Saturday, August 22, 2026
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नाथद्वारा में देवशयन काल में देव प्रतिष्ठा को लेकर विवाद: प्रदर्शनकारी बोले- सनातन परंपराओं की अनदेखी हुई, मर्यादाओं का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं – rajsamand (kankroli) News




राजसमंद जिले के कुंभलगढ़ स्थित फूटा देवल में 18 अगस्त को रामदरबार, राधाकृष्ण और 12 ज्योतिर्लिंग की स्थापना को लेकर विवाद बढ़ता जा रहा है। देवशयन काल में देव प्रतिष्ठा किए जाने का आरोप लगाते हुए विश्व हिंदू परिषद, बजरंग दल, विप्र फाउंडेशन, युवा ब्रह्मशक्ति, ब्राह्मण महासभा, युवा श्रीमाली समाज और श्रीनाथजी की टोली सहित विभिन्न संगठनों ने नाराजगी जताई। शुक्रवार देर शाम नाथद्वारा की चौपाटी पर परशुराम सेवा मंडल ट्रस्ट के अध्यक्ष का पुतला दहन किया गया। इस दौरान बड़ी संख्या में कार्यकर्ता और समाजजन मौजूद रहे। प्रदर्शनकारियों ने धार्मिक परंपराओं और शास्त्रीय मान्यताओं के अनुरूप ही देव प्रतिष्ठा किए जाने की मांग उठाई। देवशयन काल में प्रतिष्ठा को बताया शास्त्रसम्मत नहीं
पूर्व पार्षद पूरण श्रीमाली ने कहा कि सनातन धर्म की मान्यताओं और शास्त्रीय परंपराओं के अनुसार देवशयनी एकादशी से देवउठनी एकादशी तक भगवान के शयन का काल माना जाता है। इस अवधि में विवाह, उपनयन, देव प्रतिष्ठा सहित मांगलिक एवं शुभ संस्कार नहीं किए जाते। उन्होंने कहा कि इस दौरान भजन-कीर्तन, यज्ञ और धार्मिक साधना जैसे कार्य किए जा सकते हैं, लेकिन देव विग्रहों की स्थापना को शास्त्रसम्मत नहीं माना जाता। उन्होंने कहा कि धर्म और राजनीति के अपने-अपने कार्यक्षेत्र हैं। राजनीतिक और सामाजिक पदों पर बैठे लोगों को धार्मिक विषयों में निर्णय लेने से पहले धर्माचार्यों और शास्त्रों के जानकार विद्वानों से परामर्श करना चाहिए। उन्होंने आरोप लगाया कि राजनीतिक हितों के लिए धर्म का सहारा लेकर शास्त्रीय मर्यादाओं का उल्लंघन नहीं किया जाना चाहिए। प्रायश्चित और फिर से प्राण प्रतिष्ठा की मांग
हिंदू संगठनों ने मांग की कि यदि देव प्रतिष्ठा शास्त्र-विरुद्ध तरीके से हुई है तो उसका विधिवत प्रायश्चित कराया जाए और शास्त्रसम्मत मुहूर्त में विग्रहों की पुनः प्राण प्रतिष्ठा कराई जाए। संगठनों का कहना है कि वर्तमान देवशयन काल में प्राण प्रतिष्ठा के लिए उपयुक्त समय नहीं है। प्रदर्शन के दौरान कार्यकर्ताओं ने संबंधित ट्रस्ट के पदाधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने जिम्मेदार पदाधिकारियों को ट्रस्ट से हटाने, प्रायश्चित कराने और धार्मिक परंपराओं के अनुरूप आगे की प्रक्रिया अपनाने की मांग रखी। संगठनों ने चेतावनी दी कि सनातन धर्म की मान्यताओं और धार्मिक परंपराओं के साथ किसी भी प्रकार का खिलवाड़ स्वीकार नहीं किया जाएगा। पुतला दहन के दौरान विभिन्न हिंदू संगठनों के पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे।



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NH-09 पर दोपहर 3 बजे से जीरो ट्रैफिक: सावन के सोमवार पर बढ़ी कांवड़ियों की संख्या, अब हाईवे की दोनों लेन कांवड़ियों के नाम – Amroha News




