Tuesday, July 21, 2026
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पैसा कमाना है तो आज ही सीखें यह स्किल, नॉर्मल इंजीनियर्स से 7 गुना सैलरी


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FDEs Salary Package : आईटी सेक्टर के युवाओं के लिए रोजगार और मोटी सैलरी का नया अवसर सामने आ गया है. कंपनियां अब एआई और कस्टमर सपोर्ट को मिलाकर एक नया पेशेवर तैयार कर ही हैं, जिन्हें सामान्य इंजीनियर की तुलना में 7 गुना ज्यादा सैलरी मिलती है.

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आईटी सेक्टर में FDEs की डिमांड लगातार बढ़ती जा रही है.

नई दिल्ली. आज का युवा जल्दी अमीर होना चाहता है, अच्छी सैलरी और फाइनेंशियल आजादी की ख्वाहिश रखता है. लेकिन, समस्या ये आती है कि वह कौन सा रास्ता जिससे यह सभी ख्वाहिशें पूरी हो जाएं. अगर आप भी ऐसी ही समस्या से घिरे हैं तो जरा इस तरफ नजर डालें और अपने करियर को आज की डिमांड के आधार पर चुनें. आईटी सेक्टर में एक नई जॉब आई है जिसे फॉरवर्ड डेप्लॉयड इंजीनियर (FDEs) कहते हैं. यह एआई डेवलपमेंट की स्पेशलिस्ट की नई कैटेगरी है और इस सेक्टर में शुरुआती सैलरी नॉर्मल इंजीनियर्स के मुकाबले 7 गुना ज्यादा रहती है. इस सेक्टर में एंट्री लेवल पर ही करीब 18 लाख रुपये के पैकेज से शुरुआत होती है.

हालिया आंकड़े बताते हैं कि FDE को नॉर्मल सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स के मुकाबले करीब 7 गुना ज्यादा सैलरी मिलती है. ऐसे इंजीनियर्स को रिक्रूट करने वालों का कहना है कि इस काम के लिए खास स्किल की जरूरत होती है, जिसमें एआई एक्सपर्ट और कस्टमर के साथ तालमेज दोनों जरूरी होता है. FDEs को एंट्री लेवल पर ही 18 से 25 लाख रुपये का सालाना पैकेज ऑफर होता है. जॉब मार्केट पर नजर रखने वाले डिजिटल प्लेटफॉर्म टीमलीज ने बताया है कि सीनियर लेवल पर FDEs को सालाना 50 से 85 लाख रुपये तक ऑफर किया जाता है. इतना ही नहीं, ऐसे कर्मचारियों को कंपनियां हर साल 15 से 25 फीसदी का इंक्रीमेंट भी मिलता है. इसके मुकाबले एंट्री लेवल पर एक सॉफ्टवेयर इंजीनियर को सालाना 3 से 4 लाख रुपये का ही ऑफर दिया जाता है.

तेजी से बढ़ रही स्किल की डिमांड
टीमलीज डिजिटल की सीईओ नीति शर्मा का कहना है कि इस सेक्टर में टैलेंट की डिमांड तेजी से बढ़ रही है. वित्तवर्ष 2026 की पहली तिमाही से लेकर 2027 की पहली तिमाही तक ऐसे टैलेंट की डिमांड 800 फीसदी बढ़ चुकी है. अब कंपनियां एआई पायलट के छोटे स्तर से बढ़कर लार्ज स्केल पर इसे लागू कर रही हैं. मनीकंट्रोल के अनुसार, बीते मई महीने में देश में OpenAI, Anthropic जैसी कंपनियों में 230 FDEs की डिमांड थी. अब अन्य कंपनियां भी तेजी से इस सेक्टर में टैलेंट की खोज कर रही हैं. फिलहाल भारत में 2,800 से ज्यादा FDEs प्रोफेशनल्स हैं.

कैसे अलग होते हैं FDEs
पारंपरिक सॉफ्टवेयर इंजीनियर्स के मुकाबले FDEs प्रोडक्शन के लिए सीधे तौर पर कस्टमर्स कंपनियों और एआई सिस्टम से जुड़े होते हैं. इन पेशेवरों के पास Python, agentic AI, retrieval-augmented generation (RAG), MLOps, cloud platforms और APIs जैसे सेक्टर्स में एक्सपरटीज होती है. उनका काम बिजनेस वर्कफ्लो को बेहतर बरना और कस्टमर की जरूरतों के हिसाब से प्रोडक्ट तैयार करने में एआई के इस्तेमाल को लागू करना होता है. Xpheno के मुताबिक, इस काम के लिए तकनीकी दक्षता ज्यादा जरूरी है, बजाय कि ज्यादा भाषाओं पर कमांड अथवा अन्य पारंपरिक योग्यताओं के.

