Sunday, July 19, 2026
Home Blog

बोर्ड गेम्स के जरिए महिलाओं ने बनाई नई बिजनेस कनेक्टिविटी: एफबीएस वीमन फोरम जयपुर की नेटवर्किंग मीट रही खास, एंटरप्रेन्योर्स ने सुनाई सक्सेस स्टोरी – Jaipur News




नेटवर्किंग को पारंपरिक परिचय सत्रों से आगे बढ़ाते हुए एफबीएस जयपुर वुमन एंटरप्रेन्योर्स नेटवर्किंग फोरम ने इस बार एक अनूठी पहल की। शहर के अरिरासा रेस्टोरेंट में आयोजित बोर्ड गेम्स आधारित नेटवर्किंग मीट में महिला उद्यमियों ने खेल-खेल में नए व्यावसायिक संबंध बनाए और आपसी संवाद को नई दिशा दी। कार्यक्रम की संस्थापक मेघा गुप्ता ने बताया कि इस आयोजन का उद्देश्य महिलाओं को ऐसा मंच देना था, जहां वे औपचारिक बातचीत के बजाय सहज माहौल में एक-दूसरे को समझ सकें और नए बिजनेस अवसरों की संभावनाएं तलाश सकें। इसके लिए जयपुर मीपल्स की ओर से कई रोचक बोर्ड गेम्स आयोजित किए गए, जिनमें सभी प्रतिभागियों ने उत्साह के साथ भाग लिया। बोर्ड गेम्स के दौरान महिलाओं ने टीमवर्क, रणनीति और आपसी सहयोग के साथ खेल का आनंद लिया। इस प्रक्रिया में प्रतिभागियों को नए लोगों से जुड़ने, अपने अनुभव साझा करने और भविष्य के व्यावसायिक सहयोग की संभावनाओं पर चर्चा करने का अवसर मिला। आयोजन में हंसी-खुशी, स्वस्थ प्रतिस्पर्धा और सकारात्मक ऊर्जा का माहौल बना रहा। एफबीएस जयपुर की कोर टीम सदस्य रखी खंडेलवाल ने बताया कि पारंपरिक नेटवर्किंग की तुलना में यह तरीका कहीं अधिक प्रभावी और यादगार साबित हुआ। प्रतिभागियों ने इसे एक ऐसा अनुभव बताया, जिसमें औपचारिकता की बजाय सहजता और आत्मीयता अधिक महसूस हुई। कार्यक्रम में स्वादिष्ट व्यंजनों के साथ हल्के-फुल्के डांस, मनोरंजक गतिविधियां और विभिन्न बोर्ड गेम्स ने शाम को और भी जीवंत बना दिया। आयोजन के दौरान महिलाओं ने एक-दूसरे के साथ अपने उद्यम, चुनौतियों और सफलता की कहानियां भी साझा कीं। एंटरप्रेन्योर एकता विजय ने सभी प्रतिभागियों को अपने फ्रीज-ड्राइड फ्रूट्स के हेल्दी गिफ्ट हैम्पर भेंट किए, जिन्हें महिलाओं ने काफी सराहा। आयोजकों ने बताया कि एफबीएस जयपुर का उद्देश्य महिला उद्यमियों के लिए ऐसा मजबूत नेटवर्क तैयार करना है, जहां वे न केवल अपने व्यवसाय को आगे बढ़ा सकें, बल्कि सहयोग, सीख और प्रेरणा के माध्यम से एक-दूसरे की सफलता की भागीदार भी बन सकें।



Source link

झांसी में आज बारिश का अलर्ट: आसमान में बादल छाए, तापमान 31 डिग्री सेल्सियस पहुंचा, 24 जुलाई तक भारी बारिश – Jhansi News




