Wednesday, May 6, 2026
Home Blog

गजब की यूनिवर्सिटी! पढ़ाई योग-पत्रकारिता की करवाई और डिग्री ‘लॉ’ की पकड़ा दी


Last Updated:

PDUSU Degree Controversy: सीकर की शेखावाटी यूनिवर्सिटी ने योग और पत्रकारिता के स्टूडेंट्स को ‘लॉ डिपार्टमेंट’ की डिग्री थमा दी. इस बड़ी लापरवाही से स्टूडेंट्स का भविष्य संकट में है. यूनिवर्सिटी ने इसे तकनीकी गलती बताकर सुधारने का भरोसा दिया है. जानिए पूरा मामला.

Zoom

PDUSU Degree Controversy: सीकर यूनिवर्सिटी का डिग्री कांड चर्चा में है

नई दिल्ली (PDUSU Degree Controversy). किसी भी स्टूडेंट के लिए उसकी डिग्री सबसे कीमती होती है. जरा सोचिए कि आप 3 साल तक किसी कोर्स की पढ़ाई कर रहे हैं और डिग्री किसी दूसरे कोर्स की पकड़ा दी जाए, जिसकी ए, बी, सी, डी तक नहीं मालूम. राजस्थान की एक यूनिवर्सिटी में ऐसा ही मामला सामने आया है. योग के आसन और पत्रकारिता की बारीकियां समझने वालों को डिग्री मिली कानून विभाग की. यह मामला है राजस्थान के सीकर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय (PDUSU) की.

दीन दयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय के इस कारनामे ने सैकड़ों स्टूडेंट्स का भविष्य अधर में लटक दिया है. विश्वविद्यालय की इस भारी लापरवाही से शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया है. योग और पत्रकारिता जैसे विषयों की पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स जब डिग्री लेने पहुंचे तो उनके होश उड़ गए. कड़ी मेहनत के बाद मिली सफलता का जश्न चिंता में बदल गया, जब उन्होंने देखा कि उनकी मेहनत पर कानून की डिग्री का ठप्पा लगा दिया गया है. यह सिर्फ टाइपिंग मिस्टेक नहीं, बल्कि यूनिवर्सिटी के सिस्टम की बड़ी चूक है.

योग सीखा, पत्रकार बने… लेकिन डिग्री मिली वकील वाली!

सीकर की शेखावाटी यूनिवर्सिटी ने हाल ही में विभिन्न कोर्सेस के दीक्षांत समारोह और डिग्री बांटने का काम शुरू किया था, इसमें योग विज्ञान और पत्रकारिता और जनसंचार विभाग के स्टूडेंट्स भी शामिल थे. जब छात्रों ने अपनी ओरिजिनल डिग्री खोलकर देखी तो ऊपर विभाग के नाम की जगह ‘विधि विभाग’ (Department of Law) छपा हुआ था. सीकर की शेखावाटी यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट्स अपने हाथों में लॉ की डिग्री देखकर चौंक गए. मामले की शिकायत हुई तो यूनिवर्सिटी को अपनी गलती का अहसास हुआ.

प्रशासन ने टेक्नोलॉजी पर डाला दोष

इस गड़बड़ी के सामने आते ही विश्वविद्यालय परिसर में हंगामा शुरू हो गया. स्टूडेंट्स का कहना है कि अगर वे इस डिग्री को लेकर कहीं नौकरी के लिए जाते हैं तो उन्हें फर्जी घोषित कर दिया जाएगा. दूसरी तरफ, विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे तकनीकी खामी और प्रिंटिंग एरर बताया है. अधिकारियों का कहना है कि डेटा फीडिंग या प्रिंटिंग सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी की वजह से पत्रकारिता और योग के स्टूडेंट्स की फाइल लॉ डिपार्टमेंट के फॉर्मेट में प्रिंट हो गई.

स्टूडेंट्स की बढ़ी मुसीबत

यूनिवर्सिटी की डिग्री किसी भी स्टूडेंट के करियर का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होती है. इस यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट्स का तर्क है कि इस गलती की वजह से उनकी आगे की पढ़ाई और सरकारी नौकरियों के आवेदन में देरी होगी. कई स्टूडेंट्स ने तो अन्य संस्थानों में एडमिशन के लिए अपनी डिग्रियां जमा भी कर दी थीं, जिन्हें अब वापस लेकर सुधारवाना पड़ेगा. यह न केवल मानसिक तनाव है बल्कि स्टूडेंट्स के समय और पैसे की बर्बादी भी है.

अब आगे क्या होगा?

सीकर की शेखावाटी यूनिवर्सिटी ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए आश्वासन दिया है कि सभी प्रभावित स्टूडेंट्स को नई और सही डिग्रियां जारी की जाएंगी. सभी स्टूडेंट्स को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी गलत डिग्री यूनिवर्सिटी ऑफिस में सरेंडर करें, जिससे उन्हें संशोधित सर्टिफिकेट मिल सके. हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया में कितना समय लगेगा, इसे लेकर स्टूडेंट्स अभी भी असमंजस में हैं.

