Sunday, July 26, 2026
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मेरठ में युवक की हत्या, शव रेलवे ट्रैक किनारे मिला: दोस्त की बर्थडे पार्टी में गया था रजत, 3 दोस्त हिरासत में – Meerut News




मेरठ के कंकरखेड़ा थाना क्षेत्र में 24 वर्षीय युवक रजत की हत्या कर दी गई। उसका शव रविवार सुबह पीपला गांव के पास रेलवे ट्रैक किनारे मिला। स्थानीय लोगों की सूचना पर पहुंची पुलिस और फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल का निरीक्षण किया। प्रारंभिक जांच में इसे हत्या का मामला माना जा रहा है। पुलिस ने मृतक के तीन दोस्तों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू कर दी है। रजत पिछले तीन दिनों से लापता था। परिजनों ने 24 जुलाई को कंकरखेड़ा थाने में उसकी गुमशुदगी दर्ज कराई थी। परिवार के अनुसार, रजत अपने दोस्तों राहुल, नितिन और जयकुमार के साथ जयकुमार का जन्मदिन मनाने गया था। इसके बाद से उसका मोबाइल बंद था और वह घर नहीं लौटा। काफी तलाश के बाद भी कोई जानकारी न मिलने पर परिजनों ने पुलिस से संपर्क किया था। 3 तस्वीरें देखिए… रविवार सुबह शव मिलने की सूचना पर एसपी सिटी विनायक गोपाल भोसले, सीओ दौराला और कंकरखेड़ा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। फोरेंसिक टीम ने घटनास्थल से महत्वपूर्ण साक्ष्य एकत्र किए। शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। मृतक के परिजनों ने रजत की हत्या का आरोप उसके दोस्तों राहुल, नितिन और जयकुमार पर लगाया है। उनका कहना है कि रजत को आखिरी बार इन्हीं तीनों के साथ देखा गया था, जिसके बाद वह लापता हो गया। परिवार ने आरोपियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पुलिस ने तीनों संदिग्ध युवकों से अलग-अलग पूछताछ शुरू कर दी है। जांच दल कॉल डिटेल, मोबाइल लोकेशन, सीसीटीवी फुटेज और फोरेंसिक रिपोर्ट के आधार पर मामले की कड़ियां जोड़ रहा है। अधिकारियों के अनुसार, पोस्टमार्टम रिपोर्ट और अन्य वैज्ञानिक साक्ष्यों के आधार पर हत्या की पूरी साजिश का खुलासा किया जाएगा। पुलिस फिलहाल हर पहलू से मामले की जांच कर रही है।



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सीतामढ़ी में छात्र प्रदर्शन हिंसक, 8 उपद्रवी गिरफ्तार: 66 संदिग्धों की तस्वीरें जारी, एसपी समेत कई पुलिसकर्मी घायल – Sitamarhi News




सीतामढ़ी में छात्र प्रदर्शन के दौरान हुई हिंसा के मामले में पुलिस ने कार्रवाई तेज कर दी है। पुलिस ने घटना में शामिल 66 संदिग्ध उपद्रवियों की तस्वीरें जारी की हैं और आम लोगों से उनकी पहचान में सहयोग की अपील की है। अब तक आठ उपद्रवियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि अन्य की तलाश में छापेमारी जारी है। अंबेडकर कल्याण छात्रावास, भीम आर्मी और आइसा संगठन ने बंद और आक्रोश मार्च का आह्वान किया था। प्रदर्शन के दौरान कुछ असामाजिक तत्वों के शामिल होने से स्थिति अचानक हिंसक हो गई। उपद्रवियों ने पुलिस और प्रशासनिक वाहनों के साथ-साथ आम लोगों के वाहनों को भी निशाना बनाया। हिंसक भीड़ ने जमकर तोड़फोड़ की और कई वाहनों में आग लगा दी। उपद्रवियों ने दो स्कॉर्पियो और तीन मोटरसाइकिलों को आग के हवाले कर दिया, जबकि लगभग एक दर्जन अन्य वाहनों को क्षतिग्रस्त कर दिया गया। 66 संदिग्ध उपद्रवियों की तस्वीरें जारी यातायात थाना के थानाध्यक्षों को लगी चोट इस हिंसा में सीतामढ़ी के एसपी अमित रंजन भी घायल हो गए। उनके अलावा डुमरा, मेहसौल और यातायात थाना के थानाध्यक्षों को भी चोटें आई हैं। एक दर्जन से अधिक महिला एवं पुरुष पुलिसकर्मी भी उपद्रवियों के हमले में घायल हुए, जिनका उपचार कराया गया है। सीतामढ़ी पुलिस ने बताया कि घटनास्थल के वीडियो फुटेज, सीसीटीवी कैमरों और सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीरों व वीडियो के आधार पर उपद्रवियों की पहचान की जा रही है। पुलिस ने आम नागरिकों से अपील की है कि जारी तस्वीरों में किसी भी व्यक्ति की पहचान होने पर तत्काल पुलिस को सूचना दें। संवेदनशील इलाकों में पुलिस बल तैनात घटना के बाद पूरे शहर में सुरक्षा व्यवस्था कड़ी कर दी गई है और संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है। अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि कानून हाथ में लेने वालों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।



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श्रृंगेश्वर धाम में नौका संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध: बिना अनुमति नाव चलाने वालों पर होगी सख्त कार्रवाई – Jhabua News




