Saturday, April 11, 2026
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जज कैश कांड-सुप्रीम कोर्ट का लोकसभा अध्यक्ष को नोटिस: पूछा- राज्यसभा में महाभियोग प्रस्ताव नामंजूर फिर जांच पैनल क्यों बनाया, संसद में यह कैसे हुआ


नई दिल्ली3 मिनट पहले

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14 मार्च 2025 को जस्टिस वर्मा के दिल्ली स्थित आधिकारिक आवास से 500-500 रुपए के जले नोटों के बंडलों से भरे बोरे मिले थे।

सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज जस्टिस यशवंत वर्मा की याचिका पर लोकसभा स्पीकर ओम बिरला को नोटिस जारी किया। याचिका में वर्मा के खिलाफ भ्रष्टाचार के आरोपों की जांच के लिए लोकसभा द्वारा अकेले बनाई गई तीन सदस्यीय जांच समिति की वैधता को चुनौती दी गई है।

याचिका में कहा गया है कि दोनों सदनों में महाभियोग प्रस्ताव लाया गया था, लेकिन राज्यसभा ने उसे मंजूर नहीं किया। फिर भी लोकसभा ने अकेले जांच समिति बनाई जो कि गलत है। जस्टिस दीपांकर दत्ता और एजे मसीह की बेंच ने लोकसभा स्पीकर कार्यालय और दोनों सदनों के महासचिवों से जवाब मांगा है।

जस्टिस दत्ता ने पूछा- राज्यसभा में प्रस्ताव नामंजूर हुआ फिर भी लोकसभा में समिति बनाई गई। संसद में इतने सारे सांसद और कानूनी विशेषज्ञ मौजूद थे, लेकिन किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया, संसद में मौजूद कानूनी विशेषज्ञों ने इसे होने कैसे दिया?

14 मार्च को दिल्ली में जज के आधिकारिक आवास के स्टोर रूम में आग लगने के बाद जले हुए नोटों के बंडल मिले थे। इसके बाद के घटनाक्रम में उन्हें इलाहाबाद हाईकोर्ट ट्रांसफर कर दिया गया। मामले की अगली सुनवाई 7 जनवरी 2026 को होगी।

याचिका में दावा- जांच पैनल भारतीय संविधान का उल्लंघन

7 अगस्त को सुप्रीम कोर्ट ने इंटरनल कमेटी की रिपोर्ट और CJI खन्ना की सिफारिश के खिलाफ दायर याचिका खारिज कर दी थी। इसके बाद जस्टिस वर्मा ने 1968 के जज जांच कानून के तहत शुरू हुई कार्रवाई को चुनौती देते हुए नई याचिका दायर की है।

लोकसभा अध्यक्ष ने जज (जांच) कानून 1968 की धारा 3(2) के तहत के जांच पैनल बनाया, जिसे संविधान के खिलाफ बताया गया है। याचिका में 12 अगस्त 2025 की लोकसभा स्पीकर की कार्रवाई को असंवैधानिक घोषित कर रद्द करने की मांग की गई है।

जस्टिस वर्मा के वकील ने कहा कि जज को हटाने से जुड़े प्रस्ताव लाने से पहले लोकसभा और राज्यसभा दोनों मिलकर जांच समिति बनाएं सिर्फ लोकसभा स्पीकर अकेले यह कमेटी न बनाए।

इससे पहले तीन हाईकोर्ट जजों की जांच में जस्टिस वर्मा दोषी पाए गए और उन्हें हटाने की सिफारिश हुई थी। इसके बाद सरकार ने संसद में महाभियोग प्रस्ताव रखा, जिसे 146 सांसदों के समर्थन के साथ अध्यक्ष ने मंजूर कर लिया।

संसद में महाभियोग लाने की प्रक्रिया क्या है…

जजों की जांच के कानून के बारे में जानें…

  • 1968 के जजों (जांच) अधिनियम के मुताबिक जब किसी जज को हटाने का प्रस्ताव संसद के किसी भी सदन में मंजूर हो जाता है तो स्पीकर या चेयरमैन उस आरोप की जांच के लिए तीन सदस्यों की एक समिति बनाते हैं।

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हाईकोर्ट जज के घर जलते नोटों का अनकट VIDEO: SC की वेबसाइट पर 65 सेकेंड की क्लिप

सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाईकोर्ट के जस्टिस यशवंत वर्मा के घर से 15 करोड़ कैश मिलने का वीडियो जारी किया है। 65 सेकेंड के वीडियो में नोटों से भरी बोरियां दिखाई दे रही हैं। घटना 14 मार्च की है। बंगले में आग की सूचना पर फायर ब्रिगेड पहुंची थी। वहीं दमकल कर्मचारियों को ये नोट मिले। रकम करीब 15 करोड़ थी। पूरी खबर पढ़ें…

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