Thursday, June 18, 2026
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बिना प्याज-टमाटर के बनाएं ढाबा स्टाइल पिंडी छोले, जानिए बनाने का आसान तरीका


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Pindi Chole Recipe: आप घर पर बिना प्याज और टमाटर के रेस्टोरेंट जैसा पिंडी छोले बनाना चाहते हैं, तो यह आसान रेसिपी आपके लिए है. चायपत्ती, दरदरे मसाले और देसी घी का तड़का इन छोले को खास स्वाद देता है, जिसे भटूरे, नान या कुलचे के साथ परोसा जा सकता है.

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पिंडी छोले रेसिपी

Pindi Chole Recipe: उत्तर भारत के खाने की बात हो और पिंडी छोले का जिक्र न आए, ऐसा शायद ही कभी होता है. भटूरे, कुलचे या नान के साथ परोसे जाने वाले पिंडी छोले अपने गाढ़े मसालेदार स्वाद और खास खुशबू के लिए जाने जाते हैं. सबसे दिलचस्प बात यह है कि पारंपरिक पिंडी छोले में प्याज और टमाटर का इस्तेमाल नहीं किया जाता, फिर भी इसकी ग्रेवी बेहद स्वादिष्ट और चटपटी बनती है. यही वजह है कि यह डिश पंजाब से लेकर देश के कई हिस्सों तक लोगों की पसंद बनी हुई है.

अक्सर लोग सोचते हैं कि ढाबे या रेस्टोरेंट जैसा स्वाद घर पर लाना मुश्किल है, लेकिन सही मसालों और सही तरीके का इस्तेमाल करके यह काम बेहद आसान हो सकता है, अगर आप भी अपने परिवार या मेहमानों के लिए कुछ खास बनाना चाहते हैं, तो निशा मधुलिका की यह आसान रेसिपी आपके बहुत काम आने वाली है. कुछ आसान स्टेप्स को फॉलो करके आप घर पर ही ऐसे पिंडी छोले तैयार कर सकते हैं, जिनका स्वाद हर किसी को पसंद आएगा.

1. सबसे पहले चनों को सही तरीके से भिगोएं
पिंडी छोले की शुरुआत अच्छी क्वालिटी के काबुली चनों से होती है. एक कप काबुली चने लें और उन्हें साफ पानी से दो से तीन बार अच्छी तरह धो लें. इसके बाद चनों को भरपूर पानी में डालकर पूरी रात भीगने के लिए छोड़ दें. रातभर भीगे हुए चने फूल जाते हैं और पकने के बाद मुलायम बनते हैं. यही वजह है कि छोले स्वाद में बेहतर लगते हैं.

2. चायपत्ती के पानी से आएगा खास रंग और स्वाद
अगले दिन भीगे हुए चनों का पानी निकाल दें. अब प्रेशर कुकर में चने डालें और उसमें एक टुकड़ा दालचीनी, एक तेजपत्ता और स्वाद के मुताबिक नमक डाल दें. दूसरी तरफ एक कप पानी में दो चम्मच चायपत्ती उबाल लें. जब पानी का रंग गहरा हो जाए, तो उसे छानकर कुकर में डाल दें. साथ में एक कप सादा पानी भी मिला दें. चायपत्ती का पानी पिंडी छोले को वही गहरा रंग देता है, जो अक्सर ढाबों और रेस्टोरेंट में देखने को मिलता है. इसके साथ ही स्वाद में भी हल्की गहराई आ जाती है.

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3. कुकर में चनों को कितनी देर पकाएं
कुकर को गैस पर रखें और तेज आंच पर एक सीटी आने दें. पहली सीटी के बाद आंच धीमी कर दें और करीब तीन मिनट तक चनों को पकने दें. इसके बाद गैस बंद कर दें और कुकर का प्रेशर अपने आप निकलने दें. जब कुकर खुल जाए, तो चनों को छान लें. चनों का बचा हुआ पानी फेंकें नहीं. इसी पानी का इस्तेमाल आगे ग्रेवी तैयार करने में किया जाएगा, जिससे स्वाद और भी बेहतर हो जाएगा.

4. तैयार करें पिंडी छोले का खास मसाला
इस डिश की असली पहचान इसका दरदरा मसाला है. इसके लिए एक पैन में दो-दो चम्मच साबुत धनिया, सौंफ, जीरा और अनारदाना डालें. साथ में दो कश्मीरी लाल मिर्च, थोड़ी लौंग, दो बड़ी इलायची और आधा चम्मच काली मिर्च भी डाल दें. इन सभी मसालों को धीमी आंच पर तब तक भूनें, जब तक इनमें से खुशबू न आने लगे. मसाले ठंडे होने के बाद इन्हें मिक्सर में डालकर हल्का दरदरा पीस लें. यही मसाला पिंडी छोले को बाकी छोले की रेसिपी से अलग बनाता है.

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Tecno Pova 8 की सेल, 2499 रुपये महीने में घर लाएं 8000mAh बैटरी वाला धांसू फोन


Tecno के हाल में लॉन्च हुए फोन Pova 8 की सेल आज यानी 18 जून से शुरू हो गई है। यह फोन पिछले साल लॉन्च हुए Pova 7 का अपग्रेड वर्जन है। फोन के बैक में कैमरा सेटअप के साथ एक एक्टिव मैट्रिक्स डिस्प्ले भी दिया गया है, जो देखने में नथिंग Phone 4a Pro के डिस्प्ले से इंस्पायर्ड है। यह फोन भारत में 16 बिट व्हाइट, प्लाज्मा ऑरेंज और टर्मिनल ग्रीन कलर ऑप्शन में आता है। इस फोन की सेल ई-कॉमर्स वेबसाइट फ्लिपकार्ट पर आयोजित की जा रही है।

Tecno Pova 8 पर ऑफर

टेक्नो का यह फोन दो स्टोरेज वेरिएंट्स- 6GB RAM + 128GB और 8GB RAM + 256GB में आता है। इसकी शुरुआती कीमत 29,999 रुपये है, वहीं इसका टॉप वेरिएंट 31,999 रुपये में आता है। इस पर मिलने वाले ऑफर की बात करें तो इल फोन को 2,499 रुपये की शुरुआती EMI में खरीदा जा सकता है। इसके अलावा फोन की खरीद पर 3,000 रुपये तक का इंस्टैंट बैंक डिस्काउंट भी दिया जा रहा है।

