Wednesday, May 6, 2026
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बंगाल में किस जाति के कितने विधायक जीते? ‘भूरा बाल’ ने डुबो दी ममता की नाव!


कोलकाता. सोशल मीडिया पर लोग सर्च कर रहे हैं कि बंगाल में किस जाति के कितने विधायक जीतकर विधानसभा पहुंचे हैं? भूमिहार, ब्राह्मण, राजपूत, यादव और कायस्थों की संख्या इनमें से कितनी है? कितने मुस्लिम, एससी और ओबीसी कैंडिडेट जीते हैं? इस बार के बंगाल चुनाव में यूपी-बिहार के कई राजपूत और भूमिहार चेहरे बीजेपी के टिकट पर जीते हैं. अगर भूमिहार कैंडिडेट की बात करें तो बीजेपी के टिकट पर उमेश राय, दिलीप सिंह और रितेश तिवारी चुनाव जीते हैं. अगर बात करें 293 सीटों पर जीतने वाले सभी कैंडिडेट की, तो ज्यादातर उम्मीदवार ब्राह्मण, कायस्थ, ओबीसी और एससी वर्ग के हैं. महिलाओं की संख्या में इस बार इजाफा हुआ है. वहीं, मुस्लिम विधायकों की संख्या इस बार घट गई है. जानिए बंगाल चुनाव 2026 में किस जाति के कितने विधायक जीतकर आए हैं.

सबसे पहले बात करते हैं कि बंगाल में दलितों के लिए आरक्षित 68 सीटों में से 52 पर इस बार बीजेपी ने जीत दर्ज की है. मतुआ और राजबंशी समुदायों ने इस बार अपना पाला पूरी तरह बदल लिया है. पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 के रण के बाद अब नई विधानसभा के सामाजिक और जातीय समीकरणों के आंकड़े सामने आ गए हैं. 293 सीटों पर आए परिणामों ने राज्य की भावी राजनीति की एक नई पटकथा लिख दी है. इस बार की विधानसभा में न केवल सत्ता परिवर्तन हुआ है, बल्कि सदन के अंदर प्रतिनिधित्व का चेहरा भी बदल गया है. सबसे चौंकाने वाला आंकड़ा मुस्लिम विधायकों की संख्या को लेकर है, जिसमें पिछले चुनाव के मुकाबले कमी दर्ज की गई है.

ममता बनर्जी की हार के बाद देश में दिल्ली की रेखा गुप्ता इकलौती CM बची हैं.

मुस्लमों की संख्या 38 पर सिमटी

चुनाव आयोग के आंकड़ों के मुताबिक, 2026 की नई विधानसभा में कुल 38 मुस्लिम विधायक चुनकर आए हैं. यह संख्या 2021 के चुनाव 42 मुस्लिम विधायक के मुकाबले 4 कम है. इनमें सबसे ज्यादा 32 मुस्लिम विधायक तृणमूल कांग्रेस के टिकट पर जीते हैं. हुमायूं कबीर अपनी पार्टी आम जनता उन्नयन पार्टी (AJUP) से 2 सीटों से जीतकर आए हैं. पहली बार ‘ऑल इंडिया सेकुलर फ्रंट’ (AISF) ने भी 01 मुस्लिम विधायक के साथ अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है.

ब्राह्मण-राजपूत-भूमिहार वर्गों का हाल

अगर यूपी-बिहार के भूमिहार जाति की बात करें तो इस बार उमेश राय हावड़ा उत्तर विधानसभा जीते हैं. वह गांव पलियां लोहारपुर जिला गाजीपुर यूपी के रहने वाले हैं. दिलीप सिंह चांपदानी विधानसभा से जीते हैं. वह भी यूपी बनारस पिंडरा के भूमिहार हैं. तीसरे भूमिहार रितेश तिवारी काशीपुर बेलगछिया विधानसभा से जीते हैं. वह बिहार सिवान के भूमिहार हैं. बीजेपी की 206 सीटों की बड़ी जीत के साथ विधानसभा में सवर्ण और पिछड़ा वर्ग (OBC) के प्रतिनिधित्व में इजाफा हुआ है. नई विधानसभा में लगभग 42 से 45 ब्राह्मण विधायक चुनकर पहुंचे हैं, जिनमें से बहुमत बीजेपी के खेमे से है. कल्याण चक्रवर्ती और शांतनु देय जैसे चेहरों ने अपनी सीटों पर जीत दर्ज की है.

बंगाल विधानसभा में संख्या के लिहाज से इस बार अनुसूचित जाति (SC) और पिछड़ा वर्ग (OBC) से सबसे ज्यादा विधायक सदन में दिखेंगे.

एससी, ओबीसी और महिलाओं का जलवा

बंगाल विधानसभा में संख्या के लिहाज से इस बार अनुसूचित जाति (SC) और पिछड़ा वर्ग (OBC) से सबसे ज्यादा विधायक सदन में दिखेंगे. उत्तर बंगाल और जंगलमहल में बीजेपी की क्लीन स्वीप ने राजबंशी और मतुआ समुदाय के प्रतिनिधियों की संख्या बढ़ा दी है. भले ही ममता बनर्जी की सत्ता चली गई हो, लेकिन उनके द्वारा शुरू की गई ‘महिला केंद्रित राजनीति’ का असर नतीजों में दिख रहा है. इस बार विधानसभा में 44 महिला विधायक चुनकर आई हैं. टीएमसी ने सबसे अधिक महिला उम्मीदवार उतारे थे, जिनमें से कई ने जीत हासिल की. यह आंकड़ा बताता है कि बंगाल की राजनीति में महिलाओं की भागीदारी अब केवल वोट बैंक तक सीमित नहीं है, बल्कि वे नीति-निर्धारण में भी बड़ी भूमिका निभाएंगी.

