नई दिल्ली. सरकार ने घरेलू विनिर्माण को बढ़ावा देने और आयात पर निर्भरता कम करने के लिए 6 सेक्टर पर जोर देने की बात कही है. इसके लिए विशिष्ट कार्य समूह बनाए हैं, जो 100 उत्पादों की पहचान करेंगे. मामले से जुड़े अधिकारी ने बताया कि इसका उद्देश्य इन उत्पादों का स्वदेशीकरण बढ़ाना और आयात पर निर्भरता घटाना है. ये समूह इस उद्देश्य के लिए उत्पादों की सूची पर चर्चा करेंगे और उनके द्वारा तैयार की गई अंतिम सूची तीन हफ्ते के भीतर कैबिनेट सचिवालय को सौंपी जाएगी.
सरकार ने जिन 6 सेक्टर्स को चुना है उसमें फार्मास्युटिकल्स, बायोटेक और मेडिकल डिवाइसेज, केमिकल्स और पेट्रोकेमिकल्स, वस्त्र और फुटवियर, पूंजीगत वस्तुएं, ऑटोमोटिव और इलेक्ट्रिक वाहन, एडवांस कैपिटल प्रोडक्ट, ऊर्जा, निर्माण उपकरण और इन्फ्रास्ट्रक्चर, रक्षा और एयरोस्पेस (सिर्फ नागरिक उपयोग के लिए) और इलेक्ट्रॉनिक्स पर आधारित हैं. इन समूहों के सदस्य विभिन्न मंत्रालयों और विभागों से हैं, जिनमें वाणिज्य, डीपीआईआईटी, नीति आयोग, फार्मास्युटिकल्स, आर्थिक मामलों, विज्ञान और प्रौद्योगिकी, केमिकल्स, वस्त्र, भारी उद्योग, पोर्ट्स और शिपिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी, सड़क परिवहन, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा, और तेल शामिल हैं.
कैसे कम होगी आयात पर निर्भरता इन समूहों की अध्यक्षता उद्योग संवर्धन और आंतरिक व्यापार विभाग (डीपीआईआईटी) के सचिव करेंगे. ये समूह उन उत्पादों की पहचान करेंगे, जो या तो भारत में निर्मित नहीं होते या देश की जरूरतों के हिसाब से पर्याप्त मात्रा में नहीं बनते. इसका उद्देश्य घरेलू और वैश्विक दोनों बाजारों के लिए विनिर्माण का विस्तार करना है. इस कदम का मकसद विदेशी मुद्रा के बहाव को भी कम करना है, क्योंकि इससे भारतीय मुद्रा की कीमत पर असर पड़ रहा है. 2025-26 में भारत का आयात 7.5 फीसदी बढ़कर 775 अरब डॉलर हो गया.
कहां खर्च हो रहा भारत का पैसा पिछले वित्तवर्ष में भारत द्वारा मुख्य रूप से जिन उत्पादों का आयात किया गया, उनमें कच्चा तेल (174 अरब डॉलर), वनस्पति तेल (19.5 अरब डॉलर), उर्वरक (16 अरब डॉलर), अयस्क और खनिज (14.12 अरब डॉलर), कोयला, कोक और ब्रिकेट्स (27.9 अरब डॉलर), केमिकल्स (लगभग 28 अरब डॉलर), कृत्रिम रेजिन, प्लास्टिक सामग्री (22.75 अरब डॉलर), मशीनरी (61.73 अरब डॉलर), परिवहन उपकरण (34.75 अरब डॉलर) और इलेक्ट्रॉनिक सामान (116.2 अरब डॉलर) शामिल हैं.
बॉलीवुड के जाने-माने फिल्म प्रोड्यूसर और सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन (CBFC) के पूर्व चेयरमैन पहलाज निहलानी का 76 साल की उम्र में निधन हो गया है. उनके जाने से फिल्म इंडस्ट्री में एक ऐसा खालीपन आ गया है, जिसे भरा नहीं जा सकता. निहलानी सिर्फ एक प्रोड्यूसर ही नहीं थे, बल्कि 90 के दशक के सुपरस्टार गोविंदा के गॉडफादर भी थे. अपने आखिरी दिनों में ‘इल्जाम’, ‘शोला और शबनम’ और ‘आंखें’ जैसी ब्लॉकबस्टर फिल्में देने वाले फिल्ममेकर ने गोविंदा के करियर के बारे में एक चौंकाने वाला और कड़वा सच बताया था, जिसने पूरी इंडस्ट्री को हिलाकर रख दिया था.
नई दिल्ली. एंटरटेनमेंट की दुनिया से एक बहुत ही दुखद खबर आई है. हिंदी सिनेमा के सुनहरे दौर की शुरुआत करने वाले और कई कल्ट फिल्में बनाने वाले पहलाज निहलानी अब हमारे बीच नहीं रहे. 76 साल की उम्र में उनका निधन हो गया. उनके निधन की खबर ने पूरी फिल्म इंडस्ट्री को चौंका दिया है, खासकर एक्टर गोविंदा के लिए. यह एक पर्सनल और कभी न पूरी होने वाली क्षति है. पहलाज निहलानी ने ही गोविंदा के छिपे हुए टैलेंट को पहचाना और उन्हें फिल्म ‘इल्जाम’ (1986) से बड़ा ब्रेक देकर रातोंरात स्टार बना दिया. इसके बाद दोनों ने ‘शोला और शबनम’ और ‘आंखें’ जैसी ऑल-टाइम ब्लॉकबस्टर फिल्मों से बॉक्स ऑफिस पर राज किया.
