वाराणसी कोर्ट ने काशी हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) परिसर में छात्र पर जानलेवा हमला करने के प्रयास के मामले में षड़यंत्र के आरोपी अभिषेक उपाध्याय को अदालत से जमानत मिल गई है। अपर सत्र न्यायाधीश,(पंचम) यजुवेंद्र विक्रम सिंह की अदालत ने कैमूर बिहार निवासी अभिषेक उपाध्याय को 50-50 हजार रुपये के व्यक्तिगत बंधपत्र तथा समान धनराशि के दो प्रतिभू पत्र प्रस्तुत करने पर जमानत पर रिहा करने का आदेश दिया। बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता एवं पूर्व अध्यक्ष सेंट्रल बार एसोसिएशन, विवेक शंकर तिवारी ने पैरवी की। अभियोजन ने बताया कि रोशन मिश्रा बीए तृतीय वर्ष का छात्र है। आरोप है कि 23 फरवरी 2026 की रात करीब 9 से 9:30 बजे वह अपने साथी विशाल के साथ बिरला छात्रावास के गेट पर खड़ा था। इसी दौरान मोटरसाइकिल से पहुंचे पीयूष कुमार तिवारी, ऋषभ और तपस ने उस पर जान से मारने की नीयत से चार गोलियां चलाईं। एफआईआर के मुताबिक एक गोली छात्र के सिर के पास से निकल गई, जबकि दूसरी छाती के पास से गुजरी। छात्र जान बचाने के लिए छात्रावास के अंदर भागा तो पीछे से भी दो गोलियां चलाए जाने का आरोप है। अभियोजन ने इस घटना के पीछे पूर्व निष्कासित छात्र अभिषेक उपाध्याय के इशारे पर षड्यंत्र किए जाने का आरोप लगाया था। विवेचना के दौरान पुलिस ने सहअभियुक्तों को गिरफ्तार किया था तथा एक सहअभियुक्त की निशानदेही पर घटना में प्रयुक्त .32 बोर की पिस्टल बरामद किए जाने का उल्लेख केस डायरी में किया गया। बचाव पक्ष की ओर से तर्क दिया गया कि अभिषेक उपाध्याय निर्दोष है और रंजिश के कारण झूठे तथ्यों के आधार पर उसे मुकदमे में फंसाया गया है। आरोपी घटना के समय मौके पर मौजूद नहीं था और उसके विरुद्ध घटना का षड्यंत्र रचने का कोई ठोस साक्ष्य केस डायरी में उपलब्ध नहीं है। अदालत ने अपने आदेश में यह भी उल्लेख किया कि विवेचना के दौरान सीसीटीवी फुटेज का अवलोकन किया गया, लेकिन कैमरा काफी दूर होने के कारण फुटेज में घटनाक्रम स्पष्ट दिखाई नहीं दे रहा था। आरोपी को मौके से गिरफ्तार नहीं किया गया, बल्कि उसने 3 अगस्त 2026 को न्यायालय के समक्ष आत्मसमर्पण किया था और तभी से जेल में निरुद्ध था। अदालत के समक्ष यह भी बताया गया कि मामले के अन्य सहअभियुक्तों को पूर्व में जमानत मिल चुकी है। बचाव पक्ष ने आरोपी के आपराधिक इतिहास में दर्ज मुकदमों को छात्र आंदोलनों से संबंधित बताते हुए कहा कि किसी भी मामले में उसे दोषसिद्ध नहीं किया गया है।
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BHU-कैंपस में छात्र पर फायरिंग में नामजद छात्र को जमानत: हमले का षडयंत्र रचने में अहम भूमिका, 23 फरवरी 2026 की वारदात में रिहा करने का आदेश – Varanasi News
भास्कर अपडेट्स: टीवी चैनलों पर 12 मिनट एडवर्टाइजमेंट की सीमा हटेगी, सरकार का फैसला
सरकार ने टीवी चैनलों पर हर घंटे अधिकतम 12 मिनट विज्ञापन दिखाने की सीमा हटाने का फैसला किया है। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।मंत्रालय ने कहा कि प्रसारण क्षेत्र में हुए बड़े बदलावों को देखते हुए यह फैसला लिया गया है।
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ट्रॉली-बैग की सीक्रेट कैविटी में छिपाई 7 करोड़ की ड्रग: भोपाल रेलवे स्टेशन में पकड़ाया 8.6kg मेथामफेटामाइन-कोकीन, लेडी तस्कर समेत 4 विदेशी अरेस्ट – Bhopal News
