उत्तराखंड की चारधाम यात्रा के दौरान यमुनोत्री और गंगोत्री धाम में श्रद्धालुओं की मौत का सिलसिला जारी है। यमुनोत्री धाम में बुधवार को दो और श्रद्धालुओं की हृदय गति रुकने से मौत हो गई। इसके साथ ही इस यात्रा सीजन में अकेले यमुनोत्री धाम में मरने वालों की संख्या 11 हो गई है। गंगोत्री धाम में भी अब तक 8 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। दोनों धामों को मिलाकर कुल मृतकों का आंकड़ा 19 पहुंच गया है। अधिकतर मामलों में प्रारंभिक कारण हार्ट अटैक या अचानक तबीयत बिगड़ना बताया गया है। प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग लगातार यात्रियों को स्वास्थ्य जांच कराने, ऊंचाई वाले क्षेत्रों में सावधानी बरतने और अस्वस्थ महसूस होने पर तुरंत चिकित्सा सहायता लेने की सलाह दे रहे हैं। यात्रा फिलहाल सुचारु रूप से जारी है। महाराष्ट्र और गुजरात के श्रद्धालुओं की मौत मृतकों की पहचान महाराष्ट्र के अमरावती निवासी 64 वर्षीय वंदना विजय सिंह बघेल और गुजरात के भावनगर निवासी 68 वर्षीय पटेल नितिनभाई बलूभाई के रूप में हुई है। दोनों श्रद्धालु 21 मई 2026 को यमुनोत्री धाम में दर्शन के लिए पहुंचे थे। दर्शन के दौरान अचानक उनकी तबीयत बिगड़ गई। परिजन उन्हें तत्काल प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र जानकीचट्टी लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार, दोनों की मौत का संभावित कारण हार्ट अटैक माना जा रहा है। पुलिस ने आवश्यक कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी है। यमुनोत्री में सबसे ज्यादा मौतें चारधाम यात्रा के मौजूदा सीजन में यमुनोत्री धाम में अब तक 11 श्रद्धालुओं की मौत हो चुकी है। लगातार सामने आ रहे मामलों ने स्वास्थ्य व्यवस्थाओं और यात्रियों की फिटनेस को लेकर चिंता बढ़ा दी है। प्रशासन का कहना है कि अधिकतर मृतकों की उम्र 60 वर्ष से ऊपर रही है और कई मामलों में पहले से स्वास्थ्य संबंधी दिक्कतें भी सामने आई हैं। गंगोत्री में भी 8 श्रद्धालुओं की जान गई गंगोत्री धाम में भी यात्रा शुरू होने के बाद से अब तक 8 श्रद्धालुओं की मौत दर्ज की गई है। दोनों धामों को मिलाकर कुल मौतों का आंकड़ा 19 तक पहुंच चुका है। यात्रा मार्ग पर स्वास्थ्य जांच, मेडिकल कैंप और एंबुलेंस सेवाएं बढ़ाई गई हैं, लेकिन ऊंचाई और मौसम के कारण बुजुर्ग यात्रियों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की सलाह दी जा रही है। आज यमुनोत्री में 22 हजार, गंगोत्री में 25 हजार पंजीकरण चारधाम यात्रा के लिए श्रद्धालुओं का उत्साह लगातार बना हुआ है। बुधवार को यमुनोत्री धाम के लिए 22 हजार और गंगोत्री धाम के लिए 25 हजार पंजीकरण दर्ज किए गए। यमुनोत्री धाम के कपाट सुबह 6:30 बजे पूजा-अर्चना के बाद श्रद्धालुओं के लिए खोल दिए गए। मौसम साफ रहने से यात्रा सामान्य रूप से संचालित हो रही है और धामों में भीड़ भी सामान्य बनी हुई है।
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यमुनोत्री में 2 और श्रद्धालुओं की हार्ट अटैक से मौत: सीजन में मृतकों का आंकड़ा 19 पहुंचा; महाराष्ट्र और गुजरात के यात्री शामिल – Uttarkashi News
मुजफ्फरनगर में हीट स्ट्रोक का हाई अलर्ट जारी: दोपहर में बाहर निकलने से बचने की सलाह, इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर 24 घंटे सक्रिय – Muzaffarnagar News
मुज़फ़्फ़रनगर में भीषण गर्मी और लगातार बढ़ते तापमान ने हालात चिंताजनक कर दिए हैं। जिले में हीट स्ट्रोक का खतरा तेजी से बढ़ने के बाद प्रशासन ने हाई अलर्ट जारी किया है। जिला आपदा प्रबंधन विभाग की ओर से एडवाइजरी जारी कर लोगों से दोपहर 12 बजे से 3 बजे तक विशेष सतर्कता बरतने की अपील की गई है। प्रशासन ने कहा है कि इस दौरान तेज धूप और गर्म हवाएं सीधे शरीर पर असर डाल रही हैं और थोड़ी सी लापरवाही भी जानलेवा साबित हो सकती है। एडीएम प्रशासन संजय कुमार ने बताया कि इंसानों के साथ-साथ पशु-पक्षी भी भीषण गर्मी से प्रभावित हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि छोटे बच्चों, बुजुर्गों और जानवरों को बंद वाहनों में छोड़ना बेहद खतरनाक है, क्योंकि कुछ ही मिनटों में