Sunday, June 7, 2026
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रोमांटिक सीन नहीं दे पा रहे थे बॉबी देओल, मनीषा कोइराला से लिया बदला, सालों बाद खुला राज


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बॉबी देओल ने फिल्म ‘गुप्त’ से जुड़ी पुरानी यादें शेयर की हैं. उन्होंने मनीषा कोइराला के साथ अपने रोमांटिक सीन का दिलचस्प किस्सा सुनाया. स्टार ने खुलासा किया क्यों उन्हें वह सीन शूट करने में दिक्कत हो रही थी. वे एक्सप्रेशन नहीं दे पा रहे थे, इसलिए उन्होंने पीछे हटने का फैसला किया था. उन्होंने ट्विंकल खन्ना के साथ बचपन की नोक-झोंक को भी याद किया.

नई दिल्ली: बॉलीवुड के ‘लॉर्ड बॉबी’ यानी बॉबी देओल इन दिनों अपनी फिल्मों को लेकर खूब सुर्खियां बटोर रहे हैं. उन्होंने हाल में अपने करियर और पर्सनल लाइफ से जुड़े कई दिलचस्प खुलासे किए. इस दौरान उन्होंने उन पुरानी अफवाहों पर भी खुलकर बात की, जिनमें कहा जाता था कि वे सेट पर अपनी हीरोइनों को काफी परेशान करते थे. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

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बॉबी देओल पर लंबे समय से यह आरोप लगता रहा है कि वे ट्विंकल खन्ना, रानी मुखर्जी, प्रीति जिंटा और मनीषा कोइराला जैसी अपनी को-स्टार्स के साथ सेट पर अक्सर उलझ जाते थे. शो में जब उनसे इस बारे में पूछा गया, तो उन्होंने हंसते हुए इन बातों के पीछे का सच बताया. उन्होंने यह भी साफ किया कि आखिर क्यों उन्होंने एक बार मनीषा कोइराला के साथ एक इंटीमेट सीन करने से मना कर दिया था.
(फोटो साभार: YouTube/Videograb)

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ट्विंकल खन्ना के साथ फिल्म ‘बरसात’ की शूटिंग के दिनों को याद करते हुए बॉबी ने ‘आप की अदालत’ में बताया कि उस वक्त वे दोनों बहुत छोटे और नासमझ थे. बॉबी ने मजाकिया अंदाज में कहा, ‘मुझे बचपन से पेट की थोड़ी दिक्कत रही है, इसलिए मैं अक्सर सेट पर अपने पेट और वॉशरूम जाने की बातें करता रहता था. ट्विंकल मेरी इस आदत से बहुत ज्यादा चिढ़ जाती थी.’ (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

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बॉबी ने आगे बताया कि जब ट्विंकल ने अपना पहला इंटरव्यू दिया, तो उन्होंने मजे-मजे में बॉबी की इस पेट वाली समस्या का जिक्र सरेआम कर दिया. बॉबी ने उन्हें फोन करके शिकायत भी की थी कि उन्होंने इंटरव्यू में ऐसा क्यों कहा. बॉबी के मुताबिक, यह सिर्फ बचपन की नोक-झोंक थी और उनके बीच कोई गंभीर लड़ाई नहीं थी.
(फोटो साभार: YouTube/Videograb)

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साल 1997 की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘गुप्त’ में बॉबी के साथ काजोल और मनीषा कोइराला लीड रोल में थीं. इस फिल्म की शूटिंग के दौरान का एक बेहद मजेदार किस्सा सुनाते हुए बॉबी ने बताया कि आखिर उन्होंने मनीषा के साथ एक रोमांटिक सीन करने से क्यों अपने पैर पीछे खींच लिए थे. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

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बॉबी ने बताया, ‘शूटिंग के वक्त काफी ठंड थी और सेट के बाहर कोई चना बेच रहा था. मनीषा बड़े मजे से प्याज डालकर वो चने खा रही थीं. इसके तुरंत बाद, हमारा एक सीन होना था, जिसमें गाने के दौरान मनीषा को प्यार से मेरी ठुड्डी (चिन) पर काटना था. लेकिन उनके मुंह से प्याज की इतनी तेज आ रही थी कि मैं कोई रोमांटिक एक्सप्रेशन ही नहीं दे पा रहा था.’ (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

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बॉबी ने इसका बदला लेने के लिए सेट पर एक तगड़ा प्लान भी बनाया था. फिल्म के एक कॉलेज वाले सीन में मनीषा के ऑन-स्क्रीन भाई को बॉबी की पिटाई करनी थी. वह एक नया एक्टर था, तो बॉबी ने मौके का फायदा उठाया और उसकी एक्टिंग सुधारने के बहाने उसे ढेर सारे कच्चे प्याज खिला दिए, ताकि मनीषा को सबक मिल सके. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

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बॉबी ने हंसते हुए बताया, ‘मैंने उस लड़के को खूब प्याज खिलाए कि जब वह मनीषा के क्लोज जाकर शॉट देगा तो उन्हें पता चलेगा. लेकिन मजेदार बात यह रही कि मनीषा पर इसका कोई असर ही नहीं हुआ और मेरा बदला अधूरा रह गया. उस उम्र में हम लोग ऐसी ही नादानियां और प्रैंक किया करते थे.’ (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

