सहारनपुर के कोतवाली मंडी क्षेत्र में शुक्रवार दोपहर दो बजे पुलिस ने चेकिंग के दौरान 60 किलोग्राम प्रतिबंधित मांस के साथ दो युवकों को गिरफ्तार किया है। आरोपी स्कूटी पर मांस ले जा रहे थे। पुलिस ने मांस और तस्करी में इस्तेमाल स्कूटी को जब्त कर लिया है। पुलिस टीम मंडी थाना क्षेत्र में गश्त और संदिग्ध वाहनों की चेकिंग कर रही थी। इसी दौरान आली की चुंगी स्थित मंडी समिति के कूड़ाघर के पास एक स्कूटी पर सवार दो युवकों को रोका गया। तलाशी लेने पर स्कूटी से 60 किलोग्राम प्रतिबंधित मांस बरामद हुआ। पूछताछ में आरोपियों की पहचान कमेला कॉलोनी निवासी आसिफ पुत्र रमजानी और गोटेशाह की चुंगी निवासी कलीम पुत्र बहार अहमद के रूप में हुई। पुलिस ने दोनों को हिरासत में लेकर थाने पहुंचाया और बरामद मांस को कब्जे में ले लिया। पुलिस ने बरामद स्कूटी (संख्या UP11CN5314) को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 207 के तहत सीज कर दिया है। इस मामले में कोतवाली मंडी थाने में सीएस एक्ट के तहत मुकदमा दर्ज किया गया है। पुलिस का कहना है कि जिले में गौकशी, प्रतिबंधित मांस की तस्करी और अन्य आपराधिक गतिविधियों पर रोक लगाने के लिए लगातार चेकिंग और गश्त अभियान चलाए जा रहे हैं। यह कार्रवाई इसी अभियान का हिस्सा है। आवश्यक कानूनी कार्रवाई पूरी करने के बाद दोनों आरोपियों को न्यायालय के समक्ष पेश किया जाएगा। यह कार्रवाई एसएसपी के निर्देशन में प्रभारी निरीक्षक सतपाल सिंह भाटी के नेतृत्व में की गई। टीम में उपनिरीक्षक उपेंद्र सिंह, उपनिरीक्षक पंकज मिश्रा, हेड कांस्टेबल महबूब, कांस्टेबल रवि कुमार और कांस्टेबल प्रवीन शामिल थे। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि बरामद मांस कहां से लाया गया था और इसे आगे कहां पहुंचाया जाना था।
सहरसा में स्वतंत्रता दिवस की पूर्व संध्या पर शुक्रवार को ‘हर घर तिरंगा अभियान’ के तहत एक तिरंगा यात्रा निकाली गई। राष्ट्रप्रेम, राष्ट्रीय एकता और तिरंगे के प्रति सम्मान की भावना को जन-जन तक पहुंचाने के उद्देश्य से आयोजित यह यात्रा अंबेडकर चौक से शुरू होकर पटेल मैदान तक पहुंची। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग हाथों में तिरंगा लेकर देशभक्ति के नारे लगाते हुए शामिल हुए। तिरंगा यात्रा को लेकर विशेष उत्साह यात्रा में बिहार के शिक्षा मंत्री सह सहरसा के प्रभारी मंत्री मिथलेश तिवारी, पूर्व मंत्री डॉ. आलोक रंजन, भाजपा के कई नेता, जनप्रतिनिधि, विभिन्न विद्यालयों के छात्र-छात्राएं, अधिकारी और आम नागरिक शामिल हुए। जिलाधिकारी दीपेश कुमार, पुलिस अधीक्षक विक्रम सिहाग और नगर आयुक्त प्रभात कुमार झा सहित कई वरीय पदाधिकारी भी मौजूद रहे। यात्रा के दौरान पूरा मार्ग देशभक्ति के नारों से गूंज उठा और तिरंगे से सराबोर नजर आया। स्कूली बच्चों ने राष्ट्रीय ध्वज लेकर उत्साहपूर्वक भाग लिया, जिससे राष्ट्रप्रेम और राष्ट्रीय एकता का संदेश प्रसारित हुआ। नागरिकों में तिरंगा यात्रा को लेकर विशेष उत्साह देखा गया। 140 करोड़ आबादी के हर दिल में तिरंगा – प्रभार मंत्री प्रभारी मंत्री मिथलेश तिवारी ने इस अवसर पर कहा कि भारत की लगभग 140 करोड़ आबादी के हर दिल में तिरंगा है और हर घर पर तिरंगा फहराने का संकल्प देशवासियों का है। उन्होंने बताया कि तिरंगा हमारे पूर्वजों के बलिदान, देश की आजादी और भारत की समृद्धि का प्रतीक है। उन्होंने नागरिकों से ‘हर घर तिरंगा अभियान’ में सक्रिय भागीदारी की अपील की। पूर्व मंत्री डॉ. आलोक रंजन ने कहा कि जिन वीर शहीदों के बलिदान से देश को आजादी मिली, उन्हें याद करने और उनके स्वाभिमान व समर्पण को सम्मान देने के लिए भाजपा कार्यकर्ता तिरंगा लेकर सड़कों पर निकले हैं। उन्होंने जोर दिया कि तिरंगा देश की एकता, अखंडता और गौरव का प्रतीक है।