झाबुआ जिले के प्रसिद्ध श्रृंगेश्वर धाम क्षेत्र में श्रद्धालुओं की सुरक्षा को देखते हुए प्रशासन ने नौका संचालन पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया है। कलेक्टर के निर्देश के बाद जनपद पंचायत पेटलावद ने यह आदेश जारी किया है। माही डैम चारण कोटड़ा के बैकवॉटर क्षेत्र में आने वाले श्रृंगेश्वर धाम में बढ़ती भीड़ को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। बिना अनुमति नाव चलाना माना जाएगा अवैध जनपद पंचायत पेटलावद के सीईओ गौरव जैन ने आदेश जारी कर स्पष्ट किया है कि सक्षम कार्यालय की पूर्व अनुमति के बिना कोई व्यक्ति या संस्था नाव का संचालन नहीं कर सकेगी। नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ वैधानिक कार्रवाई की जाएगी। बारिश में जलस्तर बढ़ने से हादसे का खतरा प्रशासन के अनुसार बारिश के दौरान जलाशयों के जलस्तर में उतार-चढ़ाव होता है। ऐसे में बैकवॉटर क्षेत्र में जल दुर्घटनाओं की आशंका बढ़ जाती है। श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या को देखते हुए सुरक्षा के मद्देनजर नौका संचालन पर रोक लगाई गई है। नाव चालकों को समझाइश, निगरानी के निर्देश ग्राम पंचायत, सरपंच और रोजगार सहायक समेत संबंधित अधिकारियों को आदेश का पालन सुनिश्चित कराने के निर्देश दिए गए हैं। ग्राम पंचायत भेरूपाड़ा के सहायक सचिव रतन सिंगाड ने माही नदी के नाव चालकों को आदेश की जानकारी देकर नियमों का पालन करने की समझाइश दी। श्रद्धालुओं से नियमों का पालन करने की अपील प्रशासन ने श्रृंगेश्वर धाम आने वाले श्रद्धालुओं और ग्रामीणों से बिना अनुमति नाव का इस्तेमाल नहीं करने की अपील की है। आदेश की जानकारी कलेक्टर, जिला पंचायत सीईओ और एसडीएम पेटलावद समेत संबंधित अधिकारियों को भी भेजी गई है।



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ये हैं व्रत में खाई जाने वाले रेसिपी, जिनसे मिलती भरपूर एनर्जी, जानिये इनके नाम


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व्रत में ऊर्जा के लिए साबूदाना खिचड़ी, मखाने की खीर, कुट्टू चीला, सिंघाड़े का हलवा, शकरकंद चाट और फ्रूट स्मूदी जैसे पौष्टिक विकल्प अपनाएं. इससे आपके दिनभर एनर्जी का एहसास रहेगा.

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व्रत में भी खाइए एनर्जी से भरपूर ये खाना. Image AI

व्रत के दौरान शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा की आवश्यकता होती है. ऐसे में केवल पेट भरना ही नहीं, बल्कि ऐसे खाद्य पदार्थों का सेवन करना जरूरी है जो शरीर को पर्याप्त पोषण और एनर्जी प्रदान करें. भारतीय परंपरा में कई ऐसी व्रत रेसिपी हैं जो स्वादिष्ट होने के साथ-साथ सेहत के लिए भी लाभकारी होती हैं. आइए जानते हैं कुछ ऐसी रेसिपियों के बारे में जो व्रत के दौरान आपको दिनभर ऊर्जावान बनाए रख सकती हैं.

1. साबूदाना खिचड़ी
साबूदाना व्रत के दौरान सबसे ज्यादा खाया जाने वाला खाद्य पदार्थ है. इसमें कार्बोहाइड्रेट प्रचुर मात्रा में होता है, जो शरीर को तुरंत ऊर्जा देने का काम करता है. मूंगफली, आलू और हरी मिर्च के साथ बनाई गई साबूदाना खिचड़ी स्वाद के साथ पोषण भी देती है. इसमें मौजूद मूंगफली प्रोटीन और हेल्दी फैट्स का अच्छा स्रोत होती है.

2. मखाने की खीर
मखाना कैल्शियम, प्रोटीन और एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होता है. दूध और ड्राई फ्रूट्स के साथ बनाई गई मखाने की खीर न केवल स्वादिष्ट होती है, बल्कि लंबे समय तक पेट भरा रखने में भी मदद करती है. यह शरीर को ऊर्जा देने के साथ कमजोरी दूर करने में भी सहायक होती है।

3. कुट्टू के आटे का चीला
कुट्टू का आटा व्रत में खाया जाने वाला पौष्टिक विकल्प है. इससे बना चीला फाइबर, प्रोटीन और आवश्यक मिनरल्स से भरपूर होता है. दही के साथ इसका सेवन करने से शरीर को लंबे समय तक ऊर्जा मिलती है और भूख भी जल्दी नहीं लगती.

4. सिंघाड़े के आटे का हलवा
सिंघाड़े का आटा आयरन, कैल्शियम और विटामिन्स का अच्छा स्रोत माना जाता है. घी और ड्राई फ्रूट्स के साथ तैयार किया गया हलवा व्रत में स्वाद और ताकत दोनों प्रदान करता है. यह थकान को दूर करने और शरीर में ऊर्जा बनाए रखने में मदद करता है.

5. शकरकंद चाट
शकरकंद में जटिल कार्बोहाइड्रेट, फाइबर और विटामिन ए भरपूर मात्रा में पाया जाता है. उबली हुई शकरकंद में सेंधा नमक, नींबू और थोड़ी काली मिर्च मिलाकर बनाई गई चाट हल्की होने के साथ बेहद पौष्टिक भी होती है. यह धीरे-धीरे ऊर्जा प्रदान करती है.

6. फल और ड्राई फ्रूट्स स्मूदी
केला, सेब, दूध और बादाम जैसे ड्राई फ्रूट्स से बनी स्मूदी व्रत के दौरान शरीर को इंस्टेंट एनर्जी देती है. इसमें मौजूद प्राकृतिक शर्करा और पोषक तत्व शरीर को हाइड्रेटेड रखने में भी मदद करते हैं.



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प्रदर्शन खत्म, मंच हटा, छात्र लौटे: जंतर-मंतर पर देर रात से सफाई जारी, सड़कें साफ हुईं, कचरा हटाया



धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ ही दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा कॉकरोच जनता पार्टी का प्रदर्शन शनिवार को खत्म हो गया। पार्टी के लीडर और छात्र लौट गए हैं। जंतर-मंतर का इलाका करीब-करीब खाली हो गया है। शनिवार देर रात से यहां सफाई अभियान चलाया जा रहा है। कचरा हटाया गया, सड़कें साफ की गईं। भारी बैरिकेडिंग हटाने के लिए मशीनों की मदद ली गई। खबर का वीडियो देखने के लिए कवर इमेज पर क्लिक करें…



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निहंग विक्की थॉमस को घोड़े की लीद उठाने की सजा: पंजाब आकर बुड्‌ढा दल से हाथ जोड़कर माफी मांगी; अश्लील फोटो वायरल की थी – Amritsar News




