलग लग सकता है.
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विविधा सिंह हिंदी डिजिटल पत्रकारिता का उभरता हुआ नाम हैं. उन्हें डिजिटल मीडिया में साढ़े चार साल का अनुभव है. वर्तमान में वह News18 हिंदी में सब एडिटर के तौर पर कार्यरत हैं. वह लाइफस्टाइल वर्टि…
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रूस का परमाणु बम गिराने में सक्षम विमान क्रैश: 6 की मौत; उड़ान भरते ही दुर्घटनाग्रस्त हुआ, जमीन से टकराने के बाद फ्यूल टैंक में ब्लास्ट
मॉस्को1 घंटे पहले
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रूस में मंगलवार को प्लेन क्रैश का यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।
रूस का परमाणु बम गिराने में सक्षम Tu-95 सैन्य विमान मंगलवार को ट्रेनिंग उड़ान के दौरान क्रैश हो गया। हादसे में 6 क्रू मेंबर मारे गए और एक घायल हुआ।
रूसी रक्षा मंत्रालय के मुताबिक, उड़ान भरने के कुछ ही देर बाद विमान राजधानी मॉस्को से 4000 किमी दूर अमूर प्रांत के क्रास्नोयारोवो गांव के पास दुर्घटनाग्रस्त हो गया और एक सुनसान इलाके में जा गिरा। जमीन से टकराते ही विमान का फ्यूल टैंक ब्लास्ट हो गया, जिससे भीषण आग लग गई।
रूस की न्यूज एजेंसी TASS के मुताबिक, दुर्घटना के समय विमान में कोई परमाणु हथियार या गोला-बारूद लोड नहीं था।
क्रैश के बाद की तस्वीरें…

रूस के के अमूर प्रांत में प्लेन क्रैश के बाद आग की लपटे और धुआं उठता नजर आ रहा है।
रूसी सैन्य प्लेन के फ्यूल टैंक में ब्लास्ट के बाद प्लेन में आग लगी।
ईंधन में विस्फोट के कारण क्रैश होने की संभावना
रूसी अधिकारियों ने अभी तक क्रैश की सटीक वजह नहीं बताई है। हालांकि शुरुआती जांच के मुताबिक, इस हादसे का कारण विमान में ईंधन का विस्फोट हो सकता है।
मामले की हाई लेवल जांच के आदेश दे दिए गए है।
रूस के Tu-95 सैन्य विमान के बारे में जानिए
Tu-95 सैन्य विमान को सोवियत संघ के दौर में डिजाइन किया गया था। यह रूस का लंबी दूरी का रणनीतिक बॉम्बर है, जिसका इस्तेमाल 1980 के दशक से रूसी लंबी दूरी की एविएशन में हो रहा है।
- इसकी खासियत है कि यह परमाणु हथियार ले जाने वाली क्रूज मिसाइलें दाग सकता है।
- इसे लंबी दूरी तक उड़कर दुश्मन के इलाके में हमला करने के लिए डिजाइन किया गया था।
- इसमें जेट इंजन की जगह चार टर्बोप्रॉप इंजन हैं। इसके बावजूद यह दुनिया के सबसे तेज टर्बोप्रॉप विमानों में शामिल है।
- Tu-95 ने 1952 में पहली उड़ान भरी और 1957 में सोवियत वायुसेना में शामिल हुआ। इसके बाद इसके कई आधुनिक वर्जन विकसित किए गए।
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Poco X8 5G Review: पोको का बजट फ्रेंडली गेमिंग फोन, दो दिन चलेगी बैटरी
Poco X8 5G
- Display
- Processor
- Front Camera
- Rear Camera
- Ram
- Storage
- Battery
- Os
- Resolution
- Display6.83 inch, Full HD+ AMOLED
- ProcessorQualcomm Snapdragon 6s Gen 4
- Front Camera16MP
- Rear Camera50MP + 2MP
- Ram8GB
- Storage256GB
- Battery9000mAh
- OsAndroid 16, Hyper OS3
- Resolution2772 x 1280 Pixel
Poco X8 5G और Poco X8 Pro को कंपनी ने कुछ दिन पहले ही भारतीय बाजार में पेश किया है। चीनी कंपनी के ये दोनों फोन तगड़ी बैटरी के साथ दमदार फीचर्स से लैस हैं। इस सीरीज के Poco X8 5G में कंपनी ने 9000mAh बैटरी, 50MP कैमरा जैसे फीचर्स दिए गए हैं। इसमें कंपनी ने 1.5K AMOLED डिस्प्ले पैनल यूज किया है। इस स्मार्टफोन को हमने कुछ दिन यूज किया है। आइए जानते हैं कैसा रहा हमारा एक्सपीरियंस?
