Sunday, August 23, 2026
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जोधपुर में बाइक चोरी तीन आरोपियों को दबोचा: तीन मोटरसाइकिलें बरामद, रात में करते थे वारदात – Jodhpur News




जोधपुर के चौपासनी हाउसिंग बोर्ड थाना पुलिस ने वाहन चोरी की वारदात का खुलासा करते हुए दो आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही पर चोरी की तीन मोटरसाइकिलें जब्त की हैं। इनमें दो बुलेट मोटरसाइकिल भी शामिल है। पुलिस के अनुसार, 13 अगस्त को विशाल लालवानी ने रिपोर्ट दर्ज करवाई थी कि उनकी बुलेट मोटरसाइकिल को उन्होंने 7 अगस्त की रात अपने घर के आगे खड़ा किया था। 8 अगस्त को करीब 12:30 बजे दो अज्ञात युवक मोटरसाइकिल चोरी कर ले गए। रिपोर्ट दर्ज होने के बाद पुलिस ने आरोपियों की तलाश शुरू की। आरोपियों से अन्य मामलों को लेकर पूछताछ थानाधिकारी गोविन्द व्यास ने बताया कि वाहन चोरी की वारदात का खुलासा करने के लिए विशेष टीम का गठन किया गया। टीम ने कार्रवाई करते हुए रफीक (25) पुत्र मोहम्मद गनीफ, निवासी मस्जिद की ढाणी पीपवा, जिला फलोदी और जितेन्द्र उर्फ जितू (20)पुत्र पप्पूराम निवासी मेघवालों की ढाणियां पीपवा, जिला फलोदी को गिरफ्तार किया। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों से वारदात में चोरी की गई दो बुलेट और एक स्पलेंडर मोटरसाइकिल बरामद की गई। जांच के दौरान सामने आया कि आरोपियों ने अन्य क्षेत्रों में भी वाहन चोरी की वारदातें की हैं। इन मामलों में पुलिस की जांच जारी है। रात में शहर में घूमकर करते थे वाहन चोरी पुलिस की पूछताछ में सामने आया कि आरोपी अपनी पहचान छिपाकर रात के समय जोधपुर शहर में आते थे और अलग-अलग इलाकों में घूमकर गली-मोहल्लों में खड़े दुपहिया वाहनों को निशाना बनाते थे। वाहन चोरी करने के बाद वे ग्रामीण क्षेत्रों की ओर निकल जाते थे और मौका मिलने पर दूर-दराज के क्षेत्रों में चोरी के वाहनों को बेच देते थे। कार्रवाई करने वाली टीम में थानाधिकारी गोविन्द व्यास सहित पुलिस टीम के राणाराम, महेन्द्रसिंह, देवेन्द्र पटेल, पूनमचन्द, बद्रीराम, माधाराम और मनीष शामिल रहे।



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मॉरीशस की जरूरत का सारा पेट्रोल-डीजल और एटीएफ सप्लाई करेगी भारत की कंपनी


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India-Mauritius Pact : भारत और मॉरिशस के बीच ईंधन सुरक्षा को लेकर हाल में एक करार हुआ है. इस एग्रीमेंट के तहत इंडियन ऑयल ने मॉरिशस की जरूरत का सारा तेल सप्लाई करने का वादा किया है. केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री ने मॉरिशस दौरे पर इस करार को अंतिम रूप दिया है. इस करार के तहत इंडियन ऑयल मॉरिशस की जरूरत का सारा तेल सप्लाई करेगा.

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मॉरिशस अपनी जरूरत का सारा ईंधन भारत से खरीदेगा.

नई दिल्ली. भारत अपनी जरूरत का तेल भले ही दुनियाभर के 40 देशों से आयात करता है, लेकिन इस कच्चे तेल को साफ कर बनाए पेट्रोल-डीजल की सप्लाई वापस दर्जनों देशों को की जाती है. बात चाहे पड़ोसी देश नेपाल, बांग्लादेश की हो या दूरदराज में स्थित यूरोपीय देशों की, भारतीय तेल कंपनियां इन सभी को लाखों बैरल पेट्रोल-डीजल की सप्लाई हर साल करती हैं. इस लिस्ट में अब एक और नया नाम शामिल होने जा रहा मॉरिशस का. इस आईलैंड देश को पेट्रोल, डीजल और हवाई ईंधन की सप्लाई का काम भारत की ही एक कंपनी को मिला है.

भारत और मॉरिशस ने ईंधन की सप्लाई को लेकर 5 साल का एग्रीमेंट किया है. इस करार के तहत भारत की सरकारी तेल कंपनी इंडियन ऑयल मॉरिशस की जरूरत का सारा पेट्रोल-डीजल और हवाई ईंधन अगले 5 साल तक सप्लाई करेगी. इस करार को हिंद महासागर क्षेत्र में भारत के द्विपक्षीय संबंधों की मजबूती के तौर पर देखा जा रहा है. यह करार पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी के मॉरिशस दौरे पर पूरा किया गया. करार में दोनों देशों के बीच ईंधन सुरक्षा, तेल और गैस की सप्लाई सहित इसके प्रशिक्षण और क्षमता बढ़ाने के तरीकों पर काम करने को लेकर भी कई शर्तें शामिल हैं.

एशिया में बढ़ रहा भारत का दबदबा
इंडियन ऑयल और मॉरिशस के बीच लॉन्ग टर्म एग्रीमेंट के तहत भारतीय कंपनी ने इस देश को गारंटीड तेल सप्लाई को वादा किया है. कंपनी ने कहा है कि इस पर तेल की कीमतों में आ रहे उतार-चढ़ाव का कोई असर नहीं पड़ेगा. यह हाल फिलहाल के वर्ष में किसी भी सरकारी कंपनी की ओर से किया गया दक्षिण एशिया में पहला कोई करार है. इंडियन ऑयल ने इस करार के तहत मॉरिशस की जरूरत का सारा पेट्रोल, डीजल और हवाई ईंधन सप्लाई करने का वादा किया है.