पंजाब में निहंग जसदीप की दूसरे निहंग के साथ अश्लील फोटो वायरल करने वाले चर्चित निहंग विक्की थॉमस ने माफी मांगी है। विक्की ने महाराष्ट्र से पंजाब आकर निहंग संगठन बुड्‌ढा दल के सामने पेश होकर गलती स्वीकार की। विक्की ने भरोसा दिया कि आगे से उनके पास किसी की कोई विवादित सामग्री आती है तो वह उसे सीधे सोशल मीडिया पर पोस्ट नहीं करेंगे, बल्कि पहले पंथ के वरिष्ठ सिंहों के सामने रखेंगे। बुड्ढा दल ने उनकी माफी स्वीकार करते हुए धार्मिक सजा सुनाई। विक्की थॉमस को अब बर्तनों की सफाई, घोड़ों को पानी पिलाने और लीद उठानी होगी। वहीं बुड्‌ढा दल ने ये भी साफ कर दिया कि जसदीप सिंह पर पहले लिया गया फैसला बरकरार रहेगा। उन्हें अगले आदेश तक निहंग बाणा पहनने, दस्तार सजाने और पंथ की अगुवाई की अनुमति नहीं होगी। 4 पॉइंट में जानिए, विक्की थॉमस माफी मांगने क्यों आए पूरे विवाद की कहानी… फोटो से माफी तक निहंग जसदीप पर कैसे हुई कार्रवाई… पहली कार्रवाई में बाणा, दस्तार और अगुवाई पर रोक: विवाद सामने आने के बाद बुड्ढा दल ने जसदीप सिंह के खिलाफ पंथक कार्रवाई की। उन्हें अगले आदेश तक निहंग बाणा पहनने, दस्तार सजाने और पंथ की अगुवाई करने से रोक दिया गया। साथ ही पंथ में रहकर सेवा करने के निर्देश दिए गए। बीच में सजा छोड़ने का दावा, माफी नहीं मिली: बुड्ढा दल के दोआबा जोन के जत्थेदार मान सिंह ने दावा किया कि पहली बार सुनाई गई सजा के दौरान जसदीप सिंह बीच में ही वहां से चले गए थे। इसलिए उन्हें किसी प्रकार की माफी नहीं दी गई। हालांकि बाद में जसदीप ने एक इंटरव्यू और पॉडकास्ट में दावा किया कि उन्हें बुड्ढा दल ने माफ कर दिया है। पॉडकास्ट के बाद दूसरी बार धार्मिक दंड
बुड्ढा दल ने इसके बाद दूसरा वीडियो जारी किया। इसमें जसदीप सिंह को संगल (जंजीरों) से बांधकर धार्मिक दंड दिया गया। निहंगों ने उन्हें डंडों से मारा और हर प्रहार के साथ “वाहेगुरु जी का खालसा, वाहेगुरु जी की फतेह” का जयकारा लगवाया। वीडियो में जसदीप दर्द से “हाय बाबा जी” कहते हुए भी सुनाई दिए। मान सिंह ने कहा कि जसदीप को पहले माफी नहीं दी गई थी, बल्कि पंथ में रहकर सेवा करने के लिए कहा गया था। इसके बावजूद उन्होंने पॉडकास्ट में खुद को माफ किए जाने का दावा किया। एक निहंग ने कहा कि कथित कुकर्म और पॉडकास्ट, दोनों की वजह से उन्हें दोबारा धार्मिक दंड दिया गया। जसदीप बोले-अब पंथ का हर आदेश मानूंगा
धार्मिक दंड के दौरान जसदीप सिंह ने अपनी गलती स्वीकार की। उन्होंने कहा कि अब वह सजा बीच में छोड़कर नहीं जाएंगे। अगर भविष्य में वह पंथ के आदेशों का पालन नहीं करते हैं तो उसके लिए पंथ जिम्मेदार नहीं होगा। वह बड़े बाबा के हर आदेश का पालन करेंगे और जैसा निर्देश मिलेगा, वैसा ही करेंगे।



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वर्ल्ड अपडेट्स: नेपाल में ₹25 हजार तक के भारतीय नोट ले जाने की मंजूरी, ₹200 और ₹500 के नए नोट ही मान्य


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35 मिनट पहले

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नेपाल ने भारतीय और नेपाली नागरिकों को 9 नवंबर 2016 के बाद जारी ₹200 और ₹500 के भारतीय नोट, अधिकतम ₹25,000 तक नेपाल लाने और ले जाने की अनुमति दे दी है। नेपाल राष्ट्र बैंक (NRB) ने नई अधिसूचना जारी कर नियमों को स्पष्ट किया है।

केंद्रीय बैंक के अनुसार, 8 नवंबर 2016 से पहले जारी ₹500 और ₹1,000 के पुराने भारतीय नोटों पर प्रतिबंध पहले की तरह जारी रहेगा। वहीं, नेपाली नागरिक भारतीय मुद्रा केवल भारत से ही नेपाल ला सकेंगे और नेपाल से किसी तीसरे देश में नहीं ले जा सकेंगे।

NRB के प्रवक्ता गुरु प्रसाद पौडेल ने कहा कि नए नियम से नेपाल आने वाले भारतीय पर्यटकों और भारत के साथ व्यापार करने वाले नेपाली नागरिकों को सुविधा मिलेगी। अधिसूचना में यह भी कहा गया है कि नेपाली नागरिक और विदेशी यात्री बिना कस्टम घोषणा के 5,000 अमेरिकी डॉलर या उसके बराबर विदेशी मुद्रा नेपाल ला सकते हैं। इससे अधिक राशि होने पर कस्टम में घोषणा करना अनिवार्य होगा।

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जर्मनी में प्राइड परेड पर हमला, वैन से भीड़ को कुचला; 1 की मौत, 16 घायल, आरोपी गिरफ्तार

जर्मनी की राजधानी बर्लिन में LGBTQ+ समुदाय की प्राइड परेड के दौरान शनिवार रात एक वैन भीड़ में घुस गई। हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई, जबकि 16 लोग घायल हुए हैं। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर लिया है और मामले की जांच जारी है।

पुलिस के मुताबिक, सफेद वैन टियरगार्टन पार्क के पास उस इलाके में घुसी, जहां से कुछ देर पहले प्राइड परेड निकली थी। कई लोगों को टक्कर मारने के बाद वैन एक पेड़ से टकरा गई। घायलों में कुछ की हालत गंभीर है।

