Saturday, September 19, 2026
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गाजीपुर जिला प्रभारी अजीत चौबे बनाए गए: पूर्व जिलाध्यक्ष भानु प्रताप को मिर्जापुर और सुनील सिंह को अमेठी की जिम्मेदारी – Ghazipur News




गाजीपुर में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने प्रदेश के विभिन्न जिलों और महानगरों के लिए जिला प्रभारियों की नई सूची जारी की है। 19 सितंबर को जारी सूची में गाजीपुर जिले की जिम्मेदारी अजीत चौबे को सौंपी गई है। वहीं, भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष भानु प्रताप सिंह को मिर्जापुर और पूर्व जिलाध्यक्ष सुनील सिंह को अमेठी का प्रभारी बनाया गया है। ये तीनों नाम काशी क्षेत्र के जिला प्रभारियों की सूची में शामिल हैं। संगठनात्मक कामकाज की जिम्मेदारी पार्टी ने जिला प्रभारियों की नियुक्ति संगठन के कामकाज को आगे बढ़ाने, स्थानीय कार्यकर्ताओं के साथ तालमेल बनाने और पार्टी की गतिविधियों को संचालित करने के उद्देश्य से की है। 2027 विधानसभा चुनाव से पहले बदलाव ये नियुक्तियां 2027 के उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले संगठनात्मक तैयारियों के बीच हुई हैं। नई जिम्मेदारियों के तहत जिला प्रभारी अपने-अपने क्षेत्रों में पार्टी के संगठनात्मक कार्यों और गतिविधियों का समन्वय करेंगे। संगठन में सक्रिय भूमिका से जिला प्रभारी तक का सफर अजीत चौबे मूल रूप से सोनभद्र के रॉबर्ट्सगंज के निवासी हैं। वह सोनभद्र में दो बार जिला महामंत्री की जिम्मेदारी संभाल चुके हैं। इसके बाद वर्ष 2019 से 2023 तक सोनभद्र भाजपा के जिलाध्यक्ष रहे। संगठन में उनकी सक्रिय भूमिका को देखते हुए उन्हें मिर्जापुर में मंडल गठन का प्रभारी बनाया गया। इसके बाद उन्होंने चंदौली में सक्रिय सदस्यता अभियान के प्रभारी और भदोही जिले के लोकसभा प्रवासी के रूप में जिम्मेदारी निभाई। वर्तमान में वह काशी क्षेत्र के स्नातक निर्वाचन क्षेत्र में सह-संयोजक की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं।



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अनूपपुर में पारिवारिक कार्यक्रम की आड़ में धर्मांतरण का आरोप: केरल समेत कई राज्यों से लोग आए, पुलिस ने 55 नाम की सूची बनाई, जांच जारी – Anuppur News




अनूपपुर जिला मुख्यालय के वार्ड 9 में शनिवार दोपहर एक घर में चल रहे कार्यक्रम को लेकर विवाद हो गया। आयोजन को पारिवारिक कार्यक्रम बताया जा रहा था, लेकिन शिकायतकर्ताओं का आरोप है कि यह बिना अनुमति धर्मांतरण का कार्यक्रम था। जानकारी के मुताबिक, वार्ड 9 में पास्टर येशु दास के घर पर बड़ी संख्या में लोग जमा हुए थे। स्थानीय लोगों और शिकायतकर्ताओं को जब पता चला कि वहां सामूहिक प्रार्थना और धर्मांतरण से जुड़ी गतिविधियां चल रही हैं, तो उन्होंने तुरंत कोतवाली पुलिस को सूचना दी। शिकायतकर्ताओं का यह भी कहना है कि इस आयोजन के लिए पुलिस या जिला प्रशासन से कोई अनुमति नहीं ली गई थी। इस कार्यक्रम में केरल समेत कई दूसरे राज्यों से भी लोग आए थे, जिससे संदेह और बढ़ गया। सूचना मिलते ही पुलिस टीम शिकायतकर्ताओं के साथ मौके पर पहुंची। घर के मालिक बोले- पारिवारिक कार्यक्रम था घर के मालिक और पास्टर का कहना है कि यह सिर्फ एक निजी पारिवारिक कार्यक्रम था, जिसमें रिश्तेदार और परिचित शामिल हुए थे। इसके उलट, शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया है कि बाहरी राज्यों से आए लोगों को बुलाकर प्रार्थना की आड़ में सभा की जा रही थी। मामले को देखते हुए पुलिस ने स्थिति संभाली और मौके पर मौजूद लोगों के बयान दर्ज किए। नियमानुसार होगी कार्रवाई थाना प्रभारी संजय अशोक एक्का ने बताया कि बिना अनुमति हुई इस सभा और धर्मांतरण के आरोपों की बारीकी से जांच की जा रही है। जांच में जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी। 55 लोगों के नाम की सूची बनाई गई है और सभी के बयान दर्ज किए जा रहे हैं। कार्रवाई की अन्य तस्वीरें…



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बैरगनिया में आभूषण दुकान से 12 अंगूठियां चोरी: ग्राहक बनकर ज्वेलरी दुकान में घुसे चोर, दुकानदार को बातों में उलझा; फरार – Sitamarhi News



सीतामढ़ी के बैरगनिया बाजार में ग्राहक बनकर पहुंचे चोर एक आभूषण दुकान से एक दर्जन से ज्यादा सोने की अंगूठियां लेकर फरार हो गए।

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आरोपियों ने दुकानदार को अलग-अलग डिजाइन के गहने दिखाने के बहाने बातचीत में उलझाया और इसी दौरान अंगूठियां चुरा लीं। घटना के बाद बाजार के आभूषण कारोबारियों में हड़कंप मच गया है।

घटना प्रो. राम एकबाल प्रसाद की आभूषण दुकान की है। बताया जाता है कि कुछ लोग ग्राहक बनकर दुकान पर पहुंचे। उन्होंने दुकानदार से अलग-अलग डिजाइन की सोने की अंगूठियां और अन्य आभूषण दिखाने को कहा। दुकानदार ग्राहकों को गहने दिखाने में व्यस्त हो गए।

