समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने भाजपा सरकार पर बैंकिंग व्यवस्था को आम जनता के लिए परेशानी का कारण बनाने का आरोप लगाया है। उन्होंने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर पिछले 12 वर्षों की बैंकिंग व्यवस्था को लेकर सरकार के सामने 12 सवाल रखे। इन सवालों में बैंक खातों से अलग अलग शुल्कों की कटौती, छोटे और बड़े कर्जदारों के साथ कथित भेदभाव, नोटबंदी, बुजुर्गों की जमा पूंजी पर ब्याज, बैंक लॉकर की सुरक्षा और डिजिटल बैंकिंग में धोखाधड़ी जैसे मुद्दे शामिल हैं। अखिलेश यादव ने कहा कि 2014 से बैंकिंग सुधारों की बात कर रही भाजपा सरकार इन 12 सवालों का जवाब दे, ताकि बैंकिंग संबंधी समस्याओं का सामना कर रहे आम लोगों को राहत मिल सके। उन्होंने सरकार के 12 साल के आधार पर 12 सवाल पूछे हैं।
1. बैंक खातों से पेनल्टी के नाम पर पैसे क्यों काटे गए? अखिलेश यादव ने बैंक खातों में न्यूनतम बैलेंस नहीं रखने समेत दूसरे कारणों से लगाए जाने वाले जुर्माने पर सवाल उठाया। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह आम लोगों के खातों से बड़ी रकम काटी गई। उनका सवाल है कि बैंकिंग सेवाओं के नाम पर खाताधारकों से इस तरह शुल्क वसूलने की जरूरत क्यों पड़ी और इसका आम जनता पर क्या असर हुआ? 2. बैंकिंग सेवाओं पर बार-बार शुल्क और छोटे कर्जदारों पर सख्ती क्यों? सपा अध्यक्ष ने एसएमएस अलर्ट, एटीएम इस्तेमाल और खाता रखरखाव जैसी सेवाओं पर लगने वाले शुल्क का मुद्दा उठाया। उन्होंने सवाल किया कि बैंकिंग सेवाओं के लिए ग्राहकों से अलग-अलग चार्ज क्यों वसूले जाते हैं। साथ ही उन्होंने छोटे कर्जदारों से कुछ हजार रुपये की वसूली के लिए एजेंट भेजने और दूसरी ओर बड़े कर्जदारों के भारी कर्ज तथा कर्ज माफी के मामलों को लेकर कथित असमानता पर सवाल किया। 3. बुजुर्गों और पेंशन पर निर्भर लोगों को जमा पूंजी पर कम ब्याज क्यों? अखिलेश यादव ने बैंक जमा पर मिलने वाले ब्याज की दरों में कमी का मुद्दा उठाया। उनका कहना है कि बुजुर्गों और पेंशन पर निर्भर कई लोग अपनी बचत से मिलने वाले ब्याज के सहारे जीवनयापन करते हैं। ऐसे में ब्याज दरों में कमी से उनकी आमदनी प्रभावित होती है। उन्होंने सवाल किया कि सरकार ने इन लोगों की आर्थिक जरूरतों को ध्यान में रखते हुए क्या कदम उठाए? 4. नोटबंदी के दौरान आम लोगों को कतारों में क्यों लगना पड़ा? सपा अध्यक्ष ने नोटबंदी के फैसले और उसके क्रियान्वयन पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि आम लोगों, बुजुर्गों और महिलाओं को अपने ही पैसे बदलने के लिए बैंकों के बाहर लंबी कतारों में क्यों लगना पड़ा। उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि नोटबंदी के दौरान कथित तौर पर कुछ लोगों ने अनुचित तरीकों से काले धन को सफेद किया। इस आरोप के समर्थन में उनकी पोस्ट में अलग से कोई दस्तावेजी प्रमाण नहीं दिया गया। 5. बैंक लॉकर में रखे सामान की सुरक्षा और मुआवजे की व्यवस्था कैसी है? अखिलेश यादव ने बैंक लॉकर से कीमती सामान, बहुमूल्य धातुओं और निवेश संबंधी दस्तावेजों के गायब होने की शिकायतों का मुद्दा उठाया। उन्होंने लॉकर एग्रीमेंट के लिए स्टांप पेपर पर होने वाले खर्च, हर साल बढ़ने वाले किराये और कई साल का किराया अग्रिम लेने पर सवाल किया। उनका सवाल है कि लॉकर में रखे सामान के चोरी होने या नुकसान की स्थिति में ग्राहक को कितना मुआवजा मिलता है और उसकी पूरी संपत्ति की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है? 6. बार-बार केवाईसी कराने और खाते बंद होने का डर क्यों? सपा अध्यक्ष ने केवाईसी यानी ‘नो योर कस्टमर’ प्रक्रिया में आने वाली परेशानियों को उठाया। उन्होंने पूछा कि ग्राहकों को बार-बार केवाईसी कराने की जरूरत क्यों पड़ती है और ऑनलाइन सत्यापन असफल होने पर क्या व्यवस्था है। उन्होंने बुजुर्गों के फिंगरप्रिंट या आंखों की पुतली के निशान का सत्यापन नहीं होने से खाते के इस्तेमाल में आने वाली दिक्कतों का भी जिक्र किया। उनका सवाल है कि ऐसे मामलों में पेंशन रुकने या खाते में जमा पैसे तक पहुंच नहीं होने पर जिम्मेदारी किसकी होगी? 