Wednesday, October 14, 2026
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CJP कार्यकर्ता सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे गिरफ्तार: रात 3 बजे संसद मार्ग पुलिस स्टेशन लाए गए; 3 दिन में दूसरी बार अरेस्ट हुए


नई दिल्ली6 मिनट पहले

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संसद मार्ग थाने में बैठे अजिंक्य, आशुतोष और सौरव दास की यह फोटो रत्ना ने अपने X हैंडल पर पोस्ट की है।

कॉकरोच जनता पार्टी के 3 सदस्यों को दिल्ली पुलिस गिरफ्तार कर लिया है। यह दावा CJP लीगल टीम की हेड रत्ना सिंह ने एक X पोस्ट में किया है। तीनों के खिलाफ BNS की धारा 329 के तहत मामला दर्ज किया है।

रत्ना ने लिखा है- दिल्ली पुलिस ने सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन से गिरफ्तार किया। उन पर अनाधिकृत प्रवेश, बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन और सरकारी काम में रुकावट डालने का आरोप है।

रत्ना के मुताबिक, तीनों को सुबह एससीएम कोर्ट में पेश किया जाएगा। जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भी भेजा जा सकता है। तीनों को 17 घंटे बाद जाफरपुर कलां पुलिस स्टेशन से संसद मार्ग पुलिस स्टेशन लाया गया था।

सौरव दास, अजिंक्य और आशुतोष रांका को मंगलवार को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था। इनके खिलाफ बिना इजाजत जंतर-मंतर में घुसने का मामला दर्ज किया गया है।

CJP के प्रवक्ता आशुतोष और सौरव दास को 3 दिन में दूसरी बार गिरफ्तार किया गया है। इससे पहले 10 अक्टूबर को तीनों एयरपोर्ट से ही अरेस्ट कर लिया गया था।

तस्वीर जाफरपुर कलां पुलिस स्टेशन से CJP कार्यकर्ताओं को बाहर लाने की हैं।

तस्वीर जाफरपुर कलां पुलिस स्टेशन से CJP कार्यकर्ताओं को बाहर लाने की हैं।

कॉकरोच जनता पार्टी और दिल्ली पुलिस की आंख-मिचौली : पिछले 4 दिन का हाल

10 अक्टूबर को 50 हजार के मुचलके पर छूटे थे CJP टॉप लीडर्स: सीजेपी ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर और SIR के विरोध में 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन बुलाया था।

सौरव दास और आशुतोष रांका, CJP फाउंडर अभिजीत दीपके को दिल्ली एयरपोर्ट पर फ्लाइट से ही पुलिस ने हिरासत में लिया था। तीनों को 11 अक्टूबर को दिल्ली कैंट की विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत में पेश किया गया था।

इसके बाद उन्हें 50-50 हजार रुपए के जमानती मुचलके पर रिहा कर दिया गया। रिहाई की शर्त के मुताबिक, तीनों को एक साल तक शांति बनाए रखनी थी, ऐसा कोई काम नहीं करना था, जिससे शांति भंग हो।

हिरासत से छूटने के बाद CJP नेताओं ने थंब्स अप का इशारा किया था।

हिरासत से छूटने के बाद CJP नेताओं ने थंब्स अप का इशारा किया था।

13 अक्टूबर को पुलिस ने जंतर-मंतर से हिरासत में लिया: CJP समर्थकों के साथ जंतर-मंतर पर पहुंचे और नारेबाजी कर रहे थे, जिसके बाद पुलिस ने सभी को पकड़ लिया। इन दोनों के खिलाफ बिना इजाजत जंतर-मंतर में घुसने का मामला दर्ज किया गया। जंतर-मंतर के पास बैरिकेडिंग है, सभी गेट बंद हैं। प्रदर्शनकारी गेट के ऊपर से चढ़कर पहुंचे।

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जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन बैन: सरकार ने 33 साल पहले इजाजत दी थी; अन्ना आंदोलन, पहलवानों का प्रदर्शन, कॉकरोच पार्टी का धरना यहीं हुए

दिल्ली के जंतर-मंतर पर अब प्रदर्शन नहीं हो सकेंगे। केंद्र सरकार ने इसे निर्धारित प्रदर्शन स्थल की लिस्ट से हटा दिया है। सरकार ने 33 साल पहले जंतर-मंतर को प्रदर्शन की जगह तय किया था। यहीं पर अन्ना आंदोलन, पहलवानों का प्रदर्शन, कॉकरोच पार्टी का धरना हुआ था। पढ़ें पूरी खबर…



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धर्म की आज़ादी यह नहीं की कोई जमीन मांग लें: हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की, कहा ऐसा नहीं ईसाई समुदाय कुछ भी मांगे – Prayagraj (Allahabad) News




