उत्तर प्रदेश में मौसम का मिजाज बदलने लगा है। सुबह और शाम हल्की ठिठुरन महसूस होने लगी है, जबकि कई जिलों में कोहरे ने भी दस्तक दे दी है। गुरुवार सुबह भी लखनऊ, वाराणसी, प्रयागराज, मेरठ समेत 10 शहरों में कोहरा छाया हुआ है। कई जगह दृश्यता घटकर 50 मीटर तक पहुंच गई। ग्रामीण इलाकों में 10 मीटर दूर देखना भी मुश्किल हो गया। मौसम वैज्ञानिकों के मुताबिक, दिवाली वाले हफ्ते में ठंड और बढ़ेगी। सुबह के समय कोहरा छाए रहने की संभावना है। दूसरी ओर, पश्चिमी यूपी के एनसीआर वाले जिलों में प्रदूषण ने चिंता बढ़ा दी है। नोएडा का एक्यूआई 405 दर्ज किया गया, जबकि गाजियाबाद, हापुड़ और बागपत की हवा भी रेड जोन में पहुंच गई है। वाराणसी बीएचयू के मौसम वैज्ञानिक प्रो. मनोज श्रीवास्तव ने बताया- बंगाल की खाड़ी से उठे नए तूफान का यूपी पर सीधा असर नहीं पड़ रहा है। हालांकि, प्रदेश के कुछ हिस्सों में आंशिक रूप से बादल छाए रह सकते हैं। दिवाली वाले हफ्ते में तापमान में और गिरावट आने के आसार हैं। सुबह के समय कोहरा बना रह सकता है। मौसम में बदलाव के साथ सुबह और शाम की ठंडक बढ़ेगी। मौसम की तस्वीरें देखिए- 4 जिलों की हवा सांस लेने लायक नहीं, प्रदूषण को रोकने के लिए ग्रेप-2 लागू झांसी सबसे गर्म, मुजफ्फरनगर में सबसे ठंडी रात 4 नवंबर के आंकड़ों के मुताबिक, प्रदेश में सबसे अधिक अधिकतम तापमान झांसी में 33 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया। वाराणसी और बहराइच 32.2 डिग्री के साथ दूसरे स्थान पर रहे। प्रयागराज में अधिकतम तापमान 32 डिग्री और गोरखपुर में 31.6 डिग्री रहा। वहीं, न्यूनतम तापमान के आंकड़ों में वाराणसी 20 डिग्री के साथ सबसे नीचे रहा। लखीमपुर खीरी में 20.2, अयोध्या में 20.5, बलिया में 20.7 और फतेहपुर में 22 डिग्री तापमान दर्ज किया गया। मंगलवार रात मुजफ्फरनगर में पारा 15.3 डिग्री तक गिरने से वहां सबसे ज्यादा ठंड महसूस की गई। CM बोले- फसल बर्बादी पर तत्काल मुआवजा दें यूपी में 29 से 31 अक्टूबर तक अर्नब तूफान की वजह हुई लगातार बारिश से फसलों को हुए नुकसान पर सीएम योगी एक्शन में हैं। उन्होंने प्रदेश के सभी जिलाधिकारियों को फील्ड में उतरकर तत्काल फसल को हुए नुकसान का आकलन कराने के निर्देश दिए हैं। साथ ही फसल बर्बादी पर तत्काल मुआवजा देने के लिए कहा। साथ ही कहा कि हम किसानों के लिए विशेष पैकेज लेकर आएंगे। रबी फसलों की बुवाई और सिंचाई में बरतें सावधानी नवंबर में बारिश की संभावना को देखते हुए किसानों को रबी फसलों के प्रबंधन में सतर्क रहने की सलाह दी गई है। खासकर पूर्वांचल में गेहूं, चना, मटर और सरसों की बुवाई के दौरान खेतों में जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त रखें। निचले खेतों में पानी भरने से फसलों को नुकसान हो सकता है। जिन खेतों में बारिश के कारण पर्याप्त नमी है, वहां अनावश्यक सिंचाई से बचें। मौसम की स्थिति और मिट्टी में नमी को देखते हुए ही बुवाई और सिंचाई का निर्णय लें। ठंड-कोहरे में इन फसलों का रखें ध्यान
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यूपी में सुबह कोहरा-शाम को ठिठुरन बढ़ी: दिवाली वाले हफ्ते में बढ़ेगी सर्दी, नोएडा की हवा सबसे ज्यादा खराब, AQI 405 पहुंचा – Uttar Pradesh News
भोजपुर- बीपीएससी की तैयारी कर रही महिला की मौत: ट्यूशन पढ़ाकर पति के साथ लौट रही थी, नींद आने के कारण बाइक से गिरी; अस्पताल में गई जान – Bhojpur News
