Thursday, August 13, 2026
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पेंच टाइगर रिजर्व में मछली माफिया का आतंक: PMO तक पहुंची शिकायत के बाद NTCA ने एमपी से मांगी एक्शन टेकन रिपोर्ट – Bhopal News


पेंच टाइगर रिजर्व के कोर क्षेत्र (तोतलाडोह बांध) में चल रहे करोड़ों की कमाई के अवैध मछली कारोबार और संगठित माफिया के खिलाफ केंद्र सरकार ने सख्त रुख अपनाया है। नेशनल टाइगर कंजर्वेशन अथॉरिटी (एनटीसीए) ने इस मामले में मप्र सरकार से जवाब तलब करते हुए तत्

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गौरतलब है कि पेंच टाइगर रिजर्व के कोर एरिया में होने के कारण सुप्रीम कोर्ट ने पेंच नदी पर महाराष्ट्र की सीमा में बने तोतलादोह डैम से मछली पकड़ने की सभी गतिविधियों पर पूर्ण प्रतिबंध लगा रखा है। इसके बावजूद मप्र की सीमा से प्रवेश कर संगठित मछली माफिया पिछले कई सालों से बेखौफ होकर मछलियों के शिकार में लिप्त है।

NTCA ने एमपी से मांगी रिपोर्ट

एनटीसीए ने मप्र के पीसीसीएफ वाइल्ड लाइफ (मुख्य वन्यजीव वार्डन) को लिखे पत्र में इस शिकायत की गंभीरता से जांच कराने और मछली माफिया के विरुद्ध ठोस कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं। इसके साथ ही यह भी उल्लेख किया है कि मप्र सरकार की ओर से इन अवैध गतिविधियों को रोकने को लेकर पूर्व में उठाए गए कदम प्रभावी साबित नहीं हुए हैं।

डायनामाइट से हो रहा शिकार

इस मामले में छिंदवाड़ा निवासी कैप्टन ब्रजेश भारद्वाज ने पीएमओ को भेजी शिकायत में कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं, जिसके बाद एनटीसीए ने मप्र सरकार से जवाब मांगा है। शिकायत के मुताबिक, मछली माफिया जलाशय में मछलियां पकड़ने के लिए पेंच नदी और तोतलादोह डैम में डायनामाइट जैसे खतरनाक विस्फोटकों का उपयोग करता है ताकि मछलियां मरकर ऊपर आ जाएं। सबसे चिंताजनक पहलू यह है कि जब वन विभाग का गश्ती दल या विशेष बाघ सुरक्षा बल इन्हें रोकने की कोशिश करते हैं, तो उन पर भी फायर बम और बंदूकों से जानलेवा हमले किए जाते हैं।

हाल ही में नागपुर उच्च न्यायालय ने भी अपने एक अंतरिम आदेश में वन कर्मियों की नावों को आग के हवाले किए जाने की घटना पर गंभीर चिंता जताई थी। इस हिंसक माहौल के कारण पेंच नदी के आसपास के संवेदनशील कोर क्षेत्रों में वन विभाग का स्थानीय अमला गश्ती करने में भी लाचार महसूस कर रहा है।

सैकड़ों करोड़ का टर्नओवर और छिंदवाड़ा-सिवनी के रास्ते महाराष्ट्र सप्लाई

शिकायत के मुताबिक, तोतलादोह डैम से मछली पकड़ने का यह अवैध कारोबार अब एक संगठित सिंडिकेट का रूप ले चुका है, जिसका वार्षिक टर्नओवर सैकड़ों करोड़ रुपये का हो चुका है। बफर जोन के गुमतरा, पुलपुलडोह, टेकारी और परासपानी जैसे दर्जनों गांवों से हर शाम सैकड़ों की संख्या में लोग पैदल ही कोर एरिया की दीवार फांदकर घुसपैठ करते हैं।

रात भर अवैध शिकार करने के बाद सुबह 5 से 9 बजे के बीच इस माल को ठिकाने लगाया जाता है। अवैध रूप से पकड़ी गई ये मछलियां मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा और सिवनी जिलों के गुप्त रास्तों से होते हुए रात के अंधेरे में महाराष्ट्र के नागपुर, सावनेर और खापा जैसे बड़े बाजारों में बिकने भेजी जाती हैं। इस पूरे काले कारोबार को अंजाम देने के लिए टाटा 407, महिंद्रा पिकअप/बोलेरो और मारुति वैन जैसे वाहनों का धड़ल्ले से इस्तेमाल किया जा रहा है।

वर्ष 2001 में 145 मछुआरा परिवारों को दिया जा चुका है पुनर्वास पैकेज

ऐतिहासिक दस्तावेजों और सरकारी रिकॉर्ड के अनुसार, पेंच नेशनल पार्क के अंतिम गठन से पहले यहां के स्थानीय लोगों के अधिकारों का पूरी तरह निपटारा किया जा चुका था। वर्ष 2001-02 में छिंदवाड़ा कलेक्टर के माध्यम से यहां के 145 पात्र मछुआरा परिवारों को विस्थापित और शिफ्ट किया गया था।