ग्वालियर नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय ने शुक्रवार को ट्रांसपोर्ट नगर का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने यातायात व्यवस्था, सड़कों की स्थिति और जलभराव की समस्या का जायजा लिया। निरीक्षण में नाले पर अतिक्रमण पाए जाने पर आयुक्त ने नाराजगी व्यक्त की और संबंधित अधिकारियों को पानी के बहाव में बाधा बन रहे सभी अतिक्रमण तत्काल हटाने के निर्देश दिए। उन्होंने ट्रांसपोर्ट नगर के प्रवेश द्वार के पास सड़क पर बने गड्ढे को भी तुरंत ठीक करने के आदेश दिए। सड़कों पर भर जाता है नाले पानी
निगमायुक्त संघ प्रिय को दुकानदारों ने उन्हें बताया कि वार्ड क्रमांक-1 से आने वाले नाले का पानी ट्रांसपोर्ट नगर की सड़कों पर भर जाता है। बारिश के बाद यहां लंबे समय तक पानी और कीचड़ जमा रहने से दुकानदारों तथा वाहन चालकों को असुविधा होती है। दुकानदारों की शिकायतें सुनने के बाद आयुक्त ने नाले के बहाव का निरीक्षण किया, जहां पानी के रास्ते में अतिक्रमण मिला। उन्होंने क्षेत्रीय अधिकारियों को इस पर तत्काल कार्रवाई करने के निर्देश दिए। गड्ढे भरवाकर जल्द सड़क दुरुस्त करें
निरीक्षण के दौरान, ट्रांसपोर्ट नगर के प्रवेश द्वार के पास सड़क पर बने गड्ढे को देखकर भी निगमायुक्त ने असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि गड्ढे को जल्द भरकर सड़क को दुरुस्त किया जाए, ताकि भारी वाहनों के आवागमन में बाधा न आए। उन्होंने ट्रांसपोर्ट नगर में चल रहे कार्यों की स्थिति की भी जानकारी ली और ठेकेदार की लापरवाही पर नाराजगी जताते हुए उसके खिलाफ कार्रवाई के आदेश दिए। मोटर जब्त करने के दिए निर्देश निरीक्षण के समय, श्रीराम धर्म कांटे के परिसर से मोटर के माध्यम से पानी सड़क पर बहाया जा रहा था। इस पर निगमायुक्त ने आपत्ति जताई और मौके पर ही मोटर जब्त करने के निर्देश दिए। उन्होंने अधिकारियों को स्पष्ट निर्देश दिए कि निजी परिसर का पानी सड़क पर बहाकर यातायात व्यवस्था और आम लोगों के लिए परेशानी उत्पन्न न की जाए। आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ट्रांसपोर्ट नगर में जल निकासी व्यवस्था को सुव्यवस्थित करने के साथ-साथ अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई को प्राथमिकता दी जाए। इसका उद्देश्य बारिश के दौरान जलभराव की समस्या से लोगों को राहत प्रदान करना है।
Meat Marination Tips : अक्सर, घर पर चिकन या मटन पकाने में बहुत मेहनत करने के बावजूद, उसका स्वाद रेस्टोरेंट जैसा नहीं हो पाता. सही मसाले इस्तेमाल करने पर भी मीट का स्वाद फीका या बहुत ज़्यादा खट्टा हो सकता है. इसकी एक बड़ी वजह गलत तरीके से मैरिनेट करना हो सकता है. मैरिनेशन का मतलब सिर्फ़ मसाले मिलाना नहीं है. नमक, खटास और समय का सही तालमेल बिठाना बहुत ज़रूरी है. आइए ऐसी 5 आम गलतियों के बारे में जानते हैं जिनसे बचकर आप अपने चिकन या मटन डिश का स्वाद बेहतर बना सकते हैं…
बिना सोचे-समझे बहुत ज़्यादा नमक डालना मैरिनेशन में नमक ज़रूरी है क्योंकि यह मीट का स्वाद बढ़ाता है. हालांकि, बहुत ज़्यादा नमक डालने से चिकन या मटन का स्वाद खराब हो सकता है खासकर तब जब बाद में ग्रेवी या सॉस में और नमक मिलाना हो. कम नमक से शुरुआत करें और पकाते समय स्वाद के अनुसार उसे एडजस्ट करें.