भारत में कितना तेल रिफाइन
भारत दुनिया के बड़े रिफाइनिंग हब में शामिल हो रहा है. भारत की 23 रिफाइनरीज मिलकर हर साल करीब 26.70 करोड़ टन पेट्रोलियम उत्पाद तैयार करती हैं. यही वजह है कि 85 फीसदी कच्चे तेल की जरूरत आयात से पूरी करने वाला हमारा देश पेट्रोलियम उत्पादों के निर्यात में भी तेजी से आगे बढ़ रहा है. भारत से अभी नेपाल और भूटान सहित तमाम देशों को पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात किया जाता है. सरकार का कहना है कि ग्लोबल मार्केट में तेल का संकट होने के बावजूद भारत ने नेपाल और भूटान को सप्लाई में कमी नहीं आने दी. ऐसा ही करार अब मॉरिशस के साथ भी किया गया है.

समंदर के किनारे बंकर बनाने की तैयारी
पेट्रोलियम मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने मॉरिशस के साथ मिलकर समंदर किनारे बंकर बनाने की भी तैयारी कर ली है. दोनों देशों के बीच 27,500 टन की स्टोरेज क्षमता वाला मरीन बंकर बनाने को लेकर करार हुआ है. दोनों देशों के बीच हुए इस करार ने भारत का रुतबा और पकड़ एशिया-प्रशांत क्षेत्र में बढ़ाने का काम किया है. इस करार के साथ ही इंडियन ऑयल को भी अपनी कमाई बढ़ाने का मौका मिला है.

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Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…

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लखनऊ में पान मसाला फैक्ट्रियों पर एफएसडीए की छापेमारी: 1.25 करोड़ से ज्यादा का संदिग्ध माल जब्त; तंबाकू-पान मसाला साथ बनाने पर कार्रवाई – Lucknow News




लखनऊ में पान मसाला बनाने वाली इकाइयों पर खाद्य सुरक्षा एवं औषधि प्रशासन (एफएसडीए) ने बड़ी कार्रवाई की है। शहर की कई पान मसाला इकाइयों की जांच की गई। कुछ इकाइयों में एक ही जगह पान मसाला और तंबाकू का निर्माण भी होता मिला। विभाग ने ऐसी इकाइयों के खिलाफ लाइसेंस निलंबित करने की कार्रवाई शुरू कर दी है। जांच के दौरान खाद्य सामग्री के नमूने भी लिए गए हैं, जिन्हें जांच के लिए प्रयोगशाला भेजा जाएगा। आरके ब्रांड की यूनिट में तंबाकू बनता मिला लखनऊ में राज किशोर सन्स 1972 प्राइवेट लिमिटेड की आरके ब्रांड यूनिट की जांच की गई। यहां से पांच नमूने लिए गए और 76 किलो सामग्री जब्त की गई। जांच के दौरान परिसर में करीब 72 किलो तंबाकू का निर्माण होता मिला। विभाग ने इसे प्रतिबंधित कर दिया।
जांच में एक ही परिसर में पान मसाला, सुपारी और तंबाकू से जुड़ा काम होता मिलने पर लाइसेंस निलंबित करने की संस्तुति की गई है। अधिकारियों ने यूनिट में इस्तेमाल होने वाली सामग्री और निर्माण प्रक्रिया से जुड़ी जानकारी भी जुटाई है। कायम ब्रांड से 38.54 लाख का माल जब्त शिमला द बालाजी स्पेशल फ्लेवर्स प्राइवेट लिमिटेड की कायम ब्रांड यूनिट में भी एफएसडीए की टीम पहुंची। यहां सात नमूने लिए गए और 3,404 किलो सामग्री जब्त की गई। जब्त सामान की कीमत करीब 38.54 लाख रुपए बताई गई है।
अधिकारियों ने मौके पर रखे कच्चे माल और तैयार उत्पाद की जांच की। नमूनों की रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी। कमला पसंद और राजश्री ब्रांड की यूनिट भी जांची केवीएन एफएमसीजी प्राइवेट लिमिटेड की यूनिट में कमला पसंद और राजश्री ब्रांड से जुड़े उत्पादों की जांच की गई। टीम ने चार नमूने लिए और करीब 2,459 किलो कत्था पाउडर जब्त किया। इसकी अनुमानित कीमत 18.44 लाख रुपए बताई गई है।
सत्य नारायण केशो राम प्राइवेट लिमिटेड की कलश ब्रांड यूनिट से भी 10 नमूने लिए गए। यहां सिंथेटिक परफ्यूमरी कंपाउंड, तंबाकू और सैकरीन मिला। जांच में पान मसाला और तंबाकू का काम एक ही परिसर में मिलने पर लाइसेंस निलंबन की संस्तुति की गई है। गोमती इंडस्ट्रीज से 59 लाख की सामग्री जब्त गोमती इंडस्ट्रीज प्राइवेट लिमिटेड में भी टीम ने जांच की। यहां से नौ नमूने लिए गए और 12,307.4 किलो खाद्य सामग्री जब्त की गई। इसकी कीमत करीब 59.38 लाख रुपए आंकी गई है। शिमला गोमती पान प्रोडक्ट्स प्राइवेट लिमिटेड से 245 किलो पान मसाला जब्त हुआ, जिसकी कीमत करीब 6.89 लाख रुपए बताई गई है।
औद्योगिक चूना और दूसरे रसायन भी मिले
लखनऊ की कुछ इकाइयों में जांच के दौरान औद्योगिक चूना, मैग्नीशियम कार्बोनेट, गैम्बियर, लिक्विड पैराफिन और प्रतिबंधित रंग से रंगी सुपारी जैसी सामग्री भी मिली। विभाग ने संदिग्ध और प्रतिबंधित सामग्री को जब्त करने की कार्रवाई की है।
वहीं कुछ इकाइयों में साफ-सफाई और काम करने की जगह की स्वच्छता को लेकर भी कमियां मिलीं। ऐसी इकाइयों को सुधार के लिए नोटिस दिए जा रहे हैं।
तंबाकू और पान मसाला साथ बनाने पर लाइसेंस होगा निलंबित
एफएसडीए के मुताबिक एक ही परिसर में पान मसाला और तंबाकू का निर्माण नियमों के खिलाफ है। जांच में ऐसी चार इकाइयां सामने आई हैं। इनके खिलाफ लाइसेंस निलंबन की कार्रवाई की जा रही है। विभाग का कहना है कि अभियान का मकसद पान मसाला निर्माण में नियमों का पालन कराना और संदिग्ध या मिलावटी सामग्री बाजार में पहुंचने से रोकना है।