वाहन का तापमान असामान्य रूप से बढ़ जाता है। हीट स्ट्रोक के लक्षणों को पहचानने की सलाह डीएम उमेश कुमार मिश्रा ने बताया कि लंबे समय तक धूप में रहने से शरीर का तापमान तेजी से बढ़ जाता है, जिससे हीट स्ट्रोक की स्थिति बन सकती है। इसके प्रमुख लक्षणों में चक्कर आना, सिरदर्द, घबराहट, उल्टी, कमजोरी, अत्यधिक पसीना आना और बेहोशी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे लक्षण दिखाई देने पर तुरंत चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए। हल्के कपड़े पहनें, ज्यादा तरल पदार्थ लें एडवाइजरी में लोगों को दोपहर के समय घरों में रहने की सलाह दी गई है। यदि जरूरी काम से बाहर निकलना पड़े तो सिर और चेहरे को ढककर रखें तथा हल्के और सूती कपड़े पहनें। प्रशासन ने शरीर में पानी की कमी न होने देने के लिए अधिक मात्रा में पानी, नींबू पानी, छाछ और अन्य तरल पदार्थों के सेवन की सलाह दी है। साथ ही बासी और संक्रमित भोजन से बचने को कहा गया है, क्योंकि गर्मी में भोजन जल्दी खराब हो जाता है। पशु-पक्षियों के लिए पानी रखने की अपील प्रशासन ने लोगों से पशु-पक्षियों के लिए भी पानी की व्यवस्था करने की अपील की है। घरों की छतों, बालकनी और बाहर पानी से भरे बर्तन रखने की सलाह दी गई है, ताकि भीषण गर्मी में परिंदों और आवारा पशुओं को राहत मिल सके। कलेक्ट्रेट स्थित इमरजेंसी ऑपरेशन सेंटर को 24 घंटे सक्रिय रखा गया है। किसी भी आपात स्थिति में लोग टोल फ्री नंबर 1077, 0131-2436918 और 9412210080 पर संपर्क कर सकते हैं।
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‘मुझे मरना है’, कहकर युवक गंगा में कूदा: छलांग लगाने से पहले एक से दूसरे नाव पर चढ़ रहा था, नाव स्टार्ट होते ही लगाई छलांग – Bhagalpur News
भागलपुर में गुरुवार को एक युवक ने गंगा में छलांग लगा दी। युवक की पहचान अभी नहीं हुई है। बताया जा रहा कि सुबह 10 बजे युवक बरारी घाट पहुंचा था। गंगा किनारे कुछ नाव खड़ी थी। युवक नाव पर चढ़ा, फिर बगल में खड़ी दूसरी नाव पर चढ़ गया। चश्मदीद अंकित कुमार पासवान ने कहा कि युवक एक नाव से दूसरे नाव पर जा रहा था। वो काफी संदिग्ध हरकतें कर रहा था। हमने उसे कहा भी कि तुमको मरना है क्या, इस तरह से क्यों कर रह हो ? युवक ने कहा कि हां मरना है…। इसके बाद उसने नदी में छलांग लगा दी। युवक अभी लापता है। एसडीआरएफ की टीम अभी उसे तलाश रही है। मामला बरारी घाट का है। नाव थोड़ी दूर आगे बढ़ी थी, तभी कूद गया नाव पर सवार यात्रियों ने कहा कि जिस नाव पर वो चढ़ा था नाविक ने उसे स्टार्ट कर दिया था। नाव कुछ ही दूर आगे बढ़ी थी, इतने में उसने नाव से छलांग लगी दी। लोगों ने घटना की जानकारी तुरंत बरारी पुलिस को दी। मौके पर पहुंची बरारी पुलिस ने एसडीआरफ की टीम ने बुलाया। अभी टीम युवक की तलाश कर रही है। हालांकि युवक ने गंगा में छलांग क्यों लगाई। अभी तक स्पष्ट जानकारी नहीं मिली है।
पुलिस ने नाव किया जब्त बरारी पुलिस ने नाविक को हिरासत में ले लिया है। फिलहाल नाव को जब्त कर लिया गया है। अन्य यात्रियों को दूसरी नाव के जरिए नवगछिया के लिए भेज दिया गया है। बता दें कि भागलपुर से सीमांचल को जोड़ने वाली विक्रमशिला सेतु के पाया संख्या 133 का स्लैब टूटने के बाद सड़क मार्ग पूरी तरह बाधित हो गया है। लोगों का एकमात्र सहारा नाव ही है। नाव से लोग भागलपुर से नवगछिया और नवगछिया से भागलपुर आते-जाते हैं। बड़ी संख्या में नाविक बरारी गंगा घाट पर रहते हैं। फिलहाल रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है।
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मलमास में 84 कोस परिक्रमा का क्या रहस्य है, जिसे जानने के लिए पैदल जाते हैं लोग
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Braj 84 Kosh Yatra: मलमास में ब्रज की 84 कोस परिक्रमा के लिए दिल्ली-एनसीआर से उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाब. 46 डिग्री तापमान भी नहीं डिगा पाया आस्था श्रद्धालु पैदल तय कर रहे 268 किलोमीटर लंबी यात्रा. मान्यता है कि पुरुषोत्तम मास में परिक्रमा करने से अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य फल मिलता है.