इन सभी परिवारों के बीच पुनर्वास और मुआवजे के तौर पर कुल 72 लाख रुपये की राशि बांटी गई थी। इसके अलावा कई मछुआरों को वन विभाग में ही चौकीदार व गश्ती दल में शामिल कर रोजगार भी दिया गया था। इस पुनर्वास के बावजूद सुप्रीम कोर्ट के आदेशों को ठेंगा दिखाकर क्षेत्र में अवैध शिकार का यह खेल लगातार जारी है।

जलीय जैव-विविधता और बाघों के संरक्षण को गंभीर खतरा

तोतलादोह जलाशय केवल मछलियों का नहीं, बल्कि दुर्लभ मगरमच्छों, कछुओं और जलपक्षियों का भी प्राकृतिक शरणस्थल है। माफिया के गुर्गे अपनी नावों की आवाजाही का रास्ता साफ करने के लिए पानी के भीतर मौजूद उन सूखे पेड़ों को उखाड़ रहे हैं, जो प्रवासी पक्षियों के घोंसले बनाने के काम आते हैं।

कोर क्षेत्र में इतनी भारी इंसानी दखलअंदाजी, प्लास्टिक कचरा और आग जलाने से राष्ट्रीय पशु बाघ के प्राकृतिक आवास को अपूरणीय क्षति पहुंच रही है। वन्यजीव विशेषज्ञों का मानना है कि यदि इस सशस्त्र घुसपैठ को तुरंत नहीं रोका गया, तो इसकी आड़ में अंतरराष्ट्रीय शिकारी पेंच के बाघों को भी अपना निशाना बना सकते हैं।

सीमाओं में बदलाव या प्रतिबंध हटाने से केंद्र का साफ इनकार

यह मामला पहले में लोकसभा में भी उठ चुका है, जहां वन्यजीवों को नुकसान पहुंचाए बिना आदिवासियों के लिए मछली पकड़ने का एक सुरक्षित कॉरिडोर बनाने की मांग की गई थी। इस पर केंद्रीय पर्यावरण, वन और जलवायु परिवर्तन राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने संसद में स्पष्ट किया था कि वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत नेशनल पार्क के कोर एरिया में किसी भी प्रकार की व्यावसायिक गतिविधि पूरी तरह प्रतिबंधित है।

केंद्र सरकार ने साफ कर दिया था कि पेंच नेशनल पार्क की सीमाओं में किसी भी प्रकार का बदलाव करने या मछली पकड़ने पर लगा प्रतिबंध हटाने का कोई भी प्रस्ताव विचाराधीन नहीं है।



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5-डे बैंकिंग की मांग को लेकर बैंककर्मियों का प्रदर्शन: जोधपुर में बीजेपी कल निकालेगी तिरंगा वाहन रैली; पढ़ें शहर की प्रमुख खबरें – Jodhpur News




यूनाइटेड फोरम ऑफ बैंक यूनियंस के राष्ट्रव्यापी आह्वान पर बैंक कर्मचारियों और अधिकारियों ने अपनी मांगों को लेकर विरोध प्रदर्शन किया। इसके तहत जोधपुर के जालोरी गेट स्थित एसबीआई (SBI) मुख्य शाखा के बाहर बैंक कर्मियों ने एकत्रित होकर जोरदार प्रदर्शन किया और नारेबाजी की। लाइव ब्लॉग में पढ़ें शहर की प्रमुख खबरें…



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बाहर से कुरकुरा, अंदर से रसदार, अंग्रेज भी थे दीवाने…176 साल पुराना लोटे वाले का जलेबा

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Lote-wale ka Jaleba Nainital : नैनीताल में ‘लोटे वाले की दुकान’ अपने जलेबे के लिए हमेशा से चर्चा में रही है. करीब 176 साल पुरानी इस दुकान की नींव साल 1850 में शिवलाल शाह ने रखी थी. उस समय नैनीताल अंग्रेजी शासन के अधीन था. दुकान पर बनने वाले जलेबा का स्वाद धीरे-धीरे इतना लोकप्रिय हुआ कि कई ब्रिटिश अधिकारी भी उसके मुरीद हो गए. यह दुकान समय के साथ नैनीताल के पुराने बाजार की पहचान बन गई. लोकल 18 से दुकान के मालिक रक्षित साह बताते हैं कि यहां मिलने वाला जलेबा आम जलेबी से आकार में काफी बड़ा और मोटा होता है. बाहर से कुरकुरा और अंदर से रसदार होता है.

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नैनीताल. सरोवर नगरी नैनीताल की पहचान सिर्फ नैनी झील, पहाड़ों और खूबसूरत वादियों से नहीं है, बल्कि यहां की गलियों में बसी कई दशकों पुरानी दुकानों से भी है. इन दुकानों के स्वाद में शहर का इतिहास और संस्कृति आज भी जिंदा है. नैनीताल के बड़ा बाजार में स्थित नैनी जलेबा भंडार, जिसे स्थानीय लोग आज भी ‘लोटे वाले की दुकान’ के नाम से जानते हैं, ऐसी ही दुकान है. करीब 176 साल पुरानी इस दुकान की कहानी देश की आजादी से भी जुड़ी हुई है. दुकान के मालिक रक्षित साह लोकल 18 से बताते हैं कि इस दुकान की शुरुआत साल 1850 में उनके दादा शिवलाल शाह ने की थी. उस समय नैनीताल अंग्रेजी शासन के अधीन था. दुकान पर बनने वाले जलेबा का स्वाद धीरे-धीरे इतना लोकप्रिय हुआ कि कई ब्रिटिश अधिकारी भी खास तौर पर यहां जलेबा खाने पहुंचने लगे. यही वजह है कि यह दुकान समय के साथ नैनीताल के पुराने बाजार की पहचान बन गई.