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अगर बॉबी देओल हाल में रिलीज हुई फिल्म ‘बंदर’ में नजर आए हैं, जो 5 जून 2026 को सिनेमाघरों में दस्तक दे चुकी है. उन्होंने फिल्म में ‘समीर मेहरा’ नाम के एक रॉकस्टार का किरदार निभाया है. बॉबी ने इस प्रोजेक्ट के जरिए पहली बार मशहूर डायरेक्टर अनुराग कश्यप के साथ काम किया है. बॉबी देओल जल्द ही यशराज फिल्म्स की फिल्म ‘अल्फा’ में एक दमदार रोल में दिखाई देंगे. फिल्म में आलिया भट्ट और शारवरी अहम भूमिकाओं में हैं, जो इसी साल 10 जुलाई को थिएटर्स में रिलीज होने वाली है. विलेन के रोल में बॉबी को दोबारा देखने के लिए फैंस बेहद एक्साइटेड हैं. (फोटो साभार: YouTube/Videograb)

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बनना है सिविल इंजीनियर? JEE मेंस में 10 लाख रैंक पर भी मिलेगा सिविल ब्रांच


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Bihar Engineering Admission Cutoff: जेईई-मेंस की परीक्षा में कम स्कोर या 10 लाख तक रैंक लाने वाले छात्रों के लिए भी बिहार के सरकारी इंजीनियरिंग कॉलेजों में सिविल इंजीनियर बनने का रास्ता साफ है. राज्य के विभिन्न जिलों में खुले नए इंजीनियरिंग कॉलेजों और सीटों की संख्या अधिक होने के कारण, सही काउंसलिंग रणनीति अपनाकर छात्र कम रैंक पर भी सरकारी कॉलेज में अपनी सीट पक्की कर सकते हैं. जानिए एडमिशन और काउंसलिंग की पूरी प्रक्रिया.

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गयाजी: इंजीनियर बनने का सपना देख रहे हैं लेकिन जेईई एडवांस में सफलता नहीं मिली हो बावजूद बिहार के कॉलेज में जेईई मेंस के रैंक के आधार पर नामांकन लेकर इंजीनियर बनने का सपना पूरा कर सकते हैं. बिहार के लगभग हर जिले में इंजीनियरिंग कॉलेज है जहां जेईई मेंस और बीसीईसीई के रैंक पर नामांकन होता है. बिहार के टॉप फाइव इंजीनियरिंग कॉलेज में शामिल गया कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग में नामांकन के लिए जेईई मेंस में 90 हजार से 10 लाख रैंक के बीच छात्रों का नामांकन होता है.

बिहार में स्कोप ज्यादा, नामांकन की होड़
गया कॉलेज ऑफ़ इंजीनियरिंग का सिविल ब्रांच में नामांकन के लिए छात्रों में होड़ लगी रहती है. पिछले 2 साल की रैंक की बात करें तो जेईई मेंस में 1 लाख से 10 लाख के बीच के रैंक वाले छात्रों को सिविल ब्रांच मिला है. बिहार में सिविल इंजीनियरिंग एक प्रमुख और अत्यधिक मांग वाली शाखा है. यह बुनियादी ढांचे जैसे सड़क, पुल, इमारत के निर्माण और योजना से जुड़ी ब्रांच है. इस कोर्स को करने के बाद ज्यादातर छात्र सरकारी नौकरी लेता चाहते हैं और बिहार में इसका स्कोप भी अधिक है.

यहां पर है खूब मांग, मिलेगा अवसर भी
देश और राज्य में बन रहे नए एक्सप्रेसवे, बुलेट ट्रेन प्रोजेक्ट्स, एयरपोर्ट्स और स्मार्ट सिटीज, इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट जैसे सड़कें, पुल, भवन, और रियल एस्टेट के कारण सिविल इंजीनियरिंग के छात्रों के लिए भी प्लेसमेंट के शानदार मौके बन रहे हैं. इसके अलावे जूनियर इंजीनियर से लेकर सरकारी ठेकेदार और निजी कंस्ट्रक्शन फर्मों में काम करके आप शानदार करियर बना सकते हैं. वहीं प्राइवेट सेक्टर में भी सिविल इंजीनियर की मांग हाल के वर्षो में खूब बढी है.

सिविल ब्रांच की डिमांड ज्यादा, इस बार ये रहेगा रैंक
गया कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के डिप्टी रजिस्ट्रार डाॅ.कृष्णा प्रसाद ने लोकल 18 से बातचीत में बताया कि बिहार के ज्यादातर बच्चे सरकारी नौकरी में जाना चाहते हैं इसलिए सिविल ब्रांच की डिमांड ज्यादा रहती है. सरकारी नौकरियों में सबसे ज्यादा वैकेंसी सिविल इंजीनियर के लिए होती है. इन्होंने बताया इस कालेज में 120 सीट पर सिविल ब्रांच में नामांकन होता है. इस बार भी उम्मीद है 1 लाख से 10 लाख के बीच रैंक वाले छात्रों को यहां एडमिशन मिलेगा.