फरीदाबाद. मलमास में ब्रज की 84 कोस परिक्रमा का महत्व और बढ़ जाता है. यही वजह है कि इन दिनों फरीदाबाद, बल्लभगढ़ और पूरे दिल्ली एनसीआर से बड़ी संख्या में श्रद्धालु ब्रज की ओर निकल पड़े हैं. कोई पैदल चलकर परिक्रमा कर रहा है तो कोई परिवार और साथियों के साथ भजन-कीर्तन करते हुए इस कठिन यात्रा को पूरा कर रहा है. तपती गर्मी और 46 डिग्री तापमान भी श्रद्धालुओं की आस्था को डिगा नहीं पा रहा. मान्यता है कि ब्रज की 84 कोस परिक्रमा करने से जन्म-जन्मांतर के पाप नष्ट हो जाते हैं और व्यक्ति को अश्वमेध यज्ञ के बराबर पुण्य फल मिलता है.
Local18 से बातचीत में बल्लभगढ़ के महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं 84 कोस में गिरिराज महाराज की परिक्रमा सबसे मुख्य मानी जाती है. मलमास को भगवान ने अपना नाम दिया है इसलिए इसे पुरुषोत्तम मास भी कहा जाता है. शास्त्रों में भगवान श्रीकृष्ण और श्री लक्ष्मी नारायण को पुरुषोत्तम कहा गया है. जो भक्त इस पुरुषोत्तम मास में परिक्रमा करता है उसे एक-एक कदम पर अश्वमेध यज्ञ का फल मिलता है. जैसे-जैसे श्रद्धालु आगे बढ़ता है वैसे-वैसे उसके पापों का नाश होता जाता है.
महंत कामेश्वरानंद वेदांताचार्य बताते हैं कि ब्रज भूमि भगवान श्रीकृष्ण और राधारानी की लीला भूमि है. वेद-पुराणों में इसका विशेष महत्व बताया गया है. वाराह पुराण के अनुसार पृथ्वी पर मौजूद 66 अरब तीर्थ चातुर्मास के दौरान ब्रज में आकर निवास करते हैं. यही कारण है कि मलमास में 84 कोस परिक्रमा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है. जो श्रद्धालु गोवर्धन महाराज और गिरिराज जी की परिक्रमा करता है उसके जन्म-जन्मांतर के पाप समाप्त हो जाते हैं और उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है.
करीब 268 किलोमीटर लंबी यह परिक्रमा मथुरा के अलावा राजस्थान और हरियाणा के होडल क्षेत्र के गांवों से होकर गुजरती है. पूरे मार्ग में लगभग 25 पड़ाव स्थल बनाए गए हैं जहां श्रद्धालुओं के ठहरने और आराम करने की व्यवस्था रहती है. इस परिक्रमा मार्ग में करीब 1300 गांव, 1100 सरोवर, 36 वन-उपवन और कई पहाड़-पर्वत पड़ते हैं. श्रद्धालु उन स्थलों के भी दर्शन करते हैं जो भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं के साक्षी माने जाते हैं.
रोजाना चालीस किमी पैदल चलते हैं
बल्लभगढ़ निवासी कालीचरण मित्तल बताते हैं कि मैंने इस बार 84 कोस की परिक्रमा सात दिन में पूरी की. मैंने होडल से परिक्रमा शुरू की थी. हर तीसरे साल मलमास में यह परिक्रमा लगाई जाती है और इसका बहुत बड़ा महत्व है. हम रोज करीब 40 किलोमीटर चलते थे. सुबह हो दोपहर हो या शाम बस चलते ही रहते थे. रात को करीब 10 बजे रुकते थे. कालीचरण मित्तल बताते हैं भीषण गर्मी पड़ रही हैं इसलिए मैंने पूरी परिक्रमा चप्पल पहनकर की. 46 डिग्री तापमान था सड़क पूरी गर्म रहती थी इसलिए प्लास्टिक की चप्पल पहन ली थी. रास्ते में कोई परेशानी नहीं हुई. मैंने ज्यादा भंडारा या पकवान नहीं खाए. एक टाइम खाना खा लिया जूस पी लिया उसी में यात्रा चलती रही.
76 वर्षीय कालीचरण मित्तल भी यात्रा पर निकले
76 वर्षीय कालीचरण मित्तल बताते हैं कि इस उम्र में इतनी लंबी परिक्रमा पूरी करना मेरे लिए किसी आशीर्वाद से कम नहीं है. अब उम्र ज्यादा हो गई है शायद आगे परिक्रमा न कर पाऊं. लेकिन इस बार बहुत अच्छे से यात्रा पूरी हो गई. रास्ते में गद्दे, पंखे, कूलर और एसी तक की व्यवस्था थी. रात को थोड़ा आराम करते थे और सुबह तीन-चार बजे फिर परिक्रमा शुरू कर देते थे. सुबह नहाने-धोने के बाद दोबारा यात्रा पर निकल पड़ते थे. पूरी परिक्रमा श्रद्धालुओं से भरी हुई थी.