1941 के बाद यह पहली बार है जब बंगाल की विधानसभा में हिंदुत्ववादी विचारधारा के समर्थकों की संख्या बहुमत के पार है. 38 मुस्लिम विधायकों की मौजूदगी के बावजूद, सदन का शक्ति केंद्र अब ‘सांस्कृतिक राष्ट्रवाद’ की ओर झुक गया है. विश्लेषकों का मानना है कि मुस्लिम सीटों पर बीजेपी की सेंधमारी और ध्रुवीकरण के चलते टीएमसी के कई मुस्लिम बहुल किलों में भी ‘कमल’ खिला है, जिसका सीधा असर मुस्लिम विधायकों की कुल संख्या पर पड़ा है.



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वो रोमांटिक कॉमेडी, जिसमें 1 लॉटरी बदलती है पूरी कहानी, चमकती है पूरे गांव की किस्मत


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अक्षय कुमार और प्रियदर्शन ने साथ में कई फिल्मों में काम किया है. यह कॉमेडी फिल्में सुपरहिट हुई हैं. हाल में आई भूत बंगला भी बॉक्स ऑफिस 100 करोड़ रुपए से ज्यादा का कलेक्शन कर चुकी है. लेकिन साल 2006 में प्रियदर्शन की एक ऐसी फिल्म आई, जिसमें अक्षय कुमार नहीं थे. फिल्म फिर सुपरहिट हुई. फिल्म की कहानी के सेंटर में लॉटरी का टिकट था.

प्रियदर्शन ने ‘हेरा फेरा’, ‘भूल भुलैया’ जैसी कॉमेडी फिल्मों को डायरेक्ट किया और स्टार डायरेक्टर बन गए. ‘हंगामा’, ‘हलचल’ और ‘हेरा फेरी’ के अलावा उनकी एक और चर्चित फिल्म रही, जिसे बहुत कम लोग जानते हैं. साल 2006 में आई यह फिल्म ग्रामीण परिवेश में बनाई गई थी. यह फिल्म बॉक्स ऑफिस ब्लॉकबस्टर साबित हुई थी. महज 7 करोड़ रुपए में बनी इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर 42 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया था. (फिल्म पोस्टर/यूट्यूब थंबनैल)

Malamaal Weekly

इस फिल्म का नाम ‘मालामाल वीकली’ है. कॉमेडी फिल्मों की बात हो और ‘मालामाल वीकली’ का नाम न आए, ऐसा मुश्किल है. प्रियदर्शन के डायरेक्शन में बनी यह फिल्म ग्रामीण भारत की पृष्ठभूमि पर आधारित एक ऐसी कहानी है, जिसमें लालच, किस्मत और हास्य का जबरदस्त मिश्रण देखने को मिलता है. (फिल्म पोस्टर/यूट्यूब थंबनैल)

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कहानी एक छोटे से गांव लाहौली के इर्द-गिर्द घूमती है, जहां के लोग बेहद गरीब हैं और किसी चमत्कार का इंतजार करते रहते हैं. गांव में गरीबी इतनी ज्यादा है कि लोग अपनी रोजमर्रा की जरूरतें भी मुश्किल से पूरी कर पाते हैं. ऐसे में एक दिन गांव के एक आदमी लॉटरी टिकट खरीदता है और यहीं से कहानी में बड़ा ट्विस्ट आता है. (फिल्म पोस्टर/यूट्यूब थंबनैल)

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‘मालामाल वीकली’ में लीडर रोल लोटन का है, जो रितेश देशमुख ने जताया है. लोटन गांव में एक छोटे-मोटे काम करने वाला सीधा-सादा युवक है. उसे पता चलता है कि गांव के जिस आदमी ने लॉटरी टिकट खरीदा था, वह मर चुका है—लेकिन उसकी टिकट पर करोड़ों की लॉटरी लग चुकी है. अब समस्या यह है कि अगर यह बात सबको पता चल गई, तो पैसे पर झगड़ा और बवाल होना तय है. (फिल्म पोस्टर/यूट्यूब थंबनैल)

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लोटन अपने दोस्त और गांव के कुछ लोगों के साथ मिलकर एक योजना बनाता है कि इस लॉटरी के पैसे को कैसे अपने कब्जे में लिया जाए. लेकिन जैसे-जैसे वे इस प्लान को अंजाम देने की कोशिश करते हैं, कहानी में नए-नए मोड़ आते जाते हैं और हालात और ज्यादा उलझते जाते हैं. (फिल्म पोस्टर/यूट्यूब थंबनैल)

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फिल्म में परेश रावल का किरदार लीलाराम का है, जो बेहद मजेदार है, जो हर स्थिति में अपने फायदे की सोचता है. वहीं ओमपुरी बलवंत के रोल में हैं, जिनका मासूम लेकिन चालाक अंदाज दर्शकों को खूब हंसाता है. इनके अलावा असरानी और राजपाल जैसे कलाकार भी फिल्म में जबरदस्त कॉमिक टाइमिंग लेकर आते हैं. (फिल्म पोस्टर/यूट्यूब थंबनैल)

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जैसे-जैसे कहानी आगे बढ़ती है, गांव के हर व्यक्ति को इस लॉटरी के बारे में शक होने लगता है. हर कोई किसी न किसी तरह उस पैसे को हासिल करना चाहता है. नतीजा यह होता है कि एक के बाद एक झूठ, धोखा और चालबाजी का सिलसिला शुरू हो जाता है. लोग एक-दूसरे को बेवकूफ बनाने में लगे रहते हैं, और यही स्थिति फिल्म को बेहद हास्यास्पद बना देती है. फिल्म की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें हास्य सिर्फ डायलॉग्स से नहीं, बल्कि सिचुएशनसे पैदा होता है. (फिल्म पोस्टर/यूट्यूब थंबनैल)

