Wednesday, May 27, 2026
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UPSC की तरह बिहार दारोगा का पेपर देख चकराया अभ्यर्थियों का दिमाग! बोले-अब…



Bihar SI Exam Review: एग्जाम सेंटर से बाहर निकल रहे अभ्यर्थियों ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि पेपर का स्तर मॉडरेट से लेकर कठिन तक था. कई सवाल बेहद ट्रिकी और लंबे थे. छात्रों का कहना है कि इस बार केवल रटकर तैयारी करने वालों के लिए पेपर आसान नहीं था.



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‘भूत का साया’ क्या था, शिल्पी-शरत को क्यों बरी किया: आसाराम की सजा बरकरार, 16 सवालों से जानिए हाईकोर्ट का फैसला – Jodhpur News


नाबालिग से रेप के मामले में राजस्थान हाईकोर्ट (जोधपुर मुख्यपीठ) ने आसाराम की आजीवन कारावास की सजा बरकरार रखी है। कोर्ट ने आसाराम की अंतरिम जमानत तुरंत रद्द करते हुए सरेंडर करने का आदेश दिया है। साथ ही तत्काल गिरफ्तारी का वारंट भी जारी कर दिया है।

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यानी अब आसाराम को हर हाल में तुरंत जेल जाना होगा। फैसले के बाद आसाराम कल जोधपुर पहुंच जाएगा।

92 पन्नों के फैसले में उम्रकैद से लेकर सह-आरोपियों के बरी होने तक कई अहम बिंदु शामिल हैं। बचाव पक्ष के 50 करोड़ की वसूली वाले तर्क को कोर्ट ने क्यों नकारा? और जब बंद कमरे की घटना में कोई चश्मदीद नहीं था, तो अपराध कैसे साबित हुआ? आइए ‘भास्कर एक्सप्लेनर’ में 16 सवालों के जरिए समझते हैं इस पूरे फैसले को।

सबसे पहले जानिए- क्या है पूरा मामला?

  • अगस्त 2013 में जोधपुर स्थित आश्रम में नाबालिग छात्रा के साथ रेप के आरोप में आसाराम को गिरफ्तार किया गया था। लंबी सुनवाई के बाद जोधपुर की विशेष पॉक्सो कोर्ट ने 25 अप्रैल 2018 को उन्हें दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी।
  • आसाराम ने फैसले को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हाईकोर्ट में 16 फरवरी से 20 अप्रैल 2026 तक डे-टू-डे सुनवाई हुई थी। खंडपीठ ने 20 अप्रैल को फैसला सुरक्षित रख लिया था। इसे 27 मई को सुनाया गया।

1. सवाल: हाईकोर्ट का फैसला क्या आया?

जवाब: राजस्थान हाईकोर्ट ने नाबालिग से बलात्कार मामले में आसाराम की आजीवन कारावास (शेष प्राकृतिक जीवन तक) की सजा को बरकरार रखा है। उसकी अंतरिम जमानत रद्द कर दी गई। तत्काल गिरफ्तारी वारंट जारी हुआ है। यानी उसे अब सरेंडर कर जेल जाना होगा। आसाराम हरिद्वार से दिल्ली के लिए रवाना हो चुका है, वहां से जोधपुर आएगा।

2. सवाल: आसाराम अभी तक बाहर कैसे था? जवाब: साल 2018 में निचली अदालत (विशेष पॉक्सो कोर्ट) के दोषी ठहराए जाने के बाद आसाराम ने हाईकोर्ट में अपील दायर की थी। अपील पर सुनवाई के दौरान आसाराम अंतरिम जमानत दी गई थी। अब हाईकोर्ट ने अपील पर अपना अंतिम फैसला सुना दिया है और निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा है, तो इस अंतरिम जमानत का आधार समाप्त हो गया है।

3.सवाल: पीड़िता कौन है और घटना कहां हुई? जवाब: पीड़िता उस समय नाबालिग(16) थी, जो मध्यप्रदेश के छिंदवाड़ा स्थित आसाराम के गुरुकुल में कक्षा 12 की छात्रा थी। घटना 15 अगस्त 2013 की रात जोधपुर के मणई गांव स्थित आसाराम की कुटिया में हुई। परिवार उत्तर प्रदेश का रहने वाला है।

छिंदवाड़ा स्थित आसाराम के गुरुकुल में नाबालिग के साथ रेप हुआ था (फाइल फ़ोटो)।

छिंदवाड़ा स्थित आसाराम के गुरुकुल में नाबालिग के साथ रेप हुआ था (फाइल फ़ोटो)।

4. सवाल:’भूत का साया’ वाली बात क्या थी, क्या परिवार सच में माना?

जवाब: 6 अगस्त 2013 को पीड़िता हॉस्टल में गिर गई थी। हॉस्टल वार्डन शिल्पी ने परिजनों को फोन कर कहा- बच्ची पर ‘भूत का साया’ है और आसाराम ने उसे ‘भूत उतारने’ के लिए बुलाया है। गुरुकुल डायरेक्टर शरत चंद्र ने भी यही कहा। परिवार सालों से आसाराम का अंध-श्रद्धालु था और दीक्षा ले चुका था। कोर्ट ने माना कि किसी गुरु पर आस्था रखने वाले भक्त के लिए ऐसी बात मान लेना अस्वाभाविक नहीं था।

5. सवाल: हाईकोर्ट ने शिल्पी और शरत चंद्र को बरी क्यों किया? जवाब: हाईकोर्ट ने माना कि यह साबित नहीं हुआ कि जब शिल्पी और शरत चंद्र ने परिजनों को पीड़िता को आसाराम के पास भेजने को कहा, तब उन्हें यह पता था कि आसाराम भविष्य में रेप जैसा अपराध करेगा। आपराधिक साजिश साबित करने के लिए पहले से ‘सहमति’ होना जरूरी है। पूर्व जानकारी साबित न होने के कारण उन्हें बरी कर दिया गया।

31 अगस्त 2013 को पुलिस ने आसाराम को गिरफ्तार किया था। (फ़ाइल फ़ोटो)।

31 अगस्त 2013 को पुलिस ने आसाराम को गिरफ्तार किया था। (फ़ाइल फ़ोटो)।

6. सवाल: आसाराम को किन आरोपों से बरी किया, किन पर सजा बरकरार है? जवाब:आपराधिक साजिश रचना और सामूहिक रेप के आरोपों से बरी किया गया है। सजा बरकरार: मानव शोषण के उद्देश्य से बंधक बनाना, आपराधिक धमकी देना, और विश्वास का फायदा उठाकर नाबालिग के साथ रेप करने के सभी गंभीर आरोपों और पॉक्सो एक्ट के कड़े प्रावधानों के तहत सजा बरकरार रखी गई है।