पांचवीं पीढ़ी के पास कमान

इस दुकान की सबसे खास और ऐतिहासिक कहानी 15 अगस्त 1947 से जुड़ी हुई है. रक्षित साह के मुताबिक, जब देश आजाद हुआ और नैनीताल में पहली बार तिरंगा फहराया गया, तो आजादी की खुशी में उनकी दुकान का जलेबा पूरे शहर में मुफ्त बांटा गया. उस दिन मिठाई सिर्फ स्वाद नहीं, बल्कि आजादी के जश्न और खुशी का हिस्सा बन गई. आज भी दुकान की जगह और जलेबा बनाने की पारंपरिक विधि पीढ़ियों से चली आ रही है. रक्षित साह इस विरासत की पांचवीं पीढ़ी हैं और आज भी अपने पूर्वजों की परंपरा को आगे बढ़ा रहे हैं.

जलेबी से कितना अलग

रक्षित साह बताते हैं कि यहां मिलने वाला जलेबा आम जलेबी से आकार में काफी बड़ा और मोटा होता है. इसका स्वाद और बनावट ही इसे दूसरी मिठाइयों से अलग बनाती है. शुद्ध देसी घी में तैयार होने वाला यह जलेबा बाहर से बेहद कुरकुरा और अंदर से रसदार होता है. रक्षित के मुताबिक, पुराने समय में आसपास के इलाकों से लोग मवेशियों के चारे के लिए पैदल या घोड़े पर सवार होकर नैनीताल आया करते थे. रास्ते में भूख लगने पर लोग इस दुकान पर रुककर जलेबा खाते थे. धीरे-धीरे यही बड़ा आकार और इसकी खास पहचान लोगों की जुबान पर चढ़ गई और इसे जलेबा कहा जाने लगा.

‘जलेबा किंग’ के नाम से मशहूर

इस जलेबे की लोकप्रियता सिर्फ स्थानीय लोगों तक सीमित नहीं रही, बल्कि प्रसिद्ध लेखिका गौरा पंत ‘शिवानी’ भी इस मिठाई की प्रशंसक थीं. रक्षित साह बताते हैं कि शिवानी ने उनके दादा सूरज प्रसाद शाह को ‘जलेबा किंग’ की उपाधि दी थी. आज भी दुकान पर लगी तस्वीरों और पुरानी यादों में इस उपाधि की कहानी दिखाई देती है. दुकान पर कई नामी हस्तियां और देशभर से आने वाले पर्यटक भी जलेबा चख चुके हैं. रक्षित साह के मुताबिक, उनकी दुकान के जलेबे की चर्चा लोकप्रिय कॉमेडी शो ‘द कपिल शर्मा शो’ तक में हो चुकी है.

नयना देवी महोत्सव से कनेक्शन

इस जलेबे का संबंध नैनीताल की धार्मिक और सांस्कृतिक परंपराओं से भी रहा है. रक्षित साह बताते हैं कि नयना देवी महोत्सव के दौरान जलेबा विशेष रूप से माता को अर्पित किया जाता है. महोत्सव के अंतिम दिन जब माता का डोला नगर भ्रमण पर निकलता है, तब करीब चार किलो वजनी विशाल जलेबा विशेष प्रसाद के रूप में चढ़ाया जाता है और बाद में श्रद्धालुओं में बांटा जाता है. यही वजह है कि ‘लोटे वाले की दुकान’ आज सिर्फ मिठाई की दुकान नहीं, बल्कि नैनीताल के स्वाद, संस्कृति और इतिहास की विरासत भी है.

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Priyanshu Gupta

प्रियांशु गुप्‍ता बीते 10 साल से भी ज्यादा समय से पत्रकारिता में सक्रिय हैं. 2015 में भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC), दिल्ली से जर्नलिज्म का ककहरा सीख अमर उजाला (प्रिंट, नोएडा ऑफिस) से अपने करियर की शुरुआत की. य…

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लोगों की भलाई के नाम पर किन रास्तों से भारत आता है चंदा, समझिए FCRA डोनेशन का पूरा खेल


नई दिल्ली. विदेशी चंदे से जुड़े एफसीआरए (फॉरेन कॉन्ट्रिब्यूशन रेगुलेशन एक्ट) संशोधन बिल 2026 से जुड़े विधेयक को 31 सदस्यीय संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) के पास भेज दिया है. सरकार का कहना है कि प्रस्तावित बदलावों का मकसद विदेशी फंडिंग में पारदर्शिता बढ़ाना और यह सुनिश्चित करना है कि विदेश से आने वाले पैसे का इस्तेमाल देश के हितों के खिलाफ न हो. वहीं विपक्ष और कुछ धार्मिक संगठनों ने विधेयक के कुछ प्रावधानों पर सवाल उठाए हैं.

एफसीआरए भारत में विदेश से मिलने वाले चंदे को नियंत्रित करने वाला कानून है. इसे गृह मंत्रालय लागू करता है. इसके तहत एनजीओ, ट्रस्ट, सोसायटी और दूसरी पात्र संस्थाओं को विदेश से पैसा लेने के लिए रजिस्ट्रेशन या किसी खास दानदाता और उद्देश्य के लिए पहले से अनुमति लेनी होती है. अब प्रस्तावित बदलावों को लेकर बहस तेज है, खासकर विदेशी चंदे से खरीदी या बनाई गई संपत्तियों को लेकर.

