भोपाल में फर्जी जाति प्रमाण-पत्र के जरिए आरक्षित वर्ग का लाभ लेने के आरोप में रिटायर IPS अधिकारी रघुवीर सिंह मीणा के खिलाफ केस दर्ज किया गया है। आरोप है कि मीणा ने ST वर्ग के प्रमाण-पत्र के आधार पर MPPSC से DSP पद पर चयन हासिल किया और बाद में सेवा के दूसरे लाभ भी लिए। पुलिस मुख्यालय की सतर्कता शाखा ने धोखाधड़ी, साजिश, लोक सेवक द्वारा गलत दस्तावेज तैयार करने और SC-ST अत्याचार निवारण अधिनियम की धाराओं में FIR दर्ज की है। DSP बनने से पहले सरकारी शिक्षक थे, रिकॉर्ड में OBC जांच में सामने आया कि पुलिस सेवा में आने से पहले रघुवीर सिंह मीणा मध्यप्रदेश में शासकीय शिक्षक के पद पर थे। उस समय उनके दस्तावेजों में उन्हें OBC वर्ग का बताया गया था। बाद में MPPSC में उन्होंने खुद को ST वर्ग का बताया। इसी आधार पर DSP पद पर उनका चयन हुआ। जांच एजेंसी अब इसी बदलाव से जुड़े दस्तावेज और रिकॉर्ड की पड़ताल कर रही है। विदिशा से 1984 में जारी हुआ था ST प्रमाण-पत्र मीणा का ST जाति प्रमाण-पत्र वर्ष 1984 में विदिशा के आदिम जाति कल्याण विभाग से जारी हुआ था। उच्च स्तरीय जांच में प्रमाण-पत्र और इससे जुड़े रिकॉर्ड की जांच की गई। समिति ने इसे अमान्य घोषित कर दिया। जांच में मध्यप्रदेश के मूल निवासी होने से जुड़े दस्तावेजों पर भी सवाल उठे हैं। प्रमाण-पत्र जारी करने वाले कर्मचारी भी जांच के दायरे में हैं। शिकायत के बाद शासन की उच्च स्तरीय समिति ने की जांच मामले की शुरुआत गुना के राघौगढ़ निवासी हरवीर सिंह रघुवंशी की शिकायत से हुई। शिकायत के बाद मामले की जांच की गई। शासन की उच्च स्तरीय छानबीन समिति ने रघुवीर सिंह मीणा के जाति प्रमाण-पत्र और संबंधित रिकॉर्ड की जांच की। समिति की जांच में प्रमाण-पत्र अमान्य पाए जाने के बाद अब पुलिस मुख्यालय की सतर्कता शाखा ने केस दर्ज किया है।
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शिक्षक थे तो OBC, DSP बने तो ST: फर्जी जाति प्रमाण-पत्र मामले में रिटायर IPS रघुवीर सिंह मीणा पर केस – Bhopal News
ट्रम्प ने CNN को व्हाइट हाउस से बैन किया: फेक न्यूज कवरेज का आरोप, दो अन्य मीडिया हाउस पर भी कार्रवाई; कहा- आगे भी ऐसे कदम उठाएंगे
वॉशिंगटन डीसी1 घंटे पहले
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ट्रम्प ने शुक्रवार को आदेश जारी किया।
वॉशिंगटन में 18 सितंबर को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने CNN, MSNOW और पोलिटिको को व्हाइट हाउस से बैन करने का ऐलान किया।
ट्रम्प ने शुक्रवार को कहा कि इन संस्थानों की लगातार फेक न्यूज कवरेज के कारण यह रोक लगाई गई है। उन्होंने आगे और मीडिया संस्थानों पर ऐसी पाबंदी लगाने की धमकी दी।
ट्रम्प ने अपने सोशल मीडिया साइट पर लिखा कि यह रोक तुरंत प्रभाव से लागू होगी। उन्होंने इन संस्थानों की रिपोर्टिंग को “FAKE NEWS” बताया।
इससे पहले ट्रम्प ने फरवरी 2025 में एसोसिएटेड प्रेस (AP) के पत्रकारों पर भी ऐसी ही रोक लगाई थी। तब ट्रम्प ने AP के पत्रकारों को ओवल ऑफिस, एयर फोर्स वन और अन्य कार्यक्रमों में जाने से रोक दिया था। यह कार्रवाई AP के गल्फ ऑफ मेक्सिको का नाम बदलने के उनके फैसले का समर्थन नहीं करने के बाद की थी।

ट्रम्प ने ट्रुथ सोशल पर पोस्ट कर जानकारी दी।
तीनों संस्थान ट्रम्प के फैसलों पर सवाल उठाते रहे हैं
CNN- 24 घंटे चलने वाला टीवी न्यूज चैनल और डिजिटल वेबसाइट। अमेरिकी राजनीति की बड़ी खबरें और फैक्ट-चेकिंग करता है। ट्रम्प के बयानों और नीतियों पर लगातार तीखे सवाल उठाता रहा है।
MS NOW- केबल टीवी न्यूज चैनल और डिजिटल मीडिया। लेफ्ट-ऑफ-सेंटर राजनीतिक डिबेट्स और ओपिनियन शोज पर फोकस करता है। ट्रम्प प्रशासन और उनकी नीतियों का सबसे मुखर आलोचक चैनल माना जाता है।
