Monday, June 8, 2026
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अमेरिकी कांग्रेस से इजरायल की नेसेट तक, PM मोदी की कूटनीतिक विजयगाथा


नई दिल्ली. जब कोई प्रधानमंत्री किसी विदेशी संसद में भाषण देता है, तो उस पल का महत्व प्रोटोकॉल से कहीं ज़्यादा होता है. इसका मतलब है कि दूसरा देश न सिर्फ़ भारत के नेता की मेज़बानी कर रहा है, बल्कि अपनी लोकतांत्रिक संसद में – कानून बनाने वालों, राजनयिकों, मीडिया और पूरी दुनिया के सामने – भारत की आवाज़ को जगह भी दे रहा है. यहीं पर नेहरू और पीएम मोदी के बीच का अंतर अहम हो जाता है. जवाहरलाल नेहरू ने अपने कार्यकाल के दौरान तीन विदेशी संसदों को संबोधित किया था. वहीं, पीएम नरेंद्र मोदी ने 2014 से 2026 के बीच 19 विदेशी संसदों को संबोधित किया है, जो किसी भी भारतीय कार्यकारी प्रमुख के लिए सबसे ज़्यादा है.

जैसे-जैसे पीएम मोदी 10 जून, 2026 को भारत के सबसे लंबे समय तक लोकतांत्रिक रूप से चुने गए और लगातार सेवा करने वाले प्रधानमंत्री के तौर पर नेहरू का रिकॉर्ड तोड़ने के करीब पहुंच रहे हैं, ये भाषण दिखाते हैं कि कैसे भारत की ग्लोबल आवाज़ पहचान की शुरुआती कोशिशों से आगे बढ़कर दुनिया की राजधानियों में एक व्यापक और ज़्यादा आत्मविश्वास भरी मौजूदगी तक पहुंची है.

अमेरिकी सांसदों को नेहरू का संदेश
अमेरिकी सांसदों को नेहरू का 1949 का संबोधन तब हुआ था जब भारत-अमेरिका संबंध अभी शुरुआती दौर में थे. हाउस चैंबर की मरम्मत चल रही थी, इसलिए उन्होंने सीनेट जाने से पहले ‘वेज़ एंड मीन्स कमेटी रूम’ में एक स्वागत समारोह में लगभग 15 मिनट तक भाषण दिया; सीनेट की बैठक उस समय पुराने सुप्रीम कोर्ट चैंबर में हो रही थी, जहां उन्होंने वही भाषण फिर से दिया. उस समय, राष्ट्रपति हैरी एस. ट्रूमैन का वॉशिंगटन नेहरू की गुटनिरपेक्षता और समाजवादी सोच को समझने की कोशिश कर रहा था. वहीं भारत, शीत युद्ध के गुटों में तेज़ी से बँट रही दुनिया में अपनी नई-नई मिली आज़ादी की रक्षा करने की कोशिश कर रहा था.

नेहरू का संदेश सावधानी भरा लेकिन स्पष्ट था. उन्होंने कहा कि वह अमेरिका के “दिमाग और दिल” को “जानने-समझने की यात्रा” पर आए हैं और उसके सामने भारत का अपना “दिमाग और दिल” रखना चाहते हैं. उन्होंने तकनीकी और यांत्रिक सहयोग का स्वागत किया, लेकिन इस बात पर ज़ोर दिया कि भारत सबसे पहले आत्मनिर्भरता पर भरोसा करेगा और अपनी “मुश्किल से हासिल की गई आज़ादी” के किसी भी हिस्से के बदले “कोई भौतिक फ़ायदा” नहीं चाहेगा. यह एक ऐसे नए आज़ाद देश की आवाज़ थी जो बिना निर्भरता के सहयोग चाहता था. मोदी ने कैसे बढ़ाई दुनिया में भारत की आवाज़

विदेशों की संसदों में पीएम मोदी का संबोधन भारत की वैश्विक यात्रा के एक अलग दौर का हिस्सा है. उनके भाषणों ने भारत का संदेश पड़ोसी देशों, प्रमुख पश्चिमी लोकतंत्रों, अफ्रीका, कैरिबियन, इंडो-पैसिफिक और पश्चिम एशिया की संसदों तक पहुंचाया है. 2014 में पद संभालने के तुरंत बाद, मोदी ने भूटान, नेपाल, ऑस्ट्रेलिया और फ़िजी की संसदों को संबोधित किया. 2015 में, उन्होंने मॉरीशस की नेशनल असेंबली, श्रीलंका की संसद, मंगोलिया की संसद, यूके की संसद और अफ़गानिस्तान की संसद को संबोधित किया. उन्होंने 2016 और फिर 2023 में अमेरिकी कांग्रेस को संबोधित किया. बाद की सूची और भी बढ़ी: 2018 में युगांडा, 2019 में मालदीव, 2024 में गुयाना, 2025 में घाना, त्रिनिदाद और टोबैगो, नामीबिया और इथियोपिया, और 2026 में इज़रायल की नेसेट (संसद). नेसेट में, जो उनका हालिया संबोधन था, पीएम मोदी को इज़रायली संसद के सर्वोच्च सम्मान से सम्मानित किया गया.

