मध्य प्रदेश सरकार वाराणसी की तर्ज पर उज्जैन में शिप्रा तट पर नमो घाट बनाने जा रही है। यहां 182 फीट ऊंची भगवान कृष्ण की कांस्य प्रतिमा लगाई जाएगी। इसके बाद यहीं हर शाम शिप्रा आरती की जाएगी। उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) इसकी तैयारी शुरू कर दी है। प्राधिकरण का दावा है कि अगले दो साल में घाट और भगवान की प्रतिमा तैयार हो जाएगी। उज्जैन विकास प्राधिकरण (यूडीए) के अनुसार, प्रतिमा का निर्माण हरिफाटक बायपास स्थित यूनिटी मॉल के पीछे क्षिप्रा नदी के किनारे प्रस्तावित है। इसके साथ घाटों का विकास भी किया जाएगा, ताकि क्षेत्र को धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटन गतिविधियों के केंद्र के रूप में विकसित किया जा सके। ब्रॉन्ज की प्रतिमा, स्ट्रक्चर स्टेनलेस स्टील का भगवान कृष्ण के विराट स्वरूप की 182 फीट ऊंची प्रतिमा मेटल से तैयार होगी। इसमें ब्रॉन्ज यानी कांस्य का इस्तेमाल किया जाएगा, जबकि अंदरूनी स्ट्रक्चर स्टेनलेस स्टील का होगा। प्रतिमा को मजबूती और सुरक्षा के लिहाज से तैयार किया जाएगा। इसके स्ट्रक्चरल डिजाइन के लिए ऐसे इंजीनियर की मदद ली गई है, जो सरदार वल्लभभाई पटेल की विशाल प्रतिमा के डिजाइन से जुड़े रहे हैं। नमो घाट पर हर शाम होगी शिप्रा आरती प्रतिमा के साथ विकसित होने वाले नमो घाट पर नियमित रूप से शिप्रा आरती और पूजन की व्यवस्था की जाएगी। इससे श्रद्धालुओं को एक ही परिसर में भगवान कृष्ण के विराट स्वरूप के दर्शन और शिप्रा आरती का अनुभव मिल सकेगा। यूडीए अध्यक्ष डॉ. रवि सोलंकी के मुताबिक मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की मंशा के अनुरूप यह परियोजना तैयार की जा रही है। करीब दो साल में पूरे प्रोजेक्ट को पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है। यूनिटी मॉल और घाटों के साथ विकसित होगा क्षेत्र हरिफाटक बायपास के पीछे जिस क्षेत्र में प्रतिमा और नमो घाट प्रस्तावित हैं, वहां करीब 260 करोड़ रुपए की लागत से यूनिटी मॉल का निर्माण भी कराया जा रहा है। मॉल में देश-विदेश के उत्पादों के लिए स्थान, कैफेटेरिया, होटल और कॉन्फ्रेंस हॉल जैसी सुविधाएं प्रस्तावित हैं। घाट, प्रतिमा और मॉल को एक साथ विकसित कर इस पूरे क्षेत्र को उज्जैन के नए धार्मिक-पर्यटन केंद्र के रूप में तैयार करने की योजना है। सिंहस्थ 2028 को देखते हुए शहर में नए आकर्षण और पर्यटन सुविधाएं विकसित करने पर भी जोर दिया जा रहा है। उज्जैन का नया विजुअल लैंडमार्क बनेगी प्रतिमा 182 फीट ऊंची प्रतिमा शहर के प्रमुख आकर्षणों में शामिल होगी। महाकालेश्वर मंदिर और महाकाल लोक के बाद क्षिप्रा तट का यह क्षेत्र श्रद्धालुओं और पर्यटकों के लिए नया केंद्र बन सकता है। प्रदेश में ओंकारेश्वर की 108 फीट ऊंची आदि शंकराचार्य प्रतिमा, छिंदवाड़ा के रामेश्वरधाम की 81 फीट ऊंची शिव प्रतिमा और जबलपुर की कचनार सिटी में 76 फीट ऊंची शिव प्रतिमा प्रमुख हैं। ऐसे में उज्जैन की प्रस्तावित 182 फीट प्रतिमा प्रदेश की विशाल प्रतिमाओं में अलग पहचान बनाएगी। शिव के साथ विष्णु परंपरा को भी विस्तार यूडीए अध्यक्ष डॉ. रवि सोलंकी के अनुसार महाकाल की नगरी में भगवान शिव के साथ भगवान विष्णु की धार्मिक परंपरा को भी विस्तार देने की दिशा में यह परियोजना महत्वपूर्ण है। प्रतिमा, नमो घाट, आरती स्थल और यूनिटी मॉल के एक साथ विकसित होने से हरिफाटक बायपास के पीछे का क्षेत्र आने वाले समय में उज्जैन के प्रमुख पर्यटन केंद्रों में शामिल हो सकता है।
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उज्जैन में शिप्रा तट पर विकसित होगा नमो घाट: 182 फीट ऊंची भगवान कृष्ण की कांस्य प्रतिमा लगेगी, दो साल में काम पूरा करेगा यूडीए – Ujjain News
Recipe: न ज्यादा सामग्री, न झंझट… ऐसे बनाएं बाहर से कुरकुरी, अंदर से नरम गुगौरी
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Satna News: बारिश के मौसम में चाय के साथ कुछ देसी और मीठा खाने का मन हो तो बघेलखंडी गुड़ की गुगौरी जरूर बनाएं. गेहूं के आटे, गुड़, सौंफ और इलायची से तैयार यह पारंपरिक पकवान बाहर से कुरकुरा और अंदर से नरम होता है जिसका स्वाद आपको गांव-घर की याद दिलाएगा.
Baghelkhandi Gugauri: बारिश के मौसम में अगर शाम की चाय के साथ कुछ देसी और मीठा खाने का मन हो तो बघेलखंड की पारंपरिक गुड़ की गुगौरी एक बेहतरीन ऑप्शन है. बाहर से कुरकुरी और अंदर से नरम व मीठी यह गुगौरी गांव-घर के पारंपरिक स्वाद की याद दिलाती है. खास बात यह है कि इसे बनाने के लिए बहुत ज्यादा सामग्री की जरूरत नहीं पड़ती और घर में आसानी से तैयार किया जा सकता है.
