बूंदी के नैनवां उपखंड स्थित तलवास की रतनसागर झील में गुमशुदा युवक सोनू रेगर की तलाश के लिए रविवार को व्यापक सर्च अभियान चलाया गया। सिविल डिफेंस और एसडीआरएफ की टीमों ने यह अभियान चलाया, लेकिन देर शाम तक युवक का कोई सुराग नहीं मिल पाया। तलवास निवासी रामदयाल रेगर ने 4 जून 2026 को थाना देई में अपने बेटे सोनू (पुत्र रामदयाल रेगर) की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार, सोनू 2 जून की शाम करीब 6 बजे बिना बताए घर से चला गया था। परिजनों ने आसपास काफी तलाश की, लेकिन वह नहीं मिला। बाद में परिजनों ने सोनू के रतनसागर झील में डूबने की आशंका जताई थी। थाना देई के पुलिस निरीक्षक एवं थानाधिकारी कमलेश कुमार ने बताया कि रिपोर्ट मिलते ही एमपीआर संख्या 24/2026 दर्ज कर एएसआई राजेश कुमार को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया और मामले की जांच शुरू कर दी गई।
परिजनों की आशंका के आधार पर, 7 जून को रतनसागर झील में सिविल डिफेंस और एसडीआरएफ की टीमों ने सुबह से सर्च अभियान शुरू किया। सिविल डिफेंस दल के प्रभारी धनपाल के नेतृत्व में विशाल, राजकुमार, दुर्गालाल, आकाश और पवन ने अभियान में हिस्सा लिया। एसडीआरएफ दल में कमांडेंट राजेन्द्र सिंह, एकता हाड़ा, हंसराज, हरवीर, खुशीराम, रामप्रसाद, शिवपाल, सुरेश कुमार, गोविंद, अमृतलाल, राजेश और रामकिशन शामिल थे। टीमों ने पूरे दिन झील में गहन तलाश की, लेकिन युवक का कोई पता नहीं चल सका। मौके पर तहसीलदार रामराय मीणा और नायब तहसीलदार कैलाश नारायण मीणा स्वयं मौजूद रहे। उनके साथ राजस्व विभाग के कानूनगो, पटवारी, वन विभाग के कर्मचारी और पुलिस बल भी मुस्तैदी से तैनात थे। सर्च अभियान के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण भी झील किनारे एकत्रित हुए थे। पुलिस निरीक्षक कमलेश कुमार ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है। गुमशुदा युवक के संबंध में उसके पिता, भाई सहित अन्य लोगों से भी जानकारी जुटाई जा रही है।
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रतनसागर झील में गुमशुदा युवक की तलाश जारी: सिविल डिफेंस और एसडीआरएफ ने चलाया व्यापक सर्च अभियान – Bundi News
घर पर देशी अंदाज में तैयार करें करमुआ का साग, पाचन को रखता है दुरुस्त, जाने रेसिपी
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करमुआ साग बनाने के लिए सबसे पहले करमुआ की पत्तियों को अच्छे से धोकर बारीक काट लेना है. इसके बाद एक कड़ाही में सरसों का तेल गर्म कर लें. जब तेल गर्म हो जाए तो उसके बाद उसमें जीरा डालें और जब वह चटकने लगे तो उसमें कटा हुआ लहसुन डालकर हल्का सुनहरा होने तक भून लें. इसके बाद इसमें प्याज डालें और सुनहरा होने तक भूनें. अब टमाटर और हरी मिर्च डालकर अच्छे से पकाएं जब तक टमाटर नरम न हो जाए. उसके बाद इसमें हल्दी, लाल मिर्च और नमक डालकर मसाले को अच्छे से भून लना है.