About the Author

authorimg

Deepali PorwalSenior Sub Editor

Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with News18 Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is known for her versat…और पढ़ें



Source link

45 की उम्र में डेब्यू कर रही कपूर फैमिली की दुलारी, 1 ही फिल्म में दिखेगी 3 जनरेशन


Last Updated:

ऋषि कपूर और नीतू कपूर की बेटी रिद्धिमा साहनी कपूर 45 साल की उम्र में एक्टिंग डेब्यू कर रही हैं. वह फिल्म ‘दादी की शादी’ से डेब्यू करने जा रही हैं. आशीष आर. मोहन ने इसे डायरेक्ट किया है.इसमें उनकी बेटी समारा भी हैं. कपिल शर्मा, सादिया खातिब और नीतू कपूर स्टारर यह फिल्म 8 मई को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है. रिद्धिमा ने अपने डेब्यू को लेकर बात की है.

फिल्म ‘दादी की शादी’ से कपूर खानदान की लाडली रिद्धिमा साहनी कपूर डेब्यू करने जा रही हैं. इतने सालों से बिजनेस करने वालीं रिद्धिमा 45 साल की उम्र में नीतू कपूर और कपिल शर्मा के साथ लाइमलाइट में आने के लिए तैयार हैं. इस फिल्म के साथ वह कपूर परिवार की सबसे उम्रदराज डेब्यूटेंट बन गई हैं. ऋद्धिमा के लिए यह डेब्यू काफी इमोशनलभरा है. क्योंकि इस फिल्म में वह पहली बार अपनी बेटी समारा के साथ स्क्रीन शेयर कर रही हैं. (फोटो साभारः इंस्टाग्राम @ridhimakapoorsahni)

riddhima kapoor sahni

द स्क्रीन के मुताबिक, ऋद्धिमा कूपर नेबताया कि पिछले साल 45 साल की उम्र में पहली बार फिल्म सेट पर कैमरे का सामना करना उनके लिए कैसा रहा. उन्होंने अपनी बेटी समारा की फिल्म में छोटी सी झलक के बारे में भी बात की. ऋद्धिमा की शादी बिजनेसमैन भरत साहनी से हुई है और उनकी एक बेटी समारा है. (फोटो साभारः इंस्टाग्राम @ridhimakapoorsahni)

riddhima kapoor

ऋद्धिमा कपूर साहनी ने कहा, “यह अनुभव वाकई में बहुत ही अनोखा और इमोशनल है. ऐसा लगता है जैसे सब कुछ एक सर्कल में पूरा हो गया हो. मुझे पता है कि मेरे पापा हमेशा मेरे साथ हैं, मुझे आशीर्वाद देते हैं, चाहे मैं कुछ भी करूं. यही सोच मुझे बहुत ताकत और सुकून देती है…” (फोटो साभारः इंस्टाग्राम @ridhimakapoorsahni)

Add News18 as
Preferred Source on Google

riddhima kapoor

ऋद्धिमा कपूर साहनी ने कहा, “सच कहूं तो सबसे बड़ी चुनौती इस उम्र में एकदम नई दुनिया में कदम रखना था. एक नई शुरुआत में थोड़ी असुरक्षा तो होती है, लेकिन साथ ही बहुत एक्साइटमेंट भी है.” (फोटो साभारः इंस्टाग्राम @ridhimakapoorsahni)

Ridhima daughter

ऋद्धिमा कपूर साहनी ने यह भी बताया कि जब वह इस वेडिंग कॉमेडी- ‘दादी की शादी’ की शूटिंग कर रही थीं, तब उन्होंने पहली बार अपनी बेटी को दिल्ली वाले घर में अकेला छोड़ा था. इससे पहले उन्होंने साल 2019 में ऋषि कपूर के न्यूयॉर्क में कैंसर ट्रीटमेंट के दौरान भी छोड़ा था. (फोटो साभारः इंस्टाग्राम @ridhimakapoorsahni)

riddhima kapoor s

ऋद्धिमा कपूर साहनी का इस फिल्म के लिए एक खास ऑन-स्क्रीन मोमेंट भी है, जब वह अपनी मां नीतू और बेटी समारा के साथ गाने ‘सेंटी’ में नजर आएंगी. जहां समारा कैमरे और पैपराजी के सामने काफी कंफर्टेबल है, वहीं ऋद्धिमा को अभी भी यह नहीं पता कि उनका या उनकी बेटी का यह डेब्यू आगे चलकर फुल-टाइम एक्टिंग करियर में बदलेगा या नहीं. (फोटो साभारः इंस्टाग्राम @ridhimakapoorsahni)

riddhima kapoor sahni

ऋद्धिमा कपूर साहनी ने अपनी बेटी के बारे में बात करते हुए कहा, “गाने में उसका रोल छोटा है लेकिन बहुत प्यारा है. एक मां के तौर पर अपनी बेटी को स्क्रीन पर देखना बहुत गर्व और इमोशनल मोमेंट है.” (फोटो साभारः इंस्टाग्राम @ridhimakapoorsahni)

riddhima kapoor sahni

ऋद्धिमा ने पहली बार कैमरे का सामना तब किया था जब प्रोड्यूसर करण जौहर ने उन्हें अपने पॉपुलर रियलिटी शो ‘फैब्युलस लाइव्स ऑफ बॉलीवुड वाइव्स’ के लिए चुना था. ऋद्धिमा ने माना कि इस शो के लिए कैमरे के सामने आना उनके लिए आसान और कंफर्टेबल बना, जिससे फिल्मों में आना थोड़ा आसान हो गया. (फोटो साभारः इंस्टाग्राम @ridhimakapoorsahni)

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।



Source link

कोटा–रावतभाटा रूट पर खटारा बसों में सफर को मजबूर यात्री: ब्रेक फेल और बीच रास्ते खराब बसें,स्टाफ की कमी से ठप बस सेवा, डेली अप डाउन वाले सुबह घंटों इंतजार करते – Kota News