भारतीय कंपनियां भी दे रहीं जोर

  • आईटी फर्म टीसीएस ने अपने कुल ग्लोबल फोर्स का 1 से 1.5 फीसदी टैलेंट FDEs में बदलने पर जोर दे रही है. इसका मतलब है कि कंपनी के करीब 8,900 कर्मचारियों को इसका प्रशिक्षण दिया जाएगा.
  • इसके अलावा एचसीएल टेक ने भी अपने फ्रेशर्स और मौजूदा कर्मचारियों को FDEs में बदलने की तैयारी शुरू कर दी है.
  • एलटीएम ने AI1000 इनीशिएटिव लॉन्च किया है, जो कंपनी में 1,000 FDEs की फौज खड़ी करेगी.
  • Coforge ने तो इस साल के आखिर तक कंपनी के लिए 100 स्पेशल FDEs तैयार करने का लक्ष्य रखा है.

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Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें



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अमरोहा में कलेक्ट्रेट पहुंचे हजारों किसान: भारत-अमेरिका ट्रेड डील रोकने, भूमि अधिग्रहण में 4 गुना मुआवजा समेत कई मांगें – Amroha News




अमरोहा में भारतीय किसान यूनियन (टिकैत गुट) सहित अन्य किसान संगठनों ने एक साथ एकत्र होकर मंगलवार को कलेक्ट्रेट पर धरना-प्रदर्शन किया। हजारों की संख्या में पहुंचे किसानों ने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर आवाज बुलंद की और जल्द समाधान न होने पर आंदोलन की चेतावनी दी। किसान ट्रैक्टरों और अन्य वाहनों से कलेक्ट्रेट पहुंचे, जिससे आसपास के क्षेत्र में भारी भीड़ जमा हो गई। उन्होंने प्रशासन के खिलाफ जोरदार नारेबाजी की। प्रदर्शन को देखते हुए कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास भारी पुलिस बल तैनात किया गया था। किसानों ने भारत-अमेरिका ट्रेड डील समझौते को किसानों के लिए हानिकारक बताते हुए उसे रोकने की मांग की। उन्होंने यह भी मांग की कि गंगा एक्सप्रेसवे मार्ग के द्वितीय चरण में मंगरौला से हरिद्वार तक भूमि अधिग्रहण के लिए सर्किल रेट बढ़ाकर बाजार मूल्य का चार गुना मुआवजा दिया जाए। इसके अतिरिक्त, किसानों ने मुरादाबाद कॉरिडोर नेशनल हाईवे 9 के दोनों ओर एक-एक किलोमीटर भूमि को एमडीए के अधीन लाने के प्रस्ताव को तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग की। उन्होंने दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहे छात्रों के प्रदर्शन का भी समर्थन किया और उन पर हुए लाठीचार्ज की निंदा करते हुए छात्रों की मांगें मानने की अपील की। धरने के दौरान संबंधित अधिकारी भी मौके पर पहुंचे और किसानों की समस्याओं को सुना। अधिकारियों ने जल्द समस्याओं का समाधान कराने का आश्वासन दिया। हालांकि, किसानों ने स्पष्ट किया कि यदि उनकी मांगें पूरी नहीं हुईं तो वे अपना आंदोलन जारी रखेंगे।



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7,765.77 करोड़ के अनुपूरक बजट पर कल होगी चर्चा: मुख्यमंत्री सुगम परिवहन के लिए 101 करोड़, भू अर्जन और सिंचाई परियोजना के लिए तीन हजार करोड़ – Bhopal News


भोपाल4 मिनट पहले

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मध्यप्रदेश की मोहन सरकार ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 का पहला अनुपूरक बजट विधानसभा में पेश कर दिया। कुल 7,765.76 करोड़ रुपए के इस बजट में सबसे अधिक 3,000 करोड़ रुपए का प्रावधान नर्मदा घाटी विकास विभाग के लिए किया गया है। यह राशि विभिन्न सिंचाई परियोजनाओं और भूमि अधिग्रहण के भुगतान पर खर्च होगी।

अनुपूरक बजट में राजस्व मद में 907.59 करोड़ रुपए और पूंजीगत मद में 6,858.18 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है। इसके अलावा मुख्यमंत्री सुगम परिवहन सेवा योजना के लिए 101 करोड़ रुपए तथा प्रधानमंत्री ई-बस सेवा योजना के लिए 50 करोड़ रुपए का प्रावधान किया गया है।

सरकार ने स्कूल शिक्षा विभाग के तहत प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को लैपटॉप वितरण के लिए 58.07 करोड़ रुपए मंजूर किए हैं। वहीं गृह विभाग में इंटर ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (ICJS) के लिए 98.83 करोड़ रुपए और पुलिस आधुनिकीकरण के लिए 58.52 करोड़ रुपए रखे गए हैं। राजस्व विभाग को राष्ट्रीय आपदा मोचन निधि (NDRF) से प्राप्त राशि के हस्तांतरण के लिए 397.54 करोड़ रुपए दिए जाएंगे।

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एमपी में UCC बिल पास:सेलेक्ट कमेटी के पास भेजने की मांग खारिज

मध्य प्रदेश विधानसभा के मानसून सत्र के दूसरे दिन मंगलवार को सदन में भारी हंगामे और नारेबाजी के बीच समान नागरिक संहिता (यूसीसी) बिल पास हो गया। विपक्ष के तीखे विरोध और वॉकआउट के प्रयासों के बावजूद विधानसभा अध्यक्ष नरेंद्र सिंह तोमर ने सदन की कार्यवाही जारी रखते हुए विधेयक को पास घोषित कर दिया।पूरी खबर पढ़ें