पॉलिटिको- प्रमुख डिजिटल न्यूज वेबसाइट और राजनीतिक अखबार। व्हाइट हाउस और अमेरिकी संसद की अंदरूनी खबरों और नीतियों की रिपोर्टिंग करता है। ट्रम्प प्रशासन के अंदरूनी फैसलों, विवादों और रणनीतियों का बारीक विश्लेषण करता रहा है।

ट्रम्प पक्षपात का आरोप लगाते रहे हैं
साल 2016 से ही ट्रम्प CNN की खबरों को लगातार “फेक न्यूज” कहते रहे हैं और उनके कार्यकाल में पहले भी इस चैनल के पत्रकारों के व्हाइट हाउस पास रोके जा चुके हैं।
इसके अलावा उन्होंने ‘न्यूयॉर्क टाइम्स’ और ‘वॉल स्ट्रीट जर्नल’ जैसे बड़े और प्रतिष्ठित अखबारों पर भी अपने खिलाफ पक्षपात करने का आरोप लगाया और उन पर मानहानि के मुकदमे तक दर्ज कराए।
ट्रम्प ने इन सभी संस्थानों की रिपोर्टिंग पर खुले तौर पर सवाल उठाए और उन पर जानबूझकर गलत नीयत से खबरें चलाकर उन्हें निशाना बनाने का आरोप लगाया।
AP ने दायर किया मुकदमा
AP ने इस मामले में मुकदमा किया था। यह मामला अभी जारी है। ट्रम्प लंबे समय से उस मीडिया कवरेज पर नाराजगी जताते रहे हैं, जिसे वह अपने खिलाफ मानते हैं। उनका मीडिया संस्थानों पर मुकदमे करने और पत्रकारों पर व्यक्तिगत रूप से हमला करने का पुराना रिकॉर्ड है।
वह पत्रकारों पर आमने-सामने या सोशल मीडिया के जरिए भी निशाना साधते रहे हैं।
दूसरी बार राष्ट्रपति बनने के बाद से ट्रम्प ने न्यूयॉर्क टाइम्स, वॉल स्ट्रीट जर्नल, BBC और अन्य मीडिया संस्थानों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की है।

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20वां रोजगार मेला आज, पीएम मोदी बांटेंगे जॉब लेटर: वर्चुअली संबोधित भी करेंगे; अब तक 12.50 लाख से ज्यादा को मिल चुकी नौकरी
3 घंटे पहले
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अब तक 19 रोजगार मेले हो चुके हैं- फाइल फोटो
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शुक्रवार को रोजगार मेले में 51 हजार से ज्यादा नियुक्ति पत्र बांटेंगे। ये नियुक्तियां केंद्र सरकार के अलग-अलग विभागों और संगठनों में हुई हैं। रोजगार मेला देशभर के 45 स्थानों पर आयोजित होगा। मोदी नए चुने कर्मचारियों को वर्चुअली संबोधित भी करेंगे।
नवनियुक्त कर्मचारी भारत सरकार के राजस्व विभाग, रेल मंत्रालय, गृह मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, वित्तीय सेवा विभाग और रक्षा मंत्रालय सहित अन्य विभागों में शामिल होंगे।
यह 20वां रोजगार मेला होगा। इसके बाद अलग-अलग विभागों और सरकारी संगठनों में करीब 12.75 लाख युवाओं को नियुक्ति पत्र मिल चुके होंगे।
इन विभागों में मिला जॉब
प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) के बयान के मुताबिक, रोजगार मेले में नियुक्ति पत्र पाने वाले अभ्यर्थी केंद्र सरकार के अलग-अलग मंत्रालयों और विभागों में काम शुरू करेंगे।
इनमें राजस्व विभाग, रेल मंत्रालय, गृह मंत्रालय, स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय, वित्तीय सेवा विभाग और रक्षा मंत्रालय शामिल हैं।
सरकार के मुताबिक, रोजगार मेला युवाओं के लिए रोजगार के अवसर पैदा करने पर उसके लगातार फोकस को दिखाता है। इसका उद्देश्य देश की विकास यात्रा में युवाओं की ज्यादा भागीदारी सुनिश्चित करना भी है।

अक्टूबर 2022 से शुरू हुआ था रोजगार मेला
प्रधानमंत्री ने 22 अक्टूबर 2022 को रोजगार मेले का पहला फेज शुरू किया था। तब PM ने कहा था- हमारा लक्ष्य देश के युवाओं को 2023 के आखिर तक 10 लाख सरकारी नौकरियां देना था। लोकसभा चुनाव से पहले 12 फरवरी 2024 को 12वां रोजगार मेला आयोजित हुआ था, जिसमें सबसे ज्यादा 1 लाख जॉब लेटर बांटे गए थे। 11 लाख का आंकड़ा 2025 में पूरा हुआ था।
