Tuesday, June 16, 2026
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सरकारी जमीन कब्जे के मामले में हाईकोर्ट का स्वत: संज्ञान: कहा-पौधे नहीं बचा पाए ‘कागजी’ समाजसेवी, याचिकाकर्ता को जनहित याचिका से हटाया – Gwalior News




मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की ग्वालियर खंडपीठ ने सरकारी जमीन पर कथित अवैध कब्जे से जुड़े मामले में बड़ा फैसला सुनाया है। कोर्ट ने जनहित याचिका लगाने वाले चंद्रेश त्यागी का नाम याचिका से हटा दिया है। कोर्ट ने माना कि खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताने वाले याचिकाकर्ता ने पर्यावरण संरक्षण को लेकर गंभीरता नहीं दिखाई। हालांकि, सरकारी जमीन पर कब्जे के आरोपों को गंभीर मानते हुए कोर्ट ने मामले को बंद नहीं किया और अब इसे स्वत: संज्ञान (सुओ मोटू) के रूप में सुनने का फैसला लिया है। 8 बीघा जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप याचिका में आरोप लगाया गया था कि ग्वालियर के पुरानी छावनी क्षेत्र में करीब 8 बीघा सरकारी जमीन पर अवैध बाउंड्रीवॉल बनाकर प्लॉट काटे जा रहे हैं और उन्हें बेचा जा रहा है। मामले की सुनवाई के दौरान कोर्ट ने याचिकाकर्ता को पर्यावरण संरक्षण के तहत पौधे लगाने और उनकी देखभाल करने का निर्देश दिया था। लगाए पौधे, लेकिन देखभाल नहीं की जांच में सामने आया कि याचिकाकर्ता ने औपचारिकता पूरी करते हुए पौधे तो लगाए, लेकिन उनकी देखभाल नहीं की। इसके चलते सभी पौधे नष्ट हो गए। कोर्ट ने इसे गंभीर लापरवाही माना। 1.53 लाख रुपए जमा करने से किया इनकार कोर्ट ने नगर निगम से नए पौधे लगाने और पांच साल तक उनकी देखभाल का खर्च मांगा था। निगम ने इसकी लागत 1 लाख 53 हजार 765 रुपये बताई। जब कोर्ट ने यह राशि जमा कराने को कहा, तो याचिकाकर्ता की ओर से इनकार कर दिया गया। कोर्ट की सख्त टिप्पणी हाईकोर्ट ने कहा कि याचिकाकर्ता का खुद को सामाजिक कार्यकर्ता बताना सही साबित नहीं हुआ। अगर वह वास्तव में समाज और पर्यावरण के प्रति जिम्मेदार होते, तो पौधों की देखभाल और खर्च वहन करने से पीछे नहीं हटते। हाईकोर्ट का आदेश कब्जे के आरोपों की होगी जांच कोर्ट ने स्पष्ट किया कि याचिकाकर्ता की कमियों के कारण जमीन कब्जे के मामले को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। यदि सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हुआ है तो उसकी निष्पक्ष जांच जरूरी है। अब मामले की अगली सुनवाई में प्रशासन को सीमांकन रिपोर्ट पेश करनी होगी।



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दिल्ली के ये हैं 6 बेस्ट प्योर वेज रेस्टोरेंट, शौकीनों के लिए है जन्नत


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दिल्ली के ये हैं 6 बेस्ट प्योर वेज रेस्टोरेंट, शौकीनों के लिए है जन्नत

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Delhi Top 6 Pure-Veg North Indian Restaurants: दिल्ली के शुद्ध शाकाहारी नॉर्थ इंडियन रेस्टोरेंट में वेज गुलाटी, सात्विक, काके दा होटल, कारोबार, चंगेजी वेज और द येलो चिली खास आकर्षण हैं. यहां स्वाद के दीवानों की हमेशा भीड़ लगी रहती है. यहां आप अपने परिवार के साथ शानदार भोजन कर सकते हैं.

अगर आप दिल्ली में स्वादिष्ट और शुद्ध शाकाहारी खाने का मज़ा लेने का प्लान बना रहे हैं तो राजधानी में कई रेस्टोरेंट हैं. जो अपने बेहतरीन स्वाद, शानदार इंटीरियर और फ़ैमिली-फ़्रेंडली माहौल के लिए मशहूर हैं. यहां हम 6 ऐसे शुद्ध शाकाहारी भारतीय रेस्टोरेंट के बारे में बता रहे हैं, जिन्हें आप आसानी से अपने ट्रिप प्लान में शामिल कर सकते हैं.

वेज गुलाटी (पंडारा रोड) यह दिल्ली के सबसे मशहूर प्योर वेजिटेरियन नॉर्थ इंडियन रेस्टोरेंट में से एक है. यहां की दाल मखनी, पनीर बटर मसाला और स्टफ्ड नान काफी फेमस हैं. अगर आपको रिच ग्रेवी वाला पंजाबी खाना पसंद है, तो यह जगह ज़रूर ट्राई करें. यहां स्वाद के दीवानों की भीड़ लगी रहती है. 

