Saturday, May 30, 2026
Home Blog

विदेश यात्रा ही नहीं, राहु-शनि दिलाएंगे अपार दौलत और नागरिकता, जन्म कुंडली के इन शुभ योगों


Foreign Settlement Astrology Prediction: बेहतर लाइफस्टाइल, जॉब, एजुकेशन और व्यक्तिगत विकास की तलाश में आज भी लाखों लोग विदेश में बसने का सपना देखते हैं. कुछ लोग विदेश में बसने में सफल हो जाते हैं, जबकि कई लोगों को कड़ी मेहनत के बावजूद बार-बार रुकावट और देरी का सामना करना पड़ता है. वैदिक ज्योतिष के अनुसार, विदेश में बसना विशेष ग्रह योगों और जन्म कुंडली के कुछ खास भावों पर निर्भर करता है. ज्योतिषाचार्यों का मानना है कि विदेश जाना केवल किस्मत का नहीं बल्कि भाग्य, ग्रहों और सही समय का मामला है. कुंडली के चौथे, नौवें और बारहवें भाव को मुख्य रूप से विदेश में बसने की संभावना के लिए देखा जाता है.

कुंडली का चौथा और बारहवां भाव
चौथा भाव घर, परिवार, जड़ों, भावनात्मक सुरक्षा और आराम का प्रतीक है. बारहवां भाव विदेश, जन्मस्थान से दूर रहना, अपरिचित जगहों पर जीवन और अलग माहौल का संकेत देता है. नौवां भाव लंबी दूरी की यात्रा, उच्च शिक्षा, भाग्य और दूरस्थ स्थानों से मिलने वाले अवसरों से जुड़ा है.

कुंडली में नौवां और बारहवां भाव
चौथे और बारहवें भाव के बीच मजबूत संबंध को सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है, जिससे यह संकेत मिलता है कि व्यक्ति अपने देश को छोड़कर विदेश में बस सकता है. इसी तरह, नौवें और बारहवें भाव का संबंध भी विदेश यात्रा, विदेश में पढ़ाई, अंतरराष्ट्रीय करियर और अपने स्थान से दूर अवसरों की ओर इशारा करता है.

कुंडली में राहु का प्रभाव
राहु को विदेश में बसने के लिए सबसे मजबूत ग्रहों में से एक माना जाता है. यह व्यक्ति को नए स्थानों की ओर आकर्षित करता है और अंतरराष्ट्रीय अनुभव दिलाता है. राहु विदेशी संस्कृतियों, अंतरराष्ट्रीय संबंधों, अचानक मिलने वाले अवसरों और जीवन में अनोखे रास्तों का भी प्रतीक है.

राहु के साथ शनि की भी भूमिका
साथ ही, शनि की भूमिका भी महत्वपूर्ण मानी जाती है, जो धैर्य और मेहनत की परीक्षा लेता है. इससे वीजा संबंधी समस्याएं, अस्वीकृति, आर्थिक परेशानी या लंबा इंतजार हो सकता है. लेकिन अगर कुंडली में विदेश में बसने के प्रबल योग हैं, तो ज्योतिषाचार्य मानते हैं कि शनि अंत में लगातार प्रयास करने वालों को सफलता जरूर देता है.

गुरु ग्रह करेंगे कमाल
विदेश से जुड़े अवसरों में बृहस्पति भी मददगार होता है. इसका प्रभाव विकास, मार्गदर्शन, स्वीकृति, उच्च शिक्षा और विस्तार से जुड़ा है. बृहस्पति की अनुकूल दशा में अक्सर ऐसे मौके मिलते हैं, जो विदेश जाने या बसने में मदद करते हैं.

विदेश में बसने के मजबूत योग
ज्योतिष में दशा और गोचर को भी बहुत महत्व दिया जाता है. अगर कुंडली में विदेश में बसने के मजबूत योग हैं, तो भी परिणाम तभी मिलते हैं जब ग्रहों का सही समय आता है. बड़े बदलाव जैसे शिफ्टिंग, वीजा अप्रूवल, विदेश में नौकरी के मौके या स्थायी रूप से बसना, तब एक्टिव होते हैं जब राहु, शनि या बृहस्पति की दशा या गोचर चौथे, नौवें या बारहवें भाव से जुड़े होते हैं.

कुंडली का जानना जरूरी
पढ़ाई, नौकरी और बेहतर लाइफ के लिए विदेश जाने की प्रवृत्ति बढ़ने के साथ ही विदेश में बसने से जुड़ी ज्योतिषीय सलाह लेने वालों की संख्या भी तेजी से बढ़ी है. आज कई लोग अपनी कुंडली दिखाकर जानना चाहते हैं कि क्या उनकी जन्म कुंडली विदेश में जीवन के लिए अनुकूल है और सही समय कब है. ज्योतिषाचार्य कहते हैं कि किसी एक योग को विदेश में बसने का संकेत नहीं माना जा सकता, बल्कि पूरी कुंडली का विश्लेषण जरूरी है. हालांकि, चौथे, नौवें और बारहवें भाव के बीच मजबूत संबंध और अनुकूल ग्रह दशाएं आमतौर पर देश से बाहर जीवन के प्रमुख संकेत माने जाते हैं.



Source link

टॉयलेट में बर्तन धोने पर IRCTC vs FSSAI, रेलवे बोला- कोई नोटिस नहीं मिला


Last Updated:

लोकमान्य तिलक टर्मिनस (LTT)-एर्नाकुलम दुरंतो एक्सप्रेस में कथित तौर पर ट्रेन के टॉयलेट परिसर में खाने के बर्तन धोने का वीडियो वायरल होने के बाद नया विवाद खड़ा हो गया है. एक तरफ फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) ने दावा किया है कि उसने इस मामले में रेलवे की सहायक कंपनी आईआरसीटीसी (IRCTC) को नोटिस जारी किया है, वहीं दूसरी ओर IRCTC ने कहा है कि उसे FSSAI की ओर से कोई नोटिस नहीं मिला है. हालांकि रेलवे कैटरिंग कंपनी ने यह भी माना है कि घटना के बाद कार्रवाई की गई है.