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Amit ranjan

मैंने अपने 12 वर्षों के करियर में इलेक्ट्रॉनिक, प्रिंट और डिजिटल मीडिया में काम किया है। मेरा सफर स्टार न्यूज से शुरू हुआ और दैनिक भास्कर, दैनिक जागरण, दैनिक भास्कर डिजिटल और लोकल 18 तक पहुंचा। रिपोर्टिंग से ले…और पढ़ें



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बदायूं में पुलिस भर्ती परीक्षा के लिए डायवर्जन: 8 से 10 जून तक भारी वाहनों की नो-एंट्री रहेगी, पुलिस की रहेगी निगरानी – Badaun News




बदायूं में उत्तर प्रदेश पुलिस आरक्षी भर्ती परीक्षा को सुचारु रूप से संपन्न कराने के लिए पुलिस प्रशासन ने विशेष यातायात व्यवस्था लागू की है। परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों की संभावित भारी भीड़ को देखते हुए, 8 जून से 10 जून तक शहर में भारी वाहनों के प्रवेश पर प्रतिबंध रहेगा। इस अवधि में ट्रक, ट्रॉला, डीसीएम और ट्रैक्टर-ट्रॉली जैसे भारी वाहनों को शहर में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी। यह यातायात व्यवस्था 8 जून की सुबह सात बजे से शुरू होकर 10 जून की शाम आठ बजे तक प्रभावी रहेगी। प्रशासन का अनुमान है कि भर्ती परीक्षा के लिए बड़ी संख्या में अभ्यर्थी जनपद पहुंचेंगे। मुख्य मार्गों पर भारी वाहनों के संचालन से जाम की स्थिति उत्पन्न हो सकती है, जिससे परीक्षार्थियों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचने में कठिनाई का सामना करना पड़ सकता है। भारी वाहनों को वैकल्पिक मार्गों पर भेजा जाएगा डायवर्जन व्यवस्था को प्रभावी बनाने के लिए बिल्सी मोड़, पटेल चौक, मझिया मोड़, केशव मंडी चौकी, बदायूं-बरेली बाईपास स्थित बीआरवी तिराहा और कुँवरगांव चौराहे को प्रमुख नियंत्रण बिंदु बनाया गया है। इन स्थानों से भारी वाहनों को वैकल्पिक मार्गों पर भेजा जाएगा। यातायात पुलिस और स्थानीय पुलिस को व्यवस्था की निगरानी की जिम्मेदारी सौंपी गई है। एसएसपी अंकिता शर्मा ने वाहन चालकों से निर्धारित डायवर्जन व्यवस्था का पालन करने और सहयोग बनाए रखने की अपील की है, ताकि शहर को जाममुक्त रखा जा सके और अभ्यर्थियों को समय पर परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया जा सके।



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पन्ना में चलती स्कूटी पर जेब में फटा मोबाइल: युवक के कपड़ों में लगी आग, पैर झुलसा; लोगोंं ने पानी डालकर बचाई जान – Panna News




पन्ना में रविवार शाम जिला अस्पताल के ठीक सामने चलती स्कूटी पर एक युवक की जेब में रखा मोबाइल फोन अचानक ब्लास्ट हो गया। बैटरी फटते ही युवक के कपड़ों ने आग पकड़ ली। हालांकि, युवक की मुस्तैदी और स्थानीय लोगों की मदद से समय रहते आग पर काबू पा लिया गया, जिससे एक बड़ा हादसा टल गया। इस हादसे में मुकेश के कपड़े जल गए हैं और उनका पैर झुलस गया। जलता फोन जेब से निकाल सड़क पर फेंका रानी बाग निवासी मुकेश वर्मा (25) ने बताया कि रविवार शाम करीब 6:30 बजे बाजार से अपने घर लौट रहे थे, तभी जिला अस्पताल के सामने उनकी पैंट की जेब में रखे मोबाइल में विस्फोट हो गया। मौके पर मौजूद राकेश शर्मा ने बताया कि बताया कि कपड़ों में आग लगते ही मुकेश ने तुरंत चलती स्कूटी से सड़क पर छलांग लगा दी और बिना देर किए जलता हुआ फोन जेब से निकालकर बाहर फेंक दिया। स्थानीय लोगों ने पानी डालकर बुझाई आग अस्पताल के सामने मौजूद लोगों ने जब युवक को आग की लपटों से घिरा देखा, तो उन्होंने तुरंत मुकेश और मोबाइल पर पानी डालना शुरू कर दिया। लोगों की इस मदद से आग को बढ़ने से रोक लिया। इस हादसे में मुकेश के कपड़े जल गए हैं और उनका पैर झुलस गया, उसका जिला अस्पताल में प्राथमिक उपचार किया गया।



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हरी सब्जियों से हो गए हैं बोर? ट्राई करें केले के फूल की यह खास सब्जी, आसान है रेसिपी


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केले के फूल की सब्जी बनाने से पहले उसकी अच्छी तरह सफाई करना जरूरी है. सबसे पहले फूल की पंखुड़ियां हटाकर छोटे-छोटे फूल अलग कर लें। इसके बाद हर फूल के अंदर मौजूद सफेद और कड़े हिस्से को निकाल दें. प्रिया कुमारी के अनुसार, इस हिस्से को नहीं हटाने पर सब्जी का स्वाद कड़वा हो सकता है और गले में परेशानी भी हो सकती है. सफाई के बाद फूलों को धोकर कुकर में डालें और 2 से 3 सीटी तक उबाल लें.

सीतामढ़ी: ​अगर आप रोज़मर्रा की हरी सब्जियों से बोर हो चुके हैं और कुछ अलग तथा बेहद स्वादिष्ट आज़माना चाहते हैं, तो केले के फूल की सब्जी एक बेहतरीन विकल्प है. पकवानों का शौक रखने वालों के लिए यह एक अनोखा अनुभव हो सकता है. सीतामढ़ी जिले के डुमरा निवासी गृहणी प्रिया कुमारी के अनुसार, केले के फूल की सब्जी न सिर्फ खाने में लाजवाब होती है, बल्कि इसे बनाने का तरीका भी बेहद आसान है. बस इसे बनाते समय कुछ खास बातों का ध्यान रखना ज़रूरी है, ताकि इसके असली स्वाद का आनंद लिया जा सके और सेहत को भी कोई नुकसान न पहुंचे.