झांसी में 2 दिन से हो रही बरसात के बाद आज भी बारिश होने का अलर्ट है। रविवार सुबह से ही आसमान में काले बादल छाए हैं और शाम तक अच्छी बारिश होने की संभावना है। सुबह 10 बजे तापमान 31 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया। पिछले 24 घंटे में 16.3 मिलीमीटर बारिश हुई है। बारिश के बाद उमस भरी गर्मी से राहत मिली थी। लेकिन आज सुबह से फिर से उमस बढ़ गई है। मौसम विभाग का कहना है कि मानसून सक्रिय हो गया है। 24 जुलाई तक भारी बारिश होने की संभावना है। दो दिन से सक्रिय है मानसून झांसी में जून के अंत में मानसून के दस्तक देने के बाद अच्छी बारिश हुई थी। इसके बाद मानसून शुष्क पड़ गया और बारिश का दौर थम गया। तेज धूप की वजह से गर्मी बढ़ गई थी। लेकिन शुक्रवार शाम को मानसून एक्टिव हो गया और बारिश होने लगी। पिछले दो दिनों से बारिश हो रही है। पिछले 24 घंटे में 16.3 मिलीमीटर बारिश हो चुकी है। रविवार को अधिकतम तापमान 38.5 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जो सामान्य से 4.8 डिग्री ज्यादा है। वहीं न्यूनतम तापमान 24.4 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। जो सामान्य से 0.9 डिग्री सेल्सियस कम है। आज का अधिकतम तापमान 37 डिग्री सेल्सियस और न्यूनतम 26 डिग्री सेल्सियस के आसपास रह सकता है। भारी बारिश होने की संभावना भरारी कृषि विज्ञान केंद्र के मौसम वैज्ञानिक डॉ. आदित्य कुमार सिंह का कहना है कि बंगाल की खाड़ी में बने हवाओं के निम्न दाब के क्षेत्र के बाद मानसून एक्टिव हुआ है। इससे झांसी बारिश हो रही है। आज से 24 जुलाई तक भारी बारिश होने की संभावना है। 20, 21 और 22 जुलाई को बिजली कड़कने के साथ तेज हवाएं भी चल सकती हैं।



Source link

खेत में आकाशीय बिजली गिरने से मजदूर की मौत: बक्सर में धान की रोपनी की तैयारी के दौरान हादसा, अस्पताल पहुंचने से पहले तोड़ा दम – Buxar News




बक्सर के मुफस्सिल थाना क्षेत्र के नारायणपुर गांव में रविवार सुबह आकाशीय बिजली गिरने से एक मजदूर की मौत हो गई। मृतक की पहचान नारायणपुर निवासी स्वर्गीय धर्मदेव सिंह के बेटे विजय सिंह ( 50) के रूप में हुई है। वह मजदूरी कर अपने परिवार का भरण-पोषण करते थे। उनके परिवार में लगभग 20 वर्षीय एक पुत्र है, जबकि एक पुत्री की शादी हो चुकी है। विजय सिंह धान की रोपाई की तैयारी के लिए अपने खेत की मेड़ ठीक कर रहे थे, ताकि अगले दिन रोपनी का काम कराया जा सके। शनिवार रात से ही जिले में रुक-रुक कर बारिश हो रही थी, जिसके साथ तेज गर्जना और बिजली चमक रही थी। घटना सुबह करीब नौ बजे हुई, उस समय आसपास के कई किसान भी अपने-अपने खेतों में कृषि कार्य में जुटे हुए थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, काम के दौरान अचानक तेज गर्जना के साथ आकाशीय बिजली गिरी और विजय सिंह उसकी चपेट में आ गए। बिजली गिरते ही वह खेत में बेहोश होकर गिर पड़े। अस्पताल पहुंचने से पहले हुई मौत आसपास मौजूद किसानों और ग्रामीणों ने तुरंत उन्हें उठाकर चौसा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया। अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने जांच के बाद विजय सिंह को मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों ने बताया कि उनकी मौत अस्पताल पहुंचने से पहले ही हो चुकी थी। घटना की खबर मिलते ही परिजनों में कोहराम मच गया। परिवार के सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है। सूचना मिलने पर मुफस्सिल थाना की पुलिस चौसा सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंची और शव को अपने कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया। मुफस्सिल थाना अध्यक्ष शंभू भगत ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस टीम को अस्पताल भेजा गया था। शव का पोस्टमार्टम कराया जा रहा है तथा आगे की विधिक कार्रवाई की जा रही है।



Source link

धार में 11 दिन से बारिश नहीं, खेत सूखने लगे: सोयाबीन फसल पर संकट, किसानों की बढ़ी चिंता – Dhar News




