Passport New Rules: पासपोर्ट बनवाने वालों के लिए विदेश मंत्रालय ने नियमों और फीस में बड़ा बदलाव किया है. सबसे ज्यादा चर्चा बच्चों के पासपोर्ट की वैलिडिटी को लेकर है. 15 साल से कम उम्र के बच्चे को जारी 36 पेज का सामान्य पासपोर्ट अब 5 साल या बच्चे के 18 साल का होने तक ही वैलिड रहेगा, जो भी पहले हो. दूसरी तरफ पासपोर्ट की फीस भी बढ़ गई है. वयस्कों के 36 पेज के सामान्य पासपोर्ट की कीमत अब 2500 रुपए होगी. तत्काल सेवा के लिए भी ज्यादा पैसे देने होंगे. बच्चों के पासपोर्ट की फीस बढ़ी है, हालांकि छोटे बच्चों और वरिष्ठ नागरिकों के नए आवेदन पर 10 प्रतिशत छूट जारी रहेगी.
पासपोर्ट नियम 2026 में बड़ा बदलाव हुआ है. (फाइल फोटो)
आगर आप नया पासपोर्ट बनवाने जा रहे हैं तो जेब और डॉक्यूमेंट दोनों पर थोड़ा ज्यादा ध्यान देना होगा. विदेश मंत्रालय ने पासपोर्ट से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव किया है. इसका असर बच्चों से लेकर बड़ों तक, अलग-अलग तरह के पासपोर्ट आवेदन पर पड़ेगा. सबसे अहम बदलाव बच्चों के पासपोर्ट की वैलिडिटी को लेकर है. अब 15 साल से कम उम्र के बच्चे को जारी 36 पेज का सामान्य पासपोर्ट हमेशा की तरह 10 साल के लिए नहीं चलेगा. इसकी वैलिडिटी 5 साल या बच्चे के 18 साल की उम्र पूरी करने तक रहेगी. जो भी पहले होगा, वहीं पासपोर्ट की वैलिडिटी खत्म हो जाएगी. यानी पासपोर्ट बनवाते समय बच्चे की उम्र अब काफी मायने रखेगी.
सुमित कुमार News18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे हैं. वे पिछले 4 साल से यहां सेंट्रल डेस्क टीम से जुड़े हुए हैं. उनके पास जर्नलिज्म में मास्टर डिग्री है. News18 हिंदी में काम करने से पहले, उन्ह…
असम में सड़क निर्माण टेंडर दिलवाने के नाम पर 40 लाख की ठगी का मामला सामने आया है। फर्म के पार्टनर की मुलाकात आरोपियों से दिल्ली में हुई थी। उन्होंने विश्वास में लेने के लिए पीड़ित को साइट का विजिट भी करवाया। अब पैसे लौटाने से मना कर दिया है। सदर थाना पुलिस ने मामला दर्ज करके जांच शुरू कर दी है। सीकर के पालवास रोड निवासी विक्रम सिंह ने सदर पुलिस थाने में शिकायत देकर बताया कि उनकी और उनके पार्टनर्स की फर्म है। फर्म असम में रोड कंस्ट्रक्शन का काम करना चाहती थी। असम में NHIDCL के तहत चल रहे कामों की जानकारी लेने के लिए उनकी मुलाकात दिल्ली में 28 मार्च को नेहरू पैलेस में सुरेंद्र कुमार ठाकुर से हुई। जिसके साथ एक आदमी नबाज्योति कालेता भी था। उन्होंने बताया कि BHARTIA INFRAPROJECTS LIMITED नाम की कंपनी को असम में सड़क निर्माण का टेंडर है। अब वह कंपनी थर्ड पार्टी को काम देना चाहती है। सुरेंद्र और उसके साथी ने गारंटी के रूप में 40 लाख रुपए मांगे। जो सुरेंद्र कुमार के अकाउंट में ट्रांसफर कर दिए गए। उसके बाद एक एग्रीमेंट भी तैयार करवाया। जिस पर सुरेंद्र और उसके साथी ने सिग्नेचर भी किया। सुरेंद्र और उसके साथी ने असम में साइट का विजिट भी करवाया लेकिन जब विक्रम ने Bhartia infraprojects के साथ एग्रीमेंट करवाने की बात कही तो पहले तो सुरेंद्र टाइम देता रहा और फिर फोन ही स्विच ऑफ कर लिया। बाद में सुरेंद्र को पता चला कि Bhartia infraprojects से सुरेंद्र कुमार ठाकुर और नबाज्योति का कोई लेना देना नहीं है। अब दोनों ने रुपए लौटाने से मना कर दिया।