अमेरिकी कांग्रेस में पीएम मोदी ने क्या कहा
पीएम मोदी का 2016 का संबोधन नेहरू के 1949 के भाषण से बिल्कुल अलग स्थिति में हुआ था. तब तक, राष्ट्रपति बराक ओबामा के कार्यकाल में भारत-अमेरिका संबंध एक मज़बूत रणनीतिक दौर में पहुंच चुके थे; ओबामा अपने कार्यकाल के दौरान दो बार भारत का दौरा करने वाले पहले अमेरिकी राष्ट्रपति बने थे. व्यापार 2009 में $60 बिलियन से बढ़कर 2015 में $107 बिलियन हो गया था, अमेरिका से भारत की रक्षा खरीद $14 बिलियन तक पहुंच गई थी, और अमेरिका में भारतीय FDI तीन गुना हो गया था. वह आत्मविश्वास पीएम मोदी की भाषा में झलकता था. अटल बिहारी वाजपेयी के ‘हिचकिचाहट की छाया’ से बाहर निकलने के आह्वान का ज़िक्र करते हुए, मोदी ने कहा कि भारत और अमेरिका ने ‘इतिहास की हिचकिचाहटों’ को पार कर लिया है. उन्होंने संबंधों को परिभाषित करने के लिए ‘सहजता, स्पष्टता और तालमेल’ (Comfort, Candour and Convergence) जैसे शब्दों का इस्तेमाल किया और कहा कि अमेरिकी कांग्रेस ने ‘बाधाओं को साझेदारी के पुलों में बदलने’ में मदद की है.

2023 में, पीएम मोदी अमेरिकी कांग्रेस के संयुक्त सत्र को दो बार संबोधित करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने. इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के बाद, वे ऐसे दूसरे अंतरराष्ट्रीय नेता भी हैं जिन्हें एक से ज़्यादा बार यह सम्मान मिला है. उनके 2023 के भाषण से पता चला कि दुनिया में भारत की स्थिति कितनी बदल गई है. पीएम मोदी ने कहा कि जब वह पहली बार प्रधानमंत्री के तौर पर अमेरिका गए थे, तब भारत दुनिया की 10वीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था था, और अब यह पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन गया है. उन्होंने कहा, ‘जब भारत आगे बढ़ता है, तो पूरी दुनिया आगे बढ़ती है.’ पीएम मोदी ने ‘वसुधैव कुटुंबकम’ – यानी दुनिया एक परिवार है – के विचार के ज़रिए दुनिया के साथ भारत के जुड़ाव को भी पेश किया. इसे भारत की G20 थीम “एक पृथ्वी, एक परिवार, एक भविष्य” से जोड़ते हुए उन्होंने कहा कि दुनिया के साथ भारत का जुड़ाव सभी के फ़ायदे के लिए है.

दूसरे देशों की संसद में भाषण क्यों मायने रखते हैं
दूसरे देशों की संसद में दिए गए भाषण प्रतीकात्मक होते हैं, लेकिन कूटनीति में प्रतीकों का महत्व होता है. ऐसे निमंत्रण तब दिए जाते हैं जब कोई देश सम्मान दिखाना चाहता है, राजनीतिक संबंध मज़बूत करना चाहता है या आने वाले नेता के महत्व को मान्यता देना चाहता है. इसीलिए पीएम मोदी के 19 भाषण मायने रखते हैं. ये न सिर्फ़ व्यक्तिगत कूटनीति को दिखाते हैं, बल्कि एक ऐसे देश के तौर पर भारत की व्यापक स्वीकार्यता को भी दर्शाते हैं जिसकी स्थिति अलग-अलग क्षेत्रों और मुद्दों पर अहम है.



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कभी टीचर था धुरंधर में नजर आ चुका ये एक्टर, क्लास में हुई पत्नी से पहली मुलाकात


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बॉलीवुड के जाने माने एक्टर आर. माधवन ने अपने करियर में कई रोमांटिक रोल किए हैं. पर्दे पर उनका रोमांटिक अंदाज फैंस का दिल जीत लेता है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि धुरंधर स्टार असल जिंदगी में भी काफी रोमांटिक हैं. उनकी लव स्टोरी किसी फिल्मी कहानी से कम नही. अपनी पत्नी सरिता संग अपनी लव स्टोरी पर उन्होंने खुलकर बात की है.

नई दिल्ली. बॉलीवुड और साउथ में एक्टिंग का डंका बजा चुके आर. माधवन कभी पब्लिक स्पीकिंग और पर्सनैलिटी डेवलपमेंट की क्लासेस लिया करते थे. इसी बीच कोल्हापुर में उनकी मुलाकात सरिता बिरजे यानी उनकी पत्नी से हुई थी.

Madhavan was teaching public speaking and communication skills when he met Sarita during one of his sessions in Kolhapur. "I was teaching a personality development class in Kolhapur when I met Sarita. She was aspiring for a job in an airline and attended my classes. When she finally bagged the cat, she thought it was in part due to my classes and took me to a thank-you dinner. That's how it started,” he once told Times Of India.