Poco X8 5G भारत में तीन स्टोरेज वेरिएंट्स- 6GB RAM + 128GB, 8GB RAM + 128GB और 8GB RAM + 256GB में आता है। इसे 3 कलर ऑप्शन- Black, Fierry Orange और Frost White में खरीदा जा सकता है। हमने इस फोन का Fierry Orange वाला वेरिएंट यूज किया है। इस फोन की शुरुआती कीमत 29,999 रुपये है। वहीं इसका टॉप वेरिएंट 35,999 रुपये में आता है।
पोको एक्स 8 5जी
Poco X8 5G: डिजाइन और डिस्प्ले
पोको का यह मिड बजट फोन डुअल टोन बैक पैनल वाले डिजाइन के साथ आता है। इसके बैक में iPhone 16 की तरह वर्टिकली अलाइंड डुअल कैमरा मॉड्यूल मिलता है। फोन के बैक पैनल में पॉलीकॉर्बोनेट यानी प्लास्टिक बॉडी का इस्तेमाल किया गया है। इस फोन के फ्रंट में सेंटर अलाइंड पंच-होल डिजाइन वाला डिस्प्ले मिलता है। डिस्प्ले के तीन ओर पतले बेजल्स दिए गए हैं। वहीं, नीचे का चिन अन्य साइड के बेजल के मुकाबले मोटा है।
फोन के नीचे की तरफ USB Type C चार्जिंग पोर्ट, स्पीकर ग्रिल, सिम कार्ड स्लॉट और माइक मिलेंगे। वहीं, इस फोन की बाईं तरफ कोई बटन देखने को नहीं मिलेगा। वहीं, दाईं तरफ वॉल्यूम और पावर बटन दिए गए हैं। इस बजट फोन का वजन करीब 226 ग्राम है। वजन ज्यादा होने की वजह से सिंगल हैंड में यूज करते समय फोन आपको थोड़ा भारी लग सकता है।
पोको एक्स 8 5जी
इसमें 6.83 इंच का FHD+ रेजलूशन वाला बड़ा 1.5K AMOLED डिस्प्ले मिलता है, जो 120Hz तक हाई रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। हाई रिफ्रेश रेट की वजह से फोन में कॉन्टेंट स्क्रॉलिंग का अच्छा एक्सपीरियंस मिलेगा। इसके डिस्प्ले की पीक ब्राइटनेस 3500 निट्स तक की है। अच्छी ब्राइटनेस और AMOLED डिस्प्ले की वजह से धूप और तेज रोशनी में भी डिस्प्ले पर कॉन्टेंट साफ दिखाई देते हैं। वहीं, OTT पर वीडियो देखते समय आपको वाइब्रेंट एक्सपीरियंस मिलेगा।
हमने इस फोन पर स्टेंडर्ड रेजलूशन वाले बैटल रॉयल गेम खेलकर देखे। बजट फोन होने के बावजूद इस फोन के डिस्प्ले में गेम खेलते समय लैगिंग महसूस नहीं होती है। ओवरऑल फोन का डिजाइन आपको प्राइस रेंज के मुताबिक ठीक लगेगा।
पोको एक्स 8 5जी
Poco X8 5G की परफॉर्मेंस
पोको का यह मिड बजट स्मार्टफोन Qualcomm Snapdragon 6s Gen 4 प्रोसेसर पर काम करता है। इस फोन में 8GB तक रैम के साथ 256GB तक इंटरनल स्टोरेज का सपोर्ट मिलेगा। इस फोन पर आप बेसिक कॉलिंग के साथ-साथ HD क्वालिटी के वीडियो कॉन्टेंट एक्सपीरियंस कर सकते हैं। मल्टी-टास्किंग के दौरान भी फोन का परफॉर्मेंस ठीक रहता है। हालांकि, हमने इसके 6GB रैम वाला वेरिएंट यूज किया है।
यह Android 16 पर बेस्ड HyperOS 3 पर काम करता है। शाओमी का यह ऑपरेटिंग सिस्टम कई पर्सनलाइज्ड फीचर्स के साथ आता है। ये फीचर्स आपको इस फोन में यूज करने के लिए मिलेंगे। हालांकि, इसमें कई प्री-इंस्टॉल्ड ऐप्स मिलते हैं, जो आपको निराश कर सकते हैं। हालांकि, आप इन प्री-इंस्टॉल्ड ऐप्स को फोन से डिलीट कर सकते हैं। इस फोन के साथ कंपनी 2 साल OS और 3 साल सिक्योरिटी अपडेट देने का ऑफर दे रही है। कंपनी ने इसमें लेटेस्ट ऑपरेटिंग सिस्टम के साथ AI फीचर्स भी दिए हैं जो Google Gemini पर बेस्ड हैं।
पोको एक्स 8 5जी
