Friday, August 21, 2026
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मोतिहारी इंजीनियरिंग कॉलेज हॉस्टल में गर्म तेल गिरा: 3 छात्राएं झुलसीं, छात्रों ने रसोइया पर गुस्से में तेल फेंकने का लगाया आरोप, अरेस्ट – Motihari (East Champaran) News




मोतिहारी के इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रावास में नाश्ता करते समय तीन छात्राएं गर्म तेल की चपेट में आने से झुलस गई। घटना के बाद कॉलेज प्रशासन ने तत्काल छात्राओं को इलाज के लिए अस्पताल भेजा। प्राथमिक उपचार के बाद उन्हें हॉस्टल वापस भेज दिया गया। घायल छात्राओं की पहचान मोनाली कुमारी, मधु प्रिया और मुस्कान कुमारी के रूप में की गई है। रसोइया पर गुस्से में तेल फेंकने का आरोप घटना के बाद छात्राओं और अन्य छात्रों ने कॉलेज परिसर में हंगामा शुरू कर दिया। छात्रों का आरोप है कि मेस में खाना बनाने वाले रसोइये की किसी से कहासुनी हुई थी, जिसके बाद उसने गुस्से में गर्म तेल से भरी कड़ाही फेंक दी। इससे उछले गर्म तेल की चपेट में आकर छात्राएं झुलस गईं। हालांकि, रसोइये ने इन आरोपों से इनकार किया है। उसका कहना है कि गर्म तेल की कड़ाही उसके हाथ से अचानक छूट गई थी, जिससे यह हादसा हुआ। उसने घटना को पूरी तरह दुर्घटनावश बताया। कॉलेज प्रशासन ने रसोइया को पुलिस के किया हवाले घटना की सूचना मिलते ही कॉलेज प्रशासन मौके पर पहुंचा और स्थिति को नियंत्रित किया। छात्रों के बढ़ते आक्रोश को देखते हुए कॉलेज प्रशासन ने संबंधित रसोइया को पुलिस के हवाले कर दिया। पुलिस ने मामले की जांच शुरू कर दी है। छात्रों और प्रत्यक्षदर्शियों के बयान दर्ज किए जा रहे हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि घटना हादसा थी, लापरवाही का नतीजा थी या जानबूझकर की गई हरकत। तीनों छात्राओं की हालत फिलहाल खतरे से बाहर बताई जा रही है। इस घटना के बाद छात्र-छात्राओं ने कॉलेज प्रशासन से मेस की व्यवस्था में सुधार, दोषी पर कड़ी कार्रवाई और छात्रावास की सुरक्षा व्यवस्था मजबूत करने की मांग की है। कॉलेज प्रशासन ने मामले की जांच कर उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया है।



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सीधी में लैंड स्लाइड, 30 गांवों का संपर्क टूटा: सड़क पर गिरे पत्थर, जेसीबी से रास्ता सामान्य करने की कोशिश – Sidhi News




सीधी जिले के रामपुर नैकिन तहसील क्षेत्र में भवरसेन पहाड़ पर शुक्रवार सुबह अचानक भूस्खलन हो गया। लगातार दो दिनों की तेज बारिश के बाद पहाड़ की मिट्टी और बड़े-बड़े पत्थर मुख्य सड़क पर आ गिरे, जिससे मार्ग बंद हो गया। करीब 30 गांवों का संपर्क रामपुर मुख्यालय से टूट गया है। इस कारण सड़क पर भारी मात्रा में मलबा और पत्थर जमा हो गए हैं, जिससे आवागमन ठप हो गया है। वर्तमान में सड़क से मोटरसाइकिल निकालना भी संभव नहीं है। शिकारगंज, बाघड़, पेपखरा, खड्डी, मौरा, धनहा समेत करीब 30 गांव इस घटना से प्रभावित हुए हैं। स्थानीय निवासियों और समाजसेवियों ने सड़क बंद होने के बाद मौके पर पहुंचकर मलबा हटाने और रास्ता खोलने की कोशिश शुरू की। स्थानीय निवासी शैलेंद्र सिंह सेगर ने बताया कि लगातार बारिश के बाद ऐसा हुआ है। सुबह जब लोग वहां पहुंचे, तो सड़क बंद मिली। जानकारी मिलने पर रामपुर नैकिन तहसीलदार आशीष मिश्रा अपनी टीम के साथ मौके पर पहुंचे। उन्होंने बताया कि प्रशासनिक टीम को भेजा गया है। सड़क पर गिरे पत्थरों और मिट्टी के मलबे को हटाने के लिए जेसीबी बुलाई गई है। काम भी शुरू कर दिया गया है। लक्ष्य है कि जल्द ही मार्ग आवागमन के लिए बहाल किया जाए, ताकि प्रभावित गांवों का संपर्क फिर से स्थापित हो सके।



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15 मिनट में जमाएं थक्केदार गाढ़ा दही! पूनम देवनानी का यह सीक्रेट तरीका है कमाल का

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Instant Dahi Recipe : भारतीय रसोई में दही का इस्तेमाल हर रोज होता है. चाहे पराठों के साथ रायता बनाना हो, दोपहर की छाछ हो या फिर खाने का स्वाद बढ़ाना हो, दही हर थाली की शान है. लेकिन कई बार अचानक मेहमान आ जाते हैं या ऐन वक्त पर पता चलता है कि फ्रिज में दही खत्म हो चुका है. आमतौर पर दही जमने में 6 से 8 घंटे का समय लगता है, ऐसे में तुरंत दही जमाना एक बड़ी चुनौती बन जाता है.
अगर आप भी इस परेशानी का सामना कर चुके हैं, तो अब चिंता करने की बिल्कुल जरूरत नहीं है. प्रसिद्ध शेफ पूनम देवनानी ने एक ऐसा कमाल का सीक्रेट तरीका बताया है, जिससे आप बिना किसी कुकर के, सिर्फ 15 मिनट में थक्केदार और मलाईदार दही तैयार कर सकते हैं.

