यूपी भाजपा के अध्यक्ष पंकज चौधरी ने क्षेत्र प्रभारी और अग्रिम मोर्चों के प्रभारी नियुक्त किए हैं। प्रदेश महामंत्री दिलीप पटेल को अवध और प्रदेश महामंत्री राम प्रताप सिंह चौहान को पश्चिम क्षेत्र का प्रभारी बनाया है। प्रभारियों पर विधानसभा चुनाव और उसके बाद पंचायत चुनाव की जिम्मेदारी रहेगी। प्रदेश महामंत्री गीता शाक्य को ब्रज, शंकर लोधी को कानपुर को प्रभारी बनाया है। प्रदेश उपाध्यक्ष रमेश सिंह को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के काशी और प्रदेश महामंत्री अभिजात मिश्र को सीएम योगी आदित्यनाथ के गोरखपुर क्षेत्र का प्रभारी बनाया है। प्रदेश महामंत्री राजेश चौधरी को युवा मोर्चा, प्रदेश महामंत्री संजय राय को पिछड़ा वर्ग मोर्चा, प्रदेश उपाध्यक्ष कामेश्वर सिंह को महिला मोर्चा, प्रदेश उपाध्यक्ष धर्मेंद्र सिंह को अनुसूचित जाति मोर्चा, प्रदेश उपाध्यक्ष प्रियंका रावत को अनुसूचित जनजाति मोर्चा, प्रदेश उपाध्यक्ष शंकर गिरी को किसान मोर्चा, प्रदेश उपाध्यक्ष देवेश कोरी को अल्पसंख्यक मोर्चा प्रभारी बनाया है
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यूपी भाजपा ने क्षेत्र प्रभारी-अग्रिम मोर्चों प्रभारियों का ऐलान किया: गीता शाक्य को ब्रज, शंकर लोधी को कानपुर की जिम्मेदारी – Uttar Pradesh News
महिला चलती ट्रेन के नीचे लेटकर बची: शेखपुरा स्टेशन पर GRP-RPF की सतर्कता से टली दुर्घटना, सिर में चोट – Sheikhpura News
शेखपुरा रेलवे स्टेशन पर शुक्रवार शाम एक महिला चलती ट्रेन की चपेट में आने से बाल-बाल बच गई। महिला प्लेटफॉर्म संख्या-2 पर पटरी पार कर रही थी, तभी रामपुरहाट-गया पैसेंजर ट्रेन आ गई। ट्रेन को अचानक सामने देख महिला घबरा गई और सूझबूझ दिखाते हुए रेलवे पटरी के बीच लेट गई। देखते ही देखते ट्रेन उसके ऊपर से गुजरने लगी। इस दौरान प्लेटफॉर्म पर मौजूद लोगों में अफरा-तफरी मच गई। महिला की पहचान नहीं हो सकी जीआरपी और आरपीएफ के जवानों ने तत्काल सतर्कता दिखाते हुए ट्रेन मैनेजर को सूचना दी और ट्रेन रुकवाई। तब तक ट्रेन के लगभग पांच डिब्बे महिला के ऊपर से गुजर चुके थे। ट्रेन रुकते ही पुलिसकर्मियों ने महिला को सुरक्षित बाहर निकाला और तत्काल इलाज के लिए सदर अस्पताल, शेखपुरा भेजा। घटना में महिला के सिर में चोट आई है, लेकिन चिकित्सकों के अनुसार उसकी स्थिति खतरे से बाहर बताई जा रही है। समाचार लिखे जाने तक महिला की पहचान नहीं हो सकी थी। पटरी के बीच लेटकर अपनी जान बचाई जीआरपी थानाध्यक्ष श्याम नंदन चौधरी ने बताया कि महिला पटरी पार कर दूसरे प्लेटफॉर्म पर जाने का प्रयास कर रही थी। समय रहते प्लेटफॉर्म पर नहीं चढ़ पाने के कारण उसने पटरी के बीच लेटकर अपनी जान बचाई। रेलवे पुलिस ने यात्रियों से अपील की है कि वे किसी भी परिस्थिति में रेलवे पटरी पार न करें और केवल फुट ओवरब्रिज अथवा निर्धारित मार्ग का ही उपयोग करें।
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सावन व्रत में सेहत का रखें ख्याल! इन 6 हेल्दी चीजों को डाइट में करें शामिल
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Sawan 2026 : सावन के व्रत के दौरान सिर्फ़ तली-भुनी या बहुत ज़्यादा मीठी चीज़ें खाने से थकान, कमज़ोरी और सुस्ती हो सकती है. इसलिए अपने व्रत के खाने में ऐसी चीज़ें शामिल करें जो पेट भरें और शरीर को ज़रूरी पोषक तत्व दें…
