झालावाड़ जिले के खानपुर उपखण्ड क्षेत्र के छोटे से लोढ़ागुढ़ा गांव की बेटी मनीषा कंवर हाड़ा ने निशानेबाजी में राष्ट्रीय स्तर पर प्री-क्वालीफाई किया है। अब वह 13 से 27 जुलाई तक देहरादून में होने वाली प्री-नेशनल प्रतियोगिता में भाग लेंगी। वीरेंद्र सिंह हाड़ा की 16 वर्षीय बेटी मनीषा ने जयपुर में आयोजित 24वीं राजस्थान राज्य स्तरीय 10 मीटर एयर पिस्टल शूटिंग प्रतियोगिता में हिस्सा लिया था। उन्होंने न्यूनतम क्वालिफाई स्कोर 300 के मुकाबले 320 अंक बनाए। इसी प्रदर्शन के आधार पर उनका चयन राष्ट्रीय शूटिंग चैंपियनशिप के लिए हुआ है। नेशनल में भाग लेने वाली जिले की पहली बेटी
मनीषा झालावाड़ जिले की पहली बालिका हैं, जिनका चयन राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए हुआ है। वह पढ़ाई में भी होशियार हैं और उन्होंने हाल ही में 10वीं कक्षा पास की है। उन्हें अब तक 4 प्रमाण पत्र भी मिल चुके हैं। मनीषा इससे पहले दो बार राज्य स्तर की अजमेर और उदयपुर जिले में हुई प्रतियोगिताओं में भाग ले चुकी हैं, जहां उन्होंने बेहतर प्रदर्शन किया था। जिला स्तर पर वह भवानीमंडी और पचपहाड़ में आयोजित प्रतियोगिताओं में भी हिस्सा ले चुकी हैं। शूटिंग के क्षेत्र में बढ़ना चाहती है आगे
मनीषा का कहना है कि वह शूटिंग के क्षेत्र में ही आगे बढ़ना चाहती हैं। यह उनका शौक भी है, जिसके चलते वह कड़ी मेहनत कर रही हैं। उन्हें परिवार के अलावा अन्य लोगों का भी सहयोग मिल रहा है। बचपन का शौक बना आगे बढ़ने के लिए प्रेरणा
मनीषा के पिता ने बताया कि वह बचपन से ही शूटिंग के क्षेत्र में रुचि रखने के कारण परिवार में सभी ने सहयोग किया। उसके शौक को देखते हुए खानपुर के एक निजी स्कूल के उसके प्रिंसिपल देवेंद्र गुर्जर ने उसे स्कूल में ही प्रेक्टिस कराई। इसके बाद झालावाड़ में कोटा रोड पर आयोजित एक निजी कोचिंग में उसने प्रेक्टिस की। धीरे-धीरे वह आगे बढ़ती गई। वही कोटा के रंगबाड़ी क्षेत्र में शूटिंग रेंज की कोचिंग भी कराई।
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झालावाड़ की पहली बेटी लेगी नेशनल टूर्नामेंट में भाग: मनीषा कंवर देहरादून में होने वाली प्रतियोगिता में साधेगी निशाना – jhalawar News
‘दिमाग का दही करने वाली फिल्म..’! ‘वेलकम’ को कॉपी बताने वालों को सुनील शेट्टी का ज्ञान
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फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ को कुछ यूजर्स ने हॉलीवुड फिल्म की कॉपी बताया था तो कुछ ने बिना सिर पैर वाली फिल्म. इन सब बातों पर सुनील शेट्टी ने रिएक्ट किया है. पढ़िए सुनील शेट्टी का पूरा बयान.
वेलकम टू द जंगल के एक सीन में अक्षय कुमार और सुनील शेट्टी साथ साथ
मल्टीस्टारर कॉमेडी फिल्म ‘वेलकम टू द जंगल’ बॉक्स ऑफिस पर तूफानी कमाई कर रही है. अक्षय कुमार, सुनील शेट्टी, दिशा पाटनी, जैकलीन फर्नांडिस, अरशद वारसी से लेकर रवीना टंडन जैसे दो दर्जन से भी ज्यादा सितारे हैं. फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर बंपर ओपनिंग की और साथ ही कई तरह की बातों से घिर भी गई. कुछ ने फिल्म को कॉमेडी-पंच से भरपूर बताया तो कुछ लॉजिक ढूंढते रह गए और इसे दिमाग का दही करने वाली मूवी तक कह डाला. ‘वेलकम टू द जंगल’ को कुछ दर्शकों ने एक हॉलीवुड फिल्म की कॉपी-पेस्ट भी बताया. अब इसी मुद्दे पर फिल्म के एक्टर सुनील शेट्टी ने रिएक्ट किया है. साथ ही बताया कि वह पहले इस फिल्म का हिस्सा बनने से क्यों कतरा रहे थे.
अहमद खान के निर्देशन में बनी ‘वेलकम टू द जंगल’ में सुनील शेट्टी भी अहम हिस्सा हैं. जो अक्षय कुमार की टोली में नजर आए और स्क्रीन पर दर्शकों को खूब हंसाते हैं. एक इंटरव्यू में सुनील शेट्टी ने ‘वेलकम टू द जंगल’ की हॉलीवुड फिल्म ‘ट्रॉपिक थंडर’ से हो रही तुलना पर जवाब दिया.
‘वेलकम टू द जंगल’ क्या कॉपी है?