राजस्व खुफिया निदेशालय (DRI) ने भोपाल और ग्रेटर नोएडा में 8.6 किलो ड्रग्स जब्त की है। लेडी तस्कर समेत 5 तस्करों को गिरफ्तार किया है। इनमें 4 नाइजीरियाई नागरिक शामिल हैं। जब्त ड्रग्स की अंतरराष्ट्रीय अवैध बाजार में कीमत करीब 7.1 करोड़ रुपए आंकी गई है। कार्रवाई में 6.325 किलो मेथामफेटामाइन, 50 ग्राम कोकीन और 25 ग्राम गांजा बरामद किया गया। DRI को सूचना मिली थी कि एक महिला तस्कर नई दिल्ली से ट्रेन के जरिए बेंगलुरु जा रही है और सामान में ड्रग्स छिपाकर ले जा रही है। सूचना के आधार पर DRI अधिकारियों ने 11 अगस्त को भोपाल जंक्शन रेलवे स्टेशन पर निगरानी शुरू की। संदिग्ध महिला की पहचान के बाद उसे रोककर सामान की तलाशी ली गई। महिला के काले रंग के ट्रॉली बैग में शातिर तरीके से बनाई गई गुप्त कैविटी से ड्रग्स बरामद हुई। ट्रॉली बैग में बनाई थी गुप्त कैविटी DRI अधिकारियों ने महिला के काले रंग के ट्रॉली बैग की तलाशी ली। बैग में ऐसी गुप्त कैविटी बनाई गई थी, जिसमें सामान्य तलाशी के दौरान छिपा सामान आसानी से नजर नहीं आता। कैविटी में छह प्लास्टिक पैकेट रखे थे। सभी पैकेटों को भूरे रंग की टेप से अच्छी तरह लपेटा गया था। DRI अधिकारियों ने मौके पर NDPS फील्ड टेस्टिंग किट से पदार्थ की जांच की। जांच में यह मेथामफेटामाइन पाया गया। सभी छह पैकेटों को तौलने पर कुल 6.325 किलो क्रिस्टलीय मेथामफेटामाइन मिला। DRI ने ड्रग्स जब्त कर महिला को NDPS एक्ट, 1985 के तहत गिरफ्तार कर लिया। DRI और CBN ने ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क को पकड़ा महिला से पूछताछ के दौरान DRI को ड्रग्स सप्लाई नेटवर्क से जुड़े लोगों की जानकारी मिली। इसके बाद जांच आगे बढ़ाते हुए ग्रेटर नोएडा में कार्रवाई की गई। महिला से पूछताछ के आधार पर DRI और CBN की टीम ने ग्रेटर नोएडा में सप्लायरों को पकड़ने के लिए कार्रवाई की। टीम ने आरोपियों के ठिकाने पर दबिश दी। अधिकारियों को देखकर वहां मौजूद नाइजीरियाई नागरिकों ने भागने की कोशिश की। उन्होंने खिड़की से कूदकर फरार होने का प्रयास किया। हालांकि, DRI और CBN की टीम ने पीछा कर उन्हें पकड़ लिया। 2.242 किलो मेथामफेटामाइन, कोकीन और गांजा मिला ग्रेटर नोएडा में आरोपियों के कब्जे और ठिकाने की तलाशी के दौरान अलग-अलग नशीले पदार्थ बरामद किए गए। टीम को कुल 2.242 किलो क्रिस्टलीय मेथामफेटामाइन, 50 ग्राम कोकीन और 25 ग्राम गांजा मिला। इस कार्रवाई में चार नाइजीरियाई नागरिकों को गिरफ्तार किया गया। भारतीयों को कैरियर बनाकर चला रहा था विदेशी सिंडिकेट DRI के अनुसार, इस कार्रवाई से विदेश से संचालित ऐसे ड्रग सिंडिकेट का खुलासा हुआ है, जो भारतीय नागरिकों को कैरियर के तौर पर इस्तेमाल कर देश में नशीले पदार्थों की तस्करी कर रहा था। भारतीय नागरिकों के जरिए ड्रग्स की खेप एक जगह से दूसरी जगह पहुंचाई जा रही थी। भोपाल में महिला से बरामदगी और उसके बाद ग्रेटर नोएडा में की गई कार्रवाई से नेटवर्क की कड़ियां सामने आई हैं। DRI का कहना है कि इस ऑपरेशन से विदेशी सिंडिकेट की ड्रग तस्करी गतिविधियों को बड़ा झटका लगा है।
