अलीराजपुर में चरित्र शंका और रोज-रोज के क्लेश से तंग आकर 47 वर्षीय नहजुबाई ने अपने पति रामा (50 वर्ष) की लट्ठ से पीट-पीटकर हत्या कर दी। वारदात को छिपाने के लिए महिला ने पति के शव को घर में जलाया और अधजले अंगों को रेत के ढेर में दफन कर दिया। 17 दिनों तक दबा यह राज तब खुला जब गुजरात से बड़ा बेटा घर लौटा। घटना जिले के उदयगढ़ थाना क्षेत्र ग्राम तांबी आम्बा, पुजारा फलिया की है। लाश को जलाया और रेत में छुपाया उदयगढ़ थाना प्रभारी ब्रजभूषण हिरवे ने बताया कि 17 दिन पहले हुए विवाद में नहजुबाई ने पति रामा पर लट्ठ से हमला कर उसे मार डाला। इसके बाद धुआं बाहर न निकले, इसलिए जलते शव को ड्रम से ढंक दिया। शव पूरी तरह नहीं जला तो उसने सिर, हाथ और पैर के अधजले अवशेषों को कमरे में रखी रेत में दबा दिया। सुराग मिटाने के लिए आरोपी महिला ने पति के पहचान पत्र, फोटो और अन्य दस्तावेज भी जला दिए। बेटे की पूछताछ में खुला राज रामा के कई दिनों से लापता रहने पर ग्रामीणों ने गुजरात के राजकोट में मजदूरी कर रहे उसके 21 वर्षीय बड़े बेटे राहुल को सूचना दी। राहुल के घर लौटने पर जब उसने मां से सख्ती से पूछताछ की, तो महिला टूट गई और जुर्म कबूल कर लिया। घर के अंदर रेत खोदने पर पिता के अवशेष मिले। महिला गिरफ्तार सूचना मिलने पर पहुंची पुलिस ने मानव अवशेषों को निकालकर पोस्टमार्टम के लिए इंदौर भेजा है। पुलिस ने आरोपी महिला नहजुबाई को गिरफ्तार कर लिया है। उसके खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 103(1) (हत्या) और 238(ए) (साक्ष्य मिटाना) के तहत केस दर्ज कर जेल भेज दिया गया है।
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आलीराजपुर में चरित्र शंका में पीट-पीटकर पति की हत्या की: शव को घर में जलाया, अधजले अंगों को रेत के ढेर में दफनाया, महिला गिरफ्तार – alirajpur News
शहबाज बोले-भारत सिंधु का पानी रोकने की गलती नहीं करे: यह जंग शुरू करने के बराबर; कश्मीर को गले की नस बताया
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने शुक्रवार को UN में भारत को सिंधु नदी का पानी न रोकने की धमकी दी। उन्होंने कहा कि पानी रोकने की कोशिश को ‘युद्ध की कार्रवाई’ माना जाएगा। भारत को इसे लेकर कोई गलती नहीं करनी चाहिए। शहबाज ने कहा कि पानी को कभी हथियार नहीं बनाया जाना चाहिए। नदियों का काम देशों को पानी देना है, उन्हें बांटना नहीं। हर बार की तरह एक बार फिर से पाकिस्तान ने UN में कश्मीर मुद्दा उठाया और इसे UN के नियमों के मुताबिक सुलझाने की बात कही। शहबाज ने कहा कि कश्मीर उनके लिए जगुलर वेन (गर्दन की नस) है। भारत यहां पर लोगों के साथ ज्यादती कर रहा है। सिंधु जल संधि पर भारत के कदम को बताया गैरकानूनी शहबाज ने सिंधु जल संधि का मुद्दा भी उठाया। उन्होंने कहा कि पिछले साल भारत-पाकिस्तान संघर्ष के बाद भारत ने इस संधि को एकतरफा रोक दिया, जिसका कोई कानूनी आधार नहीं है। शहबाज ने दावा किया कि UN के विशेषज्ञों और स्थायी मध्यस्थता अदालत ने भी इस मामले में भारत के दावों और