सुल्तानपुरः गर्मी का मौसम चल रहा है. कुछ दिनों बाद लोगों को करमुआ का साग खाने को मिलेगा. ऐसे में करमुआ की सब्जी न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होती है बल्कि यह सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद होती है. अगर आप भी अपने घर पर करमुआ की सब्जी बनाना चाहते हैं तो आज हम आपको बताने वाले हैं करमुआ की सब्जी बनाने की बेस्ट रेसिपी के बारे में जिसको आप अपने घर पर और लोहे की कढ़ाई में बनाकर बीमारियों में भी लाभदायक होगा.
व्यंजन एक्सपर्ट सविता श्रीवास्तव लोकल 18 से बताती हैं कि करमुआ का साग बनाने के लिए आपको कुछ सामग्रियों की आवश्यकता होगी. इन सामग्रियों में आप करमुआ, सरसों का तेल, लहसुन प्याज, हरी मिर्च, हल्दी, लाल मिर्च, नमक और जीरा का इस्तेमाल किया जाता है.
ऐसे तैयार करें रेसिपी
करमुआ साग बनाने के लिए सबसे पहले करमुआ की पत्तियों को अच्छे से धोकर बारीक काट लेना है. इसके बाद एक कड़ाही में सरसों का तेल गर्म कर लें. जब तेल गर्म हो जाए तो उसके बाद उसमें जीरा डालें और जब वह चटकने लगे तो उसमें कटा हुआ लहसुन डालकर हल्का सुनहरा होने तक भून लें. इसके बाद इसमें प्याज डालें और सुनहरा होने तक भूनें. अब टमाटर और हरी मिर्च डालकर अच्छे से पकाएं जब तक टमाटर नरम न हो जाए. उसके बाद इसमें हल्दी, लाल मिर्च और नमक डालकर मसाले को अच्छे से भून लना है. मसाला जब अच्छी तरह पक जाए तो उसके बाद कटे हुए करमुआ के पत्ते डाल दें. और धीमी आंच पर लगभग 10 मिनट तक पकाएं. अब तैयार हो जाती है सब्जी.
बारिश में होता है तैयार
हरी दिखने वाली यह घास अधिकांशतः बारिश के सीजन में होती है. जिस स्थान पर पानी एकत्र रहता है उस स्थान पर करेमुआ का साग अपने आप उग आता है. इस घास को काटकर लोहे के बर्तन में सब्जी बनाई जाती है जो काफी स्वादिष्ट होती है. आयुर्वेद चिकित्सक के मुताबिक करेमुआ का साग आयरन की कमी को पूरा करता है. जिससे शरीर में एनीमिया जैसी रक्त की कमी वाली बीमारी नहीं पनपने पाती और लोगों का स्वास्थ्य ठीक रहता है.
पाचन को रखता है दुरुस्त
वर्तमान में खानपान के चलते काफी लोगों को पाचन से जुड़ी समस्याएं होने लगी हैं. ऐसे में लोगों को अपनी डाइट में करेमुआ साग को जरूर शामिल करना चाहिए. इसमें फाइबर की अच्छी मात्रा पाई जाती है और ये नेचुरल लेक्सटेसिव की तरह काम करता है.वहीं जिन लोगों का मेटाबॉलिज्म स्लो हो उनके लिए भी इसे खाना बहुत ही फायदेमंद होता है. जिससे पाचन तंत्र मजबूत रहता है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
NEET UG री-एग्जाम को लेकर बड़ी खबर, NTA ने जारी की सिटी स्लिप
नई दिल्ली: NEET-UG का पेपर लीक होने के बाद देशभर में री-एग्जाम कराया जा रहा है। इसे लेकर बड़ी खबर सामने आई है। दरअसल, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) ने रविवार को 21 जून को होने वाली NEET-UG 2026 के रि-एग्जाम के लिए एग्जाम सेंटरों की घोषणा कर दी है। एनटीए ने एक पोस्ट में बताया कि अभ्यर्थी अब NEET-UG 2026 के रि-एग्जाम के लिए अपने आवंटित एग्जाम सिटी की जानकारी देख सकते हैं। अपनी एग्जाम सिटी देखने और डाउनलोड करने के लिए अभ्यर्थी एनटीए की वेबसाइट https://neet.nta.nic.in पर जा सकते हैं। इसके बाद अभ्यर्थी अपने आवेदन नंबर और पासवर्ड से वेबसाइट पर लॉग इन कर सकते हैं, जिसके बाद परीक्षा शहर से संबंधित जानकारी मिल जाएगी। हालांकि एनटीए ने स्पष्ट किया है कि यह एडमिट कार्ड नहीं है।