गुड़ से शुरू होती है इसकी खास मिठास
लोकल 18 को जानकारी देते हुए स्थानीय निवासी अंजलि चतुर्वेदी ने बताया कि गुगौरी बनाने के लिए सबसे पहले जरूरत के अनुसार गुड़ लें और उसमें थोड़ा सा गुनगुना पानी डालकर अच्छी तरह घोल लें. गुड़ पूरी तरह घुल जाने के बाद इसे साफ छलनी से छानना जरूरी है ताकि उसमें मौजूद किसी भी तरह की गंदगी या अशुद्धियां अलग हो जाएं. यही छना हुआ गुड़ का पानी आगे आटा तैयार करने में इस्तेमाल किया जाता है.
आटे में डालें सौंफ और इलायची
अब एक बड़े बर्तन में गेहूं का आटा लें. इसमें स्वाद और खुशबू बढ़ाने के लिए दरदरी कुटी हुई सौंफ और कुटी इलायची डालें. चाहें तो एक चुटकी बेकिंग सोडा या खाने वाला सोडा भी मिलाया जा सकता है. हालांकि पारंपरिक तरीके में आटे को अच्छी तरह फेंटकर भी गुगौरी को फुलाया जाता है. इसके बाद गुड़ के पानी को धीरे-धीरे आटे में डालते हुए लगातार मिलाएं जिससे गुठलियां न पड़ें.
घोल की सही कंसिस्टेंसी रखना जरूरी
ध्यान रखें कि गुगौरी का घोल न बहुत पतला होना चाहिए और न ही बहुत सख्त. इसे पकौड़े के घोल जैसा गाढ़ा और चिकना रखना बेहतर रहता है. घोल तैयार होने के बाद बर्तन को करीब 15 से 20 मिनट के लिए ढककर रख दें. इससे आटा अच्छी तरह सेट हो जाता है और तलने के बाद गुगौरी अंदर से नरम व स्पंजी बनती है.
अब बारी है गरम तेल में तलने की
घोल तैयार होने के बाद लोहे या भारी तले की कड़ाही में शुद्ध सरसों का तेल या घी गर्म करें. तेल अच्छी तरह गर्म हो जाए तो हाथों को थोड़ा गीला करके घोल की छोटी-छोटी लोइयां या पकौड़ी जैसे हिस्से सावधानी से कड़ाही में डालते जाएं. गुगौरी डालने के बाद आंच को मध्यम से धीमा कर दें. धीमी आंच पर तलने से यह बाहर से जल्दी नहीं जलती और अंदर तक अच्छी तरह पक जाती है.
सुनहरा रंग आते ही समझिए गुगौरी तैयार
गुगौरी को बीच-बीच में पलटते रहें ताकि वह चारों तरफ से बराबर सिके. जब इसका रंग गहरा सुनहरा या हल्का भूरा हो जाए और बाहर से अच्छी तरह कुरकुरा दिखाई देने लगे तब इसे करछी की मदद से तेल से निकाल लें. तैयार गुगौरी को साफ बर्तन में रख दें ताकि अतिरिक्त तेल निकल जाए.
चाय के साथ बढ़ जाता है देसी स्वाद
गरमागरम गुड़ की गुगौरी का स्वाद वैसे तो अपने आप में खास है लेकिन बारिश के मौसम में शाम की चाय के साथ इसका मजा और बढ़ जाता है. गुड़ की मिठास, सौंफ और इलायची की खुशबू और बाहर की कुरकुरी परत इसे खास बनाती है. बघेलखंड की यह पारंपरिक डिश आज भी अपने देसी स्वाद के कारण लोगों को खूब पसंद आती है और सगे-संबंधियों के बीच इसे बड़े चाव से परोसा जाता है.
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आरा में शान से लहराया तिरंगा: प्रभारी मंत्री अरुण कुमार प्रसाद ने किया ध्वजारोहण, भरत तिवारी के माता-पिता ने तिरंगे को दी सलामी – Bhojpur News
देश आज 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है। आजादी के इस राष्ट्रीय पर्व पर भोजपुर में भी जगह-जगह शान से तिरंगा फहराया गया। आरा के ऐतिहासिक रमना मैदान में आयोजित मुख्य समारोह में प्रभारी मंत्री अरुण कुमार प्रसाद ने राष्ट्रीय ध्वज फहराया। इस दौरान जिलाधिकारी तनय सुल्तानिया, पुलिस अधीक्षक राज समेत जिले के विधायक, जनप्रतिनिधि, नेता और प्रशासनिक-पुलिस अधिकारी मौजूद रहे। ध्वजारोहण के बाद प्रभारी मंत्री ने परेड का निरीक्षण किया और मंच से देश की आजादी के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के बलिदान को याद किया। स्वतंत्रता दिवस की कुछ तस्वीरें देखिए… भरत तिवारी के परिजन ने फहराया तिरंगा वहीं, स्वतंत्रता दिवस के मौके पर शाहपुर प्रखंड के बिलौटी गांव में एक अलग तस्वीर देखने को मिली। पुलिस एनकाउंटर में मारे गए भरत तिवारी के घर पर भी तिरंगा फहराया गया। ध्वजारोहण के दौरान घर और आसपास का माहौल देशभक्ति से सराबोर रहा। देशभक्ति गीतों के बीच परिवार और ग्रामीणों ने ‘शहीद भरत तिवारी अमर रहे’ के नारे लगाए। परिवार के लोगों ने तिरंगे को सलामी देकर देश के प्रति अपनी श्रद्धा व्यक्त की। उनकी मां आशा देवी, पिता काशीनाथ तिवारी, भाई चंदन तिवारी, बसंत तिवारी, भाभी सुमन देवी समेत परिवार के अन्य सदस्यों ने ध्वजारोहण कार्यक्रम में हिस्सा लिया। भरत तिवारी के भतीजा-भतीजी ने भी तिरंगे को सलामी दी। परिजनों ने कहा कि देश की आजादी और तिरंगे की आन-बान-शान के लिए बलिदान देने वाले वीरों को हमेशा याद किया जाएगा। स्वतंत्रता दिवस के मौके पर भरत तिवारी के घर आयोजित कार्यक्रम ने एक ओर जहां देशभक्ति का संदेश दिया, वहीं परिवार और समर्थकों के बीच भरत की मौत को लेकर भावनात्मक माहौल भी देखने को मिला।
