नई दिल्ली. भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने रेपो रेट बढ़ाकर 5.50% कर दिया है. केंद्रीय बैंक के ब्याज दर बढाने के बाद एचडीएफसी बैक, पंजाब नेशनल बैंक (PNB), बैंक ऑफ बड़ौदा (BoB) और इंडियन बैंक ने अपनी लेंडिंग रेट्स में इजाफा कर दिया है. करीब चार साल बाद इंटरेस्ट रेट बढ़ने से होम लोन और कार लोन महंगा हो गया है. जिन ग्राहकों का लोन रेपो रेट बेंचमार्क से जुड़ा है, उनके सामने अब यह उलझन है कि वे अपना बजट ठीक रखने के लिए लोन की ईएमआई बढ़ाए या लोन चुकाने की अवधि (Tenure). अगर आप भी इसी ऊहापोह में है तो आइये जानते हैं कि आपके लिए कौन सा रास्ता ठीक रहेगा.
ब्याज दर में इजाफा होने पर ईएमआई या टेन्योर बढ़ाने का फैसला कुछ बातों पर निर्भर करता है. एक व्यक्ति के लिए ईएमआई बढ़ाना सही साबित हो सकता है. वहीं, दूसरे के लिए टेन्योर बढ़ाना. जिन लोगों की आय नियमित है. इमरजेंसी के लिए पर्याप्त बचत है और अपने फाइनेंशियल गोल्स को पूरा करने के लिए कमाई ठीकठाक हो रही है तो वे ब्याज बचाने को EMI बढ़ाने या प्रीपेमेंट का विकल्प चुन सकते हैं. वहीं, जिन लोगों के पास हर महीने खर्च के लिए सीमित पैसा बचता है, वे मासिक बोझ कम रखने के लिए लोन की अवधि बढ़ाने का विकल्प चुन सकते हैं.
कहां कितना बचेगा, कितना ज्यादा लगेगा पैसा
मान लीजिए आपने 8.5% की दर पर 20 साल के लिए ₹50 लाख का होम लोन ले रखा है, जिसकी सामान्य EMI ₹43,391 बनती है. जब बैंक ब्याज दर को 25 बेसिस पॉइंट बढ़ाकर 8.75% कर देता है, तो आपके सामने दो रास्ते होते हैं. पहले विकल्प में अगर आप 20 साल की अवधि बरकरार रखते हैं, तो आपकी EMI ₹43,391 से बढ़कर ₹44,186 हो जाएगी, यानी हर महीने केवल ₹795 का अतिरिक्त बोझ पड़ेगा और कुल ब्याज ₹56.04 लाख बनेगा.
वहीं दूसरे विकल्प में यदि आप अपनी EMI को ₹43,391 पर ही स्थिर रखते हैं, तो बैंक आपकी लोन अवधि को करीब 13 महीने बढ़ा देगा, जिससे आपका कुल ब्याज ₹54.1 लाख से बढ़कर सीधे ₹59.5 लाख पर पहुंच जाएगा. इसका मतलब यह है कि EMI स्थिर रखने के चक्कर में आपको करीब ₹5.4 लाख का अतिरिक्त ब्याज बैंक को चुकाना पड़ेगा.
टेन्योर बढ़ाना क्यों है ‘धीमा जहर’
कर्ज लेने वाले कई लोग महीने के बजट में ₹800 से ₹1,000 बचाने के चक्कर में बैंक से लोन की अवधि बढ़ाने की गुजारिश करते हैं. लेकिन यह महंगा सौदा साबित होता है. जब लोन की मूल बकाया रकम (Principal Balance) ज्यादा होती है, तो अवधि लंबी होने से ब्याज पर ब्याज जुड़ता चला जाता है. जैसे अगर ₹50 लाख के 20 साल वाले लोन की अवधि बढ़ाकर 25 साल कर दी जाए, तो EMI घटकर लगभग ₹40,261 जरूर दिखती है. लेकिन भविष्य में कुल ब्याज भुगतान करीब ₹16.6 लाख तक बढ़ जाता है.
10% EMI बढ़ाकर बचाए जा सकते हैं ₹12.5 लाख
यदि आपकी आय नियमित और स्थिर है तो दरों में बढ़ोतरी के समय थोड़ा आक्रामक रुख अपनाना सबसे समझदारी भरा कदम है. पैसाबाजार के अनुसार, यदि ₹50 लाख के 20 साल वाले लोन पर आप अपनी EMI में सिर्फ 10% की वृद्धि करके इसे लगभग ₹47,730 कर देते हैं, तो आपका लोन 20 साल के बजाय महज 16 साल में खत्म हो जाएगा. इससे आपको ₹12.5 लाख ब्याज के रूप में कम देने होंगे.
इन 4 बातों का रखें ध्यान
- मासिक बजट और इमरजेंसी फंड को परखना सबसे जरूरी है. अगर हर महीने ₹1,000 से ₹2,000 अतिरिक्त EMI देने से आपके बुनियादी खर्चे और आपातकालीन फंड प्रभावित नहीं होते, तो हमेशा EMI बढ़ाने का ही विकल्प चुनें.
- यदि आप 45–50 वर्ष की आयु में हैं और रिटायरमेंट के करीब हैं, तो टेन्योर कभी न बढ़ाएं क्योंकि आमदनी कम होने पर EMI चुकाना भारी पड़ सकता है.
- यदि नियमित EMI बढ़ाना संभव न हो, तो सालाना बोनस या इंसेंटिव से मूलधन का 5% से 10% हिस्सा प्री-पेमेंट कर दें, जिससे लोन अवधि अपने आप घट जाएगी.

