जयपुर11 मिनट पहले
- कॉपी लिंक
जल जीवन मिशन के कामों में कैग ने भारी फर्जीवाड़ा पकड़ते हुए तल्ख टिप्पणियां की हैं। कैग की रिपोर्ट के अनुसार- 26 क्षेत्रीय जल आपर्ति परियोजनाओं में थर्ड पार्टी इंस्पेक्शन और सर्टिफिकेशन के प्रावधान का पालन किए बिना ही ठेकेदारों को दिसंबर 2024 तक 122.31 करोड रुपए का भुगतान कर दिया गया। फर्जी बिलों से 7.7 करोड़ का भुगतान भी किया गया।
ऑडिट में यह भी सामने आया कि चयनित कामों में मनगढ़ंत और फर्जी बिल बनाए गए। दूसरे ठेकेदारों के बिलों के आधार पर 7.7 करोड़ के अनियमित भुगतान किए गए। जेजेएम में करौली में निविदा खोलने से पहले ही पाइप खरीद लिए गए। वहीं बाद में एनओसी जारी होने से पहले ही उन्हें सोजत सिटी को ट्रांसफर कर दिया गया, जिससे पूरी टेंडर प्रक्रिया शक के दायरे में है।
कैग ने उठाए सवाल, सरकार का तर्क सिरे से खारिज
कैग रिपोर्ट के अनुसार- जेजेएम की गाइडलाइन के अनुसार सहायक गतिविधियों और प्रचार-प्रसार में प्रोजेक्ट के फंड का इस्तेमाल नहीं कर सकते थे। जून 2024 में रिकॉर्ड की जांच से पता चला कि साल 2022-23 के दौरान अलग-अलग जल आपूर्ति परियोजनाओं की आधारशिला रखने के आयोजन पर 3.28 करोड़ रुपए खर्च किए गए थे।
कैग के मुताबिक- यह खर्च गलत था और जेजेएम गाइडलाइन का साफ उल्लंघन था। राज्य सरकार ने नवंबर 2025 में इसके जवाब में तर्क दिया कि शिलान्यास समारोह पर खर्च वित्त विभाग की मंजूरी लेकर किया गया था। कैग ने सरकार के इस जवाब को सिरे से खारिज करते हुए इसे जेजेएम की गाइडलाइन का उल्लंघन बताते हुए ऑडिट पैरा बनाकर आपत्ति जताई है।

इन मुद्दों पर भी उठाए सवाल
पानी की क्वालिटी जांच-मॉनिटरिंग पर 91.69% पैसा खर्च नहीं
साल 2019 से 20 जनवरी 2025 तक पानी की क्वालिटी की निगरानी और सर्वे एक्टिविटीज की गई। इसमें 486.23 करोड़ के बजट में से केवल 40.39 करोड़ रुपए ही खर्च किए, जबकि 445.84 करोड़ रुपए बिना खर्च पड़े रहे। इस काम में केवल 8.31% ही खर्च किए। कुल बजट के 91.69% रुपए बिना खर्च पड़े रहे।
विभाग की लापरवाही से टेंडर में देरी, तीन जिलों के 1.50 लाख से ज्यादा परिवार पानी से वंचित
कैग की रिपोर्ट के अनुसार- जलदाय विभाग की लापरवाही के कारण टेंडर रद्द हुए। इस वजह से सितंबर 2024 तक कोई काम नहीं हुआ। विभाग की लापरवाही के कारण बारां, झालावाड़ और कोटा जिले के 14 गांवों के 1,52,437 ग्रामीण परिवार 3 साल से ज्यादा समय तक जेजेएम के पानी से वंचित रहे।
कैग ने जलदाय विभाग की मंशा पर उठाए सवाल
कैग की रिपोर्ट के अनुसार- क्षेत्रीय जलापूर्ति परियोजना बारां में ठेकेदारों ने काम पूरा करने की अवधि को लगातार आगे बढ़ाया और देरी की। विभाग ने टेंडरों को अंतिम रूप देने में निष्क्रियता बरती। इससे निविदाओं को फाइनलाइज करने को लेकर विभाग पर संदेह होता है।
ये खबरें भी पढ़िए…