बहुत ज़्यादा नींबू का रस डालना नींबू का रस या दूसरी खट्टी चीज़ें मैरिनेड के स्वाद और टेक्सचर को बदल सकती हैं. हालांकि, बहुत ज़्यादा नींबू का इस्तेमाल करने या मीट को ज़्यादा खट्टे मैरिनेड में लंबे समय तक भिगोकर रखने से बाहरी परत का टेक्सचर खराब हो सकता है. आम तौर पर लगभग 500 ग्राम चिकन के लिए थोड़ी मात्रा में नींबू का रस काफ़ी होता है. इसी तरह, मटन के लिए भी बहुत ज़्यादा नींबू का इस्तेमाल न करें; रेसिपी में बताई गई मात्रा का ही पालन करें.
गलत मैरिनेशन समय हर रेसिपी के लिए चिकन को घंटों तक मैरिनेट करना ज़रूरी नहीं है. इसके उलट, मटन में मसालों को अंदर तक जाने और मीट को ठीक से नरम होने में ज़्यादा समय लग सकता है. जहां चिकन के लिए कुछ घंटे काफ़ी होते हैं, वहीं मटन को ज़्यादा समय की ज़रूरत हो सकती है, जो मीट के टुकड़े और पकाने के तरीके पर निर्भर करता है. मैरिनेट करते समय मीट को हमेशा रेफ्रिजरेटर में रखें.
मैरिनेट करने से पहले, मीट को अच्छी तरह से साफ़ करना और अतिरिक्त नमी हटाने के लिए उसे पोंछकर सुखाना ज़रूरी है. अगर चिकन या मटन बहुत गीला होगा, तो मैरिनेड ठीक से नहीं चिपकेगा और मसालों का स्वाद कम हो सकता है. साफ़ करने के बाद, मैरिनेड लगाने से पहले पेपर टॉवल से मीट को धीरे-धीरे पोंछकर सुखा लें.
मीट पर मैरिनेड की अच्छी तरह कोटिंग न करना सिर्फ़ मीट के ऊपर मैरिनेड डालने से यह पक्का नहीं होता कि स्वाद हर हिस्से में बराबर पहुंचेगा. अपने हाथों या स्पैटुला का इस्तेमाल करके हर टुकड़े पर मैरिनेड की अच्छी तरह कोटिंग करें. मीट के बड़े टुकड़ों पर हल्के कट लगाने से भी मैरिनेड को अंदर तक जाने में मदद मिल सकती है.
पकाने का सही तरीका क्या है? मैरिनेट किए हुए चिकन या मटन को तेज़ आंच पर लंबे समय तक पकाने से बचें. चिकन को ज़्यादा पकाने से वह सूखा हो सकता है. मटन के लिए, धीमी आंच पर काफ़ी समय तक धीरे-धीरे पकाने से करी और स्टू जैसे व्यंजनों में बेहतर टेक्सचर मिल सकता है. साथ ही, ग्रिल या रोस्ट करते समय तापमान पर नज़र रखें.
