Tuesday, August 18, 2026
Home Blog

मुजफ्फरपुर: गरीबनाथ धाम में विशेष पूजा-अर्चना: साढ़े सात क्विंटल गेहूं से बाबा का महाश्रृंगार किया गया, आरती में हजारों शिवभक्त हुए शामिल – Muzaffarpur News




मुजफ्फरपुर के प्रसिद्ध बाबा गरीबनाथ धाम में नाग पंचमी और सावन की तीसरी सोमवारी के अवसर पर भगवान शिव का विशेष महाश्रृंगार किया गया। इस दौरान बाबा गरीबनाथ को साढ़े सात क्विंटल (750 किलोग्राम) गेहूं से सजाया गया, जो भक्तों के बीच आकर्षण का केंद्र रहा। इस अलौकिक रूप के दर्शन के लिए मंदिर परिसर में शिवभक्तों की भारी भीड़ उमड़ पड़ी। सावन की सोमवारी पर होने वाला यह विशेष महाश्रृंगार वर्षों पुरानी परंपरा का हिस्सा है। महाआरती में उमड़े श्रद्धालु, गूंजा मंदिर परिसर महाश्रृंगार के बाद मंदिर में भव्य महाआरती हुई। आरती के दौरान हजारों श्रद्धालु मंदिर परिसर में मौजूद रहे। जैसे ही बाबा का अलौकिक स्वरूप श्रद्धालुओं के सामने आया, पूरा परिसर ‘हर-हर महादेव’ के जयघोष से गूंज उठा। श्रद्धालु भगवान शिव के दिव्य स्वरूप के दर्शन कर भाव-विभोर हो गए और देर रात तक पूजा-अर्चना का सिलसिला चलता रहा। गेहूं से बाबा का महाश्रृंगार किया गया बाबा गरीबनाथ धाम के प्रधान पुजारी पंडित विनय पाठक ने बताया कि इस वर्ष सावन की तीसरी सोमवारी और नाग पंचमी का एक साथ पड़ना दुर्लभ संयोग है। इस विशेष महासंयोग को और खास बनाने के लिए बाबा का गेहूं से महाश्रृंगार किया गया। सावन के महीने में तिथियों और शुभ मुहूर्तों के अनुसार विशेष संयोग बनते हैं। इन मुहूर्तों की धार्मिक महत्ता को देखते हुए हर वर्ष अलग-अलग पवित्र सामग्रियों से बाबा का श्रृंगार किया जाता है। इसी परंपरा के तहत इस बार गेहूं का उपयोग किया गया, जिसे समृद्धि और प्रकृति का प्रतीक माना जाता है। बाबा के अनूठे रूप का दर्शन इस अलौकिक दृश्य के दर्शन के लिए मुजफ्फरपुर के अलावा आसपास के कई जिलों और पड़ोसी राज्यों से भी हजारों श्रद्धालु पहुंचे। भक्तों ने कतारबद्ध होकर बाबा के इस अनूठे रूप का दर्शन किया और जलाभिषेक कर सुख-समृद्धि की कामना की। मंदिर प्रशासन और स्थानीय पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने तथा सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए व्यापक इंतजाम किए थे।



Source link

ग्वालियर में आज कई इलाकों में बिजली बंद: निर्माण और मेंटेनेंस के कारण चार घंटे तक प्रभावित रहेगी आपूर्ति – Gwalior News




मध्य क्षेत्र विद्युत वितरण कंपनी द्वारा ग्वालियर शहर में मंगलवार को अति-आवश्यक निर्माण एवं मेंटेनेंस कार्य किए जाएंगे। इसके चलते शहर के विभिन्न क्षेत्रों में बिजली आपूर्ति बाधित रहेगी। कंपनी के नगर संभागों द्वारा जारी सूचना के अनुसार, सुबह 9 बजे से दोपहर 2 बजे तक अलग-अलग समय पर कई कॉलोनियों और बाजार क्षेत्रों में बिजली बंद रहेगी। विभाग ने उपभोक्ताओं से सहयोग की अपील की है। लक्ष्मीगंज उपकेंद्र के हनुमान चौराहा फीडर पर मंगलवार को सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक बिजली कटौती होगी। इससे हनुमान चौराहा, त्रिवेदी नर्सिंग होम, जीवाजी गंज, नागदेव गली, एमपी रोड और सूबे की पायगा सहित आसपास के क्षेत्र प्रभावित रहेंगे। नगर संभाग पूर्व के अंतर्गत 11 केवी चंबल कॉलोनी फीडर पर सुबह 9 बजे से दोपहर 1 बजे तक बिजली बंद रहेगी। इससे चंबल कॉलोनी, गायत्री विहार, न्यू दर्पण कॉलोनी और कृष्णा विहार क्षेत्र में आपूर्ति प्रभावित होगी। इसी संभाग के 11 केवी शिव नगर फीडर पर सुबह 10 बजे से दोपहर 12 बजे तक सप्लाई बंद रहेगी। इससे शिव नगर, मेन रोड, कुम्हपुरा, जगजीवन नगर, 60 फुटा रोड और गन्ना कोठार क्षेत्र में बिजली आपूर्ति प्रभावित होगी। दक्षिण संभाग में 11 केवी लाला का बाजार फीडर पर सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक बिजली बंद रहेगी। इससे लाला का बाजार, बंजारा सराय का नाला, कुम्हारों का मोहल्ला, अशोक स्तंभ, संगाजी कटोरा और आंते कॉलोनी सहित आसपास के क्षेत्र प्रभावित होंगे। इसी तरह, दक्षिण संभाग के वर्कशॉप फीडर से डोलीबुआ का पुल, बाई साहब की परेड, पाटनकर का बाड़ा और लोहामंडी क्षेत्र में भी सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक बिजली आपूर्ति बंद रहेगी। नगर संभाग उत्तर के 11 केवी आनंद नगर-बी ब्लॉक फीडर पर सुबह 10 बजे से दोपहर 2 बजे तक शटडाउन रहेगा। इस दौरान आनंद नगर ए ब्लॉक, बी ब्लॉक और आनंद नगर चौराहा क्षेत्र में बिजली आपूर्ति प्रभावित रहेगी। आवश्यकता के अनुसार शटडाउन का समय घटाया या बढ़ाया भी जा सकता है।