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BSEB ने सक्षमता परीक्षा-5 का रिजल्ट किया जारी: 14,512 में 4,353 टीचर्स हुए पास, 5 से 8 जून तक चले थे एग्जाम्स – Patna News


पटना8 मिनट पहले

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बिहार बोर्ड के अध्यक्ष एस एम त्यागराजन।

BSEB ने मंगलवार को स्थानीय निकाय के शिक्षकों के लिए आयोजित 5वीं और अंतिम सक्षमता परीक्षा-2026 का रिजल्ट जारी कर दिया है।

बिहार बोर्ड के अध्यक्ष एस एम त्यागराजन ने रिजल्ट की घोषणा की। इसमें 14,512 में से 4,353 शिक्षक हुए हैं, जिसमें 1,870 पुरुष और 2,483 महिला शिक्षक शामिल हैं।

यह परीक्षा क्लास 1–5, 6–8, 9–10 और 11–12 में कार्यरत शिक्षकों के लिए आयोजित की गई थी।

शिक्षक अपना रिजल्ट Application Number की मदद से समिति की वेबसाइट पर देख सकते हैं।

14,512 शिक्षकों ने दी परीक्षा, 4,353 हुए पास

समिति के अनुसार, यह परीक्षा 5 जून से 8 जून 2026 के बीच आयोजित हुई थी। इसमें 6,559 पुरुष और 7,953 महिला, यानी कुल 14,512 शिक्षक अभ्यर्थी शामिल हुए। इनमें 1,870 पुरुष और 2,483 महिला शिक्षक सफल रहे। इस तरह कुल 4,353 शिक्षक परीक्षा में पास हुए। परीक्षा का कुल सफलता प्रतिशत 30 प्रतिशत रहा।

CBT मोड में हुई थी परीक्षा

सक्षमता परीक्षा कंप्यूटर आधारित परीक्षा (CBT) के माध्यम से ली गई थी। इसमें कुल 150 बहुविकल्पीय प्रश्न पूछे गए थे। प्रश्न पत्र तीन भागों में बंटा था। पहले भाग में भाषा के 30 प्रश्न, दूसरे भाग में सामान्य अध्ययन के 40 प्रश्न और तीसरे भाग में संबंधित विषय के 80 प्रश्न थे। परीक्षा के लिए 2 घंटे 30 मिनट का समय दिया गया था।

इन शिक्षकों को भी मिला मौका

इस परीक्षा में ऐसे शिक्षक भी शामिल हुए, जो पहली, दूसरी, तीसरी और चौथी सक्षमता परीक्षा में शामिल नहीं हो सके थे या अनुत्तीर्ण हो गए थे। इसके अलावा ऐसे शिक्षक भी परीक्षा में बैठे, जिनका पहले आवेदन किसी कारण से स्वीकृत नहीं हो पाया था।

कैटेगरी के अनुसार तय थे पासिंग मार्क्स

समिति ने बताया कि सामान्य वर्ग के लिए 40 प्रतिशत, बीसी के लिए 36.5 प्रतिशत, ईबीसी के लिए 34 प्रतिशत, जबकि एससी, एसटी, दिव्यांग और महिला अभ्यर्थियों के लिए 32 प्रतिशत अंक पास होने के लिए निर्धारित थे।

अब होगी काउंसिलिंग

बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यह रिजल्ट फिलहाल प्रोविजनल है। परीक्षा में सफल शिक्षकों की आगे काउंसिलिंग कराई जाएगी।

इसकी तारीख और अन्य जानकारी शिक्षा विभाग की ओर से अलग से जारी की जाएगी। पांचों सक्षमता परीक्षाओं को मिलाकर अब तक 2,71,133 शिक्षक सफल घोषित किए जा चुके हैं।

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बिना प्याज-लहसुन के बनाएं रुई जैसी सॉफ्ट सामा चावल की इडली, सात्विक भोग के लिए परफेक्‍ट


Sawan Special Recipe: सावन का महीना शुरू होते ही ज्यादातर घरों में सात्विक भोजन बनने लगता है. इस दौरान लोग प्याज-लहसुन से परहेज करते हैं और भगवान शिव को शुद्ध व सात्विक भोग अर्पित करते हैं. अगर आप भी इस बार भोग के लिए कुछ हल्का, हेल्दी और स्वादिष्ट बनाना चाहते हैं, तो सामा चावल की इडली(Sama Rice Idli Recipe) एक बेहतरीन विकल्प है. यह इडली न सिर्फ खाने में बेहद मुलायम होती है, बल्कि पचने में भी आसान होती है. खास बात यह है कि इसे बिना प्याज-लहसुन के तैयार किया जाता है, इसलिए यह सावन, व्रत और सात्विक भोजन के लिए बिल्कुल उपयुक्त मानी जाती है.

