Thursday, August 13, 2026
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राजधानी में ‘जैन जी’ का शक्ति-प्रदर्शन: लेडी कलेक्टर से परेशान हो गए मंत्रीजी; कोचिंग में हेलिकॉप्टर वाला ‘जुगाड़’ – Rajasthan News




नमस्कार, इन दिनों ‘जैन जी’ की चर्चा है। कॉकरोच पार्टी वाले नहीं, बाडमेर वाले मेवाराम जैन जी, जिन्होंने जयपुर में शक्ति प्रदर्शन कर दिया। अलवर में वनमंत्री जी कलेक्टर साहिबा के खिलाफ धरने पर बैठ गए और दौसा में कोचिंग संचालक ने छात्रों को बैठे-बिठाए हवाई सफर का अनुभव करा दिया। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. ‘जैन जी’ का शक्ति प्रदर्शन ये ‘जैन जी’ जनरेशन वाले नहीं हैं। ये मेवाराम जैन हैं। जो लालसा की रपटीली राह पर एक बार फिसल गए थे और जिनके वीडियो रसिकों तक पहुंच गए थे। भजन गायक और गीतकार हरिओम शरण ने एक भजन लिखा और गाया था। भजन था- मैली चादर ओढ़ के कैसे द्वार तुम्हारे आऊं। मेवाराम जी भी अभी तक यही सोचकर कतरा रहे थे। बाड़मेर से 3 बार विधायक रहे मेवाराम जैन की चादर पर उस घटना ने ऐसा दाग लगाया कि उनकी वैसी ही स्थिति हो गई, जैसे- लागा चुनरी में दाग छुपाऊं कैसे? लालसा का चक्कर ही ऐसा है कि बड़े-बड़े संत जेल की सजा काट रहे हैं। मेवाराम जैन किसी तरह उस घटना से बाहर निकल तो आए लेकिन छीछालेदर खूब हुई। कांग्रेस कमेटी के ही कुछ शरारती तत्वों ने शहरभर में उनके बड़े बड़े पोस्टर बनाकर टंगवा दिए थे। कुछ कार्यकर्ता चाहते थे कि मेवाराम की कांग्रेस में वापसी न हो। लेकिन मेवाराम कोशिश करते रहे। माफी मांगते रहे। चरित्र पर लगा दाग धोते रहे। ये धुल तो नहीं सकता, लेकिन वक्त के साथ हल्का जरूर पड़ जाता है। मेवाराम ने दोबारा जड़ें जमाई और कांग्रेस में वापसी की। अब निकाय चुनाव से पहले बाड़मेर से बड़ी संख्या में कार्यकर्ताओं-पदाधिकारियों-सरपंचों-समर्थकों को लेकर वे राजधानी पहुंचे। पूर्व सीएम अशोक गहलोत से मुलाकात की। गहलोत ने उनकी ‘पर्सनलिटी’ की तारीफ की। मेवाराम पीसीसी दफ्तर भी पहुंचे। जहां चीफ साहब ने उनको 4 बार का विधायक कहा। जबकि वे 3 बार के विधायक हैं। समर्थकों ने जब ‘4 बार के विधायक’ को दुरुस्त करने की कोशिश की तो डोटासरा बोले- एक बार ज्यादा बता रहा हूं तो आपको क्या दिक्कत? इस पर सब हंस पड़े। वैसे दिक्कत उनको हो सकती है जो पोस्टर लगाने वाले गुट में शामिल थे। 2. कलेक्टर साहिबा पर भड़के वनमंत्री धरने का फैशन चल रहा है। इसी फैशन के हिसाब से वनमंत्री ने भी बहती गंगा में हाथ धो लिए और धरने पर बैठ गए। उन्होंने धरने पर बैठने के लिए नगर निगम को चुना और विरोध करने के लिए कलेक्टर साहिबा को। मंत्रीजी बोले- कलेक्टर रुख अजीब सा है। उन्होंने कलेक्टर साहिबा के उद्देश के बारे में बताया- उसको समाज का भला नहीं करना है। यहां कलेक्टर बनकर लूटकर खाना है। इसके बाद मंत्रीजी के मुंह से गाली जैसा भी कुछ निकल गया। हालांकि कलेक्टर पर गुस्सा करने का यह उनका पहला मौका नहीं था। इससे पहले सर्दी के सीजन में वे तत्कालीन सीकर कलेक्टर पर भी गर्म हो गए थे। तब कलेक्टर की भूल यह थी कि कैंप से गायब अफसरों की हिमायत कर रहे थे। इसी में मारे गए। मंत्रीजी ने गरजकर आदेश दिया- इन चोरों को प्रोटेक्शन देने की जरूरत नहीं। अलवर में मामला सफाई कर्मियों को नियुक्ति पत्र देने का था। आरोप है कि नगर निगम कमिश्नर नियुक्ति पत्र टालते रहे। इस बीच कमिश्नर का ट्रांसफर ऑर्डर आ गया। इस पर सफाईकर्मी भड़क गए और बोले कि नियुक्ति पत्र देकर जाओ वरना नहीं जाने देंगे। चैंबर से उन्हें निकलने नहीं दिया। पुलिस ने उन्हें निकाला। सफाई कर्मी वनमंत्री के पास पहुंच गए। मंत्री ने कलेक्टर से नियुक्ति पत्र की बात की। वे बोलीं- कमिशनर साहब फोन नहीं उठा रहे। मैं किसी को यहां बुलाकर जॉइन नहीं करवा सकती। इसी पर मंत्रीजी भड़के। इतना भड़के कि अपनी ही सरकार से कलेक्टर को हटाने की मांग कर डाली। कुछ दिन पहले PCC चीफ साहब को भी SDM से दिक्कत हो गई थी। दो दिन बाद ही एसडीएम साहब का तबादला सीकर से करौली हो गया। ऐसे में मंत्रीजी को भी मांग पूरी होने की जबरदस्त उम्मीद है। 3. चलते-चलते… होनहार छात्रों को हेलिकॉप्टर की सैर कराने की खबरें सामने आती हैं। सरकारी स्कूलों के ऐसे कई टीचर हैं जिन्होंने अपने खर्चे पर होनहार छात्रों को हवाई सफर कराया। हर टीचर के पास इतना जुगाड़ नहीं होता। फिर भी हर शिक्षक चाहता है कि वह अपने शिष्यों को आसमान छूते देखे। ये अलग बात है कि कई शिष्य ‘आसमान छूना’ और ‘हवा में उड़ना’ मुहावरों को एक समझ लेते हैं। दौसा में एक कोचिंग संचालक का जन्मदिन था। अपने जन्मदिन पर संचालक चाहता था कि उसके स्टूडेंट हवा में उड़ने का अनुभव लें। इसलिए उसने एक प्रोग्राम अरेंज किया। जिसमें विधायक डीसी बैरवा को बुला लिया। छत पर सैकड़ों छात्रों को जुटा लिया। इसके बाद अशोक शर्मा खेड़ला को पेश कर दिया। अशोक किसी हवाई वाहन के पायलट नहीं थे। वे एक मिमिक्री कलाकार हैं, जो मुंह से हेलिकॉप्टर की आवाज निकालते हैं। संचालक महोदय का आदेश हुआ और कलाकार ने हेलिकॉप्टर की आवाज निकालने शुरू किया। दूर से पास आता हेलिकॉप्टर, पास से दूर जाता हेलिकॉप्टर, लैंड करता हेलिकॉप्टर, उड़ान भरता हेलिकॉप्टर। बच्चों ने बैठे-बैठे ही हवा की सैर का अनुभव ले लिया। इनपुट सहयोग- स्वप्निल सक्सेना (सीकर), धर्मेंद्र यादव (अलवर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।