Source link

ट्रंम्प ने भारत की चुनाव व्यवस्था की तारीफ की: कहा- 64.6 करोड़ वोटर्स के पास फोटो आईडी, अमेरिका में भी हो जरूरी




अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने भारत की चुनाव व्यवस्था का हवाला देते हुए ‘सेव अमेरिका एक्ट’ को पास कराने की अपील की है। उन्होंने कहा कि भारत के मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार ने अमेरिकी प्रशासन से पूछा था कि वैध फोटो पहचान पत्र के बिना अमेरिका में चुनाव कैसे कराए जा सकते हैं। ट्रंम्प ने कहा कि हर अमेरिकी मतदाता के लिए फोटो आईडी जरूरी होनी चाहिए, ताकि चुनावी धोखाधड़ी पर रोक लगाई जा सके। उन्होंने ये बातें ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहीं। पंजीकरण के लिए नागरिकता का प्रमाण दिखाना जरूरी सेव अमेरिका एक्ट के तहत अमेरिका में वोटर के तौर पर पंजीकरण कराने के लिए नागरिकता का प्रमाण दिखाना जरूरी होगा। इसके अलावा, पूरे देश में मतदाता पहचान पत्र की अनिवार्यता लागू करने का प्रस्ताव है। इस कानून में डाक से वोट देने की प्रक्रिया को काफी सीमित करने की बात भी कही गई है। ट्रंप लगातार सेफगार्ड अमेरिकन वोटर एलिजिबिलिटी (SAVE) यानी सेव अमेरिका एक्ट को पास कराने पर जोर दे रहे हैं और उनका दावा है कि इससे चुनावी धोखाधड़ी पर रोक लगेगी। सीनेट में आगे नहीं बढ़ी प्रक्रिया इस मुद्दे पर डेमोक्रेट और रिपब्लिकन, दोनों पार्टी में मतभेद हैं। इसी वजह से अमेरिकी सीनेट इस महीने की शुरुआत में कानून पास करने की दिशा में कोई ठोस कदम उठाए बिना पांच हफ्ते के अवकाश पर चली गई। ————- ये खबर पढ़ें… ट्रम्प बोले- लेविट को मुझसे ज्यादा अपने बच्चे पसंद:व्हाइट हाउस में उनकी जगह लेना मुश्किल; लेविट का प्रेस सेक्रेटरी के पद से इस्तीफा अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने अपनी प्रेस सेक्रेटरी कैरोलिन लेविट के पद छोड़ने पर मजाक किया। पूरी खबर पढ़ें…



Source link

भास्कर अपडेट्स: महुआ मोइत्रा ने सर्किट हाउस मामले में लोकसभा अध्यक्ष से कार्रवाई की मांग की, 3 अफसरों पर प्रोटोकॉल उल्लंघन का आरोप


  • Hindi News
  • National
  • Breaking News Headlines Today, Pictures, Videos And More From Dainik Bhaskar

2 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

टीएमसी सांसद महुआ मोइत्रा ने कृष्णानगर सर्किट हाउस से देर रात बाहर जाने के मामले में लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को विशेषाधिकार नोटिस दिया है।

उन्होंने नदिया के डीएम श्रीकांत पाली, एडीएम निरपेंद्र सिंह और नाजरेथ डिप्टी कलेक्टर अनामिका बेरा पर प्रोटोकॉल उल्लंघन और उन्हें संसदीय काम से रोकने की कोशिश का आरोप लगाया।

मोइत्रा के मुताबिक, 14 अगस्त की रात 9:47 बजे उन्हें सर्किट हाउस खाली करने को कहा गया, जबकि रखरखाव का आदेश 12 अगस्त को जारी हो चुका था और उनकी बुकिंग पहले से कन्फर्म थी।

उन्होंने तीनों अधिकारियों पर कार्रवाई के लिए मामला विशेषाधिकार समिति को भेजने और अपने निर्वाचन क्षेत्र के दौरे के दौरान सांसदों वाला प्रोटोकॉल सुनिश्चित करने की मांग की है।

आज की बाकी बड़ी खबरें…

पटियाला हाउस कोर्ट ने कारोबारी साहिल लूथरा से ₹10 करोड़ मांगने वाले को जमानत दी, आरोपी 13 जून से न्यायिक हिरासत में था

पटियाला हाउस कोर्ट ने डिफेंस कारोबारी साहिल लूथरा से ₹10 करोड़ की रंगदारी मांगने की साजिश के आरोपी गुरपिंदर सिंह को जमानत दे दी। कोर्ट ने ₹50 हजार के जमानत बॉन्ड और इतनी ही राशि के एक जमानतदार की शर्त पर उसे रिहा करने का आदेश दिया।

आरोपी 13 जून से न्यायिक हिरासत में था। कोर्ट ने कहा कि जांच पूरी हो चुकी है, चार्जशीट दाखिल हो गई है और आरोपी की हिरासत में पूछताछ की जरूरत नहीं है।

