रिटायरमेंट के लिए नेशनल पेंशन सिस्टम (NPS) में निवेश करने वालों के लिए अच्छी खबर है. अब NPS में निवेश करते समय अलग-अलग पेंशन फंड की स्कीमों को समझना और उनका करना पहले से आसान हो जाएगा. पेंशन फंड नियामक और विकास प्राधिकरण (PFRDA) ने NPS की स्कीमों के नाम और उन्हें ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर दिखाने के तरीके में बदलाव किया है. इससे निवेशकों को एक ही जगह पर ज्यादा ऑप्शन देना है, ताकि वे अपनी जरूरत और रिस्क उठाने की कैपेसिटी के हिसाब से सही स्कीम चुन सकें.
अभी तक कई ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर निवेशकों को सीमित पेंशन फंड की स्कीम्स ही दिखाई देती थीं. ऐसे में दूसरे फंड की स्कीमों से उनकी तुलना करना मुश्किल हो जाता था. PFRDA ने 2 नवंबर 2026 को जारी सर्कुलर में इस व्यवस्था को बदलने के निर्देश दिए हैं. नए नियमों के तहत प्लेटफॉर्म को चुनी गई कैटेगरी में सभी पेंशन फंड की स्कीमें दिखानी होंगी. सभी संस्थानों को 1 दिसंबर 2026 तक इन बदलावों को लागू करना होगा.
NPS स्कीम्स के नाम में क्या बदलाव होगा?
PFRDA ने मल्टीपल स्कीम फ्रेमवर्क (MSF) के तहत आने वाली स्कीमों के नाम रखने का तरीका भी तय किया है. अब हर स्कीम के नाम में तीन फैक्टर्स शामिल होंगे. सबसे पहले पेंशन फंड के नाम का छोटा रूप होगा. इसके बाद NPS लिखा जाएगा और आखिर में उस स्कीम का अलग नाम होगा.
उदाहरण के लिए, किसी पेंशन फंड की स्कीम का नाम ‘XYZ NPS Retirement Scheme’ हो सकता है. इससे निवेशकों को नाम देखकर ही यह समझने में मदद मिलेगी कि स्कीम किस पेंशन फंड की है और उसका नाम क्या है. टियर-2 की स्कीमों के नाम के आखिर में ‘Tier II’ लिखना जरूरी होगा. वहीं, टियर-1 को डिफॉल्ट ऑप्शन माना गया है, इसलिए उसके नाम में अलग से टियर-1 लिखने की जरूरत नहीं होगी. इसके अलावा, स्कीम के नाम में A से E तक के कैटेगरी कोड भी शामिल नहीं किए जाएंगे. अगर कोई पेंशन फंड एक ही कैटेगरी में कई स्कीमें चलाता है, तो उन सभी के नाम अलग-अलग होने चाहिए.
अब सभी पेंशन फंड की स्कीमें दिखाना होगा जरूरी
नए नियमों का सबसे बड़ा बदलाव ऑनलाइन प्लेटफॉर्म पर स्कीमों की जानकारी दिखाने से जुड़ा है. PFRDA के मुताबिक, अगर कोई पॉइंट ऑफ प्रेजेंस (PoP) अपना ऑनलाइन प्लेटफॉर्म चलाता है, तो उसे निवेशक की चुनी हुई कैटेगरी में सभी पेंशन फंड की स्कीमें दिखानी होंगी.
उदाहरण के लिए, अगर कोई निवेशक NPS में निवेश करते समय किसी खास कैटेगरी को चुनता है, तो उसे उस कैटेगरी के तहत उपलब्ध सभी पेंशन फंड की स्कीमें दिखाई जानी चाहिए. इससे वह अलग-अलग फंड के ऑप्शन एक ही जगह देखकर उनकी तुलना कर सकेगा. अभी कई प्लेटफॉर्म पर निवेशकों को सीमित ऑप्शन मिलते थे. ऐसे में वे दूसरे पेंशन फंड की स्कीमों के बारे में आसानी से जानकारी नहीं जुटा पाते थे. नए नियम इस परेशानी को कम करेंगे.
क्या PoP अपनी पसंद की स्कीम पहले दिखा सकता है?
PFRDA ने प्लेटफॉर्म को पूरी तरह से अपनी पसंद के ऑप्शन दिखाने से नहीं रोका है. कोई PoP किसी खास पेंशन फंड की स्कीम को लिस्ट में सबसे ऊपर रख सकता है. वह किसी स्कीम को पहले से चुने हुए विकल्प के तौर पर भी दिखा सकता है. हालांकि, ऐसा करने के बावजूद उसे बाकी पेंशन फंड की स्कीमें भी दिखानी होंगी. यानी निवेशक को दूसरे विकल्पों से वंचित नहीं रखा जा सकेगा.
इस नियम में एक खास छूट भी दी गई है. अगर कोई निवेशक अपनी मर्जी से किसी पेंशन फंड की वेबसाइट या ऐप पर जाता है और वहीं से खाता खोलने का प्रोसेस पूरा करता है, तो उस प्लेटफॉर्म पर सिर्फ उसी पेंशन फंड की स्कीमें दिखाई जा सकती हैं.
NPS निवेशकों को कैसे होगा फायदा?
इन बदलावों से NPS में निवेश करने वालों को ज्यादा ऑप्शन और बेहतर जानकारी मिलेगी. वे अलग-अलग पेंशन फंड की स्कीमों को एक ही प्लेटफॉर्म पर देखकर अपनी जरूरत के हिसाब से फैसला कर सकेंगे. इससे किसी एक फंड की स्कीम चुनने का दबाव भी कम होगा.
PFRDA ने NPS सेंट्रल और सेंट्रल रिकॉर्डकीपिंग एजेंसी (CRA) के प्लेटफॉर्म के लिए भी यही व्यवस्था लागू की है. इन प्लेटफॉर्म पर भी निवेशक की चुनी हुई कैटेगरी के सभी पेंशन फंड की स्कीमें दिखानी होंगी. इन नियमों का मकसद NPS में निवेश की प्रोसेस को ट्रांसपरेंट बनाना है.