21 जून को होगा री-एग्जाम
एनटीए द्वारा जारी एक सार्वजनिक सूचना के अनुसार, री-एग्जाम 21 जून को दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक भारत के 551 शहरों और अन्य देशों के 14 शहरों में पेन-एंड-पेपर मोड में आयोजित की जाएगी। इसके साथ ही एनटीए ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह सिर्फ एग्जाम सिटी की सूचना है, यह एडमिट कार्ड नहीं है। इसे केवल उम्मीदवारों को उनके परीक्षा केंद्र के शहर के बारे में सूचित करने के लिए जारी किया जा रहा है। एजेंसी ने कहा, “यह एडमिट कार्ड नहीं है। इसमें केवल आपका परीक्षा शहर दिखाया गया है। एडमिट कार्ड बाद में जारी किया जाएगा।” एनटीए ने कहा कि सभी छात्रों को उनकी पहली पसंद का शहर देने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है।
एडमिट कार्ड जल्द होगा जारी
एनटीए ने पोस्ट में उम्मीदवारों से परीक्षा और एडमिट कार्ड जारी होने से संबंधित नवीनतम घोषणाओं के लिए अपनी आधिकारिक वेबसाइटों पर अपडेट रहने का आग्रह किया। बता दें कि मेडिकल पाठ्यक्रमों में प्रवेश के लिए NEET-UG परीक्षा इस साल 3 मई को आयोजित की गई थी। हालांकि बाद में पेपर लीक के आरोप सामने आने के बाद NTA ने 12 मई को पूरी परीक्षा रद्द कर दी थी। घटना के बाद एनटीए ने री-एग्जाम कराने का ऐलान किया था। अब इसका री-एग्जाम 21 जून को कराया जाएगा। वहीं पेपर लीक मामले की जांच फिलहाल सीबीआई के द्वारा की जा रही है।
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गोंडा के प्रवीण सिंह के 8 एकड़ आम के बाग में लगे हैं 30 प्रकार के आम, बन गए लखपती
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गोंडा के मनकापुर में किसान प्रवीण सिंह के बाग में विभिन्न किस्मों के आम के पेड़ लगे हुए हैं. गर्मियों के मौसम में जब आम पककर तैयार होते हैं, तो व्यापारी सीधे बाग में पहुंचकर फलों की खरीद करते हैं. इससे किसान को अपनी उपज बेचने के लिए ज्यादा परेशानी नहीं उठानी पड़ती। स्थानीय बाजारों के साथ-साथ आसपास के जिलों में भी उनके आम की मांग रहती है.प्रवीण सिंह का कहना है कि पारंपरिक खेती की तुलना में बागवानी से बेहतर आमदनी हो रही है. एक बार पेड़ तैयार हो जाने के बाद कई वर्षों तक उनसे उत्पादन मिलता रहता है. हालांकि शुरुआती वर्षों में धैर्य और निवेश की जरूरत होती है, लेकिन बाद में यह खेती अच्छा लाभ देने लगती है.
गोंडा: मनकापुर के एक किसान ने आम की बागवानी के जरिए सफलता की नई मिसाल पेश की है. जहां कई किसान पारंपरिक फसलों की खेती करते हैं, वहीं इस किसान ने आम का बाग लगाकर अपनी आय बढ़ाई है. आज उनकी बागवानी न केवल उनके परिवार की आर्थिक स्थिति को मजबूत कर रही है, बल्कि आसपास के किसानों के लिए भी प्रेरणा बन गई है.