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एक छोटी सी बात कैसे बड़ी समस्या बन जाती है, और फिर उसे छिपाने के लिए लोग और बड़ी गलतियां करते जाते हैं—यही फिल्म की कॉमिक ताकत है. क्लाइमैक्स में हालात इतने बिगड़ जाते हैं कि सच्चाई छिपाना मुश्किल हो जाता है. अंत में यह दिखाया जाता है कि लालच इंसान को कैसे उलझनों में फंसा देता है और कभी-कभी जो चीज हमें आसानी से मिल सकती है, वही हमारी गलतियों की वजह से हाथ से निकल जाती है. (फिल्म पोस्टर/यूट्यूब थंबनैल)

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हाथरस में सरसों के तेल का टैंकर पलटा: लोग डिब्बों में भरकर ले गए, सीने में दर्द के बाद चालक ने खोया नियंत्रण – Hathras News




हाथरस-बरेली रोड पर हाथरस जंक्शन कोतवाली क्षेत्र में आज बुधवार की सुबह करीब 3 बजे के लगभग सरसों के तेल से भरा एक टैंकर पलट गया। यह घटना गांव सलेमपुर के पास हुई, जब टैंकर जयपुर से बरेली जा रहा था। टैंकर पलटने से उसमें भरा तेल सड़क और आसपास के खेतों में फैल गया। इससे कुछ देर के लिए यातायात बाधित हुआ और मौके पर लोगों की भीड़ जमा हो गई। छ लोग बर्तनों में भरकर तेल ले गए। बताया जा रहा है कि टैंकर चालक को अचानक सीने में दर्द हुआ, जिसके कारण वह वाहन पर नियंत्रण खो बैठा और टैंकर असंतुलित होकर पलट गया। चालक को इलाज के लिए एक अस्पताल में भर्ती कराया गया। सूचना मिलने पर पुलिस तत्काल मौके पर पहुंची। पुलिस ने यातायात को सुचारु कराया और स्थिति को नियंत्रित किया।



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रोजगार सहायक सस्पेंड, रिश्वतखोरी के गंभीर आरोप: संबल और आवास योजना में शिकायत के बाद हुई कार्रवाई – Maihar News




मैहर जिला की ग्राम पंचायत घोरबई में पदस्थ ग्राम रोजगार सहायक मुकेश कुमार तिवारी को निलंबित कर दिया गया है। उन पर संबल योजना और प्रधानमंत्री आवास योजना समेत कई सरकारी योजनाओं में रिश्वत लेने के गंभीर आरोप लगे हैं। सीईओ के आदेश पर हुई कार्रवाई यह कार्रवाई सतना जिला जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी शैलेंद्र सिंह के निर्देश पर की गई है। आदेश के तहत उन्हें तुरंत काम से हटा दिया गया है और जनपद पंचायत मैहर कार्यालय में अटैच किया गया है। साथ ही, उनके वेतन का सिर्फ 50 प्रतिशत ही देने के निर्देश भी जारी किए गए हैं। शिकायत के बाद खुला मामला यह मामला घोरबई के रहने वाले दिलीप पटेल की शिकायत के बाद सामने आया। उन्होंने आरोप लगाया कि संबल कार्ड बनवाने के नाम पर उनसे 3500 रुपये लिए गए। शिकायत के साथ उन्होंने ऑनलाइन पेमेंट के स्क्रीनशॉट और धमकी की ऑडियो रिकॉर्डिंग भी दी थी। अन्य ग्रामीणों ने भी लगाए आरोप गांव के अन्य लोगों ने भी आरोप लगाया है कि रोजगार सहायक संबल योजना के लाभ दिलाने के लिए 15-15 हजार रुपये तक वसूलते थे। ग्रामीणों का कहना है कि बिना पैसे दिए कोई काम नहीं होता था और प्रधानमंत्री आवास योजना जैसी योजनाओं में भी पैसे मांगे जाते थे। यह मामला सोशल मीडिया पर भी चर्चा में रहा। संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर निलंबित प्रशासन ने पहले रोजगार सहायक को नोटिस देकर जवाब मांगा था, लेकिन संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उन्हें निलंबित कर दिया गया। अब पूरे मामले की जांच के लिए एक अधिकारी नियुक्त किया गया है, जिसे एक महीने के भीतर रिपोर्ट देनी होगी।



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सिकंदर हत्याकांड का मुख्य आरोपी राजकोट से गिरफ्तार: पिछले साल होली की रात मारी थी गोली, लोकेशन ट्रैक कर आरोपी तक पहुंची पुलिस – Bhojpur News