दमोह के सिविल वार्ड 10 के खजरी मोहल्ला में गुरुवार रात नल कनेक्शन सुधारने के लिए मिट्टी निकालने को लेकर दो पक्षों में विवाद हो गया। आरोप है कि एक पक्ष के लोगों ने दूसरे पक्ष पर डंडों से हमला कर दिया। घटना में चार लोग घायल हुए हैं। सभी को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया है। मामले की शिकायत कोतवाली थाने में दर्ज कराई गई है। पाइपलाइन की खुदाई के बाद शुरू हुआ विवाद घायल संध्या अहिरवार ने बताया कि उनके नल कनेक्शन में पानी नहीं आ रहा था। उनके चाचा ने पाइपलाइन में खुदाई कर कनेक्शन सुधारा और मिट्टी सड़क पर रख दी। इसी बात को लेकर विजय अहिरवार और नितिन अहिरवार से विवाद शुरू हो गया। घर से बुलाकर डंडों से पीटने का आरोप संध्या के मुताबिक, गुरुवार रात जब परिवार के लोग घर पर थे, तब आरोपियों ने उनके चाचा को घर से बाहर बुलाया और डंडों से हमला कर दिया। बचाव के लिए परिवार के अन्य लोग पहुंचे तो उनके साथ भी मारपीट की गई। आसपास के लोगों ने बीच-बचाव किया, जिसके बाद आरोपी मौके से चले गए। चार लोग अस्पताल में भर्ती मारपीट में खुमान अहिरवार (65), मुकेश अहिरवार (42), गोपाल अहिरवार (40) और संध्या अहिरवार (16) घायल हुए हैं। घटना के बाद परिजन घायलों को जिला अस्पताल लेकर पहुंचे। पुलिस में शिकायत, जांच शुरू घटना की शिकायत कोतवाली थाने में दर्ज कराई गई है। पुलिस मामले की जांच कर रही है। जिला अस्पताल के प्रबंधक डॉ. सुरेंद्र विक्रम सिंह ने बताया कि विवाद में एक पक्ष के चार लोग घायल हुए हैं। सभी का इलाज जिला अस्पताल में चल रहा है।
भोजपुर में बाढ़ के पानी में डूबने से एक मजदूर की मौत हो गई। काम खत्म होने के बाद घर लौट रहा था, इस दौरान पानी में डूब गया। मृतक की पहचान धुंधुआं गांव निवासी रामजीत राय के पुत्र संतोष कुमार(29) के तौर पर हुई है। घटना मुफ्फसिल थाना क्षेत्र की है। जानकारी के मुताबिक संतोष गुरुवार को आरा काम करने गया था। देर शाम काम खत्म होने के बाद राशन लेकर घर लौट रहा था। गांव में चारों तरफ बाढ़ का पानी भरा हुआ था। वो सिर पर सामान रखकर जा रहा था। इस दौरान पैर फिसल जाने के कारण सड़क किनारे चार्ट में डूब गया। ग्रामीणों की सूचना पर परिवार के लोग मौके पर पहुंचे। पानी से बाहर निकालकर अस्पताल लेकर गए। जहां डॉक्टरों ने मृत घोषित कर दिया है। घर में मचा कोहराम सदर अस्पताल में पोस्टमार्टम के बाद पुलिस ने शव परिजनों को सौंप दिया है। मृतक पांच भाई-बहन में सबसे बड़ा था। परिवार में मां रामावती देवी, पत्नी गुड़िया देवी, दो पुत्री प्रिया कुमारी, प्रियांशु कुमारी और एक पुत्र ओमजी है। घटना के बाद घर में कोहराम मच गया है। मां, पत्नी और बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल है।
Famous Laccha Kalakand in Pali: राजस्थान के पाली में मशहूर कृष्ण कलाकंद का ‘लच्छा कलाकंद’ और ‘लच्छा रबड़ी’ पूरे देश में अपनी मिठास घोल रहा है. 50 साल पुरानी यह दुकान शुद्ध दूध, शक्कर और इलायची से मुंह में घुल जाने वाली मिठाई तैयार करती है. साधारण कलाकंद से अलग, इसकी खासियत इसका मलाईदार लच्छा और दानेदार टेक्सचर है. गुलाब हलवे के बाद अब यह लच्छा कलाकंद पाली की नई पहचान बन गया है. पिता द्वारा शुरू की गई इस अद्भुत स्वाद की विरासत को आज उनके बेटे पूरी शुद्धता और पारंपरिक तरीके से आगे बढ़ा रहे हैं, जो लाजवाब है.
