गोरखपुर के बीआरडी मेडिकल कालेज से सोमवार को एक माह की नवजात बच्ची के गायब हो गई। बाल सेवा संस्थान के एनआईसीयू में भर्ती बच्ची की तबीयत में सुधार होने के बाद उसे फीडिंग के लिए कंगारू मदर केयर वार्ड में मां के पास भेजा गया था। करीब दो घंटे बाद डाक्टर वार्ड में पहुंचे तो मां और बच्ची दोनों गायब मिले। कुछ देर बाद माता-पिता मेडिकल चौकी पहुंचे और पुलिस को सूचना दी। पूछताद में माता-पिता के बयान में अलग-अलग बात सामने आई। मां का कहना है कि रुपये निकालने के दौरान उसने बच्ची को एक महिला को दिया था। पुलिस अस्पताल में लगे सीसी कैमरों की फुटेज खंगालकर बच्ची और संदिग्ध महिला की तलाश में जुटी है। 15 अक्टूबर को भर्ती कराई गई बच्ची
संतकबीरनगर जिले के बेलहर कला थाना क्षेत्र के गोपालपुर निवासी राममनोहर की पत्नी रोशनी ने एक माह पहले सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर आपरेशन से बच्ची को जन्म दिया था। बच्ची की तबीयत खराब होने पर 15 अक्टूबर को उसे बीआरडी मेडिकल कालेज में भर्ती कराया गया था। यहां बाल सेवा संस्थान के एनआईसीयू में 500 नंबर बेड पर उसका उपचार चल रहा था। बच्ची की हालत में सुधार होने पर सोमवार सुबह 11:30 बजे उसे फीडिंग के लिए कंगारू मदर केयर वार्ड में मां को सौंपा गया था। दो घंटे बाद जूनियर डाक्टर वार्ड का निरीक्षण करने पहुंचे तो मां और बच्ची वहां नहीं मिलीं। इस बीच जानकारी मिलने पर राममनोहर अस्पताल पहुंचा और पत्नी रोशनी के साथ मेडिकल चौकी पहुंचे और बच्ची के गायब होने की सूचना दी। सीसीटीवी कैमरे खंगाल रही पुलिस
सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय हो गई और अस्पताल परिसर में लगे सीसी कैमरों की फुटेज के आधार पर बच्ची की तलाश शुरू कर दी। बच्ची के पिता राममनोहर के मुताबिक, घटना से पहले सुबह से ही पत्नी की मानसिक स्थिति ठीक नहीं थी। वह पत्नी की देखभाल के लिए आई अपनी साली को घर छोड़ने गया था। उस समय वार्ड में पत्नी बच्ची के साथ अकेली थी। दोपहर में फोन से बच्ची के गायब होने की जानकारी मिली। वहीं, रोशनी का कहना है कि वह खाना खाने के लिए बच्ची को लेकर वार्ड से निकली थी। रुपये निकालने के लिए उसने पास खड़ी एक महिला को बच्ची संभालने के लिए दी थी। कुछ ही देर बाद महिला बच्ची को लेकर गायब हो गई। पुलिस दोनों के बयानों के आधार पर मामले की जांच कर रही है।
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How to make Jaggery: सर्दियों का मौसम आते ही गांवों में गन्ने से देसी गुड़ बनाने का काम शुरू हो जाता है. गुड़ बनाने की यह पारंपरिक विधि आज भी कई गांवों में अपनाई जाती है. किसान जगत नारायण पाठक ने लोकल 18 ने बताया कि सबसे पहले खेत से गन्ना काटकर कोल्हू या मशीन की मदद से उसका रस निकाला जाता है. इसके बाद रस को छानकर बड़े लोहे के कड़ाह में डाला जाता है और तेज आग पर पकाया जाता है. रस उबलने के दौरान ऊपर जमा झाग और गंदगी को करछुल से हटाया जाता है. लगातार पकने से रस गाढ़ा होने लगता है और उसका पानी भाप बनकर उड़ जाता है. जब रस सही तरीके से गाढ़ा हो जाता है, तो उसे कड़ाह से निकालकर ठंडा किया जाता है. इसके बाद मनचाहा आकार देकर गुड़ तैयार किया जाता है. फिर इसे बाजार में बेचने के लिए भेज दिया जाता है.