कोटा से रावतभाटा के बीच चलने वाली रोडवेज बसों की हालत को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। भीषण गर्मी के बीच बसों का बार-बार खराब होना, ब्रेक फेल होने जैसी शिकायतों ने यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है। रोजाना इस रूट पर सफर करने वाले लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और मजबूरी में जान हथेली पर रखकर यात्रा करने को मजबूर हैं। यात्रियों के मुताबिक, कई बार बसें बीच रास्ते में ही खराब हो जाती हैं। इस रूट पर कई जगह गहरी खाई भी है, ऐसे में ब्रेक काम नहीं करने जैसी स्थिति बड़े हादसे का कारण बन सकती है। यात्रियों ने बताया कि कई बार बसों के ब्रेक ने जवाब दे दिया, तो कभी इंजन बंद हो गया। इन हालातों में सफर करना किसी खतरे से कम नहीं है। स्थानीय निवासी बालकिशन गुलाटी ने आरोप लगाया कि कोटा डिपो की बसें “भगवान भरोसे” चल रही हैं। उनका कहना है कि बसों में न तो लाइट की सुविधा है और न ही तकनीकी स्थिति ठीक है। कई बार हादसे होते-होते बचे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ ड्राइवर शराब पीकर बस चलाते हैं, जिससे यात्रियों की जान और ज्यादा खतरे में पड़ जाती है। समस्या सिर्फ बसों की खराब स्थिति तक ही सीमित नहीं है, बल्कि स्टाफ की कमी भी बड़ा कारण बन रही है। कंडक्टरों की कमी के चलते हफ्ते में 2 से 3 दिन बसों का संचालन ही नहीं हो पाता। पिछले तीन दिनों से सुबह चलने वाली बसें बंद रहीं, जिससे डेली अप डाउन करने वाले यात्रियों को घंटों तक बस स्टैंड पर इंतजार करना पड़ा। आसपास के दुकानदारों का कहना है कि सुबह की बस कभी आती है तो कभी नहीं, जिससे लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है। इसका सबसे ज्यादा असर सुबह अप डाउन करने वाले लोगों को और मरीजों, जरूरी काम से आने-जाने वालों पर पड़ रहा है। यात्रियों ने बताया कि बस सुविधा नहीं मिलने के कारण उन्हें निजी गाड़ियों और टैक्सी का सहारा लेना पड़ता है, जिससे खर्च भी बढ़ता है और परेशानी भी। वहीं, जब इस मामले में रोडवेज अधिकारियों से बात की गई तो डिपो की ऑपरेशन मैनेजर श्वेता गुप्ता ने दावा किया कि कोटा से रावतभाटा के बीच रोज तीन बसें अप-डाउन कर रही हैं और सभी बसें फिट हैं। उन्होंने माना कि एक बस में तकनीकी खराबी आई थी, जिसे अब ठीक कर लिया गया है। रोडवेज प्रबंधक अजय मीणा ने बताया कि वर्तमान में 2012-13 मॉडल की करीब 14-15 बसें है जिनमें से कुछ बस इस रूट पर संचालित हो रही हैं। नई बसों को फिलहाल लंबी दूरी के रूट पर लगाया गया है, लेकिन अगले महीने तक 17 नई बसें आने की संभावना है, जिसके बाद इस रूट पर भी राहत मिल सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि सभी बसों का डिपो में नियमित चेकअप किया जाता है। स्टाफ की कमी को लेकर भी अधिकारियों ने माना कि कंडक्टरों की कमी के चलते संचालन प्रभावित हुआ है। फिलहाल कुछ निजी कर्मचारियों की मदद ली जा रही है और आश्वासन दिया गया है कि अब रोजाना बसों का संचालन सुनिश्चित किया जाएगा।



Source link

घर के गार्डन को बनाना है कूल और फ्रेश, तो घर में लगाएं चाइना डॉल प्लांट


Last Updated:

गर्मियों में घर को ठंडा और ताजगी भरा बनाए रखने के लिए चाइना डॉल प्लांट एक बेहतरीन इनडोर विकल्प है. इसकी घनी हरी पत्तियां न केवल घर की सुंदरता बढ़ाती हैं, बल्कि आसपास के वातावरण को भी ठंडा बनाए रखने में मदद करती हैं. सही देखभाल और संतुलित पानी के साथ यह पौधा लंबे समय तक हरा-भरा और स्वस्थ रहता है.

बहराइच: गर्मियों में राहत दिलाने में बेहद मददगार चाइना डॉल प्लांट एक ऐसा पौधा है जिसे घर या बगीचे में आसानी से लगाया जा सकता है. यह एक इनडोर प्लांट है, इसलिए इसे छायादार स्थान पर रखना अधिक उपयुक्त माना जाता है. इसकी घनी, हरी और छायादार पत्तियां आसपास के तापमान को संतुलित बनाए रखती हैं और वातावरण को ठंडा रखती हैं.

यह अपने गहरे हरे और फर्न जैसी पत्तियों के कारण काफी लोकप्रिय है. यह एक सदाबहार पौधा है, जो घर में प्राकृतिक और हरियाली भरा लुक देता है. इसकी चमकदार पत्तियां ऊर्जा और ताजगी का अहसास कराती हैं. इसे तेज लेकिन अप्रत्यक्ष (इनडायरेक्ट) प्रकाश, हल्की नम मिट्टी और गर्म तापमान पसंद होता है, इसलिए यह गर्मियों में आसानी से जीवित रहता है. यह पौधा लगभग 4 से 6 फीट तक ऊंचाई तक बढ़ सकता है.