अगली बार जब भी घर में दही की तुरंत जरूरत हो, तो बिना कुकर वाली यह आसान स्टीम ट्रिक जरूर आजमाएं.

यह किचन हैक बेहद आसान है और इमरजेंसी के समय आपके बहुत काम आएगा. आइए जानते हैं बिना कुकर के सिर्फ एक साधारण बर्तन में 15 मिनट के अंदर गाढ़ा दही जमाने की पूरी आसान विधि.

दही जमाने के लिए आवश्यक सामग्री-
फुल क्रीम दूध: 2 कप (हल्का गुनगुना)
ताज़ा जामन (खट्टा): 2 छोटी चम्मच
एक बड़ा भगोना या कढ़ाई: स्टीम बनाने के लिए
पानी: 1 से 2 कप (बर्तन के पेंदे को ढकने जितना)
एक स्टैंड : दही के बर्तन को सहारा देने के लिए

15 मिनट में गाढ़ा दही जमाने की स्टेप-बाय-स्टेप विधि

दूध का तापमान सही रखें
सबसे पहले दूध को गर्म करें और फिर उसे हल्का गुनगुना होने दें. ध्यान रखें कि दूध बहुत ज्यादा गर्म नहीं होना चाहिए, वरना दही फट जाएगा और पानी छोड़ देगा. अगर दूध ठंडा होगा तो जामन एक्टिवेट नहीं हो पाएगा. उंगली डालकर देखने पर दूध हल्का गर्म महसूस होना चाहिए.

जामन को अच्छी तरह मिलाएं
गुनगुने दूध को उस बर्तन में डालें जिसमें आप दही जमाना चाहते हैं. अब इसमें 2 चम्मच ताज़ा दही (जामन) डालें. चम्मच या फेंटनी (whisk) की मदद से इसे 1 मिनट तक अच्छे से फेंट लें. दूध में झाग बनने से दही के ऊपर बढ़िया मलाईदार परत जमती है. इसके बाद बर्तन को ढक्कन से अच्छी तरह ढक दें.

स्टीम सेटअप तैयार करें
अब एक बड़ा भगोना, पतीला या गहरी कढ़ाई गैस पर रखें. इसमें नीचे 1 से 2 कप पानी डालें. पानी का स्तर सिर्फ उतना ही होना चाहिए जो बर्तन के तल में रहे. पानी इतना ज्यादा न हो कि उबलते समय उछलकर दही वाले बर्तन के अंदर चला जाए. पानी के बीच में एक जालीदार स्टैंड रख दें, ताकि दही का बर्तन सीधे पानी के संपर्क में न आए.

15 मिनट की स्टीमिंग प्रोसेस
पानी में उबाल आने दें. जब भाप (स्टीम) बनने लगे, तो स्टैंड के ऊपर दही वाले ढके हुए बर्तन को रख दें. अब बड़े भगोने को ऊपर से किसी भारी ढक्कन या थाली से पूरी तरह ढक दें ताकि भाप बाहर न निकले. गैस की आंच को धीमा से मध्यम रखें और इसे 12 से 15 मिनट तक पकने दें. भाप की गरमी से जामन तुरंत एक्टिवेट हो जाता है और दूध तेजी से गाढ़ा होने लगता है.

गैस बंद करें और सेट होने दें-
15 मिनट बाद गैस बंद कर दें. ढक्कन को तुरंत न हटाएं, बल्कि बर्तन को 2-3 मिनट के लिए ऐसे ही भाप में रहने दें. इसके बाद सावधानी से दही वाले बर्तन को बाहर निकालें.

परफेक्ट दही जमाने के लिए खास सीक्रेट टिप्स :
-बड़े बर्तन में पानी हमेशा स्टैंड की ऊंचाई से नीचे रखें, जिससे उबलता पानी दही में न पहुंचे.
-दही जमाने के लिए हमेशा ताज़ा और मीठे जामन का इस्तेमाल करें.
-खट्टे जामन से दही का स्वाद बिगड़ सकता है.
-स्टीम से निकालने के बाद अगर आप दही को 5 से 10 मिनट के लिए फ्रिज में रख देंगे, तो यह और भी अधिक थक्केदार, गाढ़ा और सेट हो जाएगा.

अगली बार जब भी घर में दही की तुरंत जरूरत हो, तो बिना कुकर वाली यह आसान स्टीम ट्रिक जरूर आजमाएं.



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चीनी कंपनी ने पेश किया चौड़े डिस्प्ले वाला स्मार्टफोन, मिलेगी 7000mAh की दमदार बैटरी


चीनी ब्रांड Huawei ने दुनिया का पहला वाइड डिस्प्ले वाला स्मार्टफोन लॉन्च कर दिया है। इस स्मार्टफोन को घरेलू मार्केट में प्री-ऑर्डर के लिए उपलब्ध करा दिया गया है। इस फोन की खास बात इसका चौड़ा डिस्प्ले है, जिसका आसपेक्ट रेश्यो 16:9.5 है। साथ ही, इसका स्क्रीन-टू-बॉडी रेश्यो 96.1 प्रतिशत तक है। इससे पहले सैमसंग ने पिछले महीने Galaxy Z Fold 8 लॉन्च किया है, जिसमें चौड़ा कवर डिस्प्ले मिलता है। हुआवे के इस फोन का डिस्प्ले भी काफी चौड़ा है, जिसकी वजह से यह देखने में काफी हैंडी लगता है।

