भारत अब जापान से सिर्फ निवेश नहीं चाहता, बल्कि ऐसे कारोबार चाहता है जो आने वाले वर्षों में Suzuki जैसी बड़ी सफलता की कहानी बन सकें. जापान दौरे पर पहुंचे केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने जापानी कंपनियों के सामने ऐसा ही बड़ा लक्ष्य रखा है. 200 से ज्यादा भारतीय और जापानी उद्योगपतियों की मौजूदगी वाले बिजनेस फोरम में पीयूष गोयल ने कहा कि भारत में काम कर रही जापानी कंपनियों की संख्या को दोगुना किया जाना चाहिए. लेकिन उन्होंने टारगेट रखते हुए कहा कि भारत का सपना 1580 और Suzuki जैसी कंपनियां खड़ी करने का है.
गोयल ने जापानी कारोबारियों को Suzuki की भारत में चार दशक लंबी कहानी का उदाहरण दिया. उनका कहना था कि जापान की कंपनियां भारत में सिर्फ कारोबार शुरू न करें, बल्कि उसे इतना बड़ा बनाएं कि वह खुद एक ग्लोबल बिजनेस बन जाए. उन्होंने कहा कि जिस तरह Suzuki ने भारत में बड़े पैमाने पर अपना कारोबार खड़ा किया है, उसी तरह वह चाहते हैं कि जापानी कंपनियां भी काम शुरू करें. वेंचर बनाएं. दरअसल, इस सेमिनार में 1580 जापानी कंपनियों ने शिरकत की थी.पीयूष गोयल उन्हें ही न्योता दे रहे थे. सरकार के मुताबिक भारत में इस समय 1400 से ज्यादा जापानी कंपनियां काम कर रही हैं. इनमें सुजुकी, टोयोटा, होंडा, सोनी, Hitachi और Mitsubishi जैसी बड़ी कंपनियां शामिल हैं.
जापान की कंपनियों के लिए भारत में क्या है?
पीयूष गोयल ने जापानी निवेशकों को भारत के बदलते बिजनेस माहौल और युवा वर्कफोर्स के बारे में बताया. कहा कि भारत में मैन्युफैक्चरिंग, डेटा सेंटर, AI, सेमीकंडक्टर, इलेक्ट्रॉनिक्स, बैटरी, क्लीन एनर्जी और ऑटोमोबाइल जैसे सेक्टर में बड़े मौके हैं, आप आइए और दुनिया के लिए प्रोडक्ट बनाइए. भारत का सबसे बड़ा प्लस पॉइंट उसका विशाल घरेलू बाजार भी है. यानी जापानी कंपनियों के लिए भारत सिर्फ कम लागत में उत्पादन करने की जगह नहीं, बल्कि खुद एक बहुत बड़ा कंज्यूमर मार्केट भी है.
10 ट्रिलियन येन इन्वेस्टमेंट भी बड़ा लक्ष्य
भारत-जापान आर्थिक रिश्तों में निवेश का लक्ष्य भी काफी बड़ा है. दोनों देशों ने अगले 10 साल में भारत में 10 ट्रिलियन येन यानी करीब 60,000 करोड़ रुपये के जापानी निवेश का लक्ष्य रखा है. जुलाई 2026 तक इस लक्ष्य की दिशा में करीब 2 ट्रिलियन येन के निवेश कमिटमेंट हो चुके थे. अब पीयूष गोयल का जापान दौरा इसी लक्ष्य को जमीन पर उतारने की कोशिश का हिस्सा है. उनके साथ 200 से ज्यादा भारतीय कारोबारी और उद्योग प्रतिनिधि भी जापान पहुंचे हैं.
भारत की नजर सिर्फ जापान पर नहीं, पूरी दुनिया पर
गोयल ने जापानी कारोबारियों को भारत की बढ़ती FTA रणनीति के बारे में भी बताया. उन्होंने कहा कि भारत पिछले चार वर्षों में 9 फ्री ट्रेड एग्रीमेंट कर चुका है और अब 8-9 और देशों तथा क्षेत्रीय समूहों के साथ बातचीत चल रही है. इन नए समझौतों से करीब 15 ट्रिलियन डॉलर की अतिरिक्त अर्थव्यवस्थाओं तक बाजार पहुंच मिल सकती है.
गोयल के मुताबिक भारत की मौजूदा और प्रस्तावित ट्रेड डील्स का दायरा धीरे-धीरे इतना बढ़ाने की कोशिश है कि वह दुनिया के करीब 75% ग्लोबल कॉमर्स तक पहुंच बनाने में मदद करे. सीधा मतलब यह है कि भारत जापानी कंपनियों को सिर्फ भारत के लिए उत्पादन करने का मौका नहीं देना चाहता. मकसद यह है कि भारत में बनाओ और दुनिया को बेचो.
2047 तक 4 ट्रिलियन से 30 ट्रिलियन डॉलर का सफर
कॉमर्स मिनिस्टर ने कहा कि भारत 2047 तक अपनी अर्थव्यवस्था को मौजूदा करीब 4 ट्रिलियन डॉलर से बढ़ाकर 30 ट्रिलियन डॉलर तक ले जाने की दिशा में काम कर रहा है. इस सफर में जापान को भारत एक अहम साझेदार के तौर पर देख रहा है. भारत चाहता है कि जापानी कंपनियां यहां फैक्ट्री लगाएं, टेक्नोलॉजी लाएं, सप्लाई चेन बनाएं, रोजगार पैदा करें और फिर भारत से दुनिया के बाजारों तक पहुंचें.








