डीडवाना में वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की जयंती ‘शौर्य दिवस’ के रूप में मनाई गई। इस अवसर पर क्षत्रिय समाज सहित सर्वसमाज द्वारा विशाल वाहन रैली का आयोजन किया गया, जिससे पूरा शहर भगवामय हो गया। रैली का शुभारंभ रहमान गेट स्थित तिरंगा सर्कल से हुआ। यहां महाराणा प्रताप की आदमकद प्रतिमा वाली एक विशेष झांकी को रथ पर सजाया गया था। विधि-विधान से पूजा-अर्चना और जयकारों के साथ रैली को रवाना किया गया। रैली में सैकड़ों की संख्या में दोपहिया और चारपहिया वाहन शामिल थे। हाथों में भगवा ध्वज लिए युवा “महाराणा प्रताप अमर रहें” और “जय राजपूताना” के नारे लगा रहे थे, जिससे पूरे शहर में उत्साह का माहौल बन गया। वाहन रैली तिरंगा सर्कल से शुरू होकर चुंगी चौकी, अशोक स्तंभ, बस स्टैंड और हॉस्पिटल चौराहा सहित शहर के प्रमुख मार्गों से गुजरी। मार्ग में विभिन्न सामाजिक संगठनों और शहरवासियों ने पुष्प वर्षा कर रैली का स्वागत किया। भीषण गर्मी को देखते हुए जगह-जगह शीतल जल और शरबत की व्यवस्था भी की गई थी। रैली के दौरान सुरक्षा और यातायात व्यवस्था के पुख्ता इंतजाम किए गए थे। पुलिस प्रशासन और आयोजकों ने अनुशासन बनाए रखने पर विशेष ध्यान दिया। रैली का समापन राजपूत सभा भवन में आयोजित एक गोष्ठी के साथ हुआ। इस दौरान वक्ताओं ने महाराणा प्रताप के शौर्य, स्वाभिमान, संघर्ष और राष्ट्रभक्ति पर प्रकाश डालते हुए युवाओं को उनके आदर्शों पर चलने का संदेश दिया। अंत में उपस्थित लोगों ने महाराणा प्रताप के चित्र पर पुष्प अर्पित कर उन्हें श्रद्धांजलि दी।
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डीडवाना में महाराणा प्रताप जयंती पर वाहन रैली निकाली: जगह-जगह पुष्प वर्षा कर किया स्वागत, सर्वसमाज ने मनाया ‘शौर्य दिवस’ – Didwana-Kuchaman News
हाईवे के साइन बोर्ड हरे रंग के क्यों? 5 कारण जिनको जानकर हैरान रह जाएंगे आप
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जब भी हम किसी नेशनल हाईवे या एक्सप्रेसवे पर सफर करते हैं तो रास्ते में लगे हरे रंग के साइनबोर्ड आसानी से नजर आते हैं. इन बोर्डों पर शहरों के नाम, दूरी और रास्तों की जानकारी लिखी होती है. लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि आखिर इन साइनबोर्ड का रंग हरा ही क्यों रखा जाता है? इसके पीछे ट्रैफिक साइंस, सुरक्षा और मानव मनोविज्ञान से जुड़े कई अहम कारण छिपे हुए हैं.
हाईवे और एक्सप्रेसवे पर साइन बोर्ड हमेशा हरे रंग के होते हैं.(Representative Image:AI)
नई दिल्ली. भारत में नेशनल हाईवे, स्टेट हाईवे और बड़े मार्गों पर लगाए जाने वाले दिशा सूचक बोर्ड हरे रंग के बनाए जाते हैं. इन बोर्डों पर सफेद अक्षरों में शहरों के नाम, एग्जिट, दूरी और रूट नंबर लिखे जाते हैं. सड़क परिवहन से जुड़े नियम तय करने वाली संस्थाएं इस रंग संयोजन को इसलिए अपनाती हैं ताकि तेज रफ्तार में चल रहे वाहन चालक तुरंत समझ सकें कि यह जानकारी मार्गदर्शन से जुड़ी है. इससे ड्राइवर को रास्ता बदलने या सही लेन पकड़ने में आसानी होती है और दुर्घटनाओं की संभावना कम हो जाती है.
दूर से साफ दिखाई देता है हरा रंग
हाईवे पर वाहन अक्सर तेज गति से चलते हैं. ऐसे में साइनबोर्ड का दूर से साफ दिखाई देना बेहद जरूरी होता है. हरे बैकग्राउंड पर सफेद अक्षर काफी ज्यादा कॉन्ट्रास्ट बनाते हैं, जिससे ड्राइवर दिन और रात दोनों समय जानकारी आसानी से पढ़ पाते हैं. यही कारण है कि ट्रैफिक विशेषज्ञ इस रंग संयोजन को सबसे सुरक्षित मानते हैं. अगर बोर्ड का रंग बहुत चमकीला या भड़कीला हो तो ड्राइवर का ध्यान भटक सकता है, जबकि हरा रंग आंखों को आराम देता है और जानकारी जल्दी समझ में आती है.
