नई दिल्ली. भारत के सबसे सफल कारोबारियों की बात होती है तो अक्सर बड़े कारोबारी परिवारों के नाम सामने आते हैं. लेकिन देश में कुछ ऐसे उद्यमी भी हैं जिन्होंने बिना किसी बड़े कारोबारी बैकग्राउंड के अपनी कंपनियां खड़ी कीं. इनमें किसी ने आर्थिक तंगी देखी तो किसी ने नौकरी छोड़कर बिजनेस शुरू करने का जोखिम उठाया. इन कारोबारियों ने अलग अलग क्षेत्रों में काम किया और लाखों करोड़ रुपये की कंपनियां खड़ी कीं. किसी ने डिजिटल पेमेंट की दुनिया बदल दी, तो किसी ने फूड डिलीवरी, होटल, ब्यूटी और रिटेल के कारोबार को नया रूप दिया. इनकी कहानी संघर्ष के साथ सही समय पर सही फैसला लेने की भी कहानी है.
ऐसे उद्यमियों में विजय शेखर शर्मा से लेकर फाल्गुनी नायर तक शामिल हैं. हालांकि, सभी का नाम यहां ले पाना संभव नहीं है. इसलिए अभी हम यहां सिर्फ 5 उद्यमियों के बारे में बात करेंगे.
विजय शेखर शर्मा
अलीगढ़ के अतरौली के एक साधारण परिवार से आने वाले विजय शेखर शर्मा के पिता स्कूल टीचर थे. हिंदी मीडियम से पढ़ाई करने के कारण दिल्ली इंजीनियरिंग कॉलेज में पहुंचने के बाद उन्हें अंग्रेजी समझने में काफी परेशानी हुई. उन्होंने हिंदी और अंग्रेजी में किताबें और मैगजीन साथ पढ़कर अपनी भाषा सुधारी.
कॉलेज में ही उन्होंने कोडिंग सीखी और एक वेबसाइट बनाई, जिसे बाद में करीब 10 लाख रुपये में बेच दिया. साल 2000 में उन्होंने वन97 कम्युनिकेशंस शुरू की. शुरुआती दौर में आर्थिक संकट इतना बढ़ा कि उन पर करीब 32 लाख रुपये का कर्ज हो गया. साल 2010 में इसी कंपनी के तहत पेटीएम शुरू हुआ. साल 2016 की नोटबंदी के बाद डिजिटल पेमेंट तेजी से बढ़ा और पेटीएम देश के सबसे चर्चित डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म में शामिल हो गया.
दीपिंदर गोयल
पंजाब के संगरूर से आने वाले दीपिंदर गोयल ने आईआईटी दिल्ली से पढ़ाई की. पढ़ाई के शुरुआती दौर में वह बहुत अच्छे छात्र नहीं थे और आठवीं कक्षा में फेल भी हुए थे. बाद में मेहनत के दम पर उन्होंने आईआईटी में जगह बनाई.
आईआईटी के बाद उन्होंने बैन एंड कंपनी में नौकरी की. ऑफिस में उन्होंने देखा कि लंच के समय कर्मचारी मेन्यू देखने के लिए परेशान होते थे. इसी समस्या से उन्हें बिजनेस आइडिया मिला. साल 2008 में उन्होंने पंकज चड्ढा के साथ फूडीबे डॉट कॉम शुरू किया. साल 2010 में इसका नाम बदलकर जोमैटो कर दिया गया. शुरुआत मेन्यू की जानकारी देने से हुई और कंपनी बाद में फूड डिलीवरी में उतरी. साल 2021 में जोमैटो का आईपीओ आया. इसके बाद ब्लिंकिट के अधिग्रहण ने कंपनी को क्विक कॉमर्स के बड़े खिलाड़ियों में शामिल कर दिया.
रितेश अग्रवाल
ओडिशा के रायगढ़ जिले के एक छोटे से इलाके से आने वाले रितेश अग्रवाल ने कम उम्र में ही कारोबार शुरू कर दिया था. 13 साल की उम्र में वह सिम कार्ड बेचते थे. आगे चलकर उन्हें थिएल फेलोशिप मिली, जिसके तहत उन्हें बिजनेस शुरू करने के लिए 1 लाख डॉलर की फंडिंग मिली.
भारत में घूमने के दौरान उन्होंने बजट होटलों की खराब स्थिति देखी. इसी समस्या को अवसर बनाकर उन्होंने साल 2012 में ओरावल स्टेस शुरू किया. साल 2013 में इसे ओयो रूम्स के रूप में रीब्रांड किया गया. शुरुआत में रितेश खुद होटल के कमरों की सफाई से लेकर ग्राहकों की शिकायतों तक संभालते थे. धीरे धीरे ओयो ने बजट होटल कारोबार को एक स्टैंडर्ड मॉडल में बदल दिया और भारत के बाहर भी अपना कारोबार फैलाया.