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Pali: राजस्थान का पाली शहर हमेशा से अपने विश्व प्रसिद्ध गुलाब हलवे के लिए जाना जाता है. लेकिन अब यहाँ की गलियों से एक और अनोखा स्वाद निकलकर पूरे देश में अपनी खास पहचान बना रहा है. हम बात कर रहे हैं पाली के बेहद मशहूर ‘लच्छा कलाकंद’ और ‘लच्छा रबड़ी’ की. अगर आप पाली घूमने आए हैं और आपने कृष्ण कलाकंद की दुकान पर जाकर इस लाजवाब मिठाई का स्वाद नहीं चखा, तो यकीन मानिए आपकी मिठास की यह खोज पूरी तरह से अधूरी है. यह कोई साधारण मिठाई नहीं है, बल्कि शुद्धता और परंपरा का एक ऐसा सुखद संगम है जो सीधे दिल में उतर जाता है.
पाली के इस खास जायके का इतिहास करीब पांच दशक पुराना है. पिछले 50 सालों से यह दुकान स्वाद के शौकीनों और मिठाई प्रेमियों की पहली पसंद बनी हुई है. इस मीठे सफर की शुरुआत पिता ने की थी, जिन्होंने अपनी अथक मेहनत और शुद्धता के दम पर इस कलाकंद को एक अलग मुकाम तक पहुंचाया. आज उनके बेटे उसी गर्व, निष्ठा और परंपरा के साथ इस विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं. यह सिर्फ एक दुकान नहीं है, बल्कि पाली के लोगों के लिए एक भावना बन चुकी है. बिना किसी बड़े विज्ञापन या दिखावे के, सिर्फ अपने असली स्वाद और पिता के जमाने से चले आ रहे जायके के कारण यह कलाकंद आज पाली की सीमाओं को पार कर पूरे देश के लोगों के दिलों पर राज कर रहा है.
मुंह में जाते ही घुल जाने वाला अद्भुत स्वाद कृष्ण कलाकंद की सबसे बड़ी खासियत इसका अनोखा ‘लच्छा’ है. यह बाजार में मिलने वाले साधारण कलाकंद की तरह बिल्कुल नहीं होता है. शुद्ध गाय या भैंस के दूध, बिल्कुल सही मात्रा में शक्कर और इलायची के सुगंधित मेल से तैयार यह कलाकंद जैसे ही मुंह में जाता है, वैसे ही मलाई की तरह घुल जाता है. इसकी मिठास कभी भी गले में नहीं चुभती, बल्कि एक सुखद एहसास देती है. इसके अलावा यहाँ मिलने वाली ‘लच्छा रबड़ी’ का भी कोई मुकाबला नहीं है. जब गाढ़ी रबड़ी के ऊपर से ताजी मलाई का लच्छा डाला जाता है, तो इसका स्वाद और भी दोगुना हो जाता है.
कैसे तैयार होता है यह खास लच्छा कलाकंद इस कलाकंद को बनाने की प्रक्रिया पूरी तरह से पारंपरिक और धैर्य से भरी है. इसे मशीनों से नहीं, बल्कि हाथों की मेहनत से तैयार किया जाता है. बड़े कड़ाहों में शुद्ध दूध को घंटों तक धीमी आंच पर पकाया जाता है. इस लंबी प्रक्रिया में दूध धीरे-धीरे गाढ़ा होता है और उसमें प्राकृतिक दाने और लच्छे बनने लगते हैं. यही लच्छेदार टेक्सचर इसे बाजार में मिलने वाले अन्य कलाकंद से बिल्कुल अलग बनाता है. शक्कर और इलायची का संतुलित मिश्रण इसके स्वाद को और भी शाही बना देता है.