7. सवाल: पीड़िता की उम्र पर विवाद क्यों था जवाब: बचाव पक्ष ने दावा किया था कि घटना के समय पीड़िता 18 साल से ऊपर थी। इसके लिए एक पुराने रजिस्टर की फर्जी एंट्री पेश की गई। लेकिन हाईकोर्ट ने माना कि वह रजिस्टर बाद में बदला गया था। कोर्ट ने 10वीं कक्षा के मूल सर्टिफिकेट को सर्वोच्च साक्ष्य माना, जिसमें जन्मतिथि 4 जुलाई 1997 दर्ज थी, जिससे साबित हुआ कि घटना के समय वह नाबालिग थी।

8. सवाल: मेडिकल रिपोर्ट में बाहरी चोट नहीं थी, तो रेप कैसे साबित हुआ? जवाब: मेडिकल जांच में हाइमन सुरक्षित पाया गया था और शरीर पर बाहरी चोट नहीं थी। कोर्ट ने माना कि पीड़िता के स्पष्ट बयान के आधार पर रेप सिद्ध होता है।

9. सवाल: FIR में 5 दिन की देरी को कोर्ट ने कैसे माना और दिल्ली में जीरो FIR क्यों हुई? जवाब: कोर्ट ने माना कि यह देरी स्वाभाविक है। एक 16 वर्षीय बच्ची, जो अपने परमपूज्य ‘गुरु’ के कृत्य से सदमे में थी, उसके लिए हिम्मत जुटाने में समय लगता है। परिवार सबसे पहले आसाराम से मिलने दिल्ली गया था। जब पता चला कि वह जोधपुर चला गया है, तो जोधपुर जाने में लगने वाले अतिरिक्त समय से बचने के लिए परिवार ने दिल्ली के पुलिस स्टेशन में ही तुरंत जीरो FIR दर्ज करवा दी।

10.सवाल: फोरेंसिक जांच न होने पर कोर्ट का क्या जवाब था? जवाब: घटना 15 अगस्त को हुई और जोधपुर में जांच 21 अगस्त को शुरू हुई। कोर्ट ने कहा- इतने दिन बीत जाने के बाद घटनास्थल से फोरेंसिक सबूत मिलना वैसे भी संभव नहीं था। इसलिए, इस जांच के न होने से पीड़िता का मुख्य बयान कमजोर नहीं होता।

11. सवाल: 50 करोड़ की जबरन वसूली की साजिश वाला तर्क क्यों खारिज हुआ? जवाब: बचाव पक्ष का आरोप था कि 50 करोड़ रुपए ऐंठने के लिए झूठा मामला बनाया गया। कोर्ट ने कहा- यदि यह पहले से रची गई साजिश होती, तो परिजन मणई आश्रम से सीधे जोधपुर पुलिस थाने जाते। दिल्ली जाकर जीरो FIR के लंबे रास्ते से गुजरना किसी साजिश की कहानी से मेल नहीं खाता।

14. सवाल: इस मामले में गवाही का क्या हाल रहा? जवाब: अभियोजन पक्ष ने 44 गवाह पेश किए, जिनमें पीड़िता स्वयं, उसके माता-पिता, डॉक्टर और पुलिस अधिकारी शामिल थे। बचाव पक्ष ने 31 गवाह पेश किए। पीड़िता से लंबे समय तक तीखे सवाल किए गए, फिर भी उसके मुख्य बयान को कोई हिला नहीं सका।

15. सवाल: ‘रिपोर्टेबल’ फैसले का क्या मतलब होता है? जवाब: जब हाईकोर्ट किसी फैसले को ‘Reportable’ घोषित करता है, तो इसका अर्थ है कि यह फैसला भविष्य में अन्य समान मामलों में एक नजीर (उदाहरण) के रूप में काम आएगा।

16. सवाल: फैसले में पीड़िता के मानसिक आघात को कोर्ट ने कैसे रेखांकित किया? जवाब: कोर्ट ने अपने फैसले में स्पष्ट रूप से दर्ज किया है कि पीड़िता सहानुभूति नहीं, बल्कि न्याय मांग रही है। कोर्ट ने उसकी इस भावना का समर्थन किया कि उत्पीड़क के लिए कारावास केवल शारीरिक है, लेकिन एक मासूम पर थोपी गई सजा उसकी आत्मा पर है, जो आजीवन रहेगी और जिसमें कोई पैरोल नहीं होती।

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आसाराम से जुड़ी ये खबर भी पढ़िए… हाईकोर्ट का फैसला-आसाराम को करना होगा सरेंडर, सजा बरकरार:नाबालिग से यौन उत्पीड़न केस में 2 आरोपी बरी, करीब एक महीने बाद सुनाया डिसीजन

राजस्थान हाईकोर्ट (जोधपुर) ने बुधवार (27 मई) सुबह आसाराम की सजा पर फैसला सुनाया। हाईकोर्ट ने नाबालिग से यौन उत्पीड़न के केस में आजीवन कारावास की सजा को बरकरार रखा है। जस्टिस अरूण मोंगा व जस्टिस योगेन्द्र कुमार पुरोहित की डिवीजन बेंच ने यह फैसला सुनाया। केस में सह आरोपी शिल्पी व शरतचंद को बरी किया गया है। पढ़ें पूरी खबर



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47 साल में बनीं वो 5 फिल्में, बिना प्रमोशन कर डाली छप्परफाड़ कमाई, तोड़े रिकॉर्ड पर रिकॉर्ड


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70-80-90 के दशक में आने वाली फिल्मों की जानकारी फिल्मी मैगजीन, पत्र-पत्रिकाओं से ही होती थी. 2000 के दशक में इसमें बदलाव आया. फिल्म रिलीज होने से पहले प्रमोशन का ट्रेंड तेजी से बढ़ा. इसका फायदा उन्हीं फिल्मों को हुआ जिनकी कहानी जबर्दस्त थी. पिछले एक दशक में कुछ ऐसी फिल्में भी आईं जिनका प्रमोशन नहीं किया गया. बस फिल्म रिलीज कर दी गई. ऐसे ही हम पांच फिल्मों की चर्चा करने जा रहे हैं. पांचों फिल्में ब्लॉकबस्टर साबित हुई. पांचों ने कमाई के नए रिकॉर्ड बनाए. पांचों फिल्में
47 साल के अंतराल में रिलीज हुईं.