फाल्गुनी नायर
फाल्गुनी नायर ने आईआईएम अहमदाबाद से पढ़ाई की और करीब 19 साल तक कोटक महिंद्रा कैपिटल में काम किया. वह कंपनी में मैनेजिंग डायरेक्टर के पद तक पहुंचीं. लेकिन करीब 50 साल की उम्र में उन्होंने अपनी सुरक्षित कॉरपोरेट नौकरी छोड़कर बिजनेस शुरू करने का फैसला किया.
साल 2012 में उन्होंने करीब 2 करोड़ रुपये की अपनी पूंजी से नायका शुरू किया. उनका लक्ष्य भारत में ब्यूटी और कॉस्मेटिक प्रोडक्ट्स के लिए भरोसेमंद ऑनलाइन प्लेटफॉर्म बनाना था. शुरुआत में ब्रांड्स को ऑनलाइन बेचने के लिए मनाना और ग्राहकों का भरोसा जीतना बड़ी चुनौती थी. साल 2021 में नायका का आईपीओ आया और फाल्गुनी नायर भारत की प्रमुख सेल्फ मेड महिला अरबपतियों में शामिल हो गईं. आज नायका का ऑनलाइन कारोबार होने के साथ देशभर में सैकड़ों स्टोर का नेटवर्क भी है.
राधाकिशन दमानी
मुंबई की एक चॉल में पले बढ़े राधाकिशन दमानी ने बीकॉम की पढ़ाई पूरी नहीं की. पिता के निधन के बाद उन्होंने पारिवारिक बॉल बेयरिंग कारोबार बंद किया और 1980 के दशक में शेयर बाजार में कदम रखा.
वैल्यू इन्वेस्टिंग के जरिए उन्होंने बड़ी पूंजी बनाई. इसके बाद उन्होंने रिटेल कारोबार में उतरने का फैसला किया. साल 2002 में मुंबई के पवई में डीमार्ट का पहला स्टोर खोला गया. दमानी ने किराए की दुकानों के बजाय जमीन खरीदकर स्टोर बनाने पर जोर दिया. कम खर्च, कम विज्ञापन और कम कीमत पर सामान बेचने के मॉडल ने डीमार्ट को तेजी से आगे बढ़ाया. साल 2017 में एवेन्यू सुपरमार्ट्स का आईपीओ आया और इसके बाद दमानी देश के सबसे अमीर कारोबारियों में शामिल हो गए.
प्रतापगढ़ में राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने मंगलवार को प्रेस वार्ता कर भाजपा सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने राम मंदिर से जुड़े चंदे, जमीन के लेनदेन और भाजपा की नई कमेटी को लेकर सवाल उठाए। तिवारी ने भाजपा पर कई गंभीर आरोप लगाते हुए आगामी चुनाव में पार्टी के प्रदर्शन को लेकर भी दावा किया। राम मंदिर विवाद पर बोले- सहमति नहीं तो कोर्ट का फैसला मानें उत्तराखंड के कांग्रेस नेता हरीश रावत के राम मंदिर से जुड़े बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए प्रमोद तिवारी ने कहा कि कांग्रेस शुरू से ही राम मंदिर विवाद का समाधान आपसी बातचीत और सहमति से करने की पक्षधर रही है। उन्होंने कहा कि यदि सहमति नहीं बनती है तो न्यायालय का फैसला सभी को स्वीकार करना चाहिए।
जमीन के लेनदेन को लेकर भाजपा पर सवाल उठाए प्रमोद तिवारी ने राम मंदिर से जुड़ी जमीन के लेनदेन को लेकर भाजपा पर कटाक्ष किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जिस जमीन को करीब दो करोड़ रुपये में खरीदा गया था, उसे बाद में 17 करोड़ रुपये में बेच दिया गया। उन्होंने कहा कि कांग्रेस को पहले यह जानकारी नहीं थी कि यहां “चंदा चोर और चढ़ावा चोर” भी हैं। बोले- सभी भाजपा नेता चोर नहीं, लेकिन… चंदा चोरी के आरोपों को लेकर भाजपा पर हमला बोलते हुए तिवारी ने कहा कि भाजपा में सभी लोग चोर नहीं हैं। हालांकि, उन्होंने आरोप लगाया कि जितने भी “चंदा चोर” हैं, वे भाजपा से जुड़े हुए हैं। नई कमेटी पर भी साधा निशाना भाजपा की ओर से घोषित नई कमेटी को लेकर प्रमोद तिवारी ने नवनियुक्त पदाधिकारियों को शुभकामनाएं दीं। इसके साथ ही उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि भाजपा चाहे जिसे राष्ट्रीय अध्यक्ष बनाए, अध्यक्ष बनने के बाद वह अपनी विधानसभा सीट भी नहीं जीत पाएगा। तिवारी ने दावा किया कि भाजपा कितनी भी कमेटियां बना ले, आने वाले चुनावों में उसका प्रदर्शन पूरी तरह विफल रहेगा।