कदमों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि इससे पाकिस्तान का रुख सही साबित हुआ है। पहलगाम हमले और भारत-पाकिस्तान संघर्ष का जिक्र शहबाज ने पिछले साल भारत और पाकिस्तान के बीच हुए संघर्ष का भी जिक्र किया। शहबाज ने कहा कि पाकिस्तान की सेना ने फील्ड मार्शल आसिम मुनीर के नेतृत्व में इसका सटीक और पेशेवर तरीके से जवाब दिया। उन्होंने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की भी तारीफ की। शहबाज ने कहा कि मई 2025 में ट्रम्प ने दोनों देशों के बीच सीजफायर कराने में अहम भूमिका निभाई। उन्होंने कहा कि ट्रम्प के दखल से करोड़ों लोगों की जान बची। शहबाज ने कहा कि दक्षिण एशिया को दोबारा ऐसी स्थिति में नहीं पहुंचना चाहिए। इसके लिए उन्होंने कश्मीर विवाद का समाधान जरूरी बताया। इस्लामोफोबिया का भी मुद्दा उठाया शहबाज शरीफ ने दुनिया में बढ़ते इस्लामोफोबिया पर भी चिंता जताई। उन्होंने कहा कि मुस्लिमों को नफरत भरी बयानबाजी, भेदभाव और हमलों का सामना करना पड़ रहा है। मस्जिदों पर हमले और कुरान के अपमान की घटनाएं भी चिंता का विषय हैं। भारत का जिक्र करते हुए शहबाज ने आरोप लगाया कि सीमा पार RSS से प्रभावित विचारधारा धार्मिक नफरत को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि इसका असर मॉब लिंचिंग, सांप्रदायिक हिंसा, धार्मिक स्थलों पर हमलों और धार्मिक स्वतंत्रता पर पाबंदियों के रूप में दिखाई दे रहा है। होर्मुज और बाब-अल-मंदेब को खुला रखने की अपील शहबाज ने होर्मुज स्ट्रेट और बाब-अल-मंदेब को दुनिया की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम समुद्री रास्ते बताया। उन्होंने कहा कि ये रास्ते खुले रहने चाहिए और इन्हें देशों के बीच टकराव का रास्ता नहीं बनने देना चाहिए। उन्होंने कहा कि इन समुद्री रास्तों से दुनिया के कई देश जुड़े हुए हैं। अगर ये रास्ते बंद होते हैं तो इसका असर सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर पड़ सकता है।
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टोंक में निकली भगवान गणेश की 100 से ज्यादा झांकियां: कलाकारों ने किया शिव नृत्य, देखने जिलेभर से आए श्रद्धालु – Tonk News
गणेश जी की साढ़े 9 फीट ऊंची प्रतिमा प्रमुख आकर्षण रही।
गणेश चतुर्थी से शुरू हुआ 11 दिवसीय गणेश महोत्सव शुक्रवार को अनंत चतुर्दशी पर प्रतिमा विसर्जन के साथ संपन्न हो गया। जिला मुख्यालय समेत जिले भर में आज गणेश महोत्सव श्रद्धा और धूमधाम से मनाया गया।
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जिला मुख्यालय पर भी धर्मोत्थान सेवा समिति के तत्वावधान में आयोजित इस 31वें श्री गणेशोत्सव के तहत काफला बाजार स्थित मालियों का मंदिर में साढ़े 9 फीट ऊंची हस्तनिर्मित मिट्टी की गणेश प्रतिमा स्थापित की गई थी।
शुक्रवार शाम को यज्ञ के बालाजी मंदिर से भव्य विसर्जन शोभायात्रा शुरू हुई। यह जुलूस बड़ा कुआ, मुख्य बाजार, सुभाष सर्किल और घंटाघर होते हुए आगे बढ़ा। इस दौरान शहर के विभिन्न मोहल्लों से 23 सहयोगी मंदिरों और मंडलों की प्रतिमाएं भी शोभायात्रा में शामिल होती गईं।
