लखनऊ. प्रदेश सरकार ने विकास प्राधिकरण क्षेत्रों में रहने वाले हजारों परिवारों को बड़ी राहत दी है। सरकार ने फैसला किया है कि विकास प्राधिकरण की सीमा में शामिल हो चुके ग्रामीण क्षेत्रों में 31 मार्च तक जिला पंचायत से स्वीकृत सभी भवन नक्शों को पूरी तरह वैध माना जाएगा। इससे लखनऊ विकास प्राधिकरण (एलडीए) की सीमा में शामिल 477 गांवों के हजारों मकान मालिकों को सीधा लाभ मिलेगा। अब तक इन गांवों में जिला पंचायत से नक्शा पास कराकर मकान बनाने वाले लोगों को यह डर बना रहता था कि एलडीए उनके निर्माण को अवैध घोषित कर सकता है। कई मामलों में लोगों को शमन शुल्क जमा करने या कार्रवाई का सामना करने की आशंका रहती थी। नए फैसले के बाद ऐसे सभी निर्माणों को कानूनी मान्यता मिल जाएगी। नहीं देना होगा शमन शुल्क सरकार के निर्णय के अनुसार, जिला पंचायत के नियमों के तहत बनाए गए मकानों और व्यावसायिक भवनों के मालिकों को अब एलडीए को भारी-भरकम शमन शुल्क या जुर्माना नहीं देना पड़ेगा। इससे वर्षों से चली आ रही अनिश्चितता खत्म होगी। बैंक लोन और रजिस्ट्री होगी आसान नक्शों को वैधता मिलने के बाद इन क्षेत्रों की संपत्तियों पर बैंक से ऋण लेना आसान हो जाएगा। साथ ही मकानों और भूखंडों की खरीद-बिक्री तथा रजिस्ट्री में आने वाली कानूनी बाधाएं भी दूर होंगी। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में संपत्ति बाजार को भी गति मिलने की उम्मीद है। क्यों लिया गया फैसला? दरअसल, किसी ग्रामीण क्षेत्र को विकास प्राधिकरण की सीमा में शामिल किए जाने के बाद वहां जिला पंचायत से पहले स्वीकृत नक्शों की वैधता को लेकर विवाद खड़ा हो जाता था। प्राधिकरण कई बार ऐसे निर्माणों को नियम विरुद्ध मानकर नोटिस जारी करता था। सरकार के इस फैसले से प्राधिकरण और ग्रामीणों के बीच लंबे समय से चला आ रहा विवाद समाप्त होने की उम्मीद है। नए निर्माणों के लिए एलडीए से लेनी होगी मंजूरी सरकार ने स्पष्ट किया है कि यह राहत केवल उन निर्माणों पर लागू होगी, जिनके नक्शे संबंधित क्षेत्र के विकास प्राधिकरण में शामिल होने से पहले जिला पंचायत से स्वीकृत हो चुके हैं। भविष्य में इन गांवों में होने वाले किसी भी नए निर्माण या भवन विस्तार के लिए एलडीए से नक्शा पास कराना अनिवार्य होगा। इस फैसले से हजारों परिवारों को राहत मिलने के साथ ही ग्रामीण क्षेत्रों में विकास कार्यों और संपत्ति कारोबार को भी नई गति मिलने की संभावना है।
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LDA सीमा में शामिल 477 गांव: जिला पंचायत से पास नक्शे होंगे वैध, नहीं देना होगा जुर्माना – Lucknow News
बुजुर्ग महिला से गहने लूटने वाला बदमाश मुरैना से गिरफ्तार: लूट से पहले मंदिर में दो घंटे रुका, पूजा-पाठ किया; जुए के कर्ज ने बनाया लुटेरा – Jaipur News
जयपुर साउथ पुलिस ने सोडाला थाना क्षेत्र में हुई सनसनीखेज चेन स्नैचिंग और लूट की वारदात के हुए मुख्य आरोपी सहित तीन लोगों को गिरफ्तार किया है। मंदिर से लौट रही बुजुर्ग महिला को सड़क पर पटककर 17 सेकंड में 4.23 लाख रुपये के सोने के आभूषण लूटने वाले आरोपी को मध्यप्रदेश के मुरैना जिले से गिरफ्तार किया गया, जबकि लूट का माल खरीदने वाले दो ज्वेलर्स को भी पुलिस ने दबोच लिया है। पुलिस को उम्मीद है कि आरोपी से पूछताछ में अन्य वारदातों के भी खुलासे होंगे। डीसीपी साउथ राजर्षि राज ने बताया कि पुलिस ने करीब 500 सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगालने के बाद आरोपी की पहचान अनिकेश रावत (21) पुत्र हरिज्ञान रावत के रूप में हुई। अनिकेश मूल रूप से मुरैना (मध्यप्रदेश) का निवासी है और वर्तमान में गंगाविहार कॉलोनी, सुशीलपुरा, सोडाला में किराए पर रह रहा था। मुरैना में छत से कूदकर भागने की कोशिश डीसीपी साउथ ने बताया कि आरोपी की लोकेशन मिलने पर पुलिस टीम मध्यप्रदेश के सबलगढ़ पहुंची। देर रात गुप्त सूचना के आधार पर आरोपी के घर दबिश दी गई। पुलिस को देखकर अनिकेश छत से कूदकर भागने लगा, लेकिन गिरने से उसके हाथ-पैर और शरीर पर चोटें आ गईं। इसके बावजूद पुलिस टीम ने पीछा कर उसे पकड़ लिया। जिसके बाद जयपुर लाकर की गई पूछताछ में आरोपी ने वारदात कबूल कर ली। जुए के कर्ज ने बनाया लुटेरा पूछताछ में आरोपी ने बताया कि वह जयपुर में किराए का कमरा लेकर रह रहा था और इधर-उधर घूमकर रेकी करता था। इसी दौरान वह जुए-सट्टे में भी शामिल हो गया, जिससे उस पर कर्ज चढ़ गया। कर्ज चुकाने के लिए उसने अपनी मोटरसाइकिल तक गिरवी रख दी थी। 