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सेल्फी लेते देवगढ़ किले से गिरा युवक: 40 फीट गहरी खाई में मिला; दोस्तों के साथ घूमने गया था, सिर में आई चोट – Sikar News
सीकर स्थित देवगढ़ किले की दीवार से एक युवक सेल्फी लेते समय पैर फिसलने से नीचे गिर गया। युवक गंभीर घायल अवस्था में 40 फीट गहरी खाई में मिला। युवक को गंभीर घायल अवस्था में सीकर के एसके अस्पताल में एडमिट करवाया गया है। गोकुलपुरा पुलिस थाने के ASI रामकुमार ने बताया- यह घटना देवगढ़ किले की है। गोकुलपुरा का ही रहने वाला युवक भूमिक जांगिड़ (20) पुत्र सुभाष जांगिड़ शुक्रवार शाम को दो दोस्तों के साथ बाइक लेकर देवगढ़ गया था। जिन्होंने बाइक को नीचे खड़ा कर दिया था और फिर तीनों ऊपर चले गए। भूमिक किले की दीवार पर चढ़कर सेल्फी ले रहा था। इसी दौरान अचानक उसका पैर फिसला और वह नीचे 40 फीट गहरी खाई में जा गिरा। मौके पर मौजूद उसके दो दोस्तों ने इसकी सूचना वहां घूमने के लिए आए लोगों को दी। इन्होंने इस बारे में 112 नंबर पर सूचना दी। ASI रामकुमार ने बताया- भूमिक का एक पैर फ्रैक्चर हो गया। सिर में और शरीर पर जगह-जगह चोट आई है। गंभीर घायल को कंधों पर रखकर नीचे लाए पुलिस और सिविल डिफेंस की टीम मौके पर पहुंची। इन्होंने आधे घंटे में पहाड़ की चढ़ाई की और फिर 40 फीट गहरी खाई में गंभीर घायल युवक को कंधों पर लादकर नीचे लेकर आए। इसके बाद उसे एंबुलेंस के जरिए सीकर के एसके अस्पताल में एडमिट करवाया गया। जहां पर उसका इलाज जारी है। सिर-शरीर में जगह-जगह आई चोट ASI रामकुमार ने बताया- भूमिक के पिता विदेश में नौकरी करते हैं। फिलहाल उसका इलाज जारी है। बता दें कि देवगढ़ किले पर जाने का कोई रास्ता नहीं है। कच्ची पगडंडी या फिर पहाड़ चढ़कर देवगढ़ किले पर जाना पड़ता है। वहां मोबाइल नेटवर्क भी नहीं है। ग्रामीणों की मांग है कि किले के पास पुलिस तैनात की जाए। इससे लोग शाम के समय किले पर न जाएं और ऐसे हादसे नहीं हों।
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विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर मधुबनी में निकला कैंडल मार्च: लोगों ने बंटवारे में जान गंवाने वालों को श्रद्धांजली दीं – Madhubani News
मधुबनी जिला प्रशासन ने शुक्रवार देर शाम ‘विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस’ पर एक कैंडल मार्च निकाला। जिला पदाधिकारी आनंद शर्मा के नेतृत्व में यह मार्च 1947 के भारत विभाजन के दौरान अपने प्राण गंवाने वाले और विस्थापन की पीड़ा झेलने वाले लाखों लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए आयोजित किया गया था। कैंडल मार्च मधुबनी समाहरणालय परिसर से शुरू होकर जिला पदाधिकारी आवास तक पहुंचा। इस दौरान उपस्थित अधिकारियों और कर्मचारियों ने दिवंगत लोगों की स्मृति में दो मिनट का मौन रखा। मार्च में जिला प्रशासन और मधुबनी नगर निगम के अधिकारी, कर्मचारी तथा जनप्रतिनिधि शामिल हुए। इस मार्च का उद्देश्य नई पीढ़ी को विभाजन के दौरान हुई त्रासदी, पीड़ा और संघर्ष से अवगत कराना था। यह दिवस ऐतिहासिक त्रासदी में जान गंवाने वाले और विस्थापन का दंश झेलने वाले लोगों के प्रति सम्मान एवं श्रद्धांजलि का अवसर है। कैंडल मार्च के समापन के बाद, जिला पदाधिकारी आनंद शर्मा ने जिला पदाधिकारी आवास के सामने मधुबनी नगर निगम द्वारा निर्मित एक पार्क का विधिवत उद्घाटन