दुकानदार को झांसा देकर चुराईं अंगूठियां

इसी दौरान आरोपियों ने दुकानदार को बातों में उलझाकर दुकान में रखी एक दर्जन से ज्यादा सोने की अंगूठियां चोरी कर लीं। वारदात के बाद आरोपी सामान्य ग्राहक की तरह दुकान से निकल गए, जिससे तत्काल चोरी का पता नहीं चल सका।

गहनों की जांच में सामने आई चोरी

कुछ देर बाद दुकान में रखे गहनों की जांच की गई तो कई सोने की अंगूठियां गायब मिलीं। इसके बाद दुकानदार को चोरी का पता चला। घटना की सूचना बैरगनिया थाना पुलिस को दी गई।

दुकानदार की शिकायत पर पुलिस ने प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी है। आरोपियों की पहचान और गिरफ्तारी के लिए पुलिस आसपास के इलाकों में भी जानकारी जुटा रही है।

CCTV फुटेज खंगाल रही पुलिस

पुलिस दुकान के अंदर और आसपास लगे CCTV कैमरों के फुटेज खंगाल रही है। फुटेज के जरिए दुकान पर आए संदिग्ध लोगों की पहचान करने की कोशिश की जा रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि वारदात में कितने लोग शामिल थे।

घटना की जानकारी मिलने के बाद बैरगनिया थानाध्यक्ष ने बाजार के आभूषण कारोबारियों से बात की और सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की सलाह दी। उन्होंने दुकानों के अंदर और बाहर पर्याप्त संख्या में CCTV कैमरे लगाने को कहा है।

दुकान खोलने-बंद करने के समय विशेष सावधानी

थानाध्यक्ष ने दुकानदारों से दुकान खोलने और बंद करने के समय विशेष सावधानी बरतने की अपील की। साथ ही संदिग्ध लोगों की गतिविधियों पर नजर रखने और किसी भी संदिग्ध स्थिति की सूचना तत्काल पुलिस को देने को कहा है।

घटना के बाद बैरगनिया बाजार के अन्य आभूषण दुकानदार भी अपनी दुकानों की सुरक्षा को लेकर सतर्क हो गए हैं। पुलिस का कहना है कि CCTV फुटेज और अन्य बिंदुओं के आधार पर आरोपियों की पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है।



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पैसा छापने वाले वॉरेन बफेट का ‘क‍िसान बेटा’, ज‍िसे सौंपी 13 लाख करोड़ की कंपनी


वैल्यू इन्वेस्टिंग के गुरु , शेयर मार्केट का उस्‍ताद और पैसा छापने की मशीन… वॉरेन बफेट को लोग कुछ ऐसे ही नामों से पुकारते हैं. बर्कशायर हैथवे की लगभग छह दशक तक कमान संभालने के बाद अब उन्‍होंने चेयरमैन का पद छोड़ दिया और अपने बेटे हावर्ड ग्राहम बफेट को 13 लाख करोड़ की यह कंपनी सौंप दी है.हावर्ड ग्राहम को लोग हावी या होवी बफेट के नाम से जानते हैं. 71 साल के हावर्ड अब दुनिया की सबसे बड़ी और सबसे सफल कंपनियों में से एक के चेयरमैन हैं. लेकिन वो अपने पिता की तरह रोज शेयर बाजार की चाल नहीं देखते. उनकी जिंदगी बिल्कुल अलग रही है. वो मार्केट एक्‍सपर्ट से ज्‍यादा क‍िसान रहे हैं. उनकी कहानी बेहद द‍िलचस्‍प है.

हावर्ड ग्राहम बफेट का जन्म 16 दिसंबर 1954 को हुआ था. वो वॉरेन बफेट और उनकी पहली पत्नी सुसान थॉम्पसन बफेट के तीन बच्चों में से बीच वाले हैं. बड़ी बहन सुसी हैं और छोटे भाई पीटर. नाम रखा गया था दादा हावर्ड बफेट और वॉरेन के गुरु बेंजामिन ग्राहम के नाम पर.

हावर्ड ने तीन कॉलेज में पढ़ाई की. अगस्टाना कॉलेज, चैपमैन कॉलेज और यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया इरविन से, लेकिन किसी से डिग्री नहीं ली. कॉलेज छोड़ने के बाद उन्होंने क‍िसानी शुरू की. 1977 में उन्होंने नेब्रास्का में खेती शुरू की. पिता वॉरेन ने उनके लिए जमीन खरीदी और किराए पर दी. बाद में हावर्ड इलिनॉय चले गए. आज वो पाना, इलिनॉय में 1500 एकड़ के पारिवारिक फार्म की देखभाल करते हैं. उनके फाउंडेशन के रिसर्च फार्म एरिजोना और साउथ अफ्रीका में भी फैले हुए हैं.

पिता ने वजन कम करने की शर्त पर खेत किराए पर दिया

हावर्ड से जुड़ा एक क‍िस्‍सा खूब मशहूर है. कहते हैं क‍ि वॉरेन बफेट ने 1980 के दशक में नेब्रास्का में एक खेत खरीदा और बेटे हावर्ड को किराए पर दिया. लेकिन शर्त अनोखी थी. किराए का एक हिस्सा हावर्ड के वजन पर निर्भर करता था. अगर वजन ज्यादा होता तो किराया प्रतिशत बढ़ जाता. वॉरेन चाहते थे कि बेटा सेहत का ध्यान रखे. हावर्ड ने बाद में खुद इस बात को स्वीकार किया था कि पिता का यह तरीका थोड़ा अजीब जरूर था, लेकिन असरदार रहा.

तीन कॉलेज छोड़े, फिर भी शेरिफ बन गए

हावर्ड ने तीन अलग-अलग कॉलेज में दाखिला लिया, लेकिन किसी से ग्रेजुएट नहीं हुए. पढ़ाई छोड़ने के बाद उन्होंने खेती शुरू की. सालों बाद इलिनॉय के मेकन काउंटी में शेरिफ भी बने. यानी दुनिया के सबसे अमीर आदमी के बेटे ने बैज लगाकर कानून व्यवस्था का काम किया. कई लोगों को यकीन नहीं होता कि बफेट का बेटा शेरिफ भी रह चुका है.