19वां रोजगार मेला: PM ने कहा था- युवा देश की विकास यात्रा में शामिल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को 51 हजार से ज्यादा युवाओं को सरकारी नौकरी के लिए अपॉइंटमेंट लेटर दिए। इसमें चुने गए युवाओं को रेलवे, गृह मंत्रालय, स्वास्थ्य विभाग, वित्तीय सेवा और उच्च शिक्षा समेत कई सरकारी विभागों में नौकरी मिली।
देश के 47 शहरों में हुए 19वें रोजगार मेले में PM मोदी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए शामिल हुए। उन्होंने युवाओं से बातचीत भी करेंगे।पढ़ें पूरी खबर…
गरबा डांडिया उत्सव-2026 को जयपुर में हुआ पोस्टर लॉन्च: 15 और 16 अक्टूबर को चित्रकूट स्टेडियम में होगा आयोजन, तैयारियां हुई शुरू – Jaipur News
मानसरोवर स्थित राज आंगन रिसॉर्ट में डैजल इवेंट्स की ओर से आयोजित ‘गरबा डांडिया उत्सव-2026’ का प्री-लॉन्च इवेंट में पोस्टर लॉन्च किया किया गया। कार्यक्रम में फिल्म और फैशन इंडस्ट्री से जुड़े विशेषज्ञों, मॉडल्स और आयोजन से जुड़े टीम सदस्यों ने उत्सव के
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आयोजक गजराज सिंह नाथावत और अनिल गुस्सर ने बताया कि जयपुर में इस बार गरबा और डांडिया का भव्य आयोजन किया जा रहा है। 15 और 16 अक्टूबर 2026 को वैशाली नगर स्थित चित्रकूट स्टेडियम में दो दिवसीय ‘गरबा डांडिया उत्सव-2026’ आयोजित होगा। यहां गरबा की थाप और डांडिया की खनक के साथ शहरवासियों को रंगारंग सांस्कृतिक माहौल देखने को मिलेगा।
आयोजकों ने बताया कि ‘गरबा डांडिया उत्सव-2026’ का उद्देश्य जयपुरवासियों को पारंपरिक संगीत, नृत्य और उत्सव के साथ बेहतर व्यवस्थाओं से जुड़ा यादगार सांस्कृतिक अनुभव देना है। आयोजन में गरबा और डांडिया के पारंपरिक रंग के साथ आधुनिक प्रस्तुतियों और मनोरंजन का भी संगम देखने को मिलेगा।
त्योहारी सीजन में होने वाले इस आयोजन को लेकर शहरवासियों में उत्साह का माहौल बनाने के लिए प्री-लॉन्च कार्यक्रम आयोजित किया गया। पोस्टर विमोचन के दौरान आयोजन की तैयारियों और आगामी कार्यक्रम से जुड़ी जानकारी भी साझा की गई।
मुंगेर इंजीनियरिंग कॉलेज में फूड प्वाइजनिंग, 50 लोग भर्ती: छात्र-छात्राओं और कर्मचारियों को पेट दर्द, उल्टी की परेशानी; एक दिन पहले मनाया गया था विश्वकर्मा पूजा – Munger News
मुंगेर इंजीनियरिंग कॉलेज में शुक्रवार की रात डिनर करने के बाद अचानक छात्र-छात्राओं और कॉलेज कर्मियों की तबीयत बिगड़ गई। अलग-अलग हॉस्टल और कॉलेज परिसर में कई लोगों को पेट दर्द, उल्टी, सिरदर्द समेत अन्य परेशानियां होने लगीं। इसके बाद एक-एक कर छात्र-छात्राओं और कर्मियों को एंबुलेंस से मुंगेर सदर अस्पताल लाया गया। शाम करीब 8 बजे से सदर अस्पताल पहुंचने का सिलसिला शुरू हुआ, जो देर रात तक जारी रहा। सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में डॉक्टरों के अनुसार करीब 40 छात्र-छात्राओं का इलाज चल रहा था। वहीं कॉलेज कर्मियों के अनुसार करीब 50 छात्र-छात्राओं और कर्मियों के प्रभावित होने की सूचना है। हालांकि, देर रात तक प्रभावित लोगों की वास्तविक संख्या स्पष्ट नहीं हो सकी थी। अचानक बिगड़ने लगी तबीयत, एंबुलेंस से अस्पताल पहुंचाए गए शुक्रवार दोपहर बाद कॉलेज परिसर में अलग-अलग जगहों पर रहने वाले छात्र-छात्राओं और कुछ कर्मियों की तबीयत अचानक खराब होने लगी। उन्हें पेट दर्द, उल्टी और सिरदर्द समेत अन्य शिकायतें हुईं। एक साथ कई लोगों की तबीयत बिगड़ने के बाद कॉलेज प्रबंधन ने एहतियात के तौर पर उन्हें सदर अस्पताल भेजना शुरू किया। शाम करीब 6 बजे से एंबुलेंस के जरिए मरीजों के अस्पताल पहुंचने का सिलसिला शुरू हुआ। लगातार मरीजों के आने से सदर अस्पताल के इमरजेंसी वार्ड में भी भीड़ बढ़ गई। चिकित्सक और स्वास्थ्यकर्मी सभी मरीजों के इलाज में जुटे रहे। इमरजेंसी में मरीजों का इलाज कर रहे चिकित्सक डॉ. फैजुद्दीन ने बताया कि करीब 25 छात्र-छात्राओं का इलाज किया जा रहा था। अधिकांश मरीजों में पेट दर्द, उल्टी और सिरदर्द की शिकायत सामने आई है। सभी को चिकित्सकों की निगरानी में उपचार दिया जा रहा है। 