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डिप्टी कलेक्टर को अस्पताल में कुत्ते सोते मिले: बच्चों के वार्ड का शौचालय जाम था, 30 की जगह सिर्फ 11 सुरक्षा गार्ड ड्यूटी पर – Neemuch News




नीमच डिप्टी कलेक्टर ने बिना सरकारी गाड़ी के पैदल ट्रामा सेंटर पहुंचकर जिला अस्पताल का निरीक्षण किया। इस दौरान अस्पताल में भारी अव्यस्थाएं, कर्मचारियों की गैरहाजिरी और जगह-जगह गंदगी देखकर उन्होंने जिम्मेदार अधिकारियों को जमकर फटकार लगाई। निरीक्षण के दौरान ओपीडी पर्ची काउंटर के पास चार कुत्ते सोते मिले और टीबी कक्ष के पास फीमेल डॉग ने बच्चे दिए हुए थे, जिस पर नाराजगी जताते हुए तुरंत कुत्तों को बाहर खदेड़ा गया। सबसे बुरी हालत बच्चों के वार्ड की मिली, जहां का शौचालय पिछले दो महीनों से जाम पड़ा था। अधिकारी ने गंदगी की तस्वीरें खींचकर इसे ‘ब्लैक स्पॉट’ बताया और कड़ी कार्रवाई की चेतावनी दी। गार्ड और सफाईकर्मियों का भारी टोटा, मरीजों का लिया फीडबैक जांच में सामने आया कि अस्पताल में 30 की जगह सिर्फ 11 सुरक्षा गार्ड और 60 की जगह केवल 30 सफाईकर्मी ही काम कर रहे हैं। डिप्टी कलेक्टर ने मरीजों से मिलकर इलाज, दवाइयों और खाने की व्यवस्था का हाल जाना। बेडशीट न मिलने की शिकायत पर तुरंत चादरें बिछवाई गईं। इसके अलावा उन्होंने खुद छत पर चढ़कर पानी की टंकी की सफाई जांच की और नवजात शिशुओं की सुरक्षा के लिए एसएनसीयू (SNCU) वार्ड में माताओं के प्रवेश हेतु स्पेशल सिक्योरिटी कार्ड जारी करने के निर्देश दिए। हर दिन अलग अफसर करेगा निरीक्षण, गुटखा-बीड़ी पर लगेगी रोक अस्पताल परिसर में बीड़ी-गुटखा ले जाने पर रोक लगाने के लिए चेकिंग बढ़ाने और परिसर के अंदर कपड़े बेचने वाली महिलाओं को बाहर दुकान लगाने की हिदायत दी गई। कलेक्टर के आदेश पर अब अस्पताल की व्यवस्था सुधारने के लिए हफ्ते के सातों दिन अलग-अलग अधिकारियों की ड्यूटी लगाई गई है, जो रोज निरीक्षण कर कलेक्टर को रिपोर्ट सौंपेंगे।



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नई 33 केवी लाइन का सफल ट्रायल: अररिया में बिजली सप्लाई होगी और मजबूत – Araria News


अररिया के पलासी प्रखंड में निर्बाध और गुणवत्तापूर्ण बिजली आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए एक महत्वपूर्ण पहल की गई है।

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पलासी ग्रिड से 33/11 केवी विद्युत शक्ति उपकेंद्र पलासी तक बिछाई गई नई 33 केवी लाइन का शनिवार को सफल परीक्षण किया गया।

ट्रायल सफल होने के बाद पलासी और बोची उपकेंद्रों को इस नई लाइन से बिजली आपूर्ति शुरू कर दी गई है।

विद्युत कार्यपालक अभियंता, अररिया, गौरव कुमार ने बताया कि पहले पलासी उपकेंद्र को अररिया ग्रिड से निकलने वाले 33 केवी बोची फीडर के माध्यम से बिजली मिलती थी।

दोनों उपकेंद्रों को मिलती रहेगी बिजली

इस पुरानी व्यवस्था में 33 केवी लाइन में खराबी आने पर पलासी और बोची दोनों उपकेंद्रों की आपूर्ति प्रभावित होने का खतरा रहता था।

उन्होंने आगे बताया कि पलासी ग्रिड से नई 33 केवी लाइन के निर्माण से अब बिजली आपूर्ति के लिए एक अतिरिक्त वैकल्पिक व्यवस्था उपलब्ध हो गई है।

इसका अर्थ है कि किसी एक 33 केवी लाइन में खराबी आने पर भी दूसरे 33 केवी लाइन के जरिए पलासी और बोची दोनों उपकेंद्रों को बिजली मिलती रहेगी।

इससे उपभोक्ताओं को बिजली कटौती के दौरान कम परेशानी होगी।

इस नई व्यवस्था से पलासी प्रखंड क्षेत्र में बिजली आपूर्ति की गुणवत्ता और विश्वसनीयता में वृद्धि होने की उम्मीद है।

मौके पर मौजूद रहे कई इंजिनियर

तकनीकी खराबी आने पर वैकल्पिक लाइन से आपूर्ति बहाल करना भी आसान हो जाएगा।

इससे घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ कृषि, छोटे व्यवसायों और अन्य बिजली आधारित गतिविधियों को भी लाभ मिलेगा।

नई 33 केवी लाइन के सफल ट्रायल के दौरान सहायक विद्युत अभियंता, जोकीहाट, जिकेश कुमार; कनीय विद्युत अभियंता, पलासी, राजेश कुमार सहित पलासी ग्रिड के अभियंता और कर्मी मौजूद रहे।

विद्युत विभाग के अधिकारियों ने इस नई व्यवस्था को क्षेत्र में बेहतर बिजली आपूर्ति की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है।



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बिना प्याज-लहसुन के खाने में चाहिए जबरदस्त स्वाद? घर पर बनाएं ये ऑल-राउंडर मसाला

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All Rounder Masala Recipe: एक चम्मच मसाला और खाने का स्वाद बदल जाएगा. कभी-कभी रसोई में सब्जियां और बाकी सामान मौजूद होते हैं, लेकिन स्वाद में वह बात नहीं आती जिसकी उम्मीद होती है. खासकर जब बिना प्याज और लहसुन के खाना बनाना हो, तब यह परेशानी और ज्यादा महसूस हो सकती है. चातुर्मास, व्रत के दिनों या सात्विक और जैन भोजन पसंद करने वाले घरों में यह स्थिति आम है. ऐसे में हर बार अलग-अलग मसालों का इस्तेमाल करने के बजाय अगर एक ऐसा मसाला तैयार मिल जाए, जो सब्जी से लेकर चावल और स्नैक्स तक में काम आ सके, तो खाना बनाना काफी आसान हो जाता है.