गुलाब हलवे के बाद पाली की नई पहचान देशभर के लोग अब सिर्फ गुलाब हलवे के लिए ही नहीं, बल्कि लच्छा कलाकंद के लिए भी पाली का रुख कर रहे हैं. यह मिठाई अब शादियों, त्योहारों और खास मौकों की शान बन चुकी है. पाली शहर में आने वाला हर पर्यटक अब इस दुकान का पता पूछता हुआ नजर आता है. शुद्धता की गारंटी और लाजवाब स्वाद के कारण इस कलाकंद को लोग अपने परिवार और दोस्तों के लिए पैक करवा कर भी ले जाते हैं. अगर आपको असली राजस्थानी मिठास का अनुभव करना है, तो एक बार इस लच्छा कलाकंद को जरूर आजमाएं. इसका स्वाद आपको बार-बार पाली खींच लाएगा.
Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with News18 Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने सऊदी अरब को 48 F-35 फाइटर जेट बेचने की मंजूरी दे दी है। इन विमानों की कीमत करीब 24 अरब डॉलर यानी ₹2.3 लाख करोड़ है। हालांकि, डील पूरी होने से पहले अमेरिकी कांग्रेस की मंजूरी जरूरी है।
इस बीच अमेरिकी खुफिया एजेंसियों ने चिंता जताई है कि F-35 की संवेदनशील तकनीक चीन के हाथ लग सकती है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, पेंटागन की डिफेंस इंटेलिजेंस एजेंसी (DIA) की एक रिपोर्ट में इस खतरे का जिक्र किया गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि चीन सऊदी अरब में जासूसी करके या वहां की सेना के साथ अपने सहयोग के जरिए F-35 की तकनीक हासिल करने की कोशिश कर सकता है।
सऊदी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन सलमान ने नवंबर 2025 में अमेरिका का दौरा किया था। इस दौरान दोनों देशों के बीच F-35 डील पर सहमति बनी थी।
F-35 की कौन-सी तकनीक की चिंता?
F-35 अमेरिका का सबसे आधुनिक लड़ाकू विमान माना जाता है। इसमें बेहद आधुनिक रडार और निगरानी सिस्टम लगे हैं।
अमेरिकी खुफिया एजेंसियों को डर है कि अगर चीन को इन सिस्टम से जुड़ी जानकारी मिल गई तो अमेरिकी सैन्य तकनीक को नुकसान हो सकता है।
इसलिए रिपोर्ट में कहा गया है कि F-35 से जुड़ी जगहों पर सिर्फ अमेरिकी और सऊदी अधिकारियों और अधिकृत कर्मचारियों को ही जाने की अनुमति होनी चाहिए।
चीन से सऊदी की बढ़ती दोस्ती चिंता की वजह
सऊदी अरब के चीन के साथ पहले से सैन्य और तकनीकी संबंध हैं। सऊदी चीन से बैलिस्टिक मिसाइलें भी खरीदता है। अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, चीन सऊदी को मिसाइल बनाने और उनका इस्तेमाल बेहतर करने में भी मदद कर रहा है।
सऊदी के टेलीकॉम और दूसरे ढांचे में चीन की कंपनियों हुआवे और ZTE के उपकरण भी इस्तेमाल होते हैं। अमेरिकी एजेंसियों ने इन उपकरणों को लेकर भी सवाल उठाए हैं।
UAE को F-35 बेचने की डील रोकनी पड़ी थी
अमेरिका को अरब देशों को F-35 देने में चीन से जुड़ी चिंता पहले भी रही है। 2020 में ट्रम्प प्रशासन ने UAE को F-35 बेचने पर सहमति दी थी।
उस समय भी अमेरिकी एजेंसियों ने UAE के चीन के साथ बढ़ते सैन्य और तकनीकी संबंधों को लेकर चिंता जताई थी। बाद में वह बिक्री प्रक्रिया रोक दी गई थी।
सऊदी अरब को F-35 देने पर इजराइल ने भी चिंता जताई है। इजराइल फिलहाल मिडिल-ईस्ट का एकमात्र देश है जिसके पास F-35 विमान हैं।
अमेरिका की नीति रही है कि मिडिल-ईस्ट में इजराइल की सैन्य बढ़त बनी रहे। इसलिए सऊदी को F-35 देने के मामले में यह भी देखा जा रहा है कि इससे इजराइल की सैन्य बढ़त पर असर न पड़े।