कुछ फिल्में ऐसी होती है जिन्हें प्रमोशन की जरूरत नहीं पड़ी. सिनेमाघरों में ये फिल्में रिलीज हुईं. माउथ पब्लिसिटी का ऐसा असर हुआ कि हर सिनेमाप्रेमी के मन में फिल्म देखने की इच्छा प्रबल होती चली गई. इस तरह की स्ट्रेटजी राज श्री प्रोडक्शन के मालिक ताराचंद बड़जात्या ने अपनी फिल्मों में 70-80 के दशक में खूब आजमाई. पिछले एक दशक में इसी स्ट्रेटजी को कई बड़े फिल्मकारों ने अपनाया. विरोध-हंगामे के बीच चुपचाप अपनी फिल्में रिलीज कीं. पांच फिल्में बिना प्रमोशन के रिलीज हुईं. पांचों ही ब्लॉकबस्टर निकलीं. ये फिल्में थीं : डॉन, खलनायक, जवान, पठान और सैयारा.

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सबसे पहले बात करते हैं 12 मई 1978 को रिलीज हुई ‘डॉन’ फिल्म की. जंजीर, दीवार, शोले और कभी-कभी फिल्म के बाद अमिताभ बच्चन की यह फिल्म आई थी. इसी फिल्म ने उन्हें फिल्म इंडस्ट्री का सही मायने में डॉन बना दिया. अमिताभ बच्चन के स्टारड को इस फिल्म में खूब भुनाया गया था. यह एक एक्शन थ्रिलर फिल्म थी और हिंदी सिनेमा के लिए मील का पत्थर साबित हुई. फिल्म का म्यूजिक कल्याण जी- आनंद जी ने दिया था. गीतकार अनजान और इंदीवर थे. अनजान का कालजयी गाना ‘खइके पान बनारस वाला’ अमिताभ बच्चन को अमिट पहचान दे गया. स्क्रिप्ट सलीम-जावेद ने लिखी थी.

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‘डॉन’ फिल्म का म्यूजिक ब्लॉकबस्टर था. फिल्म में कुल 5 गाने थे. ये गाने ‘जिसका मुझे था इंतजार’, ‘अरे दीवानों, मुझे पहचानो’ ”खइके पान बनारस वाला’, ‘ई है बंबई नगरिया तू देख बबुआ’ और ‘ये मेरा दिल प्यार का दीवाना’ थे. हर गाने ने समा बांध दिया था. डॉन के प्रोड्यूसर नरीमन ईरानी वैसे तो सिनेमेटोग्राफर थे. उन्होंने जिंदगी-जिंदगी नाम से 1972 एक फिल्म बनाई थी. फिल्म फ्लॉप रही तो 12 लाख के कर्ज में डूब गए. ‘रोटी कपड़ा और मकान’ में वो काम कर रहे थे. अमिताभ बच्चन-जीनत अमान-प्राण साहब ने फ्री में काम करने का वादा किया तो नरीमन ने सलीम-जावेद से ‘डॉन’ फिल्म की स्क्रिप्ट खरीदी. चंद्रा बारोट के निर्देशन में फिल्म बनाई गई. फिल्म बनने से पहले नरीमन का निधन हो गया. चंद्रा बारोट ने अपनी बहन से 40 हजार का कर्जा लेकर फिल्म पूरी की. फिल्म बिना प्रमोशन के रिलीज की गई. पूरे एक हफ्ते तक रिस्पांस नहीं मिला. फिर फिल्म ने इतिहास ही रच दिया. यह 1978 की सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म बनी.

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ऐसा ही कुछ 1993 में रिलीज हुई संजय दत्त-माधुरी दीक्षित स्टारर फिल्म ‘खलनायक’ के साथ हुआ. फिल्म का क्लाइमैक्स सीन शूट होने के बाद संजय दत्त को 1993 मुंबई बम बलास्ट केस के सिलसिले में जेल जाना पड़ा. पूरे देश में फिल्म को बैन किए जाने की मांग हुई. कई जगह पर प्रदर्शन हुए. फिल्म का म्यूजिक पहले ही रिलीज हो चुका था. एक सप्ताह में ही फिल्म के 1 करोड़ ऑडियो कैसेट बिक गए थे. ‘चोली के पीछे क्या है’ गाना आइकॉनिक साबित हुई. यह गाना माधुरी दीक्षित पर फिल्माया गया था. म्यूजिक लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल ने दिया था. गीत आनंद बख्शी ने लिखे थे.

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बॉलीवुड से जुड़े फिल्मकारों-आलोचकों का मानना था कि यह फिल्म नहीं चलेगी. सुभाष घई ने इसका तोड़ निकाला. उन्होंने फिल्म मे 10 प्रीमियर शो रखे. जब संजय दत्त इन प्रीमियर शो में माधुरी दीक्षित के साथ पहुंचे तो हजारों लोगों की भीड़ उमड़ी. संजय दत्त की इमेज का फायदा उठाते हुए 6 अगस्त 1993 को फिल्म को रिलीज किया. सुभाष घई का अंदाज सही निकला. यह फिल्म ब्लॉकबस्टर मूवी साबित हुई. खलनायक फिल्म में संजय दत्त का किरदार निगेटिव था. फिल्म ने उस समय 24 करोड़ का बिजनेस किया था. 1993 में बॉक्स ऑफिस पर सबसे ज्यादा कमाई करने वाली यह दूसरी फिल्म थी. इस तरह से सुभाष घई ने बिना प्रमोशन के यह फिल्म रिलीज की. उन्होंने अपने एक इंटरव्यू में बताया था कि फिल्म की पब्लिसिटी इतनी ज्यादा हो गई थी कि प्रमोशन नहीं करना पड़ा.