भोजपुर जिले के पीरो थाना क्षेत्र के पीरो ओवर ब्रिज के समीप बुधवार की देर शाम चलती बाइक से गिरकर एक महिला की मौत हो गई। इलाज के लिए सदर अस्पताल लाने के दौरान उसने रास्ते में दम तोड़ दिया। मृतका की पहचान इमादपुर थाना क्षेत्र के खुटहां गांव के रहने वाले मो. मुमताज अंसारी की 23 साल की पत्नी फातमा खातून के रूप में हुई है। फातमा बीपीएससी की तैयारी कर रही थी। बाइक से गिरकर गंभीर रूप से हुई थी जख्मी इधर, मृतका के पति मो. मुमताज अंसारी ने बताया कि घटना वह बुधवार की शाम ट्यूशन पढ़ने के लिए पीरो बाजार स्थित कोचिंग सेंटर में आई थी। बुधवार की देर शाम जब वह मेरे साथ बाइक से वापस घर लौट रही थी। उसी दौरान उसे झपकी आ गई। जिसके कारण वह असंतुलित होकर वह चलती बाइक से गिर पड़ी और गंभीर रूप से जख्मी हो गई। इसके बाद उसे इलाज के लिए सदर अस्पताल लाया गया। जहां चिकित्सक ने देख उसे मृत घोषित कर दिया। तब पुलिस द्वारा शव का पोस्टमार्टम कराया गया। बताया जाता है कि मृतका को एक पुत्र अल्ताफ हुसैन है। घटना के बाद मृतक के घर में कोहराम मच गया। उसकी उसके परिवार के सभी सदस्यों का रो-रोकर बुरा हाल है।
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सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट पर भारी बाबा कालेश्वर की बद्दुआ: रतलाम के कछालिया में बिना पुताई के 100 पीएम आवास, लोग बोले- ये पुरानी परंपरा – Madhya Pradesh News
रतलाम जिले का कछालिया गांव अपनी अनूठी परंपरा के लिए जाना जाता है। गांव में 300 से अधिक पक्के और आधुनिक घर हैं, लेकिन किसी भी घर की दीवार पर रंग नहीं किया गया है। ग्रामीण काले रंग के कपड़े-जूते नहीं पहनते और भूरे जूते भी बिना मोजे के पहनते हैं। उनके अनुसार यह परंपरा बाबा कालेश्वर से जुड़ी मान्यताओं पर आधारित है। ग्रामीणों का विश्वास है कि घरों पर रंग-रोगन कराने से अनहोनी हो सकती है। इसी कारण करीब 700 वर्षों से लोग मकानों पर पुताई नहीं कराते। दिवाली के मौके पर भी ग्रामीण बिना रंग रोगन के मकानों पर सजावट करते हैं। गांव में प्रवेश करते ही दिखती है अलग पहचान
आलोट-जावरा हाईवे से करीब ढाई किलोमीटर अंदर स्थित कछालिया गांव में दाखिल होते ही सभी घर बिना रंग के दिखाई देते हैं। गांव में कई आधुनिक और बहुमंजिला मकान हैं, जिन पर लाखों रुपये खर्च किए गए हैं, लेकिन उनकी दीवारों पर रंग नहीं किया गया है। ग्रामीण बद्रीलाल धाकड़ बताते हैं कि गांव में न केवल घरों पर पुताई नहीं की जाती, बल्कि लोग पानी छानकर पीने से भी बचते हैं। उनके अनुसार यह परंपरा करीब 700 वर्षों से चली आ रही है और बाबा कालेश्वर से जुड़ी मान्यताओं पर आधारित है। सरकारी आवासों पर भी नहीं हुआ रंग-रोगन
प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत गांव में करीब 100 मकान बने, लेकिन ग्रामीणों ने उन पर भी रंग नहीं कराया। सरपंच प्रतिनिधि जगदीश पुरी गोस्वामी के अनुसार, गांव में सरकारी और निजी दोनों तरह के मकानों पर यह परंपरा समान रूप से लागू होती है। इसी बात पर एक ग्रामीण मुस्कुराते हुए कहता है, “सरकार हमें सिर छुपाने के लिए घर तो दे सकती है, लेकिन हमारे गांव की सदियों पुरानी परंपरा को नहीं बदल सकती।” काले रंग से परहेज की परंपरा
गांव में काले कपड़े, विशेषकर काले जूते और मोजे पहनने से कई लोग परहेज करते हैं। ग्रामीण बापूपुरी गोस्वामी के अनुसार काले जूते और मोजे पहनना अशुभ माना जाता है। बुजुर्गों के अनुसार पहले इस नियम का कड़ाई से पालन होता था। अब युवाओं में कुछ बदलाव दिखता है, लेकिन अधिकांश परिवार आज भी इसे मानते हैं। बाबा कालेश्वर से जुड़ी लोककथा
