राहुल गांधी के 19 सितंबर को प्रस्तावित ‘छात्रों की गूंज’ कार्यक्रम से पहले इंदौर की सियासत गर्मा गई है। कार्यक्रम स्थल की परमिशन को लेकर अब तक स्थिति साफ नहीं है। कांग्रेस ने पहले नेहरू स्टेडियम में कार्यक्रम कराने की तैयारी की थी, लेकिन अनुमति नहीं मिलने पर रीजनल पार्क के सामने आईडीए के मैदान को चुना। यहां कार्यक्रम के लिए कांग्रेस ने रविवार को कलेक्टर से अनुमति मांगी है। इसके साथ ही जीएससीसी के पीछे खाली मैदान और खंडवा रोड स्थित यूनिवर्सिटी कैंपस के ग्राउंड के लिए भी अनुमति मांगी गई है। नेहरू स्टेडियम से शुरू हुआ था परमिशन का पेंच कांग्रेस ने पहले 8 से 12 सितंबर के बीच कार्यक्रम कराने की तैयारी की थी। शहर कांग्रेस अध्यक्ष चिंटू चौकसे ने 29 अगस्त को नगर निगम कमिश्नर क्षितिज सिंघल को नेहरू स्टेडियम के लिए अनुमति का पत्र दिया था। 31 अगस्त को कांग्रेस नेताओं का दल स्मार्ट सिटी ऑफिस में कमिश्नर से मिला और अनुमति मांगी। नेहरू स्टेडियम को लेकर कोर्ट के आदेशों का हवाला दिए जाने के बाद कांग्रेस को न तो अनुमति मिली और न ही स्पष्ट इनकार किया गया। इसके बाद कांग्रेस ने रीजनल पार्क के सामने आईडीए के खाली मैदान को कार्यक्रम स्थल तय किया। इसी बीच राहुल गांधी का दौरा 12 सितंबर के बजाय 19 सितंबर को होना तय हुआ। QR कोड में भी डाल दिया मैदान का पता आईडीए के मैदान को तय करने के बाद कांग्रेस ने कार्यक्रम के रजिस्ट्रेशन के लिए जारी QR कोड में भी इसी जगह का पता डाल दिया। रविवार को कांग्रेस नेता कलेक्टर से मैदान की अनुमति मांगने पहुंचे। कांग्रेस को उम्मीद है कि प्रशासन से यहां कार्यक्रम की मंजूरी मिल जाएगी। हालांकि, एहतियात के तौर पर जीएससीसी के पीछे खाली मैदान और खंडवा रोड यूनिवर्सिटी कैंपस के ग्राउंड की भी अनुमति मांगी गई है। कांग्रेस नेताओं को उम्मीद है कि सोमवार को स्थिति स्पष्ट हो सकती है। राहुल के दौरे से बयानबाजी तेज कार्यक्रम से पहले भाजपा और कांग्रेस नेताओं के बीच बयानबाजी भी तेज हो गई है। पिछले दिनों मंत्री कैलाश विजयवर्गीय और पूर्व विधायक आकाश विजयवर्गीय ने राहुल गांधी के इंदौर आने से भाजपा को फायदा होने की बात कही थी। इस पर कांग्रेस की राष्ट्रीय प्रवक्ता रागिनी नायक ने पलटवार किया। रागिनी नायक के बयान के बाद मंत्री विजयवर्गीय का भागीरथपुरा दूषित जलकांड के दौरान दिया गया ‘घंटा’ वाला बयान भी फिर चर्चा में आ गया। विजयवर्गीय के ‘सर्कस’ तंज पर सज्जन का पलटवार शनिवार रात गोगा नवमी के आयोजन में कैलाश विजयवर्गीय ने राहुल गांधी के कार्यक्रम पर तंज करते हुए कहा था कि सर्कस देखने हर कोई जाता है। इसके जवाब में पूर्व मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने तीखा पलटवार किया। उन्होंने कहा कि राहुल गांधी इंदौर सर्कस देखने नहीं आ रहे, बल्कि सर्कस के जंतुओं को रिंगमास्टर बनकर नचाने आ रहे हैं। इससे पहले शनिवार दोपहर इंदौर पहुंचे मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने भी राहुल गांधी और कांग्रेस पर निशाना साधा था। BJP नगर अध्यक्ष बोले- कार्यक्रम में वंदे मातरम् गाएं भाजपा नगर अध्यक्ष सुमित मिश्रा ने कांग्रेस पर झूठ और भ्रम फैलाकर कार्यक्रम के जरिए चर्चा में बने रहने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि पहले कार्यक्रम स्थल और फिर राष्ट्रीय प्रवक्ता के बयान को लेकर कांग्रेस चर्चा में है। उन्होंने कांग्रेस से कार्यक्रम में वंदे मातरम् गाने और महापुरुषों के फोटो लगाने की बात कही।
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राहुल गांधी के कार्यक्रम से पहले इंदौर में सियासी उबाल: परमिशन पर पेंच, रीजनल पार्क के साथ दो और स्थानों की अनुमति मांगी; BJP-कांग्रेस में बयानबाजी तेज – Indore News
जर्मनी में कट्टर दक्षिणपंथी पार्टी पहली बार सत्ता के करीब: राज्य चुनाव में AfD को 44% वोट; इलॉन मस्क ने दी बधाई
