Wednesday, October 14, 2026
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फर्रुखाबाद में डीएम ने फावड़ा चलाकर किया श्रमदान: गांधी गांव में श्रमिकों से मजदूरी और सुविधाओं की जानकारी ली, मरम्मत के निर्देश – Farrukhabad News




फर्रुखाबाद में जिलाधिकारी ने वीबीजी रामजी योजना के तहत राजेपुर ब्लॉक के गांधी गांव में चकमार्ग निर्माण कार्य का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने फावड़ा चलाकर श्रमदान किया और मौके पर काम कर रहे श्रमिकों से बातचीत की। डीएम ने निर्माण कार्य की स्थिति देखी और श्रमिकों से काम के दौरान मिलने वाली मजदूरी व सुविधाओं के बारे में जानकारी ली। जिलाधिकारी ने श्रमिक रामा देवी, विमला और काजल से मजदूरी भुगतान और अन्य सुविधाओं के बारे में पूछा। श्रमिकों ने बताया कि उन्हें प्रतिदिन 300 रुपये की मजदूरी सीधे उनके बैंक खातों में मिलती है। डीएम ने संबंधित अधिकारियों को नियमित रूप से कार्यस्थलों का निरीक्षण करने और श्रमिकों को समय पर मजदूरी का भुगतान सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। 2.54 लाख रुपये की लागत से बन रहा चकमार्ग ग्राम रोजगार सेवक ने बताया कि नौसारा से दहेलिया डामर रोड तक 937 मीटर लंबा और पांच मीटर चौड़ा चकमार्ग बनाया जा रहा है। इस पर 2.54 लाख रुपये की लागत से मिट्टी का काम हो रहा है। राजेपुर ब्लॉक की 81 ग्राम पंचायतों में कुल 132 काम चल रहे हैं। बाढ़ से क्षतिग्रस्त चकमार्ग और आरआरसी की मरम्मत के निर्देश डीएम ने बाढ़ से क्षतिग्रस्त चकमार्ग पर काम शुरू कराने के निर्देश दिए। उन्होंने क्षतिग्रस्त गोटियां आरआरसी का भी निरीक्षण किया और उसकी तत्काल मरम्मत कराने के आदेश दिए। निरीक्षण के दौरान मुख्य विकास अधिकारी विनोद कुमार गौड़, एसडीएम श्वेता साहू समेत अन्य अधिकारी मौजूद रहे।



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सीएम के दौरे से पहले युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष हिरासत में: काले झंडे दिखाने का था प्लान, पुलिस ने कई नेताओं को भी किया नजरबंद – Umaria News




मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव के उमरिया दौरे से पहले जिला प्रशासन और पुलिस ने कांग्रेस नेताओं पर एक्शन लिया है। युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष अंबुज सिंह समेत कई नेताओं को हिरासत में लिया गया और नजरबंद किया गया। दरअसल, कांग्रेस नेताओं ने मुख्यमंत्री को काले झंडे दिखाने का ऐलान किया था। बुधवार सुबह से ही नेताओं को नजरबंद करने की तैयारी थी। युवा कांग्रेस जिलाध्यक्ष अंबुज सिंह के घर के बाहर पुलिस का पहरा था। इसके बावजूद जब अंबुज सिंह झंडे-बैनर लेकर कार्यकर्ताओं के साथ बाहर निकले, तो नौरोजाबाद पुलिस ने उन्हें पकड़ लिया। प्रशासन ने इससे पहले कांग्रेस नेताओं को नोटिस भी भेजे थे। कांग्रेस नेता सोशल मीडिया पर नजरबंद किए जाने की जानकारी दे रहे हैं। मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान किसी भी विरोध प्रदर्शन को रोकने के लिए पुलिस और प्रशासन अलर्ट पर है।



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मधेपुरा में बांसबाड़ी से आठवीं के छात्र का मिला शव: शाम से लापता था, गले पर मिले काले निशान; कान से निकल रहा था खून – Madhepura News




मधेपुरा में बुधवार की सुबह बांसबाड़ी से आठवीं कक्षा के छात्र का शव बरामद हुआ है। घटना सदर प्रखंड के मिठाई पुलिस शिविर क्षेत्र अंतर्गत बैरवा गांव की है। मृतक की पहचान गांव निवासी जयकांत यादव के बेटे रूपेश कुमार (15) के रूप में हुई है। वो घर का इकलौता बेटा था, उसकी बड़ी बहन की शादी हो चुकी है। रूपेश मंगलवार की शाम से लापता था। उसकी काफी खोजबीन की गई, लेकिन देर रात तक कोई सुराग नहीं मिला। बुधवार की अहले सुबह गांव की कुछ महिलाएं शौच के लिए बांसबाड़ी की ओर गई। इसी दौरान उनकी नजर बांस के बीच पड़े किशोर के शव पर पड़ी। महिलाओं ने इसकी जानकारी ग्रामीणों को दी। इसके बाद मृतक के परिजनों को सूचना दी गई और स्थानीय लोगों ने पुलिस को मामले की जानकारी दी। आसपास के लोगों से पूछताछ कर रही पुलिस घटना की सूचना मिलते ही मिठाई पुलिस शिविर प्रभारी शिवानी कुमारी, सदर थानाध्यक्ष विमलेंदु कुमार और सदर एसडीपीओ अजय कुमार पुलिस बल के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। पुलिस अधिकारियों ने घटनास्थल का जायजा लिया। आसपास के लोगों से पूछताछ की। इसके बाद शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। मामले की जांच के लिए फॉरेंसिक साइंस लैब (एफएसएल) की टीम को भी बुलाया गया। टीम ने घटनास्थल से साक्ष्य जुटाने के लिए जांच की। घटनास्थल से आई तस्वीरें….. कान से निकल रहा था खून एसडीपीओ अजय कुमार ने बताया कि शुरुआती जांच में मामला हत्या का प्रतीत हो रहा है। मृतक के कान से खून निकल रहा था। गले पर भी हल्का काला निशान है। हालांकि, किशोर की मौत कैसे हुई और इसके पीछे क्या कारण है, यह पोस्टमार्टम रिपोर्ट और एफएसएल जांच के बाद ही स्पष्ट हो सकेगा। घटना के बाद गांव में शोक और दहशत का माहौल है। परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल है। पुलिस छात्र की मौत के कारणों का पता लगाने के लिए विभिन्न बिंदुओं पर जांच कर रही है। साथ ही, यह भी पता लगाया जा रहा है कि मंगलवार शाम से लापता होने के बाद रूपेश किन परिस्थितियों में बांसबाड़ी तक पहुंचा।



