Sunday, July 26, 2026
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बिहार में 600 छात्र गिरफ्तार, इनका क्या होगा?: प्रदर्शनकारी बोले-अगर छात्रों को छोड़ा नहीं गया तो फिर प्रदर्शन,परिजन बोले–सोते बेटे को उठा ले गए – Siwan News




“हम स्टूडेंट्स सड़क पर किसी से लड़ने नहीं निकले थे, अपना हक मांगने निकले थे। हम दिन-रात जगकर पढ़ाई करते हैं, एग्जाम देते हैं और मेहनत करके अपना भविष्य बनाना चाहते हैं। अगर परीक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी होती है और उसके खिलाफ आवाज उठाने पर पुलिस लाठी चलाती है, तो छात्र आखिर जाएं कहां? हमें सरकार से सिर्फ इतना चाहिए कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच हो और दोषियों पर कार्रवाई हो। सिर्फ शिक्षा मंत्री के इस्तीफे से काम नहीं चलेगा। PM मोदी को भी इस्तीफा देना पड़ेगा। हमारे ऊपर लाठी चलाने की जगह शुरू में ही हमारी बात सुनी जाती, तो ये दिन नहीं आता…” ये कहना है बिहार बंद में शामिल हुए प्रदर्शनकारी स्टूडेंट्स का, जिनका गुस्सा अभी भी पूरी तरह से शांत नहीं हुआ है। दरअसल, पेपर लीक, परीक्षा में पारदर्शिता और छात्रों पर कार्रवाई के विरोध में शनिवार (25 जुलाई) को AISA ने बिहार बंद का आवाहन किया था। इस दौरान बिहार के 4 जिलों में सबसे ज्यादा उग्र प्रदर्शन देखने को मिला। छपरा में BDO की आंख फूटी, सीवान-सीतामढ़ी में SP घायल छपरा में BDO की आंख फोड़ दी गई, सीवान-सीतामढ़ी में SP पर पत्थर फेंककर उन्हें घायल कर दिया गया। बिहार बंद के दौरान करीब 20 से ज्यादा पुलिसकर्मी जख्मी हुए हैं। वहीं, पूरे बिहार से 600 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों को पुलिस ने डिनेट किया है। उनलोगों से पूछताछ की जा रही है। इतने बवाल के बाद केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने भी इस्तीफा दे दिया है। इसके बावजूद प्रदर्शनकारी छात्रों के बीच खुशी की जगह आंदोलन को आगे जारी रखने की बात सामने आई है। छात्र संगठनों का कहना है कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा उनकी तीन प्रमुख मांगों में से सिर्फ एक मांग की पूर्ति है। दो मांगें अभी बाकी हैं। इनमें निर्दोष छात्रों पर दर्ज FIR वापस लेना और पेपर लीक और परीक्षा संबंधी अनियमितताओं के कारण जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देना शामिल है। ‘600 छात्र को किया गया डिटेन, क्या होगा इनका भविष्य? क्या अब आंदोलन कमजोर होगा या और बढ़ेगा? छात्र संगठनों की अब क्या बची है मांगें? डिटेन स्टूडेंट्स के परिवार में कैसा डर है… पढ़िए पूरी रिपोर्ट… पहले प्रदर्शन से जुड़ी तस्वीरें देखिए… ‘धर्मेंद्र गए, अब नरेंद्र मोदी को हटाने की बारी’ मुजफ्फरपुर में NSUI जिला अध्यक्ष आदित्य कुमार करण ने कहा, ‘धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा छात्रों के संघर्ष की एक उपलब्धि है, लेकिन आंदोलन अभी खत्म नहीं हुआ है। अभी धर्मेंद्र प्रधान गए हैं, अब नरेंद्र मोदी को हटाने की बारी है। छात्रों पर जिस तरह अत्याचार हुआ और बेरहमी से लाठीचार्ज किया गया, उसी के विरोध में अब आंदोलन होगा। अगर निर्दोष छात्रों पर दर्ज FIR वापस नहीं लिया गया और जिन छात्रों के साथ अत्याचार हुआ है, उनके परिवारों को मुआवजा नहीं मिला तो हमलोग फिर बड़े आंदोलन के लिए सड़क पर उतरेंगे।’ आदित्य कुमार करण ने कहा कि आंदोलन को देशभर के छात्रों और युवाओं ने मिलकर मजबूत किया है। जिन लोगों ने दिन-रात संघर्ष किया, उनके दबाव के कारण सरकार को धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लेना पड़ा। तीन मांगों में एक पूरी, दो अभी बाकी NSUI नेता ने बताया, छात्र संगठनों की तीन प्रमुख मांगें थीं। पहली मांग केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की थी, जो पूरी हो चुकी है। दूसरी मांग पेपर लीक या परीक्षा संबंधी गड़बड़ी के कारण जान गंवाने वाले छात्रों के परिवारों को मुआवजा देने की है। तीसरी मांग निर्दोष छात्रों पर दर्ज FIR वापस लेने की है। धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे के साथ सिर्फ एक मांग पूरी हुई है। बाकी दो मांगों पर केंद्र सरकार की ओर से अभी तक लिखित आदेश नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि जब तक बाकी मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं मिलता, तब तक आंदोलन खत्म नहीं माना जाएगा।।” Gen-Z के युवा वोट से बनाएंगे भविष्य वहीं, पटना में प्रदर्शन में शामिल हुईं 12वीं की छात्रा भाव्या ने कहा, वह करीब दो साल बाद मतदान के लिए योग्य हो जाएंगी। आज छात्रों के साथ जो कुछ हो रहा है, उसे Gen-Z के युवा भविष्य में अपने वोट के जरिए जरूर याद रखेंगे। इस एजुकेशन सिस्टम के फेल्योर की वजह से हमें जो कुछ सहना पड़ा है, उसे हम अपने वोट के जरिए जरूर दिखाएंगे। हम लोग बीजेपी की सरकार से बिल्कुल भी संतुष्ट नहीं हैं। अटल बिहारी वाजपेयी ने कहा था कि सरकारें आएंगी-जाएंगी, पार्टियां बनेंगी-बिगड़ेंगी, लेकिन देश का लोकतंत्र रहना चाहिए। इसलिए मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछना चाहती हूं कि क्या यही उनका लोकतंत्र है? ‘पेपर लीक न हो, परीक्षा समय पर और पारदर्शी हो’ प्रदर्शन में शामिल सुप्रिया ने सरकार और प्रशासन पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि छात्रों को मौजूदा व्यवस्था से कोई उम्मीद नहीं रह गई है। ऐसी कोई जगह नहीं है जहां करप्शन न हो। प्रदर्शन में जितनी पुलिस तैनात की गई है, अगर उतनी पुलिस लड़कियों की सुरक्षा के लिए तैनात रहे और सही तरीके से व्यवस्था संभाले तो हर रेपिस्ट जेल में होगा।