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BSNL के 1 रुपये वाले प्लान की वापसी, स्वतंत्रता दिवस पर मिल रहा खास ऑफर
BSNL ने स्वतंत्रता दिवस के मौके पर अपने 1 रुपये वाले प्लान की वापसी कर ली है। इस प्लान में यूजर्स को अनलिमिटेड कॉलिंग, डेटा समेत कई बेनिफिट्स मिलेंगे। पिछले साल भी भारत संचार निगम लिमिटेड ने ऐसे ही 1 रुपये वाले प्लान को लॉन्च किया था, जिसमें 28 दिनों की वैलिडिटी मिल रही थी। इसमें यूजर्स को नया सिम लेने पर कई कॉलिंग, डेटा जैसे बेनिफिट्स मिल रहे थे।
1 रुपये वाला नया प्लान
BSNL ने अपने आधिकारिक X हैंडल से 1 रुपये वाले नए प्लान की घोषणा की है। इस फ्रीडम ऑफर में कंपनी BSNL का नया सिम खरीदने वालों को 24 दिनों की वैलिडिटी ऑफर कर रही है। इसमें मिलने वाले बेनिफिट्स की बात करें तो यूजर्स को डेली 1GB डेटा और 100 फ्री SMS का लाभ मिलता है। यह ऑफर 12 सितंबर 2026 तक वैलिड है।
पिछले साल कंपनी ने जो 1 रुपये वाला प्लान पेश किया था उसनें यूजर्स को डेली 2GB हाई स्पीड डेटा का लाभ मिल रहा था। साथ ही, प्लान की वैलिडिटी 28 दिनों की थी। इसमें यूजर्स को पूरे भारत में अनलिमिटेड कॉलिंग, फ्री नेशनल रोमिंग और डेली 100 फ्री SMS का लाभ मिल रहा था।
पिछले साल लॉन्च हुए फ्रीडम प्लान के बंद होने के बाद कंपनी ने 51 रुपये वाला प्लान पेश किया था, जिसमें BSNL का नया सिम खरीदने पर 28 दिनों की वैलिडिटी ऑफर की जा रही थी। इस प्लान में यूजर्स को डेली 2GB डेटा और अनलिमिटेड कॉलिंग जैसे बेनिफिट्स भी दिए जा रहे थे।
BSNL का फ्रीडम ऑफर
सरकारी टेलीकॉम कंपनी ने इसके अलावा अपने करोड़ों यूजर्स के लिए एक और फ्रीडम ऑफर की घोषणा की है, जिसमें यूजर्स को 2399 रुपये वाले एनुअल रिचार्ज प्लान में 47 दिनों की एक्स्ट्रा वैलिडिटी ऑफर की जा रही है। भारत संचार निगम लिमिटेड का यह प्लान 365 दिनों की वैलिडिटी के साथ आता है। इसमें अब यूजर्स को कुल 412 दिनों की वैलिडिटी मिलेगी। इसके अलावा प्लान में मिलने वाले सभी बेनिफिट्स का लाभ भी 412 दिनों तक मिलेगा। यह प्लान डेली 2GB हाई स्पीड डेटा और 100 फ्री SMS के साथ आता है। इसके अलावा पूरे भारत में अनलिमिटेड कॉलिंग और फ्री नेशनल रोमिंग का लाभ मिलता है।
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इंडोनेशिया में 7.7 तीव्रता का भूकंप, 20 की मौत: कई इमारतें गिरीं, लोगों को सुरक्षित जगह जाने का आदेश
जकार्ता21 मिनट पहले
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इंडोनेशिया के टेर्नेट शहर में शनिवार को आए भूकंप के बाद एक इमारत क्षतिग्रस्त हो गई।
इंडोनेशिया में शनिवार सुबह 7.7 तीव्रता का शक्तिशाली भूकंप आया। भूकंप के तेज झटकों से कई इलाकों में अफरा-तफरी मच गई। अब तक 20 लोगों के मौत की पुष्टि हुई है और कई लोग घायल भी बताए जा रहे हैं।
पहले भूकंप के बाद इलाके में कई आफ्टरशॉक भी दर्ज किए गए। इनमें 5.9, 5.6 और 6.1 तीव्रता के झटके शामिल थे। शुरुआत में कई तटीय इलाकों के लिए सुनामी की चेतावनी जारी की गई थी जिसे कुछ घंटे बाद हटा लिया गया। फिलहाल लोगों से सुरक्षित जगह पर रहने को कहा गया है।
सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में कुछ इमारतें गिरती और क्षतिग्रस्त होती दिखाई दे रही हैं। कई लोग भूकंप के बाद घरों और इमारतों से बाहर निकलते नजर आए। हालांकि, इन वीडियो की पुष्टि नहीं हो सकी है।

समुद्र का पानी पीछे हटा, लोग सुनामी के डर से भागे
अमेरिकी भूवैज्ञानिक सर्वेक्षण (USGS) के मुताबिक, भूकंप स्थानीय समयानुसार सुबह करीब 6 बजे आया। इसका केंद्र एंडे शहर से करीब 68 किलोमीटर दूर समुद्र के नीचे था।
भूकंप के बाद नागेकेओ इलाके में समुद्र का पानी अचानक पीछे हट गया। इसे सुनामी का संकेत मानकर लोग घबराकर ऊंची जगहों की ओर भागने लगे।
बाद में सुनामी की चेतावनी हटा ली गई, लेकिन अधिकारियों ने लोगों से कहा कि वे फिलहाल क्षतिग्रस्त इमारतों में वापस न जाएं, क्योंकि तेज आफ्टरशॉक आ सकते हैं।
अब तक दर्जनों आफ्टरशॉक महसूस किए जा चुके हैं। इनमें सबसे तेज झटका 6.1 तीव्रता का था।

भूकंप के बाद समुद्र का पानी पीछे चला गया।
इंडोनेशिया में भूकंप से जुड़ीं 7 फोटोज…

सोशल मीडिया पर शेयर किए गए एक वीडियो में इंडोनेशिया में आए शक्तिशाली भूकंप के बाद इमारत का एक हिस्सा ढहता हुई दिखाई दिया।

भूकंप के बाद एक हॉल में मौजूद लोगों के बीच अफरा-तफरी मच गई। (यह वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल है।)

इंडोनेशिया के सिक्का इलाके में शनिवार को भूकंप के बाद क्षतिग्रस्त इमारत से एक व्यक्ति को बाहर निकालते बचावकर्मी।