भोजपुर के टाउन थाना क्षेत्र में इनामी सिकंदर उर्फ अजय शंकर हत्याकांड में पुलिस ने गुजरात के राजकोट से गिरफ्तारी की है। गिरफ्तार आरोपी की पहचान टाउन थाना क्षेत्र के बिंद टोली निवासी विशाल बिंद के रूप में हुई है। जो लंबे सयम से फरार था। पुलिस के अनुसार, विशाल बिंद हत्याकांड के अलावा शराब से जुड़े एक अन्य मामले में भी वांछित था। टाउन थाना इंस्पेक्टर देवराज राय ने बताया कि आरोपी का आपराधिक इतिहास भी रहा है। 2023 में हिमांशु शर्मा उर्फ यश शर्मा को गोली मारने के मामले में वह जेल जा चुका है। इस बार उसकी गिरफ्तारी तकनीकी साक्ष्यों और लोकेशन ट्रैकिंग के आधार पर संभव हो सकी। ट्रांजिट रिमांड पर लेगी पुलिस भोजपुर पुलिस की एक विशेष टीम आरोपी को ट्रांजिट रिमांड पर लेने के लिए राजकोट रवाना हो चुकी है। पुलिस का कहना है कि सिकंदर हत्याकांड की जांच के दौरान ही विशाल बिंद का नाम सामने आया था, जिसके बाद से उसकी तलाश की जा रही थी। पिछले साल होली की रात वारदात हुई थी 15 मार्च 2025 को होली की रात करीब 9 बजे वारदात हुई थी। उजियार टोला निवासी शुभम यादव उर्फ राहुल यादव अपने दोस्तों दशई कुमार और सिकंदर उर्फ अजय शंकर के साथ बाइक से घर लौट रहा था। इसी दौरान बिंद टोली स्थित संजू ठाकुर के घर के पास पहले से घात लगाए हमलावरों ने तीनों पर फायरिंग कर दी थी। इस हमले में सिकंदर बिंद की मौके पर ही मौत हो गई थी, जबकि शुभम यादव गंभीर रूप से घायल हो गया था। घायल शुभम यादव के बयान के आधार पर दर्ज प्राथमिकी में बिंद टोली के पांच लोगों संजू ठाकुर, कैलाश ठाकुर, सूरज ठाकुर उर्फ जान, गोलू ठाकुर उर्फ अर्जुन और हिमांशु शर्मा उर्फ यश को नामजद किया गया था। पुलिस ने सभी आरोपितों को पहले ही गिरफ्तार कर लिया था। प्राथमिकी में यह बात सामने आई थी कि शराब बिक्री का विरोध करने और पुलिस मुखबिरी के संदेह में इस वारदात को अंजाम दिया गया था।



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गजब की यूनिवर्सिटी! पढ़ाई योग-पत्रकारिता की करवाई और डिग्री ‘लॉ’ की पकड़ा दी


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PDUSU Degree Controversy: सीकर की शेखावाटी यूनिवर्सिटी ने योग और पत्रकारिता के स्टूडेंट्स को ‘लॉ डिपार्टमेंट’ की डिग्री थमा दी. इस बड़ी लापरवाही से स्टूडेंट्स का भविष्य संकट में है. यूनिवर्सिटी ने इसे तकनीकी गलती बताकर सुधारने का भरोसा दिया है. जानिए पूरा मामला.

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PDUSU Degree Controversy: सीकर यूनिवर्सिटी का डिग्री कांड चर्चा में है

नई दिल्ली (PDUSU Degree Controversy). किसी भी स्टूडेंट के लिए उसकी डिग्री सबसे कीमती होती है. जरा सोचिए कि आप 3 साल तक किसी कोर्स की पढ़ाई कर रहे हैं और डिग्री किसी दूसरे कोर्स की पकड़ा दी जाए, जिसकी ए, बी, सी, डी तक नहीं मालूम. राजस्थान की एक यूनिवर्सिटी में ऐसा ही मामला सामने आया है. योग के आसन और पत्रकारिता की बारीकियां समझने वालों को डिग्री मिली कानून विभाग की. यह मामला है राजस्थान के सीकर स्थित पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय (PDUSU) की.

दीन दयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय के इस कारनामे ने सैकड़ों स्टूडेंट्स का भविष्य अधर में लटक दिया है. विश्वविद्यालय की इस भारी लापरवाही से शिक्षा जगत में हड़कंप मच गया है. योग और पत्रकारिता जैसे विषयों की पढ़ाई करने वाले स्टूडेंट्स जब डिग्री लेने पहुंचे तो उनके होश उड़ गए. कड़ी मेहनत के बाद मिली सफलता का जश्न चिंता में बदल गया, जब उन्होंने देखा कि उनकी मेहनत पर कानून की डिग्री का ठप्पा लगा दिया गया है. यह सिर्फ टाइपिंग मिस्टेक नहीं, बल्कि यूनिवर्सिटी के सिस्टम की बड़ी चूक है.

योग सीखा, पत्रकार बने… लेकिन डिग्री मिली वकील वाली!

सीकर की शेखावाटी यूनिवर्सिटी ने हाल ही में विभिन्न कोर्सेस के दीक्षांत समारोह और डिग्री बांटने का काम शुरू किया था, इसमें योग विज्ञान और पत्रकारिता और जनसंचार विभाग के स्टूडेंट्स भी शामिल थे. जब छात्रों ने अपनी ओरिजिनल डिग्री खोलकर देखी तो ऊपर विभाग के नाम की जगह ‘विधि विभाग’ (Department of Law) छपा हुआ था. सीकर की शेखावाटी यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट्स अपने हाथों में लॉ की डिग्री देखकर चौंक गए. मामले की शिकायत हुई तो यूनिवर्सिटी को अपनी गलती का अहसास हुआ.

प्रशासन ने टेक्नोलॉजी पर डाला दोष

इस गड़बड़ी के सामने आते ही विश्वविद्यालय परिसर में हंगामा शुरू हो गया. स्टूडेंट्स का कहना है कि अगर वे इस डिग्री को लेकर कहीं नौकरी के लिए जाते हैं तो उन्हें फर्जी घोषित कर दिया जाएगा. दूसरी तरफ, विश्वविद्यालय प्रशासन ने इसे तकनीकी खामी और प्रिंटिंग एरर बताया है. अधिकारियों का कहना है कि डेटा फीडिंग या प्रिंटिंग सॉफ्टवेयर में गड़बड़ी की वजह से पत्रकारिता और योग के स्टूडेंट्स की फाइल लॉ डिपार्टमेंट के फॉर्मेट में प्रिंट हो गई.

स्टूडेंट्स की बढ़ी मुसीबत

यूनिवर्सिटी की डिग्री किसी भी स्टूडेंट के करियर का सबसे महत्वपूर्ण दस्तावेज होती है. इस यूनिवर्सिटी में पढ़ाई कर रहे स्टूडेंट्स का तर्क है कि इस गलती की वजह से उनकी आगे की पढ़ाई और सरकारी नौकरियों के आवेदन में देरी होगी. कई स्टूडेंट्स ने तो अन्य संस्थानों में एडमिशन के लिए अपनी डिग्रियां जमा भी कर दी थीं, जिन्हें अब वापस लेकर सुधारवाना पड़ेगा. यह न केवल मानसिक तनाव है बल्कि स्टूडेंट्स के समय और पैसे की बर्बादी भी है.