शिव आराधना की झलक दिखाते कलाकार
धीर धीर इसने एक विशाल रूप ले लिया। घंटाघर पर नगर परिषद सभापति मयंक गोयल और ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शर्मा समेत अन्य पदाधिकारियो द्वारा सभी सहयोगी मंडलों के पदाधिकारियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।

घंटाघर पर नगर परिषद सभापति मयंक गोयल और ज्योतिषाचार्य पंडित राजकुमार शर्मा ने सभी सहयोगी मंडलों के पदाधिकारियों को प्रशस्ति पत्र देकर सम्मानित किया गया।
पूरा मार्ग ‘गणपति बप्पा मोरया’ के जयकारों से गुंजायमान रहा। अंत में गोधूलि बेला में श्रद्धालु सभी प्रतिमाओं को लेकर चतुर्भुज तालाब पहुंचे, जहां पूजा-अर्चना और पूर्ण विधि-विधान के साथ मूर्तियों का विसर्जन किया गया। समिति के प्रबंध संचालक एडवोकेट कैलाश शर्मा और विवेक सैन के अनुसार, 14 से 25 सितंबर तक चले इस महोत्सव को श्रद्धालुओं ने पूरी श्रद्धा के साथ मनाया।
चोरौत में वाहन जांच अभियान, बिना हेलमेट-कागजात वालों पर कार्रवाई: 14 हजार रुपए का चालान काटा, कई चालक रास्ता बदलते दिखे – Choraut News
चोरौत में जिला पदाधिकारी और पुलिस अधीक्षक के निर्देश पर वाहन जांच अभियान चलाया गया। शुक्रवार शाम थानाध्यक्ष मोनी कुमारी की देखरेख में चोरौत-भिट्ठामोड़ एनएच-227 पर नेहाल गैस गोदाम के पास जांच हुई। इस दौरान बिना हेलमेट और जरूरी कागजात के गाड़ी चला रहे चालकों में हड़कंप मच गया। कई चालक जांच से बचने के लिए रास्ता बदलते दिखे। पुलिस की मुस्तैदी से दोपहिया व चार पहिया गाड़ियों की गहन जांच की गई। हेलमेट, ड्राइविंग लाइसेंस, गाड़ी का रजिस्ट्रेशन, बीमा और पॉल्यूशन सर्टिफिकेट जैसे कागजात देखे गए। ट्रैफिक नियम तोड़ने वाले चालकों पर कार्रवाई करते हुए पुलिस ने कुल 14 हजार रुपए का चालान काटा। थानाध्यक्ष मोनी कुमारी ने बताया कि सड़क सुरक्षा, ट्रैफिक व्यवस्था और अपराध रोकने के लिए यह अभियान जारी रहेगा। उन्होंने चालकों से नियमों का पालन करने की अपील की।
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Aloo Bhurji: सिर्फ 10 मिनट में बनाएं चटपटी और तीखी आलू भुर्जी, नोट करें रेसिपी
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रोज-रोज एक ही जैसा सादा खाना खाकर अगर जायका फीका लगने लगा है, तो अपनी थाली में देसी तड़का लगाने का वक्त आ गया है. सिर्फ 10 से 15 मिनट में रसोई की सामान्य चीजों से तैयार होने वाली यह चटपटी आलू भुर्जी न केवल आपका मूड फ्रेश करेगी, बल्कि इसका तीखा और कुरकुरा स्वाद हर किसी को दोबारा मांगने पर मजबूर कर देगा.
Aloo Bhurji Recipe: घर पर रोज बोरिंग सब्जी खाकर आपका मन भर गया है तो आलू से चटपटी आलू की भुर्जी बनाएं. आलू की भुर्जी का स्वाद ऐसा है, जिसे खाने के बाद आप उंगलियां भी चाटते रह जाएंगे. घर पर देसी तरीके से आलू की भुर्जी बनाने के लिए आपको आलू की आवश्यकता होगी. आलू के साथ प्याज, टमाटर और कुछ मसालों की आवश्यकता होगी, जिसकी मदद से आप आलू की भुजिया बना सकते हैं. आलू की भुजिया और कचौड़ी का स्वाद लेने के बाद आप वाह-वाह करते नजर आएंगे.