इंडोनेशिया के पूर्वी नुसा तेंगारा में 7.7 तीव्रता के भूकंप के बाद गिरी इमारत के मलबे के बीच एक मॉनिटर सुरक्षित बच गया।

इंडोनेशिया के पूर्वी नुसा तेंगारा में 7.7 तीव्रता के भूकंप के बाद घरों के बाहर खड़े लोग।

इंडोनेशिया में भूकंप के बाद एक पोर्ट पर क्षतिग्रस्त इमारत का जायजा लेते बचावकर्मी।

इंडोनेशिया के पूर्वी नुसा तेंगारा में 7.7 तीव्रता के भूकंप के बाद घरों के बाहर खड़े लोग।
प्रार्थना के दौरान गिरी छत, पादरी दूसरी मंजिल से कूदे
सिक्का के सेंट पीटर मेजर सेमिनरी में सुबह की प्रार्थना चल रही थी, तभी सभा भवन की छत का एक हिस्सा गिर गया। सेमिनरी के रेक्टर रेव. गिडेलबर्टस टांगा ने बताया कि छात्र और नन घबराकर बाहर भागे।
उन्होंने बताया कि जान बचाने की कोशिश में एक पादरी दूसरी मंजिल से कूद गए, जिससे उनके पैर में फ्रैक्चर हो गया।
अस्पतालों से मरीजों को बाहर निकाला गया
भूकंप के बाद एहतियात के तौर पर कई अस्पतालों से मरीजों को बाहर निकालना पड़ा। स्थानीय टीवी चैनलों की तस्वीरों में डॉक्टर और स्वास्थ्यकर्मी मरीजों को स्ट्रेचर पर बाहर ले जाते दिखे।
अस्पतालों के बाहर बिस्तर, आईवी स्टैंड और ऑक्सीजन सिलेंडर लगाए गए। कई जगह खुले में ही अस्थायी इलाज शुरू किया गया।
कई इमारतों को नुकसान, लोग ऊंची जगहों की ओर भागे
भूकंप के तेज झटके फ्लोरेस द्वीप के बड़े हिस्से में महसूस किए गए। शुरुआती रिपोर्टों के मुताबिक कई इमारतों को नुकसान पहुंचा।
पूर्वी नुसा तेंगारा प्रांत के सिक्का की रहने वाली योहाना एम्बू ने बताया कि झटके लगते ही लोग जान बचाने के लिए ऊंची जगहों की ओर भागने लगे। उन्होंने मौमेरे बंदरगाह के टर्मिनल का प्रतीक्षालय भी गिरा हुआ देखा।

इंडोनेशिया में इतने भूकंप क्यों आते हैं
इंडोनेशिया करीब 17,500 द्वीपों का देश है। ये द्वीप प्रशांत महासागर के उस इलाके में हैं, जिसे ‘रिंग ऑफ फायर’ कहा जाता है। यहां धरती के नीचे कई बड़ी भूगर्भीय प्लेटें मिलती हैं। ये प्लेटें लगातार खिसकती रहती हैं। जब दो प्लेटें आपस में टकराती हैं या एक प्लेट दूसरी के नीचे चली जाती है, तो धरती के अंदर जमा दबाव अचानक बाहर निकलता है। इससे भूकंप आता है।
इंडोनेशिया के आसपास समुद्र के नीचे भी ऐसी हलचल अक्सर होती रहती है। अगर समुद्र के नीचे तेज भूकंप आए और उससे समुद्र का पानी अचानक ऊपर-नीचे हो जाए, तो सुनामी आ सकती है।
इसी वजह से इंडोनेशिया में भूकंप, सुनामी और ज्वालामुखी विस्फोट का खतरा दुनिया के कई दूसरे देशों के मुकाबले ज्यादा रहता है।

———————– भूकंप से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें…
कोलंबिया में भूकंप से 224 लोगों की मौत, 1200 घायल:86 इमारतें गिरीं, 1500 से ज्यादा घरों को नुकसान; 3000 से ज्यादा लोग लापता

साउथ अमेरिकी देश कोलंबिया में 11 अगस्त की रात आए 7.4 तीव्रता के भूकंप से अब तक 224 लोगों की मौत हो गई है। पूरी खबर यहां पढ़ें…
खूब लहराया आजादी का परचम, पूनियाजी ने ‘लहराई’ बाइक: ‘नोटिस’ पर सांसद मन्नालाल का ‘बड़ा दिल’; ओवैसी-बेनीवाल की ‘ट्यूनिंग’ – Rajasthan News
नमस्कार, आज आजादी के पर्व पर घर-घर तिरंगा लहरा रहा है। राज्यसभा सांसद भी लहरा रहे हैं, लेकिन बाइक पर। उदयपुर सांसद मन्नालाल रावत ने बड़ा दिल दिखाया। नोटिस देने वाले अधिकारी को माफ किया। दिल्ली में ओवैसी और हनुमान बेनीवाल के बीच दोस्ती के रंग दिखे तो कई सरकारी स्कूलों का हाल बदरंग नजर आया। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. खूब लहराया ‘आजादी का परचम’ राजधानी में मुख्यमंत्री ने अपने आवास पर तिरंगा फहराया। इस कार्य में उनकी श्रीमतीजी ने भी साथ दिया। इधर, उप मुख्यमंत्री महोदया ने भी छत पर जाकर तिरंगा लहराया। घर-घर तिरंगा अभियान के तहत अपील की गई कि हर नागरिक सम्मान के साथ अपने घर पर तिरंगा फहराए। अपील का असर भी दिख रहा है। आजादी का उल्लास होता ही है जबरदस्त। जो चीज छीनकर मिले, लड़कर मिले, उसे पाने का आनंद ही अलग होता है। आजादी के लिए लड़ने वाली पीढ़ियों को नमन। आज भारत माता की जय और वंदेमातम की गूंज हर कंठ से निकल रही है। हर मन में एक ही भाव है- सबसे आगे होंगे हिंदुस्तानी। आज हर नारा सिर्फ देश के लिए हो। उसी तरह जैसे कांग्रेस पार्टी ने तय कर लिया है कि किसी व्यक्ति के लिए नारा नहीं, पार्टी के लिए लगाओ। प्रदेश कांग्रेस कमेटी में एक उत्साही कार्यकर्ता ने चीफ साहब का नारा लगाया। बोला- गोविंद सिंह डोटासरा जिंदाबाद। डोटासरा ने तुरंत रोका। कहा- नहीं भाई। रहने दो। 