लोककथाओं के अनुसार, बाबा कालेश्वर के अनादर के बाद यह मान्यता बनी कि घरों पर रंग-रोगन कराने से परिवार पर संकट आ सकता है। समय के साथ इस लोककथा के कई रूप प्रचलित हुए, लेकिन सभी में घरों को बिना रंग रखने की परंपरा का उल्लेख मिलता है। गांव की बुजुर्ग महिलाएं भी इसे पूर्वजों से चली आ रही मान्यता बताती हैं। ग्रामीणों का मानना है कि बाबा कालेश्वर उनकी मनोकामनाएं पूरी करते हैं, इसलिए वे इन परंपराओं का पालन करते हैं। गांव में आधुनिक सुविधाएं, स्मार्टफोन और शिक्षित युवा मौजूद हैं। युवाओं का भी कहना है कि हम पढ़े-लिखे जरूर हैं, लेकिन पूरे गांव के विश्वास के खिलाफ जाकर कोई ऐसा प्रयोग नहीं करना चाहते जिससे किसी का दिल दुखे या कोई अनहोनी हो।” परंपरा तोड़ने से जुड़ी स्थानीय कहानियां
ग्रामीणों के बीच ऐसी कई घटनाओं की चर्चा होती है, जिन्हें वे परंपरा तोड़ने के परिणाम से जोड़ते हैं। एक ग्रामीण के अनुसार, सालों पहले एक परिवार ने अपने घर के सामने वाले हिस्से पर रंग करवा लिया था। इसके कुछ समय बाद उस परिवार के छोटे बेटे की पानी में डूबने से मौत हो गई। बताया जाता है कि जहां हादसा हुआ, वहां पानी बहुत कम था, फिर भी बच्चे की जान नहीं बच सकी। इसी तरह एक अन्य परिवार ने घर की पुताई करवाई थी, जिसके बाद वे भारी आर्थिक नुकसान के शिकार हो गए। हालांकि इन दावों की कोई वैज्ञानिक या आधिकारिक पुष्टि उपलब्ध नहीं है। सामाजिक सहमति की भी भूमिका
विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसी परंपराएं केवल धार्मिक विश्वास से नहीं, बल्कि सामाजिक सहमति और सामुदायिक दबाव से भी लंबे समय तक बनी रहती हैं। यदि कोई व्यक्ति अपने घर पर रंग करवाने का फैसला कर ले, तो उसे केवल व्यक्तिगत डर ही नहीं, बल्कि समाज के विरोध और अलगाव का भी सामना करना पड़ सकता है। यही कारण है कि लोग अलग राय रखने के बावजूद सामूहिक रूप से इस परंपरा का हिस्सा बने रहते हैं।
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ईरान की मस्जिदों में परमाणु बम बनाने की मांग उठी: कट्टरपंथी नेता बोले- इसके बिना सुरक्षित नहीं; अली खामेनेई ने फतवा निकालकर रोक लगाई थी
ईरान में परमाणु बम बनाने की मांग हो रही है। देश की मस्जिदों में शुक्रवार की नमाज के दौरान इमाम और कट्टरपंथी नेता खुले तौर पर कह रहे हैं कि अमेरिका और इजराइल से सुरक्षा के लिए परमाणु हथियार बनने चाहिए। यह मांग ऐसे समय में उठ रही है, जब ईरान के नेता अमेरिका और इजराइल के साथ जारी जंग को खत्म करने की कोशिशें कर रहें हैं। देश के सुप्रीम लीडर रहे अयातुल्ला अली खामेनेई ने फतवा जारी कर परमाणु बम बनाने और इस्तेमाल करने पर बैन लगाया था। अब इसके खिलाफ आवाज उठने लगी है। शुक्रवार की नमाज में लग रहे परमाणु बम के लिए नारे पिछले हफ्ते ईरान के पश्चिमी शहर कुहदाश्त में शुक्रवार की नमाज के दौरान इमाम ने कहा था कि हमें परमाणु हथियारों से लैस होना चाहिए, ताकि हम अपराधी अमेरिका का मजबूती से मुकाबला कर सकें। उनके इस बयान के बाद नमाजियों ने नारा लगाया- परमाणु हथियारों से बचाव करना हमारा हक है। तेहरान में भी शुक्रवार की नमाज के दौरान इमाम अकबरी ने परमाणु नीति बदलने को देश की जरूरत बताया। इस पर भी लोगों ने वही नारा लगाया। अमेरिका-इजराइल के हमलों के बाद लोगों की सोच बदली अली खामेनेई चाहते थे कि ईरान परमाणु बम न बनाए लेकिन इतना सक्षम जरूर दिखे कि अमेरिका और इजराइल उस पर हमला करने से डरें। उन्हें लगता था कि ईरान की परमाणु ताकत को लेकर बना डर ही दुश्मन देशों को हमला करने से रोक देगा। लेकिन ऐसा नहीं हुआ। अमेरिका और इजराइल ने ईरान के खिलाफ जंग शुरू कर