क्या है एफसीआरए

एफसीआरए यानी विदेशी अंशदान विनियमन अधिनियम, 2010 का मकसद विदेश से आने वाले पैसे की निगरानी करना है. कानून यह तय करता है कि विदेशी चंदा कौन ले सकता है, उसे किस काम में खर्च किया जा सकता है और उसका हिसाब सरकार को किस तरह देना होगा. विदेशी चंदे का इस्तेमाल सामाजिक, शैक्षणिक, धार्मिक, सांस्कृतिक, आर्थिक और वैज्ञानिक गतिविधियों के लिए किया जा सकता है. इसमें स्कूल और अस्पताल चलाना, गरीबों की मदद, ग्रामीण विकास, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, शोध, धार्मिक गतिविधियां और सांस्कृतिक विरासत से जुड़े काम शामिल हैं.

विदेशी चंदा लेने के लिए क्या जरूरी है

किसी संस्था को विदेशी चंदा लेने के लिए एफसीआरए के तहत रजिस्ट्रेशन कराना होता है. अगर संस्था के पास रजिस्ट्रेशन नहीं है तो किसी खास विदेशी दानदाता से किसी खास उद्देश्य के लिए पहले से अनुमति लेकर विदेशी चंदा लिया जा सकता है. विदेशी चंदे के लिए अलग बैंक खाता रखना भी जरूरी है. एफसीआरए के तहत विदेशी योगदान भारतीय स्टेट बैंक (एसबीआई) की नई दिल्ली स्थित मुख्य शाखा में खोले गए एफसीआरए खाते में प्राप्त किया जाता है. संस्था को विदेशी चंदे की प्राप्ति और उसके खर्च का रिकॉर्ड रखना होता है और इसकी जानकारी गृह मंत्रालय को देनी होती है.

विदेशी चंदे का इस्तेमाल कहां किया जा सकता है

एफसीआरए के तहत विदेशी चंदे का इस्तेमाल कई तरह के सामाजिक और जनकल्याण के कामों में किया जा सकता है. इनमें अनाथालय, वृद्धाश्रम, आश्रय स्थल, स्वास्थ्य केंद्र, स्कूल और दूसरी शैक्षणिक संस्थाएं चलाना शामिल है. इसके अलावा महिलाओं और बच्चों के कल्याण, ग्रामीण विकास, कौशल विकास, रोजगार, कृषि, पशुपालन, पर्यावरण, शोध और सांस्कृतिक गतिविधियों के लिए भी विदेशी चंदे का इस्तेमाल किया जा सकता है. धार्मिक संस्थाएं भी कानून में तय शर्तों के तहत विदेशी चंदा ले सकती हैं.

किन कामों में विदेशी चंदा नहीं लगा सकते

विदेशी चंदे का इस्तेमाल भारत की संप्रभुता और अखंडता, सार्वजनिक हित या देश के रणनीतिक और आर्थिक हितों के खिलाफ गतिविधियों में नहीं किया जा सकता. राजनीतिक दलों और कुछ राजनीतिक गतिविधियों को विदेशी फंडिंग देने पर भी रोक है. संस्था को विदेशी चंदे का इस्तेमाल उसी उद्देश्य के लिए करना होता है जिसके लिए उसे पैसा मिला है. नियमों का उल्लंघन होने पर सरकार कार्रवाई कर सकती है. इसमें जुर्माना, एफसीआरए रजिस्ट्रेशन रद्द करना और कुछ मामलों में जेल की सजा तक का प्रावधान है.

प्रशासनिक खर्च की सीमा कितनी है

एफसीआरए के तहत विदेशी चंदे का इस्तेमाल प्रशासनिक खर्चों के लिए एक तय सीमा तक ही किया जा सकता है. मौजूदा नियमों के तहत यह सीमा 20% है. इसमें वेतन, कार्यालय का किराया और दूसरे प्रशासनिक खर्च शामिल हो सकते हैं. इस नियम का मकसद यह सुनिश्चित करना है कि विदेशी चंदे का बड़ा हिस्सा संस्था के घोषित सामाजिक या दूसरे वैध उद्देश्यों पर ही खर्च हो.

नए एफसीआरए बिल में क्या बदलाव प्रस्तावित हैं

एफसीआरए संशोधन बिल 2026 में विदेशी चंदे से बनी संपत्तियों को लेकर अहम बदलाव प्रस्तावित किए गए हैं. अगर किसी संस्था का एफसीआरए रजिस्ट्रेशन रद्द हो जाता है, संस्था खुद इसे वापस कर देती है या समय पर उसका रिन्यूअल नहीं होता है तो विदेशी चंदे से बनी संपत्तियों को एक नामित अथॉरिटी के नियंत्रण में रखने का प्रस्ताव है. अगर संस्था तय समय में अपना एफसीआरए रजिस्ट्रेशन दोबारा हासिल कर लेती है तो संपत्ति और इस्तेमाल नहीं किया गया विदेशी चंदा उसे वापस मिल सकता है. अगर रजिस्ट्रेशन बहाल नहीं होता है तो प्रस्तावित नियमों के तहत संपत्ति पर स्थायी अधिकार का प्रावधान लागू हो सकता है. इसी प्रावधान को लेकर विपक्ष और कई संगठनों ने सवाल उठाए हैं. उनका कहना है कि इससे एफसीआरए रजिस्ट्रेशन खोने वाली संस्थाओं की संपत्तियों पर सरकार का नियंत्रण बढ़ सकता है. सरकार का कहना है कि प्रस्तावित व्यवस्था का मकसद विदेशी चंदे से बनी संपत्तियों के इस्तेमाल और प्रबंधन को स्पष्ट करना है.