सात्विक रेस्टोरेंट, साकेत अगर आप शांत और थोड़े प्रीमियम माहौल में शुद्ध शाकाहारी खाना ढूंढ रहे हैं तो सात्विक रेस्टोरेंट एक बढ़िया ऑप्शन है. यह बिना प्याज और लहसुन के कई तरह के स्वादिष्ट नॉर्थ इंडियन डिश परोसता है. रेस्टोरेंट का इंटीरियर शाही एहसास देता है, जिससे यह फैमिली डिनर और छोटे सेलिब्रेशन के लिए एक पॉपुलर ऑप्शन बन गया है.

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दिल्ली का मशहूर काके दा होटल न सिर्फ़ अपने नॉन-वेजिटेरियन खाने के लिए, बल्कि अपने वेजिटेरियन खाने के लिए भी जाना जाता है. यहां का पनीर बटर मसाला, दाल फ्राई और बटर रोटी पॉपुलर चॉइस है. अगर आपको देसी ढाबा-स्टाइल नॉर्थ इंडियन खाना पसंद है, तो यह जगह एक बढ़िया चॉइस हो सकती है.

दिल्ली के करोल बाग में शंकर रोड पर मौजूद यह कारोबार रेस्टोरेंट अपनी बेहतरीन वेजिटेरियन थाली और नॉर्थ इंडियन फ्लेवर के लिए मशहूर है. यहां आप एक ही प्लेट में कई तरह की सब्ज़ी, रोटियां, मिठाइयां और खास डिशेज का मजा ले सकते हैं. इसे परिवार के साथ बैठकर खाने का मजा लेने के लिए एक शानदार जगह माना जाता है.

अगर आपको मुगलई स्टाइल का नॉर्थ इंडियन खाना पसंद है, तो चंगेजी वेज आपकी लिस्ट में जरूर होना चाहिए. पनीर चंगेज़ी, वेज कबाब और मलाई ग्रेवी डिश यहां काफी पॉपुलर हैं. इसका अनोखा और रिच फ्लेवर खाने के शौकीनों को बहुत पसंद आता है. इसके अलावा मशहूर शेफ संजीव कपूर का द येलो चिली नॉर्थ इंडियन खाने के लिए एक शानदार जगह है. यहां की दाल मखनी, पनीर टिक्का और वेज बिरयानी पॉपुलर है. रेस्टोरेंट का इंटीरियर भी काफी क्लासी है, जो इसे दोस्तों और परिवार के साथ डिनर के लिए एक बढ़िया ऑप्शन बनाता है.

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भोजपुर में कुएं में मिला लापता शख्स का शव: परिजनों ने हत्या की जताई आशंका; भतीजा बोला- किसी से दुश्मनी नहीं थी – Bhojpur News




भोजपुर में एक शख्स का शव कुएं से मिला है। छह दिन से लापता थे। परिजनों हत्या कर शव कुएं में फेंकने की आशंका जताई है। मृतक अमरेंद्र सिंह(55) विशंभरपुर गांव के रहने वाले थे। घटना चौरी थाना क्षेत्र की है। मृतक के भतीजे श्याम बाबू ने बताया कि 9 जून की सुबह चाचा घर से निकले थे। उसके बाद वापस नहीं लौटे। काफी खोजबीन के बाद भी कुछ पता नहीं चला। आवेदन देने के लिए थाना गए थे। वहां बोला गया कि उनकी पत्नी को बुलाइए, इसके बाद आवेदन दीजिएगा। जिसके बाद परिजन वापस घर लौट आए। अपने स्तर से परिवार के सदस्य खोजबीन कर रहे थे। इस दौरान सोमवार को बेरथ गांव के बधार स्थित कुएं में शव पड़ा मिला। कपडे और उंगली से उनकी पहचान की गई। इसके बाद पुलिस को सूचना दी गई। जानकारी मिलने के बाद पुलिस मौके पर पहुंची। शव को बाहर निकला। शव अधिक सड़-गल जाने के कारण पोस्टमार्टम के लिए पटना भेज दिया है। परिजनों का विवाद से इनकार श्याम बाबू ने हत्या कर शव को कुएं में फेंकने का आरोप लगाया है ।हालांकि उसने किसी भी व्यक्ति पर किसी प्रकार का कोई आशंका या आरोप नहीं लगाया है। साथ ही उसने अपने चाचा के गांव में किसी भी व्यक्ति से किसी भी प्रकार की दुश्मनी और विवाद की बातों से साफ इनकार किया है। घर में मचा कोहराम मृतक पांच भाइयों में तीसरे स्थान पर थे। परिवार में पत्नी गुड़िया देवी और एक पुत्र श्याम सुंदर है। मौत की खबर मिलते ही घर में कोहराम मच गया है। उनकी पत्नी गुड़िया देवी और परिवार के सभी सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है।



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वर्ल्ड अपडेट्स: ब्रिटेन में 16 साल की उम्र से पहले बच्चे नहीं चला सकेंगे सोशल मीडिया, प्रस्ताव से 10 में से 9 अभिभावक खुश


27 मिनट पहले

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ब्रिटेन में 16 साल से छोटे बच्चों के सोशल मीडिया इस्तेमाल पर बैन लगेगा। प्रधानमंत्री कीर स्टार्मर ने सोमवार को इसकी घोषणा की। संबंधित नियम इस साल दिसंबर तक बन जाएंगे और 2027 मार्च- अप्रैल तक लागू होने की उम्मीद है।