पुलिस और प्रशासन की नाकामियों की वजह से कई आरोपी खुलेआम घूम रहे हैं। सुप्रिया ने कहा कि छात्रों की सबसे बड़ी चिंता परीक्षा व्यवस्था को लेकर है। ऐसा नहीं होना चाहिए कि परीक्षा से ठीक पहले छात्रों को बताया जाए कि सेंटर बदल गया है। छात्र कई दिनों और महीनों तक तैयारी करते हैं। उन्होंने आगे कहा, मंत्रियों के बेटे-बेटियां विदेशों में पढ़ रहे हैं, क्योंकि उन्हें पता है कि इंडिया का एजुकेशन सिस्टम खराब है। आम छात्रों को इसी व्यवस्था में पढ़ना पड़ता है और परीक्षा, पेपर लीक और सेंटर जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है। हम चाहते हैं कि सरकार शिक्षा व्यवस्था को ऐसा बनाए कि हर छात्र को बराबरी का अवसर मिले। ‘युवाओं की आवाज सुनने के लिए सरकार के पास 7 सेकंड नहीं’ प्रदर्शन कर रहे एक छात्र ने बताया, देश के युवाओं की आवाज सुनने के लिए सरकार के पास सात सेकंड का समय नहीं है। हमारे छात्र सड़कों पर हैं, उनके भविष्य का सवाल है, उनकी परीक्षा और रोजगार का सवाल है, लेकिन सरकार उनकी बात सुनने को तैयार नहीं है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी अगर सिर्फ सात सेकंड लाइव आकर देश के छात्रों की बात सुन लेते तो शायद उन्हें पता चलता कि युवाओं के मन में कितना गुस्सा और कितनी पीड़ा है। एक तरफ हमारे देश के युवा अपनी पढ़ाई, परीक्षा और भविष्य को लेकर सड़कों पर संघर्ष कर रहे हैं, दूसरी तरफ प्रधानमंत्री विदेश में जाकर मेलोनी को चॉकलेट देने में व्यस्त हैं। सवाल यह है कि प्रधानमंत्री को सात समंदर पार जाकर दूसरे देश के नेता से मिलने का समय मिल सकता है, लेकिन भारत के करोड़ों युवाओं की आवाज सुनने के लिए सात सेकंड का समय क्यों नहीं मिल सकता? हम हिंसा नहीं चाहते। हम चाहते हैं कि हमारी बात सुनी जाए। अगर सरकार छात्रों से संवाद कर लेती तो शायद सड़क पर उतरने की जरूरत ही नहीं पड़ती। प्रदर्शनकारी छात्र बोले-‘यह सिर्फ केंद्र का नहीं, राज्यों का भी मुद्दा है’ औरंगाबाद में प्रदर्शन कर रहे छात्र का कहना है, यह सिर्फ केंद्र सरकार का मुद्दा नहीं है, बल्कि राज्यों का भी उतना ही बड़ा मुद्दा है। पेपर लीक, भ्रष्टाचार और परीक्षा में पारदर्शिता को लेकर कोई नेता गंभीरता से बात नहीं कर रहा है। नेताओं के लिए चुनाव जरूरी है, लेकिन छात्रों की परीक्षा और भविष्य का मुद्दा पीछे क्यों चला जाता है? कोरोना के समय भी चुनाव हुए, लेकिन जब छात्रों के भविष्य की बात आती है तो उनकी समस्याओं को क्यों टाल दिया जाता है? हम छात्र आखिर क्या करें? हमारे पास ऑपशन क्या बचा है? हम दरोगा की परीक्षा देते हैं तो उसमें भी पारदर्शिता को लेकर सवाल उठते हैं। हमें कह दिया जाता है कि कोई गड़बड़ी नहीं हुई, लेकिन हम उस व्यवस्था पर भरोसा कैसे करें, जब लगातार पेपर लीक और परीक्षा में अनियमितताओं की खबरें सामने आती रहती हैं? BPSC की परीक्षाओं में भी जांच की बात सामने आती है। बिहार में दूसरी प्रतियोगी परीक्षाओं की स्थिति भी छात्रों के सामने है। 2023 में फॉर्म भरने के बाद अगर कई साल तक परीक्षा की तारीख ही स्पष्ट नहीं हो, तो छात्र क्या करें? हम अपनी उम्र और अपने कई साल सिर्फ परीक्षा का इंतजार करने में कैसे निकाल दें? हमने सरकार को चुना है, इसलिए सरकार से उम्मीद करना हमारा अधिकार है। हम कोई गलत मांग नहीं कर रहे हैं। हम चाहते हैं कि परीक्षा निष्पक्ष हो, पेपर लीक और भ्रष्टाचार पर रोक लगे और भर्ती प्रक्रिया समय पर पूरी हो। हम हिंसा के समर्थक नहीं हैं। हम गांधी जी के अहिंसा के रास्ते पर चलकर अपनी मांग रखना चाहते हैं। हमारा आंदोलन छात्रों के भविष्य के लिए है। हम सरकार से लड़ना नहीं चाहते, हम सरकार से सिर्फ अपने भविष्य का भरोसा मांग रहे हैं। अगर सरकार हमारी बात सुने और परीक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता लाए, तो छात्रों को सड़क पर उतरने की जरूरत ही नहीं पड़ेगी। बिना कुछ बोले हमला कर दिया, दो-चार लाठियां भी मारीं’ बिहार बंद के दौरान सीतामढ़ी में प्रदर्शनकारियों के हमले में घायल हुए प्रमोद कुमार ने बताया, मैं अपनी बहन का इलाज करवा कर अस्पताल से घर लौट रहा था। इसी दौरान कुछ लोग अचानक मेरे कार के सामने आ गए। उन्होंने हमला करना शुरू कर दिया। प्रदर्शनकारी बोल रहे थे- मारो-मारो…हमला में मुझे भी 2-4 लाठी लगी है। मेरे शरीर से खून निकल रहा है। ‘धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से खुशी, लेकिन पेपर लीक पर सख्त कानून बने’ पटना के रहने वाले छात्र रेवंत रावल ने धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर खुशी जताई है। उन्होंने कहा, छात्रों के लंबे विरोध के बाद इस्तीफा हुआ है, लेकिन केवल इस्तीफे से समस्या खत्म नहीं होगी। पेपर लीक और परीक्षा में फर्जीवाड़े को रोकने के लिए सरकार को सख्त कानून बनाना चाहिए। रेवंत ने कहा कि अगर भविष्य में दोबारा पेपर लीक या परीक्षा में गंभीर अनियमितता सामने आती है तो छात्र फिर सड़क पर उतरेंगे। छात्र अपने भविष्य के साथ समझौता नहीं कर सकते। हमारी मांग है कि परीक्षा व्यवस्था पारदर्शी हो और जो लोग पेपर लीक या फर्जीवाड़े में शामिल हैं, उनके खिलाफ ऐसी सख्त कार्रवाई हो कि भविष्य में कोई ऐसा करने की हिम्मत न करे। “हम बिहार के छात्र हैं। अगर कोई हमसे छात्र होने का प्रमाण मांगता है तो हम अपना स्टूडेंट प्रूफ दिखाने के लिए तैयार हैं। हमारा मुद्दा बिल्कुल स्पष्ट है छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ नहीं होना चाहिए। 36 दिन की मेहनत, पूरे GEN-Z की जीत छात्र नेता ने कहा, हमारे आह्वान पर देशभर के युवा खुद-ब-खुद सड़कों पर निकलकर आए। 36 दिनों तक भारत की हर गली, हर मोहल्ले और हर जिले से युवाओं ने अपनी आवाज बुलंद की। यह सिर्फ किसी एक संगठन की जीत नहीं है, बल्कि पूरे छात्र समुदाय और छात्र शक्ति की जीत है। धर्मेंद्र प्रधान ने आखिरकार इस्तीफा दे दिया। यह जीत उन तमाम संघर्षों की जीत है, उन माता-पिताओं के संघर्ष की जीत है, जिनके बेटे-बेटियों ने अपने भविष्य के लिए सड़कों पर संघर्ष किया। यह उन सभी युवाओं की जीत है, जिन्होंने एक-दूसरे का हाथ थामकर इस आंदोलन को आगे बढ़ाया। आने वाले समय में भी छात्र संगठन इसी तरह छात्र हित के मुद्दों पर कदम से कदम मिलाकर संघर्ष करते रहेंगे। कोई भी सरकार आए या जाए, अगर वह तानाशाही रवैया अपनाएगी और छात्रों, युवाओं की आवाज को दबाने की कोशिश करेगी तो हम लोकतांत्रिक तरीके से उसका विरोध करेंगे। लोकतंत्र की बात आती है तो मुझे अटल बिहारी वाजपेयी जी की वह बात याद आती है कि सरकारें