Sunday, September 27, 2026
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प्रेमी युगल से मारपीट-लूट मामले में पुलिसिंग पर सवाल: 7 दिन तक पुलिस से दूर रही घटना, शासन ने पूछा- बीट पुलिस और मुखबिर तंत्र को भनक क्यों नहीं लगी? – Badaun News




बदायूं के उघैती थाना क्षेत्र में प्रेमी युगल को आपत्तिजनक हालत में पकड़कर मारपीट और लूट के मामले में पुलिस की बीट पुलिसिंग और मुखबिर तंत्र पर सवाल उठ रहे हैं। घटना के बाद करीब सात दिन तक पुलिस को मामले की जानकारी नहीं हुई। वीडियो सामने आने के बाद पुलिस सक्रिय हुई और आरोपियों की तलाश शुरू की गई। घटना की जानकारी पुलिस तक देर से पहुंचने को लेकर अब शासन ने अफसरों से जवाब मांगा है। शासन ने पूछा है कि घटना के बाद करीब सात दिन तक पुलिस को इसकी भनक कैसे नहीं लगी और जानकारी मिलने के बाद क्या कार्रवाई की गई। शासन को भेजी गई घटनाक्रम की पूरी टाइमलाइन शासन के सवाल के बाद अफसरों ने घटना से लेकर अब तक की कार्रवाई की पूरी टाइमलाइन तैयार की। इसमें घटना की जानकारी मिलने, वीडियो सामने आने, पुलिस के सक्रिय होने, आरोपियों की तलाश और गिरफ्तारियों तक की कार्रवाई का ब्योरा शामिल किया गया है। एडीजी बरेली जोन की ओर से यह ब्रीफिंग रिपोर्ट शासन को भेजी गई है। रिपोर्ट में घटना के बाद पुलिस की कार्रवाई और अब तक की स्थिति का विवरण दिया गया है। तीन आरोपी गिरफ्तार, चौथा अब भी फरार मामले में पुलिस तीन आरोपियों को गिरफ्तार कर चुकी है। चौथा आरोपी जीतेश ठाकुर अभी फरार है। पुलिस पिछले चार दिनों से उसकी तलाश में दबिश दे रही है। शनिवार को भी पुलिस टीम ने गांव में दो बार दबिश दी, लेकिन आरोपी हाथ नहीं लगा। पुलिस का दावा है कि जीतेश ठाकुर के संभावित ठिकानों पर लगातार दबिश दी जा रही है और जल्द उसे गिरफ्तार कर लिया जाएगा। पुलिस को अन्य आरोपियों के बारे में भी जानकारी मिलने की बात कही जा रही है, हालांकि उनकी गिरफ्तारी अभी नहीं हुई है। बीट पुलिस और मुखबिर तंत्र पर भी सवाल घटना के बाद स्थानीय स्तर पर पुलिस की बीट व्यवस्था और मुखबिर तंत्र की भूमिका भी सवालों के घेरे में है। गांव और आसपास के क्षेत्र में हुई घटना की जानकारी समय रहते बीट पुलिस तक नहीं पहुंची। वहीं मुखबिर तंत्र से भी पुलिस को कोई इनपुट नहीं मिला। यही देरी अब शासन के सवालों का आधार बनी है। शासन यह जानना चाहता है कि घटना से वीडियो सामने आने तक पुलिस को करीब सात दिनों तक इसकी जानकारी क्यों नहीं हुई। एसपी देहात बोले- चौथे आरोपी की तलाश जारी एसपी देहात डॉ. हृदेश कठेरिया ने बताया कि चौथे आरोपी जीतेश ठाकुर की तलाश जारी है। पुलिस टीमें लगातार दबिश दे रही हैं और जल्द गिरफ्तारी की जाएगी।



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सीकर से 3 युवतियां लापता: दादा-दादी से कटिंग करवाने का कहकर गई थी, गहने भी ले गई; कॉलेज गई युवती भी वापस नहीं लौटी – Sikar News




सीकर में 3 युवतियों के लापता होने का मामला सामने आया है। तीनों के परिजनों ने पुलिस में मुकदमा दर्ज करवाया है। पहले मामले में 19 साल की युवती के परिजनों ने शिकायत देकर बताया कि 25 सितंबर को सुबह 10 से 10:15 बजे के करीब उनकी बेटी दादा-दादी से कटिंग करवाने का के लिए पड़ोसी गांव जाने की कहकर गई, लेकिन शाम तक वापस नहीं लौटी। युवती की आस-पड़ोस में काफी तलाश की गई लेकिन कुछ पता नहीं चल पाया। 2. घर से दूसरे शहर के लिए निकली युवती लापता 19 साल की युवती के लापता होने के केस में उसके पिता ने पुलिस में शिकायत देकर बताया कि उनकी बेटी दूसरे शहर में प्राइवेट नौकरी करती है और वहां पर एक हॉस्टल में रहती है। वह घर से दूसरे शहर जाने के लिए निकली थी। शाम के समय जब उसे कॉल किया तो उसने कहा कि वह हॉस्टल है और इसके बाद में फोन काट दिया। इसके बाद से उसका मोबाइल लगातार स्विच ऑफ आ रहा था। इधर जब हॉस्टल में मालूम किया तो पता चला कि वहां पर युवती गई नहीं है। परिवार ने जब कमरे की तलाशी ली तो जेवरात भी गायब मिले। परिवार ने एक इंस्टाग्राम आईडी देखी जिस पर लड़के के साथ युवती की फोटो थी। उस लड़के का भी मोबाइल स्विच ऑफ है। 3. 20 साल की युवती गायब 20 साल की युवती के लापता होने के केस में उसके परिजनों ने बताया कि 25 सितंबर की सुबह करीब युवती घर से कॉलेज जाने के लिए निकली थी। लेकिन वापस घर पर नहीं पहुंची। युवती अपनी चाची के मोबाइल नंबर से कई बार किसी से फोन पर बात भी करती थी।



