बदायूं के मूसाझाग थाना क्षेत्र के गुरगांव में प्रेम प्रसंग की रंजिश में हुई अवधेश (45) की हत्या के मामले में पुलिस ने मुख्य आरोपी मुनेंद्र को गिरफ्तार कर लिया है। मुनेंद्र ने अपने बेटों और भाई के साथ मिलकर वारदात को अंजाम दिया था। पुलिस अन्य आरोपियों की तलाश में दबिश दे रही है। उधर, युवती ने कोर्ट में बयान देकर अमन के साथ रहने की इच्छा जताई है। पुलिस ने उसे वन स्टॉप सेंटर भेजा है।
गांव निवासी अमन करीब सालभर पहले मुनेंद्र की बेटी को लेकर चला गया था। युवती के परिजनों ने अमन के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराई थी। तभी से पुलिस दोनों की तलाश कर रही थी। बुधवार रात पुलिस ने नोएडा से दोनों को बरामद कर लिया और बदायूं ले आई। इस दौरान युवती ने परिजनों के साथ जाने से इनकार करते हुए अमन के साथ रहने की इच्छा जताई। बताया गया कि दोनों ने प्रेम विवाह भी कर लिया है।
इधर, बेटी के फैसले से नाराज मुनेंद्र गुरुवार शाम अपने बेटों और भाई के साथ गांव पहुंचा। आरोप है कि घर के बाहर सफाई कर रहे अमन के ताऊ अवधेश पर कुल्हाड़ी और फावड़े से हमला कर दिया। सिर पर ताबड़तोड़ वार किए जाने से अवधेश की मौके पर ही मौत हो गई। वारदात के बाद आरोपी फरार हो गए।
मृतक के पिता की तहरीर पर मुनेंद्र, उसके तीन बेटों और भाई के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज की गई। पुलिस ने मुख्य आरोपी मुनेंद्र को मौसमपुर के पास यात्री शेड से गिरफ्तार कर लिया। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अवधेश के सिर पर धारदार हथियार के दो गहरे घाव मिले हैं। एसएसपी अंकिता शर्मा ने बताया कि हत्या के मुख्य आरोपी को गिरफ्तार कर लिया गया है। अन्य आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए टीमें दबिश दे रही हैं।
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प्रेम प्रसंग की रंजिश में प्रेमी के ताऊ की हत्या: बदायूं में मुख्य आरोपी गिरफ्तार, तीन बेटों और भाई की तलाश जारी – Badaun News
भोजपुर- नशा करने से मना करने पर बुजुर्ग पर हमला: पट्टीदारों ने तलवार से दोनों पैर काटने की कोशिश; पति को बचाने पहुंची पत्नी भी घायल – Bhojpur News
भोजपुर के चांदी थाना क्षेत्र के रतनपुर गांव में शुक्रवार की देर शाम नशा करने से मना करना एक बुजुर्ग को भारी पड़ गया। शराब पीकर हंगामा कर रहे पाटीदारों को समझाने पर पहले बुजुर्ग की लात-घूंसे से पिटाई की गई। इसके बाद तलवार से उनके दोनों पैरों पर हमला कर काटने की कोशिश की गई। धारदार हथियार से हमले में बुजुर्ग के दोनों पैरों में करीब छह इंच से अधिक लंबे और चार से पांच इंच गहरे जख्म हो गए। हमले में काफी खून भी बह गया। वहीं, पति को बचाने पहुंची पत्नी को भी आरोपितों ने लात-घूंसे से बेरहमी से पीटकर जख्मी कर दिया। घटना के बाद गांव में अफरा-तफरी मच गई। सूचना मिलने पर चांदी थाना पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों घायलों को तत्काल इलाज के लिए आरा सदर अस्पताल पहुंचाया। वहां डॉक्टरों की देखरेख में उनका इलाज चल रहा है। घायल महिला बोली- पट्टीदार के दामाद समेत अन्य ने किया हमला घायलों में रतनपुर गांव निवासी 61 वर्षीय पुत्र नंदलाल चौहान और उनकी 60 वर्षीय पत्नी सरोजनी देवी शामिल हैं। नंदलाल चौहान पेशे से राजमिस्त्री हैं। घटना के संबंध में जख्मी सरोजनी देवी ने बताया कि आरा के धरहरा निवासी रखन उनके पाटीदार का दामाद है। आरोपी शुक्रवार की शाम शराब पीकर घर के बाहर हंगामा कर रहा था। उस समय उनके पति बाहर बैठे हुए थे। उन्होंने पर्व के दिन भी शराब पीकर आने और हंगामा करने पर आपत्ति जताई। इसी बात को