धार जिले में पिछले 11 दिनों से बारिश नहीं होने के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है। मानसून की शुरुआत में हुई अच्छी बारिश से सोयाबीन की बेहतर पैदावार की उम्मीद जगी थी, लेकिन अब बारिश थमने और तेज धूप-उमस के कारण खेतों की नमी तेजी से खत्म हो रही है। इसका असर सोयाबीन समेत खरीफ की अन्य फसलों पर भी दिखाई देने लगा है। सुबह बादल, दोपहर में तेज धूप कई दिनों से सुबह के समय आसमान में घने बादल छा रहे हैं, जिससे किसानों को बारिश की उम्मीद बंधती है। हालांकि, दोपहर होते-होते बादल छंट जाते हैं और तेज धूप निकल आती है। बारिश नहीं होने से मिट्टी लगातार सूख रही है और उमस भी बढ़ गई है। सोयाबीन की बढ़वार पर संकट कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, इस समय सोयाबीन की फसल बढ़वार के महत्वपूर्ण चरण में है और उसे पर्याप्त नमी की जरूरत होती है। यदि जल्द बारिश नहीं हुई तो पौधों की बढ़वार रुक सकती है, पत्तियां पीली पड़ने लगेंगी और फसल सूखने का खतरा बढ़ जाएगा। किसानों ने जताई नुकसान की आशंका किसान लोकेश राणा ने बताया कि पिछले 11 दिनों से जिले में अच्छी बारिश नहीं हुई है। खेतों की नमी लगातार कम होती जा रही है और सोयाबीन की फसल को इस समय सबसे ज्यादा पानी की जरूरत है। उन्होंने कहा कि यदि अगले कुछ दिनों में अच्छी बारिश नहीं हुई तो किसानों को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है। गेहूं की तैयारी भी होगी प्रभावित लोकेश राणा के मुताबिक, बारिश नहीं होने से खरीफ फसल के साथ-साथ आगामी रबी सीजन की तैयारियों पर भी असर पड़ेगा। उन्होंने बताया कि नुकसान की स्थिति में किसानों को प्रति बीघा हजारों रुपये की आर्थिक हानि हो सकती है। बारिश का इंतजार कर रहे किसान जिलेभर के किसान अब अच्छी बारिश का इंतजार कर रहे हैं। आसमान में बादल बनने के बावजूद बारिश नहीं होने से किसानों की चिंता लगातार बढ़ती जा रही है। अब सभी की निगाहें मौसम के अगले बदलाव पर टिकी हैं।



Source link

बारिश में खूब खाई जाती है यह खास डिश, चिकन-मटन को देता है टक्कर


Last Updated:

Doka Mutton Recipe: बारिश से मिथिलांचल में डोका (घोंघा) की भरमार हो जाती है. ऐसे में नॉनवेज प्रेमियों की बल्ले-बल्ले रहती है. 300-350 रुपये किलो में बिकने वाला यह डोका मटन की तरह बनता है. लोग इसे बड़े चाव से खाते हैं. यह कैंसर जैसी खतरनाक बीमारियों में भी फायदेमंद माना जाता है.

ख़बरें फटाफट

मधुबनी: लगातार हो रही बारिश ने नॉनवेज प्रेमियों की बल्ले बल्ले कर दी है. मिथिलांचल में लोग डोका बड़े चाव से खाते हैं और ये अभी खेतों में पानी भरने से ज्यादा दिखाई दे रहा है. यहां इसे दो तरीके से लोग खाते हैं, एक मटन बनाकर और दूसरा भूनकर. इसका स्वाद बेहद ही लाजवाब होता है. ऐसे में आइये जानते हैं कि लोग डोका कैसे बनाकर खाते हैं. आइये जानते हैं इसकी मिथिला में आसान रेसिपी.

जानें डोका मटन की रेसिपी 

मिथिलांचल के किसी भी क्षेत्र में अगर आप होंगे तो इन दिनों लगातार बारिश हो रही है. डोका ( घोंघा की एक प्रजाति) (snail) आपको कहीं भी आसानी से बाजार में मिल जाएगी. हालांकि अब इसकी कीमत महंगी हो गई है. यह रुपये 300 से 350 रुपये किलो मिल रहा है. इसे पकाने का तरीका भी ठीक मटन बनाने जैसा ही है. इसका 2 हिस्सा होता है, एक हिस्सा थोड़ा सा हार्ड होता है, जिसका मटन बनता है. इसे लोग बड़े ही आनंद से खाते हैं.

