Wednesday, June 24, 2026
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इंडेक्स फंड या एक्टिव फंड? ₹1 लाख के निवेश ने 10 साल में किसे बनाया ज्यादा अमीर


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Index funds Vs Active Funds: इंडेक्स फंड और एक्टिव फंड की 10 साल की तुलना बताती है कि सही एक्टिव फंड चुनने पर निवेशक को इंडेक्स फंड से कहीं बेहतर रिटर्न मिल सकता है, लेकिन गलत फंड चुनने पर नुकसान भी हो सकता है. 10 साल पहले निफ्टी 50 इंडेक्स फंड में लगाया गया 1 लाख रुपये करीब 3.15 लाख रुपये बना, जबकि सबसे बेहतर फ्लेक्सी-कैप फंड में यही रकम 5.99 लाख रुपये तक पहुंच गई. वहीं, कमजोर प्रदर्शन वाले फ्लेक्सी-कैप फंड में निवेश सिर्फ 2.53 लाख रुपये तक ही बढ़ पाया. 

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क्या वाकई इंडेक्स फंड्स से बेहतर हैं एक्टिव फंड्स?

Index funds Vs Active Funds: म्यूचुअल फंड की दुनिया में अक्सर एक बहस छिड़ी रहती है कि इंडेक्स फंड बेहतर है या एक्टिव फंड? अगर 10 साल पहले आपने 1 लाख रुपये का निवेश किया होता, तो आज किस फंड ने आपको सबसे ज्यादा अमीर बनाया होता? क्या बाजार की चाल पर चलने वाले इंडेक्स फंड ने बाजी मारी या किसी एक्सपर्ट फंड मैनेजर के दिमाग ने पैसों को दोगुना-तिगुना कर दिया? आइए जानते हैं कि बीते एक दशक में निवेश की इस जंग का असली विजेता कौन रहा?

मान लीजिए दो दोस्तों ने 10 साल पहले 1-1 लाख रुपये का निवेश किया. पहले निवेशक ने निफ्टी 50 इंडेक्स फंड चुना, जबकि दूसरे ने एक्टिव इक्विटी फंड में पैसा लगाया. निफ्टी 50 इंडेक्स फंड में लगाया गया 1 लाख रुपये बढ़कर करीब 3.15 लाख रुपये हो गया होता. वहीं, अगर दूसरे निवेशक ने एक अच्छा लार्ज-कैप एक्टिव फंड चुना होता तो उसका निवेश लगभग 3.83 लाख रुपये तक पहुंच सकता था. लेकिन कमजोर प्रदर्शन वाले फंड में निवेश करने पर यही रकम सिर्फ 2.60 लाख रुपये रह जाती.

फ्लैक्सी-कैप फंड में दिखा सबसे बड़ा अंतर
फ्लेक्सी-कैप फंड्स में रिटर्न का अंतर और भी ज्यादा देखने को मिला. आंकड़ों के अनुसार, सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वाले एक्टिव फ्लेक्सी-कैप फंड ने 1 लाख रुपये को 10 साल में लगभग 5.99 लाख रुपये में बदल दिया. इस दौरान निवेशकों को करीब 19.62% का सालाना रिटर्न मिला. दूसरी ओर, सबसे कमजोर फ्लेक्सी-कैप फंड में यही निवेश सिर्फ 2.53 लाख रुपये तक पहुंच पाया और सालाना रिटर्न 9.74% रहा.

एक्टिव फंड क्यों दे सकते हैं ज्यादा रिटर्न?
एक्सपर्ट के मुताबिक, एक्टिव फंड के फंड मैनेजर बाजार की परिस्थितियों के अनुसार अलग-अलग सेक्टर और कंपनियों में निवेश का फैसला कर सकते हैं. वे बड़े, मिड और स्मॉल-कैप शेयरों के बीच भी बदलाव कर सकते हैं. यही फ्लेक्सिबिलिटी कई बार इंडेक्स से बेहतर रिटर्न दिलाता है.

फिर भी इंडेक्स फंड क्यों पसंद किए जाते हैं?
इंडेक्स फंड उन निवेशकों के लिए बेहतर माने जाते हैं जो आसान निवेश चाहते हैं. इनमें फंड मैनेजर के फैसलों का रिस्क कम होता है और खर्च भी अपेक्षाकृत कम रहता है. हालांकि ये बाजार को मात देने की कोशिश नहीं करते, लेकिन बाजार जैसा रिटर्न देने का लक्ष्य रखते हैं.

निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सबक
यह आंकड़े बताते हैं कि एक्टिव फंड में ज्यादा कमाई की संभावना जरूर होती है, लेकिन रिस्क भी उतना ही बड़ा होता है. इसलिए केवल पिछले रिटर्न देखकर निवेश करने के बजाय फंड की स्ट्रैटेजी, रिस्क मैनेजमेंट और लंबे समय के प्रदर्शन को भी जरूर जांचना चाहिए.

इंडेक्स फंड क्या होता है?
इंडेक्स फंड किसी बाजार इंडेक्स जैसे निफ्टी 50 को ट्रैक करता है और उसी के अनुसार निवेश करता है.

एक्टिव फंड क्या होता है?
एक्टिव फंड में फंड मैनेजर बाजार का विश्लेषण करके शेयरों का चयन करता है ताकि इंडेक्स से बेहतर रिटर्न मिल सके.

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विनय कुमार झासीनियर कॉपी एडिटर

वर्तमान में विनय कुमार झा नेटवर्क18 की वेबसाइट hindi.news18.com में सीनियर कॉपी एडिटर के पद पर कार्यरत हैं. वह मई 2017 से इस वेबसाइट के साथ जुड़े हैं. वह बीते 5 सालों से वर्तमान में वेबसाइट के बिजनेस सेक्शन के …और पढ़ें



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राकेश रोशन की वो फिल्म, जिसमें थे दो आइकॉनिक गाने, किशोर कुमार की आवाज में हुए अमर


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बॉलीवुड हो या हॉलीवुड, हिट फिल्मों की कहानी में थोड़ी बहुत बदलाव के साथ दूसरी फिल्में बनाई जाती रही हैं. एक ही कहानी पर बनी फिल्में कई बार बॉक्स ऑफिस पर तहलका मचा देती हैं तो कई बार दोनों फिल्में सफल हो जाती हैं. 44 साल के अंतराल में ऐसी ही दो फिल्में बनी जिनकी कहानी सेम-सेम बट डिफरेंट वाली जैसी थी. दोनों फिल्मों का बॉक्स ऑफिस पर प्रदर्शन अलग-अलग रहा. दोनों फिल्मों के गाने खूब पॉप्युलर हुए. एक फिल्म के गाने तो इतने पॉप्युलर हैं कि आज भी सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा रील्स इन पर बनती हैं.

‘तुमसे बढ़कर दुनिया में ना देखा कोई और’ और ‘तुझ संग प्रीत लगाई सजना’ जैसे गाने सुनते ही दिल में अरमान जगते हैं. कहा जाता है कि
प्यार एक खूबसूरत अहसास है. अपने दिलवर के सामने दिल की बात जुबान पर लाना आसान नहीं होता. प्यार का इजहार करने के लिए शब्द ही सहारा बनते हैं. दिल की बात अगर गानों में झलके तो फिर क्या कहना. 1982 में ऐसी ही एक फिल्म आई थी जिसके गानों पर सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा रील्स बनाई जाती हैं. इसी फिल्म का रीमेक भी बनाया गया लेकिन फिल्म नहीं चली. हम ‘कामचोर’ और ‘राजा जी’ फिल्म की बात कर रहे हैं.

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सबसे पहले बात करते हैं 24 दिसंबर 1982 को रिलीज फिल्म ‘कामचोर’ की जिसका डायरेक्शन के. विश्वनाथ ने किया था. फिल्म में राकेश रोशन-जया प्रदा लीड रोल में थे. स्टोरी-स्क्रीनप्ले के. विश्वनाथ ने ही लिखा था. डायलॉग जैनेंद्र जैन ने लिखे थे. प्रोड्यूसर राकेश रोशन ही थे. फिल्म में म्यूजिक राजेश रोशन ने दिया था. फिल्म के यादगार गाने गीतकार इंदीवर ने लिखे थे.

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कामचोर फिल्म का म्यूजिक सुपरहिट रहा. फिल्म की सफलता का क्रेडिट भी जया प्रदा और गानों को मिला. फिल्म में वैसे तो 5 गाने थे. फिल्म के दो गाने बेहद पॉप्युलर हुए. ये गाने थे : तुमसे बढ़कर दुनिया में ना देखा कोई और, जुबां पर आज दिल की बात आ गई और तुझ संग प्रीत लगाई सजना. दोनों गाने किशोर कुमार की आवाज में थे. ‘तुमसे बढ़कर दुनिया में ना देखा कोई’ किशोर कुमार-अलका याज्ञनिक ड्यूएट और सोलो सॉन्ग था.

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इसके अलावा, फिल्म में सुरेश ओबेरॉय, सुजीत कुमार, श्रीराम लागू और तनूजा अहम भूमिकाओं में थे. सुरेश ओबेरॉय अपने रोल से खुश नहीं थे. उन्होंने फिर राकेश रोशन के साथ काम नहीं किया. फिल्म में नजर आईं नीता मेहता ने भी मूवी रिलीज होने के बाद राकेश रोशन को बुरा-भला कहा था. उन्होंने फिल्म से कई सीन हटाने का आरोप लगाया था.