धार्मिक आजादी को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खास आदेश जारी किया। हाईकोर्ट ने कहा कि धर्म की आज़ादी के अधिकार (जिसमें धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अंतिम संस्कार करने का अधिकार भी शामिल है) के तहत किसी समुदाय को कब्रिस्तान बनाने के लिए स्थानीय निकाय की ज़मीन के किसी खास टुकड़े पर दावा करने का अधिकार नहीं मिलता।
जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की बेंच ने ‘क्रिश्चियन कम्युनिटी वेलफेयर सोसाइटी’ की रिट याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।
सोसाइटी ने गाजियाबाद में बंजर ज़मीन के एक टुकड़े को ईसाई कब्रिस्तान में बदलने की अपनी अर्जी खारिज किए जाने को चुनौती दी थी। निकाय को दी थी कब्रिस्तान की जमीन कोर्ट ने कहा कि ग्राम सभा या स्थानीय निकाय को सौंपी गई ज़मीन को कब्रिस्तान के तौर पर इस्तेमाल के लिए सार्वजनिक उपयोग की ज़मीन में बदलना असल में एक प्रशासनिक फैसला है, जिसमें कई कारकों और परिस्थितियों पर विचार करना होता है। कोर्ट ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को ऐसी ज़मीन (जो सार्वजनिक उपयोग की नहीं है) को सार्वजनिक उपयोग की ज़मीन में बदलने की मांग करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है, जिसे अदालत में लागू करवाया जा सके। नागरिकों की व्यापक समस्या हो तो विचार होगा बेंच ने आगे कहा कि अगर वाकई जगह की कमी हो और उस इलाके में रहने वाले नागरिकों के व्यापक और विविध जनहित को ध्यान में रखते हुए अधिकारी ऐसी अर्जी पर विचार कर सकते हैं तो वह एक अलग बात होगी। मामले के अनुसार सोसाइटीज़ रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 के तहत रजिस्टर्ड याचिकाकर्ता सोसाइटी ने अपने अध्यक्ष विनय कुमार पॉल के ज़रिए हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था। गाजियाबाद का क्या है मामला जानिये यह विवाद गाजियाबाद ज़िले की मोदी नगर तहसील के जलालबाद परगना के विसोखर गांव में स्थित 0.3420 हेक्टेयर ज़मीन से सम्बंधित है। सरकारी रिकॉर्ड में यह ज़मीन बंजर (ऊसर) ज़मीन के तौर पर दर्ज थी। सोसाइटी का तर्क था कि आस-पास के इलाके में रहने वाले ईसाइयों को अंतिम संस्कार करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था, क्योंकि बेगमाबाद बुढ़ाना में मौजूद ईसाई कब्रिस्तान में जगह कम पड़ रही थी। यह बताया गया कि मोदी नगर की नगर पालिका परिषद के बोर्ड ने 22 जनवरी, 2018 को प्रस्ताव संख्या 11 पास किया, जिसमें ईसाई कब्रिस्तान के लिए ज़मीन आवंटित करने का प्रस्ताव था। यह प्रस्ताव ज़िला अधिकारियों को भेजा गया, लेकिन ज़मीन को प्रस्तावित मकसद के लिए बदला या आरक्षित नहीं किया गया। इसके बाद सोसाइटी ने अधिकारियों को कई बार अपनी बात रखी और सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत मामले से जुड़ी जानकारी हासिल की। इससे पहले भी उसने ईसाई समुदाय को ज़मीन का इस्तेमाल कब्रिस्तान के तौर पर करने की इजाज़त देने के निर्देश की मांग करते हुए जनहित याचिका के ज़रिए हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया।
हाईकोर्ट ने दिया था निर्देश हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद गाज़ियाबाद के अतिरिक्त ज़िला मजिस्ट्रेट (प्रशासन) ने इस साल जनवरी में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 77(2) के तहत अनुरोध खारिज किया। उस आदेश को चुनौती देते हुए सोसाइटी हाईकोर्ट पहुंची और तर्क दिया कि उपयुक्त ज़मीन आवंटित न करने से उसके सदस्यों के धर्म की आज़ादी के मौलिक अधिकार का उल्लंघन हुआ है, जिसका एक हिस्सा अंतिम संस्कार करना भी है। अफसरों ने कहा बंजर जमीन दूसरी ओर अधिकारियों का कहना था कि ज़मीन बंजर के तौर पर दर्ज थी और खाली पड़ी थी और पारंपरिक रूप से किसी भी समुदाय द्वारा इसका इस्तेमाल कब्रिस्तान के तौर पर नहीं किया जाता था। हालांकि, उप जिलाधिकारी की एक रिपोर्ट में स्थानीय निवासियों और समुदायों की अर्जियों का ज़िक्र किया गया, जिनमें यह आशंका जताई गई कि ईसाई समुदाय को ज़मीन आवंटित करने से भविष्य में सांप्रदायिक मतभेद पैदा हो सकते हैं। यह भी बताया गया कि पास में ही पहले से एक ईसाई कब्रिस्तान मौजूद है और उसका इस्तेमाल हो रहा है। इन हालात को देखते हुए ज़िला अधिकारियों ने यह निष्कर्ष निकाला कि उस चरण में विवादित ज़मीन को ईसाई कब्रिस्तान के लिए आवंटित करने का कोई औचित्य नहीं है। रेवेन्यू कोड, 2006 के प्रावधानों पर आदेश हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश रेवेन्यू कोड, 2006 के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए कहा कि गांव सभा या स्थानीय निकाय को सौंपी गई ज़मीन को सार्वजनिक उपयोग की ज़मीन में बदला जा सकता है, लेकिन यह असल में एक प्रशासनिक फ़ैसला है जिसमें कई तरह की स्थितियों और कारकों पर विचार किया जाता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी भी व्यक्ति को ऐसा कोई कानूनी अधिकार नहीं है, जिसके तहत वह गांव सभा या स्थानीय निकाय के पास मौजूद ज़मीन के किसी खास हिस्से को कब्रिस्तान के लिए सार्वजनिक उपयोग की ज़मीन में बदलने की मांग कर सके।
धार्मिक स्वतंत्रता के बारे में सोसाइटी की दलील पर बेंच ने माना कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अंतिम संस्कार करने का अधिकार धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का हिस्सा हो सकता है। हालांकि, कोर्ट ने साफ़ किया कि इस अधिकार का दावा इस तरह से नहीं किया जा सकता कि सोसाइटी या ईसाई समुदाय के सदस्य स्थानीय निकाय के पास मौजूद ज़मीन के किसी खास हिस्से को ईसाई कब्रिस्तान के लिए आरक्षित करने की ज़िद कर सकें। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी कोर्ट ने कहा “यह सच है कि याचिकाकर्ता यह कह सकता है कि अपने धर्म के नियमों के अनुसार अंतिम संस्कार करने का अधिकार उनके धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का हिस्सा है, लेकिन इस अधिकार का दावा इस तरह से नहीं किया जा सकता कि याचिकाकर्ता या ईसाई समुदाय के सदस्य स्थानीय निकाय के पास मौजूद ज़मीन के किसी खास हिस्से को ईसाई कब्रिस्तान बनाने के मकसद से आरक्षित करने की मांग कर सकें।” हाईकोर्ट ने उस खास ज़मीन के लिए की गई मांग खारिज करने वाला आदेश रद्द करने का कोई कानूनी आधार न मिलने पर याचिका खारिज कर दिया।