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दिवाली पर नो-वेटिंग, रेलवे ने उतारी दर्जनों स्पेशल ट्रेनें, चेक करें रूट


नई दिल्‍ली. दिवाली और छठ पर्व पर घर जाने की सोच रहे मुसाफिरों के लिए राहत भरी खबर है. हर साल की तरह इस बार भी नियमित ट्रेनों में लंबी वेटिंग लिस्ट देखकर अगर आपकी चिंता बढ़ गई थी, तो अब फिक्र छोड़ दीजिए. भारतीय रेलवे ने त्योहारी भीड़ को भांपते हुए दर्जनों स्पेशल ट्रेनें चलाने का फैसला है. ये ट्रेनें उत्तर प्रदेश, बिहार, दिल्ली, पंजाब, चंडीगढ़ और महाराष्ट्र के प्रमुख शहरों के बीच चलेगी. त्योहारी मांग को देखते हुए रेलवे ने नई दिल्ली–कानपुर सेंट्रल, आनंद विहार– मुजफ्फरपुर और हजरत निजामुद्दीन– दादर के बीच भी स्‍पेशल ट्रेनें चलाई जाएगी.

इन सभी स्पेशल ट्रेनों की बुकिंग भी जल्‍द शुरू होने वाली है. आपको भी अगर यात्रा करनी है तो त्योहारी भीड़ से बचने के लिए आईआरसीटीसी (IRCTC) की आधिकारिक वेबसाइट या अधिकृत काउंटर से समय रहते टिकट बुक करें और यात्रा से पहले ट्रेन का नया टाइमटेबल अवश्य जांच लें.

आनंद विहार-अयोध्या कैंट स्‍पेशल ट्रेन

धार्मिक और सांस्कृतिक आस्था के प्रमुख केंद्र अयोध्या और वाराणसी जाने वाले श्रद्धालुओं व घर लौटने वाले यात्रियों के लिए रेलवे ने सीधी ट्रेनों का प्रबंध किया है. आनंद विहार- अयोध्या कैंट (ट्रेन नं. 04214 / 04213) आनंद विहार से सुबह 9:00 बजे रवाना होकर उसी दिन रात 10:00 बजे अयोध्या कैंट पहुंचेगी. वापसी में अयोध्या कैंट से शाम 6:20 बजे चलकर अगले दिन सुबह 6:10 बजे आनंद विहार पहुंचेगी. रेलवे ने 1 अक्टूबर से 30 नवंबर के बीच इसके कुल 36 फेरे तय किए हैं.

दिल्ली-वाराणसी स्पेशल ट्रेन

दिल्ली-वाराणसी स्पेशल (ट्रेन नं. 04210 / 04209) दो अक्‍टूबर से 28 नवंबर तक चलेगी. वाराणसी से यह ट्रेन रात 10:15 बजे खुलकर अगले दिन दोपहर 1:45 बजे दिल्ली पहुंचेगी. वापसी में दिल्ली से शाम 6:50 बजे प्रस्थान कर सुबह 9:50 बजे वाराणसी पहुंचेगी. यह ट्रेन हफ्ते में तीन दिन चलेगी. इसमें एसी 2-टियर, एसी 3-टियर, स्लीपर और जनरल कोच होंगे.

पटना और पूर्वांचल के लिए भी चलेंगी स्‍पेशल ट्रेनें

दिवाली और छठ के दौरान सबसे ज्यादा दबाव बिहार जाने वाले रूटों पर रहता है. इसे ध्यान में रखते हुए नॉर्दर्न रेलवे कई ट्रेनें चलाने का फैसला लिया है.
चंडीगढ़-पटना स्पेशल (ट्रेन नं. 04512 / 04511): 18 फेरों के साथ चलने वाली यह ट्रेन अंबाला कैंट, सहारनपुर, रुड़की, मुरादाबाद, बरेली, शाहजहांपुर, वाराणसी, पंडित दीन दयाल उपाध्याय (DDU), बक्सर, आरा और दानापुर होते हुए पटना पहुंचेगी.

