जमुई सदर अस्पताल की स्वास्थ्य व्यवस्था बेहद चिंताजनक बनी हुई है। हालात यह हैं कि मरीजों को स्ट्रेचर तक नसीब नहीं हो रहा। मजबूरी में परिजनों को मरीजों को गोद में उठाकर इमरजेंसी से ब्लड टेस्ट कक्ष और अन्य विभागों तक ले जाना पड़ रहा है।
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स्वास्थ्य मंत्री का दौरा बेअसर
कुछ ही दिन पहले स्वास्थ्य मंत्री मंगल पांडेय ने अस्पताल का दौरा किया था। उम्मीद थी कि दौरे के बाद स्थिति सुधरेगी, लेकिन जमीनी हालात जस के तस हैं। मरीज और उनके परिजन परेशान हैं।
उपाधीक्षक का बयान और विवाद
सदर अस्पताल के उपाधीक्षक डॉक्टर सैयद नौशाद अहमद ने सफाई देते हुए कहा कि अस्पताल में स्ट्रेचर मौजूद हैं। लेकिन विभाग ने स्ट्रेचर चलाने के लिए कोई कर्मचारी नियुक्त नहीं किया है।जब उनसे पूछा गया कि एक सप्ताह में ऐसे एक दर्जन मामले सामने आए हैं, तो उन्होंने कहा, “मेरे सामने दो मामले आए हैं। ऐसे हजार मामले भी हो सकते हैं।”
उन्होंने सीधे तौर पर इसकी जिम्मेदारी स्वास्थ्य विभाग के सिस्टम पर डाल दी।
मरीज और परिजन नाराज
उपाधीक्षक का यह बयान सुनकर इलाज कराने आए मरीज और परिजन आक्रोशित हैं। उनका कहना है कि अगर अस्पताल प्रबंधन ही जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लेगा, तो आम लोगों का इलाज कैसे होगा।
सवालों के घेरे में स्वास्थ्य व्यवस्था
जमुई सदर अस्पताल की यह स्थिति उस समय उजागर हुई है, जब सरकार स्वास्थ्य व्यवस्था सुधारने के बड़े-बड़े दावे कर रही है।
- स्ट्रेचर न मिलने से गंभीर मरीजों की जिंदगी खतरे में पड़ रही है।
- कर्मचारियों की कमी और लापरवाही ने अस्पताल की हालत और खराब कर दी है।

