Thursday, June 4, 2026
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कभी मजदूरी करता था ये एक्टर, 1 हफ्ते में बंगला-कार पाकर बन गया सबसे अमीर, फिर भी चॉल में काटे आखिरी दिन


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एक्टिगं की दुनिया में सक्सेस का आना और जाना तय नहीं. ऐसे कई स्टार हैं जो नामी अमीर रहे, लेकिन गुमनामी में खो गए. हिंदी सिनेमा का एक ऐसा हीरो भी था, जिसे सबसे अमीर हीरो का टैग मिला था लेकिन बाद में उसकी जिंद…और पढ़ें

कभी मजदूरी करता था ये एक्टर, 1 हफ्ते में बंगला-कार पाकर बन गया सबसे अमीर, फिर भी चॉल में काटे आखिरी दिन

हाइलाइट्स

  • भगवान दादा ने 400 से ज्यादा फिल्मों में काम किया.
  • भगवान दादा ने कपड़ा मिल में मजदूरी की थी.
  • भगवान दादा ने अंतिम समय चॉल में बिताया.
नई दिल्ली. बॉलीवुड का वो कॉमेडियन, जिसकी एक्टिंग देख भी लोग खा जाते थे गच्चा. किस्मत ने उन्हें ऐसा धोखा दिया कि जिंदगी के आखिरी दिन उन्हें चॉल में रहकर गुजारने पड़े. इस एक्टर की एक गलती ने 25 कमरों वाले बंगले और 7 लग्जरी कारों के मालिक को कंगाली की हालत में ला दिया था.

हिंदी सिनेमा को वो जाने माने एक्टर कोई और नहीं भगवान दादा है. साल 1940 के दशक में भगवान दादा को कम बजट वाली फिल्मों की सफलताओं से प्रसिद्धि हासिल मिली, जिसने उन्हें छोटे शहरों में लोकप्रिय बना दिया.बॉलीवुड की दुनिया चमक-दमक से भरी होती है, लेकिन इसके पीछे असल कहानियां ऐसी भी हैं जो दिल दहला सकती हैं. ऐसी ही कुछ कहानी थी भगवान दादा की.

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रातोंरात बन गए थे स्टार

भगवान दादा का करियर रातोंरात फर्श से अर्श पर आ गया था. वह रातोंरात स्टार बन गए थे. भारतीय सिनेमा के पहले एक्शन और डांसिंग स्टार भगवान दादा की 1 अगस्त को जयंती है। ‘शोला जो भड़के’ और ‘ओ बेटा जी, ओ बाबू जी’ जैसे सदाबहार गानों से दर्शकों के दिलों में बसने वाले भगवान दादा, जिनका असली नाम भगवान आभाजी पालव था, किसी परिचय के मोहताज नहीं. लेकिन, वक्त की मार ने इस सितारे को आसमान से जमीन पर ला पटका.

कपड़ा मील में करते थे काम

हास्य कलाकार भगवान दादा की, जो एक मिल मजदूर से अभिनेता और निर्देशक बने. भगवान दादा अपनी कम बजट की फिल्मों की सफलताओं और डांस मूव्स से स्टार बन गए. पलव में जन्मे भगवान आबाजी बॉलीवुड अभिनेता भगवान दादा बन गए. 1930 के दशक में वह अपने पिता के नक्शेकदम पर चलते हुए बॉम्बे की कपड़ा मिलों में काम करने लगे, लेकिन अक्सर एक फिल्मस्टार बनने का सपना देखते थे.

गानों ने बना दिया था रातोंरात स्टार

भगवान दादा ने 400 से ज्यादा फिल्मों में एक्टिंग की और निर्देशन के साथ ही निर्माण से भी जुड़े जिस दौर में लोगों के पास फिल्म देखने के लिए टीवी नहीं था, उस दौर में भगवान दादा के पास 25 कमरे वाले बंगला और सात लग्जरी कार थी. वह हर दिन गाड़िया बदल बदल कर लेकर जाते थे. उनके पिता एक कपड़े की फैक्ट्री में मजदूरी किया करते थे. खुद भगवान दादा ने भी पिता के साथ इस फैक्ट्री में मजदूरी की थी. उनका सपना एक एक्टर बनने का था. उन्होंने फिल्म क्रिमिनल से बॉलीवुड डेब्यू किया था. एक्टर से वह डायरेक्टर और फिर प्रोड्यूसर भी बन गए थे.

बता दें कि एक वक्त था ऐसा भी आया जब उनकी फिल्में, धीरे-धीरे उनकी फिल्में फ्लॉप होने लगीं. फिर उन्होंने फिल्म ‘हंसते रहना’ बनाने की ठानी, जिसमें उन्होंने किशोर कुमार को कास्ट किया. ये उनका ड्रीम प्रोजेक्ट था. फिल्म के लिए उन्होंने अपना बंगला और गाड़ियां तक गिरवी रख दीं. लेकिन किशोर कुमार के लगातार नखरों की वजह से फिल्म कभी पूरी ही नहीं हो पाई.आखिरकार भगवान दादा को सब कुछ बेचना पड़ा और वो एक चाल में रहने लगे. उन्होंने अपना अंतिम समय भी इसी चॉल में बिताया.

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