फिरोजपुर कैंट-पटना स्पेशल (ट्रेन नं. 04616 / 04615): 16 फेरों वाली यह ट्रेन मोगा, लुधियाना, अंबाला, मुरादाबाद, बरेली, वाराणसी और बक्सर के रास्ते पटना जाएगी, जिससे पंजाब में रहने वाले पूर्वांचल के प्रवासियों को सीधी कंफर्म सीट मिल सकेगी.



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क्वारी नदी में बहे तीनों किशोरों के शव मिले: 18 घंटे रेस्क्यू के बाद दो शव पुल के पास, तीसरा 3 किमी दूर बरामद – Bhind News




भिंड के उमरी थाना क्षेत्र के कनावर गांव में गणेश प्रतिमा विसर्जन के दौरान क्वारी नदी में बहे तीन किशोरों के शव करीब 18 से 20 घंटे चले रेस्क्यू अभियान के बाद बरामद कर लिए गए। शुक्रवार शाम से शनिवार रात तक दो रेस्क्यू दलों ने बोटिंग के साथ नदी के अंदर लगातार तलाश की, लेकिन युवकों का पता नहीं चल सका। रविवार सुबह दोबारा अभियान शुरू किया गया। इस दौरान दो शव नदी में पुल के पास मिले, जबकि तीसरा शव घटनास्थल से करीब तीन किलोमीटर दूर नदी के अंदर बरामद हुआ। पुलिस ने तीनों शवों को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भिंड भेज दिया है। हादसे के बाद कनावर गांव में मातम पसरा हुआ है। पुलिस ने घटना की जांच शुरू कर दी है। विसर्जन के दौरान तेज बहाव में बहे तीन युवक
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार शाम करीब 4 बजे कनावर गांव के कहनाभजीत और मदन गांव के करीब 10 से 12 लोग गणेश प्रतिमा विसर्जन के लिए क्वारी नदी पहुंचे थे। प्रशासन ने नदी किनारे प्रतिमा विसर्जन के लिए अलग से कुंड बनाया था, लेकिन श्रद्धालु नदी के दूसरे हिस्से में जाकर प्रतिमा विसर्जित करने लगे। इसी दौरान नदी के तेज बहाव की चपेट में आकर एक के बाद एक तीन युवक बह गए। घटना के बाद मौके पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। शुक्रवार शाम से शनिवार तक चला रेस्क्यू
हादसे की सूचना मिलते ही एसडीआरएफ की टीम मौके पर पहुंची और शुक्रवार शाम करीब दो घंटे तक नदी में तलाश अभियान चलाया। इसके बाद शनिवार सुबह करीब 8 बजे से शाम 7 बजे तक दो रेस्क्यू दलों ने बोटिंग के साथ नदी के अंदर भी तलाशी ली। नदी में तेज बहाव और अधिक गहराई के कारण रेस्क्यू टीम को काफी मशक्कत करनी पड़ी। शनिवार देर शाम तक तलाश के बावजूद तीनों युवकों का कोई सुराग नहीं मिल सका।

रविवार सुबह दो शव पुल के पास मिले
रविवार सुबह करीब 6 बजे रेस्क्यू दल एक बार फिर क्वारी नदी पर पहुंचा और तलाशी अभियान शुरू किया। कुछ देर बाद नदी में पुल के पास दो युवकों के शव मिले। इसके बाद तीसरे युवक की तलाश तेज कर दी गई। रेस्क्यू टीम ने घटनास्थल से करीब तीन किलोमीटर दूर नदी के अंदर तीसरे युवक का शव भी बरामद कर लिया। पुलिस ने तीनों शवों को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भिंड भेज दिया है। पुलिस घटना की परिस्थितियों की जांच कर रही है। हादसे के बाद से कनावर गांव में शोक का माहौल है।



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समस्तीपुर में 25 दिन से किशोरी लापता: गांव के युवक पर किडनैप करने का आरोप; लव अफेयर के एंगल से पुलिस कर रही जांच – Samastipur News




समस्तीपुर जिले के वारिसनगर थाना क्षेत्र से एक किशोरी पिछले 25 दिन से लापता है। काफी खोजबीन के बाद भी कोई सुराग नहीं मिला। पीड़ित परिजन ने थाने में अपहरण की प्राथमिकी दर्ज कराई है। हालांकि पुलिस इस घटना को लव अफेयर्स से जोड़कर देख रही है। जबकि परिवार के लोगों का दावा है कि 2 लाख रुपए की फिरौती की भी मांग की गई है। अब जानिए क्या है पूरा मामला परिवार के मुताबिक किशोरी 30 अगस्त को सामान लाने के लिए घर से निकली थी। इसी दौरान गांव के ही विशाल कुमार सिंह ने अपने सहयोगी के साथ मिलकर अपहरण कर लिया। जब परिवार के लोगों की इसकी जानकारी मिली तो वह विशाल कुमार सिंह के घर पहुंचे। पूछताछ करने पर अभद्र व्यवहार किया गया और लड़की वापस लेने के लिए दो लाख की फिरौती की मांग की जाने लगी। पुलिस पदाधिकारी से न्याय की लगाई गुहार आरोप है कि प्राथमिकी दर्ज किए जाने के बावजूद इस मामले में अब तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। मामले को लेकर पीड़ित परिवार द्वारा एसपी से लेकर वरीय पुलिस पदाधिकारी को आवेदन देकर न्याय की गुहार लगाई है। अनहोनी की आशंका से परेशान हैं। पुलिस मामले की छानबीन कर रही है वहीं, इस संबंध में सदर डीएसपी-2 संजय कुमार ने कहा कि इस मामले में प्राथमिक की दर्ज की गई है। नामजद आरोपी के घर पर छापेमारी भी की गई है, लेकिन वो नहीं मिला। पुलिस की टीम लगी हुई है। वैज्ञानिक अनुसंधान से भी किशोरी की बरामदगी को लेकर प्रयास किया जा रहे हैं। पहली नजर में मामला प्रेम प्रसंग लग रहा है। पुलिस की टीम सभी बिन्दुओं पर जांच कर रही है।