अमरोहा में कांवड़ यात्रा के मद्देनजर नेशनल हाईवे-09 पर ‘जीरो ट्रैफिक’ व्यवस्था लागू कर दी गई है। यह निर्णय सावन के आखिरी सोमवार को शिव भक्तों की बढ़ती भीड़ को देखते हुए लिया गया है। नेशनल हाईवे-09 पर शिव भक्तों की भारी भीड़ देखी जा रही है। रात भर कांवड़ियों के जत्थे बरेली, रामपुर और मुरादाबाद की ओर जाते हुए दिखाई दिए। पहले हाईवे की एक लेन कांवड़ियों के लिए थी, जबकि दूसरी लेन पर हल्के वाहन चल रहे थे। हालांकि, कांवड़ियों की संख्या में लगातार वृद्धि के कारण प्रशासन ने पूरे हाईवे पर ‘जीरो ट्रैफिक’ योजना लागू करने का फैसला किया। यह व्यवस्था आज दोपहर तीन बजे से लागू होकर सोमवार दोपहर 12 बजे तक प्रभावी रहेगी। पुलिस अधीक्षक (एसपी) लखन सिंह यादव ने बताया कि बृजघाट से जल लेने आने वाले कांवड़ियों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। इसी के मद्देनजर नेशनल हाईवे-09 पर ‘जीरो ट्रैफिक’ लागू करने का निर्णय लिया गया है। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए हाईवे पर जगह-जगह पुलिस बल भी तैनात किया गया है। इन मार्गों से गुजरेगा ट्रैफिक बरेली से दिल्ली की ओर जाने वाला यातायात बरेली से दिल्ली की ओर जाने वाले समस्त भारी वाहनों (यथा- निजी/रोडवेज बस, ट्रक, ट्रैक्टर आदि मालवाहक भारी वाहन) को आवंला से शाहबाद, बिलारी, चन्दौसी, बबराला से डिबाई/नरौरा, बुलन्दशहर होते हुए दिल्ली की ओर भेजा जाएगा। रामपुर से दिल्ली की ओर जाने वाला यातायात रामपुर से दिल्ली की ओर जाने वाले समस्त भारी वाहनों (यथा- ट्रक, ट्रैक्टर आदि मालवाहक भारी वाहन) को जनपद रामपुर क्षेत्रान्तर्गत शाहबाद से डायवर्ट कर बिलारी (जनपद मुरादाबाद), चन्दौसी, बहजोई से गंगा एक्सप्रेस-वे से होकर खड़लिया कट, सिम्भावली, हापुड़ (एनएच-9) होते हुए गाजियाबाद/दिल्ली की ओर आवागमन कराएंगे। मुरादाबाद से गाजियाबाद व दिल्ली की ओर जाने वाला यातायात मुरादाबाद से गाजियाबाद/दिल्ली की ओर जाने वाले समस्त भारी वाहनों (यथा- ट्रक, ट्रैक्टर आदि मालवाहक भारी वाहन) तथा हल्के वाहनों (यथा- जीप, कार, पिक-अप, छोटा हाथी इत्यादि) को मुरादाबाद टोल द्वितीय (एनएच-09) से डायवर्ट होकर बिलारी, चन्दौसी, बहजोई, गंगा एक्सप्रेस-वे से होकर खड़लिया कट, सिम्भावली, हापुड़ (एनएच-9) होते हुए गाजियाबाद/दिल्ली की ओर आवागमन कराएंगे। मुरादाबाद से गाजियाबाद/दिल्ली की ओर जाने वाले समस्त भारी वाहनों (यथा- ट्रक, ट्रैक्टर आदि मालवाहक भारी वाहन) तथा हल्के वाहनों (यथा- जीप, कार, पिक-अप, छोटा हाथी इत्यादि) को मुरादाबाद टोल प्रथम (एनएच-09) से डायवर्ट होकर सिरसी, सम्भल से खीरनी गंगा एक्सप्रेस-वे से होकर खड़लिया कट, सिम्भावली, हापुड़ (एनएच-9) होते हुए गाजियाबाद/दिल्ली की ओर आवागमन कराएंगे। मुरादाबाद से गाजियाबाद/दिल्ली की ओर जाने वाले समस्त भारी वाहनों (ट्रक, ट्रैक्टर आदि मालवाहक भारी वाहन) और हल्के वाहनों (जीप, कार, पिक-अप, छोटा हाथी इत्यादि) को मुरादाबाद से होकर सीएनजी पेट्रोल पंप (चौकी जिवाई) से डायवर्ट होकर असमौली, सम्भल, खीरनी गंगा एक्सप्रेस-वे से होकर खड़लिया कट, सिम्भावली, हापुड़ (एनएच-9) होते हुए गाजियाबाद/दिल्ली की ओर आवागमन कराएंगे। गाजियाबाद व दिल्ली की ओर जाने वाला यातायात सम्भल से दिल्ली की ओर जाने वाले समस्त भारी वाहनों (यथा- ट्रक, ट्रैक्टर आदि मालवाहक भारी वाहन) को बहजोई, सम्भल, खिरनी गंगा एक्सप्रेस-वे होकर खड़लिया कट, सिम्भावली, हापुड़ (एनएच-9) होते हुए गाजियाबाद/दिल्ली की ओर आवागमन कराएंगे। चांदपुर (जनपद बिजनौर) से गजरौला होते हुए दिल्ली जाने वाला यातायात चांदपुर (जनपद बिजनौर) से गजरौला होते हुए दिल्ली जाने वाले समस्त भारी वाहनों (यथा- निजी/रोडवेज बस, ट्रक, ट्रैक्टर आदि मालवाहक भारी वाहन) तथा हल्के वाहनों (यथा- जीप, कार, पिक-अप, छोटा हाथी इत्यादि) को जनपद बिजनौर से जलीलपुर से डायवर्ट कर गंगा पुल से होते हुए हस्तिनापुर, मवाना, मेरठ, गाजियाबाद होते हुए दिल्ली भेजा जाएगा। अमरोहा से दिल्ली जाने वाला यातायात अमरोहा से अतरासी तिराहा से अतरासी पुलिस चौकी से हसनपुर, मंगरौला, गंवा रोड, गंगा एक्सप्रेस-वे होकर खड़लिया कट, सिम्भावली, हापुड़ (एनएच-9) होते हुए आवागमन करेगा। गजरौला से दिल्ली की ओर जाने वाला यातायात गजरौला चौपला से डायवर्ट होकर हसनपुर, मंगरौला, गंवा रोड, गंगा एक्सप्रेस-वे होकर खड़लिया कट, सिम्भावली, हापुड़ (एनएच-9) होते हुए आवागमन करेगा। धनौरा से दिल्ली की ओर जाने वाला यातायात धनौरा से दिल्ली की ओर जाने वाले समस्त भारी वाहनों (यथा- निजी/रोडवेज बस, ट्रक, ट्रैक्टर आदि मालवाहक भारी वाहन) को पत्थरकुटी से डायवर्ट होकर नौगावां फाटक होते हुए फीना, चांदपुर, बिजनौर, मवाना, मेरठ होकर दिल्ली भेजा जाएगा। हसनपुर से दिल्ली की ओर जाने वाला यातायात हसनपुर से दिल्ली की ओर जाने वाले समस्त भारी वाहनों (यथा- निजी/रोडवेज बस, ट्रक, ट्रैक्टर आदि मालवाहक भारी वाहन) को हसनपुर, मंगरौला, गंवा रोड, गंगा एक्सप्रेस-वे होकर खड़लिया कट, सिम्भावली, हापुड़ (एनएच-9) होते हुए आवागमन कराएंगे। दिल्ली-गाजियाबाद से बरेली/लखनऊ की ओर जाने वाला यातायात दिल्ली-गाजियाबाद से बरेली/लखनऊ की ओर जाने वाले समस्त भारी वाहनों (यथा- ट्रक, ट्रैक्टर आदि मालवाहक भारी वाहन) को लालकुआं (गाजियाबाद) तथा खड़लिया कट, सिम्भावली, हापुड़, गंगा एक्सप्रेस-वे, बुलन्दशहर, डिबाई, नरौरा, गुन्नौर, सहसवान, बदायूं होते हुए बरेली/लखनऊ की ओर भेजा जाएगा। मेरठ से मुरादाबाद/बरेली/लखनऊ की ओर जाने वाला यातायात मेरठ से बरेली की ओर जाने वाले समस्त भारी वाहनों (यथा- निजी/रोडवेज बस, ट्रक, ट्रैक्टर आदि मालवाहक भारी वाहन) तथा हल्के वाहनों (यथा- जीप, कार, पिक-अप, छोटा हाथी इत्यादि) को बिजनौर, धामपुर, स्यौहारा, कांठ, मुरादाबाद होते हुए बरेली की ओर भेजा जाएगा। हापुड़ व मेरठ से रामपुर की ओर जाने वाला यातायात हापुड़ व मेरठ से गढ़ के मध्य से रामपुर की ओर जाने वाले भारी वाहनों (यथा- निजी/रोडवेज बस, ट्रक, ट्रैक्टर आदि मालवाहक भारी वाहन) को गढ़ चौपला जनपद हापुड़ से डायवर्ट कर बुलन्दशहर, डिबाई, नरौरा (जनपद बुलन्दशहर), बबराला, बहजोई, चन्दौसी (जनपद सम्भल), बिलारी (जनपद मुरादाबाद), शाहबाद होते हुए रामपुर की ओर भेजा जाएगा। अमरोहा से मुरादाबाद की ओर जाने वाले वाहन अमरोहा से मुरादाबाद की ओर जाने वाले समस्त दोपहिया व चारपहिया वाहन टीपी नगर तिराहे से गांधी मूर्ति से नन्दन स्वीट्स से माया धर्म कांटा से कैलसा चौराहे से कैलसा होते हुए मुरादाबाद की ओर आवागमन करेंगे। अमरोहा से दिल्ली, गाजियाबाद व मेरठ की ओर जाने वाले वाहन अमरोहा से दिल्ली, गाजियाबाद व मेरठ की ओर जाने वाले वाहन (दोपहिया व चारपहिया वाहन) अतरासी तिराहे से आरटीओ तिराहे से अतरासी की ओर या अटल चौक से मंडी रोड, गुलड़िया बाईपास से अतरासी रोड होते हुए अतरासी पुलिस चौकी से हसनपुर से गंगा एक्सप्रेस-वे (मंगरौला कट से) होते हुए हापुड़ से दिल्ली, मेरठ व गाजियाबाद जाएंगे।