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इमरान हाशमी फिट बॉडी के लिए 2 साल से कर रहे हैं ये काम, 47 की उम्र में ऐसा है फिटनेस रूटीन


अवारापन 2 फेम एक्टर इमरान हाशमी एक्टिंग के साथ फिटनेस के लिए भी जाने जाते हैं। इमरान टोन्ड बॉडी के लिए सख्त रूटीन अपनाते हैं, चलिए उनका डेली रूटीन और टिप्स आपको बताते हैं।

फिल्म आवारापन 2 के जरिए एक्टर इमरान हाशमी फिर से एक बार चर्चा में आने वाले हैं। उनके फैंस इस फिल्म को लेकर बेहद खुश हैं और उनकी एक्टिंग के साथ फिटनेस की भी खूब चर्चा हो रही है। इमरान हाशमी वैसे तो कई बार अपना फिटनेस रूटीन बता चुके हैं लेकिन हम आपको उनकी कुछ खास आदतों के बारे में बताएंगे। 47 साल के एक्टर फिटनेस के लिए सख्त रूटीन भी खुशी से अपना लेते हैं और फिर वही उनकी आदत बन जाती है। इमरान हाशमी ने एक बार इंटरव्यू में बताया था कि फिट बॉडी और सिक्स पैक एब्स के लिए वह 2 सालों से एक आदत अपना रहे हैं, जिससे उनकी पत्नी परेशान हो चुकी हैं। चलिए आपको एक्टर के फिटनेस रूटीन और आदतों के बारे में बताते हैं।

कंसिस्टेंसी है जरूरी

इमरान हाशमी का कहना है कि अगर आपको कुछ पाना है, तो उसके लिए हर दिन प्रयास करने होंगे। फिट बॉडी पाने के लिए भी यही शर्त है और इसलिए मैं कभी अपना वर्कआउट स्किप नहीं करता। वह रोजाना 1-2 घंटे जिम करते हैं, जिसमें कार्डियो, वेट ट्रेनिंग, पुश अप्स, रनिंग जैसी तमाम चीजें होती हैं। वह हफ्ते में 5 दिन लगातार वर्कआउट करते हैं और 2 दिन शरीर को रेस्ट देते हैं।

खाने को लेकर हैं बेहद सीरियस

इमरान हाशमी ने बताया था कि उनकी फिटनेस का क्रेडिट उनकी प्लेट को भी जाता है। वह हेल्दी फूड ही खाते हैं, फिर चाहे भले ही एक ही खाना बार-बार खाना पड़े। एक्टर लंच में चिकन कीमा, सलाद और शकरकंद खाते हैं। उन्होंने बताया कि पूरा चिकन नहीं खाया जा सकता लेकिन कीमा को पचाना काफी आसान होता है, तो वह प्रोटीन के लिए इसे खाते हैं। शकरकंद उबली होती है और सलाद एवोकाडो, ब्रसेल्स स्प्राउट्स, लेट्यूस, रॉकेट लीव्स और थोड़ा बाल्सामिक विनेगर मिलाकर बनाते हैं। उनके ट्रेनर ने बैलेंस प्लेट बनवाई है, जिसमें फाइबर, प्रोटीन, कार्ब्स सबकुछ है और शरीर के लिए परफेक्ट है।

2 साल से कर रहे हैं ये काम

अगर आपसे कहा जाए कि आपको एक ही खाना हर दिन खाना है, तो शायद आप 3-4 दिन खाने के बाद उससे ऊब जाएंगे लेकिन इमरान हाशमी के साथ ऐसा नहीं है। वह बीते 2 साल से लगातार चिकन कीमा, सलाद और शकरकंद खा रहे हैं। उनका लंच-डिनर हमेशा फिक्स होता है और इससे उनकी वाइफ भी बोर हो चुकी हैं। इमरान का कहना है कि फिटनेस के लिए मुझे प्रोटीन चाहिए और इस प्लेट से सब मिलता है, तो मैं हर दिन ये खाता हूं और अब ये आदत बन चुका है।

फिजिकल एक्टिविटीज पर भी फोकस

इमरान का कहना है कि सिर्फ वर्कआउट या फिर हेल्दी फूड से ही आप फिट नहीं होते, उसके लिए आपको फिजिकली एक्टिव भी रहना होगा। इसके लिए वह रनिंग, वॉक, साइकिलिंग, स्वीमिंग जैसी चीजें भी करते हैं। इससे शरीर एक्टिव बना रहता है और एनर्जी भी रहती है।

नींद से कोई समझौता नहीं

इमरान अपनी नींद हमेशा पूरी करते हैं। वह रात में करीब 10 बजे सो जाते हैं और सुबह 5-6 बजे उठ जाते हैं। उन्हें हर दिन 7-8 घंटे की नींद चाहिए। कुल मिलाकर इमरान ने खुद को फिट रखने के लिए कठिन रूटीन में ढाल लिया है और अब वही रूटीन उनकी आदत बन चुका है। फिटनेस के लिए इमरान के इस रूटीन को हर कोई फॉलो नहीं कर सकता।



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तीन साल में बना नोएडा का पहला स्काईवॉक: 45 करोड़ किए गए खर्च, 16 अगस्त से होगा शुरू, मेट्रो की दो लाइन को जोड़ेगा – Noida (Gautambudh Nagar) News



सेक्टर-51-52 मेट्रो को जोड़ने वाला स्काईवॉक।

नोएडा में लंबे इंतजार के बाद पहला स्काईवॉक 16 अगस्त तक शुरू हो जाएगा। यह स्काईवॉक सेक्टर-52 (ब्लू लाइन) और सेक्ट(एक्वा लाइन) मेट्रो स्टेशन को जोड़ेगा। इसके बनने से यात्रियों को सड़क पार नहीं करनी पड़ेगी और इंटरचेंज पहले से ज्यादा सुरक्षित हो जाएगा। क