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चार सालों में 111 सांसद-विधायकों ने पार्टी बदली: इनमें 26% भाजपा में गए, ADR रिपोर्ट में खुलासा; नगालैंड और बंगाल में सबसे ज्यादा मामले




एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म्स (ADR) और नेशनल इलेक्शन वॉच की रिपोर्ट के मुताबिक, 2022 से 2026 के बीच चुनाव जीतने के बाद 111 सांसदों और विधायकों ने पार्टी बदली। इनमें 26 लोकसभा सांसद, 7 राज्यसभा सांसद और 78 विधायक शामिल हैं। दूसरी पार्टियों में शामिल होने वालों में सबसे ज्यादा 29 यानी 26% BJP में गए। रिपोर्ट में नगालैंड में सबसे ज्यादा 32 और पश्चिम बंगाल में 20 मामले सामने आए। विश्लेषण में चुनाव और उपचुनाव के दौरान हुए पार्टी बदलावों को शामिल किया गया है। इसमें दलबदल, पार्टी विलय और इस्तीफे के बाद उपचुनाव जीतने जैसे मामले भी शामिल हैं। नगालैंड में 32 विधायकों ने दल बदला नगालैंड में पार्टी बदलने के सभी 32 मामले विधायकों के हैं। इनमें से 25 विधायक पहले NDPP के टिकट पर चुने गए थे। वहीं, 32 नेता NPF में शामिल हुए। ADR के मुताबिक, इनमें ज्यादातर मामले NDPP और NPF के बीच राजनीतिक बदलाव से जुड़े थे। बंगाल में 20 लोकसभा सांसदों ने पार्टी बदली पश्चिम बंगाल में पार्टी बदलने के 20 मामले सभी लोकसभा सांसदों के हैं। ये सभी AITC के टिकट पर चुनाव जीते थे और बाद में NCPI में चले गए। इन सांसदों ने पार्टी में विलय का दावा किया है। इस मामले पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला के सामने फैसला होना बाकी है। तेलंगाना में 9 MLA कांग्रेस में गए, महाराष्ट्र में 6 सांसद शिंदे गुट में शामिल हुए तेलंगाना में 9 विधायक पार्टी बदलने वालों में शामिल हैं। ये सभी BRS से चुने गए थे और कांग्रेस में गए। गोवा में 8 कांग्रेस विधायकों के BJP में जाने के मामले सामने आए। महाराष्ट्र में 6 लोकसभा सांसदों ने उद्धव ठाकरे की शिवसेना से एकनाथ शिंदे की शिवसेना का रुख किया। NDPP से सबसे ज्यादा नेता बाहर गए जिन पार्टियों के नेताओं ने पार्टी बदली, उनमें NDPP के 25, AITC के 20 और कांग्रेस के 19 नेता शामिल हैं। इसके बाद BRS के 9, AAP और NCP के 7-7, शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के 6, JD(U) के 5 और NPP के 4 नेता रहे। NDPP, AITC और कांग्रेस से पार्टी बदलने वाले नेताओं की संख्या 64 यानी कुल मामलों की 58% रही। NPF में 32 और BJP में 29 नेता शामिल हुए दूसरी पार्टियों से सबसे ज्यादा नेता NPF में 32 शामिल हुए। इसके बाद BJP में 29 और NCPI में 20 नेता गए। कांग्रेस में 9, शिवसेना में 8, NPP में 6 और पीपुल्स पार्टी ऑफ अरुणाचल में 4 नेता शामिल हुए। NPF, BJP और NCPI में शामिल होने वाले नेताओं की संख्या 81 यानी कुल मामलों की 73% रही। ADR ने दलबदल कानून में बदलाव सुझाए ADR ने कहा कि कुछ राज्यों में विधायकों के दलबदल को सरकार गिरने से भी जोड़ा गया। हालांकि, संगठन ने साफ किया कि उसका आंकड़ा पूरी तरह अंतिम नहीं है, क्योंकि नेताओं के पार्टी बदलने का कोई व्यवस्थित और आसानी से उपलब्ध आधिकारिक डेटाबेस नहीं है। ADR ने सांसदों और विधायकों की अयोग्यता से जुड़ी याचिकाओं पर फैसला लेने की व्यवस्था में बदलाव का सुझाव दिया है। इसके तहत सांसदों के मामले में यह अधिकार राष्ट्रपति और विधायकों के मामले में राज्यपाल को देने की सिफारिश की गई है, जिसमें चुनाव आयोग की सलाह ली जाए। संगठन ने फैसले के लिए समय सीमा तय करने और दोबारा चुनाव जीतने तक दलबदल करने वालों को सार्वजनिक पद संभालने से रोकने का भी सुझाव दिया है।