ख़बरें फटाफट

Zoom

ट्रेन टॉयलेट में धोए जा रहे थे बर्तन

अगर आप भी ट्रेन में सफर के दौरान खाना ऑर्डर करते हैं, तो यह खबर आपको हैरान कर सकती है। सोशल मीडिया पर एक ऐसा वीडियो वायरल हुआ है, जिसने ट्रेन के खाने की सफाई पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं. मामला लोकमान्य तिलक टर्मिनस (LTT)-एर्नाकुलम दुरंतो एक्सप्रेस (ट्रेन संख्या 12223) का है. इस ट्रेन के टॉयलेट में खाने के बर्तन धोए जाने का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद हड़कंप मच गया है. इस पूरे मामले पर अब फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया (FSSAI) और रेलवे की सहायक कंपनी इंडियन रेलवे कैटरिंग एंड टूरिज्म कॉर्पोरेशन (IRCTC) के बीच बयानों की जंग छिड़ गई है.

एक तरफ जहाँ FSSAI ने इसे यात्रियों की सेहत से खिलवाड़ बताते हुए कड़ा नोटिस जारी करने का दावा किया है, वहीं दूसरी तरफ IRCTC ने साफ कर दिया है कि उन्हें ऐसा कोई नोटिस नहीं मिला है. हालांकि, रेलवे ने यह भी जोड़ा कि वीडियो सामने आते ही उन्होंने आरोपी स्टाफ पर तुरंत सख्त एक्शन ले लिया था.

FSSAI का दावा, स्वच्छता नियमों का गंभीर उल्लंघन
वीडियो सामने आने के बाद FSSAI ने इसे खाद्य सुरक्षा और स्वच्छता नियमों का गंभीर उल्लंघन बताया. FSSAI ने इस घटना को फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड्स रेगुलेशंस, 2011 का सीधा उल्लंघन माना है. FSSAI के मुताबिक, उन्होंने 28 मई 2026 को IRCTC को एक वैधानिक नोटिस जारी किया है. इस नोटिस में IRCTC से तुरंत पूरे मामले की रिपोर्ट मांगी गई है और चेतावनी दी गई है कि लापरवाही जारी रहने पर फूड सेफ्टी एक्ट, 2006 के तहत कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाएगी.

IRCTC की सफाई- FSSAI से कोई नोटिस नहीं मिला.
आईआरसीटीसी ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर FSSAI के दावों को खारिज करते हुए स्थिति साफ की है. आईआरसीटीसी ने साफ किया कि उन्हें इस मामले में FSSAI की तरफ से कोई नोटिस हासिल नहीं हुआ है. रेलवे कैटरिंग कंपनी ने यह भी साफ किया कि उसके सभी मोबाइल कैटरिंग यूनिट्स FSSAI लाइसेंस के तहत संचालित होते हैं, लेकिन उनका निरीक्षण और नियमन रेलवे के नामित अधिकारियों की ओर से किया जाता है, न कि FSSAI अधिकारियों की ओर से.



Source link

जाह्नवी कपूर ने मलयालम फिल्मों से क्यों किया तौबा? कभी नहीं करेंगी काम


Last Updated:

जाह्नवी कपूर इन दिनों अपनी आगामी फिल्म ‘पेड्डी’ को लेकर चर्चा में हैं. बॉलीवुड में अपनी पहचान बनाने के बाद अब वह साउथ सिनेमा में भी लगातार सक्रिय नजर आ रही हैं. हाल ही में उन्होंने एक इंटरव्यू में मलयालम भाषा को लेकर ऐसा खुलासा किया, जिसने उनके फैंस का ध्यान खींच लिया. जाह्नवी ने साफ कहा कि वह फिलहाल दोबारा मलयालम फिल्मों में काम करने के बारे में नहीं सोच रही हैं. एक्ट्रेस ने इसके पीछे की वजह का खुलासा किया.

नई दिल्ली. एक इंटरव्यू में जाह्नवी कपूरने बताया कि वह अलग-अलग भारतीय भाषाओं को सीखने और उनमें काम करने को लेकर काफी उत्साहित रहती हैं. उनका मानना है कि एक कलाकार के तौर पर नई भाषाएं और संस्कृतियां सीखना उनके अनुभव को और समृद्ध बनाता है. हालांकि, उन्होंने स्वीकार किया कि मलयालम भाषा उनके लिए अब तक की सबसे कठिन भाषाओं में से एक साबित हुई है. (फोटो साभार इंस्टाग्राम janhvikapoor)

जाह्नवी ने कहा, ‘मैं सच में सभी भाषाएं सीखना चाहती हूं. मुझे नई भाषाएं और नई संस्कृतियां बहुत आकर्षित करती हैं, लेकिन मलयालम की फोनेटिक्स यानी उच्चारण मेरे लिए बेहद चुनौतीपूर्ण रहे. मुझे नहीं लगता कि मुझे दोबारा मलयालम भाषा में काम करना चाहिए, क्योंकि इसे सही तरीके से बोलना मेरे लिए काफी मुश्किल है. हालांकि यह बेहद खूबसूरत और मधुर भाषा है.’ (फोटो साभार इंस्टाग्राम janhvikapoor)

अभिनेत्री ने आगे बताया कि तमिल और तेलुगु भाषाओं के साथ वह अधिक सहज महसूस करती हैं. उनके अनुसार इन भाषाओं की ध्वनियों और बोलने के तरीके से वह काफी हद तक परिचित हैं, इसलिए उनमें अभिनय करना उनके लिए आसान रहता है. यही वजह है कि वह भविष्य में तेलुगु और तमिल सिनेमा में और अधिक काम करने की इच्छुक हैं. (फोटो साभार इंस्टाग्राम janhvikapoor)