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2023 में शुरू हुआ निर्माण इस परियोजना का निर्माण 2023 में शुरू कराया था। स्काईवॉक बनने के बाद दोनों मेट्रो स्टेशनों के बीच आने-जाने वाले हजारों यात्रियों को बड़ी राहत मिलेगी। अभी यात्रियों को स्टेशन के नीचे बने पैदल मार्ग से होकर जाना पड़ता है, जहां अक्सर भीड़ रहती है। इसके निर्माण के दौरान डिजाइन में कुछ तकनीकी बदलाव किए गए थे। स्काईवॉक को मेट्रो स्टेशन की लिफ्ट के सामने से जोड़ा गया है। इससे इसकी लंबाई बढ़ गई है।

6 मीटर चौड़ा और कई सुविधा स्काईवॉक करीब 6 मीटर चौड़ा है। जिससे यात्रियों की आवाजाही आसान रहेगी। स्काईवॉक पर बेहतर लाइटिंग, मजबूत रेलिंग और दिव्यांग यात्रियों के लिए सुगम पहुंच की व्यवस्था भी की गई है। इससे दोनों मेट्रो स्टेशनों के बीच इंटरचेंज अधिक सुरक्षित और सुविधाजनक बन जाएगा। नोएडा प्राधिकरण के सीईओ कृष्णा करूणेश ने बताया कि 16 अगस्त से स्काईवॉ के जरिए लोगों आ जा सकेंगे।



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इंजेक्शन के लिए अनिका की जंग: आखिरी रकम के लिए मां-बाप की दौड़ जारी, कोर्ट में देना है डॉक्यूमेंट्स – Indore News




दुर्लभ बीमारी से ग्रसित मासूम अनिका की इंजेक्शन के लिए जंग जारी है। माता-पिता रोजाना पैसा जमा करने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। अनिका का इलाज तभी ही संभव हो सकेगा जब अमेरिका से उसका इंजेक्शन आएगा। डॉलर और रुपए के एक्सचेंज रेट में बदलाव होने के कारण 9 करोड़ का इंजेक्शन 9.50 करोड़ से ज्यादा हो गया है। ऐसे में उनका संघर्ष भी बढ़ गया है। 9 महीनों से जारी है माता-पिता की क्राउड फंडिंग माता-पिता के संघर्ष की बात करें तो उनका इस संघर्ष को 9 महीने से भी ज्यादा हो चुके हैं। इंदौर से शुरू हुआ उनका ये संघर्ष उन्हें इंदौर के अलावा दूसरे राज्य तक ले गया। वहां भी उन्होंने क्राउड फंडिंग के माध्यम से अपनी बेटी के लिए पैसा जमा किया। इसके अलावा माता-पिता कई सिलेब्रिटी के पास पहुंचे और उनसे मदद की अपील के वीडियो तक बनवाकर उन्हें सोशल मीडिया पर पोस्ट किया, ताकि ज्यादा से ज्यादा लोग उनकी बेटी की मदद कर सकें। 8 करोड़ से ज्यादा हो चुका है जमा अनिका की मां सरिता शर्मा और प्रवीण शर्मा ने बताया कि अनिका के इलाज के लिए अब तक 8 करोड़ रुपए से ज्यादा की राशि क्राउड फंडिंग के माध्यम से एकत्रित की जा चुकी है, लेकिन अभी भी वह अपने लक्ष्य से दूर है। उन्हें अभी भी 50 लाख से ज्यादा राशि की जरूरत है। जिसके लिए वे लगातार कोशिश कर रहे हैं। मां-पिता का कहना है कि उन्हें उम्मीद है कि इस महीने रक्षाबंधन तक लक्ष्य पूरा कर बेटी का इलाज शुरू होने की संभावना है। मंगलवार को ही हुई थी सुनवाई अब अनिका के इलाज की इस लड़ाई में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच अब उम्मीद की एक नई किरण बनकर सामने आई है। मामले में एडवोकेट चंचल गुप्ता और लखन शर्मा की ओर से दायर याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई। कोर्ट ने अनिका की स्थिति को देखते हुए सरकार से मौजूदा 50 लाख रुपए की सहायता से आगे भी आर्थिक मदद की संभावनाएं तलाशने की अपेक्षा की है। अब अनिका के इलाज की इस लड़ाई में मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर बेंच अब उम्मीद की एक नई किरण बनकर सामने आई है। मामले में एडवोकेट चंचल गुप्ता और लखन शर्मा की ओर से दायर याचिका पर मंगलवार को सुनवाई हुई थी। कोर्ट ने अनिका की स्थिति को देखते हुए सरकार से मौजूदा 50 लाख रुपए की सहायता से आगे भी आर्थिक मदद की संभावनाएं तलाशने की अपेक्षा की है। कोर्ट में देना है डॉक्यूमेंट्स इधर, अनिका के माता-पिता ने बताया कि कोर्ट में अनिका और उससे संबंधित कुछ डॉक्यूमेंट्स है जिन्हें देना है। जिसमें ये बताना है कि उनके हाथों में कितनी राशि आएगी। क्योंकि अनिका के लिए जमा की गई 8 करोड़ से ज्यादा की राशि बैंक खाते सहित अलग-अलग प्लेटफॉर्म पर है। यहां विथड्रोल के बाद कितनी राशि उनके हाथ में आएगी। वजन भी एक चुनौती अनिका शर्मा को इंजेक्शन देने के लिए उसका वजन 13.5 किलोग्राम से कम हो चाहिए। अभी अनिका का वजन 11.2 किलो हो चुका है और उसके वजन को कंट्रोल रखने के लिए भी मात-पिता संघर्ष कर रहे है। काफी वक्त तक अनिका को लिक्विड डाइट पर रखा था, जिसकी वजह से वह कमजोर हो गई थी। ऐसे उसे अब दाल, चाय-बिस्किट आदि खाने में दिया जा रहा है।



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पटना- सफाईकर्मियों की हड़ताल खत्म, फिर भी ऑनलाइन 163 कंम्पलेन: निगम को कचरा गाड़ी और कूड़ा डंप की 88 शिकायतें मिली, सबसे ज्यादा पाटलिपुत्र अंचल से आए फोन – Patna News