Uddhav Thackeray Shiv Sena Plea | Supreme Court Election Commission Case
नई दिल्ली2 घंटे पहले
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सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को उद्धव ठाकरे गुट की याचिका पर लगातार छठे दिन सुनवाई हुई। उद्धव ठाकरे गुट ने कोर्ट से कहा कि असली शिवसेना किसकी, इसका फैसला विधायकों की अयोग्यता से जुड़े फैसले के बाद होना चाहिए।
मामला CJI जस्टिस सूर्यकांत, जस्टिस जॉयमाल्या बागची और जस्टिस वी मोहना की बेंच के सामने दी। बेंच 2024 में दायर उद्धव गुट की 2 याचिकाओं पर सुनवाई कर रही है।
कोर्ट में उद्धव ठाकरे का पक्ष एडवोकेट कपिल सिब्बल ने रखा। उद्धव गुट का कहना है कि पहले यह तय हो कि बागी विधायक अयोग्य हैं या नहीं, इसके बाद चुनाव आयोग तय करे कि असली शिवसेना कौन सी है।
दरअसल, चुनाव आयोग ने एकनाथ शिंदे गुट को असली शिवसेना मानने और पार्टी का नाम और धनुष-बाण निशान दे दिया था। इसी फैसले को सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई है।
मंगलवार को दोनों पक्षों की बहस किसी नतीजे पर नहीं पहुंच सकी। इस मामले पर बुधवार को फिर सुनवाई होगी।
39 विधायकों की अयोग्यता से जुड़ा है मामला
यह पूरा मामला शिवसेना के 39 बागी विधायकों से जुड़ा है। जिन्हें 10 जनवरी 2024 को महाराष्ट्र विधानसभा स्पीकर राहुल नार्वेकर ने अयोग्य नहीं माना था और विधानसभा में बहुमत के आधार पर शिंदे गुट को असली शिव सेना घोषित किया था।
सिब्बल ने इसी फैसले का हवाला देते हुए कहा- चुनाव आयोग और महाराष्ट्र विधानसभा के स्पीकर ने कानून का गलत मतलब निकाला है। उन्होंने विधायकों की संख्या में बहुमत और राजनीतिक पार्टी को एक ही मान लिया, जबकि दोनों अलग चीजें हैं।
उन्होंने दलील दी- चुनाव आयोग को यह तय करना चाहिए कि असली पार्टी कौन-सी है। अगर इन विधायकों को आखिर में अयोग्य ठहराया जाता है, तो विधानसभा में उनकी संख्या को नहीं गिना जाना चाहिए।
सिब्बल ने सुभाष देसाई मामले के फैसले का हवाला दिया
सिब्बल ने सुप्रीम कोर्ट के सुभाष देसाई मामले के फैसले का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि विधायी दल में बंटवारे का मतलब अपने आप राजनीतिक दल में बंटवारा नहीं होता।
इससे पहले 13 अगस्त की सुनवाई के दौरान भी उद्धव गुट ने कहा था कि संविधान के प्रावधानों की ऐसी व्याख्या नहीं की जा सकती, जिससे उस गलती को बढ़ावा मिले जिसे रोकने के लिए दलबदल विरोधी कानून बनाया गया है।
शिवसेना की मौजूदा स्थिति क्या है
महाराष्ट्र के सबसे बड़े राजनीतिक दल के रूप में दर्ज शिवसेना पर फिलहाल चुनाव आयोग का 17 फरवरी 2023 वाला फैसला लागू है। यानी आधिकारिक तौर पर ‘शिवसेना’ नाम और ‘धनुष-बाण’ चिह्न एकनाथ शिंदे गुट के पास है। उद्धव गुट शिवसेना (UBT) के नाम से और ‘मशाल’ चिह्न के साथ चुनाव लड़ती आ रही है।