लेकर गोविंदा और लखन ने विरोध करते हुए कहा कि तुम हमारे मालिक नहीं हो, तुम्हारा क्या जाता है। सरोजनी देवी ने बताया कि गुरुवार की शाम भी दोनों शराब पीकर आपस में झगड़ा कर रहे थे। बुजुर्ग होने के नाते उनके पति दोनों को समझा रहे थे। इसी दौरान आरोपितों ने उनके पति की लात-घूंसे से पिटाई शुरू कर दी। फिर घर की कुछ महिलाओं ने उनके पति को पकड़ लिया। इसके बाद गोविंद और लखन ने तलवार से उनके दोनों पैरों पर हमला कर दिया। पति की चीख सुनकर वह बाहर पहुंचीं और उन्हें बचाने की कोशिश की। इसी दौरान आरोपितों ने उनकी भी जमकर पिटाई कर दी। उन्होंने कहा कि अगर वह मौके पर नहीं पहुंचतीं तो आरोपित उनके पति की हत्या कर देते। पुलिस बोली- मामला पारिवारिक विवाद से जुड़ा है, पड़ताल जारी वहीं, चांदी थाना में पदस्थापित दारोगा रामसेवक प्रसाद सिंह ने बताया कि पुलिस गश्ती के दौरान बुजुर्ग पर तलवार से हमला किए जाने की सूचना मिली थी। इसके बाद पुलिस मौके पर पहुंची और दोनों घायलों को अस्पताल पहुंचाया। उन्होंने बताया कि मामला आपसी पारिवारिक विवाद से जुड़ा है। घटना के बाद सभी आरोपित घर छोड़कर फरार हो गए हैं। इधर, सदर अस्पताल के इमरजेंसी ड्यूटी में तैनात चिकित्सक अशोक कुमार ने बताया कि बुजुर्ग के पैरों पर धारदार हथियार से हमला किया गया है, जिससे काफी खून बहा है। फिलहाल इमरजेंसी वार्ड में प्राथमिक उपचार किया जा रहा है। मरीज को ऑब्जर्वेशन में रखकर इलाज किया जाएगा।
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शहर की कई सड़कें रहेंगी डायवर्ट: देखें ट्राइबल आर्ट एग्जीबिशन; जानिए शहर में आज कहां-क्या खास – Bhopal News
आपको हम बता रहे हैं, भोपाल शहर में आज कहां-क्या हो रहा है। यहां हर वो जानकारी होगी, जो आपके काम आएगी। संगीत-संस्कृति, आर्ट, ड्रामा के इवेंट से लेकर मौसम, सिटी ट्रैफिक, बिजली-पानी की सप्लाई से जुड़ा हर अपडेट मिलेगा।
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ITI तिराहे से पिपलानी पेट्रोल पंप तक बदला ट्रैफिक भोपाल मेट्रो रेल परियोजना के निर्माण कार्य के चलते आईटीआई तिराहे से पिपलानी पेट्रोल पंप तिराहे तक यातायात व्यवस्था में बदलाव किया गया है। ट्रैफिक पुलिस ने 17 नवंबर 2026 तक डायवर्जन प्लान लागू किया है। पढ़ें पूरी खबर जुमेराती-चौक बाजार में चार पहिया और लोडिंग वाहनों की एंट्री बंद |
| आर्ट/कल्चर/एग्जीबिशन/ सभा |
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एग्जीबिशन मध्यप्रदेश जनजातीय संग्रहालय में गोण्ड जनजाति की दीपिका धुर्वे के चित्रों की प्रदर्शनी आयोजित की गई है । गोंड जनजाति की युवा चित्रकार दीपिका धुर्वे का जन्म मध्यप्रदेश के जनजातीय बहुल डिण्डोरी जिले के पाटनगढ़ में हुआ। जंगलों और पहाड़ों से घिरे प्राकृतिक वातावरण में आपका बचपन बीता। |
| कैंपस/जॉब |
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एमपी बोर्ड की 10वीं-12वीं परीक्षा 2027 के डमी प्रवेश पत्र जारी माध्यमिक शिक्षा मंडल मध्यप्रदेश, भोपाल ने हाईस्कूल और हायर सेकंडरी परीक्षा 2027 में शामिल होने वाले विद्यार्थियों के डमी प्रवेश पत्र ऑनलाइन जारी कर दिए हैं। कक्षा 10वीं और 12वीं के विद्यार्थी अपने प्रवेश पत्र में दर्ज जानकारियों की जांच कर सकेंगे। मंडल ने संस्था प्राचार्यों को डमी प्रवेश पत्रों का सूक्ष्म परीक्षण करने के निर्देश दिए हैं, ताकि परीक्षा से पहले किसी भी तरह की त्रुटि को सुधारा जा सके। मंडल के अनुसार ऑनलाइन घोषणा पत्र जमा करने की अवधि 26 अक्टूबर से 31 दिसंबर 2026 तक निर्धारित की गई है। घोषणा पत्र ऑनलाइन प्रस्तुत करने के बाद ही विद्यार्थी अपने मूल