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‘कामचोर’ डायरेक्टर के. विश्वनाथ की 1980 की एक तेलुगू फिल्म का रीमेक थी. फिल्म का म्यूजिक राकेश रोशन के बड़े भाई राजेश रोशन ने कंपोज किया था. फिल्म में राकेश रोशन के भतीजे का किरदार सोनू निगम ने निभाया था. बाद में वो मशहूर प्लेबैक सिंगर बने. ‘कामचोर’ फिल्म बॉक्स ऑफिस पर मैसिव हिट रही थी.

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आगे चलकर 17 साल बाद ‘कामचोर’ फिल्म का रीमेक ‘राजा जी’ नाम से बनाया गया. यह एक कॉमेडी ड्रामा फिल्म थी. प्रोड्यूसर-डायरेक्टर विमल कुमार थे. फिल्म में गोविंदा और रवीना टंडन की जोड़ी लीड रोल में थी.

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‘राजा जी’ फिल्म 21 मई 1999 को रिलीज हुई थी. म्यूजिक आनंद-मिलिंद और विश्वजीत मुखर्जी ने कंपोज किया था. गीतकार समीर थे. 41:07 मिनट के कुल 8 गाने थे. म्यूजिक हिट था. फिल्म के कुछ गाने ‘राजा चलो अकेले में’, ‘सासू जी थारो लल्ला मचाए यार हल्ला’ पॉप्युलर हुए थे.

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‘राजा जी’ फिल्म कामचोर से बहुत जयदा इंस्पायर्ड थी. दर्शक फिल्म की कहानी से नहीं जुड़ पाए. फिल्म का बजट करीब 4.75 करोड़ रुपये था. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 7.57 करोड़ रुपये का कलेक्शन किया था. यह एक फ्लॉप फिल्म साबित हुई थी.

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औसानेश्वर मंदिर में दो सगे भाइयों की मौत: नदी में स्नान करते समय गहरे पानी में डूबे, गोताखोरों ने शव निकाला – Barabanki News




बाराबंकी के औसानेश्वर महादेव मंदिर में दर्शन करने आए दो सगे भाइयों की नदी में डूबने से मौत हो गई। घटना बुधवार सुबह हैदरगढ़ कोतवाली क्षेत्र में हुई। पुलिस ने गोताखोरों की मदद से दोनों शवों को बाहर निकालकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। मृतकों की पहचान लोनीकटरा थाना क्षेत्र के बुढ़नापुर गांव निवासी अशोक कुमार पांडे के पुत्र ऋतिक पांडेय उर्फ हैप्पी (14) और गजेंद्र उर्फ हनी (18) के रूप में हुई है। दोनों भाई मंदिर में दर्शन के बाद स्नान घाट पर नदी में नहाने उतरे थे।
स्नान के दौरान वे गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, जब तक लोग घटना को समझ पाते, तब तक दोनों भाई नदी की गहराई में समा चुके थे। स्थानीय लोगों ने तत्काल पुलिस को सूचना दी। सूचना मिलने पर पुलिस मौके पर पहुंची और गोताखोरों की मदद से घंटों तलाश अभियान चलाया। काफी मशक्कत के बाद दोनों को नदी से बाहर निकाला गया, लेकिन तब तक उनकी मौत हो चुकी थी। प्रभारी निरीक्षक अनिल पांडे ने बताया कि दोनों शवों का पंचनामा भरकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है। मामले में आवश्यक विधिक कार्रवाई की जा रही है।



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बालाघाट में बारिश की कमी, किसान चिंतित: पिछले साल से इस साल कम वर्षा; IMD के अनुसार हल्की बारिश की संभावना – Balaghat (Madhya Pradesh) News