17 सितंबर को हुई थी विश्वकर्मा पूजा, प्रसाद पर भी आशंका छात्र-छात्राओं और कर्मियों की तबीयत खराब होने के पीछे फिलहाल कोई स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है। कॉलेज परिसर में 17 सितंबर को विश्वकर्मा पूजा का आयोजन किया गया था। बताया जा रहा है कि पूजा के दौरान कुछ लोगों ने प्रसाद का सेवन किया था। इसके अगले दिन यानी शुक्रवार को कई लोगों की तबीयत बिगड़ने की बात सामने आई। ऐसे में शुरुआती तौर पर प्रसाद को भी फूड पॉइजनिंग की संभावित वजह माना जा रहा है। हालांकि, अभी यह स्पष्ट नहीं है कि तबीयत खराब होने की वजह प्रसाद ही था। कॉलेज प्रबंधन ने भी इसकी पुष्टि नहीं की है। प्रसाद या खाने के किसी अन्य सामान से फूड पॉइजनिंग हुई है या नहीं, यह जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। जांच के लिए टीम गठित, विभाग और अधिकारियों को दी सूचना इंजीनियरिंग कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य डॉ. शंभू शंकर ने बताया कि शुक्रवार दोपहर से कई छात्र-छात्राओं और कर्मियों की तबीयत खराब होने की जानकारी मिली थी। इसके बाद सभी को तत्काल इलाज के लिए मुंगेर सदर अस्पताल भेजा गया। उन्होंने बताया कि घटना के कारणों का पता लगाने के लिए टीम गठित कर दी गई है। टीम की रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि लोगों की तबीयत खराब होने की वास्तविक वजह क्या थी। प्रभारी प्राचार्य के अनुसार फिलहाल कॉलेज परिसर की स्थिति सामान्य है। जिन छात्र-छात्राओं की तबीयत खराब हुई, उनमें कुछ घबराहट की स्थिति भी थी। एहतियात के तौर पर उन्हें सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। घटना की सूचना वरीय अधिकारियों और संबंधित विभाग को भी दे दी गई है। कॉलेज के प्राचार्य समेत अन्य अधिकारी सदर अस्पताल पहुंचे और वहां भर्ती छात्र-छात्राओं के इलाज की व्यवस्था का जायजा लिया। संख्या को लेकर कॉलेज और अस्पताल के आंकड़े अलग देर रात तक छात्र-छात्राओं और कर्मियों के बीमार होने की संख्या को लेकर अलग-अलग जानकारी सामने आ रही थी। कॉलेज कर्मियों के अनुसार करीब 50 छात्र और कर्मी प्रभावित हुए हैं, जबकि सदर अस्पताल के इमरजेंसी चिकित्सक ने करीब 25 छात्र-छात्राओं के इलाज की जानकारी दी। ऐसे में देर रात तक यह स्पष्ट नहीं हो सका था कि कुल कितने लोगों की तबीयत खराब हुई है। कॉलेज प्रबंधन की ओर से भी प्रभावित छात्र-छात्राओं और कर्मियों की संख्या का अंतिम आंकड़ा जारी नहीं किया गया था। फिलहाल सभी मरीजों का इलाज चिकित्सकों की निगरानी में चल रहा है। घटना की वास्तविक वजह मेडिकल जांच और कॉलेज की ओर से गठित जांच टीम की रिपोर्ट के बाद ही सामने आएगी।
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मुंबई में गणेश विसर्जन की तैयारी पूरी: BMC ने 278 लोकेशन पर 383 तालाब बनाए, 25 हजार वॉलेंटियर तैनात
मुंबई3 घंटे पहले
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मुंबई में गणेश उत्सव के दौरान मूर्तियों के इको-फ्रैंडली विसर्जन के लिए BMC ने 278 जगहों पर 383 तालाब बनाए हैं। शहर में विसर्जन की व्यवस्था संभालने के लिए 25 हजार कर्मचारी तैनात किए गए हैं।