घटना के बाद प्राइड कार्यक्रम और कॉन्सर्ट रद्द कर दिए गए। जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्च ने मामले की पूरी जांच और दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिया। वहीं, बर्लिन के मेयर काई वेगनर ने इसे समाज पर हमला बताया।

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AI ने बताई 3 साल में 133 मौतों की वजह: 20 दिन एक्सीडेंट के कारणों की डिजिटल जांच; बदलेंगे रोड डिजाइन और ट्रैफिक सिस्टम – Rajasthan News




राजस्थान में सड़क हादसों को रोकने के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की मदद ली जा रही है। जयपुर रेंज पुलिस ने आधा दर्जन ब्लैक स्पॉट चिन्हित किए, जहां सबसे ज्यादा रोड एक्सीडेंट होते हैं। इन स्पॉट पर 3 साल में 133 मौतें हो चुकी हैं। 20 दिन तक इन स्पॉट का डेटा AI पर अपलोड कर एनालिसिस किया। कारण और समाधान ढूंढ़ने की कोशिश की। पढ़िए पूरी रिपोर्ट… सीएचसी कट (पावटा) : 3 साल में 27 एक्सीडेंट, 29 मौतें गोवर्धन पुलिया (कोटपुतली) : तीन साल में 22 की मौत रामनगर (दूदू) : 31 हादसों में 40 की मौत मौखमपुरा (तिराहा) : 3 साल में 25 मौतें धाराजीसीपुर (सीकर) : 13 हादसों में 17 की मौत कैसे हुआ AI का इस्तेमाल, 20 दिनों तक क्या हुआ काम पुलिस की साइबर और आईटी टीम ने प्रत्येक ब्लैक स्पॉट से जुड़ा विस्तृत डेटा तैयार किया। इसमें सड़क की बनावट, मोड़, कट, ट्रैफिक का दबाव, वाहनों की आवाजाही, एक्सीडेंट का वक्त, एक्सीडेंट में शामिल वाहन, सड़क की चौड़ाई, सर्विस रोड, यू-टर्न, रोड लाइट व्यवस्था और अन्य तकनीकी जानकारियां AI प्लेटफॉर्म पर अपलोड की। AI ने इन सभी डेटा का एनालिसिस किया। इसके बाद बताया कि किन कमियों के कारण सबसे ज्यादा एक्सीडेंट हो रहे हैं और उन्हें रोकने के लिए कौन-कौन से व्यावहारिक कदम उठाए जा सकते हैं। सालों तक ट्रैफिक पॉइंट पर ड्यूटी देने वाले सीआई मुकेश चौधरी का कहना है कि AI ने कई ऐसे बदलाव सुझाए, जिनपर पहले कभी गौर नहीं किया गया। अगर इन पॉइंट पर काम होगा तो हादसों में भी कमी आएगी। AI ने बताए कई इनोवेटिव समाधान



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मथुरा में जाम से श्रद्धालुओं को राहत मिलेगी: 470 करोड़ की परियोजनाओं से श्रीकृष्ण जन्मस्थान तक पहुंचना होगा आसान – Mathura News




भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली में बढ़ रही श्रद्धालुओं की संख्या को देखते हुए यातायात व्यवस्था को आधुनिक और सुगम बनाने की तैयारी है। मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण ने श्रीकृष्ण जन्मभूमि को ध्यान में रखकर अवस्थापना विकास अंतर्गत 470 करोड़ रुपए का प्लान स्वीकृत किया है। इसके तहत जन्मभूमि के लिए एलिवेटेड रोड, बस पार्किंग एवं संपर्क मार्ग के विस्तार सहित अन्य जन सुविधाओं से सुसज्जित किया जाना है। इसका उद्देश्य श्रद्धालुओं को जाम से राहत, सुरक्षित आवागमन और बेहतर धार्मिक पर्यटन अनुभव के साथ ठाकुरजी के सुगम दर्शन कराना है। MVDA ने बनाया प्लान श्रीकृष्ण जन्मभूमि और वृंदावन में प्रतिवर्ष देश-विदेश से आने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं और पर्यटकों की संख्या लगातार बढ़ रही है। इसे देखते हुए मथुरा-वृंदावन विकास प्राधिकरण ने वित्तीय वर्ष 2026-27 में कई महत्वपूर्ण अवस्थापना परियोजनाएं बनाई हैं। इन परियोजनाओं का उद्देश्य धार्मिक स्थलों तक पहुंच को आसान बनाना, महानगर की यातायात व्यवस्था को सुव्यवस्थित करना और श्रद्धालुओं को आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराना है। 