Tecno Pova 8 के फीचर्स

इस फोन में 6.76 इंच के FHD+ डिस्प्ले दिया गया है। इस फोन का डिस्प्ले 144Hz रिफ्रेश रेट को सपोर्ट करता है। साथ ही, इसकी पीक ब्राइटनेस 950 निट्स तक की है। Tecno Pova 8 में MediaTek Dimensity 7100 चिपसेट दिया गया है। इसके साथ 8GB रैम और 128GB तक स्टोरेज का सपोर्ट मिलता है। टेक्नो ने अपने इस फोन में डेडिकेटेड G1 और SE1 सिग्नल चिपसेट दिया है।










Tecno Pova 8 5G फीचर्स
डिस्प्ले 6.76 इंच, 144Hz
प्रोसेसर MediaTek Dimensity 7100
स्टोरेज 8GB, 128GB
बैटरी 8000mAh, 45W
कैमरा 50MP, 13MP
OS Android 16

इस स्मार्टफोन के बैक में डुअल कैमरा सेटअप दिया गया है। इसमें 50MP का Sony LYT 600 प्राइमरी कैमरा मिलता है। इसके साथ एक लाइट सेंसर दिया गया है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए इसमें 13MP का कैमरा दिया गया है। यह फोन AI कैमरा के साथ आता है। 

इस फोन में 8000mAh की दमदार बैटरी दी गई है। इसके साथ 45W फास्ट चार्जिंग फीचर दिया गया है। यह Android 16 ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करता है। साथ ही, इसमें ड्यूरेबिलिटी के लिए MIL-STD-810H मिलिट्री ग्रेड सर्टिफिकेशन मिलता है। यह IP64 डस्ट और वाटरप्रूफ रेटिंग को सपोर्ट करता है।

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जरुरतमंदों तक सरकारी योजनाओं का लाभ पहुंचाने पर मंथन: इधर मस्कुलर डिस्ट्रॉफी के 70 मरीजों ने ऑनलाइन फिजियोथेरपी वर्कशॉप में लिया हिस्सा – Pali (Marwar) News




श्री क्षत्रिय युवक संघ के आनुसंगिक संगठन श्री क्षात्र पुरुषार्थ फाउंडेशन के तत्वावधान में आशापुरा मंदिर परिसर में जिलास्तरीय राजकीय कर्मचारी कार्यशाला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारंभ वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप को पुष्पांजलि अर्पित कर तथा संघ के संस्थापक पूज्य तन सिंह के चित्र पर दीप प्रज्ज्वलन एवं गणेश वंदना के साथ किया गया।
कार्यशाला में जिले के विभिन्न विभागों के राजकीय कर्मचारियों ने भाग लिया और अपने विचार साझा किए। इस दौरान समाज में व्याप्त कुरीतियों के उन्मूलन, अंतिम पायदान पर खड़े जरूरतमंद लोगों तक सरकारी योजनाओं की जानकारी पहुंचाने तथा उन्हें अधिकतम लाभ दिलाने जैसे विषयों पर चर्चा की गई।
कार्यक्रम में महावीर सिंह गुड़ा भीमसिंह, राजेंद्र सिंह गुड़ा, सूरसिंह, प्रेमपाल सिंह मुंडारा, दलपत सिंह गुड़ा, केसर सिंह, भवानी सिंह सादड़ा, परबत सिंह खिंनदारा एवं विचित्र सिंह मगरतलब सहित कई वक्ताओं ने समाज हित से जुड़े विचार रखे।
जयपुर से आए श्री क्षत्रिय युवक संघ के केंद्रीय कार्यकारी सदस्य रेवंत सिंह पाटोदा ने कहा कि राजकीय सेवा में रहते हुए अन्य समाजों के लोगों के साथ बेहतर समन्वय और सौहार्दपूर्ण संबंध बनाए रखना आवश्यक है। उन्होंने ईडब्ल्यूएस प्रमाण पत्र एवं प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए युवाओं की सहभागिता बढ़ाने का आह्वान किया।
फाउंडेशन के जिला प्रभारी कुन्दन सिंह खैरवा ने बताया कि आगामी महीनों में आयोजित होने वाले शिविरों एवं कार्यक्रमों की रूपरेखा पर प्रांत प्रमुख हीर सिंह लौड़ता के साथ चर्चा की गई। वहीं संभाग प्रमुख मोहब्बत सिंह धींगाना ने नए कैलेंडर वर्ष के अनुसार अधिक से अधिक बालक-बालिकाओं को शिविरों में भेजने की बात कही। कार्यक्रम का संचालन दिग्विजय सिंह कोलीवाड़ा ने किया। ऑनलाइन फिजियोथेरेपी सत्र आयोजित
स्वावलम्बन फाउंडेशन की ओर से मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से प्रभावित लोगो एवं केयरगिवर्स (देखभालकर्ताओ) के लिए ऑनलाइन फिजियोथेरेपी सत्र का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में देश के विभिन्न राज्यों से 70 से अधिक प्रतिभागियों ने भाग लिया।
बता दे कि मस्कुलर डिस्ट्रॉफी एक आनुवंशिक एवं प्रगतिशील दुर्लभ बीमारी है, जिसमें शरीर की मांसपेशियां धीरे-धीरे कमजोर होती जाती हैं और समय के साथ उनका क्षय होने लगता है। इस बीमारी का प्रभाव चलने-फिरने, बैठने, खड़े होने, हाथों की गतिविधियों तथा श्वसन क्रिया पर भी पड़ सकता है। कार्यक्रम के विशेषज्ञ वक्ता डॉ. संदीप कुमार, एसोसिएट प्रोफेसर, फिजियोथेरेपी कॉलेज, बाबा फरीद स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय, फरीदकोट रहे। उन्होंने मस्कुलर डिस्ट्रॉफी से प्रभावित व्यक्तियों के लिए नियमित व्यायाम, स्ट्रेचिंग, जोड़ों की गतिशीलता बनाए रखने, श्वसन संबंधी व्यायाम तथा दैनिक जीवन में अपनाई जाने वाली फिजियोथेरेपी तकनीकों के बारे में जानकारी दी।
सत्र के दौरान प्रतिभागियों एवं केयरगिवर्स द्वारा पूछे गए विभिन्न प्रश्नों के उत्तर भी दिए गए तथा घर पर सुरक्षित रूप से किए जा सकने वाले व्यायामों के बारे में मार्गदर्शन प्रदान किया गया।
इस अवसर पर स्वावलंबन फाउंडेशन के फ़ाउंडर डॉ वैभव भंडारी ने संस्था की ओर से मस्कुलर डिस्ट्रॉफी एवं दुर्लभ बीमारियों के क्षेत्र में किए जा रहे कार्यों, जागरूकता अभियानों, सहायता कार्यक्रमों तथा पुनर्वास प्रयासों की भी जानकारी साझा की और भविष्य में भी मस्कुलर डिस्ट्रॉफी योद्धाओं एवं उनके परिवारों के लिए ऐसे ज्ञानवर्धक एवं सहायक कार्यक्रम आयोजित करने की प्रतिबद्धता व्यक्त की।