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कौन हैं बीआर शेट्टी, जिन्होंने बैंक ऑफ बड़ौदा से मांगा 1.44 लाख करोड़ का हर्जाना


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Bank of Baroda Case : एनएमसी हेल्थकेयर समूह के संस्थापक बीआर शेट्टी ने बैंक ऑफ बड़ौदा पर फर्जीवाड़े में शामिल होने आरोप लगाते हुए 15 अरब डॉलर के हर्जाने की मांग की है. शेट्टी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील करते हुए कहा है कि जब तक उन्हें हर्जाने की रकम नहीं दी जाती है, तब तक इस रकम पर 18 फीसदी ब्याज भी जोड़ा जाना चाहिए. शेट्टी ने कहा है कि यह हर्जाना बैंक की ओर से किए गए नुकसान के एवज में वसूला जा रहा है.

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कौन हैं बीआर शेट्टी, जिन्होंने बैंक ऑफ बड़ौदा से मांगा 1.44 लाख करोड़ हर्जाना Zoom

बैंक ऑफ बड़ौदा से फ्रॉड केस में 15 अरब डॉलर का हर्जाना मांगा गया है.

नई दिल्ली. बैंकों के खिलाफ तो आपने तमाम धोखाधड़ी और फर्जीवाडे़ के केस सुने होंगे, लेकिन इस मामले बैंक के धोखाधड़ी में शामिल होने का आरोप है. यह आरोप लगाया है एनएमसी हेल्थकेयर ग्रुप और यूएई एक्सचेंज के फाउंडर बीआर शेट्टी का. शेट्टी ने बैंक ऑफ बड़ौदा सहित 25 अन्य लोगों से 15 अरब डॉलर यानी करीब 1.44 लाख करोड़ रुपये का हर्जाना मांगा है. उन्होंने आरोप लगाया है कि इस सरकारी बैंक और उसके अधिकारियों ने एनएमसी ग्रुप की कंपनियों से जुड़े फ्रॉड में मदद की है और उनके खिलाफ ऐसी गारंटी के आधार पर कार्रवाई की, जिस पर उन्होंने कभी साइन किए ही नहीं हैं.

बीआर शेट्टी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील दायर की है, जिसमें सीधे नुकसान के लिए 5 अरब डॉलर के हर्जाने की मांग की है. इसके अलावा इस नुकसान की वजह से होने वाले नुकसान के लिए भी 5 अरब डॉलर मांगे हैं, जबकि इस मामले की वजह से उनके निवेश और कारोबारी अवसरों में हुए नुकसान के लिए 5 अरब डॉलर और मांगे गए हैं. इस तरह, कुल मिलाकर 15 अरब डॉलर हर्जाने के रूप में मांगे गए हैं. भारतीय करेंसी में यह करीब 1.44 लाख करोड़ रुपये आती है.

18 फीसदी ब्याज भी मांगा
बीआर शेट्टी ने बैंक ऑफ बड़ौदा सहित अन्य पर आरोप लगाने के साथ 15 अरब डॉलर का हर्जाना मांगा है और इस पर 18 फीसदी ब्याज की भी डिमांड की है. शेट्टी ने कहा कि जब तक उन्हें हर्जाने का भुगतान कर नहीं दिया जाता, तब तक इस रकम पर हर साल 18 फीसदी ब्याज भी दिया जाना चाहिए. शेट्टी ने बताया है कि साल 2019 तक बैंक ऑफ बड़ौदा एनएमसी हेल्थकेयर ग्रुप का प्रमुख बैंकर रहा था. इस दौरान बैंक सिर्फ ट्रांजेक्शन प्रोसेस नहीं कर रहा था, बल्कि समूह की कंपनियों और स्वतंत्र सप्लायर के तौर पर पेश की गई संस्थाओं के बीच ट्रांसफर के जरिये फंड का कथित डायवर्जन में भी मदद कर रहा था.

