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Bank of Baroda Case : एनएमसी हेल्थकेयर समूह के संस्थापक बीआर शेट्टी ने बैंक ऑफ बड़ौदा पर फर्जीवाड़े में शामिल होने आरोप लगाते हुए 15 अरब डॉलर के हर्जाने की मांग की है. शेट्टी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील करते हुए कहा है कि जब तक उन्हें हर्जाने की रकम नहीं दी जाती है, तब तक इस रकम पर 18 फीसदी ब्याज भी जोड़ा जाना चाहिए. शेट्टी ने कहा है कि यह हर्जाना बैंक की ओर से किए गए नुकसान के एवज में वसूला जा रहा है.
बैंक ऑफ बड़ौदा से फ्रॉड केस में 15 अरब डॉलर का हर्जाना मांगा गया है.
नई दिल्ली. बैंकों के खिलाफ तो आपने तमाम धोखाधड़ी और फर्जीवाडे़ के केस सुने होंगे, लेकिन इस मामले बैंक के धोखाधड़ी में शामिल होने का आरोप है. यह आरोप लगाया है एनएमसी हेल्थकेयर ग्रुप और यूएई एक्सचेंज के फाउंडर बीआर शेट्टी का. शेट्टी ने बैंक ऑफ बड़ौदा सहित 25 अन्य लोगों से 15 अरब डॉलर यानी करीब 1.44 लाख करोड़ रुपये का हर्जाना मांगा है. उन्होंने आरोप लगाया है कि इस सरकारी बैंक और उसके अधिकारियों ने एनएमसी ग्रुप की कंपनियों से जुड़े फ्रॉड में मदद की है और उनके खिलाफ ऐसी गारंटी के आधार पर कार्रवाई की, जिस पर उन्होंने कभी साइन किए ही नहीं हैं.
बीआर शेट्टी ने बॉम्बे हाईकोर्ट में अपील दायर की है, जिसमें सीधे नुकसान के लिए 5 अरब डॉलर के हर्जाने की मांग की है. इसके अलावा इस नुकसान की वजह से होने वाले नुकसान के लिए भी 5 अरब डॉलर मांगे हैं, जबकि इस मामले की वजह से उनके निवेश और कारोबारी अवसरों में हुए नुकसान के लिए 5 अरब डॉलर और मांगे गए हैं. इस तरह, कुल मिलाकर 15 अरब डॉलर हर्जाने के रूप में मांगे गए हैं. भारतीय करेंसी में यह करीब 1.44 लाख करोड़ रुपये आती है.
18 फीसदी ब्याज भी मांगा
बीआर शेट्टी ने बैंक ऑफ बड़ौदा सहित अन्य पर आरोप लगाने के साथ 15 अरब डॉलर का हर्जाना मांगा है और इस पर 18 फीसदी ब्याज की भी डिमांड की है. शेट्टी ने कहा कि जब तक उन्हें हर्जाने का भुगतान कर नहीं दिया जाता, तब तक इस रकम पर हर साल 18 फीसदी ब्याज भी दिया जाना चाहिए. शेट्टी ने बताया है कि साल 2019 तक बैंक ऑफ बड़ौदा एनएमसी हेल्थकेयर ग्रुप का प्रमुख बैंकर रहा था. इस दौरान बैंक सिर्फ ट्रांजेक्शन प्रोसेस नहीं कर रहा था, बल्कि समूह की कंपनियों और स्वतंत्र सप्लायर के तौर पर पेश की गई संस्थाओं के बीच ट्रांसफर के जरिये फंड का कथित डायवर्जन में भी मदद कर रहा था.
मनी लॉन्ड्रिंग के अलर्ट जारी किए
याचिका में आरोप लगाया गया है कि बैंक के सिस्टम ने मनी-लॉन्ड्रिंग के 100 से ज्यादा अलर्ट जारी किए थे, जिन्हें बाद में बंद कर दिया गया. बैंक पर यह आरोप भी लगाया गया है कि उसने बिना पर्याप्त सिक्योरिटी के क्रेडिट देना जारी रखा और ग्रुप के लोन और लेन-देन से जुड़ी चिंताओं की जानकारी ऑडिटर को नहीं दी. शेट्टी के मामले का एक अहम हिस्सा पर्सनल गारंटी और दूसरे ऐसे डॉक्यूमेंट्स से जुड़ा है, जिन पर उनके मुताबिक जाली साइन हैं. उनका आरोप है कि बैंक ने इन डॉक्यूमेंट्स की असलियत की ठीक से जांच किए बिना ही उनके खिलाफ देनदारियों को लेकर कार्रवाई शुरू कर दी. शेट्टी ने यह भी दावा किया है कि कुछ अकाउंट इंस्ट्रक्शन और ट्रांसफर बिना इजाजत के किए गए थे.
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प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्वेस्टमेंट टिप्स, टैक्स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…