दरभंगा के पतोर इलाके में मंगलवार दोपहर करीब ढाई बजे बाइक सवार चार बदमाशों ने ज्वेलरी शॉप से करीब 8 लाख रुपए के गहने की लूट कर ली। वारदात को अंजाम देने के बाद चारों बदमाश बाइक से फरार हो गए। घटना का सीसीटीवी फुटेज भी सामने आया है, जिसमें बाइक सवार बदमाश भागते दिख रहे हैं। सुरहाचट्टी चौक के पास रानी ज्वेलर्स के मालिक धर्मेंद्र ने बताया कि घटना के दौरान मैं दुकान पर नहीं था। दुकान में सोनू नाम का एक स्टॉफ था। चार में से दो बदमाश कस्टमर बनकर आए और दुकान में मौजूद स्टॉफ को चकमा देते हुए करीब 55 ग्राम की ज्वेलरी लेकर भाग निकले। दुकान के आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों को खंगालने में जुटी पुलिस दुकान से लूट की सूचना मिलते ही पतोऱ थाना की पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जांच शुरू कर दी। पुलिस आसपास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल रही है। एफएसएल और तकनीकी सेल की टीम को भी सूचना दी गई है। दुकानदार धर्मेंद्र कुमार साह ने बताया कि दो बाइक से चार बदमाश दुकान के पास पहुंचे थे। इनमें दो बदमाश दुकान में ग्राहक बनकर आए, जबकि दो बाहर बाइक पर इंतजार कर रहे थे। दुकान के अंदर आए बदमाशों ने सोने के टॉप्स, अंगूठी, लॉकेट समेत अन्य आभूषण दिखाने को कहा। ज्वेलरी देखने के बाद दोनों ने सामान पसंद आने की बात कहते हुए कुछ देर बाद लौटकर खरीदारी करने की बात कही। धर्मेंद्र ने बताया कि कुछ ही मिनट में दोनों बदमाशों वापस आए और सोनू के हाथ से ज्वेलरी से भरा बॉक्स लेकर फरार हो गए। उन्होंने बताया कि बदमाशों ने 7 मिनट के अंदर वारदात को अंजाम दे दिया। लूटे गए बॉक्स में सोने की अंगूठी, झुमका, लॉकेट था दुकानदार ने बताया कि लूटे गए डिब्बे में करीब 55 ग्राम सोने के आभूषण थे। इनमें अंगूठी, झुमका, लॉकेट समेत महिलाओं के अन्य आभूषण शामिल थे। इसकी अनुमानित कीमत करीब 8 लाख रुपए है। धर्मेंद्र कुमार साह ने कहा कि प्रशासन जल्द बदमाशों की गिरफ्तारी कर लूटे गए आभूषण को बरामद करे। चारों बाइक सवार बदमाश बहेड़ी की ओर भागे वहीं, दुकान में मौजूद स्टाफ सोनू ने बताया कि बदमाशों ने जब कहा कि थोड़ी देर में आते हैं, तो मैंने ज्वेलरी को एक डिब्बे में रखा और उसे रखने की तैयारी में था। इसी दौरान एक बदमाश आया और झपट्टा मारकर पूरा डिब्बा छीन कर दुकान से बाहर निकल गया। जब तक मैं दुकान के बाहर आकर शोर मचाता, तब तक बदमाश बाइक पर सवार होकर भाग निकले। सोनू ने बताया कि बाइक सवार बदमाश बहेड़ी की ओर फरार हुए हैं। वहीं, पतोर थानाध्यक्ष चंद्रभूषण कुमार ने बताया कि घटना की जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का निरीक्षण किया है। आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली जा रही है। एफएसएल टीम को बुलाया गया है और तकनीकी सेल को भी सूचना दी गई है। अभी तक लिखित आवेदन प्राप्त नहीं हुआ है। आवेदन मिलने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।
सांसद फग्गनसिंह कुलस्ते ने जबलपुर–मंडला–चुटका नई रेल लाइन के निर्माण के लिए पहल की है। उन्होंने केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव को पत्र लिखकर इस परियोजना का फाइनल लोकेशन सर्वे (FLS) शीघ्र कराने और इसे प्राथमिकता वाली नई रेल परियोजनाओं में शामिल कर