सरकार का तर्क है कि एल्गोरिदम आधारित प्लेटफॉर्म बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य, पढ़ाई और सामाजिक विकास पर नकारात्मक असर डाल रहे हैं। प्रस्ताव के तहत सोशल मीडिया के उपयोग से पहले उम्र सत्यापन सख्ती से लागू होगा और नियम पालन कराने की जिम्मेदारी कंपनियों पर होगी।

बैन एप में स्नैपचैट, टिकटॉक, यूट्यूब, इंस्टाग्राम, फेसबुक और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म शामिल होंगे। वॉट्सएप और सिग्नल जैसी मैसेजिंग सेवाएं फिलहाल प्रतिबंध में शामिल नहीं होंगी। ब्रिटिश सरकार के एक सर्वे में 10 में से 9 अभिभावकों ने इस प्रतिबंध का स्वागत किया है।

ब्रिटेन की रॉयल सोसाइटी फॉर पब्लिक हेल्थ द्वारा 14-24 वर्ष के युवाओं के बीच किए सर्वे के मुताबिक स्नैपचैट, फेसबुक, ट्विटर और इंस्टाग्राम से डिप्रेशन, चिंता, अपने शरीर को लेकर हीन भावना और अकेलेपन में बढ़ोतरी होती है।

अमेरिकी सर्जन जर्नल के मुताबिक रोज 3 घंटे से ज्यादा सोशल मीडिया पर बिताने वाले किशोरों में मानसिक समस्याओं का खतरा दोगुना होता है। अमेरिका में एक परीक्षण में पाया गया कि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल बंद करने से युवाओं में खुशी, जीवन से संतुष्टि बढ़ी, डिप्रेशन-एंग्जाइटी में सुधार हुआ।

25 से ज्यादा देश किशोरों-बच्चों के लिए सोशल मीडिया बैन करने की पहल कर रहे हैं। ऑस्ट्रेलिया में साल भर पहले प्रतिबंध लागू किया गया था। मलेशिया, इंडोनेशिया और ब्राजील में भी इस साल की शुरुआत से प्रतिबंध लागू हो चुके हैं। नॉर्वे, फ्रांस, अमेरिका, चीन जैसे कई देशों में बच्चों के लिए सोशल मीडिया से जुड़े नियम सख्त किए जा रहे हैं।

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इंजीनियर का बेटा, जिसका अधूरा रह गया एक्टर बनने का सपना, बन बैठा डायरेक्टर


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बॉलीवुड को ‘जब वी मेट’, ‘रॉकस्टार’ और ‘तमाशा’ जैसी यादगार फिल्में देने वाले निर्देशक इम्तियाज अली आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं. दिलचस्प बात यह है कि वह डायरेक्टर नहीं एक्टर बनने का सपना लेकर मुंबई आए थे. हालांकि किस्मत ने उन्हें कैमरे के सामने नहीं, बल्कि कैमरे के पीछे खड़ा किया और यही फैसला उन्हें हिंदी सिनेमा के सबसे सफल निर्देशकों में शामिल कर गया.इम्तियाज अली का जन्म 16 जून 1971 को झारखंड के जमशेदपुर में हुआ था.

नई दिल्ली. बॉलीवुड के मशहूर निर्देशक इम्तियाज अली आज अपना जन्मदिन मना रहे हैं. ‘जब वी मेट’, ‘रॉकस्टार’, ‘हाइवे’ और ‘तमाशा’ जैसी यादगार फिल्में बनाने वाले इम्तियाज ने अपनी कहानियों और किरदारों से दर्शकों के दिलों में खास जगह बनाई है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि वह निर्देशक नहीं, बल्कि अभिनेता बनने का सपना लेकर मुंबई आए थे. किस्मत ने हालांकि उनके लिए कुछ और ही सोच रखा था और यही फैसला उनकी जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग प्वाइंट बन गया.

‘लव आज कल’, ‘रॉकस्टार’, ‘हाइवे’, ‘तमाशा’ और हाल ही में ‘अमर सिंह चमकीला’ जैसी फिल्मों ने उनकी पहचान को और मजबूत किया. अपने शानदार काम के लिए उन्हें आईफा, जी सिने अवॉर्ड, इंडियन टेली अवॉर्ड और कई प्रतिष्ठित सम्मान भी मिल चुके हैं. अभिनेता बनने का सपना लेकर मुंबई पहुंचे इम्तियाज अली ने निर्देशन की दुनिया में ऐसा मुकाम हासिल किया, जिसकी मिसाल आज भी दी जाती है.