ज्यादातर सार्वजनिक गणेश मंडलों की मूर्तियों का विसर्जन आखिरी दिन होगा। घरों में रखी मूर्तियों का विसर्जन उत्सव के दूसरे दिन से शुरू हो गया था।
दरअसल, अलग-अलग परंपराओं के अनुसार, भगवान गणेश की मूर्तियों का विसर्जन स्थापना के डेढ़ दिन और पांच दिन बाद किया जाता है।
12 दिन का गणेश उत्सव 14 सितंबर को शुरू हुआ था और 25 सितंबर को खत्म होगा।
विजर्सन की तस्वीरें….

पटना में गणेश प्रतिमा गंगा नदी में विसर्जन के लिए भगवान गणेश की मूर्ति ले जा रहे हैं।

उत्तराखंड के देहरादून में लोग तमसा नदी में भगवान गणेश की मूर्ति विसर्जित कर रहे हैं।

अमृतसर में विजर्सन से पहले गणेश भगवान के कान में अपनी मन की बात कहते हुए भक्त।

पंजाब के अमृतसर के बाहरी इलाके में लोग नहर में भगवान गणेश की मूर्ति विसर्जन कर रहे हैं।
प्राकृतिक विसर्जन स्थलों पर भी इंतजाम
BMC ने 6 फीट से बड़ी मूर्तियों के लिए 67 प्राकृतिक विसर्जन स्थलों पर जरूरी इंतजाम किए हैं। इनमें 44 समुद्र तट और जेटी, जबकि 23 प्राकृतिक झीलें शामिल हैं। बॉम्बे हाईकोर्ट के 20 अगस्त 2026 के निर्देशों के मुताबिक, 6 फीट तक की मूर्तियों का विसर्जन कृत्रिम तालाबों में करना जरूरी है।
BMC ने नागरिकों से प्राकृतिक जलस्रोतों को प्रदूषण से बचाने के लिए कृत्रिम तालाबों का इस्तेमाल करने की अपील की है।
समुद्र तटों पर रेत के ऊपर 1,194 स्टील प्लेटें बिछाई गई हैं। चौपाटियों और समुद्र तटों पर 23 जर्मन राफ्ट्स, 34 क्रेन, 85 एम्बुलेंस और 10 मोटरबोट तैयार रखी गई हैं।
लाइफगार्ड और निगरानी की व्यवस्था
BMC ने 1,132 लाइफगार्ड तैनात किए हैं। पूजा सामग्री के कचरे के लिए 498 निर्माल्य कलश और 326 निर्माल्य डंपर लगाए गए हैं। भीड़ पर नजर रखने के लिए 228 कंट्रोल रूम और 75 ऑब्जर्वेशन टावर बनाए गए हैं।
प्रमुख विसर्जन स्थल स्वराज्यभूमि (गिरगांव चौपाटी) पर BMC ने 12 कृत्रिम तालाब और 20 ऑब्जर्वेशन टावर बनाए हैं। यहां 22 राफ्ट्स, 90 टॉयलेट, 3 एम्बुलेंस और करीब 1,000 कर्मचारी भी तैनात किए गए हैं।
विसर्जन मार्गों पर मरम्मत का काम
विसर्जन मार्गों पर तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। 281 जगहों पर रास्ते में बाधा बन रहे केबल हटाए गए हैं। 506 सड़कों पर 4,279 गड्ढे और 171 ड्रेनेज कवर ठीक किए गए हैं। 515 जगहों पर पेड़ों की छंटाई भी की गई है।
मुंबई के समुद्र तट पर ब्लू-बटन जेलीफिश और स्टिंगरे मौजूद हैं। इसलिए समुद्र में मूर्ति विसर्जन के लिए उतरते समय खास सावधानी बरतने की सलाह दी गई है।
BMC के आपदा प्रबंधन विभाग ने हर सार्वजनिक गणेश मंडल के कम से कम 8 से 10 स्वयंसेवकों को प्रशिक्षण दिया है। इन स्वयंसेवकों को भीड़ संभालने, बिजली हादसों, आग और मेडिकल इमरजेंसी से निपटने की ट्रेनिंग दी गई है। उन्हें फर्स्ट एड और CPR का प्रशिक्षण भी दिया गया है।
चिपचिपी भिंडी से बचना है तो अपनाएं ये तरीका, रांची की नेहा ने बताई दही भिंडी की रेसिपी
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Dahi Bhindi Recipe: रांची में दही भिंडी की सब्जी काफी पसंद की जाती है और इसे कम समय में आसानी से तैयार किया जा सकता है. खास बात यह है कि इसे बनाने के लिए ज्यादा भिंडी की जरूरत भी नहीं पड़ती. रांची की गृहणी नेहा के मुताबिक, महज 5 भिंडी और 2 चम्मच दही से स्वादिष्ट दही भिंडी तैयार की जा सकती है. भिंडी को पहले धोकर अच्छी तरह सुखाकर फ्राई किया जाता है, फिर दही और मसालों से तैयार ग्रेवी में मिलाया जाता है. यह सब्जी रोटी, चावल या पराठे के साथ परोसी जा सकती है और झटपट कुछ स्वादिष्ट बनाने के लिए आसान विकल्प है.