लूथरा ने आरोप लगाया था कि उन्हें अंतरराष्ट्रीय नंबरों से व्हाट्सऐप पर धमकी देकर ₹10 करोड़ मांगे गए थे। मामले में दिल्ली पुलिस की क्राइम ब्रांच ने गुरपिंदर सिंह समेत तीन लोगों को गिरफ्तार किया था।

गुजरात पुलिस ने 1,090 साइबर अपराधों से जुड़े आरोपी को गिरफ्तार किया; ₹1,071 करोड़ के अवैध लेनदेन का मामला

गुजरात सीआईडी क्राइम ने असम से 25 साल के रफीकुल आलम को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपी देशभर में 1,090 साइबर अपराधों और ₹1,071.5 करोड़ के अवैध लेनदेन से जुड़ा था। वह व्हाट्सऐप और टेलीग्राम के जरिए चीन के साइबर अपराधियों के संपर्क में था।

ठगी की रकम को 1,754 बैंक खातों में ट्रांसफर करने के बाद क्रिप्टोकरेंसी के जरिए चीन भेजता था। आरोपी के मोबाइल से 23 क्रिप्टो वॉलेट मिले, जिनमें करीब ₹16 करोड़ का लेनदेन हुआ था। जांच के दौरान सीसीई (साइबर सेंटर ऑफ एक्सीलेंस) ने डिजिटल अरेस्ट के 10 मामलों को भी समय रहते रोकने का दावा किया है।

खबरें और भी हैं…



Source link

वाराणसी कोर्ट से जानलेवा हमले में आरोपी BHU-छात्रनेता को जमानत: बिरला हॉस्टल में फायरिंग पर पुलिस ने बनाया इनामी, कोर्ट में किया था सरेंडर – Varanasi News




वाराणसी कोर्ट ने काशी हिन्दू विश्विद्यालय में स्थित बिरला ‘अ’ छात्रावास के गेट पर पुरानी रंजिश को लेकर साथी छात्र पर पिस्टल से जानलेवा हमला करने के मामले में रोहतास, बिहार निवासी आरोपित 25 हजार के इनामी बीएचयू छात्र नेता क्षितिज उपाध्याय को राहत दे दी है। अपर जिला जज (पंचम) यजुवेंद्र विक्रम सिंह की अदालत ने आरोपित छात्र नेता को 50-50 हजार रुपए की दो जमानतें एवं बंधपत्र देने पर रिहा करने का आदेश दिया। अदालत में बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अनुज यादव व चंद्रबली पटेल ने पक्ष रखा। प्रकरण के अनुसार बीएचयू में पढ़ रहे बीए तृतीय वर्ष के छात्र रोशन मिश्रा ने लंका थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई थी। आरोप था कि 21 फरवरी 2026 को समय लगभग 9 से 9.30 बजे रात को अपने साथी विशाल के साथ बिरला ‘अ’ छात्रावास के गेट पर खड़ा था। उसी दौरान मोटर साइकिल से तीन व्यक्ति क्रमशः पीयूष कुमार तिवारी निवासी सासाराम, ऋषभ और तपस आये और हमारे ऊपर जान से मारने की नियत से पिस्टल से चार गोलियां चलायी। एक गोली मेरे सर के बगल से गुजरी तथा दूसरी छाती के बगल से निकली। जान बचाने के लिए वादी छात्र छात्रावास के अन्दर भागने लगा, तब भी उनलोगों द्वारा दो गोलियां मेरे ऊपर पीछे से फायर किया गया। यह सारी घटना पूर्व निष्काषित छात्र क्षीतिज उपाध्याय व अभिषेक उपाध्याय के इशारे पर किया गया है। इस घटना के बाद से वह काफी डरा और सहमा हुआ है। उसे अंदेशा है कि इन लोगो के द्वारा कभी भी उसकी हत्या कर दिया जायेगा। इस मामले में पुलिस ने सभी आरोपितों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया था। इस मामले में आरोपित क्षितिज उपाध्याय काफी दिनों से फरार चल रहा था। जिसके बाद उसके खिलाफ गैर जमानती वारंट जारी करते हुए 25 हजार का ईनाम घोषित किया गया था। जिसके बाद आरोपित छात्र नेता ने पिछले दिनों पुलिस को चकमा देते हुए अपने अधिवक्ता अनुज यादव व चंद्रबली पटेल के जरिए कोर्ट में आत्म समर्पण कर जेल चला गया था।



Source link

IAS राजेश बने पटना के नए कमिश्नर: पंकज कुमार को गृह विभाग के प्रधान सचिव की जिम्मेवारी, 5 जिलों के DM भी बदले – Patna News




