अलवर के सरिस्का पैलेस होटल और वन विभाग के बीच विवाद सामने आया है। होटल के मैनेजर प्रेमचंद्र शर्मा ने वन विभाग के कुछ कर्मचारियों के खिलाफ थानागाजी थाने में ऑनलाइन शिकायत दर्ज कराई है। शिकायत में गाली-गलौज, जातिसूचक टिप्पणी, धमकी देने और ड्रोन के जरिए होटल की गोपनीयता भंग करने जैसे गंभीर आरोप लगाए गए हैं। वहीं, वन विभाग ने इन आरोपों को खारिज करते हुए पूरे मामले को वन भूमि पर बिना अनुमति पौधारोपण करने से जुड़ा विवाद बताया है। गाली-गलौज और जातिसूचक टिप्पणी के लगाए आरोप होटल मैनेजर प्रेमचंद्र शर्मा के अनुसार, होटल के कर्मचारी जब भी होटल से बाहर निकलते हैं, तब वन विभाग के कर्मचारी उनके साथ अभद्र भाषा का प्रयोग करते हैं और गाली-गलौज करते हैं। कर्मचारियों ने इसकी जानकारी होटल के सुपरवाइजर धर्मेंद्र जाटव को दी। आरोप है कि गुरुवार शाम होटल के सामने पौधारोपण को लेकर दोनों पक्षों में कहासुनी हो गई। शिकायत में कहा गया है कि वन विभाग के कर्मचारी धर्मसिंह और कप्तान सिंह करीब 15 कर्मचारियों के साथ होटल पहुंचे। इस दौरान होटल स्टाफ के साथ गाली-गलौज की गई और सुपरवाइजर धर्मेंद्र जाटव के खिलाफ जातिसूचक शब्दों का प्रयोग किया गया। साथ ही कथित रूप से धमकी दी गई कि “बाहर निकलोगे तब बताएंगे।” मैनेजर का दावा है कि घटना के बाद डर के माहौल के चलते होटल के करीब 15 कर्मचारियों ने नौकरी छोड़ दी। मैनेजर ने यह भी आरोप लगाया कि वन विभाग के कर्मचारी अक्सर रात के समय ड्रोन कैमरे होटल परिसर के ऊपर उड़ाते हैं, जिससे होटल की गोपनीयता भंग होती है। उनका कहना है कि होटल में महिला कर्मचारी भी कार्यरत हैं और इस तरह की गतिविधियों से उनकी निजता प्रभावित होती है। DFO ने आरोपों को बताया निराधार वहीं, सरिस्का के डीएफओ अभिमन्यु सहारण ने होटल प्रबंधन के आरोपों से इनकार किया है। उन्होंने कहा कि होटल के कर्मचारी होटल परिसर से बाहर वन विभाग की भूमि पर गड्ढे खोदकर पौधारोपण करना चाहते हैं, जबकि उन्हें स्पष्ट रूप से कहा गया है कि यदि होटल परिसर के बाहर कोई कार्य करना है तो पहले विभाग से अनुमति लेनी होगी। अनुमति मिलने के बाद ही ऐसे कार्य किए जा सकते हैं। डीएफओ का कहना है कि कई बार होटल प्रबंधन हरियाणा से बाउंसर बुलाकर वन भूमि पर गड्ढे खुदवाने का प्रयास करता है। जब वन विभाग के कर्मचारी उन्हें रोकते हैं तो होटल पक्ष ही कहासुनी पर उतर आता है। ड्रोन कैमरे के आरोपों पर डीएफओ ने कहा कि वन विभाग सरिस्का टाइगर रिजर्व में बाघों की मॉनिटरिंग और वन क्षेत्र की निगरानी के लिए नियमित रूप से ड्रोन का उपयोग करता है। उनका कहना है कि ड्रोन उड़ाने का उद्देश्य किसी होटल की निगरानी करना नहीं, बल्कि वन्यजीव संरक्षण और गश्त करना है। मामले में थानागाजी SHO रामस्वरूप का कहना है कि गुरुवार को शिकायत मिली थी। हम मामले की जांच कर रहे हैं।
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सरिस्का होटल में 15 कर्मचारियों ने छोड़ी नौकरी: वन-विभाग के कर्मचारियों पर धमकी देने और जातिसूचक टिप्पणी के आरोप,DFO बोले-बिना परमिशन काम कर रहे – Alwar News
वार्ड की 19 गलियों में पूरे साल रहता जलभराव: वार्ड-52 के लोग बोले- निगम में शामिल होने के बाद बढ़ीं समस्याएं, हाईवे ने किया नरक – Varanasi News