मनी लॉन्ड्रिंग के अलर्ट जारी किए
याचिका में आरोप लगाया गया है कि बैंक के सिस्टम ने मनी-लॉन्ड्रिंग के 100 से ज्यादा अलर्ट जारी किए थे, जिन्हें बाद में बंद कर दिया गया. बैंक पर यह आरोप भी लगाया गया है कि उसने बिना पर्याप्त सिक्योरिटी के क्रेडिट देना जारी रखा और ग्रुप के लोन और लेन-देन से जुड़ी चिंताओं की जानकारी ऑडिटर को नहीं दी. शेट्टी के मामले का एक अहम हिस्सा पर्सनल गारंटी और दूसरे ऐसे डॉक्यूमेंट्स से जुड़ा है, जिन पर उनके मुताबिक जाली साइन हैं. उनका आरोप है कि बैंक ने इन डॉक्यूमेंट्स की असलियत की ठीक से जांच किए बिना ही उनके खिलाफ देनदारियों को लेकर कार्रवाई शुरू कर दी. शेट्टी ने यह भी दावा किया है कि कुछ अकाउंट इंस्ट्रक्शन और ट्रांसफर बिना इजाजत के किए गए थे.

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Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…

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चलती बस का गेट खुला रहने पर युवक गिरा, मौत: सिर पर लगी चोट; बीकानेर से नाथद्वारा जा रही थी बस – Jodhpur News




बीकानेर से नाथद्वारा जा रही बस से गिरने पर एक युवक की मौत हो गई। चलती बस का गेट खुला रहने से युवक नीचे गिरा था। उसके सिर और शरीर पर गंभीर चोट आई थी। हादसा जोधपुर कमिश्नरेट के करवड़ थाना क्षेत्र में हुआ था। पुलिस ने युवक के पिता की रिपोर्ट पर बस ड्राइवर के खिलाफ लापरवाही से वाहन चलाने का मामला दर्ज किया है। पुलिस से मिली जानकारी अनुसार- मामले में पुरुषोत्तम माधवानी निवासी वल्लभ गार्डन, बीकानेर ने रिपोर्ट दर्ज कराई है। रिपोर्ट में बताया कि वे और उनका 32 साल का बेटा कृष्णा पी. माधवानी बीकानेर से नाथद्वारा जाने के लिए बस नंबर AR 11 C 9200 में सवार हुए थे। वे दोनों 12 अक्टूबर 2026 की रात करीब 9 बजे बीकानेर से रवाना हुए थे। 12 अक्टूबर की रात करीब 1 से 1:30 बजे के बीच जब बस जोधपुर में आईआईटी गेट नंबर 02 के पास पहुंची। कृष्णा माधवानी बस में बने वॉशरूम में गए। इस दौरान बस का मुख्य गेट खुला था, जिसके चलते बेटा तेज गति से चलती बस से नीचे सड़क पर जा गिरे। हादसे में उसके सिर और शरीर के अन्य हिस्सों पर गंभीर चोटें आईं। घटना के तुरंत बाद बस में मौजूद लोग और परिजन घायल कृष्णा को लेकर अस्पताल पहुंचे, जहाँ जांच के बाद डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। इसके बाद बॉडी को जोधपुर के महात्मा गांधी अस्पताल की मोर्चरी में रखवाया गया। घटना की सूचना मिलने पर करवड़ पुलिस ने एमजीएच मोर्चरी पहुंचकर परिजनों के बयान दर्ज किए। प्रार्थी पिता पुरुषोत्तम माधवानी की रिपोर्ट पर पुलिस ने बस चालक के खिलाफ मामला दर्ज कर लिया है।



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साबूदाना और आलू का फलाहारी पराठा, व्रत में स्वाद और सेहत का परफेक्ट मेल, जानिये रेसिपी

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व्रत के दौरान साबूदाना और आलू से बना फलाहारी पराठा आपके लिये एक स्वादिष्ट और ऊर्जावान विकल्प हो सकता है. इसे सेंधा नमक, मूंगफली पाउडर और मसालों के साथ आसानी से तैयार किया जा सकता है. इसे जरूर ट्राई करें.

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साबूदाना और आलू का फलाहारी पराठा, व्रत में स्वाद और सेहत का परफेक्ट मेल, Zoom

व्रत में बनाइए टेस्टी फलाहारी पराठा. Image AI

नवरात्रि, एकादशी या किसी भी व्रत के दौरान लोग ऐसे भोजन की तलाश में रहते हैं जो स्वादिष्ट होने के साथ-साथ पेट भरने वाला और ऊर्जा देने वाला भी हो. ऐसे में साबूदाना और आलू से बना फलाहारी पराठा एक शानदार विकल्प है. यह पराठा न केवल जल्दी तैयार हो जाता है बल्कि लंबे समय तक पेट भरा रखने में भी मदद करता है. साबूदाना कार्बोहाइड्रेट से भरपूर होता है, जबकि आलू शरीर को तुरंत ऊर्जा प्रदान करता है. आइए जानते हैं इसकी आसान रेसिपी.

आवश्यक सामग्री

1 कप साबूदाना
3 मध्यम आकार के उबले आलू
2 हरी मिर्च बारीक कटी हुई
2 बड़े चम्मच भुनी हुई मूंगफली का पाउडर
1 बड़ा चम्मच बारीक कटा हरा धनिया
1 छोटा चम्मच सेंधा नमक
½ छोटा चम्मच काली मिर्च पाउडर
घी या मूंगफली का तेल सेंकने के लिए

साबूदाना तैयार करने का तरीका

सबसे पहले साबूदाना को अच्छी तरह धो लें. इसके बाद इसे 4 से 5 घंटे या रातभर के लिए पानी में भिगो दें. ध्यान रखें कि पानी केवल साबूदाना की सतह तक ही हो. भीगने के बाद साबूदाना नरम और फूला हुआ हो जाएगा.