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Alpha Teaser: पैसा देकर करवाई जा रही है आलिया की ट्रोलिंग? विक्रम भट्ट ने खोली PR की पोल


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Alia Bhatt Trolled for Alpha: क्या आलिया भट्ट के खिलाफ सोशल मीडिया पर साजिश हो रही है?’अल्फा’ टीजर के बाद आलिया की ट्रोलिंग पर बात करते हुए विक्रम भट्ट ने बॉलीवुड के एक बहुत बड़े डार्क सीक्रेट से पर्दा उठाया है. उन्होंने बताया कि कैसे कंपटीटर्स को बदनाम करने के लिए बोट्स और पेड ट्रोलिंग का सहारा लिया जाता है. नीचे पढ़ें विक्रम भट्ट का यह एक्सक्लूसिव और चौंकाने वाला बयान.

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‘अल्फा’ टीजर के बाद फिर ट्रोल हुईं आलिया भट्ट

Vikram Bhatt Support Alia Bhatt: फिल्म मेकर विक्रम भट्ट ने सोशल मीडिया पर होने वाली ट्रोलिंग को लेकर एक हैरान करने वाला खुलासा किया है. दरअसल बॉलीवुड की टॉप एक्ट्रेसेस में से एक आलिया भट्ट इन दिनों बार-बार ट्रोलिंग का शिकार हो रही हैं. अभी कुछ दिन पहले वह कान्स फिल्म फेस्टिवल 2026 के रेड कार्पेट पर भारत का नाम रौशन करने पहुंची थी, जहां उनके लुक और विदेशी मीडिया का उन्हें कवर न करने को लेकर तमाम बातें बनाई गई थीं. आलिया जहां कान्स में अपने खूबसूरत लुक के साथ पोज दे रही थीं,वहीं ट्रोलर्स कह रहे थे कि उन्हें कोई नोटिस नहीं कर रहा है.

अब हाल ही में आलिया की एक्शन फिल्म ‘अल्फा’ टीजर रिलीज हुआ है. जिसके बाद से एक्ट्रेस एक बार फिर ट्रोलर्स के निशाने पर आ गई. लेकिन अब इस पूरे मामले पर विक्रम भट्ट ने नाराजगी जताते हुए आलिया का खुलकर सपोर्ट किया है. इसके अलावा उन्होंने पेड पीआर के डार्क सीक्रेट का खुलासा किया है. जिसके बाद से हर जगह इसकी बात की चर्चा हो रही है.

अल्फा के टीजर का किया बचाव

आलिया भट्ट इन दिनों अपनी फिल्म ‘अल्फा’ को लेकर चर्चा में हैं. वहीं इस मूवी का टीजर जब से सामने आया है, इंटरनेट पर कुछ लोग लगातार उनकी बुराई कर रहे हैं. इस बारे में बात करते हुए विक्रम भट्ट ने कहा कि उन्हें समझ नहीं आता कि लोग आलिया को क्यों ट्रोल कर रहे हैं.बेचारी आलिया को बिना बात के परेशान किया जा रहा है.विक्रम भट्ट के मुताबिक उन्हें अल्फा का टीजर बिल्कुल ठीक लगा और उसमें कोई कमी नहीं है. उन्होंने ट्रोलर्स को सलाह देते हुए कहा कि अगर आपको कोई फिल्म नहीं देखनी है तो मत देखिए, लेकिन किसी कलाकार पर इस तरह पर्सनल अटैक करना बिल्कुल गलत है.

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अमेरिका-ईरान समझौते के 14 पॉइंट की पूरी डिटेल: होर्मुज सिर्फ 60 दिन फ्री, ईरान को ₹28 लाख करोड़ हर्जाना मिलेगा, बदले में परमाणु हथियार नहीं बनाएगा


वॉशिंगटन डीसी1 घंटे पहले

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अमेरिका और ईरान ने जंग खत्म करने के समझौते के मसौदे पर हस्ताक्षर कर दिए हैं। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पजशकियान ने बुधवार देर रात डिजिटल हस्ताक्षर किए, जिसके साथ ही यह समझौता लागू हो गया।

इस डील से जुड़े एक अमेरिकी अधिकारी ने बुधवार को रिपोर्टरों के साथ हुई एक कॉन्फ्रेंस कॉल में 14 पॉइंट्स वाली डील की पूरी जानकारी दी है। 800 शब्दों वाले डेढ़ पन्ने के इस दस्तावेज में होर्मुज को सिर्फ 60 दिनों के लिए मुफ्त खोले जाने की बात कही गई है।

डील में ईरान ने परमाणु हथियार नहीं बनाने का भरोसा दिया है, जबकि ईरान के पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर (28 लाख करोड़ रुपए) के फंड की योजना पर भी सहमति बनी है। अधिकारी ने अपनी पहचान गोपनीय रखने की शर्त पर यह जानकारी दी।

ट्रम्प ने बुधवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बैठक के दौरान पेरिस के वर्साय पैलेस में इस दस्तावेज पर साइन किए।

ट्रम्प ने बुधवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बैठक के दौरान पेरिस के वर्साय पैलेस में इस दस्तावेज पर साइन किए।

समझौते के मसौदे में शामिल 14 पॉइंट्स की पूरी डिटेल (क्रम बदल सकते हैं)

पॉइंट-1: होर्मुज स्ट्रेट फिर से खोला जाएगा

ईरान ने वादा किया है कि वह होर्मुज स्ट्रेट फिर से खोल देगा। यह व्यवस्था 60 दिनों तक लागू रहेगी। इस दौरान जहाजों से एक्स्ट्रा टैक्स नहीं लिया जाएगा।

न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक इस समझौते की सबसे अहम लाइन है- सिर्फ 60 दिनों तक बिना किसी फीस के। इसका मतलब है कि 60 दिन पूरे होने के बाद ईरान जहाजों पर शुल्क या फीस लगा सकता है।

युद्ध से पहले ईरान आमतौर पर अंतरराष्ट्रीय जहाजों से इस तरह का पैसा नहीं लेता था। अब टैक्स लगाने से वैश्विक समुद्री व्यापार की लागत बढ़ सकती है।