आएंगी-जाएंगी, पार्टियां बनेंगी-बिगड़ेंगी, लेकिन देश रहना चाहिए और देश का लोकतंत्र रहना चाहिए। हम इसी लोकतंत्र को बचाने के लिए निकले हैं। हम पूरे देश के युवाओं और छात्रों से अपील करते हैं कि अगर भविष्य में दोबारा छात्रों के अधिकारों और लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ करने की कोशिश हुई तो हम एकजुट होकर उसका विरोध करेंगे। हमारी लड़ाई किसी व्यक्ति या किसी एक सरकार के खिलाफ नहीं, बल्कि छात्रों के अधिकार, पारदर्शी व्यवस्था और लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए है।” खुशबू कुमारी बोलीं-‘धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा कोई खुशी की बात नहीं बेगूसराय की छात्रा खुशबू ने कहा, धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा हो गया है। इसमें खुश होने की क्या बात है? जो सामान्य तौर पर होना चाहिए था, वही हुआ है। लेकिन उस सामान्य कार्रवाई के लिए इतने सारे छात्र घायल हुए, उनका इतना खून बहा और कई छात्रों को जेल तक भेज दिया गया। ऐसे में खुशी मनाने की कोई वजह नहीं है। धर्मेंद्र प्रधान इस पूरे मामले में सिर्फ एक प्यादा हैं। असली जिम्मेदारी उन लोगों की है, जिन्होंने पूरी व्यवस्था को चलाया। पुलिस धर्मेंद्र प्रधान के अधीन नहीं आती। अगर छात्रों पर लाठीचार्ज हुआ, उन्हें पीटा गया और जेल में डाला गया तो इसकी जिम्मेदारी भी तय होनी चाहिए। अगर किसी व्यक्ति को नौकरी पर रखा गया है और वह अपना काम ठीक से नहीं करता है तो उसे हटाया जाता है। लेकिन उसे हटाने के लिए छात्रों को पीटा नहीं जाता, उन्हें घायल नहीं किया जाता और जेल में नहीं डाला जाता। इतने सारे छात्र घायल हुए, लेकिन जिन लोगों की इस पूरी व्यवस्था में मुख्य जिम्मेदारी थी, उनके खिलाफ अभी तक क्या कार्रवाई हुई? इसलिए सिर्फ धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को बड़ी जीत बताकर खुश होने का कोई मतलब नहीं है। यह एक सामान्य कार्रवाई थी, जो पहले ही हो जानी चाहिए थी। अब पढ़िए परिजनों का दर्द…. घर में सोते हुए बेटे को उठाकर ले गई पुलिस गिरफ्तार छात्र अंकित की मां रिंकू ने पुलिस पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा, मेरा बेटा रात में घर पर सो रहा था। पुलिस आई और उसे नींद में ही उठाकर ले गई। इतना ही नहीं उसका मोबाइल फोन भी अपने साथ ले गई। जब मैंने उनसे पूछा कि कहां ले जा रहे हैं। इसपर उन्होंने कुछ जवाब नहीं दिया। अब मेरा बेटा जेल में बंद है। अंकित किसी बड़े अपराध में शामिल नहीं था। वह पढ़ाई के साथ-साथ परिवार की आर्थिक मदद के लिए अंडे की दुकान भी चलाता है। गरीब का बच्चा है, इसलिए प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी के साथ ही काम भी करता है। उसका सपना है सरकारी नौकरी हासिल कर परिवार की स्थिति को सुधारना है, लेकिन पुलिस के इस एक्शन से मेरे बेटे पर गहरा असर पड़ेगा। रिंकू देवी ने आगे बताया, मेरा बेटा दुकान से कुछ सामान खरीदने बाजार गया था। इसी दौरान वहां पर कुछ बच्चों ने प्रोटेस्ट शुरू कर दिया। इसमें अंकित भी शामिल हो गया, क्योंकि वो भी एग्जाम की तैयारी करता है। उसे भी कई दिक्कतें होती थी। अगर वो इस प्रदर्शन में शामिल हो भी गया तो क्या पुलिस उसे इस तरह से उठाकर ले जाएगी। अगर उसने कोई गलती की थी तो थाने बुलाकर पूछताछ करती। घर में सो रहे बच्चे को छत के रास्ते से आकर उठाकर ले जाना और फिर मारपीट करना कहां का न्याय है? ‘मोबाइल रिचार्ज-सत्तू लेने निकला था बेटा, पुलिस ने पकड़ लिया’ गिरफ्तार छात्र प्रेम कुमार के पिता सुभाष पासवान ने पुलिस कार्रवाई पर सवाल उठाए हैं। उनका कहना है, मेरा बेटा किसी प्रदर्शन में शामिल होने नहीं गया था। वह मोबाइल रिचार्ज कराने और सत्तू लाने के लिए घर से निकला था। करीब 4 बजे घर वापस भी आ गया था। घर आने के बाद वह अपने काम में लगा हुआ था। देर शाम ड्यूटी के लिए निकल रहा था। उसी समय पुलिस हमारे घर आई और मेरे बेटे को अपने साथ ले गई। सुभाष पासवान का आरोप है कि, हम अपने बच्चे से मिलने के लिए थाना गए थे, लेकिन हमें मिलने नहीं दिया गया। वहां पुलिस सबको मार रही थी। हमें भी डर लगा, इसलिए हम वहां से भागकर आ गए। गार्जियन को भी बच्चे से मिलने नहीं दिया गया। प्रेम कुमार के पिता का कहना है कि, मेरा बच्चा पथराव में शामिल नहीं था। पुलिस के पास अगर कोई फुटेज है तो उसमें दिखा दे कि मेरे बेटे ने पथराव किया है। वह किसी हिंसा में शामिल नहीं था। हो सकता है कि मोबाइल रिचार्ज कराने और सत्तू लेने जाते समय वह प्रदर्शन वाली भीड़ के पास चला गया हो। भीड़ में अगर कोई छात्र खड़ा है तो सिर्फ इसी आधार पर उसे पकड़ लेना सही नहीं है। “मेरा बच्चा पढ़ता है। उसने बीए फाइनल किया है। अभी अपने भाई के साथ कंपनी में काम करता था। वह कोई अपराधी नहीं है। मेहनत करके अपना भविष्य बनाने की कोशिश कर रहा है। ऐसे में अगर उस पर केस हो गया या उसे जेल भेज दिया गया तो उसकी जिंदगी और भविष्य दोनों खराब हो सकती है। उपद्रवियों को चिन्हित कर कार्रवाई होगी पटना SSP कार्तिकेय शर्मा ने कहा, बंद के दौरान काफी उपद्रव हुआ है। उपद्रवियों की ओर से पत्थरबाजी की गई। सरकारी संपत्तियों को नुकसान पहुंचाया गया है। इस मामले में कई लोगों को डिटेन किया गया है और अन्य को चिन्हित कर रहे हैं। इसके बाद कार्रवाई की जाएगी। हमलोग अभी दूसरे इलाकों में भी गश्त कर रहे हैं। जहां जरूरत है वहां चेकिंग की जा रही है। कुछ जगहों पर उपद्रवियों की तरफ से पथराव हुआ है। पुलिस की गाड़ियों को भी नुकसान पहुंचा है और कुछ पुलिसकर्मी भी घायल हुए हैं। कई जगहों पर पथराव की घटनाएं हुई हैं और इसमें कुछ लोग घायल भी हुए हैं। तेजस्वी यादव का ट्वीट वहीं, तेजस्वी यादव ने विदेश में बैठकर अपने X से ट्वीट कर लिखा, सीवान में छात्र प्रदर्शन के दौरान पुलिस ने छात्रों पर सीधी फायरिंग की। AK-47 से भी फायरिंग की गई। जब 7 हत्याओं का आरोपी अपराधी मुख्यमंत्री बन जाए तब लोकतंत्र में प्रदर्शन कर रहे निर्दोष छात्रों पर पुलिस ऐसे ही गोलियां चलाती है। दोषी अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई हो।