पराठे का मिश्रण तैयार करें

एक बड़े बर्तन में उबले हुए आलू को अच्छी तरह मैश कर लें. इसमें भीगा हुआ साबूदाना, मूंगफली पाउडर, हरी मिर्च, हरा धनिया, सेंधा नमक और काली मिर्च डालकर अच्छी तरह मिला लें. मिश्रण को कुछ मिनट तक हाथों से गूंथें ताकि यह एक समान हो जाए.

पराठा बनाने की विधि

  • मिश्रण से मध्यम आकार की लोई बनाएं. साफ प्लास्टिक शीट या बटर पेपर पर थोड़ा घी लगाकर लोई रखें और हाथों की मदद से धीरे-धीरे पराठे का आकार दें. चूंकि इसमें आटा नहीं होता, इसलिए इसे बेलने की बजाय हाथ से फैलाना बेहतर रहता है.
  • अब तवा गर्म करें और उस पर थोड़ा घी लगाएं. तैयार पराठे को सावधानी से तवे पर डालें. मध्यम आंच पर दोनों तरफ से सुनहरा और कुरकुरा होने तक सेंकें. जब पराठा अच्छी तरह सिक जाए तो इसे प्लेट में निकाल लें.

परोसने का तरीका

साबूदाना आलू का फलाहारी पराठा दही, मूंगफली की चटनी या व्रत वाली हरी चटनी के साथ बेहद स्वादिष्ट लगता है. इसे नाश्ते, दोपहर के भोजन या शाम के हल्के भोजन के रूप में भी खाया जा सकता है.

क्यों है खास?

यह पराठा ग्लूटेन-फ्री होता है और व्रत के दौरान शरीर को पर्याप्त ऊर्जा देने में मदद करता है. साबूदाना और आलू का यह स्वादिष्ट संयोजन बच्चों से लेकर बड़ों तक सभी को पसंद आता है. यदि आप व्रत में कुछ नया और पौष्टिक बनाना चाहते हैं, तो साबूदाना आलू का फलाहारी पराठा जरूर ट्राई करें.



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पोप लियो को लंग कैंसर, निचला हिस्सा निकाला गया: ट्यूमर की सर्जरी के दौरान पता चला; मई 2025 में सर्वोच्च धर्मगुरु चुने गए थे