लेकिन, पहलाज निहलानी सिर्फ अपनी फिल्मों के लिए ही नहीं, बल्कि इंडस्ट्री में अपनी बेबाकी और सच्चाई के लिए भी जाने जाते थे. अपनी मौत से कुछ समय पहले एक इंटरव्यू में उन्होंने बॉलीवुड के उस कड़वे और डार्क साइड के बारे में बताया जिसे लोग अक्सर छिपाने की कोशिश करते हैं. उन्होंने साफ-साफ कहा कि गोविंदा का करियर अपने आप नहीं बिगड़ा, बल्कि फिल्म इंडस्ट्री के कुछ जाने-माने ‘पंडितों’ और असरदार लोगों ने उनका करियर बर्बाद करने की साजिश रची.
90 के दशक में गोविंदा का स्टारडम इतना ज्यादा था कि उन्होंने एक साथ 49 फिल्में साइन करने का रिकॉर्ड बनाया था. लेकिन, समय बदला और उन्हें धीरे-धीरे साइडलाइन किया जाने लगा. जब 2007 में सलमान खान के साथ गोविंदा की फिल्म ‘पार्टनर’ रिलीज हुई, तो सबको लगा कि यह चीची का कमबैक है और फिल्म ब्लॉकबस्टर रही, लेकिन पहलाज निहलानी ने ‘पिंकविला’ को दिए अपने एक इंटरव्यू में बड़ा खुलासा करते हुए कहा था, ”पार्टनर’ की जबरदस्त सफलता के बाद, असल में सब कुछ गोविंदा के खिलाफ हो गया था. उस बड़ी सफलता के बाद भी, उन्हें फिल्में मिलना बंद हो गईं. उन्होंने जो कई बड़ी फिल्में साइन की थीं, उन्हें जानबूझकर रोक दिया गया, जिसमें प्रियंका चोपड़ा के साथ उनकी एक बड़ी फिल्म भी शामिल थी.’ पहलाज ने दर्द भरे लहजे में कहा था, ‘अगर कोई सामने से हमला करे तो समझ में आता है, लेकिन जब कोई पीठ में छुरा घोंपता है, तो कोई निशान नहीं बचता और आपको पता भी नहीं चलता. गोविंदा के साथ यही हुआ. उनकी पीठ में कई बार छुरा घोंपा गया.’
Add News18 as Preferred Source on Google
बॉलीवुड में अक्सर यह फैलाया जाता था कि गोविंदा सेट पर देर से आते थे और प्रोड्यूसर्स को परेशान करते थे, जिससे प्रोड्यूसर्स उनसे दूरी बना लेते थे. इस प्रोपेगैंडा को गलत साबित करते हुए पहलाज निहलानी ने हमेशा अपने पसंदीदा एक्टर का बचाव किया था. उन्होंने कहा था, ‘जब मैंने 2019 में गोविंदा के साथ ‘रंगीला राजा’ बनाई, तो कई बड़े प्रोड्यूसर्स मेरे पास आए और पूछा कि क्या गोविंदा मुझे सेट पर परेशान करते हैं. मैंने साफ मना कर दिया. वह मेरे लिए टाइम पर आते थे, यहां तक कि अपनी सुबह 6 बजे की शिफ्ट में भी और पैक-अप के बाद ही जाते थे. यह सिर्फ उनके खिलाफ फैलाई गई एक सोची-समझी अफवाह थी ताकि उन्हें काम न मिले.’
फिल्म इंडस्ट्री में खोखलेपन और मतलबी रिश्तों के बारे में बात करते हुए, पहलाज निहलानी ने कुछ ऐसा कहा था जो उनके जाने के बाद अब और भी ज्यादा काम का लगता है. उन्होंने कहा था, ‘बॉलीवुड में कोई किसी का दोस्त नहीं होता, न ही कोई रिश्ते होते हैं. यहां दोस्त सिर्फ अच्छे समय के साथी होते हैं. समय बदलने के बाद कोई किसी की परवाह नहीं करता. इस इंडस्ट्री का कड़वा सच यह है कि अगर किसी बड़े स्टार की फिल्म फ्लॉप होती है, तो उसके सो-कॉल्ड दोस्त और दुश्मन चुपके से पार्टी और सेलिब्रेट करते हैं.’
जब पहलाज से गोविंदा की पत्नी सुनीता आहूजा के बारे में पूछा गया था, जिन्होंने एक इंटरव्यू में कहा था कि उनके करीबी लोगों ने उनका करियर बर्बाद कर दिया था, तो पहलाज ने उनकी बात का पूरा सपोर्ट किया था. उन्होंने कहा था, ‘सुनीता बिल्कुल सही कह रही हैं. वह गलत नहीं हैं. इन सो-कॉल्ड फिल्म पंडितों और सिंडिकेट्स ने मिलकर एक शानदार और टैलेंटेड एक्टर का करियर बर्बाद कर दिया.’