दी। इस साल अमेरिका के हमले में अली खामेनेई की भी मौत हो गई। ईरान के जानकार मोहम्मद अली शबानी के मुताबिक, इन हमलों के बाद ईरान में लोगों की सोच बदल रही है। अब उन्हें लगने लगा है कि अगर देश के पास परमाणु बम होता, तो अमेरिका और इजराइल हमला करने से पहले कई बार सोचते। यानी परमाणु बम न बनाने के बावजूद ईरान को हमले झेलने पड़े। अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प के एक बयान से भी इस सोच को बल मिला। उन्होंने सितंबर में कहा था कि अगर ईरान के पास परमाणु हथियार होते, तो वे उसके सुप्रीम लीडर को फोन करके उनका हाल पूछते और मदद की पेशकश करते। लेकिन परमाणु हथियार न होने की वजह से अमेरिका ने उन पर बमबारी की। परमाणु समझौते से बाहर निकलने की मांग भी बढ़ी ईरान में परमाणु हथियारों पर रोक लगाने वाली अंतरराष्ट्रीय संधि (NPT) से बाहर निकलने की मांग भी बढ़ रही है। इस संधि के तहत ईरान ने परमाणु बम नहीं बनाने का वादा किया है। ईरान के विदेश मामलों के जानकार मोहम्मद गदरी के मुताबिक, पहले सरकार में कुछ ही लोग संधि से बाहर निकलने की बात करते थे। लेकिन अब ज्यादा नेता इसके पक्ष में आ रहे हैं। ईरान के सुरक्षा अधिकारी मोहसेन रेजाई ने भी सरकारी टीवी पर कहा था कि सरकार इस मुद्दे पर चर्चा कर रही है। हालांकि, अभी कोई फैसला नहीं हुआ। यह साफ नहीं है कि इस बहस पर नए सुप्रीम लीडर मुजतबा खामेनेई की क्या राय है। हालांकि राष्ट्रपति मसूद पजशकियान और पूर्व राष्ट्रपति हसन रूहानी अब भी चाहते हैं कि ईरान का परमाणु कार्यक्रम सिर्फ शांतिपूर्ण कामों के लिए हो। ईरान का परमाणु कार्यक्रम हमेशा विवादों में रहा है ईरान की सरकार हमेशा कहती रही है कि उसका परमाणु कार्यक्रम शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए है। हालांकि, पश्चिमी देशों की खुफिया एजेंसियां पहले कई बार दावा कर चुकी हैं कि ईरान परमाणु बम बनाने की कोशिश कर रहा है। अमेरिका और इजराइल के कुछ अधिकारियों ने ईरान पर परमाणु बम बनाने की तैयारी करने का आरोप भी लगाया था। साल 2015 में ईरान और अमेरिका समेत दुनिया की बड़ी ताकतों के बीच परमाणु समझौता हुआ था। इसके तहत ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर कई पाबंदियां लगाई गई थीं। हालांकि, 2018 में राष्ट्रपति ट्रम्प ने अमेरिका को इस समझौते से बाहर कर लिया। अमेरिका पर दबाव बनाने की रणनीति भी हो सकती है ईरान के जानकार ओमिद मेमरियन के मुताबिक, परमाणु बम बनाने की मांग उठाकर ईरान अमेरिका पर दबाव बनाने की कोशिश कर सकता है। इस समय कतर की मदद से दोनों देशों के बीच बातचीत चल रही है। उनका कहना है कि ईरान अमेरिका को यह संकेत देना चाहता है कि अगर बातचीत से कोई हल नहीं निकला, तो वह अपनी परमाणु नीति बदल सकता है। ऐसा होने पर अमेरिका के लिए मुश्किलें बढ़ सकती हैं। ईरान के जानकार मोहम्मद अली शबानी के मुताबिक, अब मस्जिदों में भी लोग अली खामेनेई के उस फतवे के खिलाफ बोल रहे हैं, जिसमें परमाणु बम बनाने पर रोक लगाई गई थी। उनके मुताबिक, अब इस रोक का विरोध खुलकर होने लगा है। हालांकि, अभी यह साफ नहीं है कि ईरान की सरकार भी अपनी परमाणु नीति बदलेगी या नहीं। ————————– यह खबर भी पढ़ें… चीन मशीनों-तकनीक की सप्लाई रोककर दुनिया पर दबाव बना रहा: भारत को सुरंग मशीनें मिलने में अड़ंगा, अमेरिका की AI-चिप इंडस्ट्री पर भी असर दुनिया में कुछ मशीनें इतनी बड़ी होती हैं कि उनकी लंबाई फुटबॉल मैदान के बराबर होती है। इनका इस्तेमाल पहाड़ों में सुरंग बनाने के लिए किया जाता है। पूरी खबर पढ़ें…
