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Nagaur Railway Land Dispute: नागौर जिले के डेगाना में रेलवे भूमि को लेकर बड़ा विवाद सामने आया है. गोरेड़ी चाचा क्षेत्र में राजस्व अभिलेखों में रेलवे की जमीन वास्तविक स्थिति से कम दर्ज होने का मामला सामने आया है. वहीं, PWD द्वारा किए गए सीमांकन पर भी सवाल उठ रहे हैं. रेलवे और PWD विभाग के बीच लंबे समय से चल रहे भूमि विवाद के कारण महत्वपूर्ण रेलवे विकास कार्य अटके हुए हैं. रिकॉर्ड में कथित गड़बड़ियों के चलते परियोजनाओं की प्रगति प्रभावित हो रही है. अब मामले में राजस्व रिकॉर्ड और सीमांकन की निष्पक्ष जांच की मांग तेज हो गई है, ताकि विवाद का समाधान कर विकास कार्य आगे बढ़ सकें.
डेगाना में राजस्व अभिलेखों की गड़बड़ी से फंसा करोड़ों का रेलवे काम
डेगाना (नागौर)। डेगाना क्षेत्र के गोरेड़ी चाचा गांव में रेलवे लाइन से संबंधित सरकारी भूमि के राजस्व रिकॉर्ड में बड़ी विसंगति सामने आई है. उत्तर पश्चिम रेलवे, मंडल कार्यालय डेगाना द्वारा जिला कलेक्टर नागौर को भेजे गए आधिकारिक पत्र में खुलासा हुआ है कि रेलवे लाइन के लिए वर्षों पहले अधिग्रहित की गई भूमि का वास्तविक क्षेत्रफल और वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज रकबे में अंतर है. रेलवे ने इस त्रुटि को गंभीर मानते हुए राजस्व अभिलेखों में संशोधन कर भूमि को सही क्षेत्रफल सहित भारत सरकार (रेलवे) के नाम दर्ज करने की मांग की है.
इस मामले ने इसलिए भी तूल पकड़ लिया है क्योंकि इसी प्रकरण से जुड़े मौजा गोरेड़ी चाचा के खसरा संख्या 265 एवं 266 के सीमांकन को लेकर पहले से विवाद चल रहा है. इस संबंध में कार्यालय अधिशाषी अभियंता, सार्वजनिक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी), खंड डेगाना के पत्र क्रमांक अआडे/2025-26/397 दिनांक 20 जून 2025 के आधार पर अधिशाषी अभियंता के विरुद्ध विधिक कार्रवाई तथा सरकारी राजस्व को हुए नुकसान की भरपाई कराने की मांग भी उठाई गई है. इससे पूरे प्रकरण में सरकारी भूमि के रिकॉर्ड और सीमांकन प्रक्रिया पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं. रेलवे के सहायक मंडल अभियंता कार्यालय से जारी पत्र के अनुसार खसरा संख्या 17, 18, 28 और 29 में रेलवे के नाम दर्ज भूमि का रकबा वर्तमान जमाबंदी में वास्तविक क्षेत्रफल से कम अंकित है.
सरकारी अभिलेखों में रेलवे की भूमि का हिस्सा
यह तथ्य पुराने बंदोबस्त एवं वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड के मिलान के दौरान सामने आया. खसरा संख्या 17 में लगभग 0.0804 हेक्टेयर भूमि कम दर्ज है. खसरा संख्या 18 में लगभग 0.0971 हेक्टेयर भूमि कम दर्ज पाई गई. खसरा संख्या 28 में भी वास्तविक क्षेत्रफल की तुलना में कम भूमि दर्ज मिली. खसरा संख्या 29 में लगभग 0.2266 हेक्टेयर भूमि कम दर्ज होने का उल्लेख किया गया है. रेलवे के रिकॉर्ड के अनुसार पुराने बंदोबस्त में रेलवे के नाम कुल 3.3427 हेक्टेयर (करीब 20 बीघा 13 बिस्वा) भूमि दर्ज होनी चाहिए, जबकि वर्तमान राजस्व रिकॉर्ड में यह मात्र 3.3186 हेक्टेयर दर्ज है. यानी सरकारी अभिलेखों में रेलवे की भूमि का हिस्सा कम अंकित होने की पुष्टि हुई है.
सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचने की आशंका
रेलवे प्रशासन ने इस मामले को गंभीर मानते हुए जिला कलेक्टर नागौर, उपखंड अधिकारी डेगाना, तहसीलदार डेगाना, नगर पालिका मंडल डेगाना, राजस्थान राजस्व विभाग तथा मंडल अभियंता (उत्तर), उत्तर पश्चिम रेलवे, जोधपुर को पत्र भेजकर आवश्यक कार्रवाई का आग्रह किया है. दूसरी ओर, खसरा संख्या 265 एवं 266 के सीमांकन को लेकर भी विवाद गहराता जा रहा है. शिकायत में आरोप लगाया गया है कि सीमांकन प्रक्रिया में नियमों की अनदेखी की गई, जिससे सरकारी राजस्व को नुकसान पहुंचने की आशंका है. शिकायतकर्ताओं ने संबंधित अधिकारियों के खिलाफ विधिक कार्रवाई करने और यदि किसी प्रकार की त्रुटि या लापरवाही साबित होती है, तो उससे हुए राजस्व नुकसान की भरपाई भी जिम्मेदार अधिकारियों से कराने की मांग की है.
रिकॉर्ड में आवश्यक संशोधन नहीं किया
रेलवे प्रशासन का कहना है कि यदि समय रहते राजस्व रिकॉर्ड में आवश्यक संशोधन नहीं किया गया तो भविष्य में सरकारी भूमि पर स्वामित्व, सीमांकन और निर्माण कार्यों को लेकर विवाद उत्पन्न हो सकते हैं. इसलिए सभी संबंधित खसरों का पुनः सत्यापन कर सही क्षेत्रफल के साथ राजस्व अभिलेखों में संशोधन किया जाए तथा भूमि को भारत सरकार (रेलवे) के नाम विधिवत दर्ज किया जाये. अब इस पूरे मामले में जिला प्रशासन की कार्रवाई पर सभी की निगाहें टिकी हैं. यदि जांच में रिकॉर्ड में गड़बड़ी और सीमांकन में अनियमितता की पुष्टि होती है तो संबंधित अधिकारियों पर विभागीय और कानूनी कार्रवाई की संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता.
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मेरा नाम जागृति दुबे है. मीडिया और डिजिटल पत्रकारिता की दुनिया में पिछले 6 वर्षों से सक्रिय हूं. पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून को मैंने वर्ष 2019 में GBN 24 न्यूज़ चैनल से इंटर्नशिप के साथ शुरुआत देकर एक पेशेव…
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