रंग देखकर ही समझ जाते हैं ड्राइवर
भारतीय सड़कों पर अलग-अलग रंगों के साइनबोर्ड अलग संकेत देते हैं. हरे बोर्ड मुख्य रूप से हाईवे और लंबी दूरी वाले मार्गों के लिए उपयोग किए जाते हैं, जबकि शहरों और शहरी इलाकों में अक्सर नीले बोर्ड दिखाई देते हैं. इसी तरह लाल और पीले रंग चेतावनी या खतरे का संकेत देते हैं. इस रंग व्यवस्था का सबसे बड़ा फायदा यह है कि ड्राइवर बिना ज्यादा पढ़े ही समझ जाता है कि वह किस तरह की सड़क पर चल रहा है. इससे यात्रा ज्यादा सुरक्षित और व्यवस्थित बनती है.
लंबी यात्रा में तनाव कम करता है हरा रंग
ट्रैफिक डिजाइन से जुड़े कई अध्ययनों में यह बात सामने आई है कि हरा रंग मानसिक रूप से शांत प्रभाव पैदा करता है. यही वजह है कि हाईवे पर लंबे सफर के दौरान यह रंग ड्राइवर को तनाव और थकान से बचाने में मदद करता है. लाल और पीला रंग चेतावनी देने के लिए इस्तेमाल किए जाते हैं क्योंकि वे तुरंत ध्यान खींचते हैं, लेकिन लगातार ऐसे रंग देखने से मानसिक दबाव बढ़ सकता है. इसके उलट हरा रंग आंखों को सहज महसूस कराता है और ड्राइवर का फोकस बनाए रखने में मदद करता है.
दुनिया के कई देशों में भी यही नियम
भारत में हाईवे साइनबोर्ड के लिए हरे रंग का इस्तेमाल कोई अलग प्रयोग नहीं है. अमेरिका, कनाडा, जापान और ऑस्ट्रेलिया जैसे कई देशों में भी हाईवे गाइड साइन के लिए हरे बोर्ड और सफेद अक्षरों का उपयोग किया जाता है. यूरोप के कई देशों में भी मोटरवे और लंबी दूरी वाले मार्गों पर इसी तरह की रंग व्यवस्था देखने को मिलती है. अंतरराष्ट्रीय स्तर पर एक जैसी प्रणाली अपनाने का फायदा यह होता है कि अलग-अलग देशों से आने वाले लोग भी सड़क संकेतों को आसानी से समझ पाते हैं. इससे भ्रम कम होता है और सड़क सुरक्षा बेहतर बनती है.
सड़क सुरक्षा से जुड़ी है रंगों की पूरी साइंस
विशेषज्ञों के मुताबिक सड़क संकेतों का रंग सिर्फ सजावट के लिए नहीं चुना जाता, बल्कि इसके पीछे पूरी वैज्ञानिक सोच होती है. हाईवे पर हरे बोर्ड का इस्तेमाल ड्राइवर को स्पष्ट जानकारी देने, ध्यान केंद्रित रखने और तेज रफ्तार में भी सही निर्णय लेने में मदद करता है. यही कारण है कि सालों की रिसर्च और अंतरराष्ट्रीय मानकों के बाद इस रंग को हाईवे संकेतों के लिए सबसे उपयुक्त माना गया. अब अगली बार जब आप किसी एक्सप्रेसवे या हाईवे पर सफर करें और हरे साइनबोर्ड देखें, तो समझ जाइए कि यह रंग आपकी यात्रा को आसान और सुरक्षित बनाने के लिए चुना गया है.
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Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें
कौन हैं देबाशीष, सौमित्र और आनंद पॉल, जिनके परिजनों से PM ने अलग से की मुलाकात
कौन हैं देबाशीष, सौमित्र और आनंद पॉल, जिनके परिजनों से PM ने अलग से की मुलाकात
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बंगाल में नई सरकार के गठन के बाद पीएम मोदी ने राजनीतिक हिंसा के शिकार हुए तीन भाजपा कार्यकर्ताओं के परिवारों से मुलाकात की. देबाशीष मंडल, सौमित्र घोषाल और आनंद पॉल के परिजनों के बगल में बैठकर पीएम ने न केवल उनका दुख बांटा, बल्कि यह संदेश भी दिया कि पार्टी अपने बलिदानियों को कभी नहीं भूलती.
पीएम मोदी ने बीजेपी के शहीद कार्यकर्ताओं के परिवारों से मुलाकात की?