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तूफान मुरासु के असर से आंध्रप्रदेश में भारी बारिश: चेन्नई में बाढ़ के हालात, मध्यप्रदेश के 5 जिलों में आंधी-बारिश का अलर्ट
तूफान मुरासु के असर से आंध्रप्रदेश के कई जिलों में भारी बारिश हो रही है। पेड्डा वागु नदी खतरे के निशान को पार गई है, जिससे एलुरु जिले में बाढ़ के हालात हैं। करीब एक दर्जन गांवों से लोगों को सुरक्षित जगहों पर शिफ्ट किया गया है। तमिलनाडु के चेन्नई में भी बाढ़ के हालात हैं। पहाड़ियों से आ रहे बाढ़ के पानी से सड़कों पर नदियां बहने जैसा नजारा है। कई गांवों के हजारों एकड़ खेत डूब गए हैं। वहीं, चेन्नई के गोपालपुरम में भारी बारिश से निचले इलाकें डूब गए हैं। मध्य प्रदेश के पूर्वी हिस्से में चक्रवाती तूफान ‘मुरासु’ का असर है। मंगलवार को कई जिलों में बादल छाए रहे। अगले 24 घंटे के दौरान 5 जिले- सिवनी, मंडला, बालाघाट, डिंडौरी और अनूपपुर में ही आंधी-बारिश का अलर्ट है। तूफान मुरासु के असर से छत्तीसगढ़ के सुकमा जिले में लगातार दो दिनों से बारिश हो रही है। मंगलवार रात को तेज बारिश के बाद बुधवार को भी दिन भर रिमझिम बारिश होती रही। इससे धान की फसल खराब होने होने की आशंका बढ़ गई है। सैटेलाइट मैप में देखें मानसूनी बादलों की स्थिति देशभर से मौसम की तस्वीरें
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यूपी में AI से चलेगी रोडवेज बसों की व्यवस्था: 30 करोड़ रुपये से बनेगा नया सिस्टम, 120 डिपो की 14,300 बसों का संचालन होगा एक प्लेटफॉर्म से – Lucknow News
उत्तर प्रदेश में रोडवेज बसों का संचालन अब नई तकनीक से करने की तैयारी है। इसके लिए परिवहन निगम आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) आधारित सिस्टम लागू करने जा रहा है। इस पर करीब 30 करोड़ रुपये खर्च होंगे। इसके लिए टेंडर भी जारी कर दिया गया है। नई व्यवस्था लागू होने के बाद प्रदेश के सभी डिपो की बसों का संचालन एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म से किया जा सकेगा। परिवहन राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) दयाशंकर सिंह ने बताया कि इस सिस्टम से यात्रियों की संख्या और उनकी जरूरत के हिसाब से बसों का संचालन होगा। AI तकनीक यह पता लगाने में मदद करेगी कि किस रूट पर कितने यात्रियों की आवाजाही है और वहां कितनी बसों की जरूरत है। इसी के आधार पर बसों का समय और उनके बीच का अंतर तय किया जाएगा। हर 15 मिनट में मिल सकेगी बस अभी परिवहन निगम के 120 डिपो से करीब 14,300 बसें चल रही हैं। इनसे रोजाना 17 लाख से ज्यादा यात्री सफर करते हैं। नई व्यवस्था में सभी डिपो की बसों का टाइम टेबल एक साथ जोड़ा जाएगा। उदाहरण के तौर पर, अगर किसी रूट पर हर 15 मिनट में बस की जरूरत है तो अलग-अलग डिपो की बसों का समय इस तरह तय किया जाएगा कि यात्रियों को नियमित अंतराल पर बस मिलती रहे। इससे बसों का इंतजार कम होगा। जिस रूट पर ज्यादा यात्री, वहां बढ़ेंगी बसें नई तकनीक से यह भी पता चलेगा कि किस रूट पर ज्यादा यात्री सफर करते हैं और कहां बसों की जरूरत कम है। इसके हिसाब से बसों की संख्या तय की जाएगी। इससे एक तरफ यात्रियों को समय पर बस मिलेगी, वहीं दूसरी तरफ खाली या कम यात्रियों वाली बसों के संचालन पर होने वाला खर्च भी कम किया जा सकेगा। चालकों की ड्यूटी और बसों की मरम्मत का भी हिसाब इस सिस्टम से सिर्फ बसों का समय ही तय नहीं होगा, बल्कि चालकों और परिचालकों की ड्यूटी, बसों की सर्विसिंग और मरम्मत का रिकॉर्ड भी डिजिटल तरीके से रखा जाएगा। परिवहन निगम