Add News18 as
Preferred Source on Google

जाह्नवी कपूर ने साल 2024 में फिल्म ‘देवरा: पार्ट 1’ के जरिए तेलुगु सिनेमा में कदम रखा था. इस फिल्म में उन्होंने अभिनेता राम चरण के साथ काम किया और दक्षिण भारतीय दर्शकों के बीच भी अपनी पहचान बनाई. अभिनेत्री का कहना है कि तेलुगु फिल्म इंडस्ट्री में काम करने का अनुभव उनके लिए बेहद सुखद रहा है. उन्होंने कहा कि उन्हें वहां की कार्यशैली, दर्शकों का प्यार और फिल्मों की भव्यता काफी पसंद आई है. (फोटो साभार इंस्टाग्राम janhvikapoor)

साल 2018 में फिल्म ‘धड़क’ से बॉलीवुड में डेब्यू करने वाली जाह्नवी कपूर ने अपने करियर में कई अलग-अलग तरह की भूमिकाएं निभाई हैं. ‘गुंजन सक्सेना: द कारगिल गर्ल’, ‘मिली’, ‘मिस्टर एंड मिसेज माही’ और ‘देवरा: पार्ट 1’ जैसी फिल्मों में उनके अभिनय को सराहा गया है. अब वह अपने करियर के नए दौर में रीजनल सिनेमा में भी लगातार संभावनाएं तलाश रही हैं. (फोटो साभार इंस्टाग्राम janhvikapoor)

इस बीच जाह्नवी अपनी अपकमिंग तेलुगु फिल्म ‘पेड्डी’ की रिलीज की तैयारियों में व्यस्त हैं. निर्देशक बुची बाबू सना के निर्देशन में बनी यह एक एक्शन-ड्रामा फिल्म है, जिसमें उनके साथ सुपरस्टार राम चरण मुख्य भूमिका में नजर आएंगे. फिल्म के ट्रेलर को दर्शकों से शानदार प्रतिक्रिया मिली है. (फोटो साभार इंस्टाग्राम janhvikapoor)

ट्रेलर में गांव की पृष्ठभूमि, संघर्ष, मेहनत और खेलों के प्रति जुनून को प्रभावशाली अंदाज में दिखाया गया है. राम चरण फिल्म में ‘पेड्डी’ नाम के एक एथलीट का किरदार निभा रहे हैं, जो क्रिकेट, कुश्ती और दौड़ जैसे विभिन्न खेलों में अपनी पहचान बनाने की कोशिश करता है. फिल्म में खेल, एक्शन और भावनाओं का संतुलित मिश्रण देखने को मिलेगा. (फोटो साभार इंस्टाग्राम janhvikapoor)

‘पेड्डी’ में राम चरण और जाह्नवी कपूर के अलावा शिव राजकुमार, दिव्येंदु और बोमन ईरानी भी अहम भूमिकाओं में दिखाई देंगे. मजबूत कलाकारों से सजी यह फिल्म ग्रामीण परिवेश, प्रेरणादायक कहानी और दमदार एक्शन के साथ दर्शकों का मनोरंजन करने के लिए तैयार है.फिल्म 4 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होगी. (फोटो साभार इंस्टाग्राम janhvikapoor)

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।



Source link

CUET यूजी परीक्षा में दिक्कत, NTA ने मांगी माफी, कई केंद्रों पर एग्जाम में देरी


नई दिल्ली (CUET UG 2026). देश में पहले से ही मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट  को लेकर भारी घमासान मचा हुआ है और नेशनल टेस्टिंग एजेंसी चौतरफा विवादों से घिरी है. इसी बीच, आज यानी 30 मई 2026 को एनटीए की एक और परीक्षा सीयूईटी यूजी 2026 के परीक्षा केंद्रों पर भारी अव्यवस्था देखने को मिली. देश के कई परीक्षा केंद्रों पर सुबह की शिफ्ट का पेपर अपने तय समय पर शुरू नहीं हो सका, जिससे सेंटर्स के बाहर तपती धूप में खड़े उम्मीदवारों और उनके माता-पिता का गुस्सा फूट पड़ा. इस हंगामे के बाद आनन-फानन में एनटीए को आधिकारिक नोटिस जारी कर स्पष्टीकरण देना पड़ा है.

एनटीए ने अपने ऑफिशियल नोटिस में स्वीकार किया है कि सीयूईटी यूजी परीक्षा कराने वाली टेक्निकल पार्टनर कंपनी टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (M/s TCS) के एंड पर एक बड़ी तकनीकी खराबी आ गई थी. इस तकनीकी गड़बड़ी के कारण सुबह की शिफ्ट की परीक्षा में देरी हुई. इस बड़ी चूक का सीधा असर अब दोपहर की शिफ्ट पर भी पड़ा है, जिसके चलते एनटीए को दोपहर के सत्र के समय में बड़ा बदलाव करना पड़ा है. एजेंसी ने इस असुविधा के लिए छात्रों और अभिभावकों से खेद जताया है और भरोसा दिया है कि किसी भी उम्मीदवार का समय का नुकसान नहीं होने दिया जाएगा.

TCS के सर्वर में खराबी: अटकी सीयूईटी परीक्षा!

भारत की ज्यादातर यूनिवर्सिटीज में सीयूईटी यूजी स्कोर के आधार पर एडमिशन मिलता है. आज, 30 मई को सीयूईटी परीक्षा शुरू होते ही टीसीएस के सिस्टम ने जवाब दे दिया. एनटीए ने बताया कि टीसीएस की तरफ से आई इस तकनीकी खराबी के कारण कुछ चुनिंदा सेंटर्स पर परीक्षा समय से शुरू नहीं हो सकी. कंप्यूटर स्क्रीन और सर्वर डाउन होने की वजह से छात्र अपनी सीटों पर बैठे इंतजार करते रहे. हालांकि, एनटीए का दावा है कि अब इस तकनीकी खराबी को पूरी तरह से ठीक कर लिया गया है और प्रभावित सेंटर्स पर परीक्षा दोबारा सुचारू रूप से शुरू करा दी गई है.