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जीएसटी खाते में सेंध लगाकर फर्जी बिल अपलोड: कारोबारी के GST खाते से 8.09 करोड़ के 989 फर्जी बिल अपलोड, 1.46 करोड़ की टैक्स चोरी की कोशिश – Bhopal News




भोपाल के एक कारोबारी के जीएसटी खाते में सेंध लगाकर फर्जी इनवॉइस अपलोड करने का मामला सामने आया है। खाते में 8 करोड़ 9 लाख 81 हजार 305 रुपए के 989 फर्जी बिल दर्ज किए गए। इनके जरिए करीब 1.46 करोड़ रुपए की जीएसटी चोरी की कोशिश की गई। मामले में आर्थिक अपराध प्रकोष्ठ (ईओडब्ल्यू) ने दिल्ली निवासी बसंत कुमार श्रीवास्तव और अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी व आईटी एक्ट के तहत एफआईआर दर्ज की है। खास बात यह है कि कारोबारी का कहना है कि उसने अपना ओटीपी या पासवर्ड किसी को नहीं दिया था, इसके बावजूद खाते में बदलाव कर फर्जी बिल अपलोड कर दिए गए। लॉगिन किया तो पहले से फाइल मिला फरवरी का रिटर्न पीड़ित कारोबारी ने 27 फरवरी 2026 को जीएसटी ग्रीवेंस पोर्टल पर खाते के दुरुपयोग की शिकायत दर्ज कराई थी। इसके बाद भोपाल स्थित जीएसटी कार्यालय से अपनी लॉगिन आईडी और पासवर्ड अपडेट करवाए। जब दोबारा खाते में लॉगिन किया, तो पता चला कि फरवरी 2026 का जीएसटीआर-1 पहले ही दाखिल किया जा चुका है। रिटर्न की जांच करने पर भोपाल और राजगढ़ की सात फर्मों के नाम पर 989 फर्जी इनवॉइस अपलोड मिले। इन बिलों की कुल कीमत 8.09 करोड़ रुपए से अधिक बताई गई है। व्यापारी को नोटिस, लेकिन ITC का दावा नहीं फर्जी बिलों के सामने आने के बाद विभाग ने कारोबारी को नोटिस जारी किया है। हालांकि, कारोबारी पहले ही जीएसटी पोर्टल पर शिकायत दर्ज करा चुका था। उपलब्ध जानकारी के मुताबिक, इन सात फर्मों ने अब तक इन बिलों के आधार पर इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) नहीं लिया है। ऐसे में मामला फर्जी बिल अपलोड कर संभावित टैक्स चोरी की कोशिश से जुड़ा है। ऐसे जांचें अपना जीएसटी खाता कारोबारियों को समय-समय पर अपने जीएसटी खाते की जानकारी जांचते रहना चाहिए। लॉगिन के बाद ‘My Profile/Authorized Signatory’ सेक्शन में पंजीकृत मोबाइल नंबर और ईमेल आईडी की जांच की जा सकती है। वहीं, ‘Services’ में जाकर ‘Returns’ और ‘Return Dashboard’ के जरिए दाखिल जीएसटीआर-1 खोलें। इसके B2B सेक्शन में अपलोड किए गए इनवॉइस देखे जा सकते हैं। यदि खाते में अनजान मोबाइल नंबर, ईमेल या ऐसे बिल दिखाई दें जिन्हें कारोबारी ने अपलोड नहीं किया है, तो इसकी शिकायत तुरंत जीएसटी विभाग के पोर्टल पर दर्ज करानी चाहिए।