2 जून को भी वह सुबह घर से निकलकर सोडाला और सुशीलपुरा क्षेत्र में घूमता रहा। रास्ते में हनुमान मंदिर में करीब दो घंटे तक रुका और पूजा-पाठ किया। इसके बाद शिकार की तलाश में निकल पड़ा। सुनसान रास्ते पर अकेली बुजुर्ग महिला को देखकर उसने वारदात को अंजाम दे दिया। गोपाल ज्वेलर्स को बेचा था लूटा गया माल पूछताछ में आरोपी ने खुलासा किया कि उसने लूटे गए सोने के आभूषण मानसरोवर स्थित गोपाल ज्वेलर्स में बेच दिए थे। इस सूचना के आधार पर पुलिस ने कार्रवाई करते हुए दो खरीदारों को गिरफ्तार किया। दोनों आरोपियों की पहचान महेश चंद्र गुप्ता (61 वर्ष) निवासी वीटी रोड और राजेंद्र अग्रवाल (63 वर्ष) निवासी हीरापथ, मानसरोवर के रूप में हुई है। पुलिस लूटे गए आभूषणों की बरामदगी के प्रयास कर रही है। पहले भी कर चुका है चेन स्नैचिंग जांच में सामने आया है कि आरोपी अनिकेश रावत 24 अप्रैल को महेश नगर क्षेत्र के रामनगर विस्तार में भी एक महिला से मकान पूछने के बहाने सोने की चेन लूट चुका है। उस मामले में भी पुलिस जांच कर रही है। मंदिर से लौट रही महिला को बनाया था निशाना आरोपी ने बुजुर्ग महिला से घर के बाहर ही लूट की वारदात को अंजाम दिया था। संतोष अग्रवाल दोपहर करीब 12:40 बजे मंदिर से घर लौट रही थीं। श्याम सदन अपार्टमेंट, गुलाबी नगर, सोडाला के बाहर एक युवक काफी देर से उनका पीछा कर रहा था। मौका मिलते ही उसने पीछे से झपट्टा मारकर बुजुर्ग महिला को सड़क पर गिरा दिया और मारपीट करते हुए उनके कानों के टॉप्स तथा सोने की चेन लूटकर फरार हो गया। वारदात के दौरान एक ऑटो भी उसके पीछे चलता दिखाई दिया।
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कटिहार में जाम से निपटने की तैयारी: ऑटो-टोटो के लिए तीन अस्थायी पार्किंग स्थल चिन्हित – Katihar News
कटिहार नगर निगम में शहर की बढ़ती यातायात समस्या और जाम से निपटने के लिए एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। नगर आयुक्त की अध्यक्षता में हुई इस बैठक में ऑटो और टोटो के लिए अस्थायी पार्किंग व्यवस्था पर चर्चा की गई। इसमें जिला परिवहन पदाधिकारी, यातायात पुलिस के प्रतिनिधि और अन्य संबंधित अधिकारी मौजूद रहे। नगर आयुक्त ने बताया कि नगर निगम क्षेत्र में वाहनों की बढ़ती संख्या के कारण जाम की समस्या गंभीर हो गई है। इस समस्या के समाधान हेतु अरगड़ा चौक, चौधरी मोहल्ला और मिर्चाईबाड़ी (सहायक थाना के पास) को ऑटो-टोटो के लिए अस्थायी पार्किंग स्थल के रूप में चिन्हित किया गया है। इन स्थलों पर सुचारु संचालन के लिए ट्रैफिक पुलिस की तैनाती आवश्यक है। यातायात थाना प्रभारी ने अतिरिक्त पुलिस बल की कमी का उल्लेख करते हुए बताया कि अतिरिक्त बल की मांग भेजी गई है। इस पर नगर आयुक्त ने निर्देश दिया कि उपलब्ध पुलिस बल को ही रोटेशन मोड में तत्काल इन पार्किंग स्थलों पर तैनात किया जाए। जिला परिवहन पदाधिकारी ने बैठक में गैर-पंजीकृत ऑटो और टोटो के संचालन पर रोक लगाने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने सुझाव दिया कि पंजीकृत वाहनों की पहचान के लिए विशेष कलरिंग की जाएगी और उन्हें निर्धारित रूटों पर ही चलने की अनुमति दी जाएगी। इससे वाहनों की संख्या नियंत्रित होगी और जाम कम करने में मदद मिलेगी। नगर आयुक्त ने यह भी जानकारी दी कि जल्द ही ऑटो और टोटो संघ के अध्यक्ष व सचिव के साथ बैठक की जाएगी। इस बैठक में शहर में अन्य छोटे पार्किंग स्थलों का चयन किया जाएगा और वाहनों के सुव्यवस्थित परिचालन के लिए एक कार्ययोजना तैयार की जाएगी। बैठक के अंत में, नगर आयुक्त ने यातायात थाना प्रभारी को शहर के महत्वपूर्ण रूटों की सूची तैयार कर जिला परिवहन पदाधिकारी को उपलब्ध कराने का निर्देश दिया, ताकि आगे की आवश्यक कार्रवाई की जा सके। यह बैठक कटिहार में जाम मुक्त और व्यवस्थित यातायात व्यवस्था स्थापित करने के लिए नगर निगम, परिवहन विभाग और यातायात पुलिस के संयुक्त प्रयासों की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।
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56 से ज्यादा फ्लेवर, लेकिन कहानी शुरू हुई थी एक साधारण सफेद पेठे से, जानिए
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आगरा का पेठा सिर्फ एक मिठाई नहीं, बल्कि शहर की पहचान बन चुका है. ताजमहल की तरह दुनिया भर में मशहूर इस मिठाई को लेकर एक दिलचस्प मान्यता प्रचलित है, जिसका संबंध मुगलकाल और शाहजहां के दौर से जोड़ा जाता है.