के मुख्यालय और क्षेत्रीय अधिकारी एक ही प्लेटफॉर्म से बसों और डिपो के कामकाज पर नजर रख सकेंगे। यात्रियों की संख्या बढ़ने से बढ़ेगी कमाई परिवहन मंत्री के मुताबिक, बसों का सही इस्तेमाल होने और यात्रियों को बेहतर सुविधा मिलने से रोडवेज में सफर करने वालों की संख्या बढ़ सकती है। इससे निगम की कमाई भी बढ़ेगी। साथ ही ईंधन, बसों और कर्मचारियों का बेहतर इस्तेमाल होने से खर्च कम करने में मदद मिलेगी। निगम की बचत और बढ़ी हुई कमाई का इस्तेमाल यात्रियों को और बेहतर सुविधाएं देने में किया जा सकेगा।
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भोपाल के एमवीएम ग्राउंड में 12 दिन चला स्वदेशी मेला: हस्तशिल्प, घरेलू सामान-देशी उत्पाद के 200 स्टॉल रहे; हजारों लोगों ने खरीदे – Bhopal News
भोपाल के एमवीएम ग्राउंड में 12 दिन चले स्वदेशी मेले का समापन हो गया है। बुधवार रात को राज्यपाल मंगुभाई पटेल भी मेले में पहुंचे। इस मेले में देशभर के स्वदेशी उत्पादों, हस्तशिल्प, दैनिक उपयोग की वस्तुओं, स्थानीय उद्योगों और स्टार्टअप्स के 200 से अधिक स्टॉल लगाए गए। मेले में खरीदारी के साथ सांस्कृतिक कार्यक्रम और विभिन्न प्रतियोगिताएं भी आकर्षण का केंद्र रहे। स्वदेशी जागरण मंच और स्वर्णिम भारतवर्ष फाउंडेशन के संयुक्त तत्वावधान में मेले का आयोजन किया गया। आयोजकों के मुताबिक, मेले में कारीगरों, बुनकरों, शिल्पकारों और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (एमएसएमई) को अपने उत्पादों के प्रदर्शन और बिक्री का अवसर मिला। इसके जरिए युवाओं, महिलाओं और नए उद्यमियों को भी स्वरोजगार व उद्यमिता के लिए प्रोत्साहित किया गया। सांसद बोले- सभी 55 जिलों में हो ऐसे मेले मेले में पहुंचे सांसद आलोक शर्मा ने कहा कि भोपाल का गौरवशाली इतिहास और समृद्ध संस्कृति रही है। शहर में स्वदेशी मेले के आयोजन की लंबे समय से प्रतीक्षा थी। स्वदेशी जागरण मंच का सराहनीय प्रयास हैं। उनकी इच्छा है कि इसी तरह के स्वदेशी मेले मध्य प्रदेश के सभी 55 जिलों में आयोजित किए जाएं। ऐसे आयोजन अलग-अलग क्षेत्रों के लोगों और उनके प्रयासों को आपस में जोड़ने का काम करते हैं। उन्होंने भोपाल में अपने कार्यकाल के दौरान भोपाल मेले की शुरुआत का उल्लेख करते हुए कहा कि अब शहर में स्वदेशी जागरण मंच द्वारा स्वदेशी मेले का आयोजन होना प्रसन्नता की बात है। उन्होंने सुझाव दिया कि आने वाले समय में रानी कमलापति की स्मृति में भी मेले का आयोजन किया जाना चाहिए। देश को मजबूत बनाने के लिए समाज को भी आगे आना होगा-मिश्रा
भाजपा मध्य प्रदेश के मोर्चा प्रभारी मनोरंजन मिश्रा ने कहा कि वर्ष 1991 में जब पूरी दुनिया में वैश्वीकरण की चर्चा हो रही थी, उस समय स्वदेशी के विचार पर भी गंभीर विमर्श शुरू हुआ था। भोपाल में अध्ययन के दौरान उन्होंने पहली बार स्वदेशी के बारे में सुना था। उस समय उम्र कम होने के कारण इसकी व्यापकता को समझ नहीं पाए थे, लेकिन आज मेले में वक्ताओं के विचार सुनकर और यहां की गतिविधियों को देखकर स्वदेशी का महत्व समझ में आता है। उन्होंने कहा कि स्वदेशी को केवल आर्थिक दृष्टिकोण से नहीं देखना चाहिए, बल्कि इसके सामाजिक और सांस्कृतिक पक्षों को भी समझना जरूरी है। जापान जैसे देशों ने अपने भीतर स्व का भाव जागृत करके प्रगति की है। भारत में भी पहले स्थानीय व्यवस्थाओं और परंपराओं के आधार पर समाज का संचालन होता था। अंग्रेजों के शासन के दौरान शिक्षा, स्वास्थ्य और प्रशासन की जो व्यवस्थाएं आईं, स्वतंत्रता के बाद भी काफी हद तक उन्हीं पद्धतियों को अपनाया गया। कृषि और गांवों को स्वदेशी से जोड़ना जरूरी