पोको के इस फोन में 9000mAh की तगड़ी बैटरी दी गई है। इसे चार्ज करने के लिए 67W फास्ट चार्जिंग फीचर दिया गया है। इसमें 10W रिवर्स चार्जिंग फीचर का सपोर्ट मिलता है। इससे आप अपने TWS, स्मार्टवॉच आदि को भी चार्ज कर सकते हैं। पोको के इस फोन को आप एक बार फुल चार्ज करके दो दिन आसानी से इस्तेमाल कर सकते हैं। फोन को 0 से 100 प्रतिशत तक चार्ज होने में करीब 80 से 85 मिनट का समय लगता है। यह पोको का भारत में अब तक लॉन्च हुआ सबसे बड़ी बैटरी वाला फोन है।
Poco X8 5G का कैमरा
इस फोन के बैक में डुअल कैमरा सेटअप मिलता है। इसमें 50MP का मेन कैमरा दिया गया है। इसके अलावा फोन में एक 2MP का सेकेंडरी कैमरा दिया गया है। कैमरा सेटअप के साथ एक LED फ्लैश लाइट भी दी गई है। फोन का कैमरा AI फीचर से लैस है। वहीं, सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए इसमें 16MP का कैमरा मिलता है। फोन के कैमरे से आप दिन की रोशनी में ठीक-ठाक तस्वीर क्लिक कर सकते हैं। वहीं, कम रोशनी में भी फोन के कैमरे से ली गई तस्वीर आपको अच्छी नहीं लगेगी।
पोको एक्स 8 5जी
हाई रेजलूशन वाली तस्वीर क्लिक करने के लिए आपको आपको कैमरा ऐप में जाकर 50MP वाला मोड सेट करना होगा। स्टैंडर्ड मोड में यह 12.5MP वाले सेंसर से फोटो क्लिक करेगा। फोन से कम रोशनी में तस्वीर लेने के लिए नाइट मोड का भी सपोर्ट मिलता है। हालांकि, कम रोशनी में ली गई तस्वीर ज्यादा जूम करने पर पिक्सलेट होती है।
मेन कैमरा से ली गई तस्वीर की क्वालिटी आपको ठीक लगेगी। इसे आप सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर अपलोड करने के लिए यूज कर सकते हैं। आप इस फोन से बेसिक के साथ-साथ हाई क्वालिटी तस्वीरें भी क्लिक कर सकते हैं। QR कोड स्कैन करके आप ऑनलाइन डिजिटल पेमेंट भी कर सकते हैं। सेल्फी कैमरे से ली गई तस्वीर भी ठीक लगेगी। हालांकि, ली गई तस्वीर को अगर आप ज्यादा जूम करते हैं तो यह पिक्सलेट होती है।
पोको एक्स 8 5जी
हमारा फैसला
पोको का यह फोन डेली यूज के लिए एक अच्छा विकल्प हो सकता है। इस स्मार्टफोन की सबसे अच्छी बात ये है कि फोन को अगर आप एक बार फुल चार्ज कर लेते हैं तो आपको दो दिन तक चार्जर की जरूरत नहीं पड़ेगी। हालांकि, शाओमी के सब ब्रांड के इस गेमिंग फोन में कई तरह की कमियां भी हैं। फोन का कैमरा और इंप्रूव किया जा सकता था। साथ ही, कीमत को देखते हुए इसमें 7Gen का चिपसेट यूज हो सकता था, जो इसकी परफॉर्मेंस को और बेहतर बना देता।
दिल्ली में आस्था कुंज रेप केस पर गरमाई सियासत: केजरीवाल ने महिलाओं पर पाबंदियां लगाने को लेकर सरकार को घेरा – New Delhi News
देश की राजधानी दिल्ली में हुए आस्था कुंज रेप केस के बाद से गर्माई राजनीति और महिला सुरक्षा के मुद्दों पर आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने महिलाओं के सुरक्षा उपायों की बजाय उन पर पाबंदियां लगाने के सरकार के फैसलों को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि राजधानी में महिलाओं को सुरक्षित माहौल देने के बजाय उन पर बंदिशें थोपी जा रही हैं। महिलाओं पर पाबंदियां लगाना बंद करे सरकार- केजरीवाल हाल ही में कुछ महिला कॉलेजों में ऑनलाइन क्लासेज शुरू किए जाने और छात्राओं को शाम या रात के वक्त घरों से बाहर न निकलने की हिदायत दिए जाने के फैसलों पर कड़ा रोष जताते हुए केजरीवाल ने कहा कि यह कदम न्यायसंगत नहीं है। उन्होंने सवाल उठाया कि सारी पाबंदियां सिर्फ लड़कियों पर ही क्यों लगाई जाती हैं। देश की राजधानी में रहने वाली हर महिला और छात्रा एक स्वतंत्र नागरिक है, जिसके पास अपने मौलिक अधिकार और जीने की पूरी आज़ादी है। उन्होंने कहा कि महिलाओं को