दोपहर की शिफ्ट का समय बदला: अब 3 नहीं, 4 बजे से शुरू होगा पेपर

सुबह की शिफ्ट में हुई इस देरी का सीधा असर दोपहर के सत्र पर पड़ा है. एनटीए ने तुरंत एडवाइजरी जारी कर दोपहर की शिफ्ट के समय को री-शेड्यूल कर दिया है. नए टाइमिंग के मुताबिक:

  • रिपोर्टिंग और एंट्री का समय: दोपहर 2:30 बजे से शुरू होगा.
  • परीक्षा शुरू होने का समय: अब दोपहर 3:00 बजे के बजाय शाम 4:00 बजे से परीक्षा शुरू होगी.

एनटीए ने सभी संबंधित परीक्षा केंद्रों को निर्देश जारी कर दिए हैं कि वे नए टाइमिंग के हिसाब से ही उम्मीदवारों को एंट्री दें, जिससे सेंटर्स पर अफरा-तफरी का माहौल न बने.

सुबह वाले छात्रों को मिलेगा पूरा समय, बीच में निकलने पर रोक

देरी से परेशान सुबह की शिफ्ट के उम्मीदवारों को राहत देते हुए एनटीए ने साफ किया है कि किसी भी उम्मीदवार के साथ नाइंसाफी नहीं होगी. तकनीकी खराबी के कारण जितना भी समय बर्बाद हुआ है, उसकी पूरी भरपाई ‘कंपनसेटरी टाइम’ (Compensatory Time) देकर की जा रही है. छात्रों को प्रश्नपत्र हल करने के लिए निर्धारित पूरा समय दिया जाएगा. इसके साथ ही एनटीए ने सुरक्षा और गोपनीयता का हवाला देते हुए सख्त नियम लागू किया है कि सुबह की शिफ्ट का कोई भी उम्मीदवार अपना पेपर पूरा किए बिना या निर्धारित समय से पहले एग्जाम हॉल से बाहर नहीं निकल सकेगा.

एनटीए ने जताया खेद, हेल्पलाइन नंबर और ईमेल जारी

पहले से ही विश्वसनीयता के संकट से जूझ रही एनटीए ने इस घटना के तुरंत बाद उम्मीदवारों और अभिभावकों को हुई मानसिक परेशानी और असुविधा के लिए खेद प्रकट किया है. इसके साथ ही, किसी भी तरह की शंका, शिकायत या मदद के लिए एनटीए ने हेल्पलाइन नंबर और आधिकारिक ईमेल आईडी भी जारी की है. उम्मीदवार और पेरेंट्स किसी भी अपडेट के लिए ऑफिशियल वेबसाइट पर नजर बनाए रख सकते हैं:

  • हेल्पलाइन नंबर: +91-11-40759000
  • ऑफिशियल ईमेल: cuet-ug@nta.ac.in
  • ऑफिशियल वेबसाइट: https://cuet.nta.ac.in

कई केंद्रों से परीक्षा रद्द होने की सूचना

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर एनटीए के ट्वीट के नीचे कमेंट सेक्शन में कई उम्मीदवार आज की सीयूईटी यूजी परीक्षा रद्द होने की जानकारी दे रहे हैं. इन उम्मीदवारों ने कमेंट में लिखा है कि नोएडा के सेक्टर 64 समेत कई केंद्रों में परीक्षा शुरू ही नहीं हुई.

कई अभिभावकों का कहना है कि जो सीयूईटी यूजी परीक्षा सुबह 9 बजे शुरू होकर 10.30 बजे खत्म होनी थी, वो शायद अब तक शुरू ही नहीं हुई है. 1 बज चुका है और उनके बच्चे अभी तक सीयूईटी यूजी परीक्षा केंद्र से बाहर ही नहीं निकले हैं.





Source link

बॉलीवुड की पहली महिला डायरेक्टर, 1 फैसले से तोड़ डाली थी इंडस्ट्री की बेड़ियां


Last Updated:

भारतीय सिनेमा में महिलाओं के लिए नई राह बनाने वाली फातमा बेगम को देश की पहली महिला फिल्म निर्देशक माना जाता है. 1892 में जन्मीं फातमा ने उर्दू थिएटर से अपने करियर की शुरुआत की और बाद में मूक फिल्मों की लोकप्रिय अभिनेत्री बनीं. 1926 में उन्होंने ‘बुलबुल-ए-परिस्तान’ का निर्देशन कर इतिहास रच दिया. उन्होंने अपनी प्रोडक्शन कंपनी ‘फातमा फिल्म्स’ की भी स्थापना की, जहां लेखन, निर्माण, निर्देशन और अभिनय की जिम्मेदारी संभाली. उनकी बेटियों में जुबैदा ने भारत की पहली बोलती फिल्म ‘आलम आरा’ में अभिनय किया.

ख़बरें फटाफट

Zoom

फातमा बेगम बॉलीवुड की पहली महिला डायरेक्टर थीं.

नई दिल्ली.   फिल्म इंडस्ट्री में आज जया अख्तर, फराह खान, मेघना गुलजार और जोया अख्तर जैसी महिला फिल्मकारों का नाम सम्मान के साथ लिया जाता है. ये वो महिला फिल्ममेकर्स हैं जिन्होंने अपनी शानदार फिल्मों से दर्शकों के बीच अपनी खास पहचान बनाई. भारतीय सिनेमा में महिलाओं के निर्देशन का रास्ता करीब एक सदी पहले ही एक साहसी महिला ने खोल दिया था. उनका नाम था फातमा बेगम, जिन्हें भारत की पहली महिला फिल्म निर्देशक के रूप में जाना जाता है. ऐसे दौर में जब फिल्म जगत में पुरुषों का बोलबाला हुआ करता था, उस वक्त फातमा बेगम ने अपने साहस और संकल्प से नई मिसाल कायम की थी.

साल 1892 में जन्मी फातमा बेगम ने अपने करियर की शुरुआत उर्दू थिएटर से की थी. उस समय थिएटर और फिल्मों में महिलाओं की भागीदारी बेहद सीमित थी, लेकिन उन्होंने सामाजिक बंधनों को चुनौती देते हुए अभिनय की दुनिया में कदम रखा. बाद में उन्होंने मूक फिल्मों में काम करना शुरू किया और अपनी प्रभावशाली अदाकारी के कारण जल्द ही इंडस्ट्री में एक पहचान बना ली.