Sawan 2026 : सावन का महीना भगवान शिव की भक्ति और व्रत रखने के लिए खास माना जाता है. इस दौरान, कई लोग सोमवार या दूसरे दिनों में व्रत रखते हैं. व्रत के समय खान-पान की आदतें बदल जाती हैं, इसलिए यह पक्का करना ज़रूरी है कि शरीर को पर्याप्त ऊर्जा और पोषण मिले. व्रत के दौरान सिर्फ़ तली-भुनी चीज़ें या ज़्यादा मीठा खाने से थकान, कमज़ोरी और सुस्ती हो सकती है. इसलिए, व्रत के खाने में ऐसी चीज़ें शामिल करनी चाहिए जो पेट भरें और शरीर को ज़रूरी पोषक तत्व दें…
1. साबूदाना सावन व्रत के दौरान साबूदाने की खिचड़ी या टिक्की बहुत लोकप्रिय हैं. साबूदाने में कार्बोहाइड्रेट भरपूर मात्रा में होता है, जो शरीर को ऊर्जा देता है. इसे बनाते समय ज़्यादा तेल या नमक का इस्तेमाल न करें. व्रत के नियमों के अनुसार, इसमें मूंगफली और कुछ सब्ज़ियां मिलाकर इसे और भी पौष्टिक बनाया जा सकता है.
2. कुट्टू का आटा : व्रत के दौरान कुट्टू के आटे से पूड़ी, चीला या रोटी बनाई जाती है. इसमें फाइबर और ज़रूरी पोषक तत्व होते हैं. कुट्टू के आटे से बनी चीज़ें खाने से पेट लंबे समय तक भरा हुआ महसूस होता है. हालांकि, इसे डीप-फ्राई करने के बजाय कम तेल में पकाना बेहतर विकल्प है.
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3. फल : व्रत के दौरान ताज़े फल शरीर को हाइड्रेशन, फाइबर, विटामिन और प्राकृतिक शुगर देते हैं. आप अपनी डाइट में केला, सेब, पपीता, संतरा, अमरूद और तरबूज़ जैसे मौसमी फल शामिल कर सकते हैं. फल खाने से शरीर को हल्की ऊर्जा मिलती है और लंबे समय तक भूख नहीं लगती.
4. दही और दूध : दही और दूध प्रोटीन और कैल्शियम के बेहतरीन स्रोत हैं. अगर आपके व्रत के नियमों में डेयरी उत्पादों की इजाज़त है, तो आप व्रत के दौरान सादा दही या दूध ले सकते हैं. दही को फलों या कुछ नट्स के साथ भी खाया जा सकता है; हालाँकि, इसमें ज़्यादा चीनी न डालें.
5. मखाना : मखाना व्रत के लिए एक हल्का और पौष्टिक स्नैक है. इन्हें घी में हल्का भूनकर खाया जा सकता है. इनमें प्रोटीन, फाइबर और मिनरल्स होते हैं. स्वाद बढ़ाने के लिए, आप इसमें सेंधा नमक और थोड़ी काली मिर्च मिला सकते हैं, बशर्ते आपके व्रत के नियमों में इसकी इजाज़त हो.
6. नारियल पानी और पर्याप्त पानी : व्रत के दौरान शरीर में पानी की कमी (डिहाइड्रेशन) नहीं होने देनी चाहिए। पानी के अलावा, आप नारियल पानी भी पी सकते हैं. इसमें इलेक्ट्रोलाइट्स होते हैं और यह शरीर में पानी के स्तर को बनाए रखने में मदद करता है. अगर स्वास्थ्य कारणों से आपको तरल पदार्थ या पोटैशियम कम लेने की सलाह दी गई है, तो डॉक्टर की सलाह का पालन करें.
व्रत के दौरान ध्यान रखने योग्य बातें : व्रत के दौरान डीप-फ्राई किए हुए खाने, पैक्ड व्रत स्नैक्स और ज़्यादा चीनी वाली चीज़ों का सेवन कम करें. लंबे समय तक खाली पेट रहने के बजाय, अपनी उपवास की परंपराओं के अनुसार सही अंतराल पर हल्का भोजन करें. अगर आपको डायबिटीज, लो ब्लड प्रेशर या कोई अन्य स्वास्थ्य समस्या है, आप गर्भवती हैं या नियमित रूप से दवा लेती हैं, तो उपवास करने से पहले डॉक्टर से सलाह लेना सबसे अच्छा है.