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निजाम के नाम से मशहूर है ये बिस्कुट, 6 पीढ़ियों से कायम इस बेकरी का स्वाद

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Hyderabad Subhan Bakery: हैदराबाद की ऐतिहासिक सुभान बेकरी अपनी छह पीढ़ियों पुरानी बेकिंग विरासत के लिए मशहूर है. 1951 में नामपल्ली में शुरू हुई इस बेकरी के उस्मानिया बिस्कुट आज देश ही नहीं, विदेशों तक लोकप्रिय हैं. मीठे और हल्के नमकीन स्वाद वाले इन बिस्कुटों को निज़ाम मीर उस्मान अली खान के नाम से जोड़ा जाता है. सऊदी अरब, अमेरिका, कनाडा और ब्रिटेन जाने वाले प्रवासी हैदराबादी भी इन्हें अपने साथ ले जाते हैं. ब्रेड से शुरू हुआ सफर प्लम केक, पफ्स, बर्गर और पेस्ट्री तक पहुंचा. परंपरा और आधुनिक तकनीक के मेल से सुभान बेकरी आज भी हैदराबाद के खास स्वाद की पहचान बनी हुई है.

हैदराबाद. अगर आप हैदराबाद के नामपल्ली से गुजरें, तो ताज़ा बेक हो रहे बिस्कुट और ब्रेड की भीनी-भीनी खुशबू आपको खुद-ब-खुद एक दुकान की तरफ खींच लेगी. यह ठिकाना है ऐतिहासिक सुभान बेकरी का, जिसके बिस्कुट आज सिर्फ भारत में ही नहीं, बल्कि सात समंदर पार भी अपनी महक बिखेर रहे हैं. सुभान बेकरी की वर्तमान दुकान भले ही 1951 में खुली हो, लेकिन इस परिवार का बेकिंग से रिश्ता छह पीढ़ियों पुराना है.

परिवार के पूर्वज सैयद खादर कभी सिकंदराबाद में ब्रिटिश रेजिमेंट को ताज़ी ब्रेड की सप्लाई किया करते थे. आजादी के बाद 1951 में जब नामपल्ली में सुभान बेकरी की शुरुआत हुई, तो स्थानीय लोगों के बीच इसकी हाथ से बनी ब्रेड हाथों-हाथ बिकने लगी। आज चौथी पीढ़ी के संचालक सैयद इरफान इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं. सुभान बेकरी के उस्मानिया बिस्कुट का स्वाद मीठे और हल्के नमकीन का ऐसा बेजोड़ संतुलन है कि मुंह में रखते ही घुल जाता है.

हर एनआरआई के सूटकेस में मिल जाएगा सुभान बेकरी का उत्पाद

हैदराबाद के अंतिम निज़ाम, मीर उस्मान अली खान के नाम पर बने इस बिस्कुट के बारे में कहा जाता है कि इसे खास तौर पर उस्मानिया जनरल अस्पताल के मरीज़ों और निज़ाम के चाय के समय के लिए तैयार कराया गया था. राजीव गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट जाने से पहले प्रवासी हैदराबादी सुभान बेकरी रुकना नहीं भूलते. सऊदी अरब, अमेरिका, कनाडा या ब्रिटेन से आए एनआरआई के सूटकेस में सुभान बेकरी के लाल डिब्बे ज़रूर पैक होते हैं. स्थानीय लोगों के बीच तो मज़ाक में यह भी कहा जाता है कि इन बिस्कुटों के बिना हैदराबादी मुसाफिर का सफर पूरा ही नहीं माना जाता.

सुभान बेकरी ने खुद को समय के साथ ढाला

बेकरी की सबसे बड़ी खासियत समय के साथ खुद को ढालना है. 1950 के दशक में ब्रेड, 60 के दशक में प्लम केक, 70 के दशक में पफ्स और फिर बर्गर-पेस्ट्री जोड़कर इसने हर पीढ़ी का दिल जीता. बिस्कुट के अलावा यहां का पारंपरिक दम का रोत और त्योहारों पर बनने वाले खास व्यंजन भी खूब बिकते हैं. छोटे पैकेटों से लेकर गुजरात के एक आयोजन के लिए 2.4 टन बिस्कुट तैयार करने तक, सुभान बेकरी आज भी पुरानी रिवायत और आधुनिक तकनीक के दम पर हैदराबाद के सबसे भरोसेमंद स्वाद का प्रतीक बनी हुई है.