जर्मनी की दक्षिणपंथी पार्टी अल्टरनेटिव फॉर जर्मनी (AfD) ने सक्सोनी-आनहाल्ट के राज्य चुनाव में बड़ी जीत हासिल की है। एग्जिट पोल के मुताबिक, AfD को करीब 44% वोट मिले हैं और वह सबसे बड़ी पार्टी बन गई है। यह नतीजा चांसलर फ्रेडरिक मर्ज और उनकी कंजरवेटिव पार्टी के लिए बड़ा झटका है। अमेरिकी कारोबारी इलॉन मस्क ने भी AfD की जीत पर बधाई दी। AfD पहली बार द्वितीय विश्व युद्ध के बाद किसी जर्मन राज्य में सत्ता के इतने करीब पहुंची है। हालांकि, जर्मनी की मुख्य पार्टियां उसके साथ गठबंधन करने से इनकार करती रही हैं। जर्मनी की राजनीति में AfD की जीत कितनी बड़ी है? जर्मनी में नाजी शासन के इतिहास की वजह से मुख्यधारा की पार्टियां लंबे समय से बहुत ज्यादा दक्षिणपंथी मानी जाने वाली पार्टियों से दूरी रखती हैं। AfD पर भी दक्षिणपंथी चरमपंथ के आरोप लगते रहे हैं। इसलिए उसका किसी राज्य में सत्ता के करीब पहुंचना जर्मन राजनीति में बड़ा बदलाव माना जा रहा है। और बात सिर्फ इस एक राज्य की नहीं है। AfD राष्ट्रीय स्तर पर भी सबसे लोकप्रिय पार्टी बन चुकी है। हालिया INSA सर्वे में उसे करीब 28% समर्थन मिला है, जबकि मर्ज की CDU/CSU करीब 20% पर है। AfD की राजनीति में इमिग्रेशन, शरणार्थी और जर्मनी की राष्ट्रीय पहचान बड़े मुद्दे हैं। AfD पार्टी की प्रमुख मांगें और नीतियां: इमिग्रेशन पर रोक: पार्टी जर्मनी में आने वाले प्रवासियों की संख्या कम करने और नियम कड़े करने की समर्थक है। शरणार्थियों पर सख्ती: पार्टी शरणार्थियों के लिए नियम कड़े करने और उनके बच्चों की पढ़ाई के लिए अलग कक्षाओं की मांग करती है। रूस से बेहतर रिश्ते: AfD रूस के साथ संबंध सुधारना चाहती है। यूक्रेन की मदद कम करना: पार्टी यूक्रेन को जर्मनी की सैन्य मदद कम करने की मांग करती है। यूरो से बाहर निकलना: AfD जर्मनी को यूरो मुद्रा से बाहर निकालने की बात करती रही है। पारंपरिक मूल्यों पर जोर: पार्टी स्कूलों और सांस्कृतिक संस्थानों में पारंपरिक मूल्यों को बढ़ावा देना चाहती है। रेनबो झंडे पर रोक: AfD स्कूलों में रेनबो झंडे लगाने पर रोक की समर्थक है। जर्मन पहचान पर जोर: पार्टी स्कूलों में रोज जर्मन झंडा फहराने और कार्यक्रमों में राष्ट्रगान गाने की मांग करती है। विंड फार्म पर रोक: पार्टी नए विंड फार्म बनाने का विरोध करती है। सरकारी मीडिया में बदलाव: AfD सरकारी प्रसारण व्यवस्था में भी बदलाव चाहती है। जर्मनी में AfD का समर्थन क्यों बढ़ रहा है? AfD खुद को मौजूदा पार्टियों के विकल्प के तौर पर पेश करती है। चुनाव प्रचार में पार्टी ने इमिग्रेशन, सुरक्षा और जर्मन पहचान को लेकर लोगों की चिंता को मुद्दा बनाया। उसके समर्थकों का कहना है कि मौजूदा पार्टियां इन समस्याओं का समाधान नहीं कर पा रही हैं। इसी नाराजगी का फायदा AfD को खासकर पूर्वी जर्मनी में मिल रहा है। AfD ने इस चुनाव में 35 साल के उलरिश जिगमुंड को उम्मीदवार बनाया था। उन्होंने नतीजे को ऐतिहासिक बताया। जिगमुंड ने कहा कि लोगों ने साफ कर दिया है कि वे राजनीतिक बदलाव चाहते हैं और इसके लिए AfD को मौका देना चाहते हैं। उन्होंने इसे 2029 के राष्ट्रीय चुनाव से पहले अहम कदम बताया। खबर अपडेट हो रही है…
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JDU भाजपा के चक्रव्यूह में फंसी – कांग्रेस जिलाध्यक्ष: बक्सर में बोले – आने वाले दिनों में विलय की नौबत आएगी – Buxar News
बक्सर जिले में जदयू की नीतीश संवाद यात्रा और फरक्का जल संधि के मुद्दे पर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। कांग्रेस जिलाध्यक्ष पंकज उपाध्याय ने जदयू और भाजपा पर हमला बोलते हुए नीतीश संवाद यात्रा को लेकर बयान दिया है। उन्होंने कहा कि इसे नीतीश संवाद यात्रा नहीं, बल्कि जदयू बचाव यात्रा कहा जाना चाहिए। उपाध्याय ने दावा किया कि जदयू अपनी राजनीतिक जमीन और अस्तित्व बचाने के लिए गांव-गांव और जिलों में संवाद कार्यक्रम कर रही है। ”नई संधि या कोई ठोस कदम उठाना चाहिए” उनके अनुसार, जदयू को अपनी राजनीतिक जमीन खिसकने का डर सता रहा है। पंकज उपाध्याय ने फरक्का जल संधि के मुद्दे पर भी सरकार को घेरा। उन्होंने कहा कि 25 साल पुराने फैसलों के लिए पिछली सरकारों को जिम्मेदार ठहराकर जनता को गुमराह करने की कोशिश हो रही है। उन्होंने आगे कहा कि यदि फरक्का जल संधि की अवधि खत्म हो चुकी है, तो मौजूदा सरकार को पुरानी सरकारों को कोसने के बजाय इस मुद्दे पर नई संधि या कोई ठोस कदम उठाना