बजरंग नगर का पूरा इलाका हाइवे बनने के बाद नरक बन गया है। सीवर की समस्या ऐसी है कि लोग घर बेचकर जा रहे हैं। पार्षद जी ने तीन साल में इस इलाके में झांका नहीं…। ये दर्द वार्ड-52 लोहता के निवासियों का है। उनका यह भी आरोप है कि पार्षद विकास कार्य में भी पक्षपात करती हैं। वाराणसी का यह वार्ड तीन साल पहले शहर का हिस्सा बना था। लोगों को उम्मीद थी कि इलाके की तस्वीर बदल जाएगी। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। उल्टे हाईवे निकलने के बाद उनकी मुसीबत बढ़ गई। करीब पांच फीट ऊंची बनी सड़क और बंद हो चुकी जल निकासी के कारण 19 गलियां सालभर जलभराव और सीवर ओवरफ्लो की समस्या झेल रही हैं। कई घरों के शौचालय तक मलजल से भर चुके हैं। दैनिक भास्कर की वार्ड परिक्रमा में लोगों ने बताया कि रहीमपुर में धन्नीपुर गांव का सीवर भी इसी लाइन में जोड़ दिया गया है। बेटी ताल को पाटे जाने से पानी निकलने का आखिरी रास्ता भी खत्म हो गया। लोगों का कहना है कि नगर निगम बनने के बाद समस्याएं बढ़ी हैं, जबकि ग्राम प्रधान के समय छोटी-छोटी समस्याओं का समाधान जल्दी हो जाता था। दैनिक भास्कर वार्ड परिक्रमा अभियान चला रहा है। इसी कड़ी में वार्ड-52 का जायजा लिया गया… हाइवे से जुड़ी 19 गलियां सालभर सीवर और बारिश के पानी में डूबी मिलीं। बजरंग नगर में कई घरों के शौचालयों तक सीवर का पानी भरने से लोगों ने उनका इस्तेमाल बंद कर दिया है। रहीमपुर में धन्नीपुर गांव का मलजल जोड़ने के कारण सड़कें और गलियां जलमग्न नजर आईं। धमरिया में जाम नाला बारिश के दौरान लोगों के लिए बड़ी मुसीबत बन जाता है। वहीं खाली प्लॉटों और गलियों में कूड़े के ढेर पड़े मिले, जिससे नियमित सफाई व्यवस्था पर सवाल खड़े होते हैं। पहले ये नजारा देखिए… हाइवे बना, लेकिन बंद हो गई जल निकासी स्थानीय लोगों का कहना है कि हाइवे बनने के दौरान सड़क करीब पांच फीट ऊंची बना दी गई, जबकि पुरानी बस्ती पहले से नीचे थी। इससे सीवर और नालियां बेअसर हो गईं। बारिश के दिनों में पानी घरों और गलियों में भर जाता है। कई जगह शौचालयों तक मलजल पहुंच जाता है और लोगों का घरों में रहना मुश्किल हो जाता है। वार्ड की बड़ी समस्याएं सीवर और जलभराव: 19 गलियां सालभर जलभराव और सीवर ओवरफ्लो की समस्या झेल रही हैं। बेटी ताल पर कब्जा: जल निकासी का प्रमुख स्रोत खत्म होने से हालात और बिगड़े। धन्नीपुर का सीवर: दूसरे गांव का मलजल रहीमपुर की लाइन में जोड़ने से संकट बढ़ा। पेयजल संकट: दो टंकियों से पूरे वार्ड में पर्याप्त पानी नहीं पहुंच रहा। सफाई व्यवस्था: गलियों में नियमित सफाई नहीं, खाली प्लॉटों में कूड़े के ढेर। लोग बोले- सड़क ऊंची होने से डूबने इलाका निजाम खान ने बताया कि धन्नीपुर का पानी जोड़ने और सड़क ऊंची होने से पूरा इलाका डूबने लगा है। सिकंदर खान ने कहा कि दूसरे गांव का पानी हमारे मोहल्ले में छोड़ा जा रहा है। बच्चे स्कूल तक नहीं जा पा रहे। सुनील यादव के मुताबिक सीवर के पानी और कीचड़ से ग्राहक नहीं आते। कारोबार प्रभावित हो गया है। नहीं हो रही नाले की सफाई, घरों तक भर रहा पानी रशीद अहमद ने कहा कि धमरिया में नाले की सफाई नहीं होती। बारिश में घरों तक पानी भर जाता है। रियाज ने बताया कि गलियों में न सफाई होती है, न इंटरलॉकिंग। नगर निगम सिर्फ मुख्य सड़क तक सीमित है। एखलाक अहमद के अनुसार नगर पंचायत बनती तो बेहतर होता। नगर निगम बनने के बाद समस्याएं बढ़ गईं। पार्षद कभी झांकने नहीं आते शकील ने बताया कि पार्षद कभी गलियों में नहीं आते। सिर्फ सड़क तक दौरा करके लौट जाते हैं। जमाल अहमद का कहना है कि धमरिया का नाला मकानों के लिए खतरा बन गया है। बारिश में नाला फैल जाता है। इस्लामुद्दीन ने बताया कि नाले के किनारे सड़क है, लेकिन स्ट्रीट लाइट नहीं। रात में हादसे का डर बना रहता है। मोहम्मद रियाज ने कहा कि नाले की सिर्फ ऊपर-ऊपर सफाई होती है, सिल्ट नहीं निकाली जाती। रहीमपुर में दूसरे गांव का सीवर बना आफत रहीमपुर के लोगों का आरोप है कि धन्नीपुर गांव का सीवर भी उनकी लाइन में जोड़ दिया गया। पहले यह पानी बेटी ताल में जाता था, लेकिन तालाब पाट दिए जाने के बाद पूरा दबाव रहीमपुर पर आ गया। नतीजा, सड़कें और घर लगातार सीवर के पानी में डूबे रहते हैं। बेटी ताल पटा, खत्म हुआ पानी निकलने का रास्ता स्थानीय लोगों का आरोप है कि बेटी ताल पर भू-माफियाओं ने कब्जा कर लिया। पहले पूरे इलाके का