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पाकिस्तान पुलिस की अफसर हरियाणवी गानों की फैन: न्योलीवाला के रशियन बंधाना, राजू पंजाबी के चौधर जाट की गाने पर रील्स बनाईं; लाहौर में SSP रहीं – Hisar News




पाकिस्तान की सीनियर पुलिस अधिकारी डॉ. अनूश मसूद चौधरी हरियाणवी गानों की बड़ी फैन हैं। उन्होंने अपने सोशल मीडिया अकाउंट पर ढांडा न्योलीवाला के ‘रशियन बंधाना’, राजू पंजाबी के ‘चौधर पूरी जाट की’, खासा आला चाहर के ‘जय वीरू’ और सुमित गोस्वामी के ‘टोरा’ जैसे गानों पर कई रील्स बनाई हैं। पेशावर की रहने वाली डॉ. अनूश फिलहाल पाकिस्तान के पंजाब एलीट पुलिस में डिप्टी डायरेक्टर (एडमिनिस्ट्रेशन) के पद पर तैनात हैं। वह सोशल मीडिया पर काफी सक्रिय रहती हैं। उनके फेसबुक अकाउंट पर करीब 2.5 लाख फॉलोअर्स हैं। डॉ. अनूश साल 2018 में खैबर पख्तूनख्वा की पहली महिला SSP बनी थीं। उस समय उनकी कार्यशैली के साथ-साथ उनकी खूबसूरती की काफी चर्चा हुई थी। इसके बाद वह लाहौर की भी SSP बनीं। डॉ. अनूश इंडियन म्यूजिक को भी खास पसंद करती हैं। उन्होंने पंजाबी सिंगर सिद्धू मूसेवाला, आर-नैत, एमी विर्क और गुर सिद्धू के कई गानों पर भी रील्स अपलोड की हैं। जानिए कौन है डॉ. अनूश मसूद चौधरी… MBBS किया और गोल्ड मेडल हासिल किया डॉ. अनूश मसूद चौधरी ने मेडिकल क्षेत्र छोड़कर पुलिस सेवा को चुना और अपने करियर में कई ऐसे रिकॉर्ड बनाए, जिनकी वजह से वह देश की चर्चित महिला अधिकारियों में शामिल हैं। उन्होंने फातिमा जिन्ना मेडिकल कॉलेज से MBBS की पढ़ाई की और मेडिसिन में गोल्ड मेडल हासिल किया। इसके बाद सिविल सेवा परीक्षा पास कर पुलिस सेवा में शामिल हुईं। लाहौर की बेस्ट क्राइम फाइटर बनी वर्ष 2014 में अनूश मसूद चौधरी खैबर पख्तूनख्वा प्रांत की पहली महिला असिस्टेंट सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (ASP) बनीं। इसके बाद उन्होंने पंजाब पुलिस में विभिन्न अहम जिम्मेदारियां संभालीं। कसूर में SP (इन्वेस्टिगेशन), लाहौर के मॉडल टाउन में एडिशनल SP और पंजाब पुलिस मुख्यालय में SP के रूप में भी उन्होंने काम किया। वर्ष 2018 में उन्हें लाहौर का ‘बेस्ट क्राइम फाइटर’ चुना गया। इंटरनेशनल वूमेन ऑफ करेज अवॉर्ड मिला मई 2022 में अनूश मसूद चौधरी को लाहौर ऑपरेशंस विंग का सीनियर सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (SSP) नियुक्त किया गया। वह इस पद पर पहुंचने वाली पहली महिला पुलिस अधिकारी बनीं। इसके अलावा उन्होंने पुलिस विभाग में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने, जेंडर-सेंसिटिव पुलिसिंग को बढ़ावा देने और महिला पुलिसकर्मियों की ट्रेनिंग के लिए भी काम किया। वर्ष 2020 में महिलाओं के अधिकारों और पुलिस सेवा में योगदान के लिए उन्हें अमेरिकी विदेश विभाग की ओर से इंटरनेशनल वूमेन ऑफ करेज अवॉर्ड से सम्मानित किया गया। पेरेंट्स डॉक्टर बनाना चाहते थे एक यूट्यूब चैनल को दिए इंटरव्यू में डॉ. अनूश मसूद चौधरी ने बताया था कि पेरेंट्स का सपना था कि मैं डॉक्टर बनूं। मैंने MBBS भी पूरी कर ली थी। मगर, पिता के मौत के बाद सब बदल गया। परिवार वाले चाहते थे कि मैं डॉक्टर बनकर विदेश सैटल हू जाऊं, लेकिन मैं पाकिस्तान में ही रहकर जनता की सेवा करना चाहती थी। इसके मैंने सेंट्रल सुपीरियर सर्विसेज (CSS) का फिल्ड चुना।



