बांध के पास पानी में ही किनारे खड़ी कर दी गई हैं नाव।
प्रयागराज में गंगा और यमुना डेंजर लेवर से एक मीटर से भी ऊपर पहुंच गई हैं। संगम क्षेत्र में संचालित होने वाली 5000 से ज्यादा नावों के संचालन पर अब पूरी तरह से ब्रेक लगा दिया गया है। नदियों के जलस्तर में हो रही वृद्धि और दूसरी ओर बारिश के चलते प्रशासन
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जल पुलिस के अधिकारियों की ओर से सभी नाविकों को इसके लिए सख्त हिदायत भी दे दी गई है कि वह नावों को किनारे लगा दें और नावों का संचालन पूरी तरह से रोक दें। ऐसी स्थिति में अब सिर्फ NDRF व जल पुलिस के नावों व स्टीमर आदि का संचालन किया जा रहा है। सभी नावों को बांध के पास एक किनारे लगवा दी गई है।
5 हजार से ज्यादा नावों को एक किनारे लगाया गया है।
बाढ़ के दिनों में परिवार का खर्च चलाना मुश्किल
नाविक संघ के महामंत्री ननका निषाद कहते हैं, इस समय गंगा और यमुना दोनों ही नदियों का जलस्तर बहुत तेजी से बढ़ रहा है। बारिश तो कभी तेज हवा के चलते नाव के अनियंत्रित होने का खतरा बढ़ जाता है। इसे देखते हुए रविवार शाम से नावों का संचालन बंद कर दिया गया है।
नाविक रामधनी निषाद, 1983 से संगम क्षेत्र में नाव चलाते आ रहे हैं। दैनिक भास्कर से बातचीत के दौरान बताया, कि बाढ़ के दिनों में करीब एक महीने तक नावों का संचालन ठप हो जाता है। ऐसी स्थिति में आमदनी बिल्कुल शून्य हो जाती है। परिवार का खर्च चलाना मुश्किल हो जाता है। वह बताते हैं नाव का संचालन नहीं हो रहा है फिर भी प्रतिदिन नाव पर आता हूं और साफ सफाई करता हूं और फिर चला जाता हूं।

नाविकों ने अपने नाव को एक किनारे बांध कर रखे हैं।
नाव चलाकर होता है परिवार का गुजारा
दरअसल, 5 हजार से ज्यादा जो नाविक हैं उनका गुजारा इस नाव के संचालन से ही होता है। देश विदेश से जो लोग संगम आते हैं उन्हें यह नाविक ही संगम की सैर कराते हैं। महाकुंभ के दिनों में तो नाविकों को रेट भी कई गुना बढ़ गया था।

ननका निषाद, नाविक संघ के महामंत्री।
नाविक राजेश बताते हैं, यह गंगा मईया ही हमारे परिवार का खर्च उठाती हैं। उन्हीं की गोद में हम लोग वर्षाें से रहते आ रहे हैं। बाढ़ का पानी कम होने के बाद फिर से हम लोग नावों का संचालन शुरू करेंगे।