अतिरिक्त पानी इसी ताल में जाता था, लेकिन अब वहां मलबा डाल दिया गया है। इससे जल निकासी पूरी तरह प्रभावित हो गई है। पेयजल और सफाई व्यवस्था भी बदहाल धमरिया की दो पानी टंकियों से पूरे क्षेत्र में पानी की आपूर्ति होती है, लेकिन दूर के इलाकों तक पर्याप्त पानी नहीं पहुंच पाता। लोग समर्सिबल लगाने को मजबूर हैं। सफाईकर्मी मुख्य सड़क तक ही सीमित रहते हैं, जबकि गलियों में नियमित सफाई नहीं होती। ————— ये खबर भी पढ़िए… जिस वार्ड से गुजरते करोड़ों श्रद्धालु उसके रास्ते दलदल जैसे:वार्ड-9 में कच्ची सड़कें, उफना रहे सीवर; इसी वार्ड से है संगम का रास्ता प्रयागराज का वो वार्ड भी बदहाल है जहां से होकर महाकुंभ का रास्ता गुजरता है। करोड़ों श्रद्धाल इसी वार्ड से होकर संगम तक पहुंचते हैं। वार्ड-9 सोनौटी को तीन साल पहले निगम में शामिल किया गया था, लेकिन हालात आज भी गांव जैसे हैं। वार्ड में पक्की सड़कें नाम मात्र ही हैं। नालियां सालों से चोक हैं। कई इलाकों में बिजली के खंभे तक नहीं लगे। बारिश होते ही गलियां दलदल बन जाती हैं। घरों के सामने सीवर व नालियों का गंदा पानी भर जाता है। लोगों का आरोप है कि शिकायतों के बावजूद न प्रशासन सुन रहा है और न ही पार्षद। पूरी खबर पढ़ें… ————— ये खबर भी पढ़िए… वार्ड-88 में लोग बोले-द्वेष भावना से काम करा रहे पार्षद:10 महीने से 150 परिवार साफ पानी को तरस रहे; धर्म के आधार पर सुविधाएं देने का आरोप वाराणसी का सबसे घनी आबादी वाला वार्ड-88 सुविधाओं में बहुत पिछड़ा नजर आ रहा है। कुछ हिस्सों की हालत ज्यादा खराब है। यहां के लोगों का कहना है कि पार्षद द्वेष भावना से काम कर रहे हैं। धर्म के आधार पर लोगों को लाभ दिया जा रहा है। काल भैरव मंदिर से कुछ ही दूरी पर बसे वार्ड बलुआबीर में न तो पीने का साफ पानी है न ही सीवर व्यवस्था। चिकवन टोला में 10 महीने से मिनी ट्यूबवेल खराब है। 150 से अधिक परिवारों को इससे परेशानी हो रही है। नलों से सीवर मिला बदबूदार पानी आ रहा है। पूरी खबर पढ़ें…
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हरदा में अलग-अलग घटनाओं में बुजुर्ग और युवक की मौत: बीमारी से परेशान बुजुर्ग ने फांसी लगाई, 18 वर्षीय युवक की सल्फॉस खाने से जान गई – Harda News
हरदा में शनिवार को दो अलग-अलग घटनाओं में एक बुजुर्ग और एक 18 वर्षीय युवक की मौत हो गई। एक बुजुर्ग ने बीमारी से परेशान होकर फांसी लगा ली, जबकि युवक ने सल्फॉस का सेवन कर अपनी जान दे दी। पुलिस ने दोनों मामलों में मर्ग कायम कर जांच शुरू कर दी है। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, सिविल लाइन थाना क्षेत्र के ग्राम छिड़गांव निवासी 68 वर्षीय गजानंद पिता चंपालाल ने शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात अपने घर में फांसी लगा ली। सुबह करीब चार बजे परिजनों ने उन्हें फंदे पर लटका देखा, जिसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। पुलिस ने बताया कि मृतक कई दिनों से बीमारी से परेशान थे, ऐसी आशंका है कि बीमारी से परेशान होकर ही उन्होंने यह कदम उठाया होगा। दूसरी घटना में, खंडवा जिले के छनेरा निवासी 18 वर्षीय पवन पिता गोकुल कोरकू ने शुक्रवार शाम मजदूरी से लौटते समय चारुवा और हेमागांव के बीच सल्फॉस का सेवन कर लिया। तबीयत बिगड़ने पर परिजन उसे तत्काल खिरकिया अस्पताल ले गए, जहां से उसे जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। उपचार के दौरान उसकी मौत हो गई। दोनों शवों का जिला अस्पताल में पोस्टमार्टम कर परिजनों को सौंप दिया गया है। बताया जा रहा है कि पवन अपने दो भाइयों में छोटा था।
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पटना में रातभर हुई बारिश, कई इलाकों में जलजमाव: आज भी भारी वर्षा और तेज हवा का अलर्ट, 19 क्विक रिस्पॉन्स टीम फील्ड पर उतरी – Patna News
