डीग शहर की लोहा मंडी में यातायात जाम की समस्या से निजात दिलाने के लिए नगर परिषद ने अतिक्रमण हटाने की तैयारी तेज कर दी है। इस सप्ताह के अंत तक अतिक्रमणों का चिन्हांकन कर निशान लगाए जाएंगे, जबकि गुरु पूर्णिमा मेले के समापन के बाद अतिक्रमण हटाने का अभियान शुरू होगा। उल्लेखनीय है कि मास्टर प्लान-2031 के तहत घंटाघर से लोहा मंडी होते हुए इकलहरा तिराहे तक 80 फीट चौड़ी सड़क प्रस्तावित है। वर्तमान में इस मार्ग पर कई स्थानों पर अतिक्रमण के कारण सड़क संकरी है, जिससे दिनभर वाहनों का दबाव और जाम की स्थिति बनी रहती है। 125 लोगों को 2 बार जारी हो चुके नोटिस
नगर परिषद आयुक्त कुलदीप सिंह ने बताया कि लोहा मंडी क्षेत्र के लगभग 125 लोगों को पूर्व में 2 बार नोटिस जारी किए जा चुके हैं। इन नोटिसों में संबंधित लोगों से अतिक्रमण हटाने और अपने वैध स्वामित्व संबंधी दस्तावेज प्रस्तुत करने को कहा गया था।
अब तक 100 से अधिक लोगों ने नगर परिषद कार्यालय में अपने दस्तावेज जमा कराए हैं। इन दस्तावेजों के परीक्षण के आधार पर अतिक्रमणों का चिन्हांकन किया जाएगा। सप्ताहांत तक निशान लगाने की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। सड़क सीमा आने वाले हिस्सों पर होगी कार्रवाई
आयुक्त सिंह ने स्पष्ट किया कि अभियान के दौरान केवल उन्हीं हिस्सों पर कार्रवाई की जाएगी जो सरकारी भूमि या प्रस्तावित सड़क सीमा में अतिक्रमण के दायरे में आते हैं। पूरी प्रक्रिया नियमानुसार और दस्तावेजों के गहन परीक्षण के बाद ही अमल में लाई जाएगी। नगर परिषद का मानना है कि अतिक्रमण हटने के बाद सड़क की चौड़ाई बढ़ने से यातायात सुगम होगा। इससे स्थानीय व्यापारियों, राहगीरों और वाहन चालकों को जाम की समस्या से राहत मिलेगी, जिससे शहर की यातायात व्यवस्था में सुधार होगा।
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लोहा मंडी में जल्द शुरू होगा अतिक्रमण हटाओ अभियान: गुरु पूर्णिमा मेले के बाद शुरू होगी कार्रवाई, 80 फीट चौड़ी होगी सड़क – Deeg News
वाराणसी में चौथे दिन CJP के विरोध को लेकर अलर्ट: BHU कैंपस के गेट पर पुलिस तैनात, स्टूडेंट्स बोले- कड़े कानून बनाए सरकार, धमेंद्र प्रधान इस्तीफा दे – Varanasi News
काशी हिंदू विश्वविद्यालय परिसर में लगातार चौथे दिन भी सुरक्षा व्यवस्था कड़ी रही। विश्वविद्यालय के सिंहद्वार सहित पूरे परिसर में पुलिस और प्रॉक्टोरियल बोर्ड की टीमें पूरी तरह सतर्क रहीं। संवेदनशील स्थानों पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया, जबकि ड्रोन कैमरों से पूरे परिसर की निगरानी की गई। प्रधानमंत्री जनसंपर्क कार्यालय के आसपास भी सुरक्षा बढ़ा दी गई और आने-जाने वाले प्रत्येक व्यक्ति पर विशेष नजर रखी गई। विश्वविद्यालय प्रशासन और पुलिस किसी भी अप्रिय स्थिति से बचने के लिए लगातार निगरानी बनाए हुए हैं। आज CJP से बात करेगी सरकार पेपर लीक के मुद्दे पर चल रहे आंदोलन के बीच केंद्र सरकार और CJP (कॉकरोच जनता पार्टी) के बीच दूसरी दौर की वार्ता होने जा रही है। इधर, सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक ने अपना 26 दिनों से जारी अनशन समाप्त कर दिया। देर रात लगभग 12:30 बजे केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा और जितेंद्र सिंह मेदांता अस्पताल पहुंचे, जहां उन्होंने वांगचुक को जूस पिलाकर उनका अनशन समाप्त कराया। बिना अनुमति प्रदर्शन पर होगी कार्रवाई एसीपी भेलूपुर गौरव कुमार ने स्पष्ट किया कि विश्वविद्यालय परिसर अथवा उसके आसपास किसी भी प्रकार के धरना-प्रदर्शन की अनुमति नहीं दी गई है। उन्होंने कहा कि यदि कोई व्यक्ति या संगठन बिना अनुमति प्रदर्शन करता है तो उसके विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। प्रशासन का उद्देश्य कानून-व्यवस्था बनाए रखना और किसी भी अप्रिय घटना को रोकना है। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भी सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए हैं। प्रॉक्टोरियल बोर्ड की टीमें प्रमुख चौराहों और संवेदनशील स्थानों पर लगातार गश्त कर रही हैं। पुलिस के साथ स्थानीय खुफिया इकाई (LIU) की टीमें काशी विश्वनाथ मंदिर, मधुबन पार्क और अन्य महत्वपूर्ण स्थलों पर निगरानी बनाए हुए हैं। परिसर में प्रवेश करने वाले लोगों की भी सघन जांच की जा रही है। छात्रों में बढ़ी नाराजगी दूसरी ओर, BHU के छात्रों में शिक्षा व्यवस्था और लगातार सामने आ रहे पेपर लीक मामलों को लेकर नाराजगी देखी गई। छात्रों का कहना है कि बार-बार पेपर लीक होने से लाखों विद्यार्थियों का भविष्य प्रभावित हो रहा है। उनका आरोप है कि हर घटना के बाद जांच और कार्रवाई की घोषणा तो होती है, लेकिन दोषियों के खिलाफ प्रभावी कदम नहीं उठाए जाते। पेपर लीक पर कड़े