28 अगस्त से खरीद सकेंगे फोन

Huawei Pura X View को कंपनी ने तीन स्टोरेज वेरिएंट्स- 12GB RAM + 256GB, 12GB RAM + 512GB और 12GB RAM + 1TB में लॉन्च किया गया है। इसे फैंटम नाइट ब्लैक, लीपिंग शैडो रेड, लिनन ग्रे और जीरो डिग्री व्हाइट कलर ऑप्शन में खरीदा जा सकता है। इस फोन की कीमत का कंपनी ने फिलहाल खुलासा नहीं किया है। इसे 28 अगस्त से खरीदा जा सकेगा। फिलहाल इसे प्री-ऑर्डर के लिए उपलब्ध कराया गया है।

Huawei Pura X View के फीचर्स

हुआवे के इस फोन को 6.39 इंच के AMOLED डिस्प्ले के साथ लॉन्च किया गया है। इस फोन के डिस्प्ले का रेजलूशन 1320 x 2232 पिक्सल है और इसकी पीक ब्राइटनेस 6500 निट्स तक की है। फोन के डिस्प्ले में 2160Hz PWM डिमिंग का सपोर्ट दिया गया है। इसके चारों ओर 1.05mm के पतले बेजल्स दिए गए हैं। कंपनी का दावा है कि फोन के डिस्प्ले पर वीडियो, रीडिंग और गेमिंग का बेहतर एक्सपीरियंस मिलेगा।

इस स्मार्टफोन की मोटाई महज 6.68mm है और इसका वजन 201 ग्राम है। फोन में 7000mAh की बैटरी दी गई है और यह Harmony OS 7 के साथ आता है। चीनी ब्रांड के इस फोन में इन-हाउस Kirin चिपसेट दिया गया है। इसके साथ 12GB रैम और 1TB तक स्टोरेज का सपोर्ट मिलेगा। फोन के बैक में ट्रिपल कैमरा सेटअप दिया गया है। इसमें 50MP का मेन और टेलीफोटो सेंसर दिया गया है।

Huawei ने पिछले दिनों भारतीय बाजार में अपना 10,100mAh बैटरी वाला टैबलेट MatePad 11 लॉन्च किया है। साथ ही, कंपनी ने Huawei Band 11 सीरीज भी भारत में पेश की है, जिसमें 14 दिनों का बैटरी बैकअप मिलता है।

यह भी पढ़ें – Vivo ला रहा 7200mAh बैटरी वाला फोन, लॉन्च से पहले कीमत आई सामने





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ट्रम्प बोले- होर्मुज पर जल्द अमेरिका का फुल कंट्रोल होगा: ईरान की नेवी और एयरफोर्स खत्म, उसके पास सिर्फ कुछ मिसाइल और ड्रोन बचे


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15 मिनट पहले

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अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने दावा किया है कि अमेरिका जल्द ही होर्मुज स्ट्रेट पर पूरी तरह कंट्रोल कर लेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिकी हमलों में ईरान की नेवी, एयरफोर्स और सैन्य नेतृत्व को भारी नुकसान हुआ है।

ट्रम्प ने यह भी कहा कि अमेरिका किसी भी हाल में ईरान को परमाणु हथियार नहीं बनाने देगा। ईरान को परमाणु हथियार बनाने से रोकने के लिए सैन्य कार्रवाई जरूरी थी।

उन्होंने चेतावनी दी कि अगर आगे भी ऐसा खतरा हुआ तो अमेरिका फिर से कड़ा कदम उठा सकता है।

ट्रम्प बोले- ईरान से बातचीत मुश्किल

ट्रम्प ने कहा कि ईरान के कई बड़े नेता अब नहीं रहे। इसके चलते नए समझौते पर बातचीत मुश्किल हो गई है। उन्होंने कहा, फिलहाल यह भी साफ नहीं है कि ईरान में फैसले कौन ले रहा है।

ट्रम्प ने दावा किया कि ईरान आर्थिक संकट से जूझ रहा है। उन्होंने कहा कि देश में महंगाई बहुत ज्यादा है। सेना को वेतन देने में भी दिक्कतें आ रही हैं।

अमेरिका ने ईरान की मदद करने वालों को चेतावनी दी

अमेरिका ने ईरान के साथ कारोबार करने वाले देशों और कंपनियों को चेतावनी दी है। अमेरिकी वित्त मंत्री स्कॉट बैंसेट ने कहा कि जो लोग ईरान के साथ कारोबार जारी रखेंगे, उनके खिलाफ अमेरिका कड़े आर्थिक कदम उठा सकता है।

दरअसल अमेरिका ने गुरुवार को ईरान पर नई आर्थिक कार्रवाई का ऐलान किया है। इसका मकसद ईरान की अर्थव्यवस्था पर दबाव बढ़ाकर उसे परमाणु कार्यक्रम खत्म करने और होर्मुज स्ट्रेट खोलने के लिए मजबूर करना है।

अमेरिका पहले ही ईरान के तेल, बैंकिंग और ट्रांसपोर्ट सेक्टर पर कई प्रतिबंध लगा चुका है। अब वह ईरान से जुड़े दूसरे देशों और कंपनियों पर भी दबाव बढ़ाने की तैयारी में है।

ईरान बोला- अमेरिकी प्रतिबंधों से नहीं झुकेंगे

ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा कि अमेरिका जब बातचीत नहीं करना चाहता, तो प्रतिबंध लगाने लगता है। लेकिन ईरान कई साल से ऐसे प्रतिबंध झेलता आया है और इससे उसकी नीति नहीं बदली है।

इंटरनेशनल क्राइसिस ग्रुप के ईरान डायरेक्टर अली वाएज के मुताबिक, अमेरिका अब प्रतिबंधों के साथ सैन्य दबाव भी बढ़ा रहा है। लेकिन इससे ईरान के पीछे हटने के बजाय उसका रुख और सख्त हो सकता है।

उनके मुताबिक, ईरान के लिए अमेरिकी प्रतिबंध झेलना मुश्किल जरूर है, लेकिन अमेरिका की शर्तें मानना उसे इससे भी ज्यादा खतरनाक लगता है। इसलिए सिर्फ दबाव बढ़ाने से ईरान के झुकने की संभावना कम है।

होर्मुज स्ट्रेट पर कंट्रोल क्यों चाहते हैं ट्रम्प?