झारखंड की राजधानी रांची में दही भिंडी की सब्जी काफी पसंद की जाती है. यह खाने में स्वादिष्ट होती है और इसे बनाना भी बेहद आसान है. रांची की एक गृहणी ने इसकी विधि साझा की है, जिसमें मात्र 5 भिंडी से भी यह सब्जी तैयार की जा सकती है. अगर कभी झटपट कुछ स्वादिष्ट खाने का मन हो तो आप यह रेसिपी ट्राई कर सकते हैं. यह पराठे के साथ कमाल लगती है.
रांची की गृहणी नेहा के अनुसार, सबसे पहले 5 भिंडी लेकर (या अपनी जरूरत के हिसाब से) उन्हें पतले स्लाइस में काट लेना चाहिए, यानी एक भिंडी को चार भागों में काटना है. इसके बाद, भिंडी को थोड़े से तेल में तब तक फ्राई करना है, जब तक वह पूरी तरह पक न जाए, फिर उसे बाहर निकाल लेना है. याद रहे भिंडी पहले ही धोकर और सुखाकर रख लें. भिंडी सूखी रहती है तो लस नहीं बनता. गिली भिंडी काटकर बनाएंगे तो पूरी रेसिपी खराब हो जाएगी.
अगले चरण में, दो बड़े चम्मच दही में लाल मिर्च पाउडर, मिक्स मसाला, सब्जी मसाला, हल्दी, धनिया पाउडर और स्वादानुसार नमक डालकर अच्छी तरह मिला लेना है. यह मसाला दही के साथ तैयार करके अलग रख लेना है. आप चाहें तो अपनी मर्जी से मसालों को कम या ज्यादा कर सकते हैं.
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इसके बाद, गैस पर एल्युमिनियम की कड़ाही चढ़ानी है या जो आपके पास उपलब्ध हो बस लोहे की कड़ाही का उपयोग नहीं करना है. इसमें तेल डालकर जीरा और तेज पत्ता का तड़का लगाना है. फिर, तैयार दही मसाले को कड़ाही में डालकर 5 मिनट तक लगातार चलाते रहना है. जब मसाला अच्छे से पक जाए, तो इसमें फ्राई की हुई भिंडी डालकर मात्र 2 मिनट और पकाना है. बस आपकी दही भिंडी तैयार हो जाएगी.
सब्जी को आंच से उतारने के बाद, इसे धनिया पत्ती से गार्निश करना है. नेहा का कहना है कि यह दही भिंडी रोटी, चावल, पराठा किसी के भी साथ खायी जा सकती है. किसी खास मौके पर भी आप इसे बना सकते हैं. स्वाद बेहतरीन होता है और कुकिंग टाइम काफी कम है. भिंडी पहले से धोकर, सुखाकर रख लें तो और समय बच सकता है.