कानून की मांग वाराणसी के भगवानपुर क्षेत्र में नीट, जेईई और अन्य प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे छात्रों तथा BHU के पूर्व छात्रों ने ‘पेपर लीक की समस्या और समाधान’ विषय पर संवाद आयोजित किया। कार्यक्रम में छात्रों ने संसद से पेपर लीक रोकने के लिए सख्त और प्रभावी कानून बनाने की मांग की। BHU छात्रसंघ के पूर्व महामंत्री डॉ. सूबेदार सिंह ने कहा कि शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के कार्यकाल में दो बार नीट परीक्षा का पेपर लीक होने का आरोप सामने आया है। उन्होंने शिक्षा मंत्री को तत्काल पद से हटाने की मांग की। हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि केवल मंत्री बदलने से समस्या का स्थायी समाधान नहीं होगा। डॉ. सिंह का कहना था कि पेपर लीक के पीछे सक्रिय नेटवर्क और इसमें शामिल संस्थानों पर कठोर कार्रवाई किए बिना इस समस्या का समाधान संभव नहीं है। उन्होंने संसद से मांग की कि पेपर लीक कराने वाले व्यक्तियों और संस्थाओं के खिलाफ कड़े दंड का प्रावधान करने वाला प्रभावी कानून बनाया जाए।
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पुलिस पर पथराव-तोड़फोड़ करने वाले 59 उपद्रवी चिन्हित: दरभंगा में आज भी प्रदर्शन की तैयारी, अलर्ट मोड में प्रशासन; 5 हिरासत में, ड्रोन कैमरे से निगरानी – Darbhanga News
दरभंगा में गुरुवार को प्रदर्शन के दौरान जमकर हंगामा हुआ। लहेरियासराय थाना क्षेत्र के लोहिया चौक (हाजमा चौक) के पास प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर ईंट-पत्थरों से हमला कर दिया। इसके बाद हालात को नियंत्रित करने के लिए पुलिस को लाठीचार्ज और आंसू गैस के गोले दागने पड़े। कुछ ही देर में पूरा इलाका रणक्षेत्र में तब्दील हो गया। मौके पर अफरा-तफरी मच गई। घटना की सूचना मिलते ही डीआईजी मनोज तिवारी, जिलाधिकारी कौशल कुमार और वरीय पुलिस अधीक्षक जगुनाथ रेड्डी मौके पर पहुंचे। उनके नेतृत्व में भारी संख्या में पुलिस बल की तैनाती की गई और स्थिति को नियंत्रित किया गया। आज भी प्रशासन अलर्ट जिले में शुक्रवार को भी पहले से प्रदर्शन का कार्यक्रम निर्धारित है। इसे देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह सतर्क है। संवेदनशील इलाकों में अतिरिक्त पुलिस बल की तैनाती की गई है। ड्रोन कैमरों के माध्यम से लगातार निगरानी रखी जा रही है। प्रशासन ने साफ कर दिया है कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन की अनुमति है, लेकिन हिंसा, तोड़फोड़ और कानून व्यवस्था भंग करने का प्रयास करने वालों के खिलाफ तत्काल और कड़ी कार्रवाई की जाएगी। पुलिस, मीडिया और आम लोगों पर पथराव दरभंगा पुलिस के मुताबिक, प्रदर्शन के दौरान कुछ उपद्रवी तत्वों ने पुलिस बल पर जानलेवा हमला किया। इस दौरान कई महिला और पुरुष पुलिसकर्मी घायल हुए। उपद्रवियों ने सरकारी संपत्ति को भी नुकसान पहुंचाया। मौके पर मौजूद मीडिया कर्मियों और आम नागरिकों पर भी ईंट-पत्थर फेंके। हालात बिगड़ने पर पुलिस ने नियंत्रित बल का प्रयोग करते हुए भीड़ को तितर-बितर किया। 59 उपद्रवी चिन्हित, पांच हिरासत में पुलिस ने अब तक 59 उपद्रवियों की पहचान कर ली है, जबकि पांच लोगों को हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पूरे घटनाक्रम की ड्रोन कैमरे, वीडियोग्राफी, सीसीटीवी फुटेज और सोशल मीडिया के माध्यम से जांच की जा रही है। अन्य आरोपितों की पहचान कर उनकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी जारी है। सोशल मीडिया पर जारी की तस्वीरें दरभंगा पुलिस ने उपद्रवियों की तस्वीरें सोशल मीडिया पर जारी कर आम लोगों से उनकी पहचान करने में सहयोग की अपील की है। पुलिस ने सूचना देने के लिए हेल्पलाइन नंबर भी जारी किए हैं। सूचना देने वाले की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाएगी। 1. वरीय पुलिस अधीक्षक कार्यालय नियंत्रण कक्ष: 87573 69444 2. लहेरियासराय थानाध्यक्ष: 9031827317 आयोजकों पर भी होगी कार्रवाई: डीएम जिलाधिकारी कौशल कुमार ने कहा, ‘स्थिति अब पूरी तरह नियंत्रण में है, लेकिन प्रदर्शन के आयोजक भी भीड़ को नियंत्रित रखने में विफल रहे। प्रशासन ऐसे आयोजकों की भूमिका की भी जांच कर रहा है। प्रदर्शन की अनुमति लेने वाले आयोजकों की भी जिम्मेदारी होती है कि कार्यक्रम शांतिपूर्ण रहे। यदि उनकी लापरवाही या भूमिका सामने आती है तो उनके खिलाफ भी कठोर कानूनी कार्रवाई की जाएगी।’ डीएम ने स्पष्ट कहा कि शांतिपूर्ण प्रदर्शन सभी का लोकतांत्रिक अधिकार है, लेकिन कानून हाथ में लेने, सरकारी संपत्ति को नुकसान पहुंचाने और पुलिस पर हमला करने वालों को किसी भी कीमत पर बख्शा नहीं जाएगा। एसएसपी बोले- हर उपद्रवी तक पहुंचेगी पुलिस वरीय पुलिस अधीक्षक जगुनाथ रेड्डी ने कहा, ‘जिन लोगों ने पुलिस पर हमला किया, सरकारी संपत्ति को क्षति पहुंचाई और पथराव किया है, उन सभी की पहचान की जा रही है। ड्रोन फुटेज, वीडियोग्राफी और अन्य तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर प्रत्येक आरोपी के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी। कानून व्यवस्था बिगाड़ने वालों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई जारी रहेगी और किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा।’