‘मिड-डे’ को दिए इंटरव्यू में सुनील शेट्री ने साल 2008 में आई हॉलीवुड फिल्म ‘ट्रॉपिक थंडर’ से होने वाली अपनी फिल्म की तुलना और कॉपी पेस्ट जैसे सवालों को दरकिनार किया. उन्होंने कहा, ‘तुलनाएं तो होती रहेंगी. लेकिन अंतर होता है हर फिल्म की राइटिंग, एक्टिंग, और डायरेक्शन का. एक निर्देशक की फिल्म बनाने की दूरदृष्टि का. हमें भरोसा है कि बहुत ज्यादा ओवर-द-टॉप और हल्की या बेकार मानी जाने वाली फिल्में भी चल सकती हैं’. यहां सुनील शेट्टी ने उन लोगों को मुंह तोड़ जवाब दिया जो उनकी फिल्म को बिना लॉजिक की फिल्म बताकर आलोचना कर रहे थे.
बता दें जब से अक्षय कुमार और सुनील शेट्टी की फिल्म रिलीज हुई है, इसकी तुलना हॉलीवुड फिल्म ट्रॉपिक थंडर से हो रही है. ये फिल्म साल 2008 में आई थी जिसमें एक फिल्म क्रू गलती से जंगल में वॉर जैसी स्थिति में फंस जाती है.
क्यों सुनील शेट्टी फिल्म करने से डर रहे थे?
सुनील शेट्टी ने इंटरव्यू में ये भी साफ किया कि वह पहले ‘वेलकम टू द जंगल’ का हिस्सा बनने से कतरा रहे थे. फिल्म में 30 से भी अधिक एक्टर हैं. ऐसे में सुनील शेट्टी को लग रहा था कि वह डर रहे थे कि एक डायरेक्टर कैसे इतने सारे सितारों के साथ न्याय कर पाएगा. मगर फिल्म से जुड़े लोगों पर उन्हें पूरा भरोसा था और उनका फैसला बदला. सुनील शेट्टी ने कहा:
मुझे ये बात पता थी कि स्क्रिप्ट बहुत ही नाटकीय है. मगर प्रोड्यूसर फिरोज ए नाडियाडवाला और डायरेक्टर अहमद खान के साथ मैं बहुत ही सहज महसूस करता हूं. उनपर पूरा भरोसा है और इसलिए मैंने फिल्म के लिए हां कह दी.
फिल्म के बारे में
बता दें वेलकम टू द जंगल ने बॉक्स ऑफिस पर 50 करोड़ की ग्रैंड ओपनिंग की. प्रोजेक्ट में कई जाने-माने सितारों के अलावा कृष्णा अभिषेक, दलेर मेहंदी, आफताब शिवदासानी, मुकेश तिवारी, कीकू शारदा, यशपाल शर्मा, उर्वशी रौतेला से लेकर बृजेंद्र काला जैसे कलाकार भी हैं.
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न्यूज 18 हिंदी में सीनियर सब एडिटर के तौर पर काम कर रहीं वर्षा का डिजिटल मीडिया में 8 सालों का अनुभव है। एंटरटेनमेंट रिपोर्टिंग, लेखन, फिल्म रिव्यू, इंटरव्यू और विश्लेषण इनकी विशेषज्ञता है। वर्षा ने जामिया मिल्…और पढ़ें
IIT पटना में 54% और खड़गपुर में 51% पद खाली, दिल्ली, बॉम्बे में भी हालत खराब
देश के आईआईटी संस्थानों में बड़े पैमाने पर पद खाली हैं और इन सभी पदों पर नए लोगों की भर्ती करने में भी समय लगेगा। आईआईटी काउंसिल के डेटा और सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार देश के 23 आईआईटी संस्थानों में कुल 12,498 फैकल्टी पद स्वीकृत हैं और इनमें से 4,804 पद खाली हैं। कुल 38 फीसदी पद खाली हैं। इसका मतलब है कि हर पांच में से दो पद खाली हैं। एक तरफ आईआईटी संस्थान अपने कैंपस का विस्तार कर रहे हैं। ज्यादा छात्रों को एडमिशन दे रहे हैं और नए कोर्स शुरू कर रहे हैं। वहीं, दूसरी तरफ इतने बड़े पैमाने पर पदों का खाली होना परेशानी बढ़ाने वाला है।
हिंदुस्तान टाइम्स में छपी रिपोर्ट के अनुसार धारवाड़ और पालक्कड़ में बने आईआईटी संस्थानों की स्थिति सबसे बेहतर है। धारवाड़ में केवल 1 फीसदी पद खाली हैं। वहीं, पालक्कड़ में यह आंकड़ा 5 फीसदी है।
किस आईआईटी में कितने पद खाली
आईआईटी पटना (54.6%)
आईआईटी खड़गपुर (51.3%)
आईआईटी कानपुर (39%)
आईआईटी बॉम्बे (38.4%)
आईआईटी दिल्ली (38.3%)
आईआईटी मंडी (39.9%)
आईआईटी धनबाद (48.4%)
आईआईटी गोवा (45.8%)
आईआईटी गुवाहाटी (42.2%)
रिसर्च पर पड़ रहा असर
देश के आईआईटी संस्थानों में छात्रों की कुल संख्या1.35 लाख से ज्यादा है, लेकिन फैकल्टी की कमी के कारण शिक्षण और रिसर्च दोनों पर असर पड़ रहा है। आईआईटी डायरेक्टर्स के अनुसार ग्लोबल मार्केट में टॉप पीएचडी होल्डर्स के बीच भारी प्रतिस्पर्धा है। विदेशी यूनिवर्सिटी, बड़ी कंपनियां, रिसर्च लैब्स और डीप-टेक स्टार्टअप्स में ऐसे लोगों को अच्छे पदों पर नौकरी मिल रही है। इस वजह से कई लोग आईआईटी की बजाय इन जगहों पर काम करना पसंद करते हैं। इसके अलावा आईआईटी में चयन का पैमाना भी बेहद सख्त है। बेहद सख्त चयन प्रक्रिया के कारण उपयुक्त उम्मीदवार मिलने तक पद खाली रखे जाते हैं। वहीं, एआई, सेमीकंडक्टर, क्वांटम टेक्नोलॉजी जैसे विषय नए हैं। इनमें योग्य शिक्षकों की कमी है।
भर्ती के लिए प्रयास कर रहे संस्थान
कई आईआईटी संस्थानों ने रोलिंग एडवरटाइजमेंट, स्पेशल रिक्रूटमेंट ड्राइव और मिशन मोड हायरिंग शुरू कर दी है। आईआईटी खड़गपुर ने अक्टूबर 2025 से 215 से ज्यादा फैकल्टी सिलेक्शन पूरे किए हैं। आईआईटी मद्रास ने 1,100 स्वीकृत पदों में से 411 खाली बताए हैं और विसिटिंग/एडजंक्ट फैकल्टी के सहारे काम चला रहा है। शिक्षा मंत्रालय के अनुसार वैकेंसी एक निरंतर प्रक्रिया है (रिटायरमेंट, इस्तीफा, प्रमोशन के कारण)। संस्थानों को साल भर भर्ती करने के निर्देश दिए गए हैं। हालांकि, संसद में पूछे गए सवाल के लिखित जवाब में संस्थानवार आंकड़े नहीं दिए गए थे।
रिजर्वेशन वाले कितने पद खाली?