देखभाल का सही तरीका

बहराइच के पौधों के जानकार पप्पू सिंह के अनुसार, इसकी देखभाल के लिए तेज लेकिन अप्रत्यक्ष रोशनी सबसे उपयुक्त होती है, हालांकि यह आंशिक छाया में भी रह सकता है. पानी देने के लिए ध्यान रखें कि मिट्टी की ऊपरी परत सूखने पर ही पानी दें. मिट्टी को केवल नम रखें, अधिक गीली न करें, क्योंकि ज्यादा पानी देने से जड़ें सड़ सकती हैं और पौधा धीरे-धीरे नष्ट हो सकता है. इसलिए हमेशा संतुलित मात्रा में ही पानी दें और बेहतर होगा कि पानी देने से पहले हाथ से मिट्टी की नमी जांच लें.

चाइना डॉल प्लांट के लिए जरूरी सावधानियां

इस पौधे के लिए अच्छी जल निकासी वाली पॉटिंग मिक्स का उपयोग करना चाहिए. यह 18°C से 24°C के तापमान में अच्छी तरह बढ़ता है, इसलिए इसे छायादार स्थान पर रखना बेहतर रहता है. यह पौधा बार-बार जगह बदलना पसंद नहीं करता, ऐसा करने पर इसकी पत्तियां झड़ सकती हैं. इसलिए इसे एक ही स्थान पर स्थिर रखें.

यह पौधा फॉर्मेल्डिहाइड और अन्य विषैले तत्वों को अवशोषित कर घर के अंदर की हवा को शुद्ध करने में भी मदद करता है. इसकी पत्तियां गिरने का मुख्य कारण अचानक स्थान परिवर्तन, पानी की कमी या अधिकता, या पर्याप्त रोशनी का अभाव हो सकता है. यदि इसे बाहर लगाना हो, तो ग्रीन नेट के नीचे लगाएं, ताकि इस पर सीधी धूप न पड़े और यह लंबे समय तक स्वस्थ बना रहे.

About the Author

Vivek Kumar

विवेक कुमार एक सीनियर जर्नलिस्ट हैं, जिन्हें मीडिया में 10 साल का अनुभव है. वर्तमान में न्यूज 18 हिंदी के साथ जुड़े हैं और हरियाणा, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की लोकल खबरों पर नजर रहती है. इसके अलावा इन्हें देश-…और पढ़ें



Source link

राजस्थान-एमपी समेत 6 राज्यों में ओले गिरे: यूपी-बिहार में आंधी-बारिश से 24 घंटे में 25 मौतें; केदारनाथ में बर्फबारी


  • Hindi News
  • National
  • Weather MP Up Rajasthan Bihar Rain Maharashtra Heatwave Himachal Jammu Kashmir Snowfall

भोपाल/लखनऊ/जयपुर/पटना6 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

राजस्थान के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में चक्रवात बनने से देश के बड़े हिस्से में मौसम बदल गया है। उत्तर, मध्य और दक्षिण भारत में बारिश का दौर जारी है। राजस्थान , मध्य प्रदेश, बिहार, हिमाचल, हरियाणा, दिल्ली में मंगलवार को ओले गिरे।

बिहार के 22 जिलों में आंधी के साथ तेज बारिश हुई। सीवान में ओले गिरे। पिछले 24 घंटों में आंधी-बारिश और बिजली गिरने से 7 बच्चों समेत 24 लोगों की मौत हो गई। यूपी के हमीरपुर में टीन शेड गिरने से एक महिला की मौत हो गई।

मंगलवार को दिल्ली, मध्य प्रदेश के डिंडौरी, राजस्थान के बालोतरा में, हरियाणा के नूंह और झज्जर में, हिमाचल प्रदेश के शिमला में दोपहर बाद तेज बारिश के साथ मंडी और सिरमौर में ओलावृष्टि हुई।

उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और छत्तीसगढ़ में आंधी-बारिश जारी है। मंगलवार को 45 शहरों में तेज बारिश हुई। हमीरपुर-चित्रकूट में 70 किमी/घंटा की रफ्तार से तूफान चला। राजस्थान के 5 जिलों में मंगलवार को तेज बारिश हुई।

उत्तराखंड के 8 जिलों में बारिश हुई, जबकि केदार घाटी में हल्की बर्फबारी दर्ज की गई। छत्तीसगढ़ में भी तेज आंधी-बारिश से हालात प्रभावित रहे और नेशनल हाईवे-30 पर पानी भर गया।

अगले 2 दिन के मौसम का हाल

7 मई:

  • असम, मेघालय और अरुणाचल में बिजली गिरने और कुछ जगह भारी बारिश का अलर्ट है।
  • यूपी, बिहार, झारखंड और ओडिशा में बिजली गिरने का खतरा बना रहेगा।
  • मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और दक्षिण भारत के हिस्सों में तेज हवा के साथ हल्की बारिश हो सकती है।

8 मई:

  • जम्मू-कश्मीर, हिमाचल और उत्तराखंड में बारिश के साथ 30-50 किमी/घंटा की रफ्तार से हवा चल सकती है।
  • पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, यूपी और राजस्थान में तेज आंधी-बारिश का अलर्ट है।
  • बिहार, झारखंड, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में बारिश के साथ बिजली गिरने का खतरा है।