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बेटी से मिलने की तड़प में बेचैन मुस्कान, खाना-पीना छोड़ा: दोषी करार होने के बाद पूजा-पाठ से भी हुआ मोहभंग,बुधवार को अदालत सुनाएगी सजा – Meerut News




मेरठ के सौरभ राजपूत हत्याकांड में दोषी करार दी गई मुस्कान रस्तौगी इन दिनों अपनी बड़ी बेटी से मिलने के लिए बेचैन है। सजा सुनाए जाने के बाद लखनऊ नारी निकेतन में शिफ्ट किए जाने की आशंका ने उसकी बेचैनी और बढ़ा दी है। वह जेल अधिकारियों से बेटी से मिलने की गुहार लगा रही है। उधर, दोषी करार दिए जाने के बाद साहिल शुक्ला भी गुमसुम है। दोनों के व्यवहार में आए बदलाव को देखते हुए जेल प्रशासन उनकी गतिविधियों पर नजर रख रहा है। मुस्कान पर निगरानी के लिए अतिरिक्त ड्यूटी भी लगाई गई है। बुधवार को जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत दोनों को सजा सुनाएगी। बेटी से मिलने की चाह, दिनभर बेचैन रही मुस्कान
मुस्कान की बड़ी बेटी फिलहाल अपने नाना-नानी के पास रह रही है। बेटी से दूरी और सजा के बाद दूसरी जगह भेजे जाने की आशंका उसे परेशान कर रही है। जेल सूत्रों के मुताबिक, मुस्कान ने खाना-पीना भी कम कर दिया है। मंगलवार को वह दिनभर बेचैन दिखाई दी। उसने किसी से बातचीत नहीं की और बेटी को गोद में लेकर एक तरफ बैठी रही। बताया जाता है कि पहले मुस्कान जेल में पूजा-पाठ भी करती थी लेकिन दोषी करार दिए जाने के बाद से उसका पूजा-पाठ में भी मन नहीं लग रहा है। अफसरों से लगा रही मदद की गुहार
मुस्कान को आशंका है कि सजा के बाद उसे लखनऊ नारी निकेतन में शिफ्ट किया जा सकता है। इसी वजह से वह अधिकारियों से बेटी से मिलने की गुहार लगा रही है। हालांकि उसे शिफ्ट किए जाने को लेकर अंतिम स्थिति सजा और संबंधित नियमों के अनुसार ही स्पष्ट होगी। अफसरों का कहना है कि जेल में मुस्कान के किसी परिजन अथवा रिश्तेदार का कोई पता अथवा नंबर नहीं है। मुस्कान खुद पत्र लिख सकती है, जिसकी व्यवस्था करा दी जाएगी। साहिल भी गुमसुम, परिजन मिलने नहीं पहुंचे
मुस्कान की तरह साहिल शुक्ला के व्यवहार में भी बदलाव आया है। दोषी करार दिए जाने के बाद से वह गुमसुम रहने लगा है और उसने भी खाना-पीना कम कर दिया है। पहले उसकी नानी या भाई उससे मिलने जेल आया करते थे लेकिन दोषी करार दिए जाने के बाद अब तक परिवार का कोई सदस्य उससे मुलाकात करने नहीं पहुंचा है। जेल प्रशासन दोनों की गतिविधियों पर लगातार नजर रख रहा है। दोनों की मानसिक स्थिति और दिनचर्या पर निगरानी के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरती जा रही है। 573 दिन से जेल में बंद हैं दोनों
सौरभ राजपूत हत्याकांड में मुस्कान रस्तौगी और साहिल शुक्ला को 19 मार्च, 2025 को जेल भेजा गया था। मंगलवार तक दोनों को जेल में 573 दिन हो चुके थे। मुकदमे की सुनवाई करीब 13 महीने चली और इस दौरान कुल 126 तारीखें लगीं। अभियोजन पक्ष ने अदालत में 22 गवाह पेश किए। इन्हीं गवाहों और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर अदालत ने 30 सितंबर को दोनों को हत्या का दोषी करार दिया। अब बुधवार को जिला जज अरविंद कुमार मिश्रा की अदालत में सजा पर फैसला होना है। फैसले को लेकर दोनों की बेचैनी बढ़ी हुई है। दोषसिद्धि के बाद अब उनकी निगाहें अदालत के फैसले पर टिकी हैं। सजा के बाद बदल सकती है जेल
जेल मैनुअल के प्रावधानों के अनुसार, निर्धारित अवधि की सजा होने पर कैदियों को दूसरी जेल में स्थानांतरित किया जा सकता है। जेल से जुड़े नियमों के मुताबिक, साहिल शुक्ला को सात साल या उससे अधिक की सजा होने पर सेंट्रल जेल आगरा स्थानांतरित किए जाने की संभावना है। वहीं, मुस्कान को लखनऊ नारी निकेतन भेजे जाने की आशंका ने उसकी चिंता बढ़ा दी है। हालांकि दोनों को कहां रखा जाएगा, इस पर अंतिम निर्णय संबंधित जेल प्रशासन और लागू नियमों के तहत होगा। बुधवार का दिन इस चर्चित हत्याकांड में अहम होगा। अदालत के फैसले से जहां दोनों की सजा तय होगी, वहीं यह भी स्पष्ट होने की दिशा में कदम बढ़ेगा कि आगे उन्हें किस जेल में रखा जाएगा। मुस्कान के लिए फिलहाल सबसे बड़ी चिंता अपनी बेटी से मिलने की है।