​सफाई और उबालने का सही तरीका
​प्रिया कुमारी बताती हैं कि इस सब्जी को बनाने की शुरुआत केले के फूल को अच्छी तरह साफ करने से होती है. सबसे पहले फूल की पंखुड़ियों को अलग करके सारे छोटे फूलों को एक बर्तन में निकाल लें. इसके बाद सबसे महत्वपूर्ण कदम आता है हर छोटे फूल के अंदर मौजूद सफेद रंग के कड़े बीज (डंठल) को बाहर निकालना. प्रिया कुमारी सचेत करती हैं कि अगर इस सफेद हिस्से को नहीं निकाला गया, तो सब्जी का स्वाद कड़वा हो सकता है और इसे खाने से गले में खराश या अजीब सी सनसनाती हुई सनसनी होने लगती है. सफाई के बाद फूलों को साफ पानी से धोकर कुकर में पानी के साथ डालें और धीमी आंच पर दो से तीन सीटी आने तक उबाल लें. उबलने के बाद इन्हें छानकर एक बार फिर ठंडे पानी से साफ कर लें.

मसालों का पेस्ट और तड़के की तैयारी
​सब्जी को पारंपरिक और देसी स्वाद देने के लिए प्रिया कुमारी सिलबट्टे या मिक्सी में फ्रेश मसाला पीसने की सलाह देती हैं. इसके लिए लहसुन, अदरक, जीरा, काली मिर्च (मरीच) और सूखी लाल मिर्च को एक साथ पीसकर गाढ़ा पेस्ट तैयार कर लें. अब चूल्हे पर कढ़ाई चढ़ाकर उसमें तेल गरम करें. तेल गरम होने पर थोड़ा सा जीरा चटकाएं और फिर बारीक कटी हुई प्याज डालकर उसे सुनहरा भूरा (गोल्डन ब्राउन) होने तक अच्छी तरह भूनें. यहीं से सब्जी की बेहतरीन रंगत और खुशबू की शुरुआत होती है.

धीमी आंच पर भुनाई और अंतिम स्पर्श
​प्याज भूनने के बाद कढ़ाई में उबले हुए केले के फूल डालें और स्वादानुसार नमक मिलाकर धीमी आंच पर करीब 10मिनट तक भूनें. इसके बाद इसमें पहले से तैयार अदरक-लहसुन का पेस्ट, हल्दी पाउडर, धनिया पाउडर और कटी हुई टमाटर डालें. प्रिया कुमारी के मुताबिक, सब्जी को तब तक ढककर धीमी आंच पर पकाना चाहिए जब तक कि मसाले अच्छी तरह से पक न जाएं और कढ़ाई तेल न छोड़ने लगे. जब सब्जी पूरी तरह से पककर भूरे रंग की हो जाए और तेल अलग होने लगे, तो ऊपर से थोड़ा गरम मसाला डालकर मिलाएँ और गैस बंद कर दें. आपकी गरमा-गरम, खुशबूदार केले के फूल की सब्जी परोसने के लिए बिल्कुल तैयार है.

About the Author

Amita kishor

न्यूज़18इंडिया में कार्यरत हैं. आजतक से रिपोर्टर के तौर पर करियर की शुरुआत फिर सहारा समय, ज़ी मीडिया, न्यूज नेशन और टाइम्स इंटरनेट होते हुए नेटवर्क 18 से जुड़ी. टीवी और डिजिटल न्यूज़ दोनों विधाओं में काम करने क…और पढ़ें



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25 साल से जलजमाव, निकासी के लिए अनशन किया शुरू: डिप्टी मेयर बोली- वीआईपी आए तो तुरंत व्यवस्था दुरुस्त होगी, लोगों की समस्या से किसी को मतलब नहीं – Darbhanga News