बिहार में मानसून एक्टिव हो गया है। कल रात से ही लगातार पटना में बारिश हो रही है और कई इलाकों में जल जमाव की स्थिति देखने को मिली है। आज पटना में दिनभर गरज चमक के साथ 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की संभावना है। अगले 2 घंटों तक पटना शहर के कुछ हिस्सों में मध्यम वर्षा जारी रहने की संभावना है। इस दौरान 30 से 40 मिमी अतिरिक्त वर्षा होने का अनुमान है। पटना शहर में बारिश की तस्वीर…
पटना में अनुमानित कुल वर्षा के आंकड़े मौसम विभाग के मुताबिक, 10 जुलाई 2026 को शाम 5:30 बजे से 11 जुलाई 2026 को सुबह 8:30 बजे तक पटना के अनीसाबाद क्षेत्र में 46.2 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। अब तक दर्ज वर्षा और अगले कुछ घंटों के पूर्वानुमान को देखते हुए, 10 जुलाई 2026 की शाम 5:30 बजे से 11 जुलाई 2026 की शाम 5:30 बजे तक पटना में कुल 75 से 85 मिमी वर्षा होने की संभावना है।
संभावित प्रभाव निचले इलाकों, अंडरपास तथा खराब जल निकासी वाले क्षेत्रों में जलजमाव हो सकता है। प्रमुख सड़कों और व्यस्त चौराहों पर ट्रैफिक जाम तथा वाहनों की धीमी आवाजाही की संभावना है। नागरिकों से अपील है कि मध्यम से भारी बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें।
वाहन चलाते समय सावधानी बरतें और जलजमाव वाले क्षेत्रों से दूर रहें।
संबंधित नगर निकाय एवं अन्य एजेंसियां जल निकासी व्यवस्था को सुचारु रखें और स्थानीय जलभराव की स्थिति से निपटने के लिए पूरी तरह तैयार रहें।
19 क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) फील्ड पर उतरी पटना नगर निगम की टीम भी लगातार फील्ड पर जल निकासी के लिए काम कर रही है। मॉनसून को लेकर सभी वरीय पदाधिकारी, 3 अपर नगर आयुक्त, 2 DMC, सारे इग्जेक्युटिव इंजीनियर, 19 क्विक रिस्पॉन्स टीम (QRT) फील्ड पर उतरी हुई है। हर टीम में 3 लोग हैं। इन्हें एक-एक गाड़ी दी गई है, ताकि बारिश के दौरान टीमें लगातार क्षेत्र का दौरा कर सकें और जल निकासी कार्यों की निगरानी करते हुए आवश्यक कार्रवाई कर सकें। इसी क्रम में हज भवन के समीप पेड़ गिरने की सूचना प्राप्त होने पर पटना नगर निगम की टीम ने मौके पर पहुंचकर पेड़ को हटाया और यातायात व्यवस्था को सामान्य किया।
हर अंचल में जल निकासी के लिए जोन वाइज की गई व्यवस्था बुडको द्वारा डिजिटल मॉनिटरिंग की जा रही दूसरी ओर बुडको द्वारा भी लगातार शहर के प्रमुख नालों, पंप हाउसों और जलभराव वाले क्षेत्रों की 24 घंटे डिजिटल मॉनिटरिंग की जा रही है। नाले में पानी का स्तर बढ़ते ही ऑटोमैटिक पंप चालू किया गया है। इससे शहर में जलजमाव की स्थिति से निपटने में मदद मिलेगी। डीपीएस और पंप होंगे तैनात पटना शहर में कुल 56 स्थाई और 35 अस्थाई डीपीएस हैं। वहीं, शहर की जलनिकासी के लिए कुल 364 पंपों का इस्तेमाल किया जा रहा है, जिनमें 265 इलेक्ट्रिक चालित और 99 डीजल पंप शामिल हैं। स्थाई डीपीएस पर 256 पंप और अस्थाई डीपीएस पर 83 पंप लगाए गए हैं। इसके अतिरिक्त 8 नए डीपीएस भी तैयार किए गए है।
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ब्रेकफास्ट में बनाएं स्वाद से भरपूर ज्वार उपमा, पाचन और वजन दोनों के लिए फायदेमंद
Millet Breakfast Recipe : अगर आप रोजाना पोहा, उपमा या पराठा खाकर बोर हो चुके हैं और नाश्ते में कुछ हेल्दी और टेस्टी ट्राई करना चाहते हैं, तो ज्वार उपमा आपके लिए शानदार विकल्प हो सकता है. ज्वार एक ऐसा मोटा अनाज (Millet) है, जिसे पोषण का खजाना माना जाता है. इसमें भरपूर मात्रा में फाइबर, प्रोटीन, आयरन और कई जरूरी मिनरल्स पाए जाते हैं. यही वजह है कि हेल्थ एक्सपर्ट्स भी अपनी डाइट में मिलेट्स शामिल करने की सलाह देते हैं. ज्वार उपमा बनाने में आसान है और इसका स्वाद इतना अच्छा होता है कि बच्चे से लेकर बड़े तक इसे पसंद कर सकते हैं.