पहलाज निहलानी का जाना गोविंदा के लिए एक युग का अंत है. पहलाज हमेशा कहते थे कि वह गोविंदा के बारे में एक इंसान या एक्टर के तौर पर कभी कुछ नेगेटिव नहीं सुन या कह सकते. हालांकि उन्होंने यह भी माना कि गोविंदा की सोच में कभी-कभी कमियां थीं, जिससे वह समय पर साजिश करने वालों को पहचान नहीं पाए, लेकिन उनका टैलेंट बेमिसाल था.
न्यूज़18 को गूगल पर अपने पसंदीदा समाचार स्रोत के रूप में जोड़ने के लिए यहां क्लिक करें।
होर्मुज स्ट्रेट में टंटा के बीच आई खुशखबरी, LPG और तेल की कमी के बीच राहत
Last Updated:
India Solar Energy Generation: ईरान जंग के बीच एनर्जी कॉरिडोर के तौर पर मशहूर होर्मुज स्ट्रेट से LPG और तेल से लदे जहाजों की आवाजाही बुरी तरह से प्रभावित हुई है. इससे एनर्जी क्राइसिस की स्थिति पैदा हो गई है. बुरे वक्त में भारत ने सौर ऊर्जा के मामले में बड़ी सफलता हासिल की है.
होमुर्ज स्ट्रेट से जहाजों की आवाजाही बुरी तरह से प्रभावित होने से ऊर्जा संकट की स्थिति पैदा हो गई है. इस बीच, भारत ने सोलर एनर्जी जेनरेशन में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है. (फाइल फोटो/Reuters)
India Solar Energy Generation: ईरान जंग के चलते एनर्जी कॉरिडोर होर्मुज स्ट्रेट से तेल और गैस लदे जहाजों की आवाजाही बुरी तरह से प्रभाावित हुई है. इससे एशिया से लेकर यूरोप तक में एनर्जी क्राइसिस की स्थिति पैदा हो गई है. भारत पर भी इसका असर पड़ा है. अब ऊर्जा संकट के बीच बड़ी खुशखबरी सामने आई है. भारत ने सोलर एनर्जी जेनरेशन के मामले में उल्लेखनीय सफलता हासिल की है. यह किसी राहत से कम नहीं है. भारत ने स्वच्छ ऊर्जा के क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल करते हुए वर्ष 2025 में वार्षिक सौर ऊर्जा क्षमता वृद्धि के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ दिया है. केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने यह जानकारी देते हुए कहा कि भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सोलर ग्रोथ मार्केट बन गया है.
केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने सोशल एक्स पर पोस्ट शेयर कर बताया कि भारत की सौर ऊर्जा विकास गाथा वैश्विक स्तर पर नए मानक स्थापित कर रही है. उन्होंने कहा कि वर्ष 2025 में भारत ने वार्षिक सौर क्षमता वृद्धि के मामले में अमेरिका को पीछे छोड़ते हुए दूसरा स्थान हासिल किया है. जोशी के अनुसार, मजबूत सरकारी नीतियों, टेक्नोलॉजिकल इनोवेशन और विश्वस्तरीय बुनियादी ढांचे की बदौलत भारत दुनिया का सबसे तेजी से बढ़ता प्रमुख सौर ऊर्जा बाजार बनकर उभरा है. अधिकारियों के मुताबिक, अंतरराष्ट्रीय रिन्यूवेबल एनर्जी एजेंसी (आईआरईएनए) की ताजा रिपोर्ट में बताया गया है कि वर्ष 2025 के दौरान भारत ने 37 गीगावाट (GW) से अधिक नई सौर ऊर्जा क्षमता जोड़ी, जबकि इसी अवधि में अमेरिका ने 34 गीगावाट सौर क्षमता का विस्तार किया. इस उपलब्धि ने भारत को वैश्विक रैंकिंग में अमेरिका से आगे पहुंचा दिया.
दुनिया का दूसरा बड़ा सोलर एनर्जी मार्केट
केंद्रीय पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने भी इस उपलब्धि पर खुशी जताते हुए कहा कि भारत अब दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा सौर ऊर्जा बाजार बन चुका है. उन्होंने कहा कि यह उपलब्धि देश में स्वच्छ ऊर्जा क्षेत्र की तेज प्रगति को दर्शाती है और इससे अधिक भरोसेमंद, कुशल तथा टिकाऊ सौर ऊर्जा इंफ्रास्ट्रक्चर के निर्माण को बल मिलेगा. भारत की रिन्यूवेबल एनर्जी कैपेसिटी में लगातार हो रही वृद्धि का असर वैश्विक रैंकिंग में भी दिखाई दे रहा है. अप्रैल 2026 में जारी आईआरईएनए के आंकड़ों के अनुसार, कुल स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के मामले में भारत दुनिया में तीसरे स्थान पर पहुंच चुका है. इस सूची में चीन पहले और अमेरिका दूसरे स्थान पर है. भारत ने इस मामले में ब्राजील को पीछे छोड़ दिया है.