पॉइंट-2: अमेरिका समुद्री नाकेबंदी हटाएगा

ईरानी बंदरगाहों पर अमेरिका नौसैनिक नाकेबंदी 30 दिन के भीतर पूरी तरह खत्म करेगा।

न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक नाकेबंद हटने से ईरान फिर से अपने बंदरगाहों से तेल और अन्य सामान खरीद-बेच सकेगा।

यह ईरान के लिए बहुत बड़ी और तत्काल राहत होगी, क्योंकि उसके ज्यादातर निर्यात चीन को जाते हैं। जैसे ही निर्यात दोबारा शुरू होगा, ईरान के पास विदेशी मुद्रा आनी शुरू हो जाएगी।

पॉइंट-3: ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा

समझौते में ईरान ने एक बार फिर भरोसा दिया है कि वह कभी परमाणु हथियार नहीं बनाएगा और न ही उन्हें हासिल करने की कोशिश करेगा।

दस्तावेज में कहा गया है कि ईरान के पास पहले से मौजूद संवर्धित यूरेनियम (एनरिच्ड यूरेनियम) के भंडार का क्या किया जाएगा, इस पर दोनों देश मिलकर फैसला करेंगे। इसके लिए एक अलग व्यवस्था बनाई जाएगी, जिस पर आगे की बातचीत में सहमति बनेगी।

फिलहाल न्यूनतम सहमति यह है कि इस संवर्धित सामग्री को ईरान के भीतर ही इस तरह बदला जाएगा कि उससे परमाणु हथियार बनाना संभव न रहे। यह पूरी प्रक्रिया अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) की निगरानी में होगी।

न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक यह समझौते का सबसे अहम हिस्सा माना जा रहा है, क्योंकि इसमें पहली बार सीधे ईरान के परमाणु कार्यक्रम की बात की गई है। यही मुद्दा अमेरिका और ईरान के बीच टकराव और युद्ध की सबसे बड़ी वजह रहा है।

हालांकि इस पॉइंट में सबसे विवादित मुद्दों पर स्पष्ट जवाब नहीं दिया गया है। दस्तावेज में ईरान ने फिर से कहा है कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा, लेकिन यह कोई नई बात नहीं है।

ईरान ने 1970 में परमाणु अप्रसार संधि में शामिल होने के समय भी यही वादा किया था। बाद में 2015 के परमाणु समझौते में भी उसने यही कहा था कि वह परमाणु हथियार नहीं बनाएगा।

समझौते में ईरान से कहा गया है कि वह अपने पास मौजूद लगभग 11 टन संवर्धित परमाणु सामग्री को कम घनत्व वाला बनाए। इसे डाउन-ब्लेंडिंग कहा जाता है। इसका मतलब है कि यूरेनियम को इतना पतला कर दिया जाए कि उसका इस्तेमाल परमाणु हथियार बनाने में न हो सके।

इन 11 टन सामग्री में करीब 440 किलो ऐसा यूरेनियम भी शामिल है, जिसे 60% तक एनरिच्ड किया जा चुका है। यह स्तर परमाणु बम बनाने के लिए जरूरी स्तर के काफी करीब माना जाता है।

लेकिन समझौते में यह नहीं कहा गया है कि ईरान को यह सामग्री देश से बाहर भेजनी होगी। ईरान लंबे समय से अपने यूरेनियम भंडार को विदेश भेजने का विरोध करता रहा है।

हालांकि, 2015 के परमाणु समझौते में ईरान ने अपने उस समय के लगभग 97 प्रतिशत एनरिच्ड यूरेनियम भंडार को रूस भेज दिया था। यही कारण है कि अभी कई बड़े सवाल अनसुलझे हैं।

जैसे…

  • क्या ईरान अपने पास एनरिच्ड यूरेनियम का भंडार रख पाएगा?
  • क्या उसे अपनी प्रमुख परमाणु सुविधाएं बंद करनी होंगी?
  • क्या उसे नया यूरेनियम एनरिच्ड करने की अनुमति मिलेगी?
  • या उसे 13 से 20 साल तक एनरिच्ड गतिविधियां रोकनी पड़ेंगी?

पॉइंट-4: ईरान को ₹28 लाख करोड़ का हर्जाना

अमेरिका ने अपने क्षेत्रीय सहयोगियों के साथ मिलकर ईरान के पुनर्निर्माण और विकास के लिए कम से कम 300 अरब डॉलर, यानी 28 लाख करोड़ रुपए की योजना तैयार करने का वादा किया है।

हालांकि, यह पैसा तुरंत नहीं दिया जाएगा। पहले अमेरिका और ईरान को 60 दिनों में अंतिम समझौते पर पहुंचना होगा। इससे ही तय होगा कि 300 अरब डॉलर का फंड कैसे बनाया जाएगा, पैसा कहां से आएगा और उसे किस तरह खर्च किया जाएगा।

राष्ट्रपति ट्रम्प पहले ही कह चुके हैं कि इस फंड में अमेरिका सीधे पैसा नहीं लगाएगा। हालांकि, उन्होंने यह संभावना जरूर खुली छोड़ी कि खाड़ी देश, जैसे सऊदी अरब, कतर और UAE इस फंड के लिए पैसा उपलब्ध करा सकते हैं।

पॉइंट-5: ईरानी तेल के निर्यात पर छूट

समझौते के बाद अमेरिका ईरानी तेल के निर्यात पर राहत देना शुरू कर देगा।

इसके लिए अमेरिकी वित्त मंत्रालय जरूरी छूट और मंजूरियां जारी करेगा, ताकि ईरान अपना तेल अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेच सके।

यह राहत सिर्फ तेल बेचने तक सीमित नहीं होगी। इसमें बैंकिंग लेन-देन, बीमा, जहाजरानी, माल ढुलाई और अन्य वित्तीय सेवाओं से जुड़ी बाधाओं को भी कम किया जाएगा, जो ईरान के तेल निर्यात में रुकावट बनती रही हैं।

यह व्यवस्था तब तक जारी रहेगी, जब तक ईरान पर लगे सभी प्रतिबंधों को हटाने की प्रक्रिया पूरी नहीं हो जाती।

न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक समझौते का यह हिस्सा ईरान के खिलाफ सख्त रुख रखने वाले नेताओं और विशेषज्ञों के बीच सबसे ज्यादा चिंता का कारण बना हुआ है। उनका मानना है कि तेल निर्यात पर लगी रोक अमेरिका का सबसे प्रभावी दबाव का साधन थी। इसी के कारण ईरान की अर्थव्यवस्था पर भारी दबाव बना हुआ था।