बता दें कि मटन बनाने के लिए आपको प्याज ,हरी मिर्च ,लहसुन, अदरक चाहिए. प्याज को वैसे ही कट करते हैं और फिर सब घरेलू , हल्दी, मिर्च, धनिया, नमक, गरम मसाला को डोका में मिक्स करते हैं. उसके बाद फिर आप किसी भी बर्तन में या कुकर में बना सकते हैं. इसके बाद उसमें तेल, जीरा, लाल सूखी मिर्च जैसे ही चटक जाता है. उसमें आप पूरा मिक्स की हुई डोका का मटन डाल दीजिए और फिर धीमी आंच पर उसको अच्छे से फ्राई करना होता है. जैसे ही वह फ्राई हो जाता है, उसमें हल्का सा आपका ग्रेवी अपने अनुसार दे सकते हैं और अगर कुकर में पका रहे हैं तो 3-4 सिटी लगाना होता है. हालांकि कढ़ाई में भी इसे बनाते हैं तो स्वाद और बढ़िया होता है. थोड़ा समय जरूर लगता है, लेकिन यह मटन की तरह टेस्टी लगता है.

स्वाद होता है लाजवाब, कैंसर के इलाज में है लाभदायक

डोका मटन बनाने में बहुत सारे लोग आलू का भी इस्तेमाल करते हैं. जहां आलू के छिलके को उतारकर कट करके डालते हैं ताकि स्वाद लाजवाब आए. मिथिलांचल के लोग इन दिनों इसे खूब खाते हैं, इसका स्वाद भी बहुत अच्छा होता है और सेहत के लिए बहुत अच्छा होता है. डोका को लेकर लोग कहते हैं कि यह कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों में भी फायदा करता है. इसके साथ ही बॉडी को गर्म रखता है.

इन दिनों डोका कहीं भी जहां जल जमाव होता है. वहां आसानी से मिथिला में मिल जाता है. इसे शुद्ध मिट मानते है ,क्योंकि यह सिर्फ और सिर्फ मिट्टी और पानी में रहता है और मिट्टी ही खाता है. तालाब के किनारे या फिर खेत में जैसे ही थोड़ा पानी हो मेड के किनारे कीचड़ में डोका होता है और यह शुद्ध माना जाता है. इसका मटन पकाकर मिथिला क्षेत्र में लोग खूब खाते हैं.

About the Author

Brijendra Pratap Singh

बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत डेस्क, दैनिक भास्कर डिजिटल डेस्क के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से News.in में सीनियर कंटें…और पढ़ें





Source link

संडे प्रोफाइल : एलिक्स अर्ले: 85 लाख फॉलोअर्स वाली अर्ले सबसे प्रभावशाली कंटेंट क्रिएटर




अमेरिकी इंफ्लूएंसर एलिक्स अर्ले को टाइम मैग्जीन ने 2026 के 100 सबसे प्रभावशाली डिजिटल कंटेंट क्रिएटर की सूची में शीर्ष पर रखा है। अर्ले ने एक प्रोडक्ट भी लॉन्च किया है। अब नेटफ्लिक्स उन पर रियलिटी सीरीज बनाएगा। आज सोशल मीडिया पर लाखों लोग अपनी जिंदगी साझा करते हैं, लेकिन अमेरिकी कंटेंट क्रिएटर एलिक्स अर्ले ने इसी आदत को अपना सबसे बड़ा बिजनेस मॉडल बना दिया। टिकटॉक पर करीब 85 लाख फॉलोअर्स वाली 25 वर्षीय अर्ले का मानना है कि लोग अब भी उन्हें ठीक से नहीं समझते। उनके मुताबिक सबसे बड़ी गलतफहमी यह है कि लोगों को लगता है उन्हें सफलता आसानी से मिल गई। दूसरी धारणा यह है कि वह केवल किसी और के बिजनेस का चेहरा हैं, जबकि वह अपने फैसले खुद लेने वाली उद्यमी हैं। अर्ले कहती हैं, ‘लोग मुझे कम आंकते हैं या सोचते हैं कि मैं नासमझ हूं।’ इंटरनेट पर बेहद आत्मविश्वासी और प्रभावशाली दिखने वाली अर्ले वास्तविक जीवन में काफी शांत स्वभाव की हैं। उनका कहना है कि उनसे पहली बार मिलने वाले कई लोग कहते हैं कि वे तस्वीरों और वीडियो जैसी नहीं दिखतीं। एक समय उन्हें राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प का समर्थक भी माना गया। इस पर अर्ले ने साफ किया कि कॉलेज के दिनों में उनके विचार अलग थे, लेकिन अब वे खुद को ट्रम्प समर्थक नहीं मानतीं। अर्ले की सबसे बड़ी ताकत उनकी साफगोई मानी जाती है। उन्होंने कभी अपनी जिंदगी को परफेक्ट दिखाने की कोशिश नहीं की। उन्होंने पारिवारिक परेशानियों, प्रेम संबंधों, मानसिक उतार-चढ़ाव और मुंहासों जैसी निजी समस्याओं तक को सोशल मीडिया पर खुलकर साझा किया। यही ईमानदारी उनके फॉलोअर्स को उनसे जोड़ती है। उनकी लोकप्रियता को देखते हुए नेटफ्लिक्स उन पर आधारित रियलिटी सीरीज ‘अर्ले मीट्स वर्ल्ड’ लेकर आ रहा है। मियामी यूनिवर्सिटी से मार्केटिंग की पढ़ाई करने वाली अर्ले दो बार हार्वर्ड यूनिवर्सिटी में भी व्याख्यान दे चुकी हैं। उन्होंने अमेजन, कार्ल्स जूनियर और प्रीबायोटिक ड्रिंक पॉपी सहित कई बड़े ब्रांड्स के साथ काम किया है। अर्ले का सोशल मीडिया सफर भी संघर्ष से भरा रहा। न्यू जर्सी में पली-बढ़ी अर्ले ने कॉलेज के दौरान टिकटॉक पर डांस, शॉपिंग और रोजमर्रा की जिंदगी से जुड़े वीडियो पोस्ट किए, लेकिन खास पहचान नहीं मिली। 2022 में उन्होंने अपने मुंहासों (एक्ने) से जुड़ी परेशानी और बिना मेकअप वाली तस्वीरें साझा कीं। यह वीडियो वायरल हो गई और लाखों लोगों ने उनकी ईमानदारी की सराहना की।