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वैकल्पिक नमाज स्थल पर नहीं बनी सहमति: आज सुप्रीम कोर्ट में भी होगी सुनवाई; मुस्लिम समाज ने चालीस पीर दरगाह वाली जगह पर नमाज से किया इनकार – Dhar News
धार में शुक्रवार की जुमे की नमाज को लेकर स्थिति अब भी स्पष्ट नहीं हो सकी है। गुरुवार देर रात जिला प्रशासन और मुस्लिम समुदाय के प्रतिनिधियों के बीच करीब दो घंटे तक बैठक चली, लेकिन नमाज के वैकल्पिक स्थान को लेकर कोई सहमति नहीं बन पाई। ऐसे में शुक्रवार की नमाज और इस मुद्दे पर होने वाली सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुआ विवाद 14 जुलाई 2026 को सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार को निर्देश दिया था कि प्रत्येक शुक्रवार दोपहर 1 से 3 बजे के बीच मुस्लिम समुदाय को नमाज के लिए वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराया जाए। इसके बाद जिला प्रशासन ने ग्राम मालीवाड़ा स्थित चालीस पीर दरगाह के पास स्थान निर्धारित किया था, लेकिन मुस्लिम समुदाय ने इसे स्वीकार करने से इनकार कर दिया। मुस्लिम समाज ने दोबारा सुप्रीम कोर्ट का रुख किया वहीं मुस्लिम पक्ष का कहना था कि प्रशासन द्वारा उपलब्ध कराया गया स्थान भोजशाला से करीब दो किलोमीटर दूर है और यह सुप्रीम कोर्ट के आदेश की भावना के अनुरूप नहीं है। इसके बाद मामला दोबारा सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, जहां अदालत ने केंद्र और राज्य सरकार को भोजशाला के निकट या उससे सटे क्षेत्र में वैकल्पिक स्थान उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। प्रशासन का नया प्रस्ताव भी ठुकराया सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद जिला प्रशासन ने गुरुवार रात मुस्लिम समुदाय को चर्चा के लिए बुलाया और अन्य संभावित स्थानों का प्रस्ताव रखा। हालांकि, मुस्लिम समुदाय ने इन प्रस्तावों को भी अस्वीकार कर दिया। मुस्लिम समाज का कहना है कि उन्हें उनकी पारंपरिक भूमि पर ही नमाज अदा करने की अनुमति दी जाए। उनका दावा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में भी नमाज के लिए भोजशाला के नजदीक स्थान उपलब्ध कराने की बात कही गई है।
आज मस्जिदों में होगी जुमे की नमाज मुस्लिम समाज के सदर अब्दुल समद ने कहा कि प्रशासन के साथ सुबह 9:30 बजे से 11:30 बजे तक बैठक चली, लेकिन कोई समाधान नहीं निकला। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन नहीं कर रहा और समुदाय को गुमराह किया जा रहा है। उन्होंने स्पष्ट किया कि चालीस पीर दरगाह के पास निर्धारित स्थान पर नमाज नहीं पढ़ी जाएगी। इसके बजाय जुमे की नमाज आसपास की मस्जिदों में अदा की जाएगी। सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर टिकी निगाहें इस पूरे मामले में शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट में भी सुनवाई प्रस्तावित है। ऐसे में प्रशासनिक निर्णय और अदालत के अगले आदेश पर सभी की नजर बनी हुई है।
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ब्लिंकिट से पोस्टर मंगा रहे प्रदर्शनकारी: दिखाया- पीएम बोल रहे देश ऊपर जा रहा, जनता समुद्र में डूब रही
जंतर-मंतर पर प्रोटेस्ट के लिए प्रदर्शनकारी नए-नए तरीके ईजाद कर रहे हैं। लोग ब्लिंकिट से पोस्टर मंगा रहे हैं। एक पोस्टर में कार्टून बना है, जिसमें एक शिप पर सवार पीएम कह रहे हैं कि देश ऊपर जा रहा है। शिप में खड़ लोग समुद्र में डूबते दिख रहे हैं। खबर का वीडियो देखने के लिए कवर इमेज पर क्लिक करें…
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बिना सांचे के घर पर बनाएं हलवाई जैसा क्रिस्पी घीवर! बस फॉलो करें ये आसान स्टेप्स
How To Make Ghevar At Home : सावन(Sawan 2026) का महीना शुरू होते ही हर घर में पारंपरिक मिठाइयों की खुशबू महकने लगती है. तीज(Teej) और रक्षाबंधन(Raksha bandhan) का त्योहार बिना घेवर (Ghevar) के बिल्कुल अधूरा माना जाता है. सोने जैसी चमक, चाशनी की मिठास और मक्खन जैसी रबड़ी से सजा जालीदार घेवर देखते ही मुंह में पानी आ जाता है. अक्सर लोग सोचते हैं कि बाजार जैसा जालीदार और करारा घेवर सिर्फ हलवाई के पास मौजूद विशेष सांचों (Moulds) से ही बन सकता है.