लखनऊ कोर्ट के लॉकअप में बच्चे का जन्म: पेशी के लिए लाई गई थी चोरी की आरोपी, बयान से पहले उठी प्रसव पीड़ा – Lucknow News
लखनऊ कोर्ट के लॉकअप में शुक्रवार को किलकारी गूंज उठी। पेशी के लिए लाई गई चोरी की आरोपी महिला गर्भवती थी। वह चोरी के मामले में जिला जेल में बंद है। किसी दूसरे मामले में भी उसकी पेशी थी। कोर्ट के लॉकअप में पहुंची ही थी कि बयान से पहले उसे प्रसव पीड़ा होने लगी। कर्मचारियों ने उसे अस्पताल पहुंचाने की तैयारी शुरू की, लेकिन इससे पहले ही महिला ने लॉकअप में बच्चे को जन्म दे दिया। घटना के बाद महिला और नवजात को तत्काल वीरांगना अवंतीबाई महिला चिकित्सालय भेजा गया, जहां दोनों भर्ती हैं। जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। जेलर बोले- 8 अक्टूबर को होना था जन्म जिला जेल के जेलर ऋत्विक प्रियदर्शी ने बताया कि कुशीनगर के रामकोला निवासी विवेक की पत्नी तारा 27 अगस्त 2026 से चोरी के मामले में जिला जेल में बंद है। जेल में दाखिल किए जाने के समय वह गर्भवती थी। जेल प्रशासन की ओर से 15 सितंबर को उसे अल्ट्रासाउंड के लिए भेजा गया था। चिकित्सकों ने प्रसव की संभावित तारीख 8 अक्टूबर बताई थी। शुक्रवार दोपहर तारा को एक अन्य मामले में पेशी के लिए न्यायालय लाया गया था। कोर्ट परिसर स्थित लॉकअप में पहुंचने के बाद अचानक उसकी तबीयत बिगड़ गई और तेज प्रसव पीड़ा शुरू हो गई। अस्पताल भेजने से पहले बच्चे का जन्म हो गया। इसके बाद महिला और नवजात को तत्काल वीरांगना अवंतीबाई महिला चिकित्सालय भेजा गया।
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2 कंपनियां बनाएंगी 80 वंदे भारत स्लीपर ट्रेन, 35 साल तक संभालेंगी मेंटेनेंस का भी काम
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Vande Bharat Sleeper Train : भारतीय रेलवे ने 2 सरकारी कंपनियों को वंदे भारत स्लीपर ट्रेन बनाने का ठेका दिया है. यह कंपनियां 80 स्लीपर ट्रेनें बनाने के साथ ही 35 साल तक उसके रखरखाव की जिम्मेदारी भी संभालेंगी. यह पूरा प्रोजेक्ट करीब 24 हजार करोड़ रुपये का होगा.
भेल और टीटागढ़ रेल को वंदे भारत स्लीपर ट्रेन बनाने का जिम्मा मिला है.
नई दिल्ली. देश में जबसे वंदे भारत ट्रेन चलनी शुरू हुई है, हर कोई इसका कायल है. खासकर वंदे भारत की स्लीपर ट्रेनों का एहसास तो फ्लाइट में बैठने जैसा होता है. वैसे तो अभी वंदे भारत की स्लीपर ट्रेनें काफी कम हैं, लेकिन जल्द ही देश में हर बड़े शहर के बीच वंदे भारत की स्लीपर ट्रेनें दौड़ती नजर आएंगी. इन स्लीपर ट्रेनों को बनाने के लिए दो सरकारी कंपनियों ने हाथ मिलाया है. इन दोनों कंपनियों ने एक ज्वाइंट वेंचर तैयार किया है, जो 80 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनसेट तैयार करेगा और 35 साल तक इनके रखरखाव की भी जिम्मेदारी संभालेगा.
दरअसल, सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी भारत हैवी इलेक्ट्रिकल्स लिमिटेड (BHEL) और टीटागढ़ रेल सिस्टम्स लिमिटेड (TRSL) ने एक ज्वाइंट वेंचर तैयार किया है. यह दोनों कंपनियां मिलकर 80 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें तैयार करेंगी और 35 साल तक उनके रखरखाव की भी जिम्मेदारी निभाएंगी. इस काम के लिए दोनों कंपनियों ने 15 सितंबर को समझौता किया है, जिसके तहत जल्द ही नई कंपनी बनाने का काम शुरू हो जाएगा.
24 हजार करोड़ का होगा प्रोजेक्ट
भेल और टीटागढ़ कंसोर्टियम को दिया गया प्रोजेक्ट करीब 24 हजार करोड़ रुपये का होगा. इसमें 80 वंदे भारत स्लीपर ट्रेनों का निर्माण और उनका 35 साल तक रखरखाव शामिल है. इसका मतलब है कि इन ट्रेनों का मेंटेनेंस साल 2061 तक करना होगा. नया ज्वाइंट वेंचर दोनों कंपनियों का बराबर हिस्सेदारी वाला होगा. इसका मतलब है कि रेलवे ने इन दोनों कंपनियों को सिर्फ नई ट्रेनें बनाने की ही जिम्मेदारी नहीं सौंपी है, बल्कि उसके मेंटनेंस का जिम्मा भी दिया है. इससे रेलवे को लंबे समय तक इन ट्रेनों के रखरखाव आदि की चिंता नहीं करनी होगी.