आगरा: उत्तर प्रदेश के आगरा को पेठा नगरी भी कहा जाता है. आगरा का पेठा ताजमहल कि तरह पुरी दुनिया में मशहूर है. आगरा में कई तरह के पेठे बनाये जाते है जिसमे सादा पेठा, अंगूरी पेठा, पान पेठा, चॉकलेट पेठा, केसर पेठा.

इस तरह आगरा में 56 प्रकार से अधिक पेठे के फ्लेवर तैयार किये जाते है. यह पेठा मुग़लकाल के समय जन्मा था बताया जाता है कि ज़ब ताजमहल का निर्माण हो रहा था तब बादशाह शाहजहाँ ने अपने शाही रसोई खाने में ऐसी मिठाई बनाने का आदेश दिया जो ताजमहल कि तरह ही सफ़ेद हो और अपनी मिठास के साथ साथ वह लंबे समय तक खराब ना हो जिससे मजदूरों को इसे बाँटा जा सके.

तब उस समय सफ़ेद सादा पेठे को बनाया गया था. उस दौर के शाही रसोई के कारीगरों ने सफेद कद्दू (पेठे) को उबाला और चीनी की चाशनी में पकाकर पेठे का निर्माण किया था. तब से लेकर आज तक आगरा का पेठा दुनिया में मशहूर हो गया. वर्तमान में तो कई प्रकार के पेठे बाजार में मिल रहे हैं.
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आगरा में पिछले 20 सालों से पेठे का व्यापार कर रहे गगन चौहान ने बताया कि इससे पहले उनके पिताजी और दादाजी भी पेठे का कार्य करते आ रहे है.

कहा कि आगरा में हमारी दुकान काफ़ी प्राचीन है और हम कई प्रकार के पेठे को बनाते है. आगरा में पेठे का जन्म मुग़ल शासन काल में ही हुआ था.

उन्होंने कहा कि दादा और पिताजी बताते है कि ज़ब ताजमहल बन रहा था तब गर्मियों में बादशाह ने ऐसी मिठाई बनाने का आदेश दिया जो लंबे समय तक चले और खराब ना हो. तब उस दौर के लोगों ने कद्दू से इस पेठे को बनाना शुरू किया जो लोगों को काफी पसंद आया. उन्होंने कहा कि सादा पेठा एक ऐसी मिठाई है जो काफी लंबे समय तक आसानी से रखकर खाई जा सकती है यह हाल ही खराब नहीं होती है.

आगरा के पेठा व्यापारी गगन चौहान ने बताया कि पेठा विदेशी लोगों को भी काफी पसंद आ रहा है. आगरा घूमने आने वाले विदेशी पर्यटक अपने साथ आगरा का पेठा भी लेकर जाते है. उनकी एक दुकान ताजमहल के पास ही है, जहाँ से सबसे ज्यादा अंग्रेज ही पेठा खाना और अपने साथ पैक करा कर लेजाना पसंद करते है.

आगरा के वरिष्ठ इतिहासकार ने कहा की पेठे का इतिहासकार मुग़लकाल के समय का है ज़ब बादशाह शाहजहाँ ने अपने शाही रसोई में ऐसी मिठाई बनाने का आदेश दिया जो लंबे समय तक खराब ना हो तब इस पेठे का जन्म हुआ जो आज वर्तमान में पुरी दुनिया में मशहूर हो चूका है.

बेशक इसका इतिहास बेहद प्राचीन है मुग़लकाल से अबतक यह अपनी छाप छोड़ रहा है. यह ऐसी मिठाई है जिसे लोग उपहार के तौर पर भी देना पसंद करते है.
राहुल को भाई कहने वाले स्टालिन ने क्यों बनाई कांग्रेस से दूरी?