पाकिस्तान-सऊदी-तुर्किये के बीच रक्षा समझौता साइन: एक पर हमला तीनों पर माना जाएगा; साझा ट्रेनिंग और सुरक्षा सहयोग बढ़ेगा
पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने शुक्रवार को सुरक्षा सहयोग बढ़ाने के लिए डिफेंस पैक्ट साइन किया है। इसे ‘मक्का जॉइंट डिफेंस पैक्ट’ कहा जा रहा है। समझौते के मुताबिक, अगर तीनों में से किसी एक देश पर हमला होता है, तो इसे तीनों देशों पर अटैक माना जाएगा। समझौते के तहत तीनों देश आपस में रक्षा सहयोग बढ़ाएंगे। इसके लिए संयुक्त सैन्य ट्रेनिंग, सुरक्षा से जुड़ी जानकारी साझा करने और सुरक्षा तालमेल बढ़ाने पर काम किया जाएगा। साथ ही तीनों देशों के बीच रणनीतिक सहयोग भी मजबूत किया जाएगा। पाकिस्तान-सऊदी-तुर्किये की सैन्य ताकत साथ आई इस समझौते में तीनों देशों की अलग-अलग सैन्य ताकत साथ जुड़ती है। अमेरिका पर भरोसा कम होने से बढ़ी जरूरत नए सैन्य गठजोड़ की जरूरत ऐसे समय में और बढ़ी है, जब अमेरिका की सुरक्षा नीति को लेकर दूसरे देशों में सवाल उठ रहे हैं। अल जजीरा के मुताबिक, सऊदी अरब और कुछ हद तक तुर्किये लंबे समय से अमेरिका को अपना अहम सुरक्षा सहयोगी मानते रहे हैं। लेकिन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व में अमेरिका की विदेश नीति को लेकर बढ़ती अनिश्चितता के बीच कई देश दूसरे विकल्प तलाश रहे हैं। ट्रम्प प्रशासन ने साफ कहा है कि उसके सहयोगियों को अपनी सुरक्षा के लिए खुद ज्यादा जिम्मेदारी उठानी होगी। मिडिल ईस्ट में यह चिंता भी है कि अमेरिका की विदेश नीति में इजराइल को सबसे ज्यादा प्राथमिकता मिलती है। ऐसे में सऊदी अरब और दूसरे देशों के लिए अपनी सुरक्षा के नए रास्ते तलाशना जरूरी माना जा रहा है। अलग-अलग मोर्चों पर जूझ रहे तीनों देश यह समझौता ऐसे समय हुआ है, जब मिडिल ईस्ट में इजराइल और ईरान के बीच तनाव लगातार बढ़ा है। पाकिस्तान फरवरी से अफगानिस्तान के साथ बॉर्डर संघर्ष में उलझा है। मई 2025 में पाकिस्तान और भारत के बीच भी कई दिनों तक फायरिंग हुई थी। वहीं, सऊदी अरब पर ईरान और उसके समर्थक गुटों की ओर से हमले होते रहे हैं। तुर्किये भी लंबे समय से अपने देश के अंदर और बाहर कुर्द हथियारबंद गुटों से लड़ता रहा है। इजराइल के साथ उसका तनाव भी बढ़ा है। ऐसे में तीनों देशों ने अपनी अलग-अलग सैन्य ताकत को एक साथ लाकर किसी भी खतरे के खिलाफ एक-दूसरे को मजबूत करने की कोशिश की है। समझौते में सैन्य मदद कितनी जरूरी होगी? अल जजीरा के मुताबिक, मक्का जॉइंट डिफेंस पैक्ट का मकसद तीनों देशों के सामने आने वाले किसी भी खतरे को रोकना है। लेकिन समझौते की असली ताकत इस बात पर निर्भर करेगी कि इसके सदस्य एक-दूसरे की मदद करने के लिए कितनी दूर तक जाने को तैयार हैं। किलोवेन ग्रुप एडवाइजरी फर्म के चेयरमैन हार्लन उलमैन ने अल जजीरा से कहा कि माना जा रहा है कि मक्का घोषणा में यह बात हो सकती है कि एक देश पर हमला सभी पर हमला माना जाएगा। लेकिन इसमें ‘होना चाहिए’ और ‘जरूरी तौर पर होगा’ के बीच बड़ा फर्क है। उनके मुताबिक, अभी यह साफ नहीं है कि यह समझौता किसी सदस्य को दूसरे के युद्ध में उतरने के लिए मजबूर करेगा या नहीं। क्या ये समझौता ‘मुस्लिम नाटो’ की ओर बड़ा कदम पाकिस्तान, सऊदी