किया। अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने इस पहल को शहर के लिए उपयोगी बताया। महापौर अरुण राय ने पार्क के निर्माण और उद्घाटन को शहर के विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। उन्होंने कहा कि नगर निगम नागरिकों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए निरंतर कार्य कर रहा है। इस पार्क से आसपास के क्षेत्र के लोगों को बेहतर हरित एवं मनोरंजक स्थल मिलने की उम्मीद है। इस अवसर पर अपर समाहर्ता मुकेश रंजन, सदर अनुमंडल पदाधिकारी चंदन कुमार झा, मधुबनी नगर निगम के नगर आयुक्त उमेश कुमार भारती, महापौर सह भाजपा राष्ट्रीय परिषद सदस्य अरुण राय, उपमहापौर अमानुल्लाह खान, वार्ड पार्षद मनीष सिंह सहित कई अन्य अधिकारी, कर्मचारी और पार्षद उपस्थित थे।
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दावा- चीनी सामान भारत के रास्ते अमेरिका भेजा जा रहा: टैरिफ से बचने की कोशिश; अमेरिकी रिपोर्ट में पुणे, गुजरात और चेन्नई नेटवर्क का हिस्सा
अमेरिकी टैरिफ से बचने के लिए चीनी प्रोडक्ट्स को भारत के रास्ते अमेरिकी बाजारों में पहुंचाया जा रहा है। यह दावा व्हाइट हाउस की रिपोर्ट ‘द ग्रेट ट्रांसशिपमेंट स्कैम: राइज, स्कोप एंड कॉस्ट्स’ में किया गया है। रिपोर्ट के मुताबिक, चीन से आने वाले सामान या पार्ट्स को पहले भारत समेत दूसरे एशियाई देशों में भेजा जाता है। वहां उन्हें प्रोसेस, असेंबल या किसी दूसरे प्रोडक्ट में इस्तेमाल किया जाता है। इसके बाद तैयार सामान को अमेरिका निर्यात किया जाता है। अमेरिकी प्रशासन का आरोप है कि इससे चीन पर लगाए गए टैरिफ से बचने का रास्ता मिल सकता है। रिपोर्ट में इसके लिए दुनिया भर में ट्रेड रूट्स का नेटवर्क बनने की बात कही गई है। भारत के पुणे, गुजरात और चेन्नई को चीन से आने वाले सामान के एक अहम रास्ते के तौर पर बताया गया है। रिपोर्ट में यहां बनने वाले इंडस्ट्रियल पंप और कंप्रेसर में चीनी पार्ट्स का इस्तेमाल होने की संभावना का खास तौर पर जिक्र किया गया है। रिपोर्ट में रूट नेटवर्क को ‘अग्ली सिस्टर सिटीज’ कहा गया चीनी सामान को तीसरे देशों के जरिए अमेरिका भेजने के लिए इस्तेमाल हो रहे रूट नेटवर्क को रिपोर्ट में ‘अग्ली सिस्टर सिटीज’ कहा गया है। इसका मतलब शहरों की सुंदरता या बदसूरती से नहीं है। यह शब्द अलग-अलग देशों के ऐसे औद्योगिक शहरों के लिए इस्तेमाल किया गया है, जहां एक जैसे प्रोडक्ट बनते हैं और वे अमेरिकी बाजार में एक-दूसरे से मुकाबला करते हैं। भारत के मामले में रिपोर्ट ने पुणे, गुजरात और चेन्नई की तुलना अमेरिका के ओहायो राज्य के सिनसिनाटी, डेटन और कोलंबस से की है। इन अमेरिकी शहरों में भी पंप, कंप्रेसर और दूसरे औद्योगिक सामान का उत्पादन और कारोबार होता है। रिपोर्ट का तर्क है कि अगर तीसरे देशों के जरिए कम टैरिफ पर सामान अमेरिका पहुंचता है, तो वहां के स्थानीय निर्माताओं को नुकसान हो सकता है। अमेरिकी कंपनियों को कम कीमत वाले आयात से मुकाबला करना पड़ सकता है। इसका असर उत्पादन, ऑर्डर और नौकरियों पर भी पड़ सकता है। मलेशिया, इंडोनेशिया, वियतनाम और थाईलैंड का भी जिक्र व्हाइट हाउस की रिपोर्ट में सिर्फ भारत का जिक्र नहीं है। इसमें मलेशिया, इंडोनेशिया, वियतनाम और थाईलैंड के उन इलाकों का भी जिक्र है, जहां बड़े पैमाने