लेकिन सच यह है कि आप अपने घर की साधारण पतिली या सॉसपैन में भी बिल्कुल वैसा ही परफेक्ट घेवर तैयार कर सकते हैं. अगर आप भी इस बार घर पर ही शुद्ध और क्रिस्पी घेवर बनाने की सोच रहे हैं, तो बिना किसी सांचे के बस इन 5 आसान स्टेप्स को फॉलो करें.
तैयारी का समय: 15 मिनट
पकाने का समय: 30 मिनट
कितने लोगों के लिए: 4-5
सामग्री (Ingredients)
मैदा: 2 कप
देशी घी: 4 चम्मच (जमा हुआ)
बर्फ के टुकड़े: 4-5
ठंडा दूध: 1/2 कप
ठंडा पानी: 3 से 4 कप
नींबू का रस: 1 चम्मच
तलने के लिए: घी या रिफाइंड तेल
चाशनी के लिए: 1.5 कप चीनी और 1 कप पानी (1 तार की चाशनी)
5 आसान स्टेप्स में बनाएं हलवाई जैसा घेवर-
हलवाई जैसे जालीदार घेवर का सबसे बड़ा राज़ उसका बैटर होता है. एक बर्तन या मिक्सी के जार में 4 चम्मच देशी घी और बर्फ के टुकड़े डालें. इसे तब तक फेंटें जब तक घी सफेद और मक्खन जैसा क्रीमी न हो जाए. अब इसमें ठंडा दूध मिलाएं. इसके बाद थोड़ा-थोड़ा करके मैदा और एकदम बर्फ जैसा ठंडा पानी डालते हुए बिना गुठलियों वाला पतला (स्मूथ) घोल तैयार कर लें. अंत में 1 चम्मच नींबू का रस मिलाएं, जो घेवर को क्रिस्पी बनाने में मदद करता है.
स्टेप 2: बर्तन और तेल/घी का तापमान
घेवर बनाने के लिए सांचे की जगह गहरे और भारी तले वाले सॉसपैन या भगोने (Patila) का इस्तेमाल करें. बर्तन में आधा हिस्सा घी या तेल भरकर तेज आंच पर अच्छी तरह गर्म करें. याद रखें, तेल का बहुत गर्म होना और बैटर का बिल्कुल ठंडा होना ही घेवर में परफेक्ट जाली बनाता है.
स्टेप 3: धार बनाकर बैटर डालना (जाली बनने की प्रक्रिया)
अब किसी सॉस बोतल या गहरी कलछी की मदद से ठंडे बैटर को गर्म तेल के ठीक बीच में थोड़ी ऊंचाई से पतली धार बनाकर गिराएं. जैसे ही बैटर तेल में जाएगा, उसमें झाग उठेगा. झाग शांत होने पर किसी बेलन या पतली लकड़ी से बीच में जगह (छेद) बनाएं और फिर से थोड़ा बैटर डालें. यह प्रक्रिया 10-12 बार दोहराएं.
स्टेप 4: सुनहरा और क्रिस्पी सेंकना
जब घेवर किनारे छोड़ने लगे और उसका रंग हल्का सुनहरा (Golden) होने लगे, तो बेलन की मदद से उसे धीरे से दबाकर ऊपर से भी गर्म तेल में सेक लें. जब घेवर पूरी तरह क्रिस्पी और गोल्डन हो जाए, तो उसे सावधानी से निकालकर किसी जाली या छननी पर रखें ताकि अतिरिक्त तेल निकल जाए.
स्टेप 5: चाशनी डालें और गार्निशिंग करें
एक तार की गर्म चाशनी बनाएं और घेवर के ऊपर चम्मच से धीरे-धीरे डालें ताकि जाली चाशनी को सोख ले. ऊपर से पकी हुई गाढ़ी रबड़ी, कटे हुए बादाम-पिस्ता और केसर की पत्तियों से सजाएं.