सम्राट सरकार ने सोमवार देर रात बड़े स्तर पर IAS अधिकारियों के तबादले किए हैं। सरकार ने कई विभागों के प्रधान सचिव, अपर मुख्य सचिव और सचिव स्तर के अधिकारियों की जिम्मेदारी बदली है। पंकज कुमार को गृह विभाग का प्रधान सचिव बनाया गया है, जबकि राजेश कुमार को पटना प्रमंडल का नया आयुक्त बनाया गया है। इसके अलावा वित्त, ग्रामीण विकास, शिक्षा, निगरानी, समाज कल्याण, लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण और मद्य निषेध विभाग में भी अधिकारियों की जिम्मेदारी बदली गई है। पंकज कुमार को गृह विभाग की जिम्मेदारी 1997 बैच के IAS अधिकारी पंकज कुमार, जो अब तक ग्रामीण विकास विभाग के प्रधान सचिव थे, उन्हें स्थानांतरित कर गृह विभाग का प्रधान सचिव बनाया गया है। वे जांच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग के अतिरिक्त प्रभार में पहले की तरह बने रहेंगे। पंकज कुमार के गृह विभाग में आने के बाद कुंदन कुमार गृह विभाग के सचिव के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त हो जाएंगे। कुंदन कुमार उद्योग विभाग के सचिव के साथ कई अन्य जिम्मेदारियां संभाल रहे हैं। राजेश कुमार बने पटना के नए कमिश्नर 2001 बैच के IAS अधिकारी राजेश कुमार को लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग के प्रधान सचिव पद से स्थानांतरित कर पटना प्रमंडल का नया आयुक्त बनाया गया है। वहीं, पटना के मौजूदा आयुक्त मयंक वरवड़े को स्थानांतरित कर निगरानी विभाग का प्रधान सचिव बनाया गया है। एचआर श्रीनिवास बने ग्रामीण विकास विभाग के ACS 1996 बैच के IAS अधिकारी एचआर श्रीनिवास को समाज कल्याण विभाग के अपर मुख्य सचिव पद से स्थानांतरित कर ग्रामीण विकास विभाग का अपर मुख्य सचिव बनाया गया है। श्रीनिवास जांच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग के अतिरिक्त प्रभार में भी बने रहेंगे। अरविंद कुमार चौधरी को बिपार्ड का अतिरिक्त प्रभार 1995 बैच के IAS अधिकारी अरविंद कुमार चौधरी मंत्रिमंडल सचिवालय विभाग के अपर मुख्य सचिव हैं। वे अगले आदेश तक बिपार्ड (BIPARD) के महानिदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी संभालेंगे। वे बिहार राज्य संयुक्त प्रवेश परीक्षा पर्षद के परीक्षा नियंत्रक के अतिरिक्त प्रभार में भी बने रहेंगे। विनय कुमार बने वित्त विभाग के प्रधान सचिव 1999 बैच के IAS अधिकारी विनय कुमार को नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव पद से स्थानांतरित कर वित्त विभाग का प्रधान सचिव बनाया गया है। हालांकि, वे अगले आदेश तक नगर विकास एवं आवास विभाग के प्रधान सचिव का अतिरिक्त प्रभार भी संभालते रहेंगे। संजय कुमार सिंह को मद्य निषेध विभाग की जिम्मेदारी 2007 बैच के IAS अधिकारी संजय कुमार सिंह को वित्त विभाग के सचिव (सम्पूर्ण प्रभार) पद से स्थानांतरित कर मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग का सचिव बनाया गया है। वे वाणिज्य कर विभाग के सचिव, वाणिज्य कर आयुक्त/अपर आयुक्त GST और मुख्यमंत्री सचिवालय के सचिव का अतिरिक्त प्रभार पहले की तरह संभालते रहेंगे। इस बदलाव के बाद नवीन कुमार मद्य निषेध, उत्पाद एवं निबंधन विभाग के प्रभारी सचिव के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त हो जाएंगे। शिक्षा विभाग में भी बड़ा बदलाव 2010 बैच के IAS अधिकारी राजीव रौशन को उच्च शिक्षा विभाग के सचिव पद से स्थानांतरित कर शिक्षा विभाग का सचिव बनाया गया है। वे उच्च शिक्षा विभाग के सचिव का अतिरिक्त प्रभार भी संभालते रहेंगे। इसके साथ ही वित्त विभाग के सचिव (संसाधन) का अतिरिक्त प्रभार भी उनके पास बना रहेगा। वहीं, विनोद सिंह गुंजियाल, जो निर्वाचन विभाग के सचिव-सह-मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी हैं, उन्हें समाज कल्याण विभाग के सचिव का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। वे शिक्षा विभाग के सचिव के अतिरिक्त प्रभार से मुक्त हो जाएंगे। लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग में भी बदलाव 2008 बैच के IAS अधिकारी बी. कार्तिकेय धनजी को लघु जल संसाधन विभाग के सचिव पद से स्थानांतरित कर लोक स्वास्थ्य अभियंत्रण विभाग का सचिव बनाया गया है। वे जांच आयुक्त, सामान्य प्रशासन विभाग के अतिरिक्त प्रभार में पहले की तरह बने रहेंगे। चंद्रशेखर सिंह जल संसाधन विभाग के सचिव बने रहेंगे और उन्हें लघु जल संसाधन विभाग के सचिव का अतिरिक्त प्रभार दिया गया है। बिहार शिक्षा परियोजना परिषद की जिम्मेदारी नवदीप शुक्ला को 2013 बैच के IAS अधिकारी नवदीप शुक्ला, जो युवा, रोजगार एवं कौशल विकास विभाग के विशेष सचिव हैं, अगले आदेश तक बिहार शिक्षा परियोजना परिषद के परियोजना निदेशक का अतिरिक्त प्रभार भी संभालेंगे। वे बिहार कौशल विकास मिशन के अपर कार्यपालक पदाधिकारी का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे हैं।



Source link

हाईकोर्ट में ग्वालियर नगर निगम की पोल खुली: जिस सड़क की सैंपलिंग होनी थी, निगम ने रातों-रात खोदी और बना दी नई परत – Gwalior News