एक अरब डॉलर से ज्यादा सिर्फ यूक्रेन को दिए

हावर्ड का फाउंडेशन सिर्फ नाम का परोपकार नहीं करता. रूस के हमले के बाद उन्होंने यूक्रेन में एक अरब डॉलर से ज्यादा की मदद पहुंचाई. प्रिंटिंग प्रेस बचाने से लेकर खाने-पीने और पुनर्निर्माण तक का काम किया. कई मौकों पर खुद वहां गए. बड़े-बड़े देशों की मदद से भी ज्यादा व्यक्तिगत स्तर पर काम किया.

150 से ज्यादा देशों की यात्रा, लेकिन सादा जीवन

हावर्ड 150 से अधिक देशों की यात्रा कर चुके हैं. युद्ध क्षेत्र, जंगल, गरीब इलाके… सब जगह गए. फोटोग्राफी की, किताबें लिखीं. लेकिन निजी जीवन में काफी सादगी पसंद करते हैं. बड़े फार्महाउस या शानदार लाइफस्टाइल के चक्कर में नहीं रहे. इलिनॉय के अपने फार्म पर ही ज्यादा समय बिताना पसंद करते हैं.

’40 चांस’ का सिद्धांत

हावर्ड की एक मशहूर किताब है ’40 Chances’. इसमें उन्होंने लिखा कि किसान को एक फसल में सिर्फ 40 बार मौका मिलता है. इसी तरह जिंदगी में भी बड़े फैसले सीमित होते हैं. इसलिए हर मौके को गंभीरता से लेना चाहिए. ये सोच उनके परोपकार और खेती दोनों में दिखती है.

कंपनी बोर्डों का अनुभव

सिर्फ खेती और चैरिटी नहीं, हावर्ड कई बड़ी कंपनियों के बोर्ड में भी रहे. आर्चर डेनियल्स मिडलैंड, कोका-कोला, कोनाग्रा फूड्स, लिंडसे कॉर्पोरेशन जैसी कंपनियों में डायरेक्टर रहे. कुछ में चेयरमैन भी बने. बर्कशायर हैथवे के बोर्ड में वो 1993 से हैं. यानी 33 साल. वॉरेन बफेट ने खुद कहा कि हावर्ड ने उनसे लंबा अप्रेंटिसशिप किया है.

अब क्या करेंगे चेयरमैन बनकर?

हावर्ड का काम दिन-प्रतिदिन कंपनी चलाना नहीं है. वो नॉन-एग्जिक्यूटिव चेयरमैन हैं. बर्कशायर के सीईओ ग्रेग एबल हैं, जिन्होंने जनवरी 2026 से कमान संभाली हुई है. वॉरेन बफेट ने साफ लिखा, ग्रेग कंपनी चलाएंगे. हावर्ड संस्कृति और मूल्यों की रक्षा करेंगे. ये दोनों चीजें बैलेंस शीट पर लिखी किसी भी चीज से ज्यादा कीमती हैं.

हावर्ड का काम बर्कशायर की उस संस्कृति को बचाना है, जिसमें कंपनियों को आजादी दी जाती है, मैनेजरों का सम्मान किया जाता है, शेयरधारकों से ईमानदारी बरती जाती है और अनावश्यक जटिलता से बचा जाता है. उन्होंने खुद कहा था, ये कोई रॉकेट साइंस नहीं है. चीजों को सिंपल रखना है, जो जरूरी है वो करना है, लोगों के साथ फेयर रहना है.

वॉरेन बफेट का भरोसा

वॉरेन बफेट लंबे समय से कह रहे थे कि चेयरमैन का पद हावर्ड को ही मिलेगा. उनका मानना था कि बेटा कंपनी की आत्मा को समझता है. 2011 में ही उन्होंने संकेत दे दिया था. अब 96 साल की उम्र में उन्होंने आखिरकार यह कदम उठा लिया. वो बोर्ड में बने रहेंगे और सलाह देते रहेंगे, लेकिन मुख्य जिम्मेदारी अब बेटे के कंधों पर है.



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बुरहानपुर में बरसात की फेमस डिश, केले से बनते हैं चटपटे पकोड़े, जानिए बनाने की आसान विधि

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मध्य प्रदेश के बुरहानपुर में बरसात के मौसम में केले के चटपटे पकोड़े बनाए जाते हैं. एक्सपर्ट महिला फूलाबाई ने इसकी आसान विधि बताई, जिसमें केले, बेसन, हरी मिर्च और नमक जैसी सामान्य सामग्री का उपयोग होता है.

मध्य प्रदेश का बुरहानपुर अपनी ऐतिहासिक पहचान के साथ-साथ खानपान के लिए भी जाना जाता है. खासकर बरसात के मौसम में यहां घरों में तरह-तरह के गरमा-गरम पकवान बनाए जाते हैं. इन्हीं में से एक है केले के पकोड़े जो स्वाद में चटपटे और बनाने में बेहद आसान होते हैं. बारिश के मौसम में चाय के साथ केले के पकोड़े खाने का अपना ही मजा है.

एक्सपर्ट महिला ने दी जानकारी
लोकल 18 की टीम को एक्सपर्ट महिला फूलाबाई ने बताया कि यदि आप भी बरसात में घर पर कुछ स्वादिष्ट और अलग बनाना चाहते हैं तो केले के पकोड़े आसानी से तैयार कर सकते हैं.इसके लिए बहुत ज्यादा सामग्री की जरूरत भी नहीं पड़ती. केले बेसन हरी मिर्च और नमक जैसी सामान्य चीजों से यह डिश तैयार हो जाती है.