पर सामान बनाया और दूसरे देशों को भेजा जाता है। रिपोर्ट के मुताबिक ऐसे रास्तों से हर साल अरबों डॉलर का सामान अमेरिकी बाजार तक पहुंच सकता है, जिसमें चीनी पार्ट्स का इस्तेमाल किया गया हो। क्या ये टैरिफ से बचने की कोशिश को साबित करता है? किसी प्रोडक्ट में चीनी पार्ट का इस्तेमाल होना और चीन का सामान सिर्फ भारत के रास्ते अमेरिका भेजना, दोनों अलग बातें हैं। अगर भारत में किसी प्रोडक्ट की असली मैन्युफैक्चरिंग, असेंबली और उस पर काफी काम हो रहा है, तो उसे सिर्फ चीन का सामान घुमाकर अमेरिका भेजना नहीं माना जा सकता। इसलिए यह देखा जाता है कि प्रोडक्ट बनाने में असल काम और प्रोडक्ट की कीमत में कितना हिस्सा किस देश में तैयार हुआ है। सिर्फ किसी प्रोडक्ट में चीनी पार्ट लगा होने से यह साबित नहीं होता कि टैरिफ से बचने की कोशिश हुई है। आज की ग्लोबल सप्लाई चेन में एक प्रोडक्ट के अलग-अलग पार्ट कई देशों में बनते हैं और उसकी आखिरी असेंबली किसी दूसरे देश में हो सकती है। अमेरिका अब AI और डेटा से संदिग्ध शिपमेंट पकड़ेगा रिपोर्ट ऐसे समय आई है जब अमेरिका तीसरे देशों के जरिए टैरिफ से बचने की कोशिशों पर निगरानी बढ़ा रहा है। व्हाइट हाउस ने सीमा पर आने वाले सामान की जांच में टेक्नोलॉजी और डेटा एनालिसिस के ज्यादा इस्तेमाल की बात कही है। रिपोर्ट में ऐसे AI सिस्टम का भी जिक्र है, जो अमेरिकी कस्टम अधिकारियों को संदिग्ध शिपमेंट की पहचान करने में मदद कर सकता है। इसका मकसद पूरी सप्लाई चेन को ट्रैक करना है। —————— यह खबर भी पढ़ें… अमेरिकी सर्वे-10 में 9 पाकिस्तानी भारत को खतरा मानते हैं: भारतीयों के लिए रूस सबसे अहम पार्टनर, पाकिस्तानियों की पहली पसंद चीन 10 में से 9 पाकिस्तानी भारत को खतरा मानते हैं, ये बात अमेरिकी प्यू रिसर्च सेंटर के सर्वे में सामने आई है। इंडियंस भी अपना सबसे बड़ा दुश्मन पाकिस्तान को ही मानते हैं। सर्वे में कहा गया कि दोनों देशों के लोग पड़ोसी के साथ अच्छे रिश्ते चाहते हैं, लेकिन भरोसे की कमी है। पूरी खबर पढ़ें…
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सात अनाज से बनती से मिथिलांचल की खास सतंजा रोटी, स्वाद और सेहत दोनों के लिए है बेमिसाल
मधुबनी: मिथिलांचल के गांवों में आज भी देसी खान-पान की अपनी खास पहचान है. यहां लोग पारंपरिक व्यंजनों को बड़े चाव से खाते हैं. इन्हीं में से एक है सतंजा रोटी. इसे सात अनाज से तैयार किया जाता है. इसे कई जगह मोटी रोटी के नाम से भी जाना जाता है. सतंजा रोटी को खासतौर पर गांवों में रात के खाने में बनाया जाता है. इसे गरमागरम रोटी के रूप में खाया जाता है. साथ में सिलबट्टे पर पिसी मिर्च की चटनी, प्याज, हरी मिर्च, नमक और तेल का स्वाद लिया जाता है. इसके साथ अचार भी परोसा जाता है.
गांव के डिनर का देसी फ्लेवर
अगर आप गांव से हैं तो सतंजा रोटी के बारे में जरूर जानते होंगे. अगर नहीं हैं तो अब जान लीजिए. देश के हर इलाके के खान-पान की अपनी खास पहचान होती है. कहीं रोटी-चटनी पसंद की जाती है तो कहीं दूसरे पारंपरिक व्यंजन. मिथिलांचल में सतंजा रोटी इसी देसी स्वाद का हिस्सा है. सतंजा रोटी सात प्रकार के अनाज को मिलाकर बनाई जाती है. इसे बनाने का तरीका ज्यादा मुश्किल नहीं है. हालांकि, इसका आटा तैयार करने में थोड़ी मेहनत जरूर लगती है.