कोलकाता. कोलकाता के ब्रिगेड परेड ग्राउंड में शपथ ग्रहण समारोह के समापन के बाद एक ऐसा दृश्य सामने आया, जिसने वहां मौजूद हजारों लोगों की आंखों को नम कर दिया. मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के शपथ लेने के तुरंत बाद, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंच के पास ही बने एक विशेष कक्ष में तीन साधारण परिवारों से मुलाकात की. ये वे लोग थे जिनके परिजनों ने बंगाल में भाजपा के विस्तार के लिए अपने प्राणों की आहुति दी थी.
शनिवार को जब कोलकाता में ‘सोनार बांग्ला’ सरकार का आगाज हो रहा था, तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने एक बार फिर साबित कर दिया कि उनके लिए संगठन का कार्यकर्ता सर्वोपरि है. शपथ ग्रहण के तुरंत बाद पीएम मोदी उन तीन परिवारों के बीच जाकर बैठ गए, जिन्होंने पिछले वर्षों में राजनीतिक प्रतिशोध की आग में अपने घर के चिराग खो दिए थे. ये परिवार देबाशीष मंडल, सौमित्र घोषाल और आनंद पॉल के थे. पीएम ने उनकी बातें सुनीं, बच्चों के सिर पर हाथ रखा और उन्हें ढांढस बंधाया कि अब राज्य में ‘न्याय का शासन’ शुरू हो गया है.
1. देबाशीष मंडल: दक्षिण 24 परगना की निडर आवाज
देबाशीष मंडल दक्षिण 24 परगना जिले के एक सक्रिय भाजपा कार्यकर्ता थे. चुनावी गहमागहमी के दौरान उन पर जानलेवा हमला हुआ था. देबाशीष का परिवार बेहद साधारण पृष्ठभूमि से आता है. उनकी पत्नी और छोटे बच्चे आज पीएम के बगल में बैठे नजर आए. देबाशीष ने उस क्षेत्र में भाजपा का झंडा बुलंद किया था जहां पार्टी के लिए काम करना जान जोखिम में डालने जैसा था. पीएम ने उनकी पत्नी को आश्वासन दिया कि बच्चों की पढ़ाई और भविष्य की जिम्मेदारी अब पूरी तरह से नई सरकार और संगठन की होगी.
2. सौमित्र घोषाल: ग्रामीण बंगाल में संगठन के सिपाही
हुगली जिले के सौमित्र घोषाल की हत्या ने पूरे बंगाल को झकझोर दिया था. सौमित्र एक ऐसे कार्यकर्ता थे जो बूथ स्तर पर पार्टी को मजबूत करने के लिए दिन-रात काम करते थे. उनकी वृद्ध मां और भाई जब पीएम मोदी से मिले, तो माहौल काफी भावुक हो गया. सौमित्र की पृष्ठभूमि एक किसान परिवार की थी. उनकी शहादत के बाद उनके परिवार ने भारी मानसिक और आर्थिक दबाव झेला, लेकिन उन्होंने भाजपा का साथ नहीं छोड़ा. पीएम ने उनके भाई से कहा कि सौमित्र का बलिदान व्यर्थ नहीं जाएगा और उनकी स्मृति में क्षेत्र में विकास कार्य किए जाएंगे.
3. आनंद पॉल: उत्तर बंगाल की हिंसा का शिकार
आनंद पॉल उत्तर बंगाल के उन युवा चेहरों में से थे जिन्होंने सीतलकुची और आसपास के क्षेत्रों में भाजपा की पकड़ मजबूत की थी. राजनीतिक हिंसा के दौरान आनंद की जान चली गई थी. आनंद के पिता जब पीएम के बगल में बैठे, तो उन्होंने केवल इतना कहा कि ‘हमें न्याय चाहिए.’ आनंद पॉल की पृष्ठभूमि एक श्रमिक परिवार की रही है. उनकी शहादत के बाद उत्तर बंगाल में भाजपा के प्रति लोगों का समर्थन और अधिक बढ़ गया था, जिसका परिणाम आज की जीत के रूप में सामने है.
राजनीतिक संदेश और न्याय का वादा
प्रधानमंत्री का इन परिवारों के बगल में बैठना केवल एक शिष्टाचार भेंट नहीं थी, बल्कि यह बंगाल की नई सरकार के लिए एक स्पष्ट दिशा-निर्देश भी था. पीएम मोदी ने शुभेंदु अधिकारी की उपस्थिति में इन परिवारों से मुलाकात कर यह संदेश दिया कि नई सरकार की पहली प्राथमिकता राजनीतिक हिंसा को जड़ से खत्म करना और पीड़ितों को न्याय दिलाना है. इन तीनों चेहरों की पृष्ठभूमि यह बताती है कि भाजपा की यह जीत बड़े नेताओं की नहीं, बल्कि उन गुमनाम कार्यकर्ताओं के खून-पसीने की है जिन्होंने विपरीत परिस्थितियों में भी हार नहीं मानी. बंगाल के राजनीतिक इतिहास में यह पहली बार था जब किसी शपथ ग्रहण मंच पर ‘शहीद’ परिवारों को इतना सम्मान दिया गया.