17 तिराहे,चौराहे किए चिह्नित इसके तहत प्राधिकरण द्वारा महानगर के 17 प्रमुख तिराहों और चौराहों के जंक्शन इम्प्रूवमेंट का कार्य 50 करोड़ की लागत से किया जाएगा। प्लान के तहत टाउनशिप तिराहा, गोकुल तिराहा, कलेक्ट्रेट तिराहा, भूतेश्वर चौराहा, मंडी चौराहा, गोवर्धन चौराहा, गांधी पार्क तिराहा, प्रेम मंदिर जंक्शन, एसबीआई चौराहा, नया बस अड्डा तिराहा सहित अन्य प्रमुख जंक्शनों पर लेन सेपरेटर, डिवाइडर, रोटरी, साइनेज, रोड मार्किंग, ग्रिल, स्पीड ब्रेकर, फुटपाथ, वेंडिंग जोन तथा आवश्यकतानुसार पार्किंग जैसी सुविधाएं विकसित की जाएंगी। जन्मभूमि के लिए 3.5 किमी लम्बा एलिवेटेड रोड मछली फाटक से श्रीकृष्ण जन्मभूमि के गेट नंबर 3 तक लगभग 3.50 किलोमीटर लंबी एलिवेटेड रोड का निर्माण होना है। वर्तमान में यमुना एक्सप्रेस-वे,एनएच 530 बी, एनएच-19, टाउनशिप और धौली प्याऊ की ओर से आने वाले श्रद्धालु टैंक चौराहा, एसबीआई तिराहा, नया बस स्टैंड और भूतेश्वर तिराहे से होकर जन्मभूमि पहुंचते हैं। यह रास्ता शहर के प्रमुख व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को भी जोड़ता है, जिसके कारण यहां हमेशा भारी यातायात दबाव रहता है। इस मार्ग पर रेलवे अंडरपास होने और दोनों ओर पर्याप्त भूमि उपलब्ध न होने के कारण सड़क चौड़ीकरण संभव नहीं है। ऐसे में एलिवेटेड रोड सबसे व्यवहारिक समाधान माना गया है। इसके बनने से वर्तमान में 3.50 किलोमीटर की दूरी तय करने में लगने वाला 30 से 40 मिनट का समय घटकर केवल 5 से 7 मिनट रह जाएगा, जिससे श्रद्धालुओं, पर्यटकों और स्थानीय नागरिकों को ट्रैफिक जाम से बड़ी राहत मिलेगी। इस रोड पर करीब 350 करोड़ रुपये खर्च होंगे। जन्मभूमि के निकट बस पार्किंग और लिंक मार्ग का विस्तार मसानी कट स्थित कल्याण करोति हॉस्पिटल से रामलीला मैदान होते हुए महाविद्या कॉलोनी स्थित सीएम ग्रिड लिंक रोड तक लगभग 1050 मीटर लंबे लिंक मार्ग, पार्किंग, बाउंड्रीवाल और जनसुविधाओं का विकास किया जाएगा। वर्तमान में एनएच-19 से श्रीकृष्ण जन्मभूमि आने वाली अधिकांश बस गोविंद नगर के संकरे मार्गों से होकर गुजरती हैं, जिससे अक्सर जाम की स्थिति बन जाती है और स्थानीय निवासियों, पर्यटकों तथा श्रद्धालुओं को भारी असुविधा का सामना करना पड़ता है। इसी समस्या के समाधान के लिए लगभग 4 एकड़ प्राधिकरण भूमि पर विशेष रूप से बसों के लिए ओपन पार्किंग विकसित की जाएगी। पार्किंग तक पहुंचने के लिए 12.50 मीटर चौड़ा दो लेन लिंक मार्ग बनाया जाएगा। साथ ही श्रीकृष्ण जन्मभूमि की ओर जाने वाले मार्ग को जोड़ने के लिए 30 फीट चौड़े मार्ग का निर्माण तथा स्थानीय निवासियों की सुविधा के लिए 7.50-7.50 मीटर चौड़े दो कैरिज-वे और दोनों ओर दो-दो मीटर चौड़े फुटपाथ भी विकसित किए जाएंगे। इससे श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को व्यवस्थित पार्किंग मिलेगी और जन्मभूमि तक पहुंचना अधिक सुगम होगा। इस पर करीब 70 करोड़ रुपये खर्च होंगे। CM के सामने दिया प्रजेंटेशन लक्ष्मी नागप्पन, उपाध्यक्ष मथुरा वृंदावन विकास प्राधिकरण ने बताया मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के दिशानिर्देशों के तहत श्रीकृष्ण जन्मभूमि को दृष्टिगत रखते हुए यह परियोजनाएं भविष्य की आवश्यकताओं के मद्देनजर तैयार की गई हैं। इनका उद्देश्य केवल यातायात सुधारना नहीं, बल्कि मथुरा-वृंदावन में श्रद्धालुओं की आवाजाही को अधिक सुगम, सुरक्षित और व्यवस्थित बनाना है। इन योजनाओं के क्रियान्वयन से धार्मिक पर्यटन और स्थानीय विकास दोनों को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा। इन सभी परियोजनाओं को स्वीकृति मिल चुकी है। इनका प्रजेंटेशन मुख्यमंत्री के समक्ष किया गया है।