अब आगे क्या होगा?

सीकर की शेखावाटी यूनिवर्सिटी ने अपनी गलती स्वीकार करते हुए आश्वासन दिया है कि सभी प्रभावित स्टूडेंट्स को नई और सही डिग्रियां जारी की जाएंगी. सभी स्टूडेंट्स को निर्देश दिया गया है कि वे अपनी गलत डिग्री यूनिवर्सिटी ऑफिस में सरेंडर करें, जिससे उन्हें संशोधित सर्टिफिकेट मिल सके. हालांकि, इस पूरी प्रक्रिया में कितना समय लगेगा, इसे लेकर स्टूडेंट्स अभी भी असमंजस में हैं.

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Deepali PorwalSenior Sub Editor

Deepali Porwal is a seasoned bilingual journalist with 11 years of experience in the media industry. She currently works with News18 Hindi, focusing on the Education and Career desk. She is known for her versat…और पढ़ें



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बंगाल में BJP जीती तो बांग्लादेश में सत्ताधारी पार्टी खुश: कहा- रिश्ते मजबूत होंगे, ममता बनर्जी की वजह से तीस्ता नदी समझौता नहीं हो पाया


ढाका10 मिनट पहले

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बांग्लादेश की सत्ताधारी पार्टी BNP ने पश्चिम बंगाल में BJP की जीत पर खुशी जताई है। न्यूज एजेंसी ANI से बात करते हुए BNP के सूचना सचिव अजीजुल बारी हेलाल ने BJP को जीत की बधाई दी और कहा कि इससे भारत-बांग्लादेश संबंध मजबूत हो सकते हैं।

उन्होंने ममता बनर्जी सरकार पर तीस्ता जल बंटवारे समझौते में देरी करने का आरोप लगाया और कहा कि वह इसमें सबसे बड़ी रुकावट थी। उन्होंने दावा किया कि यह समझौता बांग्लादेश सरकार और मोदी सरकार दोनों ही चाहते थे।

हेलाल ने उम्मीद जताई कि सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व में बनी सरकार भारत और बांग्लादेश के रिश्तों को बेहतर बनाएगी और तीस्ता समझौते को आगे बढ़ाने में मदद करेगी।

उन्होंने कहा कि भारत के राज्यों में बांग्लादेश के साथ सबसे लंबी सीमा पश्चिम बंगाल की ही लगती है। इसलिए वहां की राजनीति का असर सीधे दोनों के संबंधों पर पड़ता है। वहां सत्ता बदलना दोनों देशों के लिए अच्छा है। इससे दोनों देशों के बीच सीमा मुद्दों पर भी सुधार हो सकता है।

तीस्ता नदी का 50% पानी चाहता है बांग्लादेश

तीस्ता नदी हिमालय के पाहुनरी ग्लेशियर से निकलती है। यह सिक्किम से पश्चिम बंगाल होते हुए बांग्लादेश जाती है और बाद में ब्रह्मपुत्र में मिल जाती है। यह नदी कुल 414 किलोमीटर का रास्ता तय करती है। इस नदी से बांग्लादेश के 2 करोड़ और भारत के 1 करोड़ लोगों का जीवनयापन जुड़ा है।

इस लंबी यात्रा के दौरान तीस्ता नदी की 83% यात्रा भारत में और 17% यात्रा बांग्लादेश में होती है। भारत और बांग्लादेश के बीच तीस्ता नदी के पानी के बंटवारे को लेकर कई सालों से विवाद है।

बांग्लादेश तीस्ता के 50 फीसदी पानी पर अधिकार चाहता है। जबकि भारत खुद 55 फीसदी पानी चाहता है। जानकारों के मुताबिक अगर तीस्ता नदी जल समझौता होता है तो पश्चिम बंगाल नदी के पानी का मनमुताबिक इस्तेमाल नहीं कर पाएगा। यही वजह है कि ममता बनर्जी इसे टालती रहीं।

लंबे समय से अटका है जल बंटवारा समझौता

1815 में नेपाल के राजा और ईस्ट इंडिया कंपनी के बीच तीस्ता नदी के पानी को लेकर समझौता हुआ था। तब राजा ने नदी के बड़े हिस्से का नियंत्रण अंग्रेजों को सौंप दिया। बांग्लादेश के आजाद होने के 12 साल बाद 1983 में दोनों देशों के बीच अंतरिम समझौता हुआ।

इसमें बांग्लादेश को 36% और भारत को 39% पानी देने की बात थी, जबकि 25% हिस्से पर बाद में फैसला होना था। लेकिन यह समझौता भी पूरी तरह लागू नहीं हो पाया। बाद में बांग्लादेश ने कहना शुरू किया कि उसे जितना पानी मिल रहा है, वो उसकी जरूरत के हिसाब से कम है। सूखे में उसका इतने पानी से गुजारा नहीं हो पाता है।

साल 2008 में शेख हसीना के पीएम बनने के बाद से बांग्लादेश की मांग तेज होने लगी। 2011 में जब कांग्रेस की सरकार थी तब भारत, तीस्ता नदी जल समझौता पर दस्तखत करने को तैयार हो गया था। इसमें बांग्लादेश को 37.5% और भारत को 42.5% पानी देने की बात थी। बाकी 20% किसी देश को देने के लिए तय नहीं था। इसे ‘अनएलोकेटेड’ या रिजर्व पानी माना गया था।

