मेरठ के पल्लवपुरम थाना क्षेत्र स्थित फेस 1 में रात लगभग 9.30 बजे से लाइट न आने से गुस्साए लोगों ने बिजली घर पर हंगामा करने के बाद आक्रोशित लोगों ने विरोध स्वरूप दिल्ली मेरठ हाईवे जाम कर दिया। आरोप है कि काफी देर तक पुलिस मौके पर नहीं पहुंची, जिससे जाम और तनाव की स्थिति बनी रही। बिजली घर पर पहुंचे लोगों ने पुलिस के सामने ही कर्मचारियों को लाइट न आने पर हाईवे जाम की चेतावनी दी और वहां से चले गए। इसके बाद उन्होंने हाईवे पर जाम लगा दिया।इसी दौरान मेरठ बार एसोसिएशन के अध्यक्ष अनुज शर्मा भी अपने परिजनों के साथ हरिद्वार की और से वहां पहुंचे जिनकी गाड़ी को लोगों ने आगे खड़े होकर रूकवा दिया। उनके परिजनों ने जब इसका विरोध किया तो कुछ लोगों ने गाड़ी में मौजूद महिला से बदसलूकी भी की। इस दौरान पुलिस भी वहां नजर नहीं आई। हालांकि लगभग 10 मिनट बाद पुलिस और कुछ अन्य लोगों ने अध्यक्ष की कार को वहां से निकलवा दिया गया। हाईवे जाम होने से दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई और राहगीरों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। घटना की सूचना मिलने के बाद पल्लवपुरम थाना प्रभारी भारत सारस्वत मौके पर पहुंचे और जाम खुलवाया। इस दौरान जाम लगाने वालों और हाईवे से जाने वाले अन्य राहगीरों के बीच भी आपस में खूब कहासुनी हुई। वहीं अनुज शर्मा ने बताया कि वह परिवार के साथ अपने घर लौट रहे थे इसी दौरान कुछ लोगों ने अचानक सामने आकर कार रूकवा दी। साथ में छोटे बच्चे भी थे जिस कारण हमने उनसे जाने के लिए कहा तो कुछ लोगों ने अभद्र व्यहवार किया । वहीं थाना प्रभारी का कहना है कि फिलहाल पूरे मामले की कोई लिखित शिकायत नहीं है विधिवत कार्रवाई की जाएगी
Source link
MP में कैंसर की दवा की 50% बढ़ी कीमतें: एक कीमों का खर्च 2 से 3 हजार रुपए ज्यादा; प्लेटिनम बेस्ड दवाएं अब भी मार्केट से ड्राई – Bhopal News
मध्य प्रदेश में अब कैंसर मरीजों के इलाज का खर्च 50 प्रतिशत तक बढ़ गया है। इससे एक कीमो का खर्च 2 से 3 हजार रुपए ज्यादा लगेगा। राष्ट्रीय औषधि मूल्य निर्धारण प्राधिकरण (एनपीपीए) ने कैंसर के इलाज में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होने वाली दो प्रमुख कीमोथेरेपी दवाओं कार्बोप्लाटिन और सिस्प्लाटिन के दाम बढ़ा दिए हैं। एक्सपर्ट की माने तो यह दोनों दवाएं ओवरी, फेफड़े, स्तन, सिर-गर्दन समेत कई प्रकार के कैंसर के इलाज में उपयोग होती हैं। कई मरीजों को 4 से 6 या उससे अधिक कीमो साइकिल लगती हैं, ऐसे में पूरे इलाज पर हजारों रुपए का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा। हालांकि, कंपनियों ने दवाओं का प्रोडक्शन शुरू कर दिया है, लेकिन करीब एक महीने मांग अनुरूप सप्लाई करने में लगेगा। दूसरी ओर, शहर के कैंसर अस्पतालों में कीमो की दवाएं पूरी तरह खत्म हो चुकी हैं। युद्ध के चलते सप्लाई चैन बाधित हुई थी। घाटे के चलते दवा कंपनियों ने प्रोडक्शन पूरी तरह बंद कर दिया था। 7 प्रकारों में इस्तेमाल होने वाली दवाएं महंगी हुई