इसकी पांच बड़ी वजह है-

1. दुनिया के तेल का अहम रास्ता- दुनिया की करीब 20% तेल और LNG सप्लाई होर्मुज से गुजरती है। इस पर कंट्रोल का मतलब ऊर्जा सप्लाई पर पकड़।

2. ईरान का दबाव कम करना- ईरान होर्मुज को दबाव बनाने के हथियार की तरह इस्तेमाल करता रहा है। यहां उसका असर कम होने से उसकी ताकत घटेगी।

3. तेल की कीमतें कंट्रोल में रखना- होर्मुज में तनाव बढ़ते ही तेल महंगा हो जाता है। अमेरिका चाहता है कि रास्ता खुला रहे और सप्लाई जारी रहे।

4. खाड़ी देशों की सुरक्षा- सऊदी अरब, UAE, कुवैत और कतर जैसे अमेरिकी सहयोगियों का तेल इसी रास्ते से जाता है। इसकी सुरक्षा अमेरिका के लिए अहम है।

5. ईरान पर बातचीत में दबाव- होर्मुज पर ईरान का प्रभाव घटने से किसी समझौते में उसकी सौदेबाजी की ताकत भी कमजोर हो सकती है।

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यह भी पढ़ें…

होर्मुज में अमेरिका पर ईरान भारी पड़ रहा: ट्रम्प की धमकी के बावजूद जहाज ईरानी रूट से जा रहे

होर्मुज स्ट्रेट से गुजरने वाले ज्यादातर जहाज अपनी पहचान या रास्ता छिपा रहे हैं। अल जजीरा की रिपोर्ट के मुताबिक, 1 से 19 अगस्त के बीच 236 जहाज यहां से गुजरे, लेकिन 148 जहाजों की राह साफ तौर पर पता नहीं चल सकी। पूरी खबर यहां पढ़ें…

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क्रूड 93 डॉलर के करीब, सोना 4,500 डॉलर पार, इन 5 फैक्टर्स पर रहेगी नजर


भारतीय शेयर बाजार के लिए शुक्रवार का कारोबारी दिन उतार-चढ़ाव वाला रह सकता है. गिफ्ट निफ्टी में हल्की मजबूती दिख रही है, लेकिन अमेरिका और एशिया के बाजारों में गिरावट से घरेलू बाजार पर दबाव बन सकता है. सुबह 7 बजे गिफ्ट निफ्टी करीब 57 अंक चढ़कर 24,347 के आसपास कारोबार करते हुए नजर आया. इसका संकेत है कि सेंसेक्स और निफ्टी की शुरुआत हल्की बढ़त के साथ हो सकती है.

गुरुवार को घरेलू बाजार ने लगातार सात कारोबारी सेशन की गिरावट पर ब्रेक लगाया था. सेंसेक्स 628 अंक की बढ़त के साथ 77,537 पर बंद हुआ, जबकि निफ्टी 154 अंक चढ़कर 24,231 के स्तर पर पहुंच गया. अब शुक्रवार को निवेशकों की नजर ग्लोबल मार्केट, कच्चे तेल, सोने और अमेरिकी बॉन्ड यील्ड समेत कई अहम संकेतों पर रहेगी.

गिफ्ट निफ्टी से बाजार को शुरुआती सहारा

गिफ्ट निफ्टी में तेजी भारतीय बाजार के लिए शुरुआती तौर पर अच्छी खबर है. यह करीब 24,347 के स्तर पर है. इससे संकेत मिल रहा है कि शुक्रवार को निफ्टी और सेंसेक्स की शुरुआत मजबूत हो सकती है. हालांकि, दिन के कारोबार में ग्लोबल संकेत बाजार की चाल बदल सकते हैं.

अमेरिका और एशिया के बाजारों में गिरावट

अमेरिकी शेयर बाजार गुरुवार को गिरावट के साथ बंद हुआ. डाउ जोन्स 1.32 फीसदी, नैस्डेक 1 फीसदी और एसएंडपी 500 करीब 0.87 फीसदी टूट गया. अमेरिकी बाजार में कमजोरी की बड़ी वजह बॉन्ड यील्ड में बढ़ोतरी रही.

एशियाई बाजारों में भी शुक्रवार सुबह दबाव देखने को मिला. निक्कई करीब 0.82 फीसदी और ताइवान इंडेक्स 0.34 फीसदी नीचे रहा. कोस्पी में भी हल्की गिरावट आई, जबकि शंघाई इंडेक्स करीब 0.03 फीसदी फिसला. वहीं, हैंगसेंग करीब 0.80 फीसदी ऊपर कारोबार करता दिखा.

बॉन्ड यील्ड और अमेरिका-ईरान तनाव पर नजर

अमेरिकी 10 साल की बॉन्ड यील्ड बढ़कर करीब 4.7 फीसदी पहुंच गई है. यील्ड बढ़ने से शेयर बाजार में निवेशकों का उत्साह कम हो सकता है, क्योंकि बॉन्ड में निवेश बढ़ जाता है. अमेरिका और ईरान के बीच तनाव भी बाजार के लिए अहम बना हुआ है. अमेरिका की ओर से ईरान पर सख्त प्रतिबंध लगाए जाने से आगे तनाव बढ़ने की चिंता है. इसका असर तेल की कीमतों और महंगाई की उम्मीदों पर पड़ सकता है.

क्रूड ऑयल फिर बना चिंता की वजह

कच्चे तेल की कीमत अभी भी हाई लेवल पर बनी हुई है. ब्रेंट क्रूड करीब 93 डॉलर प्रति बैरल के आसपास है. तेल महंगा रहने से भारत के लिए आयात का खर्च बढ़ सकता है. इसका असर रुपये, महंगाई और कंपनियों की लागत पर पड़ सकता है. इसलिए आज बाजार की नजर क्रूड की कीमतों पर भी रहेगी.