पटना नगर निगम के सफाई कर्मियों की आठ दिनों तक हड़ताल चली थी। विभाग से मांगों पर सहमति बनने के बाद इस हड़ताल को टूटे अब एक हफ्ता होने जा रहा है, मगर फिर भी कई इलाकों में कचरा उठाव की समस्या बनी हुई है। पटना नगर निगम को ऑनलाइन काफी शिकायतें आयी हैं। नगर निगम को कचरा उठाने वाली गाड़ी नहीं आने और जगह-जगह पर कूड़ा जमा होने की 88 शिकायतें मिली हैं। इसमें से सबसे ज्यादा पाटलिपुत्र अंचल में है। वहीं, वाट्सएप चैटबॉट पर 163 कंम्पलेन आयी है। हड़ताल खत्म होने के बाद की कुछ तस्वीरें…. निगम की ओर से इन शिकायतों का निपटारा कराया जा रहा हड़ताल 30 जुलाई से 6 अगस्त तक चली थी। 7 अगस्त से सफाई कर्मी नियमित रूप से अपने काम पर आ रहे हैं। बारिश हो जाने के कारण कचरा उठाव में समस्या आ रही है, इस कारण कई इलाकों में देरी हो रही है। निगम की ओर से इन शिकायतों का निपटारा कराया जा रहा है। निगम का प्रयास है कि हड़ताल के दौरान जमा हुए कचरे को जल्द से जल्द उठाकर सफाई व्यवस्था को पूरी तरह पटरी पर लाया जाए। ये शिकायतें मिलने के बाद संबंधित क्षेत्र में कचरा उठाव और सफाई की व्यवस्था कराने का प्रयास किया जा रहा है। हड़ताल के दौरान मिली थीं 362 शिकायतें पटना नगर निगम के अनुसार, आठ दिनों तक चली हड़ताल के दौरान कचरा उठाव और सफाई व्यवस्था को लेकर 362 शिकायतें प्राप्त हुईं। इनमें डोर-टू-डोर कचरा उठाने वाली गाड़ियों के नहीं पहुंचने, जगह-जगह कूड़ा जमा होने और नियमित सफाई नहीं होने जैसी शिकायतें शामिल थीं। पटना नगर निगम ने इन समस्याओं के समाधान के लिए संबंधित स्तर पर कार्रवाई की। वहीं, इस साल 1 जनवरी से 29 जुलाई के बीच नगर निगम को कचरा उठाव और सफाई व्यवस्था से जुड़ी कुल 4,310 शिकायतें मिलीं। इनमें घरों से कचरा उठाव और सार्वजनिक स्थानों की सफाई से संबंधित शिकायतें प्रमुख रहीं।



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घर पर बनाएं बाजार जैसी आलू टिक्की चाट, स्वाद ऐसा कि हर कोई मांगेंगा दोबारा

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Aloo Tikki Chaat Recipe: रक्षाबंधन पर परिवार के लिए आलू टिक्की चाट एक बेहतरीन विकल्प है. इसे घर पर आसानी से बनाया जा सकता है, जिसमें छोला, दही, चटनी और मसालों का उपयोग होता है. यह बनाने में भी बहुत ही आसान है. आइये जानते हैं इसकी रेसिपी के बारे में.

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जमशेदपुर: रक्षाबंधन का त्योहार भाई-बहन के रिश्ते को मजबूत करने के साथ-साथ परिवार को स्वादिष्ट भोजन का आनंद लेने का भी अवसर प्रदान करता है. जहां रक्षाबंधन की शाम परिवार के लिए कुछ खास और स्वादिष्ट नाश्ता बनाने के लिए घी में बनी आलू टिक्की चाट एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है. इसे घर पर आसानी से तैयार किया जा सकता है और इसमें छोला, दही, चटनी और मसालों का उपयोग इसके स्वाद को और भी बढ़ा देता है. आइये जानते हैं इसकी रेसिपी के बारे में.

आलू टिक्की बनाने की विधि

आलू टिक्की चाट बनाने के लिए सबसे पहले उबले हुए आलू को अच्छी तरह मैश कर लें. इसमें थोड़ा नमक, लाल मिर्च, भुना जीरा पाउडर और चाट मसाला मिलाएं. स्वाद बढ़ाने के लिए इसमें बारीक कटा हरा धनिया और हरी मिर्च भी डाली जा सकती है. अब इस मिश्रण की गोल टिक्की बनाकर तैयार कर लें. टिक्की को ज्यादा मोटा न रखें, ताकि वह बाहर से कुरकुरी और अंदर से नरम बनी रहे.

जानें टिक्की सेंकने का तरीका

गैस पर तवा गर्म करें और उसमें थोड़ा देसी घी डालकर आलू की टिक्कियों को धीमी से मध्यम आंच पर सेंकें. दोनों तरफ से सुनहरा और कुरकुरा होने तक टिक्की को अच्छी तरह पकाएं. जहां घी में सेकने से इसका स्वाद और खुशबू बढ़ जाती है. इसी बीच उबले हुए छोले को हल्के मसालों के साथ तैयार कर लें.

चाट परोसने का तरीका

एक प्लेट में गर्मागर्म आलू टिक्की रखें और उसके ऊपर गरम छोले डालें. इसके बाद ठंडी और गाढ़ी दही डालकर ऊपर से हरी चटनी और मीठी इमली की चटनी डालें. अब इसमें चाट मसाला, भुना जीरा पाउडर और लाल मिर्च छिड़कें. ऊपर से बारीक सेव, अनार के दाने और हरा धनिया डालकर इसे सजाया जा सकता है.

त्योहार पर है खास नाश्ता

रक्षाबंधन की शाम जब पूरा परिवार एक साथ बैठे, तब इस स्वादिष्ट आलू टिक्की चाट को गर्मागर्म परोसें. इसका कुरकुरा स्वाद, खट्टा-मीठा चटनी का फ्लेवर, दही की ठंडक और मसालेदार छोले मिलकर इसे बेहद खास बना देंगे. इसे बनाने में ज्यादा मेहनत भी नहीं लगती और घर के सामान्य सामान से ही शानदार नाश्ता तैयार हो जाता है.

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Brijendra Pratap Singh

बृजेंद्र प्रताप सिंह डिजिटल-टीवी मीडिया में (2021) लगभग 5 सालों से सक्रिय हैं. मेट्रो न्यूज 24 टीवी चैनल मुंबई, ईटीवी भारत, दैनिक भास्कर के अनुभव के साथ 14 मई 2024 से  Hindi.News18.com<…

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भास्कर अपडेट्स: ओडिशा में डिजिटल गवर्नेंस को कैबिनेट की मंजूरी, ₹122.60 करोड़ का बजट


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29 मिनट पहले

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ओडिशा कैबिनेट ने बुधवार को 10 अहम प्रस्तावों को मंजूरी दी। ये प्रस्ताव 6 बड़े विभागों से जुड़े हैं।

इनमें OSWAS 3.0 लागू करने का फैसला भी शामिल है। इसका मकसद सरकारी कामकाज को इलेक्ट्रॉनिक प्रक्रिया के जरिए आसान बनाना और डिजिटल गवर्नेंस को मजबूत करना है।

कैबिनेट की बैठक भुवनेश्वर के लोक सेवा भवन में हुई। सरकार ने OSWAS 3.0 के लिए 122.60 करोड़ रुपए का बजट तय किया। यह सिस्टम लोक सेवा भवन से ब्लॉक तक सरकारी दफ्तरों को एक डिजिटल वर्कफ्लो प्लेटफॉर्म से जोड़ेगा।