किसान ने कई वर्ष पहले अपनी जमीन पर आम के पौधे लगाए थे. शुरुआत में उन्हें पौधों की देखभाल, सिंचाई और रोगों से बचाव को लेकर काफी मेहनत करनी पड़ी. उन्होंने कृषि विशेषज्ञों की सलाह लेकर पौधों की नियमित देखरेख की. समय के साथ पेड़ बड़े हुए और अब हर साल अच्छी मात्रा में आम का उत्पादन दे रहे हैं.
लाखों में होती है कमाई
किसान प्रवीण सिंह के बाग में विभिन्न किस्मों के आम के पेड़ लगे हुए हैं. गर्मियों के मौसम में जब आम पककर तैयार होते हैं, तो व्यापारी सीधे बाग में पहुंचकर फलों की खरीद करते हैं. इससे किसान को अपनी उपज बेचने के लिए ज्यादा परेशानी नहीं उठानी पड़ती। स्थानीय बाजारों के साथ-साथ आसपास के जिलों में भी उनके आम की मांग रहती है. लोकल 18 से बातचीत के दौरान किसान प्रवीण सिंह का कहना है कि पारंपरिक खेती की तुलना में बागवानी से बेहतर आमदनी हो रही है. एक बार पेड़ तैयार हो जाने के बाद कई वर्षों तक उनसे उत्पादन मिलता रहता है. हालांकि शुरुआती वर्षों में धैर्य और निवेश की जरूरत होती है, लेकिन बाद में यह खेती अच्छा लाभ देने लगती है. आम की बिक्री से उन्हें हर साल लाखों रुपये की आय प्राप्त हो रही है.
8 एकड़ में कर रहे आम की खेती
प्रवीण सिंह बताते हैं कि बागवानी के साथ किसान आधुनिक तकनीकों का भी उपयोग कर रहे हैं. वह समय-समय पर पेड़ों की छंटाई करते हैं, जैविक और संतुलित खाद का प्रयोग करते हैं तथा सिंचाई की उचित व्यवस्था बनाए रखते हैं. इससे फलों की गुणवत्ता अच्छी रहती है और उत्पादन भी बढ़ता है. अच्छी गुणवत्ता के कारण बाजार में उनके आम को बेहतर कीमत मिलती है. इस समय हम की बागवानी लगभग 8 एकड़ में कर रहे हैं भविष्य में इसको और आगे बढ़ाना है क्योंकि इससे हमारा अच्छा इनकम हो रहा है. 8 एकड़ में आम की बागवानी से हमारा लाखों का इनकम हो रहा है और हमको खाने के लिए कई प्रकार के आम भी मिल जाते हैं. हमारे आम के बागवानी में लगभग 28 से 30 वैरायटी के आम है. दशहरी, चौसा, लंगड़ा, सफेद, मक्खन गोला, मल्लिका, अंबिका, समेत 28 से 30 प्रकार की वैरायटी हमारे बागवान में आम की लगाई गई हैं.