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Vinod Kumar Katwal, a Season journalist with 14 years of experience across print and digital media. I have worked with some of India’s most respected news organizations, including Dainik Bhaskar, IANS, Punjab K…और पढ़ें
शिवपुरी में बंद किराना दुकान में आग: गश्त कर रही पुलिस ने देखीं लपटें; पड़ोसी के बोरवेल से बुझाई आग, डेढ़ लाख का सामान खाक – Shivpuri News
शिवपुरी जिले के लुकवासा कस्बे में स्टेशन रोड स्थित एक किराना दुकान में बुधवार देर रात अचानक आग लग गई। इस घटना में दुकान के अंदर रखा करीब डेढ़ लाख रुपए का सामान जलकर राख हो गया। रात में गश्त कर रही पुलिस टीम ने शटर से लपटें उठती देख दुकानदार को सूचना दी और करीब एक घंटे की मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। दुकान संचालक पंकज गुप्ता ने बताया कि उन्होंने बुधवार रात करीब 10:30 बजे अपनी दुकान बंद की थी। इसके बाद रात लगभग 12 बजे गश्त पर निकली पुलिस टीम ने बंद दुकान से आग की लपटें उठती देखीं। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तत्काल दुकानदार को घटना की सूचना देकर मौके पर बुलाया। पड़ोसी के बोरवेल से बुझाई आग
दुकानदार के मौके पर पहुंचने के बाद शटर का ताला तोड़ा गया। इसके बाद पड़ोस में लगे बोरवेल को चालू कर पानी से आग बुझाने का प्रयास शुरू किया गया। मौके पर मौजूद लोगों और पुलिस की मदद से करीब एक घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद आग पर पूरी तरह काबू पा लिया गया। शॉर्ट सर्किट से आग लगने की आशंका
फिलहाल आग लगने के स्पष्ट कारणों का पता नहीं चल सका है। हालांकि, प्रारंभिक जांच के आधार पर शॉर्ट सर्किट को आग लगने का संभावित कारण माना जा रहा है। इस घटना में दुकान का लगभग सारा किराना सामान जलकर नष्ट हो गया है, जिससे व्यापारी को भारी आर्थिक नुकसान हुआ है।
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ताड़ का रस या एनर्जी ड्रिंक? मॉडर्न पैकेजिंग में खूब पसंद किया जा रहा है देसी नीरा
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Neera Cafe Hyderabad: हैदराबाद के नेकलेस रोड पर स्थित 13 करोड़ की लागत वाला ‘नीरा कैफे’ पारंपरिक ग्रामीण ताड़ के पेय ‘नीरा’ को आधुनिक रूप दे रहा है. कोल्ड-चेन टेक्नोलॉजी का उपयोग करके, इसे ताज़ा और नॉन-अल्कोहलिक बनाए रखा जाता है. यह पहल न केवल स्वास्थ्य के प्रति जागरूक युवाओं को प्राकृतिक विकल्प दे रही है, बल्कि ताड़ निकालने वाले गौड़ा समुदाय के लिए रोजगार और सम्मान के नए अवसर भी खोल रही है. यह भारत की सांस्कृतिक विरासत को आधुनिक बाजार में सफलतापूर्वक स्थापित करने का एक उत्कृष्ट उदाहरण है.
हैदराबाद: आधुनिकता की चकाचौंध के बीच जहां पारंपरिक देसी पेय हाशिए पर जा रहे हैं वहीं तेलंगाना की राजधानी हैदराबाद में एक अनोखा प्रयोग देश का ध्यान अपनी ओर खींच रहा है. हैदराबाद के प्रसिद्ध हुसैन सागर झील के किनारे, नेकलेस रोड पर बना नीरा कैफे आज के शहरी युवाओं के लिए एक नया हॉटस्पॉट बन चुका है. करीब 13 करोड़ रुपए की लागत से तैयार यह कैफे किसी इंटरनेशनल आउटलेट को टक्कर देता है लेकिन यहां मिलने वाला मेन्यू पूरी तरह से स्वदेशी है.
यह कैफे सिर्फ एक फूड आउटलेट नहीं है बल्कि यह पारंपरिक गौड़ा समुदाय के रोजगार को बचाने और एक प्राकृतिक हेल्थ ड्रिंक को ग्लोबल पहचान दिलाने का एक सफल सामाजिक-आर्थिक मॉडल है. ताड़ और खजूर के पेड़ों से निकलने वाला नीरा औषधीय गुणों से भरपूर और पूरी तरह से नॉन-अल्कोहलिक पेय है. हालांकि इसकी सबसे बड़ी चुनौती यह थी कि सूर्योदय के बाद तापमान बढ़ते ही यह फर्मेंट होकर नशीली ताड़ी में बदल जाता है.
कोल्ड-चेन तकनीक और स्वच्छता का संगम
इस समस्या से निपटने के लिए सरकार ने कोल्ड-चेन टेक्नोलॉजी का सहारा लिया है. गांवों के कलेक्शन सेंटरों से नीरा को निकालते ही उसे तुरंत 4°C तापमान पर स्टोर कर सीधे कैफे तक पहुंचाया जाता है. कैफे में ग्राहकों को बिल्कुल हाइजीनिक, चिल्ड और आधुनिक पैकेजिंग में शुद्ध नीरा परोसा जाता है जिसकी कीमत करीब 50 रुपए प्रति ग्लास रखी गई है. वहीं दूसरी तरफ, बाजारों में पारंपरिक ताड़ी का दाम 30 से 40 रुपए प्रति लीटर के आसपास होता है. कम कीमत और सही रखरखाव न होने के कारण ताड़ी निकालने वाले कारीगरों को पहले बहुत कम मुनाफा मिलता था लेकिन नीरा कैफे मॉडल ने इस प्राकृतिक पेय की ब्रांड वैल्यू को कई गुना बढ़ा दिया है.