PMML ने लॉन्च किया नया डिजिटल पोर्टल, AI चैटबॉट और स्मार्ट सर्च जैसी सुविधाएं

प्रधानमंत्री संग्रहालय यानी PMML ने बुधवार को अपना नया यूनिफाइड पोर्टल लॉन्च किया। इसमें कई अलग-अलग वेबसाइट्स को एक ही आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म पर जोड़ा गया है। इसका मकसद लोगों के लिए डिजिटल सेवाओं और संग्रहालय की सामग्री तक पहुंच आसान करना है।

PMML के मुताबिक, पहले अलग-अलग वेबसाइट्स के कारण यूजर्स को बिखरा हुआ अनुभव मिलता था। आर्काइव कंटेंट को खोजने में भी दिक्कत होती थी और कई काम मैनुअल तरीके से होते थे। नया पोर्टल इन समस्याओं को दूर करते हुए एक आसान डिजिटल अनुभव और आर्काइव कंटेंट के लिए बेहतर प्लेटफॉर्म उपलब्ध कराता है।

10 मिनट में मौके पर नहीं पहुंची एंबुलेंस तो ₹10 हजार जुर्माना, हाईवे पर इमरजेंसी सेवाओं के नए नियम

NHAI ने बुधवार को नेशनल हाईवे नेटवर्क पर इमरजेंसी मैनेजमेंट के लिए तैनात एंबुलेंस, क्रेन और पेट्रोलिंग वाहनों के लिए नए नियम घोषित किए।

नेशनल हाईवे पर मौजूद एंबुलेंस को हादसे की जानकारी मिलने के 10 मिनट के भीतर मौके पर पहुंचना होगा। ऐसा नहीं करने पर ₹10 हजार का जुर्माना लगेगा।

एंबुलेंस घायल व्यक्ति को गंभीर स्थिति के लिए अहम ‘गोल्डन ऑवर’ के भीतर अस्पताल नहीं पहुंचाती है, तो भी 10 हजार रुपए की पेनल्टी होगी।

NCP नेता जीशान सिद्दीकी को मारने की धमकी, 10 करोड़ की फिरौती की मांग

NCP नेता जीशान सिद्दीकी ने बुधवार को दावा किया है कि उन्हें फोन पर जान से मारने की धमकी मिली है। उन्होंने इस बारे में मुंबई पुलिस कमिश्नर देवेन भारती और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस को जानकारी दी है।

जीशान पहले भी अंडरवर्ल्ड से जान से मारने की धमकी मिलने का दावा कर चुके हैं। 22 अप्रैल 2025 को उन्हें ईमेल के जरिए धमकी मिली थी। पुलिस के मुताबिक, ईमेल में उनके पिता की तरह ही उन्हें मारने की धमकी और 10 करोड़ रुपए की मांग की गई थी।

12 अक्टूबर 2024 को मुंबई में तीन हमलावरों ने बाबा सिद्दीकी पर गोली चलाई थी। लॉरेंस बिश्नोई गैंग ने इस हत्या की जिम्मेदारी ली थी।

खबरें और भी हैं…



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रिपोर्ट-ईरान को पता था तुर्किये में कहां रुकेंगे ट्रम्प: बिल्डिंग के फ्लोर की भी जानकारी; कल ट्रम्प ने कहा था- ईरान के डर से प्लेन बदला


4 घंटे पहले

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7 जुलाई को अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प तुर्किये के अंकारा में हुए NATO शिखर सम्मेलन में शामिल हुए थे। – फाइल फोटो

ईरानी एजेंट्स को पता था कि 7 जुलाई को तुर्की के अंकारा में हुए NATO समिट में ट्रम्प किस बिल्डिंग में रुके हैं।

द न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट में दावा किया गया कि अमेरिकी इंटेलिजेंस ने यह आकलन किया है। ईरान को यह भी पता था कि ट्रम्प बिल्डिंग के किस फ्लोर पर रुके हैं। इसी जानकारी के बाद ट्रम्प को तुर्की से दूसरे विमान में ले जाया गया।

मंगलवार को ट्रम्प ने भी ईरान के डर से विमान बदलने की बात मानी थी। पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा कि वे जिस प्लेन से नाटो समिट में हिस्सा लेने गए थे, उस पर हमले का सबसे ज्यादा खतरा था।

ट्रम्प ने यह भी बताया कि उन्हें सुरक्षा कारणों से एयरपोर्ट के कैटरिंग ट्रक में बैठाकर दूसरे विमान तक ले जाया गया।

ट्रम्प पुराने एयरफोर्स वन में दाखिल हुए

एयरफोर्स वन के पीछे एक केटरिंग ट्रक नजर आ रही है

ट्रम्प के खिलाफ खास खतरे की जानकारी मिली

रिपोर्ट में दावा किया गया कि ट्रम्प को ले जाने वाले किसी भी विमान पर जमीन से हवा में मार करने वाली मिसाइल से हमला किया जा सकता था।

अमेरिकी इंटेलिजेंस को पता चला कि नाटो शिखर सम्मेलन के आसपास एक व्यक्ति कंधे से दागी जाने वाली मिसाइल के साथ भी देखा गया था।

इसके बाद सीक्रेट सर्विस और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों ने ट्रम्प को तुर्की से निकालने के लिए ऑपरेशन तैयार किया।

कतर के गिफ्ट किए प्लेन में बैठकर गए, मिलिट्री प्लेन से लौटे

इससे पहले वॉशिंगटन पोस्ट ने दावा किया था कि 8 जुलाई को अंकारा से रवाना होते समय ट्रम्प कैमरों के सामने बोइंग 747-8 एयर फोर्स वन में सवार हुए थे। यह विमान उन्हें कतर ने गिफ्ट किया था।

इसके बाद एयरपोर्ट पर सामान और खाना पहुंचाने वाली केटरिंग गाड़ी की मदद से उन्हें चुपचाप अमेरिकी वायुसेना के वीआईपी सैन्य विमान C-32A तक ले जाया गया।

वॉशिंगटन पोस्ट को मिले वीडियो में केटरिंग गाड़ी को पुराने एयरफोर्स वन के पास से निकलकर छोटे विमान की तरफ जाते देखा जा सकता है।

वॉशिंगटन पोस्ट को मिले वीडियो में केटरिंग गाड़ी को पुराने एयरफोर्स वन के पास से निकलकर छोटे विमान की तरफ जाते देखा जा सकता है।

मीडिया को भी नहीं पता था कि ट्रम्प दूसरे विमान में हैं

अमेरिकी राष्ट्रपति जब भी किसी दौरे पर जाते हैं, तो उनके साथ कुछ पत्रकार भी यात्रा करते हैं। सुरक्षा कारणों से हर जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती, लेकिन इन पत्रकारों को इतना जरूर पता होता है कि राष्ट्रपति किस विमान में हैं और कहां जा रहे हैं।