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बिहार में 600 छात्र गिरफ्तार, इनका क्या होगा?: प्रदर्शनकारी बोले-अगर छात्रों को छोड़ा नहीं गया तो फिर प्रदर्शन,परिजन बोले–सोते बेटे को उठा ले गए – Siwan News




“हम स्टूडेंट्स सड़क पर किसी से लड़ने नहीं निकले थे, अपना हक मांगने निकले थे। हम दिन-रात जगकर पढ़ाई करते हैं, एग्जाम देते हैं और मेहनत करके अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। अगर परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी होती है और उसके खिलाफ आवाज उठाने पर पुलिस लाठी चलाती है, तो छात्र आखिर जाएं कहां? हमें सरकार से सिर्फ इतना चाहिए कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर कार्रवाई हो। सिर्फ शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से काम नहीं चलेगा। PM मोदी को भी इस्तीफा देना पड़ेगा। हमारे ऊपर लाठी चलाने की जगह शुरू में ही हमारी बात सुनी जाती, तो ये दिन नहीं आता…” ये कहना है बिहार बंद में शामिल हुए प्रदर्शनकारी स्टूडेंट्स का, जिनका गुस्सा अभी भी पूरी तरह से शांत नहीं हुआ है। दरअसल, पेपर लीक, परीक्षा में पारदर्शिता और छात्रों पर कार्रवाई के विरोध में शनिवार (25 जुलाई) को AISA ने बिहार बंद का आवाहन किया था। इस दौरान बिहार के 4 जिलों में सबसे ज्यादा उग्र प्रदर्शन देखने को मिला। छपरा में BDO की आंख फूटी, सीवान-सीतामढ़ी में SP घायल छपरा में BDO की आंख फोड़ दी गई, सीवान-सीतामढ़ी में SP पर पत्थर फेंककर उन्हें घायल कर दिया गया। बिहार बंद के दौरान करीब 20 से ज्यादा पुलिसकर्मी जख्मी हुए हैं। वहीं, पूरे बिहार से 600 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने डिनेट किया है। उनलोगों से पूछताछ की जा रही है। इतने बवाल के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी इस्तीफा दे दिया है। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच खुशी की जगह आंदोलन को आगे जारी रखने की बात सामने आई है। छात्र संगठनों का कहना है कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उनकी तीन प्रमुख मांगों में से सिर्फ एक मांग की पूर्ति है। दो मांगें अभी बाकी हैं। इनमें निर्दोष छात्रों पर दर्ज FIR वापस लेना और पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के कारण जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देना शामिल है। ‘600 छात्र को किया गया डिटेन, क्या होगा इनका भविष्य? क्या अब आंदोलन कमजोर होगा या और बढ़ेगा? छात्र संगठनों की अब क्या बची है मांगें? डिटेन स्टूडेंट्स के परिवार में कैसा डर है… पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पहले प्रदर्शन से जुड़ी तस्वीरें देखिए… ‘धर्मेंद्र गए, अब नरेंद्र मोदी को हटाने की बारी’ मुजफ्फरपुर में NSUI जिला अध्यक्ष आदित्य कुमार करण ने कहा, ‘धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा छात्रों के संघर्ष की एक उपलब्धि है, लेकिन आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है। अभी धर्मेंद्र प्रधान गए हैं, अब नरेंद्र मोदी को हटाने की बारी है। छात्रों पर जिस तरह अत्याचार हुआ और बेरहमी से लाठीचार्ज किया गया, उसी के विरोध में अब आंदोलन होगा। अगर निर्दोष छात्रों पर दर्ज FIR वापस नहीं लिया गया और जिन छात्रों के साथ अत्याचार हुआ है, उनके परिवारों को मुआवजा नहीं मिला तो हमलोग फिर बड़े आंदोलन के लिए सड़क पर उतरेंगे।’ आदित्य कुमार करण ने कहा कि आंदोलन को देशभर के छात्रों और युवाओं ने मिलकर मजबूत किया है। जिन लोगों ने दिन-रात संघर्ष किया, उनके दबाव के कारण सरकार को धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेना पड़ा। तीन मांगों में एक पूरी, दो अभी बाकी NSUI नेता ने बताया, छात्र संगठनों की तीन प्रमुख मांगें थीं। पहली मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी, जो पूरी हो चुकी है। दूसरी मांग पेपर लीक या परीक्षा संबंधी गड़बड़ी के कारण जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की है। तीसरी मांग निर्दोष छात्रों पर दर्ज FIR वापस लेने की है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ सिर्फ एक मांग पूरी हुई है। बाकी दो मांगों पर केंद्र सरकार की ओर से अभी तक लिखित आदेश नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि जब तक बाकी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन खत्म नहीं माना जाएगा।।” Gen-Z के युवा वोट से बनाएंगे भविष्य वहीं, पटना में प्रदर्शन में शामिल हुईं 12वीं की छात्रा भाव्या ने कहा, वह करीब दो साल बाद मतदान के लिए योग्य हो जाएंगी। आज छात्रों के साथ जो कुछ हो रहा है, उसे Gen-Z के युवा भविष्य में अपने वोट के जरिए जरूर याद रखेंगे। इस एजुकेशन सिस्टम के फेल्योर की वजह से हमें जो कुछ सहना पड़ा है, उसे हम अपने वोट के जरिए जरूर दिखाएंगे। हम लोग बीजेपी की सरकार से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हैं। अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि सरकारें आएंगी-जाएंगी, पार्टियां बनेंगी-बिगड़ेंगी, लेकिन देश का लोकतंत्र रहना चाहिए। इसलिए मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछना चाहती हूं कि क्या यही उनका लोकतंत्र है? ‘पेपर लीक न हो, परीक्षा समय पर और पारदर्शी हो’ प्रदर्शन में शामिल सुप्रिया ने सरकार और प्रशासन पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि छात्रों को मौजूदा व्यवस्था से कोई उम्मीद नहीं रह गई है। ऐसी कोई जगह नहीं है जहां करप्शन न हो। प्रदर्शन में जितनी पुलिस तैनात की गई है, अगर उतनी पुलिस लड़कियों की सुरक्षा के लिए तैनात रहे और सही तरीके से व्यवस्था संभाले तो हर रेपिस्ट जेल में होगा।