2. मन्नालाल जी की सादगी मन्नालाल जी ढाई साल पहले तक परिवहन विभाग में अधिकारी थे। उन्होंने नौकरी से VRS ले लिया। इसके बाद राजनीति में उतरे और सांसद बन गए। मन्नालाल जी किस्मत के धनी निकले। सादगी पूर्ण जीवन के कारण तड़क-भड़क वाले नेता नहीं हैं। उन्हें चाक चलता दिखता है तो मिट्टी के बर्तन बना लेते हैं। फिर अपना पात्र देख झूमते हैं। माटी से जुड़ा आदमी सरल होता है। अचानक मन्नालालजी को जोधपुर निर्वाचन अधिकारी ने नोटिस दे दिया। साथ ही फटकार भी लगाई कि आपका काम पूरा नहीं है। आपने पोर्टल पर जानकारी अपडेट नहीं की। फलां धारा के हिसाब से फलां दंड दिया जा सकता है। जिला निर्वाचन अधिकारी को पता ही नहीं कि जिन्हें नोटिस दे दिया वे सांसद हैं। उन्हें यह भी पता नहीं कि उन्हीं की लिस्ट अपडेट नहीं थी और ढाई साल बाद भी मन्नालाल जी का नाम हटाया नहीं गया था। नोटिस देकर खुद फंस गए। कोई और सांसद होता तो गरजता भी बरसता भी। लेकिन मन्नालाल जी बोले- उन्होंने जो कुछ किया, अच्छे के लिए ही किया होगा। भले को सब भला ही भला दिखता है। 3. हनुमान की ‘लॉटरी’ निकाय चुनाव के लिए भले आरक्षण की लॉटरी निकल गई, लेकिन हनुमान बेनीवाल ‘लॉटरी का टिकट’ साथ लेकर घूम रहे हैं। यह लॉटरी का टिकट AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी हैं। देशभर की मुस्लिम कम्युनिटी में उनकी पैठ है। हनुमान बेनीवाल की तरह वे भी वन मैन आर्मी हैं। हनुमान बेनीवाल और ओवैसी की दिल्ली में मुलाकात हुई। दोनों नेता एक-दूसरे की तारीफ करते हैं। दोनों मिलते हैं तो यारी-दोस्ती दिखाई देती है। राजनीति में दोस्ती और दुश्मनी सोच-समझ कर की जाती है। दो दिग्गजों की दोस्ती को राजनीति में समीकरण कहा जाता है। क्या हनुमान बेनीवाल राजस्थान में वैसा ही समीकरण बनाने में जुटे हैं, जैसा यादव जी ने यूपी में MY का बनाया था। 4. चलते-चलते.. अलवर में थानागाजी इलाके में एक गांव है जोधावास। गांव के सरकारी स्कूल के बच्चे धरना-प्रदर्शन कर रहे हैं। स्कूल में पहाड़ा-पट्टी की जगह ‘हमारी मांगें पूरी करो’ गूंज रहा है। पत्रकार ने एक छात्रा से पूछा- देश 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, आपके लिए आजादी का क्या मतलब है। छात्रा बोली- स्कूल की पटि्टयां टूटी हैं। भवन जर्जर है। एक भी कमरा ठीक नहीं है। खेल का ग्राउंड नहीं है। टीचर नहीं है। रूपारेल नदी पार करके आते हैं। अच्छी पुलिया नहीं है। 80 साल की आजादी का यही मतलब है। अधिकारी बच्चों को समझाने पहुंचे तो एक पतली-दुबली छात्रा ने पुरजोर आवाज में कहा- अगर आपके बच्चे यहां होते तो क्या उनके लिए भी यही सुविधाएं होतीं? अधिकारी निरुत्तर। प्रतापगढ़ जिले के धरियावद में लसाड़िया तहसील की ग्राम पंचायत है धुलिया। यहां के गांव कराकला फला का तो अजब हाल है। 2013 में यहां स्कूल खुल गया, लेकिन बिल्डिंग नहीं बनी। गांव के छोटे से मंदिर में स्कूल चल रहा है। 60 बच्चों पर एक टीचर। कुल मिलाकर व्यवस्था भगवान भरोसे चल रहा है। जालोर के मेंगलवा गांव में पीएमश्री स्कूल की छात्रा मनीषा कुमारी सायला तो स्टार बन गई। उसने 90 फीसदी अंक हासिल किए। लेकिन अपनी मेहनत पर। स्कूल में पूरे टीचर ही नहीं है। छात्रों ने धरना दिया तो मनीषा ने दमदार ढंग से बात रखी। कहा- यहां सेकेंड ग्रेड के टीचर नहीं है। हिस्ट्री का एक टीचर है वे प्रिंसिपल हैं। सारे टीचर लगा दो वरना रास्ता ब्लॉक करेंगे। बाड़मेर के जालीखेड़ा स्कूल में दो टीचर हैं। दोनों अस्थायी। टीचर्स की मांग पर बच्चों ने धरना दे दिया। प्रशासन ने आश्वासन दिया। बोले- जब तक स्थायी टीचर नहीं आ जाएंगे, अस्थायी को नहीं हटाएंगे। बच्चों ने खुलकर कहा-यही बात लिखकर दे दो। राजधानी के मूक बधिर बच्चों के सरकारी स्कूल में तो बच्चे न बोल सकते हैं। न सुन सकते हैं। फिर भी इशारों में अपनी बात इतने असरदार ढंग से रखी कि प्रशासन हिल गया। मशहूर क्रांतिकारी शायर फैज अहमद फैज ने एक नज्म लिखी थी। जिसके शब्द थे- बोल कि लब आजाद हैं तेरे। आजादी के 80 साल बाद भी तसल्ली इस बात की है कि जनरेशन चाहे जेन-जी हो या फिर अल्फा। उनके भीतर भगतसिंह और चंद्रशेखर आजाद जैसे क्रांतिकारी जिंदा हैं, जो आवाज उठाना जानते हैं। इनपुट सहयोग- विजय कुमार (बाड़मेर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।
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आगरा के तिरंगा चौक ने बनाया रिकॉर्ड: 3122वें दिन भी लहराया तिरंगा, अब गिनीज बुक में नाम दर्ज कराने की तैयारी – Agra News