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पति के निधन के बाद एक्ट्रेस को लेना पड़ा थेरेपी का सहारा, कहा- मैं अंदर से पूरी तरह टूट गई
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कपूर खानदान की बहू ने अपने जीवन के सबसे भावुक और कठिन दौर का जिक्र किया. पति के निधन के बाद वह मानसिक रूप से इस कदर टूट गई कि थेरेपी का सहारा लेना पड़ा. एक्ट्रेस ने बताया कि उस अकेलेपन और दुख से बाहर निकलना उनके लिए नामुमकिन सा लग रहा था. हालांकि, थेरेपिस्ट से मिलने के बावजूद उन्हें वहां वह सुकून नहीं मिला, जिसकी उन्हें तलाश थी. आखिरकार उन्होंने अपनों के साथ से खुद को संभाला.
साल 2020 में कैसर से हुआ था कपूर खानदान के एक्टर का निधन.
नई दिल्ली. नीतू कपूर ने हाल ही में ऋषि कपूर के निधन के बाद के अपने संघर्षों को लेकर खुलकर बात की. उन्होंने बताया कि पति के जाने के बाद का समय उनके लिए भावनात्मक रूप से बेहद कठिन था. इस दुख से उबरने के लिए कई लोगों ने उन्हें थेरेपिस्ट की सलाह दी थी. नीतू कपूर ने बताया कि मुश्किल वक्त में उन्हें महसूस हुआ कि यह तरीका उनके लिए नहीं बना है. ऋषि कपूर के साथ बिताए दशकों के बाद आखिरकार उन्होंने अपने आंतरिक साहस से ही इससे उबरने को भरने का फैसला किया.
वैसे थेरेपी के मामले में नीतू कपूर की सोच थोड़ी अलग है. उन्होंने बताया कि वह व्यक्तिगत रूप से थेरेपी पर ज्यादा भरोसा नहीं करती हैं. उनका मानना है कि इंसान को ऐसे दोस्तों और परिवार की जरूरत होती है, जिनसे वह खुलकर बात कर सके और अपना दर्द बांट सके.
नीतू कपूर के लिए मुश्किल था वक्त
नीतू कपूर को थेरेपी से ज्यादा दोस्तों का मिला सहारा
नीतू कपूर ने कहा, ‘मुझे लगता है कि अच्छे दोस्त किसी भी थेरेपी से ज्यादा जरूरी होते हैं. हर इंसान के पास ऐसे चार-पांच करीबी दोस्त होने चाहिए, जिनसे वह अपने मन की हर बात बिना डर के कह सके. जब इंसान अपने दर्द और परेशानियों को भरोसेमंद लोगों के साथ साझा करता है, तो उसका मन हल्का हो जाता है. कई बार अपने लोगों का साथ ही सबसे बड़ी दवा बन जाता है.’
ऋषि कपूर के निधन के बाद टूट गई थीं नीतू कपूर
उन्होंने आगे कहा, ‘ऋषि कपूर के जाने के बाद मैं अंदर से पूरी तरह टूट चुकी थी. उस समय मैं बहुत दुखी और अकेली महसूस करती थी. जब मैं थेरेपिस्ट के पास बैठती थी तो खुद से सवाल करती थी कि आखिर मैं वहां क्या कर रही हूं. जब तक इंसान खुद अंदर से मजबूत बनने का फैसला नहीं करता, तब तक कोई भी उसे पूरी तरह संभाल नहीं सकता. थेरेपी में मुझे मेडिटेट करने, गिनती करने और अलग-अलग तरीके अपनाने की सलाह दी गई, लेकिन मुझे यह सब अपने लिए सही नहीं लगा.’
खुद को व्यस्त रखने में नीतू कपूर को मिली मजबूती
नीतू कपूर ने कहा, ‘हर इंसान का दुख से बाहर आने का तरीका अलग होता है. कुछ लोगों को थेरेपी से मदद मिलती है और यह अच्छी बात है, लेकिन मेरे लिए दोस्तों, परिवार और काम ने सबसे बड़ा सहारा दिया. काम में खुद को व्यस्त रखने से मुझे मानसिक रूप से मजबूत बनने में मदद मिली. परिवार और दोस्तों के साथ समय बिताने से भी मुझे धीरे-धीरे दुख से बाहर निकलने की ताकत मिली.’ बताते चलें कि ऋषि कपूर का अप्रैल 2020 में कैंसर के चलते निधन हो गया था.