ज्वार में मौजूद फाइबर पाचन तंत्र को बेहतर बनाने में मदद करता है. इसे खाने से पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है, जिससे बार-बार भूख नहीं लगती और ओवरईटिंग से बचाव हो सकता है. यही कारण है कि वजन कम करने की कोशिश कर रहे लोग भी इसे अपने ब्रेकफास्ट में शामिल कर सकते हैं. इसके अलावा, ज्वार ग्लूटेन-फ्री अनाज है, इसलिए जिन लोगों को ग्लूटेन से परेशानी होती है, उनके लिए भी यह एक अच्छा विकल्प हो सकता है.
ज्वार उपमा बनाने के लिए सामग्री-
1 कप ज्वार का आटा
1/2 कप सूजी
1/2 कप बारीक कटा प्याज
1/2 कप उबले हुए हरे मटर (वैकल्पिक)
2 छोटी चम्मच हरी मिर्च का पेस्ट
2 बड़े चम्मच बारीक कटा हरा धनिया
1 छोटी चम्मच राई
1 छोटी चम्मच उड़द दाल
8-10 करी पत्ते
1-2 चुटकी हींग
1-2 बड़े चम्मच तेल
1 नींबू का रस
स्वादानुसार नमक
लगभग 3 कप पानी
ऐसे बनाएं ज्वार उपमा-
सबसे पहले प्याज और करी पत्तों को बारीक काट लें. अगर मटर डाल रहे हैं, तो उन्हें पहले से उबाल लें. अब एक पैन में तेल गर्म करें और उसमें राई व उड़द दाल डालकर चटकने दें. इसके बाद हींग और करी पत्ते डालकर कुछ सेकंड भूनें.
अब इसमें कटा हुआ प्याज डालें और हल्का नरम होने तक पकाएं. फिर सूजी डालकर मध्यम आंच पर 2-3 मिनट तक भून लें. इसके बाद ज्वार का आटा डालें और लगातार चलाते हुए करीब 2 मिनट तक भूनें.
अब हरी मिर्च का पेस्ट, उबले मटर, हरा धनिया और नमक डालकर अच्छी तरह मिला लें. इसके बाद धीरे-धीरे लगभग 3 कप पानी डालें और लगातार चलाते रहें, ताकि गांठें न बनें. मिश्रण को 2-3 मिनट तक पकने दें. जब उपमा गाढ़ा होकर तैयार हो जाए, तब गैस बंद कर दें और ऊपर से ताजा नींबू का रस निचोड़ दें.
इन बातों का रखें ध्यान
अगर आप उपमा को और ज्यादा पौष्टिक बनाना चाहते हैं, तो इसमें गाजर, शिमला मिर्च, बीन्स या स्वीट कॉर्न जैसी सब्जियां भी मिला सकते हैं. स्वाद बढ़ाने के लिए ऊपर से भुनी हुई मूंगफली या काजू डाल सकते हैं. इसे दही, नारियल की चटनी या टमाटर की चटनी के साथ परोसने पर इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है.
अगर आप अपने दिन की शुरुआत हेल्दी और एनर्जी से भरपूर नाश्ते के साथ करना चाहते हैं, तो ज्वार उपमा जरूर ट्राई करें. यह स्वाद, पोषण और सेहत का ऐसा कॉम्बिनेशन है जो पूरे परिवार को पसंद आएगा.