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आधार कार्ड का इस्तेमाल सिर्फ पहचान के लिए हो: सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज; याचिका में दावा- अभी पता और जन्मतिथि का सबूत माना जा रहा


नई दिल्ली2 घंटे पहले

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याचिकाकर्ता का दावा है कि आधार अधिनियम की धारा 9 बताती है कि आधार नागरिकता या डोमिसाइल का प्रमाण नहीं है।

सुप्रीम कोर्ट आज आधार कार्ड के इस्तेमाल को लेकर दाखिल की गई जनहित याचिका पर सुनवाई करेगा। याचिका में कहा गया है कि आधार कार्ड का इस्तेमाल पहचान पत्र से आगे बढ़कर नागरिकता, निवास और जन्म तारीख के प्रमाण के रूप में किया जा रहा है, जबकि कानून इसकी अनुमति नहीं देता।

अश्विनी कुमार उपाध्याय की तरफ से दायर याचिका नागरिकता और पहचान का भ्रम में मांग की गई है कि आधार कार्ड के इस्तेमाल को सिर्फ पहचान की पुष्टि तक सीमित करने के निर्देश दिए जाएं।

याचिका में यह निर्देश देने की भी मांग की गई है कि नए वोटर रजिस्ट्रेशन के लिए एप्लीकेशन फॉर्म में जन्म तिथि और निवास के सबूत के तौर पर आधार का इस्तेमाल, आधार एक्ट 2016 की धारा 9, RPA 1950 की धारा 23(4) और संविधान के अनुच्छेद 14 के खिलाफ माना जाए।

चीफ जस्टिस सूर्य कांत और जस्टिस वी मोहना की बेंच सुनवाई कर सकती है।

याचिकाकर्ता के 2 तर्क

  • आधार अधिनियम की धारा 9 स्पष्ट रूप से बताती है कि आधार नागरिकता या डोमिसाइल का प्रमाण नहीं है।
  • UIDAI की 22 अगस्त 2023 की अधिसूचना में भी स्पष्ट किया गया है कि आधार केवल पहचान का प्रमाण है, नागरिकता, पते या जन्मतिथि का नहीं।

घुसपैठियों और अवैध प्रवासियों को आसानी से मिल रहे दूसरे दस्तावेज

आधार का इस्तेमाल स्कूलों में एडमिशन, संपत्ति खरीदने, जन्म प्रमाण पत्र, राशन कार्ड और ड्राइविंग लाइसेंस बनवाने जैसी प्रक्रियाओं में उम्र, नागरिकता और निवास के प्रमाण के रूप में किया जा रहा है। याचिका में दावा किया गया है कि इसी वजह से घुसपैठिए और अवैध प्रवासी भी आधार के आधार पर अन्य दस्तावेज हासिल कर रहे हैं।

वोटर रजिस्ट्रेशन वेरिफिकेशन पर भी सवाल उठाए

याचिकाकर्ता ने वोटर रजिस्ट्रेशन वेरिफिकेश प्रक्रिया पर भी सवाल उठाए हैं। याचिका के अनुसार फॉर्म-6 के तहत दस्तावेजों की जांच पर्याप्त नहीं है और इससे ऐसे लोगों के नाम भी मतदाता सूची में शामिल हो सकते हैं जिनके पास जरूरी वैध दस्तावेज नहीं हैं।

याचिका में चुनावी प्रक्रिया में इस्तेमाल होने वाले सत्यापन ढांचे में व्यापक सुधार की मांग की गई है। इसके साथ ही एक उच्चस्तरीय निगरानी समिति बनाए जाने का सुझाव दिया गया है, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के रिटायर जज साइबर सुरक्षा विशेषज्ञ और फॉरेंसिक विशेषज्ञ शामिल हों।

2018 में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था- आधार वैध, लेकिन सीमाओं के साथ

सुप्रीम कोर्ट ने 26 सितंबर 2018 को ऐतिहासिक फैसला सुनाया। कोर्ट ने 4:1 के बहुमत से आधार अधिनियम को संवैधानिक माना, लेकिन कुछ प्रावधान रद्द कर दिए।

कोर्ट ने कहा बैंक खाते से, मोबाइल सिम से आधार लिंक करना अनिवार्य नहीं। स्कूल एडमिशन के लिए आधार अनिवार्य नहीं। लेकिन सरकारी सब्सिडी और कल्याणकारी योजनाओं में आधार का उपयोग वैध है।

जानिए आधार अधिनियम क्या है

आधार (वित्तीय और अन्य सब्सिडी, लाभ एवं सेवाओं की लक्षित डिलीवरी) अधिनियम, 2016 वह कानून है जिसके तहत आधार संख्या जारी करने, उसके उपयोग, डेटा की सुरक्षा और UIDAI के कामकाज का कानूनी ढांचा तय किया गया। यह कानून 26 मार्च 2016 को लागू हुआ था। अधिनयिम में यह बात स्पष्ट की गई है कि आधार नागरिकता का प्रमाण नहीं है। आधार केवल यह दर्शाता है कि व्यक्ति भारत का निवासी है।

देश में आधार कार्ड सरकारी और अन्य सर्विस में जरूरी

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आधार कार्ड पर सिर्फ फोटो और QR कोड होगा: फोटोकॉपी से होने वाले मिसयूज रोकने UIDAI बना रही नियम, दिसंबर से हो सकते हैं लागू

भारतीय विशिष्ट पहचान प्राधिकरण (UIDAI) आधार कार्ड नए सिरे से डिजाइन करने पर विचार कर रहा है। भविष्य में आधार कार्ड केवल धारक की फोटो और QR कोड वाला हो सकता है। यानी कार्ड पर आधार नंबर, नाम-पता, जन्‍मतिथि अन्‍य बायोमीट्रिक जानकारी नहीं होंगी। पूरी खबर पढ़ें…