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जयपुर में दादूवाणीजी की शोभायात्रा-कलश यात्रा निकाली: महाआरती और संतों ने दिए प्रवचन; सामाजिक समरसता और भाईचारे का दिया संदेश – Jaipur News




जयपुर में नवरात्र पर ग्राम सवाई गेटोर स्थित श्री दादूदयाल मंदिर से चक गेटोर प्रताप नगर तक श्रीमद् दादूवाणी जी की शोभायात्रा और कलश यात्रा निकाली गई। स्वामी ओमप्रकाश दास महाराज के सान्निध्य में आयोजित कार्यक्रम में सर्व समाज के श्रद्धालु मौजूद रहे। इस अवसर पर महाआरती, संत प्रवचन व पंगत महाप्रसादी का आयोजन हुआ। कार्यक्रम में वार्ड 53 के पार्षद सतीश जयपुरिया सहित लालाराम मीणा, रामप्रसाद खारडा, हंसराज मीणा ने संतों का आशीर्वाद प्राप्त किया। इस धार्मिक आयोजन ने क्षेत्र में धार्मिक आस्था, सामाजिक समरसता और भाईचारे का संदेश दिया।



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पटना में STF इंस्पेक्टर पर हेलमेट से हमला, सिर फटा: हिरासत में बीजेपी नेता, कार ने इंस्पेक्टर की बाइक को मारी थी टक्कर; विवाद के बाद हमला – Patna News




पटना के कोतवाली थाना क्षेत्र में ट्रैफिक पोस्ट के पास मंगलवार को कार और बाइक की टक्कर के बाद विवाद हो गया। आरोप है कि कार सवार ने बाइक सवार को हेलमेट से मार दिया। इस घटना में बाइक सवार का सिर फट गया। घायल की पहचान एसटीएफ इंस्पेक्टर अमित कुमार के रूप में हुई है। वह फिलहाल एसटीएफ में प्रशिक्षण से जुड़ी जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। जानकारी के अनुसार, अमित कुमार एसटीएफ कार्यालय से मुख्यालय जा रहे थे। इसी दौरान कोतवाली इलाके में एक कार ने उनकी बाइक में पीछे से टक्कर मार दी। टक्कर लगने के बाद वह बीच सड़क पर लड़खड़ाकर गिर गए। इसके बाद कार सवार और बाइक सवार के बीच विवाद शुरू हो गया। विवाद में कार सवार ने हेलमेट से मारा आरोप है कि विवाद के दौरान कार सवार ने हेलमेट से अमित कुमार के सिर पर वार कर दिया। इससे उनके सिर में गंभीर चोट लगी। घटना के बाद मौके पर लोगों की भीड़ जुट गई। इस मामले में आरोपी की पहचान बीजेपी नेता ज्योति शेखर सिंह के रूप में हुई है। पीड़ित पक्ष की शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लिया है। पुलिस पूरे मामले की जांच कर रही है। घटना के दौरान क्या हुआ और विवाद किस वजह से बढ़ा, इसकी जानकारी जुटाई जा रही है। पुलिस दोनों पक्षों से पूछताछ कर मामले में आगे की कार्रवाई कर रही है।



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मंदसौर में कल 4 घंटे बिजली कटौती: मदारपुरा, नरसिंहपुरा समेत कई इलाकों में प्रभावित होगी सप्लाई – Mandsaur News




मंदसौर शहर में कल (बुधवार) चार घंटे बिजली सप्लाई बंद रहेगी। यह शटडाउन विद्युत लाइनों के मानसून मेंटेनेंस के कारण होगा। बिजली कंपनी के मुताबिक, रामघाट फीडर पर सुबह 8 बजे से दोपहर 12 बजे तक बिजली बंद रहेगी। रामघाट उपकेंद्र से जुड़े कई इलाकों में बिजली का असर पड़ेगा। इनमें जीवागंज, नरसिंहपुर, नयागांव, मदारपुरा, सर्किट हाउस और शाकिर चक्की के आसपास के क्षेत्र शामिल हैं। इस शटडाउन से करीब 3885 उपभोक्ता प्रभावित होंगे। बिजली विभाग ने लोगों से अपील की है कि वे अपने जरूरी काम बिजली बंद होने से पहले ही निपटा लें। कंपनी ने बताया कि मेंटेनेंस का काम जल्दी पूरा होने पर बिजली सप्लाई तय समय से पहले भी शुरू हो सकती है। कंपनी ने नागरिकों को हुई असुविधा के लिए खेद जताया है।