ग्रामीण हुनर को मिली कॉर्पोरेट पहचान
तेलंगाना सरकार की अनूठी नीरा पॉलिसी के तहत इस पेय को बेचने का विशेष अधिकार केवल इसी समुदाय के पास है. 300 से 500 लोगों की बैठने की क्षमता वाले इस आधुनिक कैफे ने यह साबित कर दिया है कि अगर सही मार्केटिंग और सरकारी संरक्षण मिले, तो भारत के ग्रामीण हुनर को एक हाई-एंड कॉर्पोरेट ब्रांड में बदला जा सकता है. यह प्रयोग न केवल स्वास्थ्य के प्रति जागरूक युवाओं को एक प्राकृतिक विकल्प दे रहा है, बल्कि ताड़ निकालने वाले गौड़ा समुदाय के लिए रोजगार और सम्मान के नए रास्ते भी खोल रहा है. रोजगार और संस्कृति को सहेजता यह प्रयोग वाकई देश में अपनी तरह का इकलौता और प्रेरणादायक मॉडल है जो भविष्य में अन्य राज्यों के लिए एक बेहतर उदाहरण साबित होगा.
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Vicky Rathore (born July 25, 1994) is a multimedia journalist and digital content specialist currently working with News18 Rajasthan. I have over 8 years of experience in digital media, where I specialize in cr…और पढ़ें
iQOO ने लॉन्च किया 200MP कैमरा, 8000mAh बैटरी वाला तगड़ा फोन
iQOO ने 200MP कैमरा और 8000mAh बैटरी वाला फोन लॉन्च कर दिया है। आईकू का यह फोन पिछले दिनों भारतीय सर्टिफिकेशन वेबसाइट (BIS) पर भी देखा गया है। इस फोन में 16GB तक रैम और 1TB तक स्टोरेज मिलता है। चीनी ब्रांड का यह फोन गेमिंग लवर्स के लिए खास तौर पर उतारा गया है। साथ ही, फोन में वाटर और डस्ट प्रूफ रेटिंग से लैस होगा।
कितनी है कीमत?
iQOO 15T को फिलहाल कंपनी ने चीनी मार्केट में पेश किया है, जल्द ही इसे भारत समेत अन्य ग्लोबल मार्केट में पेश किया जाएगा। यह फोन 5 स्टोरेज वेरिएंट्स- 12GB RAM + 256GB, 12GB RAM + 512GB, 16GB RAM + 256GB, 16GB RAM + 512GB और 16GB RAM + 1TB में आता है। इसकी शुरुआती कीमत CNY 4,099 यानी लगभग 58,000 रुपये है। वहीं, इसका टॉप वेरिएंट CNY 5999 यानी लगभग 85,000 रुपये है।
- 12GB + 256GB: CNY 4,099 (लगभग ₹58,000)
- 12GB + 512GB: CNY 4,499 (लगभग ₹64,000)
- 16GB + 256GB: CNY 4,799 (लगभग ₹68,000)
- 16GB + 512GB: CNY 5,199 (लगभग ₹74,000)
- 16GB + 1TB: CNY 5,999 (लगभग ₹85,000)
iQOO 15T के फीचर्स
iQOO 15T में 6.82 इंच का LTPO OLED डिस्प्ले पैनल मिलता है। फोन का डिस्प्ले 2K रेजलूशन को सपोर्ट करता है। साथ ही, यह 144Hz रिफ्रेश रेट और इन-डिस्प्ले फिंगरप्रिंट सेंसर मिलता है। यह फोन MediaTek Dimensity 9500 Monster Edition चिपसेट पर काम करता है, जिसे खास तौर पर गेमिंग परफॉर्मेंस के लिए डिजाइन किया गया है।
| iQOO 15T | फीचर्स |
| डिस्प्ले | 6.82 इंच, LTPO, OLED, 144Hz |
| प्रोसेसर | MediaTek Dimensity 9500 Monster Edition |
| स्टोरेज | 16GB, 1TB |
| कैमरा | 200MP + 50MP, 32MP |
| बैटरी | 8000mAh, 100W |
| OS | Android 16, OriginOS |
यह फ्लैगशिप फोन 8,000mAh की बैटरी के साथ आता है। इसमें 100W फास्ट चार्जिंग फीचर दिया गया है। इसमें Android 16 पर बेस्ड OriginOS दिया गया है। इसमें कंपनी ने ब्लू ओसन बैटरी दिया है, जो सिलिकन कार्बन टेक्नोलॉजी पर काम करता है। इस फोन के बैक में डुअल कैमरा सेटअप मिलता है। इसमें 200MP का मेन और 50MP का अल्ट्रा वाइड कैमरा दिया गया है। सेल्फी और वीडियो कॉलिंग के लिए इसमें 32MP कैमरा मिलता है।
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गुरुग्राम समेत दिल्ली-NCR में ट्रांसपोर्टरों की हड़ताल: ग्रीन टैक्स का विरोध, महंगाई के हिसाब से किराया तय करने की मांग, कारोबार प्रभावित होगा – gurugram News