सामा चावल की इडली बनाने के लिए सामग्री-
1 कप सामा चावल
½ कप दही
½ कप पानी (जरूरत के अनुसार)
1 छोटा चम्मच सेंधा नमक
1 छोटा चम्मच अदरक का पेस्ट (वैकल्पिक)
1 हरी मिर्च बारीक कटी (यदि व्रत में खाते हों)
1 बड़ा चम्मच बारीक कटी हरी धनिया
1 छोटा चम्मच ईनो फ्रूट सॉल्ट या थोड़ा बेकिंग सोडा
इडली मोल्ड को ग्रीस करने के लिए थोड़ा घी

बनाने की आसान विधि-

सबसे पहले सामा चावल को अच्छी तरह धो लें और करीब 2 से 3 घंटे के लिए पानी में भिगो दें. इसके बाद अतिरिक्त पानी निकालकर मिक्सर में दही और थोड़ा पानी डालते हुए मुलायम बैटर तैयार करें. बैटर न ज्यादा पतला हो और न ही बहुत गाढ़ा.

अब इसमें सेंधा नमक, अदरक का पेस्ट, हरी धनिया और चाहें तो बारीक कटी हरी मिर्च मिला दें. बैटर को 15 से 20 मिनट के लिए ढककर रख दें ताकि सभी सामग्री अच्छी तरह मिल जाए.

इडली बनाने से ठीक पहले बैटर में ईनो डालें और ऊपर से एक चम्मच पानी डालते ही हल्के हाथ से मिला लें. अब घी लगे इडली मोल्ड में बैटर भरें और पहले से गर्म स्टीमर में 10 से 12 मिनट तक पकाएं.

इडली पकने के बाद टूथपिक डालकर जांच लें. अगर टूथपिक साफ निकल आए तो इडली तैयार है. कुछ मिनट ठंडी होने दें और फिर चम्मच की मदद से निकाल लें.

ऐसे करें सर्व-
सामा चावल की इडली को नारियल की चटनी, मूंगफली की सात्विक चटनी या दही के साथ परोस सकते हैं. अगर इसे भगवान शिव के भोग के लिए बना रहे हैं, तो पहले भोग लगाएं और उसके बाद परिवार के साथ प्रसाद के रूप में ग्रहण करें.

रुई जैसी सॉफ्ट इडली बनाने के टिप्स-
सामा चावल को पर्याप्त समय तक जरूर भिगोएं. बैटर को बहुत ज्यादा पतला न रखें. ईनो हमेशा स्टीम करने से ठीक पहले डालें. स्टीमर पहले से गर्म होना चाहिए. इडली पकने के बाद तुरंत मोल्ड से न निकालें, 2 से 3 मिनट ठंडी होने दें.

सावन में अगर रोज एक जैसी डिश बनाकर बोर हो गए हैं, तो इस बार सामा चावल की सॉफ्ट इडली जरूर ट्राई करें. यह स्वाद, सेहत और सात्विकता का बेहतरीन मेल है. हल्की होने के कारण इसे नाश्ते, व्रत के भोजन या भगवान शिव के भोग के रूप में भी आसानी से बनाया जा सकता है.



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BSNL का 72 दिन चलने वाला सस्ता प्लान, अनलिमिटेड कॉलिंग के साथ मिल रहे कई बेनिफिट्स


BSNL ने हाल ही में कई सस्ते रिचार्ज प्लान उतारे हैं, जिनमें यूजर्स को अनलिमिटेड कॉलिंग के साथ कई बेनिफिट्स मिलते हैं। सरकारी टेलीकॉम ऑपरेटर के पास एक और सस्ता रिचार्ज प्लान है, जिसमें यूजर्स को 72 दिनों की वैलिडिटी मिलती है। इस प्लान में यूजर्स को अन्य प्लान की तरह ही अनलिमिटेड कॉलिंग और डेटा का बेनिफिट मिलता है।

BSNL का नया प्लान

BSNL ने अपने X हैंडल से इस रिचार्ज प्लान की घोषणा है। यह रिचार्ज प्लान 72 दिनों की वैलिडिटी के साथ आता है। इसमें यूजर्स को पूरे भारत में अनलिमिटेड कॉलिंग का बेनिफिट मिलता है। साथ ही, उन्हें फ्री नेशनल रोमिंग का लाभ भी दिया जाता है। भारत संचार निगम लिमिटेड अपने इस सस्ते प्लान में यूजर्स को डेली 2GB डेटा का लाभ मिलता है। इसके अलावा डेली 100 फ्री SMS का भी लाभ मिलता है। BSNL के इस प्रीपेड प्लान की कीमत 485 रुपये है।

भारत संचार निगम लिमिटेड ने इससे पहले 299 रुपये वाला एक सस्ता प्लान भी उतारा है। BSNL के इस प्रीपेड प्लान में पूरे महीने भर यानी 30 दिनों की वैलिडिटी मिलती है। यह प्लान अनलिमिटेड कॉलिंग और फ्री नेशनल रोमिंग के साथ आता है। इसमें पूरे भारत में कहीं भी किसी भी नंबर पर कॉल करने के लिए कोई एक्स्ट्रा चार्ज नहीं लिया जाता है। साथ ही, यह प्लान डेली 3GB हाई स्पीड डेटा और 100 फ्री SMS के साथ आता है।