फातमा बेगम बनीं भारत की पहली महिला डायरेक्टर

फातमा बेगम ने साल 1926 में भारतीय सिनेमा के इतिहास में एक नया अध्याय जोड़ा, जब उन्होंने फिल्म ‘बुलबुल-ए-परिस्तान’ का निर्देशन किया. इस फिल्म के साथ वह भारत की पहली महिला फिल्म निर्देशक बन गईं. यह एक फैंटेसी फिल्म थी, जिसे उस समय के हिसाब से काफी महत्वाकांक्षी प्रोजेक्ट माना गया था. खास बात यह थी कि फिल्म में स्पेशल इफेक्ट्स का भी इस्तेमाल किया गया था, जो उस दौर की भारतीय फिल्मों में बहुत कम देखने को मिलता था. उनके इस प्रयोग ने साबित कर दिया कि वह केवल एक कलाकार ही नहीं, बल्कि दूरदर्शी फिल्मकार भी थीं.

प्रोडक्शन में भी आजमाया हाथ

निर्देशन के अलावा फातमा बेगम ने प्रोडक्शन के फील्ड में भी अपना हाथ आजमाया था. उन्होंने 1926 में अपनी खुद की प्रोडक्शन कंपनी ‘फातमा फिल्म्स’ की स्थापना की, जो बाद में ‘विक्टोरिया-फातमा फिल्म्स’ के नाम से जानी गई. इस तरह वह भारत में अपनी फिल्म निर्माण कंपनी शुरू करने वाली पहली महिलाओं में शामिल हो गईं. अपने बैनर तले उन्होंने लेखन, निर्माण, निर्देशन और अभिनय जैसी कई जिम्मेदारियां निभाईं.

दी कईं कालजयी फिल्में

इसके बाद उन्होंने ‘हीर रांझा’ (1928), ‘चंद्रावली’, ‘शकुंतला’ और ‘गॉडेस ऑफ लक’ जैसी फिल्मों का निर्देशन किया. उनके काम ने यह साबित किया कि महिलाएं केवल पर्दे पर अभिनय ही नहीं, बल्कि कैमरे के पीछे भी सफलतापूर्वक नेतृत्व कर सकती हैं. उनकी उपलब्धियों ने आने वाली पीढ़ियों की महिला फिल्मकारों के लिए नए रास्ते खोले.

फातमा बेगम का प्रभाव सिर्फ उनके करियर तक सीमित नहीं रहा. उनकी बेटियां जुबैदा, सुल्ताना और शहजादी भी मूक सिनेमा युग की लोकप्रिय अभिनेत्रियां बनीं. खास तौर पर जुबैदा ने भारतीय सिनेमा के इतिहास में अपनी अलग जगह बनाई, क्योंकि उन्होंने 1931 में रिलीज हुई ‘आलम आरा’ में अभिनय किया था, जिसे भारत की पहली बोलती फिल्म माना जाता है.

About the Author

authorimg

Pranjul SinghSub-Editor

From the precision of chemistry labs to the vibrant chaos of a newsroom, my journey has been about finding the perfect formula for a great story. A graduate in Chemistry Honours from the historic Scottish Churc…और पढ़ें



Source link

फरुखाबाद में फंदे से लटका मिला महिला का शव: पति पर लगा हत्या का आरोप, भाई बोला-शराब पीकर मारपीट करता था – NawabGanj(Farrukhabad) News




फर्रुखाबाद के नवाबगंज थाना क्षेत्र के बसंतापुर गांव में एक महिला का शव फांसी के फंदे पर लटका मिला। शनिवार सुबह परिजनों को जानकारी होने पर परिजन महिला के ससुराल पहुंचे। महिला के भाई ने पुलिस को मामले की जानकारी दी। मौके पर पहुंची पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया। मृतका का भाई ने बहन के ससुराल वालों पर हत्या का आरोप लगाते हुए तहरीर दी है। पुलिस ने तहरीर के आधार पर कई बिंदुओं से मामले की जांच शूरू कर दी है। अब जानिए पूरा मामला… नवाबगंज के बसंतापुर के रहनेवाले रामतीर्थ पुत्र राधेश्याम मजदूह हैं। राधेश्याम की शादी सात साल पहले यानी 2019 में कन्नौज के गुरसहायगंज थाना क्षेत्र के महोना गांव की रहने वाली संगीता देवी से हुई थी। शराब पीने का आदी हो गया था और नशे की हालत में घर आकर पत्नी संगीता के साथ गाली-गलौज व मारपीट करता था। शुक्रवार रात संगीता का शव घर के कमरे में फंदे से लटका मिला। रात करीब साढ़े 12 बजे संगीता की सास नन्ही देवी ने फोन कर उसके भाई इंद्रेश को घटना की जानकारी दी कि संगीता ने साड़ी से फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली है। सास ने फोन कर भाई को दी जानकारी सूचना मिलने पर शनिवार तड़के करीब 4 बजे इंद्रेश अपने परिजनों के साथ गांव बसंतापुर पहुंचा और यूपी-112 पुलिस को सूचना दी। मौके पर पहुंची यूपी-112 टीम ने प्रारंभिक जांच की और थाना पुलिस को मामले की जानकारी दी। घटना की जानकारी मिलते ही प्रभारी निरीक्षक राजीव कुमार पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और परिजनों से पूछताछ की। भाई इंद्रेश ने जाजी पर लगाया हत्या का आरोप मृतका के भाई इंद्रेश का आरोप है कि उसका बहनोई रामतीर्थ आए दिन शराब के नशे में संगीता के साथ मारपीट करता था। उसने बताया कि शुक्रवार रात करीब साढ़े आठ बजे उसकी संगीता से बात हुई थी, जिसमें उसने मारपीट की जानकारी दी थी। इंद्रेश ने आरोप लगाया कि इसके बाद रामतीर्थ और उसके परिजनों ने मिलकर संगीता की हत्या कर शव को फंदे पर लटका दिया। मृतका अपने पीछे पांच वर्षीय पुत्री राशि और डेढ़ वर्षीय पुत्र विनायक को छोड़ गई है। घटना की सूचना पर जिला पंचायत सदस्य यशवीर सिंह आर्य भी मौके पर पहुंचे और परिजनों से जानकारी ली। मृतका के भाई इंद्रेश ने पुलिस को तहरीर देकर बहनोई रामतीर्थ समेत उसके परिजनों पर हत्या कर शव लटकाने का आरोप लगाया है। पुलिस ने शव का पंचनामा भरकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। प्रभारी निरीक्षक राजीव कुमार ने बताया शव को पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट और प्राप्त तहरीर के आधार पर आगे की विधिक कार्रवाई की जाएगी।