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कुलस्ते ने बताया कि मंडला जिले में निर्माणाधीन 2×700 मेगावाट की चुटका परमाणु विद्युत परियोजना के लिए मजबूत रेल संपर्क अत्यंत आवश्यक है। वर्तमान में परियोजना क्षेत्र तक सीधा रेल संपर्क नहीं है, जिससे भारी मशीनरी, रिएक्टर उपकरण, टर्बाइन, स्टील और सीमेंट जैसी सामग्री का परिवहन सड़क मार्ग से करना पड़ेगा। रेल कनेक्टिविटी से परिवहन की लागत और समय दोनों में कमी आएगी।
लोगों से चर्चा करते सांसद कुलस्ते।
प्रस्तावित रेल लाइन का उद्देश्य चुटका परियोजना को सीधे जोड़ने के साथ-साथ मंडला को भी रेल नेटवर्क से जोड़ना है। सांसद ने जोर दिया कि परमाणु परियोजना के लिए भारी सामान पहुंचाने के लिए रेलवे एक सुरक्षित और प्रभावी माध्यम साबित हो सकता है। उन्होंने यह भी बताया कि इस नई रेल लाइन को न्यूक्लियर पॉवर प्लांट और रेलवे के संयुक्त प्रयासों से तैयार करने प्रस्तावित किया गया है।
इस रेल लाइन से मंडला और आसपास के जनजातीय क्षेत्रों में रोजगार, व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार होने की उम्मीद है। इसके अतिरिक्त, कान्हा टाइगर रिजर्व, नर्मदा तट, सहस्रधारा, रामनगर किला और बरगी क्षेत्र जैसे प्रमुख पर्यटन स्थलों तक पहुंच आसान होगी, जिससे क्षेत्र में पर्यटन को बढ़ावा मिलेगा।
इन जिलों तक पहुंच आसान होगी
सांसद कुलस्ते के अनुसार, रेल संपर्क से कृषि और वनोपज को बड़े बाजारों तक पहुंचाना सुगम होगा। भविष्य में यह मंडला, डिंडौरी, बालाघाट और पूर्वी मध्यप्रदेश के अन्य क्षेत्रों में रेल कनेक्टिविटी के विस्तार का मार्ग भी प्रशस्त करेगा। उन्होंने विश्वास व्यक्त किया कि यह परियोजना चुटका परमाणु विद्युत परियोजना के साथ पूरे महाकौशल क्षेत्र के विकास को नई गति प्रदान करेगी।
शहद को अक्सर प्राकृतिक मिठास और सेहत से जुड़े फायदे के लिए इस्तेमाल किया जाता है, लेकिन बाजार में मिलने वाले शहद की शुद्धता को लेकर सवाल भी उठते रहते हैं. कई बार इसमें चीनी या गुड़ से बने पदार्थों की मिलावट की आशंका रहती है. ऐसे में सिर्फ शहद का रंग, गाढ़ापन या स्वाद देखकर यह तय करना मुश्किल है कि वह पूरी तरह शुद्ध है या नहीं.
यहां दिए गए टेस्टिंग में कुछ रासायनिक परीक्षणों के जरिए शहद में चीनी या गुड़ की मौजूदगी का संकेत पता किया जा सकता है…
पहला तरीका – फिएहे परीक्षण
शहद में चीनी या गुड़ की मिलावट की जांच के लिए फिएहे परीक्षण का इस्तेमाल किया जाता है. इसमें सबसे पहले 5 मिलीलीटर शहद लिया जाता है और उसमें 5 मिलीलीटर ईथर मिलाया जाता है. दोनों को अच्छी तरह मिलाने के बाद मिश्रण को कुछ देर स्थिर रहने दिया जाता है, ताकि ईथर की परत अलग हो सके.
इसके बाद ईथर की परत को पेट्री डिश में निकालकर ईथर को पूरी तरह उड़ाया जाता है. अब इसमें 2 से 3 मिलीलीटर रेसॉर्सिनॉल मिलाया जाता है. दिए गए परीक्षण में रेसॉर्सिनॉल का घोल 5 मिलीलीटर सांद्र हाइड्रोक्लोरिक एसिड में 1 ग्राम रेसॉर्सिनॉल मिलाकर तैयार करने का उल्लेख है.
अगर इस प्रक्रिया के बाद लाल रंग दिखाई देता है, तो इसे शहद में चीनी या गुड़ की उपस्थिति का संकेत माना जाता है. यानी यह टेस्ट मिलावट की आशंका की ओर इशारा कर सकता है.
दूसरा तरीका – एनिलीन क्लोराइड परीक्षण
दूसरा तरीका एनिलीन क्लोराइड परीक्षण है. इसके लिए 5 मिलीलीटर शहद लिया जाता है. इसमें एनिलीन क्लोराइड घोल मिलाया जाता है. दिए गए तरीके के अनुसार यह घोल 3 मिलीलीटर एनिलीन और 1:3 अनुपात में हाइड्रोक्लोरिक एसिड के 7 मिलीलीटर से तैयार किया जाता है.