नेटवर्क किया अपग्रेड

BSNL ने पिछले कुछ साल में अपने नेटवर्क को अपग्रेड करने का काम किया है। भारत संचार निगम लिमिटेड ने पिछले साल नवंबर में पूरे भारत में 4G सर्विस लॉन्च की है। यही नहीं, BSNL ने 5G सर्विस लॉन्च करने की भी तैयारी की है। बीएसएनएल ने इसके लिए पिछले साल करीब 1 लाख 4G मोबाइल टावर लगाने का काम किया है। इसके अलावा कंपनी लगातार मोबाइल टावर को अपग्रेड करने का काम कर रही है।

भारत संचार निगम लिमिटेड ने अपने नेटवर्क में पिछले कुछ महीनों में भारी मात्रा में नए यूजर्स भी जोड़े हैं। ट्राई की नई रिपोर्ट के मुताबिक, BSNL के यूजर्स की संख्यां 9.3 करोड़ के पार पहुंच गई है। अप्रैल और मई के महीने में कंपनी ने करीब 1 लाख नए यूजर्स अपने नेटवर्क में जोड़े हैं।

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EWS के लिए पंचायत-निकाय चुनाव में आरक्षण की मांग: अलग आयोग बनाने पर भी दिया जोर, अधिकारों को लेकर विप्र फाउंडेशन के किया प्रदर्शन – Jhunjhunu News




झुंझुनूं में आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग (EWS) के संवैधानिक अधिकारों और उनके सही तरीके से लागू करने की मांग को लेकर विप्र फाउंडेशन (जिला इकाई) ने प्रदर्शन किया। फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने प्रधानमंत्री और राजस्थान के मुख्यमंत्री के नाम मांग-पत्र सौंपा। इसमें EWS वर्ग को अन्य आरक्षित वर्गों की तरह सभी सुविधाएं और अधिकार देने के साथ दो प्रमुख मांगें रखी गईं। 103वें संविधान संशोधन का दिया हवाला विप्र फाउंडेशन के पदाधिकारियों ने बताया कि संविधान के 103वें संशोधन के तहत सामान्य वर्ग के आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को शिक्षा, रोजगार और समान अवसर देने के लिए 10 प्रतिशत EWS आरक्षण का प्रावधान किया गया था। उन्होंने कहा कि जमीनी स्तर पर आज भी इस वर्ग के लोगों को इसका पूरा फायदा नहीं मिल पा रहा है। इसी को देखते हुए सरकार से जल्द जरूरी कदम उठाने की मांग की गई है। पंचायत और निकाय चुनाव में आरक्षण की मांग फाउंडेशन ने मांग की कि आने वाले पंचायत और नगरीय निकाय चुनावों में EWS वर्ग के लिए सीटें आरक्षित की जाएं। इससे राजनीति और लोकतंत्र में इस वर्ग की भागीदारी सुनिश्चित हो सकेगी। EWS आयोग बनाने की मांग मांग-पत्र में राज्य स्तर पर एक स्वतंत्र और मजबूत EWS आयोग बनाने की मांग भी की गई है। फाउंडेशन का कहना है कि यह आयोग आय सीमा, पात्रता, प्रमाण पत्र बनाने की प्रक्रिया और सरकारी योजनाओं के सही तरीके से लागू होने की निगरानी करेगा। विप्र फाउंडेशन के जिला संयोजक उमाशंकर महमिया और संगठन महामंत्री रामगोपाल महमिया ने सरकार से आग्रह किया कि EWS वर्ग के हितों की रक्षा और उनके सशक्तिकरण के लिए इन मांगों पर जल्द विचार कर जरूरी कार्रवाई की जाए। मांग-पत्र सौंपने के दौरान कमलकांत शर्मा, नीरज शर्मा, राजदीप महर्षि, संजय शर्मा, ममता शर्मा, एडवोकेट अंजू शर्मा, पूनम शर्मा, विद्या पुरोहित, आशा शरण, उषा शर्मा सहित विप्र फाउंडेशन के कई पदाधिकारी और अन्य लोग मौजूद रहे।



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दिल्ली में भाजपा की नई टीम घोषित: 2027 एमसीडी और 2029 लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर हुआ गठन – New Delhi News