चाहिए। कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने कहा कि पिछले 15 से 20 सालों से सत्ता में रहने वाले लोग बिहार की शिक्षा, स्वास्थ्य और सड़क व्यवस्था की खराब हालत पर बात नहीं करते। ”जदयू भाजपा के राजनीतिक चक्रव्यूह में फंस चुकी” इसके बजाय, वे बार-बार पिछली सरकारों पर आरोप लगाकर अपनी जिम्मेदारी से बचने की कोशिश करते हैं। उन्होंने कहा कि बिहार की जनता को अब इन मुद्दों पर सरकार से जवाब मांगना चाहिए। उपाध्याय ने दावा किया कि जदयू भाजपा के राजनीतिक चक्रव्यूह में फंस चुकी है। आने वाले समय में पार्टी के सामने अपने अस्तित्व को बचाने की चुनौती और बढ़ सकती है। पंकज उपाध्याय ने हाल के कार्यक्रम का जिक्र करते हुए कहा कि जदयू के नेता अक्सर पांचों पांडवों के एकजुट होने की बात करते हैं। लेकिन, उन कार्यक्रमों में भाजपा और अन्य सहयोगी दलों के प्रमुख नेता मौजूद नहीं थे। उन्होंने इसे जदयू की मौजूदा राजनीतिक हालात का संकेत बताया। जदयू के भाजपा में विलय का विकल्प – कांग्रेस जिलाध्यक्ष कांग्रेस जिलाध्यक्ष ने दावा किया कि आने वाले दिनों में ऐसी राजनीतिक परिस्थिति भी बन सकती है, जब पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के सामने जदयू के भाजपा में विलय का विकल्प पैदा हो जाए। उन्होंने कहा कि जदयू आज अपनी राजनीतिक विरासत और पहचान बचाने के लिए जनता के बीच संवाद कर रही है, जबकि उसके लिए सबसे बड़ी राजनीतिक चुनौती भाजपा बनती जा रही है। हालांकि, कांग्रेस जिलाध्यक्ष के इन आरोपों पर जदयू और भाजपा की ओर से तत्काल कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है।
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कनॉट प्लेस में यहां 110 रुपये में भरपेट खाना, राजमा-चावल और छोले-भटूरे की धूम
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कनॉट प्लेस के पास स्वाद का एक खास ठिकाना छिपा है. यहां महज 110 रुपये में भरपेट देसी खाना मिलता है. राजमा-चावल से लेकर छोले-भटूरे का जायका लोगों को खींच लाता है. कम बजट में भरपेट और स्वाद से भरपूर खाना आपको चौंका देगा. आखिर कौन-सी है यह जगह, जानिए पूरा सच.
दिल्ली में खाना सिर्फ महंगे रेस्टोरेंट और बड़े कैफे का नाम नहीं है. राजधानी की असली पहचान आज भी उन छोटी-छोटी दुकानों में मिलती है, जहां स्वाद घर जैसा होता है और जेब पर ज्यादा बोझ भी नहीं पड़ता. अगर आप कनॉट प्लेस घूमने गए हैं और कम बजट में भरपेट देसी खाना चाहते हैं, तो शंकर मार्केट के पास मौजूद ढाबा फूड आपके लिए अच्छा ठिकाना हो सकता है.
यह छोटी सी दुकान अपने राजमा चावल के लिए काफी जानी जाती है. यहां गर्मागर्म चावल के साथ मसालेदार राजमा परोसा जाता है. इसके अलावा कढ़ी चावल, छोले चावल, शाही पनीर चावल और सोया चाप चावल जैसे कई देसी स्वाद भी मिलते हैं. ऑनलाइन मेन्यू में भी राजमा चावल, कढ़ी चावल, छोले चावल और शाही पनीर चावल को टॉप व्यंजनों में रखा गया है.
दुकान के बाहर लगी मेन्यू बोर्ड को देखकर ही अंदाजा हो जाता है कि यहां खाने के लिए लोगों की पसंद कितनी देसी है. यहां राजमा चावल और कढ़ी चावल की प्लेट करीब 110 रुपये, शाही पनीर चावल 110 रुपये और सोया चाप चावल करीब 130 रुपये में दिखाई दे रहे हैं. कीमतें समय के साथ बदल सकती हैं, इसलिए जाने से पहले एक बार पूछ लेना बेहतर रहेगा.
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यहां सिर्फ राजमा चावल वाली प्लेट ही नहीं, बल्कि पनीर वाले छोले भटूरे भी लोगों को पसंद आते हैं. साथ में लस्सी, मसाला छाछ और नींबू सोडा जैसे ड्रिंक्स भी मिलते हैं. दुकान पर बैठने की जगह सीमित है, इसलिए लोग यहां अक्सर जल्दी खाना खाकर या पैक कराकर निकलते हैं.
ढाबा फूड कनॉट प्लेस के म्यूनिसिपल मार्केट, सुपर बाजार कॉम्प्लेक्स, शंकर मार्केट के पास स्थित है. दुकान आमतौर पर सुबह 9 बजे से शाम 6 बजे तक खुलती है.
अगर आपको कनॉट प्लेस की चमक-दमक से अलग सादा, देसी और बजट वाला खाना पसंद है, तो यह छोटी सी दुकान आपकी फूड लिस्ट में शामिल हो सकती है. यहां का माहौल भले ही किसी बड़े रेस्टोरेंट जैसा न हो, लेकिन गर्मागर्म राजमा-चावल की प्लेट आपको दिल्ली के पुराने और सादे खाने का स्वाद जरूर याद दिला सकती है.