किसान आते हैं खेती सीखने
प्रवीण सिंह की सफलता को देखकर क्षेत्र के अन्य किसान भी बागवानी की ओर आकर्षित हो रहे हैं. कई किसान उनके बाग का निरीक्षण करने पहुंचते हैं और उनसे खेती के तरीके सीखते हैं. किसान भी अपने अनुभव साझा करते हैं ताकि दूसरे लोग भी इस क्षेत्र में आगे बढ़ सकें. प्रवीण का मानना है कि गोंडा का मौसम और मिट्टी आम की खेती के लिए अनुकूल है. यदि किसान सही तकनीक अपनाएं और पौधों की नियमित देखभाल करें तो आम की बागवानी से अच्छी कमाई की जा सकती है. इसके साथ ही बागवानी किसानों की आय बढ़ाने का एक बेहतर विकल्प साबित हो सकती है. आम के बाग के जरिए अच्छी कमाई कर रहा है उनकी मेहनत और लगन ने यह साबित कर दिया है कि यदि खेती में नई सोच और सही योजना के साथ काम किया जाए, तो किसान अपनी आय बढ़ाकर आर्थिक रूप से मजबूत बन सकते हैं.उनकी सफलता की कहानी क्षेत्र के अन्य किसानों को भी नई राह दिखा रही है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
कौन हैं अंजलि कुलथे? जिससे इंस्पायर होकर कंगना रनौत ने बनाई ‘भारत भाग्य विधाता’
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कंगना रनौत की आने वाली फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ 26/11 के एक अनसुने हीरो की कहानी को बड़े पर्दे पर ला रही है. यह फिल्म मुंबई के कामा और अल्बलेस अस्पताल की नर्स अंजली कुलथे से इंस्पायर है, जिनके साहसिक कदमों ने 2008 के आतंकी हमलों के दौरान कई लोगों की जान बचाई थी.
कंगना रनौत की मच अवेटेड फिल्म ‘भारत भाग्य विधाता’ 12 जून को सिनेमाघरों में रिलीज होने वाली है. यह फिल्म 26 नवंबर 2008 की रात को आतंकवादी हमले पर बेस्ड है. इस दिन मुंबई में कई जगहों पर आतंकवादियों ने हमला किया था, जिसमें सीएसटी रेलवे स्टेशन और ताज महल पैलेस होटल भी शामिल थे. इसी दौरान हमलावर कामा अस्पताल के पास भी पहुंचे, जहां अंजली कुलथे ड्यूटी पर थीं. (फोटो साभारः यूट्यूब वीडियोग्रैब)

रिपोर्ट्स के मुताबिक, अंजलि कुलथे ने अस्पताल में करीब 20 प्रेग्नेंट महिलाओं की सुरक्षा में अहम भूमिका निभाई. उन्होंने घबराने के बजाय मरीजों को सुरक्षित जगह पर पहुंचाया और सुनिश्चित किया कि वे खतरे से दूर रहें. बहुत से लोग यह नहीं जानते कि 26/11 के दौरान अंजलि की भूमिका सिर्फ मरीजों की सुरक्षा तक सीमित नहीं थी. (फोटो साभारः यूट्यूब वीडियोग्रैब)

रिपोर्ट्स के अनुसार, बाद में अंजलि कुलथे हमलों की जांच में एक महत्वपूर्ण गवाह भी बनीं. उनकी गवाही से अधिकारियों को कामा अस्पताल में उस रात क्या हुआ था, यह समझने में मदद मिली. कई रिपोर्ट्स में बताया गया है कि जब आतंकवादी अस्पताल पहुंचे, तो अंजलि ने तुरंत कार्रवाई की. (फोटो साभारः यूट्यूब वीडियोग्रैब)
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अंजलि कुलथे ने करीब 20 गर्भवती महिलाओं और उनके रिश्तेदारों को एक छोटे कमरे में ले जाकर लाइट बंद कर दी और उन्हें कई घंटों तक छुपाए रखा, जब बाहर हमला चल रहा था. कामा अस्पताल आतंकवादियों के मुख्य निशाने पर नहीं था, जैसे ताज होटल, ओबेरॉय होटल या सीएसटी रेलवे स्टेशन. (फोटो साभारः यूट्यूब वीडियोग्रैब)