यही वजह है कि घर पर तैयार किया गया ऑल-राउंडर मसाला काफी काम का साबित हो सकता है. इसमें कढ़ी पत्ता, मूंगफली, सूखी लाल मिर्च, नारियल, धनिया और जीरा जैसी चीजें शामिल होती हैं. इन चीजों को हल्का भूनकर पीसा जाता है, जिससे मसाले में अच्छी खुशबू और स्वाद आता है. सबसे अच्छी बात यह है कि इसे बनाने के लिए किसी खास या महंगी सामग्री की जरूरत नहीं पड़ती. एक बार बनाकर एयरटाइट डिब्बे में रख दें, फिर जरूरत के हिसाब से खाने में डालते रहें.

क्या है इस होममेड मसाले की खासियत?
इस मसाले की सबसे बड़ी खासियत इसका मल्टीपर्पज होना है. आमतौर पर एक मसाला किसी खास डिश के लिए इस्तेमाल होता है, लेकिन यह मिक्स कई तरह के खाने का स्वाद बढ़ा सकता है. कढ़ी पत्ते और जीरे की खुशबू के साथ मूंगफली और नारियल इसमें हल्का नटी स्वाद देते हैं. सूखी लाल मिर्च खाने में चटखारा बढ़ाती है, अगर घर में कोई व्यक्ति प्याज-लहसुन नहीं खाता, तब भी इस मसाले से रोज के खाने को स्वादिष्ट बनाया जा सकता है. साधारण दाल, खिचड़ी या सब्जी में थोड़ी मात्रा डालने से स्वाद में फर्क साफ महसूस होता है.

ऑल-राउंडर मसाला बनाने के लिए सामग्री
इस मसाले को बनाने के लिए बहुत लंबी लिस्ट की जरूरत नहीं है. इसके लिए खूब सारे कढ़ी पत्ते, भुनी हुई मूंगफली, सूखी कश्मीरी लाल मिर्च, थोड़ा नारियल का बुरादा, साबुत धनिया और जीरा बराबर मात्रा में लें. इसके अलावा स्वाद के अनुसार नमक, थोड़ी हींग, चाट मसाला और थोड़ा नींबू का रस चाहिए. मसालों की मात्रा अपने स्वाद के हिसाब से कम या ज्यादा की जा सकती है, अगर बच्चों के लिए बना रहे हैं तो लाल मिर्च की मात्रा कम रखना बेहतर रहेगा.

ऐसे तैयार करें घर का मसाला
पहले कढ़ी पत्ते करें कुरकुरे
सबसे पहले कढ़ी पत्तों को अच्छी तरह धोकर कपड़े या टिश्यू की मदद से पूरी तरह सुखा लें. यह कदम छोटा जरूर है, लेकिन जरूरी है. पत्तों में पानी रह गया तो उन्हें भूनने में ज्यादा समय लगेगा और मसाला जल्दी खराब भी हो सकता है. अब इन्हें बिना तेल के कड़ाही में धीमी आंच पर भूनें. पत्ते कुरकुरे होने तक चलाते रहें.

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बाकी सामग्री को भी ड्राई रोस्ट करें
अब उसी कड़ाही में मूंगफली, सूखी लाल मिर्च, नारियल का बुरादा, साबुत धनिया और जीरा डालें. सभी चीजों को धीमी आंच पर करीब दो मिनट तक हल्का भूनें. तेज आंच से बचें, क्योंकि नारियल और मसाले जल्दी जल सकते हैं. हल्की खुशबू आने पर गैस बंद कर दें और सारी सामग्री को एक प्लेट में निकाल लें.

पीसकर तैयार करें मसाला
भुनी हुई सामग्री को पूरी तरह ठंडा होने दें. इसके बाद इसे मिक्सी जार में डालें. इसमें नमक, हींग, चाट मसाला और थोड़ा नींबू का रस मिलाएं. अब सभी चीजों को पीसकर बारीक पाउडर तैयार कर लें, अगर आपको थोड़ा दरदरा मसाला पसंद है तो बहुत ज्यादा बारीक पीसने की जरूरत नहीं है. तैयार मसाले को पूरी तरह सूखे और साफ एयरटाइट कांच के जार में भरकर रखें. ध्यान रखें कि मसाला निकालने के लिए हमेशा सूखी चम्मच का इस्तेमाल करें.

सब्जी से खाखरा तक, कई तरह से करें इस्तेमाल
इस मसाले का इस्तेमाल सिर्फ सब्जी तक सीमित नहीं है. जैन या सात्विक सब्जी में थोड़ा सा मसाला डालने पर स्वाद और खुशबू दोनों बढ़ सकते हैं. सादे चावल, पुलाव या खिचड़ी में घी के साथ इसकी थोड़ी मात्रा मिलाकर भी खाया जा सकता है. अगर शाम की चाय के साथ कुछ चटपटा खाने का मन हो तो खाखरा, नमकीन या स्नैक्स पर इसे ऊपर से छिड़क सकते हैं. पराठे के आटे में थोड़ा मसाला मिलाने का तरीका भी अच्छा है. कई बार घर में बना साधारण पराठा इसी छोटे से बदलाव से काफी स्वादिष्ट लगने लगता है.