4,500 डॉलर के पार सोना

सोने की कीमत 4,500 डॉलर प्रति औंस के ऊपर बनी हुई है. कमजोर डॉलर और वैश्विक तनाव के बीच सोने को सुरक्षित निवेश के तौर पर सहारा मिल रहा है. इससे पता चलता है कि निवेशक अभी भी बाजार में रिस्क को लेकर पूरी तरह सहज नहीं हैं. मार्केट एक्सपर्ट्स के मुताबिक मौजूदा माहौल में निवेशकों को जल्दबाजी से बचना चाहिए. मजबूत शेयरों और बेहतर परफॉर्म करने वाले सेक्टर पर ध्यान देना और रिस्क को कंट्रोल रखना बेहतर स्ट्रैटजी हो सकती है.



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पाली में 31 बूथों पर पुरुषों से ज्यादा महिला वोटर: 10 ट्रांसजेंडर भी देंगे वोट; प्रत्याशियों को महिलाओं पर फोकस करना होगा – Pali (Marwar) News




पाली नगर निगम चुनाव की तारीखों के ऐलान के बाद चुनावी हलचल तेज हो गई है। टिकट के दावेदार समर्थकों के साथ पार्टी के बड़े नेताओं से मुलाकात कर पार्षद का टिकट मांग रहे हैं। इसी बीच मतदाता आंकड़ों में एक खास तस्वीर सामने आई है। पाली नगर निगम के 65 वार्डों में बनाए गए बूथों में से 31 पर महिला मतदाताओं की संख्या पुरुषों से ज्यादा है, जबकि 2 बूथों पर महिला और पुरुष मतदाताओं की संख्या बराबर है। ऐसे में चुनाव जीतने की तैयारी कर रहे प्रत्याशियों को महिला मतदाताओं पर खास फोकस करना होगा। पाली नगर निगम के चुनाव 9 सितंबर को होंगे। 31 बूथों पर महिला वोटर ज्यादा, 2 पर संख्या बराबर नगर निगम के 65 वार्डों के लिए बनाए गए मतदान बूथों के आंकड़ों के मुताबिक 31 बूथ ऐसे हैं, जहां पुरुषों की तुलना में महिला मतदाता ज्यादा हैं। वहीं 2 बूथों पर महिला और पुरुष मतदाताओं की संख्या बराबर है। ऐसे में इन बूथों पर महिला मतदाताओं का वोट चुनावी नतीजों में अहम भूमिका निभा सकता है। टिकट के लिए दावेदारी कर रहे नेताओं के बीच चुनावी तैयारियां शुरू हो चुकी हैं। संभावित प्रत्याशी अपने समर्थकों के साथ पार्टी के आलाधिकारियों से संपर्क कर रहे हैं। ऐसे में जिन उम्मीदवारों का लक्ष्य जीत हासिल करना है, उन्हें महिला मतदाताओं तक पहुंच बनाने और उन्हें अपने पक्ष में करने पर भी फोकस करना होगा। अभी और जुड़ेंगे वोटर जिला प्रशासन की और से मतदाता सूचियों को अपडेट करने का काम चल रहा है। Blo संबंधित एरिया में जाकर नए नाम जोड़ने के साथ ही मृतकों के नाम हटाने का कार्य कर रहे है। ऐसे में पूरक मतदाता सूची जारी हो सकती है। नगर निगम पार्षद 3.50 लाख तक खर्च कर सकेंगे राज्य निर्वाचन आयोग ने निकाय चुनाव लड़ने वाले प्रत्याशियों के लिए चुनावी खर्च की सीमा तय कर रखी है। नगर निगम क्षेत्र में पार्षद का चुनाव लड़ने वाला प्रत्याशी अधिकतम 3.50 लाख रुपए खर्च कर सकता है। वहीं, नगर पालिका में पार्षद पद के प्रत्याशी के लिए चुनावी खर्च की सीमा 1.50 लाख रुपए है। नगर परिषद में पार्षद का चुनाव लड़ने वाला प्रत्याशी अधिकतम 2.50 लाख रुपए खर्च कर सकेगा। पाली में 10 ट्रांसजेंडर मतदाता भी करेंगे मतदान पाली नगर निगम क्षेत्र में 10 ट्रांसजेंडर मतदाता भी हैं। ये मतदाता भी 9 सितंबर को मतदान केंद्र पर पहुंचकर अपने मताधिकार का इस्तेमाल करेंगे और शहर की शहरी सरकार चुनने में भागीदारी निभाएंगे।



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उन्नाव में 2 हजार शिवभक्तों की डाक कांवड़ यात्रा निकली: बिठूर से लोधेश्वर महादेव मंदिर तक जाएंगे, आदियोगी झांकी निकली – Unnao News