Source link

30 साल बाद घर लौटेगा जवान का शव: माउंट एवरेस्ट पर तूफान में फंसे थे लद्दाख के दोरजे, 26 हजार फीट ऊपर गुफा में शरीर


  • Hindi News
  • National
  • Ladakh ITBP Soldier Dorje Morup Body Found On Mount Everest After 30 Years

लेह5 घंटे पहलेलेखक: शेवांग रिंगजिन

  • कॉपी लिंक

1996 में ब्रिटिश पर्वतारोही और फिल्ममेकर मैट डिकिन्सन ने पहली बार शव का वीडियो रिकॉर्ड किया था।

माउंट एवरेस्ट की बर्फीली चोटियों पर 26,247 फीट ऊंचे ‘डेथ जोन’ में पिछले 30 सालों से एक पर्वतारोही का शरीर बर्फ में जमा है। पैरों में हरे जूते होने के कारण दुनिया उसे ‘ग्रीन बूट्स’ के नाम से जानती रही।

सालों तक इसे आईटीबीपी के हेड कांस्टेबल शेवांग पाल्जोर का शव माना गया, लेकिन हाल में हुए डीएनए टेस्ट से पुष्टि हुई कि यह लांस नायक दोरजे मोरुप का पार्थिव शरीर है। अब 30 साल इंतजार के बाद इस साल अक्टूबर तक लद्दाख में दोरजे के परिवार को उनका शव सौंपा जाएगा।

दोरजे मोरुप, शेवांग पाल्जोर और सूबेदार शेवांग समनला 1996 में तिब्बत के उत्तरी मार्ग से एवरेस्ट फतह करने निकली पहली भारतीय तीन सदस्यीय टीम का हिस्सा थे। 10 मई 1996 को शिखर के पास तीनों भीषण बर्फीले तूफान में फंस गए थे। यह अभियान बाद में ‘1996 माउंट एवरेस्ट डिजास्टर’ के नाम से जाना गया, जिसमें उस सीजन में 12 पर्वतारोहियों की मौत हुई थी।

75 वर्षीय पत्नी बोलीं- उन्हें देखकर ही आखिरी सांस लूंगी

भास्कर ने दोरजे के घर पहुंचकर उनकी पत्नी कोनचोक यांगस्किट से मुलाकात की। 75 वर्षीय कोनचोक अब सुन नहीं सकतीं। वह पति की पेंशन पर गुजर-बसर करती हैं। जब से बेटे फुंतसोग दोरजे ने पिता का शव लाने वाले मिशन की सूचना दी, तब से वह रो रही हैं।