मसाला बनाते समय इन बातों का रखें ध्यान
मसाले की अच्छी शेल्फ लाइफ के लिए सबसे जरूरी है कि सभी सामग्री अच्छी तरह सूखी और भुनी हुई हो. कढ़ी पत्तों में नमी नहीं रहनी चाहिए. मसाला पीसने के बाद उसे गर्म अवस्था में डिब्बे में बंद न करें. पहले पूरी तरह ठंडा होने दें, फिर एयरटाइट कंटेनर में रखें.



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एक सत्र में बिल लाने-पास कराने का ट्रेंड बढ़ा: मानसून सत्र में 12 में से 11 पारित, 7 बिना चर्चा के ही 5 मिनट में पास


नई दिल्ली21 मिनट पहले

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मानसूत्र सत्र के दौरान लोकसभा में चल रही बहस- फाइल फोटो

संसद में बिल पेश करने और उन्हें पास कराने की रफ्तार पिछले एक साल में बढ़ी है। 18वीं लोकसभा के गठन के बाद से अब तक पेश किए गए 64 बिलों में से 34 यानी 53% बिल उसी सत्र में दोनों सदनों से पास हो गए, जिसमें उन्हें पेश किया गया था। यह आंकड़ा PRS लेजिस्लेटिव रिसर्च के सेशनवाइज डेटा से सामने आया है।

PRS के मुताबिक, 16वीं लोकसभा में 189 में से 63 यानी 33% बिल उसी सत्र में दोनों सदनों से पास हुए थे। 17वीं लोकसभा में यह आंकड़ा बढ़कर 62% हो गया। उस दौरान पेश किए गए 190 बिलों में से 117 उसी सत्र में पास हुए थे।

डेटा तैयार करने वाली संस्था PRS संसद और राज्य विधानसभाओं के कामकाज पर रिसर्च और निगरानी करने वाला स्वतंत्र, गैर-लाभकारी संगठन है।

पहले मानसून सत्र का डेटा ग्राफिक्स से समझिए

मानसून सत्र में सरकार के मूल एजेंडे में 5 नए बिल थे

हाल ही खत्म हुए मानसून सत्र के लिए सरकार के एजेंडे में 5 नए बिल पेश कर उन्हें पास कराने और 2 लंबित बिलों पर विचार कर उन्हें पास कराने की योजना थी। हालांकि, संसद से पास 11 बिलों में से 6 मूल एजेंडे में पेश करने के लिए शामिल नहीं थे।

सरकार के एजेंडे में विचार और पास कराने के लिए शामिल दो पेंडिंग बिलों में से कोई भी पास नहीं हुआ। ये विकसित भारत शिक्षा अधिष्ठान (VBSA) बिल 2025 और फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन (रेगुलेशन) अमेंडमेंट (FCRA) बिल 2026 हैं।

VBSA बिल की जांच कर रही संसदीय समिति ने अभी तक अपनी रिपोर्ट पेश नहीं की है। वहीं, विपक्ष की ओर से बिल वापस लेने की मांग के बीच FCRA अमेंडमेंट बिल को संसद की संयुक्त समिति के पास भेजा गया है।

2024 से 2025 में बदला बिल पास होने का पैटर्न

PRS के रिकॉर्ड के मुताबिक, 18वीं लोकसभा की शुरुआत में उसी सत्र में बिल पास होने की रफ्तार कम थी। इसके मुताबिक बजट सत्र में पेश किए गए 10 में से 5 बिल दोनों सदनों से उसी सत्र में पास हुए।

इससे पहले, 2024 के बजट सत्र में पेश किए गए 11 में से एक भी बिल उसी सत्र में दोनों सदन से पास नहीं हुआ था। इसके बाद के शीतकालीन सत्र में पेश 4 बिल भी सत्र खत्म होने तक पेंडिंग रहे।

शीतकालीन सत्र 2024 में संसद से पास होने वाला एकमात्र बिल भारतीय वायुयान विधेयक 2024 था। इसे पिछले बजट सत्र में पेश किया गया था। 2025 से यह पैटर्न बदल गया।

PRS ने कम समय में बिल पास होने पर चिंता जताई

PRS लेजिस्लेटिव रिसर्च पहले भी कह चुका है कि बिल पेश होने और पास होने के बीच कम समय रहने से सांसदों को प्रस्तावित कानून की जांच के लिए कम समय मिलता है। इससे संबंधित पक्षों के साथ सलाह-मशविरा करने के मौके भी कम हो जाते हैं।

मानसून सत्र में कई बिलों पर हुई चर्चा में लगा समय इस चिंता से जुड़ा है। PRS के मुताबिक, 9 बिल ऐसे पास हुए जिन पर उन्हें पेश करने वाले मंत्री के अलावा किसी सांसद ने बात नहीं की। 11 में से 7 बिल 5 मिनट या उससे कम समय में पास हो गए।

मानसून सत्र 2026 में दोनों सदन का कामकाज

इस साल का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चला। इसमें 19 बैठकें हुईं। NEET-UG पेपर लीक, जंतर-मंतर पर प्रदर्शन कर रहे छात्रों पर पुलिस कार्रवाई और अयोध्या में राम मंदिर को मिले दान की चोरी के मुद्दों पर बार-बार हंगामा हुआ।

PRS के मुताबिक, लोकसभा ने तय समय का केवल 15% और राज्यसभा ने 33% समय काम किया। लोकसभा में प्रश्नकाल तय समय का सिर्फ 1% और राज्यसभा में 12% चला।

पूरे सत्र में लोकसभा का प्रश्नकाल केवल 9 मिनट हुआ। 380 लिस्टेड सवालों में से सिर्फ 2 का मौखिक जवाब दिया गया।

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आखिरी दिन लोकसभा 1 मिनट-राज्यसभा 1 घंटे चली, संसद सत्र खत्म

संसद का मानसून सत्र 13 अगस्त अनिश्चितकाल के लिए स्थगित हो गया। आखिरी दिन लोकसभा की कार्यवाही सिर्फ 1 मिनट चली, जबकि राज्यसभा करीब 1 घंटे चली। राज्यसभा में आखिरी दिन MMDR संशोधन बिल पास हुआ। मानसून सत्र में लोकसभा की 19 बैठकें हुईं। इस हिसाब से 19 बैठकों में करीब 114 घंटे कार्यवाही होनी थी, लेकिन यह करीब 17 घंटे 30 मिनट ही चली। यानी करीब 96 घंटे 30 मिनट कम कार्यवाही हुई। पढ़ें पूरी खबर…