धार्मिक संस्थाओं की संपत्ति पर भी चर्चा

एफसीआरए बिल को लेकर धार्मिक संस्थाओं की संपत्तियों का मुद्दा भी चर्चा में है. प्रस्तावित व्यवस्था में विदेशी चंदे से बनी किसी संपत्ति के पूजा स्थल होने की स्थिति में उसके धार्मिक चरित्र को बनाए रखने का प्रावधान बताया गया है. कुछ धार्मिक संगठनों ने आशंका जताई है कि रजिस्ट्रेशन रद्द होने या रिन्यू नहीं होने की स्थिति में उनकी संपत्तियां प्रभावित हो सकती हैं. सरकार का कहना है कि विधेयक किसी धर्म विशेष को निशाना बनाने के लिए नहीं है और इसका मकसद विदेशी फंडिंग की निगरानी को मजबूत करना है.

सरकार एफसीआरए को सख्त क्यों करना चाहती है

सरकार लंबे समय से यह कहती रही है कि विदेशी फंडिंग का इस्तेमाल देश की सुरक्षा, संप्रभुता और सार्वजनिक हित के खिलाफ नहीं होना चाहिए. सरकार को आशंका रहती है कि बिना पर्याप्त निगरानी के विदेशी पैसा ऐसी गतिविधियों में इस्तेमाल हो सकता है जो भारत के हितों के खिलाफ हों. इसी वजह से विदेशी चंदा लेने वाली संस्थाओं के लिए बैंकिंग, रिपोर्टिंग, ऑडिट और फंड के इस्तेमाल से जुड़े नियम सख्त किए गए हैं. सरकार का तर्क है कि विदेशी पैसा लेने वाली संस्थाओं को यह बताना चाहिए कि पैसा कहां से आया और उसका इस्तेमाल कहां किया गया.



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बरेली में Blinkit से जुड़ी दवा फर्म पर छापा: रिकॉर्ड और स्टॉक में गड़बड़ी, दवाओं की खरीद-बिक्री पर रोक – Bareilly News


शशांक राठौर | बरेली4 मिनट पहले

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बरेली में औषधि विभाग ने ऑनलाइन दवा बिक्री के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए Blinkit से जुड़ी फर्म मेसर्स मूनस्टोन वेंचर एलएलपी पर छापेमारी की। जांच में गंभीर अनियमितताएं मिलने के बाद विभाग ने फर्म की दवाओं की खरीद-बिक्री पर तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी है।

कार्रवाई सहायक आयुक्त औषधि, बरेली मंडल संदीप कुमार द्वारा Blinkit से ऑनलाइन दवा मंगाने के बाद सामने आई अनियमितताओं के आधार पर की गई। उनके निर्देश पर औषधि निरीक्षक राजेश कुमार ने टीम के साथ बुधवार को नेकपुर स्थित फर्म पर जांच की।

टीम ने रजिस्टर्ड फार्मासिस्ट विजय कुमार की मौजूदगी में दवा बिक्री लाइसेंस, खरीद-बिक्री के अभिलेख और स्टॉक में रखी एलोपैथिक दवाओं की जांच की। इस दौरान पांच प्रकार की एलोपैथिक दवाओं के रिकॉर्ड और वास्तविक स्टॉक में गंभीर अंतर पाया गया।

जांच में यह कमियां सामने आईं-

बिक्री बिल पर फॉर्म-21 का उल्लेख नहीं था।

फर्म का गलत पता दर्ज मिला।

डॉक्टर का रजिस्ट्रेशन नंबर अंकित नहीं था।

शेड्यूल H1 रजिस्टर अपडेट नहीं मिला।

एक्सपायरी दवाओं के लिए अलग भंडारण व्यवस्था नहीं थी।

कंप्यूटर सिस्टम में दवाओं की बैच नंबर के आधार पर एंट्री नहीं की गई थी।

दवाओं के लिए इस्तेमाल किया जा रहा फ्रिज निर्धारित मानकों के अनुसार संचालित नहीं हो रहा था।

औषधि विभाग ने मौके पर निरीक्षण आख्या तैयार कर सभी कमियों को दर्ज किया और औषधि एवं प्रसाधन सामग्री अधिनियम, 1940 की संबंधित धाराओं के तहत फर्म को अगले आदेश तक दवाओं के क्रय-विक्रय पर रोक लगाने के निर्देश दिए।

निरीक्षण रिपोर्ट आगे की कार्रवाई के लिए सहायक आयुक्त औषधि, बरेली मंडल को भेज दी गई है। विभाग की इस कार्रवाई से ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के माध्यम से दवाओं की बिक्री और नियामकीय मानकों के पालन को लेकर नए सवाल खड़े हो गए हैं।



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CBSE ने जारी किया 12वीं की सप्लीमेंट्री परीक्षा का रिजल्ट, कैसे चेक करेंगे परिणाम?