दुनिया के अन्य देशों का क्या हाल
दिसंबर 2025 तक के आंकड़ों के अनुसार, चीन के पास 2,258.02 गीगावाट रिन्यूवेबल एनर्जी कैपेसिटी है, जबकि अमेरिका 467.92 गीगावाट के साथ दूसरे स्थान पर है. भारत 250.52 गीगावाट क्षमता के साथ तीसरे स्थान पर है. इसके बाद ब्राजील 228.20 गीगावाट और जर्मनी 199.92 गीगावाट क्षमता के साथ चौथे और पांचवें स्थान पर हैं. प्रह्लाद जोशी ने यह भी बताया कि वित्त वर्ष 2025-26 के दौरान भारत ने 55.3 गीगावाट नॉन फॉसिल फ्यूल बेस्ड कैपेसिटी जोड़ी है.
बड़ी उपलब्धि
जुलाई 2025 में देश ने एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि दर्ज की जब कुल 203 गीगावाट बिजली मांग में से 51.5 प्रतिशत हिस्सेदारी नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों से पूरी की गई. विशेषज्ञों का मानना है कि सौर और अन्य स्वच्छ ऊर्जा स्रोतों में तेजी से बढ़ता निवेश भारत की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करने के साथ-साथ जलवायु लक्ष्यों को हासिल करने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा.
बिहार, उत्तर प्रदेश और दिल्ली से प्रारंभिक के साथ उच्च शिक्षा हासिल की. झांसी से ग्रैजुएशन करने के बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से पत्रकारिता में PG डिप्लोमा किया. Hindustan Times ग्रुप से प्रोफेशनल कॅरियर की शु…और पढ़ें
सरकार की तबादला एक्सप्रेस बनारस के डिप्टी एसपी को नई तैनाती दी गई है। जिले में सेवाकाल पूरा करने वालों का गैर जनपद तबादला किया गया है। बड़े पैमाने हुए 206 पीपीएस (प्रांतीय पुलिस सेवा) अधिकारियों के तबादले में 8 वाराणसी के हैं। पुलिस कमिश्नरेट के सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) में डा. अतुल अंजान त्रिपाठी, विदुष सक्सेना, प्रतीक कुमार, अंजनी राय, संजीव शर्मा, अजय श्रीवास्वत समेत अन्य अफसर शामिल हैं। सारनाथ एसीपी विदुष सक्सेना का स्थानांतरण पुलिस उपाधीक्षक, शाहजहांपुर के पद पर किया गया है। एसीपी दशाश्वमेध डा. अतुल अंजान त्रिपाठी का तबादला आगरा कमिश्नरेट में किया गया है। एडीसीपी पिंडरा प्रतीक कुमार को पुलिस उपाधीक्षक अयोध्या के पद पर भेजा गया है। एसीपी राजातालाब अजय कुमार श्रीवास्तव को पुलिस उपाधीक्षक, कुशीनगर के पद पर किया गया है। एसीपी सुरक्षा ज्ञानवापी अंजनी कुमार राय को पुलिस उपाधीक्षक सचिवालय सुरक्षा के तौर पर तैनाती दी गई है। रोहनिया में तैनात एसीपी संजीव कुमार शर्मा को पुलिस उपाधीक्षक संभल भेजा गया है। एसीपी अमित कुमार को पुलिस उपाधीक्षक पीटीसी मुरादाबाद के पद पर तैनाती मिली है। एसीपी वरुण मिश्रा को जनपद चंदौली भेजा गया है। वाराणसी से जुड़े शेषमणि उपाध्याय को एडीजी वाराणसी जोन में स्टाफ ऑफिसर तथा अनिल कुमार पाण्डेय को सहायक पुलिस आयुक्त, कमिश्नरेट वाराणसी के पद पर नियुक्त किया गया है। इस व्यापक तबादला आदेश को कानून-व्यवस्था और प्रशासनिक कार्यों को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
बिहार के मुजफ्फरपुर में एक प्राइवेट अस्पताल के ICU में आग लगने से 5 लोगों की मौत हो गई। वहीं, 20 से ज्यादा लोग झुलस गए। इस पर अब कांग्रेस ने वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार को घेरा है। बिहार कांग्रेस प्रवक्ता डॉ. स्नेहाशीष वर्धन ने कहा कि, राज्य में इतनी बड़ी घटना हो जाती है और स्वास्थ्य मंत्री दिल्ली दौरे पर हैं। पूरे बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था ऐसे ही धराशायी है। इस बात को वर्तमान स्वास्थ्य मंत्री को समझना चाहिए। बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था ICU में भर्ती डॉ. स्नेहाशीष वर्धन ने आगे कहा कि, बिहार की