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( Disclaimer : इस खबर में दी गई जानकारी और सलाह विशेषज्ञों से हुई बातचीत पर आधारित है. ये सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए किसी भी सलाह को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें. किसी भी नुकसान के लिए न्यूज-18 जिम्मेदार नहीं रहेगा
10 में से 9 पाकिस्तानी भारत को खतरा मानते हैं, ये बात अमेरिकी प्यू रिसर्च सेंटर के सर्वे में सामने आई है। इंडियंस भी अपना सबसे बड़ा दुश्मन पाकिस्तान को ही मानते हैं। सर्वे में कहा गया कि दोनों देशों के लोग पड़ोसी के साथ अच्छे रिश्ते चाहते हैं, लेकिन भरोसे की कमी है। भारत अपना सबसे अहम पार्टनर रूस मानता है। वहीं, पाकिस्तान ने चीन को अपना सबसे बड़ा सहयोगी देश माना है। 21% भारतीय मुस्लिमों की पाकिस्तान पर पॉजिटिव राय पहलगाम हमले के बाद रिश्ते ज्यादा बिगड़े सर्वे में भारत-पाकिस्तान के बीच हालिया तनाव का भी जिक्र है। 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में आतंकियों ने 26 लोगों की हत्या कर दी थी। इसके बाद भारत ने ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान और पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर में आतंकी ठिकानों को निशाना बनाया। सर्वे के मुताबिक, इसके बाद दोनों देशों के बीच सैन्य और तनाव बढ़ गया। भारत सरकार ने 1960 की सिंधु जल संधि को रोकने का फैसला किया। पाकिस्तान की खेती और पानी की जरूरत का एक बड़ा हिस्सा सिंधु नदी पर निर्भर है। 58% भारतीयों की रूस को लेकर पॉजिटिव राय भारत में 36% लोगों ने रूस को अपना सबसे जरूरी सहयोगी बताया। अमेरिका को 16% लोगों ने चुना। पाकिस्तान में 75% लोगों ने चीन को अपना बड़ा सहयोगी माना। 12% ने सऊदी अरब को देश का दोस्त बताया। रूस चीन अमेरिका भारत की विदेश नीति किसी एक देश से नहीं जुड़ी सर्वे में कहा गया कि भारत की विदेश नीति किसी एक देश को लेकर नहीं है। जबकि, पाकिस्तान में एकतरफा पसंद दिखती है। भारत की विदेश नीति में कई बड़े देशों के साथ एक साथ रिश्ते बनाए रखने की कोशिश दिखाई देती है। भारत अमेरिका के साथ रक्षा, तकनीक और इंडो-पैसिफिक क्षेत्र में सहयोग बढ़ा रहा है। रूस के साथ उसके पुराने रक्षा संबंध हैं। चीन के साथ सीमा पर तनाव और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा है, लेकिन दोनों देश कई मुद्दों पर साथ भी काम करते हैं। इसे भारत की रणनीतिक स्वायत्तता और कई देशों के साथ हितों के हिसाब से रिश्ते बनाने की नीति से जोड़कर देखा जा सकता है। भारत किसी एक बड़े देश के खेमे में पूरी तरह जाने के बजाय अलग-अलग देशों के साथ रिश्ते बनाए रखना चाहता है। ——————- पाकिस्तान से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें… पाकिस्तानी PM की धमकी- पानी रोका तो मुंहतोड़ जवाब देंगे: कश्मीर पर रुख कभी नहीं बदलेंगे, मुनीर की लीडरशिप में हमने दुश्मन को हराया पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने सिंधु जल समझौते को लेकर भारत को एक बार फिर धमकी दी है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के हिस्से के पानी पर कोई समझौता नहीं होगा। अगर इसे रोकने या कम करने की कोशिश हुई तो उसका मुंहतोड़ जवाब दिया जाएगा। पूरी खबर पढ़ें…