पेट्रोल-डीजल और क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों से जुड़ी खबरें इन दिनों लगातार सुर्खियों में हैं, लेकिन अमेरिका-ईरान संघर्ष का असर अब सिर्फ तेल बाजार तक सीमित नहीं रहा। इसने भारत में कैंसर के इलाज को भी मुश्किल बना दिया है। स्थिति ऐसी है कि कैंसर के 7 प्रमुख प्रकारों के इलाज में इस्तेमाल होने वाली जरूरी दवाओं की कमी से हर 100 में से करीब 70 मरीज प्रभावित हो सकते हैं। अब डॉक्टरों का इलाज के तरीकों में बदलाव पर फोकस
दवाओं की कीमतें बढ़ने और इनकी कमी की बात विशेषज्ञ पहले ही कह चुके हैं। हाल ही में भास्कर से चर्चा में मुंबई स्थित कामा और एल्ब्लेस अस्पताल के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. तुषार पाल्वे ने बताया था कि प्लैटिनम-बेस्ड कीमोथेरेपी दवाओं की भारी कमी से कैंसर के मरीजों के इलाज पर असर पड़ रहा है। सिस्प्लैटिन, कार्बोप्लैटिन और ऑक्सालिप्लैटिन जैसी जरूरी दवाओं की सप्लाई में रुकावट के कारण डॉक्टरों को इलाज के स्टैंडर्ड तरीकों में बदलाव करना पड़ रहा है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों और अस्पतालों पर भी इस कमी का असर पड़ा है। हालांकि, प्लैटिनम वाली दवाओं की कमी तो है, लेकिन दूसरी कीमोथेरेपी दवाएं मिल रही हैं। इसलिए, भले ही सभी इलाज पूरी तरह से बंद नहीं हुए हैं, लेकिन इससे कुछ खास मरीजों के इलाज पर असर पड़ रहा है। घरेलू दवा कंपनियों को भी इन दवाओं की सप्लाई बढ़ानी चाहिए, ताकि कमी खत्म हो और मरीजों के इलाज में आने वाली रुकावटें कम हों। पहले ही दवाओं के दाम में 50% तक वृद्धि की संभावना थी
केंद्र सरकार ने कैंसर के इलाज में व्यापक रूप से इस्तेमाल होने वाली दो महत्वपूर्ण कीमोथेरेपी दवाओं सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन की कीमत बढ़ाने को सैद्धांतिक मंजूरी दे दी है। देशभर में इन दवाओं की कमी और बढ़ती उत्पादन लागत को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। शुक्रवार को इस संबंध में आधिकारिक अधिसूचना जारी हो गई। फार्मा कंपनियों की मांग और उत्पादन लागत के आकलन के बाद सरकार ने कीमतों में बढ़ोतरी के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। रिपोर्टों के अनुसार सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन की कीमतों में 10% से 50% तक वृद्धि की गई है। ताकि इनकी उपलब्धता बनी रहे और उत्पादन फिर से सामान्य हो सके। दरअसल, युद्ध और सप्लाई बाधाओं के कारण प्लैटिनम-बेस्ड कीमो दवाओं की सप्लाई में लगभग 50% तक कमी आने का अनुमान है। इसका असर सिस्प्लैटिन, कार्बोप्लैटिन और ऑक्सालिप्लैटिन जैसी दवाओं की उपलब्धता और कीमतों पर देखने को मिल रहा है। 30 साल से सबसे सस्ती और भरोसेमंद दवा है सिस्प्लैटिन