स्वास्थ्य व्यवस्था पहले से ही CAG के रिपोर्ट के मुताबिक, ICU में भर्ती है। ऐसे में इस तरह के लापरवाही से अब मरीज जाए तो जाए कहां। बिहार में जहां एक ओर रेफर सिस्टम को सुधारने की बात हो रही है। जहां अस्पताल को बताया जा रहा है कि किस तरीके से काम कीजिए, ऐसे में इतनी बड़ी घटना अस्पताल में घटित हो जाती है। आखिर अस्पताल प्रशासन को एनओसी किसने दिया है। स्वास्थ्य मंत्री निशांत ने जताया दुख मुजफ्फरपुर के निजी अस्पताल में आगजनी की घटना को लेकर स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार में सोशल मीडिया पर पोस्ट कर दुख जताया है। उन्होंने अपने पोस्ट में लिखा- मुजफ्फरपुर के निजी अस्पताल में आग लगने से कई लोगों की मृत्यु का समाचार अत्यंत दुःखद और हृदयविदारक है। इस हादसे से प्रभावित परिवारों के प्रति मैं गहरी संवेदना व्यक्त करता हूं।
उन्होंने बताया कि, जिला प्रशासन को घायल मरीजों की सुरक्षा एवं उपचार के लिए हर संभव कदम उठाने के निर्देश दिए गए हैं। राहत के कार्य युद्धस्तर पर चलाने के आदेश भी दिये गए हैं। इस दुखद घटना की जांच होगी। जिम्मेवारी तय होगी।
उन्होंने आगे लिखा कि, ईश्वर दिवंगत आत्माओं को अपने श्रीचरणों में स्थान दें तथा शोकाकुल परिजनों को इस कठिन समय में धैर्य, शक्ति और संबल प्रदान करें। शॉर्ट सर्किट से लगी आग, एसी में हुआ ब्लास्ट यह हादसा बुधवार रात करीब 3 बजे हुआ। आग शॉर्ट सर्किट से लगी। इसके बाद ICU में लगे एसी में ब्लास्ट हुआ। इसकी वजह से आग तेजी से फैली। सूचना मिलते ही फायर ब्रिगेड अस्पताल पहुंची और आग पर काबू पाया। लोगों ने मौके से स्टाफ के गायब होने का आरोप लगाया। परिजन अपने मरीजों को स्ट्रैचर से बाहर ले जाते दिखे। ICU वार्ड 5वीं फ्लोर पर है, जिसकी वजह से रेस्क्यू में दिक्कत आई। दमकलकर्मियों ने ICU और अस्पताल के दूसरे वार्डों में फंसे मरीजों को खिड़कियां और दरवाजे तोड़कर बाहर निकाला। तीन मृतकों की पहचान हो गई है, जिनमें, गीता देवी, चंचला कुमारी, 57 साल के उदय कुमार, 30 साल के शशांक कुमार शामिल हैं। एक की पहचान नहीं हो पाई है।
शाजापुर शहर के वार्ड नंबर 4 में मुरतल्ली बाबा की दरगाह के पास की सड़क पानी निकासी की उचित व्यवस्था न होने के कारण क्षतिग्रस्त हो गई है। एक साल पहले डामरीकरण के बावजूद, जल जमाव से सड़क जगह-जगह से उखड़ गई है, जिससे वाहन चालकों को आवागमन में भारी परेशानी हो रही है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बारिश और गंदे पानी के लगातार जमाव से सड़क की स्थिति बिगड़ती जा रही है। ऑटो रिक्शा चालक रितेश राठौर ने बताया, “जब भी हम इस मार्ग से सामान लेकर गुजरते हैं, तो झटकों के कारण सामान गिर जाता है और ऑटो चलाना मुश्किल हो जाता है।” मोहम्मद नावेद खान ने जानकारी दी कि पानी की निकासी न होने से गंदा पानी सड़क पर फैला रहता है। इससे राहगीरों को भी दिक्कत होती है और उनके कपड़े खराब हो जाते हैं। स्थानीय नागरिकों ने नगर पालिका से जल्द मरम्मत और स्थायी जल निकासी व्यवस्था की मांग की है। इस संबंध में नगर पालिका अध्यक्ष प्रेम जैन ने बताया कि पानी निकासी की समस्या के कारण ही सड़क क्षतिग्रस्त हुई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि मरम्मत कार्य आज या कल में शुरू कर दिया जाएगा, ताकि बारिश के मौसम में लोगों को किसी प्रकार की परेशानी न हो।
सूखी लौकी चना दाल की सब्जी एक पौष्टिक और स्वादिष्ट डिश है, जो खासतौर पर घर के खाने में पसंद की जाती है. इसमें लौकी की हल्की मिठास और चना दाल की मजबूती का बेहतरीन संतुलन मिलता है. यह सब्जी न केवल स्वाद में अच्छी होती है, बल्कि सेहत के लिए भी बहुत फायदेमंद होती है. आइए जानते हैं इसे बनाने की आसान रेसिपी.
