आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने केंद्र सरकार और राष्ट्रीय कंपनी कानून न्यायाधिकरण पर निशाना साधा है। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के करोड़ों आम उपभोक्ताओं, किसानों और मजदूरों का पैसा बैंकों और एलआईसी में जमा होता है, जिसे सरकार पूंजीपतियो
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संजय सिंह ने बताया कि जब बड़े उद्योगपति हजारों करोड़ रुपये का कर्ज नहीं चुका पाते, तो उन्हें दिवालिया घोषित कर NCLT भेज दिया जाता है।
उनके मुताबिक NCLT संगठित भ्रष्टाचार का अड्डा बन चुका है, जहां केंद्र सरकार सीधे पूंजीपतियों के साथ डील करती है।
अंकों के आंकड़े और सरकार पर आरोप
संजय सिंह ने आरोप लगाते हुए बताया कि 43 कंपनियों पर कुल 5,44,000 करोड़ रुपये का कर्ज बकाया था। इन कंपनियों से करीब 1,91,000 करोड़ रुपये की वसूली की गई। बाकी 3,53,000 करोड़ रुपये का कर्ज माफ कर दिया गया।
हेयरकट नहीं, यह गर्दन कट है
संसद में उठाए गए अपने सवाल का जिक्र करते हुए संजय सिंह ने कहा कि जब उन्होंने इस मुद्दे पर सरकार से जवाब मांगा, तो इसे हेयरकट का नाम दिया गया। सरकार का तर्क था कि थोड़े से नुकसान के साथ पुराना कर्ज वसूला जा रहा है।
इस पर तंज कसते हुए आप नेता ने कहा, यह हेयरकट नहीं बल्कि आम जनता की गर्दन कट है, जहां पूंजीपतियों का 90% तक कर्ज माफ कर दिया जाता है।
आम जनता और किसानों के साथ दोहरा रवैया
संजय सिंह ने आरोप लगाया कि एक तरफ बड़े उद्योगपतियों का लाखों करोड़ का कर्ज माफ किया जा रहा है, वहीं दूसरी तरफ यदि कोई किसान या मजदूर बेटी की शादी या बच्चे की पढ़ाई के लिए 1-2 लाख रुपये का छोटा कर्ज लेता है और उसे चुका नहीं पाता, तो सरकार और बैंक उसके खिलाफ सख्त कदम उठाते हैं।
आम लोगों को नोटिस जारी कर सार्वजनिक रूप से बदनाम किया जाता है और तहसील के हवालात में बंद कर दिया जाता है।