देशभर से मौसम से जुड़ी 4 तस्वीरें…

दिल्ली में मंगलवार दोपहर को कई इलाकों में ओले गिरे।

दिल्ली में मंगलवार दोपहर को कई इलाकों में ओले गिरे।

हरियाणा के झज्जर जिले के बहादुरगढ़ में गिरे ओले।

हरियाणा के झज्जर जिले के बहादुरगढ़ में गिरे ओले।

हिमाचल प्रदेश के शिमला में कई इलाकों में ओलावृष्टि हुई।

हिमाचल प्रदेश के शिमला में कई इलाकों में ओलावृष्टि हुई।

बिहार के वैशाली में बारिश के बाद पानी भर गया।

बिहार के वैशाली में बारिश के बाद पानी भर गया।

खबरें और भी हैं…



Source link

जबलपुर हादसा- 20 साल पुराने क्रूज को ‘क्लीन चिट’: पर्यटन निगम का तर्क- लाइफ जैकेट पहनकर बैठना अनिवार्य नहीं, वाटर स्पोर्ट्स की गाइडलाइन भी दरकिनार – Bhopal News




मध्य प्रदेश के जबलपुर के बरगी डैम में जिस 20 साल पुराने क्रूज की वजह से 13 मौतें हुईं, उसे एमपी टूरिज्म कॉरपोरेशन क्लीन चिट दे रहा है। हादसे की मुख्य वजह अचानक आए ‘तूफान’ को माना जा रहा है। वहीं लाइफ जैकेट पहनने को लेकर उठ रहे सवालों को लेकर टूरिज्म ने अजीब तर्क देते हुए कहा है कि लाइफ जैकेट पहनना अनिवार्य नहीं है। इसके अलावा वाटर स्पोर्ट्स की गाइडलाइन का भी पालन नहीं किया गया। यह क्रूज साल 2006 का है। इस हिसाब से उसकी उम्र 20 साल हो चुकी है। निगम के एडवाइजर राजेंद्र निगम ने बताया कि कुछ महीने पहले ही क्रूज के दोनों इंजन बदले थे। इससे उसकी उम्र 10 साल और बढ़ गई थी। क्रूज में कोई तकनीकी समस्या नहीं थी। भविष्य में ऐसा न हो, इसलिए वेदर फोरकास्ट को ठीक करेंगे। निगम के एडवाइजर ने गोवा और विदेश में संचालित क्रूज का हवाला देते हुए कहा कि वहां भी लाइफ जैकेट क्रूज में उपलब्ध है, लेकिन पर्यटक घूमने के दौरान नहीं पहनते हैं। गाइडलाइन में सुरक्षा से जुड़े मापदंड स्पष्ट सुरक्षा मानकों के आधार पर क्रूज या वोट पर सवार होते ही लाइफ जैकेट को पहनना अनिवार्य होता है। नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ वाटर स्पोर्टस द्वारा गाइडलाइन में तय किए गए मापदंड स्पष्ट हैं जिसमें लाइफ जैकेट भी एक है। हालांकि इन सबके बीच CM डॉ. मोहन यादव के आदेश के बाद जांच कमेटी बना दी गई है। 6 कर्मचारियों पर कार्रवाई हो चुकी है। दो साल पहले हुई थी क्रूज की सर्विसिंग एडवाइजर निगम का कहना है कि फाइबर रीइन्फोर्स्ड प्लास्टिक (एफआरपी) क्रूज की उम्र 20 से 25 साल होती है। यह अन्य क्रूज में सबसे सुरक्षित माना जाता है। बरगी डैम में डूबे इस क्रूज की दो साल पहले ओवरऑल सर्विसिंग कराई गई थी। इंटरनेशनल मेनी टाइम आर्गेनेशनल के नॉर्म्स को भी फॉलो कर रहे थे। निगम के अनुसार, क्रूज का थर्ड पार्टी इंश्योरेंस हुआ था। इनमें यात्रियों का इंश्योरेंस भी शामिल हैं। एनजीटी के आदेश, फिर भी बोट चला रहे?
एडवाइजर निगम ने बताया, नेशनल ग्रीन ट्रूब्नल (एनजीटी) के आदेश के पैरा 130 और 131 में भोपाल और रामसर साइड शिवपुरी में मोटर बोट का संचालन बंद करने का उल्लेख है। बाकी जगहों पर फोर स्ट्रोक इंजन की बोट चल सकती है। दुनिया के 36 देशों में फोर स्ट्रोक इंजन की बोटें चल रही हैं। भोपाल और शिवपुरी में नहीं चला रहे हैं। हालांकि, एक्सपर्ट और एनजीटी में याचिका दाखिल करने वाले भोपाल के सुभाष सी. पांडे का कहना है कि एनजीटी ने उन सभाी जलस्रोतों में मोटर बोट चलाने पर प्रतिबंध लगाया है, जिनका पानी पीने के लिए उपयोग किया जा रहा हो। बरगी डैम का पानी पीने के लिए उपयोग होता है। ऐसे में यहां पर गलत तरीके से क्रूज चलाया जा रहा था। तूफान की पूरी जिम्मेदारी?
तकनीकी रूप से पूरी तरह से ठीक होने के बावजूद क्रूज का डैम में डूब गया? इस सवाल पर एडवाइजर निगम कहते हैं कि प्रदेश में 16 बोट क्लब है। 18 साल से कहीं भी सिंगल एक्सीडेंट नहीं हुआ है। बरगी डैम में अचानक आए तूफान की वजह से क्रूज संभल नहीं सका था और पलट गया था। आगे ऐसा न हो, इसके लिए नया सिस्टम तैयार कर हरे हैं। जहां भी बोट क्लब है, वहां पर वेदर फोरकास्ट के लिए लोकल हेड बनाएंगे। इसके लिए निगम के अफसरों से बात कर रहे हैं। जांच कमेटी बनी, अब तक 5 पर कार्रवाई
हादसे के बाद मुख्यमंत्री डॉ. यादव ने निरीक्षण किया था। वहीं, मृतकों के परिवार से भी मुलाकात की थी। सीएम के दौरे के बाद सरकार ने क्रूज मामले में एक्शन लिया था। जिसमें क्रूज पायलट महेश पटेल, क्रूज हेल्पर छोटेलाल गोंड एवं टिकट काउंटर प्रभारी (FOA) बृजेंद्र की सेवाएं तत्काल प्रभाव से समाप्त की गई थी। वहीं, होटल मैकल रिसॉर्ट और बोट क्लब बरगी के मैनेजर सुनील मरावी को कार्य में लापरवाही बरतने के कारण निलंबित किया गया था। रीजनल मैनेजर संजय मल्होत्रा को मुख्यालय अटैच कर विभागीय जांच शुरू की गई है। दूसरी ओर, एक कमेटी भी बनाई गई है, जो हादसे की मुख्य वजह की जांच कर रही है। ये खबर भी पढ़ें…
लाइफ जैकेट के बाद भी बरगी में मां-बेटे क्यों डूबे जबलपुर के बरगी डैम में क्रूज हादसे ने 13 परिवारों को उम्र भर का गम दिया। इस त्रासदी की सबसे मार्मिक तस्वीर दिल्ली की मरीना मैसी और उनके 4 साल के बेटे त्रिशान की थी। रेस्क्यू टीम को दोनों के शव एक-दूसरे से जकड़े मिले और उनके पास लाइफ जैकेट भी थी।पूरी खबर पढ़ें