मास्टर टिप: बैटर बनाते समय पानी और दूध हमेशा चिल्ड (बहुत ठंडा) इस्तेमाल करें. अगर तलते वक्त बैटर गर्म होने लगे, तो बैटर वाले बर्तन को बर्फ के कटोरे के ऊपर रख दें.
अमेरिका ने भारत पर 10% एक्स्ट्रा टैरिफ लगाया: जबरन मजदूरी से बने सामान को लेकर कार्रवाई, 60 देशों पर एक्शन
अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले सामान पर 10% एक्स्ट्रा टैरिफ लगाने की घोषणा की है। यह फैसला शुक्रवार से लागू हो गया। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के निर्देश पर अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) ने फोर्स्ड लेबर (जबरन मजदूरी) से बने सामान के आयात को लेकर 60 देशों पर कार्रवाई की है। अमेरिका ने इन देशों पर 10% से 12.5% तक अतिरिक्त टैरिफ लगाया है। भारत उन 17 देशों में शामिल है, जिन पर 10% अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया है। वहीं बाकी 43 देशों पर 12.5% अतिरिक्त टैरिफ लगाया गया है। अमेरिका ने यह कार्रवाई ट्रेड एक्ट-1974 की धारा 301 के तहत की है। भारत के अलावा ब्रिटेन, कनाडा, इंडोनेशिया, बांग्लादेश, मेक्सिको, पाकिस्तान और श्रीलंका समेत कई देशों को 10% टैरिफ वाले समूह में रखा गया है। अमेरिका का कहना है कि इन देशों ने फोर्स्ड लेबर से बने सामान पर प्रतिबंध लगाया है या ऐसा करने की दिशा में कदम उठाए हैं। भारत के किन सेक्टर्स पर सबसे ज्यादा असर पड़ सकता है अमेरिका भारत का सबसे बड़ा निर्यात बाजार है। ऐसे में अतिरिक्त 10% टैरिफ से उन सेक्टरों पर ज्यादा असर पड़ सकता है, जिनकी अमेरिकी बाजार पर निर्भरता अधिक है। इनमें टेक्सटाइल और गारमेंट्स, जेम्स एंड ज्वेलरी, लेदर उत्पाद, कृषि एवं फूड प्रोडक्ट्स, इंजीनियरिंग गुड्स, केमिकल्स और कुछ मैन्युफैक्चरिंग आइटम शामिल हैं। अतिरिक्त टैरिफ लगने से भारतीय उत्पाद अमेरिकी बाजार में महंगे हो जाएंगे। इससे खरीदार दूसरे देशों के विकल्प तलाश सकते हैं या भारतीय निर्यातकों पर कीमत घटाने का दबाव बढ़ सकता है। भारत को 12.5% की जगह 10% टैरिफ क्यों मिला शुरुआत में भारत पर 12.5% अतिरिक्त टैरिफ लगाने का प्रस्ताव था। हालांकि बाद में भारत सरकार की ओर से श्रम मानकों और सप्लाई चेन की निगरानी से जुड़े कुछ नीतिगत सुधारों तथा अमेरिका के साथ लगातार बातचीत के बाद इसे घटाकर 10% कर दिया गया। फेडरल नोट में कहा गया है कि जून में प्रस्तावित टैरिफ घोषित होने के बाद भारत ने 14 जून को अपनी विदेशी व्यापार नीति में संशोधन किया। अमेरिका का मानना था कि भारत ने श्रमिक अधिकारों की निगरानी, नियमों के पालन और सप्लाई चेन में पारदर्शिता बढ़ाने की दिशा में कुछ सकारात्मक कदम उठाए हैं। इसी आधार पर प्रस्तावित टैरिफ में 2.5% की राहत दी गई। 10% टैरिफ लागू रहने का मतलब है कि भारत को पूरी छूट नहीं मिली है। यानी अमेरिका अब भी चाहता है कि भारत श्रम मानकों और फोर्स्ड लेबर से जुड़े नियमों को और प्रभावी ढंग से लागू करे। हालांकि 12.5% के बजाय 10% टैरिफ से भारतीय निर्यातकों पर पड़ने वाला अतिरिक्त लागत का बोझ कुछ कम होगा। फोर्स्ड लेबर क्या है, जिस पर अमेरिका सख्ती कर रहा है फोर्स्ड लेबर का मतलब ऐसी मजदूरी से है, जिसमें किसी व्यक्ति से उसकी इच्छा के खिलाफ काम कराया जाए। इसमें धमकी, कर्ज, हिंसा, दस्तावेज जब्त करना, वेतन रोकना या नौकरी छोड़ने की आजादी न देना जैसी परिस्थितियां शामिल होती हैं। अंतरराष्ट्रीय श्रम संगठन (ILO) इसे मानवाधिकारों का गंभीर उल्लंघन मानता है। अमेरिका का कहना है कि अगर किसी देश से आयात होने वाला सामान फोर्स्ड लेबर से जुड़ा पाया जाता है, तो उस पर अतिरिक्त टैरिफ या आयात प्रतिबंध लगाया जा सकता है। इसका उद्देश्य कंपनियों पर दबाव बनाना है कि उनकी सप्लाई चेन में जबरन मजदूरी का इस्तेमाल