उन्नाव में श्रावण मास के अवसर पर गुरुवार रात शिवभक्ति का माहौल नजर आया। बिठूर के ऐतिहासिक ब्रह्मावर्त घाट से गंगाजल लेकर बाराबंकी के प्रसिद्ध श्री लोधेश्वर महादेव मंदिर के लिए विशाल डाक कांवड़ यात्रा रवाना हुई। यात्रा मेथी टीकुर होते हुए चकलवंशी चौराहे पहुंची। इस दौरान ‘बोल बम’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से पूरा इलाका गूंज उठा। आदियोगी स्वरूप की झांकी बनी आकर्षण का केंद्र डाक कांवड़ यात्रा में दो हजार से अधिक शिवभक्त शामिल हुए। यात्रा के आगे एक विशाल ट्रॉली पर भगवान शिव के आदियोगी स्वरूप की झांकी सजाई गई थी। झांकी पर लगी आकर्षक लाइटें रात के अंधेरे में दूर से ही लोगों का ध्यान खींच रही थीं। झांकी के पीछे डीजे की धुन पर कांवड़िए झूमते हुए आगे बढ़ रहे थे। उनके हाथों में नियॉन स्टिक्स, तिरंगा और भगवा ध्वज थे। कांवड़िए लगातार ‘बोल बम’ के जयकारे लगा रहे थे। रंग-बिरंगी रोशनी के बीच हजारों शिवभक्तों का उत्साह देखते ही बन रहा था।
ग्रामीणों और व्यापारियों ने कांवड़ियों पर की पुष्पवर्षा मेथी टीकुर से चकलवंशी चौराहे तक कई स्थानों पर ग्रामीणों, व्यापारियों और राहगीरों ने कांवड़ियों का स्वागत किया। लोगों ने श्रद्धालुओं पर पुष्पवर्षा की और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारे लगाए। देर रात सड़क से कांवड़ियों का विशाल जत्था गुजरने के दौरान मार्ग के दोनों ओर लोगों की भीड़ जमा रही। चकलवंशी चौराहे पर भी भारी भीड़ और वाहनों की आवाजाही के बीच स्थानीय लोगों ने कांवड़ियों का मार्ग सुगम बनाए रखने में सहयोग किया। बिना रुके लोधेश्वर महादेव मंदिर की ओर बढ़े कांवड़िए यात्रा में शामिल श्रद्धालुओं ने बताया कि डाक कांवड़ के लिए बिठूर के ब्रह्मावर्त घाट से पवित्र गंगाजल लिया गया है। श्रद्धालु बिना रुके लगातार गति से बाराबंकी स्थित लोधेश्वर महादेव मंदिर की ओर बढ़ रहे हैं। वहां पहुंचकर भगवान शिव का गंगाजल से जलाभिषेक किया जाएगा। शुक्लागंज और बक्सर घाट से भी उठाया गंगाजल श्रावण मास के दौरान जिले के अन्य गंगा घाटों से भी कांवड़िए जल लेकर अपने-अपने गंतव्य की ओर रवाना हुए। शुक्लागंज और बक्सर घाट से भी श्रद्धालुओं ने गंगाजल भरा। डाक कांवड़ के चकलवंशी चौराहे पहुंचने के दौरान देर रात तक पूरा क्षेत्र शिवभक्ति में डूबा रहा। ‘बोल बम’ और ‘हर-हर महादेव’ के जयकारों से माहौल भक्तिमय बना रहा।



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पटना में प्रेमजाल में फंसाकर 70 लाख की साइबर ठगी: फेसबुक पर दोस्ती, फिर ऑनलाइन बिजनेस में निवेश कराया; पैसे मिलते ही युवती फरार – Patna News




पटना में साइबर ठगी का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। फेसबुक पर एक युवती से दोस्ती के बाद एक युवक को ऑनलाइन बिजनेस में निवेश कर मोटा मुनाफा कमाने का झांसा दिया गया। भरोसा कायम होने के बाद युवक ने अपनी वर्षों की जमा पूंजी से करीब 70 लाख रुपये निवेश कर दिए। रकम वापस निकालने की कोशिश की तो ठगी का खुलासा हुआ। पीड़ित ने मामले की शिकायत साइबर थाने में दर्ज कराई है। पीड़ित मूल रूप से गया का रहने वाला है और वर्ष 2006 से पटना में एक निजी कंपनी में काम कर रहा है। फेसबुक पर पहले दोस्ती, फिर प्रेम का इजहार पुलिस को दी गई शिकायत के मुताबिक, फेसबुक पर एक युवती ने उसे फ्रेंड रिक्वेस्ट भेजी थी। प्रोफाइल सामान्य लगने पर उसने रिक्वेस्ट स्वीकार कर ली। इसके बाद दोनों के बीच मैसेंजर पर बातचीत शुरू हुई। शुरुआत में दोनों के बीच सामान्य बातचीत होती थी। धीरे-धीरे युवती ने व्यक्तिगत बातें करनी शुरू कर दीं और युवक के प्रति प्रेम का इजहार भी किया। लगातार बातचीत के कारण युवक का उस पर भरोसा बढ़ता गया। इसके बाद युवती ने उसका मोबाइल नंबर लिया। दोनों फोन और फिर व्हाट्सऐप पर बातचीत करने लगे। वीडियो कॉल के जरिए भी संपर्क होने लगा। इसी दौरान युवती ने उसका भरोसा पूरी तरह जीत लिया। ‘ई-रोजर शॉप’ में निवेश का दिया झांसा भरोसा कायम होने के बाद युवती ने युवक को ऑनलाइन बिजनेस के जरिए अच्छी कमाई का ऑफर दिया। उसने ‘ई-रोजर शॉप’ नाम के ऑनलाइन बिजनेस मॉडल के बारे में बताया और दावा किया कि इसमें पैसा लगाकर अच्छा मुनाफा कमाया जा सकता है। युवक उसके झांसे में आ गया और उसने शुरुआत में छोटी रकम निवेश की। उसे कथित तौर पर बताया गया कि उसके निवेश पर मुनाफा हो रहा है और खाते में रकम लगातार बढ़ रही है। मुनाफे की बातों में आकर युवक ने धीरे-धीरे बड़ी रकम निवेश किया। उसे लगातार यही बताया जाता रहा कि उसका पैसा सुरक्षित है और निवेश के साथ उसका रिटर्न बढ़ रहा है। 70 लाख लगाए, निकालने की कोशिश की तो खुला राज