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12 साल में 116 पेपर लीक, 7.5 करोड़ बच्चे प्रभावित: 19 राज्यों में पेपर माफिया, निशाने पर शिक्षक-पुलिस भर्तियां; नीट से सालों का गुस्सा फूटा




देश में पेपर लीक अब किसी एक परीक्षा या राज्य की समस्या नहीं रह गई है। यह पूरे देश में फैले एक बड़े संगठित नेटवर्क का रूप ले चुका है। 2014 से जुलाई 2026 तक मीडिया रिपोर्टों और सरकारी कार्रवाई के आधार पर कम से कम 116 पेपर लीक के मामले सामने आए हैं। इन मामलों से करीब 7.5 करोड़ अभ्यर्थी प्रभावित हुए और पेपर माफिया का नेटवर्क 19 राज्यों तक फैला मिला। 2014 से 2024 के बीच 89 मामले सामने आए थे। इनमें 21 केंद्रीय संस्थानों और 68 राज्य स्तरीय परीक्षाओं से जुड़े थे। इसके बाद 2025 में 20 और 2026 में जुलाई तक नीट-यूजी समेत 7 पेपर लीक के मामले दर्ज किए गए। 2019 से 65 पेपर लीक, तीन लाख सरकारी नौकरियों की भर्ती अटकी नीट पेपर लीक के बाद 21 बच्चों ने सुसाइड किया, CJP का आंदोलन और प्रधान का इस्तीफा नीट पेपर लीक के बाद स्टूडेंट्स और युवाओं के अंदर भरा सालों का गुस्सा फूट पड़ा। कॉकरोच जनता पार्टी (CJP) के नेतृत्व में इसके खिलाफ जंतर-मंतर पर आंदोलन शुरू हुआ। इसमें पेपर लीक के बाद 21 बच्चों के सुसाइड और शिक्षा व्यवस्था में गड़बड़ी को लेकर शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा मांगा गया। 36 दिनों तक चले प्रदर्शन के बाद प्रधान ने 25 जुलाई को इस्तीफा दे दिया। इन बच्चों को इंसाफ मिलना बेटी के लिए बड़ी श्रद्धांजलि केस-1 : सोचा नहीं था कि परीक्षा बेटी छीन लेगी… नीट पेपर लीक बाद खुदकुशी करने वाली सना के पैरेंट्स शेख जाफर हुसैन एवं हबीबुन्निसा कहते हैं- हमने कभी नहीं सोचा था कि एक परीक्षा हमारी बेटी को छीन लेगी। हाथ जोड़कर सरकार से यही कहने आए हैं कि इन बच्चों को इंसाफ मिल जाए, यही हमारी सना के लिए सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी। केस-2 : री-नीट कठिन होने के कारण जान दे दी थी… मिस्बाह के पिता शेख खलील कहते हैं- क्या शिक्षा मंत्री के इस्तीफा देने से मेरी बेटी वापस आ जाएगी? दूसरे बच्चे ऐसा खौफनाक कदम न उठाएं, इसकी जिम्मेदारी कौन लेगा? सिस्टम की खामियां कैसे दूर किया जाए, इस पर विचार होना चाहिए। केस-3 : मेरा बेटा हारा नहीं था, सिस्टम ने उसे छीना… कहान के पिता प्रशांत ने कहा, मेरा बेटा हारकर नहीं गया, उसे इस व्यवस्था ने छीन लिया। किसी और पिता को बेटे का सपना ऐसे टूटते हुए न देखना पड़े। प्रदीप के माता-पिता बोले : किसी और का बेटा बच जाए, यही होगी सच्ची श्रद्धांजलि गुढ़ागौड़जी (झुंझुनूं) राजस्थान के झुंझुनूं निवासी दिवंगत नीट अभ्यर्थी प्रदीप मेघवाल के माता-पिता राजेश मेघवाल और सुशीला देवी ने शिक्षा मंत्री के इस्तीफे का स्वागत किया। पिता ने कहा कि अगर इस फैसले से भविष्य में किसी और छात्र की जान बचती है, तो यही उनके बेटे के लिए सबसे बड़ी श्रद्धांजलि होगी। मां सुशीला देवी ने कहा, अब ऐसी व्यवस्था बने कि किसी मां को अपने बेटे की तस्वीर के सामने रोना न पड़े। ——————————– कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन और धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे से जुड़ी भास्कर की ये खबरें भी पढ़ें…



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ग्वालियर में फर्जी दस्तावेज से मिलिट्री हॉस्पिटल में की नियुक्तियां: वैकेंसी निकली, न विज्ञापन जारी हुआ; स्टेनो ने पत्नी को बना दिया वार्ड सहायिका; मुख्यालय पहुंचा मामला – Gwalior News




ग्वालियर के सेना के मिलिट्री अस्पताल में फर्जी दस्तावेजों के आधार पर नियुक्तियों का मामला सामने आया है। शिकायत सेना मुख्यालय तक पहुंच गई है। आरोप है कि बिना रिक्तियां निकाले और बिना पदों का विज्ञापन जारी किए पत्नी व रिश्तेदारों को नौकरी दी गई। भर्ती प्रक्रिया में कुछ अधिकारियों की संदिग्ध भूमिका होने का भी आरोप लगाया गया है। मामला उस समय सामने आया, जब सेना भर्ती फर्जीवाड़े से जुड़े एक व्यक्ति के पुत्र वंशप्रताप की पांचवीं कक्षा में कथित फर्जी जन्म प्रमाण पत्र के आधार पर हुई नियुक्ति की जांच के दौरान सेना अस्पताल की नियुक्तियों से जुड़े दस्तावेज सामने आए। 2013-14 की नियुक्तियों पर सवाल
शिकायत के अनुसार, सेना अस्पताल में पदस्थ स्टेनो संतोष कुमार ने वर्ष 2013-14 में अपनी पत्नी रामेश्वरी की वार्ड सहायिका पद पर नियुक्ति कराई। इसके लिए 19 सितंबर 2013 का नियुक्ति पत्र जारी होने का दावा किया गया है, लेकिन विभागीय रिकॉर्ड में यह पत्र उपलब्ध नहीं है। 2014 की आठ नियुक्तियां भी जांच के दायरे में
शिकायत में दावा किया गया है कि वर्ष 2014 में हुई आठ नियुक्तियों में भी फर्जी दस्तावेजों का इस्तेमाल किया गया। इन नियुक्तियों की भी जांच की मांग की गई है। कमांडेंट बोले- मामला पुराना, मुख्यालय में लंबित
मिलिट्री अस्पताल के कमांडेंट ब्रिगेडियर गोपाल कृष्ण श्रीधर ने कहा कि यह मामला पुराना है।