ऐसे बनाएं केले के पकोड़े
सबसे पहले केले लेकर उन्हें छीलकर छोटे-छोटे टुकड़ों या स्लाइस में काट लिया जाता है. इसके बाद एक बर्तन में बेसन लिया जाता है. इसमें स्वादानुसार नमक और बारीक कटी हुई हरी मिर्च मिलाई जाती है. जरूरत के अनुसार थोड़ा पानी डालकर बेसन का घोल तैयार किया जाता है. घोल न तो बहुत ज्यादा पतला होना चाहिए और न ही बहुत ज्यादा गाढ़ा.कड़ाही में तेल गर्म किया जाता है. केले के टुकड़ों को बेसन के घोल में अच्छी तरह लपेटकर गर्म तेल में डाला जाता है. इन्हें मध्यम आंच पर तब तक तला जाता है जब तक पकोड़े बाहर से सुनहरे और कुरकुरे नहीं हो जाते. इसके बाद इन्हें तेल से निकालकर कुछ देर रखा जाता है.

चटनी से बढ़ता हैं स्वाद
गरमा-गरम केले के पकोड़ों को हरी चटनी, टमाटर की चटनी या अपनी पसंद की चटनी के साथ परोसा जा सकता है. खास बात यह है कि इन्हें बनाने में करीब 25 से 30 मिनट का समय ही लगता है.बुरहानपुर और निमाड़ में बरसात के दिनों में इस तरह के पारंपरिक और चटपटे पकवान लोगों के बीच खास पसंद किए जाते हैं. केले के पकोड़े भी इसी स्वाद की एक आसान मिसाल हैं जिन्हें बड़े और बच्चे सभी पसंद कर सकते हैं.आप भी इस बारिश में घर पर केले के पकोड़े बनाकर परिवार के साथ इसका स्वाद ले सकते हैं.



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सुप्रीम कोर्ट ने पूछा- शराबंदी करके क्या मिला: गुजरात ड्राई स्टेट, फिर भी जहरीली शराब से 600+ मौतें; रोक लगाने से अवैध कारोबार बढ़ जाता है


3 मिनट पहले

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सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि शराबबंदी से शराब की लत और जहरीली शराब से होने वाली मौतें खत्म नहीं होतीं। कोर्ट ने कहा कि जबरन शराबबंदी, शराब की समस्या का समाधान नहीं है।

जस्टिस जेबी पारदीवाला की बेंच ने कहा कि गुजरात में दशकों से शराबबंदी लागू है, लेकिन जहरीली शराब से हो रही मौतें नहीं रुकीं। मेथनॉल मिली शराब से 10 बड़े हादसों में 600 से ज्यादा लोगों की मौत हुई।

सुप्रीम कोर्ट 18 सितंबर को महाराष्ट्र पॉइजन्स रूल्स, 1972 के नियम 18A और 18B रद्द करने का फैसला सुनाते हुए यह टिप्पणी की।

इन नियमों के तहत मेथनॉल खरीदने और रखने को नियंत्रित किया गया था। गैर-दवा निर्माताओं को बिक्री से पहले मेथनॉल में रंग और कड़वा पदार्थ मिलाना जरूरी था।

कोर्ट ने भावनगर, गुजरात और सागर, मध्य प्रदेश की हालिया घटनाओं का भी जिक्र किया। इनमें करीब 13 और 15 लोगों की मौत हुई थी।

सख्ती से शराब का कारोबार अंडरग्राउंड होता है

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि शराब पर पूरी तरह रोक लगाने से शराब का कारोबार अंडरग्राउंड हो जाता है। इससे जहरीली शराब का चलन बढ़ता है।

फैसले में कहा गया, “भावनगर, गुजरात और सागर, मध्य प्रदेश में हाल में हुई जहरीली शराब की घटनाएं अधिकारियों को फिर से जागने और कार्रवाई करने की याद दिलाती हैं।”

महाराष्ट्र के नियमों को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट महाराष्ट्र पॉइजन्स रूल्स के नियम 18A और 18B को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई कर रहा था। इन नियमों के तहत मेथनॉल खरीदने पर रोक लगाई गई थी। गैर-दवा निर्माता को मेथनॉल बेचने से पहले उसमें कड़वा पदार्थ और रंग मिलाना भी जरूरी किया गया था।

ये नियम 1991 में मुंबई के छाया बार से खरीदी गई नकली शराब पीने के बाद हुई मौतों के बाद लागू किए गए थे। कुल 250 लोगों ने यह शराब पी थी, जिनमें से 93 की मौत हो गई थी। बाद में पता चला था कि इन लोगों ने मेथनॉल पीया था। मेथनॉल जहर से कम खतरनाक नहीं होता।

कोर्ट ने इन नियमों को असंवैधानिक और मनमाना बताया। कोर्ट ने कहा कि इनसे उद्योगों पर भारी आर्थिक बोझ पड़ा। ये नियम उन मूल समस्याओं का समाधान नहीं करते, जिनसे जहरीली शराब की घटनाएं होती हैं। इनमें मेथनॉल की चोरी, उसका गलत जगह पहुंचना और भ्रष्टाचार शामिल हैं।

अवैध शराब की सप्लाई रोकने के निर्देश

  • बेंच ने सरकारों को कई निर्देश जारी किए। इनमें शराब की सप्लाई और मांग की कड़ी तोड़ने की जरूरत बताई गई। कोर्ट ने अवैध तरीके से शराब ले जाने पर रोक के लिए अंतरराज्यीय सीमाओं पर निगरानी बढ़ाने को भी कहा।
  • कोर्ट ने कहा कि नगर निगम के कई स्कूल परिसर खुले मैदान होते हैं। इनका इस्तेमाल अक्सर अवैध शराब रखने के लिए किया जाता है।
  • कोर्ट ने सरकारों को केमिकल सॉल्वेंट बनाने वाली औद्योगिक इकाइयों की निगरानी की सलाह दी। ऐसी इकाइयां इन सॉल्वेंट को अवैध रूप से शराब बनाने वालों को बेचती हैं।
  • सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मेथनॉल की ढुलाई अलग टैंकरों या कंटेनरों में की जानी चाहिए। इससे मेथनॉल की चोरी या उसकी जगह दूसरा पदार्थ भरने की संभावना खत्म होगी।