फाइटर जेट्स की डिलीवरी में कई साल लगेंगे
अमेरिकी विदेश विभाग ने जून में 48 F-35 विमानों और एक अतिरिक्त इंजन की बिक्री का प्रस्ताव कांग्रेस की दो समितियों को भेजा था।
F-35 बनाने वाली अमेरिकी कंपनी लॉकहीड मार्टिन है। विमान तैयार करने और उनकी डिलीवरी में कई साल लग सकते हैं। यानी ट्रम्प प्रशासन की मंजूरी के बावजूद सऊदी को विमान तुरंत नहीं मिलेंगे।
सऊदी अरब लंबे समय से F-35 खरीदना चाहता था। अमेरिका और सऊदी के बीच कई दशकों से सैन्य सहयोग है और सऊदी अमेरिकी हथियारों का बड़ा खरीदार है।
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रिपोर्ट: ट्रम्प को भरोसा, जिनपिंग से अपनी बात मनवा लेंगे:चीनी राष्ट्रपति निजी रिश्तों से ज्यादा देशहित को देते हैं तरजीह
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 24 सितंबर को चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग से मिलेंगे। ट्रम्प को भरोसा है कि शी के साथ उनके अच्छे निजी रिश्ते बातचीत में अमेरिका के काम आएंगे। पूरी खबर यहां पढ़ें…
महाराष्ट्र के ठाणे जिले में गुरुवार को 17 साल के लड़के युग धामने की डेंगू से मौत हो गई। उसका कल्याण पश्चिम स्थित फोर्टिस अस्पताल में इलाज चल रहा था। युग को 12 सितंबर को तेज बुखार हुआ था। परिवार उसे स्थानीय फैमिली डॉक्टर के पास ले गया, जहां जांच में डेंगू की पुष्टि हुई थी। इसके बाद 13 सितंबर को उसे उल्हासनगर के गांधी नगर रोड स्थित गूंगी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। हालत बिगड़ने पर 15 सितंबर को कल्याण पश्चिम स्थित फोर्टिस अस्पताल रेफर किया गया था। आज की अन्य बड़ी खबरें… मुंबई पुलिस ने अंतरराष्ट्रीय OTP फार्मिंग गिरोह का भंडाफोड़ किया, 3 गिरफ्तार मुंबई पुलिस ने एक बड़े अंतरराष्ट्रीय साइबर अपराध गिरोह का भंडाफोड़ किया है, जो OTP फार्मिंग के जरिए भारतीय मोबाइल नंबर और WhatsApp अकाउंट विदेशी साइबर ठगों को तक पहुंचाता था। पुलिस ने मामले में तीन लोगों को गिरफ्तार किया है और उनके कब्जे से 669 एक्टिव सिम कार्ड और 100 मोबाइल फोन बरामद किए हैं। यह कार्रवाई मुंबई क्राइम ब्रांच की पश्चिम क्षेत्र साइबर पुलिस ने की। गिरफ्तार आरोपियों की पहचान प्रमोद कुमार उर्फ बिपिन, धर्मेंद्र गुप्ता और राजीव कुमार गुप्ता के रूप में हुई है। डिजिटल अरेस्ट कर बुजुर्ग से 1.12 करोड़ की ठगी, IIT ग्रेजुएट और बैंक मैनेजर समेत 6 गिरफ्तार मुंबई साइबर पुलिस ने 68 साल के एक बुजुर्ग को डिजिटल अरेस्ट कर 1.12 करोड़ रुपए ठगने के मामले में छह लोगों को गिरफ्तार किया है। गिरफ्तार आरोपियों में IIT दिल्ली से इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर चुका एक वेब डेवलपर और एक निजी बैंक का ऑपरेशंस मैनेजर भी शामिल है। पुलिस के अनुसार, गिरफ्तार आरोपियों की पहचान तारिक मोमिन, राकेश जैन, चिंतन देसाई, शंकर त्यागी, जी. गोहेल और अजय शर्मा के रूप में हुई है। अधिकारी ने बताया कि गोहेल IIT दिल्ली से BE डिग्री प्राप्त वेब डेवलपर है। उसके खिलाफ 2021 में धोखाधड़ी का एक मामला भी दर्ज हो चुका है। पीड़ित दहिसर के रहने वाले सेवानिवृत्त कारोबारी हैं। ठगों ने उन्हें करीब दो सप्ताह तक जुलाई और अगस्त के बीच उनके घर में डिजिटल अरेस्ट रखा था।
Supreme Court Orders Indian Oil Corporation To Pay Compensation To Woman
नई दिल्ली1 घंटे पहले