9 आईआईटी ने जाति-आधारित वैकेंसी डेटा दिया। इनमें एससी, एसटी और ओबीसी पदों की कुल 1,501 वैकेंसी में से करीब 60% आरक्षित श्रेणियों के हैं। ओबीसी में सबसे ज्यादा (477) खाली पद हैं। फैकल्टी की कमी आईआईटी की विस्तार योजनाओं और रिसर्च आउटपुट पर असर डाल रही है। आईआईटी में 2028-29 तक 6,500 सीटें बढ़ाने का प्लान है। विशेषज्ञों का कहना है कि लंबे समय तक यह अच्छी शिक्षा और नवाचार को प्रभावित कर सकता है। इस पर आईआईटी खड़गपुर के डायरेक्टर प्रो. सुमन चक्रवर्ती ने कहा, “सवाल यह नहीं है कि भारत विश्व स्तरीय प्रतिभा आकर्षित कर सकता है या नहीं, बल्कि यह है कि हम प्रतिभा के लिए दुनिया का सबसे रोमांचक माहौल बना पाते हैं या नहीं।” वहीं, आईआईटी कानपुर के डायरेक्टर प्रो. मनींद्र अग्रवाल ने कहा कि यह नई समस्या नहीं है, लेकिन उच्च गुणवत्ता वाले पीएचडी उम्मीदवारों की कमी बनी हुई है।। आईआईटी लगातार भर्ती के प्रयास तेज कर रहे हैं, लेकिन सख्त मानकों को बनाए रखते हुए पूर्ण भर्ती में समय लगेगा।
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दो पक्षों में विवाद के बाद चली गोली: एक युवक हुआ हुआ घायल, आक्रोशित लोग धरने पर बैठे – Lucknow News
लखनऊ के गोमती नगर थाना क्षेत्र में मनीष ईटिंग प्वाइंट के पास गोली चल गई। जिसमें एक युवक अखिलेश की कमर में गोली लगी है। जो गंभीर रूप से घायल हो गया। जिसे इलाज के लिए अस्पताल पहुंचाया गया है। बताया जा रहा है पहले चाकू बाजी की घटना हुई। जिसके पीड़ित पक्ष थाने पहुंचा। इस दौरान बदमाश वापस लौटे और फायरिंग कर दी। मौके पर पुलिस बल मौजूद है। वहीं आक्रोशित लड़कों ने सड़क जाम कर दिया।
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शादी वाले घर पर हमला, एक महिला की मौत: जमुई में नकाबपोश बदमाशों ने लूटे जेवरात, 6 घायल – Jamui News
जमुई जिले के झाझा थाना क्षेत्र के दादपुर गांव में रविवार रात शादी की तैयारियों के बीच एक घर पर नकाबपोश बदमाशों ने हमला कर दिया। इस घटना में एक महिला बेबी देवी (35) की इलाज के दौरान मौत हो गई, जबकि छह अन्य लोग घायल हो गए। बदमाशों ने घर में घुसकर परिवार के सदस्यों के साथ मारपीट की, फायरिंग की और शादी के लिए रखे जेवरात लूटकर फरार हो गए। घटना की सूचना मिलते ही डायल-112 पुलिस मौके पर पहुंची और सभी घायलों को झाझा अस्पताल पहुंचाया। प्राथमिक उपचार के बाद गंभीर रूप से घायल बेबी देवी, सुहागा देवी, काजल कुमारी, कोमल कुमारी और सुबोध कुमार को सदर अस्पताल, जमुई रेफर किया गया। वहां से सभी घायलों को बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर किया गया, लेकिन बेबी देवी की नाजुक स्थिति के कारण रास्ते में ही उनकी मौत हो गई। बदमाश तलवार, टांगी और अन्य हथियारों के साथ घर में घुस आए घायल उमेश कुमार यादव ने बताया कि परिवार के सदस्य छत पर सो रहे थे। इसी दौरान दिनेश यादव के बड़े भाई वासुदेव यादव ने घर का दरवाजा खोल दिया। इसके बाद लगभग एक दर्जन नकाबपोश बदमाश तलवार, टांगी और अन्य हथियारों के साथ घर में घुस आए और हमला कर दिया। सभी बदमाश काले कपड़े पहने हुए थे और उन्होंने अपनी बाइकें घर से करीब 200 मीटर दूर खड़ी कर रखी थीं। घायल काजल कुमारी ने आरोप लगाया कि मारपीट के दौरान बदमाशों ने दो से तीन राउंड फायरिंग भी की। एक गोली उसकी मां सुहागा देवी के पैर में लगी। बदमाशों ने घर से मोबाइल फोन छीन लिए और बक्से में रखे शादी के जेवरात भी लूट लिए। गोली चलने और चीख-पुकार सुनकर ग्रामीण और रिश्तेदार मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक सभी बदमाश बाइक से फरार हो चुके थे। जमीन बंटवारे के विवाद को लेकर करवाया हमला – बड़ा भाई पीड़ित परिवार के दिनेश यादव ने बताया कि उनकी बेटी काजल कुमारी की शादी 1 जुलाई को होनी थी, जिसके लिए वे खरीदारी करने झाझा बाजार गए थे। उन्होंने आरोप लगाया कि यह हमला उनके बड़े भाई वासुदेव यादव ने जमीन बंटवारे के विवाद को लेकर करवाया है। दिनेश यादव, वासुदेव यादव और उमेश यादव तीनों सगे भाई हैं। परिजनों ने बताया है कि वासुदेव यादव, सुभाष यादव और मनोज यादव समेत अन्य कई लोगों को पहचान लिया है। परिजनों के अनुसार वासुदेव यादव वर्तमान में योगियाटीला गांव में रहता है और इस घटना को अंजाम देने के लिए वह पांच दिनों से दादपुर में रहा रहा था। जमीनी विवाद को लेकर बासुदेव यादव अपने रिश्तेदारों और बदमाशों के साथ मिलकर इस घटना को अंजाम दिया। घटना की सूचना पर झाझा थाना पुलिस मौके पर पहुंची। एसआई दीपक कुमार ने अस्पताल पहुंचकर घायलों और परिजनों से पूछताछ की। पुलिस ने बताया कि घटनास्थल का निरीक्षण कर लिया गया है। आरोपियों की गिरफ्तारी के लिए छापेमारी की जा रही है तथा पूरे मामले की जांच जारी है।
