Saturday, August 29, 2026
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कुलपति ने सरकारी आवास के बावजूद लिया HRA: हाईकोर्ट ने खाली करवाया आवास, गाड़ी भी वापस ली – Prayagraj (Allahabad) News




प्रयागराज की डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी की पहली कुलपति डॉ. उषा टंडन वित्तीय अनियमितताओं के आरोप में विवादों में घिर गई हैं। उन पर सरकारी आवास आवंटित होने के बावजूद हर महीने 19,700 रुपये हाउस रेंट अलाउंस (HRA) लेने का आरोप है। इस मामले के सामने आने के बाद अप्रैल में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने उनसे सरकारी आवास खाली करवा लिया और आधिकारिक गाड़ी भी वापस ले ली। एक अधिवक्ता ने इस संबंध में मुख्यमंत्री से शिकायत की है। डॉ. राजेंद्र प्रसाद नेशनल लॉ यूनिवर्सिटी में सितंबर 2023 में डॉ. उषा टंडन को पहली कुलपति नियुक्त किया गया था। उन्होंने कार्यभार संभालने के बाद वर्ष 2024 से विश्वविद्यालय में शैक्षणिक सत्र शुरू करवाया। वर्ष 2023 में प्रयागराज आने पर डॉ. टंडन को डीएम आवास के निकट मिशन रोड पर एक बंगला आवंटित किया गया था। उन्होंने कुछ समय वहां निवास किया और प्रशासन से उसके रखरखाव का अनुरोध किया। लोक निर्माण विभाग ने मकान की मरम्मत के लिए 60 लाख रुपये का बजट बनाया, जो शासन से स्वीकृत भी हुआ, लेकिन मरम्मत का कार्य शुरू नहीं हो सका। बाद में, उन्हें हाईकोर्ट जजेज कॉलोनी में एक अन्य आवास आवंटित किया गया। साथ ही, उन्हें हाईकोर्ट की ओर से एक आधिकारिक वाहन भी उपलब्ध कराया गया। उन्होंने इस आवास और वाहन का उपयोग करना शुरू कर दिया। इस दौरान उनके नाम पर मिशन रोड वाला बंगला भी आवंटित रहा, जिससे उनके पास दो सरकारी आवास हो गए। दो सरकारी आवास आवंटित होने के बावजूद, डॉ. टंडन हर महीने सरकार से 19,700 रुपये हाउस रेंट अलाउंस (HRA) लेती रहीं। जब इस दोहरे आवंटन और HRA लेने की जानकारी हाईकोर्ट को मिली, तो अप्रैल में उनसे हाईकोर्ट जजेज कॉलोनी का आवास खाली करवा लिया गया और वाहन भी वापस ले लिया गया। कुछ महीने पहले, मिशन रोड स्थित डीएम कंपाउंड का आवास किसी अन्य अधिकारी को आवंटित कर दिया गया। सूत्रों के अनुसार, कुलपति से वाहन और आवास के किराए के रूप में लगभग छह लाख रुपये वसूलने की तैयारी थी, लेकिन यह मामला फिलहाल लंबित है। यूनिवर्सिटी का पक्ष
यूनिवर्सिटी के पीआरओ प्रकाश त्रिपाठी ने बताया कि हाईकोर्ट में जजों की संख्या बढ़ने पर कुलपति से आवास खाली करवाया गया था। यूनिवर्सिटी का कैंपस और कुलपति आवास झलवा में निर्माणाधीन है। सरकारी आवास मिलने के बावजूद एचआरए लेने का मामला वित्त का है। मुझे इसकी जानकारी नहीं है। यूनिवर्सिटी में असिस्टेंट प्रोफेसर भर्ती पर विवाद
कुलपति पर 12 असिस्टेंट प्रोफेसरों को बिना हस्ताक्षर वाले नियुक्ति पत्र के आधार पर जॉइन करवाने का भी आरोप है।
12 पदों पर भर्ती के लिए 22 से 30 जुलाई के बीच इंटरव्यू हुए थे। 31 जुलाई की शाम 4 बजे कार्य परिषद की बैठक बुलाई गई और उसी रात 10 बजे आनन-फानन में रिजल्ट घोषित कर दिया गया। भर्ती प्रक्रिया में कुछ खामियां दिखने पर जब रजिस्ट्रार ने जॉइनिंग लेटर पर साइन करने से मना कर दिया, तो कुलपति ने बिना हस्ताक्षर वाले पत्रों से ही 1 अगस्त को अभ्यर्थियों को जॉइन करवाकर अध्यापन शुरू करवा दिया। 70,000 रुपये एकेडमिक इंसेंटिव लेने के आरोप
कुलपति डॉ. ऊषा टंडन पर पिछले दो साल से वेतन के अतिरिक्त हर महीने 70 हजार रुपये ‘एकेडमिक इंसेंटिव’ लेने का आरोप लगा है। वित्त नियंत्रक सिद्धार्थ शंकर त्रिपाठी ने जुलाई में इस अतिरिक्त भुगतान पर रोक लगा दी है। यूनिवर्सिटी में अलग अलग कार्यो के लिए जो भी कमेटी बनती है, उसमें कुलपति को चेयरमैन के रूप रहना होता है। बताया जा रहा है कमेटी का चेयरमैन बनने का भी वह भत्ता लेती हैं।



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