पॉइंट-6: ईरान पर लगे आर्थिक प्रतिबंध हटेंगे

अमेरिका ने ईरान पर लगे सभी प्रतिबंधों को एक-एक करके खत्म करने का वादा किया है।

न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, अमेरिका ईरान पर लगे कड़े आर्थिक प्रतिबंधों में राहत देकर उसे अपने परमाणु कार्यक्रम पर सख्त शर्तें मानने के लिए तैयार करना चाहता है। माना जा रहा है कि प्रतिबंधों में छूट ही वह सबसे बड़ा फायदा है, जो अमेरिका ईरान को समझौते के बदले दे सकता है।

यही व्यवस्था 2015 के परमाणु समझौते में भी अपनाई गई थी। उस समझौते के तहत ईरान ने अपने परमाणु कार्यक्रम पर कई प्रतिबंध स्वीकार किए थे और बदले में उसे आर्थिक प्रतिबंधों से राहत मिली थी।

हालांकि उस समझौते में लगी पाबंदियों की अवधि अधिकतम 15 साल थी। लेकिन ट्रम्प का कहना है कि वे ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर हमेशा के लिए प्रतिबंध चाहते हैं।

पॉइंट-7: ईरान की फ्रीज्ड संपत्तियां रिलीज होंगी

समझौते के तहत अमेरिका ने वादा किया है कि वह ईरान की फ्रीज्ड संपत्तियों को छोड़ देगा। हालांकि, यह पैसा कब और कैसे जारी होगा, यह दोनों देश बातचीत से तय करेंगे।

न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक इसका मतलब यह हो सकता है कि अंतिम समझौता होने का इंतजार किए बिना ही ईरान के लिए अरबों डॉलर की रकम जारी होना शुरू हो जाए। अनुमान है कि यह राशि 24 अरब डॉलर या उससे भी अधिक हो सकती है।

पॉइंट-8: एक-दूसरे के आंतरिक मामलों में दखल नहीं देंगे

अमेरिका-ईरान एक-दूसरे की आजादी, सीमाओं और संप्रभुता का सम्मान करेंगे। घरेलू मामलों में दखल नहीं देंगे।

समझौते का यह हिस्सा ईरान के सरकार विरोधी गुटों को पसंद नहीं आ सकता। इन्हें उम्मीद थी कि अमेरिका भविष्य में भी ईरान में राजनीतिक बदलाव या लोकतंत्र समर्थक आंदोलनों का खुलकर समर्थन करेगा।

दरअसल, इसी साल ईरान में सरकार विरोधी प्रदर्शनों के दौरान ट्रम्प ने प्रदर्शनकारियों का समर्थन करते हुए कहा था कि उनकी मदद की जाएगी। लेकिन नए समझौते के मुताबिक माना जा रहा है कि ईरान के अंदरूनी मुद्दों को लेकर अमेरिका का रुख पहले की तुलना में नरम हुआ है।

फ्रांस में ट्रम्प के पीस डील पर साइन करने के बाद ईरानी राष्ट्रपति पजशकियान ने इस पर इलेक्ट्रॉनिक तरीके से दस्तखत किए। दस्तावेज पर नीचे की ओर पजशकियान और ट्रम्प, दोनों के हस्ताक्षर नजर आ रहे हैं।

फ्रांस में ट्रम्प के पीस डील पर साइन करने के बाद ईरानी राष्ट्रपति पजशकियान ने इस पर इलेक्ट्रॉनिक तरीके से दस्तखत किए। दस्तावेज पर नीचे की ओर पजशकियान और ट्रम्प, दोनों के हस्ताक्षर नजर आ रहे हैं।

पॉइंट-9: सभी मोर्चों पर संघर्ष खत्म होगा

अमेरिका, ईरान और उनके सहयोगी देशों के बीच सभी मोर्चों पर सैन्य कार्रवाई तुरंत और स्थायी रूप से बंद की जाएगी। इसमें लेबनान भी शामिल है।

अमेरिका के लिए यह मुद्दा इसलिए अहम है, क्योंकि ट्रम्प को चिंता थी कि हिजबुल्लाह के खिलाफ इजराइल की सैन्य कार्रवाई पीस डील को कमजोर कर सकती है।

पहला पॉइंट इजराइल के खिलाफ माना जा रहा है। इजराइल पहले ही कह चुका है कि वह अमेरिका-ईरान बातचीत में लेबनान को लेकर हुई किसी भी सहमति को नहीं मानेगा।

पॉइंट-10: दोनों पक्ष मौजूदा स्थिति में बदलाव नहीं करेंगे

समझौते में कहा गया है कि जब तक अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौता नहीं हो जाता, तब तक दोनों पक्ष मौजूदा स्थिति में कोई बड़ा बदलाव नहीं करेंगे। इसका मतलब है कि ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम को अभी जिस स्तर पर चला रहा है, उससे आगे नहीं बढ़ाएगा।

न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक, यह व्यवस्था इसलिए बनाई गई है ताकि अंतिम समझौते तक दोनों पक्ष कोई नया दबाव न बनाएं। ईरान परमाणु कार्यक्रम नहीं बढ़ाएगा और अमेरिका नए प्रतिबंध या अतिरिक्त सैन्य तैनाती नहीं करेगा।

पॉइंट-11: दोनों देश मिलकर निगरानी व्यवस्था बनाएंगे

अमेरिका और ईरान मिलकर एक विशेष निगरानी व्यवस्था बनाएंगे, जो यह देखेगी कि MoU की सभी शर्तों का सही तरीके से पालन हो रहा है या नहीं।

यह सिस्टम इस बात की जांच करेगा कि:

  • ईरान अपने परमाणु कार्यक्रम से जुड़े वादों का पालन कर रहा है या नहीं।
  • अमेरिका प्रतिबंधों में राहत और अन्य आर्थिक, साथ ही राजनीतिक प्रतिबद्धताओं को पूरा कर रहा है या नहीं।
  • दोनों पक्ष समझौते की समय सीमा और शर्तों का पालन कर रहे हैं या नहीं।

न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि अमेरिका यह तय करना चाहता है कि ईरान के हर वादे की स्वतंत्र रूप से जांच और पुष्टि की जा सके। यानी केवल ईरान के वादे करना पर्याप्त नहीं होगा।