आम आदमी पार्टी के संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्र सरकार की E20 ईंधन नीति पर करारा हमला बोला है। केजरीवाल ने E20 पेट्रोल को देश का बड़ा घोटाला करार देते हुए सवाल उठाया है कि आम उपभोक्ताओं और ऑटोमोबाइल विशेषज्ञों के तीखे विरोध के बावजूद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे देश पर लागू करने के लिए इतने बेताब क्यों हैं।
केजरीवाल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘X’ (पूर्व में ट्विटर) पर एक यूजर के पोस्ट को री-ट्वीट करते हुए अपनी बात रखी। उन्होंने लिखा कि यह एक पूरा घोटाला है, क्योंकि लोगों को यह जानने का पूरा अधिकार है कि उपभोक्ताओं और विशेषज्ञों द्वारा इतनी मुखरता से आलोचना किए जाने के बावजूद मोदी जी भारत पर E20 थौपने के लिए इतने बेताब क्यों हैं। उपभोक्ताओं को जानकारी दिए बिना फैसला थौप रही सरकार केजरीवाल ने जिस पोस्ट को शेयर किया, उसमें कहा गया था कि E20 नीति से जुड़े जोखिमों, अतिरिक्त लागतों और अनिश्चितताओं के बारे में ग्राहकों को पहले से जागरूक नहीं किया गया और उन पर यह फैसला जबरन थोपा जा रहा है। माइलेज और गाड़ियों के इंजन को नुकसान का दावा पोस्ट में केजरीवाल ने कहा कि हाल ही के दिनों में कई ऑटोमोबाइल एक्सपर्ट्स और वाहन चालकों ने शिकायत दर्ज की है कि E20 पेट्रोल के इस्तेमाल से पुरानी गाड़ियों का माइलेज गिर रहा है और उनके इंजन के पुर्जों को नुकसान पहुंच रहा है। पारदर्शिता पर उठाए सवाल केजरीवाल ने केंद्र सरकार की नीयत पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब देश का वाहन चालक और विशेषज्ञ इसके नुकसान को लेकर आवाज़ उठा रहे हैं, तब भी सरकार इसे लागू करने के लिए इतनी जल्दबाज़ी क्यों दिखा रही है। E20 ईंधन नीति सरकार का तर्क केंद्र सरकार ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिलाने (E20) का लक्ष्य तय किया है। सरकार का तर्क है कि इससे भारत की विदेशी तेल आयात पर निर्भरता कम होगी और पर्यावरण को कम नुकसान पहुंचेगा। हालांकि, विपक्षी दल और वाहन मालिक इसे गाड़ियों की लाइफ और उपभोक्ता अधिकारों के खिलाफ बता रहे हैं।
मनप्रीत सिंह ने कहा है कि शायद वह अपना आखिरी वर्ल्ड कप खेलने उतरेंगे। मनप्रीत चौथी बार इस टूर्नामेंट का हिस्सा बनने वाले हैं और इस बार इसे यादगार बनाना चाहते हैं।
अनुभवी भारतीय मिडफील्डर मनप्रीत सिंह ने कहा कि वह शायद अपना आखिरी विश्व कप खेल रहे हैं और इसे यादगार बनाने के लिए प्रतिबद्ध हैं और भारत को 51 साल बाद पहली बार विश्व कप खिताब दिलाने में अपनी भूमिका निभाना चाहते हैं। दो बार ओलंपिक पदक विजेता टीम के सदस्य रहे मनप्रीत चौथे विश्व कप में खेलेंगे। उन्होंने कहा कि यह टूर्नामेंट उनके लिए इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत 1975 की अपनी एकमात्र खिताबी सफलता में एक और विश्व कप जीत जोड़ने की कोशिश कर रहा है।
मेरे पास विश्व कप का पदक नहीं
मनप्रीत ने ‘जियोस्टार’ से कहा, ”यह विश्व कप मेरे लिए बहुत मायने रखता है क्योंकि यह मेरा चौथा विश्व कप है। हमने लगातार दो ओलंपिक पदक जीते हैं लेकिन विश्व कप का पदक अब भी नहीं है। हर खिलाड़ी दोनों पदक जीतने का सपना देखता है।”
उन्होंने कहा, ”मेरे लिए यह आखिरी विश्व कप हो सकता है इसलिए मैं इसी सोच के साथ इसमें उतर रहा हूं। मैं वह हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध हूं जो हम अब तक नहीं कर सके हैं। हमें भावनात्मक रूप से संतुलित रहना होगा, अपनी भूमिकाओं पर कायम रहना होगा और अनुशासन के साथ खेलना होगा। यही हमें जीत का सबसे अच्छा मौका देगा।”