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बॉलीवुड के दिग्गज फिल्मकार यश चोपड़ा के बेटे ने अपने पिता के पदचिह्नों पर चलते हुए एक से बढ़कर एक ब्लॉकबस्टर फिल्में बनाई हैं. उन्होंने समय के साथ खुद को बदला. हमेशा युवाओं की नब्ज पक‌ड़ने की कोशिश की. कोरोना काल में बॉलीवुड इंडस्ट्री का बहिष्कार तेजी से हुआ. कुछ अप्रिय घटनाओं के चलते सोशल मीडिया पर बॉलीवुड सुपर स्टार के मीम्स बनाए गए. आमिर खान-शाहरुख खान और सलमान खान के खिलाफ कई संगठनों ने मोर्चा ही खोल दिया. ऐसे संकट के समय में आदित्य चोपड़ा ने 25 जनवरी 2023 में यशराज फिल्म्स के बैनर तले अपनी मूवी ‘पठान’ रिलीज की. इस फिल्म को बिना प्रमोशन के रिलीज किया गया.

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शाहरुख खान-दीपिका पादुकोण स्टारर इस फिल्म का जादू दर्शकों पर चला. पठान फिल्म को लेकर सोशल मीडिया पर बायकॉट कैंपेन भी चला. दीपिका पादुकोण की भगवा बिकनी पर विवाद हुआ. जितना ज्यादा विवाद हुआ, उतनी ही फिल्म को सफलता मिली. पठान फिल्म के क्रेज का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि दर्शक थिएटर में ही ‘झूमे जो पठान’ गाने पर नाचते-झूमते थे. पठान फिल्म को सिद्धार्थ आनंद ने डायरेक्ट किया था. प्रोड्यूसर आदित्य चोपड़ा थे. मूवी ने वर्ल्डवाइड 1000 करोड़ से ज्यादा का कलेक्शन किया था.

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इसी बीच शाहरुख खान की एक और फिल्म 2023 में ‘जवान’ आई. इस फिल्म का एक डायलॉग ‘बेटे से बात करने से पहले, बाप से बात कर’ खूब मशहूर हुआ था. सबको ऐसा लगा जैसे शाहरुख खान की निजी जिंदगी का दर्द डायलॉग में छ्लका है. शाहरुख खान के बेटे को ड्र्ग्स के आरोप में जेल हुई थी. ‘जवान’ फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर जलजला ला दिया था. डायरेक्टर एटली कुमार थे.

शाहरुख के करियर का यह पहला मौका था जब वो फिल्म में पुलिस की वर्दी नजर आए थे. इससे पहले वो आर्मी की वर्दी में नजर आ चुके थे. ‘जवान’ फिल्म में शाहरुख खान के अलावा नयनतारा, विजय सेतुपति, दीपिका पादुकोण, प्रियमणि, संजय मल्होत्रा और सुनील ग्रोवर ने अहम भूमिकाएं निभाई थीं. जवान मूवी ने 75 करोड़ से ओपनिंग ली थी. यह किसी भी बॉलीवुड फिल्म का सबसे बड़ा रिकॉर्ड था जिसे आगे चलकर ‘धुरंधर’ ने तोड़ दिया. फिल्म को गौरी खान ने प्रोड्यूस किया था. जवान ने इंडिया में 643 करोड़ जबकि वर्ल्ड वाइड 1146 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया था. शाहरुख खान को बेस्ट एक्टर का नेशनल अवॉर्ड भी मिला. पूरे 10 साल बॉक्स ऑफिस पर धमाकेदार वापसी की. पठान-जवान से पहले 2015 में उनकी फिल्म ‘दिलवाले’ हिट हुई थी.

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इस लिस्ट में आखिरी नाम मोहित सूरी के निर्देशन में बनी ‘सैयारा’ फिल्म का है जिसमें दो नए चेहरों अहान पांडेय और अनीत पड्डा नजर आए थे. ‘सैयारा’ से पहले मोहित सूरी की हिट फिल्म ‘आशिकी 2’ आई थी. मोहित सूरी की करियर की यह पहली ब्लॉकबस्टर फिल्म साबित हुई. ‘सैयारा’ फिल्म का भी कोई प्रमोशन नहीं किया गया था. जैसे-जैसे फिल्म की पॉप्युलर हुई, सिनेप्रेमी हीरो-हीरोइन का नाम जानने के लिए बेताब हो गए. इस फिल्म को लेकर युवाओं में एक अलग ही तरह का पागलपन थिएटर्स में दिखा.

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फिल्म का म्यूजिक खूब पसंद किया गया. फिल्म का सबसे पॉप्युलर गाना ‘सैंया रे तू तो बदला नहीं है, मौसम जरा सा बदला हुआ है’ था. इस गाने को सुनकर नई जनरेशन थिएटर पर रोती नजर आई. प्रोड्यूसर आदित्य चोपड़ा थे. आदित्य चोपड़ा ने ‘पठान’ और ‘सैयारा’ में एक जैसी स्ट्रेटजी अपनाई. 45 करोड़ के बजट में बनी ‘सैयारा’ ने 579 करोड़ का वर्ल्डवाइड कलेक्शन करके सबको चौंका दिया. फिल्म सुपर-डुपर हिट साबित हुई.

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RMLNLU के छात्रों ने बढ़ाया देश का मान: बेल्जियम में इंटरनेशनल मूट कोर्ट में जगह बनाने वाली इकलौती एशियन टीम बनी, यूरो में मिली प्राइज मनी – Lucknow News



विजेता टीम के सदस्यों के साथ कुलपति प्रो.अमरपाल सिंह।

डॉ.राम मनोहर लोहिया नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की टीम ने बेल्जियम में अंतरराष्ट्रीय टैक्स मूट कोर्ट प्रतियोगिता में शानदार प्रदर्शन करते हुए ग्लोबल टॉप-10 में जगह बनाई है। साथ ही टीम ने ‘बेस्ट मेमोरियल एप्लिकेंट्स’ का खिताब भी अपने नाम किया है।

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इंटरनेशनल लॉ पर आधारित थी प्रतियोगिता बेल्जियम के ल्यूवेन शहर में आयोजित इस ‘इंटरनेशनल एंड यूरोपियन टैक्स मूट कोर्ट प्रतियोगिता’ का आयोजन केयू ल्यूवेन विश्वविद्यालय (बेल्जियम) और इंटरनेशनल ब्यूरो ऑफ फिस्कल डॉक्यूमेंटेशन द्वारा संयुक्त रूप से किया गया था। प्रतियोगिता अंतरराष्ट्रीय कर कानून के जटिल विषयों पर आधारित थी।