ट्रम्प बोले-मेरी हत्या हुई तो जवाबी कार्रवाई, आदेश दे चुका: ईरान से बातचीत जारी पर सीजफायर खत्म; रिपोर्ट- अमेरिका ने इजराइल से फाइटर जेट्स हटाए
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने कहा है कि अगर ईरान उनकी हत्या करता है तो अमेरिका जवाबी कार्रवाई करेगा। न्यूयॉर्क पोस्ट को दिए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, “मैं काफी समय से उनके निशाने पर हूं। अगर मेरे साथ कुछ हुआ तो मैंने पहले ही ऐसे आदेश दे दिए हैं कि ईरान पर अब तक का सबसे बड़ा हमला किया जाए।” ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर एक पोस्ट में यह भी कहा कि अमेरिका ईरान से बातचीत के लिए तैयार हो गया है। हालांकि उन्होंने साफ किया कि दोनों देशों के बीच हुआ सीजफायर अब खत्म हो चुका है। उधर, इजराइली मीडिया कान न्यूज की रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका ने इजराइल से अपने 12 F-22 स्टेल्थ फाइटर जेट वापस बुलाने शुरू कर दिए हैं। ये विमान फरवरी से इजराइल के ओवदा एयरबेस पर तैनात थे। रिपोर्ट में दावा किया गया है कि इन्हें ईरान के खिलाफ सैन्य अभियान के लिए भेजा गया था और इन्होंने हालिया हमलों में भी हिस्सा लिया था। पिछले 24 घंटे के 5 बड़े अपडेट्स मिडिल ईस्ट के हालात से जुड़े अपडेट्स के लिए नीचे ब्लॉग से गुजर जाइए…
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स्वदेशी वॉरशिप INS महेंद्रगिरि आज नौसेना में शामिल होगा: एंटी सबमरीन सिस्टम-एडवांस मिसाइलों से लैस; हाई स्पीड, रडार पर ट्रैक कर पाना मुश्किल
भारतीय नौसेना को शनिवार को एक और वॉरशिप मिलने जा रहा है। स्वदेशी तकनीक से तैयार स्टेल्थ फ्रिगेट ‘महेंद्रगिरि’ को विशाखापट्टनम में नौसेना में शामिल किया जाएगा। रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह इस अवसर पर मुख्य अतिथि होंगे। महेंद्रगिरि प्रोजेक्ट-17A की नीलगिरि कैटेगरी का छठा स्टेल्थ फ्रिगेट है। इसे भारतीय नौसेना के वॉरशिप डिजाइन ब्यूरो ने डिजाइन किया है और मुंबई स्थित मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स लिमिटेड (MDL) ने तैयार किया है। महेंद्रगिरि हिंद महासागर में भारत की समुद्री सुरक्षा को और मजबूत करेगी। साथ ही इंडो-पैसिफिक रीजन को सुरक्षित और स्थिर बनाने में भूमिका निभाएगा। पहले देखिए INS महेंद्रगिरि की तस्वीरें… INS महेंद्रगिरि की खासियत जानिए क्या होता है स्टेल्थ फ्रिगेट स्टेल्थ फ्रिगेट ऐसा वॉरशिप है, जिसे रडार, इंफ्रारेड सेंसर, सोनार और दुश्मन के सर्विलांस सिस्टम भी आसानी से नहीं पहचान सकते हैं। यानी दुश्मन के लिए उसे ढूंढना और निशाना बनाना ज्यादा मुश्किल हो जाता है। अब जानिए प्रोजेक्ट 17A के बारे में… प्रोजेक्ट-17A (Project 17A) के तहत भारतीय नौसेना के लिए कुल 7 स्टेल्थ गाइडेड-मिसाइल फ्रिगेट बनाए जा रहे हैं। इनमें से 4 युद्धपोत मझगांव डॉक शिपबिल्डर्स मुंबई बना रहा है। 3 युद्धपोत गार्डन रीच शिप बिल्डर्स कोलकाता बना रहा है। प्रोजेक्ट-17A, प्रोजेक्ट-17 (शिवालिक क्लास) का एडवांस्ड वर्जन है। इसमें पहली बार भारत में बड़े युद्धपोतों के निर्माण में इंटीग्रेटेड कंस्ट्रक्शन (ब्लॉक निर्माण) तकनीक का बड़े पैमाने पर इस्तेमाल किया गया। इसमें जहाज के अलग-अलग हिस्से पहले तैयार किए जाते हैं और बाद में उन्हें जोड़कर पूरा युद्धपोत बनाया जाता है। इससे निर्माण का समय कम होता है और गुणवत्ता बेहतर रहती है। भास्कर नॉलेज… INS महेंद्रगिरि का नाम जिस महेंद्रगिरि पर्वत पर रखा गया है, उसका धार्मिक महत्व भी है। पौराणिक मान्यताओं के अनुसार यह पर्वत भगवान परशुराम की तपस्थली थी। रामायण में भी इसका उल्लेख मिलता है। भारतीय नौसेना अपनी कई युद्धपोतों के नाम देश के ऐतिहासिक पर्वतों, नदियों और विरासत से जुड़े स्थलों पर रखती है, जिससे सैन्य परंपरा और सांस्कृतिक पहचान दोनों को सम्मान मिलता है।
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15 हजार पुलिसकर्मियों पर डिमोशन का खतरा: DPC प्रक्रिया शुरू; कार्यवाहक प्रभार वापस लेकर मूल पद पर भेजा जाएगा – Bhopal News