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कभी राहुल गांधी को अपना ‘भाई’ बताने वाले एमके स्टालिन अब कांग्रेस से राजनीतिक दूरी बनाते नजर आ रहे हैं. 8 जून की इंडिया गठबंधन बैठक से डीएमके की गैरमौजूदगी ने विपक्षी एकता पर नए सवाल खड़े कर दिए हैं. कांग्रेस और डीएमके का तीन दशक पुराना रिश्ता आखिर किस वजह से कमजोर पड़ता दिख रहा है? क्या यह सिर्फ राजनीतिक रणनीति है या फिर विपक्षी गठबंधन के भीतर बढ़ते मतभेदों का संकेत? जानिए राहुल गांधी, स्टालिन, डीएमके और कांग्रेस के रिश्तों में आई दरार की पूरी कहानी और इसके 2029 की राजनीति पर संभावित असर.
क्यों बढ़ी राहुल-स्टालिन की दूरियां.
भाई से ‘बेवफाई’ तक राहुल-स्टालिन के रिश्ते: भारतीय राजनीति में कुछ रिश्ते ऐसे होते हैं जो सिर्फ चुनावी फायदे के लिए नहीं बनते, बल्कि वर्षों के भरोसे और राजनीतिक साझेदारी पर टिके होते हैं. कांग्रेस और डीएमके का रिश्ता भी ऐसा ही माना जाता रहा है. तमिलनाडु की राजनीति में लंबे समय तक दोनों दल एक-दूसरे के मजबूत सहयोगी रहे. करुणानिधि के दौर से लेकर एमके स्टालिन तक, डीएमके को गांधी परिवार का सबसे भरोसेमंद साथी माना जाता था.
कई मौकों पर स्टालिन ने सार्वजनिक मंचों से राहुल गांधी को अपना ‘भाई’ बताया और उन्हें राष्ट्रीय राजनीति का अहम चेहरा कहा. लेकिन अब हालात बदलते दिखाई दे रहे हैं. INDIA गठबंधन की 8 जून को होने वाली बैठक से डीएमके का दूरी बनाना राजनीतिक गलियारों में बड़ी चर्चा का विषय बन गया है. इसे सिर्फ एक बैठक में शामिल न होने का फैसला नहीं माना जा रहा, बल्कि कांग्रेस और डीएमके के बीच बढ़ रही राजनीतिक असहजता का संकेत समझा जा रहा है.
- कांग्रेस और डीएमके का रिश्ता कितना पुराना है?
कांग्रेस और डीएमके का साथ करीब तीन दशक से भी ज्यादा पुराना है. दोनों दलों ने कई लोकसभा और विधानसभा चुनाव मिलकर लड़े हैं. खासकर यूपीए सरकार के दौर में डीएमके कांग्रेस की सबसे महत्वपूर्ण सहयोगी पार्टियों में शामिल रही. साल 2004 और 2009 के लोकसभा चुनावों में दोनों दलों की साझेदारी ने शानदार प्रदर्शन किया था. उस समय कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और डीएमके प्रमुख करुणानिधि के बीच मजबूत राजनीतिक विश्वास था. - तमिलनाडु चुनाव तक बनी रही दोनों की एकता
यही भरोसा आगे चलकर राहुल गांधी और एमके स्टालिन के रिश्तों में भी दिखाई दिया. 2024 के लोकसभा चुनाव के दौरान भी डीएमके ने राहुल गांधी और विपक्षी एकता का खुलकर समर्थन किया था. इतना ही नहीं, तमिलनाडु विधानसभा चुनाव 2026 ने दोनों एक साथ मिलकर चुनाव भी लड़ा. चुनावी जनसभा में स्लालिन ने खुलकर राहुल को अपना भाई बताते रहे. इसलिए आज दोनों दलों के बीच दिखाई दे रही दूरी कई लोगों को हैरान कर रही है. - क्या सत्ता की महत्वाकांक्षा बनी दरार की वजह?
राजनीतिक जानकारों के मुताबिक असली संकट तब शुरू हुआ जब तमिलनाडु की राजनीति में कांग्रेस ने डीएमके से अलग रास्ता चुन लिया. कांग्रेस का विजय थलापति की टीवीके के साथ जाना और राज्य सरकार में शामिल होना डीएमके को रास नहीं आया. डीएमके को लगा कि जिस कांग्रेस को उसने वर्षों तक राजनीतिक आधार दिया, वही पार्टी अब तमिलनाडु में उसके राजनीतिक क्षेत्र में प्रवेश करने की कोशिश कर रही है. दक्षिण भारतीय राजनीति में क्षेत्रीय दल अपने राजनीतिक क्षेत्र को लेकर बेहद संवेदनशील रहते हैं. ऐसे में कांग्रेस का यह कदम डीएमके नेतृत्व को असहज कर गया. यहीं से दोनों दलों के रिश्तों में तनाव खुलकर सामने आने लगा. - इंडिया गठबंधन के लिए कितना बड़ा झटका?