एशिया की इकलौती विजेता

RMLNLU की चार सदस्यीय टीम में बीए एलएलबी फाइनल ईयर स्टूडेंट जाह्नवी, भावना, आरातिक और कनक शामिल रहे। टीम ने उत्कृष्ट प्रदर्शन करते हुए ‘बेस्ट मेमोरियल एप्लिकेंट्स’ का पुरस्कार जीता। खास बात यह रही कि इस प्रतियोगिता में पुरस्कार जीतने वाली यह एशिया की एकमात्र टीम रही। टीम को 300 यूरो का नकद पुरस्कार भी प्रदान किया गया।



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तीन दिन में दूसरी बार तापमान 45.8 डिग्री सेल्सियस पहुंचा: दतिया में 13वें दिन लू से लोग परेशान; 30 को होगी बारिश – datia News




दतिया में आपने महसूस किया कि इस बार मई की शुरुआत कितनी सुहानी थी। 15 मई तक ऐसा लग रहा था कि गर्मी इस बार घुटने टेक देगी। लेकिन दूसरे पखवाड़े से मौसम ने ऐसी करवट बदली की, लोगों का पूरा सुख-चैन ही छीन लिया। पिछले 12 से 13 दिनों से शहर के लोग लू के थपेड़े झेलने को मजबूर हो रहे हैं। बुधवार को पारा तीन दिन में दूसरी बार 45.8 डिग्री सेल्सियस के डरावने स्तर पर पहुंच गया। गर्मी इस बार नाइट शिफ्ट भी कर रही है। आमतौर पर लोग सोचते हैं कि सूरज डूबने के बाद राहत मिलेगी, लेकिन 15 मई के बाद से रातें ‘झुलसाने वाली’ हो चुकी हैं। जब रात का न्यूनतम तापमान ही 27.8 से 32 डिग्री सेल्सियस के बीच अटका हो, तो घर की दीवारें और छतें कंक्रीट के तवे की तरह व्यवहार करने लगती हैं। यही कारण है कि इस बार कूलर और पंखे सिर्फ गर्म हवा फेंक रहे हैं और लोग अनिद्रा का शिकार हो रहे हैं। दोपहर का सन्नाटा अब रातों की बेचैनी में बदल चुका है। 30 मई से शुरू हो सकती है मानसूनी बारिश
मौसम वैज्ञानिकों के अनुसार उत्तर भारत के आसमान में एक शक्तिशाली पश्चिमी विक्षोभ और प्री-मानसून एक्टिविटी का कॉम्बिनेशन दस्तक देने जा रहा है। वरिष्ठ वैज्ञानिक अरूण शर्मा के मुताबिक, तपिश के बीच 30 मई से राहत मिलना शुरू हो जाएगी। इस दिन से तेज हवाओं का दौर शुरू होगा। 30 से 40 किलोमीटर प्रतिघंटे की रफ्तार से चलने वाली तेज हवाएं गर्मी से राहत देंगी। इस दौरान बारिश की स्थिति भी देखने को मिल सकती है। तापमान में भी गिरावट होना तय है।



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कोंच में नवविवाहिता की संदिग्ध परिस्थिति में मौत: मृतका की मां ने ससुराल पक्ष पर हत्या कर शव गायब करने का आरोप लगाया – Gaya News




कोंच थाना क्षेत्र के देवरा गांव में एक नवविवाहिता की संदिग्ध परिस्थितियों में मौत का मामला सामने आया है। मृतका के मायके पक्ष ने ससुराल वालों पर हत्या कर शव छिपाने का गंभीर आरोप लगाया है। मामले को लेकर मृतका की मां ने कोंच थाने में लिखित शिकायत दर्ज कराई है। 11 माह पहले हुई थी शादी मृतका की पहचान 22 वर्षीय प्रियंका कुमारी के रूप में हुई है, जो स्वर्गीय सुनील कुमार की पुत्री थीं। उनकी शादी करीब 11 माह पूर्व जहानाबाद जिले के तेतरपुर निवासी परिवार से कोंच थाना क्षेत्र के देवरा गांव निवासी सचिन कुमार, पिता उमेश यादव के साथ हुई थी। “पति समेत कई लोगों ने मिलकर की हत्या” मृतका की मां मंजू देवी ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि उनकी बेटी की हत्या पति सहित परिवार के चार-पांच लोगों ने मिलकर की है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि घटना के बाद साक्ष्य मिटाने की नीयत से शव को गायब कर दिया गया। घटना की जानकारी मिलते ही मायके पक्ष में कोहराम मच गया और परिजन न्याय की मांग को लेकर थाने पहुंचे। पुलिस कर रही मामले की जांच कोंच थानाध्यक्ष सुदेह कुमार ने बताया कि मृतका की मां द्वारा आवेदन प्राप्त हुआ है। पुलिस मामले की गंभीरता से जांच कर रही है और आवेदन में लगाए गए आरोपों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि जांच पूरी होने के बाद ही मामले की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी। इलाके में चर्चाओं का बाजार गर्म घटना के बाद पूरे इलाके में तरह-तरह की चर्चाएं हो रही हैं। स्थानीय लोग मामले को लेकर स्तब्ध हैं, वहीं पुलिस हर पहलू को ध्यान में रखकर जांच में जुटी हुई है।



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चिरौंजी की खीर का ऐसा स्वाद आपने कभी नहीं चखा होगा! जानिए क्यों ये है खास मिठाई


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चिरौंजी की खीर उन पारंपरिक भारतीय मिठाइयों में शामिल है जिनका स्वाद साधारण मिठाइयों से बिल्कुल अलग महसूस होता है. इसका मलाईदार टेक्सचर, मेवों जैसी खुशबू और शाही स्वाद इसे खास बना देता है. अगर आपने अब तक इसे नहीं चखा, तो यह मिठाई एक बार जरूर ट्राई करने लायक है.

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भारत में खीर का नाम सुनते ही ज्यादातर लोगों के मन में चावल, दूध और इलायची की खुशबू वाली पारंपरिक मिठाई की तस्वीर उभर आती है. लेकिन देश के कई हिस्सों में खीर की ऐसी खास वैरायटी भी बनाई जाती है, जिसका स्वाद आम खीर से बिल्कुल अलग होता है. इन्हीं में से एक है चिरौंजी की खीर. इसका स्वाद इतना रिच और मलाईदार होता है कि एक बार खाने के बाद लोग इसे लंबे समय तक याद रखते हैं. खास बात यह है कि यह मिठाई सिर्फ स्वाद के लिए नहीं, बल्कि अपनी पारंपरिक पहचान और खास मौके पर बनने की वजह से भी मशहूर मानी जाती है.