About the Author

दीप रंजन सिंह Content Producer

दीपरंजन सिंह लगभग एक दशक से पत्रकारिता के फिल्ड से जुड़े हुए हैं. वह अभी न्यूज18 हिंदी के राजस्थान डिजिटल डेस्क से जुड़े हैं, जहां वे बतौर कंटेंट प्रोड्यूसर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. पिछले लगभग एक दशक से सक्रिय पत…

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गृहमंत्री आज गुजरात में LNG ट्रेन को दिखाएंगे हरी झंडी: टैंक फुल होने पर 2200 किमी चलेगी, LNG और डीजल के बीच स्विच कर सकेगा इंजन


अहमदाबादकुछ ही क्षण पहले

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गुजरात के मेहसाणा और साबरमती के बीच ट्रेन का 2000 किमी से ज्यादा का हुआ सफल ट्रॉयल।

केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह रविवार को गुजरात में 1,542 करोड़ रुपए से अधिक की रेल परियोजनाओं का शुभारंभ करेंगे। इस दौरान वह भारत की पहली LNG (लिक्विफाइड नेचुरल गैस) से चलने वाली ट्रेन को भी हरी झंडी दिखाएंगे।

ट्रेन की खास बात यह है कि यह एक बार पूरी तरह से भरे टैंक में 2200 किलोमीटर तक की लंबी दूरी तय कर सकती है।

यह ट्रेन पूरी तरह से LNG बेस्ड होगी। हालांकि, इसका इंजन LNG और डीजल दोनों पर चल सकता है। यानी कि फ्यूल की मात्रा के हिसाब से इंजन LNG और डीजल के बीच स्विच कर सकता है।

2,000 किमी से ज्यादा का फील्ड ट्रायल रहा सफल

इस प्रोजेक्ट के अंतर्गत 1400 HP क्षमता वाले दो ड्राइविंग पावर कार (DPC) को LNG ड्यूल-फ्यूल प्रणाली में ट्रांसफॉर्म किया गया है। ट्रेन का 2,000 किलोमीटर से अधिक का सफल फील्ड ट्रायल पूरा किया जा चुका है।

गुजरात के मेहसाणा और साबरमती के बीच करीब 8 महीनों तक ट्रेन का ट्रायल हुआ। आने वाले समय में 8 से 10 और ट्रेनों में एलएनजी तकनीक को अपनाने की योजना है।

ट्रेन के इंजन के अंदर की दो तस्वीरें…

प्रदूषण में भी भारी कमी आएगी: DRM

अहमदाबाद के डीआरएम वेद प्रकाश ने बताया कि एलएनजी डीजल से सस्ता होने के कारण ट्रेन चलाने की कुल लागत कम हो जाती है। एलएनजी ईंधन से प्रदूषण में भी भारी कमी आएगी।

इससे कार्बन डाइऑक्साइड, नाइट्रोजन ऑक्साइड और धूल के कण जैसे हानिकारक तत्व कम मात्रा में उत्पन्न होंगे। इससे रेलवे ट्रैक के आसपास की हवा भी शुद्ध रहेगी। इसके साथ ही, ईंधन की लागत में भी काफी बचत होगी।

वेद प्रकाश ने आगे बताया कि एलएनजी ईंधन प्रणाली के साथ इंजन की पॉवर में कोई कमी नहीं आती। इंजन की पॉवर डीजल इंजन के समान ही बनी रहती है।

एक एलएनजी टैंक से डीपीसी ट्रेन लगभग 2200 किलोमीटर तक चल सकती है, इसलिए बार-बार फ्यूल भरने की जरूरत नहीं होती।

इसके अलावा अमित शाह रेलवे से जुड़ी कई विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और लोकार्पण भी करेंगे।

700 करोड़ की लागत से नया लोकोमोटिव शेड

साबरमती में करीब 700 करोड़ रुपए की लागत से WAG-12 लोकोमोटिव मेंटेनेंस शेड बनाया गया है। यहां करीब 12,000 HP क्षमता वाले 300 WAG-12 इलेक्ट्रिक मालगाड़ी इंजनों के रखरखाव की सुविधा होगी। ये इंजन भारी और लंबी मालगाड़ियों को चलाने के लिए तैयार किए गए हैं।

साबरमती में बना 700 करोड़ की लागत से नया लोकोमोटिव शेड।

साबरमती में बना 700 करोड़ की लागत से नया लोकोमोटिव शेड।

साबरमती-सारखेज रेल लाइन होगी डबल

करीब 313.27 करोड़ रुपये की लागत से साबरमती-सारखेज रेल लाइन के 21 किलोमीटर हिस्से को डबल करने का काम भी किया जाएगा। इसे मार्च 2028 तक पूरा करने का लक्ष्य है। परियोजना में साबरमती, गांधीग्राम, वस्त्रापुर और सारखेज स्टेशनों के साथ पुलों और रोड अंडरपास से जुड़े काम भी शामिल हैं।