शहद और इस घोल को अच्छी तरह मिलाने के बाद रंग में बदलाव देखा जाता है. अगर मिश्रण में चमकीला लाल रंग दिखाई देता है, तो इसे शहद में चीनी के अपमिश्रण का संकेत माना जाता है.
सिर्फ रंग देखकर फैसला न करें
हालांकि ऐसे रासायनिक परीक्षण मिलावट की शुरुआती जांच में मदद कर सकते हैं, लेकिन इन्हें शहद की शुद्धता का अंतिम प्रमाण नहीं माना जाना चाहिए. खासतौर पर ईथर, सांद्र हाइड्रोक्लोरिक एसिड और एनिलीन जैसे रसायनों के साथ किए जाने वाले परीक्षण घर पर बिना उचित जानकारी और सुरक्षा के नहीं करने चाहिए. इनके इस्तेमाल में त्वचा, आंखों और सांस से जुड़ा जोखिम हो सकता है.
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने होर्मुज स्ट्रेट को अमेरिका का हिस्सा बताते हुए सोशल मीडिया पर मैप पोस्ट किया है। ट्रम्प के पोस्ट के बाद ईरान के उप विदेश मंत्री काजेम गरीबाबादी ने कहा कि होर्मुज स्ट्रेट को अमेरिका का हिस्सा बताना सिर्फ एक गलतफहमी है। उन्होंने तंज कसते हुए कहा कि ट्रम्प को जल्द ही समझ आ जाएगा कि इस समुद्री रास्ते पर अमेरिका का कोई अधिकार नहीं है। ईरानी मंत्री ने ट्रम्प को पुराने बयान की याद दिलाई गरीबाबादी ने ट्रम्प को उनके पुराने बयान की भी याद दिलाई। दरअसल, कुछ महीने पहले ट्रम्प ने ‘फारस की खाड़ी’ का नाम बदलकर ‘अरब की खाड़ी’ कहने का सुझाव दिया था। इस पर ईरान ने कड़ी आपत्ति जताई थी और कहा था कि यह नाम सदियों से ‘फारस की खाड़ी’ ही है। अब ट्रम्प ने अपने पोस्ट में ‘फारस की खाड़ी’ शब्द का इस्तेमाल किया। इस पर तंज कसते हुए गरीबाबादी ने कहा कि जब ट्रम्प ने इस बार सही नाम का इस्तेमाल किया है, तो उम्मीद है कि उन्हें यह भी समझ आ जाएगा कि होर्मुज स्ट्रेट अमेरिका का इलाका नहीं है। ट्रम्प ने अपने पहले कार्यकाल (2017) में ईरान पर भाषण देते हुए पहली बार फारस की खाड़ी को अरब की खाड़ी कहा था। ईरान में इसे राष्ट्रीय पहचान का मुद्दा माना जाता है, इसलिए इस पर बहुत विवाद हुआ था। ईरान बोला- शर्तें पूरी होने तक नहीं खुलेगा होर्मुज ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाघेर गालिबाफ ने मंगलवार को कहा कि होर्मुज स्ट्रेट तब तक बंद रहेगा, जब तक अमेरिका अपनी नौसैनिक नाकाबंदी नहीं हटाता और समझौता ज्ञापन में किए गए वादों को लागू नहीं करता। सरकारी टेलीविजन पर प्रसारित अपने भाषण में उन्होंने कहा कि तेहरान अपने रुख से पीछे नहीं हटेगा और अमेरिकी शर्तों के बजाय अपने देश हितों के मुताबिक फैसला लूंगा। ओमान को भी दे चुके हैं धमकी इससे पहले ट्रम्प ने सोमवार को ओमान पर बमबारी की धमकी दी थी। उन्होंने कहा कि अगर ओमान, अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में बाधा बना, तो अमेरिका उस पर ‘बमबारी करेगा’। हालांकि, ट्रम्प ने यह नहीं बताया कि ओमान ने ऐसा क्या किया था जिसे वह रुकावट मान रहे हैं। ओमान लंबे समय से खुद को इस संघर्ष में तटस्थ देश बताता रहा है। अमेरिका और ईरान के बीच बातचीत में भी वह मध्यस्थ की भूमिका निभाता रहा है। ट्रम्प का बयान इसलिए भी अहम माना जा रहा है, क्योंकि यह पहली बार है जब उन्होंने मध्यस्थ की भूमिका निभा रहे ओमान को सीधे सैन्य कार्रवाई की धमकी दी है।
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क्यों खरीदें
पैडेड कंफर्ट और ब्रीदेबल मटेरियल।