बालाघाट जिले में मानसून की देरी से धान उत्पादक किसानों की चिंता बढ़ गई है। जून का अंतिम हफ्ते होने के बावजूद जिले में अब तक एक इंच भी बारिश दर्ज नहीं की गई है। पिछले साल की तुलना में इस साल 24 जून तक केवल 22 मिलीमीटर औसत वर्षा हुई है, जबकि गत वर्ष इसी अवधि तक डेढ़ इंच से अधिक बारिश हो चुकी थी। बारिश के अभाव में किसान अपनी बोवनी शुरू नहीं कर पा रहे हैं। उन्होंने अपने खेत तैयार कर लिए हैं और खाद-बीज भी खरीद लिया है, लेकिन अब वे केवल मानसून के सक्रिय होने का इंतजार कर रहे हैं। इस बीच, भारत मौसम विज्ञान विभाग, नई दिल्ली के क्षेत्रीय कार्यालय भोपाल ने बालाघाट जिले के लिए पांच दिवसीय मध्यम अवधि मौसम पूर्वानुमान जारी किया है। बिजली गिरने और आंधी-तूफान की संभावना जिला कृषि मौसम इकाई, कृषि विज्ञान केंद्र के वैज्ञानिक डॉ. धर्मेंद्र अगासे ने बताया कि 24 से 27 जून के दौरान जिले में मौसम में बदलाव आ सकता है। इस अवधि में हल्के बादल छाए रहने, हल्की वर्षा होने और कुछ स्थानों पर बिजली गिरने और आंधी-तूफान की संभावना है। कृषि विज्ञान केंद्र ने किसानों को सलाह दी है कि वे मौसम की स्थिति को ध्यान में रखते हुए अपने कृषि कार्यों की योजना बनाएं। साथ ही, बिजली गिरने या तेज हवाओं के दौरान खुले स्थानों पर जाने से बचें। 24 घंटों के 6 मिलीमीटर वर्षा दर्ज पिछले 24 घंटों के दौरान जिले में औसतन 06 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई। इसमें बालाघाट तहसील में 01 मिलीमीटर, वारासिवनी में 07 मिलीमीटर, बैहर में 14 मिलीमीटर, लांजी में 00 मिलीमीटर, कटंगी में 00 मिलीमीटर, किरनापुर में 02 मिलीमीटर, खैरलांजी में 00 मिलीमीटर, लालबर्रा में 20 मिलीमीटर, बिरसा में 05 मिलीमीटर, परसवाड़ा में 12 मिलीमीटर और तिरोड़ी में 02 मिलीमीटर वर्षा शामिल है। सबसे ज्यादा बालाघाट में बारिश चालू वर्ष में 01 जून से 24 जून तक सबसे अधिक 41 मिलीमीटर वर्षा बालाघाट और वारासिवनी तहसील में दर्ज की गई है, जबकि सबसे कम 03 मिलीमीटर वर्षा खैरलांजी तहसील में रिकॉर्ड की गई है। वहीं बैहर में 37 मिलीमीटर, लांजी में 12 मिलीमीटर, कटंगी में 11 मिलीमीटर, किरनापुर में 06 मिलीमीटर, लालबर्रा में 31 मिलीमीटर, बिरसा में 08 मिलीमीटर, परसवाड़ा में 30 मिलीमीटर एवं तिरोड़ी में 21 मिलीमीटर वर्षा दर्ज की गई है।



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आम-कटहल का अचार छोड़िए! अब ट्राई करें निमाड़ का ये फेमस अचार, सालभर रहेगा फ्रेश


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आम-कटहल का अचार छोड़िए! अब ट्राई करें निमाड़ का ये फेमस अचार, जानें रेसिपी

 

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Nimad Mix Pickle Recipe: अगर आप आम या कटहल का अचार रोज-रोज खाकर थक गए हैं और कुछ नया ट्राई करना चाहते हैं तो आज हम आपको निमाड़ के फेमस अचार की रेसिपी बताएंगे. मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में बरसात से पहले मिक्स अचार बनाने की परंपरा है. इसको बनाने के लिए आपको मिर्ची, गाजर, नींबू, हल्दी, नमक, राई की आवश्यकता होती है, जिससे यह बनकर तैयार हो जाता है. इसकी खासियत यह है कि सही तरीके से बनाने और स्टोर करने पर यह अचार पूरे एक साल तक खराब नहीं होता. स्थानीय महिलाओं के अनुसार इस अचार को बनाने में सिर्फ एक दिन का समय लगता है, लेकिन इसका स्वाद पूरे साल रहता है. इसे रोटी, पराठा, दाल-चावल के साथ बड़े चाव से खाया जाता है. इसे सफर में भी ले जा सकते हैं. वीडियो में आप इसे बनाने की आसान रेसिपी देख सकते हैं.

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शास्त्री-आचार्य परीक्षा फॉर्म भरने की तिथि घोषित: 25 जून से भरे जाएंगे फॉर्म, 30 तक नहीं लगेगा विलंब शुल्क – Darbhanga News