भोपाल के ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. टी.पी. साहू के अनुसार, रेडियोथेरेपी के साथ इलाज का असर बढ़ाने के लिए सिस्प्लैटिन पिछले 20-30 साल से सबसे भरोसेमंद दवा मानी जाती है। इसका उपयोग लंबे समय से स्थापित इलाज पद्धति का हिस्सा रहा है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि सिस्प्लैटिन जैसी दवा जहां हजारों रुपए में इलाज पूरा कर देती है, वहीं इसका विकल्प इम्यूनोथेरेपी लाखों रुपए तक पहुंच जाता है, जो आम मरीजों की पहुंच से बाहर है। इस कारण मध्यम और निम्न आय वर्ग के मरीजों के लिए यह दवा बेहद अहम मानी जाती है। अब इसके रेट में भी वृद्धि होने जा रही है। देश के 70% तक कीमोथेरेपी में उपयोग
भोपाल के गांधी मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रोफेसर डॉ. ओपी सिंह के अनुसार, करीब 70% कीमोथेरेपी रेजिमेंस में सिस्प्लैटिन का उपयोग होता है। ऐसे में इसकी कमी सीधे तौर पर बड़े स्तर पर मरीजों को प्रभावित कर रही है। इसका मतलब यह है कि हर दस में से लगभग सात मरीजों के इलाज में यह दवा किसी न किसी रूप में शामिल रहती है, जिससे इसकी उपलब्धता पूरे कैंसर उपचार तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है। कई प्रमुख कैंसर के इलाज की ‘बैकबोन’
सिस्प्लैटिन और कार्बोप्लैटिन को दुनिया भर में कीमोथेरेपी की सबसे महत्वपूर्ण दवाओं में माना जाता है। इनका उपयोग फेफड़ों, मुंह, सर्वाइकल, ओवरी, स्तन, अंडकोष, गॉलब्लैडर समेत कई प्रकार के कैंसर के इलाज में किया जाता है। ऑन्कोलॉजिस्ट इन्हें कई कैंसरों की फर्स्ट-लाइन थेरेपी का प्रमुख हिस्सा मानते हैं। ये दोनों दवाएं राष्ट्रीय आवश्यक औषधि सूची (NLEM) और डीपीसीओ के तहत मूल्य नियंत्रण में हैं। कच्चे माल की कीमत बढ़ने के बावजूद कंपनियां दवाओं के दाम नहीं बढ़ा पा रही थीं। उद्योग का कहना है कि उत्पादन लागत और निर्धारित बिक्री मूल्य के बीच बड़ा अंतर आ गया, जिसके कारण कई कंपनियों ने उत्पादन कम कर दिया या बंद कर दिया। देश के 70% तक कीमोथेरेपी में उपयोग गांधी मेडिकल कॉलेज के पूर्व प्रोफेसर डॉ. ओपी सिंह के अनुसार, करीब 70% कीमोथेरेपी रेजिमेंस में सिस्प्लैटिन का उपयोग होता है। ऐसे में इसकी कमी सीधे तौर पर बड़े स्तर पर मरीजों को प्रभावित कर रही है। इसका मतलब यह है कि हर दस में से लगभग सात मरीजों के इलाज में यह दवा किसी न किसी रूप में शामिल रहती है, जिससे इसकी उपलब्धता पूरे कैंसर उपचार तंत्र के लिए बेहद महत्वपूर्ण हो जाती है।
Source link
बोचहां प्रमुख-उपप्रमुख के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव गिरा: कोरम के अभाव में बैठक निष्प्रभावी, 18 सदस्य रहे अनुपस्थित – bochaha News
बोचहां प्रखंड प्रमुख साजन कुमार पासवान और उप-प्रमुख के खिलाफ लाया गया अविश्वास प्रस्ताव शुक्रवार को कोरम के अभाव में निष्प्रभावी हो गया। प्रखंड मुख्यालय सभागार में बुलाई गई विशेष बैठक में आवश्यक संख्या में पंचायत समिति सदस्य उपस्थित नहीं हुए। बैठक की अध्यक्षता बीडीओ सह कार्यपालक पदाधिकारी प्रिया कुमारी ने की। जिला प्रशासन की ओर से प्रतिनियुक्त मजिस्ट्रेट सह जिला आपूर्ति पदाधिकारी संजीव कुमार भी इस दौरान मौजूद थे। पूरी कार्यवाही की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई गई। प्रस्तुत प्रतिवेदन के अनुसार, पंचायत समिति के कुल 28 निर्वाचित सदस्यों में से केवल 10 सदस्य ही बैठक में उपस्थित हुए। 