दिल्ली भाजपा अध्यक्ष हर्ष मल्होत्रा ने सोमवार को प्रदेश संगठन की नई टीम-2026 की घोषणा कर दी। नई टीम में कई बड़े और चर्चित चेहरों को जगह नहीं मिली है। वहीं, संगठन में लंबे समय से सक्रिय रहे नेताओं को प्रमोट कर महामंत्री, उपाध्यक्ष और मंत्री जैसे महत्वपूर्ण पदों की जिम्मेदारी सौंपी गई है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, नई टीम के गठन में 2027 के एमसीडी चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखा गया है। क्षेत्रीय और जातीय समीकरणों के साथ-साथ संगठनात्मक अनुभव को प्राथमिकता दी गई है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष के अनुमोदन और केंद्रीय नेतृत्व से परामर्श के बाद टीम का गठन किया गया। मल्होत्रा ने कहा उन्हें उम्मीद है कि नई टीम दिल्ली में संगठन को और मजबूत करेगी तथा केंद्र और दिल्ली सरकार की योजनाओं को जन-जन तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। घोषित 38 पदाधिकारियों में से 19 नेता पिछली टीम में भी जिम्मेदारी निभा चुके हैं। वहीं, तीन पूर्व मोर्चा अध्यक्षों को इस बार मुख्य संगठन में शामिल किया गया है। पार्टी ने विष्णु मित्तल, योगिता सिंह और मोहनलाल गिराहा को प्रदेश महामंत्री बनाया है, जबकि सतीश गर्ग को एक बार फिर कोषाध्यक्ष की जिम्मेदारी सौंपी गई है। नई टीम में 10 उपाध्यक्ष और 9 मंत्रियों की नियुक्ति की गई है। इसके अलावा, प्रवीण शंकर कपूर को दोबारा मीडिया प्रमुख बनाया गया है। डॉ. अनिल गुप्ता को मुख्य प्रवक्ता और रोहित उपाध्याय को सोशल मीडिया प्रमुख की जिम्मेदारी दी गई है।
नई टीम की प्रमुख नियुक्तियां
-महामंत्री: विष्णु मित्तल, योगिता सिंह, मोहनलाल गिराहा
-कोषाध्यक्ष: सतीश गर्ग
-मीडिया प्रमुख: प्रवीण शंकर कपूर
-मुख्य प्रवक्ता: डॉ. अनिल गुप्ता
-सोशल मीडिया प्रमुख: रोहित उपाध्याय
-आईटी प्रमुख: पुनीत अग्रवाल
10 नए उपाध्यक्ष
-राजेश भाटिया
-सुनील यादव
-ऋचा पांडेय मिश्रा
-कौशल मिश्रा
-सारिका जैन
-विनोद बछेती
-विक्रम बिधूड़ी
-रंजीत कश्यप
-सोना कुमारी
-विजय सोलंकी
संगठन में क्या है खास?
-कुल 38 पदाधिकारियों की घोषणा।
-19 नेता पिछली टीम में भी रहे शामिल।
-तीन पूर्व मोर्चा अध्यक्षों को मुख्य टीम में जिम्मेदारी।
-क्षेत्रीय और जातीय संतुलन पर विशेष ध्यान।
-2027 एमसीडी और 2029 लोकसभा चुनाव को ध्यान में रखकर टीम का गठन।



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GATE 2027 Exam की तारीखों का हुआ ऐलान, जानें इस बार क्या है नया, साथ ही रजिस्ट्रेशन प्रोसेस भी जानिए


ग्रेजुएट एप्टीट्यूड टेस्ट इन इंजीनियरिंग (GATE) 2027 परीक्षा की तारीखें जारी कर दी गई हैं। GATE परीक्षा 6, 7, 13, 14, 20 और 21 फरवरी 2027 को सुबह की शिफ्ट (सुबह 9:30 बजे से दोपहर 12:30 बजे तक) और दोपहर की शिफ्ट (दोपहर 2:30 बजे से शाम 5:30 बजे तक) में आयोजित की जाएगी। आपको बता दें कि GATE 2027 की ऑफिशियल वेबसाइट लॉन्च कर दी गई है और रजिस्ट्रेशन प्रोसेस 14 अगस्त से ऑफिशियल वेबसाइट(gate2027.iitm.ac.in) पर शुरू होगा। इसके लिए उम्मीदवार 21 सितंबर 2026 तक GATE के लिए अप्लाई कर सकते हैं।

इस बार नया क्या है?

आइए अब आपको यह बताते हैं कि इस बार क्या नया किया गया है। बता दें कि GATE 2027 में कई अहम बदलाव किए गए हैं और उसमें से एक बदलाव रोबोटिक्स एंड ऑटोमेशन (RA) पेपर की शुरुआत है। इसके साथ ही IIT मद्रास ने कुछ खास विषयों के सिलेबस में भी बदलाव किया है।

GATE 2027 के लिए कैसे अप्लाई करें?

अब आपको यह बताते हैं कि आप कैसे अप्लाई कर सकते हैं। आपको बता दें कि जो उम्मीदवार GATE 2027 के लिए अप्लाई करना चाहते हैं, उन्हें सबसे पहले तो ऑफिशियल वेबसाइट gate2027.iitm.ac.in पर जाना होगा। इसके बाद वहां जाकर आप अप्लाई कर सकते हैं। आइए इसे आसान भाषा में और क्रम के अनुसार बताते हैं।

  1. सबसे पहले आपको ऑफिशियल वेबसाइट – gate2027.iitm.ac.in पर जाना होगा।
  2. इसके बाद GATE 2027 रजिस्ट्रेशन लिंक पर क्लिक करना होगा।
  3. इतना करने के बाद जरूरी जानकारी के साथ एप्लीकेशन फ़ॉर्म को भरें और जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपलोड भी करें।
  4. अब आपको GATE 2027 एप्लीकेशन फीस का भुगतान करना होगा और फिर सबमिट पर क्लिक करना होगा।
  5. इसके बाद GATE 2027 एप्लीकेशन फ़ॉर्म की PDF सेव करें और उसका हार्ड कॉपी प्रिंट निकाल लें।

GATE 2027 की जरूरी तारीखें

आइए अब आपको GATE 2027 की जरूरी तारीखों के बारे में बताते हैं। GATE 2027 का रजिस्ट्रेशन 14 अगस्त से शुरू होगा और अंतिम तारीख 21 सितंबर है। वहीं बढ़ी हुई तारीख के साथ रजिस्ट्रेशन का लास्ट डेट 30 सितंबर है। वहां GATE 2027 परीक्षा की तारीखें: 6, 7, 13, 14, 20 और 21 फरवरी है। यह भी बता दें कि शहर आवंटन की सूचना 4 जनवरी को दी जाएगी और GATE का रिजल्ट 19 मार्च को जारी होगा।

GATE 2027 के लिए योग्यता क्या है?