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सुप्रीम कोर्ट ने इंडियन ऑयल कॉर्पोरेशन लिमिटेड (आईओसी) को एक योग्य महिला उम्मीदवार सुमित्रा को 12 लाख रुपए मुआवजा देने का आदेश दिया है। करीब 38 साल पहले आईओसी ने यह कहकर नौकरी देने से इनकार किया था कि ‘महिला सिलेंडर नहीं उठा पाएगी।
महिला अब रिटायरमेंट की उम्र तक पहुंच चुकी है। इसलिए कोर्ट ने उसे नौकरी देने के बजाय 12 लाख रुपए का मुआवजा देना तय किया है। जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस विपुल एम पंचोली की बेंच ने कॉर्पोरेशन की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि केवल महिला होने के आधार पर नौकरी न देना नारीत्व का अपमान है।
अब पूरा मामला समझिए…
हरियाणा के गुड़्हा गांव की रहने वाली सुमित्रा सुमित्रा उन 49 लोगों में शामिल थीं, जिनकी सिफारिश डिप्टी कमिश्नर की अध्यक्षता वाली एक स्थानीय समिति ने एलपीजी बॉटलिंग प्लांट में रिफिलिंग हेल्पर या कैजुअल खलासी के पद के लिए की थी।
यह मामला गुढ़ा गांव में रहने वाली एक महिला से जुड़ा है। साल 1988 में उनका नाम उन 49 लोगों की सूची में शामिल था, जिनकी सिफारिश डिप्टी कमिश्नर की अध्यक्षता वाली स्थानीय समिति ने इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन के LPG बॉटलिंग प्लांट के लिए की थी।
महिला ने खलासी, चपरासी या रीफिलिंग हेल्पर के पद के लिए इंटरव्यू दिया था। लेकिन उन्हें नौकरी नहीं मिली जबकि सूची में शामिल अन्य लोगों को नियुक्ति पत्र दे दिए गए थे। इसके बाद महिला ने नौकरी नहीं दिए जाने के फैसले के खिलाफ ट्रायल कोर्ट का रुख किया।
ट्रायल कोर्ट ने माना कि महिला नौकरी के लिए तय योग्यता पूरी करती थीं। कोर्ट ने एक गवाह के बयान का भी हवाला दिया, जिससे यह बात सामने आई कि महिला को सिर्फ इसलिए नौकरी नहीं दी गई क्योंकि वह महिला थीं।
हालांकि, ट्रायल कोर्ट के फैसले के बाद आईओसी ने अपील की और 6 अगस्त 1993 को प्रथम अपीलीय अदालत ने ट्रायल कोर्ट का फैसला पलट दिया। इसके बाद मामला हरियाणा हाईकोर्ट और फिर सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था।
क्या महिलाएं घरों में गैस सिलेंडर नहीं उठातीं: कोर्ट
इंडियन ऑयल के वकील ने दलील दी थी कि इस काम में भारी LPG सिलेंडर उठाने पड़ते हैं और रात की शिफ्ट होती है, इसलिए शायद अधिकारियों ने महिला को उपयुक्त नहीं माना। इस पर कोर्ट ने वकील से सवाल किया- क्या महिलाएं घरों में गैस सिलेंडर नहीं उठातीं?
कोर्ट ने कहा- हम भारत से हैं और हर दिन महिलाओं के सम्मान की बात करते हैं। हम कहते हैं कि महिला देवी के समान है। ऐसे में भारत सरकार के एक उपक्रम की ओर से यह महिला गरिमा का अपमान है।
लखनऊ के मोहनलालगंज में रायबरेली-लखनऊ हाईवे किनारे नहर पुलिया के नीचे बुधवार को लकड़ी के बंद बक्से में मिला शव दुबग्गा में रहने वाले बग्घी चालक राम किशोर वाल्मीकि (35) का निकला। पुलिस को घटनास्थल के पास लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज में ई-रिक्शे से आए तीन लोग पुलिया के नीचे बक्सा फेंकते दिखाई दिए हैं। ई-रिक्शे के नंबर के आधार पर पुलिस ने गुरुवार शाम दुबग्गा निवासी महिला समेत चार लोगों को हिरासत में लिया है। हालांकि पुलिस ने इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की है। सीमा विवाद के बाद मोहनलालगंज पुलिस ने भेजा था शव बुधवार को भावाखेड़ा के पास हाईवे किनारे नहर पुलिया के नीचे