मध्य प्रदेश में पिछले करीब पांच साल से कार्यवाहक पदोन्नति के आधार पर उच्च पदों पर कार्यरत लगभग 15 हजार पुलिस अधिकारी-कर्मचारियों की पदोन्नति अब खतरे में पड़ गई है। मध्य प्रदेश पदोन्नति नियम-2025 लागू होने के बाद नियमित विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की प्रक्रिया शुरू हो गई है। डीपीसी में तय मापदंडों पर खरे नहीं उतरने वाले अधिकारियों और कर्मचारियों से कार्यवाहक प्रभार वापस लेकर उन्हें उनके मूल पद पर भेजा जाएगा। इस संभावना से पुलिस विभाग में असंतोष का माहौल बनने लगा है। प्रदेश में वर्ष 2016 से नियमित पदोन्नति की प्रक्रिया रुकी हुई थी। इसी वजह से वर्ष 2021 से बड़ी संख्या में पुलिसकर्मियों को कार्यवाहक पदोन्नति देकर उच्च पदों का प्रभार सौंपा गया था। अब नियमित पदोन्नति प्रक्रिया शुरू होने के साथ इन सभी मामलों की दोबारा समीक्षा की जा रही है। पहले चरण में पांढुर्णा में कार्रवाई कार्यवाहक पदोन्नति वापस लेने की प्रक्रिया भी शुरू हो चुकी है। इसकी पहली बड़ी कार्रवाई पांढुर्णा जिले में हुई, जहां पुलिस अधीक्षक ने कार्यवाहक प्रधान आरक्षक के रूप में कार्यरत 32 पुलिसकर्मियों का प्रभार समाप्त कर उन्हें उनके मूल पद आरक्षक पर पदस्थ करने के आदेश जारी किए हैं। अब ये सभी पुलिसकर्मी आरक्षक के पद और उसी रैंक में ड्यूटी करेंगे। आदेश में स्पष्ट किया गया है कि यह कार्रवाई मध्यप्रदेश लोक सेवा पदोन्नति नियम-2025 और पुलिस मुख्यालय के निर्देशों के अनुरूप की गई है। लंबे समय तक नियमित पदोन्नति नहीं होने के कारण कार्यवाहक व्यवस्था लागू की गई थी। एसआईआर, सजा और लंबित मामलों की हो रही जांच नियमित डीपीसी से पहले पिछले पांच वर्षों के सेवा रिकॉर्ड की जांच की जा रही है। इसमें एसआईआर (वार्षिक गोपनीय प्रतिवेदन), विभागीय दंड, निलंबन और न्यायालय में लंबित मामलों को आधार बनाया जा रहा है। पुलिस मुख्यालय के सूत्रों के अनुसार करीब एक हजार अधिकारी-कर्मचारी ऐसे हैं, जिन पर इस प्रक्रिया का सीधा असर पड़ सकता है। अगले चार-पांच दिनों में इस संबंध में और कार्रवाई होने की संभावना है।
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भाकियू नेता समेत 3 नामजद, 100 अज्ञात पर FIR: PDAअफसर बोले- गेस्ट हाउस सील करने के दौरान धक्का-मुक्की, गालीगलौज की – Prayagraj (Allahabad) News
प्रयागराज में झलवा स्थित अमृत वाटिका मैरिज लॉन को सील करने प्रयागराज विकास प्राधिकरण (पीडीए) की टीम के पहुंचेन पर हंगामा हो गया। पीडीए के सुपरवाइजर ने आरोप लगाया है कि कार्रवाई का विरोध करते हुए कुछ लोगों ने सरकारी टीम के साथ धक्का-मुक्की की, सरकारी कार्य में बाधा डाली, जातिसूचक गालियां दीं और जान से मारने की धमकी दी। मामले में धूमनगंज थाने में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) गुट के युवा प्रदेश अध्यक्ष अनुज सिंह समेत तीन नामजद और करीब 100 अज्ञात लोगों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है।
अफसरों के आदेश पर पहुंची थी सीलिंग टीम
पीडीए के सुपरवाइजर विशाल कुमार भारतीया ने पुलिस को बताया, मैं जोनल अधिकारी सूरज पटेल और अवर अभियंता विनोद गुप्ता पूरी टीम के साथ दोपहर में 12 बजे के करीब मयूर विहार कॉलोनी, झलवा स्थित अमृत वाटिका को सील करने पहुंचे थे। इस बारातघर/लॉन के संबंध में उत्तर प्रदेश नगर नियोजन एवं विकास अधिनियम, 1973 की धारा 27(1) के तहत पहले 25 जून 2022 और 16 जुलाई 2022 को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए थे।
नोटिस भू-स्वामी लालचंद्र पटेल और संचालक अनुज सिंह को दिए गए थे, लेकिन निर्धारित समय में कोई जवाब नहीं दिया गया। इसके बाद 10 जुलाई 2026 को सीलिंग का आदेश पारित किया गया था।
सीलिंग शुरू होते ही विरोध, कार्रवाई रुकवाई
टीम जैसे ही सीलिंग की कार्रवाई शुरू करने लगी, तभी भू-स्वामी लालचंद्र पटेल, संचालक अनुज सिंह, मुकुंद यादव और बड़ी संख्या में लोग मौके पर पहुंच गए। आरोप है कि सभी ने मिलकर सीलिंग का विरोध किया और सरकारी कार्रवाई रुकवा दी।