प्रवेश पत्र डाउनलोड कर सकेंगे। ऐसे में विद्यार्थियों को सलाह दी गई है कि वे डमी प्रवेश पत्र में दर्ज सभी जानकारियों का समय रहते मिलान कर लें, ताकि बाद में किसी तरह की परेशानी न हो। पहली शिफ्ट सुबह 8:30 से 10:30 बजे, दूसरी दोपहर 12:30 से 2:30 बजे और तीसरी शाम 4:30 से 6:30 बजे तक होगी। परीक्षा दो घंटे की होगी। योग, मेडिटेशन व फ्री कोचिंग शुरू बायोटेक आइडिया बायोटेक्नोलॉजी के क्षेत्र में नया आइडिया रखने वाले छात्रों, वैज्ञानिकों और स्टार्टअप के लिए 50 लाख रुपए तक की आर्थिक मदद पाने का मौका है। स्वास्थ्य, मेडिकल डिवाइस, बीमारी की जांच, दवा, कृषि, औद्योगिक बायोटेक्नोलॉजी, कचरे से उपयोगी उत्पाद और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े प्रोजेक्ट आवेदन कर सकते हैं। पात्र आवेदकों को बिराक की वेबसाइट www.birac.nic.in पर BIG यूजर के रूप में रजिस्ट्रेशन कर ऑनलाइन प्रस्ताव जमा करना होगा। योजना में आमतौर पर जनवरी और जुलाई में आवेदन आमंत्रित किए जाते हैं। अगली आवेदन प्रक्रिया और अंतिम तारीख की जानकारी वेबसाइट पर जारी आधिकारिक नोटिफिकेशन से देखनी होगी। |
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न्यूजीलैंड में आम चुनाव, PM लक्सन की कुर्सी पर खतरा: महंगाई और अर्थव्यवस्था पर लेबर पार्टी से मुकाबला; छोटी पार्टियां किंगमेकर बन सकती हैं
वेलिंगटन7 मिनट पहले
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न्यूजीलैंड में आम चुनाव के लिए आज वोटिंग हो रही है। प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन के लिए सत्ता बचाना आसान नहीं दिख रहा।
उनकी नेशनल पार्टी का मुकाबला विपक्षी लेबर पार्टी से है। अल जजीरा के मुताबिक, देश में बढ़ती महंगाई और कमजोर अर्थव्यवस्था चुनाव के सबसे बड़े मुद्दे हैं।
दोनों प्रमुख पार्टियों को बहुमत मिलने के आसार नहीं हैं। ऐसे में छोटी पार्टियां तय कर सकती हैं कि अगली सरकार किसकी बनेगी।

कौन हैं प्रधानमंत्री पद के दो बड़े दावेदार?
क्रिस्टोफर लक्सन
न्यूजीलैंड के प्रधानमंत्री क्रिस्टोफर लक्सन दूसरी बार सरकार बनाने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने 2023 के चुनाव में सेंटर-राइट नेशनल पार्टी को जीत दिलाई थी। इससे देश में 6 साल से चल रही लेबर पार्टी की सरकार खत्म हो गई थी।
हालांकि, प्रधानमंत्री बनने के बाद से ही उन्हें राजनीतिक चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। इस साल अप्रैल और अगस्त में उनकी अपनी पार्टी के सांसदों ने उनके नेतृत्व पर सवाल उठाए और उन्हें हटाने की कोशिश की।
दोनों बार लक्सन अपनी कुर्सी बचाने में कामयाब रहे। अगस्त में हुई दूसरी कोशिश के पीछे उस समय के रक्षा मंत्री का हाथ होने की खबरें भी आई थीं।
उनकी सरकार को अर्थव्यवस्था में धीमी सुधार और गठबंधन में शामिल पार्टियों के बीच मतभेदों को लेकर भी आलोचना झेलनी पड़ी है।

क्रिस हिपकिंस
विपक्षी लेबर पार्टी के नेता क्रिस हिपकिंस फिर से प्रधानमंत्री बनना चाहते हैं। 2023 के चुनाव में उनकी पार्टी को बड़ी हार का सामना करना पड़ा था। हिपकिंस पहली बार 2008 में सांसद बने थे।
जनवरी 2023 में जैसिंडा अर्डर्न के प्रधानमंत्री पद से इस्तीफा देने के बाद उन्होंने यह जिम्मेदारी संभाली थी।
हालांकि, उनका कार्यकाल सिर्फ नौ महीने चला। अक्टूबर 2023 के चुनाव में लक्सन की नेशनल पार्टी के गठबंधन ने जीत हासिल की और लेबर पार्टी सत्ता से बाहर हो गई।
हार के बाद भी हिपकिंस पार्टी के नेता बने रहे। इस बार वे महंगाई से राहत देने और सरकारी सेवाओं को बेहतर बनाने का वादा कर रहे हैं।

चुनाव में कौन से मुद्दे सबसे अहम हैं?