सेंट्रल बोर्ड  ऑफ सेकेंडरी एजुकेशन यानी CBSE ने बुधवार को 12वीं कक्षा की सप्लीमेंट्री परीक्षा का रिजल्ट जारी कर दिया है। CBSE ने X पर अपने आधिकारिक हैंडल से ट्वीट कर के जानकारी दी है कि जिन छात्रों ने इस परीक्षा में भाग लिया था वे अपना परिणाम DigiLocker Result पोर्टल (results.digilocker.gov.in) पर जाकर चेक कर सकते हैं। छात्रों का रिजल्ट यहां पर उपलब्ध है।

3 कैटेगरियों के लिए हुई थी परीक्षा

आपको बता दें कि CBSE के द्वारा ये परीक्षा 12वीं कक्षा के छात्रों की तीन कैटेगरियों के लिए आयोजित की गई थी।

  • कम्पार्टमेंट वाले छात्र: ऐसे छात्र जो 12वीं बोर्ड की परीक्षा में जरूरी पांच सब्जेक्ट्स में से किसी एक में पास होने लायक अंक नहीं ला पाए थे।
  • 6 विषयों वाले छात्र: ऐसे छात्र जिन्हें एक मुख्य सब्जेक्ट की जगह एक अतिरिक्त सब्जेक्ट लेकर पास घोषित किया गया था, लेकिन वे उस मुख्य सब्जेक्ट की परीक्षा फिर से देना चाहते थे जिसमें वे पास होने के लिए जरूरी नंबर नहीं ला पाए थे।
  • सुधार (इम्प्रूवमेंट) वाले छात्र: ऐसे छात्र जो पहले ही परीक्षा पास कर चुके थे और अपना प्रदर्शन बेहतर करने के लिए दोबारा परीक्षा में शामिल हुए।

कम्पार्टमेंट में कितने छात्र पास हुए?

जानकारी के अनुसार, CBSE की 12वीं कक्षा की सप्लीमेंट्री परीक्षा 2026 के लिए कुल 2,91,576 छात्रों ने रजिस्ट्रेशन कराया था। वहीं, इनमें से 2,75,287 छात्रों ने परीक्षा में भाग लिया था। इनमें से 1,11,056 छात्रों ने इम्प्रूवमेंट कैटेगरी और 1,64,231 छात्रों ने कम्पार्टमेंट कैटेगरी के तहत परीक्षा दी थी। जानकारी के अनुसार, कम्पार्टमेंट कैटेगरी में 53.08 प्रतिशत छात्रों ने परीक्षा में सफलता हासिल की है। आपको बता दें कि CBSE ने बीते 13 मई को 12वीं कक्षा की मुख्य परीक्षा का परिणाम जारी किया था।

छात्र कैसे चेक कर सकते हैं अपना रिजल्ट?

जिन छात्रों ने CBSE की 12वीं कक्षा की सप्लीमेंट्री परीक्षा में भाग लिया था, वे अपना रिजल्ट नीचे दिए गए स्टेप्स को फॉलो कर के चेक कर सकते हैं-:

  • सबसे पहले DigiLocker की आधिकारिक रिज़ल्ट पोर्टल पर जाएं।
  • यहां पर आपको CBSE क्लास 12 सप्लीमेंट्री रिज़ल्ट 2026 का लिंक दिखेगा, उसपर क्लिक करें।
  • इसके बाद लॉगिन के लिए मांगी जा रही जरूरी जानकारी को डाले और सबमिट करें।
  • आपका रिजल्ट आपके सामने आ जाएगा, यहां आप अपने मार्क्स और क्वालिफाइंग स्टेटस को चेक कर लें।
  • आगे की जरूरत के लिए रिजल्ट डाउनलोड करके सेव कर लें।

ये भी पढ़ें- 50 दिन से दूसरे बोर्ड एग्जाम के रिजल्ट का इंतजार कर रहे CBSE 10वीं के छात्र, एडमिशन फाइनल नहीं कर रहे स्कूल

दिल्ली यूनिवर्सिटी में एडमिशन शुरू, CBSE से रिवैल्यूएशन कराने वाले छात्रों के लिए छूट, पढ़ें गाइडलाइन





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फरीदकोट में नौकरानी ने ही चुराए थे 12 तोले गहने: धार्मिक यात्रा पर गया परिवार, पीछे से दीया था वारदात को अंजाम, महिला गिरफ्तार – Faridkot News