आवश्यक सामग्री ताज़ी लौकी– 2 कप (छोटी कटी हुई) चना दाल – ½ कप (भिगोई हुई, 1-2 घंटे) तेल – 2 टेबलस्पून जीरा – 1 छोटा चम्मच हींग – एक चुटकी प्याज – 1 (बारीक कटा हुआ) हरी मिर्च – 1-2 (कटी हुई) अदरक-लहसुन पेस्ट – 1 छोटा चम्मच टमाटर – 1 (कटा हुआ) हल्दी पाउडर – ½ छोटा चम्मच धनिया पाउडर – 1 छोटा चम्मच लाल मिर्च पाउडर – ½ छोटा चम्मच गरम मसाला – ¼ छोटा चम्मच नमक – स्वादानुसार हरा धनिया – सजाने के लिए
बनाने की विधि 1. दाल तैयार करें सबसे पहले चना दाल को अच्छी तरह धोकर 1–2 घंटे के लिए भिगो दें. इससे दाल जल्दी पकती है और नरम रहती है.
2. लौकी तैयार करें अगर आप सूखी लौकी का उपयोग कर रहे हैं, तो उसे पहले हल्के गुनगुने पानी में थोड़ी देर भिगो लें ताकि वह नरम हो जाए. अगर ताज़ी लौकी है, तो उसे छीलकर छोटे टुकड़ों में काट लें.
3. तड़का लगाएं एक कढ़ाई या प्रेशर कुकर में तेल गरम करें. उसमें जीरा डालें. जब जीरा चटकने लगे, तो हींग डालें. इसके बाद कटा हुआ प्याज डालकर सुनहरा होने तक भूनें.
4. मसाले डालें अब इसमें अदरक-लहसुन पेस्ट और हरी मिर्च डालकर अच्छी तरह चलाएं. फिर टमाटर डालें और उसे नरम होने तक पकाएं. इसके बाद हल्दी, धनिया पाउडर, लाल मिर्च और नमक डालकर मसालों को भून लें.
5. लौकी और दाल मिलाएं अब भिगोई हुई चना दाल और लौकी डालें. अच्छी तरह मिक्स करें. यदि आप थोड़ा ग्रेवी रखना चाहते हैं, तो थोड़ा पानी डाल सकते हैं.
6. पकाएं अगर आप प्रेशर कुकर का इस्तेमाल कर रहे हैं, तो 2–3 सीटी आने तक पकाएं. कढ़ाई में बना रहे हैं तो ढककर मध्यम आंच पर 15–20 मिनट तक पकाएं, जब तक दाल नरम न हो जाए.
7. फाइनल टच जब सब्जी पक जाए, तो ऊपर से गरम मसाला डालें और अच्छे से मिलाएं. गैस बंद करें और ताजा हरा धनिया डालकर सजाएं.
खाने के फायदे चना दाल प्रोटीन का अच्छा स्रोत है. लौकी शरीर को ठंडक देती है. पाचन के लिए भी यह सब्जी बेहद फायदेमंद होती है.
परोसने का तरीका इस स्वादिष्ट सूखी लौकी चना दाल को आप गरम-गरम रोटी, पराठे या सादे चावल के साथ परोस सकते हैं.
ब्राजील और मेक्सिको के बीच इन दिनों भूरे रंग के एक अवारा कुत्ते को लेकर विवाद छिड़ गया है। इसका नाम कारामेलो है। ब्राजील के लोग इस कुत्ते को देश की पहचान मानते हैं। उनका कहना है कि ब्राजील में कारामेलो उतना ही खास है जितना फुटबॉल और सांबा संगीत।
मेक्सिको ने इसी साल अप्रैल में कारामेलो को स्थानीय नस्ल घोषित कर दिया जिसके बाद यह विवाद शुरू हुआ। मेक्सिको के इस फैसले ने ब्राजील में नाराजगी पैदा कर दी। कई ब्राजीलियाई लोगों को लगा कि उनकी सांस्कृतिक पहचान का एक महत्वपूर्ण हिस्सा उनसे छीना जा रहा है।
वैज्ञानिक दृष्टि से कारामेलो किसी एक शुद्ध नस्ल का कुत्ता नहीं है। ब्राजील की जेनेटिक्स कंपनी DNA पेट्स की स्टडी के मुताबिक, यह 300 से ज्यादा विदेशी नस्लों के कुत्तों के मिश्रण से बना है। यह किसी एक समय पर विकसित की गई नस्ल नहीं, बल्कि कई पीढ़ियों में सैकड़ों नस्लों के प्राकृतिक मिश्रण से बना कुत्ता है।
कारामेलो नाम इन कुत्तों के हल्के भूरे या टॉफी जैसे रंग की वजह से पड़ा है। ब्राजील में इन कुत्तों की लोकप्रियता इतनी ज्यादा है कि इन पर मीम बनते हैं, टी-शर्ट छपती हैं, वायरल गाने बनाए जाते हैं और कार्निवल परेड में इनके सम्मान में झांकियां तक निकाली जाती हैं। यहां तक कि इन्हें ब्राजील की मुद्रा पर जगह देने का प्रस्ताव भी चर्चा में आया था।
2020 में 200 रियास के नोट पर भी इस कुत्ते की तस्वीर लगाने की मांग उठी, जिसे और ज्यादा समर्थन मिला।
ब्राजील में राष्ट्रीय विरासत बनाने की कोशिश