Source link

नीमा चांदपुरा में शराब के साथ एक व्यक्ति गिरफ्तार: पुलिस ने की मुखबिर के सूचना पर कार्रवाई, कोर्ट ने न्यायिक हिरासत भेजा – Begusarai News




बेगूसराय में नीमा चांदपुरा थाना पुलिस ने शनिवार को गुप्त सूचना के आधार पर कार्रवाई करते हुए एक व्यक्ति को गिरफ्तार किया। उसके पास से 5 लीटर देशी शराब बरामद की गई है। आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया है। थाना प्रभारी विवेक कुमार ने बताया कि अवैध शराब के विरुद्ध चलाए जा रहे अभियान के तहत यह छापेमारी की गई थी। इस दौरान परना गांव निवासी तूफानी यादव (पिता- शोभी यादव) को 5 लीटर देशी शराब के साथ पकड़ा गया। पुलिस ने आरोपी तूफानी यादव के विरुद्ध बिहार मद्य निषेध एवं उत्पाद अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया। इसके बाद उसे न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया । थाना प्रभारी ने कहा कि क्षेत्र में अवैध शराब के कारोबार और तस्करी के खिलाफ पुलिस का अभियान लगातार जारी रहेगा। ऐसे मामलों में संलिप्त लोगों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की जाएगी।



Source link

छिंदवाड़ा में आदिवासी प्रीमियर लीग सीजन-2 का शुभारंभ: टेनिस बॉल से होंगे क्रिकेट मैच, खिलाड़ियों को महापौर ने दी शुभकामनाएं – Chhindwara News


छिंदवाड़ा के नागपुर रोड स्थित इनर ग्राउंड में शनिवार सुबह आदिवासी प्रीमियर लीग (APL) 2026 सीजन-2 का शानदार आगाज हो गया। सर्व आदिवासी समाज के तत्वावधान में आयोजित इस हल्की टेनिस बॉल क्रिकेट टूर्नामेंट का उद्घाटन नगर निगम महापौर विक्रम अहके ने किया। उन

.

युवाओं को मंच देने की पहल, टीमें दिखाएंगी दमखम

इस मौके पर महापौर और आयोजन के मुख्य संरक्षक विक्रम अहके ने कहा कि इस लीग का मुख्य उद्देश्य युवाओं को खेलों से जोड़ना और स्थानीय प्रतिभाओं को अपनी काबिलियत साबित करने का बेहतर मंच प्रदान करना है। समिति के मुताबिक, आगामी दिनों में जिले और आसपास के क्षेत्रों से आई कई टीमें इस मैदान पर अपना खेल कौशल दिखाएंगी।

महापौर के द्वारा खिलाड़ियों को T-शर्ट वितरित की गई

पिछले सीजन से ज्यादा भव्य है आयोजन

इस बार प्रतियोगिता को पहले से अधिक भव्य स्वरूप दिया गया है। मैदान पर खिलाड़ियों के साथ-साथ दर्शकों के लिए भी विशेष व्यवस्थाएं की गई हैं। टूर्नामेंट की विजेता और उपविजेता टीमों के लिए आकर्षक पुरस्कार घोषित किए गए हैं। उद्घाटन के दौरान बड़ी संख्या में खेल प्रेमी और समाज के लोग मौजूद रहे, जिनमें आगामी मुकाबलों को लेकर खासा उत्साह देखा जा रहा है।



Source link

ट्रम्प की मेडिकल रिपोर्ट, 80 की उम्र में सेहतमंद: कॉलेस्ट्रॉल-हार्ट की दवाएं ले रहे, डॉक्टर बोले- प्रेसिडेंट पद के लिए बिल्कुल फिट