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ऑटो की टक्कर से बाइक सवार की मौत: बांका में बाजार से घर लौटने के दौरान हादसा, चचेरा भाई घायल – Banka News




बांका में शुक्रवार शाम ऑटो की टक्कर से बाइक सवार युवक की मौत हो गई। इस घटना में उसका चचेरा भाई गंभीर रूप से घायल हो गया। घटना जमदाहा ओपी क्षेत्र अंतर्गत मोदी टोला के पास हुई। मृतक की पहचान रामपुर गांव निवासी श्याम सुंदर यादव के बेटे अंकित कुमार सुमन के रूप में हुई है, जबकि घायल युवक वीरेंद्र यादव है। अंकित कुमार सुमन और वीरेंद्र यादव बाइक से कटोरिया बाजार से अपने घर लौट रहे थे। मोदी टोला के पास सामने से आ रहे तेज रफ्तार ऑटो ने उनकी बाइक को टक्कर मार दी। टक्कर लगने से दोनों सड़क पर गिरकर गंभीर रूप से घायल हो गए। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में घायल का इलाज जारी इसी बीच, कटोरिया की ओर से आ रहे एक अज्ञात वाहन ने सड़क पर गिरे अंकित कुमार सुमन को कुचल दिया, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई। हादसे के बाद मौके पर स्थानीय लोगों की भीड़ जमा हो गई। लोगों की मदद से दोनों घायलों को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र ले जाया गया। वहां चिकित्सक डॉ. विनोद कुमार और शैलजानंद शुक्ला ने अंकित कुमार सुमन को मृत घोषित कर दिया। गंभीर रूप से घायल वीरेंद्र यादव का अस्पताल में इलाज जारी है। घटना की सूचना मिलते ही जमदाहा ओपी पुलिस मौके पर पहुंची और घटनास्थल का मुआयना किया। पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। मृतक के परिजन भी अस्पताल पहुंचे। थानाध्यक्ष रंतेज कुमार ने बताया कि शव को पोस्टमॉर्टम के लिए भेजा गया है और मामले की जांच की जा रही है। पुलिस द्वारा आगे की कानूनी कार्रवाई की जा रही है।



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बारिश में बदल जाता है बुंदेलखंडियों का स्वाद, कम तेल से बनता है ये व्यंजन

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Besan and Jeggery chilla recipe: बुंदेलखंड में सदियों से पकौड़ी और मंगोड़ी की जगह चीला को खाना पसंद करते हैं और यह बुंदेलखंड का पारंपरिक व्यंजन है जो बारिश की झड़ी लगते ही हर घर में बनना शुरू हो जाती है. इसको बनाना इतना आसान नहीं होता है. पुराने लोग इसे स्वादिष्ट बना सकते हैं.