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कामता प्रसाद (KP) एक अनुभवी पत्रकार हैं, जिनके पास मीडिया इंडस्ट्री में काम करने का 11 सालों का लंबा अनुभव है. वर्तमान में वह न्यूज18 हिंदी में बतौर सीनियर सब एडिटर अपनी सेवाएं दे रहे हैं. कामता को एंटरटेनमेंट …और पढ़ें
राजमिस्त्री की मौत के बाद परिवार ने बुलाया तांत्रिक: तांत्रिक ने युवक को जीवित करने का किया दावा, मालिक की पत्नी पर डायन का लगाया आरोप – Banka News
बांका में शुक्रवार की शाम बिमार राजमिस्त्री की मौत हो गई। परिजन झाड़-फूंक के उद्देश्य से तांत्रिक सरयूग पुजहर को गांव बुलाए। इसके बाद तांत्रिक ने युवक को जीवित कर देने का दावा करते हुए गांव के ही बिनेसर साह की पत्नी सरस्वती देवी को बुलाने के लिए कहा। इसी दौरान सरस्वती देवी पर डायन होने का संदेह जताया गया, जिसके बाद गांव में तरह-तरह की अफवाहें फैलने लगीं। देखते ही देखते ग्रामीणों की भारी भीड़ जुट गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया। घटना फुल्लीडुमर प्रखंड के भीतिया पंचायत अंतर्गत तीनमुंडा गांव की है। मृतक की पहचान नरेश राय (40) के रूप में हुई है। 8 दिन से बिमार था युवक नरेश राय गांव के ही बिनेसर साह के घर में सेंटरिंग का कार्य कर रहे थे। करीब आठ दिन पूर्व अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई थी। परिजनों ने पहले उनका इलाज बांका सदर अस्पताल में कराया,फिर बेहतर इलाज के लिए भागलपुर के मायागंज अस्पताल ले जाया गया। इलाज के बाद उन्हें घर वापस लाया गया, लेकिन गुरुवार को उनकी हालत दोबारा गंभीर हो गई। ग्रामीणों के मुताबिक, परिजन झाड़-फूंक के उद्देश्य से गेड़ाटीकर नैयासी निवासी तांत्रिक सरयूग पुजहर को गांव बुलाए थे। आरोप है कि तांत्रिक ने नरेश राय को जीवित कर देने का दावा करते हुए गांव के ही बिनेसर साह की पत्नी सरस्वती देवी को बुलाने के लिए कहा। इसी दौरान सरस्वती देवी पर डायन होने का संदेह जताया गया, जिसके बाद गांव में तरह-तरह की अफवाहें फैलने लगीं। देखते ही देखते ग्रामीणों की भारी भीड़ जुट गई और माहौल तनावपूर्ण हो गया। पुलिस ने दोनों पक्ष को कराया शांत स्थिति बिगड़ने की सूचना मिलते ही फुल्लीडुमर थानाध्यक्ष गुलशन कुमार, बीडीओ अमित प्रताप सिंह और सीओ मनोज कुमार पुलिस बल के साथ गांव पहुंचे। बाद में एसडीओ और एसडीपीओ भी अतिरिक्त पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे। अधिकारियों ने दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर शांत कराया और लोगों से अफवाहों पर ध्यान नहीं देने की अपील की। प्रशासन की मौजूदगी में मृतक के शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए बांका भेजा गया। अधिकारियों के हस्तक्षेप के बाद गांव में स्थिति सामान्य हुई, हालांकि एहतियात के तौर पर गांव में पुलिस बल की तैनाती जारी है। एसडीओ राजकुमार ने बताया कि समझा बूझाकर मामले को शांत कराया गया है। पुलिस मामले में जांच पड़ताल कर आगे की कानूनी कार्रवाई कर रही है। शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया गया है।
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खंडवा में कार पलटी, एक की मौत, दो युवतियां घायल: अमरावती से उज्जैन जा रहे थे चार दोस्त; मृतक को कालसर्प दोष की पूजा कराना थी – Khandwa News