न हो। सेक्शन 301 क्या है, जिसके तहत अमेरिका ने टैरिफ बढ़ाया सेक्शन 301 अमेरिका के ट्रेड एक्ट-1974 का एक प्रावधान है। इसके तहत अमेरिकी सरकार को यह अधिकार मिलता है कि अगर किसी देश की व्यापारिक नीतियां अमेरिकी कारोबार या उद्योगों के लिए अनुचित, भेदभावपूर्ण या नुकसानदायक मानी जाएं, तो वह उसके खिलाफ कार्रवाई कर सकती है। इस कार्रवाई में अतिरिक्त टैरिफ लगाना, आयात पर प्रतिबंध लगाना या दूसरे व्यापारिक प्रतिबंध शामिल हो सकते हैं। जांच की जिम्मेदारी अमेरिकी ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव (USTR) की होती है। जांच के दौरान संबंधित देश से जवाब मांगा जाता है और जरूरत पड़ने पर बातचीत भी की जाती है। इसके बाद अमेरिकी राष्ट्रपति की मंजूरी से कार्रवाई लागू होती है। पहले भी कई देशों और उद्योगों पर हो चुकी है कार्रवाई अमेरिका पिछले कुछ वर्षों में फोर्स्ड लेबर के मुद्दे पर कई देशों के खिलाफ कार्रवाई कर चुका है। खासतौर पर चीन के शिनजियांग क्षेत्र से आने वाले कॉटन, टमाटर, सोलर पैनल और उनसे जुड़े उत्पादों पर कड़े आयात प्रतिबंध लगाए गए थे। इसके अलावा समुद्री खाद्य, पाम ऑयल, रबर, कोको, टेक्सटाइल और खनन जैसे उद्योग भी अमेरिकी जांच के दायरे में रहे हैं।
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US Tariff : अमेरिका ने भारत सहित 60 देशों पर लगाया 10 फीसदी टैरिफ
Last Updated:
US New Tariff : नई टैरिफ व्यवस्था अमेरिका के लगभग 99.4% आयात-व्यापार को कवर करेगी.यह कदम फरवरी में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप प्रशासन के पुराने शुल्कों को रद्द किए जाने के बाद उठाया गया है.
नए टैरिफ आज से लागू हा गए हैं.
नई दिल्ली. अमेरिका ने भारत समेत दुनिया के 60 व्यापारिक देशों पर नए टैरिफ लगाने का ऐलान किया है. राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की ओर से इस साल की शुरुआत में लागू किए गए10% अस्थाई टैरिफ गुरुवार आधी रात को समाप्त होने के बाद शक्रवार आधी रात से नया टैरिफ लागू हो गया है. अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) ने यह जानकारी देते हए बताया कि शुक्रवार12:01 बजे से प्रभावी हो जाएंगे. भारत सहित 60 देशों पर न्यूनतम 10% टैरिफ लगाया गया है, जबकि कुछ देशों के लिए यह दर 12.5% तक रखी गई है. भारत को 10% टैरिफ वाली श्रेणी में रखा गया है.
अमेरिका बंधुआ मजदूरी (फोर्स्ड लेबर) से जुड़े आयात के मुद्दे पर भारत समेत 60 प्रमुख व्यापारिक साझेदारों के खिलाफ ‘धारा 301’ के तहत यह टैरिफ लगाया है.पिछले महीने यूएसटीआर कार्यालय ने इस मुद्दे पर 10 फीसदी और 12.5 फीसदी तक अतिरिक्त शुल्क लगाने का प्रस्ताव दिया था.
बंधुआ मजदूरी पर कोई ढिलाई नहीं
नए शुल्कों का ऐलान करते हुए अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि जैमीसन ग्रीयर ने कहा, ” अमेरिका में लगभग एक सदी से जबरन श्रम से बने उत्पादों के आयात पर प्रतिबंध है. हम इसका सख्ती से पालन कराते हैं. अब समय आ गया है कि हमारे व्यापारिक साझेदार भी ऐसा ही करें.”
किस देश पर कितना टैरिफ
10% टैरिफ दर: यह दर उन देशों पर लागू होगी जिन्होंने अपने यहां जबरन श्रम पर कड़े प्रतिबंधात्मक कानून बनाए हैं. इसमें भारत, कनाडा, यूरोपीय संघ (EU) और ब्रिटेन (UK) शामिल हैं.
12.5% शुल्क: चीन और जापान सहित अन्य व्यापारिक साझेदारों पर 12.5% की उच्च दर से शुल्क लगाया जाएगा.
भारत ने किया है पुरजोर विरोध
भारत ने अमेरिकी सरकार की जबरन श्रम की जांचों का विरोध करते हुए कहा था कि ऐसे मुद्दों पर द्विपक्षीय व्यापार समझौते के तहत चर्चा की जा सकती है, जिस पर दोनों देशों के बीच बातचीत जारी है. अमेरिका भारत का दूसरा सबसे बड़ा व्यापार साझेदार और निर्यात का प्रमुख गंतव्य है.