सागर. मानसून का मौसम हो और बाहर बारिश हो रही हो तो अक्सर अपने लोगों को कहते सुना होगा कि इस समय चाय के साथ गरम-गरम पकोड़े मिल जाए तो दिन बन जाएगा. या यूं कहें कि बारिश का आनंद लेने के लिए गरम पकौड़ी मंगोड़ी खाना लोग पसंद करते हैं लेकिन बुंदेलखंड में सदियों से पकौड़ी और मंगोड़ी की जगह चीला को खाना पसंद करते हैं और यह बुंदेलखंड का पारंपरिक व्यंजन है जो बारिश शुरू होते ही हर घर में बनना शुरू हो जाता है. चीला न सिर्फ बारिश का मजा लेने वाला व्यंजन है बल्कि यह पेट को भी डाइजेस्ट करता है और जिन लोगों को पाचन से संबंधित परेशानी होती है उनके लिए भी यह अच्छा होता है.

बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक हर कोई चिल्ला का फैन होता है, अब तो सागर शहर में मानसून के सीजन में अलग से भी दुकानों पर यह स्पेशल चीले तैयार किए जाते हैं और लोग इन्हें खाने के लिए पहुंचते हैं. हालांकि, इनमें बेसन के अलावा और भी अलग-अलग वैरायटी के चीला मिलते हैं, अगर आप भी इस रेसिपी को घर पर ट्राई करना चाहते हैं तो हम आपको मसाला बनाने और तैयार करने की पूरी विधि बताते हैं.

बनाने की पूरी विधि
चीला बनाने के लिए बेसन की मुख्य रूप से जरूरत होती है और इसको अलग-अलग तरह के मसाले मिलाकर घोल तैयार किया जाता है. पुराना और पारंपरिक चीला बनाने के तरीके में केवल बेसन और अजवाइन के साथ स्वादानुसार नमक मिर्च मिलाया जाता है. पतला घोल होता है इसको चूल्हे की धीमी आंच में तवे पर डालते हैं और ऊपर से रुई में तेल लेकर पराठा के जैसी सिकाई करते हैं और कुछ ही मिनट में यह लाल दिखाई देने लगता है तो उसको निकाल लेते हैं फिर इसको चटनी या अचार के साथ खाते हैं. हालांकि, इसको बनाना इतना आसान नहीं होता है जो पुराने बुजुर्ग हैं वे ही अपना हुनर दिखाते हैं. इनको तैयार करने में बहुत कम तेल खर्च होता है.

गुड का भी बना सकते हैं चीला
वहीं नए जमाने में बनाने के तरीके को जाने तो अब गैस या इंडक्शन पर भी उसको तैयार किया जाने लगा है. बाकायदा जो बेसन का घोल तैयार किया जाता है उसमें टमाटर प्याज के साथ अन्य मसाले भी मिलाए जाते हैं और जब इसको गर्म तवा पर डालते हैं तो चम्मच में तेल लेकर हल्का-हल्का लगाते हैं और जब यह पक जाता है तो निकाल लेते हैं फिर गरम-गरम चीला जब खाते हैं तो उंगलियां चाटते रह जाते हैं. इसमें चटनी के साथ टोमेटो केचप का कॉम्बो बनाया जाता है. यह भी टेस्ट में लाजवाब होता है. इसके अलावा गुड़ के मीठा चीला भी बनाए जाते हैं जिसमें पहले गुड को पानी में भीगने के लिए डाला जाता है फिर उसको अच्छे से गूंथ लेते हैं और फिर इसके पानी को बेसन में मिलाकर चिला बनाए जाते हैं.

About the Author

Mohd Majid

with more than more than 5 years of experience in journalism. It has been two and half year to associated with Network 18 Since 2023. Currently Working as a Senior content Editor at Network 18. Here, I am cover…

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सिवनी जिला जेल के विचाराधीन कैदी की मौत: सीने में दर्द के बाद बिगड़ी तबीयत, अस्पताल में तोड़ा दम; हत्या के मामले में बंद था – Seoni News




सिवनी जिला जेल में बंद एक विचाराधीन कैदी की शुक्रवार रात इलाज के दौरान मौत हो गई। सीने में अचानक दर्द उठने के बाद उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था, जहां डॉक्टरों ने उसे मृत घोषित कर दिया। सीने में दर्द के बाद बिगड़ी थी तबीयत मृतक की पहचान संकेत ठाकुर के रूप में हुई है, जो भारतीय दंड संहिता की धारा 302 (हत्या) के तहत जिला जेल में बंद था। शुक्रवार रात उसने जेल में अचानक सीने में तेज दर्द और घबराहट की शिकायत की। प्राथमिक उपचार के बाद किया गया रेफर तबीयत बिगड़ते ही जेल कर्मियों ने उसे पहले अंदर ही प्राथमिक उपचार दिया। हालत में सुधार न होने पर जेल प्रहरी नरेंद्र डहरवाल व अन्य कर्मचारियों की मदद से तत्काल जिला चिकित्सालय पहुंचाया गया, लेकिन उपचार के दौरान उसने दम तोड़ दिया। हार्ट अटैक की संभावना, जांच जारी कोतवाली प्रभारी सतीश तिवारी ने बताया कि शव का पंचनामा बनाकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया है। प्राथमिक तौर पर मौत की वजह हार्ट अटैक (हृदयघात) मानी जा रही है। पुलिस का कहना है कि वास्तविक कारणों का खुलासा पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद ही हो सकेगा।