ये हिस्सा नदी के प्राकृतिक बहाव, पर्यावरण और जरूरत के हिसाब से छोड़ा जाता है, ताकि नदी सूख न जाए और ईकोसिस्टम बना रहे। हालांकि, तब ममता बनर्जी की नाराजगी की वजह से मनमोहन सरकार को अपने कदम पीछे खींचने पड़े थे।

साल 2014 में जब नरेंद्र मोदी PM बने। एक साल बाद वो बंगाल की CM ममता बनर्जी के साथ बांग्लादेश गए। इस दौरान दोनों नेताओं ने बांग्लादेश को तीस्ता के बंटवारे पर एक सहमति का यकीन दिलाया था। लेकिन 11 साल बीतने के बावजूद अब तक तीस्ता नदी जल समझौते का समाधान नहीं निकल पाया है।

ममता सरकार इस समझौते का विरोध क्यों करती रही

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी लगातार तीस्ता और फरक्का जल बंटवारे के समझौतों का विरोध करती रही हैं। उनके मुताबिक इसका सीधा असर राज्य के लोगों की आजीविका पर पड़ेगा।

उनका तर्क है कि पहले ही तीस्ता नदी में पानी का प्रवाह कम हो चुका है, ऐसे में अगर बांग्लादेश के साथ अतिरिक्त पानी साझा किया गया तो उत्तर बंगाल में सिंचाई और पीने के पानी का संकट गहरा सकता है। साथ ही फरक्का बैराज से पानी मोड़ना कोलकाता पोर्ट की नौवहन क्षमता बनाए रखने के लिए जरूरी माना जाता है।

ममता सरकार का यह भी कहना था कि इस तरह के संवेदनशील फैसलों में राज्य सरकार को भरोसे में लिए बिना कोई समझौता नहीं होना चाहिए, क्योंकि सबसे ज्यादा असर स्थानीय लोगों पर ही पड़ता है।

प्रधानमंत्री मोदी, बांग्लादेशी पीएम शेख हसीना और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ये तस्वीर 2016 की है। तीनों शांति निकेतन में एक कार्यक्रम में पहुंचे थे।

प्रधानमंत्री मोदी, बांग्लादेशी पीएम शेख हसीना और बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की ये तस्वीर 2016 की है। तीनों शांति निकेतन में एक कार्यक्रम में पहुंचे थे।

भारत-बांग्लादेश में सिर्फ 2 नदियों पर समझौते हुए

भारत और बांग्लादेश के बीच करीब 54 साझा नदियां हैं। लेकिन अब तक सिर्फ दो बड़ी नदियों पर ही औपचारिक समझौते हो पाए हैं। पहला गंगा नदी पर 1996 में हुआ समझौता और दूसरा कुशियारा नदी पर हाल का समझौता।

गंगा जल संधि 1996 30 साल के लिए किया गया था, जिसकी अवधि 2026 में पूरी हो रही है। यानी अब इस पर दोबारा बातचीत की जरूरत पड़ेगी।

तीस्ता नदी पर अब तक कोई स्थायी समझौता नहीं हो पाया है और यह सबसे बड़ा विवाद बना हुआ है। जब भारत किसी नदी पर समझौता नहीं कर पाता, तो बांग्लादेश में यह धारणा बनती है कि भारत अपनी घरेलू राजनीति, खासकर राज्यों के दबाव की वजह से फैसले टाल रहा है।

दूसरी तरफ भारत के लिए यह संतुलन का मामला है, क्योंकि उसे एक तरफ पड़ोसी देश के साथ रिश्ते संभालने होते हैं और दूसरी तरफ अपने राज्यों, जैसे पश्चिम बंगाल की जरूरतों का भी ध्यान रखना पड़ता है।

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कर्ज से परेशान पाकिस्तान ने शराब एक्सपोर्ट शुरू किया:गैर मुस्लिम देशों को सप्लाई, 50 साल पहले इस्लाम का हवाला देकर बैन किया था

कर्ज से जूझ रहे पाकिस्तान ने 50 साल बाद फिर से दूसरे देशों को शराब बेचना शुरू कर दिया है। देश की इकलौती लोकल कंपनी मरी ब्रूअरी ने अप्रैल 2026 में ब्रिटेन, जापान, पुर्तगाल और थाईलैंड जैसे देशों को बीयर और अन्य अल्कोहलिक ड्रिंक्स एक्सपोर्ट की हैं।

कंपनी के एक्सपोर्ट मैनेजर रमीज शाह के मुताबिक, अभी शुरुआत में विदेशों में नेटवर्क बनाया जा रहा है और आगे चलकर प्रोडक्शन बढ़ाने की योजना है।

पाकिस्तान में मुस्लिम आबादी के लिए करीब 50 साल पहले इस्लामिक नियमों का हवाला देकर शराब पर बैन लगाया गया था। इसके बाद शराब का एक्सपोर्ट भी बंद हो गया था। हालांकि, पाकिस्तान में गैर-मुस्लिमों के लिए कुछ छूट थी। पूरी खबर पढ़ें…

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अनानास छीलने काटने का सही तरीका क्या है? फॉलो करें ये स्टेप्स, जानें फायदे


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How to peel and cut pineapple: गर्मियों में अनानास खूब मिलता है. खाने में ये बेहद स्वादिष्ट और पौष्टिक फल है, जो कई तरह के शरीर को फायदे भी पहुंचाता है. सबसे मुश्किल काम है अनानास को सही तरीके से काटना. इसका छिलका छीलने के बाद भी इसके गूदे में छोटे-छोटे काले आंख वाले भाग बचे रहते हैं, जो कई बार गले में खुजली करते हैं. आप यहां बताए गए आसान से तरीके से अनानास काट सकते हैं.

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अनानास काटने का सही तरीका.