अजमल कसाब और अबू इस्माइल ने सीएसटी पर गोलीबारी के बाद अस्पताल के इलाके में एंट्री की. रेलवे स्टेशन पर फायरिंग के बाद दोनों आतंकवादी दक्षिण मुंबई में घूमते हुए हमला जारी रखने और सुरक्षा बलों से बचने की कोशिश कर रहे थे. कामा अस्पताल सीएसटी के पास होने के कारण वे वहां पहुंचे. (फोटो साभारः यूट्यूब वीडियोग्रैब)

करीब 18 साल बाद, अंजली कुलथे की कहानी ‘भारत भाग्य विधाता’ के जरिए सामने आ रही है, जिसमें कंगना रनौत एक नर्स की भूमिका निभा रही हैं. फिल्म में हमलों के दौरान कामा अस्पताल की घटनाओं को दिखाया गया है और उन नर्सों, वार्ड बॉय और अस्पताल स्टाफ को सम्मान दिया गया है, जिन्होंने मरीजों की सुरक्षा के लिए अपनी जान जोखिम में डाली. (फोटो साभारः यूट्यूब वीडियोग्रैब)

‘भारत भाग्य विधाता’ के ट्रेलर में 26/11 के उन हीरो को श्रद्धांजलि के रूप में पेश किया गया है, जिन्हें अक्सर नजरअंदाज कर दिया जाता है. जहां उस रात की सार्वजनिक यादें ताज, सीएसटी और अन्य प्रमुख जगहों पर हुए हमलों पर केंद्रित रहती हैं, वहीं फिल्म अस्पताल के अंदर हुई घटनाओं और उन लोगों की कहानी दिखाती है, जिन्होंने संकट के समय आगे बढ़कर लोगों की जान बचाई. (फोटो साभारः यूट्यूब वीडियोग्रैब)

इस फिल्म की कहानी आम लोगों के असाधारण कामों के बारे में है. अंजली कुलथे का नाम भले ही हर घर में न जाना जाता हो, लेकिन भारत की सबसे काली रातों में उनके साहसिक कदम आज भी याद किए जाते हैं. ‘भारत भाग्य विधाता’ के जरिए उनकी कहानी अब और ज्यादा लोगों तक पहुंचेगी. (फोटो साभारः यूट्यूब वीडियोग्रैब)
ललितपुर में बुंदेलखंड विकास सेना का प्रदर्शन: पेयजल अमृत योजना की सड़कों की दुर्दशा पर जताया रोष – Lalitpur News
ललितपुर में रविवार को बुंदेलखंड विकास सेना ने शहर की क्षतिग्रस्त सड़कों और पेयजल अमृत योजना के तहत खोदी गई सड़कों की घटिया मरम्मत को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। यह बैठक स्थानीय कंपनी बाग में संगठन प्रमुख हरीश कपूर टीटू की अध्यक्षता में संपन्न हुई। संगठन प्रमुख हरीश कपूर टीटू ने आरोप लगाया कि गोविंदसागर बांध से आजादपुरा होते हुए तालाबपुरा जाने वाली सड़क और करीमनगर से वर्णी चौराहा जाने वाली सड़क पर पाइपलाइन बिछाने के बाद मरम्मत के नाम पर निम्न गुणवत्ता वाली सामग्री का इस्तेमाल किया गया है। उन्होंने विशेष रूप से तालाबपुरा की कंक्रीट सड़क का जिक्र किया, जिसे पाइपलाइन बिछाने के लिए कटर मशीन के बजाय जेसीबी से 2-3 फुट की जगह 6-7 फुट तक लापरवाही से खोदा गया। इसके कारण महीनों तक धूल उड़ती रही और बाद में मरम्मत के दौरान बेस परत में घटिया सामग्री का उपयोग किया गया, जिससे सड़क कई जगह धंस गई है। वर्णी चौराहे से करीमनगर और तालाबपुरा से तुवन चौराहे की ओर जाने वाली सड़कों पर उड़ती धूल से लोग दमा, एलर्जी और चर्म रोगों का शिकार हो रहे हैं, जिससे