चिरौंजी छोटे-छोटे बीज होते हैं जिन्हें कई लोग मिठाइयों और शाही व्यंजनों में इस्तेमाल करते हैं. इनका स्वाद हल्का नटी यानी मेवों जैसा होता है. जब इन्हें दूध के साथ पकाकर खीर बनाई जाती है, तो उसका स्वाद सामान्य चावल की खीर से काफी ज्यादा गाढ़ा और रिच महसूस होता है. कई जगहों पर इसमें मावा, केसर और ड्राई फ्रूट्स भी डाले जाते हैं, जिससे इसका स्वाद और ज्यादा खास हो जाता है. यही वजह है कि इसे अक्सर त्योहारों, शादी-ब्याह और खास मौकों पर बनाया जाता है.

कहां है सबसे ज्यादा मशहूर?
चिरौंजी की खीर खासतौर पर मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और राजस्थान के कुछ हिस्सों में काफी लोकप्रिय मानी जाती है. बुंदेलखंड और मालवा क्षेत्र में भी इसे पारंपरिक मिठाई की तरह पसंद किया जाता है. गांवों में पुराने समय से इसे मेहमानों के स्वागत और त्योहारों के दौरान खास डिश के रूप में बनाया जाता रहा है. कई लोग इसे “शाही खीर” भी कहते हैं क्योंकि इसमें इस्तेमाल होने वाली चिरौंजी और मेवे इसे साधारण खीर से ज्यादा खास बना देते हैं.

स्वाद क्यों लगता है अलग?
चिरौंजी की सबसे बड़ी खासियत इसकी हल्की कुरकुरी बनावट और मलाईदार स्वाद है. दूध में पकने के बाद यह नरम हो जाती है लेकिन हल्का टेक्सचर बनाए रखती है, जो हर बाइट में अलग स्वाद देता है. इसमें इलायची, केसर और घी की हल्की खुशबू मिल जाए, तो इसका स्वाद और भी शानदार हो जाता है. कई लोग इसे ठंडा करके खाना पसंद करते हैं, खासकर गर्मियों में.

कैसे बनाई जाती है?
चिरौंजी की खीर बनाने के लिए सबसे पहले दूध को धीमी आंच पर गाढ़ा किया जाता है. इसके बाद भिगोई हुई चिरौंजी डालकर उसे अच्छे से पकाया जाता है. फिर इसमें चीनी, इलायची और ड्राई फ्रूट्स मिलाए जाते हैं. धीरे-धीरे पकाने से इसका स्वाद ज्यादा उभरकर आता है. यही कारण है कि पुराने समय में लोग इसे जल्दी-जल्दी बनाने के बजाय आराम से धीमी आंच पर तैयार करते थे.

क्यों मानी जाती है खास मिठाई?
यह सिर्फ स्वाद के कारण खास नहीं है, बल्कि कई परिवारों में इसे परंपरा से भी जोड़ा जाता है. कई जगहों पर धार्मिक कार्यक्रमों और शुभ अवसरों में इसे प्रसाद के रूप में भी बनाया जाता है. इसके अलावा चिरौंजी को पोषक तत्वों से भरपूर माना जाता है, इसलिए लोग इसे ताकत देने वाली मिठाई भी कहते हैं.

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Vividha SinghSub Editor

विविधा सिंह इस समय News18 हिंदी के डिजिटल मीडिया में सब एडिटर के तौर पर काम कर रही हैं. वह लाइफस्टाइल बीट में हेल्थ, फूड, ट्रैवल, फैशन और टिप्स एंड ट्रिक्स जैसी स्टोरीज कवर करती हैं. कंटेंट लिखने और उसे आसान व …और पढ़ें



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iPhone चोरी होने की नहीं रहेगी टेंशन, Apple कर रहा बड़ी तैयारी


iPhone यूजर्स की बड़ी टेंशन खत्म होने वाली है। एप्पल ने इसके लिए तैयारी पूरी कर ली है। रिपोर्ट के मुताबिक, अब यूजर्स को आईफोन चोरी होने की टेंशन नहीं रहेगी। एप्पल इसके लिए गूगल के थेफ्ट डिटेक्शन जैसे फीचर पर काम कर रहा है। जल्द ही, यूजर्स को यह फीचर आईफोन में मिलने लगेगा। नए iOS 27 के साथ इस फीचर को रिलीज किया जा सकता है। फिलहाल यह फीचर बीटा फेज में है, जिसकी टेस्टिंग की जा रही है। जैसे ही यूजर्स का आईफोन किसी अंजान शख्स के हाथ में जाएगा, कई तरह के सिग्नल मिलने लगेंगे। यह फीचर गूगल के थेफ्ट डिटेक्शन फीचर की तर्ज पर तैयार किया जा रहा है।

AI बेस्ड फीचर

Google ने एंड्रॉइड यूजर्स के लिए थेफ्ट डिटेक्शन फीचर कुछ साल पहले ही रोल आउट किया है, जिसमें AI यानी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का इस्तेमाल करके फोन स्नैचिंग और चोरी को डिटेक्ट कर लिया जाता है। इसके बाद फोन ऑटोमैटिकली लॉक हो जाता है, जो बिना बायोमैट्रिक अनलॉक के फोन का एक्सेस बंद कर देता है यानी चोरी किया गया फोन चोर के लिए किसी काम का नहीं रहता है।

9to5Mac की लेटेस्ट रिपोर्ट की मानें तो एप्पल एक खास सिक्योरिटी फीचर पर काम कर रहा है, जो iPhone के चोरी होने पर इसे ऑटोमैटिकली लॉक कर देगा। रिपोर्ट के मुताबिक, जैसे ही यूजर के हाथ से आईफोन कोई छीनता है, तो वो अपने आप लॉक हो जाएगा और बिना बायोमैट्रिक वेरिफिकेशन के अनलॉक नहीं होगा। हालांकि, यह फीचर कैसे काम करेगा यह फिलहाल साफ नहीं है।

किस तरह काम करेगा फीचर?