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होम लोन-कार लोन हुआ महंगा, EMI बढ़ाएं या टेन्योर? जानिए किसमें बचेंगे पैसे


नई दिल्‍ली. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट बढ़ाकर 5.50% कर दिया है. केंद्रीय बैंक के ब्‍याज दर बढाने के बाद एचडीएफसी बैक, पंजाब नेशनल बैंक (PNB), बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) और इंडियन बैंक ने अपनी लेंडिंग रेट्स में इजाफा कर दिया है. करीब चार साल बाद इंटरेस्‍ट रेट बढ़ने से होम लोन और कार लोन महंगा हो गया है. जिन ग्राहकों का लोन रेपो रेट बेंचमार्क से जुड़ा है, उनके सामने अब यह उलझन है कि वे अपना बजट ठीक रखने के लिए लोन की ईएमआई बढ़ाए या लोन चुकाने की अवधि (Tenure). अगर आप भी इसी ऊहापोह में है तो आइये जानते हैं कि आपके लिए कौन सा रास्‍ता ठीक रहेगा.

ब्‍याज दर में इजाफा होने पर ईएमआई या टेन्‍योर बढ़ाने का फैसला कुछ बातों पर निर्भर करता है. एक व्‍यक्ति के लिए ईएमआई बढ़ाना सही साबित हो सकता है. वहीं, दूसरे के लिए टेन्‍योर बढ़ाना. जिन लोगों की आय नियमित है. इमरजेंसी के लिए पर्याप्त बचत है और अपने फाइनेंशियल गोल्‍स को पूरा करने के लिए कमाई ठीकठाक हो रही है तो वे ब्याज बचाने को EMI बढ़ाने या प्रीपेमेंट का विकल्‍प चुन सकते हैं. वहीं, जिन लोगों के पास हर महीने खर्च के लिए सीमित पैसा बचता है, वे मासिक बोझ कम रखने के लिए लोन की अवधि बढ़ाने का विकल्प चुन सकते हैं.

कहां कितना बचेगा, कितना ज्‍यादा लगेगा पैसा

मान लीजिए आपने 8.5% की दर पर 20 साल के लिए ₹50 लाख का होम लोन ले रखा है, जिसकी सामान्य EMI ₹43,391 बनती है. जब बैंक ब्याज दर को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 8.75% कर देता है, तो आपके सामने दो रास्ते होते हैं. पहले विकल्प में अगर आप 20 साल की अवधि बरकरार रखते हैं, तो आपकी EMI ₹43,391 से बढ़कर ₹44,186 हो जाएगी, यानी हर महीने केवल ₹795 का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और कुल ब्याज ₹56.04 लाख बनेगा.

वहीं दूसरे विकल्प में यदि आप अपनी EMI को ₹43,391 पर ही स्थिर रखते हैं, तो बैंक आपकी लोन अवधि को करीब 13 महीने बढ़ा देगा, जिससे आपका कुल ब्याज ₹54.1 लाख से बढ़कर सीधे ₹59.5 लाख पर पहुंच जाएगा. इसका मतलब यह है कि EMI स्थिर रखने के चक्कर में आपको करीब ₹5.4 लाख का अतिरिक्त ब्याज बैंक को चुकाना पड़ेगा.

टेन्योर बढ़ाना क्यों है ‘धीमा जहर’

कर्ज लेने वाले कई लोग महीने के बजट में ₹800 से ₹1,000 बचाने के चक्कर में बैंक से लोन की अवधि बढ़ाने की गुजारिश करते हैं. लेकिन यह महंगा सौदा साबित होता है. जब लोन की मूल बकाया रकम (Principal Balance) ज्यादा होती है, तो अवधि लंबी होने से ब्याज पर ब्याज जुड़ता चला जाता है. जैसे अगर ₹50 लाख के 20 साल वाले लोन की अवधि बढ़ाकर 25 साल कर दी जाए, तो EMI घटकर लगभग ₹40,261 जरूर दिखती है. लेकिन भविष्य में कुल ब्याज भुगतान करीब ₹16.6 लाख तक बढ़ जाता है.

10% EMI बढ़ाकर बचाए जा सकते हैं ₹12.5 लाख

यदि आपकी आय नियमित और स्थिर है तो दरों में बढ़ोतरी के समय थोड़ा आक्रामक रुख अपनाना सबसे समझदारी भरा कदम है. पैसाबाजार के अनुसार, यदि ₹50 लाख के 20 साल वाले लोन पर आप अपनी EMI में सिर्फ 10% की वृद्धि करके इसे लगभग ₹47,730 कर देते हैं, तो आपका लोन 20 साल के बजाय महज 16 साल में खत्म हो जाएगा. इससे आपको ₹12.5 लाख ब्‍याज के रूप में कम देने होंगे.