कामेश्वर सिंह दरभंगा संस्कृत विश्वविद्यालय (केएसडीएसयू) ने शास्त्री एवं आचार्य पाठ्यक्रमों की विभिन्न सेमेस्टर परीक्षाओं के लिए एग्जामिनेशन फॉर्म भरने की तिथि घोषित कर दी है। विश्वविद्यालय के जनसंपर्क पदाधिकारी (पीआरओ) डॉ. निशिकांत ने बताया कि परीक्षा नियंत्रक डॉ. निहार रंजन सिन्हा की ओर से 22 जून को जारी अधिसूचना के अनुसार छात्र-छात्राएं 25 से 30 जून तक बिना विलंब शुल्क के परीक्षा फॉर्म भर सकेंगे।
जिन पाठ्यक्रमों के लिए फॉर्म भरने की तिथि घोषित की गई है, उनमें शास्त्री द्वितीय सेमेस्टर (सत्र 2025-29), शास्त्री तृतीय सेमेस्टर (सत्र 2024-28), शास्त्री पंचम सेमेस्टर (सत्र 2023-27), आचार्य द्वितीय सेमेस्टर (सत्र 2025-27), आचार्य तृतीय सेमेस्टर (सत्र 2023-25) के साथ-साथ पूर्ववर्ती छात्रों के लिए शास्त्री प्रथम सेमेस्टर (सत्र 2024-28), शास्त्री प्रथम-तृतीय सेमेस्टर (सत्र 2023-27) और आचार्य प्रथम सेमेस्टर (सत्र 2023-25) शामिल हैं।
आचार्य द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा शुरू, 25 जून तक चलेगी
इधर, विश्वविद्यालय में आचार्य द्वितीय सेमेस्टर की परीक्षा मंगलवार से प्रारंभ हो गई। परीक्षा 25 जून तक 2 पालियों में होगी। इस अवसर पर कुलपति प्रो. लक्ष्मी निवास पांडेय ने परीक्षा केंद्र शिक्षा शास्त्र विभाग का औचक निरीक्षण किया और केंद्राधीक्षक डॉ. घनश्याम मिश्र को आवश्यक निर्देश दिए।
पीआरओ डॉ. निशिकांत ने बताया कि पूरे बिहार में इस परीक्षा के लिए विश्वविद्यालय परिसर में एकमात्र परीक्षा केंद्र बनाया गया है। परीक्षा में भागलपुर, पटना, गया, रमेश्वरलता संस्कृत महाविद्यालय और विश्वविद्यालय के स्नातकोत्तर विभागों के छात्र शामिल हो रहे हैं।
पहले दिन आयोजित परीक्षा में कुल 284 परीक्षार्थियों में से 260 छात्र-छात्राएं उपस्थित रहे, जबकि 24 परीक्षार्थी अनुपस्थित रहे।



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रिपोर्ट- इजराइल ने जानबूझकर फिलिस्तीनी बच्चों को मारा: 20 हजार से ज्यादा बच्चों की मौत; टारगेटेड किलिंग्स के पुख्ता सबूत मिले


न्यूयॉर्क सिटी20 मिनट पहले

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संयुक्त राष्ट्र के जांच आयोग ने इजराइल पर गाजा और वेस्ट बैंक में फिलिस्तीनी बच्चों को जानबूझकर निशाना बनाने का आरोप लगाया है।

आयोग की रिपोर्ट के मुताबिक अक्टूबर 2023 से अब तक 20 हजार से ज्यादा बच्चों की मौत हुई है। 44 हजार से अधिक घायल हुए हैं। इस दौरान कुल मौतों में लगभग 30% बच्चे शामिल रहे।

आयोग के अध्यक्ष और भारत के पूर्व हाईकोर्ट मुख्य न्यायाधीश एस. मुरलीधर ने रिपोर्ट जारी करते हुए कहा कि जांच में बच्चों को निशाना बनाकर किए गए हमलों के पुख्ता सबूत मिले हैं। इजराइली सेना मानवता के खिलाफ अपराध और युद्ध अपराधों के लिए जिम्मेदार हैं।

रिपोर्ट के अनुसार बच्चों की मौतें हवाई हमलों, ड्रोन हमलों और स्नाइपर फायरिंग में हुईं। कई मामलों में उनके सिर और शरीर के ऊपरी हिस्से को निशाना बनाया गया।

आयोग के अध्यक्ष एस. मुरलीधर ने मंगलवार को बयान जारी कर रिपोर्ट की जानकारी दी।

आयोग के अध्यक्ष एस. मुरलीधर ने मंगलवार को बयान जारी कर रिपोर्ट की जानकारी दी।

सीजफायर के बाद भी बच्चों की मौत जारी रही

अक्टूबर 2025 में इजराइल और हमास के बीच सीजफायर लागू होने के बाद भी फिलिस्तीनी बच्चों की मौत और घायल होने की घटनाएं जारी रहीं। हालांकि आयोग ने यह नहीं बताया कि युद्धविराम के बाद कितने बच्चे मारे गए।