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खड़गे बोले- चीनी आयात हो रही, ये कैसा आत्मनिर्भर भारत: बढ़ती कीमतों पर सरकार से 3 सवाल; 3 महीने में ₹19 महंगी, दाम 40% बढ़े




कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने शनिवार को चीनी की बढ़ती कीमतों और स्टॉक की कमी को लेकर केंद्र पर निशाना साधा। उन्होंने X पर पोस्ट कर कहा कि त्योहारों से पहले मोदी सरकार की नीतियों की कड़वाहट चीनी की मिठास में घुल गई है। खड़गे ने सरकार से सवाल किया कि दुनिया के बड़े चीनी उत्पादक और निर्यातक भारत में चीनी का स्टॉक 9 साल के निचले स्तर पर क्यों पहुंच गया। उन्होंने 10 लाख टन चीनी ड्यूटी-फ्री आयात करने की नौबत पर भी सवाल उठाया। खड़गे ने सरकार से 3 सवाल करते हुए पूछा कि ये कैसा आत्मनिर्भर भारत है, जहां विदेश से चीनी आयात की जा रही है और दूसरी तरफ गन्ने को पेट्रोल में मिलाने के लिए एथेनॉल में झोंका जा रहा है। देश के कई शहरों में चीनी की कीमत 70 रुपए किलो तक पहुंच गई है। पिछले 3 महीने में इसके दाम करीब 40% यानी ₹19 प्रति किलो तक बढ़े हैं। कीमत कम करने के लिए केंद्र ने 31 अक्टूबर तक 10 लाख टन रॉ शुगर बिना ड्यूटी के आयात करने की मंजूरी दी है। सरकार बोली- एथेनॉल की वजह से नहीं बढ़ी चीनी की कीमत सरकार ने चीनी की बढ़ती कीमतों के लिए एथेनॉल बनाने में गन्ने के इस्तेमाल को जिम्मेदार मानने से इनकार किया है। खाद्य सचिव संजीव चोपड़ा ने कहा कि देश में पर्याप्त चीनी स्टॉक है। कीमतों में हालिया बढ़ोतरी के पीछे मिलों की ओर से दाम बढ़ाना, जमाखोरी और सट्टेबाजी प्रमुख वजह हैं। सरकार ने चीनी की कीमत बढ़ने की अन्य वजहों में घरेलू उत्पादन में कमी, त्योहारों से पहले बढ़ी मांग, मौसम से गन्ने की फसल को नुकसान और अंतरराष्ट्रीय बाजार में सप्लाई का दबाव बताया है। खाद्य सचिव बोले- एथेनॉल के लिए कम चीनी इस्तेमाल हो रही खाद्य सचिव चोपड़ा के मुताबिक, अब देश में बनने वाले एथेनॉल का करीब एक-चौथाई हिस्सा ही चीनी से आता है, जबकि बाकी मुख्य रूप से मक्का जैसे अनाज से बनता है। एथेनॉल के लिए डायवर्ट की जाने वाली चीनी की हिस्सेदारी 2022-23 में 12% थी। यह 2025-26 में घटकर करीब 9% रह गई है। मौजूदा सीजन में एथेनॉल के लिए सिर्फ 28 लाख टन चीनी डायवर्ट की गई है। अक्टूबर तक पर्याप्त स्टॉक का दावा इस सीजन में देश में चीनी का उत्पादन 306 लाख मीट्रिक टन (LMT) रहने का अनुमान है, जबकि शुरुआती अनुमान 343 LMT था। रेड रॉट और टॉप बोरर जैसी बीमारियों के साथ ज्यादा बारिश से खेतों में पानी भरने के कारण उत्पादन घटा है। हालांकि, मंत्रालय का कहना है कि अक्टूबर में नया पेराई सीजन शुरू होने तक घरेलू जरूरत पूरी करने के लिए पर्याप्त स्टॉक मौजूद है। चीनी की कीमतों पर अंतरराष्ट्रीय बाजार का भी असर पड़ा है। 2026-27 में दुनिया में चीनी की कमी करीब 33 LMT रहने का अनुमान है। इसके चलते अंतरराष्ट्रीय कीमत 30 जून को 474 डॉलर प्रति टन से बढ़कर 20 अगस्त को 552 डॉलर प्रति टन हो गई। यानी दो महीने से भी कम समय में 16% से ज्यादा बढ़ोतरी हुई। घरेलू बाजार में जमाखोरी और सट्टेबाजी रोकने के लिए सरकार ने डीलर्स पर 400 टन की स्टॉक लिमिट 30 नवंबर तक लागू की है। वहीं, थोक उपभोक्ताओं के लिए 1 सितंबर से 15 दिन की स्टॉक सीमा लागू होगी। कृत्रिम कमी रोकने के लिए केंद्र और राज्य की संयुक्त टीमें चीनी मिलों में जाकर स्टॉक का भौतिक सत्यापन भी कर रही हैं।



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लुधियाना में तिब्बती युवाओं का प्रदर्शन: चीन की नीतियों के खिलाफ निकाला रोष मार्च, नारेबाजी की; होजरी व्यापारियों का समर्थन मिला – Ludhiana News


लुधियाना में तिब्बती युवाओं ने चीन की कम्युनिस्ट सरकार और उसकी विस्तारवादी नीतियों के खिलाफ शांतिपूर्ण रोष मार्च निकाला।

लुधियाना में तिब्बती युवाओं ने चीन की कम्युनिस्ट सरकार और उसकी विस्तारवादी नीतियों के खिलाफ आज शांतिपूर्ण रोष मार्च निकाला। तिब्बती युवा कांग्रेस के नेतृत्व में डिवीजन नंबर 3 से सुंदर नगर तक निकाले गए मार्च में 500 से अधिक तिब्बती नागरिकों ने हिस्सा