जेल में बंद रिटायर्ड IAS सुबोध अग्रवाल की बढ़ी मुश्किलें: ACB ने सरकार को भेजे सबूत, केस की परमिशन मांगी; 979 करोड़ के घोटाले हुए थी गिरफ्तारी – Rajasthan News
जल जीवन मिशन घोटाले में जेल में बंद पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल की मुश्किलें बढ़ गई हैं। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो (एसीबी) ने सुबोध अग्रवाल के खिलाफ केस चलाने (अभियोजन स्वीकृति) के लिए एप्लीकेशन दी है।
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ACB के अफसरों ने इस घोटाले में सुबोध अग्रवाल के खिलाफ सबूत की फाइल कार्मिक विभाग (DOP) भेजी है। सूत्रों का कहना है कि इस मामले में फैसला मुख्यमंत्री स्तर पर होगा। पढ़िए पूरी रिपोर्ट…
20 जुलाई को एप्लीकेशन दी
कार्मिक विभाग (DOP)के एक अधिकारी ने नाम नहीं छापने की शर्त पर बताया- एसीबी ने 20 जुलाई को अभियोजन स्वीकृति की एप्लीकेशन दी है।
एसीबी के सबूत और डॉक्यूमेंट्स देखने के बाद विभाग नोटशीट तैयार करेगा। इसके बाद मामले की फाइल मुख्यमंत्री कार्यालय को भेजी जाएगी। स्वीकृति देने या न देने का निर्णय मुख्यमंत्री लेंगे।
दरअसल, एसीबी ने जल जीवन मिशन में 979.27 करोड़ के फर्जी टेंडर मामले में रिटायर्ड आईएएस सुबोध अग्रवाल के खिलाफ 30 अक्टूबर 2024 को एफआईआर दर्ज की थी।
इसके बाद 9 अप्रैल को सुबोध अग्रवाल की गिरफ्तारी हुई थी। इससे पहले 4 जून को इस पूरे घोटाले की चार्जशीट एसीबी ने कोर्ट में पेश कर दी थी।

भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम 1988 (संशोधित 2018) की धारा 19 के तहत दागी कार्मिकों पर अभियोजन स्वीकृति देने के लिए अधिकतम 4 महीने की समय-सीमा निर्धारित है।
सरकार ने 13 अप्रैल 2012 को परिपत्र जारी कर सक्षम प्राधिकारियों को हर हाल में 4 महीने में निर्णय करने के सख्त निर्देश दिए थे।
सीनियर एडवोकेट प्रतीक कासलीवाल का कहना है- एसीबी आरोपी के खिलाफ कोर्ट में बिना अभियोजन के चालान पेश कर सकती है, लेकिन बिना अभियोजन के कोर्ट मामले में प्रसंज्ञान नहीं ले सकता।

सुबोध अग्रवाल पर क्या हैं आरोप?
केंद्र सरकार की योजना जल जीवन मिशन के तहत प्रदेश के जलदाय विभाग ने 2023 में करीब 979 करोड़ का टेंडर निकाला था। आरोप हैं जलदाय विभाग (PHED) के तत्कालीन एसीएस सुबोध अग्रवाल ने पद का दुरुपयोग करते हुए टेंडर प्रक्रिया में गड़बड़ी की। फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र लगाने वाली फर्मों को टेंडर जारी कर शर्तों में हेराफेरी की गई। एसीबी अफसरों के मुताबिक पूर्व आईएएस के खिलाफ 50 करोड़ रुपए तक के प्रोजेक्ट्स मंजूर करने के भी आरोप हैं।

टॉप ब्यूरोक्रेट्स से लेकर ‘घोटाले’ का प्रमुख चेहरा कैसे बने?
- सुबोध अग्रवाल राजस्थान कैडर के 1988 बैच के रिटायर्ड आईएएस हैं। आईआईटी दिल्ली से सिविल इंजीनियरिंग में बीटेक (1987) किया, उसके बाद प्रिंसटन विश्वविद्यालय से लोक नीति में मास्टर डिग्री और अर्थशास्त्र में पीएचडी हासिल की।
- प्रदेश में बतौर IAS अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रधान सचिव, संभागीय आयुक्त, जिला कलेक्टर, जिला मजिस्ट्रेट और प्रबंध निदेशक सहित विभिन्न पदों पर रहे। 31 दिसंबर, 2025 को सुबोध अग्रवाल रिटायरमेंट हो गए।
- सितंबर 2023 में एसीबी ने फर्जी प्रमाण पत्र बनाकर टेंडर हासिल करने के आरोप में श्याम ट्यूबवैल और गणपति ट्यूबवैल के खिलाफ एआईआर दर्ज की।
- फर्म के संचालकों ने कथित रूप से इरकॉन इंटरनेशनल लिमिटेड के फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र तैयार किए। इन्हीं दस्तावेजों के आधार पर PHED विभाग में करीब 979.27 करोड़ रुपए के टेंडर हासिल किए गए। उस दौरान PHED विभाग के एसीएस सुबोध अग्रवाल थे।

7 अगस्त, 2023 के एसीबी ने पीएचईडी इंजीनियर मायालाल सैनी, प्रदीप के साथ ठेकेदार पदमचंद जैन और कंपनी के सुपरवाइजर मलकेत सिंह को पकड़ा था। दलाल प्रवीण गुप्ता भी गिरफ्तार हुआ था।
इनके पास से 2.90 लाख रुपए कैश जब्त किया था। तत्कालीन बहरोड़ एईएन राकेश चौहान की भूमिका संदिग्ध सामने आने के बाद उसे भी अरेस्ट कर लिया।
पदमचंद जैन और महेश मित्तल ने जेजेएम में फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र और आय प्रमाण पत्र लगाए थे। तत्कालीन पीएचएडी मंत्री हमेश जोशी पर फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर लगभग 960 करोड़ रुपए के टेंडर जारी करने और रिश्वत लेने के गंभीर आरोप हैं।