Source link

‘मैं भगवान नहीं हूं’, हनुमान बनकर सड़क पर निकला था एक्टर, हाथ जोड़कर पूजने लगे लोग


Last Updated:

एक्टिंग की दुनिया के जाने माने अभिनेता विंदू दारा सिंह अपने करियर के साथ-साथ कई दिलचस्प किस्सों की वजह से भी सुर्खियों में रहे हैं. उन्हें पहचान पिता की तरह भगवान हनुमान का किरदार निभाकर ही मिली थी.

नई दिल्ली. विंदू दारा सिंह ने हनुमान का किरदार निभाकर घर-घर पहचान बनाई. उन्होंने अपने हर किरदार से लोगों का दिल जीता है. एक्टर ने इस किरदार से जुड़ा ही एक दिलचस्प किस्सा भी शेयर किया था. जब शूटिंग के दौरान लोगों ने उन्हें सच में भगवान समझ लिया था.

अभिनेता विंदू दारा सिंह सिर्फ फिल्मों और टीवी शोज के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी जिंदगी से जुड़े दिलचस्प किस्सों की वजह से भी चर्चा में रहते हैं. 6 मई 1964 को जन्मे विंदू, मशहूर पहलवान और अभिनेता दारा सिंह के बेटे हैं. (फोटो साभार: Instagram@vindusingh)

फिल्मी दुनिया से होने की वजह से उन्हें बचपन से ही आसपास फिल्मों और टीवी की दुनिया का माहौल रहा, जिससे उनका झुकाव भी एक्टिंग की तरफ बढ़ा. विंदू ने अपने करियर की शुरुआत साल 1994 में फिल्म करण से की थी. (फोटो साभार: Instagram@vindusingh)

Add News18 as
Preferred Source on Google

इसके बाद वह अपने पिता के निर्देशन में बनी पंजाबी फिल्म रब दिया राखा में नजर आए. धीरे-धीरे उन्होंने कई फिल्मों में काम किया, जिनमें पार्टनर, मुझसे शादी करोगी और हाउसफूल जैसी फिल्में शामिल हैं. हालांकि उन्हें फिल्मों में बड़े रोल कम मिले, लेकिन छोटे किरदारों में भी उन्होंने अपनी मौजूदगी दर्ज कराई.(फोटो साभार: Instagram@vindusingh)

टीवी इंडस्ट्री में विंदू को असली पहचान सीरियल जय वीर हनुमान से मिली, जिसमें उन्होंने भगवान हनुमान का किरदार निभाया था. इसी शो से जुड़ा एक मजेदार किस्सा भी काफी मशहूर है. दरअसल, शूटिंग के दौरान विंदू को लंबे समय तक भारी कॉस्ट्यूम और मेकअप में रहना पड़ता था.(फोटो साभार: Instagram@vindusingh)

एक दिन ब्रेक के दौरान वह हनुमान के गेटअप में ही बाहर चाय पीने चले गए. वहां मौजूद लोगों ने उन्हें देखकर सच में भगवान समझ लिया और हाथ जोड़कर प्रणाम करने लगे. पूजने लगे तब विंदू को हंसते हुए कहना पड़ा, ‘मैं भगवान नहीं, विंदू हूं.’ यही किस्सा आज भी उनके करियर के सबसे यादगार पलों में गिना जाता है.(फोटो साभार: Instagram@vindusingh)

अगर निजी जिंदगी की बात करें तो विंदू ने पहले एक्ट्रेस फरा नाज से शादी की थी, लेकिन बाद में दोनों अलग हो गए. इसके बाद उन्होंने डीना उमारोवा से शादी की, जिनसे उनकी एक बेटी है.(फोटो साभार: Instagram@vindusingh)