18 सदस्य अनुपस्थित रहे। बिहार पंचायत राज अधिनियम, 2006 की धारा 44(3) और उच्चतम न्यायालय के निर्देशों के तहत, अविश्वास प्रस्ताव पर विचार के लिए कुल निर्वाचित सदस्यों के कम से कम दो-तिहाई सदस्यों की उपस्थिति अनिवार्य है। आवश्यक संख्या पूरी न होने के कारण प्रस्ताव पर चर्चा नहीं हो सकी और वह स्वतः निष्प्रभावी हो गया। बीडीओ प्रिया कुमारी ने बताया कि निर्धारित समय के बाद भी आवश्यक कोरम पूरा नहीं हो सका। नियमों के अनुसार, ऐसी स्थिति में अविश्वास प्रस्ताव स्वतः गिर जाता है। उन्होंने यह भी कहा कि बैठक की पूरी कार्यवाही अभिलेख में दर्ज कर ली गई है। जिला आपूर्ति पदाधिकारी सह प्रखंड प्रभारी वरीय पदाधिकारी संजीव कुमार ने भी इसकी पुष्टि की। उन्होंने बताया कि दो-तिहाई सदस्यों की उपस्थिति न होने के कारण अविश्वास प्रस्ताव खारिज कर दिया गया है। अविश्वास प्रस्ताव गिरने के बाद प्रखंड कार्यालय परिसर में प्रमुख और उप-प्रमुख के समर्थकों द्वारा पटाखे छोड़े जाने की खबरें थीं। हालांकि, मौके पर मौजूद अधिकारियों ने इस संबंध में किसी भी जानकारी से इनकार किया। उल्लेखनीय है कि पंचायत समिति के कुछ सदस्यों ने प्रमुख और उप-प्रमुख के खिलाफ यह अविश्वास प्रस्ताव लाया था। इस पर विचार करने के लिए ही यह विशेष बैठक बुलाई गई थी, लेकिन सदस्यों की आवश्यक संख्या में अनुपस्थिति के कारण यह मामला प्रारंभिक चरण में ही समाप्त हो गया।
Source link
आरपीएससी में प्रो.संतोष आनंद और डॉ. दीपक शर्मा मेंबर नियुक्त: अध्यक्ष यूआर साहू रिटायर, केसरी सिंह को RPSC के कार्यवाहक चेयरमैन का जिम्मा – Jaipur News
राजस्थान लोक सेवा आयोग (RPSC) में दो मेंबर की नियुक्ति की गई है। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने प्रो. संतोष आनंद और डॉ.दीपक कुमार शर्मा को RPSC सदस्य पद पर शुक्रवार देर रात नियुक्ति के आदेश जारी किए। दोनों सदस्यों का कार्यकाल पद संभालने से 6 साल की अवधि या
.
RPSC अध्यक्ष यूआर साहू 19 जून को रिटायर हुए। नए अध्यक्ष की नियुक्ति तक सीनियर मेंबर लेफ्टिनेंट कर्नल (रिटायर्ड) केसरी सिंह राठौड़ को कार्यवाहक अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी गई है। केसरी सिंह की कांग्रेस सरकार के वक्त 2023 में आरपीएससी मेंबर के पद पर नियुक्ति दी गई थी।
उत्कल रंजन साहू।
आरपीएससी अध्यक्ष यूआर साहू हुए रिटायर
राजस्थान लोक सेवा आयोग के अध्यक्ष उत्कल रंजन साहू का शुक्रवार को कार्यकाल पूरा हो गया। वहीं आयोग के एक अन्य सदस्य का भी कार्यकाल अगले महीने पूरा होगा। भाजपा सरकार ने 12 जून 2025 को उत्कल रंजन साहू को अध्यक्ष बनाया था।
24 सितंबर 2025 को अजमेर के प्रो. सुशील बिस्सू सहित तीन सदस्य नियुक्त किए थे। इनमें डॉ. अशोक कलवार और हेमंत प्रियदर्शी भी शामिल हैं। डॉ. कलवार का कार्यकाल 31 जुलाई को पूरा होगा।
कांकाणी की रोटी, रोहट की कचोरी और पाली का गुलाब हलवा, हर स्टॉप पर स्वाद का धमाका!
