Monday, October 5, 2026
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जीएसटी कानून में फिर बड़ा बदलाव, अब अधिकारी नहीं कर सकेंगे गिरफ्तार


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GST Reform 3.0 : जीएसटी परिषद ने पिछले साल सितंबर में 2.0 सुधार के बाद अब कानूनी प्रक्रिया में बदलाव की तैयारी कर रही है. परिषद की इसी सप्ताह होने वाली बैठक में कानूनी प्रक्रिया में बदलाव किया जाएगा. माना जा रहा है कि परिषद सीधे गिरफ्तारी के मामलों पर रोक लगा सकती है और अधिकारियों से यह अधिकार छीना जा सकता है. अब गिरफ्तारी सिर्फ कोर्ट के आदेश पर ही की जा सकेगी.

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जीएसटी परिषद की बैठक में टैक्स अधिकारियों की शक्तियां घटाने पर चर्चा हो सकती है.

नई दिल्ली. माल एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद ने एक बार फिर कानून में बड़े बदलाव की तैयारी कर ली है. परिषद की इस महीने होने वाली बैठक में कर अधिकारियों से गिरफ्तारी का अधिकार वापस लेने और किसी भी गिरफ्तारी के लिए अदालत की मंजूरी अनिवार्य करने के प्रस्ताव पर विचार किया जा सकता है. मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि जीएसटी पर निर्णय लेने वाली शीर्ष संस्था जीएसटी परिषद 7 अक्टूबर की बैठक में गिरफ्तारी जुड़े सुधारों के पैकेज पर भी विचार कर सकती है. इसमें अपराधों के लिए आपराधिक कार्रवाई शुरू करने की सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये किया जा सकता है.

सूत्रों का कहना है कि अभियोजन के प्रावधानों का दायरा भी सीमित किया जा सकता है, ताकि वस्तुओं या सेवाओं के वर्गीकरण, मूल्यांकन या इनपुट टैक्स क्रेडिट (आईटीसी) से जुड़े सामान्य विवादों पर आपराधिक कार्रवाई न हो. ऐसे मामलों में कारोबारी और कर अधिकारी एक ही लेनदेन की अलग-अलग व्याख्या कर सकते हैं. ये प्रस्ताव सरकार के अगली पीढ़ी के जीएसटी सुधारों का हिस्सा हैं. सितंबर 2025 में जीएसटी दरों को तर्कसंगत बनाने के बाद सुधारों का अगला चरण प्रशासन को सरल बनाने, अनुपालन लागत घटाने और प्रवर्तन को अधिक आनुपातिक बनाने पर केंद्रित रहने की उम्मीद है.

और क्या बदलने की तैयारी
मामले से जुड़े लोगों का कहना है कि विचाराधीन पैकेज में जीएसटी पंजीकरण आसान करना बनाया जा सकता है. इसके अलावा तेजी से रिफंड देना, इनपुट टैक्स क्रेडिट की प्रक्रिया सरल करना और कारण बताओ नोटिस और जुर्माने से जुड़े नियमों में बदलाव शामिल हैं. प्रवर्तन से जुड़े प्रस्ताव के केंद्र में केंद्रीय जीएसटी अधिनियम की धारा 69 है. इसके तहत निर्धारित कानूनी शर्तें पूरी होने और किसी व्यक्ति के कुछ विशेष अपराध किए जाने के पर्याप्त कारण होने पर आयुक्त किसी अधिकारी को उसे गिरफ्तार करने के लिए अधिकृत कर सकता है. प्रस्तावित बदलाव में कर अधिकारियों से यह शक्ति वापस लेने और किसी भी गिरफ्तारी के लिए न्यायिक मंजूरी जरूरी करने की बात है.

खत्म नहीं होगा टैक्स वसूलने का अधिकार
इन बदलावों से सरकार का टैक्स वसूली या वित्तीय दंड लगाने का अधिकार खत्म नहीं होगा. कंपाउंडिंग के तहत निर्धारित टैकस, ब्याज और जुर्माना जुकाने के बाद अपराध का निपटारा किया जा सकता है. कम टैक्स चुकाने या गलत तरीके से इनपुट टैक्स क्रेडिट का दावा करने वालों के खिलाफ टैक्स वसूली और अन्य कानूनी कार्रवाई जारी रहेगी. गंभीर और जानबूझकर की गई कर चोरी या धोखाधड़ी के मामलों में अदालत के जरिये गिरफ्तारी की जा सकती है. यह कदम आर्थिक और नियामकीय अपराधों को गैर-आपराधिक बनाने के सरकार के व्यापक प्रयास के अनुरूप भी होगा.

आईटीसी नियमों में भी बदलाव
व्यापारियों और कारोबारियों के लिए इन बदलावों से टैकस विवाद के अंतिम निपटारे से पहले गिरफ्तारी की संभावना कम होगी, जबकि सरकार की राजस्व वसूली की शक्तियां बरकरार रहेंगी. अगर प्रस्ताव मंजूर होते हैं तो रिटर्न दाखिल करने में देरी, वर्गीकरण से जुड़े विवाद और नकदी की कमी के कारण टैक्स भुगतान में देरी जैसे मामलों में करदाता टैक्स, ब्याज और आनुपातिक जुर्माना भरकर गिरफ्तारी से बच सकेंगे. फिलहाल जीएसटी अधिकारियों को आयुक्त स्तर के अधिकारी की पूर्व मंजूरी के बाद ऐसे गंभीर मामलों में गिरफ्तारी का अधिकार है, जिनमें कर चोरी, फर्जी इनपुट टैक्स क्रेडिट या गलत तरीके से रिफंड लेने की राशि एक करोड़ रुपये से अधिक हो. अभियोजन की सीमा एक करोड़ रुपये से बढ़ाकर पांच करोड़ रुपये करने का प्रस्ताव है, ताकि आपराधिक प्रक्रिया उन मामलों तक सीमित रहे जिनका आकार इसके लायक है.

पूरी तरह खत्म होंगे 9 अपराध
इस प्रस्तावों में अभियोजन संबंधी प्रावधान के तहत आने वाले 24 अपराधों में सजा के प्रावधानों को नरम किया जाएगा, जबकि 9 अपराधों को पूरी तरह हटाना और 11 को मौजूदा रूप में बनाए रखना शामिल है. न्यूनतम सजा का प्रावधान हटाने का भी प्रस्ताव है, जिससे अदालत के लिए कारावास की सजा देना अनिवार्य नहीं रहेगा. हर मामले में जुर्माना लगाने का विकल्प उपलब्ध होगा, जबकि मध्यम श्रेणी के अपराधों में अधिकतम सजा तीन साल से घटाकर दो साल करने का प्रस्ताव है. परिषद छोटे करदाताओं के लिए विलंब शुल्क माफ करने और जुर्माने को तर्कसंगत बनाने के प्रस्ताव पर भी विचार कर सकती है.

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Pramod Kumar Tiwari

प्रमोद कुमार तिवारी को शेयर बाजार, इन्‍वेस्‍टमेंट टिप्‍स, टैक्‍स और पर्सनल फाइनेंस कवर करना पसंद है. जटिल विषयों को बड़ी सहजता से समझाते हैं. अखबारों में पर्सनल फाइनेंस पर दर्जनों कॉलम भी लिख चुके हैं. पत्रकारि…

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