अरब और तुर्किये ने इस समझौते के साथ ‘मुस्लिम नाटो’ की दिशा में बढ़ा कदम उठाया है। यह समझौता NATO की तरह मुस्लिम देशों के बीच साथ मिलकर सुरक्षा बढ़ाने की कोशिश है। इसके तहत तीनों देश जरूरत पड़ने पर एक-दूसरे की सैन्य मदद करेंगे, मिलकर आधुनिक हथियार खरीदेंगे, रक्षा तकनीक साझा करेंगे और खतरा आने पर एक-दूसरे के साथ खड़े होंगे। हालांकि, सबसे बड़ा सवाल यह है कि क्या मक्का जॉइंट डिफेंस पैक्ट में आगे दूसरे देश भी शामिल होंगे। मिस्र, कतर, सीरिया और UAE जैसे देशों के नाम संभावित सदस्य के तौर पर सामने आ रहे हैं। अल जजीरा के मुताबिक, मिडिल ईस्ट के सुन्नी बहुल देश लंबे समय से अलग-अलग रहे हैं। जानकारों का मानना है कि इसी बंटवारे के कारण वे इजराइल और ईरान से जुड़े खतरों का मिलकर सामना नहीं कर पाए। लेकिन पुराने मतभेद और अलग-अलग हित इस गठजोड़ के विस्तार में बड़ी रुकावट बन सकते हैं। इसलिए यह अभी तय नहीं है कि बाकी देश इसमें शामिल होंगे।
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UPI : 95% ट्रांजेक्शन रहेंगे पूरी तरह फ्री, आम आदमी को घबराने की जरूरत नहीं
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UPI Transactions : संसद में कराधान और अन्य कानून (संशोधन) विधेयक पास हुआ है. नए बिल में डिजिटल पेमेंट पर मिलने वाली चार्ज-फ्री छूट की समीक्षा करने की बात कही गई है. बिल पास होने के बाद से ही ये अटकलें लगाई जा रहीं हैं कि यूपीआई पेमेंट पर भी शुल्क लग सकता है. हालांकि सरकार और एनपीसीआई साफ कर चुके हैं कि आम आदमी को कोई शुल्क नहीं देना होगा.
यूपीआई पेमेंट पर शुल्क लगाने की अटकलें चल रही हैं.
नई दिल्ली. संसद में हाल ही में पारित हुए नए टैक्स संशोधन बिल के बाद आप भी इस बात को लेकर चिंतित हैं कि चाय की टपरी से लेकर किराना दुकान तक हर यूपीआई ट्रांसफर पर जेब ढीली करनी पड़ेगी, तो आपके लिए राहत भरी बड़ी खबर है. देश में होने वाले 95 फीसदी से अधिक यूपीआई ट्रांजेक्शन पूरी तरह ‘फ्री’ रहेंगे. पेमेंट इंडस्ट्री के सूत्रों के मुताबिक, भारत में UPI के जरिए होने वाले दैनिक भुगतानों का एक बड़ा हिस्सा छोटी राशि का होता है. वित्त वर्ष 2025-26 में पर्सन टू मर्चेंट (P2M) के बीच हुए कुल UPI पेमेंट्स में से केवल 4% लेनदेन ही ₹2,000 से अधिक के थे. इसलिए किराना दुकान, सब्जी विक्रेता से लेकर छोटे व्यापारियों को किए जाने वाले छोटे भुगतानों पर किसी भी तरह का मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR लगने की कोई संभावना नहीं है.
इंडियन एक्सप्रेस की एक रिपोर्ट के अनुसार, पेमेंट इंडस्ट्री से जुड़े एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि किराना दुकानों पर होने वाले लेनदेन की औसत राशि ₹100 से ₹200 के बीच होती है. इन सभी छोटे भुगतानों को पूरी तरह से शुल्क-मुक्त रखा जाएगा. एमडीआर वह शुल्क है जो बैंक और पेमेंट कंपनियां भुगतान की प्रोसेसिंग और डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर को बनाए रखने के लिए लेती हैं. संभावित MDR केवल शॉपिंग मॉल, बड़ी ई-कॉमर्स वेबसाइटों और उन बड़े कॉर्पोरेट्स पर लग सकता है जिनका सालाना टर्नओवर काफी अधिक (जैसे ₹50 करोड़ से ऊपर) है.