सुरक्षा देने की जिम्मेदारी सरकार की है, न कि उन्हें लेक्चर देने की। सीसीटीवी, स्ट्रीट लाइट्स और सेंट्रल कमांड स्ट्रक्चर की मांग दिल्ली में सुरक्षा व्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए ठोस कदम उठाने की मांग करते हुए आप संयोजक ने कहा कि सरकार को कागजी फरमान जारी करने के बजाय जमीनी स्तर पर काम करना चाहिए। पूरी दिल्ली को सीसीटीवी कैमरों के नेटवर्क से जोड़ा जाए और डार्क स्पॉट्स पर तुरंत स्ट्रीट लाइट्स लगाई जाएं। एक मजबूत सेंट्रल कमांड स्ट्रक्चर बनाकर सीसीटीवी फुटेज की रियल-टाइम मॉनिटरिंग सुनिश्चित की जाए। हर कॉलेज के अंदर दो-दो महिला पुलिस अधिकारियों समेत सुरक्षा बल तैनात किए जाएं। अपराधियों को संरक्षण मिलने का लगाया आरोप सरकार और प्रशासनिक मशीनरी पर कड़ा प्रहार करते हुए केजरीवाल ने आरोप लगाया कि महिलाओं के खिलाफ अपराध करने वाले तत्वों के खिलाफ त्वरित और सख्त कार्रवाई करने की बजाय कई बार पूरा सिस्टम उन्हें बचाने में लग जाता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आज समय की मांग है कि महिला स्टूडेंट्स को पूरी सुरक्षा और भयमुक्त माहौल दिया जाए, तभी राजधानी में महिलाओं के खिलाफ हो रहे अपराधों पर अंकुश लगाया जा सकेगा।
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कोटपूतली में कांग्रेस कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन, पुलिस से झड़प: जिलाध्यक्ष हिरासत में; मुख्य चुनाव आयुक्त को हटाने की मांग – Kotputli-Behror News
कोटपूतली में मंगलवार को कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने AICC के निर्देश पर लोकतंत्र व चुनावी मुद्दों पर प्रदर्शन किया। कार्यकर्ता नारेबाजी करते हुए कलेक्ट्रेट पहुंचे। प्रदर्शन में कांग्रेस नेताओं ने मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने और गिरफ्तारी की मांग की। उन्होंने चुनावी व्यवस्था में गड़बड़ी व लोकतंत्र की हत्या का आरोप लगाया। सुबह 11 बजे शुरू हुए प्रदर्शन के लिए पुलिस बल तैनात था। कलेक्ट्रेट जाने वाले रास्तों पर बैरिकेड लगाए गए। कार्यकर्ताओं और पुलिस के बीच झड़प हुई, जिसके बाद कांग्रेस जिलाध्यक्ष इंद्राज गुर्जर को हिरासत में लिया गया। प्रशासन ने मीडिया को भी कलेक्ट्रेट परिसर में जाने से रोका। अधिकारी लगातार प्रदर्शन स्थल पर नजर रख रहे थे। बाद में, कांग्रेस पदाधिकारियों का प्रतिनिधिमंडल जिला कलेक्टर से मिला। उन्होंने निकाय चुनाव में पुलिस प्रशासन पर सत्ता पक्ष से मिलीभगत का आरोप लगाया और आगामी पंचायतीराज चुनावों में निष्पक्ष व्यवस्था की मांग की।
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PM मोदी की डिग्री मामले में केजरीवाल की याचिका खारिज: 10 साल से चल रही थी सुनवाई, यूनिवर्सिटी से की थी डिग्री दिखाने की मांग
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अहमदाबाद2 घंटे पहले
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गुजरात हाई कोर्ट ने मंगलवार को पीएम नरेंद्र मोदी की डिग्री से जुड़े मामले में आम आदमी पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल की अपील खारिज कर दी। साथ ही कोर्ट ने केजरीवाल पर लगे 25 हजार रुपए के जुर्माने को भी बरकरार रखा।