खंडवा में शुक्रवार-शनिवार की दरमियानी रात एक बजे दर्दनाक हादसा हो गया। कार पलटने से सवार एक युवक की मौके पर ही मौत हो गई। वहीं कार में बैठी दो युवतियां घायल है, ड्राइवर को सकुशल है। चारों दोस्त महाराष्ट्र के अमरावती के रहने वाले है। वहां से उज्जैन स्थित महाकाल ज्योर्तिलिंग के दर्शन करने जा रहे थे। रास्ते में हादसा हुआ और एक दोस्त की जान चली गई। ब्लैकस्पॉट पर हादसा, एयरबैग नहीं खुले घटना खंडवा-अमरावती स्टेट हाईवे पर ग्राम गुड़ी में अनाज मंडी के पास हुई है। मंडी के पास एक ब्लाइंड टर्न है, यहीं ब्लैकस्पॉट बना हुआ है। जहां पिछले हफ्ते एक डीजे गाड़ी पलटने से दो युवकों की मौत हो गई थी। पुलिस के अनुसार, कार एक्सीडेंट की वजह ब्लैक स्पॉट के साथ-साथ तेज रफ्तार और कार ड्राइवर को झपकी आना है। कार ड्राइवर ने पूछताछ में बताया कि उसे नींद का झोंका आ गया था। इसी बीच कार अनियंत्रित हो गई, वह कंट्रोल करने लगा, तभी सामने जानवर दिखा, उसे बचाने में कार के ब्रेक लगा दिए, जिससे कि कार पलटी खा गई। ड्राइवर साइड में बैठे उसके दोस्त की मौत हो गई। इस दौरान कार के एयर बैग नहीं खुले, वरना दोस्त की जान बच सकती थी। खून से सन गई सड़क, मच गई चीख-पुकार घटना रात के एक बजे की थी। कार पलटते ही मौके पर चीख-पुकार मच गई। कार सवार दोनों युवतियां डर गई। साथी गौतम कार के गेट से बाहर सड़क पर गिर पड़ा था। वह खून से इतना लथपथ था कि सड़क भी खून से सन गई थी। घटना की जानकारी मिलते ही पिपलोद थाने की डायल 112 गाड़ी मौके पर पहुंची और घायलों को जिला अस्पताल पहुंचाया। मृतक का पोस्टमार्टम शनिवार दोपहर में होगा। कार सवार अमरावती-दिल्ली से, युवतियां मुस्लिम पिपलोद पुलिस के अनुसार, कार में गौतम पिता राजेश सेवानी (23) निवासी अमरावती, दर्शन पिता योगेश (23) निवासी अमरावती, तनु पिता चांद मियां (26) निवासी अमरावती व नायारा पिता रॉयल अली (24) निवासी दिल्ली सवार थी। कार को दर्शन ड्राइव कर रहा था। हादसे में गौतम सेवानी की मौत हुई है। दोनों युवतियों को हल्की चोंटे आई थी। प्राइमरी इलाज के बाद उन्हें डिस्चार्ज कर दिया है। मृतक स्पा संचालक, उसे कालसर्प दोष था कार ड्राइवर दर्शन के मुताबिक, वह टैक्सी चलाता है और गौतम उसका मित्र है। गौतम अमरावती में स्पा सेंटर चलाता है। दोनों युवतियां भी उसी स्पा सेंटर की वर्कर है। गौतम की शादी के लिए बात चल रही थी लेकिन उसे कालसर्प दोष था, जो कि रिश्ते में अड़चन बना हुआ था। इसी दोष के निवारण के लिए उज्जैन महाकाल मंदिर में आज शनिवार को पूजा थी। जिसके लिए उज्जैन जा रहे थे।
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पाकिस्तान में फिर तबाही मचाने आ रहे तारा सिंह, अमीषा पटेल ने कंफर्म की ‘गदर 3’
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अमीषा पटेल और सनी देओल की फिल्म ‘गदर: एक प्रेम कथा’ साल 2001 में आई थी. फिल्म को दर्शकों का जबरदस्त रिस्पांस मिला था. अनिल शर्मा के निर्देशन में बनी फिल्म ने बॉक्स-ऑफिस पर अफलातून कमाई की थी. ‘गदर’ के डायलॉग आज भी बच्चे-बच्चे की जुबां पर चढ़े हुए हैं.
नई दिल्ली.अमीषा पटेल और सनी देओल की फिल्म ‘गदर’ का 22 साल बाद साल 2023 में सीक्वल आया था. फिल्म में अनिल शर्मा ने एक बार फिर अमीषा पटेल और सनी देओल पर बड़ा दांव लगाया और इसने छप्परफाड़ कमाई कर सभी को हैरान कर दिया था. अमीषा पटेल और सनी देओल की फिल्म ने बॉक्स-ऑफिस पर 600 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई की थी.

‘गदर 2’ पहली फिल्म की सफलता को बॉक्स-ऑफिस पर दोहराने में सफल रही थी जिसके बाद से इस फ्रेंचाइजी की तीसरी फिल्म के लेकर बज बना हुआ है. अब अमीषा पटेल ने सुपरहिट एक्शन फिल्म गदर की तीसरी फिल्म को लेकर बड़ा अपडेट शेयर किया है.

अमीषा पटेल ने एक्स पर पोस्ट शेयर कर अपडेट दी. वो लिखती हैं, ‘गदर 3 जरूर आएगी और जब आएगी तो थिएटर्स में हंगामा मच जाएगा. दर्शकों के प्यार और भगवान की कृपा से, गदर जैसे ब्रांड के लिए बॉक्स ऑफिस पर 500 करोड़ तो सिर्फ शुरुआत है. इस बार फिल्म का स्केल और कहानी पहले से भी ज्यादा बड़ी और धमाकेदार होगी. तैयार रहिए’.
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एक्ट्रेस ने दावा किया कि ‘गदर 3’ बॉक्स-ऑफिस पर 500 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमाई करेगी. इसके साथ ही उनका कहना है कि फिल्म पहले से और भी ग्रैंड लेवल पर बनाई जाएगी. साल 2023 में आई ‘गदर 2’ ने बॉक्स-ऑफिस पर कमाल कर दिखाया था.