15 मिनट में बनकर होगी तैयार
आलू की भुर्जी बनाने के लिए आपको सिर्फ 10 से 15 मिनट का समय लगेगा. 10 से 15 मिनट के अंदर लाजवाब चटपटी और टेस्टी आलू की भुर्जी बनकर तैयार हो जाएगी. मां से आलू की भुर्जी बनाने का तरीका सीखने वाले राहुल ने बताया कि घर पर मां देसी तरीके से आलू की भुर्जी बनाती थीं. जिस दिन कोई सब्जी नहीं रहती थी या खुद चटपटा खाने का मन होता था तो मां आलू की भुर्जी बनाती थीं.
आवश्यक सामग्री की मात्रा
आलू की भुर्जी बनाने के लिए चार लोगों के लिए करीब आधा किलो आलू की आवश्यकता होगी. राहुल ने बताया कि आधा किलो आलू के साथ ही करीब चार से पांच प्याज, दो टमाटर, हरी मिर्च व धनिया की आवश्यकता होगी. इसके साथ ही आपको सरसों के तेल व जीरे की आवश्यकता होगी. कुछ मसाले चाट मसाला और सब्जी मसाला ले सकते हैं. अगर आपको ज्यादा स्वादिष्ट और तीखा बनाना है तो आप लाल मिर्च का भी इस्तेमाल आलू की भुर्जी बनाने के लिए कर सकते हैं.
तैयारी और तड़के की विधि
राहुल राज ने बताया कि आलू को सबसे पहले अच्छे से धो लेंगे. अच्छे से धोने के बाद उसे उबाल लेंगे. उबालने के बाद उसे सब्जी की तरह काट लेंगे. सब्जी की तरह काटने के बाद प्याज को भी एकदम बारीक काट लेंगे. टमाटर को भी काट लेंगे और मिर्च को भी काट लेंगे. सब कुछ कटिंग करने के बाद आपको सरसों का तेल लेना है. करीब बड़े वाले ढक्कन से दो ढक्कन सरसों का तेल लेने के बाद उसमें पहले जीरा डाल लेंगे. जीरा डालने के बाद उसमें अच्छे तरीके से प्याज को भून लेंगे. प्याज को भूनने के बाद उसमें टमाटर और मिर्च को डाल लेंगे.
पकाने का सही तरीका और सर्विंग
टमाटर, मिर्च और प्याज के अच्छे से पक जाने के बाद उसमें आलू डालेंगे. राहुल राय ने बताया कि आलू डालने के बाद करीब 2 से 3 मिनट तक ढककर इंतजार करना होगा. 2 से 3 मिनट के बाद फिर से कढ़ाई खोलकर अच्छे से सभी को मिला लेना होगा, इसके बाद 2 मिनट और इंतजार करना होगा. 2 मिनट इंतजार करने के बाद आपकी गरम आलू की भुर्जी बनकर तैयार हो जाएगी. उसके ऊपर बारीक कटी हरी धनिया को छिड़क लेंगे, जिसके बाद आलू भुजिया खाने में धनिये की महक आएगी और इसे आप पूरी के साथ, रोटी के साथ या फिर दाल-चावल के साथ खा सकते हैं.
About the Author
Rahul Goel is a senior journalist with over 15 years of experience in print and digital media. He currently serves as a Coordinator and Publisher at News18 Hindi, managing State and Local18 content operations a…
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तिब्बत की निर्वासित सरकार बोली-लद्दाख से तुलना बेबुनियाद: हकीकत कुछ और; वांगचुक ने कहा था- चीन ने तिब्बत का ऐसा दमन नहीं किया, जैसा हमारा हुआ
5 घंटे पहले
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फाइल फोटो
सेंट्रल तिब्बतन एडमिनिस्ट्रेशन (CTA) ने सोनम वांगचुक के उस बयान पर आपत्ति जताई, जिसमें वांगचुक ने लद्दाख के हालात की तुलना तिब्बत से की थी।
CTA के प्रवक्ता तेनजिन लेकशे ने कहा कि यह तुलना गलत और हकीकत से परे है। वांगचुक का बयान चीन के सत्तावादी शासन में तिब्बतियों की स्थिति नहीं दिखाता।
वांगचुक ने लेह में 24 सितंबर 2025 में हुई हिंसा की पहली बरसी पर एक कार्यक्रम में यह टिप्पणी की थी। इस हिंसा में चार लोगों की मौत हुई थी।