कारामेलो पुर्तगाली भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ कैरेमल या टॉफी जैसा हल्का भूरा रंग होता है। इसी रंग के कारण ब्राजील में भूरे रंग के अवारा कुत्तों को ‘कारामेलो’ कहा जाता है।
2019 में यह डॉग सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था। इसकी लोकप्रियता इतनी बढ़ी कि लोगों ने ब्राजील के 10 रियास के नोट पर बने पक्षी की जगह कारामेलो डॉग की तस्वीर लगाने की मांग शुरू कर दी। इसके लिए शुरू हुई एक याचिका पर करीब 50 हजार लोगों ने साइन किए।
इसके बाद 2023 में ब्राजील के सांसदों ने एक बिल पेश किया था, जिसमें कारामेलो स्ट्रीट डॉग्स को राष्ट्रीय धरोहर घोषित करने की मांग की गई थी। हालांकि, यह कानून अब तक पास नहीं हो सका है।
इसके बाद साओ पाउलो समेत कुछ राज्यों ने अपने स्तर पर इन्हें सांस्कृतिक विरासत का दर्जा देने वाले कानून बनाए। रियो डी जेनेरियो के एक डॉग पार्क में हाल ही में बड़ी संख्या में ऐसे भूरे कुत्ते दिखाई दिए।
साल 2025 में कारामेलो कुत्ते पर नेटफ्लिक्स की एक फिल्म भी बनी थी।
100 साल में विकसित हुआ कारामेलो
शोध के अनुसार कारामेलो की जड़ें उन कुत्तों तक जाती हैं जिन्हें पुर्तगाली उपनिवेशवादी अपने साथ ब्राजील लाए थे। बाद में इटली, जर्मनी, स्पेन और जापान से आए प्रवासी भी विभिन्न नस्लों के कुत्ते लेकर आए।
1930 से 1970 के बीच ब्राजील में औद्योगीकरण बढ़ा। इस दौरान ग्रामीण इलाकों के लोग शहरों की ओर आए तो वे अपने साथ खेतों और पशुओं की रखवाली करने वाले कुत्तों को भी लेकर आए।
शहरों में पहले से मौजूद छोटे पालतू कुत्तों के साथ इनका मेल हुआ। कई पीढ़ियों तक बिना किसी नियंत्रण के प्रजनन होने के बाद आज के कारामेलो कुत्ते अस्तित्व में आए।
मेक्सिको में भी पाए जाते है ये भूरे कुत्ते
अप्रैल में मेक्सिको के पर्यावरण अभियोजक कार्यालय ने कारामेलो को मेक्सिकन नस्ल घोषित किया। अपने बयान में कार्यालय ने कहा कि इस कदम का मकसद देसी और आवारा कुत्तों को लेकर लोगों की नकारात्मक सोच बदलना है।
मेक्सिको में जानवरों की संस्था से जुड़ी क्लाउडिया एडवर्ड्स ने कहा कि मेक्सिको में भी ऐसे भूरे कुत्ते बड़ी संख्या में मिलते हैं। इसकी वजह दोनों देशों का मिलता-जुलता इतिहास और मौसम है।
उन्होंने कहा कि ब्राजील ने सबसे पहले इन कुत्तों को पहचान जरूर दिलाई। लेकिन कारामेलो सिर्फ एक देश का नहीं, पूरे लैटिन अमेरिका का है।
ब्राजील में कारामेलो डॉग लोगों के बीच बहुत लोकप्रिय है।
गर्म मौसम में आसानी से ढल जाते हैं कारामेलो कुत्ते
ब्राजील के लगभग हर शहर में ये भूरे कुत्ते दिखाई देते हैं। स्थानीय लोग अक्सर इन्हें खाना खिलाते हैं और इनकी देखभाल भी करते हैं। कई जगह ये मोहल्लों के साझा कुत्ते बन चुके हैं।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक, इनका छोटा और हल्का भूरा फर इन्हें गर्म मौसम में फायदा देता है। इससे शरीर पर कम कीड़े लगते हैं और तेज धूप में भी ये आसानी से रह पाते हैं। मिश्रित नस्ल होने की वजह से इनमें कई जन्मजात बीमारियों का खतरा भी कम रहता है।
यही वजह है कि ये कुत्ते काफी मजबूत और परिस्थितियों के हिसाब से खुद को ढाल लेने वाले होते हैं।
कई कारामेलो लोकप्रियता बढ़ने के बावजूद शेल्टर होम्स में है
कारामेलो कुत्तों की लोकप्रियता बढ़ी है लेकिन बड़ी संख्या में ये अब भी शेल्टर होम्स में पड़े हैं। ब्राजील की सबसे बड़ी एनिमल वेलफेयर संस्था अम्पारा की संस्थापक जूलियाना कैमर्गो ने कहा कि लोग अब भी इन्हें सबसे पहले गोद लेने के लिए नहीं चुनते।
एनिमल वेलफेयर ग्रुप्स की एक ग्लोबल स्टडी के मुताबिक, ब्राजील में दो करोड़ से ज्यादा आवारा कुत्ते हैं। कैमर्गो का अनुमान है कि इनमें 90% से ज्यादा कारामेलो हैं।