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कर्नाटक स्टाइल में चावल की रोटी बनाने का तरीका, अक्की रोटी की रेसिपी


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Akki Roti Recipe: नाश्ते में कुछ नया, हेल्दी और स्वादिष्ट खाने का मन हो तो कर्नाटक की पारंपरिक डिश अक्की रोटी एक बेहतरीन विकल्प हो सकती है. दक्षिण भारत में काफी लोकप्रिय यह रोटी चावल के आटे से बनाई जाती है और अपने खास स्वाद व आसान रेसिपी के लिए जानी जाती है. इसे लेख में जानिए इसे बनाने का पूरा तरीका.

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कर्नाटक में खाने की थाली में अक्की रोटी खूब पसंद की जाती है. दरअसल, ‘अक्की’ शब्द का मतलब कन्नड़ भाषा में चावल होता है, इसलिए इसे अक्की रोटी कहा जाता है. यह सामान्य गेहूं की रोटी से अलग होती है और इसमें प्याज, हरी मिर्च, हरा धनिया और कई तरह की सब्जियां मिलाकर तैयार किया जाता है. यही वजह है कि यह स्वाद के साथ-साथ पोषण भी देती है और दिन की शुरुआत के लिए अच्छी मानी जाती है.

अक्की रोटी उन लोगों के लिए भी अच्छी मानी जाती है जो हल्का भोजन करना पसंद करते हैं. इसे सुबह के नाश्ते, शाम के स्नैक या हल्के डिनर के रूप में भी खाया जा सकता है. इसकी खास बात यह है कि इसे बनाने के लिए न तो ज्यादा सामग्री की जरूरत होती है और न ही ज्यादा समय लगता है. आप अपनी पसंद के अनुसार इसमें कद्दूकस की हुई गाजर, खीरा, नारियल, तिल भी मिला सकते हैं. नारियल की चटनी, मूंगफली की चटनी या मसालेदार करी के साथ इसका स्वाद और भी बढ़ जाता है. अगर आप घर पर कुछ नया ट्राई करना चाहते हैं, तो अक्की रोटी की यह आसान रेसिपी जरूर आजमाएं.

अक्की रोटी बनाने का तरीका

अक्की रोटी बनाने के लिए सबसे पहले एक बड़े बर्तन में एक कप चावल का आटा लें. इसमें बारीक कटा हुआ प्याज, हरी मिर्च, हरा धनिया, करी पत्ता, जीरा और स्वादानुसार नमक डालें. चाहें तो इसमें कद्दूकस की हुई गाजर, खीरा और नारियल भी मिला सकते हैं. अब सभी चीजों को अच्छी तरह मिक्स कर लें.

इसके बाद थोड़ा-थोड़ा पानी डालते हुए नरम आटा गूंध लें. ध्यान रखें कि आटा ज्यादा सख्त न हो. अब केले के पत्ते, बटर पेपर या किसी साफ कपड़े पर थोड़ा तेल या घी लगाएं. आटे का एक हिस्सा लेकर उस पर रखें और उंगलियों को पानी से गीला करके धीरे-धीरे गोल आकार में फैला दें.

यदि आप सीधे तवे पर बनाना चाहती हैं तो पहले ठंडे तवे पर थोड़ा तेल लगाकर आटे को फैलाएं. अब तवे को मध्यम आंच पर गर्म करें और रोटी को दोनों तरफ से सुनहरा होने तक सेंकें. किनारों पर थोड़ा घी या तेल डालें ताकि रोटी कुरकुरी बन सके.

ऐसे करें सर्व

जब रोटी दोनों तरफ से अच्छी तरह पक जाए और हल्की कुरकुरी हो जाए, तो इसे गर्मागर्म प्लेट में निकाल लें. अक्की रोटी को नारियल, मूंगफली या टमाटर की चटनी के साथ परोसें. चाहें तो ऊपर से थोड़ा मक्खन या घी भी लगा सकती हैं. यह स्वादिष्ट, पौष्टिक और झटपट बनने वाली डिश पूरे परिवार को जरूर पसंद आएगी.

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शारदा सिंहSenior Sub Editor

शारदा सिंह मध्यप्रदेश की रहने वाली हैं. उन्होंने माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय, भोपाल से पत्रकारिता के क्षेत्र में अपना सफर शुरू किया. उनके पास डिजिटल मीडिया और लाइफस्टाइल पत्रक…

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लखनऊ में ‘अपराजिता आरोहण-2026’ वार्षिकोत्सव: अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में कई हस्तियां सम्मानित – Lucknow News




लखनऊ के गोमती नगर स्थित अंतर्राष्ट्रीय बौद्ध शोध संस्थान में ‘अपराजिता आरोहण-2026 : संकल्प से सिद्धि तक’ थीम पर तीसरा वार्षिकोत्सव मनाया गया। इस आयोजन को अपराजिता जज्बा जीत का नेशनल वेलफेयर ट्रस्ट ने संस्कृति विभाग के सहयोग से आयोजित किया। कार्यक्रम में शिक्षा, साहित्य, समाज सेवा और संस्कृति के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाली कई हस्तियों कों सम्मानित किया गया। समारोह का शुभारंभ दीप प्रज्ज्वलन के साथ हुआ। संस्था की अध्यक्ष प्रो. सीमा सरकार ने अतिथियों का स्वागत किया। मुख्य अतिथि प्रो. शिशिर कुमार पांडे, कार्यक्रम अध्यक्ष सर्वेश अस्थाना और विशिष्ट अतिथि मुकुल महान को सम्मानित किया गया। सामाजिक कार्यों की विस्तृत जानकारी दी संस्थापक एवं सचिव डॉ. अनुपमा श्रीवास्तव ने इस अवसर पर ट्रस्ट की गतिविधियों और सामाजिक कार्यों की विस्तृत जानकारी दी। सांस्कृतिक प्रस्तुतियों की शुरुआत अनुष्का समूह की ईश वंदना से हुई, जिसके बाद मनु राय ने ‘अगर तुम साथ हो’ गीत प्रस्तुत किया। इस अवसर पर संस्था की पत्रिका ‘अपराजिता संवाद’, वार्षिक कैलेंडर, बरखा सिंह की पुस्तक ‘वामांग’ और इंजीनियर डॉ. मनोज श्रीवास्तव की पुस्तक ‘कविताओं का कारवां’ का विमोचन भी किया गया। इन हस्तियों कों सम्मानित किया गया समारोह का प्रमुख आकर्षण ‘अपराजिता आरोहण सम्मान’ रहा। शिक्षा के क्षेत्र में प्रो. अमिता बाजपेई और समाज सेवा के क्षेत्र में स्वाति शर्मा को इस सम्मान से नवाजा गया। इसके अलावा , सारथी सम्मान, अपराजिता सहोदर सम्मान, ज्योति सम्मान, जय राम सुर साधक सम्मान और अपराजितांजलि सम्मान जैसी कई श्रेणियों में भी सदस्यों को सम्मानित किया गया। प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी पुरस्कृत किया संगठन मंत्री आरती सक्सेना को मरणोपरांत ‘ज्योति सम्मान’ प्रदान किया गया, जिसे उनके परिजनों ने स्वीकार किया। वर्षभर आयोजित विभिन्न प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी पुरस्कृत किया गया। इनमें वाद-विवाद, रेट्रो जश्न-ए-माज़ी और करवा चौथ काव्य प्रतियोगिता के विजेता शामिल थे।