पॉइंट-12: तुरंत सभी मुद्दों पर बातचीत शुरू नहीं होगी

दोनों देशों को समझौते के कुछ अहम बिंदुओं को लागू करना होगा। इनमें युद्धविराम बनाए रखना, होर्मुज को खोलना, नौसैनिक नाकेबंदी हटाना, तेल निर्यात पर राहत देना और ईरान की फ्रीज्ड संपत्तियों तक पहुंच बहाल करना जैसे कदम शामिल हैं।

रिपोर्ट के मुताबिक इससे पता चलता है कि आगे सबसे बड़ा और सबसे अहम विषय ईरान का परमाणु कार्यक्रम ही होगा। परमाणु गतिविधियों की सीमा क्या होगी, एनरिच्ड यूरेनियम का क्या होगा, मॉनीटरिंग कैसे होगी और प्रतिबंध किस तरह हटाए जाएंगे, जैसे सवाल अभी पूरी तरह तय नहीं हुए हैं।

पॉइंट-13: 60 दिनों में अंतिम समझौते का टारगेट

अमेरिका-ईरान ने अधिकतम 60 दिनों में समझौता लागू करने का टारगेट रखा है। हालांकि, दोनों देश सहमति से इसे आगे भी बढ़ा सकते हैं।

न्यूयॉर्क टाइम्स के मुताबिक अमेरिकी अधिकारी मानते हैं कि इतने कम समय में अंतिम समझौते तक पहुंचना आसान नहीं होगा। खासकर इसलिए क्योंकि ईरान के साथ पहले हुई परमाणु बातचीत में कई साल लग चुके हैं।

हालांकि, ट्रम्प सरकार ने जानबूझकर यह समय सीमा तय की है। अगर तय समय में यह समझौता हो जाता है, तो अमेरिका में नवंबर में होने वाले मिडटर्म इलेक्शन में राष्ट्रपति ट्रम्प को फायदा हो सकता है।

पॉइंट-14: अंतिम समझौते को UNSC मंजूरी देगी

जब अमेरिका और ईरान के बीच अंतिम समझौता हो जाएगा, तो उसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के एक प्रस्ताव के जरिए मंजूरी दी जाएगी। इसका मतलब है कि अंतिम समझौता केवल अमेरिका और ईरान के बीच का राजनीतिक समझौता नहीं रहेगा, बल्कि उसे अंतरराष्ट्रीय कानूनी मान्यता भी मिल जाएगी।

एक्सपर्ट्स का मानना है कि इससे समझौते को मजबूती मिलेगी, जैसा कि पिछले वर्ष गाजा से जुड़े समझौते के मामले में हुआ था, जिसे भी संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का समर्थन मिला था। हालांकि कई एक्सपर्ट्स को शक है कि यह चरण वास्तव में आएगा भी या नहीं।

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अमेरिका-ईरान युद्ध खत्म, ट्रम्प चिल्लाकर बोले- डील साइन:ईरानी राष्ट्रपति पजशकियान ने डिजिटल दस्तखत किए, पेरिस के वर्साय पैलेस में समझौता

अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध खत्म करने के लिए अंतरिम समझौते (MoU) पर दस्तखत हो गए हैं। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक ट्रम्प ने बुधवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बैठक के दौरान पेरिस के वर्साय पैलेस में इस दस्तावेज पर साइन किए। पूरी खबर पढ़ें

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QS World University Ranking में IIT Delhi का कमाल, लगातार दूसरे साल भारत का टॉप संस्थान बना


आईआईटी-दिल्ली ने क्यूएस वर्ल्ड यूनिवर्सिटी रैंकिंग 2027 में लगातार दूसरे वर्ष भारतीय संस्थानों में सर्वोच्च स्थान प्राप्त किया है। आईआईटी दिल्ली वैश्विक स्तर पर पांच पायदान ऊपर चढ़कर 118वें स्थान पर पहुंच गया है। ये किसी भारतीय संस्थान के लिए अब तक का सर्वोच्च स्थान है, जिसे पहली बार आईआईटी-बॉम्बे ने 2025 की रैंकिंग में हासिल किया था। आईआईटी-बॉम्बे, जो अतीत में देश की सूची में शीर्ष पर रहा था, 129वें स्थान से गिरकर 134वें स्थान पर आ गया है। पिछले साल भी यह 11 रैंक नीचे गिर गया था।

क्या होती है QS World University Ranking  

QS World University Ranking दुनिया की सबसे लोकप्रिय विश्वविद्यालय रैंकिंग में से एक है, जो ब्रिटेन की कंपनी Quacquarelli Symonds (QS) हर साल जारी करती है। यह रैंकिंग अकादमिक रेपुटेशन (30%), एम्प्लॉयर रेपुटेशन (15%), फैकल्टी-स्टूडेंट रेशियो, साइटेशंस पर फैकल्टी, इंटरनेशनलाइजेशन और एम्प्लॉयमेंट आउटकम्स जैसे इंडिकेटर्स पर आधारित होती है। 2026-27 संस्करण में MIT टॉप पर है, उसके बाद इंपीरियल कॉलेज और स्टैनफोर्ड हैं। लाखों छात्रों को बेहतर विश्वविद्यालय चुनने में मदद करने वाली यह रैंकिंग शिक्षा की गुणवत्ता, रिसर्च और ग्लोबल आउटलुक को मापती है।

Image Source : IITआईआईटी दिल्ली का जलवा।

देश के टॉप-10 संस्थानों में आईआईटी 

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) देश के शीर्ष 10 संस्थानों की सूची में अपना दबदबा बनाए हुए हैं। आईआईटी दिल्ली और आईआईटी मुंबई के अलावा, आईआईटी मद्रास (पिछले साल के 180वें स्थान से ऊपर आकर इस साल 170वें स्थान पर) वैश्विक स्तर पर शीर्ष 200 संस्थानों में शामिल होने वाला एकमात्र भारतीय संस्थान है। रिपोर्ट्स के मुताबिक इनके अलावा, हिमाचल प्रदेश में स्थित निजी संस्थान शूलिनी यूनिवर्सिटी ऑफ बायोटेक्नोलॉजी एंड मैनेजमेंट साइंसेज भी भारत के शीर्ष 10 विश्वविद्यालयों की सूची में 452वें स्थान पर पहुंच गई है, जो पिछले साल का 503वां स्थान है।

राष्ट्रीय स्तर पर कौन से संस्थान कर रहे बेहतर 

आईआईटी खड़गपुर (205), आईआईटी कानपुर (221), भारतीय विज्ञान संस्थान, बैंगलोर (221), दिल्ली विश्वविद्यालय (322), आईआईटी रुड़की (335) और आईआईटी गुवाहाटी (349)। इनमें से, आईएससी और आईआईटी गुवाहाटी की रैंकिंग पिछले वर्ष की तुलना में गिर गई है।