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नाथद्वारा में देवशयन काल में देव प्रतिष्ठा को लेकर विवाद: प्रदर्शनकारी बोले- सनातन परंपराओं की अनदेखी हुई, मर्यादाओं का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं – rajsamand (kankroli) News




राजसमंद जिले के कुंभलगढ़ स्थित फूटा देवल में 18 अगस्त को रामदरबार, राधाकृष्ण और 12 ज्योतिर्लिंग की स्थापना को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। देवशयन काल में देव प्रतिष्ठा किए जाने का आरोप लगाते हुए विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, विप्र फाउंडेशन, युवा ब्रह्मशक्ति, ब्राह्मण महासभा, युवा श्रीमाली समाज और श्रीनाथजी की टोली सहित विभिन्न संगठनों ने नाराजगी जताई। शुक्रवार देर शाम नाथद्वारा की चौपाटी पर परशुराम सेवा मंडल ट्रस्ट के अध्यक्ष का पुतला दहन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समाजजन मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने धार्मिक परंपराओं और शास्त्रीय मान्यताओं के अनुरूप ही देव प्रतिष्ठा किए जाने की मांग उठाई। देवशयन काल में प्रतिष्ठा को बताया शास्त्रसम्मत नहीं
पूर्व पार्षद पूरण श्रीमाली ने कहा कि सनातन धर्म की मान्यताओं और शास्त्रीय परंपराओं के अनुसार देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक भगवान के शयन का काल माना जाता है। इस अवधि में विवाह, उपनयन, देव प्रतिष्ठा सहित मांगलिक एवं शुभ संस्कार नहीं किए जाते। उन्होंने कहा कि इस दौरान भजन-कीर्तन, यज्ञ और धार्मिक साधना जैसे कार्य किए जा सकते हैं, लेकिन देव विग्रहों की स्थापना को शास्त्रसम्मत नहीं माना जाता। उन्होंने कहा कि धर्म और राजनीति के अपने-अपने कार्यक्षेत्र हैं। राजनीतिक और सामाजिक पदों पर बैठे लोगों को धार्मिक विषयों में निर्णय लेने से पहले धर्माचार्यों और शास्त्रों के जानकार विद्वानों से परामर्श करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक हितों के लिए धर्म का सहारा लेकर शास्त्रीय मर्यादाओं का उल्लंघन नहीं किया जाना चाहिए। प्रायश्चित और फिर से प्राण प्रतिष्ठा की मांग
हिंदू संगठनों ने मांग की कि यदि देव प्रतिष्ठा शास्त्र-विरुद्ध तरीके से हुई है तो उसका विधिवत प्रायश्चित कराया जाए और शास्त्रसम्मत मुहूर्त में विग्रहों की पुनः प्राण प्रतिष्ठा कराई जाए। संगठनों का कहना है कि वर्तमान देवशयन काल में प्राण प्रतिष्ठा के लिए उपयुक्त समय नहीं है। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने संबंधित ट्रस्ट के पदाधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने जिम्मेदार पदाधिकारियों को ट्रस्ट से हटाने, प्रायश्चित कराने और धार्मिक परंपराओं के अनुरूप आगे की प्रक्रिया अपनाने की मांग रखी। संगठनों ने चेतावनी दी कि सनातन धर्म की मान्यताओं और धार्मिक परंपराओं के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा। पुतला दहन के दौरान विभिन्न हिंदू संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।



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80 साल बाद पहली बार महिला बन सकती UN चीफ: रेस में अभी 8 दावेदार, इनमें 5 महिलाएं; गुयाना की बिर्केट सबसे आगे


न्यूयॉर्क3 घंटे पहले

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UN के 80 साल के इतिहास में पहली बार कोई महिला महासचिव बन सकती है। फिलहाल इस रेस में कुल 8 दावेदार हैं। इनमें 5 महिलाएं हैं।

शुक्रवार को हुई दूसरे दौर की अनौपचारिक वोटिंग में गुयाना की कैरोलिन रोड्रिग्स बिर्केट सबसे आगे रहीं। वहीं कोस्टा रिका की रेबेका ग्रिन्सपैन दूसरे नंबर पर रहीं।

संयुक्त राष्ट्र के मौजूदा महासचिव एंतोनियो गुटेरेस का दूसरा पांच साल का कार्यकाल 31 दिसंबर 2026 को खत्म होगा। इसलिए अगले महासचिव को चुनने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है।

UN महासचिव पद की उम्मीदवार गुयाना की कैरोलिन रोड्रिग्स बिर्केट। (फाइल फोटो)

UN महासचिव पद की उम्मीदवार गुयाना की कैरोलिन रोड्रिग्स बिर्केट। (फाइल फोटो)

UN महासचिव का चुनाव कैसे होता है?

  • संयुक्त राष्ट्र का महासचिव सीधे जनता या सभी देशों की वोटिंग से नहीं चुना जाता। पहले सुरक्षा परिषद (UNSC) उम्मीदवारों के नामों पर विचार करती है।
  • सुरक्षा परिषद में उम्मीदवारों को लेकर कई दौर की अनौपचारिक और सीक्रेट वोटिंग होती है। इसमें 15 सदस्य देश बताते हैं कि वे उम्मीदवार के साथ हैं, उसके खिलाफ हैं या उनकी कोई राय नहीं है।
  • यह अंतिम या औपचारिक चुनाव नहीं होता। इसका मकसद यह देखना होता है कि कौन उम्मीदवार कितना मजबूत है। अगर किसी उम्मीदवार को कम समर्थन मिलता है, तो वह अपनी दावेदारी वापस भी ले सकता है।