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केंद्रीय मंत्री सिंधिया के दौर से गायब रहे गुना विधायक: दिशा बैठक से भी रहे नदारद; ऊर्जा मंत्री को कहा था ‘नकारा’ – Guna News
केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया के 26 से 29 जून तक गुना दौरे के दौरान भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य किसी भी प्रमुख कार्यक्रम में नजर नहीं आए। उन्होंने केवल सर्किट हाउस पहुंचकर सिंधिया की आगवानी की, लेकिन इसके बाद आयोजित किसी भी कार्यक्रम में शामिल नहीं हुए। यहां तक कि कलेक्ट्रेट में सिंधिया की अध्यक्षता में हुई दिशा समिति की समीक्षा बैठक में भी उनकी अनुपस्थिति चर्चा का विषय बनी रही। विधायक की यह दूरी हाल ही में सिंधिया समर्थक मंत्रियों पर दिए गए उनके विवादित बयानों के बाद राजनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है। मंत्रियों पर दिए थे तीखे बयान कुछ दिन पहले विधायक पन्नालाल शाक्य ने सिंधिया समर्थक दो मंत्रियों पर सार्वजनिक रूप से तीखी टिप्पणी की थी। ऊर्जा मंत्री प्रद्युम्न सिंह तोमर को लेकर उन्होंने कहा था कि क्षेत्र को बदनामी से बचाने की जरूरत है। उन्होंने मंत्री के कामकाज और सार्वजनिक व्यवहार पर सवाल उठाते हुए कहा था कि प्रदेश को ऐसा जनसेवक चाहिए, जो गंभीरता और प्रामाणिकता से काम करे। उन्होंने यह भी कहा था कि यदि कोई मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव की छवि खराब करने की कोशिश करेगा तो वह मुख्यमंत्री से ऐसे मंत्री को हटाने का आग्रह करेंगे। प्रभारी मंत्री पर भी साधा था निशाना विधायक ने प्रदेश के खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री तथा गुना जिले के प्रभारी मंत्री गोविंद सिंह राजपूत पर भी निशाना साधा था। उन्होंने आरोप लगाया था कि प्रभारी मंत्री उन्हें केंद्रीय मंत्री सिंधिया के साथ चलने तक नहीं देते। उन्होंने एक घटना का जिक्र करते हुए कहा था कि हवाई पट्टी पर उन्हें किनारे कर दिया गया था। साथ ही उन्होंने कहा कि वे जनता के वोट से विधायक बने हैं और किसी व्यक्ति की वजह से राजनीति में नहीं हैं। सिंधिया के कार्यक्रमों से बनाए रखी दूरी केंद्रीय मंत्री सिंधिया के गुना प्रवास के दौरान शहर और आसपास कई सरकारी एवं संगठनात्मक कार्यक्रम आयोजित हुए, लेकिन विधायक पन्नालाल शाक्य इनमें कहीं भी दिखाई नहीं दिए। उनकी लगातार अनुपस्थिति को राजनीतिक हलकों में सिंधिया और उनके समर्थक नेताओं के प्रति नाराजगी के संकेत के रूप में देखा जा रहा है। दिशा समिति की बैठक से भी रहे गायब सबसे अधिक चर्चा कलेक्ट्रेट में आयोजित दिशा समिति की समीक्षा बैठक को लेकर हुई। केंद्रीय मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया की अध्यक्षता में हुई इस महत्वपूर्ण बैठक में गुना के भाजपा विधायक पन्नालाल शाक्य शामिल नहीं हुए। वहीं बमोरी से कांग्रेस विधायक ऋषि अग्रवाल बैठक में मौजूद रहे। सत्ताधारी दल के विधायक की अनुपस्थिति और विपक्षी विधायक की मौजूदगी पूरे दिन राजनीतिक चर्चा का विषय बनी रही। अनुपस्थिति पर दिए अलग-अलग जवाब जब मीडिया ने विधायक पन्नालाल शाक्य से कार्यक्रमों में शामिल नहीं होने का कारण पूछा तो उन्होंने कहा कि वे पार्टी के काम से भोपाल में हैं, इसलिए कार्यक्रमों में नहीं पहुंच सके। वहीं एक अन्य मीडियाकर्मी से उन्होंने अपने साले के निधन और बड़ी साली की तबीयत खराब होने का कारण बताया। सोशल मीडिया पोस्ट से उठे सवाल विधायक के इन बयानों के बीच उनके आधिकारिक फेसबुक पेज पर उसी दिन उनके गुना स्थित कार्यालय में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘मन की बात’ कार्यक्रम को सुनते हुए तस्वीरें पोस्ट की गईं। इससे उनके भोपाल में होने के दावे पर सवाल उठने लगे। जब इस विरोधाभास को लेकर दोबारा सवाल किया गया तो उन्होंने सीधे जवाब देने के बजाय इतना ही कहा कि उनकी न किसी से दोस्ती है और न किसी से दुश्मनी, वे सबके चहेते हैं। पहले भी संगठन ने किया था तलब मंत्रियों के खिलाफ दिए गए उनके विवादित बयान सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद भाजपा संगठन ने मामले को गंभीरता से लिया था। पार्टी नेतृत्व के निर्देश पर विधायक को भोपाल बुलाया गया था, जहां उन्होंने वरिष्ठ नेताओं और संगठन के पदाधिकारियों के सामने अपना पक्ष रखा था। सफाई के बाद भी खत्म नहीं हुई चर्चा भोपाल में संगठन से मुलाकात के बाद विधायक ने डैमेज कंट्रोल करते हुए कहा था कि भाजपा एक परिवार है और संगठन उनके लिए सर्वोपरि है। उन्होंने यह भी कहा था कि पार्टी में किसी तरह का मतभेद नहीं है। हालांकि, इसके बाद केंद्रीय मंत्री सिंधिया के पूरे दौरे से उनकी दूरी ने एक बार फिर गुना भाजपा में अंदरूनी खींचतान और असंतोष की चर्चाओं को हवा दे दी है।
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‘मिर्जापुर’ साइन करने से पहले क्यों डरे हुए थे अली फजल? मेकर्स से मिली थी वॉर्निंग
नई दिल्ली. बॉलीवुड एक्टर अली फजल एक बार फिर गुड्डू पंडित के किरदार में धमाल मचाने के लिए तैयार हैं. उनकी ‘मिर्जापुर: द मूवी’ बड़े पर्दे पर दस्तक देगी, जिसका हाल ही में दमदार टीजर लॉन्च हुआ. वैसे यह एक पॉपुलर सीरीज है, जिस पर अब फिल्म बनकर तैयार हुई है. इस बीच अली फजल ने बताया कि वह ‘मिर्जापुर’ सीरीज को हां कहते वक्त काफी डरे हुए थे, क्योंकि उस वक्त भारत में वेब सीरीज का फॉर्मेट नया था और अपने पैर पसार ही रहा था.
सीरीज को फिल्म में बदलना बड़ा एक्सपेरिमेंट
न्यूज एजेंसी पीटीआई को दिए इंटरव्यू में अली फजल ने इस बड़े प्रोजेक्ट को लेकर अपनी एक्साइटमेंट शेयर की. उन्होंने कहा, ‘भारत में ऐसा पहली बार हो रहा है जब किसी सुपरहिट वेब सीरीज को फिल्म में बदला जा रहा है. यह नेशनल लेवल का एक बड़ा एक्सपेरिमेंट है जो हम करने जा रहे हैं. इसकी कहानी और किरदार सब कमाल के हैं. हम इस फिल्म की हर एक झलक दर्शकों के साथ शेयर करने के लिए बेहद एक्साइटेड हैं.’
अली फजल को कैसे मिली ‘मिर्जापुर’ सीरीज?
अली फजल ने एक दिलचस्प किस्सा शेयर करते हुए बताया कि उन्हें हाल ही में पता चला कि एक्सेल एंटरटेनमेंट के इस शो के लिए ‘फुकरे’ के डायरेक्टर मृगदीप सिंह लांबा ने मेकर्स को उनका नाम सुझाया था. उस वक्त अली हिंदी सिनेमा में पैर जमाने की कोशिश कर रहे थे और कुछ इंटरनेशनल प्रोजेक्ट्स भी कर चुके थे. लेकिन जब उन्हें ‘मिर्जापुर’ ऑफर हुई, तो कई लोगों ने उन्हें यह शो न करने की सलाह दी थी.
‘मिर्जापुर’ को हां करते वक्त डरे हुए थे अली फजल
उन्होंने याद करते हुए बताया, ‘उस वक्त मैं सच में काफी डरा हुआ था. मुझे समझ नहीं आ रहा था कि इस नए फॉर्मेट का भविष्य क्या होगा, क्योंकि भारत में तब वेब सीरीज का दौर बस शुरू ही हो रहा था. यहां तक कि कई मेकर्स ने मुझसे कहा था कि मैं यह क्या कर रहा हूं? फिल्मों पर ध्यान दो, शोज क्यों कर रहे हो?’ हालांकि, हॉलीवुड में काम करने के अनुभव की वजह से अली को यह अहसास हो गया था कि एंटरटेनमेंट की दुनिया में एक बड़ा बदलाव आने वाला है. इसी समझ और भरोसे के साथ उन्होंने यह रिस्क लिया.
अली फजल ने भांप लिया था ओटीटी का बदलता दौर
अली फजल ने कहा, ‘मैंने ओटीटी और शोज के बदलते इस नए दौर को भांप लिया था. मुझे लग रहा था कि एक बड़ी क्रांति आने वाली है. पुनीत कृष्णा ने जिस तरह से इसकी स्क्रिप्ट लिखी थी और मिर्जापुर की जो दुनिया खड़ी की थी, वो वाकई काबिले-तारीफ थी. हमने यूपी के उन इलाकों की कहानियां तो सुनी थीं, लेकिन उस जगह को इस नजरिए से कभी नहीं देखा था. आज जब अली पीछे मुड़कर देखते हैं, तो उन्हें लगता है कि इस शो ने उन्हें दर्शकों को सरप्राइज करने का एक बेहतरीन मौका दिया. उन्होंने मुस्कुराते हुए कहा, ‘शुरुआत में कोई भी मुझे गुड्डू पंडित के उस खूंखार किरदार में इमेजिन नहीं कर सकता था. सच में, यहां तक का सफर बेहद शानदार रहा है.
