यूरोप के बाजार में भारतीय कंपनियों के लिए बड़ा मौका तलाशने की तैयारी है. केंद्रीय वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री पीयूष गोयल 22 अक्टूबर यानी आज से जर्मनी और नीदरलैंड के दौरे पर हैं. उनके साथ करीब 100 भारतीय कारोबारी और स्टार्टअप भी जा रहे हैं. पूरी टीम 7 दिन इन दोनों देशों में रहेगी. मकसद सिर्फ व्यापार बढ़ाना नहीं, बल्कि टेक्नोलॉजी, निवेश और यूरोप में भारतीय सामान की पहुंच को मजबूत करना भी है. यह दौरा ऐसे समय हो रहा है, जब भारत और यूरोपीय यूनियन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट पर बातचीत जारी है.
एक ओर जर्मनी यूरोप की बड़ी इकॉनमी है. यहां भारतीय कंपनियों को हाईटेक टेक्नोलॉजी, मशीनरी और मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में सहयोग मिल सकता है. दूसरी तरफ नीदरलैंड का रॉटरडैम पोर्ट यूरोप के बड़े लॉजिस्टिक्स सेंटर में शामिल है. यहां तक पहुंच बनाना भारतीय निर्यातकों के लिए दूसरे यूरोपीय बाजारों तक सामान भेजने में काम आ सकता है.
यूरोप में बिजेनस का एक चौथाई हिस्सा सिर्फ जर्मनी के साथ
भारत और जर्मनी के बीच फाइनेंशियल ईयर 2025-26 में बाइलेटरल ट्रेड करीब 31.03 अरब डॉलर रहा. भारत ने जर्मनी को 11.53 अरब डॉलर का सामान एक्सपोर्ट किया, जबकि वहां से इंपोर्ट करीब 19.51 अरब डॉलर का रहा. यानी कारोबार बढ़ाने के साथ भारत के सामने व्यापार घाटा कम करने की चुनौती भी है.
जर्मनी के साथ भारत का कारोबार सिर्फ सामान खरीदने-बेचने तक सीमित नहीं है. यहां की कंपनियां मशीनरी, ऑटोमोबाइल, औद्योगिक उपकरण और उन्नत इंजीनियरिंग में मजबूत हैं. भारत के लिए ऐसी तकनीक और निवेश हासिल करना अपने कारखानों की क्षमता बढ़ाने में मददगार हो सकता है. इसी वजह से गोयल के कार्यक्रम में उन्नत विनिर्माण, ग्रीन मोबिलिटी, स्वच्छ तकनीक, माइक्रोइलेक्ट्रॉनिक्स और डीप टेक जैसे क्षेत्रों को जगह दी गई है.
भारतीय कंपनियों के लिए कहां मौके
इंजीनियरिंग सामान, कपड़े, रसायन, दवाइयां और चमड़े के उत्पाद जर्मनी को भारत के प्रमुख निर्यातों में शामिल हैं. अगर बाजार तक पहुंच बेहतर होती है और कारोबारी साझेदारी मजबूत होती है, तो भारतीय कंपनियों को यूरोप में नए ग्राहक मिल सकते हैं. हालांकि, सिर्फ समझौते से ऑर्डर नहीं मिलते. कीमत, गुणवत्ता, तकनीकी मानक और समय पर आपूर्ति की शर्तें भी पूरी करनी होंगी.
नीदरलैंड तो भारत के लिए यूरोप का गेटवे
अब बात नीदरलैंड की. यह देश भारतीय निर्यातकों के लिए इसलिए अहम है क्योंकि यहां का रॉटरडैम बंदरगाह यूरोप के प्रमुख व्यापारिक प्रवेश द्वारों में गिना जाता है. भारतीय कारोबारी प्रतिनिधिमंडल 25 अक्टूबर को इस बंदरगाह की लॉजिस्टिक्स और सप्लाई चेन व्यवस्था को समझने जाएगा. इसके बाद 26 अक्टूबर को हेग में भारत-नीदरलैंड बिजनेस फोरम होगा, जहां अलग-अलग क्षेत्रों की कंपनियां कारोबारी साझेदारी तलाशेंगी.
भारत और नीदरलैंड के बीच वित्त वर्ष 2025-26 में करीब 23.29 अरब डॉलर का वस्तु व्यापार हुआ. भारत ने वहां लगभग 17.5 अरब डॉलर का सामान निर्यात किया. इसमें पेट्रोलियम उत्पाद, इंजीनियरिंग सामान, इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद, रसायन, कपड़े और दवाइयां शामिल हैं. नीदरलैंड में कारोबार बढ़ाने का फायदा यह हो सकता है कि भारतीय कंपनियां वहां के आयातकों, लॉजिस्टिक्स कंपनियों और वितरण नेटवर्क के साथ नए रिश्ते बना सकें. लेकिन नीदरलैंड के रास्ते यूरोप में बिक्री करने के लिए हर देश के नियम और उत्पाद मानक भी ध्यान में रखने होंगे.
FTA से क्या बदल सकता है?
भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौते पर बातचीत का बड़ा मकसद दोनों तरफ कारोबार की बाधाएं कम करना और बाजार तक पहुंच बढ़ाना है. अगर समझौते में किसी उत्पाद पर शुल्क घटता है, तो भारतीय निर्यातक के लिए यूरोप में सामान बेचना अधिक प्रतिस्पर्धी हो सकता है. कपड़ा, दवाइयां, इंजीनियरिंग सामान और दूसरे विनिर्मित उत्पादों के लिए यह अवसर बन सकता है. लेकिन वास्तविक फायदा इस बात पर निर्भर करेगा कि अंतिम समझौते में किन उत्पादों पर कितनी राहत मिलती है और उसे कब लागू किया जाता है.
इन्वेस्टमेंट पर फोकस
पीयूष गोयल के दौरे इन्वेस्टमेंट एक अहम मुद्दा रहने वाला है. करीब 100 भारतीय कारोबारी और स्टार्टअप इस दौरे में शामिल होंगे. जर्मनी में निवेश संबंधी बैठक और नीदरलैंड में क्षेत्रवार कारोबारी चर्चाओं का मकसद कंपनियों को साझेदार, तकनीक और नए बाजार तलाशने का मौका देना है. एजेंडे में ऑटोमोबाइल, एआई, ऊर्जा, खाद्य प्रसंस्करण, स्वास्थ्य, फार्मा, टेक्सटाइल और लॉजिस्टिक्स जैसे क्षेत्र हैं.

