Wednesday, June 10, 2026
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अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत ने MRP पर उठाया सवाल: दवा-उपकरणों में 100 गुना मुनाफा, सरकार से सख्त कानून की मांग – Panna News




अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत (ABGP) ने केंद्र सरकार से अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) निर्धारण के लिए सख्त कानून बनाने की मांग की है। संगठन का आरोप है कि कंपनियाँ और व्यापारी MRP के नाम पर उपभोक्ताओं का बड़े पैमाने पर आर्थिक शोषण कर रहे हैं। इस संबंध में ABGP ने कलेक्टर को एक ज्ञापन सौंपा है। ज्ञापन में मेडिकल सेक्टर में हो रही धांधली के चौंकाने वाले उदाहरण दिए गए हैं। ABGP का कहना है कि दवाओं पर उत्पादन लागत से 100 गुना अधिक MRP अंकित की जा रही है। इसका उद्देश्य 80% तक का भारी डिस्काउंट दिखाकर ग्राहकों को भ्रमित करना है। उदाहरण भी दिए भूपेंद्र सिंह परमार ने बताया कि ₹25,000 में आयात होने वाले पेसमेकर की MRP ₹2 लाख तक रखी जा रही है। इसी तरह, ₹4 लाख के हार्ट वाल्व को ₹26 लाख की MRP पर बेचा जा रहा है। ₹3 की लागत वाली सुई पर भी ₹30 का मूल्य टैग लगाया जा रहा है। जानबूझकर बढ़ाए दाम ABGP के अनुसार, कंपनियां जानबूझकर अत्यधिक MRP प्रिंट करती हैं। इसके पीछे मकसद ग्राहकों को ‘भारी छूट’ का लालच देकर यह एहसास कराना है कि उन्होंने खरीदारी में बचत की है। हालांकि, ‘सेल’ और ‘डिस्काउंट’ के बाद भी कंपनियां वास्तविक लागत से कई गुना अधिक मुनाफा कमा रही हैं। यह प्रवृत्ति ऑनलाइन शॉपिंग और मॉल्स में भी देखी जा रही है। फर्स्ट सेल प्राइस छापने की मांग अखिल भारतीय ग्राहक पंचायत ने अपनी मांगों में उत्पाद पर ‘उत्पादन लागत’ और ‘फर्स्ट सेल प्राइस’ छापना अनिवार्य करने को कहा है। इसके साथ ही, MRP की निगरानी और नियम तय करने के लिए एक स्वतंत्र प्राधिकरण या बोर्ड के गठन की भी मांग की गई है। संगठन ने नियमों का उल्लंघन करने वाली कंपनियों और अस्पतालों पर भारी जुर्माने और सजा का प्रावधान करने की भी वकालत की है। मलखान सिंह ने बताया कि MRP अब उपभोक्ता संरक्षण के बजाय विपणन और मुनाफ़ाखोरी का एक उपकरण बन गया है। उन्होंने जोर दिया कि जब तक लागत मूल्य और बिक्री मूल्य में पारदर्शिता नहीं आएगी, तब तक आम आदमी का आर्थिक शोषण जारी रहेगा।



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