पैरों को सही जगह पर टिकाए रखने में मदद करते हैं और रनिंग के दौरान पूरा सपोर्ट प्रदान करते हैं।
इसका ड्यूरेबल फोम स्मूथ रनिंग अनुभव देता है।
क्यों खोजें विकल्प
वाटर रेजिस्टेंस का अभाव।
जानिए रनिंग शूज क्यों है अधिक प्रभावी विकल्प:
1. ऊर्जा शक्ति बरकरार रहती है:
ज्यादतर रनिंग शूज के सोल को कुछ इस तरह डिजाइन किया जाता है, जो दौड़ते हुए पैरों को आगे की ओर धकेलता है। इस तरह आगे बढ़ने में मदद मिलती है और पैरों की मसल्स पर कम दबाव पड़ता है। वहीं ऊर्जाशक्ति बनी रहती है, इस प्रकार लंबे समय तक पूरी ताकत के साथ गतिविधियों में भाग लिया जा सकता है।
2. कम हो जाती है चोट लगने की संभावना:
रनिंग के दौरान कई बार लोगों का बैलेंस बिगड़ सकता है, जिसकी वजह से पैरों में मोच आ जाती है या दौड़ते-दौड़ते कई बार पैर फिसल जाता है। इस तरह की घटनाओं से बचने में बेहतर क्वालिटी के रनिंग शूज आपकी मदद कर सकते हैं। ये जूते न केवल पैरों को बेहतर समर्थन देते हैं, बल्कि संतुलन बनाए रखते हैं।
3. फोकस रहने में मदद करता है:
दौड़ते हुए पैरों में परेशानी होने पर आपका ध्यान गतिविधियों से भटक सकता है। इस स्थिति में शारीरिक गतिविधियों की उत्पादकता कम हो जाती है। रनिंग शूज में आपका ध्यान केवल गतिविधियों तक सीमित रहता है, इस प्रकार आप अधिक उत्पादकता के साथ शारीरिक गतिविधियों में भाग ले पाते हैं।
4. इनका हल्का डिजाइन प्रभावी माना जाता है:
ज्यादातर ब्रांड्स के रनिंग शूज हल्के और हवादार होते हैं, जिससे दौड़ते हुए टखनों पर कम भाड़ पड़ता है और आप कम समय में ज्यादा दूरी तय कर सकते हैं। साथ ही इससे रनिंग इंटेंसिटी और प्रोडक्टिविटी भी बढ़ जाती है।
Disclaimer: लाइव हिंदुस्तान में हम आपको नए ट्रेंड्स और प्रॉडक्ट्स के साथ अप-टू-डेट रहने में मदद करते हैं। आप हमारे जरिए खरीदारी करते हैं तो अफिलीएट पार्टनरशिप की वजह से हमें राजस्व का एक हिस्सा मिल सकता है। हम प्रोडक्ट्स के संबंध में उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम, 2019 सहित लागू कानूनों के तहत किसी भी दावे के लिए जिम्मेदार नहीं होंगे। इस आर्टीकल में लिस्टेड प्रोडक्ट प्राथमिकता की किसी विशेष सीरीज में नहीं हैं।
सरकार हथियारों-मिसाइलों और टैंक के ज्यादातर पार्ट्स भारत में ही बनाना चाहती है। रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को 405 स्ट्रैटेजिक आइटम्स की छठी लिस्ट जारी की। इनमें अलग-अलग मशीनों के हिस्से, स्पेयर पार्ट्स, कंपोनेंट, सब-सिस्टम और रॉ मटेरियल शामिल है।
हेलिकॉप्टर और लड़ाकू विमान से जुड़े सामान, टैंक और बख्तरबंद गाड़ियों के सामान, रडार, सोनार और दूसरे इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम और टैंक रोधी गोला-बारूद भी शामिल हैं।
अगर ये सामान देश की कंपनियां ही बनाती हैं तो कुल 3,070 करोड़ रुपए का कारोबार हो सकता है। इसका मकसद डिफेंस सेक्टर में आयात घटाना और आत्मनिर्भरता को बढ़ानाा है।
AL-31FP सुखोई-30MKI में इस्तेमाल होने वाला इंजन है।
भारतीय उद्यमियों से खरीदे जाएंगे पार्ट्स
रक्षा मंत्रालय के तहत जारी लिस्ट में हर प्रोडक्ट के भारतीयकरण के लिए तय समय दिया गया है। इस काम में उद्योग, खासकर MSME की भागीदारी होगी। मंत्रालय ने कहा कि इससे आयात पर निर्भरता घटाने में भी मदद मिलेगी।