2018 में रिलीज हुआ था ‘मिर्जापुर’ का पहला सीजन
बताते चलें कि साल 2018 में शुरू हुई ‘मिर्जापुर’ देश के सबसे पॉपुलर शोज में से एक बन चुकी है. उत्तर प्रदेश के बैकड्रॉप पर बनी इस सीरीज में क्राइम, पॉलिटिक्स, बदले और पावर की जंग को जिस बेबाकी से दिखाया गया, उसने दर्शकों को दीवाना बना दिया. इसके बाद दोनों सीजन्स को भी फैंस का भरपूर प्यार मिला. इस सीरीज में अली फजल के साथ पंकज त्रिपाठी, दिव्येंदु, श्वेता त्रिपाठी, रसिका दुगल, विजय वर्मा, ईशा तलवार, हर्षिता गौर और श्रिया पिलगांवकर जैसे सितारों ने काम किया है.
अब सेशेल्स में भी UPI से पेमेंट होगा: भारत के साथ 19 बड़े समझौतों पर मुहर, 1250 करोड़ का लोन भी मिलेगा
विक्टोरिया1 घंटे पहले
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भारत और सेशेल्स ने रविवार को 19 बड़े समझौतों और विकास परियोजनाओं का ऐलान किया। प्रधानमंत्री मोदी और सेशेल्स के राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी की मौजूदगी में हुए इन फैसलों से रक्षा, डिजिटल भुगतान, स्वास्थ्य, शिक्षा, अंतरिक्ष और समुद्री सुरक्षा जैसे कई क्षेत्रों में सहयोग मजबूत होगा।
सबसे बड़ी घोषणा यह रही कि अब सेशेल्स में भी भारत की UPI आधारित डिजिटल भुगतान व्यवस्था शुरू होगी। भारत ने अब तक 23 से अधिक देशों के साथ UPI को लेकर समझौते किए हैं। फिलहाल 9 देशों में UPI से भुगतान की सुविधा उपलब्ध है।
इसके अलावा भारत, सेशेल्स को 1,250 करोड़ रुपए की लाइन ऑफ क्रेडिट (लोन) देगा, जिससे वहां की विकास परियोजनाओं को पूरा किया जाएगा। दोनों देशों ने प्रत्यर्पण संधि, नए राष्ट्रीय अस्पताल की तैयारी और अंतरिक्ष के शांतिपूर्ण उपयोग जैसे अहम समझौतों पर भी हस्ताक्षर किए।
भारत ने सेशेल्स को एक फास्ट पेट्रोल वेसल, 10 यूटिलिटी वाहन, 5 नौकाएं, 6 एम्बुलेंस, 500 मीट्रिक टन चावल और 8,500 मीट्रिक टन सीमेंट भी सौंपा। इसके साथ ही साइबर सुरक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, कृषि, शिक्षा और स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने पर भी सहमति बनी। ये घोषणाएं ऐसे समय हुई हैं, जब दोनों देश राजनयिक संबंधों के 50 साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं।
PM मोदी के सेशेल्स दौरे से जुड़ी 3 तस्वीरें…

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को सेशेल्स की नेशनल असेंबली के विशेष सत्र को संबोधित किया। वह ऐसा करने वाले पहले भारतीय प्रधानमंत्री बने। इससे पहले भारत की तत्कालीन राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल ने ऐसा किया था।

पीएम मोदी को राष्ट्रपति पैट्रिक ने सेशेल्स का सर्वोच्च नागरिक सम्मान दिया।

PM मोदी ने मॉरीशस के प्रधानमंत्री नवीनचंद्र रामगुलाम से मुलाकात की। वे भी सेशेल्स के 50वें स्वतंत्रता दिवस समारोह में शामिल होने पहुंचे थे।
मोदी गोल्डन जुबली नेशनल डे में चीफ गेस्ट
प्रधानमंत्री मोदी को रविवार को सेशेल्स के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘गार्जियन ऑफ ब्लू होराइजन’ से सम्मानित किया गया। उन्हें अब तक 34 देशों का सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिल चुका है।
मोदी आज सेशल्स की आजादी के 50 साल पूरे होने पर मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। इस मौके पर भारतीय सशस्त्र बलों की एक टुकड़ी और भारतीय नौसेना का युद्धपोत INS तरकश और हाइड्रोग्राफिक सर्वे शिप INS इक्षक भी परेड और समारोह का हिस्सा बनेंगे। इस दौरान भारतीय नौसेना की मार्चिंग टुकड़ी और नेवल बैंड भी परेड में शामिल होंगे।
PM मोदी के सेशेल्स दौरे की 4 खास बातें
1. गोल्डन जुबली नेशनल डे में मुख्य अतिथि
PM मोदी 29 जून को सेशल्स की आजादी के 50 साल पूरे होने पर मुख्य अतिथि के तौर पर शामिल होंगे। इस मौके पर भारतीय सशस्त्र बलों की एक टुकड़ी और भारतीय नौसेना का युद्धपोत INS तरकश और हाइड्रोग्राफिक सर्वे शिप INS इक्षक भी परेड और समारोह का हिस्सा बनेंगे।
2. 175 मिलियन डॉलर का आर्थिक पैकेज
