Saturday, June 27, 2026
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किसी को नहीं था भरोसा,तब राकेश झुनझुनवाला ने टाइटन पर लगाया दांव, रचा इतिहास


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शेयर बाजार में बड़ी कमाई सिर्फ सही कंपनी चुनने से नहीं, बल्कि सही समय पर भरोसा करने से होती है. दिग्गज निवेशक राकेश झुनझुनवाला ने यही करके दिखाया था, जब उन्होंने टाइटन में उस समय निवेश किया, जब ज्यादातर निवेशक उससे दूरी बना रहे थे. आज यही निवेश भारतीय शेयर बाजार की सबसे बड़ी सफलता की कहानियों में गिना जाता है.

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टाइटन में राकेश झुनझुनवाला ने क्यों किया था बड़ा निवेश? रामदेव अग्रवाल ने बताया सफलता का राज. (Representative Image: AI)

नई दिल्ली. भारत के मशहूर निवेशक राकेश झुनझुनवाला का टाइटन में किया गया निवेश आज भी निवेशकों के लिए प्रेरणा का उदाहरण माना जाता है. उस दौर में टाइटन को लेकर बाजार में ज्यादा उत्साह नहीं था. कंपनी कमजोर मांग, सोने की बढ़ती कीमतों, बढ़ती प्रतिस्पर्धा और कुछ आंतरिक चुनौतियों से जूझ रही थी. इसके चलते शेयर की कीमत करीब 30 से 35 रुपये के आसपास थी और ज्यादातर निवेशक इसे आकर्षक विकल्प नहीं मान रहे थे. लेकिन झुनझुनवाला ने भीड़ से अलग सोच दिखाई और इसी दौर में कंपनी के शेयर खरीदने शुरू कर दिए. उनका यह फैसला आगे चलकर उनकी सबसे बड़ी निवेश सफलता साबित हुआ.

क्या थी झुनझुनवाला की सबसे बड़ी ताकत
मोतीलाल ओसवाल ग्रुप के चेयरमैन रामदेव अग्रवाल ने एक पॉडकास्ट में बताया था कि राकेश झुनझुनवाला में सस्ते लेकिन मजबूत कारोबार पहचानने की अनोखी क्षमता थी. उनके अनुसार, यह सिर्फ पढ़ाई या अनुभव का परिणाम नहीं था, बल्कि बाजार को समझने की एक स्वाभाविक प्रतिभा थी. जब उन्हें किसी कंपनी में भविष्य दिखाई देता था, तो वह पूरे विश्वास के साथ निवेश करते थे. टाइटन के मामले में भी उन्होंने कंपनी की तत्काल मुश्किलों के बजाय उसके मजबूत ब्रांड, अनुभवी प्रबंधन और भविष्य की संभावनाओं को देखा. खासतौर पर ज्वेलरी ब्रांड तनिष्क के जरिए कंपनी के तेजी से आगे बढ़ने की संभावना ने उन्हें सबसे ज्यादा प्रभावित किया.

धैर्य ने बनाया निवेश को करोड़ों का खजाना
टाइटन में शुरुआती दौर में कई लोगों ने निवेश किया था, लेकिन लंबे समय तक टिके रहना हर किसी के बस की बात नहीं थी. राकेश झुनझुनवाला ने दो दशक से भी ज्यादा समय तक अपने निवेश पर भरोसा बनाए रखा. इसी धैर्य का नतीजा यह रहा कि 31 मार्च 2026 तक झुनझुनवाला परिवार के पास Titan में करीब 5 प्रतिशत हिस्सेदारी थी, जिसकी अनुमानित कीमत लगभग 20,250 करोड़ रुपये पहुंच गई. यह दिखाता है कि शेयर बाजार में केवल सही कंपनी चुनना ही काफी नहीं होता, बल्कि लंबे समय तक निवेश बनाए रखना भी उतना ही जरूरी होता है.

टाइटन ने कारोबार और मुनाफे दोनों में दिखाई शानदार रफ्तार
टाइटन ने सिर्फ शेयर बाजार में ही नहीं, बल्कि अपने कारोबार में भी लगातार मजबूत प्रदर्शन किया है. वित्त वर्ष 2025-26 में कंपनी की कुल आय में 33 प्रतिशत की बढ़ोतरी दर्ज की गई और यह बढ़कर 76,078 करोड़ रुपये तक पहुंच गई. वहीं, कंपनी का शुद्ध लाभ 52 प्रतिशत बढ़कर 5,073 करोड़ रुपये हो गया. कंपनी ने ज्वेलरी कारोबार के साथ-साथ घड़ियों, आईवियर और अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी अपनी मौजूदगी मजबूत की है. तनिष्क आज भी टाइटन की सबसे बड़ी ताकत बनी हुई है और आने वाले वर्षों में कंपनी अपने ज्वेलरी कारोबार को और तेजी से बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है.

निवेशकों के लिए क्या है सबसे बड़ा सबक?
टाइटन की कहानी सिर्फ एक सफल शेयर की कहानी नहीं है, बल्कि यह धैर्य, भरोसे और दूरदर्शी सोच की मिसाल भी है. जब बाजार किसी कंपनी को नजरअंदाज कर रहा था, तब राकेश झुनझुनवाला ने उसके भविष्य को पहचाना. उन्होंने जल्द मुनाफा कमाने की बजाय लंबे समय तक निवेश बनाए रखा और कंपनी के मजबूत होते कारोबार का पूरा लाभ उठाया. यही वजह है कि टाइटन आज उनकी सबसे यादगार निवेश सफलता मानी जाती है. यह कहानी नए और पुराने दोनों तरह के निवेशकों को सिखाती है कि मजबूत कारोबार वाली कंपनी में सही समय पर किया गया धैर्यपूर्ण निवेश लंबे समय में असाधारण संपत्ति बना सकता है.

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Rakesh Singh

Rakesh Singh is a chief sub editor with 14 years of experience in media and publication. International affairs, Politics and agriculture are area of Interest. Many articles written by Rakesh Singh published in …और पढ़ें



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