उन्होंने बेटे को कागज पर लिखकर दिया है कि उनकी आखिरी इच्छा एक बार पति को देखने की है। उन्होंने लिखा, “उन्हें देखकर ही आखिरी सांस लूंगी।” दोरजे के बेटे फुंतसोग भारतीय सेना में हैं। उन्होंने बताया कि आईटीबीपी से उन्हें अब तक मिशन की पूरी जानकारी नहीं मिली है। मां ने पिता के इंतजार में पूरी जिंदगी रो-रोकर बिता दी। अब उनकी आंखों में उम्मीद नजर आ रही है।

एवरेस्ट चढ़ने वालों के लिए लैंडमार्क बन गया था ग्रीन बूट्स

1996 में ब्रिटिश पर्वतारोही और फिल्ममेकर मैट डिकिन्सन ने पहली बार बर्फ में फंसे दोरजे मोरुप के शव का वीडियो रिकॉर्ड किया था। बाद में यह फुटेज ‘समिट फीवर’ डॉक्यूमेंट्री में भी दिखाई गई। पैरों में पहने हरे रंग के जूतों के कारण इस शव को ‘ग्रीन बूट्स’ नाम दिया गया।।

यह शव एवरेस्ट के उत्तरी मार्ग पर एक छोटी गुफा में पड़ा था जो ‘ग्रीन बूट्स गुफा’ नाम से मशहूर हुआ। शिखर पर जाने वाले लगभग सभी पर्वतारोही इसी रास्ते से होकर गुजरते थे। उनके लिए यह रास्ते की पहचान (लैंडमार्क) बन गया था।

दोरजे मोरुप का शव एवरेस्ट पर एक छोटी चट्टानी गुफा में पड़ा था।

दोरजे मोरुप का शव एवरेस्ट पर एक छोटी चट्टानी गुफा में पड़ा था।

30 साल तक शव क्यों नहीं निकाला जा सका

दोरजे का शव जिस जगह है, वह 8 हजार मीटर (करीब 26,247 फीट) से ऊपर का ‘डेथ जोन’ है। यहां समुद्र तल की तुलना में सिर्फ करीब 33% ऑक्सीजन होती है। इतनी ऊंचाई पर शरीर तेजी से जवाब देने लगता है। कोशिकाएं मरने लगती हैं।

यहां हेलिकॉप्टर भी नहीं पहुंच सकते। इसलिए यहां से शव वापस लाना दुनिया के सबसे मुश्किल अभियानों में गिना जाता है। यही वजह है कि एवरेस्ट पर मारे गए 340 से ज्यादा पर्वतारोहियों में से अधिकांश के शव आज भी वहीं पड़े हैं।

————————-

यह खबर भी पढ़ें…

भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट लॉन्च कामयाब: स्काईरूट एयरोस्पेस ने खुद बनाकर अंतरिक्ष में भेजा, 2 दोस्तों ने इसरो छोड़कर बनाई थी यह कंपनी

हैदराबाद की स्काईरूट एयरोस्पेस ने शनिवार 18 जुलाई को भारत का पहला प्राइवेट ऑर्बिटल रॉकेट विक्रम-1 लॉन्च किया। यह टेस्ट पहले ही प्रयास में कामयाब रहा। विक्रम-1 को स्काईरूट एयरोस्पेस ने तैयार किया और लॉन्चिंग भी खुद ही की। सिर्फ लॉन्चपैड इसरो का था। पूरी खबर पढ़ें…

खबरें और भी हैं…



Source link

मार्केट में खड़े ट्रक से डीजल चोरी – jhalawar News



भिलवाड़ी| कस्बे के मार्केट में शुक्रवार देर रात खड़े एक ट्रक से बदमाश डीजल चोरी कर ले गए। घटना का पता शनिवार सुबह ट्रक स्टार्ट करने पर चला। इसके बाद चालक ने पिपलिया पुलिस चौकी में शिकायत दर्ज कराई। ट्रक चालक रतनलाल गुर्जर के अनुसार वह देवली से बनास नदी की रेत लेकर ट्रक आरजे 06 जीबी 7218 से भिलवाड़ी आया था। रेत की अनलोडिंग शनिवार को होनी थी, इसलिए ट्रक मार्केट में खड़ा किया था। रात करीब 2 बजे अज्ञात चोर डीजल निकालकर फरार हो गए।