लकड़ी का बंद बक्सा पड़ा मिला था। बक्सा खोलने पर उसमें युवक का शव मिला। सूचना पर निगोहां और मोहनलालगंज पुलिस मौके पर पहुंची, लेकिन घटनास्थल को लेकर दोनों थानों के बीच सीमा विवाद हो गया। बाद में लेखपाल की जांच में घटनास्थल मोहनलालगंज क्षेत्र में होने की पुष्टि हुई। इसके बाद मोहनलालगंज पुलिस ने शव पोस्टमार्टम हाउस भेज दिया। ई-रिक्शे के नंबर से पुलिस महिला तक पहुंची थाना प्रभारी रामबाबू सिंह के मुताबिक, घटनास्थल के पास लगे सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली गई। इसमें एक ई-रिक्शा पुलिया पर आता दिखाई दिया। उसमें तीन लोग बैठे थे। फुटेज में तीनों ने लकड़ी का बक्सा पुलिया से नीचे फेंका और फिर ई-रिक्शे से शहर की ओर चले गए। पुलिस ने ई-रिक्शे के नंबर के आधार पर जांच शुरू की तो उसका रजिस्ट्रेशन दुबग्गा निवासी एक महिला के नाम मिला। पुलिस ने महिला को हिरासत में लेकर पूछताछ की। इसी दौरान बक्से में मिले शव की पहचान राम किशोर वाल्मीकि के रूप में हुई। वह दुबग्गा में रहकर बग्घी चलाता था। महिला समेत चार लोग हिरासत में पुलिस सूत्रों के मुताबिक महिला के अलावा तीन अन्य लोगों को भी हिरासत में लेकर पूछताछ की जा रही है। पुलिस राम किशोर के परिवार और उसके स्थायी पते की जानकारी जुटा रही है। फिलहाल उसके परिवारीजनों के बारे में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल सकी है। बक्से पर लिखे मोबाइल नंबर को भी पुलिस ने जांच के दायरे में लिया है। उस नंबर पर कॉल कर घटना से जुड़े लोगों की जानकारी जुटाई जा रही है। प्रेम प्रसंग में हत्या की आशंका प्रारंभिक जांच में पुलिस प्रेम प्रसंग के विवाद को हत्या की वजह मानकर चल रही है। सूत्रों के मुताबिक, राम किशोर का हिरासत में ली गई महिला से प्रेम प्रसंग था। आशंका है कि महिला ने दूसरे प्रेमी के साथ मिलकर राम किशोर की हत्या की और शव लकड़ी के बक्से में बंद कर मोहनलालगंज की नहर पुलिया के नीचे फिंकवा दिया। पुलिस पोस्टमार्टम रिपोर्ट और पूछताछ के आधार पर हत्या की वजह और घटना में शामिल लोगों की भूमिका स्पष्ट करने में जुटी है।
एमपी में देशी शराब की थोक सप्लाई के टेंडरों में डिस्टिलरीज के बीच मिलीभगत और टेंडर फिक्सिंग की जांच अब भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) जारी रख सकेगा।
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हाईकोर्ट जबलपुर ने एसोसिएटेड अल्कोहल्स एंड बेवरेजेस लिमिटेड समेत अन्य डिस्टिलरीज की याचिकाएं खारिज कर दी हैं। इसके साथ ही CCI की जांच पर लगी अंतरिम रोक भी हटा दी गई है। अब आयोग जांच प्रक्रिया आगे बढ़ाकर अंतिम आदेश जारी कर सकेगा।
हाईकोर्ट के जस्टिस विवेक रूसिया और जस्टिस प्रदीप मित्तल की पीठ ने गुरुवार को यह फैसला सुनाया। पूरा मामला भारत के नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (CAG) की वर्ष 2016-17 की ऑडिट रिपोर्ट के बाद सामने आया था।
रिपोर्ट में 2012-13 से 2016-17 के दौरान देशी शराब के सरकारी टेंडरों में अलग-अलग डिस्टिलरीज की बोलियों के बीच बेहद कम अंतर होने पर सवाल उठाए गए थे। इसके बाद CCI ने वर्ष 2020 में मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान आबकारी विभाग के अधिकारियों के बयान दर्ज किए गए और संबंधित डिस्टिलरीज के परिसरों की तलाशी ली गई।