जिले के सदर प्रखंड और सदर थाना जाने वाले मुख्य मार्ग पर वर्षों से जलजमाव है। जिसको लेकर स्थानीय लोगों में आक्रोश है। भीषण गर्मी के बावजूद घुटने भर पानी के बीच स्थानीय ग्रामीणों और जनप्रतिनिधियों ने भूख हड़ताल शुरू कर दी है। आंदोलनकारियों का कहना है कि जब तक जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं की जाती, तब तक उनका आंदोलन जारी रहेगा। रविवार को आंदोलन ने उस समय और जोर पकड़ लिया जब दरभंगा नगर निगम की डिप्टी मेयर नाजिया हसन भी आंदोलन स्थल पर पहुंचीं और प्रदर्शनकारियों के समर्थन में भूख हड़ताल पर बैठ गईं। डिप्टी मेयर नाजिया हसन ने जलजमाव की समस्या को लेकर कहा कि यदि किसी मंत्री, मुख्यमंत्री या प्रधानमंत्री के आगमन की सूचना मिलती है तो प्रशासन 24 घंटे क्या, 24 मिनट में सारी व्यवस्थाएं दुरुस्त कर देता है, लेकिन 25 वर्षों से जलजमाव की समस्या झेल रहे लोगों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। जलजमाव की कुछ तस्वीरें… घरों में कैद होने को मजबूर लोग
स्थानीय प्रशांत, रमेश, राकेश के अनुसार सदर थाना और सदर प्रखंड कार्यालय को जोड़ने वाले महत्वपूर्ण मार्ग पर करीब 25 वर्षों से 3 से 4 फीट तक पानी जमा रहता है। बरसात के मौसम में स्थिति और भी भयावह हो जाती है। सड़क पूरी तरह जलमग्न हो जाती है, जिससे लोगों का घरों से निकलना तक मुश्किल हो जाता है। ग्रामीणों का कहना है कि इस रास्ते से प्रतिदिन हजारों लोग सरकारी कार्यालयों, स्कूलों, कॉलेजों और अस्पतालों तक पहुंचते हैं, लेकिन जलजमाव के कारण उन्हें भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है। कई बार मरीजों को अस्पताल ले जाने में परेशानी होती है, जबकि विद्यार्थियों की पढ़ाई भी प्रभावित होती है। स्थानीय लोगों ने बताया कि समस्या इतनी गंभीर हो चुकी है कि कई परिवार बरसात के दिनों में खुद को घरों में “हाउस अरेस्ट” जैसी स्थिति में महसूस करते हैं। सड़क पर जमा पानी के कारण आवागमन लगभग ठप हो जाता है।
भोलू यादव के नेतृत्व में शुरू हुआ आंदोलन राजद नेता सह वार्ड पार्षद भोलू यादव ने भाजपा प्रदेश अध्यक्ष और नगर विधायक पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि जिस क्षेत्र में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष का आवास, सदर थाना और सदर प्रखंड है, वहीं की सड़कें वर्षों से जलजमाव की समस्या से जूझ रही हैं।
भोलू यादव ने कहा कि भाजपा प्रदेश अध्यक्ष पूरे बिहार में घूम-घूमकर विकास की बातें करते हैं और लोगों की समस्याओं के समाधान का दावा करते हैं, लेकिन उन्हें पहले अपने विधानसभा क्षेत्र की स्थिति देखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि उनके आवास से महज आधा किलोमीटर दूर सड़क पर सालों से तीन से चार फीट पानी जमा रहता है, जिससे लोगों का जीवन नारकीय बन गया है।
उन्होंने आरोप लगाया कि यह समस्या आज की नहीं बल्कि कई वर्षों पुरानी है। दरभंगा की जनता ने लगातार छह बार उन्हें विधायक चुना, लेकिन इसके बावजूद क्षेत्र की मूलभूत समस्याओं का समाधान नहीं हो सका। उन्होंने कहा कि करीब 10 हजार की आबादी इस जलजमाव से प्रभावित है।

जब तक समस्या खत्म नहीं होती अनशन जारी रहेगा भोलू ने कहा कि 11 सूत्री मांगें हैं, जिनमें सबसे प्रमुख मांग सड़क पर वर्षों से जमा तीन-चार फीट पानी की निकासी और स्थायी समाधान हो। उन्होंने कहा कि यह समस्या करीब 25 वर्षों से बनी हुई है और अब इसके समाधान के लिए उन्होंने आमरण अनशन का रास्ता चुना है।
भोलू यादव ने स्पष्ट कहा कि जब तक जलजमाव की समस्या का स्थायी समाधान नहीं हो जाता, तब तक वह अनशन स्थल से नहीं उठेंगे। उन्होंने कहा, “चाहे मेरी जान ही क्यों न चली जाए, लेकिन समस्या का समाधान हुए बिना मैं यहां से नहीं हटूंगा।”
जनप्रतिनिधि, अधिकारी और विभागों को मिलकर काम करना होगा- डिप्टी मेयर डिप्टी मेयर ने कहा कि क्षेत्र के लोगों की समस्या का समाधान कब और कैसे होगा, यह बड़ा सवाल है। अधिकारियों को खुद यहां आकर हालात देखने चाहिए। इलाके के पास सदर थाना, सदर प्रखंड कार्यालय, अस्पताल और कई प्रतिष्ठित लोगों के आवास हैं। रोज हजारों लोगों का यहां आना-जाना होता है, सभी जलजमाव से परेशान हैं। डिप्टी मेयर नाजिया हसन ने कहा कि वह साढ़े तीन साल से दरभंगा की उप महापौर हूं। नगर निगम बोर्ड की पहली बैठक में ही मैंने स्पष्ट कहा था कि किसी एक व्यक्ति के प्रयास से विकास संभव नहीं है। सभी जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और संबंधित विभागों को मिलकर काम करना होगा, तभी दरभंगा में वास्तविक विकास और परिवर्तन दिखाई देगा। अधिकांश लोग केवल अपनी-अपनी राजनीति करने में लगे हैं, जबकि जनता की समस्याओं के समाधान की ओर कोई गंभीरता नहीं दिखा रहा है। उन्होंने कहा कि यदि नगर विधायक या सांसद चाह लें तो इस समस्या का समाधान संभव है, लेकिन किसी की रुचि नहीं दिख रही है।
जल निकासी की कई बार मांग उठाई डिप्टी मेयर ने कहा कि मैंने कई बार लिखित रूप से नगर निगम की जमीनों अतिक्रमण को हटाने और जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त करने की मांग की है। केवल पंप लगाकर पानी निकालना स्थायी समाधान नहीं है। इसके लिए व्यवस्थित नाला निर्माण और जल निकासी की स्थायी व्यवस्था जरूरी है।
नगर विधायक लगातार छह बार से निर्वाचित हो रहे हैं, लेकिन अब तक क्षेत्र की इस गंभीर समस्या का समाधान नहीं हो सका है। लोगों को उम्मीद थी कि इस बार हालात बदलेंगे, लेकिन बारिश शुरू होने से पहले ही क्षेत्र की स्थिति बदतर बनी हुई है। घरों से निकलने वाला पानी सड़कों पर जमा है, न तो पर्याप्त नालियां हैं और न ही पानी निकास की कोई समुचित व्यवस्था।
बड़ी संख्या में ग्रामीण रहे मौजूद
भूख हड़ताल स्थल पर मोहन यादव, गंगा यादव, संतोष कुमार, वासुदेव कुमार, पवन यादव, प्रवीण ठाकुर, कुमार गौरव राज, संतोष कुमार चौधरी, सुनील कुमार, सुमन, दीप नारायण पासवान, रामबाबू यादव, दीपक चौधरी, राहुल कुमार चौधरी, सूरज कुमार चौधरी और सोनू कुमार सिंह सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।
सभी ने एक स्वर में कहा कि वर्षों से जलजमाव की समस्या उनकी जिंदगी को प्रभावित कर रही है। यदि प्रशासन जल्द कोई कार्रवाई नहीं करता है तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।
स्थायी समाधान की मांग
आंदोलनकारियों की मुख्य मांग है कि सदर प्रखंड और सदर थाना जाने वाले मार्ग पर जलनिकासी की स्थायी व्यवस्था की जाए, नालों की सफाई कराई जाए और सड़क को जलजमाव मुक्त बनाने के लिए विशेष योजना तैयार की जाए।
ग्रामीणों का कहना है कि यह केवल सड़क की समस्या नहीं, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य, प्रशासनिक सेवाओं और आम जनजीवन से जुड़ा मुद्दा है। इसलिए सरकार और प्रशासन को इसे प्राथमिकता के आधार पर हल करना चाहिए।