कार्यक्रम लद्दाख बौद्ध एसोसिएशन ने आयोजित किया था। इसमें वांगचुक ने 2019 से लद्दाख को लेकर केंद्र सरकार के रवैए की आलोचना की थी।
वांगचुक ने कहा था-

वांगचुक ने यह भी कहा था- लोकतंत्र के कारण भारत को चुना
वांगचुक ने कहा कि लद्दाख ने भारत के साथ रहना इसलिए चुना, क्योंकि उसे लोकतंत्र और सम्मान के साथ जीने के अधिकार पर भरोसा था। उन्होंने आरोप लगाया कि लद्दाख के हालात ने डर का माहौल बना दिया है। उनके मुताबिक, यह उस लोकतांत्रिक सोच के खिलाफ है, जिसके कारण लोगों ने भारत को चुना था।
वांगचुक ने कहा कि 2014 से 2019 तक देश में हालात अच्छे थे, जब बीजेपी सत्ता में आई थी। वांगचुक ने कहा, “एक तरफ लद्दाख के पास चीन था और दूसरी तरफ भारत। हमने भारत को इसलिए चुना, क्योंकि हमें भरोसा था कि यहां लोकतंत्र है और हम सिर ऊंचा करके जी सकेंगे।”
CTA ने तुलना को गलत बताया
तिब्बती निर्वासित सरकार CTA ने अब लद्दाख और तिब्बत की स्थिति की तुलना पर गहरी चिंता जताई है। तिब्बती सरकार के आधिकारिक प्रवक्ता तेनजिन लेकशे ने कहा कि तिब्बत अब भी चीन के सत्तावादी शासन के अधीन है। वहां तिब्बतियों को उनके मूल अधिकारों और धार्मिक स्वतंत्रता के दमन का सामना करना पड़ रहा है।
उन्होंने कहा कि तिब्बत की अलग सांस्कृतिक पहचान मिटाने के उद्देश्य से उठाए जा रहे कदम भी लगातार तेज किए जा रहे हैं।
तिब्बत में चीन के दमन के हालात
- सांस्कृतिक पहचान पर हमला: चीन तिब्बती भाषा, संस्कृति और परंपराओं को मिटाने के लिए व्यवस्थित रूप से ‘सिनिसाइज़ेशन’ की नीति अपना रहा है।
- धार्मिक दमन: चीन ने तिब्बत के हजारों मठों को नष्ट कर दिया है और भिक्षुओं व नन को जबरन धर्म छोड़ने पर मजबूर किया है।
- भाषा के अधिकार का दमन: तिब्बती भाषा की शिक्षा और उसके संरक्षण की वकालत करने वाले कार्यकर्ताओं जैसे ताशी वांगचुक को गिरफ्तार कर जेल भेजा जाता है।
- अभिव्यक्ति की आजादी का अभाव: सरकार के खिलाफ कोई भी असहमति जताने पर लोगों को ‘अलगाववाद’ का झूठा आरोप लगाकर प्रताड़ित किया जाता है और जेल भेजा जाता है।
- व्यापक निगरानी: तिब्बती लोग अत्यधिक निगरानी और ‘ड्रैकोनियन’ यानी कठोर नियंत्रण वाले माहौल में जीने को मजबूर हैं, जहां उनकी हर गतिविधि पर नजर रखी जाती है।
- धार्मिक उत्तराधिकार में हस्तक्षेप: चीन दलाई लामा और पंचन लामा के चयन की पारंपरिक आध्यात्मिक प्रक्रिया में जबरन हस्तक्षेप कर रहा है, जो तिब्बतियों की धार्मिक स्वतंत्रता का गंभीर उल्लंघन है।
- बाहरी दुनिया से अलगाव: तिब्बत को बाहरी दुनिया से लगभग पूरी तरह अलग-थलग रखा गया है, और स्वतंत्र मीडिया या विदेशी राजनयिकों को वहां जाने की अनुमति नहीं दी जाती है।
- मनमानी हिरासत और अत्याचार: शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों और असंतुष्टों को बिना किसी उचित कानूनी प्रक्रिया के मनमाने ढंग से हिरासत में लिया जाता है और यातनाएं दी जाती हैं।
- पर्यावरण का शोषण: तिब्बत में बड़े बांधों जैसे लियांगहेको बांध का निर्माण और प्राकृतिक संसाधनों का दोहनप र्यावरण और जल स्रोतों को नुकसान पहुंचा रहा है।
- प्रचार और इतिहास बिगाड़ना: चीन अपने अवैध कब्जे को सही ठहराने के लिए इतिहास को तोड़-मरोड़ कर पेश करता है और तिब्बत को ‘प्राचीन काल से चीन का हिस्सा’ बताने का झूठा प्रचार करता है।