महासचिव बनने के लिए UNSC के स्थायी सदस्यों का साथ जरूरी

  • सुरक्षा परिषद में कुल 15 देश होते हैं। इनमें अमेरिका, रूस, चीन, ब्रिटेन और फ्रांस स्थायी सदस्य हैं। इन पांचों के पास वीटो पावर है।
  • किसी उम्मीदवार को सुरक्षा परिषद से आगे बढ़ने के लिए कम से कम 9 वोट चाहिए। लेकिन सिर्फ 9 वोट मिल जाना काफी नहीं है। पांच स्थायी सदस्यों में से किसी एक का विरोध भी उम्मीदवार की राह रोक सकता है।
  • इसलिए उम्मीदवार को बाकी देशों का समर्थन जुटाने के साथ यह भी देखना होता है कि पांचों स्थायी देशों में से कोई उसके खिलाफ न हो।
  • जब बातचीत और वोटिंग के बाद किसी एक उम्मीदवार के नाम पर पर्याप्त सहमति बन जाती है, तो सुरक्षा परिषद औपचारिक बैठक में उस नाम की सिफारिश करती है।
  • इसके बाद उम्मीदवार का नाम संयुक्त राष्ट्र महासभा के पास जाता है। महासभा में संयुक्त राष्ट्र के सभी 193 सदस्य देश होते हैं।
  • महासभा सुरक्षा परिषद की सिफारिश के आधार पर नए महासचिव की नियुक्ति करती है। कई बार यह मंजूरी बिना औपचारिक वोटिंग के सर्वसम्मति से भी हो जाती है।
  • नियुक्ति के बाद महासचिव का सामान्य कार्यकाल 5 साल का होता है। उसे दूसरी बार भी चुना जा सकता है।
UN महासचिव की रेस में कौन जीतेगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। 5 स्थायी मेंबर की सहमति सबसे जरूरी है। (फाइल फोटो)

UN महासचिव की रेस में कौन जीतेगा, इसका अंदाजा लगाना मुश्किल है। 5 स्थायी मेंबर की सहमति सबसे जरूरी है। (फाइल फोटो)

वोटिंग की प्रक्रिया

अनौपचारिक वोटिंग में UNSC के 15 सदस्य हर उम्मीदवार के लिए अपनी राय देते हैं। इसमें तीन विकल्प होते हैं:

1. समर्थन 2. विरोध 3. कोई राय नहीं

इसका मतलब यह है कि हर देश को उम्मीदवार के पक्ष या विपक्ष में ही वोट देना जरूरी नहीं है। वह ‘कोई राय नहीं’ भी चुन सकता है।

जैसे 30 जुलाई की पहली अनौपचारिक वोटिंग में रेबेका ग्रिन्सपैन को सबसे ज्यादा समर्थन मिला था। उन्हें 10 देशों का समर्थन, 1 का विरोध और 4 देशों ने कोई राय नहीं दी थी।

21 अगस्त की अनौपचारिक वोटिंग में कैरोलिन रोड्रिग्स बिर्केट सबसे आगे रहीं। उन्हें 8 देशों का समर्थन, 3 का विरोध और 4 देशों ने कोई राय नहीं दी।

हालांकि इन वोटिंग के ये आंकड़े अंतिम चुनाव के नतीजे नहीं होते। इनका मकसद सिर्फ यह पता लगाना होता है कि कौन उम्मीदवार सबसे मजबूत स्थिति में है और किसके नाम पर UNSC में सहमति बन सकती है।

विकसित देशों से महासचिव क्यों नहीं बनता ?

1. हर इलाके को मौका देने की कोशिश

संयुक्त राष्ट्र में यह कोशिश रहती है कि महासचिव का पद दुनिया के अलग-अलग हिस्सों के देशों को मिलता रहे। यानी हर बार एक ही इलाके के व्यक्ति को यह पद न मिले। इससे बाकी देशों को भी लगता है कि संयुक्त राष्ट्र सबका है।

1997 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने भी कहा था कि महासचिव चुनते समय अलग-अलग क्षेत्रों को मौका देने और महिला-पुरुष बराबरी का ध्यान रखा जाना चाहिए। हालांकि, यह कोई पक्का नियम नहीं है।

2. महासचिव किसी एक बड़े देश का आदमी न लगे

महासचिव को पूरी दुनिया का चेहरा माना जाता है। इसलिए अगर अमेरिका या चीन जैसी बड़ी ताकत के किसी बड़े नेता को यह पद मिल जाए, तो दूसरे देशों को डर हो सकता है कि संयुक्त राष्ट्र पर उस देश का असर बढ़ जाएगा।

इसी वजह से ऐसे व्यक्ति को प्रायोरिटी मिलती है, जिसे किसी एक बड़ी ताकत के करीब न माना जाए।

3. एशिया-अफ्रीका के देशों की संख्या ज्यादा

संयुक्त राष्ट्र में कुल 193 देश हैं। इनमें एशिया, अफ्रीका और लैटिन अमेरिका के बहुत से देश हैं। इन देशों की भी इच्छा रहती है कि संयुक्त राष्ट्र का मुखिया सिर्फ यूरोप या अमेरिका की सोच वाला न हो, बल्कि दुनिया के बाकी हिस्सों की आवाज भी समझता हो।

लेकिन ऐसा नहीं है कि विकसित देशों के लोगों को कभी मौका ही नहीं मिला। 1991 में कनाडा, नीदरलैंड और नॉर्वे के उम्मीदवार भी महासचिव पद की दौड़ में थे। 2016 में पुर्तगाल के एंतोनियो गुटेरेस महासचिव बने। उस समय पूर्वी यूरोप से महासचिव बनाने की मांग भी काफी जोर पकड़ रही थी।

2006 में शशि थरूर भी भारत से दावेदार रहे

भारत के सांसद शशि थरूर भी संयुक्त राष्ट्र महासचिव पद की दौड़ में शामिल रह चुके हैं। 2006 में मनमोहन सिंह सरकार ने उन्हें भारत की ओर से उम्मीदवार बनाया था।

उस समय थरूर का सबसे बड़ा मजबूत पक्ष उनका लंबा संयुक्त राष्ट्र अनुभव था। वे 1978 से संयुक्त राष्ट्र में काम कर रहे थे। भारत ने उनकी अंतरराष्ट्रीय मामलों की समझ और संयुक्त राष्ट्र में लंबे अनुभव को देखते हुए उनकी उम्मीदवारी रखी थी। भारत का यह भी तर्क था कि अब महासचिव का पद एशिया को मिलना चाहिए।