जूलियाना कैमर्गो का मानना है कि अगर ब्राजील और मेक्सिको दोनों जगह कारामेलो कुत्तों को पहचान मिलेगी तो ज्यादा लोग इन्हें अपनाने के लिए आगे आएंगे।
Motorola Edge 70 सीरीज का सबसे तगड़ा फोन भारत में लॉन्च हो गया है। यह पिछले दिनों लॉन्च हुए Edge 70 Fusion, Edge 70 और Edge 70 Pro के बाद इस सीरीज में लॉन्च होने वाला चौथा फोन है। Motorola Edge 70 Pro Plus 5G को भारत में 6,500mAh की बैटरी, 50MP सेल्फी कैमरा, 12GB रैम जैसे फीचर्स के साथ उतारा गया है। इसके अलावा इसमें मीडियाटेक का एक्स्ट्रीम चिपसेट भी दिया गया है।
Motorola Edge 70 Pro Plus 5G की कीमत
मोटोरोला का यह फोन भारत में एक ही स्टोरेज वेरिएंट – 12GB RAM + 256GB में लॉन्च किया गया है। इस फोन की कीमत 47,999 रुपये है। कंपनी ने फोन की खरीद पर 3,000 रुपये का इंस्टैंट डिस्काउंट ऑफर किया है। इसकी पहली सेल 11 जून को ई-कॉमर्स वेबसाइट Flipkart पर आयोजित की जाएगी। इस फोन को कंपनी तीन कलर ऑप्शन- Panatone Stromy Sea, Panatone Chicory Coffee और Panatone Zinfandel में खरीद सकते हैं।
Motorola Edge 70 Pro Plus 5G के फीचर्स
डिस्प्ले- इस फोन में 6.8 इंच का कर्व्ड AMOLED डिस्प्ले मिलता है, जो सुपर एचडी रेजलूशन को सपोर्ट करता है। इस फोन के डिस्प्ले का रेजलूशन 1.5K पिक्सल है। साथ ही, इसमें इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर दिया गया है। यह 144Hz रिफ्रेश रेट और 5200 निट्स तक की पीक ब्राइटनेस को सपोर्ट करता है।
प्रोसेसर- मोटोरोला का यह मिड बजट फोन MediaTek Dimensity 8500 Extreme चिपसेट पर काम करता है। यह प्रोसेसर 4nm फेब्रिकेशन टेक्नोलॉजी पर काम करता है।
स्टोरेज- Motorola Edge 70 Pro Plus में 12GB रैम और 256GB तक इंटरनल स्टोरेज का सपोर्ट मिलता है।
कैमरा- मोटोरोला के इस फोन के बैक में ट्रिपल कैमरा सेटअप मिलता है। इसमें 50MP का मेन, 50MP का सेकेंडरी और 50MP का तीसरा कैमरा दिया गया है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए भी इस फोन में 50MP का कैमरा मिलेगा।
बैटरी- इस स्मार्टफोन में 6,500mAh की दमदार बैटरी दी गई है। इसके साथ 90W टर्बो चार्जिंग का सपोर्ट मिलेगा। इस फोन में 15W वायरलेस चार्जिंग का भी सपोर्ट मिलता है।
मोटोरोला का यह फोन Android 16 ऑपरेटिंग सिस्टम पर काम करता है। इसमें IP68 और IP69 रेटिंग दी गई है, जिसकी वजह से पानी और धूल-मिट्टी में यह खराब नहीं होगा। इसके अलावा फोन Google Gemini AI फीचर्स से लैस है।
अलवर जिले में पिछले पांच दिनों तक मौसम में बदलाव और रुक-रुक कर हुई बारिश से लोगों को गर्मी से राहत मिली थी, लेकिन बुधवार को एक बार फिर गर्मी का असर देखने को मिला तापमान 40 डिग्री तक पहुंच गया। गुरूवार को सुबह से धूप निकली हुई हैं। मौसम विभाग ने गुरुवार से अगले पांच दिनों का पूर्वानुमान जारी किया है। इसके अनुसार 4 से 7 जून तक जिले में आंशिक रूप से बादल छाए रहने के साथ गरज-चमक, हल्की बारिश और धूलभरी आंधी चलने की संभावना है। गुरुवार और शुक्रवार के लिए भी इसी प्रकार की चेतावनी जारी की गई है, जबकि 6 और 7 जून को भी मौसम सक्रिय रहने का अनुमान है। मौसम विभाग के अनुसार यदि जिले में हल्की बारिश और तेज हवाएं चलती हैं तो तापमान फिर से 36 डिग्री सेल्सियस तक नीचे आ सकता है। हालांकि 8 और 9 जून के लिए कोई विशेष चेतावनी जारी नहीं की गई है। इन दिनों मौसम साफ रहने और तापमान में बढ़ोतरी होने की संभावना है, जिससे 9 जून तक पारा फिर 40 डिग्री सेल्सियस के आसपास पहुंच सकता है। गौरतलब है कि पिछले दिनों जिले के कई क्षेत्रों में कहीं बूंदाबांदी तो कहीं तेज बारिश और आंधी दर्ज की गई थी, जिससे तापमान में गिरावट आई थी। अब मौसम विभाग ने अगले तीन-चार दिनों तक बादल, बारिश और