पिछली फिल्म में अनिल शर्मा के बेटे ने उत्कर्ष ने भी अहम किरदार अदा किया था. फिल्म की कहानी एक बार फिर भारत-पाकिस्तान के बंटवारे पर आधारित थे. पहली फिल्म में तारा सिंह के रोल में सनी देओल ने कहर ढा दिया था. उनके डायलॉग्स आज भी लोगों के बीच चर्चित हैं.

साल 2001 में आई फिल्म ‘गदर’ के डायलॉग्स ने इंडस्ट्री में तहलका मचा दिया था. ‘गदर’ में तारा सिंह ने कहा था कि हिंदुस्तान जिंदाबाद था, जिंदाबाद है और जिंदा रहेगा. फिल्म का एक और डायलॉग था, ‘मिया अगर हसरते औकात से ज़्यादा बढ़ जाए ना, तो तबाही के लिए दुश्मनों की ज़रूरत नहीं पड़ती’.

अमीषा पटेल ने अपने लेटेस्ट पोस्ट में आज के दौर की एक्ट्रेसेस के पीआर गेम पर भी तंज कसा. उन्होंने लिखा, ‘ ‘कहो ना प्यार है’, ‘गदर’ या ‘गदर 2’ एक नहीं बल्कि 3 सबसे बड़ी सोलो ब्लॉकबस्टर फिल्में एक हीरोइन के तौर पर मैंने दी हैं, जिनमें सबसे ज्यादा फुटफॉल्स रहे हैं और आज तक ये मेरे को-स्टार्स की भी सबसे बड़ी हिट्स हैं. लेकिन मेरी फेर पीआर मशीनरी कमजोर है, बाकी एक्ट्रेसेस की तरह नहीं’.

उन्होंने आगे लिखा, ‘एक स्टार तभी ग्लोबल सुपरस्टार बनता है जब वह पूरी दुनिया में बड़ी हिट देता है. किसी भी अभिनेता के लिए दुनिया में कहीं भी किसी प्रोजेक्ट का हिस्सा बनना अच्छा लगता है, लेकिन आप तभी सुपरस्टार बनते हैं जब आपने वो बड़ी हिट्स दी हैं. पीआर मशीनरी बंद करो’.
2005 की घटना ने बदली आशीष की सोच, अब तक करा चुके 17 गरीब बेटियों की शादी
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चित्रकूट जिले के लोहदा गांव निवासी आशीष सिंह रघुवंशी आज क्षेत्र में गरीब बेटियों के मसीहा के रूप में पहचाने जाते हैं. वे अब तक 17 जरूरतमंद लड़कियों की शादी करवा चुके हैं और उनका पूरा खर्च खुद उठाते हैं.उनका मानना है जब तक उनके अंदर जान है वह यह सेवा करते रहेंगे. उनकी इस सेवा की शुरुआत एक भावुक घटना से हुई थी. वर्ष 2005 में उनका काम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहाड़ी में चल रहा था. वहां कई मजदूर और मिस्त्री काम कर रहे थे, उन्हीं में एक गरीब लड़की भी मजदूरी करने आती थी.
चित्रकूटः समाज सेवा के कई रूप आपने देखे और सुने होंगे. कोई गरीबों को भोजन कराता है तो कोई शिक्षा और इलाज में मदद करता है, लेकिन बुंदेलखंड के चित्रकूट में एक ऐसा समाजसेवी भी है, जिसने गरीब और बेसहारा बेटियों की जिंदगी संवारने का बीड़ा उठाया है. चित्रकूट जिले के लोहदा गांव निवासी आशीष सिंह रघुवंशी आज क्षेत्र में गरीब बेटियों के मसीहा के रूप में पहचाने जाते हैं. वे अब तक 17 जरूरतमंद लड़कियों की शादी करवा चुके हैं और उनका पूरा खर्च खुद उठाते हैं.
2005 की घटना ने आशीष को किया था भावुक
आशीष सिंह रघुवंशी ने लोकल 18 को जानकारी देते हुए बताया कि उनकी इस सेवा की शुरुआत एक भावुक घटना से हुई थी. वर्ष 2005 में उनका काम सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (CHC) पहाड़ी में चल रहा था. वहां कई मजदूर और मिस्त्री काम कर रहे थे, उन्हीं में एक गरीब लड़की भी मजदूरी करने आती थी. एक दिन काम के दौरान अचानक उसकी तबीयत खराब हो गई और उसे चक्कर आने लगे. जब मैने उससे उसके परिवार के बारे में पूछा तो लड़की ने बताया कि उसके माता-पिता नहीं हैं और उसका भाई भी बीमार रहता है. घर की जिम्मेदारी उसी के कंधों पर थी और मजदूरी करके वह अपने भाई की दवा और परिवार का खर्च चलाती है.