बेल्जियम और नीदरलैंड 15 से 30 अगस्त तक इस प्रतिष्ठित टूर्नामेंट की मेजबानी करेंगे। मनप्रीत ने कहा, “टीम में खिताब जीतने के लिए अनुभव और प्रतिभा दोनों हैं। हमने अच्छी तैयारी की है और हमारा आत्मविश्वास ऊंचा है। हमने ओलंपिक पदक जीते हैं और अब विश्व कप में भी खिताब जीतने का समय है।”
हम अपनी रणनीति पर कायम रहते हैं
उन्होंने कहा, ”मुझे भरोसा है कि हम विश्व कप के फाइनल में पहुंचेंगे। टीम पूरे विश्वास के साथ खेल रही है और हर प्रशिक्षण सत्र में शत प्रतिशत दे रही है।” भारत को पूल डी में वेल्स, इंग्लैंड और पाकिस्तान के साथ रखा गया है। वह शनिवार को वेल्स के खिलाफ अपने अभियान की शुरुआत करेगा। मनप्रीत ने यह भी कहा कि भारत चिर प्रतिद्वंद्वी पाकिस्तान सहित अपने प्रतिद्वंद्वियों की प्रतिष्ठा से प्रभावित नहीं होगा।
उन्होंने कहा, ”हम चाहे पाकिस्तान के खिलाफ खेलें या किसी अन्य टीम के, हम अपनी रणनीति पर कायम रहते हैं। हम प्रतिद्वंद्वी के नाम या उसकी प्रतिष्ठा में नहीं उलझते।” मनप्रीत ने कहा, ”हॉकी टीम खेल है और अगर कोई एक खिलाड़ी अकेले सब कुछ करने की कोशिश करता है तो इससे टीम को नुकसान हो सकता है। हमें एक-दूसरे पर भरोसा करना होगा और एक इकाई के रूप में खेलना होगा।”
धौलपुर में स्वतंत्रता दिवस के उपलक्ष्य में ‘हर घर तिरंगा’ अभियान के तहत जिला परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग ने जागरूकता अभियान चलाया। इस दौरान विभागीय टीम ने रोडवेज बस स्टैंड सहित कई स्थानों पर आमजन, वाहन चालकों और यात्रियों को अभियान से जुड़ने के लिए प्रेरित किया। अभियान के तहत रोडवेज बस स्टैंड परिसर में ‘हर घर तिरंगा’ से संबंधित स्टिकर लगाए गए। इसके अतिरिक्त, वाहन चालकों के वाहनों पर भी अभियान के संदेश वाले स्टिकर लगाए गए। इसका उद्देश्य सड़क पर चलने वाले वाहनों के माध्यम से राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय एकता का संदेश व्यापक स्तर पर पहुंचाना था। जिला परिवहन अधिकारी गौरव यादव ने बताया कि ‘हर घर तिरंगा’ अभियान केवल राष्ट्रीय ध्वज फहराने तक सीमित नहीं है। यह देश के प्रति सम्मान, गौरव और जिम्मेदारी की भावना को मजबूत करने का एक महत्वपूर्ण प्रयास है। उन्होंने आमजन से 9 से 17 अगस्त तक चलने वाले इस अभियान में सक्रिय रूप से भाग लेने और अपने घरों पर सम्मानपूर्वक तिरंगा फहराने की अपील की। परिवहन विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों ने वाहन चालकों को राष्ट्रीय ध्वज के सम्मान तथा निर्धारित नियमों के अनुसार तिरंगा फहराने के संबंध में जानकारी प्रदान की। वाहन चालकों ने भी अभियान में सहयोग करते हुए स्वेच्छा से अपने वाहनों पर स्टिकर लगाए। विभाग ने सूचित किया है कि आगामी दिनों में भी बस स्टैंडों, सार्वजनिक स्थानों और परिवहन से जुड़े क्षेत्रों में जागरूकता गतिविधियां जारी रहेंगी। इस अभियान का मुख्य उद्देश्य अधिक से अधिक नागरिकों को जोड़कर स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर राष्ट्रभक्ति और राष्ट्रीय एकता का संदेश घर-घर तक पहुंचाना है।
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Campus के इस रनिंग शूज की डिमांड हमेशा से रही है, लोगों ने इसे अपना खूब सारा समर्थन दिया है। इस जूते की क्वालिटी और इसका डिजाइन दोनों ही बेहद कमल के हैं। ये देखने में जितना स्टाइलिश है, पहनने पर उतना ही आरामदायक महसूस होगा। अगर आप भी लंबे समय से जूते की तलाश में हैं, तो इस विकल्प को एक मौका जरूर दें। राखी के त्योहार पर भाई को बजट फ्रेंडली गिफ्ट देना है, तो इस जूते से बेहतर भला क्या होगा।