पोप लियो XIV को लंग कैंसर होने की पुष्टि हुई है। वेटिकन ने मंगलवार को मेडिकल बुलेटिन जारी कर इसकी जानकारी दी। दरअसल 71 साल के पोप के फेफड़े में ट्यूमर मिला था, जिसे निकालने के लिए रोम के एक अस्पताल में उनकी 90 मिनट तक सर्जरी की गई। सर्जरी के दौरान उनके दाएं फेफड़े का निचला हिस्सा निकाला गया। जांच में इसमें कैंसर होने की पुष्टि हुई। वेटिकन के मुताबिक, सर्जरी सफल रही और इस दौरान कोई परेशानी नहीं आई। सर्जरी के बाद पोप को होश भी आ गया था। पोप लियो XIV को 8 मई 2025 को कैथोलिक चर्च का 267वां पोप चुना गया था। वे अमेरिका से आने वाले पहले पोप हैं। ऑपरेशन से पहले भी कैंसर का शक था पोप लियो XIV ने रविवार को अपनी सर्जरी की जानकारी दी थी। उन्होंने रोम में सेंट पीटर्स स्क्वायर के सामने बालकनी से लोगों को संबोधित किया था। पोप ने बताया था कि उनके फेफड़े की गांठ सीमित है और शुरुआती चरण में ही इसका पता चल गया। डॉक्टरों ने उन्हें गांठ हटाने के लिए सर्जरी कराने की सलाह दी थी। फेफड़ों में बनने वाली छोटी गांठों को पल्मोनरी नोड्यूल कहा जाता है। ये गांठें आम होती हैं और जरूरी नहीं कि कैंसर वाली हों। वेटिकन ने बताया कि पोप के फेफड़े में गांठ मिलने के बाद हुई जांच में पल्मोनरी एडेनोकार्सिनोमा यानी कैंसर की पुष्टि हुई। ऑपरेशन से पहले की जांच में भी इसी तरह के कैंसर का शक था। कैंसर फैलने की जांच कर रहे डॉक्टर पोप के अस्पताल में भर्ती होने की खबर सुनकर बड़ी संख्या में लोग उनसे मिलने पहुंचे। लोगों ने घंटों इंतजार किया। पोप की कार पहुंचने पर उन्होंने उनका स्वागत किया। पोप ने भी कार की खिड़की से हाथ हिलाकर लोगों का अभिवादन किया।ट AFP के मुताबिक, उनकी सफल सर्जरी के बाद डॉक्टर अब जांच कर रहे हैं कि कैंसर शरीर के दूसरे हिस्सों में तो नहीं फैला है। पोप को उनके स्वास्थ के चलते आराम करने की सलाह दी गई है। उनके सार्वजनिक कार्यक्रम भी 20 अक्टूबर तक रद्द कर दिया गया है। जानिए पोप कौन होते हैं और कैसे चुने जाते हैं… पोप कैथोलिक ईसाई धर्म के सबसे बड़े धर्मगुरु होते हैं। उन्हें दुनिया भर के कैथोलिक ईसाइयों का आध्यात्मिक नेता माना जाता है। जिस तरह हिंदू धर्म में शंकराचार्य जैसे बड़े धार्मिक गुरु होते हैं, उसी तरह कैथोलिक ईसाई धर्म में पोप का बहुत अहम स्थान है। हालांकि, दोनों की भूमिका और अधिकार अलग-अलग हैं। पोप वेटिकन सिटी में रहते हैं। यह इटली की राजधानी रोम के अंदर बसा दुनिया का सबसे छोटा देश है। पोप कैथोलिक चर्च के प्रमुख होते हैं और दुनिया भर के चर्चों, पादरियों और बिशपों का मार्गदर्शन करते हैं। वे धार्मिक नियमों, ईसाई शिक्षाओं और नैतिक मुद्दों पर अपनी बात रखते हैं। वे युद्ध, गरीबी और शांति जैसे वैश्विक मुद्दों पर भी लोगों से अपील करते हैं। गुप्त मतदान से चुने जाते हैं पोप जब किसी पोप की मृत्यु हो जाती है या वे अपने पद से इस्तीफा दे देते हैं, तब नए पोप को चुनने की प्रक्रिया शुरू होती है। इसके लिए 80 साल से कम उम्र के धर्मगुरु वेटिकन में इकट्ठा होते हैं और गुप्त मतदान करते हैं। इस प्रक्रिया को कॉन्क्लेव कहते हैं। दो-तिहाई वोट मिलने पर नए पोप का चुनाव होता है। चुनाव की खबर वेटिकन की सिस्टीन चैपल की चिमनी से निकलने वाले सफेद धुएं के जरिए दुनिया को दी जाती है। काला धुआं निकलने का मतलब है कि अभी नया पोप नहीं चुना गया है। पोप लियो का जन्म अमेरिका के शिकागो में हुआ था पोप लियो XIV का असली नाम रॉबर्ट फ्रांसिस प्रेवोस्ट है। उनका जन्म 14 सितंबर 1955 को अमेरिका के शिकागो शहर में हुआ था। वे कैथोलिक ईसाई धर्म के सबसे बड़े धार्मिक पद पर हैं। 8 मई 2025 को उन्हें कैथोलिक चर्च का 267वां पोप चुना गया था। उनसे पहले पोप फ्रांसिस इस पद पर थे। पोप बनने से पहले लियो XIV ने कई साल तक पादरी, मिशनरी और बिशप के रूप में काम किया। उन्होंने अपनी जिंदगी का लंबा समय दक्षिण अमेरिका के पेरू में बिताया। वहां उन्होंने लोगों के बीच रहकर धार्मिक और सामाजिक काम किए। उन्होंने पेरू के चिक्लायो इलाके में बिशप के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली। 2023 में पोप फ्रांसिस ने उन्हें वेटिकन में बिशप चुनने से जुड़े अहम विभाग का प्रमुख बनाया था। बाद में उन्हें कार्डिनल भी बनाया गया। कार्डिनल कैथोलिक चर्च के वरिष्ठ धर्मगुरु होते हैं, जो नए पोप को चुनने में हिस्सा लेते हैं। ———————— यह खबर भी पढ़ें… अजरबैजान में 96% मुस्लिम, फिर भी हिजाब बैन हुआ मुस्लिम बहुल देश अजरबैजान में स्कूलों में हिजाब पहनने को लेकर विवाद शुरू हो गया है। सरकार ने स्कूलों के ड्रेस कोड में बदलाव किया है। नए नियमों के तहत ऐसे कपड़े पहनने पर रोक लगाई गई है, जिन्हें सरकार धर्मनिरपेक्षता के खिलाफ मानती है। पूरी खबर पढ़ें…



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लखनऊ में 15 दिनों से बाढ़, 5 लाख लोग प्रभावित: राजस्थान में 3 दिन बारिश और ओले गिरने का अलर्ट; हिमाचल में बर्फबारी


नई दिल्ली2 घंटे पहले

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लखनऊ में 15 दिनों से बाढ़ के हालात बने हुए हैं। 5 लाख से ज्यादा लोग प्रभावित हैं। सबसे ज्यादा परेशानी फैजुल्लागंज में है। यहां 50 से 60 हजार से अधिक घर आधे से ज्यादा पानी में डूबे हैं। कुछ इलाकों में जलस्तर घटा है, लेकिन लोगों की मुश्किलें कम नहीं हुई हैं। सड़कों पर नाव चल रही हैं।

राजस्थान में आज एक नया वेस्टर्न डिर्स्टबेंस एक्टिव होगा, जिसके असर से 16 अक्टूबर तक राज्य के उत्तर-पूर्वी जिलों में आंधी-बारिश के साथ कहीं-कहीं ओले गिर सकते हैं। मौसम विभाग ने 14 अक्टूबर को 5 जिलों के लिए यलो अलर्ट जारी किया है।

वहीं, मौसम विभाग ने हिमाचल के मैदानी क्षेत्रों में बारिश, जबकि लाहौल-स्पीति, किन्नौर और चंबा की ऊंची चोटियों पर बर्फबारी होने का अनुमान जताया है।

उत्तराखंड के 9 जिलों में आज बारिश के आसार हैं। इनमें देहरादून, उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, नैनीताल और पिथौरागढ़ शामिल है। 3,500 मीटर या उससे ज्यादा ऊंचाई वाले इलाकों में बर्फबारी हो सकती है।