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रिपोर्ट- 2030 तक AI से 22% नौकरियां प्रभावित होंगी: 40% कंपनियों में डिग्री+AI वालों को तवज्जो; चीन ने 12 हजार डिग्रियां खत्म कीं, AI कोर्स शुरू


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नई दिल्ली4 मिनट पहले

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देश में आईटी, कानून, वाणिज्य, अनुवाद, डिजाइन और पुस्तकालय विज्ञान जैसे क्षेत्रों में बड़ा उलटफेर शुरू हो चुका है। AI के टूल्स ने उन कामों को या तो खत्म कर दिया है या बेहद सिकोड़ दिया है, जिनके लिए लाखों छात्र हर साल डिग्रियां लेते हैं।

टीमलीज जैसी बड़ी एचआर कंपनी का कहना है कि 40% कंपनियां ‘हाइब्रिड स्किल’ यानी डिग्री के साथ AI टूल्स की जानकारी को अनिवार्य मानती हैं। नैस्कॉम की 2024 की रिपोर्ट कहती है कि देश में 82% बीसीए और एमसीए स्नातकों को AI टूल्स की औपचारिक ट्रेनिंग नहीं है।

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट के अनुसार, नौकरियां उन लोगों के पास रहेंगी जो AI टूल का उपयोग करके उत्पादकता 40% तक बढ़ा सकते हैं।

आईबीएम इंस्टीट्यूट फॉर बिजनेस वैल्यू की रिपोर्ट कहती है कि AI लोगों की जगह नहीं लेगा, पर जो AI का उपयोग करते हैं, वे उनकी जगह ले लेंगे जो ऐसा नहीं करते। ‘फ्यूचर ऑफ जॉब्स रिपोर्ट 2025’ के अनुसार, 2030 तक 22% नौकरियां प्रभावित हो सकती हैं।

इधर, चीन ने 2021 और 2025 के बीच अपने विश्वविद्यालयों ने 12,200 से अधिक स्नातक (अंडरग्रेजुएट) कार्यक्रमों को रद्द या निलंबित कर दिया, जबकि लगभग 10,200 नए कार्यक्रम शुरू किए।

एक्सपर्ट बोले- तरीका नहीं बदला तो डिग्रियों की कोई वैल्यू नहीं रहेगी

दैनिक भास्कर ने टेक कंपनी ‘पीपुलस्ट्रॉन्ग’ और ‘टैग्ड’ के सह-संस्थापक और एचआर पंकज बंसल से AI के असर पर चर्चा की और उनके 10 सवाल किए, जिन्हें उन्होंने जवाब दिए हैं।