भारत ने सेशल्स के विकास और बुनियादी ढांचे को मजबूत करने के लिए 175 मिलियन अमेरिकी डॉलर (1651 करोड़) के आर्थिक पैकेज की घोषणा की है। इसके अलावा भारत ने सेशेल्स को भारत में बना फास्ट पेट्रोल वेसल (FPV) ‘पीएस लेस्पवार’ गिफ्ट किया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भारत में निर्मित फास्ट पेट्रोल वेसल PS लेस्पवार सेशेल्स के राष्ट्रपति डॉ. पैट्रिक हर्मिनी को गिफ्ट किया। यह सेशेल्स की समुद्री निगरानी क्षमता को मजबूत करेगा।
3. नए समझौतों पर हस्ताक्षर
भारत और सेशेल्स ने 19 अहम समझौतों और घोषणाओं का ऐलान किया। इसमें प्रत्यर्पण संधि, यूपीआई आधारित डिजिटल भुगतान शुरू करने, डिजिटल भुगतान आदि शामिल थे।
4. मोदी ने कोको डी मेर पौधा लगाया
कोको डी मेर का पौधा और इसका फल सिर्फ सेशल्स में ही प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। इसके फल के अंदर मिलने वाला बीज दुनिया का सबसे बड़ा और सबसे भारी बीज माना जाता है। एक अकेले बीज का वजन 15 से 30 किलोग्राम तक हो सकता है।
कोको डी मेर के नर और मादा पेड़ अलग-अलग होते हैं। मादा फल महिला के कूल्हे जैसा दिखाई देता है। इसे ‘डबल कोकोनट’ भी कहा जाता है। वहीं, नर फूल पुरुष के जननांग जैसा दिखता है। इस अनूठी बनावट के कारण सदियों से इस पौधे को लेकर कई तरह की लोककथाएं और पौराणिक कहानियां प्रचलित हैं।
इस पेड़ को वयस्क होने और फल देने में 20 से 40 साल का समय लगता है। एक फल को पूरी तरह पककर तैयार होने में 6 से 7 साल लग जाते हैं। यह पेड़ बेहद लंबी उम्र जीता है; माना जाता है कि ये 200 से 350 साल तक जीवित रह सकते हैं।
प्राचीन काल में, जब यह फल समुद्र में तैरता हुआ मालदीव या भारत के तटों पर पहुंच जाता था, तो लोग सोचते थे कि यह समुद्र के तल में उगने वाले किसी जादुई पेड़ का फल है। इसी वजह से फ्रांसीसी भाषा में इसका नाम ‘कोको डी मेर’ पड़ा, जिसका अर्थ होता है समुद्र का नारियल।

मोदी सेशेल्स जाने वाले सिर्फ दूसरे प्रधानमंत्री
पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी साल 1976 में सेशेल्स गई थीं। उसी साल सेशेल्स आजाद हुआ था। भारत ने सेशेल्स के स्वतंत्रता समारोह में नौसेना का युद्धपोत आईएनएस नीलगिरि भी भेजा था। इसके बाद इंदिरा गांधी ने 1981 में फिर सेशेल्स का दौरा किया था। उनकी यात्रा के बाद, लगभग 34 साल तक किसी भी भारतीय प्रधानमंत्री ने सेशेल्स की यात्रा नहीं की थी।


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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को रविवार को सेशेल्स के सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘गार्जियन ऑफ ब्लू होराइजन’ से सम्मानित किया गया। इसके साथ ही मोदी को अब तक 34 देशों का सर्वोच्च नागरिक सम्मान मिल चुका है। सम्मान मिलने पर PM मोदी ने सेशेल्स की जनता, सरकार और राष्ट्रपति पैट्रिक हर्मिनी का आभार जताया। पूरी खबर यहां पढ़ें…

सिया के इशारे पर चेतन ने केतन को धक्का दिया: पुलिस का दावा- केतन गिरते वक्त सिया को पकड़ न पाए, इसलिए बहाने से बैठ गई
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पुणे11 मिनट पहले
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18 जून को लोहगढ़ किले से केतन अग्रवाल की धक्का दिया गया था।
पुणे के केतन अग्रवाल मर्डर केस में पुलिस ने कई खुलासे किए है। पुलिस के मुताबिक, 18 जून को लोहगढ़ किले पर सिया गोयल ने पानी पीने या जूते का फीता बांधने के बहाने बैठकर चेतन चौधरी को इशारा दिया। इसके बाद पीछे चल रहे चेतन ने केतन को खाई में धक्का दे दिया।
पुलिस का कहना है कि चेतन गिरते वक्त सिया को पकड़ न सके, इसलिए वह बैठ गई थी। सिया और चेतन ने घटना से एक दिन पहले पुणे के लुल्लानगर में एक कैफे में मर्डर प्लान किया था।
दोनों वारदात से पहले लोहगढ़ किले पर आए थे। यहां उन्होंने हत्या के लिए जगह चुनी और रिहर्सल भी की। पुलिस अब उस उस जगह का पता लगा रही है, जहां दोनों ने रिहर्सल किया था।
चेतन टोल से बचने के लिए स्कूटर से 90km पहुंचा
पुलिस के मुताबिक, चेतन पुणे से करीब 90 किलोमीटर दूर लोहगढ़ किले तक स्कूटर से पहुंचा था। उसने कार का इस्तेमाल नहीं किया ताकि टोल प्लाजा पर कार का रिकॉर्ड न बने। पुलिस ने वह स्कूटर जब्त कर लिया है।
चेतन हूडी पहनकर किले पर चढ़ा था। वहां पहुंचने के बाद उसने हूडी उतार दी और काली टी-शर्ट में रहा। मर्डर के बाद लौटते समय उसने फिर हूडी पहन ली। घटना के बाद वह उसी स्कूटर से पुणे लौट गया।