सात अनाज से बनता है आंटा
इसके लिए चावल, दाल, गेहूं समेत अलग-अलग अनाज लिए जाते हैं. अनाज को पहले अच्छी तरह साफ किया जाता है. इसके बाद उन्हें धोकर सुखाया जाता है. फिर इन्हें भूनकर पीसा जाता है. इस तरह सात अनाज का आटा तैयार होता है. इसी आटे से सतंजा रोटी बनाई जाती है. आजकल बाजार में सतंजा रोटी का तैयार आटा भी आसानी से मिल जाता है. ऐसे में लोग इसे घर पर भी आसानी से बना सकते हैं.
गरम रोटी के साथ मिर्च की चटनी का स्वाद
सतंजा रोटी का असली स्वाद इसे गरमागरम खाने में आता है. आटा तैयार होने के बाद उसे गर्म पानी से गूंथा जाता है. इसके बाद आटे की मोटी रोटी तैयार की जाती है. इस रोटी को तवे पर तेज आंच में सेंका जाता है. रोटी दोनों तरफ से अच्छी तरह पकाई जाती है. इसके बाद इसे कच्चे प्याज, हरी मिर्च, नमक और तेल के साथ खाया जाता है. कई लोग प्याज, हरी मिर्च और नमक को सिलबट्टे पर पीसकर इसकी चटनी बनाते हैं. इस चटनी के साथ गर्म सतंजा रोटी का स्वाद और भी बढ़ जाता है. साथ में अचार भी खाया जाता है.
सात अनाज से बनती है मोटी रोटी
सतंजा रोटी में चावल, गेहूं, मक्का, चूड़ा, दाल और चना समेत सात तरह के अनाज का इस्तेमाल किया जाता है. इसमें कुछ अनाज कच्चे और कुछ भुने हुए भी इस्तेमाल किए जा सकते हैं. सभी अनाज का आटा तैयार करने के बाद उसे गर्म पानी से गूंथा जाता है. इसके बाद आटे की लोई बनाकर उसे हाथों से थपथपाया जाता है. गांवों में इसे दोनों हाथों से ताली पीट-पीटकर मोटा और गोल आकार दिया जाता है. इसके बाद रोटी को गर्म तवे पर तेज आंच में पकाया जाता है. अच्छी तरह सिकने के बाद इसे गरम ही परोसा जाता है. ऊपर से थोड़ा तेल लगाकर प्याज, हरी मिर्च और नमक के साथ खाने पर इसका स्वाद काफी बढ़ जाता है.
खेत में काम करने वालों की पसंदीदा
मिथिलांचल के गांवों में सतंजा रोटी का इस्तेमाल केवल रात के खाने तक सीमित नहीं रहा है. पहले जब लोग खेतों में काम करने या दूर जाने के लिए निकलते थे, तब भी वे इसे अपने साथ ले जाते थे. इसकी एक वजह यह भी थी कि इसे बनाने में ज्यादा समय नहीं लगता था. साथ ही यह पेट को लंबे समय तक भरा रखने वाला भोजन माना जाता है. इसे खाने के बाद जल्दी भूख नहीं लगती थी. इसलिए मेहनत करने वाले लोगों के लिए यह सुविधाजनक भोजन भी था.
पारंपरिक और पौष्टिक भोजन
सात तरह के अनाज से बनने के कारण इसे पारंपरिक और पौष्टिक भोजन के रूप में भी देखा जाता है. अलग-अलग अनाज शरीर के लिए जरूरी पोषक तत्व प्रदान करते हैं. हालांकि, किसी भी भोजन के पोषण संबंधी लाभ व्यक्ति की जरूरत और मात्रा पर निर्भर करते हैं. आज के समय में भी मिथिलांचल के कई गांवों में सतंजा रोटी की परंपरा बनी हुई है. बाजार में इसका आटा उपलब्ध होने से इसे बनाना और भी आसान हो गया है. अगर आप भी देसी और पारंपरिक स्वाद का आनंद लेना चाहते हैं, तो सतंजा रोटी को घर पर बनाकर हरी मिर्च की चटनी और प्याज के साथ जरूर आजमा सकते हैं.
समय से पहले बंद होगी FCNR(B) स्वैप विंडो, आरबीआई के पास आए 56.8 अरब डॉलर
नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की ओर से जून 2026 में शुरू की गई खास फॉरेक्स स्वैप विंडो को उम्मीद से कहीं ज्यादा रिस्पॉन्स मिला है. इस विंडो के जरिए अब तक 56.8 अरब डॉलर से ज्यादा की विदेशी मुद्रा भारत में आ चुकी है. इसमें गैर आवासीय भारतीयों यानी एनआरआई के FCNR(B) डिपॉजिट्स का बड़ा योगदान है. विदेशी मुद्रा की तेज आमद को देखते हुए RBI अब इस सुविधा को तय तारीख 30 सितंबर से पहले ही बंद करने की तैयारी में है.