  1. पारंपरिक डिग्री वालों का क्या होगा?पारंपरिक डिग्रियां पूरी तरह बेकार नहीं होंगी, लेकिन उनका स्वरूप अप्रासंगिक हो रहा है। पढ़ाई का तरीका और कंटेंट न बदला, तो उन डिग्रियों की कोई वैल्यू नहीं बचेगी। बाजार में केवल थ्योरी या रट्टा वाले औसत छात्रों की जरूरत खत्म हो रही है। अपग्रेड करना होगा।
  2. जो डिग्री ले रहे हैं, वे क्या कर सकते हैं?जो छात्र अभी सेकंड या थर्ड ईयर में हैं, वे लाइव प्रोजेक्ट पर काम शुरू करें। AI टूल्स का प्रोफेशनल लाइसेंस लें, उस पर 6 महीने रात-दिन काम करें और सॉफ्टवेयर या वेबसाइट्स बनाएं।
  3. जो डिग्री पूरी कर चुके हैं, वे क्या करें?सबसे बेहतरीन रास्ता है- इंटर्नशिप और प्रैक्टिकल प्रोजेक्ट। अगर आपको किसी बड़ी कंपनी में मौका नहीं मिल रहा है, तो छोटे स्टार्टअप, एनजीओ या अपने स्थानीय क्षेत्र की किसी फैक्ट्री या दुकान के पास जाएं। उनकी समस्याओं को समझें और AI से उन्हें सुलझाएं।
  4. ‘ग्रेजुएशन’ की वैल्यू कितनी बचेगी?भारत में अभी नौकरी के आवेदन शॉर्टलिस्ट करने के लिए ग्रेजुएशन की ‘स्टैम्पिंग’ जरूरी है और यह स्थिति अगले 3 से 5 साल तक बनी रहेगी। लेकिन इसके बाद न्यू एजुकेशन पॉलिसी (NEP) का ‘5.5 क्रेडिट स्कोर’ इसे रिप्लेस कर देगा, जहां प्रैक्टिकल काम और प्रोफेशनल कोर्सेज के जरिए अंक मिलेंगे। आने वाले समय में लोग पूछेंगे कि आप ‘5.5 स्केलर’ हैं या नहीं। टेक वर्ल्ड में पहली नौकरी के बाद कोई आपकी डिग्री नहीं पूछेगा।
  5. ऐसे में जॉब पाने का अच्छा तरीका क्या?सबसे अच्छा तरीका है कि आप ‘10x इंजीनियर’ या ‘10x प्रोफेशनल’ बनें, यानी जो अकेले 10 सामान्य लोगों का काम संभाल सके। अगर आप AI की मदद से किसी कंपनी का समय और लागत बचा सकते हैं, तो जहां पहले 5 लाख रु. का शुरुआती पैकेज मिलता था, वहां आज कंपनियां 25 लाख रु. की शुरुआती तनख्वाह देने को तैयार हैं। कंपनियों को ‘औसत’ लोग नहीं, बल्कि काम के लोग चाहिए।
  6. AI कोर्सेज से जॉब के दावे सही हैं?बिल्कुल नहीं। नुक्कड़ पर चल रहे किसी भी संस्थान से AI का सर्टिफिकेट ले लेने से नौकरी की कोई गारंटी नहीं मिलती। AI सर्टिफिकेट सीवी को शॉर्टलिस्ट होने में मदद कर सकता है, पर नौकरी तभी मिलेगी जब बुनियादी योग्यता होगी, AI का व्यावहारिक ज्ञान होगा और असेसमेंट टेस्ट क्लियर करेंगे।
  7. एंट्री लेवल यानी फ्रेशर्स की जॉब्स पर इसका क्या और कितना असर पड़ रहा है?शुरुआती दौर में दबाव जरूर है क्योंकि जो बुनियादी काम पहले 10 लोग मिलकर करते थे, वह अब दो लोग AI की मदद से निपटा रहे हैं। इंफोसिस, विप्रो और टीसीएस जैसी ट्रेडिशनल कंपनियों ने शुरुआत में फ्रेशर्स की हायरिंग रोकी या टाली है। लेकिन यह केवल शॉर्ट-टर्म ट्रेंड है, लॉन्ग-टर्म में जॉब मार्केट में नेट एडिशन (नौकरियों की बढ़ोतरी) ही होने वाला है।
  8. जब आईटी कंपनियां भर्तियां रोक रही हैं, तो नए युवाओं को जॉब कहां मिलेगी?भारत में इस समय ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स यानी जीसीसी (GCCs) की बाढ़ आई हुई है। देश में 4000 से ज्यादा जीसीसी हैं और हर हफ्ते दो नए सेंटर खुल रहे हैं। ये सेंटर्स AI स्किल्स वाले युवाओं को बहुत भारी पैकेज और ऊंची सैलरी पर हायर कर रहे हैं। इसके अलावा धीरे-धीरे ट्रेडिशनल कंपनियों में भी नियुक्तियां दोबारा खुलने लगी हैं।
  9. क्या AI इंसानों को पूरी तरह रिप्लेस कर देगा, क्या इसकी लागत इंसानों से कम है?वैश्विक संगठनों को समझ आने लगा है कि AI की कॉस्ट (टोकन और जीपीयू प्रोसेसिंग लागत) इंसानी लागत से कम नहीं है। कई स्टार्टअप्स का AI बिल इतना ज्यादा आ रहा है कि वे AI टूल्स के बजाय दो इंसानों को हायर करना बेहतर समझ रहे हैं। इसके अलावा, जिन कामों में मानवीय निर्णय और लोगों से जुड़ने की जरूरत होती है, वहां AI कभी रिप्लेस नहीं कर सकता।
  10. वो कौन-सी मानवीय खूबियां और सेक्टर्स हैं, जहां इंसान ही सबसे आगे रहेंगे?AI के दौर में चार मानवीय खूबियां सबसे कीमती हो गई हैं- एग्रीगेशन एबिलिटी (चीजों को आपस में जोड़ने की समझ), डिसीजन मेकिंग (निर्णय क्षमता), हाई ईक्यू (इमोशनल कोशेंट) और अपनी बात को प्रभावी ढंग से बयां करने का हुनर। अगर सेक्टर्स की बात करें, तो हॉस्पिटैलिटी, डेटा साइंसेज, सेल्स और AI-असिस्टेड स्पेशलिस्ट्स (जैसे डॉक्टर या जर्नलिस्ट जो AI जानते हों) के रोल्स हमेशा सुरक्षित और मजबूत रहेंगे।

चीन ने 12 हजार डिग्रियां खत्म कीं, AI कोर्स शुरू

चीन ने 2021 और 2025 के बीच अपने विश्वविद्यालयों ने 12,200 से अधिक स्नातक (अंडरग्रेजुएट) कार्यक्रमों को रद्द या निलंबित कर दिया, जबकि लगभग 10,200 नए कार्यक्रम शुरू किए।

इनमें से कई कटौतियां कला, मानविकी, विदेशी भाषाओं और प्रबंधन में केंद्रित थीं, क्योंकि चीन सरकार विश्वविद्यालयों पर AI, सेमीकंडक्टर्स, रोबोटिक्स और अन्य रणनीतिक उद्योगों के लिए प्रतिभाएं तैयार करने का दबाव बना रही है।