1. अर्थव्यवस्था और महंगाई: इस चुनाव में अर्थव्यवस्था सबसे बड़ा मुद्दा है। दोनों प्रमुख पार्टियां आर्थिक विकास बढ़ाने और लोगों को महंगाई से राहत देने की बात कर रही हैं, लेकिन उनके तरीके अलग हैं।
नेशनल पार्टी सरकारी खर्च पर नियंत्रण रखकर बजट को फिर से फायदे में लाना चाहती है। इसके साथ ही राष्ट्रीय पेंशन योजना का विस्तार करने का वादा किया गया है।
वहीं, लेबर पार्टी लोगों के घरेलू खर्च को कम करने पर जोर दे रही है। पार्टी सस्ती स्वास्थ्य सेवाएं और परिवहन सुविधा देने के साथ मकान, रोजगार और बुनियादी सुविधाओं पर निवेश बढ़ाना चाहती है।
2. बिजली, किराना और टैक्स: छोटी पार्टियां बिजली और किराने के सामान की बढ़ती कीमतों को लेकर बड़े बदलाव का वादा कर रही हैं।
न्यूजीलैंड फर्स्ट पार्टी बड़ी बिजली कंपनियों को बांटने और देश की बड़ी सुपरमार्केट कंपनियों में से एक को अलग-अलग हिस्सों में बांटने की बात कर रही है।
वहीं, ग्रीन पार्टी सरकारी बिजली कंपनी और सरकारी सुपरमार्केट चेन बनाने का प्रस्ताव दे रही है। पार्टी किराने के सामान की कीमतों पर सख्त नियंत्रण चाहती है।
ग्रीन पार्टी अमीर लोगों, बड़ी कंपनियों और बैंकों पर ज्यादा टैक्स लगाने के पक्ष में है। साथ ही ज्यादातर लोगों का इनकम टैक्स कम करने का वादा कर रही है। दूसरी ओर, अपॉर्च्युनिटी पार्टी जमीन की कीमत के आधार पर टैक्स लगाने की बात कर रही है।

3. इमिग्रेशन और वोट देने का अधिकार: चुनाव में विदेशियों के रहने के नियम और वोट देने का अधिकार भी बड़े मुद्दे बने हुए हैं।
ACT पार्टी गंभीर अपराध करने वाले लोगों को न्यूजीलैंड से बाहर भेजने के पक्ष में है। पार्टी का कहना है कि उन्होंने देश में कितने भी साल बिताए हों, उन्हें वापस भेजा जाना चाहिए।
न्यूजीलैंड फर्स्ट पार्टी वोट देने का अधिकार सिर्फ देश के नागरिकों तक सीमित करना चाहती है। फिलहाल न्यूजीलैंड में रहने वाले योग्य स्थायी निवासी भी वोट दे सकते हैं, बशर्ते वे लगातार कम से कम 12 महीने से देश में रह रहे हों। इस प्रस्ताव से मौजूदा चुनावी नियम बदल जाएंगे।
चुनाव के नतीजे कब आएंगे?
न्यूजीलैंड का चुनाव आयोग शनिवार को मतदान खत्म होने के बाद चुनावी नतीजे जारी करना शुरू करेगा। आयोग का लक्ष्य है कि चुनाव की रात तक 95% मतदान केंद्रों के शुरुआती नतीजे सामने आ जाएं।
हालांकि, अंतिम नतीजे 27 नवंबर तक आने की उम्मीद है। इनमें विदेशों में रहने वाले न्यूजीलैंड के नागरिकों के डाक और अन्य माध्यमों से डाले गए वोट भी शामिल होंगे।
हर तीन साल में होते हैं आम चुनाव
न्यूजीलैंड में हर तीन साल में आम चुनाव होते हैं। यहां मिक्स्ड मेंबर प्रपोर्शनल (MMP) चुनाव प्रणाली लागू है। इस व्यवस्था में मतदाता सीधे प्रधानमंत्री या देश के नेता को नहीं चुनते, बल्कि दो वोट डालते हैं।
- पहला वोट अपने इलाके के उम्मीदवार को दिया जाता है
- दूसरा वोट अपनी पसंद की राजनीतिक पार्टी को दिया जाता है
हर इलाके में सबसे ज्यादा वोट पाने वाला उम्मीदवार संसद में पहुंचता है। इसके अलावा देशभर में किसी पार्टी को मिले वोटों के अनुपात के हिसाब से उसके दूसरे उम्मीदवारों को भी संसद में जगह मिलती है।
संसद में आमतौर पर 120 सीटें होती हैं। सरकार बनाने के लिए किसी एक पार्टी या पार्टियों के गठबंधन को आधे से ज्यादा सीटें हासिल करनी होती हैं।
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इजराइल में नए प्रधानमंत्री का ऐलान आज: आइजनकोट को 6 पार्टियों का समर्थन; देश में कभी सिंगल पार्टी की सरकार नहीं बनी

इजराइल में अगला प्रधानमंत्री कौन होगा इसका ऐलान राष्ट्रपति इसाक हर्जोग आज करेंगे। सरकार बनाने के लिए 61 सासंदों का समर्थन चाहिए। गादी आइजनकोट के गठबंधन को 6 पार्टियों के 67 सांसदों ने समर्थन दिया है। पूरी खबर पढ़ें…