सरिता उस दौरान एयरलाइन इंडस्ट्री में नौकरी करने के सपने देखा करती थीं. उन्होंने माधवन की क्लास भी जॉइन की थी.माधवन ने अपने एक इंटरव्यू खुलासा किया कि सरिता ने उनकी क्लास के बाद एयर होस्टेस की जॉब ली.

The two did not begin dating while she was his student. Their relationship began after Sarita completed the course and went on to become an air hostess. Grateful for his guidance, she invited him to dinner as a thank-you gesture. Recalling the moment, the actor shared that they met for dinner at a hotel in Kolhapur.

उन्होंने बताया कि इसमें माधवन की ट्रेनिंग का भी बड़ा अहम योगदान रहा है. नौकरी मिलने की खुशी में उन्होंने माधवन को डिनर पर भी इनवाइट किया था. इसके बाद दोनों की दोस्ती की शुरुआत हुई. लेकिन प्रेम कहानी उस वक्त नहीं शुरू हुई, जब वह उनकी स्टूडेंट थी.

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That dinner marked the beginning of a deeper connection between the two. Their bond gradually grew stronger and eventually turned into a relationship.

माधवन ने अपनी बातचीत में बताया था कि कोर्स पूरा होने और नौकरी मिलने के बाद दोनों एक दूसरे के करीब आने लगे थे. कैसे एक डिनर मीटिंग दोनों को मिलाने की वजह बन गई. इसके बाद दोनों ने एक-दूसरे को 8 साल तक डेट किया. लेकिन दोनों ने किसी को इस बात की भनक तक नहीं लगने दी थी.

The couple dated for around eight years before deciding to get married. Their relationship remained away from the spotlight during this period.

साल 1999 में जब दोनों एक दूसरे के प्यार में डूब चुके थे, तब माधवन और सरिता ने चेन्नई में तमिल रीति-रिवाजों से शादी रचाई. लेकिन इस शादी में भी खास ही लोगों को शामिल किया गया था. फिर 6 साल बाद दोनों साल 2005 में उनके बेटे वेदांत का जन्म हुआ.

In 1999, Madhavan and Sarita tied the knot in a traditional Tamil wedding in Chennai, attended by close family and friends. Six years after tying the knot, the couple embraced parenthood. They welcomed their son, Vedaant, in 2005, marking a new chapter in their journey together.

इसके बाद माधवन एक्टिंग की दुनिया में दिन दोगुनी और रात चौगुनी तरक्की करते गए. लेकिन सरिता हमेशा उनके साथ हर मौके पर खड़ी रहीं. दोनों ने अपने रिश्ते को भरोसे, सम्मान और समझदारी के साथ हर उतार चढ़ाव को देखा.

As Madhavan’s film career took off, Sarita remained a constant presence in his life. The couple built their relationship on trust and mutual understanding. The couple recently celebrated 27 years of marriage, proving that their love story has stood the test of time.

माधवन और सरिता की शादी को हाल ही में 27 साल पूरे हुए हैं. लेकिन सालों बाद भी दोनों का रिश्ता मजबूती से टिका हुआ है. ठीक वैसे ही जैसा कि शादी से पहले शुरुआत में बना हुआ था. आज लोग उनकी प्रेम कहानी की मिसाल देते हैं.

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यूपी पुलिस भर्ती परीक्षा: 75% से अधिक रही उपस्थिति, मथुरा में डीएम-एसएसपी ने संभाली कमान – Mathura News




मथुरा में पुलिस भर्ती परीक्षा सोमवार को जिले के 16 परीक्षा केंद्रों पर कड़ी सुरक्षा व्यवस्था के बीच संपन्न हुई। परीक्षा को निष्पक्ष, पारदर्शी और नकलविहीन कराने के लिए जिला प्रशासन और पुलिस प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद रहा। जिलाधिकारी चंद्र प्रकाश सिंह और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक श्लोक कुमार ने स्वयं विभिन्न परीक्षा केंद्रों का औचक निरीक्षण किया। उन्होंने वीडीपी राजकीय इंटर कॉलेज, सेठ बी.एन. पोद्दार इंटर कॉलेज और श्री गुरु कार्ष्णि इंटर कॉलेज सहित कई केंद्रों पर व्यवस्थाओं का जायजा लिया। इस दौरान सीसीटीवी कंट्रोल रूम, अभ्यर्थियों की जांच प्रक्रिया, सुरक्षा इंतजाम, प्रकाश व्यवस्था और शुद्ध पेयजल जैसी सुविधाओं को परखा गया। अधिकारियों ने केंद्र व्यवस्थापकों को परीक्षा की शुचिता बनाए रखने के निर्देश दिए। परीक्षा दो पालियों में आयोजित की गई। पहली पाली सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक और दूसरी पाली अपराह्न 3 बजे से शाम 5 बजे तक चली। जिले के सभी केंद्रों पर पहले दिन कुल 12 हजार 480 अभ्यर्थी पंजीकृत थे। पहली पाली में 4,781 अभ्यर्थी उपस्थित रहे, जबकि 1,459 अनुपस्थित थे, जिससे उपस्थिति प्रतिशत 76.61 रहा। दूसरी पाली में 4,891 अभ्यर्थियों ने परीक्षा दी और 1,349 अनुपस्थित रहे, इस हिसाब से पहली पाली में 76.61 प्रतिशत व दूसरी पाली में उपस्थिति प्रतिशत बढ़कर 78.38 प्रतिशत दर्ज किया गया। परीक्षा देकर बाहर निकले अभ्यर्थियों ने प्रश्नपत्र को अपेक्षाकृत आसान बताया। नोएडा से आए एक अभ्यर्थी ने कहा कि पेपर सरल था और अधिकांश प्रश्न पाठ्यक्रम पर आधारित थे। वहीं, बुलंदशहर से आए एक अन्य परीक्षार्थी ने अनुमान लगाया कि प्रश्नपत्र आसान होने के कारण इस बार मेरिट अधिक जा सकती है। परीक्षा के दौरान सभी केंद्रों पर पर्याप्त पुलिस बल तैनात रहा और कंट्रोल रूम से लगातार निगरानी की गई। प्रशासन ने परीक्षा को शांतिपूर्ण एवं व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने पर संतोष व्यक्त किया।