इन 4 बातों का रखें ध्यान

  • मासिक बजट और इमरजेंसी फंड को परखना सबसे जरूरी है. अगर हर महीने ₹1,000 से ₹2,000 अतिरिक्त EMI देने से आपके बुनियादी खर्चे और आपातकालीन फंड प्रभावित नहीं होते, तो हमेशा EMI बढ़ाने का ही विकल्प चुनें.
  • यदि आप 45–50 वर्ष की आयु में हैं और रिटायरमेंट के करीब हैं, तो टेन्योर कभी न बढ़ाएं क्योंकि आमदनी कम होने पर EMI चुकाना भारी पड़ सकता है.
  • यदि नियमित EMI बढ़ाना संभव न हो, तो सालाना बोनस या इंसेंटिव से मूलधन का 5% से 10% हिस्सा प्री-पेमेंट कर दें, जिससे लोन अवधि अपने आप घट जाएगी.



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देव छठ मेला की तैयारियों का डीएम-एसपी ने लिया जायजा: सुरक्षा, सुविधा पर विशेष जोर; सूर्यकुंड, रुद्रकुंड और सूर्य मंदिर परिसर की व्यवस्थाओं की समीक्षा – Aurangabad (Bihar) News


देव कार्तिक छठ मेला-2026 के सफल, सुरक्षित और सुव्यवस्थित आयोजन को लेकर जिला प्रशासन ने तैयारियां तेज कर दी हैं। मंगलवार को जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा और पुलिस अधीक्षक उपेंद्रनाथ वर्मा ने संयुक्त रूप से देव मेला क्षेत्र का स्थलीय निरीक्षण किया। इस द

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निरीक्षण के क्रम में जिला पदाधिकारी ने देव सूर्यकुंड और रुद्रकुंड छठ घाट, देव सूर्य मंदिर परिसर, मेला क्षेत्र के विभिन्न आवासन स्थलों, पेयजल आपूर्ति, विद्युत एवं प्रकाश व्यवस्था, स्वच्छता, यातायात और पार्किंग स्थलों की स्थिति की समीक्षा की। इसके साथ ही संभावित ड्रॉप गेट, बैरिकेडिंग और मेला क्षेत्र के विभिन्न मार्गों का भी निरीक्षण किया गया।

श्रद्धालुओं की संभावित भीड़ को ध्यान में रखते हुए सभी आवश्यक सुविधाओं का आकलन किया गया। जिला पदाधिकारी ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि निर्धारित समय सीमा के भीतर सभी तैयारियां पूरी कर ली जाएं। उन्होंने कहा कि छठ महापर्व के दौरान देव पहुंचने वाले श्रद्धालुओं को सुरक्षित और व्यवस्थित वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की प्राथमिकता है।

सुरक्षा और विधि व्यवस्था को लेकर आवश्यक इंतजाम किए जाने का निर्देश

आवासन, पेयजल और चिकित्सा सुविधा पर रहेगा विशेष ध्यान

देव कार्तिक छठ मेला में श्रद्धालुओं की सुविधा को ध्यान में रखते हुए आवासन स्थलों पर आवश्यक इंतजाम करने का निर्देश दिया गया है। जिला पदाधिकारी ने कहा कि सभी आवासन स्थलों पर स्वच्छता, पेयजल, पर्याप्त प्रकाश और अस्थायी शौचालय सहित अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं। घाटों और मंदिर परिसर में भीड़ प्रबंधन तथा श्रद्धालुओं के सुरक्षित आवागमन के लिए भी समय रहते व्यवस्था पूरी की जाए।

यातायात और पार्किंग व्यवस्था की समीक्षा के दौरान अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि मेला क्षेत्र में वाहनों का परिचालन सुचारू रखने के लिए उपयुक्त स्थानों पर ड्रॉप गेट और बैरिकेडिंग की व्यवस्था की जाए। पार्किंग स्थलों को व्यवस्थित रखा जाए, ताकि श्रद्धालुओं को आवागमन में परेशानी नहीं हो।

इसके अलावा आपातकालीन चिकित्सा सेवाओं और चिकित्सीय सहायता की उपलब्धता सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया गया। जिला पदाधिकारी ने संबंधित विभागों को निर्देश दिया कि मेला अवधि में किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए आवश्यक संसाधन और सेवाएं तैयार रखें। उन्होंने सभी अधिकारियों से आपसी समन्वय के साथ काम करने और तैयारियों की नियमित समीक्षा करने को कहा।

पूजा पंडाल का भी डीएम एसपी ने किया निरीक्षण

पूजा पंडाल का भी डीएम एसपी ने किया निरीक्षण

पूजा पंडाल और रानी तालाब विसर्जन स्थल का निरीक्षण

छठ मेला क्षेत्र के निरीक्षण के बाद जिला पदाधिकारी अभिलाषा शर्मा और पुलिस अधीक्षक उपेंद्रनाथ वर्मा ने देव स्थित पूजा पंडाल का भी संयुक्त निरीक्षण किया। इस दौरान पंडाल और उसके आसपास साफ-सफाई, सुरक्षा व्यवस्था तथा श्रद्धालुओं की सुविधा से संबंधित तैयारियों का जायजा लिया गया।