15 अगस्त को जहां पूरा देश अपना 80वां स्वतंत्रता दिवस मना रहा है, वहीं आगरा ने एक और गौरव अपने नाम कर लिया है। शहर के तिरंगा चौक पर हर दिन तिरंगा फहराने का रिकॉर्ड बनाया गया है। ये सिलसिला आज 3122वें दिन भी जारी है। इसी अनूठी पहल के लिए अब समिति ने अपना नाम दूसरी बार गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने के लिए आवेदन कर दिया है। इससे पहले भी तिरंगा चौक को इस रिकॉर्ड के लिए नामित किया जा चुका है। कोरोना काल में भी हर दिन तिरंगा फहराया गया 26 जनवरी 2018 से शुरू हुआ ये सिलसिला आज 3122वें दिन भी जारी है। भारत में आगरा ही एकमात्र ऐसा शहर है जहां सेल्फी पॉइंट तिरंगा चौक पर हर दिन बगैर रुके तिरंगा फहराया जाता है। कोरोना काल में जब सारी गतिविधियां ठप थीं, सड़कें सूनी थीं और लोगों का घर से निकलना बंद था, तब भी तिरंगा चौक पर रोजाना तिरंगा शान से लहराया गया। लॉकडाउन के दौरान भी समिति के सदस्य सोशल डिस्टेंसिंग के साथ यहां पहुंचकर ध्वजारोहण करते थे। इसी अनूठी पहल के लिए अब समिति ने अपना नाम दूसरी बार गिनीज बुक ऑफ वर्ल्ड रिकॉर्ड में दर्ज कराने के लिए आवेदन कर दिया है। इससे पहले भी तिरंगा चौक कमेटी को 8 इंटरनेशनल, 5 नेशनल अवॉर्ड जैसे नेल्सन मंडेला, वर्ल्ड रिकॉर्ड्स इंडिया, वर्ल्डवाइड बुक ऑफ रिकॉर्ड्स, गनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड्स, ओएमजी बुक ऑफ रिकॉर्ड्स से सम्मानित किया जा चुका हैं। बड़ी हस्तियां फहरा चुकी हैं तिरंगा इस चौक की पहचान अब सिर्फ आगरा तक सीमित नहीं रही। यहां अब तक भारतीय क्रिकेट टीम की खिलाड़ी दीप्ति शर्मा, क्रिकेटर दीपक चाहर, हॉकी के अंतरराष्ट्रीय खिलाड़ी जयवीर सिंह, राज्यसभा सांसद संजय सिंह, पूर्व केंद्रीय खेल मंत्री अनुराग ठाकुर और सांसद मनोज तिवारी समेत कई नामचीन हस्तियां तिरंगा फहरा चुकी हैं। हाल ही में बॉलीवुड अभिनेत्री रवीना टंडन को भी आमंत्रित किया गया था। उनकी फ्लाइट तक बुक हो गई थी, लेकिन किसी कारणवश वे नहीं आ सकीं। समिति का कहना है कि रवीना टंडन जल्द ही आगरा आकर तिरंगा चौक पर ध्वजारोहण करेंगी। 8 इंटरनेशनल, 5 नेशनल अवॉर्ड हर दिन तिरंगा फहराने की इस मुहिम के लिए तिरंगा समिति को अब तक 8 अंतरराष्ट्रीय, 5 राष्ट्रीय और 128 अन्य सम्मान मिल चुके हैं। विभिन्न राज्य सरकारों ने भी समिति के इस कार्य को सराहा और सम्मानित किया है। समिति का लक्ष्य है कि तिरंगे के सम्मान को घर-घर तक पहुंचाया जाए और युवाओं में देशभक्ति की भावना को लगातार बढ़ाया जाए। आज जो तिरंगा चौक देशभक्ति की मिसाल बना हुआ है, 2018 से पहले इसकी सूरत बिल्कुल अलग थी। यहां चारों तरफ कूड़े का ढेर लगा रहता था। पास में नाला बहता था। लोग इसी जगह पर कूड़ा डंप कर देते थे। 300 मीटर की दूरी पर ही खेरिया एयरपोर्ट है। गंदगी और बदबू के कारण राहगीरों और एयरपोर्ट आने-जाने वाले लोगों को काफी परेशानी होती थी। बाजार कमेटी ने पलटी तस्वीर 2018 में अजीत नगर बाजार कमेटी ने बीड़ा उठाया। कमेटी के लोगों ने अपने निजी पैसे से इस जगह को साफ कराकर एक भव्य सेल्फी पॉइंट तैयार कराया। ताकि दोबारा यहां कोई गंदगी न करे, इसलिए इसका नाम “तिरंगा चौक” रखा गया। 26 जनवरी 2018 को यहां पहली बार तिरंगा फहराया गया। उसी दिन कमेटी ने फैसला लिया कि अब ये तिरंगा हर दिन लहराया जाएगा। उस दिन से लेकर आज 3122वें दिन तक एक भी दिन नागा नहीं हुआ। हर दिन नया गेस्ट, हर दिन नई कहानी इस चौक की सबसे खास बात ये है कि हर दिन कोई नया गेस्ट यहां तिरंगा फहराता है। एक बार जिसने झंडा फहरा दिया, उसे दोबारा मौका नहीं दिया जाता। कोई भी व्यक्ति अपना जन्मदिन, शादी की सालगिरह या कोई खास दिन मनाने के लिए यहां आकर रजिस्ट्रेशन करा सकता है और तिरंगा फहरा सकता है। सुबह 10 बजे राष्ट्रगान के साथ जब तिरंगा फहराया जाता है तो पूरे चौक पर सन्नाटा छा जाता है। वाहन रुक जाते हैं और लोग सेल्यूट करते हैं। मैच के दिन उमड़ती है भीड़ चौक पर एक बड़ी एलईडी स्क्रीन भी लगी है। भारत-पाकिस्तान का मैच हो या कोई बड़ा फाइनल, उस दिन यहां हजारों की संख्या में लोग इकट्ठा होकर मैच देखते हैं। मैच के बीच-बीच में देशभक्ति के गाने और संदेश चलाए जाते हैं, जिससे माहौल और जोशीला हो जाता है।
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जहानाबाद में विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस पर कैंडल मार्च: शहीदों को दी गई श्रद्धांजलि, डीएम समेत कई अधिकारी हुए शामिल – Jehanabad News