गुरुग्राम समेत पूरे दिल्ली- एनसीआर में ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) के आह्वान पर आज (गुरुवार) से तीन दिवसीय हड़ताल शुरू हो गई है। इस हड़ताल का सबसे व्यापक और सीधा असर गुरुग्राम में भी देखने को मिल रहा है। हड़ताल के पहले ही दिन गुरुग्राम से दिल्ली जाने वाले कॉमर्शियल वाहनों और ट्रकों की संख्या कम हो गई है। जिससे गुरुग्राम उद्योगों में करोड़ों का काम अटक गया है। ट्रांसपोर्ट संघों ने साफ किया कि 21 मई की सुबह से लेकर 23 मई की रात तक माल ढुलाई से जुड़ी कोई भी छोटी या बड़ी गाड़ी दिल्ली की सीमा में प्रवेश नहीं करेगी। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस (AIMTC) के पदाधिकारियों का कहना है कि दिल्ली सरकार द्वारा लगातार कमर्शियल वाहनों पर नए-नए प्रतिबंध थोपे जा रहे हैं और ग्रीन टैक्स के नाम पर भारी वसूली की जा रही है। इससे ट्रांसपोर्ट उद्योग पूरी तरह से बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गया है। ट्रांसपोर्टरों का आरोप है कि बार-बार प्रशासनिक अधिकारियों से गुहार लगाने के बाद भी उनकी समस्याओं का कोई समाधान नहीं निकाला गया, जिसके चलते उन्हें मजबूरन इस सांकेतिक हड़ताल का रास्ता चुनना पड़ा। गुरुग्राम में करोड़ों का बिजनेस ब्लॉक बता दें कि, गुरुग्राम एक बड़ा औद्योगिक और लॉजिस्टिक्स हब है। यहां सैकड़ों बड़ी ऑटोमोबाइल और मैन्युफैक्चरिंग कंपनियां स्थित हैं, जो अपने माल की सप्लाई के लिए पूरी तरह से ट्रकों और कॉमर्शियल वाहनों पर निर्भर हैं। ट्रांसपोर्टरों की इस तीन दिवसीय हड़ताल के कारण उद्योग जगत में हड़कंप मच गया है। व्यापारिक विशेषज्ञों के अनुसार, केवल गुरुग्राम और आसपास के इलाकों में ही इस हड़ताल की वजह से प्रतिदिन करोड़ों रुपए का व्यापार प्रभावित होने की आशंका है। यदि यह हड़ताल लंबी खिंचती है, तो दिल्ली-एनसीआर में आवश्यक वस्तुओं जैसे फल, सब्जियां, दूध और दवाओं की किल्लत भी हो सकती है, जिससे आम जनता की मुश्किलें बढ़ जाएंगी। ट्रांसपोर्टर कर रहे शांतिपूर्ण प्रदर्शन हड़ताल के मद्देनजर पुलिस पूरी तरह से अलर्ट मोड पर है। सरहौल बॉर्डर, कापसहेड़ा बॉर्डर और घिटोरनी बॉर्डर जैसे प्रमुख स्थानों पर पुलिस बल तैनात किया गया है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि किसी भी असामाजिक तत्व को कानून व्यवस्था हाथ में लेने की इजाजत नहीं दी जाएगी। वहीं, दूसरी ओर, ट्रांसपोर्टरों ने शांतिपूर्ण तरीके से अपनी गाड़ियां खड़ी कर विरोध प्रदर्शन दर्ज कराया। ऑल इंडिया मोटर ट्रांसपोर्ट कांग्रेस ने चेतावनी दी है कि यदि इस तीन दिवसीय सांकेतिक हड़ताल के बाद भी दिल्ली सरकार ने बढ़े हुए टैक्स और प्रतिबंधों को वापस नहीं लिया, तो आने वाले दिनों में इस आंदोलन को अनिश्चितकालीन देशव्यापी हड़ताल में बदल दिया जाएगा।
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वर्ल्ड अपडेट्स: UN में भारत बोला- नरसंहार का इतिहास रखने वाला पाकिस्तान कश्मीर पर भाषण दे रहा
1 घंटे पहले
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संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत ने पाकिस्तान पर तीखा हमला बोला। पाकिस्तान द्वारा जम्मू-कश्मीर मुद्दा उठाने पर भारत ने कहा कि नरसंहार का इतिहास रखने वाला देश भारत के आंतरिक मामलों पर भाषण दे रहा है।
बुधवार को UNSC में सशस्त्र संघर्षों में नागरिकों की सुरक्षा पर आयोजित बहस के दौरान पाकिस्तान ने जम्मू-कश्मीर का मुद्दा उठाया। इसके जवाब में भारत के स्थायी प्रतिनिधि हरीश पर्वथनेनी ने पाकिस्तान पर कड़ा पलटवार किया।
पर्वथनेनी ने कहा कि पाकिस्तान का रिकॉर्ड दिखाता है कि वह अपनी आंतरिक विफलताओं को छिपाने के लिए हिंसा और आक्रामकता का सहारा लेता रहा है।
भारत ने अफगानिस्तान में पाकिस्तान की सैन्य कार्रवाई का भी जिक्र किया। पर्वथनेनी ने कहा कि इस साल रमजान के दौरान पाकिस्तान ने काबुल के ओमिद एडिक्शन ट्रीटमेंट अस्पताल पर बर्बर हवाई हमला किया था।