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नीट-यूजी परीक्षा के लिए प्रशासन अलर्ट: बुलंदशहर के आठ केंद्रों पर कड़ी निगरानी रहेगी, केंद्र व्यवस्थापकों को निर्देश जारी – Bulandshahar News




बुलंदशहर में 21 जून को होने वाली नीट (यूजी)-2026 परीक्षा के लिए जिला प्रशासन ने तैयारियां पूरी कर ली हैं। जिलाधिकारी कुमार हर्ष की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक में परीक्षा को शांतिपूर्ण, निष्पक्ष और पारदर्शी ढंग से संपन्न कराने पर जोर दिया गया। यह परीक्षा जनपद के आठ केंद्रों पर दोपहर 2 बजे से शाम 5:15 बजे तक आयोजित की जाएगी। जिलाधिकारी ने सभी केंद्र व्यवस्थापकों को शासन की गाइडलाइन का शत-प्रतिशत पालन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह एक राष्ट्रीय स्तर की महत्वपूर्ण परीक्षा है, जिसमें किसी भी प्रकार की लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। अधिकारियों और केंद्र प्रभारियों को निर्धारित समय से पहले परीक्षा केंद्रों पर पहुंचकर व्यवस्थाओं का निरीक्षण करने का निर्देश दिया गया है। अभ्यर्थियों को सघन जांच और पहचान सत्यापन के बाद ही परीक्षा केंद्र में प्रवेश दिया जाएगा। जांच कार्य में लगी नामित एजेंसी के प्रतिनिधियों को भी आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए हैं। परीक्षा के सुचारु संचालन और सुरक्षा व्यवस्था के लिए प्रत्येक केंद्र पर मजिस्ट्रेट तैनात किए जाएंगे। इसके अतिरिक्त, पर्याप्त संख्या में केंद्रीय बल और पुलिस बल भी लगाया जाएगा, ताकि सुरक्षा पूरी तरह चाक-चौबंद रहे। बैठक में वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दिनेश कुमार सिंह, अपर जिलाधिकारी (प्रशासन) नीतीश कुमार सिंह, क्षेत्राधिकारी प्रखर पांडेय, जिला विद्यालय निरीक्षक विनय कुमार सहित संबंधित अधिकारी और परीक्षा केंद्रों के प्रभारी उपस्थित रहे।



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कटनी में 3 महीने से पेंशन ठप: 1.06 लाख हितग्राही दाने-दाने को मोहताज; शासन से नहीं मिली राशि – Katni News


कटनी जिले में 1.06 लाख सामाजिक सुरक्षा पेंशन हितग्राही पिछले तीन महीने से पेंशन राशि से वंचित हैं। शासन स्तर से राशि का आवंटन न होने के कारण मार्च 2024 के बाद से इन हितग्राहियों के खातों में एक भी रुपया नहीं पहुंचा है। इससे दिव्यांग, वृद्ध, विधवा और

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सरकार की महत्वाकांक्षी सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजनाएं जिले में ठप पड़ी हैं। भीषण गर्मी में अपनी ट्राईसाइकिल और लाठी के सहारे बेसहारा लोग जनपद कार्यालयों और ग्राम पंचायतों के चक्कर काटने को मजबूर हैं, लेकिन उन्हें केवल आश्वासन ही मिल रहा है।

पेंशन न मिलने से भुखमरी की नौबत

बड़वारा जनपद क्षेत्र के ग्राम रोहनिया निवासी कुशल बर्मन (दृष्टिबाधित) की आपबीती स्थिति को दर्शाती है। बर्मन ने बताया कि परिवार में उनका पालन-पोषण करने वाला कोई नहीं है और वह बिल्कुल अकेले हैं। शासन से मिलने वाली पेंशन ही उनका एकमात्र सहारा थी, जिससे दो वक्त की रोटी का इंतजाम होता था।

मार्च महीने से उनके खाते में पैसे नहीं आए हैं, जिससे अब भुखमरी की नौबत आ गई है। उन्हें दूसरों से मांगकर पेट भरना पड़ रहा है और वे दर-बदर भटक रहे हैं। यह कहानी सिर्फ कुशल बर्मन की नहीं, बल्कि जिले के हजारों दिव्यांगों और अन्य हितग्राहियों की है।

तीन महीने से पेंशन नहीं, हितग्राही परेशान

सामाजिक न्याय विभाग की ओर से संचालित जिन प्रमुख योजनाओं का लाभ पिछले तीन महीने से नहीं मिल पा रहा है, उनमें इंदिरा गांधी राष्ट्रीय विकलांगता पेंशन योजना, बहुविकलांग एवं मानसिक रूप से अविकसित निःशक्तजनों को आर्थिक सहायता, निःशक्त पेंशन योजना, दिव्यांग शिक्षा प्रोत्साहन सहायता राशि, इंदिरा गांधी राष्ट्रीय वृद्धावस्था एवं विधवा पेंशन योजना, मुख्यमंत्री कन्या अभिभावक पेंशन योजना, परित्यक्ता और मुख्यमंत्री अविवाहिता पेंशन योजना शामिल हैं।

तीन महीने से पेंशनधारी भुगतान को तरसे लाभार्थी

1 लाख 6 हजार लाभार्थियों का भविष्य अधर में ​विभागीय आंकड़ों के मुताबिक, जिले भर में इन सभी योजनाओं को मिलाकर कुल लाभार्थियों की संख्या लगभग 1 लाख 6 हजार है। मार्च, अप्रैल और मई बीत जाने के बाद अब जून का महीना भी आधा खत्म हो चुका है।

लेकिन इन लाचारों के खातों में पेंशन की राशि नहीं आई है। सबसे ज्यादा मार उन दिव्यांगों और बुजुर्गों पर पड़ रही है, जिनका कोई और सहारा नहीं है और जो पूरी तरह इसी राशि पर आश्रित रहे।

पेंशन अटकने से 1.06 लाख हितग्राही परेशान

उपसंचालक, सामाजिक न्याय विभाग अनुराग मोदी ने बताया कि शासन स्तर से राशि का आवंटन नहीं होने के कारण पिछले तीन महीनों से दिव्यांगों और अन्य हितग्राहियों की पेंशन जारी नहीं हो सकी है। राशि उपलब्ध होते ही सभी पात्र हितग्राहियों के खातों में पेंशन की राशि तत्काल ट्रांसफर कर दी जाएगी। वरिष्ठ अधिकारियों और शासन स्तर पर लगातार पत्राचार किया जा रहा है।