UNICEF ने पिछले हफ्ते दावा किया था कि सीजफायर लागू होने के बाद भी औसतन हर दिन एक फिलिस्तीनी बच्चे की जान गई। UNICEF के प्रवक्ता जेम्स एल्डर के मुताबिक बच्चे अपने घरों, स्कूलों, खेल के मैदानों और यहां तक कि समुद्र किनारे भी मारे गए।

आयोग ने अपनी रिपोर्ट में 18 साल से कम उम्र के सभी लोगों को बच्चा माना है। रिपोर्ट के मुताबिक इन बच्चों को ‘आतंकवादी या भविष्य का आतंकवादी’ मानकर निशाना बनाया गया।

आयोग के मुताबिक अक्टूबर 2023 से अक्टूबर 2025 के बीच करीब 58 हजार बच्चों ने अपने एक या दोनों माता-पिता को खो दिया। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि कुपोषण के कारण 151 बच्चों की मौत हुई और एक हजार से ज्यादा बच्चों के अंग काटने पड़े।

इजराइली हमले में जान गंवाने वाले 3 वर्षीय बेटे को गोद में लेकर अंतिम संस्कार के लिए पहुंचा पिता। यह तस्वीर अप्रैल में गाजा सिटी की है।

इजराइली हमले में जान गंवाने वाले 3 वर्षीय बेटे को गोद में लेकर अंतिम संस्कार के लिए पहुंचा पिता। यह तस्वीर अप्रैल में गाजा सिटी की है।

इजराइल ने रिपोर्ट को खारिज किया

रिपोर्ट सामने आने के बाद इजराइल ने उसे पूरी तरह खारिज कर दिया। जिनेवा में इजराइल के UN मिशन ने रिपोर्ट को बदनाम करने की कोशिश बताते हुए कहा कि जांच आयोग शुरू से ही इजराइल के खिलाफ पक्षपाती रहा है।

मिशन का कहना है कि आयोग का मकसद तथ्यों की जांच नहीं, बल्कि हर हाल में इजराइल को कटघरे में खड़ा करना है। इजराइली विदेश मंत्रालय ने भी रिपोर्ट पर सवाल उठाए। मंत्रालय ने कहा कि रिपोर्ट में हमास के हमलों में मारे गए और अगवा किए गए इजराइली बच्चों का जिक्र नहीं किया गया।

इजराइल का आरोप है कि हमास ने युद्ध के दौरान फिलिस्तीनी बच्चों को मानव ढाल की तरह इस्तेमाल किया, लेकिन UN रिपोर्ट ने इस मुद्दे को भी नजरअंदाज कर दिया।

पांच साल से कम उम्र के 5 हजार बच्चों की मौत

गाजा के स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक युद्ध में 21 हजार से ज्यादा फिलिस्तीनी बच्चों की जान गई। इनमें 5,031 बच्चे ऐसे थे, जिनकी उम्र 5 साल से भी कम थी।

मरने वालों में 1,029 बच्चे एक साल से कम उम्र के थे, जबकि करीब 420 नवजात ऐसे थे, जिन्होंने दुनिया में आने के कुछ ही समय बाद जान गंवा दी।

आयोग ने बताया कि रिपोर्ट तैयार करने के लिए डॉक्टरों, वकीलों, शिक्षकों, पत्रकारों और प्रत्यक्षदर्शियों से जानकारी जुटाई गई। जांच के दौरान आयोग ने 7 अक्टूबर 2023 के बाद इजराइल को 13 बार सवाल और जानकारी के अनुरोध भेजे, लेकिन किसी भी पत्र का जवाब नहीं मिला।

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संयुक्त राष्ट्र में इजराइली राजदूत ने UN अफसर को फटकारा:यौन हिंसा से जुड़ी रिपोर्ट में इजराइल का नाम आने से नाराज थे

संयुक्त राष्ट्र (UN) में 19 जून को एक बैठक के दौरान इजराइल के राजदूत डैनी डैनन और UN महासचिव की विशेष प्रतिनिधि प्रमिला पैटन के बीच तीखी बहस हो गई। यह बैठक जंग के दौरान होने वाली यौन हिंसा को खत्म करने के अंतरराष्ट्रीय दिवस के मौके पर न्यूयॉर्क में आयोजित की गई थी। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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UPI यूजर्स के लिए NPCI ला रहा नया फीचर, एक ही जगह दिखेंगे सभी ऑटोमैटिक पेमेंट्स


PhonePe, Google Pay, Paytm जैसे UPI यूजर्स के लिए NPCI नया फीचर ला रहा है। अब यूजर्स को एक ही ऐप में सभी ऐप्स के ऑटोमैटिक पेमेंट दिखेगा। इस फीचर को लाने का मकसद यूजर को एक ही जगह खास सुविधा देना है। OTT सब्सक्रिप्शन हो या फिर बिल पेमेंट इन सबके लिए यूजर्स ऑटोमैटिक पेमेंट चुनते हैं। अगर, यूजर ने एक ऑटोमैटिक पेमेंट Paytm से और एक गूगल पे से लिया है, तो यूजर को एक ही जगह सभी ऑटोमैटिक पेमेंट की लिस्ट दिखाई देगा।