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वांगचुक से जुड़ी ये खबर भी पढ़ें…
वांगचुक ने CJP के विदेशी कनेक्शन के आरोप खारिज किए: बोले- 94% फॉलोअर्स भारत से; जांच के लिए तैयार, विदेशी फंडिंग नहीं ली

एक्टिविस्ट सोनम वांगचुक ने कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के विरोध प्रदर्शन से जुड़े विदेशी कनेक्शन के आरोपों को खारिज किया है। उन्होंने कहा कि आंदोलन को बांग्लादेश, पाकिस्तान और अमेरिका में बड़ी संख्या में समर्थन मिलने की बात कही जा रही थी।
इसके बाद उन्होंने CJP के सोशल मीडिया फॉलोअर्स के डेटा का विश्लेषण किया। उनके मुताबिक, करीब 94% फॉलोअर्स भारत से थे, जबकि सिर्फ 6% दूसरे देशों से थे। पढ़ें पूरी खबर…
क्रेन और SDRF टीम से गणेश विसर्जन: बच्चों ने बप्पा को रोकर दी विदाई; रंग-गुलाल उड़ाकर नाचे श्रद्धालु – Ashoknagar News
अशोकनगर में गणेश उत्सव के बाद शुक्रवार को गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन शुरू हो गईं। तुलसी सरोवर के विसर्जन कुंड में बप्पा को विदाई दी जा रही है। सुरक्षा में पुलिस, एसडीआरएफ और नगर पालिका टीमें तैनात हैं। गणपति बप्पा मोरया, अगले बरस तूम जल्दी आ के जयकारे लगाते हुए कुड़ तक पहुंच रहे हैं। विसर्जन कुंड इसी बार पूरी तरह बनाकर तैयार हुआ है। कुंड में सीढ़ियों के आगे बैरिकेड हैं, ताकि श्रद्धालु आगे न जा सकें। नगर पालिका कर्मचारी छोटी प्रतिमाएं हाथ से विसर्जित करा रहे हैं, बड़ी प्रतिमाओं के लिए क्रेन मशीन लगी है। कुंड के बैरीकेट के पीछे एसडीआरएफ की टीम नाव के साथ मौजूद है। पुलिस अधिकारी मौके पर व्यवस्था देख रहे हैं। पूजन के लिए नगर पालिका द्वारा तखत लगाये गए हैं, जहां प्रतिमा रख सकें। विसर्जन स्थल पर बच्चे छोटी गणेश प्रतिमाएं लेकर पहुंच रहे हैं। श्रद्धालु पूजन के बाद रंग-गुलाल उड़ाकर बप्पा को विदाई दे रहे हैं। जयकारों के बीच भक्तों में उत्साह और विदाई का माहौल है। अशोकनगर शहर, ग्रामीण और जिले के अन्य शहरी इलाकों में भी गणेश प्रतिमाओं का विसर्जन किया जा रहा है। तस्वीरें देखिए…
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बेगूसराय की 2 पुरानी मांगों पर सरकार की मुहर: दिनकर यूनिवर्सिटी मंजूर; शुगर मिल का सर्वे पूरा, गिरिराज ने CM- PM का जताया आभार – Begusarai News
बिहार के औद्योगिक और सांस्कृतिक केंद्र बेगूसराय के लिए एक ऐतिहासिक मोड़ सामने आया है। लंबे समय से चली आ रही बेगूसराय वासियों की 2 प्रमुख मांगों पर बिहार सरकार ने मुहर लगा दी है। पहली बड़ी सौगात के रूप में राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर के नाम पर बेगूसराय में नए विश्वविद्यालय की स्थापना के प्रस्ताव को राज्य कैबिनेट से स्वीकृति मिल गई है। दूसरी सौगात जिले में बंद पड़े या नए चीनी मिल (शुगर मिल) की स्थापना को लेकर सरकार की ओर से सर्वे पूरा कर लिया गया है और जिला प्रशासन ने आगे की प्रक्रिया शुरू कर दी है। इन दोनों बड़ी उपलब्धियों पर केंद्रीय मंत्री और बेगूसराय के सांसद गिरिराज सिंह ने पीसी कर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का आभार जताया है। दो महीने के भीतर कैबिनेट से पास