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सुप्रीम कोर्ट की यह खबर भी पढ़ें…

सुप्रीम कोर्ट की सलाह- युवा वकील सीनियर्स से ट्रेनिंग लें: उनके बिना पेशे की बारीकियां नहीं जान सकते, कोर्ट में क्या नहीं बोलना यह भी सीखेंगे

सुप्रीम कोर्ट ने 18 सितंबर को कोर्ट रूम में मौजूद युवा वकीलों से कहा कि सीनियरों के साथ ट्रेनिंग के बिना वे पेशे की बारीकियां नहीं सीख पाएंगे। युवा वकीलों को यह पता होना चाहिए कि कोर्ट में क्या बोलना है और क्या नहीं।

ये बातें जस्टिस बीवी नागरत्ना और ऑगस्टीन जॉर्ज मसीह की बेंच ने ये टिप्पणियां बॉम्बे हाईकोर्ट के एक आदेश से जुड़ी याचिका पर सुनवाई के दौरान कीं। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि कुछ युवा बिना ट्रेनिंग सीधे अपना काम शुरू कर रहे हैं। यह बिल्कुल सही नहीं है। पढ़ें पूरी खबर…



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पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार 3 साल में 7 गुना: 3 से 26 अरब डॉलर पहुंचा; इसमें कमाई कम, कर्ज ज्यादा




पाकिस्तान का विदेशी मुद्रा भंडार पिछले 3 साल में करीब 7 गुना बढ़कर 26.79 अरब डॉलर पहुंच गया है। जनवरी 2023 में पाकिस्तान के पास डॉलर की भारी कमी थी। स्टेट बैंक ऑफ पाकिस्तान (SBP) का रिजर्व सिर्फ 3.08 अरब डॉलर रह गया था। अब 11 सितंबर 2026 तक SBP के पास विदेशी मुद्रा भंडार 21.39 अरब डॉलर पहुंच गया है। यह SBP के इतिहास का सबसे ऊंचा स्तर है। SBP के साथ दूसरे बैंकों के पास मौजूद विदेशी मुद्रा को जोड़ने पर पाकिस्तान का कुल रिजर्व 26.79 अरब डॉलर हो गया है। हालांकि, इस बढ़ोतरी में पाकिस्तान की कमाई से ज्यादा विदेशी कर्ज और बाहरी फंड की भूमिका है। शहबाज बोले- रिजर्व बढ़ना आर्थिक नीतियों की सफलता प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने विदेशी मुद्रा भंडार के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने पर वित्त मंत्री मोहम्मद औरंगजेब, स्टेट बैंक के गवर्नर जमील अहमद और अपनी आर्थिक टीम की तारीफ की। उन्होंने विदेशों में रहने वाले पाकिस्तानियों को भी इस उपलब्धि में योगदान के लिए धन्यवाद दिया। शहबाज ने कहा कि स्टेट बैंक के पास रिकॉर्ड विदेशी मुद्रा भंडार सरकार की आर्थिक टीम की लगातार मेहनत का नतीजा है। उन्होंने इसे इस बात का संकेत बताया कि सरकार की आर्थिक नीतियां सही दिशा में आगे बढ़ रही हैं। उन्होंने यह भी कहा कि पाकिस्तान के अंतरराष्ट्रीय पूंजी बाजार में दोबारा लौटने से दुनिया के निवेशकों का भरोसा उसकी अर्थव्यवस्था पर बढ़ रहा है। एक हफ्ते में 3.06 अरब डॉलर बढ़ा रिजर्व 11 सितंबर को खत्म हुए हफ्ते में पाकिस्तान के विदेशी मुद्रा भंडार में 3.06 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई। स्टेट बैंक के मुताबिक, इसकी मुख्य वजह यूरोबॉन्ड से मिली रकम थी। यानी एक हफ्ते में रिजर्व बढ़ने का मतलब यह नहीं है कि पाकिस्तान ने 3.06 अरब डॉलर की नई कमाई की। इसका बड़ा हिस्सा कर्ज लेकर जुटाई गई रकम थी। यूरोबॉन्ड क्या होता है? यूरोबॉन्ड विदेशी बाजार से कर्ज लेने के लिए जारी किया जाने वाला एक तरह का बॉन्ड है। इसे खरीदने वाले निवेशक सरकार को पैसा देते हैं। सरकार तय समय के बाद यह रकम ब्याज के साथ लौटाती है। पाकिस्तान ने अंतरराष्ट्रीय बाजार में यूरोबॉन्ड जारी कर रकम जुटाई और इसे अपने विदेशी मुद्रा भंडार में शामिल कर लिया। इससे फिलहाल उसके पास विदेशी भुगतान के लिए ज्यादा डॉलर उपलब्ध हो गए हैं, लेकिन आगे इस कर्ज को चुकाना होगा। अभी पाकिस्तान के पास कितने डॉलर हैं? एक हफ्ते पहले कुल रिजर्व 23.72 अरब डॉलर था। यानी सात दिन में इसमें करीब 3.08 अरब डॉलर की बढ़ोतरी हुई। कुल रिजर्व सितंबर 2021 के करीब 27.1 अरब डॉलर के स्तर से अभी थोड़ा कम है। हालांकि, अकेले स्टेट बैंक का 21.39 अरब डॉलर का रिजर्व अब तक का सबसे ऊंचा स्तर है। रिजर्व बढ़ने से पाकिस्तान को क्या फायदा? विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ने से पाकिस्तान के पास डॉलर का बड़ा बफर हो गया है। इन डॉलर का इस्तेमाल तेल, मशीनरी, कच्चा माल और दूसरी जरूरी चीजें खरीदने में किया जा सकता है। विदेशी कर्ज की किस्त और ब्याज चुकाने के लिए भी डॉलर की जरूरत होती है। मौजूदा रिजर्व करीब तीन महीने के आयात खर्च के बराबर है। हालांकि, इसका यह मतलब नहीं है कि पाकिस्तान तीन महीने तक बिना कोई नया डॉलर कमाए काम चला सकता है। लगातार आयात और कर्ज भुगतान के लिए नए डॉलर की जरूरत बनी रहेगी। विदेश में काम कर रहे पाकिस्तानियों से भी मदद विदेशों में काम करने वाले पाकिस्तानियों की ओर से भेजा गया पैसा यानी रेमिटेंस विदेशी मुद्रा का बड़ा स्रोत है। अगस्त में पाकिस्तान को करीब 3.66 अरब डॉलर की रेमिटेंस मिली। जुलाई में यह रकम करीब 3.63 अरब डॉलर थी। इसी दौरान पाकिस्तान का बाकी दुनिया के साथ लेन-देन का घाटा भी कम हुआ। अगस्त में यह करीब 9.8 करोड़ डॉलर रहा, जबकि जुलाई में 44.5 करोड़ डॉलर था। पाकिस्तान का आयात अब भी निर्यात से ज्यादा अगस्त में पाकिस्तान ने करीब 6.64 अरब डॉलर का सामान और सेवाएं आयात कीं, जबकि निर्यात करीब 3.33 अरब डॉलर रहा। यानी पाकिस्तान विदेशों से जितने डॉलर का सामान और सेवाएं खरीद रहा है, उतने डॉलर वह निर्यात से नहीं कमा रहा। जुलाई-अगस्त 2026 में पाकिस्तान का कुल घाटा करीब 54.3 करोड़ डॉलर रहा। पिछले वित्त वर्ष की इसी अवधि में यह 85.3 करोड़ डॉलर था। इससे बाहरी खाते की स्थिति में सुधार तो दिखता है, लेकिन विदेशी मुद्रा की जरूरत अभी भी बनी हुई है। अब रिजर्व को बनाए रखना बड़ी चुनौती पाकिस्तान के लिए अब सिर्फ विदेशी मुद्रा भंडार बढ़ाना ही काफी नहीं होगा। उसे आने वाले महीनों में इसे बनाए रखना भी होगा। इसके लिए तीन चीजें अहम रहेंगी: खासकर तेल की कीमत बढ़ने पर पाकिस्तान का आयात बिल बढ़ सकता है। इससे उसके विदेशी मुद्रा भंडार पर फिर दबाव पड़ेगा। पाकिस्तान को पुराने कर्ज भी चुकाने हैं रिकॉर्ड रिजर्व के बावजूद पाकिस्तान पर पुराने विदेशी कर्ज चुकाने की जिम्मेदारी बनी हुई है। सितंबर से दिसंबर 2026 के बीच उसे IMF को कई भुगतान करने हैं। रॉयटर्स के मुताबिक, पाकिस्तान चीन के साथ 30 अरब युआन की मुद्रा स्वैप व्यवस्था को 2027 में बढ़ाने पर विचार कर रहा है। जरूरत पड़ने पर इस व्यवस्था के जरिए दोनों देशों को एक-दूसरे की मुद्रा उपलब्ध कराई जा सकती है। वहीं, पाकिस्तान अमेरिका के साथ 10 अरब डॉलर की एक्सचेंज स्टेबिलाइजेशन सुविधा को लेकर भी बातचीत कर रहा है। इसका इस्तेमाल विदेशी मुद्रा पर दबाव बढ़ने की स्थिति में किया जा सकता है। इसके अलावा पाकिस्तान का 7 अरब डॉलर का IMF कार्यक्रम भी जारी है। ——————– यह खबर भी पढ़ें… पाकिस्तान के बाद बांग्लादेश में भी तुर्किये की ड्रोन यूनिट पाकिस्तान के बाद अब तुर्किये बांग्लादेश में भी अपनी रक्षा तकनीक का दायरा बढ़ा रहा है। दोनों देश मिलकर ड्रोन बनाने की तैयारी कर रहे हैं। पूरी खबर पढ़ें…