कई हिस्सों में बंटा है कॉन्ट्रैक्ट
भेल और टीटागढ़ कंसोर्टियम का यह कॉन्ट्रैक्ट कई हिस्सों में बंटा हुआ है. 24 हजार करोड़ के इस प्रोजेक्ट में सरकारी मैन्युफैक्चरिंग यूनिट और ट्रेनसेट डिपो को अपग्रेड करने का काम भी शामिल है. इसका मकसद सिर्फ ट्रेनें बनाना नहीं है, बल्कि इन ट्रेनों के ऑपरेशन से लेकर इन्फ्रा तक सभी चीजों को लंबे समय तक सपोर्ट करने का काम भी इसका ही होता है.
लंबे मेंटेनेंस से क्या होगा फायदा
प्रोजेक्ट की सबसे जरूरी चीज इसका लंबे समय तक मेंटेनेंस प्लान है. दरअसल, किसी भी नए ट्रेनसेट को लंबे समय तक रखरखाव की जरूरत होती है. अमूमन ट्रेनसेट बनाने और उसके रखरखाव का काम अलग-अलग कंपनियों को सौंपा जाता है, जिससे काम उतना बेहतर तरीके से नहीं हो पाता. इसे ध्यान में रखते हुए दोनों काम एक ही कंपनी को सौंपा गया है, ताकि निर्माण के समय ही यह ध्यान रखा जा सके कि उसका मेंटेनेंस भी उसी कंपनी को लंबे समय तक करना है. ऐसे में ट्रेनसेट बनाने वाली कंपनी क्वालिटी का खास ध्यान रखेगी.
लंबी दूरी के लिए डिजाइन है ट्रेन
वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को खास तौर से लंबी दूरी की यात्रा के लिए डिजाइन किया गया है. यही वजह है कि इन ट्रेनों की क्वालिटी को खास बनाया जाता है. इसमें आराम, आधुनिक डिजाइन और एडवांस्ड टेक्नोलॉजी जैसी चीजों पर जोर दिया जाता है. इस साल जनवरी में ही पहली स्लीपर वंदे भारत ट्रेन चलनी शुरू हुई है, जबकि अब इसे देश के कई प्रमुख शहरों को जोड़ने के लिए चलाने का लक्ष्य है. देश की पहली वंदे भारत स्लीपर ट्रेन को इंटीग्रल कोच फैक्ट्री, चेन्नई में बनाया गया था.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…
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जीरन में रेतम नदी उफान पर,बांध के 7 गेट खुले: नीमच में मल्हारगढ़-जीरन मार्ग ठप; पुलिया डूबी, गांवों में पुलिस गश्त तेज – Neemuch News
नीमच के जीरन क्षेत्र में तीन दिन से हो रही तेज बारिश के बाद रेतम नदी उफान पर है। कुंचडोद के पास काका साहब गाडगिल सागर बांध के 9 में से 7 गेट शुक्रवार शाम तक खोल दिए गए। पानी बढ़ने से मल्हारगढ़ से कुंचडोद-जीरन और नयाखेड़ा जाने वाले रास्ते की पुलिया डूब गई और मार्ग पर यातायात बंद हो गया। पुलिया डूबने से रास्ता बंद बांध से पानी छोड़े जाने के बाद रेतम नदी का जलस्तर बढ़ गया। नदी के तेज बहाव से पुलिया पूरी तरह पानी में डूब गई। इसके चलते मल्हारगढ़ से कुंचडोद-जीरन और नयाखेड़ा जाने वाले रास्ते पर वाहनों की आवाजाही रोक दी गई। प्रशासन ने मौके पर पहुंचकर स्थिति देखी सूचना मिलते ही नायब तहसीलदार शत्रुघ्न चतुर्वेदी, हल्का पटवारी और पुलिस बल मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने जलस्तर और पुलिया की स्थिति का जायजा लिया। प्रशासन ने लोगों से बहते पानी में रास्ता पार नहीं करने की अपील की है। गांवों में पुलिस की गश्त बढ़ाई सुरक्षा के लिए जीरन थाने के चार पुलिस जवान प्रभावित क्षेत्र में तैनात किए गए हैं। पुलिस चलदू, पलसोड़ा समेत नदी किनारे बसे आसपास के गांवों में लगातार गश्त कर रही है। बारिश जारी रही तो बढ़ सकता है जलस्तर क्षेत्र में बारिश का दौर जारी है। प्रशासन नदी और बांध के जलस्तर पर नजर रख रहा है। बारिश बढ़ने पर नदी का जलस्तर और बढ़ने की आशंका है।
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