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Gaya Business Women Success Story: बिहार के गया जिले के इलरा गांव की रहने वाली कुमारी पुष्पा राज ने घर संभालने से लेकर अपना कारोबार खड़ा करने तक का सफर तय किया है. करीब 5 साल पहले तक घरेलू कामकाज संभालने वाली पुष्पा ने 2022 में जीविका समूह से जुड़कर बोधगया महाबोधि मंदिर के बाहर एक गुमटी में नीरा से बनी मिठाई बेचने का काम शुरू किया. इसके लिए उन्होंने समूह से 80 हजार रुपये का लोन लिया और सरकार से गुमटी व नीरा कूलिंग मशीन की मदद मिली. शुरुआत में ग्राहकों की संख्या कम थी और दिनभर में 500 रुपये की कमाई भी मुश्किल होती थी, लेकिन धीरे-धीरे नीरा मिठाई का स्वाद लोगों को पसंद आने लगा. आज पुष्पा तीन स्टॉल और एक बड़ी दुकान का संचालन कर रही हैं, 6 लोगों को रोजगार दे रही हैं और उनके मुताबिक रोजाना करीब 3-4 हजार रुपये की आमदनी हो रही है, जबकि महीने की बचत 1 लाख रुपये से अधिक है.
5 साल पूर्व तक घर का कामकाज संभालने वाली कुमारी पुष्पा राज आज महीने की 1 लाख रुपए से अधिक की आमदनी कर रही हैं. बिहार के गया जिले के इलरा गांव की रहने वाली पुष्पा ने 2022 में बोधगया महाबोधि मंदिर के बाहर एक गुमटी में नीरा मिठाई का कारोबार शुरू किया था. जीविका समूह से जुड़े होने के कारण इन्हें सरकार से एक गुमटी और नीरा कूलिंग मशीन दी गई थी. फिर उन्होंने 80 हजार रुपए समूह से लोन लेकर मिठाई का काम शुरू किया और धीरे-धीरे इनका कारोबार बढ़ता ही चला गया.
शुरुआत के दिनों में नीरा से तैयार मिठाई की डिमांड कम थी. लेकिन जब लोगों को इसका टेस्ट पसंद आया तो इसकी डिमांड बढ़ने लगी. खासकर तिब्बत और नेपाल के विदेशी श्रद्धालु इसे ज्यादा पसंद करने लगे और हर दिन 500 से 800 रुपये की बचत होने लगी. धीरे-धीरे इन्होंने गया शहर में स्थित प्रमंडलीय कार्यालय के पास दूसरा स्टॉल लगाया और अब बोधगया के भागलपुर मोड़ के पास एक बड़ी दुकान खोल ली है. आज की तारीख में पुष्पा तीन स्टॉल का संचालन कर रही हैं.
इन्होंने 6 लोगों को रोजगार दे रखा है और अब इनकी महीने की बचत 1 लाख रुपए से अधिक है. लोकल 18 से बातचीत में पुष्पा राज बताती हैं कि जीविका समूह से जुड़ने के बाद नीरा को गुड़ तैयार कर मिठाई बनाने का प्रशिक्षण दिया गया. उसके बाद बोधगया में मिठाई स्टॉल खोलने के लिए सरकार से मदद भी की गई और 80 हजार रुपए लोन लेकर इस कारोबार को शुरू किया. हमारे स्टॉल का उद्घाटन तत्कालीन मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के द्वारा किया गया था. इतना ही नहीं, नीरा से तैयार गुड़ और मिठाई को देखने नीतीश कुमार हमारे गांव भी आए थे.
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शुरुआत के एक-दो साल काफी परेशानी हुई और ग्राहकों को नीरा मिठाई की खासियत के बारे में समझाना पड़ता था. ग्राहकों को नीरा के फायदे बताते थे, तब वे खरीदारी करते थे. एक-दो साल तो दिन भर में ₹500 भी कमाना मुश्किल होता था. लेकिन धीरे-धीरे जब लोगों की जुबान पर नीरा का स्वाद चढ़ गया तो इसकी डिमांड भरपूर आने लगी. अब तो लोग नीरा से तैयार मिठाई पैक करा कर नेपाल और तिब्बत तक ले जाते हैं.
एक गुमटी से शुरू हुआ यह कारोबार अब दो स्टॉल और एक बड़ी दुकान का रूप ले चुका है. बोधगया महाबोधि मंदिर के पास, गया शहर में प्रमंडलीय कार्यालय के नजदीक और तीसरा बोधगया के भागलपुर में दुकान खुल चुकी है. इन्होंने बताया अब हर दिन लगभग 3-4 हजार रुपए की आमदनी हो रही है और घर का हर सदस्य इसी कारोबार से जुड़ गया है.