तैयार हो रहा नया सिस्टम

ET Telecom की रिपोर्ट के मुताबिक, NPCI ऐसे इंटरफेस या सॉफ्टवेयर सिस्टम तैयार कर रहा है, जिसे सभी UPI ऐप्स के लिए उपलब्ध कराया जाएगा। ऐसे में यूजर्स को ऑटोमैटिक पेमेंट को मैनेज करने में आसानी होगी। फिलहाल यूजर्स को अपने ऑटोमैटिक पेमेंट को मैनेज करने के लिए अलग-अलग ऐप पर जाना होता है। NPCI का यह फीचर लोगों का यह काम आसान बना देगा।

क्या होगा फायदा?

रिपोर्ट के मुताबिक, UPI का ऑटोपे फीचर पिछले कुछ साल में काफी लोकप्रिय हो रहा है। NPCI के डेटा के मुताबिक, मई में टॉप 10 बैंकों ने 1.6 बिलियन ई-मैंडेट ट्रांजैक्शन प्रोसेस किए हैं। यह पिछले मई के 577 मिलियन ट्रांजैक्शन के मुकाबले लगभग तीन गुना ज्यादा है। हालांकि, रिपोर्ट के मुताबिक, ट्रांजैक्शन बढ़ने के साथ-साथ ट्रांजैक्शन रिजेक्ट की संख्यां में भी बढ़ोतरी हुई है।

देश के सबसे बड़े पब्लिक सेक्टर के बैंक SBI के केवल 30 प्रतिशत ट्रांजैक्शन ही ऑटो पे के जरिए मंजूर होते हैं। ऐसे में रिजेक्शन की संख्यां 70% है। ये ट्रांजैक्शन अकाउंट में पर्याप्त बैलेंस नहीं होने की वजह से होते हैं। NPCI के इस फीचर से यूजर्स ऑटो-पे को मैनेज करके इन रिजेक्शन को बचा सकते हैं। मैंडेट रिजेक्ट होने की वजह से यूजर्स को इसका फाइन भी भरना पड़ता है।

एक ही जगह मैनेज होंगे ऑटो पे

फिलहाल यूजर्स NPCI के हेल्प पोर्टल पर जाकर ई-मैंडेट से जुड़े सवाल पूछ सकते हैं। इस पोर्टल को पिछले साल लॉन्च किया गया था। यह एक चैटबॉट बेस्ड पोर्टल है, जहां यूजर्स के सवालों का जवाब एक ही जगह मिलता है। UPI ऐप में मिलने वाले इस नए फीचर का फायदा देश के करोड़ों यूजर्स को होगा और वो आसानी से अपने ऑटोमैटिक पेमेंट्स को एक ही जगह, एक ही ऐप में मैनेज कर पाएंगे। उन्हें अलग-अलग ऐप्स पर नहीं जाना होगा।

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जयपुर में सिर फोड़ युवक की हत्या: शराब पीने को लेकर था टोका, झगड़ा होने पर पत्थर फेंके – Jaipur News




जयपुर में सिर फोड़कर एक युवक की हत्या का मामला सामने आया है। दुकान के बाहर शराब पी रहे लड़कों को टोंकने पर उसका विवाद हुआ था। गुस्साएं लड़कों ने अकेला पाकर पत्थर फेंकने के साथ डंडों से हमला कर उसको घायल कर दिया था। सांगानेर सदर थाना पुलिस ने पोस्टमार्टम के लिए शव को SMS हॉस्पिटल की मॉर्च्युरी में रखवाया है। SHO (सांगानेर सदर) अनिल जैमन ने बताया- गोविन्दपुरा के शिक्षा सागर कॉलोनी निवासी संजू शर्मा (28) पुत्र कैलाश शर्मा की हत्या हुई है। वह पानी का टैंकर सप्लाई का काम करता था। घर के बाहर ही उसके भाई की परचूनी दुकान है। मंगलवार रात को पड़ोस के खेत में शादी का प्रोग्राम चल रहा था। रात करीब 11 बजे दुकान के बाहर आधा दर्जन लड़के बैठकर शराब पी रहे थे। शराब पीने की बात को लेकर संजू के परिजनों ने उन्हें जाने को कहा। शराब पीने को टोंकने के चलते गुस्साएं लड़कों ने घर पर पत्थर फेंके। घर से बाहर निकलकर संजू उनको समझाने के लिए गया। इसी दौरान अकेला पाकर लड़कों ने झगड़ा कर हमला कर दिया। पत्थर से सिर फोड़ने के साथ डंडे से ताबड़तोड़ वार किए। लहूलुहान होकर रोड पर गिरने पर हमलावर वहां से फरार हो गए। परिजनों ने गंभीर हालत में उसे SMS हॉस्पिटल में एडमिट करवाया। इलाज के दौरान बुधवार सुबह करीब 5:30 बजे डॉक्टर्स ने उसे मृत घोषित कर दिया।