सैटेलाइट मैप में देखें मानसूनी बादलों की स्थिति

देशभर से मौसम की तस्वीरें

तस्वीर लखनऊ के फैजुल्लागंज की है। यहां 50 से 60 हजार घर पानी में डूबे हैं।

तस्वीर लखनऊ के फैजुल्लागंज की है। यहां 50 से 60 हजार घर पानी में डूबे हैं।

बिहार के बेगूसराय में मंगलवार सुबह घना कोहरा छाया रहा।

बिहार के बेगूसराय में मंगलवार सुबह घना कोहरा छाया रहा।

उत्तराखंड के केदारनाथ में बर्फबारी हो रही है।

उत्तराखंड के केदारनाथ में बर्फबारी हो रही है।

शिमला के रिज पर सुहावने मौसम का आनंद उठाते हुए टूरिस्ट और स्थानीय लोग।

शिमला के रिज पर सुहावने मौसम का आनंद उठाते हुए टूरिस्ट और स्थानीय लोग।

उत्तराखंड के नैनीताल में मंगलवार को हल्की बारिश होने से मौसम सुहावना हो गया ।

उत्तराखंड के नैनीताल में मंगलवार को हल्की बारिश होने से मौसम सुहावना हो गया ।

राज्यों के मौसम की खबर…

राजस्थान: आज से 3 दिन आंधी-बारिश और ओले गिरने का अलर्ट

राजस्थान में आज एक नया वेस्टर्न डिर्स्टबेंस एक्टिव होगा, जिसके असर से 16 अक्टूबर तक राज्य के उत्तर-पूर्वी जिलों में आंधी-बारिश के साथ कहीं-कहीं ओले गिर सकते हैं। पूरी खबर पढ़ें…

उत्तराखंड: 9 जिलों में बारिश के आसार

उत्तराखंड के 9 जिलों में आज बारिश की संभावना है। इनमें देहरादून, टिहरी, हरिद्वार, उत्तरकाशी, चमोली, रुद्रप्रयाग, बागेश्वर, नैनीताल और पिथौरागढ़ शामिल हैं। पूरी खबर पढ़ें…

हिमाचल: 7 जिलों में आंधी-तूफान का अलर्ट

हिमाचल प्रदेश में अगले चार दिन मौसम खराब रहेगा। वेस्टर्न डिस्टरबेंस के सक्रिय होने से प्रदेश के ऊंचे पहाड़ी क्षेत्रों में बर्फबारी, जबकि मैदानी और मध्यम ऊंचाई वाले इलाकों में हल्की से मध्यम बारिश होने की संभावना है। पूरी खबर पढ़ें…

पंजाब: दो दिन बारिश-आंधी के आसार

पंजाब और चंडीगढ़ में आज से दो दिन बारिश, ओलावृष्टि और तेज हवाएं चलने की संभावना है। हवाओं की रफ्तार 40 से 50 किलोमीटर प्रति घंटा रह सकती है। पूरी खबर पढ़ें…



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CJP कार्यकर्ता सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे गिरफ्तार: रात 3 बजे संसद मार्ग पुलिस स्टेशन लाए गए; 3 दिन में दूसरी बार अरेस्ट हुए


नई दिल्ली6 मिनट पहले

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संसद मार्ग थाने में बैठे अजिंक्य, आशुतोष और सौरव दास की यह फोटो रत्ना ने अपने X हैंडल पर पोस्ट की है।

कॉकरोच जनता पार्टी के 3 सदस्यों को दिल्ली पुलिस गिरफ्तार कर लिया है। यह दावा CJP लीगल टीम की हेड रत्ना सिंह ने एक X पोस्ट में किया है। तीनों के खिलाफ BNS की धारा 329 के तहत मामला दर्ज किया है।

रत्ना ने लिखा है- दिल्ली पुलिस ने सौरव दास, आशुतोष रांका और अजिंक्य शिंदे को पार्लियामेंट स्ट्रीट पुलिस स्टेशन से गिरफ्तार किया। उन पर अनाधिकृत प्रवेश, बॉन्ड की शर्तों के उल्लंघन और सरकारी काम में रुकावट डालने का आरोप है।

रत्ना के मुताबिक, तीनों को सुबह एससीएम कोर्ट में पेश किया जाएगा। जहां से उन्हें न्यायिक हिरासत में भी भेजा जा सकता है। तीनों को 17 घंटे बाद जाफरपुर कलां पुलिस स्टेशन से संसद मार्ग पुलिस स्टेशन लाया गया था।

सौरव दास, अजिंक्य और आशुतोष रांका को मंगलवार को दिल्ली पुलिस ने हिरासत में लिया था। इनके खिलाफ बिना इजाजत जंतर-मंतर में घुसने का मामला दर्ज किया गया है।

CJP के प्रवक्ता आशुतोष और सौरव दास को 3 दिन में दूसरी बार गिरफ्तार किया गया है। इससे पहले 10 अक्टूबर को तीनों एयरपोर्ट से ही अरेस्ट कर लिया गया था।

तस्वीर जाफरपुर कलां पुलिस स्टेशन से CJP कार्यकर्ताओं को बाहर लाने की हैं।

तस्वीर जाफरपुर कलां पुलिस स्टेशन से CJP कार्यकर्ताओं को बाहर लाने की हैं।

कॉकरोच जनता पार्टी और दिल्ली पुलिस की आंख-मिचौली : पिछले 4 दिन का हाल

10 अक्टूबर को 50 हजार के मुचलके पर छूटे थे CJP टॉप लीडर्स: सीजेपी ने ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग को लेकर और SIR के विरोध में 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रदर्शन बुलाया था।