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यमुना को गौरव लौटाने के लिए 14 जून को महा-अभियान: CM रेखा खुद घाट पर उतरकर करेंगी श्रमदान; पिछले साल निकला था 12 टन कचरा – New Delhi News




दिल्ली सरकार यमुना नदी को स्वच्छ, निर्मल और अविरल बनाने के लिए अब तक का सबसे बड़ा जन-अभियान शुरू करने जा रही है। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता के नेतृत्व में आगामी 14 जून को ‘यमुना तट स्वच्छता अभियान-2026’ का आयोजन किया जाएगा। इस महाअभियान की कमान खुद मुख्यमंत्री संभालेंगी और नागरिकों के साथ मिलकर घाटों की सफाई करेंगी। मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने कहा, “यमुना केवल एक नदी नहीं, बल्कि दिल्ली की सांस्कृतिक, धार्मिक और पर्यावरणीय धरोहर है। इसे स्वच्छ रखने का दायित्व सिर्फ सरकार का नहीं, बल्कि हर दिल्लीवासी का है। जब तक जनभागीदारी नहीं होगी, तब तक यमुना को उसका पुराना स्वरूप लौटाना संभव नहीं है।” पिछले साल के मुकाबले इस बार दोगुना बड़ा होगा एक्शन सरकार इस साल के अभियान को पिछले वर्ष से भी बड़े स्तर पर ले जा रही है। पिछले साल के नतीजे और इस बार की तैयारी कुछ इस प्रकार हैं। ‘मेरी यमुना, मेरा कर्तव्य’ (पिछले वर्ष): इस अभियान के तहत हजारों स्वयंसेवकों ने मिलकर यमुना घाटों से 12 टन से अधिक कचरा (वेस्ट) निकाला था। जिसका वैज्ञानिक तरीके से निस्तारण किया गया। यमुना तट स्वच्छता अभियान (इस वर्ष): 14 जून को होने वाले इस महाअभियान में करीब 500 सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक और स्वयंसेवी संगठन एक साथ हिस्सा ले रहे हैं। घाटों पर सुरक्षा और सुविधाओं का ‘मेगा अरेंजमेंट’ अभियान के दौरान किसी भी आपात स्थिति से निपटने और सुचारू संचालन के लिए मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने सभी संबंधित विभागों को अलर्ट रहने के निर्देश दिए हैं। मल्टी-एजेंसी कोऑर्डिनेशन: स्थानीय प्रशासन, दिल्ली पुलिस, एमसीडी (MCD) और स्वास्थ्य विभाग मिलकर काम करेंगे। ग्राउंड मैनेजमेंट: घाटों पर सुरक्षा, ट्रैफिक मैनेजमेंट, पीने के साफ पानी, प्राथमिक चिकित्सा (First Aid) और आपातकालीन सेवाओं के पुख्ता इंतजाम किए जा रहे हैं। जन-जागरूकता: सफाई के साथ-साथ मौके पर आने वाले लोगों को पर्यावरण संरक्षण और नदी में गंदगी न फैलाने के प्रति जागरूक भी किया जाएगा।



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रतनसागर झील में गुमशुदा युवक की तलाश जारी: सिविल डिफेंस और एसडीआरएफ ने चलाया व्यापक सर्च अभियान – Bundi News