साल 2016 में केजरीवाल ने सेंट्रल इंफॉर्मेशन कमीशन (सीआईसी) को चिट्ठी लिखकर मांग की थी कि पीएम नरेंद्र मोदी की डिग्री सार्वजनिक की जानी चाहिए। अप्रैल 2016 में सीआईसी ने दिल्ली यूनिवर्सिटी और गुजरात यूनिवर्सिटी को निर्देश दिया था कि पीएम मोदी की डिग्री से संबंधित जानकारी उपलब्ध कराएं।
लेकिन, सीआईसी के फैसले के खिलाफ यूनिवर्सिटी गुजरात हाईकोर्ट पहुंच गई थी। हाईकोर्ट ने सीआईसी के आदेश को रद्द कर दिया था। इस फैसले के खिलाफ केजरीवाल ने हाईकोर्ट में पुर्नयाचिका दायर की थी।
हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने 31 मार्च, 2023 को अपना फैसला बरकरार रखते हुए उन पर 25,000 रुपए का जुर्माना भी लगाया था। इसके बाद केजरीवाल ने हाईकोर्ट की डबल बेंच में याचिका लगाई थी, जिसका फैसला आज आया।

केजरीवाल ने 2016 में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान यह बात कही थी।
मनु सिंघवी ने कहा- केजरीवाल ने पीएम मोदी की डिग्री पाने के लिए जोर नहीं दिया था
अपनी अपील की सुनवाई के दौरान केजरीवाल के वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने जुर्माना लगाने के आधार को चुनौती दी थी। उन्होंने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल ने पीएम मोदी की डिग्री पाने के लिए लगातार जोर नहीं दिया था, जैसा कि सिंगल बेंच ने माना था।
उन्होंने तर्क दिया था कि सीआईसी ने स्वतः संज्ञान लेते हुए कार्यवाही शुरू की थी और उन्हें किसी औपचारिक आवेदन के बजाय एक पत्र के आधार पर प्रतिवादी बनाया था। सिंघवी ने तर्क दिया कि अगर डिग्री सच में ऑनलाइन उपलब्ध है, जिसे शायद गुजरात यूनिवर्सिटी ने इसके सार्वजनिक महत्व को देखते हुए उपलब्ध कराया है तो यह आरटीआई एक्ट के दायरे में आनी चाहिए और कार्रवाई की वजह खत्म हो जाएगी।

साल 2014 के लोकसभा चुनावों में दी गई पीएम मोदी की एजुकेशन से जुड़ी जानकारी का स्क्रीन शॉट।
सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा- केजरीवाल ने संस्थान को बदनाम किया यूनिवर्सिटी की ओर से पेश होते हुए सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने तर्क दिया कि केजरीवाल ने लगातार यह केस लड़ा और संस्थान को बदनाम करने के लिए प्रेस कॉन्फ्रेंस भी कीं।
उन्होंने कहा कि हाई कोर्ट को केजरीवाल पर अपील करने के लिए जुर्माना लगाना चाहिए ताकि यह पक्का किया जा सके कि आरटीआई एक्ट का गलत इस्तेमाल न हो और सरकारी अधिकारियों का काम का कीमती समय ऐसी रिक्वेस्ट से निपटने में बर्बाद न हो जिनसे एक्ट का मकसद पूरा नहीं होता।

अप्रैल 2023 में, गुजरात यूनिवर्सिटी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की डिग्री को लेकर अरविंद केजरीवाल के बयानों को लेकर मानहानि का मुकदमा दायर किया था।
केजरीवाल ने की थी डिग्री सार्वजनिक करने की मांग
2016 में केजरीवाल ने सीआईसी को पत्र लिखकर मांग की थी कि प्रधानमंत्री की डिग्री सार्वजनिक की जाए। अप्रैल 2016 में तत्कालीन सीआईसी एम. श्रीधर आचार्युलु ने दिल्ली यूनिवर्सिटी और गुजरात यूनिवर्सिटी को निर्देश दिया था कि वे पीएम मोदी को मिली डिग्रियों के बारे में केजरीवाल को जानकारी दें।
पत्र के आधार पर सीआईसी ने यूनिवर्सिटी को पीएम मोदी की शैक्षणिक योग्यता के रिकॉर्ड केजरीवाल को देने का निर्देश दिया। यूनिवर्सिटी ने सीआईसी के आदेश का विरोध करते हुए कहा कि किसी की गैर-जिम्मेदाराना जिज्ञासा सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत जनहित नहीं हो सकती।
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