उन्होंने संयुक्त राष्ट्र सहायता मिशन UNAMA का हवाला देते हुए कहा कि इस हमले में 269 नागरिकों की मौत हुई और 122 लोग घायल हुए थे। भारत ने कहा कि यह हमला ऐसे अस्पताल पर हुआ, जिसे किसी भी तरह सैन्य ठिकाना नहीं कहा जा सकता।
पर्वथनेनी ने पाकिस्तान पर अंधेरे में निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि UNAMA के मुताबिक, पाकिस्तान की सीमा पार हिंसा के कारण 94 हजार से ज्यादा लोग विस्थापित हुए।
भारत ने 1971 के ऑपरेशन सर्चलाइट का भी जिक्र किया। पर्वथनेनी ने आरोप लगाया कि पाकिस्तान की सेना ने उस दौरान 4 लाख महिलाओं के खिलाफ संगठित सामूहिक दुष्कर्म अभियान चलाया था।
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अमेरिका ने क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्रो पर हत्या का केस किया; 1996 में दो विमान गिराने का आरोप

अमेरिका ने क्यूबा के पूर्व राष्ट्रपति राउल कास्त्रो पर 1996 में दो विमानों को मार गिराने और चार लोगों की हत्या का केस दर्ज किया है। अमेरिकी न्याय विभाग ने कहा कि यह कार्रवाई अमेरिकी नागरिकों की हत्या के मामले में की गई है।
बुधवार को मियामी में कार्यवाहक अटॉर्नी जनरल टॉड ब्लांश ने राउल कास्त्रो और पांच अन्य लोगों के खिलाफ आरोपों की घोषणा की।
केस में कहा गया है कि 1996 में क्यूबा और फ्लोरिडा के बीच ब्रदर्स टू द रेस्क्यू समूह के दो विमानों को गिराया गया था। इस घटना में चार लोगों की मौत हुई थी, जिनमें तीन अमेरिकी नागरिक शामिल थे।
उस समय राउल कास्त्रो क्यूबा की सेना के प्रमुख थे। अमेरिका ने उन पर अमेरिकी नागरिकों की हत्या की साजिश, विमान नष्ट करने और चार हत्या के आरोप लगाए हैं।
अमेरिकी अधिकारियों के मुताबिक, हत्या के आरोपों में मौत की सजा या उम्रकैद तक हो सकती है। टॉड ब्लांश ने कहा, “अमेरिका और राष्ट्रपति ट्रम्प अपने नागरिकों को नहीं भूलेंगे।”
वहीं क्यूबा के राष्ट्रपति मिगेल डियाज-कैनेल ने इन आरोपों को राजनीतिक साजिश बताया। उन्होंने कहा कि यह मामला क्यूबा पर सैन्य कार्रवाई को सही ठहराने की कोशिश है। डियाज-कैनेल ने दावा किया कि क्यूबा ने उस समय आत्मरक्षा में कार्रवाई की थी।
रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिका लगातार क्यूबा पर राजनीतिक और आर्थिक दबाव बढ़ा रहा है। हाल के वर्षों में अमेरिका ने क्यूबा पर नए प्रतिबंध लगाए और तेल आपूर्ति पर भी दबाव बनाया, जिससे वहां बिजली संकट और खाद्य कमी जैसी समस्याएं बढ़ीं।
अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो ने भी हाल ही में क्यूबा की सैन्य संचालित कंपनी GAESA को देश के संकट के लिए जिम्मेदार बताया था। हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि 94 वर्षीय राउल कास्त्रो के अमेरिका आकर अदालत में पेश होने की संभावना बेहद कम है।
अमेरिका ने UN विशेषज्ञ फ्रांसेस्का अल्बानीज़ पर लगे प्रतिबंध हटाए

अमेरिका ने संयुक्त राष्ट्र की विशेषज्ञ फ्रांसेस्का अल्बानीज़ को प्रतिबंधित व्यक्तियों की सूची से हटा दिया है। अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट की वेबसाइट पर 20 मई को यह जानकारी सामने आई। यह फैसला उस फेडरल कोर्ट आदेश के एक हफ्ते बाद आया है, जिसमें ट्रम्प प्रशासन के प्रतिबंधों पर अस्थायी रोक लगाई गई थी।
फ्रांसेस्का अल्बानीज़ इटली की वकील हैं और संयुक्त राष्ट्र में इजरायल के कब्जे वाले फिलिस्तीनी क्षेत्रों पर विशेष रैपोर्टेयर हैं। उन्होंने इंटरनेशनल क्रिमिनल कोर्ट (ICC) से इजरायली और अमेरिकी नागरिकों के खिलाफ कथित युद्ध अपराधों की जांच और मुकदमे की सिफारिश की थी। उन्होंने एक रिपोर्ट में कई अमेरिकी कंपनियों पर गाजा में इजरायल के “जारी नरसंहार अभियान” में सहयोग करने का आरोप भी लगाया था।