वित्त मंत्री भी कर चुकी इंकार
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण भी यह साफ कर चुकी हैं कि नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) की स्टीयरिंग कमेटी ने अभी एमडीआर पर कोई अंतिम फैसला नहीं किया है. अगर यह लागू भी होता है, तो यह केवल बड़े मर्चेंट्स पर होगा, एंड-यूजर्स या ग्राहकों पर बिल्कुल नहीं. पेमेंट्स काउंसिल ऑफ इंडिय ने स्पष्ट किया है कि एमडीआर केवल बड़े व्यापारियों और पेमेंट कंपनियों के बीच का समझौता होता है. आम ग्राहकों से यूपीआई इस्तेमाल करने के बदले कोई चार्ज कभी नहीं लिया जाएगा.
क्यों है एमडीआर की जरूरत?
वित्त वर्ष 2025-26 में 24,000 करोड़ से अधिक यूपीआई लेनदेन हुए, जिनकी कुल वैल्यू करीब ₹314 लाख करोड़ रही. इस विशाल नेटवर्क को चौबीसों घंटे बिना किसी रुकावट के चलाने, साइबर सुरक्षा मजबूत करने, फ्रॉड रोकने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर UPI का विस्तार करने के लिए पेमेंट इंडस्ट्री को हर साल ₹15,000 करोड़ खर्च करने पड़ रहे हैं.
राजस्थान के सरकारी हॉस्पिटल्स में ICU की चौंकाने वाली हकीकत: डॉक्टर-नर्स की कमी, वेंटिलेटर-मशीनें गायब, कई जगह आग बुझाने तक के इंतजाम नहीं – Rajasthan News
जिस इंटेंसिव केयर यूनिट (ICU) में मरीज जिंदगी बचने की आखिरी उम्मीद लेकर पहुंचते हैं, वहीं उनकी जिंदगी दांव पर है। राजस्थान के अधिकतर सरकारी हॉस्पिटल्स के इन आईसीयू में ट्रेंड डॉक्टर औन नर्स तक की कमी है। कहीं जरूरी मशीनें गायब हैं तो कई हॉस्पिटल्स के ICU में आग बुझाने तक के इंतजाम नहीं। सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर प्रदेश के 55 जिला अस्पतालों में हुए गैप एनालिसिस में ये हकीकत सामने आई है। ज्यादतर ICU ऐसे ही मिले हैं, जहां तय मानक पूरे नहीं हो रहे। भास्कर टीम ने राजधानी जयपुर के कांवटिया हॉस्पिटल में जाकर जमीनी पड़ताल की। वहां भी ICU में बेड की संख्या तय मानकों से भी कम मिली। गंभीर मरीजों के शरीर की अहम जानकारी देने वाली मशीनें तक नहीं थीं। सबसे पहले देखिए- जयपुर के हॉस्पिटल के ICU की हकीकत 8 बेड की जगह 5, ABG मशीन भी नहीं जयपुर का कांवटिया हॉस्पिटल SMS मेडिकल कॉलेज से अटैच है। हॉस्पिटल में ICU दूसरी मंजिल पर बना है। हमने मौके पर जाकर देखा तो 5 बेड मिले, जबकि सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार लेवल-1 मानकों के तहत यहां 6 से 8 बेड होने चाहिए थे। यहां दो मरीज भर्ती मिले। अस्पताल के डॉक्टरों ने खुद स्वीकार किया कि यहां ट्रेंड डॉक्टर और नर्सिंग स्टाफ की कमी है। SMS मेडिकल कॉलेज से तीन रेजिडेंट डॉक्टर रोटेशन से ड्यूटी करने आते हैं। एनेस्थीसिया विभाग के रेजिडेंट और कंसल्टेंट भी आते हैं, लेकिन उनकी ड्यूटी ऑपरेशन थिएटर में ज्यादा रहती है। ऐसे में ICU में उनकी उपलब्धता बहुत सीमित रहती है। ICU में भर्ती गंभीर मरीजों के फेफड़ों में ऑक्सीजन का दबाव, पीएच लेवल जैसी कई महत्वपूर्ण जानकरियां देने वाली ABG मशीन भी उपलब्ध नहीं थी। जांच में सामने आया कि अकेले जयपुर के कांवटिया अस्पताल में नहीं बांसवाड़ा, करौली, हिंडौन और धौलपुर के अस्पतालों के ICU में भी यही हालात हैं। 