डीएमके सिर्फ एक क्षेत्रीय पार्टी नहीं है. लोकसभा में उसके सांसदों की संख्या विपक्षी राजनीति में उसे महत्वपूर्ण बनाती है. दक्षिण भारत में कांग्रेस के पास वैसे भी सीमित प्रभाव बचा है. ऐसे में डीएमके जैसी सहयोगी पार्टी का नाराज होना कांग्रेस के लिए चिंता की बात है. इंडिया गठबंधन की सबसे बड़ी ताकत उसकी विविधता रही है. लेकिन यही उसकी सबसे बड़ी कमजोरी भी बनती दिख रही है. - डीएमके का फैसला तो सिर्फ शुरूआत है
पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी, पंजाब में आम आदमी पार्टी, उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी और तमिलनाडु में डीएमके इन सभी दलों की अपनी क्षेत्रीय महत्वाकांक्षाएं हैं. जब तक लक्ष्य भाजपा को चुनौती देना था, तब तक यह एकता कायम रही. लेकिन जैसे-जैसे 2029 का चुनाव करीब आएगा, नेतृत्व और राजनीतिक हिस्सेदारी के सवाल सामने आने लगेंगे. डीएमके का यह फैसला उसी प्रक्रिया की शुरुआत माना जा सकता है.
क्या स्टालिन राहुल गांधी से नाराज हैं?
यह सवाल सबसे ज्यादा पूछा जा रहा है. लेकिन इसका जवाब इतना सीधा नहीं है. स्टालिन और राहुल गांधी के व्यक्तिगत संबंधों में सार्वजनिक तौर पर कोई कटुता दिखाई नहीं देती. समस्या राजनीतिक हितों की है. राजनीति में व्यक्तिगत रिश्ते अक्सर संगठनात्मक हितों के सामने पीछे छूट जाते हैं. स्टालिन जानते हैं कि तमिलनाडु में उनकी सबसे बड़ी ताकत डीएमके की स्वतंत्र पहचान है. अगर कांग्रेस राज्य में अलग राजनीतिक विस्तार करने लगेगी, तो डीएमके के लिए यह भविष्य का खतरा बन सकता है. इसलिए यह लड़ाई राहुल गांधी बनाम स्टालिन नहीं, बल्कि कांग्रेस बनाम डीएमके के राजनीतिक हितों की लड़ाई ज्यादा दिखाई देती है.
ममता की मौजूदगी और डीएमके की गैरमौजूदगी क्या संदेश देती है?
दिलचस्प बात यह है कि जिस ममता बनर्जी को अक्सर इंडिया गठबंधन से दूरी बनाकर रखने वाला नेता माना जाता था, उनके बैठक में शामिल होने की संभावना जताई जा रही है. वहीं डीएमके दूर रहती दिख रही है. यह स्थिति बताती है कि विपक्षी राजनीति में समीकरण तेजी से बदल रहे हैं. आज का सहयोगी कल आलोचक बन सकता है और आज का आलोचक कल रणनीतिक साझेदार. यानी विपक्ष के भीतर भी राजनीतिक पुनर्संरचना का दौर शुरू हो चुका है.
2029 की राजनीति पर क्या असर पड़ेगा?
अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि डीएमके पूरी तरह कांग्रेस से अलग रास्ता चुन रही है. लेकिन इतना जरूर है कि उसने कांग्रेस को एक राजनीतिक संदेश दिया है. स्टालिन यह दिखाना चाहते हैं कि डीएमके को हल्के में नहीं लिया जा सकता. तमिलनाडु में उसकी राजनीतिक ताकत को नजरअंदाज कर कोई राष्ट्रीय रणनीति नहीं बनाई जा सकती. दूसरी तरफ कांग्रेस के सामने चुनौती यह है कि वह क्षेत्रीय दलों को साथ भी रखे और अपनी राजनीतिक जमीन भी मजबूत करे. यही संतुलन भविष्य में इंडिया गठबंधन की सफलता या विफलता तय करेगा.
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Anoop Kumar Mishra is currently serving as Assistant Editor at News18 Hindi Digital, where he leads coverage of strategic domains including aviation, defence, paramilitary forces, international security affairs…और पढ़ें
‘अनपढ़ सेलिब्रिटी’, अनुष्का शर्मा ने होम्योपैथी का किया सपोर्ट, तो भड़क उठे मशहूर डॉक्टर
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एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा ने होम्योपैथी का सपोर्ट करने के लिए एक वीडियो शेयर किया, जिस पर सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई. अनुष्का शर्मा ने होम्योपैथी को सेहत के लिहाज से अहम बताया, जबकि वीडियो में डॉ. राजन शंकरण ने इसे बीमारियों के बजाय व्यक्ति का इलाज करने वाली एक पद्धति कहा. इस पोस्ट पर तीखा रिएक्शन आया. हेपेटोलॉजिस्ट डॉ. सायरियाक एबी फिलिप्स ने इसकी कड़ी आलोचना की. उन्होंने अनुष्का शर्मा को ‘अनपढ़ सेलिब्रिटी’ कहा. डॉक्टर फिलिप्स का दावा है कि होम्योपैथी में कोई दवा नहीं होती, यह सिर्फ पानी और चीनी की महंगी गोलियां हैं.