रेल लाइन के दोहरीकरण से ट्रेनों की आवाजाही बेहतर होने, सारखेज-धोलेरा क्षेत्र की कनेक्टिविटी बढ़ने और औद्योगिक व व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

इन परियोजनाओं का उद्देश्य रेलवे सुरक्षा बढ़ाना, ट्रेनों की परिचालन क्षमता में सुधार करना और पर्यावरण के अनुकूल परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा देना है।

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भारत में पहली हाइड्रोजन ट्रेन शुरू:हरियाणा में जींद से सोनीपत तक 89km का रूट; PM बोले- यह दुनिया में सबसे लंबी और ताकतवर

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शुक्रवार को देश की पहली हाइड्रोजन ट्रेन को हरी झंडी दिखाई। यह ट्रेन जींद से सोनीपत के लिए रवाना हुई। इसके साथ ही भारत हाइड्रोजन से चलने वाली ट्रेन शुरू करने वाला दुनिया का पांचवां देश बन गया। पूरी खबर पढ़ें…



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ब्रिटेन में भारतीय छात्रों में 20% कमी की आशंका: वजह- वीजा में सख्ती; ऐसा हुआ तो ब्रिटेन को सालाना ₹10 हजार करोड़ का घाटा




अब ब्रिटेन में भी भारतीयों छात्रों की संख्या में भारी कमी आने की आशंका है। अमेरिका में ट्रम्प राज में भारतीय छात्र मुश्किलें झेल रहे थे, लेकिन अब वैसे ही हालात ब्रिटेन में भी हो रहे हैं। सेंटर फॉर ग्लोबल हायर एजुकेशन (सीजीएचई) यूके की रिपोर्ट में चौंकाने वाले आंकड़े सामने आए हैं। 2027 के मई-जून के दाखिलों (समर इनटेक) में भारतीय छात्रों की संख्या में 20% तक की कमी आ सकती है। इस साल सितंबर तक भारतीय छात्रों को लगभग 83 हजार स्टूडेंट वीजा मिले थे। अगले साल ये घटकर 63 हजार रहने की आशंका है। इसका सबसे बड़ा कारण ब्रिटेन की एंडी बर्नहैम सरकार की सख्त वीजा नीतियां हैं। ब्रिटेन में ग्रेजुएट वर्क वीजा डेढ़ साल किया गया दरअसल, ब्रिटेन में राष्ट्रवादी पार्टियों जैसे रिफॉर्म यूके के तेजी से उभरने के कारण वीजा में सख्ती हो रही है। रिफॉर्म यूके के एजेंडे में स्थानीयों को रोजगार देना प्रमुख है। इसलिए बर्नहैम सरकार अमेरिका की तर्ज पर वीजा जारी करने में बैकग्राउंड चेक में सख्ती बरत रही है। ब्रिटेन में ग्रेजुएट वर्क वीजा को दो साल से घटाकर अब डेढ़ साल कर दिया गया है। इससे स्टूडेंट्स को पढ़ाई के बाद ब्रिटेन में नौकरी और रिसर्च करने के लिए कम समय मिल पाएगा। भारत में ब्रिटेन की 9 यूनिवर्सिटी के कैंपस खुले वीजा में सख्ती के बीच एक राहत भी है। ब्रिटेन की साउथैम्पटन, लिवरपूल, यॉर्क जैसी 9 यूनिवर्सिटी ने भारत में अपने कैंपस खोलने का ऐलान किया है। इनमें से कुछ में पढ़ाई भी शुरू हो चुकी है। जानकारों का मानना है कि भारतीय छात्र यहां पर दाखिले लेकर ब्रिटेन के स्तर की पढ़ाई कर सकते हैं। आने वाले समय में ब्रिटेन की और यूनिवर्सिटी भी आएंगी। 4 सवाल-जवाब में समझें इसका असर क्या; जर्मनी-फ्रांस-आयरलैंड होंगे नए स्टडी हब भारतीय छात्रों की कमी से क्या असर? भारतीय छात्रों की संख्या में कमी से ब्रिटेन की इकोनॉमी को सालाना लगभग 10 हजार करोड़ रुपए का घाटा झेलना पड़ेगा। लेकिन ब्रिटेन की सरकार सियासी हितों के साधने के फेर में वीजा नियम सख्त कर रही। छात्र अब किन देशों का रुख करेंगे? जर्मनी, आयरलैंड और फ्रांस में भारतीय छात्र रुख करेंगे। इन देशों में स्टूडेंट वीजा की अप्रूवल रेट 90% तक है। जर्मनी की सरकारी यूनिवर्सिटी में फीस माफी है। वीजा मुद्दे का क्या हल हो सकता है? भारत-ब्रिटेन एफटीए (फ्री ट्रेड एग्रीमेंट) में भारत की ओर से स्टूडेंट और प्रोफेशनल वीजा में रियायत का पॉइंट रखा गया था। ब्रिटेन की तत्कालीन ऋषि सुनक और फिर स्टारमर सरकारों ने अड़ियल रुख अपना कर वीजा प्रावधानों को हटा दिया था। डिपेंडेंट वीजा में भी दिक्कतें क्यों? ब्रिटेन में छात्रों और प्रोफेशनल्स को मिलने वाले डिपेंडेंट (आश्रितों) वीजा में भी सख्ती की गई है। यानी अब ब्रिटेन में आने वाले छात्र और प्रोफेशनल्स पत्नी, बच्चों और पैरेंट्स को साथ नहीं ला पाएंगे। इसके लिए 58 लाख रुपए सालाना की न्यूनतम वेतन सीमा रखी गई है। ——————————-