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गुजरात से आने के 3 दिन बाद युवक की मौत: कमरे में फंदे पर लटका मिला; डॉक्टर बोले- दाहिनी आंख निकली थी, शरीर पर मिले घाव – Banswara News




बांसवाड़ा में शुक्रवार को बंद कमरे में फंदे से लटके मिले युवक के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। शव मिलने के दूसरे दिन शनिवार को 3 सदस्यीय मेडिकल बोर्ड की निगरानी में पोस्टमॉर्टम किया गया। प्रारंभिक तौर पर सामने आया कि अर्जुन डिंडोर(20) के शव की दाहिनी आंख निकली हुई थी, पैर से खून निकल रहा था और फंदे से लटकने के बावजूद उसके पैर जमीन पर टिके हुए थे। मेडिकल ज्यूरिस्ट डॉ. संदीप मईड़ा ने बताया- मृतक के शरीर पर चोटों के निशान मिले हैं। गले पर भी खरोंच के निशान थे और आंख निकली हुई थी। प्रथम दृष्टया युवक के साथ मारपीट किए जाने और इसके बाद फंदे से लटकाए जाने की आशंका है। बता दें कि तलवाड़ा थाना क्षेत्र के शीलाभीत गांव में शुक्रवार की सुबह अर्जुन डिंडोर का शव उसके ही दूसरे मकान में फंदे से लटका मिला था। इसके बाद संदिग्ध परिस्थितियों को देखते हुए पिता मोहन ने हत्या की आशंका जताई है। 17 सितंबर को घर से निकला था अर्जुन
पुलिस को सौंपी रिपोर्ट में मृतक के पिता मोहन ने बताया- अर्जुन अहमदाबाद(गुजरात) में मजदूरी करता था। वह 15 सितंबर को अहमदाबाद से घर आया था। 17 सितंबर की सुबह वह घर से निकला, लेकिन वापस नहीं लौटा। परिजनों ने उसके मोबाइल पर फोन किया, लेकिन उसने फोन रिसीव नहीं किया। अगले दिन 18 सितंबर को गांव में स्थित उनके दूसरे मकान में अर्जुन का शव कमरे में फंदे से लटका मिला। परिजनों के अनुसार शव की स्थिति संदिग्ध थी। उसकी दाहिनी आंख निकली हुई थी, पैर से खून निकल रहा था और फंदे पर लटके होने के बावजूद पैर जमीन पर थे। इसके बाद परिजनों ने हत्या की आशंका जताते हुए पुलिस से मामले की जांच की मांग की। मेडिकल बोर्ड ने की जांच, शरीर पर चोटों के निशान मिले
मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने मेडिकल ज्यूरिस्ट सहित तीन सदस्यीय मेडिकल बोर्ड से पोस्टमॉर्टम करवाया। बोर्ड में मेडिकल ज्यूरिस्ट डॉ. सुनील मईड़ा, ईएनटी विशेषज्ञ डॉ. विजय भट्ट और नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. संदीप जोशी शामिल रहे। मेडिकल ज्यूरिस्ट डॉ. संदीप मईड़ा ने बताया- युवक के साथ मारपीट करने के बाद शव फंदे से लटकाने की आशंका है। मेडिकल बोर्ड ने विसरा भी सुरक्षित किया है। हालांकि फाइनल रिपोर्ट आने के बाद ही मौत की वजह स्पष्ट हो सकेगी। थानाधिकारी बोले- हत्या या सुसाइड, दोनों एंगल से जांच कर रहे
थानाधिकारी रूपसिंह ने बताया कि शुरुआती जांच में मृतक की आंख निकली हुई मिली है। शरीर पर धारदार हथियार से हमला या मारपीट के गहरे निशान प्रारंभिक तौर पर नजर नहीं आए थे। युवक फंदे से लटका हुआ मिला था। अब मेडिकल बोर्ड की जांच और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। फिलहाल परिजनों की रिपोर्ट पर मर्ग दर्ज कर पोस्टमॉर्टम के बाद शव परिजनों को सौंप दिया है। सुसाइड के साथ हत्या के एंगल से भी जांच कर रहे हैं।



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अखिलेश बोले-भाजपा को हराना है तो धोखे से बचना होगा: चुनाव से पहले सरकार फिर SIR जैसा रिव्यू कराएगी, हमें सावधान रहना होगा – Uttar Pradesh News