हवाई किराए में मनमानी- सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई आज: पिछली बार कहा था- अगर एयरलाइंस न मानें तो प्लेन खड़े कर दें
नई दिल्ली3 घंटे पहले
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तस्वीर दिल्ली के इंदिरा गांधी इंटरनेशनल एयरपोर्ट की है।
हवाई किराए में मनमानी बढ़ोतरी और निजी एयरलाइंस के एक्स्ट्रा चार्ज पर सुप्रीम कोर्ट सोमवार को सुनवाई करेगा। केस जस्टिस विक्रम नाथ और जस्टिस संदीप मेहता की बेंच में लिस्टेड है।
केंद्र सरकार ने 17 अगस्त को कहा था कि नए नियमों को 3 हफ्ते में फाइनल कर दिया जाएगा। सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा था- इसे सात दिन के भीतर प्रकाशित कीजिए। अगर एयरलाइंस पालन नहीं कर रही हैं तो उन्हें जमीन पर खड़ा कर दीजिए।’
मामला पिछले साल नवंबर 2025 में सुप्रीम कोर्ट पहुंचा था, जब किराए में बढ़ोतरी, हिडन चार्ज जैसे मामले पर एक याचिका दायर की गई थी।

याचिका में बैगेज और अतिरिक्त शुल्क जैसे 4 मुद्दे उठाए
याचिका सोशल एक्टिविस्ट एस लक्ष्मीनारायणन ने पिछले साल नवंबर में दायर की थी। उन्होंने पूरे सिविल एविएशन सेक्टर में ट्रांसपेरेंसी और यात्रियों की सुरक्षा के लिए मजबूत और फ्री रेगुलेटरी अथॉरिटी बनाने की मांग की है।
याचिका में भारत की प्राइवेट एयरलाइन्स की ओर से हवाई किराए और एक्स्ट्रा चार्ज के रूप में होने वाले उतार-चढ़ाव पर कंट्रोल के लिए गाइडलाइंस बनाने की मांग भी की गई है।
- सभी प्राइवेट एयरलाइंस ने इकोनॉमी क्लास के पैसेंजर्स के लिए फ्री चेक-इन बैगेज की लिमिट 25 से घटाकर 15 किलो कर दी है। पहले यह सुविधा टिकट में शामिल थी, अब इसे कमाई का नया जरिया बना दिया गया है।
- अब चेक-इन के लिए केवल एक बैग की परमिशन देने की नई नीति और चेक-इन बैगेज का इस्तेमाल नहीं करने वाले यात्रियों को किसी छूट और लाभ का प्रावधान नहीं है।
- अभी किसी भी अथॉरिटी के पास हवाई किराए या एक्स्ट्रा पैसे वसूलने की समीक्षा करने, उसकी अपर लिमिट तय करने का अधिकार नहीं है। इससे एयरलाइंस को हिडन चार्ज और अनिश्चित कीमतों के जरिए उपभोक्ताओं का शोषण करने का मौका मिलता है।
- एयरलाइन्स का बिना रेगुलेशन वाला व्यवहार मनमाने किराए में बढ़ोतरी, सेवाओं में कमी, शिकायतों का समाधान नहीं होने के रूप में सामने आता है।

इस पूरे मामले को 5 सवाल-जवाब से समझिए
1. सवाल: त्योहारों में हवाई टिकट महंगा क्यों हो जाता है?
जवाब: मुख्य वजह डायनैमिक प्राइसिंग है। मांग बढ़ने पर सस्ती सीटें जल्दी बिक जाती हैं और बची सीटें महंगी कैटेगरी में चली जाती हैं।
2. सवाल: क्या एयरलाइंस मनमाने तरीके से किराया बढ़ा सकती हैं?
जवाब: एयरलाइंस मांग और उपलब्ध सीटों के आधार पर किराया बदलती हैं। मौजूदा व्यवस्था में सरकार सामान्य तौर पर हर टिकट का अधिकतम किराया तय नहीं करती। इसी व्यवस्था पर सुप्रीम कोर्ट में सवाल उठे हैं।
3. सवाल: क्या एयरलाइंस मनमाने तरीके से किराया बढ़ा सकती हैं?
जवाब: सामान्य बाजार आधारित उड़ानों में किराया मांग और उपलब्धता के आधार पर बदलता है। हालांकि एयरलाइंस को लागू नियमों का पालन करना होता है। DGCA किराए की निगरानी करता है। कुछ सरकारी योजनाओं, जैसे UDAN, में अधिकतम किराया तय होता है।
4. सवाल: एक ही फ्लाइट में अलग-अलग यात्रियों का किराया अलग क्यों होता है?
जवाब: सीटें अलग-अलग फेयर कैटेगरी में उपलब्ध होती हैं। इसलिए अलग समय पर बुकिंग करने वाले यात्रियों को एक ही फ्लाइट में अलग किराया मिल सकता है।
5. सवाल: टिकट के अलावा कौन-कौन से शुल्क लग सकते हैं?