जिला पदाधिकारी ने संबंधित पदाधिकारियों को पूजा पंडाल के आसपास नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित करने का निर्देश दिया। उन्होंने कहा कि श्रद्धालुओं की सुरक्षा सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। पूजा के दौरान किसी प्रकार की असुविधा या अप्रिय घटना की आशंका को कम करने के लिए आवश्यक सुरक्षा प्रबंध मजबूत रखे जाएं।

इसके बाद अधिकारियों ने रानी तालाब स्थित प्रतिमा विसर्जन स्थल का निरीक्षण किया। यहां विसर्जन की तैयारियों और सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा की गई। जिला पदाधिकारी ने निर्देश दिया कि विसर्जन स्थल पर पानी की गहराई का समुचित आकलन और मापी कराई जाए। जल की स्थिति के अनुसार आवश्यक सुरक्षा इंतजाम किए जाएं।

विशेष रूप से बच्चों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए अतिरिक्त सतर्कता बरतने और घाट पर निगरानी की समुचित व्यवस्था करने का निर्देश दिया गया। प्रशासन ने पूजा और प्रतिमा विसर्जन के दौरान स्वच्छता, सुरक्षा तथा विधि-व्यवस्था बनाए रखने के लिए सभी तैयारियां समय पर पूरी करने को कहा।

डीएम-एसपी ने अधिकारियों को सौंपी जिम्मेदारी, श्रद्धालुओं की सुविधा प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता

जिला पदाधिकारी ने निर्देश दिया कि देव कार्तिक छठ मेला सहित पूजा और प्रतिमा विसर्जन के दौरान संबंधित विभाग पूरी तत्परता से अपने दायित्वों का निर्वहन करें। सभी व्यवस्थाओं की नियमित निगरानी की जाए, ताकि श्रद्धालुओं को दर्शन, आवागमन और आवासन के दौरान किसी प्रकार की परेशानी का सामना न करना पड़े।

उन्होंने कहा कि देव कार्तिक छठ मेला बिहार के प्रमुख धार्मिक आयोजनों में शामिल है। प्रत्येक वर्ष लाखों श्रद्धालु यहां आस्था और श्रद्धा के साथ पहुंचते हैं। ऐसे में सुरक्षित, स्वच्छ और व्यवस्थित वातावरण उपलब्ध कराना प्रशासन की सर्वोच्च प्राथमिकता है।



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श्यामा मुखर्जी की 125वीं जयंती पर डीयू में राष्ट्रीय संगोष्ठी: विधानसभा अध्यक्ष बोले- 2019 से पहले और बाद के कश्मीर में बदलाव का अध्ययन जरूरी – New Delhi News




दिल्ली विधानसभा अध्यक्ष विजेंद्र गुप्ता ने कहा कि वर्ष 2019 से पहले और उसके बाद के कश्मीर में आए बदलावों का व्यापक अध्ययन होना चाहिए। तथ्यों के आधार पर दोनों स्थितियों की तुलना की जानी चाहिए, ताकि लोग बदलावों और उनके महत्व को समझ सकें। वह दिल्ली विश्वविद्यालय के श्यामा प्रसाद मुखर्जी महिला महाविद्यालय में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की 125वीं जयंती के उपलक्ष्य में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी के उद्घाटन सत्र को संबोधित कर रहे थे। मुख्य अतिथि विजेंद्र गुप्ता ने डॉ. मुखर्जी के राष्ट्रीय एकता और अखंडता के लिए किए गए संघर्ष को याद किया। उन्होंने कहा कि 2019 में अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निष्प्रभावी करना उस संकल्प की पूर्ति थी, जिसके लिए डॉ. मुखर्जी ने 1952-53 में राजनीतिक आंदोलन किया था। बौद्धिक विरासत और विकसित भारत पर मंथन साहित्य अकादमी और कॉलेज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित सम्मेलन का विषय बौद्धिक विरासत, राष्ट्रीय दृष्टि और विकसित भारत की ओर यात्रा रखा गया है। इसमें डॉ. मुखर्जी के राजनीतिक विचारों, बौद्धिक योगदान और वर्तमान राष्ट्रीय आकांक्षाओं पर चर्चा की जा रही है। कार्यक्रम में संस्कृति मंत्रालय के सचिव प्रो. केजी सुरेश, डीयू के कॉलेजों के डीन प्रो. बलराम पानी और इंडियन हैबिटेट सेंटर के निदेशक डॉ. वरुण गुलाटी मौजूद रहे। इस दौरान विजेंद्र गुप्ता ने द कलेक्टेड स्पीचेज ऑफ द बंगाल टाइगर आशुतोष मुखर्जी पुस्तक की प्रति भेंट कर ऐतिहासिक और शैक्षणिक विरासत के संरक्षण पर जोर दिया।



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