ग्वालियर की बदहाल सड़कों को लेकर दायर जनहित याचिका पर सोमवार को सुनवाई हुई। इस दौरान हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच ने नगर निगम की कार्यप्रणाली पर कड़ा रुख अपनाया है। दरअसल, जिस सड़क से जांच कमीशन को सैंपलिंग करना था, नगर निगम ने जांच से ठीक पहले उसकी ऊपरी परत खुदवाकर नई सड़क बनाना शुरू कर दिया। मामले की भनक लगते ही हाईकोर्ट ने नगर निगम आयुक्त संघ प्रिय को चैंबर में तलब किया। निगमायुक्त द्वारा कोर्ट में दिखाए गए वीडियो व साक्ष्यों को देखने के बाद जस्टिस जीएस अहलूवालिया व जस्टिस अनुराधा शुक्ला की बेंच ने सख्त निर्देश दिए हैं। कहा है कि कमिश्नर अपने मोबाइल से कोई भी वीडियो, फोटो या व्हाट्सएप चैट डिलीट नहीं करेंगे, ऐसा करने पर फोन जब्त कर लिया जाएगा। एक फीट गहराई के नीचे से लिए जाएंगे सैंपल याचिकाकर्ता के वकील अवधेश सिंह तोमर ने कोर्ट में फोटो-वीडियो पेश कर खुलासा किया कि 19 अगस्त को सड़क नंबर 7 (बेटी बचाओ चौराहा से गुड़ा गुड़ी का नाका) की सैंपलिंग तय थी, लेकिन निगम ने उसकी ऊपरी परत उखाड़कर निर्माण शुरू कर दिया। क्या सरकारी काम व्हाट्सऐप पर करने की अनुमति है? निगमायुक्त ने कोर्ट को बताया कि सोशल मीडिया पर वीडियो देखने के बाद उन्होंने कार्यपालन यंत्री को व्हाट्सएप पर गड्ढे भरने के निर्देश दिए थे। इस पर कोर्ट ने पूछा कि क्या सरकारी काम व्हाट्सएप के जरिए कराने की अनुमति है? और जब सालभर से सड़क खराब थी, तो सैंपलिंग तय होते ही बिना कोर्ट की अनुमति के मरम्मत क्यों शुरू कराई गई? सैंपलिंग का नया तरीका निगमायुक्त द्वारा यह स्वीकार करने पर कि 1 फीट गहराई तक सड़क खोद दी गई है, हाईकोर्ट ने निर्देश दिया कि सैंपलिंग करते समय ऊपर की 1 फीट परत को छोड़कर उसके नीचे से ही सैंपल लिया जाएगा। साथ ही, निगम के रवैये को देखते हुए सैंपलिंग 20 की जगह 19 अगस्त को ही कराने के आदेश दिए गए। ‘जनता त्रस्त अधिकारी मस्त’ नाम से निगमायुक्त के फोन में पहले से था वीडियो सुनवाई के दौरान यह चौंकाने वाली बात भी सामने आई कि निगमायुक्त सड़क की बदहाली से पहले से वाकिफ थे। उनके मोबाइल में एक वीडियो मिला, जिसका टाइटल था “जनता त्रस्त अधिकारी मस्त, बीते एक साल से बेटी बचाओ चौराहे के पास की सड़क की स्थिति बदहाल, आम जन परेशान, जिम्मेदारों ने आंखों पर बांध रखी पट्टी।” यह वीडियो खुद निगमायुक्त ने निगम के वकील को भेजा था। कोर्ट ने दर्ज किया कि जब कमिश्नर के पास यह वीडियो पहले से था और वे स्थिति से अवगत थे, तो सैंपलिंग तय होते ही अचानक सड़क को खोदकर नया बनाने का खेल क्यों रचा गया। डीपीआर छिपाई तो अफसरों पर होगी अवमानना की कार्रवाई गुणवत्ता की निष्पक्ष जांच सुनिश्चित करने के लिए कोर्ट ने कड़े दिशा-निर्देश जारी किए हैं। हर स्थान से कुल 84 सैंपल लिए जाएंगे। प्रत्येक स्थान के चार सैंपल ग्वालियर एसएसपी कार्यालय की मोहर वाले मोम से सील होंगे। एक सैंपल पीडब्ल्यूडी टेस्टिंग लैब और दूसरा ग्रामीण यांत्रिकी सेवा लैब भेजा जाएगा। तीसरा सैंपल जिला न्यायालय के मालखाने में सुरक्षित रहेगा (ताकि क्रॉस चेक किया जा सके) और चौथा नगर निगम के पास रहेगा। नगर निगम, पीडब्ल्यूडी और एनएचएआई को संबंधित सड़क की मूल डीपीआर और मेजरमेंट बुक देनी होगी। रिकॉर्ड छिपाने या बाढ़/आग का बहाना बनाने पर संबंधित अधिकारियों के खिलाफ व्यक्तिगत अवमानना की कार्रवाई होगी।



Source link

Video: अजब स्वाद, गजब एक्शन! पुरानी दिल्ली का ‘धुरंधर ऑमलेट’, उछाल-उछाल कर बनाते हैं सिकंदर भाई

0


X

अजब स्वाद, गजब एक्शन! पुरानी दिल्ली का ‘धुरंधर ऑमलेट’, उछाल-उछाल कर बनता

 

arw img

Dhurandhar Omelette Recipe: स्ट्रीट फूड के दीवानों के लिए मशहूर पुरानी दिल्ली के चावड़ी बाजार से एक नया और अनूठा स्वाद सामने आया है. अपने अनोखे प्रयोगों के लिए चर्चित ‘सिकंदर ऑमलेट’ के मालिक सिकंदर भाई ने फिल्म ‘धुरंधर 2’ की सफलता और देशभक्ति के जोश से प्रेरित होकर एक नया ‘धुरंधर ऑमलेट’ पेश किया है. इस खास ऑमलेट को बनाने का अंदाज भी बिल्कुल फिल्मी और एक्शन से भरपूर है. सिकंदर भाई मटर के बेस पर 3 अंडों का ऑमलेट तैयार करते हैं, जिसके ऊपर 2 उबले अंडों (बॉयल्ड एग) को गार्निश किया जाता है. फिर अपने खास सीक्रेट मसालों और हरे धनिये से सजाकर, वे इसे उछाल-उछालकर तेज आंच पर सेकते हैं. प्लेट में परोसने के बाद वे इस पर बड़े ही चाव से ‘धुरंधर ऑमलेट’ लिखते हैं. लगभग 65 साल पुरानी इस दुकान को संभालने वाले सिकंदर भाई 200 से अधिक वैरायटी के ऑमलेट बनाने का दावा करते हैं. इस नए एक्शन वाले धुरंधर ऑमलेट की कीमत मात्र 80 रुपये रखी गई है. अगर आप भी इसका स्वाद चखना चाहते हैं, तो मंगलवार को छोड़कर किसी भी दिन शाम 4 बजे से रात 11 बजे के बीच चावड़ी बाजार स्थित इनकी दुकान पर पहुंच सकते हैं. 