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तमन्ना भाटिया का बड़ा बयान- ‘एक लिमिट के बाद इतने पैसे का कोई अकेले क्या करेगा?’


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100 करोड़ से ज्यादा की नेटवर्थ और मुंबई में समंदर के सामने आलीशान घर… फिर भी पैसे के पीछे नहीं भागतीं तमन्ना भाटिया. नए बिजनेस की शुरुआत पर एक्ट्रेस ने शेयर किया जिंदगी का सबसे बड़ा सबक. बोलीं एक टाइम के बाद इतने पैसे का….नीचे पढ़ें पूरी खबर-

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एक्टिंग के बाद बिजनेस में उतरीं तमन्ना भाटिया(फोटो साभार-instagram@tamannaahspeaks)

नई दिल्ली: बॉलीवुड की ब्यूटी क्वीन तमन्ना भाटिया इन दिनों फिल्मों के साथ-साथ बिजनेस की दुनिया में भी जमकर गदर मचा रही हैं. हाल ही में उन्होंने अपना खुद का एक नया लग्जरी ज्वेलरी ब्रांड लॉन्च किया है, जिसके बाद से वे लगातार सुर्खियों में हैं. इसी बीच एक हालिया इंटरव्यू में तमन्ना ने पैसे और प्रॉपर्टी को लेकर एक ऐसी बात कह दी है, जिसकी चर्चा हर तरफ हो रही है.

100 करोड़ से ज्यादा की नेटवर्थ और मुंबई में समंदर के सामने आलीशान घर होने के बावजूद तमन्ना की इस सोच ने फैंस का दिल जीत लिया है. आइए जानते हैं कि आखिर एक्ट्रेस ने ऐसा क्या कह दिया.

पैसे से ज्यादा जरूरी है काम का सफर

दरअलल हाल ही में तमन्ना ने फोर्ब्स को इंटरव्यू दिया था, जिसकी काफी चर्चा हो रही है. इस इंटरव्यू में तमन्ना ने बड़े ही सादे शब्दों में समझाया कि उनके लिए पैसा कमाने का असली मतलब क्या है. उन्होंने कहा कि समय के साथ उन्हें यह बात अच्छी तरह समझ आ गई है कि दुनिया से जाते वक्त कोई भी अपनी धन-दौलत साथ लेकर नहीं जाता. इसलिए उनके लिए सिर्फ बैंक बैलेंस बढ़ाने से ज्यादा जरूरी वो सफर है, जिससे आप अपनी पहचान बनाते हैं और कुछ नया खड़ा करते हैं. तमन्ना का कहना है कि वो नया बिजनेस सिर्फ इसलिए कर रही हैं क्योंकि उन्हें नई चीजें सीखने और कुछ नया बनाने में सचमुच बहुत मजा आता है.

पैसे का क्या काम?

तमन्ना का मानना है कि पैसे की अपनी एक लिमिट होती है, जिसके बाद उसकी कोई खास वैल्यू नहीं रह जाती. उन्होंने बहुत ही सीधा सवाल उठाया कि एक लेवल के बाद कोई भी इंसान अकेले इतने पैसे का भला क्या ही करेगा? इसलिए उनका मकसद सिर्फ पैसा इकट्ठा करना नहीं है, बल्कि अपने काम को उस लेवल पर ले जाना है जहां से वो ज्यादा से ज्यादा लोगों की जिंदगी में बदलाव ला सकें. वो कहती हैं कि जब आप किसी बड़े मकसद के साथ काम करते हैं, तो पैसा और कामयाबी अपने आप आपके पीछे आ जाती है. इंटरव्यू के दौरान जब बात समाज की मदद करने की आई, तो तमन्ना ने बहुत प्यारी बात कही. उनका मानना है कि दूसरों की मदद करने या समाज के लिए कुछ अच्छा करने के लिए किसी खास दिन या भविष्य का इंतजार नहीं करना चाहिए. यह कोई ऐसी चीज नहीं है जिसे आप कामयाब होने के बाद करेंगे, बल्कि यह एक ऐसी आदत है जो आपके काम और कामयाबी के साथ-साथ लगातार चलती रहनी चाहिए.

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