दिल्ली में प्रदूषण बढ़ा, 5वीं-तक के स्कूलों में ऑनलाइन पढ़ाई: यूपी के 20 जिलों में पारा 18°C से कम, उत्तराखंड में बर्फबारी के आसार
दिल्ली में शुक्रवार को औसत एयर क्वालिटी इंडेक्स (AQI) 382 दर्ज किया गया, जो बेहद खराब श्रेणी में आता है। इसके चलते दिल्ली-NCR में GRAP-III लागू कर दिया गया है। दिल्ली और NCR के जिलों में BS-3 पेट्रोल और BS-4 डीजल वाली 4-पहिया गाड़ियों के चलने पर पूरी तरह से रोक लगा दी गई है। पांचवी कक्षा तक के स्कूलों में ‘हाइब्रिड मोड’ (ऑनलाइन एवं ऑफलाइन दोनों) में पढ़ाई कराई जाएगी। उत्तरप्रदेश में 8 और 9 नवंबर को मौसम में बदलाव देखने को मिल सकता है। इस दौरान उत्तरकाशी, रुद्रप्रयाग, चमोली, बागेश्वर और पिथौरागढ़ में बारिश की संभावना है। मध्य प्रदेश में न्यूनतम तापमान में 1.5 डिग्री सेल्सियस की गिरावट दर्ज की गई है। इससे रात में सर्दी बढ़ गई हैं। मौसम विभाग के मुताबिक, शुक्रवार से तापमान में और गिरावट आएगी। हिमाचल प्रदेश में 8 नवंबर से वेस्टर्न डिस्टरबेंस एक्टिव हो रहा है। इसके असर से 10 से 12 नवंबर के बीच ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बारिश के आसार हैं। इस दौरान चंबा, किन्नौर, लाहौल-स्पीति और कुल्लू में हिमपात होने की भी संभावना है। सैटेलाइट मैप में देखें मानसूनी बादलों की स्थिति देशभर से मौसम की तस्वीरें…
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लखनऊ CBI कि विशेष अदालत ने बबलू को किया बरी: 20 साल पुराने मामले में मिली राहत , धमकी – रंगदारी के थे आरोप – Lucknow News
लखनऊ की सीबीआई कोर्ट ने अंडरवर्ल्ड डॉन ओमप्रकाश श्रीवास्तव उर्फ बबलू श्रीवास्तव को रंगदारी मांगने के मामले में दोषमुक्त कर दिया है। आरोप था कि प्रयागराज की नैनी जेल में बंद रहने के दौरान उसने दूसरे व्यक्ति के सिम कार्ड का इस्तेमाल कर कोलकाता के होटल व्यवसायी से 5 करोड़ रुपए की रंगदारी मांगी थी। शुक्रवार को न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रतिभा सिंह ने साक्ष्यों के अभाव में उसे बरी करने का आदेश दिया। अदालत ने अपने फैसले में कहा कि अभियोजन पक्ष आरोपों को युक्तियुक्त संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा। अभियोजन का पूरा कथानक भी विश्वसनीयता की कसौटी पर खरा नहीं उतरता है। कोर्ट ने बबलू श्रीवास्तव को 20 हजार रुपए का जमानत बांड दाखिल करने का निर्देश दिया। साथ ही कहा कि फैसले के खिलाफ अपील होने पर वह अपीलीय अदालत के नोटिस पर उपस्थित होगा। ‘जेल में कैसे पहुंचा सिंह एजेंसी नहीं बता पाई’ बचाव पक्ष के अधिवक्ता जीशान अल्वी ने कोर्ट में दलील दी कि सीबीआई यह साबित नहीं कर सकी कि नैनी जेल में बंद रहने के दौरान बबलू श्रीवास्तव ने किसी दूसरे व्यक्ति के मोबाइल से फोन कर धमकी दी या रंगदारी वसूलने की कोशिश की। जांच एजेंसी यह भी पता नहीं लगा सकी कि उसके पास इस्तेमाल किए जा रहे सिम कार्ड जेल के अंदर कैसे पहुंचे।अधिवक्ता ने कहा कि रिकॉर्ड पर ऐसा कोई विश्वसनीय साक्ष्य नहीं है, जिससे बबलू श्रीवास्तव के खिलाफ लगाए गए आरोप साबित हो सकें। हाईकोर्ट के आदेश पर सीबीआई ने दर्ज किया था केस मामले की शुरुआत 14 दिसंबर 1998 को हुई थी। धीरेंद्र कुमार श्रीवास्तव ने कैंट थाने में शिकायत दर्ज कराई थी कि उन्होंने अपना सिम कार्ड संतोष शर्मा, मुदित श्रीवास्तव और गौरव श्रीवास्तव को बेच दिया था। कुछ समय बाद मोबाइल के करीब 9 हजार रुपए का बिल आने पर उन्होंने एस्सार कंपनी से संपर्क किया। आरोप है कि कंपनी के कर्मचारियों ने उन्हें बताया कि उनके सिम का इस्तेमाल एक प्रभावशाली व्यक्ति कर रहा है। इसके बाद शिकायतकर्ता को धमकी मिलने लगी। आरोप लगाया गया कि उसका सिम नैनी जेल में बंद बबलू श्रीवास्तव इस्तेमाल कर रहा है। शिकायत में परिवार को खत्म करने की धमकी देने की बात भी कही गई थी। जेल से गैंग चलाने और रंगदारी वसूलने का था आरोप हाईकोर्ट ने 1 फरवरी 1999 को नैनी जेल से मोबाइल के जरिए गैंग के सदस्यों से संपर्क करने और बाहर अपराध कराने के आरोपों की सीबीआई जांच के आदेश दिए थे। इसके बाद सीबीआई ने 24 फरवरी 1999 को मुकदमा दर्ज कर जांच शुरू की।