Last Updated:
Famous Foods Of Marwar: जोधपुर से पाली के बीच का यह सफर सिर्फ दूरी तय करने का नहीं, बल्कि स्वादों की एक पूरी यात्रा है. कांकाणी के देसी ढाबों की सादी लेकिन दिल जीत लेने वाली रोटी-चटनी से लेकर रोहट की मशहूर कचोरी की कुरकुरी परतों तक, हर पड़ाव अपने आप में एक कहानी कहता है. आगे बढ़ते ही बुलेट बाबा धाम की रबड़ी आस्था और स्वाद दोनों का अनोखा मेल पेश करती है, जबकि पाली पहुंचते ही गुलाब हलवे की मिठास इस पूरे सफर को यादगार बना देती है. यह रास्ता हर मुसाफिर के लिए सिर्फ हाईवे नहीं, बल्कि मारवाड़ी जायकों का खुला खजाना है.
जोधपुर से रवाना होकर जब आप पाली की तरफ बढ़ते हैं, तो सफर की पहली परफेक्ट चॉइस बनती है कांकाणी. यदि आप दोपहर या रात के भोजन के समय इस रूट से गुजर रहे हैं, तो कांकाणी में रुककर शुद्ध देसी मारवाड़ी खाने का लुत्फ जरूर उठाएं. यहां के ढाबों और होटलों पर मिलने वाली हाथ की सिकी गरमा-गरम बाजरे की रोटी, देसी घी, लहसुन की तीखी चटनी और कढ़ी-साग का स्वाद आपके सफर की थकान को पल भर में दूर कर देगा. हाईवे पर मारवाड़ी संस्कृति और देसी ठाठ का यह पहला और सबसे मजबूत पड़ाव है.

सफर में थोड़ा और आगे बढ़ने पर आता है ऐतिहासिक कस्बा रोहट, जो अपने खास नाश्ते के लिए पूरे हाईवे पर मशहूर है. अगर आप रोहट से गुजर रहे हैं और यहां की प्रसिद्ध मांगीलाल प्रजापत की कचोरी नहीं खाई, तो आपका सफर अधूरा ही माना जाएगा. कड़क और खस्ता मैदे के आवरण के अंदर मूंग दाल और सीक्रेट मसालों की स्टफिंग से तैयार यह कचोरी जब गरम-गरम कढ़ी या चटनी के साथ परोसी जाती है, तो कोई तारीफ किए बिना नहीं रहता. शाम की चाय के साथ रोहट की कचोरी का कॉम्बिनेशन इस रूट के मुसाफिरों की पहली पसंद है.

बुलेट बाबा के नाम से प्रसिद्ध चोटिला का वह धाम जहां पर देश विदेश से पर्यटक दर्शन के लिए पहुंचते है. बुलेट बाबा के दर्शन कर आशीर्वाद लेने के साथ-साथ यहां की एक और चीज बेहद प्रसिद्ध है और वो है यहां मिलने वाली केसरिया मलाईदार रबड़ी. दूध को घंटों कढ़ाकर पारंपरिक तरीके से तैयार की जाने वाली यह गाढ़ी रबड़ी स्वाद में इतनी लाजवाब होती है कि दूर-दूर से लोग सिर्फ इसे खाने यहां आते हैं. आस्था के इस पावन स्थल पर प्रसाद के रूप में और सफर के स्वाद के रूप में यह रबड़ी हर दिल को जीत लेती है.
Add News18 as
Preferred Source on Google

सफर के आखिरी पड़ाव पर जैसे ही आप पाली शहर की सीमा में प्रवेश करते हैं, तो यहां आपका स्वागत मरुधरा की सबसे प्रतिष्ठित मिठाई करती है, जिसे दुनिया ‘गुलाब हलवा’ के नाम से जानती है. मावे को एक विशेष तकनीक से भूनकर तैयार किया जाने वाला यह दानेदार गुलाब हलवा पाली की सबसे बड़ी पहचान है. शुद्ध दूध की मलाई और अपनी खास बनावट के कारण इसका स्वाद देश-विदेश तक मशहूर है. पाली पहुंचते ही इस फेमस गुलाब हलवे का स्वाद चखना और परिवार के लिए पैक करवाना कोई भी मुसाफिर नहीं भूलता.