सपा मुखिया अखिलेश यादव ने शनिवार को SIR पर कहा कि चुनाव से पहले सरकार और चुनाव आयोग फिर से रिव्यू कराएंगे। इसके लिए हमें सावधान रहना होगा। भाजपा को हराना है तो हर धोखे से बचना होगा। सपा मुखिया ने कहा- आज देश और किसान के सामने सबसे बड़ा संकट भाजपा ही है। इस सरकार को सत्ता से हटाकर ही देश को संकटों से मुक्ति मिल सकती है। अब तो भाजपा के लोग ही भाजपा से खुश नहीं हैं। उन्होंने कहा- बलरामपुर से हमारे विधायक रहे जगराम पासवान के भाई ने अजय सेठ वाला वीडियो शेयर कर लिया तो केस हो गया। भविष्य में भाजपा की सरकार आ गई तो वीडियो देखने वालों पर भी मुकदमा दर्ज हो जाएगा, उन्हें थाने में बैठा दिया जाएगा। प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान कानपुर देहात के नेता जुनैद सपा में शामिल हो गए हैं। बांदा के मयंक द्विवेदी, श्रावस्ती के भाजपा नेता नंद किशोर, चेयरमैन जितेंद्र कुमार गुप्ता ने भी अखिलेश की पार्टी का दामन थाम लिया। अखिलेश की प्रेस कॉन्फ्रेंस की बड़ी बातें- 1. सपा विधायक राहुल लोधी के घर जाएंगे अखिलेश
सपा मुखिया अखिलेश यादव 24 सितंबर को रायबरेली से सपा विधायक राहुल लोधी के घर जाएंगे। अखिलेश ने कहा कि हम राहुल के घर चाय पीने जाएंगे। जनता कहेगी तो रथ लेकर जाएंगे। दरअसल, 17 सितंबर को रायबरेली में एसपी ऑफिस में सपा कार्यकर्ताओं के मारपीट की गई थी। फिरोज गांधी कॉलेज परिसर में सदस्यता अभियान के दौरान ABVP कार्यकर्ताओं से उनकी भिड़ंत हो गई थी। सपा का आरोप है कि राहुल लोधी से पुलिसवालों ने धक्का-मुक्की की। कार्यकर्ताओं को जमकर पीटा। अखिलेश ने कहा- भाजपा के गुंडों ने रायबरेली में छात्रसभा का कार्यक्रम नहीं होने दिया। संतकबीर नगर में हमारे सांसद पप्पू निषाद पर जानलेवा हमला किया गया। अगर आप सजातीय हैं तो सम्मान मिलेगा, नहीं तो आपको डराया-धमकाया जाएगा। 2. निगेटिव प्रचार के लिए 10 साल में हजारों करोड़ खर्च
अखिलेश ने कहा- निगेटिव प्रचार के लिए 10 साल में हजारों करोड़ खर्च हुए हैं। दुनिया में किसी ने इतना फंड नहीं दिया होगा, जितना भाजपा दे रही है। वो घबराए हुए हैं, इसलिए निगेटिव कंटेंट को बढ़ावा दे रहे हैं। छवि खराब करने की कोशिश कर रहे हैं। महंगाई का दौर है, जो लोग डॉलर और रुपए की तुलना करते थे, वे पूछे मुड़ के देखें। खाने-पीने की चीजें, डीजल-पेट्रोल महंगा हो गया है। नौकरी है नहीं, आय दुगनी करने की बात तो छोड़ दीजिए। 3. सरकार से पूछिए कि कितना आलू खरीदा
सपा मुखिया ने कहा- अभी आलू का विज्ञापन देखा, आप सरकार से पूछिए कि कितना आलू खरीदा, कितने पैसे किसानों को दिए। जवाब मिलेगा कि किसान को एक पैसा भी नहीं मिला। इन्वेस्टमेंट सिर्फ विज्ञापन में दिखाया जा रहा है। नौकरियां सिर्फ बताई जा रही हैं। क्या इसका मतलब है कि सबको नौकरी मिल गई है। झूठा प्रचार किया जा रहा है। हमने दीयों का कम्पटीशन भी देखा है। 4. जब दिल्ली में चुनाव हो सकता है तो यूपी में क्यों नहीं
अखिलेश ने छात्रसंघ चुनाव पर कहा कि यूपी में भी चुनाव हो। जब दिल्ली में चुनाव हो सकता है तो यूपी में क्यों नहीं। दोनों जगह भाजपा की सरकार है। DUSU चुनाव में सपा नहीं लड़ती। लेकिन, हमारे प्रत्याशी को वहां के छात्रों ने लड़ाया। बड़ी संख्या में वोट मिले हैं, हम उनको धन्यवाद देते हैं। 5. बंगाल का चुनाव हम सबने देखा, उसी हिसाब से तैयारी करिए
सपा मुखिया ने कहा- कॉकरोच पार्टी के सदस्य नोएडा गए थे। वहां देखा कि लाइब्रेरी में किताबें नहीं हैं। जब वहां का ये हाल है तो बाकी जगह की क्या ही बात करें। अखिलेश ने कहा- बंगाल का चुनाव हम सबने देखा है। स्टेट पुलिस को बाहर कर दिया था। सेंट्रल फोर्स को तैनात कर दिया था। 10 साल से जो ईमानदार अधिकारी बैठे हैं, जिन्हें कोई मौका नहीं दिया गया, वो कहीं बैठे इंतजार कर रहे हैं। कुछ लोग बीमारी के बहाने मैदान से भाग रहे हैं।