Source link

नीट‌ रिजल्ट- OMR और मार्कशीट में 600 अंकों तक अंतर: कई क्वालिफाई नहीं कर पाए; हरियाणा में एक ही छात्र के दो अलग रिजल्ट


  • Hindi News
  • National
  • Haryana NEET Result Controversy | OMR Marksheet Score Discrepancy Update

नई दिल्ली/कोटा56 मिनट पहले

  • कॉपी लिंक

NTA ने 16 जुलाई को फाइनल आंसर-की जारी करने के 3-4 घंटे बाद ही रिजल्ट जारी कर दिया था।

री-नीट के नतीजों के बाद भी छात्रों के बीच भारी असंतोष है। OMR शीट और जारी मार्कशीट के अंकों में बड़ा अंतर होने से विवाद खड़ा हो गया है। ऐसा एक या दो नहीं, बल्कि कई छात्रों के साथ हुआ है। छात्रों का कहना है कि उन्होंने जब अपनी OMR शीट का मिलान ‘फाइनल आंसर-की’ से किया, तो उनके अंक काफी अधिक थे, लेकिन मार्कशीट में नंबर अचानक घट गए।

कई छात्रों के अंक 15 से लेकर 600 तक कम हो गए हैं। इस वजह से वे छात्र जो OMR के अनुसार परीक्षा पास कर रहे थे, अब वे ‘क्वालिफाई’ भी नहीं कर पा रहे हैं। विवाद का मुख्य कारण नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) की जल्दबाजी मानी जा रही है। एजेंसी ने फाइनल आंसर-की जारी करने के महज 3-4 घंटे बाद ही रिजल्ट घोषित कर दिया।

NTA ने 16 जुलाई की देर रात नीट का रिजल्ट जारी किया था। इस साल करीब 20 लाख स्टूडेंट्स ने परीक्षा दी थी, जिनमें से 11.21 लाख स्टूडेंट्स मेडिकल, डेंटल, AYUSH और अन्य मेडिकल कोर्स में एडमिशन के लिए क्वालिफाई हुए हैं। 2020 और 2021 के बाद पहली बार कोई भी छात्र 720 का परफेक्ट स्कोर हासिल नहीं कर पाया।

न्याय के लिए हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहे छात्र

अभिभावक और छात्र इसे बड़ी लापरवाही मान रहे हैं। डॉ. राजेश कुमार सिंह जैसे अभिभावकों ने एनटीए को पत्र लिखकर अपनी शिकायत दर्ज कराई है और वे अब न्याय के लिए हाईकोर्ट जाने की तैयारी कर रहे हैं।

वहीं, एनटीए ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर लिखा- हम सभी शिकायतों की जांच कर रहे हैं। छात्रों और अभिभावकों को सलाह दी जाती है कि वे जांच के लिए केवल मूल ओएमआर ही जमा करें। फर्जी/एआई जनरेटेड ओएमआर के मामले में शिकायतकर्ता के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकती है।’

हरियाणा में एक ही छात्र के दो अलग रिजल्ट

नीट रिजल्ट को लेकर एक और चौंकाने वाला मामला हरियाणा से सामने आया है। हरियाणा के अभ्यर्थी मुकुल काजल ने एनटीए के महानिदेशक को शिकायत भेजकर आरोप लगाया है कि उनके स्कोरकार्ड में बिना किसी सूचना के बड़ा फेरबदल कर दिया गया। इसे दुरुस्त कराया जाए।

शिकायत के अनुसार, 17 जुलाई 2026 को आधिकारिक वेबसाइट से डाउनलोड किए गए स्कोरकार्ड में मुकुल के 605/720 अंक (ऑल इंडिया रैंक 9551) दर्ज थे। लेकिन महज कुछ घंटों बाद 18 जुलाई की सुबह जब दोबारा स्कोरकार्ड डाउनलोड किया गया, तो उनके अंक घटकर सिर्फ 60/720 अंक दिखाए।

इससे मुकुल की ऑल इंडिया रैंक घटकर 18,76,324 हो गई। छात्र का दावा है कि उनके पास 17 जुलाई का मूल स्कोरकार्ड सुरक्षित है। साथ ही, ओएमआर रिस्पॉन्स शीट और एनटीए की फाइनल आंसर-की के मिलान से भी उनका स्कोर 605 अंक ही बनता है।

——————————-

नीट से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें…

NEET में सफल होने वालों में करीब आधे OBC:हर दूसरा सफल छात्र इसी वर्ग से; SC परीक्षार्थी 63% और EWS 76% बढ़े