अमेरिका ने जुलाई 2025 में अल्बानीज़ पर प्रतिबंध लगाए थे। अमेरिकी प्रशासन का कहना था कि वह ICC को अमेरिकी और इजरायली अधिकारियों, कंपनियों और अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए उकसा रही थीं। इन प्रतिबंधों के तहत उनके अमेरिका में प्रवेश और बैंकिंग सेवाओं के इस्तेमाल पर रोक लगा दी गई थी।
इसके बाद अल्बानीज़ के पति और उनकी अमेरिकी नागरिक बेटी ने फरवरी में ट्रम्प प्रशासन के खिलाफ मुकदमा दायर किया। वॉशिंगटन के अमेरिकी जिला जज रिचर्ड लियोन ने 13 मई को कहा कि अल्बानीज़ के अमेरिका से बाहर रहने के बावजूद उन्हें अमेरिकी संविधान के फर्स्ट अमेंडमेंट के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का संरक्षण मिलता है। जज ने कहा कि प्रशासन ने उनके “विचार और संदेश” को नियंत्रित करने की कोशिश की।
कोर्ट के आदेश के बाद अमेरिकी ऑफिस ऑफ फॉरेन एसेट्स कंट्रोल (OFAC) ने कहा था कि आदेश प्रभावी रहने तक प्रतिबंध लागू नहीं किए जाएंगे। अब अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट की वेबसाइट से उनका नाम भी हटा दिया गया है। अमेरिकी विदेश विभाग और व्हाइट हाउस ने फिलहाल इस मामले पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है।
इबोला वैक्सीन आने में लग सकते हैं 9 महीने: WHO बोला- 600 संदिग्ध केस, 139 मौतें

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है कि बुंडीबुग्यो प्रजाति के इबोला वायरस के खिलाफ वैक्सीन तैयार होने में 6 से 9 महीने लग सकते हैं। संगठन के मुताबिक DR कांगो और युगांडा में संक्रमण तेजी से फैल रहा है और अब तक 600 संदिग्ध मामले तथा 139 संदिग्ध मौतें दर्ज की जा चुकी हैं।
WHO प्रमुख टेड्रोस अधानोम घेब्रेयसस ने बताया कि DR कांगो में 51 मामलों की पुष्टि हुई है। संक्रमण का सबसे ज्यादा असर पूर्वी इतुरी प्रांत और नॉर्थ किवु में देखा गया है। पड़ोसी देश युगांडा की राजधानी कंपाला में भी 2 संक्रमित मिले हैं, जिनमें एक की मौत हो चुकी है।
WHO ने रविवार को इस प्रकोप को अंतरराष्ट्रीय सार्वजनिक स्वास्थ्य आपातकाल घोषित किया था, लेकिन कहा कि स्थिति अभी महामारी स्तर तक नहीं पहुंची है। टेड्रोस ने कहा कि राष्ट्रीय और क्षेत्रीय स्तर पर जोखिम बहुत ज्यादा है, जबकि वैश्विक स्तर पर खतरा कम माना जा रहा है।
WHO के मुताबिक मृतकों में स्वास्थ्यकर्मी भी शामिल हैं। स्थानीय अस्पतालों और स्वास्थ्य केंद्रों पर भारी दबाव है। कई स्वास्थ्यकर्मी पर्याप्त सुरक्षा उपकरणों के बिना काम कर रहे हैं। मेडिसिन्स सैंस फ्रंटियर्स (MSF) की इमरजेंसी प्रोग्राम मैनेजर ट्रिश न्यूपोर्ट ने कहा कि कई अस्पतालों में संदिग्ध मरीजों के लिए जगह कम पड़ रही है।
WHO सलाहकार डॉ. वासी मूर्ति ने बताया कि बुंडीबुग्यो प्रजाति के खिलाफ दो संभावित वैक्सीन विकसित की जा रही हैं, लेकिन अभी किसी का क्लिनिकल ट्रायल पूरा नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि एक वैक्सीन को तैयार होने में 6 से 9 महीने लग सकते हैं। दूसरी वैक्सीन AstraZeneca के कोविड वैक्सीन प्लेटफॉर्म पर आधारित है, लेकिन उसकी प्रभावशीलता को लेकर अभी पर्याप्त जानकारी उपलब्ध नहीं है।
WHO के अनुसार पहला ज्ञात मामला एक नर्स का था, जिसमें 24 अप्रैल को लक्षण दिखे थे और बाद में उसकी मौत हो गई। शुरुआती लक्षण मलेरिया और टायफाइड जैसे होने की वजह से संक्रमण की पहचान में देरी हुई।
पूर्वी DR कांगो लंबे समय से संघर्ष और हिंसा से प्रभावित इलाका है। WHO का कहना है कि इससे संक्रमण को नियंत्रित करना और मुश्किल हो गया है। ब्रिटेन ने प्रकोप रोकने के लिए 2 करोड़ पाउंड की सहायता देने की घोषणा की है।