जहानाबाद में शुक्रवार शाम विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर जिला प्रशासन ने कैंडल मार्च निकाला। इस मार्च में जिला पदाधिकारी (डीएम) श्रीमती छिरिङ वाई भूटिया सहित जिले के कई अधिकारी, समाजसेवी और स्थानीय लोग शामिल हुए। इसका मुख्य उद्देश्य देश के विभाजन के दौरान जान गंवाने वाले लोगों और स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित करना था। कैंडल मार्च के दौरान लोगों ने हाथों में जलती मोमबत्तियां लेकर देश की एकता, अखंडता और भाईचारे का संदेश दिया। इस कार्यक्रम का आयोजन लोगों को देश के विभाजन की त्रासदी और स्वतंत्रता प्राप्ति के लिए किए गए संघर्ष से अवगत कराने के लिए किया गया था। मार्च में शामिल सभी ने शहीदों के बलिदान को याद किया और उनके प्रति सम्मान व्यक्त किया। कैंडल मार्च निकालकर शहीदों को दी श्रद्धांजलि इस अवसर पर डीएम श्रीमती छिरिङ वाई भूटिया ने कहा कि देश की आजादी के लिए अनेक वीर सपूतों ने अपना सर्वस्व न्योछावर कर दिया। उनके बलिदान और संघर्ष के कारण ही आज हम स्वतंत्र भारत में सांस ले रहे हैं। उन्होंने बताया कि आजादी की संध्या पर कैंडल मार्च निकालकर उन सभी वीरों और शहीदों को श्रद्धांजलि दी गई, जिन्होंने देश की स्वतंत्रता के लिए अपने प्राणों की आहुति दी। नई पीढ़ी को इतिहास से अवगत करवाना उद्देश्य डीएम ने आगे कहा कि देश को आजादी आसानी से नहीं मिली, बल्कि इसके पीछे वर्षों का संघर्ष, कठिनाइयां और असंख्य लोगों का बलिदान जुड़ा हुआ है। विभाजन के दौरान भी बड़ी संख्या में लोगों को विस्थापन, हिंसा और पीड़ा का सामना करना पड़ा था। उन्होंने ऐसे आयोजनों के माध्यम से नई पीढ़ी को इतिहास के इन महत्वपूर्ण अध्यायों से परिचित कराने की आवश्यकता पर जोर दिया। यह कार्यक्रम विशेष रूप से युवा पीढ़ी को देश के स्वतंत्रता संग्राम और शहीदों के त्याग के बारे में जागरूक करने के उद्देश्य से आयोजित किया गया था। डीएम ने लोगों से देश की एकता और अखंडता को मजबूत बनाए रखने तथा आपसी भाईचारे और सौहार्द की भावना को कायम रखने की अपील की।
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सरकार ने पेट्रोल-डीजल पर घटा दिया टैक्स, क्या देश में सस्ता होगा तेल
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Tax on Petrol-Diesel : सरकार ने तेल कंपनियों को राहत देते हुए पेट्रोल-डीजल और हवाई ईंधन पर विंडफाल टैक्स घटा दिया है. अब देश के बाहर निर्यात किए जाने वाले तेल पर कम टैक्स लगेगा तो कंपनियां भी ज्यादा मुनाफा कमा सकेंगी. सरकार ने इसी महीने की शुरुआत में तीनों ही ईंधन पर विंडफाल टैक्स बढ़ा दिया था.
सरकार ने पेट्रोल-डीजल और एटीएफ पर विंडफाल टैक्स घटा दिया है.
नई दिल्ली. देश में पेट्रोल और डीजल का उत्पादन सामान्य होने और डिमांड से ज्यादा सप्लाई पहुंचने के बाद सरकार ने कंपनियों को बड़ी राहत देते हुए निर्यात किए जाने वाले तेल पर टैक्स कम कर दिया है. सरकार ने आदेश दिया है कि शनिवार से ही निर्यात किए जाने वाले पेट्रोल, डीजल और हवाई ईंधन पर विंडफाल टैक्स कम किया जा रहा है. आदेश के तहत डीजल पर टैक्स 25.5 रुपये से घटाकर 24 रुपये प्रति लीटर कर दिया गया है, जबकि पेट्रोल पर 3.5 रुपये से घटाकर शून्य कर दिया गया है. हवाई ईंधन पर भी टैक्स को 22 रुपये लीटर से घटाकर 19.5 रुपये कर दिया गया है.
सरकार हर पखवाड़े पर पेट्रोल-डीजल और एविएशन टरबाइन फ्यूल यानी एटीएफ पर विंडफाल टैक्स रिवाइज करती है. यह कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल व अन्य पेट्रोलियम उत्पादों की कीमतों के आधार पर तय की जाती है. पहली बार सरकार ने निर्यात किए जाने वाले ईंधन पर विंडफाल टैक्स जुलाई, 2022 में लगाया था. इसका मकसद तेल कंपनियों और रिफाइनरियों की ओर ईंधन निर्यात करके कमाए जाने वाले बड़े मुनाफे पर लगाम कसना था. जब ग्लोबल मार्केट में तेल के दाम ज्यादा बढ़ते हैं तो भारतीय कंपनियां भी अपने प्रोडक्ट बाहर भेजकर जबरदस्त मुनाफा कमाती हैं.
क्या देश में सस्ता होगा तेल
विंडफाल टैक्स घटाने का असर तेल की घरेलू कीमतों पर नहीं दिखेगा. यह टैक्स सिर्फ देश के बाहर जाने वाले तेल पर कम किया गया है, जिसका सीधा फायदा तेल कंपनियों और रिफाइनरियों को होगा. सरकार ने साल 2024 में विडफाल टैक्स को खत्म भी कर दिया था, लेकिन इसे मार्च 2026 में दोबारा लागू कर दिया गया, क्योंकि ईरान और अमेरिका युद्ध की वजह से ग्लोबल बाजार में तेल की कीमतें अंधाधुंध बढ़ने लगीं जिससे भारतीय कंपनियों के ज्यादा निर्यात करने की आशंका पैदा हो गई. निर्यात पर लगाम कसने के लिए ही सरकार ने दोबारा विंडफाल टैक्स लगा दिया.
इसी महीने बढ़ाया था टैक्स
सरकार ने विंडफाल टैक्स को इसी महीने बढ़ाया था. 3 अगस्त को इसे बढ़ाकर डीजल पर 25.5 रुपये लीटर कर दिया गया था, जो पहले 15.5 रुपये लीटर था. इसका मतलब है कि एकमुश्त 10 रुपये की बढ़ोतरी की गई थी. इसी तरह, एटीएफ पर 14.5 रुपये से बढ़ाकर 22 रुपये प्रति लीटर का विंडफाल टैक्स लगाया गया था. पेट्रोल पर भी विंडफाल टैक्स 2.5 रुपये से बढ़ाकर 3.5 रुपये किया गया था, लेकिन अब इसे शून्य कर दिया गया है.