हिजाब छोड़ स्लीवलेस ड्रेस में गाना पड़ा भारी, ईरानी सिंगर परस्तू अहमदी को 74 कोड़ों की सजा
Last Updated:
हिजाब न पहनकर स्लीवलेस ड्रेस में ऑनलाइन कॉन्सर्ट करना ईरानी सिंगर को भारी पड़ गया. ईरानी सिंगर परस्तू अहमदी को ऐसा करने पर ईरान की एक अदालत ने 74 कोड़े मारने की सजा सुना दी है. इतना ही नहीं, सिंगर को देश न छोड़ने और किसी भी तरह की क्रिएटिव एक्टिविटी में हिस्सा लेने पर भी रोक लगा दी है.
सिंगर को ड्रेस पहनना पड़ा भारी
नई दिल्ली. ईरान की जानी मानी सिंगर और कंपोजर परस्तू अहमदी के लिए एक कॉन्सर्ट में स्लीवलेस पहनना मुसीबत बन गया. सिंगर को ऐसा करने पर 74 कोड़ों की सजा मिल गई है. ईरान की एक अदालत ने सिंगर को ये सजा सुनाई है. खबरों की मानें तो आरोप है कि उन्होंने हिजाब नहीं पहना और स्लीवलेस ड्रेस में रही कॉन्सर्ट किया था.
ईरानी सिंगर को ड्रेस पहनने के बाद सुनाई गई सजा के बाद सोशल मीडिया पर विवाद छिड़ गया है. इस खबर के सामने आने के बाद कई मानवाधिकार संगठनों ने इसकी कड़ी आलोचना की है. रिपोर्ट्स के मुताबिक, ईरान के कोम प्रांत की अदालत ने परस्तू के साथ उनकी प्रोडक्शन टीम के 8 सदस्यों को भी 74-74 कोड़े मारने का सजा सुनाई है.
ईरानी सिंगरो को मिली 74 कोड़ों की सजा
ईरानी सिंगर को 74 कोड़ों की सजा के बाद से सोशल मीडिया पर तहलका मच गया है. कोर्ट का कहना है कि उन्होंने अश्लील कंटेंट दिया है. वह आने वाले दो साल तक किसी भी काम के लिए देश छोड़ने पर भी रोक लगा दी गई है.यहां तक कि उन्हें किसी भी तरह के इवेंट या कॉन्सर्ट में भी शामिल होने पर रोक लगा दी है. इसके बाद से ही सोशल मीडिया पर बहस छिड़ गई है. लोग इसकी निंदा कर रहे हैं. कुछ कह रहे हैं कि महिलाओं की आजादी और मानवाधिकारों को लेकर अब भी काफी बुरी स्थिति है.
हिजाब की जगह स्लीवलेस पहनना पड़ा भारी
गौरतलब है कि ये सारा विवाद दिसंबर 2024 में हुए एक ऑनलाइन कॉन्सर्ट का है. जब 29 वर्षीय परस्तू अहमदी ने यूट्यूब पर लाइव परफॉर्म किया था.इस दौरान उन्होंने देशभक्ति गीत ‘अज खूने जवानाने वतन’ गाया था.कॉन्सर्ट में लाखों लोग शामिल हुए थे. इसी कॉन्सर्ट में परस्तू ने हिजाब की जगह काले रंग की स्लीवलेस ड्रेस पहन ली थी. इसके बाद से ही सिंगर मुश्किलों में घिरती नजर आईं. ईरानी अधिकारियों ने इसे कानून का उल्लंघन बताया.
बता दें कि इस विवाद के बाद परस्तू और उनकी टीम के कई सदस्यों को हिरासत में ले लिया गया था. लेकिन बाद में किसी तरह उन्हें रिहा कर दिया गया. इस कॉन्सर्ट को लेकर कार्रवाई अभी भी जारी रही.गौरतलब है कि ईरान में महिलाओं के लिए सार्वजनिक जगहों पर हिजाब पहनना अनिवार्य है. खासतौर पर फीमेल सिंगर्स के लिए तो सख्त नियम हैं.