आप अगर GATE 2027 के लिए अप्लाई करना चाहते हैं तो फिर यह जानना भी जरूरी है कि इसका योग्यता क्या है। आपको बता दें कि अप्लाई करने वाले उम्मीदवारों का इनमें से कोई एक होना जरूरी है:

  1. अभी अंडरग्रेजुएट डिग्री प्रोग्राम के तीसरे या उससे ऊपर के साल में हों।
  2. किसी मान्यता प्राप्त संस्थान से इंजीनियरिंग, टेक्नोलॉजी, आर्किटेक्चर, साइंस, कॉमर्स, आर्ट्स या ह्यूमैनिटीज में डिग्री पूरी कर ली हो।
  3. डिग्री प्रोग्राम MoE/AICTE/UGC/UPSC या उनके अंतरराष्ट्रीय समकक्षों द्वारा स्वीकृत होने चाहिए।

GATE 2027 एप्लीकेशन फीस

इसमें अप्लाई करने वाले महिला/SC/ST/PwD उम्मीदवार की फीस प्रति पेपर (रेगुलर) 1 हजार रुपए और प्रति पेपर (लेट) का 1 हजार 500 रुपए होगा। वहीं अन्य उम्मीदवारों के लिए यह फीस अलग है। अन्य उम्मीदवारों के लिए प्रति पेपर (रेगुलर) 2 हजार रुपए और प्रति पेपर (लेट) 2 हजार 500 है।

GATE 2027 के बारे में ज़्यादा जानकारी के लिए, कृपया आधिकारिक वेबसाइट – gate2027.iitm.ac.in पर जाएं।

(Report: Arnab Mitra)

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नेपाल में एक रुपए के सिक्के से विवादित-नक्शा नहीं हटेगा: इसमें भारत के इलाकों को अपना दिखाया; नई डिजाइन का प्रस्ताव लौटाया


4 घंटे पहलेलेखक: काठमांडू से रमेश पोख्रेल

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नेपाल सरकार ने एक रुपए के सिक्के से विवादित राष्ट्रीय नक्शा हटाने का प्रस्ताव खारिज कर दिया है। इस नक्शे में भारत के लिपुलेख, कालापानी और लिम्पियाधुरा को नेपाल का हिस्सा दिखाया गया है।

नेपाल राष्ट्र बैंक (NRB) ने पहले प्रस्ताव रखा था कि एक रुपए के सिक्के पर छपे नेपाल के विवादित नक्शे की जगह मुस्तांग के ऐतिहासिक मठ की तस्वीर लगाई जाए। इस नक्शे को सिक्के से हटाने की खबर जैसे ही बाहर आई, इसका विरोध होने लगा।

इसके बाद मंत्रालय ने नेपाल राष्ट्र बैंक को निर्देश दिया कि डिजाइन में बौद्ध मठ के साथ नेपाल का राष्ट्रीय नक्शा भी शामिल किया जाए। इसके बाद संशोधित प्रस्ताव दोबारा मंजूरी के लिए भेजा जाए।

इससे पहले कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया जा रहा था कि नेपाल सरकार ने एक रुपये के नए सिक्के को मंजूरी दे दी है।

तस्वीर नेपाल के 1 रुपए के सिक्के की है, जिस पर विवादित नक्शा उकेरा गया है।

तस्वीर नेपाल के 1 रुपए के सिक्के की है, जिस पर विवादित नक्शा उकेरा गया है।

मौजूदा सरकार बनने से पहले ही प्रस्ताव तैयार हुआ

अधिकारियों के मुताबिक, यह प्रस्ताव मौजूदा सरकार बनने से पहले तैयार होना शुरू हो गया था। इसका मकसद नेपाल की मुद्रा पर देश की अलग-अलग सांस्कृतिक और ऐतिहासिक धरोहरों को जगह देना था।

नेपाल राष्ट्र बैंक के एक अधिकारी ने कहा,

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नेपाल के कई नोटों और सिक्कों पर पहले से ही पशुपतिनाथ मंदिर और जानकी मंदिर जैसे हिंदू धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों की तस्वीरें हैं। यह महसूस किया गया कि बौद्ध विरासत को पर्याप्त जगह नहीं मिली है। इसलिए घर मठ को चुना गया क्योंकि इसका ऐतिहासिक महत्व बहुत बड़ा है। साथ ही इससे मुस्तांग में पर्यटन को भी बढ़ावा मिलेगा।

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लो घेकर मठ नेपाल के अपर मुस्तांग में स्थित है। माना जाता है कि इसकी स्थापना आठवीं शताब्दी में गुरु पद्मसंभव (गुरु रिनपोछे) ने की थी। इतिहासकार इसे नेपाल के सबसे पुराने बौद्ध मठों में से एक ही नहीं, बल्कि पूरे हिमालयी क्षेत्र के सबसे प्राचीन बौद्ध मठों में भी गिनते हैं।

तस्वीर नेपाल के अपर मुस्तांग क्षेत्र में स्थित लो घेकर मठ की है। इसे नेपाल के सबसे प्राचीन बौद्ध मठों में गिना जाता है।

तस्वीर नेपाल के अपर मुस्तांग क्षेत्र में स्थित लो घेकर मठ की है। इसे नेपाल के सबसे प्राचीन बौद्ध मठों में गिना जाता है।

1 रुपए को बनाने में 2 रुपए से ज्यादा खर्च

नेपाल राष्ट्र बैंक कैबिनेट के निर्देश के मुताबिक नया डिजाइन तैयार करेगा, जिसमें राष्ट्रीय नक्शा और लो घेकर मठ दोनों होंगे। सरकार की अंतिम मंजूरी मिलने के बाद ही नए सिक्के की ढलाई शुरू होगी।

नेपाल राष्ट्र बैंक एक रुपए के सिक्के की धातु और वजन बदलने की तैयारी भी कर रहा है। अधिकारियों के अनुसार, इस समय एक रुपए का एक सिक्का बनाने में दो रुपए से भी ज्यादा खर्च आता है। इसलिए इसका उत्पादन आर्थिक रूप से घाटे का सौदा बन गया है। नई डिजाइन में सिक्के का वजन भी कम किया जाएगा, जिससे निर्माण लागत घटेगी।

10 रुपए के सिक्के की डिजाइन भी बदलेगी

इसके अलावा 10 रुपए के सिक्के पर दैलेख के भुर्ति देवल मंदिर समूह को शामिल करने का प्रस्ताव भी विचार चल रहा है।

नेपाल राष्ट्र बैंक 10 रुपये के सिक्के का डिजाइन भी बदलने पर विचार कर रहा है। प्रस्ताव के अनुसार इस सिक्के पर दैलेख जिले के भुर्ति देवल मंदिर समूह की तस्वीर हो सकती है। यह 22 मंदिरों का समूह है, जिसका निर्माण 14वीं और 15वीं शताब्दी में खास मल्ल शासकों के समय हुआ था।

नेपाल में मुद्रा के डिजाइन बदलने का इतिहास भी पुराना है। राजशाही के दौर में नोटों और सिक्कों पर राजा महेंद्र, राजा बीरेन्द्र और राजा ज्ञानेन्द्र की तस्वीरें छपी होती थीं। लेकिन वर्ष 2006 के राजनीतिक बदलाव के बाद इनकी जगह माउंट एवरेस्ट, वन्यजीव, राष्ट्रीय स्मारक और सांस्कृतिक प्रतीकों को शामिल किया गया।

नेपाल में सिक्के को अपनाने की मंजूरी कैसे मिलती है

  • नेपाल राष्ट्र बैंक अधिनियम और नेपाल राष्ट्र बैंक नोट एवं सिक्का नियमावली के मुताबिक किसी भी नए नोट या सिक्के के डिजाइन को लागू करने से पहले कई चरणों वाली मंजूरी प्रक्रिया से गुजरना पड़ता है।
  • सबसे पहले नोट और सिक्का डिजाइन समिति डिजाइन तैयार करती है। इस समिति में गवर्नर, डिप्टी गवर्नर, इतिहासकार, पुरातत्वविद, भाषाविद और अन्य विशेषज्ञ शामिल होते हैं।
  • इसके बाद डिजाइन को नेपाल राष्ट्र बैंक का निदेशक मंडल मंजूरी देता है। फिर इसे वित्त मंत्रालय के माध्यम से अंतिम मंजूरी के लिए मंत्रिपरिषद के पास भेजा जाता है।
  • कैबिनेट की मंजूरी के बिना किसी नई या बदली डिजाइन वाले नोट या सिक्के को जारी नहीं किया जा सकता।

2020 के नक्शे के बाद उठा विवाद

भारत-नेपाल सीमा विवाद 2020 में हुई थी। भारत ने उत्तराखंड के लिपुलेख दर्रे तक सड़क का उद्घाटन किया। नेपाल ने इसका विरोध करते हुए मई 2020 में नया राजनीतिक नक्शा जारी किया, जिसमें कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा को अपने क्षेत्र का हिस्सा दिखाया।

इसके बाद जून 2020 में नेपाल की संसद ने संविधान संशोधन कर इस नक्शे को आधिकारिक मान्यता दे दी। तब से यही नक्शा सरकारी दस्तावेजों, स्कूल की किताबों, पासपोर्ट, 100 रुपए के नोट और 1 व 2 रुपए के सिक्कों पर इस्तेमाल हो रहा है। इसके बाद सरकार ने नए 1 रुपए के सिक्के की डिजाइन में भी इसी आधिकारिक नक्शे को बनाए रखने का फैसला किया।

भारत ने नेपाल के इस कदम पर कड़ी आपत्ति जताई थी। भारत का कहना है कि कालापानी, लिपुलेख और लिम्पियाधुरा भारतीय क्षेत्र हैं और सीमा विवाद का समाधान दोनों देशों के बीच बातचीत से होना चाहिए, न कि एकतरफा नक्शा बदलकर।

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