क्या है इस टैक्स का मकसद
सरकार ने विंडफाल टैक्स इसलिए लगाया था, ताकि कंपनियां ज्यादा मुनाफे के चक्कर में अपना तेल देश के बाहर न भेज दें. देश के भीतर तेल की सप्लाई बेहतर बनाए रखने के लिए ही सरकार ने यह टैक्स कंपनियों पर लगाया है. पिछले कुछ समय से ग्लोबल मार्केट में तेल के दाम लगातार बढ़ रहे हैं, जिसकी वजह से भारतीय तेल कंपनियां और रिफाइनरियां निर्यात पर जोर देना चाहती हैं. इसी पर लगाम कसने के लिए सरकार ने विंडफाल टैक्स लगाया है. हालांकि, यह टैक्स देश के भीतर बिकने वाले तेल पर लागू नहीं होता है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…
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उज्जैन में शहीदों का अनोखा मंदिर: 41 वीर सपूतों को रोज मिलता है सम्मान; पूर्व जज ने चौराहों पर प्रतिमाएं देख की थी शुरुआत – Ujjain News
महाकाल की नगरी उज्जैन में आस्था के कई केंद्र हैं, लेकिन शिप्रा किनारे महाकाल मंदिर के पीछे नरसिंह घाट क्षेत्र में बना शहीदों का मंदिर अपनी अलग पहचान रखता है। यहां पूजा सिर्फ देवी-देवताओं की नहीं, बल्कि देश के लिए प्राण न्योछावर करने वाले वीर जवानों की भी होती है। मंदिर में करीब 41 वीर सपूतों और नारी शक्ति की प्रतिमाएं स्थापित हैं। इन्हें देखने और श्रद्धांजलि देने के लिए लोग रोज यहां पहुंचते हैं। इस मंदिर की शुरुआत वर्ष 2008 में हुई थी। मंदिर निर्माण के पीछे पूर्व जज दान सिंह चौधरी की सोच और संकल्प था। वर्तमान में वे अपने परिवार के साथ भोपाल में रहते हैं। उनका मानना था कि देश के अमर शहीदों की प्रतिमाएं अक्सर शहरों के चौराहों पर स्थापित तो कर दी जाती हैं, लेकिन समय के साथ उनकी उपेक्षा होने लगती है। कई प्रतिमाएं धूल और गंदगी से ढकी रहती हैं और उनकी साफ-सफाई केवल राष्ट्रीय पर्वों या विशेष अवसरों पर ही हो पाती है। इसी विचार ने दान सिंह चौधरी को एक ऐसा स्थान बनाने की प्रेरणा दी, जहां देश के वीरों को हर दिन सम्मान मिले। उन्होंने अपनी सेवानिवृत्ति पर मिली राशि शहीदों के सम्मान में समर्पित कर दी। अलीराजपुर निवासी गुरु नरसिंहानंद महाराज की प्रेरणा से शुरू हुए इस प्रयास को आगे चलकर परमानंद महाराज ने आकार दिया। संकल्प था कि देश के लिए बलिदान देने वाले जवानों को केवल राष्ट्रीय पर्वों पर नहीं, बल्कि हर दिन याद किया जाए। इसी सोच ने छोटे स्तर पर शुरू हुई पहल को आज एक ऐसे मंदिर का रूप दे दिया है, जहां राष्ट्रभक्ति और श्रद्धा एक साथ दिखाई देती है। एक ही परिसर में सेना के दिग्गज और परमवीर चक्र विजेता मंदिर की सबसे बड़ी विशेषता यहां स्थापित प्रतिमाएं हैं। परिसर में भारतीय सेना और देश की सुरक्षा में महत्वपूर्ण योगदान देने वाले कई महान व्यक्तित्वों को स्थान दिया गया है। इनमें देश के प्रथम थलसेना अध्यक्ष जनरल के.एम. करियप्पा, फील्ड मार्शल सैम मानेकशॉ और वायुसेना प्रमुख अर्जुन सिंह जैसे नाम शामिल हैं। इसके अलावा यहां 21 परमवीर चक्र विजेताओं को भी प्रतिमाओं के माध्यम से सम्मान दिया गया है। करीब 41 प्रतिमाओं वाले इस परिसर में शहीद जवानों के साथ नारी शक्ति को भी स्थान दिया गया है। खास बात यह है कि प्रत्येक प्रतिमा के साथ संबंधित वीरों के बारे में विस्तृत जानकारी भी दी गई है, ताकि यहां आने वाले लोग उनके जीवन, शौर्य और बलिदान के बारे में पढ़ सकें। 40 से 45 हजार रुपए में तैयार हुईं प्रतिमाएं मंदिर में स्थापित सभी प्रतिमाएं फाइबर से बनाई गई हैं। मंदिर से जुड़े संजय कुमार चौधरी के अनुसार, एक प्रतिमा तैयार करने में लगभग 40 से 45 हजार रुपए की लागत आई है। ये प्रतिमाएं केवल मूर्तियां नहीं हैं, बल्कि देश के लिए दिए गए बलिदान और साहस की जीवंत कहानियां भी हैं। मंदिर में ‘अमर जवान, अमर किसान और अमर विज्ञान’ की भावना भी दिखाई देती है। यही कारण है कि यहां आने वाले लोगों के लिए यह स्थान किसी सामान्य मंदिर से अलग अनुभव प्रदान करता है। परिवार बदला, लेकिन सेवा का संकल्प जारी मंदिर की स्थापना के बाद इसकी देखरेख करने वाले परिवार में समय के साथ बदलाव आया। संस्थापक दान सिंह चौधरी के माता-पिता के निधन के बाद अब जामोद परिवार मंदिर की सेवा और व्यवस्थाओं को संभाल रहा है। आज शिप्रा किनारे शांत वातावरण में बना यह मंदिर लोगों को यही संदेश देता है कि देश के लिए अपना जीवन समर्पित करने वाले वीर जवानों की स्मृति किसी एक दिन तक सीमित नहीं होनी चाहिए। उनके बलिदान को याद करने और उन्हें श्रद्धांजलि देने के लिए यहां हर दिन श्रद्धा से सिर झुकते हैं।
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