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फिल्म बनाने के लिए डायरेक्टर-राइटर को प्रेरणा कहीं से भी मिल सकती है. बॉलीवुड में ऐसा कई बार हुआ है कि सिर्फ एक लाइन के आइडिया के डेवलप किया गया. कहानी का रूप देकर फिल्म बनाई गई. 70 के दशक में ऐसे ही एक फिल्म की स्टोरी का जन्म कविता से हुआ था. चाचा-भतीजे की इस फिल्म ने बॉक्स ऑफिस पर इतिहास रच दिया. मजेदार बात यह है कि डायरेक्टर हीरो को एयरपोर्ट से पकड़कर लाया था. गाने आज भी पॉप्युलर हैं.
‘राम तेरी गंगा मैली’, ‘शोले’ जैसे कालजयी फिल्मों का जन्म सिर्फ एक लाइन के आइडिया से हुआ. 70 के दशक में बीआर चोपड़ा के भाई यश चोपड़ा ने एक ऐसी फिल्म बनाई जिसकी प्रेम कहानी को आज भी याद किया जाता है. मजेदार बात यह है कि इस सुपरहिट फिल्म का जन्म एक कविता से हुआ. चाचा-भतीजे की जोड़ी भी फिल्म में नजर आई थी. अमिताभ बच्चन का एक ही रंग दर्शकों को देखने को मिला था. यह फिल्म ‘कभी-कभी’ थी जो कि 1976 में रिलीज हुई थी.

कहा जाता है कि प्यार वही अच्छा होता है जिसे मंजिल मिल पाए. अधूरा प्यार जिंदगी का दर्द बन जाता है. इसी थीम पर 1976 में अमिताभ बच्चन-राखी, शशि कपूर-ऋषि कपूर और नीतू सिंह स्टारर एक फिल्म ‘कभी-कभी’ आई थी. फिल्म का जन्म मशूर शायर-गीतकार साहिर लुधियानवी की एक नज्म से हुआ था. यह नज्म थी : कभी-कभी मेरे दिल में ख्याल आता है.

दरअसल, साहिर लुधियानवी की कविताओं का संग्रह 1940 के दशक में ‘तल्खियां’ नाम से छपा था. ‘तल्खियां’ में एक दर्द भरी नज्म ‘कभी-कभी’ थी. इस कविता को धुन में पिरोने का काम संगीतकार खय्याम ने किया था. 1960 के दशक में देवानंद के भाई चेतन आनंद काफिर’ फिल्म में सुधा मल्होत्रा और गीता बाली से गाना ‘कभी-कभी मेरे दिल में, ख्याल आता है’ रिकॉर्ड करवाया. आगे चलकर यह फिल्म बंद कर दी गई. 1966 में जब चेतन आनंद राजेश खन्ना-इंद्राणी मुखर्जी को लेकर ‘आखिरी खत’ बना रहे थे तो संगीतकार खय्याम ने ‘काफिर’ फिल्म के रिकॉर्ड किए गए गाने ‘कभी-कभी’ को ‘आखिरी खत’ में लेने के बारे में पूछा लेकिन बात नहीं बनी.
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आगे चलकर ‘रोमांस के जादूगर’ यश चोपड़ा ने ‘कभी-कभी’ फिल्म बनाई. वैसे भी यश चोपड़ा गीतकार साहिर लुधियानवी को बहुत पसंद करते थे. उन्होंने ‘कभी-कभी’ नज्म का इस्तेमाल अपनी फिल्म में किया. इतना ही नहीं फिल्म का टाइटल ही ‘कभी-कभी’ रख दिया. ‘कभी-कभी’ में वहीदा रहमान, शशि कपूर, अमिताभ बच्चन, राखी गुलजार, ऋषि कपूर, नीतू सिंह जैसे सितारे थे. म्यूजिक खय्याम ने कंपोज किया था. खैय्याम ने ऐसा कालजयी म्यूजिक तैयार किया, जो तब भी हिट था और आज भी हिट है.

वैसे यश चोपड़ा चाहते थे कि लक्ष्मीकांत-प्यारेलाल फिल्म का म्यूजिक दें लेकिन साहिर लुधियानवी को उन पर भरोसा नहीं था. उन्होंने खय्याम से म्यूजिक लेने पर जोर दिया. कहा जाता है कि ‘कभी-कभी’ फिल्म की कहानी गीतकार साहिर लुधियानवी की निजी जिंदगी से इंस्पायर्ड थी. साहिर साहब ने अपनी कविता के कई अल्फाज बदल दिए थे. खय्याम ने ऐसा रोमांटिक गाना तैयार हुआ जिसे सुनकर आज भी प्रेमी जोड़ी दुनिया भूल जाते हैं.

‘कभी-कभी’ फिल्म स्क्रीनप्ले सागर सरहदी ने लिखा था. फिल्म में कुल 9 गाने रखे गए थे. फिल्म का यूथफुल सॉन्ग ‘तेरे चेहरे से नजर नहीं हटती नजारे हम क्या देखें’ किशोर कुमार की आवाज में था. फिल्म में नीतू सिंह और ऋषि कपूर का आइडिया पामेला चोपड़ा को अखबार के एक आर्टिकल से मिला था. फिल्म रिलीज होने के बाद राजेश खन्ना ने दावा किया था कि अमिताभ बच्चन वाला रोल पहले उन्हें ऑफर किया गया था.

फिल्म में नजर आए शशि कपूर-ऋषि कपूर का असल रिश्ता चाचा-भतीजे का था जबकि फिल्म में दोनों पिता-पुत्र के रोल में दिखाई दिए थे. मजेदार बात यह है कि ऋषि कपूर ने शुरुआत में यह फिल्म ठुकरा दी थी. यश चोपड़ा ने शशि कपूर से बात की. शशि कपूर ने वादा किया था कि वो भतीजे ऋषि कपूर के कान पकड़कर सेट पर लाएंगे. शशि कपूर के दबाव में ऋषि ने फिल्म के लिए हामी भर दी. इसी फिल्म के दौरान ऋषि कपूर-नीतू सिंह का प्यार परवान चढ़ा.

‘कभी-कभी’ फिल्म का बजट करीब 1.4 करोड़ था और मूवी ने 3 करोड़ का कलेक्शन किया था. यह एक सुपरहिट फिल्म साबित हुई थी. यह 1976 की आठवीं सबसे ज्यादा कमाई करने वाली फिल्म थी. खय्याम को बेस्ट म्यूजिक डायरेक्टर का जबकि साहिर लुधियानवी को बेस्ट गीतकार का फिल्मफेयर अवॉर्ड मिला था.