एसीबी अधिकारियों का दावा है कि उनके पास रिटायर्ड आईएएस के खिलाफ घोटाले में शामिल होने के पूरे सबूत हैं।
दिल्ली से किया था गिरफ्तार
9 अप्रैल 2026 को एंटी करप्शन ब्यूरो (ACB) टीम ने जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले में फरार चल रहे पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल को गुरुवार को गिरफ्तार किया था।
पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल के खिलाफ जेजेएम घोटाले में गिरफ्तारी वारंट जारी था। जानकारी के अनुसार साल 2024 में शुरू हुई जांच में अब तक 10 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है, जबकि 3 आरोपी फरार हैं।
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राजस्थान में 960 करोड़ के जल जीवन मिशन (जेजेएम) घोटाले में अफसरों को जयपुर के एक होटल में बुलाकर रिश्वत बांटी गई थी। घोटाले में शामिल पूर्व IAS सुबोध अग्रवाल को गिरफ्तार कर लिया गया है। वहीं, 9 अफसर 17 फरवरी को पकड़े गए थे….(CLICK कर पढ़ें)
मंत्री के घर के बाहर प्रदर्शन करने वालों को जेल: जांच में सामने आया स्टूडेंट्स के प्रदर्शन में की थी अपील, सोशल मीडिया से पुलिस को मिली जानकारी – Indore News
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के घर के बाहर प्रदर्शन करने वालों पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए उन्हें जेल भेज दिया। पुलिस की पूछताछ में उन्होंने अपनी गलती भी मानी। साथ ही ये बात भी सामने आई है कि इन्होंने टंट्याभील चौराहे पर चल रहे स्टूडेंट्स के प्रदर्शन मे
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बुधवार दोपहर को मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के घर के बाहर प्रहलाद पाण्डेय और उनकी पत्नी संगीता प्रदर्शन करने पहुंचे थे। हाथों में संविधान लेकर वे यहां पहुंचे। हालांकि उनके प्रदर्शन की जानकारी पुलिस को एक घंटे पहले मिली। जिसके बाद पुलिस तुरंत एक्शन में आई और उनके घर के बाहर सुरक्षा व्यवस्था को बढ़ा दिया।
दोनों ही पहुंचे, कोई साथ नहीं आया
इधर, परदेशीपुरा पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि दोनों दंपती ही यहां प्रदर्शन करने आए। उन्होंने कुछ लोगों से मंत्री के घर के बाहर प्रदर्शन में शामिल होने की अपील भी की थी। सोशल मीडिया पर मैसेज भी चलाए थे, इसके अलावा पुलिस पूछताछ में ये बात भी सामने आई कि इन्होंने टंट्याभील चौराहे पर चल रहे स्टूडेंट्स के धरना प्रदर्शन में भी उनके साथ मंत्री के घर के बाहर प्रदर्शन में शामिल होने की अपील की थी। मगर उनका साथ देने कोई भी नहीं आया।
पुलिस ने प्रहलाद को टांगा-टोली कर पुलिस की गाड़ी में बैठाया था।
1 घंटे पहले मिली जानकारी
इधर, मंत्री के घर के बाहर प्रदर्शन की जानकारी पुलिस को करीब एक घंटे पहले सोशल मीडिया से मिली। जिसके बाद पुलिस ने सारी तैयारी की। जब दोनों दंपति यहां पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें रोका और समझाया भी, लेकिन वे नहीं माने।
प्रहलाद पाण्डेय के रोड पर बैठने के बाद पुलिस ने उन्हें उठाया और पुलिस की गाड़ी में बैठा दिया। उनकी पत्नी को भी पुलिस की गाड़ी में बैठाया और थाने ले जाकर पूछताछ की।

मंत्री के घर के बाहर प्रदर्शन करने आए थे।
पुलिस ने की कार्रवाई
टीआई आर.डी.कानवा ने बताया कि दोनों से पूछताछ में सामने आया कि उन्होंने अन्य लोगों से भी यहां आने की अपील की थी, लेकिन कोई उनके साथ नहीं आया। हालांकि उन्हें ये अहसास हो गया था कि उनसे चूक हुई है। बिना अनुमति के धरना प्रदर्शन करने पर पुलिस ने कार्रवाई की। पुलिस ने 151 और बिना अनुमति के प्रदर्शन करने पर केस दर्ज कर सोमवार को ही जेल भेज दिया।
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इंदौर में विजयवर्गीय के घर के सामने दंपती का प्रदर्शन

इंदौर में नगरीय विकास एवं आवास मंत्री कैलाश विजयवर्गीय के घर के सामने बुधवार को दंपती ने प्रदर्शन किया। वे संविधान की कॉपी लेकर गेट के सामने खड़े हो गए। उनका कहना था कि विजयवर्गीय के हाल ही में दिए बयानों से वे आहत हैं। सूचना मिलते ही पुलिस मौके पर पहुंची। प्रदर्शन की अनुमति के बारे में पूछा तो पति-पत्नी बहस करने लगे। अधिकारियों ने दंपती को समझाइश दी लेकिन उन्होंने मंत्री के बंगले से हटने से इनकार कर दिया।पूरी खबर पढ़ें