नई दिल्ली: बॉलीवुड एक्ट्रेस अनुष्का शर्मा ने होम्योपैथी का सपोर्ट किया, तो सोशल मीडिया पर एक नया विवाद खड़ा हो गया. इस चिकित्सा पद्धति को लेकर इंटरनेट पर लोग दो गुटों में बंट गए. जहां एक तरफ कई लोग अनुष्का के इस कदम का सपोर्ट कर रहे हैं, वहीं दूसरी तरफ मॉडर्न चिकित्सा से जुड़े लोग इस पर तीखा रिएक्शन दे रहे हैं. (फोटो साभार: Instagram@anushkasharma)

पूरे विवाद की शुरुआत तब हुई, जब अनुष्का शर्मा ने अपने अकाउंट पर एक वीडियो शेयर किया. वीडियो में मशहूर होम्योपैथिक डॉक्टर राजन शंकरण और बिजनेसमैन नमिता थापर आपस में बातचीत करते हुए नजर आ रहे हैं. पोस्ट के जरिए अनुष्का ने अपनी सेहत से जुड़ी जर्नी में होम्योपैथी और डॉ. शंकरण की अहमियत को स्वीकार किया. (फोटो साभार: Instagram@anushkasharma)

अनुष्का ने अपनी पर्सनल अनुभव को फैंस के साथ शेयर करते हुए लिखा, ‘होम्योपैथी ने मेरी जिंदगी में हमेशा एक अहम भूमिका निभाई है. डॉक्टर राजन शंकरण मेरी इस पूरी हेल्थ जर्नी का एक बहुत बड़ा हिस्सा रहे हैं. मैं उनकी लाइफ स्टाइल से जुड़े विचारों को बहुत ज्यादा महत्व देती हूं.’ (फोटो साभार: Instagram@anushkasharma)
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वायरल वीडियो में किसी भी तरह की होड़ के बजाय आपसी सहयोग पर जोर दिया गया है. ‘न्यूज18 इंग्लिश’ की रिपोर्ट के अनुसार, डॉ. राजन शंकरण ने बातचीत के दौरान कहा कि होम्योपैथी वास्तव में बीमारियों का इलाज नहीं करती, बल्कि यह सीधे इंसान का इलाज करती है. जब व्यक्ति अंदर से ठीक होता है, तो उसकी बीमारी अपने आप दूर हो जाती है. (फोटो साभार: Instagram@anushkasharma)

डॉ. शंकरण ने यह भी स्वीकार किया कि हर मेडिकल सिस्टम की अपनी कुछ सीमाएं होती हैं. उन्होंने आगे तर्क दिया कि एलर्जी, एक्जिमा और मल्टीपल स्क्लेरोसिस जैसी बीमारियों का मॉडर्न मेडिसिन में कोई लंबी अवधि का समाधान नहीं है. यही वजह है कि एलोपैथिक डॉक्टर भी अपने मरीजों को होम्योपैथी के पास रेफर करते हैं, क्योंकि आज का युग का है. (फोटो साभार: Instagram@anushkasharma)

अनुष्का शर्मा का पोस्ट जैसे ही वायरल हुआ, वैसे ही सोशल मीडिया पर ‘द लिवर डॉक’ के नाम से मशहूर हेपेटोलॉजिस्ट डॉ. सायरियाक एबी फिलिप्स ने इस पर कड़ी आपत्ति जताई. होम्योपैथी के बड़े आलोचक डॉ. फिलिप्स ने वीडियो की कड़ी आलोचना की और इसमें शामिल तीनों ही हस्तियों को अपने निशाने पर ले लिया. (फोटो साभार: Instagram@anushkasharma)

डॉ. फिलिप्स ने सोशल मीडिया पर इस वीडियो से जुड़े लोगों पर बेहद आक्रामक कमेंट किया. उन्होंने राजन शंकरण, नमिता थापर और अनुष्का शर्मा की तिकड़ी तंज कसा. इतना ही नहीं, उन्होंने तीनों पर तंज कसते हुए उन्हें ‘सप्लीमेंट बेचने वाला, कानूनी रूप से मान्य झोलाछाप और अनपढ़ सेलिब्रिटी’ तक कह डाला.