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अग्निशमन विभाग का 17 होटल्स, प्रतिष्ठानों में छापा:: कंकड़बाग इलाके में पहुंची टींम, लापरवाही और मानकों का उल्लंघन करते पकड़े गए होटल्स – Patna News




अग्निशमन विभाग की ओर से लगातार कार्रवाई जारी है। कंकड़बाग इलाके में आज 17 होटल्स और अन्य प्रतिष्ठानों में अनुमंडल अग्निशमन पदाधिकारी अजीत कुमार के नेतृत्व में औचक निरीक्षण और धावा बोला गया। इसमें राजेंद्र नगर टर्मिनल के ठीक सामने स्थित होटल रॉयल पैलेस हंग्री हाउस रेस्टोरेंट, HOTEL PANASIA, समेत अन्य दो होटल्स में औचक धावा दल पहुंचा। इस दौरान घोर लापरवाही पाई गई। खानापूर्ति के लिए फायर एक्सटिंग्विशर रखे गए थे। जब इसकी जांच हुई तो इन सभी के डेट एक साल पहले ही लेप्स पाए गए। एंट्री एग्जिट गेट पर साइनेज नहीं मिले पानी टैंक भी मानकों के मुताबिक नहीं पाया गया। एंट्री एग्जिट गेट पर साइनेज नहीं मिले। सीढ़ियों की चौड़ाई और गैलरी भी मानकों के मुताबिक नहीं थी। फायर सर्टिफिकेट की जांच जब अनुमंडल अग्निशमन पदाधिकारी ने की तो वो भी 1 वर्ष पहले के लेप्स प्रस्तुत किए गए। अग्निशमन अनुमंडल पदाधिकारी अजीत कुमार ने बताया कि वरीय अधिकारियों के निर्देशानुसार लगातार कार्रवाई की जा रही है। आज कंकड़बाग इलाके के 17 प्रतिष्ठानों का औचक निरीक्षण किया गया। खासकर के होटल्स में खामियां पाई गई हैं। 15 दिन की मोहल्लत दी गई है इन सभी को 7 से 15 दिन की मोहल्लत दी गई है। सभी को नोटिस दिया गया है। इसके बाद एक बार फिर आकर देखा जाएगा। उस समय अवधि तक इसे दुरुस्त नहीं किया जाता है, तो बिल्डिंग सील करने की प्रक्रिया अपनाई जाएगी।



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500 CCTV खंगालकर बाइक लूट गैंग का खुलासा: देवास में , 2 नाबालिग समेत 6 आरोपी गिरफ्तार, चोरी के बाद पार्ट्स निकालकर कबाड़ी को बेचे थे – Dewas News