विंदू का नाम साल 2013 के स्पॉट फिक्सिंग विवाद में भी सामने आया था. हालांकि विवादों और मुश्किलों के बावजूद उन्होंने अपने करियर में आगे बढ़ने की कोशिश कभी नहीं छोड़ी.(फोटो साभार: Instagram@vindusingh)

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।



Source link

झांसी में मकान पर गिरा पुराना पीपल का पेड़: घर में फंसे परिवार को पुलिस ने रेस्क्यू किया, मलवे में गृहस्थी हो गई बर्बाद – Jhansi News




झांसी में मंगलवार को आए आंधी-तूफान में बड़ा हादसा टल गया। मोठ तहसील के अमरा गांव में करीब 100 साल पुराना पीपल का पेड़ जड़ समेत उखड़कर एक मकान पर गिर गया, जिससे मकान क्षतिग्रस्त हो गया, हालांकि परिवार सुरक्षित बच गया। बारिश के बाद आंधी, तबाही की दो तस्वीर… मंगलवार दोपहर अचानक बदले मौसम के बीच तेज आंधी और बारिश शुरू हुई। इसी दौरान मोठ के अमरा निवासी मदन कुशवाहा के दो मंजिला मकान के पास खड़ा लगभग 100 साल का विशाल पीपल का पेड़ भरभराकर गिर पड़ा। पेड़ का भारी तना सीधे मकान की ऊपरी मंजिल पर गिरा, जिससे दीवारें ढह गईं। उस वक्त घर के अंदर मदन, उनकी पत्नी संध्या और दोनों बच्चे राघव व आदित्य मौजूद थे। तेज आवाज और मलबा गिरते ही घर में अफरा-तफरी मच गई और परिवार के लोग डर के मारे चीखने लगे।
शोर सुनकर आसपास के ग्रामीण तुरंत मौके पर पहुंचे और बिना देर किए पुलिस को सूचना दी। स्थानीय लोगों के मुताबिक, पुलिस महज 7-8 मिनट में मौके पर पहुंच गई और राहत-बचाव शुरू किया। टीम ने सूझबूझ के साथ पूरे परिवार को सुरक्षित बाहर निकाल लिया। इस हादसे में भले ही किसी को चोट नहीं आई, लेकिन परिवार की गृहस्थी पूरी तरह उजड़ गई। मदन कुशवाहा ने बताया कि उन्होंने हाल ही में छत पर कमरे बनवाए थे, जहां अनाज, अलमारी, फ्रिज, बर्तन और कपड़े रखे थे—जो पेड़ गिरने से पूरी तरह नष्ट हो गए। घटना की जानकारी मिलते ही मोठ के एसडीएम अवनीश तिवारी भी मौके पर पहुंचे और हालात का जायजा लिया। उन्होंने बताया कि आंधी-तूफान के चलते क्षेत्र में कई जगह पेड़ गिरे हैं। पीड़ित परिवार को शासन की ओर से आर्थिक सहायता दिलाने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। साथ ही, ऐसे जर्जर या जोखिम वाले पेड़ों की पहचान भी कराई जा रही है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं से बचा जा सके।
वहीं, बारिश के बाद झांसी में मौसम जरूर सुहावना हो गया है और भीषण गर्मी से लोगों को राहत मिली है। लेकिन मौसम विभाग ने चेतावनी भी दी है कि आने वाले दिनों में तेज आंधी और तूफान का खतरा बना रह सकता है, ऐसे में लोगों को सतर्क रहने की जरूरत है।



Source link

VIDEO: जालंधर ब्लास्ट का खौफनाक सीसीटीवी आया सामने, एक्टिवा पर हुआ था ग्रेनेड अटैक?


होमवीडियोदेश

VIDEO: जालंधर ब्लास्ट का खौफनाक सीसीटीवी आया सामने, एक्टिवा पर हुआ था ग्रेनेड अटैक?

X

VIDEO: जालंधर ब्लास्ट का खौफनाक सीसीटीवी आया सामने, एक्टिवा पर हुआ था ग्रेनेड अटैक?

 

arw img

पंजाब के जालंधर में बीएसएफ चौक के पास मंगलवार रात एक एक्टिवा स्कूटर में हुए जोरदार धमाके ने सबको दहला दिया. शुरुआत में इसे गाड़ी की तकनीकी खराबी या शॉर्ट सर्किट से लगी आग माना जा रहा था. अब इस मामले में सुरक्षा एजेंसियों ने चौंकाने वाला दावा किया है. टॉप इंटेलिजेंस सोर्सेज के मुताबिक यह एक सोची-समझी साजिश के तहत किया गया ग्रेनेड हमला था. धमाके का सीसीटीवी फुटेज सामने आने के बाद पुलिस और जांच एजेंसियां पूरी तरह अलर्ट मोड पर हैं. इस ब्लास्ट के बाद इलाके में भारी पुलिस बल तैनात कर दिया गया है. गनीमत यह रही कि इस घटना में कोई जानी नुकसान नहीं हुआ. फायर ब्रिगेड ने मौके पर पहुंचकर आग पर काबू पा लिया था. अब इस हमले के पीछे सीमा पार बैठे आकाओं का हाथ होने की आशंका जताई जा रही है.