About the Author
.jpeg?impolicy=website&width=52&height=52)
न्यूज 18 हिंदी में एंटरटेनमेंट सेक्शन में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहे मुनीष कुमार दिल्ली के रहने वाले हैं. डिजिटल मीडिया में उन्हें 10 साल का अनुभव है.राजधानी कॉलेज (DU) से पॉलिटिकल साइंस (ऑनर्स) की पढ…और पढ़ें
NEET-UG 2026 री-एग्जाम को लेकर तैयारी पूरी, जानें NTA ने क्या-क्या किए हैं इंतजाम
नई दिल्ली: पिछले महीने हुई NEET (UG) 2026 की परीक्षा कैंसिल होने के बाद अब री-एग्जाम को लेकर एनटीए पूरी तैयारी में है। इस बार परीक्षा में कोई गड़बड़ी न हो, इसके लिए तमाम उपाय किए जा रहे हैं। ऐसे में नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने 21 जून 2026 को होने वाली NEET (UG) 2026 की दोबारा परीक्षा को सुचारू और सुरक्षित ढंग से आयोजित करने के लिए कई उपाय किए हैं। इसके अलावा देशभर में आज परीक्षा को लेकर मॉक ड्रिल भी की जाएगी। एनटीए ने बताया कि कैंडिडेट, NEET (UG)-2026 री-एग्जाम से जुड़ी किसी भी जानकारी के लिए हेल्पलाइन नंबर 011-40759000/011-69227700 पर संपर्क कर सकते हैं। इसके अलावा neetug2026@nta.ac.in पर ईमेल भी कर सकते हैं।
एनटीए ने क्या-क्या किए उपाय
- शहर-स्तर के कामकाज की देखरेख के लिए 674 सिटी कोऑर्डिनेटर तैनात होंगे
- परीक्षा केंद्रों पर स्वतंत्र निगरानी के लिए 6,669 ऑब्जर्वर तैनात होंगे
- हर परीक्षा केंद्र पर सेंटर सुपरिटेंडेंट और इनविजिलेटर तैनात होंगे
- जिला प्रशासन, पुलिस बल और एस्कॉर्ट टीमें, खासकर गोपनीय सामग्री को सुरक्षित रूप से लाने-ले जाने के लिए तैनात रहेंगी
- NTA ने निष्पक्ष और पारदर्शी परीक्षा सुनिश्चित करने के लिए कई स्तरों वाली सुरक्षा व्यवस्था लागू की है
- सीलबंद प्रोटोकॉल के तहत तय जगहों तक गोपनीय सामग्री को पूरी तरह सुरक्षित तरीके से पहुंचाना होगा
- परीक्षा सामग्री लाने-ले जाने के लिए पुलिस एस्कॉर्ट के साथ GPS-इनेबल्ड गाड़ियां होंगी
- सभी परीक्षा केंद्रों पर CCTV निगरानी होगी, जिसके फीड सेंट्रलाइज्ड कंट्रोल रूम से जुड़े होंगे
- अंदर जाने से पहले हाई-सेंसिटिविटी मेटल डिटेक्टर से अनिवार्य जांच होगी
- हर केंद्र पर ज़्यादा मैनपावर और बेहतर उपकरण होंगे
- किसी और के परीक्षा देने को रोकने के लिए आधार-आधारित बायोमेट्रिक ऑथेंटिकेशन होगा
- सेंट्रलाइज्ड कंट्रोल सिस्टम के जरिए रियल-टाइम मॉनिटरिंग होगी
छात्रों को सतर्क रहने की सलाह
एनटीए ने इससे पहले एक एडवाइजरी जारी कर छात्रों को सतर्क रहने की सलाह दी। जारी एडवाइजरी में कहा गया, “एनटीए कभी भी कोई पेमेंट नहीं मांगेगा, एग्जाम पेपर, आंसर की, या ‘लीक’ हुआ मटीरियल नहीं भेजेगा, या किसी लिंक के जरिए आपका एडमिट कार्ड शेयर नहीं करेगा। अगर आपको ऐसा कोई मैसेज मिले, तो क्लिक न करें। इसकी रिपोर्ट करें।” इसके अलावा, एनटीए ने बताया कि वह अब री-एग्जामिनेशन के लिए कैंडिडेट्स को सीधे व्हाट्सएप के जरिए एग्जाम अपडेट और सेंटर की जानकारी भेजेगा। कैंडिडेट्स को यह देखना चाहिए कि उन्हें मैसेज भेजने वाले के आगे ब्लू वेरिफाइड टिक और ‘नेशनल टेस्टिंग एजेंसी’ का नाम दिखे। एडवाइजरी में कहा गया है कि बिना ब्लू टिक वाले अकाउंट से कोई भी मैसेज एनटीए का नहीं है, भले ही उसमें उनका नाम इस्तेमाल किया गया हो।