How to peel and cut pineapple: फलों में अनानास तो काफी लोगों को खाना पसंद होता है, लेकिन जब बात आती है इसे काटने की तो सभी हाथ पीछे कर लेते हैं. कुछ लोग दुकानदार से कटवा लेते हैं, लेकिन जब आप साबुत अनानास ले आते हैं तो काटने का सही तरीका ही नहीं पता चलता. दरअसल, अनानास के छिलके में छोटे-छोटे कांटे जैसे होते हैं, जो सही से नहीं निकल पाते हैं. कई बार ये गले में जाकर खुजली सी करते हैं. अब अनानास खाने पर खुजली ना हो, इसके लिए इसे सही तरीके से छीलना और काटना आना चाहिए. चलिए आपको यहां अनानास काटने और छीलने का सही तरीका जानते हैं. इसके बारे में शेफ कुणाल कपूर ने एक वीडियो अपने इंस्टाग्राम अकाउंट पर शेयर की है. जानिए किस तरह से काटने का सही तरीका वे बता रहे हैं.

अनानास काटने का सही तरीका क्या है? (Ananas katne ka sahi tarika)
-सबसे पहले अनानास का ऊपर लगे पत्तों (क्राउन) को काटकर निकाल दें. अब चाकू से उसके बेस को काटकर निकाल दें. इसे काटने के लिए बड़ा चाकू रहेगा तो ये आराम से कट जाएगा.

-अब अनानास को सीधा खड़ा करें और बीच से आधे हिस्से में काट कर अलग कर दें. पहले एक तरफ से लंबाई में चाकू चलाकर अनानास को पतले आकार में काटते जाएं. फिर उसे दूसरी तरफ से काटें ताकि छोटे-छोटे टुकड़े में अनानास कट जाए. आप ये वीडियो देख कर समझ सकते हैं.

-टुकड़ों को निकालें और उस पर लगे हुए छिलके को चाकू से छील कर निकाल दें. इससे छिलके आसानी से निकल जाएंगे. अब आप चाहें तो और छोटे-छोटे टुकड़ों में इसे काट सकते हैं.

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45 की उम्र में डेब्यू कर रही कपूर फैमिली की दुलारी, 1 ही फिल्म में दिखेगी 3 जनरेशन


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ऋषि कपूर और नीतू कपूर की बेटी रिद्धिमा साहनी कपूर 45 साल की उम्र में एक्टिंग डेब्यू कर रही हैं. वह फिल्म ‘दादी की शादी’ से डेब्यू करने जा रही हैं. आशीष आर. मोहन ने इसे डायरेक्ट किया है.इसमें उनकी बेटी समारा भी हैं. कपिल शर्मा, सादिया खातिब और नीतू कपूर स्टारर यह फिल्म 8 मई को सिनेमाघरों में रिलीज हो रही है. रिद्धिमा ने अपने डेब्यू को लेकर बात की है.

फिल्म ‘दादी की शादी’ से कपूर खानदान की लाडली रिद्धिमा साहनी कपूर डेब्यू करने जा रही हैं. इतने सालों से बिजनेस करने वालीं रिद्धिमा 45 साल की उम्र में नीतू कपूर और कपिल शर्मा के साथ लाइमलाइट में आने के लिए तैयार हैं. इस फिल्म के साथ वह कपूर परिवार की सबसे उम्रदराज डेब्यूटेंट बन गई हैं. ऋद्धिमा के लिए यह डेब्यू काफी इमोशनलभरा है. क्योंकि इस फिल्म में वह पहली बार अपनी बेटी समारा के साथ स्क्रीन शेयर कर रही हैं. (फोटो साभारः इंस्टाग्राम @ridhimakapoorsahni)

riddhima kapoor sahni

द स्क्रीन के मुताबिक, ऋद्धिमा कूपर नेबताया कि पिछले साल 45 साल की उम्र में पहली बार फिल्म सेट पर कैमरे का सामना करना उनके लिए कैसा रहा. उन्होंने अपनी बेटी समारा की फिल्म में छोटी सी झलक के बारे में भी बात की. ऋद्धिमा की शादी बिजनेसमैन भरत साहनी से हुई है और उनकी एक बेटी समारा है. (फोटो साभारः इंस्टाग्राम @ridhimakapoorsahni)

riddhima kapoor

ऋद्धिमा कपूर साहनी ने कहा, “यह अनुभव वाकई में बहुत ही अनोखा और इमोशनल है. ऐसा लगता है जैसे सब कुछ एक सर्कल में पूरा हो गया हो. मुझे पता है कि मेरे पापा हमेशा मेरे साथ हैं, मुझे आशीर्वाद देते हैं, चाहे मैं कुछ भी करूं. यही सोच मुझे बहुत ताकत और सुकून देती है…” (फोटो साभारः इंस्टाग्राम @ridhimakapoorsahni)

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riddhima kapoor

ऋद्धिमा कपूर साहनी ने कहा, “सच कहूं तो सबसे बड़ी चुनौती इस उम्र में एकदम नई दुनिया में कदम रखना था. एक नई शुरुआत में थोड़ी असुरक्षा तो होती है, लेकिन साथ ही बहुत एक्साइटमेंट भी है.” (फोटो साभारः इंस्टाग्राम @ridhimakapoorsahni)

Ridhima daughter

ऋद्धिमा कपूर साहनी ने यह भी बताया कि जब वह इस वेडिंग कॉमेडी- ‘दादी की शादी’ की शूटिंग कर रही थीं, तब उन्होंने पहली बार अपनी बेटी को दिल्ली वाले घर में अकेला छोड़ा था. इससे पहले उन्होंने साल 2019 में ऋषि कपूर के न्यूयॉर्क में कैंसर ट्रीटमेंट के दौरान भी छोड़ा था. (फोटो साभारः इंस्टाग्राम @ridhimakapoorsahni)