थरूर के समर्थन में भारत ने कई देशों से संपर्क किया। तत्कालीन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने दूसरे देशों के नेताओं को पत्र लिखे, जबकि थरूर ने भी अलग-अलग देशों के नेताओं से मुलाकात कर समर्थन जुटाया।

अमेरिका के विरोध की वजह से हारे थरूर

2006 में हुई अनौपचारिक वोटिंग के हर दौर में थरूर दक्षिण कोरिया के बान की-मून के बाद दूसरे नंबर पर रहे। पहली वोटिंग में बान की-मून को 12 और थरूर को 10 वोट मिले थे। थरूर के मुताबिक, इन 10 वोटों में चीन का वोट भी शामिल था। बाद की वोटिंग में चीन ने उनके खिलाफ वीटो का इस्तेमाल नहीं किया।

आखिरी वोटिंग में थरूर को 10 देशों का समर्थन मिला, जबकि 3 देशों ने उनके खिलाफ वोट दिया। इनमें अमेरिका भी शामिल था। अमेरिका UNSC के पांच स्थायी सदस्यों में से एक है और उसके पास वीटो पावर है। आखिरकार बान की-मून महासचिव चुने गए।

थरूर ने बाद में लिखा कि उनकी उम्मीदवारी को रोकने में अमेरिका की भूमिका थी। उनके मुताबिक, अमेरिका बान की-मून के समर्थन में था और उसने दूसरे सुरक्षा परिषद सदस्यों के बीच भी उनके पक्ष में समर्थन जुटाया। थरूर के अनुसार, अमेरिका के रुख के पीछे दक्षिण कोरिया के साथ उसके रिश्ते और उस समय कोफी अन्नान के साथ अमेरिकी रिश्तों में आई खटास जैसे कारण भी थे।

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क्विनोआ या राजगिरा: वेट लॉस के लिए कौन से अनाज को डाइट में करें शामिल? जान लें दोनों के पोषक तत्व


वेट लॉस करने के साथ ही हेल्दी डाइट फॉलो करनी है तो क्विनोआ खाना अच्छा होगा, अगर आप भी ऐसा ही सोचते हैं तो जरा अपने देसी अनाज अमरंथ यानि राजगिरा के पोषक तत्वों के बारे में जान लें, पता चल जाएगा कौन सा अनाज बेस्ट है?

वेट लॉस करना है और हेल्दी रहना है तो डाइट में क्विनोआ शामिल कर लो। ये सलाह तो कई बार मिली होगी। लेकिन क्विनोआ खरीदने में घर का बजट हिल जा रहा तो टेंशन ना लें। अपने देसी फूड किसी भी मामले में इन महंगे अनाज से कम नहीं। क्विनोआ जैसे पोषक तत्व चाहिए तो अमरंथ या राजगिरा एक बेस्ट ऑप्शन हो सकता है, जिसमे आपको क्विनोआ से भी ज्यादा पोषण मिल जाएंगे। साथ ही फिटनेस कोच से जाने कि अमरंथ या राजगिरा से बनी कौन सी चीजों को डाइट में शामिल कर सकते हैं।

क्विनोआ में कितनी है पोषक तत्व की मात्रा

वैसे तो क्विनोआ को कंप्लीट प्रोटीन माना जाता है क्योंकि इसमे सारे जरूरी 9 अमीनो एसिड होते हैं। और अगर इसके पोषक तत्वों की बात करें तो एक कप पके हुए क्विनोआ यानि 185 ग्राम में लगभग 5 ग्राम फाइबर, 8 ग्राम प्रोटीन और कैलोरी 222 होती है। वहीं आयरन मात्र 4.6 मिलीग्राम और कैल्शियम मात्र 47 ग्राम होता है। वहीं अब अमरंथ यानि राजगिरा के पोषक तत्वों के बारे में भी जान लें।

राजगिरा या अमरंथ की न्यूट्रिशनल वैल्यू कितनी है

राजगिरा या अमरंथ में आपको ढेर सारे पोषक तत्व मिल जाएंगे। रिपोर्ट के मुताबिक सौ ग्राम कच्चे राजगिरा में 14 ग्राम प्रोटीन, 7 ग्राम फाइबर और 7 ग्राम फैट और 7.6 मिलीग्राम आयरन होता है। वहीं मैग्नीशियम की मात्रा इसमे करीब 248 मिलीग्राम होती है। जबकि कैलोरी लगभग 102 ग्राम ही होती है। जो ना केवल वेट लॉस के लिए आइडियल फूड है बल्कि हड्डियों की मजबूती और पीरियड्स में होने वाले दर्द के लिए भी फायेदमंद है।

राजगिरा को अगर रोजाना डाइट में खाना चाहते हैं तो फिटनेस कोच प्रियांक मेहता ने 3 आसान डिश शेयर की है। जिसे खाकर ना केवल हड्डियों को मजबूत किया जा सकता है बल्कि वेट लॉस करना भी ज्यादा आसान हो जाएगा।

ब्रेकफास्ट में खाएं दलिया

राजगिरा से बनी दलिया ब्रेकफास्ट के लिए हेल्दी डिश है। इसे बनाने के लिए एक कप दूध में तीन चम्मच राजगिरा को डालकर पकाएं। मिठास के लिए शहद और केला डाल सकते हैं।

बनाएं राजगिरा रोटी

दोपहर के खाने के लिए राजगिरा के आटे की रोटी बनाकर तैयार की जा सकती है। लंच में इसे दाल, सब्जी और घी के साथ सर्व करें।

राजगिरा लड्डू बनाएं

राजगिरा को घी में भूनकर तिल और गुड़ के साथ टेस्टी लड्डू तैयार करें। इन लड्डूओं को और भी ज्यादा हेल्दी और पोषण से भरपूर बनाने के लिए इसमे पंपकिन सीड्स भी मिला सकते हैं। बस ध्यान रहे कि गुड़ को ठंडा होने से पहले फटाफट लड्डुओं को बांध लें। राजगिरा के ये लड्डू शरीर को एनर्जी देने में मदद करेंगे।



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