रक्षा मंत्रालय के मुताबिक इससे भारतीय उद्योगों के पास अवसर बढ़ेंगे। घरेलू प्रोडक्शन सिस्टम मजबूत होगा। इसके अलावा इन्वेस्टमेंट और इनीशिएटिव को बढ़ावा मिलने की भी उम्मीद है।
पिछले 5 साल में 15,700 से ज्यादा प्रोडक्ट भारत में बने
अगस्त 2020 में SRIJAN डिफेंस पोर्टल शुरू किया था। यह ऐसा प्लेटफॉर्म है, जहां DPSUs और सर्विस हेडक्वार्टर (SHQs) डिफेंस प्रोडक्ट्स को देश में डेवलप करने और बनाने के लिए उद्योग, MSME और स्टार्ट-अप्स के सामने रखते हैं।
मंत्रालय के मुताबिक, पोर्टल शुरू होने के बाद से जून 2026 तक 33,000 से ज्यादा प्रोडक्ट्स भारतीय उद्योगों के सामने रखे जा चुके हैं।
पिछले 5 साल में 15,700 से ज्यादा प्रोडक्ट्स का भारतीयकरण किया जा चुका है इससे करीब 9,000 करोड़ रुपए के आयात की जगह घरेलू उत्पादन होने का अनुमान है।
मंत्रालय के मुताबिक मार्च 2026 तक घरेलू विक्रेताओं को करीब 10,000 करोड़ रुपए के खरीद ऑर्डर दिए हैं। इसमें इन-हाउस प्रोडक्शन से जुड़े ऑर्डर भी शामिल हैं।
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जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय (JNVU) के पेंशनर्स को पिछले 5 महीने से पेंशन नहीं मिली है। लगातार 8 दिन प्रदर्शन के बाद भी यूनिवर्सिटी की तरफ से कोई सुध नहीं ली गई है।
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पेंशनर्स का कहना है कि रक्षाबंधन का त्यौहार नजदीक है। इसके बाद भी पेंशन का भुगतान नहीं किया जा रहा है।
आक्रोशित पेंशनर्स ने आज कुलगुरु ऑफिस के बाहर धरना-प्रदर्शन किया। इसके बाद संवित सर्किल तक रैली निकाली। सांकेतिक तौर पर कुछ समय के लिए सड़क पर भी जाम लगा दिया। हालांकि इसके बाद खुद ही रास्ता खोलकर कुलगुरु ऑफिस पहुंचे।
पेंशनर्स ने विश्वविद्यालय में प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की और रैली निकाली।
वार्ता के लिए नहीं बुलाया
पेंशनर्स सोसाइटी के संयोजक अशोक व्यास ने बताया कि प्रदर्शन के 8 दिन बाद भी प्रशासन की तरफ से वार्ता के लिए नहीं बुलाया गया है। इससे ऐसा लगता है कि विश्वविद्यालय प्रशासन कर्मचारियों की इस मांग को लेकर टालमटोल रवैया अपनाए हुए है।
यदि समय रहते समस्याओं का सकारात्मक समाधान नहीं किया जाता है तो मजबूर होकर पेंशनर्स को सड़कों पर आंदोलन करना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि बकाया पेंशन का भुगतान न होने तक इसी तरह प्रदर्शन निरंतर जारी रहेगा।
प्रदर्शनकारियों को सोसाइटी के अध्यक्ष प्रो. राम निवास शर्मा, प्रो.सुखवीर सिंह बैस, संयोजक अशोक व्यास आदि ने संबोधित किया। धरने में शैक्षणिक, अशैक्षणिक एवं पारिवारिक पेंशन प्राप्त करने वाले पेंशनर शामिल हुए।
एक सप्ताह तक पेंशन मिलने की संभावना
पेंशनर्स सोसाइटी के अध्यक्ष प्रो. रामनिवास शर्मा ने कहा कि अलग-अलग बैंकों के करीब 260 फ्रीज अकाउंट में 173 करोड़ रुपए पड़े होने के बारे में विश्वविद्यालय प्रशासन को बताया था। विश्वविद्यालय के फाइनेंशियल एडवाइजर (एफए) से आज फिर बात हुई थी।
उन्होंने कहा कि मैं इसको एनालाइज करवा रहा हूं कि कौनसे अकाउंट रखने हैं और किस अकाउंट ऑपरेटिव करने के बाद पैसा विड्र्रोल करना है। सप्ताहभर में इसका कोई न कोई समाधान निकल जाएगा और आपको इसके बारे बता दिया जाएगा।