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ऋद्धिमा कपूर साहनी का इस फिल्म के लिए एक खास ऑन-स्क्रीन मोमेंट भी है, जब वह अपनी मां नीतू और बेटी समारा के साथ गाने ‘सेंटी’ में नजर आएंगी. जहां समारा कैमरे और पैपराजी के सामने काफी कंफर्टेबल है, वहीं ऋद्धिमा को अभी भी यह नहीं पता कि उनका या उनकी बेटी का यह डेब्यू आगे चलकर फुल-टाइम एक्टिंग करियर में बदलेगा या नहीं. (फोटो साभारः इंस्टाग्राम @ridhimakapoorsahni)

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ऋद्धिमा कपूर साहनी ने अपनी बेटी के बारे में बात करते हुए कहा, “गाने में उसका रोल छोटा है लेकिन बहुत प्यारा है. एक मां के तौर पर अपनी बेटी को स्क्रीन पर देखना बहुत गर्व और इमोशनल मोमेंट है.” (फोटो साभारः इंस्टाग्राम @ridhimakapoorsahni)

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ऋद्धिमा ने पहली बार कैमरे का सामना तब किया था जब प्रोड्यूसर करण जौहर ने उन्हें अपने पॉपुलर रियलिटी शो ‘फैब्युलस लाइव्स ऑफ बॉलीवुड वाइव्स’ के लिए चुना था. ऋद्धिमा ने माना कि इस शो के लिए कैमरे के सामने आना उनके लिए आसान और कंफर्टेबल बना, जिससे फिल्मों में आना थोड़ा आसान हो गया. (फोटो साभारः इंस्टाग्राम @ridhimakapoorsahni)

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कोटा–रावतभाटा रूट पर खटारा बसों में सफर को मजबूर यात्री: ब्रेक फेल और बीच रास्ते खराब बसें,स्टाफ की कमी से ठप बस सेवा, डेली अप डाउन वाले सुबह घंटों इंतजार करते – Kota News




कोटा से रावतभाटा के बीच चलने वाली रोडवेज बसों की हालत को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं। भीषण गर्मी के बीच बसों का बार-बार खराब होना, ब्रेक फेल होने जैसी शिकायतों ने यात्रियों की चिंता बढ़ा दी है। रोजाना इस रूट पर सफर करने वाले लोग खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं और मजबूरी में जान हथेली पर रखकर यात्रा करने को मजबूर हैं। यात्रियों के मुताबिक, कई बार बसें बीच रास्ते में ही खराब हो जाती हैं। इस रूट पर कई जगह गहरी खाई भी है, ऐसे में ब्रेक काम नहीं करने जैसी स्थिति बड़े हादसे का कारण बन सकती है। यात्रियों ने बताया कि कई बार बसों के ब्रेक ने जवाब दे दिया, तो कभी इंजन बंद हो गया। इन हालातों में सफर करना किसी खतरे से कम नहीं है। स्थानीय निवासी बालकिशन गुलाटी ने आरोप लगाया कि कोटा डिपो की बसें “भगवान भरोसे” चल रही हैं। उनका कहना है कि बसों में न तो लाइट की सुविधा है और न ही तकनीकी स्थिति ठीक है। कई बार हादसे होते-होते बचे हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कुछ ड्राइवर शराब पीकर बस चलाते हैं, जिससे यात्रियों की जान और ज्यादा खतरे में पड़ जाती है। समस्या सिर्फ बसों की खराब स्थिति तक ही सीमित नहीं है, बल्कि स्टाफ की कमी भी बड़ा कारण बन रही है। कंडक्टरों की कमी के चलते हफ्ते में 2 से 3 दिन बसों का संचालन ही नहीं हो पाता। पिछले तीन दिनों से सुबह चलने वाली बसें बंद रहीं, जिससे डेली अप डाउन करने वाले यात्रियों को घंटों तक बस स्टैंड पर इंतजार करना पड़ा। आसपास के दुकानदारों का कहना है कि सुबह की बस कभी आती है तो कभी नहीं, जिससे लोगों की दिनचर्या प्रभावित हो रही है। इसका सबसे ज्यादा असर सुबह अप डाउन करने वाले लोगों को और मरीजों, जरूरी काम से आने-जाने वालों पर पड़ रहा है। यात्रियों ने बताया कि बस सुविधा नहीं मिलने के कारण उन्हें निजी गाड़ियों और टैक्सी का सहारा लेना पड़ता है, जिससे खर्च भी बढ़ता है और परेशानी भी। वहीं, जब इस मामले में रोडवेज अधिकारियों से बात की गई तो डिपो की ऑपरेशन मैनेजर श्वेता गुप्ता ने दावा किया कि कोटा से रावतभाटा के बीच रोज तीन बसें अप-डाउन कर रही हैं और सभी बसें फिट हैं। उन्होंने माना कि एक बस में तकनीकी खराबी आई थी, जिसे अब ठीक कर लिया गया है। रोडवेज प्रबंधक अजय मीणा ने बताया कि वर्तमान में 2012-13 मॉडल की करीब 14-15 बसें है जिनमें से कुछ बस इस रूट पर संचालित हो रही हैं। नई बसों को फिलहाल लंबी दूरी के रूट पर लगाया गया है, लेकिन अगले महीने तक 17 नई बसें आने की संभावना है, जिसके बाद इस रूट पर भी राहत मिल सकती है। उन्होंने यह भी कहा कि सभी बसों का डिपो में नियमित चेकअप किया जाता है। स्टाफ की कमी को लेकर भी अधिकारियों ने माना कि कंडक्टरों की कमी के चलते संचालन प्रभावित हुआ है। फिलहाल कुछ निजी कर्मचारियों की मदद ली जा रही है और आश्वासन दिया गया है कि अब रोजाना बसों का संचालन सुनिश्चित किया जाएगा।



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