जवाब: अतिरिक्त बैगेज, पसंद की सीट, भोजन और कुछ अन्य वैकल्पिक सेवाओं के लिए अलग शुल्क लिया जा सकता है। टिकट बदलने या रद्द करने पर भी संबंधित शुल्क लागू हो सकते हैं। इनकी राशि और शर्तें एयरलाइन पर निर्भर करती हैं।
हवाई किराए पर सुप्रीम कोर्ट में हुई पिछली बड़ी सुनवाइयां
- फरवरी 2026- त्योहारों में हवाई किराया बढ़ाने पर सुप्रीम कोर्ट सख्त: केंद्र से 4 हफ्ते में जवाब मांगा: सुप्रीम कोर्ट ने त्योहारों और इमरजेंसी हालातों में प्राइवेट एयरलाइंस के हवाई किराए बढ़ाने को लेकर चिंता जताई। कोर्ट ने कहा कि यह एक बहुत गंभीर चिंता का विषय है। वरना, हम 32 पिटीशन पर विचार नहीं करते। एडिशनल सॉलिसिटर जनरल अनिल कौशिक ने अदालत को बताया कि यह मामला आम जनता के हित से जुड़ा है। सरकार और संबंधित विभाग इसे हाईलेवल पर देख रहे हैं। पढ़ें पूरी खबर…
- मई 2026- सुप्रीम कोर्ट बोला- दो एयरलाइन का किराया अलग-अलग क्यों: एक एयरलाइन ₹8000 चार्ज करती है, दूसरी ₹18000: एक ही दिन, एक ही सेक्टर में उड़ान भरने वाली एक एयरलाइन कुछ अलग हवाई किराया लेती है, जबकि दूसरी एयरलाइनल अलग किराया लेती है। इसे सही किया जाना चाहिए। केंद्र सरकार यात्रियों को राहत दे। याचिकाकर्ता ने बेंच से कहा- हवाई किराया 300% तक बढ़ जाता है। इस पर बेंच ने मजाक में कहा- वकीलों की फीस भी कई बार 400% तक बढ़ जाती है, अब क्या किया जाए। पढ़ें पूरी खबर…
मियामी में रनवे से बाहर निकला प्लेन, आग लगी: पार्किंग में खड़ी गाड़ियों से टकराया, कई मौतों की आशंका
16 मिनट पहले
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प्लेन में आग लगने का वीडियो एयरपोर्ट के बाहर खड़ी कार के डैशबोर्ड कैमरे में रिकॉर्ड हो गया।
अमेरिका के मियामी इंटरनेशनल एयरपोर्ट पर रविवार को बोइंग 767 कार्गो विमान लैंडिंग के बाद रनवे से बाहर निकल गया। फेडरल एविएशन एडमिनिस्ट्रेशन (FAA) के मुताबिक, प्लेन स्थानीय समय के मुताबिक दोपहर करीब 2 बजे रनवे से बाहर गया।
क्रैश हुए कार्गो प्लेन की टक्कर कई गाड़ियों से हुई। वीडियो में विमान एयरपोर्ट के पास एक सड़क के किनारे दिखाई दे रहा है। फायर रेस्क्यू टीमों ने कई लोगों की मौत की आशंका जताई है।
विमान अमेजन का बताया जा रहा है। इस पर प्राइम एयर लिखा हुआ है लेकिन इसकी आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है।
FAA ने एक बयान में बताया कि बोइंग 767-300 कार्गाे प्लेन ने प्यूर्टो रिको के लुइस मुनोज मारिन इंटरनेशनल एयरपोर्ट से उड़ान भरी थी।
एयर ट्रैफिक कंट्रोल के रिकॉर्ड किए गए ऑडियो में एक ग्राउंड व्हीकल से टावर को सूचना देते सुना गया, “लगता है कि विमान 30 नंबर रनवे से आगे निकल गया है।” यह ऑडियो ATC.com ने कैप्चर किया।
विमान हादसे की तस्वीरें…

आग की लपटों में घिरे प्लेन से काले धुएं का गुबार उठता देखा गया।

मियामी-डेड फायर रेस्क्यू की 60 यूनिट्स मौके पर आग बुझाने की कोशिश कर रही थीं।

प्लेन की टेल पर अमेजन प्राइम का लोगो नजर आ रहा है।

कार्गो प्लेन में आग बुझने के बाद की तस्वीर है, इस पर प्राइम लिखा दिखाई दे रहा है।
मियामी एयरपोर्ट पर ग्राउंड स्टॉप लागू
FAA के अलर्ट के मुताबिक, रनवे पर प्लेन अभी भी मौजूद है। इस कारण मियामी एयरपोर्ट पर ग्राउंड स्टॉप लागू है। इसका मतलब है कि एयरपोर्ट पर सभी विमानों की आवाजाही रोक दी गई है।
बताया जा रहा है कि कार्गो प्लेन अमेजन का था। हादसे पर प्रतिक्रिया के लिए अमेजन से संपर्क किया गया, लेकिन उसकी तरफ से अभी कोई बयान सामने नहीं आया है।
प्लेन में कितने लोग सवार थे, रनवे के बाहर गाड़ियों से टकराने के बाद कितने घायल हुए और गाड़ियों के नुकसान की जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
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प्लेन हादसे से जुड़ी यह खबर भी पढ़ें…
ग्रीस एयर शो में करतब दिखा रहा जेट क्रैश: दोनों पायलटों की मौत

ग्रीस की वायुसेना का दो सीटों वाला F-4 फैंटम फाइटर जेट शनिवार को एयर शो के दौरान क्रैश हो गया। इसमें दोनों पायलटों की मौत हो गई। यह हादसा तानाग्रा एयर फोर्स बेस पर आयोजित ‘एथेंस फ्लाइंग वीक’ के दौरान हुआ। इसे देखने के लिए कई हजार लोग मौजूद थे। पढ़ें पूरी खबर…