(फोटो साभार: Instagram@anushkasharma)

हेपेटोलॉजिस्ट ने होम्योपैथी को पूरी तरह नकारते हुए अपनी पुरानी राय को एक बार फिर दोहराया. उन्होंने दावा किया कि इन होम्योपैथिक दवाओं में कोई भी एक्टिव तत्व या दवा नहीं होती है. डॉ. फिलिप्स की मानें, तो यह पूरी पद्धति सिर्फ पानी, शराब और चीनी के मिश्रण पर टिकी है, जहां लोग महंगे दामों में सिर्फ रंगीन चीनी की गोलियां खरीद रहे हैं. (फोटो साभार: Instagram@anushkasharma)
दिल्ली में महिला असिस्टेंट प्रोफेसर की घर में घुसकर हत्या: फ्लैट सुबह से ही बाहर से बंद, अकेली रहती थी, सीसीटीवी खंगाल रही पुलिस – New Delhi News
नई दिल्ली। ईस्ट जिले के न्यू अशोक नगर थाना इलाके में एक महिला असिस्टेंट प्रोफेसर की घर में घुसकर हत्या करने का मामला सामने आया है। मृतका की पहचान देवोस्मिता पॉल (45) के रूप में हुई है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया महिला के सिर पर किसी भारी चीज से हमला कर हत्या की गई है। पुलिस ने उसके शव को पोस्टमार्टम के लिए अस्पताल भेज दिया है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया दरवाजा बाहर से बंद था। पुलिस ने हत्या का मामला दर्ज कर लिया है। पुलिस सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाल कर मामले की छानबीन कर रही है। पुलिस हर एंगल से मामले की छानबीन कर रही है। सत्यम अपार्टमेंट के एक फ्लैट में मिला शव डीसीपी राजीव कुमार रावल ने बताया गुरुवार दोपहर करीब 02.35 बजे न्यू अशोक नगर थाना पुलिस को एक महिला से पीसीआर कॉल मिली। कॉलर ने बताया उसकी बहन की हत्या कर दी गई है और उसका शव दिल्ली के वसुंधरा एन्क्लेव स्थित सत्यम अपार्टमेंट के एक फ्लैट के अंदर पड़ा है। पुलिस तुरंत मौके पर पहुंची, जहां कॉल करने वाली महिला देवरती पॉल (49) मिली। उसने पुलिस को बताया उसकी बहन देवोस्मिता (शिवाजी कॉलेज में असिस्टेंट प्रोफेसर) फ्लैट में अकेली रह रही थी। शिकायतकर्ता के अनुसार फ्लैट सुबह से ही बाहर से बंद था और मृतका बार-बार किए जा रहे फोन कॉल्स का कोई जवाब नहीं दे रही थी। फोरेंसिक टीम ने जुटाए सबूत किसी अनहोनी की आशंका होने पर शिकायतकर्ता ने ताला तोड़कर फ्लैट खोला और अपनी बहन को अपार्टमेंट के अंदर मृत पाया। उधर, मौके पर पहुंची क्राइम व फोरेंसिक टीम की टीम ने निरीक्षण के बाद साक्ष्य जुटाए।
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मुजफ्फरनगर में होटलों की फायर सेफ्टी जांच: दिल्ली अग्निकांड के बाद प्रशासन-दमकल विभाग ने की पड़ताल, लापरवाही पर कार्रवाई की चेतावनी – Muzaffarnagar News
दिल्ली में हुए हालिया होटल अग्निकांड के बाद मुज़फ़्फ़रनगर प्रशासन सतर्क हो गया है। जनपद में संभावित हादसों को रोकने के लिए प्रशासन और अग्निशमन विभाग ने संयुक्त रूप से होटलों, गेस्ट हाउसों तथा व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में विशेष जांच अभियान शुरू किया है। बुधवार को अग्निशमन अधिकारी अनुराग सिंह के नेतृत्व में दमकल विभाग की टीम ने शहर के कई प्रमुख होटलों का दौरा किया। इस दौरान सिटी मजिस्ट्रेट पंकज राठौर भी मौजूद रहे। अधिकारियों ने फायर अलार्म सिस्टम, अग्निशमन यंत्र, इमरजेंसी एग्जिट, फायर फाइटिंग सिस्टम, बिजली व्यवस्था और आपातकालीन निकासी के इंतजामों का बारीकी से निरीक्षण किया। जांच दल ने यह भी सुनिश्चित किया कि आपात स्थिति में होटल प्रबंधन और कर्मचारी किस प्रकार प्रतिक्रिया देंगे। उनके पास पर्याप्त संसाधन और प्रशिक्षण उपलब्ध है या नहीं, इसकी भी पड़ताल की गई। कई स्थानों पर कर्मचारियों को सुरक्षा संबंधी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। सिटी मजिस्ट्रेट पंकज राठौर ने स्पष्ट किया कि जनपद में किसी भी होटल, गेस्ट हाउस या व्यावसायिक प्रतिष्ठान को फायर सेफ्टी नियमों की अनदेखी करने की अनुमति नहीं दी जाएगी। उन्होंने चेतावनी दी कि सुरक्षा मानकों में कमी पाए जाने पर संबंधित संस्थान के खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाएगी। अग्निशमन अधिकारी अनुराग सिंह ने बताया कि यह अभियान केवल औपचारिक निरीक्षण नहीं, बल्कि लोगों की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए है। उन्होंने कहा कि आने वाले दिनों में भी शहर और ग्रामीण क्षेत्रों के विभिन्न प्रतिष्ठानों की जांच जारी रहेगी। सभी को सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित करना होगा। दिल्ली में हुए अग्निकांड के बाद प्रशासन कोई जोखिम नहीं लेना चाहता। जनपद भर में सुरक्षा व्यवस्थाओं की समीक्षा की जा रही है, ताकि भविष्य में किसी भी बड़े हादसे की संभावना को समय रहते रोका जा सके।
