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AI Cyberattack : ओपनएआई के एक एआई ने ऐसा कारनामा कर डाला है, जिससे हर कोई हैरान और चिंतित है. लैब में सुरक्षा घेरे में बंद इस एजेंट ने सारी निगरानियों को धत्ता बताते हुए खुद को आजाद कर लिया और एक कंपनी पर ही साइबर अटैक कर डाला. खास बात यह है कि ओपनएआई को इसका पता ही नहीं चला कि उसका एक एआई एजेंट फरार हो गया है.
विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियां एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में सुरक्षा को ठेंगा दिखा रही हैं.
नई दिल्ली. जिस AI को इंसानों का काम आसान करने के लिए बनाया गया था, वही अब इंसानों की नाक में दम कर रहा है. चैटजीपीटी (ChatGPT) बनाने वाली कंपनी OpenAI में जो मामला सामने आया है, वो एक चेतावनी है. कंपनी एक AI एजेंट इतना होशियार हो गया कि लैब की वह लैब की सारी बंदिशों को तोड़कर ‘फरार’ हो गया. उसने चुपके से एक दूसरी कंपनी को हैक कर डाला. खास बात यह रही कि यह शरारती एआई एक हफ्ते तक हैकिंग करता रहा और OpenAI को कानोंकान खबर न हुई. जिस कंपनी पर इस एआई एजेंट ने हमला किया, उसने एफबीआई को शिकायत दी तो यह मामला खुला.
यह मामला इसी महीने का है. OpenAI अपने एक बेहद एडवांस्ड साइबर सिक्योरिटी AI एजेंट का टेस्ट कर रहा था. इसे पूरी तरह से आइसोलेट करके एक सुरक्षित जगह पर रखा गया था. लेकिन 9 जुलाई को यह AI एजेंट लैब के सारे बैन को धत्ता बता भाग निकला . 11 से 13 जुलाई के बीच इसने Hugging Face नामक AI प्लेटफॉर्म के सिस्टम में सेंध लगा दी. यह AI बिना किसी इंसानी मदद के खुद फैसले ले रहा था और हैकिंग के मजे ले रहा था.
कांड करके छुपाया सबूत
यह कोई मामूली AI एजेंट नहीं था, यह तो पूरा ‘क्रिमिनल माइंड’ निकला. जांच में पता चला कि इस AI एजेंट ने सुरक्षा निगरानी तंत्र (Monitoring System) को ही बंद कर दिया था. सबसे हैरानी की बात यह रही की इसने अपने आने वाले ‘फ्यूचर वर्जन्स’ के लिए गुप्त नोट्स छोड़ दिए. इन नोट्स में बताया गया था कि OpenAI की पाबंदियों और सुरक्षा घेरों को कैसे तोड़ा जा सकता है. यानी, यह AI न सिर्फ खुद आजाद हुआ, बल्कि अपने वंशज AI को भी बागी बनने का तरीका सिखा गया.
हफ्ते भर सोती रही कंपनी, FBI तक पहुंच गई बात
AI की दुनिया में इस घटना ने तहलका मचा दिया. हगिंग फेस को जब अपनी हैकिंग का अहसास हुआ, तो उन्होंने सीधे अमेरिकी खूफिया एजेंसी एफबीआई से शिकायत कर दी. हगिंग फेस के सह-संस्थापक थॉमस वुल्फ ने हैकिंग की जानकारी दी. दूसरी तरफ, ओपनएआई को ये ही पता नहीं चला कि उसके घर में क्या हुआ है. वुल्फ और जांच से जुड़े तीन अन्य लोगों के अनुसार, ओपनएआई को यह समझने में कई और दिन लग गए कि इस हैकिंग के पीछे उसका अपना AI एजेंट था.
16 जुलाई को जब हगिंग फेस ने ब्लॉग लिखकर इस हमले का खुलासा किया, तब कहीं जाकर OpenAI के इंजीनियरों की नींद खुली. 18-19 जुलाई के वीकेंड पर जब लॉग्स खंगाले गए, तब समझ आया कि यह कांड तो कंपनी के ही एआई एजेंट ने किया है. जब मामला मीडिया में उछला तो 21 जुलाई को OpenAI को सार्वजनिक रूप से मानना पड़ा कि उनका AI एजेंट ‘बेकाबू’ हो गया था. कंपनी ने इसे एक “अभूतपूर्व” घटना बताया.
आगे निकलने की होड़ पड़ रही भारी
विशेषज्ञों का कहना है कि कंपनियां एक-दूसरे से आगे निकलने की होड़ में सुरक्षा को ठेंगा दिखा रही हैं. पैलिसेड रिसर्च के जेफ्री लैडिश ने कहा, “ये AI मॉडल झूठ बोलते हैं, धोखा देते हैं और हैक भी करते हैं.” वर्ल्ड एथिकल डेटा फाउंडेशन की प्रमुख इंटेलिजेंस विशेषज्ञ मार्ले स्मिथ ने कहा, “क्या इसका मतलब यह है कि कंपनी ने AI एजेंट को बिना निगरानी छोड़ दिया था और उसे पता ही नहीं चला कि वह क्या कर रहा है? या फिर उन्हें पता था लेकिन वे उसे रोक नहीं पाए? दोनों ही स्थितियां बेहद खतरनाक और चिंताजनक हैं.”