पद्मश्री प्रो. टीके लाहिड़ी मामले को CM ने लिया संज्ञान: 3 सदस्यों की टीम करेगी जांच,BHU के छात्र बोले- मामले कि निष्पक्ष जांच हो – Varanasi News
वाराणसी में बीएचयू के सर सुंदरलाल अस्पताल में कार्डियोथोरेसिक सर्जन रहे पद्मश्री प्रो. टीके लाहिड़ी के साथ वार्ड में मारपीट के आरोप मामले में जांच के लिए तीन सदस्यीय समिति बनाई गई है। इसमें बीएचयू के चीफ प्रॉक्टर, आईएमएस निदेशक और डीसीपी काशी को रखा गया है। इस पूरे मामले में सीएम योगी आदित्यनाथ ने संज्ञान लेते हुए मंत्री रवींद्र जायसवाल को अस्पताल भेजा। वही,इस पूरे मामले पर विश्वविद्यालय प्रशासन ने 6 सितंबर की शाम 5.30 बजे पक्ष रखते हुए बताया कि सभी आरोप गलत है। सबसे पहले अब जानिए मामले की शुरुआत कहां से हुई पद्मश्री प्रो. टीके लहरी 27 जनवरी से बीएचयू अस्पताल के आईसीयू में भर्ती हैं और उनका इलाज चल रहा है। परिजनों के मुताबिक, 29 अगस्त की रात सुपरस्पेशियलिटी ब्लॉक की पांचवीं मंजिल पर स्थित कार्डियोथोरेसिक विभाग के आईसीयू में उनके साथ मारपीट की गई। परिजनों का कहना है कि 1 सितंबर को विभाग के स्तर से उन्हें घटना की जानकारी मिली। इसके बाद उन्हें प्रो. लहरी को लगी चोटों से संबंधित फोटो और वीडियो उपलब्ध कराए गए। परिजनों ने ईमेल के माध्यम से बीएचयू के कुलपति, आईएमएस बीएचयू के निदेशक और चिकित्सा अधीक्षक से शिकायत की। परिजनों ने प्रो. लहरी की मेडिकल जांच कराने की मांग की है। लेकिन कोई भी परिजन उनसे मिलने के लिए खुद बीएचयू अस्पताल नहीं पहुंचा। प्रो. लाहिड़ी मेरे गुरु,आरोप गलतः डॉ. अरविंद पांडेय डॉ. अरविंद पांडेय ने कहा – प्रो. लाहिड़ी मेरे गुरु हैं। मैं उनके साथ मारपीट के बारे में सोच भी नहीं सकता हूं। वह थूक रहे थे। मैंने बस मुंह की तरफ हाथ बढ़ाकर रोकने का प्रयास किया। पिछले आठ महीने से उनकी सेवा कर रहा हूं। वार्ड में शौच कर देते हैं तो मैं उसे भी साफ कराता हूं। पीटने और गाली देने का आरोप बेबुनियाद और गलत है। अधिवक्ता ने लंका थाने में दी तहरीर अधिवक्ता दीपक राय ‘कान्हा’ ने लंका थाने में तहरीर दी है। आरोप लगाया है कि कार्डियोथोरेसिक सर्जन पद्मश्री डॉ. टीके लाहिड़ी के साथ डॉ. अरविंद पांडेय ने मारपीट की। मारपीट से उनके चेहरे और आंख में गंभीर चोट आई है। मुकदमा दर्ज कर तत्काल कार्रवाई की मांग की गई है। बीएचयू के छात्रों ने किया विरोध बीएचयू के छात्रों ने परिसर स्थित विश्वनाथ मंदिर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया। छात्रों ने प्रो. लाहिड़ी को न्याय दिलाने की मांग की। वहीं दूसरी ओर से अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (अभाविप) बीएचयू इकाई के प्रतिनिधिमंडल ने प्रो. लाहिड़ी से मुलाकात की। इकाई अध्यक्ष पल्लव सुमन ने कहा कि आरोपी को तत्काल प्रभाव से निलंबित किया जाए। सहमंत्री जया यादव प्रो. लाहिड़ी को सुरक्षा व्यवस्था देने की मांग की है। क्या बोले निदेशक और एमएस आईएमएस निदेशक प्रो. एसएन संखवार के अनुसार प्रो. टीके लाहिड़ी के साथ मारपीट नहीं हुई है। मैंने खुद जाकर हालचाल लिया है। डॉ. अरविंद पिछले आठ माह से सेवा कर रहे हैं। जो भी आरोप लग रहा है वह गलत है। हमारी टीम लगातार निगरानी कर रही है। वहीं, अस्पताल के एमएस प्रोफेसर पुनीत के अनुसार मारपीट का आरोप गलत है। बहन की शिकायत के बाद एक टीम जांच के लिए गई थी। मारपीट नहीं हुई है। अस्पताल के डॉक्टर और कर्मचारी ही उनकी सेवा कर रहे हैं। बीएचयू ने जारी किया स्पष्टीकरण बीएचयू प्रशासन ने इस बीच स्पष्ट किया है कि प्रो. लाहिड़ी के साथ सर सुंदरलाल अस्पताल में कथित मारपीट और दुर्व्यवहार प्रकरण की शिकायत बीएचयू के कुलपति, आईएमएस निदेशक और चिकित्सा अधीक्षक को ई-मेल पर प्राप्त हुई थी। चिकित्सा अधीक्षक (एमएस) ने तीन सितम्बर को ह्रदय रोग, सामान्य मेडिसिन, मनोचिकित्सा, वृद्धावस्था रोग, न्यूरोलोजी, क्रिटिकल केयर और, टीबी और छाती रोग के विशेषज्ञ चिकित्सकों से डॉ. लाहिड़ी के स्वास्थ्य की जांच का आदेश जारी किया। विशेषज्ञ चिकित्सकों की रिपोर्ट के अनुसार डॉ लाहिड़ी उम्र जनित शारीरिक और मानसिक बीमारियों के चलते अपने उपचार, नित्यकर्म तथा साफ-सफाई में भी आनाकानी करते रहते हैं।