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प्रदर्शनकारियों ने चीन की तिब्बत नीति के विरोध में भी नारेबाजी की। “तिब्बत एक राष्ट्र था, तिब्बत एक राष्ट्र है और जल्द ही तिब्बत आजाद होगा” जैसे नारे लगाए गए। मार्च को लुधियाना के स्थानीय होजरी व्यापारियों का भी समर्थन मिला। यह प्रदर्शन तिब्बती युवा कांग्रेस की ओर से शुरू किए गए अंतरराष्ट्रीय चेन प्रोटेस्ट का हिस्सा है।

संगठन के अनुसार, यह आंदोलन शहीद लोबगा रांगजेन के बलिदान की याद में किया जा रहा है। संगठन का दावा है कि उन्होंने तिब्बत की स्थिति और तिब्बती लोगों के संघर्ष की ओर दुनिया का ध्यान खींचने के लिए संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय के सामने आत्मदाह किया था।

शांतिपूर्ण रोष मार्च के दौरान नारेबाजी करते हुए तिब्बती युवा।

कैंडल मार्च और रैलियां आयोजित

तिब्बती युवा कांग्रेस ने कहा कि धर्मशाला से शुरू हुई यह मुहिम अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जारी है। इसके तहत भूख हड़ताल, कैंडल मार्च और रैलियां आयोजित की जा रही हैं। संगठन का कहना है कि चीन के खिलाफ ठोस कार्रवाई होने तक यह अभियान जारी रखा जाएगा।

एथनिक यूनिटी लॉ का विरोध, UN प्रवक्ता के बयान पर भी निशाना

प्रदर्शनकारियों ने 1 जुलाई को चीन की ओर से लागू किए गए कथित एथनिक यूनिटी लॉ (Ethnic Unity Law) का विरोध किया। तिब्बती युवा कांग्रेस का आरोप है कि इस कानून के जरिए तिब्बत समेत अन्य क्षेत्रों की अलग सांस्कृतिक और राष्ट्रीय पहचान को कमजोर करने की कोशिश की जा रही है। संगठन ने चीन पर कॉलोनियल बोर्डिंग स्कूलों के जरिए बच्चों को उनके समुदायों से अलग करने और उनकी पहचान पर प्रभाव डालने का भी आरोप लगाया।

तिब्बती युवा कांग्रेस ने संयुक्त राष्ट्र महासचिव के प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक के उस कथित बयान की भी आलोचना की, जिसमें तिब्बत को चीन की अल्पसंख्यक आबादी का हिस्सा बताया गया था। संगठन ने इसे ऐतिहासिक रूप से गलत बताते हुए कहा कि संयुक्त राष्ट्र को ऐसी भाषा से बचना चाहिए, जिसे वह चीन के कब्जे को वैध ठहराने वाला मानता है।



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ट्रक से टकराई कार के परखच्चे उड़े, 3 की मौत: 8 गंभीर, नागपुर से कुबेरेश्वर धाम जा रहे थे 11 लोग; बैतूल में मुलताई फोरलेन पर हादसा – Multai News




बैतूल जिले के मुलताई फोरलेन पर जीतू ढाबे के पास एक तेज रफ्तार कार सड़क किनारे खड़े ट्रक के पीछे जा घुसी। टक्कर इतनी तेज थी कि कार के परखच्चे उड़ गए। मौके पर ही पति-पत्नी सहित तीन लोगों की मौत हो गई, जबकि 8 लोग गंभीर रूप से घायल हैं। हादसा शनिवार तड़के 3:30 बजे का बताया जा रहा है। पुलिस के मुताबिक, कार में सभी श्रद्धालु थे, जो नागपुर (महाराष्ट्र) के पास बुट्टी बोरी कोल माइंस एरिया के रहने वाले हैं। ये लोग सीहोर के कुबेरेश्वर धाम दर्शन करने के लिए जा रहे थे। पुलिस ने आशंका जताई है कि झपकी आने के कारण कार ड्राइवर सड़क किनारे खड़ा ट्रक नहीं देख पाया होगा और हादसे का शिकार हो गया। हालांकि, सही वजह जांच के बाद ही स्पष्ट होगी। अभी दो मृतकों की पहचान हुई है, जो पति-पत्नी हैं। इनके नाम 40 वर्षीय छाया और 42 वर्षीय दीपक हैं। तीसरी महिला की पहचान नहीं हो पाई है। पुलिस ने शवों को पोस्टमॉर्टम के लिए भेज दिया है। देखिए तस्वीरें ड्राइवर समेत 8 लोग घायल, नागपुर रेफर हादसे में कार ड्राइवर सहित 8 लोग घायल हैं। इनमें बच्चे भी शामिल हैं। सूचना मिलते ही 108 एंबुलेंस मौके पर पहुंची और घायलों को मुलताई के सरकारी अस्पताल ले गई। प्राथमिक इलाज के बाद सभी घायलों को नागपुर रेफर कर दिया गया। पुलिस ने केस दर्ज कर हादसे की जांच शुरू कर दी है। अगला पहिया टूटकर अलग हो गया, आगे की सीट पीछे चली गई चश्मदीद के मुताबिक, हादसे की जोरदार आवाज सुनकर जब हम लोग पहुंचे तो कार की बीच वाली सीट पर बैठे दो लोगों की मौत हो चुकी थी। कार का अगला पहिया टूटकर अलग हो गया था। आगे की सीट पीछे चली गई थी, जबकि छत पूरी तरह क्षतिग्रस्त थी।



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मुठभेड़ में दो इनामी बदमाशों को गोली लगी: फिरोजाबाद में तीसरे साथी ने किया आत्मसमर्पण, चोरी के मामले में वांछित थे – Firozabad News