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नेशनल फिल्म अवार्ड विजेता विनोद अनुपम बने CBFC मेंबर: 3 साल के लिए मनोनयन, सिनेमा और OTT कंटेंट का करेंगे सर्टिफिकेशन – Khagaria News


खगड़िया के परबत्ता प्रखंड के कबेला गांव निवासी फिल्म समीक्षक और राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार से सम्मानित विनोद अनुपम को केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड (CBFC) का सदस्य बनाया गया है।

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केंद्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय ने बोर्ड के पुनर्गठन के तहत उन्हें तीन साल के लिए मनोनीत किया है। उनके मनोनयन की खबर से खगड़िया के कला, साहित्य और सिनेमा जगत में खुशी का माहौल है।

कबेला गांव से जुड़ा है नाता

विनोद अनुपम का संबंध खगड़िया के कबेला गांव से है। हालांकि, उनका जन्म मुंगेर जिले के जमालपुर में हुआ था और शुरुआती शिक्षा भी उन्होंने मुंगेर में ही हासिल की।

वर्ष 1984 में उन्होंने भागलपुर विश्वविद्यालय से हिंदी में स्नातकोत्तर की पढ़ाई पूरी की। इसके बाद वर्ष 2000 में फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया (FTII), पुणे से फिल्म का कोर्स किया।

विनोद अनुपम।

2002 में मिला राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार

फिल्म समीक्षा के क्षेत्र में उनके योगदान को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान वर्ष 2002 में मिली। 49वें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में उन्हें ‘सर्वश्रेष्ठ फिल्म समीक्षक’ का सम्मान दिया गया।

इसके बाद भी वे लगातार फिल्म समीक्षा, सिनेमा और फिल्म संस्कृति से जुड़े रहे।

बिहार फिल्म विकास निगम में भी मिली जिम्मेदारी

विनोद अनुपम को अगस्त 2024 में बिहार राज्य फिल्म विकास वित्त निगम का मुख्य सलाहकार भी बनाया गया था। सिनेमा के क्षेत्र में उनके लंबे अनुभव और सक्रियता को देखते हुए अब उन्हें केंद्रीय फिल्म प्रमाणन बोर्ड में महत्वपूर्ण जिम्मेदारी मिली है।

फिल्मों-ऑडियो-विजुअल कंटेंट के प्रमाणन में भूमिका

CBFC सदस्य के तौर पर विनोद अनुपम फिल्मों के सार्वजनिक प्रदर्शन से पहले होने वाली प्रमाणन प्रक्रिया का हिस्सा होंगे।

मौजूदा दौर में सिनेमाघरों के साथ OTT प्लेटफॉर्म पर भी बड़ी संख्या में फिल्में और अन्य ऑडियो-विजुअल कंटेंट दर्शकों तक पहुंच रहे हैं। ऐसे में प्रमाणन प्रक्रिया को लेकर बोर्ड की जिम्मेदारी भी बढ़ी है।

विनोद अनुपम (ब्राउन शर्ट में )

विनोद अनुपम (ब्राउन शर्ट में )

CBFC का सदस्य बनना गर्व की बात

नई जिम्मेदारी मिलने पर विनोद अनुपम ने कहा कि CBFC का सदस्य बनना उनके लिए गर्व की बात है। उन्होंने कहा कि सिनेमा के साथ OTT पर भी लगातार नया कंटेंट आ रहा है, जिससे बोर्ड की जिम्मेदारी काफी बढ़ गई है। उनका प्रयास रहेगा कि दर्शकों तक अच्छी गुणवत्ता वाली और सार्थक फिल्में पहुंच सकें।

खगड़िया के कला-साहित्य जगत में खुशी

विनोद अनुपम के मनोनयन पर खगड़िया के स्थानीय कलाकारों, साहित्यकारों और प्रबुद्धजनों ने प्रसन्नता जताई है। उनका कहना है कि फिल्म समीक्षा के क्षेत्र में विनोद अनुपम के लंबे अनुभव और सिनेमा की गहरी समझ का लाभ अब राष्ट्रीय स्तर पर फिल्म प्रमाणन प्रक्रिया को मिलेगा।

उनके CBFC सदस्य बनने को खगड़िया के लिए भी महत्वपूर्ण उपलब्धि माना जा रहा है।



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