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जयपुर से ओवैसी-बेनीवाल की नई सियासी पारी: AIMIM-RLP का गठबंधन, हनुमान बोले- BJP-कांग्रेस के सामने तैयार करेंगे तीसरा विकल्प – Jaipur News
राजस्थान में निकाय चुनाव के बीच नई सियासी तस्वीर उभरती दिखाई दे रही है। एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी और राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी के प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने जयपुर में एक मंच साझा कर भाजपा और कांग्रेस के सामने तीसरा राजनीतिक विकल्प खड़ा करने का ऐलान किया है। दोनों नेताओं ने साफ संकेत दिए कि यह गठबंधन केवल निकाय चुनाव तक सीमित नहीं रहेगा। निकाय चुनाव से शुरू हुआ यह राजनीतिक साथ आगे विधानसभा चुनाव तक जारी रह सकता है। ओवैसी ने इसे राजस्थान की राजनीति में तीसरे विकल्प की शुरुआत बताया, जबकि हनुमान बेनीवाल ने कहा कि जयपुर की धरती से नई राजनीति का आगाज हो रहा है। ओवैसी बोले- BJP-कांग्रेस के बीच फंसी रही राजस्थान की राजनीति असदुद्दीन ओवैसी ने कहा कि लंबे समय से राजस्थान की राजनीति भाजपा और कांग्रेस के इर्द-गिर्द घूमती रही है। अब जनता के सामने तीसरा विकल्प देने की तैयारी की जा रही है। उन्होंने 11 सितंबर को होने वाले निकाय चुनाव को मतदाताओं के लिए महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि जहां आरएलपी के प्रत्याशी चुनावी मैदान में हैं, वहां जनता उन्हें समर्थन दे। ओवैसी ने भाजपा पर हिंदू-मुस्लिम के नाम पर तनाव और राजनीति करने का आरोप लगाया। उन्होंने प्रदेश में शिक्षा, सरकारी स्कूलों की स्थिति, मूलभूत सुविधाओं और महिला सुरक्षा जैसे मुद्दों को उठाते हुए सरकार को घेरा। बेनीवाल बोले- जयपुर से नई राजनीति की शुरुआत वहीं आरएलपी प्रमुख हनुमान बेनीवाल ने ओवैसी के साथ राजनीतिक गठजोड़ को राजस्थान की राजनीति में नई शुरुआत बताया। उन्होंने कहा कि जाट और मुस्लिम समुदाय पहले भी राजनीतिक रूप से साथ रहे हैं और आगे भी यह साथ बना रहेगा। बेनीवाल ने सरकार को पेपर लीक, किसानों की समस्याओं, अग्निवीर योजना और युवाओं के रोजगार के मुद्दे पर घेरा। उन्होंने कहा कि गठबंधन केवल चुनाव लड़ने के लिए नहीं, बल्कि इन मुद्दों को लेकर संघर्ष करने के लिए भी आगे आएगा। निकाय चुनाव से विधानसभा तक साथ चलने का दावा जयपुर के भट्टा बस्ती के वार्ड 146 में दोनों नेताओं का एक मंच पर आना सिर्फ चुनावी सभा तक सीमित नहीं माना जा रहा। ओवैसी और बेनीवाल के बयानों से साफ है कि दोनों दल निकाय चुनाव के बाद भी राजनीतिक गठजोड़ को आगे बढ़ाने की संभावनाएं तलाश रहे हैं। राजस्थान की राजनीति लंबे समय से भाजपा और कांग्रेस के बीच दो ध्रुवों में बंटी रही है। ऐसे में AIMIM और RLP का यह गठबंधन तीसरे विकल्प के तौर पर खुद को स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि ओवैसी का मुस्लिम वोट बैंक और बेनीवाल का जाट और किसान राजनीति पर प्रभाव क्या राजस्थान में कोई नया राजनीतिक समीकरण बना पाएगा। ऐसे में निकाय चुनाव इस गठबंधन की पहली परीक्षा होगा। इसके बाद यह तय होगा कि जयपुर से शुरू हुई ओवैसी-बेनीवाल की यह नई सियासी दोस्ती विधानसभा चुनाव तक कितनी मजबूत रहती है और भाजपा-कांग्रेस की पारंपरिक राजनीति को कितनी चुनौती दे पाती है।
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ग्वालियर की महल रोड पर सड़क हादसा: सिंधिया छतरी के सामने रात में डिवाइडर में घुसी अनियंत्रित स्कॉर्पियो, कई राहगीर बाल-बाल बचे – Gwalior News
शहर के अति-व्यस्त क्षेत्र महल रोड पर रविवार रात को एक बड़ा सड़क हादसा टल गया। महाराज सिंधिया की छतरी के ठीक सामने एक अनियंत्रित स्कॉर्पियो गाड़ी सीधे सड़क के डिवाइडर पर जा चढ़ी और जोर का धमाका हुआ। गनीमत रही कि हादसे के समय सड़क पर चल रहे कई राहगीर वाहन की चपेट में आने से बच गए और बड़ा हादसा होने से टल गया। घटना के बाद आसपास के इलाके में हड़कंप मच गया और लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। स्कूटी को बचाने के चक्कर में हुआ हादसा, भिंड के निवासी की है कार सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने तुरंत मौके