NEET 2026 के नतीजों में मेडिकल शिक्षा के सामाजिक-शैक्षणिक रुझानों में बड़ा बदलाव दिखा है। इस साल परीक्षा देने वालों में OBC सबसे बड़ा वर्ग रहा। कुल रजिस्ट्रेशन में OBC की हिस्सेदारी 41.8% थी, जबकि क्वालिफाई करने वालों में यह बढ़कर 45.7% हो गई। यानी लगभग हर दूसरा सफल छात्र OBC वर्ग से है। पूरी खबर पढ़ें…

खबरें और भी हैं…



Source link

बिजली शिकायतों का निस्तारण न होने पर होगी कार्रवाई: लखनऊ में एमडी बोले- बिना समाधान किए बंद नहीं होगी शिकायत, हर महीने लगेगा विशेष समाधान शिविर – Lucknow News




लखनऊ में मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड (एमवीवीएनएल) के प्रबंध निदेशक संदीप भागिया ने स्पष्ट निर्देश दिया। बिजली बिल, खराब मीटर, नया कनेक्शन या बिजली चोरी से जुड़ी शिकायतों के समाधान में लापरवाही अब अधिकारियों पर भारी पड़ेगी। संदीप भागिया ने निर्देश दिए हैं कि टोल फ्री नंबर 1912 पर दर्ज हर शिकायत का समयबद्ध और वास्तविक निस्तारण अनिवार्य होगा । अगर किसी अधिकारी ने बिना समाधान किए फर्जी तरीके से शिकायत बंद दिखाई, तो उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। शिकायतों को नजरअंदाज करना पड़ेगा भारी मध्यांचल निगम मुख्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में एमडी ने बताया कि कुछ मामलों में जनप्रतिनिधियों द्वारा भेजी गई शिकायतों का भी समाधान नहीं किया गया। ऐसे मामलों की जांच कराई जा रही है और रिपोर्ट मिलने के बाद दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी। उन्होंने कहा कि उपभोक्ताओं को गलत बिजली बिल, खराब मीटर और नए कनेक्शन से जुड़ी समस्याओं से राहत दिलाने के लिए विभाग रोजाना समीक्षा कर रहा है। सोलर कनेक्शन लेने वाले उपभोक्ताओं की तकनीकी दिक्कतों का भी प्राथमिकता के आधार पर समाधान कराया जाएगा। उपकेंद्रों की क्षमता बढ़ाई जा रही है एमडी ने बताया कि शहर और ग्रामीण क्षेत्रों में बढ़ते बिजली भार को देखते हुए नए उपकेंद्रों की क्षमता बढ़ाई जाएगी। जर्जर बिजली तारों और पुराने खंभों को बदलने के लिए जल्द ही विशेष अभियान शुरू किया जाएगा, जिससे फॉल्ट और बिजली आपूर्ति में आने वाली बाधाओं को कम किया जा सके। हर महीने विशेष समाधान शिविर आयोजित होगा उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए एलडीए और नगर निगम की तर्ज पर अब हर महीने मध्यांचल निगम मुख्यालय में विशेष समाधान शिविर आयोजित किया जाएगा। इन शिविरों में नए कनेक्शन, गलत बिलों का संशोधन, लोड बढ़ाने, खराब मीटर बदलने और अन्य समस्याओं का मौके पर निस्तारण किया जाएगा। शिविर की तारीख जल्द घोषित की जाएगी। इसके अलावा अमौसी जोन के मोहनलालगंज और मलिहाबाद क्षेत्र में नए कार्यालय खोलने पर भी विचार किया जा रहा है। चोरी रोकने के लिए अभियान चलाया जाएगा बिजली चोरी रोकने के लिए लेसा और विजिलेंस की संयुक्त टीम शहर के संवेदनशील इलाकों में सघन अभियान चलाएगी। होटल, रेस्टोरेंट, हॉस्टल, नर्सिंग होम और औद्योगिक प्रतिष्ठानों की भी जांच होगी। कटिया लगाकर अवैध रूप से ई-रिक्शा चार्ज करने वालों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया जाएगा। एमडी ने कहा कि उपभोक्ताओं को निर्बाध और पारदर्शी बिजली सेवा उपलब्ध कराना निगम की सर्वोच्च प्राथमिकता है।



Source link