तुर्किये से उड़ान भरते समय पत्रकारों को लगा कि ट्रम्प भी उसी पुराने एयर फोर्स वन में हैं, लेकिन हकीकत अलग थी।

उड़ान के दौरान पत्रकारों को अपनी खिड़कियों के शेड नीचे रखने को कहा गया। यानी उन्हें बाहर देखने की इजाजत नहीं थी।

ऐसी सावधानी आमतौर पर तब बरती जाती है, जब विमान किसी खतरे वाले इलाके से गुजर रहा हो।

बाद में पत्रकारों ने ट्रम्प से पूछा कि खिड़कियों के शेड बंद रखने को क्यों कहा गया था। ट्रम्प ने कहा, “शायद हम एक खतरनाक फ्लाइट पर थे। उनकी सूची में सबसे ऊपर मेरा नाम है। अगर मैं मरूंगा, तो आप भी मरेंगे।”

ट्रम्प वाला छोटा विमान पहले ब्रिटेन पहुंचा

ट्रम्प को लेकर छोटा C-32A विमान रात करीब 10:20 बजे ब्रिटेन के RAF मिल्डेनहॉल एयरबेस पहुंचा। इसके कुछ मिनट बाद पुराना एयरफोर्स वन भी वहां पहुंच गया। इस विमान में पत्रकार सवार थे।

इसके बाद उन्हें चुपचाप पुराने एयर फोर्स वन में लाया गया। कुछ देर बाद वे उसी विमान से उतरते दिखे, जिससे पत्रकारों को लगा कि वे पूरी यात्रा उसी में कर रहे थे।

हालांकि, यह साफ नहीं है कि C-32A से उतरने के बाद ट्रम्प पुराने एयरफोर्स वन तक कैसे पहुंचे। ट्रम्प ने पत्रकारों की तरफ हाथ हिलाया, लेकिन उनसे बात नहीं की।

इसके बाद फिर वे आधिकारिक प्लेन यानी कि एयरफोर्स वन में बैठ गए और उसी से अमेरिका पहुंचे।

ऐसा तरीका पहले भी अपनाया जा चुका है

राष्ट्रपति को खतरे से बचाने के लिए उनके असली सफर को छिपाने का तरीका नया नहीं है। साल 2000 में राष्ट्रपति बिल क्लिंटन पाकिस्तान गए थे। तब उन्हें एक ऐसे सरकारी विमान से भेजा गया था, जिस पर राष्ट्रपति के विमान की कोई पहचान नहीं थी।

वहीं, उनका असली एयरफोर्स वन दूसरे रास्ते से भेजा गया था, ताकि लोगों को पता न चले कि राष्ट्रपति किस विमान में हैं।

अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, ईरान से मिले विश्वसनीय खतरे के इनपुट के बाद यह पूरा सुरक्षा ऑपरेशन कुछ ही घंटों में तैयार किया गया था। ज्वाइंट चीफ्स ऑफ स्टाफ के चेयरमैन जनरल डैन केन और रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ समेत कुछ चुनिंदा अधिकारी इसमें शामिल थे।

कतर से मिले नए विमान की सुरक्षा पर भी सवाल उठे

ट्रम्प जिस बोइंग 747-8 विमान से तुर्किये पहुंचे थे, वह कतर के शाही परिवार ने पिछले साल अमेरिका को दिया था। अमेरिकी डिफेंस कंपनी L3 हैरिस टेक्नोलॉजीज ने इसे राष्ट्रपति के सफर के लिए तैयार किया है।

ट्रम्प ने पहली बार इस विमान का इस्तेमाल 1 जुलाई को नॉर्थ डकोटा जाने के लिए किया था। कुछ दिन बाद वे इसी विमान से अपनी पहली विदेश यात्रा पर तुर्किये पहुंचे।

इस विमान की सुरक्षा को लेकर पहले से सवाल उठते रहे हैं। अमेरिकी मीडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पुराने एयरफोर्स वन में राष्ट्रपति को हमले से बचाने के लिए कुछ खास सुरक्षा इंतजाम हैं, जो कतर से मिले विमान में नहीं हैं या उनकी क्षमता अलग है।

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8 जुलाई को बदला गया विमान

यह खतरा 8 जुलाई को सामने आया, जब ट्रम्प नाटो शिखर सम्मेलन के आखिरी दिन अंकारा से रवाना होने की तैयारी कर रहे थे। ट्रम्प ने सार्वजनिक रूप से कहा था कि वह पुराने एयरफोर्स वन विमान से तुर्की से निकलेंगे, जिसे उन्होंने “पुराने समय की याद के लिए” बताया था।

कैमरों के सामने ट्रम्प को उसी विमान में सवार होते देखा गया। लेकिन रिपोर्ट के मुताबिक, बाद में उन्हें गुप्त रूप से एयरपोर्ट के कैटरिंग कंटेनर के जरिए उस विमान से निकाला गया और छोटे सैन्य विमान में ले जाया गया।

पुराना एयरफोर्स वन विमान ट्रम्प के साथ व्हाइट हाउस के अधिकारियों, सुरक्षा कर्मचारियों और पत्रकारों को लेकर रवाना हुआ। इस तरह वह विमान एक डिकॉय के तौर पर काम कर रहा था।

इसके बाद ट्रम्प ब्रिटेन में रुके। वहां उन्होंने गुप्त रूप से दोबारा उस विमान में सवारी की और बाद में कतर से मिले बोइंग 747-8 विमान में लौटे।

ट्रम्प ने कहा- मुझे दूसरे विमान में भेजना चाहते थे

ट्रम्प ने मंगलवार को पुष्टि की कि उन्हें दूसरे विमान में ले जाया गया था। उन्होंने बताया कि सीक्रेट सर्विस और सेना ने उनसे कहा था कि वे चाहते हैं कि ट्रम्प किसी दूसरे विमान से जाएं।

द एसोसिएटेड प्रेस के मुताबिक, ट्रम्प ने पत्रकारों से कहा, “वे चाहते थे कि मैं दूसरी फ्लाइट, दूसरे विमान से जाऊं।” उन्होंने कहा, “शायद बाहर कोई खतरा था। मैंने इसके बारे में ज्यादा नहीं पूछा। मुझे बहुत धमकियां मिलती हैं।”

ट्रम्प ने खतरे को कम करके बताया। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें लगता है कि जिस विमान से वह वास्तव में गए थे, वह शायद ज्यादा खतरे में था।

डिकॉय ऑपरेशन को असामान्य क्यों माना गया

खतरनाक जगहों की यात्राओं के दौरान अमेरिकी राष्ट्रपति पहले भी गुप्त यात्रा योजनाओं और डिकॉय विमानों का इस्तेमाल कर चुके हैं।