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।



Source link

ईरान-अमेरिका के बीच 60 दिन की डेडलाइन खत्म: फिर ट्रम्प ने हमले का आदेश क्यों नहीं दिया; दुश्मन को 3 तरफ से घेरने की स्ट्रैटजी


वॉशिंगटन डीसी2 घंटे पहले

  • कॉपी लिंक

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प 14 अगस्त को न्यूयॉर्क के गार्डन सिटी में भाषण देते हुए।

अमेरिका और ईरान के बीच जून में हुआ 60 दिन का समझौता सोमवार को खत्म हो गया। इसका मकसद दोनों देशों के बीच युद्ध रोकना और ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर विवाद का समाधान निकालना था। डेडलाइन खत्म होने के बावजूद न तो कोई फाइनल समझौता हुआ, न ही अमेरिका ने ईरान पर बड़ा हमला शुरू किया।

60 दिनों के दौरान ट्रम्प ने कई बार कहा कि अगर बातचीत नाकाम रही तो अमेरिका सैन्य कार्रवाई के लिए पूरी तरह तैयार है। माना जा रहा था कि डेडलाइन खत्म होते ही अमेरिका फिर बड़ा हमला कर सकता है।

समयसीमा खत्म होने से ठीक पहले ट्रम्प का रुख बदलता दिखा। एक्सियोस को दिए इंटरव्यू में ट्रम्प ने कहा, “हम पहले के मुकाबले हल्का रुख अपना रहे हैं।” वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक अमेरिका, ईरान को तीन तरीके से घेर रहा है।

1. आर्थिक दबाव- ईरान की कमाई और अर्थव्यवस्था को कमजोर करना।

2. नौसैनिक नाकाबंदी- ईरान के लिए समुद्र के रास्ते व्यापार मुश्किल करना।

3. बातचीत- सीधे या दूसरे देशों के जरिए ईरान से समझौते की कोशिश करना।

ट्रम्प के इस बयान का मतलब अभी अमेरिका सीधे बड़ा हमला करने की बजाय ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बना रहा है, समुद्र के रास्ते उसका व्यापार रोक रहा है और बातचीत से समझौते की कोशिश भी कर रहा है।

ट्रम्प हमला रोककर क्या हासिल करना चाहते हैं?

ट्रम्प की मौजूदा रणनीति को समझने के लिए सबसे अहम बात यह है कि अमेरिका युद्ध को खत्म नहीं मान रहा है।

ट्रम्प को लगता है कि फिलहाल ईरान पर आर्थिक दबाव बढ़ाना सैन्य हमले से ज्यादा असरदार हो सकता है।

अमेरिकी नौसैनिक नाकाबंदी ने ईरान की आर्थिक मुश्किलों को और बढ़ा दिया है। ट्रम्प का मानना है कि अगर ईरान युद्ध में नहीं उलझा रहेगा तो उसे अपनी असली आर्थिक स्थिति का सामना करना पड़ेगा। जैसे कि बर्बाद बुनियादी ढांचा, कमजोर अर्थव्यवस्था, महंगाई और पैसों की कमी।

यानी अमेरिका का दांव यह है कि युद्ध रोककर ईरान को कमजोर होने दिया जाए। अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने शनिवार को कहा कि अमेरिका कूटनीतिक, आर्थिक और सैन्य तीनों तरीकों का इस्तेमाल कर रहा है।

अमेरिकी अधिकारियों का मानना है कि युद्ध जारी रहने पर ईरानी सरकार अपनी आर्थिक परेशानियों के लिए जंग को जिम्मेदार ठहरा सकती है। जब युद्ध नहीं होगा, तब जनता और सरकार को आर्थिक संकट का सामना सीधे करना पड़ेगा।

ईरान में गरीबी दर इस साल 40% से ज्यादा होने का अनुमान है।

ईरान में गरीबी दर इस साल 40% से ज्यादा होने का अनुमान है।

ट्रम्प को ईरान के खिलाफ रणनीति क्यों बदलनी पड़ी?

ट्रम्प ने फरवरी में इजराइल के साथ मिलकर ईरान के खिलाफ युद्ध शुरू किया था। शुरुआत में उम्मीद थी कि संघर्ष ज्यादा लंबा नहीं चलेगा, लेकिन यह कई महीनों तक खिंच गया।

अब अमेरिका के सामने दो तरह का दबाव है। एक तरफ वह ईरान के खिलाफ अपने सैन्य लक्ष्य हासिल करना चाहता है, दूसरी तरफ लंबे युद्ध की बढ़ती लागत भी उसके लिए चिंता बन रही है।

ट्रम्प लगातार कहते रहे हैं कि ईरान की कमजोर अर्थव्यवस्था अमेरिका की सबसे बड़ी ताकत है। एक इंटरव्यू में ट्रम्प ने कहा था कि अमेरिका के सामने दो रास्ते हैं- या तो ईरान को आर्थिक रूप से टूटने दिया जाए या फिर उस पर बहुत बड़ा सैन्य हमला किया जाए। फिलहाल ट्रम्प पहला रास्ता आजमाते दिख रहे हैं।