मुनाफे के लालच और अंजान युवती पर अधिक भरोसे के चलते युवक ने अपनी जिंदगी भर की जमा पूंजी से करीब 70 लाख रुपए ऑनलाइन बिजनेस में लगा दिए। उसे उम्मीद थी कि निवेश के बाद उसे अच्छी रकम वापस मिलेगी। जब उसने निवेश की रकम वापस निकालने की कोशिश की तो पैसे नहीं निकले। इसके बाद उसे शक हुआ। उसने युवती से संपर्क कर रकम वापस मांगी, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। उसने युवती से संपर्क करने की कोशिश की और निवेश की गई रकम वापस मांगने लगा। जब पैसे वापस नहीं मिले तो उसे समझ में आया कि वह साइबर ठगी का शिकार हो चुका है। ठगी का एहसास होने के बाद युवक के पैरों तले जमीन खिसक गई। नौकरी कर वर्षों से जमा की गई उसकी बड़ी रकम एक झटके में चली गई थी। साइबर थाने में शिकायत, जांच शुरू ठगी का एहसास होने के बाद युवक ने पटना साइबर थाने में लिखित शिकायत दी। उसने पुलिस को फेसबुक और व्हाट्सऐप पर हुई बातचीत से जुड़ी जानकारी उपलब्ध कराई है। साथ ही उस मोबाइल नंबर की जानकारी भी पुलिस को दी गई है, जिससे युवती उससे बातचीत करती थी। पुलिस अब मोबाइल नंबर, डिजिटल लेनदेन और जिन खातों में रकम ट्रांसफर हुई है, उनकी जांच कर रही है। पुलिस यह भी पता लगाने में जुटी है कि युवती कौन है और कहीं इसके पीछे कोई संगठित साइबर ठगी गिरोह तो काम नहीं कर रहा। सोशल मीडिया की दोस्ती से रहें सावधान यह मामला सोशल मीडिया पर अनजान लोगों से दोस्ती और ऑनलाइन निवेश के नाम पर होने वाली ठगी के खतरे को सामने लाता है। साइबर अपराधी पहले दोस्ती या भावनात्मक संबंध बनाकर भरोसा हासिल करते हैं और बाद में निवेश या बिजनेस में अधिक मुनाफे का लालच देकर बड़ी रकम ट्रांसफर करा लेते हैं। विशेषज्ञों की सलाह है कि सोशल मीडिया पर मिले किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर निवेश न करें। किसी भी ऑनलाइन बिजनेस या निवेश योजना में पैसा लगाने से पहले उसकी स्वतंत्र रूप से जांच करें और असामान्य रूप से अधिक मुनाफे के दावे को ठगी का संभावित संकेत मानें।



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जनवरी में आई थी खबर, जुलाई तक सोता रहा सिस्टम: बालाघाट में जानलेवा बनी मिजल्स-रूबेला बीमारी; 20 बैगा बच्चों की मौत की 5 वजह – Madhya Pradesh News


मिजल्स-रूबेला बीमारी से सबसे ज्यादा प्रभावित अडोरी, मछुरदा और लालपुर ग्राम पंचायतें हैं।

बालाघाट के बिरसा ब्लॉक में मिजल्स-रूबेला से विशेष संरक्षित बैगा आदिवासी परिवारों के 20 बच्चों की मौत हो चुकी है। प्रशासन को बच्चों में बीमारी की जानकारी जनवरी 2026 में ही मिल गई थी, लेकिन प्रभावी कार्रवाई में देरी हुई।

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बिरसा ब्लॉक के आदिवासी गांवों में बीमारी फैलने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग को इसकी जानकारी नहीं थी। 22 जुलाई को अडोरी के सरपंच परशुराम धुर्वे ने एसडीएम को फोन कर स्थिति बताई। इसके बाद उसी दिन स्वास्थ्य विभाग की टीम गांव पहुंची और 23 जुलाई से इलाज शुरू हुआ।

स्वास्थ्य टीम के पहुंचने तक 9 बच्चों की मौत हो चुकी थी। बीमारी आसपास के गांवों तक फैल चुकी थी और कई परिवारों में बच्चे बीमार थे। कुछ बच्चों की हालत इतनी गंभीर थी कि अस्पताल पहुंचने के बाद भी उनकी जान नहीं बच सकी।

भास्कर की इस रिपोर्ट में जानिए कि बीमारी की जानकारी मिलने के बावजूद कार्रवाई में कहां चूक हुई? स्वास्थ्य, टीकाकरण और पोषण की योजनाएं जमीन पर क्यों असर नहीं दिखा सकीं?

बच्चों की मौत के पीछे 5 बड़ी वजहें

1. अस्पताल दूर, झोलाछाप डॉक्टर पर निर्भरता

बीमारी से सबसे ज्यादा प्रभावित अडोरी, मछुरदा और लालपुर ग्राम पंचायतें हैं। यहां से प्राथमिक उप स्वास्थ्य केंद्र 15 से 20 किमी और कम्युनिटी अस्पताल 35 से 40 किमी दूर है। इतनी दूरी के कारण कई परिवार झोलाछाप डॉक्टरों या पारंपरिक इलाज पर निर्भर थे।

सरकारी टीम के पहुंचने के बाद भी कई परिवार इलाज के लिए तैयार नहीं थे। उन्हें समझाने में समय लगा, जिससे गंभीर मरीजों के अस्पताल पहुंचने में देरी हुई।

2. समय पर नहीं मिली मिजल्स-रूबेला की जानकारी

ICMR यानी भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद की रिपोर्ट के मुताबिक, बच्चों की मौत मिजल्स-रूबेला (खसरा) से हुई। बच्चों में त्वचा पर इसके लक्षण भी मिले। गांवों में आंगनबाड़ी और आशा कार्यकर्ताओं का नेटवर्क होने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग को प्रकोप की जानकारी समय पर नहीं मिल सकी।

3. जागरूकता की कमी, टीकाकरण में चूक

मिजल्स-रूबेला से बचाव के लिए बच्चों को 9 महीने और 2 साल की उम्र में टीके लगाए जाते हैं। लेकिन पड़ताल में कई ऐसे गांव सामने आए, जहां बच्चों का टीकाकरण नहीं हुआ था। कई क्षेत्रों में ANM की तैनाती भी नहीं है। इसके अलावा परिवारों का पलायन, जागरूकता की कमी और टीकाकरण को लेकर हिचकिचाहट भी वैक्सीनेशन कवरेज कम रहने की वजह रही।