सीबीआई के मुताबिक, बबलू श्रीवास्तव 31 जनवरी 1997 से 11 जून 1999 तक नैनी जेल में बंद था। आरोप था कि वह जेल के अंदर मोबाइल और अलग-अलग सिम कार्ड का इस्तेमाल कर कृष्णा शेट्टी समेत अपने साथियों से संपर्क करता था। उसके सहयोगियों पर जेल कर्मचारियों को रिश्वत देकर मोबाइल और सिम पहुंचाने का भी आरोप था।
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Pok में पाकिस्तानी सेना की फायरिंग, 2 की मौत: बस टर्मिनल पर प्रदर्शनकारियों को निशाना बनाया, दो दिन में 9 जानें गईं
पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) के रावलकोट में शुक्रवार को पाकिस्तानी सेना ने प्रदर्शनकारियों पर फायरिंग कर दी। इसमें 2 लोगों की मौत हो गई। पिछले दो दिनों में पाकिस्तानी सेना की तरफ से अब तक 9 लोगों की जान जा चुकी है। इससे पहले गुरुवार को भी 7 प्रदर्शनकारी मारे गए थे। यूनाइटेड कश्मीर पीपुल्स नेशनल पार्टी (UKPNP) ने आरोप लगाया कि सुरक्षाबलों ने शांतिपूर्ण प्रदर्शन कर रहे लोगों पर भारी मशीनगनों और ड्रोन से हमला किया। 5 नवंबर की फायरिंग की तस्वीरें… लगातार 2 दिन हमले, तीन जगह पर निशाना पाकिस्तानी सुरक्षाबलों ने लगातार दो दिनों तक मटियालमेरा बस टर्मिनल, उमर फारूक चौक और रावलकोट में चल रहे धरनों पर कार्रवाई की। आरोप है कि सुरक्षाबलों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी के साथ ड्रोन से हमले भी किए। इस दौरान भारी मशीनगनों और बख्तरबंद गाड़ियों का इस्तेमाल किया गया। PoK में 7 जून से अब तक 155 लोगों की मौत PoK में 7 जून से शुरू हुआ विरोध प्रदर्शन लगातार बढ़ता जा रहा है। गुरुवार और शुक्रवार की घटना के बाद इस आंदोलन में जान गंवाने वालों की कुल संख्या 155 हो गई है। आंदोलन की शुरुआत स्थानीय लोगों के राजनीतिक अधिकारों और आर्थिक समस्याओं को लेकर हुई थी। अब प्रदर्शनकारी पाकिस्तानी सुरक्षाबलों की वापसी और अपने नेताओं पर दर्ज मामलों को खत्म करने की मांग भी कर रहे हैं। आंदोलन की 4 बड़ी वजहें…. 1. विधानसभा की 12 आरक्षित सीटों का विवाद PoK विधानसभा में कुल 53 सीटें हैं। इनमें से 12 सीटें पाकिस्तान में रहने वाले कश्मीर मूल के लोगों के लिए आरक्षित हैं। प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि इन सीटों के जरिए पाकिस्तान की सरकार PoK की राजनीति में दखल देती है। उनका कहना है कि इन सीटों पर स्थानीय लोगों का प्रतिनिधित्व नहीं होता। 7 जून को PoK के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद यह विवाद और बढ़ गया। अदालत ने कहा था कि इन सीटों को संवैधानिक बदलाव के बिना खत्म नहीं किया जा सकता। 2. बिजली और मंगला डैम का मुद्दा PoK के मंगला डैम से बड़ी मात्रा में बिजली बनाई जाती है, लेकिन स्थानीय लोगों का आरोप है कि उन्हें बिजली महंगे दामों पर मिलती है। प्रदर्शनकारी चाहते हैं कि डैम से बनने वाली बिजली स्थानीय लोगों को कम कीमत पर दी जाए। 3. महंगाई और आटे की कमी PoK में महंगाई, महंगा आटा और दूसरी जरूरी चीजों की बढ़ती कीमतों से लोग परेशान हैं। प्रदर्शनकारियों की मांग है कि बिजली के साथ आटे पर भी सब्सिडी दी जाए, ताकि आम परिवारों को राहत मिल सके। 4. पाकिस्तानी सुरक्षाबलों की वापसी प्रदर्शनकारियों की मांग है कि आंदोलन को दबाने के लिए तैनात पाकिस्तानी रेंजर्स और सेना को वापस बुलाया जाए। इसके अलावा अवामी एक्शन कमेटी के नेताओं पर आतंकवाद निरोधक कानून के तहत दर्ज मामले खत्म करने की मांग भी की जा रही है। —————- यह खबर भी पढ़ें… यूरोप में 15 विमानों को बम से उड़ाने की धमकी:फ्रांस ने फाइटर जेट भेजे, इमरजेंसी लैंडिंग कराई; 2 दिन पहले भी धमकियां मिली थीं यूरोप में गुरुवार को 15 विमानों को बम से उड़ाने की धमकी मिली है। इनमें फिनलैंड, इटली, फ्रांस, चेक गणराज्य और बुल्गारिया के विमान शामिल हैं। सुरक्षा एजेंसियों ने कई विमानों का रास्ता बदलवाया, जबकि फ्रांस ने डबलिन से रोम जा रही फ्लाइट की सुरक्षा के लिए फाइटर जेट भेजे। पूरी खबर यहां पढ़ें…