व्हाइट हाउस ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की नई मेडिकल रिपोर्ट शुक्रवार को जारी की है। 14 दिनों में 80 साल के होने वाले ट्रम्प की सेहत बेहतरीन हैं। मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प इस समय कॉलेस्ट्रॉल और हार्ट के लिए कुल तीन दवाएं ले रहे हैं। इनमें दो दवाएं, ‘रोसुवास्टैटिन’ और ‘एजेटिमिब’ कॉलेस्ट्रॉल कंट्रोल के लिए हैं। वहीं एक लो-डोज ‘एस्पिरिन’ हार्ट संबंधी बीमारियों से बचाव के लिए दी जा रही है। व्हाइट हाउस के डॉक्टर शॉन पी. बारबाबेला ने बताया कि ट्रम्प की सेहत शानदार है और वे राष्ट्रपति पद की जिम्मेदारियां निभाने के लिए पूरी तरह फिट हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि उनकी कार्डियक, फेफड़ों और न्यूरोलॉजिकल हेल्थ मजबूत है। 22 विशेषज्ञ डॉक्टरों ने ट्रम्प की जांच की ट्रम्प का यह मेडिकल चेकअप मंगलवार को वॉल्टर रीड नेशनल मिलिट्री मेडिकल सेंटर में हुआ था। व्हाइट हाउस के मुताबिक, इस दौरान 22 विशेषज्ञ डॉक्टरों ने उनकी जांच की। इसमें CT स्कैन, हार्ट इमेजिंग, कैंसर स्क्रीनिंग और कई प्रिवेंटिव टेस्ट शामिल थे। रिपोर्ट में कहा गया कि ट्रम्प का कॉग्निटिव और फिजिकल परफॉर्मेंस एक्सीलेंट है। डॉक्टर ने यह भी लिखा कि ट्रम्प की व्यस्त शेड्यूल, लगातार मीटिंग्स, पब्लिक इवेंट्स और शारीरिक गतिविधियां उनके ओवरऑल हेल्थ को सपोर्ट करती हैं। डॉक्टर ने वजन कम करने की सलाह दी मेडिकल रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रम्प का वजन अब 238 पाउंड यानी करीब 108 किलो है। अप्रैल 2025 की पिछली मेडिकल जांच में उनका वजन 224 पाउंड यानी करीब 101.6 किलो था। ट्रम्प की लंबाई 6 फीट 3 इंच बताई गई है। डॉक्टर बारबाबेला ने ट्रम्प को वजन कम करने, हेल्दी डाइट अपनाने और ज्यादा फिजिकल एक्टिविटी करने की सलाह दी है। रिपोर्ट में कहा गया कि उन्हें कार्डियोवैस्कुलर हेल्थ और वेट लॉस को लेकर प्रिवेंटिव काउंसलिंग भी दी गई। बार-बार लोगों से हाथ मिलाने की वजह से हाथों पर पड़े निशान ट्रम्प के हाथों पर दिख रहे निशानों को लेकर पिछले कई महीनों से सवाल उठ रहे हैं। मेडिकल रिपोर्ट में इसे लेकर भी सफाई दी गई है। डॉक्टर बारबाबेला के मुताबिक, बार-बार लोगों से हाथ मिलाने और एस्पिरिन लेने की वजह से उनके हाथों पर हल्के निशान पड़ रहे हैं। हालांकि, कुछ स्वतंत्र डॉक्टर पहले इस दावे पर सवाल उठा चुके हैं। उनका कहना था कि निशान ट्रम्प के बाएं हाथ पर ज्यादा दिखे, जबकि वे दाएं हाथ से काम करते हैं। रिपोर्ट में यह भी कहा गया कि ट्रम्प के पैरों के निचले हिस्से में हल्की सूजन थी, जो पिछले साल की तुलना में बेहतर हुई है। हालांकि, इसके बारे में ज्यादा जानकारी नहीं दी गई। ट्रम्प राष्ट्रपति पद संभालने वाले सबसे उम्रदराज नेताओं में शामिल डोनाल्ड ट्रम्प 14 जून को 80 साल के हो जाएंगे। वह अमेरिकी इतिहास में राष्ट्रपति पद संभालने वाले सबसे उम्रदराज नेताओं में शामिल हैं। पिछले एक साल में उनके पैरों में सूजन, कुछ कार्यक्रमों में नींद में दिखने और गर्दन पर दिखे रैश को लेकर लगातार चर्चा होती रही है। व्हाइट हाउस पहले बता चुका है कि ट्रम्प को ‘क्रॉनिक वेनस इंसफिशिएंसी’ की समस्या है। यह उम्र से जुड़ी एक सामान्य बीमारी है, जिसमें पैरों में ब्लड सर्कुलेशन प्रभावित होता है। मार्च में उनकी गर्दन पर दिखे रैश को लेकर भी कहा गया था कि वह स्किन ट्रीटमेंट की वजह से था। इसी बीच, ट्रम्प और उनके सहयोगी लगातार यह दावा करते रहे हैं कि उन्हें कोई गंभीर स्वास्थ्य समस्या नहीं है। ट्रम्प ने हमेशा अपनी स्टैमिना और मानसिक क्षमता को अपनी सार्वजनिक छवि का अहम हिस्सा बताया है। मेडिकल रिपोर्ट में ‘कार्डियक एज’ का भी जिक्र व्हाइट हाउस की मेडिकल रिपोर्ट में एक और असामान्य बात शामिल की गई। डॉक्टर बारबाबेला ने दावा किया कि इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम के आधार पर ट्रम्प की ‘कार्डियक एज’ (यानी दिल की वास्तविक उम्र) उनकी असली उम्र से 14 साल कम है। कुछ स्वतंत्र डॉक्टरों ने इसे मेडिकल रिपोर्ट में शामिल किए जाने को असामान्य बताया। वहीं, ट्रम्प ने मंगलवार को चेकअप के बाद अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ट्रुथ सोशल पर लिखा था, “वॉल्टर रीड मिलिट्री मेडिकल सेंटर में मेरा 6 महीने का फिजिकल पूरा हुआ। सबकुछ बिल्कुल परफेक्ट निकला।” हालांकि, कई डॉक्टरों ने 6 महीने के फिजिकल वाले दावे पर सवाल उठाए। हार्वर्ड मेडिकल स्कूल की प्रोफेसर और डॉक्टर इशानी गांगुली ने कहा कि आमतौर पर फुल फिजिकल टेस्ट साल में एक बार होता है। छह महीने के फॉलोअप को आमतौर पर फिजिकल नहीं कहा जाता।



Source link

मछली बनाते समय भूलकर भी न करें ये 8 गलतियां, जानिए बनाने का सही तरीका


Last Updated:

Fish Cooking Tips: मछली खाना जितना स्वादिष्ट होता है, उसे सही तरीके से पकाना उतना ही जरूरी होता है. कई बार छोटी-छोटी गलतियों की वजह से फिश सूखी, सख्त और बेस्वाद बन जाती है. अगर आप चाहते हैं कि आपकी बनाई हुई मछली हर बार रेस्टोरेंट जैसी जूसी और स्वाद से भरपूर बने, तो कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना होगा. आइए जानते हैं मछली पकाते समय होने वाली उन गलतियों के बारे में जो पूरा स्वाद खराब कर सकती हैं.