देवास में औद्योगिक क्षेत्र थाना पुलिस ने ‘ऑपरेशन त्रिनेत्रम’ के तहत बाइक लूटने वाले एक गिरोह का पर्दाफाश किया है। पुलिस ने दो नाबालिगों सहित कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है। उनके कब्जे से लूटी गई बाइक के विभिन्न पार्ट्स, चोरी की एक अन्य मोटरसाइकिल और अन्य सामान बरामद किया गया है। पुलिस के अनुसार, 3 फरवरी 2026 की रात मांगलिया निवासी अनिल प्रजापति क्षिप्रा स्थित यात्री प्रतीक्षालय में मोबाइल पर बात कर रहे थे। तभी बाइक पर सवार तीन युवक वहां पहुंचे और उन पर हमला कर दिया। एक आरोपी ने पीछे से अनिल की गर्दन पकड़ ली, जबकि दूसरे ने बियर की कांच की बोतल से उनके सिर और जांघ पर वार किया। इसके बाद आरोपी बाइक की चाबी छीनकर उन्हें नाली की ओर धकेलते हुए मोटरसाइकिल लेकर फरार हो गए। 500 से ज्यादा CCTV फुटेज खंगाली मामले की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर विशेष टीम गठित की गई। टीम ने ‘ऑपरेशन त्रिनेत्रम’ के तहत 500 से अधिक सीसीटीवी कैमरों की फुटेज खंगाली। तकनीकी साक्ष्यों और मुखबिरों से मिली सूचना के आधार पर 7 जून को आरोपी आकाश पटेल उर्फ अप्पु खोटा और दो नाबालिगों को पकड़ा गया। पूछताछ में आकाश पटेल और नाबालिगों ने बताया कि लूटी गई बाइक शहजाद कुरैशी को बेच दी गई थी। पुलिस ने शहजाद को गिरफ्तार किया। उसने स्वीकार किया कि बाइक के पार्ट्स अलग-अलग कर कबाड़ी विनोद योगी और सद्दाम गौरी को बेच दिए थे। इसके बाद पुलिस ने विनोद योगी और सद्दाम गौरी को भी गिरफ्तार कर बाइक के विभिन्न पार्ट्स बरामद किए। एक और चोरी की बाइक बरामद जांच में सामने आया कि आरोपियों ने क्षिप्रा थाना क्षेत्र से एक अन्य मोटरसाइकिल भी चोरी की थी। पुलिस ने वह बाइक भी बरामद कर ली है। आरोपियों ने नागदा पहाड़ी क्षेत्र में केबल चोरी की कई वारदातों में शामिल होना भी स्वीकार किया है। पुलिस इन मामलों में पूछताछ कर रही है और चोरी का अन्य सामान बरामद करने का प्रयास जारी है। मामले के खुलासे में थाना प्रभारी निरीक्षक शशिकांत चौरसिया के नेतृत्व में प्रआर अजय बैस, शैलेन्द्र राणा, आरक्षक अजय जाट, राबी यादव, अर्पित जायसवाल, सैनिक ज्ञानेन्द्र द्विवेदी एवं तेजसिंह मण्डलोई की महत्वपूर्ण भूमिका रही। पुलिस अधिकारियों ने इसे ऑपरेशन त्रिनेत्रम की बड़ी सफलता बताया।



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स्वच्छता और हरियाली से निखरा सूरजमल विहार का पार्क: उप-महापौर ने किया अभियान का नेतृत्व; एमसीडी ने चलाया विशेष सफाई अभियान – New Delhi News




दिल्ली के सूरजमल विहार स्थित सी-ब्लॉक शिव मंदिर पार्क में स्वच्छता और हरियाली का संगम देखने को मिला। दिल्ली की उप-महापौर डॉ मोनिका पंत के नेतृत्व में यहां एक विशेष स्वच्छता अभियान और वृक्षारोपण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस दौरान नगर निगम के आला अधिकारी, शाहदरा साउथ जोन के उपायुक्त, सहायक आयुक्त और उद्यान विभाग की टीम ने सक्रिय भागीदारी निभाई। अभियान के तहत पार्क और उसके आसपास के क्षेत्रों की सघन सफाई की गई। इस दौरान डॉ मोनिका पंत ने उपस्थित अधिकारियों को क्षेत्र को स्वच्छ एवं सुंदर बनाए रखने के कड़े निर्देश दिए। एक पेड़ मां के नाम के तहत हुआ पौधरोपण स्वच्छता अभियान के बाद प्रधानमंत्री के प्रेरणादायी अभियान एक पेड़ मां के नाम के तहत उप-महापौर और उपायुक्त ने पार्क परिसर में पौधों का रोपण किया। इस मौके पर उप-महापौर ने कहा, स्वच्छता और हरियाली, दोनों ही एक स्वस्थ एवं विकसित दिल्ली की आधारशिला हैं। नगर निगम दिल्ली को सुंदर और पर्यावरण अनुकूल बनाने के लिए प्रतिबद्ध है। मैं नागरिकों से भी अपील करती हूं कि वे अपने आसपास के परिवेश को साफ रखें और अधिक से अधिक पौधे लगाकर पर्यावरण संरक्षण में अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें। कार्यक्रम का उद्देश्य न केवल सार्वजनिक स्थानों को स्वच्छ रखना था, बल्कि जन-भागीदारी के जरिए दिल्ली को पर्यावरण की दृष्टि से समृद्ध बनाना भी था।



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बहराइच में कलेक्ट्रेट के सामने मिल रही है बिना बर्फ और केमिकल वाली खास लस्सी


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Bahraich khas lassi: गर्मियों के इस मौसम में यदि आप कलेक्ट्रेट के सामने से गुजर रहे हैं, तो रुकिए! यहां स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के हाथों का बना एक ऐसा अमृत आपका इंतजार कर रहा है, जिसका स्वाद बड़े-बड़े होटलों की महंगी लस्सी को भी मात दे रहा है. शुद्ध दूध, ढेर सारे ड्राईफ्रूट्स और चेरी के लाजवाब संगम से तैयार इस खास लस्सी के 200 एमएल गिलास की कीमत मात्र 51 रुपये है. बिना किसी केमिकल और बिना बर्फ के शुद्धता से तैयार इस लस्सी का स्वाद ऐसा है कि आप इसे एक बार पीने के बाद कभी भूल नहीं पाएंगे.