फरीदकोट में थाना सिटी कोटकपूरा पुलिस ने घर से18 लाख की करीब कीमत के 12 तोले सोने के गहने चोरी के मामले को ट्रेस कर लिया है। पुलिस जांच में सामने आया कि घर में काम करने वाली नौकरानी ने ही वारदात को अंजाम दिया है। पुलिस ने जांच के बाद आरोपी नौकरानी को गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी महिला की पहचान मोहल्ला काजियां निवासी बिंदू के रूप में हुई, जोकि पिछले करीब छह महीनों से शिकायतकर्ता के घर में घरेलू काम कर रही थी। धार्मिक यात्रा पर गया था परिवार, पीछे से नौकरानी ने दिया वारदात को अंजाम पुलिस के अनुसार, पुराना शहर निवासी ओम प्रकाश जोशी ने थाना सिटी में शिकायत दर्ज करवाई थी कि वह अपनी पत्नी के साथ धार्मिक यात्रा पर गए हुए थे। यात्रा से वापस घर लौटने पर उन्होंने देखा कि घर अलमारी में रखे करीब 12 तोले सोने के गहने गायब थे। जब घर में रखे गहनों के गायब होने का पता चला, तो परिवार ने अपने स्तर पर मामले की पड़ताल शुरू कर दी, घर में आने-जाने वाले लोगों के बारे में जानकारी जुटाई। इस दौरान पिछले करीब छह महीनों से घर में काम कर रही नौकरानी बिंदू पर शक जताया। इसके बाद मामले की जानकारी थाना सिटी पुलिस को दी गई। शिकायत मिलने के बाद पुलिस ने मामले की जांच शुरू करते हुए विभिन्न पहलुओं से पड़ताल की। जांच के दौरान पुलिस ने केस दर्ज कर उसे उक्त महिला नौकरानी को गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि चोरी किए गए सोने के गहने कहां छिपाए गए हैं और इस मामले में कौन-कौन शामिल है। रिमांड हासिल कर आभूषण बरामद किए जाएंगे-एसएचओ इस मामले में थाना सिटी के एसएचओ सुखविंदर सिंह ने बताया कि जांच में महिला को आरोपी पाए जाने पर चोरी का मामला दर्ज कर लिया गया है। आरोपी महिला को गिरफ्तार करके अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड हासिल किया जा रहा है। रिमांड के दौरान आरोपी से गहन पूछताछ की जाएगी और चोरी किए गए गहने बरामद करने के प्रयास किए जाएंगे। पुलिस मामले की आगे की जांच कर रही है।



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अरवल अस्पताल से मोटरसाइकिल चोरी, CCTV वीडियो वायरल: पुलिस फुटेज के आधार पर चोर की पहचान में जुटी – Arwal News




अरवल सदर अस्पताल परिसर से दो दिन पहले एक डाटा एंट्री ऑपरेटर की मोटरसाइकिल चोरी हो गई। चोरी की यह पूरी घटना अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरे में कैद हो गई, जिसका वीडियो अब सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। पीड़ित की पहचान औरंगाबाद जिले के दाउदनगर थाना क्षेत्र स्थित जमुआमा गांव निवासी अंकित कुमार के रूप में हुई है। अंकित अरवल में डाटा एंट्री ऑपरेटर के पद पर कार्यरत हैं। उन्होंने अपनी मोटरसाइकिल रोज की तरह सदर अस्पताल परिसर में खड़ी की थी, जिसके बाद चोर ने मौका पाकर उसे चुरा लिया। घटना की सूचना मिलने पर पीड़ित ने अज्ञात चोर के खिलाफ थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई है। पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर चोर की पहचान कर उसकी गिरफ्तारी के लिए छापेमारी कर रही है। बुधवार को अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (SDPO) कुमार संजय ने बताया कि सीसीटीवी फुटेज की मदद से चोर की पहचान कर ली गई है। उन्होंने आश्वासन दिया कि चोर को जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। अरवल पुलिस ने कहा कि जिले में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए पुलिस लगातार सक्रियता से काम कर रही है।



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रीवा में सड़क पर अतिक्रमण, कलेक्टर से मिले रहवासी: कब्जा हटाने और पक्की सड़क की मांग लेकर कलेक्ट्रेट पहुंचे लोग – Rewa News




रीवा शहर के वार्ड क्रमांक 09 स्थित सुदर्शन नगर के रहवासी कॉलोनी की मुख्य सड़क की बदहाली और अतिक्रमण की समस्या को लेकर बुधवार को एकजुट होकर कलेक्ट्रेट पहुंचे। रहवासियों ने कलेक्टर को आवेदन सौंपकर सड़क से अतिक्रमण हटाने, जल निकासी की व्यवस्था कराने और पक्की सड़क का निर्माण कराने की मांग की। रहवासियों ने बताया कि कॉलोनी का विकास वर्ष 2010 से शुरू हुआ था और वर्तमान में यहां करीब 50 से 55 परिवार निवास कर रहे हैं। कॉलोनी में मकानों का निर्माण होने के बावजूद मुख्य मार्ग की स्थिति बेहद खराब है। रहवासियों का कहना है कि प्लॉट खरीदते समय मुख्य सड़क की चौड़ाई करीब 20 फीट बताई गई थी, लेकिन वर्तमान में अतिक्रमण के कारण मार्ग की चौड़ाई करीब 10 से 15 फीट ही रह गई है। बारिश में कीचड़ और गड्ढों से परेशानी रहवासियों के अनुसार, मुख्य सड़क पर जगह-जगह गहरे गड्ढे हैं और बारिश का पानी जमा होने से पूरा मार्ग कीचड़ में तब्दील हो जाता है। इससे स्कूली बच्चों, महिलाओं, बुजुर्गों और मरीजों को आने-जाने में परेशानी होती है। कई बार वाहन भी कीचड़ में फंस जाते हैं। रहवासियों ने आवेदन में दावा किया कि कॉलोनी की मुख्य सड़क आज तक राजस्व अभिलेख यानी खसरे में सड़क के रूप में दर्ज नहीं की गई है। उनका आरोप है कि मार्ग पर कुछ लोगों ने अतिक्रमण कर सड़क की चौड़ाई कम कर दी है। इस संबंध में पहले भी संबंधित अधिकारियों को लिखित आवेदन दिए गए, लेकिन कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई। राजस्व अभिलेख में सड़क दर्ज कराने की मांग कलेक्ट्रेट पहुंचे रहवासियों ने मांग की कि मुख्य मार्ग को राजस्व अभिलेख में सड़क के रूप में दर्ज कराया जाए। सड़क से सभी प्रकार के अतिक्रमण हटाकर उसकी मूल स्वीकृत चौड़ाई करीब 20 फीट बहाल की जाए। साथ ही सड़क का समतलीकरण, जल निकासी की व्यवस्था और पक्की सड़क का निर्माण कराया जाए। रहवासियों ने यह भी मांग की कि भविष्य में सड़क पर दोबारा अतिक्रमण न हो, इसके लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए। आवेदन की प्रतिलिपि विश्वविद्यालय थाना प्रभारी, नगर निगम आयुक्त, एसडीएम रीवा और स्थानीय जनप्रतिनिधि को भी दी गई है।