हालांकि इसका मतलब यह नहीं कि अमेरिका ने टकराव खत्म कर दिया है। रॉयटर्स के मुताबिक, ट्रम्प सरकार चीन की उन रिफाइनरियों पर नए प्रतिबंध लगाने पर विचार कर रहा है जो ईरानी तेल खरीदती हैं।

इसके अलावा ईरान के साथ लेन-देन करने वाले चीनी बैंकों और उन संस्थाओं पर भी कार्रवाई की तैयारी है, जिन पर प्रतिबंधों से बचने में ईरान की मदद करने का आरोप है। यानी हमला भले ही रुका हुआ है, लेकिन दबाव कम नहीं हुआ है।

होर्मुज स्ट्रेट बना सबसे बड़ा सौदेबाजी का मुद्दा

अमेरिका और ईरान के बीच मौजूदा टकराव में होर्मुज स्ट्रेट सबसे बड़ा दांव बन गया है।

दुनिया के बड़े हिस्से का तेल इसी समुद्री रास्ते से गुजरता है। इसलिए होर्मुज स्ट्रेट को लेकर किसी भी तरह की रुकावट का असर सिर्फ अमेरिका और ईरान पर नहीं, बल्कि पूरी दुनिया के तेल बाजार और समुद्री व्यापार पर पड़ सकता है।

ईरान इस मुद्दे पर ओमान के साथ बातचीत कर रहा है। 9 अगस्त को ईरानी अधिकारियों ने कहा था कि ओमान के साथ समझौता अंतिम चरण में पहुंच गया है।

लेकिन तेहरान ने यह भी साफ कर दिया कि ओमान के साथ समझौता होने का मतलब यह नहीं है कि होर्मुज स्ट्रेट तुरंत अंतरराष्ट्रीय जहाजों के लिए खोल दिया जाएगा।

ईरान चाहता है कि अमेरिका पहले नौसैनिक नाकाबंदी खत्म करे, प्रतिबंध हटाए और युद्ध में हुए नुकसान का मुआवजा दे।

यानी अमेरिका चाहता है कि समुद्री रास्ते और जहाजों की आवाजाही सामान्य हो, जबकि ईरान इसे अमेरिकी रियायतों से जोड़कर देख रहा है।

इसी वजह से होर्मुज स्ट्रेट अब सिर्फ एक समुद्री रास्ता नहीं रह गया है। यह दोनों देशों के बीच सबसे बड़ा सौदेबाजी का हथियार बन चुका है।

युद्ध की बड़ी कीमत चुका रहा अमेरिका

सूत्रों के मुताबिक, ईरान के साथ पांच महीने चले युद्ध में अमेरिका ने लंबी दूरी तक मार करने वाली बड़ी संख्या में मिसाइलें इस्तेमाल की हैं। इनमें ATACMS और प्रिसीजन स्ट्राइक मिसाइल शामिल हैं।

दो सूत्रों ने दावा किया कि अमेरिका ने इन हथियारों का लगभग पूरा भंडार इस्तेमाल कर लिया है, हालांकि उन्होंने सटीक संख्या नहीं बताई।

अमेरिका युद्ध के दौरान कम से कम 45 एमक्यू-9 रीपर ड्रोन भी गंवा चुका है। यह उसके कुल बेड़े का करीब 25% है।

अमेरिकी वायुसेना के मुताबिक, एक रीपर ड्रोन की कीमत उसके उपकरणों के आधार पर 3 से 5 करोड़ डॉलर तक हो सकती है। वॉशिंगटन पोस्ट के मुताबिक, इन नुकसानों की कुल कीमत 1.3 अरब डॉलर से ज्यादा हो सकती है।

इन ड्रोन का इस्तेमाल खास तौर पर होर्मुज स्ट्रेट के आसपास निगरानी और हमलों के लिए किया गया था। कम ऊंचाई और धीमी गति के कारण ये ईरानी बलों और ईरान समर्थित समूहों के निशाने पर रहे।

युद्ध शुरू होने से पहले अमेरिका के पास करीब 185 रीपर ड्रोन थे। इनमें 165 वायुसेना और 20 मरीन कॉर्प्स के पास थे। मई में अमेरिकी वायुसेना के वरिष्ठ अधिकारी लेफ्टिनेंट जनरल डेविड टैबर ने सीनेट को बताया था कि वायुसेना के पास करीब 135 रीपर ड्रोन बचे हैं।

पेंटागन पहले से ही रीपर ड्रोन को धीरे-धीरे हटाकर उनकी जगह कम कीमत वाले नए हथियारबंद ड्रोन लाने की योजना पर काम कर रहा है।

लंबी दूरी की मिसाइलों की कीमत भी 10 लाख डॉलर से ज्यादा होती है। इनका बड़े पैमाने पर इस्तेमाल यूक्रेन युद्ध में भी किया गया है।

अगर अमेरिका के पास इन हथियारों का भंडार कम होता है तो भविष्य में ईरान पर बड़े हमले या रूस और चीन जैसे दूसरे प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ उसकी सैन्य क्षमता प्रभावित हो सकती है।

हालांकि एक अन्य अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि अमेरिका दुनिया भर में मौजूद अपने सैन्य भंडार से इन हथियारों की फिर से आपूर्ति कर सकता है।

ईरान की मांगें क्या हैं?