Bahraich khas lassi: वैसे तो बाजार में बहुत सी जगहों पर गर्मियों में लस्सी मिलती है और बहुत सी जगहों की लस्सी फेमस भी होती है. लेकिन बहराइच में महिलाओं द्वारा बनाई गई यह लस्सी बेहद स्वादिष्ट है. इसे महिलाएं अपने हाथों से, बिना किसी केमिकल के दही को जमाकर बनाती हैं. इसमें दूध भी अच्छी क्वालिटी का इस्तेमाल किया जाता है और लस्सी में ड्राईफ्रूट, चेरी और भी कई चीजों को डालकर परोसा जाता है. अब लोग धीरे-धीरे समूह की महिलाओं द्वारा बनाई गई इस लस्सी की ओर आकर्षित होकर इसका सेवन कर रहे हैं.

गर्मी को देखते हुए महिलाओं ने लगाया दिमाग!
समूह की महिलाओं द्वारा बनाई गई इस लस्सी की बिक्री गांव में नहीं, बल्कि शहर में की जा रही है. शहर में समूह की दुकान पर, जो बहराइच शहर के कलेक्ट्रेट के सामने बनी हुई है, वहां पर महिलाएं लस्सी को बनाकर बेचने के लिए भेज देती हैं. यहां पर महिलाओं द्वारा बनाई गई खाद्य सामग्री जैसे अचार, मुरब्बा, चूर्ण समेत लस्सी को बेचने का काम रवि नाम के शख्स करते हैं, जिन्होंने एक बैनर भी लगा रखा है. जहां पर आप पहुंचकर हर वक्त ताजी ठंडी लस्सी को पीकर ठंडक का एहसास बड़े आराम से ले सकते हैं.

लस्सी में चीनी की मात्रा सीमित, बर्फ न के बराबर!
लस्सी की बिक्री करने वाले रवि नाम के शख्स ने बताया कि इसमें बर्फ का इस्तेमाल नहीं किया जाता है, इस वजह से पीने में यह बड़ी ही स्वादिष्ट लगती है और पनछुट्टी (पतली) नहीं होती है. वहीं चीनी की बात करें तो बहुत मीठी होने पर लस्सी का मजा किरकिरा हो जाता है, इसलिए चीनी की मात्रा कम ही डाली जाती है. शायद यही वजह है जो यह लस्सी सभी को पसंद आती है.

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Rahul Goel

राहुल गोयल न्यूज़ 18 हिंदी में हाइपरलोकल (यूपी, उत्तराखंड, हरियाणा और हिमाचल प्रदेश) के लिए काम कर रहे हैं. मीडिया इंडस्ट्री में उन्हें 16 साल से ज्यादा का अनुभव है, जिसमें उनका फोकस हमेशा न्यू मीडिया और उसके त…और पढ़ें



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PoK में हिंसा, 11 की मौत, इनमें 4 पुलिसकर्मी: विधानसभा में आरक्षित सीटें खत्म करने की मांग, कश्मीर से आए लोगों को दी गई थी




पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच हुई हिंसक झड़पों में 11 लोगों की मौत हो गई, जबकि 70 से ज्यादा लोग घायल हुए हैं। न्यूज एजेंसी रॉयटर्स के मुताबिक यह हिंसा जॉइंट अवामी एक्शन कमेटी (JAAC) और क्षेत्रीय सरकार के बीच चल रहे विवाद के दौरान हुई। रिपोर्ट के अनुसार मृतकों में 7 नागरिक और 4 पुलिसकर्मी शामिल हैं। वहीं 23 सुरक्षाकर्मी और करीब 50 प्रदर्शनकारी घायल हुए हैं। पुलिस ने अब तक 30 लोगों को गिरफ्तार किया है। PoK में JAAC और सरकार के बीच विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों को लेकर विवाद चल रहा है। ये सीटें उन शरणार्थियों के लिए आरक्षित हैं जो जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में जाकर बसे थे। JAAC इन सीटों को खत्म करने की मांग को लेकर आंदोलन कर रहा है। JAAC पर बैन लगा, जिसके बाद हिंसा भड़की रविवार को JAAC के कार्यकर्ता संगठन के एक सदस्य की मौत के विरोध में अस्पताल के शवगृह के बाहर प्रदर्शन कर रहे थे। सदस्य की मौत कथित तौर पर पुलिस फायरिंग में हुई थी। पुलिस जब प्रदर्शनकारियों को हटाने पहुंची, तभी झड़प शुरू हो गई और हिंसा फैल गई। रावलकोट के कमिश्नर सरदार वहीद खान ने रॉयटर्स से कहा कि प्रदर्शनकारियों की गोलीबारी में चार पुलिसकर्मियों और एक राहगीर की मौत हुई। उन्होंने दावा किया कि इसके जवाब में सुरक्षा बलों की कार्रवाई में छह प्रदर्शनकारी मारे गए। पाकिस्तानी अखबार डॉन के मुताबिक पुलिस का आरोप है कि JAAC से जुड़े लोगों ने सुरक्षाकर्मियों पर शॉटगन और अन्य हथियारों से हमला किया। पुलिस ने घटना को आतंकवादी कार्रवाई करार देते हुए कहा कि कानून-व्यवस्था और नागरिकों की सुरक्षा से कोई समझौता नहीं किया जाएगा। क्षेत्रीय सरकार ने 5 जून को JAAC पर आतंकवाद विरोधी कानून के तहत प्रतिबंध लगा दिया था। इसके बाद से इलाके में तनाव लगातार बढ़ रहा है। 2 दिन पहले JAAC पर बैन लगा था PoK सरकार ने JAAC पर 5 जून को बैन लगाया था। बैन लगाने के लिए सार्वजनिक व्यवस्था और सुरक्षा संबंधी चिंताओं का हवाला दिया। इसके अगले दिन पुलिस ने संगठन के समर्थकों के खिलाफ कार्रवाई शुरू की और कई गिरफ्तारियां कीं। प्रशासन का दावा है कि JAAC की 38 मांगों में से ज्यादातर मांगों को पहले ही स्वीकार किया जा चुका है। इसके बावजूद संगठन अपना आंदोलन जारी रखे हुए है। JAAC के आंदोलन की अहम वजह विधानसभा की 12 आरक्षित सीटें हैं, जिन्हें खत्म करने की मांग की जा रही है। असल में ये 12 सीटें उन लोगों के लिए आरक्षित हैं, जो जम्मू-कश्मीर से पाकिस्तान के अन्य हिस्सों में जाकर बसे थे। ये लोग 1947, 1965, 1971 युद्ध या बाद के संघर्षों की वजह से गए थे। JAAC का आरोप है कि आरक्षित सीटों के कारण स्थानीय आबादी का प्रतिनिधित्व कम हो जाता है और इसका फायदा कुछ ही परिवारों को मिल रहा है। वे चाहते हैं कि उनकी समस्याओं और जरूरतों के लिए अधिक विधायक चुने जाएं। PoK में 27 जुलाई को चुनाव होंगे गिलगित-बाल्टिस्तान के बाद 27 जुलाई को पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) में विधानसभा चुनाव कराए जाएंगे। PoK की विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं। इनमें से 45 सीटों पर सीधे चुनाव होता है, जबकि 8 सीटें महिलाओं, तकनीकी विशेषज्ञों और धार्मिक विद्वानों के लिए आरक्षित हैं। PoK में विधानसभा का कार्यकाल पांच साल का होता है। इससे पहले 2021 में PoK विधानसभा चुनाव में इमरान खान की पार्टी (PTI) ने 45 में से 25 सीटें जीतकर सरकार बनाई थी। इसके बाद सरदार अब्दुल कय्यूम नियाजी प्रधानमंत्री बने। हालांकि अप्रैल 2022 में इमरान खान की सरकार गिर गई। इसका असर वहां की राजनीति पर भी पड़ा। मई 2022 में सरदार अब्दुल कय्यूम नियाजी ने इस्तीफा दे दिया। इसके बाद PTI ने ही सरदार तनवीर इलियास को नया प्रधानमंत्री बनाया। लेकिन अप्रैल 2023 में PoK की उच्च अदालत ने उन्हें अदालत की अवमानना के मामले में अयोग्य घोषित कर दिया। इसके बाद उनका पद चला गया और एक बार फिर नया प्रधानमंत्री चुनना पड़ा। इसके बाद PTI के ही चौधरी अनवरुल हक प्रधानमंत्री बने। लेकिन कुछ ही समय बाद उन्होंने इमरान खान और PTI से दूरी बना ली और खुद को स्वतंत्र नेता के रूप में स्थापित किया। चौधरी अनवरुल हक को भी नवंबर 2025 में अविश्वास प्रस्ताव के जरिए हटा दिया गया था, और अब वहां पाकिस्तान पीपल्स पार्टी (PPP) के फैसल मुमताज राठौर नए प्रधानमंत्री हैं। ————————— पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में चुनाव से भारत नाराज:कहा- इससे अवैध कब्जा वैध नहीं होगा; 7 जून को 24 सीटों पर वोटिंग भारत ने पाकिस्तान के कब्जे वाले गिलगित-बाल्टिस्तान में 7 जून को होने वाले विधानसभा चुनावों का कड़ा विरोध किया है। विदेश मंत्रालय ने शुक्रवार को जारी बयान में कहा कि पाकिस्तान जिस क्षेत्र पर अवैध और जबरन कब्जा किए हुए है, वहां चुनाव कराने की उसकी योजना पूरी तरह अस्वीकार्य है। पूरी खबर यहां पढ़ें…



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AC में स्विंग मोड ऑन करना चाहिए या नहीं? जानें क्या है फायदे और नुकसान


इन दिनों मार्केट में आने वाले एसी में कई तरह के मोड्स दिए जाते हैं। ये मोड्स आपके एसी को जरूरत के हिसाब से इस्तेमाल करने के लिए होते हैं। ऑटो मोड में एसी का कंप्रेसर अपने आप ऑन और ऑफ होते रहता है, जिससे बिजली की बचत होती है। वहीं, बारिश के मौसम में ह्यूमिडिटी को खत्म करने के लिए ड्राई मोड का यूज किया जाता है। ठीक ऐसे ही एसी में स्विंग मोड भी होता है, तो इंडोर यूनिट के फ्लैप को घूमाता है। इसे कब ऑन करना चाहिए और कब नहीं? आइए, जानते हैं…

AC का Swing Mode कब करें ऑन?