आईफोन में लगे सेंसर के आधार पर डिवाइस में यह फंक्शन एक्टिवेट हो जाएगा, जो आईफोन की चोरी होने की टेंशन खत्म कर देगा। एप्पल के अपकमिंग iOS वर्जन में यह फीचर दिया जा सकता है, जो गूगल के थेफ्ट डिटेक्शन टूल की तर्ज पर ही काम करेगा। यही नहीं, इस फीचर में आईफोन और इसके साथ पेयर किए गए एप्पल वॉच की दूरी को भी मॉनिटर करने का काम करेगा, जिससे साफ हो जाएगा कि डिवाइस चोरी हुआ है या फिर यूजर से दूर है।

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सरकारी कर्मचारी बहू मिसेज राजस्थान बनी,दुल्हन की तरह हुआ स्वागत: कहा- ऑफिस का स्टाफ भी साथ रहा; दूसरी विजेता बोलीं- मुझे मंच पर देख परिवार का नजरिया बदला – Jaipur News




मिसेज राजस्थान 2026 में इस साल दो महिलाओं के सिर पर विजेता का ताज सजा। सिल्वर कैटेगरी (20 से 36 उम्र) में उमा मीना और गोल्ड कैटेगरी (37 से 51 उम्र) में श्वेता कंसाना मिसेज राजस्थान 2026 बनीं। टाइटल जीतने के बाद दोनों मॉडल्स दैनिक भास्कर ऑफिस पहुंचीं। अपने अनुभव साझा किए। उमा मीना ने बताया कि वो एक सरकारी कर्मचारी हैं। यहां तक पहुंचने में मुझे मेरे ऑफिस के चेयरमैन और पूरे स्टाफ का सहयोग मिला। जब मैं जीतकर घर पहुंची तो जैसे शादी के बाद दुल्हन बनकर घर (ससुराल) आई थी, वैसे ही दोबारा स्वागत किया गया। वहीं, श्वेता कंसाना ने बताया- वे एक डेंटिस्ट हैं। फैशन इंडस्ट्री को लेकर, शुरुआत में मेरे परिवार में भी अलग सोच थी। लेकिन जैसे-जैसे उन्होंने मुझे मंच पर देखा, उनका नजरिया बदल गया। आगे पढ़िए दोनों मॉडल्स से खास बातचीत… सवाल: जीत के बाद कैसा महसूस हो रहा है? उमा मीना: मैं मिसेज राजस्थान 2026 की सिल्वर कैटेगरी विनर हूं। यह मेरा पैशन था। मैंने पहले भी मिस राजस्थान के ऑडिशन दिए थे, लेकिन तब सफलता नहीं मिली। तब मेरी पैर में चोट आ गई थी। अब मिसेज राजस्थान जीतकर बहुत खुशी हो रही हूं। मैं चाहती हूं कि महिलाएं अपने सपनों को कभी न छोड़ें और अपने लक्ष्य के लिए मेहनत करती रहें। श्वेता कंसाना: मैं मिसेज राजस्थान 2026 की गोल्ड कैटेगरी विनर हूं। पेशे से डेंटिस्ट हूं, लेकिन दिल से हमेशा मॉडलिंग की तरफ झुकाव रहा है। इस मंच ने मुझे आत्मविश्वास दिया कि मैं खुद को बेहतर तरीके से प्रस्तुत कर सकती हूं। सवाल: उमा, आप सरकारी कर्मचारी भी हैं। मॉडलिंग को कैसे चुना और शादी के बाद ही क्यों? उमा मीना: शादी से पहले भी मैंने मिस राजस्थान के ऑडिशन दिए थे, लेकिन चयन नहीं हो पाया। मुझे सरकारी क्षेत्र भी हमेशा आकर्षित करता था। मैंने सिविल सर्विस की तैयारी भी की, लेकिन वहां पूरी सफलता नहीं मिली। इसी दौरान नौकरी लग गई। मुझे मेरे ऑफिस के चेयरमैन और पूरे स्टाफ का सहयोग मिला। शादी के बाद ऐसा परिवार मिला, जिसने मुझे हमेशा सपोर्ट किया। उन्होंने कहा कि अपने सपनों को पूरा करो, हम तुम्हारे साथ हैं। तभी मैंने फैसला लिया कि अब अपने पैशन के लिए पूरा प्रयास करूंगी। मैं जयपुर कंज्यूमर कोर्ट में जज की पीए के रूप में कार्यरत हूं। दोनों चीजों को साथ संभालना आसान नहीं था, लेकिन प्लानिंग के साथ काम किया। मैंने पहले ऑफिस की जिम्मेदारियां पूरी कीं। मेरे सीनियर अधिकारी ने भी कहा था कि अपना काम पूरा करो और फिर अपने सपनों के लिए पूरी मेहनत करो। उनका सहयोग मेरे लिए बहुत मायने रखता है। सवाल: श्वेता, आप डेंटिस्ट हैं। अब मॉडलिंग में भी पहचान बनाई है। दोनों प्रोफेशन को कैसे देखती हैं? श्वेता कंसाना: दोनों प्रोफेशन मेरे लिए महत्वपूर्ण हैं। डेंटिस्ट मेरा मुख्य पेशा है, लेकिन मॉडलिंग भी मेरे लिए उतनी ही खास है। यह मेरा सपना था और उसे पूरा करने के लिए मेहनत भी की। 40 साल की उम्र में खुद को बनाए रखना आसान नहीं होता। खासकर जब आप मां भी हों। लेकिन मेरा मानना है कि जिंदगी में आगे बढ़ते रहना चाहिए। जो सपना देखें, उसे पूरा करने के लिए पूरी मेहनत लगानी चाहिए। सवाल: उमा, जीतने के बाद परिवार का क्या रिएक्शन था? उमा मीना: मेरा पूरा परिवार बहुत खुश था। जिस दिन मैंने प्रतियोगिता में हिस्सा लिया, उसी दिन से सभी उत्साहित थे। सबका कहना था कि जीतो या हारो, लेकिन इस सफर को पूरी तरह जीकर आओ। मेरी सास, जेठानी, पीहर पक्ष और पूरा परिवार वहां मौजूद था। जब मेरा नाम विजेता के रूप में घोषित हुआ, उस समय परिवार के चेहरे की खुशी देखकर मैं भावुक हो गई। वह पल जिंदगीभर याद रहेगा। जब घर पहुंची तो मेरा स्वागत बहुत शानदार तरीके से हुआ। जैसे शादी के बाद दुल्हन बनकर घर आई थी, वैसे ही दोबारा स्वागत किया गया। ढोल-नगाड़े, शहनाई, फूल-मालाएं और पूरा घर खुशियों से भरा हुआ था। मेरे रिश्तेदार और पीहर वाले भी आए थे। वह पल मेरे लिए बहुत खास था। सवाल: श्वेता, अक्सर फैशन इंडस्ट्री को लेकर परिवार में अलग सोच होती है। क्या आपके साथ भी ऐसा हुआ? श्वेता कंसाना: हां फैशन इंडस्ट्री को लेकर, शुरुआत में मेरे परिवार में भी अलग सोच थी। लेकिन जैसे-जैसे उन्होंने मुझे मंच पर देखा, उनका नजरिया बदल गया। उन्हें लगा कि यह एक अच्छा और सुरक्षित मंच है। मिसेज राजस्थान बहुत प्रतिष्ठित मंच है। परिवार ने देखा कि यहां हमें बहुत सम्मान और सुरक्षा मिलती है। अब परिवार को हम पर गर्व महसूस होता है। मेरे ससुर साहब फाइनल में मौजूद थे, जीत के बाद उन्होंने अपने हर परिचित को इस जीत से अवगत करवाया। उनकी खुशी ने मेरी जीत को और खास बना दिया। सवाल: आपके छोटे बेटे का क्या रिएक्शन था? श्वेता कंसाना: मेरा बेटा बहुत उत्साहित था। वह दो दिन पहले से ही कह रहा था कि ‘मेरी मम्मी मिसेज राजस्थान 2026 बनेंगी।’ उसकी बात सच हो गई। उसकी खुशी मेरे लिए सबसे बड़ा पुरस्कार है।