7. बैंकिंग सेवाओं में अव्यवस्था और सरकारी बैंकों को कमजोर करने का आरोप अखिलेश यादव ने बैंकों में सर्वर डाउन होने, प्रिंटर खराब होने, ओटीपी नहीं आने और ग्राहकों को बार-बार लौटाए जाने जैसी समस्याओं का उल्लेख किया। उन्होंने आरोप लगाया कि बैंक कर्मचारियों को कामचोर बताकर बदनाम किया जाता है और सरकारी बैंकों को कमजोर किया जा रहा है। उन्होंने यह भी सवाल उठाया कि सरकारी बैंकों को बेचने की कोशिशों के पीछे क्या वजह है। ये उनके राजनीतिक आरोप हैं; इनके समर्थन में पोस्ट में अलग से प्रमाण नहीं दिए गए। 8. डिजिटल बैंकिंग में धोखाधड़ी होने पर ग्राहकों की सुनवाई क्यों नहीं? सपा अध्यक्ष ने ऑनलाइन लेनदेन में पैसे कटने, साइबर फ्रॉड और अनधिकृत ट्रांजैक्शन की शिकायतों के निस्तारण पर सवाल उठाए। उन्होंने पूछा कि ऐसी घटनाओं के बाद ग्राहकों को समय पर सहायता क्यों नहीं मिलती और कस्टमर केयर से संपर्क करना मुश्किल क्यों होता है। उन्होंने यह भी सवाल किया कि ठगी की रकम वापस दिलाने की प्रक्रिया को आसान बनाने और लोगों को साइबर धोखाधड़ी से बचाने के लिए पर्याप्त जागरूकता अभियान क्यों नहीं चलाए जाते। 9. आम लोगों को कर्ज लेने में मुश्किल, बड़े कर्जदारों को आसानी क्यों? अखिलेश यादव ने छोटे कर्जदारों और बड़े कर्ज लेने वालों के बीच कथित भेदभाव का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि आम लोग बच्चों की पढ़ाई, घर बनाने या कारोबार बढ़ाने के लिए कुछ लाख रुपये का कर्ज लेने में आधार, पैन, गारंटर और सिबिल स्कोर जैसी शर्तों से गुजरते हैं। दूसरी ओर, बड़े कर्जदारों को भारी रकम के कर्ज मिलने और कुछ मामलों में कर्ज चुकाए बिना फरार होने की घटनाएं सामने आती हैं। उन्होंने पूछा कि कर्ज देने और वसूली की प्रक्रिया में समान जवाबदेही क्यों नहीं दिखाई देती। 10. खाता खुलवाने के साथ बीमा, क्रेडिट कार्ड या एफडी लेने का दबाव क्यों? सपा अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि कुछ ग्राहकों पर बैंक खाता खोलने के दौरान बीमा पॉलिसी खरीदने, क्रेडिट कार्ड लेने या एफडी कराने का दबाव बनाया जाता है। उन्होंने सवाल किया कि क्या बैंकिंग सेवाओं का लाभ लेने के लिए ग्राहकों को दूसरे वित्तीय उत्पाद खरीदने के लिए बाध्य किया जाना चाहिए और ऐसी बिक्री से किसे फायदा होता है। 11. बैंक कर्मचारियों की समस्याओं और ग्राहकों की शिकायतों पर सरकार का ध्यान क्यों नहीं? अखिलेश यादव ने बैंक कर्मचारियों की कार्यदशा, सेवा शर्तों और उनकी मांगों को लेकर सरकार की भूमिका पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि बैंक कर्मचारियों को ग्राहकों की नाराजगी और शिकायतों का सामना करना पड़ता है, जबकि व्यवस्था से जुड़ी समस्याओं का समाधान करने की जिम्मेदारी उच्च स्तर पर भी है। उन्होंने पूछा कि कर्मचारियों की मांगों पर ध्यान क्यों नहीं दिया जाता और बार-बार हड़ताल की नौबत क्यों आती है। उन्होंने बैंक कर्मचारियों और ग्राहकों के प्रति सरकार के रवैये को भी आलोचना का विषय बनाया। 12. जनधन खातों में पेनल्टी और गरीबों के साथ कथित धोखाधड़ी क्यों? अखिलेश यादव ने प्रधानमंत्री जनधन योजना के तहत खोले गए खातों को लेकर सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि जीरो बैलेंस खाते के नाम पर गरीबों के खातों से शुल्क काटे जाने के कारण कुछ खाते माइनस में चले जाते हैं। उन्होंने इसे गरीबों और वंचित तबकों के साथ अन्याय बताते हुए पूछा कि सरकार सरल भाषा में वित्तीय साक्षरता अभियान क्यों नहीं चलाती, ताकि लोग बैंकिंग नियमों, शुल्कों और अपने अधिकारों को समझ सकें। उन्होंने इस मुद्दे को पीडीए यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक समाज से जोड़ते हुए भाजपा सरकार पर निशाना साधा। आपका खाता, भाग्यविधाता से आपका खाता, देता घाटा तक अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट के अंत में भाजपा के बैंकिंग संबंधी नारे पर तंज कसते हुए लिखा कि आपका खाता, भाग्यविधाता कहने वालों को अब जनता से सच कहना चाहिए आपका खाता, देता घाटा। उन्होंने कहा कि इन 12 सवालों का जवाब मिलने के बाद बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े सैकड़ों अन्य सवाल भी पूछे जाएंगे।
Source link
अखिलेश यादव ने बैंकिंग व्यवस्था पर उठाए 12 सवाल: नोटबंदी, बैंकिंग फीस, डिजिटल फ्रॉड जैसे मुद्दों पर सरकार से मांगा जवाब – Lucknow News
RELATED ARTICLES