पूर्व राष्ट्रपति जो बाइडेन ने 2023 में गुप्त रूप से कीव की यात्रा की थी। वह पहले पोलैंड गए और वहां से रात में गुप्त ट्रेन के जरिए यूक्रेन पहुंचे। दो पत्रकार उनके साथ थे और यात्रा शुरू होने के बाद उन्होंने इस दौरे की जानकारी दर्ज की थी।

ट्रम्प ने 2019 में अफगानिस्तान की गुप्त थैंक्सगिविंग यात्रा भी की थी। अधिकारियों ने एक डिकॉय विमान और अलग प्रेस पूल का इस्तेमाल किया था, ताकि यह impression बना रहे कि ट्रम्प छुट्टियां अपने मार-ए-लागो एस्टेट में मना रहे हैं।

पूर्व राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश, बराक ओबामा और बिल क्लिंटन ने भी सुरक्षा कारणों से गुप्त यात्राएं की थीं या यात्रा के दौरान भ्रम पैदा करने वाली व्यवस्थाओं का इस्तेमाल किया था।

ट्रम्प के मामले में असामान्य बात यह थी कि वह तत्काल खतरे वाले इलाके से निकलने के बाद भी यह धोखा जारी रहा। उनके साथ यात्रा कर रहे प्रेस पूल को नहीं बताया गया कि राष्ट्रपति उस विमान में नहीं थे, जिसे वे राष्ट्रपति को ले जाने वाला विमान समझ रहे थे।

“रेवेन रॉक” किताब के लेखक गैरेट एम ग्राफ ने एपी से कहा कि राष्ट्रपति पहले भी बिना पहचान वाले या डिकॉय विमानों से यात्रा कर चुके हैं। हालांकि, उन्होंने ट्रम्प के ठिकाने को लेकर लंबे समय तक जानकारी छिपाए जाने को अभूतपूर्व बताया।

ईरान पहले भी ट्रम्प को निशाना बना चुका है

ट्रम्प पहले भी ईरान से जुड़ी धमकियों और साजिशों का निशाना बन चुके हैं। 2024 में पेंसिलवेनिया के बटलर में चुनावी रैली के दौरान एक संभावित हमलावर की गोली उन्हें छूकर निकल गई थी।

उसी साल बाद में फ्लोरिडा के उनके गोल्फ कोर्स में एक हथियारबंद व्यक्ति ने भी उन्हें निशाना बनाया था। हत्या के ये दोनों प्रयास ईरान से जुड़ी धमकियों से अलग थे।

इसके अलावा, ट्रम्प की हत्या के लिए सुपारी देने की साजिश के मामले में एक व्यक्ति को दोषी ठहराया गया था। इस साजिश का पता बाइडेन प्रशासन के दौरान चला था।

अमेरिकी अधिकारियों ने कहा था कि यह साजिश ईरानी एजेंट्स के एक प्रॉक्सी के जरिए काम करने से जुड़ी थी। द न्यूयॉर्क टाइम्स के हवाले से अमेरिकी अधिकारियों ने बताया कि ताजा खुफिया जानकारी ट्रम्प के अंकारा में रहने के दौरान मिले एक खास खतरे से जुड़ी थी।

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दिल्ली में अमित शाह से मिले रवि किशन: गोरखपुर के विकास और Gen Z की आकांक्षाओं पर मंथन – Gorakhpur News




गोरखपुर के सांसद रवि किशन ने बुधवार को संसद भवन स्थित कार्यालय में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं के बीच गोरखपुर के विकास, सहकारिता क्षेत्र और युवाओं से जुड़े कई महत्वपूर्ण मुद्दों पर चर्चा हुई। इसके साथ ही रवि किशन ने Gen Z समेत नई पीढ़ी की आकांक्षाओं, रोजगार और भविष्य के अवसरों को लेकर सार्थक चर्चा की। सांसद रवि किशन ने सहकारिता के क्षेत्र में केंद्र सरकार की ओर से किए जा रहे प्रयासों के लिए गोरखपुर की जनता की ओर से आभार भी जताया। सहकारिता के क्षेत्र में सरकार के प्रयासों की सराहना मुलाकात के दौरान रवि किशन ने कहा कि केंद्र सरकार सहकारिता के क्षेत्र को मजबूत करने के लिए लगातार काम कर रही है। इन प्रयासों से किसानों, ग्रामीणों और आम लोगों को लाभ पहुंचाने की दिशा में सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। उन्होंने कहा कि सहकारिता के माध्यम से ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने और किसानों को अधिक अवसर देने की दिशा में सरकार की ओर से कई कदम उठाए जा रहे हैं। सांसद ने इन प्रयासों के लिए अमित शाह के प्रति आभार जताया। गोरखपुर के विकास पर भी हुई चर्चा अमित शाह से मुलाकात के दौरान गोरखपुर के विकास से जुड़े विभिन्न विषयों पर भी चर्चा हुई। सांसद रवि किशन ने कहा कि गोरखपुर में विकास कार्यों को लगातार आगे बढ़ाया जा रहा है और जनता की जरूरतों के अनुसार नए अवसर तैयार करने पर जोर दिया जा रहा है। उन्होंने गोरखपुर के विकास और क्षेत्र की जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए आगे भी लगातार प्रयास जारी रखने की बात कही। युवाओं की आकांक्षाओं पर हुआ विचार-विमर्श मुलाकात में युवाओं से जुड़े मुद्दे भी प्रमुखता से उठे। सांसद ने बताया कि Gen Z समेत नई पीढ़ी की आकांक्षाओं, रोजगार और भविष्य के अवसरों को लेकर सार्थक चर्चा हुई। बदलते भारत में युवाओं की भूमिका और उन्हें आगे बढ़ने के लिए बेहतर अवसर उपलब्ध कराने को लेकर भी विचार-विमर्श किया गया। युवाओं की ऊर्जा और प्रतिभा का उपयोग देश के विकास में किस तरह किया जा सकता है, इस पर भी चर्चा हुई। आगामी चुनाव को लेकर मिला मार्गदर्शन सांसद रवि किशन ने बताया कि मुलाकात के दौरान आगामी चुनाव को लेकर भी अमित शाह से मार्गदर्शन प्राप्त हुआ। उन्होंने कहा कि पार्टी और क्षेत्र से जुड़े विषयों को लेकर केंद्रीय नेतृत्व से मिले मार्गदर्शन के आधार पर आगे काम किया जाएगा। जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने का संकल्प रवि किशन ने कहा कि गोरखपुर की जनता ने उन्हें जो जिम्मेदारी दी है, उसे पूरी निष्ठा के साथ निभाने का प्रयास जारी रहेगा। गोरखपुर के विकास को और गति देने तथा जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने के लिए लगातार काम किया जाएगा। उन्होंने कहा कि युवाओं के लिए नए अवसर पैदा करना और क्षेत्र के विकास को आगे बढ़ाना उनकी प्राथमिकताओं में शामिल है।