अगर आपके भाई रोजाना वॉक करते हैं, या हर रोज लंबी दूरी ट्रैवल करके ऑफिस जाते हैं, तो कैंपस का ये वाकिंग शूज उनके लिए बिल्कुल परफेक्ट रहेगा। Campus का ये जूता एक फ्लैक्सिबल विकल्प है, ये पैरों के मूवमेंट अनुसार एडजस्ट हो जाता है, इस प्रकार पैर जल्दी नहीं थकते और साथ ही साथ संतुलन बना रहता है।
कैंपस जूते कम दाम में अपने प्रीमियम एहसास के लिए जाने जाते हैं। ये जूता देखने में स्टाइलिश है, साथ ही आरामदायक भी है। इस बजट फ्रेंडली जूते का गद्देदार सोल और इसका आरामदायक एहसास, कंज्यूमर्स को बेहद पसंद आया है, जो आपको भी अच्छा लगेगा। वर्कआउट या रनिंग के लिए ये जूता एक अच्छा विकल्प है। साथ ही इसे कैजुअल आउटफिट के साथ भी स्टाइल कर सकते हैं।
अगर आप कम दाम में ब्रांडेड एहसास चाहते हैं, तो ये जूता आपके लिए परफेक्ट रहेगा। 7000 से अधिक उपभोक्ताओं का पसंदीदा जूता, वर्कआउट और अन्य शारीरिक गतिविधियों के लिए एक प्रभावी विकल्प है। इसका बनावट और गद्देदार सोल इसे एक आरामदायक विकल्प बना रहे, जिसमें लंबे समय तक सक्रिय रहने पर भी उत्पादकता कम नहीं होती।
जानते हैं कैंपस के जूते के कुछ मुख्य खासियत:
किफायती और स्टाइलिश:
कैंपस के जूते प्रीमियम स्टाइल और लुक के साथ किफायती दामों में उपलब्ध हैं, इस तरह कम बजट में भी ब्रांडेड अहसास पाया जा सकता है।
आरामदायक गद्देदार सोल:
कैंपस के जूतों के सोल गद्देदार (cushioned sole) होते हैं, जो पैरों को बेहतर सपोर्ट देने के लिए जाने जाते हैं। इस तरह लंबे समय तक शारीरिक रूप से सक्रीय रहने के बाद भी थकान का अनुभव नहीं होता है।
लचीलापन (Flexibility):
ये जूते बहुत लचीले होते हैं और पैरों की गतिविधि के अनुसार खुद को ढाल लेते हैं, जिससे वर्कआउट के दौरान चोट लगने का खतरा काम हो जाता है और संतुलन बना रहता है।
हवादार फैब्रिक:
इनकी हवादार फैब्रिक पैरों को सूखा रखती है और गंध कम करती है। साथ ही वर्कआउट या शारीरिक गतिविधियों के दौरान पैर ठंडे और आरामदायक रहते है।
मजबूत और टिकाऊ:
कैंपस के जूते मजबूत और टिकाऊ सामग्री से बने होते हैं, जो इन्हें नियमित रनिंग, एक्सरसाइज और डेली वर्कआउट के लिए एक भरोसेमंद विकल्प बनाते हैं।
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अमेरिका की प्रसिद्ध एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी (एएसयू) ने कंटेंट क्रिएशन में डिग्री प्रोग्राम शुरू किया है। यह कोर्स उन युवाओं के लिए तैयार किया गया है जो सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर, डिजिटल स्टोरीटेलर या प्रोफेशनल कंटेंट क्रिएटर बनना चाहते हैं। विश्वविद्यालय का दावा है कि यह डिग्री क्रिएटर इकोनॉमी में करियर बनाने में छात्रों की प्रभावी मदद करेगी। बता दें कि, यूनिवर्सिटी ने अपने वाल्टर क्रोनकाइट स्कूल ऑफ जर्नलिज्म एंड मास कम्युनिकेशन के माध्यम से कंटेंट क्रिएशन में एक नई बैचलर डिग्री शुरू की है। इसका सिलेबस एएसयू के मास कम्युनिकेशन और मीडिया स्टडीज डिग्री के सिलेबस से मिलता-जुलता है, लेकिन इसमें मुख्य अंतर पॉडकास्टिंग, स्टूडियो प्रोडक्शन और ऑन-कैमरा प्रेजेंस पर विशेष ऐच्छिक कोर्सेज का होना है।
डिग्री कोर्स की कीमत
एएसयू में, एरिजोना के निवासियों के लिए स्कॉलरशिप को छोड़कर प्रति शैक्षणिक वर्ष की मूल ट्यूशन फीस लगभग 12,000 डॉलर है, लेकिन आवास, भोजन और अन्य शुल्कों को जोड़ने के बाद कुल लागत 37,000 डॉलर से अधिक हो सकती है। एरिजोना के बाहर के छात्रों के लिए, ट्यूशन फीस 35,000 डॉलर से अधिक है और स्कॉलरशिप से पहले कुल लागत लगभग 60,000 डॉलर है।