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ट्रम्प बोले- ईरान मुश्किल में, तभी होर्मुज खोलना चाहते: हमने लोहे की दीवार जैसी नाकाबंदी की, 2 दिन पहले ईरान ने जंग खत्म करने का प्लान बताया था


न्यूयॉर्क9 मिनट पहले

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अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने शनिवार को कहा कि वे (ईरान) तुरंत होर्मुज इसलिए खोलना चाहते हैं। क्योंकि वे मुश्किल में हैं। उनके पास पैसा नहीं आ रहा है, क्योंकि उनकी कमाई होर्मुज स्ट्रेट से ही होती है। हमने वहां सैन्य इतिहास की सबसे बड़ी नाकाबंदी कर दी। यह लोहे की दीवार जैसी है।

दरअसल दो दिन पहले ईरान ने अमेरिका के सामने जंग रोकने का 7 दिन का प्लान रखा था। ईरान का कहना है कि सबसे पहले लड़ाई बंद हो और ईरान के तेल बेचने पर लगी पाबंदियों में राहत दी जाए।

इसके बाद सातवें दिन होर्मुज स्ट्रेट खोला जाएगा और फिर ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर नई बातचीत शुरू होगी। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने कहा है कि अब यह अमेरिका पर निर्भर है कि वह संघर्ष खत्म करना चाहता है या नहीं।

जंग रोकने का प्रस्ताव ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने मध्यस्थ देशों के जरिए अमेरिका को भेजा है।

पजशकियान UN महासभा में 23 सितंबर को भाषण देने पहुंचे थे। वहां उन्होंने पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की भी तस्वीर दिखाई।

पजशकियान UN महासभा में 23 सितंबर को भाषण देने पहुंचे थे। वहां उन्होंने पूर्व सुप्रीम लीडर अयातुल्लाह अली खामेनेई की भी तस्वीर दिखाई।

ट्रम्प की चेतावनी के बाद ईरान ने भेजा था प्रस्ताव

ईरानी प्रस्ताव ऐसे समय आया है, जब अमेरिका और ईरान के बीच तनाव चरम पर है। बुधवार को संयुक्त राष्ट्र महासभा में पजशकियान ने कहा था कि ईरान अमेरिकी दबाव के आगे नहीं झुकेगा।

इससे एक दिन पहले अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने चेतावनी दी थी कि अगर समझौता नहीं हुआ तो अमेरिका ईरान को ‘पूरी तरह तबाह’ कर सकता है।

अमेरिका ने ईरान के 5 तेल टैंकरों पर हमला किया था

अमेरिकी सेना ने 8 सितंबर को ईरान से जुड़े 5 तेल टैंकरों पर हमला किया था। इसके कुछ घंटे बाद ईरान ने जॉर्डन में अमेरिकी सैन्य ठिकाने की ओर 20 बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। जॉर्डन की सेना के मुताबिक, उसके एयर डिफेंस सिस्टम ने इनमें से 18 मिसाइलों को मार गिराया, जबकि 2 आबादी से दूर इलाकों में गिरीं।

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने कहा था कि ईरान ने अमेरिकी नौसेना के एक युद्धपोत को दो बार बैलिस्टिक मिसाइलों से निशाना बनाने की कोशिश की थी। इसी के जवाब में ईरान के रेवोल्यूशनरी गार्ड्स कॉर्प्स (IRGC) से जुड़े तेल टैंकरों पर हमला किया।

इसके बाद ईरान ने स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में 10 जहाजों पर हमले की बात की थी। इनमें 2 अमेरिकी जहाज और 8 तेल टैंकर शामिल थे। इसी दौरान ईरान ने एक अमेरिकी सबमरीन ड्रोन भी पकड़ा था।

28 फरवरी से चल रही है अमेरिका-ईरान की लड़ाई

अमेरिका और इजराइल ने 28 फरवरी को ईरान के खिलाफ सैन्य कार्रवाई शुरू की थी। इसके जवाब में ईरान ने इजराइल और उन खाड़ी देशों में हमले किए, जहां अमेरिकी सैन्य ठिकाने मौजूद हैं।

अमेरिका का कहना है कि उसका मकसद ईरान की परमाणु क्षमता को कमजोर करना है। वहीं ईरान लगातार कहता रहा है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है और उसे परमाणु तकनीक के इस्तेमाल का अधिकार है।

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