एसी के अन्य फंक्शन की तरह की Swing Mode भी काफी उपयोगी होता है। यह कमरे में हवा को सही से सर्कुलेट करने के लिए यूज किया जाता है। हालांकि, हमेशा स्विंग मोड ऑन नहीं करना चाहिए। स्विंग मोड का इस्तेमाल हवा को ज्यादा एरिया में फैलाने के लिए किया जाता है। खास तौर पर अगर आपके रूम का साइज बड़ा है और दूर के कोने में एसी का एयरफ्लो नहीं पहुंच रहा है तो इस मोड को ऑन करना चाहिए।

इसके अलावा अगर कमरे में ज्यादा लोग मौजूद है तो भी आप इस मोड को ऑन कर सकते हैं। ऐसा करने से हवा का फैलाव पूरे कमरे में होगा और कमरा तेजी से ठंडा होगा। इस मोड के फायदे की बात करें तो यह बड़े एरिया को कवर करने के लिए होता है। साथ ही, कमरे के हर कोने को समान तरीके से ठंडा करने के लिए यूज किया जाता है।

स्विंग मोड बिजली बचाएगा या नहीं?

खास तौर पर दोपहर की गर्मी में स्विंग मोड को ऑन करने से कमरा तेजी से ठंडा होने में मदद मिलती है। हालांकि, कई लोग ये सोचते हैं कि स्विंग ऑन करने से बिजली का बिल भी ज्यादा आता होगा क्योंकि स्विंग का मोटर ऑन होगा और वह बिजली की खपत करेगा। हालांकि, वास्तविक में ऐसा नहीं होता है। स्विंग ऑन होने से कमरा तेजी से ठंडा होता है, जिसकी वजह से कंप्रेसर पर जोर कम पड़ता है और बिजली के बिल में बचत होती है।

स्विंग मोड को इस्तेमाल करते समय ये सावधानी बरतें कि इसे लगातार ऑन न रखें। जब कमरा ठंडा हो जाए तो इसे बंद कर दें। ऐसा करने से एयर फ्लैप का मोटर जल्दी खराब नहीं होगा।

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नागौर मंडी में आज के भाव: सरसों और चने में लौटी तेजी, सौंफ 500 और जीरा 400 रुपये प्रति क्विंटल लुढ़का – Nagaur News




नागौर कृषि उपज मंडी में सोमवार को विभिन्न फसलों के भावों में मिला-जुला उतार-चढ़ाव देखने को मिला। मंडी में जहां मूंग, ज्वार, चना और सरसों के अधिकतम भावों में तेजी दर्ज की गई, वहीं जीरा, सौंफ, ग्वार और दाना मैथी के भावों में मंदी का रुख रहा। ईसबगोल, असालिया और तिल के भाव स्थिर बने रहे। मंडी में मूंग के अधिकतम भाव में 100 रुपये प्रति क्विंटल की तेजी आई, जिससे शनिवार को 7900 रुपये पर बिकने वाला मूंग सोमवार को 8000 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गया, हालांकि इसका न्यूनतम भाव 5000 रुपये पर ही टिका रहा। ज्वार के अधिकतम भाव में भी 200 रुपये का उछाल आया और यह 5800 रुपये से बढ़कर 6000 रुपये प्रति क्विंटल दर्ज की गई। चना का अधिकतम भाव 5300 रुपये से बढ़कर 5350 रुपये प्रति क्विंटल हो गया। तेल मिलों की मांग निकलने से सरसों (40 प्रतिशत फैट) के भाव में 100 रुपये की तेजी दर्ज की गई, जिससे सरसों के भाव 7200 रुपये से बढ़कर 7300 रुपये प्रति क्विंटल पर पहुंच गए। तारामीरा का अधिकतम भाव भी 50 रुपये सुधरकर 5900 रुपये प्रति क्विंटल रहा।
दूसरी ओर, मसाला फसलों के बाजार में नरमी का माहौल रहा। जीरा के अधिकतम भाव में 400 रुपये प्रति क्विंटल की गिरावट दर्ज की गई, जिससे इसके भाव 20900 रुपये से घटकर 20500 रुपये रह गए। सौंफ के अधिकतम भाव में 500 रुपये की बड़ी मंदी आई और यह 11500 रुपये से नीचे उतरकर 11000 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गई। दाना मैथी का अधिकतम भाव भी 150 रुपये टूटकर 6150 रुपये से 6000 रुपये प्रति क्विंटल रह गया। सिन्धी सुवा के अधिकतम भाव में 100 रुपये की कमी आई और यह 7000 रुपये प्रति क्विंटल पर बंद हुआ। ग्वार के अधिकतम भाव में 25 रुपये की मामूली गिरावट रही और यह 5625 रुपये से घटकर 5600 रुपये प्रति क्विंटल बिका। इन सभी फसलों के न्यूनतम भाव शनिवार के स्तर पर ही स्थिर रहे। मंडी में ईसबगोल, असालिया, काला तिल और सफेद तिल के भावों में सोमवार को कोई बदलाव नहीं देखा गया। ईसबगोल के भाव 9000 से 13000 रुपये, असालिया के भाव 5000 से 6100 रुपये, काला तिल के भाव 8000 से 9500 रुपये और सफेद तिल के भाव 9000 से 10500 रुपये प्रति क्विंटल पर पूरी तरह से स्थिर बने रहे।



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