1. बांसवाड़ा: ICU में फायर NOC नहीं, जरूरी उपकरण भी कम गैप एनालिसिस रिपोर्ट के अनुसार बांसवाड़ा जिला हॉस्पिटल के ICU की जांच में फायर NOC नहीं मिली। स्वास्थ्य विभाग की चेकलिस्ट के मुताबिक पोर्टेबल मल्टी-पैरामीटर मॉनिटर के साथ ट्रांसपोर्ट वेंटिलेटर भी उपलब्ध नहीं है। इसके अलावा पोर्टेबल मल्टी-पैरामीटर मॉनिटर, ट्रांसपोर्ट वेंटिलेटर और बॉडी वार्मिंग डिवाइस जैसे बेहद जरूरी उपकरण भी वहां उपलब्ध नहीं हैं। 2. करौली और हिंडौन सिटी : फायर NOC और इमरजेंसी एग्जिट तक नहीं हिडौन सिटी हॉस्पिटल् के ICU के लिए भी फायर NOC नहीं है। इससे भी हैरान करने वाली बात ये है कि ICU में इमरजेंसी एग्जिट तक नहीं है। लेवल-1 के अनुसार मरीजों की संख्या के अनुपात में नर्सिंग स्टाफ की कमी भी सामने आई। करौली जिला हॉस्पिटल की फायर NOC के रिन्यूअल प्रोसेस में है। 3. धौलपुर: NOC के लिए आवेदन किया, अभी मिली नहीं धौलपुर जिला हॉस्पिटल् में भी ICU के लिए फायर NOC उपलब्ध नहीं है। अस्पताल की ओर से NOC के लिए आवेदन किया जा चुका है। राजस्थान में कितने अस्पतालों का गैप एनालिसिस हुआ? राजस्थान में 55 जिला अस्पताल हैं। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों का कहना है कि इनमें से 16 अस्पतालों में जरूरी इंफ्रास्ट्रक्चर विकसित किया जा रहा है। इसके अलावा 6 मेडिकल कॉलेजों के साथ राजमेस के मेडिकल कॉलेज भी संचालित हैं। स्वास्थ्य विभाग के कार्यवाहक निदेशक डॉ. नरोत्तम शर्मा के अनुसार सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर सभी अस्पतालों का ICU गैप एनालिसिस कराया गया है। अब जानते हैं लेवल-1 ICU में क्या-क्या होना जरूरी है? भारत सरकार ने आईसीयू के लिए तीन लेवल निर्धारित किए हैं। सुप्रीम कोर्ट ने दो महिने पहले ICU को लेकर तैयार किए गए मानकों को स्वीकार करते हुए सभी राज्यों को लेवल-1 आईसीयू मानक लागू करने को कहा था। साथ ही तय समय सीमा में कमियां दूर करने की योजना पेश करने को कहा था। राजस्थान में भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुसार स्वास्थ्य विभाग ने गैप एनालिसिस कराया है। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद भारत सरकार ने ICU के लिए ये एक समान मानक तय किए हैं… इंफ्रास्ट्रक्चर: ICU में सामान्यतः 6 से 8 बेड, पर्याप्त स्पेस, इमरजेंसी और ऑपरेशन थिएटर (OT) के नजदीक लोकेशन, बिजली बैकअप, फायर सेफ्टी और इमरजेंसी एग्जिट जरूरी हैं। मेडिकल उपकरण और मशीनें : हर बेड पर ऑक्सीजन और सक्शन की सुविधा, मल्टी-पैरामीटर मॉनिटर, सिरिंज व इन्फ्यूजन पंप, वेंटिलेटर, डिफिब्रिलेटर, पोर्टेबल सक्शन, 12-चैनल ECG, ग्लूकोमीटर और अन्य जरूरी उपकरण होने चाहिए। ABG, एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड और जरूरी लैब सुविधाएं भी उपलब्ध होनी चाहिए। डॉक्टर और मेडिकल स्टाफ : ICU की देखरेख के लिए क्रिटिकल केयर का अनुभव या ट्रेनिंग प्राप्त योग्य डॉक्टर होना चाहिए। 24 घंटे MBBS या उससे अधिक योग्यता वाला डॉक्टर ड्यूटी पर उपलब्ध रहना चाहिए। नर्सिंग स्टाफ: सामान्य मरीजों की निगरानी के लिए 2 से 3 मरीज पर एक नर्सिंग स्टाफ और गंभीर या वेंटिलेटर पर भर्ती मरीज के लिए एक मरीज पर एक नर्स का प्रावधान है। रिकॉर्ड मेंटेनेंस : मेडिकल रिकॉर्ड- जैसे डॉक्टर के नोट्स, नर्सिंग रिकॉर्ड, जांच रिपोर्ट और इलाज की फाइलें सुरक्षित रखी जानी चाहिए। …. ये खबर भी पढ़िए… जयपुर का SMS हॉस्पिटल… जांच के लिए काटते रहिए चक्कर:पूर्व चिकित्सा मंत्री बिना टेस्ट कराए लौटे थे, मरीज बोले- न साइन बोर्ड, न सही जानकारी जयपुर के सवाई मान सिंह (SMS) हॉस्पिटल में MRI कराने गए पूर्व चिकित्सा मंत्री डॉ. रघु शर्मा नाराज हो गए थे। 26 मार्च को हुई इस घटना के बाद भास्कर टीम SMS अस्पताल पहुंची थी। पूर्व मंत्री ने जो दावे किए उसकी हकीकत जानी थी। पूरी खबर पढ़िए…