​स्थानीय सामाजिक कार्यकर्ताओं का कहना है कि सरकार एक तरफ बड़ी-बड़ी योजनाओं का प्रचार-प्रसार कर रही है। वहीं समाज के सबसे कमजोर वर्ग को तीन महीने से उनके हक की मामूली राशि भी नसीब नहीं हो रही है।



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भोजपुर के शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश कुमार सस्पेंड: कर्तव्यहीनता और गंभीर चूक पर DIG ने की कार्रवाई; युवक ने पुलिसकर्मी पर तानी थी पिस्टल – Bhojpur News




भोजपुर के शाहपुर थाना क्षेत्र के बिलौंटी गांव में पुलिसकर्मियों पर हथियार तानने और उससे जुड़े वीडियो के सोशल मीडिया पर वायरल होने के मामले में बड़ी कार्रवाई की गई है। शाहाबाद प्रक्षेत्र के डीआईजी डॉ. सत्यप्रकाश ने मामले में घोर लापरवाही और कर्तव्यहीनता पाए जाने पर शाहपुर थानाध्यक्ष राजेश कुमार मलाकार को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया है। यह कार्रवाई भोजपुर एसपी राज की अनुशंसा पर की गई। साथ ही ड्यूटी पर तैनात एक सब इंस्पेक्टर और सिपाही को भी निलंबित किया गया है। विभागीय कार्रवाई के बाद पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया है। बिलौंटी गांव में भरत भूषण तिवारी द्वारा अवैध हथियार लहराने की सूचना मिलने पर मंगलवार को पुलिस टीम जांच के लिए पहुंची थी। इसी दौरान युवक ने पुलिसकर्मियों के सामने पिस्तौल निकाल ली और उन्हें निशाना बनाते हुए हथियार तान दिया। घटना का वीडियो किसी ने रिकॉर्ड कर सोशल मीडिया पर वायरल कर दिया, जिसके बाद पुलिस की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठने लगे। हालांकि पुलिस एनकाउंटर में भरत भूषण तिवारी की मौत हो गई। मुठभेड़ के दौरान गोली लगी थी। एसपी की रिपोर्ट पर की गई कार्रवाई हैरानी की बात यह रही कि घटना के दौरान युवक को तत्काल काबू नहीं किया जा सका। वीडियो में युवक की मां भी मौजूद दिख रही है, जो पुलिसकर्मियों और अपने बेटे को समझाने का प्रयास कर रही है। मामले की गंभीरता को देखते हुए उच्चाधिकारियों ने जांच कराई, जिसमें पुलिसकर्मियों की लापरवाही और कर्तव्य निर्वहन में गंभीर चूक सामने आई। इसके बाद एसपी की रिपोर्ट पर डीआईजी ने शाहपुर थानाध्यक्ष को निलंबित कर दिया। छत पर चढ़कर पुलिस टीम पर की फायरिंग बुधवार की सुबह भरत तिवारी फिर से फेसबुक पर लाइव आता है। वो छत पर खड़ा होकर पिस्टल लहराता और पुलिस को चुनौती देता है। वह खुद को व्यवस्था सुधार की लड़ाई लड़ने वाला बताते हुए सिस्टम में बदलाव की मांग दोहराता रहा। फेसबुक लाइव पर हथियार लहराने की खबर सुनकर पुलिस फिर से भरत तिवारी के घर पहुंचती है। पुलिस टीम उसके घर को घेर लेती है, लेकिन भरत तिवारी के घर का दरवाजा बंद रहता है। पुलिस ने सरेंडर करने के लिए कहा, लेकिन वो नहीं माना पुलिस को देखकर भरत तिवारी छत से ही पुलिस टीम पर फायरिंग कर देता है। वो काफी देर तक छत पर खड़ा होकर पिस्टल लहराता रहता है। कई घंटों तक ड्रामे के बाद आरोपी किसी तरह घर से निकलकर खेतों की ओर पहुंच जाता है। वो वहां भी पुलिस को खुलेआम ललकारता रहा। मौके पर मौजूद पुलिस अधिकारी लगातार उसे आत्मसमर्पण के लिए समझाते हैं। आखिरकार आरोपी एक और हवाई फायरिंग करता है। वो पुलिस को कहता है कि मेरी मांग मान लीजिए, मैं हथियार फेंक दूंगा। पुलिस कहती है तुम्हारी हर मांग मान ली गई है। जिसके बाद वो पुलिस के सामने हथियार फेंक देता है। लेकिन जैसे ही पुलिस उसे पकड़ने जाती है वो पिस्टल उठा लेता है। उसके बाद पुलिस फायरिंग करती है। 2 गोली भरत के पैर में लगती है और वो खेत में गिर जाता है। इलाज के लिए पुलिस ने अस्पताल पहुंचाया, जहां उसकी मौत हो गई।



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वर्ल्ड अपडेट्स: भारत और ब्रिटेन का फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 15 जुलाई से लागू, G7 में मोदी- स्टार्मर ने इसकी घोषणा की


36 मिनट पहले

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भारत और ब्रिटेन का फ्री ट्रेड एग्रीमेंट 15 जुलाई 2026 से लागू होगा। पीएम नरेंद्र मोदी और ब्रिटिश पीएम कीर स्टार्मर ने बुधवार को इसकी घोषणा की। इस समझौते पर 24 जुलाई 2025 को हस्ताक्षर हुए थे। दोनों नेताओं की फ्रांस के एवियन में जी-7 शिखर सम्मेलन में मुलाकात हुई थी। यानी कारोबारियों को नई व्यवस्था की तैयारी के लिए 28 दिन मिलेंगे। पीएम मोदी ने इसे भारत-ब्रिटेन संबंधों के लिए ऐतिहासिक उपलब्धि बताया।

भारतीय कपड़े, फुटवियर और कुछ खाद्य उत्पादों पर टैरिफ घटाएगा। भारतीय कुशल प्रोफेशनल्स को ब्रिटेन में काम के दौरान दोहरे सोशल सिक्योरिटी योगदान से राहत मिलेगी। यह राहत 36 महीने से बढ़ाकर 60 महीने तक होगी। भारत में ब्रिटिश व्हिस्की पर शुल्क 150% से घटकर 40% होगा। ऑटोमोबाइल पर शुल्क कोटा के तहत 100% से घटकर 10% होगा।

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