इस दौरान ‘एमपी डिस्टिलर्स एसोसिएशन’ नाम के वॉट्सऐप ग्रुप, ईमेल और अन्य डिजिटल सामग्री मिलने की बात सामने आई। महानिदेशक स्तर पर की गई जांच के बाद 1200 से ज्यादा पन्नों की रिपोर्ट CCI को सौंपी गई।
डिस्टिलरीज ने कहा- पूरा कारोबार सरकार के नियंत्रण में
एसोसिएटेड अल्कोहल्स, ग्रेट गैलियन और ओएसिस डिस्टिलरीज समेत अन्य कंपनियों ने CCI की कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। कंपनियों का तर्क था कि प्रदेश में शराब के कारोबार का नियमन पूरी तरह राज्य सरकार और आबकारी विभाग के हाथ में है। लाइसेंस, उत्पादन, आपूर्ति, कीमत और कोटा तक सरकार तय करती है। ऐसे में प्रतिस्पर्धा कानून के तहत CCI को जांच का अधिकार नहीं है।
आबकारी विभाग की ओर से भी इसी तरह का पक्ष रखा गया। विभाग ने बताया कि पूरी व्यवस्था सरकारी नियंत्रण में है और डिस्टिलरीज का मुनाफा भी करीब 10 से 15 प्रतिशत तक निर्धारित है। हाईकोर्ट ने इन तर्कों को स्वीकार नहीं किया।
कंपनियों की चार प्रमुख दलीलें, कोर्ट ने इस तरह दिया जवाब
शराब राज्य सरकार का विषय हैकोर्ट: आबकारी कानून के तहत लाइसेंस, निर्माण, बिक्री और राजस्व की व्यवस्था नियंत्रित होने से CCI का अधिकार समाप्त नहीं होता। प्रतिस्पर्धा कानून का उद्देश्य प्रतिस्पर्धा को प्रभावित करने वाली गतिविधियों की जांच करना भी है।
आबकारी विभाग ही पूरी व्यवस्था नियंत्रित करता हैकोर्ट: आबकारी विभाग की भूमिका मुख्य रूप से लाइसेंस और नियामकीय व्यवस्था तक सीमित है। कंपनियों के बीच प्रतिस्पर्धा विरोधी गतिविधियों की जांच के लिए कोई स्वतंत्र नियामक संस्था नहीं है। इसलिए CCI की जांच के अधिकार को सिर्फ आबकारी नियंत्रण के आधार पर खत्म नहीं किया जा सकता।
CCI की कार्रवाई CAG रिपोर्ट के आधार पर शुरू हुईकोर्ट: CAG की रिपोर्ट को अंतिम सबूत नहीं माना गया है। यह जांच शुरू करने का आधार बनी। CCI ने केवल रिपोर्ट के आधार पर डिस्टिलरीज को दोषी नहीं माना, बल्कि उसके बाद महानिदेशक के माध्यम से स्वतंत्र जांच कर दस्तावेज और अन्य सामग्री जुटाई गई।
CCI की जांच को बाद में चुनौती दी गईकोर्ट: कंपनियों ने 4 अगस्त 2020 के शुरुआती आदेश को उसी समय चुनौती नहीं दी थी और जांच में सहयोग करती रहीं। महानिदेशक की रिपोर्ट आने और CCI में आगे की कार्यवाही शुरू होने के बाद उन्होंने हाईकोर्ट का रुख किया।
अब CCI की रिपोर्ट पर होगी आगे की कार्रवाई
हाईकोर्ट के आदेश का मतलब यह नहीं है कि डिस्टिलरीज को टेंडर फिक्सिंग या मिलीभगत का दोषी ठहरा दिया गया है। कोर्ट ने फिलहाल केवल यह तय किया है कि CCI को इस मामले की जांच करने का अधिकार है।
अब CCI महानिदेशक की जांच रिपोर्ट, उपलब्ध डिजिटल और दस्तावेजी सामग्री तथा संबंधित कंपनियों का पक्ष सुनकर मामले में अंतिम निर्णय करेगा। आयोग के आदेश से असहमति होने पर संबंधित कंपनियों के पास NCLAT में अपील का विकल्प रहेगा।
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सिंघार बोले- पाकिस्तान के बाद एमपी में हिंदू खतरे में
नेता प्रतिपक्ष उमंग सिंघार ने सागर में जहरीली शराब से हुई मौतों को लेकर सरकार पर तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि मध्य प्रदेश में लगातार हिंदुओं की मौत हो रही है और सरकार के जिम्मेदार अधिकारी जहरीली शराब के मामले में डिस्टलरी मालिकों को बचाने में लगे हैं। सिंघार ने कहा- पाकिस्तान के बाद अगर हिंदू कहीं खतरे में हैं तो वह मध्य प्रदेश है।पूरी खबर पढ़ें