फिरोजाबाद में नारखी थाना पुलिस, एसओजी, सर्विलांस और मक्खनपुर पुलिस की संयुक्त टीम ने शुक्रवार रात मुठभेड़ के बाद तीन शातिर बदमाशों को गिरफ्तार किया। पुलिस की जवाबी कार्रवाई में 25-25 हजार रुपये के इनामी दो बदमाशों के पैर में गोली लगी, जबकि उनके तीसरे साथी को घेराबंदी कर पकड़ लिया गया। घायल बदमाशों को पुलिस अभिरक्षा में उपचार के लिए अस्पताल में भर्ती कराया गया है। सीओ अरुण चौरसिया ने बताया कि नारखी और मक्खनपुर क्षेत्र में हुई चोरी की घटनाओं में वांछित बदमाश चोरी का माल बेचने के लिए बाइक से जा रहे थे। सूचना पर पुलिस टीम ने जलेसर पुल सर्विस रोड के पास घेराबंदी की। पुलिस ने बदमाशों को रोकने का प्रयास किया तो उन्होंने जान से मारने की नीयत से पुलिस टीम पर फायरिंग कर दी। जवाबी कार्रवाई में अनुज उर्फ अनूप उर्फ मोटा पुत्र घनश्याम और मिथुन पुत्र वेदप्रकाश, निवासी केरावली, थाना करहल, मैनपुरी, के पैर में गोली लगी।
वहीं, तीसरा आरोपी अंशू पुत्र घनश्याम भागने का प्रयास कर रहा था, जिसे पुलिस ने घेराबंदी कर गिरफ्तार कर लिया। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से दो चेन, एक अंगूठी, दो जोड़ी पाजेब, तीन करधनी, एक जोड़ी झुमकी, एक जोड़ी टॉप्स और 10,500 रुपये नकद बरामद किए हैं। इसके अलावा दो तमंचे 315 बोर, पांच जिंदा कारतूस, तीन खोखा कारतूस और वारदात में प्रयुक्त सुपर स्प्लेंडर बाइक भी बरामद की गई है। पुलिस के मुताबिक तीनों आरोपी नारखी और मक्खनपुर थाने में दर्ज चोरी के मुकदमों में वांछित थे। सीसीटीवी फुटेज और अन्य साक्ष्यों के आधार पर उनकी संलिप्तता सामने आई थी।
पुलिस के अनुसार, अनुज उर्फ अनूप पर विभिन्न जनपदों में तीन दर्जन से अधिक मुकदमे दर्ज हैं। इनमें गैंगस्टर एक्ट, चोरी, लूट, बरामदगी और आर्म्स एक्ट के मामले शामिल हैं। अनुज और मिथुन की गिरफ्तारी पर एसएसपी फिरोजाबाद की ओर से 25-25 हजार रुपये का इनाम घोषित था। 18 मार्च 2026 को नारखी क्षेत्र के हरीनगर लदपुरा में घर का ताला तोड़कर हुई चोरी और 20 अगस्त को मक्खनपुर क्षेत्र के राजपुर बलाई में हुई चोरी के खुलासे के लिए चार पुलिस टीमें गठित की गई थीं। कार्रवाई में नारखी थाना प्रभारी राकेश कुमार गिरी, एसओजी प्रभारी प्रेम शंकर पांडेय, सर्विलांस प्रभारी मुकेश कुमार, मक्खनपुर थाना प्रभारी चमन शर्मा सहित पुलिस टीम शामिल रही। तीनों आरोपियों के खिलाफ अग्रिम विधिक कार्रवाई की जा रही है।



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‘तबेले’ में घुसने से पहले ‘कॉकरोचों’ की पिटाई: साइंस टीचर का ‘अलाइनमेंट’ गड़बड़ाया; ट्रांसफर हुआ तो गुरुजी से लिपटे – Rajasthan News