सौरव दास और आशुतोष रांका, CJP फाउंडर अभिजीत दीपके को दिल्ली एयरपोर्ट पर फ्लाइट से ही पुलिस ने हिरासत में लिया था। तीनों को 11 अक्टूबर को दिल्ली कैंट की विशेष कार्यकारी मजिस्ट्रेट अदालत में पेश किया गया था।

इसके बाद उन्हें 50-50 हजार रुपए के जमानती मुचलके पर रिहा कर दिया गया। रिहाई की शर्त के मुताबिक, तीनों को एक साल तक शांति बनाए रखनी थी, ऐसा कोई काम नहीं करना था, जिससे शांति भंग हो।

हिरासत से छूटने के बाद CJP नेताओं ने थंब्स अप का इशारा किया था।

हिरासत से छूटने के बाद CJP नेताओं ने थंब्स अप का इशारा किया था।

13 अक्टूबर को पुलिस ने जंतर-मंतर से हिरासत में लिया: CJP समर्थकों के साथ जंतर-मंतर पर पहुंचे और नारेबाजी कर रहे थे, जिसके बाद पुलिस ने सभी को पकड़ लिया। इन दोनों के खिलाफ बिना इजाजत जंतर-मंतर में घुसने का मामला दर्ज किया गया। जंतर-मंतर के पास बैरिकेडिंग है, सभी गेट बंद हैं। प्रदर्शनकारी गेट के ऊपर से चढ़कर पहुंचे।

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जंतर-मंतर पर धरना-प्रदर्शन बैन: सरकार ने 33 साल पहले इजाजत दी थी; अन्ना आंदोलन, पहलवानों का प्रदर्शन, कॉकरोच पार्टी का धरना यहीं हुए

दिल्ली के जंतर-मंतर पर अब प्रदर्शन नहीं हो सकेंगे। केंद्र सरकार ने इसे निर्धारित प्रदर्शन स्थल की लिस्ट से हटा दिया है। सरकार ने 33 साल पहले जंतर-मंतर को प्रदर्शन की जगह तय किया था। यहीं पर अन्ना आंदोलन, पहलवानों का प्रदर्शन, कॉकरोच पार्टी का धरना हुआ था। पढ़ें पूरी खबर…



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धर्म की आज़ादी यह नहीं की कोई जमीन मांग लें: हाईकोर्ट ने याचिका खारिज की, कहा ऐसा नहीं ईसाई समुदाय कुछ भी मांगे – Prayagraj (Allahabad) News