एएसयू को झेलनी पड़ीं आलोचनाएं
एएसयू के इस कोर्स पर कई पक्षों से तुरंत आलोचना हुईं। कुछ लोगों का मानना है कि कंटेंट क्रिएशन एक वैध पेशा नहीं है, तो कुछ लोग सोशल मीडिया के प्रोफशन में करियर शुरू करने के लिए कॉलेज की डिग्री के महत्व पर सवाल उठा रहे हैं। गौरतलब है कि, छात्रों की घटती संख्या के लिए प्रतिस्पर्धा करने के इच्छुक विश्वविद्यालय, छात्रों को आज के करियर के लिए तैयार करने के उद्देश्य से नए कोर्सेज शुरू कर रहे हैं। हालांकि, इनसे रोजगार मिलने की संभावना पर बहस हो सकती है।
एक्सपर्ट से समझिए इस कोर्स का महत्व
कॉर्नेल विश्वविद्यालय में संचार की प्रोफेसर ब्रुक एरिन डफी के अनुसार ये कॉलेज कार्यक्रम एक महत्वपूर्ण मोड़ का प्रतिनिधित्व करते हैं। डफी ने कहा कि पिछले एक साल में शिक्षा और अन्य क्षेत्रों के संस्थानों ने कंटेंट क्रिएशन को एक बेहतर करियर विकल्प के रूप में स्वीकार किया है। भले ही “इन्फ्लुएंसर” शब्द कुछ लोगों को असहज कर दे। डफी ने कहा कि एक आदर्श इन्फ्लुएंसर की छवि आमतौर पर एक “युवा लड़की की होती है जो सेल्फी ले रही होती है और बिना कुछ किए ही जबरदस्त लाभ कमा रही होती है।” लेकिन यह उन कंटेंट क्रिएटर्स के लिए नहीं है, जो मीडिया प्रोडक्शन, ऑडियंस रिटेंशन स्ट्रेटेजी, ब्रांड पार्टनरशिप और अपनी ऑनलाइन उपस्थिति से जुड़े व्यावसायिक संबंधों पर काम कर रहे हैं। डफी के मुताबिक, यह एक समय लेने वाला, श्रमसाध्य काम है जिसमें अक्सर अच्छी तनख्वाह नहीं मिलती, कम से कम शुरुआत में तो नहीं। लेकिन इस बात को अक्सर इस धारणा के पीछे छिपा दिया जाता है कि यह एक सपनों की नौकरी है।
दूसरे एक्सपर्ट ईमार्केटर के प्रमुख विश्लेषक मैक्स विलेंस के मुताबिक, सोशल मीडिया पहले से ही एक भीड़भाड़ वाला क्षेत्र है, और आने वाले वर्षों में यह और भी अधिक प्रतिस्पर्धी होने वाला है। ईमार्केटर का अनुमान है कि अमेरिका में सोशल मीडिया क्रिएटर्स की आय इस साल 20 अरब डॉलर से ऊपर पहुंच जाएगी, लेकिन विलेंस ने कहा कि यह समझना महत्वपूर्ण है कि इसका व्यक्तिगत क्रिएटर्स के लिए क्या मतलब है। उन्होंने कहा, ‘उस पैसे का अधिकांश हिस्सा क्रिएटर्स की जेब में नहीं जा रहा है।’
कंटेंट क्रिएटर और अभिनेता सैमी क्रिस्टर्ना ने इस साल एरिजोना स्टेट यूनिवर्सिटी से समाजशास्त्र और राजनीति विज्ञान में डिग्री के साथ स्नातक किया, लेकिन उन्होंने कहा कि अगर कंटेंट क्रिएशन प्रोग्राम उपलब्ध होता तो वह निश्चित रूप से उसमें कक्षाएं लेते और इस विषय को मुख्य विषय के रूप में चुनने पर विचार करते। क्रिस्टर्ना ने कहा कि ये कोर्स ब्रांड सौदों पर बातचीत करने, मॉनेटाइजेशन के अवसरों को अधिकतम करने और दर्शकों को आकर्षित करने और बनाए रखने के तरीके सीखने में उपयोगी होते। उन्होंने आगे कहा कि इनमें से कुछ कौशल अनुभव के माध्यम से स्वयं सीखे जा सकते हैं। फिर भी, “औपचारिक शिक्षा प्राप्त करना अच्छा है।”
कई संस्थान कर चुके हैं ऐसे कोर्स की शुरुआत
पिछले कुछ वर्षों में कई उच्च शिक्षा संस्थानों ने उभरते हुए कंटेंट क्रिएशन उद्योग पर केंद्रित पाठ्यक्रम शुरू कर दिए हैं और कई संस्थानों में सर्टिफिकेट या माइनर प्रोग्राम भी उपलब्ध हैं। इनमें सिरैक्यूज़ विश्वविद्यालय, क्विनिपियाक विश्वविद्यालय और कोलोराडो स्टेट यूनिवर्सिटी के नाम शामिल हैं जिन्होंने माइनर कोर्स शुरू किए हैं और सेंट बोनावेंचर विश्वविद्यालय ने भी पूर्व में कंटेंट क्रिएशन में मेजर कोर्स की घोषणा की थी।