इस स्कीम का मकसद बैंकों को विदेश से डॉलर जुटाने में मदद करना और देश में विदेशी मुद्रा की उपलब्धता बढ़ाना था. इसके बदले RBI बैंकों को रुपये देता है. इससे एक तरफ देश के फॉरेक्स रिजर्व को सपोर्ट मिलता है, वहीं दूसरी तरफ बैंकिंग सिस्टम में रुपये की नकदी बढ़ती है. ऐसे समय में जब कच्चे तेल की कीमतों और ग्लोबल मार्केट की अनिश्चितता का दबाव रुपये पर बना हुआ है, यह कदम काफी अहम माना जा रहा है.
56.8 अरब डॉलर से ज्यादा का विदेशी पैसा आया
RBI की स्पेशल फॉरेक्स स्वैप विंडो को जून 2026 में शुरू किया गया था. इसका मकसद बैंकों के जरिए ज्यादा से ज्यादा विदेशी मुद्रा भारत लाना था. स्कीम शुरू होने के बाद विदेशी मुद्रा की आमद काफी तेज रही. अब तक कुल इन्फ्लो 56.8 अरब डॉलर के पार पहुंच चुका है. इसमें सबसे बड़ा योगदान FCNR(B) डिपॉजिट्स का रहा है. FCNR(B) का मतलब Foreign Currency Non Resident Bank Account है. इसमें एनआरआई अपनी विदेशी कमाई को विदेशी मुद्रा में भारत के बैंकों में जमा कर सकते हैं.
RBI अब विंडो जल्दी क्यों बंद कर रहा है
शुरुआत में इस सुविधा को 30 सितंबर 2026 तक जारी रखने की योजना थी. लेकिन बैंकों को उम्मीद से ज्यादा विदेशी मुद्रा मिलने लगी. जब स्कीम का तय लक्ष्य तेजी से पूरा हो गया तो इसे सितंबर तक जारी रखने की जरूरत कम हो गई. इसी वजह से RBI अब इस विंडो को समय से पहले बंद करने की तैयारी कर रहा है. आसान भाषा में कहें तो RBI ने जितनी विदेशी मुद्रा जुटाने का लक्ष्य रखा था, वह उससे काफी तेजी से हासिल हो गया.
फॉरेक्स स्वैप आखिर काम कैसे करता है
इस स्कीम को आसान तरीके से समझें. बैंक विदेशों और एनआरआई से डॉलर जुटाते हैं. इसके बाद बैंक ये डॉलर RBI को दे देते हैं. इसके बदले RBI बैंकों को रुपये देता है. यह लेनदेन एक तय अवधि के लिए होता है. अवधि पूरी होने पर बैंक RBI को रुपये वापस करते हैं और RBI उन्हें पहले से तय शर्तों के मुताबिक डॉलर वापस करता है. यानी RBI को स्थायी रूप से डॉलर नहीं मिलते. यह एक तरह का अस्थायी लेनदेन है, जिससे कुछ समय के लिए देश में विदेशी मुद्रा और रुपये दोनों की उपलब्धता बेहतर होती है.
एनआरआई के लिए भी क्यों खास थी यह स्कीम
इस स्कीम के जरिए बैंकों के पास विदेश से डॉलर जुटाने का एक सस्ता रास्ता खुला. सामान्य तौर पर डॉलर जुटाने और उससे जुड़े जोखिम को संभालने के लिए बैंकों को हेजिंग की लागत उठानी पड़ती है. इस योजना में RBI की स्वैप सुविधा से बैंकों को इस लागत का दबाव कम करने में मदद मिली. इससे वे एनआरआई को FCNR(B) डिपॉजिट पर ज्यादा आकर्षक ब्याज देने की स्थिति में आए. कुछ बैंकों ने ऐसे डिपॉजिट पर ब्याज दर करीब 7% तक की पेशकश की. इससे एनआरआई के बीच इस सुविधा की मांग और बढ़ी.