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पेंच टाइगर रिजर्व में मछली माफिया का आतंक: PMO तक पहुंची शिकायत के बाद NTCA ने एमपी से मांगी एक्शन टेकन रिपोर्ट – Bhopal News


पेंच टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र (तोतलाडोह बांध) में चल रहे करोड़ों की कमाई के अवैध मछली कारोबार और संगठित माफिया के खिलाफ केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) ने इस मामले में मप्र सरकार से जवाब तलब करते हुए तत्

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गौरतलब है कि पेंच टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में होने के कारण सुप्रीम कोर्ट ने पेंच नदी पर महाराष्ट्र की सीमा में बने तोतलादोह डैम से मछली पकड़ने की सभी गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा है। इसके बावजूद मप्र की सीमा से प्रवेश कर संगठित मछली माफिया पिछले कई सालों से बेखौफ होकर मछलियों के शिकार में लिप्त है।

NTCA ने एमपी से मांगी रिपोर्ट

एनटीसीए ने मप्र के पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ (मुख्य वन्यजीव वार्डन) को लिखे पत्र में इस शिकायत की गंभीरता से जांच कराने और मछली माफिया के विरुद्ध ठोस कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही यह भी उल्लेख किया है कि मप्र सरकार की ओर से इन अवैध गतिविधियों को रोकने को लेकर पूर्व में उठाए गए कदम प्रभावी साबित नहीं हुए हैं।

डायनामाइट से हो रहा शिकार

इस मामले में छिंदवाड़ा निवासी कैप्टन ब्रजेश भारद्वाज ने पीएमओ को भेजी शिकायत में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं, जिसके बाद एनटीसीए ने मप्र सरकार से जवाब मांगा है। शिकायत के मुताबिक, मछली माफिया जलाशय में मछलियां पकड़ने के लिए पेंच नदी और तोतलादोह डैम में डायनामाइट जैसे खतरनाक विस्फोटकों का उपयोग करता है ताकि मछलियां मरकर ऊपर आ जाएं। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जब वन विभाग का गश्ती दल या विशेष बाघ सुरक्षा बल इन्हें रोकने की कोशिश करते हैं, तो उन पर भी फायर बम और बंदूकों से जानलेवा हमले किए जाते हैं।

हाल ही में नागपुर उच्च न्यायालय ने भी अपने एक अंतरिम आदेश में वन कर्मियों की नावों को आग के हवाले किए जाने की घटना पर गंभीर चिंता जताई थी। इस हिंसक माहौल के कारण पेंच नदी के आसपास के संवेदनशील कोर क्षेत्रों में वन विभाग का स्थानीय अमला गश्ती करने में भी लाचार महसूस कर रहा है।

सैकड़ों करोड़ का टर्नओवर और छिंदवाड़ा-सिवनी के रास्ते महाराष्ट्र सप्लाई

शिकायत के मुताबिक, तोतलादोह डैम से मछली पकड़ने का यह अवैध कारोबार अब एक संगठित सिंडिकेट का रूप ले चुका है, जिसका वार्षिक टर्नओवर सैकड़ों करोड़ रुपये का हो चुका है। बफर जोन के गुमतरा, पुलपुलडोह, टेकारी और परासपानी जैसे दर्जनों गांवों से हर शाम सैकड़ों की संख्या में लोग पैदल ही कोर एरिया की दीवार फांदकर घुसपैठ करते हैं।

रात भर अवैध शिकार करने के बाद सुबह 5 से 9 बजे के बीच इस माल को ठिकाने लगाया जाता है। अवैध रूप से पकड़ी गई ये मछलियां मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा और सिवनी जिलों के गुप्त रास्तों से होते हुए रात के अंधेरे में महाराष्ट्र के नागपुर, सावनेर और खापा जैसे बड़े बाजारों में बिकने भेजी जाती हैं। इस पूरे काले कारोबार को अंजाम देने के लिए टाटा 407, महिंद्रा पिकअप/बोलेरो और मारुति वैन जैसे वाहनों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है।

वर्ष 2001 में 145 मछुआरा परिवारों को दिया जा चुका है पुनर्वास पैकेज

ऐतिहासिक दस्तावेजों और सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, पेंच नेशनल पार्क के अंतिम गठन से पहले यहां के स्थानीय लोगों के अधिकारों का पूरी तरह निपटारा किया जा चुका था। वर्ष 2001-02 में छिंदवाड़ा कलेक्टर के माध्यम से यहां के 145 पात्र मछुआरा परिवारों को विस्थापित और शिफ्ट किया गया था।

इन सभी परिवारों के बीच पुनर्वास और मुआवजे के तौर पर कुल 72 लाख रुपये की राशि बांटी गई थी। इसके अलावा कई मछुआरों को वन विभाग में ही चौकीदार व गश्ती दल में शामिल कर रोजगार भी दिया गया था। इस पुनर्वास के बावजूद सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को ठेंगा दिखाकर क्षेत्र में अवैध शिकार का यह खेल लगातार जारी है।

जलीय जैव-विविधता और बाघों के संरक्षण को गंभीर खतरा

तोतलादोह जलाशय केवल मछलियों का नहीं, बल्कि दुर्लभ मगरमच्छों, कछुओं और जलपक्षियों का भी प्राकृतिक शरणस्थल है। माफिया के गुर्गे अपनी नावों की आवाजाही का रास्ता साफ करने के लिए पानी के भीतर मौजूद उन सूखे पेड़ों को उखाड़ रहे हैं, जो प्रवासी पक्षियों के घोंसले बनाने के काम आते हैं।

कोर क्षेत्र में इतनी भारी इंसानी दखलअंदाजी, प्लास्टिक कचरा और आग जलाने से राष्ट्रीय पशु बाघ के प्राकृतिक आवास को अपूरणीय क्षति पहुंच रही है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस सशस्त्र घुसपैठ को तुरंत नहीं रोका गया, तो इसकी आड़ में अंतरराष्ट्रीय शिकारी पेंच के बाघों को भी अपना निशाना बना सकते हैं।

सीमाओं में बदलाव या प्रतिबंध हटाने से केंद्र का साफ इनकार

यह मामला पहले में लोकसभा में भी उठ चुका है, जहां वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाए बिना आदिवासियों के लिए मछली पकड़ने का एक सुरक्षित कॉरिडोर बनाने की मांग की गई थी। इस पर केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने संसद में स्पष्ट किया था कि वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत नेशनल पार्क के कोर एरिया में किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि पूरी तरह प्रतिबंधित है।

केंद्र सरकार ने साफ कर दिया था कि पेंच नेशनल पार्क की सीमाओं में किसी भी प्रकार का बदलाव करने या मछली पकड़ने पर लगा प्रतिबंध हटाने का कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।



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