पुलिस रविवार को सिया और चेतन को लोहगढ़ किले लेकर पहुंची। केतन का डमी बनाकर पूरे घटनाक्रम को दोहराया गया।
सिया के वकील बोले- पुलिस हिरासत में दिया बयान सबूत नहीं
सिया गोयल के वकील आशुतोष श्रीवास्तव ने कहा कि पुलिस हिरासत में आरोपी का दिया बयान अदालत में सबूत नहीं माना जाता। उन्होंने कहा कि कोर्ट में यह सवाल उठाएंगे कि पहले इस मामले को हादसा क्यों माना गया और बाद में हत्या का केस कैसे बना।
उनका कहना है कि पुलिस सिया से पूछताछ के लिए काफी समय ले चुकी है। अब उसे और पुलिस रिमांड में रखने की जरूरत नहीं है।
पुणे मर्डर केस जुड़े अपडेट
- सिया गोयल और चेतन चौधरी ने गूगल पर लोहगढ़ किले के डेथ पॉइंट सर्च किए थे। वहां तक पहुंचने का रास्ता और खाइयों की भी जानकारी जुटाई थी। दोनों ने गूगल पर ‘डेथ पॉइंट और जहर देकर कैसे मारें, ताकि पुलिस को शक न हो’ जैसे सवाल सर्च किए।
- पुलिस ने शनिवार को सिया गोयल के माता-पिता से 12 घंटे पूछताछ की। इससे पहले गुरुवार को सिया के भाई से 10 घंटे तक पूछताछ की थी।
18 जून को कब-क्या हुआ…

हत्या से 6 दिन के अंदर आरोपी अरेस्ट
18 जून को केतन की हत्या से छह दिन के अंदर पुलिस ने आरोपी सिया और चेतन को अरेस्ट कर लिया। जांच के दौरान दोनों आरोपी एक-दूसरे को मास्टरमाइंड बता रहे हैं। पुलिस दोनों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ भी कर चुकी है।

सिया के प्रेमी संग 2 पुराने वीडियो; कैफे गई, मैच देखा
सिया के प्रेमी चेतन के साथ के दो पुराने वीडियो अब सामने आए हैं। एक वीडियो में दोनों महाराष्ट्र क्रिकेट लीग का मैच देखते नजर आ रहे हैं। हालांकि, यह वीडियो कब का है, इसकी आधिकारिक जानकारी अभी सामने नहीं आई है।
वहीं दूसरा वीडियो पुणे के कैफे का है जो कि हत्या के एक दिन पहले यानी 17 जून का बताया जा रहा है। दावा है कि दोनों ने कैफै में बैठकर केतन के मर्डर की प्लानिंग की थी।

सिया और चेतन का वीडियो सामने आया है, जिसमें दोनों महाराष्ट्र क्रिकेट लीग का मैच देखते नजर आ रहे हैं।

केतन की मौत से एक दिन पहले 17 जून को सिया और चेतन पुणे के कोंढवा इलाके में स्थित एक कैफे गए थे।
31 मई को मारने का आइडिया आया, 18 जून को मर्डर

31 मई को आइडिया आया, 18 जून को मर्डर
31 मई: सिया को केतन की हत्या का प्लान सूझा
11 फरवरी को सगाई के बाद केतन, सिया को घर लेकर आता था, साथ घुमाने ले जाता था। उसे ट्रैकिंग यानी पहाड़ी चढ़ने का शौक था। उसने सिया से ट्रैकिंग के लिए लोहगढ़ किले चलने को कहा। यहीं सिया को केतन की हत्या की प्लान सूझा।
5 जून: किले पर जाने की जिद की, केतन नहीं गया
सिया ने 4 जून को केतन से दोबारा लोहगढ़ किला जाने की जिद की। केतन नहीं माना। 6 जून को केतन, उनकी बहन, एक दोस्त और सिया के इंडोनेशिया के बाली जाने के टिकट बुक थे। पुणे पुलिस के मुताबिक बाली न जाना पड़े, इसलिए सिया ने केतन का पासपोर्ट छिपा लिया।
14 जून: दूसरी कोशिश, धक्का दिया, लेकिन केतन बच गया
सिया ने केतन से दोबारा किले पर चलने को कहा। पुलिस के मुताबिक 14 जून को दोनों किले पहुंचे। सिया ने केतन को धक्का दिया। लेकिन पेड़ का सहारा मिलने से केतन बच गया। उसने पूछा- धक्का क्यों दिया? सिया ने कहा, ‘एक सांप था, तुम्हें उससे बचाने के लिए धक्का दिया।’ केतन ने घर आकर सबको बताया कि सिया की वजह से उसकी जान बच गई।
18 जून: तीसरी कोशिश में बॉयफ्रेंड के साथ मिलकर धक्का दिया
19 जून को सिया का जन्मदिन मनाने के लिए केतन ने महाबलेश्वर में एक लग्जरी रिजॉर्ट बुक किया था। सिया ने उससे पहले केतन को प्री-वेडिंग फोटोशूट की बात कहकर लोहगढ़ किले पर जाने के लिए मना लिया। इस बार पीछे-पीछे चेतन भी था। एक जगह जब केतन पहाड़ियों की तरफ देख रहा था, तभी दोनों ने उसे पीछे से धक्का दे दिया।

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सिया के सामने केतन मर्डर का सीन रीक्रिएट किया गया: पुलिस लोहगढ़ किला ले गई, दीवार से डमी गिराकर देखा

पुणे मर्डर केस में पुलिस ने रविवार को केतन को लोहगढ़ किले से गिराने का सीन रीक्रिएट किया। रिपोर्ट्स के मुताबिक इसके लिए पुलिस सुबह 6.30 बजे आरोपी सिया गोयल को लोहगढ़ किले लेकर पहुंची। टीम करीब 2.30 घंटे किले पर रही। पूरी खबर पढ़ें…