नमस्कार, जयपुर में ‘कॉकरोच’ दूसरी बार पिट गए। पहले फाउंडर साहब को थप्पड़ पड़ गए थे, अब को-फाउंडर को पीट दिया। अजमेर में साइंस टीचर नशे में स्कूल पहुंच गया, खेल ग्राउंड में उसका ‘अलाइनमेंट’ बिगड़ गया। वहीं चूरू के एक स्कूल से प्रिंसिपल का ट्रांसफर हुआ तो बच्चे लिपटकर रोने लगे। राजनीति और ब्यूरोक्रेसी की ऐसी ही खरी-खरी बातें पढ़िए, आज के इस एपिसोड में… 1. स्कूल सेफ नहीं और निरीक्षण भी.. कॉकरोचों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री का इस्तीफा क्या लिया, अब देशभर के स्कूल सूंघते घूम रहे हैं। आंदोलन का पैटर्न सेट। एजुकेशन के नाम पर पब्लिक और जेन-जी का सपोर्ट ले लो। कॉकरोचों के फाउंडर साहब महाराष्ट्र के स्कूलों में घूम रहे हैं। खामियों पर रीलें बना रहे हैं। छोटे उस्ताद राजस्थान की परिक्रमा कर रहे हैं। टीम के साथ अलवर के एक स्कूल में हल्ला भी बोल आए। इसके बाद छोटे उस्ताद राजधानी के बगरू की तरफ निकले। वहां सरकारी स्कूल जर्जर। भैंसों के तबेले में बच्चे पढ़ रहे। कॉकरोच सेना तबेले की तरफ बढ़ने लगी। स्कूल की हालत ये कि जिस दीवार पर लिखा था- मेरा विद्यालय सुरक्षित विद्यालय, वही दीवार सबसे ज्यादा जर्जर। मौका बढ़िया था। मौसम चुनावी था। निशाना सियासी था। लेकिन.. कॉकरोचों को पता नहीं था कि गांव में ‘फौज’ खड़ी है। फौज ने ऐलान किया कि कॉकरोचों को गांव में नहीं घुसने देंगे। कॉकरोचों ने तय किया कि घुसकर ही मानेंगे। गांव की पगडंडी पर दोनों फौजें आमने-सामने हो गईं। राजनीति का एक उसूल है- जो पिटेगा वही टिकेगा। तो टिकने के लिए कॉकरोच खूब पिटे। जाना था जापान पहुंच गए चीन की तर्ज पर जिन कॉकरोचों को स्कूल जाना था, वे हॉस्पिटल पहुंच गए। राजस्थान में अस्पतालों के हालात भी कहां अच्छे हैं? प्रसूताओं का मामला ताजा है ही। लोगों में चर्चा रही कि कि कहीं टारगेट शिक्षा मंत्री से खिसक कर चिकित्सा मंत्री पर सेट न हो जाए। लेकिन घायल कॉकरोचों ने अव्यवस्थाओं की ओर ध्यान न देकर सिर्फ इलाज कराया। चौपाल पर देर तक यही बात होती रही- अब तो स्कूल ही नहीं, बल्कि स्कूल का निरीक्षण करना भी सुरक्षित नहीं है। 2. साइंस टीचर का ‘अलाइनमेंट’ उनका नाम भीमाराम है। वे अजमेर के केकड़ी इलाके के छोटे से गांव उंदरी के सरकारी स्कूल में साइंस टीचर हैं। पता नहीं उनकी खुशकिस्मती है या बदकिस्मती। वे 27 साल से इसी स्कूल में हैं। चूंकि उन्हें ट्रांसफर का डर नहीं, इसलिए वे नशा करके भी स्कूल आ सकते हैं। उस दिन भीमाराम जी की डोज कुछ हेवी हो गई। स्कूल का खेल मैदान पार करते वक्त उनका अलाइनमेंट बिगड़ गया। वे मैदान में चादर की तरह बिछ गए। दिमाग ने भीमाराम जी को ललकारा- अरे मूर्ख, शर्म कर, तू शिक्षक है। शिक्षक बच्चों को अपने पैरों पर खड़ा होना सिखाता है। तू खुद मिट्‌टी सूंघ रहा है। दिमाग की बात सुन भीमाराम ने आत्मनिर्भर होने की भरसक कोशिश की। लेकिन शरीर ने इस्तीफा दे दिया। गांव वाले भी स्कूल में पहुंच गए। मास्टरजी की हालत पर किसी को हंसी आई, किसी को तरस और किसी को गुस्सा। सबने मिलकर संबल अभियान चलाया और मास्टरजी को लगभग घसीटते हुए चौरस स्थल पर ले आए। कोई पानी की कैन ले आया। चूंकि सावन का महीना चल रहा है। इसलिए एक बुजुर्ग ने गुरुजी का जलाभिषेक कर डाला। बच्चों को नशे की बुराई का इससे बढ़िया पाठ कोई गुरु ही पढ़ा सकता है। बच्चों ने सोचा होगा- मास्टर जी की जो दशा है, उसका कारण नशा है। 3. चलते-चलते.. मशहूर शायर निदा फाजली साहब ने लिखा था- बच्चों के छोटे हाथों को चांद-सितारे छूने दो, चार किताबें पढ़कर ये भी हम जैसे हो जाएंगे। जो पाठ जिंदगी सिखा सकती है, वो किताबें नहीं सिखा सकतीं। कई दिनों से हो हल्ला मचा है। बच्चे सरकारी स्कूल में अच्छी सुविधाओं के लिए आंदोलन कर रहे हैं। कहीं टीचर नहीं, कहीं टपकती छत, कहीं टॉयलेट खराब। कहीं झोंपड़े में स्कूल है तो कहीं तबेले में। भारत जैसे विशाल जनसंख्या वाले देश में कमियां तो मिलेंगी। हम कमियों का रोना रोएंगे तो रोते ही रहेंगे। क्योंकि कमियां कभी पूरी तरह दूर नहीं की जा सकती। ऐसे-ऐसे प्राइवेट स्कूल भी हैं, जहां किसी सुविधा की कोई कमी नहीं। लग्जरी होटल जैसा स्कूल। लेकिन वहां भी बुलिंग से परेशान होकर बच्ची ने छलांग लगा दी। सरकारी स्कूल के बच्चे बुलिंग नहीं समझते। वे पिटाई खाकर भी मस्ती करते हैं। वे खुद को किसी रेस में शामिल नहीं करते। वे खुलकर जीते हैं। जिंदगी का पाठ पढ़ते हैं। कभी-कभी कुछ टीचर बच्चों को जिंदगी का पाठ पढ़ा देते हैं। चूरू के बैरासर स्कूल के प्रिंसिपल सुभाष मेघवाल का ट्रांसफर हो गया। स्कूल की ओर से विदाई समारोह रखा गया। प्रिंसिपल साहब जब जाने लगे तो बच्चों ने उन्हें घेर लिया। लिपट कर रोने लगे। प्रिंसिपल भी अपने आंसू नहीं रोक सके। माहौल दुख और करुणा से भर गया। प्रिंसिपल साहब ने स्कूल के बच्चों को अपने बच्चों की तरह मानकर उन्हें शिक्षा दी। बस, इसी में स्कूल की जीत है, टीचर की जीत है, बच्चों की जीत है। बाकी, जहां तक कमियों की बात है तो निदा फाजली साहब का ही एक और शेर है- कभी किसी को मुकम्मल जहां नहीं मिलता, कहीं जमीं तो कहीं आसमां नहीं मिलता। इनपुट सहयोग- स्मित पालीवाल, रिषभ सैनी (जयपुर), भरत मूलचंदानी (अजमेर)। वीडियो देखने के लिए सबसे ऊपर फोटो पर क्लिक करें। अब कल सुबह 7 बजे मुलाकात होगी।



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