जातिसूचक टिप्पणी और जान से मारने की धमकी दी
विरोध के दौरा जातिसूचक शब्दों से अपमानित किया गया। मेरे साथ और टीम के अन्य सदस्यों के साथ धक्का-मुक्की की गई तथा सरकारी कार्य में बाधा पहुंचाई गई। जान से मारने की धमकी भी दी गई। इस घटना से मौके पर अफरातफरी मची रही। बाद में सुपरवाइजर ने थाने पहुंचकर तहरीर दी। रात नौ बजे के करीब इस मामले में एफआईआर दर्ज कर ली गई।
इन लोगों के खिलाफ दर्ज हुआ मुकदमा
अनुज सिंह (संचालक, अमृत वाटिका एवं भारतीय किसान यूनियन टिकैत गुट के युवा प्रदेश अध्यक्ष)
लालचंद्र पटेल (भू-स्वामी)
मुकुंद यादव
तथा 100 अज्ञात
पुलिस करेगी साक्ष्यों के आधार पर जांच
धूमनगंज थाना प्रभारी धनंजय पांडेय का कहना है कि मामले की जांच शुरू कर दी गई है। घटनास्थल के वीडियो, मौजूद अधिकारियों और कर्मचारियों के बयान तथा अन्य साक्ष्यों के आधार पर आगे की कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
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चीन ने लगा दी हीलियम निर्यात पर रोक, भारत पर इसका क्या असर
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China Helium Export Ban : चीन ने ईरान और अमेरिका के बीच दोबारा युद्ध शुरू होने के बाद हीलियम के निर्यात पर रोक लगा दी है.इससे भारत पर क्या असर पड़ेगा और चीन अपनी जरूरत का कितना हीलियम निर्यात करता है. साथ ही हीलियम की कीमतें बढ़ने से किन सेवाओं पर असर पड़ता है.
चीन ने हीलियम के निर्यात पर रोक लगा दी है.
नई दिल्ली. अमेरिका और ईरान के बीच दोबारा तनाव बढ़ने और हमले शुरू होने के बाद ताजा समीकरण को देखते हुए चीन ने हीलियम के निर्यात पर रोक लगा दी है.अब सवाल यह उठता है कि आखिर चीन के हीलियम निर्यात पर रोक लगाने से दुनिया पर क्या असर पड़ेगा. खासकर भारत पर इस कदम का क्या असर पड़ सकता है. साथ ही यह भी जानना जरूरी है कि हीलियम का इस्तेमाल किन चीजों में होता है और भारत अपनी जरूरत का हीलियम कहां से आयात करता है.
सबसे पहले बात करते हैं चीन की. चीन ने सेमीकंडक्टर निर्माण में उपयोग होने वाली प्रमुख गैस हीलियम के निर्यात पर अस्थायी रोक लगा दी. उसने यह कदम ईरान युद्ध के चलते वैश्विक आपूर्ति पहले से ही बाधित होने के बीच उठाया गया है. चीन के वाणिज्य मंत्रालय और सीमा शुल्क एजेंसी ने बताया कि विदेशी व्यापार कानून के प्रावधानों के तहत हीलियम के निर्यात पर तत्काल प्रभाव से अस्थायी रोक लगाई जा रही है. हालांकि, चीन सरकार की तरफ से इस अस्थायी रोक के पीछे के कारण विस्तार से नहीं बताए गए.
कहां इस्तेमाल होती है हीलियम गैस
हीलियम सेमीकंडक्टर चिप के विनिर्माण के अलावा चिकित्सा क्षेत्र में भी एमआरआई मशीनों को ठंडा रखने में इस्तेमाल होती है. फरवरी के अंत में अमेरिका-ईरान युद्ध शुरू होने के बाद से वैश्विक हीलियम आपूर्ति प्रभावित हुई है और इसकी कीमतों में तेज वृद्धि देखी गई है. विशेषज्ञों ने कहा कि चीन अपनी घरेलू उद्योगों की जरूरतों को सुरक्षित करने के लिए यह कदम उठा रहा है, क्योंकि वैश्विक स्तर पर हीलियम की उपलब्धता काफी सीमित हो गई है. इसके दाम बढ़ने से एमआरआई कराना महंगा हो सकता है, जबकि सेमीकंडक्टर के उत्पादन की लागत भी बढ़ सकती है. हालांकि, चीन के हीलियम का बड़ा निर्यातक नहीं होने से इस कदम का वैश्विक बाजार पर प्रभाव सीमित ही रहने का अनुमान है. चीन अपनी हीलियम जरूरत का बड़ा हिस्सा आयात करता है और कतर जैसे देशों पर काफी हद तक निर्भर है.
भारत कहां से मंगाता है हीलियम
भारत अपनी हीलियम जरूरत का 100 फीसदी हिस्सा आयात करता है. उसके कुल आयात का 50 फीसदी से ज्यादा हिस्सा अकेले कतर से मंगाता है, जबकि रूस और अमेरिका से भी बड़ी मात्रा में आयात किया जाता है. जहां तक चीन का सवाल है तो भारत वहां से कोई आयात नहीं करता है, क्योंकि चीन खुद अपनी जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा हीलियम आयात के जिरये ही पूरा करता है. चीन में दुनिया का महज 1.6 फीसदी हीलियम पैदा होता है और भारत इसमें से कुछ भी आयात नहीं करता है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें