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MP में 2% महंगाई भत्ते के एरियर की प्रक्रिया: जनवरी से सितंबर तक का बकाया 3 किस्तों में मिलेगा; IFMIS विंडो खुली – Bhopal News
मध्यप्रदेश के 12 लाख कर्मचारियों और पेंशनर्स को 2% अतिरिक्त महंगाई भत्ता (DA) और महंगाई राहत (DR) के साथ मिलने वाले एरियर के भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो गई है। इसके लिए IFMIS विंडो खोल दी गई है।
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दैनिक भास्कर की खबर के बाद वित्त विभाग के आयुक्त कोष एवं लेखा ने सभी विभागाध्यक्षों, संभागीय संयुक्त संचालकों और कोषालय अधिकारियों को एरियर का भुगतान करने के निर्देश जारी किए हैं। अब महंगाई भत्ते और महंगाई राहत के बिल लगने शुरू होंगे। हालांकि, कर्मचारियों और पेंशनर्स को दिवाली पर इसका लाभ नहीं मिल पाएगा।
आयुक्त कोष एवं लेखा ने जारी आदेश में बताया है कि राज्य शासन के कर्मचारियों का महंगाई भत्ता 1 जनवरी 2026 से 58% से बढ़ाकर 60% कर दिया गया है। इस 2% वृद्धि का एरियर तीन समान किस्तों में दिया जाएगा। जनवरी से सितंबर 2026 तक के 9 महीने के एरियर की किस्तें नवंबर 2026, दिसंबर 2026 और जनवरी 2027 में जारी होंगी।
अक्टूबर 2026 का एरियर नकद मिलेगा
आदेश के अनुसार, अक्टूबर 2026 के महंगाई भत्ते का एरियर कर्मचारियों को नकद भुगतान के रूप में दिया जाएगा। एरियर की गणना और भुगतान के लिए IFMIS-Payroll Admin में Arrear Calculation/Verification स्क्रीन के जरिए प्रक्रिया पूरी करनी होगी।
इसके तहत जनवरी से सितंबर 2026 तक के एरियर के लिए ‘State Employee DA Arrear – Arrear Duration (Jan 2026 to Sept 2026) DA Arrear’ विकल्प चुनना होगा। वहीं, 1 जनवरी 2024 से देय महंगाई भत्ते के एरियर सहित भुगतान के लिए ‘Arrear (01 Jan 2024 including DA arrear)’ विकल्प उपलब्ध कराया गया है।
आयुक्त कोष एवं लेखा कार्यालय ने सभी संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि वे अपने अधीनस्थ आहरण एवं संवितरण अधिकारियों को इस प्रक्रिया की जानकारी देकर जरूरी कार्रवाई कराएं।
गौरतलब है कि दैनिक भास्कर ने 4 नवंबर को कर्मचारियों और पेंशनर्स को दिवाली से पहले महंगाई भत्ता और महंगाई राहत मिलने को लेकर खबर प्रकाशित की थी। इसके बाद वित्त विभाग ने 5 नवंबर को भुगतान संबंधी निर्देश जारी किए।
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सीएम की घोषणा…फिर भी वेतन के साथ बढ़ा डीए नहीं
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव द्वारा 2% महंगाई भत्ता (डीए) बढ़ाने की घोषणा के बाद वित्त विभाग ने 30 अक्टूबर को आदेश जारी कर दिए, लेकिन कर्मचारियों को बढ़ा हुआ डीए वेतन के साथ नहीं मिल सका। पढ़िए पूरी खबर।
दूसरे की जमीन पर रास्ता बना सकते हैं या नहीं, क्या कहता है संपत्ति का कानून
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Property Knowledge : मान लीजिए कि आपकी कोई जमीन गली के ऐसे कोने में पड़ती है, जहां कोई आने-जाने का रास्ता ही नहीं है. सामने जो रास्ता है भी वह किसी अन्य की जमीन से जाता है. अब सवाल ये है कि क्या आपको दूसरे की जमीन से रास्ता लेने का अधिकार है या नहीं. अगर है तो आप कितना चौड़ा रास्ता बना सकते हैं और क्या आप उस जमीन के मालिक भी बन सकते हैं.