भारतीय किसान संघ के अध्यक्ष सर्वज्ञ दीवान ने कहा कि स्वदेशी का भाव कृषि और गांवों के जीवन से गहराई से जुड़ा हुआ है। वे स्वयं कृषि क्षेत्र से आते हैं। आज खेती में केवल उर्वरक ही नहीं, बल्कि बीज जैसी जरूरी चीजों के लिए भी विदेशी स्रोतों पर निर्भर रहना पड़ रहा है, जबकि गांवों का जीवन और कृषि व्यवस्था पहले पूरी तरह स्वदेशी पर आधारित हुआ करती थी। उन्होंने कहा कि स्वदेशी को केवल खानपान या वस्तुओं के उपयोग तक सीमित नहीं रखना चाहिए, बल्कि इसे अपनी पूरी जीवनशैली और दिनचर्या का हिस्सा बनाना होगा। गांवों के लोगों और किसानों को मजबूत करने से ही देश मजबूत होगा। स्वावलंबन भारत फाउंडेशन के सीईओ संकेत सिंह राठौड़ ने कहा कि 1947 में देश की आजादी के साथ एक लड़ाई समाप्त हुई थी, लेकिन उसी वर्ष आर्थिक लड़ाई की शुरुआत भी हो गई थी। आज यह लड़ाई अपने अंतिम चरण में है। पूरी दुनिया वैश्वीकरण से स्थानीयकरण की ओर बढ़ रही है और स्वदेशी का विचार इस बदलाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सांस्कृतिक कार्यक्रम भी हुए
मेले के दौरान प्रतिदिन रात में सांस्कृतिक कार्यक्रमों में लोक नृत्य, गायन और वादन सहित विभिन्न रंगारंग प्रस्तुतियां हुईं। कार्यक्रम में मेला संयोजक सतीश विश्वकर्मा, स्वदेशी जागरण मंच के मध्य क्षेत्र संयोजक सुधीर दाते, स्वर्णिम भारतवर्ष फाउंडेशन के सीईओ राठौड़, सांसद शर्मा, मोर्चा प्रभारी मिश्रा, किसान संघ के अध्यक्षज्ञ दीवान, राजीव गांधी प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के संचालक संजीव शर्मा, श्रीकांत बुदौलिया, सीमा भारद्वाज, दीपक वर्मा, रमन तिवारी, शोभराज सुखवानी, अजय सोनी, अभिषेक तिवारी, हरिओम सेन, महेंद्र सिंह चौहान, वीरेंद्र पटेल, अश्विनी कुमार,सहित अन्य पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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कौन सा बैंक दे रहा है FD पर सबसे ज्यादा ब्याज? कहां मिल रहा 8.60% रिटर्न
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Highest FD Interest Rates : अगर आप भी बिना किसी जोखिम के घर बैठे अपनी गाढ़ी कमाई पर बंपर मुनाफा कमाने की सोच रहे हैं तो यह खबर सीधे आपकी जेब से जुड़ी है. भारतीय रिजर्व बैंक के रेपो रेट में इजाफा करने के बाद कई बैंकों ने फिकस्ड डिपॉजिट की ब्याज दरें बढ़ा दी हैं. देश में इस समय कौन सा बैंक एफडी पर सबसे ज्यादा ब्याज दे रहा है, आइये जानते हैं.
स्मॉल फाइनेंस बैंकों से लेकर देश के दिग्गज सरकारी और प्राइवेट बैंकों ने अपनी नई दरें लागू कर दी हैं. एफडी की ब्याज की रेस में स्मॉल फाइनेंस बैंक बड़े सरकारी और प्राइवेट बैंकों को पीछे छोड़ते नजर आ रहे हैं. अगर सही जगह और सही बैंक में पैसा लगाया जाए तो आपको एफडी पर 8.60% तक का धांसू रिटर्न मिल सकता है. (Photo : Canva)
सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक इस समय ग्राहकों पर सबसे ज्यादा मेहरबान है. बैंक ने 30 अक्टूबर 2026 से अपनी नई ब्याज दरें लागू की हैं. बैंक सामान्य ग्राहकों को 5 साल की एफडी पर8.25% का भारी-भरकम ब्याज दे रहा है. वहीं, अगर आप सीनियर सिटीजन हैं, तो आपके लिए यह दर पूरे 8.60% तक पहुंच जाती है. (Photo : Canva)
सूर्योदय स्मॉल फाइनेंस बैंक में केवल 5 साल ही नहीं, बल्कि 18 महीने की अवधि वाली एफडी पर भी ग्राहकों खूब ब्याज मिल रहा है. बैंक 18 महीने की जमा राशि पर आम ग्राहकों को 8.01% और वरिष्ठ नागरिकों को 8.16% सालाना ब्याज दे रहा है. यानी अगर आप बहुत लंबे समय के लिए पैसा लॉक नहीं करना चाहते, तो डेढ़ साल की यह स्कीम आपके लिए बेहद मुफीद साबित हो सकती है. (Photo : Canva)
