Tuesday, October 13, 2026
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दुनिया की रफ्तार से दोगुनी भारत की GDP ग्रोथ, IMF ने इकोनॉमी पर दी गुड न्यूज


दुनिया के कई देशों में इकोनॉमिक अनसर्टेनिटी, महंगे कच्चे तेल और बढ़ते जियो-पॉलिटिकल टेंशन के बीच भी भारतीय अर्थव्यवस्था में मजबूती बनी हुई है. इंटरनेशनल मॉनेटरी फंड (IMF) ने वित्त वर्ष 2027-28 (FY28) के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान 6.7% से बढ़ाकर 7% कर दिया है. इसका मतलब है कि IMF को उम्मीद है कि आने वाले दो वित्त वर्षों में भी भारत की आर्थिक विकास दर मजबूत बनी रह सकती है. इससे पहले वित्त वर्ष 2026-27 (FY27) के लिए भी भारत की ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7% किया गया था. ऐसे में सवाल है कि आखिर किन वजहों से IMF ने भारत की ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया है?

घरेलू मांग और सर्विस सेक्टर से मिल रही ताकत

IMF के मुताबिक, भारत की अर्थव्यवस्था को आगे बढ़ाने में घरेलू मांग की अहम भूमिका है. जब देश के लोग सामान और सर्विसेस पर खर्च करते हैं, तो कारोबार बढ़ता है और आर्थिक गतिविधियों को गति मिलती है. इसके अलावा, बैंकिंग, आईटी, पर्यटन और दूसरी सर्विसेस से जुड़े कारोबार का अच्छा परफॉर्मेंस भी अर्थव्यवस्था को सहारा दे रहा है.

भारत की बड़ी आबादी, युवाओं की भागीदारी और देश के सामानों व सर्विसेस की बढ़ती मांग भी आर्थिक विकास के लिए अहम हैं. इसके साथ ही, आर्थिक सुधारों और कारोबार के लिए बेहतर माहौल से आने वाले वर्षों में विकास को मदद मिलने की उम्मीद है.

वित्त वर्ष 2025-26 में भारत की अर्थव्यवस्था 7.8% बढ़ी, जबकि इससे पहले वित्त वर्ष 2024-25 में विकास दर 7.2% रही थी. इन आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में इकोनॉमिक कंडिशन मजबूत बनी हुई हैं.

वर्ल्ड बैंक ने भी बढ़ाया था ग्रोथ का अनुमान

हाल ही में, भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर सिर्फ IMF ही नहीं, बल्कि वर्ल्ड बैंक का अनुमान भी बेहतर हुआ है. वर्ल्ड बैंक ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान अप्रैल के 6.6% से बढ़ाकर 7.1% कर दिया.

वर्ल्ड बैंक के मुताबिक, पहली तिमाही में उम्मीद से बेहतर प्रदर्शन के कारण अनुमान में बदलाव किया गया. व्यापार से जुड़ी चुनौतियों और ग्लोबल तनाव के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था ने अच्छी रफ्तार बनाए रखी. बैंक ने यह भी बताया कि मजबूत निवेश और लोगों के निजी खर्च ने विकास को सहारा दिया. सरकार की नीतियों और कर्ज मिलने की बेहतर स्थिति से भी आर्थिक गतिविधियों को मदद मिली. ग्रामीण और शहरी दोनों ही क्षेत्रों में खपत का अर्थव्यवस्था पर असर रहा है.

गांवों से शहरों तक बढ़ा खर्च

भारत में खपत का रुझान भी आर्थिक विकास को समझने के लिए महत्वपूर्ण है. शुरुआत में ग्रामीण इलाकों में खर्च की रफ्तार शहरों के मुकाबले बेहतर रही. अच्छी कृषि पैदावार, ग्रामीण परिवारों को मिलने वाली आर्थिक सहायता, खाद्य सब्सिडी और कम महंगाई ने ग्रामीण मांग को सहारा दिया.

बाद में शहरी क्षेत्रों में भी खर्च बढ़ने लगा. आयकर में राहत और GST दरों में कटौती जैसे कदमों से लोगों के पास खर्च करने के लिए ज्यादा पैसा बचने और खरीदारी को बढ़ावा मिलने की उम्मीद बनी.

वित्त वर्ष 2026-27 की पहली तिमाही में GDP की 7.8% वृद्धि भी मजबूत आर्थिक गतिविधियों का संकेत देती है. हालांकि, आने वाली तिमाहियों में विकास दर कुछ धीमी पड़ सकती है, लेकिन IMF और वर्ल्ड बैंक के अनुमान बताते हैं कि कुल मिलाकर आर्थिक विकास की रफ्तार मजबूत रहने की उम्मीद है.

महंगा कच्चा तेल बना सबसे बड़ा रिस्क

अच्छे अनुमानों के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था के सामने कुछ चुनौतियां भी हैं. इनमें कच्चे तेल की ऊंची कीमतें सबसे अहम हैं. भारत अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से आयात करता है. ऐसे में अगर तेल लंबे समय तक महंगा रहता है, तो देश का आयात बिल बढ़ सकता है.

इसका असर पेट्रोल-डीजल और परिवहन की लागत पर पड़ सकता है, जिससे सामान की कीमतें बढ़ने और महंगाई पर दबाव आने की आशंका रहती है. तेल आयात पर ज्यादा खर्च होने से चालू खाते का घाटा भी बढ़ सकता है और रुपये पर दबाव आ सकता है.

2026 में ग्लोबल इकोनॉमी की ग्रोथ घटकर 3.1% रहेगी

IMF के मुताबिक, दुनिया की आर्थिक विकास दर 2025 के 3.5% से घटकर 2026 में 3.1% रहने का अनुमान है. हालांकि, 2027 में इसके बढ़कर 3.4% होने की उम्मीद है. IMF के अनुसार, ग्लोबल अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत बनी हुई है, लेकिन यह मजबूती पहले के मुकाबले कमजोर होती जा रही है. एनर्जी और खाद्य पदार्थों की ऊंची कीमतों के कारण 2026 में महंगाई दर 4.7% तक पहुंचने का अनुमान है.

IMF ने कहा कि अलग-अलग देशों की आर्थिक ग्रोथ इस बात पर निर्भर करेगी कि वे महंगी एनर्जी से कितना प्रभावित होते हैं और तकनीक के सेक्टर में ग्लोबल तेजी का कितना फायदा उठा पाते हैं. चीन की आर्थिक विकास दर 2025 के 5% से घटकर 2026 में 4.5% रहने और 2027 में और गिरकर 4% होने का अनुमान है. महंगा कच्चा तेल, घरेलू मांग में कमजोरी और लंबे समय से चली आ रही आर्थिक समस्याएं चीन की ग्रोथ पर दबाव डाल सकती हैं.

असल में, घरेलू मांग, निवेश और सर्विस सेक्टर भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूती दे रहे हैं. IMF और वर्ल्ड बैंक के बढ़े हुए अनुमान इसी मजबूती को दिखाते हैं. हालांकि, आगे विकास की रफ्तार कितनी बनी रहती है, यह काफी हद तक कच्चे तेल की कीमतों और ग्लोबल आर्थिक हालात पर निर्भर करेगा.



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