पर पहुंचकर स्कॉर्पियो गाड़ी को अपने कब्जे में लिया और जांच शुरू की। वाहन के रजिस्ट्रेशन नंबर के आधार पर पुलिस ने जब पड़ताल की, तो पता चला कि यह कार भिंड निवासी सोनी दीक्षित के नाम पर पंजीकृत है। पुलिस द्वारा संपर्क किए जाने पर कार मालिक सोनी दीक्षित ने बताया कि उनका एक रिश्तेदार कार मांगकर ग्वालियर लेकर गया था। कार में सवार युवक सुरक्षित, पुलिस कर रही पड़ताल कार में सवार युवक हादसे में पूरी तरह सुरक्षित है। प्राथमिक पूछताछ में चालक का कहना था कि अचानक सामने आई एक स्कूटी को बचाने के प्रयास में गाड़ी का संतुलन बिगड़ गया, जिसके चलते स्कॉर्पियो अनियंत्रित होकर सीधे डिवाइडर में जा घुसी। वहीं, मौके पर मौजूद प्रत्यक्षदर्शियों का आरोप है कि चालक नशे की हालत में था। फिलहाल पुलिस ने स्कॉर्पियो गाड़ी को जब्त कर लिया है और चालक की डॉक्टरी जांच (मेडिकल) कराने के साथ घटना के सही कारणों की पड़ताल में जुटी हुई है। पुलिस का कहना इस मामले में पुलिस का कहना है कि “महल रोड पर स्कॉर्पियो के डिवाइडर से टकराने की सूचना पर पुलिस टीम मौके पर पहुंची थी। कार को जब्त कर लिया गया है। चालक का कहना है कि स्कूटी सवार को बचाने के फेर में हादसा हुआ। मामले की विस्तृत जांच और वैधानिक कार्रवाई की जा रही है।”
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मिलावट की चिंता छोड़ें, घर पर बनाएं केसर मिल्क मलाई मिठाई, जानें आसान तरीका
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Raksha Bandhan Special Recipe: त्योहारों पर मिठाई के बिना खुशियां अधूरी लगती हैं, लेकिन बाजार की मिठाइयों में मिलावट की चिंता के चलते कई लोग घर पर ही मिठाई बनाना पसंद करते हैं. ऐसे में कोडरमा की कविता कुमारी ने दूध, छेना, चीनी और केसर से तैयार होने वाली केसर मिल्क मलाई मिठाई की आसान रेसिपी बताई है. यह मिठाई स्वाद में रसीली और मुलायम होने के साथ देखने में भी बेहद आकर्षक लगती है.
त्योहार के खास मौके पर मिठाई की मांग बढ़ जाती है. हालांकि बाजार की मिठाइयों में मिलावट की आशंका को देखते हुए कई लोग घर पर ही मिठाई बनाना पसंद करते हैं. ऐसे में कोडरमा की कविता कुमारी ने घर पर दूध, चीनी और केसर से स्वादिष्ट केसर मिल्क मलाई मिठाई बनाने की आसान विधि बताई है. यह मिठाई स्वाद में रसीली होने के साथ देखने में भी बेहद आकर्षक लगती है.
कविता कुमारी ने बताया कि सबसे पहले करीब एक लीटर दूध लें. इसमें से लगभग 900 ग्राम दूध को अच्छी तरह उबालें. इसके बाद इसमें थोड़ा थोड़ा विनेगर डालकर दूध को फाड़ लें. दूध फटने के बाद तैयार हुए छेने को अलग कर लें. छेने को ठंडे पानी से अच्छी तरह धो लें. ताकि विनेगर का खट्टापन निकल जाए. इसके बाद छेने को अच्छी तरह मैश कर लें. जिससे इसमें गांठें न रहें और यह मुलायम हो जाए.
अब एक बर्तन को धीमी आंच पर रखें. इसमें थोड़ा पानी डालकर उसके ऊपर करीब 100 ग्राम दूध डालें और गर्म करें. इसके बाद इसमें केसर के कुछ धागे डालें. दूध को उबालने पर उसका रंग धीरे धीरे केसरिया होने लगेगा. यही केसरिया रंग मिठाई को खूबसूरत और आकर्षक बनाएगा, जबकि केसर इसकी खुशबू और स्वाद को भी खास बना देगा.
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कविता ने बताया कि केसर वाला दूध तैयार होने के बाद इसमें पहले से मैश किया हुआ छेना डालें. दोनों को अच्छी तरह मिलाएं. अब अपनी पसंद के अनुसार करीब 2 से 3 चम्मच चीनी का बुरादा डालें. मिठास कम या ज्यादा रखने के लिए चीनी की मात्रा अपने स्वाद के अनुसार बदली जा सकती है. मिश्रण को धीमी आंच पर लगातार चलाते रहें. धीरे-धीरे दूध और छेना मिलकर गाढ़े पेस्ट का रूप लेने लगेगा. इस दौरान मिश्रण को लगातार चलाना जरूरी है. ताकि यह बर्तन की तली में चिपके नहीं.
उन्होंने बताया कि जब मिश्रण अच्छी तरह गाढ़ा होकर सख्त होने लगे. तो गैस बंद कर दें और इसे थोड़ा ठंडा होने दें. इसके बाद हाथों की मदद से मिश्रण के छोटे छोटे हिस्से लेकर लड्डू का आकार दें. तैयार मिठाइयों को एक प्लेट में सजा दें. अंत में मिठाई के ऊपर केसर के धागे रखें और केसर के पानी की हल्की सजावट करें. इससे मिठाई देखने में बेहद सुंदर और त्योहार के अनुरूप आकर्षक लगेगी.