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मेरठ में आज शिवभक्तों पर पुष्पवर्षा करेंगे मुख्यमंत्री: सुरक्षा के कड़े इंतजाम, अलर्ट मोड पर पुलिस और प्रशासन – Meerut News
मेरठ में पिछले लगभग 1 हफ्ते से जारी कांवड़ यात्रा में आज शनिवार को उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ पहुंचकर शिवभक्त कांवड़ियों पर पुष्पवर्षा करेंगे। मुख्यमंत्री के कार्यक्रम को लेकर प्रशासन और पुलिस पूरी तरह अलर्ट है। सुरक्षा व्यवस्था के लिए बड़ी संख्या में पुलिस, पीएसी और अन्य सुरक्षा बलों की तैनाती की गई है। अधिकारियों ने कार्यक्रम स्थल और प्रमुख मार्गों का निरीक्षण कर सभी तैयारियों को अंतिम रूप दिया है। मुख्यमंत्री के आगमन को देखते हुए कांवड़ मार्ग और आसपास के क्षेत्रों में सुरक्षा के व्यापक इंतजाम किए गए हैं। चप्पे-चप्पे पर पुलिसकर्मी तैनात हैं, जबकि ड्रोन कैमरों और सीसीटीवी के माध्यम से भी निगरानी की जा रही है। यातायात व्यवस्था को सुचारु बनाए रखने के लिए कई स्थानों पर डायवर्जन लागू किया गया है और अधिकारियों को लगातार निगरानी के निर्देश दिए गए हैं। बारिश की संभावना को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम स्थल के मंच को जर्मन हैंगर से कवर किया गया है, ताकि मौसम का आयोजन पर असर न पड़े। शनिवार को सुबह से ही दिल्ली-देहरादून हाईवे समेत प्रमुख कांवड़ मार्गों पर शिवभक्तों की भारी भीड़ उमड़ रही है। ‘बोल बम’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से पूरा वातावरण भक्तिमय बना हुआ है। विभिन्न राज्यों से आए लाखों कांवड़िये अपने गंतव्य की ओर बढ़ रहे हैं। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए जगह-जगह चिकित्सा शिविर, पेयजल, विश्राम और सुरक्षा की विशेष व्यवस्था की गई है। प्रशासन का कहना है कि मुख्यमंत्री का कार्यक्रम शांतिपूर्ण और व्यवस्थित ढंग से संपन्न कराने के लिए सभी विभाग समन्वय के साथ कार्य कर रहे हैं। अधिकारियों ने श्रद्धालुओं से प्रशासन द्वारा जारी यातायात और सुरक्षा संबंधी निर्देशों का पालन करने की अपील की है।यदि चाहें, मैं इसे दैनिक भास्कर डिजिटल ऐप स्टाइल में अधिक आकर्षक इंट्रो और फैक्ट बॉक्स के साथ भी तैयार कर सकता हूँ।
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शिव पालकी यात्रा का पहला निमंत्रण चिंतामन गणेश मंदिर में – Sehore News
सीहोर| सनातन परंपरा के अनुसार शुभ कार्य की शुरुआत प्रथम पूज्य भगवान गणेश के पूजन से होती है। इसी परंपरा के तहत श्री सिद्धेश्वर महादेव समिति ने 17 अगस्त, तृतीय सावन सोमवार को निकलने वाली शिव पालकी यात्रा का पहला निमंत्रण शुक्रवार को प्राचीन चिंतामन गणेश मंदिर में भगवान गणेश के चरणों में अर्पित किया। शिव पालकी यात्रा के मीडिया प्रभारी आशीष गुप्ता ने बताया कि भगवान गणेश को पहला निमंत्रण देने के साथ सावन माह का भक्ति वातावरण और भक्तिमय हुआ है। समिति संस्थापक किशोर कौशल और अध्यक्ष विपुल चांडक ने कहा कि भगवान गणेश को पहला निमंत्रण देना धार्मिक परंपरा है। श्री सिद्धेश्वर महादेव समिति के अनुसार शिव पालकी यात्रा 17 अगस्त को दोपहर 2 बजे स्थानीय कोतवाली चौराहे से शुरू होगी। इस मौके पर अध्यक्ष विपुल चांडक, शंकर प्रजापति, सुनील दुबे, प्रदीप चौहान, बृजमोहन सोनी, मनोज जैन, प्रदीप कौशल, अनिल शर्मा, सतनारायण माहेश्वरी, बृजेश पाराशर, प्रवीण तिवारी, आरसी जैन, प्रदीप चावड़ा, राजेश शर्मा सहित समिति के पदाधिकारी और सदस्य मौजूद रहे।
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भावना बनीं पहली महिला ‘टॉप गन’: 20 सप्ताह का लीडर कोर्स पूरा कर हासिल की उपलब्धि, एक प्रतिशत पायलट एफसीएल के लिए चुने जाते हैं – Darbhanga News
मिथिला की बेटी और भारतीय वायुसेना की स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ ने एक और इतिहास रचा है। उन्होंने भारतीय वायुसेना का सबसे प्रतिष्ठित और चुनौतीपूर्ण फाइटर कॉम्बेट लीडर (एफसीएल) कोर्स पूरा कर लिया है। इसके साथ ही वह भारतीय वायुसेना की पहली महिला ‘टॉप गन’ बन गई हैं। इस उपलब्धि से उनके परिवार और मिथिला में खुशी का माहौल है। दरभंगा के घनश्यामपुर प्रखंड के बाउर गांव में उत्सव जैसा माहौल है। भावना के पिता तेज नारायण ने बताया कि एफसीएल कोर्स मध्य प्रदेश के ग्वालियर स्थित टैक्टिक्स एंड एयर कॉम्बेट डेवलपमेंट स्टेब्लिशमेंट में संचालित होता है। इसे भारतीय वायुसेना का सबसे प्रतिष्ठित ‘टॉप गन’ प्रशिक्षण संस्थान माना जाता है। करीब 20 सप्ताह तक चलने वाला यह प्रशिक्षण बेहद कठिन होता है। इसके लिए भारतीय वायुसेना के केवल लगभग एक प्रतिशत फाइटर पायलटों का चयन होता है। प्रशिक्षण में अत्याधुनिक हवाई युद्ध कौशल सिखाया जाता है। पायलटों को सामरिक नेतृत्व और आधुनिक लड़ाकू अभियानों की योजना का प्रशिक्षण भी दिया जाता है। जटिल युद्ध परिस्थितियों से निपटने की तैयारी भी कराई जाती है। एफसीएल कोर्स पूरा करने के बाद स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ की जिम्मेदारियां और बढ़ेंगी। वह भविष्य में लड़ाकू अभियानों का नेतृत्व करेंगी पहले भी रच चुकी हैं कई इतिहास भावना कंठ इससे पहले भी कई उपलब्धियां हासिल कर चुकी हैं। 2016 में वह अवनी चतुर्वेदी और मोहना सिंह के साथ भारतीय वायुसेना की पहली तीन महिला फाइटर पायलटों में शामिल हुई थीं। नवंबर 2017 में उन्होंने फाइटर स्क्वाड्रन जॉइन किया। मार्च 2018 में उन्होंने मिग-21 बाइसन लड़ाकू विमान की पहली एकल उड़ान भरी। उन्होंने एक और इतिहास रचा। 2021 में वह फ्लाइट लेफ्टिनेंट थीं। तब गणतंत्र दिवस परेड में भारतीय वायुसेना की टुकड़ी का हिस्सा बनने वाली पहली महिला फाइटर पायलट बनीं। पिता बोले- बचपन से अनुशासित थी भावना बेटी की सफलता पर पिता तेज नारायण कंठ ने गर्व जताया। उन्होंने कहा कि उन्होंने कभी भावना को केवल एक लड़की के रूप में नहीं देखा। वह बचपन से ही मेधावी और अनुशासित थी। वह अपने लक्ष्य के प्रति भी समर्पित रही। भावना की प्रारंभिक शिक्षा बेगूसराय के बरौनी में हुई। बचपन से ही उसका सपना आसमान की ऊंचाइयों को छूना था। उसने मेहनत, लगन और आत्मविश्वास के दम पर भारतीय वायुसेना में अपनी अलग पहचान बनाई।
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