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ITR Update : आईटीआर भरने की डेडलाइन नजदीक आ रही है. 31 जुलाई से पहले पर्सनल टैक्सपेयर्स को अपना आईटीआर हर हाल में भरना होगा. ऐसे में कई टैक्सपेयर्स अपने आईटीआर को वैलिडेट करना भूल जाते हैं. ऐसी चूक हुई तो आपको न सिर्फ रिफंड मिलने में परेशानी होगी, बल्कि जुर्माना और लेट फीस भी लगाया जा सकता है.
आईटीआर भरने के बाद उसे सत्यापित करना जरूरी होता है.
नई दिल्ली. नौकरी और कारोबार करने वालों के लिए जुलाई का महीना हमेशा भागदौड़ भरा रहता है. करीब -करीब हर साल जुलाई महीने की आखिरी तारीख ही इनकम टैक्स रिटर्न भरने की डेडलाइन भी होती है. साल 2026 में भी इनकम टैक्स रिटर्न भरने की आखिरी डेट लाइन 31 जुलाई ही है. महीना शुरू हुए एक सप्ताह से ज्यादा का समय बीत भी चुका है और अभी तक मुश्किल से 40% लोगों ने ही अपना आइटीआर भरा है. अब बचे हुए समय में 4 करोड़ से भी ज्यादा लोग अपना इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल करेंगे. जाहिर है कि इस भागदौड़ में उनसे जल्दबाजी भी होगी और कुछ चीजों की गलतियां होने की भी गुंजाइश होगी. अगर आप भी अपना आईटीआर भरने जा रहे तो एक जरूरी बात पर हमेशा ध्यान रखना नहीं तो आप समय पर आईटीआर भरेंगे भी, सारी जानकारी भी सही-सही डालेंगे फिर भी न सिर्फ आपका रिफंड अटक जाएगा बल्कि पेनल्टी भी चुकानी पड़ेगी.
दरअसल, इनकम टैक्स रिटर्न भरने की सबसे बड़ी शर्त यह होती है कि एक तो आप डेडलाइन के भीतर अपना आईटीआर पूरी तरह मिलान करने के बाद सही डॉक्यूमेंट के हिसाब से भरे. दूसरा उसे समय के भीतर वेरीफाई भी करें. पिछले वित्त वर्ष में नई-नई नौकरी करने वालों के लिए जुलाई का महीना और भी ज्यादा महत्वपूर्ण है. ऐसे लाखों युवा होंगे जिन्होंने पहली बार वेतन उठाया है और अब उन्हें अपनी कमाई पर इनकम टैक्स रिटर्न भरना है. जानकारी के अभाव में तमाम टैक्सपेयर्स अपना आईटीआर भरने के बाद उसे वैलिडेट यानी सत्यापित करना भूल जाते हैं. अगर यह गलती हो गई तो इनकम टैक्स एक्ट 1961 के तहत न सिर्फ आपका आईटीआर इनवैलिड हो जाएगा, बल्कि आपके ऊपर जुर्माना भी लगाया जा सकता है.
क्यों जरूरी है आईटीआर वैलिडेट करना
इनकम टैक्स एक्ट 1961 के तहत आईटीआर भरने के 30 दिनों के भीतर उसे वेरीफाई करना या सत्यापित करना जरूरी होता है. बिना वेरीफाई किया हुआ आईटीआर एक तरह से इनवैलिड माना जाता है और बाद में अगर उसको भरा जाए तो इनकम टैक्स विभाग उस पर जुर्माना और लेट फीस दोनों लगा सकता है. इस तरह के आईटीआर को बाद में भरने पर आपको रिफंड भी नहीं मिलेगा ऊपर से जुर्माना और लेट फीस के रूप में हजारों रुपए और भरने पड़ेंगे. आईटीआर का वैलिडेशन एक तरह से आपका हलफनामा होता है कि आपने अपने इनकम टैक्स रिटर्न में जो भी जानकारियां दी हैं, वह पूरी तरह से सही और सत्यापित है.
वैलिडेशन के बाद शुरू होती है रिफंड की प्रक्रिया
आईटीआर को वैलिडेट करना इतना जरूरी क्यों है, इस बात को आप ऐसे समझ लीजिए कि जब तक आप अपने इनकम टैक्स रिटर्न को वेरीफाई नहीं करते हैं तब तक इनकम टैक्स विभाग आपके रिफंड की प्रक्रिया भी शुरू नहीं करता है. जाहिर है कि इस जरा सी गलती से आपका हजारों रुपए का रिफंड अटक सकता है. आपने आईटीआर भर दिया और वैलिडेट नहीं किया तो भले ही आपका रिफंड बनता है फिर भी इनकम टैक्स विभाग उसे वापस नहीं करेगा.
कितना जुर्माना लगाने का प्रावधान
अगर आपने आईटीआर समय पर भर दिया है और उसे वैलिडेट करना भूल गए तो इनकम टैक्स की धारा 234एफ के तहत ऐसे आईटीआर को इनवैलिड माना जाएगा. जरूरी है कि आप आईटीआर भरने के 30 दिनों के भीतर ही उसे वैलिडेट कर दें. एक बार यह 30 दिन की डेडलाइन बीत गई तो इनकम टैक्स विभाग आपके ऊपर ₹5000 का जुर्माना लगा देगा अगर आपकी कमाई 5 लाख से ज्यादा है तो. कमाई 5 लाख से कम है तो ऐसे करदाताओं को ₹1000 का जुर्माना भरना पड़ेगा. इसके अलावा अगर आप आईटीआर को वैलिडेट करना भूल गए और आपके ऊपर टैक्स की लायबिलिटी निकलती है यानि टैक्स की देनदारी निकलती है तो इनकम टैक्स विभाग लेट फीस के साथ-साथ उस टैक्स देनदारी पर ब्याज भी आप वसूलेगा.
अगर वैलिडेट करना भूल जाएं तो क्या करें
अगर आप इनकम टैक्स रिटर्न भरने के 30 दिनों के भीतर अपने आईटीआर को वैलिडेट करना भूल गए हैं तो सबसे पहले काम यह करें कि इनकम टैक्स अथॉरिटी को जानकारी दें. इसके लिए आप मेल भी कर सकते हैं और ऑनलाइन शिकायत पोर्टल पर भी जाकर अपनी बात रख सकते हैं. आपको समय पर वैलिडेट ना कर पाने का कारण बताना होगा अगर आपका कारण सही रहा और टैक्स अथॉरिटी को लगता है कि आपसे सचमुच चूक हुई है तो आपके आईटीआर को वैलिडेट करने के प्रक्रिया को लेकर विचार कर सकता है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें