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15 अगस्त पर मेहमानों को खिलाएं तिरंगी नारियल बर्फी, जानें आसान रेसिपी!

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15 August Recipe: 15 अगस्त हर भारतीय के लिए एक खास मौका होता है. इस दिन घरों, स्कूलों और दूसरी जगहों को तिरंगे के रंगों से सजाया जाता है. अगर आप इस मौके पर कुछ खास और स्वादिष्ट बनाना चाहते हैं, तो ‘तिरंगा नारियल बर्फी’ एक बेहतरीन विकल्प हो सकता है. नारियल, दूध और चीनी से बनी यह मिठाई न सिर्फ़ स्वादिष्ट होती है, बल्कि देखने में भी बहुत आकर्षक लगती है. आइए जानते हैं इसे घर पर बनाने की आसान रेसिपी…

तिरंगी नारियल बर्फी के लिए सामग्री
इस बर्फी को बनाने के लिए आपको लगभग 2 कप सूखा कद्दूकस किया हुआ नारियल, 1 कप कंडेंस्ड मिल्क, 2-3 बड़े चम्मच दूध, 1 छोटा चम्मच घी और थोड़ा सा इलायची पाउडर चाहिए होगा. तिरंगा लुक देने के लिए आप केसरिया और हरे रंग के फ़ूड कलर का इस्तेमाल कर सकते हैं, सफ़ेद परत के लिए मिश्रण को बिना रंग का ही रहने दें.

सबसे पहले नारियल का मिश्रण तैयार करें
भारी तले वाली कड़ाही में थोड़ा घी गरम करें. कद्दूकस किया हुआ नारियल डालें और धीमी आंच पर 2-3 मिनट तक हल्का भूनें, ध्यान रहे कि नारियल का रंग ज़्यादा न बदले. इसके बाद, कंडेंस्ड मिल्क डालें और लगातार चलाते रहें. जब मिश्रण गाढ़ा हो जाए और कड़ाही के किनारे छोड़ने लगे, तो इलायची पाउडर डालें और आंच बंद कर दें.

तीन रंगों की परतें बनाना
तैयार मिश्रण को तीन बराबर हिस्सों में बांट लें. पहले हिस्से को सफ़ेद ही रहने दे. दूसरे हिस्से में थोड़ा सा केसरिया फ़ूड कलर और तीसरे हिस्से में हरा फ़ूड कलर मिलाएं. रंगों को बहुत गहरा न करें ताकि बर्फी आकर्षक और स्वादिष्ट दिखे.

एक प्लेट या ट्रे पर घी लगाएं और केसरिया रंग वाले मिश्रण को पहली परत के रूप में फैलाएं. इसके ऊपर सफ़ेद मिश्रण की परत लगाएं और फिर सबसे ऊपर हरा मिश्रण फैलाएं, हर परत को अच्छी तरह दबाएं. चम्मच या स्पैटुला की मदद से सतह को चिकना कर लें.

सेट होने के बाद काटें
बर्फी को कमरे के तापमान पर ठंडा होने दें, फिर लगभग 1-2 घंटे के लिए फ्रिज में रख दें. जब यह अच्छी तरह सेट हो जाए, तो इसे चौकोर या डायमंड शेप में काट लें. अगर चाहें तो ऊपर से बारीक कटे हुए बादाम और पिस्ते से सजा सकते हैं.

स्वाद और देशभक्ति का मेल
तिरंगी नारियल बर्फी आज़ादी के दिन की पार्टियों, स्कूल के कार्यक्रमों या घर पर होने वाले छोटे-मोटे जश्न के लिए एक शानदार मिठाई है. इसे बनाना आसान है और इसके तीन रंग 15 अगस्त के जश्न में एक खास रंग भर देते हैं.

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( Disclaimer : इस खबर में दी गई जानकारी और सलाह विशेषज्ञों से हुई बातचीत पर आधारित है. ये सामान्य जानकारी है, व्यक्तिगत सलाह नहीं. इसलिए किसी भी सलाह को अपनाने से पहले विशेषज्ञ की सलाह जरूर लें. किसी भी नुकसान के लिए न्यूज-18 जिम्मेदार नहीं रहेगा



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