पुलिस और प्रशासन की नाकामियों की वजह से कई आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं। सुप्रिया ने कहा कि छात्रों की सबसे बड़ी चिंता परीक्षा व्यवस्था को लेकर है। ऐसा नहीं होना चाहिए कि परीक्षा से ठीक पहले छात्रों को बताया जाए कि सेंटर बदल गया है। छात्र कई दिनों और महीनों तक तैयारी करते हैं। उन्होंने आगे कहा, मंत्रियों के बेटे-बेटियां विदेशों में पढ़ रहे हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि इंडिया का एजुकेशन सिस्टम खराब है। आम छात्रों को इसी व्यवस्था में पढ़ना पड़ता है और परीक्षा, पेपर लीक और सेंटर जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। हम चाहते हैं कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को ऐसा बनाए कि हर छात्र को बराबरी का अवसर मिले। ‘युवाओं की आवाज सुनने के लिए सरकार के पास 7 सेकंड नहीं’ प्रदर्शन कर रहे एक छात्र ने बताया, देश के युवाओं की आवाज सुनने के लिए सरकार के पास सात सेकंड का समय नहीं है। हमारे छात्र सड़कों पर हैं, उनके भविष्य का सवाल है, उनकी परीक्षा और रोजगार का सवाल है, लेकिन सरकार उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी अगर सिर्फ सात सेकंड लाइव आकर देश के छात्रों की बात सुन लेते तो शायद उन्हें पता चलता कि युवाओं के मन में कितना गुस्सा और कितनी पीड़ा है। एक तरफ हमारे देश के युवा अपनी पढ़ाई, परीक्षा और भविष्य को लेकर सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं, दूसरी तरफ प्रधानमंत्री विदेश में जाकर मेलोनी को चॉकलेट देने में व्यस्त हैं। सवाल यह है कि प्रधानमंत्री को सात समंदर पार जाकर दूसरे देश के नेता से मिलने का समय मिल सकता है, लेकिन भारत के करोड़ों युवाओं की आवाज सुनने के लिए सात सेकंड का समय क्यों नहीं मिल सकता? हम हिंसा नहीं चाहते। हम चाहते हैं कि हमारी बात सुनी जाए। अगर सरकार छात्रों से संवाद कर लेती तो शायद सड़क पर उतरने की जरूरत ही नहीं पड़ती। प्रदर्शनकारी छात्र बोले-‘यह सिर्फ केंद्र का नहीं, राज्यों का भी मुद्दा है’ औरंगाबाद में प्रदर्शन कर रहे छात्र का कहना है, यह सिर्फ केंद्र सरकार का मुद्दा नहीं है, बल्कि राज्यों का भी उतना ही बड़ा मुद्दा है। पेपर लीक, भ्रष्टाचार और परीक्षा में पारदर्शिता को लेकर कोई नेता गंभीरता से बात नहीं कर रहा है। नेताओं के लिए चुनाव जरूरी है, लेकिन छात्रों की परीक्षा और भविष्य का मुद्दा पीछे क्यों चला जाता है? कोरोना के समय भी चुनाव हुए, लेकिन जब छात्रों के भविष्य की बात आती है तो उनकी समस्याओं को क्यों टाल दिया जाता है? हम छात्र आखिर क्या करें? हमारे पास ऑपशन क्या बचा है? हम दरोगा की परीक्षा देते हैं तो उसमें भी पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते हैं। हमें कह दिया जाता है कि कोई गड़बड़ी नहीं हुई, लेकिन हम उस व्यवस्था पर भरोसा कैसे करें, जब लगातार पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं की खबरें सामने आती रहती हैं? BPSC की परीक्षाओं में भी जांच की बात सामने आती है। बिहार में दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं की स्थिति भी छात्रों के सामने है। 2023 में फॉर्म भरने के बाद अगर कई साल तक परीक्षा की तारीख ही स्पष्ट नहीं हो, तो छात्र क्या करें? हम अपनी उम्र और अपने कई साल सिर्फ परीक्षा का इंतजार करने में कैसे निकाल दें? हमने सरकार को चुना है, इसलिए सरकार से उम्मीद करना हमारा अधिकार है। हम कोई गलत मांग नहीं कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि परीक्षा निष्पक्ष हो, पेपर लीक और भ्रष्टाचार पर रोक लगे और भर्ती प्रक्रिया समय पर पूरी हो। हम हिंसा के समर्थक नहीं हैं। हम गांधी जी के अहिंसा के रास्ते पर चलकर अपनी मांग रखना चाहते हैं। हमारा आंदोलन छात्रों के भविष्य के लिए है। हम सरकार से लड़ना नहीं चाहते, हम सरकार से सिर्फ अपने भविष्य का भरोसा मांग रहे हैं। अगर सरकार हमारी बात सुने और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाए, तो छात्रों को सड़क पर उतरने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। बिना कुछ बोले हमला कर दिया, दो-चार लाठियां भी मारीं’ बिहार बंद के दौरान सीतामढ़ी में प्रदर्शनकारियों के हमले में घायल हुए प्रमोद कुमार ने बताया, मैं अपनी बहन का इलाज करवा कर अस्पताल से घर लौट रहा था। इसी दौरान कुछ लोग अचानक मेरे कार के सामने आ गए। उन्होंने हमला करना शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारी बोल रहे थे- मारो-मारो…हमला में मुझे भी 2-4 लाठी लगी है। मेरे शरीर से खून निकल रहा है। ‘धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से खुशी, लेकिन पेपर लीक पर सख्त कानून बने’ पटना के रहने वाले छात्र रेवंत रावल ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर खुशी जताई है। उन्होंने कहा, छात्रों के लंबे विरोध के बाद इस्तीफा हुआ है, लेकिन केवल इस्तीफे से समस्या खत्म नहीं होगी। पेपर लीक और परीक्षा में फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सरकार को सख्त कानून बनाना चाहिए। रेवंत ने कहा कि अगर भविष्य में दोबारा पेपर लीक या परीक्षा में गंभीर अनियमितता सामने आती है तो छात्र फिर सड़क पर उतरेंगे। छात्र अपने भविष्य के साथ समझौता नहीं कर सकते। हमारी मांग है कि परीक्षा व्यवस्था पारदर्शी हो और जो लोग पेपर लीक या फर्जीवाड़े में शामिल हैं, उनके खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई हो कि भविष्य में कोई ऐसा करने की हिम्मत न करे। “हम बिहार के छात्र हैं। अगर कोई हमसे छात्र होने का प्रमाण मांगता है तो हम अपना स्टूडेंट प्रूफ दिखाने के लिए तैयार हैं। हमारा मुद्दा बिल्कुल स्पष्ट है छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। 36 दिन की मेहनत, पूरे GEN-Z की जीत छात्र नेता ने कहा, हमारे आह्वान पर देशभर के युवा खुद-ब-खुद सड़कों पर निकलकर आए। 36 दिनों तक भारत की हर गली, हर मोहल्ले और हर जिले से युवाओं ने अपनी आवाज बुलंद की। यह सिर्फ किसी एक संगठन की जीत नहीं है, बल्कि पूरे छात्र समुदाय और छात्र शक्ति की जीत है। धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार इस्तीफा दे दिया। यह जीत उन तमाम संघर्षों की जीत है, उन माता-पिताओं के संघर्ष की जीत है, जिनके बेटे-बेटियों ने अपने भविष्य के लिए सड़कों पर संघर्ष किया। यह उन सभी युवाओं की जीत है, जिन्होंने एक-दूसरे का हाथ थामकर इस आंदोलन को आगे बढ़ाया। आने वाले समय में भी छात्र संगठन इसी तरह छात्र हित के मुद्दों पर कदम से कदम मिलाकर संघर्ष करते रहेंगे। कोई भी सरकार आए या जाए, अगर वह तानाशाही रवैया अपनाएगी और छात्रों, युवाओं की आवाज को दबाने की कोशिश करेगी तो हम लोकतांत्रिक तरीके से उसका विरोध करेंगे। लोकतंत्र की बात आती है तो मुझे अटल बिहारी वाजपेयी जी की वह बात याद आती है कि सरकारें