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Recession in America : आईएमएफ की पूर्व प्रमुख गीता गोपीनाथ ने एआई में भारी-भरकम निवेश को लेकर अमेरिकी कंपनियों को खुली चेतावनी दी है. उन्होंने कहा कि एआई से निवेश जितना रिटर्न मुश्किल दिख रहा है और 1 ट्रिलियन डॉलर के निवेश पर जोखिम पैदा हो रहा है. यह जोखिम गहराया तो अमेरिकी बाजार में गिरावट और इकनॉमी की ग्रोथ शून्य से नीचे चली जाएगी जो सीधे तौर पर मंदी का संकेत दे रहा है.
अमेरिकी एआई कंपनियों को निवेश से कम रिटर्न की चिंता सता रही है.
नई दिल्ली. आईएमएफ की पूर्व प्रमुख और दिग्गज अर्थशास्त्री गीता गोपीनाथ ने एआई की वजह से दुनिया पर मंदी का खतरा बताया है. गोपीनाथ ने कहा कि अमेरिकी कंपनियों का एआई में ज्यादा निवेश देश को मंदी की तरफ धकेल सकता है. उन्होंने कहा कि एआई में निवेश करने वाली कंपनियों को बाजार करेक्शन का सामना करना पड़ सकता है. अमेरिकी कंपनियां शायद उतना मुनाफा न कमा पाएं, जो उन्होंने एआई पर खर्च किया है. इससे 1 ट्रिलियन के निवेश पर असर पड़ सकता है.
गीता गोपीनाथ ने कहा कि एआई मौजूदा समय में निवेश के सबसे बड़े क्षेत्र के रूप में उभरा है. कंपनियां इसके बुनियादी ढांचे और विकास में भारी-भरकम पैसे लगा रही हैं. कुछ कंपनियों ने अपने निवेश के बोझ को कम करने के लिए छंटनी भी शुरू कर दी है, लेकिन इससे समस्या का हल नहीं निकलने वाला है. हालांकि, निवेशक इससे जुड़ने की कोशिश कर रहे हैं लेकिन असली सवाल यही है कि क्या कंपनियां अपनी लागत वसूल सकेंगी. अमेरिका, दक्षिया कोरिया और ताइवान जैसे बाजारों में एआई तकनीक से फिलहाल बढ़त दिख रही है लेकिन असली चुनौती आगे आने वाली है.
एक गिरावट साफ तौर पर दिख रही
हार्वर्ड यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर और पूर्व आईएमएफ प्रमुख गोपीनाथ ने कहा कि मुझे ऐसा साफ तौर पर लगता है कि बाजार में एक करेक्शन आने वाला है. हालांकि, उन्होंने यह नहीं बताया कि करेक्शन कब आएगा. लेकिन, इसका कारण जरूर बताया. उन्होंने ग्लोबल डेवलपमेंट को लेकर 2 विपरीत कारण बताए, जिसमें एक एआई है जहां बढ़ता निवेश ग्रोथ को गति दे रहा है. दूसरी ओर, भू-राजनैतिक तनाव और पश्चिम एशिया में जारी युद्ध इसे सुस्त बना रहे हैं. लिहाजा चालू वित्तवर्ष के ग्लोबल ग्रोथ के अनुमान और आर्थिक झटके एक-दूसरे के करीब बने हुए हैं.
दुनिया में सबकुछ बदल गया
गोपीनाथ ने कहा कि आज हम ऐसी दुनिया में हैं, जहां सबकुछ बदल चुका है और फिर देखा जाए तो कुछ भी ज्यादा नहीं बदला. अगर आप सिर्फ आंकड़ों से दुनिया को देखेंगे तो लगेगा कि इतना हायतौबा ऐसे ही मचा हुआ है, लेकिन गहराई में जाकर देखने पर पता चल जाएगा कि असल में क्या-क्या बदलाव हो रहे हैं. खासकर एआई से जुड़े सप्लाई चेन वाले देशों में यह बदलाव ज्यादा दिख रहा है. ताइवान, कोरिया की ग्रोथ रेट सामान्य से दोगुनी हो गई है. ताइवान की एजेंसी ने तो एआई की डिमांड बढ़ती देख ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 11 फीसदी कर दिया है. यह साल 1987 के बाद सबसे ज्यादा अनुमान है. दूसरी ओर, खाड़ी देश हैं जिन्हें युद्ध की वजह से अपने विकास दर अनुमान को घटाना पड़ रहा है. अमेरिका अभी तो अनुमान से बेहतर ग्रोथ कर रहा है, लेकिन यहां असली जोखिम एआई का भारी-भरकम निवेश और निवेशकों के मन में उसे लेकर समाया डर है.
अमेरिका पर क्यों मंदी का खतरा
गोपीनाथ ने कहा कि अमेरिका में एआई का सुस्त रिटर्न वहां मंदी का संकेत दे रहा है. साल 2026 में इस तकनीक पर 1 ट्रिलियन डॉलर निवेश करने वाली कंपनियों को अपने रेवेन्यू और मुनाफे की अभी से चिंता सताने लगी है. उन्होंने कहा कि एनविडिया ने एआई लैब्स में निवेश किया, जो उसके चिप बाजार को सपोर्ट करता है. अगर उसके एआई लैब्स में गिरावट आई तो चिप का कारोबार भी प्रभावित होगा. इसका असर दूसरी तकनीकी कंपनियों पर पड़ेगा और अमेरिका के सामने मंदी जैसी समस्या खड़ी हो सकती है. अमेरिकी बाजार में पहले ही दबाव है और यह ज्यादा बढ़ा तो ग्रोथ शून्य या उससे भी नीचे जा सकती है जो सीधे मंदी का संकेत देता है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…