अमेरिका आर्थिक दबाव बढ़ाकर ईरान को समझौते के लिए तैयार करना चाहता है। लेकिन ईरान भी अपने पास मौजूद विकल्पों का इस्तेमाल कर रहा है। होर्मुज स्ट्रेट इसका सबसे बड़ा उदाहरण है। ईरान ने अमेरिका के सामने होर्मुज खोलने के लिए 6 मांगें रखी हैं।

यानी अमेरिका आर्थिक प्रतिबंधों को दबाव के हथियार की तरह इस्तेमाल कर रहा है, जबकि ईरान दुनिया के सबसे अहम समुद्री तेल मार्ग पर अपनी पकड़ को दबाव के तौर पर इस्तेमाल कर रहा है।

यही वजह है कि दोनों पक्षों के बीच बातचीत की गुंजाइश होते हुए भी समझौते की राह आसान नहीं है। ——————————– ईरान से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें…

ट्रम्प ने ओमान पर बमबारी की धमकी दी:कहा- ईरान मुद्दे पर बीच में न आए; IRGC का अमेरिका से बातचीत का दावा खारिज

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने ईरान को लेकर ओमान को बमबारी की धमकी दी है। फॉक्स न्यूज के मुताबिक, ट्रम्प ने कहा कि अगर ओमान अमेरिका और ईरान के बीच चल रही बातचीत में बाधा बना, तो अमेरिका उस पर ‘बमबारी करेगा’। पूरी खबर यहां पढ़ें…

खबरें और भी हैं…



Source link

जलेबी और इमरती को एक समझते हैं?, जानिए दोनों मिठाइयों में क्या है बड़ा अंतर

0


होमफोटोलाइफ़फूड

जलेबी और इमरती को एक समझते हैं?, जानिए दोनों मिठाइयों में क्या है बड़ा अंतर

Last Updated:

Jalebi And Imarti Difference: जलेबी और इमरती देखने में भले ही एक जैसी लगती हों, लेकिन दोनों मिठाइयों के स्वाद, बनावट और बनाने के तरीके में बड़ा अंतर है. जलेबी जहां मैदा से तैयार होकर पतली, कुरकुरी और हल्की खट्टी-मीठी होती है, वहीं इमरती उड़द की दाल से बनती है और मोटी, फूल जैसी बनावट के साथ ज्यादा रसीली होती है. चाशनी में डूबने के बाद दोनों का स्वाद और भी खास हो जाता है. यही वजह है कि कई लोग दोनों को एक समझने की गलती करते हैं, जबकि सामग्री से लेकर आकार और स्वाद तक दोनों की अपनी अलग पहचान है.

जलेबी और इमरती, लगभग एक जैसी दिखती हैं. अक्सर लोग खासकर बच्चे दोनों में अंतर नहीं कर पाते. जबकि वास्तव में इनके स्वाद, बनावट और बनाने के तरीके में बहुत फर्क होता है. ये दो बेहद अलग-अलग मिठाइयां हैं. त्योहारों और दुकानों पर साथ मिलने के कारण लोग इन्हें एक ही समझ लेते हैं, लेकिन इनके बीच कई साफ अंतर हैं. ये अंतर सामग्री से लेकर, बनाने के तरीके और अंत में स्वाद में साफ दिखता है पर रेसिपी के कई चरण एक जैसे भी हैं. जानते हैं दोनों का अंतर.

जलेबी पतली और एक समान लच्छों में बनाई जाती है, जिसे गोल सर्पिल आकार में घुमाया जाता है. तलने के बाद यह बाहर से कुरकुरी और अंदर से रसीली होती है. वहीं, इमरती मोटी और फूल जैसी दिखती है, जिसके बीच में एक बड़ा छेद और चारों तरफ 8-10 छोटी गोलाकार डिजाइन होती हैं. इमरती जलेबी की तुलना में अधिक फूली हुई और मोटी होती है. जलेबी अंदर से मुलायम होती है पर इमरती अंदर-बाहर दोनों से थोड़ी सख्त होती है.

जलेबी मैदा से बनती है. मैदा को दही या खमीर के साथ 6-8 घंटे तक खमीर उठाकर घोल तैयार किया जाता है. इसके उल्टे, इमरती उड़द की दाल से बनती है. उड़द दाल को पीसकर उसका गाढ़ा और चिकना घोल बनाया जाता है. इसमें बेकिंग सोडा नहीं डाला जाता, बल्कि फेंटकर हवा भरी जाती है, जिससे यह फूलती है.

Add News18 as
Preferred Source on Google

जलेबी खाने में बहुत हल्की सी खट्टी और मीठी, साथ ही कुरकुरी होती है, क्योंकि यह मैदा और खमीर से बनती है. इमरती का स्वाद ज्यादा मीठा और अंदर से रसभरा होता है. उड़द दाल की वजह से इसका स्वाद जलेबी से बिल्कुल अलग लगता है. इन्हें पसंद करने वालों की कैटेगरी भी अलग है. कोई जलेबी का फैन होता है कोई इमरती का. जलेबी जहां खासतौर पर सुबह के समय हलवाइयों की दुकान पर बनती है और गर्म ही पसंद की जाती है. वहीं इमरती शाम को भी तैयार होती है और कई बार गर्म न भी हो तो भी लोग खरीदकर ले जाते हैं और चाव से खाते हैं.

दोनों को गर्म चाशनी में डुबोया जाता है, लेकिन इमरती चाशनी को ज्यादा देर तक सोखती है, इसलिए अधिक रसीली लगती है. जलेबी नाश्ते और दही के साथ खाई जाती है, जबकि इमरती को ज्यादातर पूजा-पाठ और त्योहारों पर खास मिठाई के रूप में बनाया जाता है. संक्षेप में, जलेबी मैदा की पतली-कुरकुरी मिठाई है और इमरती उड़द दाल की मोटी-नरम मिठाई है.

न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।



Source link