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।



Source link

नौसेना अफसर की बेटी, बचपन में 1 फैसले को बनाया जिंदगी का फलसफा, जिंदगीभर की कला की साधना


Last Updated:

मशहूर भरतनाट्यम डांसर लीला सैमसन ने मात्र 9 साल की आयु में डांस को अपना जीवन बनाने का निर्णय लिया था. तमिलनाडु में जन्मी लीला ने चेन्नई के ‘कलाक्षेत्र’ में महान गुरु रुक्मिणी देवी अरुंडेल से शिक्षा हासिल की. उन्होंने न केवल ग्लोबल स्तर पर भारतीय डांस को पहचान दिलाई, बल्कि ‘स्पंदा’ ग्रुप के जरिये इसे आधुनिक नजरिया भी दिया. उन्होंने डांस के साथ-साथ कलाक्षेत्र की निदेशक, संगीत नाटक अकादमी की अध्यक्ष और सेंसर बोर्ड में अहम भूमिकाएं भी निभाईं. ‘पद्मश्री’ से सम्मानित लीला आज भी कला और समर्पण की एक मिसाल हैं.

ख़बरें फटाफट

Zoom

लीला सैमसन बचपन से डांस सीख और सिखा रही हैं.

नई दिल्ली: भारतीय शास्त्रीय डांस की दुनिया में लीला सैमसन एक ऐसा नाम है, जिन्होंने भरतनाट्यम को महज एक कला नहीं, बल्कि अपनी रूह और जिंदगी का हिस्सा बना लिया. 6 मई 1951 को तमिलनाडु के कूनूर में जन्मी लीला के घर का माहौल ही कुछ ऐसा था कि उनका झुकाव बचपन से ही कला की तरफ हो गया. उनके पिता नौसेना में अधिकारी थे, लेकिन उनकी मां को संगीत और कला से इतना लगाव था कि उन्होंने ही लीला को इस रास्ते पर आगे बढ़ने का हौसला दिया. आप जानकर हैरान रह जाएंगे कि जब बच्चे खेल-कूद में व्यस्त रहते हैं, यानी सिर्फ 9 साल की छोटी सी उम्र में, लीला ने यह फैसला कर लिया था कि उन्हें एक डांसर ही बनना है. उनके पिता ने उन्हें चेन्नई के मशहूर संस्थान ‘कलाक्षेत्र’ भेजा, जहां उन्होंने महान गुरु रुक्मिणी देवी अरुंडेल की देखरेख में भरतनाट्यम की बारीकियां सीखीं और अपनी पूरी जिंदगी इस साधना के नाम कर दी.

लीला की खासियत यह रही कि उन्होंने अपनी पढ़ाई के साथ कभी अपनी डांस साधना को पीछे नहीं छूटने दिया. डिग्री हासिल करने के बाद भी वे लगातार सीखती रहीं और जल्द ही उनकी मेहनत रंग लाई, जब वे एक बेमिसाल डांसर के रूप में पहचानी जाने लगीं. उन्होंने न सिर्फ खुद को एक कलाकार के रूप में स्थापित किया, बल्कि दिल्ली के श्रीराम भारतीय कला केंद्र और गंधर्व महाविद्यालय जैसे संस्थानों में नई पीढ़ी को भी इस कला के गुर सिखाए. उनकी कला की गूंज सिर्फ भारत तक ही सीमित नहीं रही, बल्कि उन्होंने यूरोप, अफ्रीका और अमेरिका जैसे बड़े देशों में मंच पर अपनी प्रस्तुतियों से भारतीय संस्कृति का परचम लहराया. साल 1995 में उन्होंने ‘स्पंदा’ नाम का अपना डांस ग्रुप बनाया, जिसका मकसद भरतनाट्यम को एक फ्रेश और नए नजरिए के साथ पेश करना था ताकि युवा भी इससे जुड़ सकें.

कला की दुनिया को किया संपन्न
लीला सैमसन की शख्सियत सिर्फ नाचने-गाने तक ही सीमित नहीं रही, उन्होंने प्रशासन के क्षेत्र में भी बड़ी जिम्मेदारियां बहुत बखूबी निभाईं. वे 2005 से 2012 तक उस संस्थान ‘कलाक्षेत्र’ की डायरेक्टर रहीं जहां से उन्होंने खुद सीखा था, जो उनके लिए किसी सपने के सच होने जैसा था. इसके अलावा उन्होंने संगीत नाटक अकादमी की चेयरपर्सन और सेंसर बोर्ड (CBFC) की प्रमुख के तौर पर भी काम किया और कला के क्षेत्र में कई कड़े और जरूरी फैसले लिए. उनकी इस अटूट निष्ठा और कला के प्रति समर्पण के लिए भारत सरकार ने उन्हें ‘पद्मश्री’ जैसे बड़े नागरिक सम्मान से नवाजा और उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार भी मिला. हालांकि, ऊंचे पदों पर रहते हुए उनके करियर में कुछ विवाद भी आए, लेकिन लीला ने हमेशा साबित किया कि उनके लिए कला और शिक्षा सबसे ऊपर है. आज वे दुनिया भर के कलाकारों के लिए एक मिसाल हैं कि बचपन का एक छोटा सा फैसला कैसे आपकी पूरी जिंदगी की पहचान बन सकता है.

About the Author

authorimg

Abhishek NagarSenior Sub Editor

अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ में सीनियर सब एडिटर के पद पर काम कर रहे हैं. दिल्ली के रहने वाले अभिषेक नागर ‘न्यूज18 डिजिटल’ की एंटरटेनमेंट टीम का हिस्सा हैं. उन्होंने एंटरटेनमेंट बीट के अलावा करियर, हेल्थ और पॉल…और पढ़ें





Source link