सड़क किनारे रहने वाले नागरिकों और दुकानदारों का जीवन मुश्किल हो गया है। टीटू कपूर ने यह भी बताया कि गड्ढों के कारण कमर दर्द के मरीजों की संख्या में भारी वृद्धि हुई है, और लोग लगातार दुर्घटनाओं का शिकार हो रहे हैं। बुंदेलखंड विकास सेना ने मांग की है कि ललितपुर शहर की सभी क्षतिग्रस्त सड़कों को जल्द से जल्द दुरुस्त किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि सड़कों की स्थिति में सुधार नहीं हुआ, तो संगठन आंदोलन छेड़ने के लिए बाध्य होगा। बैठक में राजकुमार कुशवाहा, फूलचंद रजक, खुशाल बरार,कमल विश्वकर्मा,कदीर खां, भैयन कुशवाहा,संजू राजा, रामप्रकाश झा,गफूर खां, जगदीश झा, सुरेन्द्र सेन, प्रदीप साहू, लालचंद रजक, जितेन्द्र, कामता प्रसाद भट्ट, ओमकार राजा, मथुरा प्रसाद मिश्रा प्रकाश रैकवार,मनोज सैनी , सुरेश झा आदि मौजूद रहे।
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दरभंगा के सुपौल पुल घाट पर जाम से लोग परेशान: बीच सड़क पर लगाई सब्जी की दुकान, कहा- शिकायत के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ – Darbhanga News
दरभंगा में बिरौल प्रखंड क्षेत्र के सुपौल बाजार स्थित पुल घाट पर रोजाना लगने वाले भीषण जाम से ग्रामीण परेशान है। शिकायत के बाद भी समस्या का समाधान नहीं हुआ। परेशान होकर रविवार को आक्रोशित ग्रामीणों ने सड़क पर ही आलू और परवल की दुकान सजा दी। करीब एक घंटे तक आवागमन पूरी तरह बाधित रहा। सड़क के दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई। ग्रामीणों का आरोप है कि पुल घाट के दोनों किनारों पर वर्षों से मछली बाजार, सब्जी दुकान और फुटपाथी दुकानदारों का अतिक्रमण बना हुआ है। सड़क किनारे दुकानें सजने और सामान रखे जाने के कारण रोजाना घंटों जाम लगता है। सबसे अधिक परेशानी स्कूली बच्चों, मरीजों, महिलाओं और आम राहगीरों को उठानी पड़ती है। कई बार एंबुलेंस तक जाम में फंस जाती है, जिससे गंभीर मरीजों की जान पर भी बन आती है। कई बार शांति समिति की बैठकों में शिकायत की गई, लेकिन कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। ‘मजबूरन प्रदर्शन करना पड़ा’ स्थानीय विनोद सहनी उर्फ बलियाबी ने कहा कि प्रशासन की उदासीनता से लोग परेशान हो चुके हैं। बार-बार गुहार लगाने के बाद भी समस्या जस की तस बनी हुई है, इसलिए मजबूरी में सड़क पर सब्जी की दुकान लगाकर विरोध जताना पड़ा। हमारा उनका उद्देश्य किसी को परेशान करन नहीं है, बल्कि वर्षों पुरानी समस्या की ओर प्रशासन का ध्यान खींचना था। सड़क पर अतिक्रमण से बढ़ रही परेशानी मो. मुस्ताक शाह ने बताया कि पुल घाट पर दोनों ओर मछली विक्रेता और सब्जी विक्रेता सड़क किनारे ही दुकान लगा लेते हैं। इसके अलावा कई दुकानदार सड़क पर आलू, प्याज समेत अन्य सामान रख देते हैं। ठेला और फुटपाथी दुकानदार भी सड़क के बड़े हिस्से पर कब्जा कर लेते हैं। परिणामस्वरूप संकरी सड़क पर वाहनों की आवाजाही बाधित हो जाती है। अक्सर लंबा जाम लग जाता है। जब तक अतिक्रमण नहीं