यह भी पढ़ें-
झांसी में दिनभर की उमस और गर्मी के बाद बारिश: तेज हवाओं से गर्मी में मिली राहत, टेम्परेचर 34℃ आया – Jhansi News
झांसी में शुक्रवार को दिनभर भीषण गर्मी और उमस ने लोगों को परेशान किए रखा। दोपहर में जिले का अधिकतम तापमान 42.6 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया, जो प्रदेश में बांदा, प्रयागराज और वाराणसी के बाद सबसे अधिक रहा। तेज धूप और उमस के कारण लोग जरूरी काम होने पर ही घरों से बाहर निकले। मौसम विज्ञान विभाग ने पहले ही शुक्रवार को झांसी में बारिश और तेज हवाएं चलने की संभावना जताई थी। विभाग के अनुमान के अनुसार अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस तक रहने की उम्मीद थी, लेकिन पारा अनुमान से 1.6 डिग्री अधिक चढ़कर 42.6 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।
हालांकि शाम होते-होते मौसम ने करवट ले ली। करीब 7 बजे के बाद आसमान में बादल छाने लगे और तेज हवाएं चलने लगीं। इसके बाद शहर के कई इलाकों में बारिश शुरू हो गई। बारिश और हवाओं के चलते लोगों को गर्मी से राहत मिली और तापमान घटकर 34 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया।
मौसम में आए इस बदलाव से जहां लोगों ने राहत की सांस ली, वहीं सड़कों और बाजारों में भी चहल-पहल बढ़ती नजर आई। मौसम विभाग के अनुसार शनिवार को भी झांसी के तापमान में कोई बड़ा बदलाव होने की संभावना नहीं है और अधिकतम तापमान 41 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। साथ ही बादल छाने और कहीं-कहीं हल्की बारिश की स्थिति बनी रह सकती है।
Source link
0कटनी में बलेनो कार से शराब तस्करी तस्करी: जबलपुर के दो युवक गिरफ्तार; 360 लीटर शराब समेत 7 लाख का सामान बरामद – Katni News
कटनी की कुठला पुलिस ने अवैध शराब के खिलाफ कार्रवाई करते हुए एक बलेनो कार से देशी शराब जब्त की है। पुलिस ने घेराबंदी कर जबलपुर निवासी दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। जब्त की गई शराब और कार की कुल कीमत लगभग 7 लाख रुपए है। पुलिस को देखकर कार मोड़कर भागने का प्रयास कुठला थाना प्रभारी निरीक्षक अखलेश दाहिया ने बताया कि शुक्रवार को पुलिस टीम इंद्रानगर पुल के पास चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान मुखबिर से शाहनगर की ओर से आ रही एक संदिग्ध बलेनो कार (MP20ZK0581) की सूचना मिली। पुलिस को देखकर चालक ने गाड़ी मोड़कर भागने का प्रयास किया, लेकिन टीम ने पीछा कर उसे अनी नदी पुल के पास घेर लिया। कार से बरामद की 40 कार्टून शराब पुलिस ने कार की तलाशी ली तो उसके भीतर से 40 कार्टून में रखी कुल 2,000 पाव (360 लीटर) अवैध प्लेन देशी सफेद शराब बरामद हुई। पूछताछ में पकड़े गए आरोपियों की पहचान गोकलपुर निवासी सौरभ सोमकुवर (32) और रांझी निवासी शिवबहादुर सोनी (28) के रूप में हुई है। वाहन समेत सात लाख का सामान जब्त पुलिस ने करीब 2 लाख रुपए की 40 पेटी शराब और तस्करी में इस्तेमाल की जा रही 5 लाख रुपए की बलेनो कार को जब्त कर लिया गया है। इस पूरी कार्रवाई में कुठला थाना पुलिस के स्टाफ की मुख्य भूमिका रही।
Source link