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उत्कर्ष स्मॉल फाइनेंस बैंक ने 1 नवंबर से अपनी एफडी ब्याज दरों में बदलाव किया है. बैंक ने अपनी 666 दिन की एक खास अवधि वाली एफडी पर पर सामान्य ग्राहकों को 8.10% और वरिष्ठ नागरिकों को 8.50% की दर से सालाना ब्याज देने का ऐलान किया है. इसके अलावा 2 साल से 3 साल से कम की अवधि पर आम ग्राहक को बैंक 7.50% और सीनियर सिटीजन्स को 7.90% का ब्याज दे रहा है. (Photo : canva)
कोटक महिंद्रा बैंक और एक्सिस बैंक भी अपने ग्राहकों को एफडी पर अच्छा ब्याज दे रहे हैं. कोटक महिंद्रा बैंक ने 4 नवंबर से अपनी चुनिंदा एफडी दरों में बदलाव करते हुए 2 से 3 साल से कम की एफडी पर आम लोगों को 6.80% और बुजुर्गों को 7.55% ब्याज देना शुरू किया है. वहीं एक्सिस बैंक 2 से 10 साल की एफडी पर सामान्य ग्राहकों को अधिकतम 6.60% और 5 से 10 साल की अवधि पर वरिष्ठ नागरिकों को 7.35% तक का आकर्षक रिटर्न दे रहा है. (Photo : Canva)
पंजाब नेशनल बैंक (PNB) और बैंक ऑफ इंडिया भी एफडी पर 7.35 फीसदी तक ब्याज दे रहे हैं. पीएनबी अपनी 444 दिन की स्पेशल एफडी पर आम ग्राहक को 6.60% और सीनियर सिटीजन को 7.10% ब्याज दे रहा है. बैंक ऑफ इंडिया ने 3 करोड़ रुपये से कम जमा के लिए अपनी नई ‘BOI अक्षय एफडी’ लॉन्च की है. इस स्कीम में सामान्य नागरिकों को 6.85%, 60 से 80 वर्ष के वरिष्ठ नागरिकों को 7.35% और 80 वर्ष से अधिक के सुपर सीनियर सिटीजन्स को 7.50% ब्याज मिल रहा है.
एफडी में पैसा लगाने से पहले सिर्फ सबसे ऊंची ब्याज दर देखकर ही फैसला न कर लें, बल्कि कुछ बुनियादी नियमों को भी समझें. निवेश करने से पहले यह जरूर जांच लें कि जमा की अवधि आपकी वित्तीय योजना के अनुकूल है या नहीं. इसके साथ ही समय से पहले पैसा निकालने पर लगने वाली पेनल्टी और शर्तों भी अच्छे से जांच लें.
एक और सबसे महत्वपूर्ण बात जो हर निवेशक को गांठ बांध लेनी चाहिए, वह है एफडी से होने वाली कमाई पर लगने वाला टैक्स. फिक्स्ड डिपॉजिट से मिलने वाला ब्याज पूरी तरह कर-मुक्त नहीं होता. यह आपकी सालाना आय में जुड़कर आपके तय इनकम टैक्स स्लैब के अनुसार टैक्स के दायरे में आता है.
युवक की लाठियों से पीट-पीटकर हत्या: पुरानी रंजिश में 2 हिस्ट्रीशीटर ने मिलकर मारा, मौके पर ही मौत, दोनों आरोपी डिटेन – rajsamand (kankroli) News
राजसमंद में आपसी रंजिश में एक युवक की लाठियों से पीट-पीटकर हत्या करने का मामला सामने आया है। दो हिस्ट्रीशीटर ने युवक को जब तक पीटा, तब उसने दम नहीं तोड़ दिया। घटना राजनगर-कांकरोली सीमा पर सुलूस रोड पर बुधवार की रात करीब 7 बजे की है। डीएसपी नेत्र पाल सिंह ने बताया- मृतक की पहचान चारभुजा थाना क्षेत्र निवासी सुरेंद्र सिंह के रूप में हुई है। वारदात में शामिलन आरोपी दिलशान और इलियास को डिटेन कर लिया है। दोनों आरोपी राजनगर और कांकरोली क्षेत्र के हिस्ट्रीशीटर हैं। घटना राजनगर थाना सर्किल में सुलूस रोड़ पर रात करीब 7 बजे की है। डीएसपी ने बताया कि सूचना मिलते ही पुलिस अधिकारी मौके पर पहुंचे और घटनास्थल का जायजा लिया। जरूरी कार्रवाई के बाद शव को राजसमंद जिला हॉस्पिटल की मॉर्च्युरी में रखवाया है। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार हत्या के पीछे आपसी रंजिश को कारण माना जा रहा है। पुलिस पूरे मामले की जांच में जुटी है।
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