बूंदी के नैनवां उपखंड स्थित तलवास की रतनसागर झील में गुमशुदा युवक सोनू रेगर की तलाश के लिए रविवार को व्यापक सर्च अभियान चलाया गया। सिविल डिफेंस और एसडीआरएफ की टीमों ने यह अभियान चलाया, लेकिन देर शाम तक युवक का कोई सुराग नहीं मिल पाया। तलवास निवासी रामदयाल रेगर ने 4 जून 2026 को थाना देई में अपने बेटे सोनू (पुत्र रामदयाल रेगर) की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। रिपोर्ट के अनुसार, सोनू 2 जून की शाम करीब 6 बजे बिना बताए घर से चला गया था। परिजनों ने आसपास काफी तलाश की, लेकिन वह नहीं मिला। बाद में परिजनों ने सोनू के रतनसागर झील में डूबने की आशंका जताई थी। थाना देई के पुलिस निरीक्षक एवं थानाधिकारी कमलेश कुमार ने बताया कि रिपोर्ट मिलते ही एमपीआर संख्या 24/2026 दर्ज कर एएसआई राजेश कुमार को जांच अधिकारी नियुक्त किया गया और मामले की जांच शुरू कर दी गई।
परिजनों की आशंका के आधार पर, 7 जून को रतनसागर झील में सिविल डिफेंस और एसडीआरएफ की टीमों ने सुबह से सर्च अभियान शुरू किया। सिविल डिफेंस दल के प्रभारी धनपाल के नेतृत्व में विशाल, राजकुमार, दुर्गालाल, आकाश और पवन ने अभियान में हिस्सा लिया। एसडीआरएफ दल में कमांडेंट राजेन्द्र सिंह, एकता हाड़ा, हंसराज, हरवीर, खुशीराम, रामप्रसाद, शिवपाल, सुरेश कुमार, गोविंद, अमृतलाल, राजेश और रामकिशन शामिल थे। टीमों ने पूरे दिन झील में गहन तलाश की, लेकिन युवक का कोई पता नहीं चल सका। मौके पर तहसीलदार रामराय मीणा और नायब तहसीलदार कैलाश नारायण मीणा स्वयं मौजूद रहे। उनके साथ राजस्व विभाग के कानूनगो, पटवारी, वन विभाग के कर्मचारी और पुलिस बल भी मुस्तैदी से तैनात थे। सर्च अभियान के दौरान बड़ी संख्या में ग्रामीण भी झील किनारे एकत्रित हुए थे। पुलिस निरीक्षक कमलेश कुमार ने बताया कि मामले की जांच अभी जारी है। गुमशुदा युवक के संबंध में उसके पिता, भाई सहित अन्य लोगों से भी जानकारी जुटाई जा रही है।



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घर पर देशी अंदाज में तैयार करें करमुआ का साग, पाचन को रखता है दुरुस्त, जाने रेसिपी


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करमुआ साग बनाने के लिए सबसे पहले करमुआ की पत्तियों को अच्छे से धोकर बारीक काट लेना है. इसके बाद एक कड़ाही में सरसों का तेल गर्म कर लें. जब तेल गर्म हो जाए तो उसके बाद उसमें जीरा डालें और जब वह चटकने लगे तो उसमें कटा हुआ लहसुन डालकर हल्का सुनहरा होने तक भून लें. इसके बाद इसमें प्याज डालें और सुनहरा होने तक भूनें. अब टमाटर और हरी मिर्च डालकर अच्छे से पकाएं जब तक टमाटर नरम न हो जाए. उसके बाद इसमें हल्दी, लाल मिर्च और नमक डालकर मसाले को अच्छे से भून लना है.

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सुल्तानपुरः गर्मी का मौसम चल रहा है. कुछ दिनों बाद लोगों को करमुआ का साग खाने को मिलेगा. ऐसे में करमुआ की सब्जी न सिर्फ स्वाद में लाजवाब होती है बल्कि यह सेहत के लिए भी काफी फायदेमंद होती है. अगर आप भी अपने घर पर करमुआ की सब्जी बनाना चाहते हैं तो आज हम आपको बताने वाले हैं करमुआ की सब्जी बनाने की बेस्ट रेसिपी के बारे में जिसको आप अपने घर पर और लोहे की कढ़ाई में बनाकर बीमारियों में भी लाभदायक होगा.

व्यंजन एक्सपर्ट सविता श्रीवास्तव लोकल 18 से बताती हैं कि करमुआ का साग बनाने के लिए आपको कुछ सामग्रियों की आवश्यकता होगी. इन सामग्रियों में आप करमुआ, सरसों का तेल, लहसुन प्याज, हरी मिर्च, हल्दी, लाल मिर्च, नमक और जीरा का इस्तेमाल किया जाता है.

ऐसे तैयार करें रेसिपी

करमुआ साग बनाने के लिए सबसे पहले करमुआ की पत्तियों को अच्छे से धोकर बारीक काट लेना है. इसके बाद एक कड़ाही में सरसों का तेल गर्म कर लें. जब तेल गर्म हो जाए तो उसके बाद उसमें जीरा डालें और जब वह चटकने लगे तो उसमें कटा हुआ लहसुन डालकर हल्का सुनहरा होने तक भून लें. इसके बाद इसमें प्याज डालें और सुनहरा होने तक भूनें. अब टमाटर और हरी मिर्च डालकर अच्छे से पकाएं जब तक टमाटर नरम न हो जाए. उसके बाद इसमें हल्दी, लाल मिर्च और नमक डालकर मसाले को अच्छे से भून लना है. मसाला जब अच्छी तरह पक जाए तो उसके बाद कटे हुए करमुआ के पत्ते डाल दें. और धीमी आंच पर लगभग 10 मिनट तक पकाएं. अब तैयार हो जाती है सब्जी.

बारिश में होता है तैयार

हरी दिखने वाली यह घास अधिकांशतः बारिश के सीजन में होती है. जिस स्थान पर पानी एकत्र रहता है उस स्थान पर करेमुआ का साग अपने आप उग आता है. इस घास को काटकर लोहे के बर्तन में सब्जी बनाई जाती है जो काफी स्वादिष्ट होती है. आयुर्वेद चिकित्सक के मुताबिक करेमुआ का साग आयरन की कमी को पूरा करता है. जिससे शरीर में एनीमिया जैसी रक्त की कमी वाली बीमारी नहीं पनपने पाती और लोगों का स्वास्थ्य ठीक रहता है.