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गंगा में डूबे युवक का दूसरे दिन भी सुराग नहीं: एसडीआरएफ का सर्च ऑपरेशन जारी, अंतिम संस्कार के दौरान हुई थी घटना – Bhagalpur News




कहलगांव (भागलपुर)। कहलगांव श्मशान घाट के समीप गंगा स्नान के दौरान डूबे अनादीपुर गांव निवासी 24 वर्षीय अमित कुमार झा का दूसरे दिन शनिवार को भी कोई सुराग नहीं मिल पाया है। घटना के बाद से ही एसडीआरएफ की टीम स्थानीय प्रशासन के सहयोग से गंगा में लगातार तलाश अभियान चला रही है। जानकारी के अनुसार, अमित कुमार झा शुक्रवार को एक अंतिम संस्कार कार्यक्रम में शामिल होने कहलगांव श्मशान घाट पहुंचे थे। दाह संस्कार की प्रक्रिया पूरी होने के बाद वे गंगा स्नान करने गए थे। इसी दौरान वे तेज बहाव की चपेट में आ गए और गहरे पानी में चले जाने के बाद लापता हो गए। घटना की सूचना मिलते ही स्थानीय प्रशासन और एसडीआरएफ की टीम तुरंत मौके पर पहुंची और खोजबीन शुरू की। शनिवार को भी दिनभर नदी में सघन अभियान चलाया गया। हालांकि, गंगा का जलस्तर बढ़ा होने और तेज धारा के कारण बचाव दल को तलाशी अभियान में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कहलगांव थाना प्रभारी मृत्युंजय कुमार ने बताया कि लापता युवक की तलाश लगातार जारी है। प्रशासन और एसडीआरएफ की टीम पूरी तत्परता के साथ इस अभियान में जुटी हुई है।



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कटनी में पठरा सरपंच अशोक सिंह सस्पेंड: महिला से रेप के आरोप में जेल गया, एसडीएम ने की कार्रवाई – Katni News




कटनी जिले के बड़वारा जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम पंचायत पठरा के सरपंच अशोक सिंह गौड़ को पद से निलंबित कर दिया गया है। उन पर एक महिला से दुष्कर्म का गंभीर आपराधिक मामला दर्ज किया गया है। यह कार्रवाई कटनी एसडीएम और विहित प्राधिकारी प्रमोद चतुर्वेदी ने कलेक्टर आशीष तिवारी के निर्देश पर की है। यह निलंबन मध्यप्रदेश पंचायतराज और ग्राम स्वराज अधिनियम 1993 की धारा 39 के तहत किया गया है। बड़वारा जनपद पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के 21 जुलाई भेजी गई रिपोर्ट और बड़वारा थाने की रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई की गई। गंभीर धाराओं में केस दर्ज बड़वारा पुलिस ने आरोपी सरपंच अशोक सिंह गौड़ के खिलाफ अपराध क्रमांक 330/26 के तहत भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 64(2)एम, 332बी, और 2351(3) के अंतर्गत विभिन्न गंभीर धाराओं में मामला दर्ज किया है। पुलिस ने मामले की कानूनी जांच शुरू कर दी है। सूने मकान का फायदा उठाकर किया दुष्कर्म घटना 4 जुलाई को सामने आई थी, जब बड़वारा थाना क्षेत्र की पीड़िता ने महिला थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई थी। पीड़िता ने अपनी लिखित शिकायत में आरोप लगाया था कि सरपंच अशोक सिंह गौड़ ने अलग-अलग तारीखों पर उसके सूने मकान का फायदा उठाकर उसके साथ दुष्कर्म किया। आरोपी सरपंच को भेजा गया जेल शिकायत की गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने तुरंत केस दर्ज कर आरोपी सरपंच को गिरफ्तार कर लिया था। गिरफ्तारी के बाद आरोपी सरपंच को कोर्ट में पेश किया गया, जहां से अदालत ने उसे जेल भेज दिया। मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए एसडीएम प्रमोद चतुर्वेदी ने अपने कानूनी अधिकारों का प्रयोग करते हुए आरोपी सरपंच को निलंबित करने का आदेश जारी किया।



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रघुवीर मीणा बोले-अहंकारी भाजपा सरकार को जवाब देना होगा: केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर कांग्रेस ने मनाया जश्न, कांग्रेसी बोले- यह तो शुरूआत – Udaipur News




केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे को लेकर उदयपुर में कांग्रेस ने शनिवार शाम को जश्न मनाया। उदयपुर शहर और देहात जिला कांग्रेस कमेटी के संयुक्त नेतृत्व में हिरणमगरी सेक्टर-4 चौराहा पर आतिशबाजी की गई और कार्यकर्ताओं ने नारेबाजी करते हुए इसे केंद्र की मोदी सरकार की नीतियों के खिलाफ जनता की जीत बताया। शहर कांग्रेस अध्यक्ष फतह सिंह राठौड़ ने कहा कि केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा केवल शुरुआत है। आने वाले दिनों में केंद्र सरकार के कई मंत्रियों और भाजपा नेताओं के मामले जनता के सामने आएंगे। उन्होंने आरोप लगाया कि भ्रष्टाचार, बेरोजगारी, महंगाई और युवाओं के भविष्य से खिलवाड़ के कारण जनता का भाजपा से मोहभंग हो चुका है और अब सरकार के पतन की उलटी गिनती शुरू हो गई है। देहात कांग्रेस अध्यक्ष रघुवीर सिंह मीणा ने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा केंद्र सरकार की जनविरोधी नीतियों के खिलाफ जनता और कांग्रेस के संघर्ष की जीत है। उन्होंने कहा कि सत्ता के अहंकार में बैठी भाजपा सरकार को अब जनता के सवालों का जवाब देना होगा और उसकी हर नाकामी का हिसाब लिया जाएगा। कांग्रेस नेताओं ने कहा कि नीट सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं में अनियमितताओं और पेपर लीक की घटनाओं ने करोड़ों युवाओं के भविष्य को प्रभावित किया है। कांग्रेस ने दावा किया कि वह छात्रों और युवाओं के अधिकारों की लड़ाई आगे भी सड़क से सदन तक लड़ती रहेगी। कार्यक्रम में कांग्रेस नेता ताराचंद मीणा, पूर्व विधायक प्रीति शक्तावत, पूर्व देहात अध्यक्ष लाल सिंह झाला, विवेक कटारा, जगदीश राज श्रीमाली, पंकज शर्मा, कचरूलाल चौधरी, लक्ष्मीनारायण पंड्या, डॉ. कल्याण सिंह राव, डॉ. कौशल नागदा सहित बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी और कार्यकर्ता मौजूद रहे। उदयपुर की ये खबरें भी पढ़े… राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में कांग्रेस ने निकाली रैली:नेता बोले- दोषी कितना प्रभावशाली हो, उसका नाम सामने लेकर आए सरकार उदयपुर में एक घंटे तक झमाझम बरसात:कई इलाकों में भरा, जयसमंद झील का जलस्तर 6 सेमी बढ़ा; अगले 3 दिन भारी बारिश का अलर्ट होटल की खिड़की से झील में गिरी बच्ची, मौत:दिल्ली से उदयपुर घूमने आया था परिवार, पिता गोद में शव लेकर घर रवाना उदयपुर में पुलिस अफसर बनकर दंपती से लूट की कोशिश:बढ़ती वारदातों का हवाला देकर गहने उतारने के लिए कहा, लोगों को आता देख बाइक छोड़कर भागे बदमाश चतुर्थ-श्रेणी कर्मचारी भर्ती में उदयपुर में काउंसलिंग 28 जुलाई से:विशेष छूट के लिए 27 जुलाई तक जमा करें दस्तावेज, जानिए किन अभ्यर्थियों को मिलेगी प्राथमिकता



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धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लोकतंत्र की सबसे बड़ी जीत- केजरीवाल: देश के युवाओं का संघर्ष रंग लाया – New Delhi News




आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे पर देश के लोगों को बधाई दी है। उन्होंने कहा कि धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा लोकतंत्र की सबसे बड़ी जीत है। देश के युवाओं का संघर्ष रंग लाया और अंततः धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना ही पड़ा। उन्होंने कहा कि देश के लोगों का जनतंत्र से भरोसा उठा गया था। सरकारें लोगों की बात सुनती ही नहीं थीं। लेकिन अब सरकार को यह समझ लेना चाहिए कि यह लोकतंत्र है और लोकतंत्र में सरकार को जनता की बात सुननी ही पड़ेगी। देश के लोगों को उम्मीद है कि सरकार परीक्षा सिस्टम में सुधार कर फिर कभी पेपर लीक नहीं होने देगी और हमारे बच्चों को कभी आत्महत्या नहीं करनी पड़ेगी। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि हमारे देश के युवाओं और जेन-जी को बहुत-बहुत बधाई। यह बहुत खुशी की बात है कि आप लोगों का संघर्ष रंग लाया और आखिरकार धर्मेंद्र प्रधान को इस्तीफा देना पड़ा। यह पूरे लोकतंत्र की बहुत बड़ी जीत है। हमारे देश में लोगों का जनतंत्र से भरोसा ही उठ गया था और लोगों को लगने लगा था कि सरकारें सुनती ही नहीं हैं। जनता सरकारों के सामने चिल्लाती, गिड़गिड़ाती रहती थी। हर बात के लिए हम सरकार के आगे हाथ जोड़ते रहते थे, पैर पकड़ते थे, लेकिन सरकारें कभी सुनती नहीं थीं। अरविंद केजरीवाल ने कहा कि इतना बड़ा संघर्ष हुआ और अंततः सरकार के अहंकार को जनता के सामने झुकना ही पड़ा। यह बहुत बड़ी जीत है, यह पूरे जनतंत्र और लोकतंत्र की जीत है। सरकार को भी अब समझ लेना चाहिए कि आपको जनता की बात सुननी ही पड़ेगी, क्योंकि यह लोकतंत्र है। लोकतंत्र जनता का, जनता द्वार और जनता के लिए होता है। उन्होंने कहा कि मैं उम्मीद करता हूं कि सरकार अब नीट के पूरे सिस्टम को ठीक करेगी ताकि इस देश के अंदर आगे से पेपर लीक होना बंद हो जाए और हमारे बच्चों को फिर कभी आत्महत्या न करनी पड़े। 12 साल में मोदी सरकार ने हर आंदोलन को लाठी-डंडों से कुचलने का रिकॉर्ड बनाया- संजय सिंह आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने कहा कि पिछले 12 साल में सिर्फ दो बार ऐसा वक्त आया जब अंहकार में चूर मोदी सरकार को मजबूरी में झुकना पड़ा। पहला किसानों का आंदोलन था जब एक साल बाद सरकार झुकी और दूसरा नौजवानों का यह आंदोलन है जिसमें सरकार को झुकना पड़ा। इसके परिणाम स्वरूप शिक्षा मंत्री का इस्तीफा हुआ और एनटीए के कई अधिकारियों को बर्खास्त किया गया, जो युवाओं की बहुत बड़ी जीत है। इससे अलावा, मोदी सरकार का रिकॉर्ड रहा है कि उसने हर आंदोलन को लाठियों से कुचलने का काम किया और सरकार किसी के आगे नहीं झुकी। युवाओं ने यह पहली जंग जीती है, शिक्षा सुधार का नया आंदोलन जन्म लेगा- मनीष सिसोदिया
आम आदमी पार्टी के वरिष्ठ नेता व दिल्ली के पूर्व शिक्षा मंत्री मनीष सिसोदिया ने देश के छात्रों और युवाओं को बधाई देते हुए कहा कि आपने वह कर दिखाया, जिसकी कुछ दिनों पहले तक कल्पना भी नहीं की जा सकती थी। आपने धर्मेंद्र प्रधान से इस्तीफा ले लिया है। देश के युवाओं और छात्रों ने नरेंद्र मोदी के अहंकार को तोड़ दिया है। जो नरेंद्र मोदी चार दिन पहले तक दिल्ली पुलिस की लाठियों के दम पर इन युवाओं के सिर फोड़ रहे थे, छात्रों के पैर तोड़ रहे थे, उनके साथ बदतमीजी कर रहे थे और उन्हें पशुओं की तरह क्रूरता से मार रहे थे। आज उन्हीं नरेंद्र मोदी को अपने भ्रष्ट शिक्षा मंत्री से इस्तीफा लेना पड़ा है। यह आपकी बहुत बड़ी जीत है। सभी छात्रों और आंदोलनकारियों को बहुत-बहुत बधाई।



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