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Foreign Investment in Bond : आरबीआई गवर्नर ने पिछले दिनों जब विदेशी निवेश बढ़ाने के लिए टैक्स छूट सहित तमाम तरह की रियायतों का ऐलान किया था, तो किसी को अंदाजा नहीं था कि इसका असर इतना जल्दी दिखना शुरू हो जाएगा. अभी फैसले के सिर्फ 2 कारोबारी दिन बीते हैं और बॉन्ड में विदेशी निवेश बढ़कर 3.32 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है.
विदेशी निवेशकों को टैक्स छूट दिए जाने से बॉन्ड में निवेश बढ़ गया है.
नई दिल्ली. रिजर्व बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने पिछले सप्ताह जब एमपीसी बैठक के नतीजों का ऐलान किया था, तो उनका सबसे ज्यादा जोर विदेशी निवेश लाने पर था. इसके लिए टैक्स छूट लेकर तमाम तरह के नियमों को आसान बनाने का भी ऐलान किया गया था और अब उनके इन फैसलों का असर भी दिखना शुरू हो गया है. विदेशी संस्थागत निवेशकों के बीच सरकारी बॉन्ड में पैसे लगाने की होड़ मच गई है. देखते हुी देखते पूर्ण सुलन मार्ग यानी एफएआर के जरिये सरकारी प्रतिभूतियों में कुल विदेशी निवेश बढ़कर 3.32 लाख करोड़ रुपये पहुंच गया है.
भारतीय समाशोधन निगम लिमिटेड (सीसीआईएल) ने आंकड़े जारी कर बताया कि विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (एफपीआई) ने सरकार की तरफ से कर छूट दिए जाने के बाद ‘पूर्ण सुलभ मार्ग’ (एफएआर) के तहत सरकारी प्रतिभूतियों में 8,794.74 करोड़ रुपये का निवेश किया है. सरकारी प्रतिभूतियों से मतलब सरकारी बॉन्ड से है. आरबीआई गवर्नर ने इस बॉन्ड में निवेश करने पर विदेशी निवेशकों को टैक्स छूट दिए जाने का ऐलान किया है.
अब कितना पहुंच गया कुल निवेश
एफएआर प्रतिभूतियों में एफपीआई की हिस्सेदारी तीन जून के 3.23 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर मंगलवार को 3.32 लाख करोड़ रुपये हो गई है. पूर्ण सुलभ मार्ग के तहत विदेशी निवेशकों को किसी तरह की निवेश सीमा के बगैर भारत सरकार की निर्धारित प्रतिभूतियों में निवेश की अनुमति होती है. इसका मतलब है कि इस तरह के रूट से विदेशी निवेश जितनी मर्जी उतनी राशि सरकार के बॉन्ड में लगा सकते हैं.
सरकार ने क्या किया है बदलाव
सरकार ने 5 जून को आयकर अधिनियम में संशोधन करते हुए सरकारी बॉन्ड में एफपीआई निवेश पर मिलने वाले ब्याज और पूंजीगत लाभ को टैक्स से छूट दे दी थी. यह छूट एक अप्रैल, 2025 से प्रभावी मानी जाएगी. इसका मतलब है कि अगर किसी विदेशी निवेशक ने पिछले साल भी सरकारी बॉन्ड में पैसे लगाए थे तो उन्हें भी अपने मुनाफे पर किसी तरह के टैक्स भुगतान की जरूरत नहीं पड़ेगी.
बढ़ रहा विदेशी निवेशकों का भरोसा
मार्केट एक्सपर्ट का कहना है कि इस कदम से एफपीआई निवेशकों का भरोसा बढ़ा है और वे सरकारी प्रतिभूतियों में निवेश बढ़ा रहे हैं. इससे भारत को प्रमुख वैश्विक बॉन्ड सूचकांकों में शामिल किए जाने की संभावना भी मजबूत हो सकती है. भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने भी हालिया मौद्रिक नीति में एफएआर के दायरे का विस्तार करते हुए 15, 30 और 40 वर्ष की अवधि वाले नए सरकारी बॉन्ड को इसमें शामिल किया है. इसके अलावा, केंद्रीय बैंक ने एफपीआई निवेश से जुड़े कुछ प्रतिबंध भी हटाए हैं, जिससे विदेशी निवेश को आकर्षित करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…और पढ़ें