लड़की की बातें सुन आशीष हुए थे भावुक
उनका कहना है कि लड़की की यह कहानी सुनकर मैं एक दम भावुक हो गया था और उस परिवार की मदद करने का फैसला किया. इसके बाद मैने लड़की के भाई और भाभी से बातचीत की और वर्ष 2006 में उस लड़की की शादी करवाई थी. शादी का पूरा खर्च मैने खुद उठाया था. यही घटना मेरे जीवन का टर्निंग प्वाइंट बन गई है. उन्होंने आगे की जानकारी में बताया कि उस लड़की की शादी करवाने के बाद से मैने मन में ठान लिया था कि वे गरीब और बेसहारा बेटियों की शादी में सहयोग करेंगे. ोतब से लेकर अब तक यानी 2006 से 2026 के बीच वे 17 लड़कियों का कन्यादान कर चुके हैं.खास बात यह है कि शादी में लगने वाला हर खर्च, जैसे कपड़े, जेवर, भोजन और दहेज का सामान तक, उनकी ओर से उपलब्ध कराया जाता है.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
स्वाद और सेहत से भरपूर इस बार जरूर बनाइए चटपटी सोया चाप, नोट करें टेस्टी रेसिपी
सोया चाप आजकल वेज खाने वालों के बीच बहुत पसंद की जाने वाली डिश है. यह प्रोटीन से भरपूर, स्वाद में मटन‑स्टाइल और बनाने में आसान होती है. सही तरीके से बनाई जाए तो सोया चाप इतनी सॉफ्ट और रसीली बनती है कि नॉन‑वेज खाने वाले भी तारीफ करते हैं. आइए जानें इसकी परफेक्ट रेसिपी.
सामग्री
मुख्य सामग्री
सोया चाप – 6–8 स्टिक
पानी – उबालने के लिए
नमक – 1 छोटी चम्मच
ग्रेवी के लिए
तेल / बटर – 3 टेबलस्पून
जीरा – ½ छोटी चम्मच
प्याज – 2 मध्यम
अदरक‑लहसुन पेस्ट – 1 टेबलस्पून
टमाटर प्यूरी – 1 कप
दही – ½ कप
मसाले
हल्दी – ½ छोटी चम्मच
लाल मिर्च पाउडर – 1 छोटी चम्मच
धनिया पाउडर – 1½ छोटी चम्मच
गरम मसाला – ½ छोटी चम्मच
कसूरी मेथी – 1 छोटी चम्मच
नमक – स्वादानुसार
सजाने के लिए
ताजा क्रीम / मलाई – 2 टेबलस्पून
हरा धनिया
बनाने की विधि
सोया चाप की तैयारी.
सबसे पहले सोया चाप को स्टिक सहित उबलते पानी में नमक डालकर 8–10 मिनट उबाल लें.
अब पानी निकालकर चाप को हल्का‑सा निचोड़ें और चाहें तो स्टिक हटा दें. इससे कच्ची स्मेल निकल जाती है.
हल्का फ्राय करें
एक पैन में थोड़ा‑सा तेल गरम करें और उबली हुई सोया चाप को सुनहरा होने तक हल्का फ्राय कर लें. इससे चाप की टेक्सचर बेहतर हो जाती है.
ग्रेवी बनाएं
अब कड़ाही में तेल या बटर गरम करें. जीरा डालें, चटकने पर प्याज डालकर सुनहरा भूनें.
अदरक‑लहसुन पेस्ट डालकर कच्चापन खत्म करें.
अब टमाटर प्यूरी डालें और मसाले डालकर तब तक भूनें जब तक तेल अलग न दिखे.
दही और चाप डालें
आंच धीमी करें और फेंटा हुआ दही धीरे‑धीरे डालें, लगातार चलाते रहें.
ग्रेवी स्मूद हो जाए तो फ्राय की हुई सोया चाप डालें.
2–3 मिनट पकाने के बाद थोड़ा पानी डालकर 5–7 मिनट धीमी आंच पर पकाएं.
फाइनल टच
अंत में गरम मसाला, कसूरी मेथी और क्रीम डालें.
2 मिनट पकाकर गैस बंद करें और ऊपर से हरा धनिया डालें.
परोसने के सुझाव
बटर नान, तंदूरी रोटी या रूमाली रोटी.
जीरा राइस या प्लेन चावल.
साथ में प्याज‑नींबू और हरी चटनी.
टिप्स
सोया चाप अच्छी तरह उबालना बहुत जरूरी है.
ज्यादा मुलायम स्वाद के लिए क्रीम न छोड़ें.
तीखापन अपने स्वाद के अनुसार एडजस्ट करें.
निष्कर्ष:
यह ढाबा‑स्टाइल सोया चाप रेसिपी स्वाद, पोषण और तृप्ति,तीनों का बेहतरीन मेल है. एक बार घर पर बनाएं, बार‑बार बनाने का मन करेगा.