भारत में कर्नाटक सरकार ने 1300 कोर्स की सीटें घटाईं

भारत में फिलहाल कर्नाटक सरकार ने कम दाखिले और अन्य कारकों का हवाला देते हुए शैक्षणिक 2026-27 के लिए सरकारी कॉलेजों में 458 बीए, बीएससी, बीकॉम कार्यक्रम संयोजनों (कॉम्बिनेशन्स) को बंद कर दिया है। 1,300+ कोर्स में सीटें घटाईं।

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सैम ऑल्टमैन बोले- AI से नौकरी जाने का खतरा नहीं: रोजगार में इंसानी हिस्सा बदलना नामुमकिन; शुरुआती डर गलत साबित हुआ

ओपन-AI के CEO सैम ऑल्टमैन ने कहा कि AI की तेज ग्रोथ और इस्तेमाल से दुनिया में जॉब्स एपोकैलिप्स यानी नौकरियों का संकट नहीं आएगा। उन्होंने माना कि तकनीक ने उतने व्हाइट कॉलर जॉब्स खत्म नहीं किए हैं, जितने का उन्हें पहले डर था।CBA के चीफ एग्जीक्यूटिव मैट कॉम्यन को दिए इंटरव्यू में ऑल्टमैन ने कहा कि शुरुआत में वह ग्लोबल एम्प्लॉयमेंट लेवल पर AI के प्रभाव को लेकर चिंतित थे। पूरी खबर पढ़ें…

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लखनऊ फर्जी आईपीएस पकड़ा गया: नोएडा में पोस्ट होने की बात कही, पुलिस से बोला- सैल्यूट करो – Lucknow News




लखनऊ के महानगर इलाके में फर्जी आईपीएस पकड़ा गया। जलसाज पुलिस को अर्दब में लेने का प्रयास कर रहा था। इसके बाद शक होने पर पुलिस ने आईडी कार्ड मांगा तो नहीं दिखा सका। पुलिस ने आरोपी को हिरासत में लेकर पूछताछ की तब मामले का खुलासा हुआ। पुलिस के मुताबिक सोमवार शाम गोल मार्केट चौराहे पर चेकिंग के दौरान सूचना मिली एक व्यक्ति दुकानदारों से झगड़ा कर रहा है। मौके पर पहुंचने पर जानकारी हुई एक युवक को आईपीएस अधिकारी बताकर दुकानदार पर जब गांठ रहा है। इसके बाद पुलिस ने पूछताछ की तो उनसे भी सैल्यूट करने का दबाव बनाने लगा। पुलिस को संदेह हुआ तो उन्होंने आईडी कार्ड मांगा। इस पर जालसाज नाराज हो गया और उनके नाम पूछने लगा। उसके हाव-भाव से संदेह होने पर पुलिस ने हिरासत में ले लिया। मामले में चौकी प्रभारी आर्यन शर्मा ने बताया हिरासत में लिए गए व्यक्ति का नाम मिथलेश शुक्ला (40) है। लखनऊ के मड़ियांव थाना क्षेत्र स्थित भारत नगर में रहता है। मिथिलेश खुद को नोएडा में पोस्टेड आईपीएस बता रहा था। आरोपी के खिलाफ मुकदमा दर्ज करके आगे की कार्रवाई की जा रही है।



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क्वीन्स हब क्लब में अवैध हुक्का-बार पर छापा, मैनेजर गिरफ्तार: 3 हुक्के, 17 पाइप, 5 चिलम और नशीले फ्लेवर जब्त – Jaipur News




जवाहर सर्किल थाना पुलिस ने मालवीय नगर स्थित क्वीन्स हब क्लब में चल रहे अवैध हुक्का बार पर देर रात छापा मारकर क्लब के मैनेजर को गिरफ्तार किया है। कार्रवाई के दौरान पुलिस ने मौके से 3 हुक्के, 17 पाइप, 5 चिलम और विभिन्न प्रकार के नशीले फ्लेवर जब्त किए हैं। वहीं हुक्का पार्टी कर रहे दो युवकों के खिलाफ कोटपा एक्ट के तहत चालान भी किया गया है। डीसीपी ईस्ट रंजिता शर्मा ने बताया किपुलिस को 15 जून को मुखबिर से सूचना मिली थी कि मालवीय नगर के गिरधर मार्ग स्थित क्वीन्स हब क्लब में ग्राहकों को खाने-पीने की सामग्री के साथ हुक्का परोसा जा रहा है। सूचना पर पुलिस टीम ने मौके पर पहुंचकर क्लब में दबिश दी। जांच के दौरान क्लब के अंदर कुछ युवक टेबल पर रखे हुक्कों के जरिए तंबाकूयुक्त फ्लेवर का सेवन करते मिले। पुलिस ने टेबल पर रखे 3 हुक्के, 17 पाइप, 5 चिलम और फ्लेवर के पैकेट जब्त कर लिए। पूछताछ में क्लब मैनेजर इरशाद कोई वैध लाइसेंस प्रस्तुत नहीं कर सका। इसके बाद पुलिस ने क्लब मैनेजर इरशाद (31) निवासी जिला नूंह, हरियाणा को गिरफ्तार कर लिया। साथ ही हुक्का पी रहे दो युवकों के खिलाफ कोटपा अधिनियम के तहत चालान कर जुर्माना वसूला गया। पुलिस का कहना है कि शहर में अवैध हुक्का बार और देर रात पार्टियां आयोजित करने वालों के खिलाफ आगे भी अभियान जारी रहेगा।