हटेगा, तब तक जाम की समस्या का स्थायी समाधान संभव नहीं है। समस्या के समाधान का मिला आश्वासन सड़क जाम की सूचना मिलते ही एसडीपीओ प्रभाकर तिवारी के निर्देश पर पुलिस मौके पर पहुंची। अधिकारियों ने ग्रामीणों से बातचीत कर उन्हें शांत कराया। सड़क खाली करकार आवागमन बहाल कराया। प्रदर्शनकारियों को जल्द से जल्द समस्या के समाधान का आश्वासन मिला है। कार्रवाई के दिए निर्देश इधर, बिरौल अनुमंडल पदाधिकारी शशांक राज ने मामले की गंभीरता को देखते हुए नगर पंचायत के कार्यपालक पदाधिकारी को आवश्यक निर्देश दिएं। उन्होंने भरोसा दिलाया कि जल्द ही नगर पंचायत, अंचल प्रशासन और पुलिस के साथ समन्वय स्थापित कर समस्या के स्थायी समाधान की दिशा में कार्रवाई की जाएगी।
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कमर के इलाज में बिगड़ा मरीज का पैर: जीवन ज्योति अस्पताल में लापरवाही का आरोप; परिजनों ने किया हंगामा – Sheopur News
शहर के शिवपुरी रोड स्थित जीवन ज्योति अस्पताल में भर्ती मरीज के परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही का आरोप लगाया है। परिजनों का दावा है कि कमर में चोट के इलाज के लिए भर्ती मरीज सूबेदार बंजारा का पैर इलाज शुरू होने से पहले ही खराब हो गया। इस घटना को लेकर परिजनों ने अस्पताल में हंगामा किया। परिजनों के अनुसार, दोहरी वाबड़ी निवासी सूबेदार बंजारा को कमर की चोट के बाद अस्पताल में भर्ती कराया गया था। अस्पताल प्रबंधन ने इलाज के लिए 40 हजार रुपए मांगे थे। मरीज के बेटे ने आरोप लगाया कि आयुष्मान भारत योजना की सुविधा होने के बावजूद अस्पताल ने आयुष्मान कार्ड को वैध नहीं बताकर नकद भुगतान की मांग की। परिजनों का कहना है कि पैसे देने के बाद भी मरीज की स्थिति में सुधार नहीं हुआ, बल्कि उनका पैर और खराब हो गया। डॉक्टर बोले- मरीज पहले से गंभीर हालत में था परिजनों ने बताया कि कमर की चोट के लिए लाए गए मरीज के पैर की समस्या इलाज के दौरान गंभीर हो गई। जब उन्होंने अस्पताल प्रबंधन से शिकायत की, तो अस्पताल संचालक डॉ. रवि तोमर ने मरीज को किसी अन्य अस्पताल में इलाज कराने की सलाह दी। इस सलाह से परिजन और अधिक आक्रोशित हो गए। वहीं, डॉ. रवि तोमर ने इस मामले पर अपनी सफाई दी। उन्होंने कहा कि जब मरीज को अस्पताल में भर्ती किया गया था, तब उसके शरीर में खून की कमी थी। साथ ही, मरीज का आयुष्मान कार्ड अपडेटेड नहीं था। डॉक्टर बोले- बेहतर इलाज के लिए दूसरे अस्पताल भेजा डॉ. तोमर ने यह भी बताया कि मरीज के पैर में पहले से चोट थी और उससे संबंधित कुछ आवश्यक जांच रिपोर्ट श्योपुर में उपलब्ध नहीं थीं, जिसके कारण बेहतर इलाज के लिए उन्हें अन्य स्थान पर जाने की सलाह दी गई थी। परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर लापरवाही बरतने और अनावश्यक रूप से पैसे मांगने का आरोप दोहराया है। फिलहाल, दोनों पक्षों के अलग-अलग दावे सामने आने के बाद यह मामला शहर में चर्चा का विषय बना हुआ है।
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