Fish Cooking Tips: मछली उन चुनिंदा खाद्य पदार्थों में से एक है जो स्वाद और सेहत दोनों के लिए शानदार मानी जाती है. इसमें प्रोटीन, ओमेगा-3 फैटी एसिड और कई जरूरी पोषक तत्व पाए जाते हैं. लेकिन जितनी जल्दी मछली पक जाती है, उतनी ही जल्दी इसका स्वाद भी खराब हो सकता है. अक्सर लोग शिकायत करते हैं कि घर पर बनाई गई फिश बाहर जैसी स्वादिष्ट नहीं बनती. कभी वह बहुत सूखी हो जाती है, कभी अंदर से कच्ची रह जाती है और कभी उसमें तेज गंध आने लगती है. इसकी वजह कोई बड़ी समस्या नहीं बल्कि किचन में होने वाली कुछ आम गलतियां होती हैं. सही तापमान, सही मसाले, सही समय और सही तैयारी मछली के स्वाद को पूरी तरह बदल सकते हैं. अगर आप चाहते हैं कि आपकी बनाई हुई फिश हर बार मुलायम, जूसी और स्वाद से भरपूर बने तो इन बातों को नजरअंदाज बिल्कुल न करें.

a

ताजी मछली का चुनाव करना सबसे जरूरी: मछली की क्वालिटी ही उसके स्वाद की नींव होती है. अगर मछली ताजी नहीं है तो चाहे आप कितने भी अच्छे मसाले डाल लें, स्वाद वैसा नहीं आएगा. बासी मछली में अक्सर तेज गंध आने लगती है और उसका टेक्सचर भी खराब हो जाता है. मछली खरीदते समय उसकी त्वचा चमकदार होनी चाहिए और उसका मांस सख्त महसूस होना चाहिए. बहुत ज्यादा बदबू वाली मछली खरीदने से बचना चाहिए.

a

ज्यादा देर तक पकाने से हो जाती है सख्त: मछली को चिकन या मटन की तरह लंबे समय तक पकाने की जरूरत नहीं होती. यह बहुत जल्दी पक जाती है. कई लोग इसे जरूरत से ज्यादा देर तक गैस पर रखते हैं, जिससे इसका सारा रस निकल जाता है और यह रबड़ जैसी सख्त हो जाती है. सही समय पर गैस बंद करना बेहद जरूरी है. जब मछली आसानी से टूटने लगे तो समझिए कि वह पक चुकी है.

Add News18 as
Preferred Source on Google

a

जरूरत से ज्यादा मसाले डालना भी नुकसानदायक: मछली का अपना एक अलग और हल्का स्वाद होता है. अगर उसमें बहुत ज्यादा मसाले डाल दिए जाएं तो उसका प्राकृतिक स्वाद दब जाता है. कई बार लोग ज्यादा लाल मिर्च, गरम मसाला और भारी मसाले डाल देते हैं, जिससे फिश का असली फ्लेवर खत्म हो जाता है. हल्के मसालों और नींबू का इस्तेमाल स्वाद को बेहतर बनाता है.

a

सही तरीके से मैरिनेट करना जरूरी: मैरिनेशन मछली के स्वाद को बढ़ाने का काम करता है. लेकिन कई लोग या तो इसे बिल्कुल मैरिनेट नहीं करते या फिर घंटों तक मसालों में छोड़ देते हैं. दोनों ही तरीके गलत हैं. बहुत ज्यादा देर तक मैरिनेट करने से मछली का टेक्सचर खराब हो सकता है. आमतौर पर 20 से 30 मिनट का समय काफी माना जाता है.

a

बहुत तेज आंच पर पकाने की गलती: जल्दी पकाने के चक्कर में लोग अक्सर तेज आंच का इस्तेमाल करते हैं. इससे मछली ऊपर से जल जाती है जबकि अंदर का हिस्सा ठीक से नहीं पकता. ऐसी स्थिति में स्वाद और टेक्सचर दोनों खराब हो जाते हैं. मध्यम आंच पर पकाने से मछली समान रूप से पकती है और ऊपर से हल्की सुनहरी परत भी बन जाती है.

a

मछली को सुखाए बिना पकाना: मछली धोने के बाद अगर उस पर पानी रह जाए तो फ्राई करते समय वह ठीक से क्रिस्पी नहीं बनती. अतिरिक्त नमी की वजह से तेल भी ज्यादा उछलता है. इसलिए मछली को धोने के बाद किचन टॉवल से अच्छी तरह सुखाना जरूरी है. इससे उसका टेक्सचर बेहतर रहता है.

a

बार-बार पलटना भी खराब कर सकता है स्वाद: कई लोग मछली को पकाते समय बार-बार पलटते रहते हैं. ऐसा करने से मछली टूट सकती है और उसका आकार बिगड़ सकता है. इसके अलावा उसका रस भी निकलने लगता है. मछली को एक तरफ से अच्छे से पकने दें और फिर सावधानी से पलटें. इससे वह बेहतर तरीके से पकती है.

a

नमक डालने का सही समय जानना जरूरी: नमक स्वाद बढ़ाने का काम करता है लेकिन गलत समय पर डाला गया नमक मछली को सूखा बना सकता है. बहुत पहले नमक डालने से मछली की नमी बाहर आने लगती है. इसलिए नमक को संतुलित मात्रा में मैरिनेशन के दौरान या पकाने से ठीक पहले डालना बेहतर माना जाता है. इससे स्वाद भी अच्छा रहता है और मछली मुलायम भी बनी रहती है.

a

सही तकनीक से बनेगी हर बार स्वादिष्ट मछली: मछली बनाना कोई मुश्किल काम नहीं है, बस कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखना होता है. ताजी मछली चुनना, सही समय तक पकाना, हल्के मसालों का इस्तेमाल करना और आंच को नियंत्रित रखना स्वाद को कई गुना बेहतर बना सकता है. अगली बार जब आप फिश फ्राई, फिश करी या ग्रिल्ड फिश बनाएं, तो इन बातों को जरूर याद रखें. इससे आपकी मछली हर बार जूसी, मुलायम और स्वाद से भरपूर बनेगी.

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।



Source link