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अररिया में पोखर में डूबी 3 किशोरियों की मौत: नहाने के लिए पानी में उतरीं; जलावन लेने घर से निकली थीं,ग्रामीण बोले-चेतावनी बोर्ड लगाएं – Araria News
अररिया के भरगामा प्रखंड अंतर्गत खजुरी पंचायत के बलुआही टोला वार्ड संख्या-4 में गुरुवार दोपहर 3 किशोरियों की पोखर में डूबने से मौत हो गई। घटना दोपहर करीब तीन बजे की बताई जा रही है। हादसे के बाद पूरे गांव में शोक और मातम का माहौल है। मृतक किशोरियों की पहचान उपेंद्र ऋषिदेव की 13 वर्षीय पुत्री रनिया कुमारी, फूलचंद ऋषिदेव की 14 वर्षीय पुत्री अंजली कुमारी तथा राजू ऋषिदेव की 14 वर्षीय पुत्री काजल कुमारी के रूप में हुई है। तीनों महादलित बस्ती की रहने वाली थीं। देखें,मौके से आई तस्वीरें… सिलसिलेवार पढ़ें, पूरा मामला… जलावन चुनने घर से निकली थीं स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार, तीनों किशोरियां दोपहर में जलावन चुनने के लिए घर से निकली थीं। भीषण गर्मी से राहत पाने के लिए वे पास स्थित एक पोखर में नहाने चली गईं। इसी दौरान वे अनजाने में पोखर के गहरे हिस्से में पहुंच गईं और डूबने लगीं। आसपास कोई मौजूद नहीं होने के कारण समय रहते उनकी मदद नहीं हो सकी। परिजनों-ग्रामीणों ने तलाश शुरू की काफी देर तक बच्चियों के घर नहीं लौटने पर परिजनों और ग्रामीणों ने उनकी तलाश शुरू की। खोजबीन के दौरान पोखर में डूबने की आशंका होने पर ग्रामीणों ने पानी में तलाश की और काफी मशक्कत के बाद तीनों के शव बाहर निकाले। यह दृश्य देखकर परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। सूचना पर पहुंची पुलिस जांच में जुटी घटना की सूचना मिलते ही भरगामा थाना पुलिस मौके पर पहुंची और मामले की जानकारी जुटाई। पुलिस ने शवों को अपने कब्जे में लेकर आगे की कानूनी प्रक्रिया शुरू कर दी है तथा घटना के सभी पहलुओं की जांच की जा रही है। पोखरों पर सुरक्षा के इंतजाम किए जाएं इस हृदयविदारक हादसे ने पूरे इलाके को झकझोर कर रख दिया है। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि गांवों के पोखरों और तालाबों के गहरे हिस्सों की पहचान कर वहां चेतावनी बोर्ड लगाए जाएं तथा सुरक्षा के पर्याप्त इंतजाम किए जाएं, ताकि भविष्य में इस तरह की दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
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8 जून को लॉन्च होगा Infinix Smart 20, कीमत 10,000 रुपये से भी कम?
8 जून को Infinix अपना एक और बजट फ्रेंडली फोन लॉन्च करने जा रहा है। कंपनी ने इस फोन की लॉन्च डेट कंफर्म कर दी है। इसकी कीमत 10,000 रुपये से कम हो सकती है। इन्फिनिक्स का यह फोन ई-कॉमर्स वेबसाइट Flipkart पर लिस्ट किया गया है। साथ ही, फोन का एक माइक्रोसाइट भी तैयार किया गया है, जहां इसके कई फीचर्स भी रिवील हुए हैं। Infinix का यह स्मार्टफोन पिछले साल आए Infinix Smart 10 का अपग्रेड होगा।
Infinix Smart 20 की लॉन्च डेट कंफर्म
इनफिनिक्स का यह फोन 8 जून को दिन के 12 बजे ई-कॉमर्स वेबसाइट फ्लिपकार्ट पर लॉन्च होगा। फोन की कीमत भी लॉन्च से पहले लीक हो गई है। यह फोन चार कलर ऑप्शन – क्लाउडलाइन ब्लू, पोलारिस टाइटेनियम, शैडो ब्लैक और सनलाइक ऑरेंज में आएगा। लिस्टिंग के मुताबिक, इस फोन के बैक में डुअल कैमरा सेटअप और LED फ्लैश लाइट मिलेगी।
मिलेंगे ये फीचर्स?
माइक्रोसाइट के मुताबिक, इस फोन में पंच-होल डिजाइन वाला डिस्प्ले मिलेगा। फोन के बैक में 3D टेक्स्चर डिजाइन दिया जाएगा। वहीं, फ्रेम में पावर बटन के साथ वॉल्यूम कंट्रोलर्स देखे जा सकते हैं। फोन की मोटाई 7.7mm होगी। इस फोन के फीचर्स की बात करें तो इसमें MediaTek Helio G81 चिपसेट दिया जा सकता है। इसमें 4GB रैम के साथ माइक्रोएसडी के जरिए 2TB तक स्टोरेज का सपोर्ट मिलेगा।
Infinix Smart 20 में 6.78 इंच का डिस्प्ले मिल सकता है, जो 120Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करेगा। फोन में 5,200mAh की बैटरी के साथ 15W वायर्ड और 5W रिवर्स वायर्ड चार्जिंग का सपोर्ट दिया जा सकता है। इसमें IP64 रेटिंग मिल सकती है, जो फोन को पानी में भींगने और धूल-मिट्टी से बचाएगा।
Infinix Smart 10 के फीचर्स
पिछले साल लॉन्च हुए Infinix Smart 10 की बात करें तो इसे भारत में 6,799 रुपये की शुरुआती कीमत में पेश किया गया था। फोन में 4GB रैम के साथ 64GB स्टोरेज मिलता है। यह फोन 6.67 इंच के HD+ डिस्प्ले के साथ आता है। फोन में Unisoc T7250 चिपसेट दिया गया है। इस फोन के बैक और फ्रंट में 8MP के कैमरे लगे हैं। यह फोन 5,000mAh की दमदार बैटरी के साथ आता है और Android 15 ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करता है।
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