नई दिल्ली. जियो प्लेटफॉर्म्स का आईपीओ 21 अक्टूबर को रिटेल निवेशकों के लिए खुलेगा. इस इश्यू को लेकर लोगों में जबरदस्त उत्साह देखा जा रहा है. ग्रे मार्केट में भी जियो आईपीओ के शेयर प्रीमियम पर ट्रेड कर रहे हैं. किसी भी आईपीओ में पैसा लगाने से पहले यह समझना जरूरी है कि कौन-कौन से निवेशक किस कोटे में आवेदन कर सकते हैं और किन खास वर्गों के लिए अलग से शेयर आरक्षित रखे गए हैं. जियो आईपीओ में भी अलग-अलग इन्वेस्टर्स के लिए कोटा निर्धारित है और रिलायंस शेयरहोल्डर्स के लिए अलग से शेयर रखे गए हैं.
आईपीओ में रिटेल निवेशकों के लिए कोटा रखा जाता है. इस श्रेणी में कोई भी व्यक्तिगत नागरिक अधिकतम दो लाख रुपये तक की बोली लगा सकता है. जियो आईपीओ का प्राइस बैंड 1065 से 1119 रुपये है. एक लॉट में 12 शेयर हैं. इस तरह रिटेल निवेशकों के लिए अपर प्राइस बैंड के हिसाब से जियो प्लेटफॉर्म्स के इश्यू में एक लॉट का न्यूनतम मूल्य 13,428 रुपये तय किया गया है. रिटेल निवेशक अपनी सुविधा अनुसार न्यूनतम एक लॉट से लेकर अधिकतम 14 लॉट तक के लिए बोली लगा सकते हैं.
एचएनआई कोटा
दो लाख रुपये से ऊपर की पूंजी लगाने वाले निवेशकों को नॉन-इंस्टीट्यूशनल इन्वेस्टर्स यानी एनआईआई की श्रेणी में रखा जाता है. इसमें दो अलग-अलग उप-श्रेणियां बनाई गई हैं ताकि पूंजी के आकार के हिसाब से निष्पक्ष आवंटन हो सके. पहली उप-श्रेणी स्मॉल एचएनआई की है, जिसमें 15 लॉट यानी 180 शेयरों से लेकर अधिकतम 74 लॉट यानी 888 शेयरों तक के लिए बोली लगाई जा सकती है. इसके लिए 2,01,420 रुपये से लेकर 9,93,672 रुपये तक की पूंजी आवश्यक होती है.
दूसरी उप-श्रेणी बिग एचएनआई की है, जहां 75 लॉट यानी 900 शेयरों से बोली की शुरुआत होती है और इसके लिए कम से कम 10,07,100 रुपये का निवेश करना अनिवार्य है. इसके अलावा बैंक, म्यूचुअल फंड और बीमा कंपनियों जैसे बड़े संस्थागत खरीदारों के लिए क्वालिफाइड इंस्टीट्यूशनल बायर्स का कोटा अलग से निर्धारित होता है.
रिलायंस शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ का रिजर्व कोटा
जियो प्लेटफॉर्म्स के 30,213 करोड़ रुपये के कुल इश्यू में से रिलायंस इंडस्ट्रीज के मौजूदा शेयरधारकों के लिए 2,500 करोड़ रुपये का विशेष आरक्षित कोटा रखा गया है. इस कोटे में वे निवेशक आवेदन कर सकते हैं जिनके डीमैट खाते में तय कट-ऑफ तारीख तक रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयर मौजूद थे. शेयरधारक श्रेणी के तहत पात्र निवेशक अधिकतम दो लाख रुपये तक की बोली लगा सकते हैं.
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि एक पात्र शेयरधारक इस रिजर्व कोटे के साथ-साथ रिटेल या एनआईआई श्रेणी में से किसी एक में अलग से भी एक बोली लगा सकता है. ऐसा करने पर ऑफर दस्तावेजों के मुताबिक दोहरा आवेदन नहीं माना जाएगा. भारतीय शेयर बाजार के टी-प्लस-वन सेटलमेंट नियमों के तहत पात्रता की कट-ऑफ तारीख 14 अक्टूबर निर्धारित थी. जिसके लिए 13 अक्टूबर तक शेयर खरीदना जरूरी था.
कर्मचारियों के लिए 500 करोड़ के शेयर रिजर्व
जियो आईपीओ में रिलायंस इंडस्ट्रीज और उसकी सहायक इकाइयों के पात्र कर्मचारियों के लिए 500 करोड़ रुपये के शेयर अलग से आरक्षित किए हैं. इस श्रेणी के अंतर्गत आने वाले कर्मचारी अधिकतम पांच लाख रुपये तक के शेयरों के लिए बोली लगा सकते हैं. इसके लिए आवेदन फॉर्म भरते समय कर्मचारी कोटा चुनना होगा.
बैंक फंड ब्लॉकिंग और लिस्टिंग टाइमलाइन
जियो प्लेटफॉर्म्स के आईपीओ में भाग लेने के लिए निवेशक अपने बैंक के एएसबीए पोर्टल, ब्रोकरेज ट्रेडिंग ऐप या यूपीआई मैंडेट के जरिए 19 अक्टूबर से आवेदन प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं. आईपीओ में आवेदन करते ही पैसे क खाते से नहीं कटते, बल्कि अकाउंट में ही ब्लॉक हो जाते हैं. यदि शेयर मिल जाए तो राशि खाते से कट जाती है, जबकि अलॉटमेंट न मिलने की स्थिति में ब्लॉक फंड रिलीज हो जाता है. आईपीओ बंद होने के तीन दिनों के भीतर सफल निवेशकों के डीमैट खातों में शेयर ट्रांसफर कर दिए जाएंगे.
(डिस्क्लेमर – नेटवर्क18 और टीवी18 कंपनियां चैनल/वेबसाइट का संचालन करती हैं, जिनका नियंत्रण इंडिपेंडेट मीडिया ट्रस्ट करता है, जिसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज एकमात्र लाभार्थी है.)