4. कुपोषण से प्रतिरोधक क्षमता कम हुई

इस क्षेत्र के कई बच्चे गंभीर कुपोषण से जूझ रहे थे। कुपोषित बच्चों को मिलने वाला सरकारी पोषण आहार भी कई महीनों से नहीं मिला था। कुपोषण के कारण बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हुई, जिससे संक्रमण का खतरा बढ़ा।

5. बिरसा ब्लॉक को नहीं मिली जनमन एम्बुलेंस

PVTG यानी विशेष रूप से संवेदनशील जनजातीय समूह के लिए प्रधानमंत्री जनमन योजना के तहत मोबाइल एम्बुलेंस की व्यवस्था है। इसमें एमबीबीएस डॉक्टर समेत स्वास्थ्यकर्मी तैनात होते हैं। बालाघाट में ऐसी 4 एम्बुलेंस हैं, लेकिन बैगा आबादी वाले बिरसा ब्लॉक को इनमें से एक भी नहीं मिली।

किस स्तर पर क्या चूक हुई?

तत्कालीन कलेक्टर: हेल्थ कैंप की मॉनिटरिंग पर सवाल

जनवरी 2026 में मीडिया के जरिए तत्कालीन कलेक्टर मृणाल मीणा को बच्चों में त्वचा संबंधी बीमारी की जानकारी मिली थी। जनवरी-फरवरी में हेल्थ कैंप लगाए गए, लेकिन फरवरी के बाद कैंप बंद हो गए। सवाल यह है कि कैंप के बाद बीमारी की निगरानी क्यों जारी नहीं रही? यदि उसी समय मिजल्स के प्रकोप की पहचान हो जाती, तो समय पर उपचार की संभावना बन सकती थी।

सीएमएचओ, जिला टीकाकरण अधिकारी: वैक्सीनेशन पर ध्यान नहीं

विशेष संरक्षित जनजाति क्षेत्र होने के बावजूद टीकाकरण की जमीनी स्थिति पर सवाल हैं। सीएमएचओ परेश उपलव के मुताबिक, क्षेत्र में 80% टीकाकरण हुआ जबकि पड़ताल में दर्जनों ऐसे परिवार मिले, जिनके बच्चों को एक भी टीका नहीं लगा था। सरकार के टीकाकरण अभियान के बावजूद कई बच्चों तक मिजल्स-रूबेला का टीका क्यों नहीं पहुंचा, इस पर सीएमएचओ से स्पष्ट जवाब नहीं मिल सका।

बीएमओ: बीमारी की जानकारी ही नहीं मिली

रिपोर्ट के मुताबिक, त्रासदी से पहले बीएमओ निमिष गौतम ने इन सुदूर क्षेत्रों का दौरा नहीं किया था। उन्हें क्षेत्र में बीमारी की जानकारी सरपंच के एसडीएम को फोन करने के बाद मिली।

जिला महिला एवं बाल विकास अधिकारी: आंकड़ों पर नजर नहीं रखी

बैगा परिवारों को पोषण आहार नहीं मिलने और बच्चों की मौत के आंकड़ों की निगरानी को लेकर विभाग की भूमिका पर सवाल उठते हैं। स्थानीय आशा और ANM कार्यकर्ताओं के जन्म-मृत्यु रजिस्टर में बच्चों की मौत दर्ज थी, लेकिन इस डेटा पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई, यह भी जांच का विषय है।

जब स्थिति ज्यादा खराब हुई तो बच्चों और महिलाओं को अस्पताल में भर्ती कराया गया।

जब स्थिति ज्यादा खराब हुई तो बच्चों और महिलाओं को अस्पताल में भर्ती कराया गया।

प्रशासन बोला- इलाका चुनौतीपूर्ण है, बीमारी पर नियंत्रण किया

बालाघाट के वर्तमान कलेक्टर कुमार सत्यम ने कहा कि यह स्वास्थ्य के लिहाज से चुनौतीपूर्ण इलाका है। यह मलेरिया प्रभावित क्षेत्र है, जहां हर साल सितंबर, अक्टूबर और नवंबर में मेडिकल कैंप लगाए जाते हैं। इस साल भी इसकी तैयारी थी। नई बीमारी की जानकारी मिलते ही स्वास्थ्य टीम को सक्रिय किया गया और स्थिति को नियंत्रित किया गया।

उन्होंने ब्लॉक में बच्चों के कुपोषित होने की बात भी स्वीकार की और कहा- कुपोषण से निपटने के लिए मध्यम और दीर्घकालीन योजना बनाई जा रही है। स्वास्थ्य टीमें घर-घर जाकर कुपोषित बच्चों की पहचान और उपचार कर रही हैं। जिन तीन गांवों में बच्चों की मौत हुई, वहां स्थिति नियंत्रण में है।

पीने के पानी के स्रोतों की पहचान कर क्लोरीनेशन किया जा रहा है और मच्छरों की रोकथाम के लिए फॉगिंग कराई जा रही है।

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रहस्यमयी बीमारी…8 बच्चों की मौत, कारण नहीं ढूंढ पाए डॉक्टर

बालाघाट जिले के आदिवासी इलाकों में रहस्यमयी बीमारी के चलते 26 जून से अब तक 8 बच्चों की जान चली गई है। जबलपुर मेडिकल कॉलेज और बालाघाट के डॉक्टरों की टीम ने प्रभावित इलाकों का दौरा किया। टीम के मुताबिक, बीमार बच्चों में न्युमोनिया, एनीमिया यानी खून की कमी, डिहाइड्रेशन, बुखार, खुजली, मलेरिया और किडनी पर असर जैसे लक्षण मिले हैं। पढे़ं पूरी खबर…



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