रुपये को संभालने में भी मदद
सहारनपुर में 60 किलो प्रतिबंधित मांस बरामद, दो गिरफ्तार: स्कूटी से ले जा रहे थे आरोपी, पुलिस ने आली की चुंगी से दबोचा – Saharanpur News
सहारनपुर के कोतवाली मंडी क्षेत्र में शुक्रवार दोपहर दो बजे पुलिस ने चेकिंग के दौरान 60 किलोग्राम प्रतिबंधित मांस के साथ दो युवकों को गिरफ्तार किया है। आरोपी स्कूटी पर मांस ले जा रहे थे। पुलिस ने मांस और तस्करी में इस्तेमाल स्कूटी को जब्त कर लिया है। पुलिस टीम मंडी थाना क्षेत्र में गश्त और संदिग्ध वाहनों की चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान आली की चुंगी स्थित मंडी समिति के कूड़ाघर के पास एक स्कूटी पर सवार दो युवकों को रोका गया। तलाशी लेने पर स्कूटी से 60 किलोग्राम प्रतिबंधित मांस बरामद हुआ। पूछताछ में आरोपियों की पहचान कमेला कॉलोनी निवासी आसिफ पुत्र रमजानी और गोटेशाह की चुंगी निवासी कलीम पुत्र बहार अहमद के रूप में हुई। पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर थाने पहुंचाया और बरामद मांस को कब्जे में ले लिया। पुलिस ने बरामद स्कूटी (संख्या UP11CN5314) को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 207 के तहत सीज कर दिया है। इस मामले में कोतवाली मंडी थाने में सीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि जिले में गौकशी, प्रतिबंधित मांस की तस्करी और अन्य आपराधिक गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए लगातार चेकिंग और गश्त अभियान चलाए जा रहे हैं। यह कार्रवाई इसी अभियान का हिस्सा है। आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी करने के बाद दोनों आरोपियों को न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा। यह कार्रवाई एसएसपी के निर्देशन में प्रभारी निरीक्षक सतपाल सिंह भाटी के नेतृत्व में की गई। टीम में उपनिरीक्षक उपेंद्र सिंह, उपनिरीक्षक पंकज मिश्रा, हेड कांस्टेबल महबूब, कांस्टेबल रवि कुमार और कांस्टेबल प्रवीन शामिल थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद मांस कहां से लाया गया था और इसे आगे कहां पहुंचाया जाना था।
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सहरसा में हर घर तिरंगा अभियान यात्रा: अंबेडकर चौक से पटेल मैदान तक भारत माता की जय और जय हिंद के नारे – Saharsa News
सहरसा में स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर शुक्रवार को ‘हर घर तिरंगा अभियान’ के तहत एक तिरंगा यात्रा निकाली गई। राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रीय एकता और तिरंगे के प्रति सम्मान की भावना को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित यह यात्रा अंबेडकर चौक से शुरू होकर पटेल मैदान तक पहुंची। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग हाथों में तिरंगा लेकर देशभक्ति के नारे लगाते हुए शामिल हुए। तिरंगा यात्रा को लेकर विशेष उत्साह यात्रा में बिहार के शिक्षा मंत्री सह सहरसा के प्रभारी मंत्री मिथलेश तिवारी, पूर्व मंत्री डॉ. आलोक रंजन, भाजपा के कई नेता, जनप्रतिनिधि, विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राएं, अधिकारी और आम नागरिक शामिल हुए। जिलाधिकारी दीपेश कुमार, पुलिस अधीक्षक विक्रम सिहाग और नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा सहित कई वरीय पदाधिकारी भी मौजूद रहे। यात्रा के दौरान पूरा मार्ग देशभक्ति के नारों से गूंज उठा और तिरंगे से सराबोर नजर आया। स्कूली बच्चों ने राष्ट्रीय ध्वज लेकर उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिससे राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रीय एकता का संदेश प्रसारित हुआ। नागरिकों में तिरंगा यात्रा को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। 140 करोड़ आबादी के हर दिल में तिरंगा – प्रभार मंत्री प्रभारी मंत्री मिथलेश तिवारी ने इस अवसर पर कहा कि भारत की लगभग 140 करोड़ आबादी के हर दिल में तिरंगा है और हर घर पर तिरंगा फहराने का संकल्प देशवासियों का है। उन्होंने बताया कि तिरंगा हमारे पूर्वजों के बलिदान, देश की आजादी और भारत की समृद्धि का प्रतीक है। उन्होंने नागरिकों से ‘हर घर तिरंगा अभियान’ में सक्रिय भागीदारी की अपील की। पूर्व मंत्री डॉ. आलोक रंजन ने कहा कि जिन वीर शहीदों के बलिदान से देश को आजादी मिली, उन्हें याद करने और उनके स्वाभिमान व समर्पण को सम्मान देने के लिए भाजपा कार्यकर्ता तिरंगा लेकर सड़कों पर निकले हैं। उन्होंने जोर दिया कि तिरंगा देश की एकता, अखंडता और गौरव का प्रतीक है।
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