धार्मिक आजादी को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट ने खास आदेश जारी किया। हाईकोर्ट ने कहा कि धर्म की आज़ादी के अधिकार (जिसमें धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अंतिम संस्कार करने का अधिकार भी शामिल है) के तहत किसी समुदाय को कब्रिस्तान बनाने के लिए स्थानीय निकाय की ज़मीन के किसी खास टुकड़े पर दावा करने का अधिकार नहीं मिलता।
जस्टिस जेजे मुनीर और जस्टिस इंद्रजीत शुक्ला की बेंच ने ‘क्रिश्चियन कम्युनिटी वेलफेयर सोसाइटी’ की रिट याचिका खारिज करते हुए यह टिप्पणी की।
सोसाइटी ने गाजियाबाद में बंजर ज़मीन के एक टुकड़े को ईसाई कब्रिस्तान में बदलने की अपनी अर्जी खारिज किए जाने को चुनौती दी थी। निकाय को दी थी कब्रिस्तान की जमीन कोर्ट ने कहा कि ग्राम सभा या स्थानीय निकाय को सौंपी गई ज़मीन को कब्रिस्तान के तौर पर इस्तेमाल के लिए सार्वजनिक उपयोग की ज़मीन में बदलना असल में एक प्रशासनिक फैसला है, जिसमें कई कारकों और परिस्थितियों पर विचार करना होता है। कोर्ट ने कहा कि किसी भी व्यक्ति को ऐसी ज़मीन (जो सार्वजनिक उपयोग की नहीं है) को सार्वजनिक उपयोग की ज़मीन में बदलने की मांग करने का कोई कानूनी अधिकार नहीं है, जिसे अदालत में लागू करवाया जा सके। नागरिकों की व्यापक समस्या हो तो विचार होगा बेंच ने आगे कहा कि अगर वाकई जगह की कमी हो और उस इलाके में रहने वाले नागरिकों के व्यापक और विविध जनहित को ध्यान में रखते हुए अधिकारी ऐसी अर्जी पर विचार कर सकते हैं तो वह एक अलग बात होगी। मामले के अनुसार सोसाइटीज़ रजिस्ट्रेशन एक्ट, 1860 के तहत रजिस्टर्ड याचिकाकर्ता सोसाइटी ने अपने अध्यक्ष विनय कुमार पॉल के ज़रिए हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया था। गाजियाबाद का क्या है मामला जानिये यह विवाद गाजियाबाद ज़िले की मोदी नगर तहसील के जलालबाद परगना के विसोखर गांव में स्थित 0.3420 हेक्टेयर ज़मीन से सम्बंधित है। सरकारी रिकॉर्ड में यह ज़मीन बंजर (ऊसर) ज़मीन के तौर पर दर्ज थी। सोसाइटी का तर्क था कि आस-पास के इलाके में रहने वाले ईसाइयों को अंतिम संस्कार करने में काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था, क्योंकि बेगमाबाद बुढ़ाना में मौजूद ईसाई कब्रिस्तान में जगह कम पड़ रही थी। यह बताया गया कि मोदी नगर की नगर पालिका परिषद के बोर्ड ने 22 जनवरी, 2018 को प्रस्ताव संख्या 11 पास किया, जिसमें ईसाई कब्रिस्तान के लिए ज़मीन आवंटित करने का प्रस्ताव था। यह प्रस्ताव ज़िला अधिकारियों को भेजा गया, लेकिन ज़मीन को प्रस्तावित मकसद के लिए बदला या आरक्षित नहीं किया गया। इसके बाद सोसाइटी ने अधिकारियों को कई बार अपनी बात रखी और सूचना का अधिकार अधिनियम, 2005 के तहत मामले से जुड़ी जानकारी हासिल की। इससे पहले भी उसने ईसाई समुदाय को ज़मीन का इस्तेमाल कब्रिस्तान के तौर पर करने की इजाज़त देने के निर्देश की मांग करते हुए जनहित याचिका के ज़रिए हाईकोर्ट का दरवाज़ा खटखटाया।
हाईकोर्ट ने दिया था निर्देश हाईकोर्ट के निर्देशों के बाद गाज़ियाबाद के अतिरिक्त ज़िला मजिस्ट्रेट (प्रशासन) ने इस साल जनवरी में उत्तर प्रदेश राजस्व संहिता, 2006 की धारा 77(2) के तहत अनुरोध खारिज किया। उस आदेश को चुनौती देते हुए सोसाइटी हाईकोर्ट पहुंची और तर्क दिया कि उपयुक्त ज़मीन आवंटित न करने से उसके सदस्यों के धर्म की आज़ादी के मौलिक अधिकार का उल्लंघन हुआ है, जिसका एक हिस्सा अंतिम संस्कार करना भी है। अफसरों ने कहा बंजर जमीन दूसरी ओर अधिकारियों का कहना था कि ज़मीन बंजर के तौर पर दर्ज थी और खाली पड़ी थी और पारंपरिक रूप से किसी भी समुदाय द्वारा इसका इस्तेमाल कब्रिस्तान के तौर पर नहीं किया जाता था। हालांकि, उप जिलाधिकारी की एक रिपोर्ट में स्थानीय निवासियों और समुदायों की अर्जियों का ज़िक्र किया गया, जिनमें यह आशंका जताई गई कि ईसाई समुदाय को ज़मीन आवंटित करने से भविष्य में सांप्रदायिक मतभेद पैदा हो सकते हैं। यह भी बताया गया कि पास में ही पहले से एक ईसाई कब्रिस्तान मौजूद है और उसका इस्तेमाल हो रहा है। इन हालात को देखते हुए ज़िला अधिकारियों ने यह निष्कर्ष निकाला कि उस चरण में विवादित ज़मीन को ईसाई कब्रिस्तान के लिए आवंटित करने का कोई औचित्य नहीं है। रेवेन्यू कोड, 2006 के प्रावधानों पर आदेश हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश रेवेन्यू कोड, 2006 के प्रावधानों को ध्यान में रखते हुए कहा कि गांव सभा या स्थानीय निकाय को सौंपी गई ज़मीन को सार्वजनिक उपयोग की ज़मीन में बदला जा सकता है, लेकिन यह असल में एक प्रशासनिक फ़ैसला है जिसमें कई तरह की स्थितियों और कारकों पर विचार किया जाता है। कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी भी व्यक्ति को ऐसा कोई कानूनी अधिकार नहीं है, जिसके तहत वह गांव सभा या स्थानीय निकाय के पास मौजूद ज़मीन के किसी खास हिस्से को कब्रिस्तान के लिए सार्वजनिक उपयोग की ज़मीन में बदलने की मांग कर सके।
धार्मिक स्वतंत्रता के बारे में सोसाइटी की दलील पर बेंच ने माना कि धार्मिक मान्यताओं के अनुसार अंतिम संस्कार करने का अधिकार धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का हिस्सा हो सकता है। हालांकि, कोर्ट ने साफ़ किया कि इस अधिकार का दावा इस तरह से नहीं किया जा सकता कि सोसाइटी या ईसाई समुदाय के सदस्य स्थानीय निकाय के पास मौजूद ज़मीन के किसी खास हिस्से को ईसाई कब्रिस्तान के लिए आरक्षित करने की ज़िद कर सकें। कोर्ट ने याचिका खारिज कर दी कोर्ट ने कहा “यह सच है कि याचिकाकर्ता यह कह सकता है कि अपने धर्म के नियमों के अनुसार अंतिम संस्कार करने का अधिकार उनके धार्मिक स्वतंत्रता के अधिकार का हिस्सा है, लेकिन इस अधिकार का दावा इस तरह से नहीं किया जा सकता कि याचिकाकर्ता या ईसाई समुदाय के सदस्य स्थानीय निकाय के पास मौजूद ज़मीन के किसी खास हिस्से को ईसाई कब्रिस्तान बनाने के मकसद से आरक्षित करने की मांग कर सकें।” हाईकोर्ट ने उस खास ज़मीन के लिए की गई मांग खारिज करने वाला आदेश रद्द करने का कोई कानूनी आधार न मिलने पर याचिका खारिज कर दिया।



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