आएंगी-जाएंगी, पार्टियां बनेंगी-बिगड़ेंगी, लेकिन देश रहना चाहिए और देश का लोकतंत्र रहना चाहिए। हम इसी लोकतंत्र को बचाने के लिए निकले हैं। हम पूरे देश के युवाओं और छात्रों से अपील करते हैं कि अगर भविष्य में दोबारा छात्रों के अधिकारों और लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश हुई तो हम एकजुट होकर उसका विरोध करेंगे। हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति या किसी एक सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि छात्रों के अधिकार, पारदर्शी व्यवस्था और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए है।” खुशबू कुमारी बोलीं-‘धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा कोई खुशी की बात नहीं बेगूसराय की छात्रा खुशबू ने कहा, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो गया है। इसमें खुश होने की क्या बात है? जो सामान्य तौर पर होना चाहिए था, वही हुआ है। लेकिन उस सामान्य कार्रवाई के लिए इतने सारे छात्र घायल हुए, उनका इतना खून बहा और कई छात्रों को जेल तक भेज दिया गया। ऐसे में खुशी मनाने की कोई वजह नहीं है। धर्मेंद्र प्रधान इस पूरे मामले में सिर्फ एक प्यादा हैं। असली जिम्मेदारी उन लोगों की है, जिन्होंने पूरी व्यवस्था को चलाया। पुलिस धर्मेंद्र प्रधान के अधीन नहीं आती। अगर छात्रों पर लाठीचार्ज हुआ, उन्हें पीटा गया और जेल में डाला गया तो इसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। अगर किसी व्यक्ति को नौकरी पर रखा गया है और वह अपना काम ठीक से नहीं करता है तो उसे हटाया जाता है। लेकिन उसे हटाने के लिए छात्रों को पीटा नहीं जाता, उन्हें घायल नहीं किया जाता और जेल में नहीं डाला जाता। इतने सारे छात्र घायल हुए, लेकिन जिन लोगों की इस पूरी व्यवस्था में मुख्य जिम्मेदारी थी, उनके खिलाफ अभी तक क्या कार्रवाई हुई? इसलिए सिर्फ धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को बड़ी जीत बताकर खुश होने का कोई मतलब नहीं है। यह एक सामान्य कार्रवाई थी, जो पहले ही हो जानी चाहिए थी। अब पढ़िए परिजनों का दर्द…. घर में सोते हुए बेटे को उठाकर ले गई पुलिस गिरफ्तार छात्र अंकित की मां रिंकू ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा, मेरा बेटा रात में घर पर सो रहा था। पुलिस आई और उसे नींद में ही उठाकर ले गई। इतना ही नहीं उसका मोबाइल फोन भी अपने साथ ले गई। जब मैंने उनसे पूछा कि कहां ले जा रहे हैं। इसपर उन्होंने कुछ जवाब नहीं दिया। अब मेरा बेटा जेल में बंद है। अंकित किसी बड़े अपराध में शामिल नहीं था। वह पढ़ाई के साथ-साथ परिवार की आर्थिक मदद के लिए अंडे की दुकान भी चलाता है। गरीब का बच्चा है, इसलिए प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के साथ ही काम भी करता है। उसका सपना है सरकारी नौकरी हासिल कर परिवार की स्थिति को सुधारना है, लेकिन पुलिस के इस एक्शन से मेरे बेटे पर गहरा असर पड़ेगा। रिंकू देवी ने आगे बताया, मेरा बेटा दुकान से कुछ सामान खरीदने बाजार गया था। इसी दौरान वहां पर कुछ बच्चों ने प्रोटेस्ट शुरू कर दिया। इसमें अंकित भी शामिल हो गया, क्योंकि वो भी एग्जाम की तैयारी करता है। उसे भी कई दिक्कतें होती थी। अगर वो इस प्रदर्शन में शामिल हो भी गया तो क्या पुलिस उसे इस तरह से उठाकर ले जाएगी। अगर उसने कोई गलती की थी तो थाने बुलाकर पूछताछ करती। घर में सो रहे बच्चे को छत के रास्ते से आकर उठाकर ले जाना और फिर मारपीट करना कहां का न्याय है? ‘मोबाइल रिचार्ज-सत्तू लेने निकला था बेटा, पुलिस ने पकड़ लिया’ गिरफ्तार छात्र प्रेम कुमार के पिता सुभाष पासवान ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है, मेरा बेटा किसी प्रदर्शन में शामिल होने नहीं गया था। वह मोबाइल रिचार्ज कराने और सत्तू लाने के लिए घर से निकला था। करीब 4 बजे घर वापस भी आ गया था। घर आने के बाद वह अपने काम में लगा हुआ था। देर शाम ड्यूटी के लिए निकल रहा था। उसी समय पुलिस हमारे घर आई और मेरे बेटे को अपने साथ ले गई। सुभाष पासवान का आरोप है कि, हम अपने बच्चे से मिलने के लिए थाना गए थे, लेकिन हमें मिलने नहीं दिया गया। वहां पुलिस सबको मार रही थी। हमें भी डर लगा, इसलिए हम वहां से भागकर आ गए। गार्जियन को भी बच्चे से मिलने नहीं दिया गया। प्रेम कुमार के पिता का कहना है कि, मेरा बच्चा पथराव में शामिल नहीं था। पुलिस के पास अगर कोई फुटेज है तो उसमें दिखा दे कि मेरे बेटे ने पथराव किया है। वह किसी हिंसा में शामिल नहीं था। हो सकता है कि मोबाइल रिचार्ज कराने और सत्तू लेने जाते समय वह प्रदर्शन वाली भीड़ के पास चला गया हो। भीड़ में अगर कोई छात्र खड़ा है तो सिर्फ इसी आधार पर उसे पकड़ लेना सही नहीं है। “मेरा बच्चा पढ़ता है। उसने बीए फाइनल किया है। अभी अपने भाई के साथ कंपनी में काम करता था। वह कोई अपराधी नहीं है। मेहनत करके अपना भविष्य बनाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में अगर उस पर केस हो गया या उसे जेल भेज दिया गया तो उसकी जिंदगी और भविष्य दोनों खराब हो सकती है। उपद्रवियों को चिन्हित कर कार्रवाई होगी पटना SSP कार्तिकेय शर्मा ने कहा, बंद के दौरान काफी उपद्रव हुआ है। उपद्रवियों की ओर से पत्थरबाजी की गई। सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया है। इस मामले में कई लोगों को डिटेन किया गया है और अन्य को चिन्हित कर रहे हैं। इसके बाद कार्रवाई की जाएगी। हमलोग अभी दूसरे इलाकों में भी गश्त कर रहे हैं। जहां जरूरत है वहां चेकिंग की जा रही है। कुछ जगहों पर उपद्रवियों की तरफ से पथराव हुआ है। पुलिस की गाड़ियों को भी नुकसान पहुंचा है और कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। कई जगहों पर पथराव की घटनाएं हुई हैं और इसमें कुछ लोग घायल भी हुए हैं। तेजस्वी यादव का ट्वीट वहीं, तेजस्वी यादव ने विदेश में बैठकर अपने X से ट्वीट कर लिखा, सीवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने छात्रों पर सीधी फायरिंग की। AK-47 से भी फायरिंग की गई। जब 7 हत्याओं का आरोपी अपराधी मुख्यमंत्री बन जाए तब लोकतंत्र में प्रदर्शन कर रहे निर्दोष छात्रों पर पुलिस ऐसे ही गोलियां चलाती है। दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो।



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