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नौकरी का झांसा देकर दुष्कर्म फिर करने लगा ब्लैकमेल: सुनवाई न होने का आरोप लगाकर थाने में जहर खाने का प्रयास, पुलिस ने बचाई जान – Gwalior News




ग्वालियर के मुरार थाना क्षेत्र के अंतर्गत आने वाले रहने वाली एक 26 वर्षीय विवाहिता के साथ छल-कपट और ब्लैकमेलिंग का गंभीर मामला उजागर हुआ है। आरोपी ने महिला की मजबूरी का फायदा उठाते हुए पहले नौकरी लगवाने का लालच दिया और फिर शादी का झांसा देकर उसका लगातार शारीरिक शोषण किया। पीड़ित ने सुनवाई न होने का आरोप लगाते हुए सोमवार रात मुरार थाना में जहर खाने का प्रयास किया, लेकिन पुलिस ने समय रहते उसे बचाकर अस्पताल पहुंचाया है। पीड़िता की लिखित शिकायत पर मुरार थाना पुलिस ने आरोपी युवक के खिलाफ दुष्कर्म सहित विभिन्न गंभीर धाराओं मामला दर्ज कर लिया है। एक बार पहले भी महिला शिकायत कराने आई थी और फिर मना कर गई थी। साथ ही जहर खाने की हरकत पहले भी कर चुकी है। बच्ची को पढ़ाने ग्वालियर आई थी पीड़िता
मुरार थाना पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार, मूल रूप से भिंड की रहने वाली महिला की शादी वर्ष 2016 में भिंड में ही हिंदू रीति-रिवाज से हुई थी। शादी के बाद उसकी दो छोटी बच्चियां (5 वर्ष और 3 वर्ष) हैं। करीब 4 साल पहले पीड़िता अपनी बड़ी बेटी को अच्छी शिक्षा दिलाने के लिए ग्वालियर में किराये का मकान लेकर रहने आई थी। मोहल्ले में ही आरोपी गजेंद्र केवट की एक ऑनलाइन (कियोस्क सेंटर) दुकान थी। पीड़िता अक्सर अपने बैंक खाते से पैसे निकालने के लिए गजेंद्र की दुकान पर जाती थी, जिसके चलते दोनों के बीच जान-पहचान हो गई और मोबाइल नंबरों का आदान-प्रदान होने के बाद बातचीत शुरू हो गई। मजबूरी का उठाया फायदा, मई 2024 में पहली बार बनाए संबंध
बातचीत के दौरान आरोपी गजेंद्र केवट को पता चला कि महिला अपने पति से दूर बच्चों की पढ़ाई के लिए ग्वालियर में अकेली रहती है। उसने महिला की आर्थिक स्थिति का फायदा उठाने के लिए जाल बुना। गजेंद्र ने पीड़िता से कहा कि “तुम बच्चों के साथ अकेली रहती हो, तुम्हें पैसों की सख्त जरूरत होगी। मैं तुम्हारी एक अच्छी जगह नौकरी लगवा दूंगा।” इसी बहाने से माह मई 2024 में आरोपी नौकरी का झांसा देकर महिला के किराये के कमरे पर पहुंचा और वहां उसके साथ पहली बार जबरन शारीरिक संबंध बनाए। इसके बाद आरोपी लगातार नौकरी लगवाने का लालच देकर महिला का शारीरिक शोषण करता रहा। जब महिला ने विरोध किया, तो आरोपी ने उसे अपने जाल में फंसाए रखने के लिए कहा कि “तुम अपने पति से कानूनी तौर पर तलाक ले लो, तो मैं तुमसे कोर्ट मैरिज (शादी) कर लूंगा।”इसके बाद से लगाकार ब्लैकमेल कर संबंध बना रहा था। 23 मई 2026 तक आरोपी ने संबंध बनाए अब शादी से मुकर गया है। सुनवाई न होने पर जहर खाने का किया प्रयास
सोमवार को महिला मुरार थाना पहुंची और सुनवाई न होने का आरोप लगाते हुए जहर खाने का प्रयास किया। जिस पर वहां मौजूद पुलिस कर्मियों ने तत्काल उसे रोक लिया और तत्काल मेडिकल के लिए हॉस्पिटल पहुंचाया है। पुलिस ने महिला के लौटने पर तत्काल आरोपी के खिलाफ नौकरी व शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का मामला दर्ज किया है। पहले भी कर चुकी है ऐसा पुलिस ने बताया कि महिला पहले भी मामला दर्ज कराने आई थी और पूरी रिपोर्ट टाइप कराने के बाद जब मामला दर्ज करने की बारी आई तो आरोपी से समझौता कर चली गई थी। इसके बाद एक बार पहले भी वह जहर खाने का प्रयास कर चुकी है। सीएसपी मुरार अतुल कुमार सोनी ने बताया एक महिला ने अपने साथ नौकरी के नाम पर दुष्कर्म की शिकायत की है। महिला की शिकायत पर मामला दर्ज कर लिया गया है। आरोपी की तलाश की जा रही है, जल्द ही आरोपी को पकड़ लिया जाएगा।



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