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जमीन के नीचे कुबेर का खजाना! खुदाई के बाद निकले 500-500 के नोटों से भरे बोरे


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Underground Recovered From TMC: पश्चिम बंगाल में टीएमसी के भ्रष्ट नेताओं पर पुलिस का शिकंजा कसता जा रहा है. इस कड़ी में बदुरिया नगर पालिका के चेयरमैन दीपांकर भट्टाचार्य आ गए हैं. उनकी गिरफ्तारी के बाद पार्टी कार्यालय के पास जमीन में गाड़ कर रखे गए 500 रुपये के नोटों से भरे 4 बैग और एक बोरा बरामद हुआ है. इससे पहले उनके पास से 80 लाख रुपये नकद और 4000 सरकारी तिरपाल जब्त किए गए थे.

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जमीन के अंदर से मिले 500-500 के नोट से भरे नोट.

500-500 Notes Found Under TMC Office: पश्चिम बंगाल राजनीतिक बदलाव के दौर से गुजर रहा है. कानून अपना काम पूरी सख्ती से करना शुरु कर दिया है. तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के भ्रष्ट नेताओं के खिलाफ ताबड़तोड़ कार्रवाई हो रही है. भ्रष्टाचार के ऐसे-ऐसे मामले सामने आ रहे हैं, जिन्हें देखकर खुद जांच अधिकारियों के पसीने छूट गए हैं. बदुरिया में तो फिल्मी स्टाइल में जमीन के नीचे दबाकर रखा गया लाखों-करोड़ों का कैश बरामद हुआ है.

बदुरिया नगर पालिका के चेयरमैन और टीएमसी नेता दीपांकर भट्टाचार्य को पुलिस ने हाल ही में गिरफ्तार किया था. उनके खिलाफ सरकारी तिरपाल की हेराफेरी और अवैध संपत्ति जुटाने का मामला दर्ज था. लेकिन सबसे बड़ा खुलासा उनकी पुलिस रिमांड के दौरान हुआ. पुलिस को गुप्त सूचना मिली थी कि काले धन को छिपाने के लिए जमीन के अंदर खजाना गाड़ा है.

500-500 की गड्डियां

सटीक जानकारी के आधार पर, पुलिस ने दीपांकर भट्टाचार्य के पार्टी कार्यालय के पास जमीन की खुदाई शुरू की. चश्मदीदों के मुताबिक, जैसे ही मिट्टी हटाई गई, वहां से 4 बड़े बैग और एक बोरा बरामद हुआ. इन सभी में 500 रुपये के नोटों की गड्डियां ठूंस-ठूंस कर भरी हुई थीं. हालांकि अभी तक इस भारी-भरकम रकम की आधिकारिक गिनती पूरी नहीं हो पाई है, लेकिन नोटों के बंडल देखकर माना जा रहा है कि यह रकम करोड़ों में हो सकती है.

पहले भी मिले थे 80 लाख कैश और सरकारी तिरपाल

यह कोई पहला मौका नहीं है जब दीपांकर भट्टाचार्य के ठिकानों से ऐसा भारी खजाना निकला हो. इससे पहले भी पुलिस ने उनके ठिकानों पर छापेमारी कर लगभग 80 लाख रुपये की भारी नकदी बरामद की थी. इसके साथ ही, प्राकृतिक आपदाओं में गरीबों के बीच बांटने के लिए आए करीब 4,000 सरकारी तिरपाल भी उनके पास से अवैध रूप से जमा किए हुए पाए गए थे. इस घटना ने पूरे इलाके में सनसनी फैला दी है.

दुर्गापुर में टीएमसी का मजदूर नेता गिरफ्तार

भ्रष्टाचार और गुंडागर्दी के खिलाफ यह पुलिस कार्रवाई सिर्फ बदुरिया तक सीमित नहीं है. राज्य के दुर्गापुर-फरीदपुर ब्लॉक के लौदोहा इलाके में भी पुलिस ने देर रात एक बड़ा ऑपरेशन चलाते हुए टीएमसी के दबंग मजदूर यूनियन नेता शेख वसुल को गिरफ्तार कर लिया है. पुलिस सूत्रों के अनुसार, शेख वसुल के खिलाफ इलाके में लंबे समय से कई गंभीर शिकायतें लंबित थीं.

स्थानीय लोगों ने आरोप लगाया था कि वह रोजगार दिलाने का झांसा देकर बेरोजगार युवाओं से मोटी रकम वसूलता था. इसके अलावा, विधानसभा चुनाव से पहले इलाके में दहशत फैलाने, मतदाताओं पर वोटिंग के लिए अनुचित दबाव बनाने और अपना दबदबा कायम रखने के लिए गुंडागर्दी करने के भी गंभीर आरोप उस पर लगे हैं.

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Deep Raj DeepakSub-Editor

Deep Raj Deepak working with News18 Hindi (hindi.news18.com/) Central Desk since 2022. He has strong command over national and international political news, current affairs and science and research-based news. …और पढ़ें



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