हुआ दिनकर विश्वविद्यालय केंद्रीय मंत्री गिरिराज सिंह ने कहा कि बेगूसराय में विश्वविद्यालय की स्थापना क्षेत्र के छात्रों और बुद्धिजीवियों का वर्षों पुराना सपना रहा है। बीते 19 जुलाई को बेगूसराय में सरस्वती विद्या केंद्र (मॉडल स्कूल) के उद्घाटन के दौरान सीएम की ओर से इस विश्वविद्यालय की घोषणा की गई थी। महज दो महीने के भीतर राज्य सरकार ने तत्परता दिखाते हुए कैबिनेट से इस प्रस्ताव को पारित कर दिया। गिरिराज सिंह ने बताया कि नए दिनकर विश्वविद्यालय के अस्तित्व में आने से बेगूसराय और पड़ोसी खगड़िया जिले के सभी अंगीभूत एवं संबद्ध महाविद्यालय अब इसी विश्वविद्यालय से संबद्ध होंगे। इससे पहले इस क्षेत्र के महाविद्यालयों को दूसरे सुदूर विश्वविद्यालयों पर निर्भर रहना पड़ता था, जिससे सत्र में देरी और प्रशासनिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था। अब इस नए विश्वविद्यालय के बनने से हजारों छात्र-छात्राओं को अपने ही जिले में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा प्राप्त होगी।
कई बार प्रयास हुए, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी थी उन्होंने बताया कि आज से 20 साल पहले हमारे कई स्थानीय कार्यकर्ताओं, जिलाध्यक्षों और नेताओं ने बेगूसराय में विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए कड़ा संघर्ष किया था। इस मांग को लेकर हमारे कार्यकर्ताओं को पूरे-पूरे दिन थाने में बंद रहना पड़ा था। गिरिराज सिंह ने कहा कि इसके लिए कई बार प्रयास हुए, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी थी। आज महादेव की कृपा, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मार्गदर्शन, पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सहयोग और मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के नेतृत्व में यह घोषणा न केवल पूरी हुई, बल्कि कैबिनेट से स्वीकृत होकर धरातल पर उतरने जा रही है। आने वाले वित्तीय वर्ष से नियम, बायलॉज और प्रक्रिया पूरी कर इसका कार्य और शैक्षणिक सत्र शुरू हो जाएगा। विश्वविद्यालय को क्रियाशील बनाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कई प्रक्रियाएं पूरी की जानी हैं। बायलॉज का निर्माण, नियम-कानून तय करना, पदों का सृजन और इंफ्रास्ट्रक्चर की व्यवस्था होगी।
शुगर मिल की स्थापना का रास्ता साफ गिरिराज सिंह ने बताया कि विश्वविद्यालय के साथ-साथ बेगूसराय के किसानों और मजदूरों के लिए दूसरी बड़ी खुशखबरी चीनी मिल को लेकर आई है। बेगूसराय जिले में गन्ने की खेती की प्रचुर संभावनाएं रही और खेती होती है, लेकिन चीनी मिल के अभाव में किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता था। बेगूसराय के एनडीए विधायकों, विशेषकर स्थानीय विधायक कुंदन कुमार और राज्य सरकार के गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार के निरंतर प्रयासों के बाद बिहार सरकार ने जिले में चीनी मिल की स्थापना के लिए तकनीकी और व्यावहारिक सर्वे पूरा करा लिया है। इस चीनी मिल के चालू होने से जिले के हजारों किसानों को गन्ने का उचित मूल्य मिलेगा और स्थानीय स्तर पर प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। मु
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