सुखाधिकार कानून के तहत दूसरे की जमीन से रास्ता मांगा जा सकता है.
नई दिल्ली. संपत्ति के विवाद में एक मुद्दा अक्सर सामने आता है कि आपके घर के सामने दूसरे की जमीन पड़ रही तो आने-जाने का रास्ता कहां से मिलेगा. मसलन, अगर आपका रास्ता हर तरफ से बंद है और जो खुला है, वह किसी और की जमीन है. क्या ऐसे में आपको दूसरे की जमीन पर रास्ता बनाने का अधिकार होगा. इस बारे में देश का कानून आखिर क्या कहता है. सुप्रीम कोर्ट ने भी इसे लेकर बाकायदा कानून और गाइडलाइन बनाई है.
भारतीय कानून में एक प्रावधान है ईजमेंट राइट यानी सुखाधिकार का. इंडियन ईजमेंट एक्ट, 1882 के तहत यह कानून किसी और की जमीन से भी आपको रास्ता दिलाने की वकालत करता है. हालांकि, इसके लिए कुछ जरूरी शर्तें पूरी करनी होती हैं. कानून के तहत किसी अन्य की जमीन पर सीमित उपयोग का अधिकार मिल सकता है, लेकिन मालिकाना हक उसी व्यक्ति के पास रहेगा जिसकी जमीन है. यह कानून अपनी मर्जी से किसी अन्य की जमीन पर रास्ता बनाने का अधिकार नहीं देता है.
कब मिलता है रास्ते का अधिकार
मान लीजिए कि आपने जहां पर मकान बनवाया है, वह काफी अंदर पड़ता है और आसपास रास्ते का कोई और विकल्प नहीं है. आपका मकान चारों तरफ से घिरा है और जिधर से खुला है, वह किसी और की जमीन है. ऐसे में ईजमेंट एक्ट (Indian Easements Act) की धारा 13 के तहत आप दूसरे की जमीन पर रास्ते का दावा कर सकते हैं. लेकिन, रास्ता तभी मिलेगा जब यह साबित हो जाए कि बिना इस रास्ते के संपत्ति का इस्तेमाल करना संभव नहीं है. अगर संबंधित मकान तक कोई वैकल्पिक रास्ता मौजूद है तो दूसरे की जमीन से रास्ता मांगने का अधिकार नहीं मिलेगा.
कब कर सकते हैं दावा
सुखाधिकार कानून की धारा 15 में साफ कहा गया है कि अगर किसी रास्ते का इस्तेमाल 20 साल से किया जा रहा है और अचानक उस जमीन को किसी और ने खरीदकर रास्ता बंद कर दिया तो संबंधित व्यक्ति को वहां से रास्ता मांगने का अधिकार है. इसमें यह साबित करना होता है कि रास्ते का इस्तेमाल खुलेआम किया जा रहा है और इसके लिए किसी अन्य की अनुमति भी नहीं लेनी पड़ी है. कानून की धारा 18 के तहत रास्ता मांगने वाले को यह साबित करना पड़ता है कि वहां से आवाजाही सार्वजनिक रूप से लंबे समय से रही है.
क्या रास्ता देने से कर सकते हैं इनकार
सवाल ये है कि जमीन का मालिक क्या रास्ता देने से इनकार कर सकता है. जवाब है कि अगर रास्ता मांगने वाला सेक्शन 13 की सभी शर्तों को पूरा कर रहा है तो जमीन का मालिक सामान्य रूप से रास्ता देने से इनकार नहीं कर सकता. इसमें यह भी तय किया जाता है कि रास्ते की चौड़ाई कितनी होगी. जमीन की स्थिति को देखते हुए रास्ते की चौड़ाई तय की जाती है. इसमें यह देखा जाता है कि पहले से किस तरह के उद्देश्य के तहत रास्ते का इस्तेमाल किया जा रहा था.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…