पाचन को रखता है दुरुस्त

वर्तमान में खानपान के चलते काफी लोगों को पाचन से जुड़ी समस्याएं होने लगी हैं. ऐसे में लोगों को अपनी डाइट में करेमुआ साग को जरूर शामिल करना चाहिए. इसमें फाइबर की अच्छी मात्रा पाई जाती है और ये नेचुरल लेक्सटेसिव की तरह काम करता है.वहीं जिन लोगों का मेटाबॉलिज्म स्लो हो उनके लिए भी इसे खाना बहुत ही फायदेमंद होता है. जिससे पाचन तंत्र मजबूत रहता है.

About the Author

Rajneesh Kumar Yadav

मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें



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‘तुम्हारे चेहरे में वो बात नहीं’, जब राज कपूर ने डिंपल कपाड़िया को किया था रिजेक्ट


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बॉलीवुड के शोमैन राज कपूर अपनी फिल्मों की हीरोइन को चुनने के लिए काफी सख्त माने जाते थे. वह सिर्फ खूबसूरती नहीं, बल्कि किरदार की जरूरत के हिसाब से चेहरा और व्यक्तित्व तलाशते थे. साल 1985 में भी वह एक ऐसी फिल्म लेकर आए थे, जिसके लिए डिंपल कपाड़िया ने भी स्क्रीन टेस्ट दिया था. लेकिन राज कपूर ने उन्हें ये कहकर रिजेक्ट कर दिया था कि वह उनके चेहरे में वो मासूमियत नहीं, जो वह तालाश रहे हैं.

नई दिल्ली. जब कभी भी हिंदी सिनेमा की सबसे बोल्ड और ब्लॉकबस्टर फिल्मों की बात होती है, राज कपूर का नाम जहन में आता है. उन्होंने अपने करियर में कई ऐसी फिल्में बनाई हैं, जिन्हें देख लोग हैरान हो जाते थे. ऐसी ही उनकी एक फिल्म है, ‘राम तेरी गंगा मैली’. इस फिल्म के लिए उन्होंने कई एक्ट्रेसेस को रिजेक्ट किया था.

साल 1985 में जब राज कपूर फिल्म राम तेरी गंगा मैली लेकर आए, तो इस फिल्म पर लोगों ने खूब सवाल उठाए थे. फिल्म में कई ऐसे बोल्ड सीन थे, जिन्हें उस दौर की कई एक्ट्रेसेस ने करने से इनकार भी कर दिया था. तब जाकर राज कपूर ने ये रोल मंदाकिनी को दिया था.

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राज कपूर की ब्लॉकबस्टर फिल्म ‘राम तेरी गंगा मैली’ के लिए भी उन्होंने कई एक्ट्रेसेस का स्क्रीन टेस्ट लिया था. कई मीडिया रिपोर्ट्स में ये दावा किया गया है, इस लिस्ट डिंपल कपाड़िया भी इस फिल्म का हिस्सा बनना चाहती थीं, लेकिन राज कपूर ने उन्हें रिजेक्ट कर दिया.

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कहा तो ये भी जाता है कि राज कपूर ने उन्हें ये तक कह दिया था कि तुम्हारे चेहरे में वह मासूमियत नहीं है कि गंगा के रोल में फिट बैठ सको. क्योंकि डिंपल पहले से इंडस्ट्री में बड़ा नाम भी थी, वह कई हिट फिल्मों में नजर आ चुकी थीं और राज कपूर नया चेहरा या कहे कि मासूम चेहरा चाहते थे.

राज कपूर इस फिल्म में गंगा के आइकॉनिक रोल के लिए किसी मासूम चेहरे वाली लड़की को कास्ट करना चाहते थे. इसके लिए उन्होंने बॉलीवुड की जानी मानी अदाकारा पद्मिनी कोल्हापुरे से भी बात की थी. वह उनके साथ कई फिल्मों में काम कर चुकी थीं.

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हद तो तब हुई थी कि जब मंदाकिनी ने फिल्म की 45 दिनों की शूटिंग कर ली थी, तब भी राज कपूर फिल्म में पद्मिनी कोल्हापुरे को ही कास्ट करना चाहते थे.क्योंकि वह इस फिल्म के लिए उनकी पहली पसंद थी. एक्ट्रेस ने अपने एक इंटरव्यू में कहा भी था कि फिल्म में मुझे ब्रेस्टफीडिंग सीन से कोई प्रॉब्लम नहीं थी. लेकिन मैं फिल्म के किसिंग सीन को लेकर थोड़ी असहज थी.

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फिर किस्मत तो मंदाकिनी का इंतजार कर रही थी. तब जाकर फिल्म राम तेरी गंगा मैली का ये रोल मंदाकिनी को मिला था. जिनका असली नाम यास्मीन जोसेफ था। राज कपूर ने ही उन्हें स्क्रीन नाम मंदाकिनी दिया, जो गंगा नदी का ही एक दूसरा नाम है. गंगा का रोल निभाने के बाद मंदाकिनी रातोंरात स्टार बन गई थीं.

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बता दें कि वहीं दूसरी तरफ इस एक फिल्म से मंदाकिनी के लिए आगे के रास्ते खुल गए थे. इस फिल्म के बाद उन्होंने भी किसी बड़ी हिट में काम नहीं किया. लेकिन इस एक फिल्म से उन्हें ताउम्र पहचान मिली. लोग आज भी मंदाकिनी को गंगा के नाम से जानते हैं.

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